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भिखारी हसबैंड | Episode 01–10 | Kahvanihindi — Transcript

by Kahvani Hindi · 21,073 words · 2,589 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00इस दुनिया के सभी [संगीत] जीवों में इंसान
  2. 0:02ने सबसे ज्यादा तरक्की की है। इसकी सबसे
  3. 0:05बड़ी वजह यह है कि हमने एक साथ मिलकर रहना
  4. 0:08सीखा है। इंसान ने एकजुट होकर रहने के लिए
  5. 0:12समाज का निर्माण किया और उसकी नीव बने
  6. 0:15हमारे रिश्ते।
  7. 0:17जी हां, जरूरत में एक दूसरे के काम आना,
  8. 0:20सुख-दुख बांटना और रिश्ते निभाना। यह
  9. 0:23सदियों से चला आ रहा है। लेकिन क्या होता
  10. 0:26है जब कोई रिश्तों का नाजायज फायदा उठाने
  11. 0:29लगे? या फिर जबरदस्ती किसी के साथ रिश्ता
  12. 0:32जोड़ने की कोशिश करें। जब कोई किसी को
  13. 0:35पाने की चाहत में पागलपन की सभी हदें पार
  14. 0:38कर देता है तभी उसका विनाश होता है और साथ
  15. 0:42ही कहीं कुछ नए रिश्ते भी [संगीत] उजागर
  16. 0:44होते हैं। ऐसा ही कुछ होने वाला था राजदीप
  17. 0:46राय के परिवार के साथ। उनकी जिंदगी के
  18. 0:49सबसे खास दिन आज जब उनकी बेटी शिप्रा की
  19. 0:53शादी है। शिप्रा दुल्हन के भेष में अप्सरा
  20. 0:57जैसी लग रही थी। उसे देखकर लगता है कि ऊपर
  21. 1:00वाले ने उसे फुर्सत से बनाया होगा। गोरा
  22. 1:03रंग, सुरमई आंखें, तराशा हुआ बदन, पलखाती
  23. 1:07कमर और कमर को छूते उसके लंबे सुनहरे बाल।
  24. 1:11शिप्रा की खूबसूरती देखकर कोई भी अपना होश
  25. 1:14खो बैठे।
  26. 1:17शहर की जानी मानी हस्ती की बेटी [संगीत]
  27. 1:18और बलवंत राय की पोती होने के नाते कोई भी
  28. 1:21शिप्रा से उलझने की हिम्मत नहीं करता था।
  29. 1:24आज उसकी शादी रायजादा फैमिली के इकलौते
  30. 1:26चिराग विहान से है। असल में इस शादी के
  31. 1:29जरिए दोनों परिवारों के बीच एक [संगीत]
  32. 1:31गहरा बिजनेस रिलेशन बनने वाला है। फैमिली
  33. 1:34फ्रेंड्स होने के नाते शिप्रा और विहान एक
  34. 1:36दूसरे को अच्छी तरह जानते तो हैं लेकिन
  35. 1:39शादी जैसे बंधन में बंधने के लिए जिस
  36. 1:41प्यार की जरूरत होती है वो इन दोनों के
  37. 1:43बीच है या नहीं इसकी सुध लेने की शायद
  38. 1:46किसी ने जरूरत ही नहीं समझी। शिप्रा जैसी
  39. 1:50अप्सरा को पाकर विहान जरूर बेहद खुश होगा।
  40. 1:53लेकिन अगर कोई दुल्हन बनी शिप्रा को गौर
  41. 1:55से देखे तो उसके चेहरे पर मुस्कान [संगीत]
  42. 1:58तो थी लेकिन उसकी आंखें खामोश नजर आती थी।
  43. 2:02शिप्रा की तरह राजदीप राय की हवेली भी
  44. 2:05किसी दुल्हन की तरह जगमगा रही थी। बाहर
  45. 2:07महंगी चमचमाती गाड़ियां खड़ी थी और शहर के
  46. 2:10जानेमाने लोग हाथों में महंगे तोहफे लिए
  47. 2:13अंदर आते दिखाई दे रहे थे। शिप्रा का छोटा
  48. 2:16भाई राहुल मुख्य द्वार पर खड़ा आने वाले
  49. 2:18सभी मेहमानों पर इत्र छिड़क कर उनका
  50. 2:21स्वागत कर रहा था।
  51. 2:25दादा बलवंत राय गुलाबी साफा पहने,
  52. 2:27डेकोरेशन और बाकी तैयारियों का मुआयना कर
  53. 2:30रहे थे। अरे भाई बारात आने को है और अभी
  54. 2:33तक तुम लोगों का काम पूरा नहीं हुआ। कोई
  55. 2:36भी गड़बड़ हुई तो मैं सबके पैसे काटूंगा।
  56. 2:39वहीं शिप्रा के पिता राजदीप राय थोड़े से
  57. 2:42भावुक खड़े दिख रहे थे। हो भी क्यों ना
  58. 2:45[संगीत] प्यारी बेटी आज विदा होने वाली
  59. 2:47है। वहीं घर के अंदर शिप्रा की मां पंडित
  60. 2:50जी द्वारा दी गई लिस्ट को चेक करते हुए
  61. 2:52सुनिश्चित कर रही थी कि पूजा का सारा
  62. 2:54सामान सही से व्यवस्थित है कि नहीं। जब वो
  63. 2:57तेज-तेज़ चलते हुए पूजा की थाली ले जा रही
  64. 3:00थी तो बुआ से भिड़ते भिड़ते बची और राहत
  65. 3:02की सांस लेते हुए बोली ओ अब शुगुन
  66. 3:06होते-होते बचा और फिर दोनों खिलखिात के
  67. 3:09हंस पड़ी। [हंसी] कुछ ही देर में बारात
  68. 3:11दरवाजे पर आने वाली थी। इसीलिए सभी लोग
  69. 3:13बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इस बात से
  70. 3:16बिल्कुल अनजान कि आज जो बारात इस हवेली
  71. 3:18में आने वाली है उसे बारात कहना कितना
  72. 3:21मुश्किल होगा। वहीं दूसरी तरफ बाजेगाजे के
  73. 3:25साथ धूम मचाती बारात आगे बढ़ रही थी।
  74. 3:28दूल्हा विहान घोड़े पर सवार था और रायजादा
  75. 3:31परिवार के सगी संबंधी और दोस्त बैंड की
  76. 3:33धुन पर नाच रहे थे। अभी बारात घर से कुछ
  77. 3:36ही दूर निकली थी कि तभी गाड़ियों का
  78. 3:39काफिला तेजी से बारात के सामने आकर रुका।
  79. 3:42काफिले के बीच एक काले रंग की बड़ी जीप
  80. 3:44खड़ी थी। तभी गाड़ी में सवार एक आदमी अपनी
  81. 3:47बंदूक से आसमानी फायर करता है। गोली की
  82. 3:50आवाज सुनकर बैंड बाजा सब बंद हो जाता है।
  83. 3:52इतने में बाकी गाड़ियों से बंदूक लिए कुछ
  84. 3:55लोग निकलते हैं और बारात को चारों तरफ से
  85. 3:57घेर लेते हैं। तभी सन्नाटे को चीरती एक
  86. 4:01गुस्से भरी रौपदार आवाज आती है। यह गोली
  87. 4:04किसने चलाई? मैंने बारात में बंदूक लाने
  88. 4:06के लिए मना किया था ना। इस पर विहान का एक
  89. 4:09दोस्त घबराते हुए बोला, "अंकल, हमने कुछ
  90. 4:13नहीं किया। गोली वहां से चली है। कहते हुए
  91. 4:16उसने सामने की तरफ इशारा किया। यह क्या
  92. 4:19बदतमीजी है? कौन है जिसने धर्मवीर रायजादा
  93. 4:22की बेटे की बारात को रोकने की हिम्मत की
  94. 4:24है? कहते हुए धर्मवीर बारातियों में से
  95. 4:27बाहर आए तो गाड़ियों का काफिला और गन मैन
  96. 4:30देखकर उनके होश उड़ गए। अब उनके हलक से
  97. 4:33कोई आवाज नहीं निकली। वो तुरंत बड़ी गाड़ी
  98. 4:35के पास पहुंचे और झट से गाड़ी का दरवाजा
  99. 4:38खोला। इससे पहले कि मुख्तार भाई बाहर
  100. 4:40निकलते धर्मवीर ने मुख्तार का हाथ पकड़ कर
  101. 4:43चूमते हुए कहा मेरे अहोभाग्य मुख्तार भाई
  102. 4:46कि आप मेरे बेटे को आशीर्वाद देने आ गए
  103. 4:49मुख्तार अहमद रॉबीला चेहरा आंखों में
  104. 4:52सुरमा उनकी लंबी सफेद दाढ़ी सफेद कपड़ों
  105. 4:56के साथ और भी जच रही थी और पूरा बदन महंगे
  106. 4:59इत्र से महक रहा था। धर्मवीर के मुंह से
  107. 5:02अपना नाम सुनकर मुख्तार के चेहरे पर हल्की
  108. 5:04मुस्कान तैर गई। फिर उसने संजीदगी भरी
  109. 5:07निगाह से अपने सेवादार की तरफ देखा तो
  110. 5:10सेवादार ने झट से एक पीक दान मुख्तार के
  111. 5:12आगे बढ़ाया। मुख्तार पान थूक कर बोला
  112. 5:15सुभान अल्लाह।
  113. 5:17तो तुम हमें जानते हो। कैसी बात कर रहे
  114. 5:21हैं मुख्तार भाई? आपको कौन नहीं जानता?
  115. 5:24धर्मवीर ने दबी आवाज और चेहरे पर फिक्रमंद
  116. 5:26मुस्कान के साथ कहा, चलो बढ़िया है। फिर
  117. 5:30शायद खून बहाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और
  118. 5:33तुम्हें आसानी से मेरी बात समझ आ जाएगी।
  119. 5:37कहते हुए मुख्तार हाथ में छड़ी लिए गाड़ी
  120. 5:39से बाहर निकला। लेकिन धर्मवीर को कुछ समझ
  121. 5:42नहीं आया। वो बोले क्या कहना चाहते हैं
  122. 5:45भाई? आप हुक्म कीजिए आपका हुक्म सर आंखों
  123. 5:48पर। जिसकी शादी है कौन है वो तुम्हारा?
  124. 5:52मुख्तार ने घोड़े पर बैठे विहान पर नजर
  125. 5:54डालते हुए पूछा तो जवाब में धर्मवीर
  126. 5:57घबराते हुए बोले वो मेरा बेटा है मुख्तार
  127. 6:00भाई क्या हुआ मेरे बेटे से कोई गलती हो गई
  128. 6:03क्या अभी तक तो गलती नहीं हुई है पर करने
  129. 6:07जा रहा है क्या बात कर रहे हैं भाई हम
  130. 6:10भूलकर भी आपके खिलाफ नहीं जा सकते आप
  131. 6:12बताइए तो मैं गारंटी देता हूं मेरा बेटा
  132. 6:16कभी आपके खिलाफ नहीं जाएगा मुख्तार भाई
  133. 6:18कुछ पल धर्मवीर को देखता रहा फिर बोला तो
  134. 6:22ठीक है। जैसे आए थे वैसे ही यहां से वापस
  135. 6:26चले जाओ। मुख्तार भाई की यह बात सुनकर
  136. 6:29धर्मवीर रायजादा को झटका सा लगा। क्या बात
  137. 6:33कर रहे हो भाई? आज तो विहान की शादी है।
  138. 6:36वही तो नहीं करनी है। मुख्तार ने तिरछी
  139. 6:40मुस्कान के साथ कहा। जिसे देखकर धर्मवीर
  140. 6:42की घबराहट और बढ़ने लगी। वो लगभग रुआसा
  141. 6:46होते हुए बोला भाई अगर बिना शादी किए
  142. 6:48बारात वापस गई तो परिवार की बड़ी बेइज्जती
  143. 6:51हो जाएगी। इस पर मुख्तार ने धर्मवीर के
  144. 6:54कंधे पर हाथ रखकर समझाते हुए कहा बेइज्जती
  145. 6:58का गम बेटे की लाश को कंधा देने के गम से
  146. 7:03कम होता है बरखुरदार।
  147. 7:05यह सुनकर धर्मवीर के शरीर में झुरझुरी सी
  148. 7:08फैल गई। फिर भी उन्होंने बड़ी हिम्मत
  149. 7:10लगाकर पूछा।
  150. 7:12भाई क्या मैं जान सकता हूं कि आपको मेरे
  151. 7:14बेटे की शादी से ऐतराज क्यों है? वैसे तो
  152. 7:17मुख्तार जैसे डॉन को कोई सफाई देने की
  153. 7:19जरूरत नहीं थी। पर धर्मवीर ने अब तक उसकी
  154. 7:21सभी बातें मानी थी। शायद इसीलिए वो बोला
  155. 7:25अगर तुम जानना चाहते हो तो सुनो। ऐतराज
  156. 7:29तुम्हारे बेटे की शादी से नहीं उस लड़की
  157. 7:32की शादी से है। उसका नाम शिप्रा है ना? जो
  158. 7:37भी लड़का उस घमंडी लड़की से शादी करेगा
  159. 7:40मेरे हाथों उसकी मौत तय है। अब अगर तुम
  160. 7:44अपने बेटे का जनाजा देखना चाहते हो तो शौक
  161. 7:48से उसकी शादी शिप्रा से करवा सकते हो।
  162. 7:52इस पर धर्मवीर ने जिज्ञासु होकर पूछा।
  163. 7:55लेकिन भाई उस मासूम लड़की ने आखिर आपका
  164. 7:58क्या बिगाड़ा है? मासूम नहीं है वो।
  165. 8:02मुख्तार गुस्से में भड़क उठा। वो एक
  166. 8:04निहायती घमंडी और घटिया लड़की है। मुख्तार
  167. 8:08कुछ पल के लिए रुका और फिर आगे बोलना शुरू
  168. 8:11किया। अब बताओ एक खूबसूरत नौजवान लड़का है
  169. 8:15जो एक लड़की से बेइंतहा मोहब्बत करता है।
  170. 8:18दीवानगी की हद तक उसे चाहता है। उसके लिए
  171. 8:22मरने मारने को तक आमादा है। लेकिन सितम
  172. 8:26जरीफी तो देखिए। गुरूर में चूर उस लड़की
  173. 8:29को उसकी मोहब्बत ही नहीं दिखती। फिर
  174. 8:33मुख्तार व्यंग्ञात्मक हंसी-हंसते हुए बोला
  175. 8:35[हंसी]
  176. 8:36जवानी का जोश वो नौजवान दोस्तों के बहकावे
  177. 8:39में आकर उस लड़की के साथ एक छोटी सी शरारत
  178. 8:43कर बैठा। गुरूर में चूर उस लड़की ने
  179. 8:45बेचारे को सबके सामने तमाचा जड़ दिया। एक
  180. 8:49छोटा सा मजाक उस बदजात से बर्दाश्त ना
  181. 8:51हुआ। कहते हुए मुख्तार का गुस्सा फूट
  182. 8:54पड़ा। उस लड़की की इतनी औकात कि किसी मर्द
  183. 8:58को सरे बाजार थप्पड़ मार दे। औरत चाहे
  184. 9:01खूबसूरती में किसी की जैसे ही क्यों ना हो
  185. 9:04पर उसकी जगह मर्द की जूती के नीचे होती
  186. 9:07है। मुख्तार की इस घटिया सोच और ऊंची आवाज
  187. 9:11के चलते एक खुशनुमा माहौल में श्मशानी
  188. 9:14सन्नाटा छा गया। धर्मवीर रायजादा अपने
  189. 9:17मेहमानों के सामने शर्मिंदा हो गए। कुछ पल
  190. 9:20के लिए किसी को कुछ समझ में नहीं आया कि
  191. 9:22बात कहां से शुरू हुई थी और कहां पहुंच
  192. 9:25गई। धर्मवीर माहौल को बदलने के लिए बात
  193. 9:28बदलने की कोशिश करते हैं। लेकिन उससे पहले
  194. 9:30ही मुख्तार बोल पड़ा,
  195. 9:33"मेरे भाई को वो लड़की बेहद पसंद है। यह
  196. 9:36सोचकर मैंने उसके यहां शादी का प्रपोजल भी
  197. 9:39भेजा। पर एक गुंडे के घर अपनी पोती की
  198. 9:42शादी कराना उन्हें नागवार है। ऐसा कहकर
  199. 9:46उसके दादा ने शादी से इंकार कर दिया।
  200. 9:49मुख्तार की बात सुनकर धर्मवीर रायजादा को
  201. 9:52लगा कि उसे यह बात पहले क्यों नहीं पता
  202. 9:54चली। अगर उसे पहले से पता होता कि शिप्रा
  203. 9:57का पंगा मुख्तार भाई से चल रहा है तो वह
  204. 9:59कभी शादी के लिए तैयार नहीं होते।
  205. 10:02ऐसा लग रहा था कि किसी ने मुख्तार भाई के
  206. 10:05दर्द भरे तार छेड़ दिए हो। वो बोला
  207. 10:09उस लड़की की वजह से मेरा भाई आज जेल में
  208. 10:11है। अब वो लोग शादी के लिए नहीं माने तो
  209. 10:15इसमें मेरे भाई की क्या गलती?
  210. 10:18उसने उस लड़की के साथ थोड़ी सी छेड़छाड़
  211. 10:21कर दी। उसने मेरे भाई को जेल करवा दी। अब
  212. 10:25इतनी बेइज्जती के बाद तुम्हें लगता है कि
  213. 10:27मैं उसकी शादी किसी अच्छे परिवार में होने
  214. 10:30दूंगा।
  215. 10:32इतना सब सुनने के बाद भी धर्मवीर अपने मन
  216. 10:34में उठ रहे एक सवाल को पूछने से खुद को
  217. 10:36रोक नहीं पाए। लेकिन भाई आप उसके दूल्हे
  218. 10:40को क्यों खत्म करना चाहते हैं? उससे अच्छा
  219. 10:43तो यह नहीं होगा कि आप उस लड़की को ही
  220. 10:45ठिकाने लगा देते। इस पर मुख्तार गुस्से
  221. 10:48में जबड़ा भीते हुए बोले तुम्हें क्या
  222. 10:51लगता है कि मुझे बात समझ नहीं आती? अंजाम
  223. 10:56तो उसका एक दिन यही होना है। पर अभी कुछ
  224. 10:59वक्त के लिए हम कुछ नहीं कर सकते। क्या है
  225. 11:02कि अभी मेरे भाई का केस चल रहा है। अगर
  226. 11:05अभी उस लड़की को कुछ हुआ तो उसका शक मेरे
  227. 11:09ऊपर जाएगा। मैं खामखा कानून को अपने ऊपर
  228. 11:12फंदा कसने का मौका [संगीत] नहीं देना
  229. 11:14चाहता। यह समझ लो कि कोई उड़ता हुआ तीर भी
  230. 11:18अगर उसकी तरफ आता है तो उसे मैं अपने ऊपर
  231. 11:21ले लूंगा। पर उसे खरोच तक नहीं आने दूंगा।
  232. 11:25लेकिन हां जो उसका रकीब बनकर आएगा उसको
  233. 11:29छोडूंगा भी नहीं।
  234. 11:32घोड़े पर सवार विहान जो अब तक सारी बातें
  235. 11:34सुन रहा था अब उससे रहा नहीं गया। पापा
  236. 11:37मैं गुंडे के डर से शिप्रा से शादी करने
  237. 11:39का फैसला नहीं बदल सकता। मैं शिप्रा से ही
  238. 11:42शादी करूंगा।
  239. 11:44कहते हुए वह घोड़े से उतर कर सामने आया ही
  240. 11:46था कि तभी एक जोरदार थप्पड़ की आवाज
  241. 11:48गूंजी। विहान को थप्पड़ मारने वाला कोई और
  242. 11:51नहीं धर्मवीर रायजादा खुद थे। जब उन्होंने
  243. 11:55देखा कि विहान कुछ ज्यादा ही बोल गया है
  244. 11:57तो उसकी जान बचाने के लिए उन्होंने खुद
  245. 11:59विहान को थप्पड़ जड़ दिया। और फिर मुख्तार
  246. 12:02को सफाई देते हुए बोले
  247. 12:05भाई मेरा बेटा भी नासमझ है। इसे अच्छे
  248. 12:07बुरे का ज्ञान नहीं है। इसकी तरफ से मैं
  249. 12:10माफी मांगता हूं।
  250. 12:12इस पर मुख्तार ठंडे लहजे में बोला कोई बात
  251. 12:16नहीं सेठ जवानी का जोश अच्छे भले आदमी को
  252. 12:20दीवाना बना देता है। तुम शरीफ आदमी हो
  253. 12:24इसलिए छोड़ रहा हूं। अब चलो निकलो यहां
  254. 12:27से। अभी मुझे एक दूसरा लड़का ढूंढकर उस
  255. 12:31लड़की की शादी भी तो करानी है। [हंसी]
  256. 12:34ये सुनकर धर्मवीर रायजादा हैरान रह गए और
  257. 12:37उन्होंने अपनी हैरानी मुख्तार के आगे
  258. 12:39जाहिर भी कर दी।
  259. 12:41भाई मैं कुछ समझा नहीं। आपने तो कहा था कि
  260. 12:44जिससे भी उसकी शादी होगी उसे आप मौत के
  261. 12:46घाट उतार देंगे। पर अभी आप कह रहे हैं कि
  262. 12:49उसकी शादी करानी है। मुख्तार के चेहरे पर
  263. 12:52कुटिल मुस्कान फैल गई। वो बोला मेरे कहने
  264. 12:57का मतलब यह था कि मैं किसी इज्जतदार
  265. 12:59फैमिली में उसकी शादी नहीं होने दूंगा।
  266. 13:04बड़ा गुरूर है ना उसे अपने हुस्न पर तो अब
  267. 13:07मैं जिससे उसकी शादी करवाऊंगा उससे उस
  268. 13:10लड़की का घमंड भी [संगीत] टूटेगा और एक
  269. 13:13गुंडे के साथ रिश्ता ना करवाने वाले उसके
  270. 13:16दादा की भी अक्ल ठिकाने आ जाएगी।
  271. 13:20कहते हुए मुख्तार की नजर एक जगह ठहर गई और
  272. 13:23अचानक ही उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान
  273. 13:25तैर गई। ए कल्ला
  274. 13:28मुख्तार ने जोर से आवाज लगाई तो कल्ला
  275. 13:30मुख्तार के सामने आकर बोला जी भाई क्या
  276. 13:34हुक्म है? और फिर मुख्तार ने कल्ला को कुछ
  277. 13:37इशारा किया। फिर मुख्तार ने धर्मवीर की ओर
  278. 13:40देखे बिना कहा
  279. 13:42तुम्हारा बैंड बाजा और बारात मैं लेकर
  280. 13:45जाऊंगा। और अगर तुम्हारे कुछ रिश्तेदार
  281. 13:48अच्छी दावत खाना चाहते हैं तो वो भी आ
  282. 13:51सकते हैं। रात की खामोशी के बीच मुख्तार
  283. 13:54की भयानक हंसी गूंज उठी। [हंसी]
  284. 13:58शाम का वक्त था। शिप्रा अपने फ्रेंड्स के
  285. 14:00साथ हंसते खिलखिलाते हुए अपनी गाड़ी की
  286. 14:02तरफ बढ़ रही थी कि तभी अचानक पीछे से किसी
  287. 14:05ने शिप्रा का हाथ पकड़ लिया। इससे पहले कि
  288. 14:07शिप्रा कुछ समझ पाती उस आदमी ने शिप्रा को
  289. 14:10बाजू से पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया।
  290. 14:13शिप्रा हैरान रह गई। हाउ डेयर यू? शिप्रा
  291. 14:16ने गुस्से में कहा। लेकिन उस आदमी को इससे
  292. 14:19कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने प्यार से शिप्रा
  293. 14:21की नाजुक कमर में हाथ डाला और इसके गालों
  294. 14:24को चूम कर बेशर्मी से हंसने लगा। [हंसी]
  295. 14:29एक पल के लिए तो शिप्रा को कुछ समझ ही
  296. 14:30नहीं आया कि उसके साथ क्या हुआ। फिर अगले
  297. 14:33ही पल उसका शरीर गुस्से में कांप उठा। एक
  298. 14:36झटके के साथ शिप्रा ने खुद को उसकी गिरफ्त
  299. 14:39से छुड़ाया और उस बदतमीज आदमी के चेहरे पर
  300. 14:41एक जोरदार तमाचा जड़ दिया। वो आदमी सन्य
  301. 14:45रह गया। उसने कभी नहीं सोचा था कि शिपरा
  302. 14:48भरे बाजार सबके सामने उसे थप्पड़ जड़
  303. 14:51देगी। उस थप्पड़ की गूंज पूरे इलाके ने
  304. 14:54सुनी।
  305. 14:56और आज वही गूंज शिपरा का पूरा परिवार
  306. 14:59सुनने वाला है।
  307. 15:02बारात को निकले काफी देर हो चुकी है लेकिन
  308. 15:04अभी तक यहां पहुंची नहीं। सब ठीक तो है
  309. 15:07ना? यह सोचकर शिप्रा के घर वाले परेशान हो
  310. 15:10रहे थे। अरे आप एक बार फिर से फोन करके
  311. 15:13पता करिए ना। शिप्रा की मां बीना राय
  312. 15:16घबराहट में राय साहब से बोली। इस पर राय
  313. 15:19साहब ने झुंझुला कर जवाब दिया। कितनी बार
  314. 15:22फोन कर चुका हूं। अब नहीं उठा रहे तो क्या
  315. 15:25करूं? पूरी बारात के साथ निकलने में टाइम
  316. 15:28तो लग ही जाता है। इतने में दूर जगमग
  317. 15:31रोशनी के साथ बैंड बाजे की धुन सुनाई दी।
  318. 15:34फिर क्या था? सभी के चेहरे खिल उठे। लो आ
  319. 15:37गई बारात। बिना मतलब परेशान हो रही थी। अब
  320. 15:41जल्दी जाओ और स्वागत की तैयारी करो। राय
  321. 15:44साहब उत्साहित होकर अपनी पत्नी से बोले।
  322. 15:46देखते ही देखते आरती की थाल लिए सभी द्वार
  323. 15:49पर खड़े हो गए। वहीं झूमतेनाचते बारात भी
  324. 15:52दरवाजे तक आ पहुंची। लेकिन बारात के हाल
  325. 15:55देखकर सभी के चेहरे का रंग एकदम से उड़
  326. 15:58गया। हे भगवान ये क्या? मवालियों जैसे
  327. 16:02कपड़े, पैरों में चप्पल, बड़ी दाढ़ी और
  328. 16:06हाथों में बंदूक लहराते ये गुंडे। भला ये
  329. 16:09कैसी बारात है? राजदीप राय किससे अपनी
  330. 16:12बेटी का ब्याह कर रहे हैं? सभी मेहमान आपस
  331. 16:16में बुदबुदाने लगे। और तो और घोड़ी पर
  332. 16:19बैठे दूल्हे को देखकर तो सबके होश ही उड़
  333. 16:21गए। दूल्हे के सर पर चमचमाता सेहरा तो था
  334. 16:25पर वो बहुत गंदा सा दिख रहा था। नंगे पैर,
  335. 16:29बदन पर मैले से फटे पुराने कपड़े, बेतरतीब
  336. 16:32ढंग से बढ़ी दाढ़ी और बाल। ऐसा लग रहा था
  337. 16:35कि वो सदियों से नहाया तक नहीं है। दूल्हे
  338. 16:38की फटीचर हालत देखकर राजदीप राय सामने आए
  339. 16:41और गुस्से में तमतमाते हुए बोले, "यह क्या
  340. 16:44तमाशा है? कौन हो तुम लोग? तभी बारात की
  341. 16:49भीड़ के बीच से मुख्तार भाई की आवाज आती
  342. 16:52है। तमाशा अभी शुरू कहां हुआ है राय साहब?
  343. 16:58कहते हुए मुख्तार हाथ में छड़ी लिए सामने
  344. 17:01आया।
  345. 17:02मुख्तार तुम्हारी यहां आने की हिम्मत कैसे
  346. 17:05हुई? राजदीप राय गुस्से में आग बबूला हो
  347. 17:08उठे। इस पर मुख्तार ने चेतावनी भरे अंदाज
  348. 17:11में कहा,
  349. 17:13"मुझ में कितनी हिम्मत है। यह परखने की
  350. 17:16गलती भी मत करना राजदीप वरना अपनों की
  351. 17:20लाशें गिनतेगिनते थक जाओगे।
  352. 17:23कहते हुए मुख्तार ने अपनी छड़ी से राजदीप
  353. 17:26राय के पूरे परिवार की तरफ इशारा किया।
  354. 17:28कहा जाता है कि मुख्तार को असला, बारूद या
  355. 17:31बंदूकों की जरूरत नहीं पड़ती। वो सिर्फ
  356. 17:34अपनी छड़ी से दुश्मन का गला काट देता है।
  357. 17:37मुख्तार की धमकी सुनकर राजदीप राय एक पल
  358. 17:40के लिए ठिठक गया। और एक खाली घूंट भरते
  359. 17:44हुए धीमे स्वर में बोला आखिर तुम चाहते
  360. 17:48क्या हो? इस पर मुख्तार भी थोड़ा नरम होते
  361. 17:51हुए बोला हां
  362. 17:54ये हुई ना बात। अरे भाई आज खुशी का मौका
  363. 17:58है। तुम्हारी बेटी की शादी है और दूल्हा
  364. 18:02मैं साथ लेकर आया हूं। कोई भी अच्छा काम
  365. 18:06करने से पहले तुम लोग ओ क्या देखते हो?
  366. 18:11शुभ मुहूर्त है ना? हां। तो इससे पहले कि
  367. 18:16मुहूर्त बीत जाए अपनी बेटी को बुलाओ। चलो
  368. 18:21चलो जल्दी करो। और भी बहुत काम है मुझे।
  369. 18:25बोलते हुए मुख्तार राजदीप को धकियाने लगे।
  370. 18:30यहां राजदीप राय के सभी रिश्तेदार मौजूद
  371. 18:32हैं। राय साहब ने मदद की उम्मीद के साथ जब
  372. 18:35अपने खास रिश्तेदारों की ओर देखा तो सभी
  373. 18:38उनसे नजर चुराने लगे। मुख्तार के सामने
  374. 18:42कुछ [संगीत] भी कहने की किसी की हिम्मत
  375. 18:44नहीं हो रही थी। तभी दादा बलवंत राय आगे
  376. 18:47आए। उनकी आंखों में गुस्से के अंगारे धधक
  377. 18:50रहे थे। बकवास बंद कर और निकल जा यहां से।
  378. 18:55क्यों हमारी खुशियों पर ग्रहण लगाने आया
  379. 18:57है तू?
  380. 18:59उधर दूसरी तरफ शिप्रा की सहेलियां उसे
  381. 19:02बाहर का सारा हाल बता चुकी थी। अपनी
  382. 19:04सहेलियों के चेहरे पर छाए डर को देखकर
  383. 19:07शिप्रा को बाहर की स्थिति का अंदाजा लग
  384. 19:09चुका था। शिप्रा का मन किसी अनहोनी के डर
  385. 19:12से घबरा उठा। अब कमरे में बैठे रहना उसके
  386. 19:15लिए मुश्किल हो गया था। वो [संगीत] उठी और
  387. 19:18तुरंत कमरे से बाहर चली गई और सीधी शादी
  388. 19:21के मंडप की तरफ बढ़ गई। उसकी सहेलियां भी
  389. 19:23उसके पीछेछे बाहर आ गई। शिप्रा भागकर मंडप
  390. 19:26के पास पहुंची तो दूर से ही उसकी [संगीत]
  391. 19:28नजर मुख्तार भाई पर पड़ी। शिप्रा को उसके
  392. 19:31पिता की आवाज सुनाई दी।
  393. 19:34देखो मुख्तार बात को ज्यादा बढ़ाने की
  394. 19:36जरूरत नहीं है। हमें किसी तरह का कोई
  395. 19:39बखेड़ा नहीं चाहिए। तभी बलवंत राय भी बोले
  396. 19:43हां अगर तुम चाहते हो तो मैं अपनी पोती से
  397. 19:47कहकर तुम्हारे भाई के खिलाफ जो केस है उसे
  398. 19:50वापस करवा देता हूं। पर तुम यहां पर इस
  399. 19:52शुभ घड़ी में कोई हंगामा मत करो।
  400. 19:56मुख्तार ठहाका लगाते हुए बोला हे बुड्ढे
  401. 20:01तुझे क्या लगता है? मेरा भाई तेरी पोती के
  402. 20:05कारण जेल में बंद है। अबे वही तो एक सच्चा
  403. 20:09आशिक है तेरी पोती का जो अपने प्यार की
  404. 20:12खातिर खुद अपनी कुर्बानी देने को तैयार
  405. 20:16है। यह सब देखकर शिप्रा से रहा नहीं गया।
  406. 20:20पर वो जैसे ही बाहर आने को हुई कि तभी
  407. 20:22उसकी मां ने उसे रोक लिया। तभी राजदीप आगे
  408. 20:26बढ़े और लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोले देखो
  409. 20:29मुख्तार भाई मैं तुमसे रिक्वेस्ट करता
  410. 20:31हूं। अभी तुम चले जाओ। थोड़ी ही देर में
  411. 20:34बारात आती ही होगी। अगर वो लोग यह सब
  412. 20:37देखेंगे तो सब गड़बड़ हो जाएगा।
  413. 20:40[हंसी]
  414. 20:43[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] कैसी
  415. 20:44बारात?
  416. 20:46अरे जो बारात लेकर आ रहे थे वो तो खुद
  417. 20:49बाराती बने हुए हैं। मुख्तार के इतना
  418. 20:52बोलते ही कल्ला धर्मवीर और विहान को धकेल
  419. 20:54कर सामने ले आया। उन दोनों को सामने देखकर
  420. 20:58राजदीप और बलवंत की आंखें फटी [संगीत] की
  421. 21:00फटी रह गई। मजबूर धर्मवीर और विहान लाचारी
  422. 21:04और शर्म के मारे राजदीप और बलवंत से नजर
  423. 21:07भी नहीं मिला पा रहे थे। मुख्तार उनका
  424. 21:10मजाक उड़ाते हुए बोला ये दोनों बाप बेटे
  425. 21:14तो बारात लाने से मुकर गए थे। फिर मैंने
  426. 21:18सोचा भाई किसी की इज्जत ऐसे नीलाम नहीं
  427. 21:21होनी चाहिए। फिर आनन-फानन में जो लड़का
  428. 21:24मिला मैं ले आया।
  429. 21:27देख ले बुड्ढे तेरी पोती से शादी करने के
  430. 21:30लिए यह लड़का मिला है। पसंद तो है ना
  431. 21:34तुझे? मेरे घर रिश्ता जोड़ने से तेरी
  432. 21:38इज्जत घट रही थी ना। अब ये देख यह भिखारी
  433. 21:43दूल्हा तेरी इज्जत में चार चांद लगाएगा।
  434. 21:48बलवंत राय और राजदीप मुख्तार की बात सुनकर
  435. 21:50खून का घूंट पीकर रह गए। यह सब देखकर
  436. 21:53शिप्रा से रहा नहीं गया। वो गुस्से में
  437. 21:56चिल्लाते हुए बाहर निकली। जिसकी खुद की
  438. 21:58कोई इज्जत ना हो वो किसी और की इज्जत का
  439. 22:00मोल क्या जाने।
  440. 22:03माशा्लाह
  441. 22:05ये लो लड़की भी आ गई। कल्ला
  442. 22:10फेरों की तैयारी कर। मुख्तार उत्तेजित
  443. 22:13होकर बोला। तभी राजदीप शिप्रा को खींच कर
  444. 22:16अंदर ले जाते हुए बोला,
  445. 22:20पागल हो गई हो क्या? चलो अंदर। लेकिन
  446. 22:23शिप्रा रुकती नहीं है। वो गुस्से में लाल
  447. 22:25हो चुकी थी।
  448. 22:27भाई के जेल जाने के बाद भी तुम नहीं
  449. 22:29सुधरे। तुम्हें भी अपने भाई के पास जाना
  450. 22:31है क्या? मुख्तार शिप्रा का ये रूप देखकर
  451. 22:35कुटिल मुस्कान के साथ बोला, वाह क्या तेवर
  452. 22:40है। तभी मैं कहूं मेरा भाई इसके पीछे इतना
  453. 22:44पागल क्यों है? अब तो मैं भी तेरा दीवाना
  454. 22:48हो गया रे।
  455. 22:51तभी घोड़ी ने हिनहिनाते हुए अपने दोनों
  456. 22:53टांगे ऊपर उठा ली। यह देखकर मुख्तार तंज
  457. 22:57कसते हुए बोला, अब तो इस दूल्हे से भी
  458. 23:00नहीं रहा जा रहा। आजा जल्दी से मंडप में
  459. 23:05आकर बैठ जा। हे पंडित चल मंत्र शुरू कर।
  460. 23:12मुख्तार हुक्म देते हुए बोला। इतने में
  461. 23:15शिपरा ने मुख्तार को आगाह करते हुए कहा
  462. 23:18मुख्तार अपनी सलामती चाहते हो तो अभी के
  463. 23:21अभी यहां से चले जाओ नहीं तो मैं पुलिस को
  464. 23:23बुलाऊंगी।
  465. 23:26तुम्हारी दिक्कत क्या है? सीधा पुलिस की
  466. 23:30धमकी देने लगती हो। तुम्हारे अपने बस में
  467. 23:33कुछ है भी या नहीं? मुख्तार दांत पीसते
  468. 23:37हुए बोला। इतने में बीना राय मुख्तार के
  469. 23:39सामने आकर रोते गिड़गिड़ाते हुए बोली।
  470. 23:42मुख्तार भाई मेरी बेटी को माफ कर दो। उससे
  471. 23:45गलती हो गई जो वो आपके भाई के खिलाफ गई।
  472. 23:49इस पर मुख्तार हंसी उड़ाते हुए बोला।
  473. 23:52अबे क्या नौटंकी चल रही है? राय खानदान
  474. 23:56में कोई मर्द नहीं बचा जो औरतों को आगे
  475. 23:59करके अपनी बात रख रहे हो। राजदीप उम्मीद
  476. 24:03भरी नजरों से वहां मौजूद लोगों की ओर
  477. 24:05देखने लगे कि शायद कोई उनकी मदद को आगे
  478. 24:08आएगा। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। धर्मवीर
  479. 24:11और विहान तो पहले ही मुख्तार के सामने
  480. 24:13सरेंडर कर चुके थे। वहां मौजूद मेहमानों
  481. 24:16की आंखों में उनके लिए हमदर्दी तो थी पर
  482. 24:19किसी में इतना साहस नहीं था कि वो मुख्तार
  483. 24:21के सामने राजदीप जी के साथ खड़ा हो पाए।
  484. 24:25कोई रास्ता ना पाकर राजदीप राय ने आखिरकार
  485. 24:28पुलिस को फोन लगा ही दिया।
  486. 24:31घंटी बजती रही। लेकिन पुलिस स्टेशन में
  487. 24:34किसी ने फोन नहीं उठाया। राजदीप बार-बार
  488. 24:37कोशिश करते रहे। लेकिन हर बार उनकी कोशिश
  489. 24:40बेकार साबित हुई।
  490. 24:42तभी अचानक मुख्तार हंसने लगा। [हंसी]
  491. 24:45उसके साथ उसके आदमी भी ठहाका लगाकर हंसने
  492. 24:48लगे। मैं बदमाशी के धंधे में तब से हूं जब
  493. 24:53मेरे दूध के दांत भी नहीं टूटे थे।
  494. 24:57सब बंदोबस्त करके आया हूं। अब हाथ पैर
  495. 25:01मारने से कोई फायदा नहीं। अपनी लाडली से
  496. 25:05कहो शांति से मंडप में बैठ जाए। मुख्तार
  497. 25:09राजदीप को समझाते हुए बोला,
  498. 25:12शिप्रा के तेवर में अभी भी कोई बदलाव नहीं
  499. 25:15आया था। मर जाऊंगी पर एक गुंडे के आगे
  500. 25:18नहीं झुकूंगी।
  501. 25:20बंद कर अपनी किटर पिटर।
  502. 25:23बड़ी जल्दी है तुझे मरने की। तेरी यह
  503. 25:26ख्वाहिश भी पूरी करूंगा। पर शादी के बाद
  504. 25:30हे कल्ला
  505. 25:33मुख्तार का इशारा मिलते ही कल्ला शिप्रा
  506. 25:35को मंडप पर ले जाने के लिए उसकी तरफ बढ़ने
  507. 25:38लगा।
  508. 25:40मुख्तार पंडित को हुक्म देते हुए बोला
  509. 25:43पंडित तेरे मंत्र रुके तो तेरी सांसे भी
  510. 25:47रुक जाएंगी। क्या समझा?
  511. 25:51डर के मारे पंडित ने झटपट मंत्र पढ़ना
  512. 25:53शुरू कर दिए। वहीं जैसे ही कल्ला आगे
  513. 25:56बढ़कर शिप्रा का हाथ पकड़ने वाला था कि
  514. 25:58तभी उसके चेहरे पर एक जोरदार मुक्का पड़ा।
  515. 26:01कल्ला ने पलट कर देखा तो शिप्रा का छोटा
  516. 26:04भाई राहुल गुस्से में मुट्ठी बांधे खड़ा
  517. 26:06था। कल्ला ने पूरी ताकत के साथ राहुल की
  518. 26:09छाती पर एक लात मारी जिससे राहुल दूर
  519. 26:12मुख्तार के पैरों के पास आ गिरा। राजदीप
  520. 26:15और उनके परिवार के लोग राहुल की तरफ भागे
  521. 26:18पर मुख्तार के आदमी उनके सामने खड़े हो
  522. 26:20गए। राहुल मुख्तार के पैरों में पड़ा दर्द
  523. 26:23से करा रहा था। शिप्रा यह सब देखकर सिहर
  524. 26:26उठी। वहीं मुख्तार का चेहरा अब गुस्से में
  525. 26:30लाल हो चुका था। वो अपनी छड़ी का हत्थ
  526. 26:33पकड़ कर खींचता है तो उस छड़ी में से एक
  527. 26:35तलवार निकल आती है। यह देखकर वहां खड़े
  528. 26:38सभी मेहमानों का चेहरा डर के मारे पीला
  529. 26:40पड़ गया। राजदीप, बलवंत और बीना सभी
  530. 26:44मुख्तार के आगे गिड़गिड़ाने लगे। नहीं
  531. 26:47मुख्तार भाई नहीं यह भी बच्चा है। प्लीज
  532. 26:50इसे कुछ मत करो। मुख्तार शिप्रा को घूरते
  533. 26:54हुए धारदार तलवार राहुल की गर्दन पर रख
  534. 26:57देता है। यह देखकर बीना राय बेहोश हो जाती
  535. 27:01है और बूढ़े बलवंत राय माथा पीट कर रोने
  536. 27:04लगते हैं।
  537. 27:06मैं तुम्हारे सामने हाथ जोड़ रहा हूं।
  538. 27:08मुख्तार भाई मेरे बेटे की जान बखश दो।
  539. 27:11राजदीप राय गिड़गिड़ा कर रहम की भीख
  540. 27:14मांगने लगे। अपने परिवार के लोगों की हालत
  541. 27:17देखकर शिप्रासन रह गई। उसने कहां सोचा था
  542. 27:21कि एक सर फेरे आशिक को सबक सिखाने के चलते
  543. 27:24उसके खुद के परिवार की यह दुर्दशा हो
  544. 27:27जाएगी। रात का वक्त मंदिर की सीढ़ियों पर
  545. 27:31बैठा एक गंदा सा दिखने वाला भिखारी पत्तल
  546. 27:33में सब्जी रोटी खा रहा था। साथ ही वो उन
  547. 27:36आवारा कुत्तों को भी खिला रहा था जो उसे
  548. 27:38घेर कर खड़े थे। कुछ ही दूरी पर रोशनी से
  549. 27:41सजी एक जगमग बारात दिख रही थी। लेकिन उसका
  550. 27:44ध्यान अपने पत्तल में पड़ी रोटी पर ही था।
  551. 27:47तभी कल्ला उसके पास आया और रॉबीले अंदाज
  552. 27:49में हुक्म देते हुए बोला सुन ओ भिखारी चल।
  553. 27:54तुझे हमारे बॉस बुला रहे हैं। भिखारी ने
  554. 27:57कल्ला को एक नजर देखा और फिर वापस खाने
  555. 27:59लगा।
  556. 28:01यह भिखारी कम और पागल ज्यादा लग रहा है।
  557. 28:04उठाओ इसे। कल्ला ने अपने आदमियों से कहा,
  558. 28:07जैसे ही वो लोग उस भिखारी की तरफ बढ़े तो
  559. 28:09सारे कुत्ते गुर्राते हुए उन्हें काटने को
  560. 28:12दौड़ पड़े। कल्ला और उसके साथी डर कर पीछे
  561. 28:15हट गए। क्या गुंडे बनोगे रे तुम लोग? इन
  562. 28:18आवारा कुत्तों से डर गए। उठाओ पत्थर और
  563. 28:21मारो इन्हें। कल्ला अपने आदमियों से बोला
  564. 28:24इससे पहले कि वो लोग उन कुत्तों को मारते
  565. 28:27भिखारी ने उन्हें इशारा करके रुकने को कहा
  566. 28:29और कल्ला के साथ चल दिया। कुत्ते भी दुम
  567. 28:32हिलाते हुए उसके पीछे पीछे चल दिए।
  568. 28:34मुख्तार ने जब भिखारी को करीब से देखा तो
  569. 28:36उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
  570. 28:39सुभान अल्लाह।
  571. 28:41जैसा सोचा था एकदम वैसा ही दूल्हा मिल
  572. 28:45गया। नाम क्या है रे तेरा? मुख्तार ने
  573. 28:49पूछा। तभी पीछे से एक बूढ़ी भिखारन बोली
  574. 28:53साहब यह बेचारा बोल नहीं सकता है। यह
  575. 28:57सुनते ही मुख्तार की बाछें खिल उठी। अरे
  576. 29:00वाह ये तो और भी अच्छी बात है। तुम इसे
  577. 29:05जानती हो क्या? नहीं साहब। इसका नाम,
  578. 29:08ग्राम कुछ नहीं पता। 6 महीने से यहीं
  579. 29:12मंदिर के पास पड़ा रहता है। मैंने आज तक
  580. 29:15इसे किसी से बात करते हुए नहीं सुना।
  581. 29:18बूढ़ी भिखारन ने मुख्तार को बताया।
  582. 29:21मुख्तार ने कुटिल मुस्कान के साथ भिखारी
  583. 29:24से कहा, आज से तू मुझे अपना मसीहा समझ
  584. 29:29क्योंकि आज मैं तेरी किस्मत चमकाने वाला
  585. 29:33हूं। इस वक्त राय साहब की हवेली के अंदर
  586. 29:36सर पर सेहरा बांधे घोड़ी पर सवार वो
  587. 29:39भिखारी शायद यही सोच रहा होगा कि उसकी
  588. 29:41किस्मत चमकने पर किसी और के जीवन में मातम
  589. 29:44क्यों छा गया है। मुख्तार के हाथों में
  590. 29:47फंसा राहुल उससे छूटने की पूरी कोशिश कर
  591. 29:50रहा था। पर उसकी हालत बाज के पंजों में
  592. 29:53फंसे कबूतर जैसी थी। शिप्रा से अपने भाई
  593. 29:56की हालत देखी नहीं जा रही थी। वो मुख्तार
  594. 29:59के सामने आई और बेबस होकर बोली।
  595. 30:02छोड़ दो मेरे भाई को। तुम्हारी दुश्मनी
  596. 30:04मुझसे है तो फिर मेरी जान ले लो पर मेरे
  597. 30:07भाई को छोड़ दो। ओ हो [कराहने की आवाज़]
  598. 30:11इतनी भी क्या जल्दी है? जान भी लूंगा पर
  599. 30:15अभी उसका वक्त नहीं आया है। मुख्तार कुटिल
  600. 30:19[संगीत] मुस्कान के साथ बोला। और याद रखना
  601. 30:24मुझे तुम्हारी जान लेने की जरूरत नहीं
  602. 30:26पड़ेगी। तू खुद अपनी जान ले लेगी। क्योंकि
  603. 30:30तूने खुद अपनी किस्मत पर लात मारी है। एक
  604. 30:36तरफ जहां मुख्तार की धारदार तलवार राहुल
  605. 30:38का गला काटने वाली थी, राजदीप और बलवंत
  606. 30:41उसकी जान की भीख मांग रहे थे। वहीं शिप्रा
  607. 30:44सभी मेहमानों और रिश्तेदारों को देख रही
  608. 30:46थी और उम्मीद कर रही थी कि कोई तो चमत्कार
  609. 30:49हो जाए। [संगीत] लेकिन अफसोस ऐसा कुछ नहीं
  610. 30:52होने वाला था। शिप्रा ने धर्मवीर रायजादा
  611. 30:55और विहान को मौका पाकर वहां से खिसकते
  612. 30:57[संगीत]
  613. 30:58देखा। वहीं जब मुख्तार ने राहुल के गले पर
  614. 31:01अपनी तलवार की नोक से थोड़ा जोर डाला तो
  615. 31:03राहुल के गले से हल्का सा खून निकल आया।
  616. 31:06शिप्रा जोर से चिल्लाई रुको मैं तैयार
  617. 31:10हूं। मेरे भाई को छोड़ दो। मैं तैयार हूं।
  618. 31:12तुम जो बोलोगे वो मैं करूंगी। शिप्रा अपने
  619. 31:16परिवार की अब और दुर्दशा नहीं देख सकती
  620. 31:18थी। वो भाग कर राहुल के पास गई और उसे गले
  621. 31:21लगाकर रोने लगी।
  622. 31:24मुझे कुछ नहीं होगा दीदी। और अगर हो भी
  623. 31:27गया तो परवाह नहीं। अपने जीते जी मैं आपकी
  624. 31:30जिंदगी बर्बाद नहीं होने दूंगा।
  625. 31:32राहुल छिप्रा से बोला जान खतरे में होने
  626. 31:35पर भी उसने हिम्मत नहीं हारी थी। ये देखकर
  627. 31:39मुख्तार ताली पीटते हुए बोला क्या बात है।
  628. 31:44भाई-बहन का प्यार देखकर मेरी आंखों में
  629. 31:46आंसू आ गए। [हंसी]
  630. 31:50बहन भाई की खातिर अपनी जिंदगी बर्बाद करने
  631. 31:53को तैयार है और भाई अपनी जान कुर्बान करने
  632. 31:57को आमादा है।
  633. 32:00राजदीप राय को अफसोस हो रहा था कि उसने
  634. 32:02शादी से पहले पुलिस प्रोटेक्शन क्यों नहीं
  635. 32:04लिया। शायद तब मुख्तार इतनी हिम्मत नहीं
  636. 32:07करता। शिप और राजदीप मुख्तार की इस खोखली
  637. 32:11धमकी को समझ नहीं पाए कि [संगीत] मुख्तार
  638. 32:12इतनी भरी महफिल में सबके सामने उसके भाई
  639. 32:15की जान नहीं ले सकता।
  640. 32:18मुख्तार कितना भी बड़ा डॉन सही पर वो किसी
  641. 32:21को इस तरह सरेआम जान से मारकर अपने खिलाफ
  642. 32:24इतना बड़ा सबूत नहीं छोड़ सकता था जो कल
  643. 32:26को उसके लिए मुसीबत बन जाए।
  644. 32:30दरअसल मुख्तार के भाई के केस के दौरान
  645. 32:32कोर्ट ने आर्डर दिया था कि मुख्तार कभी भी
  646. 32:34शिप्रा की फैमिली के नजदीक नहीं जाएगा और
  647. 32:37ना ही उन्हें डराने धमकाने की कोशिश
  648. 32:39करेगा। पुलिस को तो मुख्तार कंट्रोल कर
  649. 32:41सकता है। लेकिन कोर्ट से पंगा लेना उसके
  650. 32:44लिए भी ठीक नहीं होगा। आज शिप्रा की शादी
  651. 32:46एक ऊंचे खानदान में होते देख [संगीत]
  652. 32:48मुख्तार से रहा नहीं गया इसलिए वह जोखिम
  653. 32:51उठाकर आ गया। कहते हैं जब समय खराब होता
  654. 32:54है तो अच्छे खासे इंसान के दिमाग पर पत्थर
  655. 32:57पड़ जाता है। पर एक गुंडे का क्या भरोसा?
  656. 33:00पुलिस, मुकदमा और जेल से तो इनका अटूट
  657. 33:03नाता है। मुख्तार के आगे घुटने टेकने का
  658. 33:06शायद यह भी एक कारण रहा होगा। खैर,
  659. 33:09मुख्तार जो चाह रहा था वो उसे मिल गया।
  660. 33:12शिप्रा के हामी भरते ही मुख्तार अपनी
  661. 33:14तलवार वापस छड़ी में डालते हुए बोला, चलो
  662. 33:18अच्छा हुआ जो मान गई वरना खामखा इस बच्चे
  663. 33:22की जान चली जाती।
  664. 33:25फिर उसने अपने आदमियों को आदेश दिया। तुम
  665. 33:28लोगों ने सुना नहीं।
  666. 33:30लड़की मान गई है। दूल्हे को घोड़ी से नीचे
  667. 33:34उतारो और दूल्हा दुल्हन दोनों को मंडप पर
  668. 33:38ले जाओ।
  669. 33:42सभी मेहमान घबराए नहीं। आप बस शादी का
  670. 33:46लुत्फ उठाइए। मेरे आदमी आप लोगों की दिल
  671. 33:50खोलकर खातिरदारी करेंगे। आप सभी खुशकिस्मत
  672. 33:55हैं जो इस ऐतिहासिक दिन के गवाह बनने जा
  673. 33:58रहे हैं।
  674. 34:00फिर मुख्तार बैंड वालों की ओर मुड़कर
  675. 34:02बोला। तुम लोगों को अलग से बोलना पड़ेगा
  676. 34:06क्या? बजाओ।
  677. 34:09मुख्तार की हरकतें देखकर राजदीप, बलवंत
  678. 34:12राय और वहां उपस्थित सभी मेहमानों का खून
  679. 34:15खौल रहा था। लेकिन सब बस मन ही मन मुख्तार
  680. 34:19को सिर्फ बद्दुआ ही दे सकते थे। कुछ कर
  681. 34:22नहीं सकते थे। क्या करें? बदमाशी और गुंडई
  682. 34:26अक्सर शराफत पर हावी हो जाती है। ऐसा लग
  683. 34:30रहा था मानो किसी आतंकवादी ने पूरी शादी
  684. 34:32को हाईजैक कर रखा हो। अपनी मर्जी से कोई
  685. 34:35उठ बैठ भी नहीं सकता था। शिप और राजदीप
  686. 34:38बेहोश हो चुकी बीना जी को होश में लाने की
  687. 34:40कोशिश कर रहे थे कि तभी उनकी नौकरानी बोली
  688. 34:44सुबह से उन्होंने कुछ नहीं खाया है। अपनी
  689. 34:46बीपी की दवा भी नहीं ली है। क्यों? राजदीप
  690. 34:51ने पूछा तो नौकरानी ने बताया कह रही थी कि
  691. 34:54बेटी के कन्यादान के बाद ही कुछ खाएंगी।
  692. 34:57यह सुनकर शिप्रा की आंखों में आंसू छलक गए
  693. 34:59और वो बिलक-बिलख कर रोने लगी। राजदीप ने
  694. 35:02आवाज लगाई। अरे कोई डॉक्टर को बुलाओ
  695. 35:05जल्दी।
  696. 35:07तभी मुख्तार राजदीप को टोकता है। इन्हें
  697. 35:11[गला साफ़ करने की आवाज़]
  698. 35:12मैं देख लूंगा। तुम अपनी लाडली को लेकर
  699. 35:16मंडप में चलो।
  700. 35:18इस पर राजदीप मुख्तार को घूरते हुए बोला।
  701. 35:22ये तुम ठीक नहीं कर रहे हो मुख्तार। याद
  702. 35:26रखना समय सबका बदलता है। सबका बदलता है पर
  703. 35:32मेरा नहीं। मुख्तार ने कुटिल मुस्कान के
  704. 35:36साथ कहा। मरता क्या ना करता राजदीप शिप्रा
  705. 35:40को लेकर मंडप की तरफ बढ़ चले। तभी मुख्तार
  706. 35:43शिप्रा के सामने जाकर खड़ा हो गया और
  707. 35:45व्यंग से बोला, देखी मेरी ताकत। अगर तेरे
  708. 35:51बाप ने मेरे भाई का रिश्ता कुबूल कर लिया
  709. 35:54होता, तो तू इस शहर पर राज करती।
  710. 35:58पर नहीं तेरे नसीब में तो यह भिखारी लिखा
  711. 36:02था। अब बढ़ेगा तेरे परिवार का सोशल
  712. 36:06स्टेटस।
  713. 36:08शिप्रा को ये सब बोलकर मुख्तार अलग ही सुख
  714. 36:10अनुभव कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि उसके
  715. 36:13अहम को जो ठेस पहुंची थी अब उस पर मरहम
  716. 36:16लगाया जा रहा है। राजदीप एक आखिरी कोशिश
  717. 36:20करते हैं। वो मुख्तार के पास गए और उसके
  718. 36:22सामने नतमस्तक होकर बोले
  719. 36:25मुख्तार भाई हमसे जाने अनजाने में जो भी
  720. 36:29भूल हुई है उसके लिए मैं इस भरी महफिल में
  721. 36:31तुमसे माफी मांगता हूं। मेरी बेटी [संगीत]
  722. 36:33की जिंदगी बर्बाद मत करो। कल्ला तुरंत
  723. 36:37भिखारी दूल्हे के पास पहुंचा। मुख्तार
  724. 36:40राजदीप की बात को इग्नोर करते हुए कल्ला
  725. 36:42से बोला ए कल्ला
  726. 36:46देख क्या रहा है दूल्हे को मंडप पर ले जा
  727. 36:51आदेश मिलने की देर थी कल्ला तुरंत भिखारी
  728. 36:53दूल्हे के पास पहुंचा। अब तक भिखारी बस
  729. 36:56मूकदर्शक बना तमाशा देख रहा था। उसे सब
  730. 37:00समझ में आ रहा था कि यहां क्या चल रहा है।
  731. 37:02पर वो खुद कुछ करने की स्थिति में नहीं
  732. 37:04था।
  733. 37:05उसे राय परिवार पर दया तो आ रही थी लेकिन
  734. 37:08उसे समझ नहीं आ रहा था कि यहां जो कुछ हो
  735. 37:11रहा है वो उसे कैसे रोक सकता है। लंबे
  736. 37:14बालों के बीच से झांकती उसकी आंखों में
  737. 37:16शिप्रा के लिए दया का भाव था। पर उसकी घनी
  738. 37:20दाढ़ी के पीछे छिपे चेहरे का भाव किसी को
  739. 37:22समझ नहीं आने [संगीत] वाला था। और सबसे
  740. 37:25बड़ी बात वो क्या सोच रहा है, क्या महसूस
  741. 37:28कर रहा है इससे किसी को कोई फर्क भी नहीं
  742. 37:31पड़ता है। कल्ला उसके पास आया और चहकते
  743. 37:34हुए बोला चल भाई दूल्हे तूने भी क्या
  744. 37:38किस्मत पाई है जो बैठे-बठाए इतनी खूबसूरत
  745. 37:41लड़की का पति बनने का मौका मिल रहा है।
  746. 37:44लेकिन भिखारी नहीं हिला। पहले गूंगा था।
  747. 37:46अब बहरा भी हो गया क्या? चल बे। कहते हुए
  748. 37:50कल्ला ने भिखारी की बाजू [संगीत] पकड़ी और
  749. 37:52मंडप की तरफ खींचने लगा। पर भिखारी ने
  750. 37:55झटके से अपनी बाह छुड़ा ली। इस पर कल्ला
  751. 37:57आश्चर्य से उस भिखारी को देखते हुए बोला,
  752. 38:00ओ भाई, अब तुझे क्या हुआ? मैं यहां तेरी
  753. 38:03शादी करवाने जा रहा हूं और तू भाव खा रहा
  754. 38:05है? यह बोलकर वो दोबारा उसकी बाह पकड़ कर
  755. 38:08खींचने लगा। पर भिखारी अपनी जगह से टस से
  756. 38:11मस ना हुआ। वहां खड़े लोग भिखारी की
  757. 38:14हिम्मत देखकर हैरान थे। सोच रहे थे कि वो
  758. 38:17क्यों आगे नहीं बढ़ रहा।
  759. 38:19मुख्तार भी उस भिखारी की [संगीत] हरकत
  760. 38:21देखकर दंग रह गया और राहुल को अपनी पकड़
  761. 38:24में रखे हुए ही बोला क्या बात है क्या इस
  762. 38:28भिखारी का जमीर जाग गया क्या जो ये शादी
  763. 38:33नहीं करना चाहता
  764. 38:35अबे गधे मैं तेरी किस्मत बदलने जा रहा हूं
  765. 38:40और तू कीचड़ में ही रहना चाहता है कल्ला
  766. 38:43भिखारी को ही घूरता हुआ बोला क्या करूं
  767. 38:46बॉस ये साला तो अपनी जगह से हिलने का नाम
  768. 38:49ही नहीं ले रहा। अब ये कुछ बोलता भी तो
  769. 38:52नहीं। जो समझ में आए कि यह चाहता क्या है?
  770. 38:55कल्ला ने देखा कि भिखारी की आंखों में
  771. 38:57उसके लिए गुस्सा है। कल्ला तमतमा उठा और
  772. 39:01भिखारी के गाल पर एक थप्पड़ जमाते हुए
  773. 39:03बोला, साले, मुझे घूर रहा है। चल, आंखें
  774. 39:06नीचे कर। थप्पड़ की आवाज पूरे पंडाल में
  775. 39:09गूंज गई। सब हैरानी से भिखारी की तरफ देख
  776. 39:12रहे थे। शिप्रा भी उसे देखने लगी। वो
  777. 39:16भिखारी की मनोदशा समझ रही थी कि शायद वह
  778. 39:18किसी की मजबूरी का फायदा नहीं उठाना चाह
  779. 39:20रहा इसीलिए वो आगे नहीं बढ़ रहा। शिप्रा
  780. 39:23को भिखारी पर दया आने लगी। कद काठी से एक
  781. 39:26जवान ही जान पड़ रहा था। उसने देखा कि
  782. 39:29कल्ला के थप्पड़ से उसके गाल के कोर से
  783. 39:31खून आने लगा था। पर उसके मुंह से एक आ भी
  784. 39:34नहीं निकली। कल्ला भिखारी को धमकाते हुए
  785. 39:37बोला चलेगा। यह अभी और मार खानी है। लेकिन
  786. 39:41फिर भी भिखारी टस सेम मस नहीं हुआ। कल्ला
  787. 39:44के दो चेले भी उसके पास आकर उसे मंडप की
  788. 39:47तरफ खींचने लगे। लेकिन कोई फायदा नहीं
  789. 39:50हुआ। भिखारी हिलने का नाम ही नहीं ले रहा
  790. 39:52था। यह देखकर कल्ला को और गुस्सा आ गया।
  791. 39:55उसने भिखारी के गाल पर दो-तीन थप्पड़ रसीद
  792. 39:57कर दिए। वहां मौजूद सभी लोग हैरान थे। एक
  793. 40:01तरफ जहां लोग मुख्तार के डर से चू भी नहीं
  794. 40:04कर पा रहे थे, वहीं इस भिखारी पर मुख्तार
  795. 40:06के गुंडों का थोड़ा सा भी खौफ नहीं था।
  796. 40:09बलवंत राय की आंखों में भी उस भिखारी के
  797. 40:11लिए सम्मान का भाव उमड़ आया। वो उनका अपना
  798. 40:13ना होकर भी उनके परिवार के दर्द को समझ
  799. 40:16रहा था। इस ड्रामे को देख रहे मुख्तार का
  800. 40:18भी गुस्सा बढ़ने लगा था। वो कल्ला से बोला
  801. 40:22क्या रे कल्ला तू एक भिखारी को भी कंट्रोल
  802. 40:26नहीं कर पा रहा है। इस पर कल्ला बेबस होकर
  803. 40:29बोला बॉस ये तो बड़ा [संगीत] ढीठ है। लगता
  804. 40:33है इस पर मार का भी कोई असर नहीं हो रहा।
  805. 40:35इतनी मार खाने के बाद भी ऐसे घूर रहा है
  806. 40:38कि मानो बस नजर से ही भस्म कर देगा। अब
  807. 40:41क्या करूं इसका?
  808. 40:43इस पर मुख्तार बोला इसे किसी को खोने का
  809. 40:48डर नहीं है ना इसीलिए कोई खौफ भी नहीं है
  810. 40:53और जहां तक मार खाने की बात है तो यह तो
  811. 40:57इसके जैसे लोग हर जगह किसी ना किसी से मार
  812. 41:01खाते ही रहते हैं। इसीलिए इस पर कोई असर
  813. 41:05नहीं हो रहा। पर एक बात गौर करने वाली है
  814. 41:10कि खामखा मार खा क्यों रहा है? मुख्तार ने
  815. 41:14कल्ला से सवाल किया तो कल्ला अपने सिर पर
  816. 41:16हाथ फेरते हुए बोला मैं समझा नहीं बॉस आप
  817. 41:20कहना क्या चाहते हो? अरे बेवकूफ समझ
  818. 41:25मंदिर से यहां तक आने में तो इसने कोई
  819. 41:28ड्रामा नहीं किया। पर यहां आकर अब ऐन वक्त
  820. 41:32पर अकड़ना शुरू कर दिया। क्यों? मुख्तार
  821. 41:36भिखारी को ऐसे देख रहा था जैसे समझने की
  822. 41:40कोशिश कर रहा हो कि उसके दिमाग में क्या
  823. 41:42चल रहा है। कल्ला ने भी अपने मोटे दिमाग
  824. 41:45पर जोर दिया। फिर अपना सिर खुजलाते हुए
  825. 41:48बोला क्यों बॉस? ये ऐसा क्यों कर रहा है?
  826. 41:53मुख्तार यह समझने की कोशिश कर रहा था कि
  827. 41:55मंदिर से यहां तक आने में तो भिखारी ने
  828. 41:58कोई ड्रामा नहीं किया। फिर यहां आकर अब
  829. 42:01क्यों अकड़ रहा है?
  830. 42:03ये ऐसा क्यों कर रहा है बॉस?
  831. 42:06कल्ला ने सर खुजलाते हुए पूछा।
  832. 42:10वो भी यह जानने के लिए उत्सुक था। तभी कुछ
  833. 42:13सोचकर मुख्तार के चेहरे पर तिरछी मुस्कान
  834. 42:16तैर गई। प्यार
  835. 42:19हमदर्दी
  836. 42:20हमें कल्ले लड़की चीज ही ऐसी होती है कि
  837. 42:25कोई भी इनके प्यार में फिसल जाए। जरूर
  838. 42:29इसको इस लड़की और इसके परिवार वालों पर
  839. 42:33दया आ रही है। इसीलिए यह इस लड़की की
  840. 42:37खातिर सब कुछ सहने को तैयार है।
  841. 42:41कल्ला का तो पता नहीं पर शिप्रा को
  842. 42:44मुख्तार की बात समझ आ गई। इसीलिए अब उसकी
  843. 42:47आंखों में भिखारी के लिए सम्मान नजर आ रहा
  844. 42:50था। वो उसका अपना ना होकर भी उसके [संगीत]
  845. 42:53दर्द को महसूस कर रहा था। भिखारी के उलझे
  846. 42:57बालों और घनी दाढ़ी के बीच झांकती आंखों
  847. 42:59के अलावा शिप्रा को कुछ दिखाई नहीं दे रहा
  848. 43:02था। जाने कितने महीनों से उसने अपने बाल
  849. 43:06नहीं कटवाए थे जो बेतरतीब ढंग से उलझे हुए
  850. 43:10थे। तभी कल्ला ने अपनी उलझन जाहिर करते
  851. 43:14हुए कहा।
  852. 43:16तो फिर अब क्या करें बॉस? मैं झट से कोई
  853. 43:19दूसरा भिखारी ढूंढ के ले आऊं।
  854. 43:22ना
  855. 43:24किसी दूसरे की जरूरत नहीं है।
  856. 43:28यही करेगा शादी।
  857. 43:31मुख्तार कुछ सोच कर बोला। उसके दिमाग में
  858. 43:34कुछ तो चल रहा था। वहीं कल्ला के चेहरे पर
  859. 43:38अभी भी उलझन नजर आ रही थी। उसने हैरान
  860. 43:41होकर पूछा।
  861. 43:43यही करेगा। पर वो कैसे बॉस? वो ऐसे कि जब
  862. 43:49यह भिखारी इस बुलबुल के लिए मार खाने को
  863. 43:53तैयार है तो [संगीत] यह इसी की खातिर शादी
  864. 43:57करने को भी तैयार हो सकता है।
  865. 44:01कहते हुए मुख्तार ने छड़ी में से एक बार
  866. 44:03फिर तलवार निकाली। [संगीत] कल्ला को कुछ
  867. 44:06समझ नहीं आया। लेकिन उसे विश्वास था कि जब
  868. 44:10उसके बॉस ने कहा है तो कुछ ना कुछ तो बात
  869. 44:12होगी ही। उसने बस नकली सी मुस्कान के साथ
  870. 44:16सर हिला दिया।
  871. 44:18मुख्तार राहुल के करीब गया और धमकी भरे
  872. 44:21लहजे में भिखारी से बोला,
  873. 44:24सुन बे
  874. 44:27यह लड़का अपनी बहन के कारण तो बच गया। पर
  875. 44:31अगर तू ऐसे ही अपनी जिद पर अड़ा रहा तो
  876. 44:35[संगीत] यह जरूर मारा जाएगा।
  877. 44:37और इसकी मौत का जिम्मेदार
  878. 44:40तू होगा।
  879. 44:43मुख्तार की इस बात का भिखारी पर तुरंत असर
  880. 44:46हुआ। उसकी आंखों में बेचैनी नजर आने लगी।
  881. 44:50वो कभी राहुल की ओर देख रहा था तो कभी
  882. 44:52शिप्रा की ओर। शिप्रा भी उसकी बेबसी को
  883. 44:55भली-भांति समझ पा रही थी। तभी मुख्तार ने
  884. 44:58भिखारी को धमकाते हुए कहा,
  885. 45:01"क्या हुआ?
  886. 45:04तुझे मेरी बात समझ नहीं आ रही? क्या तू
  887. 45:08चाहता है कि इस लड़के की बलि चढ़ जाए?
  888. 45:11कहते हुए मुख्तार ने एक बार फिर अपनी
  889. 45:14तलवार राहुल के गले से लगा दी। उसके ऐसा
  890. 45:17करते ही भिखारी खुद ब खुद मंडप की तरफ बढ़
  891. 45:20गया।
  892. 45:22कल्ला हैरानी से कभी भिखारी को देख रहा था
  893. 45:25तो कभी अपने बॉस को। फिर वो ताली बजाकर
  894. 45:28तारीफ करते हुए बोला मानना पड़ेगा बॉस।
  895. 45:31आपने इसकी कमजोरी को सही पकड़ लिया।
  896. 45:35शायद शिप्रा भी समझ रही थी कि भिखारी ने
  897. 45:37अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि वो उससे
  898. 45:40शादी करने के लिए मजबूर ना हो और अगर वह
  899. 45:44मजबूर हुआ भी तो सिर्फ उसके भाई की जान
  900. 45:46बचाने के लिए। मंडप एक बड़े से स्टेज के
  901. 45:50ऊपर था जहां से सभी मेहमान शादी की रस्मों
  902. 45:54को देख सकते थे। भिखारी स्टेज तक गया।
  903. 45:57उसकी कसमसाहट उसके हाव-भाव में साफ झलक
  904. 46:00रही थी। स्टेज पर जाकर वो शिप्रा के पास
  905. 46:04खड़ा तो हो गया पर वो शिप्रा से नजर नहीं
  906. 46:07मिला पा रहा था। शिप्रा भी बेसुद [संगीत]
  907. 46:10सी खड़ी थी। इतने लोगों के सामने इस तरह
  908. 46:13जलील होने पर वो बिल्कुल नम हो चुकी थी।
  909. 46:17अपनी शादी को लेकर उसने क्या-क्या सपने
  910. 46:20देखे होंगे। पर आज वो इतनी मजबूर है कि
  911. 46:24उसे एक भिखारी से शादी करनी पड़ रही है।
  912. 46:27उसने उम्मीद भरी नजर से एक बार मुख्तार की
  913. 46:30ओर देखा कि हो सकता है कि उसका दिल पसीज
  914. 46:34जाए और वह उसके भाई को छोड़ दे।
  915. 46:37पर कहते हैं ना पत्थर दिल लोगों से
  916. 46:40हमदर्दी की उम्मीद [संगीत] करना रेगिस्तान
  917. 46:43में गुलिस्ता खिलाने की कोशिश करने जैसा
  918. 46:45होता है।
  919. 46:47मुख्तार ने मुस्कुराते हुए कहा कल्ला
  920. 46:52इन दोनों की जयमाला तो करवाओ।
  921. 46:56मुख्तार के इतना कहते ही कल्ला तुरंत दो
  922. 46:59मालाएं लेकर स्टेज पर पहुंच गया। और फिर
  923. 47:02पंडित की ओर देखकर बोला आओ पंडित जी कुछ
  924. 47:07मंत्र-मंत्र तो पढ़ो।
  925. 47:09फिर वो व्यंग्यात्मक ढंग से चिल्ला कर
  926. 47:11बोला हां भाई कैमरामैन तुम्हें अलग से
  927. 47:15न्योता देना पड़ेगा क्या?
  928. 47:18इस तरह कल्ला ने सब कुछ सेट कर दिया।
  929. 47:20शिप्रा की रही सही उम्मीद भी खत्म होती जा
  930. 47:23रही थी। तभी कल्ला ने मंच के पास खड़ी एक
  931. 47:26लड़की को वरवधू को माला देने का इशारा
  932. 47:29किया और अगले ही पल उस [संगीत] लड़की ने
  933. 47:32माला लेकर शिप्रा के हाथ में थमा दी। जैसे
  934. 47:36उसे डर हो कि अगर उसने जरा भी देर की तो
  935. 47:38कहीं कल्ला उसकी शादी भी किसी भिखारी से
  936. 47:41ना करवा दे। जब उस लड़की ने वरमाला भिखारी
  937. 47:44के हाथ में देनी चाही तो उसने माला नहीं
  938. 47:47पकड़ी।
  939. 47:49कल्ला ने जब यह देखा तो वो झुंझुला उठा और
  940. 47:52बोला अरे यार बॉस इसने फिर अपना ड्रामा
  941. 47:56शुरू कर दिया। हमें फिर से इसकी लगाम कसनी
  942. 47:59पड़ेगी।
  943. 48:00फिर कल्ला ने धमकी भरे लहजे में भिखारी से
  944. 48:03कहा ओ नवाब साहब हमारे पास इतना टाइम नहीं
  945. 48:07है कि मैं तुझे मनाने में ही सारा वक्त
  946. 48:09गवा दूं।
  947. 48:11तभी मुख्तार ने फिर से तलवार का नुकीला
  948. 48:13हिस्सा राहुल के गले से लगा दिया और दांत
  949. 48:17पीसते हुए बोला अब मैं धमकी नहीं दूंगा अब
  950. 48:22अगर तूने जरा भी ना नुक की तो मैं इसकी
  951. 48:26गर्दन काट डालूंगा और इसकी मौत का
  952. 48:29जिम्मेदार तू होगा।
  953. 48:33भिखारी ने एक नजर राहुल पर डाली जिसकी
  954. 48:36आंखों में मौत की परछाई साफ नजर आ रही थी।
  955. 48:40राजदीप और बलवंत राय भी एक तरफ खड़े होकर
  956. 48:43बेबसी के साथ यह सब होते हुए देख रहे थे।
  957. 48:47अब तक होश में आ चुकी बीना जी ने भी जब
  958. 48:50अपने बेटे के गले से लगी तलवार देखी तो
  959. 48:52उन्हें लगा मानो उनका सीना फटने वाला है।
  960. 48:57अब उनसे यह सब और बर्दाश्त नहीं हुआ। वो
  961. 48:59तेजी से भागकर स्टेज पर पहुंची और कल्ला
  962. 49:02के हाथ से वरमाला लेकर भिखारी को देते हुए
  963. 49:06उससे विनती करते हुए बोली ये लोग जैसा
  964. 49:09कहते हैं वैसा करते रहो बेटा प्लीज मैं
  965. 49:14अपने बेटे को मरते हुए नहीं देख सकती
  966. 49:18भिखारी बीना जी की बेबसी को महसूस कर सकता
  967. 49:20था वो ममता और आंसुओं से भरी उनकी आंखों
  968. 49:25को देखता रहा और अगले ही पल उसने भाव
  969. 49:28शून्यता के साथ बीना जी के हाथ से वरमाला
  970. 49:31ले ली। कल्ला ने जब यह सब देखा तो वह बोले
  971. 49:35बिना रह ना सका। क्या बात है? मुझे नहीं
  972. 49:39पता था इतना आसान होगा बॉस।
  973. 49:43बीना जी शिप्रा के पास गई और उसके कंधे पर
  974. 49:46हाथ रखकर आगे बढ़ने का इशारा किया। शिप्रा
  975. 49:49ने एक नजर अपनी मां को देखा। फिर अपने कदम
  976. 49:52सामने खड़े भिखारी की तरफ बढ़ा दिए। इस
  977. 49:56समय उसे अपना एक-एक कदम बहुत भारी लग रहा
  978. 49:59था। शिप्रा ने एक नजर भिखारी की तरफ देखा
  979. 50:03जो उससे नजर भी नहीं मिला रहा था। एक बार
  980. 50:06को तो शिप्रा की हिम्मत ही जवाब दे गई।
  981. 50:09उसका मन किया कि वो माला फेंके और भागकर
  982. 50:12यहां से कहीं दूर चली जाए। पर अगले ही पल
  983. 50:15उसकी आंखों के सामने उसके भाई का चेहरा आ
  984. 50:18गया। जिसकी गर्दन पर मुख्तार की तलवार अब
  985. 50:21भी रखी हुई थी।
  986. 50:24फिर क्या था? उसने देर नहीं लगाई। अपनी
  987. 50:28आंखें बंद की और वरमाला सामने खड़े गंदे
  988. 50:31भिखारी के गले में डाल दी। यह देखकर कल्ला
  989. 50:35ने जोर से ताली बजाई।
  990. 50:38उसके साथ आए पंटर भी ताली बजाने लगे। पर
  991. 50:42भिखारी जस का तस खड़ा रहा। उसने माला
  992. 50:46डालने का कोई प्रयास नहीं किया।
  993. 50:49कल्ला को आखिरकार बोलना ही पड़ा। ओ भाई अब
  994. 50:53तुम किस बात का इंतजार कर रहे हो? बीना जी
  995. 50:56ने भी आंखों ही आंखों में भिखारी से
  996. 50:58रिक्वेस्ट की।
  997. 51:00जब कोई और रास्ता नहीं बचा तो भिखारी ने
  998. 51:03भी शिप्रा के गले में वरमाला डाल दी।
  999. 51:07शिप्रा की आंखें अब भी बंद थी। उसके दर्द
  1000. 51:10को वो भिखारी भली-भांति [संगीत] महसूस कर
  1001. 51:12सकता था। अभी तक उसने शिप्रा के चेहरे को
  1002. 51:16ज्यादा ध्यान से देखा नहीं था। लेकिन अब
  1003. 51:18उसकी [संगीत] निगाह शिप्रा के चेहरे पर ही
  1004. 51:21ठहर गई थी।
  1005. 51:24कितना मासूम [संगीत] चेहरा है यह। इसके
  1006. 51:27साथ इतनी बड़ी ज्यादती नहीं होनी चाहिए
  1007. 51:29थी। भिखारी ने मन ही मन सोचा। [संगीत]
  1008. 51:34पर वो कुछ कर नहीं सकता था। एक भिखारी के
  1009. 51:36पास हालातों के साथ बहते चले जाने के
  1010. 51:39अलावा और कोई रास्ता भी तो नहीं होता।
  1011. 51:42मुख्तार वहीं फर्श पर पान थूक कर बोला।
  1012. 51:45बहुत बढ़िया। अब जल्दी से मंडप पर बैठ
  1013. 51:49जाओ।
  1014. 51:51चलो पंडित बाकी सब रस्म भी जल्दी से निपटा
  1015. 51:55दो।
  1016. 51:57शायद पंडित भी यही चाहता था। वो भी जल्द
  1017. 52:00से जल्द इन लोगों से पीछा छुड़ाना चाहता
  1018. 52:02था। पंडित दोनों को लेकर लगन बेदी पर
  1019. 52:06पहुंचा और मंत्रोार के साथ सभी रस्में
  1020. 52:09विधिपूक कराने लगा।
  1021. 52:11अब ना शिप्रा और ना ही उस भिखारी ने किसी
  1022. 52:14तरह की रुकावट डालने की कोशिश की। ऐसा लग
  1023. 52:17रहा था जैसे उन्होंने अपनी नियति के आगे
  1024. 52:20घुटने टेक दिए हैं।
  1025. 52:23अब आप कन्या की मांग में सिंदूर भरेंगे।
  1026. 52:27पंडित के कहने पर जब भिखारी ने शिप्रा की
  1027. 52:29मांग में सिंदूर भरा तो शिप्रा एक बार फिर
  1028. 52:32फूट-फूट कर रोने लगी।
  1029. 52:35इसके बाद फेरे हुए कन्यादान हुआ और
  1030. 52:38मंगलसूत्र भी पहनाया गया। एक के बाद एक
  1031. 52:42विधि पूर्वक सभी रस्में पूरी हो गई और
  1032. 52:46शिप्रा के साथ उसके सभी परिवार वाले रोते
  1033. 52:49रह गए। शादी सिर्फ दो लोगों या दो
  1034. 52:54परिवारों के बीच का बंधन नहीं होता। यह दो
  1035. 52:57आत्माओं के मिलन का शुभ समारोह होता है।
  1036. 53:00उम्मीद है आप दोनों मरते दम तक एक दूसरे
  1037. 53:04का साथ निभाएंगे। इसी के साथ आपका विवाह
  1038. 53:08संपन्न होता है।
  1039. 53:11कहते हुए पंडित जी ने चैन की सांस ली और
  1040. 53:13वहां से खिसक लिए। तभी मुख्तार खुशी से
  1041. 53:17चिल्लाया। बधाई हो बलवंत राय। आज तुम्हारी
  1042. 53:22पोती ने तुम्हारा मान बढ़ा दिया।
  1043. 53:25फिर वो तंज भरे लहजे में बोला अब इस
  1044. 53:29भिखारी की फैमिली का पता कर लेना और यह भी
  1045. 53:32देख लेना कि वो कितने इज्जतदार लोग हैं।
  1046. 53:38इसका परिवार जरूर तुम्हारे सोशल स्टेटस
  1047. 53:41में चार चांद लगा देगा।
  1048. 53:45कहते हुए मुख्तार ठहाका लगाकर हंसने लगा।
  1049. 53:48उसके चमचे भी जोर-जोर से हंसने लगे थे।
  1050. 53:52[हंसी]
  1051. 53:54और कुछ हो ना हो आज के बाद इस शादी की
  1052. 53:58चर्चा पूरे शहर में होगी। और ये लो जैसा
  1053. 54:03मैंने कहा था तुम्हारे पोते को बख्श देता
  1054. 54:07हूं।
  1055. 54:09इतना कहकर मुख्तार ने राहुल को छोड़ दिया।
  1056. 54:12राहुल को आजाद देखकर बीना जी को सुकून
  1057. 54:15मिला। वो दौड़कर राहुल के पास आई और उसे
  1058. 54:18अपने सीने से लगा लिया। मुख्तार इतने पर
  1059. 54:21रुका नहीं। वो राजदीप के पास गया और धमकी
  1060. 54:25भरे लहजे में बोला मैं जानता हूं कि तुम
  1061. 54:30मुझे कच्चा चबा जाना चाहते हो पर वो
  1062. 54:34तुम्हारे बस का नहीं है।
  1063. 54:37इसलिए अपने खून को ठंडा रखो। जहां तक मेरे
  1064. 54:43से बदले का सवाल है। [संगीत] तो यह तो बस
  1065. 54:47शुरुआत है। आगे-आगे देखते जाओ। होता क्या
  1066. 54:52है? इसके बाद वो वहां से बाहर जाने को
  1067. 54:55मुड़ा। पर फिर उसे कुछ याद आया और वो सीधा
  1068. 55:00शिप्रा के पास गया और उसका मजाक उड़ाते
  1069. 55:02हुए बोला
  1070. 55:04देखा नखरे वाली मुझसे पंगे लेने का अंजाम।
  1071. 55:10कहते हुए मुख्तार के चेहरे पर विजय
  1072. 55:13मुस्कान थी। मानो उसने कोई बड़ा किला फतेह
  1073. 55:16कर लिया हो। [संगीत] इसके बाद वह भिखारी
  1074. 55:19की तरफ पलटा और बोला
  1075. 55:22मैंने कहा था ना मैं तेरी किस्मत बदल
  1076. 55:27दूंगा। देख एक ही रात में मैंने तुझे कहां
  1077. 55:32से कहां पहुंचा दिया।
  1078. 55:35तूने तो सपने में भी कभी ऐसी खूबसूरत बीवी
  1079. 55:39की कल्पना नहीं की होगी।
  1080. 55:42उसने भिखारी के कंधे पर हाथ रखना चाहा। पर
  1081. 55:46उसकी हालत देखकर विचार बदल दिया और बोला
  1082. 55:49तू अब अपनी नई जिंदगी को एंजॉय कर पर उससे
  1083. 55:55पहले [गला साफ़ करने की आवाज़]
  1084. 55:56नहा लेना ठीक है
  1085. 55:59मुख्तार हंसता हुआ वहां से चला गया
  1086. 56:02पीछे-पीछे [संगीत]
  1087. 56:03उसके पंटर भी वहां से दफा हो गए तभी अचानक
  1088. 56:06वहां एक धड़ाम की आवाज गूंजी जिसे सुनकर
  1089. 56:10सब इधर-उधर देखने लगे कि क्या हुआ और
  1090. 56:13आखिरकार सबकी नजर एक जगह जाकर ठहर गई।
  1091. 56:16किस्मत भी अजीब चीज होती है। न जाने कब
  1092. 56:19क्या खेल दिखा दे। राजा को रंक और रंक को
  1093. 56:23राजा बना दे। कल तक जो शिप्रा विहान के
  1094. 56:26साथ अपने उज्जवल भविष्य को देख रही थी। आज
  1095. 56:29उसकी पूरी दुनिया ही उजड़ चुकी थी। या यूं
  1096. 56:32कहें कि उजाड़ दी गई थी। जाने किस मनहूस
  1097. 56:36घड़ी में मुख्तार के मुंह बोले भाई रजत की
  1098. 56:39नजर शिप्रा पर पड़ी और उसके बाद वह शिप्रा
  1099. 56:42के पीछे ही पड़ गया। जब शिप्रा को पता चला
  1100. 56:45कि रजत अंडरवर से ताल्लुक रखता है तब से
  1101. 56:48वह उससे और भी नफरत करने लगी। लेकिन रजत
  1102. 56:51कहां मानने वाला था? हालांकि रजत और
  1103. 56:54मुख्तार का खून का रिश्ता नहीं है। लेकिन
  1104. 56:57मुख्तार [संगीत] उसे अपने सगे भाई से भी
  1105. 56:59ज्यादा मानता है। यही कारण था कि उसने खुद
  1106. 57:02इनवॉल्व होकर शिप्रा से अपने भाई की शादी
  1107. 57:05करवानी चाही। पर शिप्रा के परिवार ने उनका
  1108. 57:08रिश्ता ठुकरा दिया। उस समय उन्होंने सोचा
  1109. 57:11नहीं था कि यह मामला इस हद तक चला जाएगा।
  1110. 57:15रजत शिप्रा के साथ कुछ ज्यादा ही बदतमीजी
  1111. 57:17करने लगा। उसे आए दिन [संगीत] परेशान करने
  1112. 57:19लगा और आखिरकार शिप्रा के कंप्लेंट पर रजत
  1113. 57:23को जेल की हवा खानी पड़ी। इस बात ने
  1114. 57:25मुख्तार की बेइज्जती के घाव पर नमक का काम
  1115. 57:28किया और इन्हीं सब बातों का परिणाम था कि
  1116. 57:31मुख्तार ने शिप्रा की शादी एक गूंगे
  1117. 57:33भिखारी से कर दी। खैर जैसे ही मुख्तार
  1118. 57:37अपनी गैंग के साथ वहां से निकला तो शिप्रा
  1119. 57:40अपनी जगह पर ही बेहोश होकर गिर पड़ी। बीना
  1120. 57:42जी भागकर शिप्रा के पास पहुंची। अरे कोई
  1121. 57:45देखो जरा क्या हुआ है मेरी बच्ची को?
  1122. 57:47शिप्रा के चारों तरफ लोग जमा हो गए। तभी
  1123. 57:49एक डॉक्टर ने शिप्रा की जांच की और फिर
  1124. 57:52बीना जी से बोले
  1125. 57:54घबराने की जरूरत नहीं है। ज्यादा स्ट्रेस
  1126. 57:57के कारण ये बेहोश हो गई है। इनके साथ जो
  1127. 58:00गुजरा है इट्स मेंटली टैक्सिंग। आप इन्हें
  1128. 58:04इनके रूम पर ले चलिए। फिर मैं एक इंजेक्शन
  1129. 58:06लगा देता हूं। इन्हें आराम मिलेगा। यह
  1130. 58:09सुनकर बीना जी ने राहत की सांस ली और
  1131. 58:11बोली, कोई इसे उठाकर इसके कमरे में पहुंचा
  1132. 58:15दो। राहुल आगे बढ़कर आया और अपनी बहन को
  1133. 58:18उठाकर अंदर चला गया। माहौल बहुत गमगीन हो
  1134. 58:22चुका था। ज्यादातर लोग जा चुके थे और बाकी
  1135. 58:25बचे मेहमानों की आंखों में राय परिवार के
  1136. 58:27लिए हमदर्दी थी।
  1137. 58:29लेकिन किसी को समझ नहीं आ रहा था कि कोई
  1138. 58:31इस फैमिली को सांत्वना दे भी तो कैसे? तभी
  1139. 58:35बलवंत राय सामने आए और हाथ जोड़कर वहां
  1140. 58:37उपस्थित मेहमानों से बोले
  1141. 58:40आप सब यहां हमारी खुशी में शामिल होने के
  1142. 58:42लिए आए। उसके लिए हमारा परिवार आप सबका
  1143. 58:45आभारी है। पर आप सब देख ही रहे हैं कि
  1144. 58:49चीजें [संगीत] उस तरह से नहीं हुई जैसा
  1145. 58:51हमने सोचा था।
  1146. 58:54फिर वो निराशा भरी आवाज में बोले मैं इसके
  1147. 58:57लिए किसी को ब्लेम भी नहीं कर सकता। शायद
  1148. 59:00हमारी पोती की किस्मत ही खराब थी या यूं
  1149. 59:03कहें कि हमारे शहर की कानून व्यवस्था ही
  1150. 59:06कमजोर है। जो एक अपराधी यूं सरेआम किसी की
  1151. 59:10दुनिया उजाड़ देता है और कोई कुछ नहीं कर
  1152. 59:12पाता।
  1153. 59:14कहते हुए वह एक पल के लिए शांत हो गए और
  1154. 59:16फिर हाथ जोड़कर थके हुए लहजे में बोले अभी
  1155. 59:20मेरा परिवार जिस सदमे में है उस स्थिति
  1156. 59:24में हम आपके लिए कुछ नहीं कर पाएंगे। हमें
  1157. 59:27कुछ वक्त चाहिए होगा।
  1158. 59:30आने के लिए धन्यवाद। इतना कहकर बलवंत राय
  1159. 59:34मुड़े और वहां से निकल कर हवेली के अंदर
  1160. 59:36चले गए। बचे हुए मेहमान भी धीरे-धीरे करके
  1161. 59:39वहां से निकलने लगे। कुछ ही देर में वहां
  1162. 59:42से सब जा चुके थे। किसी को भी उस भिखारी
  1163. 59:44की नहीं पड़ी थी। काम करने वाले [संगीत]
  1164. 59:46जो थोड़े बहुत लोग वहां पर थे उनका भी
  1165. 59:49ध्यान उस भिखारी की तरफ नहीं था। सबको
  1166. 59:52अपने में मग्न देखकर वो भिखारी भी वहां से
  1167. 59:56बाहर निकल आया और चलता हुआ मंदिर की तरफ
  1168. 59:58बढ़ गया। उसकी आंखों के आगे बार-बार
  1169. 1:00:01शिप्रा का चेहरा घूम रहा था। वो लाख
  1170. 1:00:04कोशिशों के बाद भी उसे अपने दिमाग से
  1171. 1:00:06निकाल नहीं पा रहा था। खैर इसी दिमागी
  1172. 1:00:09उलझनों के बीच वो मंदिर पहुंच गया। लगभग
  1173. 1:00:13आधी रात हो चुकी थी और चारों ओर सन्नाटा
  1174. 1:00:16था। जब वो मंदिर की सीढ़ियों के पास आकर
  1175. 1:00:18बैठा तो पुजारी जी अपने कमरे से बाहर निकल
  1176. 1:00:22आए और चिंता जाहिर करते हुए बोले [संगीत]
  1177. 1:00:25तुम आ गए बेटा। मैंने सुना कि कुछ बदमाश
  1178. 1:00:27तुम्हें उठाकर ले गए थे। सब ठीक तो है ना?
  1179. 1:00:30एक ही सांस में पुजारी ने कई सवाल कर दिए।
  1180. 1:00:34फिर जैसे उन्हें ध्यान आया कि वह पूछ भी
  1181. 1:00:36किससे रहे हैं? यह तो कुछ बोल ही नहीं
  1182. 1:00:38पाता तो जवाब कैसे देगा? इस बात का ख्याल
  1183. 1:00:41आते ही पुजारी जी अपनी बेवकूफी पर हल्के
  1184. 1:00:44से हंस दिए और फिर बोले चलो छोड़ो इन
  1185. 1:00:48बातों को। यह बताओ कुछ खानावाना खाया है
  1186. 1:00:50कि नहीं?
  1187. 1:00:52भिखारी एक टक पुजारी को देखता रहा और
  1188. 1:00:55सोचने लगा कि यह एक पुजारी है जो उसका
  1189. 1:00:57अपना ना होकर भी उसकी इतनी चिंता कर रहा
  1190. 1:01:00है और वहीं कुछ [संगीत] अपने ही लोग होते
  1191. 1:01:02हैं जो आपकी फिक्र तो छोड़ो आपको अपने
  1192. 1:01:05रास्ते का कांटा समझकर आपको साफ कर देना
  1193. 1:01:08चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ बलवंत राय की
  1194. 1:01:11कोठी के मेन हॉल में पूरा राय परिवार
  1195. 1:01:14इकट्ठा था। आखिर मुश्किल की घड़ी में ही
  1196. 1:01:16अपने परायों का फर्क समझ में आता है।
  1197. 1:01:20बलवंत राय के तीन बेटे बृजभूषण, [संगीत]
  1198. 1:01:23राजदीप और जगताप राय और एक बेटी नैना राय
  1199. 1:01:27हैं। नैना की शादी राजगढ़ के ही एक बड़े
  1200. 1:01:30बिजनेसमैन राजकुमार टंडन से हो रखी है।
  1201. 1:01:33बृजभूषण बलवंत का बड़ा बेटा है। दूसरे
  1202. 1:01:36नंबर पर राजदीप और तीसरे नंबर पर जगताप
  1203. 1:01:39है। इन सब में नैना सबसे छोटी है। बलवंत
  1204. 1:01:43राय के सभी बच्चों के दो-दो बच्चे हैं।
  1205. 1:01:46धीरे-धीरे सबके साथ मुलाकात हो ही जाएगी।
  1206. 1:01:49लेकिन फिलहाल घर का माहौल काफी टेंस है।
  1207. 1:01:52इस वक्त तक शिप्रा भी होश में आ चुकी थी
  1208. 1:01:54और अपनी मां के साथ एक सोफे पर बैठी हुई
  1209. 1:01:57थी। इन सबके बीच बलवंत राय अकेले एक सोफे
  1210. 1:02:00पर बैठे थे। हेड ऑफ द फैमिली होने के कारण
  1211. 1:02:02सबकी नजर उन पर ही थी। आखिरकार खामोशी को
  1212. 1:02:06तोड़ते हुए बलवंत राय गंभीर स्वर में
  1213. 1:02:08बोले। आप सभी जानते हैं कि हम सब यहां
  1214. 1:02:11क्यों इकट्ठा हुए हैं। आज हमारे परिवार के
  1215. 1:02:14साथ जो हुआ है। अब उससे कैसे निपटा जाए।
  1216. 1:02:19इतना बोलकर बलवंत राय सबकी ओर देखने लगे।
  1217. 1:02:22तभी कोई और कुछ कहता। उससे पहले बड़े बेटे
  1218. 1:02:25बृजभूषण की पत्नी सरला आरोप लगाते हुए बोल
  1219. 1:02:28पड़ी।
  1220. 1:02:30माफ कीजिए पिताजी। लेकिन आज जो कुछ हुआ
  1221. 1:02:33उसकी जिम्मेदार खुद शिप्रा है। किसी को
  1222. 1:02:37उम्मीद नहीं थी कि ऐसी स्थिति में भी सरला
  1223. 1:02:40शिप्रा पर ही इल्जाम लगा देगी। बृजभूषण को
  1224. 1:02:43भी सरला का यूं सबके सामने शिप्रा पर
  1225. 1:02:45दोषारोपण करना ठीक नहीं लगा। घर की बड़ी
  1226. 1:02:49बहू है। पर सरला अक्सर वक्त की नजाकत को
  1227. 1:02:51भांप नहीं पाती। तभी अचानक बृजभूषण ने
  1228. 1:02:54सरला को डांटते हुए कहा, चुप रहो। तुम्हें
  1229. 1:02:58जरा भी अंदाजा है कि कब कहां क्या बोलना
  1230. 1:03:00चाहिए? इस पर सरला अपने बचाव में बोली,
  1231. 1:03:03मैंने क्या गलत कहा? आज जो भी हुआ वो सब
  1232. 1:03:06शिप्रा की गलती के कारण ही तो हुआ है।
  1233. 1:03:08मुझे तो डर है कि इसकी गलती का खामियाजा
  1234. 1:03:11हमारे बच्चों को भी ना भुगतना पड़े। सरला
  1235. 1:03:14रुकने का नाम नहीं ले रही थी। बृजभूषण को
  1236. 1:03:17डर था कि कहीं बाबूजी बुरा ना मान जाए।
  1237. 1:03:19इसीलिए बृजभूषण ने सख्त लहजे में कहा। तुम
  1238. 1:03:23अपनी जुबान बंद रखोगी। मेरी जुबान तो आप
  1239. 1:03:26बंद करवा देंगे पर इससे सच बदल नहीं
  1240. 1:03:29जाएगा। सरला ने जैसे तैसे कसम ही खा रखी
  1241. 1:03:32थी कि आज वो चुप नहीं बैठेगी। हॉल में
  1242. 1:03:35उपस्थित परिवार के और भी कई लोग थे जिनके
  1243. 1:03:38विचार सरला जैसे ही थे। पर सरेआम वो अपने
  1244. 1:03:41विचार व्यक्त करने की हिम्मत नहीं कर सकते
  1245. 1:03:43थे। इसलिए सरला ने जो कहा था उससे वह मन
  1246. 1:03:46ही मन खुश थे। बलवंत राय एक टक सरला को ही
  1247. 1:03:50देख रहे थे। बाबूजी के कारण सरला थोड़ी
  1248. 1:03:52हिचकिचाई लेकिन वो खुश थी कि उसने अपने मन
  1249. 1:03:55की बात कह दी। तभी बलवंत राय ने रबदार
  1250. 1:03:58आवाज में पूछा
  1251. 1:04:00तुम्हें और भी जहर उगलना है बहू।
  1252. 1:04:05सरला को उम्मीद नहीं थी कि बलवंत राय उसकी
  1253. 1:04:07बातों को ऐसे लेंगे। तभी बृजभूषण [संगीत]
  1254. 1:04:10बोल पड़े।
  1255. 1:04:13इसकी तरफ से मैं माफी मांगता हूं पिताजी।
  1256. 1:04:15यह थोड़ी नादान है। क्यों? क्या यह 12 साल
  1257. 1:04:19की बच्ची है? और इसके लिए तुम्हें माफी
  1258. 1:04:22मांगने की कोई जरूरत नहीं है। इतना बोलकर
  1259. 1:04:25बलवंत राय एक बार फिर सरला से सवाल करते
  1260. 1:04:27हुए बोले,
  1261. 1:04:29हां तो बताओ बहू। इसके लिए शिप्रा कैसे
  1262. 1:04:32जिम्मेदार है?
  1263. 1:04:35यह सुनकर सरला इधर-उधर देखने लगी। लेकिन
  1264. 1:04:37बलवंत राय इस बात को इतनी आसानी से जाने
  1265. 1:04:40देने वाले नहीं थे। उन्होंने दोबारा सरला
  1266. 1:04:42पर दबाव डालते हुए पूछा। बोलो तुम जवाब
  1267. 1:04:46क्यों नहीं दे रही? शिप्रा इसके लिए
  1268. 1:04:48जिम्मेदार कैसे है?
  1269. 1:04:51जब सरला को लगा कि वो इस सवाल से पीछा
  1270. 1:04:53नहीं छुड़ा सकती तो वो बोली
  1271. 1:04:56आज जो मुख्तार हमारे परिवार का दुश्मन बना
  1272. 1:04:59बैठा है वो शिप्रा की वजह से ही तो है।
  1273. 1:05:02अगर यह उसके भाई को जेल नहीं भिजवाती तो
  1274. 1:05:04आज ये नौबत नहीं आती। तो फिर तुम्हारे
  1275. 1:05:07हिसाब से शिप्रा को उस परिस्थिति में क्या
  1276. 1:05:09करना चाहिए था? बलवंत राय ने दोबारा सवाल
  1277. 1:05:13दागते हुए पूछा।
  1278. 1:05:15सरला ने दबी हुई आवाज में जवाब दिया, जेल
  1279. 1:05:18तो नहीं भिजवाती? हम शरीफ लोग हैं। ऐसे
  1280. 1:05:21बदमाश लोगों से नहीं भिड़ सकते। इसीलिए
  1281. 1:05:23ऐसे लोगों से तो बच के ही रहना चाहिए ना।
  1282. 1:05:27बलवंत राय कुछ पल सरला को देखते रहे। फिर
  1283. 1:05:30बोले,
  1284. 1:05:31"अच्छा मान लो।" शिप्रा की जगह तुम्हारी
  1285. 1:05:34बेटी युविका होती और जैसे शिप्रा को
  1286. 1:05:36मुख्तार का भाई परेशान कर रहा था, वैसे ही
  1287. 1:05:39युविका को परेशान किया जाता। दिन दहाड़े
  1288. 1:05:42कहीं भी उसके साथ छेड़छाड़ की जाती तो
  1289. 1:05:45क्या तब भी तुम्हारा जवाब यही होता।
  1290. 1:05:49बलवंत राय के सवाल पर सरला फिर से बगले
  1291. 1:05:51झांकने लगी। उसे कोई जवाब नहीं सूझ रहा
  1292. 1:05:54था। सरला की इस हरकत को देख बलवंत राय
  1293. 1:05:57बोले जब अपने बच्चे पर बात आई तो जवाब
  1294. 1:06:00देते नहीं बन रहा। तुमसे अच्छी तो वो
  1295. 1:06:03चींटी होती है जो झुंड में रहती है और एक
  1296. 1:06:06पर भी आफत आए तो पूरा झुंड उस दुश्मन पर
  1297. 1:06:08टूट पड़ता है। यह परवाह किए बिना कि उसके
  1298. 1:06:11जीवन का अंतिम पल भी हो सकता है। इतना
  1299. 1:06:14बोलकर बलवंत राय चुप हो गए और घरवालों की
  1300. 1:06:17प्रतिक्रिया देखने लगे। किसी को उम्मीद
  1301. 1:06:19नहीं थी कि बलवंत राय सरला के लिए इतने
  1302. 1:06:22कड़े शब्दों का प्रयोग करेंगे। वहां
  1303. 1:06:24उपस्थित किसी के मन में शिप्रा के खिलाफ
  1304. 1:06:27कुछ चल भी रहा था तो अब वह बाहर नहीं आने
  1305. 1:06:30वाला था।
  1306. 1:06:31तभी बलवंत राय ने गंभीरता से बोलना शुरू
  1307. 1:06:34किया।
  1308. 1:06:36यहां सबको एक साथ इकट्ठा करने का कारण यह
  1309. 1:06:38था कि हम किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचे कि
  1310. 1:06:41यह परिवार एकजुट होकर बाहर के दुश्मन से
  1311. 1:06:44कैसे [संगीत] निपटे। पर यहां तो लग रहा है
  1312. 1:06:46कि सबके आपस में ही इतने क्लेश हैं कि
  1313. 1:06:49इन्हें किसी बाहर के दुश्मन की जरूरत ही
  1314. 1:06:51नहीं है। इतना कहकर बलवंत राय कुछ पल
  1315. 1:06:54रुके। एक नजर सबको देखा और फिर बोले
  1316. 1:06:58परिवार का मतलब होता है कि आपके आपस में
  1317. 1:07:00कितने ही मतभेद क्यों ना हो पर जब किसी
  1318. 1:07:03बाहर के दुश्मन से लड़ने की बात आती है तो
  1319. 1:07:06उस समय अपने सारे मतभेद भुलाकर एक होकर उस
  1320. 1:07:10दुश्मन से लड़ना चाहिए पर क्या हमारा
  1321. 1:07:13परिवार ऐसा कर पाएगा हम मुझे तो नहीं लगता
  1322. 1:07:18इतना कहकर वो अपनी जगह से उठ खड़े हुए और
  1323. 1:07:20झुंझुला कर बोले अरे जिस वक्त एक दूसरे का
  1324. 1:07:24सहारा बनना चाहिए। उस वक्त एक दूसरे पर
  1325. 1:07:26दोषारोपण करने में लग गए। इस चिंता में लग
  1326. 1:07:29गए कि इसके कारण मुझे कोई नुकसान ना हो
  1327. 1:07:32जाए। तुम सबको क्या लगता है? मैं तुम सबके
  1328. 1:07:35मन की बातें नहीं जानता। पर मैंने सोचा था
  1329. 1:07:38कि शायद इस मुश्किल वक्त में एक परिवार की
  1330. 1:07:41तरह इससे निपटने का प्रयास करेंगे। अब
  1331. 1:07:43उनकी आवाज पहले से भी दृढ़ हो गई। वो बोले
  1332. 1:07:47सब अपने बेस्ट सोर्स का इस्तेमाल करेंगे।
  1333. 1:07:50तो हो सकता है कि इस मुसीबत से निपटने का
  1334. 1:07:52कोई बेहतर रास्ता नजर आए। पर लगता है
  1335. 1:07:56मैंने ही तुम सबको लेकर गलत सोच पाल रखी
  1336. 1:07:59थी। बाबूजी की इस भारी भरकम स्पीच के बाद
  1337. 1:08:01पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया। ऐसा कि अगर
  1338. 1:08:04सुई भी गिरे तो उसकी भी खननक साफ सुनाई दे
  1339. 1:08:07जाए। तभी बलवंत राय अपना फैसला सुनाते हुए
  1340. 1:08:10बोले।
  1341. 1:08:12अब मेरी बात ध्यान से सुनो सब लोग। जिसको
  1342. 1:08:16भी लगता है कि इस मुसीबत से निपटने में
  1343. 1:08:17कोई रोल प्ले कर सकता है या अपनी पॉजिटिव
  1344. 1:08:20राय दे सकता है वो ही यहां रुके। बाकी सब
  1345. 1:08:24यहां से जा सकते हैं। यह सुनकर किसी ने भी
  1346. 1:08:26वहां से हिलने का प्रयास नहीं किया। सभी
  1347. 1:08:28अपनी जगह पर बैठे रहे। यहां मंदिर में
  1348. 1:08:32पुजारी ने भिखारी को खाना खिला दिया था।
  1349. 1:08:34उसके बाद पुजारी दयालु लेकिन थके हुए लहजे
  1350. 1:08:37में बोला। ठीक है। अब जाकर सो जाओ। रात
  1351. 1:08:42बहुत हो गई है। पर भिखारी अपनी जगह पर ही
  1352. 1:08:45खड़ा रहा। यह देखकर पुजारी ने जिज्ञासु
  1353. 1:08:47होकर पूछा। क्या हुआ? कुछ कहना है क्या?
  1354. 1:08:51तभी अचानक भिखारी की दृढ़ और स्पष्ट आवाज
  1355. 1:08:54सुनाई दी।
  1356. 1:08:56बाबा मुझे आपका फोन चाहिए। मुझे एक कॉल
  1357. 1:08:59करनी है। पहली बार पुजारी ने भिखारी की
  1358. 1:09:02आवाज सुनी थी। वो आश्चर्य से उसको देखता
  1359. 1:09:05रह गया। वो हैरान होकर बोला। तुम बोल सकते
  1360. 1:09:08हो। पुजारी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।
  1361. 1:09:12उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि जो बंदा
  1362. 1:09:146 महीने से कुछ भी बोला नहीं था आज अचानक
  1363. 1:09:17वो बोलने कैसे लगा?
  1364. 1:09:20हां बाबा मैं बोल सकता हूं। एक्चुअली मुझे
  1365. 1:09:23किसी से बात करनी है। क्या आप मुझे अपना
  1366. 1:09:25फोन देंगे?
  1367. 1:09:27भिखारी शांत लेकिन दृढ़ता से बोला। अब
  1368. 1:09:30पुजारी जी की बोलती बंद हो चुकी थी।
  1369. 1:09:32उन्होंने चुपचाप अपना फोन निकाला और उसके
  1370. 1:09:34हाथ में थमा दिया। वो फोन लेकर एक कोने
  1371. 1:09:37में गया और एक आईएसटी नंबर डायल किया।
  1372. 1:09:40लंबी रिंग के बाद फोन उठाया गया। दूसरी
  1373. 1:09:42तरफ से आवाज आई। हेलो कौन बोल रहा है? तभी
  1374. 1:09:46भिखारी ने रबदार और स्पष्ट आवाज में कहा,
  1375. 1:09:49"मैं बोल रहा हूं। मैं शौर्य राठौड़।
  1376. 1:09:54दूसरी तरफ वाले व्यक्ति को विश्वास ही
  1377. 1:09:56नहीं हो रहा था कि वो यह क्या सुन रहा
  1378. 1:09:58है।" इधर पुजारी जी का भी यही हाल था। वो
  1379. 1:10:01विश्वास नहीं कर पा रहे थे कि जिसे वो
  1380. 1:10:03लगभग 6 महीने से गूंगा समझ रहे थे। आज वो
  1381. 1:10:06कितने रौपदार तरीके से फोन पर बात कर रहा
  1382. 1:10:08है। इधर राय साहब की हवेली में बलवंत राय
  1383. 1:10:11का लेक्चर सुनकर सब सुन्न हो चुके थे।
  1384. 1:10:14उन्होंने ना सिर्फ बड़ी बहू सरला जी को
  1385. 1:10:16फटकार लगाई थी बल्कि इसी बहाने वो पूरे
  1386. 1:10:18परिवार को एकजुट करने की कोशिश कर रहे थे।
  1387. 1:10:21और यह शायद उनकी ही बातों का असर था कि
  1388. 1:10:23परिवार के कुछ लोग शिप्रा की समस्या को
  1389. 1:10:26मिलकर हल करने का मन बना चुके थे। तभी
  1390. 1:10:29बलवंत राय का छोटा बेटा जगताप अपनी जगह पर
  1391. 1:10:31खड़ा हुआ और भावुकता के साथ बोला मैं भी
  1392. 1:10:34एक लड़की का बाप हूं और मैं समझता हूं कि
  1393. 1:10:37अगर मेरी बेटी रागिनी के साथ ऐसा कुछ होता
  1394. 1:10:39तो जो शिप्रा ने किया मैं तो शायद उससे भी
  1395. 1:10:42ज्यादा कुछ कर जाता और मेरे लिए रागिनी और
  1396. 1:10:45शिप्रा में कोई अंतर नहीं है। वो भी मेरी
  1397. 1:10:48बेटी ही है। और मैं अपनी बेटी के साथ गलत
  1398. 1:10:51करने वालों को किसी भी सूरत में माफ नहीं
  1399. 1:10:53करूंगा। अपने परिवार के दुश्मन से निपटने
  1400. 1:10:56के लिए मुझसे जो बन पड़ेगा मैं वो हर
  1401. 1:10:58कोशिश करूंगा।
  1402. 1:11:00जताप चाचा की बात सुनकर शिप्रा भावुक हो
  1403. 1:11:03गई और उसकी आंखों में आंसू आ गए।
  1404. 1:11:06तभी सरला जी का बड़ा बेटा कुलवंत शिप्रा
  1405. 1:11:08की ओर देखते हुए बोला मैं भी अपनी बहन को
  1406. 1:11:11मजधार में यूं अकेला नहीं छोड़ सकता दादा
  1407. 1:11:13जी। शिप्रा मेरी भी बहन है और मैं अपने
  1408. 1:11:16परिवार के दुश्मन से निपटने के लिए कोई
  1409. 1:11:18कसर नहीं छोडूंगा। तभी राजदीप राय ने सभी
  1410. 1:11:22को आगाह करते हुए कहा,
  1411. 1:11:24मुख्तार के बदले की आग अभी बुझी नहीं है।
  1412. 1:11:27वैसे भी वह कह कर गया है कि यह तो बस
  1413. 1:11:29शुरुआत है। हो ना हो वो फिर से कुछ करेगा।
  1414. 1:11:34इसलिए हमें पहले अपने परिवार की सुरक्षा
  1415. 1:11:36सुनिश्चित करने का इंतजाम करना चाहिए।
  1416. 1:11:39उसके बाद उसे रोकने के तरीके खोजने होंगे।
  1417. 1:11:42देखते ही देखते परिवार के सभी लोग अपनी
  1418. 1:11:44राय सामने रखने लगे। अब जाकर बलवंत राय के
  1419. 1:11:47चेहरे से परेशानी का भाव कुछ कम हुआ। अब
  1420. 1:11:50जाकर उन्हें लगा कि इस परिवार की नींव
  1421. 1:11:52उतनी भी कमजोर नहीं है जितना वह सोच रहे
  1422. 1:11:55थे। लेकिन जगदाप और कुलवंत की बातें सुनकर
  1423. 1:11:58सरला जी का चेहरा लटक चुका था। इधर मंदिर
  1424. 1:12:01में पुजारी को शौर्य अब कुछ अलग ही नजर आ
  1425. 1:12:03रहा था। आज उन्हें अचानक लगा कि शौर्य का
  1426. 1:12:06पूरा व्यक्तित्व ही बदल चुका है। अभी तक
  1427. 1:12:08वो जिसे दीनहीन समझ रहे थे, अचानक उसके
  1428. 1:12:11बात करने का अंदाज देखकर उन्हें विश्वास
  1429. 1:12:13ही नहीं हो रहा था कि यह वही व्यक्ति है
  1430. 1:12:15जिसे वह इतने समय से जानते हैं। इधर शौर्य
  1431. 1:12:18फोन पर सामने वाले के बोलने की प्रतीक्षा
  1432. 1:12:20कर रहा था। जबकि दूसरी ओर मौजूद व्यक्ति
  1433. 1:12:23उसकी बात पर विश्वास ही नहीं कर पा रहा
  1434. 1:12:25था। वो गहरी उलझन में पड़ चुका था। फोन के
  1435. 1:12:29दूसरी तरफ सचमुच शौर्य ही है। यह बात मान
  1436. 1:12:31पाना उसके लिए बेहद मुश्किल नहीं असंभव
  1437. 1:12:34था। वो गुस्से में बोला हे मिस्टर तुम जो
  1438. 1:12:38कोई भी हो यह मजाक तुम्हें बहुत महंगा
  1439. 1:12:39पड़ेगा। समझे तुम? इस पर शौर्य ने शांत
  1440. 1:12:43लेकिन दृढ़ता के साथ कहा। विक्रम ये मैं
  1441. 1:12:46ही बोल रहा हूं। शौर्य
  1442. 1:12:49अपना नाम सुनकर विक्रम और भी चौंक गया।
  1443. 1:12:52लेकिन उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि जो
  1444. 1:12:53वह सुन रहा है वो सच भी हो सकता है। लेकिन
  1445. 1:12:57फिर उसने एक लंबी सांस लेकर खुद को शांत
  1446. 1:12:59किया और अनुमान लगाने की कोशिश की। फोन पर
  1447. 1:13:02सुनाई दे रही इस आवाज में वही ठहराव और
  1448. 1:13:05खननक थी जो उसके बॉस शौर्य राठौड़ की आवाज
  1449. 1:13:07में हुआ करती थी और जिस तरह उसने उसका नाम
  1450. 1:13:10लिया था वैसे तो सिर्फ उसके बॉस ही उसे
  1451. 1:13:13पुकारा करते थे। क्या ये सच में आप हो? अब
  1452. 1:13:16जिंदा हो बॉस। उसने उत्सुकता और अविश्वास
  1453. 1:13:19से पूछा तो शौर्य ने उसे आश्वस्त करते हुए
  1454. 1:13:22जवाब दिया, हां, मैं ही हूं और मैं एकदम
  1455. 1:13:25सही सलामत हूं। शौर्य समझ रहा था कि
  1456. 1:13:28विक्रम के लिए अचानक इस बात पर विश्वास
  1457. 1:13:30करना कितना मुश्किल होगा कि वह जिंदा है।
  1458. 1:13:32क्योंकि पिछले 6 महीने से उसने किसी से
  1459. 1:13:35कोई संपर्क नहीं किया था। बहुत से लोगों
  1460. 1:13:37ने शौर्य को ढूंढने के लिए जमीन आसमान एक
  1461. 1:13:39कर दिया था। जिसमें उसके दोस्त और दुश्मन
  1462. 1:13:42दोनों ही शामिल थे। तभी विक्रम ने
  1463. 1:13:45उत्सुकता के साथ पूछा आप कहां हो बॉस?
  1464. 1:13:48हमने आपको कितना ढूंढा? पर आपका कोई पता
  1465. 1:13:50नहीं चला।
  1466. 1:13:53इतना कहते हुए विक्रम भावुक हो उठा और
  1467. 1:13:55रंधी आवाज में बोला। सबके साथ मैंने भी यह
  1468. 1:13:58मान लिया था कि प्लेन हादसे में आप नहीं
  1469. 1:14:00रहे।
  1470. 1:14:01विक्रम के मन में खुशी, उत्साह और गहरे
  1471. 1:14:04दुख से उभरने के भाव एक साथ जाग उठे थे।
  1472. 1:14:07आज सच्चाई उसके सामने थी जिसे स्वीकारते
  1473. 1:14:09हुए उसने खुद को संभाला और फिर उत्साहित
  1474. 1:14:11होकर बोला मैं बता नहीं सकता सर कि आपकी
  1475. 1:14:14आवाज सुनकर मुझे कितनी खुशी हो रही है।
  1476. 1:14:18इसके बाद विक्रम ने जल्दीबाजी में कहा आप
  1477. 1:14:21बस बताओ आप हो कहां मैं अभी आपके पास आता
  1478. 1:14:23हूं। विक्रम की खुशी उसकी आवाज में बखूबी
  1479. 1:14:26झलक रही थी। लेकिन शौर्य उसे समझाते हुए
  1480. 1:14:29बोला
  1481. 1:14:31मैं जानता हूं विक्रम कि तुम मेरे पास आना
  1482. 1:14:33चाहते हो। मैंने तुम्हें फोन भी इसीलिए
  1483. 1:14:35किया है कि तुम मेंटली प्रिपयर्ड रहो
  1484. 1:14:37क्योंकि मुझे कभी भी तुम्हारी जरूरत पड़
  1485. 1:14:40सकती है। एक्चुअली मैं अब तक जिस अज्ञात
  1486. 1:14:43वास में रह रहा था मुझे नहीं लगता कि अब
  1487. 1:14:45ज्यादा दिनों तक इस स्थिति में रह पाऊंगा।
  1488. 1:14:48विक्रम बड़े ध्यान से अपने बॉस की एक-एक
  1489. 1:14:50बात सुन रहा था और स्थिति का अंदाजा लगाने
  1490. 1:14:52की कोशिश कर रहा था। वहीं शौर्य ने एक पल
  1491. 1:14:55अपने अगल-बगल देखा और फिर चिंता भरे स्वर
  1492. 1:14:58में बोला। दरअसल मेरे आसपास कुछ इस तरह की
  1493. 1:15:01सिचुएशन क्रिएट हो गई है कि मैं चाहकर भी
  1494. 1:15:03उसमें इन्वॉल्व हुए बिना रह नहीं सकता।
  1495. 1:15:06इसके बाद शौर्य ने निर्देश देते हुए कहा
  1496. 1:15:09तुम बस तैयार रहना कभी भी तुम्हें मेरा
  1497. 1:15:11बुलावा आ सकता है। इस पर विक्रम चिंतित
  1498. 1:15:14होकर बोला लेकिन आप अज्ञातवास में क्यों
  1499. 1:15:16हो बॉस? आपको पता है आपके ना होने की खबर
  1500. 1:15:19सुनकर आपके पिताजी की क्या हालत हो गई है?
  1501. 1:15:22कहते हुए वो उदास हो गया। लेकिन अगले ही
  1502. 1:15:24पल हल्की खुशी जताते हुए बोला जब आपके
  1503. 1:15:27पिताजी को पता चलेगा कि आप बिल्कुल सही
  1504. 1:15:29सलामत हो तो उनको तो मानो संजीवनी मिल
  1505. 1:15:32जाएगी। वैसे भी वो आज भी उस वक्त को कोसते
  1506. 1:15:34हैं जब उन्होंने आपको इंडिया जाने दिया
  1507. 1:15:36था।
  1508. 1:15:38इतना कहकर विक्रम लगभग उछल पड़ा और फिर
  1509. 1:15:40उत्साह के साथ बोला मैं अभी जाकर उन्हें
  1510. 1:15:43बताता हूं कि आप जिंदा और सही सलामत हो।
  1511. 1:15:45नाना
  1512. 1:15:47अभी किसी को सच्चाई बताने की जरूरत नहीं
  1513. 1:15:49है। शौर्य तपाक से बोला अगर मुझे यह जाहिर
  1514. 1:15:53ही करना होता कि मैं जिंदा हूं तो फिर मैं
  1515. 1:15:56यूं छुप कर क्यों रहता जब सही समय आएगा तो
  1516. 1:15:59मैं खुद यह बात जग जाहिर कर दूंगा पर अभी
  1517. 1:16:02नहीं। कहते हुए शौरक की आवाज गंभीर हो गई।
  1518. 1:16:05वो बोला और वैसे भी जब तक मुझे यह पता
  1519. 1:16:09नहीं चल जाता कि मेरे ही परिवार में से
  1520. 1:16:11कौन मुझे मारना चाहता है तब तक दुनिया की
  1521. 1:16:14नजर में मेरा मरा रहना ही ठीक होगा। यह
  1522. 1:16:18सुनकर विक्रम चौंक उठा और बोला ये आप क्या
  1523. 1:16:21कह रहे हैं बॉस? कोई आपको मारना चाहता है?
  1524. 1:16:23ऐसा कौन हो सकता है? यही तो पता लगाना है
  1525. 1:16:27कि आखिर मुझे कौन मारना चाहता है? कुछ
  1526. 1:16:30सोचते हुए शौर्य ने गंभीर स्वर में कहा।
  1527. 1:16:32इस पर विक्रम ने फिर सवाल किया। यानी आपका
  1528. 1:16:35जो प्लेन क्रैश हुआ था वो स्वाभाविक घटना
  1529. 1:16:37नहीं थी। नहीं बिल्कुल नहीं। वो सब कुछ एक
  1530. 1:16:41षड्यंत्र के तहत किया गया था। पूरी
  1531. 1:16:43प्लानिंग के साथ वो तो ऐन वक्त पे मुझे
  1532. 1:16:46होश आ गया इसलिए मैं बच गया। शौर्य ने उस
  1533. 1:16:49दिन को याद करते हुए कहा और सबसे बड़ी बात
  1534. 1:16:52प्लेन क्रैश की घटना के बाद भी पूरे इलाके
  1535. 1:16:54में मुझे जिस तरह ढूंढा गया वो भी कुछ ऐसे
  1536. 1:16:57लोगों के द्वारा जो मुझे बचाने के लिए
  1537. 1:16:59नहीं चेक करने के लिए मुझे ढूंढ रहे थे कि
  1538. 1:17:02मुझे रास्ते से हटाने का उनका मकसद पूरा
  1539. 1:17:04हुआ है कि नहीं। मेरी इंट्यूशन कहती है कि
  1540. 1:17:08इस षड्यंत्र में मेरे किसी अपने का हाथ
  1541. 1:17:10है। कहते हुए शौर्य की आंखों में दुख नजर
  1542. 1:17:13आ रहा था। लेकिन उसने दृढ़ता के साथ अपना
  1543. 1:17:15मकसद साफ किया। बस अब पता यह लगाना है कि
  1544. 1:17:19वो आस्तीन का सांप कौन है। इस पर विक्रम
  1545. 1:17:22ने चिंता जाहिर करते हुए बोला वो तो हम
  1546. 1:17:25पता लगा कर ही रहेंगे बॉस पर आप अपने
  1547. 1:17:27पिताजी को तो बता ही सकते हैं। नहीं तो
  1548. 1:17:29आपके चले जाने के गम में दिन प्रतिदिन
  1549. 1:17:31उनकी हालत खराब होती जाएगी। इस पर शौर्य
  1550. 1:17:34स्थिति को समझाते हुए बोला तुम्हारा कहना
  1551. 1:17:37सही है। पर मैं चाहता हूं कि मेरे जीवित
  1552. 1:17:40होने की खबर अभी बाहर ना ही आए तो अच्छा
  1553. 1:17:43है। नहीं तो मेरे दुश्मन फिर से सतर्क हो
  1554. 1:17:46जाएंगे। कहते हुए शौर्य एक पल के लिए रुका
  1555. 1:17:49और फिर कुछ सोच कर बोला मैं ऐसा करूंगा कि
  1556. 1:17:52खुद ही पापा से बात करके उन्हें अपने
  1557. 1:17:54हालातों की जानकारी दे दूंगा। शौर्य की
  1558. 1:17:57बातों में अपने पापा के लिए कंसर्न साफ
  1559. 1:17:59झलक रहा था। लेकिन तभी विक्रम के मन में
  1560. 1:18:01जिज्ञासा जाग उठी और उसने पूछा आपको किसी
  1561. 1:18:05पर शक है क्या बॉस?
  1562. 1:18:07शक तो है पर जब तक मेरा शक यकीन में नहीं
  1563. 1:18:10बदल जाता तब तक मैं कुछ भी नहीं कह सकता।
  1564. 1:18:13शौर्य की इस बात पर विक्रम आश्वस्त होकर
  1565. 1:18:16बोला, "यह बात तो आप ही बेहतर समझ सकते
  1566. 1:18:18हैं बॉस।" फिर अगले ही पल वो उत्सुकता के
  1567. 1:18:21साथ बोला, "आप तो मुझे यह बताइए कि मैं कब
  1568. 1:18:24तक आपके पास आ सकता हूं। जल्दी ही तुम
  1569. 1:18:26इंतजार करो। कभी भी मेरा बुलावा तुम्हें आ
  1570. 1:18:29सकता है। लेकिन उससे पहले तुम्हें कुछ और
  1571. 1:18:31काम करना है। शौर्य ने गंभीरता के साथ
  1572. 1:18:34कहा, तो विक्रम किसी फौजी की तरह अलर्ट हो
  1573. 1:18:36गया। आप बस हुक्म कीजिए बॉस। जल्दी ही
  1574. 1:18:40बताऊंगा। तुम तैयार रहना। मुझे कभी भी
  1575. 1:18:42तुम्हारी जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद
  1576. 1:18:44शौर्य ने फोन कट कर दिया और पुजारी की तरफ
  1577. 1:18:47पलटा। पुजारी बड़ी-बड़ी आंखों से शौर्य को
  1578. 1:18:49ही घरे जा रहा था। अभी-अभी शौर्य की जो भी
  1579. 1:18:52बातें उन्होंने सुनी वो उनका मतलब निकालने
  1580. 1:18:54की कोशिश कर रहे थे। वो यह तो समझ चुके थे
  1581. 1:18:57कि यह भिखारी जो दिख रहा है वास्तव में वो
  1582. 1:19:00है नहीं। इसका बैकग्राउंड कुछ अलग ही है।
  1583. 1:19:03शौर्य ने पुजारी को उनका फोन लौटाते हुए
  1584. 1:19:05कहा। बाबा मेरी बातों से आपको इतना तो समझ
  1585. 1:19:08आ ही गया होगा कि मेरी असलियत कुछ और है
  1586. 1:19:11और मैंने छुपने के लिए भेष धारण किया है।
  1587. 1:19:15पुजारी जिज्ञासा से बोले
  1588. 1:19:17वो तो मैं समझ गया बेटा पर हकीकत में तुम
  1589. 1:19:21हो कौन?
  1590. 1:19:22कमरे में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया।
  1591. 1:19:25एक तरफ सच्चाई जानने के लिए पुजारी की
  1592. 1:19:27उत्सुकता वहीं दूसरी तरफ लंबे समय से दबा
  1593. 1:19:30हुआ एक रहस्य।
  1594. 1:19:32शौर्य अभी किसी को कुछ नहीं बताना चाहता
  1595. 1:19:34था। पुजारी जी को भी नहीं। इसलिए उनके
  1596. 1:19:37सवाल को टालते हुए बस इतना ही कहा।
  1597. 1:19:41पुजारी जी मैं आपसे ज्यादा कुछ तो नहीं कह
  1598. 1:19:43सकता। बस यह समझिए कि पांडवों का
  1599. 1:19:45अज्ञातवास चल रहा है और इसलिए इस वक्त
  1600. 1:19:47किसी भी हाल में उनकी पहचान उजागर नहीं
  1601. 1:19:49होनी चाहिए। बलवंत राय के घर का डिस्कशन
  1602. 1:19:52अभी भी जारी था। तभी बीच में गले को
  1603. 1:19:54खराशते हुए बलवंत राय के दामाद यानी नैना
  1604. 1:19:57के पति राजकुमार टंडन ने गंभीर स्वर में
  1605. 1:20:00कहा। वैसे तो यहां के कमिश्नर के साथ आपके
  1606. 1:20:03संपर्क तो हैं ही। मैं कोशिश करूंगा कि
  1607. 1:20:05कानून मंत्री के द्वारा भी उन पर थोड़ा
  1608. 1:20:07प्रेशर बिल्ड करूं। हो सकता है कुछ असर
  1609. 1:20:09हो। इस पर बृजभूषण राय ने भी समर्थन करते
  1610. 1:20:12हुए कहा, हां हां यह बढ़िया रहेगा। तभी
  1611. 1:20:15राजदीप राय ने भी कुछ सोचते हुए अपना
  1612. 1:20:17विचार व्यक्त किया। [संगीत]
  1613. 1:20:19इन सबके साथ हमें परिवार के लिए घर की
  1614. 1:20:21सिक्योरिटी भी बढ़ानी पड़ेगी। इस पर बलवंत
  1615. 1:20:24राय ने एक लंबी सांस ली और चिंतित स्वर
  1616. 1:20:26में बोले हम इसके लिए मैंने भी कुछ सोचा
  1617. 1:20:30है। जब तक इस मुख्तार का कोई इलाज नहीं हो
  1618. 1:20:33जाता तब तक सिक्योरिटी का इंतजाम तो करना
  1619. 1:20:35ही पड़ेगा।
  1620. 1:20:37इन सब बातों के बीच शिप्रा एक कोने में
  1621. 1:20:39अपने चेहरे पर गहरी उदासी लिए खड़ी थी।
  1622. 1:20:41मानो उसका जीवन ही शून्य हो गया हो। तभी
  1623. 1:20:44बीना जी शिप्रा को करुणा भरी दृष्टि से
  1624. 1:20:46देखते हुए बोली।
  1625. 1:20:48यह सब तो ठीक है पर अभी जो हो गया है उसके
  1626. 1:20:52बारे में आप सबका क्या विचार है इस पर
  1627. 1:20:54बलवंत राय ने उदास स्वर में पूछा
  1628. 1:20:57तुम किस बारे में बात कर रही हो बहु असल
  1629. 1:21:00में बलवंत राय बीना जी के कहने का मतलब तो
  1630. 1:21:02समझ गए थे फिर भी वह यह पक्का करना चाहते
  1631. 1:21:05थे कि क्या बीना जी का कंसर्न शिप्रा को
  1632. 1:21:07लेकर है या उनका इशारा किसी और बात की तरफ
  1633. 1:21:10है और तभी बीना जी ने दृढ़ आवाज में कहा
  1634. 1:21:14मैं शिप्रा की शादी की बात कर रही हूं
  1635. 1:21:17बीना की बात सुनकर थोड़ी देर के लिए वहां
  1636. 1:21:19खामोशी छा गई। किंतु तभी सरला ने उस
  1637. 1:21:22खामोशी को तोड़ते हुए कटाक्ष किया। अब
  1638. 1:21:24इसमें ज्यादा कुछ तो नहीं किया जा सकता।
  1639. 1:21:26जैसा भी हो शिप्रा की शादी उस भिखारी से
  1640. 1:21:29तो हो ही गई है। अब मानो या ना मानो वो
  1641. 1:21:32भिखारी ही इस घर का दामाद है। इतना कहकर
  1642. 1:21:35सरला ने ऐसा चेहरा बनाया मानो उसे इस घर
  1643. 1:21:38की सबसे ज्यादा फिक्र हो। लेकिन सरला की
  1644. 1:21:40बात पर किसी ने भी कोई जवाब नहीं दिया।
  1645. 1:21:43वैसे भी यह एक ऐसी सच्चाई थी जिसे जानते
  1646. 1:21:45तो सभी थे पर कोई भी इसे मानना नहीं चाहता
  1647. 1:21:47था। और तभी नैना जी भी जले पर नमक छिड़कते
  1648. 1:21:50हुए बोली यह एक ऐसी घटना है जिसे हजम करना
  1649. 1:21:54हम सबके लिए ही बहुत मुश्किल है पर सच्चाई
  1650. 1:21:56से मुंह तो नहीं मोड़ा जा सकता ना। इस पर
  1651. 1:21:59बलवंत राय ने गुस्से से भरी तीखी आवाज में
  1652. 1:22:01कहा। कोई इस बात से मुंह नहीं मोड़ रहा है
  1653. 1:22:04नैना। हम सब जो यहां इकट्ठा हैं उसका कारण
  1654. 1:22:06भी यही है कि इस हालात से कैसे निपटा जाए।
  1655. 1:22:09बलवंत जी के शब्दों से जाहिर था कि वो
  1656. 1:22:11नैना और सरला के कटाक्ष को भली-भांति समझ
  1657. 1:22:14चुके थे। इसीलिए नैना ने मुंह बनाते हुए
  1658. 1:22:16नाराजगी भरे शब्दों में कहा, अरे हमने ऐसा
  1659. 1:22:19भी क्या कह दिया बाबूजी जो सच है वही तो
  1660. 1:22:21बताया। इस पर बलवंत राय की आवाज कड़वी हो
  1661. 1:22:24गई और वो कठोर स्वर में बोले। सच को जानने
  1662. 1:22:27और उस पर कटाक्ष करने में बहुत अंतर होता
  1663. 1:22:29है। वैसे भी यहां ऐसा कोई नहीं है जो
  1664. 1:22:32सच्चाई से वाकिफ ना हो। तभी जगताप परेशान
  1665. 1:22:34होकर बोल उठे। इस बारे में आप ही कोई राह
  1666. 1:22:37सुझाइए पिताजी। हम तो खुद ही नहीं समझ पा
  1667. 1:22:40रहे हैं कि स्थिति से कैसे निपटे। जो हुआ
  1668. 1:22:43है उसके बारे में तो शहर भर में बातें भी
  1669. 1:22:45शुरू हो जाएंगी। हमें जल्दी ही कोई कदम
  1670. 1:22:47उठाना पड़ेगा।
  1671. 1:22:49इस पर बलवंत राय ने एक लंबी सांस ली और
  1672. 1:22:51धीमे स्वर में बोले। जिंदगी में कभी कोई
  1673. 1:22:54ऐसी घटना हो जाती है जब दिमाग काम करना
  1674. 1:22:56बंद कर देता है। यह घटना भी कुछ ऐसी ही है
  1675. 1:22:59जहां सही मायने में मेरा भी दिमाग काम
  1676. 1:23:02नहीं कर रहा। इसीलिए इसका निर्णय शिप्रा
  1677. 1:23:05खुद ही करे तो बेहतर होगा। आखिर यह उसकी
  1678. 1:23:08अपनी जिंदगी है। इसीलिए इसका निर्णय लेने
  1679. 1:23:10का अधिकार भी इसी का है। हम तो बस यह कर
  1680. 1:23:13सकते हैं कि इसके निर्णय को अपना पूरा
  1681. 1:23:15समर्थन दें। सबकी निगाहें अब शिप्रा की
  1682. 1:23:18तरफ मुड़ गई कि वो क्या डिसीजन लेने वाली
  1683. 1:23:20थी। शिप्रा ने जब सबकी निगाहें अपनी तरफ
  1684. 1:23:23देखी तो कुछ पल तो वो शांत रही। फिर एक
  1685. 1:23:25लंबी सांस लेकर भावुक लेकिन दृढ़ आवाज में
  1686. 1:23:28बोलने लगी।
  1687. 1:23:30अभी तक जो भी मेरी जिंदगी में हुआ। उसमें
  1688. 1:23:33आप सब ने ही अपने हिसाब से अच्छा बुरा
  1689. 1:23:35सोचकर निर्णय लिया और मैं उसमें अपनी
  1690. 1:23:38सहमति देती रही। चाहे वो निर्णय विहान और
  1691. 1:23:41मेरी शादी का हो। वहां भी आपने यह नहीं
  1692. 1:23:43देखा कि लड़का कैसा है। आपको तो बस इसकी
  1693. 1:23:46फिक्र थी कि दोनों परिवार बिजनेस पॉइंट ऑफ
  1694. 1:23:48व्यू से पावरफुल हो जाएंगे। जिसका परिणाम
  1695. 1:23:51यह हुआ कि सफर में एक मुश्किल पड़ाव क्या
  1696. 1:23:53आया। विहान मैदान छोड़कर भाग गया। इतना
  1697. 1:23:57कहते ही शिप्रा की आंखों से आंसू की एक
  1698. 1:23:59बूंद गाल तक लुढ़क आई। जिसे पोंछकर उसने
  1699. 1:24:02एक बार फिर खुद को हिम्मत दी और दृढ़ आवाज
  1700. 1:24:04में आगे बोली। अंत में कौन आखिर समय तक
  1701. 1:24:08आपके साथ खड़ा रहा? इस बात को सोचूं तो
  1702. 1:24:11[संगीत] इस मामले में वो भिखारी ज्यादा
  1703. 1:24:13हिम्मत वाला था। वो मार खाता रहा पर
  1704. 1:24:15मुख्तार के गुंडों के सामने झुका नहीं।
  1705. 1:24:18झुका भी तब जब बात राहुल की जान पर बनाई।
  1706. 1:24:21उससे हमारा कोई रिश्ता नहीं था। फिर भी वह
  1707. 1:24:23भिखारी होकर हमारा दर्द समझ रहा था। और एक
  1708. 1:24:26वो विहान था जो हमारे साथ पूरी जिंदगी
  1709. 1:24:29जीने की कसम खाने वाला था। लेकिन उसने यह
  1710. 1:24:32तक जानने की कोशिश नहीं की कि हमारे ऊपर
  1711. 1:24:34क्या बीती है।
  1712. 1:24:36मैंने खुद उसे वहां से दुम दबा के भागते
  1713. 1:24:38देखा था। अब इसे अपने लिए मैं अच्छा समझूं
  1714. 1:24:41या बुरा कि उसकी सच्चाई शादी होने से पहले
  1715. 1:24:44ही सामने आ गई या यह सोच कर दुखी होऊं कि
  1716. 1:24:46मेरी शादी एक भिखारी से हो गई। इतना बोलकर
  1717. 1:24:49शिप्रा रुक कर सबके चेहरे का एक्सप्रेशन
  1718. 1:24:51देखने लगी। पर किसी ने कुछ भी नहीं कहा।
  1719. 1:24:53इस पर शिप्रा एक बार फिर मायूसी भरे
  1720. 1:24:56शब्दों में बोली और अब जब हमारे हाथ में
  1721. 1:24:58कुछ रहा ही नहीं तब आप कह रहे हैं कि मैं
  1722. 1:25:01जो भी निर्णय लूंगी आप उसमें मेरा साथ
  1723. 1:25:03देंगे। अब [संगीत] आप ही बताइए कि स्थिति
  1724. 1:25:05में मैं क्या ही निर्णय ले सकती हूं। इतना
  1725. 1:25:09बोलकर शिप्रा का गला रंध गया और वो अपने
  1726. 1:25:11दादाजी की तरफ देखने लगी। उधर दूसरी तरफ
  1727. 1:25:14मुख्तार भाई पूरे लश्कर के साथ जेल पहुंच
  1728. 1:25:17चुके थे। उनके साथ वकीलों की फौज थी।
  1729. 1:25:20मुख्तार के भाई रजत को आज फाइनली बेल मिल
  1730. 1:25:22गया था। रजत जेल से छूट कर बाहर आया और
  1731. 1:25:25अपने भाई की कार में उसके पास आकर बैठ
  1732. 1:25:27गया। लेकिन उसके चेहरे पर गहरी नाराजगी के
  1733. 1:25:30भाव थे। वहीं जब मुख्तार ने अपने भाई को
  1734. 1:25:33यूं मुंह फुलाए नाराजगी से बैठे देखा तो
  1735. 1:25:36वो हल्की मुस्कान के साथ बोल उठा।
  1736. 1:25:38बरखुरदार
  1737. 1:25:40अब तो खुश हो जाओ। तुम जेल से बाहर आ गए
  1738. 1:25:44हो। रजत उखड़े हुए स्वर में बोला क्या जो
  1739. 1:25:48मैंने सुना है वो सही है? यह सुनकर
  1740. 1:25:50मुख्तार रजत की ओर पलटा और उलझन भरी आवाज
  1741. 1:25:52में बोला अब मुझे क्या पता कि तुमने क्या
  1742. 1:25:56सुना है। तभी रजत ने अपने दांत पीसते हुए
  1743. 1:25:59सीधे ही पूछ लिया कि आपने शिप्रा की शादी
  1744. 1:26:02भिखारी से करवा दी। अरे हां लेकिन यह तो
  1745. 1:26:06खुशी की बात है ना। मैंने उससे तुम्हारी
  1746. 1:26:10बेइज्जती का ऐसा बदला लिया है कि जिंदगी
  1747. 1:26:12भर वो किसी को मुंह नहीं दिखा पाएगी। यह
  1748. 1:26:16कहते हुए मुख्तार के चेहरे पर गहरी
  1749. 1:26:18संतुष्टि का भाव झलक रहा था। मानो उसने
  1750. 1:26:20कोई बड़ा तीर मार दिया हो। इस पर रजत
  1751. 1:26:23झल्ला उठा और नाराजगी भरे शब्दों में
  1752. 1:26:25बोला,
  1753. 1:26:27यही तो नहीं करना था भाई। आपको सिर्फ उसकी
  1754. 1:26:29शादी होने नहीं देनी थी। मुझे उससे शादी
  1755. 1:26:32करनी थी। पर आपने क्या किया? उसकी शादी एक
  1756. 1:26:34भिखारी से करवा दी। हां। मुख्तार ने रजत
  1757. 1:26:37को ठंडे दिमाग से समझाते हुए कहा। देख
  1758. 1:26:40मेरे भाई यह मत भूल कि उसने सिर्फ
  1759. 1:26:43तुम्हारी ही नहीं बल्कि हमारी भी बेइज्जती
  1760. 1:26:46[संगीत]
  1761. 1:26:46की है। और ऐसी लड़कियों को घर की ज़ीनत
  1762. 1:26:49नहीं बनाया जाता। बाकी अगर तुम्हें ज्यादा
  1763. 1:26:52ही उस लड़की की चुल मची हुई है तो उसके
  1764. 1:26:55लिए और भी रास्ते हैं। जरूरी नहीं है कि
  1765. 1:26:59उससे शादी ही की जाए। इतना कहकर मुख्तार
  1766. 1:27:02एक पल के लिए रुका और राय परिवार द्वारा
  1767. 1:27:04की गई अपनी बेइज्जती को याद करते हुए
  1768. 1:27:07गंभीर लहजे में बोला,
  1769. 1:27:09मुझे उसके परिवार का घमंड तोड़ना था जिसके
  1770. 1:27:13लिए मुझे कुछ ऐसा करना जरूरी था। तुम्हें
  1771. 1:27:17याद नहीं है क्या? उसके परिवार को हमारे
  1772. 1:27:21परिवार से रिश्ता जोड़ने में उनकी इज्जत
  1773. 1:27:23पर आंच आ रही थी। अब जब एक भिखारी से उसकी
  1774. 1:27:27शादी हो गई है तो क्या इज्जत रह जाएगी उस
  1775. 1:27:29परिवार की? अब जब हर जगह उस परिवार की ही
  1776. 1:27:32चर्चा हो रही है तो उसका घमंड तो चूरचूर
  1777. 1:27:35होगा ना।
  1778. 1:27:37मुख्तार की बात सुनकर रजत के चेहरे पर अब
  1779. 1:27:40थोड़ी संतुष्टि के भाव थे। लेकिन तभी उसकी
  1780. 1:27:42आंखों में खतरनाक इरादे की चमक दिखाई देने
  1781. 1:27:44लगी और वो तुरंत बोला आप देख लेना। मैं उस
  1782. 1:27:48लड़की को ऐसे ही नहीं छोडूंगा। इस पर
  1783. 1:27:51मुख्तार ने उसे वक्त की नज़ाकत समझाते हुए
  1784. 1:27:53कहा अरे भाई तुम्हें जो भी करना है वो कर
  1785. 1:27:57लेना। लेकिन अभी कुछ दिनों तक शांत रहो।
  1786. 1:28:00कहीं ऐसा ना हो जाए कि अभी-अभी बेल पर
  1787. 1:28:03छूटे हो और फिर दोबारा जेल चले जाओ। रजत
  1788. 1:28:07को देखकर लग नहीं रहा था कि मुख्तार की
  1789. 1:28:09बात उसको समझ में आ रही है और तभी उसने
  1790. 1:28:11कुछ सोचा और ड्राइवर से गाड़ी रोकने का
  1791. 1:28:14आदेश दिया। अरे गाड़ी क्यों रुकवा रहे हो?
  1792. 1:28:17मुख्तार ने संशय भरे लहजे में पूछा तो रजत
  1793. 1:28:21अपने शरारती अंदाज में बोला क्या भाई
  1794. 1:28:24जानते हो ना कितने दिनों बाद जेल से छूटा
  1795. 1:28:26हूं। मुझे थोड़ा चेंज चाहिए। इस पर
  1796. 1:28:29मुख्तार ने उसे घूरते हुए चेतावनी दी।
  1797. 1:28:32ठीक है लेकिन ध्यान रखना अभी कुछ ऐसी वैसी
  1798. 1:28:36हरकत मत करना कि मुझे फिर से तुम्हारी बेल
  1799. 1:28:39के लिए धक्के खाने पड़े। टेंशन मत लो भाई
  1800. 1:28:42ऐसा कुछ नहीं होगा। इतना बोलकर रजत गाड़ी
  1801. 1:28:45से नीचे उतर गया। यहां राय साहब की हवेली
  1802. 1:28:48में शिप्रा की बात एक तरह से सबके मुंह पर
  1803. 1:28:51तमाचा ही थी। क्योंकि जब घर के बड़ों को
  1804. 1:28:54भी यह समझ नहीं आया कि वो शिप्रा के लिए
  1805. 1:28:56क्या निर्णय लें तब उन्होंने आसान रास्ता
  1806. 1:28:58अपनाया और अपना पल्ला झाड़कर शिप्रा पर ही
  1807. 1:29:01सब कुछ छोड़ दिया। वहीं बलवंत राय को भी
  1808. 1:29:03अपनी गलती का एहसास हुआ। जब उनको सबसे
  1809. 1:29:06ज्यादा मजबूत होना चाहिए था तब एक तरह से
  1810. 1:29:09उन्होंने भी गिव अप कर दिया था। इसलिए वो
  1811. 1:29:11पछतावे की गहरी भावना के साथ बोल उठे।
  1812. 1:29:14मुझे माफ करना मेरी बच्ची कि इस समय
  1813. 1:29:16तुम्हारी हालत क्या होगी। मैं सोच ही नहीं
  1814. 1:29:19पाया। जबकि मुझे सोचना चाहिए था कि हम
  1815. 1:29:22सबसे ज्यादा यह समय तुम्हारे लिए चुनौती
  1816. 1:29:24भरा है। इतना कहकर बलवंत राय ने बाकी घर
  1817. 1:29:27वालों की तरफ देखा और गंभीर आवाज में बोले
  1818. 1:29:30मैं इस मुद्दे पर बाकी घर वालों की राय भी
  1819. 1:29:32जानना चाहता हूं। इस पर जगताप ने कुछ
  1820. 1:29:36सोचते हुए कहा,
  1821. 1:29:38"मुझे लगता है कि हमें उस लड़के को अपने
  1822. 1:29:40घर में ले आना चाहिए और हालात को थोड़ा
  1823. 1:29:42नॉर्मल होने देने का इंतजार करना चाहिए।
  1824. 1:29:45जब लगेगा कि हालात अब ठीक है और बाहर
  1825. 1:29:48हमारे परिवार के बारे में बातें होनी अब
  1826. 1:29:50लगभग बंद हो गई है तो सही समय देखकर फिर
  1827. 1:29:54दोनों का तलाक करवा देंगे। इतना कहकर
  1828. 1:29:57जगताप बाकी घर वालों का चेहरा देखने लगा।
  1829. 1:29:59मानो अपनी बात पर सबकी सहमति चाहता हो।
  1830. 1:30:02खुद बलवंत राय भी जगताप की बात से संतुष्ट
  1831. 1:30:05दिखाई [संगीत] दिए। उन्हें भी लगा कि समय
  1832. 1:30:07यही सबसे अच्छा समाधान होगा। इसीलिए
  1833. 1:30:09उन्होंने सभी की ओर देखा और भारी आवाज में
  1834. 1:30:12सबकी राय जानने के लिए पूछा। तो बताओ
  1835. 1:30:15कौन-कौन जगताप की बातों से सहमत है? बाकी
  1836. 1:30:18घर वालों को कुछ समझ नहीं आया कि वो क्या
  1837. 1:30:20राय दें। इसीलिए उन्होंने भी जगताप की बात
  1838. 1:30:23का समर्थन कर दिया। लेकिन वहीं जब सरला ने
  1839. 1:30:26देखा कि कोई कुछ नहीं बोल रहा है तो उसने
  1840. 1:30:28अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए कहा तो क्या
  1841. 1:30:31अब एक भिखारी आकर हमारे घर में रहेगा?
  1842. 1:30:35सरला ने बोल तो दिया पर जब उसने बलवंत राय
  1843. 1:30:37का गुस्से में लाल चेहरा देखा तो उसने
  1844. 1:30:39अपनी नजर दूसरी तरफ फेर ली। राय परिवार के
  1845. 1:30:42सभी लोग जब एक निष्कर्ष पर पहुंच गए तो
  1846. 1:30:44बलवंत राय ने गंभीर लेकिन स्नेह भरी आवाज
  1847. 1:30:47में शिप्रा से कहा शिप्रा बेटा हम सबको
  1848. 1:30:50स्थिति में सबसे अच्छा उपाय यही नजर आ रहा
  1849. 1:30:52है लेकिन अगर तुम्हारे मन में भी कुछ है
  1850. 1:30:55तो तुम बता सकती हो शिप्रा को भी ज्यादा
  1851. 1:30:58कुछ नहीं सूझा वैसे भी उसने अब खुद को
  1852. 1:31:00तकदीर के हवाले कर दिया था इसीलिए वो
  1853. 1:31:03मायूसी से भरी थकी आवाज में बोली मेरी
  1854. 1:31:06किस्मत में आगे क्या लिखा है यह मुझे भी
  1855. 1:31:08नहीं पता पर शायद आप सबके हाथ में भी इससे
  1856. 1:31:10ज्यादा कुछ है नहीं जो आप कर सकते हैं।
  1857. 1:31:13इसलिए मुझे आप सब से कोई शिकायत नहीं है।
  1858. 1:31:16इस पर राजदीप राय ने अपनी बेटी शिप्रा का
  1859. 1:31:18हौसला बढ़ाते हुए कहा। कहते हैं गहरे
  1860. 1:31:21अंधकार के बाद एक खूबसूरत सवेरा होता है।
  1861. 1:31:23मुझे विश्वास है कि मेरी बेटी की जिंदगी
  1862. 1:31:25[संगीत] में भी वो सवेरा जल्दी ही आएगा।
  1863. 1:31:28फिर किसी अच्छे लड़के से जो तुम्हें पसंद
  1864. 1:31:30हो उससे तुम्हारी शादी कर देंगे। इतना
  1865. 1:31:33सुनते ही शिपरा झल्ला उठी और गुस्से से
  1866. 1:31:35भरी आवाज में बोली अब और कितनी शादी
  1867. 1:31:37करवाएंगे पापा? हो तो गई एक। आपको क्या
  1868. 1:31:40लगता है कि जिंदगी जीने के लिए किसी का
  1869. 1:31:42साथ होना जरूरी है? नहीं, मैं अकेले ही
  1870. 1:31:45अपनी जिंदगी जी सकती हूं। मुझे जिंदगी
  1871. 1:31:47जीने के लिए किसी के साथ की जरूरत नहीं
  1872. 1:31:49है। अब किसी और पर विश्वास कर पाना मेरे
  1873. 1:31:51लिए मुश्किल होगा। अब मैं अपने जीवन की
  1874. 1:31:53डोर किसी और के हाथ में नहीं दे सकती। और
  1875. 1:31:56आप आगे से मुझसे इस बात की अपेक्षा भी मत
  1876. 1:31:58कीजिएगा कि एक से तलाक लेने के बाद मैं
  1877. 1:32:00किसी और से शादी करूंगी। अगर आपकी यह शर्त
  1878. 1:32:03है कि शादी जरूरी ही है तो फिर तलाक कराने
  1879. 1:32:05की जरूरत ही नहीं है। इतना कहकर शिप्रा ने
  1880. 1:32:08अपनी मुट्ठियां भी ली। उसके अंदर भावनाओं
  1881. 1:32:11का एक सैलाब सा उमड़ रहा था जिसे वो ना
  1882. 1:32:13जाने कैसे काबू कर रही थी। सब ने शिप्रा
  1883. 1:32:16की बात को सुना पर किसी ने कुछ कहा नहीं।
  1884. 1:32:19यह स्वाभाविक भी था। क्योंकि एक तरह से
  1885. 1:32:21देखें तो अभी शिप्रा के जख्म इतने ताजा
  1886. 1:32:23हैं और तुरंत ही यह सब चर्चा भी शुरू हो
  1887. 1:32:25गई है। बलवंत राय को भी लगा कि यह वक्त यह
  1888. 1:32:28सब बातें करने का नहीं था कि शिप्रा के
  1889. 1:32:30लिए आगे क्या करना है। बल्कि यह समय तो बस
  1890. 1:32:33अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का
  1891. 1:32:35था। इसीलिए बलवंत राय ने गंभीर और
  1892. 1:32:38निर्णायक स्वर में कहा अब हम शिप्रा के
  1893. 1:32:41भविष्य को लेकर क्या करना है। इस पर बात
  1894. 1:32:44नहीं करेंगे। वो आगे देखेंगे कि भविष्य
  1895. 1:32:46हमसे क्या करवाता है। फिलहाल के लिए उस
  1896. 1:32:50लड़के को अपने घर लाओ और हालात के नॉर्मल
  1897. 1:32:52होने का इंतजार करो। लेकिन सरला देवी कहां
  1898. 1:32:55बाज आने वाली थी? उन्हें तो अपना ओपिनियन
  1899. 1:32:58देना ही था। इसीलिए वो एक बार फिर कटाक्ष
  1900. 1:33:00भरे शब्दों में बोल उठी। हे भगवन यही दिन
  1901. 1:33:04देखना बाकी रह गया था। अब एक भिखारी के
  1902. 1:33:06साथ रहना पड़ेगा। इस पर बलवंत राय तमतमा
  1903. 1:33:09उठे [संगीत] और तेज आवाज में बोले बहू तुम
  1904. 1:33:12अपनी बेहूदा बातें आखिर कब बंद करोगी?
  1905. 1:33:15लेकिन सरला ने अब भी अपनी जुबान को काबू
  1906. 1:33:18में नहीं किया और तंज भरे लहजे में बोली
  1907. 1:33:20अब मैंने क्या गलत बोल दिया? भिखारी को
  1908. 1:33:23भिखारी नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे?
  1909. 1:33:25मुझे तो उसको देखकर भी घिन आ रही थी। तभी
  1910. 1:33:28बलवंत राय ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए
  1911. 1:33:30कठोर आवाज में कहा, बहू एक बात गांठ बांध
  1912. 1:33:34लो। अगर वो लड़का भिखारी था भी तो आज के
  1913. 1:33:37बाद भिखारी नहीं रहेगा। हम खुद देखेंगे कि
  1914. 1:33:40उसे किसी काम में इनवॉल्व किया जाए। बलवंत
  1915. 1:33:43राय की बात सुनकर सरला देवी ने बुरा सा
  1916. 1:33:45मुंह बना लिया और उसी समय बृजभूषण राय
  1917. 1:33:48चिंतित आवाज में बोल उठे। पर पिताजी अभी
  1918. 1:33:50तो हमें यह भी नहीं पता कि वो भिख। पर
  1919. 1:33:52इतना कहते ही बृजभूषण का सामना अपने
  1920. 1:33:54पिताजी की लाल आंखों से हो गया और वह
  1921. 1:33:56तुरंत अपने कहने के तरीके को बदलते हुए
  1922. 1:33:58बोला वो वो मैं कह रहा था कि हमें तो यह
  1923. 1:34:02भी नहीं पता कि वह लड़का अब है कहां। तभी
  1924. 1:34:04राजदीप राय ने बात को संभालते हुए स्पष्ट
  1925. 1:34:07शब्दों में कहा, हां पिताजी जब शिप्रा
  1926. 1:34:09बेहोश होकर गिर गई थी तो हम सब उसी में लग
  1927. 1:34:12गए थे। शायद उसी समय वो लड़का यहां से चला
  1928. 1:34:15गया था। इस पर बलवंत राय खीज पड़े और अपने
  1929. 1:34:18दांत पीसते हुए बोले अरे तो गया कहां
  1930. 1:34:21होगा? यहीं कहीं आसपास ही होगा। ढूंढोगे
  1931. 1:34:23तो मिल ही जाएगा। और अगर कुछ लोगों को भी
  1932. 1:34:26लगाना पड़े तो लगा दो। पर उसे ढूंढ कर
  1933. 1:34:28लाओ। तभी राजदीप राय ने सिर हिलाते हुए
  1934. 1:34:32तुरंत कहा। ठीक है पिताजी मैं देखता हूं।
  1935. 1:34:35मैं कुछ लोगों को उसे ढूंढने में लगा देता
  1936. 1:34:37हूं। इस पर बलवंत राय ने खुद को शांत करते
  1937. 1:34:40हुए कहा
  1938. 1:34:42मुझे लगता है कि अब सब कुछ समझ में आ गया
  1939. 1:34:44होगा कि क्या करना है। इतना कहकर बलवंत
  1940. 1:34:47राय कुछ सोचने लगे और फिर गंभीर आवाज में
  1941. 1:34:49आगे बोले। और हां एक और बात जो मेरे दिमाग
  1942. 1:34:53में चल रही है। हमारे परिवार का समय कुछ
  1943. 1:34:55ठीक नहीं चल रहा है। खास करके शिप्रा का
  1944. 1:34:59ऐसा करते हैं कि कल शिप्रा को लेकर मंदिर
  1945. 1:35:01चलते हैं और उसके नाम से पूजा कराते हैं।
  1946. 1:35:04यह सुनते ही मीना जी तपाक से बोली। आप सही
  1947. 1:35:07कह रहे हैं पिताजी। मैं भी कुछ ऐसा ही चाह
  1948. 1:35:09रही थी। वहीं दूसरी तरफ मंदिर में शौर्य
  1949. 1:35:12भी सोकर उठा ही था। वह अब भी भिखारी के
  1950. 1:35:15भेष में ही था। तभी वहां पुजारी बाबा आए।
  1951. 1:35:18उनके साथ एक 20 21 साल की लड़की भी
  1952. 1:35:20[संगीत] थी जो पुजारी बाबा की पोती है।
  1953. 1:35:22शौर्य पहले भी मेघा से मिल चुका था। आखिर
  1954. 1:35:25परिवार के नाम पर पुजारी बाबा की एक पोती
  1955. 1:35:27ही तो है। असल में मेघा के माता-पिता की
  1956. 1:35:30मृत्यु 5 साल पहले एक सड़क दुर्घटना में
  1957. 1:35:32हो गई थी। जिसके बाद पुजारी बाबा ने ही
  1958. 1:35:34उसे पाला। अब किसी तरह मेघा मेडिकल की
  1959. 1:35:37पढ़ाई करने लगी है और अब वीकेंड्स पर यहां
  1960. 1:35:39आकर अपने बाबा से मिलती है। शौर्य ने देखा
  1961. 1:35:42कि आज मेघा के चेहरे पर परेशानी की लकीरें
  1962. 1:35:45हैं। खैर जब मेघा की नजर शौर्य से मिली तो
  1963. 1:35:48वो सादगी से बोली नमस्ते भैया नमस्ते
  1964. 1:35:51नमस्ते। शौर्य ने भी हल्की मुस्कान के साथ
  1965. 1:35:54जवाब दिया। यह सुनकर मेघा उसे आश्चर्य से
  1966. 1:35:57देखने लगी और फिर उत्सुकता से बोल उठी।
  1967. 1:35:59भैया बोल सकते हो? शौर्य ने मजाक करते हुए
  1968. 1:36:02जवाब दिया। हां, अभी दो दिन पहले मैं
  1969. 1:36:04घोड़ी से गिरा और मेरी आवाज वापस आई है।
  1970. 1:36:08अरे वाह, यह तो बहुत ही अच्छी बात है।
  1971. 1:36:10मेघा लगभग उछल पड़ी और [संगीत] फिर झेपते
  1972. 1:36:12हुए बोली, "मेरा मतलब आपकी आवाज वापस आ
  1973. 1:36:15गई। यह अच्छी बात है।" शौर्य हल्के से हंस
  1974. 1:36:18दिया। तुम बताओ तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल
  1975. 1:36:21रही है? शौर्य ने [संगीत] पूछा, तो मेघा
  1976. 1:36:23का चेहरा एक पल के लिए लटक गया। लेकिन फिर
  1977. 1:36:25वो मुस्कुराते हुए बोली, "पढ़ाई का क्या
  1978. 1:36:28है भैया? मैं सोच रही हूं कि कहीं जॉब कर
  1979. 1:36:30लूं। पर बाबा मानते ही नहीं। मेरी पढ़ाई
  1980. 1:36:33के चक्कर में इनका सब कुछ तो बिक गया। अब
  1981. 1:36:35एक रहा सहा घर बचा हुआ है। वो भी बेचना
  1982. 1:36:37चाहते हैं। [संगीत] इस पर पुजारी भावुक
  1983. 1:36:39उठे और तुरंत बोले, अरे पगली मेरे लिए
  1984. 1:36:43मेरी सबसे बड़ी संपत्ति तो तुम हो। वैसे
  1985. 1:36:46भी उस घर का क्या करना है जब मैं रहता तो
  1986. 1:36:48मंदिर में ही हूं। मेरा सपना तो तुम्हें
  1987. 1:36:51डॉक्टर बनते देखने का है। मेरे डॉक्टर
  1988. 1:36:54बनने के जुनून ने बाबा का सब कुछ बिकवा
  1989. 1:36:57दिया। इतना बोलते हुए मेघा की आंखें छलक
  1990. 1:36:59उठी। तभी शौर्य ने सांत्वना देते हुए कहा,
  1991. 1:37:03अरे पगली संपत्तियों का क्या है? जब तुम
  1992. 1:37:05डॉक्टर बन जाओगी तो जो चाहे अपने बाबा के
  1993. 1:37:08लिए खरीद लेना। इस पर मेघा ने मायूस होकर
  1994. 1:37:10कहा ऐसा नहीं है भैया एक वीक में मुझे ₹
  1995. 1:37:13लाख जमा करने होंगे। पता नहीं इतनी जल्दी
  1996. 1:37:16घर का सौदा हो पाएगा भैया या नहीं। और
  1997. 1:37:18उसके चक्कर में बाबा परेशान रहेंगे सो
  1998. 1:37:20अलग। इतना कहकर मेघा ने एक नजर अपने बाबा
  1999. 1:37:23को देखा और फिर शौर्य को देखते हुए आगे
  2000. 1:37:25बोली। मैं अपने बाबा को अपने लिए इतना
  2001. 1:37:28परेशान नहीं देख सकती। और फिर यह तो अभी
  2002. 1:37:31की बात है। मान लिया [संगीत] एक वीक में
  2003. 1:37:33इन्होंने पैसों का इंतजाम कर भी लिया।
  2004. 1:37:34लेकिन फिर 6 महीने के बाद 2 लाख और देने
  2005. 1:37:37पड़ेंगे। मेरे हॉस्टल में रहने का जो खर्च
  2006. 1:37:39होता है वो अलग से है। अब आप ही बताओ घर
  2007. 1:37:42बिकवाने से अच्छा यह नहीं है कि मैं कहीं
  2008. 1:37:44जॉब [संगीत] कर लूं।
  2009. 1:37:46यह कहकर मेघा शौर्य से अपनी बात का समर्थन
  2010. 1:37:48चाहती थी ताकि उसे अपने बाबा को कन्विंस
  2011. 1:37:50करने में आसानी हो। लेकिन पुजारी बाबा
  2012. 1:37:53पहले ही दृढ़ता से बोल उठे। अरे तुम पैसों
  2013. 1:37:56की चिंता मत करो। जैसे भी होगा मैं इंतजाम
  2014. 1:37:59कर लूंगा। [संगीत] चाहे उसके लिए मुझे
  2015. 1:38:02अपना खून भी क्यों ना बेचना पड़े। तुम्हें
  2016. 1:38:04बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना है। तुम बस
  2017. 1:38:07वो करो बाकी मुझ पर छोड़ दो। देख रहे हैं
  2018. 1:38:10भैया मैं कैसे बर्दाश्त कर सकती हूं कि
  2019. 1:38:13मेरे कारण मेरे बाबा को खून बेचने की नौबत
  2020. 1:38:15आ जाए। मेघा ने फिर से शौर्य से समर्थन की
  2021. 1:38:18उम्मीद में उसकी तरफ देखा। शौर्य ने हल्की
  2022. 1:38:21मुस्कान के साथ कहा। अच्छा तुम्हारी चिंता
  2023. 1:38:23यह है कि तुम्हारी वजह से बाबा को परेशानी
  2024. 1:38:25ना हो। मेघा उलझन भरी स्थिति में बोली हां
  2025. 1:38:29और क्या कारण होगा? इस पर शौर्य ने गहराई
  2026. 1:38:32से कहा अगर तुम्हारे बाबा को पैसों के लिए
  2027. 1:38:35परेशान ना होना पड़े तो तुम्हें कोई
  2028. 1:38:37दिक्कत नहीं है। मेघा को समझ नहीं आ रहा
  2029. 1:38:39था कि शौर्य ये बातें क्यों कर रहा है?
  2030. 1:38:41लेकिन फिर भी वो बोली फिर मुझे क्या
  2031. 1:38:44दिक्कत होगी भैया? पर ये संभव नहीं है।
  2032. 1:38:47अच्छा यह बताओ तुम्हारी पूरी पढ़ाई के
  2033. 1:38:48दौरान फीस, [संगीत] हॉस्टल और रहने खाने
  2034. 1:38:51का कुल खर्च कितना होगा? शौर्य ने पूछा।
  2035. 1:38:54मेघा को समझ नहीं आया कि वो क्यों पूछ रहा
  2036. 1:38:56है। यही सवाल पुजारी बाबा के मन में भी
  2037. 1:38:59था।
  2038. 1:39:01दोनों सेमेस्टर पूरे होते-होते कम से कम ₹
  2039. 1:39:04लाख खर्च होंगे भैया। मेघा ने थोड़ा हिसाब
  2040. 1:39:07लगाकर जवाब दिया। उसके लिए बहुत बड़ी रकम
  2041. 1:39:10है। लेकिन शौर्य ने दृढ़ स्वर में कहा।
  2042. 1:39:13ठीक है। तुम मुझे अपना अकाउंट नंबर दो।
  2043. 1:39:16मेघा अब भी उलझन में थी। अकाउंट नंबर
  2044. 1:39:20अकाउंट नंबर का क्या करेंगे भैया? तुम दो
  2045. 1:39:23तो सही। शौर्य ने फिर जोर देकर कहा, यह
  2046. 1:39:26सुनकर मेघांजस में अपने दादाजी की ओर
  2047. 1:39:29देखने लगी। पुजारी बाबा को भी कुछ समझ
  2048. 1:39:31नहीं आया। शौर्य के जोर देने पर मेघा ने
  2049. 1:39:34अकाउंट डिटेल्स दे दी। शौर्य ने पुजारी
  2050. 1:39:36बाबा से फोन लिया। लेकिन जब उसने कॉल
  2051. 1:39:39लगाने की कोशिश की तो कॉल नहीं लगा
  2052. 1:39:41क्योंकि बैलेंस खत्म हो चुका था। शौर्य को
  2053. 1:39:44याद आया कि एक रात पहले उसने इसी फोन से
  2054. 1:39:46एक आईएसडी कॉल की थी। शायद उसी में सारा
  2055. 1:39:49बैलेंस खत्म हो गया होगा। यह सोचकर उसे
  2056. 1:39:51पुजारी बाबा पर दया आई। उसने मेघा का फोन
  2057. 1:39:54लिया और कॉल लगाकर किसी से बात की। मेघा
  2058. 1:39:57को कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसे लगा जरूर
  2059. 1:40:00शौर्य उसके साथ मजाक कर रहा है। उससे रहा
  2060. 1:40:03नहीं गया और उसने संदेह जताते हुए पूछ ही
  2061. 1:40:05लिया। क्या भैया? आप मुझसे मजाक कर रहे
  2062. 1:40:08हैं। मेघा को यह भी याद था कि उसने तो 5
  2063. 1:40:11लाख की जरूरत बताई थी। लेकिन शौर्य ने
  2064. 1:40:14सामने वाले से 6 लाख भेजने को कहा। उसके
  2065. 1:40:17लिए तो यह बात अविश्वसनीय थी कि शौर्य के
  2066. 1:40:19पास इतने पैसे भी हो सकते हैं। शौर्य
  2067. 1:40:22मुस्कुराते हुए बोला बस 5 मिनट इंतजार कर
  2068. 1:40:25लो। फिर तुम्हें खुद समझ आ जाएगा कि मैं
  2069. 1:40:28कैसा मजाक कर रहा हूं। वहीं दूसरी तरफ
  2070. 1:40:31मुख्तार की गाड़ी से उतरने के बाद रजत
  2071. 1:40:33अपनी अय्याशू में डूबने के लिए अपने
  2072. 1:40:35फेवरेट ठिकाने पर आ पहुंचा था। नशे में
  2073. 1:40:37धुत उसने अपनी जेब से फोन निकाला और एक
  2074. 1:40:40नंबर डायल [संगीत] किया। थोड़े इंतजार के
  2075. 1:40:43बाद जब दूसरी तरफ से किसी ने फोन उठाया तो
  2076. 1:40:45रजत अपनी भारी आवाज में बोला हेलो बृजु
  2077. 1:40:49कहां हो तुम? दूसरी तरफ से एक चापलूसी भरी
  2078. 1:40:52आवाज आई। आपकी दी हुई ड्यूटी ही निभा रहा
  2079. 1:40:55हूं सर जी। इस पर रजत ने अपने होंठ गीले
  2080. 1:40:57करते हुए लालसा भरे शब्दों में कहा, "अरे
  2081. 1:41:00वाह! कहां है वो अभी?" अभी तो वो अपने घर
  2082. 1:41:04पर ही है भाई। बिरजू ने तुरंत जवाब दिया।
  2083. 1:41:08तभी रजत ने सख्त लहजे में हुक्म दिया।
  2084. 1:41:10[संगीत] ठीक है। जैसे ही वो घर से बाहर
  2085. 1:41:12निकले तुम सबसे पहले मुझे खबर करोगे। जी
  2086. 1:41:15बॉस जैसा आपका हुक्म। बीप की आवाज के साथ
  2087. 1:41:18मेघा के फोन पर नोटिफिकेशन आया। मैसेज
  2088. 1:41:21पढ़ते ही उसका मुंह खुला का खुला रह गया।
  2089. 1:41:24उसके अकाउंट में ₹ लाख क्रेडिट हुए थे। वो
  2090. 1:41:27कभी अपने मोबाइल को तो कभी शौर्य की तरफ
  2091. 1:41:30देख रही थी। उसे विश्वास नहीं हो रहा था
  2092. 1:41:33कि उसके सामने जो व्यक्ति बैठा है उसके
  2093. 1:41:35सिर्फ एक फोन कॉल पर ₹ लाख उसके अकाउंट
  2094. 1:41:38में आ सकते हैं। मेघा ने खुद को संयमित
  2095. 1:41:41किया और शौर्य के पास जाकर जिज्ञासु स्वर
  2096. 1:41:44में बोली कौन है आप? इस पर शौर्य ने कंधे
  2097. 1:41:48उचका के पूछा क्या मतलब हुआ इस सवाल का?
  2098. 1:41:52फिर शांत स्वर में बोला तुमने कहा था कि
  2099. 1:41:55अगर दादा जी को परेशानी नहीं होगी तो तुम
  2100. 1:41:57पढ़ाई तसल्ली से करोगी। अब तो तुम्हें कोई
  2101. 1:42:00समस्या नहीं होगी। मेघा ने अपनी जिज्ञासा
  2102. 1:42:04जाहिर की। वो तो मैं करूंगी भैया। पर मैं
  2103. 1:42:07यह जानना चाहती हूं कि आप कौन हैं और अगर
  2104. 1:42:09आपके पास इतने पैसे हैं तो आप इस तरह की
  2105. 1:42:11जिंदगी क्यों जी रहे हैं?
  2106. 1:42:14इस पर शौर्य मेघा की आंखों में झांकते हुए
  2107. 1:42:16बोला। क्या यह भी कोई कंडीशन है? जवाब में
  2108. 1:42:20शिप्रा ने प्यार भरी आवाज में कहा, नहीं
  2109. 1:42:22भैया, यह एक बहन की जिज्ञासा है जिसे वो
  2110. 1:42:25शांत करना चाहती है। पुजारी बाबा भी खुद
  2111. 1:42:28को रोक नहीं पाए और गंभीर स्वर में बोले,
  2112. 1:42:31हां बेटा मैं भी
  2113. 1:42:32[नाक से की जाने वाली आवाज़] जानना चाहता
  2114. 1:42:33हूं कि तुम्हारी ऐसी क्या मजबूरी है जो
  2115. 1:42:36तुम भिखारियों वाली जिंदगी जी रहे हो। इस
  2116. 1:42:39पर शौर्य ने शांत लेकिन विचारपूर्ण आवाज
  2117. 1:42:41में कहा। बाबा ऐसे कुछ हालात है कि मैं
  2118. 1:42:45अभी दुनिया के सामने आ नहीं सकता। इसीलिए
  2119. 1:42:48मेरे बारे में आप भी ना ही जाने तो ही ठीक
  2120. 1:42:50रहेगा।
  2121. 1:42:52शौर्य खुद को अभी दुनिया के सामने लाना
  2122. 1:42:54नहीं चाहता था। इसीलिए वह सोच रहा था कि
  2123. 1:42:56इन्हें बताना ठीक रहेगा या नहीं। पुजारी
  2124. 1:42:59बाबा भी शौर्य पर ज्यादा प्रेशर नहीं
  2125. 1:43:01डालना चाहते थे। वे स्नेहपूर्ण अंदाज में
  2126. 1:43:04बोले [संगीत]
  2127. 1:43:05अगर ऐसी बात है तो मैं तुम पर जोर नहीं
  2128. 1:43:08डालूंगा बेटे। पर मेघा के मन में कुछ और
  2129. 1:43:11[संगीत] ही चल रहा था। जब शौर्य ने देखा
  2130. 1:43:13कि मेघा कुछ बोल नहीं रही है तो उसने पूछा
  2131. 1:43:17तुम्हें क्या हुआ? तुम अचानक इतनी शांत
  2132. 1:43:19क्यों हो गई? मेघा किसी गहरी उलझन में थी।
  2133. 1:43:22वो बोली, मैं आपसे इतने ज्यादा पैसे नहीं
  2134. 1:43:25ले सकती हूं जब मुझे पता है कि मैं इतनी
  2135. 1:43:28जल्दी यह पैसे आपको वापस भी नहीं कर
  2136. 1:43:30पाऊंगी। पुजारी बाबा भी मेघा की बात का
  2137. 1:43:33समर्थन करते हुए बोले, हां बेटा, मेघा ठीक
  2138. 1:43:36कह रही है। हम तुम्हारा यह एहसान चुका
  2139. 1:43:39नहीं पाएंगे। शौर्य ने पुजारी बाबा की बात
  2140. 1:43:42काटते हुए दृढ़ता के साथ कहा, क्या बाबा
  2141. 1:43:45आप भी मेघा की बातों में आ रहे हैं? क्या
  2142. 1:43:47आपने एक भिखारी को मंदिर में जगह देकर
  2143. 1:43:49एहसान किया था? वैसे भी यह पैसे मैं कोई
  2144. 1:43:52उधार नहीं दे रहा हूं जो मुझे वापस चाहिए।
  2145. 1:43:55मैं यह पैसे अपनी बहन [संगीत] को उसकी
  2146. 1:43:57पढ़ाई पूरी करने के लिए दे रहा हूं।
  2147. 1:43:59पुजारी बाबा तपाक से बोले, पर बेटे
  2148. 1:44:03तुम्हारी खुद की हालत भी तो बहुत अच्छी
  2149. 1:44:05नहीं है। तुम्हें खुद भी तो पैसों की
  2150. 1:44:07जरूरत होगी। इस पर शौर्य बेफिक्री से बोला
  2151. 1:44:10अरे बाबा मेरी चिंता मत कीजिए यह पैसे
  2152. 1:44:13मेरे लिए कोई मायने नहीं रखते यह सुनकर
  2153. 1:44:16मेघा को बेहद आश्चर्य हुआ वो बोली क्या
  2154. 1:44:19भैया अगर आपके पास इतना ही पैसा है तो आप
  2155. 1:44:22यूं मुफलिसी की जिंदगी क्यों जी रहे हैं
  2156. 1:44:25इस पर शौर्य गंभीर लेकिन स्पष्ट आवाज में
  2157. 1:44:28बोला यही बात तो [संगीत] मैं अभी पब्लिक
  2158. 1:44:30नोटिस में नहीं लाना चाहता तुम बस यह जान
  2159. 1:44:32लो कि मेरे पास इतना पैसा है कि अगर मैं
  2160. 1:44:35दोनों हाथ से भी लुटाना शुरू कर दूं तो भी
  2161. 1:44:38अपना पैसा खत्म नहीं कर पाऊंगा। शौर्य के
  2162. 1:44:41मुंह से ऐसी बात सुनकर मेघा हैरान होकर
  2163. 1:44:43बोली, "भैया आपकी बातों और आपकी मुफलिसी
  2164. 1:44:46भरी जिंदगी में कोई सामंजस्य नहीं है। इस
  2165. 1:44:49पर शौर्य ने मेघा को समझाते हुए कहा,
  2166. 1:44:52"मेघा, तुम मेरे इस हुलिए पर मत जाओ"।"
  2167. 1:44:54"इसके पीछे एक लंबी कहानी है जो तुम्हें
  2168. 1:44:57समय के साथ ही पता चलेगी।" मेघा को अब भी
  2169. 1:45:00हिचक हो रही थी। यह देखकर शौर्य हौसला
  2170. 1:45:03देते हुए बोला, अब ज्यादा संकोच करने की
  2171. 1:45:06जरूरत नहीं है। तुम बस अपनी पढ़ाई पर
  2172. 1:45:08ध्यान दो और डॉक्टर बनकर अपने बाबा को
  2173. 1:45:11गौरव महसूस करवाओ। और हां, इसके अलावा भी
  2174. 1:45:15तुम्हें कभी किसी चीज की जरूरत हो तो बस
  2175. 1:45:17अपने भाई को याद कर लेना। शौर्य की इस बात
  2176. 1:45:20पर मेघा भावुक होकर बोली, "मुझे समझ नहीं
  2177. 1:45:23आ रहा है कि मैं आपका यह एहसान कैसे चुका
  2178. 1:45:26पाऊंगी।"
  2179. 1:45:27इस पर शौर्य शिकायती लेकिन प्यार भरे लहजे
  2180. 1:45:29में बोला लो फिर वही बात भाई बोलती हो और
  2181. 1:45:33फिर ऐसी बात करती हो क्या कोई भाई अपनी
  2182. 1:45:36बहन की मदद करके एहसान करता है अगर तुम
  2183. 1:45:39मुझे दिल से भैया कहती हो तो फिर कभी
  2184. 1:45:41दोबारा ऐसी बात मत कहना अचानक मेघा की
  2185. 1:45:44आंखें छलक आई वो भावुक होकर बोली बिल्कुल
  2186. 1:45:48नहीं भैया अब भूलकर भी मैं अपने भाई को
  2187. 1:45:50शिकायत का मौका नहीं दूंगी और मैं आपको
  2188. 1:45:53बेस्ट डॉक्टर बनकर दिखाऊंगी पुजारी ारी
  2189. 1:45:56बाबा भी दोनों का स्नेह देखकर अभिभूत हो
  2190. 1:45:58गए। उन्होंने शौर्य के सिर पर हाथ फेरते
  2191. 1:46:01हुए कहा, आज इतने वर्षों बाद भगवान ने
  2192. 1:46:05मुझे अपना आशीर्वाद दिया है। उन्होंने
  2193. 1:46:07तुम्हें मेरी परेशानी दूर करने के लिए
  2194. 1:46:10मेरे [संगीत] पास भेजा है। शौर्य मेघा को
  2195. 1:46:13प्यार से देखते हुए बोला, "अरे नहीं बाबा,
  2196. 1:46:17भगवान का आशीर्वाद तो मुझे मिला है जो
  2197. 1:46:19मुझे इतनी प्यारी बहन मिल गई।" अब कमरे का
  2198. 1:46:22माहौल थोड़ा बदल गया था। पुजारी बाबा के
  2199. 1:46:25चेहरे का रंग भी बदल चुका था। उनकी चिंता
  2200. 1:46:28अब दूर हो गई थी। मेघा भी अब खुश नजर आ
  2201. 1:46:31रही थी। आज उसे एक नया रिश्ता मिल गया था।
  2202. 1:46:35एक भाई मिल गया था। अब चलो। मैं तुम्हें
  2203. 1:46:38बाहर तक छोड़ आता हूं। शौर्य प्यार भरे
  2204. 1:46:41लहजे में बोला। कुछ देर बाद मंदिर की
  2205. 1:46:44सीढ़ियों के बाहर रोड पर शौर्य ने एक
  2206. 1:46:46रिक्शा रुकवाया और मेघा उसमें बैठकर चली
  2207. 1:46:49गई। शौर्य वापस मुड़ा और वापस मंदिर की ओर
  2208. 1:46:52हो लिया। अभी वो कुछ कदम ही आगे बढ़ा था
  2209. 1:46:55कि उसके पास से गुजरती हुई तीन कारें
  2210. 1:46:57मंदिर के सामने आकर रुकी। जैसे ही कार से
  2211. 1:47:00उतरने वाले लोगों पर शौर्य की नजर पड़ी
  2212. 1:47:02उसके कदम जहां के तहां ठहर गए। वो तुरंत
  2213. 1:47:05एक पेड़ की ओठ में चला गया और ध्यान से
  2214. 1:47:07उन्हें देखने लगा। शौर्य ने देखा कि उन
  2215. 1:47:10कारों में कुछ जाने पहचाने चेहरे मौजूद
  2216. 1:47:13हैं। सबसे पहली कार में ही उसे शिप्रा नजर
  2217. 1:47:16आ गई जो अपनी फैमिली के साथ आज मंदिर आई
  2218. 1:47:19है। पेड़ के पीछे छुपा शौर्य पूरी कोशिश
  2219. 1:47:21कर रहा था कि वो उनकी नजर से बचा रहे। फिर
  2220. 1:47:24जब शौर्य ने देखा कि शिप्रा की पूरी
  2221. 1:47:26फैमिली मंदिर की सीढ़ियां चढ़कर ऊपर चली
  2222. 1:47:28गई तो वह पेड़ के पीछे से बाहर आ गया। वो
  2223. 1:47:31सीधे पुजारी बाबा के कमरे में चले जाना
  2224. 1:47:33चाहता था ताकि शिप्रा और उसकी फैमिली की
  2225. 1:47:36नजर से ओझल रह सके। अभी वह यह सोच ही रहा
  2226. 1:47:39था कि तभी उसने देखा कि एक बाइक उसके पास
  2227. 1:47:42से गुजर कर शिप्रा की फैमिली की गाड़ियों
  2228. 1:47:44के पीछे खड़ी हो गई। वेशभूषा से ही बाइक
  2229. 1:47:47पर मौजूद दोनों लोग गुंडे मवालियों जैसे
  2230. 1:47:50लग रहे थे। शौर्य को दोनों का व्यवहार भी
  2231. 1:47:52थोड़ा अजीब लग रहा था। इसलिए वह चलता हुआ
  2232. 1:47:55उन गुंडों के करीब पहुंच गया ताकि उन
  2233. 1:47:57दोनों की बातें सुन सके। व दोनों मवालियों
  2234. 1:48:00का ध्यान अब भी मंदिर की सीढ़ियों की तरफ
  2235. 1:48:02ही था। और तभी उनमें से एक ने अपना फोन
  2236. 1:48:05निकाला और किसी को कॉल लगाया और धीमी आवाज
  2237. 1:48:08में बोला बॉस आपकी चिड़िया यहां मंदिर आई
  2238. 1:48:12हुई है। इस पर दूसरी तरफ से भी कुछ कहा
  2239. 1:48:15गया जिसके जवाब में वो फिर से बुदबुदाते
  2240. 1:48:18हुए बोला उसकी फैमिली के कुछ लोग भी उसके
  2241. 1:48:21साथ है बॉस। मंदिर में उन्हें थोड़ा समय
  2242. 1:48:24तो लगेगा ही। और जहां तक भीड़ का सवाल है
  2243. 1:48:27तो मंदिर है। लोग तो यहां आते-जाते ही
  2244. 1:48:29रहते हैं। पर इस समय यहां ज्यादा भीड़
  2245. 1:48:32नहीं है। इसके बाद वो गुंडा अपने बॉस की
  2246. 1:48:35योजना सुनने लगा और फिर चापलूसी भरे अंदाज
  2247. 1:48:37में बोला ठीक है बॉस आप जल्दी करना। मैं
  2248. 1:48:41यहीं पर आपका इंतजार करता हूं।
  2249. 1:48:43उसकी बात से शौर्य इतना तो समझ गया कि ये
  2250. 1:48:46सब शिप्रा के ही चक्कर में है और इन लोगों
  2251. 1:48:49का इरादा ठीक नहीं है और यह भी कि जिससे
  2252. 1:48:52भी यह बात कर रहा था वो कुछ ही देर में
  2253. 1:48:54आने वाला है। अब शौर्य विचार करने लगा कि
  2254. 1:48:57ऐसे में उसे क्या करना चाहिए। वो खुद उनके
  2255. 1:49:00सामने नहीं आना चाहता था। इसीलिए उसके
  2256. 1:49:03दिमाग में एक आईडिया आया और वो जल्दी से
  2257. 1:49:05भाग कर पुजारी बाबा के कमरे में पहुंच
  2258. 1:49:07गया। पुजारी बाबा खुद तो कमरे में नहीं थे
  2259. 1:49:10पर उनका मोबाइल चार्जिंग पर लगा हुआ था
  2260. 1:49:13जिसे उठाकर शौर्य ने झट से पुलिस को कॉल
  2261. 1:49:16कर दिया।
  2262. 1:49:19सर मैं बैकुंठपुर के मंदिर से बोल रहा हूं
  2263. 1:49:22यहां कुछ बुरा होने वाला है। शौर्य ने
  2264. 1:49:25गंभीर आवाज में कहा तो पुलिस अधिकारी ने
  2265. 1:49:27संदेह से भरी कड़क आवाज में पूछा क्यों
  2266. 1:49:30भाई क्या बुरा होने वाला है? इस पर शौर्य
  2267. 1:49:33ने जो देखा और सुना था वो पूरी बात पुलिस
  2268. 1:49:35अधिकारी को बता दी। शौर्य की बात पर पुलिस
  2269. 1:49:38अधिकारी ने उसे चेतावनी देते हुए कहा
  2270. 1:49:43अगर तुम्हारी बात गलत निकली तो समझ लेना
  2271. 1:49:45तुम्हारा हाल बहुत बुरा होगा। इस पर शौर्य
  2272. 1:49:48अपना बचाव करते हुए बोला मैं गलत क्यों
  2273. 1:49:50बोलूंगा सर? मैंने तो अभी-अभी जो देखा और
  2274. 1:49:53सुना बस वही बता रहा हूं। इसके बाद शौर्य
  2275. 1:49:57कमरे से बाहर निकला और उन मवालियों पर नजर
  2276. 1:49:59रखता हुआ पुलिस का इंतजार करने लगा। इधर
  2277. 1:50:02शिप्रा अपनी फैमिली के साथ मंदिर के अंदर
  2278. 1:50:05आ चुकी थी। इस वक्त शिप्रा के साथ बीना
  2279. 1:50:08जी, राजदीप राय, बलवंत राय, राहुल और घर
  2280. 1:50:11के कुछ और सदस्य भी मौजूद थे। बीना जी ने
  2281. 1:50:14पूजा का सामान पुजारी को देते हुए शिप्रा
  2282. 1:50:17के नाम से पूजा करने को कहा। पुजारी बाबा
  2283. 1:50:20ने पूजा की सामग्री ली और विधि अनुसार
  2284. 1:50:23शिप्रा के नाम से पूजा करने लगे। इस दौरान
  2285. 1:50:26वहां मौजूद परिवार के सभी लोग हाथ जोड़कर
  2286. 1:50:29भगवान से अपनी और अपने परिवार की रक्षा की
  2287. 1:50:31प्रार्थना कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ
  2288. 1:50:34शौर्य अब भी उन दोनों मवाली पर नजर रखे
  2289. 1:50:37हुए था। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, उसकी
  2290. 1:50:40बेचैनी बढ़ती जा रही थी और तभी दो
  2291. 1:50:43गाड़ियां उन मवालियों के पास आकर रुकी और
  2292. 1:50:46गाड़ी में से रजत बाहर आया। उसके साथ ही
  2293. 1:50:49कुछ और गुंडे भी गाड़ी से बाहर निकल आए।
  2294. 1:50:52अब तक शौर्य समझ रहा था कि आने वाला
  2295. 1:50:55व्यक्ति इन गुंडों का बॉस मुख्तार होगा।
  2296. 1:50:58पर यह तो कोई और ही है। वैसे तो शादी वाली
  2297. 1:51:01रात उसने रजत को नहीं देखा था। लेकिन उसके
  2298. 1:51:04हावभाव, पहनावे और एटीट्यूड को देखकर उसने
  2299. 1:51:08अंदाजा लगा लिया कि यह वही भाई है जिसके
  2300. 1:51:10लिए मुख्तार ने इतना बवाल कर दिया था।
  2301. 1:51:13शौर्य ने महसूस किया कि यह लोग पहुंच चुके
  2302. 1:51:15हैं और पुलिस का तो नामोनिशान ही नहीं है।
  2303. 1:51:18वो सच में खुद सामने नहीं आना चाह रहा था।
  2304. 1:51:21कहां है मेरी बुलबुल? गाड़ी से उतरने के
  2305. 1:51:24बाद रजत ने ऐठ कर पूछा तो बाइक वाले गुंडे
  2306. 1:51:27ने जवाब दिया बॉस अभी वो अंदर मंदिर में
  2307. 1:51:30ही है। रजत के चेहरे पर एक तिरछी मुस्कान
  2308. 1:51:33आ गई और वो एक्साइटेड होकर बोला तो देर
  2309. 1:51:36किस बात की है? चलो खेल शुरू किया जाए। आ
  2310. 1:51:39मेरी बुलबुल मुद्दतों बाद आज होगा दीदार।
  2311. 1:51:42तेरी हर अदा करती है मेरे सीने पर वार।
  2312. 1:51:45[हंसी]
  2313. 1:51:48लेकिन तभी उसके एक साथी ने थोड़ा
  2314. 1:51:50हिचकिचाते हुए पूछा। बॉस मंदिर के अंदर से
  2315. 1:51:53उसको उठाना सही रहेगा क्या? अबे तुम डर
  2316. 1:51:55किससे रहे हो बे? मेरे रहते किसकी हिम्मत
  2317. 1:51:57है जो हमारे काम में बाधा डाले? रजत ने रब
  2318. 1:52:00झाड़ते हुए कहा। इस पर उसका साथी उसे याद
  2319. 1:52:03दिलाते हुए बोला पर मुख्तार भाई ने तो कहा
  2320. 1:52:06था कि अभी कुछ दिनों तक पब्लिक प्लेस में
  2321. 1:52:08आप कुछ हरकत ना करें। भाई अगर कुछ ऊंचनीच
  2322. 1:52:11हो गई तो मुख्तार भाई को जवाब देना
  2323. 1:52:13मुश्किल हो जाएगा। इतना सुनते ही रजत ने
  2324. 1:52:16उस आदमी का गिरेबान पकड़ लिया और गुस्से
  2325. 1:52:18में दांत पीसते हुए बोला देख मैं बहुत
  2326. 1:52:21ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता जितनी जल्दी
  2327. 1:52:23हो सके उसे उठाओ और ले चलो यहां से अगर
  2328. 1:52:26कोई गड़बड़ होती है तो मैं देख लूंगा
  2329. 1:52:29लेकिन लेकिन बॉस एक बार मुख्तार भाई से
  2330. 1:52:32बात कर लें क्या मवाली ने हिचकिचाते हुए
  2331. 1:52:34कहा लेकिन रजत किसी की सुनने को तैयार ही
  2332. 1:52:37नहीं था मेरा कहना काफी नहीं है क्या
  2333. 1:52:40मैंने कहा ना भाई को मैं संभाल लूंगा और
  2334. 1:52:43अब अगर किसी किसी ने भी ना नुक की तो मैं
  2335. 1:52:46उसका भेजा यहीं खोल के रख दूंगा। रजत के
  2336. 1:52:48सर पर जुनून सवार था। जब पास में खड़े
  2337. 1:52:51शौर्य ने रजत और उसके साथियों की बातें
  2338. 1:52:53सुनी तो उसके दिल में शिप्रा के लिए
  2339. 1:52:55हमदर्दी का भाव पैदा हुआ। वो शिप्रा को हर
  2340. 1:52:58हाल में इस हैवान से बचाना चाहता था।
  2341. 1:53:00लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो सबके
  2342. 1:53:02सामने आए बिना रजत के प्लान पर पानी कैसे
  2343. 1:53:04फेर पाएगा। तभी अचानक उसे शिप्रा का मासूम
  2344. 1:53:08चेहरा याद आने लगा। कितनी मजबूर थी वो
  2345. 1:53:10शादी वाले दिन। और तभी शौर्य ने निर्णय
  2346. 1:53:13लिया कि वो अंतिम क्षण तक पुलिस का इंतजार
  2347. 1:53:15करेगा। लेकिन अगर कोई रास्ता ही नहीं बचा
  2348. 1:53:18तो वो शिप्रा के लिए सामने आने से भी नहीं
  2349. 1:53:20हिचकिचाएगा। मजबूरी में ही सही पर फिर
  2350. 1:53:23शिप्रा से उसकी शादी हो चुकी थी और पत्नी
  2351. 1:53:25की रक्षा करना पति का धर्म होता है। अब वो
  2352. 1:53:28शिप्रा को भगवान के भरोसे नहीं छोड़ सकता
  2353. 1:53:31था। [संगीत] व अब गुंडों ने रजत को कोई
  2354. 1:53:33नसीहत देने की जुर्रत नहीं की और वो सब भी
  2355. 1:53:36अपने बॉस के पीछे मंदिर की सीढ़ियां चढ़ने
  2356. 1:53:38लगे। शौर्य भी सावधानी के साथ उन सबके
  2357. 1:53:42पीछे हो लिया। वहीं मंदिर में पुजारी बाबा
  2358. 1:53:45पूजा की प्रक्रिया पूरी कर चुके थे। जिसके
  2359. 1:53:47बाद वो शांत स्वर में शिप्रा से बोले जाओ
  2360. 1:53:51बेटा मंदिर की परिक्रमा कर लो। [संगीत]
  2361. 1:53:54बीना जी ने भी शिप्रा से कहा हां बेटी तुम
  2362. 1:53:58परिक्रमा कर लो। हम भोग लगाकर और दान
  2363. 1:54:01दक्षिणा देकर आते हैं। राहुल तुम भी दीदी
  2364. 1:54:04के साथ जाओ। राहुल के साथ शिप्रा मंदिर से
  2365. 1:54:07बाहर आई और मुख्य मंदिर की परिक्रमा के
  2366. 1:54:10लिए बढ़ने लगी। जहां पहले से ही कई लोग
  2367. 1:54:12परिक्रमा कर रहे थे। राहुल ने अपना फोन
  2368. 1:54:15निकाला और मंदिर में लगी खूबसूरत
  2369. 1:54:16चित्रकारी की फोटो लेने लगा और अपनी ही
  2370. 1:54:19धुन में शिप्रा आगे बढ़ गई। सभी के साथ
  2371. 1:54:22शिप्रा भी हाथ जोड़कर भगवान का स्मरण करते
  2372. 1:54:24हुए सिर झुकाए मंदिर की परिक्रमा करने
  2373. 1:54:27लगी। अभी उसने एक ही चक्र पूरा किया था कि
  2374. 1:54:30उसने देखा कि कोई उसके सामने आकर खड़ा हो
  2375. 1:54:32गया था। सर झुकाए ही शिप्रा ने साइड से
  2376. 1:54:35निकलने की कोशिश की। लेकिन वो व्यक्ति फिर
  2377. 1:54:38से उसके सामने आ गया। ऐसा होने पर शिप्रा
  2378. 1:54:41को अजीब एहसास हुआ। उसने धीरे से सिर
  2379. 1:54:44उठाया और जैसे ही उसकी नजर सामने वाले
  2380. 1:54:47व्यक्ति पर पड़ी तो उसके शरीर में सेहरन
  2381. 1:54:49दौड़ गई। उसके सामने वो आदमी खड़ा था
  2382. 1:54:52जिसकी घटिया हरकतों का खामियाजा शिप्रा ने
  2383. 1:54:55भरा था। वासना से भरा रजत ललचाई आंखों से
  2384. 1:54:59शिप्रा को घूर रहा था। मारे घबराहट के
  2385. 1:55:02शिप्रा ने अटकते हुए लफ्जों में कहा तुम
  2386. 1:55:05तुम यहां क्या कर रहे हो?
  2387. 1:55:07इस पर रजत अपनी परिचित कुटिल मुस्कान के
  2388. 1:55:10साथ बोला सुना था शादी के बाद लड़कियां
  2389. 1:55:13अपने एक्स को भूल जाती हैं। लेकिन चलो
  2390. 1:55:15शुक्र है कि मैं तुम्हें याद तो हूं। जेल
  2391. 1:55:17में दिन रात मैं बस तुम्हें ही याद करता
  2392. 1:55:19था। कसम से बहुत याद किया। मेरा रास्ता
  2393. 1:55:23छोड़ो। शिप्रा ने दांत पीसते हुए कहा। इस
  2394. 1:55:27पर रजत ने व्यंग भरे शब्दों में कहा, "यह
  2395. 1:55:30लो छोड़ दिया।" इतना बोलकर रजत शिप्रा के
  2396. 1:55:32सामने से थोड़ा साइड हुआ। पर उसके पीछे
  2397. 1:55:35उसके बाकी के चमचे दीवार बनकर खड़े थे।
  2398. 1:55:37वहां मौजूद परिक्रमा कर रहे लोग जिन्होंने
  2399. 1:55:40यह मंजर देखा वो भी अपनी जगह खड़े हो गए।
  2400. 1:55:43क्योंकि रजब के गुंडों ने पूरा रास्ता ही
  2401. 1:55:45रोक दिया था। मंदिर की भौगोलिक स्थिति इस
  2402. 1:55:48प्रकार की थी कि यह मंदिर पहाड़ी नुमा
  2403. 1:55:50टीले पर स्थित था। जिसके सामने से
  2404. 1:55:53सीढ़ियां चढ़कर लोग ऊपर मंदिर में आते थे।
  2405. 1:55:56उसके बाद गोलाई में मंदिर के चारों तरफ
  2406. 1:55:58रेलिंग लगी हुई थी और रेलिंग के दूसरी तरफ
  2407. 1:56:00खाई थी जो कहीं-कहीं पर ज्यादा गहरी तो
  2408. 1:56:03कहीं कम गहरी थी। वहीं मंदिर की साइड में
  2409. 1:56:0612 से 15 फुट का गलियारा बना हुआ था जिस
  2410. 1:56:08पर लोग परिक्रमा करते थे। शिप्रा ने जब
  2411. 1:56:11देखा कि रजत के गुंडों ने पूरा रास्ता ही
  2412. 1:56:14जाम कर रखा था तो उसने रजत की तरफ पलट कर
  2413. 1:56:16पूछा। तुम आखिर चाहते क्या हो? इस पर रजत
  2414. 1:56:20ने तंज भरे स्वर में कहा। यह हुई ना बात।
  2415. 1:56:24अब किया ना तुमने सही क्वेश्चन? तो इसका
  2416. 1:56:26सीधा सा जवाब है कि मैं तुम्हें चाहता हूं
  2417. 1:56:29और एक तुम हो कि मुझे भाव ही नहीं देती।
  2418. 1:56:31अगर तुमने मेरे प्यार को ठुकराया ना होता
  2419. 1:56:33तो यह जो मैंने सुना है कि तुम्हारी शादी
  2420. 1:56:35एक भिखारी से हो गई है वो नहीं होती। कहते
  2421. 1:56:40हुए रजत जोर-जोर से हंसने लगा। अपनी बकवास
  2422. 1:56:43बंद करो और रास्ता छोड़ो मेरा। शिप्रा
  2423. 1:56:46झल्ला उठी। रजत की बातें उसका खून जला रही
  2424. 1:56:49थी लेकिन वो उसका कुछ कर भी तो नहीं सकती
  2425. 1:56:51थी। तभी रजत ने शिप्रा की तरफ एक कदम
  2426. 1:56:54बढ़ाया और उसे गुस्से में घूरते हुए बोला,
  2427. 1:56:56"तुम्हें क्या लगता है कि मैंने तुम्हारा
  2428. 1:56:58रास्ता छोड़ने के लिए रोका है? मुझसे ऐसी
  2429. 1:57:01उम्मीद करना बेवकूफी है। हमने तुम्हें
  2430. 1:57:04ऑप्शन दिया था मुझसे शादी करने का। पर अब
  2431. 1:57:07तो तुम एक भिखारी की पत्नी हो। हाय।
  2432. 1:57:11कहते हुए रजत ने अपने दिल पर हाथ रखा और
  2433. 1:57:13उसे सहलाते हुए किसी लफंगे की तरह बोला
  2434. 1:57:16हाय कमबख्त इस दिल का क्या जिसे अब भी
  2435. 1:57:20तुम्हें पाने की हसरत है साला तुम्हारे
  2436. 1:57:23चक्कर में तुम्हें जेल भी हो आया और
  2437. 1:57:25तुम्हें लगता है कि मैं इतनी आसानी से
  2438. 1:57:27तुम्हारा पीछा छोड़ दूंगा। रजत के घिनौने
  2439. 1:57:30इरादे भांप कर शिप्रा बेहद डर गई और जब
  2440. 1:57:33उसे कुछ समझ नहीं आया तो वह पलटी और तेजी
  2441. 1:57:35से वापस भागने लगी। रजत को उम्मीद नहीं थी
  2442. 1:57:38कि शिप्रा यूं फुर्ती दिखाएगी। वो तो अपनी
  2443. 1:57:41ही दीवानगी में डूबा हुआ था। फिर जब उसे
  2444. 1:57:43होश आया तो वो और उसके गुंडे भी तेजी से
  2445. 1:57:46शिप्रा के पीछे भागने लगे। अब चाहे शिप्रा
  2446. 1:57:48कितनी भी तेज क्यों ना हो उसकी स्पीड रजत
  2447. 1:57:51से तेज नहीं थी। जल्द ही रजत उसके पास
  2448. 1:57:53पहुंच गया और उसने पीछे से उसकी कलाई पकड़
  2449. 1:57:56ली। शिप्रा ने अपनी कलाई छुड़ाने की पूरी
  2450. 1:57:58कोशिश की। वो रजत की मजबूत पकड़ से आजाद
  2451. 1:58:01नहीं हो पा रही थी। यह हंगामा सुनकर जब
  2452. 1:58:04शिप्रा की फैमिली वाले गलियारे में पहुंचे
  2453. 1:58:06तो सामने का नजारा देखकर वे भी आवाक रह
  2454. 1:58:08गए। सब कुछ इतनी जल्दीबाजी में हुआ कि
  2455. 1:58:11किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या
  2456. 1:58:13करें। इधर जब शिप्रा को कोई रास्ता नहीं
  2457. 1:58:16सूझा तो उसने अपने दांत रजत के हाथ में
  2458. 1:58:18गड़ा दिए जिससे रजत को तेज चुभैन महसूस
  2459. 1:58:21हुई और उसकी पकड़ ढीली होते ही शिप्रा ने
  2460. 1:58:23उसे एक जोर का धक्का दे मारा जिससे रजत
  2461. 1:58:26तेजी से पीछे की ओर खड़े अपने ही गुंडों
  2462. 1:58:28पर गिर गया। रजत को बिल्कुल भी अंदाजा
  2463. 1:58:30नहीं था कि शिप्रा इस तरह से फाइट बैक
  2464. 1:58:32करेगी। ठीक से बैलेंस ना हो पाने के कारण
  2465. 1:58:35रजत की पीठ पर काफी चोट भी आई जिससे उसका
  2466. 1:58:38चेहरा गुस्से में लाल हो गया और अगले ही
  2467. 1:58:40पल उसने अपने एक साथी से हॉकी स्टिक छीनी
  2468. 1:58:43और शिप्रा को सबक सिखाने के लिए उसकी ओर
  2469. 1:58:46बढ़ गया। वहीं जब शिप्रा ने हॉकी स्टिक के
  2470. 1:58:49साथ रजत को अपनी ओर बढ़ते देखा तो वो अपनी
  2471. 1:58:51पूरी ताकत समेट कर फिर से मंदिर की
  2472. 1:58:53सीढ़ियों की तरफ भागने लगी। लेकिन आज रजत
  2473. 1:58:56किसी भी कीमत पर शिप्रा को छोड़ने वाला
  2474. 1:58:59नहीं था। वहीं मंदिर में मौजूद सभी लोग बस
  2475. 1:59:02तमाशबीन बने हुए थे। किसी की हिम्मत नहीं
  2476. 1:59:04हो रही थी कि उन गुंडों से शिप्रा को
  2477. 1:59:06बचाने की कोशिश करें। इधर शिप्रा बेसुध
  2478. 1:59:09होकर भाग ही रही थी कि तभी अपने ही
  2479. 1:59:12दुपट्टे में उलझकर वो मंदिर की सीढ़ियों
  2480. 1:59:14पर गिर पड़ी। उसी पल रजत मौका पाकर उसके
  2481. 1:59:17पास आ गया और दांत भीचते हुए बोला, तेरी
  2482. 1:59:20इतनी हिम्मत कि तूने मुझे धक्का दिया। अब
  2483. 1:59:24देख मैं तेरा क्या हाल करता हूं। इतना
  2484. 1:59:27कहकर रजत ने अपनी हॉकी स्टिक उठाई और तेजी
  2485. 1:59:29से शिप्रा के सिर की ओर घुमा दी। वहीं
  2486. 1:59:32जमीन पर पड़ी शिप्रा ने जब देखा कि अब
  2487. 1:59:34बचने का कोई रास्ता नहीं है तो उसने बस
  2488. 1:59:37जोर से अपनी आंखें बंद कर ली। वो समझ गई
  2489. 1:59:39कि अब उसका सिर फूटने से कोई नहीं बचा
  2490. 1:59:42सकता। पर यह क्या? आंखें बंद किए ही
  2491. 1:59:45शिप्रा ने महसूस किया कि हॉकी टकराने की
  2492. 1:59:47आवाज तो आ रही है पर उससे नहीं। यह कैसे
  2493. 1:59:50हो सकता है? इतना सोचकर शिप्रा ने अपनी
  2494. 1:59:53आंखें खोल ली और नजर उठाकर देखा तो पाया
  2495. 1:59:56कि कोई ढाल बनकर उसके ऊपर झुका है। वो जो
  2496. 1:59:59कोई भी था शिप्रा पर पड़ने वाली [संगीत]
  2497. 2:00:02सभी लाठियां वो अपनी पीठ के ऊपर ले रहा
  2498. 2:00:04था। शिप्रा समझ नहीं पाई कि यह कौन है जो
  2499. 2:00:07अपनी जान दांव पर लगाकर उसे बचाने के लिए
  2500. 2:00:09सामने आया है। इधर जब रजत ने उस व्यक्ति
  2501. 2:00:12को शिप्रा की ढाल बने देखा तो उसका हाथ
  2502. 2:00:14रुक गया। इधर डर से नीचे बैठ चुकी शिप्रा
  2503. 2:00:17के चेहरे पर खून की कुछ बूंदे गिरी तो
  2504. 2:00:20उसने सर उठाकर ढाल बने उस व्यक्ति को
  2505. 2:00:22ध्यान से देखा। उस व्यक्ति के चेहरे पर
  2506. 2:00:24नजर पड़ते ही शिप्रा की आंखें फैल गई। एक
  2507. 2:00:27पल के लिए तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास
  2508. 2:00:29ही नहीं हुआ। वो कल्पना भी नहीं कर सकती
  2509. 2:00:32थी कि ऐसे मौके पर यह इंसान उसकी रक्षा के
  2510. 2:00:34लिए आ जाएगा। जी हां, वो कोई और नहीं
  2511. 2:00:38शिप्रा का बेगर हस्बैंड शौर्य था। अब
  2512. 2:00:42शिप्रा ही नहीं वहां मौजूद हर इंसान हैरान
  2513. 2:00:45था कि इतने सब लोगों के बीच किसी ने एक
  2514. 2:00:47लड़की की इज्जत बचाने की हिम्मत की तो वो
  2515. 2:00:49भी एक भिखारी।
  2516. 2:00:52बलवंत राय भी वहां दूर से ही यह सब देख
  2517. 2:00:54रहे थे। यह सब इतनी जल्दी हुआ कि उन्हें
  2518. 2:00:56खुद कुछ करने का समय ही नहीं मिला। इधर
  2519. 2:00:59रजत ने जब शिप्रा के इस रक्षक को देखा तो
  2520. 2:01:02वो हैरान रह गया। खासतौर पर उसकी वेशभूषा
  2521. 2:01:05और स्थिति देखकर रजत एक पल के लिए भौचक्का
  2522. 2:01:08सा खड़ा रह गया। फिर उसने खुद को संभाला
  2523. 2:01:10और वहीं उपस्थित भीड़ पर तंज कसते हुए
  2524. 2:01:12कहा,
  2525. 2:01:14[हंसी]
  2526. 2:01:15कमाल है भाई। यहां इतने लोगों में अगर
  2527. 2:01:18किसी का जमीर जागा भी तो एक भिखारी का।
  2528. 2:01:22वहीं जब शौर्य ने देखा कि रजत ने हॉकी
  2529. 2:01:24स्टिक चलाना बंद कर दिया है तो वो अपनी
  2530. 2:01:26जगह पर खड़ा हुआ और पीछे पलटा। शौर्य सीधा
  2531. 2:01:29तो हो गया था पर वो शिप्रा के सामने से
  2532. 2:01:31नहीं हटा। अब शौर्य के सामने एक अजीब
  2533. 2:01:34स्थिति पैदा हो गई थी क्योंकि वो ना तो
  2534. 2:01:36शिप्रा को रजत के हाथों किडनैप होने दे
  2535. 2:01:38सकता था और ना ही रजत पर हमला करके वहां
  2536. 2:01:41सबका अटेंशन पा सकता था। आखिर यहां मौजूद
  2537. 2:01:44लोग एक भिखारी से इतनी ज्यादा बहादुरी की
  2538. 2:01:46उम्मीद नहीं कर सकते थे। ऐसे में अगर
  2539. 2:01:50शौर्य कोई हिरइक कारनामा कर देता तो वहां
  2540. 2:01:52मौजूद लोगों के लिए विश्वास करना मुश्किल
  2541. 2:01:54हो जाता कि शौर्य सच में कोई भिखारी है।
  2542. 2:01:57शौर्य यह बिल्कुल भी नहीं चाहता था कि
  2543. 2:01:59उसकी सच्चाई बाहर आए। और तभी रजत ने शौर्य
  2544. 2:02:03की बहादुरी का मजाक बनाते हुए कहा, "हे
  2545. 2:02:06भिखारी, मैं तेरी हिम्मत की दाद देता हूं
  2546. 2:02:09कि तूने इन तमाश मुर्दों को दिखाया कि बस
  2547. 2:02:12एक तेरे अंदर ही शेर जैसा दिल धड़क रहा
  2548. 2:02:14है। लेकिन हमारे सामने शेर बनने का कोई
  2549. 2:02:17फायदा नहीं। तू बेमौत मारा जाएगा। इसलिए
  2550. 2:02:20मेरा कहना मान और एक साइड खड़े होकर तू भी
  2551. 2:02:23बस इन लोगों की तरह तमाशा देख। क्या समझा?
  2552. 2:02:26शौर्य ने तो जैसे रजत की बातों पर कोई
  2553. 2:02:29ध्यान ही नहीं दिया। वो तो बस चाह रहा था
  2554. 2:02:31कि पुलिस जल्दी से आ जाए। वो मन ही मन
  2555. 2:02:34बोला मुझे लगा था पुलिस बस फिल्मों में ही
  2556. 2:02:37देर से आती है। कहां रह गए ये लोग? इधर जब
  2557. 2:02:40रजत ने शौर्य की तरफ से कोई भी एक्शन होते
  2558. 2:02:43हुए नहीं देखा तो कंधे उचकाते हुए बोला।
  2559. 2:02:45जब तू खुद अपनी मौत को दावत देना चाहता
  2560. 2:02:47है। तो अब मैं क्या ही कर सकता हूं। कहते
  2561. 2:02:51हुए रजत ने अपनी हॉकी स्टिक उठाई। वो
  2562. 2:02:53शौर्य पर वार करने ही वाला था कि तभी
  2563. 2:02:55शिप्रा का छोटा भाई राहुल बीच में आ गया
  2564. 2:02:57और उसने रजत की हॉकी स्टिक पकड़ ली। रजत
  2565. 2:03:01ने राहुल की इस हरकत को देखा तो उसने
  2566. 2:03:03घिन्न भरी नजरों से उसे घूरा और बोला अबे
  2567. 2:03:06यार अब इस चूजे के भी पर निकल आए। बेटा
  2568. 2:03:10छोड़ो इसे वरना लग जाएगी। कहते हुए रजत
  2569. 2:03:14जोर लगाकर हॉकी सिक्स छुड़वाना चाह रहा
  2570. 2:03:16था। लेकिन राहुल ने उसे मजबूती से पकड़
  2571. 2:03:19रखा था। तभी रजत ने गुस्से भरी आंखों से
  2572. 2:03:21अपने साथियों को देखा और चीख कर बोला,
  2573. 2:03:24कमबख्त देख क्या रहे हो तुम सब? हर चीज
  2574. 2:03:27तुम्हें बोलनी पड़ेगी क्या? पकड़ो इसे।
  2575. 2:03:30रजत का आदेश पाते ही उसके दो गुर्गे आगे
  2576. 2:03:32आए और उन्होंने राहुल को खींच कर उसे रजत
  2577. 2:03:35से अलग कर दिया। राहुल कसमसाता रहा। पर
  2578. 2:03:38रजत के गुर्गों ने उस पर कोई रहम नहीं
  2579. 2:03:40किया। अब रजत का टारगेट राहुल बन चुका था।
  2580. 2:03:43वहीं राहुल को रजत के दुर्गों में फंसा
  2581. 2:03:46देखकर शिप्रा की जान हलक में आ गई और वो
  2582. 2:03:49तेज आवाज में चिल्लाई। नहीं छोड़ो उसे
  2583. 2:03:52छोड़ दो मेरे भाई को। तो क्या होगा आगे?
  2584. 2:03:56क्या एक बार फिर राहुल को बलि का बकरा
  2585. 2:03:58बनाकर शिप्रा के साथ मनमानी की जाएगी या
  2586. 2:04:01इस बार शौर्य अपनी पहचान उजागर कर रजत को
  2587. 2:04:04सबक सिखाएगा? जानने के लिए सुनते रहिए।
  2588. 2:04:08बेगर हस्बैंड
  2589. 2:04:10[संगीत]

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