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Does God Exist? Javed Akhtar और Mufti Shamail Nadwi के बीच बहस में क्या हुआ? Saurabh Dwivedi — Transcript

by The Lallantop · 19,530 words · 2,598 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00कॉन्सिट्यूशन क्लब में हो रही इस बेहद
  2. 0:03जरूरी बहस में डिबेट में आप सभी का
  3. 0:05बहुत-बहुत स्वागत है। मेरा नाम सौरभ
  4. 0:07द्विवेदी है। मैं इंडिया टुडे हिंदी
  5. 0:10मैगजीन का और ललन टॉप का संपादक हूं और आज
  6. 0:13की इस बहस का मॉडरेटर भी।
  7. 0:16इससे पहले कि यह बहस जिसका शीर्षक जिसका
  8. 0:19टॉपिक है डस गॉड एकिस्ट?
  9. 0:22यह शुरू हो दो विद्वानों के बीच जिनके नाम
  10. 0:26हैं श्री जावेद अख्तर और श्री मुफ्ती
  11. 0:29शमाइल नदवी जी। मैं कुछ बुनियादी चीजें आप
  12. 0:33लोगों को बता दूं ताकि यह बहस व्यवस्थित
  13. 0:36ढंग से चले। वैसे नहीं जैसी बहसों को
  14. 0:39देखने के हम इन दिनों आदि हो गए हैं। पढ़ी
  15. 0:42लिखी अकादमिक बहस।
  16. 0:44इस बहस का प्रारूप कैसा होगा? इसका
  17. 0:47स्ट्रक्चर कैसा होगा? पहले मैं आपको यह
  18. 0:49बता देता हूं।
  19. 0:50सबसे पहले
  20. 0:53नौजवान
  21. 0:55विद्वान मुफ्ती शमाल नदवी जी 10 मिनट अपनी
  22. 0:58दलीलें आप लोगों के सामने रखेंगे। उसके
  23. 1:02बाद जावेद अख्तर साहब 10 मिनट अपनी बात
  24. 1:05रखेंगे। उसके बाद जिसको हम अंग्रेजी में
  25. 1:08रिबटल कहते हैं। एक जवाबी दौर रहेगा कि
  26. 1:11आपने जो कहा मैं उससे मुतमाइन हूं कि नहीं
  27. 1:13हूं और हमने जो कहा। इसके बाद बहस का
  28. 1:16राउंड टू शुरू होगा। दोनों विद्वानों को
  29. 1:19फिर से 7-सा मिनट का वक्त मिलेगा और इसके
  30. 1:22बाद रिबर्टल राउंड टू होगा 5-प मिनट का।
  31. 1:27इसके बाद एक दूसरे से सवाल जवाब होंगे।
  32. 1:30इसके लिए हमने लगभग 16 मिनट का वक्त तय
  33. 1:32किया है। अब यह सवालों की प्रकृति पर
  34. 1:35निर्भर करता है कि कितने सवाल होंगे।
  35. 1:37इसीलिए हमने वक्त की पाबंदी रखी है और
  36. 1:40इसके बाद आखिरी में 5-प मिनट का वक्त
  37. 1:43दोनों विद्वानों को एक बार फिर से दिया
  38. 1:45जाएगा अपने क्लोजिंग आर्गुमेंट के लिए और
  39. 1:48उसके बाद जो इस बहस के लिए सबसे जरूरी चीज
  40. 1:52है कि आप और हम और इंटरनेट पर देख रहे
  41. 1:56लाखों करोड़ों लोग उनके सवाल जवाब होंगे।
  42. 1:58तो आप लोग जो यहां मौजूद हैं आपके हम कुछ
  43. 2:01सवाल लेने की कोशिश करेंगे। 30 मिनट का
  44. 2:04वक्त हमने उसके लिए तय कर रखा है। इस तरह
  45. 2:06से यह 2 घंटे की बहस पूरी होगी।
  46. 2:10दो तीन बुनियादी बातें हैं जिनका हमें
  47. 2:12ध्यान रखना है। किसी भी किस्म की नारेबाजी
  48. 2:15में हमें शरीक नहीं होना है। यह
  49. 2:18हल्लागुल्ला नहीं है क्योंकि पूरी दुनिया
  50. 2:20देख रही है तो एक नजीर कायम करनी है। एक
  51. 2:22उदाहरण लोगों के सामने रखना है कि पढ़े
  52. 2:24लिखे लोग इत्तेफाकी और नाइत्तेफाकी रखते
  53. 2:28हुए भी एक दूसरे से सहमति और असहमति रखते
  54. 2:30हुए भी बात कह सकते हैं। यहां पर मेरे
  55. 2:33जेएनयू के प्रोफेसर बैठे हैं पुरुषोत्तम
  56. 2:35अग्रवाल जी जिन्होंने हमें क्लास में
  57. 2:36सिखाया है कि सहमति का
  58. 2:40साहस और असहमति का विवेक और इसका ठीक उलट
  59. 2:44भी यह बड़ा जरूरी है।
  60. 2:47दूसरी बात यह किसी एक धर्म के बारे में
  61. 2:51बहस नहीं है। यह बात सबको स्पष्ट होनी
  62. 2:54चाहिए। किसी धर्म को महान बताने या किसी
  63. 2:57धर्म को कमतर बताने की यह बहस नहीं है। तो
  64. 3:00यदि कोई इस उम्मीद से देख रहा है या यहां
  65. 3:03आया है तो मैं आपको आश्वस्त करना चाहता
  66. 3:05हूं कि आपको नाउद ही हाथ लगेगी।
  67. 3:09इस बहस में बहुत ज्यादा धार्मिक प्रतीकों
  68. 3:12के इस्तेमाल को लेकर भी यह दोनों लोग जो
  69. 3:14अभी आपको गंभीर दिख रहे हैं। भले लोग हैं।
  70. 3:17कल शाम को चाय पर मिले थे। बहुत हंसीज़ाक
  71. 3:21भी इनके बीच हुआ था और गलवैया डालते हुए
  72. 3:23एक तस्वीर भी हुई थी। यह इस बात का प्रमाण
  73. 3:27है कि इंटरनेट पर जो हल्ला मचा हुआ है
  74. 3:30उसके मुकाबले यह दोनों लोग बहुत ही अच्छे
  75. 3:34शांत ढंग से बहस के लिए राजी हो गए हैं।
  76. 3:36Twitter की बातें Twitter तक सीमित एलन
  77. 3:39मस्क आजकल उसको एक्स कहते हैं
  78. 3:42और अब इस बहस की शुरुआत मैं इन विद्वानों
  79. 3:46का हालांकि इनको परिचय की जरूरत नहीं है
  80. 3:48पर हो सकता है। हमें पत्रकारिता में
  81. 3:51सिखाया जाता है कि नेवर अस्यूम विज्ञान भी
  82. 3:54यही कहता है। मुफ्ती शमाल नदवी साहब
  83. 3:56इस्लामिक विद्वान शिक्षाविद हैं। कोलकाता
  84. 3:58के वाहियान फाउंडेशन के संस्थापक हैं।
  85. 4:01लखनऊ की प्रतिष्ठित दारुल उलूम नदतुल उलमा
  86. 4:04से ग्रेजुएशन किया है। सोशल मीडिया और
  87. 4:06सार्वजनिक मंचों पर अध्यापन और बौद्धिक
  88. 4:08कामों में सक्रिय हैं। और इस समय
  89. 4:10इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी मलेशिया
  90. 4:13से पीएचडी कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि
  91. 4:16पढ़ाई के साथ-साथ ट्रेवल ब्लॉग भी बनाते
  92. 4:18हैं। पेट्रोनस टावर के सामने का ब्लॉग
  93. 4:20हमने देखा।
  94. 4:22हमारे साथ जावेद अख्तर साहब हैं। जावेद
  95. 4:25अख्तर साहब कवि हैं, शायर हैं। गद्य भी
  96. 4:29लिखते हैं। फिल्मों के लिए संवाद लिखे
  97. 4:32हैं, गीत लिखे हैं। इससे इत
  98. 4:37वैज्ञानिक सोच को लेकर या अपने डिक्लेयर्ड
  99. 4:41एथिज्म को लेकर भी मुखरित रहते हैं और
  100. 4:43अपने तैशनालिटी की बात करते हैं। देवियों
  101. 4:46और सज्जनों, डस गॉड एकिस्ट? इस सवाल का
  102. 4:50जवाब सब अपने-अपने त खोजने की कोशिश कर
  103. 4:53रहे हैं। कोई इसको गॉड डम पार्टिकल की खोज
  104. 4:56बताता है। कोई गॉड पार्टिकल की खोज बताता
  105. 4:58है। कोई हिक्स बोसान की खोज बताता है। कोई
  106. 5:01यह सवाल जवाब तलाशने की कोशिश करता है कि
  107. 5:04मास एग्जिस्टेंस में आखिर आया कैसे? हुआ
  108. 5:07क्या था? सृष्टि के पहले, समय के पहले
  109. 5:09क्या था? और कोई यह कहता है कि ये सारी
  110. 5:12खोजें जिस मस्तिष्क में हो रही है,
  111. 5:14प्रकृति के क्रम में वो कैसे विकसित हुआ?
  112. 5:16मैं उम्मीद करता हूं कि हम आज इन बुनियादी
  113. 5:21सवालों के कुछ जवाब हासिल करने में कामयाब
  114. 5:23हो। मैं सबसे पहले मंच पर आमंत्रित कर रहा
  115. 5:26हूं मुफ्ती शमाल नदवी साहब को। आइए सर।
  116. 5:29जी
  117. 5:32[प्रशंसा]
  118. 5:42एक आपकी गुजारिश बोलना शुरू करें। आप लोग
  119. 5:45प्लीज अपने फोन लाइव मोड पे या साइकिल एक
  120. 5:49बार चेक कर ले कई बार बेहानी हो जाती है।
  121. 6:00तमाम तारीफें उस क्रिएटर के लिए जिसने इस
  122. 6:03यूनिवर्स को एक मकसद के तहत पैदा किया है।
  123. 6:07रिस्पेक्टेड जनाब जावेद अख्तर साहब,
  124. 6:09मिस्टर सौरभ द्विवेदी और रिस्पेक्टेड
  125. 6:12ऑडियंस थैंक यू ऑल फॉर बीइंग हियर टुडे।
  126. 6:15आज की डिबेट में क्योंकि हम बात करने वाले
  127. 6:18हैं डस गॉड एक्सिस्ट के टॉपिक पर तो यह एक
  128. 6:22ऐसा टॉपिक है जिसके मुतालिक कोई भी डिसीजन
  129. 6:25लेने के लिए अलग-अलग स्टैंडर्ड्स हो सकते
  130. 6:27हैं। लिहाजा डिबेट के शुरू में यह जरूरी
  131. 6:31है कि हम यह जान लें कि आज के इस टॉपिक
  132. 6:34में कौन सा स्टैंडर्ड सही होगा और कौन सा
  133. 6:38गलत होगा। सबसे पहला स्टैंडर्ड जिसे मैं
  134. 6:42समझता हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब
  135. 6:44जावेद अख्तर साहब बड़ी तेजी के साथ उसकी
  136. 6:47तरफ लपकेंगे वो है साइंस। जबकि साइंस दर
  137. 6:51हकीकत खुदा के एग्जिस्टेंस को डायरेक्टली
  138. 6:54साबित करने या उसके एकिस्टेंस को डिनाई
  139. 6:58करने के लिए स्टैंडर्ड नहीं बन सकती। और
  140. 7:00उसकी वजह क्या है? ये मैं नहीं कह रहा। यह
  141. 7:04वो लोग कह रहे हैं जो साइंस के एक्सपर्ट्स
  142. 7:07हैं। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस कहती है साइंस
  143. 7:12डजंट हैव द प्रोसेससेस टू प्रूव और
  144. 7:16डिस्प्रूव द एकिस्टेंस ऑफ़ गॉड। व्हाई?
  145. 7:19क्योंकि साइंस का ताल्लुक एंपेरिकल
  146. 7:22एविडेंस से है और एंपेरिकल एविडेंसेस का
  147. 7:24ताल्लुक हमारे नेचुरल और फिजिकल वर्ल्ड से
  148. 7:27है। जबकि गॉड नॉन फिजिकल और सुपर नेचुरल
  149. 7:31रियलिटी है। लिहाजा नॉन फिजिकल रियलिटी को
  150. 7:35आप उस टूल के साथ नहीं चेक कर सकते जिसका
  151. 7:38काम फिजिकल रियलिटी को तलाश करना है।
  152. 7:41लिहाजा आज इस डिबेट में गॉड की
  153. 7:44एग्ज़िस्टेंस को साबित करने या उसे डिनाई
  154. 7:47करने में साइंटिफिक एविडेंस को एक्सेप्ट
  155. 7:50नहीं किया जाएगा। दूसरा स्टैंडर्ड हो सकता
  156. 7:54है रेवुलेशन कि रेवेलेशन के जरिए हम ये
  157. 7:57साबित करें कि गॉड एकिस्ट करता है या
  158. 8:00नहीं। लेकिन ये स्टैंडर्ड भी आज
  159. 8:02इररेलेवेंट है। क्यों? क्योंकि रेवोलेशन
  160. 8:05मेरे नजदीक सोर्स ऑफ नॉलेज है। वैलिड
  161. 8:09सोर्स ऑफ नॉलेज है। लेकिन हमारे जावेद
  162. 8:11अख्तर साहब के नजदीक ये वैलिड सोर्स ऑफ
  163. 8:13नॉलेज नहीं है। लिहाजा आज की डिबेट में
  164. 8:16मैं एक भी एविडेंस किसी भी मजहबी
  165. 8:19स्क्रिप्चर से नहीं दूंगा। ताकि जावेद
  166. 8:22अख्तर साहब के लिए वो अनएक्सेप्टेबल ना
  167. 8:24हो। तीसरा जो मयार हो सकता है वो है
  168. 8:28ऑब्जरवेशन के भाई कोई कहे कि हमें खुदा
  169. 8:31दिखाओ। अगर है तो दिखाओ या ये कि खुदा के
  170. 8:34एकिस्टेंस पर एंपेरिकल एविडेंस दो। तो ये
  171. 8:37है दर हकीकत गलत टूल का इस्तेमाल करना। ये
  172. 8:40ऐसा ही है कि जावेद साहब मुझसे ये मुतालबा
  173. 8:42करें कि मुफ्ती साहब आप मेटल डिटक्टर के
  174. 8:45जरिए प्लास्टिक डिटेक्ट करके दिखाएं। अबकि
  175. 8:47प्लास्टिक डिटेक्ट नहीं हो पा रही है।
  176. 8:49लिहाजा प्लास्टिक डज नॉट एक्सिस्ट। नो यू
  177. 8:52आर यूजिंग द रोंग टूल। इस टूल से
  178. 8:54प्लास्टिक को डिटेक्ट नहीं किया जाता।
  179. 8:56लिहाजा
  180. 8:58मैं समझता हूं कि गॉड के एकिस्टेंस पर
  181. 9:01एंपेरिकल एविडेंस का मुतालबा करना एक
  182. 9:04बचकाना मुतालबा है और हमारे रिस्पेक्टेड
  183. 9:06जनाब जावेद अख्तर साहब इस स्टेज से अब
  184. 9:09बहुत आगे निकल चुके हैं। अब बचता है एक ही
  185. 9:12स्टैंडर्ड और वो स्टैंडर्ड है अकल लॉजिक
  186. 9:17रीजनिंग और यही वो स्टैंडर्ड है जिसके तहत
  187. 9:21गॉड के एक्जिस्टेंस को साबित किया जाएगा
  188. 9:24या गॉड की एक्सिस्टेंस को डिनाई किया
  189. 9:26जाएगा। लेकिन चूंकि ये बहुत इंपॉर्टेंट और
  190. 9:29सेंसिटिव टॉपिक है। इसलिए लॉजिकल
  191. 9:32आर्गुमेंट भी ऐसा होना चाहिए जो डेफिनेटिव
  192. 9:35हो। इनडेफिनेटिव ना हो जो दो और दो चार की
  193. 9:38तरह बिल्कुल वाज़ हो। जिसे लॉजिकली रिजेक्ट
  194. 9:41करना पॉसिबल नहीं हो। फॉर एग्जांपल हम
  195. 9:43कहें हमारे रिस्पेक्टेड मिस्टर सौरभ साहब
  196. 9:47ये एक इंसान है और तमाम इंसान कॉन्शियस
  197. 9:51बीइंग है। लिहाजा नतीजा क्या निकला? हमारे
  198. 9:54सौरभ साहब भी कॉन्शियस बीइंग हैं। क्या ये
  199. 9:56इनडेफिनेट आर्गुमेंट है या डेफिनेट
  200. 9:58आर्गुमेंट? है? ये डेफिनेट आर्गुमेंट है।
  201. 10:00ये दो और दो की तरह वाज़ है। इसमें किसी
  202. 10:03तरह जो है लॉजिकली इसको रिजेक्ट नहीं किया
  203. 10:05जा सकता। तो अगर आज हमारे जावेद अख्तर
  204. 10:08साहब ऐसी कोई अकली दलील और लॉजिकल एविडेंस
  205. 10:13दें खुदा के ना होने पर जो डेफिनेट भी हो
  206. 10:16तो मैं ये ऐलान करता हूं कि यकीनन मैं उस
  207. 10:19एविडेंस को कबूल करूंगा और उस पर गौर
  208. 10:22करूंगा। लेकिन साथ में ये भी ऐलान कर देता
  209. 10:24हूं प्रेडिक्शन के तौर पर कि ऐसा कोई
  210. 10:26डेफिनेट आर्गुमेंट कोई नहीं पेश कर सकता।
  211. 10:30दलील हम देंगे और डेफिनेटिव दलील देंगे।
  212. 10:35लॉजिकल दलील देंगे। ऐसी दलील देंगे जो
  213. 10:38एंटायर एथिस्टिक वर्ल्ड उसे रेफ्यूट नहीं
  214. 10:42कर सकती। चल अब हम एक एग्जांपल सोचते हैं।
  215. 10:45एक सिनेरियो सिंपल सिनेरियो तमाम ऑडियंस
  216. 10:47से गुजारिश है। हम और आप एक आइसोलेटेड
  217. 10:50आइलैंड पर हैं। ऐसा आइलैंड जहां पे हमसे
  218. 10:53पहले कोई कभी नहीं गया। चलते-चलते आपके
  219. 10:56सामने अचानक आपने देखा एक पिंक कलर की बॉल
  220. 10:59पड़ी हुई है। सबसे पहला सवाल आपके ज़हन में
  221. 11:02क्या आएगा कि ये बॉल यहां क्यों आई? कैसे
  222. 11:05आई? यह पिंक कलर की ही क्यों है? कोई और
  223. 11:07कलर भी हो सकता था। यह इसी शेप में क्यों
  224. 11:10है? कोई और शेप भी हो सकता था। नेचुरली आप
  225. 11:13इस तरफ पहुंचेंगे कि कोई ना कोई है जिसने
  226. 11:16इन स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ इस बॉल को
  227. 11:19बनाया है और यहां पे रखा है। चकि आप जानते
  228. 11:23हैं कि ये जो बॉल है इसका एग्ज़िस्ट करना
  229. 11:26जरूरी नहीं है। ये एग्ज़िस्ट कर भी सकती थी
  230. 11:28नहीं भी कर सकती थी। और एक्सिस्ट करना ही
  231. 11:30था तो किसी और फॉर्म में करती। किसी और
  232. 11:32कलर में करती। अब आप इस बॉल को एक्सपेंड
  233. 11:35करते चले जाएं। एक्सपेंड करते चले जाएं।
  234. 11:37एक्सपैंड करते चले जाएं। यहां तक कि ये
  235. 11:39बॉल यूनिवर्स के साइज की हो जाए। बताइए कि
  236. 11:42क्या साइज साइज के बढ़ जाने से सवाल बदल
  237. 11:44जाएगा? हरगिज़ नहीं बदलेगा। अभी भी सवाल
  238. 11:47रहेगा। ये यूनिवर्स कहां से आया? इन
  239. 11:49स्पेसिफिक प्रॉपर्टीज के साथ कहां से आया?
  240. 11:52क्यों आया? किसने बनाया? ये सवाल उस वक्त
  241. 11:55भी वैलिड रहेगा।
  242. 11:57लेकिन यह सवाल अगर हम जनाब जावेद अख्तर
  243. 12:01साहब से करें तो क्योंकि इनका वर्ल्ड व्यू
  244. 12:03एथिस्टिक है और सिर्फ इनका नहीं मतलब
  245. 12:05जितने भी एथिस्ट हैं और एथिस्टिक वर्ल्ड
  246. 12:07व्यू को रखने वाले से अगर आप ये सवाल करें
  247. 12:10कि ये यूनिवर्स कहां से आया तो इनका जवाब
  248. 12:14या तो आर्गुमेंट फ्रॉम इग्नोरेंस होगा या
  249. 12:17डॉग्मैटिक होगा। या तो यह कहेंगे कि मुझे
  250. 12:20नहीं पता कि यह कहां से आया। लिहाजा गॉड
  251. 12:23डज नॉट एक्सिस्ट। या आर्गुमेंट फ्रॉम
  252. 12:25इग्नोरेंस है या ये कहेंगे के ये यूनिवर्स
  253. 12:30खुद ब खुद बन गया। इसका मतलब यह है कि उस
  254. 12:32बॉल को भी खुद ब खुद बन जाना चाहिए। लेकिन
  255. 12:34बॉल के ताल्लुक से ये एक्सप्लेनेशन
  256. 12:36एक्सेप्ट नहीं की जाएगी कि ये खुद ब खुद
  257. 12:38बन गई। लेकिन यूनिवर्स के ताल्लुक से कर
  258. 12:40दिया जाएगा। इसे हम दूसरे अल्फाज़ में
  259. 12:42डॉग्मा भी कह सकते हैं। दूसरी चीज हमारे
  260. 12:46जावेद अख्तर साहब जरूर गॉड ऑफ गैप्स की
  261. 12:49मिसाल भी जरूर देंगे। और मिसाल देंगे कि
  262. 12:52पहले जमाने में बिजलियां कड़कती थी तो
  263. 12:54लोगों ने किसी एक खुदा की तरफ और बारिश
  264. 12:56होती थी तो दूसरे खुदा की तरफ मंसूब कर
  265. 12:57दिया। उनके पास दलील नहीं थी। ये हमारा
  266. 12:59वर्ल्ड व्यू है ही नहीं। ये हमारा वर्ल्ड
  267. 13:01व्यू है ही नहीं। क्योंकि नेचुरल फेनोमिना
  268. 13:04के प्रोसेस की इंटरप्रिटेशन को जान लेने
  269. 13:07से ये कहां से साबित हो गया कि गॉड
  270. 13:09एक्सिस्ट नहीं करता है। इस पर मैं
  271. 13:10इंशाल्लाह अभी आगे बात करूंगा। आप हजरात
  272. 13:14यह भी देखेंगे और मैं यह एक्सपेक्ट करता
  273. 13:16हूं कि हमारे रिस्पेक्टेड जनाब जावेद
  274. 13:19अख्तर साहब जरूर इमोशनल आर्गुमेंट्स भी
  275. 13:21देंगे जो कि एक लॉजिकल फैलेसी है जब बात
  276. 13:24आती है ट्रुथ को डिसाइड करने में। क्यों?
  277. 13:27मिसाल के तौर पर वो कहेंगे कि अगर गॉड है
  278. 13:30तो इविल क्यों एक्सिस्ट करता है? जबकि मैं
  279. 13:32कहता हूं इविल का एक्सिस्ट करना गॉड के
  280. 13:34एग्जिस्ट हो एक्सिस्ट करने की दलील है।
  281. 13:36उसके खिलाफ नहीं है। क्योंकि अगर गॉड है
  282. 13:38तो हम सब उसके सामने अकाउंटेबल हैं। और
  283. 13:41अगर हम अकाउंटेबल हैं तो अकाउंटेबिलिटी के
  284. 13:43लिए इविल का मौजूद होना जरूरी है। उसके
  285. 13:45बगैर हम अकाउंटेबल नहीं हो सकते। और अगर
  286. 13:48हम अकाउंटेबल नहीं हैं तो हम जनाब जावेद
  287. 13:50अख्तर साहब से पूछेंगे कि आप बताएं कि फिर
  288. 13:53सफरिंग इस दुनिया में क्यों है? अगर खुदा
  289. 13:55नहीं है तो सफरिंग क्यों है? और उन लोगों
  290. 13:58के जज्बे का क्या जिनके अंदर सफरिंग के के
  291. 14:00बाद इंतकाम लेने का जज्बा पाया जाता है और
  292. 14:03वो इस दुनिया से ऐसे ही चले गए। क्या उनकी
  293. 14:05सारी तकलीफें बेकार चली जाएंगी? अब आ जाए
  294. 14:07उसी एग्जांपल की तरफ कि बॉल मुझसे अगर कोई
  295. 14:10पूछे इस बॉल को किसने बनाया और या इस
  296. 14:13एक्सपेंडेड बॉल को किसने बनाया? मैं
  297. 14:15कहूंगा क्योंकि ये यूनिवर्स और इस
  298. 14:18यूनिवर्स की तमाम चीजें कंटिंजेंट हैं।
  299. 14:20कंटिंजेंट होने का मतलब ये होता है कि जो
  300. 14:22अपने एक्सिस्टेंस पे किसी के ऊपर डिपेंड
  301. 14:24करती हो। तो जाहिर है ये यूनिवर्स
  302. 14:27कंटिंजेंट है। और अगर कोई चीज कंटिंजेंट
  303. 14:30नहीं है तो मैं रिक्वेस्ट करूंगा कि मुझे
  304. 14:32दिखा दें कि कौन सी चीज यूनिवर्स में
  305. 14:33कंटिंजेंट नहीं है। हम भी जरा गौर कर लें
  306. 14:35और हम भी देख लें। और जब कॉन्टिंजेंट
  307. 14:38चीजें मौजूद हैं तो फिलॉसोफर्स की इस्तिला
  308. 14:41के मुताबिक हम उस टर्मिनोलॉजी के मुताबिक
  309. 14:44हम उस जगह तक पहुंचते हैं और उस हस्ती तक
  310. 14:47पहुंचते हैं जिसे नेसेसरी बीइंग कहा जाता
  311. 14:49है कि ये वो नेसेसरी बीइंग है जिसका मौजूद
  312. 14:52ना होना नामुमकिन हो चूंकि अगर ये मौजूद
  313. 14:54ना हो तो सारी चीजें एकिस्टेंस में आएंगी
  314. 14:56ही नहीं और ये सारी डिप कंटिंजेंट चीजें
  315. 14:59उसी के ऊपर डिपेंड करती हैं। अब अगर आप ये
  316. 15:01सवाल करते हैं कि फिर उस हस्ती को किसने
  317. 15:03बनाया? फिर उसका कॉज क्या है? फिर उसका
  318. 15:05कॉज क्या है? फिर उसका कॉज क्या है? और
  319. 15:07एंडलेसली चले जाएं। इसे हम कहते हैं
  320. 15:09इनफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस जो कि लॉजिकल
  321. 15:12फैलेसी है। कॉनसेप्चुअली इंफिनिटी पॉसिबल
  322. 15:15है। मिसाल के तौर पे न्यूमेरिकल्स वन टू
  323. 15:18थ्री गिनते चले जाएं। इनफिनिट नंबर्स हैं।
  324. 15:19मैं कॉनसेप्चुअली बात नहीं कर रहा।
  325. 15:21प्रैक्टिकली रियलिटी में साबित करके
  326. 15:23दिखाएं कि इनफिनिट रिग्रेस ऑफ़ कॉजेस
  327. 15:25पॉसिबल है या नहीं। अगर पॉसिबल है तो हम
  328. 15:27मान लेंगे। मिसाल दे दें और पॉसिबल नहीं
  329. 15:30है तो एक ही ऑप्शन बचता है जिसे हम कहते
  330. 15:32हैं नेसेसरी बीइंग। ऐसी नेसेसरी बीइंग जो
  331. 15:34इंडिपेंडेंट है क्योंकि अगर वो डिपेंडेंट
  332. 15:37हुई तो वो नेसेसरी नहीं रहेगी। ऐसी
  333. 15:39इंडिपेंडेंट बीइंग जो इटरनल है। अगर वो
  334. 15:41इटरनल नहीं होगी उसकी बिगिनिंग होगी तो वो
  335. 15:43खुद कंटिंजेंट है। ऐसी बीइंग जो पावरफुल
  336. 15:46है। क्योंकि कंटिंजेंट को एक्चुअलाइज करने
  337. 15:48के लिए पावर चाहिए। ऐसी बीइंग जो
  338. 15:50इंटेलिजेंट है और नॉलेजेबल है। क्योंकि ये
  339. 15:53यूनिवर्स स्पेसिफिक फॉर्म और स्पेसिफिक
  340. 15:55लॉज़ ऑफ नेचर के तहत प्रिसाइजली चल रहा है।
  341. 15:59थैंक यू।
  342. 15:59थैंक यू साहब। [प्रशंसा]
  343. 16:03मैं इन दलीलों के बाद जावेद अख्तर साहब से
  344. 16:06गुजारिश करूंगा। आप बैठ के बोलना चाहेंगे?
  345. 16:09जी।
  346. 16:15[प्रशंसा]
  347. 16:20पहले तो मैं मुफ्ती साहब को एक अच्छी खबर
  348. 16:22देना चाहूंगा कि मेरी नॉलेज साइंस के बारे
  349. 16:25में बड़ी मामूली है। तो आप फिक्र ना करें
  350. 16:27उसकी। लेकिन कुछ कॉमन सेंस है मुझ में।
  351. 16:32देखिए ये खुदा का तसवुर कोई नया तसवुर
  352. 16:36नहीं है। ये सदियों से रहा है। ये कुछ
  353. 16:40रिलजन 3000 साल पुराने होंगे। 4000 साल
  354. 16:43पुराने होंगे। लेकिन इंसान कोई 10,000
  355. 16:4612000 साल से एकिस्ट करता है होमोसेपियर
  356. 16:49की शक्ल में और हमेशा कुछ ना कुछ मजहब
  357. 16:52रहे।
  358. 16:54ये मजहब जाहिलों के नहीं थे। ये मजहब एक
  359. 16:58ऐसी ग्रीक सोसाइटी के थे जहां बड़े-बड़े
  360. 17:02फिलॉसफर पैदा हुए। ये मजहब इजिपशियंस के
  361. 17:06थे जिन्होंने पिरामिड्स बनाए थे। ये रोमंस
  362. 17:10के थे कि जिनका आर्किटेक्चर और सेनेट यानी
  363. 17:13पहली बुनियाद डेमोक्रेसी थी। लिमिटेड थी
  364. 17:16मगर डेमोक्रेसी थी। ये उन लोगों ने किए
  365. 17:19थे। तो इनका जो जुपिटर था रा था जस था
  366. 17:25उन्हें उस पर इतना ही एतमा था जितना आज
  367. 17:28किसी मजहबी आदमी को अपने खुदा पे होगा।
  368. 17:32क्रिश्चियनिटी आने से पहले यूरोप में एक
  369. 17:36मजहब था जर्मेनिक रिलीजन। उसका एक खुदा
  370. 17:40था। उसकी एक बीवी थी। उसके दो बेटे थे। एक
  371. 17:44बेटी थी। कि जर्मनी में जब यूरोप में
  372. 17:47क्रिश्चियनिटी आई तो वो खुदा उसकी बीवी और
  373. 17:50पूरे खानदान चला गया। तो हमने अगर हम
  374. 17:54हिस्ट्री देखें तो खुदा जो है वो ज्यादातर
  375. 17:58फनी है। वो हमेशा रहे नहीं और वो जो लोग
  376. 18:03इन्हें मानते थे उनको आप कहे वो तो जाहिल
  377. 18:06थे। उन्हें तो कुछ पता ही नहीं था। ऐसा
  378. 18:08नहीं है। वो अपने वक्त में बड़े काबिल लोग
  379. 18:11थे। और अपने वक्त में उन्होंने बड़े-बड़े
  380. 18:14काम किए हैं। फिलॉसफर्स थे, साइंटिस्ट थे।
  381. 18:18लेकिन उनका मजहब कहां गया? उनके खुदा कहां
  382. 18:21गए? आज जो खुदा है दुनिया में लोग उन्हें
  383. 18:25मानते हैं। आपको क्या मालूम कि कितने
  384. 18:27बरसों के बाद क्या होने वाला है? हम यूरोप
  385. 18:29में देखते हैं तो चर्च खाली है तो वक्त के
  386. 18:33साथ चीजें बदलती हैं। जहां तक इसका
  387. 18:37ताल्लुक है मजहबों का
  388. 18:40हर मजहब आपसे एक चीज मांगता है। फेथ
  389. 18:45ये फेथ क्या चीज होती है?
  390. 18:49व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन फेथ एंड बिलीफ?
  391. 18:52ये कोई ये तो बहुत ही अहमखाना बात होगी कि
  392. 18:55कोई आदमी कहे साहब अगर खुदा है तो मुझे
  393. 18:57दिखाइए। ये तो जाहिला में बात हुई। मैंने
  394. 19:00तो नॉर्थ पोल नहीं देखा है। मगर मैं मानता
  395. 19:03हूं कि नॉर्थ पोल है। मैं क्यों मानता
  396. 19:06हूं? इसलिए कि अगर ये दुनिया राउंड है तो
  397. 19:09उसका कोई टॉप होगा। कुछ लोग हैं जो वहां
  398. 19:12गए भी हैं। कॉमन सेंस कहता है कि ऐसा
  399. 19:14होगा। सबूत है, गवाह है, रीजन है। तो ये
  400. 19:19मेरा फेथ नहीं है। तो फेथ में और बिलीफ
  401. 19:23में डिफरेंस क्या है?
  402. 19:25जो मजहब मांगता है आपसे हर मजहब फथ मांगता
  403. 19:29फथ का मतलब यह है कि ना कोई गवाह हो ना
  404. 19:33कोई सबूत हो ना कोई रैशन हो ना कोई लॉजिक
  405. 19:37हो ना कोई प्रूफ हो मगर तुम एक बात को
  406. 19:39मानो ये है फेथ
  407. 19:43वरना बिलीफ होता अगर इसमें कुछ भी सबूत
  408. 19:46होते गवाह होते तो फिर इसे आप बिलीफ कहते
  409. 19:49जैसे मेरा बिलीफ है कि नॉर्थ पोल है मेरा
  410. 19:52फेथ थोड़ी है
  411. 19:54फेथ इन तमाम शर्तों को रद्द करता है।
  412. 20:00तो फिर स्टुपिडिटी क्या है?
  413. 20:02अगर मैं एक बात ऐसी मानू जिसकी ना कोई
  414. 20:05लॉजिक है, ना कोई रैशन है, ना कोई प्रूफ
  415. 20:08है, ना कोई गवाह है,
  416. 20:12ना कोई सबूत है और मैं उसे मानूं। तो ये
  417. 20:16स्टुपिडिटी हुई। इसे ही वही कल को मैं
  418. 20:19यकीन कर लूं कि ईलॉन मस्क जो है मेरा भाई
  419. 20:22है तो मुझे इंतहाई खुशी होगी सुकून भी
  420. 20:25बहुत मिलेगा मुझे लेकिन और कहे भाई क्यों
  421. 20:28मानते हो क्या सबूत है भाई वो तो अमेरिकन
  422. 20:30है और तुम तो इंडियन हो वो तो नस्ल अलग है
  423. 20:33तुम्हें कभी मिले भी नहीं साहब देखिए ये
  424. 20:35मेरा फेथ है ये बात किया फेथ का मतलब ही
  425. 20:40यह है कि आप प्रूव नहीं कर सकते अगर आप
  426. 20:43प्रूफ कर सकते हो तो फेथ की जरूरत ही नहीं
  427. 20:46फिर तो आप बात करेंगे। आप कितनी बहस कर
  428. 20:48लीजिए। अल्टीमेटली दुनिया का हर मजहब फेथ
  429. 20:51पे टिका है। और फेथ का मतलब है एक ऐसा
  430. 20:54यकीन जिसका कोई सबूत, कोई गवाह, कोई
  431. 20:57प्रेशर नहीं।
  432. 21:01अब आप ये कहें कि आप ये क्यों कह रहे हैं
  433. 21:04कि साहब ये कायनात किसने बनाई? कमाल ये है
  434. 21:09कि आपने बताया कि एक आइलैंड पे गए और एक
  435. 21:12बॉल देखी।
  436. 21:14आपने ये नहीं कहा कि आइलैंड किसने बनाया?
  437. 21:17आपको सिर्फ बॉल पर हैरत हुई।
  438. 21:21हमने आइलैंड पे हमने हैरत नहीं की। होते
  439. 21:23हैं आइलैंड। इसी तरह ये आइलैंड है। सितारे
  440. 21:26ये गैलेक्सीस ये सब आइलैंड है। खलम है। हम
  441. 21:31उन्हें टेकन फॉर ग्रांटेड लेते हैं। हम
  442. 21:33पूछते नहीं किसने बनाए? आपने गदी के बारे
  443. 21:35में भी नहीं पूछा। हैं।
  444. 21:38मेरी पैदाइश कैसे हुई?
  445. 21:41क्या मैं प्लान पैदा हुआ था?
  446. 21:44आई वास प्ल टू बी बोर्न
  447. 21:48या एक लकी स्पम था जो किसी एक से चिपक
  448. 21:50गया।
  449. 21:52मेरी पैदाइश रैंडम है। रैंडम
  450. 21:57और इंसाफ जिसे आप कहते हैं इंसाफ का तो
  451. 22:01नेचर से कोई वास्ता ही नहीं है। जो आप
  452. 22:04कहते हैं कि एक दिन इंसाफ मिलेगा। इंसाफ
  453. 22:06इज अ ह्यूमन कासेप्ट। नेचर में कोई इंसाफ
  454. 22:10नहीं। अगर शेर हिरण को खा जाता है तो उसे
  455. 22:14कोई सुविधा नहीं मिलती।
  456. 22:16अगर एक आंधी आती है और हरेभरे पेड़ों को
  457. 22:19उखाड़ के फेंक देती है तो आंधियों की जेल
  458. 22:21नहीं होती है।
  459. 22:24नेचर में इंसाफ नहीं है। इसलिए उसे नेचर
  460. 22:28को इंसाफ की जरूरत भी नहीं। नेचर तमाम एक
  461. 22:31है। अब हम कहे कि साहब ये देखिए जो मैंने
  462. 22:34खाना खाया था मेरी आंख तो नहीं यूं कर
  463. 22:36दिया उसे तो इसे सजा मिलने। नहीं वो
  464. 22:39सिस्टम है ऐसे ही चल रहा है। नेचर बगैर
  465. 22:44इंसाफ के है। इंसाफ इज अ ह्यूमन कासेप्ट।
  466. 22:48तो जो आपसे कहता है कि मैं तुम्हें इंसाफ
  467. 22:51दूंगा वो इंसानी बहन की बात है। ये नेचुरल
  468. 22:55है ही नहीं। ये आसमानी है ही नहीं। नेचर
  469. 22:59का तसवुर इंसाफ का तसुर। भाई आप साथ मिलते
  470. 23:03हैं। अब आप लेफ्ट हैंड ड्राइव करते हैं।
  471. 23:06ये क्या है? तमाम सच, तमाम नेकी, तमाम
  472. 23:10शराफत लेफ्ट हैंड राइट है। वरना क्या
  473. 23:14होगा? या तो आप कॉस कर देंगे, आपका
  474. 23:16एक्सीडेंट हो जाएगा या आप किसी को मार
  475. 23:18देंगे या ट्रैफिक जाम हो जाएगा। झूठ,
  476. 23:22बेईमानी, रिश्वतखोरी ये तमाम जो है
  477. 23:25ड्राइविंग अंदर आउटसाइड है। इसके ऊपर कुछ
  478. 23:28नहीं। ये तो हमने बनाया है। जैसे हमने
  479. 23:31लेफ्ट हैंड ड्राइव बनाए। ये कासेप्ट ऑफ
  480. 23:34इंसाफ जो है ये हमारा है। इसका नेचर से
  481. 23:38कोई वास्ता नहीं। शेर खा जाता है हिरन को
  482. 23:40उसे जेल होती है क्या? कुछ भी है ही नहीं।
  483. 23:46तो ये जो दुनिया के रिलीजन प्रॉमिस करते
  484. 23:49हैं आपसे इंसाफ इसी से मालूम होता है कि
  485. 23:52ये मैनमेंट है। ये तसवुर कहीं और का है ही
  486. 23:57नहीं। जो नेचर है कुछ लोग कहते हैं नेचर
  487. 24:00ही खुदा है। तो नेचर में तो इंसाफ नहीं
  488. 24:03कहीं।
  489. 24:05और आप वादा कर रहे हैं कि तुम्हें मरने के
  490. 24:07बाद इंसाफ मिलेगा।
  491. 24:09मुझे अगर मिलेगा तो मैं बहुत खुश हूंगा।
  492. 24:12लेकिन मैं यकीन नहीं कर पाता हूं। इसलिए
  493. 24:16कि मैं फेथ नहीं पैदा कर सकता। द वेरी
  494. 24:20फैक्ट रिलीज डिमांड फेथ।
  495. 24:24इसका मतलब है कि उनके पास जस्टिफिकेशन
  496. 24:28नहीं है।
  497. 24:30अच्छा था। फिर
  498. 24:33रिलीजन अगर मॉडरेशन में है कोई सा भी वो
  499. 24:37आप में कुछ खूबियां भी पैदा करता होगा
  500. 24:40देखिए उसे ये फायदा है वो फायदा है
  501. 24:42अल्कोहल जो है
  502. 24:45वो ज्यादातर दवाओं में यूज़ होती है और एक
  503. 24:50सर्वे किया गया था अमेरिका में कि
  504. 24:52लोंगिटिविटी किन लोगों की है तो एक तरफ वो
  505. 24:55लोग थे जो शराब पीते ही नहीं थे और एक तरफ
  506. 24:57वो थे जो एक बोतल शराब पीते थे सबसे
  507. 25:01ज्यादा लंबी लंबी उम्र उनकी है जो दो
  508. 25:04पैगराब के शराब पीते हैं और खाना खाते
  509. 25:06हैं।
  510. 25:07मगर हम शराब को बुरा समझते हैं। मैं भी
  511. 25:10बड़ा समझता हूं। क्यों?
  512. 25:13ऐसा होता नहीं। कुछ चीजों में आदत होती है
  513. 25:17जो बढ़ती है। आज तक मैं एक आदमी दूध पीता
  514. 25:20है। आप 10 साल बाद भी मिलेंगे तो एक ही
  515. 25:22गिलास पीता होगा। ऐसा नहीं होता। सुबह से
  516. 25:25दूध पीता रहता है।
  517. 25:28अल्कोहलिक मैंने नहीं देखे। अलकोहलिक
  518. 25:31खोलते हैं। ये टेंडेंसी है मजहब की कि वो
  519. 25:35बढ़ता है। जैसे कैंसर बढ़ता है, जैसे शराब
  520. 25:39बढ़ती है।
  521. 25:41कुछ लोग होंगे जो उसे सही तरह से यूज़ करते
  522. 25:45हैं। मुझे यकीन है कि हमारे मुफ़्ती साहब
  523. 25:47भी होंगे। एक बहुत खुशी हुई मुझे इनसे
  524. 25:50मिलके। लेकिन कितने लोग हैं आज आप देखते
  525. 25:52हैं दुनिया में जो तबाहया है इनमें कितना
  526. 25:55हाथ है उन लोगों का जो बिलीव है कहते मजहब
  527. 25:59ये नहीं कहता ना कहता होगा मगर जब ये मजहब
  528. 26:02पीते हैं तो ऐसे बिहेव करते हैं थोड़ा सा
  529. 26:06अगर हो तो शायद बहुत अच्छी बात है लेकिन
  530. 26:09शराब थोड़ी सी नहीं रहती उसमें टेंडेंसी
  531. 26:13है पहले थोड़ा सा अगर दो तीन कैंसर के सेल
  532. 26:15हो ना बॉडी में तो आदमी सिम रहेगा लेकिन
  533. 26:18वो दो तीन सेल नहीं रहते वो मल्टीप्लाई
  534. 26:21होते हैं। जावेद साहब टाइम पूरा हो गया।
  535. 26:23टाइम हो गया। बस बात खत्म हो गई। अच्छा
  536. 26:25मुझे कुछ और कहने को था भी नहीं।
  537. 26:29[प्रशंसा]
  538. 26:31जी मैं पहले जवाबी दौर के लिए इनवाइट कर
  539. 26:35रहा हूं मुफ्ती साहब को। योर रिबटल राउंड
  540. 26:37वन। यू हैव से मिनट्स।
  541. 26:44थैंक यू वेरी मच जावेद साहब। आपकी बात को
  542. 26:47सुनकर बड़े महजूस हुए हैं हम महजूस डू यू
  543. 26:50अंडरस्टैंड वी एंजॉय ओके अब थोड़ा सा
  544. 26:53लॉजिकली उसको हम लोग
  545. 26:54दरअसल हम लोगों ने कल गुजारिश की थी
  546. 26:56मुफ्ती साहब से भी जावेद साहब से भी कि
  547. 26:58हिंदुस्तानी जबान आम फहम सबको समझ में आ
  548. 27:01जाए और जहां कहीं आप मुश्किल शब्द
  549. 27:02इस्तेमाल करें वहां बताते भी चलें थैंक यू
  550. 27:06तो सबसे पहले हमारे रिस्पेक्टेड जावेद
  551. 27:09साहब ने हवाला दिया कि खुदा फानी है कितने
  552. 27:11मजहब आ गए चले गए किसी ने जुपिटर को खुदा
  553. 27:14माना किसी ने किसी को माना मैं कहता हूं
  554. 27:16जिसने कॉन्टिंजेंट चीज को खुदा माना गलत
  555. 27:18माना वो खुदा ही नहीं वो खुदा ही नहीं है।
  556. 27:21[प्रशंसा]
  557. 27:22हम तो नेसेसरी बीन को साबित करने बैठे
  558. 27:25हैं। वो नेसेसरी कॉज जो इटरनल है जो जो
  559. 27:28अबदी भी है और अजली भी है। हम किसी और को
  560. 27:31साबित करने नहीं बैठे। दूसरी चीज उन्होंने
  561. 27:33कहा के फेथ एंड बिलीफ ये एक
  562. 27:38ऐसी डेफिनेशन है फेथ की जो इन्होंने पहली
  563. 27:42मर्तबा पेश की है या माफ़ कीजिएगा इन्होंने
  564. 27:44पहली मर्तबा पेश नहीं की है। रिचर्ड
  565. 27:46डॉकिंस ने पहली मर्तबा पेश की है। मुझे
  566. 27:48मालूम है ये सोर्स कहां से है।
  567. 27:49एपिस्टेमोलॉजिकली
  568. 27:51फेथ और बिलीफ का फर्क आप इस तरह नहीं कर
  569. 27:54सकते सर। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता
  570. 27:57है। बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता
  571. 27:59है। जो लॉजिक रीजन और एविडेंस से बैक्ट
  572. 28:03होगा वो फेथ सही होगा। और आप जिस फेथ की
  573. 28:06बात कर रहे हैं कि इलॉजिकल है और उसके
  574. 28:08पीछे नहीं है तो वी आर ऑन द सेम पेज। हम
  575. 28:11नहीं मानते उस फेथ को। जो फेथ ऐसा हो
  576. 28:14जिसके पीछे कोई लॉजिक ना हो। एविडेंस ना
  577. 28:16हो। हम नहीं मानते। हम तो उस फेथ के कायल
  578. 28:18हैं जिसके पीछे लॉजिक हो और एविडेंस हो।
  579. 28:21तो बिलीफ सही भी होता है, गलत भी होता है,
  580. 28:23फेथ भी सही होता है और गलत भी होता है। तो
  581. 28:25आज फेथ और बिलीफ के डिफरेंस पे बात नहीं
  582. 28:28हो रही है। आज आप चाहे फेथ एक्सेप्ट कर
  583. 28:30लें या बिलीफ एक्सेप्ट कर लें। आज ये बात
  584. 28:32होगी कि ट्रुथ क्या है? चाहे ट्रू बिलीफ
  585. 28:35सही है या ट्रू फेथ सही है और फॉल्स फेथ
  586. 28:38क्या है और फॉल्स बिलीफ क्या है? बात इसपे
  587. 28:40हो रही है। दूसरी चीज इन्होंने पूछा
  588. 28:41स्टुपिडिटी फिर क्या है? अगर फेथ रिलीजन
  589. 28:44स्टुपिडिटी नहीं है तो और क्या है?
  590. 28:45क्योंकि फेथ का मुतालबा करते हैं तो
  591. 28:47स्टुपिडिटी स्टुपिडिटी क्या है? मैं कहता
  592. 28:49हूं स्टुबिडिटी एथिज्म है। उसकी वजह ये है
  593. 28:52कि आप एक सड़क पे जा रहे हो और आप किसी
  594. 28:54गार्डन में जाएं और देखें वहां लिखा है
  595. 28:56फूलों के साथ आई लव जावेद अख्तर एंड आई
  596. 28:59रियली डू आई लव यू सर। सो
  597. 29:02जब आप [प्रशंसा]
  598. 29:05वहां पर पहुंचे तो वहां पहुंचकर अब ये
  599. 29:08बताएं क्या आप ये कहेंगे वाओ व्हाट अ
  600. 29:11नेचुरल सेक्शन। ये क्या नेचुरल सेक्शन है?
  601. 29:14नहीं। यह प्रिसाइजली डिजाइन है। इसके पीछे
  602. 29:18डिजाइनर है। लिहाजा अगर कोई एक ऐसी कॉमन
  603. 29:22सेंस की बात को कबूल नहीं कर रहा है कि
  604. 29:24यूनिवर्स जो इतनी प्रिसाइजली काम कर रहा
  605. 29:26है। हम कह दें कि खुद ब खुद बन गई। मैं
  606. 29:28समझता हूं इससे बड़ी स्टुबिडिटी और कुछ
  607. 29:30नहीं है। ये इररेशनल चीज है। [प्रशंसा]
  608. 29:34फिर हमारे सर ने कहा कि आपने बॉल पे फोकस
  609. 29:38किया, आइलैंड पे फोकस नहीं किया। अरे
  610. 29:41आइलैंड को किसने बनाया यही समझाने के लिए
  611. 29:43तो बॉल की मिसाल दे रहा हूं।
  612. 29:47और बॉल भी कॉन्टिंजेंट है, आइलैंड भी
  613. 29:50कंटिंजेंट है। दोनों नेसेसरी बीइंग का
  614. 29:52मुतालबा करते हैं। आगे इन्होंने कहा कि
  615. 29:54नेचर में कोई इंसाफ नहीं है। हम डिसाइड
  616. 29:57करते हैं कि मोरालिटी क्या होती है? इंसाफ
  617. 29:59क्या होता है? हम डिसाइड करते हैं जैसे
  618. 30:02ड्राइविंग सीट में, ट्रैफिक वाला ये तो
  619. 30:03किसी खुदा ने नहीं कहा। ये है इसे कहते
  620. 30:05हैं फॉल्स इक्विवेलेंस। ये एक लॉजिकल
  621. 30:08फैलेसी है। आपने जो है मिसाल दी ड्राइविंग
  622. 30:11की और ट्रैफिक की। ये सब्जेक्टिव मोरालिटी
  623. 30:13है। आप सब्जेक्टिव मोरालिटी को मिसाल
  624. 30:15बनाकर ऑब्जेक्टिव मोरालिटी के ऊपर नहीं
  625. 30:17थोप सकते। इंसाफ ये ऑब्जेक्टिव मोरालिटी
  626. 30:19है। अगर आप ये कहते हैं कि नेचर में इंसाफ
  627. 30:21नहीं है तो इंसाफ का ना होना ये नेचुरल
  628. 30:24हुआ तो फिर नेचर को नेचर रहने दे। क्यों
  629. 30:26हम इतना स्ट्राइव कर रहे हैं दुनिया में
  630. 30:28इंसाफ लाने के लिए? यह तो इलॉजिकल बात है,
  631. 30:30इरशनल बात है। इसलिए बहुत सी चीजें ऐसी
  632. 30:33हैं जो ऑब्जेक्टिवली जो है इविल या गुड
  633. 30:36हैं और बहुत सी चीजें ऐसी हैं जो
  634. 30:38सब्जेक्टिवली हैं। सब्जेक्टिवली जो मोरल
  635. 30:41होता है या इमोरल होता है उसको हम सोशल
  636. 30:43कंसेंस कंसेंसेस से या पर्सनल प्रेफरेंस
  637. 30:46से डिसाइड करते हैं। लेकिन जो ऑब्जेक्टिव
  638. 30:48मोरालिटी है जिसमें इंसाफ आया जो इन्होंने
  639. 30:50बार-बार रिपीट किया ये ऑब्जेक्टिव है।
  640. 30:53सब्जेक्टिव नहीं है। अगर आप कहते हैं ये
  641. 30:55सब्जेक्टिव है। तो मेरा सवाल आपसे यह है
  642. 30:57क्या सोशल कंसेंसेस के जरिए अगर जुल्म को
  643. 31:00सही करार दे दिया जाएगा तो आप जुल्म को
  644. 31:02जस्टिफाई करेंगे? दूसरी चीज इन्होंने ये
  645. 31:06कहा कि दो पैक शराब पी लें तो वो उतने पे
  646. 31:11नहीं रहता बढ़ जाता है। यही मामला मजहब के
  647. 31:14साथ है। दो पैक आप पी लें बढ़ेगा। तो ये
  648. 31:16एक ऐसी मिसाल है इसको कहीं भी फिट कर लें
  649. 31:19कि आप एथिज्म पे जब फिट करें जब आप दो पैक
  650. 31:21एथिज्म का लेंगे ना तो वो बढ़-बढ़ के
  651. 31:24नॉर्थ कोरिया बनेगा। थैंक यू।
  652. 31:25[प्रशंसा]
  653. 31:31[प्रशंसा]
  654. 31:32फर्स्ट राउंड की रिबटल के लिए मैं जावेद
  655. 31:34साहब को इनवाइट कर रहा हूं। आपके पास 7
  656. 31:36मिनट का वक्त है। रिसेट कर दीजिएगा प्लीज।
  657. 31:41मुझे इस बात की खुशी है कि मुफ्ती साहब ने
  658. 31:43भी मान लिया कि नेचर में कोई इंसाफ नहीं
  659. 31:46है। तो कोई भी चीज जो इंसान ने नहीं बनाई
  660. 31:49है उसमें इंसाफ नहीं होता है। एक बात मैं
  661. 31:52आपसे अ करूं जरा पता लगा लीजिएगा। ये जो
  662. 31:54आप बाग में जाते हैं बेहद खूबसूरत फूल
  663. 31:56देखते हैं ना इनमें से कोई नेचुरल नहीं
  664. 31:58है। ये सारे फूल क्रॉस करके बनाए गए हैं।
  665. 32:02जो जंगल में फूल होते हैं निहायत मामूली
  666. 32:05होते हैं। ये फूल इंसानों ने बनाए हैं जो
  667. 32:07आप बाग में देख के वाहवाह कहते हैं। ये
  668. 32:10इंसानों के बनाए हुए हैं। डिफरेंट फूलों
  669. 32:11को क्रॉस करके डेवलप करके फिर क्रॉस करके
  670. 32:14इस तरह से बनाए गए। नेचुरल फ्लावर्स नहीं।
  671. 32:16किसी जंगल वीरान में जाके आप गुलाब के फूल
  672. 32:19नहीं देखेंगे। ये सब बनाए हुए इंसान ने।
  673. 32:21बहुत से काम इंसान ने किए हैं। बाकी ये कि
  674. 32:25आपने मेरी एक बात का जवाब नहीं दिया जिससे
  675. 32:28मुझे शिकायत है कि फथ क्या है? और आप फेथ
  676. 32:33मांगते क्यों हैं मुझसे? आप तो लॉजिकल है।
  677. 32:36आपके पास तो सारे रैशन हैं। आपके पास सारे
  678. 32:39सबूत हैं। तो आपको फेथ की डिमांड क्यों
  679. 32:42करते हो आप? कि भाई तुम सरेंडर कर दो और
  680. 32:45सवाल मत करो। कोई मजहब सारे सवाल करने की
  681. 32:48इजाजत नहीं देता है और मना करता है कि
  682. 32:51ज्यादा सवाल ना करो बह जाओगे तुम। आप
  683. 32:54क्यों रोकते हैं? हकीकत ये है कि इंसानी
  684. 32:58तारीख क्या है? इंसानी तारीख यह है कि
  685. 33:01दुनिया में दो तरह के लोग हुए हैं। एक वो
  686. 33:04जिन्होंने अपनी लालमी की परस्तिश की है।
  687. 33:08दूसरे वो जिन्होंने अपनी इग्नोरेंस या
  688. 33:10लालमी से झगड़ा किया है और मालूम किया है
  689. 33:13कि क्या है। ये जो आप कह रहे हैं आज आप
  690. 33:16हैरान हैं कि भाई ये यूनिवर्स कैसे बनी?
  691. 33:20लोग हैरान थे कि सूरज डूबता है तो इधर से
  692. 33:22कैसे निकलता है
  693. 33:24और आप एक कदम जाके हमेशा का मानने को
  694. 33:28तैयार है एक कदम पीछे ही मत जाइए भाई आप
  695. 33:32इसके पास जाते हैं और कहते हैं सवाल ना
  696. 33:33करना कि ये कहां से आया ये पावर तो हमेशा
  697. 33:36से हमेशा रहेगी तो आप यूनिवर्स के बारे
  698. 33:38में माने क्या तकलीफ है एक कदम पहले या
  699. 33:40रुक जाइए
  700. 33:42ये हमेशा से थी या नहीं थी हमें मालूम
  701. 33:44नहीं है और ये कहना कि हमें मालूम नहीं
  702. 33:47है। कमाल यह है कि दुनिया के सारे मजहब सब
  703. 33:51जानते हैं। ये दुनिया कैसे बनी थी? कैसे
  704. 33:54मिटेगी? मरने के बाद क्या होगा? इनको सब
  705. 33:57इल्म है। इनको किसी को डायनासोर होते थे
  706. 34:01पहले ये नहीं पता था। किसी को नहीं पता।
  707. 34:06किसी भी दुनिया की मजहबी किताब में
  708. 34:09डायनासोर का जिक्र नहीं है।
  709. 34:12लेकिन बाकी सब बातें हाउ टू मेक यूनिवर्सल
  710. 34:15फोर ईजी लेसंस एंड बाकी सब पता है। जिसको
  711. 34:19सब पता है वो गड़बड़ है। हम में ये इंकसार
  712. 34:23ये ह्यूमिलिटी होनी चाहिए कि हम ये कहे कि
  713. 34:26हमें ये बहुत सारी बातें नहीं मालूम।
  714. 34:28लेकिन हम उनकी परस्त ना कर ले। अपनी लालमी
  715. 34:31को की परस्त ना करें। हम उसे पता लगाने की
  716. 34:36कोशिश करें। जिस दुनिया में आप बैठे हैं
  717. 34:38सर ये हॉल जो है ये इलेक्ट्रिसिटी जो है
  718. 34:41ये माइक जो है जिस हवाई जहाज से आप आए थे
  719. 34:43वो जिस कार से आप यहां आए हैं ये सब उन
  720. 34:47लोगों की बनाई हुई है जिन्होंने सवाल किए
  721. 34:49थे।
  722. 34:52[प्रशंसा]
  723. 34:52ये दुनिया जिसमें आप आज आराम से हैं। ये
  724. 34:56उन लोगों की बनाई है कि जिन्होंने सवाल
  725. 34:59किए थे और हर स्टेज पे इन सवालों को
  726. 35:07मकरू कहा गया था। गलत कहा गया था। आप जरा
  727. 35:10तारीख पढ़िए। एक बड़ी दिलचस्प किताब है
  728. 35:12बैटन की
  729. 35:15जिसमें उसने रिलीजन एंड साइंस कि कब से
  730. 35:19रिलीजन जो है साइंस के अगेंस्ट है और हद
  731. 35:23तो ये है कि भाप के इंजन के खिलाफ थे
  732. 35:27स्टीम इंजन के भी खिलाफ थे और फतवे उन पे
  733. 35:30वेटिकन ने दिए
  734. 35:33तो ये हमेशा अभी जैसे ही ये राइट फिंगर
  735. 35:37आते हैं
  736. 35:39अमेरिका में पावर तो वो जो अपना ये क्या
  737. 35:43बोलते हैं उसे
  738. 35:46सीड क्या है? शीट क्या
  739. 35:49हां
  740. 35:50नहीं नहीं शीट जो होती है
  741. 35:54जी
  742. 35:59नहीं भाई
  743. 36:01वो जो ह्यूमन बॉडी के
  744. 36:10बंद हो जाती है। रिपब्लिकन नहीं करने
  745. 36:13देते। अरे भाई इतना डर क्या है तुम्हें?
  746. 36:16एक जमाने में बहुत नाराज थे ये सारे मजहबी
  747. 36:20लोग कि ये इंसान तो इंसान बनाने की कोशिश
  748. 36:22कर रहा है। आपको क्या तकलीफ हुई बना ले तो
  749. 36:25बना लेने दो। ये खौफ क्या है?
  750. 36:29और ये सब आज जो आप कह रहे हैं नामुमकिन है
  751. 36:32ये कैसे हुआ? मुझे किस्सा याद आता है। जब
  752. 36:35मैं छठी क्लास में था तो मैं मैथमेटिक्स
  753. 36:38में बहुत वीक था। तो एक टीचर रख दिया गया।
  754. 36:40उसने एक दो तीन चार पांच छ सात तो सिखा
  755. 36:42दिया मुझे। वो दिन मैं भूल नहीं सकता हूं
  756. 36:45सब। जिस दिन उसने ये बताया कि 1/2 क्या
  757. 36:48होता है और 3/4 क्या होता है। मुझे ऐसा
  758. 36:51लगा कि मेरा सर बीच से फट जाएगा। ये आदमी
  759. 36:54कह रहा है कि यू दीवार के अंदर जाओ वॉक
  760. 36:57करते हुए। आज हंसता हूं मैं इस बात पे। तो
  761. 37:00आज जो बातें आपके ज़हन से बिल्कुल परे है
  762. 37:03और आप हैरान होते हो उन्हें देख के। एक
  763. 37:05वक्त आएगा कि मामूली लगेंगे और हुआ है
  764. 37:08आपकी इंसानी तारीख ही है। इतनी जल्दी सारे
  765. 37:11फैसले आप मत कर लीजिए। थोड़ा ह्यूमिलिटी
  766. 37:14रखिए कि भाई ये हमें नहीं मालूम। ये कहने
  767. 37:18में क्या आ रहा है? ये यूनिवर्स कहां तक
  768. 37:20फैली? ये कब से है और कब तक रहेगी? हमें
  769. 37:24नहीं मालूम। आपने फैसला कर लिया कब बनी?
  770. 37:27ये आपके हिसाब से कोई 14 बिलियन इयर्स
  771. 37:29बनी। जो समझा जाता है उससे पहले हजारों
  772. 37:34करोड़ों अरबों साल तक खुदा बैठा क्या कर
  773. 37:37रहा था खामोश बैठा था ऐसे ही जमाइयां ले
  774. 37:40रहा था फिर उसे आईडिया आया यार एक काम
  775. 37:43करते हैं वक्त अच्छा गुजर जाएगा यूनिवर्स
  776. 37:45पर
  777. 37:48सोचिए
  778. 37:51वो तो हमेशा से है ना मगर यूनिवर्स हमेशा
  779. 37:54से नहीं है ये तो बनाई गई है और उससे पहले
  780. 37:58क्या था इनका का क्या काम था?
  781. 38:02कैसी बात थी? ये बड़ा आसान है। जो बात
  782. 38:05हमें आज धीरे-धीरे पता चल रही है। बरसों
  783. 38:082000 और ढाई हजार साल पहले आपको किसी ने
  784. 38:10बता दिया कि क्या था आप मान गए? और तब से
  785. 38:14वही मान रहे हैं जो ढाई हजार साल पहले कहा
  786. 38:16गया। सब कुछ बदल गया है। सॉल्व हो रही है
  787. 38:20चीजें। अभी
  788. 38:22साइंस बिल्कुल दावा नहीं करती या कोई
  789. 38:26फिलॉसफर ये दावा नहीं करता कि हमें सब
  790. 38:28मालूम बल्कि वो कहता है कि हमें जितना
  791. 38:30मालूम होता है उससे ये मालूम होता है कि
  792. 38:32हमें कितना कम मालूम है। तो हम अपनी
  793. 38:35जियालत से लड़े उसकी परफेशना करें।
  794. 38:39जी टाइम थैंक यू। थैंक यू सो मच।
  795. 38:42[प्रशंसा]
  796. 38:44मैं
  797. 38:46तर्कों की श्रंखला में राउंड टू के लिए
  798. 38:48मुफ्ती साहब को आमंत्रित कर रहा हूं। आपके
  799. 38:50पास एक बार फिर से 7 मिनट का वक्त है।
  800. 38:57शुक्रिया। जनाब जावेद अख्तर साहब कई
  801. 39:00मर्तबा दोहरा रहे हैं कि फेथ का मतलब
  802. 39:02बताइए। फेथ का मतलब बताइए। मैंने बता
  803. 39:04दिया। फेथ सही भी होता है, गलत भी होता
  804. 39:07है। और आज हम फेथ पे बात नहीं कर रहे। हम
  805. 39:10ट्रुथ और डस गॉड एक्सिस्ट पे बात कर रहे
  806. 39:12हैं। क्या डस गॉड एक्सिस्ट? ये ट्रुथ यानी
  807. 39:15गॉड है या नहीं है? इसमें से दोनों ट्रुथ
  808. 39:18क्या है? अब आप उसे फेथ कह लें, बिलीफ कह
  809. 39:20लें नॉट माय बिनेस। उसके बाद आपने कहा कि
  810. 39:22भाई सवाल करने से मजहब रोकता है। मैं कहता
  811. 39:26हूं जो रोकता है वो रोकता होगा। मैं नहीं
  812. 39:29रोकता। बल्कि सवाल करें। सवाल करना चाहिए।
  813. 39:33सवाल कर के तो हम आगे बढ़ते हैं, तरक्की
  814. 39:35करते हैं। और इसीलिए मैं आज यहां पे आया
  815. 39:37हूं। लेकिन सवाल सिर्फ खुदा से नहीं होगा।
  816. 39:39आपसे भी होगा। सवाल एथिज्म से भी होगा।
  817. 39:41सवाल सिर्फ मजहब से नहीं होगा। सबसे होगा।
  818. 39:44और आज मैं सवाल करूंगा और उम्मीद है कि आप
  819. 39:46जवाब देंगे। अभी तक आपने वैसे कंटिंजेंसी
  820. 39:48आर्गुमेंट का कोई जवाब नहीं दिया है। चलें
  821. 39:50आपने कहा यूनिवर्स के बारे में इटरनल
  822. 39:52क्यों नहीं बोल देते? ये क्योंकि लॉजिकली
  823. 39:55पॉसिबल ही नहीं है कि यूनिवर्स इटरनल हो।
  824. 39:58यूनिवर्स एक कंटिंजेंट
  825. 40:00चीज है। जो टाइम एंड स्पेस के पाबंद है।
  826. 40:03टाइम एंड स्पेस से बाउंड है। जो टाइम एंड
  827. 40:05स्पेस से बाउंड होगा वो कंटिंजेंट होगा।
  828. 40:08जो कंटिंजेंट होगा उसकी बिगिनिंग हुई
  829. 40:10होगी। जिसकी बिगिनिंग हुई होगी वो इटरनल
  830. 40:12नहीं हो सकता। ये तो कॉमन सी बात है।
  831. 40:16[प्रशंसा]
  832. 40:17आपने कहा कि किसी मजहबी किताब में
  833. 40:20डायनासोर का जिक्र नहीं है। अफसोस कि आज
  834. 40:22तक किसी मैथमेटिक्स के किताब में मुझे
  835. 40:24डायनासोर का जिक्र नहीं मिला।
  836. 40:28तो इसका मतलब मैथमेटिक्स की किताब बेकार
  837. 40:30है। नहीं उसका वो टॉपिक नहीं है। रेवेलेशन
  838. 40:33का और मजहबी किताबों का टॉपिक ये नहीं है
  839. 40:35कि आपको आके बताएं साइकिल कैसे बनाते हैं।
  840. 40:37ये आकर ये बताएं कि जो है डायनासोर कब था।
  841. 40:39वो तो मोरालिटी सिखाने आया है। गॉड के
  842. 40:41बारे में बताने आया। नॉन फिजिकल रियलिटी
  843. 40:44की हकीकत को सिखाने के लिए आया। रिलीजियन
  844. 40:46साइंस को रोकता है। नहीं रोकता। अगर रोकता
  845. 40:48है तो गलत करता है। रिलीजन साइंटिज्म को
  846. 40:51रोकता है जिसमें हमारे जावेद साहब मुख्तल
  847. 40:53है।
  848. 40:56साइंस
  849. 40:57साइंस और साइंटिज्म में फर्क है।
  850. 41:00साइंटिज्म ये है कि आप समझे के साइंस और
  851. 41:03साइंटिफिक मेथोडोलॉजी ये नॉलेज को हासिल
  852. 41:07करने का वाहिद सोर्स ऑफ नॉलेज है। ये है
  853. 41:09साइंटिज्म। हम इसे रिजेक्ट करते हैं। हम
  854. 41:12साइंस को तो तरक्की करते हैं। भाई आप
  855. 41:13हमारी पूरी तारीख कर लें। पढ़ लें तो आपको
  856. 41:15पता चल जाएगा। बहरहाल ये अलग टॉपिक है।
  857. 41:17उसके बाद इन्होंने एक लफ्ज़ कहा वेटिकन ने
  858. 41:19फतवा दिया। वेटिकन का फतवे से कोई ताल्लुक
  859. 41:21नहीं है। दोनों कंट्राडिक्टरी अल्फ़ाज़
  860. 41:23हैं। उसके बाद उन्होंने कहा कि भई हमें
  861. 41:25नहीं मालूम। अगर नहीं मालूम तो क्लियरली
  862. 41:27कह दे ना कि नहीं मालूम है इसमें क्या हरज
  863. 41:29है? तो वही तो मैं कह रहा हूं ना कि आप कह
  864. 41:31दें कि नहीं मालूम लेकिन क्लेम क्यों कर
  865. 41:33रहे हैं कि गॉड एक्सिस्ट नहीं कर रहा है।
  866. 41:36[प्रशंसा]
  867. 41:39आप कह दे नहीं मालूम है। हो सकता है हो
  868. 41:42सकता ना हो। लेकिन आप क्लेम कर रहे हैं। द
  869. 41:44मोमेंट यू से गॉड डज नॉट एक्सिस्ट। दिस इज
  870. 41:47अ क्लेम एंड नाउ द बर्डन ऑफ प्रूफ इज अपॉन
  871. 41:50यू टू जैसे हमारे ऊपर है।
  872. 41:53और क्यों है मैं बताता हूं। क्यों है ये
  873. 41:55भी मैं बताता हूं। फिलॉसोफिकली
  874. 41:58जो क्लेम होता है ना सिर्फ ये नहीं होता
  875. 42:01कि इंसान कहे पॉजिटिव क्लेम करे और
  876. 42:04नेगेटिव क्लेम करे तो बर्डन अप्रूव नहीं
  877. 42:05है। आप मिसाल के तौर पे मैं कहूं कि फुलां
  878. 42:08उस कमरे में कोई नहीं है। मैंने एक नॉलेज
  879. 42:10का क्लेम किया है। उस कमरे में कोई नहीं
  880. 42:13है। मैंने एक नॉलेज का क्लेम किया। या तो
  881. 42:15मैं कहूं मुझे नहीं पता हो भी सकता है
  882. 42:16नहीं भी हो सकता है। दिस इज़ नॉट अ क्लेम।
  883. 42:18लेकिन जब मैं कह रहा हूं कि वहां कोई नहीं
  884. 42:20है। या मैं कह रहा हूं वहां कोई है। दोनों
  885. 42:22क्लेम है और दोनों के ऊपर बर्डन ऑफ प्रूफ
  886. 42:24है। हमारे ऊपर भी बर्डन ऑफ प्रूफ है।
  887. 42:26मैंने कंटिंजेंसी आर्गुमेंट दिया। इसे
  888. 42:27तोड़ कर दिखाइए।
  889. 42:29[प्रशंसा]
  890. 42:32आखिरी चीज इन्होंने कहा कि खुदा दुनिया
  891. 42:35बनाने से पहले 150 साल पहले या करोड़ों
  892. 42:38साल पहले क्या कर रहा था। अरे हजरत
  893. 42:42चलें बहरहाल मैं जवाब दे देता हूं। आप
  894. 42:45हमारे रिस्पेक्टेड पर्सनालिटी हैं। अगर आप
  895. 42:46नहीं होते तो मैं ऐसे एंटरटेन ही नहीं
  896. 42:48करता।
  897. 42:51[प्रशंसा]
  898. 42:52टाइम ये 100 साल पहले या 100 साल बाद पहले
  899. 42:56बाद में अभी ये वो अल्फाज़ हैं जिनका
  900. 42:59ताल्लुक टाइम से है। टाइम शुरू ही हुआ है
  901. 43:02यूनिवर्स की बिगिनिंग के बाद। तो उसके
  902. 43:04पहले खुदा क्या कर रहा था? सवाल ही
  903. 43:05इलॉजिकल है। ये फैलेसी है। यानी आप ये कह
  904. 43:08रहे हैं कि यूनिवर्स के बनने से पहले खुदा
  905. 43:10क्या कर रहा था? टाइम के बनने से पहले
  906. 43:13पहले का ताल्लुक टाइम से है। टाइम उस वक्त
  907. 43:15था ही नहीं। तो ये सवाल ही इनवैलिड है
  908. 43:17खुदा के ताल्लुक से। [प्रशंसा]
  909. 43:21दूसरी चीज आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी जो
  910. 43:25मैंने आपके सामने पेश की है। आपने बार-बार
  911. 43:28ये प्रूफ किया और ये कह रहे हैं कि गॉड ऑफ
  912. 43:30गैप्स। देखिए पहले नहीं मालूम था साइंस ने
  913. 43:32कर दिया। सिंपल इसकी मिसाल से मैं समझा
  914. 43:34देता हूं। जिस गैप्स की आप बात कर रहे हैं
  915. 43:37ना साइंस उन गैप्स को जिन चीज के जरिए भी
  916. 43:40प्रूव करेगा वो कंटिंजेंट ही होगा। अब
  917. 43:43चाहे वो फोर्स हो, मैटर हो या एनर्जी हो।
  918. 43:47लिहाजा सवाल हमारा उस वक्त भी वैलिड होगा
  919. 43:49जब तक कि आप नेसेसरी बीइंग पे ना आ जाएं।
  920. 43:52और इनफिनिट रिग्रेस पॉसिबल नहीं है ऑफ
  921. 43:54कॉजेस इन प्रैक्टिकल वर्ल्ड। तो जाहिर है
  922. 43:57कहीं रुकना पड़ेगा। जहां रुकेंगे वही खुदा
  923. 44:00है। दूसरी चीज़ आपने
  924. 44:04ये कहा क्या कह रहा था मैं? किस पॉइंट को?
  925. 44:15जस्ट जस्ट जस्ट
  926. 44:19हां जहां रुकेंगे वही खुदा है। बहरहाल तो
  927. 44:22टाइम का जिक्र हो गया। गॉड ऑफ़ गैप सॉरी या
  928. 44:24इसकी एक मिसाल आप ले लें। एक कार है। एक
  929. 44:28साहब ने देखा कि भाई कार जो है उसके
  930. 44:32व्हील्स कितने अच्छे लगे हुए हैं। सही जगह
  931. 44:34पे स्टीयरिंग जो है कितने अच्छे जगह पे
  932. 44:38लगी हुई है। और सीट्स कितने वेल डिज़ है।
  933. 44:41कितनी प्रिसाइजली ये कार काम कर रही है।
  934. 44:44तो जरूर कोई ना कोई इसे क्रिएट किया है।
  935. 44:46किसी ने क्रिएट किया है। अब जावेद साहब आए
  936. 44:48और कहे अरे जनाब बोननेट खोलिए। इसमें इंजन
  937. 44:50है। इंजन इस कार को चला रहा है। हेंस
  938. 44:53प्रूव्ड नो वन हैज़ क्रिएटेड द कार। दिस इज़
  939. 44:55इलॉजिकल। दिस इज़ इरशनल। आपने इंजन के जरिए
  940. 44:59उस गैप को तो साबित किया लेकिन क्या उससे
  941. 45:04कार की जो क्रिएशन है और उसका जो क्रिएटर
  942. 45:08है ये इंपॉसिबल हो जाए ऐसा पॉसिबल है उसका
  943. 45:10सवाल खत्म हो जाए ऐसा पॉसिबल है नहीं आपने
  944. 45:13गैप्स को फिल करके कंटिंजेंट चीजों से
  945. 45:16गैप्स को फिल करके हमारे ऑब्जरवेशन को और
  946. 45:18ब्रॉड कर दिया अब हमें और पता चल गया कि
  947. 45:21ये जो कार है इसका सिस्टम कितना ज्यादा
  948. 45:24कॉम्प्लेक्स है। पहले कम समझते थे। अब
  949. 45:25कॉम्प्लेक्सिटी और ज्यादा वाज़ हो गई। अब
  950. 45:27हमें समझ में आ रहा है कि हमारी सर्टेनिटी
  951. 45:29और बढ़ गई कि जरूर इस कार को किसी ना किसी
  952. 45:32ने बनाया। यही मामला यूनिवर्स का है।
  953. 45:34साइंस हमेशा फिजिकल वर्ल्ड की चीजों को ही
  954. 45:36फिल करती जाएगी और फिजिकल चीजों से ही
  955. 45:38करती जाएगी। चूंकि एंपेरिकल एविडेंस का
  956. 45:40ताल्लुक फिजिकल वर्ल्ड से है। आप साइंस के
  957. 45:43जरिए मेटाफिजिकल रियलिटी को कभी साबित
  958. 45:45नहीं कर सकते। ये रॉन्ग टूल का इस्तेमाल
  959. 45:47करना है। यह वही काम है कि आप मेटल
  960. 45:49डिटक्टर से प्लास्टिक डिटक्टर करने चलें
  961. 45:52जो कि जाहिर है सही नहीं है। थैंक यू।
  962. 45:55[प्रशंसा]
  963. 45:59जी।
  964. 46:01ये आर्गुमेंट का राउंड टू है।
  965. 46:03सात मिनट।
  966. 46:05पहले तो मैं आपसे अर्ज करूं कि आपने कहा
  967. 46:07कि जब कायनात ही नहीं थी तो वक्त भी नहीं
  968. 46:09था, कुछ भी नहीं था। कैसे नहीं था? खुदा
  969. 46:11था।
  970. 46:13एक एक्सिस्टेंट तो था ना खुदा का तो जब
  971. 46:16खुदा था तो व भी होगा। ऐसा नहीं है कि कुछ
  972. 46:19भी नहीं था। खुदा था। अच्छा बाकी है कि
  973. 46:22आपने कहा साहब आप साबित कीजिए। आपके पास
  974. 46:24भी लॉजिक है या मेरे पास भी लॉजिक है आप
  975. 46:26मेरा जिम्मेदारी नहीं है साबित करना कि
  976. 46:28खुदा है। बर्टन रसेल ने बड़ी अच्छी बात
  977. 46:31कही।
  978. 46:33बर्टन रसेल ने बड़ी अच्छी बात कही है। मैं
  979. 46:35आपसे अगर यह दावा करूं कि चाय की केतली
  980. 46:38मिररी के चारों तरफ घूम रही है मार्स के
  981. 46:40चारों तरफ तो ये आपका काम नहीं है कि आप
  982. 46:43साबित करें कि कोई चाय की केतली नहीं है।
  983. 46:45ये मेरा काम है। मैंने दावा किया है। ये
  984. 46:47दावा तो मजहबी लोग करते हैं कि खुदा है।
  985. 46:50मैं क्यों साबित करूं कि नहीं है? जब तक
  986. 46:52आप मुझे कंफस नहीं कर देंगे मैं नहीं
  987. 46:54मानूंगा।
  988. 46:56आपकी जिम्मेदारी है। मेरी जिम्मेदारी नहीं
  989. 46:59है।
  990. 47:01दो यह कि यह जो आप कह रहे हैं जो गैप्स है
  991. 47:04ये गैप्स जब जब किसी मजहब को चैलेंज करते
  992. 47:08हैं। जब ऐसा कोई बात आती है तो हंगामा हो
  993. 47:11जाता है। के जब वो चैलेंज करें किसी फेथ
  994. 47:15को ये तमाम साइन जो है इसे मुख्तलिफ जगहों
  995. 47:20पे मुख्तलिफ वक्तों में मजहब ने रोकने की
  996. 47:24कोशिश की है। ये किताब है रिलजन एंड साइंस
  997. 47:27बटर की पढ़िएगा अच्छी लगेगी आपको। तारीख
  998. 47:32ही है साइंस मजहब की साइंस से उसका यही
  999. 47:35रिश्ता है। अच्छा अब ये हम सोचे कि बहाल
  1000. 47:39ये वजूद जो है मजहब और ये बिलीफ इन गॉड
  1001. 47:42इंसान को बेहतर बना देता है। तो एक काम
  1002. 47:45कीजिए हिंदुस्तान वर्ल्ड का नक्शा लीजिए
  1003. 47:47और मार्क कीजिए कि रिलजन कहां-कहां ज्यादा
  1004. 47:49है। कहां-कहां चाहे वो लैटिन अमेरिका हो
  1005. 47:52या मिडिल ईस्ट हो या फस्ट हो या
  1006. 47:55हिंदुस्तान के वो इलाके जहां मजहबियत
  1007. 47:57ज्यादा है। रख दीजिए नक्शा अलग। अब दूसरा
  1008. 48:01नक्शा कि कहां-कहां नाइंसाफी, रिप्रेशन,
  1009. 48:05औरतों के हुकूक की पामाली, जुल्म,
  1010. 48:08डिक्टेटरशिप कहां है? नक्शा एक ही होगा।
  1011. 48:14तो आप मुझे बताएं के जो इसका तरकीब
  1012. 48:18इस्तेमाल क्या है?
  1013. 48:20खुदा का तरकीब इस्तेमाल तो बताइए। आप छोटी
  1014. 48:23सी दवा सड़क पे बेचते हैं उसकी भी तरकीब
  1015. 48:25इस्तेमाल बताते हैं। इसके इस्तेमाल से तो
  1016. 48:27फायदा ही नहीं हुआ किसी को। जो सारे के
  1017. 48:31सारे खराब मुल्क है, खराब समाज है वो सारे
  1018. 48:34जुल्म खुदा के नाम पे करते हैं। वो गलत
  1019. 48:37करते हैं, सही करते हैं। मुझे क्या लेना
  1020. 48:39देना उससे? इस्तेमाल से मालूम होता ना। एक
  1021. 48:43विस््की की बोतल कभी शायद देखी हो आपने।
  1022. 48:45लाल रंग की होती है। उस पे रोशनी और छिपड़
  1023. 48:47इंतहाई खूबसूरत लगती है। क्या बिगाड़ रही
  1024. 48:49है किसी का? उसका इस्तेमाल गलत है। इसलिए
  1025. 48:52आप उसे नापसंद करते हैं। इसका इस्तेमाल
  1026. 48:55गलत है। इस तसवुर का
  1027. 48:59इस्तेमाल ही गलत है और हमेशा से गलत हुआ
  1028. 49:01है। आप देख लीजिए इंसानी तारीख देख लीजिए।
  1029. 49:04आज देख लीजिए हिंदुस्तान देख लीजिए।
  1030. 49:05दुनिया देख लीजिए। क्या हो रहा है?
  1031. 49:09इसे कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं? फेथ वाले
  1032. 49:11लोग क्या फेयर हैं? जस्ट हैं जो अपने
  1033. 49:15खुदाओं पे यकीन रखते हैं। वो किस तरह के
  1034. 49:18लोग हैं?
  1035. 49:19वो लोगों को इंसाफ देते हैं। वो बेहतर
  1036. 49:21इंसान बने। तो इस दवा का फायदा क्या है?
  1037. 49:24चलो बहुत फायदा हो रहा तो मैं इस्तेमाल कर
  1038. 49:26लूंगा। मुझे तो इस दवा का कोई फायदा दिखता
  1039. 49:29ही नहीं। मुझे तो ऐसा लगता मैं एक और बात
  1040. 49:32बताऊं। अगर कोई आदमी मजहबी है और अच्छा
  1041. 49:35आदमी है तो मैं उसकी बहुत इज्जत करता हूं।
  1042. 49:38इसलिए कि मेरा ख्याल है मजहबी आदमी का
  1043. 49:40अच्छा होना मुझसे अच्छा होने से ज्यादा
  1044. 49:42मुश्किल है। भाई हर चीज की एक लिमिट है।
  1045. 49:47आप इतना भाग सकते हैं, इतना नहीं भाग
  1046. 49:49सकते। इतना वजन उठा सकते, इतना नहीं उठा
  1047. 49:51सकते। इतना दूर देख सकते हैं, इतना दूर
  1048. 49:54नहीं देख सकते। उसी तरह कॉमन सेंस कहता है
  1049. 49:56कि आप में नेकी का भी एक कोटा होगा। अब आप
  1050. 49:59अगर सुबह जाते हैं अपनी इबादतगाह और इबादत
  1051. 50:03करते हैं तो बाहर निकलते हैं तो आप तो यही
  1052. 50:05महसूस करते हैं कि आपने बहुत अच्छा काम
  1053. 50:07किया। आपकी नेकी का एक बहुत बड़ा कोटा
  1054. 50:09खर्च हो गया जिससे किसी का कोई फायदा नहीं
  1055. 50:11होगा। मैं तो नहीं जाता हूं तो मुझे तो
  1056. 50:14किसी को खाना खिलाना पड़ेगा। किसी बेवा की
  1057. 50:16मदद करनी पड़ेगी। मैं अपना कोटा कैसे
  1058. 50:19कंज्यूम करूं? आप अपना कोटा सारे मजहबी
  1059. 50:22लोग इंतहाई यूज़लेस कामों में यूज़ करते
  1060. 50:25हैं। उसके बाद भी अगर आप में बचती है थोड़ी
  1061. 50:27सी शराफत तो भाई वाह क्या बात है।
  1062. 50:31[प्रशंसा]
  1063. 50:35एक तो मुझे यह बात बहुत अच्छी लग रही है
  1064. 50:37कि दोनों ही विद्वान समय को मानते हैं और
  1065. 50:42बहुत समय से अपनी दलीलें और बाज दफा समय
  1066. 50:46से पहले अपनी तकरीरें पूरी करके अपनीपनी
  1067. 50:48कुर्सी पर बैठ रहे हैं। ये इस आर्गुमेंट
  1068. 50:51का राउंड टू पूरा हुआ। अब रिबर्टल का
  1069. 50:54राउंड टू है और उसके बाद क्रॉस
  1070. 50:56एग्जामिनेशन होगा।
  1071. 50:59नहीं आपका आर्गुमेंट हो गया सर।
  1072. 51:03हमारे यहां स्कूल के सिलेबस में पंच
  1073. 51:06परमेश्वर कहानी पढ़ाई जाती है प्रेमचंद जी
  1074. 51:08की लिखी हुई। आप निश्चिंत रहिए। आपके कोई
  1075. 51:10राउंड मैं मिस नहीं होने दूंगा। रिबटल का
  1076. 51:12राउंड टू मुफ्ती शमाल नदी साहब।
  1077. 51:19असल में जो हकीकी प्रॉब्लम है असल
  1078. 51:22प्रॉब्लम है वो यह है कि जावेद साहब के
  1079. 51:24पास कासेप्ट ऑफ गॉड क्लियर नहीं है।
  1080. 51:27इन्होंने कहा कि कायनात से पहले खुदा तो
  1081. 51:30था तब भी तो टाइम होगा कि खुद कायनात टाइम
  1082. 51:34कायनात का हिस्सा है। हम खुदा उस खुदा को
  1083. 51:38मानते हैं। नेसेसरी बीइंग का टाइमलेस होना
  1084. 51:40जरूरी है। क्योंकि वो टाइम का क्रिएटर है।
  1085. 51:42जब उसने टाइम को क्रिएट किया तो वो खुद
  1086. 51:44टाइम पे कैसे होगा? उसने जब स्पेस को
  1087. 51:46क्रिएट किया तो खुद स्पेस में कैसे होगा?
  1088. 51:48अगर वो टाइम एंड स्पेस को पहले से ही उस
  1089. 51:51का पाबंद है तो फिर किस चीज को उसने
  1090. 51:52क्रिएट किया? लिहाजा ये सवाल गलत है के
  1091. 51:55खुदा था तो टाइम होगा। बिल्कुल नहीं। टाइम
  1092. 51:58के पाबंद हम है खुदा नहीं है। हम फिजिकल
  1093. 52:00वर्ल्ड से ताल्लुक रखते हैं। वो
  1094. 52:02मेटाफिजिकल रियलिटी है। दूसरी चीज
  1095. 52:04इन्होंने मिसाल दी कि चाय की केतली हवा
  1096. 52:06में घूम रही होगी और पता नहीं शायद वो
  1097. 52:08बर्टन रसेल का उन्होंने हवाला दिया।
  1098. 52:10बहरहाल यही प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम यही है
  1099. 52:13कि हम चीजों के दरमियान डिफरेंशिएट नहीं
  1100. 52:15कर पाते हैं। ये जो आपने मिसाल दी ये
  1101. 52:17इमेजिनेशन है और मैं जो साबित कर रहा हूं
  1102. 52:20वो लॉजिकल नेसेसिटी है।
  1103. 52:24[प्रशंसा]
  1104. 52:25आप इमेजिन करने आए तो कुछ भी करें। जुपिटर
  1105. 52:27में पिंक एलीफेंट होगा, यूनिकॉर्न होगा
  1106. 52:29करें। उससे कायनात पे क्या फर्क पड़ता है?
  1107. 52:32उससे आप लॉजिकल नेसेसिटी साबित नहीं कर
  1108. 52:34सकते। मैं तो उस प्राइम कॉज की बात कर रहा
  1109. 52:37हूं। उस नेसेसरी बीइंग की बात कर रहा हूं
  1110. 52:39जिसके बगैर इस कायनात का एकिस्टेंस मुमकिन
  1111. 52:42नहीं है। दूसरी चीज मजहब को साइंस चैलेंज
  1112. 52:44करती है वगैरह-वगैरह ये हमारा टॉपिक ही
  1113. 52:46नहीं है। मैं मैं इस पे बात करूंगा तो फिर
  1114. 52:48मेरा वक्त चला जाएगा। मजहब के ऊपर क्योंकि
  1115. 52:50हमारी डिस्कशन नहीं है। साइंस को मजहब और
  1116. 52:54बिलखसूस मैं और हमारा वर्ल्ड व्यू कम से
  1117. 52:57कम साइंस को पीछा नहीं पीछे नहीं करता है।
  1118. 52:59साइंटिज्म की मज़म्मत करता है। इसकी वजाहत
  1119. 53:01मैंने पहले कर दी। दूसरी ची चीज इन्होंने
  1120. 53:04कहा वर्ल्ड का नक्शा लीजिए। वर्ल्ड मैप
  1121. 53:06लीजिए दो अलग-अलग जगह की। हजरत मैंने ये
  1122. 53:09होमवर्क किया था और मैंने मिडिल ईस्ट
  1123. 53:11मिडिल ईस्ट का एक नक्शा लिया और यूरोप का
  1124. 53:14एक नक्शा लिया। ये मजहबी इलाका और ये
  1125. 53:18लिबरल और एथस्ट इलाका। मुझे पता चला कि
  1126. 53:21सबसे ज्यादा रेप केसेस जो है वहां पर है।
  1127. 53:25[प्रशंसा]
  1128. 53:29मुझे ये पता चला यूएन की रिपोर्ट के
  1129. 53:31मुताबिक। मैं ये अपने घर से नहीं लेके आ
  1130. 53:33रहा कि जो वर्किंग वुमेन है यूरोपियन
  1131. 53:36कंट्रीज में उसमें 81%
  1132. 53:38वुमेन सेक्सुअल हरासमेंट का वर्क में जो
  1133. 53:41शुमार ये मिडिल ईस्ट में नहीं हो रहा है।
  1134. 53:43[प्रशंसा] वो मजहबी लोग हैं इसलिए नहीं हो
  1135. 53:45रहा है। दूसरी चीज आपने ये कहा के मजहबी
  1136. 53:50आदमी का अच्छा होना हमारे अच्छे होने से
  1137. 53:53बहुत मुश्किल है। बहुत मुश्किल है। तो
  1138. 53:56इसका मतलब ये है कि गॉड के अलावा आपके पास
  1139. 53:58अच्छे और बुरे का कोई स्टैंडर्ड है। मैं
  1140. 54:01चाहूंगा कि कन्वर्सेशनल स्टाइल वाले
  1141. 54:04डिस्कशन और सेगमेंट पे इसी पे बात कर लेते
  1142. 54:06हैं। थैंक यू वेरी मच। [प्रशंसा]
  1143. 54:13ये रिबर्टल का राउंड टू है। आपके पास 5
  1144. 54:16मिनट का वक्त है और इसके बाद क्रॉस
  1145. 54:19एग्जामिनेशन शुरू करेंगे। आप चाहे तो जो
  1146. 54:21इन्होंने सवाल पूछे उनके जवाब आप रिबर्टल
  1147. 54:23में भी दे सकते हैं।
  1148. 54:24जी
  1149. 54:26देखिए पहले तो ये बात कि ये मिसाल गलत
  1150. 54:29नहीं है। गलत है। इन्होंने पहले ही हमको
  1151. 54:31डिस्म कर दिया। कह अकल से मामला सॉल्व
  1152. 54:34नहीं हो सकता। लॉजिक से आप पहुंच नहीं
  1153. 54:36सकते। ये एक मेटाफिजिकल चीज है।
  1154. 54:38मेटाफिजिकल अजीब सा लब्ज़ है। ठीक से किसी
  1155. 54:40को माने नहीं मालूम इसके तो ऐसा लगता है
  1156. 54:42कुछ बड़ी चीज है। अरे भाई क्या होता है
  1157. 54:45मेटाफिजिकल? बताओ खड़ी हो। ये एक लफज़ है जो
  1158. 54:50कहीं भी इस्तेमाल हो जाता है। जब आप एक
  1159. 54:53बात कर रहे हैं और आप मुझसे बहस कर रहे
  1160. 54:55हैं तो मुझे मेटाफिजिकल मत बताइए। आप
  1161. 54:57लॉजिकली मुझे प्रूफ किए और अगर लॉजिकली आप
  1162. 55:00नहीं बात करते साहब ये मेटोफिजिकल है तो
  1163. 55:02फिर हम आप बात क्या कर रहे हैं मेरा आपका
  1164. 55:04किस जुबान में कन्वर्सेशन हुआ
  1165. 55:07और ये कहना कि वक्त पहले नहीं था तो फिर
  1166. 55:10क्यों कहते हैं ये हमेशा से और हमेशा
  1167. 55:12रहेगा हमेशा वक्त है तो आप कैसे कहते हैं
  1168. 55:16वो हमेशा से है और हमेशा रहेगा हमेशा का
  1169. 55:19मतलब है कोई वक्त अगर वक्त ही नहीं है तो
  1170. 55:22हमेशा कैसे
  1171. 55:25बहरहाल वो रहेगा। अब मैं ये देखता हूं।
  1172. 55:29आपने कहा ना कि वहां रेप ज्यादा होते हैं।
  1173. 55:31तो हम एक बात देखते हैं कि ये दुनिया
  1174. 55:34जिसमें वो कादरे मुतलक है। जिसकी मर्जी के
  1175. 55:36बगैर पत्ता भी नहीं हिलता वो ओमनीपोटेंट
  1176. 55:39है। ये दुनिया चल कैसे रही है? और इस
  1177. 55:43दुनिया का हाल क्या है? 45,000
  1178. 55:47बच्चे
  1179. 55:49जो 10 साल की उम्र से कम थे वो गदा में
  1180. 55:54मरे हैं।
  1181. 55:56भूख से काला हांडी में बच्चे मरते हैं और
  1182. 55:59डिप्थेरिया से मरते हैं। डिप्थेरिया अजीब
  1183. 56:02मर्ज़ है। गले में जाली मरना शुरू होती है।
  1184. 56:05बच्चा नीला हो जाता है। गरीब का बच्चा
  1185. 56:08इसलिए कि वो पास आती है। ये कादरे मुक है
  1186. 56:11जो चाहे कर दे। इससे आप दुआएं मांगते हैं
  1187. 56:14हमारी ये काम कर दे वो कर दे तो इसका मतलब
  1188. 56:16है डे टू डे लाइफ में वो इंटरफेयर करता है
  1189. 56:20और ये देख रहा है वो अगर वो वाकई भी है
  1190. 56:23फॉर डिस्कशन सेक तो मैं जब दुनिया देखता
  1191. 56:26हूं तो मेरे दिल में उसके लिए कोई इज्जत
  1192. 56:28नहीं पैदा होती क्या कर रहे हो तुम
  1193. 56:32[प्रशंसा]
  1194. 56:33पूरे ऑल पावरफुल हो ओमनीपोटेंट हो ओमनी
  1195. 56:37प्रेजेंट हो तुम तो वहां गदा में रहेगे ना
  1196. 56:40तुम हर जगह हो तुम देख रहे थे कि बच्चे की
  1197. 56:43कैसे धज्जियां उड़ गई। तुम देख रहे थे और
  1198. 56:47तुम चाहते हो मैं तुम्हारी परश कर तुम हो
  1199. 56:50भी।
  1200. 56:52अरे यार इससे अच्छे तो हमारे चीफ प्राइम
  1201. 56:54मिनिस्टर हैं। कुछ तो ख्याल करते हैं।
  1202. 56:59[हंसी]
  1203. 57:00आप किसकी इबादत कर रहे हैं? अगर वो है भी
  1204. 57:03यह दुनिया नाइंसाफी से जुल्म से जब्र से
  1205. 57:07तशद्दुद से भरी हुई है और आप ये मत कहिएगा
  1206. 57:11कि वो देख रहा है और वो बताएगा एक दिन अगर
  1207. 57:14वो देख रहा है और इंटरफेयर नहीं करता तो
  1208. 57:16आप दुआ क्यों मांगते आप कहते हैं मेरा ये
  1209. 57:19काम करा दे इसका मतलब है वो दखल दे सकता
  1210. 57:22है वो आपको नौकरी दिलवा सकता है भले दूसरे
  1211. 57:26आदमी को ना मिले मगर आपका काम कर देगा
  1212. 57:29क्योंकि आपने दुआ मांगी है तो तो जब वो
  1213. 57:31आपको नौकरी दिला सकता है, लड़की की शादी
  1214. 57:34कर सकता है, बेटे को ग्रीन कार्ड दिलवा
  1215. 57:36सकता है तो कम से कम ये जो मर रहे हैं
  1216. 57:39बच्चे इनको रोकते हैं। कुछ तो करें। मुझे
  1217. 57:42तो दुनिया में इस दुनिया का कोई मालिक है।
  1218. 57:44इसका ओमनीपोटेंट
  1219. 57:47कोई रूलर है। और ये दुनिया ऐसी चल रही है।
  1220. 57:51मैं तो चाहूंगा कि भाई ना हो। अगर हो तो
  1221. 57:55बड़ी शर्मिंदगी की बात है। शुक्रिया।
  1222. 57:59[प्रशंसा]
  1223. 58:03देवियों और सज्जनों इस बहस के दो राउंड और
  1224. 58:07दो रिबटल पूरे हो चुके हैं। अब सबसे जरूरी
  1225. 58:11और सबसे मुश्किल राउंड शुरू हो रहा है
  1226. 58:14क्रॉस एग्जामिनेशन का। अब इन विद्वानों की
  1227. 58:17सज्जनता की एक परख भी होगी और वक्त हमने
  1228. 58:2016 मिनट का तय किया है। अह पहला सवाल आप
  1229. 58:24पूछना चाहेंगे?
  1230. 58:26जी बिलकुल।
  1231. 58:28पहले बोले
  1232. 58:30[हंसी]
  1233. 58:30आप माइक ले लीजिएगा हाथ में
  1234. 58:34नीचे से
  1235. 58:38जी मैं मैं
  1236. 58:41ये डाइस हटा सकते हैं क्या हम थोड़ा
  1237. 58:44क्विकली
  1238. 58:47डाइस पीछे कर दीजिए बस थोड़ा सा ताकि ये जो
  1239. 58:51दाएं बाएं लोग बैठे हैं इसे हटा ही दीजिए
  1240. 58:53अब हम वहां तो जाने वाले नहीं आराम से
  1241. 58:56आराम
  1242. 58:57दोनों तरफ से
  1243. 59:08इस बीच आप लोग भी अपनेप सवाल तैयार कर
  1244. 59:10लें। ये ध्यान रखेंगे कि मैं यहां से सवाल
  1245. 59:14लूंगा। आप लोगों को अपना हाथ ऊपर करना है।
  1246. 59:16अपना नाम बताना है और अधिकतम तीन वाक्यों
  1247. 59:20में अपना सवाल पूरा करना है। कई लोग सवाल
  1248. 59:22की जगह भाषण देने लगते हैं। उससे आज बचना
  1249. 59:25है।
  1250. 59:27जी मुफ्ती साहब पहला सवाल आपका 16 मिनट है
  1251. 59:30हम दोनों लोगों के सवाल जी
  1252. 59:31जी बहुत शुक्रिया आप आपकी जो अभी बात हुई
  1253. 59:35बहुत अहम थी मैं इसको चाहूंगा कि आगे
  1254. 59:36डिस्कस करूं लेकिनकि अभी इस वो सेगमेंट है
  1255. 59:40क्रॉस एग्जामिनेशन
  1256. 59:42तो सबसे पहला सवाल आपसे ये है कि जो मैं
  1257. 59:46इतनी देर से कॉन्टिंजेंसी आर्गुमेंट आपको
  1258. 59:49बता रहा था ये अक्कल से ही बता रहा था
  1259. 59:51हजरत आप ये बताएं के आप इनफिनिट रिग्रेस
  1260. 59:55ऑफ कॉज को पॉसिबल मानते हैं या नेसेसरी
  1261. 59:57बीइंग के एक्सिस्टेंस को सही समझते हैं।
  1262. 59:59क्योंकि दो ही ऑप्शन हो सकता है। आप ये
  1263. 1:00:01बताएं।
  1264. 1:00:02देखिए आपको मैं ईमानदारी से बात करूंगा।
  1265. 1:00:04एक तो मैं कॉन्टिजेंसी वर्ड ठीक से समझता
  1266. 1:00:06हूं और इस वक्त भी जो आपने अंग्रेजी के
  1267. 1:00:09अल्फाज़ इस्तेमाल किए वो जरा थोड़े से मुझे
  1268. 1:00:12डिफिकल्ट और कॉम्प्लिकेटेड लगे। तो आप जरा
  1269. 1:00:14सिंपल सवाल में ये सवाल कर सकते हैं।
  1270. 1:00:16बिल्कुल कर सकता हूं। जी
  1271. 1:00:18यूनिवर्स की हर चीज कंटिंजेंट होने का
  1272. 1:00:20मतलब ये है कि वो अपने एक्सिस्टेंस में
  1273. 1:00:22किसी के ऊपर डिपेंडेंट है। जो भी चीज
  1274. 1:00:25डिपेंडेंट होगी वो चीज इंडिपेंडेंट नहीं
  1275. 1:00:27हो सकती तो उसका कोई ना कोई कॉज होगा। तो
  1276. 1:00:30अब आप क्या समझते हैं कि ये इनफिनिट
  1277. 1:00:32रिग्रेस है यानी कॉज पर कॉज कॉज पर कॉज
  1278. 1:00:35कॉज पर कॉज और कभी कोई यानी एंडलेसली चलता
  1279. 1:00:37रहा। क्योंकि अगर ऐसा होगा तो हम तो
  1280. 1:00:39एक्सिस्टेंस में आते ही नहीं। लॉजिकली ये
  1281. 1:00:41मुत्तफक अल चीज है। मुत्तफक अल अग्रीड
  1282. 1:00:44अपॉन ओके
  1283. 1:00:47इस पे हमने एग्री किया था कि मुश्किल शब्द
  1284. 1:00:49आएगा तो अर्थ बताना पड़ेगा।
  1285. 1:00:50तो इनफिनिट रिग्रेस तो पॉसिबल नहीं है। तो
  1286. 1:00:52कहीं ना कहीं आपको रुकना पड़ेगा ऐसे
  1287. 1:00:54नेसेसिटी पर।
  1288. 1:00:55नहीं कोई जरूरत नहीं रुकने की। किसने कहा
  1289. 1:00:58रुकना पड़ेगा? आप रुकते हैं वो होता है।
  1290. 1:01:00आप नहीं रुकते। आप कहते हैं वो हमेशा से
  1291. 1:01:03है। जब उस वक्त से है जब वक्त नहीं था। आप
  1292. 1:01:07कहां रुकते हैं? कि अब हुआ था वो। आप नहीं
  1293. 1:01:10कहते। हम क्यों नहीं मान सकते कि यूनिवर्स
  1294. 1:01:12जो है और बल्कि मल्टीिवर्स जो है वो हमेशा
  1295. 1:01:16से है वो बनती है सब एक हमारे यहां एक चीज
  1296. 1:01:20है ब्लैक होल वो समेट लेता है वापस फिर
  1297. 1:01:23ब्लास्ट होता है फिर फैल जाता है और इसमें
  1298. 1:01:26हमारी तो खैर कोई औकात ही नहीं है इंसान
  1299. 1:01:28की एक छोटे से दर्रे पे हम 50 60 साल की
  1300. 1:01:32उम्र रखते हैं जो करोरा अरबों साल की
  1301. 1:01:36कायनात हो उसमें और पैदा भी निहायती
  1302. 1:01:39बेहूदा वजह से हुए थे। तो तो इसमें ये
  1303. 1:01:43सोचना कि इसकी वजूहात और ये क्यों है? ये
  1304. 1:01:47डिपेंडेंट है। ये हम देख रहे हैं। क्या
  1305. 1:01:49मालूम? आप सोचिए कि ये जो फैल रही है
  1306. 1:01:52कायनात ये कहां फैल रही है? ये कहां जा
  1307. 1:01:55रही है? और ये फैल क्यों रही है? अरे बना
  1308. 1:01:58ली थी तुमने। रुको भैया हमें काफी है। ये
  1309. 1:02:00फैल क्यों रही है? ये और कौन सी कायनात?
  1310. 1:02:03जिसे मैं दूरबीन से देखता हूं तो दो
  1311. 1:02:05बिलियन लाइट ईयर पे है। उससे मेरा कोई
  1312. 1:02:08वास्ता ही नहीं है। दो बिलियन ईयर यानी
  1313. 1:02:11अगर मैं 80 थाउजेंड माइल्स पर सेकंड से
  1314. 1:02:16चलूं तो 20 करोड़ साल में वहां पहुंच
  1315. 1:02:19जाऊंगा। इसकी जरूरत क्या थी? ये दुनिया ये
  1316. 1:02:23कायनात तो इंसान अशरफुल मखलूकात के लिए
  1317. 1:02:25बनाई गई ना। तो ये सब
  1318. 1:02:27टर्म समझ में नहीं आया।
  1319. 1:02:31इसमें कोई खास समझने वाली बात थी नहीं।
  1320. 1:02:35ये जो अल्टीमेट कहा ये जाता है कि ये जो
  1321. 1:02:38पूरी यूनिवर्स है ये जो दुनिया है ये
  1322. 1:02:40इंसान के लिए बनाई गई।
  1323. 1:02:42अच्छा ये सब इंसान के लिए क्यों साहब सही
  1324. 1:02:44है ना?
  1325. 1:02:44बिल्कुल लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि किसी
  1326. 1:02:46चीज के पीछे रीज़ आपको नहीं पता तो रीज़
  1327. 1:02:48नहीं है। इसे कहते हैं
  1328. 1:02:51मुझे मुझे नहीं पता। लेकिन मेरी
  1329. 1:02:53जिम्मेदारी नहीं है। वो बिल्कुल सही कहा
  1330. 1:02:55था उसने। बल्टन रसल ने। आपने उसे मजाक में
  1331. 1:02:58टाल दिया कि भाई आप एक दावा कर रहे हैं।
  1332. 1:03:01मैं क्यों कहूं कि ये गलत है दावा। आप
  1333. 1:03:03प्रूफ कीजिए। मेरे पे जिम्मेदारी ही नहीं
  1334. 1:03:06है। मैंने थोड़ी कहा है। आप प्रूफ कीजिए
  1335. 1:03:09कि यह सही है।
  1336. 1:03:10आप आर्गुमेंट ऑफ कंटजेंसी का जवाब सवाल
  1337. 1:03:12पूछना चाहेंगे?
  1338. 1:03:13आप सवाल पूछना चाहेंगे मुफ्ती साहब से?
  1339. 1:03:17क्योंकि ये क्रॉस एग्जामिनेशन का दौर है।
  1340. 1:03:19आप जैसे पहले बोल रहे थे फेथ को लेके कुछ?
  1341. 1:03:21मैं ये पूछना चाहूंगा कि खुदा ने जो भी
  1342. 1:03:24रेवोलेशन किए है एक मजहब के नहीं बहुत से
  1343. 1:03:26मजहबों में किए है अलग-अलग रेवोलशन है।
  1344. 1:03:28कहीं कुछ एक बातें हैं कंट्राडिक्शन भी है
  1345. 1:03:31आपस में कहीं कुछ आप कर सकते हैं कहीं कुछ
  1346. 1:03:34नहीं कर सकते। ऐसा नहीं है कि सबकी कोड ऑफ़
  1347. 1:03:37मोरल एक है। तो
  1348. 1:03:42ये
  1349. 1:03:44किस्सा क्या है? अब आप ये देखिए कि मुझे
  1350. 1:03:47कभी-कभी लगता है कि ये जो फुटबॉल फाइनल
  1351. 1:03:50होता है
  1352. 1:03:51लाखों लोग होते हैं। फिर वो टीवी कवर करती
  1353. 1:03:53करोड़ों लोग। अगर उसमें खुदा की एक घूम
  1354. 1:03:56आवाज आ जाती मैं गॉड हूं। तो सारे लोग अभी
  1355. 1:04:00सुन लेते और टीवी पे भी सुन लेते किस्सा
  1356. 1:04:03खत्म होता। ये इतनी राजदारी क्या है कि
  1357. 1:04:06तुम सामने कुछ तो सबूत दे दो हमें। सॉलिड
  1358. 1:04:09ये कह साहब ये यूनिवर्स कैसे बनेगा? इससे
  1359. 1:04:12मसला क्या हल होगा? मैं पूछूंगा आपसे खुदा
  1360. 1:04:14कैसे बना? क्यों नहीं पूछूंगा? कैसे बना?
  1361. 1:04:17बल्कि वो तो कायनात से कहीं ज्यादा
  1362. 1:04:20इंटेलिजेंट है। कायनात से कहीं ज्यादा जी
  1363. 1:04:22वो हमेशा से सही आप कहेंगे मैं मान लूंगा।
  1364. 1:04:26अच्छा दोयम वो काद मुखल यानी कादरे मुख का
  1365. 1:04:30मतलब ओमनीपोटेंट है। जो चाहे कर सकता है।
  1366. 1:04:33आपको नौकरी दिलवा सकता है। आपकी अच्छी जगह
  1367. 1:04:36शादी करवा सकता है। आपके पड़ोसी का मुकदमा
  1368. 1:04:40हरवा सकता है। आपको जिता सकता है। सब काम
  1369. 1:04:42करता है।
  1370. 1:04:42थोड़ा सा माइक
  1371. 1:04:44वो इस दुनिया को चला कैसे रहा है?
  1372. 1:04:47यह दुनिया कैसे चल रही है? आपको इसमें
  1373. 1:04:49हैरत नहीं होती या कयामत के बाद कभी एक
  1374. 1:04:53जस्टिस होगा जब ये बच्चा मर चुका होगा
  1375. 1:04:56जिसकी धज्जियां उड़ गई बम से इसको इंसाफ
  1376. 1:04:59मिलेगा तब
  1377. 1:05:01अच्छा
  1378. 1:05:02अब जवाब दूं
  1379. 1:05:03मैं इसीलिए आपकी तरफ
  1380. 1:05:05सबसे पहले आपने रेवोलेशन और स्क्रिप्चर की
  1381. 1:05:08बात की इस पे मैं बात कर सकता हूं लेकिन
  1382. 1:05:10आज नहीं करूंगा क्योंकि वक्त कम है कभी और
  1383. 1:05:12इस पे डिस्कस करेंगे मैं तैयार हूं उसप भी
  1384. 1:05:14बात करने के लिए
  1385. 1:05:14ये अभी से राउंड टू की भूमिका तय हो रही
  1386. 1:05:17है डस गॉट एक्सिस्ट राउंड टू
  1387. 1:05:20जीकि आज गॉड के एक्सिस्टेंस पे बात है तो
  1388. 1:05:23मैं उसी के रिलेटेड जो है आपके सवालात को
  1389. 1:05:26एंटरटेन भी करूंगा और मैं भी पूछूंगा।
  1390. 1:05:28आपने कहा कि आपने साबित ही नहीं किया जबकि
  1391. 1:05:31आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी बुनियादी
  1392. 1:05:33आर्गुमेंट है।
  1393. 1:05:34आप मुझे कॉनंटिंजेंसी का मतलब बताइए। आपका
  1394. 1:05:36मतलब क्या है? कंटिंजेंसी? कंटिंजेंसी का
  1395. 1:05:39मतलब यह हुआ के हर वो वजूद जो किसी भी चीज
  1396. 1:05:44का पाबंद है। हर वो वजूद या हर वो चीज जो
  1397. 1:05:47अपने एकिस्टेंस में किसी भी चीज के पाबंद
  1398. 1:05:50है और उससे बाउंड है। उसको उसकी जरूरत है।
  1399. 1:05:53उस पर डिपेंड करती है। तो जाहिर सी बात है
  1400. 1:05:55कि उसका कोई ना कोई कॉज होता है। ये तो
  1401. 1:05:57अक्ल की बात है। ये आप रीजनिंग की बात
  1402. 1:05:59करते हैं। मैं वही कर रहा हूं। दूसरी चीज
  1403. 1:06:01आपने ये बात कही कि
  1404. 1:06:04इतने बिलियन लाइट इयर्स दूर है उसका मेरा
  1405. 1:06:07क्या लेना देना फिर मेरे ख्याल से आपको ये
  1406. 1:06:09नहीं कहना चाहिए आई एम आई थिंक देयर फॉर
  1407. 1:06:12आई एम एन एथिस्ट आपको सोचना चाहिए सिर्फ
  1408. 1:06:14आप एक लिमिटेड दायरे में रहकर नहीं सोचे
  1409. 1:06:17बल्कि बाहर निकल कर सोचें आपने तीसरा सवाल
  1410. 1:06:20किया आपने दो तीन सवाल एक साथ
  1411. 1:06:21ऐसी बातें ना कीजिए कुछों को एतराज हो
  1412. 1:06:23जाएगा आप पे कि आप कुछ भी सोचिए ये इजाजत
  1413. 1:06:27आपको है नहीं मुझे है [हंसी]
  1414. 1:06:34[प्रशंसा]
  1415. 1:06:35जी आप आपने प्रॉब्लम ऑफ इविल के ताल्लुक
  1416. 1:06:39से सवाल किया और बार-बार आप एक लफ्ज रिपीट
  1417. 1:06:41कर रहे हैं के ओमनीपोटेंट गॉड है। ऑल
  1418. 1:06:44पावरफुल गॉड है। यही तो दरअसल समझना है कि
  1419. 1:06:48गॉड का कांसेप्ट क्या है? प्रॉब्लम ऑफ
  1420. 1:06:50इविल जो है प्रॉब्लम ऑफ इविल दर हकीकत दो
  1421. 1:06:53असमशन पर कायम है। अगर आप इन दो असंप्शनंस
  1422. 1:06:55को समझ जाएं तो ये प्रॉब्लम प्रॉब्लम नहीं
  1423. 1:06:57रहेगी। आर्गुमेंट आपको समझ में आ जाएगी कि
  1424. 1:06:59ये कोलैप्स कर जाता है। पॉइंट नंबर वन
  1425. 1:07:01यानी जो आपका सबसे पहला फॉल्स असमशन है कि
  1426. 1:07:05गॉड मर्सफुल है, ओमनीपोटेंट है। दुनिया
  1427. 1:07:08में जुल्म हो रहा है। लेकिन आपको ये समझना
  1428. 1:07:10चाहिए कि हमारे वर्ल्ड व्यू के मुताबिक
  1429. 1:07:12गॉड सिर्फ ओमनीपोटेंट और सिर्फ मर्सफुल
  1430. 1:07:14नहीं है बल्कि वो ऑल वाइज भी है और वो ऑल
  1431. 1:07:17नोइंग भी है। उसके हर काम के पीछे हिकमत
  1432. 1:07:20और विज़डम है। ये कोई जरूरी नहीं है कि वो
  1433. 1:07:22हिकमत और विज़डम आपको समझ में आए या मुझे
  1434. 1:07:24समझ में आए। अगर आप जो समझ रहे हैं उसके
  1435. 1:07:26मुताबिक आप फैसला कर रहे हैं। ये लिमिटेड
  1436. 1:07:28पर्सपेक्टिव से आर्गुमेंट है और इस चीज को
  1437. 1:07:30हम अपनी दुनिया में अपने लाइफ में डेली
  1438. 1:07:33लाइफ में इस प्रिंसिपल को एक्सेप्ट करते
  1439. 1:07:34हैं। हम जब किसी डॉक्टर के पास जाते हैं
  1440. 1:07:37डॉक्टर के पास जाकर वो अगर उसने हमें कोई
  1441. 1:07:39दवाई दी है तो हम ये तो नहीं कहते कि जब
  1442. 1:07:42तक आपके पास जितना नॉलेज और जितना विज़डम
  1443. 1:07:44नहीं है आपने क्यों ये दवाई दी है तब तक
  1444. 1:07:46हम इस चीज को एक्सेप्ट नहीं करेंगे। नहीं
  1445. 1:07:48कहते। हम उसकी अथॉरिटी को तस्लीम करते
  1446. 1:07:50हैं। क्यों? क्योंकि उसकी हम जानते हैं कि
  1447. 1:07:52वो नॉलेजेबल है। वो विज़डम वाला है। हमसे
  1448. 1:07:55ज्यादा नॉलेज और हमसे ज्यादा विज़डम है।
  1449. 1:07:56बताएं सर।
  1450. 1:07:57नहीं डॉक्टर में खुदा में बड़ा डिफरेंस है।
  1451. 1:08:00डॉक्टर पढ़ा लिखा होता है। एक तो मैं उसकी
  1452. 1:08:03बात सुनूंगा।
  1453. 1:08:05दो नहीं कुछ जवाब तो ये भी नहीं है।
  1454. 1:08:08सर प्लीज आप
  1455. 1:08:09अगर सब ऑडियंस से बोलने लगेंगे तो फिर
  1456. 1:08:11मतलब नहीं इस बहस में।
  1457. 1:08:12मतलब आप ये कहें कि क्योंकि आप डॉक्टर पे
  1458. 1:08:14बिलीव करते हैं इसलिए खुदा पे बिलीव
  1459. 1:08:16कीजिए। क्या
  1460. 1:08:16ये मिसाल आपको समझाने के लिए
  1461. 1:08:18आर्गुममेंट है इस पे आपको एतराज नहीं है
  1462. 1:08:22तो
  1463. 1:08:25सिंपल बात ये है कि मैं अगर ये यकीन कर
  1464. 1:08:28लूं कि एक ओमनीपटेंट उसकी मसलहत है ये जो
  1465. 1:08:31बच्चे मर रहे हैं ये मसलहत है उसकी मुझे
  1466. 1:08:35नहीं चाहिए थी मसलहत
  1467. 1:08:36उसकी मसलहत नहीं यही तो समझना है
  1468. 1:08:38मतलब एक्सपीरियंस
  1469. 1:08:40अच्छा
  1470. 1:08:40इस आपने अभी मेरी बात पूरी सुनी नहीं
  1471. 1:08:43मैंने कहा आपका पूरा आर्गुमेंट दो फॉल्स
  1472. 1:08:45असमशन पर है। एक फॉल्स असमशन मैंने बता
  1473. 1:08:48दिया। दूसरा फॉल्स असमशन ये है कि इस
  1474. 1:08:51दुनिया में इविल के होने का कोई गुड रीज़
  1475. 1:08:53नहीं है। जबकि हमारे पास बाज़ रीज़ंस मौजूद
  1476. 1:08:56हैं। हमारे पास बाज़ वजूहात मौजूद हैं। अगर
  1477. 1:08:58इस दुनिया में इविल ना हो तो आप गुड को
  1478. 1:09:00डिफाइन कैसे करेंगे? अगर जुल्म ना हो, आप
  1479. 1:09:02इंसाफ को समझेंगे कैसे? अगर तारीकी ना हो,
  1480. 1:09:04तो आप लाइट को समझेंगे कैसे?
  1481. 1:09:08[प्रशंसा]
  1482. 1:09:08बहुत अच्छे।
  1483. 1:09:09अभी और सुन अभी और बाकी है।
  1484. 1:09:11ये तो बात बहुत पसंद आई साहब मुझे के जब
  1485. 1:09:14तक रेप ना हो तब तक औरतों की इज्जत का
  1486. 1:09:16ख्याल आप
  1487. 1:09:17आपने मेरा जवाब पूरा सुना ही नहीं।
  1488. 1:09:18जब तक के बच्चों का कत्ल ना किया जाए तब
  1489. 1:09:21तक आपको बच्चों की मासूमियत की इज्जत
  1490. 1:09:23आपने पूरा जवाब सुना ही नहीं।
  1491. 1:09:24क्या बात है? क्या आपने नुक्ता निकाला
  1492. 1:09:26हुआ?
  1493. 1:09:27आपने पूरा जवाब सुना ही नहीं। आप सुन ले।
  1494. 1:09:29मेरी बात सुन लें। ये मैंने आपको एक चीज
  1495. 1:09:30बताई। दूसरी चीज इस दुनिया में हम आए हैं
  1496. 1:09:34टेस्ट के लिए। हमारा टेस्ट हो रहा है और
  1497. 1:09:35हर इंसान का अलग-अलग अंदाज में टेस्ट होता
  1498. 1:09:38है और इस दुनिया में अगर इविल मौजूद है तो
  1499. 1:09:41वो इविल जरिया है हमारे अंदर ह्यूमन नोबल
  1500. 1:09:44क्वालिटीज को डेवलप करने का और अलग-अलग
  1501. 1:09:47फील्ड में प्रोग्रेस करने का और अगर हमारे
  1502. 1:09:50अंदर और इस दुनिया में इविल नहीं होता तो
  1503. 1:09:53बताइए टेस्ट का मतलब क्या होता है? अगर
  1504. 1:09:55मैं अपने स्टूडेंट को एमसीक्यूस दूं और
  1505. 1:09:57उसमें सिर्फ राइट आंसर लिख कर दे दूं और
  1506. 1:09:59कहूं तुम्हारा टेस्ट हो गया। ये मीनिंगलेस
  1507. 1:10:00है। इस दुनिया में अगर हम टेस्ट के लिए आए
  1508. 1:10:02हैं तो जाहिर है गुड एंड इविल दोनों मौजूद
  1509. 1:10:05है।
  1510. 1:10:07[प्रशंसा]
  1511. 1:10:08तो अगर गुड एंड इविल दोनों मौजूद है तो ये
  1512. 1:10:11इवल भी खुदा का बनाया हुआ है।
  1513. 1:10:13जी हां खुदा का बनाया हुआ है। लेकिन
  1514. 1:10:14अच्छा चलो अच्छी बात है।
  1515. 1:10:15जी बिल्कुल।
  1516. 1:10:16तो अभी अभी तो ये है कि जो मेजॉरिटी
  1517. 1:10:21है दुनिया में वो इविल है। तो ये खुदा
  1518. 1:10:24एक्चुअली इविल के साइड पे लग रहा है मुझे।
  1519. 1:10:26बिल्कुल मेजॉरिटी में तो वो है।
  1520. 1:10:29[प्रशंसा]
  1521. 1:10:30क्या बात कर रहे हैं भाई आप कोई भी जो
  1522. 1:10:32मुसिफ होगा चाहे आपका अपना घर हो जिसके आप
  1523. 1:10:35सबसे बड़े हैं चाहे आपकी ऑर्गेनाइजेशन हो
  1524. 1:10:38जो आप चलाते हैं वहां पर आप इवल रखेंगे
  1525. 1:10:42साबित करने को कि बाकी लोग शरीफ है
  1526. 1:10:44मेरी बात सुनिए
  1527. 1:10:44क्या ये आर्गुमेंट ही गलत है कि जब तक के
  1528. 1:10:47कोई इवल नहीं होगा तब तक के शरीफ आदमी
  1529. 1:10:49शरीफ नहीं लगेगा
  1530. 1:10:50अगर एग्जामिनर इ गलत ऑप्शन दे रहा है तो
  1531. 1:10:53एग्जामिनर इविल नहीं हो गया जो गलत ऑप्शन
  1532. 1:10:56को सेलेक्ट कर रहा है वो फेल होगा क्रिएटर
  1533. 1:10:58ने इविल को बनाया है लेकिन वो इविल नहीं
  1534. 1:11:01है।
  1535. 1:11:01सुनिए मेरी बात सर लेट मी कंप्लीट सर
  1536. 1:11:05क्रिएटर ने इविल को बनाया है टेस्ट के लिए
  1537. 1:11:08वो इविल नहीं है। इविल वो होगा वो होगा जो
  1538. 1:11:11उसे इख्तियार करेगा। छुरी को बनाने वाला
  1539. 1:11:13गलत नहीं होता है। छुरी का गलत इस्तेमाल
  1540. 1:11:15करने वाला गलत होता है।
  1541. 1:11:21रेप को कैसे गलत इस्तेमाल करते हैं?
  1542. 1:11:24रेप इंसान के फ्री व्हील का नतीजा है। ये
  1543. 1:11:26माइक
  1544. 1:11:28ये रेप कैसे गलत इस्तेमाल होता है? ये
  1545. 1:11:31अब सुन ले। अब सुन ले इस्तेमाल होता है।
  1546. 1:11:33हां मैं बता रहा हूं ना कैसे
  1547. 1:11:34मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं कि जो
  1548. 1:11:36इविल इस दुनिया में मौजूद है। उसके कई
  1549. 1:11:39सारे तरीके हैं। एक तरीका इंसान का अपना
  1550. 1:11:42फ्री विल है। अब अगर कोई रेपिस्ट रेप कर
  1551. 1:11:44रहा है तो इसका गॉड का कसूर नहीं है। वो
  1552. 1:11:46अपने फ्री विल का गलत इस्तेमाल करना कर
  1553. 1:11:48रहा है। उसको सजा मिलनी चाहिए। और उसी के
  1554. 1:11:50लिए जहन्नुम बनाई गई है।
  1555. 1:11:51यह फ्री विल का भी बड़ा चक्कर है। आप जब
  1556. 1:11:54कोई बुरा काम करते हैं या कोई बुराई होती
  1557. 1:11:56है तो यह कहा जाता है कि ये फ्री विल है।
  1558. 1:11:597 बिलियन फ्री विल्स आर मूविंग ऑन दिस
  1559. 1:12:02प्लनेट। 7 बिलियन फ्री विल। और एक आदमी
  1560. 1:12:06अपनी फ्री विल से मुझे कत्ल कर दे तो मैं
  1561. 1:12:08खुदा की मर्जी से मरा हूं। क्या इसकी फ्री
  1562. 1:12:10विल की वजह से?
  1563. 1:12:12मेरी मौत खुदा के हाथ है या इस फ्री विल
  1564. 1:12:14वाले के हाथ है?
  1565. 1:12:16खुदा ने फ्री विल का निजाम बनाया है और उस
  1566. 1:12:19निजाम का गलत इस्तेमाल करके कोई आपको मार
  1567. 1:12:21रहा है।
  1568. 1:12:21इस्तेमाल करके मेरा कत्ल कर देता है। अब
  1569. 1:12:24मेरी मौत का जिम्मेदार कौन है?
  1570. 1:12:25वो इंसान जिम्मेदार है।
  1571. 1:12:26वो इंसान।
  1572. 1:12:27तो ये कहना कि
  1573. 1:12:28और उसको उसको उसको सजा मिलेगी।
  1574. 1:12:30तो अब आप आगे चलिए कि ये तय करना कि
  1575. 1:12:33अल्लाह ही या खुदा सॉरी अल्लाह नहीं। खुदा
  1576. 1:12:36ही जिंदगी देता है। खुदा ही मौत देता है।
  1577. 1:12:38ये गलत है।
  1578. 1:12:39बिल्कुल गलत नहीं है।
  1579. 1:12:40हां नहीं।
  1580. 1:12:41निजाम उसी ने बनाया फ्री विल का। निजाम
  1581. 1:12:43मौत और हयात का उसी ने बनाया।
  1582. 1:12:45यू आर कंट्राडिक्टिंग योरसेल्फ। अभी आपने
  1583. 1:12:47कहा कि एक आदमी ने फ्री विल से आपको मार
  1584. 1:12:50दिया। इसमें उसे फ्री विल दी गई थी। उसने
  1585. 1:12:52गलत इस्तेमाल किया। 7 बिलियन फ्री विल्स
  1586. 1:12:56आर मूविंग ऑन दिस प्लेनेट। और आप चाह रहे
  1587. 1:12:58हैं कि मैं सिर्फ खुदा का ध्यान करूं। ये
  1588. 1:13:007 बिलियन फ्री विल्स को मुझे लुक आफ्टर
  1589. 1:13:03करना पड़ेगा कि नहीं? ये तो तबाहियां कर
  1590. 1:13:05रही है और तबाहियां ज्यादा हो रही हैं।
  1591. 1:13:08बिल्कुल। तो अगर आप बताएं आप बताएं अगर
  1592. 1:13:11खुदा नहीं है फॉर एग्जांपल तो आप इविल को
  1593. 1:13:14कैसे डिसाइड करेंगे? यानी हाउ कैन यू
  1594. 1:13:16डिफाइन इविल ऑब्जेक्टिवली विदाउट गॉड?
  1595. 1:13:19इविल को डिफाइन।
  1596. 1:13:22देखिए दुनिया में दो तरह के जानवर है। एक
  1597. 1:13:25जो अकेले रहते हैं जंगल में और एक जो
  1598. 1:13:28ग्रुप्स में रहते हैं। ग्रुप में जो भी
  1599. 1:13:32रहेगा चाहे वो आपका फाउंडेशन हो, चाहे कोई
  1600. 1:13:36क्लब हो, चाहे कोई पिटिकल पार्टी हो, चाहे
  1601. 1:13:40कोई यूनिट हो, उसमें आपको इंटलेक्ट करने
  1602. 1:13:44के रूल बनाने पड़ेंगे।
  1603. 1:13:45यानी लोग तय करेंगे।
  1604. 1:13:47लोग तय करेंगे। अगर लोगों ने यह तय किया
  1605. 1:13:49कि किसी का रेप करना सही है, आप जस्टिफाई
  1606. 1:13:50करेंगे?
  1607. 1:13:51नहीं।
  1608. 1:13:52आपका फाउंडेशन तो यह हो गया ना कि लोग
  1609. 1:13:53इविल डिसाइड करेंगे।
  1610. 1:13:55नहीं नहीं अरे [प्रशंसा]
  1611. 1:13:58दुनिया में ऐसे ग्रुप्स हैं जो रेप को
  1612. 1:14:02जायज मानते हैं सर्टेन हालात में। मैं
  1613. 1:14:06डिटेल में नहीं जानूंगा। आप भी जानते हैं।
  1614. 1:14:08ये जो आईिस वाले थे जिन्होंने क्या किया
  1615. 1:14:11था? तो
  1616. 1:14:13उन्होंने क्या किया? उसका खुदा से कोई
  1617. 1:14:14ताल्लुक नहीं है सर। मैंने सिंपल सवाल
  1618. 1:14:16किया कि इविल को आप डिफाइन करते कैसे हैं?
  1619. 1:14:18आइए वापस आइए।
  1620. 1:14:19जी
  1621. 1:14:21आप साथ में तभी रह सकते हैं जब कुछ आप ऐसे
  1622. 1:14:24उसूल डेवलप करें जिसमें हर एक का बेसिक
  1623. 1:14:27तहफुल हर एक का बेसिक राइट हो और हर एक को
  1624. 1:14:30कोई आराम मिले। यही तरीका है किसी भी
  1625. 1:14:34ऑर्गेनाइजेशन जिसमें एक से ज्यादा लोग हैं
  1626. 1:14:37और वो ऐसे चलती है जिंदगी। उसमें अगर आप
  1627. 1:14:40गड़बड़ करेंगे तो तबाही होगी, नुकसान
  1628. 1:14:43होगा, बर्बादियां आएंगी। और अगर उसमें आप
  1629. 1:14:46घर ले लीजिए ना एक हस्बैंड है, एक वाइफ
  1630. 1:14:49है, बच्चे हैं, वालिदा भी है, दो बहनें भी
  1631. 1:14:52है, एक भाई भी है। अब इसमें कोई निजाम
  1632. 1:14:55आपको चाहिए साथ में रहने का। और एक दूसरे
  1633. 1:14:58पे भरोसा रहे। एक दूसरे के वही ख्वाब हो,
  1634. 1:15:01एक दूसरे की मदद करें। ऐसी जिंदगी
  1635. 1:15:03सर आपकी बात आ गई। आप ये कह रहे हैं कि
  1636. 1:15:05लोग डिसाइड करेंगे क्या सही है क्या गलत
  1637. 1:15:07है। यही है मेजॉरिटी डिसाइड करेगी क्या
  1638. 1:15:09सही है क्या गलत है। अरे भाई बिल्कुल
  1639. 1:15:11मेजॉरिटी अगर ये कहे कि नाज़ जर्मनी के साथ
  1640. 1:15:14जिस तरह मेजॉरिटी थी कि जेनोसाइड करना सही
  1641. 1:15:16है आप जस्टिफाई करेंगे
  1642. 1:15:18[प्रशंसा]
  1643. 1:15:19उस वक्त उस वक्त
  1644. 1:15:20आपका आपका ये
  1645. 1:15:22सिर्फ उसके बाद उस वक्त प्लनेट पे जो लोग
  1646. 1:15:25थे
  1647. 1:15:26उनमें कितने लोग हिट को सही समझते
  1648. 1:15:28अच्छा प्लनेट की मेजॉरिटी तय करी सोसाइटी
  1649. 1:15:30की नहीं प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड के
  1650. 1:15:32एक्सिस्टेंस को सही मानती है आप क्यों
  1651. 1:15:33नहीं मानते
  1652. 1:15:39ये
  1653. 1:15:40हेलो हेलो हेलो [प्रशंसा] ये क्रॉस
  1654. 1:15:43क्वेश्चन का राउंड यहां पर समाप्त होता है
  1655. 1:15:47और ये बड़ा अच्छा है कि इस तरह से
  1656. 1:15:48फ्रेगमेंट कर दिया गया है ताकि जो मरकरी
  1657. 1:15:50ऊपर जा रहा है नीचे
  1658. 1:15:52जी
  1659. 1:15:52प्लेनेट की ज्यादातर मेजरिटी
  1660. 1:15:56कुछ दूसरे मजहबों के खुदा को मानती है
  1661. 1:16:00नहीं आप तो मेजॉरिटी की बात कर रहे हैं
  1662. 1:16:03आप ये कह रहे हैं इविल और गुड को डिसाइड
  1663. 1:16:05मेजॉरिटी करेगी मेजॉरिटी जो कर दे वो सही
  1664. 1:16:07हो जाएगा
  1665. 1:16:09इसको जैसा आप ही लोगों ने तय किया है उसी
  1666. 1:16:11फॉर्मेट को फॉलो कर लेते हैं।
  1667. 1:16:14भाई मैंने तो भले लोगों पे ऐतबार किया पर
  1668. 1:16:17तब मॉडरेशन तय किया। जी आपके पास 5 मिनट
  1669. 1:16:20का वक्त है क्लोजिंग आर्गुमेंट है। उसके
  1670. 1:16:22बाद हम ऑडियंस से क्वेश्चन आंसर लेंगे
  1671. 1:16:24जावेद साहब के क्लोजिंग आर्गुमेंट के बाद।
  1672. 1:16:25ओके टाइम स्टार्ट।
  1673. 1:16:26बहुत शुक्रिया।
  1674. 1:16:27हमारा जो टॉपिक है डस गॉड एक्सिस्ट? मैं
  1675. 1:16:31इस पे इतने एकेडमिक तैयारी करके आया था।
  1676. 1:16:33मुझे था कि मैं मैंने सोचा था कि कई सारे
  1677. 1:16:36मैं आर्गुमेंट्स दूंगा। लेकिन वक्त की भी
  1678. 1:16:38किल्लत और जावेद साहब बार-बार इधर-उधर चले
  1679. 1:16:40जा रहे थे तो उसको भी थोड़ा एंटरटेन करना
  1680. 1:16:42पड़ गया। डस गॉड एक्सिस्ट पे मैं एक ही
  1681. 1:16:44आर्गुमेंट दे पाया। आर्गुमेंट्स बहुत हैं
  1682. 1:16:47और डेफिनेटिव आर्गुमेंट्स हैं और मेरे
  1683. 1:16:49आर्गुमेंट को किसी एक राउंड में भी
  1684. 1:16:51इन्होंने एंटरटेन नहीं किया और रेफ्यूट
  1685. 1:16:53नहीं किया है। एक राउंड में भी नहीं। एक
  1686. 1:16:55राउंड में भी नहीं।
  1687. 1:16:57और ना ही अभी अभी आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट
  1688. 1:16:59आएगा। बता देना।
  1689. 1:17:00आर्गुमेंट ऑफ कंटिंजेंसी सर।
  1690. 1:17:02अरे मैं आपसे कई बार कह चुका हूं
  1691. 1:17:03कंटिंजेंसी का मतलब
  1692. 1:17:04अब मैं कैसे समझाऊं [हंसी] आपको? आपस में
  1693. 1:17:06हां आप
  1694. 1:17:07और कितने आसानी से समझाऊं मैं मुझे तो
  1695. 1:17:09नहीं समझ में आ रहा है बस आप अपनी
  1696. 1:17:11कंटिजेंसी उर्दू में बोल सकते हैं
  1697. 1:17:14हां आप अपनी बात पूरी कर लें आखरी चार
  1698. 1:17:16मिनट
  1699. 1:17:17दूसरी चीज
  1700. 1:17:19जस्ट अ मिनट प्लीज मैम कैन आई टॉक
  1701. 1:17:24दूसरी चीज ये है कि आपने एक तो इसका जवाब
  1702. 1:17:26नहीं दिया दूसरा आपने गॉड के ना होने पर
  1703. 1:17:29कोई डेफिनेटिव आर्गुमेंट नहीं दिया सिर्फ
  1704. 1:17:31मजहब पे बात कर रहे हैं आप मजहब तो आज
  1705. 1:17:33हमारा टॉपिक ही नहीं था आज तो हमारा टॉपिक
  1706. 1:17:35को आप मजहब से ले लेकर आईएस आईएस तक चले
  1707. 1:17:38गए। भाई हमारा क्या ताल्लुक है उससे? वी
  1708. 1:17:40कंडेम देम। और उसका गॉड से क्या ताल्लुक
  1709. 1:17:42है? अगर कोई गलत काम कर रहा है। किसी ने
  1710. 1:17:44किसी को कत्ल किया, किसी ने किसी का रेप
  1711. 1:17:46किया उसको सजा मिलनी चाहिए। और आपके पास
  1712. 1:17:49कोई भी कोई भी रैशन स्ट्रांग फाउंडेशन ऑफ
  1713. 1:17:52मोरालिटी नहीं है। आपने कहा कि मेजॉरिटी
  1714. 1:17:56तय करेगी सोसाइटी की वो सही होगा। मैंने
  1715. 1:17:58कहा हिटलर को फिर आप सही कहेंगे। नहीं
  1716. 1:18:00नहीं नहीं। प्लेनेट की सोसाइट की मेजॉरिटी
  1717. 1:18:02तय करेगी। तो प्लनेट की मेजॉरिटी गॉड के
  1718. 1:18:04एक्सिस्टेंस को मानती है। आप कह रहे हैं
  1719. 1:18:06ये रिलीजियस है। तो यानी आपके पास कोई
  1720. 1:18:08स्ट्रांग फाउंडेशन नहीं है ऑब्जेक्टिव
  1721. 1:18:10मोरालिटी का। ऑब्जेक्टिव मोरालिटी का अगर
  1722. 1:18:13कोई फाउंडेशन है तो वो सिर्फ गॉड है। गॉड
  1723. 1:18:16है। गॉड है। जी ये मुफ्ती शमालय नदवी साहब
  1724. 1:18:21का क्लोजिंग आर्गुमेंट था। अब हमारे पास
  1725. 1:18:24जी मैं
  1726. 1:18:26जी [हंसी]
  1727. 1:18:28ये बड़ा अच्छा है कि दोनों लोगों को
  1728. 1:18:31मॉडरेटर से शिकायत भी और बोल रहे हैं भाई
  1729. 1:18:33हमारी शाबाशी भी तो करते चलो
  1730. 1:18:36अब मेरी बात
  1731. 1:18:37जी आपके पास जावेद अख्तर साहब पांच मिनट
  1732. 1:18:39का वक्त है ये आपका क्लोजिंग आर्गुमेंट है
  1733. 1:18:41टाइम रिसेट कर दें
  1734. 1:18:42जी
  1735. 1:18:44देखिए बहुत सारी बातें हैं। गॉड का
  1736. 1:18:47डेफिनेशन दुनिया के किसी भी रिलजन में है
  1737. 1:18:49कि वो भी पोटेंट है। वो भी प्रेजेंट है।
  1738. 1:18:51ही इज़ जस्ट, ही इज़ काइंड, ही लव्स यू एंड
  1739. 1:18:55सो ऑन। मैं जब दुनिया देखता हूं तो मुझे
  1740. 1:18:58कोई ऐसा सुप्रीम पावर यहां दिखाई नहीं
  1741. 1:19:01देती है जो इंसान की बेहबूती के लिए कुछ
  1742. 1:19:04कर रही हो, कमजोर को बचा रही हो, मदद कर
  1743. 1:19:07रही हो, जालिम को पीछे हटा रही हो। मैं
  1744. 1:19:09नहीं देखा। तारीख में नहीं। एक तो अगर है
  1745. 1:19:12और ये देख रहा है तमाशा तो उसका होना ना
  1746. 1:19:16होना बराबर है। दो ये कि
  1747. 1:19:20ये जो है जब आप ये कहते हैं कि कायनात
  1748. 1:19:24जिसकी कंटिंजेंसी है मैं देखिए लफज़
  1749. 1:19:26इस्तेमाल किया मैंने तो ये कैसे हो सकती
  1750. 1:19:29है बात और फौरन आप सरेंडर कर देते हैं कि
  1751. 1:19:33जाहिर है कि इसका बनाने वाला तो इतने
  1752. 1:19:3510,000 गुना ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड होगा।
  1753. 1:19:37उस पर आपके होने पर कोई एतराज नहीं है।
  1754. 1:19:40उसे वो टाइमलेस है। वो पहले से था। टाइम
  1755. 1:19:42तो बहुत बाद में आया। ये सब आप मानने को
  1756. 1:19:45तैयार है। जिसका आपके पास कोई सबूत नहीं।
  1757. 1:19:48आपके पास कोई रीज़ नहीं है। आपकी तारीफ
  1758. 1:19:50क्या है मजहबों की? बिलीफ की जो खुदा का
  1759. 1:19:54बिलीफ है। ये कास्टेंटली गलत साबित होता
  1760. 1:19:56रहा है। मतलब आप कहे कि एस्टोटिस के जमाने
  1761. 1:19:59में तो सब जाहिल थे। वो भी इतने ही यकीन
  1762. 1:20:02से खुदा पे यकीन रखते थे जो अब नहीं रहा।
  1763. 1:20:06यह भी नहीं रहेगा। आप लिख लीजिए और इसके
  1764. 1:20:10आसार आपको दुनिया में दिखाई देना शुरू हो
  1765. 1:20:12चुके हैं। ये बहस क्या आज से 100 साल पहले
  1766. 1:20:16इस तरह हो सकती थी? यहां तक तो आपको हम ले
  1767. 1:20:19आए हैं। तो
  1768. 1:20:24सर सर [प्रशंसा]
  1769. 1:20:26अरे इनको मदद की जरूरत नहीं। भाई ये सेल्फ
  1770. 1:20:28सफिशिएंट आदमी है। आप क्यों इनकी मदद कर
  1771. 1:20:30रहे हैं?
  1772. 1:20:31सर सर सर [हंसी] सर प्लीज प्लीज
  1773. 1:20:33तो ये जो है तमाम बातें अपनी जगह है ये एक
  1774. 1:20:37पैकेज है आप अकेले कोई आदमी ऐसा नहीं है
  1775. 1:20:39जो सिर्फ गॉड को मानता हो उसके साथ बहुत
  1776. 1:20:42पैराफनेलिया आता है अलग-अलग पैराफनेलिया
  1777. 1:20:45आते हैं दे आर ओनली दे हैव ऑलवेज क्रिएटेड
  1778. 1:20:49इन द सोसाइटी मैं तो आपको सीधा ऑफर देता
  1779. 1:20:52हूं कि दुनिया में 10 इंपॉर्टेंट बिलीव
  1780. 1:20:55दैट आप एक मानते हैं नौ नहीं मानते नौ में
  1781. 1:20:59आप एक चीज है नौ को आप बिल्कुल रीज़नेबली
  1782. 1:21:02मेरी तरह देखते हैं
  1783. 1:21:05तो 90 मजहबी आदमी भी 90स है वो दूसरे खुदा
  1784. 1:21:09नहीं मानता एक खुदा मानता है अपना वाला
  1785. 1:21:12बाकियों को कहता है गलत है
  1786. 1:21:15अगर आप मानना ही बंद कर दे तो आपका 10%
  1787. 1:21:18चांस है कि आप सही है और 90% चांस है कि
  1788. 1:21:20आप गलत है। मेरा मशवरा है आप मानना छोड़
  1789. 1:21:22दिए तो 50% चांस होगा कि आप सही है और 50%
  1790. 1:21:26चांस होगा। 40% आप गेन करेंगे बाय बिकम एन
  1791. 1:21:30एथ।
  1792. 1:21:36ये एक फसूदा ख्याल है। ये खत्म हो रहा है।
  1793. 1:21:39हो सकता है मेरी जिंदगी में ना हो। लेकिन
  1794. 1:21:42ये हो जाएगा। जो बातें ये इनको आप
  1795. 1:21:45मेटाफिजिकल ये वो ऐसे रिस्पेक्टेबल टर्म
  1796. 1:21:48दे दिए। ये तो उन लोग के हैं जिन्हें ना
  1797. 1:21:51फिजिक्स मालूम थी ना मेटा मालूम था। ये
  1798. 1:21:53उन्होंने आपको दिए हैं।
  1799. 1:21:57जी बहुत शुक्रिया आप दोनों लोगों का और अब
  1800. 1:22:00इस बातचीत का आखिरी राउंड शुरू होगा डस
  1801. 1:22:03गॉड एक्सिस्ट की ये बहस मुफ्ती शमाइल नदवी
  1802. 1:22:06और जावेद अख्तर साहब के बीच आप लोग अपने
  1803. 1:22:08अपने हाथ ऊपर करेंगे मैं यहां से तय
  1804. 1:22:11करूंगा और माइक हमारे पास है क्या एक ही
  1805. 1:22:14माइक है ऑडियंस के लिए दो माइक है एक इस
  1806. 1:22:16तरफ एक इस तरफ ठीक है तो जी सबसे पहले
  1807. 1:22:20हमारी सहयोगी है मारिया मारिया शकी जी
  1808. 1:22:23पूछिए सवाल थोड़ा सा रुकेंगे ताकि कैमरे
  1809. 1:22:25फ्रेम आप पर आ जाए। आपकी तो प्रैक्टिस है
  1810. 1:22:28टीवी की। जी
  1811. 1:22:30नजवी साहब मैं खुदा को मानती हूं। पहले
  1812. 1:22:34मैं इसी प्रमाइस से शुरू कर रही हूं और ये
  1813. 1:22:36बता रही हूं आपको। मैं मानती हूं। लेकिन
  1814. 1:22:39कुछ कुछ सवाल है जो जावेद साहब ने उठाया।
  1815. 1:22:41उसका जवाब आपको देना चाहिए। पहला सवाल ये
  1816. 1:22:45कि गजा में सालों से छोटे बच्चे मर रहे
  1817. 1:22:50हैं वो उनको अगर खुदा मर्सफुल है हम मानते
  1818. 1:22:54हैं कि अल्लाह ताला में बहुत ताकत है तो
  1819. 1:22:57वो बच्चे क्यों मर रहे हैं? दूसरी बात यह
  1820. 1:23:00कि अगर कंटिंजेंसी की जो आप बात करते हैं
  1821. 1:23:03पूरे मुस्लिम मुालिक
  1822. 1:23:06मिलकर के भी उन गजा के बच्चों को क्यों
  1823. 1:23:08नहीं बचा पा रहे हैं? क्योंकि अगर वो
  1824. 1:23:11चाहते क्योंकि अल्लाह ताला उन पर हुकूमत
  1825. 1:23:14करते हैं। सब पर हुकूमत करते हैं तो वो
  1826. 1:23:16उनको क्यों नहीं बचा?
  1827. 1:23:17जी थैंक यू।
  1828. 1:23:18थैंक यू वेरी मच। बहुत अच्छा किया। आपने
  1829. 1:23:20इस चीज को जिक्र कर दिया। मैं इसको और
  1830. 1:23:22अच्छे से एक्सप्लेन करने की कोशिश करता
  1831. 1:23:24हूं।
  1832. 1:23:25देखें जहां तक आपने कहा कि गजा के बच्चों
  1833. 1:23:28को मारा जा रहा है। देखिए दो वर्ल्ड व्यू
  1834. 1:23:30है। एक एथिस्टिक वर्ल्ड व्यू एक थिस्टिक
  1835. 1:23:32वर्ल्ड व्यू है। बच्चे मर रहे हैं दोनों
  1836. 1:23:35वर्ल्ड व्यू में है। लेकिन हमारा वर्ल्ड
  1837. 1:23:37व्यू कह रहा है कि रिकंपेंस है। ये कह रहे
  1838. 1:23:39हैं कि उनका मर उनका मरना बेकार जाने वाला
  1839. 1:23:41है। कोई उसका रिकंपैेंस नहीं है। क्योंकि
  1840. 1:23:44इनके यहां आखिरत और अल्लाह का कोई तसवुर
  1841. 1:23:46या गॉड का कोई तसवुर नहीं है। आपने ये
  1842. 1:23:48सवाल किया कि गॉड मर्सफुल है। क्यों नहीं
  1843. 1:23:51रोकता? ये मैंने बताया कि ये मिसकंसेप्शन
  1844. 1:23:54है लोगों के दरमियान कि गॉड को सिर्फ
  1845. 1:23:57मर्सफुल और ओमनीपोटेंट समझते हैं। गॉड के
  1846. 1:23:59सिर्फ यही दो एट्रिब्यूट्स नहीं है। गॉड
  1847. 1:24:01के कई सारे एट्रिब्यूट्स हैं। उनमें से अल
  1848. 1:24:03हकीम भी है। उनमें से सॉरी ऑल ऑल ऑल वाइज
  1849. 1:24:08भी है। ऑल नोइंग भी है। लिहाजा अगर इस
  1850. 1:24:11दुनिया में किसी को तकलीफ आ रही है और गॉड
  1851. 1:24:14उसको नहीं रोक रहा है। वो इसलिए नहीं रोक
  1852. 1:24:16रहा है क्योंकि इंसानों को फ्री विल दिया
  1853. 1:24:18गया है। ठीक इसी सुनिए सुनिए। ठीक इसी
  1854. 1:24:20तरीके से अगर एक डॉक्टर किसी छोटे बच्चे
  1855. 1:24:22को इंजेक्शन लगा रहा है उसे तकलीफ पहुंच
  1856. 1:24:24रही है। उसके लिमिटेड पर्सपेक्टिव के
  1857. 1:24:26ऐतबार से ये गलत हो रहा है और डॉक्टर बुरा
  1858. 1:24:29है। लेकिन जब आप ब्रॉडर पिक्चर को देखेंगी
  1859. 1:24:32आपके और हमारे पास सिर्फ एक पिक्सल है।
  1860. 1:24:34हमें इतना नजर आ रहा है कि गज्जा में कत्ल
  1861. 1:24:36हो रहा है। लेकिन इसके पीछे कितना रिकमेंस
  1862. 1:24:39उनको मिलने वाला है। पूरा पिक्चर गॉड के
  1863. 1:24:42पास है। तो एक पिक्सल से आप पूरे पिक्चर
  1864. 1:24:44को कभी भी जज नहीं कर सकती।
  1865. 1:24:46आप आप इसमें कुछ जोड़ना चाहेंगे? आपको कुछ
  1866. 1:24:48बोलना है इसमें?
  1867. 1:24:51भाई आपने बहुत अच्छा जस्टिफिकेशन दिया या
  1868. 1:24:53आप वो जो वहां के प्राइम मिनिस्टर है
  1869. 1:24:55इजराइल के उन्हें भेजिए। वो बहुत खुश
  1870. 1:24:57होंगे।
  1871. 1:24:58आप जस्टिफिकेशन दे देना कि अगर गॉड नहीं
  1872. 1:25:00है तो बच्चे क्यों मर रहे हैं? आप बताएं।
  1873. 1:25:02वो ये सवाल पूछ रहे हैं कि अगर आप ईश्वर
  1874. 1:25:05का अस्तित्व नहीं मानते हैं तो उन बच्चों
  1875. 1:25:07की मौत को आप कैसे इंटरप्रेट करते हैं?
  1876. 1:25:11भाई ये दुनिया जो है जो ताकतवर लोग होते
  1877. 1:25:14हैं वो एक नाइंसाफी करते हैं।
  1878. 1:25:17तो ये अच्छा काम है। आपके नजदीक तो नेचर
  1879. 1:25:19नाइंसाफी पे मबनी है।
  1880. 1:25:20अरे मेरे भाई आप नेचर की कहां बात कर तो
  1881. 1:25:23इंसान की बात
  1882. 1:25:23तो फिर जब मैं इंसान की बात कर रहा था आप
  1883. 1:25:25नेचर की बात करने लग गए।
  1884. 1:25:26क्रॉस एग्जामिनेशन हां अगर मुझे बोलने
  1885. 1:25:29नहीं देंगे तो अलग बात है। आप बोलिए मैं
  1886. 1:25:31मुझे कोई
  1887. 1:25:32नहीं ये क्रॉस एग्जामिनेशन
  1888. 1:25:35मुझे बोल तो लेने दीजिए।
  1889. 1:25:37ठीक है बात
  1890. 1:25:38बात ये है के ह्यूमन सोसाइटी तभी साथ में
  1891. 1:25:42रह सकती है जब वो मोहब्बत से एकता से एक
  1892. 1:25:44दूसरे के एतराम करके रहे। इसके अलावा
  1893. 1:25:47पॉसिबल नहीं है। अकेले तो इंसान रह ही
  1894. 1:25:49नहीं सकता। वहां पर कुछ लोग हैं जो फाउल
  1895. 1:25:51करते हैं। वो फाउल हमेशा से तारीख में
  1896. 1:25:55होता आया है। आज ये हो रहा है जो हो रहा
  1897. 1:25:58है बहुत बुरा हो रहा है। बहुत जालिमाना
  1898. 1:26:00है। बहुत जाबराना है। उसको आप कहे कि ये
  1899. 1:26:03बच्चों को कंपनसेशन मिल जाएगा या इसकी
  1900. 1:26:06इंजेक्शन है। इंजेक्शन तो हेल्थ के लिए
  1901. 1:26:09दिया जाता है। आप ये कह रहे हैं कि ये
  1902. 1:26:11बच्चों की जो धज्जियां उड़ रही है ये
  1903. 1:26:13इंजेक्शन है।
  1904. 1:26:14ये टेस्ट है। यह टेस्ट है और उस टेस्ट में
  1905. 1:26:17उनको उनको ऐसा रिकफेंस मिलेगा जो आपके
  1906. 1:26:20तसवुर के बाहर है।
  1907. 1:26:21ये आप तीन बरस के बच्चे को बारूद से उड़ा
  1908. 1:26:23के टेस्ट ले रहे हैं।
  1909. 1:26:24वाह!
  1910. 1:26:25वो नहीं ले रहा है। खुदा नहीं उड़ा रहा है।
  1911. 1:26:26इजराइल उड़ा रहा है। तो उसको उसको
  1912. 1:26:29अगला सवाल लेते हैं। अगला सवाल लेते हैं
  1913. 1:26:32प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल।
  1914. 1:26:34मुफ्ती साहब एक निवेदन आपसे है कि कम से
  1915. 1:26:36कम
  1916. 1:26:37थोड़ा सा माइक क्लोज।
  1917. 1:26:38एक रिलीजियस और फिलोसफिकल
  1918. 1:26:40कर रहे कर रहे हैं। करम प्लीज
  1919. 1:26:42एक रिलीजियस और फिलोसफिकल ट्रेडिशन है।
  1920. 1:26:45जो ब्रह्मांड को यानी यूनिवर्स को ही
  1921. 1:26:48अंतिम मानती है। सर्वम खल इदम ब्रह्मम।
  1922. 1:26:52दिस इज छंदोग उपनिषद एंड इट कंप्लीटली
  1923. 1:26:56रूल्स आउट द एकिस्टेंस और नेसेसिटी आपके
  1924. 1:26:59शब्दों में नेसेसिटी ऑफ़ अ क्रिएटर। द
  1925. 1:27:02क्रिएशन इटसेल्फ इज द क्रिएटर। तो एक मिनट
  1926. 1:27:06प्लीज। दूसरा जो सवाल आपने अभी जो आप
  1927. 1:27:09बार-बार कह रहे हैं कि भगवान विद्वान भी
  1928. 1:27:11है, वाइज सब जानने वाला। तो अगर विडम में
  1929. 1:27:16दुनिया भर के पापों और अत्याचारों को
  1930. 1:27:18बर्दाश्त करना शामिल है तो फिर इसका मतलब
  1931. 1:27:21ये हुआ कि अगर मैं फ्री विल से उसको अपोज
  1932. 1:27:23करता हूं तो ईश्वर की विज़डम और मेरी फ्री
  1933. 1:27:25विल में कंट्राडिक्शन है। बिकॉज़ व्हेन आई
  1934. 1:27:28एम अपोजिंग व्हाटएवर हैपनिंग इन गाजा देन
  1935. 1:27:30आई एम अपोजिंग द गॉड्स विल और गॉड्स विज़डम
  1936. 1:27:33जवाब ले क्योंकि तो गॉड की विज़डम एक मिनट
  1937. 1:27:35सॉरी प्लीज सर [हंसी] ये एक एक जुमला गॉड
  1938. 1:27:38की विज़डम है कि गाजा में जो कुछ हो रहा है
  1939. 1:27:40वो हो रहा है। मैं उसका अपोज कर रहा हूं
  1940. 1:27:43तो मैं गॉड की विडम के खिलाफ जा रहा हूं।
  1941. 1:27:45एक सवाल दूसरा यह
  1942. 1:27:47नहीं नहीं आपने दो ऑलरेडी
  1943. 1:27:50सर
  1944. 1:27:50आप और सवाल कर लें लेकिन मुझे दो जवाब
  1945. 1:27:52देने पहले आपने ये कहा सुनिए मेरी बात
  1946. 1:27:54सुनिए के मुताबिक थोड़ा ठीक हो रहा है ना
  1947. 1:27:57नहीं नहीं हो रहा है ठीक नहीं हो रहा है
  1948. 1:27:58मैं बता रहा हूं क्या हो रहा है आप तशरीफ
  1949. 1:28:00रखिए मैं बता रहा हूं क्या हो रहा है लेट
  1950. 1:28:01मी कंप्लीट प्लीज
  1951. 1:28:02एक सेकंड गाइस एक सेकंड ये देखिए ऐसा है
  1952. 1:28:05कि ये सब बड़ा आपस में विचार विमर्श के
  1953. 1:28:09बाद ये तय हुआ था कि कुछ नियम बना लिए
  1954. 1:28:11जाएं ताकि एक टाइम बाउंड बातचीत चले और
  1955. 1:28:15भाई साहब आप बड़ा जरूरी काम कर रहे हैं
  1956. 1:28:18लेकिन कैमरे के फ्रेम में आके उस काम को
  1957. 1:28:20गड़बड़ कर दे रहे हैं। ठीक है गुरु अब
  1958. 1:28:22मेरे को कहीं का गुस्सा कहीं निकालना था।
  1959. 1:28:24सॉरी [हंसी]
  1960. 1:28:26नहीं कोई गुस्सा नहीं है। जी तो प्रोफेसर
  1961. 1:28:28ने सवाल पूछे आप उनके जवाब दें। और थोड़ा
  1962. 1:28:31ये सब लोग थोड़ा ख्याल रखें। भाई सवाल
  1963. 1:28:33संक्षिप्त रखें। आपने दो सवाल किए। सबसे
  1964. 1:28:37पहला ये कहा कि हमारे पास ये कांसेप्ट है
  1965. 1:28:39कि ये यूनिवर्स खुद नेसेसरी बीइंग है।
  1966. 1:28:42क्रिएशन इटसेल्फ इज द क्रिएटर।
  1967. 1:28:44हाउ इररेशनल इज दिस? कि मैं एक्सिस्ट
  1968. 1:28:48करूंगा बाद में लेकिन अभी एक्सिस्ट कर भी
  1969. 1:28:49रहा हूं। यानी एक ही टाइम में एक्सिस्ट भी
  1970. 1:28:51कर रहे हैं, नहीं भी कर रहे हैं। दिस इज
  1971. 1:28:52नॉट ट्रू। दूसरी चीज आपने कहा के अगर
  1972. 1:28:56इजराइल में सॉरी माफ कीजिएगा इजराइल डजंट
  1973. 1:28:59एक्सिस्ट। ऑक्युपाइड पैलेस्टाइन में अगर
  1974. 1:29:06अगर ऑक्युपाइड पैलेस्टाइन में बच्चों को
  1975. 1:29:09मारा जा रहा है फ्री विल की वजह से और गॉड
  1976. 1:29:11नहीं रोक रहा ये कंट्राडिक्शन है ये बताइए
  1977. 1:29:14कि एक एग्जाम में एक बच्चा गलत आंसर लिख
  1978. 1:29:16रहा है सुनिए एग्जामिनर चाहे तो रोक रोक
  1979. 1:29:19सकता है| क्यों नहीं रोक रहा है?
  1980. 1:29:21ये कंट्राडिक्शन है या कंट्राडिक्शन नहीं
  1981. 1:29:23है?
  1982. 1:29:25सर माइक नहीं सर ये आपस में [हंसी]
  1983. 1:29:29ये क्या आपका सवाल माइक माइक माइक माइक
  1984. 1:29:32दीजिए
  1985. 1:29:33फ्री विल दिया गया है टेस्ट के लिए
  1986. 1:29:35अकाउंटेबिलिटी के लिए अगर फ्री विल नहीं
  1987. 1:29:37होता तो आप कहते हमें रोबोट बना दिया गया
  1988. 1:29:39नॉट रिप्रेजेंट माय पोजीशन आपकी जो भी
  1989. 1:29:41पोजीशन मैं अपनी फ्री विल के नाते अपने
  1990. 1:29:45ह्यूमन विज़डम के नाते गाजा में हो रही
  1991. 1:29:47अत्याचार का विरोध करता हूं
  1992. 1:29:48बिल्कुल करना चाहिए
  1993. 1:29:49आपके हिसाब से मैं गॉड की विज़डम का विरोध
  1994. 1:29:50कर रहा हूं
  1995. 1:29:51बिल्कुल नहीं
  1996. 1:29:51समाज हो रहा है गॉड
  1997. 1:29:52बिल्कुल भी नहीं बिल्कुल भी नहीं। उसका
  1998. 1:29:55वहां पर गाजा में कत्ल होना यह इंसानों के
  1999. 1:29:58गलत इस्तेमाल का नतीजा है। फ्री विल के
  2000. 1:30:01इस्तेमाल का नतीजा है। गॉड इसको गॉड इसका
  2001. 1:30:03हुक्म नहीं देता। उससे रोकता है। यही तो
  2002. 1:30:05मसला है ना आपके लिए कांसेप्ट क्लियर है।
  2003. 1:30:07नहीं नहीं भाई आपने तो बताया था इंजेक्शन
  2004. 1:30:09लगाने से बच्चे को तकलीफ होती है। ये
  2005. 1:30:11इंजेक्शन लगा
  2006. 1:30:12सर आप ऐसे रेटोरिक स्टेटमेंट दे तब तो कोई
  2007. 1:30:14मसला नहीं समझते रहेंगे। दिस इज अ रेटोरिक
  2008. 1:30:16स्टेटमेंट। दिस इज नॉट अ लॉजिकल आर्गुमेंट
  2009. 1:30:18सर। आई एम सॉरी। आई एम सॉरी। सर आखरी 30
  2010. 1:30:20मिनट बड़े मुश्किल होने वाले हैं। जी
  2011. 1:30:22मुफ्ती साहब आगे बैठे हैं। इनको माइक
  2012. 1:30:24दीजिए।
  2013. 1:30:25हां तरुण माइक आप अपने पास रखिए। आपको
  2014. 1:30:27कैमरे का फ्रेम पता है।
  2015. 1:30:28जी
  2016. 1:30:30सबसे पहले दोनों को मुबारकबाद।
  2017. 1:30:31एक सर अपना आप नाम बता दें। आप अमेरिका
  2018. 1:30:35में शिकागो में रहते हैं। इतना मुझे याद
  2019. 1:30:36है।
  2020. 1:30:37बताएं आपको। यासिर नदीम अलवाजदी मेरा नाम
  2021. 1:30:39है। जावेद सर आपसे क्वेश्चन है इनफिनिटी
  2022. 1:30:42इंग्रेस के ताल्लुक से। एक हाइपोथेटिकल
  2023. 1:30:43सिनेरियो है। मसल अगर आप
  2024. 1:30:45सर माइक थोड़ा सा प्लीज क्लोज। जी
  2025. 1:30:47अगर आप शायर इसलिए हैं कि आपके कोई उस्ताद
  2026. 1:30:50शायर थे और वो इसलिए शायर थे कि उनके कोई
  2027. 1:30:52उस्ताद शायर थे और इसी तरीके से हम माज़
  2028. 1:30:55में पीछे चलते चलते चले जाए और कहीं ना
  2029. 1:30:58रुके तो माफ़ कीजिएगा आप कभी शायर नहीं हो
  2030. 1:31:00सकते लेकिन आप शायर हैं। आपका शायर
  2031. 1:31:02एक्सिस्ट करता है। इसका मतलब ये है कि आप
  2032. 1:31:04कहीं ना कहीं रुके हैं। तो मेरा सवाल यह
  2033. 1:31:06है कि क्या आप इनफिनिट रिग्रेस ऑफ कॉजेस
  2034. 1:31:09को लॉजिकल फैलेसी मानते हैं या नहीं
  2035. 1:31:13मानते? हां या ना?
  2036. 1:31:17मैं इन्हें लॉजिकल फैलेसी नहीं मानता हूं।
  2037. 1:31:20लेकिन मैं मेरा प्रॉब्लम यह है कि जब मैं
  2038. 1:31:23नहीं मानता हूं तो आई विल कंटिन्यू विद
  2039. 1:31:25दिस लॉजिक जो फैलेसी नहीं हो। आप एक जगह
  2040. 1:31:28रुक जाते हैं जाके। आप कहते हैं ये गेंद
  2041. 1:31:31कैसे बनी? ये जजीरा कैसे बना? ये समंदर
  2042. 1:31:33कैसे बना? ये जमीन कैसे बनी? और अचानक गॉड
  2043. 1:31:36पे जाके आपको ब्रेक लग जाता है। एक बार आप
  2044. 1:31:39सवाल नहीं करते कि भाई इनको बनाने वाला तो
  2045. 1:31:42इनसे भी कॉम्प्लिकेटेड होगा। वो कैसे बना
  2046. 1:31:45उसके बारे में आपने इत्मीनान कर लिया वो
  2047. 1:31:47हमेशा से तो अगर आप उसे हमेशा से मानते
  2048. 1:31:50हैं तो फिर ये मान लीजिए कि कायनात हमेशा
  2049. 1:31:52से क्या तकलीफ है
  2050. 1:31:53फिर हम वजूद में नहीं आते
  2051. 1:31:54जी
  2052. 1:31:55हम मौजूद नहीं
  2053. 1:31:56अच्छा सर सर सर
  2054. 1:31:57क्यों नहीं होते मैं बताऊंगा प्लीज
  2055. 1:31:59जैसे मैंने मिसाल दी आपके शेर
  2056. 1:32:01आपका शेर कभी वजूद में ना आता अगर शायद
  2057. 1:32:03इसी तरह चलता रहे हमेशा
  2058. 1:32:05माइक माइक मेरे ख्याल से इनफिनिट रिग्रेस
  2059. 1:32:08का कांसेप्ट क्लियर नहीं हो पाया ऐसा रहने
  2060. 1:32:09दे लेट्स गोप
  2061. 1:32:10ठीक है
  2062. 1:32:10हां थोड़ा सा मॉडरेटर का भी ख्याल रखें।
  2063. 1:32:14नहीं नहीं आपने तो रखा है। आपने रखा है।
  2064. 1:32:16यहां पे गौहर रजा साहब है। वो भी एक सवाल
  2065. 1:32:18पूछना चाहते हैं।
  2066. 1:32:21माइक या नहीं तो ऑन करिए।
  2067. 1:32:26पहले तो ये कह दूं के
  2068. 1:32:29मैं उन बच्चों से शर्मिंदा हूं जिनको गजा
  2069. 1:32:33में कत्ल किया गया।
  2070. 1:32:35[प्रशंसा]
  2071. 1:32:36क्योंकि हमारे होते हुए कत्ल किया गया।
  2072. 1:32:39लेकिन उससे ज्यादा शर्मिंदगीगी इस बात से
  2073. 1:32:41हुई कि मुझे लगा कि मुफ्ती साहब उसको
  2074. 1:32:44जस्टिफाई कर रहे हैं।
  2075. 1:32:47बिल्कुल भी नहीं आप आप गलत मुझे लगा मैं
  2076. 1:32:49गलत हो सकता हूं। गलत मैं सवाल पूछ रहा
  2077. 1:32:51हूं। मैं सवाल
  2078. 1:32:54मैं जावेद भाई से डिसए्री करता हूं।
  2079. 1:32:56एक सेकंड आस्किंग
  2080. 1:32:57देखिए अगर देखिए ऐसा एक सेकंड
  2081. 1:33:00आप सर वेट वेट अरे आप मैं कुछ मेरे पहले
  2082. 1:33:02मुझे अपनी बात कह लेने दीजिए। अगर ऑडियंस
  2083. 1:33:05तय करेगी तो फिर मॉडरेटर का मतलब नहीं।
  2084. 1:33:07मेरा आप सबसे यह कहना है ये बहस दो लोगों
  2085. 1:33:12के बीच में है। एक तरफ मुफ्ती साहब, एक
  2086. 1:33:14तरफ जावेद साहब। पिछले डेढ़ घंटे से ये
  2087. 1:33:17लोग अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। आपकी इनसे
  2088. 1:33:20इत्तेफाकी हो सकती है ना इत्तेफाकी हो
  2089. 1:33:22सकती है। मेरे उस्ताद मुझे सिखा गए हैं कि
  2090. 1:33:25मुखा मुखम में असहमति की गुंजाइश बची रहनी
  2091. 1:33:29चाहिए। अगर मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूं
  2092. 1:33:33गौर साहब। आपने जो कमाल की किताबें लिखी
  2093. 1:33:35हैं साइंटिफिक टरामेंट लेकिन मेरी ये
  2094. 1:33:37गुजारिश है आप सबसे कि यदि आप इन लोगों ने
  2095. 1:33:41जो बोला उनप टिप्पणियां करेंगे तो ना वक्त
  2096. 1:33:43की पाबंदी रहेगी ना वनशा आप सवाल पूछ लें
  2097. 1:33:46उस सवाल में जो बात आ जाए वो आ जाए मैं
  2098. 1:33:49जावेद साहब से डिसए्री करता हूं इसलिए
  2099. 1:33:51जावेद साहब से सवाल पूछ रहा हूं आपका सवाल
  2100. 1:33:54जावेद अख्तर साहब से
  2101. 1:33:55और सवाल ये है मेरा कि जावेद साहब ने कई
  2102. 1:33:57बार लॉजिक का इस्तेमाल किया के साइंस में
  2103. 1:34:01लॉजिक है और रिलजन में लॉजिक लॉजिक नहीं
  2104. 1:34:03है। मेरा ख्याल ये है कि रिलजन में भी
  2105. 1:34:06लॉजिक है। लेकिन उस लॉजिक की बेसिस ये है
  2106. 1:34:10कि आप रुक जाते हैं जिसका जिक्र जावेद
  2107. 1:34:12साहब ने बार-बार किया। यानी खुदा के तसवुर
  2108. 1:34:15पे आते हुए, गॉड के तसवुर पे आते हुए रुक
  2109. 1:34:17जाते हैं। और इसके इसमें सवाल पूछना मतलब
  2110. 1:34:22फॉरबिटन होता है। सवाल ये है कि क्या
  2111. 1:34:25जावेद साहब इससे एग्री करते हैं कि साइंस
  2112. 1:34:28की लॉजिक अलग है और रिलीजन की लॉजिक अलग
  2113. 1:34:32है।
  2114. 1:34:33बताइए सर।
  2115. 1:34:36देखिए तीन चीजें हैं। साइंस है, एक है
  2116. 1:34:40मंतिक है, इ्तदाल है। और एक जो है कुछ भी
  2117. 1:34:44नहीं है। फथ है, अकीदा है। मैं अकीदे के
  2118. 1:34:48लॉजिक का कायल नहीं हूं। मुझे आप इ्तदाल
  2119. 1:34:52से, लॉजिक से, रीज़ से समझाइए। मैं मानने
  2120. 1:34:55को तैयार हूं। मेरा क्या नुकसान होगा?
  2121. 1:34:58लेकिन ये कि अकीदे पे मैं नहीं जा सकता
  2122. 1:35:00हूं। अकीदे का मतलब है कि तुम ये मान लो
  2123. 1:35:03सवाल को ये नहीं आप सारी बातें करके बड़ी
  2124. 1:35:07साइंटिफिक बातें करके एक जगह जाके खुदा के
  2125. 1:35:09हुजूद पे रुक जाते हैं सरेंडर कर देते हैं
  2126. 1:35:11मैं सरेंडर करने को तैयार हूं दैट्स ऑल
  2127. 1:35:15जी ये आगे सर बैठे हुए हैं इनको माइक
  2128. 1:35:18दीजिए
  2129. 1:35:18भाई वो वो आप पूछना चाह रहे थे ना
  2130. 1:35:20हां नहीं मैं ये
  2131. 1:35:22जी आपका नाम
  2132. 1:35:23आसिम इफ्तखार
  2133. 1:35:25आसिम जी पूछिए
  2134. 1:35:26सर जावेद सर से सवाल है कि आपने अपनी
  2135. 1:35:29क्लोजिंग
  2136. 1:35:29माइक थोड़ा करीब आपने क्लोजिंग स्टेटमेंट
  2137. 1:35:31में ये बात कही थी के मजहब का जो फ्यूचर
  2138. 1:35:35है वो ज्यादा दिन नहीं जाने वाला है।
  2139. 1:35:38लेकिन मैं देख पा रहा हूं कि जो ऑक्सफोर्ड
  2140. 1:35:40यूनिवर्सिटी की एक स्टडी है 2011 में हुई
  2141. 1:35:42है जिसके 50 एकेडमिशंस ने इसको अंजाम दिया
  2142. 1:35:45था। उसमें वो ये कहते हैं कि जो फथ इन गॉड
  2143. 1:35:50है वो इनबिल्ट है ह्यूमन नेचर के अंदर
  2144. 1:35:53जिसको हम कहते हैं फितरत के अंदर शामिल है
  2145. 1:35:55वो और वो ये कहते हैं कि अगर कोई ये समझता
  2146. 1:35:58है के मजहब को वो खत्म कर देगा तो ये उसकी
  2147. 1:36:02गलतफहमी है तो आप इसके बारे में इस स्टडीज
  2148. 1:36:05के बारे में क्या कहते हैं?
  2149. 1:36:06ठीक है। मैं उनसे एग्री नहीं करता हूं। वो
  2150. 1:36:09कौन से प्रोफेसर होंगे ऐसा
  2151. 1:36:10उनके पास डाटा है। इन्होंने डाटा के
  2152. 1:36:12होगा। डाटा क्या हो सकता है? फ्यूचर का
  2153. 1:36:14डाटा तो नहीं हो सकता ना उनके पास
  2154. 1:36:16प्रेजेंट का डाटा हो सकता है। डाटा आपने
  2155. 1:36:19सुना 100 साल पहले का बाद का डाटा मैंने
  2156. 1:36:21तो नहीं सुना अब तक तो आज उनकी ये राय है
  2157. 1:36:25और होगी राय है। ठीक है? दुनिया में
  2158. 1:36:27तरह-तरह की राय है लोग। लेकिन मैं समझता
  2159. 1:36:30हूं कि वक्त के साथ इंसान ज्यादा से
  2160. 1:36:32ज्यादा रीज़नेबल और लॉजिकल होता जा रहा है।
  2161. 1:36:35आज आप देखिए वेस्टर्न यूरोप में क्या
  2162. 1:36:38परसेंटेज है नॉन बिलीवर्स की। बहुत हाई।
  2163. 1:36:42वहां चर्च खाली पड़े होते हैं। तो
  2164. 1:36:45अल्टीमेटली
  2165. 1:36:46तो इंसान कोई ऐसी बात बहुत अरसे तक नहीं
  2166. 1:36:50मान सकेगा चाहे गलत या सही जो उसे उसके
  2167. 1:36:54दिमाग को उसके ज़हन को उसके लॉजिक को अपील
  2168. 1:36:57ना करे। वो कह रहे हैं तो ऑक्सफोर्ड के
  2169. 1:36:59होंगे तो केवरेज के होंगे तो मुझे क्या
  2170. 1:37:01लेना देना? उनका डाटा मुस्तकबिल का नहीं
  2171. 1:37:04हो सकता है।
  2172. 1:37:05जी दीपक हां पूछिए। मैं आऊंगा अभी पीछे की
  2173. 1:37:09साइड भी आऊंगा। माइक व भेजूंगा दो-ती साल
  2174. 1:37:11के लिए। जी।
  2175. 1:37:12जावेद साहब आपसे सवाल है। नमस्ते।
  2176. 1:37:14अरे भाई
  2177. 1:37:14सर अगर आप ही लोगों को तय करना है तो फिर
  2178. 1:37:17सब फिर 200 लोग तय कर लेंगे। नहीं सर
  2179. 1:37:19प्लीज डोंट डू दिस सर। सर एवरीबडी हैज़ अ
  2180. 1:37:21राइट सर। बट वी कैन ओनली टेक सिलेक्टेड
  2181. 1:37:24क्वेश्चन।
  2182. 1:37:25सर ये यंग लोग भी हैं तो इनकी ये आप उतने
  2183. 1:37:29यंग भाई आप यंग है कि नहीं है?
  2184. 1:37:31वो कह रहे हैं वो भी यंग है साहब। आप उनकी
  2185. 1:37:33नौजवानी पर दावा उनको ही करने दें।
  2186. 1:37:36हां। मुफ्ती साहब आप यंग हां पूछिए।
  2187. 1:37:40अरे भैया मेरा सवाल यह है
  2188. 1:37:41इनसे भी तो पूछो जी
  2189. 1:37:43बस आपसे एक सवाल [हंसी] है जैसे थीस्टो के
  2190. 1:37:46पास अपने जो ईश्वर को मानते हैं उनके पास
  2191. 1:37:48अपने सोशल गेट टुगेदर्स हैं पांच रोजा
  2192. 1:37:49क्रिसमस आने वाला है होली है दिवाली है ईद
  2193. 1:37:52है एथिस्ट क्या ऑफर कर रहे हैं मतलब मैं
  2194. 1:37:54इनकी दुकान से दूर में आना चाहता हूं उस
  2195. 1:37:55तरफ पर मैं अट्रैक्ट नहीं हो पा रहा हूं
  2196. 1:37:57मैं सोशल गेट टुगेदर्स क्या है आपके पास
  2197. 1:38:01वो ये कह रहे हैं कि जो धार्मिक लोग हैं
  2198. 1:38:04अलग-अलग धर्म के लोग उनके उत्सव त्यौहार
  2199. 1:38:07बहुत है
  2200. 1:38:08अब आपको मैं एक सुनाता हूं यहां
  2201. 1:38:09हिस्टोरियन भी बैठे हैं। मृदुला जी आप
  2202. 1:38:12बताइएगा सही है क्या? ये एक कॉन्सेंटाइन
  2203. 1:38:16एक ग्रीक रोमन भाषा था जो क्रिश्चियनिटी
  2204. 1:38:19आने के 400 साल बाद उसने डिसाइड किया कि
  2205. 1:38:23मैं क्रिश्चियन हो जाऊंगा। मेरी पूरी
  2206. 1:38:24स्टेट कैंसिल हो जाएगी। उस जमाने में ऐसे
  2207. 1:38:27ही होता था राजा जो धर्म इख्तियार करता था
  2208. 1:38:29वो जनता भी कर लेती थी।
  2209. 1:38:32इसलिए कि वो हो गया था बैंककरप्ट और उसे
  2210. 1:38:34जो मेडिटेरियन पोस्ट के रिच क्रिश्चियन वो
  2211. 1:38:38थे मर्चेंट उससे पैसा चाहिए था। तो उसने
  2212. 1:38:41कहा यार क्रिश्चियन हो जाओ। तो उसने अपने
  2213. 1:38:44वजीर से कहा कि भाई ये हिस्ट्री है के अब
  2214. 1:38:47हम लोग क्रिश्चियन हो जाते हैं। कहते सर
  2215. 1:38:49हो जाएंगे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन एक
  2216. 1:38:52प्रॉब्लम ये है कि 17 दिसंबर से 25 दिसंबर
  2217. 1:38:57तक जो पिगम फेस्टिवल होता जो पिगम स्टेबल
  2218. 1:39:00हो जो फेस्टिवल होता है वो बंद हो जाएगा।
  2219. 1:39:03इसलिए कि हम क्रिश्चियन हो गए तो होगा
  2220. 1:39:04नहीं। तो वो बच्चों को बहुत बुरा लगेगा।
  2221. 1:39:07पब्लिक को बहुत डे बहुत एंजॉय करते हैं।
  2222. 1:39:10खास तौर से 25 को मेन डे उसने कहा हां ये
  2223. 1:39:12तो सही कह रहे हो ये जीसस क्राइस्ट की
  2224. 1:39:14पैदाइश कब थी? कह साहब वो अप्रैल में थी
  2225. 1:39:17नहीं कट करो वो 25 दिसंबर को [हंसी]
  2226. 1:39:20ये हकीकत है।
  2227. 1:39:23और 400 साल बाद क्रिश्चियनिटी के अप्रैल
  2228. 1:39:26से दिसंबर ले आए और इसलिए कि यहां बेगम
  2229. 1:39:29फेस्टिवल होता था। अब मनाते हैं आप आराम
  2230. 1:39:31से। ये जो सारे फेस्टिवल है ये रिलीजन थे।
  2231. 1:39:35हर एक को एक एंटरटेनमेंट डिपार्टमेंट
  2232. 1:39:37चाहिए होता है अपनी कंपनी चलाने के लिए।
  2233. 1:39:40तो ये रिलीजंस ने ये सेुलर त्यहार थे
  2234. 1:39:43जिन्हें रिलीजंस ने ले लिया है। ये मौसम
  2235. 1:39:46के थे, फसलों के थे, किसानों के थे। उसको
  2236. 1:39:49आपने लेके रिलीजियस रंग दे दिया। ये ये
  2237. 1:39:52कोई रिवीजन से थोड़ी आए आप आप अच्छा हमें
  2238. 1:39:56देखिए हम तो मुद है हम ईद मनाते हैं हम
  2239. 1:40:00दिवाली मनाते हैं हम होली मनाते हैं हम
  2240. 1:40:02क्रिसमस मनाते हैं मुंबई की फिल्म
  2241. 1:40:04इंडस्ट्री की सबसे बड़ी होली हमारे घर में
  2242. 1:40:07सबसे बड़ी ईद हमारे घर में वो हमारी सोशल
  2243. 1:40:11वो है हमारे यहां हेरिटेज है ऐसा थोड़ी है
  2244. 1:40:14कि वी विल थ्रो द बेबी अलोंग वि द वाटर ये
  2245. 1:40:17तो अच्छी चीज है इन्हें रखो तो बेकार है
  2246. 1:40:20फेंक दो
  2247. 1:40:21जी हां हेलो जी मेरा सवाल नादरी जी से है।
  2248. 1:40:26जैसा कि आपने बोला कि गॉड टाइम के भी परे
  2249. 1:40:30हैं और गॉड इतनी कॉम्प्लेक्स चीज है कि
  2250. 1:40:32उसे ह्यूमन माइंड समझ नहीं सकता और गॉड ने
  2251. 1:40:36अर्थ पे फ्री वेल भी दे दी है। तो आप अपना
  2252. 1:40:38वक्त जाया क्यों कर रहे हैं गॉड के बारे
  2253. 1:40:40में बात करके। अपन को तो बात करनी चाहिए
  2254. 1:40:42कि सोसाइटी को बेहतर कैसे करें?
  2255. 1:40:44मैं गॉड वही बताता है सोसाइटी को कैसे
  2256. 1:40:46बेहतर करें? अभी मैं आपका जवाब देता हूं।
  2257. 1:40:48आपने कहा कि टाइम पे वो एक्सिस्ट नहीं
  2258. 1:40:52करता। सो
  2259. 1:40:54नहीं मेरा सवाल ये है कि जैसा आपने बोला
  2260. 1:40:58कि गॉड बहुत ही कॉम्प्लेक्स चीज है।
  2261. 1:41:00मैंने कहा ही नहीं कि कॉम्प्लेक्स है ये
  2262. 1:41:01तो आपके अल्फाज़ हैं। कॉम्प्लेक्स का लव्स
  2263. 1:41:04गॉड के लिए सूटेबल नहीं है। क्यों?
  2264. 1:41:06क्योंकि कॉम्प्लेक्स वो चीजें होती है जो
  2265. 1:41:07ऑब्जेक्ट हो। गॉड इज नॉट एन ऑब्जेक्ट
  2266. 1:41:09जिसको आप इंस्ट्रूमेंट के जरिए लैबोरेटरी
  2267. 1:41:12में जाकर टेस्ट करें। ओह इट्स वैरी
  2268. 1:41:13कॉम्प्लेक्स। वो कोई कार का इंजन नहीं है।
  2269. 1:41:16वो फिलोसफिकली
  2270. 1:41:18नेसेसरी बीइंग ऐसी बीइंग है जो सिंपल
  2271. 1:41:21बीइंग है। हां आप उसको मुकम्मल तौर पे
  2272. 1:41:24उसकी तमाम हिकमतों को जान ले और हर चीज को
  2273. 1:41:26जान ले ये पॉसिबल नहीं है। क्योंकि वो ऑल
  2274. 1:41:28वाइज है आप ऑल वाइज नहीं है और वो खुदा है
  2275. 1:41:31वो आपको सारी चीजें बता दे ये जरूरी नहीं
  2276. 1:41:33है।
  2277. 1:41:34मेरा सवाल ये नहीं था। मेरा सवाल यह था कि
  2278. 1:41:36जब गॉड इतना परे है इस दुनिया से कि उसने
  2279. 1:41:40अर्थ पे फ्री विल भी दी है हम सब ह्यूमंस
  2280. 1:41:42की फ्री विल है और जो सोसाइटी में हो रहा
  2281. 1:41:45है वो अपन लोग डिसाइड करेंगे तो अपन लोग
  2282. 1:41:48डिसाइड नहीं करेंगे ना अपन लोग डिसाइड
  2283. 1:41:50नहीं करेंगे गॉड जो है गॉड ने वो उसकी जात
  2284. 1:41:54उसकी एकिस्टेंस टाइम एंड स्पेस से परे है
  2285. 1:41:57लेकिन वो हमारा टेस्ट ले रहा है और उसी
  2286. 1:41:58गॉड ने हमें बताया कि तुम्हें क्या करना
  2287. 1:42:01है क्या नहीं करना है तो जाहिर है उस गॉड
  2288. 1:42:02की बात सुनेंगे ना हम
  2289. 1:42:03जी
  2290. 1:42:04वो पीछे पीछे एक चश्मा लगा है जो मैम खड़ी
  2291. 1:42:07है उनको दीजिए। हां आप आप
  2292. 1:42:11जी जी बिलकुल आएंगे देखिए मैं कोशिश कर
  2293. 1:42:14रहा हूं सब तरफ जाने की हां उनको दीजिए
  2294. 1:42:16माइक जी
  2295. 1:42:20हेलो सर
  2296. 1:42:21मैं ओमनी प्रेजेंट नहीं हूं टाइम पाबंद
  2297. 1:42:23हूं और जहां तक कोशिश कर सकता हूं करूंगा
  2298. 1:42:26जी अपना नाम बताइए
  2299. 1:42:27मेरा नाम उर्सला है मैं दिल्ली
  2300. 1:42:29यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट हूं और मैं
  2301. 1:42:30स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया से हूं अ मेरा
  2302. 1:42:34सवाल मुफ्ती जी से है कि इस हॉल के इस
  2303. 1:42:37कमरे में बैठ के हम हम लोग रेप की
  2304. 1:42:38मोरालिटी के बारे में फिलॉसफिकली बात तो
  2305. 1:42:41कर सकते हैं। बट असलियत ये है कि रोजमर्रा
  2306. 1:42:44की जिंदगी में औरतें रेप के थ्रू गुजरती
  2307. 1:42:46हैं। और हम लोग सिर्फ नंबर्स पे इस तरह
  2308. 1:42:49नहीं देख सकते क्योंकि कितनी औरतें हैं इन
  2309. 1:42:52कंट्रीज में जहां पे आप बता रहे हैं कि
  2310. 1:42:54केसेस कम है जिनका एक्सेस है कि वो जाके
  2311. 1:42:56केस फाइल कर सके। कितनी औरतें हैं जो
  2312. 1:42:59वर्किंग जिनको काम करने की आजादी है उन
  2313. 1:43:03कंट्रीज में। यूरोप में ये आजादी आ गई।
  2314. 1:43:05यूरोप में ये रूल्स आ गए। तो हम आज उसके
  2315. 1:43:07बारे में बात कर पा रहे हैं।
  2316. 1:43:08जी जाओ।
  2317. 1:43:10आपने ये कहा कि कमरे में बंद होकर हम लोग
  2318. 1:43:14इस पर फिलॉसफिकली बात कर सकते हैं। लेकिन
  2319. 1:43:16हकीकत में क्या हो रहा है वो ग्राउंड लेवल
  2320. 1:43:19पे क्या हो रहा है? जो बहुत गलत हो रहा है
  2321. 1:43:22और वो सफर कर रही हैं। आई एग्री? बहुत गलत
  2322. 1:43:24हो रहा है। और जो गलत हो रहा है उसको हमें
  2323. 1:43:26रोकना है। और क्यों रोकना है? वो गलत
  2324. 1:43:28क्यों है? हमारे पास इसका ऑब्जेक्टिव
  2325. 1:43:30फाउंडेशन है। इनके पास उसका ऑब्जेक्टिव
  2326. 1:43:33फाउंडेशन नहीं है। मैं ये कहना चाह रहा
  2327. 1:43:35हूं कि जहां पे भी जुल्म हो रहा है, जहां
  2328. 1:43:37पे भी औरत पे जुल्म हो रहा है या उसकी
  2329. 1:43:39इज्जत लूटी जा रही है या उसे तकलीफ
  2330. 1:43:41पहुंचाई जा रही है। और सिर्फ औरत नहीं
  2331. 1:43:42किसी इंसान के ऊपर भी जुल्म हो रहा है तो
  2332. 1:43:45उसके खिलाफ खड़ा होना ये मोरालिटी हमारे
  2333. 1:43:48पास गॉड के पास से आई है। वरना जावेद साहब
  2334. 1:43:50तो कह रहे हैं कि जो है मेजॉरिटी डिसाइड
  2335. 1:43:52करेगी तो मेजॉरिटी तो कभी भी बदल सकती है।
  2336. 1:43:57क्या आप ये थोड़ी सी आपको गलतफहमी है। मैं
  2337. 1:44:01अगर मेरे जुमले से ये मजला निकला या मैंने
  2338. 1:44:04कहा तो ये जुमला मैं वापस लेता हूं। ये
  2339. 1:44:06मेरा मतलब ही नहीं था कि मेजरिटी डिसाइड
  2340. 1:44:08करेगा। मेजरिटी डिसाइड करे तो दुनिया में
  2341. 1:44:11बड़ी
  2342. 1:44:12वैसे आपने कहा था ये जुमला।
  2343. 1:44:13मैं मान रहा हूं।
  2344. 1:44:14बाद में रीकैप कर लेंगे।
  2345. 1:44:15अरे एक सेकंड मैं अपनी एक्सप्लेनेशन देता
  2346. 1:44:18हूं।
  2347. 1:44:18मुनासिब बात ये है कि हम सब के सब दिल में
  2348. 1:44:21जानते हैं कि क्या अच्छा है, क्या बुरा
  2349. 1:44:23है। हमें पता है अच्छी तरह से। जो लोग
  2350. 1:44:26बुरे काम करते हैं उन्हें भी मालूम है
  2351. 1:44:27अच्छा अच्छा
  2352. 1:44:29यही तो सवाल था हजरत कि फिर ये मोरालिटी
  2353. 1:44:31आई कहां से
  2354. 1:44:32क्रॉस एग्जामिनेशन हां जी हां जी
  2355. 1:44:33मोरालिटी साथ रहने की डिजायर से आई
  2356. 1:44:36यानी साथ रहकर जो कुछ कह दे जो कुछ कर दे
  2357. 1:44:38वो हो जाएगा
  2358. 1:44:39नहीं
  2359. 1:44:40तो
  2360. 1:44:40आप कायदे से रहित सकते हैं जब तक लोगों
  2361. 1:44:43में मोरालिटी हो वरना केस हो जाएगा
  2362. 1:44:45ये आपको कैसे पता
  2363. 1:44:47जी हमने देखा ना जहां मोरालिटी का कॉस हो
  2364. 1:44:49गया हम देखते हैं
  2365. 1:44:51कहां पे देखते हैं
  2366. 1:44:51भाई दुनिया में आप क्यों
  2367. 1:44:55अगर गलत हो रहा है इसको आप सर आपोलॉजी की
  2368. 1:45:00बात कर रहे हैं मैं ऑटोलॉजी की बात कर रहा
  2369. 1:45:02हूं मैं इस दोनों लोगों को चैट करूंगा
  2370. 1:45:05वहां पे क्रॉस एग्जामिनेशन कर लीजिएगा अभी
  2371. 1:45:07ऑडियंस का हक मार रहे हैं आप लोग भाई जस्ट
  2372. 1:45:09लोग हैं आप लोग और भाई ये
  2373. 1:45:12हां उधर उधर आएंगे उधर जी सर आएंगे आएंगे
  2374. 1:45:15सर सर मेरा नाम लख उर रहमान है और मैं
  2375. 1:45:17अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट
  2376. 1:45:19हूं और जहां तक मुझे पता है कि सर यू आर
  2377. 1:45:21आल्सो प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम
  2378. 1:45:23मैं भी उसी चमन का बुलबुल हूं सर तो बड़ी
  2379. 1:45:26खुशी हुई मुझे जान के कि मैं आपसे
  2380. 1:45:28मिलूंगा। सवाल
  2381. 1:45:28सर मेरा सवाल ये है कि सर सैयद अली रहमा
  2382. 1:45:31का नजरिया ये था के खुदा के वजूद को अकल
  2383. 1:45:35के दायरे में रह के तलाश करना ना के पूरी
  2384. 1:45:39तौर से उसका इंकार कर देना। सर हाउ विल यू
  2385. 1:45:42डिफाइन इट? नहीं नहीं तो यह तो आप इन्हें
  2386. 1:45:45बताइए सवाल है कि खुदा का वजूद साबित कर
  2387. 1:45:48रहे हैं। तो सर आपने इनकार रखा है। इस वजह
  2388. 1:45:51से मेरा क्वेश्चन
  2389. 1:45:52उन्होंने यही सर एक सेकंड सर सैयद ने यही
  2390. 1:45:55कहा है ना कि अकल से आप खुदा के वजूद को
  2391. 1:45:58साबित नहीं कर सकते। यही कहा ना भाई
  2392. 1:46:01वो उन्होंने कहा है कर सकते हैं और वो कर
  2393. 1:46:03दिया गया आज।
  2394. 1:46:04वो फ़
  2395. 1:46:06तलाश करना या साबित करना अक्ल से ताल्लुक
  2396. 1:46:09अक्ल से नहीं। अरे सवाल तो सुन लीजिए। जी
  2397. 1:46:12अक्ल से नहीं हो सकता। यही कहा ना आपने?
  2398. 1:46:15अक्ल से हो सकता है। अरे वो यही कह रहे
  2399. 1:46:18हैं भाई आप बता रहे हो सकता है। वो तो कुछ
  2400. 1:46:20और
  2401. 1:46:22आप अगर सर देखो नौजवान
  2402. 1:46:24फ़ इतनी कमाल की यूनिवर्सिटी है
  2403. 1:46:27भाई दे दो जरा एक मिनट। अरे भाई मेरी बात
  2404. 1:46:30सुनो। माइक पे बोलो ताकि जो लाखों लोग देख
  2405. 1:46:33रहे हैं।
  2406. 1:46:33माइक दे दो ना।
  2407. 1:46:34अरे देंगे ना माइक तुम ठहरो तो। हां सर
  2408. 1:46:38मेरा सवाल यह था कि सर सैयद अल रहमा का एक
  2409. 1:46:41नजरिया था अपना के खुदा का जो वजूद है
  2410. 1:46:45उसको अकल के दायरे में रह के तलाश करना है
  2411. 1:46:48ना कि पूरे तौर से इंकार कर देना है ये ये
  2412. 1:46:51उनका कांसेप्ट था लेकिन मेरा सवाल ये है
  2413. 1:46:53कि आप इसको कैसे डिफाइन करते हैं
  2414. 1:46:55एक्सप्लेन कैसे करेंगे मैं आपसे जानना
  2415. 1:46:57चाहता हूंकि यू आर द प्रोडक्ट ऑफ अलीगढ़
  2416. 1:46:59मुस्लिम यूनिवर्सिटी
  2417. 1:47:00मुझे अली मुझे अकल के दायरे में मैंने
  2418. 1:47:04बहुत तलाश की मुझे मिला नहीं
  2419. 1:47:06[हंसी]
  2420. 1:47:08हां ये इधर उधर वो चश्मा लगाए हां उनको दे
  2421. 1:47:11दीजिए
  2422. 1:47:14जी जी फटाफट पूछिए बस पांच मिनट है पांच
  2423. 1:47:16मिनट में खत्म हो रहा है हां
  2424. 1:47:17अस्सलाम वालेकुम मुफ्ती साहब एंड मेरा
  2425. 1:47:18सवाल मेरा सवाल जावेद अख्तर साहब से
  2426. 1:47:21क्या नाम है आपका
  2427. 1:47:22अरे भैया मुझे पूछ रहे हो यार
  2428. 1:47:24फैज फैज फैज
  2429. 1:47:25फैज पूछिए फैज साहब
  2430. 1:47:26तो मेरा सवाल ये है कि अभी जो एथियस्ट है
  2431. 1:47:30वो प्रॉब्लम ऑफ इवल आर्गुमेंट यूज कर रहे
  2432. 1:47:32हैं अगेंस्ट मुस्लिम्स राइट कि इस दुनिया
  2433. 1:47:34में इतना सारा ईवल है और अगेंस्ट मुस्लिम
  2434. 1:47:36तो यहां
  2435. 1:47:37अगेंस्ट थिएस्ट अगेंस्ट थिएस्ट हां थोड़ा
  2436. 1:47:39सा करेक्ट कर लीजिए भाई पूरी मशक्कत ही
  2437. 1:47:41इसी बात की थी कि किसी एक मजहब पे बात ना
  2438. 1:47:43टिके।
  2439. 1:47:44जी तो बेसिकली ये आर्गुमेंट ऐसा है कि इस
  2440. 1:47:47दुनिया में इतना ज्यादा ईवल एक्सिस्ट करता
  2441. 1:47:48है और अगर एक ऑल गुड गॉड है तो वो रोकता
  2442. 1:47:50क्यों नहीं है? लेकिन इस सवाल में एक हिडन
  2443. 1:47:52असंप्शन ये है कि इस दुनिया में ईवल
  2444. 1:47:54एक्सिस्ट करता है। अब एथियस कि कैसे
  2445. 1:47:56ऑनटोलॉजिकली प्रूव कर सकते हैं कि इस
  2446. 1:47:58दुनिया में ईवल एक्सिस्ट करता है। मैं
  2447. 1:47:59आपको बताता हूं थोड़ा सा समझा।
  2448. 1:48:00नहीं नहीं सर [हंसी]
  2449. 1:48:02इनको सुनिए। नहीं नहीं प्लीज डोंट डू।
  2450. 1:48:04नहीं।
  2451. 1:48:04आई वांट टू एक्सप्लेन ऑनटोलॉजी।
  2452. 1:48:06नहीं नहीं हम समझ गए, सर। इनको आप जवाब
  2453. 1:48:07देने दीजिए।
  2454. 1:48:08अच्छा सवाल पूछ रहा हूं मैं।
  2455. 1:48:09अभी तक क्या था?
  2456. 1:48:10वो मैं थोड़ा सा ऐड ऑन कर लेता हूं।
  2457. 1:48:12तुम गुरु तो हम जब इसका राउंड 13 करेंगे
  2458. 1:48:15ना, तब तुमको स्टेज पे बिठाएंगे।
  2459. 1:48:17जी, जी। तो, हां, जल्दी से। तो, तो देखिए,
  2460. 1:48:20एथिज, एथिज्म के हिसाब से सब कुछ रैंडमली
  2461. 1:48:22बन गया है। सब कुछ एटम्स और मॉलिक्यूल्स
  2462. 1:48:24है। एक पत्थर में और मुझ में सिर्फ इतना
  2463. 1:48:26फर्क है कि हम लोग एटम्स और मॉलिक्यूल्स
  2464. 1:48:28का अलग-अलग रिअरेंजमेंट है। अब एक पत्थर
  2465. 1:48:29को कोई इंसान तलवार से दो टुकड़ों में
  2466. 1:48:31काटते हैं या मुझे? अकॉर्डिंग टू एथिज्म
  2467. 1:48:33इट इज़ सेम। देयर इज नो इवल एंड गुड
  2468. 1:48:34अकॉर्डिंग टू एथिज्म।
  2469. 1:48:37जी। अच्छा फैज साहब का सवाल ये है कि
  2470. 1:48:41कोशिश भी करते तो इससे गलत सवाल नहीं कर
  2471. 1:48:43पाते।
  2472. 1:48:45एक लाइफ फॉर्म है और लाइफ फॉर्म में
  2473. 1:48:48फीलिंग्स है। मतलब लाइफ फॉर्म सुनता है,
  2474. 1:48:51देखता है, टेस्ट कर सकता है, फील कर सकता
  2475. 1:48:55है। तो उसकी जो ये जो क्वालिटी एक बबल में
  2476. 1:48:59आ गई है कि वो जानवर में भी है, इंसान में
  2477. 1:49:01भी है। तो जाहिर है कि उसे कोई तकलीफ
  2478. 1:49:04पहुंचेगी तोकि उसके पास वो सेंसिटिविटी है
  2479. 1:49:06तो करेगा। पत्थर में वह सेंसिटिविटी नहीं
  2480. 1:49:10है। तो यह क्या सवाल हुआ कि अगर पत्थर को
  2481. 1:49:12काटा तो पत्थर को तकलीफ नहीं होती तो आपको
  2482. 1:49:14काटे तो आपको क्यों तकलीफ होगी? बैठ जाइए।
  2483. 1:49:17जी हां अगला सवाल
  2484. 1:49:19हां पूछिए पूछिए पूछिए।
  2485. 1:49:20जी जावेद अख्तर साहब।
  2486. 1:49:22अरे भैया सब आप लोग मुफ्ती साहब को छोड़
  2487. 1:49:25रहे हैं। वो मेरे ही पीछे पड़े हैं। क्या?
  2488. 1:49:28चलो बोलो भाई।
  2489. 1:49:30यू यू आस्क हाउ गॉड कैन एक्सिस्ट व्हेन
  2490. 1:49:32चिल्ड्रन डाई एंड गाज़ा। हां यू आस्क्ड
  2491. 1:49:35हाउ गॉड कैन एकिस्ट व्हेन चिल्ड्रन डाई इन
  2492. 1:49:38काज़ा एंड यू आल्सो मेंशन द राइज़ ऑफ़ एथिज्म
  2493. 1:49:41इन यूरोप बट द सेम इवेंट्स आल्सो आर
  2494. 1:49:44लीडिंग मेनी एथिस्ट एंड नॉट बिलीवर्स टू
  2495. 1:49:46टर्न टुवर्ड्स फेथ हाउ डू यू इंटरप्रेट
  2496. 1:49:49दिस कंट्राडिक्शन वेल सफरिंग पुशेस सम अवे
  2497. 1:49:52फ्रॉम गॉड येट ब्रिंग्स अदर्स क्लोजर टू
  2498. 1:49:55बिलीफ आपको एक बात बताऊं दुनिया परफेक्ट
  2499. 1:49:58तो कहीं भी नहीं है हर जगह कुछ खामियां है
  2500. 1:50:01बेटा एक मिनट मैं आप ही को कहेंगे देखो वो
  2501. 1:50:05तो कुछ खामियां कमजोरियां खराबियां सब जगह
  2502. 1:50:09है लेकिन अगर देखोगे ईमानदारी से कि
  2503. 1:50:12दुनिया सबसे ज्यादा मुजब कहां है एक आम
  2504. 1:50:15शहरी को कहां हुकूक हासिल है वो बोल सकता
  2505. 1:50:20है अपनी मर्जी से काम कर सकता है अपनी
  2506. 1:50:22मर्जी से राय दे सकता है हुकूमत के खिलाफ
  2507. 1:50:24बोल सकता है बरसरे इख्तेदार लोगों के बारे
  2508. 1:50:28में बोल सकता है सरमायादारों के खिलाफ बोल
  2509. 1:50:31सकता है तो आपको ये स्कडी नेवियन कंट्रीज
  2510. 1:50:33में मिलेगा। वेस्टर्न यूरोप में मिलेगा।
  2511. 1:50:35मैं नहीं कह रहा वो परफेक्ट है। बिल्कुल
  2512. 1:50:37नहीं। वहां बहुत खराबियां भी है। परफेक्ट
  2513. 1:50:39तो कोई नहीं। लेकिन जिनजिन मुल्कों में
  2514. 1:50:41लैटिन अमेरिका देखो, गल्फ देखो। वहां पर
  2515. 1:50:46आपको ये जरूर है कि रेप नहीं होते होंगे।
  2516. 1:50:48रेप की जरूरत क्या है? भ उसको तो खरीद लो।
  2517. 1:50:51घर में रखो। तो सड़क पे रेप करने की क्या
  2518. 1:50:53जरूरत है? मगर सुनिए सुनिए सुनिए। मगर
  2519. 1:50:57हकीकत ये है कि वहां शख्स आजादी राय देने
  2520. 1:51:01की बोलने की नहीं है।
  2521. 1:51:04जी ये एक आखरी सवाल मुफ्ती साहब से हां
  2522. 1:51:06मैम इनको माइक दीजिए।
  2523. 1:51:09शुक्रिया। मेरा नाम मनीषा है। मैं हरियाणा
  2524. 1:51:12से आई हूं। मैं मुफ्ती साहब से एक बात
  2525. 1:51:14पूछना चाहती हूं। आप बार-बार जावेद साहब
  2526. 1:51:16को कंट्राडिक्ट तो कर रहे हैं कि आपने ये
  2527. 1:51:18कहा ये कहा। लेकिन आप भी एजम्पशनंस के
  2528. 1:51:20बेसिस पे बात कर रहे हैं। आपने खुदा के
  2529. 1:51:23होने का कौन सा प्रूफ पेश किया है? खुदा
  2530. 1:51:26की एक्सिस्टेंस का। अब मां इस सवाल को अलग
  2531. 1:51:28रहने दीजिए कौन एथस्ट है कौन नहीं है। और
  2532. 1:51:30दूसरी बात जो आपने एक छोटी सी कही थी के
  2533. 1:51:33ये फ्री विल का इस्तेमाल करता है इंसान
  2534. 1:51:36अपनी। लेकिन उस फ्री विल का इस्तेमाल में
  2535. 1:51:38मतलब खुदा ने ये दे दी सबको ये इजाजत के
  2536. 1:51:42वो कितना घिनौनापन और कितने ज्यादा खराब
  2537. 1:51:45से खराब तरीके इस्तेमाल कर सकते हैं। लोग
  2538. 1:51:46जब आप
  2539. 1:51:47आप फ्री विल को मानती है ना या कहती है कि
  2540. 1:51:50फ्री विल नहीं है।
  2541. 1:51:51है ना? मानती है ना? तो अब आपके पास इसका
  2542. 1:51:55कोई एक्सप्लेनेशन नहीं है कि अगर एक इंसान
  2543. 1:51:58उस फ्री विल का इस्तेमाल करके गलत काम कर
  2544. 1:52:01रहा है और बच के अच्छी जिंदगी गुजार के
  2545. 1:52:03निकल जा रहा है उसका कोई रिकंपेंस नहीं
  2546. 1:52:05है। हमारे वर्ल्ड व्यू में जो इंसान गलत
  2547. 1:52:10काम कर रहा है उसको भी रिकंपैेंस यानी
  2548. 1:52:12उसका बुरा बदला मिलना है और जो सही काम कर
  2549. 1:52:15रहा है उसको सही बदला मिलना है। लिहाजा जो
  2550. 1:52:18फ्री विल है वो इस तरीके से है कि एक
  2551. 1:52:20लिमिटेड टाइम तक खुदा ने मोहलत दी है। ऐसा
  2552. 1:52:23नहीं कि छूट दे दी जो करना है करते रहो
  2553. 1:52:25हमेशा। वक्त आएगा जब एग्जाम का टाइम खत्म
  2554. 1:52:28होगा तब रिजल्ट आएगा। दौरान एग्जाम
  2555. 1:52:30जबरदस्ती आपको नहीं बताया जाएगा।
  2556. 1:52:32अरे भाई एक सेकंड सवाल मुफ़्ती साहब से
  2557. 1:52:34मेरा मैम मुफ्ती साहब सेम
  2558. 1:52:40एक सेकंड रुक जाइए। आपसे आपसे
  2559. 1:52:44मैं मुफ्ती साहब एक ही सवाल करता हूं
  2560. 1:52:47के अगर जो हो रहा है फ्री विल से हो रहा
  2561. 1:52:50है और एक दिन बरोज़ कयामत इंसाफ होगा महशर
  2562. 1:52:55में वगैरह वगैरह
  2563. 1:52:57तो दुआ क्यों मांगते हैं लोग
  2564. 1:52:59दुआ मांगते हैं इसके मतलब है अभी भी उसने
  2565. 1:53:02ये डिपार्टमेंट रखा है कि मैं रोजमर्रा की
  2566. 1:53:05जिंदगी में इंटरव्यू ही कैन
  2567. 1:53:08तो तुम कैन हो तुम मुझे नौकरी दिला देते
  2568. 1:53:11हो। मेरे बेटे को ग्रीन कार्ड दिला देते
  2569. 1:53:13हो और 45,000 बच्चे मरते हैं उन्हें रोकते
  2570. 1:53:16नहीं हो।
  2571. 1:53:16नहीं। तो क्या आप ये कह रहे हैं कि इस
  2572. 1:53:18दुनिया में जालिमों को कभी पकड़ ही नहीं
  2573. 1:53:20होती है।
  2574. 1:53:20अरे जो भी पकड़ होगी वो बच्चे रोते हैं।
  2575. 1:53:23बिल्कुल देखिए मैंने अपने ओपनिंग
  2576. 1:53:25स्टेटमेंट में यही कहा था कि जनाब जावेद
  2577. 1:53:27साहब सिर्फ इमोशनल आर्गुमेंट है। दिस इज़
  2578. 1:53:30एन इमोशनल आर्गुमेंट।
  2579. 1:53:31ये छोटे इसके पीछे
  2580. 1:53:34इसके पीछे का रीज़न मैंने बताया क्या है?
  2581. 1:53:36इसके पीछे का विज़डम क्या है? मैंने बताया।
  2582. 1:53:38मंच से आप लोगों को सज्जनों इसलिए कह रहा
  2583. 1:53:41हूं ताकि थोड़ा सा आपके कॉन्शेंस पे जोर
  2584. 1:53:43रहे कि आपको आर्डर बचा के रखना है। वक्त
  2585. 1:53:46तय हुआ था। ये वक्त पूरा हुआ। आपने इतने
  2586. 1:53:49धैर्य पूर्वक सुना। मैं आप सबका बहुत-बहुत
  2587. 1:53:52शुक्रगुजार हूं। यदि इन दोनों विद्वानों
  2588. 1:53:55की इच्छा होगी। तो कभी हम इस बातचीत का
  2589. 1:53:58राउंड टू राउंड थ्री यही तो देखिए खूबी है
  2590. 1:54:00इंसान की कि बहस मुबासे में वो पड़ा रहता
  2591. 1:54:02है। आप लोगों ने बड़े धैर्य का परिचय
  2592. 1:54:04दिया। बहुत-बहुत शुक्रिया। इसी के साथ ये
  2593. 1:54:06बातचीत
  2594. 1:54:06आप लोग को मैं एक बात बता दूं। ये सारी
  2595. 1:54:09बहस हो गई। अब मुफ्ती साहब और बड़े मुफ्ती
  2596. 1:54:12साहब इन सब के साथ में खाना खाने वाला
  2597. 1:54:14हूं।
  2598. 1:54:18[संगीत]

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This page contains the full transcript of Does God Exist? Javed Akhtar और Mufti Shamail Nadwi के बीच बहस में क्या हुआ? Saurabh Dwivedi by The Lallantop, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 19,530 words across 2,598 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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