Episode # 3 Series غور و فکر — Transcript
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- 0:00अजु बिल्लाह मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह
- 0:02रहमान रहीम पढ़ पढ़ इल्म हजार किताबा कभी
- 0:07अपने आप न पढ नहीं जा जा वड़ जा मंदिर
- 0:11मस्जिद कदी मन अपने विच बड़ नहीं लड़ता
- 0:14रहदा नाल शैतान कधी नफ्स अपने ना लड़ ही
- 0:18नहीं पहले अपने आप न पढ़ फिर मंदिर मस्जिद
- 0:22वढ़ जद नफ्स जाए तेरा मर फिर नाल शैतान तू
- 0:27लड़ क्या आपने कभी खुद को पढ़ा है
- 0:30हम में से अक्सर लोग अपनी जिंदगी कोलू के
- 0:33बैल की तरह गुजारते हैं अच्छी जिंदगी
- 0:36अच्छी नौकरी अच्छी गाड़ी अच्छा घर और
- 0:39हमारी नस्ले इस ना खत्म होने वाले दायरे
- 0:42में घूमते हुए गुजर जाती हैं पिछली किस्त
- 0:45में मैंने आपको एक ऐसे शख्स के बारे में
- 0:47बताया था जिसने सवालात को तलाश किया और
- 0:50इंसानों की तखक के हकीकी मानों को समझने
- 0:52की कोशिश की उनका नाम प्रोफेसर डॉक्टर
- 0:55जेफ्री लैंग है जो कंसास यूनिवर्सिटी
- 0:57अमेरिका में मैथमेटिक्स के प्रोफेसर सर
- 1:00इंतिहा जहीन शख्स है पर उनके वालिद एक
- 1:04इंतिहा सख्त तबीयत के मालिक थे और उनकी
- 1:06वालिदा पर बहुत जुल्म किया करते थे बचपन
- 1:09में वह अक्सर यह सोचते थे कि अगर उनके
- 1:11वालिद ना होते तो जिंदगी कितनी खूबसूरत
- 1:13होती वह सिर्फ चाहते थे कि उनके वालिदा पर
- 1:18यह तशदूद खत्म हो जाए वह खौफ से आजाद हो
- 1:20जाए ऐसा लगता था जैसे वह किसी भयानक ख्वाब
- 1:23में कद हो जहां से निकलने का कोई रास्ता
- 1:26नहीं वह बार-बार खुदा से दुआ करते कि वो
- 1:29उसके वालिद को इनकी जिंदगी से निकाल दिया
- 1:32मगर उनके वालिद हमेशा मौजूद रहते और फिर
- 1:35आहिस्ता आहिस्ता उसने सवाल करना शुरू कर
- 1:38दिया कि क्या वाकई खुदा मौजूद हैक मेरी
- 1:40दवाओ का कोई असर नहीं उसके बचपन के
- 1:43साथ-साथ 60 और 70 की दहाई के वाकत ने उसके
- 1:46शुकू को मजीद बढ़ा दिया जन एफ केनेडी
- 1:48रॉबर्ट केनेडी और मार्टिन लूथर किंग के
- 1:51कत्ल वियतनाम की तबाही शहरों में फसा दत
- 1:55गैंग वार्स और बेशुमार बेगुनाहों का कत्ल
- 1:58वह सोचता अगर खुदा बाकी मौजूद है तो व यह
- 2:01सब क्यों होने दे रहा है क्यों छोटे मासूम
- 2:04बच्चे वियतनाम में जलकर मर रहे हैं क्यों
- 2:07बेगुनाह लोग जुल्म का शिकार हो रहे हैं
- 2:09अगर खुदा हमें फरिश्ते भी बना सकता था तो
- 2:12यह गुनाहगार इंसान क्यों
- 2:15बनाया हमें गुनाह की ताकत क्यों दी उसे इन
- 2:18सवालों का कभी कोई इत्मीनान बख जवाब ना
- 2:20मिला यहां तक कि वह 16 साल की उम्र में
- 2:22एथी बन गया मगर उसकी जिंदगी में इस्तरा
- 2:25खत्म ना हुआ फिर जब वो 28 साल का हुआ तो
- 2:27उसकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया उसके चंद
- 2:30दोस्तों ने उसे तोहफे के तौर पर कुरान
- 2:32शरीफ दिया एक रात वो अपने अपार्टमेंट में
- 2:35बैठा था और उसके पास पढ़ने के लिए कुछ ना
- 2:37था तो उसने कुरान शरीफ खोला उसने पहले चंद
- 2:39सफात पढ़े और फिर सूर बकरा की चंद आयात
- 2:42पढ़ने के बाद अचानक रुक गया उसने सरह बकरा
- 2:46की आयत नंबर 30 पढ़ी और जब तेरे रब ने
- 2:49फरिश्तों से कहा मैं जमीन में एक खलीफा
- 2:51बनाने वाला हूं यह बात प्रोफेसर डॉक्टर
- 2:54जफ्री लिंग के लिए चौका देने वाली थी
- 2:56क्योंकि ईसाइयत में यह अकीदा था कि
- 2:59इंसानों को जमीन पर सजा के तौर पर भेजा
- 3:01गया था लेकिन इस आयत में अल्लाह ताला
- 3:04इंसानों को खलीफा बनाकर जमीन पर भेजने की
- 3:07बात कर रहे थे दूसरी आयत ने उसे और भी
- 3:10चौका दिया जब उसने फरिश्तों का सवाल सुना
- 3:13फरिश्तों ने अल्लाह से कहा क्या आप इस
- 3:16इंसान को जमीन पर पैदा करेंगे जो जमीन में
- 3:19फसाद करेगा और खून बहाए हालांकि आपकी हमद
- 3:23आपकी तस्बीह और आपकी तकदीस बयान करने के
- 3:26लिए हम हैं यह पढ़कर प्रोफेसर डॉक्टर
- 3:28जेफ्री लेक र खड़े हो गए वह सोचने लगे
- 3:31फरिश्तों ने बिल्कुल वही सवाल किया जो मैं
- 3:3428 साल से पूछ रहा हूं ऐसा इंसान क्यों
- 3:37पैदा किया जो जमीन पर जुल्म और सितम फैलाए
- 3:40उसकी बेचैनी में इजाफा हुआ उसे लगा कि वह
- 3:43अपने जवाबाइकिरण
- 3:59तुम नहीं जानते उस इस जुमले में के पीछे
- 4:03क्या राज था अल्लाह क्या जानते थे जो
- 4:05फरिश्ते नहीं जानते थे इसका जवाब अगली आयत
- 4:08में था जब अल्लाह ताला ने फरमाया फिर
- 4:11अल्लाह ने हजरत आदम अली सलाम को तमाम नाम
- 4:13सिखा दिए और फरिश्तों से कहा कि अगर आप
- 4:16सच्चे हैं तो आप ही नाम बताएं फरिश्तों ने
- 4:19कहा अपनी आज से दिखाई और कहा क्या अल्लाह
- 4:22ताला हमारे पास इल्म नहीं मगर वही जो आपने
- 4:25हमें दिया है तो फिर अल्लाह ताला ने हजरत
- 4:27आदम अल सलाम से कहा कि आप के नाम बताएं तो
- 4:30हजरत आदम अल सलाम ने वह तमाम नाम बता दिए
- 4:34तो अल्लाह ताला ने कहा आपको मैंने कहा
- 4:36नहीं था कि मैं वो जानता हूं जो आप नहीं
- 4:39जानते यह वो लम्हा था जब प्रोफेसर डॉक्टर
- 4:42जफरी लंग को महसूस हुआ कि अल्लाह ने
- 4:44इंसानों को इंटेलिजेंस देकर सीखने की
- 4:47सलाहियत से नवाजा है इंसान जहीन मखलूक है
- 4:50उन्हें समझ आ गया कि इंसान की सबसे बड़ी
- 4:52ताकत अपनी जहान से इल्म हासिल करना है
- 4:55फरिश्ते मासूम थे वो गलती नहीं करते थे और
- 4:58वो सिर्फ वही कर सकते थे जो उहे हुकम दिया
- 5:00जाता मगर इंसान को अल्लाह ने एक ऐसी
- 5:02सलाहियत दी थी जो फरिश्तों के पास नहीं थी
- 5:05सीखने समझने और फैसला करने की ताकत इंसान
- 5:08को यह आजादी दी गई कि वह सीखे समझे
- 5:12तजुर्बा करे और अपने इरादे से फैसला करें
- 5:16अपने इरादे से इंतखाब करें यही वह फर्क था
- 5:18जो फरिश्ते नहीं समझ सके और यही वह बात थी
- 5:20जो डॉक्टर जेफरी लैंग के जहन को झंझोट गई
- 5:24डॉक्टर जेफ्री लंग ने पहली बार यह समझा कि
- 5:27अगर दुनिया में बुराई है तो उसकी वजह अलाह
- 5:30नहीं बल्कि इंसानी आजाद इरादा है फ्री विल
- 5:33है अल्लाह ने जहान के साथ इस दुनिया में
- 5:36इंसानों को फ्री विल अता की अगर इंसान को
- 5:39बुराई का इख्तियार ना दिया जाता तो वह
- 5:41नेकी का इंतखाब भी ना कर सकता तब ना किसी
- 5:44का इम्तिहान होता ना किसी को जन्नत और
- 5:46जहन्नुम का फर्क समझ आता पर अफसोस अमर यह
- 5:50है कि हम ब हैसियत मुस्लिम मुशरा जहान
- 5:53हिकमत और इल्म को बिल्कुल छोड़ चुके हैं
- 5:55हम ब हैसियत मुशरा इंटेलेक्चुअल पैरालिसिस
- 5:58का शिकार हैं और अपने हकीकी मकसद से
- 6:01बिल्कुल हट चुके हैं लेकिन यहां दो सवाल
- 6:03पैदा होते हैं एक ये कि सीखने और जहान की
- 6:06अहमियत इन आयात से वाज है लेकिन प्रोफेसर
- 6:08डॉक्टर जेफ्री लैंग ने यह क्यों कहा कि
- 6:11अल्लाह ने हमें फ्रीविल दी है और दूसरा
- 6:13सवाल कि क्या कुरान शरीफ में दूसरे मकामा
- 6:16पर भी जहान को इतनी ही अहमियत दी है अगर
- 6:19हां तो फिर अल्लाह क्या फरमाता है कि हम
- 6:21अपनी जनत को कहां और कैसे इस्तेमाल करें
- 6:25यह हमारी सीरीज गौर और फिक्र की तीसरी किस
- 6:28थी अगली कि में जब हम मिलेंगे तो इन दो
- 6:31सवालात का जवाब देंगे आप सबकी स मातो का
- 6:35बहुत-बहुत शुक्रिया मिलते हैं अगली किस्म
- 6:37में अल्लाह हाफिज
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This page contains the full transcript of Episode # 3 Series غور و فکر by Dr Sufyan Quran Daily Dose, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 1,126 words across 135 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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