Episode # 2 Series غور و فکر — Transcript
Full transcript
- 0:00अज बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्ला रहमान
- 0:04रहीम जहां में राब
- 0:07है नहीं नहीं जहां ही इराब है हजार हा
- 0:12कवाक बो नजूम हा
- 0:14कहकशा हजार हा का वाक बो नजूम हाय किशा से
- 0:18एटम की गोक तक मदार दर मदार हर वजूद
- 0:22बेकरार है जहां में इराब
- 0:25है य शार उस इराब उस अंदरूनी बेचैनी उस
- 0:30बेकरारी की तरफ इशारा करती है जो हर जी शर
- 0:32और अकल इंसान अपनी जिंदगी के मकसद को
- 0:36भूलने या उसे भटकने के बाद महसूस करता है
- 0:39बल्कि इस इराब को हर इंसान महसूस करता है
- 0:41मगर ज्यादातर लोग इस इराब इस बेचैनी
- 0:46को दुनिया के रंग महल जिंदगी के तग दो और
- 0:50सोशल मीडिया और मोबाइल के अनगिनत
- 0:52स्क्रोलिंग के मनो बोज ले दबा देते हैं यह
- 0:55वही इराब है जिससे तंग आकर गनी खान बाबा
- 0:59कहते हैं नले वने
- 1:02कमतल जाना बाबा तलग दे मसले
- 1:12दबत
- 1:13शराब साम ब सास र केम ता क
- 1:19सुख
- 1:21मतरा रा का सामना करने के लिए बहुत बड़ी
- 1:26हिम्मत की जरूरत होती है इसलिए ज्यादातर
- 1:28इंसान शोर इस इलाही रहनुमाई से फरार
- 1:33इख्तियार करते हैं और इससे फरार के बहाने
- 1:35ढूंढते हैं ताकि इसका सामना ना करना पड़े
- 1:37हम इस सीरीज में इस इराब का सामना और
- 1:41बुनियादी सवालात का जवाब ढूंढ रहे हैं कि
- 1:43जिंदगी का मकसद है क्या पिछली किस में हम
- 1:47लोगों ने अक्वायर्ड नॉलेज में इस सवाल का
- 1:50जवाब ढूंढा कि जिंदगी का मकसद क्या है पर
- 1:53बदकिस्मती से अक्वायर्ड नॉलेज जवाब ना दे
- 1:56सका तो हमने रुख किया रिवी नॉलेज का और
- 1:58हमने पूछा कि क्या कभी
- 2:00किसी ने अल्लाह ताला से पूछा कि इंसान को
- 2:02बनाने का मकसद क्या है आप अगर अपने पास
- 2:06अपने घर में पड़े हुए रिवील नॉलेज के सबसे
- 2:09बड़े नुस्खे और सबसे
- 2:11अजीम किताब कुरान शरीफ को उठाए और उसके
- 2:14कुछ ही सफों को पलटे तो आपको सूर बकरा की
- 2:1730 नंबर आयत में अल्लाह ताला और फरिश्तों
- 2:20के दरमियान एक इंतिहा खूबसूरत मुकाल
- 2:23मिलेगा जिसमें अल्लाह ताला फरमाते हैं
- 2:25बिस्मिल्लाह रहमान रहीम र मला
- 2:31खलीफा जब अल्लाह ताला
- 2:34ने फरिश्तों से कहा कि मैं जमीन पर अपना
- 2:39खलीफा या नय मुकर्रर करने वाला हूं तो वह
- 2:42फरिश्ते जो आमतौर पर अल्लाह ताला का कोई
- 2:45भी हुकम बजा लाने में पलक झपक की भी देर
- 2:48नहीं करते उन्होंने
- 2:49कहा काल जहा
- 2:55महामा
- 2:58कालक अल्ला ताला आप बना रहे हैं जो जमीन
- 3:01पर फसाद करेगा और खून बहाए और आपकी बड़ाई
- 3:05आपकी हमद सना और आपकी तकदीस बयान करने के
- 3:08लिए हम
- 3:09हैं हम में से कोई भी हम जैसा कोई भी
- 3:12इंसान फरिश्तो जितनी इबादत नहीं कर सकता
- 3:15तो फरिश्तों ने अल्लाह ताला से पूछा कि
- 3:17इंसान को बनाने का मकसद क्या है तो अल्लाह
- 3:19ताला जवाब में क्या कहते हैं काला इनी आलम
- 3:22माला तालम मुझे जो मालूम है वह आपको नहीं
- 3:26मालूम फिर आगे इसको और एक्सप्लेन करते हैं
- 3:30ल माद मल समा कुला सु मारल मला
- 3:37फलास मैंने आदम अली सलाम को तमाम नाम सिखा
- 3:40दिए और फरिश्तो से कहा कि आप यह नाम बताए
- 3:45तो फरिश्तो ने अपने आजी का इर किया और कहा
- 3:48काल सुभान लाना इला मालम
- 3:52इला ताला आप पाक है हमारे पासम नहीं मगर
- 3:56वही जो आपने दिया है और आप इम और हिकमत के
- 4:00मालिक है तो अल्ला ताला ने आदम अ सलाम से
- 4:02कहा कि आप य नाम
- 4:05बताए
- 4:07फल त आदम सलाम ने व तमाम नाम बता दिए जो
- 4:11फरिश्ते ना बता सके तोला ताला ने जवाब में
- 4:15कहा समा क्या मैंने आपको कहा नहीं था कि
- 4:19मेरे पास य इम आसमान और जमीन के गब का तो
- 4:24जो सवाल फरिश्तो ने पूछा था कि इंसान को
- 4:26बनाने का मकसद क्या है उसका जवाब पिछली दो
- 4:28आतो में अला ताला ने दिया मगर मुझ जैसे
- 4:30नाकस अक इंसान जो कुरान शरीफ को
- 4:34सिर्फ तब के लिए आदतन पढ़ता है और उस पर
- 4:37गौर फिक्र नहीं करता उसको इन आयात की
- 4:39गहराई नहीं समझ आई उमाराम ने इंतहा
- 4:42खूबसूरत अंदाज में और इतहा तफसील में इन
- 4:45आयात की तफसीर बयान की
- 4:47है पर इस आयात का मकसद समझने में और इसमें
- 4:52जिंदगी का मकसद समझने में जिस इंसान ने
- 4:54मेरी मदद की वो एक ईसाई अंग्रेज प्रोफेसर
- 4:58है जिसको यही इस्तरा मुब्तला हो गया था
- 5:03यही बेचैनी मुब्तला हो गई थी और उसने अपना
- 5:06सफर शुरू किया और ईसाइयत से मुलखत हो गया
- 5:10और मुलखत के बाद इसी आयात के सिलसिले के
- 5:14जरिए मुसलमान हुआ क्योंकि वहां उसे जिंदगी
- 5:17का मकसद मिल
- 5:19गया पर उसे नायतो में ऐसा क्या मिला जो हम
- 5:23ना देख
- 5:24सके आने वाली किस्त में हम इस पर मजीद बात
- 5:29करें
- 5:30उसके नजरिए को समझेंगे और फिर कुरान शरीफ
- 5:33पर बाकी मकामा प देखेंगे कि उसमें भी इसी
- 5:35से मसलत है इसी तरह के मकास का जिक्र किया
- 5:38गया है या नहीं आप सबकी स मातो का
- 5:41बहुत-बहुत शुक्रिया हम मिलेंगे तीसरी
- 5:44किस्त में तब तक के लिए अल्लाह हाफिज
About this transcript
This page contains the full transcript of Episode # 2 Series غور و فکر by Dr Sufyan Quran Daily Dose, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 800 words across 106 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
What you can do with it
Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.
Free YouTube transcript tool
YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.