Ek Wafadar Gadha Or Gareeb Kisan Ki Insaaf Ki Kahani|Wafadar Gadha Kahani|Emotional Story Urdu| — Transcript
Full transcript
- 0:00रहमत नाम का एक गरीब किसान [संगीत] था। इस
- 0:02किसान के पास एक गधा था। लेकिन किसी को
- 0:05नहीं मालूम था कि यह गधा इंसानों की तरह
- 0:07बोल सकता है और इंसानों की तरह बात कर
- 0:09सकता है। एक रात गधे ने रहमत से ऐसी
- 0:11[संगीत] बात की जिसने उसकी जिंदगी ही बदल
- 0:13दी। रहमत तुम्हारे बाप का एक राज है। अगर
- 0:16यह राज गलत हाथों में चला गया तो [संगीत]
- 0:18वह ना सिर्फ तुम्हारी जमीन बल्कि पूरे
- 0:20गांव को बर्बाद कर सकता है। लेकिन रहमत को
- 0:22क्या मालूम था कि इस राज [संगीत] के पीछे
- 0:24दौलत, धोखे और अमानत की एक ऐसी कहानी छुपी
- 0:27है जो इसके माजी से जुड़ी हुई है। [संगीत]
- 0:29यह सदियों साल पुरानी बात है। एक छोटा सा
- 0:32गांव था जिसका नाम गुलस्तान था। गांव के
- 0:34बाहर बड़े-बड़े खजूरों के दरख्त और
- 0:36हरे-भरे खेत और दूर-दूर तक फैली हुई खुश
- 0:38पहाड़ियां नजर आती थी। इसी गांव [संगीत]
- 0:40में एक छोटे से कच्चे मकान के अंदर रहमत
- 0:43नाम का एक गरीब किसान अपनी बीवी ज़ैनब और
- 0:4510 साला बेटे अली के साथ रहता था। रहमत की
- 0:47उम्र 40 साल थी। इसका जिस्म मेहनत मशक्कत
- 0:50करके दुबला पतला हो चुका था। हाथों पर
- 0:52मेहनत की वजह से बने हुए छाले थे और उसके
- 0:55चेहरे पर वक्त से पहले पड़ी हुई झुर्रियां
- 0:56उसकी गुरबत की गवाही देती [संगीत] थी।
- 0:58इसके पास थोड़ी सी जमीन थी जिसके अंदर यह
- 1:01कभी कपास, कभी जौ और कभी सब्जियां उगाता
- 1:03था। ज्यादा जमीन नहीं थी, लेकिन फिर भी यह
- 1:06अल्लाह का शुक्र अदा करता था। वह अक्सर
- 1:08[संगीत] अपने बेटे से कहता था कि बेटा अली
- 1:10इंसान के पास रिज़्क ज्यादा हो या कम लेकिन
- 1:12उसे शुक्र नहीं छोड़ना चाहिए। हलाल की एक
- 1:15रोटी हराम की 100 रोटियों से ज्यादा बेहतर
- 1:17है। अली अपने बाप की बात को बड़े ध्यान से
- 1:19सुनता और हां में सर हिला देता। रहमत के
- 1:22घर में सबसे [संगीत] ज्यादा कीमती चीज कोई
- 1:23सोना चांदी नहीं थी बल्कि उसका गधा था
- 1:26जिसका नाम भूरा [संगीत] था। इस गधे का रंग
- 1:28ज्यादा गहरा भूरा था। इसके कान बड़े,
- 1:30आंखें फैली हुई और चाल [संगीत] मजबूत थी।
- 1:33रहमत ने इस गधे को कई साल पहले एक मुसाफिर
- 1:35से खरीदा था। यह गधा बाकी गधों से बहुत
- 1:38ज्यादा मुख्तलिफ था और बाकी गधों की
- 1:40निस्बत ज्यादा [संगीत] समझदार था। अगर
- 1:42रहमत खेत में हल चलाता तो यह उसके पास
- 1:44खड़ा रहता और उसका हौसला बढ़ाता। अगर रहमत
- 1:47लकड़ियां काटता तो यह लकड़ियों को पीठ पर
- 1:49उठा [संगीत] लेता। यहां तक कि जब रहमत थका
- 1:51हारा घर वापस आता तो भूरा इसके कंधे को
- 1:53छूता जैसे इसे तसल्ली दे रहा हो। और अली
- 1:56तो इस गधे [संगीत] को अपना दोस्त समझता
- 1:57था। वह उसके पास बैठकर उससे बातें करता।
- 2:00भूरे आज अब्बू बहुत ज्यादा थके हुए हैं।
- 2:02भूरा भी अपनी दुम [संगीत] हिला देता जैसे
- 2:04वह उसकी हां में हां मिला रहा हो। फिर अली
- 2:07हंसकर कहता भूरे तुम भी अब्बू की तरह बहुत
- 2:09ज्यादा मेहनत करते हो। भूरा जब यह सुनता
- 2:12तो खामोश हो जाता। एक दिन सुबह सवेरे रहमत
- 2:14[संगीत] खेत में जाने के लिए तैयार हुआ।
- 2:16इसने सर पर पटका बांधा हाथ में लाठी ली और
- 2:18अपनी बीवी ज़ैनब से कहने लगा कि आज फसल का
- 2:21आखिरी हिस्सा भी देखने जाना है। लेकिन
- 2:23ज़ैनब ने फिकरमंद [संगीत] होकर कहा कि आज
- 2:25घर में आटा भी बहुत कम है। रहमत ने जब यह
- 2:27सुना तो वह थोड़ा मायूस [संगीत] हो गया।
- 2:29फिर कुछ लम्हे सोचने के बाद कहने लगा कि
- 2:31हमारी फसल चंद दिनों में तैयार हो जाएगी।
- 2:34अल्लाह बेहतर करेगा। मैं बाजार जाऊंगा और
- 2:36आज के लिए कुछ [संगीत] अनाज उधार ले
- 2:38आऊंगा। ज़ैनब ने जब यह सुना तो वह थोड़ा
- 2:40परेशान होकर बोली उधार किससे मांगोगे?
- 2:42[संगीत] सलीम शाह से। सलीम शाह का नाम
- 2:44सुनकर रहमत का चेहरा थोड़ा संजीदा हो गया।
- 2:47[संगीत] सलीम शाह गांव का सबसे बड़ा ताजिर
- 2:49था। इसके बड़े-बड़े गोदाम थे और सैकड़ों
- 2:51थैले अनाज के पड़े रहते थे। लेकिन वो इतना
- 2:53मकरूर था कि किसी गरीब को एक मुट्ठी भर भी
- 2:56अनाज नहीं देता था। रहमत ने अपनी बीवी से
- 2:58कहा कि हां मैं कोशिश करूंगा कि किसी के
- 3:01ऊपर बोझ ना बनूं। रहमत ने भूरे को अपने
- 3:03साथ लिया और [संगीत] वह घर से निकल पड़ा।
- 3:05वह खेत की तरफ चलता हुआ जा रहा था। रास्ते
- 3:07में एक बूढ़ा आदमी बैठा था। यह हाजी करीम
- 3:10था जिसकी उम्र 65 साल थी। हाजी करीम ने जब
- 3:12रहमत को देखा तो मुस्कुरा [संगीत] कर कहा
- 3:14बेटा आज तुम बड़ी जल्दी निकल आए। रहमत ने
- 3:17कहा कि हां बाबा अगर गरीब देर से उठे तो
- 3:20उसके [संगीत] लिए नुकसानदेह होता है। जब
- 3:22हाजी करीम ने यह सुना तो वह मुस्कुरा कर
- 3:24बोले तुम्हारे मुंह से हमेशा [संगीत]
- 3:25सच्ची बात निकलती है। अल्लाह तुम्हारे
- 3:27रिज़्क में बरकत दे। रहमत ने आमीन कहा और
- 3:30इजाजत लेकर आगे बढ़ गया। थोड़ी देर चलने
- 3:32के बाद वह अपने खेत [संगीत] में पहुंच
- 3:34गया। अब सूरज बहुत ज्यादा तेज हो चुका था।
- 3:36रहमत ने खेत में काम शुरू कर दिया और भूरा
- 3:39एक तरफ बोझ उठाकर खड़ा रहा। जब दोपहर का
- 3:41वक्त हुआ तो रहमत बुरी तरह से पसीने में
- 3:44भीग गया। इसने गधे [संगीत] की तरफ देखा और
- 3:46कहा, चल भूरे दरख्त के नीचे आराम करते
- 3:48हैं। भूरा दरख्त के नीचे एक तरफ खड़ा हो
- 3:51गया। रहमत भी वहीं पर बैठ गया। रहमत ने
- 3:53अपनी जेब से रोटी का एक छोटा सा टुकड़ा
- 3:55निकाला। यह रोटी का टुकड़ा [संगीत] इतना
- 3:56छोटा था कि एक इंसान का पेट भी ना भरता।
- 3:59रहमत ने यह रोटी का टुकड़ा भूरे के आगे रख
- 4:01दिया और कहा, भूरे, तुम इसे खा लो। भूरा
- 4:04उस रोटी को कुछ देर तो देखता रहा, लेकिन
- 4:06उसने रोटी नहीं खाई। रहमत ने जब यह देखा,
- 4:09तो वह हैरान हो गया। भूरे, क्या हुआ? क्या
- 4:11तुम्हें भूख नहीं? भूरा खामोश रहा। रहमत
- 4:14ने रोटी उठाई और फिर उसके सामने रखते हुए
- 4:16कहा कि भूरे इसे खा लो। इसी लम्हे एक अजीब
- 4:19वाक्या [संगीत] पेश आया। भूरे ने अपना सर
- 4:21उठाया। रहमत की तरफ देखते हुए कहने लगा कि
- 4:23मुझे भूख नहीं इसे तुम खा लो। रहमत ने जब
- 4:26यह सुना तो [संगीत] उसके हाथ से रोटी छूट
- 4:28गई। वह वहीं पर बैठा रहा। उसकी आंखें ठहर
- 4:31गई। उसने समझा कि शायद उसे वहम हुआ है।
- 4:33[संगीत] उसने अपनी आंखें मली और फिर भूरे
- 4:35की तरफ देखते हुए कहने लगा। क्या तुमने
- 4:38कुछ कहा? भूरा खामोश रहा और कुछ नहीं
- 4:40बोला। रहमत का दिल जोर-जोर से [संगीत]
- 4:42धड़कने लगा और वह कहने लगा भूरे अगर तुमने
- 4:45कोई बात कही है तो तुम दोबारा से कहो।
- 4:47भूरा चंद लम्हे [संगीत] तो खामोश रहा। फिर
- 4:49अपना सर झुकाकर आहिस्ता से बोला मैंने यह
- 4:52कहा था कि पहले तुम खाना खा लो। तुम सुबह
- 4:54से भूखे हो। रहमत ने जब यह सुना [संगीत]
- 4:56तो उसके रोंगटे खड़े हो गए। वो अपनी जगह
- 4:58से खड़ा हुआ और दो कदम पीछे हट गया। फिर
- 5:01आसमान की तरफ देखकर बोला या अल्लाह यह
- 5:03क्या मामला है? भूरा उसकी तरफ देखता रहा।
- 5:06फिर बोला देखो रहमत डरो नहीं मैं तुम्हें
- 5:09नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा। रहमत की जुबान
- 5:11जैसे बंद [संगीत] हो गई थी। उसने कांपते
- 5:13हुए पूछा तुम तुम इंसानों की तरह बात कर
- 5:15सकते हो। भूरे ने कहा कि हां मैं बहुत
- 5:18अरसे पहले से बोल सकता हूं। रहमत ने कहा
- 5:20फिर पहले कभी तुमने मुझसे बात क्यों नहीं
- 5:22की? [संगीत] फिर भूरा बोला क्योंकि मुझे
- 5:24हुक्म दिया गया था कि जब तक वह वक्त ना आए
- 5:27तो मैं खामोश रहूं। रहमत ने हैरान होकर
- 5:29पूछा कि कौन सा वक्त? भूरे ने कुछ कहने की
- 5:32बजाय गांव की तरफ देखा और फिर बोला कि
- 5:34तुम्हारी जमीन, तुम्हारे खेत और तुम्हारे
- 5:36घर के बारे में एक ऐसा राज है जिसे तुम
- 5:39नहीं जानते। रहमत ने हैरान होकर पूछा कि
- 5:41कौन [संगीत] सा राज मुझे जल्दी बताओ। फिर
- 5:43भूरा बोला कि आज रात जब तुम्हारे घर में
- 5:46सब सो [संगीत] जाएं तो तुम अपने घर का
- 5:47पुराना संदूक खोलना। उसमें वो राज छुपा है
- 5:50जो तुम्हारे वालिद ने छुपा कर रखा था।
- 5:52रहमत ने जब यह सुना तो उसके पैरों तले से
- 5:54जमीन खिसक गई और उसके चेहरे का रंग बदल
- 5:56गया क्योंकि उसके बाप का इंतकाल हुए काफी
- 5:59अरसा गुजर गया था और वह पुराना संदूक
- 6:01[संगीत] वो तो घर में कई अरसे से बंद पड़ा
- 6:03था। रहमत ने फिर भूरे की तरफ देखा लेकिन
- 6:05भूरा [संगीत] खामोश हो चुका था जैसे कुछ
- 6:07हुआ ही ना हो। भूरा ऐसे खड़ा रहा। रहमत ने
- 6:10फिर आसमान की तरफ देखा [संगीत] और उस
- 6:12संदूक के बारे में सोचने लगा जैसे उसकी
- 6:14जिंदगी बदलने वाली हो। उस दिन [संगीत]
- 6:16रहमत खेत में तो मौजूद था लेकिन उसका ज़हन
- 6:18बार-बार उसी बात की तरफ जा रहा था जो भूरे
- 6:21ने बताई [संगीत] थी कि आज रात पुराना
- 6:22संदूक खोलना इसमें ऐसी चीज छुपी है जो
- 6:25तुम्हारे बाप ने तुमसे छुपाई [संगीत] हुई
- 6:26है। रहमत का इंतकाल तकरीबन कई साल पहले हो
- 6:29चुका था। वह बहुत सीधे-साधे इंसान थे।
- 6:31उन्होंने अपनी जिंदगी में हमेशा रहमत को
- 6:33नेक काम करने, [संगीत] किसी का हक ना
- 6:35मारने और हमेशा सच बोलने की तालीम दी थी।
- 6:38लेकिन उन्होंने कभी किसी राज या छुपे हुए
- 6:40खजाने का जिक्र नहीं किया था। रहमत ने
- 6:42दोबारा भूरे से पूछने की कई [संगीत] कोशिश
- 6:43की। लेकिन भूरा खामोश रहा। रहमत ने सोचा
- 6:46कि भूरा शायद किसी खास वजह से कुछ नहीं
- 6:48बताना चाहता। जब शाम ढलने लगी तो रहमत ने
- 6:51लकड़ियों का बोझ भूरे की पीठ पर रख दिया
- 6:53और घर की तरफ बढ़ने लगा। रास्ते में रहमत
- 6:55का सामना [संगीत] सलीम शाह से हुआ। सलीम
- 6:57अपने घोड़े पर सवार था और इसके साथ इसका
- 6:59भतीजा काशिफ भी था। सलीम शाह ने [संगीत]
- 7:01जब रहमत को देखा तो तंजी अंदाज में कहा,
- 7:04कहां जा रहे हो रहमत? आज फिर तुम खाली हाथ
- 7:06हो। रहमत ने कहा कि मैं खाली हाथ नहीं
- 7:09हूं। [संगीत] अल्लाह पाक ने मुझे दो हाथ
- 7:11दिए हैं। मेरे लिए यही काफी हैं। काशिफ जो
- 7:13सलीम शाह का [संगीत] भतीजा था वह भी
- 7:15मुस्कुरा कर बोला कि चाचा यह गरीब लोग भी
- 7:17अजीबोगरीब बातें [संगीत] करते हैं। फिर
- 7:19सलीम शाह कहने लगा कि देखो रहमत अगर
- 7:22तुम्हें अनाज चाहिए तो कल मेरे गोदाम पर आ
- 7:24जाना। [संगीत] लेकिन याद रखना कि उधार
- 7:26देने का मतलब मुफ्त देना नहीं होता। रहमत
- 7:28ने पूछा कि कितना वापस देना होगा। सलीम
- 7:31शाह ने अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरा और कहा कि
- 7:33जितनी मकदार अनाज की होगी उससे दुगनी।
- 7:36रहमत ने जब यह सुना तो वह खामोश हो गया
- 7:38क्योंकि यह कीमत बहुत ज्यादा थी लेकिन घर
- 7:40में आटा खत्म हो चुका था। इसने कुछ सोचते
- 7:43[संगीत] हुए कहा कि चलो मैं सोच कर
- 7:45बताऊंगा। सलीम शाह ने घोड़ा आगे बढ़ा
- 7:47लिया। जाते-जाते उसने रहमत के खेतों की
- 7:49तरफ देखा। इसके [संगीत] आंखों में एक अजीब
- 7:51सी चमक थी। जाते-जाते काशिफ ने कहा कि
- 7:54चाचा इसकी जमीन अच्छी है। सलीम शाह कहने
- 7:56लगा, हां, मैं जानता हूं। इसीलिए [संगीत]
- 7:58तो मैं इसे देख रहा हूं। रहमत ने उनकी बात
- 8:00नहीं सुनी। वह घर पहुंचा तो बीवी उसका
- 8:02इंतजार कर रही थी। आज इतनी देर [संगीत]
- 8:04क्यों हो गई? रहमत ने कुछ नहीं कहा। वह
- 8:06अपने गधे को लेकर अस्तबल में आ गया। उसे
- 8:09पानी पिलाया और उसके सामने खड़ा रहा। फिर
- 8:11उसने भूरे के सामने झुककर कहा कि भूरे जो
- 8:14बात तुमने बताई है क्या वह सच है? भूरा
- 8:16खामोश खड़ा रहा। रहमत ने फिर पूछा कि भूरे
- 8:19अगर तुम इंसानों की तरह बोल सकते हो तो
- 8:21मेरी बात का जवाब दो। भूरा कुछ लम्हे उसे
- 8:23देखता रहा। फिर आहिस्ता से बोला कि रहमत
- 8:26हर राज हर वक्त नहीं बताया जाता। फिर रहमत
- 8:28ने [संगीत] पूछा कि भूरे यह बताओ क्या
- 8:30मेरे वालिद भी उस राज के बारे में जानते
- 8:32थे? भूरा कहने [संगीत] लगा कि हां वो राज
- 8:35के बारे में सिर्फ जानते नहीं थे बल्कि वह
- 8:37उसकी हिफाजत भी करते थे। रहमत का दिल
- 8:39जोर-जोर [संगीत] से धड़कने लगा और फिर
- 8:41पूछा क्या मेरे वालिद साहब ने तुम्हें कुछ
- 8:43बताया था? लेकिन भूरे ने अपनी नजरें झुका
- 8:45ली। वो वक्त आने पर मुझे बताने ही वाले
- 8:47थे। लेकिन वक्त आने से पहले वह दुनिया से
- 8:49चले गए। रहमत ने फिर पूछा क्या तुम मेरे
- 8:52वालिद को जानते थे? भूरे ने हां में सर
- 8:54हिलाया और कहा कि हां मैं जानता था। रहमत
- 8:57खामोश हो [संगीत] गया। अब रहमत को यकीन हो
- 8:59गया था कि भूरा कोई आम गधा नहीं था। रात
- 9:01के वक्त सब ने हस्बे मामूल [संगीत] खाना
- 9:03खाया और अली भूरे के बारे में बातें करता
- 9:06रहा। अब्बू आज भूरा अजीब लग रहा था। वो
- 9:08जैसे किसी चीज के बारे में सोच रहा हो।
- 9:10रहमत ने चौंक कर अली की तरफ देखा और पूछा
- 9:13कि बेटा तुम्हें कैसे मालूम? अली ने कहा
- 9:16मुझे नहीं पता बस मुझे ऐसा महसूस हुआ।
- 9:18रहमत खामोश हो गया। जब रात के वक्त ज़ैनब
- 9:21और अली [संगीत] सो गए तो रहमत आहिस्ता से
- 9:22उठा। घर में एक पुराना संदूक रखा था। इस
- 9:25संदूक के ऊपर इतनी गर्द जमी हुई थी कि कई
- 9:27सालों से किसी ने हाथ [संगीत] भी नहीं
- 9:29लगाया था। रहमत आहिस्ता से उठा और चिराग
- 9:31लेकर वह संदूक के करीब जाकर बैठ गया। उसके
- 9:34हाथ कांप रहे थे। [संगीत] उसने वह पुराना
- 9:36ताला देखा जो संदूक पर लगा हुआ था। लेकिन
- 9:38वह ताला पुराना था। लेकिन अजीब बात यह
- 9:40[संगीत] थी कि उस ताले की चाबी के बारे
- 9:42में कोई नहीं जानता था। रहमत ने कई बार
- 9:44उसे तलाश किया लेकिन वह नहीं मिली। फिर
- 9:46अचानक रहमत को अपनी मां की बात याद आई।
- 9:49बचपन में उसकी मां ने कहा था कि तुम्हारे
- 9:51बाप ने एक ऐसी चाबी छुपा कर रखी है कि उसे
- 9:53कोई नहीं ढूंढ सकता। उस वक्त इस बात की
- 9:56समझ रहमत को नहीं आई। लेकिन आज वह उठा और
- 9:58घर की पुरानी लकड़ी [संगीत] की दीवार के
- 10:00पास गया। उसके अंदर एक छोटा सा सुराग था।
- 10:02रहमत उसके करीब जाकर बैठ गया। उसने अंदर
- 10:04उंगली [संगीत] डाली तो मिट्टी के साथ अंदर
- 10:06से एक लोहे की चाबी निकली। रहमत की आंखें
- 10:08हैरत के मारे खुल गई। फिर वह वापस उस
- 10:10संदूक [संगीत] के पास आया। ताले के अंदर
- 10:12चाबी लगाई तो ताला खुल गया। उसने आहिस्ता
- 10:15से संदूक का ढक्कन उठाया तो उसके अंदर कुछ
- 10:17पुराने कपड़े, कुछ कागजात और एक छोटी सी
- 10:19लकड़ी की डब्बी थी। रहमत ने सबसे पहले
- 10:21कागज बाहर निकाले। [संगीत] वह किसी जमीन
- 10:23के कागजात लग रहे थे। रहमत ने चिराग करीब
- 10:26किया और उन्हें पढ़ने की कोशिश की। हैरत
- 10:28के मारे रहमत की आंखें फटी की फटी रह
- 10:30[संगीत] गई क्योंकि कागजात के मुताबिक वह
- 10:32जमीन जिसके ऊपर रहमत खेती कर रहा था वो
- 10:34कभी उसके बाप के नाम [संगीत] थी। लेकिन
- 10:36रहमत के बाप ने उसे राज के तौर पर हमेशा
- 10:38छुपा कर रखा था। फिर रहमत ने वो लकड़ी की
- 10:40डिब्बिया खोली। [संगीत] उसके अंदर एक छोटी
- 10:42सी अंगूठी थी और एक छोटा सा कागज था। रहमत
- 10:44ने वह कागज उठाया। इसके ऊपर उसके बाप की
- 10:47एक तहरीर [संगीत] लिखी हुई थी कि बेटा
- 10:48रहमत अगर तुम इस खत को पढ़ रहे हो। तो
- 10:51जरूरी है कि अब तुम सारे राज को जान लो।
- 10:53[संगीत] तुम्हें इस जमीन की हिफाजत करना
- 10:55क्योंकि इस जमीन के अंदर सिर्फ हमारी
- 10:57मेहनत नहीं बल्कि एक राज की बात छुपी है।
- 10:59इसमें एक अमानत [संगीत] छुपी है। इसे किसी
- 11:01लालची इंसान के हाथ में ना जाने देना।
- 11:03रहमत का दिल जोर से धड़का। इसी सफे के
- 11:06अंदर नीचे कोने में लिखा हुआ था कि इस राज
- 11:08की दूसरी कुंजी तुम्हारे दोस्त के पास है।
- 11:10रहमत का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। रहमत
- 11:12[संगीत] ने वह कागज उठाया और वह अस्तबल की
- 11:14तरफ दौड़ा। वो भूरे के पास जाकर बोला,
- 11:16"तुम्हें सब मालूम है ना? भूरा खामोश रहा।
- 11:19फिर रहमत ने वह चांदी की अंगूठी उसके
- 11:21[संगीत] सामने रखी जो उसे संदूक के अंदर
- 11:23से मिली थी। भूरा अचानक पीछे हट गया। इसकी
- 11:25आंखों में खौफ नजर आया। रहमत ने पूछा
- 11:27[संगीत] कि क्या हुआ? पहली बार भूरे ने
- 11:29ऐसी आवाज में बात की जिसकी आवाज के अंदर
- 11:32खौफ मालूम होता [संगीत] था। भूरा आहिस्ता
- 11:34से बोला यह अंगूठी तुम्हारे वालिद की नहीं
- 11:36है। रहमत ने पूछा तो फिर यह किसकी है? फिर
- 11:39भूरे ने बताया कि यह अंगूठी उस आदमी की है
- 11:41जिसने तुम्हारे वालिद को तुमसे हमेशा दूर
- 11:43रखने की [संगीत] कोशिश की थी। रहमत ने
- 11:45पूछा कि वो शख्स कौन है? भूरे ने जवाब
- 11:48देने से पहले अस्तबल के दरवाजे की तरफ
- 11:50देखा। बाहर [संगीत] बिल्कुल खामोशी थी।
- 11:52कोई भी नहीं था। फिर भूरा आहिस्ता से बोला
- 11:54कि सलीम शाह के खानदान [संगीत] के साथ एक
- 11:56ऐसा राज जुड़ा हुआ है जो तुम्हारी जमीन के
- 11:58साथ ताल्लुक रखता है। रहमत के पैरों तले
- 12:00से जमीन खिसक गई। इसी लम्हे बाहर किसी चीज
- 12:02के गिरने की आवाज आई। जब रहमत ने देखा तो
- 12:05बाहर कोई नहीं था। लेकिन जमीन के ऊपर ताजा
- 12:07किसी के कदमों [संगीत] के निशान थे। लेकिन
- 12:09वह निशान उसके घर की तरफ जा रहे थे। रहमत
- 12:11ने भूरे की तरफ देखा तो भूरा कहने लगा कि
- 12:14रहमत हमें अब एहतियात से गम
- 12:16[संगीत]
- 12:16लेना होगा। रात के वक्त रहमत काफी देर
- 12:18अपने अस्तबल के साथ बैठा रहा। चांदनी रात
- 12:21थी और जमीन [संगीत] के ऊपर जो कदमों के
- 12:22निशान थे वो इस कदर साफ थे कि साफ मालूम
- 12:25होता था कि कुछ ही देर पहले यहां पर कोई
- 12:27खड़ा था। फिर रहमत आहिस्ता-आहिस्ता अपने
- 12:29मकान के अंदर आ गया। इसके ज़हन में एक
- 12:31[संगीत] ही सवाल था कि क्या संदूक का राज
- 12:33किसी ने सुन लिया था? उसने वह चांदी की
- 12:35अंगूठी एक कपड़े के अंदर लपेट कर उसी
- 12:36संदूक में रख दी और उस संदूक को किसी
- 12:39महफूज़ जगह पर छुपा कर रख दिया। रहमत फिर
- 12:41भूरे के पास गया और फिर कहने लगा कि सच-सच
- 12:43बताओ क्या सलीम शाह इस राज के बारे में
- 12:45जानता है? भूरा कुछ देर खामोश रहा। फिर
- 12:48बोला सलीम शाह को पूरा राज नहीं मालूम
- 12:50लेकिन वह तुम्हारी जमीन को हासिल करना
- 12:52चाहता है। सलीम शाह को मालूम है कि
- 12:54तुम्हारे वालिद साहब ने कोई चीज छुपा कर
- 12:56रखी थी। रहमत ने हैरान होकर पूछा लेकिन
- 12:58उसे कैसे मालूम हुआ? भूरा कहने लगा
- 13:00क्योंकि तुम्हारे वालिद साहब [संगीत] के
- 13:02इंतकाल से पहले एक आदमी उसे मिलने आया था।
- 13:04वो शख्स सलीम शाह के खानदान से ताल्लुक
- 13:06रखता था। रहमत हैरान रह गया। उसने पूछा कि
- 13:09वह आदमी कौन था? भोरा ने सर झुका लिया और
- 13:12कहने लगा यह राज तुम्हें खुद मालूम करना
- 13:14होगा। रहमत ने बेबसी से कहा कि तुम हर बात
- 13:17अधूरी क्यों बताते हो? भूरा कहने लगा
- 13:19क्योंकि हर बात मैं अगर एक साथ बता दूं तो
- 13:21शायद [संगीत] तुम उस सच को संभाल ना सको।
- 13:23रहमत ने एक गहरी सांस ली। लेकिन इस रात वह
- 13:25सो ना सका। जब सुबह हुई तो खिड़की [संगीत]
- 13:28के अंदर से सूरज की रोशनी अंदर आने लगी।
- 13:30ज़ैनब ने रहमत के चेहरे की तरफ देखा तो
- 13:32पूछा क्या तुम रात भर [संगीत] सोए नहीं?
- 13:34क्योंकि उसकी आंखों के नीचे थकन के आसार
- 13:36थे। रहमत ने बात छुपाने की कोशिश की और
- 13:38कहा कि बस कुछ जमीन की फिक्र थी। फिर ज़ैनब
- 13:41करीब आई और उसके चेहरे को गौर से देखा।
- 13:44[संगीत] ज़ैनब ने कहा कि रहमत तुम मुझसे
- 13:46कुछ छुपा रहे हो। लेकिन रहमत ने भूरे का
- 13:48यह राज छुपा कर रखा [संगीत] क्योंकि वह
- 13:49जानता था कि यह अजीब राज हर एक से छुपा कर
- 13:52रखना जरूरी है। इसी लम्हे बाहर से किसी की
- 13:54आवाज आई। रहमत [संगीत] जब रहमत बाहर निकला
- 13:57सामने सलीम शाह खड़ा था वह कहने लगा मैं
- 13:59तुम्हें कल की बात याद करवाने के लिए आया
- 14:01हूं तुम्हें अनाज की जरूरत [संगीत] थी ना
- 14:03रहमत कहने लगा कि हां मुझे अनाज की जरूरत
- 14:07थी लेकिन मैं सोच रहा हूं कि अपने अनाज
- 14:09तैयार होने तक मैं गुजारा कर लूं। सलीम
- 14:11शाह ने [संगीत] यह सुना तो वह हंस पड़ा और
- 14:13कहने लगा कि गरीब आदमी पर इतना गुरूर
- 14:15अच्छा नहीं लगता। रहमत ने इत्मीनान से कहा
- 14:17कि यह गुरूर नहीं सलीम शाह मैं सिर्फ किसी
- 14:19का एहसान नहीं लेना चाहता। काशिफ ने फौरन
- 14:22कहा कि चाचा इसे कहें कि अगर यह जमीन
- 14:24[संगीत] को बेच सकता है तो इसका फौरन मसला
- 14:26हल हो सकता है। रहमत ने जब यह सुना तो
- 14:29रहमत [संगीत] चौंक गया और बोला कि मैं
- 14:31अपनी जमीन को क्यों बेचूं? काशिफ कहने लगा
- 14:33क्योंकि तुम्हारी जमीन [संगीत] की कीमत
- 14:35अच्छी खासी तुम्हें मिलेगी। रहमत ने कहा
- 14:37कि यह जमीन मेरे बाप की निशानी है। मैं
- 14:39इसे कभी नहीं बेचूंगा। सलीम ने पहली बार
- 14:41अपनी मुस्कुराहट [संगीत] को दूर किया और
- 14:43कहा कि रहमत कभी-कभी जिद इंसान को बहुत
- 14:46महंगी पड़ती है। फिर वह दोनों वहां से चले
- 14:48गए। रहमत [संगीत] काफी देर तक दूर तक
- 14:50उन्हें जाते हुए देखता रहा। फिर उसके ज़हन
- 14:52में भूरे की आवाज गूंजने लगी कि सलीम शाह
- 14:54तुम्हारी जमीन को हड़पना चाहता है। उस दिन
- 14:56जब रहमत खेत में काम के लिए गया तो उसने
- 14:58एक अजीब चीज देखी। जमीन के अंदर मिट्टी
- 15:00खुदी हुई थी। जब रहमत ने करीब जाकर देखा
- 15:03तो उसके अंदर से एक पुराना पत्थर [संगीत]
- 15:04निकला हुआ था। इस पत्थर के ऊपर एक
- 15:06अजीबोगरीब निशान बना हुआ था। यह वही निशान
- 15:09था जो उस अंगूठी के ऊपर बना हुआ था। रहमत
- 15:11ने फौरन भूरे [संगीत] को बुलाया। भूरा
- 15:13करीब आया। उसने निशान को गौर से देखा और
- 15:15खामोश हो गया। रहमत ने पूछा, यही वह निशान
- 15:18है ना? भूरे ने हां में सर हिलाया। फिर
- 15:21रहमत ने मिट्टी हटाना शुरू की। कुछ ही देर
- 15:23में उसे लकड़ी का एक छोटा सा संदूक मिला।
- 15:25वह संदूक [संगीत] मिट्टी और नमी की वजह से
- 15:27खराब हो चुका था। रहमत ने उसे खोला तो
- 15:29उसके अंदर कपड़े के अंदर लिपटी [संगीत]
- 15:31हुई एक पुरानी किताब थी। किताब बहुत
- 15:32ज्यादा पुरानी थी। रहमत ने पहला सफा खोला।
- 15:35ऊपर लिखा हुआ था इमानत का हिसाब। रहमत के
- 15:38हाथ कांपने लगे। क्योंकि इसके अंदर गांव
- 15:40के [संगीत] कई लोगों के नाम लिखे थे। किसी
- 15:42नाम के साथ पैसों का जिक्र था। किसी नाम
- 15:44के साथ जमीन का और किसी के नाम कर्ज का।
- 15:47अचानक रहमत की नजर एक नाम के ऊपर रुक गई।
- 15:49सलीम [संगीत] शाह के वालिद रहमत ने भूरे
- 15:51की तरफ चौंक कर देखा। भूरा कहने लगा, यही
- 15:54वजह है कि वह तुम्हारी जमीन को हड़पना
- 15:56चाहता है। फिर रहमत ने तेजी से उस किताब
- 15:58के सफात को पलटना शुरू किया। आखिर में एक
- 16:00तहरीर लिखी हुई थी कि अगर यह किताब किसी
- 16:02गलत हाथों में चली गई, तो बहुत से
- 16:04[संगीत]
- 16:04लोगों की जमीनें खतरे में पड़ सकती हैं।
- 16:06इसलिए उस शख्स के पास रखना जो लालच से दूर
- 16:09हो। रहमत ने किताब को बंद कर दिया। अब उसे
- 16:12[संगीत] आहिस्ता-आहिस्ता समझ आने लगा था
- 16:13कि उसके बाप ने यह राज क्यों छुपाया था।
- 16:15यह सिर्फ उसके बाप की जमीन का [संगीत]
- 16:17मामला नहीं था बल्कि यह पूरे गांव की जमीन
- 16:19का मामला था। रहमत को नहीं मालूम था। दूर
- 16:22दरख्तों के पीछे काशिफ छुप कर इसकी तरफ
- 16:24देख रहा था। काशिफ जल्दी से अपने चाचा
- 16:25सलीम शाह के पास पहुंच गया और कहने लगा कि
- 16:28चाचा मुझे वह चीज मिल [संगीत] गई जिसे हम
- 16:30बरसों से तलाश कर रहे थे। सलीम ने चौंक कर
- 16:32पूछा कि वो क्या? काशिफ [संगीत] ने कहा कि
- 16:34वह पुरानी किताब। जब सलीम ने यह सुना तो
- 16:37उसके चेहरे का रंग बदल गया और वह कहने लगा
- 16:39क्या तुम्हें यकीन है? क्या तुमने अपनी
- 16:41आंखों से देखा है? सलीम कुछ [संगीत] देर
- 16:43सोचने लगा। फिर काशिफ से कहने लगा कि चाहे
- 16:45जो मर्जी हो जाए वो किताब हमारे हाथों में
- 16:47आनी चाहिए। काशिफ [संगीत] कहने लगा कि अगर
- 16:49रहमत ने वो किताब काजी के हवाले कर दी तो
- 16:52सलीम शाह कहने लगा कि तब हमारा सारा
- 16:54मंसूबा मिट्टी [संगीत] में मिल जाएगा। उसी
- 16:56रात रहमत ने यह किताब गांव के एक बुजुर्ग
- 16:58आदमी को दिखाने का फैसला [संगीत] किया। उस
- 17:00बुजुर्ग का नाम हाजी करीम था। रात के वक्त
- 17:03रहमत उस किताब को एक कपड़े के अंदर लपेट
- 17:05कर हाजी करीम के पास पहुंच गया। हाजी करीम
- 17:07ने जब यह किताब देखी तो उसका चेहरा बदल
- 17:10गया और पूछा कि रहमत तुम्हें यह किताब
- 17:12कहां से मिली? [संगीत] रहमत ने सारी बात
- 17:14बता दी। हाजी करीम ने किताब का एक सफा
- 17:16पढ़ा और कहने लगा कि बेटा रहमत मैं
- 17:18तुम्हारे बाप को जानता था। वह कभी किसी का
- 17:21हक नहीं मारते थे। फिर [संगीत] उस बुजुर्ग
- 17:22ने बताया कि बेटा रहमत तुम्हारे बाप ने
- 17:25कहा था कि अगर तुम्हें यह कभी किताब मिले
- 17:27तो तुम काजी के पास ले जाना। रहमत ने हैरत
- 17:29से उस बूढ़े आदमी की तरफ देखा और कहा कि
- 17:32काजी अब्दुल्ला हाजी करीम ने सर हिलाया और
- 17:34कहा कि हां यह किताब सिर्फ तुम्हारी
- 17:36[संगीत] जमीन के साथ नहीं बल्कि पूरे गांव
- 17:38के हक के साथ जुड़ी हुई है। रहमत ने यह
- 17:40फैसला किया कि वह सुबह सवेरे ही काजी के
- 17:42पास जाएगा। लेकिन इसी रात एक और वाकया पेश
- 17:45आया। जब रहमत अपने घर वापस आया तो इसने
- 17:47देखा कि घर का दरवाजा खुला हुआ है। जब वह
- 17:50अंदर दाखिल हुआ तो वह हैरान रह गया
- 17:52क्योंकि इसने [संगीत] देखा कि संदूक खुला
- 17:54हुआ है लेकिन वह अपनी जगह पर मौजूद है।
- 17:56रहमत ने जल्दी से आगे बढ़कर संदूक का
- 17:58ढक्कन खोला। [संगीत] अंदर अंगूठी मौजूद थी
- 18:00लेकिन वो किताबें वहां से गायब थी। रहमत
- 18:02के जिस्म के अंदर सनसनी दौड़ गई। वह जल्दी
- 18:04से भूरे के पास गया। भूरा हैरत के मारे
- 18:07जमीन को सूंघ रहा था। रहमत ने भूरे से
- 18:09पूछा [संगीत] कि वो किताब कहां गई? भूरे
- 18:11ने दरवाजे की तरफ देखा और कहा कि जिस आदमी
- 18:14ने किताब [संगीत] चुराई है वह अभी गांव से
- 18:16बाहर नहीं गया। रहमत ने पूछा कि तुम्हें
- 18:18कैसे मालूम? भूरा कहने लगा कि जमीन
- 18:20[संगीत] के ऊपर देखो जो निशान छपे हुए हैं
- 18:22वो आदमी एक गलती कर गया है। उसके जूते की
- 18:25एड़ी टूटी [संगीत] हुई है। फिर रहमत ने
- 18:27पूछा कि आखिर यह आदमी है कौन? भूरे ने कहा
- 18:30कि यह आदमी वही है जो आज खेत में मौजूद
- 18:32[संगीत] था और तुम्हें छुप कर देख रहा था।
- 18:34रहमत ने गौर से वह जूते का निशान देखा।
- 18:36रहमत की आंखों के सामने फौरन काशिफ का
- 18:38चेहरा आ गया। फिर अचानक इसने दरवाजे के
- 18:40ऊपर दस्तक दी और आवाज दी। रहमत दरवाजा
- 18:43खोलो। यह काजी अब्दुल्ला की आवाज थी। रहमत
- 18:45हैरान रह गया कि काजी इतनी रात कैच के घर
- 18:48पे क्यों आए हैं और [संगीत] सबसे हैरत की
- 18:50बात तो यह थी कि काजी के हाथ में वही
- 18:52पुरानी किताबें थी जो अब्दुल्ला के संदूक
- 18:54के [संगीत] अंदर से गायब हुई थी। रात काफी
- 18:56गुजर चुकी थी। घरों के दरवाजे बंद थे और
- 18:58आसमान के ऊपर चांद चमक रहा था। रहमत ने जब
- 19:01दरवाजा खोल कर देखा तो सामने काजी
- 19:03अब्दुल्ला थे और [संगीत] उनके हाथ में वही
- 19:05किताब मौजूद थी जो कुछ देर पहले उसके घर
- 19:07से कुछ चुरा के ले गया था। रहमत हैरत के
- 19:09मारे उस किताब की तरफ देखता रह गया और
- 19:11काजी से पूछा कि काजी साहब यह किताब आपके
- 19:14पास कैसे आई? काजी उसके मकान [संगीत] के
- 19:16अंदर दाखिल हो गया और कहा तुम्हें यह सवाल
- 19:18जरूर करना चाहिए था। लेकिन पहले तुम
- 19:20दरवाजे को बंद करो। रहमत ने फौरन दरवाजे
- 19:23को बंद किया। अब ज़ैनब और अली भी जाग चुके
- 19:25थे। काजी ने यह किताब रहमत के सामने रखी
- 19:27और बताया। मुझे [संगीत] यह किताब गांव के
- 19:29एक चौराहे पर मिली। रहमत ने हैरान होकर
- 19:31पूछा, क्या आपने चोर को देखा? काजी ने
- 19:34कहा, कि नहीं? लेकिन किताब जिस जगह पर
- 19:36पड़ी थी, वहां चोर के कदमों [संगीत] के
- 19:37निशान थे। रहमत का ध्यान फौरन काशिफ की
- 19:40तरफ गया। काजी ने रहमत के चेहरे की तरफ
- 19:42[संगीत] गौर से देखा और कहा, "तुम किसी के
- 19:44ऊपर शक कर रहे हो।" अभी रहमत कुछ कहने ही
- 19:46वाला था। रहमत सलीम शाह और काशिफ का नाम
- 19:49लेना चाहता था। लेकिन इसके पास अभी कोई
- 19:51सबूत नहीं था।" [संगीत] रहमत कहने लगा,
- 19:53"मुझे शक तो है, लेकिन सबूत के बगैर मैं
- 19:55किसी पर इल्जाम नहीं लगाना चाहता।"
- 19:57[संगीत] काजी ने जब यह सुना तो उसके चेहरे
- 19:59पर एक मुस्कुराहट फैल गई। यही बात तुम्हें
- 20:01दूसरों से मुख्तलिफ बनाती है। फिर रहमत ने
- 20:03पूछा [संगीत] लेकिन यह किताब आप तक पहुंची
- 20:05कैसे? काजी कहने लगा कि मुझे हाजी
- 20:07अब्दुल्ला ने बताया था कि तुम्हारे पास एक
- 20:09किताब आई है। पुरानी है और उसके अंदर राज
- 20:12छुपा हुआ है। जब मैं रात को तुम्हारे घर
- 20:14की तरफ आ रहा था तो चौराहे के ऊपर मैंने
- 20:16एक आदमी को तेजी से जाते हुए देखा। वो
- 20:18मुझे देखकर घबरा गया और किताब को जमीन पर
- 20:20गिराकर वहां से गायब हो गया। रहमत ने
- 20:22पूछा, क्या आपने उसका चेहरा देखा? काजी ने
- 20:25कहा कि नहीं मैं उसका चेहरा गौर से नहीं
- 20:27देख सका लेकिन मैंने किताब उठा ली थी।
- 20:30रहमत ने एक गहरी [संगीत] सांस ली। फिर
- 20:31काजी ने बताया कि यह किताब पढ़ने के बाद
- 20:34मालूम हो चुका है कि तुम्हारे बाप ने बहुत
- 20:36बड़ी अमानत छुपा कर रखी थी। रहमत खामोश हो
- 20:39गया। फिर काजी ने किताब खोली और रहमत के
- 20:41सामने रखकर [संगीत] कहने लगा देखो यहां पर
- 20:43कई लोगों की जमीनों का जिक्र है। उन लोगों
- 20:45से नाजायज [संगीत] कर्ज लिया गया था। फिर
- 20:47उन लोगों से जबरदस्ती जमीनें नाम करवाई गई
- 20:50थी। रहमत ने हैरान होकर पूछा [संगीत] कि
- 20:52किसने काजी अब्दुल्ला ने किसी का नाम नहीं
- 20:54लिया लेकिन इशारा दिया सलीम शाह के वालिद
- 20:56रहमत के दिल की धड़कन तेज हो गई। फिर काजी
- 20:59ने कहा कि हमें जल्दी नहीं करनी चाहिए।
- 21:01हमारे पास अभी सबूत नहीं है। सिर्फ एक
- 21:03किताब सबूत के तौर [संगीत] पर मौजूद है।
- 21:05हमें और भी ज्यादा सबूत इकट्ठा करने
- 21:07होंगे। इसी वक्त भोरे की आवाज आई। रहमत
- 21:10घबरा गया। काजी [संगीत] ने पूछा कि यह गधा
- 21:12इतनी रात को क्यों आवाज कर रहा है? रहमत
- 21:14ने फौरन बात को बदलने की कोशिश की। शायद
- 21:17किसी जानवर को देख लिया होगा। रहमत कुछ
- 21:19देर तो उस गधे की तरफ देखते रहे। फिर वह
- 21:21खामोश हो गए। लेकिन भूरा जानता था कि वक्त
- 21:24काफी तेजी से गुजर रहा है। जब रात के
- 21:26पिछले पहर काजी जाने लगे तो उन्होंने रहमत
- 21:28से कहा कि मेरे पास जरूर आना। और यह किताब
- 21:31किसी के सामने [संगीत] मत खोलना। रहमत ने
- 21:33वादा किया और जब काजी वहां से चले गए तो
- 21:35रहमत फौरन अस्तबल के अंदर पहुंच गया। भूरे
- 21:37ने रहमत को देखते ही कहा, "तुमने अच्छा
- 21:39किया [संगीत] कि तुमने काजी को सब कुछ बता
- 21:41दिया।" रहमत ने पूछा, क्या तुमने सब कुछ
- 21:44सुन लिया?" भूरा कहने लगा कि मैं तुम्हारी
- 21:46हर बात को सुनता हूं। फिर रहमत ने पूछा
- 21:48[संगीत] क्या तुम जानते हो कि किताब किसने
- 21:50चुराई थी? भूरा कुछ देर तो सोचने लगा। फिर
- 21:53कहने लगा कि मुझे शक है। रहमत ने पूछा किस
- 21:55पर? भूरे ने बताया कि काशिफ पर। रहमत कहने
- 21:58लगा कि मुझे भी काशिफ पर शक है। लेकिन फिर
- 22:01भूरे ने कहा कि सिर्फ शक काफी नहीं है।
- 22:04सुबह होते ही रहमत [संगीत] काजी अब्दुल्ला
- 22:05के पास पहुंच गया। काजी ने रहमत से कहा कि
- 22:08मुझे वह किताब अच्छी तरह से पढ़नी होगी
- 22:10ताकि मुझे पता चल सके कि इसके अंदर
- 22:12किस-किस की जमीन [संगीत] मौजूद है और अगर
- 22:14सलीम शाह के वालिद ने नाजायज किसी की जमीन
- 22:16पर कब्जा किया है तो हमें उन
- 22:18[संगीत]
- 22:18लोगों को ढूंढना होगा। रहमत ने कहा कि अगर
- 22:20सलीम शाह इन किताबों को झूठा करार दे दे।
- 22:23फिर काजी कहने लगा इसीलिए [संगीत] हमें
- 22:25दूसरा सबूत तलाश करना होगा। इसी दौरान
- 22:27रहमत ने वह चांदी की अंगूठी निकाली और
- 22:29काजी को दिखाई। [संगीत] काजी ने अंगूठी को
- 22:31हाथ में लिया और उसके ऊपर देखा कि एक
- 22:33पुराना निशान बना हुआ है। काजी कहने लगा
- 22:36कि यह निशान तो काफी पुराना है। रहमत कहने
- 22:38लगा क्या आप इस निशान को पहचानते [संगीत]
- 22:40हैं? काजी ने कहा कि हां यह किसी पुराने
- 22:43तजारती खानदान की मोहर है। रहमत ने हैरान
- 22:45होकर पूछा कि किस खानदान [संगीत] की? फिर
- 22:48काजी ने बताया कि यही मोहर किसी दौर में
- 22:50सलीम शाह के दादा इस्तेमाल करते थे। रहमत
- 22:53के लिए यह बात बहुत अहम थी। लेकिन काजी ने
- 22:55कहा कि मुझे तुम्हारे वालिद की मौत से
- 22:57पहले के हालात जानना होंगे। रहमत खामोश हो
- 23:00गया और फिर रहमत को अपने बाप की वह आखिरी
- 23:02रात याद आई जिसमें रहमत के बाप ने रहमत का
- 23:04हाथ पकड़ कर कहा था कि [संगीत] बेटा अगर
- 23:06तुम्हारी जमीन के बदले में कोई बहुत
- 23:08ज्यादा दौलत दे तो तुम इंकार कर देना जमीन
- 23:10[संगीत] सिर्फ मिट्टी नहीं बल्कि रहमत
- 23:12होती है। इस वक्त तक रहमत ने इस बात को
- 23:14बहुत आम [संगीत] समझा था। अब सलीम को इस
- 23:16बात की असल अहमियत की समझ आ रही थी और उसी
- 23:19दिन सलीम शाह को भी इस बात का पता चल गया
- 23:21था कि वह किताब काजी अब्दुल्ला तक पहुंच
- 23:23गई है। वो गुस्से में कांप [संगीत] उठा।
- 23:24इसने काशिफ को अपने पास बुलाया और कहा
- 23:27तुमने तो कहा था कि किताब हमारे हाथ लग गई
- 23:29है। काशिफ ने सर झुका लिया और कहा कि चाचा
- 23:32मैं उसे ले आया था लेकिन सामने रास्ते के
- 23:34अंदर काजी अब्दुल्ला आ गए। सलीम [संगीत]
- 23:36शाह गुस्से में आ गया और कहने लगा तुमसे
- 23:38इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई? फिर काशी कहने
- 23:41लगा [संगीत] कि अभी बात मुकम्मल नहीं हुई
- 23:43क्योंकि किताब के अंदर अभी बहुत सारे सबूत
- 23:45बाकी हैं। सलीम शाह चौंक [संगीत] कर बोला
- 23:47क्या मतलब? काशी ने कहा मैंने देखा था कि
- 23:50रहमत के संदूक के अंदर [संगीत] और भी काफी
- 23:51सारी चीजें मौजूद थी। सलीम शाह ने हुक्म
- 23:54दिया कि आज रात दोबारा उसके घर में जाओ।
- 23:56काशिफ कहने लगा [संगीत] अगर वह जाग रहा
- 23:58हुआ तो सलीम शाह कहने लगा तो उसे खौफजुदा
- 24:00करना और उसे डराधमका [संगीत] देना ताकि
- 24:02उसे पता चले कि अमीरों के मामले में दखल
- 24:05नहीं देना चाहिए। इधर रहमत को नहीं मालूम
- 24:07था कि इसके खिलाफ [संगीत] साजिशें रची जा
- 24:09रही हैं। वो घर पहुंचा तो भूरा अली के पास
- 24:11बैठा था। अली ने रहमत से कहा कि अब्बू
- 24:14[संगीत] आज भूरा मुझे अजीब बात बता रहा
- 24:16था। रहमत का दिल धक से रह गया। उसने पूछा
- 24:18कि क्या बात? अली [संगीत] ने बताया कि
- 24:20अब्बू भूरा कह रहा था कि आज रात पिछले
- 24:23दरवाजे के ऊपर नजर रखना। रहमत ने भूरे की
- 24:25तरफ देखा। भूरा खामोश खड़ा [संगीत] था।
- 24:27रहमत ने फिर पूछा क्या आज लोग वह दोबारा
- 24:30वापस आएंगे? भूरा कहने लगा कि हां आज
- 24:32काशिफ आएगा। रहमत कहने लगा [संगीत] आज हम
- 24:35उसे पकड़ सकते हैं। भूरा कहने लगा कि
- 24:37नहीं। रहमत ने पूछा क्यों? भूरे ने बताया
- 24:40क्योंकि आज वह अकेला नहीं आएगा। आज रात
- 24:42रहमत ने घर के सारे दरवाजे बंद किए। ज़ैनब
- 24:45और अली को एक तरफ बंद कर दिया और खुद
- 24:47इंतजार करने लगा। कुछ देर गुजरने [संगीत]
- 24:49के बाद आधी रात के करीब एक आवाज आई।
- 24:51किश्ठी ने दीवार फलांी। कोई शख्स अंदर
- 24:53आया। फिर दूसरा शख्स अंदर आया। रहमत ने
- 24:56अपनी सांस [संगीत] रोक ली। एक साया रहमत
- 24:58के कमरे की तरफ बढ़ने लगा। भूरा अचानक
- 25:00ढीचू करने लगा। साया डर के मारे पीछे हट
- 25:02गया। रहमत [संगीत] ने जैसे ही चिराग को
- 25:04रोशन किया तो सामने काशिफ खड़ा था। लेकिन
- 25:06उसके हाथ में खंजर था। उसने कहा कि
- 25:09[संगीत] पीछे हटो रहमत। रहमत ने कहा
- 25:11तुम्हें किताब मिल चुकी थी। लेकिन तुम
- 25:13दोबारा क्यों आए हो? काशिफ ने दांत भीचे
- 25:15और वह संदूक की तरफ [संगीत] देखकर बोला
- 25:17हमें किताब नहीं चाहिए। हमें वह चीज चाहिए
- 25:19जिसे तुम्हारे बाप ने किताब से भी ज्यादा
- 25:21अहमियत दी थी। अचानक भोरा आगे बढ़ा और
- 25:23पहली बार वो काशिफ के सामने बोला जिस चीज
- 25:26को तुम ढूंढ रहे हो तुम्हें वह कभी नहीं
- 25:28[संगीत] मिलेगी। जब काशिफ ने यह सुना तो
- 25:30उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई और उसके
- 25:32हाथ से खंजर तकरीबन [संगीत] गिर गया। वो
- 25:34कांपती हुई आवाज में बोला यह यह गधा कैसे
- 25:37बोल रहा है? काशिफ भी हैरान था कि यह
- 25:39अजनबी के सामने पहली बार क्यों बोला है?
- 25:41काशिफ डरता हुआ पीछे [संगीत] हटने लगा।
- 25:43लेकिन उसी दौरान बाहर कई लोगों के चलने की
- 25:45आवाज आई। काजी अब्दुल्ला अपने लोगों के
- 25:47साथ वहां पर पहुंच चुके थे। काजी
- 25:49अब्दुल्ला ने कहा कि [संगीत] काशिफ अपने
- 25:51हथियार फेंक दो। काशिफ गिरफ्तार हो गया।
- 25:53लेकिन जब काजी ने काशिफ से पूछा कि
- 25:55[संगीत] तुम किस चीज के लिए आए थे? तो
- 25:57काशिफ ने ऐसी बात कही जिसने सबको हैरान कर
- 25:59दिया। मैं [संगीत] जिस चीज को लेने के लिए
- 26:01आया था वह रहमत के पास नहीं बल्कि इसके
- 26:03बाप के एक पुराने साथी के पास है। काजी ने
- 26:06पूछा कि वो शख्स कौन है? काशी ने बताया कि
- 26:08बाबा यूसुफ रहमत हैरान रह गया क्योंकि
- 26:11उसने [संगीत] पहली बार यह नाम सुना था।
- 26:12भूरे ने जब यह सुना तो वह अचानक चौंक गया
- 26:15और डर के पीछे हटने लगा। रहमत ने पूछा
- 26:18भूरे क्या तुम जानते हो कि यह कौन है?
- 26:20भूरा कहने लगा कि हां अगर वह जिंदा है तो
- 26:23वही जानता है कि तुम्हारे वालिद की मौत की
- 26:25वजह क्या है? काशिफ के मुंह से बाबा यूसुफ
- 26:28का नाम निकलते ही रहमत के दिल में एक अजीब
- 26:30सी बेचैनी पैदा हो गई। काजी अब्दुल्ला ने
- 26:32सिपाहियों से कहा कि वो काशिफ को मजबूती
- 26:34के साथ पकड़ कर रखें। फिर वह रहमत की तरफ
- 26:36मुतवज्जा हुए। क्या तुमने इस आदमी का पहले
- 26:38कभी नाम सुना है? [संगीत] रहमत कहने लगा,
- 26:40नहीं काजी साहब। लेकिन भूरा इसके बारे में
- 26:43जानता है। काजी ने हैरत के साथ गधे की तरफ
- 26:45देखा और कहा यह गधा अभी काजी कुछ कहने ही
- 26:48वाला था कि भूरा बोल [संगीत] उठा। भूरा
- 26:50कहने लगा कि हां मैं बाबा यूसुफ को जानता
- 26:53हूं। काजी कहने लगा [संगीत] कि मैंने बहुत
- 26:55से केस देखे हैं। लेकिन पहली बार मैं किसी
- 26:57गधे को इंसानी जुबान में बोलते [संगीत]
- 26:59हुए देख रहा हूं। भूरा कहने लगा कि काजी
- 27:01साहब मुझे भी बोलने का शौक नहीं था। लेकिन
- 27:04कुछ अमानतें ऐसी [संगीत] होती हैं जिनकी
- 27:06हिफाजत के लिए अल्लाह ऐसे रास्ते रखता है
- 27:08कि जिन्हें इंसान सोच भी नहीं सकता। फिर
- 27:10काजी ने रहमत से कहा [संगीत] कि हमें इस
- 27:12राज को छुपाने की बजाय इस राज की हकीकत तक
- 27:14पहुंचना होगा। सुबह होते ही काजी
- 27:16अब्दुल्ला [संगीत] अपने सिपाहियों को लेकर
- 27:18और रहमत को लेकर बाबा यूसुफ की तलाश में
- 27:20निकल पड़ा। काशिफ को भी साथ ले जाया गया
- 27:23ताकि वह रास्ता बता सके। कई घंटों का सफर
- 27:25तय करने के बाद वो एक पुरानी सी पहाड़ी
- 27:27[संगीत] के पास पहुंचे। वहां पर एक छोटी
- 27:28सी झोपड़ी थी। काशी ने इशारा किया, यही वह
- 27:31जगह है। काजी अब्दुल्ला आगे बढ़े और
- 27:33दरवाजा खटखटाया। अंदर से किसी बूढ़े शख्स
- 27:36की आवाज आई कि कौन [संगीत] है? काजी ने
- 27:38जवाब दिया कि मैं काजी अब्दुल्ला हूं।
- 27:40हमें आपसे कुछ पूछना है। दरवाजा खुला
- 27:42सामने तकरीबन 70 साल [संगीत] का एक बूढ़ा
- 27:44आदमी खड़ा था। उसकी सफेद बड़ी दाढ़ी थी।
- 27:46हाथ में लाठी थी। वो बाबा यूसुफ था। उसकी
- 27:49नजर रहमत के ऊपर पड़ी तो वह चंद लम्हे के
- 27:51लिए साकत रह गया। फिर उसकी आंखों में आंसू
- 27:53आ गए और [संगीत] उसने पूछा तुम तुम क्या
- 27:56तुम रहमत हो? रहमत हैरान रह गया। तुम मुझे
- 27:59कैसे जानते हो? बाबा यूसुफ ने बताया कि
- 28:01मैं तुम्हारे बाप का दोस्त था। रहमत के
- 28:03दिल की धड़कन तेज हो गई। मेरे बाप के बारे
- 28:05में आप क्या जानते हैं? फिर बाबा यूसुफ ने
- 28:07सबको अंदर आने का इशारा किया। फिर बाबा
- 28:09यूसुफ ने लकड़ी का एक छोटा सा संदूक
- 28:11[संगीत] उठाया। उसके अंदर से एक दस्तावेज
- 28:13निकाली। फिर बाबा यूसुफ ने बताया कि यह
- 28:15कुछ अरसा पहले तुम्हारे बाप ने मुझे दी थी
- 28:17और मुझे कहा था कि यह उस वक्त रहमत को
- 28:20देना [संगीत] जिस वक्त सलीम के खानदान का
- 28:21लालच उस जमीन तक दोबारा पहुंचे। काजी
- 28:23अब्दुल्ला ने उस दस्तावेज को पकड़ा और
- 28:25उसके अंदर देखा तो उसके अंदर बहुत सारे
- 28:27सबूत थे और इस दस्तावेज के ऊपर यह इस
- 28:29पुरानी जमीन का [संगीत] एक पुराना मोहदा
- 28:31था। इसके अलावा रहमत के बाप ने गांव वालों
- 28:33की जमीन की हिफाजत करने की जिम्मेदारी ली
- 28:35थी। क्योंकि सलीम [संगीत] शाह के बाप गांव
- 28:37वालों से नाजायज जमीनें छीनने के लिए
- 28:38मंसूबा बनाते थे और उन्हें कर्ज देकर
- 28:40[संगीत] उन्हें परेशान करते थे। लेकिन
- 28:42सलीम शाह के खानदान को जब यह सारी बात
- 28:44मालूम हुई तो उन्होंने सबूतों को खत्म
- 28:46करने का मंसूबा बनाया। फिर बाबा यूसुफ ने
- 28:48बताया कि तुम्हारे बाप ने यह खतरा मोल
- 28:50लेकर [संगीत] तमाम लोगों की जमीन को
- 28:51महफूज़ करने के लिए यह खतरा मोल लिया था।
- 28:53रहमत की आंखों में आंसू आ गए। रहमत ने
- 28:56पूछा लेकिन मेरे वालिद साहब ने मुझे यह
- 28:58क्यों नहीं बताया? फिर बाबा यूसुफ कहने
- 29:00लगे [संगीत] क्योंकि वह चाहते थे कि तुम
- 29:02इन झगड़ों से दूर रहो क्योंकि वह जानते थे
- 29:04कि अगर यह राज गलत वक्त पर खुला तो
- 29:06तुम्हारी जान भी खतरे में पड़ सकती है।
- 29:08[संगीत] फिर रहमत ने गधे की तरफ देखा। फिर
- 29:10बाबा यूसुफ ने कहा कि भूरा भी इस राज का
- 29:12हिस्सेदार है। फिर बाबा यूसुफ ने बताया कि
- 29:15कई साल पहले जब यह भूरा छोटा सा था तो
- 29:17तुम्हारा बाप इसे लेकर आया था मेरे पास और
- 29:19मुझे बताया था कि यह जानवर गैर मामूली
- 29:22जहानत रखता है। रहमत ने पूछा [संगीत]
- 29:24लेकिन यह इंसानों की तरह कैसे बोल सकता
- 29:26है? बाबा यूसुफ कहने लगे इस बात का
- 29:28मुकम्मल जवाब तो मेरे पास भी नहीं। ऐसे
- 29:30राज अल्लाह ही जानता है। लेकिन मैं सिर्फ
- 29:32इतना जानता हूं कि तुम्हारे वालिद ने इसके
- 29:34ऊपर बहुत एतमाद किया था। बुरा खामोश खड़ा
- 29:37रहा। फिर बाबा यूसुफ कहने लगे तुम्हारे
- 29:39बाप ने मुझसे कहा था कि अगर कभी रहमत को
- 29:41किसी चीज की जरूरत पड़े तो [संगीत] भूरा
- 29:43इसे सही रास्ता दिखाएगा। रहमत की आंखों
- 29:45में आंसू आ गए। उसने भूरे के सर पर हाथ
- 29:47रखा और कहा कि तुम इतने साल तक मेरे साथ
- 29:50रहे लेकिन मैं तुम्हें एक आम गधा समझता
- 29:52रहा। भूरा कहने लगा, तुमने मुझे कभी भी आम
- 29:55नहीं समझा। तुमने हमेशा मुझे अपना साथी
- 29:57समझा। इसीलिए मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहा।
- 29:59फिर काजी अब्दुल्ला ने सारे सबूत जमा
- 30:01[संगीत] किए। वह पुरानी किताब और दस्तावेज
- 30:04और चांदी की मोहर और बाबा यूसुफ की गवाही।
- 30:06अब सारा मामला बिल्कुल वाजे था। काजी ने
- 30:09सलीम शाह और काशिफ को अदालत के अंदर तलब
- 30:11किया। सारे गांव के लोग अदालत के अंदर जमा
- 30:13हो गए। [संगीत] सलीम शाह को इस बात का
- 30:14गुरूर था और यकीन था कि वह दौलत की वजह से
- 30:17बच जाएगा। उसने काजी अब्दुल्ला से कहा,
- 30:19"ये सारे कागजात झूठे [संगीत] हैं।" इनके
- 30:21ऊपर गौर फिकर करने की कोई जरूरत नहीं है।
- 30:23काजी-ए अब्दुल्लाह ने कहा, "अगर यह झूठे
- 30:25हैं, तो तुम्हें भी परेशान होने की जरूरत
- 30:27नहीं है।" फिर काजी ने एक-एक करके सारे
- 30:29सबूत सामने रखे। जब सलीम शाह [संगीत] ने
- 30:31अपने खानदान की पुरानी मोहर देखी, तो उसका
- 30:33चेहरा जर्द पड़ गया। काजी ने पूछा क्या यह
- 30:36मोहर तुम्हारे खानदान की नहीं? सलीम
- 30:37[संगीत] शाह खामोश हो गया। फिर बाबा यूसुफ
- 30:40ने गवाही दी। आखिरकार सारे सबूतों को
- 30:42मद्देनजर रखते हुए काजी ने फैसला सुनाया
- 30:44[संगीत] कि सलीम के खानदान ने जितनी भी
- 30:46गरीबों की जमीनें हड़प की थी, वह सारी
- 30:48वापस करें और उनका हक भी दें। काशिफ को भी
- 30:50चोरी और उसकी गलती की [संगीत] सजा मिली और
- 30:52रहमत की जमीन महफूज़ हो गई। लेकिन इस
- 30:54दौरान रहमत ने एक ऐसी बात की जिसने सबको
- 30:57हैरान कर दिया। इसने काजी से कहा कि काजी
- 31:00साहब मैं उन लोगों को अपनी जमीन का कुछ
- 31:02हिस्सा देना चाहता हूं जिनको जमीन मिलने
- 31:04में टाइम लगेगा। काजी अब्दुल्ला ने
- 31:05मुस्कुरा कर कहा कि रहमत तुमने साबित कर
- 31:07दिया [संगीत] कि इंसान की असल दौलत इसका
- 31:09नेक दिल है। हाजी करीम ने भी रहमत के कंधे
- 31:12पर हाथ रखा और कहा कि बेटा अगर आज
- 31:14तुम्हारे बाप जिंदा [संगीत] होते तो वह
- 31:16तुम्हारे ऊपर फक्र करते। फिर वक्त यूं ही
- 31:18गुजरता गया और कुछ माह के बाद गांव की
- 31:20[संगीत] हालत बदलने लगी। गरीबों को उनके
- 31:22हक मिलने लगे। रहमत की फसल भी अच्छी खासी
- 31:24हुई। उसने अपने घर की मरम्मत करवाई। ज़ैनब
- 31:27के लिए नए कपड़े खरीदे और अली के लिए भी
- 31:29नए कपड़े और किताबें लेकर आया। लेकिन उसने
- 31:31अपनी [संगीत] पुरानी जिंदगी नहीं भूली। वह
- 31:33पहले की तरह बिल्कुल सादा रहता और भूरा भी
- 31:35उसके साथ खेतों में काम करता था। एक शाम
- 31:37रहमत खेत के अंदर काम कर रहा था और अली
- 31:39भूरे के पास बैठा खेल रहा था। ज़ैनब दूर
- 31:42खड़ी होकर उन्हें देख रही थी। रहमत ने
- 31:44[संगीत] भूरे से कहा, भूरे, क्या तुम
- 31:46आखिरी राज भैया मुझे बताओगे? भूरा खामोश
- 31:48रहा। फिर रहमत हंसते हुए कहने [संगीत]
- 31:50लगा, अभी भी खामोश रहोगे। फिर भूरा थोड़ी
- 31:52देर बाद कहने लगा, रहमत राज कभी खत्म नहीं
- 31:55होते।
- 31:55[संगीत]
- 31:56लेकिन एक बात हमेशा याद रखना रहमत ने पूछा
- 31:58वो क्या? भूरेन ने आसमान की तरफ [संगीत]
- 32:00देखते हुए कहा जिस इंसान के पास अल्लाह का
- 32:02दिया हुआ रिज़्क अच्छा दिल पे अल्लाह पर
- 32:04भरोसा हो तो उसे दुनिया की बड़ी से बड़ी
- 32:06दौलत भी नहीं खरीद सकती। रहमत कहने लगा और
- 32:09हां तुमने मुझे यह सब कुछ सिखा दिया। बुरा
- 32:12[संगीत] कहने लगा नहीं रहमत यह सब कुछ
- 32:14तुम्हारे अंदर पहले से मौजूद था। लेकिन
- 32:16मैंने सिर्फ तुम्हें दिखाया है। फिर
- 32:17आहिस्ता-आहिस्ता सूरज गुरूब हो गया। अब
- 32:19रहमत को आहिस्ता-आहिस्ता समझ आ गया था कि
- 32:22उसकी [संगीत] सबसे बड़ी दौलत ना वह जमीन
- 32:23थी ना वो किताब ना वो चांदी की अंगूठी
- 32:26बल्कि इसकी सबसे बड़ी दौलत थी इसका ईमान
- 32:28इसकी ईमानतारी इसका सब्र और इसका हलाल
- 32:31रिज़्क उस दिन के बाद उस गांव के अंदर अगर
- 32:33कोई किसी का हक मारने की कोशिश करता तो
- 32:35बुजुर्ग उसे रहमत का किस्सा [संगीत]
- 32:37सुनाते और कहते कि रिज़्क अल्लाह देता है
- 32:39लेकिन बरकत सिर्फ हलाल रास्ते में होती
- 32:41है। प्यारे दोस्तों, इस कहानी [संगीत] से
- 32:43हमें यह सबक मिलता है कि जिस इंसान के पास
- 32:45दौलत नहीं होती, वह छोटा नहीं होता और जिस
- 32:48इंसान के पास दौलत होती है, वह बड़ा नहीं
- 32:50होता। बल्कि इंसान की असल [संगीत] दौलत और
- 32:52उसकी इज्जत हलाल कमाई में है, उसके ईमान
- 32:55में है और ईमानदारी में है। जो अल्लाह पर
- 32:56भरोसा रखकर सच्चाई का रास्ता चुनता है,
- 32:58[संगीत] तो अल्लाह उसके लिए ऐसे रास्ते
- 33:00खोलता है जिस पर वो गुमान भी नहीं कर
- 33:02सकता। हमें कभी किसी का हक नहीं छीनना
- 33:04चाहिए और ना ही कभी अमानत में खयानत करनी
- 33:06चाहिए। हमें हमेशा लालच से बचना चाहिए और
- 33:09[संगीत] मुश्किल वक्त में अल्लाह को याद
- 33:10रखना चाहिए। प्यारे दोस्तों, उम्मीद करता
- 33:12हूं कि आज की यह कहानी आपको पसंद आई होगी।
- 33:19[संगीत]
About this transcript
This page contains the full transcript of Ek Wafadar Gadha Or Gareeb Kisan Ki Insaaf Ki Kahani|Wafadar Gadha Kahani|Emotional Story Urdu| by Sachi Kahani , generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 7,653 words across 909 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
What you can do with it
Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.
Free YouTube transcript tool
YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.