DOCTOR DARK OBSESSION EPISODE 1 TO 100 — Transcript
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- 0:00पूरी तरह काल्पनिक है। यह सिर्फ दर्शकों
- 0:02के मनोरंजन के लिए बनाई गई है। इसमें
- 0:05दर्शाए गए सभी पात्र, नाम, उत्पाद और
- 0:08घटनाएं पूरी तरह काल्पनिक है। यह कहानी
- 0:11किसी भी तरह से किसी भी व्यक्ति के
- 0:13भावनाओं, प्रथाओं, परंपराओं और विश्वासों
- 0:15के अपमान नहीं करती है। और कहानी में बताए
- 0:18गए सभी चीजों का मात्र कहानी के लेखक
- 0:20द्वारा बनाई गई लेखक की अपनी एक कल्पना
- 0:23है। बैक टू स्टोरी। चियर्स। एक साथ कई
- 0:26आवाजें गूंजी और साथ ही में चाय के प्याली
- 0:28की छिनकार भी। उसी के साथ-साथ उस ग्रुप की
- 0:31हंसने की आवाजें जिसने यह अजीबोगरीब चियस
- 0:34कर अपने खुशी को सेलिब्रेट किया था। आसपास
- 0:37मौजूद लोगों में से किसी ने मुंह बनाया तो
- 0:39किसी ने बिगड़ी हुई नई पीढ़ी कहकर नाम
- 0:42रखा। तो कुछ लोग अपने सामने खड़े उन पांच
- 0:44बच्चों की खुशी देख खुश भी हुआ। अपने
- 0:47आसपास के लोगों को इग्नोर कर वो पांचों
- 0:49अपनी खुशी जाहिर करने में लगे थे। आफ्टर
- 0:52ऑल इतना बड़ा दिन जो था उन सबके लिए आज
- 0:55उनका ट्वेथ का रिजल्ट जो लगा था उसी ग्रुप
- 0:58में की एक लड़की ने अपनी पास वाली लड़की
- 1:00का हाथ पकड़ा और खुशी से बोली सी यू सी यू
- 1:02सी यू आई एम सो हैप्पी फॉर यू फाइनली
- 1:06तुमने कर दिखाया 12थ में 96%ेज कॉलेज में
- 1:09फर्स्ट और स्टेट में सेकंड रैंक तू तो छा
- 1:12गई यार आई एम सो प्राउड ऑफ यू वो लड़की
- 1:15साक्षी थी जिसने अपने सामने खड़ी सिया को
- 1:17कसकर गले लगाया ओए हम भी है यार निखिल ने
- 1:21कहा और वह भी उनके गले लग गया। पुनीत और
- 1:24नेहा कहा पीछे रहने वाले थे। वह दोनों भी
- 1:27उनके गले लग गए और एक ग्रुप हग करने के
- 1:29बाद वह पांचों खिलखिलाकर हंस दिए। सिया
- 1:32साक्षी, निखिल, नेहा और पुनीत पांचों
- 1:34स्कूल फ्रेंड्स लगभग फर्स्ट स्टैंडर्ड से
- 1:36ही वह साथ थे और आज ही उनका 12थ का रिजल्ट
- 1:38लगा था। हालांकि उनमें से कोई भी 90%ेज के
- 1:40नीचे नहीं था। लेकिन सियासिया अग्निहोत्री
- 1:42पूरे महाराष्ट्र में सेकंड आई थी और वह सब
- 1:44उसी की खुशी सेलिब्रेट कर रहे थे। क्या
- 1:47यार तुम सब भी रिएक्ट तो ऐसे कर रहे हो
- 1:50जैसे सिर्फ मैं ही पास हुई हूं और तुम सब
- 1:53फेल यह जीत हम सब की है और हम सब काफी
- 1:56अच्छे नंबर से पास हुए हैं उसी की ये ती
- 1:58पार्टी है समझे तो फिर फिर एक बार चियर्स
- 2:01फॉर ऑल सिया ने कहा और एक बार उन सबके चाय
- 2:04के ग्लास आपस में टकरा गए और साथ में फिर
- 2:06एक बार उनके हंसने की आवाज वहां गूंजी
- 2:09वैसे व्हाट नेक्स्ट सी यू तेरी ओब्रोड
- 2:12स्कॉलरशिप तो कंफर्म है तो चल बता क्या
- 2:14मैं भी डैड से कहकर अपना एडमिशन तेरे साथ
- 2:16लंदन यूनिवर्सिटी में करवा दूं। पुनीत ने
- 2:19मुस्कुराते हुए कहा और उसकी बात सुन सिया
- 2:21एक पल सोच में गिर गई। तू करवाते ही रह
- 2:24जा। मैंने तो अपनी एडमिशन करवा भी ली और
- 2:27ठीक 15 दिन बाद मेरी फ्लाइट भी है लंदन के
- 2:29लिए। नेहा ने इतराते हुए कहा ओय तुम तीनों
- 2:33अगर जा रहे हो तो मैं भी जाऊंगी। मैं भी
- 2:35डैड से बात करती हूं। साक्षी भी कहा पीछे
- 2:38रहने वाली थी। लेकिन उन तीनों की बात सुन
- 2:40निखिल और सिया खामोश ही रहे। निखिल खामोश
- 2:43था क्योंकि उसकी उसके घर की इकोनॉमिकल
- 2:45कंडीशन इतनी कुछ खास नहीं थी और सिया
- 2:47खामोश थी क्योंकि उसे पता था जो घरवाले
- 2:49उसे मार्केट तक अकेले नहीं भेजते थे वह
- 2:51लंदन भेजना तो इंपॉसिबल ही था। सिया यह
- 2:54बात बताकर किसी को हर्ट नहीं करना चाहती
- 2:57थी। इस वजह से वह खामोश ही रही। पुनीत ने
- 3:00निखिल की तरफ देखा और बोला देख भाई मेरा
- 3:03और नेहा का एडमिशन लगभग हो ही गया। समझो
- 3:06साक्षी के डैड भी उसका एडमिशन करवा देंगे
- 3:08और हमारी टॉपअप सिया का जाना तो फिक्स ही
- 3:10है। अब सिर्फ रहा तू और मैंने तेरे एडमिशन
- 3:13के बारे में डैड से बात कर ली है तो तू मन
- 3:15नहीं करेगा। पुनीत की बात सुन निखिल हल्के
- 3:18से मुस्कुराया और वो मुस्कान उन सबको समझ
- 3:21गई। नेहा उसके कुछ बोलने से पहले ही बोली
- 3:24निखिल यार प्लीज मना मत कर। यार हम सब
- 3:27बचपन से साथ हैं और हम हमारा यह ग्रुप
- 3:29बिल्कुल भी टूटने नहीं देंगे। तो तू आ रहा
- 3:32है। यह फिक्स है। नेहा के बाद पुनीत और
- 3:34साक्षी भी निखिल को मनाने लगे और निखिल बस
- 3:37खामोशी से उन्हें देखता रहा। पुनीत उसकी
- 3:40खामोशी को देख बोला अबे अब बोल भी कुछ। और
- 3:43फिर निखिल ने उसे देख एक बार सिया को
- 3:46देखा। वो उससे धीरे से बोला सिया तेरे घर
- 3:49वाले मान जाएंगे क्या? क्या वो तुझे लंदन
- 3:52भेजेंगे? और बस उसका सवाल सुन सबको एहसास
- 3:55हुआ कि सिया के घर वाले कैसे हैं? सिया उन
- 3:58सब की तरफ देखकर मुस्कुराई। मगर वह सब
- 4:00जानते थे कि उसके उस मुस्कान में कितनी
- 4:02उदासी छिपी हुई है। सिया ने फिर गहरी सांस
- 4:05ली और बोली गाइस यह टॉपिक ना हम कल डिस्कस
- 4:08करते हैं। आज ना सिर्फ हम अपनी जिद एंजॉय
- 4:10करते थे। चलो जल्दी-जल्दी चाय खत्म करो।
- 4:13पुनीत हमें पानी पूरी खाने ले जाएगा। सिया
- 4:17ने मुस्कुराते हुए कहा और अगले ही पल वह
- 4:19सब भी नॉर्मल हो गए। अपनी-अपनी चाय खत्म
- 4:22कर वह सब बाहर आ गए और उनके स्कूल के बाहर
- 4:24थोड़ी दूर पड़ के एक ठेले पर गए। फिर क्या
- 4:27उन सब ने जमकर पानी पूरी खाए और अपनीपनी
- 4:29साइकिल लेकर घर के लिए निकल गए। निखिल और
- 4:32सिया के जाते ही पुनीत, नेहा और साक्षी ने
- 4:35एक दूसरे के तरफ देखा। फिर नेहा बोली गाइस
- 4:38जेएम कॉलेज कैसा रह रहेगा हमारी आगे की
- 4:40स्टडी के लिए? उहरण चिन्ह जवाब में साक्षी
- 4:44बोली जेएम ठीक है। मैं भी डैड से बात करके
- 4:47रखती हूं। अगर वह दोनों नहीं आएंगे तो हम
- 4:50भी नहीं जाएंगे। साक्षी की बात पर पुनीत
- 4:52और नेहा ने मुस्कुराकर हां में सर हिलाया
- 4:55और वह सभी अपनेपने घर के लिए बढ़ गया। उन
- 4:57पांचों की फ्रेंडशिप थी ही इतनी स्ट्रांग
- 5:00कि वह एक दूसरे के बिना रह ही नहीं सकते
- 5:02थे। नेहा, पुनीत और साक्षी अच्छे फैमिली
- 5:05से बिलोंग करते थे और उनके पेरेंट्स फ्री
- 5:07माइंडेड भी थे। वही निखिल भी अच्छी फैमिली
- 5:10से ही था। लेकिन उसके डैड के अचानक हुए
- 5:12डेथ की वजह से उनका पूरा बिजनेस लॉस में
- 5:14चला गया और बचा हुआ उसके सो कॉल्ड रिलेटिव
- 5:16ने हड़प लिया। इस वजह से उसकी और उसकी मां
- 5:20की हालत बहुत ही खराब हो गई। अपनी स्टडी
- 5:23के साथ-साथ वह छोटे-मोटे काम कर अपनी मां
- 5:25को हेल्प किया करता था और वही सिया ऐसा
- 5:28नहीं था कि उसकी फैमिली गरीब थी। वह भी
- 5:31काफी अच्छे घर से बिलोंग करती थी। सिटी के
- 5:34टॉप एरिया में और चार फेमस मॉल में उसके
- 5:36परिवार की कई दुकानें थी जो कुछ रैंड पर
- 5:39दी थी तो कुछ उसके पापा, काका और भाई
- 5:41मिलकर संभाल रहे थे। फाइनेंशियली उसके घर
- 5:44की हालत काफी अच्छी थी। लेकिन वह थोड़े
- 5:47पुराने ख्यालात के थे। शहर में अपनी इज्जत
- 5:49बरकरार रखने के लिए ही वह अपने घर की
- 5:51लड़कियों को पने भेजा करते थे। वरना तो
- 5:54उसका मार्केट तक अकेला जाना भी मुश्किल
- 5:56था। और यह सब जानने के बावजूद भी सिया ने
- 5:59इतनी बड़ी हिम्मत की थी। लंदन यूनिवर्सिटी
- 6:02में अपनी हायर स्टडी के लिए अप्लाई किया
- 6:04था। सिया आखिर अपने घर पहुंच ही गई। उसने
- 6:07सरे ख्यालात को अपने आप से दूर रखा और
- 6:09फिलहाल बस यही सोचने लगी। वह अपना रिजल्ट
- 6:12घर वालों को दिखाकर उन्हें खुश कर देंगी।
- 6:14घर की सबसे छोटी बेटी थी वह। इस वजह से
- 6:17उसके बड़े बहनों के मुकाबले उसे कुछ
- 6:19ज्यादा ही लाड प्यार मिलता था। ऊपर से ऊ
- 6:22की खूबसूरती वो इतनी ज्यादा क्यूट और
- 6:24मासूम दिखती थी कि हर कोई उसके तरफ
- 6:26अट्रैक्ट हो ही जाता। और इस बात का फायदा
- 6:29सिया खूब उठाती थी। वैसे वह सिर्फ अपने घर
- 6:32वालों के सामने ही शरीफ और मासूम थी। बाहर
- 6:34अपने दोस्त को साथ वह कैसी थी यह आपको आगे
- 6:36स्टोरी में पता चल ही जाएगा। सिया खुश
- 6:39होते हुए अंदर आए और चाहते हुए सबको
- 6:41पुकारते हुए बोली मां बड़ी मां चाची कहां
- 6:44है आप सब सिया अंदर की ओर दौड़ी वैसे भी
- 6:48दोपहर का समय था इस वजह से उसे लगा कि घर
- 6:50में कोई भी नहीं होगा लेकिन उसकी यह
- 6:52गलतफहमी जल्द ही दूर हो गई अंदर हॉल में
- 6:55आते ही उसे सबकी गुस्से भरी नजरें अपने
- 6:58ऊपर दिखाई दी और घबराकर सिया ने अपनी थूक
- 7:00निगल ली। वह जल्दी से अपने मां के पास गई
- 7:03और उनके पीछे छिप गई। उसे दूसरों के
- 7:06गुस्से से काफी डर लगता था। वह किसी को भी
- 7:08गुस्से से लाल हुआ देखती तो ना जाने क्यों
- 7:10घबरा जाती थी। इस वजह से वह भी घबरा गई।
- 7:14जब उसने अपने सभी बड़ों को गुस्से में
- 7:16देखा तब सिया इधर आओ। उसके बड़े पापा गरजे
- 7:19और बस सिया की हालत भीगी बिल्ली जैसी हो
- 7:21गई। वो डर से कांपने लग गई। उसकी इस
- 7:24थरथराहट का मतलब उसके घर वालों ने गलत ही
- 7:27लिया और बिना कुछ सोचे समझे उसके अपने
- 7:29पापा ने उसे जोर से एक थप्पड़ मार दिया।
- 7:32यू ऑल आर गुड फॉर नथिंग। अपने आप को
- 7:33रिस्पांसिबल डॉक्टर कहते हैं। और यह ऐसी
- 7:36हरकत वो गुस्से से चीखा और उसका गुस्सा
- 7:38देख वहां मौजूद सभी की सिटी पिट्टी गुल हो
- 7:40गई। उसके गुस्से से हॉस्पिटल में के सभी
- 7:43काफी डरते थे सिवाय उन तीनों के और हर बार
- 7:45की तरह सभी ने उम्मीद से उन तीनों के तरफ
- 7:47ही देखा। उनके चल रहे इशारे उसे समझ आ गए
- 7:51और वह जोर से चीखते हुए गरजा आउट और बस
- 7:54उसी पल सभी के सभी व से रफू चक्कर हो गए।
- 7:56ऑफकोर्स उन तीनों को छोड़कर। राघव अब शांत
- 7:59भी हो जा। राज ने कहा और उसने राघव ने बस
- 8:02एक लुक उसे दिया। ओए शर्म कर अपने बड़े
- 8:05भाई को घूर कर देखते हुए तुम्हें कुछ नहीं
- 8:07लगता। अक्षय ने भी बदले में उसे घूर कर
- 8:09देखा। उसकी बात सुन पास ही में खड़ा
- 8:11कृष्णा बोला उसे नहीं तुम दोनों को कुछ
- 8:14लगना चाहिए। हर बार उन्हें इरिस्पांसिबल
- 8:16डॉक्टर्स और नर्सेज की गलतियां छिपाने के
- 8:18लिए हर बार क्यों तुम दोनों उन्हें अपने
- 8:20पीठ पीछे लेते हो। कृष्णा की बात सुन उन
- 8:23दोनों ने ना में सर हिलाया और सामने खड़े
- 8:25अपने दोनों छोटे भाइयों को घूर कर देखने
- 8:27लगे।
- 8:28यस वो तीनों राघव के बड़े भाई थे। राज
- 8:31उनमें सबसे बड़ा और राघव का सगा भाई था जो
- 8:33उससे 2 साल से बड़ा था। वही अक्षय और
- 8:35कृष्णा दोनों ट्विंस थे। और राघव के कजिन
- 8:38ब्रदर जो उससे सिर्फ एक साल बड़े थे और अब
- 8:41वह उनके हॉस्पिटल में थे जो उन्होंने खुद
- 8:43के मेहनत से बनाया था। और बस एक साल के
- 8:45अंदर ही उस हॉस्पिटल को सिटी के टॉप
- 8:47हॉस्पिटल्स में शामिल किया था। पेशे से वह
- 8:50चारों डॉक्टर्स थे। राघव एक न्यूरोलॉजिस्ट
- 8:52था। वही राजगायनकोलॉजिस्ट कृष्णा एक
- 8:54चाइल्ड स्पेशलिस्ट था और अक्षय
- 8:56ऑर्थोपेडिक्स वैसे तो वह सभी मिडिल क्लास
- 8:58फैमिली से ही बिलोंग करते थे और आज अपनी
- 9:00मेहनत से वह इस मुकाम पर पहुंचे थे। राज
- 9:03और अक्षय काफी समझदार थे। इस वजह से पूरा
- 9:06स्टाफ उन दोनों के साथ ही कंफर्टेबल फील
- 9:08करता। वहीं कृष्णा बहुत नटखट। लेकिन सिर्फ
- 9:11अपने घर वालों के और अपने पेशेंट के जो
- 9:13छोटे-छोटे बच्चे थे उनके सामने उसी
- 9:15मुकाबले राघव बचपन से ही थोड़ा ज्यादा
- 9:17गुस्से वाला था। बेवजह तो नहीं लेकिन किसी
- 9:20के गलती करने पर उसे बहुत ज्यादा गुस्सा
- 9:22आता। वही हाल कृष्णा का भी था। गलती करने
- 9:24पर वह भी किसी को नहीं बखशता था। अक्षय इस
- 9:28सीरियस माहौल को नॉर्मल करने के लिए बोला,
- 9:30"अच्छा छोड़ो सारी बातें। कितने दिन हो गए
- 9:32हम बड़ी मां? बड़े पापा और मां के साथ
- 9:34बाहर डिनर पर नहीं गए। चलो आज चलते हैं।
- 9:37मां भी कह रही थी कि फिलहाल हम उन्हें
- 9:39वक्त नहीं देते। तो चलो आज उनकी यह
- 9:41कंप्लेंट दूर करते हैं। अक्षय की बात सुन।
- 9:43उन सभी ने हां में सर हिलाया। राघव कृष्णा
- 9:46के तरफ देखकर बोला कृष डिनर की अरेंजमेंट
- 9:49करो और राज भाई आप जाकर उन तीनों को लेकर
- 9:52आ जाओ हम सभी आपको वही ज्वाइन करेंगे राघव
- 9:55की बात भले ही नॉर्मल हो लेकिन उसमें छिपा
- 9:57हिडन मैसेज वह सभी समझ गए थे उसके कहने का
- 10:00साफ-साफ मतलब था कि सिर्फ राज ही आज जल्दी
- 10:02घर जाएगा और बचे वह तीनों एक साथ
- 10:04अपनी-अपनी ड्यूटी पूरी करके जाएंगे उन
- 10:07तीनों ने उदासी से एक दूसरे के तरफ देखा
- 10:09और फिर अपने-अपने ड्यूटी पर चले गए। सो
- 10:12ऐसा था हमारा राघव शांत समझदार लेकिन वक्त
- 10:15आने पर उतना ही गुस्सैल भी अपने काम के
- 10:17लिए काफी डेडिकेटेड इसी वजह से तो उसे
- 10:20थोड़ी सी भी गलती बर्दाश्त नहीं होती थी
- 10:22गोरे हैंडसम चेहरे को और हैंडसम बनती वो
- 10:24उसकी हल्की बियर्ड और हल्के पिंकिश किसे
- 10:26बलोड परफेक्ट वी शेप फिगर एंड एब्स 6 फीट
- 10:29हाइट और चेहरे पर ऐसी चमकती हर कोई बस उसे
- 10:31देखता ही रह जाता अंडरस्को सिया खुश होते
- 10:35हुए अंदर आए और चहकते हुए सबको पुकारते
- 10:37हुए बोली मां बड़ी मां चाची कहां है आप सब
- 10:40सिया सिया अंदर की ओर दौड़ी। वैसे भी
- 10:42दोपहर का समय था। इस वजह से उसे लगा कि घर
- 10:45में कोई भी नहीं होगा। लेकिन उसकी यह
- 10:47गलतफहमी जल्द ही दूर हो गई। अंदर हॉल में
- 10:50आते ही उसे सबकी गुस्से भरी नजरें अपने
- 10:52ऊपर दिखाई दी और घबराकर सिया ने अपनी थूक
- 10:54निगल ली। वह जल्दी से अपने मां के पास गई
- 10:57और उनके पीछे छिप गई। उसे दूसरों के
- 10:59गुस्से से काफी डर लगता था। वह किसी को भी
- 11:01गुस्से से लाल हुआ देखती तो ना जाने क्यों
- 11:03घबरा जाती थी। इस वजह से वह अभी घबरा गई।
- 11:06जब उसने अपने सभी बड़ों को गुस्से में
- 11:08देखा तब। सिया इधर आओ। उसके बड़े पापा
- 11:11गरजे और बस सिया की हालत भीगी बिल्ली जैसी
- 11:14हो गई। वह डर से कांपने लग गई। उसकी इस
- 11:16थरथराहट का मतलब उसके घर वालों ने गलत ही
- 11:18लिया और बिना कुछ सोचे समझे उसके अपने
- 11:20पापा ने उसे जोर से एक थप्पड़ मार दिया।
- 11:23वो थप्पड़ इतनी जोर से उसे लगा था कि सिया
- 11:25नीचे जमीन पर ही गिर गई और रोने लग गई।
- 11:28गिरीश मैं बात कर रहा हूं ना। फिर तुम्हें
- 11:30किसने कहा उसे मारने के लिए? आनंद। सिया
- 11:33के बड़े पापा उसके पापा गिरीश पर चीखे और
- 11:36वह सिया से दूर खड़े हुए। सिया नीचे बैठकर
- 11:38अब भी सिसक रही उसे लगा था कि शायद उसके
- 11:41घर वाले उसके रिजल्ट देखकर खुश होंगे।
- 11:43उसकी तारीफ करेंगे। लेकिन यहां वह बस अपने
- 11:45आंसू बहाते रही। सिया के चाचू विनोद उसके
- 11:48पास आए और उनके चेहरे पर का गुस्सा देख
- 11:51सिया और डर गई। उसे लगा कि शायद अब वह भी
- 11:53उसे मारेंगे। इस वजह से वह डर से कांपने
- 11:56लग गई। उसके चाचू गुस्से से उससे बोले
- 11:58सिया जया और प्रभा कहां है? और उनका सवाल
- 12:01सुन सिया हैरान हो गई। उसे खामोश देख उसके
- 12:03चाचू विनोद फिर से बोले तुमने सुना नहीं
- 12:06मैंने क्या कहा तुमसे? तुम्हारी बड़ी
- 12:09बहनें जया और प्रभा कहां है? तुम्हें पता
- 12:11है वह किसके साथ भाग कर गई है? जवाब दो।
- 12:14आखिर में विनोद इतने जोर से चीखे कि सिया
- 12:17डर से पीछे हट गई। किसी तरह से हकलाते हुए
- 12:19वह बोली मैं नहीं जानती चाचू। मुझे नहीं
- 12:22पता है जया दी और प्रभा दी कहां गई है।
- 12:24मुझे कुछ भी नहीं पता है। सिया
- 12:26जल्दी-जल्दी बोलने लग गई और उसका जवाब सुन
- 12:28उसके चाचू ने उसे मारने के लिए हाथ उगारा।
- 12:31इससे पहले कि वह उसे मार पाते तब तक आनंद
- 12:33फिर से बोले विनोद उसे मारकर कोई फायदा
- 12:36नहीं है। चाहे उसने उन दोनों की भागने में
- 12:38मदद की हो या फिर ना की हो। सच्चाई अब यही
- 12:41है कि हमारे घर की दोनों बेटियां हम पर
- 12:43कलंक लगाकर अपने प्रेमी के साथ भाग गई है।
- 12:45और अब जबकि उन्होंने हमारे इज्जत की परवाह
- 12:48नहीं की। तब हमें भी उनकी कोई फिक्र नहीं
- 12:50है। मेरे लिए तो मेरी बेटी जया मर चुकी
- 12:52है। अब तुम तुम्हारा देख लो। अगर तुम
- 12:54प्रभा के लौटने के बाद उन्हें अपनाओगे तो
- 12:56मैं। आनंद अपने लफज पूरे बोल ही रहे तब तक
- 12:59विनोद बोले नहीं बड़े भाई साहब मेरे लिए
- 13:02भी अब वह बदचलन लड़की प्रभा मर चुकी है।
- 13:05विनोद की बात सुन आनंद सिर्फ हम इतना ही
- 13:07बोले और सिया के पास आ गए। सिया को लगा कि
- 13:10शायद उसके बड़े पापा उसकी बात सुनेंगे।
- 13:12उन्हें उस पर यकीन होगा लेकिन वह बिल्कुल
- 13:14भी नहीं जानती थी कि उसके बड़े पापा कुछ
- 13:16ऐसा बोलेंगे जिससे उसके सारे ख्वाब एक पल
- 13:19में ही टूट जाएंगे। पहले कि वह उसे मार
- 13:22पाते तब तक आनंद फिर से बोले विनोद उसे
- 13:24मारकर कोई फायदा नहीं है। चाहे उसने उन
- 13:27दोनों की भागने में मदद की हो या फिर ना
- 13:29की हो। सच्चाई अब यही है कि हमारे घर की
- 13:31दोनों बेटियां हम पर कलंक लगाकर अपने
- 13:33प्रेमी के साथ भाग गई है। और अब जबकि
- 13:35उन्होंने हमारे इज्जत की परवाह नहीं की।
- 13:37तब हमें भी उनकी कोई फिक्र नहीं है। मेरे
- 13:40लिए तो मेरी बेटी जया मर चुकी है। अब तुम
- 13:42तुम्हारा देख लो। अगर तुम प्रभा के लौटने
- 13:44के बाद उन्हें अपनाएंगे तो मैं। आनंद अपने
- 13:47लफ्ज पूरे बोल ही रहे तब तक विनोद बोले
- 13:50नहीं बड़े भाई साहब मेरे लिए भी अब वह
- 13:52बदचलन लड़की प्रभा मर चुकी है। विनोद की
- 13:55बात सुन आनंद सिर्फ हम इतना ही बोले और
- 13:57सिया के पास आ गए। सिया को लगा कि शायद
- 14:00उसके बड़े पापा उसकी बात सुनेंगे। उन्हें
- 14:02उस पर यकीन होगा लेकिन वह बिल्कुल भी नहीं
- 14:04जानती थी कि उसके बड़े पापा कुछ ऐसा
- 14:06बोलेंगे जिससे उसके सारे ख्वाब एक पल में
- 14:08ही टूट जाएंगे। आनंद सिया के करीब बैठे और
- 14:12उसके आंखों में आंखें डाल उन्होंने सवाल
- 14:14किया। सिया अगर तुम्हारा भी कोई प्रेमी हो
- 14:16तो बता दो। नहीं अगर होगा और आगे जाकर तुम
- 14:19भी उसके साथ भाग गई तो आनंद की बात पूरी
- 14:22होने से पहले ही सिया ने जोर-जोर से ना
- 14:24में सर हिलाया और रोते हुए बोली ना नहीं
- 14:28बड़े मैं मेरा ऐसा कुछ भी नहीं है यकीन
- 14:31कीजिए हम अच्छा एक यकीन तो नहीं है लेकिन
- 14:35तुम चाहो तो मेरी बात मान मुझे तुम पर
- 14:37यकीन करने के लिए मना सकती हो। बड़े पापा
- 14:39की यह बात सुन सिया ने जल्दी-जल्दी हां
- 14:41में सर हिलाया और और बोली आप जो बोलेंगे
- 14:44मैं वह करूंगी। बड़े पापा आपका यकीन जीतने
- 14:46के लिए आपकी सिया कुछ भी करने के लिए
- 14:48तैयार है। एक सिया की बात सुन वो व्यंग से
- 14:50मुस्कुराए और उससे दूर होकर गिरीश यानी
- 14:52सिया के पापा के तरफ गए। उनके कंधे पर हाथ
- 14:55रख वो बोले गिरीश इस घर का बड़े होने के
- 14:58नाते तुम सब मेरी हर एक बात मानते हो। तो
- 15:01मैं चाहूंगा कि तुम मेरी यह बात भी मानो।
- 15:03सिया तुम्हारी बेटी है। लेकिन हमारे घर की
- 15:06इज्जत और खराब ना हो। इस वजह से मैं चाहता
- 15:08हूं कि उसकी शादी जल्द से जल्द हो जाए।
- 15:11आनंद जी ने जैसे ही कहा वैसे ही सिया के
- 15:13ऊपर मानो पहाड़ ही टूट पड़ा। क्या कुछ
- 15:15नहीं सोचा था उसने अपने फ्यूचर को लेकर।
- 15:17कितने ख्वाब थे उसके? और अब उसकी तो कुछ
- 15:20गलती भी नहीं थी। फिर भी फिर भी उसे इतनी
- 15:22बड़ी सजा मिल रही थी। उसने उम्मीद से अपने
- 15:25पापा और फिर मां के तरफ देखा। लेकिन उन
- 15:27दोनों के चेहरे को देख ऐसा लग रहा था।
- 15:29जैसे उन्हें इस फैसले से कोई प्रॉब्लम
- 15:31नहीं है। सिया के पापा ने एक बार उसके तरफ
- 15:34देखा और फिर अपने भाई से बोले भाई साहब
- 15:37जैसा आप चाहे 7 महीने के बाद सिया 18 साल
- 15:40की हो जाएंगी और हम उसी दिन उसकी शादी
- 15:42करवा देंगे अगर आपकी नजरों में कोई हो तो
- 15:45बताइए जिससे हम उसके रिश्ते की बात कर सके
- 15:47और बस अपने पापा की यह बात सुन सिया की
- 15:49सारी हिम्मत जवाब दे गई। वह बेजान सी वहीं
- 15:52बैठी रही। बाहर गेट पर आती आवाजों से उनका
- 15:55ध्यान आकर्षित हुआ और बड़े पापा ने अपने
- 15:57बेटे आलोक से बाहर को उन्हें जाकर देखने
- 16:00के लिए बोल दिया। वह भी जल्दी से वहां गया
- 16:02और इतने सारे न्यूज़ रिपोर्टर को बाहर
- 16:04खड़ा देख वो हैरान हुआ। वह जल्दी से अंदर
- 16:06आया और बोला पापा बाहर न्यूज़ रिपोर्टर
- 16:09खड़े हैं। पता नहीं क्या हुआ होगा। न्यूज़
- 16:11रिपोर्टर का नाम सुन एक पल सभी हैरान हुए
- 16:14और फिर घर से सभी जेंट्स बाहर की ओर गए।
- 16:16गेट खोलते ही आनंद जी ने सभी के तरफ देखा
- 16:18और बोले क्या मैं जान सकता हूं आप सभी
- 16:21यहां क्या कर रहे हैं। उनका सवाल सुन उन
- 16:23रिपोर्टर्स ने एक दूसरे के तरफ देखा और
- 16:26फिर उन्हीं में से एक बोला यह घर सिया
- 16:28अग्निहोत्री का ही है ना नहीं वह स्टेट
- 16:30सेकंड टॉपर है इस वजह से हम उनका इंटरव्यू
- 16:33लेने आए हैं। रिपोर्टर की बात सुन सभी ने
- 16:35एक दूसरे के तरफ देखा। अगर आज यह सब नहीं
- 16:38हुआ होता तो यकीनन उन्हें सिया के टॉप
- 16:40करने की बहुत खुशी होती। मगर नहीं यह सच
- 16:43है कि यह घर सिया अग्निहोत्री का ही है।
- 16:45लेकिन हमारी बेटी ने टॉप नहीं किया है। वो
- 16:48एक एवरेज स्टूडेंट है जो बड़ी मुश्किल से
- 16:50पास हुई है। सो आप यहां से जा सकते हैं।
- 16:52आनंद जी ने कहा और गेट का दरवाजा बंद कर
- 16:54वह सीधा अंदर आ गए। सियाबा भी वहीं बैठी
- 16:58हुई थी और घर की बाकी औरतें उसके आसपास
- 17:00खड़ी उससे जाया और प्रभा के बारे में पूछ
- 17:02रही थी। उन सबके आते ही सिया की बड़ी मां
- 17:04कोमल आ गई और अपना सर झुकाए हुए ही उसने
- 17:07धीरे सवाल किया। क्या हुआ जी? वो रिपोर्टर
- 17:10कहीं कुछ बुरा तो नहीं हुआ ना? बस उनका
- 17:12इतना ही कहना और आनंद जी ने उन्हें घूर कर
- 17:15देखा। वह गुस्से से बोले बुरा और भी कुछ
- 17:17बुरा होना बाकी है क्या? जो तुम्हारी बेटी
- 17:20ने गुल खिलाए है उसके बाद भी पूछ रही हो।
- 17:23आनंद जी की वह गुस्से भरी आवाज और उनके
- 17:25नजरें देख कोमल जी पीछे हट गई और उन्होंने
- 17:27ने अपना सर झुका दिया। अगर बच्चा कुछ
- 17:29अच्छा करे तब मेरा बच्चा मेरा बच्चा करके
- 17:32आदमी उसे सर पर उठाते हैं और वही अगर उसने
- 17:34कुछ गलती की तो सारा इल्जाम औरत पर डालते
- 17:36हैं और यह हमारे समाज की बहुत ही कड़वी
- 17:38लेकिन सच्चाई है प्रिय ने ना में सर
- 17:41हिलाया और आगे आकर सिया से सवाल किया क्या
- 17:44आज तुम्हारा रिजल्ट आया है और बस अपने भाई
- 17:47का सवाल सुन सिया के दिल में थोड़ी उम्मीद
- 17:49जगी लेकिन अपने चाचू के बात सुन वो उम्मीद
- 17:51फिर से टूट गई वो प्रिय से बोले रिजल्ट
- 17:53आया हो या फिर ना आया हो लेकिन अब यह आगे
- 17:56की पाई नहीं करेंगी तुमने सुना नहीं आज से
- 17:58कुछ महीनों बाद इसकी शादी है और जब तक
- 18:00इसके हाथ पीले होकर वह उसके घर ब्याह नहीं
- 18:03हो जाती तब तक यह घर से बाहर कदम भी नहीं
- 18:05रखेंगी। प्रिय को अपने बाबा की यह बात
- 18:08बिल्कुल पसंद नहीं आई। उसने अपनी बहन सिया
- 18:10को देखा था जो हर रोज देर रात तक जग कर
- 18:13पाई करती थी और तो और बाकी दोनों बहनों से
- 18:15ज्यादा घर के काम भी करती थी। वो अपने
- 18:17पापा से बोला क्यों नहीं कर सकती पापा? उन
- 18:20दोनों के गलती की सजा आप सिया को नहीं दे
- 18:22सकते। हमारी सिया कितनी होशियार है और आप
- 18:25उसकी शादी करा के उसके फ्यूचर को बर्बाद
- 18:27नहीं कर सकते। मैं आपको ऐसा करने नहीं
- 18:29दूंगा। प्रियेश ने थोड़ी तेज आवाज में ही
- 18:31कहा और अगले ही पल विनोद जी ने उसे थप्पड़
- 18:33मार दिया। चाचू प्लीज प्लीज भाई को मत
- 18:36मारो। सिया से बर्दाश्त नहीं हुआ। उसके
- 18:39वजह से उसके भाई को थप्पड़ पड़े। वह भी
- 18:41तैयार नहीं थी इस शादी के लिए। और पानी
- 18:44पाई छोड़ने के लिए तो बिल्कुल भी नहीं।
- 18:46लेकिन घर का माहौल देख उसे मना करना सही
- 18:49नहीं लगा। उसने कुछ सोचकर अपने कदम बड़े
- 18:51पापा की ओर बढ़ाए और उसका हाथ अपने हाथों
- 18:53में थाम कर बोली बड़े पापा मैं शादी के
- 18:56लिए तैयार हूं आप जिससे कहेंगे जब कहेंगे
- 18:59मैं शादी करूंगी लेकिन प्लीज मेरी पाई बंद
- 19:02मत कीजिए आप चाहते हैं ना कि मैं घर से
- 19:05बाहर ना जाऊं तो आई प्रॉमिस मैं बाहर नहीं
- 19:09जाऊंगी एज अ एक्सटर्नल स्टूडेंट मैं अपनी
- 19:11पढ़ी पूरी करूंगी बड़े पापा सिर्फ एग्जाम
- 19:13के लिए ही जाऊंगी वो भी भाई के साथ लेकिन
- 19:16प्लीज प्लीज बड़े पापा मेरी पाई बंद मत
- 19:18कीजिए आपने आपने कहा था अगर मैं अच्छे
- 19:21नंबर से पास हुई तो आप में जो मांगूंगी वह
- 19:23देंगे। प्लीज बड़े पापा प्लीज मेरी पाई
- 19:26सिया रोते हुए अपने बड़े पापा से
- 19:28रिक्वेस्ट कर रही थी। उसे उतना रोता देख
- 19:30उसके मां को बहुत बुरा लग रहा था लेकिन वह
- 19:32कुछ भी नहीं कर सकती थी। आनंद जी फिर बोले
- 19:36ठीक है शशांत किसी अच्छे से कॉलेज में
- 19:38इसका बाहर से एडमिशन करवा दो और याद रहे
- 19:40कि यह अकेले कहीं भी आए जाए ना और तुम याद
- 19:42रहे कि तुमने अगर एक गलती की या फिर किसी
- 19:45लड़के से बात भी की तो मुझसे बुरा कोई
- 19:47नहीं होगा। समझ में आ गया ना? और उनकी बात
- 19:50सुनसिया ने हां में सर हिलाया। भले ही
- 19:52उसके साथ बहुत बुरा हुआ था, लेकिन वह आगे
- 19:54पढ़ सकती है। इसी बात की खुशी उसे अब हो
- 19:56रही थी। आनंद जी फिर आलोक से बोले आलोक
- 20:00इसके स्कूल में फोन करो। और वह जो टीवी पर
- 20:03या फिर न्यूज़ में इसके फोटो आने वाली है
- 20:05ना। उसे दिखने से मना कर दो। मैं नहीं
- 20:08चाहता कि किसी को भी पता चले कि इसने टॉप
- 20:10किया है। आनंद जी ने कहा और वह से चले गए।
- 20:12एक-एक कर बाकी सब भी वह से चले गए। सिया
- 20:15की बड़ी मां और चाची भी अपने कमरे में चली
- 20:17गई और फिर उसकी मानपिया जल्दी से उसके
- 20:19करीब आ गई। सिया अपने मां से लिप्त कर
- 20:21रोने लगी। वह उन्हें बताना चाहती थी कि
- 20:24उसने कुछ नहीं किया है। जया दी और प्रभा
- 20:26दी के जाने के पीछे उसका कोई हाथ नहीं है।
- 20:29लेकिन उसने अपनी बात कहने से पहले ही
- 20:30प्रिया बोली देख सिया बड़े भाई साहब ने
- 20:33तुझे जो यह आगे बढ़ने का मौका दिया है ना
- 20:35उसका गैर फायदा मत उठा। पहले ही हम सबको
- 20:38उन दोनों के वजह से बहुत कुछ झेलना पड़ने
- 20:40वाला है और इसमें भी अगर तूने कुछ किया ना
- 20:42तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। अपनी मां की
- 20:45बात सुन सिया ने सिर्फ हां में सर हिलाया
- 20:47और सीधा अपने कमरे में चली गई। आज उसके
- 20:50सामने उसके परिवार का एक अलग ही सच आया
- 20:52था। हां, वह जानती थी कि उसके घर वाले
- 20:55पुराने जमाने वाले सोच के लड़कों के
- 20:57मुकाबले लड़कियों से कम ही प्यार करते
- 20:59हैं। लेकिन जैसे भी थे। उन्होंने कभी भी
- 21:02उनके घर के बेटियों पर हाथ नहीं उठाया था।
- 21:04उनके मॉडर्न कपड़े पहनने और अकेले बाहर
- 21:06जाने पर रोक जरूर लगाई थी। लेकिन अपने भाई
- 21:10और बड़ों के साथ वह उन्हें बाहर भी भेजते
- 21:12थे। उनके बस एक बार कहने पर ही वह सभी
- 21:14चीजें उन्हें लाकर देते थे जो वह चाहती
- 21:16थी। फिर चाहे वह चीज कितनी भी महंगी ना
- 21:18हो। उसके बड़े पापा तो हमेशा कहते थे कि
- 21:21वह तीनों उनके घर ली लक्ष्मी है। इस वजह
- 21:24से वह हमेशा खुश रहनी चाहिए। लेकिन आज आज
- 21:26सब कुछ बदल के रह गया। उसके बहनों की वह
- 21:29गलती और सिया की पूरी दुनिया ही पलट गई।
- 21:32अगले दिन जब सिया के दोस्तों को जब जया और
- 21:34प्रभा के बारे में पता चला तब वह बहुत ही
- 21:36हैरान हुए और उन्होंने सिया से बात की और
- 21:38सिया ने उन्हें सब कुछ बता दिया। उन्हें
- 21:40उसके लिए बहुत बुरा लगा और उन सभी ने भी
- 21:43ठान लिया कि वह अपनी आगे की पाई वहीं से
- 21:45करने गए जहां सिया के घर वाले उसका एडमिशन
- 21:47कराएंगे ताकि नोट्स और बाकी सभी चीजों के
- 21:49लिए वह सिया की हेल्प कर सके। देखते ही
- 21:52देखते कुछ महीने बीत गए और आखिर वह दिन आ
- 21:55ही गया जब सिया की शादी होनी थी। बीते
- 21:57दिनों में सिया सिर्फ अपने एडमिशन और
- 21:59पेपर्स के लिए ही बाहर गई थी। वरना तो
- 22:01उसकी जिंदगी घर काम और अपने कमरे में ही
- 22:03बीत रही थी और अब दो दिन बाद उसके शादी की
- 22:05रस्में शुरू होनी थी। अंडरस्को मुझे बताओ
- 22:09तुम चारों में से मेरे साथ कौन आने वाला
- 22:11है? लास्ट मोमेंट पर मुझे कुछ भी गड़बड़
- 22:14नहीं चाहिए। हर बार में ना ही यह मैं नहीं
- 22:16यह कहकर मेरा दिमाग खराब कर देते हो तुम
- 22:18सब। अरे भाई क्या फायदा चारचार बेटे होने
- 22:21का जो वक्त पर एक भी काम नहीं आता है।
- 22:23सुधा जी चिते हुए अपने सामने बैठे राज
- 22:25राघव अक्षय और कृष्णा से बोले जा रही थी
- 22:28और वह चारों मुंह छिपा कर हंस रहे थे। तब
- 22:31तक राघव के डैड संजय बोले रहने भी दो सुधा
- 22:34डॉक्टर बेटे होने का यही तो नुकसान है।
- 22:36बेचारों को कभी भी इमरजेंसी केस आ जाती है
- 22:38और वह फिर उधर चले जाते हैं। अब वह भी
- 22:41क्या करने गए भला? संजय जी का बस यही कहना
- 22:44और सुधा जी ने उनकी तरफ घूर के देखा। वह
- 22:46फिर खामोश हो गए और अपने बच्चों की तरफ
- 22:48देख उन्हें जवाब देने के लिए बोलने लगे।
- 22:51मां उस दिन मुझे टाइम नहीं है। आप इन
- 22:53तीनों से पूछ लो। राज ने कहकर अपने हाथ
- 22:56ऊपर कर दिए और उसने अपना बोलना खत्म ही
- 22:58किया था। तब तक अक्षय भी बोला और मैं भी
- 23:00बिजी हूं। मेरा आना भी पॉसिबल नहीं है। उन
- 23:03दोनों को बैक आउट करता देख राघव भी जल्दी
- 23:05से बोला। मुझे बहुतेंट केस स्टडी करनी है।
- 23:08सो आप कृष्णा को ले जाइए और आगे किसी का
- 23:10कुछ सुनने से पहले ही उसने अपनी प्रोटीन
- 23:12शेक का ग्लास उठाया और वह से चला गया।
- 23:15कृष्ण ने अपने तीनों भाई को घूर कर देखा
- 23:17और फिर घरी सांस छोड़ते हुए बोला ठीक है
- 23:20मैं आ जाऊंगा आपके साथ बड़ी मां और बस
- 23:22उसका इतना कहना तीनों भाइयों ने और संजय
- 23:25जी ने गहरी सांस छोड़ी सुधा जी से घर में
- 23:27सभी काफी डरते थे लेकिन साथ ही साथ ही
- 23:29उनकी उतनी रिस्पेक्ट भी करते थे आज उनके
- 23:32वजह से तो वह सब यहां थे वरना ना जाने
- 23:34क्या होता तब तक राघव के डैड संजय बोले
- 23:37रहने भी दो सुधा डॉक्टर बेटे होने का यही
- 23:40तो नुकसान है बेचारों को कभी भी इमरजेंसी
- 23:42केस आ जाती है और वह फिर उधर चले ले जाते
- 23:45हैं। अब वह भी क्या करने गए भला? संजय जी
- 23:48का बस यही कहना और सुधा जी ने उनकी तरफ
- 23:50घुर के देखा। वह फिर खामोश हो गए और अपने
- 23:52बच्चों की तरफ देख उन्हें जवाब देने के
- 23:54लिए बोलने लगे। मां उस दिन मुझे टाइम नहीं
- 23:57है। आप इन तीनों से पूछ लो। राज ने कहकर
- 24:00अपने हाथ ऊपर कर दिए और उसने अपना बोलना
- 24:02खत्म ही किया था। तब तक अक्षय भी बोला और
- 24:04मैं भी बिजी हूं। मेरा आना भी पॉसिबल नहीं
- 24:07है। उन दोनों को बैक आउट करता देख राघव भी
- 24:10जल्दी से बोला। मुझे बहुत इंपॉर्टेंट केस
- 24:12स्टडी करनी है। सो आप कृष्णा को ले जाइए।
- 24:14और आगे किसी का कुछ सुनने से पहले ही उसने
- 24:17अपनी प्रोटीन शेक का ग्लास उठाया और वह से
- 24:19चला गया। कृष्ण ने अपने तीनों भाई को घूर
- 24:22कर देखा और फिर गहरी सांस छोड़ते हुए
- 24:24बोला, ठीक है मैं आ जाऊंगा आपके साथ बड़ी
- 24:27मां। और बस उसका इतना कहना तीनों भाइयों
- 24:29ने और संजय जी ने गहरी सांस छोड़ी। सुधा
- 24:31जी से घर में सभी काफी डरते थे। लेकिन साथ
- 24:34ही साथ उनकी उतनी रिस्पेक्ट भी करते थे।
- 24:36आज उनके वजह से तो वह सब यहां थे। वरना ना
- 24:39जाने क्या होता। अंडस्को अपने दुखों में
- 24:42उलझी हुई सिया अकेली अपने कमरे के खिड़की
- 24:44पर बैठ आंसुओं को बहा रही थी। पिछले कुछ
- 24:46महीनों में बहुत कुछ हुआ था। उसके साथ ना
- 24:48जाने क्या-क्या सहना पड़ा था उसे। अपनी
- 24:51आजादी खो दी थी उसने। अपना पद लिखकर कुछ
- 24:54बड़ा करने का सपना खोया था उसने। लड़की
- 24:57होने के ताने और उसके बहनों ने की हुई
- 24:59गलती की सजा उसे हर बार मिलती थी। उसके
- 25:02पापा ने तो उस माजर के बाद एक नजर उठाकर
- 25:04भी उसे नहीं देखा था। बात तो दूर की बात
- 25:06थी। हां, अगर इस पूरे बुरे वक्त में कोई
- 25:08उसके साथ था, तो वह सिर्फ था उसका भाई
- 25:10प्रिय और उसके दोस्त जो उसे टाइम टू टाइम
- 25:13कॉलेज के सभी नोट्स भी लाकर देते और उसे
- 25:15हंसाने की कोशिश भी करते। उस वक्त उनके
- 25:17साथ वह हंस तो देती लेकिन हर पल यही दुआ
- 25:20करती कि काश वक्त यही थम जाए और वह 18 साल
- 25:22की हो ही ना। अपने शादी को लेकर पहले तो
- 25:25उसे कुछ नहीं लगा था। उसने एक्सेप्ट कर
- 25:27लिया था सब कुछ और सबके खुशी के तैयार भी
- 25:30हो गई थी उस शादी के लिए। लेकिन जो लड़का
- 25:32उसे देखने आया था और जिसकी अब वह हमसफर
- 25:35बनने जा रही थी वह लड़का उसे बिल्कुल भी
- 25:37पसंद नहीं आया था। एक अलग ही नेगेटिव वाइब
- 25:40उसे उससे मिल रही थी ना सिर्फ उससे बल्कि
- 25:42उसके पूरे फैमिली से भी और उस लड़के का
- 25:44बड़ा भाई उसे देखकर तो सिया को डर ही लग
- 25:47रहा था। आज तक आए उन हालत में खुश रहने
- 25:49वाली वो दो डिब आए अपने शादी को लेकर काफी
- 25:52डर गई थी। आज भी सिया खिड़की पर बैठे हुए
- 25:55यही सोच में लगी थी कि काश कुछ ऐसा हो जाए
- 25:58और यह शादी टल जाए। उसके आंखों से बहते
- 26:00आंसुओं में उसके गाल और गले को तक के भिगो
- 26:03दिया था। सिया ने अपने हाथ जोड़े और ऊपर
- 26:05देखकर बोली कान्हा जी प्लीज प्लीज कुछ
- 26:08करिए। मुझे नहीं करनी है यह शादी। मुझे
- 26:10कुछ अच्छा नहीं लग रहा है। प्लीज कान्हा
- 26:12जी मैंने आज तक आपसे किसी चीज को लेकर
- 26:15शिकायत नहीं की। आपने जो जो भी मेरे
- 26:18किस्मत में लिखा उसे मैंने हंसते-हंसते
- 26:20अपनाया है। लेकिन यह शादी नहीं प्लीज कम
- 26:23से कम कान्हा जी यह लड़का तो नहीं। मुझे
- 26:25बहुत डर लग रहा है उससे। और उसने बड़े भाई
- 26:28से भी प्लीज कान्हा जी प्लीज अपने कान्हा
- 26:30को मानते हुए रोते हुए सिया वही खिड़की के
- 26:33पास ही सो गई और उसे देखने आए हुए उसकी
- 26:35मां बड़ी मां और चाची किसी तरह अपने आंखों
- 26:38में आए आंसुओं को साफ करते हुए वहां से
- 26:40चले गए। घर में सबसे छोटी होने की वजह से
- 26:42सिया उन सब की बहुत ही लाडली थी और उसी के
- 26:44साथ ऐसा होता देख किसी को अच्छा नहीं लगा
- 26:47मगर वह कुछ कर भी तो नहीं सकते थे। देखते
- 26:50ही देखते अगला दिन भी आ गया और शाम को
- 26:52सिया के मेहंदी का फंक्शन जोरों शोरों से
- 26:54हुआ। उसके होने वाले पति के नाम की मेहंदी
- 26:56और उसके नाम का पहला लेटर उसके हाथों में
- 26:59सज गया और सिया बस हताश सी देखती रह गई।
- 27:01निखिल और पुनीत से बात करना उसके घर में
- 27:03किसी को भी मंजूर नहीं था। इस वजह से वह
- 27:06तो नहीं लेकिन साक्षी और नेहा उसके साथ
- 27:08थे। अपनी बेस्ट फ्रेंड की यह हालत तो उनसे
- 27:11भी देखी नहीं जा रही थी। लेकिन वह कुछ कर
- 27:13भी तो नहीं सकती थी। उन चारों ने
- 27:15अपने-अपने पेरेंट्स से कहकर सिया के घर
- 27:17वालों से बात की थी। लेकिन उसका कोई भी
- 27:19फायदा नहीं हुआ और आज सिया को मेहंदी लग
- 27:21ही गई। अगले दिन हल्दी का फंक्शन भी काफी
- 27:24जोरों शोरों से हुआ। राहुल सिया का होने
- 27:27वाला पति और उनके फैमिली की डिमांड ही यही
- 27:29थी कि उन्हें शादी हाईफाई चाहिए थी। इस
- 27:32वजह से पूरे अग्निहोत्री परिवार ने कोई भी
- 27:34कमी नहीं छोड़ी थी उन्हें खुश करने में।
- 27:36मगर गिरोह को खुश करते-करते वह यह भूल गई
- 27:38थी कि वह उनकी अपनी बेटी को कितना नाराज
- 27:40कर रहे हैं। सिया से अब यह कुछ भी
- 27:42बर्दाश्त नहीं हो रहा था। काफी हेल्प
- 27:44प्लेस महसूस कर रही थी वो। अगर यह बात
- 27:46उसके पापा की इज्जत की और मां के
- 27:48संस्कारों की ना होती तो वह कब का अपनी
- 27:50जान दे चुकी होती या फिर यहां से कहा दूर
- 27:52चली गई होती। किसी तरह अपनी घुटन को
- 27:54बर्दाश्त कर सिया सब कुछ बर्दाश्त करती
- 27:56रही। कितनी प्यारी लग रही है मेरी
- 27:59गुड़िया। सिया के नानी ने उसकी बलाई ली और
- 28:01नजर का टिकाव उसे लगा लिया। दुल्हन के
- 28:03सुरख लाल जोड़े में सजी हुई सिया देखी ऐसी
- 28:05रही थी कि किसी की नजरें भी उस पर से
- 28:07हटाना मुश्किल थी। लेकिन उनकी उस नजरों को
- 28:09सिर्फ और सिर्फ सिया की खूबसूरती दिखाई दे
- 28:11रही थी। उसके आंखों में छिपा हुआ दर्द
- 28:14खालीपन नहीं जो वह सिर्फ उसके खूबसूरती
- 28:17की। उसने पहने हुए उन महंगे गहनों की उसके
- 28:19जोड़े की तारीफ कर रहा था। लेकिन किसी ने
- 28:22भी यह जरूरी नहीं समझा कि उससे पूछे कि
- 28:24क्या वह खुश है या नहीं। फाइनली फेरों का
- 28:27समय हो गया और पंडित जी ने सिया को मंडप
- 28:29में लाने के लिए बुलावा भेज ही दिया। सिया
- 28:31एक पल डर गई और दिल ही दिल कान्हा जी को
- 28:33याद कर वह बोली ठीक है कान्हा जी आपका यह
- 28:36फैसला भी मंजूर है मुझे और आपकी कसम
- 28:39कान्हा जी जिस तरह मैंने आज तक अपने हर एक
- 28:41रिश्ते दिल से निभाए हैं ना उसी तरह आगे
- 28:43भी आने वाले हर एक रिश्ता में अपने दिल से
- 28:46पूरे ईमानदारी से निभाऊंगी मुझे आप पर
- 28:48यकीन है कान्हा जी आपने मेरे लिए जरूर कुछ
- 28:50ना कुछ अच्छा ही सोचा होगा और अब मेरे साथ
- 28:53कुछ बुरा नहीं होने देंगे सिया ने कहकर एक
- 28:55बार अपने कान्हा जी की मूर्ति की तरफ देखा
- 28:58और उनका आशीर्वाद लेकर वह अपने कदम मंडप
- 29:00की ओर बहाने लग गई। योजक चिन्ह सुधा जी
- 29:03अपने कमरे में तैयार होकर इधर-उधर टहलते
- 29:06हुए कृष्णा के आने का इंतजार कर रही थी। 5
- 29:08मिनट 10 मिनट कहते कहते अब एक घंटा बिकत
- 29:11गया था। लेकिन वह कुछ आने का नाम नहीं ले
- 29:13रहा था। जिस वजह से सुधा जीओ गुस्सा आ रहा
- 29:15था। कविता जी और संजय जी चुपचाप उन्हें
- 29:18देखकर अपनी थूक कटक रहे थे। उनके गुस्से
- 29:20से उन्हें अभी काफी डर लग रहा था। उसी
- 29:22वक्त बाहर कार रुकने की आवाज आई और उन
- 29:24दोनों ने अपनी सांस छोड़ दी। राघव तुम।
- 29:27सुधा जी ने अंदर आते राघव को देखा और तभी
- 29:29राघव बोला मां कृष्णा को एक बहुत ही
- 29:32इंपॉर्टेंट केस आ गई जिस वजह से वह नहीं आ
- 29:35सका इसीलिए मैं आपके साथ जाऊंगा राघव के
- 29:37यह शब्द सुधा जी को खुश कर गए और वह झट से
- 29:39मान गई वैसे भी उनका यह बेटा था सबसे छोटा
- 29:43लेकिन सबसे ज्यादा काम वही संभाले हुए थे
- 29:45उसे आराम करना थोड़ा भी मालूम नहीं था हर
- 29:47वक्त सिर्फ काम ही काम करता था वह इस वजह
- 29:50से सुधा जी को अच्छा ही लगा उसे आता देखा
- 29:53संजय जी और कविता जी दोनों भी बहुत खुश
- 29:55हुए राघव की बात सुन और कविता जी जल्दी से
- 29:58बोली राघव जाओ तुम फ्रेश हो जाओ तब तक मैं
- 30:01तुम्हारे लिए कपड़े निकलती हूं कहकर कविता
- 30:03जी जल्दी से अपने कमरे की तरफ बढ़ गई और
- 30:05राघव को समझते देर नहीं लगी कि उसकी
- 30:07प्यारी बुआ फिर से उसके लिए शॉपिंग करके
- 30:09आई है। वह मुस्कुराया और अपने कमरे में
- 30:11चला गया। कविता जी ने भी जल्दी से कपड़े
- 30:14लिए और राघव को देकर वह बाहर आ गई। सुधा
- 30:17जी की तरफ देखते हुए वह बोली भाभी यह
- 30:19गिफ्ट मैंने पैक कर दिया है और बुकी भी
- 30:22रेडी है। मैं बस अभी लेकर आती हूं। हां
- 30:24कहते हुए कविता जी जल्दी से किचन के तरफ
- 30:26जाने लगी और सुधा जी ने चिदते हुए उन्हें
- 30:28पुकारा वो गुस्से से उनसे बोली तुम्हें
- 30:30कितनी बार कहा है कवि आराम से चला करो पैर
- 30:33में फिर से स्वेलिंग चढ़ गई तो बिल्कुल
- 30:36ध्यान नहीं रखती हो तुम अपना सुधा जी ने
- 30:38डांटते हुए उन्हें बैठने का इशारा किया और
- 30:40खुद अंदर जाकर बुके लेकर आ गई संजय जी की
- 30:43तरफ देखते हुए वह बोली आप आराम से ऑफिस
- 30:46चले जाइएगा और तुम कविता पड़ोस में किसी
- 30:49तरह की वो क्या कहते हैं कि टी पार्टी की
- 30:51क्या है वो मिसेज शर्मा बोल रही थी तो
- 30:54अच्छे से तैयार होकर वहां चले जाना और
- 30:56थोड़ा एंजॉय भी करना थोड़ा बहुत बाहर भी
- 30:58निकला करो समझी सुधा जी ने कहकर राघव को
- 31:01आवाज लगाई और फिर उन दोनों को भी बोलकर
- 31:03राघव और सुधा जी बाहर निकल गए कविता जी ने
- 31:06भी जल्दी से कपड़े लिए और राघव को देकर वह
- 31:09बाहर आ गई सुधा जी की तरफ देखते हुए वह
- 31:11बोली भाभी यह गिफ्ट मैंने पैक कर दिया है
- 31:14और वो भी रेडी है मैं बस अभी लेकर आती हूं
- 31:16हां कहते हुए कविता जी जल्दी से किचन के
- 31:19तरफ जाने लगी और सुधा जी ने चिते हुए
- 31:21उन्हें पुकारा वो गुस्से से उनसे बोली
- 31:23बोली तुम्हें कितनी बार कहा है कवि आराम
- 31:25से चला करो पैर में फिर से स्वेलिंग चढ़
- 31:27गई तो बिल्कुल ध्यान नहीं रखती हो तुम
- 31:30अपना सुधा जी ने डांटते हुए उन्हें बैठने
- 31:32का इशारा किया और खुद अंदर जाकर बुके लेकर
- 31:35आ गई संजय जी की तरफ देखते हुए वह बोली आप
- 31:38आराम से ऑफिस चले जाइएगा और तुम कविता
- 31:41पड़ोस में किसी तरह की वो क्या कहते हैं
- 31:43कि टी पार्टी की क्या है वो मिसेज शर्मा
- 31:46बोल रही थी तो अच्छे से तैयार होकर वहां
- 31:48चले जाना और थोड़ा एंजॉय भी करना थोड़ा
- 31:51बहुत बाहर भी निकला करो समझी ठीक सुधा जी
- 31:53ने कहकर राघव को आवाज लगाई और फिर उन
- 31:55दोनों को भी बोलकर राघव और सुधा जी बाहर
- 31:57निकल गए। राघव ने गाड़ी चलाते हुए अपनी
- 32:00मां की तरफ देखा और बोला मां वैसे हम
- 32:03किसकी शादी में जा रहे हैं? मेरा मतलब है
- 32:06क्या मैं पहचानता हूं उन्हें? राघव का
- 32:09सवाल सुन सुधा मुस्कुराते और बोली अरे वो
- 32:11मेरे साथ काम करने वाले प्रोफेसर है ना?
- 32:14प्रोफेसर मिश्रा उन्हीं के छोटे बेटे की
- 32:16शादी है। सुधा जी की बात सुन राघव ने
- 32:18सिर्फ हां में सर हिलाया और फिर से अपने
- 32:20ड्राइविंग पर कंसंट्रेट करने लगा। उन्हें
- 32:22आने में थोड़ा लेट ही हुआ था। जिस वजह से
- 32:25राघव ने गाड़ी हॉल के बैक साइड में पार्क
- 32:27की और अपनी मां के साथ अंदर जाने लगा।
- 32:29थोड़े कदम वह अंदर आ ही गए थे। तब उनके
- 32:31कानों पर कुछ आवाजें आए और वह बात सुनकर
- 32:33दोनों बहुत ही ज्यादा हैरान हुए। राघव तो
- 32:36गुस्से से आग बबूला हो गया था। उनकी बात
- 32:38सुन और वह कुछ कहने के लिए आगे बढ़ने ही
- 32:40वाला था कि सुधा जी ने उसका हाथ पकड़
- 32:42लिया। तब तक वह दोनों तीनों वहां से चले
- 32:44गए थे। राघव ने फिर गुस्से से अपनी मां को
- 32:47देखा और बोला आपने मुझे को रोका मोम आपने
- 32:50सुना नहीं वह क्या कह रहे थे डिस्कस्टिंग
- 32:52है यह सब वो लोग कैसे ऐसा कर सकते हैं
- 32:54किसी की मजबूरी का फायदा कैसे उठा सकते
- 32:57हैं राघव बहुत ही गुस्से में था अभी-अभी
- 32:59बात ही उसने ऐसी सुनी थी। राहुल सिया का
- 33:02कभी ना होने वाला हस्बैंड अपने बड़े भाई
- 33:04और मां से बात करते हुए कह रहा था कि वह
- 33:07अब शादी से भाग जाएगा और फिर तुम गिरीश से
- 33:09सिया के पापा से जाकर कहना कि उसकी दोनों
- 33:12बड़ी बहनों की भाग जाने की वजह से वह इस
- 33:14शादी से इंकार कर रहा है। ऐसे खानदान में
- 33:16जिसको दो-दो लड़कियां घर से भाग गई है। वह
- 33:18उनसे रिश्ता जोड़ना नहीं चाहते और फिर सही
- 33:21समय देखकर महान बनते हुए रोहित राहुल का
- 33:23बड़ा भाई उसकी शादी सिया से करवाकर दहेज
- 33:26और बढ़ाकर मांग लेना। राघव को उनकी बात
- 33:29सुन बहुत ही ज्यादा गुस्सा आया था और वह
- 33:31उसी गुस्से में अंदर जाने के लिए बढ़ा।
- 33:34रुको राघव सुधा जी ने राघव को आवाज देते
- 33:36हुए उसे रोका और उससे सवाल करते हुए वह
- 33:39बोली ऐसे गुस्से में जाकर कुछ भी गड़बड़
- 33:41मत करो। मिश्रा सर बहुत अच्छे हैं। हम
- 33:43पहले उनसे बात करते हैं। फिर आगे का आगे
- 33:46देखेंगे। सुधा जी ने राघव को समझाते हुए
- 33:48बोली और फिर मिश्रा सर को कॉल करने लगी।
- 33:51उनके फोन की रिंग आसपास ही उन्हें सुनाई
- 33:53दी और वह उस ओर गए। मिश्रा सर वही सर को
- 33:55हाथ लगाए बैठे हुए थे। सुधा जी और राघव
- 33:58जल्दी से उनके पास गए और सुधा जी फिक्र से
- 34:00बोली मिश्रा सर आप ऐसे क्यों बैठे हैं? आप
- 34:04जानते हैं हमने अभी-अभी सुना कि आपका बेटा
- 34:06वो। सुधा जी ने पूरी बात उन्हें बता दी और
- 34:09उसे सुन मिश्रा सर के आंखों में आंसू आ
- 34:11गए। वह रोते हुए ही बोले मैं जानता हूं
- 34:14सुधा जी और मैं पहले से ही इस शादी के
- 34:16खिलाफ था वो बच्ची। वो बच्ची सिया बहुत
- 34:19अच्छी है वो और बहुत मासूम और संस्कारी
- 34:21भी। लेकिन उसके बड़ी बहनों के भाग जाने की
- 34:24वजह से उसके परिवार वाले जल्द से जल्द
- 34:26उसकी शादी करवाने पर तुले हुए हैं। इसी
- 34:28बात का फायदा उठाकर पहले ही कामिनी राहुल
- 34:30की मां उनसे बहुत सारा दहेज ले चुकी है और
- 34:33अब अब मेरे उस बेवड़े निकम्मे बेटे से
- 34:35उसकी शादी करवाने पर तुली है। मुझे कुछ
- 34:37समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं। आप
- 34:40कुछ कीजिए सुधा जी अगर यह शादी नहीं हुई
- 34:42तो उस बच्ची के घर वाले उसे जान से मार
- 34:44देंगे और अगर यह शादी हो गई तो जीते जी उस
- 34:47लड़की की जिंदगी जहनुम से बदतर हो जाएंगी।
- 34:49मिश्रा सर अच्छे से जानते थे कि उनकी
- 34:51पत्नी और बेटे कैसे थे। इस वजह से वह किसी
- 34:54भी तरह से सिया को इस शादी से बचाना चाहते
- 34:56थे। मगर अब सब कुछ उनके हाथ से छूटता हुआ
- 34:58महसूस हो रहा था। सुधा जी भी बहुत हैरान
- 35:01हो गई। यह सब सुनकर वो मिश्रा सर को बहुत
- 35:04अच्छे से जानती थी। मिश्रा सर बहुत ही
- 35:06अच्छे व्यक्ति महत्व के मालिक थे और बहुत
- 35:08अच्छे इंसान भी। उनकी बात सुन सुधा जी सोच
- 35:11में गिर गई कि वह क्या करें और फिर कुछ
- 35:12सोचकर उन्होंने राघव के तरफ देखा और फिर
- 35:15मिश्रा सर के तरफ देखकर वह बोली क्या वह
- 35:17लड़की सच में अच्छी और संस्कारों वाली है।
- 35:20सुधा जी की बात सुन मिश्रा सर ने जल्दी से
- 35:22हां में सर हिलाया और सिया की खूब तारीफ
- 35:24की। सुधा जी खुश थी। उनकी बात सुन। इस वजह
- 35:27से वह बोली ठीक है फिर तो आज उस लड़की के
- 35:30साथ आपके बेटे की नहीं बल्कि मेरे बेटे
- 35:32राघव की शादी होंगी और बस उनकी बात सुन
- 35:35राघव हैरान हो गया वह जल्दी से बोली मॉम
- 35:37आप क्या बोल रही हो शादी और वह भी मेरी
- 35:40राघव बहुत ही हैरान था सुधा जी की बात सुन
- 35:43और वह दो कदम पीछे हो गया सुधा जी भी बहुत
- 35:46हैरान हो गई यह सब सुनकर वो मिश्रा सर को
- 35:49बहुत अच्छे से जानती थी मिश्रा सर बहुत ही
- 35:51अच्छे व्यक्ति महत्व के मालिक थे और बहुत
- 35:53अच्छे इंसान भी उनकी बात सुन सुधा जी सोच
- 35:56में गिर गई कि वह क्या करें और फिर कुछ
- 35:58सोचकर उन्होंने राघव के तरफ देखा और फिर
- 36:00मिश्रा सर के तरफ देखकर वह बोली क्या वह
- 36:02लड़की सच में अच्छी और संस्कारों वाली है
- 36:05सुधा जी की बात सुन मिश्रा सर ने जल्दी से
- 36:08हां में सर हिलाया और सिया की खूब तारीफ
- 36:10की सुधा जी खुश थी उनकी बात सुन इस वजह से
- 36:12वह बोली ठीक है फिर तो आज उस लड़की के साथ
- 36:15आपके बेटे की नहीं बल्कि मेरे बेटे राघव
- 36:18की शादी होंगी और बस उनकी बात सुन राघव
- 36:20हैरान हो गया वह जल्दी से बोली मॉम आप
- 36:22क्या बोल रही हो शादी और वह भी मेरी राघव
- 36:26बहुत ही हैरान था। सुधा जी की बात सुन और
- 36:28वो दो कदम पीछे हो गया। हां राघव तुम्हारी
- 36:32शादी मैं चाहती हूं कि तुम उस लड़की से
- 36:34शादी करो और अगर तुम अपनी मां से थोड़ा भी
- 36:36प्यार करते हो तो तुम इस शादी के लिए मना
- 36:38नहीं करोगे और मेरे साथ अंदर आओगे वरना
- 36:41तुम यहां से ही वापस जा सकते हो। सुधा जी
- 36:43ने डायरेक्ट अपना फैसला सुना दिया और
- 36:45मिश्रा सर के साथ अंदर की ओर जाने लगी। वह
- 36:47चाहती थी कि यह शादी हो जाए और इसके पीछे
- 36:50वजह थी कविता जी और संजय जी। संजय जी बैंक
- 36:53में काम करते थे और उन्हें रिटायर होने
- 36:56में बस एक दो साल ही बाकी थे। वही कविता
- 36:59जी की हेल्थ जो दिन-ब दिन बिघती जा रही थी
- 37:02उनके साथ घर में किसी ना किसी का होना
- 37:04जरूरी था। वह पिछले कुछ महीनों से अपने
- 37:06बेटे राज को तैयार कर रही थी कि वह शादी
- 37:08के रेडी हो जाए। वैसे देखा जाए तो वह
- 37:11चारों भी अब शादी के लायक हो गए थे। राज
- 37:13अब ऑलमोस्ट 28 साल का था तो वहीं कृष्णा
- 37:15और अक्षय 27 साल के राघव भी अब 26 साल का
- 37:18हो गया था। लेकिन उन तीनों ने राज, कृष्णा
- 37:21और अक्षय ने यह कहकर शादी की बात टाल दी
- 37:24थी कि उन्हें अभी शादी नहीं करनी है।
- 37:26इनफैक्ट इट जब तक वह 30 क्रॉस नहीं कर
- 37:28लेते तब तक वह शादी नहीं करेंगे और उन्हें
- 37:30भी उनकी तरह ही डॉक्टर वाइफ चाहिए थी। इस
- 37:33वजह से वह आज यह शादी करने के लिए भी टायर
- 37:35नहीं होंगे। राघव सबसे छोटा होने की वजह
- 37:37से उन्होंने उससे नहीं पूछा था और आज सीधा
- 37:40वह उसे शादी के लिए खड़ा होने के लिए बोल
- 37:42रहे थे। राघव ने गहरी सांस छोड़ी। वह अब
- 37:45पछता रहा था कि वह क्यों इस शादी को आया।
- 37:47वह अपनी मां की मना नहीं कर सकता था। आखिर
- 37:50उन्होंने ने उनके लिए क्या कुछ नहीं किया
- 37:52था। इस वजह से ना चाहते हुए भी उसे अपने
- 37:54कदम आगे बढ़ाने पड़े। वह जल्दी से उसकी
- 37:56मां के पास आया और उसे अंदर आया हुआ देख
- 37:59कहीं ना कहीं सुधा जी और मिश्रा सर को
- 38:01बहुत ही खुशी हुई। उनके मुस्कुराते हुए
- 38:03चेहरे को देख राघव थोड़े गुस्से से ही
- 38:05बोला। आपकी बात मैं टाल नहीं सकता। मोम
- 38:07इसी वजह से अंदर आ गया। लेकिन क्या आपको
- 38:10लगता है कि वह लोग अपनी बेटी की शादी
- 38:12मुझसे कराने के लिए तैयार होंगे। राघव का
- 38:15सवाल सुधा जी को हकीकत का एहसास दिला गया।
- 38:17उन्होंने उसे कसम तो दे दी थी कि उसे यह
- 38:19शादी करनी है। लेकिन उस लड़की के घर वाले
- 38:23क्या वह मानेंगे? अगर राहुल और रोहित का
- 38:25प्लान सक्सेसफुल हो गया और उन्होंने उस
- 38:27लड़की की शादी रोहित के साथ कर दी। तो यही
- 38:30सवाल अब सुधा जी के दिमाग में घूम रहे थे।
- 38:33उन्हें यूं फिक्रमंद हुआ देखकर मिश्र सर
- 38:35बोले आप फिक्र मत कीजिए। सुधा मैडम मैं उन
- 38:38लोगों से सिया के घर वालों से बात करूंगा।
- 38:40अब चलिए इससे पहले कि देर हो जाए। हम अंदर
- 38:43चलते हैं। मिश्रा जी की बात सुन सुधा जी
- 38:45ने अपनी अंदर जाने की स्पीड बाय और अंदर
- 38:47की ओर जाने लगे। लेकिन कहीं ना कहीं
- 38:49उन्हें थोड़ी देर हो ही गई थी। सिया पहले
- 38:52ही मंडप में आ गई थी और सभी को राहुल के
- 38:54गायब होने की खबर भी मिल गई थी। शादी में
- 38:56आए सभी लोग अलग-अलग बातें बना रहे थे।
- 38:59जिसे सुनते हुए मिश्रा सर, सुधा जी और
- 39:01राघव अंदर गए। सिया अपनी दोनों सहेलियों
- 39:03के साथ स्टेज पर घबराई हुई खड़ी थी। भले
- 39:06ही वह घूंघट में धकी हुई थी, लेकिन फिर भी
- 39:08उसका कांपना नीचे खड़े सभी को महसूस हो
- 39:10रहा था। मिश्रा सर ने वहीं मौजूद किसी को
- 39:13सबही के बारे में पूछा और फिर उन्होंने
- 39:15कुछ कहते हुए एक कमरे की ओर इशारा किया।
- 39:18मिश्रा सर सुधा जी और ना चाहते हुए राघव
- 39:20भी वह चला गया और अंदर जाते ही उसके कानों
- 39:22पर जो लफज टकराए उसे सुन राघव को बड़ा ही
- 39:25गुस्सा आया। मिसेस मिश्रा बहुत गुस्से में
- 39:27सिया के सभी घर वालों को बातें सुना रही
- 39:29थी और वही वह सभी हाथ जोड़कर खड़े चुपचाप
- 39:31बातें सुन रहे थे। मिस मिश्रा फिर आगे
- 39:34गुस्से से बोली यह इस तरह हाथ जोड़कर खड़े
- 39:36रहने से कुछ नहीं होगा। सब आपकी ही गलती
- 39:39है। आपने इतना बड़ा सच हमसे क्यों छुपाया
- 39:41कि आपके घर की दोनों बेटियां अपने यारों
- 39:43के साथ घर से भाग गई है। और हां कही
- 39:46इसीलिए तो आपने इस शादी की जल्दी नहीं कर
- 39:48दी ना ताकि आप अपनी इस बेटी की करतूत भी
- 39:50छिपा सके। मिसेज मिश्रा की बात सुन बड़े
- 39:53पापा जल्दी से बोले नहीं समधन जी ऐसा कुछ
- 39:56भी नहीं है। हमारी सिया ऐसी नहीं है। आप
- 39:58मेहरबानी करिए। शादी मत तोड़िए और जमाई जी
- 40:01को वापस बुलाइए। बड़े पापा दिल ही दिल
- 40:03गुस्सा तो बहुत थे। लेकिन फिर भी वह अभी
- 40:06चुप थे। अगर यह शादी नहीं होती तो उनकी
- 40:08समाज में क्या इज्जत रह जाती। मिसेज
- 40:10मिश्रा बहुत ही खुश हुई उन्हें यूं
- 40:12गिदगिदाते हुए देख और फिर कुछ सोचने का
- 40:14नाटक करते हुए वह बोली, नहीं वह तो अब
- 40:17वापस नहीं आ सकता। उसने साफ-साफ मना किया
- 40:19है कि वह ऐसे घर से रिश्ता नहीं जोड़ेगा
- 40:22जहां की लड़कियां घर से भाग गई हो। लेकिन
- 40:25कहकर मिज मिश्रा कुछ पल रुकी। उनकी बातें
- 40:27सुन सभी को बहुत डर लग रहा था। मगर उनका
- 40:30लेकिन कहना सबको एक उम्मीद दिला गया।
- 40:32मिसेज मिश्रा ने फिर अपनी बात आगे बढ़ाते
- 40:35हुए जैसे उन पर एहसान कर रही हो इस अंदाज
- 40:37में बोली लेकिन मैं अपने बड़े बेटे की
- 40:39शादी आपकी बेटी से करवाने के लिए तैयार
- 40:41हूं। अब राहुल का वापस आना तो पॉसिबल नहीं
- 40:44है। इसी वजह से मैं अपने बेटे रोहित को इस
- 40:46शादी के लिए तैयार कर सकती हूं। हां, अगर
- 40:49वह तैयार हुआ तो वह क्या है ना। वह भी
- 40:51आपकी यू बेइज्जत हुई लड़की से शादी करने
- 40:53के लिए पहले मन ही करेगा। लेकिन मुझे यकीन
- 40:56है वह अपनी मां की बात भी नहीं तालगा।
- 40:58हीना रोहित क्या तुम अपनी मां की खातिर यह
- 41:01शादी करोगे? मिज मिश्रा फिर वहीं मौजूद
- 41:04अपने नाकारा बेटे के पास जाकर खड़ी हो गई।
- 41:07सिया की रोहित से शादी यह बात गिरीश यानी
- 41:10सिया के पापा को बिल्कुल अच्छी नहीं लगी
- 41:12थी। लेकिन वह अपने बड़े भाई के आगे कुछ
- 41:14बोल नहीं सकते थे। आखिर घर के सभी फैसले
- 41:18वही तो लेते थे। रोहित ने भी पहले कुछ ऐसा
- 41:20ही मुंह बनाया कि जैसे उसे यह शादी नहीं
- 41:22करनी है। जिसे देख बड़े पापा बहत परेशान
- 41:25हुए और बोले आप आप तैयार हो जाए रोहित जी
- 41:28मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि मेरी सिया
- 41:30आपके मर्जी के हिसाब से ही चलेंगी और और
- 41:33हां आप इस शादी के बदले जो मांगेंगे वह भी
- 41:35मैं देने को तैयार हूं। बस बड़े पापा का
- 41:38ऐसा कहना और रोहित और मिसेज मिश्रा बहुत
- 41:40ही खुश हुए। उन्हें भी तो यही चाहिए था और
- 41:42उसी खुशी से रोहित हां बोलने को ही हुआ था
- 41:44कि तब तक राघव अंदर आ गया। बड़े पापा के
- 41:48सामने खड़े होकर वह गुस्से से बोला, आप
- 41:50अपनी बेटी की शादी करवा रहे हैं या फिर
- 41:53उसका सौदा कर रहे हैं। राघव का यह कहना
- 41:56बड़े पापा को बहुत अपमानित कर गया। वहीं
- 41:58मिसेस मिश्रा भी गुस्से से जल्दी से आगे आ
- 42:00गई। पता नहीं यह लड़का कौन था और अगर उसने
- 42:03कुछ ऐसा वैसे कह दिया तब उनका बना बनाया
- 42:05हुआ प्लान बिगड़ जाता। वह उससे कुछ बोलने
- 42:07को हुई। लेकिन उससे पहले ही मिश्रा सर
- 42:10बोले सिया की शादी रोहित से नहीं होंगी।
- 42:12अपने दोस्त मिश्रा की बात सुन बड़े पापा
- 42:15उनके पास आए और बोले यह क्या कह रहा है
- 42:17यार तू कम से कम हमारी इस दोस्ती के खातिर
- 42:20तो तैयार हो जा इस शादी के लिए कितने लोग
- 42:22बाहर आए हुए हैं और अगर यह शादी टूट गई तो
- 42:25बहुत बदनामी होंगी यार मेरी मान जा इस
- 42:27शादी के लिए बड़े पापा हाथ जोड़कर मिश्रा
- 42:29सर के सामने खड़े हो गए वो मिश्रा सर को
- 42:32बहुत अच्छे जानते थे इसी वजह से तो
- 42:34उन्होंने सिया का रिश्ता उनके घर में तय
- 42:35किया था और अब यह सब उन्हें समझ ही नहीं आ
- 42:38रहा था कि वह क्या कहे मिश्रा सर ने उनके
- 42:41जोड़े हुए हाथ को पकड़ा और मिसेज मिश्रा
- 42:43को लगा कि वह शायद मन कर दे इस वजह से वह
- 42:45जल्दी से बोली यह क्या कर रहे हैं जी आप
- 42:48अपने दोस्त को यूं खुद के सामने हाथ
- 42:50जोड़कर खड़ा करना अच्छी बात थोड़ी ही है
- 42:53और हां अगर यह शादी नहीं हुई तो समाज में
- 42:55इनके साथ-साथ हमारी भी तो बेइज्जती हो ही
- 42:57जाएंगी ना आप मना मत कीजिए इस शादी को भाई
- 43:01साहब हम तैयार है इस शादी के लिए चलिए
- 43:03जल्दी बाहर मुहूर्त बीता जा रहा है मिसेज
- 43:05मिश्रा ने खुद ही से सब कुछ डिसाइड कर
- 43:07लिया और बाहर जाने के लिए भी मुनी बड़े
- 43:09पापा खुश तो बहुत हुए लेकिन फिर फिर भी वह
- 43:12अपने दोस्त के तरफ देखने लगे। मिश्रा सर
- 43:15फिर बोले, मैंने भी मना नहीं किया इस शादी
- 43:17के लिए। आज यहां सिया की शादी होंगी।
- 43:19लेकिन रोहित के साथ नहीं बल्कि राघव के
- 43:21साथ मिश्रा सर का यह कहना सभी को हैरत में
- 43:24डाल गया। रोहित और मिज मिश्रा तो उन्हें
- 43:26खा जाने वाली नजर से देखने लग गए। मिज
- 43:29मिश्र फिर आगे आए और अपने गुस्से को किसी
- 43:31तरह से दबाते ही बोली यह आप क्या कह रहे
- 43:34हैं? और राघव कौन राघव? कहते हुए उनकी नजर
- 43:38राघव के तरफ गई और वह कुछ बोलने को हुई।
- 43:41मगर उनकी बात को काटते हुए मिश्रा सर फिर
- 43:43से बोले देखो आनंद सिया की शादी रोहित से
- 43:46नहीं हो सकती। सिया अभी सिर्फ 18 साल की
- 43:49है और रोहित जल्द ही 37 साल का हो जाएगा।
- 43:51उन दोनों में उम्र का काफी ज्यादा गैप है।
- 43:54इसी वजह से मैं चाहता हूं कि यह शादी ना
- 43:56हो बल्कि राघव और सिया की शादी हो जाए।
- 43:58राघव बहुत हो अच्छा लड़का है और वह एक
- 44:01बहुत काबिल और सक्सेसफुल डॉक्टर भी है।
- 44:03उसका खुद का अपना हॉस्पिटल है। तो मैं
- 44:05चाहूंगा कि तुम मेरी बात का मान रख लो और
- 44:07राघव सिया के शादी के लिए तैयार हो जाओ।
- 44:10मिश्रा जी का यह कहना उनके परिवार को
- 44:12गुस्सा दिला गया तो वही बाकी सबको सोच में
- 44:14डाल गया। गिरीश जी को भी राघव के बारे में
- 44:17सुनकर और उसे देखकर बहुत अच्छा लगा था।
- 44:19आखिर राघव सक्सेसफुल होने के साथ काफी गुड
- 44:21लुकिंग भी तो था और आज तो वह दिखने के
- 44:23मामले में कहर भी ढा रहा था। उसकी
- 44:25पर्सनालिटी ही ऐसी थी कि जिससे अट्रैक्ट
- 44:27हुए बगैर कोई नहीं रह पाता था। मिसेज
- 44:30मिश्र ने एक नजर अपने पति को और फिर राघव
- 44:33को देखा और गुस्से से कुछ बोलने को हुई।
- 44:36लेकिन वह कुछ बोल पाती उससे पहले ही
- 44:37प्रिया सिया की मां बोली हमें मंजूर है
- 44:40मेरे सिया की शादी राघव जी के साथ ही
- 44:42होंगी। वह सबसे पूछ नहीं रही थी बल्कि
- 44:45सबको बता रही थी और जिस तरह से उन्होंने
- 44:47मेरी सिया कहा था ना उस हिसाब से सबको
- 44:50समझते देर नहीं लगी कि वह अब किसी की बात
- 44:52नहीं मानेंगी। बड़े पापा को गुस्सा तो
- 44:54बहुत आया लेकिन गिरीश जी को चुप देख वह
- 44:56कुछ नहीं बोले और उन्होंने अपना सर हां
- 44:58में हिला दिया। प्रिया जी फिर सुधा जी के
- 45:01पास आ गई और उनके नजरों में का सवाल देख
- 45:03सुधा जी बोली मैं राघव की मां हूं। उनका
- 45:05इतना ही कहना कि प्रिया जी ने उनके आगे
- 45:07हाथ जोड़ दिए और बोली बहन जी मेरा यकीन
- 45:10कीजिए मेरी सिया बहुत अच्छी है और बहुत
- 45:13पाक भी उसके बहनों ने ऐसा क्यों किया मैं
- 45:15नहीं जानती लेकिन मैं यह पूरे यकीन के साथ
- 45:18कह सकती हूं कि मेरे सिया का दमन बिल्कुल
- 45:20पाक साफ है और वह आगे भी आपके लफ्जों के
- 45:22बाहर नहीं जाएंगी। प्लीज उसे अपना लीजिए।
- 45:25प्रिया के हाथ नीचे करते हुए सुधा जी बोली
- 45:28आपको हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है बहन जी
- 45:30मैं समझती हूं और आप बेफिक्र हो जाइए मेरे
- 45:33घर में आपकी बेटी को पूरी इज्जत मिलेंगी
- 45:35और घर की सबसे छोटी बहू होने का मान भी और
- 45:37बस उनकी बात प्रिया जी को बहुत सुकून
- 45:39पहुंचा गए घर की बाकी औरतों ने भी प्रिया
- 45:42का साथ दिया और फिर किसी के पास कुछ कहने
- 45:44के लिए बचा ही नहीं अब सब कुछ होने में ही
- 45:46जमा था इस वजह से बड़े पापा भी इस शादी के
- 45:48लिए मान गए और वह सभी राघव को लेकर मंडप
- 45:51में आ गए राघव को दूल्हे की जगह देख पीठ
- 45:54पीछे बातें तो बहुत बनी लेकिन मुंह पर कोई
- 45:57कुछ नहीं कह पाया। मिश्रा जी ने सभी को
- 45:59यही बताया कि उनके बेटे राहुल को कोई और
- 46:01पसंद थी और वह किसी को बिना बताए ही शादी
- 46:04से भाग गया। इसी वजह से आज सिया की शादी
- 46:07राघव से होने जा रही है। मिसेज मिश्रा जो
- 46:09सभी को यह बताने के लिए उतावली हो रही थी
- 46:12कि सिया का चरित्र खराब है। इसी वजह से
- 46:14उन्होंने यह शादी तोड़ दी। मगर उनका मकसद
- 46:16पूरा होने से पहले ही मिश्रा जी ने अपने
- 46:18बेटे को ही गलत साबित कर दिया और यही नहीं
- 46:20कि सबके सामने बोल भी दिया। इस वजह से वह
- 46:22कुछ नहीं कर पाए और गुस्से में वहां से
- 46:24चली भी गई। प्रिया जी फिर सुधा जी के पास
- 46:27आ गई और उनके नजरों में का सवाल देख सुधा
- 46:30जी बोली मैं राघव की मां हूं। उनका इतना
- 46:32ही कहना कि प्रिया जी ने उनके आगे हाथ
- 46:34जोड़ दिए और बोली बहन जी मेरा यकीन कीजिए
- 46:37मेरी सिया बहुत अच्छी है और बहुत पाक भी
- 46:40उसके बहनों ने ऐसा क्यों किया? मैं नहीं
- 46:42जानती। लेकिन मैं यह पूरे यकीन के साथ कह
- 46:44सकती हूं कि मेरे सिया का दमन बिल्कुल पाक
- 46:46साफ है और वह आगे भी आपके लफ्जों के बाहर
- 46:49नहीं जाएंगी। प्लीज उसे अपना लीजिए।
- 46:51प्रिया के हाथ नीचे करते हुए सुधा जी बोली
- 46:54आपको हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है बहन जी
- 46:56मैं समझती हूं और आप बेफिक्र हो जाइए मेरे
- 46:59घर में आपकी बेटी को पूरी इज्जत मिलेंगी
- 47:01और घर की सबसे छोटी बहू होने का मान भी और
- 47:04बस उनकी बात प्रिया जी को बहुत सुकून पहन
- 47:06पहुंचा गए घर की बाकी औरतों ने भी प्रिया
- 47:08का साथ दिया और फिर किसी के पास कुछ कहने
- 47:10के लिए बचा ही नहीं अब सब कुछ होने में ही
- 47:12जमा था इस वजह से बड़े पापा भी इस शादी के
- 47:15लिए मान गए और वह सभी राघव को लेकर मंडप
- 47:17में आ गए राघव को दूल्हे की जगह देख पीठ
- 47:20पीछे बातें तो बहुत बनी लेकिन मुंह पर कोई
- 47:23कुछ नहीं कह पाया। मिश्रा जी ने सभी को
- 47:26यही बताया कि उनके बेटे राहुल को कोई और
- 47:28पसंद थी और वह किसी को बिना बताए ही शादी
- 47:31से भाग गया। इसी वजह से आज सिया की शादी
- 47:33राघव से होने जा रही है। मिज मिश्रा जो
- 47:36सभी को यह बताने के लिए उतावली हो रही थी
- 47:38कि सिया का चरित्र खराब है। इसी वजह से
- 47:40उन्होंने यह शादी तोड़ दी। मगर उनका मकसद
- 47:42पूरा होने से पहले ही मिश्रा जी ने अपने
- 47:44बेटे को ही गलत साबित कर दिया और यही नहीं
- 47:47कि सबके सामने बोल भी दिया। इस वजह से वह
- 47:49कुछ नहीं कर पाए और गुस्से में वहां से
- 47:51चली भी गई। घूंघट की आछिपी सिया चुपचाप
- 47:54स्टेज पर खड़ी भरी आंखों से अब तक मिलते
- 47:56तानों को सुन रही थी। उसे काफी पहले ही
- 47:58स्टेज पर बुला लिया था और यहां आने के बाद
- 48:01उसे पता चला था कि उसका होने वाला पति कब
- 48:04का भाग गया है। उसकी फैमिली में से किसी
- 48:06ने भी यह जरूरी नहीं समझा कि वह उसके साथ
- 48:08वहां खड़े रहे या फिर उसे वहां से अंदर ले
- 48:11जाए। एक-एक कर वह सभी किसी कमरे में चले
- 48:13गए। तब तक सिया अकेले ही स्टेज पर खड़ी
- 48:16लोगों में हो रही बातें सुनने लगी। कोई
- 48:17उसे ताने दे रहा था तो कोई उसके नसीब को
- 48:20कोस रहा था। किसी को उसके लिए बुरा लग रहा
- 48:22था तो किसी को उस पर हंसी आ रही थी और इन
- 48:25सब बातों की वजह से सिया का मजूक दिलकांश
- 48:27की तरह टूट रहा था। फिर कुछ देर बाद सब
- 48:30स्टेज पर आ गए और ऐलान कर दिया कि उसकी
- 48:32शादी अब दूसरे लड़के से होने वाली है।
- 48:34दूसरा सिया के दिल में सबसे पहले ख्याल
- 48:37आया वह राहुल के बड़े भाई रोहित का और वह
- 48:39डर से कांप उठी नहीं। वह ऐसा नहीं चाहती
- 48:42थी। रोहित से शासी करने से बेहतर है कि वह
- 48:44अपनी जान दे दे और इसीलिए उसने वहां से
- 48:47अपने कदम उठाना चाहा। लेकिन तभी मिश्रा जी
- 48:49ने कहा कि उसकी शादी राघव से होने वाली है
- 48:52और बस इतना ही नहीं उन्होंने निसिया पर
- 48:54कोई इल्जाम ना लगाकर अपने बेटे को पूरा
- 48:56दोष दिया। इस बात से सिया के कदम वहां रुक
- 48:58गए और बाकी सब उसे हवकुंड की तरफ ले जाने
- 49:01लगे। रुकी एक राघव की आई आवाज और सब ने
- 49:04उसकी तरफ देखा। सिया के कदम भी ठिठक गए।
- 49:07उस आवाज को सुन और उसके दिल में अनचाहा डर
- 49:09बैठ गया। वह घबराते हुए वहीं खड़ी रही और
- 49:11तभी उसे कोई अपने ठीक सामने खड़ा हुआ
- 49:13महसूस हुआ। सुधा जी ने फिक्र से राघव से
- 49:16पूछा, क्या हुआ राघव? क्यों रोका तुमने?
- 49:20सुधा जी की आवाज सुन राघव ने उनके तरफ हाथ
- 49:22किया और रुकने का इशारा किया। फिर सिया के
- 49:25तरफ देखते हुए वह बोला, क्या तुम इस शादी
- 49:27के लिए तैयार हो? राघव का सवाल सुन सिया
- 49:30की आंखों में नमी छाने लगी। उसके अपनों ने
- 49:32तक के यह सवाल पूछना जरूरी नहीं समझा था
- 49:34कि क्या वह सच में शादी करना चाहती है और
- 49:37ना जाने सामने खड़ा यह शख्स कौन है जो
- 49:39उससे इतने अपनेपण से बात कर रहा है। उससे
- 49:42उसकी मर्जी पूछ रहा है। उसके आंखों से नमी
- 49:45लुढ़क कर नीचे आ गई। राघव को उसका कोई भी
- 49:48जवाब नहीं मिला। मगर उसकी हल्की सी सिसकी
- 49:51उसे सुनाई दी जिसे सुन उसे बहुत ही बुरा
- 49:53लगा। वो फिर से फिक्र से बोला अगर तुम
- 49:56नहीं चाहती कि यह शादी हो तो मेरा यकीन
- 49:58करो। मैं यह शादी नहीं होने दूंगा ना ही
- 50:00मुझसे और ना ही किसी और से तुम जो चाहोगी
- 50:03वही होगा और वैसा ही होगा तो बताओ कि क्या
- 50:06चाहती हो तुम राघव की बातों में अपनापन था
- 50:09उसके लिए फिक्र थी और उतनी ही उसके लिए
- 50:11इज्जत भी सिया को बहुत ही अपनापन महसूस
- 50:13हुआ उसकी बातों से कृष्णा जी दिल ही
- 50:16दिलसिया ने अपने भगवान कृष्णा जी को
- 50:18पुकारा और उनसे बोली आपसे वादा किया था
- 50:21मैंने कि जो भी हो मैं आज यह शादी करूंगी
- 50:24और पूरे दिल से भी निभाऊंगी भी क्या आप यह
- 50:26चाहते हैं कि मैं यह शादी करूं सिया खुद
- 50:28से ही सवाल कर रही थी और तभी उसे उसके
- 50:31बड़े पापा की आवाज सुनाई दी जिसे सुन वह
- 50:33घबरा गई। उसके बड़े पापा राघव से बोले यह
- 50:36क्या कह रहे हैं आप राघव जी आपने और आपकी
- 50:40मां जी ने अंदर खुद ही इस शादी के लिए हां
- 50:42कहा था और आप अब है कि बड़े पापा आगे कुछ
- 50:45बोल पाते उससे पहले ही राघव ने उन्हें रोक
- 50:47दिया और वह बोला इस शादी के लिए मैंने अब
- 50:50भी मना नहीं किया है। एक मां चाहती है कि
- 50:52मैं यह शादी करूं तो ऐसा ही होगा। लेकिन
- 50:54इस शादी के लिए मेरे साथ-साथ सिया की
- 50:56हांकी उतनी ही जरूरी है। कहकर राघव सिया
- 50:59के तरफ मुड़ा और उससे फिर से सवाल करते
- 51:01हुए बोला, "बताओ सिया, तुम्हारा क्या
- 51:03फैसला है? क्या तुम मुझसे शादी करोगी?
- 51:06क्या तुम मेरी हमसफर बनना चाहोगी?" राघव
- 51:09ने कहते हुए जाने अनजाने ही सही उसके आगे
- 51:12हाथ कर दिया और बिना कुछ कहे ही सिया ने
- 51:14उसका हाथ अपने नाजुक हाथों में थाम लिया।
- 51:16कुछ ही देर में शादी के सभी रस्में हुई और
- 51:19सिया ऑफिशियली सिया से सिया राघव सक्सेना
- 51:21हो गई। कृष्णा जी दिल ही दिलसिया ने अपने
- 51:24भगवान कृष्णा जी को पुकारा और उनसे बोली
- 51:27आपसे वादा किया था मैंने कि जो भी हो मैं
- 51:30आज यह शादी करूंगी और पूरे दिल से भी
- 51:32निभाऊंगी भी क्या आप यह चाहते हैं कि मैं
- 51:34यह शादी करूं। सिया खुद से ही सवाल कर रही
- 51:37थी और तभी उसे उसके बड़े पापा की आवाज
- 51:39सुनाई दी जिसे सुन वो घबरा गई। उसके बड़े
- 51:42पापा राघव से बोले यह क्या कह रहे हैं आप
- 51:45राघव जी? आपने और आपकी मां जी ने अंदर खुद
- 51:48ही इस शादी के लिए हां कहा था और आप अब है
- 51:50कि बड़े पापा आगे कुछ बोल पाते उससे पहले
- 51:53ही राघव ने उन्हें रोक दिया और वह बोला इस
- 51:56शादी के लिए मैंने अब भी मना नहीं किया है
- 51:58मां चाहती है कि मैं यह शादी करूं तो ऐसा
- 52:00ही होगा लेकिन इस शादी के लिए मेरे
- 52:03साथ-साथ सिया की हांकी उतनी ही जरूरी है
- 52:05कहकर राघव सिया के तरफ मुड़ा और उससे फिर
- 52:07से सवाल करते हुए बोला बताओ सिया तुम्हारा
- 52:10क्या फैसला है क्या तुम मुझसे शादी करोगी
- 52:13क्या तुम मेरी हमसफर बनना चाहोगी होंगी।
- 52:16राघव ने कहते हुए जाने अनजाने ही सही उसके
- 52:19आगे हाथ कर दिया और बिना कुछ कहे ही सिया
- 52:21ने उसका हाथ अपने नाजुक हाथों में थाम
- 52:23लिया। कुछ ही देर में शादी के सभी रस्में
- 52:26हुई और सिया ऑफिशियली सिया से सिया राघव
- 52:28सक्सेना हो गई। देखते ही देखते उसके विदाई
- 52:30का वक्त हो गया और कभी नहीं तो आज। सिया
- 52:33के पापा उसे गले से लगाकर रो पड़े। उसकी
- 52:36मां चाची और बड़ी मां भी बहुत रोई। उसके
- 52:38गले लग और उसका भाई शशांक भी। ऐसे ही आगे
- 52:41बदसिया अपने सभी घर वालों से मिली और आखिर
- 52:43में उसने अपने बड़े पापा के पैर छू लिए।
- 52:45उन्होंने उसे उठाकर अपने गले से लगा लिया
- 52:47और धीरे से बोले तुम जानती हो सिया मैंने
- 52:50अपने सभी बच्चों में सबसे ज्यादा तुम्हें
- 52:52प्यार किया है मगर तुमसे भी बढ़कर मुझे
- 52:55अपने खानदान की इज्जत प्यारी है तुम जब तक
- 52:57उस घर को अपना मानकर अच्छे से रहूंगी तब
- 53:00तक ही तुम्हारे लिए इस घर के दरवाजे खुले
- 53:02हैं जिस दिन किसी भी वजह से मैं फिर से
- 53:04कहता हूं कि अगर किसी भी वजह से तुमने वह
- 53:07घर छोड़ा या फिर कुछ ऐसी हरकत की जिस वजह
- 53:09से हमें शर्मिंदा होना पड़े बस उसी वक्त
- 53:12से तुम हमारे लिए मर जाऊंगी जिस तरह से वह
- 53:14दोनों लड़कियां सिया मर गई। तुम पर यकीन
- 53:16कर तुम्हें विदा कर रहा हूं। सिया मेरे इस
- 53:18यकीन को मत तोड़ो। बड़े पापा ने कहकर सिया
- 53:20के सर पर अपना हाथ रखा और उसे आशीर्वाद
- 53:22देकर गाड़ी तक छोड़ने आ गए। उन्होंने सिया
- 53:25के लिए गाड़ी का दरवाजा खोला और उसे अंदर
- 53:28बैठने का इशारा किया। तभी सिया उनसे बोली,
- 53:31मैं आपका यकीन नहीं तोडूंगी बड़े पापा और
- 53:33घर को पूरे दिल से अपनाऊंगी। बस आप मुझसे
- 53:36नाराज मत रहिए। सिया जानती थी कि उसके
- 53:38बड़े पापा ने बहुत बार अपनी वसूलों को दूर
- 53:41रखकर उन सभी की। स्पेशली सिया की हर एक
- 53:44ख्वाहिश पूरी की थी और हर बार ना चाहते
- 53:46हुए भी सिर्फ उनके खुशियों के लिए
- 53:47उन्होंने हर एक बात मानी थी। मगर जब से
- 53:49सिया की दोनों बड़ी बहनें घर से भाग गए
- 53:52थे। बस तब से ही वह इतना बदल गए थे। सिया
- 53:54ने उनकी तरफ देखते हुए उनका हाथ पकड़ा और
- 53:56अगले ही फिर एक बार उसे अपने सर पर बड़े
- 53:59पापा का हाथ महसूस हुआ और थोड़े रंधे गले
- 54:01से बोले खुश रहो और फिर उन्होंने सिया को
- 54:03अंदर बिठा दिया। वो राघव और सुधा जी के
- 54:07सामने आए और बोले जमाई सा ख्याल रखिएगा
- 54:10उसका। और फिर सुधा जी के तरफ देख उन्होंने
- 54:12अपने हाथ जोड़ दिए। सुधा जी उनसे बोली आप
- 54:15फिक्र मत कीजिएगा संधि जी आपकी बेटी अब
- 54:17हमारी जिम्मेदारी है और हम उसका अच्छे से
- 54:20ख्याल रखेंगे। सुधा जी भी फिर सबसे मिली
- 54:22और उन्होंने उन सब से विदा ले ली। सिया और
- 54:25सुधा जी पीछे बैठे थे और राघव आगे कार
- 54:27ड्राइव कर रहा था। तीनों भी फिलहाल बहुत
- 54:29खामोश थे। उन तीनों के दिल में अलग-अलग
- 54:32बातें चल रही थी। इस वजह से उनमें से किसी
- 54:35ने भी कुछ नहीं कहा। कुछ ही देर में सुधा
- 54:37जी को कविता जी का फोन आया और रिंग होते
- 54:39फोन की वजह से वह अपने ख्यालों से बाहर आ
- 54:41गए जब शादी शुरू थी तभी उन्होंने ने घर पर
- 54:44फोन कर राघव के शादी के बारे में बता दिया
- 54:46था और सिया के वेलकम की छोटी-मोटी तैयारी
- 54:49करने के लिए भी बोल दिया था यह सब सुनकर
- 54:51सब तो बहुत हैरान थे मगर फिर भी उन्होंने
- 54:53थोड़ी बहुत तैयारी कर दी थी सुधा जी ने
- 54:56फोन रिसीव किया और बोले हां कविता बोलो
- 54:59पूर्णविराम उद्धारण चिन्ह सामने से कविता
- 55:02जी बोली जी भाभी आप कब तक आ रही है तैयारी
- 55:05तो वैसे हो गई है और राज, अक्षय और कृष्णा
- 55:08तीनों भी घर आ गए हैं। मगर मोहल्ले की कुछ
- 55:10लेडीज भी आई हुई है। क्या यह ठीक रहगा ना?
- 55:13कविता जी ने थोड़े धीरे से ही कहा। सुधा
- 55:16जी को भी यह समझ आ गया कि वह धीरे से
- 55:18क्यों बात कर रही है। जरूर मोहल्ले की
- 55:19लेडीज वही आसपास ही होंगी। उन्होंने गहरी
- 55:22सांस छोड़ी और फिर कविता जी से बोली, ठीक
- 55:25है, कोई बात नहीं। वैसे भी यह बात आज ना
- 55:27कल सभी को पता चलनी ही है। तो रहने दो और
- 55:30हां, राज से कहकर उनके नाश्ते पानी का देख
- 55:32लो। बाहर से ऑर्डर करना। किचन में मत घुस
- 55:35जाना तुम। समझी सुधा जी ने एक दो और बातें
- 55:37की और फिर कॉल कट कर दी। उनकी नजर चुपचाप
- 55:40बैठे सिया पर और फिर ड्राइव कर रहे राघव
- 55:42पर गई। आराम से बैठो सिया और हां घबराने
- 55:45की जरूरत नहीं है। अब हम एक फैमिली है तो
- 55:47फिल कंफर्टेबल। सुधा जी ने प्यार से सिया
- 55:50से कहा और सिया ने हां में सर हिला दिया।
- 55:52उसके लंबे घुंघट की वजह से उसका चेहरा
- 55:54नहीं दिख रहा था और अब जाकर सुधा जी को
- 55:56सिया का चेहरा देखने की तमन्ना हुई।
- 55:58मिश्रा जी की बातों से यह तो जाहिर था कि
- 56:00सिया बहुत ही संस्कारी और अच्छी बच्ची है।
- 56:02लेकिन वो दिखती कैसी है? यह बात तो उन्हें
- 56:05भी पता नहीं थी। इस वजह से उन्हें उसका
- 56:07चेहरा देखने की तमन्ना हुई जिसे उन्होंने
- 56:09अपने दिल में ही रखा। यह सोचकर कि घर जाकर
- 56:12वह सबसे साथ ही उसकी मुंह दिखाई कर लेंगे।
- 56:15कुछ ही देर में उनकी गाड़ी एक खूबसूरत से
- 56:17घर के गेट के अंदर दाखिल हुई और सुधा जी
- 56:19ने नीचे उतर कर सिया के तरफ का गेट खोल
- 56:22दिया। वो उससे बोली, आओ सिया तुम्हारा
- 56:24हमारे घर में स्वागत है। सुधा जी की बात
- 56:26सुन। सिया धीरे-धीरे बाहर आए और उन्होंने
- 56:28उसे सीधे राघव के पास ले जाकर दरवाजे के
- 56:31सामने खड़ा कर दिया। कविता जी ने आरती की
- 56:34थाल लाकर सुधा जी के पास दे दी और सुधा जी
- 56:37ने आरती उतारकर सिया को चावल के कलश को
- 56:39लाकर अंदर आने के लिए बोला। आसपड़ोस की
- 56:41औरतें बस सिया के नाजुक काया को निहारने
- 56:43में लगी हुई थी। और जब सिया ने कलश को
- 56:46गिराने के लिए अपना पैर आगे किया तब उसके
- 56:48खूबसूरत घोर पैर को देखकर हैरान हो गई या
- 56:50फिर यह कहे कि सिया के गोर पैर में जचते
- 56:52गोल्ड की उस हैवी से पायल को देख हैरान हो
- 56:54गई। कलश को गिराते हुए ही सिया अंदर घर
- 56:57में आए और फिर सुधा जी उसे अंदर ले गई।
- 56:59कविता जी बोली राघव तुम और कविता जी एक पल
- 57:03रुकी। राघव के दुल्हन का नाम क्या था? यह
- 57:06तो उन्हें पता ही नहीं था। उन्हें यूं
- 57:07खामोश हुआ देख राघव ही बोला सिया सिया नाम
- 57:10है इसका। कविता जी मुस्कुराए और हां में
- 57:13सर हिलाकर बोली तुम और सिया जाकर सबसे
- 57:16पहले भगवान जी का आशीर्वाद ले लो। और फिर
- 57:18सभी बड़ों का कविता जी की बात सुन। राघव
- 57:20ने हां में सर हिलाया और आगे जाने के लिए
- 57:22कदम बाए। लेकिन फिर कुछ सोचकर उसने सिया
- 57:25का हाथ अपने हाथ में लिया और उसे घर में
- 57:27बने मंदिर की ओर ले गया। उन दोनों को जाता
- 57:29हुआ सब देखते ही रह गए। राघव सिया ने
- 57:32भगवान के मूर्ति के आगे हाथ जोड़े और तभी
- 57:35राघव उससे बोला डरने की कोई बात नहीं है
- 57:38सिया फील कंफर्टेबल कोई तुमसे कुछ नहीं
- 57:40कहेंगा। ओके। राघव की बात सुन सिया जल्दी
- 57:44से उसकी तरफ मुड़ी और हां में सर हिला
- 57:46दिया। वह खुद ही जानती थी कि कार में
- 57:47बैठने के बाद से उसे कितना डर लग रहा था।
- 57:50लेकिन उसके इस डर को बिना कहे ही राघव ने
- 57:52समझ लिया था और अब उसे हौसला देकर उसे
- 57:55शांत भी करवा दिया। सिया धीरे से
- 57:57बुदबुदाई। थैंक यू। उसके यह लफ्ज इतने
- 57:59धीरे थे कि राघव को कुछ सुनाई ही नहीं
- 58:00दिया और वह उसकी ओर झुक कर बोला कुछ कहा
- 58:03क्या? सिया हट बढ़ा गई। उसके यूं इस तरह
- 58:06करीब आने पर और उसने जल्दी से ना में सर
- 58:08हिलाया और एक कदम पीछे होने को हुई। राघव
- 58:11को भी समझ आ गया कि वह कुछ ज्यादा ही उसके
- 58:13करीब हो गया है। इस वजह से वह दूर हट गया
- 58:16और बोला, "सॉरी वो मेरा तुम्हें डराने का
- 58:18इरादा नहीं था। बस राघव को समझ नहीं आ रहा
- 58:21था कि वह कैसे एक्सप्लेन करें। वह खामोश
- 58:23हो गया। कोई बात नहीं सिया का फिर से वह
- 58:26धीरे से गुनगुनाना जो अब भी राघव के कानों
- 58:28तक नहीं पहुंचा। लेकिन उसने अब उसके करीब
- 58:31झुकने की गलती नहीं की और उसके सामने हाथ
- 58:33कर बोला चले। सिया ने भी फिर अपना हाथ
- 58:36उसके हाथ में दे दिया और अंदर की ओर चले
- 58:38गए। उसी वक्त बाहर हॉल में मोहल्ले की सभी
- 58:41लेडी सिया के बारे में जानने के लिए
- 58:43उत्सुक थी। उन्हीं में से एक मिसेज पटेल
- 58:45बोली मिसेज सक्सेना राघव की शादी ऐसे
- 58:48अचानक कैसे तय कर दिया आपने लव शव का तो
- 58:51कोई चक्कर नहीं था ना नहीं मेरा मतलब ही
- 58:54है कि आपके तीनों बड़े बेटे अब भी शादी के
- 58:56बाकी है और घर के सबसे छोटे बेटे की शादी
- 58:59यह बात कुछ रास नहीं आई मिसेज पटेल की बात
- 59:03से सहमति जताते हुए और एक लेडीज मिसेज शाह
- 59:05बोली लव शव ही होगा या फिर कहीं ऐसा तो
- 59:08नहीं है ना लड़की के घर वालों को इन दोनों
- 59:11के बारे में पता चल गया और फिर गुस्से में
- 59:13उन्होंने ने इस लड़की की क्या नाम था?
- 59:15हासिया की शादी कई और तय कर दी और फिर
- 59:17आपने जाकर मिसेज शाह अपनी बात पूरी कर
- 59:20पाती उससे पहले ही कृष्णा गुस्से से बोला
- 59:22क्या आपको यह कोई फिल्म नजर आ रही है जो
- 59:25इतनी फिल्मी स्टोरी आप बना रही है कृष्णा
- 59:28की गुस्से भरी आवाज सुन सुधा जी ने उसे
- 59:30पुकारा और फिर मिसेज शाह और बाकी सबके तरफ
- 59:33देखकर बोली आजकल के जमाने में कहा अरेंज
- 59:35मैरिज होती है मिसेज शाह और अगर मैं गलत
- 59:38नहीं हूं तो शायद आपके बेटे और हां आपकी
- 59:40बेटी दोनों ने भी लव मैरिज ही की है ना तो
- 59:43फिर मेरे बेटे की लव मैरिज का आप बखेड़ा
- 59:45क्यों खड़ा कर रही है? सुधा जी की वह सख्त
- 59:48आवाज सुन मिसेज शाह को भी गुस्सा आ गया और
- 59:50वह बोली हां कि हे मेरे बच्चों ने लव
- 59:53मैरिज लेकिन उसमें भी दोनों फैमिली की
- 59:55रजामंदी थी आपकी तरह नहीं ऐसे अचानक पूर्ण
- 59:58विराम उद्धारण चिन्ह मिसेज शाह पूरा बोल
- 1:00:01भी नहीं पाई थी तब तक सुधा जी बोली अचानक
- 1:00:04नहीं यह शादी पहले से ही होना तय थी राघव
- 1:00:06ने हमें सिया के बारे में बताया था और हम
- 1:00:09सुधा जी आगे बोल पाती उससे पहले ही शशांक
- 1:00:12और आलोक सिया के भाई दरवाजे पर आ गए
- 1:00:14उन्होंने से सबको नमस्ते बोला और फिर आगे
- 1:00:16आगे आलोक बोला वो हम सीयू का सामान लेकर
- 1:00:19आए थे। सॉरी वो आपका एड्रेस थोड़ा अंदर
- 1:00:21होने की वजह से गाड़ियों की आने में
- 1:00:23दिक्कत हो गई। हम आओ अंदर आओ आलोक और
- 1:00:26शशांक सिया घर के मंदिर में आशीर्वाद लेने
- 1:00:28गई है। आती ही होंगी। अब सुधा जी ने पहले
- 1:00:31आलोक से कहा और शशांक जो इधर-उधर अपनी बहन
- 1:00:33को तलाश रहा था उसे भी बता दिया।
- 1:00:37एपिसोड 11 से 20 डिस्क्लेमर यह कहानी पूरी
- 1:00:41तरह काल्पनिक है। यह सिर्फ दर्शकों के
- 1:00:43मनोरंजन के लिए बनाई गई है। इसमें दर्शाए
- 1:00:46गए सभी पात्र, नाम, उत्पाद और घटनाएं पूरी
- 1:00:49तरह काल्पनिक है। यह कहानी किसी भी तरह से
- 1:00:52किसी भी व्यक्ति के भावनाओं, प्रथाओं,
- 1:00:54परंपराओं और विश्वासों के अपमान नहीं करती
- 1:00:57है। और कहानी में बताए गए सभी चीजों का
- 1:01:00मात्र कहानी के लेखक द्वारा बनाई गई लेखक
- 1:01:02की अपनी एक कल्पना है। बैक टू स्टोरी।
- 1:01:05मिसेज पटेल की बात से सहमति जताते हुए और
- 1:01:08एक लेडीज मिसेज शाह बोली लव शव ही होगा या
- 1:01:11फिर कहीं ऐसा तो नहीं है ना लड़की के घर
- 1:01:13वालों को इन दोनों के बारे में पता चल गया
- 1:01:15और फिर गुस्से में उन्होंने ने इस लड़की
- 1:01:17क्या नाम था हासिया की शादी कहीं और तय कर
- 1:01:20दी और फिर आपने जाकर मिसेज शाह अपनी बात
- 1:01:23पूरी कर पाती उससे पहले ही कृष्णा गुस्से
- 1:01:25से बोला क्या आपको यह कोई फिल्म नजर आ रही
- 1:01:28है जो इतनी फिल्मी स्टोरी आप बना रही है
- 1:01:31कृष्णा की गुस्से भरी आवाज सुन सुधा जी ने
- 1:01:33उसे पुकारा और फिर मिसेज शाह और बाकी सब
- 1:01:36के तरफ देखकर बोली आजकल के जमाने में कहा
- 1:01:38अरेंज मैरिज होती है मिसेज शाह और अगर मैं
- 1:01:41गलत नहीं हूं तो शायद आपके बेटे और हां
- 1:01:43आपकी बेटी दोनों ने भी लव मैरिज ही की है
- 1:01:45ना तो फिर मेरे बेटे की लव मैरिज का आप
- 1:01:48बखेड़ा क्यों खड़ा कर रही है सुधा जी की
- 1:01:51वो सख्त आवाज सुन मिसेज शाह को भी गुस्सा
- 1:01:53आ गया और वह बोली हां कि हे मेरे बच्चों
- 1:01:56ने लव मैरिज लेकिन उसमें भी दोनों फैमिली
- 1:01:58की रजामंदी थी आपकी तरह नहीं ऐसे अचानक
- 1:02:01पूर्ण विराम उद्धारण चिन्ह मिसेज शाह पूरा
- 1:02:04बोल भी नहीं पाई थी। तब तक सुधा जी बोली
- 1:02:07अचानक नहीं यह शादी पहले से ही होना तय
- 1:02:09थी। राघव ने हमें सिया के बारे में बताया
- 1:02:11था और हम सुधा जी आगे बोल पाती उससे पहले
- 1:02:15ही शशांक और आलोक सिया के भाई दरवाजे पर आ
- 1:02:17गए। उन्होंने से सबको नमस्ते बोला और फिर
- 1:02:20आगे आलोक बोला वो हम सीयू का सामान लेकर
- 1:02:22आए थे। सॉरी वो आपका यह ड्रेस थोड़ा अंदर
- 1:02:25होने की वजह से गाड़ियों की आने में दिक्त
- 1:02:26हो गई। हम आओ अंदर आओ आलोक और शशांक सिया
- 1:02:30घर के मंदिर में आशीर्वाद लेने गई है आती
- 1:02:33ही होंगी अब सुधा जी ने पहले आलोक से कहा
- 1:02:35और शशांक जो इधर-उधर अपनी बहन को तलाश रहा
- 1:02:37था उसे भी बता दिया जी नहीं आंटी हम सोच
- 1:02:41रहे हैं कि पहले सारा सामान उतार देते
- 1:02:44हैं। वो गाड़ियों को जाना है ना कहां रखें
- 1:02:46सभी सामान। आलोक ने कहा और तभी उसकी नजर
- 1:02:49राघव का हाथ थाम कर आते हुए सिया पर गई।
- 1:02:52सिया अपने भाई शशांक को देखकर खुश हो गई
- 1:02:54थी और आलोक पर नजर जाते ही थोड़ा डर भी
- 1:02:57गई। शशांक के तरफ जाते उसके कदम रुक गए और
- 1:02:59वह फिर से राघव के पास जाकर खड़ी हो गई।
- 1:03:02आलोक की बात सुन मोहल्ले में की ही एक और
- 1:03:05लेडी बोली सामान ऐसा कितना सामान ले आए हो
- 1:03:08तुम नई दुल्हन का जरा हम भी तो देखे कहते
- 1:03:11हुए वह बाहर की ओर जाने लग गई और उन्हें
- 1:03:13देख बाकी सभी औरतें और घर वाले भी बाहर
- 1:03:15चले गए। गाड़ियों की आवाज तो उन्होंने भी
- 1:03:18सुनी थी। लेकिन वह गाड़ियां उन्हीं के घर
- 1:03:20के सामने आकर खड़ी है। इस बात का अंदाजा
- 1:03:22उन्हें नहीं था। बाहर आने के बाद सभी को
- 1:03:25दो बड़े-बड़े ट्रक पूरी तरह सामान से भरे
- 1:03:27हुए दिखाई दिए और एक ब्रांड न्यूकर भी
- 1:03:29उन्हें दिखाई दी जिसे देख सब हैरान हो गए।
- 1:03:32मिसेज मिश्रा ने सिया के फैमिली से ढेर
- 1:03:34सारे दहेज की डिमांड की थी और उसके घर
- 1:03:36वालों ने भी सभी डिमांड्स को पूरा किया
- 1:03:38था। अब वही सामा उन्होंने राघव के घर भी
- 1:03:40भिजवा दिया था। राघव ने इतने सारे चीजों
- 1:03:43को देखा और गुस्से से बोला, "यह सब क्या
- 1:03:45है आलोक?"
- 1:03:46क्या तुम मुझे बताओगे? शशांक राघव का
- 1:03:49गुस्सा देख डर गया और उसकी नजर सिया पर गई
- 1:03:52जो डर से कांप रही थी। उसे बचपन से ही
- 1:03:54किसी को गुस्से में या फिर ऊंची आवाज में
- 1:03:56बात करता देख बहुत डर लगता था और अब भी
- 1:03:58उसे राघव का गुस्सा देख डर लगने लग गया।
- 1:04:01वह जल्दी से बोला जीजा जी यह सब सब सिया
- 1:04:04के लिए है। हमारे वहां प्रथा होती है। हम
- 1:04:06बेटियों को खाली हाथ ससुराल नहीं भेजते।
- 1:04:08शशांत किसी भी तरह राघव का गुस्सा शांत
- 1:04:11करना चाहता था। राघव के इस रूप को देख उसे
- 1:04:13सिया के लिए बहुत बुरा लग रहा था। तभी
- 1:04:16राघव बोला और हमारे यहां बहुएं अपने साथ
- 1:04:19दहेज नहीं बस सबके लिए दिल में अपनापन और
- 1:04:21बहुत सारा प्यार लेकर आती है। तो यह जो
- 1:04:23कुछ भी सामान तुम लाए हो ना उसे वापस ले
- 1:04:26जाओ। राघव की बात सुन शशांक को अब थोड़ा
- 1:04:28बेहतर महसूस हुआ। तभी आलोक बोला ऐसे कसी
- 1:04:32जीजा जी यह सब तो आलोक उसे समझाना चाहता
- 1:04:35था कि उसका और सिया का इन सारी चीजों पर
- 1:04:37हक है। मगर राघव ने हाथ दिखाकर उसे रोक
- 1:04:40दिया और बोला यह सब वापस जा रहा है आलोक
- 1:04:43और अब मैं कुछ सुनना नहीं चाहता। राघव की
- 1:04:45बात सुन सुधा जी को ही बीच में गिरना पड़ा
- 1:04:47और वह बोली आलोक बेटा राघव सही कह रहा है
- 1:04:50हमें बस स्याही चाहिए तो यह सब तुम वापस
- 1:04:52लेकर जाओ और चलो अब अंदर आओ मैं तुम्हें
- 1:04:55बिना चाय नाश्ता किए हुए नहीं जाने दूंगी
- 1:04:57सुधा जी फिर बाकी सबके साथ उन दोनों को भी
- 1:04:59अंदर लेकर आ गई कविता जी ने राज अक्षय और
- 1:05:03कृष्णा की मदद से सभी को चाय नाश्ता दिया
- 1:05:05और अब सभी सिया का चेहरा देखने के लिए जिद
- 1:05:08करने लगे सुधा जी के साथ-साथ बाकी सभी घर
- 1:05:10वाले यहां तक कि राघव भी सिया का चेहरा
- 1:05:12देखने लिए बेताब हो रहा था। भूनघट के आड़
- 1:05:15में से उसे और सुधा जी को सिया के चेहरे
- 1:05:17की झलक मिली थी। लेकिन उन्होंने भी अब तक
- 1:05:19उसका पूरा चेहरा नहीं देखा था। इसी वजह से
- 1:05:21सभी के बातों का मान रखते हुए सुधा जी आगे
- 1:05:23आए और उन्होंने सिया के घंघट को हटा दिया
- 1:05:26और बस पूरे हॉल में खामोशी छा गई। सिया का
- 1:05:29चांद से भी ज्यादा प्यारा चेहरा देख बेहद
- 1:05:31खूबसूरत चॉकलेटी आंखें। दूध सा गोरा रंग
- 1:05:34और मक्खन सी मुलायम स्किन, छोटे करनेदार
- 1:05:37ओठ और उसके ऊपर जचता वो छोटा सा तिल। मानो
- 1:05:40उसे हर बुरी नजर से बचाने के लिए ही लगाया
- 1:05:42गया हो। कमर तक आते बाल और उस पर सजाए गए
- 1:05:45हुए गजरे। उस लाल रंग के शादी के जोड़े
- 1:05:47में वह किसी खूबसूरत परी की तरह देख रही
- 1:05:49थी। नाक में जचती ना, कानों में बड़े-बड़े
- 1:05:52गोल्ड एयरिंग्स, गले में जचता वो बड़ा सा
- 1:05:54गोल्ड का हार, चोकर और एक लंबा और एक छोटा
- 1:05:57गोल्ड का मंगलसूत्र, हाथ में हरी चुइयों
- 1:05:59के साथ जचते सोने के हैवी कंगन और पैरों
- 1:06:02में भी पहनी हुई गोल्ड की पायल पहनी बैठी
- 1:06:04हुई 18 साल की सिया बेहद खूबसूरत दिखाई दे
- 1:06:06रही थी। वहां मौजूद सभी उसकी खूबसूरती और
- 1:06:09उसने पहने हुए गहने देखकर काफी हैरान थे।
- 1:06:12उन्हें तो क्या सुधा जी को भी बिलीव नहीं
- 1:06:14हो रहा था कि सिया इतनी ज्यादा खूबसूरत
- 1:06:16होंगी। दिल ही दिल उन्हें भी अपने फैसले
- 1:06:18पर गर्व हुआ कि उन्होंने राघव को इस शाई
- 1:06:20के लिए तैयार किया और यह इतनी प्यारी बहू
- 1:06:22उनके घर में आ गई। एक-एक कर सभी सिया को
- 1:06:25करीब आकर देखने लगे और उसकी तारीफ करने
- 1:06:27लगे। वही सिया ने भी एक-एक कर उन सबके पैर
- 1:06:29छूकर उनका दिल और भी जीत लिया। राघव दूर
- 1:06:32से ही खड़ा होकर सिया को देख रहा था। हां,
- 1:06:34वह जानता था कि सिया उम्र में छोटी है।
- 1:06:37लेकिन अब उसके चेहरे को देख वह उसे
- 1:06:39कंफ्यूजन हो गया कि क्या वाकई में उसने 18
- 1:06:42साल भी पूरे किए हैं या नहीं। ऊपर से उसके
- 1:06:44पहने हुए गहने जिसे देख राघव को सिया के
- 1:06:46घर वालों पर बहुत ही गुस्सा आ गया। सिर्फ
- 1:06:49इसीलिए कि उसके बड़ी बहनें अपनी प्यार के
- 1:06:51साथ भाग कर दी गई है। सिया के पेरेंट्स
- 1:06:53उसके साथ इस तरह से बिहेव कर रहे थे। अगर
- 1:06:55वह उसकी शादी कराना ही चाहते थे तो कोई धन
- 1:06:58का अच्छी फैमिली ढूंढते। यह इस तरह दहेज
- 1:07:00के लालची फैमिली से उसका रिश्ता जोड़ने की
- 1:07:02क्या जरूरत थी? बाहर खड़ी हुई सामान से
- 1:07:05भरी हुई गाड़ियां और सिया को इतने ज्यादा
- 1:07:07गहनों में सजा देख राघव को समझते देर नहीं
- 1:07:10लगी कि इस सब की डिमांड भी उसके पहले होने
- 1:07:12वाले ससुराल ने की थी और सिया के घर वालों
- 1:07:14ने वह मान भी ली थी क्या उन्हें सिया को
- 1:07:16कोई फिक्र नहीं थी। ऐसे ही कई सारे सवालात
- 1:07:19उसके दिमाग में घूम रहे थे और अब उसे सर
- 1:07:22दर्द होना शुरू हो गया था। राघव का बस
- 1:07:24चलता तो वह उन सारी गहनों को भी लौटा
- 1:07:26देता। लेकिन वह बिना सिया की मर्जी जाने
- 1:07:28उन्हें वापस करने के लिए नहीं बोल सकता
- 1:07:30था। इस वजह से खामोश ही रहा। अपनी बहन की
- 1:07:33होती तारीफ देख आलोक और शशांक को बहुत
- 1:07:35अच्छा लग रहा था। वहां आए सभी मेहमान भी
- 1:07:38चले गए और अब उन्हें भी देर हो रही थी। इस
- 1:07:40वजह से वह खड़े हुए और सिया के सर पर हाथ
- 1:07:43रखकर उसे आशीर्वाद देकर सभी घर वालों से
- 1:07:45बोले अब हम जाने की इजाजत चाहेंगे वो काफी
- 1:07:48लेट हो रहा है ना। बस इसीलिए आलोक ने सभी
- 1:07:51से इजाजत मांगी और सभी ने हां में सर हिला
- 1:07:53दिया। आलोक फिर शशांत की ओर मुड़ा और बोला
- 1:07:56सिया के कपड़ों की और जरूरतों के सामान की
- 1:07:58बैग लेकर आओ। उसे देकर चलते हैं। उसकी बात
- 1:08:01सुन। शशांक बाहर गया और एक-एक कर चारप बैग
- 1:08:04लेकर आ गया। राघव की तरफ देखते हुए वह
- 1:08:07बोला, वह आपका कमरा कहां है? मैं इतने
- 1:08:09बग्स अंदर रख आता। शशांक की बात सुन
- 1:08:12कृष्णा बोला, नहीं शशांक इसकी जरूरत नहीं
- 1:08:15है। हम सारा सामान अंदर रख आएंगे। कृष्ण
- 1:08:17की बात सुन उसने सिर्फ हां में सर हिलाया
- 1:08:19और आलोक की ओर देखा। उन दोनों ने भी फिर
- 1:08:21सभी बड़ों का आशीर्वाद लिया और चले गए। अब
- 1:08:24सिया वहां अकेली थी और उसे अब थोड़ा डर सा
- 1:08:27लग रहा था। अपने परिवार से दूर अनजान
- 1:08:29लोगों में अनजान घर में रहने के सोच से ही
- 1:08:32वह बेचैन हो रही थी और उसकी यही बेचैनी
- 1:08:34कविता जी ने समझ ली वो उसके करीब आए और
- 1:08:36प्यार से बोली सिया बेटा चलो आओ मैं
- 1:08:39तुम्हें तुम्हारा कमरा दिखाती हूं फ्रेश
- 1:08:41होकर तुम चेंज कर लेना ठीक है कविता जी का
- 1:08:44ममता भरा स्पर्श और बातों में की मिठास
- 1:08:46देख सिया को थोड़ा बेहतर फील हुआ और उसने
- 1:08:48हां में सर हिलाया उनके साथ वह ऊपर के
- 1:08:50मंजिल पर बने राघव के कमरे में गई कविता
- 1:08:53जी ने उसे कमरा दिखाया और बोली जाओ जाकर
- 1:08:56अच्छे से शावर लो और फ्रेश हो जाओ। मैं
- 1:08:58तुम्हारी बैगस किसी से मंगवाती हूं। कविता
- 1:09:00जी ने कहा और वापस जाने के लिए मुनि तब तक
- 1:09:03कृष्णा और अक्षय सारे बैग्स लाकर ऊपर आ गए
- 1:09:06थे। उन्होंने वह बैग दरवाजे में एक तरफ रख
- 1:09:08दी और बाहर चले गए। कविता जी ने भी उसे
- 1:09:10फ्रेश होकर आने का इशारा किया और वह नीचे
- 1:09:12चली गई। सिया ने फिर उसकी बैग में से एक
- 1:09:14साड़ी निकाली और बाथरूम में चली गई। कविता
- 1:09:18जी के नीचे आते ही सुधा जी ने उन्हें और
- 1:09:20बाकी सबको हर एक बात बतानी शुरू कर दी जो
- 1:09:22वह बीती थी और उनकी बातों को सुन कविता जी
- 1:09:25और संजय की को सिया के लिए बुरा लगा तो
- 1:09:27बाकी तीनों भाइयों को गुस्सा आया राज राघव
- 1:09:29के कंधे पर हाथ रखकर बोला आई एम सो प्राउड
- 1:09:32ऑफ यू राघव तूने सिया से शादी कर बहुत ही
- 1:09:34अच्छा काम किया है। राघव राज की बात सुन
- 1:09:37फीकी सी मुस्कान मुस्कुराया और तीनों को
- 1:09:39समझ आ गया कि वह राघव बहुत ही ज्यादा
- 1:09:42डिस्टर्ब है। राघव ने फिर गहरी सांस छोड़ी
- 1:09:44और एक नजर अपनी भाइयों की तरफ देखा।
- 1:09:46कृष्णा से बोला कृष्ण मुझे कुछ काम है
- 1:09:48बाहर चल जाकर आते हैं और फिर इजाजत लेने
- 1:09:51के लिए राघव ने अपने घर के सभी बड़ों की
- 1:09:53तरफ देख इजाजत ली कृष्णा और वह दोनों बाहर
- 1:09:56चले गए वही राज और अक्षय आगे क्या करना है
- 1:09:58यह सोचने लगे अब सिया वहां अकेली थी और
- 1:10:01उसे अब थोड़ा डर सा लग रहा था अपने परिवार
- 1:10:03से दूर अनजान लोगों में अनजान घर में रहने
- 1:10:06के सोच से ही वह बेचैन हो रही थी और उसकी
- 1:10:08यही बेचैनी कविता जी ने समझ ली वो उसके
- 1:10:11करीब आई और प्यार से बोली सिया बेटा चलो
- 1:10:14आओ मैं तुम्हें तुम्हारा कमरा दिखाती हूं
- 1:10:16फ्रेश होकर तुम चेंज कर लेना। ठीक है।
- 1:10:18कविता जी का ममता भरा स्पर्श और बातों में
- 1:10:20की मिठास देख सिया को थोड़ा बेहतर फील हुआ
- 1:10:23और उसने हा में सर हिलाया। उनके साथ वो
- 1:10:25ऊपर के मंजिल पर बने राघव के कमरे में गई।
- 1:10:28कविता जी ने उसे कमरा दिखाया और बोली जाओ
- 1:10:31जाकर अच्छे से शावर लो और फ्रेश हो जाओ।
- 1:10:33मैं तुम्हारी बैग्स किसी से मंगवाती हूं।
- 1:10:35कविता जी ने कहा और वापस जाने के लिए
- 1:10:37मुनी। तब तक कृष्णा और अक्षय सारे बैग्स
- 1:10:40लाकर ऊपर आ गए थे। उन्होंने वह बैग्स
- 1:10:42दरवाजे में एक तरफ रख दी और बाहर चले गए।
- 1:10:44कविता जी ने भी उसे फ्रेश होकर आने का
- 1:10:46इशारा किया और वह नीचे चली गई। सिया ने
- 1:10:48फिर उसकी बैग में से एक साड़ी निकाली और
- 1:10:50बाथरूम में चली गई। कविता जी के नीचे आते
- 1:10:54ही सुधा जी ने उन्हें और बाकी सबको हर एक
- 1:10:56बात बतानी शुरू कर दी जो वह बीती थी और
- 1:10:58उनकी बातों को सुन कविता जी और संजय की
- 1:11:00कुसिया के लिए बुरा लगा तो बाकी तीनों
- 1:11:03भाइयों को गुस्सा आया। राज राघव के कंधे
- 1:11:05पर हाथ रखकर बोला आई एम सो प्राउड ऑफ यू
- 1:11:07राघव तूने सिया से शादी कर बहुत ही अच्छा
- 1:11:09काम किया है। राघव राज की बात सुन फीकी सी
- 1:11:13मुस्कान मुस्कुराया और तीनों को समझ आ गया
- 1:11:15कि वह राघव बहुत ही ज्यादा डिस्टर्ब है।
- 1:11:17राघव ने फिर गहरी सांस छोड़ी और एक नजर
- 1:11:20अपनी भाइयों की तरफ देखा। कृष्णा से बोला
- 1:11:22कृष्ण मुझे कुछ काम है बाहर। चल जाकर आते
- 1:11:25हैं और फिर इजाजत लेने के लिए राघव ने
- 1:11:27अपने घर के सभी बड़ों की तरफ देख इजाजत
- 1:11:29ली। कृष्णा और वह दोनों बाहर चले गए। वही
- 1:11:31राज और अक्षय आगे क्या करना है यह सोचने
- 1:11:34लगे। सिया शावल लेकर बाहर आ गई थी और उसे
- 1:11:37अब बहुत हल्का महसूस हो रहा था। उसका वह
- 1:11:39शादी का जोड़ा और गहने यह कहने में गैर
- 1:11:42नहीं होगा कि वह उसके वजन से ज्यादा थे और
- 1:11:44अब वह सब निकालने के बाद सिया को काफी
- 1:11:46अच्छा महसूस हो रहा था। उसने जल्दी से एक
- 1:11:48लाल रंग की खूबसूरत सी साड़ी पहनी और अपना
- 1:11:51छोटा मंगलसूत्र और बड़ा मंगलसूत्र गले में
- 1:11:53रख बाकी ज्वेलरी अच्छे से बॉक्स एक्स में
- 1:11:55पैक कर दी। सारे बग्स को एक और अच्छे से
- 1:11:57सेट करके रख दिया और बेड पर जाकर बैठ गई।
- 1:12:00उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें।
- 1:12:03उसके पास उसका फोन भी नहीं था जिससे वह
- 1:12:05अपने मां से या फिर अपने फ्रेंड्स से बात
- 1:12:07कर सके। वह उदास सी वही बैठी रही। तभी उसे
- 1:12:10दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी। सिया ने जल्दी
- 1:12:12से अपना सर पल्लू से कवर किया और दरवाजे
- 1:12:14की तरफ आकर उसे खोल दिया। छोटी मां कविता
- 1:12:17की मुस्कुराते हुए अंदर आए और बोली, बहुत
- 1:12:20प्यारी लग रही हो बेटा। लेकिन यह पल्ला
- 1:12:22क्यों लिया? अगर ना भी लो तो कोई मसला
- 1:12:25नहीं है। चलो अब नीचे चलते हैं। तुम्हें
- 1:12:27भी तो पता चलना चाहिए ना कि तुम्हारे इस
- 1:12:29नए घर में कौन-कौन है। छोटी मां के चेहरे
- 1:12:32पर की मुस्कान देख सिया को बहुत ही अच्छा
- 1:12:34और अपनापन महसूस हुआ। उसने हां में सर
- 1:12:36हिलाया और उनके साथ बाहर जाने के लिए
- 1:12:38निकली। तभी उसे कुछ याद आया और वह रुक गई।
- 1:12:41छोटी मां को उसके रुकने का एहसास हुआ। इस
- 1:12:43वजह से उन्होंने पीछे मुड़कर देखा और बोली
- 1:12:46क्या हुआ बेटा? कोई प्रॉब्लम है क्या?
- 1:12:49छोटी मां की बात सुन सिया उसकी मीठी सी
- 1:12:51आवाज में बोली नहीं प्रॉब्लम नहीं है
- 1:12:53लेकिन वो वो मेरी ज्वेलरी आंटी मैं आपको
- 1:12:56क्या कहकर पुकारूं सिया को समझ ही नहीं आ
- 1:12:59रहा था कि वो उन्हें क्या करके पुकारे और
- 1:13:02उसका सवाल सुन छोटी मां मुस्कुराते हुए
- 1:13:04बोली वैसे तो रिश्ते में मैं तुम्हारी
- 1:13:06मामी और बुआ दोनों लगती हूं लेकिन सभी
- 1:13:09बच्चे मुझे छोटी मां कहकर पुकारते हैं तो
- 1:13:12तुम भी वही कहकर पुकारो छोटी मां की बात
- 1:13:14सुन सिया ने हां में सर तो हिलाया लेकिन
- 1:13:16उसके चेहरे पर कंफ्यूजन भी था और उसे
- 1:13:18कंफ्यूज हुआ। देख छोटी मां मुस्कुराते हुए
- 1:13:20बोली सिया मैं राघव की बुआ हूं। संजय भाई
- 1:13:23मेरे सगे बड़े भाई है और सुधा भाभी मेरी
- 1:13:26भाभी है। फिर आगे जाकर सुधा भाभी के भाई
- 1:13:28अजय जी से मेरी शादी हो गई और मैं फिर
- 1:13:30राघव की मामी बन गई। छोटी मां ने कहा और
- 1:13:32फिर वह थोड़ी उदास हो गई। सिया को उनके
- 1:13:35चेहरे पर हुए यह बदलाव समझ आ गए और वह
- 1:13:38बोली क्या मैंने कुछ गलत कह दिया छोटी मां
- 1:13:41आप इतनी उदास क्यों हो गई। सिया को समझ
- 1:13:44नहीं आ रहा था कि उससे ऐसी कौन सी गलती हो
- 1:13:46गई कि छोटी मां इतनी उदास हो गई और फिर
- 1:13:48उसके चेहरे पर भी नाराजगी छा गई। छोटी मां
- 1:13:50को उसका यूं उदास होना बिल्कुल अच्छा नहीं
- 1:13:52लगा। सिया का फुल सा चेहरा एक पल में
- 1:13:55मुरझा गया था। उन्होंने छोटी मां ने उसका
- 1:13:58चेहरा अपने हाथ में थामा और प्यार से
- 1:13:59बोली। नहीं सिया मैं तुम्हारी वजह से उदास
- 1:14:03नहीं हूं। वह तो बस अक्षय और कृष्णा मेरे
- 1:14:05दोनों बच्चे अभी तुम उनसे नीचे मिलूंगी
- 1:14:08ही। वह जब दो साल के थे तब अजय जी का
- 1:14:10देहांत हो गया और फिर हम यही आकर रहने
- 1:14:12लगे। सुधा भाभी ने ही हमें उस वक्त संभाला
- 1:14:14तो बस अब उनकी याद आ गई। इस वजह से थोड़ी
- 1:14:17सी उदास हो गई मैं। वरना तो तुम्हारी वजह
- 1:14:19से कुछ भी नहीं है। चलो अब छोड़ो भी यह
- 1:14:21बातें। अब हम नीचे चलते हैं। छोटी मां आगे
- 1:14:24जाने लगी। तभी सिया ने उन्हें पीछे से
- 1:14:26आवाज दी। सिया फिर हिचकिचाते हुए उनसे
- 1:14:29बोली, वो छोटी मां मेरी ज्वेलरी क्या आप
- 1:14:31यह अपने पास रख देंगी? मुझे डर है कि मैं
- 1:14:34कहीं इसे खो ना दूं। सिया ने मासूमियत से
- 1:14:37कहा और छोटी मां को उस पर बहुत ही प्यार
- 1:14:39आया। जाहिर सी बात है उनके घर में सभी
- 1:14:41लड़के ही थे तो उन्हें लड़की की कमी बहुत
- 1:14:43महसूस होती थी और अब सिया इतनी मासूम थी।
- 1:14:46इतनी प्यारी थी कि बस उसे देखते ही छोटी
- 1:14:48मां को लगा कि उनकी बेटी ना होने की कमी
- 1:14:50पूरी हो गई। छोटी मां मुखसुराई और बोली,
- 1:14:53एक काम करो यह सब तुम मां अपनी सासू मां
- 1:14:56के पास दे दो। उनके कमरे का लॉकर सबसे सेफ
- 1:14:58है तो वह वहां यह सारे ज्वेलरी रख देंगी।
- 1:15:00छोटी मां की बात मानकर सिया ने हां में सर
- 1:15:03हिलाया और सारे ज्वेलरी बॉक्सेस लेकर उनके
- 1:15:05साथ नीचे आ गई। वहीं हॉल में पापा संजय
- 1:15:08जी, मां सुधा जी और उनके साथ राज और अक्षय
- 1:15:11बैठे थे। राघव और कृष्णा अब तक वापस नहीं
- 1:15:13आए थे। सिया को नीचे आता देख सब बस उसे
- 1:15:16देखते ही रह गया। बिना किसी मेकअप के उस
- 1:15:18सिंपल से लुक में भी सिया बहुत अच्छी लग
- 1:15:20रही थी और दिल ही दिल सब ने यह कहा कि
- 1:15:22अच्छा हुआ इतनी कि इतनी प्यारी बच्ची उन
- 1:15:24जल्लादों के घर नहीं गई। सिया ने सबकी तरफ
- 1:15:26मुस्कुरा कर देखा और उसकी मुस्कान देख
- 1:15:29सबके होठों पर भी स्माइल आ गई। सुधा जी ने
- 1:15:32तो उसके करीब जाकर उसे नजर का टीका लगा
- 1:15:34दिया। राघव के वक्त वह भी एक बेटी चाहती
- 1:15:37थी। मगर राघव हो गया और अब उसके बीवी को
- 1:15:40देख सुधा जी को भी ऐसा लगा कि उनके घर में
- 1:15:42की बेटी की कमी पूरी हो गई। सिया ने फिर
- 1:15:44झुककर मां के पैर छुए और अपने तरफ के
- 1:15:46ज्वेलरी बॉक्स उन्हें देते हुए बोली वो यह
- 1:15:48मेरे सारी ज्वेलरी है। मां छोटी मां ने
- 1:15:51कहा कि मैं आपके पास दे दूं। आप आप इसे
- 1:15:53अपने पास रख लीजिए ना। मुझसे यह संभाले
- 1:15:55नहीं जाएंगे। सिया ने किसी तरह से डरते
- 1:15:57हुए मगर प्यार से कहा और सुधा मां के
- 1:15:59चेहरे पर मुस्कान आ गई। वो प्यार से बोली,
- 1:16:02सिया तुम्हारे और राघव के कमरे में भी एक
- 1:16:05लॉकर है। तुम अपनी यह सारी ज्वेलरी वही
- 1:16:07रुको ताकि अगर कभी तुम्हें उसकी जरूरत हो
- 1:16:09तो तुम्हें मुझसे मांगना ना पड़े। आओ मैं
- 1:16:12दिखाती हूं कि वो लॉकर कहां है। मां सिया
- 1:16:14को अपने साथ ले गई। छोटी मां भी उनके साथ
- 1:16:16ही थी। सुधा मोम ने फिर ना सिर्फ सिया को
- 1:16:18लॉकर और उसका कोड बताया बल्कि फिर
- 1:16:20उन्होंने सिया के लिए कबोर्ड में जगह भी
- 1:16:22खाली कर दी और तीनों ने मिलकर फिर सिया के
- 1:16:24दो बैग जमे रखे हुए सामान को इंपैक्ट कर
- 1:16:26दिया और बाकी कल के लिए छोड़ दिया। फिर वह
- 1:16:29तीनों नीचे आए जहां छोटी मां ने उसे सिया
- 1:16:32को पापा से राज और अक्षय से मिलाया। राघव
- 1:16:34और कृष्णा कृष्णा भी उस वक्त आ गए और फिर
- 1:16:37छोटी मां ने सिया को कृष्णा से भी मिला
- 1:16:39दिया। वह दोनों आते वक्त दिन का पार्सल
- 1:16:41लेकर आ गए थे। जिसे मां और छोटी मां दोनों
- 1:16:43ने मिलकर सबको सर्व किया। सिया उनकी हेल्प
- 1:16:46करना चाहती थी मगर उन्होंने उसे ऐसा करने
- 1:16:48से मा कर दिया। हर रोज के जैसे ही हंसते
- 1:16:51बातें करते हुए सबका खाना खत्म हुआ और
- 1:16:54सिया बस उन सबको देखते ही रह गई। उन सभी
- 1:16:56में आपस में बहुत प्यार था और उतनी ही एक
- 1:16:58दूसरे के लिए इज्जत भी थी जो सिया को बहुत
- 1:17:00ही ज्यादा खुश कर गई। मगर सुधा मोम की कही
- 1:17:02आगे की बात उसे काफी डरा गई। वह प्यार से
- 1:17:06बोली सिया तुम्हारे और राघव के कमरे में
- 1:17:08भी एक लॉकर है। तुम अपनी यह सारी ज्वेलरी
- 1:17:10वही रुको ताकि अगर कभी तुम्हें उसकी जरूरत
- 1:17:13हो तो तुम्हें मुझसे मांगना ना पड़े। आओ
- 1:17:15मैं दिखाती हूं कि वह लॉकर कहां है। मां
- 1:17:17सिया को अपने साथ ले गई। छोटी मां भी उनके
- 1:17:19साथ ही थी। सुधा मोम ने फिर ना सिर्फ सिया
- 1:17:22को लॉकर और उसका कोड बताया बल्कि फिर
- 1:17:24उन्होंने सिया के लिए कबोर्ड में जगह भी
- 1:17:26खाली कर दी और तीनों ने मिलकर फिर सिया के
- 1:17:28दो बाइक जमे रखे हुए सामान को इंपैक्ट कर
- 1:17:30दिया और बाकी कल के लिए छोड़ दिया। फिर वह
- 1:17:33तीनों नीचे आए जहां छोटी मां ने उसे सिया
- 1:17:35को पापा से राज और अक्षय से मिलाया। राघव
- 1:17:38और कृष्णा कृष्णा भी उस वक्त आ गए और फिर
- 1:17:40छोटी मां ने सिया को कृष्णा से भी मिला
- 1:17:42दिया। वह दोनों आते वक्त दिन का पार्सल
- 1:17:45लेकर आ गए थे। जिसे मां और छोटी मां दोनों
- 1:17:47ने मिलकर सबको सर्व किया। सिया उनकी हेल्प
- 1:17:50करना चाहती थी। मगर उन्होंने उसे ऐसा करने
- 1:17:52से मा कर दिया। हर रोज के जैसे ही हंसते
- 1:17:55बातें करते हुए सबका खाना खत्म हुआ और
- 1:17:57सिया बस उन सबको देखते ही रह गई। उन सभी
- 1:17:59में आपस में बहुत प्यार था और उतनी ही एक
- 1:18:02दूसरे के लिए इज्जत भी थी जो सिया को बहुत
- 1:18:04ही ज्यादा खुश कर गई। छोटी मां सिया की
- 1:18:06प्लेट में सब्जी डालते हुए बोली सिया तुम
- 1:18:09कुछ खा क्यों नहीं रही हो? चलो जल्दी से
- 1:18:12इसे खत्म करो। कहकर छोटी मां ने एक रोटी
- 1:18:14भी सिया के प्लेट में डाल दी। जिसके बाद
- 1:18:16सिया की शक्ल देखने लायक हो गई थी। पिछले
- 1:18:18कुछ महीनों से वह जिन हालातों से गुजर रही
- 1:18:21थी, उसके बाद उसका खाना बहुत ही कम हो गया
- 1:18:23था। पूरे दिन में वह मुश्किल से एक रोटी
- 1:18:25भी नहीं खाती थी और अब उसे एक ही वक्त में
- 1:18:27अपने प्लेट में रखी गई एक और रोटी खानी
- 1:18:29थी। वह किसी तरह से मुस्कुराई और उसने
- 1:18:32खाने के लिए बाइट उठा दिया। राघव की नजरें
- 1:18:35सिया का नाम सुनने के बाद उस पर ही टिकी
- 1:18:37हुई थी और उसके चेहरे पर के आए एक्सप्रेशन
- 1:18:39देख उसे हंसी आ गई। सिर्फ उसके ही नहीं
- 1:18:41बाकी तीन भाइयों ने भी अपनी हंसी किसी तरह
- 1:18:43से रोकी थी। सबका खाना होने के बाद भी
- 1:18:46सिया अभी तक खाने में लगी हुई थी। एक-एक
- 1:18:48कर सभी उठकर वहां से चले गए और छोटी मां
- 1:18:50ने नजरों से ही राघव को उसके पास बैठने को
- 1:18:52बोल। वो भी वहां से चली गई। सिया ने किसी
- 1:18:55तरह से अपने प्लेट में से एक और बाइट
- 1:18:57उठाया और उसे मुंह में डालने लगी। लेकिन
- 1:18:59तब तक राघव ने उसका हाथ पकड़ लिया। जिससे
- 1:19:02सिया कांप उठी। उसने सहमी नजरों से उसकी
- 1:19:05तरफ देखा। राघव को उसने हुए बदलाव समझ में
- 1:19:07आ गए। इस वजह से उसने उसके हाथ को छोड़ा
- 1:19:10और बोला, "अगर खाया नहीं जा रहा है तो
- 1:19:12रहने दो। जबरदस्ती खाने की कोई जरूरत नहीं
- 1:19:15है।" राघव की बात सुन। सिया ने सिर्फ हां
- 1:19:17में सर हिलाया और पानी का गिलास अपने मुंह
- 1:19:19से लगाकर एक घुंट पानी पिया। वह खड़ी हुई
- 1:19:22और उसने एक-एक कर टेबल पर की सभी प्लेट
- 1:19:24जमा की और अंदर किचन में रखने लग गई। राघव
- 1:19:26खामोशी से उसे देख रहा था। एक टीन एज की
- 1:19:29लड़की में जो चंचलता होनी चाहिए थी। वो
- 1:19:32सिया में दूर-दूर तक नहीं थी और साथ ही
- 1:19:34में उसकी हेल्थ भी उसके एज के हिसाब से वह
- 1:19:36काफी ज्यादा अंडरवेट थी और कमजोर भी। राघव
- 1:19:38उसे तब तक देखता रहा जब तक वह उसके सामने
- 1:19:40आकर खड़ी ना हो गई। राघव की इस तरह की
- 1:19:44नजरों की वजह से सिया को काफी अनकंफर्टेबल
- 1:19:46फील हो रहा था। वह सर झुकाकर उसके सामने
- 1:19:48खड़ी हो गई और अपने साड़ी के आंचल से
- 1:19:50खेलने लग गई। राघव एक पल कंफ्यूज हो गया
- 1:19:53कि वह ऐसी क्यों कर रही है और फिर बाद में
- 1:19:55उसे एहसास हुआ कि वह शायद उसके एक टक
- 1:19:57देखने की वजह से असहज हो गई हो। उसने अपनी
- 1:20:00नजरें फेर दी और उठकर सीधा अपने कमरे की
- 1:20:02तरफ बढ़ गया। सिया को सुझा ही नहीं कि वो
- 1:20:04अब क्या करें। वो हॉल में आ गई जहां छोटी
- 1:20:07मां मोम और पापा बैठे ही कुछ बातें कर रहे
- 1:20:10थे। सुधा मोम ने उसे देखा और मुस्कुरा कर
- 1:20:13बोली सिया यहां आओ और हमारे पास बैठो।
- 1:20:16उनकी बात सुन सिया ने सिर्फ हां में सर
- 1:20:18हिलाया और उनके करीब आकार बैठ गई। कुछ देर
- 1:20:20किसी को कुछ सुझा ही नहीं कि वह क्या कहे
- 1:20:22और क्या नहीं। लेकिन आगे जो सुधा मोम ने
- 1:20:25कहा उसे सुनसिया को थोड़ा डर लगने गया।
- 1:20:27पहले तो उन्होंने नॉर्मल ही बातें सिया को
- 1:20:29कही थी। वही बातें जो उसके मोम ने शादी से
- 1:20:32पहले उसे कही थी। उस वजह से सिया को भी
- 1:20:34कुछ नहीं लगा। लेकिन फिर आगे सुधा मोम ने
- 1:20:36कहा कि अब से उसे और राघव को एक कमरे में
- 1:20:39रहना है। तब जाकर डर की एक ठंडी लकीर उसके
- 1:20:41जिस्म में दौड़ गई। छोटी मां और मोम उसे
- 1:20:43ऊपर उसके और राघव के कमरे के बाहर छोड़कर
- 1:20:46नीचे चली गई और सिया डर से वही कहदी
- 1:20:48कांपती रही। उसे वह वक्त याद आया जब राहुल
- 1:20:51के साथ उसका रिश्ता तय हुआ था। उनके
- 1:20:54शॉपिंग के दौरान राहुल ने उसे किस करने की
- 1:20:56कोशिश की थी। उसकी छुन से सिया को इतना
- 1:20:59गंदा फील हुआ था कि वह किसी को बता भी
- 1:21:01नहीं सकती थी। उसने किसी तरह से उसकी पकड़
- 1:21:03से खुद को छुड़ा तो लिया। लेकिन उसके बाद
- 1:21:06राहुल ने उससे कहा था कि वह उसे उनके
- 1:21:08फर्स्ट नाइट पर बिल्कुल भी नहीं छोड़ेंगा।
- 1:21:09उस हादसे के बाद सिया के दिल में खौफ बैठ
- 1:21:12गया और फिर बची हुई कसर रोहित ने उसके साथ
- 1:21:14बदतमीजी करके पूरी कर दी। रोहित की नजरें
- 1:21:16उसे ऐसे घुर रही थी कि जैसे वह सिया को
- 1:21:18पूरी तरह से खा जाएगा और फिर सिया के दिल
- 1:21:20में बैठा हुआ डर और भी बढ़ गया। डर से
- 1:21:23कांपती हुई सिया लखा गई और उसका धक्का पास
- 1:21:26ही के टेबल को लगा। राघव ने उस चीज की
- 1:21:28आवाज सुनी और जब बाहर आया तो उसे टेबल का
- 1:21:31सहारा लेकर खड़ी हुई सिया दिखाई दी। उसने
- 1:21:33उसे पकड़ कर संभालना चाहा। लेकिन फिर वह
- 1:21:36रुक गया। उसे याद आया कि कैसे उसके छूने
- 1:21:38पर सिया असहज महसूस करती है और अब उसकी जो
- 1:21:41हालत थी उस हालत में वह उसे और असहज महसूस
- 1:21:43नहीं कराना चाहता था। इस वजह से वह धीरे
- 1:21:46से प्यार से उससे बोला सिया क्या तुम ठीक
- 1:21:48हो? राघव की आवाज से सिया ने अपना चेहरा
- 1:21:51ऊपर किया और उसकी आंसुओं से भरी आंखें देख
- 1:21:54राघव को बहुत ही बुरा लगा। राघव बेहद आराम
- 1:21:57से उससे सवाल करते हुए बोला, "क्या हुआ?"
- 1:22:00और उसके लफ्जों में की फिक्र को समझ सिया
- 1:22:02के आंखों से आंसू नीचे लुड आए। वह किसी
- 1:22:04तरह हकलाते हुए बोली वो वो मैं हम मुझे
- 1:22:08कुछ वह वक्त चाहिए सिया को सूझ नहीं रहा
- 1:22:11था कि वह क्या कहे और क्या नहीं उसने
- 1:22:13राहुल के बदतमीजी वाली बात सिर्फ अपने
- 1:22:15दोनों सहेलियों को बताई थी और उसके बाद
- 1:22:17उन्होंने ही उसे समझाया था कि अगर राहुल
- 1:22:20उसके साथ कुछ करने लगे उसे कहना कि वह अभी
- 1:22:22उन सारी चीजों के लिए तैयार नहीं है और
- 1:22:24उसे वक्त चाहिए सिया ने उस बात को याद कर
- 1:22:26राघव से कहा उसे लगा कि शायद वह भी वह सब
- 1:22:29करे जो हर मैरिज का पल करता है। राघव ने
- 1:22:32सवालिया नजरों से उसे देखा और सोचने लगा
- 1:22:35कि वह किस बारे में बात कर रही है। मगर
- 1:22:37उसे कुछ भी समझ नहीं आया। इस वजह से वह
- 1:22:39उससे बोला पहले अंदर चलो और फिर मुझे
- 1:22:42बताना कि तुम्हें किस चीज के लिए वक्त
- 1:22:43चाहिए। राघव अंदर की तरफ आ गया और सिया ने
- 1:22:46भी फिर किसी तरह से हिम्मत की और अंदर
- 1:22:48दाखिल हो गई। वह दिल ही दिल लफ्ज़ों को
- 1:22:50जोड़ रही थी कि राघव से किस तरह से बात
- 1:22:53करें। राघव कुछ मिनट्स खामोशी से उसे
- 1:22:55देखता रहा। मगर सिया कुछ कहने का नाम ही
- 1:22:57नहीं ले रही थी। फिर राघव ने ही गहरी सांस
- 1:23:00छोड़ी और बोला एक काम करो यहां सोते हुए
- 1:23:02आराम से सोचो कि तुम्हें मुझसे क्या कहना
- 1:23:05है और फिर सुबह आराम से बता देना नाउ गुड
- 1:23:07नाइट राघव ने इशारे से उसे बेड के एक साइड
- 1:23:10सोने के लिए बोल दिया और खुद भी जाकर
- 1:23:12दूसरी साइड से सो गया फिलहाल वही कुछ
- 1:23:15सोचने समझने के हालत में नहीं था शादी यह
- 1:23:17लफज तो बहुत दूर का था उसने तो आज तक किसी
- 1:23:20लड़की के बारे में सोचा भी नहीं था उसे तो
- 1:23:22बस बेस्ट से भी बेस्ट डॉक्टर बनना था और
- 1:23:25वह अपने उस सपने को जी रहा था सिया की
- 1:23:27बेचैनी देखकर उसे एक पल लगा कि क्या वह
- 1:23:30उनके शादी की फर्स्ट नाइट को लेकर डर रही
- 1:23:32है। लेकिन फिर अगले ही पल उसने अपनी इस
- 1:23:34सोच को बदल दिया। अब उन्हें मिले कुछ घंटे
- 1:23:36ही हुए थे और भले ही वह शादी जैसे रिश्ते
- 1:23:40में जुड़े हुए थे, लेकिन इतनी जल्दी उस
- 1:23:41रिलेशन को थोड़ी ना शुरू कर सकते थे। उसे
- 1:23:44लगा कि वही गलत सोच रहा है और शायद सिया
- 1:23:46उससे कुछ और कहना चाहती है। इसी वजह से
- 1:23:49उसने सिया को सुबह बताने के लिए बोल दिया।
- 1:23:51कल सुबह-सुबह ही उसकी एक बहुत इंपॉर्टेंट
- 1:23:53अपॉइंटमेंट थी और फिर बाद में बैक टू बैक
- 1:23:56एक बड़ा ऑपरेशन और एक छोटा ऑपरेशन उसकी
- 1:23:58नींद होना जरूरी थी और बस इसी वजह से वह
- 1:24:01सीधा जाकर बेड की दूसरी ओर सो गया। सिया
- 1:24:04अपने आंखों की खोल बंद करते हुए उसे ही
- 1:24:06देखते रह गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह
- 1:24:08कैसे रिएक्ट करें। राघव ने उसके साथ वह
- 1:24:11रिलेशन नहीं बनाए इस वजह से खुश हो जाए।
- 1:24:14या फिर उसने उससे ठीक से बात भी नहीं की।
- 1:24:17इस वजह से नाराज हो जाए। वह वही खड़ी
- 1:24:20सोचती रह गई और फिर राघव अपनी बंद आंखों
- 1:24:22से ही बोला मुझे कल 7:00 बजे ही हॉस्पिटल
- 1:24:24जाना है सिया तो कुआ तुम लाइट्स बंद कर
- 1:24:26सोने की कोशिश करूंगी। राघव की बात सुन
- 1:24:29सिया ने जल्दी से हां में सर हिलाया और झट
- 1:24:32से आकर लाइट्स बंद कर वो बेड के दूसरे
- 1:24:34हिस्से पर सो गई। थकी हुई तो वह भी बहुत
- 1:24:37थी। इसलिए नरम बिस्तर पर गिरते ही उसे
- 1:24:39नींद आ गई और वह महज 5 मिनट में ही गहरे
- 1:24:41नींद में सो गई। उसके शांत चलती सांसों की
- 1:24:43वजह से राघव को पता चल गया कि वह सो रही
- 1:24:46है। उसने धीरे से अपनी आंखें खोली और सिया
- 1:24:48को देखा। गहरी नींद में सोई हुई सिया इतनी
- 1:24:50ज्यादा प्यारी और मासूम लग रही थी कि उसकी
- 1:24:53नजरें बस उस पर ही टिक कर रह गई और ना
- 1:24:55जाने कब उसे देखतेदेखते ही वह भी नींद की
- 1:24:57आगोश में चला गया। अगली सुबह राघव हमेशा
- 1:25:00अपने वक्त पर सुबह 5:30 बजे ही उठ गया।
- 1:25:03उसकी आदत थी वह। रात चाहे वह कितना भी लेट
- 1:25:06क्यों ना सोया हो। वह सुबह जल्दी उठ ही
- 1:25:08जाता और आंखें खोलते ही उसकी नजर सबसे
- 1:25:10पहले सिया पर गई जो उसी के तरफ चेहरा करके
- 1:25:13सो रही थी। उसके चेहरे पर की मासूमियत देख
- 1:25:15राघव के होठों पर भी स्माइल आ गई। वह नहीं
- 1:25:17जानता था कि उनके रिश्ते का फ्यूचर कैसा
- 1:25:19है। उसे आगे क्या करना चाहिए। मगर अब जब
- 1:25:23उसने सिया के होठों पर वह प्यारी सी
- 1:25:25स्माइल देखी तब उसके दिल में बस यही ख्याल
- 1:25:27आया कि वह उसके स्माइल को हमेशा हमेशा
- 1:25:29संभाल कर रखगा। सिया अपने आंखों की खोल
- 1:25:32बंद करते हुए उसे ही देखते रह गई। उसे समझ
- 1:25:35नहीं आ रहा था कि वो कैसे रिएक्ट करें।
- 1:25:37राघव ने उसके साथ वो रिलेशन नहीं बनाए इस
- 1:25:40वजह से खुश हो जाए या फिर उसने उससे ठीक
- 1:25:43से बात भी नहीं की। इस वजह से नाराज हो
- 1:25:45जाए। वो वही खड़ी सोचती रह गई और फिर राघव
- 1:25:48अपनी बंद आंखों से ही बोला मुझे कल 7:00
- 1:25:51बजे ही हॉस्पिटल जाना है सिया तो कुआ तुम
- 1:25:53लाइट्स बंद कर सोने की कोशिश करूंगी। राघव
- 1:25:56की बात सुन सिया ने जल्दी से हां में सर
- 1:25:58हिलाया और झट से आकर लाइट्स बंद कर वह बेड
- 1:26:00के दूसरे हिस्से पर सो गई। थकी हुई तो वह
- 1:26:03भी बहुत थी। इसलिए नरम बिस्तर पर गिरते ही
- 1:26:06उसे नींद आ गई और वह महज 5 मिनट में ही
- 1:26:08गहरी नींद में सो गई। उसके शांत चलती
- 1:26:10सांसों की वजह से राघव को पता चल गया कि
- 1:26:12वह सो रही है। उसने धीरे से अपनी आंखें
- 1:26:15खोली और सिया को देखा। गहरी नींद में सोई
- 1:26:17हुई सिया इतनी ज्यादा प्यारी और मासूम लग
- 1:26:19रही थी कि उसकी नजरें बस उस पर ही टिक कर
- 1:26:21रह गई और ना जाने कब उसे देखतेदेखते ही वह
- 1:26:24भी नींद की आगोश में चला गया। अगली सुबह
- 1:26:27राघव हमेशा अपने वक्त पर सुबह 5:30 बजे ही
- 1:26:30उठ गया। उसकी आदत थी वह रात चाहे वह कितना
- 1:26:32भी लेट क्यों ना सोया हो। वह सुबह जल्दी
- 1:26:35उठ ही जाता और आंखें खोलते ही उसकी नजर
- 1:26:37सबसे पहले सिया पर गई जो उसी के तरफ चेहरा
- 1:26:39करके सो रही थी। उसके चेहरे पर की
- 1:26:41मासूमियत देख राघव के होठों पर भी स्माइल
- 1:26:44आ गई। वह नहीं जानता था कि उनके रिश्ते का
- 1:26:46फ्यूचर कैसा है। उसे आगे क्या करना चाहिए।
- 1:26:49मगर अब जब उसने सिया के होठों पर वह
- 1:26:51प्यारी सी स्माइल देखी तब उसके दिल में बस
- 1:26:54यही ख्याल आया कि वह उसके स्माइल को हमेशा
- 1:26:56हमेशा संभाल कर रखगा। राघव ने किसी तरह से
- 1:26:59अपने आप को सिया के मुंह से निकाला और
- 1:27:01उठकर उसके जिम में चला गया। उसके अक्षय और
- 1:27:04कृष्णा पहले से ही वही थे। राघव के नजरों
- 1:27:06को जब राज नहीं दिखा तब वह बोला राज भाई
- 1:27:09कहां है? क्या वह अभी तक उठे नहीं है?
- 1:27:12राघव का सवाल सुन अक्षय बोला, नहीं रात
- 1:27:14में ही भाई को कोई इमरजेंसी आ गई थी तो वह
- 1:27:17हॉस्पिटल चले गए। अक्षय का जवाब सुन राघव
- 1:27:19ने सिर्फ हां सर हिलाया और अपनी एक्सरसाइज
- 1:27:22करने लग गया। अक्षय और कृष्णा उससे कुछ
- 1:27:25पूछना चाहते थे। लेकिन उनकी हिम्मत नहीं
- 1:27:27हुई और वह भी अपना-अपना वर्कआउट करने में
- 1:27:29लग गए। तकरीबन 1 घंटे तक पसीना बहाने के
- 1:27:32बाद उन्होंने अपना वर्कआउट बंद कर दिया और
- 1:27:34अपने-अपने कमरे की तरफ बढ़ गए। राघव के
- 1:27:36कदम भी उसके कमरे की तरफ जाने लगे। लेकिन
- 1:27:39फिर वह वैसे राज के कमरे की तरफ बढ़ गया।
- 1:27:42वह सिया की नींद खराब नहीं करना चाहता था।
- 1:27:44वह इतनी मासूमी से इतने सुकून के साथ सो
- 1:27:46रही थी कि उसका दिल ही नहीं हुआ कमरे में
- 1:27:48जाकर थोड़ा भी शोर करने का और उसे जगाने
- 1:27:50का। राज के कमरे में फ्रेश होकर उसने उसी
- 1:27:54के कपड़े पहन लिए और उसे आए हुए मेल चेक
- 1:27:56करने में लग गया। तकरीबन 7:00 बजे वह कमरे
- 1:27:58के बाहर निकला और किचन में जाने लगा।
- 1:28:00ब्रेकफास्ट कर उसे तुरंत हॉस्पिटल के लिए
- 1:28:02निकलना था। तेज कदमों से किचन में आते हुए
- 1:28:06राघव सीधे फ्रिज की तरफ गया और जूस की
- 1:28:08बोतल निकालते हुए बोला, छोटी मां मुझे
- 1:28:10ब्रेड टोस्ट करके दे दीजिए। आज जल्दी
- 1:28:13हॉस्पिटल जाना है। और हां कृष्णा भी मेरे
- 1:28:15साथ आने वाला है। तो उसके लिए भी ब्रेड दे
- 1:28:17दीजिए। प्लीज राघव ने कहते हुए पीनट बटर
- 1:28:19निकाला और फ्रिज में से फ्रूट लेकर उन्हें
- 1:28:21वाश करने में लग गया। सिया जो तब से उसकी
- 1:28:24सारी हरकतें देख रही थी। उसे समझते देर
- 1:28:27नहीं लगी कि राघव वो फ्रूट खाने के लिए कट
- 1:28:29कर रहा है। वो उसे रोकते हुए बोली जी
- 1:28:32सुनिए और उसकी उस मीठी सी आवाज से राघव के
- 1:28:34हाथ रुक गए। वो पीछे मुदा और सिया को यहां
- 1:28:37देख हैरान हो गया। हल्के पीले रंग की
- 1:28:39साड़ी। खुले गीले बाल, माथे पर छोटी सी
- 1:28:42बिंदी और उस पर लगाया कुमकुम जो इस बात को
- 1:28:44बता रहा था कि जैसे वह अभी-अभी पूजा करके
- 1:28:47आई है गले में जचता वह लंबा सा मंगलसूत्र
- 1:28:49और सबसे अच्छा जो उसकी खूबसूरती में चार
- 1:28:51चांद लगा रहा था। वह था उसके माथे में भरा
- 1:28:54हुआ वो लाल सिंदूर। राघव की नजरें तो उस
- 1:28:56पर से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी।
- 1:28:58सिया की नेचुरल ब्यूटी तो कल के उस मेकअप
- 1:29:00से भी अच्छी लग रही थी। राघव उसकी सिया की
- 1:29:03खूबसूरती अपने नजरों से पीने में इस कदर
- 1:29:06बिजी था कि उसे एहसास ही नहीं हुआ कि सिया
- 1:29:08उसकी इन नजरों से बेचैन हो रही है। बेचारी
- 1:29:10कहना क्या चाहती थी और उसकी नजरें देख कर
- 1:29:13क्या रही थी जब आखिर उसे उसकी नजरें
- 1:29:15बर्दाश्त नहीं हुई तो वह जल्दी से पलट गई
- 1:29:17और अपनी बढ़ी हुई सांसों को कंट्रोल करने
- 1:29:19लगी। उसके यूझट से पलटने से उसके बालों का
- 1:29:22पानी उड़ा और राघव के चेहरे पर आ गया
- 1:29:24जिससे राघव होश में आया और उसे समझ आ गया
- 1:29:26कि वो क्या कर रहा था। राघव ने किसी तरह
- 1:29:29अपना गला तराशा और बोला वो तुम यहां इतनी
- 1:29:33सुबह क्या कुछ कह रही थी क्या तुम राघव को
- 1:29:36समझ ही नहीं आया कि वह क्या कहे इस वजह से
- 1:29:38उसने एक साथ कई सारे सवाल कर दिए उसके
- 1:29:41इतने सारे सवालों को सुन सिया बिना उसके
- 1:29:44तरफ देखे ही बोली वो आपको जल्दी हॉस्पिटल
- 1:29:46जाना था ना इस वजह से मैं आपके लिए
- 1:29:48ब्रेकफास्ट बनाने आई थी आप आप बस 5 मिनट
- 1:29:51रुकिए मैं अभी सर्व करती हूं सिया ने कहा
- 1:29:53और जल्दी-जल्दी अपने हाथ चलाने लग गई राघव
- 1:29:57ने भी फिर वो फ्रूट्स वही रख दिए और बाहर
- 1:29:59जाकर बैठ गया। कृष्णा और अक्षय भी उसके
- 1:30:01पास आकार बैठ गए। तभी उनकी नजर मॉर्निंग
- 1:30:03वाक से वापस आए। मॉम और डैड पर गई।
- 1:30:05उन्होंने उन दोनों को मॉर्निंग विश किया
- 1:30:07और फिर बैठने के लिए बोल दिया। सिया ने
- 1:30:09किचन की खिड़की से उन्हें आते हुए देख
- 1:30:11लिया था। इस वजह से उसने जल्दी से सबके
- 1:30:13लिए चाय डाल दी और दूसरे काम करने में लग
- 1:30:15गई। कृष्णा छोटी मां को आवाज देते हुए
- 1:30:18बोला मां जल्दी ब्रेकफास्ट लेकर आइए। हमें
- 1:30:21लेट हो रहा है। कृष्णा की आवाज सुन सिया
- 1:30:23की कुछ सुझा ही नहीं कि वह क्या करें और
- 1:30:25वह फिर तेजी से अपने हाथ चलाने लग गई।
- 1:30:28राघव ने ब्रेड टोस्ट करके भी मांगे थे।
- 1:30:30इसीलिए उसे लगा कि शायद उसे वही पसंद है।
- 1:30:32इसी वजह से उसने जल्दी-जल्दी ब्रेड भी
- 1:30:35टोस्ट कर दिए। उसी वक्त छोटी मां भी अपने
- 1:30:37कमरे से बाहर आ गई। उन्होंने कृष्णा का
- 1:30:40आवाज सुनी थी। इस वजह से वह गड़बड़ करते
- 1:30:42हुए आए और बोली, कृष्णा, सॉरी बेटा। मैं
- 1:30:45भूल गई थी कि तुम्हें जल्दी जाना है। बस
- 1:30:47कुछ देर रुको। हां, मैं अभी कुछ
- 1:30:48ब्रेकफास्ट बनाकर लाती हूं। छोटी मां
- 1:30:51जल्दी-जल्दी अंदर किचन में जाने लगी लेकिन
- 1:30:53उन्हें राघव ने रोक दिया और बोला छोटी मां
- 1:30:56आराम से बैठिए अंदर सिया है वो वो
- 1:30:58ब्रेकफास्ट बना रही है और राघव आगे कुछ
- 1:31:01बोल पाता उससे पहले ही उसे पायल के झनकार
- 1:31:04की आवाज आई और फिर सिया दिखाई दी जो अपने
- 1:31:06हाथ में दो बॉल जिसे हा बाउल भी कहते लेकर
- 1:31:09आ रही थी उसने जल्दी से उन्हें टेबले पर
- 1:31:11रखा और फिर से अंदर गई एक के बाद एक कर
- 1:31:13उसने दो-चार बॉल लाकर रखे और आखिर में चाय
- 1:31:16की ट्रे लेकर आ गई। उसकी गड़बड़ सब हैरान
- 1:31:19होकर देख रहे थे। सुधा मोम भी बेह तो
- 1:31:21हैरान थी कि सिया ने इतने कम वक्त में
- 1:31:23कितना कुछ बना दिया। सुबह जब वह मॉर्निंग
- 1:31:26वाक के लिए जा रही थी। तभी सिया उन्हें
- 1:31:28पूरी तरह से तैयार होकर बाहर आई हुई दिखी
- 1:31:31और जब उन्होंने उससे पूछा कि वह इतनी
- 1:31:33जल्दी क्यों उठी तब उसी ने बताया कि राघव
- 1:31:35को जल्दी हॉस्पिटल जाना है। इस वजह से वह
- 1:31:38उनके लिए ब्रेकफास्ट बनने के लिए उठी है।
- 1:31:40सिया ने बहुत ही शर्माते हुए यह बात कही
- 1:31:43थी। जिसे सुन मोम को बहुत ही अच्छा लगा।
- 1:31:45वह उससे फिर बोली हम तुम्हें जो बनाना है
- 1:31:48बनाओ लेकिन मैं और तुम्हारे डैड करीब 7:00
- 1:31:50बजे के आसपास वाक से वापस आएंगे तो उस
- 1:31:53वक्त हमारे लिए भी चाय बनाकर लाना सुधा
- 1:31:55मोम की बात सुन सिया ने हां में सर हिलाया
- 1:31:57और वो किचन की तरफ चली गई। मोम को बिल्कुल
- 1:31:59नहीं लगा था कि सिया इतना कुछ बना देंगी।
- 1:32:02सिया ने सबसे पहले तिन को चाय छान ली और
- 1:32:05सबसे पहले डैड को देकर उनके पैर छू लिए।
- 1:32:07सुधा मोम और छोटी मां को भी उसने चाय दी
- 1:32:10और बारी-बारी उनके पैर छू लिए। फिर वह
- 1:32:12जल्दी से टेबल के पास आए और उसने एक-एक कर
- 1:32:14तीनों को ब्रेकफास्ट सर्व करना शुरू कर
- 1:32:16दिया। उसने आज ब्रेकफास्ट में पोहा और
- 1:32:18ओट्स बनाए थे और टोस्ट को पीनट, बटर और
- 1:32:21जैम लगाकर भी उसने सर्व कर दिए थे। उसने
- 1:32:23एक-एक कर तीनों को सर्व किया और फिर जूस
- 1:32:25का ग्लास भी उन्हें दे दिया। उसका काम
- 1:32:27करने का सलीखा इतना अच्छा और क्लीन था कि
- 1:32:30सभी का दिल उसने एक ही पल में जीत लिया और
- 1:32:32फिर उसके हाथ का ब्रेकफास्ट कर सबका दिल
- 1:32:34तो और भी खुश हो गया। सिया अपने होठों पर
- 1:32:36छोटी सी मुस्कान लिए सबको सर्व कर रही थी।
- 1:32:39और उसकी यही मुस्कान ना सिर्फ उनका पेट
- 1:32:41बल्कि उनके दिल को भी सुकून से भर रही थी।
- 1:32:43सिया में इतनी ज्या पॉजिटिविटी थी कि सबको
- 1:32:46भी उसके आसपास होने से बहुत अच्छा फील
- 1:32:48हुआ। राघव का दिल भी बहुत खुश हो गया और
- 1:32:51फिर पेट भर के ब्रेकफास्ट करने के बाद वह
- 1:32:53ओठों पर स्माइल लिए हुए ही हॉस्पिटल के
- 1:32:55लिए निकल। उसकी गड़बड़ सब हैरान होकर देख
- 1:32:58रहे थे। सुधा मोम भी बहुत हैरान थी कि
- 1:33:01सिया ने इतने कम वक्त में इतना कुछ कैसे
- 1:33:03बना दिया। सुबह जब वह मॉर्निंग वॉक के लिए
- 1:33:05जा रही थी। तभी सिया उन्हें पूरी तरह से
- 1:33:08तैयार होकर बाहर आई हुई दिखी और जब
- 1:33:11उन्होंने उससे पूछा कि वह इतनी जल्दी
- 1:33:12क्यों उठी तब उसी ने बताया कि राघव को
- 1:33:15जल्दी हॉस्पिटल जाना है। इस वजह से वह
- 1:33:17उनके लिए ब्रेकफास्ट बनने के लिए उठी है।
- 1:33:19सिया ने बहुत ही शर्माते हुए यह बात कही
- 1:33:22थी जिसे सुन मोम को बहुत ही अच्छा लगा। वो
- 1:33:24उससे फिर बोली हम तुम्हें जो बनाना है
- 1:33:27बनाओ। लेकिन मैं और तुम्हारे डैड करीब
- 1:33:297:00 बजे के आसपास वाक से वापस आएंगे। तो
- 1:33:32उस वक्त हमारे लिए भी चाय बनाकर लाना।
- 1:33:34सुधा मोम की बात सुन। सिया ने हां में सर
- 1:33:36हिलाया और वह किचन की तरफ चली गई। मोम को
- 1:33:38बिल्कुल नहीं लगा था कि सिया इतना कुछ बना
- 1:33:40देंगी। सिया ने सबसे पहले तिन को चाय छान
- 1:33:44ली और सबसे पहले डैड को देकर उनके पैर छू
- 1:33:46लिए। सुधा मोम और छोटी मां को भी उसने चाय
- 1:33:48दी और बारी-बारी उनके पैर छू लिए। फिर वह
- 1:33:51जल्दी से टेबल के पास आए और उसने एक-एक कर
- 1:33:53तीनों को ब्रेकफास्ट सर्व करना शुरू कर
- 1:33:55दिया। उसने आज ब्रेकफास्ट में पोहा और
- 1:33:57ओट्स बनाए थे। और टोस्ट को पीनट, बटर और
- 1:34:00जैम लगाकर भी उसने सर्व कर दिए थे। उसने
- 1:34:02एक-एक कर तीनों को सर्व किया और फिर जूस
- 1:34:05का ग्लास भी उन्हें दे दिया। उसका काम
- 1:34:06करने का सलीखा इतना अच्छा और क्लीन था कि
- 1:34:09सभी का दिल उसने एक ही पल में जीत लिया और
- 1:34:11फिर उसके हाथ का ब्रेकफास्ट कर सबका दिल
- 1:34:13तो और भी खुश हो गया। सिया अपने होठों पर
- 1:34:15छोटी सी मुस्कान लिए सबको सर्व कर रही थी
- 1:34:18और उसकी यही मुस्कान ना सिर्फ उनका पेट
- 1:34:20बल्कि उनके दिल को भी सुकून से भर रही थी।
- 1:34:23सिया में इतनी ज्यादा पॉजिटिविटी थी कि
- 1:34:25सबको भी उसके आसपास होने से बहुत अच्छा
- 1:34:27फील हुआ। राघव का दिल भी बहुत खुश हो गया
- 1:34:30और फिर पेट भर के ब्रेकफास्ट करने के बाद
- 1:34:32वह होठों पर स्माइल लिए हुए ही हॉस्पिटल
- 1:34:34के लिए निकल गया। वह सिया से बात करना
- 1:34:36चाहता था लेकिन उसे अब जाने के लिए काफी
- 1:34:39लेट हो रहा था। इस वजह से वह बिना कुछ
- 1:34:41बोले ही चला गया। सिया की नजरें राघव को
- 1:34:43तब तक देख रही थी जब तक वह उसकी नजरों से
- 1:34:45ओझल ना हो गया और फिर उसने अपना ध्यान
- 1:34:47अक्षय और बाकी सबके तरफ देना शुरू कर
- 1:34:50दिया। अपने होठों पर प्यारी सी स्माइल लिए
- 1:34:52वह बोली मां आप छोटी मां और डैड कब नाश्ता
- 1:34:55करेंगे? मैं उस हिसाब से आपको सर्व कर
- 1:34:58दूंगी। सिया की बात सुन सुधा मोम ने उसे
- 1:35:00अपने नाश्ते का वक्त बताया। सिया ने उनकी
- 1:35:02बात सुन हमें सर हिलाया और फिर किचन में
- 1:35:05जाने लग गई। राघव का यूं बिना कुछ कहे
- 1:35:08जाना किसी को भी अच्छा नहीं लगा था और उन
- 1:35:10सभी को लगा कि शायद उस वजह से सिया नाराज
- 1:35:12हो गई और अंदर किचन में जा रही है। कृष्णा
- 1:35:14ने एक बार सबको और फिर सिया को जाते हुए
- 1:35:17देखा और उसे आवाज देकर बुलाया सिया। सिया
- 1:35:20उसकी आवाज सुन पीछे पलटी और अपनी नजरें
- 1:35:22नीचे करते हुए बोली जी भैया क्या कुछ
- 1:35:25चाहिए था? सिया का सवाल सुन कृष्णा ने ना
- 1:35:28में सर हिलाया और आगे बोला नहीं वो बस
- 1:35:30बताना चाहता था कि आज का ब्रेकफास्ट बहुत
- 1:35:33अच्छा बना है। तुम बहुत अच्छी शेफ हो।
- 1:35:35कृष्णा की बात से सहमति जताते हुए अक्षय
- 1:35:37भी बोला हां सिया सच में तुमने ब्रेकफास्ट
- 1:35:40बहुत ही अच्छा बनाया है। मजा आ गया खाकर
- 1:35:42उन दोनों की तारीफ सुन सिया के होठों पर
- 1:35:44बड़ी वाली स्माइल आ गई और फिर वो
- 1:35:46मुस्कुराते हुए अंदर किचन में चली गई। खुश
- 1:35:49थी वो क्योंकि आज ना जाने कितने वक्त बाद
- 1:35:52उसने अपनी तारीफ सुनी थी। वैसे तो उसे कोई
- 1:35:54फर्क नहीं गिरता था। कोई उसकी तारीफ करे
- 1:35:56या ना करे और राघव के भी बिना कुछ कहे
- 1:35:58जाने से उसे उतना कुछ नहीं लगा। उसके घर
- 1:36:01में भी कोई जेंट्स किसी लेडीज की तारीफ
- 1:36:03नहीं करता था तो उसके लिए राघव की तारीफ
- 1:36:05करना या ना करना कोई बड़ी बात नहीं थी।
- 1:36:07मगर अब कृष्णा और अक्षय ने की हुई उसकी
- 1:36:09तारीफ उसे बहुत ही खुश कर गई। आखिर अपनी
- 1:36:11तारीफ सुनना किसे पसंद नहीं है? उसके
- 1:36:14पीछेछे छोटी मां भी किचन में आ गई और सिया
- 1:36:17से बोली सिया जाओ बेटा तुम आराम करो।
- 1:36:20शांति 9:00 9:30 तक आ जाएंगी और फिर किचन
- 1:36:23और बर्तन कर लेंगी और कमला भी उसी वक्त तक
- 1:36:25आती ही होंगी। वह सब घर की साफ सफाई और
- 1:36:29कपड़े धो देंगी। वो क्या है ना मुझसे अब
- 1:36:32पहले जैसा काम नहीं होता। इस वजह से भाभी
- 1:36:34ने घर के ऊपर के सारे काम और रोटियां
- 1:36:36बनाने के लिए बाई को लगाया हुआ है। शांति
- 1:36:39ही किचन के सारे काम देखती है और फिर मैं
- 1:36:41सब्जी बनती हूं। उन चारों को ना तो होटल
- 1:36:43का खाना अच्छा लगता है और ना ही किसी और
- 1:36:46के हाथों का। भाभी के हाथ के खाने को भी
- 1:36:48उनकी नानू कुर चलती है। लेकिन क्या है ना
- 1:36:50उनके सामने कोई कुछ बोल नहीं सकता ना। इस
- 1:36:53वजह से सब चुपचाप खा लेते हैं। छोटी मां
- 1:36:55खुशी-खुशी सिया से बात कर रही थी। सिया
- 1:36:58इतनी प्यारी थी कि छोटी मां उससे बात करने
- 1:37:00के लिए अपने आप को रोक ही नहीं पाई। सिया
- 1:37:02भी मुस्कुराकर उनकी बात सुन रही थी। वैसे
- 1:37:05तो उसके दिमाग में कई सवाल थे। लेकिन वह
- 1:37:07थोड़ा झिझक रही थी। वह सवाल वो पूछे या
- 1:37:09फिर ना पूछे। सिया की कशमकश छोटी मां को
- 1:37:12समझ आ गई और उसका हाथ थामकर वह बोली मैं
- 1:37:15ना तुम्हें घर में सबके बारे में बता
- 1:37:17दूंगी लेकिन अभी नहीं थोड़ी देर बाद एक
- 1:37:19बार सबको अपनेप काम पर जाने दो तब जाकर हम
- 1:37:22दोनों आराम से बातें करेंगे हां सिया ने
- 1:37:25उनकी बात सुन हमें सर हिलाया और बोली हम
- 1:37:27चलेंगा छोटी मां लेकिन वो इनके और बाकी
- 1:37:30सबके टिफिन का क्या मेरा मतलब हम कब
- 1:37:33बनाएंगे या फिर यह घर पर ही आएंगे सिया ने
- 1:37:36आखिर अपने दिल में चल रहा सवाल उनसे पूछ
- 1:37:38ही लिया और छोटी मां अपने आप को
- 1:37:40मुस्कुराने से नहीं रोक पाई। सिया ने बहुत
- 1:37:42ही आसानी से ना सिर्फ राघव को बल्कि घर के
- 1:37:45सभी मेंबर्स को अपना लिया था और यह उसके
- 1:37:47बातों में उसके बर्ताव में साफ-साफ झलक
- 1:37:49रहा था। छोटी मां बहुत ही खुश हो गई और
- 1:37:52उससे बोली, तुम टिफिन को लेकर फिक्र मत
- 1:37:54करो। सिया सबको उनका टिफिन वक्त पर मिल
- 1:37:57जाएगा। शांति आने के बाद रोटियां बना
- 1:37:59देंगी और फिर दोपहर 12:00 बजे के आसपास
- 1:38:01में सब्जी बनाकर टिफिन पैक कर दूंगी। वो
- 1:38:04राजू हिना हमारे हॉस्पिटल में ही काम करता
- 1:38:06है। वह आकर सुधा भाभी भैया और बाकी सब का
- 1:38:09टिफिन लेकर चला जाएगा। छोटी मां ने उसे
- 1:38:11बताया और सिया के चेहरे पर शिकन छा गई।
- 1:38:14क्या हुआ? कोई मसला है क्या सिया? छोटी
- 1:38:17मां को समझ ही नहीं आया कि सिया परेशान
- 1:38:19क्यों हो गई? इस वजह से उन्होंने उसका हाथ
- 1:38:22थामते हुए उससे सवाल किया। उन्हें जवाब
- 1:38:24देते हुए सिया बोली वो वो छोटी मां अगर
- 1:38:27रोटियां अभी बनाएंगे तो दोपहर तक ठंडी हो
- 1:38:29जाएंगी ना। क्या हम रोटियां बाद में डाल
- 1:38:32दे? मैं बना दूंगी रोटी और सब्जी भी बना
- 1:38:34दूंगी। आप बस मुझे बताना कि मैं क्या
- 1:38:36बनाऊं और क्या नहीं। सिया जल्दी-जल्दी
- 1:38:39बोली उसके घर में सभी जेंट्स हर वक्त
- 1:38:41गरमगरम ही खाना खाते थे और घर की सभी
- 1:38:44लेडीज भी इस बात का ध्यान रखती थी कि गलती
- 1:38:46से भी उन्हें ठंडा खाना ना जाए। सिया पर
- 1:38:48भी यही संस्कार हुए थे और पिछले कुछ दिनों
- 1:38:50में तो उसे हर वक्त घर कैसा संभालना है और
- 1:38:53कैसे घर की रिस्पांसिबिलिटी निभानी है यही
- 1:38:55बताया जा रहा था। तो उसे भी वही आदत पद गई
- 1:38:58थी। छोटी मां ने अपने सामने खड़ी उस छोटी
- 1:39:01सी लड़की की तरफ देखा और जाने अनजाने ही
- 1:39:03सही उनकी आंखों में आंसुओं की कुछ बूंदे आ
- 1:39:05गई जिसे छिपाने की उन्होंने बड़ी ही
- 1:39:07शिद्दत से कोशिश की लेकिन सिया ने वो आंसू
- 1:39:10देख ही लिए। सिया जल्दी से उनके करीब आई
- 1:39:13और बोली क्या हुआ छोटी मां? मुझसे कोई
- 1:39:16गलती हो गई क्या? मैं सिया को समझ नहीं आ
- 1:39:19रहा था कि वह क्या कहे या फिर क्या करें?
- 1:39:22छोटी मां के आंखों में के आंसू उसे बेचैन
- 1:39:24कर गए और फिर उसकी आंखें भी आंसुओं से भर
- 1:39:26गई। छोटी मां ने सिया का हाथ पकड़ा और
- 1:39:29बोली कुछ नहीं बेटा वो बस मगर आगे वह कुछ
- 1:39:33कह पाती तब तक सुधा मोम वहां आ गई और छोटी
- 1:39:36मां के आंखों में के आंसू उनसे छिप नहीं
- 1:39:38पाए वो जल्दी से उनके पास आए और बोली
- 1:39:40कविता क्या हुआ तुम रो क्यों रही हो और
- 1:39:43सिया तुम भी क्या हुआ यहां सुधा मोम की
- 1:39:46आवाज देखते ही देखते स्ट्रिक्ट हो गई और
- 1:39:48सिया को काफी डर लगने लग गया उसे यूं डरता
- 1:39:51देख छोटी मां जल्दी से बोली कुछ नहीं भाभी
- 1:39:54बस बस में खुश हूं ना इस वजह से यह आंसू आ
- 1:39:56गए वो वो क्या है ना आप सबके जाने के बाद
- 1:39:59मैं घर में अकेले ही रहती थी लेकिन अब
- 1:40:01मेरी बेटी जो आ गई है मेरे साथ इस वजह से
- 1:40:04मैं बहुत ही खुश हूं और यह आंसू मेरे
- 1:40:06आंखों से आ गए छोटी मां की बात सुन सुधा
- 1:40:09मोम ने हां में सर हिलाया और बोली हां ठीक
- 1:40:11है अच्छा कविता मेरा एक काम कर दो मुझे ना
- 1:40:14कुछ सामान चाहिए था शॉप से मैं लिस्ट दे
- 1:40:16देती हूं तुम लेकर आ जाऊंगी अभी फिर हम
- 1:40:19साथ में नाश्ता करते हैं प्लीज सुधा मोम
- 1:40:22की बात सुन छोटी मां ने मुंह बनाया और
- 1:40:24बोली साफ-साफ कहिए ना भाभी मैं आज वॉक पर
- 1:40:27नहीं आई। इस वजह से आप मुझे इस तरह चलने
- 1:40:29को बोल रही है। छोटी मां की बात सुन सुधा
- 1:40:32मोम ने उन्हें घुरा और हां में सर हिलाते
- 1:40:34हुए बोली बिल्कुल सही समझा है तुमने। चलो
- 1:40:37अब जाओ और हां आते हुए ना जरा गरमा गरम
- 1:40:40जलेबी लेकर आना। बहुत दिन हो गए है खाई
- 1:40:42हुई कहकर सुधा मोम सिया के तरफ मुली और
- 1:40:44बोली सिया तुम्हें कौन सी मिठाई पसंद है?
- 1:40:47बताओ जरा। कविता आते हुए लेकर आ जाएंगी।
- 1:40:50सुधा मोम का आया सवाल। सुन सिया को कुछ
- 1:40:52सुझा ही नहीं कि वो क्या कहे। वह बस मासूम
- 1:40:55सी शक्ल लेकर टकमक टकमक करते हुए उन्हें
- 1:40:57देखती ही रह गई। उसकी रिएक्शन देख सुधा
- 1:40:59मोम और छोटी मां दोनों को हंसी आ गई और वह
- 1:41:01हंसने लग गई। छोटी मां किसी तरह से अपनी
- 1:41:05हंसी रोकते हुए बोली शक्ल देखिए भाभी
- 1:41:07इसकी। इसे देखकर तो ऐसा लग रहा है जैसी
- 1:41:09हमने इससे कोई बहुत ही मुश्किल सवाल पूछ
- 1:41:12दिया हो। छोटी मां फिर से हंसने लग गई और
- 1:41:14सिया ने शर्म से अपना चेहरा झुका लिया।
- 1:41:17सुधा मोम फिर उससे बोली शर्माओ मत और बोलो
- 1:41:20कि तुम कौन सी मिठाई खाऊंगी? फिर कविता वह
- 1:41:23हमारे लिए ले आएंगी। क्यों कविता? सुधा
- 1:41:26मोम की बात पर छोटी मां ने हां में सर
- 1:41:28हिलाया और सिया के तरफ देखने लग गई। सिया
- 1:41:30फिर धीरे से बोली मैं मैं जलेबी खा लूंगी।
- 1:41:32मुझे सारी मीठी चीजें पसंद आती है तो मैं
- 1:41:35किसी एक को सिलेलेक्ट नहीं कर सकती। सिया
- 1:41:37ने कहा और उसकी बात सुन। फिर एक बार सुधा
- 1:41:39मोम और छोटी मां हंस पड़ी। छोटी मां फिर
- 1:41:42सिया के गाल हल्के से खींचते हुए बोली।
- 1:41:44तभी भाभी यह इतनी प्यारी और मीठी है। चलो
- 1:41:47फिर आज जलेबी खाते हैं। फिर कल कुछ और खा
- 1:41:49लेंगे। छोटी मां कहकर बाहर चली गई। उनके
- 1:41:52आते ही सुधा मोम ने सिया के तरफ देखा और
- 1:41:55बोली सिया क्या हुआ था? कविता के आंखों
- 1:41:58में आंसू क्यों थे? और जवाब में सिया ने
- 1:42:00उन्हें उनके बीच हुई सारी बातें बता दी।
- 1:42:02वो थोड़ा डर कर ही बोली मुझे मुझे नहीं
- 1:42:05पता मां मैंने उनसे कुछ नहीं कहा और ना ही
- 1:42:07उनसे कोई बदतमीजी की है। आप मेरा यकीन
- 1:42:09कीजिए। सुधा मोम फिर उससे बोली शर्माओ मत
- 1:42:13और बोलो कि तुम कौन सी मिठाई खाऊंगी। फिर
- 1:42:16कविता वो हमारे लिए ले आएंगी। क्यों
- 1:42:18कविता? सुधा मोम की बात पर छोटी मां ने
- 1:42:20हां में सर हिलाया और सिया के तरफ देखने
- 1:42:22लग गई। सिया फिर धीरे से बोली मैं मैं
- 1:42:24जलेबी खा लूंगी। मुझे सारी मीठी चीजें
- 1:42:27पसंद आती है तो मैं किसी एक को सिलेलेक्ट
- 1:42:29नहीं कर सकती। सिया ने कहा और उसकी बात
- 1:42:31सुन। फिर एक बार सुधा मोम और छोटी मां हंस
- 1:42:33पड़ी। छोटी मां फिर सिया के गाल हल्के से
- 1:42:36खींचते हुए बोली। तभी भाभी यह इतनी प्यारी
- 1:42:39और मीठी है। चलो फिर आज जलेबी खाते हैं।
- 1:42:41फिर कल कुछ और खा लेंगे। छोटी मां कहकर
- 1:42:43बाहर चली गई। उनके आते ही सुधा मोम ने
- 1:42:46सिया के तरफ देखा और बोली सिया क्या हुआ
- 1:42:49था? कविता के आंखों में आंसू क्यों थे? और
- 1:42:52जवाब में सिया ने उन्हें उनके बीच हुई
- 1:42:54सारी बातें बता दी। वो थोड़ा डर कर ही
- 1:42:56बोली मुझे मुझे नहीं पता मां। मैंने उनसे
- 1:42:59कुछ नहीं कहा और ना ही उनसे कोई बातमीजी
- 1:43:01की है। आप मेरा यकीन कीजिए। सिया को
- 1:43:04घबराया हुआ देख सुधा मोम ने उसके कंधे पर
- 1:43:06हाथ रखा और बोली। सिया डरो मत बेटा। मैं
- 1:43:10बस पूछ रही हूं। वो कविता मेरे लिए मेरी
- 1:43:12ननंद ही नहीं बल्कि मेरी छोटी बहन के जैसी
- 1:43:14है। पता है। जब मैं शादी करके यहां आई थी
- 1:43:17ना तब वो सिर्फ 15 साल की थी। छोटी होने
- 1:43:20के बाद भी उसने मेरी बहुत हेल्प की। मुझे
- 1:43:22सपोर्ट किया और उसके इसी अच्छाई और अपनेपन
- 1:43:25को देख मेरे पापा ने उसकी और मेरे भाई अजय
- 1:43:27की शादी तय कर दी। सिर्फ 17 साल की थी तो
- 1:43:29तब। मैं मना कर रही थी इस शादी के लिए।
- 1:43:32लेकिन सबके आगे मेरी एक ना चली। वो नहीं
- 1:43:34चाहती थी यह शादी। लेकिन फिर उसने अजय को
- 1:43:37और मेरे मायके को अपना लिया। साल भर के
- 1:43:40अंदर ही उसे अक्षय और कृष्णा हुए। सब कुछ
- 1:43:42अच्छा जा रहा था। राघव के वक्त हम सबको
- 1:43:44लगा कि शायद इस बार हमें लड़की होंगी।
- 1:43:46लेकिन नहीं हमें राघव हुआ। हम सब खुश थे।
- 1:43:49लेकिन एक दिन यह अजय और गहर के सभी बड़े
- 1:43:52हमारे पूना वाले रिश्तेदार के शादी में जा
- 1:43:54रहे थे और रास्ते में उनका बहुत ही बुरा
- 1:43:56एक्सीडेंट हो गया जिसमें सब चल बसे। सिर्फ
- 1:43:59तुम्हारे पापा ही ठीक थे। लेकिन वो कोमा
- 1:44:01में चले गए। सुधा मोम की आंखें कहते कहते
- 1:44:03नम हो गई। उन्होंने अपने आंसू साफ किए और
- 1:44:06बोली जानती हो सिया उस वक्त हम इतने आमिर
- 1:44:09नहीं थे और जो कुछ भी सेवंस थी वो सब
- 1:44:12तुम्हारे पापा के इलाज में चली गई। उन
- 1:44:14दिनों बहुत बुरे हालात देखे हैं हमने।
- 1:44:17क्या करें कुछ सूझ नहीं रहा था। इस वजह से
- 1:44:19फिर मैंने डिसाइड किया कि मैं बाहर काम पर
- 1:44:21जाऊंगी और कविता घर रहकर सबका ध्यान
- 1:44:24रखेंगी। मैं उससे ज्यादा पढ़ी लिखी थी। इस
- 1:44:26वजह से मुझे काम मिलने के ज्यादा चांसेस
- 1:44:29थे। पता है वो थी। इस वजह से ही मैं बाहर
- 1:44:31काम पर पाई। उसने मेरे राज और राघव को
- 1:44:33उतना ही प्यार दिया जो वो अक्षय और कृष्णा
- 1:44:35को देती थी। यहां तक इनका भी बहुत ध्यान
- 1:44:38रखा। यह उसी के बदौलत है कि यह आज चल फिर
- 1:44:40पा रहे हैं। फिर से काम पर जा रहे हैं।
- 1:44:42वरना सुधा मोम आगे कुछ कह ही नहीं। सिया
- 1:44:46के आंखों में भी आंसू आ गए। सुधा मोम फिर
- 1:44:48एक बार उससे बोली। सिया अगर एक पल तुम
- 1:44:51मेरी बात मत मानो। मुझे बुरा भला कह दो।
- 1:44:55लेकिन कविता को कुछ मत कहना। उसने अपनी
- 1:44:57पूरी जिंदगी अकेले ही बिताई है। और बहुत
- 1:45:00अकेली हो गई है वह। और इसी अकेलेपन की वजह
- 1:45:02से बीमार भी। कहने को तो हमसे छोटी है
- 1:45:06सिर्फ 46 साल की लेकिन उसकी बॉडी काफी
- 1:45:08कमजोर हो गई है और बीपी जैसे बीमारी ने भी
- 1:45:11उसे घेर लिया है। इसीलिए हम सब उसका बहुत
- 1:45:13ध्यान रखते हैं और मैं उम्मीद करती हूं कि
- 1:45:16तुम भी उसका ध्यान रखूंगी। सुधा मोम की
- 1:45:18बात सुन सिया ने हां मैं सर हिलाया और
- 1:45:20बोली हां मोम मैं उनका ध्यान रखूंगी।
- 1:45:22उन्हें कभी हर्ट नहीं करूंगी। सिया की
- 1:45:24आंखों में पानी था जिसे सुधा मोम ने प्यार
- 1:45:27से साफ किया और फिर अपने कमरे में चली गई।
- 1:45:29कुछ देर बाद जब छोटी मां आई तब उन सभी ने
- 1:45:32मिलकर नाश्ता किया। सुधा मोम और डैड उनके
- 1:45:34काम पर निकल गए। वही सिया बाकी सब काम
- 1:45:37करने में लग गई। थोड़ी देर बाद जब दोनों
- 1:45:39काम वाली आंटी आई तब कविता जी ने उसका
- 1:45:41इंट्रो उन दोनों से करवा दिया। दोपहर का
- 1:45:43खाना भी सिया ने ही बन था। उसने शांति
- 1:45:45आंटी को मना कर दिया और बाकी काम ही करने
- 1:45:47के लिए बोल दिए और फिर सबके लिए गरमागरम
- 1:45:49टिफिन भिजवा दिया। सिया ने एक पल के लिए
- 1:45:52भी छोटी मां को अकेला नहीं छोड़ा था। उनके
- 1:45:55साथ से वह भी बेहतर फील कर रही थी। दिन भर
- 1:45:57छोटी मां के साथ रहकर उसने सबकी पसंद जान
- 1:45:59ली थी और सबकी आदतें भी शाम होने तक उन
- 1:46:02दोनों ने मिलकर सिया का वार्ड्रोब भी
- 1:46:04अच्छे से सेट कर दिया और फिर वह रात का
- 1:46:05खाना बनाने के लिए किचन में चली गई। सब
- 1:46:08खुश थे उससे बहुत ज्यादा खुश। सुधा मोम और
- 1:46:11डेथ तो सबसे ज्यादा जिस तरह से घर आने के
- 1:46:14बाद उसने सिया ने उनका मुस्कुराकर स्वागत
- 1:46:16किया और फिर उन्हें पानी देकर चाय दी। उस
- 1:46:18वजह से ही उसके संस्कारों का पता चल रहा
- 1:46:21था और फिर दोपहर में उसके हाथ का खाया
- 1:46:23गरम-गरम खाना जिससे उनका आगे का दिन बहुत
- 1:46:26ही अच्छा बीता था। उन दोनों ने भर-भर के
- 1:46:28आशीर्वाद उसे दिए थे। देखते ही देखते राज
- 1:46:31और अक्षय भी आ गए और सिया ने उन्हें भी
- 1:46:33स्माइल देकर कॉफी दी। वह भी बहुत खुश थे।
- 1:46:35आज उनका दिन जो इतना अच्छा बीता था। अब
- 1:46:38सिया की आंखें दरवाजे पर राघव की राह देख
- 1:46:40रही थी। लेकिन जिसका इंतजार उसे था, वह तो
- 1:46:43अभी तक आया ही नहीं था। मायूस होकर वह
- 1:46:45किचन में चली गई और खाना बनाने लग गई। कुछ
- 1:46:48ही देर में किचन से इतनी अच्छी खुशबू आने
- 1:46:50लग गई कि सबके कदम अपने आप डाइनिंग टेबल
- 1:46:52की तरफ बढ़ गए। सिया उन सबको देख थोड़ी
- 1:46:55हैरान ही हो गई। वैसे तो खाना बन चुका था
- 1:46:57लेकिन रोटियां पूरी नहीं बनी थी और इस वजह
- 1:47:00से सिया डर गई। उसने एक बार सबकी तरफ देखा
- 1:47:02और फिर डर कर जल्दी-जल्दी अपने हाथ चलाने
- 1:47:04लग गई। सिया को यह समझ नहीं आ रहा था कि
- 1:47:06वह क्या करें। पहले रोटियां बनाए या फिर
- 1:47:10टेबल अरेंज करें। और इसी गड़बड़ी में ना
- 1:47:12तो उससे रोटी गोल बनी और तवे पर राखी।
- 1:47:14रोटी भी जल गई। उस जली हुई रोटी को देख
- 1:47:16सिया की आंखें नम हो गई और वह जल्दी से
- 1:47:18उसे पलटने को हुई। इससे पहले ही वह रोटी
- 1:47:21पलट पाती या फिर उसका हाथ गर्म तवे को लग
- 1:47:24पाता। उससे पहले ही किसी ने उसका हाथ पकड़
- 1:47:26लिया और उसके बाद उसे सुनाई दिए उस शख्स
- 1:47:29की फिक्र से भरी हुई आवाज आराम से हाथ जल
- 1:47:31जाएगा तुम्हारा। इस आवाज को सुन सिया की
- 1:47:33नजरें उस ओर चली गई और राघव उसे फिक्र से
- 1:47:36देखते हुए फिर से बोला क्या हुआ? लग गई
- 1:47:38क्या? आंखों में आंसू क्यों है तुम्हारे?
- 1:47:41दिखावा जरा। राघव के एक के बाद एक सवाल
- 1:47:44सुन सिया को सुझा ही नहीं वह क्या कहे और
- 1:47:46वह कुछ कह पाती उससे पहले ही वहां सब आ
- 1:47:49गए। छोटी मां जल्दी से उन दोनों के पास आए
- 1:47:52और बोली क्या हुआ? और सिया बेटा तुम रो
- 1:47:55क्यों रही हो? सुधा मोम भी बोली क्या हुआ?
- 1:47:58तुम्हें चोट लगी है क्या? और फिर क्या
- 1:48:00उनके सवाल और सबको देख सिया के आंखों के
- 1:48:03आंसू और भी बहने लगे। सिया इतनी कमजोर कभी
- 1:48:05भी नहीं थी। हां, उसे लोगों के गुस्से से
- 1:48:07डर लगता था। लेकिन इतना डर और रोती वह कभी
- 1:48:10नहीं थी। मगर बीते कुछ महीनों में उसके
- 1:48:12साथ इतना कुछ हो गया था कि वह कमजोर हो गई
- 1:48:14थी और राहुल और रोहित की टोक्सिक फैमिली
- 1:48:16की वजह से उसके अंदर बहुत ही ज्यादा खौफ
- 1:48:18बैठ गया था। राज अक्षय और कृष्णा ने पहले
- 1:48:22उसे सिया को और फिर राघव को देखा। वह
- 1:48:24डॉक्टर्स थे और सिया के बॉडी लैंग्वेज को
- 1:48:26देख वो आसानी से समझ गए थे कि वह इस वक्त
- 1:48:29काफी डरी हुई है। मगर क्यों? यह उन्हें भी
- 1:48:32समझ नहीं आया और इसलिए उन्होंने राघव के
- 1:48:34तरफ देखा। राघव ने गहली सांस ली और बोला
- 1:48:37सिर्फ एक रोटी ही जली है। इस वजह से इतना
- 1:48:39डरने की कोई बात नहीं है सिया कोई तुमसे
- 1:48:42कुछ नहीं कहगा। राघव की बात सुन सिया ने
- 1:48:44किसी तरह ऊपर देखा और सिसकते हुए बोली खा
- 1:48:47ना खाना भी नहीं बना मैं मैं जल्दी जल्दी
- 1:48:50बनाती हूं। आप प्लीज वेट करेंगे थोड़ा।
- 1:48:53सिया ने सिसकते हुए हकलाते हुए किसी तरह
- 1:48:55से कहा। राघव के प्रेजेंस की वजह से ही
- 1:48:57उसमें थोड़ी हिम्मत आ गई थी और उसे लगा कि
- 1:49:00कोई है जो उसे डांटगा नहीं बल्कि उसे
- 1:49:02सपोर्ट करेगा। वह बड़ी ही उम्मीद से उसकी
- 1:49:04तरफ देखने लगी। राघव ने अपने होठों पर एक
- 1:49:07छोटी सी स्माइल लाई और बोला, हां बिल्कुल
- 1:49:10तुम आराम से रोटी बनाओ। हम रुकते हैं एक
- 1:49:12राघव की बात सुन। सिया को अच्छा लगा। तभी
- 1:49:14छोटी मां भी बोली इसमें रोने वाली कोई बात
- 1:49:17नहीं थी सिया कोई तुम्हें नहीं डांटेंगा।
- 1:49:19राघव अक्षय चलो तुम दोनों एक काम करो। यह
- 1:49:22जो सब्जी के बीएओएल है ना उसे बाहर लेकर
- 1:49:24जाओ और कृष्णा पानी और प्लेट्स अरेंज करो।
- 1:49:27राज तुम कृष्णा की हेल्प करो। छोटी मां ने
- 1:49:29सभी को काम बता दिए और सिया उन्हें देखती
- 1:49:31ही रह गई। उसने अपनी आंखें दोचार बार खोल
- 1:49:35बंद की और बड़े ही मासूमी से बोली छोटी
- 1:49:37मां आप उन्हें क्यों काम बोल रही है? वह
- 1:49:40सब यह काम कैसे कर सकते हैं? सिया का सवाल
- 1:49:42सुन सबके चेहरे पर स्माइल आ गई या फिर यूं
- 1:49:45कहे कि उसके अपेक्सेशन देख सबके चेहरे पर
- 1:49:47स्माइल आ गई। उसके सवाल का जवाब देते हुए
- 1:49:50सुधा मोम बोली वो यह काम क्यों नहीं कर
- 1:49:52सकते सिया? यह घर हम सबका है तो यहां किए
- 1:49:56जाने वाले काम भी तो सबके ही हुए ना। सुधा
- 1:49:59मोम की बात सुन सिया धीरे से बोली लेकिन
- 1:50:01वो वो तो लड़के हैं ना तो वह किचन में काम
- 1:50:03कैसे कर सकते हैं सिया ने अपने घर के
- 1:50:06माहौल को याद करते हुए सवाल किया उसके
- 1:50:08यहां तो सभी जेंट्स यहां तक कि उसके भाई
- 1:50:10भी हाथ से एक गिलास पानी तक के नहीं लेते
- 1:50:12थे और यहां उसकी सासू मां और छोटी मां
- 1:50:14उनके सभी बेटों को काम बोल रही थी। सिया
- 1:50:17की बातें जो अब तक सभी सुन रहे थे उन्हें
- 1:50:19अंदाजा हो गया कि शायद सिया के घर पर कोई
- 1:50:22काम ना करता हो और उनके बारे में जो भी
- 1:50:24उन्होंने सुना था उस बात को याद कर इस बात
- 1:50:26का अंदाजा लग गया कि शायद उसके घर लड़के
- 1:50:28और लड़कियों के बीच भेदभाव नहीं होता हो।
- 1:50:31उन्हें यह बात बहुत ही बुरी लगी। सिया को
- 1:50:33समझाते हुए पापा बोले लड़के है तो क्या
- 1:50:35हुआ सिया? किचन और घर के बेसिक काम सभी को
- 1:50:38आने चाहिए ना।
- 1:50:41एपिसोड 21 से 30 डिस्क्लेमर यह कहानी पूरी
- 1:50:45तरह काल्पनिक है। यह सिर्फ दर्शकों के
- 1:50:47मनोरंजन के लिए बनाई गई है। इसमें दर्शाए
- 1:50:50गए सभी पात्र, नाम, उत्पाद और घटनाएं पूरी
- 1:50:53तरह काल्पनिक है। यह कहानी किसी भी तरह से
- 1:50:56किसी भी व्यक्ति के भावनाओं, प्रथाओं,
- 1:50:58परंपराओं और विश्वासों के अपमान नहीं करती
- 1:51:01है। और कहानी में बताए गए सभी चीजों का
- 1:51:04मात्र कहानी के लेखक द्वारा बनाई गई लेखक
- 1:51:07की अपनी एक कल्पना है। बैक टू स्टोरी।
- 1:51:09राघव ने अपने होठों पर एक छोटी सी स्माइल
- 1:51:12लाई और बोला हां बिल्कुल तुम आराम से रोटी
- 1:51:14बनाओ। हम रुकते हैं। एक राघव की बात सुन।
- 1:51:17सिया को अच्छा लगा। तभी छोटी मां भी बोली
- 1:51:19इसमें रोने वाली कोई बात नहीं थी सिया कोई
- 1:51:21तुम्हें नहीं डांटेंगा। राघव अक्षय चलो
- 1:51:24तुम दोनों एक काम करो। यह जो सब्जी के
- 1:51:26बीएओएल है ना उसे बाहर लेकर जाओ और कृष्णा
- 1:51:29पानी और प्लेट्स अरेंज करो। राज तुम
- 1:51:31कृष्णा की हेल्प करो। छोटी मां ने सभी को
- 1:51:33काम बता दिए। और सिया उन्हें देखती ही रह
- 1:51:35गई। उसने अपनी आंखें दो चार बार खोल बंद
- 1:51:38की और बड़े ही मासूमी से बोली छोटी मां आप
- 1:51:41उन्हें क्यों काम बोल रही है? वो सब यह
- 1:51:44काम कैसे कर सकते हैं? सिया का सवाल सुन
- 1:51:46सबके चेहरे पर स्माइल आ गई या फिर यूं कहे
- 1:51:49कि उसके अपेक्सशन देख सबके चेहरे पर
- 1:51:51स्माइल आ गई। उसके सवाल का जवाब देते हुए
- 1:51:54सुधा मोम बोली वो यह काम क्यों नहीं कर
- 1:51:56सकते सिया? यह घर हम सबका है। तो यहां किए
- 1:51:59जाने वाले काम भी तो सबके ही हुए ना। सुधा
- 1:52:02मोम की बात सुन। सुन सिया धीरे से बोली
- 1:52:04लेकिन वो वो तो लड़के हैं ना तो वो किचन
- 1:52:06में काम कैसे कर सकते हैं? सिया ने अपने
- 1:52:09घर के माहौल को याद करते हुए सवाल किया
- 1:52:11उसके यहां तो सभी जेंट्स यहां तक कि उसके
- 1:52:13भाई भी हाथ से एक गिलास पानी तक के नहीं
- 1:52:15लेते थे और यहां उसकी सासू मां और छोटी
- 1:52:18मां उनके सभी बेटों को काम बोल रही थी।
- 1:52:20सिया की बातें जो अब तक सभी सुन रहे थे
- 1:52:23उन्हें अंदाजा हो गया कि शायद सिया के घर
- 1:52:25पर कोई काम ना करता हो और उनके बारे में
- 1:52:27जो भी उन्होंने सुना था उस बात को याद कर
- 1:52:29इस बात का अंदाजा लग गया कि शायद उसके घर
- 1:52:31लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव नहीं
- 1:52:34होता हो उन्हें यह बात बहुत ही बुरी लगी
- 1:52:36सिया को समझाते हुए पापा बोले लड़के है तो
- 1:52:38क्या हुआ सिया किचन और घर के बेसिक काम
- 1:52:41सभी को आने चाहिए ना उद्धण चिन्ह मगर सिया
- 1:52:45फिर भी कुछ बोलना चाहती थी लेकिन वह शांत
- 1:52:47हो गई उसकी चुप्पी को देख पापा बोले मगर
- 1:52:49अगर तुम सोचो बेटा कल के को तुम तीनों
- 1:52:52सुधा मोम छोटी मां और सिया के तरफ इशारी
- 1:52:54करते हुए कहीं बाहर चली गई सपोज टू बी
- 1:52:57कहीं वेकेशन पर चली गई तब हम क्या करेंगे
- 1:53:00पापा और भी आगे बोलने वाले थे लेकिन तब तक
- 1:53:03ही सिया बोल पड़ी नहीं हम आपको छोड़कर
- 1:53:06क्यों जाएंगे भला हम सब साथ ही जाएंगे और
- 1:53:09उसकी वह बात सुन सबके चेहरे पर बड़ी वाली
- 1:53:11स्माइल आ गई चाहे कुछ भी हो उसके घर का
- 1:53:14माहौल कैसा भी हो लेकिन एक बात थी उसके घर
- 1:53:16वालों ने सिया पर संस्कार काफी अच्छे किए
- 1:53:19थे उसकी की बातों से यह साफ जाहिर होता था
- 1:53:21कि वो घर तोड़ने वालों में से नहीं बल्कि
- 1:53:23घर को जोड़कर रखने वालों में से थी। सिया
- 1:53:26ने सबको यूं मुस्कुराते हुए देखा और शर्म
- 1:53:28से अपना चेहरा झुका लिया। उसे समझ नहीं
- 1:53:30आया कि वह सब क्यों मुस्कुरा रहे हैं।
- 1:53:33उसने ऐसी क्या बात कह दी भला जो सब उस पर
- 1:53:36हंस रहे। सिया को बहुत ही शर्मिंदगीगी
- 1:53:38महसूस हुई। उसे समझाते हुए फिर से पापा
- 1:53:41बोले सिया बेटा ठीक है कि हम सब साथ ही
- 1:53:43कहीं घूमने जाएंगे। लेकिन फिर भी कभी कभार
- 1:53:46तुम लेडीज को भी थोड़े बहुत चेंजेस चाहिए।
- 1:53:48होते हैं ना। बस इसी वजह से इन लड़कों को
- 1:53:51भी कुकिंग और बाकी सब छोटे बड़े काम आने
- 1:53:53चाहिए। और एक बात ऐसे कौन से किताब में
- 1:53:55नहीं लिखा कि तुम लेडीज ही घर के सारे काम
- 1:53:57करोगी और हम जेंट्स नहीं हम बताओ जरा हे
- 1:54:01क्या ऐसी कोई किताब में लिखा पापा के सवाल
- 1:54:04पर सिया ने ना में सर हिलाया तो फिर इन
- 1:54:07सबको कम करने दो और तुम जल्दी से रोटियां
- 1:54:09बनाओ। वैसे भी तुम्हारी बनाई हुई सब्जी की
- 1:54:12कहे इतनी अच्छी है कि मुझसे अब भूख
- 1:54:14बर्दाश्त ही नहीं हो रही है। पाप की बात
- 1:54:16सुन सिया मुस्कुराई और फिर से गैस के तरफ
- 1:54:18मुड़ गई। बाकी सब ने अपना-अपना बताया हुआ
- 1:54:20काम किया और छोटी मां सिया की हेल्प करने
- 1:54:22लग गई। सुधा मोम भी सैलाड कट करने में लग
- 1:54:25गई और पापा उनकी हेल्प करने में सिया ने
- 1:54:28फिर जल्दी-जल्दी हाथ चलाया और सभी के लिए
- 1:54:30रोटियां बना दी। उसने छोटी मां से कहा था
- 1:54:33कि वह सब खाने के लिए बैठ जाए। वह गरम-गरम
- 1:54:35रोटियां बनाकर दे देंगी।
- 1:54:38लेकिन उन्होंने मना किया और कहा कि वह सब
- 1:54:40साथ ही में डिनर करने बैठेंगे और आखिर में
- 1:54:42सभी ने एक साथ सिया के हाथों से बने हुए
- 1:54:44खाने का लुफ उठाया और उसकी बहुत तारीफ भी
- 1:54:46की। सिया राघव के पास वाली कुर्सी पर ही
- 1:54:49बैठी थी डिनर करने और सबको क्या चाहिए और
- 1:54:51क्या नहीं इस बात का ध्यान भी रख रही थी।
- 1:54:53तभी कुछ लेने के बहाने से राघव उसके पास
- 1:54:56झुका और धीरे से उससे बोला बहुत ही लजीज
- 1:54:59खाना बना है सिया मुझे बहुत पसंद आया और
- 1:55:01बस राघव के वह चंद लफज सुन सिया के चेहरे
- 1:55:04पर मानो गुलाब खिल गए। उसकी वह छोटी सी
- 1:55:06तारीफ सिया को इतनी खुश कर गई कि वह खुशी
- 1:55:08से फुले ना समाए। सबका डिनर हो जाने के
- 1:55:11बाद सभी ने प्लेट्स और टेबल क्लीन करने
- 1:55:13में उसकी हेल्प की और हॉल में आकर बैठ गए।
- 1:55:15सिया भी किचन के जाकर किचन प्लेटफार्म
- 1:55:17क्लीन करने लगी। तभी सुधा मोम ने उसे आवाज
- 1:55:20देकर हॉल में बुलाया और बोली, बर्तन रहने
- 1:55:22दो सिया। कल शांति उन्हें साफ कर देंगी।
- 1:55:25आओ बैठो हमारे साथ। सुधा मोम की बात सुन।
- 1:55:28सिया बोली, मोम रत भर बर्तन झूठे रखना
- 1:55:30अच्छी बात नहीं है और थोड़े ही बर्तन है।
- 1:55:33मैं उन्हें साफ कर दूंगी। आप फिक्र मत
- 1:55:35कीजिए। सिया की बात सुन। सुधा मोम ने हां
- 1:55:37में सर हिलाया और बोली, ठीक है जैसे तुम
- 1:55:40चाहो लेकिन अभी कुछ देर बैठो। मुझे तुमसे
- 1:55:42इनफेक्टेड सभी से बात करनी है। सुधा मोम
- 1:55:45ने चेहरे पर के एक्सप्रेशन देख सिया भी
- 1:55:46सीरियस होकर वहां बैठ गई। तभी राज बोला
- 1:55:50क्या हुआ मॉम? कोई सीरियस बात है क्या?
- 1:55:53जवाब में सुधा मोम बोली नहीं सीरियस नहीं।
- 1:55:56लेकिन आज दोपहर राघव को गिरीश जी का सिया
- 1:55:58के पापा का कॉल आया था। उन्होंने हम सभी
- 1:56:01को कल दोपहर लंच के लिए उनके घर इनवाइट
- 1:56:03किया है। सुधा मोम ने पहले राज के तरफ और
- 1:56:06फिर सिया के तरफ देखकर कहा और अपने पापा
- 1:56:08का नाम सुन सिया के आंखों में नमी छा गई।
- 1:56:10उसके पापा से उसने कितने दिनों से बात
- 1:56:12नहीं की थी और अब उनका जिक्र सुन सिया को
- 1:56:15उनकी उसकी मां प्रिया की याद आने लग गई।
- 1:56:17उसका फोन तो उससे उसी वक्त छीन लिया था।
- 1:56:19जब उसे घर में कैद करके रखा था। वहां वो
- 1:56:21शशांक का फोन कभी कभार यूज करती थी अपने
- 1:56:24दोस्तों से बात करने के लिए। लेकिन अब
- 1:56:26उसके पास कोई मोबाइल फोन नहीं था। सिया
- 1:56:29सिया सुधा मोम की आवाज सुन सिया होश में
- 1:56:31आए और उसने उनकी तरफ देखा। उसकी आंसुओं से
- 1:56:35भरी हुई आंखें देख उन सभी को बहुत बुरा
- 1:56:37लगा। सुधा मोम आगे बोली अम्मा सिया हम कल
- 1:56:40तुम्हारे घर जाएंगे। जिस तरह से तुम अब
- 1:56:43हमारे घर की बेटी हो। उसी तरह से राघव भी
- 1:56:45अब उस घर का हिस्सा है। तो हम सबका फर्ज
- 1:56:47बनता है कि हम वहां जाए। इसी बहाने सबकी
- 1:56:50पहचान भी उनसे हो जाएंगी। सुधा मोम की बात
- 1:56:52सुन। सिया ने हां में सर हिलाया। सुधा मोम
- 1:56:54फिर बोली ठीक है फिर एक काम करो तुम ना
- 1:56:57गिरीश जी को कॉल कनेक्ट करके दे दो और
- 1:56:59राघव उनसे बात कर उन्हें इनफॉर्म कर दो कि
- 1:57:01हम कल 12:00 बजे तक आ जाएंगे सुधा मोम की
- 1:57:05बात सुन राघव ने हां में सर हिलाया और
- 1:57:07सिया के तरफ देखने लग गया सिया भी उसे देख
- 1:57:09रही थी राघव उससे बोला कॉल कनेक्ट करके दे
- 1:57:12रही हो ना राघव की बात सुन सिया ने ना में
- 1:57:15सर हिलाया और धीरे से बोली मेरे पास मेरे
- 1:57:18पास मेरा फोन नहीं है वो वो मेरा फोन सिया
- 1:57:21को आगे सुझा ही नहीं कि वह क्या कहे है और
- 1:57:24कैसे कहे कि उसके घर वालों ने महीनों पहले
- 1:57:26ही उसका फोन उससे छीन लिया था। राघव शायद
- 1:57:29उसकी यह बात समझ गया और वह बोला अम्मा
- 1:57:32डोंट वरी। मैं अपने फोन से कॉल कनेक्ट
- 1:57:35करता हूं। 1 मिनट हां राघव ने कहा और जाकर
- 1:57:37अपना मोबाइल फोन ले आया। उसने फिर दोपहर
- 1:57:40को आए हुए गिरीश जी के नंबर पर कॉल किया
- 1:57:42और उन्हें इनफॉर्म किया कि वह कल दोपहर तक
- 1:57:44आ जाएंगे। कुछ और बातें करने के बाद उसने
- 1:57:47सिया के तरफ देखा और फिर गिरीश जी से बोला
- 1:57:49मैं सिया के पास सेल देता हूं। आप उससे
- 1:57:52बात कीजिए। राघव ने फिर मोबाइल सिया के
- 1:57:54पास दे दिया और उसे बात करने के लिए
- 1:57:56प्राइवेसी मिले। इस वजह से सब एक-एक कर
- 1:57:58वहां से चले गए। सिया ने अपने कैपते हाथों
- 1:58:01से मोबाइल लिया और किस तरह हिम्मत जुटाकर
- 1:58:03धीरे से बोली हेलो पापा जवाब में गिरीश जी
- 1:58:07की भी धीमी आवाज उसे सुनाई दी। वो उससे
- 1:58:09बोले कैसी हो सी? और उनका सवाल सुन सिया
- 1:58:12के आंखों से आंसू बहने लग गए। उसकी सिसकी
- 1:58:14गिरीश जी को भी साफ-साफ सुनाई दे रही थी।
- 1:58:17वो उससे सिया से बहुत कुछ कहना चाहते थे।
- 1:58:19उसके बारे में पूछना चाहते थे। मगर इन कुछ
- 1:58:22महीनों में उन दोनों के बीच इतनी दूरी आ
- 1:58:24गई थी कि वह आगे कुछ कह ही नहीं पाए।
- 1:58:26दोनों तरफ भी सिर्फ खामोशी थी। अगर कुछ
- 1:58:28सुनाई दे रहा था तो वो थी सिया की
- 1:58:30हल्की-हल्की सिसकिया। मास्टर आध्या के
- 1:58:33गुरु जिन्होंने उसे कराटे, बॉक्सिंग जैसी
- 1:58:35और भी सेल्फ डिफेंस टेक्निक सिखाई और ना
- 1:58:38सिर्फ सिखाई बल्कि उन सभी चीजों में उसे
- 1:58:40एक्सपर्ट भी बना दिया। वह चाहते थे कि
- 1:58:42आध्या आगे उसी में अपना करियर बनाए। लेकिन
- 1:58:45आध्या ने अपने पेरेंट्स के सपनों को चुना
- 1:58:47और उस पर काम करने लगी।
- 1:58:49लेकिन मास्टर के साथ वह अब भी थी। सिद्ध
- 1:58:51के बाद एक वही थे जिनसे आध्या थोड़ी बहुत
- 1:58:54डरती थी। यहां इस बॉक्सिंग रिंग में आध्या
- 1:58:56हमेशा नहीं आती थी। जब उसे पैसों की जरूरत
- 1:58:58होती या फिर जब वह इमोशनली बहुत वीक या
- 1:59:01फिर बहुत गुस्सा होती तभी वह यहां आती थी
- 1:59:04और अपने अंदर के सारे इमोशन को गुस्से को
- 1:59:06उतार देती। सिद्ध को या फिर मास्टर को यह
- 1:59:09बात पता चले। यह आध्या कभी नहीं चाहती थी
- 1:59:11और यही वजह थी कि उसने यहां अपना नाम
- 1:59:13आध्या ना बताकर आर्या बताया था। मार्तन
- 1:59:16ठीक आध्या के पीछे ही था। आध्या बड़े ही
- 1:59:18आसानी से वह मौजूद ऊंची कंपाउंड वॉल पर
- 1:59:20चढ़ गई और पल भर में ही दूसरी ओर जंप कर
- 1:59:22दी। मार्तंड का गुस्सा उसकी यह करतब देख
- 1:59:25और बढ़ गया और उसने भी उसी की तरह वॉल पर
- 1:59:27से छलांग लगाई। आध्या वही पाक की हुई अपने
- 1:59:30बाइक के पास गई और उस पर बैठ उसने बाइक
- 1:59:32स्टॉप की। इससे पहले कि वह आगे बढ़ पाती
- 1:59:34मार्तंड वहां आ गया और उससे कुछ बोलने को
- 1:59:36ही हुआ था कि उससे पहले ही आध्या उससे
- 1:59:38बोली हे मैन क्या कर रहे हो? हटो जल्दी
- 1:59:42पुलिस आ गई ना तो हो गया कांड सिद्ध और
- 1:59:44मास्टर तो मेरी जान ही ले लेंगे आध्या की
- 1:59:47बब सुनकर भी मार्तंड वह से नहीं हटा और
- 1:59:49उसे ऐसे खड़े देख आध्या ने जल्दी से उसका
- 1:59:51हाथ पकड़ लिया और थोड़ा जोर से उसे खींचकर
- 1:59:54अपने पीछे कर बोली चलो बैठो तुम्हें भी
- 1:59:56लिफ्ट देकर यहां से निकालती हूं और आध्या
- 1:59:58ने उसे अपने पीछे बैठने का इशारा कर बाइक
- 2:00:00स्टार्ट कर दी मार्तंड भी बिना कुछ कहे
- 2:00:03आध्या के पीछे बैठ गया उसके होठों पर एक
- 2:00:06मुस्कान आ गई आध्या की वो छोटी सी छुवन पल
- 2:00:08भर के अंदर ही मार्तंड के अंदर पनप रहे
- 2:00:10गुस गुस्से के लावा को शांत कर गई और उसे
- 2:00:12एक अजीब सा सुकून महसूस हुआ। मार्तंड
- 2:00:14आध्या को मना ही नहीं कर पाया और चुपचाप
- 2:00:16आकार उसके पीछे बैठ गया। आध्या ने फुल रेस
- 2:00:19छोड़ते हुए अपनी बाइक स्टॉप की और फिर
- 2:00:21तेजी से वहां से निकल गई। मार्तंड को नहीं
- 2:00:23लगा था कि वह इतनी तेज बाइक चलाएंगी। इस
- 2:00:26वजह से फोर्स से वह थोड़ा पीछे हुआ और
- 2:00:28सपोर्ट के लिए उसने आध्या के कंधों को
- 2:00:30पकड़ लिया। आध्या एक पल तो कुछ नहीं बोली।
- 2:00:33लेकिन जब मार्तंड के हाथ उसके कंधे पर से
- 2:00:36नहीं हटे तो उसने बाइक की स्पीड थोड़ी कम
- 2:00:38कर दी और पीछे की ओर झुककर उससे बोली बड़ी
- 2:00:41बाइक पर बैठने की परमिशन दी है मुझे छूने
- 2:00:44की नहीं 100 हाथ हटाओ आध्या ने जिस
- 2:00:46एटीट्यूड से यह बात कही थी उसे सुन
- 2:00:48मार्तंड के ओठ के किनार ऊपर की और उठ गए
- 2:00:50उसने अपने हाथ नीचे किए और उसी एटीट्यूड
- 2:00:53से बोला आई कनो कि तुमने मुझे बाइक पर
- 2:00:55बैठने की परमिशन दी है ना कि छूने की
- 2:00:58लेकिन तुमने जिस स्पीड से बाइक स्टार्ट की
- 2:01:00थी ना उस वजह से मुझे सपोर्ट के लिए
- 2:01:02तुम्हें छूना ही पड़ा। वो क्या है ना बाइक
- 2:01:04पर किसी से पीछे बैठने का यह मेरा फर्स्ट
- 2:01:06टाइम है। मार्तंड कहकर उससे थोड़ा दूर
- 2:01:09होकर बैठ गया और आध्या मुस्कुराए और बोली
- 2:01:11वेल फर्स्ट टाइम मेरा भी है। किसी को अपने
- 2:01:14पीछे बिठाने का और आधी आने फिर से स्पीड
- 2:01:16बढ़ा दी। इस बात से अनजान होकर कि मार्तंड
- 2:01:19कितना खुश हुआ था। आध्या के लबों से यह
- 2:01:21सुनकर वो वो पहला शख्स है जो उसके आध्या
- 2:01:23के पीछे बाइक पर बैठा था। आगे फिर किसी ने
- 2:01:26कुछ नहीं कहा। मार्तंड मुस्कुराते हुए
- 2:01:29आध्या के प्रेजेंस को फिल कर रहा था। तो
- 2:01:31वही आध्या बाइक चलाने पर कंसंट्रेट कर रही
- 2:01:33थी। वह लोग सिटी जाने वाले हाईवे पर लग गए
- 2:01:36और आगे जाकर एक जगह आध्या ने बाइक रोक दी।
- 2:01:38मार्तंड उस जगह को देख हैरान हो गया और
- 2:01:40उससे आध्या से बोला, "हम यहां क्यों रुके
- 2:01:43हैं?" मार्तंड को वो जगह कुछ ठीक नहीं लग
- 2:01:45रही थी। वो जगह काफी सुनसान थी और रात के
- 2:01:48अंधेरे से घिरी हुई भी। मार्तंड ने आध्या
- 2:01:50के तरफ देखा और फिर उस जगह को गौर से
- 2:01:52देखने लगा। आध्या उसका सवाल सुन कुछ देर
- 2:01:55उसे देखती रह गई और फिर कुछ सोचकर जोर-जोर
- 2:01:58से हंसने लगी। मार्तंड की बातें और आंखें
- 2:02:00साफ-साफ दिखा रही थी कि वह कितना सीरियस
- 2:02:02हो गया है और इसी वजह से आध्या में उसे एक
- 2:02:04पल निहारा और फिर हंसने लगी। मार्तंड ने
- 2:02:07उसे घुरा और बोला तुम्हारे हंसने की वजह
- 2:02:09जान सकता हूं। मार्तंड के सवाल पर अध्या
- 2:02:12झट से बोली बेशक बेशक जान सकते हो। और
- 2:02:15आध्या फिर एक बार हंस पड़ी। मार्तंड ने
- 2:02:17अपने हाथ फोल्ड किए और उसे घूरते हुए
- 2:02:19नजरों से ही बोला कि बताओ क्या रीजन है
- 2:02:21तुम्हारे हंसने का? और आध्या भी उसका सवाल
- 2:02:24समझ गई। उसने अपनी हंसी रोकी और बोली,
- 2:02:27"हंसू नहीं तो क्या करूं यार?"
- 2:02:29तुम मुझे और इस जगह को ऐसे घूर रहे हो
- 2:02:31जैसे मैं तुम्हें यहां धोखे से लेकर आई
- 2:02:33हूं और अब तुम्हें चाकू दिखाकर तुम्हें
- 2:02:35लूटकर तुम्हारा मर्डर कर दूंगी। मतलब इतने
- 2:02:37सीरियस क्यों हो गए यार तुम? उद्धण चिन्ह
- 2:02:41आध्या का सवाल सुन मार्तन ने एक बार उसे
- 2:02:43देखा और फिर जगह को देखा। वो एक कदम आध्या
- 2:02:46के करीब आया और बोला मैं सीरियस इस वजह से
- 2:02:48नहीं हुआ कि मुझे तुमसे कोई खतरा हो बल्कि
- 2:02:51मैं तुम्हारे लिए सीरियस हुआ। इस तरह ऐसे
- 2:02:53अनजान लड़के के साथ रात के वक्त ऐसी
- 2:02:55सुनसान जगह पर रुकना क्या सेफ है? मार्तंड
- 2:02:58आध्या का नाम लेते लेते रुक गया और उसकी
- 2:03:01तरफ देखने लगा। आध्या भी उसे ही देख रही
- 2:03:04थी। अपलक बिना अपने पल के झपकाए हुए और उस
- 2:03:06अनजान शख्स के आंखों में मार्तंड के आंखों
- 2:03:09में झांकने की कोशिश कर रही थी। जिसमें
- 2:03:12उसे अपने लिए फिक्र दिखाई दे रही थी।
- 2:03:14मार्तंड सच में आध्या के सिक्योरिटी को
- 2:03:16लेकर बहुत फिक्रमंद था और थोड़ा डरा हुआ
- 2:03:18भी। कल तक उसके जिंदगी में डर नाम की कोई
- 2:03:20चीज नहीं थी। यहां तक कि उसे जानने वालों
- 2:03:23को भी कोई यह कहता ना कि मार्तंड पाटिल डर
- 2:03:25गया तो कोई उसकी बात पर भरोसा नहीं करता।
- 2:03:28इतना बेखौफ था मार्तंड। मगर आध्या के उसके
- 2:03:30लाइफ में आने के बाद सिर्फ एक दिन में ही
- 2:03:32मार्तंड एक बार नहीं बल्कि कई बार डर गया
- 2:03:35और वो डर वोफिक्र आध्या को अब उसकी आंखों
- 2:03:37में दिखाई दे रही थी। क्या हुआ? ऐसे क्या
- 2:03:40देख रही हो? मार्तंड ने आध्या के चेहरे के
- 2:03:43आगे चुटकी बजाई और सवाल किया। आध्या में
- 2:03:45सिर्फ नाम में सर हिलाया और कुछ ना बोलते
- 2:03:47हुए उससे नजरें चुरा ली। मार्तंड ही फिर
- 2:03:49बोला अब चले यहां से आई डोंट थिंक सो कि
- 2:03:53यहां रुकना सेफ होगा मार्तंड की बात सुन
- 2:03:55आध्या ने उसके तरफ देखा और बोली डोंट वरी
- 2:03:59यह जगह सेफ है। आध्या बाइक के हैंडल को
- 2:04:01थामकर वही पास के कच्चे रास्ते से बाइक
- 2:04:03फोड़ी अंदर लेने लग गई और मार्तंड ने बिना
- 2:04:05कुछ बोले ही उसके हाथ से बाइक अपने हाथ
- 2:04:07में ले ली और उसे आगे चलने का इशारा किया।
- 2:04:10वह रास्ता वाकई में बहुत ही खराब था और
- 2:04:12बाइक के हेडलाइट में साफ-साफ दिखाई दे रहा
- 2:04:14था। मार्तंड किसी तरह से बाइक को थामे।
- 2:04:17आध्या के पीछे जा रहा था। बस कुछ दूरी पर
- 2:04:19जाने के बाद आध्या ने उसे रुकने के लिए
- 2:04:21बोल दिया और गाड़ी को लॉक कर उसने बाइक पर
- 2:04:23लगी साइड बैग से एक और बैग निकाली। चले
- 2:04:26आध्या के सवाल पर मार्तंड ने कुछ नहीं कहा
- 2:04:29और उसके पीछे जाने लगा। मोबाइल फ्लैशाइट
- 2:04:31के उजाले में वह दोनों आगे बढ़ रहे थे और
- 2:04:34जैसे-जैसे वह आगे जा रहे थे, वैसे-वैसे
- 2:04:36मार्तंड को हवा में बढ़ी हुई ठंड का एहसास
- 2:04:39हो रहा था और कुछ ही देर में वह दोनों एक
- 2:04:41खूबसूरत तालाब के किनारे पहुंचे। आसपास
- 2:04:43बिखरे चांद और सितारों की रोशनी में वह
- 2:04:45जगह बहुत ही ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रही
- 2:04:48थी। आध्या में मार्तंड के हाथ में अपना
- 2:04:50सेलफोन दिया और वहां आसपास के छोटी-छोटी
- 2:04:52लकड़ियां जमाकर उसने अपने साथ लाई हुई
- 2:04:54माचिस से उन लकड़ियों में आग जला दी।
- 2:04:57मार्तंड उसे गौर से देख रहा था और उसके हर
- 2:04:59एक हरकत को निहार रहा था। वह जिस तरह वहां
- 2:05:02थोड़ा अंधेरा होने के बावजूद भी हलचल कर
- 2:05:04रही थी ना उससे यह साफ जाहिर था कि वह
- 2:05:06पहले भी कई बार आ चुकी है। आध्या ने फिर
- 2:05:08मार्तंड को बैठने का इशारा किया और साथ
- 2:05:11लाई हुई बैग में से एक टिफिन और थमस
- 2:05:13निकालकर साइड में रख दिया। सुधा मोम की
- 2:05:15बात सुन राघव ने हां में सर हिलाया और
- 2:05:17सिया के तरफ देखने लग गया। सिया भी उसे
- 2:05:20देख रही थी। राघव उससे बोला कॉल कनेक्ट
- 2:05:22करके दे रही हो ना। राघव की बात सुन सिया
- 2:05:25ने ना में सर हिलाया और धीरे से बोली मेरे
- 2:05:28पास मेरे पास मेरा फोन नहीं है। वो वो
- 2:05:30मेरा फोन सिया को आगे सुझा ही नहीं कि वो
- 2:05:34क्या कहे और कैसे कहे कि उसके घर वालों ने
- 2:05:36महीनों पहले ही उसका फोन उससे छीन लिया
- 2:05:38था। राघव शायद उसकी यह बात समझ गया और वह
- 2:05:42बोला अम्मा डोंट वरी। मैं अपने फोन से कॉल
- 2:05:45कनेक्ट करता हूं। 1 मिनट हां राघव ने कहा
- 2:05:48और जाकर अपना मोबाइल फोन ले आया। उसने फिर
- 2:05:50दोपहर को आए हुए गिरीश जी के नंबर पर कॉल
- 2:05:52किया और उन्हें इनफॉर्म किया कि वह कल
- 2:05:54दोपहर तक आ जाएंगे। कुछ और बातें करने के
- 2:05:57बाद उसने सिया के तरफ देखा और फिर गिरीश
- 2:05:59जी से बोला मैं सिया के पास कॉल देता हूं।
- 2:06:02आप उससे बात कीजिए। राघव ने फिर मोबाइल
- 2:06:04सिया के पास दे दिया और उसे बात करने के
- 2:06:06लिए प्राइवेसी मिले। इस वजह से सब एक-एक
- 2:06:08कर वहां से चले गए। सिया ने अपने कैपते
- 2:06:11हाथों से मोबाइल लिया और किस तरह हिम्मत
- 2:06:13जुटाकर धीरे से बोली हेलो पापा जवाब में
- 2:06:17गिरीश जी की भी धीमी आवाज उसे सुनाई दी वो
- 2:06:19उससे बोले कैसी हो सी और उनका सवाल सुन
- 2:06:23सिया के आंखों से आंसू बहने लग गए उसकी
- 2:06:25सिसकी गिरीश जी को भी साफ-साफ सुनाई दे
- 2:06:27रही थी वो उससे सिया से बहुत कुछ कहना
- 2:06:30चाहते थे उसके बारे में पूछना चाहते थे
- 2:06:32मगर इन कुछ महीनों में उन दोनों के बीच
- 2:06:34इतनी दूरी आ गई थी कि वह आगे कुछ कह ही
- 2:06:36नहीं पाए दोनों तरफ सिर्फ खामोशी थी अगर
- 2:06:39कुछ सुनाई दे रहा था तो वो थीसिया की
- 2:06:41हल्की-हल्की सिसकिया आंखें तो गिरीश जी की
- 2:06:44भी नम थी लेकिन फिर भी उन्होंने ने किसी
- 2:06:46तरह अपने आवाज पर कंट्रोल किया और बोले कल
- 2:06:48कल जल्दी आ जाऊंगी ना मैं इंतजार करूंगा
- 2:06:52और उनके सवाल पर सिया ने रोते हुए हां में
- 2:06:54सर हिलाया और सिसकते हुए हो बोली हां हां
- 2:06:57पापा जल्दी जल्दी आऊंगी मैं आप अब मेरा
- 2:06:59इंतजार करना हां मैं आ जाऊंगी सिया खुश थी
- 2:07:02बहुत ज्यादा खुश उसके पापा के कुछ लफ्ज
- 2:07:05उसे कितना खुश कर गए थे यह उसके स्माइल पर
- 2:07:07से पता चल रहा था हम रखता हूं फोन फोन कल
- 2:07:09आ जाना। हां। गिरीश जी ने भावुक होते हुए
- 2:07:11कहा और फिर जल्दी से कॉल काट दी। कॉल कट
- 2:07:14होने के बाद भी सिया ने उसे अपने कान से
- 2:07:16पकड़ रखा था और वह सिसक रही थी। कितने
- 2:07:18महीनों बाद उसके पापा ने उससे बात की थी
- 2:07:21और उनके उन चमद लफ्जों में छिपी ममता सिया
- 2:07:23को समझ आ गई थी। वह वैसे ही रोते हुए उसके
- 2:07:25पापा के कहे हर एक लफ्ज को बार-बार याद कर
- 2:07:28रही थी। राघव जो तब से उसे देख रहा था।
- 2:07:31उसे अब सिया की हालत और देखी नहीं गई।
- 2:07:33गोरी सियारो- रोकर पूरी तरह से लाल हो
- 2:07:35चुकी थी और उसके आंखों पर हल्की सी सूजन
- 2:07:38भी आ चुकी थी। राघव ने उसके सर पर हाथ रखा
- 2:07:40और उसके बालों को सहलाते हुए बोला शस शांत
- 2:07:43हो जाओ सिया इतना नहीं रोते हैं। राघव की
- 2:07:46बात सुन सिया ने उसके तरफ देखा और रोते
- 2:07:48हुए बोली मेरे पापा ने मुझसे बात की और
- 2:07:51आपको पता है उन्होंने मुझे बोला कि कल मैं
- 2:07:53जल्दी आ जाओ। हम कल जाएंगे ना। क्या आप
- 2:07:56मुझे थोड़ा जल्दी उनके पार लेकर जाएंगे।
- 2:07:59प्लीज। सिया राघव की तरफ बहुत उम्मीद से
- 2:08:01देखने लगी और राघव ने हां में सर हिलाया।
- 2:08:04वो बोला, हां, कल हम जल्दी ही जाएंगे। मैं
- 2:08:06लेकर जाऊंगा तुम्हें। राघव की बात सुन।
- 2:08:08सिया सीधे उसके गले लग गई और रोते हुए ही
- 2:08:10उसे थैंक यू बोलने लग गई। राघव हैराना था
- 2:08:14उसके इस मुंह से। मगर उसे अच्छा भी लगा और
- 2:08:16उसने भी अपना हाथ उसके सर पर रख उसके
- 2:08:18बालों को सहलाने लगा। कुछ देर दोनों वैसे
- 2:08:20ही थे। फिर राघव ही होश में आया और उससे
- 2:08:23बोला, "सिया, चलो फ्रेश हो जाओ। देखो तो
- 2:08:25सही। रो-रो कर अपना चेहरा कैसा कर दिया है
- 2:08:27तुमने? सिया उसकी बात सुन उससे दूर हुई और
- 2:08:30और उनकी करीबी को याद कर हल्का सा शर्मा
- 2:08:33गई। वह शर्माते हुए किसी तरह हकलाते हुए
- 2:08:35बोली, मैं मैं अभी आती हूं और अगले ही पल
- 2:08:37सिया वहां से भाग गई। उसे इतनी शर्मा रही
- 2:08:40थी कि राघव से नजरें मिलाने की या फिर
- 2:08:42उसके तरफ देखने की उसमें हिम्मत ही नहीं
- 2:08:44थी। राघव उसे ऐसे भागते देख मुस्कुराया और
- 2:08:46फिर उसके नजरों से ओझल होते ही उसके चेहरे
- 2:08:49पर सीरियस एक्सप्रेशन आ गए। वह समझ नहीं
- 2:08:51पा रहा था सिया के फैमिली को। अगर वाकई
- 2:08:53में वह इतने टॉक्सिक थे तो अब क्या था?
- 2:08:56गिरीश जी ने जब उस सिया से कहा था ना कि
- 2:08:59कल जल्दी आना। उन लफ्जों से राघव को भी
- 2:09:01महसूस हो गया था कि वह अपनी बेटी से बहुत
- 2:09:03प्यार करते हैं। फिर उसकी शादी और बाकी
- 2:09:05सब। क्या सच में उनकी इज्जत उनके बेटी से
- 2:09:08ज्यादा इंपॉर्टेंट थी? यही सवाल राघव को
- 2:09:11रहरह कर आ रहे थे और उस ख्याल में खोया
- 2:09:13हुआ वह कृष्णा की आवाज से होश में आया।
- 2:09:16क्या कुछ कहा तुमने कृष? राघव ने सवाल
- 2:09:19किया और कृष्णा बोला कहां खो गया था तू?
- 2:09:22वो छोड़ बड़ी मॉम तुझे बुला रही है। वो कल
- 2:09:25जाना है नासिया के घर। तो उनका कहना था कि
- 2:09:27उनके कुछ गिफ्ट और पता नहीं क्या जाकर देख
- 2:09:31ले कि वो क्या कह रही थी। कृष्णा ने राघव
- 2:09:34को भेज दिया और फिर राघव सुधा मोम में
- 2:09:36कमरे में चला गया। राघव ने दरवाजे पर नॉक
- 2:09:39करते हुए अंदर आने की इजाजत मांगी और अंदर
- 2:09:41आकर उनसे बोला क्या हुआ मोम? आपने बुलाया।
- 2:09:45सुधा मोम ने उसे बैठने का इशारा किया और
- 2:09:48बोली हां कालसिया के घर खाली हाथ जाना
- 2:09:50अच्छा नहीं लगेगा। तुम एक काम करो कल सुबह
- 2:09:53तुम कृष्णा और राज को लेकर मार्केट चले
- 2:09:55जाओ। सिया को भी अपने साथ ले जाना और उससे
- 2:09:58पूछकर सबके सभी घर वालों के लिए उनके पसंद
- 2:10:00का कुछ ना कुछ ले लेना। इस तरह खाली हाथ
- 2:10:03जाना अच्छा नहीं लगता। और हां कुछ फ्रूट्स
- 2:10:05भी ले आना। लिस्ट में तुम्हें डाल दूंगी।
- 2:10:07बाकी मिठाई हम हमारे हमेशा वाली शॉप से
- 2:10:10लेकर चले जाएंगे। कविता और कुछ रहा तो
- 2:10:12नहीं है ना। याद दिला दो मुझे। और संजय जी
- 2:10:15आप आपसे मैंने कहा था कि सिया के हिस्से
- 2:10:17की ज्वेलरी बैंक लॉकर से निकाल लेंगा।
- 2:10:20लेकिन नहीं आपको तो कुछ याद नहीं रहता। अब
- 2:10:22कल जाते वक्त उसे हमारी तरफ से दिए हुए
- 2:10:24गहने भी पहनने होंगे ना। मगर आप है कि पता
- 2:10:27नहीं कैसे होगा सब कुछ। सुधा मोम अकेली
- 2:10:30है। बड़बड़ाए जा रही थी और उसे ऐसा देख
- 2:10:32अक्षय संजय जी और कविता मुस्कुरा रहे थे।
- 2:10:35हंसने वाले कोई बात नहीं की है मैंने। छह
- 2:10:38आपको कुछ समझ ही नहीं आता है। सुधा मोम ने
- 2:10:41उन्हें डांटते हुए कहा और वह सब खामोश हो
- 2:10:43गए। सुधा मोम की नजर फिर राघव पर गई जो
- 2:10:45किसी सोच में खोया वहां ही खड़ा था। सुधा
- 2:10:47मोम फिर उसके पास आई और फिक्र से बोली
- 2:10:49क्या हुआ राघव कोई बात हुई है क्या जवाब
- 2:10:53में राघव बोला नहीं वह बस सिया में पापा
- 2:10:56चाहते थे कि वो कल थोड़ा जल्दी आ जाए वो
- 2:10:58मोम राघव ने सिया और उसके पापा के बीच हुई
- 2:11:01सारी बातें यहां तक कि जो उसे फील हुआ वो
- 2:11:04भी बता दिया जिसे सुन सुधा मोम एक पल सोच
- 2:11:06में गिर गई क्या हुआ मॉम क्या सोच रही है
- 2:11:10आप राघव का सवाल सुन सुधा मोम मुस्कुराए
- 2:11:13और बोली नहीं कुछ नहीं एक काम करो तुम सब
- 2:11:15ना अभी शॉपिंग के लिए चले जाओ जाओ। वैसे
- 2:11:17भी अभी तक तो 8:30 ही हुए हैं और कुछ
- 2:11:19शॉप्स तो लेट नाइट भी ओपन होती है ना।
- 2:11:22देखो क्या लेते आता है और फिर सुबह तुम और
- 2:11:24सिया आगे जल्दी चले जाना। सुधा मोम की बात
- 2:11:26सुन राघव ने हां में सर हिलाया और अक्षय
- 2:11:29को आवाज देकर वह बाहर चले गए। हंसने वाले
- 2:11:32कोई बात नहीं की है मैंने। छह आपको कुछ
- 2:11:34समझ ही नहीं आता है। सुधा मोम ने उन्हें
- 2:11:37डांटते हुए कहा और वह सब खामोश हो गए।
- 2:11:39सुधा मोम की नजर फिर राघव पर गई। जो किसी
- 2:11:41सोच में खोया वहां ही खड़ा था। सुधा मोम
- 2:11:43फिर उसके पास आई और फिक्र से बोली क्या
- 2:11:45हुआ राघव कोई बात हुई है क्या जवाब में
- 2:11:49राघव बोला नहीं वह बस सिया में पापा चाहते
- 2:11:52थे कि वो कल थोड़ा जल्दी आ जाए वो मोम
- 2:11:55राघव ने सिया और उसके पापा के बीच हुई
- 2:11:57सारी बातें यहां तक कि जो उसे फील हुआ वो
- 2:12:00भी बता दिया जिसे सुन सुधा मोम एक पल सोच
- 2:12:02में गिर गई क्या हुआ मॉम क्या सोच रही है
- 2:12:06आप राघव का सवाल सुन सुधा मोम मुस्कुराए
- 2:12:08और बोली नहीं कुछ नहीं एक काम करो तुम सब
- 2:12:11ना अभी शॉपिंग के लिए चले जाओ जाओ। वैसे
- 2:12:13भी अभी तक तो 8:30 ही हुए हैं और कुछ
- 2:12:15शॉप्स तो लेट नाइट भी ओपन होती है ना।
- 2:12:17देखो क्या लेते आता है और फिर सुबह तुम और
- 2:12:20सिया आगे जल्दी चले जाना। सुधा मोम की बात
- 2:12:22सुन राघव ने हां में सर हिलाया और अक्षय
- 2:12:24को आवाज देकर वह बाहर चले गए। सिया सिया
- 2:12:28राघव ने उसे आवाज देते हुए पुकारा और सिया
- 2:12:30जो कि किचन में बर्तन धो रही थी, वह
- 2:12:32दौड़ते हुए ही बाहर आ गई। अपनी फूली हुई
- 2:12:35सांस को नॉर्मल करते हुए वह बोली, क्या
- 2:12:37हुआ जी? आपा ने बुलाया। उसका सवाल सुनने
- 2:12:40के लिए राघव होश में ही नहीं था। वह तो
- 2:12:42दौड़ती हुई सिया को आता देख फ्रिज होकर एक
- 2:12:45जगह खड़े हो गया। सिया दिखी इतनी खूबसूरत
- 2:12:47रही थी को वो चाहकर भी अपनी आंखें उस पर
- 2:12:49से हटा नहीं पा रहा था। बालों का बंधा
- 2:12:51मेसी बंद जिसमें से कुछ लिटे उसके चेहरे
- 2:12:54पर और गर्दन पर बिखरी हुई थी। दिखाई देती
- 2:12:57वो उसकी खूबसूरत लंबी गोरी गर्दन और उस पर
- 2:12:59जजचता उसका पहना मंगलसूत्र सिया ने अपने
- 2:13:02साड़ी का पल्लो अपने कमर पर बाढ़ रखा था।
- 2:13:04जिस वजह से उसकी गोरी-गोरी कमर साफ दिख
- 2:13:06रही थी। जिसे देख राघव ने अपनी थूक गटक ली
- 2:13:09और कई सारी नाकाम कोशिशें करने के बाद
- 2:13:11आखिर में अपनी नजर वहां से हटा दी। जी
- 2:13:14आपने आपने कुछ कहा नहीं। क्या हुआ? सिया
- 2:13:17ने फिर से पूछा और जवाब में सबसे पहले
- 2:13:19राघव ने उसके कमर पर टक किए हुए उसके
- 2:13:22पल्लों को अलग कर दिया। सिया की आंखें
- 2:13:24हैरानी से बड़ी हो गई। उसकी यह हरकत देख
- 2:13:26और राघव ने उसे अपनी नजरें फेर दी। वो
- 2:13:29धीरे से बोला, "अना काम छोड़ो और तैयार हो
- 2:13:31जाओ। हम शोपिन पर जा रहे हैं घर वालों के
- 2:13:34लिए गिफ्ट लेने है और राघव हवा की तेजी से
- 2:13:36वहां से चला गया। सिया वैसे ही खड़े रही
- 2:13:39और जब उसे एहसास हुआ कि राघव ने अभी क्या
- 2:13:41बोला और क्या किया तब शर्म से उसका चेहरा
- 2:13:44लाल हो गया। साथ ही में वह बहुत खुश भी
- 2:13:46हुई। तभी छोटी मां ने उसे आवाज दी और उसके
- 2:13:49पास आते हुए बोली सिया बेटा काम रहने दो
- 2:13:52और राघव के साथ जाओ। और हां जो तुम्हें
- 2:13:54पसंद है वह सारी चीजें ले लेना। छोटी मां
- 2:13:57की बात सुन। सिया बोली हां छोटी मां बस 10
- 2:14:00मिनट मैं उतने बर्तन जल्दी से साफ करती
- 2:14:02हूं और फिर जाती हूं। सिया कहकर जल्दी से
- 2:14:04किचन के तरफ जाने लग गई। लेकिन छोटी मां
- 2:14:06ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक दिया और सीधे
- 2:14:08तैयार होने के लिए भेज दिया। सिया खुश
- 2:14:11होते हुए उसके कमरे में गई और जल्दी से एक
- 2:14:14अच्छी से रॉयल ब्लू कलर की साड़ी पहनकर
- 2:14:16तैयार हो गई। ब्लैक कलर का छोटी स्लीव्स
- 2:14:18का ब्लाउज और वह डार्क ब्लू कलर की साड़ी
- 2:14:20उसके गोल रंग पर बहुत ही ज्यादा जच रही
- 2:14:22थी। सिया ने अपने बाल खोले। लेकिन फिर उसे
- 2:14:25याद आया कि शॉपिंग करते वक्त उसे उसके
- 2:14:27लंबे बाल कुछ ज्यादा ही परेशान करते हैं।
- 2:14:30इसलिए उसने जल्दी से अपने बालों का जुड़ा
- 2:14:32बंद बनाया और कान में झुमके पहनकर हल्का
- 2:14:34सा मेकअप कर दिया। अपने आंखों में काजल
- 2:14:37सजाकर उसने अपनी पर्स ली और बाहर आकर सुधा
- 2:14:39मोम के कमरे की ओर चली गई। उसने दरवाजे पर
- 2:14:42कनोक करके अंदर आने की इजाजत मांगी और
- 2:14:44उनसे बोली मोम वो वो हम शॉपिंग आपने कहा
- 2:14:47था ना कि हम शॉपिंग पर जाए तो क्या मैं
- 2:14:49जाऊं? सिया ने इजाजत मांगते हुए कहा और
- 2:14:52सुधा मोम ने हां में सर हिलाकर उसे जाने
- 2:14:54के लिए इजाजत दे दी। फिर कुछ सोचकर
- 2:14:57उन्होंने उसे आवाज दी और बोली यह लो कुछ
- 2:14:59पैसे रख लो मेरी तरफ से और तुम्हारा जो
- 2:15:02दिल चाहे अपने लिए खरीद लेना। सुधा मोम ने
- 2:15:04उसके हाथ में पैसे रखकर कहा तभी पापा भी
- 2:15:06सामने आकर बोले और यह मेरी तरफ से मेरी
- 2:15:09बेटी के लिए कुछ अच्छा सा खरीदना। हां।
- 2:15:11पापा ने आंखें मिचकाते हुए कहा और सिया ने
- 2:15:13मुस्कुराकर हां में सर हिलाया। वो जल्दी
- 2:15:15से नीचे झुकी और उनके पैर छूकर आशीर्वाद
- 2:15:17ले लिया। सब जाओ। राघव इंतजार कर रहा
- 2:15:21होगा। सुधा मोम ने उसे भेज दिया और सिया
- 2:15:23भी मुस्कुराती हुई चली गई। राघव ने उसे
- 2:15:25आते हुए देखा और इस बार किसी तरह से अपनी
- 2:15:27नजरों को उस पर से हटा दिया। वो खुद से ही
- 2:15:30बोला यह क्यों हर बार इतनी खूबसूरत दिखती
- 2:15:32है और पता नहीं मेरे नजरों को क्या हो गया
- 2:15:35जो उस पर से हटने का नाम ही नहीं ले रही
- 2:15:37है। राघव खुद से ही बड़बड़ाए जा रहा था।
- 2:15:40तभी सिया के पायल की छिनकार और हाथों के
- 2:15:42चूयों की खनखन उसे सुनाई दी। उसने एक नजर
- 2:15:44फिर से उसे देखा और मुस्कुराकर उसके लिए
- 2:15:46कार का गेट खोल दिया। सिया भी फिर जल्दी
- 2:15:48से गाड़ी में बैठ गई। राघव ने उसके सभी
- 2:15:52भाइयों को उसके साथ आने के लिए कहा था।
- 2:15:54लेकिन राज ने उसे समझाते हुए कहा कि यह
- 2:15:56वक्त उन दोनों को एक दूसरे के साथ ज्यादा
- 2:15:58से ज्यादा बिताना चाहिए ताकि वह दोनों एक
- 2:16:00दूसरे के करीब आ सके। एक दूसरे को समझ
- 2:16:03सके। राघव को भी कहीं ना कहीं उसकी बात
- 2:16:05सही लगी। इसलिए वह अकेला ही साथ जाने के
- 2:16:07लिए तैयार हुआ। राघव के अंदर ड्राइविंग
- 2:16:10सीट पर बैठते ही सिया ने उसके तरफ देखा और
- 2:16:12सवाल करते हुए बोली वो वो बाकी सब नहीं आ
- 2:16:15रहे हैं। छोटी मां ने कहा था कि अक्षय भाई
- 2:16:18और कृष्णा भाई आने वाले थे। सिया की बात
- 2:16:20सुन राघव उससे बोला क्या तुम्हें मेरे साथ
- 2:16:23जाने में डर लग रहा है? नहीं नहीं बिल्कुल
- 2:16:26नहीं। लेकिन हम एक फैमिली है ना तो हम साथ
- 2:16:29जाएंगे ना। और फिर रात भी तो है अगर साथ
- 2:16:31में कोई होता तो। सिया खामोश हो गई और फिर
- 2:16:35अपनी नजरें चुराते हुए बोली आप आप मुझे
- 2:16:37ऐसे मत देखिए ना मैं भूल जाती हूं कि मुझे
- 2:16:40क्या कहना है। सिया ने छोटा सा मुंह बनाते
- 2:16:42हुए कहा और उसके एक्सप्रेशन और बात सुन
- 2:16:44राघव अपनी हंसी नहीं रोक पाया। वो हंसने
- 2:16:47लग गया जिसे देख सिया फिर से बोली मैं
- 2:16:49क्या इतनी फनी हूं। जो आप सब बार-बार मुझ
- 2:16:52पर हंसते हैं। सिया का चेहरा तो और भी
- 2:16:54छोटा हो गया जिसे देख राघव ने ना में सर
- 2:16:57हिलाया और बोला नहीं तुम फनी नहीं बल्कि
- 2:16:59बहुत अच्छी हो। जितनी खूबसूरत हो ना उतनी
- 2:17:02ही समझदार और रिश्तों का मान रखने वाली
- 2:17:04भी। और यह जो एक्सप्रेशन तुम्हारे चेहरे
- 2:17:06पर आते हैं ना उसे देख अपने आप एक सुकून
- 2:17:09वाली मुस्कान चेहरे पर आ जाती है। बहुत
- 2:17:11खुशी होती है मुझे। इस वजह से सिर्फ
- 2:17:13मुस्कुराता नहीं बल्कि खुलकर हंसता हूं।
- 2:17:15राघव ने समझाते हुए कहा और फिर एक बार
- 2:17:18बड़ी सी स्माइल उसे दे दी। सिया ने भी
- 2:17:20समझते हुए उसे मुस्कान दी और बोली तो आप
- 2:17:23उन्हें बुला रहे हैं ना। हम साथ में
- 2:17:25जाएंगे और राज भाई को भी बुला लेना। हम
- 2:17:28साथ में जाएंगे। सिया की बात सुन राघव ने
- 2:17:30राज को कॉल किया और उन तीनों को भी अपने
- 2:17:32साथ आने के लिए बोल दिया। वह दोनों फिर
- 2:17:34गाड़ी से उतरे और उनके बड़ी गाड़ी के तरफ
- 2:17:37चले गए। राज, अक्षय और कृष्णा तीनों भी
- 2:17:40वहां आ गए। राज ने सिया के तरफ देखा और
- 2:17:42बोला, डोंट यू थिंक कि तुम दोनों को अकेले
- 2:17:45जाना चाहिए। तुम्हें उतना। राज के आगे कुछ
- 2:17:48बोलने से पहले ही सिया बोली, भाई, हम सब
- 2:17:50साथ जाते हैं ना। मुझे अच्छा लगेगा अगर आप
- 2:17:53हमारे साथ आओगे तो सिया ने इतने प्यार से
- 2:17:55कहा कि राज का भी दिल नहीं हुआ उसे मना
- 2:17:57करने के लिए। तभी अक्षय बोला सोच लो हां
- 2:18:01सिया हमारा आकर या ना आकर कोई फायदा नहीं
- 2:18:03है क्योंकि हमें शॉपिंग का एस भी नहीं आता
- 2:18:05है। हां कृष्णा तुम्हारी हेल्प कर सकता
- 2:18:07है। मां के साथ आदत है उसे शॉपिंग करने
- 2:18:10की। अक्षय की बात सुन सिया मुस्कुराते हुए
- 2:18:12बोली कोई बात नहीं भाई मैं सब मैनेज कर
- 2:18:15लूंगी। बस आप मेरे साथ चलो। सिया ने कहा
- 2:18:17और फिर उस बड़ी गाड़ी में बैठ मुस्कुराते
- 2:18:19हुए वो पांचो शॉपिंग के लिए निकल गए। या
- 2:18:22ने भी समझते हुए उसे मुस्कान दी और बोली
- 2:18:24तो आप उन्हें बुला रहे हैं ना। हम साथ में
- 2:18:27जाएंगे और राज भाई को भी बुला लेना। हम
- 2:18:30साथ में जाएंगे। सिया की बात सुन राघव ने
- 2:18:32राज को कॉल किया और उन तीनों को भी अपने
- 2:18:34साथ आने के लिए बोल दिया। वो दोनों फिर
- 2:18:36गाड़ी से उतरे और उनके बड़ी गाड़ी के तरफ
- 2:18:38चले गए। राज अक्षय और कृष्णा तीनों भी
- 2:18:42वहां आ गए। राज ने सिया के तरफ देखा और
- 2:18:44बोला डोंट यू थिंक कि तुम दोनों को अकेले
- 2:18:46जाना चाहिए। तुम्हें उतना। राज के आगे कुछ
- 2:18:49बोलने से पहले ही सिया बोली भाई हम सब साथ
- 2:18:52जाते हैं ना। मुझे अच्छा लगेगा अगर आप
- 2:18:55हमारे साथ आओगे तो सिया ने इतने प्यार से
- 2:18:57कहा कि राज का भी दिल नहीं हुआ उसे मना
- 2:18:59करने के लिए। तभी अक्षय बोला सोच लो हां
- 2:19:02सिया हमारा आकर या ना आकर कोई फायदा नहीं
- 2:19:05है क्योंकि हमें शॉपिंग का एस भी नहीं आता
- 2:19:07है। हां कृष्णा तुम्हारी हेल्प कर सकता
- 2:19:09है। मां के साथ आदत है उसे शॉपिंग करने
- 2:19:12की। अक्षय की बात सुन सिया मुस्कुराते हुए
- 2:19:14बोली कोई बात नहीं भाई मैं सब मैनेज कर
- 2:19:16लूंगी। बस आप मेरे साथ चलो। सिया ने कहा
- 2:19:19और फिर उस बड़ी गाड़ी में बैठ मुस्कुराते
- 2:19:21हुए वह पांचो शॉपिंग के लिए निकल गए। राघव
- 2:19:24ने कार मॉल के सामने खड़ी की और उन्हें
- 2:19:26उतरने का बोल वो पार्किंग एरिया में चला
- 2:19:28गया। सिया ने एक पल मॉल के तरफ देखा और
- 2:19:31फिर राघव के आने तक वह वहीं खड़े रहे।
- 2:19:33उसके आते ही वह सब अंदर गए। सिया आगे चल
- 2:19:35रही थी और यह चारों उसके पीछे जैसे उसके
- 2:19:38बॉडीगार्ड्स हो। मॉल में जो थोड़ी बहुत
- 2:19:40गर्दी थी। वो इन सबको बस देखते ही रह गए।
- 2:19:42एक बेहद खूबसूरत लड़की और उसके आसपास खड़े
- 2:19:45चार उतने ही हैंडसम पर्सनालिटी वाले लड़के
- 2:19:47सब बस उन्हें ही देख रहे थे। सिया ने राघव
- 2:19:50के तरफ देखा और बोली, सुनिए ना पहले हम
- 2:19:53जेंट सेक्शन में जाते हैं। वहां सबके लिए
- 2:19:56कपड़े ले लेंगे और फिर लेडीज की शॉपिंग
- 2:19:58करेंगे। मोम ने सभी के लिए कपड़े लेने के
- 2:20:00लिए बोले थे और घड़ी या दूसरा कुछ सिया की
- 2:20:02बात सुन राघव ने सिर्फ हां में सर हिलाया।
- 2:20:05वैसे भी वह सिर्फ पेमेंट करने और बैग
- 2:20:07उठाने के लिए ही आया था। यह शॉपिंग तो
- 2:20:09उसके बस की बात ही नहीं थी। सेम हाल अक्षय
- 2:20:12का भी था। राघव और अक्षय शॉपिंग के मामले
- 2:20:14में बहुत ही आलसी थे। राज का भी वैसा ही
- 2:20:16कुछ हाल था। मगर फिर भी वह कभी कभार कुछ
- 2:20:19ना कुछ खरीद लेता था। इन सब से अलग कृष्णा
- 2:20:21छोटी मां को हेल्प किया करता था शॉपिंग
- 2:20:23में। वो सब थर्ड फ्लोर पर मौजूद जेंट्स
- 2:20:26सेक्शन में गए। कृष्णा यहां से की शॉपिंग
- 2:20:28करता तो वह पहले वही चले गए। राघव राज और
- 2:20:30अक्षय ने एक कोना देखा और जाकर बैठ गए।
- 2:20:33वही सिया और कृष्णा आगे गए। सेल्समैन ने
- 2:20:36उन्हें आते हुए देखा और उन्हें ग्रीट करते
- 2:20:38हुए बोला वेलकम सर मैडम कहिए क्या देखना
- 2:20:41पसंद करेंगे आप? सिया भी मुस्कुराए और
- 2:20:44बोली हमें साधा कुर्ता पजामा का सेट
- 2:20:46दिखाए। सिया ने फिर कृष्णा के तरफ देखा और
- 2:20:48बोली भाई आप कलर सिलेलेक्ट करने में मेरी
- 2:20:51हेल्प कीजिए। ओके सिया की बात सुन कृष्णा
- 2:20:53ने उसे थंब दिखाया और ओके बोला। उसके बाद
- 2:20:56सिया ने शुरुआत की अपने शॉपिंग स्किल्स
- 2:20:58दिखानी की और पांच ही मिनट में उसके बड़े
- 2:21:00पापा के लिए उसने कुर्ता खरीद लिया। उसके
- 2:21:03बड़े पापा हमेशा सादे कपड़े पहनना पसंद
- 2:21:05करते थे। उन्हीं से अलग थे उसके पापा
- 2:21:07जिन्हें सफारी सूट पसंद था। जिसकी शॉपिंग
- 2:21:10भी अगले 5 मिनट में हो गई। सिया को पता था
- 2:21:12कि उसे क्या लेना है और वह उसी हिसाब से
- 2:21:14उस सेल्समैन को बता रही थी जिस वजह से
- 2:21:17उसके दोनों ड्रेस बहुत जल्दी से लेट हो
- 2:21:19गए। सिया ने कुछ सोचा और बोली भैया अब ना
- 2:21:22फॉर्मल विद कोट के दो ड्रेस सेट दिखाए। उस
- 2:21:25पर शर्ट लाइट कलर में होने चाहिए और फिर
- 2:21:27कुछ ही मिनट्स में उसके सामने कुछ सेट्स आ
- 2:21:29गए। जिसमें से सिया और कृष्णा ने दो
- 2:21:32सिलेलेक्ट कर लिए। सेल्समैन भी बहुत खुश
- 2:21:34था सिया और कृष्णा के ऊपर और उसी खुशी में
- 2:21:36वह बोला अरे वाह मैडम आप दोनों भाई बहन
- 2:21:39शॉपिंग के मामले में बहुत ही अच्छे हैं।
- 2:21:41वरना तो चार ड्रेस सेलेक्ट होने में
- 2:21:42कोई-कोई 4 घंटे लगा देता है। उसकी बात सुन
- 2:21:45कृष्णा और सिया ने एक दूसरे के तरफ देखा
- 2:21:47और मुस्कुराए। सिया बोली थैंक यू भैया। आप
- 2:21:51एक काम कीजिए। इसमें से वो ब्लू वाला
- 2:21:52ड्रेस है ना वो साइड में रखिए और पांच
- 2:21:54फॉर्मल ड्रेस दिखाइए। सिया की बात सुन।
- 2:21:56जहां से मैन कम पर लग गया। वही कृष्णा
- 2:21:59थोड़ा काफज हुआ। उसे जहां तक पता था सिया
- 2:22:02को तो तीन ही भाई थे ना। फिर पांच ड्रेस
- 2:22:04मगर उसने उसे कुछ नहीं कहा और उसकी हेल्प
- 2:22:07करने लगा। उन ड्रेसेस के सिलेक्शन के बाद
- 2:22:09सिया ने दो और टीशर्ट और उस पर जींस और
- 2:22:11अरमानी पैंट्स खरीद ली और कृष्णा के तरफ
- 2:22:14देखकर डन बोला। कृष्णा कंफ्यूज था। मगर
- 2:22:16उसने उसे कुछ नहीं कहा। सिया उसे बोली भाई
- 2:22:19आप इन्हें बुलाकर लाएंगे। वो पेमेंट सिया
- 2:22:22की बात सुन कृष्णा ने हां में सर हिलाया
- 2:22:24और राघव को बुलाने के लिए चला गया। सिया
- 2:22:26उस सेल्समैन से बोली भैया आप वह पहला वाला
- 2:22:29कोर्ट सेट और इनमें से यह चार फॉर्मल
- 2:22:31ड्रेस का बिल अलग तैयार कीजिए और इस कार्ड
- 2:22:34से उनकी पेमेंट कर लीजिए। सिया ने एक
- 2:22:36कार्ड उसके तरफ दिया और राघव के आने से
- 2:22:38पहले ही उन ड्रेसेस का बिल कर दिया। राघव
- 2:22:40के आने के बाद वह बिल करके बाहर निकले।
- 2:22:42राघव थोड़ा कंफ्यूज था क्योंकि जितने
- 2:22:45सामान की बग्जा थी उस हिसाब से बिल उसे कम
- 2:22:47ही लग रहा था। मगर उसने कुछ नहीं कहा और
- 2:22:49बग्जा लेकर बाहर चला गया। राज ने बग्जा को
- 2:22:53देखा और बोला इतनी शॉपिंग और वो भी इतने
- 2:22:55कम टाइम में नोट बैड सिया तुम तो बहुत
- 2:22:58स्मार्ट हो राज की तारीफ सुन सिया
- 2:23:00मुस्कुराए और बोली और कृष्णा भाई भी
- 2:23:02उन्होंने ने मेरी बहुत हेल्प की सिया की
- 2:23:04बात सुन कृष्णा मुस्कुराया और फिर वो लेडी
- 2:23:06सेक्शन में गए वह भी सिया ने बहुत ही
- 2:23:09जल्दी-जल्दी पांच साड़ियां खरीद ली और फिर
- 2:23:11वो वॉच खरीदने के लिए गए। अगेन सिया ने
- 2:23:14जल्दी-जल्दी 11 जेंट्स वॉच और पांच लेडीज
- 2:23:16वॉच खरीद ली। जिसमें से कुछ का पेमेंट
- 2:23:18उसने किया और कुछ का राघव के थ्रू करवाया।
- 2:23:21उसे वहां एक हैंडबैग भी पसंद आए और उसने
- 2:23:23वह भी खरीद ली। मगर इस बैग का पेमेंट राघव
- 2:23:25ने किया। उन्होंने वक्त देखा तो अब तक 11
- 2:23:28भी नहीं बजे थे। अक्षय बोला गाइस हमारे
- 2:23:31वाले आइसक्रीम पार्लर चलते हैं अभी भी ओपन
- 2:23:34ही होगा और उसकी बात सुन राघव ने गाड़ी उस
- 2:23:37ओर ले ली। वहां उनका हमेशा आना जाना था और
- 2:23:39वह वेटर भी उनके पहचान का था। इस वजह से
- 2:23:42जैसे ही उसने गाड़ी देखी वो बिना कुछ कहे
- 2:23:44ही उनकी ऑर्डर ले आया और उन्हें सर्व करते
- 2:23:46हुए बोला सर आपकी आर्डर और पार्सल भी रेडी
- 2:23:49करने के लिए बोल दिया है। कहकर ही उसकी
- 2:23:51नजर सिया पर गई और उसने राघव और बाकी सबके
- 2:23:54तरफ देखा। किसी तरह से फिर वह बोला मैम आप
- 2:23:56क्या लेना चाहेंगी? सिया ने फिर राघव के
- 2:23:59तरफ देखा और उसने आंखें मिचकाते हुए अपनी
- 2:24:01आर्डर देने के लिए बोल दिया। सिया ने फिर
- 2:24:04उसे आर्डर देते हुए बोली, आई वांट चोको
- 2:24:06ब्राउनी विद एक्स्ट्रा टॉपिंग्स। सिया ने
- 2:24:09चहकते हुए कहा, उसने काफी दिन हो गए थे।
- 2:24:12उसकी फेवरेट आइसक्रीम नहीं खाई थी। तो वह
- 2:24:14बहुत एक्साइटेड थी और आज इतने दिन बाद ना
- 2:24:17सिर्फ वह बाहर आई थी बल्कि उसने बहुत सारी
- 2:24:19शॉपिंग भी की और अब उसकी फेवरेट आइसक्रीम
- 2:24:22उसकी खुशी तो सातवें आसमान पर थी। उसे
- 2:24:25इतना खुश देख सबको कहीं ना कहीं बहुत
- 2:24:27अच्छा लगा और राघव को तो सबसे ज्यादा काफी
- 2:24:30खुश था। वो सिया को यूं इतना खुश देख और
- 2:24:32बस उसे देखता ही रह गया। और आने के बाद सब
- 2:24:34ने अपनी-अपनी आइसक्रीम एंजॉय की और घर के
- 2:24:36लिए निकल गए। वह भी सिया ने बहुत ही
- 2:24:39जल्दी-जल्दी पांच साड़ियां खरीद ली और फिर
- 2:24:41वह वॉच खरीदने के लिए गए। अगेन सिया ने
- 2:24:44जल्दी-जल्दी 11 जेंट्स वॉच और पांच लेडीज
- 2:24:46वॉच खरीद ली। जिसमें से कुछ का पेमेंट
- 2:24:48उसने किया और कुछ का राघव के थ्रू करवाया।
- 2:24:51उसे वहां एक हैंडबैग भी पसंद आए और उसने
- 2:24:53वह भी खरीद ली। मगर इस बैग का पेमेंट राघव
- 2:24:55ने किया। उन्होंने वक्त देखा तो अब तक 11
- 2:24:58भी नहीं बजे थे। अक्षय बोला गाइस हमारे
- 2:25:02वाले आइसक्रीम पार्लर चलते हैं। अभी भी
- 2:25:04ओपन ही होगा और उसकी बात सुन राघव ने
- 2:25:06गाड़ी उस और ले ली। वहां उनका हमेशा आना
- 2:25:09जाना था और वह वेटर भी उनके पहचान का था।
- 2:25:11इस वजह से जैसे ही उसने गाड़ी देखी वह
- 2:25:13बिना कुछ कहे ही उनकी ऑर्डर ले आया और
- 2:25:15उन्हें सर्व करते हुए बोला सर आपकी आर्डर
- 2:25:18और पार्लल भी रेडी करने के लिए बोल दिया
- 2:25:20है। कहकर ही उसकी नजर सिया पर गई और उसने
- 2:25:22राघव और बाकी सबके तरफ देखा। किसी तरह से
- 2:25:25फिर वह बोला मैम आप क्या लेना चाहेंगी?
- 2:25:28सिया ने फिर राघव की तरफ देखा और उसने
- 2:25:30आंखें मिचकाते हुए अपनी आर्डर देने के लिए
- 2:25:32बोल दिया। सिया ने फिर उसे आर्डर देते हुए
- 2:25:35बोली आई वांट चोको ब्राउनी विद एक्स्ट्रा
- 2:25:37टॉपिंग्स। सिया ने चहते हुए कहा उसने काफी
- 2:25:41दिन हो गए थे। उसकी फेवरेट आइसक्रीम नहीं
- 2:25:43खाई थी। तो वह बहुत एक्साइटेड थी और आज
- 2:25:46इतने दिन बाद ना सिर्फ वह बाहर आई थी
- 2:25:48बल्कि उसने अब बहुत सारी शॉपिंग भी की और
- 2:25:50अब उसकी फेवरेट आइसक्रीम उसकी खुशी तो
- 2:25:53सातवें आसमान पर थी। उसे इतना खुश देख
- 2:25:56सबको कहीं ना कहीं बहुत अच्छा लगा और राघव
- 2:25:58को तो सबसे ज्यादा काफी खुश था। वह सिया
- 2:26:00को यूं इतना खुश देख और बस उसे देखता ही
- 2:26:03रह गया। और आने के बाद सब ने अपनी-अपनी
- 2:26:05आइसक्रीम एंजॉय की और घर के लिए निकल गए।
- 2:26:08राघव सिया और बाकी सब जैसे ही घर के अंदर
- 2:26:10दाखिल हुए तो उन्हें वहां सुधा मोम, पापा
- 2:26:13और छोटी मां बैठे हुए दिखाई दिए। राघव ने
- 2:26:15उन्हें घूर कर देखा और बोला, क्या आप
- 2:26:17लोगों ने वक्त देखा है? 11:30 बजे है और
- 2:26:20आप अब तक जाग रहे हैं। डोंट यू थिंक कि
- 2:26:23आपको अभी तक सो जाना चाहिए था। राघव में
- 2:26:26के खडूस डॉक्टर ने कहा जिसे देख सब बड़ों
- 2:26:28ने अपनी आंखें घुमा दी। छोटी मां ने भी
- 2:26:30उसे इग्नोर किया और सिया के पास आते हुए
- 2:26:32बोली हो गई सब शॉपिंग। कुछ रहा हो तो हमें
- 2:26:35बता देना। मैं और भाभी कल सुबह-सुबह
- 2:26:38मार्केट जाकर ले आएंगे। राज ने मॉल से
- 2:26:41निकलने के बाद घर पर कॉल कर सुधा मोम को
- 2:26:43बता दिया था कि वह लोग आधे घंटे में घर आ
- 2:26:45जाएंगे। उसकी बात सुन सुधा मोम फिक्र में
- 2:26:48पड़ गई। अब इतनी जल्दी इतनी सारी शॉपिंग
- 2:26:50थोड़ी ना हो सकती थी। भला उन्हें लगा कि
- 2:26:53शायद सिया ने सारी चीजें खरीदी नहीं है।
- 2:26:55और यही बात उन्होंने कविता छोटी मां को और
- 2:26:57पापा को बता दी। वह भी फिक्र में पड़ गए
- 2:27:00और उनके घर आने का इंतजार करते हुए बैठे
- 2:27:02रहे। सिया मुस्कुराई और बोली हां हो गई
- 2:27:05छोटी मां। सब कुछ खरीद लिया। मैं दिखाऊं
- 2:27:07आपको। सिया की चहकती हुई आवाज सुन और
- 2:27:10उन्हें शॉपिंग दिखानी की एक्साइटमेंट देख
- 2:27:12राघव ने कुछ बोलने के लिए खोला हुआ अपना
- 2:27:14मुंह बंद कर दिया। वह अभी के अभी सभी को
- 2:27:16जिनके उनके कमरे में भेजना चाहता था और
- 2:27:19सिया को लेकर अपने रूम में जाना चाहता था।
- 2:27:22आज का ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर सभी कुछ सिया
- 2:27:25ने बनाया था और इतना ही नहीं बल्कि उसका
- 2:27:27सारा सामान भी अनपैक करके अच्छे से अरेंज
- 2:27:29करके रख लिया था। इतना सारा काम करने के
- 2:27:32बाद लास्ट में शॉपिंग। इसी वजह से राघव
- 2:27:34चाहता था कि सिया अब जाकर आराम करे। लेकिन
- 2:27:37नहीं उसे तो सोना नहीं था बल्कि अपनी की
- 2:27:39हुई शॉपिंग सभी को बतानी थी। अब छोटी मां
- 2:27:43ने सोचते हुए सुधा मोम के तरफ देखा और
- 2:27:45उन्होंने हां में सर हिला दिया। उन दोनों
- 2:27:47ने सोच लिया था अगर कुछ कम लगेगा तो वह कल
- 2:27:50लेकर आ जाएंगे। छोटी मां फिर सिया के तरफ
- 2:27:52देखकर बोली हां बिल्कुल दिखाओ तो जरा
- 2:27:54क्या-क्या खरीदा है तुमने। और बस उनका
- 2:27:57इतना ही कहना सिया ने चाहते हुए बग्जा
- 2:27:59उठाए और एक-एक बैग खोलकर सभी को सब कुछ
- 2:28:02दिखाने लग गई। उसने अपने परिवार के लिए
- 2:28:04लाए हुए सभी कपड़े और वॉच एक-एक कर दिखाई
- 2:28:06और उसकी शॉपिंग सुधा मोम और छोटी मां
- 2:28:09दोनों को भी बहुत पसंद आई। बहुत ही बारीकी
- 2:28:11से देखकर खरीदा था। उस बे सब कुछ रंग और
- 2:28:13फैब्रिक भी बहुत अच्छा था। सुधा मोम अपने
- 2:28:16आप को उसकी तारीफ करने से रोक नहीं पाए।
- 2:28:19अरे वाह सिया तुम्हारी चॉइस तो बहुत ही
- 2:28:21अच्छी है। सब कुछ बहुत अच्छा है। उनके
- 2:28:23मुंह से अपने लिए तारीफ सुन सिया खुश हुई
- 2:28:25और बोली मोम कृष्णा भाई ने भी इसमें मेरी
- 2:28:28बहुत हेल्प की। अगर वह नहीं होते तो सब
- 2:28:30कुछ इतनी जल्दी नहीं होता। पापा सिया की
- 2:28:33बात सुन बोले मुझे लगा ही था कि सिर्फ
- 2:28:35कृषि तुम्हारी मदद करेगा। वरना यह तीनों
- 2:28:38तो किसी के काम के नहीं है। पापा की बात
- 2:28:40सुन सब मुस्कुरा उठे तो वही बाकी बचे हुए
- 2:28:42तीनों में मुंह बना लिया। कृष्णा सिया के
- 2:28:44तरफ देखकर बोला वैसे सिया उन बग जमे के
- 2:28:47कपड़े किसके लिए है? तुमने बताया नहीं अभी
- 2:28:50तक। कृष्णा ने इतनी देर से अपने मन में चल
- 2:28:53रहे सवाल को पूछ ही लिया और जवाब में सिया
- 2:28:55बोली यह सब आप सबके लिए है। मैंने एक मिनट
- 2:28:58हां, मैं दिखाती हूं। सिया ने जल्दी से
- 2:29:00दूसरी बैग खोली और उसने से सबसे पहले पापा
- 2:29:02के लिए लिया हुआ फॉर्मल ड्रेस विद कोट
- 2:29:04निकालकर उन्हें दे दिया। फिर सुधा मोम और
- 2:29:06छोटी मां की साड़ी और फिर एक-एक कर लिए
- 2:29:08हुए सभी फॉर्मल ड्रेस उसने निकालकर राज
- 2:29:10अक्षय कृष्णा और फिर लास्ट में राघव को दे
- 2:29:13दिए। सिया ने फिर दूसरे बैग में से सबके
- 2:29:16लिए ली हुई घिया निकाली और एक केयर वो भी
- 2:29:18सभी को दे दी और लास्ट में वो पस छोटी मां
- 2:29:20को देते हुए सिया बोली छोटी मां यह पस
- 2:29:23आपके लिए मुझे ना यह आपके लिए बहुत ज्यादा
- 2:29:25पसंद आए और आपके लिए मैंने जो साड़ी ली है
- 2:29:27ना यह उस पर भी मैच हो जाएगी। इसलिए यह
- 2:29:30मैंने ली सिया की बात सुन छोटी मां को
- 2:29:32बहुत ही अच्छा लगा। उन्होंने पस को देखा
- 2:29:34और मुस्कुराते हुए बोली बहुत अच्छी है।
- 2:29:36थैंक यू बेटा छोटी मां यू मुस्कुराते हुए
- 2:29:39देख सभी को बहुत अच्छा लगा। सिया यह सब तो
- 2:29:42ठीक है लेकिन इन सारी चीजों का बिल बहुत
- 2:29:44ही कम आया है। कैसे राघव ने सवाल किया
- 2:29:48जिसे सुन सिया हड़बड़ा गई। वो किसी तरह से
- 2:29:50बोली वो वो आप सबके लिए हुए चीजों का बिल
- 2:29:53मैंने पे कर दिया। वो वो मैं आप सबके लिए
- 2:29:55कुछ ना कुछ लेना लेना चाहती थी ना इस वजह
- 2:29:57से बिल। सिया से आगे कुछ बोला ही नहीं
- 2:30:00गया। जब उसने राघव का गुस्से भरा चेहरा
- 2:30:02देखा। राघव गुस्से से उससे बोला और किससे
- 2:30:06पूछकर तुमने अपने घर वालों के पैसे खर्च
- 2:30:08किए? क्या मैं तुम्हारे खर्चे उठाने के
- 2:30:10लायक नहीं हूं क्या? या फिर मैंने मना करा
- 2:30:13था तुम्हें ज्यादा खर्चा करने के लिए।
- 2:30:15इसलिए तुमने अपने घर वालों में पैसे यूज
- 2:30:17किए। राघव ने बेहद गुस्से में कही थी यह
- 2:30:20बात और थोड़ी तेज आवाज में भी जिसे सुन
- 2:30:22सिया सहम गई और डर से कांपने लगी। उसे यूं
- 2:30:25डरता देख राघव को तो और भी गुस्सा आया और
- 2:30:28वह सख्ती से बोला मैंने ऐसा क्या कह दिया
- 2:30:30सिया कि तुम मुझसे इतना डर रही हो क्या
- 2:30:33मैंने मारा तुम्हें जो तुम मुझे से राघव
- 2:30:36आगे कुछ बोला पाता उससे पहले ही सुधा मोम
- 2:30:38उससे बोली राघव बस करो एक और लफ्ज नहीं और
- 2:30:42उनकी बात मान राघव चुप हो गया और सिया के
- 2:30:44तरफ उसने पीट कर ली पता नहीं क्यों मगर
- 2:30:47सिया उसे इस तरह नहीं देख पाए वो किसी तरह
- 2:30:50हिम्मत करके बोली जी वो यह पैसे ऐसे मेरे
- 2:30:53घर वालों के नहीं थे बल्कि मेरे थे में
- 2:30:56मैं जॉब करती थी ना अकाउंटिंग की तो वह
- 2:30:58प्रोफेसर के पास वो उसके पैसे मेरे मेरे
- 2:31:02हेत सिया को सूझ ही नहीं रहा था कि वो
- 2:31:04कैसे कहे उसे इतना ज्यादा डर लग रहा था कि
- 2:31:07वह लगभग बेहोश होने के कगार पर थी और अंत
- 2:31:10में जब उसका दिमाग यह सारा स्ट्रेस सह
- 2:31:12नहीं पाया तब वह चक्कर खाकर नीचे गिरने को
- 2:31:14हुई। सिया सभी के मुंह से उसी का नाम
- 2:31:17निकला और उसके गिरने से पहले ही अक्षय और
- 2:31:19राज जो उसके करीब थे उन्होंने उसे पकड़
- 2:31:21लिया। इतनी देर से गुस्से में खड़ा राघव
- 2:31:24भी जल्दी से पीछे मुड़ा और जल्दी से सिया
- 2:31:26के पास आ गया। राज ने उसे गुस्से में घुरा
- 2:31:28और कृष्णा से बोला कृष्णा मेरी हेल्प करो
- 2:31:31सिया को अंदर छोटी मां के कमरे में ले
- 2:31:33जाने के लिए और अक्षय जल्दी से मेडिकल किट
- 2:31:35लेकर आओ। राज की बात मान कृष्णा ने एक पला
- 2:31:38राघव को देखा और उसने जैसे ही हां इशारा
- 2:31:40किया कृष्णा ने उसे अपने गोद में उठाकर
- 2:31:42छोटी मां के कमरे में ले गया। वह जाकर राज
- 2:31:44ने उसे चेक किया और फिर इंजेक्शन लगा
- 2:31:46दिया। राघव गुस्से से उससे बोला और किससे
- 2:31:50पूछकर तुमने अपने घर वालों के पैसे खर्च
- 2:31:52किए? क्या मैं तुम्हारे खर्चे उठाने के
- 2:31:54लायक नहीं हूं क्या? या फिर मैंने मना करा
- 2:31:57था तुम्हें ज्यादा खर्चा करने के लिए
- 2:31:59इसलिए तुमने अपने घर वालों में पैसे यूज
- 2:32:01किए। राघव ने बेहद गुस्से में कही थी यह
- 2:32:04बात और थोड़ी तेज आवाज में भी जिसे सुन
- 2:32:06सिया सहम गई और डर से कांपने लगी। उसे यूं
- 2:32:09डरता देख राघव को तो और भी गुस्सा आया और
- 2:32:12वह सख्ती से बोला मैंने ऐसा क्या कह दिया
- 2:32:14सिया कि तुम मुझसे इतना डर रही हो क्या
- 2:32:17मैंने मारा तुम्हें जो तुम मुझे से राघव
- 2:32:20आगे कुछ बोला पाता उससे पहले ही सुधा मोम
- 2:32:22उससे बोली राघव बस करो एक और लफ्ज नहीं और
- 2:32:26उनकी बात मान राघव चुप हो गया और सिया के
- 2:32:28तरफ उसने पीट कर ली पता नहीं क्यों मगर
- 2:32:31सिया उसे इस तरह नहीं देख पाए वो किसी तरह
- 2:32:34हिम्मत करके बोली जी वो यह पैसे ऐसे मेरे
- 2:32:37घर वालों के नहीं थे बल्कि मेरे थे में
- 2:32:40मैं जॉब करती थी ना अकाउंटिंग की तो वह
- 2:32:42प्रोफेसर के पास वो उसके पैसे मेरे मेरे
- 2:32:46एक सिया को सूझ ही नहीं रहा था कि वो कैसे
- 2:32:48कहे उसे इतना ज्यादा डर लग रहा था कि वह
- 2:32:51लगभग बेहोश होने के कगार पर थी और अंत में
- 2:32:54जब उसका दिमाग यह सारा स्ट्रेस सह नहीं
- 2:32:56पाया तब वह चक्कर खाकर नीचे गिरने को हुई।
- 2:32:59सिया सभी के मुंह से उसी का नाम निकला और
- 2:33:02उसके गिरने से पहले ही अक्षय और राज जो
- 2:33:04उसके करीब थे उन्होंने उसे पकड़ लिया।
- 2:33:06इतनी देर से गुस्से में खड़ा राघव भी
- 2:33:08जल्दी से पीछे मुड़ा और जल्दी से सिया के
- 2:33:10पास आ गया। राज ने उसे गुस्से में घुरा और
- 2:33:12कृष्णा से बोला कृष्णा मेरी हेल्प करो
- 2:33:15सिया को अंदर छोटी मां के कमरे में ले
- 2:33:17जाने के लिए और अक्षय जल्दी से मेडिकल किट
- 2:33:19लेकर आओ। राज की बात मान कृष्णा ने एक पला
- 2:33:22राघव को देखा और उसने जैसे ही हां इशारा
- 2:33:24किया कृष्णा ने उसे अपने गोद में उठाकर
- 2:33:26छोटी मां के कमरे में ले गया। वह जाकर राज
- 2:33:28ने उसे चेक किया और फिर इंजेक्शन लगा
- 2:33:30दिया। सिया के चक्कर खाकर गिरने की वजह से
- 2:33:34घर के सभी परेशान हो गए। सुधा मोम फिक्र
- 2:33:36से राज से बोली राज क्या हुआ क्या वो ठीक
- 2:33:39तो है ना राज ने हां में सर हिलाया और
- 2:33:42बोला हां मोम वो ठीक है उसका बीपी बढ़ गया
- 2:33:44था इसी वजह से उसे चक्कर आ गए राज की बात
- 2:33:47सुन राघव फिक्र से बोला हाय ब्लड प्रेशर
- 2:33:50यह कैसे पॉसिबल है भाई वो बस 18 की है और
- 2:33:53इतनी कम उम्र में यह बीमारी थोड़ी हो सकती
- 2:33:55है भला वेट मैं चेक करता हूं राघव सिया के
- 2:33:58पास जाने को हुआ काफी फिक्र हो रही थी उसे
- 2:34:00सिया की और इसी फिक्र में बॉस के पास जाने
- 2:34:02को हुआ मगर राज ने उसका हाथ पकड़ कर उसे
- 2:34:05उसे रोक दिया और गुस्से से उसकी तरफ देखकर
- 2:34:07बोला अब क्यों फिक्र हो रही है तुम्हें
- 2:34:09उसकी कुछ देर पहले तो तुम उसे ऐसे डांट
- 2:34:12रहे थे उस पर ऐसे चीख रहे थे जैसे कि ना
- 2:34:14जाने उसने कौन सा बड़ा गुनाह कर दिया हो
- 2:34:16कितनी बार कहा है मैंने तुमसे राघव अपने
- 2:34:19गुस्से पर तदाका काबू रखो तुम अपने गुस्से
- 2:34:21में ऐसे खोए हुए थे कि तुमने यह तक कि
- 2:34:23ध्यान नहीं दिया कि तुम्हारे बस थोड़े से
- 2:34:25चीखने पर सिया डर से कितना कांप रही थी
- 2:34:27उसका चेहरा देखना चाहिए था तुम्हें जो डर
- 2:34:29से पिला पड़ गया था मगर नहीं यह सब देखने
- 2:34:32की बजाय तुमने उसके तरफ पीट कर दी और
- 2:34:34बेवजह उसे डाट दिया। मैं राघव कुछ बोलने
- 2:34:37को हुआ लेकिन उससे पहले ही सुधा मोम बोली
- 2:34:40तुम क्या राघव तुम क्या और क्या मैंने
- 2:34:43तुम्हें यही सिखाया है? यह इस तरह से
- 2:34:45लड़कियों से बात करना क्या यही सिख दी
- 2:34:47हमने तुम्हें? सुधा मोम भी बहुत गुस्से
- 2:34:50में थी और उन्होंने गुस्से से राघव को
- 2:34:52डांट लगा दी। कृष्णा को बिल्कुल अच्छा
- 2:34:54नहीं लग रहा था। राघव को यूं डांट पड़ती।
- 2:34:56देख वो बोला बड़ी मोम आयकनों की राघव ने
- 2:34:58उसे बहुत बुरी तरह डांट लगाई है। उसे सिया
- 2:35:01से ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी। लेकिन
- 2:35:04कृष्णा ने आगे कुछ बोलने से पहले ही राघव
- 2:35:06बोला मोम मैं नहीं चाहता ही मेरी वाइफ उन
- 2:35:10लोगों का कुछ भी ले या फिर कुछ भी यूज
- 2:35:12करें भले ही वह उसके सो कॉल्ड पेरेंट्स है
- 2:35:15मगर उन्होंने जिस तरह का बिहेव सिया के
- 2:35:17साथ किया था ना उस वजह से मैं उन लोगों की
- 2:35:20शक्ल भी नहीं देखना चाहता सिया उनसे
- 2:35:22रिश्ता रखे या फिर ना रखे यह उसकी मर्जी
- 2:35:24है लेकिन मुझसे उनकी शक्ल देखना भी
- 2:35:26बर्दाश्त नहीं होगा और रहा सवाल कल उनके
- 2:35:28घर जाने का तो मैं बता दूं कि मैं वहां उन
- 2:35:32लोगों ने बुलाया है इस वजह से नहीं जा रहा
- 2:35:34हूं। बल्कि उन लोगों ने जो सिया को ऊपर से
- 2:35:36नीचे तक सोने से गोल्ड से सजाकर दिखावे की
- 2:35:39मूर्ति बनाया था ना उनके उसी गोल्ड को
- 2:35:41वापस देने जा रहा हूं। मोम में नहीं
- 2:35:43चाहता। उन लोगों ने जो कुछ भी सिया के साथ
- 2:35:45किया। उसके बाद वो सिया उनका दिया हुआ कुछ
- 2:35:48भी कीमती सामान इस्तेमाल करें या फिर उनके
- 2:35:51पैसे खर्च करें। तो फिर सोचिए उनके पैसों
- 2:35:53से हमारे लिए की गई हुई शॉपिंग में कैसे
- 2:35:55एक्सेप्ट कर सकता हूं। राघव की बात सुन एक
- 2:35:58पल सभी खामोश हो गया। उनमें से किसी को
- 2:36:00कुछ सुझा ही नहीं कि वह कहे। राघव ने जब
- 2:36:03सिया को पहली बार देखा था तब उसके चेहरे
- 2:36:06पर से ही उसे हुई तकलीफ। उसे हुआ वाला
- 2:36:08दर्द समझ आ रहा था। उसके चेहरे पर की
- 2:36:10उदासी राघव को गैर होने के बावजूद समझ में
- 2:36:12आ गई। फिर उसके अपनी परिवार ने कैसे वह
- 2:36:15तकलीफ वो दर्द इग्नोर कर दिया। बस अपनी सो
- 2:36:17कॉल्ड इज्जत के खातिर उन्होंने मासूम सी
- 2:36:20सिया के बारे में थोड़ा भी नहीं सोचा। जब
- 2:36:22राहुल के घर वाले दहेज की मांग कर रहे थे।
- 2:36:24तभी उन्होंने सिया के लिए स्टैंड क्यों
- 2:36:26नहीं लिया। यही गुस्सा राघव के अंदर शुरू
- 2:36:29से ही था। उसके दिल में सिया के लिए
- 2:36:30हमदर्दी तैयार हुई और फिर उसे दिया हुआ वह
- 2:36:33गाड़ियां भरभ के दहेज। सिर्फ यह जताने के
- 2:36:35लिए वह उनकी बेटी से कितना प्यार करते हैं
- 2:36:37और उसे कितना कुछ दे रहे हैं। राघव को वह
- 2:36:40देखकर ही बहुत गुस्सा आ गया जो घरवाले उसे
- 2:36:43थोड़ा सा प्यार ना दे सके तो उनके दिए हुए
- 2:36:45कीमती सामानों को वह क्यों रखे भला। इस
- 2:36:48वजह से ही राघव ने सोच लिया था कि उसे
- 2:36:50क्या करना है और कल वह जाकर क्या कहना है।
- 2:36:54मगर उससे पहले ही आज सिया ने उसके लिए
- 2:36:56उसके घर वालों के लिए भरभर के शॉपिंग की।
- 2:36:58वह भी उन लोगों के पैसों से। इस वजह से ही
- 2:37:00राघव को गुस्सा आया और हर बार की तरह उसका
- 2:37:03गुस्सा फूट पड़ा। राघव में कई सारी अच्छी
- 2:37:05आदतें थी। मगर उसका गुस्सा उन सारी आदतों
- 2:37:08पर भारी पड़ता था। उसे गुस्से में समझ ही
- 2:37:10नहीं आता था कि वह सामने वाले को कितना
- 2:37:12हर्ट कर रहा है। हां, यह बात थी कि काम के
- 2:37:14अलावा राघव बाकी जगह शांत रहना ही पसंद
- 2:37:16करता था और अपने एंगर को दबाए रखता था।
- 2:37:19मगर कभी कभार उसका गुस्सा फुट ही पड़ता।
- 2:37:22उस खामोशी को चीरते हुए पापा बोले, क्या
- 2:37:24तुमने इस बरे में सिया से बात की थी? क्या
- 2:37:27उसे बताया था कि तुम्हें पसंद नहीं आएगा?
- 2:37:29अगर वह अपने घर वालों के पैसे यूज़ करेंगी
- 2:37:32तो? क्या तुमने उसे यह बातें कि आज के बाद
- 2:37:35उसकी सारी जरूरतों को, सारे खर्चे को तुम
- 2:37:37उठाओगे। राघव के आंखों में आंखें डालकर
- 2:37:40पापा ने सवाल किया और राघव ने अपनी नजरें
- 2:37:42चुरा ली। वह बात करने वाला था। वह आज ही
- 2:37:45उससे बात करने वाला था। मगर उससे पहले ही
- 2:37:47यह सब हो गया। तुमने जवाब नहीं दिया। पापा
- 2:37:50की आई फिर एक बार सख्त आवाज और राघव धीरे
- 2:37:53से बोला। वो मैं आज उससे बात करने वाला
- 2:37:55था। कहकर राघव ने अपना सर झुका लिया। तो
- 2:37:58फिर तुमने उसे डांटने की इस तरह बात करने
- 2:38:00की हिम्मत कैसे की? पापा का सवाल और राघव
- 2:38:04ने शर्म से अपना सर झुका लिया। सिया को
- 2:38:06बेहोश देख उसे एहसास हो गया था कि उसने
- 2:38:08गलत किया है और वो उससे उस चीज के लिए
- 2:38:10माफी भी मांगने वाला था। बट पापा का यूं
- 2:38:13कहना उसे शर्मसार कर गया। पापा फिर हताश
- 2:38:16स्वर में बोले राघव मुझे तुम में से यह
- 2:38:18उम्मीद नहीं थी। मेरे चारों बच्चों में
- 2:38:20मुझे लगता हटा कि तुम सबसे कदा
- 2:38:22रिस्पांसिबल हो। मगर तुम पापा खामोश हो गए
- 2:38:26और फिर से सबकी तरफ देखते हुए बोले सब
- 2:38:29सोने जाओ और सुधा तुम भी कविता और सिया
- 2:38:31साथ रुको। अगर सिया को रात को जरूरत पड़ी
- 2:38:33तो तुम दोनों का होना जरूरी है। पापा ने
- 2:38:35अपने लफज खत्म ही करे थे कि तब तक राघव
- 2:38:38बोला डैड मैं उसे हमारे कमरे में ले जा
- 2:38:40रहा हूं और राघव फिर उनकी बात सुनने के
- 2:38:42लिए रुका भी नहीं। उसने सीधे जाकर सिया को
- 2:38:45अपनी बाहों में उठा लिया और बिना किसी के
- 2:38:47तरफ देखे ही वह उसे लेकर उनके कमरे में
- 2:38:49चला गया। सब उसे जाते हुए देखते ही रह गए।
- 2:38:51फिर पापा ने उन सबको उनके उनके कमरे में
- 2:38:53जाने का इशारा किया। राघव ने बड़ी ही
- 2:38:56नजाकत के साथ आराम से सिया को बिस्तर पर
- 2:38:59सुलाया और उसे देखने लग गया। सिया को इस
- 2:39:01तरह देख उसे बहुत ही बुरा लग रहा था। अपने
- 2:39:03शोर टपर नेचर की वजह से वह इतना रिएक्ट
- 2:39:06हुआ था। वरना तो उसका दिल ही जानता था कि
- 2:39:09उसने सिया से ऐसे बात करने की कभी नहीं
- 2:39:11सोची थी। राघव अगले कुछ पल सिया को देखता
- 2:39:14रहा। कुछ देर पहले खुशी से चहकने वाली
- 2:39:16सिया अब मुरझा गई थी। नींद में बजी उसके
- 2:39:18चेहरे पर उदासी थी और माथे पर शिंकज। राघव
- 2:39:21से उसे इस तरह बिल्कुल भी देखा नहीं गया।
- 2:39:24उसने प्यार से सिया के चेहरे पर हाथ
- 2:39:25घुमाया और नीचे झुककर सिया के माथे को
- 2:39:28आराम से चूम लिया। राघव धीरे से उससे बोला
- 2:39:30आई एम सॉरी। मेरा बिल्कुल भी इंटेंशन नहीं
- 2:39:33था तुम्हें डराने का। लेकिन राघव ने फिर
- 2:39:35गहरी सांस छोड़ी और फिर एक बार उसके माथे
- 2:39:37को चूम लिया। वो वही उसके पास बैठा रहा।
- 2:39:40अगर वह रात में जग गई या फिर डर गई तो उसे
- 2:39:42समझ आए। इस वजह से राघव पूरी रात उसके पास
- 2:39:45बैठा हुआ था और जैसे कि उसे शक था। रात
- 2:39:48में सिया डर से सहम गई। गहरी नींद में
- 2:39:50होने के बावजूद भी उसके बॉडी की थरथराहट
- 2:39:52हो रही थी। जिसे देख राघव को बहुत ही
- 2:39:54ज्यादा बुरा था। उसने हर बार सहलाकर उसे
- 2:39:57शांत किया और सुबह-सुबह उसे भी नींद आ गई।
- 2:40:01एपिसोड 31 से 40 डिस्क्लेमर यह कहानी पूरी
- 2:40:05तरह काल्पनिक है। यह सिर्फ दर्शकों के
- 2:40:08मनोरंजन के लिए बनाई गई है। इसमें दर्शाए
- 2:40:11गए सभी पात्र, नाम, उत्पाद और घटनाएं पूरी
- 2:40:14तरह काल्पनिक है। यह कहानी किसी भी तरह से
- 2:40:18किसी भी व्यक्ति के भावनाओं, प्रथाओं,
- 2:40:20परंपराओं और विश्वासों के अपमान नहीं करती
- 2:40:23है। और कहानी में बताए गए सभी चीजों का
- 2:40:26मात्र कहानी के लेखक द्वारा बनाई गई लेखक
- 2:40:29की अपनी एक कल्पना है बैक टू स्टोरी पापा
- 2:40:33फिर हताश स्वर में बोले राघव मुझे तुमने
- 2:40:36से यह उम्मीद नहीं थी मेरे चारों बच्चों
- 2:40:38में मुझे लगता हटा कि तुम सबसे कदा
- 2:40:41रिस्पांसिबल हो मगर तुम पापा खामोश हो गए
- 2:40:45और फिर से सबकी तरफ देखते हुए बोले सब
- 2:40:48सोने जाओ और सुधा तुम भी कविता और सिया
- 2:40:51साथ रुको अगर सिया को रात को जरूरत पड़ी
- 2:40:53तो तुम दोनों का होना जरूरी है। पापा ने
- 2:40:55अपने लफज खत्म ही करे थे कि तब तक राघव
- 2:40:58बोला डेड मैं उसे हमारे कमरे में ले जा
- 2:41:01रहा हूं और राघव फिर उनकी बात सुनने के
- 2:41:03लिए रुका भी नहीं। उसने सीधे जाकर सिया को
- 2:41:06अपनी बाहों में उठा लिया और बिना किसी के
- 2:41:08तरफ देखे ही वह उसे लेकर उनके कमरे में
- 2:41:11चला गया। सब उसे जाते हुए देखते ही रह गए।
- 2:41:13फिर पापा ने उन सबको उनके उनके कमरे में
- 2:41:16जाने का इशारा किया। राघव ने बड़ी ही
- 2:41:19नजाकत के साथ आराम से सिया को बिस्तर पर
- 2:41:22सुलाया और उसे देखने लग गया। सिया को इस
- 2:41:24तरह देख उसे बहुत ही बुरा लग रहा था। अपने
- 2:41:27शॉर्ट टपर नेचर की वजह से वह इतना रिएक्ट
- 2:41:30हुआ था। वरना तो उसका दिल ही जानता था कि
- 2:41:33उसने सिया से ऐसे बात करने की कभी नहीं
- 2:41:35सोची थी। राघव अगले कुछ पल सिया को देखता
- 2:41:38रहा। कुछ देर पहले खुशी से चहकने वाली
- 2:41:40सिया अब मुरझा गई थी। नींद में बजी उसके
- 2:41:43चेहरे पर उदासी थी और माथे पर शिंकज। राघव
- 2:41:47से उसे इस तरह बिल्कुल भी देखा नहीं गया।
- 2:41:49उसने प्यार से सिया के चेहरे पर हाथ
- 2:41:51घुमाया और नीचे झुककर सिया के माथे को
- 2:41:54आराम से चूम लिया। राघव धीरे से उससे
- 2:41:56बोला, आई एम सॉरी मेरा बिल्कुल भी इंटेंशन
- 2:41:59नहीं था तुम्हें डराने का। लेकिन राघव ने
- 2:42:02फिर गहरी सांस छोड़ी और फिर एक बार उसके
- 2:42:04माथे को चूम लिया। वो वही उसके पास बैठा
- 2:42:08रहा। अगर वह रात में जग गई या फिर डर गई
- 2:42:10तो उसे समझ आई। इस वजह से राघव पूरी रात
- 2:42:13उसके पास बैठा हुआ था और जैसे कि उसे शक
- 2:42:16था। रात में सियाडर से सहम गई। गहरी नींद
- 2:42:19में होने के बावजूद भी उसके बॉडी की
- 2:42:21थरथराहट हो रही थी जिसे देख राघव को बहुत
- 2:42:24ही ज्यादा बुरा था। उसने हर बार सहलाकर
- 2:42:26उसे शांत किया और सुबह-सुबह उसे भी नींद आ
- 2:42:29गई। रोज जल्दी उठने वाले वह दोनों आज 8:00
- 2:42:32बज गए। फिर भी सो रहे थे और उनके सोने के
- 2:42:35लिए वजह भी थी। नींद में ही सिया राघव के
- 2:42:37बाहों में चली गई थी और राघव ने भी फिर
- 2:42:40उसे अपने आगोश में ले लिया था। एक दूसरे
- 2:42:42के करीबी से उन्हें इतना सुकून का एहसास
- 2:42:44हो रहा था कि वह सोए ही रहे। खिड़की से
- 2:42:47आती धूप ने सिया के नींद को डिस्टर्ब किया
- 2:42:50और उसने अपना सर राघव के सीने में छिपाते
- 2:42:53हुए रब किया। राघव जो नींद में था उसे लगा
- 2:42:55कि शायद रात की तरह अब भी सिया डर रही है।
- 2:42:58इसलिए उसने नींद में ही सिया के सर को
- 2:43:00थपथपाया और बोला शांत शांत हो जाओ बच्चा
- 2:43:04तुम ठीक हो। मैं तुम्हें कुछ नहीं होने
- 2:43:06दूंगा डरो मत और फिर राघव लगातार सिया के
- 2:43:09सर को थपथपाते हुए सहलाने लग गया। उसकी
- 2:43:13आवाज से या फिर यूं कहें कि जब राघव का
- 2:43:15हाथ सिया को अपने सर पर महसूस हुआ था। तभी
- 2:43:18सिया की नींद पूरी तरह खुल चुकी थी और फिर
- 2:43:20आगे राघव ने जो कहा उसे सुन सिया के आंखें
- 2:43:23भर आए। उसे यकीन करना मुश्किल जा रहा था
- 2:43:26कि कल उसे डांटने वाला यही शख्स है जो इस
- 2:43:28वक्त इतने प्यार से नींद में होने के
- 2:43:30बावजूद भी उसे समझा रहा है। उसने थोड़ी
- 2:43:33हलचल की और उसके आंखों से बहे आंसू ने
- 2:43:35राघव के सीने को भिगो दिया। उस गीलेपन का
- 2:43:37एहसास होते ही राघव ने अपनी आंखें खोली और
- 2:43:40उसे अपने सीने पर सर रखकर सोई सिया का
- 2:43:42एहसास हुआ। वो एक पल खामोश सा उसे देखता
- 2:43:46रहा और फिर बड़ी हिम्मत करके उसने फिर से
- 2:43:48सिया के सर पर हाथ रख धीरे से उसे पुकारा।
- 2:43:51सिया उसकी आवाज इतनी सॉफ्ट थी, इतनी प्यार
- 2:43:54भरी थी कि सिया के आंखों के आंसू और उस पर
- 2:43:56बरसने लग गए। राघव को उसे ऐसा देख बिल्कुल
- 2:43:59अच्छा नहीं लगा और बोला, "स्टॉप क्राइंग
- 2:44:02बच्चा, यह ऐसे सुबह-सुबह कौन रोता है
- 2:44:04भला।" यू आर अ गुड गर्ल ना। फिर रोना बंद
- 2:44:08करो। राघव को समझ नहीं आ रहा था कि वह ऐसा
- 2:44:11क्या कहे जिससे वह सिया खामोश हो जाए। अब
- 2:44:13तक के अपनी जिंदगी में उसने सिर्फ दो ही
- 2:44:15लेडीज को जाना था। और वह दोनों उसकी मॉम
- 2:44:18थी। सुधा मोम और छोटी मां। उसने अलावा
- 2:44:20राघव का कभी किसी भी लड़की से रिलेशन नहीं
- 2:44:23आया था। यहां तक कि उसकी कोई गर्ल दोस्त
- 2:44:25भी नहीं थी। सिर्फ उसकी ही नहीं बल्कि उन
- 2:44:28चारों भाइयों की भी कोई लड़की दोस्त नहीं
- 2:44:30थी। सुधा मोम और छोटी मां ने कितनी मेहनत
- 2:44:33करके उन्हें संभाला था यह वह जानते थे।
- 2:44:36इसलिए बचपन से ही उन्होंने सिर्फ पढ़ाई
- 2:44:38करने का और अपने पेरेंट्स को अच्छी लाइफ
- 2:44:40देने का ही गोल रखा। यही वजह तो थी कि वह
- 2:44:43इतने कम उम्र में सभी के सभी बेस्ट और टॉप
- 2:44:46डॉक्टर्स में शामिल थे और उनका हॉस्पिटल
- 2:44:48सिटी के जानेमाने हॉस्पिटल्स में शामिल
- 2:44:50था। हां, बाद में जन डेथ ठीक हुए और
- 2:44:53उन्होंने फिर से अपना काम ज्वाइन किया।
- 2:44:55उसके बाद उनके हालत थोड़े अच्छे हो गए थे।
- 2:44:57मगर इसके बावजूद भी उन्होंने कभी अपने गोल
- 2:45:00को नहीं छोड़ा और कम उम्र में ही यहां तक
- 2:45:02पहुंच गए। सिया को इतना रोता देख राघव से
- 2:45:06रहा नहीं गया और वह उसे वैसे हो अपने
- 2:45:08बाहों में लेकर उठकर बैठ गया। सिया उसके
- 2:45:10गोद में बैठी हुई थी और उसके सिने में सर
- 2:45:13छिपा कर रो रही थी। राघव ने फिर एक बार
- 2:45:15उसे पुकारते हुए बोला, "सिया और सिया फिर
- 2:45:18जल्दी जल्दी बोलने लग गई। वो वो मेरे पैसे
- 2:45:22थे। मैं प्रोफेसर नीता हेना उन्हें असिस्ट
- 2:45:25करती थी और और फिर छोटे बच्चों की टशंस भी
- 2:45:28लेती थी और संडे टू संडे योगा क्लासेस भी।
- 2:45:31वो मेरे पैसे थे। मेरे पापा के नहीं सिया
- 2:45:34को डरकर इतने जल्दी-जल्दी बोलता देख राघव
- 2:45:37को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा और उसे एहसास
- 2:45:39भी हो गया कि उसने जो कल उसे डांट लगाई थी
- 2:45:42वह बेफजुल की थी उसे सिया की पूरी बात सुन
- 2:45:45लेनी चाहिए थी और अपना पॉइंट ऑफ व्यू भी
- 2:45:47उसे बताना चाहिए था उसके चेहरे पर गिल छा
- 2:45:49गया सिया फिर से रोते हुए बोली आप आप
- 2:45:53नाराज नहीं है ना मुझसे आई एम आई एम सॉरी
- 2:45:57मैंने आपको पहले बताना सिया के आगे कुछ
- 2:46:00बोलने से पहले ही राघव ने उसे ओठ होठों पर
- 2:46:02अपनी उंगली रख दी और ना में सर हिलाते हुए
- 2:46:05बोला नो नहीं सिया तुम सॉरी मत बोलो बल्कि
- 2:46:08सॉरी मुझे बोलना चाहिए आई एम सॉरी बच्चा
- 2:46:11मैंने बिना सच जाने ही तुम्हें इतना डांट
- 2:46:14दिया और पता नहीं तुमसे क्या-क्या बोला आई
- 2:46:16एम रियली सॉरी राघव ने सिया के आंसू साफ
- 2:46:19किया और उसके सर पर ओठ रख दिए राघव की वह
- 2:46:22छुवन सिया को शांत कर गई उसे बहुत अच्छा
- 2:46:25बहुत सुकून फील हुआ था उस वजह से वह धीरे
- 2:46:28से राघव से बोली आप आप नाराज नहीं है ना
- 2:46:32और मुझसे गुस्सा भी। सिया की बात सुन राघव
- 2:46:35ने नामे सर हिलाया। तभी सिया फिर से बोली,
- 2:46:38आप आप प्लीज अगर हो तो मुझे मार लेना।
- 2:46:41लेकिन मुझ पर चीखना मत। मुझे मुझ बहुत डर
- 2:46:43लगता है फिर मैं में मैं। सिया उसे बताना
- 2:46:47चाहती थी कि किसी की तेज आवाज या फिर
- 2:46:49गुस्से को देखने सुनने के बाद उसे पैनिकिक
- 2:46:51अटैक्स आते थे। उससे वह स्ट्रेस, वो ऊंची
- 2:46:54आवाज बर्दाश्त नहीं होती थी। मगर वह आगे
- 2:46:56कुछ कह ही नहीं पाई और उसके चेहरे पर छाई
- 2:46:58बेचैनी राघव ने समझ ली। कल उसे अंदाजा भी
- 2:47:01हो गया था कि कहीं ना कहीं सिया को ऊंची
- 2:47:04आवाज से डर लगता है और उसे पैनिकिक अटैक्स
- 2:47:06भी आते हैं। राघव ने कुछ नहीं कहा और फिर
- 2:47:08एक बार उसे के बालों को सहलाकर अपने ओठ
- 2:47:11उसके माथे पर रख दिए। वो धीरे से उससे
- 2:47:14बोला कभी नहीं डाटूंगा बच्चा और मैं क्यों
- 2:47:17मारूंगा भला? मुझे तो क्या किसी को कोई भी
- 2:47:20हक नहीं है तुम्हें मारने का और कोई तुम
- 2:47:22हाथ लगाकर तो दिखाए उन सभी को मैं छोडूंगा
- 2:47:25नहीं। फिर वह चाहे मेरी फैमिली हो या फिर
- 2:47:28तुम्हारी फैमिली राघव की बात सुन सिया को
- 2:47:30बहुत अच्छा लगा और उसने उसे कसकर गले लगा
- 2:47:33लिया। राघव कुछ देर तक उसे वैसे ही सहलाते
- 2:47:37रहा और फिर यही समय जानकर उसने उसकी
- 2:47:39ज्वेलरी के बारे में बात करने का सोचा।
- 2:47:42उसने धीरे से उसे पुकारा और उसका ध्यान
- 2:47:44अपने तरफ किया। सिया उससे दूर होकर उसके
- 2:47:47तरफ देखने लग गई और उसके कहने का इंतजार
- 2:47:50करने लगी। रोने की वजह से लाल हुई सिया
- 2:47:53अपनी मासूम शक्ल लेकर राघव की तरफ देख रही
- 2:47:55थी। उस वक्त उसे वह इतनी प्यारी इतनी
- 2:47:58मासूम लगी कि राघव का दिल तेजी से धड़क
- 2:48:00उठा। राघव ने गहरी सांस छोड़ी और उससे
- 2:48:03बोला सिया अगर मैं तुमसे कुछ कहूं तो क्या
- 2:48:06तुम मेरी बात मानोगी? और उसके सवाल पर
- 2:48:09सिया ने बिना एक पल की भी देरी किए हुए
- 2:48:11हां में सर हिला दिया। राघव जब से उसकी
- 2:48:13जिंदगी में आया था तब से उसने उसे सिया को
- 2:48:16इतना कंफर्ट फील करवाया था कि वह चाहे कुछ
- 2:48:18भी कहे सया बिना हिचकिचाहट की उसकी हर एक
- 2:48:21बात मानने के लिए तैयार हो जाती। उसकी
- 2:48:24आईटी ने इंस्टेंट रिएक्शन और मासूम सा
- 2:48:26चेहरा देख राघव काका का दिल उसके गाल
- 2:48:28खींचकर उसे पर करने को कहा। लेकिन उसने
- 2:48:31अपनी इस तमन्ना का दिल में ही दबाए रखा और
- 2:48:33सीरियस चेहरा लेकर बोला सिया मैं चाहता
- 2:48:36हूं कि तुम तुम्हारे परिवार की तरफ से आया
- 2:48:39हुआ कोई भी कीमती सामान अपने पा मत रखो।
- 2:48:41तुम्हारी वह सारी ज्वेलरी तुम उन्हें वापस
- 2:48:44लौटा दो। राघव ने अपनी बात कही और वह सिया
- 2:48:47के जवाब का इंतजार करते हुए उसके तरफ
- 2:48:49देखने लगा। सिया एक पल को सोच में गिर गई।
- 2:48:52मगर अगले ही पल बोली ठीक है मैं उन्हें सब
- 2:48:55लौटा दूंगी लेकिन लेकिन उसमें एक गोल्ड के
- 2:48:58चैन है वो मेरे नानू ने मुझे दी थी उनकी
- 2:49:00आखिरी निशानी के तौर पर क्या मैं उसे अपने
- 2:49:03रख सकती हूं प्लीज सिया ने उसके चेहरे की
- 2:49:07तरफ देखते हुए कहा और राघव समझ गया कि वह
- 2:49:10चैन सिया के लिए बहुत ही खास है। उसने हां
- 2:49:12में सर हिला दिया और सिया मुस्कुराई आगे
- 2:49:14का कुछ वक्त दोनों यूं ही एक दूसरे के
- 2:49:17बाहों में बैठे रहे। बात करते हुए एक
- 2:49:19दूसरे के साथ को महसूस करते हुए वह दोनों
- 2:49:22इतने खो गए थे कि उन्हें एहसास ही नहीं था
- 2:49:24उनके करीबी का सिया राघव के इतने करीब
- 2:49:26उसके गोद में बैठी है यह बात दोनों के भी
- 2:49:29जहन में नहीं आई थी घड़ी का कांटा 9:00
- 2:49:32बजे यह दर्शाने लगा और अब तक उन दोनों के
- 2:49:34फिक्र से आधे होते घर वालों का सबका बांध
- 2:49:37टूट गया सुधा मोम छोटी मां डैड राज अक्षय
- 2:49:40और कृष्णा सभी को बहुत फ़िक्र हो रही थी
- 2:49:43सिया की उसके तबीयत की और इस बात की भी कि
- 2:49:46कहीं राघव उससे कुछ ज्यादा बोल ना दे।
- 2:49:48सुधा मोम से जब रहा नहीं गया तब वह उनके
- 2:49:51कमरे के पास आए और उन्होंने दरवाजा
- 2:49:53खटखटाया और उसी आवाज के साथ एक दूसरे में
- 2:49:56खोए दोनों हटबड़ा गए। सिया ने अपनी आंखें
- 2:49:59खोली और तब जाकर उसे एहसास हुआ कि वो राघव
- 2:50:01के कितने करीब है। वो जल्दी जल्दी उठने को
- 2:50:04हुई लेकिन उसके साड़ी में उसका पैर उलझ
- 2:50:06गया और वो राघव को लेकर बिस्तर पर गिर गई।
- 2:50:09सिया ने दो बार और उठने की कोशिश की लेकिन
- 2:50:11नो यूज़। वो इतना डरी हुई थी कि उससे ठीक
- 2:50:15से उठा भी नहीं जा रहा था। राघव चुपचाप
- 2:50:17उसकी सारी हरकतें देख रहा था और एंजॉय भी
- 2:50:20कर रहा था। मगर जब उसने सिया के
- 2:50:22एक्सप्रेशन चेंज होते हुए देखा तब उससे
- 2:50:24रहा नहीं गया और वह बोला बिल्कुल भी रोना
- 2:50:28नहीं है सिया और वैसे भी तुम अपने हस्बैंड
- 2:50:30के साथ अपने कमरे में हो ना कि तुम्हारे
- 2:50:33बॉयफ्रेंड के साथ जो इतना डर रही हो राघव
- 2:50:35की बात सुन सिया के रोते हुई एक्सप्रेशन
- 2:50:38और रोने जैसे हो गए और वो बोली मेरा कोई
- 2:50:40बॉयफ्रेंड नहीं था सच्ची और क्या मैडम की
- 2:50:43आंखें भी भर आ गई राघव ने ना में सर
- 2:50:47हिलाया और उसे लेकर टर्न हो गया अब वो ऊपर
- 2:50:50और सिया नीचे थी। राघव ने उसके आंखों के
- 2:50:52किनारे पर लगे उस आंसू को अपनी उंगली से
- 2:50:55साफ किया और बोला बच्चा मैंने कब कहा कि
- 2:50:58तुम्हारा बॉयफ्रेंड था। मैं तो कह रहा था
- 2:51:00खैर छोड़ो रिलैक्स हो जाओ और जाकर फ्रेश
- 2:51:03हो जाओ। मैं देखता हूं कि दरवाजे पर कौन
- 2:51:06है और हां इस तरह डरना और बातबात पर रोना
- 2:51:09सही नहीं है। तुम्हें ना अब स्ट्रांग बनने
- 2:51:11की जरूरत है। समझी तो यूना। राघव उससे बोल
- 2:51:15ही रहा था तब तक ही सिया बोली आप हटो ना
- 2:51:18ऊपर से। आप बहुत मोटे हो। मुझसे आपका वेट
- 2:51:20बर्दाश्त नहीं हो रहा है और सिया ने उसे
- 2:51:23धक्का देना स्टार्ट कर दिया। राघव भी फिर
- 2:51:25जल्दी से उसके ऊपर से उठ गया और सिया
- 2:51:28जल्दी से अपनी साड़ी संभालते हुए बाथरूम
- 2:51:30की तरफ भाग गई। राघव हैरानी से उसे भागते
- 2:51:34हुए जाता देखता रह गया और फिर उठकर शीशे
- 2:51:36के सामने गया और अपने आप को देखते हुए
- 2:51:39बोला सीरियसली इसे किस एंगल से मैं मोटा
- 2:51:41दिख रहा हूं। अच्छी खांसी तो बॉडी है मेरी
- 2:51:44और वो कह रही है कि मैं मोटा हूं। राघव
- 2:51:47नाराजगी से खुद से ही बोल रहा था कि तब तक
- 2:51:49उसे फिर एक बार दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी
- 2:51:51और उसने ना में सर हिलाते हुए उस ओर गया
- 2:51:54जहां पूरी फैमिली उसी के इंतजार में बाहर
- 2:51:56खड़ी थी। राघव ने ना में सर हिलाया और उसे
- 2:52:00लेकर टर्न हो गया। अब वो ऊपर और सिया नीचे
- 2:52:03थी। राघव ने उसके आंखों के किनारे पर लगे
- 2:52:05उस आंसू को अपनी उंगली से साफ किया और
- 2:52:08बोला बच्चा मैंने कब कहा कि तुम्हारा
- 2:52:10बॉयफ्रेंड था। मैं तो कह रहा था खैर छोड़ो
- 2:52:13रिलैक्स हो जाओ और जाकर फ्रेश हो जाओ। मैं
- 2:52:16देखता हूं कि दरवाजे पर कौन है और हां इस
- 2:52:19तरह डरना और बात बातबात पर रोना सही नहीं
- 2:52:21है। तुम्हें ना अब स्ट्रांग बनने की जरूरत
- 2:52:23है। समझी तो यूना राघव उससे बोल ही रहा था
- 2:52:27तब तक ही सिया बोली आप हटो ना ऊपर से। आप
- 2:52:30बहुत मोटे हो। मुझसे आपका वेट बर्दाश्त
- 2:52:33नहीं हो रहा है। और सिया ने उसे धक्का
- 2:52:35देना स्टार्ट कर दिया। राघव भी फिर जल्दी
- 2:52:38से उसके ऊपर से उठ गया और सिया जल्दी से
- 2:52:40अपनी साड़ी संभालते हुए बाथरूम की तरफ भाग
- 2:52:43गई। राघव हैरानी से उसे भागते हुए जाता
- 2:52:46देखता रह गया और फिर उठकर शीशे के सामने
- 2:52:49गया और अपने आप को देखते हुए बोला
- 2:52:51सीरियसली इसे किस एंगल से मैं मोटा दिख
- 2:52:54रहा हूं। अच्छी खांसी तो बॉडी है मेरी और
- 2:52:56वह कह रही है कि मैं मोटा हूं। राघव
- 2:52:59नाराजगी से खुद से ही बोल रहा था कि तब तक
- 2:53:01उसे फिर एक बार दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी
- 2:53:03और उसने ना में सर हिलाते हुए उस ओर गया
- 2:53:06जहां पूरी फैमिली उसी के इंतजार में बाहर
- 2:53:08खड़ी थी। राघव सिया कहा हे और तुम दोनों
- 2:53:12अब तक उठे क्यों नहीं? अगर तुमने उसे फिर
- 2:53:15से डांट लगाई होंगी ना तो मैं बता रही
- 2:53:17हूं। मैं तुम्हें थप्पड़ लगा दूंगी। सुधा
- 2:53:20मोम दरवाजा खोलते ही राघव पर बरस पड़ी और
- 2:53:23उसने उन्हें घूर कर देखा। तभी पापा भी
- 2:53:26बोले घरो मत और जवाब दो। कहीं तुमने फिर
- 2:53:29से उसे डांटा तो नहीं ना? और क्या वह ठीक
- 2:53:32से सो पाई थी रात को? पापा के भी एक के
- 2:53:35बाद एक सवाल शुरू हो गए और सेम वही सारे
- 2:53:37सवाल राघव को। बाकी सबके नजरों में भी
- 2:53:39दिखे। उसने ना में सर हिलाया और बोला,
- 2:53:42फ्रेश होने गई है वो। रात को लगे इंजेक्शन
- 2:53:45की वजह से उसकी नींद जल्दी नहीं खुली
- 2:53:47होंगी। और रहा सवाल मेरा तो मैं रात भर
- 2:53:50उसकी केयर करते हुए जगा था। इसलिए मेरी
- 2:53:52नींद नहीं खुली। एंड हां अगला सवाल पूछने
- 2:53:55से पहले ही बता दूं कि मैंने ना ही उसे
- 2:53:57डांट लगाई है और ना ही दूसरा कुछ हम दोनों
- 2:54:00में भी सारी बातें हो गई है तो अगर आपको
- 2:54:02आपके सभी सवालों का जवाब मिल गया होगा तो
- 2:54:05आप जा सकते हैं बाय राघव ने दरवाजे की तरफ
- 2:54:08इशारा किया और उन सबको जाने के लिए बोल
- 2:54:10दिया राज समझ गया था कि यह इशारा उसके लिए
- 2:54:14है इसलिए उसने राघव के सर पर एक चपेट लगाई
- 2:54:17और बोला हां हां मैं समझ गया तू किसे जाने
- 2:54:20के लिए बोल रहा है और फिर राज और उसके
- 2:54:22पीछे पीछेछे अक्षय बाहर चले गए। कृष्णा ने
- 2:54:25भी मुस्कुराते हुए राघव को देखा और चला
- 2:54:28गया। राघव फिर बाकी सब के तरफ मुड़ा और
- 2:54:31बोला, "मैंने सिया से बात कर ली है। वो
- 2:54:33अपनी सारी ज्वेलरी लौटाने के लिए तैयार
- 2:54:35है। इस वजह से आप रिलैक्स रहिए और बाकी की
- 2:54:38तैयारी कीजिए। थोड़ी देर में हम फ्रेश
- 2:54:40होकर नीचे आ जाते हैं। राघव की बात सुन
- 2:54:44छोटी मां बोली, हम वो सब तो ठीक है राघव।
- 2:54:47मगर हमारी बहू इस तरह बिना गहनों के पहली
- 2:54:50बार अपने मायके में जाएंगी। ऐसा अच्छा
- 2:54:52थोड़ी लगता है कविता जी की बात सुन राघव
- 2:54:55कुछ बोलने को हुआ तब तक सुधा मोम बोली
- 2:54:57नहीं बिना गहनों के कैसे जाएंगी संजय जी
- 2:55:00आप ना राघव और सिया को लेकर बैंक चले जाए
- 2:55:03और वह से गहने निकालकर सिया को दे दीजिए
- 2:55:05राघव उसके बाद ही तुम आगे जाना और
- 2:55:08तुम्हारे पापा कृष्णा या फिर अक्षय के साथ
- 2:55:10वापस लौट आएंगे। सुधा मोम की बात सुन राघव
- 2:55:14ने हां में सर हिलाया और बोला ठीक है जैसा
- 2:55:17आप कहे और हां एक बात मैं बताना भूल गया
- 2:55:20वो वो चली मैंने ना मैंने एक गोल्ड सेट
- 2:55:22सिया के लिए ऑर्डर किया था वो बस किसी भी
- 2:55:25वक्त आता ही होगा मैं आपको बताना भूल गया
- 2:55:28राघव ने अपनी जुबान चबाते हुए कहा वह सच
- 2:55:31में भूल गया था यह बात सबको बताना सुधा
- 2:55:34मोम से उसकी इस बारे में बात हुई थी लेकिन
- 2:55:36वह एक दिन जाकर सिया के लिए ज्वेलरी और
- 2:55:39कुछ साड़ियां खरीदेंगे ऐसी बात हुई थी
- 2:55:42सुधा मोम ने उसकी तरफ देखा और वह कुछ बोल
- 2:55:44पति उससे पहले ही राघव बोला यार मोम वो सब
- 2:55:48जल्दी जल्दी हो गया इसलिए बताने का मौका
- 2:55:51नहीं मिला उसने दिया हुआ एक्सप्लेनेशन सुन
- 2:55:53तीनों बड़ों ने कुछ पल उसे घूर कर देखा और
- 2:55:56फिर हंसने लग गए छोटी मॉम मुस्कुराते हुए
- 2:55:58बोली भैया भाभी मुझे लगा था हमें ना राघव
- 2:56:02की शादी के लिए ज्यादा पापड़ बेलने पड़ने
- 2:56:04वाले हैं और फिर बाद में उसकी गृहस्ती ठीक
- 2:56:08हो इस वजह से इसे ढेर सारा ज्ञान भी देना
- 2:56:10पड़ने वाला
- 2:56:12लेकिन यहां देखिए ना सिर्फ इसकी शादी सबसे
- 2:56:14पहले हो गई बल्कि जनाब को तो कुछ सिखाने
- 2:56:17की या बताने की जरूरत ही नहीं पड़ी। छोटी
- 2:56:20मां ने हंसते हुए कहा और उनकी बात सुन डैड
- 2:56:22और सुधा मोम भी मुस्कुराने लगे। वही राघव
- 2:56:25झेप गया और बोला हां ठीक है। ठीक है। अब
- 2:56:28जाइए आप। राघव ने उनका हाथ पकड़ कर ही
- 2:56:31उन्हें बाहर निकाला। बेचारा शर्मा जो गया
- 2:56:33था और उसकी ऐसे हालत देख उन सबको बहुत
- 2:56:36हंसी आ गई। हंसते हुए ही वह बाहर चले गए
- 2:56:39और राघव सीधा आकार बिस्तर पर लेट गया।
- 2:56:42छोटी मां को चिढ़ाते हुए उससे बात करना एल
- 2:56:45अजीब सी फीलिंग दे रहा था उसे। एक ऐसी
- 2:56:48फीलिंग जो उसने कभी भी फील नहीं की थी।
- 2:56:50उसने अपनी आंखें बंद कर ली और उस बंद
- 2:56:52आंखों के पीछे उसे सिया का चेहरा दिखाई
- 2:56:55दिया। और नजर आया थोड़ी देर पहले कि उनकी
- 2:56:58नजदीकी उस वक्त तो उनके ध्यान में नहीं
- 2:57:01आया था कि वह कितने नजदीक थे। लेकिन अब
- 2:57:03जाकर राघव सिया के नजदीकी की को फिल कर पा
- 2:57:06रहा था। उसे एहसास हुआ था कि सियासिया
- 2:57:09उसके कितने करीब थी और उस एहसास से राघव
- 2:57:11के तन बदन में एक अलग सी झुरझुरी फैल गई।
- 2:57:14एक अनजानी मगर अपनी सी फीलिंग उसे महसूस
- 2:57:17हुई और सिया की वो छुवन उसे मदहोश करने लग
- 2:57:19गई। वहीं दूसरी और बाथरूम में सिया राघव
- 2:57:23से छूटकर अंडर भाग तो आई थी लेकिन उसकी
- 2:57:26सांसे बहुत ही तेज-तेज चल रही थी। उसे
- 2:57:29उठने में केद जो हो गया था और ऊपर से
- 2:57:32दरवाजे पर होती दस्तक। सिया ने
- 2:57:34जल्दी-जल्दी शावर ऑन किया और हड़बड़ी में
- 2:57:36उसकी पूरी साड़ी और बाकी के कपड़े भीग गए।
- 2:57:39शिट यह नहीं करना था। सीयू सिया ने अपने
- 2:57:42आप से ही कहा और किसी तरह कपड़े उतार कर
- 2:57:45वो शावर लेने लग गई। उसने जल्दी-जल्दी
- 2:57:48अपने बाल धो दिए और फिर जाकर उसे एहसास
- 2:57:50हुआ कि ना तो उसने आज टॉवल लाया है और ना
- 2:57:53ही दूसरे कपडे सिया टेंशन में आ गई और
- 2:57:56अपनी गीली सादिम लपेट कर इफेर उधर घूमने
- 2:57:59लग गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह राघव
- 2:58:02को आवाज दे या ना दे अगर घर को बाकी सब वह
- 2:58:04हुए तो। नहीं नहीं सोच कर ही वह डर गई और
- 2:58:08कुछ पल वैसे ही खड़े रही। अब अब उसे ठंडी
- 2:58:11लगने लग गई थी और उसके पास राघव को आवाज
- 2:58:14देने के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं था। उसने
- 2:58:17थोड़ा सा दरवाजा खोलकर बाहर से आती आवाजों
- 2:58:20को सुनने की कोशिश की और उसे सिवाय खामोशी
- 2:58:23के और कोई शोर सुनाई नहीं दिया। सिया खुद
- 2:58:25से ही बोली आई थिंक कमरे में कोई नहीं है।
- 2:58:28सिया ने राहत की सांस छोड़ी और फिर कुछ सच
- 2:58:30कर राघव को आवाज लगनी चाहिए। वो धीरे से
- 2:58:33बोली सुनिए सुनिए क्या आप कमरे में है?
- 2:58:36सिया की आवाज इतनी धीमी थी कि राघव तो
- 2:58:39क्या खुद को भी सुनाई दी या नहीं यह
- 2:58:41कंफ्यूजन था। सिया ने अपने ओठ बाहर निकाल
- 2:58:45दिए और फिर एक बार हिम्मत करके बोली सुनिए
- 2:58:47जी क्या आप है यहां? और क्या उसकी आवाज
- 2:58:51सुन उसी के ख्यालों में खोया राघव होश में
- 2:58:53आ गया। इसी मदहोशी में खोया हुआ वो तब होश
- 2:58:57में आया जब सिया की आवाज उसके कानों से
- 2:58:59टकराए अंदर बात। सिया ने अपने ओठ बाहर
- 2:59:03निकाल दिए और फिर एक बार हिम्मत करके बोली
- 2:59:06सुनिए जी क्या आप है यहां और क्या उसकी
- 2:59:09आवाज सुन उसी के ख्यालों में खोया राघव
- 2:59:11होश में आ गया वो जल्दी से उठा और बाथरूम
- 2:59:14के दरवाजे के करीब आकर उसने दरवाजा हल्का
- 2:59:16सा नॉक करते हुए बोला क्या हुआ क्या तुम
- 2:59:20ठीक हो सिया राघव की आवाज सुन सिया हकलाते
- 2:59:23हुए बोली हां वो वो मैंने मैंने अपने
- 2:59:26कपड़े नहीं लिए वो सिया खामोश हो गई और
- 2:59:29राघव के कुछ बोलने का इंतजार करने लगी।
- 2:59:32मगर राघव की तरफ से कोई आवाज नहीं आई।
- 2:59:34सिया खामोश खड़ी रही यह सोचते हुए कि क्या
- 2:59:37सच में राघव वह था या नहीं। अगले दो मिनट
- 2:59:40में ही उसका कंफ्यूजन दूर हुआ। राघव ने
- 2:59:43फिर एक बार दरवाजा का नोक किया और बोला,
- 2:59:46"सिया टॉवल और बाथ रोब यहां रख दिया है और
- 2:59:49मैं बाहर जा रहा हूं। तुम आकर चेंज कर
- 2:59:52लेना। और फिर राघव ने दरवाजे के हैंडल को
- 2:59:55टॉवल टांग दिया और बाहर चला गया। उसकी बात
- 2:59:57सुन सिया के सांस में सांस आए। उसने कुछ
- 3:00:00पल के बाद थोड़ा सा दरवाजा खोला और जल्दी
- 3:00:03से टॉवल और बाथरूम लेकर दरवाजा बंद कर
- 3:00:06दिया। उसने जल्दी से अपने आप को साफ किया
- 3:00:08और बाथरूम पहनकर बाहर आ गई। फिर जल्दी से
- 3:00:11उसने अपनी साड़ी निकाली और उसे पहनकर अपना
- 3:00:14मेकअप कर दिया। उसे लेट हुआ था इस वजह से
- 3:00:17उसने ज्यादा कुछ ना करते हुए बस फेस टेल
- 3:00:19लगाया और आंखों में काजल की धार खींच दी।
- 3:00:22अपने माथे पर बिंदी सजाते हुए उसने मांग
- 3:00:24में लंबा सिंदूर भरा और फिर अपने
- 3:00:26मंगलसूत्र को ठीक कर वो जल्दी-जल्दी बाहर
- 3:00:28चली गई। हॉल में आते ही वो मॉम से बोली
- 3:00:32मॉम सॉरी मैं लेट हो गई। मैं अभी
- 3:00:34ब्रेकफास्ट का देखती हूं। सिया किचन की
- 3:00:37तरफ जाने लग गई। लेकिन सुधा मोम ने उसका
- 3:00:39हाथ पकड़ कर उसे रोका और डाइनिंग टेबल की
- 3:00:42ओर ले गई। सुधा मोम उसे चेयर पर बिठाते
- 3:00:44हुए बोली सब कुछ तैयार है। चलो अब बैठो और
- 3:00:47नाश्ता करो। सुधा मोम ने उसे सर्व करते
- 3:00:49हुए कहा और छोटी मां से कहकर उन दोनों की
- 3:00:52चाय मंगवा ली। वो ये इनका नाश्ता सिया ने
- 3:00:56धीरे से कहा बाकी सबका पता नहीं मगर राघव
- 3:00:59अभी तक उसके साथ था तो उसे पता नहीं था कि
- 3:01:01उसने नाश्ता किया है या नहीं। छोटी मां को
- 3:01:04उसकी आवाज सुनाई नहीं दी। इसलिए वह बोली
- 3:01:07क्या कह रही हो सिया? और सिया ने ना में
- 3:01:10सर हिला दिया। वह वैसे ही बैठी यह देखती
- 3:01:12रही कि राघव आ रहा है या नहीं। क्या हुआ?
- 3:01:16तुम खा क्यों नहीं रही हो? छोटी मां की
- 3:01:18फिर से आए आवाज से सिया ने उनके तरफ देखा
- 3:01:21और बोली वो वो क्या आओ सब ने खा लिया।
- 3:01:24मेरा भाई डैड आप सिया ने राघव का नाम नहीं
- 3:01:28लिया मगर वो दोनों समझ गई और मुस्कुराने
- 3:01:30लग गई। छोटी मां उसे छिड़ते हुए बोली हम
- 3:01:34सब या फिर राघव। किसके बारे में पूछना
- 3:01:37चाहती हो सिया? और क्या उनकी बात सुन सिया
- 3:01:40बुरी तरह से शर्मा गई। उसे इतने शर्मा रही
- 3:01:43थी कि उसने अपना सर झुका लिया। सुधा मोम
- 3:01:45और छोटी मां उसकी हरकत देख हंसने लग गई।
- 3:01:48सुधा मोम बोली अरे राघव आ जाओ देखो
- 3:01:51तुम्हारी बीवी तुम्हारे बिना नाश्ता नहीं
- 3:01:53कर रही है। अब दोनी आराम से नाश्ता करो।
- 3:01:56चलो कविता हम यहां से जाते हैं। सुधा मोम
- 3:01:59ने राघव का आता देख कहा और फिर कविता जी
- 3:02:01के साथ वहां से चली गई। क्या हुआ? राघव को
- 3:02:05समझ नहीं आया कि मोम ने उससे ऐसा कहीं
- 3:02:08किया। इसलिए वह सिया के पास वाली चेयर पर
- 3:02:10बैठते। हुए उसके तरफ झुक कर बोला और सिया
- 3:02:14के शर्म की लाली और बढ़ गई। उसने ना में
- 3:02:17सर हिलाया और राघव के लिए प्लेट में
- 3:02:20ब्रेकफास्ट सर्व कर दिया। उसके बाद उन
- 3:02:23दोनों ने आराम से बैठकर अपना अपना नाश्ता
- 3:02:25खत्म किया और राघव हॉल में तो सिया किचन
- 3:02:27में प्लेट्स और बाकी सब लेकर चली गई।
- 3:02:30थोड़ी देर बाद जब वो आईए तब राघव के कहने
- 3:02:32पर सुधा मोम ने उसका लाया हुआ सेट सिया को
- 3:02:35दे दिया और अच्छे से टायर होकर आने के लिए
- 3:02:37बोल दिया। राघव भी तैयार होने चला गया और
- 3:02:40कल सिया ने उसके लिए लिया हुआ ड्रेस उसने
- 3:02:42पहन लिया। सच में सिया को चॉइस उस पर काफी
- 3:02:44जच रही थी और उसके लुक्स को और भी निखार
- 3:02:47रही थी। सिया भी फिर रेडी होकर वहां आ गई
- 3:02:51और तभी डैड ने उसे बैंक लॉकर से लाए हुए
- 3:02:53ज्वेलरी उसे दे दी। उन्होंने अपने चारों
- 3:02:56बेटों के बहुओं के लिए कुछ ना कुछ बनकर
- 3:02:58रखा रहा और राघव के वाइफ होने के नाते जो
- 3:03:01सिया के हिस्से का था वह सारी ज्वेलरी
- 3:03:03उन्होंने सिया को दे दी। सुधा मोम बोली आओ
- 3:03:06सिया इसे पहन लो और सुधा मोम ने खुद अपने
- 3:03:08हाथों से सिया को तैयार कर दिया। सच में
- 3:03:12हर बार की तरह इस बार भी सिया बहुत ही
- 3:03:14अच्छी दिख रही थी और सब की नजरें उस पर ही
- 3:03:16टिकी थी। छोटी मां ने उसे नजर का टीका
- 3:03:19लगाया और धीरे से राघव से बोली राघव संभाल
- 3:03:22कर ले जाना सिया को और हां वह अपने गुस्से
- 3:03:25पर थोड़ा काबू रखना। राघव ने उनकी बात सुन
- 3:03:27हां में सर हिलाया। क्या हुआ? राघव को समझ
- 3:03:31नहीं आया कि मोम ने उससे ऐसा कहीं किया
- 3:03:34इसलिए वह सिया के पास वाली चेयर पर बैठते
- 3:03:37हुए उसके तरफ झुक कर बोला और सिया के
- 3:03:40चेहरे पर छाई हुई शर्म की लाली और बढ़ गई
- 3:03:43उसने ना में सर हिलाया और राघव के लिए
- 3:03:46प्लेट में ब्रेकफास्ट सर्व कर दिया। उसके
- 3:03:49बाद उन दोनों ने आराम से बैठकर अपना अपना
- 3:03:51नाश्ता खत्म किया और राघव हॉल में तुसिया
- 3:03:53किचन में प्लेट्स और बाकी सब लेकर चली गई।
- 3:03:56थोड़ी देर बाद जब वह आए तब राघव के कहने
- 3:03:59पर सुधा मोम ने उसका लाया हुआ सेट सिया को
- 3:04:01दे दिया और अच्छे से टायर होकर आने के लिए
- 3:04:03बोल दिया। राघव भी तैयार होने चला गया और
- 3:04:06कल सिया ने उसके लिए लिया हुआ ड्रेस उसने
- 3:04:08पहन लिया। सच में सिया को चॉइस उस पर काफी
- 3:04:11जच रही थी और उसके लुक्स को और भी निखार
- 3:04:13रही थी। सिया भी फिर रेडी होकर वहां आ गई
- 3:04:17और तभी डैड ने उसे बैंक लॉकर से लाए हुए
- 3:04:20ज्वेलरी उसे दे दी। उन्होंने अपने चारों
- 3:04:22बेटों के बहुओं के लिए कुछ ना कुछ बनकर
- 3:04:24रखा रहा और राघव के वाइफ होने के नाते जो
- 3:04:27सिया के हिस्से का था वह सारी ज्वेलरी
- 3:04:29उन्होंने सिया को दे दी। सुधा मोम बोली आओ
- 3:04:32सिया इसे पहन लो और सुधा मोम ने खुद अपने
- 3:04:35हाथों से सिया को तैयार कर दिया। सच में
- 3:04:38हर बार की तरह इस बार भी सिया बहुत ही
- 3:04:40अच्छी दिख रही थी और सबकी नजरें उस पर ही
- 3:04:43टिकी थी। छोटी मां ने उसे नजर का टीका
- 3:04:45लगाया और धीरे से राघव से बोली, "राघव
- 3:04:48संभालकर ले जाना सिया को और हां वहां अपने
- 3:04:51गुस्से पर थोड़ा काबू रखना। राघव ने उनकी
- 3:04:53बात सुन हां में सर हिलाया और वह दोनों
- 3:04:56सिया के मायके जाने के लिए निकल गए।
- 3:04:58खामोशी से उनका सफर बीत रहा था। राघव सिया
- 3:05:01से बहुत सारी बातें करना चाहता था। लेकिन
- 3:05:04कहां से शुरू करें, यह उसके समझ के परे था
- 3:05:07और सिया उसके लिए तो राघव का साथ ही काफी
- 3:05:09था। खुशी उसके चेहरे पर साफ-साफ झलक रही
- 3:05:12थी। राघव का साथ इतना अच्छा परिवार और अब
- 3:05:15मायके जाने की खुशी सिया तो ताजे गुलाब की
- 3:05:18तरह खिली खिली लग रही थी। राघव ने एफएम
- 3:05:20शुरू किया और फिर आगे का सफर रोमांटिक
- 3:05:23सोंग को सुनते हुए ही बीतने लगा। सिया
- 3:05:26रहकर उसे देख रही थी जिसका एहसास राघव को
- 3:05:29था। लेकिन उसने कुछ कहा नहीं और ऐसा जताया
- 3:05:33कि उसका पूरा ध्यान ड्राइविंग पर ही
- 3:05:35सिग्नल पर गाड़ी रोकने के बाद राघव ने
- 3:05:37सिया की तरफ देखा। इस उम्मीद से कि शायद
- 3:05:40वह अभी कुछ कहेंगी। लेकिन सिया ने अपनी
- 3:05:43खामोश भी बरकरार राखी और जब उसने कुछ कहने
- 3:05:45के लिए मुंह खोला उसी वक्त कार की खिड़की
- 3:05:48पर दस्तक सुनाई दी। राघव ने सिया की तरफ
- 3:05:51की खिड़की ओपन की और सामने खड़ी बच्ची की
- 3:05:53तरफ देखने लगा जो ताजेताजे फूलों के गजरे
- 3:05:56बेच रही थी। वो बच्ची राघव से बोली साहब
- 3:06:00मिस साहब के लिए गजरे ले लीजिए ना। उनके
- 3:06:02लंबे बालों पर यह गजरे बहोर जचेंगे। उस
- 3:06:05बच्ची की बात सुन राघव ने सिया के तरफ
- 3:06:07देखा जिसके चेहरे का नूर उन गजरों को देख
- 3:06:10और बढ़ गया था। राघव उस बच्ची से बोला ठीक
- 3:06:13है सारे के सारे दे दो और राघव की यह बात
- 3:06:16सिया और वो लड़की दोनों को हैरान कर गई।
- 3:06:18उसके पास बहुत सारे गजरे थे और एक ही वक्त
- 3:06:21पर सब बिक रहे थे। इस वजह से वह बच्ची
- 3:06:23खुशी के मारे हैरान थी तो सिया इतने सारे
- 3:06:26गजरों का क्या करना है? यह सोचकर हैरान
- 3:06:29थी। राघव एक बार सिया को और फिर उस लड़की
- 3:06:32को देखकर बोला दे रही हो ना और उस लड़की
- 3:06:36ने जल्दी-जल्दी हां सर हिलाकर पूरी टोकरी
- 3:06:38ही सिया के पास दे दी। राघव ने फिर उसे
- 3:06:41500 500 के दो नोट दी और खुले उसे ही रखने
- 3:06:44के लिए बोल दिए। वह लड़की खुशी-खुशी वहां
- 3:06:47से चली गई और राघव ने फिर एक बार उनकी
- 3:06:49मंजिल की ओर गाड़ी बढ़ा दी। कुछ दूरी पर
- 3:06:51जाने के बाद राघव ही बोला, क्या तुम्हें
- 3:06:54फूल पसंद नहीं है? उसका अचानक आया सवाल
- 3:06:57सुन सिया हड़बड़ा गई और जल्दीजल्दी बोली
- 3:07:00हां है ना पसंद है तो फिर लगाओ ना उन्हें
- 3:07:03अपने बालों में राघव ने गजरों की तरफ
- 3:07:06इशारा करके कहा और सिया ने हां में सर
- 3:07:08हिला दिया उसने दो-तीन गजरे अपने हाथ में
- 3:07:11लिए तभी राघव बोला जितने तुम्हारे बाल है
- 3:07:14एटलीस्ट उतने तो गजरे लो और राघव ने ही
- 3:07:16हाथ आगे कर उसमें से सात आठ गजरों की लड़
- 3:07:19उठा दी सिया ने मुस्कुराते हुए उन्हें
- 3:07:21लिया और बोली थैंक यू उसकी वो मीठी सी
- 3:07:24आवाज आज राघव को अक्सू तो कर गई लेकिन
- 3:07:27उसका सिया का उसे थैंक यू कहना उसे
- 3:07:29बिल्कुल पसंद नहीं आया। वो कुछ बोलने ही
- 3:07:32वाला था। तब तक ही सिया फिर से बोली थैंक
- 3:07:35यू एवरीथिंग आप और बाकी सभी घर वाले बहुत
- 3:07:38अच्छे हैं। बहुत-बहुत अच्छे। थैंक यू मुझे
- 3:07:41समझने के लिए और मेरा साथ देने के लिए।
- 3:07:43सिया की आंखों में झलक रहा था कि वो कितने
- 3:07:46सच्चे दिल से यह बोल रही है। इस वजह से
- 3:07:49राघव ने उसे आगे कुछ नहीं कहा और मुस्कुरा
- 3:07:51दिया। सिया ने फिर एक-एक कर गजरों को आपस
- 3:07:54में जोड़ दिया और अपना हाथ पीछे करके वह
- 3:07:56बालों में सेट करने लगी। मगर उससे यह हो
- 3:07:58ही नहीं रहा था। उसकी वह नाकाम कोशिश देख
- 3:08:02राघव ने एक और गाड़ी लगा दी और उसके तरफ
- 3:08:05झुककर उसके हाथ को अपने हाथ में थाम लिया।
- 3:08:07वेट में करता हूं राघव बोला और उन गजरों
- 3:08:10को लगाने की कोशिश करने लगा। बिना यह जाने
- 3:08:12कि उसकी यह छुवन सिया के अंदर क्या खलबली
- 3:08:15मचा गई है। राघव की करीबी सिया को कुछ
- 3:08:18हिप्सा महसूस करवा रही थी। मगर वह अजीब
- 3:08:20फीलिंग उसे बहुत अच्छी लग रही थी। उसके
- 3:08:23सांसे बढ़ गई थी राघव के करीबी से जिसे
- 3:08:25अपने सीने पर हाथ रख वो किसी तरह नॉर्मल
- 3:08:28करने की तरह कोशिश कर रही थी। वही राघव का
- 3:08:31हाल भी कुछ वैसा ही था। सिया की करीबी और
- 3:08:33गजरे के अति वो महकीम-मह की खुशबू राघव को
- 3:08:36बहकने के लिए मजबूर कर रहे थे। राघव ने
- 3:08:39गजरों को सिया के बालों में सजा दिया और
- 3:08:41झुककर उसने गहरी सांस लेते हुए वे उस
- 3:08:44खुशबू को अपने सांसों में भर ली और उसकी
- 3:08:46इस हरकत से सिया के हाथों की मुट्ठियां
- 3:08:48उसके साड़ी पर कस गई। उसमें हुआ यह बदलाव
- 3:08:52राघव के भी समझ में आ गया। लेकिन वो वैसे
- 3:08:54ही रहा और थोड़ा सा उसके चेहरे के तरफ
- 3:08:57झुककर उसके सर पर किस करते हुए बोला, "तुम
- 3:09:00बहुत अच्छी दिख रही हो। बच्चा बहुत ही
- 3:09:02खूबसूरत और प्यारी राघव का यह कहना और
- 3:09:04सिया ने उसके तरफ देखा। उन दोनों की आंखें
- 3:09:07आपस में उलझ गई और कुछ ऐसे उलझी कि एक
- 3:09:10दूसरे पर से हटने का नाम ही नहीं ले रही
- 3:09:12थी। आप सिया उसने कुछ कहना चाहती थी लेकिन
- 3:09:15राघव का उसको यूं इतना इंटेंसली देखना
- 3:09:18सिया के लफ्जों को उसके हलक से बाहर
- 3:09:20निकलने ही नहीं दे रहा था। राघव के चेहरे
- 3:09:23पर बड़ी वाली स्माइल आ गई। उसे ऐसे देख और
- 3:09:26उसने सिया का चेहरा अपने हाथों में थाम
- 3:09:28लिया। उसके आंखों में बारी-बारी देखते हुए
- 3:09:30वह बोला चाहे जिस हालत में भी हो लेकिन सच
- 3:09:33यही कि हम दोनों शादी जैसे पवित्र रिश्ते
- 3:09:36में बंध गए तो क्यों ना इस रिश्ते को एक
- 3:09:38मौका दे और हम एक दूसरे के साथ आगे बढ़े
- 3:09:42मेरी हमसफ बनकर क्या तुम मेरे साथ अपने
- 3:09:44जिंदगी का आगे का सफर काटना चाहोगी सिया
- 3:09:48मेरे साथ एक नए शुरुआत करोगी राघव ने अपने
- 3:09:51हाथ से उसके गाल को धीरे से सहलाया और फिर
- 3:09:54उसके आगे कर दिया सिया जो अभी भी उसके
- 3:09:56नजरों में खोई हुई थी उसने ने अपना सरहमे
- 3:09:59हिलाया और उसके हाथ में अपना हाथ दे दिया।
- 3:10:02राघव खुश होते हुए बोला, आई प्रॉमिस
- 3:10:05तुम्हारा यह हाथ मैं कभी नहीं छोडूंगा
- 3:10:07बच्चा और राघव ने फिर उसके हाथ पर किस कर
- 3:10:10दिया। सिया शर्मा गई और उसका शर्माना राघव
- 3:10:12के दिल की धकनों को इतना बढ़ा गया कि उसका
- 3:10:15दिल किया कि सिया के उस लाल रंगत में
- 3:10:17नहाए-हाए चेहरे पर किस की बौछार कर देख।
- 3:10:20किसी तरह अपने जज्बात पर काबू रख। राघव ने
- 3:10:22अपना ध्यान उस पर से हटाया और फिर एक बार
- 3:10:25वह सिया के घर के तरफ निकल पड़े। मगर अब
- 3:10:27इस सफर के बीच भले ही ज्यादा ना सही मगर
- 3:10:30थोड़ी बहुत बातें दोनों में हो रही थी।
- 3:10:32उसमें हुआ यह बदलाव राघव के भी समझ में आ
- 3:10:35गया लेकिन वो वैसे ही रहा और थोड़ा सा
- 3:10:38उसके चेहरे के तरफ झुककर उसके सर पर किस
- 3:10:41करते हुए बोला तुम बहुत अच्छी दिख रही हो
- 3:10:43बच्चा बहुत ही खूबसूरत और प्यारी राघव का
- 3:10:46यह कहना और सिया ने उसके तरफ देखा। उन
- 3:10:48दोनों की आंखें आपस में उलझ गई और कुछ ऐसे
- 3:10:51उलझी कि एक दूसरे पर से हटने का नाम ही
- 3:10:53नहीं ले रही थी। आप सिया उसने कुछ कहना
- 3:10:57चाहती थी लेकिन राघव का उसको यू इतना
- 3:10:59इंटेंसली देखना सिया के लफ्जों को उसके
- 3:11:02हलक से बाहर निकलने ही नहीं दे रहा था।
- 3:11:04राघव के चेहरे पर बड़ी वाली स्माइल आ गई।
- 3:11:07उसे ऐसे देख और उसने सिया का चेहरा अपने
- 3:11:09हाथों में थाम लिया। उसके आंखों में
- 3:11:11बारी-बारी देखते हुए वह बोला चाहे जिस
- 3:11:14हालत में भी हो। लेकिन सच यही है कि हम
- 3:11:16दोनों शादी जैसे पवित्र रिश्ते में बंध गए
- 3:11:19तो क्यों ना इस रिश्ते को एक मौका दे और
- 3:11:21हम एक दूसरे के साथ आगे बढ़े। मेरी हमसफ
- 3:11:25बनकर क्या तुम मेरे साथ अपने जिंदगी का
- 3:11:27आगे का सफर काटना चाहोगी सिया मेरे साथ एक
- 3:11:31नए शुरुआत करोगी राघव ने अपने हाथ से उसके
- 3:11:34गाल को धीरे से सहलाया और फिर उसके आगे कर
- 3:11:37दिया सिया जो अभी भी उसके नजरों में खोई
- 3:11:40हुई थी उसने अपना सरह में हिलाया और उसके
- 3:11:42हाथ में अपना हाथ दे दिया राघव खुश होते
- 3:11:45हुए बोला आई प्रॉमिस तुम्हारा यह हाथ मैं
- 3:11:48कभी नहीं छोडूंगा बच्चा और राघव ने फिर
- 3:11:51उसके हाथ पर किस कर दिया सिया शर्मा ਗਈ और
- 3:11:53उसका शर्माना राघव के दिल की धकनों को
- 3:11:56इतना बढ़ा गया कि उसका दिल किया कि सिया
- 3:11:58के उस लाल रंगत में नहाए चेहरे पर किसकी
- 3:12:01बौछार कर देख किसी तरह अपने जज्बात पर
- 3:12:03काबू रख राघव ने अपना ध्यान उस पर से
- 3:12:06हटाया और फिर एक बार वह सिया के घर के तरफ
- 3:12:08निकल पड़े मगर अब इस सफर के बीच भले ही
- 3:12:11ज्यादा ना सही मगर थोड़ी बहुत बातें दोनों
- 3:12:13में हो रही थी। कुछ देर बाद सिया के बताने
- 3:12:17पर राघव की गाड़ी उसके घर के सामने आकर
- 3:12:19रुकी। शहर से थोड़ा सा बाहर सिया के घर
- 3:12:22वालों की बड़ी सी बेहद खूबसूरत पुश्तैनी
- 3:12:24हवेली थी जिसकी खूबसूरती आज भी सब ने
- 3:12:27मिलकर बरकरार रखी हुई थी। बड़ा सा अलग-अलग
- 3:12:30फूलों के पौधों से और पेड़ों से सजा हुआ
- 3:12:32आंगन और घर के ठीक सामने निकली गई सुंदर
- 3:12:35बड़ी रंगोली देखकर ही राघव के चेहरे पर
- 3:12:38स्माइल आ गई। उसके गाड़ी की आवाज सुनकर घर
- 3:12:41के सभी बाहर आ गए थे। सिया की मां ने आरती
- 3:12:44की थाल लाई हुई थी और दरवाजे पर खड़ी हुई
- 3:12:46उन्हीं के आने का इंतजार कर रही थी। राघव
- 3:12:49ने सिया के लिए दरवाजा खोला और हाथ देते
- 3:12:51हुए उसे आराम से गाड़ी के बाहर निकालकर
- 3:12:54पीछे से बैग भी ले ली। सिया ने भी आगे
- 3:12:56बढ़कर उसकी मदद की और वह बचे हुए गजरों की
- 3:12:59टोकरी अपने साथ ले ली। उन्हें देखकर जल्दी
- 3:13:01से आलोक और प्रियेश आगे आए। वहीं शशांक भी
- 3:13:04दौड़ते हुए छोटी बहन के पास आ गया जो बहुत
- 3:13:06ही प्यारी लग रही थी। आलोक ने राघव के हाथ
- 3:13:10में से बैक की और प्रियेश की तरफ देते हुए
- 3:13:12राघव से बोला जमाई जी आने को कोई तकलीफ तो
- 3:13:16नहीं हुई ना? राघव ना में सर हिलाते हुए
- 3:13:19बोला नहीं कोई तकलीफ नहीं हुई हे उन दोनों
- 3:13:22ने हैंडशेक किया और आगे की ओर बढ़ गए बड़े
- 3:13:25पापा काका और सिया के पापा तीनों भी उसका
- 3:13:28वेलकम करने के लिए आगे आ गए थे राघव ने
- 3:13:31उनके तरफ मुस्कुरा कर देखा हां यह सच था
- 3:13:34कि वह उनसे गुस्सा था उनकी सोच उसे
- 3:13:36बिल्कुल पसंद नहीं थी मगर बावजूद उसके वह
- 3:13:39जान गया था कि सिया की फैमिली उसके लिए
- 3:13:41इंपॉर्टेंट है और सबसे इंपॉर्टेंट वो उसकी
- 3:13:44फैमिली है जिस नाते वह उसकी भी फैमिली बली
- 3:13:46हुई और अपने संस्कारों की वजह से उसने
- 3:13:49बिना कोई मेल मुटाव अपने दिल में लाए हुए
- 3:13:51नीचे झुक गया और उसने सबके पैर छू लिए। उन
- 3:13:55तीनों ने भी उसे सच्चे दिल से आशीर्वाद
- 3:13:57दिया। राघव अब उनके बेटी का हस्बैंड था।
- 3:14:00उनका जमाए जो ना सिर्फ दिखने में अच्छा था
- 3:14:02बल्कि बहुत होनहार और संस्कारी भी था।
- 3:14:05बड़े पापा ने भले ही शादी में उससे ठीक से
- 3:14:07बात नहीं की हो। लेकिन सिया के विदा होने
- 3:14:10के बाद सबसे पहले उन्होंने राघव के बारे
- 3:14:12में जानकारी निकाली थी। सिया की शादी
- 3:14:16उन्होंने मिश्रा जी के अच्छे स्वभाव के
- 3:14:18वजह से ही तय की थी। उन्हें लगा था कि
- 3:14:20राहुल भी उसके पिता की तरह ही होगा लेकिन
- 3:14:23वह गलत थे। उन्हें लाफिलेट राहुल ही
- 3:14:25सच्चाई पता चली जिसे जानने के बाद वह
- 3:14:28चाहकर भी कुछ कर नहीं सकते थे और यही वजह
- 3:14:30थी कि उन्होंने मिसेज मिश्रा को उनका मोह
- 3:14:33मांगा दहेज देने की पहल की थी ताकि आगे
- 3:14:35जाकर उनकी बेटी को कोई तकलीफ ना हो। मगर
- 3:14:38वह यह भूल गए थे कि उनका दिया हुआ दहेज
- 3:14:40उनकी बेटी के लिए और खतरा पैदा कर सकता
- 3:14:43था। खैर, यह सिया की खुशकिस्मती थी कि वह
- 3:14:46उस घर में नहीं गई और सही वक्त रहते राघव
- 3:14:49सिया के लाइफ में आ गया। उन्हें हर तरफ से
- 3:14:52राघव के बारे में अच्छी ही बातें सुनने को
- 3:14:54मिली थी। सिवाय एक बात के और वो एक थी कि
- 3:14:57राघव को गुस्सा थोड़ा ज्यादा ही आता है।
- 3:14:59उसके गुस्से के अलावा उसमें एक भी ऐसी
- 3:15:01खोटी चीज नहीं थी कि जिस वजह से उसे नाम
- 3:15:04रखा जा सके। बड़े पापा पापा सिया ने अपनी
- 3:15:08भरी हुई आंखों से उनकी तरफ देखा और ना
- 3:15:10सिर्फ वह दोनों बल्कि काका भी उनकी घर की
- 3:15:13सबसे छोटी बेटी का यह मित्रो शादीशुदा लुक
- 3:15:16देखकर भावुक हो गए। उनकी नजर सिया पर ही
- 3:15:19रुक गई। उनकी उंगली पकड़ कर इधर से उधर
- 3:15:21उछलने वाली और चहकते हुए उनके घर आंगन को
- 3:15:24महकाने वाली उनकी बेटी आज किसी के घर की
- 3:15:26बहू किसी के पत्नी के रूप में उनके सामने
- 3:15:29खड़ी थी। पिंक कलर की साड़ी नई नवेली
- 3:15:32दुल्हन की तरह पूरा शादी का श्रृंगार
- 3:15:35सिंदूर से भरी मांग, गले में बड़ा और छोटा
- 3:15:38मंगलसूत्र जो दोनों राघव ने उसे दिए थे।
- 3:15:40एक गोल्ड नेकलेस और उसी पर एयरिंग्स। हाथ
- 3:15:44भर पहने हुए चिड़िया जिसके आगे पीछे सोने
- 3:15:46के कंगन थे और मेहंदी की वो रंगत जो उसके
- 3:15:49नाजुक गोर हाथों को और भी खुसबुरद बना रही
- 3:15:52थी। पैरों के मेहंदी पर भी जचती। वो नाजुक
- 3:15:54पायल। कितनी परिपूर्ण लग रही थी। वो ऊपर
- 3:15:57से वो उसके सामने से हेयर स्टाइल करके
- 3:15:59खुले छोड़े हुए बल्ब जिसमें राघव ने कुछ
- 3:16:02ज्यादा ही गजरे लगा दिए थे जो सिया के रूप
- 3:16:04को और निखारने का काम बखूबी निभा रहे थे।
- 3:16:07सिया हर बार की तरह बहुत ही प्यारी लग रही
- 3:16:09थी। उसके आंखों में भी अपने घर वालों को
- 3:16:12सामने देख आंसू छा गए। उसका दिल कर रहा था
- 3:16:15कि दौड़ कर जाए और अपने पापा के बड़े पापा
- 3:16:18के गले लग जाए। मगर उसने अपने आप को रोक
- 3:16:21दिया। बचपन की तरह कोई ट्रॉफी जीत के आने
- 3:16:23पर जैसे वह भाग कर जाती थी। वैसे अब वह
- 3:16:26नहीं जा सकती थी। अब वह बच्ची तो नहीं रही
- 3:16:29थी। इस वजह से सिया वैसे ही खड़ी रही।
- 3:16:31उसके दिल में चल रहे जज्बात शायद उसके
- 3:16:33पापा को समझ आ गए। वो सिया को बाहों में
- 3:16:36लेने के लिए आगे ही बढ़ने वाले थे कि तब
- 3:16:38तक बड़े पापा ने अपने कदम आगे बढ़ा दिए और
- 3:16:41सिया के तरफ चले गए। बड़े पापा सिया ने
- 3:16:44धीरे से उन्हें पुकारा और अगले ही पल बड़े
- 3:16:46पापा ने उसे अपने गले से लगा लिया। सिया
- 3:16:49भी जल्दी से बड़े पापा के पीठ पर हाथ रखे
- 3:16:52और उनके सीने पर सर रखकर रोने लग गई। बड़े
- 3:16:54पापा उसे शांत कराते हुए बिले श रो मत चुप
- 3:16:58हो जाओ और मुझे बताओ कि मेरी लाडो कैसी
- 3:17:00है? ठीक हो ना लाडो बड़े पापा ने उसके सर
- 3:17:04को सहलाया और उसे थोड़ा सा दूर कर उसकी
- 3:17:06आंखों में देखते हुए सवाल किया। सिया ने
- 3:17:09रोते हुए ही हां में सर हिलाया और एक नजर
- 3:17:12राघव पर डाली जो वही खड़े रहकर किसी सोच
- 3:17:14में गम था। पापा अभी तक सिया के पास आ गए
- 3:17:17थे और उन्होंने फिर सिया को अपने गले से
- 3:17:19लगा लिया। सिया भी अपने पापा के गले लगस
- 3:17:21पड़ी। तभी काका उससे बोले सिया ऐसे रोते
- 3:17:25नहीं हे बेटा चलो शांत हो जाओ और अंदर आओ।
- 3:17:28जमाई जी को और कितने देर दरवाजे पर खड़े
- 3:17:31करेंगे। हम चलो अब अंदर काका ने भी प्यार
- 3:17:34से उससे कहा और सिया उनके गले लगकर हां सर
- 3:17:37हिलाया। उन्होंने प्यार से सिया के सर को
- 3:17:39छुमा और उसे लेकर अंदर की तरफ आने लग गए।
- 3:17:42सिया को राघव के करीब खड़े करके उन्होंने
- 3:17:45घर की औरतों को इशारा किया और तभी सिया की
- 3:17:47मम्मा सिया की बड़ी मोम से बोली भाभी आइए
- 3:17:50आरती कीजिए हमारे बेटी जमाई की बड़ी मां
- 3:17:53ने हां में सर हिलाया और अच्छे से दोनों
- 3:17:56की आरती उतारी फिर सिया की मोम की तरफ
- 3:17:58थाली दे दी उन्होंने भी राघव सिया की आरती
- 3:18:01उतारी और अपनी देवरानी की तरफ थाल देकर
- 3:18:04उन्हें भी इशारा किया कि वह भी उन दोनों
- 3:18:06का स्वागत किया। उन्होंने भी फिर दोनों का
- 3:18:08राघव सिया का अच्छे से स्वागत किया और
- 3:18:11उनकी नजर उतारते हुए रोटी टुकड़ा उन पर से
- 3:18:14उतार के फेंक दिया। आइए जमाई जी सिया बड़ी
- 3:18:17मॉम ने पहले राघव की तरफ और फिर सिया के
- 3:18:20तरफ देखकर कहा और उक के अंदर आते ही बाकी
- 3:18:22सब भी अंदर आ गए। अंदर आते ही सिया अपनी
- 3:18:25तीनों मॉम्स के गले लग गई। उन तीनों ने भी
- 3:18:27बचपन से उसे बहुत प्यार दिया था। तो उसने
- 3:18:31तीनों को गले लगा लिया और वह सभी सिस पड़ी
- 3:18:33सिया की मॉम ने तो उसके चेहरे पर किसकी की
- 3:18:36बौछार कर दी। वह प्यार से उसके चेहरे को
- 3:18:38चूम रही थी। उनकी एक लौटी मासूम सी बच्ची
- 3:18:42के साथ बहुत कुछ हुआ था और अब जब वह उसके
- 3:18:45सामने थी तब वह अपना प्यार उस पर लुटाने
- 3:18:48से खुद को नहीं रोक पाए। उन्हें तो उनसे
- 3:18:50बहुत सारी बातें करनी थी। लेकिन अब फिलहाल
- 3:18:53में उनके जमाई की आभगत करना जरूरी था। तो
- 3:18:56वह उसी के तरफ मुड़ गई। बाकी दोनों ने भी
- 3:18:59सिया को प्यार किया और फिर अपना पूरा
- 3:19:01अटेंशन अपने जमी को देते हुए टेबले नाश्ते
- 3:19:04के अलग-अलग चीजों से भरा दिया। चाय, कॉफी
- 3:19:06और व्हाट नॉट कितना कुछ सामने रख दिया
- 3:19:09उन्होंने। राघव के राघव ने बस मुस्कुराकर
- 3:19:11उन सबकी तरफ देखा और एक दो बाइट उठा लिए।
- 3:19:14पापा और बाकी सिया के भाई उससे बातें करने
- 3:19:17में लग गए थे। बड़े पापा भी बीच-बीच में
- 3:19:20कुछ ना कुछ कह रहे थे और सिया बस वही
- 3:19:22बैठकर उनकी बातों को सुन रही थी। कहर के
- 3:19:24लेडी सारे अंदर चले गए थे और उनके पीछे
- 3:19:27सिया भी जाना चाहती थी।
- 3:19:29लेकिन उसकी मॉम ने ना में इशारा कर अंदर
- 3:19:31आने से मना किया और वही उनके जमाई जी यानी
- 3:19:34कि राघव के पास बैठने बोल दिया। अपना मन
- 3:19:36मारकर सिया वही बैठी रही। मगर कुछ ही देर
- 3:19:40में उसकी चुलबुल शुरू हो गई जिसे देख राघव
- 3:19:43उससे बोला सिया जाओ और आंटी की आई मीन मोम
- 3:19:46की हेल्प करा दो थोड़ी बहुत जाओ। राघव ने
- 3:19:49जैसे ही कहा सबकी नजरें उसकी तरफ आ गई।
- 3:19:52सिया तो खुशी से चाहक उठी और खदे होते हुए
- 3:19:54बोली मैं भी यही सोच रही थी कि मैं अंदर
- 3:19:57जाऊं। सिया फिर बिना एक अपने की भेद देरी
- 3:19:59किए हुए वहां से उठी और अंदर की ओर भाग गई
- 3:20:02और उसकी यह बच्चों जैसे हरकत जहां राघव को
- 3:20:05खुश कर गई वही सबको परेशान यह सोचकर कि अब
- 3:20:08उनके जमाई जी क्या सोचेंगे उनके बेटी के
- 3:20:10बारे में उन तीनों ने भी उसे सच्चे दिल से
- 3:20:13आशीर्वाद दिया राघव अब उनके बेटी का
- 3:20:16हस्बैंड था उनका जमाई जो ना सिर्फ दिखने
- 3:20:19में अच्छा था बल्कि बहुत होनहार और
- 3:20:21संस्कारी भी था बड़े पापा ने भले ही शादी
- 3:20:23में उससे ठीक से बात नहीं की हो लेकिन
- 3:20:26सिया के विदा होने के बाद सबसे पहले
- 3:20:28उन्होंने राघव के बारे में जानकारी निकाली
- 3:20:31थी। सिया की शादी उन्होंने मिश्रा जी के
- 3:20:34अच्छे स्वभाव के वजह से ही तय की थी।
- 3:20:36उन्हें लगा था कि राहुल भी उसके पिता की
- 3:20:38तरह ही होगा। लेकिन वह गलत थे। उन्हें
- 3:20:41लाफिलेट राहुल ही सच्चाई पता चली जिसे
- 3:20:44जानने के बाद वह चाहकर भी कुछ कर नहीं
- 3:20:46सकते थे और यही वजह थी कि उन्होंने मिसेज
- 3:20:49मिश्रा को उनका मोह मांगा दहेज देने की
- 3:20:51पहल की थी। ताकि आगे जाकर उनकी बेटी को
- 3:20:54कोई तकलीफ ना हो। मगर वह यह भूल गए थे कि
- 3:20:56उनका दिया हुआ दहेज उनकी बेटी के लिए और
- 3:20:59खतरा पैदा कर सकता था। खैर, यह सिया की
- 3:21:02खुशकिस्मती थी कि वह उस घर में नहीं गई और
- 3:21:05सही वक्त रहते राघव सिया के लाइफ में आ
- 3:21:08गया। उन्हें हर तरफ से राघव के बारे में
- 3:21:10अच्छी ही बातें सुनने को मिली थी। सिवाय
- 3:21:12एक बात के और वह एक थी कि राघव को गुस्सा
- 3:21:15थोड़ा ज्यादा ही आता है। उसके गुस्से के
- 3:21:17अलावा उसमें एक भी ऐसी खोटी चीज नहीं थी
- 3:21:20कि जिस वजह से उसे नाम रखा जा सके। बड़े
- 3:21:23पापा पापा सिया ने अपनी भरी हुई आंखों से
- 3:21:26उनकी तरफ देखा और ना सिर्फ वह दोनों बल्कि
- 3:21:29काका भी उनकी घर की सबसे छोटी बेटी का यह
- 3:21:32मैच्योर शादीशुदा लुक देखकर भावुक हो गए।
- 3:21:34उनकी नजरें सिया पर ही रुक गई। उनकी उंगली
- 3:21:37पकड़ कर इधर से उधर उछलने वाली और चहकते
- 3:21:40हुए उनके घर आंगन को महकाने वाली उनकी
- 3:21:42बेटी आज किसी के घर की बहू किसी के पत्नी
- 3:21:45के रूप में उनके सामने खड़ी थी। पिंक कलर
- 3:21:48की साड़ी, नई नवेली दुल्हन की तरह पूरा
- 3:21:50शादी का श्रृंगार सिंदूर से भरी मांग, गले
- 3:21:54में बड़ा और छोटा मंगलसूत्र जो दोनों राघव
- 3:21:57ने उसे दिए थे। एक गोल्ड नेकलेस और उसी पर
- 3:21:59एयरिंग्स। हाथ भर पहने हुए चिड़िया जिसके
- 3:22:03आगे पीछे सोने के कंगन थे और मेहंदी की वो
- 3:22:05रंगत जो उसके नाजुक गोर हाथों को और भी
- 3:22:08खूबसूरत बना रही थी। पैरों के मेहंदी पर
- 3:22:10भी जचती। वो नाजुक पायल। कितनी परिपूर्ण
- 3:22:13लग रही थी। वो ऊपर से वो उसके सामने से
- 3:22:15हेयर स्टाइल करके खुले छोड़े हुए बल्ब
- 3:22:18जिसमें राघव ने कुछ ज्यादा ही गजरे लगा
- 3:22:20दिए थे जो सिया के रूप को और निखारने का
- 3:22:22काम बखूबी निभा रहे थे। सिया हर बार की
- 3:22:25तरह बहुत ही प्यारी लग रही थी। उसके आंखों
- 3:22:28में भी अपने घर वालों को सामने देख आंसू
- 3:22:30छा गए। उसका दिल कर रहा था कि दौड़ कर जाए
- 3:22:33और अपने पापा के बड़े पापा के गले लग जाए।
- 3:22:36मगर उसने अपने आप को रोक दिया। बचपन की
- 3:22:39तरह कोई ट्रॉफी जीत के आने पर जैसे वह भाग
- 3:22:42कर जाती थी। वैसे अब वह नहीं जा सकती थी।
- 3:22:44अब वह बच्ची तो नहीं रही थी। इस वजह से
- 3:22:47सिया वैसे ही खड़ी रही। उसके दिल में चल
- 3:22:49रहे जज्बात शायद उसके पापा को समझ आ गए।
- 3:22:52वो सिया को बाहों में लेने के लिए आगे ही
- 3:22:54बढ़ने वाले थे कि तब तक बड़े पापा ने अपने
- 3:22:57कदम आगे बढ़ा दिए और सिया के तरफ चले गए।
- 3:23:00बड़े पापा सिया ने धीरे से उन्हें पुकारा
- 3:23:03और अगले ही पल बड़े पापा ने उसे अपने गले
- 3:23:05से लगा लिया। सिया भी जल्दी से बड़े पापा
- 3:23:08के पीठ पर हाथ रखे और उनके सीने पर सर
- 3:23:10रखकर रोने लग गई। बड़े पापा उसे शांत
- 3:23:13कराते हुए बिले श रो मत चुप हो जाओ और
- 3:23:16मुझे बताओ कि मेरी लाडो कैसी है? ठीक हो
- 3:23:19ना लाडो बड़े पापा ने उसके सर को सहलाया
- 3:23:22और उसे थोड़ा सा दूर कर उसकी आंखों में
- 3:23:24देखते हुए सवाल किया। सिया ने रोते हुए ही
- 3:23:27हां में सर हिलाया और एक नजर राघव पर डाली
- 3:23:30जो वही खड़े रहकर किसी सोच में गम था।
- 3:23:32पापा भी तक सिया के पास आ गए थे और
- 3:23:34उन्होंने फिर सिया को अपने गले से लगा
- 3:23:36लिया। सिया भी अपने पापा के गले लगिस
- 3:23:39पड़ी। तभी काका उससे बोले सिया ऐसे रोते
- 3:23:43नहीं हे बेटा चलो शांत हो जाओ और अंदर आओ।
- 3:23:46जमाई जी को और कितने देर दरवाजे पर खड़े
- 3:23:49करेंगे हम। चलो अब अंदर काका ने भी प्यार
- 3:23:51से उससे कहा और सिया उनके गले लगकर हमें
- 3:23:54सर हिलाया। उन्होंने प्यार से सिया के सर
- 3:23:56को छुआमा और उसे लेकर अंदर की तरफ आने लग
- 3:23:59गए। सिया को राघव के करीब खड़े करके
- 3:24:02उन्होंने घर की औरतों को इशारा किया और
- 3:24:04तभी सिया की मम्मा सिया की बड़ी मोम से
- 3:24:06बोली भाभी आइए आरती कीजिए हमारे बेटी जमाई
- 3:24:09की। बड़ी मां ने हां में सर हिलाया और
- 3:24:12अच्छे से दोनों की आरती उतारी। फिर सिया
- 3:24:15की मोम की तरफ थाली दे दी। उन्होंने भी
- 3:24:17राघव सिया की आरती उतारी और अपनी देवरानी
- 3:24:20की तरफ थाल देकर उन्हें भी इशारा किया कि
- 3:24:22वह भी उन दोनों का स्वागत किया। उन्होंने
- 3:24:25भी फिर दोनों का राघव सिया का अच्छे से
- 3:24:27स्वागत किया और उनकी नजर उतारते हुए रोटी
- 3:24:30टुकड़ा उन पर से उतार के फेंक दिया। आइए
- 3:24:33जमाई जी सिया बड़ी मॉम ने पहले राघव की
- 3:24:36तरफ और फिर सिया के तरफ देखकर कहा और उप
- 3:24:38के अंदर आते ही बाकी सब भी अंदर आ गए।
- 3:24:41अंदर आते ही सिया अपनी तीनों मॉम्स के गले
- 3:24:43लग गई। उन तीनों ने भी बचपन से उसे बहुत
- 3:24:46प्यार दिया था। तो उसने तीनों को गले लगा
- 3:24:49लिया और वह सभी सिस पड़ी सिया की मॉम ने
- 3:24:52तो उसके चेहरे पर किसकी बौछार कर दी। वह
- 3:24:54प्यार से उसके चेहरे को चूम रही थी। उनकी
- 3:24:56एक लौटी मासूम सी बच्ची के साथ बहुत कुछ
- 3:25:00हुआ था और अब जब वह उसके सामने थी तब वह
- 3:25:04अपना प्यार उस पर लुटाने से खुद को नहीं
- 3:25:06रोक पाए। उन्हें तो उनसे बहुत सारी बातें
- 3:25:08करनी थी। लेकिन अब फिलहाल में उनके जमाई
- 3:25:11की आभगत करना जरूरी था। तो वह उसी के तरफ
- 3:25:14मुड़ गई। बाकी दोनों ने भी सिया को प्यार
- 3:25:17किया और फिर अपना पूरा अटेंशन अपने जमी को
- 3:25:19देते हुए टेबले नाश्ते के अलग-अलग चीजों
- 3:25:22से भरा दिया। चाय, कॉफी और व्हाट नॉट
- 3:25:24कितना कुछ सामने रख दिया उन्होंने। राघव
- 3:25:27के राघव ने बस मुस्कुराकर उन सबकी तरफ
- 3:25:29देखा और एक दो बाइट उठा लिए। पापा और बाकी
- 3:25:33सिया के भाई उससे बातें करने में लग गए
- 3:25:35थे। बड़े पापा भी बीच-बीच में कुछ ना कुछ
- 3:25:37कह रहे थे और सिया बस वही बैठकर उनकी
- 3:25:40बातों को सुन रही थी। कहर के लेडी सारे
- 3:25:42अंदर चले गए थे और उनके पीछे सिया भी जाना
- 3:25:45चाहती थी।
- 3:25:46लेकिन उसकी मॉम ने ना में इशारा कर अंदर
- 3:25:49आने से मना किया और वही उनके जमाई जी यानी
- 3:25:51कि राघव के पास बैठने बोल दिया। अपना मन
- 3:25:54मारकर सिया वही बैठी रही। मगर कुछ ही देर
- 3:25:57में उसकी चुलबुल शुरू हो गई जिसे देख राघव
- 3:26:00उससे बोला सिया जाओ और आंटी की आई मीन मॉम
- 3:26:03की हेल्प करा दो थोड़ी बहुत जाओ। राघव ने
- 3:26:06जैसे ही कहा सबकी नजरें उसकी तरफ आ गई।
- 3:26:09सिया तो खुशी से चाहक उठी और खदे होते हुए
- 3:26:11बोली मैं भी यही सोच रही थी कि मैं अंदर
- 3:26:14जाऊं। सिया फिर बिना एक अपने की भेद देरी
- 3:26:17किए हुए वहां से उठी और अंदर की ओर भाग गई
- 3:26:19और उसकी यह बच्चों जैसे हरकत जहां राघव को
- 3:26:22खुश कर गई वही सबको परेशान यह सोचकर कि अब
- 3:26:25उनके जमाई जी क्या सोचेंगे उनके बेटी के
- 3:26:27बारे में आइए जमाई जी सिया बड़ी मॉम ने
- 3:26:31पहले राघव के तरफ और फिर सिया के तरफ
- 3:26:33देखकर कहा और उक के अंदर आते ही बाकी सब
- 3:26:36भी अंदर आ गए अंदर आते ही सिया अपनी तीनों
- 3:26:39मॉम्स के गले लग गई उन तीनों ने भी बचपन
- 3:26:41से उसे बहुत प्यार दिया था तो उसने तीन
- 3:26:44तीनों को गले लगा लिया और वो सभी सिस
- 3:26:46परसिया की मोम ने तो उसके चेहरे पर किसकी
- 3:26:49की बौछार कर दी। वो प्यार से उसके चेहरे
- 3:26:51को चूम रही थी। उनकी एक लौटी मासूम सी
- 3:26:55बच्ची के साथ बहुत कुछ हुआ था और अब जब वह
- 3:26:58उसके सामने थी तब वह अपना प्यार उस पर
- 3:27:01लुटाने से खुद को नहीं रोक पाए। उन्हें तो
- 3:27:03उनसे बहुत सारी बातें करनी थी। लेकिन अब
- 3:27:06फिलहाल में उनके जमाई की आभगत करना जरूरी
- 3:27:09था। तो वह उसी के तरफ मुड़ गई। बाकी दोनों
- 3:27:12ने भी सिया को प्यार किया और फिर अपना
- 3:27:14पूरा अटेंशन अपने जमी को देते हुए टेबले
- 3:27:16नाश्ते के अलग-अलग चीजों से भरा दिया।
- 3:27:19चाय, कॉफी और व्हाट नॉट कितना कुछ सामने
- 3:27:21रख दिया उन्होंने। राघव के राघव ने बस
- 3:27:24मुस्कुराकर उन सब की तरफ देखा और एक-दो
- 3:27:26बाइट उठा लिए। पापा और बाकी सिया के भाई
- 3:27:30उससे बातें करने में लग गए थे। बड़े पापा
- 3:27:32भी बीच-बीच में कुछ ना कुछ कह रहे थे और
- 3:27:34सिया बस वही बैठकर उनकी बातों को सुन रही
- 3:27:37थी। कहर के लेडीज सारे अंदर चले गए थे और
- 3:27:39उनके पीछे सिया भी जाना चाहती थी। लेकिन
- 3:27:43उसकी मॉम ने ना में इशारा कर अंदर आने से
- 3:27:45मना किया और वही उनके जमाई जी यानी कि
- 3:27:48राघव के पास बैठने बोल दिया। अपना मन
- 3:27:50मारकर सिया वहीं बैठी रही। मगर कुछ ही देर
- 3:27:53में उसकी चुलबुल शुरू हो गई। जिसे देख
- 3:27:56राघव उससे बोला सिया जाओ और आंटी की आई
- 3:27:59मीन मॉम की हेल्प करा दो। थोड़ी बहुत जाओ।
- 3:28:01राघव ने जैसे ही कहा सबकी नजरें उसकी तरफ
- 3:28:04आ गई। सिया तो खुशी से चहक उठी और खदे
- 3:28:07होते हुए बोली मैं भी यही सोच रही थी कि
- 3:28:10मैं अंदर जाऊं सिया फिर बिना एक अपर की
- 3:28:12भेद देरी किए हुए वहां से उठी और अंदर की
- 3:28:15ओर भाग गई और उसकी यह बच्चों जैसे हरकत
- 3:28:17जहां राघव को खुश कर गई वही सबको परेशान
- 3:28:20यह सोचकर कि अब उनके जमाई जी क्या सोचेंगे
- 3:28:23उनके बेटी के बारे में क्या हुआ राघव को
- 3:28:26समझ नहीं आया कि सभी एक चेहरे के
- 3:28:28एक्सप्रेशन चेंज क्यों हो गए उसने सवाल
- 3:28:32करते हुए सबको देखा बड़े पापा फिर किसी
- 3:28:34तरह से बोले वो वो जमाई जी सिया में ना
- 3:28:37अभी थोड़ा बचपना है वो कभी-कभी ऐसे बच्चों
- 3:28:40वाली हरकत कर देती है आप प्लीज मगर बड़े
- 3:28:44पापा के पूरा बोलने से पहले ही राघव
- 3:28:46उन्हें रोकते हुए बोला कौन सी बच्चों वाली
- 3:28:48हरकत मेरे ख्याल से सिया ने ऐसा कुछ भी
- 3:28:51नहीं किया है और हां अगर आप उसके दौड़ कर
- 3:28:54जाने के बारे में बोल रहे हैं तो मैं बता
- 3:28:56दूं कि मेरी बीवी जो चाहे जैसे चाहे वैसे
- 3:28:59कर सकती है दूसरे क्या कहेंगे इस बारे में
- 3:29:02सोचकर वो खुद को बदले यह मुझे मुझे पसंद
- 3:29:04नहीं आएगा तो आप सब भी ना ही उसे अब कोई
- 3:29:08रोक-टोक करें और ना ही कुछ बोले कहते हुए
- 3:29:10राघव का ओरा थोड़ा स्ट्रांग हो गया था
- 3:29:13जिसे देख खुद बड़े पापा भी खामोश हो गए और
- 3:29:15बाकी सबकी कुछ कहने की हिम्मत ही नहीं
- 3:29:17बची। सिया के पापा किसी तरह से बोले वो
- 3:29:21भाई साहब के बोलने का गलत मतलब नहीं था।
- 3:29:24हम तो बस पापा भी आगे कुछ बोल नहीं पाए।
- 3:29:27राघव ने कुछ ऐसी नजरों से उन सब की तरफ
- 3:29:30देखा कि पल भर के अंदर वहां का माहौल बदल
- 3:29:32गया। उतने में सिया वहां पर जूस का ग्लास
- 3:29:35लेकर आई और जैसे ही उसे वहां हुआ बदलाव
- 3:29:38महसूस हुआ उसके कदम अपने आप धीरे हो गए।
- 3:29:41उसने एक नजर सबकी तरफ और फिर राघव की तरफ
- 3:29:44देखा। सिया के चेहरे पर टेंशन साफ-साफ झलक
- 3:29:47रहा था और उसे ऐसे देखना राघव को बिल्कुल
- 3:29:50अच्छा नहीं लगा। वो मुस्कुराते हुए उससे
- 3:29:52बोला, "सिया क्या हुआ?" इतने धीरे क्यों
- 3:29:56चल रही हो? राघव ने उसका ध्यान अपनी तरफ
- 3:29:58करने के हिसाब से कहा। मगर उसकी आए आवाज
- 3:30:01से सिया थोड़ी सहम गई और उसके हाथ से
- 3:30:03ट्रेन नीचे गिर गया। सब कुछ इतना जल्दी
- 3:30:06हुआ कि सिया भी हड़बड़ा गई और उस ट्रे को
- 3:30:08बचाने के चक्कर में सामने टेबल से टकरा
- 3:30:10गई। सीयूब राघव जल्दी से उसके पास आया और
- 3:30:14उसने उसे संभाला। उसे ठीक से खड़े करते
- 3:30:17हुए राघव फिक्र से बोला ध्यान कहां है
- 3:30:19बच्चा तुम्हारा? कहीं ज्यादा चोट तो नहीं
- 3:30:22लगी हेना। दिखाओ। राघव बोलते बोलते नीचे
- 3:30:25बैठ गया और उसने सिया के उस पैर को जो
- 3:30:28टेबल से टकराया था उसे अपने घुटनों पर
- 3:30:30लेकर चेक करने लगा। उसने यह सब इतनी जल्दी
- 3:30:32किया था कि सिया तो क्या किसी और के भी
- 3:30:34कुछ समझ नहीं आया। आ आप क्या कर रहे हो?
- 3:30:38रने दीजिए। दीजिए ना मैं ठीक हूं। सिया ने
- 3:30:42एक नजर सभा की तरफ देख किसी तरह अपना पैर
- 3:30:44छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा। राघव का
- 3:30:47इस तरह उसके कदमों में बैठना किसी को
- 3:30:49अच्छा नहीं लगता। किसी को तो छोड़ो। उसे
- 3:30:52खुद अच्छा नहीं लगता यह सब। वह बस किसी भी
- 3:30:55तरीके से अपने पैर को छुड़वाना चाहती थी।
- 3:30:57मगर राघव एक ही उसे छोड़ने का नाम ही नहीं
- 3:31:00ले रहा था। सिया ने किसी तरह एक नजर सबको
- 3:31:03और फिर उसे देखा और ठीक उसी वक्त राघव ने
- 3:31:06उसका पैर छोड़ दिया। सिया ने चैन की सांस
- 3:31:08छोड़ी ही थी कि उसे लगा जैसे उसके पैर हवा
- 3:31:11में तैरने लग गए और वह किसी की पकड़ में
- 3:31:13गिरफ थे। एंड शी वाज राइट। राघव ने उसे
- 3:31:16छोड़ने के साथ-साथ अपनी बाहों में उठाकर
- 3:31:18ले लिया था। सिया की हिम्मत नहीं थी। कुछ
- 3:31:22कहने की तो दूर ही अपनी आंखें खोलने की भी
- 3:31:24उसने कास कर अपनी आंखें बंद कर ली। प्रभु
- 3:31:27उसके कानों पर राघव की आवाज टकरा गई। राघव
- 3:31:30उससे बोला तुम्हारा कमरा कहां है? मुझे
- 3:31:33तुम्हें चेक करना है। राघव ने सवाल किया
- 3:31:36मगर सिया तो शर्म से उसके बाहों में अपनी
- 3:31:38आंखें बंद करके लेटी थी। राघव ने फिर उससे
- 3:31:41कुछ नहीं कहा और सामने शशांक की तरफ देखा।
- 3:31:43वो उससे बोला इस और जीजू आइए मैं आपको ले
- 3:31:46चलता हूं। और फिर शशांक के पीछेछे राघव
- 3:31:49सिया को अपने बाहों के झूले में के जाने
- 3:31:51लगा जिसे हजाते हुए हर कोई देख रहा था।
- 3:31:54किस-किस के दिमाग में क्या चल रहा था यह
- 3:31:57तो कोई नहीं जानता था। राघव का पहले सिया
- 3:32:00के पैरों में बैठना फिर उसे बाहों में
- 3:32:02उठाकर ले जाना। घर के जेंट्स को कैसा लगा
- 3:32:06यह तो पता नहीं था। लेकिन घर की लेडीज को
- 3:32:08बहुत ही अच्छा लगा था। उन तीनों ने दिल ही
- 3:32:11दिल अपने भगवान को हाथ जोड़ दिए और यह दुआ
- 3:32:13की कि राघव हमेशा सिया के साथ ऐसा ही रहे
- 3:32:16और उसकी इतनी ही फिक्र करें। सिया की मोम
- 3:32:18प्रिया भी बहुत खुश थी। तभी उनके कानों पर
- 3:32:21गिरीश जी सिया के पापा की आवाज आई। यू
- 3:32:24उनसे बोले प्रिया किसी से कहकर इसे साफ
- 3:32:26करवा दो और मेरे साथ चलो। गिरीश जी ने कहा
- 3:32:29और सिया के कमरे की और फिक्र से बढ़ गए।
- 3:32:31उन्हें डर था कि कहीं सिया को कहीं चोट तो
- 3:32:34नहीं लगी हेना। शशांक ने बाहर से ही राघव
- 3:32:37को कमरा दिखाया और वह वहीं खड़ा रहा। राघव
- 3:32:40फिर आराम से सिया को अंदर ले गया और किसी
- 3:32:42कांच की गुड़िया हम जितने नजाकत के साथ
- 3:32:45रखते हैं ना ठीक उसी तरह से उसने सिया को
- 3:32:47आराम से बिस्तर पर रख दिया। मे सिया उससे
- 3:32:51कुछ कहना चाहती थी। लेकिन राघव ने उसे
- 3:32:53होठों पर उंगली रख दी और नाम में सर
- 3:32:55हिलाते हुए बोला कुछ मत कहो। एंड लेट मी
- 3:32:58चेक कि तुम्हें कहां लगी है। राघव कटे हुए
- 3:33:01फिर से सिया के पैरों के पास बैठ गया और
- 3:33:04उसके पैरों को हाथ लगाने ही वाला था कि
- 3:33:06सिया ने अपने पैर ऊपर की और खींच दिए और
- 3:33:09बोली, नहीं आप मेरे पैरों को हाथ मत लगाओ।
- 3:33:12पति इस तरह से पत्नी के पैरों को हाथ
- 3:33:14लगाते हुए अच्छे नहीं लगते। आप क्या मुझ
- 3:33:16पर पाप चढ़वाना चाहते हो। सिया ने अपने
- 3:33:20पैर को कवर करते हुए कुछ ऐसे कहा कि राघव
- 3:33:22को उसकी बात पर हंसी आने लग गई। किस-किस
- 3:33:25के दिमाग में क्या चल रहा था, यह तो कोई
- 3:33:28नहीं जानता था। राघव का पहले सिया के
- 3:33:31पैरों में बैठना, फिर उसे बाहों में उठाकर
- 3:33:33ले जाना। घर के जेंट्स को कैसा लगा, यह तो
- 3:33:37पता नहीं था, लेकिन घर की लेडीज को बहुत
- 3:33:39ही अच्छा लगा था। उन तीनों ने दिल ही दिल
- 3:33:41अपने भगवान को हाथ जोड़ दिए और यह दुआ की
- 3:33:44कि राघव हमेशा सिया के साथ ऐसा ही रहे और
- 3:33:47उसकी इतनी ही फिक्र करें। सिया की मोम
- 3:33:49प्रिया भी बहुत खुश थी। तभी उनके कानों पर
- 3:33:51गिरीश जीत सिया के पापा की आवाज आई। यो
- 3:33:54उनसे बोले प्रिया किसी से कहकर इसे साफ
- 3:33:57करवा दो और मेरे साथ चलो। गिरीश जी ने कहा
- 3:34:00और सिया के कमरे की ओर फिक्र से बढ़ गए।
- 3:34:02उन्हें डर था कि कहीं सिया को कहीं चोट तो
- 3:34:04नहीं लगी है ना। शशांक ने बाहर से ही राघव
- 3:34:08को कमरा दिखाया और वह वहीं खड़ा रहा। राघव
- 3:34:10फिर आराम से सिया को अंदर ले गया और किसी
- 3:34:13कांच की गुड़िया हम जितने नजाकत के साथ
- 3:34:15रखते हैं ना ठीक उसी तरह से उसने सिया को
- 3:34:18आराम से बिस्तर पर रख दिया। मे सिया उससे
- 3:34:21कुछ कहना चाहती थी। लेकिन राघव ने उसे
- 3:34:24होठों पर उंगली रख दी और नाम में सर
- 3:34:26हिलाते हुए बोला कुछ मत कहो एंड लेट मी
- 3:34:29चेक कि तुम्हें कहां लगी है। राघव कटे हुए
- 3:34:32फिर से सिया के पैरों के पास बैठ गया और
- 3:34:34उसके पैरों को हाथ लगाने ही वाला था कि
- 3:34:37सिया ने अपने पैर ऊपर की और खींच दिए और
- 3:34:39बोली नहीं आप मेरे पैरों को हाथ मत लगाओ।
- 3:34:43पति इस तरह से पत्नी के पैरों को हाथ
- 3:34:45लगाते हुए अच्छे नहीं लगते। आप क्या मुझ
- 3:34:47पर पाप चढ़वाना चाहते हो। सिया ने अपने
- 3:34:50पैर को कवर करते हुए कुछ ऐसे कहा कि राघव
- 3:34:53को उसकी बात पर हंसी आने लग गई। राघव
- 3:34:56जोरजोर से हंसने लगा और सिया बस उसे हंसता
- 3:34:59हुआ देख उसमें ही खो गई। फिर जब उसे याद
- 3:35:02आया कि वह उस पर हंस रहा है तब उसने अपना
- 3:35:04मुंह बना लिया और नाराजगी से बोली आप हंसो
- 3:35:07मत ना मैंने ऐसा क्या कह दिया जिससे आप
- 3:35:09हंस रहे हो। सिया को नाराज होता देख राघव
- 3:35:13ने अपना हंसना कंट्रोल किया और बोला क्या
- 3:35:15किया। सच में बच्चा मतलब कौन से किताब में
- 3:35:19लिखा है कि पति के अपने पत्नी के पैर छूने
- 3:35:21की वजह से पत्नी को पाप चढ़ता है। को भी
- 3:35:24बोलती हो तुम और ऊपर से ऐसे एक्सप्रेशन
- 3:35:27देती हो। सो क्यूट राघव ने कहते हुए सिया
- 3:35:30के गाल को चुटकी काटी और फिर एक बार उसके
- 3:35:33पैर को देखने लगा। सिया का नाजुक गोरा पैर
- 3:35:36उंगलियों की साइड लाल हो चुका था। जिसे
- 3:35:39राघव ने प्यार से अपने उंगलियों से सहलाया
- 3:35:42और सिया सिहर उठी। उसने अपना पैर पीछे की
- 3:35:44और खींचा और राघव से अपनी नजरें चुराने लग
- 3:35:47गई। राघव होले से मुस्कुरा उठा। उसकी
- 3:35:50नजरें सिया पर गई जो शर्म से लाल हो चुकी
- 3:35:52थी। पता नहीं क्यों। लेकिन राघव को उसके
- 3:35:56इस रूप पर बड़ा ही प्यार आया। उसका दिल
- 3:35:58किया कि वह सिया को अपने बाहों में खींच
- 3:36:00ले और अपने अनादर उमड़ रहे सरे जज्बातों
- 3:36:03को उसके सामने बयान करें। उसके उन गुलाबी
- 3:36:06गालों को अपने लबों से छूकर अपनी प्यास
- 3:36:08बुझाए। लेकिन उसने कंट्रोल किया और आराम
- 3:36:10से सिया का पैर छोड़ दिया। सिया के पापा
- 3:36:14ने दरवाजे पर दस्तक दी और बोले क्या मैं
- 3:36:16अंदर आ जाओ। राघव और सिया का ध्यान उनकी
- 3:36:20आवाज के पास गया और राघव अपनी जगह पर से
- 3:36:22उठ खड़ा हुआ। पापा के पीछे सिया की मॉम भी
- 3:36:25खड़ी थी। वो दोनों अंदर आ गए और सोया की
- 3:36:28मां ने उसे गले लगा लिया। वो फिक्र से
- 3:36:30उससे बोली क्या हुआ सीयू? सब ठीक तो है
- 3:36:34ना? ऐसे अचानक कैसे गिर गई तुम? अपनी मॉम
- 3:36:37को यूं फिक्र करता देख सिया उनके गले लग
- 3:36:40गई और बोली मैं ठीक हूं मम्मा। आप फिक्र
- 3:36:42मत करो। सिया की बात सुन मोम कुछ नहीं
- 3:36:45बोली और उसके सर वो वैसे ही सहलाने लग गई।
- 3:36:48तब तक बड़े पापा और घर के बाकी सब भी वहां
- 3:36:51आ गए।
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