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भिखारी हसबैंड | Episode 11–30 | Kahvanihindi — Transcript

by Kahvani Hindi · 44,111 words · 5,338 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:04नमस्कार दोस्तों राम राम दोस्तों स्वागत
  2. 0:07है हमारे YouTube चैनल में और Facebook
  3. 0:11चैनल में आज हम लेकर आए हैं एक ऐसी कहानी
  4. 0:15जो आपकी सोच बदल देगी जो कि है वेगर
  5. 0:19हस्बैंड
  6. 0:20जिसमें एक भिखारी जिसके पास ना घर ना
  7. 0:23पहचान लेकिन किस्मत उसे वहां ले जाती है
  8. 0:27जहां करोड़ों की दौलत और बड़े बड़े-बड़े
  9. 0:30लोग भी उसके सामने झुकने को मजबूर हो जाते
  10. 0:33हैं। क्या यह सच में एक भिखारी है या अपनी
  11. 0:37असली पहचान जी
  12. 0:40रहा है?
  13. 0:42अगर ऐसी ही दमदार ऑडियो स्टोरीज पसंद है
  14. 0:47तो वीडियो को लाइक करें, चैनल को
  15. 0:49सब्सक्राइब करें और बेल आइकन जरूर दबाएं।
  16. 0:53अब बिना किसी देरी के शुरू करते हैं आज का
  17. 0:57रोमांचक एपिसोड। जिसमें एपिसोड
  18. 1:0111 से 30 तक हैं। तो जल्दी से जल्दी इस
  19. 1:04वीडियो को देखो और डिस्क्लेमर है यह कहानी
  20. 1:09केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की
  21. 1:12गई है।
  22. 1:13यह कहानी के सभी पात्र घटनाएं, संवाद एवं
  23. 1:18परिस्थितियां काल्पनिक हैं। किसी भी
  24. 1:22वास्तविक व्यक्ति, संस्था, स्थान या घटना
  25. 1:26से किसी भी प्रकार की समानता मात्र संयोग
  26. 1:30मानी जाएगी। तो आइए शुरू करते हैं वेगर
  27. 1:34हस्बैंड की दिलचस्प और रहस्यमय कहानी
  28. 1:38का वीडियो जिसमें एपिसोड 11 से 30 तक है।
  29. 1:43तो लेट स्टार्ट दिस वीडियो।
  30. 1:44शिप्रा के भाई राहुल को गुंडों ने पकड़
  31. 1:46लिया था। यह देखकर [संगीत] शिप्रा तेज
  32. 1:49आवाज में चिल्लाई। छोड़ो उसे। छोड़ दो
  33. 1:52मेरे भाई को। लेकिन रजत पर इसका क्या ही
  34. 1:54असर होना था। वो राहुल का सिर फोड़ने का
  35. 1:56मन बना चुका था। वहीं जब शौर्य ने देखा कि
  36. 1:59उसे बचाने के चक्कर में राहुल फंस गया है
  37. 2:01तो वो बिना सोचे [संगीत] समझे तेजी से रजत
  38. 2:04और उसके आदमियों की तरफ भागा और उसने रजत
  39. 2:06को अपने शरीर से एक जोरदार टक्कर मारी।
  40. 2:09[संगीत] इस अनएक्सेक्टेड टक्कर से रजत का
  41. 2:11संतुलन बिगड़ गया और वो सीधे सीढ़ियों पर
  42. 2:13गिरकर लुढ़कता हुआ नीचे जा पहुंचा। अचानक
  43. 2:16हुए इस हमले से रजत के गुरे भी हैरान थे।
  44. 2:20शायद किसी ने भी यह सोचा नहीं था कि यह
  45. 2:22भिखारी ऐसा करने की हिम्मत करेगा। इसी के
  46. 2:25साथ राहुल को दबोचे हुए दोनों गुंडों की
  47. 2:27पकड़ भी ढीली पड़ गई और राहुल उन दोनों को
  48. 2:30धक्का देकर दूर भाग निकला। वहीं रजत के
  49. 2:33बाकी सभी गुंडे अपने बॉस को संभालने के
  50. 2:35लिए दौड़ पड़े। इधर शिप्रा शौर्य की
  51. 2:38हिम्मत देखकर हैरान थी। उसने एक बार फिर
  52. 2:41से अपनी परवाह ना करते हुए पहले शिप्रा और
  53. 2:43फिर राहुल को भी बचा लिया था। इसके बाद जब
  54. 2:46शिप्रा ने रजत की तरफ देखा तो वह समझ गई
  55. 2:49कि जिस तरह से रजत गिरा था उससे यह तो
  56. 2:52पक्का था कि उसे गहरी चोट [संगीत] लगी
  57. 2:54होगी। बुरे काम का बुरा नतीजा। उसकी एक दो
  58. 2:57हड्डियां भी [संगीत] टूट गई होंगी। यह
  59. 2:59देखकर अब शिप्रा की फैमिली वालों को भी
  60. 3:01राहत मिली। वहीं रजत दर्द के मारे कराता
  61. 3:04हुआ अपनी जगह से उठा। इस समय उसे घोर
  62. 3:07अपमान [संगीत] का एहसास हो रहा था। हो भी
  63. 3:10क्यों ना वो इस भीड़ के लिए उपहास का
  64. 3:12पात्र जो बन गया था। अगले ही पल वो
  65. 3:15झल्लाकर अपने गुर्गों पर चिल्लाया।
  66. 3:17कमबख्तों तुम लोग यहां तमाशा देखने के लिए
  67. 3:20आए हो क्या? जाओ उस लड़की को खींच कर अपने
  68. 3:22साथ ले चलो। अगर कोई बीच में आए तो उसकी
  69. 3:25हड्डियां तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ना।
  70. 3:27[संगीत] बॉस का आदेश पाते ही गुंडे शिप्रा
  71. 3:29की तरफ पलट गए। लेकिन वो अभी कुछ ही कदम
  72. 3:32आगे बढ़ा था कि तभी सायरन बजाती पुलिस की
  73. 3:35गाड़ी मंदिर की सीढ़ियों के पास आकर रुकी।
  74. 3:38इंस्पेक्टर को यह माजरा समझते देर नहीं
  75. 3:40लगी। वो रजत को पहले से जानता था। उसे यह
  76. 3:44भी पता था कि रजत अभी दो दिन पहले ही बेल
  77. 3:46पर छूटा है और उसे खास आदेश मिला था कि वो
  78. 3:49शिप्रा के आसपास नजर नहीं आना चाहिए। पर
  79. 3:52वो तो सीधे शिप्रा को किडनैप करने आ गया
  80. 3:55औरंगे हाथों पकड़ा भी गया। पुलिस को देखकर
  81. 3:58रजत समझ गया कि उसका प्लान फेल हो चुका है
  82. 4:01और सिर्फ प्लान ही फेल नहीं हुआ। अब उसका
  83. 4:03खेल [संगीत] भी खत्म समझो। यही नहीं भीड़
  84. 4:06में कुछ मंचले ऐसे भी थे जो अपना मोबाइल
  85. 4:09निकालकर वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगे थे।
  86. 4:12कहां उसका इरादा था कि वो [संगीत] जल्दी
  87. 4:13से शिप्रा को उठाएगा और यहां से रफूचक्कर
  88. 4:16हो जाएगा। पर भिखारी ने उसका सारा खेल
  89. 4:18बिगाड़ दिया था और अब उसे यह भी डर था कि
  90. 4:21कहीं यह बात सोशल मीडिया पर वायरल ना हो
  91. 4:23जाए। उसके भाई मुख्तार ने उसे आगाह किया
  92. 4:26था कि अभी कुछ दिन उसे ऐसी वैसी हरकत नहीं
  93. 4:29करनी है। पर वो इतना ओवर कॉन्फिडेंट था कि
  94. 4:31उसने अपने भाई की बात को इग्नोर कर दिया।
  95. 4:34आखिर ये पुलिस इतनी जल्दी कैसे आ सकती है?
  96. 4:37यह तो तभी हो सकता है जब उन्हें पहले से
  97. 4:39खबर मिली हो। रजत ने मन ही मन विचार किया।
  98. 4:42[संगीत] क्या किसी ने पुलिस को पहले ही
  99. 4:43खबर कर दी थी? वो किसी भी हालत में पुलिस
  100. 4:46के हाथ नहीं लगना चाहता था। इसीलिए इस एक
  101. 4:48बात को सोचकर उसके शरीर में सिहरन दौड़
  102. 4:51गई। लेकिन जब उसने देखा कि ज्यादातर पुलिस
  103. 4:53वाले उसके गुर्गों को पकड़ने में व्यस्त
  104. 4:55थे तो रजत [संगीत] ने तेजी से अपना दिमाग
  105. 4:58चलाया और पुलिस की विपरीत दिशा में भागने
  106. 5:00लगा। पर यह क्या? वो कुछ ही कदम आगे भागा
  107. 5:03था कि भरभरा कर जमीन पर गिर पड़ा। अब जाकर
  108. 5:06उसे महसूस हुआ कि सीढ़ियों से गिरने के
  109. 5:08कारण उसकी कोई पसली टूट गई है। लेकिन फिर
  110. 5:11भी वो मौका पाकर पुलिस की पकड़ से छूट कर
  111. 5:14दौड़ लिया। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
  112. 5:16जल्द ही इंस्पेक्टर ने उसे दोबारा पकड़
  113. 5:18लिया और उसका कॉलर पकड़ कर सख्ती से बोला।
  114. 5:22भागने की सोचना भी मत। नहीं तो तेरी
  115. 5:24[संगीत] हड्डियां तोड़ने में कोई कसर नहीं
  116. 5:27छोडूंगा। अब सरेंडर करने के अलावा रजत के
  117. 5:30पास कोई चारा नहीं था। लेकिन वो कहते हैं
  118. 5:33ना रस्सी जल [संगीत] जाती है पर उसकी ऐंठ
  119. 5:36नहीं जाती। ठीक उसी तरह रजत का रब अभी तक
  120. 5:39उतरा नहीं था। इसीलिए वो इंस्पेक्टर पर रब
  121. 5:43झाड़ते हुए बोला चलो चलो मुझे हॉस्पिटल ले
  122. 5:46चलो। शायद मेरी पसली टूट गई है। इस
  123. 5:49[संगीत] पर इंस्पेक्टर हंस पड़ा और फिर
  124. 5:51बोला तुम जैसे लोगों के साथ ऐसा ही होना
  125. 5:55था। अब आराम से दर्द को सहो। मैं तुम्हारे
  126. 5:58बाप का नौकर नहीं हूं जो तुम्हारे हुक्म
  127. 6:00पर तुम्हारे पैर चाटने लगूंगा।
  128. 6:03इस पर रजत झल्ला उठा और इंस्पेक्टर को ही
  129. 6:05धमकाते हुए बोला इंस्पेक्टर तुम शायद भूल
  130. 6:08रहे हो कि मैं कौन हूं? रजत ने एक बार फिर
  131. 6:12से अपने भाई का रब जताने की कोशिश की। पर
  132. 6:15जवाब में इंस्पेक्टर ने एक जोर का थप्पड़
  133. 6:17उसके गाल पर जड़ दिया। इंस्पेक्टर से
  134. 6:20थप्पड़ खाकर रजत के होश ठिकाने आ गए। उसे
  135. 6:23विश्वास नहीं हो रहा था कि यह जानने के
  136. 6:25बाद कि वो मुख्तार का भाई है। फिर भी
  137. 6:27इंस्पेक्टर ने उसको थप्पड़ मारा। तभी वह
  138. 6:30गुस्से में घूरता हुआ बोला, इंस्पेक्टर,
  139. 6:33मैं इस थप्पड़ को भूलूंगा नहीं। अगर मैंने
  140. 6:35यह थप्पड़ तुम्हें ब्याज के साथ वापस नहीं
  141. 6:38किया, तो मेरा नाम रजत नहीं। इस पर
  142. 6:41इंस्पेक्टर व्यंग भरे लहजे [संगीत] में
  143. 6:42बोला, "अरे तो फिर देर किस बात की? अभी से
  144. 6:46अपने लिए एक नया नाम ढूंढना शुरू कर दो।
  145. 6:48बाकी मैं खुद ही अशोर करूंगा कि तुम्हारी
  146. 6:51जल्दी से बेल ना हो। उधर बलवंत राय ने जब
  147. 6:55देखा कि इंस्पेक्टर ने सरेआम रजत को
  148. 6:57थप्पड़ मारा है तो उन्हें बहुत खुशी हुई।
  149. 6:59[संगीत] वो इंस्पेक्टर के पास आए और उनका
  150. 7:01आभार जताते हुए बोले आपका बहुत-बहुत
  151. 7:04धन्यवाद इंस्पेक्टर साहब जो आप एकदम सही
  152. 7:07समय पर आ गए। इस पर इंस्पेक्टर ने शांत
  153. 7:10लेकिन [संगीत] दृढ़ आवाज में कहा। इसमें
  154. 7:13धन्यवाद की कोई जरूरत नहीं है राय साहब।
  155. 7:15यह तो मेरा काम है। धन्यवाद तो उस शख्स का
  156. 7:18कीजिएगा जिसने सही समय पर हमें कॉल किया।
  157. 7:22यह जानकर बलवंत राय आश्चर्य में पड़ गए और
  158. 7:25बोले लेकिन इंस्पेक्टर साहब आपको कॉल
  159. 7:28किसने किया था और पुलिस मौके पर कैसे
  160. 7:30पहुंची? तभी इंस्पेक्टर ने पूरा माजरा
  161. 7:33समझाते हुए कहा दरअसल किसी को पहले ही पता
  162. 7:36चल गया था कि ऐसा कुछ होने वाला है और उस
  163. 7:39भले व्यक्ति ने पहले ही पुलिस को खबर कर
  164. 7:41दी थी। इस पर बलवंत राय सोचने लगे कि आखिर
  165. 7:45वो शख्स कौन हो सकता है? इसी विचार के साथ
  166. 7:48उन्होंने वहां मौजूद लोगों पर एक नजर
  167. 7:50दौड़ाई। पर कहना मुश्किल था कि इतने लोगों
  168. 7:53में से किसने पुलिस को फोन किया होगा।
  169. 7:55शौर्य के सिर से अभी भी खून रिस रहा था।
  170. 7:58पर वो अपनी चोट से बेपरवाह रजत की तरफ ही
  171. 8:01देख रहा था। उसे तसल्ली थी कि पुलिस सही
  172. 8:04समय पर पहुंच गई और रजत और उसके साथियों
  173. 8:06को गिरफ्तार कर लिया। खैर रजत और उसके
  174. 8:10गुर्गों को जीप में डालने के बाद
  175. 8:12इंस्पेक्टर ने बलवंत राय से कहा
  176. 8:15राय साहब आपको और आपके परिवार को थोड़ी
  177. 8:18देर के लिए थाने चलना पड़ेगा और अपना बयान
  178. 8:21दर्ज करवाना पड़ेगा ताकि रजत के खिलाफ केस
  179. 8:24को और भी मजबूत किया जा सके। इस पर राय
  180. 8:27साहब ने शौर्य की तरफ देखते हुए कहा
  181. 8:29[संगीत]
  182. 8:30हम जरूर चलेंगे पर उससे पहले इस लड़के को
  183. 8:33हमें हॉस्पिटल ले जाना पड़ेगा। उसने बहुत
  184. 8:35ही बहादुरी से हमारी बच्ची को बचाया है।
  185. 8:38वो अगर नहीं होता तो यह हैवान [संगीत]
  186. 8:40अपने मकसद में कामयाब भी हो जाता। यह कहते
  187. 8:44हुए राय साहब की निगाहों में शौर्य के लिए
  188. 8:46चिंता और आभार दोनों की मिश्रित भावना
  189. 8:48उमड़ रही थी। तभी इंस्पेक्टर साहब उन्हें
  190. 8:51आश्वस्त करते हुए बोले आप उसकी चिंता मत
  191. 8:54कीजिए। उसे हम खुद हॉस्पिटल ले चलेंगे और
  192. 8:57उसका इलाज कराकर उसका भी बयान लेंगे। ठीक
  193. 9:01है तो फिर मैं भी आपके साथ हॉस्पिटल
  194. 9:03चलूंगा। या ऐसा कीजिए आप मेरी गाड़ी में
  195. 9:06ही चलिए। उस लड़के को मैं अपनी गाड़ी में
  196. 9:08ही ले चलता हूं। इतना बोलकर राय साहब
  197. 9:10शौर्य के पास पहुंच गए। वैसे भी उनका
  198. 9:13परिवार दो दिनों से शौर्य को ढूंढ रहा था।
  199. 9:16पर वो अब जाकर मिला और मिला भी तो किस
  200. 9:19हालत में। खैर, सारी बातों को दरकिनार
  201. 9:22करते हुए राय साहब ने शौर्य से कहा,
  202. 9:24तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद नौजवान। तुमने
  203. 9:28समय पर आकर हमारी बच्ची को बचा लिया।
  204. 9:30[संगीत] इस पर शौर्य कुछ नहीं बोला। बसराय
  205. 9:33साहब की ओर देखता रहा। वहीं कुछ दूरी पर
  206. 9:36राहुल भी खड़ा था और जब उसकी नजर शौर्य से
  207. 9:39मिली तो वह उसके हौसले को अप्रिशिएट करते
  208. 9:41हुए बोला अगर आपकी जितनी बहादुरी यहां
  209. 9:44मौजूद लोगों ने भी दिखाई होती तो इन
  210. 9:46बदमाशों की इतनी हिम्मत नहीं होती। पर इन
  211. 9:49सबसे अलग शिप्रा को केवल शौर्य [संगीत] के
  212. 9:52माथे से बहता हुआ खून ही दिख रहा था। और
  213. 9:55तभी वो जल्दीबाजी में बोली। आप सभी किन
  214. 9:58बातों में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं?
  215. 10:00अभी इनको डॉक्टर की जरूरत है। इस पर राय
  216. 10:03साहब ने भी देर नहीं की और चिंतित स्वर
  217. 10:05में बोले हां शिप्रा बेटी सही कह रही है।
  218. 10:09हमें अभी के अभी पुलिस के साथ हॉस्पिटल
  219. 10:11चलना होगा। हमारे बयान भी वहीं ले लिए
  220. 10:13जाएंगे। [संगीत] चलो हमारी कार में चलते
  221. 10:16हैं। वहीं हॉस्पिटल का नाम सुनकर शौर्य
  222. 10:19थोड़ा असहज हो गया और तुरंत इंकार करते
  223. 10:22हुए बोला। नहीं नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं
  224. 10:25है। छोटी सी चोट है। अभी पानी से साफ करके
  225. 10:27हल्दी लगा लूंगा। ठीक हो जाएगी। अब तक रजत
  226. 10:30और उसके गुर्गों को ठिकाने लगाकर
  227. 10:32इंस्पेक्टर साहब भी वहां पहुंच चुके थे।
  228. 10:34और जब उन्होंने शौर्य की बात सुनी तो वे
  229. 10:37गंभीर और चेतावनी भरी आवाज में बोले किसी
  230. 10:40भी चोट को इतने हल्के में नहीं लेना
  231. 10:42चाहिए। उसका प्रॉपर ट्रीटमेंट जरूरी है और
  232. 10:44उसके बाद मुझे तुम्हारा बयान भी लेना
  233. 10:46पड़ेगा। इसके बाद इंस्पेक्टर साहब ने कुछ
  234. 10:49सोचा और तुरंत बोले वैसे तुमने आज बहुत ही
  235. 10:52बहादुरी का काम किया है। नाम क्या है
  236. 10:54तुम्हारा? इस पर शौर्य सोच में पड़ गया।
  237. 10:57पर जवाब तो देना ही था। इसीलिए वो
  238. 10:59हिचकिचाते हुए बोला मेरा नाम
  239. 11:03श्रवण है। असल में शौर्य को अपना असली नाम
  240. 11:06बताना ठीक नहीं लगा। इसीलिए लास्ट [संगीत]
  241. 11:08मोमेंट पर उसने अपना एक अलग नाम बता दिया।
  242. 11:12तुम रहते कहां हो श्रवण? इंस्पेक्टर ने
  243. 11:15जिज्ञासावश एक और सवाल पूछा। इस पर शौर्य
  244. 11:18ने एक बार वहां उपस्थित सभी लोगों पर नजर
  245. 11:20दौड़ाई और फिर शांत लेकिन स्पष्ट आवाज में
  246. 11:23बोला, "मैं यहीं इसी मंदिर में रहता हूं।
  247. 11:27क्या? मंदिर में इंस्पेक्टर आश्चर्य से
  248. 11:30बोल उठे। शौर्य को उनके चेहरे पर स्पष्ट
  249. 11:33[संगीत]
  250. 11:33रूप से अनेक क्वेश्चन मार्क दिखाई दे रहे
  251. 11:35थे। आखिर पुलिस का काम ही शक करना होता
  252. 11:37है। खैर शौर्य ने जोड़तोड़ कर कुछ बात
  253. 11:41बनाई और अटकते हुए बोला हां इसी मंदिर में
  254. 11:45पुजारी बाबा ने अपने ही कमरे में मुझे
  255. 11:47थोड़ी सी जगह दे दी है। मैं उनके साथ ही
  256. 11:50रहता हूं। इंस्पेक्टर उसकी हालत से अंदाजा
  257. 11:53लगा सकता था। फिर उसने कुछ सोच कर पूछा।
  258. 11:55[संगीत] क्या पुलिस को फोन तुमने ही किया
  259. 11:58था? शौर्य सोचने लगा उसे क्या बोलना
  260. 12:01चाहिए? फिर उसे ध्यान [संगीत] आया कि
  261. 12:02पुलिस के पास पुजारी बाबा का नंबर होगा।
  262. 12:05अगर वो सच नहीं बताएगा तो फालतू में
  263. 12:07पुजारी बाबा से पूछताछ हो सकती थी। यही सब
  264. 12:10सोचते हुए उसने तुरंत कहा हां मैंने ही
  265. 12:13किया था। वहीं शौर्य का जवाब सुनकर शिप्रा
  266. 12:16हैरान रह गई। उसे समझ नहीं आया कि शौर्य
  267. 12:19ने यह कब किया होगा। लेकिन उसके [संगीत]
  268. 12:21दिल में शौर्य के लिए एक रिस्पेक्ट आ गई
  269. 12:24थी। इंस्पेक्टर के सवाल अभी खत्म कहां हुए
  270. 12:26थे? इसीलिए उन्होंने अपना अगला सवाल पूछ
  271. 12:29लिया। तो तुम्हें पहले से पता था कि ऐसा
  272. 12:32कुछ होने वाला था। इस पर शौर्य ने एक नजर
  273. 12:35बलवंत राय और शिप्रा की तरफ देखा और फिर
  274. 12:38साफ शब्दों में सारा माजरा समझाते हुए
  275. 12:40[संगीत] बोला। मुझे ऐसा महसूस हुआ कि कुछ
  276. 12:43गड़बड़ है। क्योंकि जिस वक्त यह फैमिली
  277. 12:45यहां आई थी तो मैं नीचे सीढ़ियों के पास
  278. 12:47ही था और मैंने [संगीत] दो बदमाशों को
  279. 12:49इनका पीछा करते देखा। फोन पर किसी से उनकी
  280. 12:52बातचीत सुनकर मुझे उनके इरादों का पता
  281. 12:54चला। इस पर इंस्पेक्टर ने शौर्य की फटे
  282. 12:57स्थिति का अंदाजा लगाया और एक बार फिर
  283. 12:59गहरी जिज्ञासा और संदेह के साथ बोल उठे
  284. 13:02तुमने फोन कहां से किया था? [संगीत]
  285. 13:04तुम्हें देखकर लगता तो नहीं कि तुम्हारे
  286. 13:05पास कोई फोन भी होगा। मैंने पुजारी बाबा
  287. 13:08के फोन से कॉल लगाया था। शौर्य ने सच्चाई
  288. 13:11से जवाब दिया। शिप्रा को यह अच्छा नहीं लग
  289. 13:14रहा था कि शौर्य के सिर से खून रिस रहा है
  290. 13:17और इंस्पेक्टर उससे सवाल जवाब ही किए जा
  291. 13:19रहे हैं। आखिरकार उसका सब्र जवाब दे गया
  292. 13:22और वो इंस्पेक्टर को विनम्रता के साथ
  293. 13:24टोकते [संगीत] हुए बोली इंस्पेक्टर साहब
  294. 13:27यह सवाल जवाब तो बाद में भी हो सकते हैं
  295. 13:29ना अभी इनका इलाज ज्यादा जरूरी है। वहीं
  296. 13:32शिप्रा की आंखों में नाराजगी देखकर
  297. 13:33इंस्पेक्टर [संगीत] ने आगे कोई सवाल नहीं
  298. 13:35पूछा और राय साहब से कहा ठीक है। राय साहब
  299. 13:39चलिए हम [संगीत] साथ में चलते हैं। इस पर
  300. 13:42बलवंत राय ने हां में सर हिलाया और अपने
  301. 13:44परिवार के साथ कार की तरफ बढ़ गए। कुछ ही
  302. 13:47घंटों में बलवंत राय की फैमिली बैकुंठपुर
  303. 13:49थाने से बाहर निकल गई। हॉस्पिटल में शौर्य
  304. 13:52की मरम पट्टी के बाद सभी थाने आ गए थे।
  305. 13:54जहां सबके बयान दर्ज करने के बाद
  306. 13:56इंस्पेक्टर ने उन सभी को फ्री कर दिया।
  307. 13:58वहीं शौर्य अभी भी बलवंत राय की कार में
  308. 14:01मौजूद था। जहां बलवंत राय और राजदीप राय
  309. 14:03भी बैठे हुए थे और शिप्रा अपने भाई के साथ
  310. 14:05दूसरी गाड़ी में थी। [संगीत] इस वक्त
  311. 14:07माहौल में गहरी शांति पसरी हुई थी। कोई भी
  312. 14:10किसी से बात करने की स्थिति में नहीं था।
  313. 14:12लेकिन अभी पुलिस स्टेशन से निकले हुए 5
  314. 14:14मिनट ही गुजरे थे कि शौर्य बोल उठा। प्लीज
  315. 14:17मुझे मंदिर के बाहर छोड़ दीजिएगा। वहीं
  316. 14:20बलवंत राय शौर्य की बात सुनकर कुछ पल उसको
  317. 14:22देखते रहे। फिर उनकी निगाह राजदीप से मिली
  318. 14:25और आंखों ही आंखों में दोनों के बीच किसी
  319. 14:27बात की सहमति होते ही राजदीप राय ने गहरी
  320. 14:30चिंता जताते हुए शौर्य से कहा, तुम्हें
  321. 14:34पता है दो दिनों से हम तुम्हें ढूंढ रहे
  322. 14:35हैं। शौर्य को कुछ ऐसा ही अंदेशा था। उसने
  323. 14:39कुछ कहा नहीं पर अपनी आंखों से ऐसे जताया
  324. 14:41कि मानो उसे इसका कोई आभास ही ना हो। तभी
  325. 14:44राजदीप राय ने शौर्य पर थोड़ा दबाव बनाते
  326. 14:46हुए जिज्ञासा के साथ पूछा तुम उस रात बिना
  327. 14:50किसी को कुछ बताए कहां चले गए थे? शौर्य
  328. 14:53को पहले से ही पता था कि ऐसा सवाल उसके
  329. 14:55सामने आ सकता है। इसीलिए उसने शांत लेकिन
  330. 14:58स्पष्ट लहजे में कहा। दरअसल वहां जो हुआ
  331. 15:01उसके बाद मेरा वहां रुकना ठीक नहीं था।
  332. 15:03सुमै वहां से वापस मंदिर आ गया था। मंदिर
  333. 15:06से तो उठाकर वो लोग मुझे ले गए थे। इस पर
  334. 15:09राजदीप राय ने एक लंबी सांस ली और फिर
  335. 15:11समझाते हुए बोले मैं जानता हूं कि उस रात
  336. 15:13वहां जो कुछ भी हुआ था उसमें तुम्हारी कोई
  337. 15:16गलती नहीं थी पर वो सिचुएशन हमारे लिए भी
  338. 15:18अनएक्सेक्टेड थी। हमें खुद समझ नहीं आ रहा
  339. 15:21था कि उस स्थिति में हम क्या करें। फिर जब
  340. 15:23कुछ सोचने लायक हुए तब तक तुम वहां से जा
  341. 15:26चुके थे। यह कहते हुए राजदीप राय अतीत में
  342. 15:28कहीं खोसे गए। उन्हें अब भी समझ नहीं आ
  343. 15:30रहा था कि आखिर उनकी बेटी के साथ ऐसा हुआ
  344. 15:33तो हुआ क्यों? वहीं राजदीप की बात सुनकर
  345. 15:36शौर्य को भी गहरी शर्मिंदगीगी महसूस होने
  346. 15:38लगी और वह सहानुभूति जताते हुए बोला उस
  347. 15:41वक्त मुझे भी नहीं समझ आ रहा था कि मैं आप
  348. 15:43लोगों का सामना कैसे करूंगा। मैं क्या
  349. 15:46जवाब देता आप लोगों को? आप जैसे बड़े
  350. 15:48लोगों के साथ यह नहीं होना चाहिए था। यह
  351. 15:50कहते हुए शौर्य का चेहरा शर्मिंदगीगी से
  352. 15:52झुक गया। अगर उसका अतीत रहस्यमय नहीं होता
  353. 15:55तो वह कभी शिप्रा के साथ वह सब नहीं होने
  354. 15:57देता जो उस रात उसने झेला। वहीं कुछ समय
  355. 16:00तक गाड़ी में सन्नाटा पसर गया। जिसे
  356. 16:02तोड़ते हुए राजदीप राय ने गंभीर लहजे में
  357. 16:05कहा वहां जो भी हुआ था हम सबके सामने हुआ
  358. 16:08था। इसीलिए कोई भी तुम्हें दोष नहीं दे
  359. 16:11सकता था। पर अब एक सबसे बड़ा सच यह भी है
  360. 16:14कि ना चाहते हुए भी शिप्रा के साथ
  361. 16:15तुम्हारी शादी हो चुकी है। हमारे परिवार
  362. 16:18के लिए भी यह बड़ी ऑकवर्ड स्थिति है। शहर
  363. 16:20में सिर्फ हमारे परिवार की ही चर्चा हो
  364. 16:22रही है। और अब हमें खुद नहीं पता चल रहा
  365. 16:25कि स्थिति से हम बाहर कैसे निकलें।
  366. 16:28यह कहते हुए राजदीप के सामने रह-रह कर
  367. 16:30शिप्रा का मासूम चेहरा आ रहा था। उस बच्ची
  368. 16:33पर तो मानो दुख का पहाड़ ही टूट पड़ा था।
  369. 16:35और तभी राजदीप ने भावुक स्वर में आगे कहा,
  370. 16:38इस वक्त सबसे विकट स्थिति तो शिप्रा के
  371. 16:40लिए है। क्योंकि उस अकेली को सबके ताने
  372. 16:43झेलने पड़ रहे हैं। पर फिर भी वो किसी से
  373. 16:46कोई शिकायत नहीं कर रही। इस पर शौर्य ने
  374. 16:48भी शिप्रा के लिए सिंपैथी दिखाई और गहरी
  375. 16:50आवाज में कहा। मुझे खुद भी उनके लिए बुरा
  376. 16:53फील हो रहा है। आप ही बताइए उनके लिए मैं
  377. 16:56क्या कर सकता हूं? वहीं अब तक बलवंत राय
  378. 16:58चुपचाप दोनों की बात को सुन रहे थे।
  379. 17:00उन्होंने शौर्य की तरफ पलट कर कहा, क्या
  380. 17:03नाम बताया था तुमने अपना? हां श्रवण। तो
  381. 17:07देखो श्रवण जब तक हमारे परिवार के लिए
  382. 17:08स्थिति सामान्य नहीं हो जाती तुम हमारे
  383. 17:11साथ ही रहोगे। जब हमें लगेगा कि स्थिति अब
  384. 17:14अनुकूल है तो फिर तुम दोनों के रिश्ते का
  385. 17:16क्या किया जा सकता है? उसके बारे में हम
  386. 17:18सोच सकेंगे। लेकिन तभी शौर्य संकोच करते
  387. 17:21हुए तुरंत बोल उठा। पर अगर मैं आपके साथ
  388. 17:24रहूं तो और भी तरह-तरह की बातें होंगी।
  389. 17:26तुम गलत सोच रहे हो। अभी ज्यादा बातें हो
  390. 17:29रही हैं। जब तुम हमारे साथ रहोगे तो इतनी
  391. 17:32बातें नहीं होंगी। तुम्हें जब लोग इस हाल
  392. 17:34में देखेंगे तो यही कहेंगे कि यह देखो यही
  393. 17:37है राय फैमिली का दामाद शिप्रा का पति। पर
  394. 17:40जब तुम हमारे साथ रहोगे तो तुम्हारी
  395. 17:42स्थिति बेहतर हो जाएगी। जिससे लोगों की
  396. 17:44जुबान पर ताला लग जाएगा। इतना बोलकर बलवंत
  397. 17:48राय शौर्य की प्रतिक्रिया का इंतजार करने
  398. 17:50लगे। आखिर अब उस पर ही उनकी पूरी आशा टिकी
  399. 17:54हुई थी। वहीं बलवंत राय जी की बात शौर्य
  400. 17:56को भी समझ में आ गई थी। वो समझ गया कि
  401. 17:59बलवंत राय ने खुलकर नहीं कहा। पर उनके
  402. 18:01कहने का मतलब यही था कि वह शौर्य की
  403. 18:03भिखारी वाली स्थिति से ज्यादा परेशान थे।
  404. 18:06एक दृष्टि से देखा जाए तो वह अपनी जगह सही
  405. 18:08भी थे। क्योंकि कौन पिता अपनी बेटी के पति
  406. 18:11के रूप में एक भिखारी को देखना चाहेगा।
  407. 18:13लेकिन अब शौर्य को समझ नहीं आ रहा था कि
  408. 18:16वह क्या करें। क्योंकि उसके अपने भी कुछ
  409. 18:18मसले हैं। उसे अभी तक पता नहीं चला था कि
  410. 18:20कौन उसकी हत्या करना चाहता था। ऐसा कौन
  411. 18:23दुश्मन था जो नहीं चाहता था कि वह भारत की
  412. 18:26धरती पर अपना पैर भी रख पाए। हालांकि
  413. 18:29फिलहाल उसका दुश्मन यह मान चुका था कि
  414. 18:30शौर्य मर चुका है। इसीलिए अब उसे यह चिंता
  415. 18:33तो नहीं थी कि फिलहाल कोई उसकी ताक में
  416. 18:35होगा। लेकिन वो किसी रिश्ते में बंधकर भी
  417. 18:38नहीं रह सकता था। इसीलिए वो बलवंत राय से
  418. 18:40इंकार करना चाहता था। इसीलिए उसने संकोच
  419. 18:43भरे शब्दों में पूरी ईमानदारी से जवाब
  420. 18:45दिया।
  421. 18:47देखिए राय साहब मुझे नहीं पता कि मेरी
  422. 18:49स्थिति से आप कितने वाकिफ हैं। लेकिन मेरे
  423. 18:52जैसे लोगों का आप जैसे रईस लोगों के साथ
  424. 18:54रहना ठीक नहीं रहेगा। लोगों के ताने सुनकर
  425. 18:57आप कुछ दिनों के बाद मुझे अपने घर से
  426. 18:59निकाल ही देंगे। इसीलिए इससे तो अच्छा यही
  427. 19:02है कि इसी वक्त आप मुझे अपने साथ ले जाने
  428. 19:04का ख्याल छोड़ दें। आखिर शौर्य के हालात,
  429. 19:08उसकी बातें और बात करने का तरीका कहीं से
  430. 19:11भी आपस में मेल खाती नजर नहीं आ रही थी।
  431. 19:14वैसे भी किसी भिखारी से उन्हें इस तरह की
  432. 19:16समझदारी भरी बातों की उम्मीद नहीं थी।
  433. 19:19शौर्य की जगह कोई और भिखारी होता तो वह
  434. 19:21ऐसे मौके को दोनों हाथों से लपक लेता। पर
  435. 19:24इसके उलट शौर्य अभी भी उनके साथ जाने से
  436. 19:26इंकार कर रहा है। शादी वाली रात को भी उसे
  437. 19:30मुख्तार के गुर्गों का कोई खौफ नहीं था।
  438. 19:32उसने शादी भी की थी तो राहुल को बचाने के
  439. 19:35लिए। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि
  440. 19:37किसी भिखारी में इतनी हिम्मत हो सकती है।
  441. 19:40पर उन्होंने सोचा कि अपवाद हर जगह होते
  442. 19:42हैं। हो सकता है पहले इसके हालात इतने
  443. 19:45बुरे नहीं रहे होंगे। एक चीज तो वो समझ गए
  444. 19:48थे कि जो भी हो इसकी नियत साफ है। इसीलिए
  445. 19:50बलवंत राय इतनी आसानी से हार नहीं मान
  446. 19:53सकते थे। इसीलिए उन्होंने एक बार फिर जोर
  447. 19:55देकर कहा देखो श्रवण बेटा यह समय तुम्हारे
  448. 20:00अपने लिए भी एक मौके की तरह है। मुझे नहीं
  449. 20:02पता कि तुम्हारी ऐसी हालत क्यों है।
  450. 20:04तुम्हारी उम्र भी अभी ज्यादा नहीं लगती।
  451. 20:06[संगीत] तुम चाहो तो अपने हालात बेहतर कर
  452. 20:08सकते हो। तुम चाहो तो हमारे यहां कुछ काम
  453. 20:11कर सकते हो। अभी जो दर-दर की ठोकर खा रहे
  454. 20:14हो उससे तो बेहतर ही होगा ना। शौर्य कुछ
  455. 20:17पल सोचता रहा। फिर उसे लगा कि अब अगर उसने
  456. 20:19मना किया तो वह खुद पर शक करने का मौका
  457. 20:21देगा कि वह क्यों अपना जीवन स्तर सुधारना
  458. 20:24नहीं चाहता। इसी विचार के साथ उसने हल्का
  459. 20:27संकोच दिखाया और फिर सहमति में सिर हिलाते
  460. 20:29हुए कहा,
  461. 20:31अगर ऐसा है तो ठीक है। मैं चलने के लिए
  462. 20:34तैयार हूं। पर मुझे वहां क्या करना होगा?
  463. 20:38वहीं राजदीप राय ने शौर्य की हां सुनकर
  464. 20:40राहत की सांस ली और अगले ही पल वो सोचने
  465. 20:42लगे कि वो शौर्य से क्या काम ले सकते हैं।
  466. 20:45तभी उनके दिमाग में कुछ बात आई और
  467. 20:47उन्होंने तुरंत पूछा क्या तुम ड्राइविंग
  468. 20:51कर लेते हो? जब शौर्य ने सवाल सुना तो
  469. 20:54अनायास ही उसकी नजर गाड़ी ड्राइव कर रहे
  470. 20:56अधेड़ उम्र के शख्स पर ठहर गई। बलवंत राय
  471. 21:00शौर्य के भाव समझ गए और मुस्कुराते हुए
  472. 21:02बोले तुम उसकी चिंता मत करो। गिरधर की
  473. 21:05नौकरी पर कोई आंच नहीं आने वाली है। यह
  474. 21:08हमारा पुराना वफादार ड्राइवर है। यह भी
  475. 21:10हमारी फैमिली की ही तरह है। तुम सिर्फ यह
  476. 21:12बताओ कि तुम ड्राइविंग कर लेते हो? इस पर
  477. 21:15शौर्य ने केवल हां कहकर अपना सिर हिला
  478. 21:18दिया। तभी बलवंत राय ने अपनी भौंए चढ़ाई
  479. 21:20और निर्णायक लहजे में बोल उठे तो फिर ठीक
  480. 21:23है। अभी तुम हमारे यहां ड्राइविंग कर सकते
  481. 21:26हो। बाद में देखेंगे अगर तुम्हारे लिए और
  482. 21:28कोई दूसरा काम हुआ तो उसके लिए भी मनाही
  483. 21:30नहीं होगी। जब राय साहब की गाड़ी उनके
  484. 21:33बंगले में जाकर रुकी तो कुछ ही समय में
  485. 21:35राजदीप राय और शौर्य भी गाड़ी से बाहर
  486. 21:37निकल आए और उनके पीछे ही शिप्रा की कार भी
  487. 21:40आ चुकी थी। गाड़ी से बाहर आने के बाद
  488. 21:42शौर्य पूरे बंगले का निरीक्षण करने लगा।
  489. 21:45बंगले के सामने एक बड़ा सा लॉन था जिसमें
  490. 21:48सरला और जगदाप की वाइफ बिंदु बैठी हुई थी।
  491. 21:50जब उन्होंने देखा कि बलवंत राय के साथ
  492. 21:53शौर्य भी वहां पहुंच चुका है तो सरला भी
  493. 21:55बिंदु जी को लेकर तुरंत उन सभी के पास आ
  494. 21:57गई। वैसे भी उन्हें मंदिर में घटी सारी
  495. 21:59घटना पता चल चुकी थी। तभी शौर्य को देखकर
  496. 22:02सरला अपना मुंह बनाते हुए बोली, आखिर आप
  497. 22:05लोग इस भिखारी को घर ले ही आए। अब तक
  498. 22:07बलवंत राय हवेली के अंदर जा चुके थे और
  499. 22:10वहां पर अभी राजदीप राय, शिप्रा, राहुल और
  500. 22:13गिरधर ही मौजूद थे। वहीं जब राजदीप राय ने
  501. 22:15सरला के मुंह से भिखारी शब्द सुना। तो
  502. 22:18उन्हें टोकते हुए कहा, "भाभी, इसका नाम
  503. 22:20श्रवण है। इसीलिए अगर आप इसे नाम से
  504. 22:23बुलाएंगी, तो अच्छा लगेगा।"
  505. 22:25लेकिन सरला ने राजदीप की बात को बिल्कुल
  506. 22:26ही अनसुना कर दिया और फिर तंज भरे लहजे
  507. 22:29में बोल उठी तो क्या अब ये भिखारी यहीं
  508. 22:31रहेगा? सरला के इन बेवजह के तानों से अब
  509. 22:34राजदीप का मन भी खट्टा हो गया था। लेकिन
  510. 22:37उन्होंने सरला के मुंह लगना ठीक नहीं समझा
  511. 22:40और बात को खत्म करने के इरादे से ठंडे
  512. 22:42लहजे में कहा। लगता है आपने पिताजी की बात
  513. 22:45को सुना नहीं था। अगर आपको ऐतराज है तो आप
  514. 22:48उनसे बात कर सकती हैं। लेकिन सरला तो जैसे
  515. 22:51अपनी जुबान को धार करके बैठी थी। इसीलिए
  516. 22:54उसने जाते-जाते भी कटाक्ष करते हुए कहा,
  517. 22:57"मुझे क्या जरूरत है? जब आपको खुद ही कुएं
  518. 23:00में गिरना है तो मैं कौन होती हूं रोकने
  519. 23:02वाली?" एक भिखारी को आप अपने दामाद के रूप
  520. 23:04में स्वीकार करने को तैयार हैं, तो अब कोई
  521. 23:07क्या ही कर सकता है? इतना बोलकर सरला मुंह
  522. 23:10बनाते हुए वहां से चली गई। साथ ही बिंदु
  523. 23:13भी सरला के पीछे हो ली। वहीं राजदीप राय
  524. 23:15ने भी उनको रोकने की कोशिश नहीं की। अब
  525. 23:18राजदीप के पीछे शिप्रा, राहुल, गिरिधर और
  526. 23:20शौर्य ही बचे थे।
  527. 23:22लेकिन इस समय राजदीप के चेहरे पर गहरी
  528. 23:24शर्मिंदगीगी के भाव उमड़ आए थे। आखिर जो
  529. 23:27कुछ भी सरला ने शौर्य के सामने कहा था वो
  530. 23:29सभी अनकंफर्टेबल करने वाली बातें थी। तभी
  531. 23:32राजदीप राय ने एक लंबी सांस ली और शौर्य
  532. 23:35की तरफ मुड़कर धीमी आवाज में बोले यह
  533. 23:38हमारी भाभी हैं। इनकी बातों का बुरा मत
  534. 23:41मानना। यह ऐसी ही हैं। इन्हें बस किसी पर
  535. 23:44तंज कसने का मौका चाहिए होता है। इस पर
  536. 23:47शौर्य ने हल्की मुस्कान के साथ सहज भाव से
  537. 23:49जवाब दिया। मैं समझता हूं आप चिंता मत
  538. 23:52कीजिए। ऐसी बातें सुनने की मुझे आदत है।
  539. 23:55इसीलिए इस तरह की बातें मुझ पर कोई असर
  540. 23:57नहीं करती। वहीं शिप्रा गौर से शौर्य की
  541. 24:00तरफ ही देख रही थी। शौर्य की मुस्कुराहट
  542. 24:02इस वक्त उसकी घनी लंबी दाढ़ी के नीचे छुप
  543. 24:05गई थी। जिसे शिप्रा बखूबी देख पा रही थी।
  544. 24:08साथ ही जब शौर्य अपनी बात रखता है तो लगता
  545. 24:10नहीं कि वो किसी भिखारी की बात है। तभी
  546. 24:13शिप्रा के दिमाग में आया कि इसकी बेतरतीब
  547. 24:15दाढ़ी के पीछे इसका चेहरा कैसा होगा। इसकी
  548. 24:18बेतरतीब दाढ़ी के पीछे आखिर इसका चेहरा
  549. 24:21कैसा होगा? अपने भिखारी पति को देखकर
  550. 24:24शिप्रा के दिमाग में ख्याल आया। आखिर कुछ
  551. 24:26भिखारी जानबूझकर भी अपनी स्थिति खराब
  552. 24:29दिखाते हैं ताकि लोगों को उन पर दया आए और
  553. 24:32उन्हें ज्यादा से ज्यादा भीख मिल सके। अभी
  554. 24:35शिप्रा अपनी इसी उधेड़बुन में थी कि तभी
  555. 24:37उसके कानों में राजदीप राय की आवाज पड़ी।
  556. 24:40गिरधर तुम श्रवण को अपने साथ ले जाओ और
  557. 24:43अपने साथ वाला कमरा इसे दिखा दो। आज से यह
  558. 24:46वहीं रहेगा। और हां काम वाली से बोलकर
  559. 24:49कमरा साफ करवा देना। जी साहब गिरधर ने
  560. 24:53सहमति में सिर हिलाते हुए कहा। फिर वह
  561. 24:55शौर्य की तरफ पलट कर बोला चलो श्रवण
  562. 24:58तुम्हें तुम्हारा कमरा दिखा देता हूं।
  563. 25:01गिरधर के साथ अभी शौर्य कुछ ही कदम आगे
  564. 25:03बढ़ा था कि तभी पीछे से राजदीप राय की
  565. 25:06आवाज गूंजी। सुनो श्रवण क्या तुम्हारा
  566. 25:09सामान मंदिर में है? इस पर शौर्य ने खुद
  567. 25:12को एक सामान्य भिखारी जताते हुए साफ
  568. 25:14शब्दों में कहा। जी हां, मेरे कुछ कपड़े
  569. 25:17होंगे जो लोगों ने दिए थे। मैं गिरधर चाचा
  570. 25:20के साथ जाकर ले आऊंगा। जब राजदीप ने शौर्य
  571. 25:23की बातों पर गौर किया तो उन्हें काफी
  572. 25:25अच्छा लगा। उसने गिरधर [संगीत] से एक
  573. 25:27रिश्ता भी बना लिया था। वो खुश थे कि इस
  574. 25:29तरह श्रवण का मन यहां लग जाएगा। वहीं जब
  575. 25:31शिप्रा ने शौर्य की बात सुनी और उसके
  576. 25:33कपड़ों पर ध्यान दिया तो पाया कि इस वक्त
  577. 25:35शौर्य ने जो कपड़े पहने थे वे उसकी फिटिंग
  578. 25:38के नहीं थे। इसीलिए शिप्रा ने सोचा कि
  579. 25:40इसके दूसरे कपड़े भी ऐसे ही होंगे। और यही
  580. 25:43सोचकर शिप्रा ने सहज भाव से कहा उन कपड़ों
  581. 25:46को रहने दो। तुम राहुल के साथ जाकर अपने
  582. 25:49नाप के कुछ दूसरे कपड़े ले लेना। यह पहली
  583. 25:53बार था जब शिप्रा ने शौर्य से कुछ कहा था।
  584. 25:55उसके मीठे शब्दों को सुनते ही शौर्य के
  585. 25:58दिल की घंटी बज उठी। लेकिन जब शौर्य ने
  586. 26:00शिप्रा की तरफ देखा तो उसे शिप्रा के
  587. 26:02चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नजर नहीं आया। पर
  588. 26:06उसे यह तो महसूस हो ही गया कि शिप्रा उसे
  589. 26:08इन गंदे कपड़ों में नहीं देखना चाहती है।
  590. 26:10वहीं जब राहुल ने शिप्रा की बात सुनी तो
  591. 26:12वह फौरन बोल उठा मैं अभी तैयार होकर आता
  592. 26:14हूं श्रवण भैया आप भी तब तक अपना रूम देख
  593. 26:17लो। फिर हम आपके लिए शॉपिंग करने चलते
  594. 26:20हैं। राहुल के मुंह से अपने लिए भैया
  595. 26:22सुनकर शौर्य को काफी अच्छा लगा। गुमनामी
  596. 26:25के कई महीनों के बाद आखिरकार उसे कुछ नए
  597. 26:27रिश्ते मिले थे। वैसे भी राहुल के दिल में
  598. 26:30शौर्य के लिए इज्जत बढ़ गई थी। जिस तरह से
  599. 26:32आज शौर्य ने राहुल को गुंडों से बचाया
  600. 26:35उससे राहुल की नजर में शौर्य सुपरमैन बन
  601. 26:37चुका था। इससे पहले शादी वाली रात को भी
  602. 26:40शौर्य राहुल की जान बचाने की खातिर ही
  603. 26:42शिप्रा से शादी करने को तैयार हुआ था।
  604. 26:45कहीं ना कहीं यह राहुल के अनकॉन्शियस
  605. 26:47माइंड में काम कर रहा था। इसलिए राहुल के
  606. 26:49दिल में खुद ब खुद शौर्य के लिए रिस्पेक्ट
  607. 26:51आ गई थी। वहीं जब राजदीप राय ने भी राहुल
  608. 26:54के मुंह से श्रवण के लिए भैया सुना तो
  609. 26:56उन्हें भी लगा कि उनकी फैमिली में श्रवण
  610. 26:58को लेकर एक्सेप्टेंस बढ़ रही है। इसके बाद
  611. 27:01शौर्य गिरधर के साथ अपने नए आशियाने को
  612. 27:03देखने के लिए बढ़ गया। बलवंत राय की हवेली
  613. 27:06एक बहुत बड़े कंपाउंड से घिरी थी जिसके
  614. 27:08बीच में एक बड़ी कोठी [संगीत] मौजूद थी और
  615. 27:10उसके इर्द-गिर्द तीन छोटी कोठियां बनी थी।
  616. 27:12व कंपाउंड में मौजूद खूबसूरत फूलों की
  617. 27:15क्या हवेली की सुंदरता को और भी बढ़ा रही
  618. 27:18थी। चलते-चलते गिरधर ने शौर्य को राय
  619. 27:20परिवार के बारे में बताना शुरू किया। वो
  620. 27:24जो आप सबसे बड़ी वाली कोठी देख रहे हैं
  621. 27:26श्रवण उसमें बड़े साहब रहते हैं। बाई तरफ
  622. 27:29वाली कोठी राजदीप साहब की है और दाई तरफ
  623. 27:32वाली बृजभूषण भाई साहब की और यह जो तीसरी
  624. 27:35कोठी है उसमें जगताप भाई साहब रहते हैं।
  625. 27:37वो जो मैडम अभी आपके लिए बुरा बोल कर गई
  626. 27:40वो [संगीत] बृजभूषण भाई साहब की पत्नी
  627. 27:42सरला जी थी। और उनके साथ जो मैडम थी वो
  628. 27:45जगताप भाई साहब की पत्नी बिंदु [संगीत] जी
  629. 27:47थी।
  630. 27:48तभी शौर्य ने कुछ जानने की इच्छा से पूछा।
  631. 27:51अच्छा गिरधर चाचा एक बात बताइए। मुझे लगता
  632. 27:54है कि सरला जी शिप्रा मैम को कुछ खास पसंद
  633. 27:57नहीं करती हैं। ऐसा है क्या? इस पर गिरधर
  634. 28:00ने पहले आसपास देखा और फिर धीमी आवाज में
  635. 28:02बोला हां सही पहचाना तुमने। पहले ऐसा नहीं
  636. 28:06था। लेकिन जब से शिप्रा बेबी का अपने दम
  637. 28:09पर खड़ा किया ब्रांड जिंग मर्चेंडाइज
  638. 28:12पॉपुलर हुआ है तब से बड़ी मेम साहब को
  639. 28:15शिप्रा बेबी खटकने लगी हैं।
  640. 28:17बड़े घरों में अक्सर देखा जाता है कि घर
  641. 28:19की आपसी कलह की जानकारी जितनी नौकरों को
  642. 28:22होती है उतनी किसी और को नहीं। छोटी-छोटी
  643. 28:25चीजों को नौकर जितना ऑब्जर्व करते हैं,
  644. 28:27उतना कोई और नहीं कर पाता। गिरधर इस घर का
  645. 28:29पुराना नौकर है। इसीलिए उसे घर के
  646. 28:32प्रत्येक सदस्य के बारे में अच्छी बुरी हर
  647. 28:34चीज पता थी। इसीलिए शौर्य ने एक और सवाल
  648. 28:37पूछ डाला। लेकिन अगर शिप्रा मैम का ब्रांड
  649. 28:41पॉपुलर हो रहा है तो इसमें सरला मैम को
  650. 28:43क्यों तकलीफ होने लगी?
  651. 28:45इस पर गिरधर ने उसे समझाते हुए कहा, दरअसल
  652. 28:49बात यह है कि इससे पहले फैमिली में सरला
  653. 28:51मैम के बेटे कुलवंत बाबू की बड़ी पूछ थी
  654. 28:54क्योंकि उन्होंने भी बिजनेस को बढ़ाने में
  655. 28:56बहुत योगदान दिया था। लेकिन एक लड़की होकर
  656. 28:59शिप्रा बेबी ने बिना किसी की मदद के अपने
  657. 29:02ब्रांड को पॉपुलर कर लिया तो हेड ऑफ
  658. 29:04फैमिली की निगाह में उनकी अहमियत बढ़ गई
  659. 29:07और कुलवंत बाबू की पूछ छोटी हो गई। बस यही
  660. 29:10बात सरला मैन को खटकती है। बातचीत करते
  661. 29:14हुए शौर्य गिरधर के साथ आगे बढ़ ही रहा था
  662. 29:16कि उसे सामने 24-25 साल की लड़की टाइट से
  663. 29:19आउटफिट में दौड़ कर उनकी तरफ आती हुई
  664. 29:21दिखाई दी और ताजा हवा के झोंके की तरह वो
  665. 29:24लड़की इन दोनों की तरफ ध्यान दिए बिना
  666. 29:26वहां से गुजर गई। जब शौर्य ने उस लड़की को
  667. 29:29देखा तो वह फौरन समझ गया कि इस लड़की को
  668. 29:31अपने आसपास क्या हो रहा है इससे कोई फर्क
  669. 29:34नहीं पड़ता। वहीं जब गिरिधर ने शौर्य की
  670. 29:36नजर उस गुजरती लड़की पर पड़ती देखी तो वो
  671. 29:38तुरंत बोला [संगीत] यह युविका बिटिया है।
  672. 29:42बृजभूषण साहब की बेटी लगता है किसी ने फिर
  673. 29:45से इनको बोल दिया है कि ये मोटी दिख रही
  674. 29:47हैं। मतलब शौर्य को कुछ समझ नहीं आया। इस
  675. 29:52[संगीत] पर गिरधर हंसते हुए बोला, अरे
  676. 29:55मतलब यह है कि जब कोई इनको बोल देता है कि
  677. 29:58यह थोड़ी मोटी लग रही हैं तो बस इनका
  678. 30:00वर्कआउट शुरू हो जाता है। ओ अच्छा तो यह
  679. 30:04बात है। कहते हुए शौर्य के चेहरे पर भी
  680. 30:06मुस्कान आ गई। खैर, गिरधर के कमरे के पास
  681. 30:09पहुंचकर शौर्य ने देखा कि कंपाउंड को घेरे
  682. 30:12हुए जो दीवार थी, उसके साथ ही तीन कमरे
  683. 30:14बने हुए थे। गिरधर शौर्य को दूसरे नंबर के
  684. 30:17कमरे के पास ले गया। उस कमरे के दरवाजे पर
  685. 30:19बिना ताले के बस कुंडी लगी हुई थी। शौर्य
  686. 30:23गिरधर के साथ कमरे के अंदर चला गया। उस
  687. 30:26पूरे कमरे में धूल की परत चढ़ी हुई थी
  688. 30:29क्योंकि बहुत समय से कमरा खाली पड़ा था।
  689. 30:32कमरे के साथ ही एक छोटा सा किचन था और
  690. 30:35किचन के अपोजिट ही एक अटैच बाथरूम था।
  691. 30:38शौर्य ने एक सरसरी नजर के साथ पूरे कमरे
  692. 30:40का मुआयना किया। [संगीत] तभी खामोशी को
  693. 30:43तोड़ते हुए गिरधर की आवाज गूंजी। तो बताओ
  694. 30:46कैसा लगा कमरा?
  695. 30:49शौर्य पिछले 6 महीने से एक मंदिर के छोटे
  696. 30:51से कमरे में पुजारी बाबा के साथ रहकर जमीन
  697. 30:54पर सोता आया था। उसकी तुलना में तो यह
  698. 30:56कमरा उससे काफी बड़ा था और साथ में किचन
  699. 30:59और बाथरूम भी अटैच थे। लॉन के साइड एक
  700. 31:02खिड़की भी थी जिससे लॉन का नजारा दिखाई
  701. 31:05देता था। इसीलिए यह कहा जा सकता है कि
  702. 31:07शौर्य की पिछले कुछ महीनों की जिंदगी से
  703. 31:10तो यह काफी बेहतर है। शौर्य खुशी जाहिर
  704. 31:13करते हुए बोला यह तो बढ़िया है चाचा। बस
  705. 31:17इसे साफ करने में थोड़ी मेहनत लगेगी।
  706. 31:20उसकी [संगीत] चिंता मत करो। वैसे भी अभी
  707. 31:22तुम मार्केट जाने वाले हो। तब तक मैं इसे
  708. 31:25साफ करवा दूंगा। ऐसा करो अभी तुम मेरे
  709. 31:28कमरे में चलकर हाथ मुंह धो लो। तब तक
  710. 31:31राहुल बाबा भी आ जाएंगे। गिरधर ने एक
  711. 31:34हल्की मुस्कान के साथ कहा और शौर्य को भी
  712. 31:36यह सुझाव ठीक लगा। शौर्य के कमरे से ही
  713. 31:39सटा गिरधर चाचा का कमरा बहुत साफ सुथरा था
  714. 31:42और हर सामान करीने से अपनी जगह पर रखा हुआ
  715. 31:45था। इसके बाद शौर्य ने वक्त गवाए बिना हाथ
  716. 31:48मुंह धोया और कपड़ों पर जो खून लगा हुआ था
  717. 31:50उसको भी साफ कर लिया। दरअसल शौर्य के सर
  718. 31:53पर कट लगने के कारण उसके कपड़ों पर खून लग
  719. 31:56गया था। पर [संगीत] अब डॉक्टर ने दो
  720. 31:58स्टिचेस लगा दिए थे जो उसके लंबे बालों के
  721. 32:01कारण दिखाई भी नहीं दे रहे थे। वहीं अब तक
  722. 32:04गिरधर ने टीवी चला लिया और वो न्यूज़ चैनल
  723. 32:06देखने लगा। शौर्य गिरधर के पास आकर बैठा
  724. 32:09ही था कि [संगीत] तभी बाहर किसी की आहट
  725. 32:11हुई। जब गिरधर और शौर्य ने बाहर देखा तो
  726. 32:13कमरे के बाहर राहुल था। राहुल मुस्कुराते
  727. 32:16हुए बोला चलिए भैया शॉपिंग टाइम। अगर
  728. 32:21शौर्य चाहता तो कब का अपना होलिया चेंज कर
  729. 32:23सकता था। पर उसने तो जानबूझकर यह वेश अपना
  730. 32:25रखा था ताकि अपने दुश्मनों का पता [संगीत]
  731. 32:28लगा सके। लेकिन अब उसके पास मना करने का
  732. 32:30कोई कारण नहीं था। इसीलिए वह हालात के
  733. 32:33बहाव में बहने के लिए तैयार हो गया। वैसे
  734. 32:36भी कहीं ना कहीं शिप्रा की मासूमियत उसके
  735. 32:38दिल में घर कर गई थी। शायद यह भी एक कारण
  736. 32:40था कि वो राहुल के साथ जाने को तैयार हो
  737. 32:43गया। कुछ ही देर में शौर्य राहुल के साथ
  738. 32:45एक मॉल में पहुंच गया।
  739. 32:48मॉल में प्रवेश करते वक्त वहां के गार्ड
  740. 32:50ने शौर्य का हुलिया देखकर उसे रोकना चाहा।
  741. 32:53पर राहुल के कारण उसने ऐसा करने की हिम्मत
  742. 32:55नहीं की। फिर जब वो दोनों एक स्टोर में गए
  743. 32:58तो स्टोर में मौजूद सेल्स गर्ल ने शौर्य
  744. 33:00को देखकर मुंह बना लिया। पर वो भी राहुल
  745. 33:03को देखकर कुछ बोल नहीं सकी। वहीं राहुल ने
  746. 33:06दो-तीन जोड़े शर्ट पट पसंद किए और शौर्य
  747. 33:09का हाथ पकड़ कर चेंजिंग रूम की तरफ बढ़
  748. 33:11गया। जाहिर है एक भिखारी को मॉल के
  749. 33:14तौरतरीकों का क्या ही पता होगा। यही सोचकर
  750. 33:17राहुल उसे अच्छे से असिस्ट करना चाह रहा
  751. 33:19था। शौर्य का हाथ पकड़े हुए जैसे ही राहुल
  752. 33:22ने चेंजिंग रूम के एक दरवाजे को पुश किया
  753. 33:24तो वहां पहले से एक लड़की कपड़े चेंज कर
  754. 33:27रही थी। राहुल ने जैसे ही उस लड़की को
  755. 33:29देखा उसका मुंह खुला का खुला रह गया और
  756. 33:32उसने जल्दी से ओह आई एम रियली सॉरी कहकर
  757. 33:35दरवाजा बंद कर दिया। राहुल का चेहरा शर्म
  758. 33:38से लाल हो गया। लेकिन उसने खुद को नॉर्मल
  759. 33:41किया और शौर्य को लेकर दूसरे चेंजिंग रूम
  760. 33:44में पहुंच गया। उसने पहले हल्के से
  761. 33:46चेंजिंग रूम के दरवाजे को पुश करके देखा
  762. 33:48कि [संगीत] कोई अंदर है तो नहीं। फिर उसने
  763. 33:50शौर्य को कपड़े थमाते हुए कहा, "आप अंदर
  764. 33:53जाकर फिटिंग वगैरह देख लो भैया।" राहुल
  765. 33:57शौर्य को ऐसे ट्रीट कर रहा था जैसे शौर्य
  766. 33:59पहली बार किसी स्टोर में आया हो। शौर्य को
  767. 34:02राहुल के इस व्यवहार पर अंदर ही अंदर हंसी
  768. 34:04आ रही थी। खैर, इसके बाद शौर्य ने चेंजिंग
  769. 34:07रूम को अंदर से बंद कर लिया और राहुल बाहर
  770. 34:09ही खड़ा रहा। समय बिताने के लिए राहुल
  771. 34:12चेंजिंग रूम के पास से हटकर स्टोर में
  772. 34:14इधर-उधर घूमने लगा। तभी सामने से एक लड़की
  773. 34:17एक हट्टे-कट्टे लड़के के साथ उसके सामने
  774. 34:19आकर खड़ी हो गई। जब राहुल ने देखा कि उसके
  775. 34:22सामने वही लड़की खड़ी है जिसके चेंजिंग
  776. 34:24रूम का दरवाजा उसने गलती से खोल दिया था
  777. 34:26तो एक पल के लिए घबरा गया। वो लड़की राहुल
  778. 34:29की तरफ इशारा करके गुस्से में बोली विनायक
  779. 34:32ये यही है वो लड़का। बदतमीज दिस गाय हैज़
  780. 34:36जीरो सिविक सेंस। वैसे देखा जाए तो इसमें
  781. 34:39राहुल का कोई दोष नहीं था। उस लड़की ने ही
  782. 34:41अंदर से दरवाजा बंद नहीं किया था। पर अब
  783. 34:44वो अपना दोष राहुल के ऊपर मढ़ रही थी।
  784. 34:47वहीं जब राहुल ने उस लड़की के साथ आए
  785. 34:49पहलवान जैसे लड़के को देखा तो उसकी बॉडी
  786. 34:52देखकर वो कांप गया।
  787. 34:54लेकिन फिर उसने हिम्मत करके झुंझलाते हुए
  788. 34:57कहा। अरे मैडम मैंने सॉरी बोला तो सही और
  789. 35:00वैसे इसमें मेरी क्या गलती थी? आपको
  790. 35:02चेंजिंग रूम का दरवाजा सही से बंद करना
  791. 35:04चाहिए था। इससे पहले कि वो लड़की कोई जवाब
  792. 35:06देती विनायक राहुल के सामने आकर गुर्राते
  793. 35:09हुए बोला तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम
  794. 35:12मेरी विद्या पर इल्जाम लगा रहे हो। इस पर
  795. 35:15राहुल ने एक बार फिर झुंझुलाते हुए कहा
  796. 35:18अरे यार तो मुझे क्या पता होगा कि ये
  797. 35:19दरवाजा खोलकर कपड़े चेंज कर रही हैं। देख
  798. 35:22रहे हो डार्लिंग ये कैसे मुझे ही दोष दे
  799. 35:24रहा है? यह कहकर विद्या ने विनायक को और
  800. 35:26भी भड़का दिया। विनायक को अपनी गर्लफ्रेंड
  801. 35:29के सामने हीरो बनने का मौका मिल रहा था।
  802. 35:31ऐसे में वो पीछे कैसे हट सकता है? इसीलिए
  803. 35:34उसने राहुल का कॉलर पकड़ कर कहा तेरी इतनी
  804. 35:37हिम्मत मैं तेरा मुंह तोड़ दूंगा।
  805. 35:40इस हंगामे को देखकर एक सेल्स बॉय उनके बीच
  806. 35:43आ गया और विनती करते हुए बोला सर आप
  807. 35:46[संगीत] क्या कर रहे हैं? आप स्टोर में इस
  808. 35:48तरह मारपीट नहीं कर सकते।
  809. 35:50लेकिन विनायक ने उस सेल्स बॉय को एक ही
  810. 35:52हाथ से धक्का देकर दूर फेंक दिया और
  811. 35:55गुस्से में दहाड़ते हुए बोला
  812. 35:57तुम उस समय कहां थे जब इसने विद्या के
  813. 36:00चेंजिंग रूम का दरवाजा खोला था। और अब तुम
  814. 36:02इसको बचाने आए हो। जरूर इसमें तुम्हारी भी
  815. 36:05मिलीभगत होगी। विनायक कुछ सुनने को तैयार
  816. 36:08नहीं था। उसे बस अपनी गर्लफ्रेंड की नजर
  817. 36:10में बड़ा बनना था। वहीं चेंजिंग रूम के
  818. 36:13अंदर शौर्य ने कपड़े बदल लिए थे। सिर्फ इन
  819. 36:16कपड़ों को पहनने मात्र से शौर्य का गेटअप
  820. 36:19पूरी तरह चेंज हो गया था। ना जाने कितने
  821. 36:21दिनों बाद वो खुद को ढंग के कपड़ों में
  822. 36:23देख रहा था।
  823. 36:25हम एक बार राहुल को भी दिखाना चाहिए। यह
  824. 36:30सोचकर शौर्य चेंजिंग रूम से बाहर निकला और
  825. 36:32राहुल को ढूंढने के लिए इधर-उधर नजर
  826. 36:34दौड़ाने लगा। कुछ ही दूरी पर उसे भीड़
  827. 36:37दिखाई दी तो वो उस भीड़ की तरफ बढ़ गया।
  828. 36:40वहां चल रहे हंगामे को देखकर शौर्य को
  829. 36:42किसी अनहोनी की आशंका होने लगी। वो तेजी
  830. 36:45से चलकर भीड़ के पास पहुंचा तो विनायक
  831. 36:47राहुल का कॉलर पकड़े उसे पीछे की ओर धकेल
  832. 36:50रहा था। राहुल स्टोर की एक दीवार से सट
  833. 36:53गया। विनायक के सामने राहुल मेमने जैसा
  834. 36:56नजर आ रहा था।
  835. 36:58अरे तुम समझ क्यों नहीं रहे? मैंने कुछ भी
  836. 37:00जानबूझकर नहीं किया। राहुल ने विनायक को
  837. 37:02समझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन कोई असर
  838. 37:05नहीं हुआ। विनायक धौस देता हुआ बोला,
  839. 37:08हां अब तो तू यही कहेगा पर जब मेरा एक हाथ
  840. 37:12पड़ेगा तो गिड़गिड़ा कर विद्या से माफी
  841. 37:14मांगेगा।
  842. 37:15अच्छा रुको रुको। राहुल हार मानता हुआ
  843. 37:18बोला। बताओ तुम क्या चाहते हो मुझसे?
  844. 37:21विनायक को उम्मीद नहीं थी कि राहुल इतनी
  845. 37:23आसानी से सरेंडर कर देगा। वहीं शौर्य जो
  846. 37:26राहुल की तरफ बढ़ रहा था राहुल की बात
  847. 37:28सुनकर विनायक का रिएक्शन देखने के लिए ठहर
  848. 37:31गया।
  849. 37:33इस समय विनायक विद्या की तरफ देख रहा था।
  850. 37:35मानो समझना चाह रहा हो कि वो क्या चाहती
  851. 37:37है। राहुल खामखा कोई लड़ाई नहीं चाहता था।
  852. 37:40इसीलिए वो तुरंत बोला। तुम यही चाहते हो
  853. 37:43ना कि मैं इनसे माफी मांगू तो ठीक है। आई
  854. 37:47एम सॉरी मैम।
  855. 37:49क्या? आई एम सॉरी। तुम्हारे एक सॉरी बोल
  856. 37:51देने से तुम्हारी गलती सही हो जाएगी क्या?
  857. 37:54विद्या बात का पतंगड़ बनाते हुए बोली
  858. 37:57विनायक ने जब देखा कि विद्या तो और भी
  859. 37:59भड़क गई तो उसने पूछा बताओ बेबी तुम क्या
  860. 38:02चाहती हो? इसे क्या सजा दी जाए? इस पर
  861. 38:06विद्या ऐंठ कर बोली इसे तो ऐसी सजा मिलनी
  862. 38:09चाहिए जो एक मिसाल बन जाए। अगर इसे आसानी
  863. 38:12से जाने दिया तो यह फिर किसी के साथ ऐसी
  864. 38:14ही हरकत करेगा।
  865. 38:16फिर वो राहुल को घूरती हुई बोली तुम्हारी
  866. 38:18सजा यह है कि तुम अभी यहां सबके सामने खुद
  867. 38:21के गाल पर जोर से थप्पड़ मारोगे और मेरे
  868. 38:24पैरों में गिरकर दोनों कान पकड़ कर मुझसे
  869. 38:27माफी मांगोगे।
  870. 38:29विद्या की बात सुनकर विनायक मुस्कुराया और
  871. 38:31बोला
  872. 38:32ठीक है। तुम चिंता मत करो बेबी। अब ये
  873. 38:35बिल्कुल ऐसा ही करेगा। इतना बोलकर विनायक
  874. 38:38राहुल की आंखों में देखकर मजाक उड़ाते हुए
  875. 38:40बोला। क्यों मुन्ना? जैसा बेबी ने कहा
  876. 38:45वैसा करेगा ना।
  877. 38:47राहुल समझ गया कि वो बुरा फंस चुका है।
  878. 38:50स्टोर में मौजूद स्टाफ के साथ वहां
  879. 38:52उपस्थित खरीदार भी राहुल को दया की दृष्टि
  880. 38:54से देख रहे थे। वो समझ रहे थे कि इसमें
  881. 38:56राहुल की कोई गलती नहीं है। पर यह लड़की
  882. 38:59सिर्फ अपने ईगो को सेटिस्फाई करने के लिए
  883. 39:02यह कर रही है। पर राहुल भी इतनी आसानी से
  884. 39:04झुकने वाला नहीं था। उसने निडरता से कहा
  885. 39:08देखो अब तुम ज्यादती कर रहे हो। तुम मुझसे
  886. 39:11ताकतवर हो तो इसका मतलब यह नहीं कि तुम
  887. 39:13मुझसे कुछ भी करवा लोगे।
  888. 39:16अभी तुम मेरे साथ मारपीट कर सकते हो। पर
  889. 39:18यह समझ लेना कि मैं यह भूलूंगा नहीं। समय
  890. 39:21आने पर मैं अपनी बेइज्जती का बदला जरूर
  891. 39:23लूंगा। राहुल की बात सुनकर शौर्य को अच्छा
  892. 39:26लगा। उसे खुशी हुई कि पहले राहुल ने दिमाग
  893. 39:28से काम लिया। अगर एक सॉरी बोल देने से
  894. 39:31विवाद टल सकता है, तो उसने सॉरी बोलने में
  895. 39:33देर नहीं लगाई। पर जब उसे लगा कि यह लोग
  896. 39:36जानबूझकर उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने
  897. 39:39की कोशिश कर रहे हैं तो उसने झुकने से
  898. 39:41इंकार कर दिया। [संगीत] राहुल ने जितनी
  899. 39:44आसानी से शुरुआत में माफी मांग ली थी उसके
  900. 39:47बाद विनायक को लगा नहीं था कि [संगीत]
  901. 39:49राहुल का ऐसा जवाब आएगा। पर बात अब उसके
  902. 39:51भी ईगो पर आ चुकी थी। विद्या के सामने उसे
  903. 39:54अपने आप को भी तो साबित करना था। इसीलिए
  904. 39:57विनायक राहुल के कॉलर पर अपनी पकड़ मजबूत
  905. 39:59करते हुए गरज कर बोला। तेरी इतनी हिम्मत
  906. 40:02कि तूने मुझे धमकाने की कोशिश की। विनायक
  907. 40:05राणा को धमकाने की कोशिश की। फिर वो राहुल
  908. 40:09को उसके कॉलर से खींचते हुए अपने करीब
  909. 40:11लाया और दांत भीते हुए बोला सुन बच्चे अब
  910. 40:16मेरी एक ही सलाह है कि जैसा बेबी ने कहा
  911. 40:19तू वैसा ही कर। नहीं तो यहां से सही सलामत
  912. 40:22अपने पैरों पर चलकर नहीं जा पाएगा।
  913. 40:25लेकिन राहुल ने भी अब झुकने का इरादा बदल
  914. 40:28दिया था। वो तेज आवाज में बोला मैंने
  915. 40:31तुमसे कहा ना कि तुम अब कुछ भी कर लो पर
  916. 40:34मैं तुम्हारी कोई भी बात नहीं मानने वाला।
  917. 40:37जब मैंने कोई गलती की ही नहीं तो माफी किस
  918. 40:39बात की? जब शौर्य ने राहुल की यह बात सुनी
  919. 40:43तो उसका मन किया कि जाकर वो राहुल की पीठ
  920. 40:45थपथपाए। क्योंकि जिस विषम परिस्थिति में
  921. 40:47राहुल था उसके बाद भी उसने जो दृढ़ निश्चय
  922. 40:50किया कि वो विनायक के सामने नहीं झुकेगा
  923. 40:52यह सच में काबिले तारीफ है। वहीं राहुल की
  924. 40:55बात सुनकर विनायक का पारा हाई हो गया। वो
  925. 40:58राहुल के कॉलर को खींचते हुए बोला
  926. 41:01लगता है जब तक तुम्हारी एक दो हड्डी नहीं
  927. 41:03टूट जाती तुम अपनी जिद पर अड़े रहोगे।
  928. 41:06शौर्य देख रहा था कि विनायक राहुल पर हावी
  929. 41:09होता जा रहा है। इसीलिए उसे लगा कि अब उसे
  930. 41:12बीच में आना ही पड़ेगा। नहीं तो [संगीत]
  931. 41:14कहीं देर ना हो जाए। और अगले ही पल शौर्य
  932. 41:16तेजी से राहुल के पास पहुंचा और विनायक के
  933. 41:19कंधे को पकड़ते हुए बोला।
  934. 41:22अरे रुको लाला। यह क्या बच्चे पर जोर
  935. 41:25आजमाइश कर रहे हो? इधर विनायक को बिल्कुल
  936. 41:28भी उम्मीद नहीं थी कि कोई उन दोनों के बीच
  937. 41:30में आएगा। इसीलिए उसकी पकड़ राहुल के कॉलर
  938. 41:32पर थोड़ी ढीली हो गई और वो शौर्य की तरफ
  939. 41:35देखकर गरजते हुए बोला अब तुम कौन हो और
  940. 41:39बीच में कहां से टपक पड़े? इस पर शौर्य ने
  941. 41:42मुस्कुराते हुए कहा,
  942. 41:44"भाई मैं वो हूं जिसकी वजह से इस लड़के ने
  943. 41:47वो चेंजिंग रूम खोला था।
  944. 41:50शौर्य की बात सुनकर विनायक ने राहुल का
  945. 41:52कॉलर छोड़ दिया और शौर्य की तरफ देखने
  946. 41:54लगा। शौर्य को यहां देखकर अब राहुल की भी
  947. 41:57हिम्मत बढ़ गई थी। उसे लगा कि अब वो शौर्य
  948. 42:01के साथ मिलकर कुछ हद तक तो इस पहलवान का
  949. 42:03मुकाबला कर ही लेगा। लेकिन तभी विनायक ने
  950. 42:07अपने उस घमंडी लहजे में शौर्य की शर्ट को
  951. 42:09सहलाते हुए कहा तो तुम हो जिसके कारण
  952. 42:13विद्या के चेंजिंग रूम का दरवाजा खोला
  953. 42:15गया। यानी इसकी जगह तुम अपने गाल पर
  954. 42:18थप्पड़ लगाओगे और विद्या के पैरों में
  955. 42:20गिरकर माफी मांगोगे।
  956. 42:23इस पर शौर्य ने तिरछी मुस्कान के साथ
  957. 42:25चुनौती भरे अंदाज में कहा ना ना मैं नहीं
  958. 42:30अब तुम राहुल से अपने किए हुए व्यवहार के
  959. 42:33लिए माफी मांगोगे।
  960. 42:35राहुल देख रहा था कि शौर्य के कपड़े क्या
  961. 42:38चेंज हुए। उसका पूरा व्यक्तित्व ही बदल
  962. 42:40गया। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि वह
  963. 42:43अभी इसी शौर्य के साथ यहां मॉल में आया था
  964. 42:45जो यहां आने से पहले दया का पात्र नजर आ
  965. 42:48रहा था और जिसके चेहरे पर बेचारगी नजर आ
  966. 42:52रही थी।
  967. 42:53पर जो भी हो यह परिवर्तन उसे अच्छा लग रहा
  968. 42:56था। लेकिन तभी विनायक ने व्यंग भरे लहजे
  969. 42:58में हंसते हुए कहा क्या कहा? तुम मुझसे
  970. 43:02माफी मंगवाओगे। विनायक राणा से लगता है
  971. 43:06तुमने दिन में ही भांग चढ़ा रखी है। मेरा
  972. 43:09एक हाथ पड़ जाएगा तो दोबारा धरती से उठकर
  973. 43:12पानी नहीं मांग पाओगे।
  974. 43:14इस पर शौर्य ने उसे और भी उकसाते हुए कहा,
  975. 43:18क्या तुम्हें सिर्फ बोलना ही आता है या
  976. 43:21कुछ करना भी जानते हो? कहीं तुम सिर्फ
  977. 43:24बातों के ही शेर तो नहीं हो? शौर्य को
  978. 43:27अपने पुराने फॉर्म में आने में अब अच्छा
  979. 43:29लग रहा था। पुराने दिनों में शौर्य को
  980. 43:32किसी की अकड़ तोड़ने में बड़ा मजा आता था।
  981. 43:34वहीं शौर्य की बात सुनकर विनायक का गुस्सा
  982. 43:37सातवें आसमान पर पहुंच गया। उधर राहुल भी
  983. 43:40सोच रहा था कि श्रवण क्यों विनायक को और
  984. 43:42भड़का रहा है? और तभी विनायक ने शौर्य का
  985. 43:45कॉलर पकड़ लिया और उसके करीब जाकर गुस्से
  986. 43:48भरी आवाज में बोला तुमने अपनी जिंदगी की
  987. 43:52सबसे बड़ी भूल की जो मुझसे पंगा ले लिया।
  988. 43:54अब [संगीत] देखो मैं तुम्हारा क्या हाल
  989. 43:57करता हूं और मैं तुम्हें कह रहा हूं कि
  990. 43:59मेरा कॉलर छोड़ो नहीं तो कम से कम एक
  991. 44:02महीने तक तुम इस हाथ से खाना नहीं खा
  992. 44:05पाओगे। शौर्य ने बड़े ही इत्मीनान से कहा
  993. 44:08मानो उसे विनायक की मजबूत दिखती बॉडी से
  994. 44:10रत्ती भर डर ना हो। वहीं राहुल हैरान था
  995. 44:13कि शौर्य इस वक्त भी इतना रिलैक्स कैसे हो
  996. 44:16सकता है? लेकिन तभी विनायक ने शौर्य को
  997. 44:19चुनौती देते हुए कहा, "अच्छा, तो अगर
  998. 44:22तुम्हारे अंदर इतने ही गट्स हैं तो अपना
  999. 44:24कॉलर छुड़ा के दिखाओ।"
  1000. 44:27विनायक का इतना कहना था कि शौर्य ने सेकंड
  1001. 44:29के 100वें हिस्से में विनायक की कलाई
  1002. 44:32पकड़ी और कोरियन मार्शल आर्ट्स अब कीड़ों
  1003. 44:34के मूव के साथ उसकी कलाई को मरोड़ दिया।
  1004. 44:37और तभी हड्डी टूटने की आवाज गूंज उठी।
  1005. 44:41वहां मौजूद लोग तो समझ भी नहीं पाए कि एक
  1006. 44:43पल में ऐसा क्या हो गया कि विनायक जो अभी
  1007. 44:46सीना ताने खड़ा था अब वो जमीन पर आ चुका
  1008. 44:48था। वहीं इस वक्त राहुल के आश्चर्य का तो
  1009. 44:52कोई ठिकाना ही नहीं था। वो आंखें फाड़े बस
  1010. 44:54शौर्य को घरे जा रहा था। वो समझ ही नहीं
  1011. 44:57पाया कि शौर्य ने एक पल में ही ऐसा क्या
  1012. 45:00दांव चलाया कि विनायक चारों खाने चित हो
  1013. 45:02गया। विनायक दर्द से बेहाल होकर चिल्लाने
  1014. 45:05लगा। उसकी ऐसी हालत देखकर विद्या के चेहरे
  1015. 45:08पर भी हैरानी के भाव थे। वो सोच भी नहीं
  1016. 45:12सकती थी कि एक हट्टे-कट्टे व्यक्ति को
  1017. 45:14इतनी आसानी से घुटनों पर लाया जा सकता है।
  1018. 45:17सही मायनों में देखा जाए तो शौर्य ने तो
  1019. 45:19अभी अपना पूरा एफर्ट भी नहीं लगाया था और
  1020. 45:22विनायक घुटनों के बल फर्श पर पड़ा था और
  1021. 45:25उसके दाएं हाथ की हड्डी भी टूट चुकी थी।
  1022. 45:29बहुत घमंड था विनायक को अपनी ताकत पर।
  1023. 45:31लेकिन कहते हैं ना शेर को सवा शेर मिल ही
  1024. 45:34जाता है। विनायक का चेहरा दर्द से लाल हो
  1025. 45:37चुका था। उसे भी समझ नहीं आया कि शौर्य ने
  1026. 45:41ऐसा कौन सा दाम चला जो वह उसके सामने एक
  1027. 45:44पल भी नहीं टिक पाया। वहीं विद्या को तो
  1028. 45:46समझ ही नहीं आ रहा था कि वो क्या करें।
  1029. 45:49देखा जाए तो यहां जो कुछ भी हुआ था वो सब
  1030. 45:52विद्या के कारण ही हुआ था। और अब वो बस
  1031. 45:55यही सोच रही थी कि यहां से बाहर कैसे
  1032. 45:57निकला जाए।
  1033. 45:59खैर विनायक ने तुरंत राहुल से माफी मांगी।
  1034. 46:02फिर [संगीत] वहां से जाने के लिए पलटा कि
  1035. 46:03तभी शौर्य की कड़क आवाज गूंजी।
  1036. 46:06इतनी जल्दी कहां चल दिए? पहले उसको तो
  1037. 46:10माफी मांगने को बोलो जो इस फसाद की जड़
  1038. 46:14है।
  1039. 46:15विनायक ने जब शौर्य की बात सुनी तो वो
  1040. 46:17विद्या की तरफ पलटा और जल्दीबाजी में
  1041. 46:19विद्या पर गरजते हुए बोला। अब तुम
  1042. 46:21खड़े-खड़े मेरा मुंह क्या देख रही हो? चलो
  1043. 46:24माफी मांगो इनसे। मैं क्यों माफी
  1044. 46:26मांगूंगी? तुमने तो मांग ही ली है ना।
  1045. 46:29विद्या अकड़ कर बोली तो विनायक झुंझुला
  1046. 46:32उठा। अब ज्यादा ड्रामा मत करो। तुम्हारी
  1047. 46:36गलती के कारण मेरा हाथ टूट गया और तुम
  1048. 46:38नौटंकी कर रही हो। चेंजिंग रूम को अंदर से
  1049. 46:41बंद करने की जिम्मेदारी उसकी होती है जो
  1050. 46:43अंदर कपड़े चेंज कर रहा है। बाहर वाले को
  1051. 46:45क्या पता कि अंदर कोई है या रूम खाली है।
  1052. 46:48अब जल्दी से इनसे माफी मांगो। नहीं तो
  1053. 46:50मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। बोलते हुए
  1054. 46:53विनायक का चेहरा लाल हो गया था। विनायक की
  1055. 46:56धमकी सुनकर विद्या तुरंत राहुल के पास गई
  1056. 46:58और कान पकड़ कर सॉरी बोली। लेकिन राहुल ने
  1057. 47:01उसकी तरफ ध्यान भी नहीं दिया और उसको
  1058. 47:03इग्नोर करके शौर्य के पास पहुंच गया।
  1059. 47:06विद्या को बहुत बेइज्जती महसूस हुई पर अभी
  1060. 47:08वह कुछ कर भी नहीं सकती थी। वहीं दूसरी
  1061. 47:12तरफ मुख्तार के अड्डे पर सामने दो बदमाश
  1062. 47:14भीगी बिल्ली बनकर खड़े थे और मुख्तार
  1063. 47:16उन्हें गुस्से में घूर रहा था।
  1064. 47:20अचानक मुख्तार ने एक के चेहरे पर जोर का
  1065. 47:23थप्पड़ जड़ दिया जिससे उसके गाल के कोर से
  1066. 47:26खून रिसने लगा। तभी मुख्तार ने गरजते हुए
  1067. 47:29कहा,
  1068. 47:30हरामजादों
  1069. 47:33मैंने कहा था कि रजत उस लड़की के आसपास भी
  1070. 47:37नहीं दिखना चाहिए। उसके बाद भी तुमने मुझे
  1071. 47:42खबर नहीं की। अरे खबर करना तो दूर तुम तो
  1072. 47:46खुद उसके साथ इस कांड में शामिल हो लिए।
  1073. 47:51इस पर उस आदमी ने आस्तीन से खून पोंछा और
  1074. 47:53कांपती आवाज में बोला बॉस मैंने रजत भाई
  1075. 47:57को रोकने की बहुत कोशिश की पर वो मेरी बात
  1076. 48:00सुनने को तैयार ही नहीं थे उल्टा उन्होंने
  1077. 48:02मुझे ही धमका दिया ऐसे में मैं क्या ही
  1078. 48:05करता इस पर मुख्तार ने अपनी मुट्ठियां भी
  1079. 48:08ली और तमतमाते हुए बोला इस कमबख्त रजत को
  1080. 48:12कितनी बार समझाया है मैंने अब अपने मन की
  1081. 48:16करने का अंजाम भुगत रहा है ना कहते हुए
  1082. 48:19मुख्तार एक बार फिर झुंझुला उठा और
  1083. 48:21बड़बड़ाते हुए बोला साले सब खुद को पन्ने
  1084. 48:25खान समझने लगे हैं। खुद अपनी मनमानी करते
  1085. 48:28हैं और मेरे लिए मुसीबत छोड़ जाते हैं।
  1086. 48:33अब फिर से छुड़ा कर लाओ नवाबजादे को।
  1087. 48:36बड़बड़ाते हुए मुख्तार अपनी जगह पर ही
  1088. 48:38चहलकदमी करने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे वो
  1089. 48:41किसी का इंतजार कर रहा हो। मुख्तार भाई
  1090. 48:44रजत की हरकतों से बेहद परेशान हो चुका था।
  1091. 48:47वो कुछ सोचते हुए तेजी से इधर-उधर चक्कर
  1092. 48:49लगाने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी का
  1093. 48:52इंतजार कर रहा है और अगले ही पल अपनी घड़ी
  1094. 48:54पर निगाह डालते हुए वो खुद में बड़बड़ाया।
  1095. 48:58ये साला चड्ढा कहां मर गया? अब तक तो उसे
  1096. 49:01आ जाना चाहिए था। तभी उसे कुछ कदमों की
  1097. 49:04आवाज सुनाई दी और जब वो आवाज वाली दिशा
  1098. 49:06में पलटा तो एक 50-5 की उम्र का आदमी काले
  1099. 49:09कोर्ट में उसे अपनी तरफ आता दिखाई दिया।
  1100. 49:12जगजीत चड्ढा। यही है वो जिसका मुख्तार
  1101. 49:15इंतजार कर रहा था। जगजीत के पीछे-पीछे
  1102. 49:18उसका असिस्टेंट भी अपने हाथ में एक फाइल
  1103. 49:20दबाए चल रहा था। तभी जगजीत चड्ढा मुख्तार
  1104. 49:23के पास पहुंचा और गंभीर आवाज में बोला,
  1105. 49:26माफ करना मुख्तार भाई अभी रजत को छुड़ाना
  1106. 49:29इतना आसान नहीं रह गया है। उसने खुद ही
  1107. 49:31अपना केस इतना खराब कर लिया है कि कोई भी
  1108. 49:33वकील शायद ही कुछ कर पाए।
  1109. 49:36चड्ढा की बात सुनकर मुख्तार की थ्योरियां
  1110. 49:38चढ़ गई और वो गुस्से में चिल्लाते हुए
  1111. 49:40बोला क्या मैं तुम लोगों से यही सुनने के
  1112. 49:43लिए इतने पैसे खर्च करता हूं? इस पर चड्ढा
  1113. 49:46ने घबराते हुए मुख्तार को समझाने की
  1114. 49:48हिमाकत की। दरअसल भाई हम लोग भी तभी कुछ
  1115. 49:51कर सकते हैं जब कोई लूपहुल रहते हैं। रजत
  1116. 49:54के लिए तो पहले ही कोर्ट का आदेश था कि वो
  1117. 49:56शिप्रा के आसपास भी नजर नहीं आएगा। पर वो
  1118. 49:59तो उसे किडनैप करने ही पहुंच गया और अपने
  1119. 50:01खिलाफ इतने सारे गवाहों को खड़ा कर लिया।
  1120. 50:04अच्छा चलो गवाहों को तोड़ मरोड़ भी दें।
  1121. 50:06पर वो जो कुछ मंचलों ने उनका वीडियो बना
  1122. 50:08लिया है उसको कैसे झुठलाएंगे?
  1123. 50:12देख वकील किसको कैसे झुठलाना है और क्या
  1124. 50:15दिखाना है। यह सब तुम जानो। मुझे तो बस
  1125. 50:20मेरा भाई जेल के बाहर चाहिए। अब यह तुम
  1126. 50:23बताओ यह कैसे मुमकिन हो सकता है। सख्त
  1127. 50:26लहजे में अपना फरमान सुनाने के बाद
  1128. 50:28मुख्तार [संगीत] चड्ढा की तरफ देखने लगा।
  1129. 50:30वहीं चड्ढा कुछ पल सोचता रहा। फिर उसके
  1130. 50:33दिमाग में एक आईडिया आया तो वो मुख्तार की
  1131. 50:35तरफ देखकर संकोच भरी आवाज में बोला भाई इस
  1132. 50:39हालत में तो एक ही रास्ता है पर वो शायद
  1133. 50:42ही मुमकिन हो पाएगा हो सकता है कि आप ही
  1134. 50:45उसके लिए तैयार ना हो इस पर मुख्तार तुरंत
  1135. 50:48बोल उठा तुम बस रास्ता बताओ वकील फिर मैं
  1136. 50:52तय करूंगा कि वो मुमकिन है या नहीं
  1137. 50:56ठीक है तो फिर सुनिए इतना कहकर वकील
  1138. 50:59मुख्तार को कुछ समझाने लगा चड्ढा का सुझाव
  1139. 51:02सुनकर मुख्तार के चेहरे पर नागवारी के भाव
  1140. 51:05झलक उठे और वो गुस्से में झिल्ला उठा। तुम
  1141. 51:08सोच भी कैसे सकते हो वकील कि मैं उस घमंडी
  1142. 51:11लड़की के परिवार से समझौता कर लूं।
  1143. 51:15तुम्हें क्या लगता है कि मुख्तार उनके आगे
  1144. 51:18झुक जाएगा।
  1145. 51:20मुख्तार भाई यह जरूरी तो नहीं कि उसके लिए
  1146. 51:22झुकना ही पड़े। डराधमका कर भी तो कंप्लेंट
  1147. 51:25वापस करवाई जा सकती है। कहते हुए चड्ढा ने
  1148. 51:28मुख्तार की छड़ी की तरफ इशारा किया। वो भी
  1149. 51:31जानता है कि मुख्तार की इस छड़ी का शहर
  1150. 51:33में कितना खौफ है। लेकिन मुख्तार का सिर
  1151. 51:36अभी तक इंकार में हिल रहा था। वो गंभीर
  1152. 51:38आवाज में बोला नहीं वो लड़की इसके लिए
  1153. 51:42तैयार नहीं होगी। बहुत जिद्दी है वो। अगर
  1154. 51:45धमकी से काम चल जाता तो यह केस लड़ने की
  1155. 51:48नौबत ही नहीं आती। ऊपर से उसका दादा भी
  1156. 51:51अपने उसूलों का ढोल पीटता रहता है। इस पर
  1157. 51:54चड्ढा ने अपने हथियार डाल दिए और धीमी
  1158. 51:56आवाज [संगीत] में बोला, "देखो भाई, रजत
  1159. 51:59बाबू को जेल से निकालने का एक यही रास्ता
  1160. 52:01है। अब शिप्रा से समझौता करके ही उसको
  1161. 52:04जल्दी बाहर लाया जा सकता है।" अब तक
  1162. 52:06मुख्तार बुरी तरह चिढ़ चुका था। वो अपने
  1163. 52:08दांत खींचते हुए बोला, "अबे वकील, कहां तो
  1164. 52:12मैं शिप्रा और उसके परिवार को ऊपर
  1165. 52:14पहुंचाने का इंतजार कर रहा हूं और कहां
  1166. 52:16तुम मुझे उससे ही समझौता करने का सुझाव दे
  1167. 52:19रहे हो।"
  1168. 52:22भाई मैंने तो वो बताया जिसकी मदद से आप
  1169. 52:24रजत को जेल से बाहर ला सकते हैं। नहीं तो
  1170. 52:26उस इंस्पेक्टर ने रजत पर ऐसीऐसी धाराएं
  1171. 52:28लगा दी हैं कि उसको अभी बेल दिलवाना
  1172. 52:31नामुमकिन है। मुझे तो लगता है कि वो
  1173. 52:33इंस्पेक्टर भी रजत से अपनी कोई दुश्मनी
  1174. 52:35निकाल रहा है। इतना बोलकर चड्ढा यह देखने
  1175. 52:38के लिए रुका कि मुख्तार पर उसकी बात का
  1176. 52:40कोई असर हो भी रहा है या नहीं।
  1177. 52:43[गला साफ़ करने की आवाज़] और जब उसने
  1178. 52:44मुख्तार को अपनी बात ध्यान से सुनते देखा
  1179. 52:46तो वह फिर से हिम्मत जुटाकर बोला
  1180. 52:49भाई मैं जानता हूं कि आप पहले शिप्रा से
  1181. 52:52अपने भाई की शादी कराना चाहते थे। लेकिन
  1182. 52:54अपनी इज्जत की दुहाई देकर उन्होंने शादी
  1183. 52:56से इंकार कर दिया। पर अब जिस स्थिति में
  1184. 52:58आप उसके परिवार को ले आए हैं, उससे पूरे
  1185. 53:01शहर में उसका परिवार चर्चा का विषय बना
  1186. 53:03हुआ है। एक भिखारी से उसकी शादी कराकर
  1187. 53:06आपने उसे कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं
  1188. 53:08छोड़ा है। आखिर लोक लज्जा भी तो कोई चीज
  1189. 53:11होती है। मुख्तार समझ नहीं पा रहा था कि
  1190. 53:14वकील इतनी लंबी चौड़ी भूमिका क्यों बना
  1191. 53:16रहा है। इसीलिए उसने रूखे लहजे में कहा,
  1192. 53:19"अरे चड्ढा, जो भी कहना है साफ-साफ कहो।"
  1193. 53:22कचहरी वाले अपने ये गिराह और दलीलें मेरे
  1194. 53:26सामने मत चलाओ। यह सुनकर चड्ढा सीधे
  1195. 53:29शब्दों में बोला, "देखो भाई, एक भिखारी से
  1196. 53:31शिप्रा की शादी करवाकर आपने उसकी इज्जत की
  1197. 53:34ऐसी तैसी कर दी है। अब एक भिखारी की
  1198. 53:36विहाता से कोई इज्जतदार फैमिली तो शादी
  1199. 53:39करने से रही। तो अगर आप अपने भाई के साथ
  1200. 53:42शिप्रा की शादी का प्रपोजल लेकर जाते हैं,
  1201. 53:44तो शिप्रा के परिवार के लिए इंकार करना
  1202. 53:47मुश्किल हो जाएगा।
  1203. 53:49तब जाकर चड्ढा की बात मुख्तार की समझ में
  1204. 53:51आई और उसने कुछ सोचते हुए कहा तो तुम
  1205. 53:54चाहते हो कि मैं रजत से शिप्रा की शादी
  1206. 53:57करवा दूं और तुम्हें लगता है कि अब उसका
  1207. 54:00परिवार इसके लिए तैयार हो जाएगा।
  1208. 54:03हां मुख्तार भाई अगर रजत से उसकी शादी हो
  1209. 54:06जाती है तो शहर में कोई भी उनके परिवार की
  1210. 54:08हंसी उड़ाने की हिम्मत नहीं करेगा। और जिस
  1211. 54:11खतरे का एहसास उन्हें आपसे दुश्मनी मोल
  1212. 54:13लेकर हो रहा होगा वो भी उनके परिवार के
  1213. 54:15लिए टल जाएगा। अब आप ही सोच कर देखिए यह
  1214. 54:19उस परिवार के लिए बढ़िया सौदा है कि नहीं।
  1215. 54:22वकील ने जोर देकर अपनी बात कही और फिर कुछ
  1216. 54:24सोचकर चालाकी भरे लहजे में कहा और फिर अगर
  1217. 54:27एक बार शादी के समझौते के चलते केस वापस
  1218. 54:30ले लेते हैं और रजत बाबू जेल से बाहर आ
  1219. 54:32जाते हैं तो फिर आप शिप्रा के साथ जो करना
  1220. 54:35चाहे कर सकते हैं। इस तरह से सांप भी मर
  1221. 54:38जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी।
  1222. 54:41बात में तुम्हारी दम तो है चड्ढा। अब अगर
  1223. 54:44यही रास्ता बचा है तो यही सही। वैसे भी
  1224. 54:48रजत इस बात से खफा था कि मैंने उस लड़की
  1225. 54:50की शादी और किसी से क्यों करवा दी। कहते
  1226. 54:54हुए मुख्तार गहरी सोच में डूब गया। यहां
  1227. 54:56राय साहब की हवेली में राजदीप राय और बीना
  1228. 54:59जी एक सोफे पर बैठे थे। शिपराय चेयर पर थी
  1229. 55:02और उसके सामने ही उसकी बुआ नैना जी एक
  1230. 55:04सिंगल सोफे पर बैठी हुई थी। सबको देखकर लग
  1231. 55:08रहा था कि किसी गंभीर विषय पर चर्चा हो
  1232. 55:10रही है। तभी नैना शिकायती लहजे में बोली,
  1233. 55:14देखो मैं कह रही हूं उस भिखारी को घर लाकर
  1234. 55:16तुमने सही नहीं किया। वैसे ही पूरे शहर
  1235. 55:18में परिवार की चर्चा हो रही है। ऊपर से उस
  1236. 55:21भिखारी को घर लाकर तुमने उस पर और मोहर
  1237. 55:23लगा दी। इस पर राजदीप नैना को झिड़कते हुए
  1238. 55:26बोले। नैना अगर ऐसा ही था तो तुम पिताजी
  1239. 55:29के सामने ये बात क्यों नहीं बोली? इस पर
  1240. 55:31नैना ने एक बार फिर मीठी आवाज में तंज
  1241. 55:33कसते हुए कहा। आपको तो पता है भाई साहब
  1242. 55:36पिताजी इन बातों को कहां समझते हैं? उनके
  1243. 55:39लिए तो हर बात उनकी इज्जत पर आकर खत्म हो
  1244. 55:41जाती है। अगर मुख्तार के प्रपोजल को
  1245. 55:44उन्होंने पहले ही स्वीकार कर लिया होता तो
  1246. 55:46राय फैमिली का रुतबा इस शहर में और बढ़
  1247. 55:49जाता। पर नहीं उनको तो अपनी इज्जत की पड़ी
  1248. 55:52थी। अब देख लो आज क्या इज्जत रह गई है
  1249. 55:54परिवार की। तभी राजदीप जी दृढ़ आवाज में
  1250. 55:57बोले तुम कुछ भी कहो मैं खुद भी उस मामले
  1251. 56:00में पिताजी के निर्णय से सहमत था और आज भी
  1252. 56:03हूं। हां तो देख लो उसका अंजाम क्या हुआ
  1253. 56:06आपकी बेटी के साथ। अब इस शहर का कौन सा
  1254. 56:08इज्जतदार परिवार आपकी बेटी को अपने परिवार
  1255. 56:10की बहू बनाने को तैयार होगा। इतना कहकर
  1256. 56:14नैना बुआ ने एक पल शिप्रा की ओर देखा और
  1257. 56:16फिर अपना मुंह फेर लिया। लेकिन अब शिप्रा
  1258. 56:19इन तानों से परेशान हो चुकी थी और अगले ही
  1259. 56:21पल वो बुआ से पूछ बैठी। क्या एक लड़की के
  1260. 56:24लिए शादी इतनी जरूरी है बुआ कि वो बिना
  1261. 56:26शादी के रह ही नहीं सकती? और अगर जरूरी ही
  1262. 56:29है तो मेरी शादी तो पहले ही हो चुकी है।
  1263. 56:32फिर अब इस बारे में चर्चा क्यों?
  1264. 56:34शिप्रा की बात सुनकर नैना अब झल्ला उठी और
  1265. 56:36उसे झिड़कते हुए बोली बेवकूफ लड़की ये
  1266. 56:39शादी नहीं खिलवाड़ था तुम्हारे साथ। अब
  1267. 56:41अगर तुम उस भिखारी से तलाक ले भी लोगी तो
  1268. 56:44भी कोई लड़का तुमसे शादी करने को तैयार
  1269. 56:46नहीं होगा।
  1270. 56:48बुआ मुझे नहीं पता कि मैं उस भिखारी को
  1271. 56:50जिससे मेरी शादी हुई है अपने पति के रूप
  1272. 56:52में स्वीकार कर पाऊंगी या नहीं। पर यह भी
  1273. 56:55सच है कि मैं किसी दूसरे से शादी करने के
  1274. 56:57लिए उससे तलाक भी नहीं लूंगी। इतना कहकर
  1275. 57:00शिप्रा ने बाकी लोगों की तरफ देखा और फिर
  1276. 57:03पूरे आत्मविश्वास के साथ बोली और हां मैं
  1277. 57:05आपको बता दूं कि मुझे अपनी जिंदगी जीने के
  1278. 57:07लिए किसी लड़के की जरूरत नहीं है। मैं
  1279. 57:10अकेले रहकर भी खुश रह सकती हूं। वहीं
  1280. 57:13शिप्रा की बात सुनकर सबके बीच खड़ी बीना
  1281. 57:15जी भी हैरान रह गई और तभी वो गुस्से से
  1282. 57:18झल्लाते हुए बोली तुम क्या बकवास कर रही
  1283. 57:21हो? हम उस भिखारी को इस घर में सिर्फ
  1284. 57:23इसीलिए लाए हैं ताकि लोगों की जुबान बंद
  1285. 57:25हो जाए। लोग उसे भीख मांगते देखकर यह ना
  1286. 57:28कहें कि इसी भिखारी से राय खानदान की बेटी
  1287. 57:30ब्याही है। इसीलिए जैसे ही हालात सुधरने
  1288. 57:33लगेंगे तुम्हारा तलाक करवा कर किसी अच्छे
  1289. 57:35लड़के से तुम्हारी शादी कर दी जाएगी। समझी
  1290. 57:38तुम? और इस बात की क्या गारंटी होगी कि वो
  1291. 57:41लड़का भी विहान की तरह नहीं निकलेगा। इन
  1292. 57:44जैसे तथाकथित इज्जतदार लोगों से तो अच्छा
  1293. 57:46यह भिखारी है। जो किसी मुसीबत के वक्त
  1294. 57:49धोखा तो नहीं देगा। इतना बोलकर शिप्रा
  1295. 57:52रुकी और अपना फाइनल फैसला सुनाते हुए बोली
  1296. 57:55मां अब आप यह बात गांठ बांध लो कि भविष्य
  1297. 57:58में मैं कोई दूसरी शादी नहीं करने वाली।
  1298. 58:01अगर शादी एक लड़की के लिए इतनी ही जरूरी
  1299. 58:04है तो यह समझ लो कि वह भिखारी ही आपका
  1300. 58:06दामाद है। मैं खुद में इतनी आत्मनिर्भर
  1301. 58:09हूं कि मुझे किसी सहारे की जरूरत नहीं है।
  1302. 58:12आपने मुझे इतना काबिल बना दिया है कि मैं
  1303. 58:14अपने साथ औरों का भी ध्यान रख सकती हूं।
  1304. 58:18इतना कहते हुए शिप्रा की आंखों में नमी
  1305. 58:20उभर आई जिसे छुपाते हुए उसने एक [संगीत]
  1306. 58:22पल अपने तंज कसते परिवार को देखा और फिर
  1307. 58:24दृढ़ आवाज में बोली आज तक आप लोग मेरी
  1308. 58:27जिंदगी का फैसला लेते रहे पर अब मैं किसी
  1309. 58:30और को अपनी जिंदगी का फैसला लेने का
  1310. 58:32अधिकार नहीं दूंगी वैसे भी कहा जाता है कि
  1311. 58:35शादी के बाद बेटी पराई हो जाती है तो समझ
  1312. 58:38लो जिस वक्त मेरी शादी उस भिखारी से हो गई
  1313. 58:41उसी वक्त मैं आप सबके लिए पराई [संगीत] हो
  1314. 58:43गई शिप्रा की ये बातें बीना जी के लिए
  1315. 58:46किसी हार्ट अटैक से कम नहीं थी। बीना जी
  1316. 58:48शिप्रा की बातें सुनकर राजदीप [संगीत] का
  1317. 58:50चेहरा देखने लगी। लेकिन राजदीप भी शिप्रा
  1318. 58:53की बातें सुनकर अचंभित थे। आज तक शिप्रा
  1319. 58:56ने कभी [संगीत] भी राजदीप के सामने इस तरह
  1320. 58:59से बात नहीं की थी। पर आज शायद उन्हें
  1321. 59:02महसूस हुआ कि शिप्रा कितना दर्द अपने अंदर
  1322. 59:04समेटे [संगीत] घुट-घुट कर जी रही है।
  1323. 59:07उन्हें इस बात का मलाल होने लगा कि
  1324. 59:09उन्होंने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की
  1325. 59:11[संगीत] थी कि उनकी बेटी के दिल में क्या
  1326. 59:13चल रहा है। और ना ही कभी यह जान पाए कि उस
  1327. 59:16भिखारी श्रवण से शादी को लेकर शिप्रा की
  1328. 59:19अपनी राय क्या थी। राजदीप श्रवण को अपने
  1329. 59:22घर भी इसीलिए लाए थे ताकि उनके [संगीत]
  1330. 59:24परिवार की और बदनामी ना हो। साथ ही वह
  1331. 59:26श्रवण को अपने कंट्रोल में रखकर अपने मन
  1332. 59:28मुताबिक जब चाहे तब शिप्रा से उसका तलाक
  1333. 59:31करवा सकते थे। पर अब शिप्रा का फैसला
  1334. 59:34सुनकर वो यह नहीं समझ पा रहे थे कि आगे वो
  1335. 59:36क्या कदम उठाएंगे। लेकिन जब वो किसी
  1336. 59:39निर्णय पर नहीं पहुंच पाए तो उन्होंने यह
  1337. 59:41सोच लिया कि ज्यादा सोचने से अच्छा है कि
  1338. 59:43सब कुछ समय पर छोड़ दिया जाए। अब समय ही
  1339. 59:46फैसला करेगा कि क्या सही है और क्या गलत।
  1340. 59:50उधर दूसरी तरफ जब मुख्तार ने फैसला कर
  1341. 59:52लिया कि आखिर उसे क्या करना है तो उसने
  1342. 59:54अपना फोन निकाला और एक नंबर डायल किया।
  1343. 59:57शिप्रा का फैसला सुनकर परिवार के सभी
  1344. 1:00:00सदस्य असहज हो गए। नैना बुआ से शिप्रा का
  1345. 1:00:03फैसला बर्दाश्त नहीं हुआ तो चिंतित होकर
  1346. 1:00:05राजदीप से बोली भाई साहब इसे तो अच्छे
  1347. 1:00:08बुरे की समझ नहीं है। पर आप इसकी बातों
  1348. 1:00:11में मत आइएगा। अभी इसे समझ नहीं आएगा कि
  1349. 1:00:13हम लोग जो करने की सोच रहे हैं वो इसके
  1350. 1:00:15भले के लिए ही है। इस पर शिप्रा एक बार
  1351. 1:00:18फिर बोल उठी
  1352. 1:00:21बुआ मैं अपना अच्छा बुरा समझ सकती हूं।
  1353. 1:00:23इसीलिए आपसे रिक्वेस्ट है कि दोबारा मेरी
  1354. 1:00:25शादी को लेकर बात मत कीजिएगा। उसके अलावा
  1355. 1:00:28आपको जो भी बात करनी हो उसे मैं ध्यान से
  1356. 1:00:31सुनूंगी। फिर शिप्रा अपनी मां की ओर देखती
  1357. 1:00:34हुई बोली। और हां मम्मी पापा आपसे भी मैं
  1358. 1:00:37यही कहना चाहूंगी कि आप भी दोबारा मेरी
  1359. 1:00:40शादी को लेकर बात मत कीजिएगा। मैं बार-बार
  1360. 1:00:43इस मुद्दे पर किसी से कोई बात नहीं करना
  1361. 1:00:45चाहती हूं और ना ही यह सुनना चाहती हूं कि
  1362. 1:00:47कोई मेरी शादी को लेकर चिंतित है। यह
  1363. 1:00:51सुनकर बीना जी राजदीप राय की ओर देखने
  1364. 1:00:53लगी। राजदीप ने आंखों ही आंखों में उन्हें
  1365. 1:00:55शांत रहने का इशारा किया। पर नैना बुआ वो
  1366. 1:00:59कहां चुप रहने वाली थी। उन्हें शिप्रा की
  1367. 1:01:02बात अच्छी नहीं लगी और वो अपनी जगह पर
  1368. 1:01:03खड़ी होकर नाराजगी भरे लहजे में बोली, "हम
  1369. 1:01:07तो बस अच्छा बुरा समझा ही सकते हैं। बाकी
  1370. 1:01:09मानना ना मानना वो तुम जानो।" फिर नैना
  1371. 1:01:13राजदीप की ओर मुड़ी और मुंह बनाते हुए
  1372. 1:01:15बोली, ठीक है भैया अभी मैं चलती हूं। इतना
  1373. 1:01:18बोलकर नैना बुआ दरवाजे की ओर बढ़ गई।
  1374. 1:01:21लेकिन अभी वो दरवाजे के पास पहुंची ही थी
  1375. 1:01:23कि तभी दरवाजा खोलकर राहुल अंदर आया और
  1376. 1:01:26नैना को देखकर हल्की मुस्कान के साथ बोला
  1377. 1:01:29प्रणाम बुआ ये क्या मैं आया और आप जा रही
  1378. 1:01:32हैं?
  1379. 1:01:34यह तो तुम्हारी गलती है कि तुम इतनी देर
  1380. 1:01:36से आए। नैना हल्की मुस्कान के साथ बोली और
  1381. 1:01:39बाहर चली गई। राहुल अंदर पहुंचा तो उसने
  1382. 1:01:42देखा राजदीप और बीना जी सोफे पर बैठे थे
  1383. 1:01:45और शिप्रा एक तरफ चेयर पर बैठी हुई थी। उन
  1384. 1:01:47सबके चेहरे का एक्सप्रेशन देखकर वो समझ
  1385. 1:01:50गया कि किसी गंभीर मुद्दे पर चर्चा हो रही
  1386. 1:01:52थी। इसीलिए सबके चेहरे गंभीर नजर आ रहे
  1387. 1:01:55थे। [संगीत] खैर जब राजदीप ने राहुल को
  1388. 1:01:57देखा तो वो सामान्य लहजे में बोला आ गए
  1389. 1:02:00तुम हो गई खरीदारी। हां पापा शॉपिंग हो
  1390. 1:02:04गई। पर आप लोग इतने सीरियस क्यों नजर आ
  1391. 1:02:06रहे हैं? राहुल ने चिंतित होकर पूछा और
  1392. 1:02:09सबकी तरफ देखने लगा। इस पर राजदीप तुरंत
  1393. 1:02:12बोल उठे। अरे कुछ खास नहीं। तुम तो समझ ही
  1394. 1:02:15रहे हो कि जिस तरह के हालात हैं चिंता तो
  1395. 1:02:18हो ही जाती है। अब रजत फिर जेल चला गया है
  1396. 1:02:21तो मुख्तार शांत नहीं बैठेगा और शायद फिर
  1397. 1:02:23से कोई हरकत करने वाला होगा। इस पर राहुल
  1398. 1:02:26ने पूछा तो आपने कुछ सोचा है उसके लिए?
  1399. 1:02:30हां बाबूजी ने घर और ऑफिस दोनों जगह की
  1400. 1:02:32सिक्योरिटी तो बढ़वा दी है लेकिन बदमाश
  1401. 1:02:35लोगों का क्या भरोसा? वो कब घात लगाकर
  1402. 1:02:37हमला कर दें? इतना कहकर राजदीप ने एक नजर
  1403. 1:02:41शिप्रा को देखा और फिर चिंतित स्वर में
  1404. 1:02:43बोले शिप्रा बेटे तुम कुछ दिन ऑफिस जाना
  1405. 1:02:46बंद कर दो। इस पर शिप्रा जिद भरे लहजे में
  1406. 1:02:49बोली नहीं पापा मैं किसी के डर से घर में
  1407. 1:02:52नहीं बैठ सकती। वो भी एक बदमाश के डर से
  1408. 1:02:55तो हरगिज़ नहीं। इस पर राजदीप ने हल्की
  1409. 1:02:58आवाज में उसे डांटते हुए कहा, बेटा तुम
  1410. 1:03:00समझती क्यों नहीं? अकेले ऑफिस जाना रिस्की
  1411. 1:03:03होगा। राजदीप की बातों में चिंता साफ झलक
  1412. 1:03:06रही थी। तभी राहुल ने सुझाव देते हुए कहा,
  1413. 1:03:09पापा यह भी तो कर सकते हैं कि कल से दीदी
  1414. 1:03:11के लिए भी एक ड्राइवर रख देते हैं। कम से
  1415. 1:03:14कम कोई तो इनके साथ होगा। इस पर शिप्रा
  1416. 1:03:17तुरंत बोल उठी। मुझे किसी ड्राइवर की
  1417. 1:03:20जरूरत नहीं है। मैं खुद ड्राइव कर सकती
  1418. 1:03:22हूं।
  1419. 1:03:23लेकिन अब राजदीप राय शिप्रा की हर बात
  1420. 1:03:25मानने को तैयार नहीं थे। इसीलिए उन्होंने
  1421. 1:03:28सख्त लहजे में कहा तुम समझ क्यों नहीं
  1422. 1:03:30रही? अभी हमें सिक्योरिटी की जरूरत है।
  1423. 1:03:33मैं किसी ऐसे आदमी को देखता हूं जो
  1424. 1:03:35ड्राइविंग के साथ तुम्हारा बॉडीगार्ड भी
  1425. 1:03:37बन जाए। नहीं पापा सिक्योरिटी के नाम पे
  1426. 1:03:39मैं हर वक्त किसी को अपने सिर पर बर्दाश्त
  1427. 1:03:41नहीं कर सकती।
  1428. 1:03:43शिप्रा ने नाराजगी के साथ जिद करते हुए
  1429. 1:03:45कहा और अपना मुंह फुला लिया। वो किसी भी
  1430. 1:03:48कीमत पर मानने को तैयार नहीं थी। तभी
  1431. 1:03:50राहुल ने एक और आईडिया देते हुए कहा। पापा
  1432. 1:03:53श्रवण भी तो ड्राइविंग कर सकता है और जहां
  1433. 1:03:56तक सिक्योरिटी की बात है तो वह मुसीबत में
  1434. 1:03:58पीठ दिखाने वालों में से नहीं है।
  1435. 1:04:00राहुल ने जानबूझकर श्रवण का नाम लिया था
  1436. 1:04:03क्योंकि आज जो कुछ मॉल में हुआ उससे राहुल
  1437. 1:04:05शौर्य से बहुत इंप्रेस था। अगर शौर्य यानी
  1438. 1:04:08श्रवण शिप्रा के साथ रहता तो सिक्योरिटी
  1439. 1:04:11की प्रॉब्लम सॉल्व हो सकती है। राहुल
  1440. 1:04:14चाहता तो आज मॉल वाली घटना फैमिली को बता
  1441. 1:04:16सकता था। पर उसे पता था कि अगर वो उस घटना
  1442. 1:04:19का जिक्र करता तो उसके मम्मी पापा और भी
  1443. 1:04:21परेशान हो जाते। इसीलिए उसने उस बारे में
  1444. 1:04:24कोई चर्चा नहीं की। वहीं राजदीप जी ने कुछ
  1445. 1:04:27पल इस बारे में सोचा फिर बोले
  1446. 1:04:30अगर शिप्रा इसके लिए तैयार है तो यह भी
  1447. 1:04:32सही है। इस पर शिप्रा ने भी कुछ पल सोचा
  1448. 1:04:36और फिर तुरंत बोली ठीक है अगर आपकी यही
  1449. 1:04:40ज़िद है तो फिर मैं श्रवण को कुछ समय के
  1450. 1:04:43लिए अपने साथ रख सकती हूं। शिप्रा इसीलिए
  1451. 1:04:46श्रवण के लिए तैयार हो गई क्योंकि [संगीत]
  1452. 1:04:47आज ही उसने अपनी जान पर खेलकर उसकी रक्षा
  1453. 1:04:50की थी। फिर उसे यह भी लगा कि इसमें कोई
  1454. 1:04:53हर्ज नहीं है। जब वो यहां रहने आया ही है
  1455. 1:04:56तो उसे कोई काम तो चाहिए ही होगा। पर बीना
  1456. 1:04:59जी को यह प्लान अच्छा नहीं लगा। इसीलिए
  1457. 1:05:01उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा, क्या
  1458. 1:05:04श्रवण का शिपरा के साथ रहना सही रहेगा?
  1459. 1:05:06क्योंकि इससे तो लोग और भी बातें बनाएंगे।
  1460. 1:05:09अरे भाई लोग क्या अभी भी कम बात बना रहे
  1461. 1:05:12हैं जो हम दूसरों की चिंता करें। राजदीप
  1462. 1:05:15ने फौरन जवाब दिया और बीना जी की ओर देखने
  1463. 1:05:17लगे। इस पर बीना जी ने झिझकते हुए कहा।
  1464. 1:05:21लेकिन फिर लोग यह भी तो समझेंगे कि शायद
  1465. 1:05:23हमने इनकी शादी को एक्सेप्ट कर लिया है।
  1466. 1:05:26इस पर शिप्रा ने तेजी से रिएक्ट किया। फिर
  1467. 1:05:29तो मैं जरूर श्रवण को ही साथ ले जाऊंगी।
  1468. 1:05:31फिर शायद उसके बाद आपके दिमाग में मेरी
  1469. 1:05:34शादी का ख्याल आना बंद हो जाए। जब राजदीप
  1470. 1:05:37ने देखा कि बात फिर से गलत दिशा में जा
  1471. 1:05:39रही है तो उन्होंने शांत लेकिन दृढ़ आवाज
  1472. 1:05:42में कहा। अभी जो बात हो चुकी है उसको
  1473. 1:05:45दोहराने का कोई मतलब नहीं है। सुन लो सब
  1474. 1:05:48और वैसे भी भी हमारी प्रायोरिटी यह नहीं
  1475. 1:05:51है। वहीं राहुल को समझ नहीं आया कि पापा
  1476. 1:05:54किस बारे में बात कर रहे हैं और माहौल फिर
  1477. 1:05:57से भारी क्यों हो गया। उसने इस बारे में
  1478. 1:05:59पूछना भी उचित नहीं समझा और झल्लाई सी
  1479. 1:06:02मुस्कान के साथ वहां से निकल गया। इधर
  1480. 1:06:05मुख्तार के अड्डे पर जब मुख्तार ने डिसाइड
  1481. 1:06:07कर लिया कि उसे क्या करना है तो उसने अपना
  1482. 1:06:09मोबाइल निकाला और बलवंत राय को फोन करने
  1483. 1:06:12लगा। लेकिन जब पूरी रिंग जाने के बाद भी
  1484. 1:06:15[संगीत] दूसरी तरफ से फोन नहीं उठाया गया
  1485. 1:06:17तो मुख्तार ने जगजीत चड्ढा की ओर गुस्से
  1486. 1:06:19में देखते हुए कहा यह तो फोन ही नहीं उठा
  1487. 1:06:23रहा। हम एक बार और ट्राई करता हूं। इसके
  1488. 1:06:28बाद मुख्तार ने दोबारा कॉल किया। पर इस
  1489. 1:06:30बार दो रिंग के बाद ही फोन काट दिया गया।
  1490. 1:06:33अब मुख्तार गुस्से से तिलमिला उठा।
  1491. 1:06:36इसकी इतनी हिम्मत कि यह मेरा फोन काट रहा
  1492. 1:06:40है। इतना कहकर उसका चेहरा गुस्से से लाल
  1493. 1:06:43हो गया था। लेकिन तभी चड्ढा ने कुछ सोचने
  1494. 1:06:47के बाद एक सुझाव दिया। भाई मुझे लगता है
  1495. 1:06:49कि आपको एक-द दिन इंतजार करके फोन करना
  1496. 1:06:52चाहिए। यह सुनकर मुख्तार के चेहरे पर एक
  1497. 1:06:55प्रश्न चिन्ह नजर आने लगा। जैसे वो जानना
  1498. 1:06:58चाहता हो कि चड्ढा ऐसा क्यों बोल रहा है।
  1499. 1:07:01इसीलिए चड्ढा ने समझाते हुए कहा भाई यह
  1500. 1:07:04अभी आज ही की घटना है। तो अभी वो लोग
  1501. 1:07:06[संगीत] भी थोड़ा गुस्से में होंगे। एक-द
  1502. 1:07:09दिन के बाद उनका गुस्सा भी थोड़ा शांत
  1503. 1:07:11होगा तो फिर अपने मतलब की बात करना ज्यादा
  1504. 1:07:14आसान होगा। मुख्तार को वकील की बात समझ
  1505. 1:07:17में आई और उसने सहमति में सिर हिलाते हुए
  1506. 1:07:19कहा।
  1507. 1:07:21तो ठीक है चड्ढा। तुम कहते हो तो मैं अब
  1508. 1:07:26दो दिन के बाद ही इसको फोन करूंगा। पर हां
  1509. 1:07:30तब तक तुम भी ट्राई करते रहो कि रजत को
  1510. 1:07:33छुड़ाने के लिए और कुछ भी किया जा सकता है
  1511. 1:07:36या नहीं। हां हां वो तो मैं करूंगा ही
  1512. 1:07:40भाई। चड्ढा ने जवाब दिया। इधर रजत को जेल
  1513. 1:07:43भेज दिया गया था और इस समय वो मुलाकात
  1514. 1:07:45कक्ष में किसी से मुलाकात कर रहा था। तभी
  1515. 1:07:48रजत ने झल्लाते हुए कहा।
  1516. 1:07:51यह चड्ढा किसी काम का नहीं है जगवीर। पता
  1517. 1:07:54नहीं किस लिए भैया इसको सिर पर चढ़ाए हुए
  1518. 1:07:57हैं। इस वक्त रजत की टांग पर पट्टी बंधी
  1519. 1:08:00थी। सीढ़ियों से गिरने के कारण उसके टखने
  1520. 1:08:03पर मोच आ गई थी। वो तो शुक्र है कि हड्डी
  1521. 1:08:06नहीं टूटी। खैर रजत की बात सुनकर जगबीर ने
  1522. 1:08:09उसे समझाते हुए कहा, इसमें चड्ढा की कोई
  1523. 1:08:13गलती नहीं है भाई। आपको शिपरा को किडनैप
  1524. 1:08:15करते हुए पुलिस के हाथ नहीं आना चाहिए था।
  1525. 1:08:18आपको नहीं पता आपका केस कितना कमजोर हो
  1526. 1:08:20गया है। अबे तुम छोड़ो इन बातों को। इसका
  1527. 1:08:24जो भी होगा वो भैया देख लेंगे। पर मैं
  1528. 1:08:26[संगीत] उस तीखी छुरी को इतनी आसानी से
  1529. 1:08:28नहीं छोड़ने वाला। तुमने पता लगाया कि वो
  1530. 1:08:31दाढ़ी वाला कौन था जो शिप्रा को बचाने आ
  1531. 1:08:33गया था। कहते हुए रजत के चेहरे पर शौर्य
  1532. 1:08:36के लिए गुस्सा साफ झलक रहा था। जवाब में
  1533. 1:08:39जग ने बताया।
  1534. 1:08:42यह वही भिखारी है भाई जिसके साथ मुख्तार
  1535. 1:08:44भाई ने शिप्रा की शादी करवाई थी।
  1536. 1:08:47जगवीर की बात सुनकर रजत की आंखें गोल हो
  1537. 1:08:50गई। अब जाकर उसे समझ आया कि आखिर वो
  1538. 1:08:52भिखारी शिप्रा के सिर पड़ने वाले डंडों को
  1539. 1:08:55अपने ऊपर क्यों ले रहा था। यह सोचते ही
  1540. 1:08:58रजत ने अपनी मुट्ठियां भीते हुए कहा, "अरे
  1541. 1:09:01यार, यह भाई ने भी ना जाने क्या कर दिया।"
  1542. 1:09:04खैर, इस भिखारी को तो मैं बाहर निकल कर
  1543. 1:09:06देखूंगा। पर अभी तुम्हें क्या करना है यह
  1544. 1:09:09सुनो। रजत ने जग को नजदीक आने का इशारा
  1545. 1:09:13किया और फिर जगबीर के कान में आगे की
  1546. 1:09:15योजना बताने लगा। खैर राय परिवार के
  1547. 1:09:19लफड़ों से निपटने के बाद जैसे ही शौर्य ने
  1548. 1:09:21अपने कमरे में कदम रखा तो वो यह देखकर
  1549. 1:09:23हैरान रह गया कि उसका कमरा साफ हो चुका
  1550. 1:09:25था। अब कमरे की हालत अच्छी लग रही थी।
  1551. 1:09:28शौर्य ने कपड़ों का थैला बेड पर रखा और
  1552. 1:09:31पूरे कमरे का मुआयना करने लगा। वहीं आहट
  1553. 1:09:34सुनकर गिरिधर भी शौर्य के कमरे में आ गया
  1554. 1:09:36और मुस्कुराते हुए बोला अब बताऊं कैसा लगा
  1555. 1:09:40तुम्हें तुम्हारा कमरा?
  1556. 1:09:43आपने सही कहा था चाचा। यह तो अब चकाचक लग
  1557. 1:09:45रहा है।
  1558. 1:09:47शौर्य ने इतना कहा ही था कि तभी [संगीत]
  1559. 1:09:49उसे बाथरूम से कुछ खटपट की आवाज सुनाई दी
  1560. 1:09:51और वो आश्चर्य से बोला, "यह बाथरूम से
  1561. 1:09:54कैसी आवाज आ रही है।" इस [संगीत] पर गिरधर
  1562. 1:09:57ने हल्के से मंदमंद मुस्कुराते हुए कहा,
  1563. 1:10:00"पता नहीं कोई बिल्लीविल्ली तो नहीं आ गई
  1564. 1:10:02है।" कहते हुए गिरधर का ध्यान शौर्य के
  1565. 1:10:05कपड़ों पर गया जो उसने पहन रखे [संगीत]
  1566. 1:10:07थे। शौर्य अपने गंदे पुराने कपड़े स्टोर
  1567. 1:10:09में ही छोड़ आया था और नए कपड़े पहन लिए
  1568. 1:10:12थे जो उसके शरीर पर पूरी तरह फिट आ रहे
  1569. 1:10:14थे। इसीलिए गिरधर ने उसकी तारीफ करते हुए
  1570. 1:10:17कहा बहुत बढ़िया है। भाई तुम्हारा तो पूरा
  1571. 1:10:21लुक ही चेंज हो गया श्रवण बाबू। अब तुम
  1572. 1:10:23बिल्कुल फिट एंड फाइन लग रहे हो। धन्यवाद
  1573. 1:10:27चाचा। इतना कहकर जैसे ही शौर्य ने बाथरूम
  1574. 1:10:30का दरवाजा खोला तो कुछ देखकर उसने झटके के
  1575. 1:10:33साथ फिर से दरवाजा बंद कर दिया और पीछे
  1576. 1:10:35आकर गिरधर के पास खड़ा हो गया। इस पर
  1577. 1:10:38गिरधर ने उत्सुकता से पूछा क्या हुआ? कौन
  1578. 1:10:41है बाथरूम में? इस पर शौर्य लड़खड़ाते
  1579. 1:10:45स्वर में बोला, लड़की है बाथरूम में।
  1580. 1:10:48[संगीत] अभी गिरिधर कुछ कहने ही वाला था
  1581. 1:10:50कि तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और एक लड़की
  1582. 1:10:52बाथरूम से बाहर आ गई।
  1583. 1:10:55शौर्य अपने कमरे में आया और जैसे ही उसने
  1584. 1:10:57बाथरूम का दरवाजा खोला तो अचानक एक लड़की
  1585. 1:11:00को बाथरूम में देख के वो ठिटक के रह गया।
  1586. 1:11:03उसने हैरानी से गिरिधर को पूछा लेकिन इससे
  1587. 1:11:06पहले कि वो कुछ जवाब दे पाता कि तभी
  1588. 1:11:08बाथरूम का दरवाजा खोला और वो लड़की हाथ
  1589. 1:11:11में बाल्टी लिए बाथरूम से बाहर निकल गई।
  1590. 1:11:14उस लड़की को देखकर गिरधर मुस्कुराते हुए
  1591. 1:11:16बोला ओो अरे संतो तुम हो। मुझे तो लगा
  1592. 1:11:21श्रवण ने कोई भूत देख लिया है। वैसे तुम
  1593. 1:11:24अभी तक कमरे को साफ कर रही हो। इस पर
  1594. 1:11:26संतोष शिकायती लहजे में बोली, वाह गिरधर
  1595. 1:11:29काका मैं कोई मशीन हूं क्या या कोई
  1596. 1:11:32जादूगरनी जो छू मंतर किया और घर साफ हो
  1597. 1:11:35जाए। संतो की उम्र लगभग 20 22 साल के करीब
  1598. 1:11:38होगी। उसका रंग गेहूं और नए नक्श तीखे थे।
  1599. 1:11:42उसकी अदाएं देखकर ही समझ आता है कि उसके
  1600. 1:11:44आसपास के लड़के उस पर लट्टू हुए रहते
  1601. 1:11:47होंगे। संतो ने शौर्य को ऊपर से नीचे तक
  1602. 1:11:50घूरा और बोली हम तो यही रहेंगे इस कमरे
  1603. 1:11:54में दिखने में तो स्मार्ट हैं पर ये दाढ़ी
  1604. 1:11:57क्यों बढ़ा रखी है अरे तुमको क्या करना है
  1605. 1:12:00इसकी दाढ़ी से तुमने अपना काम कर लिया हो
  1606. 1:12:03तो जाओ यहां से गिरधर ने उससे पीछा
  1607. 1:12:06छुड़ाने के लिए कहा लेकिन जवाब मिशन तो
  1608. 1:12:09मजाकिया अंदाज में बोली मैं तो जा ही रही
  1609. 1:12:11हूं काका पर मैं जो बोल रही हूं वो इसके
  1610. 1:12:14भले की बात है अगर यह अपनी दाढ़ी को साफ
  1611. 1:12:16कर लेगा ना तो और भी ज्यादा स्मार्ट
  1612. 1:12:18लगेगा। मैं कहती हूं लड़कियां तो इसकी
  1613. 1:12:21दीवानी हो जाएंगी। इस पर गिरधर को भी कुछ
  1614. 1:12:24शरारत सूझी और वो हंसते हुए बोला अच्छा
  1615. 1:12:27दूसरों की बात छोड़ो। अगर यह दाढ़ी साफ
  1616. 1:12:30करवा लेगा तो क्या तू भी इसकी दीवानी हो
  1617. 1:12:33जाएगी? अरे इसको एक बार शेव करने को तो
  1618. 1:12:36कहो। क्या पता? तब मैं भी इस पर फिदा हो
  1619. 1:12:39जाऊं। [हंसी]
  1620. 1:12:41बोलकर संतो हंसती हुई कमरे से बाहर चली गई
  1621. 1:12:43और गिरधर काका मुस्कुराते हुए शौर्य से
  1622. 1:12:46बोले बहुत बोलती है यह लड़की।
  1623. 1:12:50अगर कोई इसको रोके नहीं तो लगातार बोलती
  1624. 1:12:53जाएगी। पर दिल की साफ है। शौर्य तो बस उस
  1625. 1:12:57लड़की को देखता ही रह गया। उसका बेबाक
  1626. 1:12:59अंदाज कुछ अलग ही था। उसके दिल में जो कुछ
  1627. 1:13:02भी आ रहा था उसे बोलने से पहले वो कुछ सोच
  1628. 1:13:05नहीं रही थी। उसकी बातों में कोई फिल्टर
  1629. 1:13:07नहीं था। शौर्य ने जिज्ञासा के साथ पूछा।
  1630. 1:13:11यह यहां काम करती है। हां भाई, काम करती
  1631. 1:13:14है। तभी तो सफाई करने के लिए यहां आई थी।
  1632. 1:13:17मुझे लगा था कि यह सफाई करके चली गई होगी।
  1633. 1:13:20अच्छा वो सब छोड़ो। तुम तो यह बताओ कितना
  1634. 1:13:23चूना लगाया मालिक को? क्या-क्या खरीदा
  1635. 1:13:26तुमने? गिरधर ने बेड पर पड़े थैले की ओर
  1636. 1:13:29देखते हुए पूछा। इस पर शौर्य ने गिरधर के
  1637. 1:13:31सामने बैग खोलते हुए कहा, बस ज्यादातर तो
  1638. 1:13:34कपड़े ही लिए और कुछ डेली यूज़ की चीजें
  1639. 1:13:37हैं। बहुत बढ़िया है। तुम्हारी तो भाई
  1640. 1:13:40काया पलट ही हो गई है। बस अब अगर दाढ़ी
  1641. 1:13:43कटवा लोगे तो शो तो राजी हो ही गई है।
  1642. 1:13:46[हंसी]
  1643. 1:13:48गिरधर ने हंसते हुए ताली बजाई। मानो इतने
  1644. 1:13:50कमाल का जोक मारने पर खुद ही सराहना कर
  1645. 1:13:52रहा हो। वहीं शौर्य को समझ नहीं आ रहा था
  1646. 1:13:55कि वो अपने इस नए हाल पर हंसे या रोए।
  1647. 1:13:58वहीं दूसरी तरफ नैना बुआ राजदीप राय के
  1648. 1:14:01यहां से निकलकर बड़ी भाभी सरला राय के पास
  1649. 1:14:03पहुंची। सरला के साथ छोटी भाभी बिंदु भी
  1650. 1:14:06बैठी थी। नैना ने जब अपनी दोनों भाबियों
  1651. 1:14:09को एक साथ देखा तो वो खुश होकर बोली अजी
  1652. 1:14:12प्रणाम है मेरी दोनों भाबियों को। आप
  1653. 1:14:14दोनों एक साथ लगता है जरूर कोई खास बात हो
  1654. 1:14:17रही है।
  1655. 1:14:19आओ आओ नैना बैठो। कहते हुए सरला ने नैना
  1656. 1:14:23को सोफे पर बैठने का इशारा किया। सोफे पर
  1657. 1:14:25बैठते ही नैना ने उलहना देते हुए कहा
  1658. 1:14:30तो बताओ क्या बातें हो रही थी आप दोनों
  1659. 1:14:32में जो मुझे देखते ही एकदम से चुप हो गई
  1660. 1:14:35इस पर सरला ने बड़ी ही सफाई से जवाब दिया
  1661. 1:14:38अरे भला तुमको देखकर क्यों चुप हो जाएंगे
  1662. 1:14:41आजकल तो घर में एक ही टॉपिक चल रहा है
  1663. 1:14:43शिप्रा और उसका भिखारी पति
  1664. 1:14:46अरे हां अब तो सुना है वो भिखारी घर में
  1665. 1:14:49भी आ गया है क्या आपने देखा उसे सवाल
  1666. 1:14:53पूछकर नैना सर सरला और बिंदु के चेहरे के
  1667. 1:14:55भाव समझने की कोशिश करने लगी। उसे इतना तो
  1668. 1:14:58समझ आ गया था कि वो यहां दिल खोलकर शिप्रा
  1669. 1:15:01और उसके भिखारी पति का मजाक बना सकती है।
  1670. 1:15:04तभी बिंदु ने जवाब दिया। यह भी क्या पूछने
  1671. 1:15:07वाली बात है? हमारे सामने ही तो बाबूजी की
  1672. 1:15:10गाड़ी से उतरा था।
  1673. 1:15:13अच्छा और कैसा लग रहा था वो? पूछते हुए
  1674. 1:15:16नैना की उत्सुकता तीव्र हो गई। इस पर सरला
  1675. 1:15:19भाभी ने आंखें बड़ी करते हुए नाटकीय ढंग
  1676. 1:15:21से कहा। अब यह भी क्या पूछने वाली बात है?
  1677. 1:15:25भिखारी है। भिखारी की तरह ही लग रहा था।
  1678. 1:15:28और कैसा लगेगा? उसके चेहरे के बाल। हे राम
  1679. 1:15:32क्या बताऊं? किसी जंगली भालू की तरह लग
  1680. 1:15:35रहा था वो। और कपड़े तो ऐसे जैसे बोरा
  1681. 1:15:38टांग लिया हो शरीर पर। अब क्या ही बोलूं
  1682. 1:15:41मेरा मुंह मत खुलवाओ।
  1683. 1:15:43तभी बिंदु शिप्रा पर दया दिखाते हुए बोली।
  1684. 1:15:46शिप्रा का तो जीवन ही बर्बाद हो गया दीदी।
  1685. 1:15:49बेचारी बेचारी किस बात की? उसे तो अपने
  1686. 1:15:53कर्मों का फल मिला है बस। बहुत घमंड था ना
  1687. 1:15:56उसे अपनी खूबसूरती पर। अरे घमंड तो रावण
  1688. 1:15:59तक का टूट गया। तो फिर ये क्या चीज है?
  1689. 1:16:02ऐसा बोलकर सरला ने बिंदु को चुप करवा
  1690. 1:16:05दिया। इस पर नैना बुआ ने भी कड़वाहट भरे
  1691. 1:16:08लहजे में कहा। अब क्या कहूं भाभी? अभी भी
  1692. 1:16:11उसका घमंड कम नहीं हो रहा है। अभी मैं
  1693. 1:16:14उसके ही भले की बात बोल रही थी। पर वो
  1694. 1:16:16सुनने वाली कहां है? उल्टा मुझे ही उपदेश
  1695. 1:16:18देने लगी। मुझे ही क्या उसने तो राजदीप
  1696. 1:16:21भाई साहब और बीना भाभी को भी नहीं छोड़ा।
  1697. 1:16:24नैना की बात सुनकर सरला और बिंदु दोनों की
  1698. 1:16:26नजरें मिली। उन्हें लगा उनके मन मुताबिक
  1699. 1:16:29सब्जेक्ट मिल गया है। इसीलिए सरला ने भोली
  1700. 1:16:31बनने का नाटक करते हुए पूछा। अच्छा ऐसा
  1701. 1:16:35क्या उपदेश दे दिया शिप्रा ने?
  1702. 1:16:38अब क्या बताऊं भाभी? शिप्रा ने क्या-क्या
  1703. 1:16:40नहीं बोला? उसके बाद नैना ने दोनों
  1704. 1:16:43भाबियों को हर एक बात बता दी। नैना की
  1705. 1:16:45बातें सुनकर सरला भौचक्की रह गई और एक
  1706. 1:16:48कुटिल मुस्कान के साथ बोली तो इसका मतलब
  1707. 1:16:50कि अब वो उस भिखारी की ही बीवी बनकर
  1708. 1:16:52रहेगी। कहते हुए सरला के चेहरे की धूर्तता
  1709. 1:16:55साफ नजर आ रही थी और शिप्रा के लिए जो
  1710. 1:16:58ईर्ष्या उसके दिल में थी वो अब चेहरे पर
  1711. 1:17:00भी नजर आने लगी थी। [संगीत] यहां शिप्रा
  1712. 1:17:02अपने कमरे में गहन सोच विचार में उलझी हुई
  1713. 1:17:05थी। जीवन के जिस दोराहे पर वो खड़ी थी
  1714. 1:17:07उसमें वह समझ नहीं पा रही थी कि उसे आखिर
  1715. 1:17:10क्या करना चाहिए। जीवन को लेकर उसके जो भी
  1716. 1:17:12सपने थे वह सब धराशाई हो चुके थे। उसे
  1717. 1:17:16विहान से बहुत उम्मीदें थी। पर शादी वाली
  1718. 1:17:19रात को जब से वह गायब हुआ था उसके बाद
  1719. 1:17:21उसने एक बार भी यह जानने की कोशिश नहीं की
  1720. 1:17:24कि शिप्रा अब किस हाल में है। एक बार को
  1721. 1:17:27यह मान भी लिया जाए कि वो मुख्तार के डर
  1722. 1:17:29से भाग निकला था। पर बाद में तो जानकारी
  1723. 1:17:32ले सकता था कि शिप्रा ठीक है या नहीं। पर
  1724. 1:17:35उसने तो कोई कोशिश ही नहीं की। वैसे तो
  1725. 1:17:38शिप्रा सोचकर संतोष करती आई है कि अच्छा
  1726. 1:17:41ही हुआ जो विहान से उसकी शादी नहीं हुई
  1727. 1:17:43क्योंकि जो शादी से पहले मुसीबत में
  1728. 1:17:45छोड़कर भाग सकता है वो बाद में भी क्या ही
  1729. 1:17:48साथ देगा। लेकिन शिप्रा की दुविधा यह है
  1730. 1:17:51कि अब किसी पर भी भरोसा कर पाना उसे
  1731. 1:17:53मुश्किल लग रहा था। उसकी सबसे बड़ी दिक्कत
  1732. 1:17:56यह थी कि वह शौर्य को लेकर फैसला नहीं कर
  1733. 1:17:59पा रही थी। उसने यह भी ठान लिया था कि
  1734. 1:18:01इसके बाद वह दोबारा किसी से शादी नहीं
  1735. 1:18:04करेगी। भले सारी जिंदगी अकेले रहना पड़े।
  1736. 1:18:07उसने मन ही मन फैसला कर लिया था कि अगर
  1737. 1:18:09घरवाले दूसरी शादी के लिए जिद करेंगे तो
  1738. 1:18:12फिर वह श्रवण से तलाक ही नहीं लेगी। उसे
  1739. 1:18:14श्रवण की बीवी बनकर रहना मंजूर था। पर
  1740. 1:18:17दोबारा शादी के पिचड़े में पड़ना कबूल नहीं
  1741. 1:18:19था। वो यह सोचकर दिल को तसल्ली दे रही थी
  1742. 1:18:22कि उसके लिए श्रवण को हैंडल करना आसान
  1743. 1:18:24होगा। उसे अब दुनियादारी से भी कुछ खास
  1744. 1:18:27फर्क नहीं पड़ने वाला था। क्योंकि उसकी
  1745. 1:18:29जितनी छीछा लेदर होनी थी वो हो गई। अब
  1746. 1:18:32इससे ज्यादा क्या ही होगा। इतना सब कुछ
  1747. 1:18:35सोचने के बाद उसे लगा कि यह सब बातें अब
  1748. 1:18:37एक बार श्रवण से भी कर लेनी चाहिए ताकि
  1749. 1:18:40बाद में कोई कंफ्यूजन ना रहे। इसीलिए वो
  1750. 1:18:43अपने बेड से उठी और हवेली से बाहर आ गई।
  1751. 1:18:46अब तक शाम की झुरमुट चारों ओर छाने लगी
  1752. 1:18:49थी। शिप्रा ने उस तरफ देखा जहां शौर्य
  1753. 1:18:51ठहरा था और धीरे से उस ओर बढ़ गई। जब
  1754. 1:18:55शिप्रा गिरधर के क्वार्टर के पास पहुंची
  1755. 1:18:57तो उसने [संगीत] देखा गिरधर किचन में खाना
  1756. 1:18:59बना रहा था और शौर्य बेड पर बैठकर प्याज
  1757. 1:19:02काट रहा था। शौर्य को देखकर उसे कुछ अलग
  1758. 1:19:05एहसास हुआ। उसे वो कुछ बदला बदला सा लग
  1759. 1:19:08रहा था। फिर उसे ख्याल आया कि उसके कपड़े
  1760. 1:19:10आज कुछ अलग थे। [संगीत] कमाल है। कपड़ों
  1761. 1:19:14से आदमी की पर्सनालिटी में कितना चेंज आ
  1762. 1:19:16जाता है। इसी विचार के साथ शिप्रा ने मन
  1763. 1:19:19ही मन कुछ निश्चय किया और क्वार्टर का
  1764. 1:19:21दरवाजा खटखटा दिया। इस पर अंदर से गिरिधर
  1765. 1:19:24की आवाज आई। इस समय कौन आया होगा। श्रवण
  1766. 1:19:28जरा देखना बाहर कौन है। यह सुनकर प्यास
  1767. 1:19:31काटते शौर्य ने भीगी आंखों के साथ जब
  1768. 1:19:33दरवाजा खोला तो उसके सामने शिप्रा खड़ी
  1769. 1:19:36थी। उसे उम्मीद नहीं थी कि इस समय शिप्रा
  1770. 1:19:39उसके सामने आ जाएगी। न जाने क्यों वो
  1771. 1:19:42फपफला गया और आंसू पोंछ कर अपनी शक्ल ठीक
  1772. 1:19:44करने लगा और मुंह से अचानक ही निकला। आप
  1773. 1:19:48यहां तभी कमरे के अंदर से गिरधर की आवाज
  1774. 1:19:51आई। क्या हुआ? दरवाजे पर कौन है श्रवण?
  1775. 1:19:55श्रवण कुछ बोलता उससे पहले शिप्रा बोल उठी
  1776. 1:19:58मैं हूं गिरधर काका शिप्रा शिप्रा का नाम
  1777. 1:20:01सुनकर गिरधर गैस की आंच कम करके अपने हाथ
  1778. 1:20:03पोंछते हुए दरवाजे पर पहुंचा और सम्मानपूक
  1779. 1:20:06बोला अरे शिप्रा बेबी आप इस समय कुछ काम
  1780. 1:20:10था क्या इस पर शिप्रा ने विनम्रता के साथ
  1781. 1:20:13कहा नहीं ऐसा कुछ खास नहीं है काका मुझे
  1782. 1:20:17श्रवण से कुछ बात करनी थी क्या मैं कुछ
  1783. 1:20:19देर के लिए श्रवण को यहां से ले जा सकती
  1784. 1:20:21हूं अरे आप भी क्या बात कर रही हो यह कोई
  1785. 1:20:25पूछने वाली बात है? आप ले जाइए श्रवण को।
  1786. 1:20:28[संगीत] कहते हुए गिरधर ने श्रवण को साथ
  1787. 1:20:30ले जाने का इशारा कर दिया। तभी शिप्रा
  1788. 1:20:33गिरधर काका का धन्यवाद करते हुए पलट गई और
  1789. 1:20:35शौर्य भी उसके पीछे हो लिया। लेकिन वो समझ
  1790. 1:20:38नहीं पा रहा था कि आखिर शिप्रा क्या बात
  1791. 1:20:40करना चाहती है। रह-रह कर शौर्य की नजर
  1792. 1:20:44शिप्रा की ओर चली जा रही थी। सिंपल से सूट
  1793. 1:20:47में भी शिप्रा की सादगी शायद शौर्य को
  1794. 1:20:49अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। खैर क्वार्टर
  1795. 1:20:52से निकलने के बाद 6-7 फीट का रास्ता था
  1796. 1:20:54जिस पर सीमेंट की ईंटें बिछी हुई थी। उसके
  1797. 1:20:56बाद लॉन शुरू हो जाता था। लॉन में जगह-जगह
  1798. 1:21:00बेंच लगी हुई थी। शिप्रा ने एक बेंच की
  1799. 1:21:02तरफ इशारा करते हुए कहा। चलो वहां चलकर
  1800. 1:21:06बैठते हैं। शिप्रा बेंच पर जाकर बैठ गई।
  1801. 1:21:09[संगीत] पर शौर्य खड़ा ही रहा। उसे समझ
  1802. 1:21:11नहीं आ रहा था कि वो शिप्रा के साथ किस
  1803. 1:21:14तरह पेश आए। वैसे भी शिप्रा की नजर में
  1804. 1:21:16उसकी हैसियत एक भिखारी से ज्यादा कुछ नहीं
  1805. 1:21:19थी। अभी शौर्य इसी उधेड़बुन में था कि तभी
  1806. 1:21:22[संगीत] फिर से शिप्रा की नरम आवाज उसके
  1807. 1:21:24कान में पड़ी। क्या हुआ? बैठ जाओ ना। मैं
  1808. 1:21:29समझती हूं कि तुम्हारे मन में क्या चल रहा
  1809. 1:21:31होगा। कुछ ऐसी ही मनस्थिति मेरी भी है और
  1810. 1:21:34इसी के बारे में मुझे तुमसे बात करनी है।
  1811. 1:21:38इस पर शौर्य बेंच के दूसरे छोर पर बैठ
  1812. 1:21:40गया। शिप्रा सोच रही थी उसे कहां से शुरू
  1813. 1:21:43करना चाहिए और इसी सोच में कुछ पल बीत गए।
  1814. 1:21:46तभी शौर्य ने बड़े ही शालीनता से पूछा,
  1815. 1:21:49"क्या हुआ? आप कुछ बोलने वाली थी?" शौर्य
  1816. 1:21:53की बात सुनकर शिप्रा ने उसकी ओर देखा और
  1817. 1:21:56गंभीरता से पूछा,
  1818. 1:21:58"अभी जो कुछ भी दो-तीन दिनों के दरमियान
  1819. 1:22:00हमारे साथ हुआ है, उसके बारे में तुम क्या
  1820. 1:22:04सोचते हो।" शिप्रा की बात सुनकर एक पल को
  1821. 1:22:07तो शौर्य को समझ नहीं आया कि वह क्या
  1822. 1:22:09बोले, पर बोलना तो था। वो भी शौर्य बनकर
  1823. 1:22:12नहीं बल्कि एक ऐसा व्यक्ति जिसकी अपनी कोई
  1824. 1:22:15हैसियत नहीं है। [संगीत] खैर शौर्य ने कुछ
  1825. 1:22:18सोचा और फिर सहानुभूति जाहिर करते हुए
  1826. 1:22:21ईमानदारी से जवाब दिया। मुझे खुद का तो
  1827. 1:22:24पता नहीं पर मैं समझता हूं कि आपके साथ
  1828. 1:22:26अच्छा नहीं हुआ। आपके साथ यह नहीं होना
  1829. 1:22:29चाहिए था। शिप्रा ने शौर्य की बात सुनी और
  1830. 1:22:33फिर से अगला सवाल किया।
  1831. 1:22:35अब जबकि तुम्हें पता है कि जो नहीं होना
  1832. 1:22:37था वह हो गया तो इस स्थिति में मुझे क्या
  1833. 1:22:41करना चाहिए? शौर्य को समझ नहीं आया कि वो
  1834. 1:22:44क्या जवाब दे। लेकिन इस सवाल से शौर्य को
  1835. 1:22:47यही समझ में आया कि शिप्रा अभी किस मानसिक
  1836. 1:22:50स्थिति से गुजर रही होगी। शिप्रा की
  1837. 1:22:52स्थिति के बारे में सोचकर शौर्य को शिप्रा
  1838. 1:22:55पर दया आने लगी। इसीलिए वो शिप्रा को
  1839. 1:22:57दिलासा देते हुए स्पष्ट शब्दों में बोला।
  1840. 1:23:00इस स्थिति में मैं आपको यही कहूंगा कि जो
  1841. 1:23:02भी आपके साथ हुआ है आप उसे मानने के लिए
  1842. 1:23:04बाध्य नहीं हैं। बंदूक की नोक पर रखकर
  1843. 1:23:07किसी से अगर आपकी शादी कर दी [संगीत] जाती
  1844. 1:23:08है तो जरूरी नहीं है कि आप उसको जबरदस्ती
  1845. 1:23:11निभाएंगी ही। मेरी तरफ से आप पूरी तरह से
  1846. 1:23:13आजाद हैं। उस दिन भी जब [संगीत] वो बदमाश
  1847. 1:23:15जबरदस्ती कर रहा था तो मैं उसके सामने
  1848. 1:23:18झुकने वाला नहीं था। मैं भी उसकी बात
  1849. 1:23:20मानने को इसीलिए मजबूर हो गया था क्योंकि
  1850. 1:23:22उसने आपके भाई के गले पर तलवार रख दी थी।
  1851. 1:23:24[संगीत] शौर्य की बात सुनकर शिप्रा को
  1852. 1:23:26अच्छा लगा। उसे लगा बंदा अपनी सोच को लेकर
  1853. 1:23:29कितना क्लियर है। इसीलिए शिप्रा राहत की
  1854. 1:23:32सांस लेते हुए बोली तुम्हारी बात सुनकर
  1855. 1:23:35मुझे अच्छा लगा कि तुम इस तरह से सोचते हो
  1856. 1:23:37लेकिन मेरे साथ कुछ और भी प्रॉब्लम है।
  1857. 1:23:40इतना बोलकर शिप्रा एक पल ठहरी। फिर कुछ
  1858. 1:23:42सोच कर बोली मैं अपनी बात बताऊं उससे पहले
  1859. 1:23:45मुझे तुम्हारे बारे में जानना है। यह
  1860. 1:23:47सुनते ही शौर्य की धड़कन तेज हो गई। अपने
  1861. 1:23:50आप को संभालते हुए उसने स्पष्ट शब्दों में
  1862. 1:23:52पूछा। क्या जानना चाहती हैं आप मेरे बारे
  1863. 1:23:55में? शौर्य की दुविधा यह थी कि वो शिप्रा
  1864. 1:23:57से झूठ बोलना नहीं चाहता था। पर इस समय वो
  1865. 1:23:59उसे अपने बारे में बता भी नहीं सकता था।
  1866. 1:24:02तभी शिप्रा ने सहानुभूति भरे लहजे में
  1867. 1:24:04पूछा। यही कि तुम स्वस्थ हो फिर भी तुम
  1868. 1:24:07कुछ कामधाम ना करके यूं बेसहारे की जिंदगी
  1869. 1:24:09क्यों जी रहे थे? शिप्रा को सीधा यह पूछना
  1870. 1:24:12ठीक नहीं लगा कि वो भीख मांगकर क्यों खा
  1871. 1:24:14रहा था। इसीलिए उसने मरदित ढंग से अपना
  1872. 1:24:17सवाल किया। वहीं शौर्य ने अब कुछ भी
  1873. 1:24:19छुपाना ठीक नहीं समझा। उसने एक लंबी सांस
  1874. 1:24:22लेने के बाद शांत स्वर में कहा। दरअसल आज
  1875. 1:24:25से 6 महीने पहले मेरी स्थिति ऐसी नहीं थी।
  1876. 1:24:286 महीने पहले मेरा एक एक्सीडेंट हुआ था।
  1877. 1:24:30या यूं समझिए कि मेरे परिवार में से ही
  1878. 1:24:32कुछ लोगों ने मुझे जान से मारने की कोशिश
  1879. 1:24:34की थी। उस एक्सीडेंट में तो मैं बच गया
  1880. 1:24:37लेकिन मेरे परिवार की नजर में मेरी मौत हो
  1881. 1:24:39चुकी थी। अब क्योंकि मुझे मारने के
  1882. 1:24:41षड्यंत्र में मेरे परिवार के ही किसी का
  1883. 1:24:44हाथ था। इसीलिए मैं अपने घर भी वापस नहीं
  1884. 1:24:46जा सकता था। यह सुनकर शिप्रा को शौर्य के
  1885. 1:24:49लिए सिंपैथी का अभाव महसूस हुआ और वह गौर
  1886. 1:24:51से उसे सुनने लगी। शौर्य ने एक नजर शिप्रा
  1887. 1:24:55को देखा और फिर से बोलने लगा जब मेरा
  1888. 1:24:57एक्सीडेंट हुआ तो मुझे उसी मंदिर में शरण
  1889. 1:24:59मिली थी। उस समय मैं कुछ कर पाने की
  1890. 1:25:02स्थिति में भी नहीं था। इसीलिए मंदिर
  1891. 1:25:04आते-जाते लोग जो कुछ दे देते [संगीत]
  1892. 1:25:06मैं उसी से अपना गुजारा कर लेता था। फिर
  1893. 1:25:09धीरे-धीरे ऐसा हुआ कि मेरी इच्छाएं ही
  1894. 1:25:11खत्म हो गई। मुझे [संगीत] किसी चीज की कोई
  1895. 1:25:13चाह ही नहीं रही। और मैं मंदिर में ही
  1896. 1:25:15अपनी सेवा देने लगा। मैंने इसी को अपनी
  1897. 1:25:18नियति मानकर जीना सीख लिया। शौर्य ने अपनी
  1898. 1:25:21कहानी बता दी जो कि लगभग सत्य ही है। वहीं
  1899. 1:25:24शौर्य की कहानी सुनकर शिप्रा को आभास हुआ
  1900. 1:25:27कि सिर्फ उसका दुख ही दुख नहीं है। दुनिया
  1901. 1:25:29में ऐसे कई लोग होंगे जिनका दुख उससे भी
  1902. 1:25:32बड़ा है। खैर अब वो मुद्दे की बात करना
  1903. 1:25:35चाहती [संगीत] थी। लेकिन वो सोच रही थी कि
  1904. 1:25:37कैसे वो अपने मन की बात श्रवण से कहे और
  1905. 1:25:40क्या श्रवण उसकी स्थिति को समझेगा? इसी
  1906. 1:25:43उधेड़बुन में उसने एक लंबी सांस ली और
  1907. 1:25:45आखिरकार कहना शुरू किया। देखो श्रवण नियति
  1908. 1:25:48ने हम दोनों को जिस मोड़ पर लाकर खड़ा कर
  1909. 1:25:50दिया है उसकी कल्पना ना तुमने की होगी और
  1910. 1:25:53ना ही मैंने। दो-तीन दिन पहले तक देखा जाए
  1911. 1:25:56तो मैं एक अलग ही लड़की थी जिसके कुछ सपने
  1912. 1:25:59थे जिन्हें मैं जीना चाहती थी। पर उस रात
  1913. 1:26:01जो कुछ भी घटित हुआ उसने जिंदगी के प्रति
  1914. 1:26:04मेरा नजरिया ही चेंज कर दिया। इतना कहने
  1915. 1:26:07के बाद शिपरा रुक गई। वो देखना चाहती थी
  1916. 1:26:09कि श्रवण का रिएक्शन कैसा है। और जब उसने
  1917. 1:26:12देखा कि श्रवण धैर्यपूर्वक उसकी बातों को
  1918. 1:26:14सुन रहा है तो उसने आगे कहा अब मुझे किसी
  1919. 1:26:17खास रिश्ते की चाह नहीं है और अब दोबारा
  1920. 1:26:20मैं किसी नए रिश्ते में बंधूं ऐसी भी कोई
  1921. 1:26:22इच्छा नहीं रही है। लेकिन अब जो हालात हैं
  1922. 1:26:25उनमें मैं मानूं या ना मानूं पर दुनिया की
  1923. 1:26:27नजर में हम दोनों पतिपत्नी हैं। मेरे घर
  1924. 1:26:30वालों ने तुम्हें यहां लाया भी इसीलिए है
  1925. 1:26:32कि जब परिस्थिति सामान्य होगी तो हम दोनों
  1926. 1:26:34का तलाक हो जाए ताकि फिर कहीं और मेरा
  1927. 1:26:37रिश्ता करने में कोई अड़चन ना आए। इतना
  1928. 1:26:40कहकर शिप्रा ने अपने शब्दों को विराम दिया
  1929. 1:26:42और अंधेरे में डूबी हुई फूलों की क्या
  1930. 1:26:44देखने लगी। वहीं जब शौर्य ने देखा कि
  1931. 1:26:46शिप्रा चुप हो गई है तो उसने शांत और
  1932. 1:26:49समझदारी भरे लहजे में कहा तो इसमें गलत
  1933. 1:26:51क्या है? कोई भी मां-बाप अपने बच्चे के
  1934. 1:26:53लिए यही करेंगे। श्रवण की बात सुनकर
  1935. 1:26:56शिप्रा के चेहरे पर एक फीकी मुस्कान आ गई
  1936. 1:26:58और वो सामने अंधेरे में देखती हुई फिर से
  1937. 1:27:00बोली हां तुम सही कह रहे हो। इसमें गलत
  1938. 1:27:04कुछ भी नहीं है। पर इस मर्दों के वर्चस्व
  1939. 1:27:07वाली दुनिया में जो यह भ्रम है कि औरत
  1940. 1:27:09सिर्फ एक मर्द के स्वामित्व में ही सेफ रह
  1941. 1:27:12सकती है, उसमें मेरा विश्वास नहीं रहा है।
  1942. 1:27:15जब मैं अकेले अपनी जिंदगी अपने ढंग से
  1943. 1:27:17बिना किसी सहारे के जी सकती हूं तो क्यों
  1944. 1:27:20परिवार वाले शादी के रिश्ते में बांधने के
  1945. 1:27:22लिए मजबूर करते हैं। इतना कहकर शिप्रा ने
  1946. 1:27:25अपनी भावनाओं को नियंत्रित किया और एक बार
  1947. 1:27:27फिर कुछ सोचते हुए बोली तुम्हें पता है
  1948. 1:27:30विहान से जो मेरी शादी होने जा रही थी वो
  1949. 1:27:33शादी [संगीत] कम और दो परिवार के बीच
  1950. 1:27:35बिजनेस रिलेशन ज्यादा था। इसीलिए इस शादी
  1951. 1:27:37के टूटने का भी मुझे ज्यादा दुख नहीं हुआ।
  1952. 1:27:40एक तरह से अच्छा ही हुआ जो उसकी असलियत
  1953. 1:27:43पता चल गई। ऐसा व्यक्ति जो मुसीबत में पीठ
  1954. 1:27:46दिखा दे उससे तो अच्छा उसका ना होना है।
  1955. 1:27:49शौर्य को समझ नहीं आ रहा था कि शिप्रा उसे
  1956. 1:27:51इतना कुछ क्यों सुना रही है। इसीलिए उसने
  1957. 1:27:54उलझन भरी आवाज में पूछ ही लिया। आप जो भी
  1958. 1:27:57कह रही हैं वो सही है पर आप यह सब मुझे
  1959. 1:28:00क्यों बता रही हैं? [संगीत] यह मुझे समझ
  1960. 1:28:02में नहीं आ रहा। यह सुनकर शिप्रा ने अब
  1961. 1:28:04बातों को और घुमाने की कोशिश नहीं की और
  1962. 1:28:06मुद्दे पर आते हुए बोली, दरअसल तुम्हें यह
  1963. 1:28:09सब बताने के पीछे मेरा एक मकसद है। मैं
  1964. 1:28:12चाहती हूं कि तुम मेरी स्थिति समझकर मेरी
  1965. 1:28:14मदद कर सको। यह बोलकर शिप्रा श्रवण की ओर
  1966. 1:28:17देखने लगी। लेकिन मेरे जैसा गरीब भला आपकी
  1967. 1:28:20क्या मदद कर सकता है। शौर्य ने विवशता भरी
  1968. 1:28:23आवाज में कहा। तभी शिप्रा ने ईमानदारी से
  1969. 1:28:26जवाब दिया। देखो श्रवण मैं जानती हूं कि
  1970. 1:28:30मैं तुम्हें पति के रूप में शायद ही कभी
  1971. 1:28:31स्वीकार कर पाऊंगी। पर मैं यह भी नहीं
  1972. 1:28:34चाहती कि मैं तुमसे तलाक लूं क्योंकि एक
  1973. 1:28:37बार मैंने तुमसे तलाक ले लिया तो फिर मेरे
  1974. 1:28:39घर वाले मेरी दूसरी शादी करवाना चाहेंगे
  1975. 1:28:42और मैं दोबारा शादी करना नहीं चाहती। इतना
  1976. 1:28:45[संगीत] सुनते ही शौर्य को कुछ बातें समझ
  1977. 1:28:47आने लगी। पर क्लेरिटी के लिए उसने फिर से
  1978. 1:28:49पूछा। तो इसमें मेरी मदद की जरूरत कहां
  1979. 1:28:53है? इस पर शिप्रा थोड़ी निराशा के साथ
  1980. 1:28:55बोली लगता है तुम समझे नहीं मेरी बात को
  1981. 1:28:59अगर मैं तुमसे तलाक नहीं लूंगी तो तुम भी
  1982. 1:29:01तो शादीशुदा ही रहोगे और शादीशुदा होने के
  1983. 1:29:04बाद भी तुम्हें पत्नी का सुख नहीं मिलेगा
  1984. 1:29:07तो क्या तुम्हें इस तरह के रिश्ते में
  1985. 1:29:08रहना कुबूल होगा शिप्रा की बात का मतलब अब
  1986. 1:29:12जाकर शौर्य की समझ में आया और अगले ही पल
  1987. 1:29:14वो शांत और विश्वास से भरी आवाज में बोला
  1988. 1:29:17मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं है। आप जब तक
  1989. 1:29:19खुद नहीं चाहेंगी तब तक मैं अपनी तरफ से
  1990. 1:29:21आपको तलाक के लिए कभी मजबूर [संगीत] नहीं
  1991. 1:29:23करूंगा। इस पर शिप्रा ने एक बार फिर
  1992. 1:29:26कंफर्म करने के लिए पूछा। एक बार अच्छे से
  1993. 1:29:28सोच लो मेरे कारण तुम भी शादी नहीं कर
  1994. 1:29:31पाओगे। तभी शौर्य हल्की मुस्कान के साथ
  1995. 1:29:33बोला आप मेरी तरफ से निश्चिंत रहें। वैसे
  1996. 1:29:37भी कौन [संगीत] ही शहजादी मुझसे शादी करना
  1997. 1:29:39चाहेगी। श्रवण की बात सुनकर शिप्रा को
  1998. 1:29:42तसल्ली हुई और उसने जाने से पहले कहा वैसे
  1999. 1:29:45मेरी तरफ से तुम आजाद हो। तुम कहां क्या
  2000. 1:29:47करते हो या किसी के साथ रिलेशन भी रखते हो
  2001. 1:29:50[संगीत] तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बस
  2002. 1:29:52मैं यह चाहूंगी कि मेरे परिवार वालों को
  2003. 1:29:54ना पता चले तो अच्छा होगा। यह सुनकर श्रवण
  2004. 1:29:57ने वादा करते हुए कहा हां मैं इस बात का
  2005. 1:30:00ध्यान रखूंगा। ठीक है तो फिर मैं चलती
  2006. 1:30:02हूं। [संगीत] इतना बोलकर शिप्रा अपनी जगह
  2007. 1:30:05से खड़ी हो गई लेकिन जाते-जाते रुकी और
  2008. 1:30:07भावुक शब्दों में बोली तुम एक अच्छे
  2009. 1:30:10व्यक्ति हो श्रवण तुमने जो कुछ भी मेरे
  2010. 1:30:12लिए किया है वो शायद ही कोई कर पाए। इतना
  2011. 1:30:15बोलकर शिप्रा वहां से चली गई और शौर्य उसे
  2012. 1:30:17देखता रहा। रात की ठंडी हवा शौर्य के
  2013. 1:30:20बालों को सहला रही थी। तभी उसने एक प्यार
  2014. 1:30:22भरी मुस्कान के साथ कहा, तुम आ गई मेरी
  2015. 1:30:25जिंदगी में तो मुझे और किसी की जरूरत नहीं
  2016. 1:30:27है। आज से तुम्हारी सारी तकलीफें मेरी।
  2017. 1:30:31मेरा वादा है कि आज के बाद किसी मुसीबत को
  2018. 1:30:33तुम्हारे पास भी नहीं भटकने दूंगा। शिप्रा
  2019. 1:30:36से बात होने के बाद शौर्य खुश था। उसे पता
  2020. 1:30:39था कि यहां लाने के पीछे इस परिवार का
  2021. 1:30:41मकसद यही था कि सही समय पर दोनों का तलाक
  2022. 1:30:44हो जाए। जिससे सोसाइटी में तरह-तरह की
  2023. 1:30:46बातें ना हो। पर जब शिप्रा ही तलाक के लिए
  2024. 1:30:49तैयार नहीं है तो फिर दोनों का तलाक होने
  2025. 1:30:51से रहा। खैर कुछ देर बाद शौर्य वहां से
  2026. 1:30:53गिरधर के क्वार्टर में पहुंचा। अब तक
  2027. 1:30:55गिरधर ने खाना बना लिया था। शौर्य के आने
  2028. 1:30:58के बाद गिरधर ने अपने साथ उसका भी खाना
  2029. 1:31:00लगा दिया था। गिरधर को शिप और श्रवण के
  2030. 1:31:03रिश्ते के बारे में पता था। इसीलिए उसने
  2031. 1:31:05श्रवण से इस बारे में कुछ पूछा नहीं। अगली
  2032. 1:31:08सुबह 10:00 बजे का समय था। बलवंत राय
  2033. 1:31:11डाइनिंग हॉल में अपने तीनों बेटों
  2034. 1:31:12बृजभूषण, राजदीप और जगताप राय के साथ बैठे
  2035. 1:31:15हुए थे। और अभी-अभी संतोष चाय की ट्रे
  2036. 1:31:18डाइनिंग टेबल पर रखकर गई थी। तभी जगताप
  2037. 1:31:20राय ने चार कप में चाय निकाली और एक कप
  2038. 1:31:23अपने पिता के सामने कर दिया। बाकी भाइयों
  2039. 1:31:26ने अपना कप स्वयं लिया। अभी किसी ने कोई
  2040. 1:31:29बात शुरू नहीं की थी। उसी समय बृजभूषण राय
  2041. 1:31:32ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा। क्या बात
  2042. 1:31:34है पिताजी? [संगीत] कुछ जरूरी है क्या? जो
  2043. 1:31:37आपने हम तीनों को एक साथ बुलाया है। हां,
  2044. 1:31:40है तो कुछ जरूरी बात। बलवंत राय गंभीर
  2045. 1:31:42स्वर में बोले। इस पर जगताप उत्सुकता से
  2046. 1:31:45बोल उठा। क्या बात है पिताजी बताइए?
  2047. 1:31:47[संगीत]
  2048. 1:31:48तभी बलवंत जी तीनों के चेहरे की तरफ ध्यान
  2049. 1:31:50से देखते हुए बोले। अभी थोड़ी देर पहले
  2050. 1:31:53मुख्तार का फोन आया था। यह सुनकर राजदीप
  2051. 1:31:56तुरंत बोल उठा। मुख्तार का। पर उसने आपको
  2052. 1:32:00क्यों कॉल किया था? तभी बलवंत जी ने बात
  2053. 1:32:03को स्पष्ट करते हुए बताया वो हमसे मिलना
  2054. 1:32:06चाहता है पर उसने मिलने का कारण नहीं
  2055. 1:32:08बताया तो फिर आपने क्या कहा उससे जगताप ने
  2056. 1:32:12हैरानी से पूछा तो बलवंत राय ने सामान्य
  2057. 1:32:15स्वर में जवाब दिया हम उससे जरूर मिलेंगे
  2058. 1:32:18लेकिन आज नहीं कल [संगीत] इतना कहकर बलवंत
  2059. 1:32:22राय ने एक नजर अपने बेटों को देखा और फिर
  2060. 1:32:24तुरंत बोले मैंने सोचा एक बार तुम लोगों
  2061. 1:32:27से [संगीत] भी बात कर लूं कि तुम सबका
  2062. 1:32:29क्या विचार है इस बारे
  2063. 1:32:30इस पर राजदीप ने कुछ सोचते हुए कहा, क्या
  2064. 1:32:34उससे [संगीत] मिलना ठीक रहेगा पिताजी?
  2065. 1:32:36क्या पता वो रजत को लेकर बात करना चाहता
  2066. 1:32:39हो क्योंकि कल की उसकी हरकत के कारण उसका
  2067. 1:32:42बेल कैंसिल हो गया है। [संगीत] इसीलिए
  2068. 1:32:44शायद वो समझौता करना चाहता हो ताकि वो
  2069. 1:32:46अपने भाई को बचा सके। इस पर बलवंत राय ने
  2070. 1:32:49स्पष्ट शब्दों में कहा, बात चाहे जो भी हो
  2071. 1:32:52वह तो हमें मिलने पर ही पता चलेगा। वैसे
  2072. 1:32:55मैंने अभी मीटिंग के लिए हां नहीं कहा है।
  2073. 1:32:57मैंने सिर्फ यह कहा है कि कल देखते हैं।
  2074. 1:33:00तो बताओ क्या राय है तुम सभी की? वैसे
  2075. 1:33:04मिलके देखने में कोई हर्ज नहीं है। कम से
  2076. 1:33:07कम यह तो पता चलेगा कि वो चाहता क्या है।
  2077. 1:33:11बड़े भाई बृजभूषण ने शांति से अपना विचार
  2078. 1:33:13व्यक्त किया। इसके बाद जगताप ने भी सहमति
  2079. 1:33:16में सिर हिलाते हुए कहा, हां पिताजी हमें
  2080. 1:33:19मिल लेना चाहिए।
  2081. 1:33:20[संगीत]
  2082. 1:33:20वैसे भी यह बदमाश लोग हैं। अगर इनसे मिलकर
  2083. 1:33:23कोई बीच का रास्ता निकल सकता है तो इसमें
  2084. 1:33:25बुराई ही क्या होगी? हम इन जैसे लोगों से
  2085. 1:33:27दुश्मनी मोल लेकर चैन से नहीं रह पाएंगे।
  2086. 1:33:31पर इस सबके बीच में राजदीप खामोश रहा।
  2087. 1:33:33उन्होंने अपना कोई भी विचार व्यक्त नहीं
  2088. 1:33:35किया। और तभी राजदीप को खामोश देखकर बलवंत
  2089. 1:33:39जी ने पूछ ही लिया। तुम क्या सोचते हो
  2090. 1:33:42राजदीप? तुम क्या चाहते हो? तुम भी तो
  2091. 1:33:45अपना विचार दो। इस पर राजदीप ने शांत स्वर
  2092. 1:33:48में कहा, आप ही देख लीजिए पिताजी आपको जो
  2093. 1:33:52सही लगता है वो कीजिए। मुझे कोई [संगीत]
  2094. 1:33:54आपत्ति नहीं है। तो ठीक है मैं उसे कल का
  2095. 1:33:57समय दे देता हूं। तुम लोगों में से कोई
  2096. 1:33:59चलेगा मेरे साथ। इतना कहकर बलवंत जी ने
  2097. 1:34:02तीनों की तरफ देखा तो बृजभूषण ने सहमति
  2098. 1:34:05जताते हुए कहा अगर आप कहें तो मैं चलता
  2099. 1:34:08हूं। तो फिर यह तय रहा। कल तुम मेरे साथ
  2100. 1:34:11रहना। मैं मिलने की कोई जगह फिक्स कर लेता
  2101. 1:34:14हूं क्योंकि यहां घर या ऑफिस बुलाना ठीक
  2102. 1:34:16नहीं है। यह कहते हुए बलवंत जी वहां से चल
  2103. 1:34:20दिए। शौर्य अपने क्वार्टर में था। यहां पर
  2104. 1:34:22उसकी पहली रात ठीक-ठाक बीती थी। तभी अचानक
  2105. 1:34:25उसे पुजारी बाबा का ख्याल आया। असल में
  2106. 1:34:28शौर्य ने उनको बताया भी नहीं कि वो अब राय
  2107. 1:34:30साहब की हवेली में ही रहने वाला है। यह
  2108. 1:34:33सोचकर उसने गिरधर से मोबाइल मांगा और
  2109. 1:34:35पुजारी बाबा का नंबर मिलाया। दो-तीन रिंग
  2110. 1:34:38के बाद ही दूसरी तरफ से फोन उठाया गया।
  2111. 1:34:41हेलो इस पर शौर्य ने शांत आवाज में कहा,
  2112. 1:34:45"हेलो पुजारी बाबा, मैं श्रवण बोल रहा
  2113. 1:34:47हूं।" शौर्य अपना असली नाम बोलते बोलते
  2114. 1:34:50संभल गया। तभी सामने से पुजारी बाबा की
  2115. 1:34:52खुशी से भरी आवाज आई।
  2116. 1:34:54अरे बेटा कहां हो तुम?
  2117. 1:34:56इस पर शौर्य ने क्षमा मांगते हुए कहा।
  2118. 1:34:59क्या कहूं बाबा? आपको बताने का समय ही
  2119. 1:35:02नहीं मिला। मुझे लगा कि आप चिंता कर रहे
  2120. 1:35:04होंगे। इसीलिए मैंने गिरधर काका के मोबाइल
  2121. 1:35:06से आपको फोन लगा दिया।
  2122. 1:35:09मुझे तुम्हारी चिंता हो रही थी। तुम ठीक
  2123. 1:35:11तो हो ना बेटे।
  2124. 1:35:13पुजारी बाबा ने पूछा तो शौर्य ने उन्हें
  2125. 1:35:15आश्वस्त करते हुए जवाब दिया। आप मेरी
  2126. 1:35:18चिंता मत करो। मैं बिल्कुल ठीक हूं। उसी
  2127. 1:35:21पल पुजारी बाबा तुरंत बोल पड़े।
  2128. 1:35:23अरे हां मैं तुम्हें एक बात बताना चाहता
  2129. 1:35:25था। बेटे कल तुम्हारे लिए किसी विक्रम का
  2130. 1:35:28फोन आया था। तुम यहां थे नहीं तो उसने
  2131. 1:35:31मुझसे हमारे मंदिर का पता ले लिया। वो कह
  2132. 1:35:34रहा था कि वो तुम्हें ढूंढने के लिए यहां
  2133. 1:35:36आएगा।
  2134. 1:35:37यह सुनते ही शौर्य परेशान हो गया। वो नहीं
  2135. 1:35:39चाहता था कि विक्रम फिलहाल इंडिया आए। पर
  2136. 1:35:42जब उसने विक्रम से दोबारा बात नहीं की तो
  2137. 1:35:44जाहिर है वह अपने बॉस को ढूंढना चाहेगा।
  2138. 1:35:47शौर्य विक्रम से राय मेंशन में नहीं मिल
  2139. 1:35:49सकता था। इसीलिए कुछ सोच कर उसने पुजारी
  2140. 1:35:51से कहा। बाबा मैं आता हूं आपके पास। अगर
  2141. 1:35:54विक्रम मुझसे पहले वहां आ गया तो आप उसे
  2142. 1:35:57बैठा कर रखिएगा।
  2143. 1:35:59ठीक है बेटे तुम जल्दी से आ जाओ।
  2144. 1:36:02इतना कहकर पुजारी ने फोन काट दिया। और
  2145. 1:36:05यहां शौर्य ने गिरधर काका से विनती करते
  2146. 1:36:07हुए पूछा। काका आप मुझे ₹1200 दे सकते हैं
  2147. 1:36:11क्या? मुझे मंदिर तक जाना है और मेरे पास
  2148. 1:36:14पैसे नहीं है। यह सुनते ही गिरधर ने जेब
  2149. 1:36:16से 200 का नोट निकाल कर शौर्य को दिया।
  2150. 1:36:19नोट लेते हुए शौर्य ने वादा किया
  2151. 1:36:22मैं जल्दी ही आपके पैसे लौटा दूंगा। अरे
  2152. 1:36:25ये तुम कैसी बात कर रहे हो? गिरिधर ने
  2153. 1:36:27अपनेपन के साथ कहा। हड़बड़ी में वहां से
  2154. 1:36:30निकलते हुए शौर्य बोला। बाबा मैं
  2155. 1:36:32बैकुंठपुर के मंदिर तक जाकर आता हूं। अगर
  2156. 1:36:35कोई पूछे तो बता दीजिएगा कि मैं जल्दी ही
  2157. 1:36:37वापस आ जाऊंगा। शौर्य सोच रहा था कि वह
  2158. 1:36:40विक्रम को फोन करके उसे यहां आने के लिए
  2159. 1:36:42मना कर देगा। इसी नियत के साथ वो तुरंत ही
  2160. 1:36:44पुजारी बाबा के कमरे में पहुंच गया। लेकिन
  2161. 1:36:47इससे पहले कि वहां पुजारी बाबा से फोन
  2162. 1:36:49मांगता पुजारी बाबा बोल उठे। अरे वाह इन
  2163. 1:36:53कपड़ों में तो तुम बहुत अच्छे लग रहे हो
  2164. 1:36:55श्रवण। इस पर शौर्य मुस्कुराते हुए बोला,
  2165. 1:36:59हां, यह राय साहब के लड़के ने खरीद कर दिए
  2166. 1:37:01हैं। लेकिन आप यह सब छोड़िए पहले बताइए कि
  2167. 1:37:04क्या फिर से विक्रम का कॉल आया था?
  2168. 1:37:07नहीं अभी तो नहीं आया। कहते हुए पुजारी
  2169. 1:37:10बाबा ने सिर हिला दिया। तभी शौर्य ने
  2170. 1:37:12अनुरोध किया। बाबा क्या आप मुझे अपना फोन
  2171. 1:37:15दे सकते हैं? इस पर पुजारी बाबा ने तुरंत
  2172. 1:37:18अपना फोन आगे कर दिया और शौर्य ने भी बिना
  2173. 1:37:20देरी किए विक्रम का नंबर डायल कर दिया।
  2174. 1:37:24हेलो
  2175. 1:37:24विक्रम की आवाज आई तो शौर्य ने बिना कोई
  2176. 1:37:27हालचाल पूछे तुरंत कहा हेलो कहां हो तुम?
  2177. 1:37:31मैं बस पहुंचने ही वाला हूं बॉस।
  2178. 1:37:33विक्रम ने उत्सुकता से कहा तो शौर्य
  2179. 1:37:35नाराजगी के साथ बोला अरे यार आने से पहले
  2180. 1:37:37एक बार कॉल तो कर लिया होता। यह सुनकर
  2181. 1:37:40विक्रम ने धीमी आवाज में स्पष्टीकरण देते
  2182. 1:37:42हुए कहा,
  2183. 1:37:44फोन तो किया था बॉस। पुजारी जी से बात भी
  2184. 1:37:46हुई थी। उन्होंने बताया कि आपको पुलिस ले
  2185. 1:37:48गई है तो मुझे कुछ समझ ही नहीं आया। और जब
  2186. 1:37:51आपके डैड को यह पता चला तो उन्होंने मुझे
  2187. 1:37:53जल्दी से यहां भेज दिया।
  2188. 1:37:55यह सुनते ही शौर्य की आंखें चौड़ी हो गई
  2189. 1:37:57और वो आश्चर्य से बोला यानी डैड को तुमने
  2190. 1:38:00मेरे बारे में बता दिया।
  2191. 1:38:01बॉस मैं यहां मंदिर पहुंच चुका हूं। मैं
  2192. 1:38:04आपको सारी बातें सामने आकर ही बताता हूं।
  2193. 1:38:07ठीक है। इतना बोलकर शौर्य ने फोन कट कर
  2194. 1:38:10दिया और फिर पुजारी से बोला। बाबा क्या
  2195. 1:38:13प्लीज विक्रम को यहां ले आएंगे?
  2196. 1:38:16ठीक है। मैं अभी उन्हें लेकर आता हूं।
  2197. 1:38:19बोलकर पुजारी बाबा वहां से निकल गए। फिर
  2198. 1:38:21मंदिर की सीढ़ियों के पास पुजारी ने देखा
  2199. 1:38:23कि सूट बूट में एक आदमी खड़ा है। उसे
  2200. 1:38:26देखकर ही वह समझ गए कि यही विक्रम होगा।
  2201. 1:38:28उन्होंने उसके पास जाकर तुरंत पूछा। बेटा
  2202. 1:38:31क्या आप ही विक्रम हो? जी हां। क्या आप?
  2203. 1:38:34इससे पहले कि विक्रम कुछ कहता। पुजारी ने
  2204. 1:38:37सादगी के साथ कहा। आप चलिए मेरे साथ। यह
  2205. 1:38:40सुनकर विक्रम उनके पीछे हो लिया। फिर जब
  2206. 1:38:43वह कमरे में पहुंचा तो अपने बॉस शौर्य को
  2207. 1:38:45पहचान ही नहीं पाया। और इधर-उधर नजर
  2208. 1:38:47दौड़ाते हुए बोला, बॉस कहां है? पुजारी
  2209. 1:38:51बाबा को समझ नहीं आया कि विक्रम उनसे क्या
  2210. 1:38:53पूछ रहा है। जबकि शौर्य के चेहरे पर
  2211. 1:38:56मुस्कान तैर रही थी। उलझन भरी निगाह के
  2212. 1:38:58साथ पुजारी शौर्य की तरफ देखने लगा।
  2213. 1:39:02और जब विक्रम ने उनकी निगाहों का पीछा
  2214. 1:39:04करते हुए बेतरतीब ढंग से बड़ी दाढ़ी वाले
  2215. 1:39:06शख्स को गौर से देखा तो वो दाढ़ी के पीछे
  2216. 1:39:09छिपे चेहरे को पहचान गया। और उत्सुकता से
  2217. 1:39:12बोल उठा। ये आप हो बॉस। क्या हाल बना रखा
  2218. 1:39:16है आपने अपना?
  2219. 1:39:18क्या हुआ? पहचान में नहीं आ रहा हूं ना।
  2220. 1:39:21शौर्य ने मुस्कुराते हुए पूछा। इस पर
  2221. 1:39:23विक्रम मुंह बनाते हुए बोला, "क्या बात कर
  2222. 1:39:26रहे हो बॉस? मैं तो सोच भी नहीं सकता था
  2223. 1:39:28कि आपको कभी इस हाल में भी देखूंगा।" क्या
  2224. 1:39:31बॉस अगर आपको दाढ़ी बढ़ानी ही थी, तो कम
  2225. 1:39:33से कम इसे सही से ट्रिम तो करवा लेते।
  2226. 1:39:36विक्रम की यह बात सुनकर पुजारी बाबा सोचने
  2227. 1:39:38लगे कि अभी तो यह फिर भी ठीक हालत में है।
  2228. 1:39:41अगर विक्रम इसको पहले के फटे हाल में देख
  2229. 1:39:43लेता तो पता नहीं शायद बेहोश ही हो जाता।
  2230. 1:39:46इस विचार के साथ आखिर पुजारी बाबा से रहा
  2231. 1:39:48नहीं गया और वह तुरंत बोल उठे विक्रम बेटे
  2232. 1:39:52[संगीत] तुमने आने में थोड़ी देर कर दी।
  2233. 1:39:54कुछ दिन पहले तो इसका हाल और भी बुरा था।
  2234. 1:39:57यह सुनकर विक्रम दोबारा शौर्य की ओर देखने
  2235. 1:40:00लगा और चिंता जाहिर करते हुए बोला क्यों
  2236. 1:40:02बॉस आपने ऐसा हाल क्यों बना रखा है? मैं
  2237. 1:40:06ऐसी हालत में रहा इसीलिए जिंदा हूं। किसी
  2238. 1:40:09की नजर मेरी तरफ नहीं पड़ी। अगर मैं बन ठन
  2239. 1:40:11के रहता तो छुपना मुश्किल हो जाता। कहते
  2240. 1:40:14हुए शौर्य ने गहरी सांस ली। अच्छा छोड़ो
  2241. 1:40:17इन बातों को। मैंने तुम्हें मना किया था
  2242. 1:40:19डैड से बताने को फिर भी तुमने उनको बता
  2243. 1:40:22दिया। शौर्य ने नाराजगी जाहिर करते हुए
  2244. 1:40:24कहा। इस पर वो दुखी स्वर में बोला। सॉरी
  2245. 1:40:29बॉस लेकिन आप तो यहां अज्ञात वास काट रहे
  2246. 1:40:31थे। पर आपको कुछ पता भी है कि अंकल और
  2247. 1:40:33आंटी का क्या हाल है। जब से उनको पता चला
  2248. 1:40:35है कि आप नहीं रहे उनकी जीने की इच्छा ही
  2249. 1:40:38खत्म हो गई। आपके डैड ने बिजनेस पर ध्यान
  2250. 1:40:40देना तो छोड़ ही दिया था। इतना कहकर उसने
  2251. 1:40:43एक नजर शौर्य को देखा और फिर एक गहरी सांस
  2252. 1:40:46लेकर बोला यही नहीं इसके बाद एक और
  2253. 1:40:48परेशानी खड़ी हो गई। दो दिन पहले आपके
  2254. 1:40:51दादाजी का फोन आया था। उनकी तबीयत भी ठीक
  2255. 1:40:53नहीं रहती। आपकी मौत की वजह वो खुद को ही
  2256. 1:40:56मान रहे हैं। उनको लगता है कि उन्हीं की
  2257. 1:40:58ज़िद के कारण आप इंडिया आए थे और एक्सीडेंट
  2258. 1:41:01में आपकी मौत हो गई। उन्हें लगता है कि
  2259. 1:41:03अगर उन्होंने आपको इंडिया आने के लिए नहीं
  2260. 1:41:05कहा होता तो शायद आप जिंदा होते। अब वो
  2261. 1:41:08लास्ट समय में यह चाहते हैं कि आपके पिता
  2262. 1:41:10यहां आकर अपने हक की संपत्ति अपने नाम कर
  2263. 1:41:13लें। नहीं तो आपके दादाजी के बाद उनके
  2264. 1:41:15भाई-बहन कुछ भी उनके लिए नहीं छोड़ने
  2265. 1:41:17वाले।
  2266. 1:41:19इतना बोलकर विक्रम चुप हो गया। फिर एक पल
  2267. 1:41:21की खामोशी के बाद आखिरकार शौर्य ने फिर से
  2268. 1:41:24सवाल किया।
  2269. 1:41:26तो फिर पापा ने दादाजी को क्या जवाब दिया?
  2270. 1:41:29वो क्या ही कहते। वो तो कुछ भी लेने से
  2271. 1:41:31मना करने वाले थे। उनका कहना था जिसके लिए
  2272. 1:41:34उन्होंने इतना बड़ा एंपायर खड़ा किया जब
  2273. 1:41:36उसको भोगने वाला ही नहीं रहा तो अब वह
  2274. 1:41:38अपनी पुश्तैनी संपत्ति लेकर क्या ही
  2275. 1:41:40करेंगे। वह सब कुछ छोड़ना चाहते थे। वो
  2276. 1:41:43कहने वाले थे कि उनके हिस्से की संपत्ति
  2277. 1:41:45भी उनके भाई बहनों को ही दे दें। तब मुझे
  2278. 1:41:48उनको आपकी सच्चाई बतानी पड़ी।
  2279. 1:41:51इतना कहकर आखिरकार विक्रम ने शौर्य को
  2280. 1:41:53पूरा माजरा समझा दिया। इसके बाद अचानक
  2281. 1:41:56विक्रम को कुछ याद आया और वो आगे बोला
  2282. 1:42:00आपकी मां तो उसी समय आपसे बात करना चाहती
  2283. 1:42:03थी। पर पुजारी बाबा से बात करने पर पता
  2284. 1:42:05चला कि आपको पुलिस ले गई है। जैसे ही अंकल
  2285. 1:42:08को पता चला कि आपको पुलिस लेके गई है तो
  2286. 1:42:10उन्होंने उसी समय मुझे यहां भेज दिया। तभी
  2287. 1:42:14शौर्य ने धीमी आवाज में पूछा। अब पापा
  2288. 1:42:17मम्मी कैसे हैं? इस पर विक्रम शौर्य की
  2289. 1:42:20आंखों में देखते हुए भावुक होकर बोला, आप
  2290. 1:42:22एक बार उनसे बात कर लीजिए। जब तक आप बात
  2291. 1:42:25नहीं करेंगे, उनको चैन नहीं मिलेगा। खासकर
  2292. 1:42:28आपकी मॉम को मेरे यहां लैंड करने के बाद
  2293. 1:42:31भी कई बार उनका फोन आ चुका है। मां के
  2294. 1:42:34बारे में जानकर शौर्य को थोड़ा बुरा लगा
  2295. 1:42:36और उसने फौरन कहा, "फ़ोन लगाओ मॉम को।"
  2296. 1:42:40विक्रम ने तुरंत फोन लगा दिया और तुरंत ही
  2297. 1:42:42फोन उठा लिया गया। मानो शौर्य की मां इसी
  2298. 1:42:45कॉल का इंतजार कर रही थी। शौर्य को अपनी
  2299. 1:42:48मां की घबराई हुई आवाज सुनाई दी।
  2300. 1:42:50शौर्य बेटा
  2301. 1:42:52मां की आवाज सुनकर शौर्य की आंखें नम हो
  2302. 1:42:55आई। हां मॉम। कहते हुए शौर्य की आवाज भररा
  2303. 1:42:59गई। कुछ देर के लिए खामोशी छा गई। ऐसा लग
  2304. 1:43:02रहा था जैसे मां का गला भी भर आया है।
  2305. 1:43:05उन्होंने खुद को कंट्रोल किया और वात्सल्य
  2306. 1:43:07से भरी आवाज में बोली
  2307. 1:43:09बेटा तुझे एक बार भी अपनी मां पर तरस नहीं
  2308. 1:43:12आया। इस पर शौर्य ने अपने आंसुओं को पोछा
  2309. 1:43:15और मां को समझाते हुए बोला,
  2310. 1:43:18ऐसी बात नहीं है मॉम। जब तक मैं इस लायक
  2311. 1:43:21हुआ कि किसी को अपने बारे में बता पाऊं,
  2312. 1:43:24तब तक बहुत लेट हो चुका था। ऑलरेडी सब जगह
  2313. 1:43:27यह बात कंफर्म हो गई थी कि मैं मर चुका
  2314. 1:43:30हूं। सब ने मुझे मरा हुआ मान लिया तो
  2315. 1:43:32मैंने भी सोचा कि यह समय मेरी हीलिंग के
  2316. 1:43:35लिए ठीक है। मैं जानता हूं इससे आपको बहुत
  2317. 1:43:38दुख पहुंचा होगा मॉम। लेकिन मैं सही समय
  2318. 1:43:40पर दुनिया के सामने आना चाहता था।
  2319. 1:43:43तभी मां ने उसे बीच में ही टोकते हुए कहा,
  2320. 1:43:45हां, तो तुम दुनिया से छुपते रहते ना
  2321. 1:43:48बच्चा। पर मुझे तो बता सकते थे। अरे मैं
  2322. 1:43:50मां हूं तुम्हारी। [संगीत] बच्चे की मौत
  2323. 1:43:53की खबर सुनकर मां पर क्या बीतती है? शायद
  2324. 1:43:55इसका अंदाजा नहीं है तुम्हें।
  2325. 1:43:57कहते हुए शौर्य की मां कल्पना राठौड़ अपने
  2326. 1:44:00आंसुओं को रोकने की भरपूर कोशिश कर रही
  2327. 1:44:02थी। मैं समझता हूं मॉम, मैं आप दोनों का
  2328. 1:44:05गुनहगार हूं। मैं आपके सामने आकर ही आपको
  2329. 1:44:08वो खुशी देना चाहता था।
  2330. 1:44:10लेकिन अब मुझे लग रहा है कि मुझे आपको
  2331. 1:44:12पहले ही बता देना चाहिए था।
  2332. 1:44:15शौर्य को ऐसा लग रहा था कि जैसे सच में वो
  2333. 1:44:17अपनी मां के इमोशन को समझ नहीं पाया। और
  2334. 1:44:20तभी वो रुआसा होकर बोला कि प्लीज मुझे माफ
  2335. 1:44:24कर दो मॉम।
  2336. 1:44:25बस कर अब ऐसे मत बोल। तुमसे बात कर ली ना
  2337. 1:44:29तो अब मुझे तसल्ली है। ले अपने डैड से भी
  2338. 1:44:33बात कर ले। इतना बोलकर कल्पना जी ने शौर्य
  2339. 1:44:36के पापा सूर्यभान राठौड़ को फोन थमा दिया
  2340. 1:44:38और तभी सूर्यभान जी ने अपनी आवाज को थोड़ा
  2341. 1:44:41कड़क करने की कोशिश करते हुए पूछा
  2342. 1:44:44कैसा है तू नालायक
  2343. 1:44:46इस पर शौर्य ने इमोशनल होकर कहा आई एम
  2344. 1:44:50सॉरी डैड मुझे आपको पहले ही खबर कर देनी
  2345. 1:44:52चाहिए थी यह सुनते ही सूर्यभान पिघल गए और
  2346. 1:44:56नरम लहजे में बोले
  2347. 1:44:57कोई बात नहीं मेरे बच्चे तुम ठीक हो यही
  2348. 1:45:01मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी की बात है इसके
  2349. 1:45:03बाद उन्होंने खुद को संभाला और गंभीर लहजे
  2350. 1:45:06में बोले
  2351. 1:45:07वैसे विक्रम से तुम्हें [संगीत] तुम्हारे
  2352. 1:45:09दादाजी के बारे में पता चल ही गया होगा।
  2353. 1:45:12तुम्हारे साथ जो हुआ उसके लिए वो खुद को
  2354. 1:45:14ही जिम्मेदार मान रहे हैं। उनको जब पता
  2355. 1:45:17चलेगा कि तुम ठीक हो तो शायद वो भी अपने
  2356. 1:45:19[संगीत] गिल्ट से बाहर आ पाएंगे।
  2357. 1:45:21इस पर शौर्य ने आश्वासन देते हुए कहा मैं
  2358. 1:45:24समझ गया डैड मैं जल्दी ही उनसे मिलूंगा।
  2359. 1:45:28ठीक है। जैसा तुम्हें ठीक लगे तुम करना पर
  2360. 1:45:31अपना ध्यान रखना बेटा।
  2361. 1:45:33सूर्यभान जी की बातों में शौर्य के लिए
  2362. 1:45:35चिंता साफ झलक रही थी और [संगीत] तभी
  2363. 1:45:36शौर्य ने हल्की मुस्कान के साथ कहा जरूर
  2364. 1:45:39डैड आप भी अपना और मॉम का ख्याल रखना।
  2365. 1:45:43आंखों से आंसू पोछते हुए शौर्य ने फोन काट
  2366. 1:45:46दिया और [संगीत] विक्रम को वापस कर दिया।
  2367. 1:45:48इसके बाद विक्रम ने गंभीरता से पूछा।
  2368. 1:45:50[संगीत]
  2369. 1:45:51अब बताइए बॉस आपको क्यों लगता है कि आपको
  2370. 1:45:54मारने की कोशिश हुई थी? अब बताइए बॉस आपको
  2371. 1:45:57क्यों लगता है कि आपको मारने की कोशिश हुई
  2372. 1:45:59थी? विक्रम की बात सुनकर शौर्य ने उसे
  2373. 1:46:02ध्यान से देखा। फिर गंभीर लहजे में बोला,
  2374. 1:46:06तुम्हें क्या लगता है कि मैं गलत बोल रहा
  2375. 1:46:08हूं? इस पर विक्रम एक पल के लिए सकपका गया
  2376. 1:46:10और फिर संकोच भरी आवाज में बोला, "अरे
  2377. 1:46:13नहीं, मैंने यह नहीं कहा बॉस। मैं तो बस
  2378. 1:46:16यह जानना चाहता हूं कि आपका ऐसा कहने के
  2379. 1:46:18पीछे वजह क्या है?" यह सुनकर शौर्य के
  2380. 1:46:21चेहरे पर एक मुस्कान तैर गई और उसने सब
  2381. 1:46:23कुछ विस्तार से बताना शुरू किया। ठीक है।
  2382. 1:46:26तुम जानना चाहते हो तो सुनो। जब मैं यूके
  2383. 1:46:29से मुंबई लैंड किया तो मुझे लेने के लिए
  2384. 1:46:31दादाजी ने अपना प्राइवेट प्लेन भेजा था।
  2385. 1:46:33फिर जैसे ही हमने मुंबई से उड़ान भरी तो
  2386. 1:46:36थकावट और जेट लैग के कारण मुझे नींद आ गई।
  2387. 1:46:39पर कुछ देर बाद अचानक किसी आहट से मेरी
  2388. 1:46:41नींद खुली और मैंने देखा कि कोई चाकू लेकर
  2389. 1:46:44मुझ पर हमला करने वाला है। मुझे नहीं पता
  2390. 1:46:46वो कौन था और मेरे प्लेन में कैसे आया।
  2391. 1:46:49मैंने जैसे तैसे करके खुद को उसके वार से
  2392. 1:46:51बचाया। हमारे बीच अच्छी खासी हाथापाई हुई
  2393. 1:46:55और जब वो मुझे काबू नहीं कर पाया तो उसने
  2394. 1:46:57मुझ पर पिस्तल तान दी और फिर गोली चला दी।
  2395. 1:47:00मैं बचने के लिए झट से हटा लेकिन गोली
  2396. 1:47:02मेरी कमर को चीरती हुई पीछे प्लेन में जा
  2397. 1:47:04लगी। कहते हुए शौर्य की आंखों के सामने वो
  2398. 1:47:07मंजर आ गया। उसने एक गहरी सांस ली और अपनी
  2399. 1:47:10बात जारी रखते हुए बोला। शायद प्लेन का
  2400. 1:47:13कोई जरूरी हिस्सा डैमेज हो गया था। इसीलिए
  2401. 1:47:16उसने अपना बैलेंस खो दिया जिससे हत्यारा
  2402. 1:47:18भी कुछ पल के लिए डगमगा गया और मुझे मौका
  2403. 1:47:21मिल गया। मैं समझ गया था कि प्लेन क्रैश
  2404. 1:47:23होने वाला है। इसीलिए मैंने पैराशूट निकाल
  2405. 1:47:25लिया और इससे पहले कि वो हत्यारा फिर से
  2406. 1:47:28मुझ पर गोली चलाता मैं बिना देरी किए
  2407. 1:47:30इमरजेंसी गेट खोलकर बाहर कूद गया। अब इसे
  2408. 1:47:34अच्छा नसीब कहेंगे या बुरा मैं सीधे नदी
  2409. 1:47:37में गिरा और मेरे सामने ही प्लेन जमीन से
  2410. 1:47:39टकरा कर ब्लास्ट हो गया।
  2411. 1:47:42इतना कहकर शौर्य ने एक नजर पुजारी बाबा को
  2412. 1:47:44देखा जो शौर्य की बात को बेहद ध्यान से
  2413. 1:47:46सुन रहे थे। उनके चेहरे पर हैरानी के भाव
  2414. 1:47:49देखे जा सकते थे। तभी शौर्य ने आगे कहा
  2415. 1:47:53मेरे शरीर से बहुत ज्यादा खून बहने के
  2416. 1:47:55कारण मुझ पर बेहोशी छाने लगी थी। मुझे बस
  2417. 1:47:58इतना याद है कि बेहोश होने से पहले दो
  2418. 1:48:00हाथों ने मुझे थाम लिया। और जब मुझे होश
  2419. 1:48:03आया तो मैं एक मछुआरे की झोपड़ी में था।
  2420. 1:48:06शौर्य ने पूरा वाक्य सुना दिया जिसे सुनकर
  2421. 1:48:09विक्रम तो हैरान था ही लेकिन पुजारी बाबा
  2422. 1:48:12को देखकर ऐसा लग रहा था मानो उनके प्राण
  2423. 1:48:14पखेरू उड़ चुके हैं। [संगीत]
  2424. 1:48:18तो मतलब तुम वही शौर्य शौर्य राठौड़ हो
  2425. 1:48:23जिसकी मौत प्लेन दुर्घटना में हुई थी।
  2426. 1:48:26यानी तुम राजा साहब के पोते हो। पुजारी ने
  2427. 1:48:29हैरानी में लगभग हकलाते हुए पूछा। इस पर
  2428. 1:48:32शौर्य कुछ नहीं बोला। बस उसने सहमति में
  2429. 1:48:35अपना सिर हिला दिया। तभी पुजारी बाबा ने
  2430. 1:48:38हमदर्दी और चिंता जाहिर करते हुए कहा हे
  2431. 1:48:41भगवान इतने बड़े घर का वारिस होने के बाद
  2432. 1:48:44भी तुम यहां इस मंदिर में एक भिखारी सी
  2433. 1:48:47जिंदगी जीते रहे। तभी विक्रम के दिमाग में
  2434. 1:48:50कुछ आया और उसने उत्सुकता से पूछा। लेकिन
  2435. 1:48:53बॉस जब आप मछुआरे के यहां थे तो फिर इस
  2436. 1:48:56मंदिर में कैसे आए? इस पर शौर्य ने हल्के
  2437. 1:48:59से मुस्कुराते हुए कहा इसकी भी एक कहानी
  2438. 1:49:01है विक्रम। असल में उस वक्त मेरी स्थिति
  2439. 1:49:04ठीक नहीं थी। लेकिन मुझे पता चला कि कुछ
  2440. 1:49:06लोग मेरे बारे में पूछताछ कर रहे हैं।
  2441. 1:49:08मुझे समझ आ गया कि यह वही लोग होंगे जो
  2442. 1:49:11मुझे मारना चाहते हैं। वो मेरी मौत की खबर
  2443. 1:49:13को कंफर्म करना चाह रहे थे क्योंकि प्लेन
  2444. 1:49:16के साथ जो लाश के टुकड़े मिले थे वो बुरी
  2445. 1:49:18तरह जल चुके थे। इसीलिए पहचान करना
  2446. 1:49:21मुश्किल था और चकि उस प्लेन में मैं ही
  2447. 1:49:24सफर कर रहा था। इसीलिए यह मान लिया गया कि
  2448. 1:49:26मरने वाला व्यक्ति मैं ही था। लेकिन जो
  2449. 1:49:29मुझे मरवाना चाहता था उसके लिए यह जानना
  2450. 1:49:32जरूरी था कि मरने वाला मैं ही हूं या उसका
  2451. 1:49:35आदमी जिसे उसने मुझे मारने के लिए भेजा
  2452. 1:49:37था। इस तरह शौर्य की कहानी के सभी पहलुओं
  2453. 1:49:41को समझने के बाद विक्रम ने एक राहत भरी
  2454. 1:49:43सांस ली और बोला
  2455. 1:49:45जो भी हो बॉस आप बहुत लकी थे जो बच गए।
  2456. 1:49:49लेकिन अब आपका क्या प्लान है? आप दादा जी
  2457. 1:49:51के यहां जाने वाले हैं या नहीं? इस पर
  2458. 1:49:54शौर्य ने दृढ़ स्वर में कहा।
  2459. 1:49:57जब यहां तक आ गया हूं तो दादा जी से तो
  2460. 1:49:59मिलूंगा ही और उस आदमी का पता भी लगा के
  2461. 1:50:02रहूंगा जिसने मुझे मारने की कोशिश की थी।
  2462. 1:50:05तो फिर अभी चलें। विक्रम तो जैसे मिशन पर
  2463. 1:50:08जाने के लिए तैयार होकर ही आया था। लेकिन
  2464. 1:50:11शौर्य ने उसे रोकते हुए कहा अरे नहीं अभी
  2465. 1:50:14नहीं। अभी तो पहले मुझे कुछ और काम
  2466. 1:50:17निपटाने हैं। इतने दिनों में यहां बहुत
  2467. 1:50:20कुछ चेंज हो गया है। क्यों? ऐसा भी क्या
  2468. 1:50:23हो गया बॉस? पूछते हुए विक्रम के चेहरे पर
  2469. 1:50:26जानने की उत्कंठा प्रबल हो गई। तभी शौर्य
  2470. 1:50:30ने विक्रम को शिप्रा और उसकी शादी से
  2471. 1:50:32रिलेटेड सारी कहानी बताना शुरू की। यहां
  2472. 1:50:35दूसरी तरफ राय साहब की हवेली में शिप्रा
  2473. 1:50:37तैयार होकर डाइनिंग टेबल पर आकर बैठी।
  2474. 1:50:40राहुल भी सामने बैठा नाश्ता कर रहा था।
  2475. 1:50:43शिप्रा कई दिनों से ऑफिस नहीं गई थी।
  2476. 1:50:45इसीलिए आज उसे हर हाल में ऑफिस जाना है।
  2477. 1:50:48वो सिर्फ स्टाफ के भरोसे काम नहीं छोड़
  2478. 1:50:50सकती। राजदीप राय को वहां ना पाकर शिप्रा
  2479. 1:50:52ने बीना जी से पूछा
  2480. 1:50:54मां पापा दिखाई नहीं दे रहे हैं। वो ऑफिस
  2481. 1:50:57चले गए क्या? बीना जी ने शांत स्वर में
  2482. 1:50:59कहा। नहीं अभी नहीं वो बाबूजी से मिलने गए
  2483. 1:51:03हैं। पता नहीं क्यों उन्होंने सुबह-सुबह
  2484. 1:51:05बुला लिया। दादा जी ने बुलाया है। शिप्रा
  2485. 1:51:09ने हल्के संशय से पूछा। उसे लगा कि हो ना
  2486. 1:51:11हो जरूर उसी के बारे में कोई बात करनी
  2487. 1:51:13होगी। अभी शिप्रा के दिमाग में यह ख्याल
  2488. 1:51:16आया ही था कि उसी समय राजदीप अंदर आते
  2489. 1:51:19दिखाई दिए। शिप्रा कुछ कहती उससे पहले ही
  2490. 1:51:22राहुल ने पूछ लिया। पापा दादा जी ने आपको
  2491. 1:51:24सुबह-सुबह क्यों बुलाया था? राजदीप अभी भी
  2492. 1:51:27बलवंत राय की कही बातों में उलझे हुए थे।
  2493. 1:51:30वो ख्यालों में इस तरह डूबे हुए थे कि
  2494. 1:51:31उन्होंने राहुल का सवाल सुना ही नहीं। जब
  2495. 1:51:34शिप्रा ने देखा कि वो खोए हुए से हैं तो
  2496. 1:51:36उसने धीरे से पूछा क्या बात है पापा? आप
  2497. 1:51:40किस सोच में डूबे हैं? हां। क्या कहा
  2498. 1:51:43तुमने? कुछ पूछ रही थी। उनकी तंद्रा टूटी
  2499. 1:51:47तो शिप्रा ने दोबारा पूछा। पापा आपको दादा
  2500. 1:51:50जी ने बुलाया था। कोई खास बात है क्या?
  2501. 1:51:52राजदीप सोचने लगे कि शिप्रा को यह बात
  2502. 1:51:54बताना ठीक होगा या नहीं। फिर उन्हें लगा
  2503. 1:51:57कि छिपाने का भी कोई मतलब नहीं है। इसीलिए
  2504. 1:52:00वह बोले दरअसल पिताजी को मुख्तार का फोन
  2505. 1:52:03आया था। वो उनसे मिलना चाहता है।
  2506. 1:52:06मुख्तार दादाजी से मिलना चाहता है। पर
  2507. 1:52:09क्यों? शिप्रा को कुछ समझ नहीं आया। इस पर
  2508. 1:52:12राजदीप ने जवाब दिया। यह तो मिलने के बाद
  2509. 1:52:15ही पता चलेगा।
  2510. 1:52:17तो क्या दादाजी सच में मुख्तार से मिलने
  2511. 1:52:19वाले हैं? शिप्रा ने तपाक से पूछा तो
  2512. 1:52:22राजदीप ने शांत स्वर में कहा
  2513. 1:52:25वैसे एक बार मिलने में कोई बुराई नहीं है।
  2514. 1:52:28कम से कम यह तो पता चलेगा कि वो चाहता
  2515. 1:52:30क्या है। शिप्रा के मन में यही उत्कंठा थी
  2516. 1:52:33कि आखिर मुख्तार जैसा गुंडा दादाजी से
  2517. 1:52:35क्यों मिलना चाहता है? उसने पूछा दादाजी
  2518. 1:52:39मुख्तार से कब मिलने वाले हैं? कल
  2519. 1:52:41मिलेंगे। होटल राजकमल में मिलने का तय हुआ
  2520. 1:52:44है। राजदीप ने बताया।
  2521. 1:52:47हालांकि उनके स्वर में साफ झलक रहा था कि
  2522. 1:52:49वो इस मुलाकात को लेकर पूरी तरह सहज नहीं
  2523. 1:52:51है। शिप्रा के मन में आशंका उठी कहीं
  2524. 1:52:54मुख्तार कोई गलत कदम ना उठा ले। उसने पूछा
  2525. 1:52:58क्या दादाजी अकेले ही जाएंगे? अरे नहीं
  2526. 1:53:01नहीं बड़े भाई साहब भी उनके साथ जाएंगे और
  2527. 1:53:04कुछ बॉडीगार्ड भी रहेंगे। राजदीप ने
  2528. 1:53:06स्पष्ट किया तो शिप्रा ने हल्की राहत की
  2529. 1:53:08सांस ली। अच्छा फिर ठीक है। वैसे तुम कहां
  2530. 1:53:13जाने के लिए तैयार बैठी हो? राजदीप ने उसे
  2531. 1:53:16सजी सवरी देखकर पूछा तो शिप्रा ने संयद
  2532. 1:53:18स्वर में जवाब दिया, ऑफिस जाऊंगी पापा। कई
  2533. 1:53:22दिनों से नहीं गई हूं। बहुत सारे काम
  2534. 1:53:24पेंडिंग पड़े हैं। इस पर राजदीप जी ने
  2535. 1:53:26हल्की नाराजगी के साथ कहा, कुछ दिन और
  2536. 1:53:29नहीं जाओगी तो कोई आफत नहीं आ जाएगी। आफत
  2537. 1:53:32तो नहीं आएगी पापा लेकिन बहुत से काम
  2538. 1:53:34बिगड़ जाएंगे। मेरी कंपनी अभी शुरुआती दौर
  2539. 1:53:37में है। इस समय [संगीत] अगर मैंने ठीक से
  2540. 1:53:39ध्यान नहीं दिया तो जितनी जल्दी उसने नाम
  2541. 1:53:41कमाया है उतनी ही जल्दी नाम खराब भी हो
  2542. 1:53:43सकता है। शिप्रा ने साफ शब्दों में अपनी
  2543. 1:53:46चिंता जाहिर की। तो राजदीप ने भी अपनी
  2544. 1:53:49चिंता जाहिर करते हुए कहा
  2545. 1:53:52तुम समझती क्यों नहीं? कल ही एक बड़ी घटना
  2546. 1:53:54होते-होते बची है। अगर फिर वैसा कुछ हुआ
  2547. 1:53:56तो पापा अगर मैं डर कर घर पर बैठ जाऊं तो
  2548. 1:54:00फिर कंपनी चलाने का क्या मतलब? मैं ऐसा
  2549. 1:54:02नहीं कर सकती। प्लीज किसी के डर से मैं घर
  2550. 1:54:05में नहीं बैठूंगी। चाहे उसके लिए मुझे
  2551. 1:54:07अपनी जान की बाजी ही क्यों ना लगानी पड़े।
  2552. 1:54:10शिप्रा ने दृढ़ स्वर में कहा क्योंकि अब
  2553. 1:54:12वो पीछे हटने वाली नहीं है। जब राजदीप ने
  2554. 1:54:15देखा कि शिप्रा को समझाने का कोई फायदा
  2555. 1:54:17नहीं है तो कुछ सोचकर उन्होंने कहा
  2556. 1:54:21ठीक है, ठीक है। करोगी तो तुम अपने मन की
  2557. 1:54:24ही। लेकिन मेरी बस एक बात मान लो। श्रवण
  2558. 1:54:27को अपने साथ ले जाओ। यह सुनकर शिप्रा ने
  2559. 1:54:30सहमति में सिर हिलाया।
  2560. 1:54:32ठीक है पापा। आपकी तसल्ली के लिए मैं उसे
  2561. 1:54:34अपने साथ ले जाऊंगी। इतना कहकर शिप्रा
  2562. 1:54:37अपनी जगह से उठी और बाहर जाते हुए बोली,
  2563. 1:54:40आपको भी तो ऑफिस जाना चाहिए। बड़े चाचा भी
  2564. 1:54:43आपके काम पर अपनी नजर गड़ाए बैठे हैं।
  2565. 1:54:46मुझे पता है तो मेरी चिंता मत करो। मैं सब
  2566. 1:54:49संभाल लूंगा। मैं भी थोड़ी देर में ऑफिस
  2567. 1:54:51जाने वाला हूं। राजदीप जी ने जवाब दिया।
  2568. 1:54:54शिप्रा वहां से निकल कर सीधे गिरधर के
  2569. 1:54:56क्वार्टर पहुंच गई। वहां गिरधर तो था
  2570. 1:54:59लेकिन श्रवण नहीं था। उसने पूछा श्रवण
  2571. 1:55:02कहां है? दिखाई नहीं दे रहा। वो तो मंदिर
  2572. 1:55:06गया है। पुजारी बाबा से मिलने। गिरधर ने
  2573. 1:55:09बताया मंदिर गया है तो वापस कब तक [संगीत]
  2574. 1:55:13आएगा? कुछ कह कर तो गया होगा। शिप्रा ने
  2575. 1:55:16फिर पूछा। इस पर गिरधर बोला अब तक तो आ
  2576. 1:55:19जाना चाहिए था। कह कर गया था कि जल्दी ही
  2577. 1:55:22लौट आएगा। यहां मंदिर में शौर्य और शिप्रा
  2578. 1:55:25की पूरी कहानी जानने के बाद विक्रम को एक
  2579. 1:55:27और धक्का लगा और वह हैरानी से बोला
  2580. 1:55:31यानी आपकी शादी हो गई है। इस पर शौर्य ने
  2581. 1:55:34सहमति में सिर हिला दिया। विक्रम को आज एक
  2582. 1:55:37के बाद एक इतने सदमे लग रहे थे कि मानो वो
  2583. 1:55:40किसी सपने में हो। लेकिन तभी विक्रम ने
  2584. 1:55:42कुछ सोचकर नाराजगी भरे शब्दों में कहा।
  2585. 1:55:46पर जबरदस्ती की शादी का क्या ही मतलब होगा
  2586. 1:55:48बॉस। वैसे तो कोई मतलब नहीं है पर अगर
  2587. 1:55:51लड़की आपकी पसंद की हो तो कुछ भी किया जा
  2588. 1:55:54सकता है।
  2589. 1:55:56शौर्य ने धीमी आवाज में कहा और उसके चेहरे
  2590. 1:55:59पर एक मध्यम मुस्कान उभर आई। इस पर विक्रम
  2591. 1:56:02लगभग उछल पड़ा और तुरंत बोला यानी जिससे
  2592. 1:56:05आपकी शादी हुई है वो आपको पसंद है।
  2593. 1:56:08पसंद तो है ही पर अगर ना भी होती तो भी
  2594. 1:56:11मैं उसके इस मुश्किल वक्त में उसके साथ
  2595. 1:56:13जरूर खड़ा होता। इतना कहते हुए शौर्य के
  2596. 1:56:17चेहरे पर निश्चय के भाव स्पष्ट रूप से नजर
  2597. 1:56:19आ रहे थे। तभी विक्रम ने उत्साहित होकर
  2598. 1:56:22सलाह दी। जब आपको वो लड़की इतनी पसंद है
  2599. 1:56:25तो फिर इंतजार किस बात का कर रहे हैं बॉस?
  2600. 1:56:27उसको अपने बारे में सब सच-सच बता क्यों
  2601. 1:56:30नहीं देते? विक्रम के हिसाब से अगर लड़की
  2602. 1:56:33को शौर्य की सच्चाई पता चल जाए तो फिर उसे
  2603. 1:56:35मनाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। पर शौर्य
  2604. 1:56:38यही तो नहीं चाहता था। वो चाहता है कि
  2605. 1:56:40शिप्रा उसे बिना यह जाने प्यार करे कि वह
  2606. 1:56:42किसी बड़े खानदान का वारिस है। अभी वह जिस
  2607. 1:56:45रूप में शौर्य को जानती है उसी रूप में
  2608. 1:56:47उसे प्यार करें। तब जाकर शौर्य को तसल्ली
  2609. 1:56:50होती। [संगीत] वहीं शौर्य ने विक्रम के
  2610. 1:56:52सवाल का कोई जवाब नहीं दिया तो वो थोड़े
  2611. 1:56:54व्यंग और निराशा भरी आवाज में बोला। पता
  2612. 1:56:58नहीं आपको इस तरह की चीजों में क्या मजा
  2613. 1:57:00आता है कि आप हमेशा कुछ नया करने की कोशिश
  2614. 1:57:02करते हैं। असल में विक्रम नहीं चाहता था
  2615. 1:57:05कि शौर्य अपने और शिप्रा के रिलेशन को
  2616. 1:57:07ज्यादा लंबा खींचे। लेकिन तभी शौर्य ने
  2617. 1:57:10अपना मुद्दा बदलते हुए स्पष्ट रूप से कहा
  2618. 1:57:13तुम छोड़ो इन बातों को। कुछ और काम है
  2619. 1:57:16जिसे तुम्हें करना है। इस पर विक्रम फिर
  2620. 1:57:19से अपने आज्ञाकारी फॉर्म में आ गया और
  2621. 1:57:21तुरंत बोला हां बॉस बताइए। तभी शौर्य ने
  2622. 1:57:24गंभीर आवाज में निर्देश देते हुए कहा।
  2623. 1:57:28तुम्हें यहां के अंडरवर्ड डॉन मुख्तार के
  2624. 1:57:30बारे में पता लगाना है। वो हाथ धोकर
  2625. 1:57:32शिप्रा के पीछे पड़ा हुआ है। इस पर विक्रम
  2626. 1:57:35एक कमांडो की तरह बोला आप चिंता मत कीजिए
  2627. 1:57:38बॉस। मैं देखता हूं इस मुख्तार को। शौर्य
  2628. 1:57:41यानी श्रवण को वहां ना पाकर शिप्रा थोड़ी
  2629. 1:57:43निराश हुई। वो अकेली भी जा सकती थी। लेकिन
  2630. 1:57:46राजदीप जी की खास हिदायत थी कि वो श्रवण
  2631. 1:57:48के साथ ही जाए। इसीलिए उसने थोड़ी देर
  2632. 1:57:50इंतजार करना ठीक समझा। फिर कुछ सोचकर उसने
  2633. 1:57:53गिरधर से कहा। गिरधर काका आप श्रवण को फोन
  2634. 1:57:57लगाकर पूछ तो सकते हैं कि वो कितनी देर
  2635. 1:57:59में आएगा।
  2636. 1:58:01लेकिन उसके पास फोन कहां है? कहते हुए
  2637. 1:58:04गिरधर की नजर शिप्रा के पीछे पड़ी जहां
  2638. 1:58:07उसे श्रवण आता दिखाई दिया। लो अब फोन करने
  2639. 1:58:10की जरूरत नहीं है। वो आ गया श्रवण। शिप्रा
  2640. 1:58:14पीछे मुड़ी और श्रवण को देखकर बोली कहां
  2641. 1:58:16चले गए थे? आज तो मेरे साथ ऑफिस चल रहे
  2642. 1:58:19हो। हां तो चलिए मैं तैयार हूं। शौर्य ने
  2643. 1:58:22शांत स्वर में कहा। शौर्य शिप्रा के
  2644. 1:58:25पीछे-छे पार्किंग एरिया में पहुंचा। वहां
  2645. 1:58:27कई कारें खड़ी थी। शिप्रा ने शौर्य को कार
  2646. 1:58:30की चाबी देते हुए पूछा, "तुम गाड़ी तो चला
  2647. 1:58:33लेते हो ना? इस पर शौर्य मुस्कुराया और
  2648. 1:58:36बोला, "जी हां, चला लेता हूं।" शौर्य को
  2649. 1:58:39पता नहीं था कि शिप्रा की कार कौन सी है।
  2650. 1:58:41इसीलिए उसने चाबी पर अनलॉक बटन दबाया। और
  2651. 1:58:44दरवाजे के अनलॉक होने की आवाज से उसे समझ
  2652. 1:58:47में आ गया कि कौन सी कार है। शौर्य भी उस
  2653. 1:58:50कार की ओर बढ़ता उससे पहले ही पास में एक
  2654. 1:58:52और कार के अनलॉक होने की आवाज आई। आवाज
  2655. 1:58:54सुनकर वो मुड़ा तो उसने देखा कि शिप्रा के
  2656. 1:58:56बराबर में एक और खूबसूरत लड़की खड़ी है।
  2657. 1:58:59यह शिप्रा की कजिन युविका है। बड़े बाबा
  2658. 1:59:02बृजभूषण राय की बेटी। युविका सुंदर है।
  2659. 1:59:06लेकिन शिप्रा के सामने उसकी खूबसूरती फीकी
  2660. 1:59:08पड़ जाती है। यही कारण है कि वो शिप्रा के
  2661. 1:59:11प्रति ईर्ष्या महसूस करती थी। जब युविका
  2662. 1:59:13ने शौर्य को वहां देखा तो खुद को रोक नहीं
  2663. 1:59:16पाई और उसने शिप्रा से पूछा
  2664. 1:59:19यही है वो भिखारी जिससे तुम्हारी शादी हुई
  2665. 1:59:21है। युविका का सवाल चुभने वाला था लेकिन
  2666. 1:59:24शिप्रा पर उसका कोई असर नहीं हुआ। हां यही
  2667. 1:59:27है। युविका को उम्मीद नहीं थी कि शिप्रा
  2668. 1:59:30इतनी सहजता से जवाब देगी। जब उसने देखा कि
  2669. 1:59:32उसकी बातों का कोई खास असर नहीं हुआ तो
  2670. 1:59:35उसने सामने खड़े शौर्य की ओर देखा। शौर्य
  2671. 1:59:38को भी अपनी ओर देखते हुए पाकर उसने एक पल
  2672. 1:59:40के लिए कुछ सोचा और शौर्य से कहा
  2673. 1:59:43माफ करना मुझे तुम्हारा नाम पता नहीं है
  2674. 1:59:45इसीलिए एकदम से भिखारी बोल दिया। शौर्य
  2675. 1:59:49युविका के तंज को भली-भांति समझा था पर वो
  2676. 1:59:51शांत भाव से बोला नाना इसमें बुरा मानने
  2677. 1:59:54जैसी कोई बात ही नहीं है। आपने तो वही कहा
  2678. 1:59:57जो मैं हूं। यह सुनकर एक बार फिर युविका
  2679. 1:59:59को झटका लगा कि शौर्य ने उसकी बात को
  2680. 2:00:02कितनी सहजता से लिया। ऐसा लगा ही नहीं कि
  2681. 2:00:04उसकी बातों से उसे जरा भी ठेस पहुंची हो।
  2682. 2:00:07शिप्रा को भी हैरानी हुई क्योंकि शौर्य के
  2683. 2:00:09चेहरे पर एक शिकन भी नहीं थी।
  2684. 2:00:12क्या नाम है तुम्हारा? युविका ने
  2685. 2:00:14मुस्कुराते हुए पूछा तो शौर्य ने एक पल
  2686. 2:00:17सोचा फिर जवाब दिया, नाम में क्या रखा है?
  2687. 2:00:20आपको जो अच्छा लगे आप उसी नाम से पुकार
  2688. 2:00:22सकती हैं। युविका को ऐसे जवाब की बिल्कुल
  2689. 2:00:25उम्मीद नहीं थी। शिप्रा को भी शौर्य का एक
  2690. 2:00:28कटाक्ष अच्छा लगा। उसे विश्वास नहीं हो
  2691. 2:00:31रहा था कि यह वही युवक है जो दो दिन पहले
  2692. 2:00:33कितना मजबूर दिखाई दे रहा था। वो मन ही मन
  2693. 2:00:36बोली। सिर्फ कपड़े बदलने से इसके
  2694. 2:00:39व्यक्तित्व में कितना आत्मविश्वास आ गया
  2695. 2:00:41है। वहीं शौर्य का जवाब सुनकर युविका के
  2696. 2:00:44पास कहने को कुछ नहीं बचा। उसे गुस्सा तो
  2697. 2:00:47बहुत आया लेकिन वो यहां कुछ और बोलकर खुद
  2698. 2:00:50को हंसी का पात्र नहीं बनाना चाहती थी। वो
  2699. 2:00:52बस फीकी सी मुस्कान के साथ अपनी कार की ओर
  2700. 2:00:55बढ़ गई। शौर्य भी शिप्रा की कार की तरफ
  2701. 2:00:58बढ़ गया। उसने गाड़ी बैक करके शिप्रा के
  2702. 2:01:00सामने लाकर खड़ी कर दी। तभी तेजी से
  2703. 2:01:02युविका की कार वहां से गुजरी। उसकी रफ्तार
  2704. 2:01:05देखकर शिप्रा समझ गई कि शौर्य की बात उसे
  2705. 2:01:07कितनी ज्यादा चुभ है। शिप्रा जाकर कार में
  2706. 2:01:10बैठ गई और शौर्य ने गाड़ी आगे बढ़ाते हुए
  2707. 2:01:13कहा, "मुझे ऑफिस का पता नहीं है तो आप
  2708. 2:01:16रास्ता बताते रहिएगा।
  2709. 2:01:18ठीक है, अभी तो सीधे चलते रहो।" शिप्रा ने
  2710. 2:01:22जवाब दिया, शिप्रा के निर्देशानुसार शौर्य
  2711. 2:01:25गाड़ी चलाता रहा। अंत में उनकी कार इंदिरा
  2712. 2:01:27नगर की चर्चित बिल्डिंग हिल टॉप हेवन में
  2713. 2:01:29पहुंची। पार्किंग एरिया में एक कार को
  2714. 2:01:32पहचानकर शौर्य बोला,
  2715. 2:01:34अरे यह तो वही कार है जिसमें वो लड़की
  2716. 2:01:36आपके घर से निकली थी। शिप्रा ने गाड़ी से
  2717. 2:01:39निकलते हुए जवाब दिया। उसका नाम युविका
  2718. 2:01:42है। वो मेरे बड़े पापा की बेटी है। लगता
  2719. 2:01:45है वो आपको कुछ खास पसंद नहीं करती। शौर्य
  2720. 2:01:48ने सहजता से वो कहा जो उसने महसूस किया
  2721. 2:01:51था।
  2722. 2:01:52हां, है तो कुछ ऐसा ही पर क्या कर सकते
  2723. 2:01:55हैं? सबका अपना मिजाज होता है। लेकिन
  2724. 2:01:58तुमने उसे अच्छे से हैंडल किया? शिप्रा ने
  2725. 2:02:01शौर्य की तारीफ करते हुए कहा, तो इसी
  2726. 2:02:04बिल्डिंग में आपका ऑफिस है। शौर्य ने एक
  2727. 2:02:06और सवाल किया तो शिप्रा ने उसे विस्तार से
  2728. 2:02:08बताया, हमारी फैमिली का जितना भी बिजनेस
  2729. 2:02:11है सबके ऑफिस इसी बिल्डिंग में है। सभी
  2730. 2:02:14गोदाम और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट अलग-अलग
  2731. 2:02:16जगहों पर हैं। यूं समझ लो कि जो भी
  2732. 2:02:18ऑफिशियल काम होता है, वो यहीं से ऑपरेट
  2733. 2:02:20होता है और मेरा ऑफिस पांचवें फ्लोर पर
  2734. 2:02:23है। लगता है यहां की ज्यादातर बिल्डिंग्स
  2735. 2:02:26कॉर्पोरेट ऑफिस के लिए ही इस्तेमाल होती
  2736. 2:02:27हैं। शौर्य ने आसपास नजर दौड़ाते हुए कहा,
  2737. 2:02:31"अब तक दोनों कार से बाहर आ चुके थे।"
  2738. 2:02:33शिप्रा ने शौर्य की बात पर सहमति जताई और
  2739. 2:02:35फिर बोली, "अच्छा सुनो, मैं तो अपने काम
  2740. 2:02:38में बिजी हो जाऊंगी, तब तक तुम क्या
  2741. 2:02:40करोगे?"
  2742. 2:02:41"मुझे क्या करना है? मैं यहीं कहीं बैठकर
  2743. 2:02:44आपका इंतजार कर लूंगा।" शौर्य ने सहजता से
  2744. 2:02:47जवाब दिया। अच्छा, देखो मुझे काम खत्म
  2745. 2:02:49करते शायद 4:5 बज जाएंगे। तब तक नीचे एक
  2746. 2:02:52कॉमन एरिया है, जहां बाकी ड्राइवर समय
  2747. 2:02:54बिताते हैं। तुम वहां टाइम पास कर सकते
  2748. 2:02:56हो। वहां कैंटीन भी है जहां खानेपीने का
  2749. 2:02:59सामान मिल जाता है। इसके अलावा अगर चाहो
  2750. 2:03:03तो इस बीच तुम कहीं घूम फिर के भी आ सकते
  2751. 2:03:05हो। शिप्रा ने समय बिताने के सारे विकल्प
  2752. 2:03:08बताए तो शौर्य ने हल्की मुस्कान के साथ
  2753. 2:03:10कहा आप मेरी चिंता ना करें। मैं यहीं
  2754. 2:03:12इंतजार कर लूंगा। आप बेफिक्र होकर अपना
  2755. 2:03:15काम कीजिए।
  2756. 2:03:16ठीक है तो मैं ऑफिस जाती हूं। यह कहकर
  2757. 2:03:19शिप्रा आगे बढ़ गई। फिर अचानक उसे कुछ याद
  2758. 2:03:21आया तो वह रुकी और मुड़कर बोली तुम्हारे
  2759. 2:03:25पास पैसे हैं क्या? शौर्य एक [संगीत] पल
  2760. 2:03:27के लिए असमंजस में पड़ गया। उसे समझ नहीं
  2761. 2:03:30आया कि वह क्या जवाब दे। नहीं लेकिन मुझे
  2762. 2:03:33जरूरत भी नहीं है। शिप्रा ने अपने पर्स से
  2763. 2:03:36500 के दो नोट निकालकर शौर्य की ओर बढ़ा
  2764. 2:03:38दिए। इस पर शौर्य बोला अरे इसकी कोई जरूरत
  2765. 2:03:41नहीं है। आप मेरी चिंता मत कीजिए।
  2766. 2:03:44तुम्हारा कुछ खाने पीने का मन करेगा तो
  2767. 2:03:46क्या करोगे? यहां किससे मांगोगे? चलो अब
  2768. 2:03:49रख भी लो। इस बार शौर्य मना नहीं कर पाया।
  2769. 2:03:53उसने चुपचाप नोट ले लिए और शिप्रा वहां से
  2770. 2:03:55चली गई। शौर्य ने इधर-उधर नजर दौड़ाई और
  2771. 2:03:58फिर कैंटीन की ओर बढ़ गया। कुछ देर बाद
  2772. 2:04:01शौर्य कैंटीन में सैंडविच खा रहा था कि
  2773. 2:04:03तभी उसने अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस
  2774. 2:04:05किया। उसने पलट कर देखा तो सामने गिरधर
  2775. 2:04:08काका खड़े थे। अरे काका आप यहां शौर्य
  2776. 2:04:12चौंक कर बोला। तो गिरधर ने कहा, "इतना
  2777. 2:04:14हैरान होने की क्या बात है। मुझे भी बड़े
  2778. 2:04:17साहब को ऑफिस लाना होता है। अरे वाह, यह
  2779. 2:04:20तो बढ़िया हो गया। मैं तो सोच रहा था कि
  2780. 2:04:22यहां अकेले बोर हो जाऊंगा। लेकिन आप आ गए?
  2781. 2:04:25बढ़िया है। शौर्य ने खुशी जताते हुए कहा।
  2782. 2:04:29गिरधर शौर्य के सामने बैठते हुए बोला,
  2783. 2:04:32यहां हम जैसे बहुत से ड्राइवर हैं जो
  2784. 2:04:34तुम्हें बोर नहीं होने देंगे। सबके
  2785. 2:04:36अपने-अपने किस्से होते हैं। सभी गप्पे
  2786. 2:04:38मारकर अच्छे से समय बिताते हैं। चलो तुम
  2787. 2:04:41सैंडविच खा लो। फिर तुम्हें सबसे मिलवाता
  2788. 2:04:44हूं। कहते हुए गिरधर के चेहरे पर बड़ी सी
  2789. 2:04:46मुस्कान थी। शौर्य का ऐसा कोई इरादा नहीं
  2790. 2:04:49था कि वह जाकर सबसे मिले। लेकिन अब गिरधर
  2791. 2:04:51ने इतना जोश दिखाया था तो शौर्य उसे निराश
  2792. 2:04:53नहीं करना चाहता था। कॉमन एरिया [संगीत]
  2793. 2:04:56जहां बहुत से लोग बैठे थे। काम के सिलसिले
  2794. 2:04:59में जो भी लोग इस बिल्डिंग में आते हैं वो
  2795. 2:05:01सब भी यही इंतजार करते हैं। वहां बहुत सी
  2796. 2:05:04कुर्सियां और बेंच लगी हुई थी। जब शौर्य
  2797. 2:05:07गिरधर के साथ उस हॉल में दाखिल हुआ तो
  2798. 2:05:09उसने देखा कि कुछ लोग एक कोने में समूह
  2799. 2:05:11बनाकर बैठे हैं। गिरधर उसे लेकर वहां
  2800. 2:05:14पहुंचा तो शौर्य ने देखा कि वहां बैठे सभी
  2801. 2:05:16लोगों की नजरें एक ही व्यक्ति पर केंद्रित
  2802. 2:05:18थी। गिरिधर ने जब उस आदमी को देखा तो वह
  2803. 2:05:22तेजी से उसके पास गया और बोला अरे
  2804. 2:05:25वाल्मीकि तुम यहां हो बेटी की शादी की
  2805. 2:05:28सारी खरीदारी हो गई क्या? इस पर वाल्मीकि
  2806. 2:05:31के साथ बैठा एक व्यक्ति बोला गिरधर काका
  2807. 2:05:34इनके साथ गड़बड़ हो गई है। लड़के वाले ने
  2808. 2:05:37मोटरसाइकिल की डिमांड की थी और इन्होंने
  2809. 2:05:39एक बाइक देख भी ली थी। लेकिन आज अचानक
  2810. 2:05:42लड़के ने महंगी वाली बाइक की डिमांड कर
  2811. 2:05:44दी। अब दोनों के दाम में जमीन आसमान का
  2812. 2:05:46अंतर है और तुरंत पैसों का इंतजाम नहीं हो
  2813. 2:05:49रहा है। इसीलिए ऑफिस से कुछ एडवांस चाहते
  2814. 2:05:51हैं। लेकिन आज अकाउंटेंट छुट्टी पर है।
  2815. 2:05:54इसीलिए आज पैसे मिलने से रहे। इसी बात पर
  2816. 2:05:57वाल्मीकि चाचा परेशान है कि अब पैसों का
  2817. 2:05:59इंतजाम कहां से करें? अगर अकाउंटेंट
  2818. 2:06:02छुट्टी पर है तो क्या हुआ? हम लोग तो हैं
  2819. 2:06:04ना। ऐसा करो जिसके पास अभी जितने भी पैसे
  2820. 2:06:06हैं वो सब वाल्मीकि को दे देते हैं। बाद
  2821. 2:06:09में हिसाब कर लेंगे। गिरधर के कहने पर
  2822. 2:06:11सबने जो बन पड़ा वो कर दिया। लेकिन सबकी
  2823. 2:06:14मदद के बाद भी केवल ₹35,000 ही इकट्ठे हो
  2824. 2:06:16पाए। शौर्य यह देखकर हैरान था कि कहने को
  2825. 2:06:19तो यह सब गरीब हैं। लेकिन किसी जान पहचान
  2826. 2:06:21वाले को मुसीबत में देखकर जिससे जो बन पड़
  2827. 2:06:24रहा था, मदद करने में कोई हिचक नहीं रहा
  2828. 2:06:27था। और वहीं पैसे वालों की भी एक दुनिया
  2829. 2:06:29होती है। जहां लोग एक दूसरे के पैर खींचने
  2830. 2:06:31में लगे रहते हैं। कैश के नाम पर शौर्य के
  2831. 2:06:34पास वही पैसे थे जो शिप्रा ने उसे दिए थे।
  2832. 2:06:36इसलिए वह चाहकर भी इस समय उनकी कोई मदद
  2833. 2:06:39नहीं कर सकता था। मैं तुम सबका बहुत आभारी
  2834. 2:06:42हूं कि तुमने मेरी मदद करने की कोशिश की।
  2835. 2:06:45लेकिन इस समय मुझे ₹65,000 की जरूरत है
  2836. 2:06:47क्योंकि [संगीत] वो मोटरसाइकिल ₹1,65,000
  2837. 2:06:50की है। 1 लाख तो मैं जमा कर चुका हूं।
  2838. 2:06:53बाकी पैसों के लिए ही ऑफिस आया था। अब समझ
  2839. 2:06:56नहीं आ रहा है कि क्या करूं। अगर मैं वो
  2840. 2:06:58बाइक लेकर नहीं गया, तो लड़के वाले क्या
  2841. 2:06:59सोचेंगे। वाल्मीकि की मजबूरी ने शौर्य के
  2842. 2:07:02दिल को भारी कर दिया था। तभी गिरधर ने
  2843. 2:07:04वाल्मीकि को सांत्वना देते हुए कहा, "ऐसे
  2844. 2:07:07ही हाथ पर हाथ धरे बैठने से कुछ नहीं
  2845. 2:07:09होगा, बाबा।"
  2846. 2:07:10एजेंसी के डीलर के पास चलकर उससे बात करते
  2847. 2:07:13हैं। वो कुछ ना कुछ तो जरूर करेंगे। बाकी
  2848. 2:07:16के पैसे चुकाने के लिए थोड़ा समय तो दे ही
  2849. 2:07:19सकते हैं। और आजकल फाइनेंस की सुविधा भी
  2850. 2:07:21तो मिलती है। हां गिरधर काका सही कह रहे
  2851. 2:07:24हैं। आप जाकर एक बार बात करके देखिए शायद
  2852. 2:07:27वो मान जाए। अन्य लोगों ने भी सुझाव दिया।
  2853. 2:07:30तभी अचानक शौर्य को कुछ ध्यान आया। उसने
  2854. 2:07:33अपनी अंगूठी उतारी और वाल्मीकि को देते
  2855. 2:07:36हुए कहा। काका यह अंगूठी किसी दुकान में
  2856. 2:07:39गिरवी रख दीजिए। इसके अच्छे खासे पैसे मिल
  2857. 2:07:41जाएंगे और आपकी समस्या हल हो जाएगी। शौर्य
  2858. 2:07:45की बात सुनकर सबकी निगाहें उसकी ओर घूम
  2859. 2:07:47गई। वहां कोई भी शौर्य को पहचानता नहीं
  2860. 2:07:49था। सबके चेहरों पर हैरानी के भाव थे कि
  2861. 2:07:52यह कौन है जो वाल्मीकि की मदद करने आगे आ
  2862. 2:07:54गया। सबकी आंखों में आश्चर्य देखकर गिरधर
  2863. 2:07:58बोला। यह श्रवण है। आज इसका पहला दिन है।
  2864. 2:08:01यह शिप्रा मेम साहब की गाड़ी लेकर आया है।
  2865. 2:08:04पर यह तो वाल्मीकि काका को जानता भी नहीं।
  2866. 2:08:06फिर भी मदद कर रहा है। [संगीत] एक व्यक्ति
  2867. 2:08:09ने कहा। इस पर शौर्य बोला मदद चेहरा देखकर
  2868. 2:08:12नहीं जरूरत देखकर की जाती है। मैं समझ
  2869. 2:08:15सकता हूं कि यह अभी किस स्थिति से गुजर
  2870. 2:08:17रहे होंगे। मेरे पास पैसे तो नहीं है पर
  2871. 2:08:19ये अंगूठी है जो इनके काम आ [संगीत] सकती
  2872. 2:08:21है। पर क्या इस अंगूठी से इतने पैसे मिल
  2873. 2:08:24जाएंगे कि इनका काम हो जाए? किसी दूसरे ने
  2874. 2:08:27सवाल उठाया तो जवाब में शौर्य ने हल्की
  2875. 2:08:29मुस्कान के साथ कहा, इस अंगूठी से इतने
  2876. 2:08:32पैसे मिल जाएंगे कि आपको किसी और से मदद
  2877. 2:08:34लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्या सच में
  2878. 2:08:36यह अंगूठी इतनी कीमती है? एक ने सवाल
  2879. 2:08:39किया। तभी दूसरा ड्राइवर आगे आकर बोला,
  2880. 2:08:41"अरे इसमें इतना सोचने की क्या बात है? इस
  2881. 2:08:44बिल्डिंग के बाहर कोने पर ही गोल्ड
  2882. 2:08:45फाइनेंसिंग कंपनी का ऑफिस है। वहां चलकर
  2883. 2:08:48पता कर लेते हैं कि कितने पैसे मिलेंगे।"
  2884. 2:08:50गिरधर शौर्य की ओर देखकर सोच रहा था कि
  2885. 2:08:52क्या सच में यह ओरिजिनल गोल्ड है? उसने भी
  2886. 2:08:55शौर्य के हाथ में अंगूठी देखी थी। लेकिन
  2887. 2:08:58उसकी यही धारणा थी कि यह तांबे की होगी।
  2888. 2:09:00क्योंकि शौर्य की स्थिति देखकर गिरधर यह
  2889. 2:09:02सोच भी नहीं सकता था कि उसके पास असली
  2890. 2:09:04सोने की अंगूठी होगी। वाल्मीकि को भी
  2891. 2:09:07विश्वास नहीं था कि यह अंगूठी इतनी महंगी
  2892. 2:09:09हो सकती है। खैर, इन सबके बीच एक व्यक्ति
  2893. 2:09:12ने अपना विचार रखा। गिरधर काका आप भी
  2894. 2:09:15वाल्मीकि काका के साथ चले जाइए। गिरधर को
  2895. 2:09:18यह बात ठीक लगी। उन्हें लगा कि अगर ज्यादा
  2896. 2:09:20पैसे भी नहीं मिले तो वह स्थिति संभाल
  2897. 2:09:22लेंगे। हां चलो वाल्मीकि मैं चलता हूं
  2898. 2:09:25तुम्हारे साथ। जब शौर्य वाल्मीकि और गिरधर
  2899. 2:09:27को लेकर गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनी के ऑफिस
  2900. 2:09:29गया तो उनको पता चला कि अंगूठी के बदले
  2901. 2:09:31उन्हें ₹1,75,000
  2902. 2:09:34मिल सकते हैं। क्या? ₹1,75,000
  2903. 2:09:37यह तो बहुत ज्यादा है। मुझे तो बस 65,000
  2904. 2:09:40ही चाहिए। वाल्मीकि को संकोच करते देख
  2905. 2:09:43शौर्य खुद आगे बढ़कर बोला, "कासा कीजिए 1
  2906. 2:09:47लाख ले लीजिए। बाकी सबके पैसे वापस कर
  2907. 2:09:49दीजिएगा। आपके पास कुछ बैलेंस भी रह
  2908. 2:09:52जाएगा। हां, यह ठीक रहेगा। गिरधर ने भी
  2909. 2:09:55शौर्य की बात का समर्थन किया। इसके बाद
  2910. 2:09:57गिरधर ने अपनी ही आईडी पर गोल्ड लोन लिया
  2911. 2:10:00और पैसे वाल्मीकि को दे दिए। पैसे लेते
  2912. 2:10:02हुए वाल्मीकि कृतज्ञता से बोला, "मैं
  2913. 2:10:04तुम्हारा एहसान कैसे चुकाऊंगा?" तुमने ऐसे
  2914. 2:10:07समय मेरी मदद की है जब मुझे कहीं से कोई
  2915. 2:10:09रास्ता नजर नहीं आ रहा था। तुम्हारा
  2916. 2:10:12बहुत-बहुत धन्यवाद बेटा। मैं जल्दी ही
  2917. 2:10:14पैसों का इंतजाम करके यह अंगूठी छुड़ाकर
  2918. 2:10:16तुम्हें वापस कर दूंगा। अरे नहीं काका आप
  2919. 2:10:20इसकी चिंता मत कीजिए। पहले आप अपनी बेटी
  2920. 2:10:22की शादी करवाइए। वो ज्यादा जरूरी है।
  2921. 2:10:25शौर्य ने अभी इतना ही कहा था कि तभी गिरधर
  2922. 2:10:27का मोबाइल बज उठा। उन्होंने स्क्रीन पर
  2923. 2:10:30नजर डाली तो देखा कि शिप्रा का कॉल था।
  2924. 2:10:32उसने शौर्य के लिए ही फोन किया था क्योंकि
  2925. 2:10:34शौर्य के पास अपना मोबाइल तो था नहीं।
  2926. 2:10:36शिप्रा को वहां मौजूद एक ड्राइवर से पता
  2927. 2:10:38चल गया था कि शौर्य गिरधर और वाल्मीकि के
  2928. 2:10:40साथ पास की बिल्डिंग में गया है। इसीलिए
  2929. 2:10:43उसने गिरधर को फोन लगा डाला। जब गिरधर और
  2930. 2:10:46शौर्य वापस हिल टॉप हेवन पहुंचे तो नीचे
  2931. 2:10:48वेटिंग एरिया में ही शिप्रा शौर्य का
  2932. 2:10:50इंतजार कर रही थी। शौर्य जल्दी से शिप्रा
  2933. 2:10:52के पास पहुंचा और सफाई देते हुए बोला सॉरी
  2934. 2:10:55मुझे पता नहीं था कि आप इतनी जल्दी फ्री
  2935. 2:10:57हो जाएंगी। कहीं चलना है क्या? हां एक
  2936. 2:11:00क्लाइंट के पास जाना था। उसने हमारा
  2937. 2:11:03प्रोडक्ट अपने स्टोर में रखने से मना कर
  2938. 2:11:04दिया है। इसलिए एक बार खुद जाकर उससे
  2939. 2:11:07मिलना पड़ेगा। शिप्रा ने जवाब दिया। ठीक
  2940. 2:11:10है मैं गाड़ी निकाल कर लाता हूं। इतना
  2941. 2:11:12बोलकर शौर्य पार्किंग की तरफ बढ़ गया।
  2942. 2:11:14शौर्य पार्किंग से गाड़ी निकालकर गेट पर
  2943. 2:11:16पहुंचा तो शिप्रा दरवाजा खोलकर अंदर आई और
  2944. 2:11:19शौर्य ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। कहां जाना
  2945. 2:11:22है? शौर्य ने पूछा तो जवाब में शिप्रा
  2946. 2:11:24बोली चार मीनार की तरफ चलो। लगभग 15 मिनट
  2947. 2:11:28के बाद शौर्य की कार बिगर कलेक्शन की
  2948. 2:11:30पार्किंग में जाकर रुकी। शिप्रा के साथ
  2949. 2:11:32शौर्य भी बाहर आया। शौर्य समझ गया कि
  2950. 2:11:34शिप्रा को बिग कलेक्शन के ऑफिस में ही
  2951. 2:11:36जाना होगा। इसीलिए वो भी उसके पीछे हो
  2952. 2:11:39लिया। पर अचानक शिप्रा की निगाह एक मोबाइल
  2953. 2:11:41स्टोर पर पड़ी और वो स्टोर की तरफ बढ़ गई।
  2954. 2:11:44शौर्य को समझ नहीं आया कि शिप्रा बिग
  2955. 2:11:46कलेक्शन की जगह मोबाइल स्टोर में क्यों जा
  2956. 2:11:48रही थी। पर उसने कुछ कहा नहीं बस उसके
  2957. 2:11:50पीछे चलता रहा। शिप्रा के पीछे वो भी
  2958. 2:11:53स्टोर के अंदर चला गया। [संगीत] स्टोर के
  2959. 2:11:55अंदर पहुंचने के बाद शिप्रा ने शौर्य से
  2960. 2:11:57कहा। तुम अपने लिए एक मोबाइल पसंद कर लो।
  2961. 2:12:00यह सुनकर शौर्य चौंक कर बोला मोबाइल मैं
  2962. 2:12:04क्या करूंगा मोबाइल का। दरअसल शौर्य को
  2963. 2:12:07समझ नहीं आया कि वो क्या जवाब दे। उसे
  2964. 2:12:09उम्मीद नहीं थी कि शिप्रा उसके लिए मोबाइल
  2965. 2:12:11लेने की सोचेगी। मोबाइल का जो काम होता है
  2966. 2:12:14वही करोगे। कांटेक्ट में रहने के लिए कुछ
  2967. 2:12:16तो चाहिए होता है। शिप्रा ऐसे बोल रही थी
  2968. 2:12:19जैसे किसी बच्चे को समझा रही है। वो तो
  2969. 2:12:22ठीक है पर इतने महंगे स्टोर में आने की
  2970. 2:12:24क्या जरूरत थी। मेरा काम तो किसी सस्ते
  2971. 2:12:27मोबाइल से भी चल जाता। शौर्य की बातें
  2972. 2:12:29सुनकर स्टोर में खड़ी सेल्स गर्ल को हंसी
  2973. 2:12:31आ रही थी। वो समझ रही थी कि इस बंदे को
  2974. 2:12:33मोबाइल की ज्यादा समझ नहीं है। शिप्रा ने
  2975. 2:12:36यह नोटिस किया तो उसने कहा तुम रहने दो
  2976. 2:12:39मैं ही देख लेती हूं। इसके बाद शिप्रा ने
  2977. 2:12:41खुद एक मोबाइल पसंद किया और उसका पेमेंट
  2978. 2:12:43किया। वैसे कहने को तो शौर्य शिप्रा को
  2979. 2:12:46मोबाइल लेने के लिए मना कर रहा था पर उसे
  2980. 2:12:48शिप्रा का उसके लिए मोबाइल पसंद करना
  2981. 2:12:50अच्छा लग रहा था। मोबाइल लेने के बाद
  2982. 2:12:53शिप्रा ने उसी दुकान से एक नया सिम भी
  2983. 2:12:55अपने नाम पर लेकर उस मोबाइल में लगाया।
  2984. 2:12:58शिप्रा ने मोबाइल ऑपरेटर से विशेष आग्रह
  2985. 2:13:00करके उसी समय सिम को एक्टिवेट भी कराया।
  2986. 2:13:03इसके बाद उसने उस मोबाइल से अपने नंबर पर
  2987. 2:13:06फोन किया। नंबर डिस्प्ले होने के बाद उसने
  2988. 2:13:08उस नंबर को अपने मोबाइल में सेव किया और
  2989. 2:13:11मोबाइल शौर्य की तरफ बढ़ा दिया। शौर्य ने
  2990. 2:13:14सकुचाते हुए शिप्रा के हाथ से मोबाइल लिया
  2991. 2:13:16और पूछा। क्या आप ऑफिस से इतनी दूर यह
  2992. 2:13:19मोबाइल लेने के लिए ही आई हैं? नहीं, मुझे
  2993. 2:13:21यहां बगैर कलेक्शन के मैनेजर से मिलना है।
  2994. 2:13:23पर तुम्हारे लिए मोबाइल भी लेना था। यह
  2995. 2:13:25दुकान नजर आ गई तो ले लिया। शिप्रा शॉप से
  2996. 2:13:28बाहर आती हुई बोली और तभी शौर्य ने बड़े
  2997. 2:13:31भोलेपन से कहा, पर इतना महंगा मोबाइल लेने
  2998. 2:13:33की क्या जरूरत थी? राहुल ने भी मेरे कपड़े
  2999. 2:13:36खरीदने में अच्छा खासा पैसा खर्च किया है।
  3000. 2:13:39इतना पैसा मैं कैसे चुका पाऊंगा? यह सुनकर
  3001. 2:13:42शिप्रा ने शौर्य के चेहरे की तरफ देखा। अब
  3002. 2:13:44शौर्य की दाढ़ी उसे बुरी नहीं लग रही थी।
  3003. 2:13:47पर उसे लग रहा था कि इसे कम से कम अपनी
  3004. 2:13:49दाढ़ी को सेट करवा लेना चाहिए। उसने सोचा
  3005. 2:13:52[संगीत] इतनी बड़ी दाढ़ी भला कौन रखता है?
  3006. 2:13:54पूरा चेहरा तो इसकी दाढ़ी में ही छुपा हुआ
  3007. 2:13:56है। पर उसने कुछ कहा नहीं। उसे कुछ ध्यान
  3008. 2:13:59आया तो वह बोली मैंने सुना कि तुम
  3009. 2:14:02वाल्मीकि की मदद करने के लिए अपनी अंगूठी
  3010. 2:14:04गिरवी रखने गए थे। शौर्य को उम्मीद नहीं
  3011. 2:14:07थी कि यह बात शिप्रा को पता होगी। पर जब
  3012. 2:14:09शिप्रा ने पूछ लिया तो वो इससे मुकर नहीं
  3013. 2:14:11सकता था। हां, उनकी लड़की की शादी होने
  3014. 2:14:14वाली है। उन्हें अर्जेंट में पैसों की
  3015. 2:14:15जरूरत आ पड़ी है। सबने कुछ ना कुछ मदद की।
  3016. 2:14:18मेरे पास पैसे तो थे नहीं लेकिन एक अंगूठी
  3017. 2:14:21थी। सोचा इसको गिरवी रखकर [संगीत] जो पैसे
  3018. 2:14:23मिलेंगे उससे उनकी कुछ मदद हो जाएगी। तो
  3019. 2:14:26कितने पैसे मिले उस अंगूठी के बदले?
  3020. 2:14:28शिप्रा ने उत्सुकता वश पूछ लिया। मिल तो
  3021. 2:14:31पौने दो लाख रहे थे पर उनका काम 1 लाख से
  3022. 2:14:33ही होने वाला था। इसलिए 1 लाख ही लिया।
  3023. 2:14:36शौर्य ने सिंपली जवाब दिया। क्या कहा? 1
  3024. 2:14:40लाख? शिप्रा को विश्वास नहीं हो रहा था।
  3025. 2:14:42उसने शौर्य से कहा, "तुम यह कह रहे हो कि
  3026. 2:14:45तुम्हारे पास इतनी महंगी अंगूठी थी जिसको
  3027. 2:14:48गिरवी रखकर तुमने ₹1 लाख वाल्मीकि को दे
  3028. 2:14:51दिया।" हां, शौर्य ऐसे बोला, जैसे यह रकम
  3029. 2:14:54उसके लिए मायने ही नहीं रखती। पर तुम्हारे
  3030. 2:14:57पास इतनी महंगी अंगूठी आई कहां से? शिप्रा
  3031. 2:15:00को शौर्य पर शक सा होने लगा। दरअसल वो
  3032. 2:15:03मेरी पुश्तैनी अंगूठी थी। मुझे खुद भी
  3033. 2:15:05नहीं पता था कि वो अंगूठी इतनी महंगी
  3034. 2:15:07होगी। शौर्य सफाई से झूठ बोल रहा था। वो
  3035. 2:15:10शिप्रा को शक करने का कोई कारण नहीं देना
  3036. 2:15:12चाहता था। लेकिन जब तुम्हारे पास इतनी
  3037. 2:15:15महंगी अंगूठी थी तो फिर तुम यूं लाचारी
  3038. 2:15:17भरी जिंदगी क्यों जी रहे थे? शिप्रा के
  3039. 2:15:20प्रश्न खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे
  3040. 2:15:22थे। शौर्य ने सफाई दी। कहा तो मुझे खुद
  3041. 2:15:25अंदाजा नहीं था कि उस अंगूठी के बदले इतने
  3042. 2:15:28पैसे मिल जाएंगे। वो तो मेरे पास कुछ था
  3043. 2:15:30नहीं। ले दे के एक अंगूठी थी। तो मैंने
  3044. 2:15:33यही सोचा कि इससे जो मिल जाएगा उससे उनकी
  3045. 2:15:35जितनी मदद हो सके। तुमने एक बार भी नहीं
  3046. 2:15:38सोचा कि फिर कभी तुम उस अंगूठी को वापस पा
  3047. 2:15:41सकोगे या नहीं। शिप्रा ने यह टोल लेने की
  3048. 2:15:44कोशिश की कि कहीं शौर्य को अब इसका अफसोस
  3049. 2:15:46तो नहीं है। इस पर शौर्य ने पूरी सादगी से
  3050. 2:15:50जवाब दिया। कैसी बात कर रही हो? मुझे तो
  3051. 2:15:53खुशी है कि मैं उनके कुछ काम आ सका।
  3052. 2:15:55अंगूठी का क्या है? यह नहीं तो कल कोई
  3053. 2:15:58दूसरी आ जाएगी। और ना भी आए तो मुझे उसकी
  3054. 2:16:01कोई जरूरत भी नहीं है। देखा जाए तो सही
  3055. 2:16:03मायने में उस अंगूठी का सबसे सही उपयोग
  3056. 2:16:06हुआ।
  3057. 2:16:08शिप्रा के दिमाग में चल रहा था कि आदमी
  3058. 2:16:10जितना गरीब होता है उसका दिल उतना ही बड़ा
  3059. 2:16:12होता है। उसे शौर्य की ईमानदारी बहुत
  3060. 2:16:15अच्छी लगी। शादी वाली रात को भी उसने जो
  3061. 2:16:18जज्बा दिखाया था और मंदिर में भी उसने जिस
  3062. 2:16:20हिम्मत के साथ रजत के गुंडों का सामना
  3063. 2:16:22किया उन एहसानों के सामने आज जो उसने
  3064. 2:16:25शौर्य को मोबाइल खरीद कर दिया उसकी क्या
  3065. 2:16:27ही वैल्यू है।
  3066. 2:16:29अब तक शिप्रा और शौर्य रोड पार करके बिगर
  3067. 2:16:32कलेक्शन के सामने पहुंच चुके थे। शिप्रा
  3068. 2:16:35बिगर कलेक्शन के ऑफिस में पहुंची। [संगीत]
  3069. 2:16:37उसने शौर्य को कोई इंस्ट्रक्शन नहीं दी
  3070. 2:16:39थी। इसीलिए शौर्य भी उसके पीछे-पीछे ऑफिस
  3071. 2:16:42पहुंच गया। बिगर कलेक्शन एक बड़ा आउटलेट
  3072. 2:16:45था जिसका अपना कोई प्रोडक्ट नहीं था। वो
  3073. 2:16:47अलग-अलग ब्रांड के प्रोडक्ट के साथ ही डील
  3074. 2:16:50करता था। पब्लिक [संगीत] के लिए मीडियम
  3075. 2:16:51रेंज के प्रोडक्ट के लिए यह आउटलेट एक
  3076. 2:16:53अच्छी चॉइस थी। अब तक शिप्रा के जिंक
  3077. 2:16:56कलेक्शन के प्रोडक्ट को भी यह आउटलेट अपने
  3078. 2:16:58स्टोर में डिस्प्ले करता था और अचानक
  3079. 2:17:01[संगीत] दो दिन पहले ही उसने शिप्रा के
  3080. 2:17:02साथ हुई डील को कैंसिल कर दिया था और उसके
  3081. 2:17:05प्रोडक्ट को डिस्प्ले करना बंद कर दिया
  3082. 2:17:07था। शिप्रा कुछ दिनों से ऑफिस नहीं आ रही
  3083. 2:17:10थी। इसीलिए उसे खबर नहीं लगी। वो आज यहां
  3084. 2:17:13इसलिए आई है कि वह जानना चाहती थी कि ऐसा
  3085. 2:17:15क्या हुआ कि अचानक ही बिगर कलेक्शन ने
  3086. 2:17:18उसके प्रोडक्ट को डिस्प्ले करना बंद कर
  3087. 2:17:20दिया। यह एक ऐसा स्टोर था जहां से लार्ज
  3088. 2:17:23अमाउंट में उसका प्रोडक्ट सेल होता था। यह
  3089. 2:17:26शिप्रा के लिए किसी झटके से कम नहीं था।
  3090. 2:17:29मैनेजर शुक्ला कहां मिलेंगे? शिप्रा ने एक
  3091. 2:17:32ऑफिस बॉय से पूछा तो वो बोला शुक्ला जी को
  3092. 2:17:35रौनित सर ने कहीं भेजा है। शिप्रा को
  3093. 2:17:38आश्चर्य हुआ कि बगैर कलेक्शन के मालिक
  3094. 2:17:40आउटलेट में ही है। क्या मिस्टर रनित जनेजा
  3095. 2:17:43ऑफिस में है? ऑफिस बॉय ने हां में जवाब
  3096. 2:17:46दिया। अभी शिप्रा उनके ऑफिस में जाकर
  3097. 2:17:48मिलने के बारे में सोच ही रही थी कि तभी
  3098. 2:17:50रौनित जनेजा बलराज खन्ना के साथ अपने ऑफिस
  3099. 2:17:53से निकलता दिखाई दिया। बलराज खन्ना को
  3100. 2:17:56देखकर शिप्रा की आंखें बड़ी हो गई। दरअसल
  3101. 2:17:59बलराज खन्ना वो व्यक्ति है जो शिप्रा का
  3102. 2:18:02सीधा कंपिटिटर है। अब तक रौनित जनेजा की
  3103. 2:18:04नजर भी शिप्रा पर पड़ गई थी। रौनित जनेजा
  3104. 2:18:08शिप्रा के पास आया और बोला अरे मिस शिप्रा
  3105. 2:18:11आप यहां इनसे मिलिए। इनको तो आप जानती ही
  3106. 2:18:14होंगी। बलराज खन्ना
  3107. 2:18:17ये आप क्या कह रहे हैं मिस्टर रौनित? ये
  3108. 2:18:19अब मिस शिप्रा नहीं मिज शिप्रा हो गई हैं।
  3109. 2:18:22आजकल पूरे शहर में इन्हीं के तो चर्चे
  3110. 2:18:24हैं। बलराज खन्ना ने मुस्कुराते हुए कहा।
  3111. 2:18:27इस पर शिप्रा नाखुशी से बोली लगता है आजकल
  3112. 2:18:31आप ज्यादा ही फ्री हैं मिस्टर खन्ना।
  3113. 2:18:33इसीलिए लोगों की कुछ ज्यादा ही खबर रखने
  3114. 2:18:35लगे हैं। अरे नहीं नहीं हम कहां ऐसा कर
  3115. 2:18:39पाते हैं? वो तो आपसे कुछ ज्यादा ही प्यार
  3116. 2:18:41है। इसीलिए आपकी खबर रखनी पड़ती है। सच
  3117. 2:18:44कहूं तो मुझे आपसे बहुत ही हमदर्दी है।
  3118. 2:18:46बहुत गलत हुआ आपके साथ। बलराज खन्ना झूठी
  3119. 2:18:49हमदर्दी जताते हुए बोला तो शिप्रा ने
  3120. 2:18:52बलराज खन्ना पर सीधा तंज कसा। मेरी छोड़कर
  3121. 2:18:55अगर आप अपनी चिंता करें तो ज्यादा अच्छा
  3122. 2:18:57होगा। वैसे भी मुझे बेकार लोगों के मुंह
  3123. 2:19:00लगने का कोई शौक नहीं है। शिप्रा की बात
  3124. 2:19:03सुनकर बलराज का चेहरा लाल हो गया। वो
  3125. 2:19:06गुस्से में बोला
  3126. 2:19:08रस्सी जल गई पर बल नहीं गया। लगता है कि
  3127. 2:19:10वो भिखारी तुम्हें कुछ ज्यादा ही रास आ
  3128. 2:19:12गया है जिससे तुम्हारी शादी हुई है। मानना
  3129. 2:19:15पड़ेगा पूरे कुत्ते की तुम ही हो। कितना
  3130. 2:19:19भी नाली में रह लो पर टेढ़े के टेढ़े ही
  3131. 2:19:21रहोगे। शिप्रा भी जवाब देने में पीछे नहीं
  3132. 2:19:24रही। बलराज खन्ना गुस्से में शिप्रा की
  3133. 2:19:26तरफ बढ़ा। तुम्हारी इतनी हिम्मत वो शिप्रा
  3134. 2:19:30के और करीब जा पाता। उससे पहले शौर्य
  3135. 2:19:32शिप्रा और बलराज खन्ना के बीच आ गया। अगले
  3136. 2:19:34ही पल शौर्य तीखी नजर से बलराज खन्ना को
  3137. 2:19:37घूरते हुए बोला आगे आने की सोचना भी मत
  3138. 2:19:40नहीं तो अपने पैरों पर चलकर वापस नहीं जा
  3139. 2:19:43पाओगे।
  3140. 2:19:44बलराज खन्ना को उम्मीद नहीं थी कि शिप्रा
  3141. 2:19:47के साथ कोई और भी होगा। वो शौर्य को देखकर
  3142. 2:19:49अपनी जगह पर ही थम गया। घनी दाढ़ी के बीच
  3143. 2:19:52घूरती हुई शौर्य की दो आंखें उसे डराने के
  3144. 2:19:55लिए काफी थी। शिप्रा भी उम्मीद नहीं कर
  3145. 2:19:58रही थी कि शौर्य उसके बीच आकर उसकी ढाल बन
  3146. 2:20:00जाएगा। और वहीं बलराज खन्ना से भी शिप्राई
  3147. 2:20:04उम्मीद नहीं कर रही थी कि वो यूं उस पर
  3148. 2:20:05चढ़ाएगा। उसे शौर्य को अपने साथ लाने का
  3149. 2:20:08फैसला अब सही लग रहा था क्योंकि अब वो
  3150. 2:20:11सुरक्षित महसूस करने लगी थी। मिस शिप्रा
  3151. 2:20:15मेरे स्टोर में हरकत आपको शोभा नहीं देती।
  3152. 2:20:17रौनित जनेजा कमान अपने हाथ में लेते हुए
  3153. 2:20:19बोला और बलराज खन्ना जो करने की कोशिश कर
  3154. 2:20:22रहा था वो सही था। शिप्रा भी रौनित जनेजा
  3155. 2:20:25को जवाब देते हुए बोली।
  3156. 2:20:28ऐसा क्या कर दिया बलराज खन्ना ने?
  3157. 2:20:30उन्होंने ऐसा कुछ गलत तो नहीं बोला जो आप
  3158. 2:20:32कुत्ते की पूंछ से उनकी तुलना करने लगी।
  3159. 2:20:35रौनित जनेजा बेशर्मी से बोला। इस पर
  3160. 2:20:38शिप्रा रौनित जनेजा पर इल्जाम लगाते हुए
  3161. 2:20:41बोली कमाल है जवाब नहीं आपका भी। तो आप भी
  3162. 2:20:45उसी थाली के चट्टे-बट्टे हैं। अब मैं समझी
  3163. 2:20:48बलराज खन्ना के कारण ही आपने हमारे
  3164. 2:20:50प्रोडक्ट को अपने आउटलेट में जगह देने से
  3165. 2:20:52मना कर दिया। शिप्रा की इस बात पर रौनित
  3166. 2:20:55जनेजा शिप्रा को ऊपर से नीचे तक घूरता हुआ
  3167. 2:20:58बोला।
  3168. 2:21:00जब इतना समझ आ ही गया है तो फिर यहां समय
  3169. 2:21:02बर्बाद करने क्यों आ गई? जाओ अब किसी
  3170. 2:21:05फुटपाथ वाले शॉप पर अपने प्रोडक्ट को
  3171. 2:21:07डिस्प्ले करो। वैसे अब एक भिखारी वो क्या
  3172. 2:21:11ही खुश कर पाएगा तुम्हें। कभी मेरे लिए
  3173. 2:21:13समय निकालना। क्या पता कब मैं तुम्हारे
  3174. 2:21:16प्रोडक्ट को अपने आउटलेट में जगह दे दूं।
  3175. 2:21:18यह शब्द शिप्रा की बर्दाश्त का चरम था।
  3176. 2:21:21उसने एक कदम आगे बढ़ाया और एक जोर का
  3177. 2:21:23थप्पड़ रौनने जुनेजा के गाल पर जड़ दिया।
  3178. 2:21:25रौनित जनेजा हैरानी से शिप्रा को देखने
  3179. 2:21:28लगा। वो विश्वास नहीं कर पा रहा था कि
  3180. 2:21:30शिप्रा ने उसे भरे आउटलेट में थप्पड़ रसीद
  3181. 2:21:33कर दिया था। शिप्रा के थप्पड़ की आवाज के
  3182. 2:21:36साथ सबकी निगाहें रौनित जनेजा की तरफ घूम
  3183. 2:21:38गई थी। रौनित जनेजा का हाथ अपने गाल पर
  3184. 2:21:41था। वो कभी शिप्रा को तो कभी आउटलेट में
  3185. 2:21:44मौजूद लोगों को देख रहा था। शायद ऐसी
  3186. 2:21:46बेइज्जती उसने आज तक कभी नहीं झेली थी। वो
  3187. 2:21:49शिप्रा को घूरते हुए बोला शिप्रा राय
  3188. 2:21:53तुमने आज अपने जीवन की सबसे बड़ी [संगीत]
  3189. 2:21:55भूल की है। मैं खुद अब यह अशोर करूंगा कि
  3190. 2:21:58तुम अपने प्रोडक्ट को इस शहर में कैसे बेच
  3191. 2:22:00पाती हो। अगर मैंने तुम्हें रोड पर ना ला
  3192. 2:22:03दिया तो मेरा नाम रौनित जनेजा नहीं। चलो
  3193. 2:22:07निकल जाओ मेरे आउटलेट से। शिप्रा ने रौनित
  3194. 2:22:10जनेजा को थप्पड़ तो जड़ दिया था। पर अब
  3195. 2:22:12उसे खुद महसूस हो रहा था कि उसने गुस्से
  3196. 2:22:14में कुछ ज्यादा ही बड़ा पंगा ले लिया है।
  3197. 2:22:17लेकिन कहते हैं ना कि कमान से निकला तीर
  3198. 2:22:19और मुंह से निकली वाणी वापस नहीं आ सकती।
  3199. 2:22:22उसी तरह शिप्रा ने जो रौनित जनेजा को
  3200. 2:22:24थप्पड़ जड़ा था वो भी अब वापस नहीं हो
  3201. 2:22:27सकता था। इस थप्पड़ की गूंज जाने कब तक
  3202. 2:22:29रौनित जनेजा को सताती रहेगी। बलराज खन्ना
  3203. 2:22:32इस इंसिडेंट से मन ही मन बहुत खुश था। उसे
  3204. 2:22:35लग रहा था कि बिना कुछ किए ही उसने
  3205. 2:22:37मार्केट से अपने सबसे बड़े कंपिटिट को
  3206. 2:22:40बाहर कर दिया है। बिगर कलेक्शन विशालगढ़
  3207. 2:22:43का सबसे बड़ा आउटलेट चेन था। इसका इतना
  3208. 2:22:45प्रभाव था कि छोटे-मोटे आउटलेट को अगर वो
  3209. 2:22:48कह दे कि वे अपने स्टोर में जिंक कलेक्शन
  3210. 2:22:50को जगह ना दें तो कोई उसे मना नहीं करेगा।
  3211. 2:22:53बलराज खन्ना रौनने जनेजा की नजर में उसका
  3212. 2:22:56सबसे बड़ा हितषी बनने का मौका चूकना नहीं
  3213. 2:22:59चाहता था। उसने शिप्रा की तरफ देखते हुए
  3214. 2:23:02गुस्से में कहा। शिप्रा राय आज के दिन को
  3215. 2:23:06तुम कभी भूल नहीं पाओगी। तुमने मिस्टर
  3216. 2:23:08रौनित जनेजा को नहीं अपनी किस्मत को
  3217. 2:23:10थप्पड़ मारा है। अब मैं देखता [संगीत] हूं
  3218. 2:23:13तुम्हें मेरे कहर से कौन बचाता है। शिप्रा
  3219. 2:23:16को समझ नहीं आया कि वो अब क्या करे। वो
  3220. 2:23:18क्या करने आई थी और क्या हो गया। पर उसे
  3221. 2:23:21अपने किए पर कोई अफसोस नहीं था। वो
  3222. 2:23:23जाते-जाते बोली भले ही मुझे अपने प्रोडक्ट
  3223. 2:23:27को फुटपाथ पर ही क्यों ना बेचना पड़े पर
  3224. 2:23:29मैं खुद नहीं चाहूंगी कि मैं अपने
  3225. 2:23:30प्रोडक्ट को कभी तुम जैसे घटिया आदमी के
  3226. 2:23:33आउटलेट में डिस्प्ले करूं। इतना कहने के
  3227. 2:23:35बाद शिप्रा उस आउटलेट से बाहर आ गई। वो
  3228. 2:23:38जानती थी कि वो चुप नहीं बैठेगा। वो जरूर
  3229. 2:23:40उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।
  3230. 2:23:43[संगीत] शौर्य जाकर गाड़ी ले आया तो
  3231. 2:23:45शिप्रा कार में बैठ गई। शिप्रा ने जो आज
  3232. 2:23:48किया था उससे शौर्य के दिल में शिप्रा के
  3233. 2:23:50लिए रिस्पेक्ट और बढ़ गई थी। उसे पता था
  3234. 2:23:53कि उसके इस कदम से उसे फाइनेंशियली नुकसान
  3235. 2:23:56होने वाला है। फिर भी वह रौनित जनेजा को
  3236. 2:23:58थप्पड़ मारने में हिचकी नहीं। शौर्य ने
  3237. 2:24:01कार को भीड़ से बाहर लाकर शिप्रा से पूछा।
  3238. 2:24:05अब कहां चलना है? कार में बैठते ही शिपरा
  3239. 2:24:08सीट से अपना सिर टिका कर आंखें बंद करके
  3240. 2:24:10बैठ गई थी। उसने उसी अवस्था में कहा,
  3241. 2:24:14घर ही ले चलो। शौर्य ने गाड़ी घर की तरफ
  3242. 2:24:17मोड़ दी। उसने बैक मिरर में [संगीत]
  3243. 2:24:19शिप्रा को देखा तो उसकी नजर उसके चेहरे पर
  3244. 2:24:21ही जम गई। कितना सुकून था उसके चेहरे में।
  3245. 2:24:24ऐसी सादगी कि किसी को अपनी ओर आकर्षित कर
  3246. 2:24:27ले। इतने सुकून से शौर्य ने कभी शिप्रा की
  3247. 2:24:30तरफ नहीं देखा था। अब भी वह इसीलिए बिना
  3248. 2:24:32झिझके देख रहा था क्योंकि शिप्रा ने अपनी
  3249. 2:24:35आंखें बंद की हुई थी। शौर्य समझ रहा था कि
  3250. 2:24:38भले ही शिप्रा के चेहरे पर शांति नजर आ
  3251. 2:24:40रही थी पर [संगीत] उसके अंदर बहुत
  3252. 2:24:42उथल-पुथल हो रही होगी और उसी पल शौर्य ने
  3253. 2:24:45सोच लिया कि वो उसकी मदद करेगा। उसने
  3254. 2:24:49शिप्रा का दिल टटोलने के इरादे से पूछा।
  3255. 2:24:51आज जो घटना हुई आपने सोचा उसके बाद आप
  3256. 2:24:54क्या करेंगी?
  3257. 2:24:56[संगीत] पता नहीं अभी तो मुझे कुछ समझ
  3258. 2:24:58नहीं आ रहा। शिप्रा की आंखें अभी भी बंद
  3259. 2:25:01थी।
  3260. 2:25:03आपने कभी बिग बुल के साथ काम करने की
  3261. 2:25:06कोशिश नहीं की? [संगीत] शौर्य ने बात को
  3262. 2:25:08एक नई दिशा देने की कोशिश की। बिग बुल का
  3263. 2:25:11नाम सुनकर शिप्रा अपनी आंखें खोलते हुए
  3264. 2:25:13आश्चर्य से बोली,
  3265. 2:25:16तुम्हें पता भी है कि बिगbul कितने बड़े
  3266. 2:25:18ब्रांड के साथ काम करती है। शिप्रा ने फिर
  3267. 2:25:21कुछ मिनट रुक कर कहा, "अभी कुछ महीने पहले
  3268. 2:25:24ही तो इस स्टोर की ओपनिंग भारत में हुई है
  3269. 2:25:26और यह सिर्फ टॉप के ब्रांड के साथ ही काम
  3270. 2:25:28करती है। फिर भी कोशिश करने में क्या जाता
  3271. 2:25:31है? शौर्य ने जोर देकर अपनी बात कही। इस
  3272. 2:25:34पर शिप्रा ने निराशा भरे स्वर में कहा,
  3273. 2:25:37तुम्हें क्या लगता है कि मैंने कोशिश नहीं
  3274. 2:25:38की? बिग बुल के साथ अपने प्रोडक्ट को
  3275. 2:25:41लिस्ट करना बड़ी बात है। मैंने कोशिश की
  3276. 2:25:44थी पर बात नहीं बनी।
  3277. 2:25:46दरअसल मेरा एक जानने वाला वहां काम करता
  3278. 2:25:49है। अगर आप कहें तो मैं एक बार उससे बात
  3279. 2:25:51करके उस कंपनी के किसी सीनियर से आपकी
  3280. 2:25:54मीटिंग कराऊं क्या? शौर्य ने बैक मिरर में
  3281. 2:25:56शिप्रा को देखते हुए पूछा।
  3282. 2:25:59तुम्हें लगता है कि किसी सेल्समैन की बात
  3283. 2:26:01सुनकर कोई एग्जीक्यूटिव रैंक का पर्सन
  3284. 2:26:03मुझसे मीटिंग करेगा? अरे मैंने तो यह भी
  3285. 2:26:05सुना है कि बिग बुल का ओनर यूनाइटेड
  3286. 2:26:08किंगडम में रहता है। यही नहीं वो वहां के
  3287. 2:26:10राज परिवार से भी संबंध रखता है। शिप्रा
  3288. 2:26:14ने सोचा कि शौर्य का जानने वाला अगर वहां
  3289. 2:26:16काम करता होगा तो कोई सेल्समैन ही होगा।
  3290. 2:26:18कोई मैनेजर किसी सेल्समैन की बात को कितनी
  3291. 2:26:21तरजीह देगा। शौर्य को समझ नहीं आया कि अब
  3292. 2:26:24वो शिप्रा को कैसे मोटिवेट करें। कुछ
  3293. 2:26:26सोचकर उसने कहा कोशिश करने में क्या हर्ज
  3294. 2:26:29है? मेरा मतलब है अगर आप कहें तो मैं
  3295. 2:26:31ट्राई करके देख सकता हूं। ज्यादा से
  3296. 2:26:33ज्यादा क्या होगा? ना सुनने को मिलेगी।
  3297. 2:26:37इसमें नुकसान ही क्या है? कम से कम यह पता
  3298. 2:26:39चल जाएगा कि मेरा दोस्त कुछ कर पाने के
  3299. 2:26:41लायक है भी या नहीं। तुमने मेरे बारे में
  3300. 2:26:44इतना सोचा यह काफी है मेरे लिए। इसके बाद
  3301. 2:26:47भी अगर तुम कोशिश करना चाहते हो तो मैं
  3302. 2:26:49तुम्हें रोकूंगी नहीं। और मैं तुम्हें यह
  3303. 2:26:52भी बता दूं कि अगर तुम इसमें सफल नहीं भी
  3304. 2:26:54हो पाते हो तो भी इसमें कोई बुरा लगने
  3305. 2:26:56वाली बात नहीं होगी।
  3306. 2:26:58शिप्रा ने इसलिए कहा कि कल को शौर्य का
  3307. 2:27:01दोस्त बिग बुल के साथ कोई मीटिंग अरेंज
  3308. 2:27:03नहीं भी कर पाता है तो उसको लेकर शौर्य को
  3309. 2:27:05बुरा फील ना हो। ठीक है मैं ध्यान रखूंगा।
  3310. 2:27:08बोलते हुए शौर्य को कुछ अजीब सा एहसास
  3311. 2:27:11हुआ। वो गौर से अपनी गाड़ी के साइड मिरर
  3312. 2:27:13को देखने लगा। अचानक एक मोड़ पर उसने कार
  3313. 2:27:16को एक अलग रास्ते पर मोड़ लिया। उसने देखा
  3314. 2:27:18कि एक लाल रंग की वैन भी उसके साथ ही उस
  3315. 2:27:21रास्ते पर मुड़ गई। अब शौर्य को पक्का
  3316. 2:27:23यकीन हो गया कि एक गाड़ी उसी का पीछा कर
  3317. 2:27:26रही है। शौर्य अब चौकन्ना हो गया था। शिप
  3318. 2:27:30ने जब देखा कि शौर्य ने गाड़ी गलत रास्ते
  3319. 2:27:32पर ले ली है तो उसने कहा तुम ये कहां चल
  3320. 2:27:36दिए? यह किस रास्ते पर गाड़ी ले आए? कोई
  3321. 2:27:39हमारा पीछा कर रहा है। शौर्य अपनी पीछे
  3322. 2:27:42वाली गाड़ी पर नजर गड़ाए हुए ही बोला।
  3323. 2:27:46भला कौन हमारा पीछा करेगा? शिप्रा पीछे
  3324. 2:27:49देखते हुए बोली। हमारे पीछे जो लाल रंग की
  3325. 2:27:52वैन देख रही हैं आप वही हमारा पीछा कर रही
  3326. 2:27:54है। शौर्य ने जवाब दिया इस पर शिप्रा ने
  3327. 2:27:57अपना शक जाहिर किया। कहीं ये रौनित जनेजा
  3328. 2:28:00का काम तो नहीं है? वो अपनी बेइज्जती का
  3329. 2:28:03बदला लेना चाहता हो? नहीं यह उसका काम
  3330. 2:28:07नहीं हो सकता। शौर्य इंकार में गर्दन
  3331. 2:28:09हिलाता हुआ बोला। तुम इतने यकीन से कैसे
  3332. 2:28:12कह सकते हो? शिप्रा की आवाज में थोड़ी
  3333. 2:28:15घबराहट थी। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि
  3334. 2:28:18हमारे चारमीनार पहुंचने से पहले से यह कार
  3335. 2:28:20हमारा पीछा कर रही है। हिल टॉप से निकलने
  3336. 2:28:23के कुछ देर बाद से ही मैं इस कार को देख
  3337. 2:28:25रहा था। पर उस समय मुझे शक नहीं हुआ था।
  3338. 2:28:28लेकिन एक बार फिर से चार मीनार से निकलने
  3339. 2:28:30के बाद जब दोबारा इस कार को अपने पीछे
  3340. 2:28:32देखा तो मुझे शक हुआ। इसीलिए मैंने गलत
  3341. 2:28:35रास्ते पर अपनी गाड़ी ले ली। फिर भी उसने
  3342. 2:28:37हमारा पीछा नहीं छोड़ा।
  3343. 2:28:39शौर्य ने शिप्रा को यकीन दिलाया। यह सुनकर
  3344. 2:28:42शिप्रा के चेहरे पर चिंता की लकीर खींच
  3345. 2:28:44गई। वो परेशान होकर बोली अब हम क्या
  3346. 2:28:47करेंगे? आप चिंता मत कीजिए मैं देखता हूं
  3347. 2:28:51इसे। मैं भी तो देखूं चाहता क्या है यह।
  3348. 2:28:54इतना कहकर शौर्य ने अपनी गाड़ी की स्पीड
  3349. 2:28:56भी बढ़ा दी। जैसे ही शौर्य की गाड़ी की
  3350. 2:28:58स्पीड बढ़ी वैन की स्पीड भी बढ़ गई। वो
  3351. 2:29:01शिप्रा की कार का पीछा छोड़ने का नाम ही
  3352. 2:29:03नहीं ले रहा था। आगे सड़क थोड़ी पतली हो
  3353. 2:29:06गई थी जिसके एक तरफ डिवाइडर और दूसरी तरफ
  3354. 2:29:09खाई थी। शौर्य ने शिप्रा से कहा, आप अपने
  3355. 2:29:12पैर आगे जमाकर पीछे की तरफ पुश करके
  3356. 2:29:14रहिएगा। शिप्रा ने वैसे ही किया। शौर्य
  3357. 2:29:18गाड़ी की स्पीड बढ़ाता गया। पीछे वाली कार
  3358. 2:29:20उसी रफ्तार से आगे बढ़ती रही। जब दोनों
  3359. 2:29:23गाड़ियों का डिस्टेंस कम रह गया तो शौर्य
  3360. 2:29:25ने अचानक अपनी गाड़ी का ब्रेक लगा दिया।
  3361. 2:29:28अचानक सामने वाली गाड़ी का ब्रेक लगते देख
  3362. 2:29:30वैन का ड्राइवर अपनी गाड़ी पर नियंत्रण
  3363. 2:29:32नहीं रख पाया। टक्कर से बचने के लिए उसने
  3364. 2:29:35अपनी वैन [संगीत] को बाएं मोड़ दिया और वो
  3365. 2:29:37सीधा गड्ढे में जा गिरी। शौर्य ने देखा कि
  3366. 2:29:40वैन बुरी तरह पिचक चुकी थी। उसने शिप्रा
  3367. 2:29:42को गाड़ी में ही रुकने का इशारा किया और
  3368. 2:29:44खुद बाहर आ गया। वैन में तीन लोग थे। आगे
  3369. 2:29:48ड्राइवर और दो पीछे। पलटने से दरवाजा जाम
  3370. 2:29:51हो गया था। ड्राइवर बेहोश था। जबकि पीछे
  3371. 2:29:54वाले दोनों होश में थे लेकिन घायल। उनमें
  3372. 2:29:57से एक बदमाश अपना हाथ पकड़ कर चिल्ला रहा
  3373. 2:29:59था। शौर्य ने देखा उसका हाथ बुरी तरह जला
  3374. 2:30:02हुआ था। चमड़ी तक पिघली हुई। पहले समझ
  3375. 2:30:05नहीं आया क्योंकि आग तो लगी नहीं थी।
  3376. 2:30:07लेकिन फिर ध्यान से देखने पर साफ हुआ कि
  3377. 2:30:10यह तेजाब का असर था। शायद उसके हाथ में
  3378. 2:30:12तेजाब का जार था जो पलटते ही उस पर गिर
  3379. 2:30:15गया। दूसरा बदमाश जो पहले बदमाश से कम
  3380. 2:30:18घायल था वो शौर्य से उसे वैन से बाहर
  3381. 2:30:21निकालने की विनती करने लगा। कौन हो तुम?
  3382. 2:30:24और यह बताओ कि तुम हमारा पीछा क्यों कर
  3383. 2:30:26रहे थे? शौर्य ने सीधा सवाल किया। मैं
  3384. 2:30:29तुम्हारे सभी सवालों का जवाब दूंगा। पर
  3385. 2:30:31पहले हमें इस गाड़ी से निकालो।
  3386. 2:30:35दूसरा बदमाश दरवाजे को खोलने की कोशिश
  3387. 2:30:37करते हुए बोला, "मुझे लगता है तुम्हें
  3388. 2:30:40मेरी मदद नहीं चाहिए। तो फिर ऐसे ही पड़े
  3389. 2:30:43रहो। इतना बोलकर शौर्य पलटने ही वाला था
  3390. 2:30:46कि पहला बदमाश बोला, रुको रुको। मैं बताता
  3391. 2:30:50हूं रुको। हमें रजत ने भेजा था। रजत ने।
  3392. 2:30:54शौर्य तुरंत सारा मामला समझ गया। इसका
  3393. 2:30:57मतलब तुम लोग शिप्रा के ऊपर तेजाब डालने
  3394. 2:31:00वाले थे। यह सुनकर पहले बदमाश ने अपनी नजर
  3395. 2:31:03फेर ली। शौर्य उसको नफरत भरी नजर से देखता
  3396. 2:31:05हुआ बोला
  3397. 2:31:07तुम शिप्रा के ऊपर तेहजाब डालने वाले थे
  3398. 2:31:09और तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें यहां से
  3399. 2:31:11बाहर निकालूं। तुम इसी लायक हो कि तुम
  3400. 2:31:14यहां फंसे रहो। प्लीज हमें ऐसे छोड़ कर मत
  3401. 2:31:18जाओ। वैसे भी सुनसान इलाका है। जल्दी किसी
  3402. 2:31:21की नजर भी नहीं पड़ेगी। मैं तो इसके चक्कर
  3403. 2:31:23में यहां फंस गया। दूसरा बदमाश
  3404. 2:31:26गिड़गिड़ाते हुए बोला। उसकी उम्र भी
  3405. 2:31:28ज्यादा नहीं लग रही थी। शौर्य ने फिर एक
  3406. 2:31:31पल सोचा और बोला,
  3407. 2:31:33मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकता। बस
  3408. 2:31:36कॉल करके एंबुलेंस को खबर कर देता हूं।
  3409. 2:31:39इसके बाद शौर्य ने पुलिस का नंबर डायल
  3410. 2:31:41किया और यहां हुआ एक्सीडेंट की खबर कर दी।
  3411. 2:31:43उसे पता था कि जब पुलिस इन बदमाशों से
  3412. 2:31:45तेजाब से हाथ जलने के बारे में पूछेगी तो
  3413. 2:31:48इनके लिए जवाब देना भारी पड़ने वाला है।
  3414. 2:31:50शौर्य उन बदमाशों को ऐसे ही छोड़कर शिप्रा
  3415. 2:31:53के पास पहुंच गया। उसने अपनी सीट संभाली
  3416. 2:31:56और गाड़ी को वापस मोड़ लिया। [संगीत]
  3417. 2:31:58कुछ पता चला? कौन है ये लोग? शिप्रा ने
  3418. 2:32:01शौर्य की तरफ झुककर पूछा।
  3419. 2:32:04इन्हें रजत ने भेजा था।
  3420. 2:32:08शौर्य ने जवाब दिया,
  3421. 2:32:11मुझे पहले ही समझ जाना चाहिए था कि यह उसी
  3422. 2:32:13का काम हो सकता है। बोलते हुए शिप्रा के
  3423. 2:32:16माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई। आप टेंशन
  3424. 2:32:19मत लीजिए। उन्हें उनके किए की सजा हाथों
  3425. 2:32:22हाथ मिल गई है। शौर्य ने शिप्रा को दिलासा
  3426. 2:32:24दिया। इस पर शिप्रा ने पूछा क्या हुआ उनके
  3427. 2:32:28साथ? वो बुरी तरह घायल हो चुके हैं। मैंने
  3428. 2:32:31पुलिस को फोन कर दिया है। बाकी खातिरदारी
  3429. 2:32:33पुलिस कर देगी।
  3430. 2:32:35शौर्य ने जानबूझकर तेजाब वाली बात शिप्रा
  3431. 2:32:38को नहीं बताई क्योंकि यह सुनकर वो पैनिकिक
  3432. 2:32:40कर सकती थी। थोड़ी ही देर [संगीत] में
  3433. 2:32:43शौर्य शिप्रा को लेकर उसके घर पहुंच गया।
  3434. 2:32:46शिप्रा कार से उतर कर अपने घर चली गई और
  3435. 2:32:48शौर्य अपने क्वार्टर में पहुंच गया। उसने
  3436. 2:32:51फोन निकाला और विक्रम को कॉल किया। लंबी
  3437. 2:32:54रिंग जाने के बाद विक्रम ने फोन उठाया और
  3438. 2:32:56विक्रम की आवाज आई। हेलो कौन बोल रहा है?
  3439. 2:33:01इस पर शौर्य गंभीर आवाज में बोला मैं बोल
  3440. 2:33:05रहा हूं शौर्य।
  3441. 2:33:07बॉस अच्छा हुआ। आपने फोन कर लिया। मेरे
  3442. 2:33:09पास आपसे कनेक्ट करने का कोई साधन नहीं
  3443. 2:33:11था।
  3444. 2:33:12विक्रम की आवाज में राहत झलक रही थी। उसकी
  3445. 2:33:14बातों से लगा कि वह खुद शौर्य से कांटेक्ट
  3446. 2:33:17करना चाहता था। पर उसके पास कोई नंबर नहीं
  3447. 2:33:19होने के कारण वो हेल्पलेस था। शौर्य
  3448. 2:33:22विक्रम की लाचारी को बिना कहे समझ गया और
  3449. 2:33:24हल्की मुस्कान के साथ बोला इस नंबर को सेव
  3450. 2:33:27कर लो। अब यह फोन मेरे पास ही रहेगा।
  3451. 2:33:29फाइनली आपने मोबाइल ले ही लिया।
  3452. 2:33:32विक्रम चैन की सांस लेते हुए बोला
  3453. 2:33:35अच्छा बताइए मेरे लिए क्या आदेश है?
  3454. 2:33:37शौर्य की आंखें हल्की सुकुड़ी। वो सीधे
  3455. 2:33:39मुद्दे पर आते हुए बोला। यह बताओ अभी
  3456. 2:33:42इंडिया में बिग बबल का इंचार्ज कौन है?
  3457. 2:33:45मोहित रैना क्यों बॉस? कोई प्रॉब्लम?
  3458. 2:33:48विक्रम चौकन्ना हो गया। लेकिन शौर्य ने
  3459. 2:33:50शांत स्वर में कहा नहीं कोई प्रॉब्लम नहीं
  3460. 2:33:54है बस शिप्रा से उसकी एक मीटिंग करानी
  3461. 2:33:55[संगीत] है एक पल की चुप्पी के बाद विक्रम
  3462. 2:33:58तुरंत बोला
  3463. 2:33:59ठीक है आप बताइए कब करनी है मीटिंग वो खुद
  3464. 2:34:02जाकर शिप्रा मेरा मतलब है भाभी से मिल
  3465. 2:34:04लेगा
  3466. 2:34:05कहते हुए विक्रम को समझ ही नहीं आ रहा था
  3467. 2:34:07कि वो शिप्रा को क्या कह कर पुकारे अरे
  3468. 2:34:10नहीं ऐसा कुछ नहीं करना है इस तरह से नहीं
  3469. 2:34:13मिलाना है शौर्य ने तुरंत उसकी बात काट दी
  3470. 2:34:16उसकी आवाज धीमी थी लेकिन उसमें आदेश आदेश
  3471. 2:34:19स्पष्ट था। फिर वो कुछ सोच कर बोला, एक
  3472. 2:34:23काम करो पहले मुझसे मोहित की मीटिंग कराओ।
  3473. 2:34:26मैं उसे समझा दूंगा। विक्रम समझ गया कि
  3474. 2:34:29कोई साधारण मीटिंग नहीं होने वाली। फिर भी
  3475. 2:34:31वो तपाक से बोला,
  3476. 2:34:32कोई टेंशन नहीं है बॉस। आप जगह बताइए। मैं
  3477. 2:34:35उसे अभी लेकर हाजिर हो जाता हूं।
  3478. 2:34:37तुम मुझे बताओ वो कहां मिलेगा? मैं खुद
  3479. 2:34:40वहां चला जाऊंगा। शौर्य ने जल्दी से कहा।
  3480. 2:34:42उसे लगा अगर उसने और टाइम लगाया तो कहीं
  3481. 2:34:45विक्रम खुद ही वहां प्रकट ना हो जाए।
  3482. 2:34:48ठीक है। ऐसा कीजिए बॉस। अगर आप खुद ही आना
  3483. 2:34:50चाहते हैं तो बिग बुल के चार मीनार वाले
  3484. 2:34:52स्टोर पर आ जाइए। मोहित राज जहां भी होगा
  3485. 2:34:55उसको मैं वहीं बुला लूंगा और मैं खुद भी आ
  3486. 2:34:57जाता हूं। विक्रम किसी कमांडो की तरह जोश
  3487. 2:35:01में बोला। इस पर शौर्य ने मोबाइल में टाइम
  3488. 2:35:04देखते हुए कहा। ठीक है मैं आधे घंटे में
  3489. 2:35:06चार मीनार पहुंचता हूं। तुम मोहित रैना को
  3490. 2:35:09लेकर वहीं पहुंचो।
  3491. 2:35:10ठीक है बॉस जो हुकुम।
  3492. 2:35:12शौर्य ने फोन काटा और राय साहब की हवेली
  3493. 2:35:14से पैदल निकल गया। कुछ दूर जाकर उसने
  3494. 2:35:17टैक्सी पकड़ी और आधे घंटे में वो चार
  3495. 2:35:19मीनार मार्केट में बिगbul के स्टोर के
  3496. 2:35:21बाहर था। अंदर जाकर उसने पूरे स्टोर का
  3497. 2:35:24जायजा लिया। जहां सभी इंटरनेशनल ब्रांड्स
  3498. 2:35:27उपलब्ध थे। बिगbul शौर्य का ही कांसेप्ट
  3499. 2:35:29था जिसे उसने खुद अपने दम पर एस्टैब्लिश
  3500. 2:35:32किया था। यूके में तो यह ब्रांड पहले से
  3501. 2:35:35ही बेहद पॉपुलर था। करीब 10 महीने पहले
  3502. 2:35:37शौर्य ने इसे भारत में ल्च किया था।
  3503. 2:35:40शुरुआती सफलता के बाद अब इसका विस्तार कई
  3504. 2:35:42शहरों में किया जा रहा था। खैर शौर्य
  3505. 2:35:45स्टोर के अंदर गया जो चमकती रोशनी से
  3506. 2:35:47झिलमिला रहा था। कस्टमर्स अपने पसंदीदा
  3507. 2:35:50इंटरनेशनल ब्रांड्स को खरीद रहे थे। लेकिन
  3508. 2:35:52शौर्य की नजर किसी और चीज को स्कैन कर रही
  3509. 2:35:55थी। वहां का सिस्टम वेल ट्रेंड एंप्लाइज
  3510. 2:35:58और उनका व्यवहार। घूमते हुए शौर्य ज्वेलरी
  3511. 2:36:01सेक्शन में पहुंचा तो उसकी नजर शोकेस में
  3512. 2:36:03रखी एंटीक रिंग्स पर गई। उन्हें देखकर
  3513. 2:36:07शौर्य की आंखों में हल्की चमक आ गई। उसे
  3514. 2:36:10अंगूठियों का बहुत शौक था। लेकिन वाल्मीकि
  3515. 2:36:13के लिए उसने अपनी अंगूठी गिरवी रख दी थी।
  3516. 2:36:15वो शोकेस में रखी एंटीिक अंगूठियों को
  3517. 2:36:17देखने लगा। शौर्य को शोकेस के पास देखकर
  3518. 2:36:21एक सेल्स गर्ल की मीठी आवाज आई। सर कैन आई
  3519. 2:36:24हेल्प यू? अगर आप कुछ सर्च कर रहे हैं तो
  3520. 2:36:26मैं आपकी मदद कर सकती हूं। शौर्य ने
  3521. 2:36:29अंगूठियों से नजर हटाए बिना ही जवाब दिया।
  3522. 2:36:32अभी मैं बस देख रहा हूं। कुछ पसंद आया तो
  3523. 2:36:34मैं जरूर आपकी मदद लूंगा। पास खड़ी दूसरी
  3524. 2:36:37सेल्स गर्ल श्वेता धीरे से हंसते हुए
  3525. 2:36:39बोली। क्या प्रिया इसका हुलिया तो देख
  3526. 2:36:42क्यों टाइम वेस्ट कर रही है? ऐसे लोग बस
  3527. 2:36:45देखने ही आते हैं। शौर्य ने सब सुन लिया
  3528. 2:36:48था। लेकिन वो तुरंत कुछ नहीं बोला। कुछ पल
  3529. 2:36:51के लिए वो उन एंटीक रिंग्स को निहारता
  3530. 2:36:53रहा। फिर धीरे से मुड़ा और सीधे श्वेता के
  3531. 2:36:55सामने जाकर खड़ा हो गया और उसकी आंखों में
  3532. 2:36:58देखता रहा। उसकी नजर ऐसी थी कि एक सेकंड
  3533. 2:37:00में ही श्वेता असहज हो गई। शौर्य ने शांत
  3534. 2:37:03स्वर में कहा। एक सवाल पूछूं? श्वेता
  3535. 2:37:06हड़बड़ा गई। कि क्या मतलब? शौर्य ने उसकी
  3536. 2:37:10आंखों में झांकते हुए कहा, दिन भर में
  3537. 2:37:12कितने लोगों को अटेंड करती हो तुम? श्वेता
  3538. 2:37:15की तो सिट्टी पिट्टी गुल हो चुकी थी। उसकी
  3539. 2:37:18हलक से आवाज ही नहीं निकल रही थी। यह
  3540. 2:37:20देखकर उसकी फ्रेंड प्रिया बीच में बोल
  3541. 2:37:22पड़ी। सॉरी सर वो एक्चुअली मैंने आपसे
  3542. 2:37:25नहीं पूछा। शौर्य ने उसकी तरफ देखे बिना
  3543. 2:37:28ही कहा। उसका पूरा ध्यान श्वेता पर ही था।
  3544. 2:37:32तुमसे कुछ पूछ रहा हूं मैं। जवाब दो।
  3545. 2:37:35शौर्य की आवाज धीमी थी मगर दबाव साफ था।
  3546. 2:37:38श्वेता को उम्मीद नहीं थी कि शौर्य उसके
  3547. 2:37:40पास आकर अचानक क्यों क्वेश्चन करेगा? वो
  3548. 2:37:43हड़बड़ा कर बोली क्या मतलब हुआ इस सवाल
  3549. 2:37:46का? मैंने सिंपल सा सवाल किया है कि आप
  3550. 2:37:49दिन भर में कितने लोगों को यहां अटेंड
  3551. 2:37:51करती हो? शौर्य ने फिर से वही सवाल
  3552. 2:37:53दोहराया। प्रिया को लगा कि श्वेता की बात
  3553. 2:37:56शौर्य को बुरी लग गई है। इसीलिए वो उससे
  3554. 2:37:58सवाल कर रहा है। वो बात को ना बढ़ाते हुए
  3555. 2:38:01बोली सॉरी सर अगर आपको मेरी फ्रेंड की बात
  3556. 2:38:04बुरी लगी हो तो वी आर रियली सॉरी। इसका
  3557. 2:38:07मकसद आपको हर्ट करना नहीं था। डोंट बी
  3558. 2:38:11सॉरी। मैं इनकी बात का बुरा नहीं मान रहा
  3559. 2:38:13हूं। मैंने इनसे एक सिंपल सा सवाल किया
  3560. 2:38:15है। मैं बस उसका जवाब चाहता हूं। शौर्य
  3561. 2:38:18सहज भाव से बोला। श्वेता को लगा कि प्रिया
  3562. 2:38:21के सॉरी बोलने के बाद इस आदमी को बात खत्म
  3563. 2:38:23कर देनी चाहिए। लेकिन फिर भी वह सवाल किए
  3564. 2:38:26जा रहा है। श्वेता इरिटेट होकर शौर्य से
  3565. 2:38:28बोली दिखने में तो तुम फटीचर ही लग रहे
  3566. 2:38:31हो। पता नहीं तुम्हारे अंदर किस बात का
  3567. 2:38:33घमंड है जो मुझसे सवाल कर रहे हो। श्वेता
  3568. 2:38:37कैसी बात कर रही हो तुम? कुछ बोलने से
  3569. 2:38:39पहले [संगीत] सोच तो लिया करो। प्रिया ने
  3570. 2:38:42श्वेता को झड़कते हुए कहा। पर शौर्य
  3571. 2:38:44प्रिया को नजरअंदाज करता हुआ श्वेता से
  3572. 2:38:46बोला। तुम सही कह रही हो। मैं फटीचर ही
  3573. 2:38:49हूं। पर फिर भी मेरा सवाल वही है कि तुम
  3574. 2:38:52एक दिन में कितने कस्टमर को अटेंड करती
  3575. 2:38:54हो? अब तक श्वेता बुरी तरह चिढ़ चुकी थी।
  3576. 2:38:57उसने दांत पीसकर कहा 25-30 कस्टमर तो अब
  3577. 2:39:01क्या करोगे इस इंफॉर्मेशन का? और उनमें से
  3578. 2:39:05कितने लोग प्रोडक्ट खरीदते हैं? शौर्य ने
  3579. 2:39:08मुस्कुराते हुए पूछा तो श्वेता ने
  3580. 2:39:10झुंझुलाकर जवाब दिया सात या आठ? यह सुनकर
  3581. 2:39:14शौर्य हल्का सा मुस्कुराया और बोला
  3582. 2:39:17इंटरेस्टिंग मतलब तुम चेहरा देखकर पहचान
  3583. 2:39:20लेती हो कि कौन खरीदेगा और कौन नहीं।
  3584. 2:39:23श्वेता कुछ बोल पाती उससे पहले ही शौर्य
  3585. 2:39:26आगे बोल पड़ा। अच्छा फिर भी 30 में से 22
  3586. 2:39:30लोग बिना खरीदे चले जाते हैं। अब उसकी
  3587. 2:39:33आवाज में हल्की धार आ गई थी। तो इसका मतलब
  3588. 2:39:36यह हुआ कि तुम्हारी पहचान गलत है या फिर
  3589. 2:39:38शायद तुम्हारी सेलिंग स्किल्स।
  3590. 2:39:41स्टोर में एकदम सन्नाटा छा चुका था।
  3591. 2:39:44प्रिया भी चुप [संगीत] थी और आसपास खड़े
  3592. 2:39:46लोग अब ध्यान से शौर्य को सुन रहे थे।
  3593. 2:39:48सबके सामने इस तरह एंबरेस होकर श्वेता का
  3594. 2:39:51चेहरा लाल हो गया। देखो मिस्टर बहुत हो
  3595. 2:39:55गया।
  3596. 2:39:57रिलैक्स।
  3597. 2:39:59शौर्य ने हाथ उठाकर उसे बीच में ही रोक
  3598. 2:40:01दिया। मैं बस तुम्हें और तुम्हारी
  3599. 2:40:04कैपेबिलिटीज को समझना चाह रहा था। कहते
  3600. 2:40:07हुए उसकी आंखों में अब हल्की सख्ती थी।
  3601. 2:40:09कस्टमर कभी टाइम पास नहीं होता। या तो वह
  3602. 2:40:12बाय करता है या तुम उसे कन्विंस नहीं कर
  3603. 2:40:15पाती। शौर्य अपनी बात को क्लेरिफाई करते
  3604. 2:40:17हुए बोला, अब जाकर सबको समझ आया कि शौर्य
  3605. 2:40:20क्या कहना चाहता है। प्रिया भी शौर्य की
  3606. 2:40:23बात का मतलब समझ कर मुस्कुरा दी। पर
  3607. 2:40:25श्वेता बुरी तरह चिढ़ चुकी थी और वो झल्ला
  3608. 2:40:28कर बोली। ए मिस्टर बहुत हो गया। ओके। कुछ
  3609. 2:40:31लेना है तो लो नहीं तो निकलो यहां से। और
  3610. 2:40:33यह भाषण बाजी का इतना ही शौक है तो
  3611. 2:40:36इलेक्शन में खड़े हो जाओ। समझे?
  3612. 2:40:38श्वेता ने इतना कहा ही था कि तभी शौर्य का
  3613. 2:40:40फोन बज उठा। यह विक्रम का फोन था। शौर्य
  3614. 2:40:44ने फोन उठाया। दूसरी तरफ से विक्रम की
  3615. 2:40:46आवाज आई।
  3616. 2:40:48क्या हुआ बॉस? आप आए नहीं अभी तक?
  3617. 2:40:51मैं यहीं पर हूं स्टोर में ज्वेलरी
  3618. 2:40:54डिपार्टमेंट में। शौर्य का जवाब सुनकर
  3619. 2:40:57विक्रांत तपाक से बोला।
  3620. 2:40:58अरे बॉस, आपको बताना चाहिए था ना। मैं तो
  3621. 2:41:01कब से बाहर ही आपका इंतजार कर रहा था। ठीक
  3622. 2:41:03है मैं अभी आपके पास पहुंचता हूं।
  3623. 2:41:07श्वेता ने सिर्फ शौर्य की बात सुनी। दूसरी
  3624. 2:41:09तरफ की बात तो उसे सुनाई नहीं दी। पर
  3625. 2:41:11शौर्य की बात सुनकर उसने यह निष्कर्ष
  3626. 2:41:13निकाला कि यह स्टोर शौर्य के लिए एक
  3627. 2:41:16मीटिंग पॉइंट से ज्यादा कुछ नहीं है। सुना
  3628. 2:41:19तुम सबने? इसने तो इस स्टोर को भी मिलने
  3629. 2:41:21की जगह बना रखा है। श्वेता की कड़वाहट कम
  3630. 2:41:25होने का नाम ही नहीं ले रही थी। अब तक कई
  3631. 2:41:27सेल्समैन वहां पर इकट्ठा हो चुके थे। तभी
  3632. 2:41:30एक सेल्समैन आगे आकर बोला,
  3633. 2:41:33"क्यों भाई? क्यों हमारा टाइम खराब कर रहे
  3634. 2:41:36हो? कुछ लेना है तो लो नहीं तो निकलो यहां
  3635. 2:41:38से। सेल्समैन के रवैया को देखकर शौर्य
  3636. 2:41:41उसकी तरफ मुड़कर बोला, "अरे यह क्या बात
  3637. 2:41:44हुई? तुम लोग ऐसे ट्रीट करते हो अपने
  3638. 2:41:46कस्टमर को?" ओ भाई, अब क्या तुमसे सीखना
  3639. 2:41:49पड़ेगा कि कस्टमर से कैसे ट्रीट किया जाता
  3640. 2:41:51है?" वो सेल्समैन शायद श्वेता पर अपना
  3641. 2:41:53इंप्रेशन जमाने के चक्कर में कुछ ज्यादा
  3642. 2:41:55ही बोल रहा था। शौर्य खुद को कंट्रोल में
  3643. 2:41:58रखकर बोला, "यार, तुम नाराज क्यों होते
  3644. 2:42:01हो?" मैंने तो बहुत नाम सुना था बिग बुल
  3645. 2:42:04का। इसकी कस्टमर सर्विस की भी बहुत तारीफ
  3646. 2:42:06सुनी थी। पर तुमने तो मेरा सारा भ्रम ही
  3647. 2:42:08तोड़ दिया। आज शौर्य शायद पहली बार भारत
  3648. 2:42:11के किसी आउटलेट में आया था और ऐसी कस्टमर
  3649. 2:42:14सर्विस उसने एक्सपेक्ट नहीं की थी। शौर्य
  3650. 2:42:17की बात सुनकर सेल्समैन के चेहरे पर हल्की
  3651. 2:42:19असहजता झलक उठी। वो कुछ कहना चाहता था पर
  3652. 2:42:22परिस्थिति को भांपते हुए उसने चुप रहना ही
  3653. 2:42:25बेहतर समझा। लेकिन श्वेता चुप रहने वालों
  3654. 2:42:28में से नहीं थी। उसने भोएं चढ़ाते हुए
  3655. 2:42:30सीधे सवाल दाग दिया। तुम यह बोलकर क्या
  3656. 2:42:33जताना चाहते हो कि हम अपना काम ठीक से
  3657. 2:42:35नहीं कर रहे? शौर्य ने हल्की मुस्कान के
  3658. 2:42:38साथ उसकी तरफ देखा जैसे उसे इसी सवाल का
  3659. 2:42:41इंतजार हो। यह तो तुम ही बताओ क्या ऐसे ही
  3660. 2:42:44जॉब की जाती है? ऐसे एटीट्यूड के साथ वो
  3661. 2:42:47आराम से बोला। पर [संगीत] उसके लहजे में
  3662. 2:42:49चुभन साफ थी। श्वेता तिलमिला गई। उसने हाथ
  3663. 2:42:53बांध लिए और तंज कसते हुए कहा। बातें तो
  3664. 2:42:56तुम ऐसे कर रहे हो जैसे यह पूरा आउटलेट ही
  3665. 2:42:58खरीदने वाले हो। इस बार शौर्य के चेहरे पर
  3666. 2:43:02मुस्कान थोड़ी और गहरी हो गई। तो तुम्हारा
  3667. 2:43:05मतलब यह हुआ कि अगर मैं इस आउटलेट को
  3668. 2:43:07खरीदने की सोचता तो तुम मुझे अच्छे से
  3669. 2:43:09ट्रीट करती। उसने हल्के मजाके अंदाज में
  3670. 2:43:12पूछा जैसे कोई खेल चल रहा हो और वो हर चाल
  3671. 2:43:15सोच समझ कर चल रहा हो। श्वेता ने मुंह
  3672. 2:43:18बनाते हुए कंधे उचकाए। क्या पता शायद ऐसा
  3673. 2:43:21ही होता। तभी माहौल अचानक बदल गया। एक
  3674. 2:43:25सेल्समैन हड़बड़ाते हुए वहां पहुंचा और
  3675. 2:43:27सबको आगाह करते हुए बोला, "अरे, सब
  3676. 2:43:30अपनी-अपनी जगह चले जाओ। मोहित सर इसी तरफ
  3677. 2:43:33आ रहे हैं।" ऐसा लगा जैसे किसी ने अलार्म
  3678. 2:43:36बजा दिया हो। जो जहां खड़ा था वहीं से
  3679. 2:43:38फुर्र हो गया। कुछ सेकंड पहले तक जो भीड़
  3680. 2:43:42थी, वो अब गायब होकर प्रोफेशनल एक्टिंग
  3681. 2:43:44में बदल चुकी थी। रिया तुरंत शौर्य की तरफ
  3682. 2:43:47मुड़ी। उसके चेहरे पर झिझक और प्रोफेशनल
  3683. 2:43:50स्माइल का अजीब सा कॉम्बिनेशन था। आई एम
  3684. 2:43:53सॉरी सर। मैं श्वेता की तरफ से आपसे फिर
  3685. 2:43:55से माफी मांगती हूं। इसे आपसे इस तरह बात
  3686. 2:43:58नहीं करनी चाहिए थी। लेकिन श्वेता को यह
  3687. 2:44:00डैमेज कंट्रोल बिल्कुल पसंद नहीं आया। वो
  3688. 2:44:03तुरंत भड़क उठी। तुम मेरे लिए सॉरी क्यों
  3689. 2:44:05बोल रही हो? बोलना है तो खुद के लिए बोलो।
  3690. 2:44:08मैंने कुछ गलत नहीं किया। ऐसे लोग बस टाइम
  3691. 2:44:11पास करने के लिए शॉप में आ जाते हैं। और
  3692. 2:44:13मैं तो अभी मोहित सर के पास जाकर इसकी भी
  3693. 2:44:16शिकायत करने वाली हूं।
  3694. 2:44:18अच्छा क्या शिकायत करोगी मेरी? मैंने ऐसा
  3695. 2:44:21क्या कर दिया? शौर्य ने हल्के-फुल्के
  3696. 2:44:24अंदाज में पूछा। अब वो मजा लेने के मूड
  3697. 2:44:26में था। श्वेता ने बिना रुके जवाब दिया।
  3698. 2:44:29तुम जैसे लोग जो इतने बड़े स्टोर में
  3699. 2:44:31सिर्फ तफरी करने आते हैं, शायद हम जैसी
  3700. 2:44:34लड़कियों को घूरने के लिए ही आते हो। क्या
  3701. 2:44:36मैं गलत कह रही हूं? उसके चेहरे पर पूरा
  3702. 2:44:39कॉन्फिडेंस था। उसे लगता था कि वो लड़कों
  3703. 2:44:42की नियत अच्छे से समझती है। श्वेता बस भी
  3704. 2:44:45करो अब। तुम कुछ ज्यादा ही बोल रही हो।
  3705. 2:44:47प्रिया ने झुंझलाते हुए कहा। लेकिन अब बात
  3706. 2:44:50हाथ से निकल चुकी थी। इसी बीच पीछे से एक
  3707. 2:44:52भारी सदी हुई आवाज गूंजी। यहां क्या हो
  3708. 2:44:56रहा है?
  3709. 2:44:57तीनों एक साथ उस दिशा में मुड़े। मोहित सर
  3710. 2:45:00आ चुके थे और उनकी नजर सीधे शौर्य पर टिक
  3711. 2:45:03गई थी। अगले ही पल उनके चेहरे के भाव
  3712. 2:45:05अचानक बदल गए। सर मोहित ने ऐसे कहा जैसे
  3713. 2:45:09खुद से ही सवाल कर रहा हो। प्रिया और
  3714. 2:45:12श्वेता के साथ ही स्टोर का स्टाफ और
  3715. 2:45:14कस्टमर जो इस नोकझोंक को सुन रहे थे सभी
  3716. 2:45:17हक्के बक्के रह गए। जब मोहित और विक्रम
  3717. 2:45:20प्रिया और श्वेता के पास पहुंचे तो श्वेता
  3718. 2:45:22आगे बढ़कर मोहित रैना को ग्रीट करती हुई
  3719. 2:45:24बोली, नमस्कार सर। मोहित ने एक नजर श्वेता
  3720. 2:45:28के साथ खड़े शौर्य पर भी डाली। फिर तुरंत
  3721. 2:45:30ही इधर-उधर देखने लगा। मोहित रैना की यह
  3722. 2:45:33हरकत देखकर श्वेता पूछ बैठी। आप किसी को
  3723. 2:45:37ढूंढ रहे हैं क्या सर? पर मोहित ने श्वेता
  3724. 2:45:39की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। वो विक्रम
  3725. 2:45:42की ओर देखने लगा। जैसे वह जानना चाहता हो
  3726. 2:45:44कि शौर्य कहां है? वहीं विक्रम शौर्य की
  3727. 2:45:47तरफ ही देख रहा था। विक्रम को शौर्य की
  3728. 2:45:50तरफ देखते हुए पाकर मोहित रहना समझ गया कि
  3729. 2:45:52यही शौर्य राठौड़ है। उसे शौर्य का हुलिया
  3730. 2:45:55देखकर थोड़ा अजीब तो लगा पर उसने इस पर
  3731. 2:45:58ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उसने सोचा बड़े
  3732. 2:46:01लोग बड़ी बातें यह कैसे भी रह सकते हैं।
  3733. 2:46:04श्वेता मोहित रैना से शौर्य की शिकायत
  3734. 2:46:06करने के लिए कुछ बोलने का सोच ही रही थी
  3735. 2:46:08कि तभी उसने मोहित को शौर्य से कहते सुना।
  3736. 2:46:12आपसे मिलने की बड़ी इच्छा थी सर। फाइनली
  3737. 2:46:15आज आपसे मुलाकात हो ही गई। श्वेता हैरानी
  3738. 2:46:17से मोहित रैना को देख रही थी और सोच रही
  3739. 2:46:20थी कि यह सर को क्या हो गया जो इस फटीचर
  3740. 2:46:23से दिखने वाले शख्स को सर कह रहे हैं और
  3741. 2:46:25इतनी रिस्पेक्ट दे रहे हैं। प्रिया के
  3742. 2:46:28चेहरे पर भी करीब-करीब यही एक्सप्रेशन था।
  3743. 2:46:31मोहित शौर्य की ओर देखते हुए बोला,
  3744. 2:46:33"विश्वास कीजिए सर, जैसे ही विक्रम सर ने
  3745. 2:46:35बताया कि आप मुझसे मिलना चाहते हैं, मेरी
  3746. 2:46:38खुशी का ठिकाना नहीं रहा।"
  3747. 2:46:40मोहित रैना को देखकर ऐसा लग रहा था कि वो
  3748. 2:46:42शौर्य के सामने बिछ जाएगा। मोहित रैना को
  3749. 2:46:45ऐसा करते देखकर श्वेता के चेहरे पर
  3750. 2:46:47हवाइयां उड़ने लगी। उसे समझ नहीं आ रहा था
  3751. 2:46:50कि कौन है यह आदमी जिसके सामने उसके सर भी
  3752. 2:46:53कालीन की तरह बिछे जा रहे हैं। हां, मुझे
  3753. 2:46:57बताया विक्रम ने कि आप मुझसे मिलने को
  3754. 2:46:59बहुत बेकरार हैं। फाइनली मुझे भी आपसे
  3755. 2:47:03मिलने का मौका मिल गया। शौर्य मोहित रैना
  3756. 2:47:06से हाथ मिलाते हुए बोला। इस पर शौर्य ने
  3757. 2:47:08सीधा जवाब देते हुए कहा, नहीं वो हम फिर
  3758. 2:47:11कभी देख लेंगे। अभी चलकर कुछ काम की बात
  3759. 2:47:14कर लेते हैं। प्रिया से रहा नहीं गया कि
  3760. 2:47:16यह कौन है जिन्हें मोहित रैना भी सर कहकर
  3761. 2:47:19संबोधित कर रहे हैं। सो उसने मोहित रैना
  3762. 2:47:21से पूछ ही लिया। सर अगर आप बुरा ना माने
  3763. 2:47:24क्या हम स्टाफ के लोगों से भी सर का परिचय
  3764. 2:47:27करवा देंगे? मोहित रैना को अपनी गलती का
  3765. 2:47:30एहसास हुआ। सो वो जोर से बोला ओके
  3766. 2:47:33एवरीबॉडी कम हियर।
  3767. 2:47:35मोहित रैना की आवाज सुनकर आसपास जितना भी
  3768. 2:47:38स्टाफ था सब इकट्ठा हो गया। सबको अपने
  3769. 2:47:40आसपास देखकर मोहित रैना बोले आज का दिन
  3770. 2:47:44हमारे लिए बहुत खुशी का दिन है कि हमारे
  3771. 2:47:46बीच बिग बुल के मालिक मिस्टर शौर्य राठौड़
  3772. 2:47:49उपस्थित हैं। श्वेता ने जैसे ही यह सुना
  3773. 2:47:52उसे तो लगा कि आसमान उसके सिर पर गिर गया
  3774. 2:47:55है। उसका तो हाल ऐसा था जैसे कांटो तो खून
  3775. 2:47:58नहीं। करीब-करीब यही हाल उस सेल्समैन का
  3776. 2:48:01भी था जो श्वेता के समर्थन में बड़ी-बड़ी
  3777. 2:48:03बातें कर रहा था। शौर्य ने कनखियों से
  3778. 2:48:06उनकी तरफ देखा पर कुछ बोला नहीं। कोई भी
  3779. 2:48:08स्टाफ कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था
  3780. 2:48:10कि यह साधारण सा दिखने वाला शख्स बिग बुल
  3781. 2:48:13का मालिक हो सकता है। वहां मौजूद सभी
  3782. 2:48:16कर्मचारियों में से श्वेता और उस सेल्समैन
  3783. 2:48:18लड़के के चेहरे पर साफ हवाइयां उड़ रही
  3784. 2:48:20थी। सबके सामने परिचय देने के बाद मोहित
  3785. 2:48:22रैना ने आदर के साथ कहा। सर क्या आप स्टाफ
  3786. 2:48:26को कोई संदेश देना चाहेंगे? शौर्य ने एक
  3787. 2:48:29नजर पूरे स्टाफ पर डाली और आखिरकार उसकी
  3788. 2:48:32नजर श्वेता पर ठहरी। फिर वो शांत लेकिन
  3789. 2:48:34प्रभावशाली अंदाज में बोला
  3790. 2:48:37मेरा आप सबके लिए बस इतना ही संदेश है कि
  3791. 2:48:39याद रखिए बिग बॉल अपनी क्वालिटी और कस्टमर
  3792. 2:48:42सर्विस के लिए जाना जाता है। किसी को भी
  3793. 2:48:45यह मौका मत दीजिए कि वो हमारी सेवा पर
  3794. 2:48:47उंगली उठा सके। कभी किसी के कपड़ों या
  3795. 2:48:50पहनावे को देखकर व्यवहार मत बदलिए। जो भी
  3796. 2:48:53इस स्टोर में दाखिल हो समझ लीजिए कि आपके
  3797. 2:48:55लिए भगवान पधारे हैं। किसी भी ग्राहक के
  3798. 2:48:58साथ भेदभाव ना हो और ऐसी कोई बात ना कही
  3799. 2:49:00जाए जिससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचे।
  3800. 2:49:04शौर्य का छोटा सा भाषण खत्म हुआ तो माहौल
  3801. 2:49:06बदल चुका था। श्वेता समझ रही थी कि यह
  3802. 2:49:09बातें उसी के लिए कही गई हैं। वो हैरान
  3803. 2:49:12थी। अगर शौर्य चाहता तो सबके सामने उसकी
  3804. 2:49:14क्लास भी लगा सकता था। उसकी नौकरी तक जा
  3805. 2:49:17सकती थी। मगर शौर्य ने ऐसा कुछ नहीं किया।
  3806. 2:49:20प्रिया के मन में भी शौर्य के लिए सम्मान
  3807. 2:49:22और बढ़ गया। उसने आगे बढ़कर कहा, "सर, हम
  3808. 2:49:27आपकी कही हर बात को जरूर अमल में लाएंगे।"
  3809. 2:49:30शौर्य ने हल्की मुस्कान के साथ फिर कहा,
  3810. 2:49:33हां, एक बात और। हम इंसान हैं तो गलतियां
  3811. 2:49:36होना स्वाभाविक है। मगर असली बात यह है कि
  3812. 2:49:38हम अपनी गलती से क्या सीखते हैं। अगर हम
  3813. 2:49:41उसे दोहराते नहीं तो इसका मतलब है कि हम
  3814. 2:49:43आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन अगर वो गलती हम
  3815. 2:49:46बार-बार दोहराएं तो समझिए [संगीत] हम ठहर
  3816. 2:49:48गए हैं। आपने सुना होगा ठहरा हुआ पानी
  3817. 2:49:52सड़ने लगता है और बहता हुआ पानी हमेशा
  3818. 2:49:55ताजा रहता है। [संगीत] उम्मीद है मेरी बात
  3819. 2:49:57आप सब तक पहुंची होगी। पूरा स्टाफ अब
  3820. 2:50:00खामोशी से खड़ा था। पर इस बार उस खामोशी
  3821. 2:50:03में घबराहट नहीं सीख छिपी हुई थी। जी सर
  3822. 2:50:06हम जरूर आपकी उम्मीद पर खरे उतरने की
  3823. 2:50:09कोशिश करेंगे। प्रिया ने ही इस बार भी
  3824. 2:50:12जवाब दिया। ठीक है अभी मैं आप सब से विदा
  3825. 2:50:15लेता हूं। दोबारा फिर मुलाकात होगी। इतना
  3826. 2:50:18बोलकर शौर्य मोहित के साथ उसके केबिन में
  3827. 2:50:20पहुंचा। मोहित ने शौर्य को अपनी चेयर पर
  3828. 2:50:22बैठाया और खुद विक्रम के साथ शौर्य के
  3829. 2:50:25सामने आकर बोला, "हां सर, बताइए मेरे लिए
  3830. 2:50:27क्या आदेश है?" शौर्य ने बात की शुरुआत
  3831. 2:50:30की।
  3832. 2:50:31देखो एक-द [संगीत] दिन में तुम्हें शिप्रा
  3833. 2:50:33राय से मीटिंग करनी है। उनका जिंक कलेक्शन
  3834. 2:50:36के नाम से फैशन ब्रांड है। उसे अपने स्टोर
  3835. 2:50:38में स्पेस देनी है। पर सर जिंक कलेक्शन
  3836. 2:50:42कोई बड़ा ब्रांड तो नहीं है। मोहित बीच
  3837. 2:50:44में ही बोल पड़ा। मोहित की बात पर शौर्य
  3838. 2:50:47विक्रम की ओर देखते हुए बोला मुझे पता है।
  3839. 2:50:50अब यूं समझो बड़ा ब्रांड नहीं है तो उसे
  3840. 2:50:52बड़ा बनाना है। [संगीत] उसके लिए तुम
  3841. 2:50:54शिप्रा राय को एक पार्टनरशिप प्रपोजल भी
  3842. 2:50:56दोगे। वो प्रपोजल क्या होगा कि तुम्हें
  3843. 2:50:59विक्रम समझा देगा।
  3844. 2:51:01ठीक है सर जैसा आप कहें मोहित रैना ने
  3845. 2:51:03सहमति में अपना सिर हिलाया और एक बात हो
  3846. 2:51:07सकता है कि तुम्हारी मीटिंग के दौरान मैं
  3847. 2:51:08भी तुम्हें शिप्रा राय के साथ दिख जाऊं तो
  3848. 2:51:10उस समय तुम मुझे पहचानोगे नहीं शिपरा राय
  3849. 2:51:13को जरा सा भी शक नहीं होना चाहिए कि
  3850. 2:51:15[संगीत] तुम मुझे जानते हो। कहते हुए
  3851. 2:51:17शौर्य ने मोहित के लिए गाइडलाइन निर्धारित
  3852. 2:51:20कर दी। ठीक है सर मैं आपकी बात समझ गया।
  3853. 2:51:23मोहित बोला जबकि उसे कुछ समझ नहीं आया था
  3854. 2:51:26कि शौर्य क्यों चाहता है कि वो शिपरा राय
  3855. 2:51:28के सामने शौर्य को नहीं पहचाने। तभी शौर्य
  3856. 2:51:31को कुछ याद आया तो उसने मोहित से पूछा
  3857. 2:51:35क्या तुम बीगर कलेक्शन के बारे में जानते
  3858. 2:51:37हो? हां सर राजगढ़ में इसके कई आउटलेट
  3859. 2:51:40हैं। मिडिल क्लास लोगों के लिए यह बढ़िया
  3860. 2:51:42चॉइस है। मोहित ने बताया। और क्या जानते
  3861. 2:51:46हो उसके बारे में? शौर्य बीगर कलेक्शन के
  3862. 2:51:48बारे में उससे कुछ और जानकारी की उम्मीद
  3863. 2:51:50कर रहा था। सर यह रत्नाकर बजाज की कंपनी
  3864. 2:51:53है। इसको अभी रौनने जनेजा जो कि उनका
  3865. 2:51:55दामाद है वही ऑपरेट
  3866. 2:51:57[नाक से की जाने वाली आवाज़] करता है। अगर
  3867. 2:51:58स्टेक्स की बात करूं तो इस कंपनी के शेयर
  3868. 2:52:00रत्नाकर बजाज के तीन बच्चों को बराबर मिले
  3869. 2:52:02हैं। रत्नाकर बजाज के शेयर्स मिलने के
  3870. 2:52:04कारण उनका दामाद अभी बीगर कलेक्शन का
  3871. 2:52:07डायरेक्टर बना हुआ है। बीगर कलेक्शन का
  3872. 2:52:0930-30% शेयर उनके तीनों बच्चों के पास है
  3873. 2:52:12और 10% शेयर खुद रत्नाकर बजाज के पास है।
  3874. 2:52:16मोहित ने डिटेल में बताया। मोहित की बात
  3875. 2:52:18सुनकर शौर्य के दिमाग में कुछ खिचड़ी पकने
  3876. 2:52:20लगी। वो बोला रत्नाकर बजाज के तीन बच्चों
  3877. 2:52:24का आपस में कैसा रिश्ता है? मोहित ने
  3878. 2:52:26बताया उनमें जरा भी नहीं बनती। उनके
  3879. 2:52:29[संगीत] दोनों बेटे अपने बहनोई को जरा भी
  3880. 2:52:31पसंद नहीं करते। मोहित को उनकी अंदरूनी
  3881. 2:52:34बातें भी पता थी। यह देखकर शौर्य मोहित के
  3882. 2:52:37चेहरे को गौर से देखते हुए बोला। तुम इतना
  3883. 2:52:40सब कैसे जानते हो? रत्नाकर बजाज का छोटा
  3884. 2:52:43बेटा राघव बजाज मेरा दोस्त है। मोहित ने
  3885. 2:52:46जवाब दिया। यह सुनकर शौर्य खुश हुआ और
  3886. 2:52:49बोला, "बढ़िया। अच्छा क्या तुम राघव को
  3887. 2:52:52उसका शहर बेचने के लिए तैयार कर सकते हो?"
  3888. 2:52:55वो तो पहले से ही इसके लिए तैयार है। वो
  3889. 2:52:57खुद कई बार मेरे सामने बोल चुका है कि वो
  3890. 2:53:00अपना शहर निकालना चाहता है। मोहित को समझ
  3891. 2:53:03नहीं आ रहा था कि शौर्य उससे क्या चाहता
  3892. 2:53:05है। तभी शौर्य उत्साहित होकर बोला सुनो
  3893. 2:53:09सिर्फ राघव का नहीं उसके भाई का भी शेयर
  3894. 2:53:11हमें चाहिए। तुम्हें उसके भाई को भी उसका
  3895. 2:53:13शेयर बेचने के लिए तैयार करना पड़ेगा।
  3896. 2:53:16क्या तुम ये कर पाओगे? मोहित को लगा कि
  3897. 2:53:18शौर्य उसे चैलेंज कर रहा है। इसीलिए वह
  3898. 2:53:20जोश में बोला बिल्कुल सर मैं कर लूंगा।
  3899. 2:53:24ठीक है तो तुम्हें साथ में यह काम भी करना
  3900. 2:53:27है और हां जब तक ये डील फाइनल ना हो जाए
  3901. 2:53:30तब तक किसी को इस बात की भनक नहीं लगनी
  3902. 2:53:32चाहिए। शौर्य को रौनने जनेजा को बगैर
  3903. 2:53:35कलेक्शन से बाहर करने का रास्ता मिल गया
  3904. 2:53:37था। अगर 60% शेयर पर शौर्य का कब्जा हो
  3905. 2:53:40जाता है तो वो सबसे पहले रौनित जनेजा को
  3906. 2:53:43ही डायरेक्टर के पद से हटा देगा। शौर्य
  3907. 2:53:46मोहित की आंखों में देखते हुए बोला मैं
  3908. 2:53:49देखता हूं कि तुम इस काम को कितनी जल्दी
  3909. 2:53:51कर पाते हो। फिर जब शौर्य को लगा कि मोहित
  3910. 2:53:54से उसे जो बात करनी थी वह हो चुकी है तो
  3911. 2:53:56उसने कहा मुझे कुछ देर विक्रम से अकेले
  3912. 2:53:59में बात करनी है। मोहित शौर्य का इशारा
  3913. 2:54:02समझ गया और अपनी जगह से उठते हुए बोला मैं
  3914. 2:54:04जरा बाहर एक चक्कर लगा कर आता हूं सर।
  3915. 2:54:07मोहित कैबिन से बाहर चला गया। जैसे ही
  3916. 2:54:10मोहित बाहर गया, शौर्य ने विक्रम की ओर
  3917. 2:54:12मुड़कर पूछा।
  3918. 2:54:14अब बताओ तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो? इस
  3919. 2:54:16पर विक्रम ने जवाब [संगीत] दिया। आपके
  3920. 2:54:19पापा का फोन आया था। वो चाहते हैं कि
  3921. 2:54:21जितनी जल्दी हो सके आप अपने दादाजी से एक
  3922. 2:54:24बार मिल लें। क्या कोई बात हुई है? शौर्य
  3923. 2:54:27को आशंका हुई कि जरूर कोई गंभीर बात है।
  3924. 2:54:30इस पर विक्रम ने आगे बताया। दरअसल आपके
  3925. 2:54:33दादाजी हॉस्पिटल में हैं। कांता प्रसाद जी
  3926. 2:54:35का फोन आया था। वो जानना चाह रहे थे कि
  3927. 2:54:38क्या आप उनसे मिलने आ रहे हैं।
  3928. 2:54:40कांता प्रसाद शौर्य के दादाजी चंद्रभान
  3929. 2:54:42राठौड़ के पीए थे। यूं कहें तो वो उनके
  3930. 2:54:45लिए सब कुछ थे। चंद्रभान राठौड़ की पूरी
  3931. 2:54:48देखभाल की जिम्मेदारी कांता प्रसाद के ही
  3932. 2:54:50कंधों पर थी। चंद्रभान जी पूरी तरह उन्हीं
  3933. 2:54:53पर निर्भर थे। उन्हें मेरे बारे में कैसे
  3934. 2:54:56पता चला? शौर्य को शक हुआ कि उसके जीवित
  3935. 2:54:59होने की खबर कहीं लीक तो नहीं हो गई।
  3936. 2:55:02उन्हें आपके पापा से पता चला जब आपके
  3937. 2:55:04दादाजी हॉस्पिटल में भर्ती हुए और वो इस
  3938. 2:55:06गिल्ट में थे कि उनके कारण ही आपकी मृत्यु
  3939. 2:55:09हुई तो आपके पिताजी को सच बताना पड़ा। किस
  3940. 2:55:12हॉस्पिटल में है वो? और अब उनकी तबीयत
  3941. 2:55:14कैसी है? शौर्य की आवाज में अपने दादाजी
  3942. 2:55:17के लिए चिंता साफ झलक रही थी। सिटी
  3943. 2:55:20हॉस्पिटल में है। जहां तक तबीयत की बात है
  3944. 2:55:23अभी स्थिर है। पर मैं कांता प्रसाद जी को
  3945. 2:55:26क्या जवाब दूं? विक्रम ने पूछा। इस पर
  3946. 2:55:29शौर्य बोला ठीक है कल चलेंगे। एक बार दादा
  3947. 2:55:32जी से मिलना जरूरी है। मैं भी कल पहली बार
  3948. 2:55:34अपने दादा जी से मिलूंगा। शौर्य की बातों
  3949. 2:55:37में उसके जज्बात साफ दिखाई दे रहे थे।
  3950. 2:55:40विक्रम शौर्य के हालात समझता था। इसीलिए
  3951. 2:55:42उसके लिए हर बात स्पष्ट जानना जरूरी था।
  3952. 2:55:45किस समय चलना है और कैसे चलना है यह बता
  3953. 2:55:48दीजिए ताकि मैं समय पर आपको पिक कर लूं।
  3954. 2:55:50शौर्य को भी अपनी स्थिति का आभास था। वह
  3955. 2:55:52कुछ सोच कर [संगीत] बोला समय मैं बता
  3956. 2:55:54दूंगा। तुम तैयार रहना जब मैं कहूं तब
  3957. 2:55:57मेरे बताए हुए जगह पर आ जाना। ठीक है मैं
  3958. 2:56:00आपकी कॉल का इंतजार करूंगा। विक्रम बोला
  3959. 2:56:03अच्छा अब सबसे बड़ी बात। तुमने मुख्तार के
  3960. 2:56:06बारे में कुछ पता किया। शौर्य अब सीधे
  3961. 2:56:08मुद्दे पर आ गया। बहुत ज्यादा तो नहीं पता
  3962. 2:56:11चला बॉस लेकिन इतना मालूम हुआ है कि
  3963. 2:56:13अंडरवर में वो एक बड़ा नाम है। राजगढ़ में
  3964. 2:56:16उसके नाम का खौफ है। विक्रम ने जितनी
  3965. 2:56:19जानकारी जुटाई थी वह सब बता दी। उसका कोई
  3966. 2:56:22वीक पॉइंट? शौर्य ने कुछ सोच कर पूछा। आज
  3967. 2:56:25जो उसका सबसे बड़ा दुश्मन है वही [संगीत]
  3968. 2:56:27कभी उसका खास दोस्त हुआ करता था। उसका नाम
  3969. 2:56:30लवकेश राणा है। मुख्तार के ताकत पर होने
  3970. 2:56:33का दूसरा बड़ा कारण है रूलिंग पार्टी का
  3971. 2:56:36हाथ उसके सिर पर होना। विक्रम की बात से
  3972. 2:56:38शौर्य को मुख्तार की ताकत का अंदाजा हो
  3973. 2:56:40गया। वो कुछ सोच कर बोला एक काम करो लवकेश
  3974. 2:56:45राणा से मेरी एक मीटिंग फिक्स करो। शायद
  3975. 2:56:47शौर्य ने मुख्तार से निपटने का कोई तरीका
  3976. 2:56:50सोच लिया था। एक काम करो लवकेश राणा से
  3977. 2:56:53मेरी एक मीटिंग फिक्स करो। शौर्य को
  3978. 2:56:56मुख्तार से निपटने का रास्ता नजर आ चुका
  3979. 2:56:58था। ठीक है। मैं लवकेश राणा से मीटिंग
  3980. 2:57:01फिक्स करता हूं। लेकिन अगर आप मुख्तार से
  3981. 2:57:03निपटने के लिए उससे मिलना चाहते हैं तो
  3982. 2:57:05उससे बेहतर यह होगा कि हम अपनी ताकत खुद
  3983. 2:57:08इतनी बना लें कि हमें किसी लवश राणा की
  3984. 2:57:10जरूरत ही ना पड़े। विक्रम ने अपना विचार
  3985. 2:57:13सामने रखा। विक्रम की बात सुनकर शौर्य
  3986. 2:57:16हल्का सा मुस्कुराया और बोला तुम समझ नहीं
  3987. 2:57:19रहे हो। अपनी ताकत बनाने के लिए हमें जीरो
  3988. 2:57:22से शुरुआत करनी पड़ेगी। लेकिन अगर हम लव
  3989. 2:57:24राणा को अपने पक्ष में ले आते हैं तो हमें
  3990. 2:57:27पहले से तैयार एक स्थापित आर्मी मिल
  3991. 2:57:29जाएगी। इससे हमें वह कीमती समय नहीं गवाना
  3992. 2:57:32पड़ेगा जो यहां अपनी ताकत खड़ी करने में
  3993. 2:57:34लग सकता है। शौर्य की बात अब विक्रम की
  3994. 2:57:37समझ में आ गई। तभी शौर्य ने कहा ठीक है तो
  3995. 2:57:41अब यहीं बात खत्म करते हैं। कोई खास बात
  3996. 2:57:43हो तो मुझे फोन कर देना। अभी मैं निकलता
  3997. 2:57:46हूं। इतना कहकर शौर्य अपनी जगह से खड़ा
  3998. 2:57:49हुआ और बाहर की ओर बढ़ गया। विक्रम भी
  3999. 2:57:52उसके साथ स्टोर के बाहर तक आया और उससे
  4000. 2:57:54पूछा। मैं आपको राय हाउस तक छोड़ दूं?
  4001. 2:57:57नहीं रहने दो। मैं कैब कर लूंगा। इतना
  4002. 2:58:00कहकर शौर्य अपने मोबाइल में कैब बुक करने
  4003. 2:58:03लगा। विक्रम से शौर्य की हालत देखी नहीं
  4004. 2:58:05जा रही थी। वो बोला, कल दादा जी से मिलने
  4005. 2:58:09इसी हालत में जाएंगे। पहली बार उनसे मिलने
  4006. 2:58:11जा रहे हैं। कम से कम अपनी हालत तो सुधार
  4007. 2:58:14लीजिए। विक्रम की बात सुनकर शौर्य
  4008. 2:58:16मुस्कुरा दिया। ठीक है देखता हूं क्या
  4009. 2:58:18किया जा सकता है। इतने में शौर्य की कैब
  4010. 2:58:21भी आ गई। वो वहां से सीधा राय हाउस पहुंचा
  4011. 2:58:24और अपने क्वार्टर में चला गया। उसने देखा
  4012. 2:58:26कि गिरधर भी आ चुका था। वो सीधे गिरधर के
  4013. 2:58:28कमरे में पहुंच गया। आ गए तुम कहीं गए थे
  4014. 2:58:33क्या? गिरिधर ने शौर्य को देखते ही पूछा।
  4015. 2:58:36हां काका एक परीक्षित से मिलने गया था। और
  4016. 2:58:39बताइए [संगीत] वाल्मीकि काका का काम हो
  4017. 2:58:41गया ना? शौर्य ने चिंता व्यक्त करते हुए
  4018. 2:58:44पूछा। तो गिरधर ने जवाब दिया। वो तुम्हें
  4019. 2:58:47बहुत दुआएं दे रहा था। कह रहा था कि जल्दी
  4020. 2:58:50ही पैसों का इंतजाम करके तुम्हारी अंगूठी
  4021. 2:58:52छुड़ा देगा। अरे काका उनसे कह देना मेरी
  4022. 2:58:55अंगूठी की चिंता ना करें। पहले अपनी बेटी
  4023. 2:58:57की शादी करें। [संगीत] अंगूठी मैं खुद
  4024. 2:58:59छुड़ा लूंगा। शौर्य बेफिक्री से बोला। तभी
  4025. 2:59:02गिरधर ने खिड़की से बाहर झांकते हुए कहा,
  4026. 2:59:05"अरे मैं बताना भूल गया। अभी थोड़ी देर
  4027. 2:59:08पहले राहुल बाबा तुम्हें ढूंढ रहे थे।
  4028. 2:59:10अच्छा अभी कहां होंगे वो? शौर्य को समझ
  4029. 2:59:14नहीं आया कि राहुल उसे किस लिए ढूंढ रहा
  4030. 2:59:16था। तभी गिरिधर ने बताया। वो सब लॉन में
  4031. 2:59:20ही टेनिस खेल रहे होंगे। टेनिस। शौर्य को
  4032. 2:59:23आश्चर्य हुआ। हां, यहां टेनिस कोर्ट बना
  4033. 2:59:26हुआ है। शाम को रोज परिवार के लोग इकट्ठा
  4034. 2:59:29होकर खेलते हैं। गिरधर की बात सुनकर शौर्य
  4035. 2:59:31के मन में एक सुखद अनुभूति हुई। उसने सोचा
  4036. 2:59:35एक बार चलकर देखना चाहिए। शायद वहां
  4037. 2:59:37परिवार के और भी लोगों से मुलाकात हो जाए
  4038. 2:59:39और उसे इस परिवार को समझने में आसानी
  4039. 2:59:42मिले।
  4040. 2:59:44यही सोचकर शौर्य गिरधर के क्वार्टर से
  4041. 2:59:45बाहर निकला और टेनिस कोर्ट की ओर बढ़ गया।
  4042. 2:59:48दूर से ही उसे कोर्ट नजर आ गया। वहां
  4043. 2:59:50पहुंचकर उसने देखा राहुल टेनिस खेल रहा
  4044. 2:59:52था। उसके साथ रागिनी भी थी और सामने की ओर
  4045. 2:59:55कुलवंत और मयूर खड़े थे। परिवार के बाकी
  4046. 2:59:58सदस्य भी आसपास खड़े होकर खेल का आनंद ले
  4047. 3:00:01रहे थे। शिप्रा भी एक ओर बेंच पर बैठी
  4048. 3:00:04मुस्कुराते हुए मैच देख रही थी। सब खेल
  4049. 3:00:06में इतने मग्न थे कि किसी ने शौर्य के आने
  4050. 3:00:09पर ध्यान ही नहीं दिया। मैच अपने चरम पर
  4051. 3:00:11था। शौर्य भी चुपचाप खड़ा होकर खेल का
  4052. 3:00:14आनंद लेने लगा। आखिरकार खेल खत्म हुआ और
  4053. 3:00:17राहुल और रागिनी हार गए। जैसे ही मैच
  4054. 3:00:20समाप्त हुआ, युविका की नजर शौर्य पर पड़ी।
  4055. 3:00:23वो सबका ध्यान आकर्षित करते हुए बोली, अरे
  4056. 3:00:27अरे देखो तो कौन आया है। उसकी आवाज सुनते
  4057. 3:00:30ही सबकी निगाहें शौर्य की ओर मुड़ गई। जब
  4058. 3:00:33शौर्य ने देखा कि सब लोग उसे ही देख रहे
  4059. 3:00:35हैं तो वो थोड़ा असहज हो गया। उसने सिर
  4060. 3:00:37हिलाकर सबका अभिवादन किया। राहुल ने शौर्य
  4061. 3:00:40को देखा तो बोला आप आ गए? भैया मैं आपको
  4062. 3:00:43ही देखने गया था। भैया युविका आश्चर्य से
  4063. 3:00:47बोली जीजा जी बोलो जीजाजी को कोई भैया
  4064. 3:00:51बोलता है क्या? उसने राहुल पर तंज कसने
  4065. 3:00:54में कोई कसर नहीं छोड़ी। फिर [संगीत] वो
  4066. 3:00:55शिप्रा की तरफ मुड़कर बोली, मैंने कुछ गलत
  4067. 3:00:58तो नहीं कहा ना शिप्रा? सिर्फ राहुल ही
  4068. 3:01:01नहीं तुम्हें भी इन्हें जीजाजी ही बोलना
  4069. 3:01:03चाहिए। शिप्रा ने युविका का समर्थन करते
  4070. 3:01:05हुए जवाब दिया जिससे युविका की चाल उसी पर
  4071. 3:01:08उल्टी पड़ गई। वो खिसियानी हंसी-हंसते हुए
  4072. 3:01:10बोली पता नहीं कैसे-कैसे लोगों को अब
  4073. 3:01:13जीजाजी बोलना पड़ेगा।
  4074. 3:01:16और श्रवण कैसे हो? कुलवंत शौर्य के पास
  4075. 3:01:19जाकर उससे हाथ मिलाते हुए बोला तुम्हारी
  4076. 3:01:22तो जिंदगी ही पूरी तरह बदल गई। कैसा लग
  4077. 3:01:25रहा है यह नया जीवन? राहुल को शौर्य के
  4078. 3:01:27प्रति सबका बर्ताव पसंद तो नहीं आ रहा था
  4079. 3:01:30पर वो कुछ बोल नहीं सकता था। शौर्य को भी
  4080. 3:01:32कुलवंत का कटाक्ष समझ में आ रहा था। वो
  4081. 3:01:35मुस्कुराते हुए [संगीत] बोला सही कहा
  4082. 3:01:37आपने। किसे ऐसा जीवन पसंद नहीं आएगा। मयूर
  4083. 3:01:41भी क्यों पीछे रहता? उसने भी बहती गंगा
  4084. 3:01:43में हाथ धो लिए। वाह [संगीत] जीजा जी।
  4085. 3:01:46जीजा जी तो एंजॉय कर रहे हैं अपनी जिंदगी
  4086. 3:01:48को। आखिर क्यों ना हो एक भिखारी से सीधे
  4087. 3:01:51बड़े घर के दामाद जो बन गए एंजॉय करना तो
  4088. 3:01:54बनता है। क्यों है ना जीजा जी? शौर्य वहां
  4089. 3:01:57उपस्थित सबके कमेंट सुन तो रहा था पर उन
  4090. 3:02:00कमेंट्स का उस पर कोई असर नहीं हो रहा था
  4091. 3:02:02क्योंकि वो सबके मकसद को अच्छी तरह समझ
  4092. 3:02:04रहा था। उसने शिप्रा की तरफ देखा। उसके
  4093. 3:02:08चेहरे पर नापसंद का भाव वो स्पष्ट रूप से
  4094. 3:02:10नोटिस कर पा रहा था। शायद उसे डर था कि
  4095. 3:02:13शौर्य इन सबके कमेंट्स को किस तरह लेगा।
  4096. 3:02:17वाह जीजाजी तो बड़े कूल हैं। रागिनी खुश
  4097. 3:02:20होते हुए बोली उसके रिएक्शन से समझ नहीं आ
  4098. 3:02:23रहा था कि यह उसका असली इमोशन है या वो भी
  4099. 3:02:25शौर्य के मजे ले रही थी। फिर वो कुलवंत की
  4100. 3:02:28ओर मुड़कर बोली कुलवंत भैया आपने मुझे तो
  4101. 3:02:31टेनिस में हरा दिया। क्यों ना एक गेम
  4102. 3:02:33हमारे जीजा जी के साथ भी हो जाए। [संगीत]
  4103. 3:02:35इनका गेम भी तो देखें। क्या पता आपको कोई
  4104. 3:02:38सही टक्कर देने वाला मिल जाए।
  4105. 3:02:41पहले इनसे पूछ तो लो कि इन्हें रैकेट
  4106. 3:02:43पकड़ना आता भी है या नहीं। युविका बुरा सा
  4107. 3:02:46मुंह बनाती हुई बोली तो मयूर शौर्य के मजे
  4108. 3:02:49लेते हुए बोला यह गलत बात है युविका तुम
  4109. 3:02:52अंडरएस्टिमेट कर रही हो हमारे जीजाजी को
  4110. 3:02:54ऐसा थोड़ी हो सकता है कि इन्हें रैकेट
  4111. 3:02:56पकड़ना ना आता हो हां यह हो सकता है कि यह
  4112. 3:02:59हम दोनों भाइयों के सामने ज्यादा देर टिक
  4113. 3:03:01ना पाए पर खेल तो लेते ही होंगे क्यों
  4114. 3:03:04जीजा जी मैं सही कह रहा हूं ना शिप्रा से
  4115. 3:03:07रहा नहीं गया तो वो चिढ़कर बोली बस करो अब
  4116. 3:03:10तुम लोग कुछ ज्यादा ही ह्यूमिलिएट करने की
  4117. 3:03:12कोशिश नहीं कर रहे श्रवण को इस पर मयूर
  4118. 3:03:15तपाक से बोला कैसी बात कर रही हो शिप्रा
  4119. 3:03:18दी मैं भला जीजा जी को ह्यूमिलिएट करने की
  4120. 3:03:21कोशिश क्यों करूंगा ऐसा भी कहीं हो सकता
  4121. 3:03:23है कि जीजा जी को रैकेट पकड़ना ना आता हो
  4122. 3:03:26हां यह हो सकता है कि खेलना ज्यादा अच्छे
  4123. 3:03:29से ना आता हो पर खेल तो सकते ही होंगे
  4124. 3:03:32वैसे भी कौन सा कोई टूर्नामेंट खेलना है
  4125. 3:03:34यह एक फ्रेंडली मैच ही तो होगा क्यों जीजा
  4126. 3:03:36जी हो जाए एक मैच राहुल भी यह सब सुन रहा
  4127. 3:03:40था पर शौर्य के लिए यह सब सुनना उसे अच्छा
  4128. 3:03:42नहीं लग रहा था सबका मुंह बंद करने के लिए
  4129. 3:03:45वो बोला
  4130. 3:03:47ठीक है फिर मैं और श्रवण भैया एक टीम में
  4131. 3:03:49रहेंगे आइए खेलते हैं युविका फिर से राहुल
  4132. 3:03:53को टोकते हुए बोली फिर से भैया जीजाजी
  4133. 3:03:56बोलो राहुल क्यों शिप्रा राहुल को समझाया
  4134. 3:03:59नहीं तुमने दरअसल राहुल को लग रहा था कि
  4135. 3:04:02वो भी अगर शौर्य को जीजाजी बोलेगा तो हो
  4136. 3:04:04सकता है शिप्रा को बुरा लगे क्योंकि वो
  4137. 3:04:06यही समझ रहा था कि यह मजबूरी की शादी है
  4138. 3:04:09जैसे ही हालात ठीक होंगे दोनों का तलाक हो
  4139. 3:04:12जाएगा यही सोचकर कर वो शिप्रा की ओर देख
  4140. 3:04:14रहा था। तभी शिप्रा बोली ठीक तो कह रही है
  4141. 3:04:17युविका राहुल अब से तुम श्रवण को जीजाजी
  4142. 3:04:20ही बोलोगे। शौर्य ने शिप्रा की बात सुनी
  4143. 3:04:23तो उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ।
  4144. 3:04:25पर उसे अच्छा लगा कि इससे बाकी सबकी जुबान
  4145. 3:04:28बंद हो जाएगी। एक कहावत है कि लोग आपको
  4146. 3:04:31[संगीत] जिसका भय दिखाएं, आप उसे ही अपना
  4147. 3:04:33हथियार बना लें। तो भय अपने आप दूर हो
  4148. 3:04:36जाता है। वहां मौजूद सभी लोग शिप्रा को
  4149. 3:04:39नीचा दिखाने के लिए ही बार-बार शौर्य को
  4150. 3:04:42जीजाजी कह रहे थे। उन्हें लग रहा था कि
  4151. 3:04:44इससे शिप्रा को बुरा लगेगा। पर शिप्रा ने
  4152. 3:04:47जितनी आसानी से इस बात को स्वीकार कर लिया
  4153. 3:04:49उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। शिप्रा ने
  4154. 3:04:52जिस तरह से राहुल से शौर्य को जीजाजी
  4155. 3:04:54बुलवाया उससे युविका और चिढ़ गई। क्योंकि
  4156. 3:04:56जैसा रिएक्शन वो शिप्रा से चाह रही थी
  4157. 3:04:59वैसा उसे मिला नहीं।
  4158. 3:05:01तो फिर तुम तैयार हो श्रवण मैच के लिए? इस
  4159. 3:05:05बार कुलवंत ने शौर्य से पूछा तो शौर्य
  4160. 3:05:07अपने चेहरे पर घबराहट दिखाते हुए बोला पर
  4161. 3:05:10मुझे खेलना नहीं आता। वैसे यहां जो भी हो
  4162. 3:05:14रहा था शौर्य उसे एंजॉय कर रहा था। वो
  4163. 3:05:16अनजान बनने का दिखावा कर रहा था। मानो उसे
  4164. 3:05:19टेनिस के बारे में कुछ पता ही ना हो। तभी
  4165. 3:05:21मयूर तंज कसते हुए बोला। नहीं नहीं आप तो
  4166. 3:05:24पहले ही हार मान बैठे जीजा जी। कम से कम
  4167. 3:05:27मुकाबला करने की हिम्मत तो दिखाइए।
  4168. 3:05:30राहुल जानता था उसके कजिंस शौर्य को ऐसे
  4169. 3:05:32ही छोड़ने वाले नहीं है। इसीलिए उसने
  4170. 3:05:34शौर्य को हिम्मत देते हुए बोला, आइए जीजा
  4171. 3:05:37जी घबराने की जरूरत नहीं है। आप बस थोड़ा
  4172. 3:05:40साथ दीजिएगा बाकी मैं देख लूंगा। शौर्य को
  4173. 3:05:43राहुल के मुंह से जीजाजी सुनकर अपनेपन की
  4174. 3:05:46फीलिंग आई। बाकी सब जो उसे जीजाजी बोल रहे
  4175. 3:05:49थे, उसमें एक सरकाजम था। पर राहुल के कहने
  4176. 3:05:51में अपनापन था। तभी मयूर राहुल पर हंसते
  4177. 3:05:54हुए बोला, "क्या बात है राहुल? तुम्हें
  4178. 3:05:57लगता है कि तुम मेरा और कुलवंत भैया का
  4179. 3:05:59मुकाबला कर पाओगे।
  4180. 3:06:01भले मैं आपको हरा ना पाऊं पर इतनी आसानी
  4181. 3:06:04से आपको जीतने भी नहीं दूंगा। राहुल ने
  4182. 3:06:06रैकेट उठाकर जोश में कहा। तभी युविका बोली
  4183. 3:06:09मुझे तो लगता है कि मैच में मयूर की जरूरत
  4184. 3:06:11भी नहीं है। कुलवंत भैया अकेले ही काफी है
  4185. 3:06:14तुम दोनों को हराने के लिए। युविका कुछ
  4186. 3:06:17ज्यादा ही उत्साह में बोल रही थी। इस पर
  4187. 3:06:19कुलवंत भी उत्साहित होकर बोला। कह तो तुम
  4188. 3:06:23ठीक रही हो। क्यों राहुल? क्यों ना मैं
  4189. 3:06:25अकेले ही तुम दोनों का मुकाबला करूं। नहीं
  4190. 3:06:28भैया अगर आप हार जाएंगे तो कहेंगे कि
  4191. 3:06:30अकेले थे इसीलिए हार गए। राहुल ने साफ
  4192. 3:06:33इंकार कर दिया। लेकिन कुलवंत की बातों में
  4193. 3:06:35उसका घमंड साफ झलक रहा था। तुम्हारे
  4194. 3:06:38कॉन्फिडेंस की दाद देनी पड़ेगी। तुम्हें
  4195. 3:06:40लगता है कि तुम मुझे हरा पाओगे। खैर चलो
  4196. 3:06:43कोई बात नहीं। जब तुम चाहते हो तो मयूर भी
  4197. 3:06:46हमारी तरफ से खेलेगा। आखिरकार शौर्य को
  4198. 3:06:49गेम के लिए तैयार होना ही पड़ा। शिप्रा को
  4199. 3:06:51शौर्य पर तरस आ रहा था। आज उसके भाई-बहन
  4200. 3:06:54जानबूझकर उसे नीचा दिखाने के लिए यह सब कर
  4201. 3:06:57रहे थे। स्थिति ऐसी थी कि वह भी इसमें
  4202. 3:06:59ज्यादा कुछ कर नहीं सकती थी। लेकिन वो देख
  4203. 3:07:01रही थी कि शौर्य बड़े अच्छे से सबको हैंडल
  4204. 3:07:04कर रहा था। थोड़ा ध्यान से कुलवंत भैया
  4205. 3:07:07थोड़ा इन्हें भी खेलने का मौका देना। इतनी
  4206. 3:07:09जल्दी मत हराना कि बेचारे जीजाजी फिर
  4207. 3:07:11दोबारा खेलने की हिम्मत ही ना कर सकें।
  4208. 3:07:14रागिनी शौर्य के लिए नकली सहानुभूति
  4209. 3:07:16दिखाते हुए कुलवंत से बोली इस पर कुलवंत
  4210. 3:07:19कुछ बोलता उससे पहले मयूर बोल पड़ा। तुम
  4211. 3:07:22चिंता मत करो। हमारे भी जीजा जी हैं। इतना
  4212. 3:07:26ध्यान तो हम रखेंगे ही। तभी शौर्य राहुल
  4213. 3:07:28से रैकेट लेते हुए बोला। मैं समझता हूं कि
  4214. 3:07:31आप सब मुझे हराने के लिए बेकरार हैं। पर
  4215. 3:07:34मैं कोशिश करूंगा कि ज्यादा से ज्यादा समय
  4216. 3:07:36तक आपका सामना कर पाऊं। इस पर राहुल ने
  4217. 3:07:39शौर्य को समझाते हुए कहा, गेम के नियम तो
  4218. 3:07:42पता है ना आपको? अगर नहीं भी पता है तो
  4219. 3:07:44टेंशन नहीं है। मैं जैसा कहता हूं आप बस
  4220. 3:07:47फॉलो करना। तुम चिंता मत करो राहुल। मुझे
  4221. 3:07:50गेम का ज्यादा पता तो नहीं है पर मैं
  4222. 3:07:53सीखता बड़ी जल्दी हूं। शौर्य धीरे लेकिन
  4223. 3:07:56दृढ़ स्वर [संगीत] में बोला। तभी कुलवंत
  4224. 3:07:58की आवाज आई तो ठीक है। फिर बेस्ट ऑफ थ्री
  4225. 3:08:01खेलते हैं। जो दो मैच जीत जाएगा वही विनर।
  4226. 3:08:05[संगीत]
  4227. 3:08:05ठीक है भैया गेम शुरू कीजिए। राहुल ने
  4228. 3:08:08पोजीशन लेते हुए कहा। इसके बाद युविका ने
  4229. 3:08:10बीच में आकर टॉस किया और टॉस कुलवंत ने
  4230. 3:08:12जीता। लो जीजा जी टॉस ने भी आपका साथ नहीं
  4231. 3:08:16दिया। युविका शौर्य का मजाक उड़ाते हुए
  4232. 3:08:18बोली तो शौर्य ने युविका को देखते हुए
  4233. 3:08:20फीकी सी हंसी-हंस कर कहा लगता है आपका ये
  4234. 3:08:23सिक्का भी दल बदलू निकला।
  4235. 3:08:27नॉट बैड जीजा जी। आपको तो जवाब देना भी
  4236. 3:08:29आता है। रागिनी शौर्य की प्रशंसा करते हुए
  4237. 3:08:32बोली। शिप्रा ने भी शौर्य का वन लाइनर
  4238. 3:08:35सुना तो उसे भी अच्छा लगा। उसे पता था
  4239. 3:08:37उसके भाई-बहनों के सामने टिकना है तो जवाब
  4240. 3:08:40देते रहना पड़ेगा। नहीं तो वो सामने वाले
  4241. 3:08:42पर हावी हो जाते हैं। सभी खिलाड़ी टेनिस
  4242. 3:08:45कोर्ट में पहुंच चुके थे। सभी कजिंस में
  4243. 3:08:47सबसे बड़ा बड़े पापा का लड़का कुलवंत पूरे
  4244. 3:08:50कॉन्फिडेंस के साथ सर्विस करने के लिए
  4245. 3:08:52तैयार था। राहुल ने शौर्य को थोड़ा आगे
  4246. 3:08:55खड़े होने का इशारा किया और खुद सर्विस
  4247. 3:08:57लेने के लिए पीछे खड़ा हो गया। कुलवंत
  4248. 3:09:00टेनिस बॉल को लिए सर्विस लाइन पर पहुंचा।
  4249. 3:09:03बॉल टॉस करने से पहले उसने मयूर की तरफ
  4250. 3:09:05देखकर कहा तुम सिर्फ दर्शक बनकर मैच देखो।
  4251. 3:09:08मैं अकेले ही दोनों को निपटा दूंगा। ठीक
  4252. 3:09:11है भैया। मयूर मुस्कुराते हुए बोला। उसे
  4253. 3:09:14भी कुलवंत पर बहुत भरोसा था। तैयार हो
  4254. 3:09:17तुम? कुलवंत ने राहुल से पूछा तो राहुल
  4255. 3:09:20पोजीशन लेता हुआ बोला। हां भैया अब शुरू
  4256. 3:09:22कीजिए। कुलवंत ने बॉल टॉस की और एक तेज
  4257. 3:09:25सर्व की। बॉल बिल्कुल सही पॉकेट में टप्पा
  4258. 3:09:27खाकर गिरी और उतनी ही अच्छी तरह राहुल ने
  4259. 3:09:30उसे रिटर्न भी किया। जवाब में कुलवंत ने
  4260. 3:09:32बॉल शौर्य की तरफ मारी। जैसे ही बॉल शौर्य
  4261. 3:09:36की तरफ आई, उसने आव देखा ना ताव, बॉल के
  4262. 3:09:39टप्पे खाने से पहले ही उसने उसे हिट करके
  4263. 3:09:41कुलवंत की साइड भेज दिया। इस पर कुलवंत ने
  4264. 3:09:44बॉल को हाथ से पकड़ लिया और मुस्कुराया।
  4265. 3:09:4815 लव। युविका [संगीत] ने स्कोरिंग का
  4266. 3:09:50जिम्मा संभालते हुए अनाउंस किया। शौर्य
  4267. 3:09:53अनजान बनते हुए राहुल की तरफ देखने लगा तो
  4268. 3:09:55राहुल उसकी नादानी पर मुस्कुराया और बोला,
  4269. 3:09:59"जीजा जी बॉल को पहले टप्पा खाने देना था।
  4270. 3:10:02उसके बाद हिट करना था। ओह अच्छा ठीक है अब
  4271. 3:10:05ध्यान रखूंगा। शौर्य भोलेपन से बोला व
  4272. 3:10:08शिप्रा को लगा कि बेचारे शौर्य को तो
  4273. 3:10:10टेनिस का बेसिक रूल भी नहीं पता तो वो
  4274. 3:10:12कुलवंत के सामने कितनी ही देर टिक पाएगा।
  4275. 3:10:15कुलवंत ने फिर से अपनी पोजीशन ली और
  4276. 3:10:17सर्विस के लिए तैयार हुआ। अब सर्विस शौर्य
  4277. 3:10:20को लेनी थी। राहुल ने शौर्य को कोर्ट के
  4278. 3:10:23बाहर खड़ा होने को कहा ताकि वह आसानी से
  4279. 3:10:25सर्विस उठा पाए। कुलवंत ने बॉल टॉस की और
  4280. 3:10:28हल्के हाथ से उसे हिट किया। बॉल नेट के
  4281. 3:10:31पास ही टप्पा खाकर गिरी। जब तक बॉल शौर्य
  4282. 3:10:33के पास पहुंचती वो दो टप्पे खा चुकी थी।
  4283. 3:10:36शौर्य ने फिर भी बॉल को हिट किया और इसी
  4284. 3:10:38के साथ युविका ने फिर से घोषणा की 30 लव।
  4285. 3:10:44अब क्या हुआ? मैंने तो बॉल को टप्पा खाने
  4286. 3:10:46के बाद मारा था ना। शौर्य ने राहुल से
  4287. 3:10:48पूछा तो राहुल अब थोड़ा खींचते हुए बोला
  4288. 3:10:51अरे जीजा जी बॉल को एक टप्पे के बाद ही
  4289. 3:10:53मारना था। जब आपने बॉल को हिट किया तब तक
  4290. 3:10:56दो टप्पे पड़ चुके थे। ओ अच्छा अच्छा यह
  4291. 3:10:59भी रूल होता है। सॉरी अब मैं ध्यान
  4292. 3:11:00[संगीत] रखूंगा। शौर्य धीरे से बोला, "यह
  4293. 3:11:03अमीरों का खेल है। इस बेचारे ने पहले कभी
  4294. 3:11:06खेला होता, तब तो नियम पता होता। युविका
  4295. 3:11:09की बातों में झलक रहे तंज को सुनकर शिप्रा
  4296. 3:11:11शर्मिंदा सी हो रही थी। खैर, एक बार फिर
  4297. 3:11:14कुलवंत ने सर्विस की। बॉल टप्पा खाकर गोली
  4298. 3:11:17की तरह राहुल के पास से निकल गई। 40 लव।
  4299. 3:11:21युविका ने घोषणा की। राहुल कुछ बोला नहीं।
  4300. 3:11:24अब उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था। उसने फिर
  4301. 3:11:26से पोजीशन ली। सर्विस हुई और टप्पा खाने
  4302. 3:11:29के बाद शौर्य ने बॉल को हिट किया पर बॉल
  4303. 3:11:32दूसरी साइड के बॉक्स के बाहर जा गिरी।
  4304. 3:11:35देखो जीजा जी इस बार आपने बॉल तो सही हिट
  4305. 3:11:37किया पर उसे दूसरी साइड के बॉक्स के अंदर
  4306. 3:11:39टप्पा खाना चाहिए। राहुल ने शौर्य को
  4307. 3:11:42समझाया तो शौर्य भोलेपन से बोला तो अब
  4308. 3:11:46क्या गेम खत्म हो गया? नहीं नहीं गेम खत्म
  4309. 3:11:49नहीं हुआ है। हम बस सेट में एक शून्य से
  4310. 3:11:51पीछे हो गए हैं। राहुल की बातों में
  4311. 3:11:53निराशा साफ झलक रही थी। तो शौर्य ने राहुल
  4312. 3:11:56से पूछा क्या तुम्हें मुझे अपना पार्टनर
  4313. 3:11:58बनाने पर अफसोस हो रहा है? नहीं, बिल्कुल
  4314. 3:12:01नहीं। अफसोस बस इस बात का है कि हम एक भी
  4315. 3:12:04पॉइंट नहीं बना पाए। राहुल की आवाज में
  4316. 3:12:06निराशा साफ थी। चिंता मत करो। अब मैं गेम
  4317. 3:12:10समझ चुका हूं। कहते हुए शौर्य ने राहुल को
  4318. 3:12:12आंख मारी। राहुल शौर्य की इस हरकत का मतलब
  4319. 3:12:15नहीं समझ पाया। तभी युविका जले पर नमक
  4320. 3:12:18लगाते हुए बोली, "क्या जीजा जी, ऐसे तो आप
  4321. 3:12:20अपने साथ राहुल का भी नाम खराब करोगे।"
  4322. 3:12:22शिप्रा को अब वहां बैठना भारी लगने लगा
  4323. 3:12:25था। वो चाह रही थी कि उठकर वहां से चली
  4324. 3:12:27जाए पर वो ऐसा कर नहीं सकती थी। नहीं तो
  4325. 3:12:30सब और भी बातें बनाते। क्या श्रवण कुछ तो
  4326. 3:12:33एफर्ट दिखाओ यार। दोनों मिलकर एक भी पॉइंट
  4327. 3:12:35नहीं बना पाए। अब थोड़ा ध्यान से खेलना।
  4328. 3:12:38ओके। कुलवंत विजय मुस्कान के साथ बोला।
  4329. 3:12:41खैर, एक बार फिर से सबने अपनी पोजीशन ली
  4330. 3:12:43और कुलवंत ने सर्विस की। इस बार शौर्य ने
  4331. 3:12:46बॉल को ऐसा जबरदस्त स्मैश मारा कि बॉल
  4332. 3:12:48कुलवंत के कान में सीटी बजाते हुए पीछे
  4333. 3:12:51निकल गई। यह देखकर राहुल खुशी में उछल
  4334. 3:12:53पड़ा। क्या बात है जीजा जी। वाह! क्या शॉट
  4335. 3:12:57मारा आपने। कहते हुए राहुल ने शौर्य की
  4336. 3:13:00पीठ थपथपाई। युविका को भी अपनी आंखों पर
  4337. 3:13:02विश्वास नहीं हो रहा था। उसने धिझकते हुए
  4338. 3:13:05स्कोर अनाउंस किया। 15 लव। अगली कुछ
  4339. 3:13:08सर्विसेज का सामना करते हुए ऐसा लगा मानो
  4340. 3:13:11शौर्य अब पूरी तरह बदल चुका था। फुर्ती के
  4341. 3:13:13साथ लगातार तीन सर्विस का मुंहतोड़ जवाब
  4342. 3:13:16देने के बाद इस सेट की समाप्ति हुई। और यह
  4343. 3:13:19सेट राहुल और शौर्य के नाम रहा। वन ऑल के
  4344. 3:13:22साथ सेट बराबर है। युविका ने घोषणा की। अब
  4345. 3:13:26शर्मिंदा होने की बारी कुलवंत की थी। उसे
  4346. 3:13:29विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वो यह सेट
  4347. 3:13:31हार चुका है। शिप्रा भी हैरानी से मैच को
  4348. 3:13:33पलटते हुए देख रही थी। किसी ने भी नहीं
  4349. 3:13:36सोचा था कि यूं पासा पलट जाएगा। कुलवंत को
  4350. 3:13:39अब अपनी गलती का एहसास हो रहा था। उसे
  4351. 3:13:42अपने ओवर कॉन्फिडेंस का शिकार होना पड़ा।
  4352. 3:13:44क्या जरूरत थी उसे मयूर को सिर्फ दर्शक
  4353. 3:13:46बनाकर रखने की? उसने मयूर को इशारा किया
  4354. 3:13:49कि वो अपनी पोजीशन ले ले और अचानक वहां का
  4355. 3:13:51माहौल एकदम शांत हो गया। क्या बात है जीजा
  4356. 3:13:55जी आपने तो कमाल कर दिया। आपने जब कहा था
  4357. 3:13:58कि आप बहुत जल्दी सीखते हैं तो मुझे
  4358. 3:14:00विश्वास नहीं हुआ था। राहुल शौर्य से बोला
  4359. 3:14:03खेल एक बार फिर शुरू हुआ और चीते की
  4360. 3:14:05रफ्तार के साथ एक बार फिर शौर्य ने विरोधी
  4361. 3:14:07टीम को कोई मौका नहीं दिया। यह सेट भी
  4362. 3:14:10शौर्य और राहुल ने जीत लिया था। जिसमें
  4363. 3:14:12लगभग सारा योगदान शौर्य का ही रहा। अब
  4364. 3:14:16राहुल और शौर्य दो एक से आगे थे। यहां
  4365. 3:14:19राहुल खुश था और वहां युविका और रागिनी की
  4366. 3:14:21आवाज तक नहीं निकल रही थी। कुलवंत का
  4367. 3:14:23चेहरा भी देखने लायक था। टमाटर सा एकदम
  4368. 3:14:26लाल। उसे समझ नहीं आ रहा था कि राहुल की
  4369. 3:14:29टीम का कमजोर खिलाड़ी अचानक इतना स्ट्रांग
  4370. 3:14:31कैसे हो गया। उसने मयूर को अपने पास
  4371. 3:14:34बुलाया और बोला सुनो हमें अपनी स्ट्रेटजी
  4372. 3:14:37चेंज करनी होगी। हां बताओ भैया क्या करना
  4373. 3:14:40है? मयूर ने धीमे स्वर में कहा। इस पर
  4374. 3:14:43कुलवंत मयूर के कान के पास आकर धीरे से
  4375. 3:14:45बोला, अब हम जो भी शॉट्स करेंगे वो सब
  4376. 3:14:48राहुल की तरफ होंगे। लगता है इस भिखारी को
  4377. 3:14:51हमने कुछ ज्यादा ही अंडरएस्टीमेट कर लिया
  4378. 3:14:53था। इसके बाद अगला सेट शुरू हुआ और इस बार
  4379. 3:14:56कुलवंत की स्ट्रेटजी काम कर गई। उसने यह
  4380. 3:14:58सेट 40-15 से जीत लिया और तभी युविका की
  4381. 3:15:02आवाज फिर से गूंजी। क्या हुआ? इतनी जल्दी
  4382. 3:15:05हवा निकल गई। मैं तो समझी थी कि कुछ जादू
  4383. 3:15:08करोगे। लेकिन सेट दोस्त से बराबर हो गए
  4384. 3:15:11हैं। [संगीत]
  4385. 3:15:12अरे युविका दी आप तो हमें पहले इस लायक भी
  4386. 3:15:15नहीं समझ रही थी कि हम एक पॉइंट भी ले
  4387. 3:15:16सकेंगे और अभी भी हम बराबरी पर हैं। मैच
  4388. 3:15:20हारे नहीं है। राहुल ने मुंहत जवाब दिया।
  4389. 3:15:23शौर्य कुलवंत की स्ट्रेटजी समझ गया था। वो
  4390. 3:15:26जान गया था कि कुलवंत और मयूर जानबूझकर
  4391. 3:15:28राहुल को टारगेट कर रहे हैं। वो राहुल के
  4392. 3:15:31नजदीक गया और बोला एक बात कहूं मानोगे?
  4393. 3:15:34हां बोलिए ना क्या बात है? राहुल धीमे
  4394. 3:15:38स्वर में बोला। इस पर शौर्य ने कहा तुम
  4395. 3:15:41नेट के पास ही रहना और जिन्हें तुम आराम
  4396. 3:15:43से हिट कर सको वही बॉल खेलना बाकी सब छोड़
  4397. 3:15:46देना उन्हें मैं देख लूंगा। यह समझ लो
  4398. 3:15:50तुम्हें भी अब वही करना है जो शुरुआत में
  4399. 3:15:52मयूर कर रहा था। शौर्य की बात सुनकर राहुल
  4400. 3:15:55को थोड़ा बुरा लगा कि जिसे अभी गेम खेलना
  4401. 3:15:57तक नहीं आ रहा था वो अब उसे ही गेम सिखा
  4402. 3:15:59रहा है। लेकिन उसे लगा कि शायद शौर्य अब
  4403. 3:16:02ओवर कॉन्फिडेंट हो रहा है। लेकिन फिर उसने
  4404. 3:16:05सोचा एक गेम में यह बात मानकर देखता हूं।
  4405. 3:16:07इनकी भी गलतफहमी दूर हो जाएगी। वो बोला
  4406. 3:16:11अगर आपको लगता है कि आप हैंडल कर लोगे तो
  4407. 3:16:13ठीक है। एक गेम में मैं आपके हिसाब से
  4408. 3:16:15चलता हूं। [संगीत] नेक्स्ट राउंड स्टार्ट
  4409. 3:16:18हुआ और बिल्कुल वैसा ही हुआ जैसा शौर्य ने
  4410. 3:16:20प्लान किया था। कुलवंत की टीम को एक भी
  4411. 3:16:23पॉइंट बनाने का मौका नहीं मिला। कुलवंत की
  4412. 3:16:25सारी स्ट्रेटजी फेल हो गई। राहुल कुलवंत
  4413. 3:16:29के सारे शॉट्स छोड़ता रहा। वो ऐसे हिट को
  4414. 3:16:31भी छोड़ रहा था जिसे वह आसानी से पिक कर
  4415. 3:16:33सकता था। वो चाहता था कि शौर्य को एहसास
  4416. 3:16:36हो कि उसने राहुल को बॉल छोड़ने के लिए
  4417. 3:16:38कहकर गलत निर्णय लिया था। पर जब कुलवंत
  4418. 3:16:41गेम हार गया तो राहुल को शौर्य के
  4419. 3:16:43कॉन्फिडेंस पर गर्व हुआ। उसके दिल में
  4420. 3:16:45शौर्य के लिए जो गलत भावना जागृत हुई थी
  4421. 3:16:48वो भी दूर हो गई। अब शौर्य में उसे अपना
  4422. 3:16:50हीरो नजर आने लगा था। वैसे भी उसके दिल
  4423. 3:16:53में शौर्य के लिए रिस्पेक्ट शॉपिंग सेंटर
  4424. 3:16:55वाले दिन से ही थी। युविका और रागिनी की
  4425. 3:16:57बोलती बंद हो चुकी थी और शिप्रा उसे तो
  4426. 3:17:01विश्वास ही नहीं हो रहा था कि कुलवंत
  4427. 3:17:03शौर्य से गेम में पीछे चल रहा है। आखिरकार
  4428. 3:17:06कुलवंत परिवार का सबसे अच्छा खिलाड़ी था।
  4429. 3:17:08कुलवंत का चेहरा गुस्से में लाल हो रहा
  4430. 3:17:10था। वो बहुत कोशिश कर रहा था पर कुछ हो
  4431. 3:17:13नहीं पा रहा था। युविका और रागिनी दोनों
  4432. 3:17:15उसका हौसला बढ़ा रही थी। ऐसा हुआ कि
  4433. 3:17:18कुलवंत अगला गेम भी हार गया। इस तरह चार
  4434. 3:17:21दो से यह सेट शौर्य और राहुल जीत गए और
  4435. 3:17:23उन्होंने पहला मैच अपने नाम कर लिया।
  4436. 3:17:26राहुल खुश होकर बोला क्या हुआ भैया आज
  4437. 3:17:29आपका जादू चल नहीं रहा है। कहां तो आप
  4438. 3:17:31मुझे एक गेम नहीं जीतने देने वाले थे और
  4439. 3:17:34यहां पूरा सेट हार गए।
  4440. 3:17:36किस्मत के धनी हो इसलिए सेट जीत गए। पर हर
  4441. 3:17:39बार काठ की हांडी नहीं चढ़ती। अगले सेट
  4442. 3:17:41में तुम्हें पता चल जाएगा। अभी भी कुलवंत
  4443. 3:17:44की हेकड़ी कम होने का नाम नहीं ले रही थी।
  4444. 3:17:46शिप्रा को शौर्य और राहुल से कुछ खास
  4445. 3:17:48उम्मीद नहीं थी। लेकिन गेम पलटते देखकर अब
  4446. 3:17:51उसका भी गेम में इंटरेस्ट जाग गया। वो
  4447. 3:17:53शौर्य का खेल देखकर इंप्रेस थी। शौर्य की
  4448. 3:17:56फुर्ती तो देखते ही बनती थी और सबसे बड़ी
  4449. 3:17:58बात वो जिस भी शॉट को मार रहा था वो दूसरे
  4450. 3:18:01पाले में बेहद एक्यूरेट टप्पा खा रहा था।
  4451. 3:18:03उसके खेल को देखकर लग ही नहीं रहा था कि
  4452. 3:18:06वो कोई अनाड़ी खिलाड़ी होगा। पर ये कैसे
  4453. 3:18:08मुमकिन हो सकता है। टेनिस वैसे भी खर्चीला
  4454. 3:18:11गेम होता है और श्रवण जैसे गरीब के बस का
  4455. 3:18:13तो नहीं लगता कि उसने कभी यह खेल खेला भी
  4456. 3:18:16होगा। फिर वो इस खेल में इतना अच्छा कैसे
  4457. 3:18:18हो सकता है? जब शिप्रा को कुछ समझ नहीं
  4458. 3:18:21आया तो उसने ज्यादा सोचना बंद कर दिया और
  4459. 3:18:23गेम को एंजॉय करने लगी। दूसरा मैच भी शुरू
  4460. 3:18:26हो गया। शौर्य ने गेम की शुरुआत में ही
  4461. 3:18:29अपना दबदबा बना लिया था। कुलवंत और मयूर
  4462. 3:18:32अब ज्यादा एफर्ट लगा रहे थे। जिसकी वजह से
  4463. 3:18:34वे और भी गलतियां करने लगे थे। वहां पूरी
  4464. 3:18:37तरह शांति छाई हुई थी। आखिरकार शौर्य ने
  4465. 3:18:41फाइनल शॉट मारा और कुलवंत उसे मिस कर गया।
  4466. 3:18:44इसके साथ [संगीत] ही यह सेट शौर्य और
  4467. 3:18:46राहुल के नाम हो गया। इस तरह यह मैच दो
  4468. 3:18:49शून्य से शौर्य और राहुल जीत गए। मैच
  4469. 3:18:53जीतते ही राहुल ने हुंकार भरी। विनर विनर
  4470. 3:18:56चिकन डिनर। कुलवंत और मयूर का चेहरा उतर
  4471. 3:18:59गया था। कुलवंत को यह हजम ही नहीं हो रहा
  4472. 3:19:02था कि वो हार गया था। क्या हुआ युविका दी?
  4473. 3:19:05अब कुछ बोलोगी नहीं। [संगीत] राहुल युविका
  4474. 3:19:08को छेड़ता हुआ बोला। हां हां जानती हूं
  4475. 3:19:11तुम जीत गए हो लेकिन ज्यादा खुश मत हो। आज
  4476. 3:19:13तुम्हारा दिन बहुत अच्छा था [संगीत] या यह
  4477. 3:19:15कहूं कि हमारे प्यारे जीजा जी की किस्मत
  4478. 3:19:17अच्छी थी जो वो जीत गए। मना लो खुशी।
  4479. 3:19:21[संगीत]
  4480. 3:19:21युविका मुंह बिगाड़ते हुए बोली। तभी
  4481. 3:19:23कुलवंत ने खुद को शांत किया और शौर्य के
  4482. 3:19:25पास आकर बोला
  4483. 3:19:27हमने तुम्हें अंडरएस्टिमेट किया श्रवण।
  4484. 3:19:29तुमने अच्छा खेल दिखाया। मुझे लगता है कि
  4485. 3:19:32तुम इस खेल के माहिर हो। तुम सिर्फ हमारे
  4486. 3:19:34सामने यह दिखावा कर रहे थे कि तुम्हें यह
  4487. 3:19:36खेल नहीं आता।
  4488. 3:19:38ऐसी कोई बात नहीं है। मुझ में एक खूबी है
  4489. 3:19:40कि कोई भी चीज मैं बड़ी [संगीत] जल्दी सीख
  4490. 3:19:42जाता हूं। शौर्य नम्र बनने की कोशिश करता
  4491. 3:19:45हुआ बोला, वैसे मुझे ऐसा लगता तो नहीं पर
  4492. 3:19:48तुम कहते हो तो मैं मान लेता हूं। [संगीत]
  4493. 3:19:50तुम्हें जीत की बधाई। उम्मीद करता हूं कि
  4494. 3:19:53फिर कभी हमारा वन टू वन मुकाबला होगा। फिर
  4495. 3:19:55देखेंगे कि कौन किसको हराता है। कुलवंत की
  4496. 3:19:58बातों से लग रहा था कि उसे अपनी हार हजम
  4497. 3:20:00करना कितना मुश्किल हो रहा है। अब शायद
  4498. 3:20:03किसी दिन वन टू वन मुकाबले में वह अपनी
  4499. 3:20:05हसरत पूरी कर पाए। मुझे इंतजार रहेगा उस
  4500. 3:20:08दिन का। शौर्य मुस्कुराते हुए बोला। इसके
  4501. 3:20:11बाद कुलवंत शौर्य से हाथ मिलाकर वहां से
  4502. 3:20:13चला गया। रागिनी कुछ बोल नहीं रही थी पर
  4503. 3:20:16वो शौर्य के खेल से बहुत इंप्रेस नजर आ
  4504. 3:20:18रही थी। टेनिस रागिनी का फेवरेट गेम था।
  4505. 3:20:21वो स्टेट सिलेक्शन के कैंप में भाग लेने
  4506. 3:20:23वाली थी। जो शौर्य अभी थोड़ी देर पहले तक
  4507. 3:20:26उसके लिए मजाक का पात्र था। अचानक ही
  4508. 3:20:28रागिनी के दिल में उसके लिए रिस्पेक्ट आ
  4509. 3:20:30गई। वो शौर्य के पास गई और बोली बधाई हो
  4510. 3:20:34जीजा जी। आपने हमें गलत साबित कर दिया।
  4511. 3:20:37मानना पड़ेगा आपने जबरदस्त खेल दिखाया। आज
  4512. 3:20:40तक कुलवंत भैया ही हमारे लिए इस खेल के
  4513. 3:20:42हीरो थे। लेकिन आज आपने भी हमारे दिल में
  4514. 3:20:44एक स्पेशल जगह बना ली। [संगीत]
  4515. 3:20:46शौर्य महसूस कर रहा था कि रागिनी जो भी कह
  4516. 3:20:49रही है वो दिल से कह रही है। रागिनी की
  4517. 3:20:51बात सुनकर युविका के दिल में तो आग ही लग
  4518. 3:20:53गई। उसे रागिनी का यूं शौर्य की तारीफ
  4519. 3:20:56करना अच्छा नहीं लगा। वो भी पैर पटकती हुई
  4520. 3:20:58वहां से चली गई। कोई और भी था जिसके दिल
  4521. 3:21:01में शौर्य के लिए धीरे-धीरे अपनेपन की
  4522. 3:21:04फीलिंग जन्म ले रही थी। शौर्य के खेल ने
  4523. 3:21:07सबको चौंका कर रख दिया था। लेकिन सबसे
  4524. 3:21:09ज्यादा हैरान अगर कोई था तो वह था राहुल।
  4525. 3:21:12उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि शौर्य
  4526. 3:21:14ने पहले कभी टेनिस नहीं खेला होगा। ऐसा
  4527. 3:21:17कैसे हो सकता है कि कोई पहली बार रैकेट
  4528. 3:21:19पकड़े और इतना अच्छा खेल दिखाए। राहुल से
  4529. 3:21:22रहा नहीं गया तो उसने शौर्य से पूछ ही
  4530. 3:21:24लिया। सच बताओ जीजा जी आपने सच में पहले
  4531. 3:21:27कभी टेनिस नहीं खेला था। शौर्य राहुल की
  4532. 3:21:29बात को टालने की कोशिश करते हुए बोला तुम
  4533. 3:21:32[संगीत] ऐसा क्यों पूछ रहे हो? और वैसे भी
  4534. 3:21:34इससे क्या ही फर्क पड़ता है? आज का मैच तो
  4535. 3:21:36हम जीत गए ना तो उसका जश्न मनाओ। वो तो
  4536. 3:21:39ठीक है पर मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है
  4537. 3:21:41कि कोई पहली बार कोर्ट पर उतरे और ऐसा खेल
  4538. 3:21:44दिखाए। यह तो वैसा ही है जैसे कोई पहली
  4539. 3:21:46बार गाड़ी चलाए और सीधे एफ1 रेस जीत जाए।
  4540. 3:21:49सच-सच बताओ आपने पहले टेनिस खेला है या
  4541. 3:21:52नहीं? राहुल ने जिद करते हुए पूछा। अब तक
  4542. 3:21:55युविका, कुलवंत और मयूर वहां से जा चुके
  4543. 3:21:58थे। लेकिन रागिनी वहीं रुकी थी। वो भी
  4544. 3:22:00शौर्य के खेल का सच जानना चाहती थी
  4545. 3:22:02क्योंकि अब वो शौर्य से काफी प्रभावित हो
  4546. 3:22:04चुकी थी। शिप्रा बेंच पर बैठे मोबाइल में
  4547. 3:22:07बिजी होने का दिखावा कर रही थी जबकि उसका
  4548. 3:22:09भी ध्यान राहुल के सवाल की तरफ ही था।
  4549. 3:22:12शौर्य को जब लगा कि राहुल इतनी आसानी से
  4550. 3:22:14उसका पीछा नहीं छोड़ने वाला है तो उसने
  4551. 3:22:17कहा हां बाबा खेला है। मैं अपने कॉलेज
  4552. 3:22:20[संगीत] की टेनिस टीम में था। कॉलेज राहुल
  4553. 3:22:24को आश्चर्य हुआ। आप पढ़े लिखे हो। कहते
  4554. 3:22:27हुए राहुल ने सिर पकड़ लिया। तभी रागिनी
  4555. 3:22:29बोल पड़ी अगर आप पढ़े लिखे हैं तो जिस
  4556. 3:22:32स्थिति में आप थे वो कैसे हो गया? आई मीन
  4557. 3:22:35आप ऐसा जीवन क्यों जी रहे थे? अरे भाई
  4558. 3:22:37पढ़ा लिखा होने का यह मतलब तो नहीं कि
  4559. 3:22:39आदमी अमीर ही होगा। 6 महीने पहले मेरी एक
  4560. 3:22:42जान पर बनाई थी। यह तो गनीमत है कि मैं
  4561. 3:22:45जिंदा बच गया। वरना हालत तो ऐसी थी कि मैं
  4562. 3:22:47कुछ भी करने की स्थिति में नहीं था।
  4563. 3:22:49संपत्ति के चक्कर में जब रिश्तेदार दुश्मन
  4564. 3:22:51बन जाते हैं तो जीवन में प्रलय आ जाती है।
  4565. 3:22:54उस समय मंदिर ही मेरा सहारा बना। वहां
  4566. 3:22:57रहते हुए जिंदगी के कुछ ऐसे तजुर्बे हासिल
  4567. 3:23:00हुए कि बाकी इच्छाएं समाप्त हो गई। शौर्य
  4568. 3:23:03ने आधी सच्चाई बताई पर सब कुछ चुप कराने
  4569. 3:23:05के लिए वह काफी थी। शिप्रा को यह जानकर
  4570. 3:23:08खुशी हुई कि शौर्य पढ़ा लिखा है। राहुल को
  4571. 3:23:10भी यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि शौर्य के
  4572. 3:23:13बारे में उसकी जो धारणा बनी थी वो गलत
  4573. 3:23:15निकली। तो फिर आपने पहले क्यों नहीं बताया
  4574. 3:23:18कि आप पढ़े लिखे हैं? राहुल के सवाल से
  4575. 3:23:20शौर्य चौंक गया और बोला अरे यह क्या बात
  4576. 3:23:23हुई कि मैंने पहले क्यों नहीं बताया? किसी
  4577. 3:23:25ने मुझसे कुछ पूछा ही कहां था? तुम बताओ
  4578. 3:23:27मुझे क्या करना चाहिए था? सबके पास जाकर
  4579. 3:23:30बोलता कि सुनिए मैं पढ़ा लिखा हूं। कहते
  4580. 3:23:33हुए शौर्य ने तुरंत खुद को संभाला और अपनी
  4581. 3:23:36दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए बोला खैर मुझे पता
  4582. 3:23:39है कि मैं किस परिस्थिति के कारण यहां
  4583. 3:23:41हूं। [संगीत] कुछ समय की बात है। जब
  4584. 3:23:43सिचुएशन नॉर्मल हो जाएगी तो मेरी कोई
  4585. 3:23:45जरूरत नहीं रह जाएगी यहां पर। शौर्य की
  4586. 3:23:48बात सुनकर सभी खामोश हो गए। पहले से
  4587. 3:23:50इम्प्रेस्ड राहुल ने मन ही मन कहा। यह
  4588. 3:23:53अपनी सोच को लेकर कितने क्लियर हैं। इधर
  4589. 3:23:55शिप्रा को भी शौर्य की बात सुनकर अच्छा
  4590. 3:23:57लगा कि वो कितना प्रैक्टिकल है। पहले
  4591. 3:23:59शिप्रा जिस अवसाद में रहती थी कि उसके साथ
  4592. 3:24:01यह क्या हो गया है। अब वो धीरे-धीरे दूर
  4593. 3:24:04हो रहा था। शौर्य की बातों से उसे इतना तो
  4594. 3:24:06समझ आ गया कि वो उससे कोई उम्मीद नहीं रख
  4595. 3:24:08रहा है। वो शौर्य ही था जिसकी वजह से
  4596. 3:24:11शिप्रा अपने परिवार वालों के सामने मजबूती
  4597. 3:24:13से अपनी बात रख पाई थी। फिर चाहे वह तलाक
  4598. 3:24:16हो या दूसरी शादी। वो फिर से किसी पचड़े
  4599. 3:24:19में नहीं पड़ना चाहती थी और परिवार वालों
  4600. 3:24:21को दिखाने के लिए अपनी ढाल के रूप में वो
  4601. 3:24:24शौर्य को यूज कर सकती थी। पहले उसे डर था
  4602. 3:24:26कि शौर्य पता नहीं अपनी बात पर खड़ा रह
  4603. 3:24:28पाएगा या नहीं। पर आज उसकी बातें सुनकर
  4604. 3:24:31उसे इतना तो अंदाजा हो ही गया था कि वह
  4605. 3:24:33बाकियों की तरह मतलबी नहीं है। उसके दिल
  4606. 3:24:36में दूसरों के लिए दया भी है और सम्मान
  4607. 3:24:38भी। इसीलिए तो खुद गरीब होते हुए भी किसी
  4608. 3:24:41और को प्रॉब्लम में देखकर अपनी कीमती
  4609. 3:24:43अंगूठी गिरवी रखने में वो एक बार भी नहीं
  4610. 3:24:45हिचका। इन्हीं सब ख्यालों के साथ शिप्रा
  4611. 3:24:48अब काफी हल्का महसूस कर रही थी। अगर
  4612. 3:24:51तुम्हारे सवाल खत्म हो गए हो तो अब मैं
  4613. 3:24:53अपने क्वार्टर में जाऊं। शौर्य ने
  4614. 3:24:55मुस्कुराते हुए राहुल से कहा। तभी रागिनी
  4615. 3:24:58ने बड़े भोलेपन से सवाल किया। राहुल मुझे
  4616. 3:25:01एक बात समझ नहीं आई। जब श्रवण हमारे जीजा
  4617. 3:25:03जी हैं तो फिर इन्हें सर्वेंट क्वार्टर
  4618. 3:25:05में क्यों ठहराया गया है? यह घर में क्यों
  4619. 3:25:07नहीं रहते? इस सवाल का जवाब राहुल के पास
  4620. 3:25:10नहीं था। वो शिप्रा की ओर देखने लगा कि
  4621. 3:25:13शायद वह रागिनी को जवाब दे पाएगी। लेकिन
  4622. 3:25:15शिप्रा की स्थिति भी अजीब थी। वो खुद इस
  4623. 3:25:18बात को जस्टिफाई नहीं कर सकती थी। तभी
  4624. 3:25:20शौर्य बोल उठा आप अच्छा मजाक कर लेती हैं
  4625. 3:25:23रागिनी। आपको सब पता है फिर भी ऐसा सवाल
  4626. 3:25:26पूछ रही हैं। [संगीत] मुझे अपनी हैसियत का
  4627. 3:25:28पता है और मैं उसमें ही ठीक हूं। अभी तो
  4628. 3:25:30मैंने कहा कि मैं यहां सिर्फ हालातों के
  4629. 3:25:32कारण हूं और हालात हमेशा एक जैसे नहीं
  4630. 3:25:35रहते। वो बदलेंगे और मैं चला जाऊंगा। तो
  4631. 3:25:38फिर ऐसा सवाल पूछकर आप राहुल को मुश्किल
  4632. 3:25:40में क्यों डाल रही हैं? ऐसा कहकर शौर्य ने
  4633. 3:25:43राहुल को ऑकवर्डनेस से बाहर निकाल दिया।
  4634. 3:25:45शौर्य का जवाब सुनकर राहुल ने राहत की
  4635. 3:25:47सांस ली। शिप्रा भी उसकी बुद्धिमानी की
  4636. 3:25:50घायल होती जा रही थी और हो भी क्यों ना?
  4637. 3:25:53एक वही तो है जो हर मुश्किल वक्त में ढाल
  4638. 3:25:55बनकर सामने आ जाता है। तभी रागिनी ने
  4639. 3:25:58शौर्य की बात का अर्थ निकालते हुए पूछा।
  4640. 3:26:01[संगीत] इसका मतलब आप जो मेरे जीजाजी हैं,
  4641. 3:26:03वह टेंपरेरी बेसिस पर हैं। हां। इसीलिए आप
  4642. 3:26:07मुझे जीजाजी ना कहें, तो अच्छा होगा। आप
  4643. 3:26:09मुझे मेरे नाम से बुला सकती हैं। श्रवण
  4644. 3:26:12शौर्य ने स्पष्ट रूप से जवाब दिया। जितनी
  4645. 3:26:15देर तक रागिनी शौर्य से बात करती उतना ही
  4646. 3:26:18वह उससे प्रभावित होती जा रही थी। उसे अब
  4647. 3:26:20अपने उस व्यवहार के लिए अफसोस हो रहा था
  4648. 3:26:22जो उसने शुरू में जानबूझकर शौर्य को
  4649. 3:26:25डीमोरलाइज करने के लिए किया था। खैर, अगली
  4650. 3:26:27सुबह शौर्य जल्दी नहा धोकर तैयार हो गया।
  4651. 3:26:30उसने खुद को एक बार शीशे में देखा तो उसका
  4652. 3:26:32हाथ खुद-ब खुद अपनी बढ़ी हुई दाढ़ी पर चला
  4653. 3:26:34गया। अब उसे अपनी दाढ़ी अजीब लगने लगी थी
  4654. 3:26:37क्योंकि वो फिर से अपनी सामान्य जिंदगी
  4655. 3:26:39में लौट रहा था और इसीलिए अब उसे अपना रूप
  4656. 3:26:42बदलना था। आज उसे अपने दादाजी से मिलने
  4657. 3:26:44जाना था। वह सोच रहा था कि पता नहीं यह
  4658. 3:26:47मुलाकात कैसी होने वाली है। शौर्य के दादा
  4659. 3:26:50चंद्रभान राठौड़ राजगढ़ के राजघराने से
  4660. 3:26:54हैं। अब उनकी राजशाही तो चली गई है पर
  4661. 3:26:56राजगढ़ के लोग अभी भी उनको राजा मानते हैं
  4662. 3:26:59और उन्हें राजा साहब कह कर ही बुलाते हैं।
  4663. 3:27:02राजा साहब के तीन बच्चे हैं। वीरभद्र,
  4664. 3:27:05सूर्यभान [संगीत] और बेटी स्वर्णलता
  4665. 3:27:06राठौड़। शौर्य के डैड सूर्यभान की कहानी
  4666. 3:27:09भी बेहद दिलचस्प है। दरअसल राजा साहब
  4667. 3:27:12सूर्यभान की शादी अपने एक दोस्त की बेटी
  4668. 3:27:14के साथ करना चाहते थे। पर सूर्यभान अपने
  4669. 3:27:16कॉलेज की दोस्त कल्पना के प्रेम में थे।
  4670. 3:27:19जब सूर्यभान ने अपने पिताजी के सामने अपने
  4671. 3:27:21प्यार की बात जाहिर की तो चंद्रभान जी
  4672. 3:27:23तमतमा उठे। वो अपने दोस्त को जुबान दे
  4673. 3:27:26चुके थे और प्यार में पड़ा उनका बेटा अपनी
  4674. 3:27:28मनमानी करके उनके रुतबे को ठेस पहुंचा रहा
  4675. 3:27:31था। उन्होंने अपने बेटे की एक ना सुनी और
  4676. 3:27:33उसके सामने एक शर्त रख दी कि वह प्यार और
  4677. 3:27:35पिता के बीच किसी एक को चुन ले। राजा साहब
  4678. 3:27:39के अहम को जरूर बहुत ठेस पहुंची होगी जब
  4679. 3:27:41[संगीत] उस मुश्किल वक्त में सूर्यभान ने
  4680. 3:27:43परिवार की जगह अपने प्यार यानी कल्पना को
  4681. 3:27:46चुना। कल्पना से शादी के बाद सूर्यभान का
  4682. 3:27:49राजगढ़ में रहना मुश्किल था। अब परिवार को
  4683. 3:27:51उनसे कोई मतलब नहीं था। इसीलिए सूर्यभान
  4684. 3:27:54कल्पना के साथ भारत छोड़कर इंग्लैंड चले
  4685. 3:27:56गए। इंग्लैंड में उन्होंने नए सिरे से
  4686. 3:27:59अपने जीवन की शुरुआत की। उन्होंने अलग-अलग
  4687. 3:28:01कंपनी में जॉब की। फिर कुछ समय बाद ही
  4688. 3:28:04उन्होंने अपना स्टार्टअप शुरू किया।
  4689. 3:28:06राजघराने का खून होने के कारण किसी के
  4690. 3:28:08अंडर रहकर काम करना उनके बस का नहीं था।
  4691. 3:28:11स्टार्टअप में उन्हें जल्दी ही सफलता मिली
  4692. 3:28:13और उसके बाद वह आगे बढ़ते ही गए। सूर्य
  4693. 3:28:16भांजी के दो बच्चे हुए। शौर्य और नीली
  4694. 3:28:18मां। वक्त अपना परवान चढ़ता रहा। शौर्य ने
  4695. 3:28:21भी अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद [संगीत]
  4696. 3:28:23पिताजी के बिजनेस को ना जॉइ करके अपना ही
  4697. 3:28:26स्टार्टअप शुरू किया। बिग बुल जल्दी ही
  4698. 3:28:29बिगbul इंग्लैंड में एक बड़ा नाम हो गया।
  4699. 3:28:31सारे बड़े-बड़े ब्रांड का एक स्टोर में एक
  4700. 3:28:34साथ होना उसकी सफलता का एक बहुत बड़ा कारण
  4701. 3:28:36था। आज के समय अगर बिगbul में किसी फैशन
  4702. 3:28:39ब्रांड को जगह मिल जाती है तो मानो उसे एक
  4703. 3:28:42बड़ा ब्रांड बनने का लाइसेंस मिल जाता है।
  4704. 3:28:45इंग्लैंड में बिग बुल की सफलता देखकर ही
  4705. 3:28:47सूर्यभान जी ने शौर्य को इंडिया में भी
  4706. 3:28:49[संगीत] इसकी फ्रेंचाइजी खोलने का सुझाव
  4707. 3:28:51दिया। और अपने शहर राजगढ़ से इसकी शुरुआत
  4708. 3:28:54करनी चाही। यही वह समय था जब राजगढ़ में
  4709. 3:28:57शौर्य की दादी का निधन हो गया। मरते समय
  4710. 3:29:00सूर्यभान की मां की इच्छा थी कि सूर्यभान
  4711. 3:29:02ही उसकी चिता को अग्नि दे। अपनी पत्नी की
  4712. 3:29:05इच्छा को ध्यान में रखकर चंद्रभान जी ने
  4713. 3:29:07सूर्यभान के एक दोस्त से कहकर सूर्यभान तक
  4714. 3:29:10उसकी मां की मौत की खबर पहुंचाई और उनकी
  4715. 3:29:12इच्छा के बारे में भी बताया। लगभग 25 वर्ष
  4716. 3:29:15के बाद सूर्यभान अपनी बेटी नीलिमा के साथ
  4717. 3:29:18अपने घर वापस आया था। अपनी मां के श्राद्ध
  4718. 3:29:22कर्म तक वो हवेली में ही रुका। लेकिन इस
  4719. 3:29:24दौरान भी राजा साहब ने सूर्यभान से कोई
  4720. 3:29:27बात नहीं की। फिर जब उनका सामना अपनी पोती
  4721. 3:29:30से हुआ तो वह उसका मोह त्याग नहीं सके।
  4722. 3:29:33नीलिमा थी ही इतनी प्यारी। [संगीत] नीलिमा
  4723. 3:29:35से मिलने से पहले चंद्रभान जी को यह भी
  4724. 3:29:37नहीं पता था कि सूर्यभान के कितने बच्चे
  4725. 3:29:39हैं। जब उन्हें पता चला कि सूर्यभान के
  4726. 3:29:42साथ उनकी पोती भी आई है तो वह उससे मिलने
  4727. 3:29:45को उत्सुक हो गए। शुरुआत में नीलिमा उनके
  4728. 3:29:48सामने पड़ते ही डर के मारे छुप जाती थी।
  4729. 3:29:52उस समय कांता प्रसाद ने नीलिमा और उसके
  4730. 3:29:54दादाजी के बीच सेतु का काम किया। फिर तो
  4731. 3:29:57दादा पोती के बीच जो प्यार पनपा उसका कहना
  4732. 3:30:00ही क्या? चंद्रभान जी सूर्यभान से तो बात
  4733. 3:30:03नहीं करते थे पर नीलिमा से बात किए बिना
  4734. 3:30:06रह भी नहीं पाते थे। नीलिमा से ही उन्हें
  4735. 3:30:08पता चला कि उसका एक भाई भी है। जब
  4736. 3:30:11चंद्रभान जी को शौर्य के बारे में पता चला
  4737. 3:30:13तो उन्होंने नीलिमा से पूछा
  4738. 3:30:16शौर्य क्यों नहीं आया? तो नीलिमा ने बताया
  4739. 3:30:20कितना डर-डर के तो मैं ही आई थी कि पता
  4740. 3:30:22नहीं आप कितना गुस्सा करेंगे। उस पर अगर
  4741. 3:30:24शौर्य भी आता तो पता नहीं कि आप क्या कर
  4742. 3:30:27जाते। हमने सुना था कि आप बहुत गुस्से
  4743. 3:30:29वाले हैं। इसीलिए मैं अकेली आई क्योंकि
  4744. 3:30:32आपके बारे में यह भी सुना था कि आप
  4745. 3:30:33लड़कियों पर गुस्सा नहीं करते। इस पर
  4746. 3:30:36चंद्रभान जी बोले मेरी नाराजगी सूर्यभान
  4747. 3:30:40से है। अपने पोते-पोतियों से नहीं। इस तरह
  4748. 3:30:43जब तक नीलिमा राजगढ़ में रही चंद्रभान जी
  4749. 3:30:46का लगाव उससे बढ़ता ही रहा। सूर्यभान
  4750. 3:30:49राठौड़ और नीलिमा के वापस चले जाने के बाद
  4751. 3:30:51चंद्रभान जी नीलिमा को मिस करने लगे। अब
  4752. 3:30:55उनके मन में अपने पोते से भी मिलने की
  4753. 3:30:57इच्छा प्रबल होने लगी थी। एक दिन जब वह
  4754. 3:31:00बीमार होकर हॉस्पिटल में भर्ती हुए तो
  4755. 3:31:02उन्होंने बेटे सूर्यभान को फोन किया और
  4756. 3:31:04शौर्य को उनके पास भेजने को कहा। वो चाहते
  4757. 3:31:08थे कि जीवन रहते ही वह अपने पोते को उसका
  4758. 3:31:10हक दे दें। नहीं तो वीरभद्र और स्वर्णलता
  4759. 3:31:13उसके हाथ कुछ भी नहीं लगने देंगे। इसी वजह
  4760. 3:31:16से शौर्य भारत आया था। जिसके बाद उसका
  4761. 3:31:19एक्सीडेंट हो गया। या यूं कहूं कि किसी ने
  4762. 3:31:21उसे जान से मारने की कोशिश की थी। कुछ ही
  4763. 3:31:24पलों में ये सारी बातें शौर्य के दिमाग
  4764. 3:31:26में किसी चलचित्र की भांति घूम गई। वो भी
  4765. 3:31:28अपने दादा जी से मिलना चाहता था। इसके लिए
  4766. 3:31:31उसे अपने लुक को थोड़ा सुधारना था। शौर्य
  4767. 3:31:34अपने क्वार्टर से निकला और गिरधर के
  4768. 3:31:35क्वार्टर में पहुंचा। गिरधर भी तैयार था।
  4769. 3:31:38उसे भी राय साहब को ऑफिस लेकर जाना था। जब
  4770. 3:31:41शौर्य गिरधर के रूम में पहुंचा तो वहां पर
  4771. 3:31:43संतो पहले से ही बैठी गप्पे हाक रही थी।
  4772. 3:31:46तब उसने शौर्य को आते देखा तो वह बोली कुछ
  4773. 3:31:49तो रहम करो अपने ऊपर साहब। शौर्य को उसकी
  4774. 3:31:52बात समझ नहीं आई। वो संतो की ओर देखते हुए
  4775. 3:31:55बोला तुम कहना क्या चाहती हो? जरा [संगीत]
  4776. 3:31:58साफ-साफ समझाओगी। इस पर संतो अपनी बात
  4777. 3:32:01स्पष्ट करती हुई बोली। कल कहा था ना कि
  4778. 3:32:04अपनी दाढ़ी साफ करवा लो या कम से कम ट्रिम
  4779. 3:32:07ही करवा लो। अरे मान लो मेरी बात अच्छे
  4780. 3:32:10लगोगे। ठीक है। अगर तुम कहती हो तो यह
  4781. 3:32:13करने की सोचूंगा। शौर्य ने बस उसकी बोलती
  4782. 3:32:16बंद करने के लिए कहा था। लेकिन संतो इसे
  4783. 3:32:18सच मान बैठी और उछल पड़ी। देखना उसके बाद
  4784. 3:32:21दुआएं दोगे मुझे। तभी गिरधर काका बीच में
  4785. 3:32:24बोल पड़े। तुम जब इतना ही इसके पीछे पड़ी
  4786. 3:32:27हो तो आज मैं खुद इसकी शेव करवा दूंगा।
  4787. 3:32:31ठीक है काका आप ही करा दीजिए। बस ध्यान
  4788. 3:32:33रखना। इतना भी हैंडसम मत बना देना कि इनके
  4789. 3:32:36लिए खुद ही आईने से नजर हटाना मुश्किल हो
  4790. 3:32:38जाए। [हंसी]
  4791. 3:32:40इतना कहकर शंतू खिलखिलाती हुई वहां से
  4792. 3:32:42निकल गई। तभी शौर्य का फोन रिंग हुआ।
  4793. 3:32:45शौर्य ने फोन की स्क्रीन की ओर देखा और
  4794. 3:32:47फोन उठा लिया। शौर्य ने फोन की स्क्रीन पर
  4795. 3:32:50शिप्रा का नाम देखा और तुरंत फोन उठाया।
  4796. 3:32:52शिप्रा ने पूछा तुम तैयार हो गए? हां अभी
  4797. 3:32:56आता हूं। इतना बोलकर शौर्य ने फोन कट किया
  4798. 3:32:59और गिरधर की तरफ मुड़कर बोला चलता हूं
  4799. 3:33:02काका। कैंटीन में मिलता हूं। अरे रुको
  4800. 3:33:05पहले थोड़ा नाश्ता तो कर लो फिर चले जाना।
  4801. 3:33:09गिरधर एक प्लेट में दो परांठे और चटनी ले
  4802. 3:33:11आया था। शौर्य झिझकते [संगीत] हुए बोला
  4803. 3:33:13अरे काका इसकी क्या जरूरत थी? मैं तो रोज
  4804. 3:33:16कैंटीन में नाश्ता कर लेता हूं। भाई मैं
  4805. 3:33:19तो अपने लिए बना ही रहा था। दो परांठे
  4806. 3:33:21ज्यादा बना लिए। गिरधर की बातों में उसका
  4807. 3:33:23स्नेह झलक रहा था। इसीलिए शौर्य मना नहीं
  4808. 3:33:26कर पाया। उसने जल्दी से नाश्ता किया और
  4809. 3:33:28पार्किंग के पास पहुंच गया। जहां शिप्रा
  4810. 3:33:30खड़ी थी। उसने शिप्रा से चाबी ली और कार
  4811. 3:33:33बाहर निकाली। तभी सामने से युविका आती
  4812. 3:33:36दिखाई दी। शिप्रा ने कार का दरवाजा खोला
  4813. 3:33:39और पीछे जाकर बैठ गई। तभी युविका उसके पास
  4814. 3:33:42से गुजरते हुए बोली मुझे नहीं पता था कि
  4815. 3:33:45तुमने पति के रूप में एक ड्राइवर रखा है।
  4816. 3:33:47शिप्रा दांत पीसते हुए बोली सुबह-सुबह अगर
  4817. 3:33:50कुछ अच्छा नहीं बोल सकती तो मुंह बंद रखना
  4818. 3:33:53चाहिए। [संगीत]
  4819. 3:33:54ओहो इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है?
  4820. 3:33:57मैंने क्या गलत कहा? जो सच है वो सामने
  4821. 3:33:59है। इतना बोलकर युविका मुस्कुराती हुई
  4822. 3:34:02वहां से निकल गई। युविका की बात सुनकर
  4823. 3:34:04शौर्य के चेहरे पर मुस्कान तैर गई। उसे
  4824. 3:34:07उसकी बात बिल्कुल भी बुरी नहीं लगी थी। वो
  4825. 3:34:09तो चाहता था कि तकदीर का ऐसा कोई चक्र चले
  4826. 3:34:12कि वो हमेशा शिप्रा का ड्राइवर बना रहे।
  4827. 3:34:14पर शिप्रा युविका की बात सुनकर थोड़ी
  4828. 3:34:17नर्वस दिखाई दे रही थी। वो यह सोचकर
  4829. 3:34:19ज्यादा चिंतित थी कि श्रवण को बुरा लगा
  4830. 3:34:22होगा। अपराध बोध से दबी शिप्रा बोली तुम
  4831. 3:34:25युविका की बातों को दिल पर मत लेना। मैं
  4832. 3:34:27तुम्हें ड्राइवर नहीं मानती। मैं तो
  4833. 3:34:29तुम्हें सिर्फ इसीलिए साथ ले जा रही हूं
  4834. 3:34:31कि पापाम मेरे अकेले घर से निकलने के फेवर
  4835. 3:34:34में नहीं है। अब वो किसी बॉडीगार्ड को
  4836. 3:34:36मेरे साथ भेज दे। इससे अच्छा है कि मैं
  4837. 3:34:39तुम्हारे साथ जाऊं। यह सुनकर शौर्य के दिल
  4838. 3:34:42में हलचल हुई। उसे अच्छा लगा कि शिप्रा
  4839. 3:34:44उसके साथ खुद को सुरक्षित महसूस करती है।
  4840. 3:34:47वो बोला पर मैंने तो उनकी बातों को दिल पर
  4841. 3:34:50लिया ही नहीं। लेकिन [संगीत] लगता है आपको
  4842. 3:34:52जरूर उनकी बात बुरी लग गई। शिप्रा समझ
  4843. 3:34:55नहीं पाई कि क्या जवाब दे। तभी शौर्य
  4844. 3:34:58बोला, आप किसी और की बातों पर ध्यान मत
  4845. 3:35:01दीजिए और यह भी मत सोचिए कि मुझे कैसा
  4846. 3:35:03लगेगा। जो लोग मेरे लिए मायने नहीं रखते,
  4847. 3:35:06उनकी बातों को भी मैं कोईेंस नहीं देता।
  4848. 3:35:09आप मेरी तरफ से निश्चिंत रहिए। [संगीत]
  4849. 3:35:11ऐसी बातों का मुझ पर कोई असर नहीं होता।
  4850. 3:35:15शिप्रा शौर्य की समझदारी से हैरान थी। उसे
  4851. 3:35:18समझ नहीं आ रहा था कि इतना समझदार होकर भी
  4852. 3:35:20शौर्य भिखारियों वाली लाइफ क्यों जी रहा
  4853. 3:35:23था। फिर उसे शौर्य की पिछली शाम को कही
  4854. 3:35:25बातें याद आई। कुछ सोचकर उसने शौर्य से
  4855. 3:35:28कहा, [संगीत] गाड़ी जरा साइड में रोकना।
  4856. 3:35:31शौर्य को समझ नहीं आया कि भरे बाजार में
  4857. 3:35:33वो गाड़ी रोकने को क्यों बोल रही है? उसने
  4858. 3:35:36पूछा, "क्या हुआ? आप गाड़ी क्यों रुकवा
  4859. 3:35:39रही हैं? पहले रोको तो सही। शिप्रा दरवाजे
  4860. 3:35:43की तरफ खिसकती हुई बोली। शौर्य ने गाड़ी
  4861. 3:35:45सड़क किनारे रोक दी। शिप्रा दरवाजा खोलकर
  4862. 3:35:48बाहर आई और फिर आगे का दरवाजा खोलकर
  4863. 3:35:51ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठ गई। यह आप
  4864. 3:35:54क्या कर रही हैं? शौर्य ने उसकी ओर देखते
  4865. 3:35:56हुए पूछा तो शिप्रा खुश होते हुए बोली
  4866. 3:36:00मैं सोच रही थी कि युविका ने ऐसा क्यों
  4867. 3:36:02कहा? फिर मुझे लगा उसने कुछ गलत भी तो
  4868. 3:36:05नहीं कहा। जैसे मैं पीछे बैठी थी। कोई भी
  4869. 3:36:08हमें देखकर यही सोचता। लेकिन अब ठीक है।
  4870. 3:36:11चलो। शिप्रा की बात सुनकर शौर्य के चेहरे
  4871. 3:36:14पर फिर से मुस्कान आ गई। जिसे नोटिस करके
  4872. 3:36:16शिप्रा बोल पड़ी, क्या मैं तुम्हारे चेहरे
  4873. 3:36:20की मुस्कान का कारण जान सकती हूं? मुझे यह
  4874. 3:36:22सोचकर हंसी आ रही है कि आपके दिमाग से अभी
  4875. 3:36:25तक युविका की बात नहीं गई। इसीलिए आप आगे
  4876. 3:36:27बैठकर यह जताना चाह रही हैं कि आप मुझे
  4877. 3:36:30ड्राइवर नहीं समझती। शौर्य की इस बात पर
  4878. 3:36:32शिप्रा सवालिया नजर से शौर्य को देखती हुई
  4879. 3:36:35बोली। तो इसमें गलत क्या है? किसी और के
  4880. 3:36:38बोलने या समझने से आप अपने एक्शन बदल रही
  4881. 3:36:40हैं तो यह गलत हुआ ना? शौर्य की समझदारी
  4882. 3:36:44वाली बात सुनकर शिप्रा आश्चर्य से उसे
  4883. 3:36:46देखने लगी। तो शौर्य बोला क्या हुआ? अब
  4884. 3:36:49[संगीत] क्या मैं आपके इस तरह देखने का
  4885. 3:36:51कारण जान सकता हूं? तुम्हें पता है जैसे
  4886. 3:36:54तुम दिखाई देते हो और जैसी बातें तुम करते
  4887. 3:36:57हो वो आपस में बिल्कुल मैच नहीं करती।
  4888. 3:37:00कहते हुए शिप्रा की आंखें सिकुड़ गई। जैसे
  4889. 3:37:03वो समझने की कोशिश कर रही हो कि शौर्य
  4890. 3:37:05आखिर है क्या चीज? शौर्य शिप्रा के चेहरे
  4891. 3:37:08पर ही नजर गड़ाए हुए बोला। अब इस बात को
  4892. 3:37:11मैं अपनी तारीफ समझूं या यह समझूं कि आपको
  4893. 3:37:13लगता है कि मैं सिर्फ समझदार होने का
  4894. 3:37:15दिखावा कर रहा हूं। इस पर शिप्रा अपनी एक
  4895. 3:37:18आइब्रो उठाकर बोली [संगीत] यह भी तुम ही
  4896. 3:37:20बताओ कि मैं तुम्हारे बारे में क्या
  4897. 3:37:22सोचूं? आप खुद ज्यादा ही सोच रही हैं।
  4898. 3:37:26किसी चीज के बारे में ज्यादा सोचने से सही
  4899. 3:37:28गलत के बीच अंतर बताना मुश्किल हो जाता
  4900. 3:37:30है। कहते हुए शौर्य शिप्रा की तरफ मुड़ा
  4901. 3:37:33और बोला युविका ने मुझे ड्राइवर कह दिया।
  4902. 3:37:37आप इस बात को लेकर इतना परेशान क्यों हो
  4903. 3:37:39रही हैं? क्या मैं आपका ड्राइवर होने के
  4904. 3:37:41लायक भी नहीं हूं? मुझे काम मिल गया और यह
  4905. 3:37:44ड्राइवर का काम कोई बुरा तो नहीं है ना?
  4906. 3:37:47शिप्रा को समझ नहीं आया कि वो इसका क्या
  4907. 3:37:49जवाब दे? इसका मतलब ड्राइवर की जॉब से
  4908. 3:37:51तुम्हें कोई परेशानी नहीं है।
  4909. 3:37:53परेशानी क्यों होगी? जब तक यहां हूं तब तक
  4910. 3:37:56तो यह जॉब कर ही सकता हूं। शौर्य तुरंत
  4911. 3:37:59बोला तो शिप्रा उसे घूरती हुई बोली। अच्छा
  4912. 3:38:02फिर उसके बाद क्या करोगे? बाहर कोई काम
  4913. 3:38:06देखूंगा। इसके लिए मैंने एक दोस्त से बात
  4914. 3:38:08भी कर रखी है। यह बोलकर शौर्य शिप्रा का
  4915. 3:38:11रिएक्शन देखना चाहता था। शिप्रा को समझ ही
  4916. 3:38:14नहीं आया कि अब वो क्या बोले। जब उसे कुछ
  4917. 3:38:16नहीं सूझा तो उसने कहा क्या अब यही
  4918. 3:38:19खड़े-खड़े समय खराब करना है या मुझे ऑफिस
  4919. 3:38:22भी पहुंचाओगे?
  4920. 3:38:24आप पहले पीछे जाकर बैठ जाइए। अगर ऑफिस के
  4921. 3:38:26लोगों ने आपको आगे बैठे देखा तो फिर से वो
  4922. 3:38:29तरह-तरह की बातें बनाएंगे।
  4923. 3:38:31शौर्य ने शिप्रा को समझाने की कोशिश की।
  4924. 3:38:33[संगीत] लेकिन शिप्रा शायद अपना मन बना
  4925. 3:38:35चुकी थी। कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम
  4926. 3:38:39है कहना। [संगीत]
  4927. 3:38:40अब ऑफिस भी पहुंचाओगे या पूरा दिन कार में
  4928. 3:38:43ही बैठे रहना है? ऐसा बोलकर शिप्रा
  4929. 3:38:45खिलखिला कर हंस दी। पहली बार शौर्य ने उसे
  4930. 3:38:48इस तरह खुलकर हंसते देखा। कुछ [संगीत] देर
  4931. 3:38:51बाद शौर्य शिप्रा को लेकर हिल टॉप हेवन
  4932. 3:38:53पहुंचा।
  4933. 3:38:55आज आपको कहीं बाहर मीटिंग के लिए जाना तो
  4934. 3:38:57नहीं है ना? शिप्रा कार से उतरती उससे
  4935. 3:39:00पहले ही शौर्य ने पूछा। इस पर शिप्रा बोली
  4936. 3:39:04ऐसा क्यों पूछ रहे हो?
  4937. 3:39:06शौर्य ने कहा दरअसल आज मुझे कहीं जाना है।
  4938. 3:39:10अगर आपको ऐतराज ना हो तो मैं अपना काम
  4939. 3:39:12निपटा के आता हूं। किससे मिलने जा रहे हो?
  4940. 3:39:15शिप्रा ये पूछने से खुद को रोक नहीं सकी।
  4941. 3:39:19है मेरा एक जानने वाला। वो हॉस्पिटल में
  4942. 3:39:21एडमिट है। शौर्य के जवाब से शिप्रा के
  4943. 3:39:24चेहरे पर चिंता झलक आई। कुछ सीरियस तो
  4944. 3:39:27नहीं है? नहीं नहीं कोई चिंता की बात नहीं
  4945. 3:39:30है। शौर्य धीरे से बोला तो शिप्रा ने कहा
  4946. 3:39:33ठीक है कोई बात नहीं मैं खुद वापस चली
  4947. 3:39:35जाऊंगी। तुम इत्मीनान से जाओ। नहीं घर
  4948. 3:39:38जाने के टाइम तक तो मैं आ जाऊंगा। मैंने
  4949. 3:39:40तो यह सोच कर पूछा कि बीच में आपको कहीं
  4950. 3:39:42जाना हुआ तो शौर्य ने समझाया तो शिप्रा
  4951. 3:39:45बोली ठीक है मैं देख लूंगी। अगर तुम कार
  4952. 3:39:48ले जाना चाहते हो तो ले जा सकते हो। नहीं
  4953. 3:39:51मुझे कार नहीं चाहिए। मैं टैक्सी [संगीत]
  4954. 3:39:53करके चला जाऊंगा।
  4955. 3:39:55शौर्य ने स्पष्ट किया तो शिप्रा कार से
  4956. 3:39:57उतरते हुए बोली तुम देख लो जैसा तुम्हें
  4957. 3:40:00ठीक लगे।
  4958. 3:40:02शौर्य ने कार पार्क करके चाबी गार्ड को
  4959. 3:40:04थमा दी और फिर कैंटीन में जाकर उसने
  4960. 3:40:06विक्रम को फोन किया। विक्रम उसी के फोन का
  4961. 3:40:09इंतजार कर रहा था।
  4962. 3:40:11कहां हो तुम? शौर्य ने पूछा तो विक्रम
  4963. 3:40:14बोला
  4964. 3:40:15मैं तो अभी होटल में ही हूं। आप बताइए
  4965. 3:40:17कहां आना है?
  4966. 3:40:191 घंटे बाद इंदिरा नगर में हिल टॉप हेवन
  4967. 3:40:21के बाहर मिलो। [संगीत] यहीं से साथ चलते
  4968. 3:40:23हैं। सोच रहा हूं आज शेविंग करा ही लूं।
  4969. 3:40:27इतना बोलकर शौर्य ने फोन काट दिया और फिर
  4970. 3:40:30कुछ सोचकर इधर-उधर देखने लगा। तभी उसकी
  4971. 3:40:33नजर गणेश पर पड़ी। [संगीत] हेलो गणेश भाई
  4972. 3:40:36कैसे हो? गणेश भी शौर्य को देखकर खुश हुआ।
  4973. 3:40:40अरे श्रवण तुमने वाल्मीकि काका की बहुत
  4974. 3:40:43बड़ी मदद की। वो तुम्हें याद कर रहे थे।
  4975. 3:40:46इस पर शौर्य बोला बस यार जरूरत के वक्त एक
  4976. 3:40:50दूसरे के काम आना चाहिए। अच्छा सुनो यहां
  4977. 3:40:53आसपास कोई सैलूून है क्या? तुम्हें सैलूून
  4978. 3:40:56जाना है? चलो मैं तुम्हें ले चलता हूं।
  4979. 3:40:59थोड़ी देर बाद शेविंग और हेयर कट करवा कर
  4980. 3:41:01जब शौर्य सैलूून से बाहर निकला तो गणेश की
  4981. 3:41:04आंखें फैल गई। क्या लग रहे हो यार श्रवण
  4982. 3:41:07भाई? बिल्कुल फिल्मी हीरो। इतना खूबसूरत
  4983. 3:41:10चेहरा तुमने अब तक गाड़ी के पीछे क्यों
  4984. 3:41:12छुपा रखा था? गणेश की बात पर शौर्य बस
  4985. 3:41:15मुस्कुरा कर रह गया। अरे सही कह रहा हूं
  4986. 3:41:18मैं। अब अगर कोई तुम्हें देख ले तो
  4987. 3:41:20तुम्हें ड्राइवर तो बिल्कुल नहीं समझेगा।
  4988. 3:41:22तुम तो मालिक लग रहे हो भाई। गणेश की
  4989. 3:41:26तारीफ खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही
  4990. 3:41:28थी। खैर दोनों वापस हिल टॉप हेवन के
  4991. 3:41:31वेटिंग एरिया में पहुंच गए। शौर्य ने देखा
  4992. 3:41:33कि गिरधर काका भी आ चुके हैं। जब शौर्य
  4993. 3:41:36गणेश के साथ गिरधर काका के पास पहुंचा तो
  4994. 3:41:38गिरधर दबी हुई आवाज में गणेश से बोला।
  4995. 3:41:43ओए गणेश ये किन साहब को साथ लेकर घूम रहा
  4996. 3:41:46है तू?
  4997. 3:41:47देखा यह भी धोखा खा गए ना। गणेश चुटकी
  4998. 3:41:51बजाते हुए बोला, गिरधर को कुछ समझ नहीं
  4999. 3:41:53आया।
  5000. 3:41:55क्या हुआ? क्या बोल रहा है तू? भांग चढ़ा
  5001. 3:41:57ली है क्या तूने? इस बीच शौर्य कुछ नहीं
  5002. 3:42:00बोल रहा था। वो सिर्फ खड़े-खड़े तमाशा देख
  5003. 3:42:02रहा था। गणेश गिरधर के पास गया और उसके
  5004. 3:42:05कान में बोला,
  5005. 3:42:07क्या आप इन साहब को नहीं जानते?
  5006. 3:42:10[संगीत] मैं कैसे जानूंगा भला? मैं तो
  5007. 3:42:12इन्हें पहली बार देख रहा हूं। गिरधर शौर्य
  5008. 3:42:15की तरफ देखता हुआ अनुमान लगा रहा था कि
  5009. 3:42:18आखिर यह है कौन। लेकिन किसी स्पष्ट निर्णय
  5010. 3:42:21पर ना पहुंच पाने के कारण गिरिधर गणेश को
  5011. 3:42:23झिड़कते हुए बोला अब तो मुझे पक्का यकीन
  5012. 3:42:26हो गया है कि तेरा दिमाग फिर चुका है।
  5013. 3:42:28जाने क्या बोले जा रहा है। फिर वो शौर्य
  5014. 3:42:31की तरफ देखकर बोला साहब क्या आप मुझसे
  5015. 3:42:34पहले भी कभी मिले हो। इतने में शौर्य बोल
  5016. 3:42:37पड़ा। क्या गिरधर काका आप भी गणेश की तरह
  5017. 3:42:40शुरू हो गए। शौर्य की आवाज पहचानते ही
  5018. 3:42:43गिरधर कुछ पल के लिए आंखें बड़ी करके
  5019. 3:42:46शौर्य को देखता रहा। फिर दोनों हाथों से
  5020. 3:42:48अपना सिर पकड़ कर बोला,
  5021. 3:42:51सही कहती थी संतो इसीलिए तो कहते हैं कि
  5022. 3:42:54औरतों की बात मान लेनी चाहिए। उनकी नजर
  5023. 3:42:57बहुत पारखी होती है। इस पर शौर्य गिरधर से
  5024. 3:43:01बोला, "अरे अब बस भी करो काका।" "आप क्या
  5025. 3:43:04मुझे झाड़ पर चढ़ाकर ही मानोगे?" तभी शौर्य
  5026. 3:43:07का फोन रिंग हुआ। यह विक्रम का कॉल था। तो
  5027. 3:43:10उसने फोन उठाया तो विक्रम की आवाज आई।
  5028. 3:43:12[संगीत]
  5029. 3:43:13मैंने हिल टॉप हेवन के बाहर गाड़ी पार्क
  5030. 3:43:15कर रखी है। आप कितनी देर में आ रहे हो
  5031. 3:43:17बॉस?
  5032. 3:43:18तुम इंतजार करो। मैं बस आ ही रहा हूं।
  5033. 3:43:20[संगीत] इतना बोलकर शौर्य ने फोन काट दिया
  5034. 3:43:22और गिरधर से बोला। काका अभी मैं अपने एक
  5035. 3:43:25पहचान वाले से मिलने हॉस्पिटल जा रहा हूं।
  5036. 3:43:27वापस आकर आपसे बात करता हूं। हॉस्पिटल का
  5037. 3:43:30नाम सुनकर गिरधर के माथे पर बल पड़ गए।
  5038. 3:43:33हॉस्पिटल जा रहे हो? कोई परेशानी वाली बात
  5039. 3:43:36तो नहीं है? नहीं काका ऐसी कोई चिंता की
  5040. 3:43:39बात नहीं है। इतना बोलकर शौर्य वहां से
  5041. 3:43:41निकल गया। हिल टॉप हेवन से बाहर आकर उसने
  5042. 3:43:44चारों तरफ नजर दौड़ाई तो उसे रोड के दूसरी
  5043. 3:43:46तरफ एक लंबी सी गाड़ी के साथ टेक लगाए
  5044. 3:43:49विक्रम खड़ा दिखाई दिया। शौर्य विक्रम के
  5045. 3:43:52पास पहुंचा तो विक्रम मुस्कुराते हुए
  5046. 3:43:53बोला। अब लग रहे हो ना आप? दी शौर्य
  5047. 3:43:57राठौड़ चुप करो तुम। शौर्य ने विक्रम को
  5048. 3:44:00झिड़क दिया और कार में बैठ गया। विक्रम भी
  5049. 3:44:03ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और गाड़ी बढ़ा
  5050. 3:44:05दी। तभी शौर्य ने पूछा मैं दादा जी से
  5051. 3:44:08मिलने जा रहा हूं। यह बात कांता प्रसाद जी
  5052. 3:44:11को बता दी। इस पर विक्रम ने जवाब दिया,
  5053. 3:44:14हां, अभी थोड़ी देर पहले ही उनका फोन आया
  5054. 3:44:16था। मैंने बोल दिया, आधे 1 घंटे में हम
  5055. 3:44:18हॉस्पिटल पहुंच जाएंगे। फिर कुछ देर बाद
  5056. 3:44:22शौर्य की गाड़ी सिटी हॉस्पिटल में प्रवेश
  5057. 3:44:24कर रही थी। शौर्य और विक्रम सिटी हॉस्पिटल
  5058. 3:44:27के वीआईपी एरिया में पहुंचे और फिर विक्रम
  5059. 3:44:29ने कांता प्रसाद को फोन किया। एक रिंग के
  5060. 3:44:32बाद ही फोन उठा लिया गया। ऐसा लगा जैसे वो
  5061. 3:44:35इसी फोन का इंतजार कर रहे थे।
  5062. 3:44:38हेलो कांता प्रसाद जी, हम नीचे वीआईपी
  5063. 3:44:41लाउंज में खड़े हैं। कहां पर आना है?
  5064. 3:44:43विक्रम ने सीधा सवाल किया तो कांता प्रसाद
  5065. 3:44:46बोले,
  5066. 3:44:47"आप नीचे लाउंज में ही इंतजार करें। मैं
  5067. 3:44:49वहीं पर आता हूं।" दो मिनट भी नहीं गुजरे
  5068. 3:44:52थे कि शौर्य को 55 60 साल का एक बुजुर्ग
  5069. 3:44:55हाथ में मोबाइल लिए इधर-उधर देखता हुआ
  5070. 3:44:57लाउंज में प्रवेश करता दिखाई दिया।
  5071. 3:45:00प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी उस बुजुर्ग
  5072. 3:45:02का रब वहां आते ही दिखाई देने लगा था।
  5073. 3:45:05वहां जो भी लोग उपस्थित थे सभी उनकी तरफ
  5074. 3:45:07रिस्पेक्ट से देखने लगे थे। कारण यह था कि
  5075. 3:45:10वह राजा साहब के पर्सनल असिस्टेंट कम बटलर
  5076. 3:45:12थे। इसीलिए राजगढ़ में शायद ही कोई ऐसा
  5077. 3:45:15होगा जो उनको नहीं जानता होगा। शौर्य उनके
  5078. 3:45:18प्रभाव को देखते ही समझ गया कि यही कांता
  5079. 3:45:21प्रसाद जी होंगे। और कांता प्रसाद ने भी
  5080. 3:45:23शौर्य और विक्रम को देखकर अंदाजा लगा लिया
  5081. 3:45:26कि यही विक्रम और शौर्य होंगे। बस उनके
  5082. 3:45:29लिए यह अनुमान लगाना मुश्किल था कि इन
  5083. 3:45:31दोनों में से विक्रम कौन है और शौर्य कौन?
  5084. 3:45:34उन्होंने कपड़ों को देखकर पहचानने की
  5085. 3:45:36कोशिश की। विक्रम के कपड़े ज्यादा फैंसी
  5086. 3:45:39थे। इसीलिए कांता प्रसाद ने विक्रम को
  5087. 3:45:41शौर्य समझ लिया और शौर्य के पास जाकर बोले
  5088. 3:45:46आप ही विक्रम हो ना? शौर्य भी कांता
  5089. 3:45:49प्रसाद के मनोभाव को समझ गया था। इसीलिए
  5090. 3:45:52विक्रम कुछ बोलता उससे पहले शौर्य खुद बोल
  5091. 3:45:54दिया।
  5092. 3:45:56जी आप ही कांता प्रसाद जी हैं। विक्रम को
  5093. 3:46:00कुछ बोलने का मौका ही नहीं मिला। कांता
  5094. 3:46:02प्रसाद जी विक्रम की तरफ मुड़े और बोले तो
  5095. 3:46:06आप हैं शौर्य। राजा साहब को जब से पता चला
  5096. 3:46:09है कि आप आज उनसे मिलने के लिए आने वाले
  5097. 3:46:12हैं तब से उनकी नजर बस दरवाजे पर ही टिकी
  5098. 3:46:15है। चलिए पहले चलकर उनसे मिल लीजिए। नहीं
  5099. 3:46:18तो मुझे ही फटकार पड़ जाएगी। विक्रम कुछ
  5100. 3:46:22बोलना चाह रहा था। पर शौर्य ने आंख के
  5101. 3:46:24इशारे से उसे चुप रहने का संकेत दिया।
  5102. 3:46:27शौर्य और विक्रम लिफ्ट के जरिए कांता
  5103. 3:46:30प्रसाद के साथ फिफ्थ फ्लोर पर पहुंचे और
  5104. 3:46:32फिर चंद्रभान जी के कमरे में दाखिल हुए।
  5105. 3:46:35चंद्रभान जी बेड पर लेटे हुए थे और उनकी
  5106. 3:46:38नजर दरवाजे पर ही टिकी थी। लगभग 75 वर्ष
  5107. 3:46:42की उम्र में भी उनके चेहरे का जो ओज था वो
  5108. 3:46:45कमाल का था। उनकी निगाह शौर्य और विक्रम
  5109. 3:46:48दोनों के चेहरे का परीक्षण कर रही थी।
  5110. 3:46:51कांता प्रसाद बताने वाले थे कि दोनों में
  5111. 3:46:53से शौर्य कौन है। पर चंद्रभान जी ने
  5112. 3:46:56उन्हें रोक दिया।
  5113. 3:46:58तुम्हें बताने की जरूरत नहीं है कि इन
  5114. 3:47:02दोनों में से मेरा पोता कौन है। मैं खुद
  5115. 3:47:05ही पहचान लूंगा।
  5116. 3:47:08शौर्य भी दिलचस्पी से अपने दादाजी की तरफ
  5117. 3:47:10देखने लगा। शौर्य ने खुद आज अपने दादाजी
  5118. 3:47:13को पहली बार देखा था। वो उनके पैर छूकर
  5119. 3:47:16आशीर्वाद लेना चाहता था। पर जब उसने देखा
  5120. 3:47:19कि उसके दादाजी बिना उसके बताए उसे पहचान
  5121. 3:47:22जाएंगे। इस जिद के साथ बैठे थे तो वह भी
  5122. 3:47:25आजमाना चाहता था कि क्या सच में वो उसे
  5123. 3:47:28पहचान पाएंगे। कांता प्रसाद जी तो नहीं
  5124. 3:47:30पहचान पाए थे। आज पहली बार शौर्य का अपने
  5125. 3:47:34दादाजी से आमनासामना हुआ था। थोड़ी देर
  5126. 3:47:37देखने के बाद चंद्रभान जी शौर्य की तरफ
  5127. 3:47:39देखकर बोले।
  5128. 3:47:42आजा मेरे बच्चे अपने दादाजी से गले नहीं
  5129. 3:47:45मिलेगा। जब कांता प्रसाद ने देखा कि
  5130. 3:47:48चंद्रभान जी शौर्य को अपना पोता समझ रहे
  5131. 3:47:50हैं तो वह विक्रम की तरफ इशारा कर बोल
  5132. 3:47:53पड़े। अरे [संगीत] नहीं साहब शौर्य बाबा
  5133. 3:47:56तो यह हैं। चंद्रभान जी ने विक्रम की तरफ
  5134. 3:47:59देखा पर उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि शौर्य
  5135. 3:48:01वो हो सकता है। फिर वह पूरे विश्वास के
  5136. 3:48:04साथ बोले
  5137. 3:48:06यह नहीं हो सकता। मेरी आंखें धोखा नहीं खा
  5138. 3:48:11सकती। कांता प्रसाद को समझ नहीं आ रहा था
  5139. 3:48:14कि वह चंद्रभान जी को कैसे समझाए। अभी
  5140. 3:48:17कांता प्रसाद कुछ बोलने की सोच ही रहे थे
  5141. 3:48:20कि तभी शौर्य आगे बढ़कर चंद्रभान जी का
  5142. 3:48:23पैर छूकर प्रणाम करता हुआ बोला
  5143. 3:48:26आप एकदम सही हैं दादा जी मैं ही आपका पोता
  5144. 3:48:29शौर्य हूं। शौर्य की बात सुनकर चंद्रभान
  5145. 3:48:32जी के चेहरे पर विजय मुस्कान खिल गई। वो
  5146. 3:48:35कांता प्रसाद की तरफ देखकर बोले देखा
  5147. 3:48:39मैंने कहा था ना कि मेरी नजर धोखा नहीं खा
  5148. 3:48:43सकती।
  5149. 3:48:44कांता प्रसाद किसी बेवकूफ की तरह कभी
  5150. 3:48:47शौर्य को तो कभी विक्रम को देख रहे थे।
  5151. 3:48:50उन्हें उलझन में देखकर शौर्य बोला
  5152. 3:48:53माफ कीजिएगा कांता प्रसाद जी मेरा इरादा
  5153. 3:48:55आपको भ्रमाने का नहीं था। पर जब आपने मुझे
  5154. 3:48:58विक्रम समझा तो मैं देखना चाहता था कि
  5155. 3:49:01दादा जी मुझे पहचानते हैं या नहीं। पर
  5156. 3:49:03देखिए आप तो धोखा खा गए पर दादा जी ने
  5157. 3:49:07मुझे एक नजर में ही पहचान लिया। कांता
  5158. 3:49:09प्रसाद को भी तसल्ली हुई कि चंद्रभान जी
  5159. 3:49:11ने कोई गलती नहीं की। पर उत्सुकतावश वो
  5160. 3:49:14पूछने से खुद को रोक नहीं पाए। पर एक बात
  5161. 3:49:17मुझे समझ नहीं आई साहब कि आपने शौर्य को
  5162. 3:49:20पहचाना कैसे? इस पर चंद्रभान जी बोले बहुत
  5163. 3:49:25सिंपल है। शौर्य की आंखों में जो मुझे
  5164. 3:49:28[संगीत]
  5165. 3:49:28अपने लिए प्यार और अपनापन नजर आया वो
  5166. 3:49:32विक्रम की आंखों में नहीं था। उल्टा मुझे
  5167. 3:49:36उसकी आंखों में डर नजर आ रहा था। बस इसी
  5168. 3:49:40से अपने पोते को पहचानने में आसानी हो गई।
  5169. 3:49:45कितना सही विश्लेषण किया था चंद्रभान जी
  5170. 3:49:47ने। तभी वह शौर्य को अपने पास बैठाते हुए
  5171. 3:49:50बोले आओ मेरे पास आकर बैठो तुम्हें जी भर
  5172. 3:49:55के देख तो लूं। शौर्य उनके पास बैठते हुए
  5173. 3:49:58बोला आपको क्या हुआ है दादा जी जो आप
  5174. 3:50:02हॉस्पिटल में भर्ती हो गए हैं? अरे कुछ
  5175. 3:50:05नहीं। थोड़ा सा बुखार हो गया था। साथ में
  5176. 3:50:08थोड़ी घबराहट हो रही थी। इसीलिए डॉक्टर को
  5177. 3:50:12दिखाया तो डॉक्टर ने अपना बिल बढ़ाने के
  5178. 3:50:16लिए मुझे हॉस्पिटल में ही भर्ती कर लिया।
  5179. 3:50:20चंद्रभान जी धीमे स्वर में बोले। इस पर
  5180. 3:50:22कांता प्रसाद ने नाराजगी के भाव के साथ
  5181. 3:50:25कहा, बहुत बढ़िया। आपके ही हॉस्पिटल में
  5182. 3:50:29डॉक्टर आपको ही बिल के लिए भर्ती करेगा।
  5183. 3:50:32शौर्य ने जब महसूस किया कि उसके दादा अपनी
  5184. 3:50:35बीमारी छुपाने का प्रयास कर रहे हैं तो वह
  5185. 3:50:37कांता प्रसाद से बोला आप बताइए अंकल दादा
  5186. 3:50:41जी को क्या हुआ है? अरे तुम किसकी बातों
  5187. 3:50:44में आ रहे हो? यह तो ऐसे ही क्या-क्या बोल
  5188. 3:50:48रहा है? इसकी बातों की तरफ ध्यान देने की
  5189. 3:50:51कोई जरूरत नहीं है। चंद्रभान जी बात को
  5190. 3:50:54टालने की कोशिश करते हुए बोले तो कांता
  5191. 3:50:57प्रसाद ने तुरंत कंसर्न दिखाते हुए कहा
  5192. 3:51:00इन्हें सीवियर हार्ट अटैक आया था। वो तो
  5193. 3:51:04शुक्र है कि मैं वहीं था और इन्हें समय पर
  5194. 3:51:07हॉस्पिटल ले आया। नहीं तो कुछ भी हो सकता
  5195. 3:51:09था। और आपको यह भी बता दूं शौर्य बाबा कि
  5196. 3:51:13इन्हें यह हार्ट अटैक अपने बच्चों के कारण
  5197. 3:51:15ही आया है। शौर्य को पता नहीं था कि उसके
  5198. 3:51:18दादा को हार्ट अटैक आया था। उसे तो लगा था
  5199. 3:51:21कि मामूली बीमारी होगी जिसके इलाज के लिए
  5200. 3:51:24वो हॉस्पिटल में भर्ती हुए हैं। उसने
  5201. 3:51:26कांता प्रसाद द्वारा कही बातों पर गौर
  5202. 3:51:28किया और फिर कुछ सोचते हुए बोला। आप कहना
  5203. 3:51:31क्या चाहते हैं अंकल? दादाजी को हार्ट
  5204. 3:51:33अटैक उनके बच्चों के कारण हुआ इसका क्या
  5205. 3:51:36मतलब है?
  5206. 3:51:38शौर्य बाबा मैं जो कह रहा हूं एकदम सही
  5207. 3:51:41[संगीत] है। दरअसल इनके दोनों बच्चों में
  5208. 3:51:45संपत्ति अपने नाम करने की होड़ लगी है। ना
  5209. 3:51:48वीरभद्र और ना ही स्वर्णलता कोई कसर छोड़
  5210. 3:51:51रहे हैं। दोनों इस कोशिश में लगे हैं कि
  5211. 3:51:54कौन सा बिजनेस कौन अपने नाम करवाता है। हद
  5212. 3:51:57तो तब हो गई जब पिछले सप्ताह उन्हें पता
  5213. 3:52:00चला कि साहब ने सूर्यभान को फोन किया था
  5214. 3:52:03कि वह आकर संपत्ति में अपना [संगीत]
  5215. 3:52:04हिस्सा ले ले। तो वह दोनों राजा साहब पर
  5216. 3:52:07ही आग बबूला हो गए कि जब आपने उसे घर से
  5217. 3:52:10निकाल दिया है तो उसे संपत्ति में किस बात
  5218. 3:52:12का हक मिलेगा। उस दिन वीरभद्र और
  5219. 3:52:15स्वर्णलता दौलत के लालच में ऐसे अंधे हुए
  5220. 3:52:18कि सारा लिहाज ही भूल गए। अब तक जो बच्चे
  5221. 3:52:21राजा साहब से ऊंची आवाज में बात तक नहीं
  5222. 3:52:24करते थे। उस दिन उन्होंने बातों के ऐसे
  5223. 3:52:26तीर चलाए कि राजा साहब के सीने को चीर कर
  5224. 3:52:29रख दिया। उन दोनों का यह रूप देखकर ही
  5225. 3:52:32[संगीत] राजा साहब को हार्ट अटैक आया था।
  5226. 3:52:35कांता प्रसाद ने पूरा किस्सा बताया तो
  5227. 3:52:37शौर्य को विश्वास ही नहीं हुआ कि कोई दौलत
  5228. 3:52:40के लालच में इतना अंधा हो सकता है कि
  5229. 3:52:42रिश्ते का लिहाज तक भूल जाए। कांता प्रसाद
  5230. 3:52:46तुम क्या सुनाने लगे मेरे पोते को? एक तो
  5231. 3:52:49पहली बार यह मुझसे मिलने आया है और तुम
  5232. 3:52:52इसे यहां की प्रॉब्लम से परेशान करने लगे।
  5233. 3:52:56कहते हुए चंद्रभान जी ने कांता प्रसाद को
  5234. 3:52:58चुप रहने का इशारा किया। लेकिन एक वफादार
  5235. 3:53:01होने के नाते कांता प्रसाद ने स्पष्ट
  5236. 3:53:03शब्दों में कहा नहीं राजा साहब इनको घर के
  5237. 3:53:06हालात जानना जरूरी है। यह भी इस संपत्ति
  5238. 3:53:09के हिस्सेदार हैं। मैं समझता हूं कि
  5239. 3:53:12वीरभद्र और स्वर्णलता जो यह ड्रामा कर रहे
  5240. 3:53:15हैं वो इसीलिए है [संगीत] कि सूर्यभान जी
  5241. 3:53:17को इस संपत्ति में से कुछ ना मिले। यह
  5242. 3:53:20सुनकर शौर्य ने कुछ सोचा और बोला, दादा
  5243. 3:53:23जी, अब जब हमें यह बातें पता चली हैं तो
  5244. 3:53:25मुझे लगता है कि यहां आने पर मुझे मारने
  5245. 3:53:28की जो कोशिश हुई है वो भी इन्हीं दोनों
  5246. 3:53:31में से किसी ने तो नहीं करवाई।
  5247. 3:53:34शौर्य ने अपना शक जाहिर किया तो चंद्रभान
  5248. 3:53:36जी चौंक कर बोले क्या कहा? तुम्हें मारने
  5249. 3:53:40की कोशिश हुई? यह कब हुआ?
  5250. 3:53:44दादा जी मेरा प्लेन क्रैश कोई हादसा नहीं।
  5251. 3:53:46एक सोची समझी साजिश [संगीत] थी। इसके बाद
  5252. 3:53:49शौर्य ने सारी कहानी अपने दादा जी को बता
  5253. 3:53:51दी। शौर्य की आपबीती सुनकर चंद्रभान जी का
  5254. 3:53:55चेहरा गुस्से में लाल हो गया और वो बोले
  5255. 3:53:58अगर तुम्हारे साथ हुई घटना में इन दोनों
  5256. 3:54:01में से किसी का भी हाथ हुआ तो मैं उसे
  5257. 3:54:05छोडूंगा नहीं। ये दोनों इतना नीचे गिर
  5258. 3:54:08जाएंगे। ये तो मैं सोच भी नहीं सकता।
  5259. 3:54:13आप ज्यादा परेशान मत होइए दादा जी मैं सही
  5260. 3:54:16सलामत हूं। मैं खुद ही पता लगा लूंगा कि
  5261. 3:54:18मुझे मारने की कोशिश किसने की थी। शौर्य
  5262. 3:54:22ने दादा जी को शांत करने की कोशिश की।
  5263. 3:54:24लेकिन चंद्रभान जी अब यहां और नहीं ठहरना
  5264. 3:54:26चाहते थे। कांता प्रसाद मुझे यहां से
  5265. 3:54:30डिस्चार्ज कराओ। अब मैं ठीक हूं। मुझे
  5266. 3:54:34अपने पोते को अपने [संगीत] साथ घर ले जाना
  5267. 3:54:36है। नहीं साहब अभी डॉक्टर ने आपको तीन-चार
  5268. 3:54:40दिन और ऑब्जरवेशन में रहने को कहा है।
  5269. 3:54:44कांता प्रसाद ने स्थिति समझाई तो शौर्य ने
  5270. 3:54:46भी समझाते हुए कहा हां दादा जी आप
  5271. 3:54:49जल्दीबाजी ना करें। पहले आप पूरी तरह ठीक
  5272. 3:54:52हो जाइए फिर घर जाने का सोचिएगा।
  5273. 3:54:56तो ठीक है। फिर तुम कांता प्रसाद के साथ
  5274. 3:54:59चले जाना। यह तुम्हारे रहने की व्यवस्था
  5275. 3:55:02कर देगा। चंद्रभान जी कांता प्रसाद की तरफ
  5276. 3:55:05देखकर बोले इस पर शौर्य ने दादा जी को
  5277. 3:55:08समझाते हुए कहा आप मेरे रहने की चिंता मत
  5278. 3:55:11करिए दादा जी अभी मैं घर नहीं जा सकता मैं
  5279. 3:55:14तो यह चाहता था कि जब तक मैं अपने
  5280. 3:55:16दुश्मनों का पता यहां विशालगढ़ में हूं ना
  5281. 3:55:19लगा लूं तब तक किसी को यह पता ना चले कि
  5282. 3:55:22मैं जिंदा हूं।
  5283. 3:55:24ठीक है। अगर तुम घर नहीं जाना चाहते हो तो
  5284. 3:55:28ना सही। लेकिन तुम हमारे होटल में जाकर रह
  5285. 3:55:31सकते हो। चंद्रभान जी ने जिद की। फिर वो
  5286. 3:55:34कांता प्रसाद की तरफ मुड़कर बोले,
  5287. 3:55:37हां, यह ठीक रहेगा। कांता तुम शौर्य के
  5288. 3:55:42साथ जाकर होटल राजकमल में इसके रहने की
  5289. 3:55:44व्यवस्था करवा दो। नहीं, ऐसा करो। वहां के
  5290. 3:55:49मैनेजर को बोल देना आज से उस होटल का
  5291. 3:55:51मालिक शौर्य होगा। वैसे भी मैंने इसे आज
  5292. 3:55:55तक कुछ नहीं दिया है। तो यह छोटा सा गिफ्ट
  5293. 3:55:58तो बनता है। विक्रम ने यह सुना तो वो
  5294. 3:56:02हैरान रह गया। वो खुद होटल राजकमल में ही
  5295. 3:56:05ठहरा था। उसे नहीं पता था कि यह होटल
  5296. 3:56:08शौर्य के दादाजी का ही है और अभी
  5297. 3:56:10खड़े-खड़े दादाजी ने शौर्य को होटल का
  5298. 3:56:12मालिक बना दिया। उसी से विक्रम अंदाजा लगा
  5299. 3:56:15सकता था कि शौर्य के दादाजी के पास कितनी
  5300. 3:56:18संपत्ति होगी। शौर्य ने जब यह सुना तो वह
  5301. 3:56:21बोला अरे नहीं दादा जी इसकी कोई जरूरत
  5302. 3:56:24नहीं है। मुझे आपकी संपत्ति का कोई लालच
  5303. 3:56:27नहीं है। यह आप उन्हीं को दे दीजिए जो
  5304. 3:56:29इसके लिए मरे जा रहे हैं। कांता प्रसाद
  5305. 3:56:32शौर्य की बात सुनकर हैरान रह गए।
  5306. 3:56:35वो राजा जी से बोले देखा साहब एक यह है
  5307. 3:56:40इन्हें आपकी संपत्ति का कोई लालच नहीं है
  5308. 3:56:43और एक वो हैं जो आपकी संपत्ति के लिए सारे
  5309. 3:56:46[संगीत] लिहाज भूल बैठे हैं। चंद्रभान जी
  5310. 3:56:49ने सिर हिलाया और फिर पुरजोर तरीके से
  5311. 3:56:51शौर्य से बोले बेटा तुम ऐसे मुझे मना नहीं
  5312. 3:56:56कर सकते। मैं तुम्हारा दादा हूं और वैसे
  5313. 3:57:00भी यह होटल तुम्हारे हाथ में रहेगा तो सही
  5314. 3:57:02से रह पाएगा। अगर यह वीरभद्र या स्वर्णलता
  5315. 3:57:06के हाथ चला गया तो वो नालायक उसे बर्बाद
  5316. 3:57:09कर देंगे। इसीलिए तो मैंने उन दोनों को आज
  5317. 3:57:13तक वहां कोई हस्तक्षेप करने नहीं दिया।
  5318. 3:57:16तभी कांता प्रसाद भी बोल पड़े।
  5319. 3:57:19अब आप इंकार मत करो। शौर्य बाबा साहब पहली
  5320. 3:57:22बार कोई चीज आपको दे रहे हैं तो इनका मान
  5321. 3:57:25रखो।
  5322. 3:57:26ठीक है दादा जी। जब आपकी यही ज़िद है तो
  5323. 3:57:29ठीक है।
  5324. 3:57:31कहते हुए शौर्य ने दादा जी का हाथ थाम
  5325. 3:57:33लिया। तभी कांता प्रसाद बोले तो ठीक है
  5326. 3:57:36राजा साहब आप आराम कीजिए। मैं शौर्य बाबा
  5327. 3:57:39को लेकर होटल जाता हूं। फिर वो शौर्य से
  5328. 3:57:43बोले चलें। निकलने से पहले शौर्य ने दादा
  5329. 3:57:47जी का हाथ चूमा और बोला आप अपना ध्यान
  5330. 3:57:50रखिए दादाजी। [संगीत] मैं आपसे मिलने आता
  5331. 3:57:52रहूंगा। इसके बाद शौर्य और विक्रम कांता
  5332. 3:57:55प्रसाद जी के साथ बाहर निकल गए तो क्या
  5333. 3:57:58होगा आगे? शौर्य की किस्मत उसे कहां ले
  5334. 3:58:01जाएगी? क्या वीरभद्र और स्वर्णलता पर उठा
  5335. 3:58:04शौर्य का शक सही साबित होगा? और आखिर होटल
  5336. 3:58:08राजकमल में क्या होने वाला है? जानने के
  5337. 3:58:11लिए सुनते रहिए बेगर हस्बैंड।
  5338. 3:58:23[संगीत]

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