भिखारी हसबैंड | Episode 01–10 | Kahvanihindi — Transcript
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- 0:00इस दुनिया के सभी [संगीत] जीवों में इंसान
- 0:02ने सबसे ज्यादा तरक्की की है। इसकी सबसे
- 0:05बड़ी वजह यह है कि हमने एक साथ मिलकर रहना
- 0:08सीखा है। इंसान ने एकजुट होकर रहने के लिए
- 0:12समाज का निर्माण किया और उसकी नीव बने
- 0:15हमारे रिश्ते।
- 0:17जी हां, जरूरत में एक दूसरे के काम आना,
- 0:20सुख-दुख बांटना और रिश्ते निभाना। यह
- 0:23सदियों से चला आ रहा है। लेकिन क्या होता
- 0:26है जब कोई रिश्तों का नाजायज फायदा उठाने
- 0:29लगे? या फिर जबरदस्ती किसी के साथ रिश्ता
- 0:32जोड़ने की कोशिश करें। जब कोई किसी को
- 0:35पाने की चाहत में पागलपन की सभी हदें पार
- 0:38कर देता है तभी उसका विनाश होता है और साथ
- 0:42ही कहीं कुछ नए रिश्ते भी [संगीत] उजागर
- 0:44होते हैं। ऐसा ही कुछ होने वाला था राजदीप
- 0:46राय के परिवार के साथ। उनकी जिंदगी के
- 0:49सबसे खास दिन आज जब उनकी बेटी शिप्रा की
- 0:53शादी है। शिप्रा दुल्हन के भेष में अप्सरा
- 0:57जैसी लग रही थी। उसे देखकर लगता है कि ऊपर
- 1:00वाले ने उसे फुर्सत से बनाया होगा। गोरा
- 1:03रंग, सुरमई आंखें, तराशा हुआ बदन, पलखाती
- 1:07कमर और कमर को छूते उसके लंबे सुनहरे बाल।
- 1:11शिप्रा की खूबसूरती देखकर कोई भी अपना होश
- 1:14खो बैठे।
- 1:17शहर की जानी मानी हस्ती की बेटी [संगीत]
- 1:18और बलवंत राय की पोती होने के नाते कोई भी
- 1:21शिप्रा से उलझने की हिम्मत नहीं करता था।
- 1:24आज उसकी शादी रायजादा फैमिली के इकलौते
- 1:26चिराग विहान से है। असल में इस शादी के
- 1:29जरिए दोनों परिवारों के बीच एक [संगीत]
- 1:31गहरा बिजनेस रिलेशन बनने वाला है। फैमिली
- 1:34फ्रेंड्स होने के नाते शिप्रा और विहान एक
- 1:36दूसरे को अच्छी तरह जानते तो हैं लेकिन
- 1:39शादी जैसे बंधन में बंधने के लिए जिस
- 1:41प्यार की जरूरत होती है वो इन दोनों के
- 1:43बीच है या नहीं इसकी सुध लेने की शायद
- 1:46किसी ने जरूरत ही नहीं समझी। शिप्रा जैसी
- 1:50अप्सरा को पाकर विहान जरूर बेहद खुश होगा।
- 1:53लेकिन अगर कोई दुल्हन बनी शिप्रा को गौर
- 1:55से देखे तो उसके चेहरे पर मुस्कान [संगीत]
- 1:58तो थी लेकिन उसकी आंखें खामोश नजर आती थी।
- 2:02शिप्रा की तरह राजदीप राय की हवेली भी
- 2:05किसी दुल्हन की तरह जगमगा रही थी। बाहर
- 2:07महंगी चमचमाती गाड़ियां खड़ी थी और शहर के
- 2:10जानेमाने लोग हाथों में महंगे तोहफे लिए
- 2:13अंदर आते दिखाई दे रहे थे। शिप्रा का छोटा
- 2:16भाई राहुल मुख्य द्वार पर खड़ा आने वाले
- 2:18सभी मेहमानों पर इत्र छिड़क कर उनका
- 2:21स्वागत कर रहा था।
- 2:25दादा बलवंत राय गुलाबी साफा पहने,
- 2:27डेकोरेशन और बाकी तैयारियों का मुआयना कर
- 2:30रहे थे। अरे भाई बारात आने को है और अभी
- 2:33तक तुम लोगों का काम पूरा नहीं हुआ। कोई
- 2:36भी गड़बड़ हुई तो मैं सबके पैसे काटूंगा।
- 2:39वहीं शिप्रा के पिता राजदीप राय थोड़े से
- 2:42भावुक खड़े दिख रहे थे। हो भी क्यों ना
- 2:45[संगीत] प्यारी बेटी आज विदा होने वाली
- 2:47है। वहीं घर के अंदर शिप्रा की मां पंडित
- 2:50जी द्वारा दी गई लिस्ट को चेक करते हुए
- 2:52सुनिश्चित कर रही थी कि पूजा का सारा
- 2:54सामान सही से व्यवस्थित है कि नहीं। जब वो
- 2:57तेज-तेज़ चलते हुए पूजा की थाली ले जा रही
- 3:00थी तो बुआ से भिड़ते भिड़ते बची और राहत
- 3:02की सांस लेते हुए बोली ओ अब शुगुन
- 3:06होते-होते बचा और फिर दोनों खिलखिात के
- 3:09हंस पड़ी। [हंसी] कुछ ही देर में बारात
- 3:11दरवाजे पर आने वाली थी। इसीलिए सभी लोग
- 3:13बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इस बात से
- 3:16बिल्कुल अनजान कि आज जो बारात इस हवेली
- 3:18में आने वाली है उसे बारात कहना कितना
- 3:21मुश्किल होगा। वहीं दूसरी तरफ बाजेगाजे के
- 3:25साथ धूम मचाती बारात आगे बढ़ रही थी।
- 3:28दूल्हा विहान घोड़े पर सवार था और रायजादा
- 3:31परिवार के सगी संबंधी और दोस्त बैंड की
- 3:33धुन पर नाच रहे थे। अभी बारात घर से कुछ
- 3:36ही दूर निकली थी कि तभी गाड़ियों का
- 3:39काफिला तेजी से बारात के सामने आकर रुका।
- 3:42काफिले के बीच एक काले रंग की बड़ी जीप
- 3:44खड़ी थी। तभी गाड़ी में सवार एक आदमी अपनी
- 3:47बंदूक से आसमानी फायर करता है। गोली की
- 3:50आवाज सुनकर बैंड बाजा सब बंद हो जाता है।
- 3:52इतने में बाकी गाड़ियों से बंदूक लिए कुछ
- 3:55लोग निकलते हैं और बारात को चारों तरफ से
- 3:57घेर लेते हैं। तभी सन्नाटे को चीरती एक
- 4:01गुस्से भरी रौपदार आवाज आती है। यह गोली
- 4:04किसने चलाई? मैंने बारात में बंदूक लाने
- 4:06के लिए मना किया था ना। इस पर विहान का एक
- 4:09दोस्त घबराते हुए बोला, "अंकल, हमने कुछ
- 4:13नहीं किया। गोली वहां से चली है। कहते हुए
- 4:16उसने सामने की तरफ इशारा किया। यह क्या
- 4:19बदतमीजी है? कौन है जिसने धर्मवीर रायजादा
- 4:22की बेटे की बारात को रोकने की हिम्मत की
- 4:24है? कहते हुए धर्मवीर बारातियों में से
- 4:27बाहर आए तो गाड़ियों का काफिला और गन मैन
- 4:30देखकर उनके होश उड़ गए। अब उनके हलक से
- 4:33कोई आवाज नहीं निकली। वो तुरंत बड़ी गाड़ी
- 4:35के पास पहुंचे और झट से गाड़ी का दरवाजा
- 4:38खोला। इससे पहले कि मुख्तार भाई बाहर
- 4:40निकलते धर्मवीर ने मुख्तार का हाथ पकड़ कर
- 4:43चूमते हुए कहा मेरे अहोभाग्य मुख्तार भाई
- 4:46कि आप मेरे बेटे को आशीर्वाद देने आ गए
- 4:49मुख्तार अहमद रॉबीला चेहरा आंखों में
- 4:52सुरमा उनकी लंबी सफेद दाढ़ी सफेद कपड़ों
- 4:56के साथ और भी जच रही थी और पूरा बदन महंगे
- 4:59इत्र से महक रहा था। धर्मवीर के मुंह से
- 5:02अपना नाम सुनकर मुख्तार के चेहरे पर हल्की
- 5:04मुस्कान तैर गई। फिर उसने संजीदगी भरी
- 5:07निगाह से अपने सेवादार की तरफ देखा तो
- 5:10सेवादार ने झट से एक पीक दान मुख्तार के
- 5:12आगे बढ़ाया। मुख्तार पान थूक कर बोला
- 5:15सुभान अल्लाह।
- 5:17तो तुम हमें जानते हो। कैसी बात कर रहे
- 5:21हैं मुख्तार भाई? आपको कौन नहीं जानता?
- 5:24धर्मवीर ने दबी आवाज और चेहरे पर फिक्रमंद
- 5:26मुस्कान के साथ कहा, चलो बढ़िया है। फिर
- 5:30शायद खून बहाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और
- 5:33तुम्हें आसानी से मेरी बात समझ आ जाएगी।
- 5:37कहते हुए मुख्तार हाथ में छड़ी लिए गाड़ी
- 5:39से बाहर निकला। लेकिन धर्मवीर को कुछ समझ
- 5:42नहीं आया। वो बोले क्या कहना चाहते हैं
- 5:45भाई? आप हुक्म कीजिए आपका हुक्म सर आंखों
- 5:48पर। जिसकी शादी है कौन है वो तुम्हारा?
- 5:52मुख्तार ने घोड़े पर बैठे विहान पर नजर
- 5:54डालते हुए पूछा तो जवाब में धर्मवीर
- 5:57घबराते हुए बोले वो मेरा बेटा है मुख्तार
- 6:00भाई क्या हुआ मेरे बेटे से कोई गलती हो गई
- 6:03क्या अभी तक तो गलती नहीं हुई है पर करने
- 6:07जा रहा है क्या बात कर रहे हैं भाई हम
- 6:10भूलकर भी आपके खिलाफ नहीं जा सकते आप
- 6:12बताइए तो मैं गारंटी देता हूं मेरा बेटा
- 6:16कभी आपके खिलाफ नहीं जाएगा मुख्तार भाई
- 6:18कुछ पल धर्मवीर को देखता रहा फिर बोला तो
- 6:22ठीक है। जैसे आए थे वैसे ही यहां से वापस
- 6:26चले जाओ। मुख्तार भाई की यह बात सुनकर
- 6:29धर्मवीर रायजादा को झटका सा लगा। क्या बात
- 6:33कर रहे हो भाई? आज तो विहान की शादी है।
- 6:36वही तो नहीं करनी है। मुख्तार ने तिरछी
- 6:40मुस्कान के साथ कहा। जिसे देखकर धर्मवीर
- 6:42की घबराहट और बढ़ने लगी। वो लगभग रुआसा
- 6:46होते हुए बोला भाई अगर बिना शादी किए
- 6:48बारात वापस गई तो परिवार की बड़ी बेइज्जती
- 6:51हो जाएगी। इस पर मुख्तार ने धर्मवीर के
- 6:54कंधे पर हाथ रखकर समझाते हुए कहा बेइज्जती
- 6:58का गम बेटे की लाश को कंधा देने के गम से
- 7:03कम होता है बरखुरदार।
- 7:05यह सुनकर धर्मवीर के शरीर में झुरझुरी सी
- 7:08फैल गई। फिर भी उन्होंने बड़ी हिम्मत
- 7:10लगाकर पूछा।
- 7:12भाई क्या मैं जान सकता हूं कि आपको मेरे
- 7:14बेटे की शादी से ऐतराज क्यों है? वैसे तो
- 7:17मुख्तार जैसे डॉन को कोई सफाई देने की
- 7:19जरूरत नहीं थी। पर धर्मवीर ने अब तक उसकी
- 7:21सभी बातें मानी थी। शायद इसीलिए वो बोला
- 7:25अगर तुम जानना चाहते हो तो सुनो। ऐतराज
- 7:29तुम्हारे बेटे की शादी से नहीं उस लड़की
- 7:32की शादी से है। उसका नाम शिप्रा है ना? जो
- 7:37भी लड़का उस घमंडी लड़की से शादी करेगा
- 7:40मेरे हाथों उसकी मौत तय है। अब अगर तुम
- 7:44अपने बेटे का जनाजा देखना चाहते हो तो शौक
- 7:48से उसकी शादी शिप्रा से करवा सकते हो।
- 7:52इस पर धर्मवीर ने जिज्ञासु होकर पूछा।
- 7:55लेकिन भाई उस मासूम लड़की ने आखिर आपका
- 7:58क्या बिगाड़ा है? मासूम नहीं है वो।
- 8:02मुख्तार गुस्से में भड़क उठा। वो एक
- 8:04निहायती घमंडी और घटिया लड़की है। मुख्तार
- 8:08कुछ पल के लिए रुका और फिर आगे बोलना शुरू
- 8:11किया। अब बताओ एक खूबसूरत नौजवान लड़का है
- 8:15जो एक लड़की से बेइंतहा मोहब्बत करता है।
- 8:18दीवानगी की हद तक उसे चाहता है। उसके लिए
- 8:22मरने मारने को तक आमादा है। लेकिन सितम
- 8:26जरीफी तो देखिए। गुरूर में चूर उस लड़की
- 8:29को उसकी मोहब्बत ही नहीं दिखती। फिर
- 8:33मुख्तार व्यंग्ञात्मक हंसी-हंसते हुए बोला
- 8:35[हंसी]
- 8:36जवानी का जोश वो नौजवान दोस्तों के बहकावे
- 8:39में आकर उस लड़की के साथ एक छोटी सी शरारत
- 8:43कर बैठा। गुरूर में चूर उस लड़की ने
- 8:45बेचारे को सबके सामने तमाचा जड़ दिया। एक
- 8:49छोटा सा मजाक उस बदजात से बर्दाश्त ना
- 8:51हुआ। कहते हुए मुख्तार का गुस्सा फूट
- 8:54पड़ा। उस लड़की की इतनी औकात कि किसी मर्द
- 8:58को सरे बाजार थप्पड़ मार दे। औरत चाहे
- 9:01खूबसूरती में किसी की जैसे ही क्यों ना हो
- 9:04पर उसकी जगह मर्द की जूती के नीचे होती
- 9:07है। मुख्तार की इस घटिया सोच और ऊंची आवाज
- 9:11के चलते एक खुशनुमा माहौल में श्मशानी
- 9:14सन्नाटा छा गया। धर्मवीर रायजादा अपने
- 9:17मेहमानों के सामने शर्मिंदा हो गए। कुछ पल
- 9:20के लिए किसी को कुछ समझ में नहीं आया कि
- 9:22बात कहां से शुरू हुई थी और कहां पहुंच
- 9:25गई। धर्मवीर माहौल को बदलने के लिए बात
- 9:28बदलने की कोशिश करते हैं। लेकिन उससे पहले
- 9:30ही मुख्तार बोल पड़ा,
- 9:33"मेरे भाई को वो लड़की बेहद पसंद है। यह
- 9:36सोचकर मैंने उसके यहां शादी का प्रपोजल भी
- 9:39भेजा। पर एक गुंडे के घर अपनी पोती की
- 9:42शादी कराना उन्हें नागवार है। ऐसा कहकर
- 9:46उसके दादा ने शादी से इंकार कर दिया।
- 9:49मुख्तार की बात सुनकर धर्मवीर रायजादा को
- 9:52लगा कि उसे यह बात पहले क्यों नहीं पता
- 9:54चली। अगर उसे पहले से पता होता कि शिप्रा
- 9:57का पंगा मुख्तार भाई से चल रहा है तो वह
- 9:59कभी शादी के लिए तैयार नहीं होते।
- 10:02ऐसा लग रहा था कि किसी ने मुख्तार भाई के
- 10:05दर्द भरे तार छेड़ दिए हो। वो बोला
- 10:09उस लड़की की वजह से मेरा भाई आज जेल में
- 10:11है। अब वो लोग शादी के लिए नहीं माने तो
- 10:15इसमें मेरे भाई की क्या गलती?
- 10:18उसने उस लड़की के साथ थोड़ी सी छेड़छाड़
- 10:21कर दी। उसने मेरे भाई को जेल करवा दी। अब
- 10:25इतनी बेइज्जती के बाद तुम्हें लगता है कि
- 10:27मैं उसकी शादी किसी अच्छे परिवार में होने
- 10:30दूंगा।
- 10:32इतना सब सुनने के बाद भी धर्मवीर अपने मन
- 10:34में उठ रहे एक सवाल को पूछने से खुद को
- 10:36रोक नहीं पाए। लेकिन भाई आप उसके दूल्हे
- 10:40को क्यों खत्म करना चाहते हैं? उससे अच्छा
- 10:43तो यह नहीं होगा कि आप उस लड़की को ही
- 10:45ठिकाने लगा देते। इस पर मुख्तार गुस्से
- 10:48में जबड़ा भीते हुए बोले तुम्हें क्या
- 10:51लगता है कि मुझे बात समझ नहीं आती? अंजाम
- 10:56तो उसका एक दिन यही होना है। पर अभी कुछ
- 10:59वक्त के लिए हम कुछ नहीं कर सकते। क्या है
- 11:02कि अभी मेरे भाई का केस चल रहा है। अगर
- 11:05अभी उस लड़की को कुछ हुआ तो उसका शक मेरे
- 11:09ऊपर जाएगा। मैं खामखा कानून को अपने ऊपर
- 11:12फंदा कसने का मौका [संगीत] नहीं देना
- 11:14चाहता। यह समझ लो कि कोई उड़ता हुआ तीर भी
- 11:18अगर उसकी तरफ आता है तो उसे मैं अपने ऊपर
- 11:21ले लूंगा। पर उसे खरोच तक नहीं आने दूंगा।
- 11:25लेकिन हां जो उसका रकीब बनकर आएगा उसको
- 11:29छोडूंगा भी नहीं।
- 11:32घोड़े पर सवार विहान जो अब तक सारी बातें
- 11:34सुन रहा था अब उससे रहा नहीं गया। पापा
- 11:37मैं गुंडे के डर से शिप्रा से शादी करने
- 11:39का फैसला नहीं बदल सकता। मैं शिप्रा से ही
- 11:42शादी करूंगा।
- 11:44कहते हुए वह घोड़े से उतर कर सामने आया ही
- 11:46था कि तभी एक जोरदार थप्पड़ की आवाज
- 11:48गूंजी। विहान को थप्पड़ मारने वाला कोई और
- 11:51नहीं धर्मवीर रायजादा खुद थे। जब उन्होंने
- 11:55देखा कि विहान कुछ ज्यादा ही बोल गया है
- 11:57तो उसकी जान बचाने के लिए उन्होंने खुद
- 11:59विहान को थप्पड़ जड़ दिया। और फिर मुख्तार
- 12:02को सफाई देते हुए बोले
- 12:05भाई मेरा बेटा भी नासमझ है। इसे अच्छे
- 12:07बुरे का ज्ञान नहीं है। इसकी तरफ से मैं
- 12:10माफी मांगता हूं।
- 12:12इस पर मुख्तार ठंडे लहजे में बोला कोई बात
- 12:16नहीं सेठ जवानी का जोश अच्छे भले आदमी को
- 12:20दीवाना बना देता है। तुम शरीफ आदमी हो
- 12:24इसलिए छोड़ रहा हूं। अब चलो निकलो यहां
- 12:27से। अभी मुझे एक दूसरा लड़का ढूंढकर उस
- 12:31लड़की की शादी भी तो करानी है। [हंसी]
- 12:34ये सुनकर धर्मवीर रायजादा हैरान रह गए और
- 12:37उन्होंने अपनी हैरानी मुख्तार के आगे
- 12:39जाहिर भी कर दी।
- 12:41भाई मैं कुछ समझा नहीं। आपने तो कहा था कि
- 12:44जिससे भी उसकी शादी होगी उसे आप मौत के
- 12:46घाट उतार देंगे। पर अभी आप कह रहे हैं कि
- 12:49उसकी शादी करानी है। मुख्तार के चेहरे पर
- 12:52कुटिल मुस्कान फैल गई। वो बोला मेरे कहने
- 12:57का मतलब यह था कि मैं किसी इज्जतदार
- 12:59फैमिली में उसकी शादी नहीं होने दूंगा।
- 13:04बड़ा गुरूर है ना उसे अपने हुस्न पर तो अब
- 13:07मैं जिससे उसकी शादी करवाऊंगा उससे उस
- 13:10लड़की का घमंड भी [संगीत] टूटेगा और एक
- 13:13गुंडे के साथ रिश्ता ना करवाने वाले उसके
- 13:16दादा की भी अक्ल ठिकाने आ जाएगी।
- 13:20कहते हुए मुख्तार की नजर एक जगह ठहर गई और
- 13:23अचानक ही उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान
- 13:25तैर गई। ए कल्ला
- 13:28मुख्तार ने जोर से आवाज लगाई तो कल्ला
- 13:30मुख्तार के सामने आकर बोला जी भाई क्या
- 13:34हुक्म है? और फिर मुख्तार ने कल्ला को कुछ
- 13:37इशारा किया। फिर मुख्तार ने धर्मवीर की ओर
- 13:40देखे बिना कहा
- 13:42तुम्हारा बैंड बाजा और बारात मैं लेकर
- 13:45जाऊंगा। और अगर तुम्हारे कुछ रिश्तेदार
- 13:48अच्छी दावत खाना चाहते हैं तो वो भी आ
- 13:51सकते हैं। रात की खामोशी के बीच मुख्तार
- 13:54की भयानक हंसी गूंज उठी। [हंसी]
- 13:58शाम का वक्त था। शिप्रा अपने फ्रेंड्स के
- 14:00साथ हंसते खिलखिलाते हुए अपनी गाड़ी की
- 14:02तरफ बढ़ रही थी कि तभी अचानक पीछे से किसी
- 14:05ने शिप्रा का हाथ पकड़ लिया। इससे पहले कि
- 14:07शिप्रा कुछ समझ पाती उस आदमी ने शिप्रा को
- 14:10बाजू से पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया।
- 14:13शिप्रा हैरान रह गई। हाउ डेयर यू? शिप्रा
- 14:16ने गुस्से में कहा। लेकिन उस आदमी को इससे
- 14:19कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने प्यार से शिप्रा
- 14:21की नाजुक कमर में हाथ डाला और इसके गालों
- 14:24को चूम कर बेशर्मी से हंसने लगा। [हंसी]
- 14:29एक पल के लिए तो शिप्रा को कुछ समझ ही
- 14:30नहीं आया कि उसके साथ क्या हुआ। फिर अगले
- 14:33ही पल उसका शरीर गुस्से में कांप उठा। एक
- 14:36झटके के साथ शिप्रा ने खुद को उसकी गिरफ्त
- 14:39से छुड़ाया और उस बदतमीज आदमी के चेहरे पर
- 14:41एक जोरदार तमाचा जड़ दिया। वो आदमी सन्य
- 14:45रह गया। उसने कभी नहीं सोचा था कि शिपरा
- 14:48भरे बाजार सबके सामने उसे थप्पड़ जड़
- 14:51देगी। उस थप्पड़ की गूंज पूरे इलाके ने
- 14:54सुनी।
- 14:56और आज वही गूंज शिपरा का पूरा परिवार
- 14:59सुनने वाला है।
- 15:02बारात को निकले काफी देर हो चुकी है लेकिन
- 15:04अभी तक यहां पहुंची नहीं। सब ठीक तो है
- 15:07ना? यह सोचकर शिप्रा के घर वाले परेशान हो
- 15:10रहे थे। अरे आप एक बार फिर से फोन करके
- 15:13पता करिए ना। शिप्रा की मां बीना राय
- 15:16घबराहट में राय साहब से बोली। इस पर राय
- 15:19साहब ने झुंझुला कर जवाब दिया। कितनी बार
- 15:22फोन कर चुका हूं। अब नहीं उठा रहे तो क्या
- 15:25करूं? पूरी बारात के साथ निकलने में टाइम
- 15:28तो लग ही जाता है। इतने में दूर जगमग
- 15:31रोशनी के साथ बैंड बाजे की धुन सुनाई दी।
- 15:34फिर क्या था? सभी के चेहरे खिल उठे। लो आ
- 15:37गई बारात। बिना मतलब परेशान हो रही थी। अब
- 15:41जल्दी जाओ और स्वागत की तैयारी करो। राय
- 15:44साहब उत्साहित होकर अपनी पत्नी से बोले।
- 15:46देखते ही देखते आरती की थाल लिए सभी द्वार
- 15:49पर खड़े हो गए। वहीं झूमतेनाचते बारात भी
- 15:52दरवाजे तक आ पहुंची। लेकिन बारात के हाल
- 15:55देखकर सभी के चेहरे का रंग एकदम से उड़
- 15:58गया। हे भगवान ये क्या? मवालियों जैसे
- 16:02कपड़े, पैरों में चप्पल, बड़ी दाढ़ी और
- 16:06हाथों में बंदूक लहराते ये गुंडे। भला ये
- 16:09कैसी बारात है? राजदीप राय किससे अपनी
- 16:12बेटी का ब्याह कर रहे हैं? सभी मेहमान आपस
- 16:16में बुदबुदाने लगे। और तो और घोड़ी पर
- 16:19बैठे दूल्हे को देखकर तो सबके होश ही उड़
- 16:21गए। दूल्हे के सर पर चमचमाता सेहरा तो था
- 16:25पर वो बहुत गंदा सा दिख रहा था। नंगे पैर,
- 16:29बदन पर मैले से फटे पुराने कपड़े, बेतरतीब
- 16:32ढंग से बढ़ी दाढ़ी और बाल। ऐसा लग रहा था
- 16:35कि वो सदियों से नहाया तक नहीं है। दूल्हे
- 16:38की फटीचर हालत देखकर राजदीप राय सामने आए
- 16:41और गुस्से में तमतमाते हुए बोले, "यह क्या
- 16:44तमाशा है? कौन हो तुम लोग? तभी बारात की
- 16:49भीड़ के बीच से मुख्तार भाई की आवाज आती
- 16:52है। तमाशा अभी शुरू कहां हुआ है राय साहब?
- 16:58कहते हुए मुख्तार हाथ में छड़ी लिए सामने
- 17:01आया।
- 17:02मुख्तार तुम्हारी यहां आने की हिम्मत कैसे
- 17:05हुई? राजदीप राय गुस्से में आग बबूला हो
- 17:08उठे। इस पर मुख्तार ने चेतावनी भरे अंदाज
- 17:11में कहा,
- 17:13"मुझ में कितनी हिम्मत है। यह परखने की
- 17:16गलती भी मत करना राजदीप वरना अपनों की
- 17:20लाशें गिनतेगिनते थक जाओगे।
- 17:23कहते हुए मुख्तार ने अपनी छड़ी से राजदीप
- 17:26राय के पूरे परिवार की तरफ इशारा किया।
- 17:28कहा जाता है कि मुख्तार को असला, बारूद या
- 17:31बंदूकों की जरूरत नहीं पड़ती। वो सिर्फ
- 17:34अपनी छड़ी से दुश्मन का गला काट देता है।
- 17:37मुख्तार की धमकी सुनकर राजदीप राय एक पल
- 17:40के लिए ठिठक गया। और एक खाली घूंट भरते
- 17:44हुए धीमे स्वर में बोला आखिर तुम चाहते
- 17:48क्या हो? इस पर मुख्तार भी थोड़ा नरम होते
- 17:51हुए बोला हां
- 17:54ये हुई ना बात। अरे भाई आज खुशी का मौका
- 17:58है। तुम्हारी बेटी की शादी है और दूल्हा
- 18:02मैं साथ लेकर आया हूं। कोई भी अच्छा काम
- 18:06करने से पहले तुम लोग ओ क्या देखते हो?
- 18:11शुभ मुहूर्त है ना? हां। तो इससे पहले कि
- 18:16मुहूर्त बीत जाए अपनी बेटी को बुलाओ। चलो
- 18:21चलो जल्दी करो। और भी बहुत काम है मुझे।
- 18:25बोलते हुए मुख्तार राजदीप को धकियाने लगे।
- 18:30यहां राजदीप राय के सभी रिश्तेदार मौजूद
- 18:32हैं। राय साहब ने मदद की उम्मीद के साथ जब
- 18:35अपने खास रिश्तेदारों की ओर देखा तो सभी
- 18:38उनसे नजर चुराने लगे। मुख्तार के सामने
- 18:42कुछ [संगीत] भी कहने की किसी की हिम्मत
- 18:44नहीं हो रही थी। तभी दादा बलवंत राय आगे
- 18:47आए। उनकी आंखों में गुस्से के अंगारे धधक
- 18:50रहे थे। बकवास बंद कर और निकल जा यहां से।
- 18:55क्यों हमारी खुशियों पर ग्रहण लगाने आया
- 18:57है तू?
- 18:59उधर दूसरी तरफ शिप्रा की सहेलियां उसे
- 19:02बाहर का सारा हाल बता चुकी थी। अपनी
- 19:04सहेलियों के चेहरे पर छाए डर को देखकर
- 19:07शिप्रा को बाहर की स्थिति का अंदाजा लग
- 19:09चुका था। शिप्रा का मन किसी अनहोनी के डर
- 19:12से घबरा उठा। अब कमरे में बैठे रहना उसके
- 19:15लिए मुश्किल हो गया था। वो [संगीत] उठी और
- 19:18तुरंत कमरे से बाहर चली गई और सीधी शादी
- 19:21के मंडप की तरफ बढ़ गई। उसकी सहेलियां भी
- 19:23उसके पीछेछे बाहर आ गई। शिप्रा भागकर मंडप
- 19:26के पास पहुंची तो दूर से ही उसकी [संगीत]
- 19:28नजर मुख्तार भाई पर पड़ी। शिप्रा को उसके
- 19:31पिता की आवाज सुनाई दी।
- 19:34देखो मुख्तार बात को ज्यादा बढ़ाने की
- 19:36जरूरत नहीं है। हमें किसी तरह का कोई
- 19:39बखेड़ा नहीं चाहिए। तभी बलवंत राय भी बोले
- 19:43हां अगर तुम चाहते हो तो मैं अपनी पोती से
- 19:47कहकर तुम्हारे भाई के खिलाफ जो केस है उसे
- 19:50वापस करवा देता हूं। पर तुम यहां पर इस
- 19:52शुभ घड़ी में कोई हंगामा मत करो।
- 19:56मुख्तार ठहाका लगाते हुए बोला हे बुड्ढे
- 20:01तुझे क्या लगता है? मेरा भाई तेरी पोती के
- 20:05कारण जेल में बंद है। अबे वही तो एक सच्चा
- 20:09आशिक है तेरी पोती का जो अपने प्यार की
- 20:12खातिर खुद अपनी कुर्बानी देने को तैयार
- 20:16है। यह सब देखकर शिप्रा से रहा नहीं गया।
- 20:20पर वो जैसे ही बाहर आने को हुई कि तभी
- 20:22उसकी मां ने उसे रोक लिया। तभी राजदीप आगे
- 20:26बढ़े और लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोले देखो
- 20:29मुख्तार भाई मैं तुमसे रिक्वेस्ट करता
- 20:31हूं। अभी तुम चले जाओ। थोड़ी ही देर में
- 20:34बारात आती ही होगी। अगर वो लोग यह सब
- 20:37देखेंगे तो सब गड़बड़ हो जाएगा।
- 20:40[हंसी]
- 20:43[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] कैसी
- 20:44बारात?
- 20:46अरे जो बारात लेकर आ रहे थे वो तो खुद
- 20:49बाराती बने हुए हैं। मुख्तार के इतना
- 20:52बोलते ही कल्ला धर्मवीर और विहान को धकेल
- 20:54कर सामने ले आया। उन दोनों को सामने देखकर
- 20:58राजदीप और बलवंत की आंखें फटी [संगीत] की
- 21:00फटी रह गई। मजबूर धर्मवीर और विहान लाचारी
- 21:04और शर्म के मारे राजदीप और बलवंत से नजर
- 21:07भी नहीं मिला पा रहे थे। मुख्तार उनका
- 21:10मजाक उड़ाते हुए बोला ये दोनों बाप बेटे
- 21:14तो बारात लाने से मुकर गए थे। फिर मैंने
- 21:18सोचा भाई किसी की इज्जत ऐसे नीलाम नहीं
- 21:21होनी चाहिए। फिर आनन-फानन में जो लड़का
- 21:24मिला मैं ले आया।
- 21:27देख ले बुड्ढे तेरी पोती से शादी करने के
- 21:30लिए यह लड़का मिला है। पसंद तो है ना
- 21:34तुझे? मेरे घर रिश्ता जोड़ने से तेरी
- 21:38इज्जत घट रही थी ना। अब ये देख यह भिखारी
- 21:43दूल्हा तेरी इज्जत में चार चांद लगाएगा।
- 21:48बलवंत राय और राजदीप मुख्तार की बात सुनकर
- 21:50खून का घूंट पीकर रह गए। यह सब देखकर
- 21:53शिप्रा से रहा नहीं गया। वो गुस्से में
- 21:56चिल्लाते हुए बाहर निकली। जिसकी खुद की
- 21:58कोई इज्जत ना हो वो किसी और की इज्जत का
- 22:00मोल क्या जाने।
- 22:03माशा्लाह
- 22:05ये लो लड़की भी आ गई। कल्ला
- 22:10फेरों की तैयारी कर। मुख्तार उत्तेजित
- 22:13होकर बोला। तभी राजदीप शिप्रा को खींच कर
- 22:16अंदर ले जाते हुए बोला,
- 22:20पागल हो गई हो क्या? चलो अंदर। लेकिन
- 22:23शिप्रा रुकती नहीं है। वो गुस्से में लाल
- 22:25हो चुकी थी।
- 22:27भाई के जेल जाने के बाद भी तुम नहीं
- 22:29सुधरे। तुम्हें भी अपने भाई के पास जाना
- 22:31है क्या? मुख्तार शिप्रा का ये रूप देखकर
- 22:35कुटिल मुस्कान के साथ बोला, वाह क्या तेवर
- 22:40है। तभी मैं कहूं मेरा भाई इसके पीछे इतना
- 22:44पागल क्यों है? अब तो मैं भी तेरा दीवाना
- 22:48हो गया रे।
- 22:51तभी घोड़ी ने हिनहिनाते हुए अपने दोनों
- 22:53टांगे ऊपर उठा ली। यह देखकर मुख्तार तंज
- 22:57कसते हुए बोला, अब तो इस दूल्हे से भी
- 23:00नहीं रहा जा रहा। आजा जल्दी से मंडप में
- 23:05आकर बैठ जा। हे पंडित चल मंत्र शुरू कर।
- 23:12मुख्तार हुक्म देते हुए बोला। इतने में
- 23:15शिपरा ने मुख्तार को आगाह करते हुए कहा
- 23:18मुख्तार अपनी सलामती चाहते हो तो अभी के
- 23:21अभी यहां से चले जाओ नहीं तो मैं पुलिस को
- 23:23बुलाऊंगी।
- 23:26तुम्हारी दिक्कत क्या है? सीधा पुलिस की
- 23:30धमकी देने लगती हो। तुम्हारे अपने बस में
- 23:33कुछ है भी या नहीं? मुख्तार दांत पीसते
- 23:37हुए बोला। इतने में बीना राय मुख्तार के
- 23:39सामने आकर रोते गिड़गिड़ाते हुए बोली।
- 23:42मुख्तार भाई मेरी बेटी को माफ कर दो। उससे
- 23:45गलती हो गई जो वो आपके भाई के खिलाफ गई।
- 23:49इस पर मुख्तार हंसी उड़ाते हुए बोला।
- 23:52अबे क्या नौटंकी चल रही है? राय खानदान
- 23:56में कोई मर्द नहीं बचा जो औरतों को आगे
- 23:59करके अपनी बात रख रहे हो। राजदीप उम्मीद
- 24:03भरी नजरों से वहां मौजूद लोगों की ओर
- 24:05देखने लगे कि शायद कोई उनकी मदद को आगे
- 24:08आएगा। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। धर्मवीर
- 24:11और विहान तो पहले ही मुख्तार के सामने
- 24:13सरेंडर कर चुके थे। वहां मौजूद मेहमानों
- 24:16की आंखों में उनके लिए हमदर्दी तो थी पर
- 24:19किसी में इतना साहस नहीं था कि वो मुख्तार
- 24:21के सामने राजदीप जी के साथ खड़ा हो पाए।
- 24:25कोई रास्ता ना पाकर राजदीप राय ने आखिरकार
- 24:28पुलिस को फोन लगा ही दिया।
- 24:31घंटी बजती रही। लेकिन पुलिस स्टेशन में
- 24:34किसी ने फोन नहीं उठाया। राजदीप बार-बार
- 24:37कोशिश करते रहे। लेकिन हर बार उनकी कोशिश
- 24:40बेकार साबित हुई।
- 24:42तभी अचानक मुख्तार हंसने लगा। [हंसी]
- 24:45उसके साथ उसके आदमी भी ठहाका लगाकर हंसने
- 24:48लगे। मैं बदमाशी के धंधे में तब से हूं जब
- 24:53मेरे दूध के दांत भी नहीं टूटे थे।
- 24:57सब बंदोबस्त करके आया हूं। अब हाथ पैर
- 25:01मारने से कोई फायदा नहीं। अपनी लाडली से
- 25:05कहो शांति से मंडप में बैठ जाए। मुख्तार
- 25:09राजदीप को समझाते हुए बोला,
- 25:12शिप्रा के तेवर में अभी भी कोई बदलाव नहीं
- 25:15आया था। मर जाऊंगी पर एक गुंडे के आगे
- 25:18नहीं झुकूंगी।
- 25:20बंद कर अपनी किटर पिटर।
- 25:23बड़ी जल्दी है तुझे मरने की। तेरी यह
- 25:26ख्वाहिश भी पूरी करूंगा। पर शादी के बाद
- 25:30हे कल्ला
- 25:33मुख्तार का इशारा मिलते ही कल्ला शिप्रा
- 25:35को मंडप पर ले जाने के लिए उसकी तरफ बढ़ने
- 25:38लगा।
- 25:40मुख्तार पंडित को हुक्म देते हुए बोला
- 25:43पंडित तेरे मंत्र रुके तो तेरी सांसे भी
- 25:47रुक जाएंगी। क्या समझा?
- 25:51डर के मारे पंडित ने झटपट मंत्र पढ़ना
- 25:53शुरू कर दिए। वहीं जैसे ही कल्ला आगे
- 25:56बढ़कर शिप्रा का हाथ पकड़ने वाला था कि
- 25:58तभी उसके चेहरे पर एक जोरदार मुक्का पड़ा।
- 26:01कल्ला ने पलट कर देखा तो शिप्रा का छोटा
- 26:04भाई राहुल गुस्से में मुट्ठी बांधे खड़ा
- 26:06था। कल्ला ने पूरी ताकत के साथ राहुल की
- 26:09छाती पर एक लात मारी जिससे राहुल दूर
- 26:12मुख्तार के पैरों के पास आ गिरा। राजदीप
- 26:15और उनके परिवार के लोग राहुल की तरफ भागे
- 26:18पर मुख्तार के आदमी उनके सामने खड़े हो
- 26:20गए। राहुल मुख्तार के पैरों में पड़ा दर्द
- 26:23से करा रहा था। शिप्रा यह सब देखकर सिहर
- 26:26उठी। वहीं मुख्तार का चेहरा अब गुस्से में
- 26:30लाल हो चुका था। वो अपनी छड़ी का हत्थ
- 26:33पकड़ कर खींचता है तो उस छड़ी में से एक
- 26:35तलवार निकल आती है। यह देखकर वहां खड़े
- 26:38सभी मेहमानों का चेहरा डर के मारे पीला
- 26:40पड़ गया। राजदीप, बलवंत और बीना सभी
- 26:44मुख्तार के आगे गिड़गिड़ाने लगे। नहीं
- 26:47मुख्तार भाई नहीं यह भी बच्चा है। प्लीज
- 26:50इसे कुछ मत करो। मुख्तार शिप्रा को घूरते
- 26:54हुए धारदार तलवार राहुल की गर्दन पर रख
- 26:57देता है। यह देखकर बीना राय बेहोश हो जाती
- 27:01है और बूढ़े बलवंत राय माथा पीट कर रोने
- 27:04लगते हैं।
- 27:06मैं तुम्हारे सामने हाथ जोड़ रहा हूं।
- 27:08मुख्तार भाई मेरे बेटे की जान बखश दो।
- 27:11राजदीप राय गिड़गिड़ा कर रहम की भीख
- 27:14मांगने लगे। अपने परिवार के लोगों की हालत
- 27:17देखकर शिप्रासन रह गई। उसने कहां सोचा था
- 27:21कि एक सर फेरे आशिक को सबक सिखाने के चलते
- 27:24उसके खुद के परिवार की यह दुर्दशा हो
- 27:27जाएगी। रात का वक्त मंदिर की सीढ़ियों पर
- 27:31बैठा एक गंदा सा दिखने वाला भिखारी पत्तल
- 27:33में सब्जी रोटी खा रहा था। साथ ही वो उन
- 27:36आवारा कुत्तों को भी खिला रहा था जो उसे
- 27:38घेर कर खड़े थे। कुछ ही दूरी पर रोशनी से
- 27:41सजी एक जगमग बारात दिख रही थी। लेकिन उसका
- 27:44ध्यान अपने पत्तल में पड़ी रोटी पर ही था।
- 27:47तभी कल्ला उसके पास आया और रॉबीले अंदाज
- 27:49में हुक्म देते हुए बोला सुन ओ भिखारी चल।
- 27:54तुझे हमारे बॉस बुला रहे हैं। भिखारी ने
- 27:57कल्ला को एक नजर देखा और फिर वापस खाने
- 27:59लगा।
- 28:01यह भिखारी कम और पागल ज्यादा लग रहा है।
- 28:04उठाओ इसे। कल्ला ने अपने आदमियों से कहा,
- 28:07जैसे ही वो लोग उस भिखारी की तरफ बढ़े तो
- 28:09सारे कुत्ते गुर्राते हुए उन्हें काटने को
- 28:12दौड़ पड़े। कल्ला और उसके साथी डर कर पीछे
- 28:15हट गए। क्या गुंडे बनोगे रे तुम लोग? इन
- 28:18आवारा कुत्तों से डर गए। उठाओ पत्थर और
- 28:21मारो इन्हें। कल्ला अपने आदमियों से बोला
- 28:24इससे पहले कि वो लोग उन कुत्तों को मारते
- 28:27भिखारी ने उन्हें इशारा करके रुकने को कहा
- 28:29और कल्ला के साथ चल दिया। कुत्ते भी दुम
- 28:32हिलाते हुए उसके पीछे पीछे चल दिए।
- 28:34मुख्तार ने जब भिखारी को करीब से देखा तो
- 28:36उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
- 28:39सुभान अल्लाह।
- 28:41जैसा सोचा था एकदम वैसा ही दूल्हा मिल
- 28:45गया। नाम क्या है रे तेरा? मुख्तार ने
- 28:49पूछा। तभी पीछे से एक बूढ़ी भिखारन बोली
- 28:53साहब यह बेचारा बोल नहीं सकता है। यह
- 28:57सुनते ही मुख्तार की बाछें खिल उठी। अरे
- 29:00वाह ये तो और भी अच्छी बात है। तुम इसे
- 29:05जानती हो क्या? नहीं साहब। इसका नाम,
- 29:08ग्राम कुछ नहीं पता। 6 महीने से यहीं
- 29:12मंदिर के पास पड़ा रहता है। मैंने आज तक
- 29:15इसे किसी से बात करते हुए नहीं सुना।
- 29:18बूढ़ी भिखारन ने मुख्तार को बताया।
- 29:21मुख्तार ने कुटिल मुस्कान के साथ भिखारी
- 29:24से कहा, आज से तू मुझे अपना मसीहा समझ
- 29:29क्योंकि आज मैं तेरी किस्मत चमकाने वाला
- 29:33हूं। इस वक्त राय साहब की हवेली के अंदर
- 29:36सर पर सेहरा बांधे घोड़ी पर सवार वो
- 29:39भिखारी शायद यही सोच रहा होगा कि उसकी
- 29:41किस्मत चमकने पर किसी और के जीवन में मातम
- 29:44क्यों छा गया है। मुख्तार के हाथों में
- 29:47फंसा राहुल उससे छूटने की पूरी कोशिश कर
- 29:50रहा था। पर उसकी हालत बाज के पंजों में
- 29:53फंसे कबूतर जैसी थी। शिप्रा से अपने भाई
- 29:56की हालत देखी नहीं जा रही थी। वो मुख्तार
- 29:59के सामने आई और बेबस होकर बोली।
- 30:02छोड़ दो मेरे भाई को। तुम्हारी दुश्मनी
- 30:04मुझसे है तो फिर मेरी जान ले लो पर मेरे
- 30:07भाई को छोड़ दो। ओ हो [कराहने की आवाज़]
- 30:11इतनी भी क्या जल्दी है? जान भी लूंगा पर
- 30:15अभी उसका वक्त नहीं आया है। मुख्तार कुटिल
- 30:19[संगीत] मुस्कान के साथ बोला। और याद रखना
- 30:24मुझे तुम्हारी जान लेने की जरूरत नहीं
- 30:26पड़ेगी। तू खुद अपनी जान ले लेगी। क्योंकि
- 30:30तूने खुद अपनी किस्मत पर लात मारी है। एक
- 30:36तरफ जहां मुख्तार की धारदार तलवार राहुल
- 30:38का गला काटने वाली थी, राजदीप और बलवंत
- 30:41उसकी जान की भीख मांग रहे थे। वहीं शिप्रा
- 30:44सभी मेहमानों और रिश्तेदारों को देख रही
- 30:46थी और उम्मीद कर रही थी कि कोई तो चमत्कार
- 30:49हो जाए। [संगीत] लेकिन अफसोस ऐसा कुछ नहीं
- 30:52होने वाला था। शिप्रा ने धर्मवीर रायजादा
- 30:55और विहान को मौका पाकर वहां से खिसकते
- 30:57[संगीत]
- 30:58देखा। वहीं जब मुख्तार ने राहुल के गले पर
- 31:01अपनी तलवार की नोक से थोड़ा जोर डाला तो
- 31:03राहुल के गले से हल्का सा खून निकल आया।
- 31:06शिप्रा जोर से चिल्लाई रुको मैं तैयार
- 31:10हूं। मेरे भाई को छोड़ दो। मैं तैयार हूं।
- 31:12तुम जो बोलोगे वो मैं करूंगी। शिप्रा अपने
- 31:16परिवार की अब और दुर्दशा नहीं देख सकती
- 31:18थी। वो भाग कर राहुल के पास गई और उसे गले
- 31:21लगाकर रोने लगी।
- 31:24मुझे कुछ नहीं होगा दीदी। और अगर हो भी
- 31:27गया तो परवाह नहीं। अपने जीते जी मैं आपकी
- 31:30जिंदगी बर्बाद नहीं होने दूंगा।
- 31:32राहुल छिप्रा से बोला जान खतरे में होने
- 31:35पर भी उसने हिम्मत नहीं हारी थी। ये देखकर
- 31:39मुख्तार ताली पीटते हुए बोला क्या बात है।
- 31:44भाई-बहन का प्यार देखकर मेरी आंखों में
- 31:46आंसू आ गए। [हंसी]
- 31:50बहन भाई की खातिर अपनी जिंदगी बर्बाद करने
- 31:53को तैयार है और भाई अपनी जान कुर्बान करने
- 31:57को आमादा है।
- 32:00राजदीप राय को अफसोस हो रहा था कि उसने
- 32:02शादी से पहले पुलिस प्रोटेक्शन क्यों नहीं
- 32:04लिया। शायद तब मुख्तार इतनी हिम्मत नहीं
- 32:07करता। शिप और राजदीप मुख्तार की इस खोखली
- 32:11धमकी को समझ नहीं पाए कि [संगीत] मुख्तार
- 32:12इतनी भरी महफिल में सबके सामने उसके भाई
- 32:15की जान नहीं ले सकता।
- 32:18मुख्तार कितना भी बड़ा डॉन सही पर वो किसी
- 32:21को इस तरह सरेआम जान से मारकर अपने खिलाफ
- 32:24इतना बड़ा सबूत नहीं छोड़ सकता था जो कल
- 32:26को उसके लिए मुसीबत बन जाए।
- 32:30दरअसल मुख्तार के भाई के केस के दौरान
- 32:32कोर्ट ने आर्डर दिया था कि मुख्तार कभी भी
- 32:34शिप्रा की फैमिली के नजदीक नहीं जाएगा और
- 32:37ना ही उन्हें डराने धमकाने की कोशिश
- 32:39करेगा। पुलिस को तो मुख्तार कंट्रोल कर
- 32:41सकता है। लेकिन कोर्ट से पंगा लेना उसके
- 32:44लिए भी ठीक नहीं होगा। आज शिप्रा की शादी
- 32:46एक ऊंचे खानदान में होते देख [संगीत]
- 32:48मुख्तार से रहा नहीं गया इसलिए वह जोखिम
- 32:51उठाकर आ गया। कहते हैं जब समय खराब होता
- 32:54है तो अच्छे खासे इंसान के दिमाग पर पत्थर
- 32:57पड़ जाता है। पर एक गुंडे का क्या भरोसा?
- 33:00पुलिस, मुकदमा और जेल से तो इनका अटूट
- 33:03नाता है। मुख्तार के आगे घुटने टेकने का
- 33:06शायद यह भी एक कारण रहा होगा। खैर,
- 33:09मुख्तार जो चाह रहा था वो उसे मिल गया।
- 33:12शिप्रा के हामी भरते ही मुख्तार अपनी
- 33:14तलवार वापस छड़ी में डालते हुए बोला, चलो
- 33:18अच्छा हुआ जो मान गई वरना खामखा इस बच्चे
- 33:22की जान चली जाती।
- 33:25फिर उसने अपने आदमियों को आदेश दिया। तुम
- 33:28लोगों ने सुना नहीं।
- 33:30लड़की मान गई है। दूल्हे को घोड़ी से नीचे
- 33:34उतारो और दूल्हा दुल्हन दोनों को मंडप पर
- 33:38ले जाओ।
- 33:42सभी मेहमान घबराए नहीं। आप बस शादी का
- 33:46लुत्फ उठाइए। मेरे आदमी आप लोगों की दिल
- 33:50खोलकर खातिरदारी करेंगे। आप सभी खुशकिस्मत
- 33:55हैं जो इस ऐतिहासिक दिन के गवाह बनने जा
- 33:58रहे हैं।
- 34:00फिर मुख्तार बैंड वालों की ओर मुड़कर
- 34:02बोला। तुम लोगों को अलग से बोलना पड़ेगा
- 34:06क्या? बजाओ।
- 34:09मुख्तार की हरकतें देखकर राजदीप, बलवंत
- 34:12राय और वहां उपस्थित सभी मेहमानों का खून
- 34:15खौल रहा था। लेकिन सब बस मन ही मन मुख्तार
- 34:19को सिर्फ बद्दुआ ही दे सकते थे। कुछ कर
- 34:22नहीं सकते थे। क्या करें? बदमाशी और गुंडई
- 34:26अक्सर शराफत पर हावी हो जाती है। ऐसा लग
- 34:30रहा था मानो किसी आतंकवादी ने पूरी शादी
- 34:32को हाईजैक कर रखा हो। अपनी मर्जी से कोई
- 34:35उठ बैठ भी नहीं सकता था। शिप और राजदीप
- 34:38बेहोश हो चुकी बीना जी को होश में लाने की
- 34:40कोशिश कर रहे थे कि तभी उनकी नौकरानी बोली
- 34:44सुबह से उन्होंने कुछ नहीं खाया है। अपनी
- 34:46बीपी की दवा भी नहीं ली है। क्यों? राजदीप
- 34:51ने पूछा तो नौकरानी ने बताया कह रही थी कि
- 34:54बेटी के कन्यादान के बाद ही कुछ खाएंगी।
- 34:57यह सुनकर शिप्रा की आंखों में आंसू छलक गए
- 34:59और वो बिलक-बिलख कर रोने लगी। राजदीप ने
- 35:02आवाज लगाई। अरे कोई डॉक्टर को बुलाओ
- 35:05जल्दी।
- 35:07तभी मुख्तार राजदीप को टोकता है। इन्हें
- 35:11[गला साफ़ करने की आवाज़]
- 35:12मैं देख लूंगा। तुम अपनी लाडली को लेकर
- 35:16मंडप में चलो।
- 35:18इस पर राजदीप मुख्तार को घूरते हुए बोला।
- 35:22ये तुम ठीक नहीं कर रहे हो मुख्तार। याद
- 35:26रखना समय सबका बदलता है। सबका बदलता है पर
- 35:32मेरा नहीं। मुख्तार ने कुटिल मुस्कान के
- 35:36साथ कहा। मरता क्या ना करता राजदीप शिप्रा
- 35:40को लेकर मंडप की तरफ बढ़ चले। तभी मुख्तार
- 35:43शिप्रा के सामने जाकर खड़ा हो गया और
- 35:45व्यंग से बोला, देखी मेरी ताकत। अगर तेरे
- 35:51बाप ने मेरे भाई का रिश्ता कुबूल कर लिया
- 35:54होता, तो तू इस शहर पर राज करती।
- 35:58पर नहीं तेरे नसीब में तो यह भिखारी लिखा
- 36:02था। अब बढ़ेगा तेरे परिवार का सोशल
- 36:06स्टेटस।
- 36:08शिप्रा को ये सब बोलकर मुख्तार अलग ही सुख
- 36:10अनुभव कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि उसके
- 36:13अहम को जो ठेस पहुंची थी अब उस पर मरहम
- 36:16लगाया जा रहा है। राजदीप एक आखिरी कोशिश
- 36:20करते हैं। वो मुख्तार के पास गए और उसके
- 36:22सामने नतमस्तक होकर बोले
- 36:25मुख्तार भाई हमसे जाने अनजाने में जो भी
- 36:29भूल हुई है उसके लिए मैं इस भरी महफिल में
- 36:31तुमसे माफी मांगता हूं। मेरी बेटी [संगीत]
- 36:33की जिंदगी बर्बाद मत करो। कल्ला तुरंत
- 36:37भिखारी दूल्हे के पास पहुंचा। मुख्तार
- 36:40राजदीप की बात को इग्नोर करते हुए कल्ला
- 36:42से बोला ए कल्ला
- 36:46देख क्या रहा है दूल्हे को मंडप पर ले जा
- 36:51आदेश मिलने की देर थी कल्ला तुरंत भिखारी
- 36:53दूल्हे के पास पहुंचा। अब तक भिखारी बस
- 36:56मूकदर्शक बना तमाशा देख रहा था। उसे सब
- 37:00समझ में आ रहा था कि यहां क्या चल रहा है।
- 37:02पर वो खुद कुछ करने की स्थिति में नहीं
- 37:04था।
- 37:05उसे राय परिवार पर दया तो आ रही थी लेकिन
- 37:08उसे समझ नहीं आ रहा था कि यहां जो कुछ हो
- 37:11रहा है वो उसे कैसे रोक सकता है। लंबे
- 37:14बालों के बीच से झांकती उसकी आंखों में
- 37:16शिप्रा के लिए दया का भाव था। पर उसकी घनी
- 37:20दाढ़ी के पीछे छिपे चेहरे का भाव किसी को
- 37:22समझ नहीं आने [संगीत] वाला था। और सबसे
- 37:25बड़ी बात वो क्या सोच रहा है, क्या महसूस
- 37:28कर रहा है इससे किसी को कोई फर्क भी नहीं
- 37:31पड़ता है। कल्ला उसके पास आया और चहकते
- 37:34हुए बोला चल भाई दूल्हे तूने भी क्या
- 37:38किस्मत पाई है जो बैठे-बठाए इतनी खूबसूरत
- 37:41लड़की का पति बनने का मौका मिल रहा है।
- 37:44लेकिन भिखारी नहीं हिला। पहले गूंगा था।
- 37:46अब बहरा भी हो गया क्या? चल बे। कहते हुए
- 37:50कल्ला ने भिखारी की बाजू [संगीत] पकड़ी और
- 37:52मंडप की तरफ खींचने लगा। पर भिखारी ने
- 37:55झटके से अपनी बाह छुड़ा ली। इस पर कल्ला
- 37:57आश्चर्य से उस भिखारी को देखते हुए बोला,
- 38:00ओ भाई, अब तुझे क्या हुआ? मैं यहां तेरी
- 38:03शादी करवाने जा रहा हूं और तू भाव खा रहा
- 38:05है? यह बोलकर वो दोबारा उसकी बाह पकड़ कर
- 38:08खींचने लगा। पर भिखारी अपनी जगह से टस से
- 38:11मस ना हुआ। वहां खड़े लोग भिखारी की
- 38:14हिम्मत देखकर हैरान थे। सोच रहे थे कि वो
- 38:17क्यों आगे नहीं बढ़ रहा।
- 38:19मुख्तार भी उस भिखारी की [संगीत] हरकत
- 38:21देखकर दंग रह गया और राहुल को अपनी पकड़
- 38:24में रखे हुए ही बोला क्या बात है क्या इस
- 38:28भिखारी का जमीर जाग गया क्या जो ये शादी
- 38:33नहीं करना चाहता
- 38:35अबे गधे मैं तेरी किस्मत बदलने जा रहा हूं
- 38:40और तू कीचड़ में ही रहना चाहता है कल्ला
- 38:43भिखारी को ही घूरता हुआ बोला क्या करूं
- 38:46बॉस ये साला तो अपनी जगह से हिलने का नाम
- 38:49ही नहीं ले रहा। अब ये कुछ बोलता भी तो
- 38:52नहीं। जो समझ में आए कि यह चाहता क्या है?
- 38:55कल्ला ने देखा कि भिखारी की आंखों में
- 38:57उसके लिए गुस्सा है। कल्ला तमतमा उठा और
- 39:01भिखारी के गाल पर एक थप्पड़ जमाते हुए
- 39:03बोला, साले, मुझे घूर रहा है। चल, आंखें
- 39:06नीचे कर। थप्पड़ की आवाज पूरे पंडाल में
- 39:09गूंज गई। सब हैरानी से भिखारी की तरफ देख
- 39:12रहे थे। शिप्रा भी उसे देखने लगी। वो
- 39:16भिखारी की मनोदशा समझ रही थी कि शायद वह
- 39:18किसी की मजबूरी का फायदा नहीं उठाना चाह
- 39:20रहा इसीलिए वो आगे नहीं बढ़ रहा। शिप्रा
- 39:23को भिखारी पर दया आने लगी। कद काठी से एक
- 39:26जवान ही जान पड़ रहा था। उसने देखा कि
- 39:29कल्ला के थप्पड़ से उसके गाल के कोर से
- 39:31खून आने लगा था। पर उसके मुंह से एक आ भी
- 39:34नहीं निकली। कल्ला भिखारी को धमकाते हुए
- 39:37बोला चलेगा। यह अभी और मार खानी है। लेकिन
- 39:41फिर भी भिखारी टस सेम मस नहीं हुआ। कल्ला
- 39:44के दो चेले भी उसके पास आकर उसे मंडप की
- 39:47तरफ खींचने लगे। लेकिन कोई फायदा नहीं
- 39:50हुआ। भिखारी हिलने का नाम ही नहीं ले रहा
- 39:52था। यह देखकर कल्ला को और गुस्सा आ गया।
- 39:55उसने भिखारी के गाल पर दो-तीन थप्पड़ रसीद
- 39:57कर दिए। वहां मौजूद सभी लोग हैरान थे। एक
- 40:01तरफ जहां लोग मुख्तार के डर से चू भी नहीं
- 40:04कर पा रहे थे, वहीं इस भिखारी पर मुख्तार
- 40:06के गुंडों का थोड़ा सा भी खौफ नहीं था।
- 40:09बलवंत राय की आंखों में भी उस भिखारी के
- 40:11लिए सम्मान का भाव उमड़ आया। वो उनका अपना
- 40:13ना होकर भी उनके परिवार के दर्द को समझ
- 40:16रहा था। इस ड्रामे को देख रहे मुख्तार का
- 40:18भी गुस्सा बढ़ने लगा था। वो कल्ला से बोला
- 40:22क्या रे कल्ला तू एक भिखारी को भी कंट्रोल
- 40:26नहीं कर पा रहा है। इस पर कल्ला बेबस होकर
- 40:29बोला बॉस ये तो बड़ा [संगीत] ढीठ है। लगता
- 40:33है इस पर मार का भी कोई असर नहीं हो रहा।
- 40:35इतनी मार खाने के बाद भी ऐसे घूर रहा है
- 40:38कि मानो बस नजर से ही भस्म कर देगा। अब
- 40:41क्या करूं इसका?
- 40:43इस पर मुख्तार बोला इसे किसी को खोने का
- 40:48डर नहीं है ना इसीलिए कोई खौफ भी नहीं है
- 40:53और जहां तक मार खाने की बात है तो यह तो
- 40:57इसके जैसे लोग हर जगह किसी ना किसी से मार
- 41:01खाते ही रहते हैं। इसीलिए इस पर कोई असर
- 41:05नहीं हो रहा। पर एक बात गौर करने वाली है
- 41:10कि खामखा मार खा क्यों रहा है? मुख्तार ने
- 41:14कल्ला से सवाल किया तो कल्ला अपने सिर पर
- 41:16हाथ फेरते हुए बोला मैं समझा नहीं बॉस आप
- 41:20कहना क्या चाहते हो? अरे बेवकूफ समझ
- 41:25मंदिर से यहां तक आने में तो इसने कोई
- 41:28ड्रामा नहीं किया। पर यहां आकर अब ऐन वक्त
- 41:32पर अकड़ना शुरू कर दिया। क्यों? मुख्तार
- 41:36भिखारी को ऐसे देख रहा था जैसे समझने की
- 41:40कोशिश कर रहा हो कि उसके दिमाग में क्या
- 41:42चल रहा है। कल्ला ने भी अपने मोटे दिमाग
- 41:45पर जोर दिया। फिर अपना सिर खुजलाते हुए
- 41:48बोला क्यों बॉस? ये ऐसा क्यों कर रहा है?
- 41:53मुख्तार यह समझने की कोशिश कर रहा था कि
- 41:55मंदिर से यहां तक आने में तो भिखारी ने
- 41:58कोई ड्रामा नहीं किया। फिर यहां आकर अब
- 42:01क्यों अकड़ रहा है?
- 42:03ये ऐसा क्यों कर रहा है बॉस?
- 42:06कल्ला ने सर खुजलाते हुए पूछा।
- 42:10वो भी यह जानने के लिए उत्सुक था। तभी कुछ
- 42:13सोचकर मुख्तार के चेहरे पर तिरछी मुस्कान
- 42:16तैर गई। प्यार
- 42:19हमदर्दी
- 42:20हमें कल्ले लड़की चीज ही ऐसी होती है कि
- 42:25कोई भी इनके प्यार में फिसल जाए। जरूर
- 42:29इसको इस लड़की और इसके परिवार वालों पर
- 42:33दया आ रही है। इसीलिए यह इस लड़की की
- 42:37खातिर सब कुछ सहने को तैयार है।
- 42:41कल्ला का तो पता नहीं पर शिप्रा को
- 42:44मुख्तार की बात समझ आ गई। इसीलिए अब उसकी
- 42:47आंखों में भिखारी के लिए सम्मान नजर आ रहा
- 42:50था। वो उसका अपना ना होकर भी उसके [संगीत]
- 42:53दर्द को महसूस कर रहा था। भिखारी के उलझे
- 42:57बालों और घनी दाढ़ी के बीच झांकती आंखों
- 42:59के अलावा शिप्रा को कुछ दिखाई नहीं दे रहा
- 43:02था। जाने कितने महीनों से उसने अपने बाल
- 43:06नहीं कटवाए थे जो बेतरतीब ढंग से उलझे हुए
- 43:10थे। तभी कल्ला ने अपनी उलझन जाहिर करते
- 43:14हुए कहा।
- 43:16तो फिर अब क्या करें बॉस? मैं झट से कोई
- 43:19दूसरा भिखारी ढूंढ के ले आऊं।
- 43:22ना
- 43:24किसी दूसरे की जरूरत नहीं है।
- 43:28यही करेगा शादी।
- 43:31मुख्तार कुछ सोच कर बोला। उसके दिमाग में
- 43:34कुछ तो चल रहा था। वहीं कल्ला के चेहरे पर
- 43:38अभी भी उलझन नजर आ रही थी। उसने हैरान
- 43:41होकर पूछा।
- 43:43यही करेगा। पर वो कैसे बॉस? वो ऐसे कि जब
- 43:49यह भिखारी इस बुलबुल के लिए मार खाने को
- 43:53तैयार है तो [संगीत] यह इसी की खातिर शादी
- 43:57करने को भी तैयार हो सकता है।
- 44:01कहते हुए मुख्तार ने छड़ी में से एक बार
- 44:03फिर तलवार निकाली। [संगीत] कल्ला को कुछ
- 44:06समझ नहीं आया। लेकिन उसे विश्वास था कि जब
- 44:10उसके बॉस ने कहा है तो कुछ ना कुछ तो बात
- 44:12होगी ही। उसने बस नकली सी मुस्कान के साथ
- 44:16सर हिला दिया।
- 44:18मुख्तार राहुल के करीब गया और धमकी भरे
- 44:21लहजे में भिखारी से बोला,
- 44:24सुन बे
- 44:27यह लड़का अपनी बहन के कारण तो बच गया। पर
- 44:31अगर तू ऐसे ही अपनी जिद पर अड़ा रहा तो
- 44:35[संगीत] यह जरूर मारा जाएगा।
- 44:37और इसकी मौत का जिम्मेदार
- 44:40तू होगा।
- 44:43मुख्तार की इस बात का भिखारी पर तुरंत असर
- 44:46हुआ। उसकी आंखों में बेचैनी नजर आने लगी।
- 44:50वो कभी राहुल की ओर देख रहा था तो कभी
- 44:52शिप्रा की ओर। शिप्रा भी उसकी बेबसी को
- 44:55भली-भांति समझ पा रही थी। तभी मुख्तार ने
- 44:58भिखारी को धमकाते हुए कहा,
- 45:01"क्या हुआ?
- 45:04तुझे मेरी बात समझ नहीं आ रही? क्या तू
- 45:08चाहता है कि इस लड़के की बलि चढ़ जाए?
- 45:11कहते हुए मुख्तार ने एक बार फिर अपनी
- 45:14तलवार राहुल के गले से लगा दी। उसके ऐसा
- 45:17करते ही भिखारी खुद ब खुद मंडप की तरफ बढ़
- 45:20गया।
- 45:22कल्ला हैरानी से कभी भिखारी को देख रहा था
- 45:25तो कभी अपने बॉस को। फिर वो ताली बजाकर
- 45:28तारीफ करते हुए बोला मानना पड़ेगा बॉस।
- 45:31आपने इसकी कमजोरी को सही पकड़ लिया।
- 45:35शायद शिप्रा भी समझ रही थी कि भिखारी ने
- 45:37अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि वो उससे
- 45:40शादी करने के लिए मजबूर ना हो और अगर वह
- 45:44मजबूर हुआ भी तो सिर्फ उसके भाई की जान
- 45:46बचाने के लिए। मंडप एक बड़े से स्टेज के
- 45:50ऊपर था जहां से सभी मेहमान शादी की रस्मों
- 45:54को देख सकते थे। भिखारी स्टेज तक गया।
- 45:57उसकी कसमसाहट उसके हाव-भाव में साफ झलक
- 46:00रही थी। स्टेज पर जाकर वो शिप्रा के पास
- 46:04खड़ा तो हो गया पर वो शिप्रा से नजर नहीं
- 46:07मिला पा रहा था। शिप्रा भी बेसुद [संगीत]
- 46:10सी खड़ी थी। इतने लोगों के सामने इस तरह
- 46:13जलील होने पर वो बिल्कुल नम हो चुकी थी।
- 46:17अपनी शादी को लेकर उसने क्या-क्या सपने
- 46:20देखे होंगे। पर आज वो इतनी मजबूर है कि
- 46:24उसे एक भिखारी से शादी करनी पड़ रही है।
- 46:27उसने उम्मीद भरी नजर से एक बार मुख्तार की
- 46:30ओर देखा कि हो सकता है कि उसका दिल पसीज
- 46:34जाए और वह उसके भाई को छोड़ दे।
- 46:37पर कहते हैं ना पत्थर दिल लोगों से
- 46:40हमदर्दी की उम्मीद [संगीत] करना रेगिस्तान
- 46:43में गुलिस्ता खिलाने की कोशिश करने जैसा
- 46:45होता है।
- 46:47मुख्तार ने मुस्कुराते हुए कहा कल्ला
- 46:52इन दोनों की जयमाला तो करवाओ।
- 46:56मुख्तार के इतना कहते ही कल्ला तुरंत दो
- 46:59मालाएं लेकर स्टेज पर पहुंच गया। और फिर
- 47:02पंडित की ओर देखकर बोला आओ पंडित जी कुछ
- 47:07मंत्र-मंत्र तो पढ़ो।
- 47:09फिर वो व्यंग्यात्मक ढंग से चिल्ला कर
- 47:11बोला हां भाई कैमरामैन तुम्हें अलग से
- 47:15न्योता देना पड़ेगा क्या?
- 47:18इस तरह कल्ला ने सब कुछ सेट कर दिया।
- 47:20शिप्रा की रही सही उम्मीद भी खत्म होती जा
- 47:23रही थी। तभी कल्ला ने मंच के पास खड़ी एक
- 47:26लड़की को वरवधू को माला देने का इशारा
- 47:29किया और अगले ही पल उस [संगीत] लड़की ने
- 47:32माला लेकर शिप्रा के हाथ में थमा दी। जैसे
- 47:36उसे डर हो कि अगर उसने जरा भी देर की तो
- 47:38कहीं कल्ला उसकी शादी भी किसी भिखारी से
- 47:41ना करवा दे। जब उस लड़की ने वरमाला भिखारी
- 47:44के हाथ में देनी चाही तो उसने माला नहीं
- 47:47पकड़ी।
- 47:49कल्ला ने जब यह देखा तो वो झुंझुला उठा और
- 47:52बोला अरे यार बॉस इसने फिर अपना ड्रामा
- 47:56शुरू कर दिया। हमें फिर से इसकी लगाम कसनी
- 47:59पड़ेगी।
- 48:00फिर कल्ला ने धमकी भरे लहजे में भिखारी से
- 48:03कहा ओ नवाब साहब हमारे पास इतना टाइम नहीं
- 48:07है कि मैं तुझे मनाने में ही सारा वक्त
- 48:09गवा दूं।
- 48:11तभी मुख्तार ने फिर से तलवार का नुकीला
- 48:13हिस्सा राहुल के गले से लगा दिया और दांत
- 48:17पीसते हुए बोला अब मैं धमकी नहीं दूंगा अब
- 48:22अगर तूने जरा भी ना नुक की तो मैं इसकी
- 48:26गर्दन काट डालूंगा और इसकी मौत का
- 48:29जिम्मेदार तू होगा।
- 48:33भिखारी ने एक नजर राहुल पर डाली जिसकी
- 48:36आंखों में मौत की परछाई साफ नजर आ रही थी।
- 48:40राजदीप और बलवंत राय भी एक तरफ खड़े होकर
- 48:43बेबसी के साथ यह सब होते हुए देख रहे थे।
- 48:47अब तक होश में आ चुकी बीना जी ने भी जब
- 48:50अपने बेटे के गले से लगी तलवार देखी तो
- 48:52उन्हें लगा मानो उनका सीना फटने वाला है।
- 48:57अब उनसे यह सब और बर्दाश्त नहीं हुआ। वो
- 48:59तेजी से भागकर स्टेज पर पहुंची और कल्ला
- 49:02के हाथ से वरमाला लेकर भिखारी को देते हुए
- 49:06उससे विनती करते हुए बोली ये लोग जैसा
- 49:09कहते हैं वैसा करते रहो बेटा प्लीज मैं
- 49:14अपने बेटे को मरते हुए नहीं देख सकती
- 49:18भिखारी बीना जी की बेबसी को महसूस कर सकता
- 49:20था वो ममता और आंसुओं से भरी उनकी आंखों
- 49:25को देखता रहा और अगले ही पल उसने भाव
- 49:28शून्यता के साथ बीना जी के हाथ से वरमाला
- 49:31ले ली। कल्ला ने जब यह सब देखा तो वह बोले
- 49:35बिना रह ना सका। क्या बात है? मुझे नहीं
- 49:39पता था इतना आसान होगा बॉस।
- 49:43बीना जी शिप्रा के पास गई और उसके कंधे पर
- 49:46हाथ रखकर आगे बढ़ने का इशारा किया। शिप्रा
- 49:49ने एक नजर अपनी मां को देखा। फिर अपने कदम
- 49:52सामने खड़े भिखारी की तरफ बढ़ा दिए। इस
- 49:56समय उसे अपना एक-एक कदम बहुत भारी लग रहा
- 49:59था। शिप्रा ने एक नजर भिखारी की तरफ देखा
- 50:03जो उससे नजर भी नहीं मिला रहा था। एक बार
- 50:06को तो शिप्रा की हिम्मत ही जवाब दे गई।
- 50:09उसका मन किया कि वो माला फेंके और भागकर
- 50:12यहां से कहीं दूर चली जाए। पर अगले ही पल
- 50:15उसकी आंखों के सामने उसके भाई का चेहरा आ
- 50:18गया। जिसकी गर्दन पर मुख्तार की तलवार अब
- 50:21भी रखी हुई थी।
- 50:24फिर क्या था? उसने देर नहीं लगाई। अपनी
- 50:28आंखें बंद की और वरमाला सामने खड़े गंदे
- 50:31भिखारी के गले में डाल दी। यह देखकर कल्ला
- 50:35ने जोर से ताली बजाई।
- 50:38उसके साथ आए पंटर भी ताली बजाने लगे। पर
- 50:42भिखारी जस का तस खड़ा रहा। उसने माला
- 50:46डालने का कोई प्रयास नहीं किया।
- 50:49कल्ला को आखिरकार बोलना ही पड़ा। ओ भाई अब
- 50:53तुम किस बात का इंतजार कर रहे हो? बीना जी
- 50:56ने भी आंखों ही आंखों में भिखारी से
- 50:58रिक्वेस्ट की।
- 51:00जब कोई और रास्ता नहीं बचा तो भिखारी ने
- 51:03भी शिप्रा के गले में वरमाला डाल दी।
- 51:07शिप्रा की आंखें अब भी बंद थी। उसके दर्द
- 51:10को वो भिखारी भली-भांति [संगीत] महसूस कर
- 51:12सकता था। अभी तक उसने शिप्रा के चेहरे को
- 51:16ज्यादा ध्यान से देखा नहीं था। लेकिन अब
- 51:18उसकी [संगीत] निगाह शिप्रा के चेहरे पर ही
- 51:21ठहर गई थी।
- 51:24कितना मासूम [संगीत] चेहरा है यह। इसके
- 51:27साथ इतनी बड़ी ज्यादती नहीं होनी चाहिए
- 51:29थी। भिखारी ने मन ही मन सोचा। [संगीत]
- 51:34पर वो कुछ कर नहीं सकता था। एक भिखारी के
- 51:36पास हालातों के साथ बहते चले जाने के
- 51:39अलावा और कोई रास्ता भी तो नहीं होता।
- 51:42मुख्तार वहीं फर्श पर पान थूक कर बोला।
- 51:45बहुत बढ़िया। अब जल्दी से मंडप पर बैठ
- 51:49जाओ।
- 51:51चलो पंडित बाकी सब रस्म भी जल्दी से निपटा
- 51:55दो।
- 51:57शायद पंडित भी यही चाहता था। वो भी जल्द
- 52:00से जल्द इन लोगों से पीछा छुड़ाना चाहता
- 52:02था। पंडित दोनों को लेकर लगन बेदी पर
- 52:06पहुंचा और मंत्रोार के साथ सभी रस्में
- 52:09विधिपूक कराने लगा।
- 52:11अब ना शिप्रा और ना ही उस भिखारी ने किसी
- 52:14तरह की रुकावट डालने की कोशिश की। ऐसा लग
- 52:17रहा था जैसे उन्होंने अपनी नियति के आगे
- 52:20घुटने टेक दिए हैं।
- 52:23अब आप कन्या की मांग में सिंदूर भरेंगे।
- 52:27पंडित के कहने पर जब भिखारी ने शिप्रा की
- 52:29मांग में सिंदूर भरा तो शिप्रा एक बार फिर
- 52:32फूट-फूट कर रोने लगी।
- 52:35इसके बाद फेरे हुए कन्यादान हुआ और
- 52:38मंगलसूत्र भी पहनाया गया। एक के बाद एक
- 52:42विधि पूर्वक सभी रस्में पूरी हो गई और
- 52:46शिप्रा के साथ उसके सभी परिवार वाले रोते
- 52:49रह गए। शादी सिर्फ दो लोगों या दो
- 52:54परिवारों के बीच का बंधन नहीं होता। यह दो
- 52:57आत्माओं के मिलन का शुभ समारोह होता है।
- 53:00उम्मीद है आप दोनों मरते दम तक एक दूसरे
- 53:04का साथ निभाएंगे। इसी के साथ आपका विवाह
- 53:08संपन्न होता है।
- 53:11कहते हुए पंडित जी ने चैन की सांस ली और
- 53:13वहां से खिसक लिए। तभी मुख्तार खुशी से
- 53:17चिल्लाया। बधाई हो बलवंत राय। आज तुम्हारी
- 53:22पोती ने तुम्हारा मान बढ़ा दिया।
- 53:25फिर वो तंज भरे लहजे में बोला अब इस
- 53:29भिखारी की फैमिली का पता कर लेना और यह भी
- 53:32देख लेना कि वो कितने इज्जतदार लोग हैं।
- 53:38इसका परिवार जरूर तुम्हारे सोशल स्टेटस
- 53:41में चार चांद लगा देगा।
- 53:45कहते हुए मुख्तार ठहाका लगाकर हंसने लगा।
- 53:48उसके चमचे भी जोर-जोर से हंसने लगे थे।
- 53:52[हंसी]
- 53:54और कुछ हो ना हो आज के बाद इस शादी की
- 53:58चर्चा पूरे शहर में होगी। और ये लो जैसा
- 54:03मैंने कहा था तुम्हारे पोते को बख्श देता
- 54:07हूं।
- 54:09इतना कहकर मुख्तार ने राहुल को छोड़ दिया।
- 54:12राहुल को आजाद देखकर बीना जी को सुकून
- 54:15मिला। वो दौड़कर राहुल के पास आई और उसे
- 54:18अपने सीने से लगा लिया। मुख्तार इतने पर
- 54:21रुका नहीं। वो राजदीप के पास गया और धमकी
- 54:25भरे लहजे में बोला मैं जानता हूं कि तुम
- 54:30मुझे कच्चा चबा जाना चाहते हो पर वो
- 54:34तुम्हारे बस का नहीं है।
- 54:37इसलिए अपने खून को ठंडा रखो। जहां तक मेरे
- 54:43से बदले का सवाल है। [संगीत] तो यह तो बस
- 54:47शुरुआत है। आगे-आगे देखते जाओ। होता क्या
- 54:52है? इसके बाद वो वहां से बाहर जाने को
- 54:55मुड़ा। पर फिर उसे कुछ याद आया और वो सीधा
- 55:00शिप्रा के पास गया और उसका मजाक उड़ाते
- 55:02हुए बोला
- 55:04देखा नखरे वाली मुझसे पंगे लेने का अंजाम।
- 55:10कहते हुए मुख्तार के चेहरे पर विजय
- 55:13मुस्कान थी। मानो उसने कोई बड़ा किला फतेह
- 55:16कर लिया हो। [संगीत] इसके बाद वह भिखारी
- 55:19की तरफ पलटा और बोला
- 55:22मैंने कहा था ना मैं तेरी किस्मत बदल
- 55:27दूंगा। देख एक ही रात में मैंने तुझे कहां
- 55:32से कहां पहुंचा दिया।
- 55:35तूने तो सपने में भी कभी ऐसी खूबसूरत बीवी
- 55:39की कल्पना नहीं की होगी।
- 55:42उसने भिखारी के कंधे पर हाथ रखना चाहा। पर
- 55:46उसकी हालत देखकर विचार बदल दिया और बोला
- 55:49तू अब अपनी नई जिंदगी को एंजॉय कर पर उससे
- 55:55पहले [गला साफ़ करने की आवाज़]
- 55:56नहा लेना ठीक है
- 55:59मुख्तार हंसता हुआ वहां से चला गया
- 56:02पीछे-पीछे [संगीत]
- 56:03उसके पंटर भी वहां से दफा हो गए तभी अचानक
- 56:06वहां एक धड़ाम की आवाज गूंजी जिसे सुनकर
- 56:10सब इधर-उधर देखने लगे कि क्या हुआ और
- 56:13आखिरकार सबकी नजर एक जगह जाकर ठहर गई।
- 56:16किस्मत भी अजीब चीज होती है। न जाने कब
- 56:19क्या खेल दिखा दे। राजा को रंक और रंक को
- 56:23राजा बना दे। कल तक जो शिप्रा विहान के
- 56:26साथ अपने उज्जवल भविष्य को देख रही थी। आज
- 56:29उसकी पूरी दुनिया ही उजड़ चुकी थी। या यूं
- 56:32कहें कि उजाड़ दी गई थी। जाने किस मनहूस
- 56:36घड़ी में मुख्तार के मुंह बोले भाई रजत की
- 56:39नजर शिप्रा पर पड़ी और उसके बाद वह शिप्रा
- 56:42के पीछे ही पड़ गया। जब शिप्रा को पता चला
- 56:45कि रजत अंडरवर से ताल्लुक रखता है तब से
- 56:48वह उससे और भी नफरत करने लगी। लेकिन रजत
- 56:51कहां मानने वाला था? हालांकि रजत और
- 56:54मुख्तार का खून का रिश्ता नहीं है। लेकिन
- 56:57मुख्तार [संगीत] उसे अपने सगे भाई से भी
- 56:59ज्यादा मानता है। यही कारण था कि उसने खुद
- 57:02इनवॉल्व होकर शिप्रा से अपने भाई की शादी
- 57:05करवानी चाही। पर शिप्रा के परिवार ने उनका
- 57:08रिश्ता ठुकरा दिया। उस समय उन्होंने सोचा
- 57:11नहीं था कि यह मामला इस हद तक चला जाएगा।
- 57:15रजत शिप्रा के साथ कुछ ज्यादा ही बदतमीजी
- 57:17करने लगा। उसे आए दिन [संगीत] परेशान करने
- 57:19लगा और आखिरकार शिप्रा के कंप्लेंट पर रजत
- 57:23को जेल की हवा खानी पड़ी। इस बात ने
- 57:25मुख्तार की बेइज्जती के घाव पर नमक का काम
- 57:28किया और इन्हीं सब बातों का परिणाम था कि
- 57:31मुख्तार ने शिप्रा की शादी एक गूंगे
- 57:33भिखारी से कर दी। खैर जैसे ही मुख्तार
- 57:37अपनी गैंग के साथ वहां से निकला तो शिप्रा
- 57:40अपनी जगह पर ही बेहोश होकर गिर पड़ी। बीना
- 57:42जी भागकर शिप्रा के पास पहुंची। अरे कोई
- 57:45देखो जरा क्या हुआ है मेरी बच्ची को?
- 57:47शिप्रा के चारों तरफ लोग जमा हो गए। तभी
- 57:49एक डॉक्टर ने शिप्रा की जांच की और फिर
- 57:52बीना जी से बोले
- 57:54घबराने की जरूरत नहीं है। ज्यादा स्ट्रेस
- 57:57के कारण ये बेहोश हो गई है। इनके साथ जो
- 58:00गुजरा है इट्स मेंटली टैक्सिंग। आप इन्हें
- 58:04इनके रूम पर ले चलिए। फिर मैं एक इंजेक्शन
- 58:06लगा देता हूं। इन्हें आराम मिलेगा। यह
- 58:09सुनकर बीना जी ने राहत की सांस ली और
- 58:11बोली, कोई इसे उठाकर इसके कमरे में पहुंचा
- 58:15दो। राहुल आगे बढ़कर आया और अपनी बहन को
- 58:18उठाकर अंदर चला गया। माहौल बहुत गमगीन हो
- 58:22चुका था। ज्यादातर लोग जा चुके थे और बाकी
- 58:25बचे मेहमानों की आंखों में राय परिवार के
- 58:27लिए हमदर्दी थी।
- 58:29लेकिन किसी को समझ नहीं आ रहा था कि कोई
- 58:31इस फैमिली को सांत्वना दे भी तो कैसे? तभी
- 58:35बलवंत राय सामने आए और हाथ जोड़कर वहां
- 58:37उपस्थित मेहमानों से बोले
- 58:40आप सब यहां हमारी खुशी में शामिल होने के
- 58:42लिए आए। उसके लिए हमारा परिवार आप सबका
- 58:45आभारी है। पर आप सब देख ही रहे हैं कि
- 58:49चीजें [संगीत] उस तरह से नहीं हुई जैसा
- 58:51हमने सोचा था।
- 58:54फिर वो निराशा भरी आवाज में बोले मैं इसके
- 58:57लिए किसी को ब्लेम भी नहीं कर सकता। शायद
- 59:00हमारी पोती की किस्मत ही खराब थी या यूं
- 59:03कहें कि हमारे शहर की कानून व्यवस्था ही
- 59:06कमजोर है। जो एक अपराधी यूं सरेआम किसी की
- 59:10दुनिया उजाड़ देता है और कोई कुछ नहीं कर
- 59:12पाता।
- 59:14कहते हुए वह एक पल के लिए शांत हो गए और
- 59:16फिर हाथ जोड़कर थके हुए लहजे में बोले अभी
- 59:20मेरा परिवार जिस सदमे में है उस स्थिति
- 59:24में हम आपके लिए कुछ नहीं कर पाएंगे। हमें
- 59:27कुछ वक्त चाहिए होगा।
- 59:30आने के लिए धन्यवाद। इतना कहकर बलवंत राय
- 59:34मुड़े और वहां से निकल कर हवेली के अंदर
- 59:36चले गए। बचे हुए मेहमान भी धीरे-धीरे करके
- 59:39वहां से निकलने लगे। कुछ ही देर में वहां
- 59:42से सब जा चुके थे। किसी को भी उस भिखारी
- 59:44की नहीं पड़ी थी। काम करने वाले [संगीत]
- 59:46जो थोड़े बहुत लोग वहां पर थे उनका भी
- 59:49ध्यान उस भिखारी की तरफ नहीं था। सबको
- 59:52अपने में मग्न देखकर वो भिखारी भी वहां से
- 59:56बाहर निकल आया और चलता हुआ मंदिर की तरफ
- 59:58बढ़ गया। उसकी आंखों के आगे बार-बार
- 1:00:01शिप्रा का चेहरा घूम रहा था। वो लाख
- 1:00:04कोशिशों के बाद भी उसे अपने दिमाग से
- 1:00:06निकाल नहीं पा रहा था। खैर इसी दिमागी
- 1:00:09उलझनों के बीच वो मंदिर पहुंच गया। लगभग
- 1:00:13आधी रात हो चुकी थी और चारों ओर सन्नाटा
- 1:00:16था। जब वो मंदिर की सीढ़ियों के पास आकर
- 1:00:18बैठा तो पुजारी जी अपने कमरे से बाहर निकल
- 1:00:22आए और चिंता जाहिर करते हुए बोले [संगीत]
- 1:00:25तुम आ गए बेटा। मैंने सुना कि कुछ बदमाश
- 1:00:27तुम्हें उठाकर ले गए थे। सब ठीक तो है ना?
- 1:00:30एक ही सांस में पुजारी ने कई सवाल कर दिए।
- 1:00:34फिर जैसे उन्हें ध्यान आया कि वह पूछ भी
- 1:00:36किससे रहे हैं? यह तो कुछ बोल ही नहीं
- 1:00:38पाता तो जवाब कैसे देगा? इस बात का ख्याल
- 1:00:41आते ही पुजारी जी अपनी बेवकूफी पर हल्के
- 1:00:44से हंस दिए और फिर बोले चलो छोड़ो इन
- 1:00:48बातों को। यह बताओ कुछ खानावाना खाया है
- 1:00:50कि नहीं?
- 1:00:52भिखारी एक टक पुजारी को देखता रहा और
- 1:00:55सोचने लगा कि यह एक पुजारी है जो उसका
- 1:00:57अपना ना होकर भी उसकी इतनी चिंता कर रहा
- 1:01:00है और वहीं कुछ [संगीत] अपने ही लोग होते
- 1:01:02हैं जो आपकी फिक्र तो छोड़ो आपको अपने
- 1:01:05रास्ते का कांटा समझकर आपको साफ कर देना
- 1:01:08चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ बलवंत राय की
- 1:01:11कोठी के मेन हॉल में पूरा राय परिवार
- 1:01:14इकट्ठा था। आखिर मुश्किल की घड़ी में ही
- 1:01:16अपने परायों का फर्क समझ में आता है।
- 1:01:20बलवंत राय के तीन बेटे बृजभूषण, [संगीत]
- 1:01:23राजदीप और जगताप राय और एक बेटी नैना राय
- 1:01:27हैं। नैना की शादी राजगढ़ के ही एक बड़े
- 1:01:30बिजनेसमैन राजकुमार टंडन से हो रखी है।
- 1:01:33बृजभूषण बलवंत का बड़ा बेटा है। दूसरे
- 1:01:36नंबर पर राजदीप और तीसरे नंबर पर जगताप
- 1:01:39है। इन सब में नैना सबसे छोटी है। बलवंत
- 1:01:43राय के सभी बच्चों के दो-दो बच्चे हैं।
- 1:01:46धीरे-धीरे सबके साथ मुलाकात हो ही जाएगी।
- 1:01:49लेकिन फिलहाल घर का माहौल काफी टेंस है।
- 1:01:52इस वक्त तक शिप्रा भी होश में आ चुकी थी
- 1:01:54और अपनी मां के साथ एक सोफे पर बैठी हुई
- 1:01:57थी। इन सबके बीच बलवंत राय अकेले एक सोफे
- 1:02:00पर बैठे थे। हेड ऑफ द फैमिली होने के कारण
- 1:02:02सबकी नजर उन पर ही थी। आखिरकार खामोशी को
- 1:02:06तोड़ते हुए बलवंत राय गंभीर स्वर में
- 1:02:08बोले। आप सभी जानते हैं कि हम सब यहां
- 1:02:11क्यों इकट्ठा हुए हैं। आज हमारे परिवार के
- 1:02:14साथ जो हुआ है। अब उससे कैसे निपटा जाए।
- 1:02:19इतना बोलकर बलवंत राय सबकी ओर देखने लगे।
- 1:02:22तभी कोई और कुछ कहता। उससे पहले बड़े बेटे
- 1:02:25बृजभूषण की पत्नी सरला आरोप लगाते हुए बोल
- 1:02:28पड़ी।
- 1:02:30माफ कीजिए पिताजी। लेकिन आज जो कुछ हुआ
- 1:02:33उसकी जिम्मेदार खुद शिप्रा है। किसी को
- 1:02:37उम्मीद नहीं थी कि ऐसी स्थिति में भी सरला
- 1:02:40शिप्रा पर ही इल्जाम लगा देगी। बृजभूषण को
- 1:02:43भी सरला का यूं सबके सामने शिप्रा पर
- 1:02:45दोषारोपण करना ठीक नहीं लगा। घर की बड़ी
- 1:02:49बहू है। पर सरला अक्सर वक्त की नजाकत को
- 1:02:51भांप नहीं पाती। तभी अचानक बृजभूषण ने
- 1:02:54सरला को डांटते हुए कहा, चुप रहो। तुम्हें
- 1:02:58जरा भी अंदाजा है कि कब कहां क्या बोलना
- 1:03:00चाहिए? इस पर सरला अपने बचाव में बोली,
- 1:03:03मैंने क्या गलत कहा? आज जो भी हुआ वो सब
- 1:03:06शिप्रा की गलती के कारण ही तो हुआ है।
- 1:03:08मुझे तो डर है कि इसकी गलती का खामियाजा
- 1:03:11हमारे बच्चों को भी ना भुगतना पड़े। सरला
- 1:03:14रुकने का नाम नहीं ले रही थी। बृजभूषण को
- 1:03:17डर था कि कहीं बाबूजी बुरा ना मान जाए।
- 1:03:19इसीलिए बृजभूषण ने सख्त लहजे में कहा। तुम
- 1:03:23अपनी जुबान बंद रखोगी। मेरी जुबान तो आप
- 1:03:26बंद करवा देंगे पर इससे सच बदल नहीं
- 1:03:29जाएगा। सरला ने जैसे तैसे कसम ही खा रखी
- 1:03:32थी कि आज वो चुप नहीं बैठेगी। हॉल में
- 1:03:35उपस्थित परिवार के और भी कई लोग थे जिनके
- 1:03:38विचार सरला जैसे ही थे। पर सरेआम वो अपने
- 1:03:41विचार व्यक्त करने की हिम्मत नहीं कर सकते
- 1:03:43थे। इसलिए सरला ने जो कहा था उससे वह मन
- 1:03:46ही मन खुश थे। बलवंत राय एक टक सरला को ही
- 1:03:50देख रहे थे। बाबूजी के कारण सरला थोड़ी
- 1:03:52हिचकिचाई लेकिन वो खुश थी कि उसने अपने मन
- 1:03:55की बात कह दी। तभी बलवंत राय ने रबदार
- 1:03:58आवाज में पूछा
- 1:04:00तुम्हें और भी जहर उगलना है बहू।
- 1:04:05सरला को उम्मीद नहीं थी कि बलवंत राय उसकी
- 1:04:07बातों को ऐसे लेंगे। तभी बृजभूषण [संगीत]
- 1:04:10बोल पड़े।
- 1:04:13इसकी तरफ से मैं माफी मांगता हूं पिताजी।
- 1:04:15यह थोड़ी नादान है। क्यों? क्या यह 12 साल
- 1:04:19की बच्ची है? और इसके लिए तुम्हें माफी
- 1:04:22मांगने की कोई जरूरत नहीं है। इतना बोलकर
- 1:04:25बलवंत राय एक बार फिर सरला से सवाल करते
- 1:04:27हुए बोले,
- 1:04:29हां तो बताओ बहू। इसके लिए शिप्रा कैसे
- 1:04:32जिम्मेदार है?
- 1:04:35यह सुनकर सरला इधर-उधर देखने लगी। लेकिन
- 1:04:37बलवंत राय इस बात को इतनी आसानी से जाने
- 1:04:40देने वाले नहीं थे। उन्होंने दोबारा सरला
- 1:04:42पर दबाव डालते हुए पूछा। बोलो तुम जवाब
- 1:04:46क्यों नहीं दे रही? शिप्रा इसके लिए
- 1:04:48जिम्मेदार कैसे है?
- 1:04:51जब सरला को लगा कि वो इस सवाल से पीछा
- 1:04:53नहीं छुड़ा सकती तो वो बोली
- 1:04:56आज जो मुख्तार हमारे परिवार का दुश्मन बना
- 1:04:59बैठा है वो शिप्रा की वजह से ही तो है।
- 1:05:02अगर यह उसके भाई को जेल नहीं भिजवाती तो
- 1:05:04आज ये नौबत नहीं आती। तो फिर तुम्हारे
- 1:05:07हिसाब से शिप्रा को उस परिस्थिति में क्या
- 1:05:09करना चाहिए था? बलवंत राय ने दोबारा सवाल
- 1:05:13दागते हुए पूछा।
- 1:05:15सरला ने दबी हुई आवाज में जवाब दिया, जेल
- 1:05:18तो नहीं भिजवाती? हम शरीफ लोग हैं। ऐसे
- 1:05:21बदमाश लोगों से नहीं भिड़ सकते। इसीलिए
- 1:05:23ऐसे लोगों से तो बच के ही रहना चाहिए ना।
- 1:05:27बलवंत राय कुछ पल सरला को देखते रहे। फिर
- 1:05:30बोले,
- 1:05:31"अच्छा मान लो।" शिप्रा की जगह तुम्हारी
- 1:05:34बेटी युविका होती और जैसे शिप्रा को
- 1:05:36मुख्तार का भाई परेशान कर रहा था, वैसे ही
- 1:05:39युविका को परेशान किया जाता। दिन दहाड़े
- 1:05:42कहीं भी उसके साथ छेड़छाड़ की जाती तो
- 1:05:45क्या तब भी तुम्हारा जवाब यही होता।
- 1:05:49बलवंत राय के सवाल पर सरला फिर से बगले
- 1:05:51झांकने लगी। उसे कोई जवाब नहीं सूझ रहा
- 1:05:54था। सरला की इस हरकत को देख बलवंत राय
- 1:05:57बोले जब अपने बच्चे पर बात आई तो जवाब
- 1:06:00देते नहीं बन रहा। तुमसे अच्छी तो वो
- 1:06:03चींटी होती है जो झुंड में रहती है और एक
- 1:06:06पर भी आफत आए तो पूरा झुंड उस दुश्मन पर
- 1:06:08टूट पड़ता है। यह परवाह किए बिना कि उसके
- 1:06:11जीवन का अंतिम पल भी हो सकता है। इतना
- 1:06:14बोलकर बलवंत राय चुप हो गए और घरवालों की
- 1:06:17प्रतिक्रिया देखने लगे। किसी को उम्मीद
- 1:06:19नहीं थी कि बलवंत राय सरला के लिए इतने
- 1:06:22कड़े शब्दों का प्रयोग करेंगे। वहां
- 1:06:24उपस्थित किसी के मन में शिप्रा के खिलाफ
- 1:06:27कुछ चल भी रहा था तो अब वह बाहर नहीं आने
- 1:06:30वाला था।
- 1:06:31तभी बलवंत राय ने गंभीरता से बोलना शुरू
- 1:06:34किया।
- 1:06:36यहां सबको एक साथ इकट्ठा करने का कारण यह
- 1:06:38था कि हम किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचे कि
- 1:06:41यह परिवार एकजुट होकर बाहर के दुश्मन से
- 1:06:44कैसे [संगीत] निपटे। पर यहां तो लग रहा है
- 1:06:46कि सबके आपस में ही इतने क्लेश हैं कि
- 1:06:49इन्हें किसी बाहर के दुश्मन की जरूरत ही
- 1:06:51नहीं है। इतना कहकर बलवंत राय कुछ पल
- 1:06:54रुके। एक नजर सबको देखा और फिर बोले
- 1:06:58परिवार का मतलब होता है कि आपके आपस में
- 1:07:00कितने ही मतभेद क्यों ना हो पर जब किसी
- 1:07:03बाहर के दुश्मन से लड़ने की बात आती है तो
- 1:07:06उस समय अपने सारे मतभेद भुलाकर एक होकर उस
- 1:07:10दुश्मन से लड़ना चाहिए पर क्या हमारा
- 1:07:13परिवार ऐसा कर पाएगा हम मुझे तो नहीं लगता
- 1:07:18इतना कहकर वो अपनी जगह से उठ खड़े हुए और
- 1:07:20झुंझुला कर बोले अरे जिस वक्त एक दूसरे का
- 1:07:24सहारा बनना चाहिए। उस वक्त एक दूसरे पर
- 1:07:26दोषारोपण करने में लग गए। इस चिंता में लग
- 1:07:29गए कि इसके कारण मुझे कोई नुकसान ना हो
- 1:07:32जाए। तुम सबको क्या लगता है? मैं तुम सबके
- 1:07:35मन की बातें नहीं जानता। पर मैंने सोचा था
- 1:07:38कि शायद इस मुश्किल वक्त में एक परिवार की
- 1:07:41तरह इससे निपटने का प्रयास करेंगे। अब
- 1:07:43उनकी आवाज पहले से भी दृढ़ हो गई। वो बोले
- 1:07:47सब अपने बेस्ट सोर्स का इस्तेमाल करेंगे।
- 1:07:50तो हो सकता है कि इस मुसीबत से निपटने का
- 1:07:52कोई बेहतर रास्ता नजर आए। पर लगता है
- 1:07:56मैंने ही तुम सबको लेकर गलत सोच पाल रखी
- 1:07:59थी। बाबूजी की इस भारी भरकम स्पीच के बाद
- 1:08:01पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया। ऐसा कि अगर
- 1:08:04सुई भी गिरे तो उसकी भी खननक साफ सुनाई दे
- 1:08:07जाए। तभी बलवंत राय अपना फैसला सुनाते हुए
- 1:08:10बोले।
- 1:08:12अब मेरी बात ध्यान से सुनो सब लोग। जिसको
- 1:08:16भी लगता है कि इस मुसीबत से निपटने में
- 1:08:17कोई रोल प्ले कर सकता है या अपनी पॉजिटिव
- 1:08:20राय दे सकता है वो ही यहां रुके। बाकी सब
- 1:08:24यहां से जा सकते हैं। यह सुनकर किसी ने भी
- 1:08:26वहां से हिलने का प्रयास नहीं किया। सभी
- 1:08:28अपनी जगह पर बैठे रहे। यहां मंदिर में
- 1:08:32पुजारी ने भिखारी को खाना खिला दिया था।
- 1:08:34उसके बाद पुजारी दयालु लेकिन थके हुए लहजे
- 1:08:37में बोला। ठीक है। अब जाकर सो जाओ। रात
- 1:08:42बहुत हो गई है। पर भिखारी अपनी जगह पर ही
- 1:08:45खड़ा रहा। यह देखकर पुजारी ने जिज्ञासु
- 1:08:47होकर पूछा। क्या हुआ? कुछ कहना है क्या?
- 1:08:51तभी अचानक भिखारी की दृढ़ और स्पष्ट आवाज
- 1:08:54सुनाई दी।
- 1:08:56बाबा मुझे आपका फोन चाहिए। मुझे एक कॉल
- 1:08:59करनी है। पहली बार पुजारी ने भिखारी की
- 1:09:02आवाज सुनी थी। वो आश्चर्य से उसको देखता
- 1:09:05रह गया। वो हैरान होकर बोला। तुम बोल सकते
- 1:09:08हो। पुजारी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।
- 1:09:12उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि जो बंदा
- 1:09:146 महीने से कुछ भी बोला नहीं था आज अचानक
- 1:09:17वो बोलने कैसे लगा?
- 1:09:20हां बाबा मैं बोल सकता हूं। एक्चुअली मुझे
- 1:09:23किसी से बात करनी है। क्या आप मुझे अपना
- 1:09:25फोन देंगे?
- 1:09:27भिखारी शांत लेकिन दृढ़ता से बोला। अब
- 1:09:30पुजारी जी की बोलती बंद हो चुकी थी।
- 1:09:32उन्होंने चुपचाप अपना फोन निकाला और उसके
- 1:09:34हाथ में थमा दिया। वो फोन लेकर एक कोने
- 1:09:37में गया और एक आईएसटी नंबर डायल किया।
- 1:09:40लंबी रिंग के बाद फोन उठाया गया। दूसरी
- 1:09:42तरफ से आवाज आई। हेलो कौन बोल रहा है? तभी
- 1:09:46भिखारी ने रबदार और स्पष्ट आवाज में कहा,
- 1:09:49"मैं बोल रहा हूं। मैं शौर्य राठौड़।
- 1:09:54दूसरी तरफ वाले व्यक्ति को विश्वास ही
- 1:09:56नहीं हो रहा था कि वो यह क्या सुन रहा
- 1:09:58है।" इधर पुजारी जी का भी यही हाल था। वो
- 1:10:01विश्वास नहीं कर पा रहे थे कि जिसे वो
- 1:10:03लगभग 6 महीने से गूंगा समझ रहे थे। आज वो
- 1:10:06कितने रौपदार तरीके से फोन पर बात कर रहा
- 1:10:08है। इधर राय साहब की हवेली में बलवंत राय
- 1:10:11का लेक्चर सुनकर सब सुन्न हो चुके थे।
- 1:10:14उन्होंने ना सिर्फ बड़ी बहू सरला जी को
- 1:10:16फटकार लगाई थी बल्कि इसी बहाने वो पूरे
- 1:10:18परिवार को एकजुट करने की कोशिश कर रहे थे।
- 1:10:21और यह शायद उनकी ही बातों का असर था कि
- 1:10:23परिवार के कुछ लोग शिप्रा की समस्या को
- 1:10:26मिलकर हल करने का मन बना चुके थे। तभी
- 1:10:29बलवंत राय का छोटा बेटा जगताप अपनी जगह पर
- 1:10:31खड़ा हुआ और भावुकता के साथ बोला मैं भी
- 1:10:34एक लड़की का बाप हूं और मैं समझता हूं कि
- 1:10:37अगर मेरी बेटी रागिनी के साथ ऐसा कुछ होता
- 1:10:39तो जो शिप्रा ने किया मैं तो शायद उससे भी
- 1:10:42ज्यादा कुछ कर जाता और मेरे लिए रागिनी और
- 1:10:45शिप्रा में कोई अंतर नहीं है। वो भी मेरी
- 1:10:48बेटी ही है। और मैं अपनी बेटी के साथ गलत
- 1:10:51करने वालों को किसी भी सूरत में माफ नहीं
- 1:10:53करूंगा। अपने परिवार के दुश्मन से निपटने
- 1:10:56के लिए मुझसे जो बन पड़ेगा मैं वो हर
- 1:10:58कोशिश करूंगा।
- 1:11:00जताप चाचा की बात सुनकर शिप्रा भावुक हो
- 1:11:03गई और उसकी आंखों में आंसू आ गए।
- 1:11:06तभी सरला जी का बड़ा बेटा कुलवंत शिप्रा
- 1:11:08की ओर देखते हुए बोला मैं भी अपनी बहन को
- 1:11:11मजधार में यूं अकेला नहीं छोड़ सकता दादा
- 1:11:13जी। शिप्रा मेरी भी बहन है और मैं अपने
- 1:11:16परिवार के दुश्मन से निपटने के लिए कोई
- 1:11:18कसर नहीं छोडूंगा। तभी राजदीप राय ने सभी
- 1:11:22को आगाह करते हुए कहा,
- 1:11:24मुख्तार के बदले की आग अभी बुझी नहीं है।
- 1:11:27वैसे भी वह कह कर गया है कि यह तो बस
- 1:11:29शुरुआत है। हो ना हो वो फिर से कुछ करेगा।
- 1:11:34इसलिए हमें पहले अपने परिवार की सुरक्षा
- 1:11:36सुनिश्चित करने का इंतजाम करना चाहिए।
- 1:11:39उसके बाद उसे रोकने के तरीके खोजने होंगे।
- 1:11:42देखते ही देखते परिवार के सभी लोग अपनी
- 1:11:44राय सामने रखने लगे। अब जाकर बलवंत राय के
- 1:11:47चेहरे से परेशानी का भाव कुछ कम हुआ। अब
- 1:11:50जाकर उन्हें लगा कि इस परिवार की नींव
- 1:11:52उतनी भी कमजोर नहीं है जितना वह सोच रहे
- 1:11:55थे। लेकिन जगदाप और कुलवंत की बातें सुनकर
- 1:11:58सरला जी का चेहरा लटक चुका था। इधर मंदिर
- 1:12:01में पुजारी को शौर्य अब कुछ अलग ही नजर आ
- 1:12:03रहा था। आज उन्हें अचानक लगा कि शौर्य का
- 1:12:06पूरा व्यक्तित्व ही बदल चुका है। अभी तक
- 1:12:08वो जिसे दीनहीन समझ रहे थे, अचानक उसके
- 1:12:11बात करने का अंदाज देखकर उन्हें विश्वास
- 1:12:13ही नहीं हो रहा था कि यह वही व्यक्ति है
- 1:12:15जिसे वह इतने समय से जानते हैं। इधर शौर्य
- 1:12:18फोन पर सामने वाले के बोलने की प्रतीक्षा
- 1:12:20कर रहा था। जबकि दूसरी ओर मौजूद व्यक्ति
- 1:12:23उसकी बात पर विश्वास ही नहीं कर पा रहा
- 1:12:25था। वो गहरी उलझन में पड़ चुका था। फोन के
- 1:12:29दूसरी तरफ सचमुच शौर्य ही है। यह बात मान
- 1:12:31पाना उसके लिए बेहद मुश्किल नहीं असंभव
- 1:12:34था। वो गुस्से में बोला हे मिस्टर तुम जो
- 1:12:38कोई भी हो यह मजाक तुम्हें बहुत महंगा
- 1:12:39पड़ेगा। समझे तुम? इस पर शौर्य ने शांत
- 1:12:43लेकिन दृढ़ता के साथ कहा। विक्रम ये मैं
- 1:12:46ही बोल रहा हूं। शौर्य
- 1:12:49अपना नाम सुनकर विक्रम और भी चौंक गया।
- 1:12:52लेकिन उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि जो
- 1:12:53वह सुन रहा है वो सच भी हो सकता है। लेकिन
- 1:12:57फिर उसने एक लंबी सांस लेकर खुद को शांत
- 1:12:59किया और अनुमान लगाने की कोशिश की। फोन पर
- 1:13:02सुनाई दे रही इस आवाज में वही ठहराव और
- 1:13:05खननक थी जो उसके बॉस शौर्य राठौड़ की आवाज
- 1:13:07में हुआ करती थी और जिस तरह उसने उसका नाम
- 1:13:10लिया था वैसे तो सिर्फ उसके बॉस ही उसे
- 1:13:13पुकारा करते थे। क्या ये सच में आप हो? अब
- 1:13:16जिंदा हो बॉस। उसने उत्सुकता और अविश्वास
- 1:13:19से पूछा तो शौर्य ने उसे आश्वस्त करते हुए
- 1:13:22जवाब दिया, हां, मैं ही हूं और मैं एकदम
- 1:13:25सही सलामत हूं। शौर्य समझ रहा था कि
- 1:13:28विक्रम के लिए अचानक इस बात पर विश्वास
- 1:13:30करना कितना मुश्किल होगा कि वह जिंदा है।
- 1:13:32क्योंकि पिछले 6 महीने से उसने किसी से
- 1:13:35कोई संपर्क नहीं किया था। बहुत से लोगों
- 1:13:37ने शौर्य को ढूंढने के लिए जमीन आसमान एक
- 1:13:39कर दिया था। जिसमें उसके दोस्त और दुश्मन
- 1:13:42दोनों ही शामिल थे। तभी विक्रम ने
- 1:13:45उत्सुकता के साथ पूछा आप कहां हो बॉस?
- 1:13:48हमने आपको कितना ढूंढा? पर आपका कोई पता
- 1:13:50नहीं चला।
- 1:13:53इतना कहते हुए विक्रम भावुक हो उठा और
- 1:13:55रंधी आवाज में बोला। सबके साथ मैंने भी यह
- 1:13:58मान लिया था कि प्लेन हादसे में आप नहीं
- 1:14:00रहे।
- 1:14:01विक्रम के मन में खुशी, उत्साह और गहरे
- 1:14:04दुख से उभरने के भाव एक साथ जाग उठे थे।
- 1:14:07आज सच्चाई उसके सामने थी जिसे स्वीकारते
- 1:14:09हुए उसने खुद को संभाला और फिर उत्साहित
- 1:14:11होकर बोला मैं बता नहीं सकता सर कि आपकी
- 1:14:14आवाज सुनकर मुझे कितनी खुशी हो रही है।
- 1:14:18इसके बाद विक्रम ने जल्दीबाजी में कहा आप
- 1:14:21बस बताओ आप हो कहां मैं अभी आपके पास आता
- 1:14:23हूं। विक्रम की खुशी उसकी आवाज में बखूबी
- 1:14:26झलक रही थी। लेकिन शौर्य उसे समझाते हुए
- 1:14:29बोला
- 1:14:31मैं जानता हूं विक्रम कि तुम मेरे पास आना
- 1:14:33चाहते हो। मैंने तुम्हें फोन भी इसीलिए
- 1:14:35किया है कि तुम मेंटली प्रिपयर्ड रहो
- 1:14:37क्योंकि मुझे कभी भी तुम्हारी जरूरत पड़
- 1:14:40सकती है। एक्चुअली मैं अब तक जिस अज्ञात
- 1:14:43वास में रह रहा था मुझे नहीं लगता कि अब
- 1:14:45ज्यादा दिनों तक इस स्थिति में रह पाऊंगा।
- 1:14:48विक्रम बड़े ध्यान से अपने बॉस की एक-एक
- 1:14:50बात सुन रहा था और स्थिति का अंदाजा लगाने
- 1:14:52की कोशिश कर रहा था। वहीं शौर्य ने एक पल
- 1:14:55अपने अगल-बगल देखा और फिर चिंता भरे स्वर
- 1:14:58में बोला। दरअसल मेरे आसपास कुछ इस तरह की
- 1:15:01सिचुएशन क्रिएट हो गई है कि मैं चाहकर भी
- 1:15:03उसमें इन्वॉल्व हुए बिना रह नहीं सकता।
- 1:15:06इसके बाद शौर्य ने निर्देश देते हुए कहा
- 1:15:09तुम बस तैयार रहना कभी भी तुम्हें मेरा
- 1:15:11बुलावा आ सकता है। इस पर विक्रम चिंतित
- 1:15:14होकर बोला लेकिन आप अज्ञातवास में क्यों
- 1:15:16हो बॉस? आपको पता है आपके ना होने की खबर
- 1:15:19सुनकर आपके पिताजी की क्या हालत हो गई है?
- 1:15:22कहते हुए वो उदास हो गया। लेकिन अगले ही
- 1:15:24पल हल्की खुशी जताते हुए बोला जब आपके
- 1:15:27पिताजी को पता चलेगा कि आप बिल्कुल सही
- 1:15:29सलामत हो तो उनको तो मानो संजीवनी मिल
- 1:15:32जाएगी। वैसे भी वो आज भी उस वक्त को कोसते
- 1:15:34हैं जब उन्होंने आपको इंडिया जाने दिया
- 1:15:36था।
- 1:15:38इतना कहकर विक्रम लगभग उछल पड़ा और फिर
- 1:15:40उत्साह के साथ बोला मैं अभी जाकर उन्हें
- 1:15:43बताता हूं कि आप जिंदा और सही सलामत हो।
- 1:15:45नाना
- 1:15:47अभी किसी को सच्चाई बताने की जरूरत नहीं
- 1:15:49है। शौर्य तपाक से बोला अगर मुझे यह जाहिर
- 1:15:53ही करना होता कि मैं जिंदा हूं तो फिर मैं
- 1:15:56यूं छुप कर क्यों रहता जब सही समय आएगा तो
- 1:15:59मैं खुद यह बात जग जाहिर कर दूंगा पर अभी
- 1:16:02नहीं। कहते हुए शौरक की आवाज गंभीर हो गई।
- 1:16:05वो बोला और वैसे भी जब तक मुझे यह पता
- 1:16:09नहीं चल जाता कि मेरे ही परिवार में से
- 1:16:11कौन मुझे मारना चाहता है तब तक दुनिया की
- 1:16:14नजर में मेरा मरा रहना ही ठीक होगा। यह
- 1:16:18सुनकर विक्रम चौंक उठा और बोला ये आप क्या
- 1:16:21कह रहे हैं बॉस? कोई आपको मारना चाहता है?
- 1:16:23ऐसा कौन हो सकता है? यही तो पता लगाना है
- 1:16:27कि आखिर मुझे कौन मारना चाहता है? कुछ
- 1:16:30सोचते हुए शौर्य ने गंभीर स्वर में कहा।
- 1:16:32इस पर विक्रम ने फिर सवाल किया। यानी आपका
- 1:16:35जो प्लेन क्रैश हुआ था वो स्वाभाविक घटना
- 1:16:37नहीं थी। नहीं बिल्कुल नहीं। वो सब कुछ एक
- 1:16:41षड्यंत्र के तहत किया गया था। पूरी
- 1:16:43प्लानिंग के साथ वो तो ऐन वक्त पे मुझे
- 1:16:46होश आ गया इसलिए मैं बच गया। शौर्य ने उस
- 1:16:49दिन को याद करते हुए कहा और सबसे बड़ी बात
- 1:16:52प्लेन क्रैश की घटना के बाद भी पूरे इलाके
- 1:16:54में मुझे जिस तरह ढूंढा गया वो भी कुछ ऐसे
- 1:16:57लोगों के द्वारा जो मुझे बचाने के लिए
- 1:16:59नहीं चेक करने के लिए मुझे ढूंढ रहे थे कि
- 1:17:02मुझे रास्ते से हटाने का उनका मकसद पूरा
- 1:17:04हुआ है कि नहीं। मेरी इंट्यूशन कहती है कि
- 1:17:08इस षड्यंत्र में मेरे किसी अपने का हाथ
- 1:17:10है। कहते हुए शौर्य की आंखों में दुख नजर
- 1:17:13आ रहा था। लेकिन उसने दृढ़ता के साथ अपना
- 1:17:15मकसद साफ किया। बस अब पता यह लगाना है कि
- 1:17:19वो आस्तीन का सांप कौन है। इस पर विक्रम
- 1:17:22ने चिंता जाहिर करते हुए बोला वो तो हम
- 1:17:25पता लगा कर ही रहेंगे बॉस पर आप अपने
- 1:17:27पिताजी को तो बता ही सकते हैं। नहीं तो
- 1:17:29आपके चले जाने के गम में दिन प्रतिदिन
- 1:17:31उनकी हालत खराब होती जाएगी। इस पर शौर्य
- 1:17:34स्थिति को समझाते हुए बोला तुम्हारा कहना
- 1:17:37सही है। पर मैं चाहता हूं कि मेरे जीवित
- 1:17:40होने की खबर अभी बाहर ना ही आए तो अच्छा
- 1:17:43है। नहीं तो मेरे दुश्मन फिर से सतर्क हो
- 1:17:46जाएंगे। कहते हुए शौर्य एक पल के लिए रुका
- 1:17:49और फिर कुछ सोच कर बोला मैं ऐसा करूंगा कि
- 1:17:52खुद ही पापा से बात करके उन्हें अपने
- 1:17:54हालातों की जानकारी दे दूंगा। शौर्य की
- 1:17:57बातों में अपने पापा के लिए कंसर्न साफ
- 1:17:59झलक रहा था। लेकिन तभी विक्रम के मन में
- 1:18:01जिज्ञासा जाग उठी और उसने पूछा आपको किसी
- 1:18:05पर शक है क्या बॉस?
- 1:18:07शक तो है पर जब तक मेरा शक यकीन में नहीं
- 1:18:10बदल जाता तब तक मैं कुछ भी नहीं कह सकता।
- 1:18:13शौर्य की इस बात पर विक्रम आश्वस्त होकर
- 1:18:16बोला, "यह बात तो आप ही बेहतर समझ सकते
- 1:18:18हैं बॉस।" फिर अगले ही पल वो उत्सुकता के
- 1:18:21साथ बोला, "आप तो मुझे यह बताइए कि मैं कब
- 1:18:24तक आपके पास आ सकता हूं। जल्दी ही तुम
- 1:18:26इंतजार करो। कभी भी मेरा बुलावा तुम्हें आ
- 1:18:29सकता है। लेकिन उससे पहले तुम्हें कुछ और
- 1:18:31काम करना है। शौर्य ने गंभीरता के साथ
- 1:18:34कहा, तो विक्रम किसी फौजी की तरह अलर्ट हो
- 1:18:36गया। आप बस हुक्म कीजिए बॉस। जल्दी ही
- 1:18:40बताऊंगा। तुम तैयार रहना। मुझे कभी भी
- 1:18:42तुम्हारी जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद
- 1:18:44शौर्य ने फोन कट कर दिया और पुजारी की तरफ
- 1:18:47पलटा। पुजारी बड़ी-बड़ी आंखों से शौर्य को
- 1:18:49ही घरे जा रहा था। अभी-अभी शौर्य की जो भी
- 1:18:52बातें उन्होंने सुनी वो उनका मतलब निकालने
- 1:18:54की कोशिश कर रहे थे। वो यह तो समझ चुके थे
- 1:18:57कि यह भिखारी जो दिख रहा है वास्तव में वो
- 1:19:00है नहीं। इसका बैकग्राउंड कुछ अलग ही है।
- 1:19:03शौर्य ने पुजारी को उनका फोन लौटाते हुए
- 1:19:05कहा। बाबा मेरी बातों से आपको इतना तो समझ
- 1:19:08आ ही गया होगा कि मेरी असलियत कुछ और है
- 1:19:11और मैंने छुपने के लिए भेष धारण किया है।
- 1:19:15पुजारी जिज्ञासा से बोले
- 1:19:17वो तो मैं समझ गया बेटा पर हकीकत में तुम
- 1:19:21हो कौन?
- 1:19:22कमरे में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया।
- 1:19:25एक तरफ सच्चाई जानने के लिए पुजारी की
- 1:19:27उत्सुकता वहीं दूसरी तरफ लंबे समय से दबा
- 1:19:30हुआ एक रहस्य।
- 1:19:32शौर्य अभी किसी को कुछ नहीं बताना चाहता
- 1:19:34था। पुजारी जी को भी नहीं। इसलिए उनके
- 1:19:37सवाल को टालते हुए बस इतना ही कहा।
- 1:19:41पुजारी जी मैं आपसे ज्यादा कुछ तो नहीं कह
- 1:19:43सकता। बस यह समझिए कि पांडवों का
- 1:19:45अज्ञातवास चल रहा है और इसलिए इस वक्त
- 1:19:47किसी भी हाल में उनकी पहचान उजागर नहीं
- 1:19:49होनी चाहिए। बलवंत राय के घर का डिस्कशन
- 1:19:52अभी भी जारी था। तभी बीच में गले को
- 1:19:54खराशते हुए बलवंत राय के दामाद यानी नैना
- 1:19:57के पति राजकुमार टंडन ने गंभीर स्वर में
- 1:20:00कहा। वैसे तो यहां के कमिश्नर के साथ आपके
- 1:20:03संपर्क तो हैं ही। मैं कोशिश करूंगा कि
- 1:20:05कानून मंत्री के द्वारा भी उन पर थोड़ा
- 1:20:07प्रेशर बिल्ड करूं। हो सकता है कुछ असर
- 1:20:09हो। इस पर बृजभूषण राय ने भी समर्थन करते
- 1:20:12हुए कहा, हां हां यह बढ़िया रहेगा। तभी
- 1:20:15राजदीप राय ने भी कुछ सोचते हुए अपना
- 1:20:17विचार व्यक्त किया। [संगीत]
- 1:20:19इन सबके साथ हमें परिवार के लिए घर की
- 1:20:21सिक्योरिटी भी बढ़ानी पड़ेगी। इस पर बलवंत
- 1:20:24राय ने एक लंबी सांस ली और चिंतित स्वर
- 1:20:26में बोले हम इसके लिए मैंने भी कुछ सोचा
- 1:20:30है। जब तक इस मुख्तार का कोई इलाज नहीं हो
- 1:20:33जाता तब तक सिक्योरिटी का इंतजाम तो करना
- 1:20:35ही पड़ेगा।
- 1:20:37इन सब बातों के बीच शिप्रा एक कोने में
- 1:20:39अपने चेहरे पर गहरी उदासी लिए खड़ी थी।
- 1:20:41मानो उसका जीवन ही शून्य हो गया हो। तभी
- 1:20:44बीना जी शिप्रा को करुणा भरी दृष्टि से
- 1:20:46देखते हुए बोली।
- 1:20:48यह सब तो ठीक है पर अभी जो हो गया है उसके
- 1:20:52बारे में आप सबका क्या विचार है इस पर
- 1:20:54बलवंत राय ने उदास स्वर में पूछा
- 1:20:57तुम किस बारे में बात कर रही हो बहु असल
- 1:21:00में बलवंत राय बीना जी के कहने का मतलब तो
- 1:21:02समझ गए थे फिर भी वह यह पक्का करना चाहते
- 1:21:05थे कि क्या बीना जी का कंसर्न शिप्रा को
- 1:21:07लेकर है या उनका इशारा किसी और बात की तरफ
- 1:21:10है और तभी बीना जी ने दृढ़ आवाज में कहा
- 1:21:14मैं शिप्रा की शादी की बात कर रही हूं
- 1:21:17बीना की बात सुनकर थोड़ी देर के लिए वहां
- 1:21:19खामोशी छा गई। किंतु तभी सरला ने उस
- 1:21:22खामोशी को तोड़ते हुए कटाक्ष किया। अब
- 1:21:24इसमें ज्यादा कुछ तो नहीं किया जा सकता।
- 1:21:26जैसा भी हो शिप्रा की शादी उस भिखारी से
- 1:21:29तो हो ही गई है। अब मानो या ना मानो वो
- 1:21:32भिखारी ही इस घर का दामाद है। इतना कहकर
- 1:21:35सरला ने ऐसा चेहरा बनाया मानो उसे इस घर
- 1:21:38की सबसे ज्यादा फिक्र हो। लेकिन सरला की
- 1:21:40बात पर किसी ने भी कोई जवाब नहीं दिया।
- 1:21:43वैसे भी यह एक ऐसी सच्चाई थी जिसे जानते
- 1:21:45तो सभी थे पर कोई भी इसे मानना नहीं चाहता
- 1:21:47था। और तभी नैना जी भी जले पर नमक छिड़कते
- 1:21:50हुए बोली यह एक ऐसी घटना है जिसे हजम करना
- 1:21:54हम सबके लिए ही बहुत मुश्किल है पर सच्चाई
- 1:21:56से मुंह तो नहीं मोड़ा जा सकता ना। इस पर
- 1:21:59बलवंत राय ने गुस्से से भरी तीखी आवाज में
- 1:22:01कहा। कोई इस बात से मुंह नहीं मोड़ रहा है
- 1:22:04नैना। हम सब जो यहां इकट्ठा हैं उसका कारण
- 1:22:06भी यही है कि इस हालात से कैसे निपटा जाए।
- 1:22:09बलवंत जी के शब्दों से जाहिर था कि वो
- 1:22:11नैना और सरला के कटाक्ष को भली-भांति समझ
- 1:22:14चुके थे। इसीलिए नैना ने मुंह बनाते हुए
- 1:22:16नाराजगी भरे शब्दों में कहा, अरे हमने ऐसा
- 1:22:19भी क्या कह दिया बाबूजी जो सच है वही तो
- 1:22:21बताया। इस पर बलवंत राय की आवाज कड़वी हो
- 1:22:24गई और वो कठोर स्वर में बोले। सच को जानने
- 1:22:27और उस पर कटाक्ष करने में बहुत अंतर होता
- 1:22:29है। वैसे भी यहां ऐसा कोई नहीं है जो
- 1:22:32सच्चाई से वाकिफ ना हो। तभी जगताप परेशान
- 1:22:34होकर बोल उठे। इस बारे में आप ही कोई राह
- 1:22:37सुझाइए पिताजी। हम तो खुद ही नहीं समझ पा
- 1:22:40रहे हैं कि स्थिति से कैसे निपटे। जो हुआ
- 1:22:43है उसके बारे में तो शहर भर में बातें भी
- 1:22:45शुरू हो जाएंगी। हमें जल्दी ही कोई कदम
- 1:22:47उठाना पड़ेगा।
- 1:22:49इस पर बलवंत राय ने एक लंबी सांस ली और
- 1:22:51धीमे स्वर में बोले। जिंदगी में कभी कोई
- 1:22:54ऐसी घटना हो जाती है जब दिमाग काम करना
- 1:22:56बंद कर देता है। यह घटना भी कुछ ऐसी ही है
- 1:22:59जहां सही मायने में मेरा भी दिमाग काम
- 1:23:02नहीं कर रहा। इसीलिए इसका निर्णय शिप्रा
- 1:23:05खुद ही करे तो बेहतर होगा। आखिर यह उसकी
- 1:23:08अपनी जिंदगी है। इसीलिए इसका निर्णय लेने
- 1:23:10का अधिकार भी इसी का है। हम तो बस यह कर
- 1:23:13सकते हैं कि इसके निर्णय को अपना पूरा
- 1:23:15समर्थन दें। सबकी निगाहें अब शिप्रा की
- 1:23:18तरफ मुड़ गई कि वो क्या डिसीजन लेने वाली
- 1:23:20थी। शिप्रा ने जब सबकी निगाहें अपनी तरफ
- 1:23:23देखी तो कुछ पल तो वो शांत रही। फिर एक
- 1:23:25लंबी सांस लेकर भावुक लेकिन दृढ़ आवाज में
- 1:23:28बोलने लगी।
- 1:23:30अभी तक जो भी मेरी जिंदगी में हुआ। उसमें
- 1:23:33आप सब ने ही अपने हिसाब से अच्छा बुरा
- 1:23:35सोचकर निर्णय लिया और मैं उसमें अपनी
- 1:23:38सहमति देती रही। चाहे वो निर्णय विहान और
- 1:23:41मेरी शादी का हो। वहां भी आपने यह नहीं
- 1:23:43देखा कि लड़का कैसा है। आपको तो बस इसकी
- 1:23:46फिक्र थी कि दोनों परिवार बिजनेस पॉइंट ऑफ
- 1:23:48व्यू से पावरफुल हो जाएंगे। जिसका परिणाम
- 1:23:51यह हुआ कि सफर में एक मुश्किल पड़ाव क्या
- 1:23:53आया। विहान मैदान छोड़कर भाग गया। इतना
- 1:23:57कहते ही शिप्रा की आंखों से आंसू की एक
- 1:23:59बूंद गाल तक लुढ़क आई। जिसे पोंछकर उसने
- 1:24:02एक बार फिर खुद को हिम्मत दी और दृढ़ आवाज
- 1:24:04में आगे बोली। अंत में कौन आखिर समय तक
- 1:24:08आपके साथ खड़ा रहा? इस बात को सोचूं तो
- 1:24:11[संगीत] इस मामले में वो भिखारी ज्यादा
- 1:24:13हिम्मत वाला था। वो मार खाता रहा पर
- 1:24:15मुख्तार के गुंडों के सामने झुका नहीं।
- 1:24:18झुका भी तब जब बात राहुल की जान पर बनाई।
- 1:24:21उससे हमारा कोई रिश्ता नहीं था। फिर भी वह
- 1:24:23भिखारी होकर हमारा दर्द समझ रहा था। और एक
- 1:24:26वो विहान था जो हमारे साथ पूरी जिंदगी
- 1:24:29जीने की कसम खाने वाला था। लेकिन उसने यह
- 1:24:32तक जानने की कोशिश नहीं की कि हमारे ऊपर
- 1:24:34क्या बीती है।
- 1:24:36मैंने खुद उसे वहां से दुम दबा के भागते
- 1:24:38देखा था। अब इसे अपने लिए मैं अच्छा समझूं
- 1:24:41या बुरा कि उसकी सच्चाई शादी होने से पहले
- 1:24:44ही सामने आ गई या यह सोच कर दुखी होऊं कि
- 1:24:46मेरी शादी एक भिखारी से हो गई। इतना बोलकर
- 1:24:49शिप्रा रुक कर सबके चेहरे का एक्सप्रेशन
- 1:24:51देखने लगी। पर किसी ने कुछ भी नहीं कहा।
- 1:24:53इस पर शिप्रा एक बार फिर मायूसी भरे
- 1:24:56शब्दों में बोली और अब जब हमारे हाथ में
- 1:24:58कुछ रहा ही नहीं तब आप कह रहे हैं कि मैं
- 1:25:01जो भी निर्णय लूंगी आप उसमें मेरा साथ
- 1:25:03देंगे। अब [संगीत] आप ही बताइए कि स्थिति
- 1:25:05में मैं क्या ही निर्णय ले सकती हूं। इतना
- 1:25:09बोलकर शिप्रा का गला रंध गया और वो अपने
- 1:25:11दादाजी की तरफ देखने लगी। उधर दूसरी तरफ
- 1:25:14मुख्तार भाई पूरे लश्कर के साथ जेल पहुंच
- 1:25:17चुके थे। उनके साथ वकीलों की फौज थी।
- 1:25:20मुख्तार के भाई रजत को आज फाइनली बेल मिल
- 1:25:22गया था। रजत जेल से छूट कर बाहर आया और
- 1:25:25अपने भाई की कार में उसके पास आकर बैठ
- 1:25:27गया। लेकिन उसके चेहरे पर गहरी नाराजगी के
- 1:25:30भाव थे। वहीं जब मुख्तार ने अपने भाई को
- 1:25:33यूं मुंह फुलाए नाराजगी से बैठे देखा तो
- 1:25:36वो हल्की मुस्कान के साथ बोल उठा।
- 1:25:38बरखुरदार
- 1:25:40अब तो खुश हो जाओ। तुम जेल से बाहर आ गए
- 1:25:44हो। रजत उखड़े हुए स्वर में बोला क्या जो
- 1:25:48मैंने सुना है वो सही है? यह सुनकर
- 1:25:50मुख्तार रजत की ओर पलटा और उलझन भरी आवाज
- 1:25:52में बोला अब मुझे क्या पता कि तुमने क्या
- 1:25:56सुना है। तभी रजत ने अपने दांत पीसते हुए
- 1:25:59सीधे ही पूछ लिया कि आपने शिप्रा की शादी
- 1:26:02भिखारी से करवा दी। अरे हां लेकिन यह तो
- 1:26:06खुशी की बात है ना। मैंने उससे तुम्हारी
- 1:26:10बेइज्जती का ऐसा बदला लिया है कि जिंदगी
- 1:26:12भर वो किसी को मुंह नहीं दिखा पाएगी। यह
- 1:26:16कहते हुए मुख्तार के चेहरे पर गहरी
- 1:26:18संतुष्टि का भाव झलक रहा था। मानो उसने
- 1:26:20कोई बड़ा तीर मार दिया हो। इस पर रजत
- 1:26:23झल्ला उठा और नाराजगी भरे शब्दों में
- 1:26:25बोला,
- 1:26:27यही तो नहीं करना था भाई। आपको सिर्फ उसकी
- 1:26:29शादी होने नहीं देनी थी। मुझे उससे शादी
- 1:26:32करनी थी। पर आपने क्या किया? उसकी शादी एक
- 1:26:34भिखारी से करवा दी। हां। मुख्तार ने रजत
- 1:26:37को ठंडे दिमाग से समझाते हुए कहा। देख
- 1:26:40मेरे भाई यह मत भूल कि उसने सिर्फ
- 1:26:43तुम्हारी ही नहीं बल्कि हमारी भी बेइज्जती
- 1:26:46[संगीत]
- 1:26:46की है। और ऐसी लड़कियों को घर की ज़ीनत
- 1:26:49नहीं बनाया जाता। बाकी अगर तुम्हें ज्यादा
- 1:26:52ही उस लड़की की चुल मची हुई है तो उसके
- 1:26:55लिए और भी रास्ते हैं। जरूरी नहीं है कि
- 1:26:59उससे शादी ही की जाए। इतना कहकर मुख्तार
- 1:27:02एक पल के लिए रुका और राय परिवार द्वारा
- 1:27:04की गई अपनी बेइज्जती को याद करते हुए
- 1:27:07गंभीर लहजे में बोला,
- 1:27:09मुझे उसके परिवार का घमंड तोड़ना था जिसके
- 1:27:13लिए मुझे कुछ ऐसा करना जरूरी था। तुम्हें
- 1:27:17याद नहीं है क्या? उसके परिवार को हमारे
- 1:27:21परिवार से रिश्ता जोड़ने में उनकी इज्जत
- 1:27:23पर आंच आ रही थी। अब जब एक भिखारी से उसकी
- 1:27:27शादी हो गई है तो क्या इज्जत रह जाएगी उस
- 1:27:29परिवार की? अब जब हर जगह उस परिवार की ही
- 1:27:32चर्चा हो रही है तो उसका घमंड तो चूरचूर
- 1:27:35होगा ना।
- 1:27:37मुख्तार की बात सुनकर रजत के चेहरे पर अब
- 1:27:40थोड़ी संतुष्टि के भाव थे। लेकिन तभी उसकी
- 1:27:42आंखों में खतरनाक इरादे की चमक दिखाई देने
- 1:27:44लगी और वो तुरंत बोला आप देख लेना। मैं उस
- 1:27:48लड़की को ऐसे ही नहीं छोडूंगा। इस पर
- 1:27:51मुख्तार ने उसे वक्त की नज़ाकत समझाते हुए
- 1:27:53कहा अरे भाई तुम्हें जो भी करना है वो कर
- 1:27:57लेना। लेकिन अभी कुछ दिनों तक शांत रहो।
- 1:28:00कहीं ऐसा ना हो जाए कि अभी-अभी बेल पर
- 1:28:03छूटे हो और फिर दोबारा जेल चले जाओ। रजत
- 1:28:07को देखकर लग नहीं रहा था कि मुख्तार की
- 1:28:09बात उसको समझ में आ रही है और तभी उसने
- 1:28:11कुछ सोचा और ड्राइवर से गाड़ी रोकने का
- 1:28:14आदेश दिया। अरे गाड़ी क्यों रुकवा रहे हो?
- 1:28:17मुख्तार ने संशय भरे लहजे में पूछा तो रजत
- 1:28:21अपने शरारती अंदाज में बोला क्या भाई
- 1:28:24जानते हो ना कितने दिनों बाद जेल से छूटा
- 1:28:26हूं। मुझे थोड़ा चेंज चाहिए। इस पर
- 1:28:29मुख्तार ने उसे घूरते हुए चेतावनी दी।
- 1:28:32ठीक है लेकिन ध्यान रखना अभी कुछ ऐसी वैसी
- 1:28:36हरकत मत करना कि मुझे फिर से तुम्हारी बेल
- 1:28:39के लिए धक्के खाने पड़े। टेंशन मत लो भाई
- 1:28:42ऐसा कुछ नहीं होगा। इतना बोलकर रजत गाड़ी
- 1:28:45से नीचे उतर गया। यहां राय साहब की हवेली
- 1:28:48में शिप्रा की बात एक तरह से सबके मुंह पर
- 1:28:51तमाचा ही थी। क्योंकि जब घर के बड़ों को
- 1:28:54भी यह समझ नहीं आया कि वो शिप्रा के लिए
- 1:28:56क्या निर्णय लें तब उन्होंने आसान रास्ता
- 1:28:58अपनाया और अपना पल्ला झाड़कर शिप्रा पर ही
- 1:29:01सब कुछ छोड़ दिया। वहीं बलवंत राय को भी
- 1:29:03अपनी गलती का एहसास हुआ। जब उनको सबसे
- 1:29:06ज्यादा मजबूत होना चाहिए था तब एक तरह से
- 1:29:09उन्होंने भी गिव अप कर दिया था। इसलिए वो
- 1:29:11पछतावे की गहरी भावना के साथ बोल उठे।
- 1:29:14मुझे माफ करना मेरी बच्ची कि इस समय
- 1:29:16तुम्हारी हालत क्या होगी। मैं सोच ही नहीं
- 1:29:19पाया। जबकि मुझे सोचना चाहिए था कि हम
- 1:29:22सबसे ज्यादा यह समय तुम्हारे लिए चुनौती
- 1:29:24भरा है। इतना कहकर बलवंत राय ने बाकी घर
- 1:29:27वालों की तरफ देखा और गंभीर आवाज में बोले
- 1:29:30मैं इस मुद्दे पर बाकी घर वालों की राय भी
- 1:29:32जानना चाहता हूं। इस पर जगताप ने कुछ
- 1:29:36सोचते हुए कहा,
- 1:29:38"मुझे लगता है कि हमें उस लड़के को अपने
- 1:29:40घर में ले आना चाहिए और हालात को थोड़ा
- 1:29:42नॉर्मल होने देने का इंतजार करना चाहिए।
- 1:29:45जब लगेगा कि हालात अब ठीक है और बाहर
- 1:29:48हमारे परिवार के बारे में बातें होनी अब
- 1:29:50लगभग बंद हो गई है तो सही समय देखकर फिर
- 1:29:54दोनों का तलाक करवा देंगे। इतना कहकर
- 1:29:57जगताप बाकी घर वालों का चेहरा देखने लगा।
- 1:29:59मानो अपनी बात पर सबकी सहमति चाहता हो।
- 1:30:02खुद बलवंत राय भी जगताप की बात से संतुष्ट
- 1:30:05दिखाई [संगीत] दिए। उन्हें भी लगा कि समय
- 1:30:07यही सबसे अच्छा समाधान होगा। इसीलिए
- 1:30:09उन्होंने सभी की ओर देखा और भारी आवाज में
- 1:30:12सबकी राय जानने के लिए पूछा। तो बताओ
- 1:30:15कौन-कौन जगताप की बातों से सहमत है? बाकी
- 1:30:18घर वालों को कुछ समझ नहीं आया कि वो क्या
- 1:30:20राय दें। इसीलिए उन्होंने भी जगताप की बात
- 1:30:23का समर्थन कर दिया। लेकिन वहीं जब सरला ने
- 1:30:26देखा कि कोई कुछ नहीं बोल रहा है तो उसने
- 1:30:28अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए कहा तो क्या
- 1:30:31अब एक भिखारी आकर हमारे घर में रहेगा?
- 1:30:35सरला ने बोल तो दिया पर जब उसने बलवंत राय
- 1:30:37का गुस्से में लाल चेहरा देखा तो उसने
- 1:30:39अपनी नजर दूसरी तरफ फेर ली। राय परिवार के
- 1:30:42सभी लोग जब एक निष्कर्ष पर पहुंच गए तो
- 1:30:44बलवंत राय ने गंभीर लेकिन स्नेह भरी आवाज
- 1:30:47में शिप्रा से कहा शिप्रा बेटा हम सबको
- 1:30:50स्थिति में सबसे अच्छा उपाय यही नजर आ रहा
- 1:30:52है लेकिन अगर तुम्हारे मन में भी कुछ है
- 1:30:55तो तुम बता सकती हो शिप्रा को भी ज्यादा
- 1:30:58कुछ नहीं सूझा वैसे भी उसने अब खुद को
- 1:31:00तकदीर के हवाले कर दिया था इसीलिए वो
- 1:31:03मायूसी से भरी थकी आवाज में बोली मेरी
- 1:31:06किस्मत में आगे क्या लिखा है यह मुझे भी
- 1:31:08नहीं पता पर शायद आप सबके हाथ में भी इससे
- 1:31:10ज्यादा कुछ है नहीं जो आप कर सकते हैं।
- 1:31:13इसलिए मुझे आप सब से कोई शिकायत नहीं है।
- 1:31:16इस पर राजदीप राय ने अपनी बेटी शिप्रा का
- 1:31:18हौसला बढ़ाते हुए कहा। कहते हैं गहरे
- 1:31:21अंधकार के बाद एक खूबसूरत सवेरा होता है।
- 1:31:23मुझे विश्वास है कि मेरी बेटी की जिंदगी
- 1:31:25[संगीत] में भी वो सवेरा जल्दी ही आएगा।
- 1:31:28फिर किसी अच्छे लड़के से जो तुम्हें पसंद
- 1:31:30हो उससे तुम्हारी शादी कर देंगे। इतना
- 1:31:33सुनते ही शिपरा झल्ला उठी और गुस्से से
- 1:31:35भरी आवाज में बोली अब और कितनी शादी
- 1:31:37करवाएंगे पापा? हो तो गई एक। आपको क्या
- 1:31:40लगता है कि जिंदगी जीने के लिए किसी का
- 1:31:42साथ होना जरूरी है? नहीं, मैं अकेले ही
- 1:31:45अपनी जिंदगी जी सकती हूं। मुझे जिंदगी
- 1:31:47जीने के लिए किसी के साथ की जरूरत नहीं
- 1:31:49है। अब किसी और पर विश्वास कर पाना मेरे
- 1:31:51लिए मुश्किल होगा। अब मैं अपने जीवन की
- 1:31:53डोर किसी और के हाथ में नहीं दे सकती। और
- 1:31:56आप आगे से मुझसे इस बात की अपेक्षा भी मत
- 1:31:58कीजिएगा कि एक से तलाक लेने के बाद मैं
- 1:32:00किसी और से शादी करूंगी। अगर आपकी यह शर्त
- 1:32:03है कि शादी जरूरी ही है तो फिर तलाक कराने
- 1:32:05की जरूरत ही नहीं है। इतना कहकर शिप्रा ने
- 1:32:08अपनी मुट्ठियां भी ली। उसके अंदर भावनाओं
- 1:32:11का एक सैलाब सा उमड़ रहा था जिसे वो ना
- 1:32:13जाने कैसे काबू कर रही थी। सब ने शिप्रा
- 1:32:16की बात को सुना पर किसी ने कुछ कहा नहीं।
- 1:32:19यह स्वाभाविक भी था। क्योंकि एक तरह से
- 1:32:21देखें तो अभी शिप्रा के जख्म इतने ताजा
- 1:32:23हैं और तुरंत ही यह सब चर्चा भी शुरू हो
- 1:32:25गई है। बलवंत राय को भी लगा कि यह वक्त यह
- 1:32:28सब बातें करने का नहीं था कि शिप्रा के
- 1:32:30लिए आगे क्या करना है। बल्कि यह समय तो बस
- 1:32:33अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का
- 1:32:35था। इसीलिए बलवंत राय ने गंभीर और
- 1:32:38निर्णायक स्वर में कहा अब हम शिप्रा के
- 1:32:41भविष्य को लेकर क्या करना है। इस पर बात
- 1:32:44नहीं करेंगे। वो आगे देखेंगे कि भविष्य
- 1:32:46हमसे क्या करवाता है। फिलहाल के लिए उस
- 1:32:50लड़के को अपने घर लाओ और हालात के नॉर्मल
- 1:32:52होने का इंतजार करो। लेकिन सरला देवी कहां
- 1:32:55बाज आने वाली थी? उन्हें तो अपना ओपिनियन
- 1:32:58देना ही था। इसीलिए वो एक बार फिर कटाक्ष
- 1:33:00भरे शब्दों में बोल उठी। हे भगवन यही दिन
- 1:33:04देखना बाकी रह गया था। अब एक भिखारी के
- 1:33:06साथ रहना पड़ेगा। इस पर बलवंत राय तमतमा
- 1:33:09उठे [संगीत] और तेज आवाज में बोले बहू तुम
- 1:33:12अपनी बेहूदा बातें आखिर कब बंद करोगी?
- 1:33:15लेकिन सरला ने अब भी अपनी जुबान को काबू
- 1:33:18में नहीं किया और तंज भरे लहजे में बोली
- 1:33:20अब मैंने क्या गलत बोल दिया? भिखारी को
- 1:33:23भिखारी नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे?
- 1:33:25मुझे तो उसको देखकर भी घिन आ रही थी। तभी
- 1:33:28बलवंत राय ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए
- 1:33:30कठोर आवाज में कहा, बहू एक बात गांठ बांध
- 1:33:34लो। अगर वो लड़का भिखारी था भी तो आज के
- 1:33:37बाद भिखारी नहीं रहेगा। हम खुद देखेंगे कि
- 1:33:40उसे किसी काम में इनवॉल्व किया जाए। बलवंत
- 1:33:43राय की बात सुनकर सरला देवी ने बुरा सा
- 1:33:45मुंह बना लिया और उसी समय बृजभूषण राय
- 1:33:48चिंतित आवाज में बोल उठे। पर पिताजी अभी
- 1:33:50तो हमें यह भी नहीं पता कि वो भिख। पर
- 1:33:52इतना कहते ही बृजभूषण का सामना अपने
- 1:33:54पिताजी की लाल आंखों से हो गया और वह
- 1:33:56तुरंत अपने कहने के तरीके को बदलते हुए
- 1:33:58बोला वो वो मैं कह रहा था कि हमें तो यह
- 1:34:02भी नहीं पता कि वह लड़का अब है कहां। तभी
- 1:34:04राजदीप राय ने बात को संभालते हुए स्पष्ट
- 1:34:07शब्दों में कहा, हां पिताजी जब शिप्रा
- 1:34:09बेहोश होकर गिर गई थी तो हम सब उसी में लग
- 1:34:12गए थे। शायद उसी समय वो लड़का यहां से चला
- 1:34:15गया था। इस पर बलवंत राय खीज पड़े और अपने
- 1:34:18दांत पीसते हुए बोले अरे तो गया कहां
- 1:34:21होगा? यहीं कहीं आसपास ही होगा। ढूंढोगे
- 1:34:23तो मिल ही जाएगा। और अगर कुछ लोगों को भी
- 1:34:26लगाना पड़े तो लगा दो। पर उसे ढूंढ कर
- 1:34:28लाओ। तभी राजदीप राय ने सिर हिलाते हुए
- 1:34:32तुरंत कहा। ठीक है पिताजी मैं देखता हूं।
- 1:34:35मैं कुछ लोगों को उसे ढूंढने में लगा देता
- 1:34:37हूं। इस पर बलवंत राय ने खुद को शांत करते
- 1:34:40हुए कहा
- 1:34:42मुझे लगता है कि अब सब कुछ समझ में आ गया
- 1:34:44होगा कि क्या करना है। इतना कहकर बलवंत
- 1:34:47राय कुछ सोचने लगे और फिर गंभीर आवाज में
- 1:34:49आगे बोले। और हां एक और बात जो मेरे दिमाग
- 1:34:53में चल रही है। हमारे परिवार का समय कुछ
- 1:34:55ठीक नहीं चल रहा है। खास करके शिप्रा का
- 1:34:59ऐसा करते हैं कि कल शिप्रा को लेकर मंदिर
- 1:35:01चलते हैं और उसके नाम से पूजा कराते हैं।
- 1:35:04यह सुनते ही मीना जी तपाक से बोली। आप सही
- 1:35:07कह रहे हैं पिताजी। मैं भी कुछ ऐसा ही चाह
- 1:35:09रही थी। वहीं दूसरी तरफ मंदिर में शौर्य
- 1:35:12भी सोकर उठा ही था। वह अब भी भिखारी के
- 1:35:15भेष में ही था। तभी वहां पुजारी बाबा आए।
- 1:35:18उनके साथ एक 20 21 साल की लड़की भी
- 1:35:20[संगीत] थी जो पुजारी बाबा की पोती है।
- 1:35:22शौर्य पहले भी मेघा से मिल चुका था। आखिर
- 1:35:25परिवार के नाम पर पुजारी बाबा की एक पोती
- 1:35:27ही तो है। असल में मेघा के माता-पिता की
- 1:35:30मृत्यु 5 साल पहले एक सड़क दुर्घटना में
- 1:35:32हो गई थी। जिसके बाद पुजारी बाबा ने ही
- 1:35:34उसे पाला। अब किसी तरह मेघा मेडिकल की
- 1:35:37पढ़ाई करने लगी है और अब वीकेंड्स पर यहां
- 1:35:39आकर अपने बाबा से मिलती है। शौर्य ने देखा
- 1:35:42कि आज मेघा के चेहरे पर परेशानी की लकीरें
- 1:35:45हैं। खैर जब मेघा की नजर शौर्य से मिली तो
- 1:35:48वो सादगी से बोली नमस्ते भैया नमस्ते
- 1:35:51नमस्ते। शौर्य ने भी हल्की मुस्कान के साथ
- 1:35:54जवाब दिया। यह सुनकर मेघा उसे आश्चर्य से
- 1:35:57देखने लगी और फिर उत्सुकता से बोल उठी।
- 1:35:59भैया बोल सकते हो? शौर्य ने मजाक करते हुए
- 1:36:02जवाब दिया। हां, अभी दो दिन पहले मैं
- 1:36:04घोड़ी से गिरा और मेरी आवाज वापस आई है।
- 1:36:08अरे वाह, यह तो बहुत ही अच्छी बात है।
- 1:36:10मेघा लगभग उछल पड़ी और [संगीत] फिर झेपते
- 1:36:12हुए बोली, "मेरा मतलब आपकी आवाज वापस आ
- 1:36:15गई। यह अच्छी बात है।" शौर्य हल्के से हंस
- 1:36:18दिया। तुम बताओ तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल
- 1:36:21रही है? शौर्य ने [संगीत] पूछा, तो मेघा
- 1:36:23का चेहरा एक पल के लिए लटक गया। लेकिन फिर
- 1:36:25वो मुस्कुराते हुए बोली, "पढ़ाई का क्या
- 1:36:28है भैया? मैं सोच रही हूं कि कहीं जॉब कर
- 1:36:30लूं। पर बाबा मानते ही नहीं। मेरी पढ़ाई
- 1:36:33के चक्कर में इनका सब कुछ तो बिक गया। अब
- 1:36:35एक रहा सहा घर बचा हुआ है। वो भी बेचना
- 1:36:37चाहते हैं। [संगीत] इस पर पुजारी भावुक
- 1:36:39उठे और तुरंत बोले, अरे पगली मेरे लिए
- 1:36:43मेरी सबसे बड़ी संपत्ति तो तुम हो। वैसे
- 1:36:46भी उस घर का क्या करना है जब मैं रहता तो
- 1:36:48मंदिर में ही हूं। मेरा सपना तो तुम्हें
- 1:36:51डॉक्टर बनते देखने का है। मेरे डॉक्टर
- 1:36:54बनने के जुनून ने बाबा का सब कुछ बिकवा
- 1:36:57दिया। इतना बोलते हुए मेघा की आंखें छलक
- 1:36:59उठी। तभी शौर्य ने सांत्वना देते हुए कहा,
- 1:37:03अरे पगली संपत्तियों का क्या है? जब तुम
- 1:37:05डॉक्टर बन जाओगी तो जो चाहे अपने बाबा के
- 1:37:08लिए खरीद लेना। इस पर मेघा ने मायूस होकर
- 1:37:10कहा ऐसा नहीं है भैया एक वीक में मुझे ₹
- 1:37:13लाख जमा करने होंगे। पता नहीं इतनी जल्दी
- 1:37:16घर का सौदा हो पाएगा भैया या नहीं। और
- 1:37:18उसके चक्कर में बाबा परेशान रहेंगे सो
- 1:37:20अलग। इतना कहकर मेघा ने एक नजर अपने बाबा
- 1:37:23को देखा और फिर शौर्य को देखते हुए आगे
- 1:37:25बोली। मैं अपने बाबा को अपने लिए इतना
- 1:37:28परेशान नहीं देख सकती। और फिर यह तो अभी
- 1:37:31की बात है। मान लिया [संगीत] एक वीक में
- 1:37:33इन्होंने पैसों का इंतजाम कर भी लिया।
- 1:37:34लेकिन फिर 6 महीने के बाद 2 लाख और देने
- 1:37:37पड़ेंगे। मेरे हॉस्टल में रहने का जो खर्च
- 1:37:39होता है वो अलग से है। अब आप ही बताओ घर
- 1:37:42बिकवाने से अच्छा यह नहीं है कि मैं कहीं
- 1:37:44जॉब [संगीत] कर लूं।
- 1:37:46यह कहकर मेघा शौर्य से अपनी बात का समर्थन
- 1:37:48चाहती थी ताकि उसे अपने बाबा को कन्विंस
- 1:37:50करने में आसानी हो। लेकिन पुजारी बाबा
- 1:37:53पहले ही दृढ़ता से बोल उठे। अरे तुम पैसों
- 1:37:56की चिंता मत करो। जैसे भी होगा मैं इंतजाम
- 1:37:59कर लूंगा। [संगीत] चाहे उसके लिए मुझे
- 1:38:02अपना खून भी क्यों ना बेचना पड़े। तुम्हें
- 1:38:04बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना है। तुम बस
- 1:38:07वो करो बाकी मुझ पर छोड़ दो। देख रहे हैं
- 1:38:10भैया मैं कैसे बर्दाश्त कर सकती हूं कि
- 1:38:13मेरे कारण मेरे बाबा को खून बेचने की नौबत
- 1:38:15आ जाए। मेघा ने फिर से शौर्य से समर्थन की
- 1:38:18उम्मीद में उसकी तरफ देखा। शौर्य ने हल्की
- 1:38:21मुस्कान के साथ कहा। अच्छा तुम्हारी चिंता
- 1:38:23यह है कि तुम्हारी वजह से बाबा को परेशानी
- 1:38:25ना हो। मेघा उलझन भरी स्थिति में बोली हां
- 1:38:29और क्या कारण होगा? इस पर शौर्य ने गहराई
- 1:38:32से कहा अगर तुम्हारे बाबा को पैसों के लिए
- 1:38:35परेशान ना होना पड़े तो तुम्हें कोई
- 1:38:37दिक्कत नहीं है। मेघा को समझ नहीं आ रहा
- 1:38:39था कि शौर्य ये बातें क्यों कर रहा है?
- 1:38:41लेकिन फिर भी वो बोली फिर मुझे क्या
- 1:38:44दिक्कत होगी भैया? पर ये संभव नहीं है।
- 1:38:47अच्छा यह बताओ तुम्हारी पूरी पढ़ाई के
- 1:38:48दौरान फीस, [संगीत] हॉस्टल और रहने खाने
- 1:38:51का कुल खर्च कितना होगा? शौर्य ने पूछा।
- 1:38:54मेघा को समझ नहीं आया कि वो क्यों पूछ रहा
- 1:38:56है। यही सवाल पुजारी बाबा के मन में भी
- 1:38:59था।
- 1:39:01दोनों सेमेस्टर पूरे होते-होते कम से कम ₹
- 1:39:04लाख खर्च होंगे भैया। मेघा ने थोड़ा हिसाब
- 1:39:07लगाकर जवाब दिया। उसके लिए बहुत बड़ी रकम
- 1:39:10है। लेकिन शौर्य ने दृढ़ स्वर में कहा।
- 1:39:13ठीक है। तुम मुझे अपना अकाउंट नंबर दो।
- 1:39:16मेघा अब भी उलझन में थी। अकाउंट नंबर
- 1:39:20अकाउंट नंबर का क्या करेंगे भैया? तुम दो
- 1:39:23तो सही। शौर्य ने फिर जोर देकर कहा, यह
- 1:39:26सुनकर मेघांजस में अपने दादाजी की ओर
- 1:39:29देखने लगी। पुजारी बाबा को भी कुछ समझ
- 1:39:31नहीं आया। शौर्य के जोर देने पर मेघा ने
- 1:39:34अकाउंट डिटेल्स दे दी। शौर्य ने पुजारी
- 1:39:36बाबा से फोन लिया। लेकिन जब उसने कॉल
- 1:39:39लगाने की कोशिश की तो कॉल नहीं लगा
- 1:39:41क्योंकि बैलेंस खत्म हो चुका था। शौर्य को
- 1:39:44याद आया कि एक रात पहले उसने इसी फोन से
- 1:39:46एक आईएसडी कॉल की थी। शायद उसी में सारा
- 1:39:49बैलेंस खत्म हो गया होगा। यह सोचकर उसे
- 1:39:51पुजारी बाबा पर दया आई। उसने मेघा का फोन
- 1:39:54लिया और कॉल लगाकर किसी से बात की। मेघा
- 1:39:57को कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसे लगा जरूर
- 1:40:00शौर्य उसके साथ मजाक कर रहा है। उससे रहा
- 1:40:03नहीं गया और उसने संदेह जताते हुए पूछ ही
- 1:40:05लिया। क्या भैया? आप मुझसे मजाक कर रहे
- 1:40:08हैं। मेघा को यह भी याद था कि उसने तो 5
- 1:40:11लाख की जरूरत बताई थी। लेकिन शौर्य ने
- 1:40:14सामने वाले से 6 लाख भेजने को कहा। उसके
- 1:40:17लिए तो यह बात अविश्वसनीय थी कि शौर्य के
- 1:40:19पास इतने पैसे भी हो सकते हैं। शौर्य
- 1:40:22मुस्कुराते हुए बोला बस 5 मिनट इंतजार कर
- 1:40:25लो। फिर तुम्हें खुद समझ आ जाएगा कि मैं
- 1:40:28कैसा मजाक कर रहा हूं। वहीं दूसरी तरफ
- 1:40:31मुख्तार की गाड़ी से उतरने के बाद रजत
- 1:40:33अपनी अय्याशू में डूबने के लिए अपने
- 1:40:35फेवरेट ठिकाने पर आ पहुंचा था। नशे में
- 1:40:37धुत उसने अपनी जेब से फोन निकाला और एक
- 1:40:40नंबर डायल [संगीत] किया। थोड़े इंतजार के
- 1:40:43बाद जब दूसरी तरफ से किसी ने फोन उठाया तो
- 1:40:45रजत अपनी भारी आवाज में बोला हेलो बृजु
- 1:40:49कहां हो तुम? दूसरी तरफ से एक चापलूसी भरी
- 1:40:52आवाज आई। आपकी दी हुई ड्यूटी ही निभा रहा
- 1:40:55हूं सर जी। इस पर रजत ने अपने होंठ गीले
- 1:40:57करते हुए लालसा भरे शब्दों में कहा, "अरे
- 1:41:00वाह! कहां है वो अभी?" अभी तो वो अपने घर
- 1:41:04पर ही है भाई। बिरजू ने तुरंत जवाब दिया।
- 1:41:08तभी रजत ने सख्त लहजे में हुक्म दिया।
- 1:41:10[संगीत] ठीक है। जैसे ही वो घर से बाहर
- 1:41:12निकले तुम सबसे पहले मुझे खबर करोगे। जी
- 1:41:15बॉस जैसा आपका हुक्म। बीप की आवाज के साथ
- 1:41:18मेघा के फोन पर नोटिफिकेशन आया। मैसेज
- 1:41:21पढ़ते ही उसका मुंह खुला का खुला रह गया।
- 1:41:24उसके अकाउंट में ₹ लाख क्रेडिट हुए थे। वो
- 1:41:27कभी अपने मोबाइल को तो कभी शौर्य की तरफ
- 1:41:30देख रही थी। उसे विश्वास नहीं हो रहा था
- 1:41:33कि उसके सामने जो व्यक्ति बैठा है उसके
- 1:41:35सिर्फ एक फोन कॉल पर ₹ लाख उसके अकाउंट
- 1:41:38में आ सकते हैं। मेघा ने खुद को संयमित
- 1:41:41किया और शौर्य के पास जाकर जिज्ञासु स्वर
- 1:41:44में बोली कौन है आप? इस पर शौर्य ने कंधे
- 1:41:48उचका के पूछा क्या मतलब हुआ इस सवाल का?
- 1:41:52फिर शांत स्वर में बोला तुमने कहा था कि
- 1:41:55अगर दादा जी को परेशानी नहीं होगी तो तुम
- 1:41:57पढ़ाई तसल्ली से करोगी। अब तो तुम्हें कोई
- 1:42:00समस्या नहीं होगी। मेघा ने अपनी जिज्ञासा
- 1:42:04जाहिर की। वो तो मैं करूंगी भैया। पर मैं
- 1:42:07यह जानना चाहती हूं कि आप कौन हैं और अगर
- 1:42:09आपके पास इतने पैसे हैं तो आप इस तरह की
- 1:42:11जिंदगी क्यों जी रहे हैं?
- 1:42:14इस पर शौर्य मेघा की आंखों में झांकते हुए
- 1:42:16बोला। क्या यह भी कोई कंडीशन है? जवाब में
- 1:42:20शिप्रा ने प्यार भरी आवाज में कहा, नहीं
- 1:42:22भैया, यह एक बहन की जिज्ञासा है जिसे वो
- 1:42:25शांत करना चाहती है। पुजारी बाबा भी खुद
- 1:42:28को रोक नहीं पाए और गंभीर स्वर में बोले,
- 1:42:31हां बेटा मैं भी
- 1:42:32[नाक से की जाने वाली आवाज़] जानना चाहता
- 1:42:33हूं कि तुम्हारी ऐसी क्या मजबूरी है जो
- 1:42:36तुम भिखारियों वाली जिंदगी जी रहे हो। इस
- 1:42:39पर शौर्य ने शांत लेकिन विचारपूर्ण आवाज
- 1:42:41में कहा। बाबा ऐसे कुछ हालात है कि मैं
- 1:42:45अभी दुनिया के सामने आ नहीं सकता। इसीलिए
- 1:42:48मेरे बारे में आप भी ना ही जाने तो ही ठीक
- 1:42:50रहेगा।
- 1:42:52शौर्य खुद को अभी दुनिया के सामने लाना
- 1:42:54नहीं चाहता था। इसीलिए वह सोच रहा था कि
- 1:42:56इन्हें बताना ठीक रहेगा या नहीं। पुजारी
- 1:42:59बाबा भी शौर्य पर ज्यादा प्रेशर नहीं
- 1:43:01डालना चाहते थे। वे स्नेहपूर्ण अंदाज में
- 1:43:04बोले [संगीत]
- 1:43:05अगर ऐसी बात है तो मैं तुम पर जोर नहीं
- 1:43:08डालूंगा बेटे। पर मेघा के मन में कुछ और
- 1:43:11[संगीत] ही चल रहा था। जब शौर्य ने देखा
- 1:43:13कि मेघा कुछ बोल नहीं रही है तो उसने पूछा
- 1:43:17तुम्हें क्या हुआ? तुम अचानक इतनी शांत
- 1:43:19क्यों हो गई? मेघा किसी गहरी उलझन में थी।
- 1:43:22वो बोली, मैं आपसे इतने ज्यादा पैसे नहीं
- 1:43:25ले सकती हूं जब मुझे पता है कि मैं इतनी
- 1:43:28जल्दी यह पैसे आपको वापस भी नहीं कर
- 1:43:30पाऊंगी। पुजारी बाबा भी मेघा की बात का
- 1:43:33समर्थन करते हुए बोले, हां बेटा, मेघा ठीक
- 1:43:36कह रही है। हम तुम्हारा यह एहसान चुका
- 1:43:39नहीं पाएंगे। शौर्य ने पुजारी बाबा की बात
- 1:43:42काटते हुए दृढ़ता के साथ कहा, क्या बाबा
- 1:43:45आप भी मेघा की बातों में आ रहे हैं? क्या
- 1:43:47आपने एक भिखारी को मंदिर में जगह देकर
- 1:43:49एहसान किया था? वैसे भी यह पैसे मैं कोई
- 1:43:52उधार नहीं दे रहा हूं जो मुझे वापस चाहिए।
- 1:43:55मैं यह पैसे अपनी बहन [संगीत] को उसकी
- 1:43:57पढ़ाई पूरी करने के लिए दे रहा हूं।
- 1:43:59पुजारी बाबा तपाक से बोले, पर बेटे
- 1:44:03तुम्हारी खुद की हालत भी तो बहुत अच्छी
- 1:44:05नहीं है। तुम्हें खुद भी तो पैसों की
- 1:44:07जरूरत होगी। इस पर शौर्य बेफिक्री से बोला
- 1:44:10अरे बाबा मेरी चिंता मत कीजिए यह पैसे
- 1:44:13मेरे लिए कोई मायने नहीं रखते यह सुनकर
- 1:44:16मेघा को बेहद आश्चर्य हुआ वो बोली क्या
- 1:44:19भैया अगर आपके पास इतना ही पैसा है तो आप
- 1:44:22यूं मुफलिसी की जिंदगी क्यों जी रहे हैं
- 1:44:25इस पर शौर्य गंभीर लेकिन स्पष्ट आवाज में
- 1:44:28बोला यही बात तो [संगीत] मैं अभी पब्लिक
- 1:44:30नोटिस में नहीं लाना चाहता तुम बस यह जान
- 1:44:32लो कि मेरे पास इतना पैसा है कि अगर मैं
- 1:44:35दोनों हाथ से भी लुटाना शुरू कर दूं तो भी
- 1:44:38अपना पैसा खत्म नहीं कर पाऊंगा। शौर्य के
- 1:44:41मुंह से ऐसी बात सुनकर मेघा हैरान होकर
- 1:44:43बोली, "भैया आपकी बातों और आपकी मुफलिसी
- 1:44:46भरी जिंदगी में कोई सामंजस्य नहीं है। इस
- 1:44:49पर शौर्य ने मेघा को समझाते हुए कहा,
- 1:44:52"मेघा, तुम मेरे इस हुलिए पर मत जाओ"।"
- 1:44:54"इसके पीछे एक लंबी कहानी है जो तुम्हें
- 1:44:57समय के साथ ही पता चलेगी।" मेघा को अब भी
- 1:45:00हिचक हो रही थी। यह देखकर शौर्य हौसला
- 1:45:03देते हुए बोला, अब ज्यादा संकोच करने की
- 1:45:06जरूरत नहीं है। तुम बस अपनी पढ़ाई पर
- 1:45:08ध्यान दो और डॉक्टर बनकर अपने बाबा को
- 1:45:11गौरव महसूस करवाओ। और हां, इसके अलावा भी
- 1:45:15तुम्हें कभी किसी चीज की जरूरत हो तो बस
- 1:45:17अपने भाई को याद कर लेना। शौर्य की इस बात
- 1:45:20पर मेघा भावुक होकर बोली, "मुझे समझ नहीं
- 1:45:23आ रहा है कि मैं आपका यह एहसान कैसे चुका
- 1:45:26पाऊंगी।"
- 1:45:27इस पर शौर्य शिकायती लेकिन प्यार भरे लहजे
- 1:45:29में बोला लो फिर वही बात भाई बोलती हो और
- 1:45:33फिर ऐसी बात करती हो क्या कोई भाई अपनी
- 1:45:36बहन की मदद करके एहसान करता है अगर तुम
- 1:45:39मुझे दिल से भैया कहती हो तो फिर कभी
- 1:45:41दोबारा ऐसी बात मत कहना अचानक मेघा की
- 1:45:44आंखें छलक आई वो भावुक होकर बोली बिल्कुल
- 1:45:48नहीं भैया अब भूलकर भी मैं अपने भाई को
- 1:45:50शिकायत का मौका नहीं दूंगी और मैं आपको
- 1:45:53बेस्ट डॉक्टर बनकर दिखाऊंगी पुजारी ारी
- 1:45:56बाबा भी दोनों का स्नेह देखकर अभिभूत हो
- 1:45:58गए। उन्होंने शौर्य के सिर पर हाथ फेरते
- 1:46:01हुए कहा, आज इतने वर्षों बाद भगवान ने
- 1:46:05मुझे अपना आशीर्वाद दिया है। उन्होंने
- 1:46:07तुम्हें मेरी परेशानी दूर करने के लिए
- 1:46:10मेरे [संगीत] पास भेजा है। शौर्य मेघा को
- 1:46:13प्यार से देखते हुए बोला, "अरे नहीं बाबा,
- 1:46:17भगवान का आशीर्वाद तो मुझे मिला है जो
- 1:46:19मुझे इतनी प्यारी बहन मिल गई।" अब कमरे का
- 1:46:22माहौल थोड़ा बदल गया था। पुजारी बाबा के
- 1:46:25चेहरे का रंग भी बदल चुका था। उनकी चिंता
- 1:46:28अब दूर हो गई थी। मेघा भी अब खुश नजर आ
- 1:46:31रही थी। आज उसे एक नया रिश्ता मिल गया था।
- 1:46:35एक भाई मिल गया था। अब चलो। मैं तुम्हें
- 1:46:38बाहर तक छोड़ आता हूं। शौर्य प्यार भरे
- 1:46:41लहजे में बोला। कुछ देर बाद मंदिर की
- 1:46:44सीढ़ियों के बाहर रोड पर शौर्य ने एक
- 1:46:46रिक्शा रुकवाया और मेघा उसमें बैठकर चली
- 1:46:49गई। शौर्य वापस मुड़ा और वापस मंदिर की ओर
- 1:46:52हो लिया। अभी वो कुछ कदम ही आगे बढ़ा था
- 1:46:55कि उसके पास से गुजरती हुई तीन कारें
- 1:46:57मंदिर के सामने आकर रुकी। जैसे ही कार से
- 1:47:00उतरने वाले लोगों पर शौर्य की नजर पड़ी
- 1:47:02उसके कदम जहां के तहां ठहर गए। वो तुरंत
- 1:47:05एक पेड़ की ओठ में चला गया और ध्यान से
- 1:47:07उन्हें देखने लगा। शौर्य ने देखा कि उन
- 1:47:10कारों में कुछ जाने पहचाने चेहरे मौजूद
- 1:47:13हैं। सबसे पहली कार में ही उसे शिप्रा नजर
- 1:47:16आ गई जो अपनी फैमिली के साथ आज मंदिर आई
- 1:47:19है। पेड़ के पीछे छुपा शौर्य पूरी कोशिश
- 1:47:21कर रहा था कि वो उनकी नजर से बचा रहे। फिर
- 1:47:24जब शौर्य ने देखा कि शिप्रा की पूरी
- 1:47:26फैमिली मंदिर की सीढ़ियां चढ़कर ऊपर चली
- 1:47:28गई तो वह पेड़ के पीछे से बाहर आ गया। वो
- 1:47:31सीधे पुजारी बाबा के कमरे में चले जाना
- 1:47:33चाहता था ताकि शिप्रा और उसकी फैमिली की
- 1:47:36नजर से ओझल रह सके। अभी वह यह सोच ही रहा
- 1:47:39था कि तभी उसने देखा कि एक बाइक उसके पास
- 1:47:42से गुजर कर शिप्रा की फैमिली की गाड़ियों
- 1:47:44के पीछे खड़ी हो गई। वेशभूषा से ही बाइक
- 1:47:47पर मौजूद दोनों लोग गुंडे मवालियों जैसे
- 1:47:50लग रहे थे। शौर्य को दोनों का व्यवहार भी
- 1:47:52थोड़ा अजीब लग रहा था। इसलिए वह चलता हुआ
- 1:47:55उन गुंडों के करीब पहुंच गया ताकि उन
- 1:47:57दोनों की बातें सुन सके। व दोनों मवालियों
- 1:48:00का ध्यान अब भी मंदिर की सीढ़ियों की तरफ
- 1:48:02ही था। और तभी उनमें से एक ने अपना फोन
- 1:48:05निकाला और किसी को कॉल लगाया और धीमी आवाज
- 1:48:08में बोला बॉस आपकी चिड़िया यहां मंदिर आई
- 1:48:12हुई है। इस पर दूसरी तरफ से भी कुछ कहा
- 1:48:15गया जिसके जवाब में वो फिर से बुदबुदाते
- 1:48:18हुए बोला उसकी फैमिली के कुछ लोग भी उसके
- 1:48:21साथ है बॉस। मंदिर में उन्हें थोड़ा समय
- 1:48:24तो लगेगा ही। और जहां तक भीड़ का सवाल है
- 1:48:27तो मंदिर है। लोग तो यहां आते-जाते ही
- 1:48:29रहते हैं। पर इस समय यहां ज्यादा भीड़
- 1:48:32नहीं है। इसके बाद वो गुंडा अपने बॉस की
- 1:48:35योजना सुनने लगा और फिर चापलूसी भरे अंदाज
- 1:48:37में बोला ठीक है बॉस आप जल्दी करना। मैं
- 1:48:41यहीं पर आपका इंतजार करता हूं।
- 1:48:43उसकी बात से शौर्य इतना तो समझ गया कि ये
- 1:48:46सब शिप्रा के ही चक्कर में है और इन लोगों
- 1:48:49का इरादा ठीक नहीं है और यह भी कि जिससे
- 1:48:52भी यह बात कर रहा था वो कुछ ही देर में
- 1:48:54आने वाला है। अब शौर्य विचार करने लगा कि
- 1:48:57ऐसे में उसे क्या करना चाहिए। वो खुद उनके
- 1:49:00सामने नहीं आना चाहता था। इसीलिए उसके
- 1:49:03दिमाग में एक आईडिया आया और वो जल्दी से
- 1:49:05भाग कर पुजारी बाबा के कमरे में पहुंच
- 1:49:07गया। पुजारी बाबा खुद तो कमरे में नहीं थे
- 1:49:10पर उनका मोबाइल चार्जिंग पर लगा हुआ था
- 1:49:13जिसे उठाकर शौर्य ने झट से पुलिस को कॉल
- 1:49:16कर दिया।
- 1:49:19सर मैं बैकुंठपुर के मंदिर से बोल रहा हूं
- 1:49:22यहां कुछ बुरा होने वाला है। शौर्य ने
- 1:49:25गंभीर आवाज में कहा तो पुलिस अधिकारी ने
- 1:49:27संदेह से भरी कड़क आवाज में पूछा क्यों
- 1:49:30भाई क्या बुरा होने वाला है? इस पर शौर्य
- 1:49:33ने जो देखा और सुना था वो पूरी बात पुलिस
- 1:49:35अधिकारी को बता दी। शौर्य की बात पर पुलिस
- 1:49:38अधिकारी ने उसे चेतावनी देते हुए कहा
- 1:49:43अगर तुम्हारी बात गलत निकली तो समझ लेना
- 1:49:45तुम्हारा हाल बहुत बुरा होगा। इस पर शौर्य
- 1:49:48अपना बचाव करते हुए बोला मैं गलत क्यों
- 1:49:50बोलूंगा सर? मैंने तो अभी-अभी जो देखा और
- 1:49:53सुना बस वही बता रहा हूं। इसके बाद शौर्य
- 1:49:57कमरे से बाहर निकला और उन मवालियों पर नजर
- 1:49:59रखता हुआ पुलिस का इंतजार करने लगा। इधर
- 1:50:02शिप्रा अपनी फैमिली के साथ मंदिर के अंदर
- 1:50:05आ चुकी थी। इस वक्त शिप्रा के साथ बीना
- 1:50:08जी, राजदीप राय, बलवंत राय, राहुल और घर
- 1:50:11के कुछ और सदस्य भी मौजूद थे। बीना जी ने
- 1:50:14पूजा का सामान पुजारी को देते हुए शिप्रा
- 1:50:17के नाम से पूजा करने को कहा। पुजारी बाबा
- 1:50:20ने पूजा की सामग्री ली और विधि अनुसार
- 1:50:23शिप्रा के नाम से पूजा करने लगे। इस दौरान
- 1:50:26वहां मौजूद परिवार के सभी लोग हाथ जोड़कर
- 1:50:29भगवान से अपनी और अपने परिवार की रक्षा की
- 1:50:31प्रार्थना कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ
- 1:50:34शौर्य अब भी उन दोनों मवाली पर नजर रखे
- 1:50:37हुए था। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, उसकी
- 1:50:40बेचैनी बढ़ती जा रही थी और तभी दो
- 1:50:43गाड़ियां उन मवालियों के पास आकर रुकी और
- 1:50:46गाड़ी में से रजत बाहर आया। उसके साथ ही
- 1:50:49कुछ और गुंडे भी गाड़ी से बाहर निकल आए।
- 1:50:52अब तक शौर्य समझ रहा था कि आने वाला
- 1:50:55व्यक्ति इन गुंडों का बॉस मुख्तार होगा।
- 1:50:58पर यह तो कोई और ही है। वैसे तो शादी वाली
- 1:51:01रात उसने रजत को नहीं देखा था। लेकिन उसके
- 1:51:04हावभाव, पहनावे और एटीट्यूड को देखकर उसने
- 1:51:08अंदाजा लगा लिया कि यह वही भाई है जिसके
- 1:51:10लिए मुख्तार ने इतना बवाल कर दिया था।
- 1:51:13शौर्य ने महसूस किया कि यह लोग पहुंच चुके
- 1:51:15हैं और पुलिस का तो नामोनिशान ही नहीं है।
- 1:51:18वो सच में खुद सामने नहीं आना चाह रहा था।
- 1:51:21कहां है मेरी बुलबुल? गाड़ी से उतरने के
- 1:51:24बाद रजत ने ऐठ कर पूछा तो बाइक वाले गुंडे
- 1:51:27ने जवाब दिया बॉस अभी वो अंदर मंदिर में
- 1:51:30ही है। रजत के चेहरे पर एक तिरछी मुस्कान
- 1:51:33आ गई और वो एक्साइटेड होकर बोला तो देर
- 1:51:36किस बात की है? चलो खेल शुरू किया जाए। आ
- 1:51:39मेरी बुलबुल मुद्दतों बाद आज होगा दीदार।
- 1:51:42तेरी हर अदा करती है मेरे सीने पर वार।
- 1:51:45[हंसी]
- 1:51:48लेकिन तभी उसके एक साथी ने थोड़ा
- 1:51:50हिचकिचाते हुए पूछा। बॉस मंदिर के अंदर से
- 1:51:53उसको उठाना सही रहेगा क्या? अबे तुम डर
- 1:51:55किससे रहे हो बे? मेरे रहते किसकी हिम्मत
- 1:51:57है जो हमारे काम में बाधा डाले? रजत ने रब
- 1:52:00झाड़ते हुए कहा। इस पर उसका साथी उसे याद
- 1:52:03दिलाते हुए बोला पर मुख्तार भाई ने तो कहा
- 1:52:06था कि अभी कुछ दिनों तक पब्लिक प्लेस में
- 1:52:08आप कुछ हरकत ना करें। भाई अगर कुछ ऊंचनीच
- 1:52:11हो गई तो मुख्तार भाई को जवाब देना
- 1:52:13मुश्किल हो जाएगा। इतना सुनते ही रजत ने
- 1:52:16उस आदमी का गिरेबान पकड़ लिया और गुस्से
- 1:52:18में दांत पीसते हुए बोला देख मैं बहुत
- 1:52:21ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता जितनी जल्दी
- 1:52:23हो सके उसे उठाओ और ले चलो यहां से अगर
- 1:52:26कोई गड़बड़ होती है तो मैं देख लूंगा
- 1:52:29लेकिन लेकिन बॉस एक बार मुख्तार भाई से
- 1:52:32बात कर लें क्या मवाली ने हिचकिचाते हुए
- 1:52:34कहा लेकिन रजत किसी की सुनने को तैयार ही
- 1:52:37नहीं था मेरा कहना काफी नहीं है क्या
- 1:52:40मैंने कहा ना भाई को मैं संभाल लूंगा और
- 1:52:43अब अगर किसी किसी ने भी ना नुक की तो मैं
- 1:52:46उसका भेजा यहीं खोल के रख दूंगा। रजत के
- 1:52:48सर पर जुनून सवार था। जब पास में खड़े
- 1:52:51शौर्य ने रजत और उसके साथियों की बातें
- 1:52:53सुनी तो उसके दिल में शिप्रा के लिए
- 1:52:55हमदर्दी का भाव पैदा हुआ। वो शिप्रा को हर
- 1:52:58हाल में इस हैवान से बचाना चाहता था।
- 1:53:00लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो सबके
- 1:53:02सामने आए बिना रजत के प्लान पर पानी कैसे
- 1:53:04फेर पाएगा। तभी अचानक उसे शिप्रा का मासूम
- 1:53:08चेहरा याद आने लगा। कितनी मजबूर थी वो
- 1:53:10शादी वाले दिन। और तभी शौर्य ने निर्णय
- 1:53:13लिया कि वो अंतिम क्षण तक पुलिस का इंतजार
- 1:53:15करेगा। लेकिन अगर कोई रास्ता ही नहीं बचा
- 1:53:18तो वो शिप्रा के लिए सामने आने से भी नहीं
- 1:53:20हिचकिचाएगा। मजबूरी में ही सही पर फिर
- 1:53:23शिप्रा से उसकी शादी हो चुकी थी और पत्नी
- 1:53:25की रक्षा करना पति का धर्म होता है। अब वो
- 1:53:28शिप्रा को भगवान के भरोसे नहीं छोड़ सकता
- 1:53:31था। [संगीत] व अब गुंडों ने रजत को कोई
- 1:53:33नसीहत देने की जुर्रत नहीं की और वो सब भी
- 1:53:36अपने बॉस के पीछे मंदिर की सीढ़ियां चढ़ने
- 1:53:38लगे। शौर्य भी सावधानी के साथ उन सबके
- 1:53:42पीछे हो लिया। वहीं मंदिर में पुजारी बाबा
- 1:53:45पूजा की प्रक्रिया पूरी कर चुके थे। जिसके
- 1:53:47बाद वो शांत स्वर में शिप्रा से बोले जाओ
- 1:53:51बेटा मंदिर की परिक्रमा कर लो। [संगीत]
- 1:53:54बीना जी ने भी शिप्रा से कहा हां बेटी तुम
- 1:53:58परिक्रमा कर लो। हम भोग लगाकर और दान
- 1:54:01दक्षिणा देकर आते हैं। राहुल तुम भी दीदी
- 1:54:04के साथ जाओ। राहुल के साथ शिप्रा मंदिर से
- 1:54:07बाहर आई और मुख्य मंदिर की परिक्रमा के
- 1:54:10लिए बढ़ने लगी। जहां पहले से ही कई लोग
- 1:54:12परिक्रमा कर रहे थे। राहुल ने अपना फोन
- 1:54:15निकाला और मंदिर में लगी खूबसूरत
- 1:54:16चित्रकारी की फोटो लेने लगा और अपनी ही
- 1:54:19धुन में शिप्रा आगे बढ़ गई। सभी के साथ
- 1:54:22शिप्रा भी हाथ जोड़कर भगवान का स्मरण करते
- 1:54:24हुए सिर झुकाए मंदिर की परिक्रमा करने
- 1:54:27लगी। अभी उसने एक ही चक्र पूरा किया था कि
- 1:54:30उसने देखा कि कोई उसके सामने आकर खड़ा हो
- 1:54:32गया था। सर झुकाए ही शिप्रा ने साइड से
- 1:54:35निकलने की कोशिश की। लेकिन वो व्यक्ति फिर
- 1:54:38से उसके सामने आ गया। ऐसा होने पर शिप्रा
- 1:54:41को अजीब एहसास हुआ। उसने धीरे से सिर
- 1:54:44उठाया और जैसे ही उसकी नजर सामने वाले
- 1:54:47व्यक्ति पर पड़ी तो उसके शरीर में सेहरन
- 1:54:49दौड़ गई। उसके सामने वो आदमी खड़ा था
- 1:54:52जिसकी घटिया हरकतों का खामियाजा शिप्रा ने
- 1:54:55भरा था। वासना से भरा रजत ललचाई आंखों से
- 1:54:59शिप्रा को घूर रहा था। मारे घबराहट के
- 1:55:02शिप्रा ने अटकते हुए लफ्जों में कहा तुम
- 1:55:05तुम यहां क्या कर रहे हो?
- 1:55:07इस पर रजत अपनी परिचित कुटिल मुस्कान के
- 1:55:10साथ बोला सुना था शादी के बाद लड़कियां
- 1:55:13अपने एक्स को भूल जाती हैं। लेकिन चलो
- 1:55:15शुक्र है कि मैं तुम्हें याद तो हूं। जेल
- 1:55:17में दिन रात मैं बस तुम्हें ही याद करता
- 1:55:19था। कसम से बहुत याद किया। मेरा रास्ता
- 1:55:23छोड़ो। शिप्रा ने दांत पीसते हुए कहा। इस
- 1:55:27पर रजत ने व्यंग भरे शब्दों में कहा, "यह
- 1:55:30लो छोड़ दिया।" इतना बोलकर रजत शिप्रा के
- 1:55:32सामने से थोड़ा साइड हुआ। पर उसके पीछे
- 1:55:35उसके बाकी के चमचे दीवार बनकर खड़े थे।
- 1:55:37वहां मौजूद परिक्रमा कर रहे लोग जिन्होंने
- 1:55:40यह मंजर देखा वो भी अपनी जगह खड़े हो गए।
- 1:55:43क्योंकि रजब के गुंडों ने पूरा रास्ता ही
- 1:55:45रोक दिया था। मंदिर की भौगोलिक स्थिति इस
- 1:55:48प्रकार की थी कि यह मंदिर पहाड़ी नुमा
- 1:55:50टीले पर स्थित था। जिसके सामने से
- 1:55:53सीढ़ियां चढ़कर लोग ऊपर मंदिर में आते थे।
- 1:55:56उसके बाद गोलाई में मंदिर के चारों तरफ
- 1:55:58रेलिंग लगी हुई थी और रेलिंग के दूसरी तरफ
- 1:56:00खाई थी जो कहीं-कहीं पर ज्यादा गहरी तो
- 1:56:03कहीं कम गहरी थी। वहीं मंदिर की साइड में
- 1:56:0612 से 15 फुट का गलियारा बना हुआ था जिस
- 1:56:08पर लोग परिक्रमा करते थे। शिप्रा ने जब
- 1:56:11देखा कि रजत के गुंडों ने पूरा रास्ता ही
- 1:56:14जाम कर रखा था तो उसने रजत की तरफ पलट कर
- 1:56:16पूछा। तुम आखिर चाहते क्या हो? इस पर रजत
- 1:56:20ने तंज भरे स्वर में कहा। यह हुई ना बात।
- 1:56:24अब किया ना तुमने सही क्वेश्चन? तो इसका
- 1:56:26सीधा सा जवाब है कि मैं तुम्हें चाहता हूं
- 1:56:29और एक तुम हो कि मुझे भाव ही नहीं देती।
- 1:56:31अगर तुमने मेरे प्यार को ठुकराया ना होता
- 1:56:33तो यह जो मैंने सुना है कि तुम्हारी शादी
- 1:56:35एक भिखारी से हो गई है वो नहीं होती। कहते
- 1:56:40हुए रजत जोर-जोर से हंसने लगा। अपनी बकवास
- 1:56:43बंद करो और रास्ता छोड़ो मेरा। शिप्रा
- 1:56:46झल्ला उठी। रजत की बातें उसका खून जला रही
- 1:56:49थी लेकिन वो उसका कुछ कर भी तो नहीं सकती
- 1:56:51थी। तभी रजत ने शिप्रा की तरफ एक कदम
- 1:56:54बढ़ाया और उसे गुस्से में घूरते हुए बोला,
- 1:56:56"तुम्हें क्या लगता है कि मैंने तुम्हारा
- 1:56:58रास्ता छोड़ने के लिए रोका है? मुझसे ऐसी
- 1:57:01उम्मीद करना बेवकूफी है। हमने तुम्हें
- 1:57:04ऑप्शन दिया था मुझसे शादी करने का। पर अब
- 1:57:07तो तुम एक भिखारी की पत्नी हो। हाय।
- 1:57:11कहते हुए रजत ने अपने दिल पर हाथ रखा और
- 1:57:13उसे सहलाते हुए किसी लफंगे की तरह बोला
- 1:57:16हाय कमबख्त इस दिल का क्या जिसे अब भी
- 1:57:20तुम्हें पाने की हसरत है साला तुम्हारे
- 1:57:23चक्कर में तुम्हें जेल भी हो आया और
- 1:57:25तुम्हें लगता है कि मैं इतनी आसानी से
- 1:57:27तुम्हारा पीछा छोड़ दूंगा। रजत के घिनौने
- 1:57:30इरादे भांप कर शिप्रा बेहद डर गई और जब
- 1:57:33उसे कुछ समझ नहीं आया तो वह पलटी और तेजी
- 1:57:35से वापस भागने लगी। रजत को उम्मीद नहीं थी
- 1:57:38कि शिप्रा यूं फुर्ती दिखाएगी। वो तो अपनी
- 1:57:41ही दीवानगी में डूबा हुआ था। फिर जब उसे
- 1:57:43होश आया तो वो और उसके गुंडे भी तेजी से
- 1:57:46शिप्रा के पीछे भागने लगे। अब चाहे शिप्रा
- 1:57:48कितनी भी तेज क्यों ना हो उसकी स्पीड रजत
- 1:57:51से तेज नहीं थी। जल्द ही रजत उसके पास
- 1:57:53पहुंच गया और उसने पीछे से उसकी कलाई पकड़
- 1:57:56ली। शिप्रा ने अपनी कलाई छुड़ाने की पूरी
- 1:57:58कोशिश की। वो रजत की मजबूत पकड़ से आजाद
- 1:58:01नहीं हो पा रही थी। यह हंगामा सुनकर जब
- 1:58:04शिप्रा की फैमिली वाले गलियारे में पहुंचे
- 1:58:06तो सामने का नजारा देखकर वे भी आवाक रह
- 1:58:08गए। सब कुछ इतनी जल्दीबाजी में हुआ कि
- 1:58:11किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या
- 1:58:13करें। इधर जब शिप्रा को कोई रास्ता नहीं
- 1:58:16सूझा तो उसने अपने दांत रजत के हाथ में
- 1:58:18गड़ा दिए जिससे रजत को तेज चुभैन महसूस
- 1:58:21हुई और उसकी पकड़ ढीली होते ही शिप्रा ने
- 1:58:23उसे एक जोर का धक्का दे मारा जिससे रजत
- 1:58:26तेजी से पीछे की ओर खड़े अपने ही गुंडों
- 1:58:28पर गिर गया। रजत को बिल्कुल भी अंदाजा
- 1:58:30नहीं था कि शिप्रा इस तरह से फाइट बैक
- 1:58:32करेगी। ठीक से बैलेंस ना हो पाने के कारण
- 1:58:35रजत की पीठ पर काफी चोट भी आई जिससे उसका
- 1:58:38चेहरा गुस्से में लाल हो गया और अगले ही
- 1:58:40पल उसने अपने एक साथी से हॉकी स्टिक छीनी
- 1:58:43और शिप्रा को सबक सिखाने के लिए उसकी ओर
- 1:58:46बढ़ गया। वहीं जब शिप्रा ने हॉकी स्टिक के
- 1:58:49साथ रजत को अपनी ओर बढ़ते देखा तो वो अपनी
- 1:58:51पूरी ताकत समेट कर फिर से मंदिर की
- 1:58:53सीढ़ियों की तरफ भागने लगी। लेकिन आज रजत
- 1:58:56किसी भी कीमत पर शिप्रा को छोड़ने वाला
- 1:58:59नहीं था। वहीं मंदिर में मौजूद सभी लोग बस
- 1:59:02तमाशबीन बने हुए थे। किसी की हिम्मत नहीं
- 1:59:04हो रही थी कि उन गुंडों से शिप्रा को
- 1:59:06बचाने की कोशिश करें। इधर शिप्रा बेसुध
- 1:59:09होकर भाग ही रही थी कि तभी अपने ही
- 1:59:12दुपट्टे में उलझकर वो मंदिर की सीढ़ियों
- 1:59:14पर गिर पड़ी। उसी पल रजत मौका पाकर उसके
- 1:59:17पास आ गया और दांत भीचते हुए बोला, तेरी
- 1:59:20इतनी हिम्मत कि तूने मुझे धक्का दिया। अब
- 1:59:24देख मैं तेरा क्या हाल करता हूं। इतना
- 1:59:27कहकर रजत ने अपनी हॉकी स्टिक उठाई और तेजी
- 1:59:29से शिप्रा के सिर की ओर घुमा दी। वहीं
- 1:59:32जमीन पर पड़ी शिप्रा ने जब देखा कि अब
- 1:59:34बचने का कोई रास्ता नहीं है तो उसने बस
- 1:59:37जोर से अपनी आंखें बंद कर ली। वो समझ गई
- 1:59:39कि अब उसका सिर फूटने से कोई नहीं बचा
- 1:59:42सकता। पर यह क्या? आंखें बंद किए ही
- 1:59:45शिप्रा ने महसूस किया कि हॉकी टकराने की
- 1:59:47आवाज तो आ रही है पर उससे नहीं। यह कैसे
- 1:59:50हो सकता है? इतना सोचकर शिप्रा ने अपनी
- 1:59:53आंखें खोल ली और नजर उठाकर देखा तो पाया
- 1:59:56कि कोई ढाल बनकर उसके ऊपर झुका है। वो जो
- 1:59:59कोई भी था शिप्रा पर पड़ने वाली [संगीत]
- 2:00:02सभी लाठियां वो अपनी पीठ के ऊपर ले रहा
- 2:00:04था। शिप्रा समझ नहीं पाई कि यह कौन है जो
- 2:00:07अपनी जान दांव पर लगाकर उसे बचाने के लिए
- 2:00:09सामने आया है। इधर जब रजत ने उस व्यक्ति
- 2:00:12को शिप्रा की ढाल बने देखा तो उसका हाथ
- 2:00:14रुक गया। इधर डर से नीचे बैठ चुकी शिप्रा
- 2:00:17के चेहरे पर खून की कुछ बूंदे गिरी तो
- 2:00:20उसने सर उठाकर ढाल बने उस व्यक्ति को
- 2:00:22ध्यान से देखा। उस व्यक्ति के चेहरे पर
- 2:00:24नजर पड़ते ही शिप्रा की आंखें फैल गई। एक
- 2:00:27पल के लिए तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास
- 2:00:29ही नहीं हुआ। वो कल्पना भी नहीं कर सकती
- 2:00:32थी कि ऐसे मौके पर यह इंसान उसकी रक्षा के
- 2:00:34लिए आ जाएगा। जी हां, वो कोई और नहीं
- 2:00:38शिप्रा का बेगर हस्बैंड शौर्य था। अब
- 2:00:42शिप्रा ही नहीं वहां मौजूद हर इंसान हैरान
- 2:00:45था कि इतने सब लोगों के बीच किसी ने एक
- 2:00:47लड़की की इज्जत बचाने की हिम्मत की तो वो
- 2:00:49भी एक भिखारी।
- 2:00:52बलवंत राय भी वहां दूर से ही यह सब देख
- 2:00:54रहे थे। यह सब इतनी जल्दी हुआ कि उन्हें
- 2:00:56खुद कुछ करने का समय ही नहीं मिला। इधर
- 2:00:59रजत ने जब शिप्रा के इस रक्षक को देखा तो
- 2:01:02वो हैरान रह गया। खासतौर पर उसकी वेशभूषा
- 2:01:05और स्थिति देखकर रजत एक पल के लिए भौचक्का
- 2:01:08सा खड़ा रह गया। फिर उसने खुद को संभाला
- 2:01:10और वहीं उपस्थित भीड़ पर तंज कसते हुए
- 2:01:12कहा,
- 2:01:14[हंसी]
- 2:01:15कमाल है भाई। यहां इतने लोगों में अगर
- 2:01:18किसी का जमीर जागा भी तो एक भिखारी का।
- 2:01:22वहीं जब शौर्य ने देखा कि रजत ने हॉकी
- 2:01:24स्टिक चलाना बंद कर दिया है तो वो अपनी
- 2:01:26जगह पर खड़ा हुआ और पीछे पलटा। शौर्य सीधा
- 2:01:29तो हो गया था पर वो शिप्रा के सामने से
- 2:01:31नहीं हटा। अब शौर्य के सामने एक अजीब
- 2:01:34स्थिति पैदा हो गई थी क्योंकि वो ना तो
- 2:01:36शिप्रा को रजत के हाथों किडनैप होने दे
- 2:01:38सकता था और ना ही रजत पर हमला करके वहां
- 2:01:41सबका अटेंशन पा सकता था। आखिर यहां मौजूद
- 2:01:44लोग एक भिखारी से इतनी ज्यादा बहादुरी की
- 2:01:46उम्मीद नहीं कर सकते थे। ऐसे में अगर
- 2:01:50शौर्य कोई हिरइक कारनामा कर देता तो वहां
- 2:01:52मौजूद लोगों के लिए विश्वास करना मुश्किल
- 2:01:54हो जाता कि शौर्य सच में कोई भिखारी है।
- 2:01:57शौर्य यह बिल्कुल भी नहीं चाहता था कि
- 2:01:59उसकी सच्चाई बाहर आए। और तभी रजत ने शौर्य
- 2:02:03की बहादुरी का मजाक बनाते हुए कहा, "हे
- 2:02:06भिखारी, मैं तेरी हिम्मत की दाद देता हूं
- 2:02:09कि तूने इन तमाश मुर्दों को दिखाया कि बस
- 2:02:12एक तेरे अंदर ही शेर जैसा दिल धड़क रहा
- 2:02:14है। लेकिन हमारे सामने शेर बनने का कोई
- 2:02:17फायदा नहीं। तू बेमौत मारा जाएगा। इसलिए
- 2:02:20मेरा कहना मान और एक साइड खड़े होकर तू भी
- 2:02:23बस इन लोगों की तरह तमाशा देख। क्या समझा?
- 2:02:26शौर्य ने तो जैसे रजत की बातों पर कोई
- 2:02:29ध्यान ही नहीं दिया। वो तो बस चाह रहा था
- 2:02:31कि पुलिस जल्दी से आ जाए। वो मन ही मन
- 2:02:34बोला मुझे लगा था पुलिस बस फिल्मों में ही
- 2:02:37देर से आती है। कहां रह गए ये लोग? इधर जब
- 2:02:40रजत ने शौर्य की तरफ से कोई भी एक्शन होते
- 2:02:43हुए नहीं देखा तो कंधे उचकाते हुए बोला।
- 2:02:45जब तू खुद अपनी मौत को दावत देना चाहता
- 2:02:47है। तो अब मैं क्या ही कर सकता हूं। कहते
- 2:02:51हुए रजत ने अपनी हॉकी स्टिक उठाई। वो
- 2:02:53शौर्य पर वार करने ही वाला था कि तभी
- 2:02:55शिप्रा का छोटा भाई राहुल बीच में आ गया
- 2:02:57और उसने रजत की हॉकी स्टिक पकड़ ली। रजत
- 2:03:01ने राहुल की इस हरकत को देखा तो उसने
- 2:03:03घिन्न भरी नजरों से उसे घूरा और बोला अबे
- 2:03:06यार अब इस चूजे के भी पर निकल आए। बेटा
- 2:03:10छोड़ो इसे वरना लग जाएगी। कहते हुए रजत
- 2:03:14जोर लगाकर हॉकी सिक्स छुड़वाना चाह रहा
- 2:03:16था। लेकिन राहुल ने उसे मजबूती से पकड़
- 2:03:19रखा था। तभी रजत ने गुस्से भरी आंखों से
- 2:03:21अपने साथियों को देखा और चीख कर बोला,
- 2:03:24कमबख्त देख क्या रहे हो तुम सब? हर चीज
- 2:03:27तुम्हें बोलनी पड़ेगी क्या? पकड़ो इसे।
- 2:03:30रजत का आदेश पाते ही उसके दो गुर्गे आगे
- 2:03:32आए और उन्होंने राहुल को खींच कर उसे रजत
- 2:03:35से अलग कर दिया। राहुल कसमसाता रहा। पर
- 2:03:38रजत के गुर्गों ने उस पर कोई रहम नहीं
- 2:03:40किया। अब रजत का टारगेट राहुल बन चुका था।
- 2:03:43वहीं राहुल को रजत के दुर्गों में फंसा
- 2:03:46देखकर शिप्रा की जान हलक में आ गई और वो
- 2:03:49तेज आवाज में चिल्लाई। नहीं छोड़ो उसे
- 2:03:52छोड़ दो मेरे भाई को। तो क्या होगा आगे?
- 2:03:56क्या एक बार फिर राहुल को बलि का बकरा
- 2:03:58बनाकर शिप्रा के साथ मनमानी की जाएगी या
- 2:04:01इस बार शौर्य अपनी पहचान उजागर कर रजत को
- 2:04:04सबक सिखाएगा? जानने के लिए सुनते रहिए।
- 2:04:08बेगर हस्बैंड
- 2:04:10[संगीत]
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