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DOCTOR DARK OBSESSION EPISODE 1 TO 100 — Transcript

by SK AUDIO STORY · 46,066 words · 5,167 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00पूरी तरह काल्पनिक है। यह सिर्फ दर्शकों
  2. 0:02के मनोरंजन के लिए बनाई गई है। इसमें
  3. 0:05दर्शाए गए सभी पात्र, नाम, उत्पाद और
  4. 0:08घटनाएं पूरी तरह काल्पनिक है। यह कहानी
  5. 0:11किसी भी तरह से किसी भी व्यक्ति के
  6. 0:13भावनाओं, प्रथाओं, परंपराओं और विश्वासों
  7. 0:15के अपमान नहीं करती है। और कहानी में बताए
  8. 0:18गए सभी चीजों का मात्र कहानी के लेखक
  9. 0:20द्वारा बनाई गई लेखक की अपनी एक कल्पना
  10. 0:23है। बैक टू स्टोरी। चियर्स। एक साथ कई
  11. 0:26आवाजें गूंजी और साथ ही में चाय के प्याली
  12. 0:28की छिनकार भी। उसी के साथ-साथ उस ग्रुप की
  13. 0:31हंसने की आवाजें जिसने यह अजीबोगरीब चियस
  14. 0:34कर अपने खुशी को सेलिब्रेट किया था। आसपास
  15. 0:37मौजूद लोगों में से किसी ने मुंह बनाया तो
  16. 0:39किसी ने बिगड़ी हुई नई पीढ़ी कहकर नाम
  17. 0:42रखा। तो कुछ लोग अपने सामने खड़े उन पांच
  18. 0:44बच्चों की खुशी देख खुश भी हुआ। अपने
  19. 0:47आसपास के लोगों को इग्नोर कर वो पांचों
  20. 0:49अपनी खुशी जाहिर करने में लगे थे। आफ्टर
  21. 0:52ऑल इतना बड़ा दिन जो था उन सबके लिए आज
  22. 0:55उनका ट्वेथ का रिजल्ट जो लगा था उसी ग्रुप
  23. 0:58में की एक लड़की ने अपनी पास वाली लड़की
  24. 1:00का हाथ पकड़ा और खुशी से बोली सी यू सी यू
  25. 1:02सी यू आई एम सो हैप्पी फॉर यू फाइनली
  26. 1:06तुमने कर दिखाया 12थ में 96%ेज कॉलेज में
  27. 1:09फर्स्ट और स्टेट में सेकंड रैंक तू तो छा
  28. 1:12गई यार आई एम सो प्राउड ऑफ यू वो लड़की
  29. 1:15साक्षी थी जिसने अपने सामने खड़ी सिया को
  30. 1:17कसकर गले लगाया ओए हम भी है यार निखिल ने
  31. 1:21कहा और वह भी उनके गले लग गया। पुनीत और
  32. 1:24नेहा कहा पीछे रहने वाले थे। वह दोनों भी
  33. 1:27उनके गले लग गए और एक ग्रुप हग करने के
  34. 1:29बाद वह पांचों खिलखिलाकर हंस दिए। सिया
  35. 1:32साक्षी, निखिल, नेहा और पुनीत पांचों
  36. 1:34स्कूल फ्रेंड्स लगभग फर्स्ट स्टैंडर्ड से
  37. 1:36ही वह साथ थे और आज ही उनका 12थ का रिजल्ट
  38. 1:38लगा था। हालांकि उनमें से कोई भी 90%ेज के
  39. 1:40नीचे नहीं था। लेकिन सियासिया अग्निहोत्री
  40. 1:42पूरे महाराष्ट्र में सेकंड आई थी और वह सब
  41. 1:44उसी की खुशी सेलिब्रेट कर रहे थे। क्या
  42. 1:47यार तुम सब भी रिएक्ट तो ऐसे कर रहे हो
  43. 1:50जैसे सिर्फ मैं ही पास हुई हूं और तुम सब
  44. 1:53फेल यह जीत हम सब की है और हम सब काफी
  45. 1:56अच्छे नंबर से पास हुए हैं उसी की ये ती
  46. 1:58पार्टी है समझे तो फिर फिर एक बार चियर्स
  47. 2:01फॉर ऑल सिया ने कहा और एक बार उन सबके चाय
  48. 2:04के ग्लास आपस में टकरा गए और साथ में फिर
  49. 2:06एक बार उनके हंसने की आवाज वहां गूंजी
  50. 2:09वैसे व्हाट नेक्स्ट सी यू तेरी ओब्रोड
  51. 2:12स्कॉलरशिप तो कंफर्म है तो चल बता क्या
  52. 2:14मैं भी डैड से कहकर अपना एडमिशन तेरे साथ
  53. 2:16लंदन यूनिवर्सिटी में करवा दूं। पुनीत ने
  54. 2:19मुस्कुराते हुए कहा और उसकी बात सुन सिया
  55. 2:21एक पल सोच में गिर गई। तू करवाते ही रह
  56. 2:24जा। मैंने तो अपनी एडमिशन करवा भी ली और
  57. 2:27ठीक 15 दिन बाद मेरी फ्लाइट भी है लंदन के
  58. 2:29लिए। नेहा ने इतराते हुए कहा ओय तुम तीनों
  59. 2:33अगर जा रहे हो तो मैं भी जाऊंगी। मैं भी
  60. 2:35डैड से बात करती हूं। साक्षी भी कहा पीछे
  61. 2:38रहने वाली थी। लेकिन उन तीनों की बात सुन
  62. 2:40निखिल और सिया खामोश ही रहे। निखिल खामोश
  63. 2:43था क्योंकि उसकी उसके घर की इकोनॉमिकल
  64. 2:45कंडीशन इतनी कुछ खास नहीं थी और सिया
  65. 2:47खामोश थी क्योंकि उसे पता था जो घरवाले
  66. 2:49उसे मार्केट तक अकेले नहीं भेजते थे वह
  67. 2:51लंदन भेजना तो इंपॉसिबल ही था। सिया यह
  68. 2:54बात बताकर किसी को हर्ट नहीं करना चाहती
  69. 2:57थी। इस वजह से वह खामोश ही रही। पुनीत ने
  70. 3:00निखिल की तरफ देखा और बोला देख भाई मेरा
  71. 3:03और नेहा का एडमिशन लगभग हो ही गया। समझो
  72. 3:06साक्षी के डैड भी उसका एडमिशन करवा देंगे
  73. 3:08और हमारी टॉपअप सिया का जाना तो फिक्स ही
  74. 3:10है। अब सिर्फ रहा तू और मैंने तेरे एडमिशन
  75. 3:13के बारे में डैड से बात कर ली है तो तू मन
  76. 3:15नहीं करेगा। पुनीत की बात सुन निखिल हल्के
  77. 3:18से मुस्कुराया और वो मुस्कान उन सबको समझ
  78. 3:21गई। नेहा उसके कुछ बोलने से पहले ही बोली
  79. 3:24निखिल यार प्लीज मना मत कर। यार हम सब
  80. 3:27बचपन से साथ हैं और हम हमारा यह ग्रुप
  81. 3:29बिल्कुल भी टूटने नहीं देंगे। तो तू आ रहा
  82. 3:32है। यह फिक्स है। नेहा के बाद पुनीत और
  83. 3:34साक्षी भी निखिल को मनाने लगे और निखिल बस
  84. 3:37खामोशी से उन्हें देखता रहा। पुनीत उसकी
  85. 3:40खामोशी को देख बोला अबे अब बोल भी कुछ। और
  86. 3:43फिर निखिल ने उसे देख एक बार सिया को
  87. 3:46देखा। वो उससे धीरे से बोला सिया तेरे घर
  88. 3:49वाले मान जाएंगे क्या? क्या वो तुझे लंदन
  89. 3:52भेजेंगे? और बस उसका सवाल सुन सबको एहसास
  90. 3:55हुआ कि सिया के घर वाले कैसे हैं? सिया उन
  91. 3:58सब की तरफ देखकर मुस्कुराई। मगर वह सब
  92. 4:00जानते थे कि उसके उस मुस्कान में कितनी
  93. 4:02उदासी छिपी हुई है। सिया ने फिर गहरी सांस
  94. 4:05ली और बोली गाइस यह टॉपिक ना हम कल डिस्कस
  95. 4:08करते हैं। आज ना सिर्फ हम अपनी जिद एंजॉय
  96. 4:10करते थे। चलो जल्दी-जल्दी चाय खत्म करो।
  97. 4:13पुनीत हमें पानी पूरी खाने ले जाएगा। सिया
  98. 4:17ने मुस्कुराते हुए कहा और अगले ही पल वह
  99. 4:19सब भी नॉर्मल हो गए। अपनी-अपनी चाय खत्म
  100. 4:22कर वह सब बाहर आ गए और उनके स्कूल के बाहर
  101. 4:24थोड़ी दूर पड़ के एक ठेले पर गए। फिर क्या
  102. 4:27उन सब ने जमकर पानी पूरी खाए और अपनीपनी
  103. 4:29साइकिल लेकर घर के लिए निकल गए। निखिल और
  104. 4:32सिया के जाते ही पुनीत, नेहा और साक्षी ने
  105. 4:35एक दूसरे के तरफ देखा। फिर नेहा बोली गाइस
  106. 4:38जेएम कॉलेज कैसा रह रहेगा हमारी आगे की
  107. 4:40स्टडी के लिए? उहरण चिन्ह जवाब में साक्षी
  108. 4:44बोली जेएम ठीक है। मैं भी डैड से बात करके
  109. 4:47रखती हूं। अगर वह दोनों नहीं आएंगे तो हम
  110. 4:50भी नहीं जाएंगे। साक्षी की बात पर पुनीत
  111. 4:52और नेहा ने मुस्कुराकर हां में सर हिलाया
  112. 4:55और वह सभी अपनेपने घर के लिए बढ़ गया। उन
  113. 4:57पांचों की फ्रेंडशिप थी ही इतनी स्ट्रांग
  114. 5:00कि वह एक दूसरे के बिना रह ही नहीं सकते
  115. 5:02थे। नेहा, पुनीत और साक्षी अच्छे फैमिली
  116. 5:05से बिलोंग करते थे और उनके पेरेंट्स फ्री
  117. 5:07माइंडेड भी थे। वही निखिल भी अच्छी फैमिली
  118. 5:10से ही था। लेकिन उसके डैड के अचानक हुए
  119. 5:12डेथ की वजह से उनका पूरा बिजनेस लॉस में
  120. 5:14चला गया और बचा हुआ उसके सो कॉल्ड रिलेटिव
  121. 5:16ने हड़प लिया। इस वजह से उसकी और उसकी मां
  122. 5:20की हालत बहुत ही खराब हो गई। अपनी स्टडी
  123. 5:23के साथ-साथ वह छोटे-मोटे काम कर अपनी मां
  124. 5:25को हेल्प किया करता था और वही सिया ऐसा
  125. 5:28नहीं था कि उसकी फैमिली गरीब थी। वह भी
  126. 5:31काफी अच्छे घर से बिलोंग करती थी। सिटी के
  127. 5:34टॉप एरिया में और चार फेमस मॉल में उसके
  128. 5:36परिवार की कई दुकानें थी जो कुछ रैंड पर
  129. 5:39दी थी तो कुछ उसके पापा, काका और भाई
  130. 5:41मिलकर संभाल रहे थे। फाइनेंशियली उसके घर
  131. 5:44की हालत काफी अच्छी थी। लेकिन वह थोड़े
  132. 5:47पुराने ख्यालात के थे। शहर में अपनी इज्जत
  133. 5:49बरकरार रखने के लिए ही वह अपने घर की
  134. 5:51लड़कियों को पने भेजा करते थे। वरना तो
  135. 5:54उसका मार्केट तक अकेला जाना भी मुश्किल
  136. 5:56था। और यह सब जानने के बावजूद भी सिया ने
  137. 5:59इतनी बड़ी हिम्मत की थी। लंदन यूनिवर्सिटी
  138. 6:02में अपनी हायर स्टडी के लिए अप्लाई किया
  139. 6:04था। सिया आखिर अपने घर पहुंच ही गई। उसने
  140. 6:07सरे ख्यालात को अपने आप से दूर रखा और
  141. 6:09फिलहाल बस यही सोचने लगी। वह अपना रिजल्ट
  142. 6:12घर वालों को दिखाकर उन्हें खुश कर देंगी।
  143. 6:14घर की सबसे छोटी बेटी थी वह। इस वजह से
  144. 6:17उसके बड़े बहनों के मुकाबले उसे कुछ
  145. 6:19ज्यादा ही लाड प्यार मिलता था। ऊपर से ऊ
  146. 6:22की खूबसूरती वो इतनी ज्यादा क्यूट और
  147. 6:24मासूम दिखती थी कि हर कोई उसके तरफ
  148. 6:26अट्रैक्ट हो ही जाता। और इस बात का फायदा
  149. 6:29सिया खूब उठाती थी। वैसे वह सिर्फ अपने घर
  150. 6:32वालों के सामने ही शरीफ और मासूम थी। बाहर
  151. 6:34अपने दोस्त को साथ वह कैसी थी यह आपको आगे
  152. 6:36स्टोरी में पता चल ही जाएगा। सिया खुश
  153. 6:39होते हुए अंदर आए और चाहते हुए सबको
  154. 6:41पुकारते हुए बोली मां बड़ी मां चाची कहां
  155. 6:44है आप सब सिया अंदर की ओर दौड़ी वैसे भी
  156. 6:48दोपहर का समय था इस वजह से उसे लगा कि घर
  157. 6:50में कोई भी नहीं होगा लेकिन उसकी यह
  158. 6:52गलतफहमी जल्द ही दूर हो गई अंदर हॉल में
  159. 6:55आते ही उसे सबकी गुस्से भरी नजरें अपने
  160. 6:58ऊपर दिखाई दी और घबराकर सिया ने अपनी थूक
  161. 7:00निगल ली। वह जल्दी से अपने मां के पास गई
  162. 7:03और उनके पीछे छिप गई। उसे दूसरों के
  163. 7:06गुस्से से काफी डर लगता था। वह किसी को भी
  164. 7:08गुस्से से लाल हुआ देखती तो ना जाने क्यों
  165. 7:10घबरा जाती थी। इस वजह से वह भी घबरा गई।
  166. 7:14जब उसने अपने सभी बड़ों को गुस्से में
  167. 7:16देखा तब सिया इधर आओ। उसके बड़े पापा गरजे
  168. 7:19और बस सिया की हालत भीगी बिल्ली जैसी हो
  169. 7:21गई। वो डर से कांपने लग गई। उसकी इस
  170. 7:24थरथराहट का मतलब उसके घर वालों ने गलत ही
  171. 7:27लिया और बिना कुछ सोचे समझे उसके अपने
  172. 7:29पापा ने उसे जोर से एक थप्पड़ मार दिया।
  173. 7:32यू ऑल आर गुड फॉर नथिंग। अपने आप को
  174. 7:33रिस्पांसिबल डॉक्टर कहते हैं। और यह ऐसी
  175. 7:36हरकत वो गुस्से से चीखा और उसका गुस्सा
  176. 7:38देख वहां मौजूद सभी की सिटी पिट्टी गुल हो
  177. 7:40गई। उसके गुस्से से हॉस्पिटल में के सभी
  178. 7:43काफी डरते थे सिवाय उन तीनों के और हर बार
  179. 7:45की तरह सभी ने उम्मीद से उन तीनों के तरफ
  180. 7:47ही देखा। उनके चल रहे इशारे उसे समझ आ गए
  181. 7:51और वह जोर से चीखते हुए गरजा आउट और बस
  182. 7:54उसी पल सभी के सभी व से रफू चक्कर हो गए।
  183. 7:56ऑफकोर्स उन तीनों को छोड़कर। राघव अब शांत
  184. 7:59भी हो जा। राज ने कहा और उसने राघव ने बस
  185. 8:02एक लुक उसे दिया। ओए शर्म कर अपने बड़े
  186. 8:05भाई को घूर कर देखते हुए तुम्हें कुछ नहीं
  187. 8:07लगता। अक्षय ने भी बदले में उसे घूर कर
  188. 8:09देखा। उसकी बात सुन पास ही में खड़ा
  189. 8:11कृष्णा बोला उसे नहीं तुम दोनों को कुछ
  190. 8:14लगना चाहिए। हर बार उन्हें इरिस्पांसिबल
  191. 8:16डॉक्टर्स और नर्सेज की गलतियां छिपाने के
  192. 8:18लिए हर बार क्यों तुम दोनों उन्हें अपने
  193. 8:20पीठ पीछे लेते हो। कृष्णा की बात सुन उन
  194. 8:23दोनों ने ना में सर हिलाया और सामने खड़े
  195. 8:25अपने दोनों छोटे भाइयों को घूर कर देखने
  196. 8:27लगे।
  197. 8:28यस वो तीनों राघव के बड़े भाई थे। राज
  198. 8:31उनमें सबसे बड़ा और राघव का सगा भाई था जो
  199. 8:33उससे 2 साल से बड़ा था। वही अक्षय और
  200. 8:35कृष्णा दोनों ट्विंस थे। और राघव के कजिन
  201. 8:38ब्रदर जो उससे सिर्फ एक साल बड़े थे और अब
  202. 8:41वह उनके हॉस्पिटल में थे जो उन्होंने खुद
  203. 8:43के मेहनत से बनाया था। और बस एक साल के
  204. 8:45अंदर ही उस हॉस्पिटल को सिटी के टॉप
  205. 8:47हॉस्पिटल्स में शामिल किया था। पेशे से वह
  206. 8:50चारों डॉक्टर्स थे। राघव एक न्यूरोलॉजिस्ट
  207. 8:52था। वही राजगायनकोलॉजिस्ट कृष्णा एक
  208. 8:54चाइल्ड स्पेशलिस्ट था और अक्षय
  209. 8:56ऑर्थोपेडिक्स वैसे तो वह सभी मिडिल क्लास
  210. 8:58फैमिली से ही बिलोंग करते थे और आज अपनी
  211. 9:00मेहनत से वह इस मुकाम पर पहुंचे थे। राज
  212. 9:03और अक्षय काफी समझदार थे। इस वजह से पूरा
  213. 9:06स्टाफ उन दोनों के साथ ही कंफर्टेबल फील
  214. 9:08करता। वहीं कृष्णा बहुत नटखट। लेकिन सिर्फ
  215. 9:11अपने घर वालों के और अपने पेशेंट के जो
  216. 9:13छोटे-छोटे बच्चे थे उनके सामने उसी
  217. 9:15मुकाबले राघव बचपन से ही थोड़ा ज्यादा
  218. 9:17गुस्से वाला था। बेवजह तो नहीं लेकिन किसी
  219. 9:20के गलती करने पर उसे बहुत ज्यादा गुस्सा
  220. 9:22आता। वही हाल कृष्णा का भी था। गलती करने
  221. 9:24पर वह भी किसी को नहीं बखशता था। अक्षय इस
  222. 9:28सीरियस माहौल को नॉर्मल करने के लिए बोला,
  223. 9:30"अच्छा छोड़ो सारी बातें। कितने दिन हो गए
  224. 9:32हम बड़ी मां? बड़े पापा और मां के साथ
  225. 9:34बाहर डिनर पर नहीं गए। चलो आज चलते हैं।
  226. 9:37मां भी कह रही थी कि फिलहाल हम उन्हें
  227. 9:39वक्त नहीं देते। तो चलो आज उनकी यह
  228. 9:41कंप्लेंट दूर करते हैं। अक्षय की बात सुन।
  229. 9:43उन सभी ने हां में सर हिलाया। राघव कृष्णा
  230. 9:46के तरफ देखकर बोला कृष डिनर की अरेंजमेंट
  231. 9:49करो और राज भाई आप जाकर उन तीनों को लेकर
  232. 9:52आ जाओ हम सभी आपको वही ज्वाइन करेंगे राघव
  233. 9:55की बात भले ही नॉर्मल हो लेकिन उसमें छिपा
  234. 9:57हिडन मैसेज वह सभी समझ गए थे उसके कहने का
  235. 10:00साफ-साफ मतलब था कि सिर्फ राज ही आज जल्दी
  236. 10:02घर जाएगा और बचे वह तीनों एक साथ
  237. 10:04अपनी-अपनी ड्यूटी पूरी करके जाएंगे उन
  238. 10:07तीनों ने उदासी से एक दूसरे के तरफ देखा
  239. 10:09और फिर अपने-अपने ड्यूटी पर चले गए। सो
  240. 10:12ऐसा था हमारा राघव शांत समझदार लेकिन वक्त
  241. 10:15आने पर उतना ही गुस्सैल भी अपने काम के
  242. 10:17लिए काफी डेडिकेटेड इसी वजह से तो उसे
  243. 10:20थोड़ी सी भी गलती बर्दाश्त नहीं होती थी
  244. 10:22गोरे हैंडसम चेहरे को और हैंडसम बनती वो
  245. 10:24उसकी हल्की बियर्ड और हल्के पिंकिश किसे
  246. 10:26बलोड परफेक्ट वी शेप फिगर एंड एब्स 6 फीट
  247. 10:29हाइट और चेहरे पर ऐसी चमकती हर कोई बस उसे
  248. 10:31देखता ही रह जाता अंडरस्को सिया खुश होते
  249. 10:35हुए अंदर आए और चहकते हुए सबको पुकारते
  250. 10:37हुए बोली मां बड़ी मां चाची कहां है आप सब
  251. 10:40सिया सिया अंदर की ओर दौड़ी। वैसे भी
  252. 10:42दोपहर का समय था। इस वजह से उसे लगा कि घर
  253. 10:45में कोई भी नहीं होगा। लेकिन उसकी यह
  254. 10:47गलतफहमी जल्द ही दूर हो गई। अंदर हॉल में
  255. 10:50आते ही उसे सबकी गुस्से भरी नजरें अपने
  256. 10:52ऊपर दिखाई दी और घबराकर सिया ने अपनी थूक
  257. 10:54निगल ली। वह जल्दी से अपने मां के पास गई
  258. 10:57और उनके पीछे छिप गई। उसे दूसरों के
  259. 10:59गुस्से से काफी डर लगता था। वह किसी को भी
  260. 11:01गुस्से से लाल हुआ देखती तो ना जाने क्यों
  261. 11:03घबरा जाती थी। इस वजह से वह अभी घबरा गई।
  262. 11:06जब उसने अपने सभी बड़ों को गुस्से में
  263. 11:08देखा तब। सिया इधर आओ। उसके बड़े पापा
  264. 11:11गरजे और बस सिया की हालत भीगी बिल्ली जैसी
  265. 11:14हो गई। वह डर से कांपने लग गई। उसकी इस
  266. 11:16थरथराहट का मतलब उसके घर वालों ने गलत ही
  267. 11:18लिया और बिना कुछ सोचे समझे उसके अपने
  268. 11:20पापा ने उसे जोर से एक थप्पड़ मार दिया।
  269. 11:23वो थप्पड़ इतनी जोर से उसे लगा था कि सिया
  270. 11:25नीचे जमीन पर ही गिर गई और रोने लग गई।
  271. 11:28गिरीश मैं बात कर रहा हूं ना। फिर तुम्हें
  272. 11:30किसने कहा उसे मारने के लिए? आनंद। सिया
  273. 11:33के बड़े पापा उसके पापा गिरीश पर चीखे और
  274. 11:36वह सिया से दूर खड़े हुए। सिया नीचे बैठकर
  275. 11:38अब भी सिसक रही उसे लगा था कि शायद उसके
  276. 11:41घर वाले उसके रिजल्ट देखकर खुश होंगे।
  277. 11:43उसकी तारीफ करेंगे। लेकिन यहां वह बस अपने
  278. 11:45आंसू बहाते रही। सिया के चाचू विनोद उसके
  279. 11:48पास आए और उनके चेहरे पर का गुस्सा देख
  280. 11:51सिया और डर गई। उसे लगा कि शायद अब वह भी
  281. 11:53उसे मारेंगे। इस वजह से वह डर से कांपने
  282. 11:56लग गई। उसके चाचू गुस्से से उससे बोले
  283. 11:58सिया जया और प्रभा कहां है? और उनका सवाल
  284. 12:01सुन सिया हैरान हो गई। उसे खामोश देख उसके
  285. 12:03चाचू विनोद फिर से बोले तुमने सुना नहीं
  286. 12:06मैंने क्या कहा तुमसे? तुम्हारी बड़ी
  287. 12:09बहनें जया और प्रभा कहां है? तुम्हें पता
  288. 12:11है वह किसके साथ भाग कर गई है? जवाब दो।
  289. 12:14आखिर में विनोद इतने जोर से चीखे कि सिया
  290. 12:17डर से पीछे हट गई। किसी तरह से हकलाते हुए
  291. 12:19वह बोली मैं नहीं जानती चाचू। मुझे नहीं
  292. 12:22पता है जया दी और प्रभा दी कहां गई है।
  293. 12:24मुझे कुछ भी नहीं पता है। सिया
  294. 12:26जल्दी-जल्दी बोलने लग गई और उसका जवाब सुन
  295. 12:28उसके चाचू ने उसे मारने के लिए हाथ उगारा।
  296. 12:31इससे पहले कि वह उसे मार पाते तब तक आनंद
  297. 12:33फिर से बोले विनोद उसे मारकर कोई फायदा
  298. 12:36नहीं है। चाहे उसने उन दोनों की भागने में
  299. 12:38मदद की हो या फिर ना की हो। सच्चाई अब यही
  300. 12:41है कि हमारे घर की दोनों बेटियां हम पर
  301. 12:43कलंक लगाकर अपने प्रेमी के साथ भाग गई है।
  302. 12:45और अब जबकि उन्होंने हमारे इज्जत की परवाह
  303. 12:48नहीं की। तब हमें भी उनकी कोई फिक्र नहीं
  304. 12:50है। मेरे लिए तो मेरी बेटी जया मर चुकी
  305. 12:52है। अब तुम तुम्हारा देख लो। अगर तुम
  306. 12:54प्रभा के लौटने के बाद उन्हें अपनाओगे तो
  307. 12:56मैं। आनंद अपने लफज पूरे बोल ही रहे तब तक
  308. 12:59विनोद बोले नहीं बड़े भाई साहब मेरे लिए
  309. 13:02भी अब वह बदचलन लड़की प्रभा मर चुकी है।
  310. 13:05विनोद की बात सुन आनंद सिर्फ हम इतना ही
  311. 13:07बोले और सिया के पास आ गए। सिया को लगा कि
  312. 13:10शायद उसके बड़े पापा उसकी बात सुनेंगे।
  313. 13:12उन्हें उस पर यकीन होगा लेकिन वह बिल्कुल
  314. 13:14भी नहीं जानती थी कि उसके बड़े पापा कुछ
  315. 13:16ऐसा बोलेंगे जिससे उसके सारे ख्वाब एक पल
  316. 13:19में ही टूट जाएंगे। पहले कि वह उसे मार
  317. 13:22पाते तब तक आनंद फिर से बोले विनोद उसे
  318. 13:24मारकर कोई फायदा नहीं है। चाहे उसने उन
  319. 13:27दोनों की भागने में मदद की हो या फिर ना
  320. 13:29की हो। सच्चाई अब यही है कि हमारे घर की
  321. 13:31दोनों बेटियां हम पर कलंक लगाकर अपने
  322. 13:33प्रेमी के साथ भाग गई है। और अब जबकि
  323. 13:35उन्होंने हमारे इज्जत की परवाह नहीं की।
  324. 13:37तब हमें भी उनकी कोई फिक्र नहीं है। मेरे
  325. 13:40लिए तो मेरी बेटी जया मर चुकी है। अब तुम
  326. 13:42तुम्हारा देख लो। अगर तुम प्रभा के लौटने
  327. 13:44के बाद उन्हें अपनाएंगे तो मैं। आनंद अपने
  328. 13:47लफ्ज पूरे बोल ही रहे तब तक विनोद बोले
  329. 13:50नहीं बड़े भाई साहब मेरे लिए भी अब वह
  330. 13:52बदचलन लड़की प्रभा मर चुकी है। विनोद की
  331. 13:55बात सुन आनंद सिर्फ हम इतना ही बोले और
  332. 13:57सिया के पास आ गए। सिया को लगा कि शायद
  333. 14:00उसके बड़े पापा उसकी बात सुनेंगे। उन्हें
  334. 14:02उस पर यकीन होगा लेकिन वह बिल्कुल भी नहीं
  335. 14:04जानती थी कि उसके बड़े पापा कुछ ऐसा
  336. 14:06बोलेंगे जिससे उसके सारे ख्वाब एक पल में
  337. 14:08ही टूट जाएंगे। आनंद सिया के करीब बैठे और
  338. 14:12उसके आंखों में आंखें डाल उन्होंने सवाल
  339. 14:14किया। सिया अगर तुम्हारा भी कोई प्रेमी हो
  340. 14:16तो बता दो। नहीं अगर होगा और आगे जाकर तुम
  341. 14:19भी उसके साथ भाग गई तो आनंद की बात पूरी
  342. 14:22होने से पहले ही सिया ने जोर-जोर से ना
  343. 14:24में सर हिलाया और रोते हुए बोली ना नहीं
  344. 14:28बड़े मैं मेरा ऐसा कुछ भी नहीं है यकीन
  345. 14:31कीजिए हम अच्छा एक यकीन तो नहीं है लेकिन
  346. 14:35तुम चाहो तो मेरी बात मान मुझे तुम पर
  347. 14:37यकीन करने के लिए मना सकती हो। बड़े पापा
  348. 14:39की यह बात सुन सिया ने जल्दी-जल्दी हां
  349. 14:41में सर हिलाया और और बोली आप जो बोलेंगे
  350. 14:44मैं वह करूंगी। बड़े पापा आपका यकीन जीतने
  351. 14:46के लिए आपकी सिया कुछ भी करने के लिए
  352. 14:48तैयार है। एक सिया की बात सुन वो व्यंग से
  353. 14:50मुस्कुराए और उससे दूर होकर गिरीश यानी
  354. 14:52सिया के पापा के तरफ गए। उनके कंधे पर हाथ
  355. 14:55रख वो बोले गिरीश इस घर का बड़े होने के
  356. 14:58नाते तुम सब मेरी हर एक बात मानते हो। तो
  357. 15:01मैं चाहूंगा कि तुम मेरी यह बात भी मानो।
  358. 15:03सिया तुम्हारी बेटी है। लेकिन हमारे घर की
  359. 15:06इज्जत और खराब ना हो। इस वजह से मैं चाहता
  360. 15:08हूं कि उसकी शादी जल्द से जल्द हो जाए।
  361. 15:11आनंद जी ने जैसे ही कहा वैसे ही सिया के
  362. 15:13ऊपर मानो पहाड़ ही टूट पड़ा। क्या कुछ
  363. 15:15नहीं सोचा था उसने अपने फ्यूचर को लेकर।
  364. 15:17कितने ख्वाब थे उसके? और अब उसकी तो कुछ
  365. 15:20गलती भी नहीं थी। फिर भी फिर भी उसे इतनी
  366. 15:22बड़ी सजा मिल रही थी। उसने उम्मीद से अपने
  367. 15:25पापा और फिर मां के तरफ देखा। लेकिन उन
  368. 15:27दोनों के चेहरे को देख ऐसा लग रहा था।
  369. 15:29जैसे उन्हें इस फैसले से कोई प्रॉब्लम
  370. 15:31नहीं है। सिया के पापा ने एक बार उसके तरफ
  371. 15:34देखा और फिर अपने भाई से बोले भाई साहब
  372. 15:37जैसा आप चाहे 7 महीने के बाद सिया 18 साल
  373. 15:40की हो जाएंगी और हम उसी दिन उसकी शादी
  374. 15:42करवा देंगे अगर आपकी नजरों में कोई हो तो
  375. 15:45बताइए जिससे हम उसके रिश्ते की बात कर सके
  376. 15:47और बस अपने पापा की यह बात सुन सिया की
  377. 15:49सारी हिम्मत जवाब दे गई। वह बेजान सी वहीं
  378. 15:52बैठी रही। बाहर गेट पर आती आवाजों से उनका
  379. 15:55ध्यान आकर्षित हुआ और बड़े पापा ने अपने
  380. 15:57बेटे आलोक से बाहर को उन्हें जाकर देखने
  381. 16:00के लिए बोल दिया। वह भी जल्दी से वहां गया
  382. 16:02और इतने सारे न्यूज़ रिपोर्टर को बाहर
  383. 16:04खड़ा देख वो हैरान हुआ। वह जल्दी से अंदर
  384. 16:06आया और बोला पापा बाहर न्यूज़ रिपोर्टर
  385. 16:09खड़े हैं। पता नहीं क्या हुआ होगा। न्यूज़
  386. 16:11रिपोर्टर का नाम सुन एक पल सभी हैरान हुए
  387. 16:14और फिर घर से सभी जेंट्स बाहर की ओर गए।
  388. 16:16गेट खोलते ही आनंद जी ने सभी के तरफ देखा
  389. 16:18और बोले क्या मैं जान सकता हूं आप सभी
  390. 16:21यहां क्या कर रहे हैं। उनका सवाल सुन उन
  391. 16:23रिपोर्टर्स ने एक दूसरे के तरफ देखा और
  392. 16:26फिर उन्हीं में से एक बोला यह घर सिया
  393. 16:28अग्निहोत्री का ही है ना नहीं वह स्टेट
  394. 16:30सेकंड टॉपर है इस वजह से हम उनका इंटरव्यू
  395. 16:33लेने आए हैं। रिपोर्टर की बात सुन सभी ने
  396. 16:35एक दूसरे के तरफ देखा। अगर आज यह सब नहीं
  397. 16:38हुआ होता तो यकीनन उन्हें सिया के टॉप
  398. 16:40करने की बहुत खुशी होती। मगर नहीं यह सच
  399. 16:43है कि यह घर सिया अग्निहोत्री का ही है।
  400. 16:45लेकिन हमारी बेटी ने टॉप नहीं किया है। वो
  401. 16:48एक एवरेज स्टूडेंट है जो बड़ी मुश्किल से
  402. 16:50पास हुई है। सो आप यहां से जा सकते हैं।
  403. 16:52आनंद जी ने कहा और गेट का दरवाजा बंद कर
  404. 16:54वह सीधा अंदर आ गए। सियाबा भी वहीं बैठी
  405. 16:58हुई थी और घर की बाकी औरतें उसके आसपास
  406. 17:00खड़ी उससे जाया और प्रभा के बारे में पूछ
  407. 17:02रही थी। उन सबके आते ही सिया की बड़ी मां
  408. 17:04कोमल आ गई और अपना सर झुकाए हुए ही उसने
  409. 17:07धीरे सवाल किया। क्या हुआ जी? वो रिपोर्टर
  410. 17:10कहीं कुछ बुरा तो नहीं हुआ ना? बस उनका
  411. 17:12इतना ही कहना और आनंद जी ने उन्हें घूर कर
  412. 17:15देखा। वह गुस्से से बोले बुरा और भी कुछ
  413. 17:17बुरा होना बाकी है क्या? जो तुम्हारी बेटी
  414. 17:20ने गुल खिलाए है उसके बाद भी पूछ रही हो।
  415. 17:23आनंद जी की वह गुस्से भरी आवाज और उनके
  416. 17:25नजरें देख कोमल जी पीछे हट गई और उन्होंने
  417. 17:27ने अपना सर झुका दिया। अगर बच्चा कुछ
  418. 17:29अच्छा करे तब मेरा बच्चा मेरा बच्चा करके
  419. 17:32आदमी उसे सर पर उठाते हैं और वही अगर उसने
  420. 17:34कुछ गलती की तो सारा इल्जाम औरत पर डालते
  421. 17:36हैं और यह हमारे समाज की बहुत ही कड़वी
  422. 17:38लेकिन सच्चाई है प्रिय ने ना में सर
  423. 17:41हिलाया और आगे आकर सिया से सवाल किया क्या
  424. 17:44आज तुम्हारा रिजल्ट आया है और बस अपने भाई
  425. 17:47का सवाल सुन सिया के दिल में थोड़ी उम्मीद
  426. 17:49जगी लेकिन अपने चाचू के बात सुन वो उम्मीद
  427. 17:51फिर से टूट गई वो प्रिय से बोले रिजल्ट
  428. 17:53आया हो या फिर ना आया हो लेकिन अब यह आगे
  429. 17:56की पाई नहीं करेंगी तुमने सुना नहीं आज से
  430. 17:58कुछ महीनों बाद इसकी शादी है और जब तक
  431. 18:00इसके हाथ पीले होकर वह उसके घर ब्याह नहीं
  432. 18:03हो जाती तब तक यह घर से बाहर कदम भी नहीं
  433. 18:05रखेंगी। प्रिय को अपने बाबा की यह बात
  434. 18:08बिल्कुल पसंद नहीं आई। उसने अपनी बहन सिया
  435. 18:10को देखा था जो हर रोज देर रात तक जग कर
  436. 18:13पाई करती थी और तो और बाकी दोनों बहनों से
  437. 18:15ज्यादा घर के काम भी करती थी। वो अपने
  438. 18:17पापा से बोला क्यों नहीं कर सकती पापा? उन
  439. 18:20दोनों के गलती की सजा आप सिया को नहीं दे
  440. 18:22सकते। हमारी सिया कितनी होशियार है और आप
  441. 18:25उसकी शादी करा के उसके फ्यूचर को बर्बाद
  442. 18:27नहीं कर सकते। मैं आपको ऐसा करने नहीं
  443. 18:29दूंगा। प्रियेश ने थोड़ी तेज आवाज में ही
  444. 18:31कहा और अगले ही पल विनोद जी ने उसे थप्पड़
  445. 18:33मार दिया। चाचू प्लीज प्लीज भाई को मत
  446. 18:36मारो। सिया से बर्दाश्त नहीं हुआ। उसके
  447. 18:39वजह से उसके भाई को थप्पड़ पड़े। वह भी
  448. 18:41तैयार नहीं थी इस शादी के लिए। और पानी
  449. 18:44पाई छोड़ने के लिए तो बिल्कुल भी नहीं।
  450. 18:46लेकिन घर का माहौल देख उसे मना करना सही
  451. 18:49नहीं लगा। उसने कुछ सोचकर अपने कदम बड़े
  452. 18:51पापा की ओर बढ़ाए और उसका हाथ अपने हाथों
  453. 18:53में थाम कर बोली बड़े पापा मैं शादी के
  454. 18:56लिए तैयार हूं आप जिससे कहेंगे जब कहेंगे
  455. 18:59मैं शादी करूंगी लेकिन प्लीज मेरी पाई बंद
  456. 19:02मत कीजिए आप चाहते हैं ना कि मैं घर से
  457. 19:05बाहर ना जाऊं तो आई प्रॉमिस मैं बाहर नहीं
  458. 19:09जाऊंगी एज अ एक्सटर्नल स्टूडेंट मैं अपनी
  459. 19:11पढ़ी पूरी करूंगी बड़े पापा सिर्फ एग्जाम
  460. 19:13के लिए ही जाऊंगी वो भी भाई के साथ लेकिन
  461. 19:16प्लीज प्लीज बड़े पापा मेरी पाई बंद मत
  462. 19:18कीजिए आपने आपने कहा था अगर मैं अच्छे
  463. 19:21नंबर से पास हुई तो आप में जो मांगूंगी वह
  464. 19:23देंगे। प्लीज बड़े पापा प्लीज मेरी पाई
  465. 19:26सिया रोते हुए अपने बड़े पापा से
  466. 19:28रिक्वेस्ट कर रही थी। उसे उतना रोता देख
  467. 19:30उसके मां को बहुत बुरा लग रहा था लेकिन वह
  468. 19:32कुछ भी नहीं कर सकती थी। आनंद जी फिर बोले
  469. 19:36ठीक है शशांत किसी अच्छे से कॉलेज में
  470. 19:38इसका बाहर से एडमिशन करवा दो और याद रहे
  471. 19:40कि यह अकेले कहीं भी आए जाए ना और तुम याद
  472. 19:42रहे कि तुमने अगर एक गलती की या फिर किसी
  473. 19:45लड़के से बात भी की तो मुझसे बुरा कोई
  474. 19:47नहीं होगा। समझ में आ गया ना? और उनकी बात
  475. 19:50सुनसिया ने हां में सर हिलाया। भले ही
  476. 19:52उसके साथ बहुत बुरा हुआ था, लेकिन वह आगे
  477. 19:54पढ़ सकती है। इसी बात की खुशी उसे अब हो
  478. 19:56रही थी। आनंद जी फिर आलोक से बोले आलोक
  479. 20:00इसके स्कूल में फोन करो। और वह जो टीवी पर
  480. 20:03या फिर न्यूज़ में इसके फोटो आने वाली है
  481. 20:05ना। उसे दिखने से मना कर दो। मैं नहीं
  482. 20:08चाहता कि किसी को भी पता चले कि इसने टॉप
  483. 20:10किया है। आनंद जी ने कहा और वह से चले गए।
  484. 20:12एक-एक कर बाकी सब भी वह से चले गए। सिया
  485. 20:15की बड़ी मां और चाची भी अपने कमरे में चली
  486. 20:17गई और फिर उसकी मानपिया जल्दी से उसके
  487. 20:19करीब आ गई। सिया अपने मां से लिप्त कर
  488. 20:21रोने लगी। वह उन्हें बताना चाहती थी कि
  489. 20:24उसने कुछ नहीं किया है। जया दी और प्रभा
  490. 20:26दी के जाने के पीछे उसका कोई हाथ नहीं है।
  491. 20:29लेकिन उसने अपनी बात कहने से पहले ही
  492. 20:30प्रिया बोली देख सिया बड़े भाई साहब ने
  493. 20:33तुझे जो यह आगे बढ़ने का मौका दिया है ना
  494. 20:35उसका गैर फायदा मत उठा। पहले ही हम सबको
  495. 20:38उन दोनों के वजह से बहुत कुछ झेलना पड़ने
  496. 20:40वाला है और इसमें भी अगर तूने कुछ किया ना
  497. 20:42तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। अपनी मां की
  498. 20:45बात सुन सिया ने सिर्फ हां में सर हिलाया
  499. 20:47और सीधा अपने कमरे में चली गई। आज उसके
  500. 20:50सामने उसके परिवार का एक अलग ही सच आया
  501. 20:52था। हां, वह जानती थी कि उसके घर वाले
  502. 20:55पुराने जमाने वाले सोच के लड़कों के
  503. 20:57मुकाबले लड़कियों से कम ही प्यार करते
  504. 20:59हैं। लेकिन जैसे भी थे। उन्होंने कभी भी
  505. 21:02उनके घर के बेटियों पर हाथ नहीं उठाया था।
  506. 21:04उनके मॉडर्न कपड़े पहनने और अकेले बाहर
  507. 21:06जाने पर रोक जरूर लगाई थी। लेकिन अपने भाई
  508. 21:10और बड़ों के साथ वह उन्हें बाहर भी भेजते
  509. 21:12थे। उनके बस एक बार कहने पर ही वह सभी
  510. 21:14चीजें उन्हें लाकर देते थे जो वह चाहती
  511. 21:16थी। फिर चाहे वह चीज कितनी भी महंगी ना
  512. 21:18हो। उसके बड़े पापा तो हमेशा कहते थे कि
  513. 21:21वह तीनों उनके घर ली लक्ष्मी है। इस वजह
  514. 21:24से वह हमेशा खुश रहनी चाहिए। लेकिन आज आज
  515. 21:26सब कुछ बदल के रह गया। उसके बहनों की वह
  516. 21:29गलती और सिया की पूरी दुनिया ही पलट गई।
  517. 21:32अगले दिन जब सिया के दोस्तों को जब जया और
  518. 21:34प्रभा के बारे में पता चला तब वह बहुत ही
  519. 21:36हैरान हुए और उन्होंने सिया से बात की और
  520. 21:38सिया ने उन्हें सब कुछ बता दिया। उन्हें
  521. 21:40उसके लिए बहुत बुरा लगा और उन सभी ने भी
  522. 21:43ठान लिया कि वह अपनी आगे की पाई वहीं से
  523. 21:45करने गए जहां सिया के घर वाले उसका एडमिशन
  524. 21:47कराएंगे ताकि नोट्स और बाकी सभी चीजों के
  525. 21:49लिए वह सिया की हेल्प कर सके। देखते ही
  526. 21:52देखते कुछ महीने बीत गए और आखिर वह दिन आ
  527. 21:55ही गया जब सिया की शादी होनी थी। बीते
  528. 21:57दिनों में सिया सिर्फ अपने एडमिशन और
  529. 21:59पेपर्स के लिए ही बाहर गई थी। वरना तो
  530. 22:01उसकी जिंदगी घर काम और अपने कमरे में ही
  531. 22:03बीत रही थी और अब दो दिन बाद उसके शादी की
  532. 22:05रस्में शुरू होनी थी। अंडरस्को मुझे बताओ
  533. 22:09तुम चारों में से मेरे साथ कौन आने वाला
  534. 22:11है? लास्ट मोमेंट पर मुझे कुछ भी गड़बड़
  535. 22:14नहीं चाहिए। हर बार में ना ही यह मैं नहीं
  536. 22:16यह कहकर मेरा दिमाग खराब कर देते हो तुम
  537. 22:18सब। अरे भाई क्या फायदा चारचार बेटे होने
  538. 22:21का जो वक्त पर एक भी काम नहीं आता है।
  539. 22:23सुधा जी चिते हुए अपने सामने बैठे राज
  540. 22:25राघव अक्षय और कृष्णा से बोले जा रही थी
  541. 22:28और वह चारों मुंह छिपा कर हंस रहे थे। तब
  542. 22:31तक राघव के डैड संजय बोले रहने भी दो सुधा
  543. 22:34डॉक्टर बेटे होने का यही तो नुकसान है।
  544. 22:36बेचारों को कभी भी इमरजेंसी केस आ जाती है
  545. 22:38और वह फिर उधर चले जाते हैं। अब वह भी
  546. 22:41क्या करने गए भला? संजय जी का बस यही कहना
  547. 22:44और सुधा जी ने उनकी तरफ घूर के देखा। वह
  548. 22:46फिर खामोश हो गए और अपने बच्चों की तरफ
  549. 22:48देख उन्हें जवाब देने के लिए बोलने लगे।
  550. 22:51मां उस दिन मुझे टाइम नहीं है। आप इन
  551. 22:53तीनों से पूछ लो। राज ने कहकर अपने हाथ
  552. 22:56ऊपर कर दिए और उसने अपना बोलना खत्म ही
  553. 22:58किया था। तब तक अक्षय भी बोला और मैं भी
  554. 23:00बिजी हूं। मेरा आना भी पॉसिबल नहीं है। उन
  555. 23:03दोनों को बैक आउट करता देख राघव भी जल्दी
  556. 23:05से बोला। मुझे बहुतेंट केस स्टडी करनी है।
  557. 23:08सो आप कृष्णा को ले जाइए और आगे किसी का
  558. 23:10कुछ सुनने से पहले ही उसने अपनी प्रोटीन
  559. 23:12शेक का ग्लास उठाया और वह से चला गया।
  560. 23:15कृष्ण ने अपने तीनों भाई को घूर कर देखा
  561. 23:17और फिर घरी सांस छोड़ते हुए बोला ठीक है
  562. 23:20मैं आ जाऊंगा आपके साथ बड़ी मां और बस
  563. 23:22उसका इतना कहना तीनों भाइयों ने और संजय
  564. 23:25जी ने गहरी सांस छोड़ी सुधा जी से घर में
  565. 23:27सभी काफी डरते थे लेकिन साथ ही साथ ही
  566. 23:29उनकी उतनी रिस्पेक्ट भी करते थे आज उनके
  567. 23:32वजह से तो वह सब यहां थे वरना ना जाने
  568. 23:34क्या होता तब तक राघव के डैड संजय बोले
  569. 23:37रहने भी दो सुधा डॉक्टर बेटे होने का यही
  570. 23:40तो नुकसान है बेचारों को कभी भी इमरजेंसी
  571. 23:42केस आ जाती है और वह फिर उधर चले ले जाते
  572. 23:45हैं। अब वह भी क्या करने गए भला? संजय जी
  573. 23:48का बस यही कहना और सुधा जी ने उनकी तरफ
  574. 23:50घुर के देखा। वह फिर खामोश हो गए और अपने
  575. 23:52बच्चों की तरफ देख उन्हें जवाब देने के
  576. 23:54लिए बोलने लगे। मां उस दिन मुझे टाइम नहीं
  577. 23:57है। आप इन तीनों से पूछ लो। राज ने कहकर
  578. 24:00अपने हाथ ऊपर कर दिए और उसने अपना बोलना
  579. 24:02खत्म ही किया था। तब तक अक्षय भी बोला और
  580. 24:04मैं भी बिजी हूं। मेरा आना भी पॉसिबल नहीं
  581. 24:07है। उन दोनों को बैक आउट करता देख राघव भी
  582. 24:10जल्दी से बोला। मुझे बहुत इंपॉर्टेंट केस
  583. 24:12स्टडी करनी है। सो आप कृष्णा को ले जाइए।
  584. 24:14और आगे किसी का कुछ सुनने से पहले ही उसने
  585. 24:17अपनी प्रोटीन शेक का ग्लास उठाया और वह से
  586. 24:19चला गया। कृष्ण ने अपने तीनों भाई को घूर
  587. 24:22कर देखा और फिर गहरी सांस छोड़ते हुए
  588. 24:24बोला, ठीक है मैं आ जाऊंगा आपके साथ बड़ी
  589. 24:27मां। और बस उसका इतना कहना तीनों भाइयों
  590. 24:29ने और संजय जी ने गहरी सांस छोड़ी। सुधा
  591. 24:31जी से घर में सभी काफी डरते थे। लेकिन साथ
  592. 24:34ही साथ उनकी उतनी रिस्पेक्ट भी करते थे।
  593. 24:36आज उनके वजह से तो वह सब यहां थे। वरना ना
  594. 24:39जाने क्या होता। अंडस्को अपने दुखों में
  595. 24:42उलझी हुई सिया अकेली अपने कमरे के खिड़की
  596. 24:44पर बैठ आंसुओं को बहा रही थी। पिछले कुछ
  597. 24:46महीनों में बहुत कुछ हुआ था। उसके साथ ना
  598. 24:48जाने क्या-क्या सहना पड़ा था उसे। अपनी
  599. 24:51आजादी खो दी थी उसने। अपना पद लिखकर कुछ
  600. 24:54बड़ा करने का सपना खोया था उसने। लड़की
  601. 24:57होने के ताने और उसके बहनों ने की हुई
  602. 24:59गलती की सजा उसे हर बार मिलती थी। उसके
  603. 25:02पापा ने तो उस माजर के बाद एक नजर उठाकर
  604. 25:04भी उसे नहीं देखा था। बात तो दूर की बात
  605. 25:06थी। हां, अगर इस पूरे बुरे वक्त में कोई
  606. 25:08उसके साथ था, तो वह सिर्फ था उसका भाई
  607. 25:10प्रिय और उसके दोस्त जो उसे टाइम टू टाइम
  608. 25:13कॉलेज के सभी नोट्स भी लाकर देते और उसे
  609. 25:15हंसाने की कोशिश भी करते। उस वक्त उनके
  610. 25:17साथ वह हंस तो देती लेकिन हर पल यही दुआ
  611. 25:20करती कि काश वक्त यही थम जाए और वह 18 साल
  612. 25:22की हो ही ना। अपने शादी को लेकर पहले तो
  613. 25:25उसे कुछ नहीं लगा था। उसने एक्सेप्ट कर
  614. 25:27लिया था सब कुछ और सबके खुशी के तैयार भी
  615. 25:30हो गई थी उस शादी के लिए। लेकिन जो लड़का
  616. 25:32उसे देखने आया था और जिसकी अब वह हमसफर
  617. 25:35बनने जा रही थी वह लड़का उसे बिल्कुल भी
  618. 25:37पसंद नहीं आया था। एक अलग ही नेगेटिव वाइब
  619. 25:40उसे उससे मिल रही थी ना सिर्फ उससे बल्कि
  620. 25:42उसके पूरे फैमिली से भी और उस लड़के का
  621. 25:44बड़ा भाई उसे देखकर तो सिया को डर ही लग
  622. 25:47रहा था। आज तक आए उन हालत में खुश रहने
  623. 25:49वाली वो दो डिब आए अपने शादी को लेकर काफी
  624. 25:52डर गई थी। आज भी सिया खिड़की पर बैठे हुए
  625. 25:55यही सोच में लगी थी कि काश कुछ ऐसा हो जाए
  626. 25:58और यह शादी टल जाए। उसके आंखों से बहते
  627. 26:00आंसुओं में उसके गाल और गले को तक के भिगो
  628. 26:03दिया था। सिया ने अपने हाथ जोड़े और ऊपर
  629. 26:05देखकर बोली कान्हा जी प्लीज प्लीज कुछ
  630. 26:08करिए। मुझे नहीं करनी है यह शादी। मुझे
  631. 26:10कुछ अच्छा नहीं लग रहा है। प्लीज कान्हा
  632. 26:12जी मैंने आज तक आपसे किसी चीज को लेकर
  633. 26:15शिकायत नहीं की। आपने जो जो भी मेरे
  634. 26:18किस्मत में लिखा उसे मैंने हंसते-हंसते
  635. 26:20अपनाया है। लेकिन यह शादी नहीं प्लीज कम
  636. 26:23से कम कान्हा जी यह लड़का तो नहीं। मुझे
  637. 26:25बहुत डर लग रहा है उससे। और उसने बड़े भाई
  638. 26:28से भी प्लीज कान्हा जी प्लीज अपने कान्हा
  639. 26:30को मानते हुए रोते हुए सिया वही खिड़की के
  640. 26:33पास ही सो गई और उसे देखने आए हुए उसकी
  641. 26:35मां बड़ी मां और चाची किसी तरह अपने आंखों
  642. 26:38में आए आंसुओं को साफ करते हुए वहां से
  643. 26:40चले गए। घर में सबसे छोटी होने की वजह से
  644. 26:42सिया उन सब की बहुत ही लाडली थी और उसी के
  645. 26:44साथ ऐसा होता देख किसी को अच्छा नहीं लगा
  646. 26:47मगर वह कुछ कर भी तो नहीं सकते थे। देखते
  647. 26:50ही देखते अगला दिन भी आ गया और शाम को
  648. 26:52सिया के मेहंदी का फंक्शन जोरों शोरों से
  649. 26:54हुआ। उसके होने वाले पति के नाम की मेहंदी
  650. 26:56और उसके नाम का पहला लेटर उसके हाथों में
  651. 26:59सज गया और सिया बस हताश सी देखती रह गई।
  652. 27:01निखिल और पुनीत से बात करना उसके घर में
  653. 27:03किसी को भी मंजूर नहीं था। इस वजह से वह
  654. 27:06तो नहीं लेकिन साक्षी और नेहा उसके साथ
  655. 27:08थे। अपनी बेस्ट फ्रेंड की यह हालत तो उनसे
  656. 27:11भी देखी नहीं जा रही थी। लेकिन वह कुछ कर
  657. 27:13भी तो नहीं सकती थी। उन चारों ने
  658. 27:15अपने-अपने पेरेंट्स से कहकर सिया के घर
  659. 27:17वालों से बात की थी। लेकिन उसका कोई भी
  660. 27:19फायदा नहीं हुआ और आज सिया को मेहंदी लग
  661. 27:21ही गई। अगले दिन हल्दी का फंक्शन भी काफी
  662. 27:24जोरों शोरों से हुआ। राहुल सिया का होने
  663. 27:27वाला पति और उनके फैमिली की डिमांड ही यही
  664. 27:29थी कि उन्हें शादी हाईफाई चाहिए थी। इस
  665. 27:32वजह से पूरे अग्निहोत्री परिवार ने कोई भी
  666. 27:34कमी नहीं छोड़ी थी उन्हें खुश करने में।
  667. 27:36मगर गिरोह को खुश करते-करते वह यह भूल गई
  668. 27:38थी कि वह उनकी अपनी बेटी को कितना नाराज
  669. 27:40कर रहे हैं। सिया से अब यह कुछ भी
  670. 27:42बर्दाश्त नहीं हो रहा था। काफी हेल्प
  671. 27:44प्लेस महसूस कर रही थी वो। अगर यह बात
  672. 27:46उसके पापा की इज्जत की और मां के
  673. 27:48संस्कारों की ना होती तो वह कब का अपनी
  674. 27:50जान दे चुकी होती या फिर यहां से कहा दूर
  675. 27:52चली गई होती। किसी तरह अपनी घुटन को
  676. 27:54बर्दाश्त कर सिया सब कुछ बर्दाश्त करती
  677. 27:56रही। कितनी प्यारी लग रही है मेरी
  678. 27:59गुड़िया। सिया के नानी ने उसकी बलाई ली और
  679. 28:01नजर का टिकाव उसे लगा लिया। दुल्हन के
  680. 28:03सुरख लाल जोड़े में सजी हुई सिया देखी ऐसी
  681. 28:05रही थी कि किसी की नजरें भी उस पर से
  682. 28:07हटाना मुश्किल थी। लेकिन उनकी उस नजरों को
  683. 28:09सिर्फ और सिर्फ सिया की खूबसूरती दिखाई दे
  684. 28:11रही थी। उसके आंखों में छिपा हुआ दर्द
  685. 28:14खालीपन नहीं जो वह सिर्फ उसके खूबसूरती
  686. 28:17की। उसने पहने हुए उन महंगे गहनों की उसके
  687. 28:19जोड़े की तारीफ कर रहा था। लेकिन किसी ने
  688. 28:22भी यह जरूरी नहीं समझा कि उससे पूछे कि
  689. 28:24क्या वह खुश है या नहीं। फाइनली फेरों का
  690. 28:27समय हो गया और पंडित जी ने सिया को मंडप
  691. 28:29में लाने के लिए बुलावा भेज ही दिया। सिया
  692. 28:31एक पल डर गई और दिल ही दिल कान्हा जी को
  693. 28:33याद कर वह बोली ठीक है कान्हा जी आपका यह
  694. 28:36फैसला भी मंजूर है मुझे और आपकी कसम
  695. 28:39कान्हा जी जिस तरह मैंने आज तक अपने हर एक
  696. 28:41रिश्ते दिल से निभाए हैं ना उसी तरह आगे
  697. 28:43भी आने वाले हर एक रिश्ता में अपने दिल से
  698. 28:46पूरे ईमानदारी से निभाऊंगी मुझे आप पर
  699. 28:48यकीन है कान्हा जी आपने मेरे लिए जरूर कुछ
  700. 28:50ना कुछ अच्छा ही सोचा होगा और अब मेरे साथ
  701. 28:53कुछ बुरा नहीं होने देंगे सिया ने कहकर एक
  702. 28:55बार अपने कान्हा जी की मूर्ति की तरफ देखा
  703. 28:58और उनका आशीर्वाद लेकर वह अपने कदम मंडप
  704. 29:00की ओर बहाने लग गई। योजक चिन्ह सुधा जी
  705. 29:03अपने कमरे में तैयार होकर इधर-उधर टहलते
  706. 29:06हुए कृष्णा के आने का इंतजार कर रही थी। 5
  707. 29:08मिनट 10 मिनट कहते कहते अब एक घंटा बिकत
  708. 29:11गया था। लेकिन वह कुछ आने का नाम नहीं ले
  709. 29:13रहा था। जिस वजह से सुधा जीओ गुस्सा आ रहा
  710. 29:15था। कविता जी और संजय जी चुपचाप उन्हें
  711. 29:18देखकर अपनी थूक कटक रहे थे। उनके गुस्से
  712. 29:20से उन्हें अभी काफी डर लग रहा था। उसी
  713. 29:22वक्त बाहर कार रुकने की आवाज आई और उन
  714. 29:24दोनों ने अपनी सांस छोड़ दी। राघव तुम।
  715. 29:27सुधा जी ने अंदर आते राघव को देखा और तभी
  716. 29:29राघव बोला मां कृष्णा को एक बहुत ही
  717. 29:32इंपॉर्टेंट केस आ गई जिस वजह से वह नहीं आ
  718. 29:35सका इसीलिए मैं आपके साथ जाऊंगा राघव के
  719. 29:37यह शब्द सुधा जी को खुश कर गए और वह झट से
  720. 29:39मान गई वैसे भी उनका यह बेटा था सबसे छोटा
  721. 29:43लेकिन सबसे ज्यादा काम वही संभाले हुए थे
  722. 29:45उसे आराम करना थोड़ा भी मालूम नहीं था हर
  723. 29:47वक्त सिर्फ काम ही काम करता था वह इस वजह
  724. 29:50से सुधा जी को अच्छा ही लगा उसे आता देखा
  725. 29:53संजय जी और कविता जी दोनों भी बहुत खुश
  726. 29:55हुए राघव की बात सुन और कविता जी जल्दी से
  727. 29:58बोली राघव जाओ तुम फ्रेश हो जाओ तब तक मैं
  728. 30:01तुम्हारे लिए कपड़े निकलती हूं कहकर कविता
  729. 30:03जी जल्दी से अपने कमरे की तरफ बढ़ गई और
  730. 30:05राघव को समझते देर नहीं लगी कि उसकी
  731. 30:07प्यारी बुआ फिर से उसके लिए शॉपिंग करके
  732. 30:09आई है। वह मुस्कुराया और अपने कमरे में
  733. 30:11चला गया। कविता जी ने भी जल्दी से कपड़े
  734. 30:14लिए और राघव को देकर वह बाहर आ गई। सुधा
  735. 30:17जी की तरफ देखते हुए वह बोली भाभी यह
  736. 30:19गिफ्ट मैंने पैक कर दिया है और बुकी भी
  737. 30:22रेडी है। मैं बस अभी लेकर आती हूं। हां
  738. 30:24कहते हुए कविता जी जल्दी से किचन के तरफ
  739. 30:26जाने लगी और सुधा जी ने चिदते हुए उन्हें
  740. 30:28पुकारा वो गुस्से से उनसे बोली तुम्हें
  741. 30:30कितनी बार कहा है कवि आराम से चला करो पैर
  742. 30:33में फिर से स्वेलिंग चढ़ गई तो बिल्कुल
  743. 30:36ध्यान नहीं रखती हो तुम अपना सुधा जी ने
  744. 30:38डांटते हुए उन्हें बैठने का इशारा किया और
  745. 30:40खुद अंदर जाकर बुके लेकर आ गई संजय जी की
  746. 30:43तरफ देखते हुए वह बोली आप आराम से ऑफिस
  747. 30:46चले जाइएगा और तुम कविता पड़ोस में किसी
  748. 30:49तरह की वो क्या कहते हैं कि टी पार्टी की
  749. 30:51क्या है वो मिसेज शर्मा बोल रही थी तो
  750. 30:54अच्छे से तैयार होकर वहां चले जाना और
  751. 30:56थोड़ा एंजॉय भी करना थोड़ा बहुत बाहर भी
  752. 30:58निकला करो समझी सुधा जी ने कहकर राघव को
  753. 31:01आवाज लगाई और फिर उन दोनों को भी बोलकर
  754. 31:03राघव और सुधा जी बाहर निकल गए कविता जी ने
  755. 31:06भी जल्दी से कपड़े लिए और राघव को देकर वह
  756. 31:09बाहर आ गई सुधा जी की तरफ देखते हुए वह
  757. 31:11बोली भाभी यह गिफ्ट मैंने पैक कर दिया है
  758. 31:14और वो भी रेडी है मैं बस अभी लेकर आती हूं
  759. 31:16हां कहते हुए कविता जी जल्दी से किचन के
  760. 31:19तरफ जाने लगी और सुधा जी ने चिते हुए
  761. 31:21उन्हें पुकारा वो गुस्से से उनसे बोली
  762. 31:23बोली तुम्हें कितनी बार कहा है कवि आराम
  763. 31:25से चला करो पैर में फिर से स्वेलिंग चढ़
  764. 31:27गई तो बिल्कुल ध्यान नहीं रखती हो तुम
  765. 31:30अपना सुधा जी ने डांटते हुए उन्हें बैठने
  766. 31:32का इशारा किया और खुद अंदर जाकर बुके लेकर
  767. 31:35आ गई संजय जी की तरफ देखते हुए वह बोली आप
  768. 31:38आराम से ऑफिस चले जाइएगा और तुम कविता
  769. 31:41पड़ोस में किसी तरह की वो क्या कहते हैं
  770. 31:43कि टी पार्टी की क्या है वो मिसेज शर्मा
  771. 31:46बोल रही थी तो अच्छे से तैयार होकर वहां
  772. 31:48चले जाना और थोड़ा एंजॉय भी करना थोड़ा
  773. 31:51बहुत बाहर भी निकला करो समझी ठीक सुधा जी
  774. 31:53ने कहकर राघव को आवाज लगाई और फिर उन
  775. 31:55दोनों को भी बोलकर राघव और सुधा जी बाहर
  776. 31:57निकल गए। राघव ने गाड़ी चलाते हुए अपनी
  777. 32:00मां की तरफ देखा और बोला मां वैसे हम
  778. 32:03किसकी शादी में जा रहे हैं? मेरा मतलब है
  779. 32:06क्या मैं पहचानता हूं उन्हें? राघव का
  780. 32:09सवाल सुन सुधा मुस्कुराते और बोली अरे वो
  781. 32:11मेरे साथ काम करने वाले प्रोफेसर है ना?
  782. 32:14प्रोफेसर मिश्रा उन्हीं के छोटे बेटे की
  783. 32:16शादी है। सुधा जी की बात सुन राघव ने
  784. 32:18सिर्फ हां में सर हिलाया और फिर से अपने
  785. 32:20ड्राइविंग पर कंसंट्रेट करने लगा। उन्हें
  786. 32:22आने में थोड़ा लेट ही हुआ था। जिस वजह से
  787. 32:25राघव ने गाड़ी हॉल के बैक साइड में पार्क
  788. 32:27की और अपनी मां के साथ अंदर जाने लगा।
  789. 32:29थोड़े कदम वह अंदर आ ही गए थे। तब उनके
  790. 32:31कानों पर कुछ आवाजें आए और वह बात सुनकर
  791. 32:33दोनों बहुत ही ज्यादा हैरान हुए। राघव तो
  792. 32:36गुस्से से आग बबूला हो गया था। उनकी बात
  793. 32:38सुन और वह कुछ कहने के लिए आगे बढ़ने ही
  794. 32:40वाला था कि सुधा जी ने उसका हाथ पकड़
  795. 32:42लिया। तब तक वह दोनों तीनों वहां से चले
  796. 32:44गए थे। राघव ने फिर गुस्से से अपनी मां को
  797. 32:47देखा और बोला आपने मुझे को रोका मोम आपने
  798. 32:50सुना नहीं वह क्या कह रहे थे डिस्कस्टिंग
  799. 32:52है यह सब वो लोग कैसे ऐसा कर सकते हैं
  800. 32:54किसी की मजबूरी का फायदा कैसे उठा सकते
  801. 32:57हैं राघव बहुत ही गुस्से में था अभी-अभी
  802. 32:59बात ही उसने ऐसी सुनी थी। राहुल सिया का
  803. 33:02कभी ना होने वाला हस्बैंड अपने बड़े भाई
  804. 33:04और मां से बात करते हुए कह रहा था कि वह
  805. 33:07अब शादी से भाग जाएगा और फिर तुम गिरीश से
  806. 33:09सिया के पापा से जाकर कहना कि उसकी दोनों
  807. 33:12बड़ी बहनों की भाग जाने की वजह से वह इस
  808. 33:14शादी से इंकार कर रहा है। ऐसे खानदान में
  809. 33:16जिसको दो-दो लड़कियां घर से भाग गई है। वह
  810. 33:18उनसे रिश्ता जोड़ना नहीं चाहते और फिर सही
  811. 33:21समय देखकर महान बनते हुए रोहित राहुल का
  812. 33:23बड़ा भाई उसकी शादी सिया से करवाकर दहेज
  813. 33:26और बढ़ाकर मांग लेना। राघव को उनकी बात
  814. 33:29सुन बहुत ही ज्यादा गुस्सा आया था और वह
  815. 33:31उसी गुस्से में अंदर जाने के लिए बढ़ा।
  816. 33:34रुको राघव सुधा जी ने राघव को आवाज देते
  817. 33:36हुए उसे रोका और उससे सवाल करते हुए वह
  818. 33:39बोली ऐसे गुस्से में जाकर कुछ भी गड़बड़
  819. 33:41मत करो। मिश्रा सर बहुत अच्छे हैं। हम
  820. 33:43पहले उनसे बात करते हैं। फिर आगे का आगे
  821. 33:46देखेंगे। सुधा जी ने राघव को समझाते हुए
  822. 33:48बोली और फिर मिश्रा सर को कॉल करने लगी।
  823. 33:51उनके फोन की रिंग आसपास ही उन्हें सुनाई
  824. 33:53दी और वह उस ओर गए। मिश्रा सर वही सर को
  825. 33:55हाथ लगाए बैठे हुए थे। सुधा जी और राघव
  826. 33:58जल्दी से उनके पास गए और सुधा जी फिक्र से
  827. 34:00बोली मिश्रा सर आप ऐसे क्यों बैठे हैं? आप
  828. 34:04जानते हैं हमने अभी-अभी सुना कि आपका बेटा
  829. 34:06वो। सुधा जी ने पूरी बात उन्हें बता दी और
  830. 34:09उसे सुन मिश्रा सर के आंखों में आंसू आ
  831. 34:11गए। वह रोते हुए ही बोले मैं जानता हूं
  832. 34:14सुधा जी और मैं पहले से ही इस शादी के
  833. 34:16खिलाफ था वो बच्ची। वो बच्ची सिया बहुत
  834. 34:19अच्छी है वो और बहुत मासूम और संस्कारी
  835. 34:21भी। लेकिन उसके बड़ी बहनों के भाग जाने की
  836. 34:24वजह से उसके परिवार वाले जल्द से जल्द
  837. 34:26उसकी शादी करवाने पर तुले हुए हैं। इसी
  838. 34:28बात का फायदा उठाकर पहले ही कामिनी राहुल
  839. 34:30की मां उनसे बहुत सारा दहेज ले चुकी है और
  840. 34:33अब अब मेरे उस बेवड़े निकम्मे बेटे से
  841. 34:35उसकी शादी करवाने पर तुली है। मुझे कुछ
  842. 34:37समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं। आप
  843. 34:40कुछ कीजिए सुधा जी अगर यह शादी नहीं हुई
  844. 34:42तो उस बच्ची के घर वाले उसे जान से मार
  845. 34:44देंगे और अगर यह शादी हो गई तो जीते जी उस
  846. 34:47लड़की की जिंदगी जहनुम से बदतर हो जाएंगी।
  847. 34:49मिश्रा सर अच्छे से जानते थे कि उनकी
  848. 34:51पत्नी और बेटे कैसे थे। इस वजह से वह किसी
  849. 34:54भी तरह से सिया को इस शादी से बचाना चाहते
  850. 34:56थे। मगर अब सब कुछ उनके हाथ से छूटता हुआ
  851. 34:58महसूस हो रहा था। सुधा जी भी बहुत हैरान
  852. 35:01हो गई। यह सब सुनकर वो मिश्रा सर को बहुत
  853. 35:04अच्छे से जानती थी। मिश्रा सर बहुत ही
  854. 35:06अच्छे व्यक्ति महत्व के मालिक थे और बहुत
  855. 35:08अच्छे इंसान भी। उनकी बात सुन सुधा जी सोच
  856. 35:11में गिर गई कि वह क्या करें और फिर कुछ
  857. 35:12सोचकर उन्होंने राघव के तरफ देखा और फिर
  858. 35:15मिश्रा सर के तरफ देखकर वह बोली क्या वह
  859. 35:17लड़की सच में अच्छी और संस्कारों वाली है।
  860. 35:20सुधा जी की बात सुन मिश्रा सर ने जल्दी से
  861. 35:22हां में सर हिलाया और सिया की खूब तारीफ
  862. 35:24की। सुधा जी खुश थी। उनकी बात सुन। इस वजह
  863. 35:27से वह बोली ठीक है फिर तो आज उस लड़की के
  864. 35:30साथ आपके बेटे की नहीं बल्कि मेरे बेटे
  865. 35:32राघव की शादी होंगी और बस उनकी बात सुन
  866. 35:35राघव हैरान हो गया वह जल्दी से बोली मॉम
  867. 35:37आप क्या बोल रही हो शादी और वह भी मेरी
  868. 35:40राघव बहुत ही हैरान था सुधा जी की बात सुन
  869. 35:43और वह दो कदम पीछे हो गया सुधा जी भी बहुत
  870. 35:46हैरान हो गई यह सब सुनकर वो मिश्रा सर को
  871. 35:49बहुत अच्छे से जानती थी मिश्रा सर बहुत ही
  872. 35:51अच्छे व्यक्ति महत्व के मालिक थे और बहुत
  873. 35:53अच्छे इंसान भी उनकी बात सुन सुधा जी सोच
  874. 35:56में गिर गई कि वह क्या करें और फिर कुछ
  875. 35:58सोचकर उन्होंने राघव के तरफ देखा और फिर
  876. 36:00मिश्रा सर के तरफ देखकर वह बोली क्या वह
  877. 36:02लड़की सच में अच्छी और संस्कारों वाली है
  878. 36:05सुधा जी की बात सुन मिश्रा सर ने जल्दी से
  879. 36:08हां में सर हिलाया और सिया की खूब तारीफ
  880. 36:10की सुधा जी खुश थी उनकी बात सुन इस वजह से
  881. 36:12वह बोली ठीक है फिर तो आज उस लड़की के साथ
  882. 36:15आपके बेटे की नहीं बल्कि मेरे बेटे राघव
  883. 36:18की शादी होंगी और बस उनकी बात सुन राघव
  884. 36:20हैरान हो गया वह जल्दी से बोली मॉम आप
  885. 36:22क्या बोल रही हो शादी और वह भी मेरी राघव
  886. 36:26बहुत ही हैरान था। सुधा जी की बात सुन और
  887. 36:28वो दो कदम पीछे हो गया। हां राघव तुम्हारी
  888. 36:32शादी मैं चाहती हूं कि तुम उस लड़की से
  889. 36:34शादी करो और अगर तुम अपनी मां से थोड़ा भी
  890. 36:36प्यार करते हो तो तुम इस शादी के लिए मना
  891. 36:38नहीं करोगे और मेरे साथ अंदर आओगे वरना
  892. 36:41तुम यहां से ही वापस जा सकते हो। सुधा जी
  893. 36:43ने डायरेक्ट अपना फैसला सुना दिया और
  894. 36:45मिश्रा सर के साथ अंदर की ओर जाने लगी। वह
  895. 36:47चाहती थी कि यह शादी हो जाए और इसके पीछे
  896. 36:50वजह थी कविता जी और संजय जी। संजय जी बैंक
  897. 36:53में काम करते थे और उन्हें रिटायर होने
  898. 36:56में बस एक दो साल ही बाकी थे। वही कविता
  899. 36:59जी की हेल्थ जो दिन-ब दिन बिघती जा रही थी
  900. 37:02उनके साथ घर में किसी ना किसी का होना
  901. 37:04जरूरी था। वह पिछले कुछ महीनों से अपने
  902. 37:06बेटे राज को तैयार कर रही थी कि वह शादी
  903. 37:08के रेडी हो जाए। वैसे देखा जाए तो वह
  904. 37:11चारों भी अब शादी के लायक हो गए थे। राज
  905. 37:13अब ऑलमोस्ट 28 साल का था तो वहीं कृष्णा
  906. 37:15और अक्षय 27 साल के राघव भी अब 26 साल का
  907. 37:18हो गया था। लेकिन उन तीनों ने राज, कृष्णा
  908. 37:21और अक्षय ने यह कहकर शादी की बात टाल दी
  909. 37:24थी कि उन्हें अभी शादी नहीं करनी है।
  910. 37:26इनफैक्ट इट जब तक वह 30 क्रॉस नहीं कर
  911. 37:28लेते तब तक वह शादी नहीं करेंगे और उन्हें
  912. 37:30भी उनकी तरह ही डॉक्टर वाइफ चाहिए थी। इस
  913. 37:33वजह से वह आज यह शादी करने के लिए भी टायर
  914. 37:35नहीं होंगे। राघव सबसे छोटा होने की वजह
  915. 37:37से उन्होंने उससे नहीं पूछा था और आज सीधा
  916. 37:40वह उसे शादी के लिए खड़ा होने के लिए बोल
  917. 37:42रहे थे। राघव ने गहरी सांस छोड़ी। वह अब
  918. 37:45पछता रहा था कि वह क्यों इस शादी को आया।
  919. 37:47वह अपनी मां की मना नहीं कर सकता था। आखिर
  920. 37:50उन्होंने ने उनके लिए क्या कुछ नहीं किया
  921. 37:52था। इस वजह से ना चाहते हुए भी उसे अपने
  922. 37:54कदम आगे बढ़ाने पड़े। वह जल्दी से उसकी
  923. 37:56मां के पास आया और उसे अंदर आया हुआ देख
  924. 37:59कहीं ना कहीं सुधा जी और मिश्रा सर को
  925. 38:01बहुत ही खुशी हुई। उनके मुस्कुराते हुए
  926. 38:03चेहरे को देख राघव थोड़े गुस्से से ही
  927. 38:05बोला। आपकी बात मैं टाल नहीं सकता। मोम
  928. 38:07इसी वजह से अंदर आ गया। लेकिन क्या आपको
  929. 38:10लगता है कि वह लोग अपनी बेटी की शादी
  930. 38:12मुझसे कराने के लिए तैयार होंगे। राघव का
  931. 38:15सवाल सुधा जी को हकीकत का एहसास दिला गया।
  932. 38:17उन्होंने उसे कसम तो दे दी थी कि उसे यह
  933. 38:19शादी करनी है। लेकिन उस लड़की के घर वाले
  934. 38:23क्या वह मानेंगे? अगर राहुल और रोहित का
  935. 38:25प्लान सक्सेसफुल हो गया और उन्होंने उस
  936. 38:27लड़की की शादी रोहित के साथ कर दी। तो यही
  937. 38:30सवाल अब सुधा जी के दिमाग में घूम रहे थे।
  938. 38:33उन्हें यूं फिक्रमंद हुआ देखकर मिश्र सर
  939. 38:35बोले आप फिक्र मत कीजिए। सुधा मैडम मैं उन
  940. 38:38लोगों से सिया के घर वालों से बात करूंगा।
  941. 38:40अब चलिए इससे पहले कि देर हो जाए। हम अंदर
  942. 38:43चलते हैं। मिश्रा जी की बात सुन सुधा जी
  943. 38:45ने अपनी अंदर जाने की स्पीड बाय और अंदर
  944. 38:47की ओर जाने लगे। लेकिन कहीं ना कहीं
  945. 38:49उन्हें थोड़ी देर हो ही गई थी। सिया पहले
  946. 38:52ही मंडप में आ गई थी और सभी को राहुल के
  947. 38:54गायब होने की खबर भी मिल गई थी। शादी में
  948. 38:56आए सभी लोग अलग-अलग बातें बना रहे थे।
  949. 38:59जिसे सुनते हुए मिश्रा सर, सुधा जी और
  950. 39:01राघव अंदर गए। सिया अपनी दोनों सहेलियों
  951. 39:03के साथ स्टेज पर घबराई हुई खड़ी थी। भले
  952. 39:06ही वह घूंघट में धकी हुई थी, लेकिन फिर भी
  953. 39:08उसका कांपना नीचे खड़े सभी को महसूस हो
  954. 39:10रहा था। मिश्रा सर ने वहीं मौजूद किसी को
  955. 39:13सबही के बारे में पूछा और फिर उन्होंने
  956. 39:15कुछ कहते हुए एक कमरे की ओर इशारा किया।
  957. 39:18मिश्रा सर सुधा जी और ना चाहते हुए राघव
  958. 39:20भी वह चला गया और अंदर जाते ही उसके कानों
  959. 39:22पर जो लफज टकराए उसे सुन राघव को बड़ा ही
  960. 39:25गुस्सा आया। मिसेस मिश्रा बहुत गुस्से में
  961. 39:27सिया के सभी घर वालों को बातें सुना रही
  962. 39:29थी और वही वह सभी हाथ जोड़कर खड़े चुपचाप
  963. 39:31बातें सुन रहे थे। मिस मिश्रा फिर आगे
  964. 39:34गुस्से से बोली यह इस तरह हाथ जोड़कर खड़े
  965. 39:36रहने से कुछ नहीं होगा। सब आपकी ही गलती
  966. 39:39है। आपने इतना बड़ा सच हमसे क्यों छुपाया
  967. 39:41कि आपके घर की दोनों बेटियां अपने यारों
  968. 39:43के साथ घर से भाग गई है। और हां कही
  969. 39:46इसीलिए तो आपने इस शादी की जल्दी नहीं कर
  970. 39:48दी ना ताकि आप अपनी इस बेटी की करतूत भी
  971. 39:50छिपा सके। मिसेज मिश्रा की बात सुन बड़े
  972. 39:53पापा जल्दी से बोले नहीं समधन जी ऐसा कुछ
  973. 39:56भी नहीं है। हमारी सिया ऐसी नहीं है। आप
  974. 39:58मेहरबानी करिए। शादी मत तोड़िए और जमाई जी
  975. 40:01को वापस बुलाइए। बड़े पापा दिल ही दिल
  976. 40:03गुस्सा तो बहुत थे। लेकिन फिर भी वह अभी
  977. 40:06चुप थे। अगर यह शादी नहीं होती तो उनकी
  978. 40:08समाज में क्या इज्जत रह जाती। मिसेज
  979. 40:10मिश्रा बहुत ही खुश हुई उन्हें यूं
  980. 40:12गिदगिदाते हुए देख और फिर कुछ सोचने का
  981. 40:14नाटक करते हुए वह बोली, नहीं वह तो अब
  982. 40:17वापस नहीं आ सकता। उसने साफ-साफ मना किया
  983. 40:19है कि वह ऐसे घर से रिश्ता नहीं जोड़ेगा
  984. 40:22जहां की लड़कियां घर से भाग गई हो। लेकिन
  985. 40:25कहकर मिज मिश्रा कुछ पल रुकी। उनकी बातें
  986. 40:27सुन सभी को बहुत डर लग रहा था। मगर उनका
  987. 40:30लेकिन कहना सबको एक उम्मीद दिला गया।
  988. 40:32मिसेज मिश्रा ने फिर अपनी बात आगे बढ़ाते
  989. 40:35हुए जैसे उन पर एहसान कर रही हो इस अंदाज
  990. 40:37में बोली लेकिन मैं अपने बड़े बेटे की
  991. 40:39शादी आपकी बेटी से करवाने के लिए तैयार
  992. 40:41हूं। अब राहुल का वापस आना तो पॉसिबल नहीं
  993. 40:44है। इसी वजह से मैं अपने बेटे रोहित को इस
  994. 40:46शादी के लिए तैयार कर सकती हूं। हां, अगर
  995. 40:49वह तैयार हुआ तो वह क्या है ना। वह भी
  996. 40:51आपकी यू बेइज्जत हुई लड़की से शादी करने
  997. 40:53के लिए पहले मन ही करेगा। लेकिन मुझे यकीन
  998. 40:56है वह अपनी मां की बात भी नहीं तालगा।
  999. 40:58हीना रोहित क्या तुम अपनी मां की खातिर यह
  1000. 41:01शादी करोगे? मिज मिश्रा फिर वहीं मौजूद
  1001. 41:04अपने नाकारा बेटे के पास जाकर खड़ी हो गई।
  1002. 41:07सिया की रोहित से शादी यह बात गिरीश यानी
  1003. 41:10सिया के पापा को बिल्कुल अच्छी नहीं लगी
  1004. 41:12थी। लेकिन वह अपने बड़े भाई के आगे कुछ
  1005. 41:14बोल नहीं सकते थे। आखिर घर के सभी फैसले
  1006. 41:18वही तो लेते थे। रोहित ने भी पहले कुछ ऐसा
  1007. 41:20ही मुंह बनाया कि जैसे उसे यह शादी नहीं
  1008. 41:22करनी है। जिसे देख बड़े पापा बहत परेशान
  1009. 41:25हुए और बोले आप आप तैयार हो जाए रोहित जी
  1010. 41:28मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि मेरी सिया
  1011. 41:30आपके मर्जी के हिसाब से ही चलेंगी और और
  1012. 41:33हां आप इस शादी के बदले जो मांगेंगे वह भी
  1013. 41:35मैं देने को तैयार हूं। बस बड़े पापा का
  1014. 41:38ऐसा कहना और रोहित और मिसेज मिश्रा बहुत
  1015. 41:40ही खुश हुए। उन्हें भी तो यही चाहिए था और
  1016. 41:42उसी खुशी से रोहित हां बोलने को ही हुआ था
  1017. 41:44कि तब तक राघव अंदर आ गया। बड़े पापा के
  1018. 41:48सामने खड़े होकर वह गुस्से से बोला, आप
  1019. 41:50अपनी बेटी की शादी करवा रहे हैं या फिर
  1020. 41:53उसका सौदा कर रहे हैं। राघव का यह कहना
  1021. 41:56बड़े पापा को बहुत अपमानित कर गया। वहीं
  1022. 41:58मिसेस मिश्रा भी गुस्से से जल्दी से आगे आ
  1023. 42:00गई। पता नहीं यह लड़का कौन था और अगर उसने
  1024. 42:03कुछ ऐसा वैसे कह दिया तब उनका बना बनाया
  1025. 42:05हुआ प्लान बिगड़ जाता। वह उससे कुछ बोलने
  1026. 42:07को हुई। लेकिन उससे पहले ही मिश्रा सर
  1027. 42:10बोले सिया की शादी रोहित से नहीं होंगी।
  1028. 42:12अपने दोस्त मिश्रा की बात सुन बड़े पापा
  1029. 42:15उनके पास आए और बोले यह क्या कह रहा है
  1030. 42:17यार तू कम से कम हमारी इस दोस्ती के खातिर
  1031. 42:20तो तैयार हो जा इस शादी के लिए कितने लोग
  1032. 42:22बाहर आए हुए हैं और अगर यह शादी टूट गई तो
  1033. 42:25बहुत बदनामी होंगी यार मेरी मान जा इस
  1034. 42:27शादी के लिए बड़े पापा हाथ जोड़कर मिश्रा
  1035. 42:29सर के सामने खड़े हो गए वो मिश्रा सर को
  1036. 42:32बहुत अच्छे जानते थे इसी वजह से तो
  1037. 42:34उन्होंने सिया का रिश्ता उनके घर में तय
  1038. 42:35किया था और अब यह सब उन्हें समझ ही नहीं आ
  1039. 42:38रहा था कि वह क्या कहे मिश्रा सर ने उनके
  1040. 42:41जोड़े हुए हाथ को पकड़ा और मिसेज मिश्रा
  1041. 42:43को लगा कि वह शायद मन कर दे इस वजह से वह
  1042. 42:45जल्दी से बोली यह क्या कर रहे हैं जी आप
  1043. 42:48अपने दोस्त को यूं खुद के सामने हाथ
  1044. 42:50जोड़कर खड़ा करना अच्छी बात थोड़ी ही है
  1045. 42:53और हां अगर यह शादी नहीं हुई तो समाज में
  1046. 42:55इनके साथ-साथ हमारी भी तो बेइज्जती हो ही
  1047. 42:57जाएंगी ना आप मना मत कीजिए इस शादी को भाई
  1048. 43:01साहब हम तैयार है इस शादी के लिए चलिए
  1049. 43:03जल्दी बाहर मुहूर्त बीता जा रहा है मिसेज
  1050. 43:05मिश्रा ने खुद ही से सब कुछ डिसाइड कर
  1051. 43:07लिया और बाहर जाने के लिए भी मुनी बड़े
  1052. 43:09पापा खुश तो बहुत हुए लेकिन फिर फिर भी वह
  1053. 43:12अपने दोस्त के तरफ देखने लगे। मिश्रा सर
  1054. 43:15फिर बोले, मैंने भी मना नहीं किया इस शादी
  1055. 43:17के लिए। आज यहां सिया की शादी होंगी।
  1056. 43:19लेकिन रोहित के साथ नहीं बल्कि राघव के
  1057. 43:21साथ मिश्रा सर का यह कहना सभी को हैरत में
  1058. 43:24डाल गया। रोहित और मिज मिश्रा तो उन्हें
  1059. 43:26खा जाने वाली नजर से देखने लग गए। मिज
  1060. 43:29मिश्र फिर आगे आए और अपने गुस्से को किसी
  1061. 43:31तरह से दबाते ही बोली यह आप क्या कह रहे
  1062. 43:34हैं? और राघव कौन राघव? कहते हुए उनकी नजर
  1063. 43:38राघव के तरफ गई और वह कुछ बोलने को हुई।
  1064. 43:41मगर उनकी बात को काटते हुए मिश्रा सर फिर
  1065. 43:43से बोले देखो आनंद सिया की शादी रोहित से
  1066. 43:46नहीं हो सकती। सिया अभी सिर्फ 18 साल की
  1067. 43:49है और रोहित जल्द ही 37 साल का हो जाएगा।
  1068. 43:51उन दोनों में उम्र का काफी ज्यादा गैप है।
  1069. 43:54इसी वजह से मैं चाहता हूं कि यह शादी ना
  1070. 43:56हो बल्कि राघव और सिया की शादी हो जाए।
  1071. 43:58राघव बहुत हो अच्छा लड़का है और वह एक
  1072. 44:01बहुत काबिल और सक्सेसफुल डॉक्टर भी है।
  1073. 44:03उसका खुद का अपना हॉस्पिटल है। तो मैं
  1074. 44:05चाहूंगा कि तुम मेरी बात का मान रख लो और
  1075. 44:07राघव सिया के शादी के लिए तैयार हो जाओ।
  1076. 44:10मिश्रा जी का यह कहना उनके परिवार को
  1077. 44:12गुस्सा दिला गया तो वही बाकी सबको सोच में
  1078. 44:14डाल गया। गिरीश जी को भी राघव के बारे में
  1079. 44:17सुनकर और उसे देखकर बहुत अच्छा लगा था।
  1080. 44:19आखिर राघव सक्सेसफुल होने के साथ काफी गुड
  1081. 44:21लुकिंग भी तो था और आज तो वह दिखने के
  1082. 44:23मामले में कहर भी ढा रहा था। उसकी
  1083. 44:25पर्सनालिटी ही ऐसी थी कि जिससे अट्रैक्ट
  1084. 44:27हुए बगैर कोई नहीं रह पाता था। मिसेज
  1085. 44:30मिश्र ने एक नजर अपने पति को और फिर राघव
  1086. 44:33को देखा और गुस्से से कुछ बोलने को हुई।
  1087. 44:36लेकिन वह कुछ बोल पाती उससे पहले ही
  1088. 44:37प्रिया सिया की मां बोली हमें मंजूर है
  1089. 44:40मेरे सिया की शादी राघव जी के साथ ही
  1090. 44:42होंगी। वह सबसे पूछ नहीं रही थी बल्कि
  1091. 44:45सबको बता रही थी और जिस तरह से उन्होंने
  1092. 44:47मेरी सिया कहा था ना उस हिसाब से सबको
  1093. 44:50समझते देर नहीं लगी कि वह अब किसी की बात
  1094. 44:52नहीं मानेंगी। बड़े पापा को गुस्सा तो
  1095. 44:54बहुत आया लेकिन गिरीश जी को चुप देख वह
  1096. 44:56कुछ नहीं बोले और उन्होंने अपना सर हां
  1097. 44:58में हिला दिया। प्रिया जी फिर सुधा जी के
  1098. 45:01पास आ गई और उनके नजरों में का सवाल देख
  1099. 45:03सुधा जी बोली मैं राघव की मां हूं। उनका
  1100. 45:05इतना ही कहना कि प्रिया जी ने उनके आगे
  1101. 45:07हाथ जोड़ दिए और बोली बहन जी मेरा यकीन
  1102. 45:10कीजिए मेरी सिया बहुत अच्छी है और बहुत
  1103. 45:13पाक भी उसके बहनों ने ऐसा क्यों किया मैं
  1104. 45:15नहीं जानती लेकिन मैं यह पूरे यकीन के साथ
  1105. 45:18कह सकती हूं कि मेरे सिया का दमन बिल्कुल
  1106. 45:20पाक साफ है और वह आगे भी आपके लफ्जों के
  1107. 45:22बाहर नहीं जाएंगी। प्लीज उसे अपना लीजिए।
  1108. 45:25प्रिया के हाथ नीचे करते हुए सुधा जी बोली
  1109. 45:28आपको हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है बहन जी
  1110. 45:30मैं समझती हूं और आप बेफिक्र हो जाइए मेरे
  1111. 45:33घर में आपकी बेटी को पूरी इज्जत मिलेंगी
  1112. 45:35और घर की सबसे छोटी बहू होने का मान भी और
  1113. 45:37बस उनकी बात प्रिया जी को बहुत सुकून
  1114. 45:39पहुंचा गए घर की बाकी औरतों ने भी प्रिया
  1115. 45:42का साथ दिया और फिर किसी के पास कुछ कहने
  1116. 45:44के लिए बचा ही नहीं अब सब कुछ होने में ही
  1117. 45:46जमा था इस वजह से बड़े पापा भी इस शादी के
  1118. 45:48लिए मान गए और वह सभी राघव को लेकर मंडप
  1119. 45:51में आ गए राघव को दूल्हे की जगह देख पीठ
  1120. 45:54पीछे बातें तो बहुत बनी लेकिन मुंह पर कोई
  1121. 45:57कुछ नहीं कह पाया। मिश्रा जी ने सभी को
  1122. 45:59यही बताया कि उनके बेटे राहुल को कोई और
  1123. 46:01पसंद थी और वह किसी को बिना बताए ही शादी
  1124. 46:04से भाग गया। इसी वजह से आज सिया की शादी
  1125. 46:07राघव से होने जा रही है। मिसेज मिश्रा जो
  1126. 46:09सभी को यह बताने के लिए उतावली हो रही थी
  1127. 46:12कि सिया का चरित्र खराब है। इसी वजह से
  1128. 46:14उन्होंने यह शादी तोड़ दी। मगर उनका मकसद
  1129. 46:16पूरा होने से पहले ही मिश्रा जी ने अपने
  1130. 46:18बेटे को ही गलत साबित कर दिया और यही नहीं
  1131. 46:20कि सबके सामने बोल भी दिया। इस वजह से वह
  1132. 46:22कुछ नहीं कर पाए और गुस्से में वहां से
  1133. 46:24चली भी गई। प्रिया जी फिर सुधा जी के पास
  1134. 46:27आ गई और उनके नजरों में का सवाल देख सुधा
  1135. 46:30जी बोली मैं राघव की मां हूं। उनका इतना
  1136. 46:32ही कहना कि प्रिया जी ने उनके आगे हाथ
  1137. 46:34जोड़ दिए और बोली बहन जी मेरा यकीन कीजिए
  1138. 46:37मेरी सिया बहुत अच्छी है और बहुत पाक भी
  1139. 46:40उसके बहनों ने ऐसा क्यों किया? मैं नहीं
  1140. 46:42जानती। लेकिन मैं यह पूरे यकीन के साथ कह
  1141. 46:44सकती हूं कि मेरे सिया का दमन बिल्कुल पाक
  1142. 46:46साफ है और वह आगे भी आपके लफ्जों के बाहर
  1143. 46:49नहीं जाएंगी। प्लीज उसे अपना लीजिए।
  1144. 46:51प्रिया के हाथ नीचे करते हुए सुधा जी बोली
  1145. 46:54आपको हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है बहन जी
  1146. 46:56मैं समझती हूं और आप बेफिक्र हो जाइए मेरे
  1147. 46:59घर में आपकी बेटी को पूरी इज्जत मिलेंगी
  1148. 47:01और घर की सबसे छोटी बहू होने का मान भी और
  1149. 47:04बस उनकी बात प्रिया जी को बहुत सुकून पहन
  1150. 47:06पहुंचा गए घर की बाकी औरतों ने भी प्रिया
  1151. 47:08का साथ दिया और फिर किसी के पास कुछ कहने
  1152. 47:10के लिए बचा ही नहीं अब सब कुछ होने में ही
  1153. 47:12जमा था इस वजह से बड़े पापा भी इस शादी के
  1154. 47:15लिए मान गए और वह सभी राघव को लेकर मंडप
  1155. 47:17में आ गए राघव को दूल्हे की जगह देख पीठ
  1156. 47:20पीछे बातें तो बहुत बनी लेकिन मुंह पर कोई
  1157. 47:23कुछ नहीं कह पाया। मिश्रा जी ने सभी को
  1158. 47:26यही बताया कि उनके बेटे राहुल को कोई और
  1159. 47:28पसंद थी और वह किसी को बिना बताए ही शादी
  1160. 47:31से भाग गया। इसी वजह से आज सिया की शादी
  1161. 47:33राघव से होने जा रही है। मिज मिश्रा जो
  1162. 47:36सभी को यह बताने के लिए उतावली हो रही थी
  1163. 47:38कि सिया का चरित्र खराब है। इसी वजह से
  1164. 47:40उन्होंने यह शादी तोड़ दी। मगर उनका मकसद
  1165. 47:42पूरा होने से पहले ही मिश्रा जी ने अपने
  1166. 47:44बेटे को ही गलत साबित कर दिया और यही नहीं
  1167. 47:47कि सबके सामने बोल भी दिया। इस वजह से वह
  1168. 47:49कुछ नहीं कर पाए और गुस्से में वहां से
  1169. 47:51चली भी गई। घूंघट की आछिपी सिया चुपचाप
  1170. 47:54स्टेज पर खड़ी भरी आंखों से अब तक मिलते
  1171. 47:56तानों को सुन रही थी। उसे काफी पहले ही
  1172. 47:58स्टेज पर बुला लिया था और यहां आने के बाद
  1173. 48:01उसे पता चला था कि उसका होने वाला पति कब
  1174. 48:04का भाग गया है। उसकी फैमिली में से किसी
  1175. 48:06ने भी यह जरूरी नहीं समझा कि वह उसके साथ
  1176. 48:08वहां खड़े रहे या फिर उसे वहां से अंदर ले
  1177. 48:11जाए। एक-एक कर वह सभी किसी कमरे में चले
  1178. 48:13गए। तब तक सिया अकेले ही स्टेज पर खड़ी
  1179. 48:16लोगों में हो रही बातें सुनने लगी। कोई
  1180. 48:17उसे ताने दे रहा था तो कोई उसके नसीब को
  1181. 48:20कोस रहा था। किसी को उसके लिए बुरा लग रहा
  1182. 48:22था तो किसी को उस पर हंसी आ रही थी और इन
  1183. 48:25सब बातों की वजह से सिया का मजूक दिलकांश
  1184. 48:27की तरह टूट रहा था। फिर कुछ देर बाद सब
  1185. 48:30स्टेज पर आ गए और ऐलान कर दिया कि उसकी
  1186. 48:32शादी अब दूसरे लड़के से होने वाली है।
  1187. 48:34दूसरा सिया के दिल में सबसे पहले ख्याल
  1188. 48:37आया वह राहुल के बड़े भाई रोहित का और वह
  1189. 48:39डर से कांप उठी नहीं। वह ऐसा नहीं चाहती
  1190. 48:42थी। रोहित से शासी करने से बेहतर है कि वह
  1191. 48:44अपनी जान दे दे और इसीलिए उसने वहां से
  1192. 48:47अपने कदम उठाना चाहा। लेकिन तभी मिश्रा जी
  1193. 48:49ने कहा कि उसकी शादी राघव से होने वाली है
  1194. 48:52और बस इतना ही नहीं उन्होंने निसिया पर
  1195. 48:54कोई इल्जाम ना लगाकर अपने बेटे को पूरा
  1196. 48:56दोष दिया। इस बात से सिया के कदम वहां रुक
  1197. 48:58गए और बाकी सब उसे हवकुंड की तरफ ले जाने
  1198. 49:01लगे। रुकी एक राघव की आई आवाज और सब ने
  1199. 49:04उसकी तरफ देखा। सिया के कदम भी ठिठक गए।
  1200. 49:07उस आवाज को सुन और उसके दिल में अनचाहा डर
  1201. 49:09बैठ गया। वह घबराते हुए वहीं खड़ी रही और
  1202. 49:11तभी उसे कोई अपने ठीक सामने खड़ा हुआ
  1203. 49:13महसूस हुआ। सुधा जी ने फिक्र से राघव से
  1204. 49:16पूछा, क्या हुआ राघव? क्यों रोका तुमने?
  1205. 49:20सुधा जी की आवाज सुन राघव ने उनके तरफ हाथ
  1206. 49:22किया और रुकने का इशारा किया। फिर सिया के
  1207. 49:25तरफ देखते हुए वह बोला, क्या तुम इस शादी
  1208. 49:27के लिए तैयार हो? राघव का सवाल सुन सिया
  1209. 49:30की आंखों में नमी छाने लगी। उसके अपनों ने
  1210. 49:32तक के यह सवाल पूछना जरूरी नहीं समझा था
  1211. 49:34कि क्या वह सच में शादी करना चाहती है और
  1212. 49:37ना जाने सामने खड़ा यह शख्स कौन है जो
  1213. 49:39उससे इतने अपनेपण से बात कर रहा है। उससे
  1214. 49:42उसकी मर्जी पूछ रहा है। उसके आंखों से नमी
  1215. 49:45लुढ़क कर नीचे आ गई। राघव को उसका कोई भी
  1216. 49:48जवाब नहीं मिला। मगर उसकी हल्की सी सिसकी
  1217. 49:51उसे सुनाई दी जिसे सुन उसे बहुत ही बुरा
  1218. 49:53लगा। वो फिर से फिक्र से बोला अगर तुम
  1219. 49:56नहीं चाहती कि यह शादी हो तो मेरा यकीन
  1220. 49:58करो। मैं यह शादी नहीं होने दूंगा ना ही
  1221. 50:00मुझसे और ना ही किसी और से तुम जो चाहोगी
  1222. 50:03वही होगा और वैसा ही होगा तो बताओ कि क्या
  1223. 50:06चाहती हो तुम राघव की बातों में अपनापन था
  1224. 50:09उसके लिए फिक्र थी और उतनी ही उसके लिए
  1225. 50:11इज्जत भी सिया को बहुत ही अपनापन महसूस
  1226. 50:13हुआ उसकी बातों से कृष्णा जी दिल ही
  1227. 50:16दिलसिया ने अपने भगवान कृष्णा जी को
  1228. 50:18पुकारा और उनसे बोली आपसे वादा किया था
  1229. 50:21मैंने कि जो भी हो मैं आज यह शादी करूंगी
  1230. 50:24और पूरे दिल से भी निभाऊंगी भी क्या आप यह
  1231. 50:26चाहते हैं कि मैं यह शादी करूं सिया खुद
  1232. 50:28से ही सवाल कर रही थी और तभी उसे उसके
  1233. 50:31बड़े पापा की आवाज सुनाई दी जिसे सुन वह
  1234. 50:33घबरा गई। उसके बड़े पापा राघव से बोले यह
  1235. 50:36क्या कह रहे हैं आप राघव जी आपने और आपकी
  1236. 50:40मां जी ने अंदर खुद ही इस शादी के लिए हां
  1237. 50:42कहा था और आप अब है कि बड़े पापा आगे कुछ
  1238. 50:45बोल पाते उससे पहले ही राघव ने उन्हें रोक
  1239. 50:47दिया और वह बोला इस शादी के लिए मैंने अब
  1240. 50:50भी मना नहीं किया है। एक मां चाहती है कि
  1241. 50:52मैं यह शादी करूं तो ऐसा ही होगा। लेकिन
  1242. 50:54इस शादी के लिए मेरे साथ-साथ सिया की
  1243. 50:56हांकी उतनी ही जरूरी है। कहकर राघव सिया
  1244. 50:59के तरफ मुड़ा और उससे फिर से सवाल करते
  1245. 51:01हुए बोला, "बताओ सिया, तुम्हारा क्या
  1246. 51:03फैसला है? क्या तुम मुझसे शादी करोगी?
  1247. 51:06क्या तुम मेरी हमसफर बनना चाहोगी?" राघव
  1248. 51:09ने कहते हुए जाने अनजाने ही सही उसके आगे
  1249. 51:12हाथ कर दिया और बिना कुछ कहे ही सिया ने
  1250. 51:14उसका हाथ अपने नाजुक हाथों में थाम लिया।
  1251. 51:16कुछ ही देर में शादी के सभी रस्में हुई और
  1252. 51:19सिया ऑफिशियली सिया से सिया राघव सक्सेना
  1253. 51:21हो गई। कृष्णा जी दिल ही दिलसिया ने अपने
  1254. 51:24भगवान कृष्णा जी को पुकारा और उनसे बोली
  1255. 51:27आपसे वादा किया था मैंने कि जो भी हो मैं
  1256. 51:30आज यह शादी करूंगी और पूरे दिल से भी
  1257. 51:32निभाऊंगी भी क्या आप यह चाहते हैं कि मैं
  1258. 51:34यह शादी करूं। सिया खुद से ही सवाल कर रही
  1259. 51:37थी और तभी उसे उसके बड़े पापा की आवाज
  1260. 51:39सुनाई दी जिसे सुन वो घबरा गई। उसके बड़े
  1261. 51:42पापा राघव से बोले यह क्या कह रहे हैं आप
  1262. 51:45राघव जी? आपने और आपकी मां जी ने अंदर खुद
  1263. 51:48ही इस शादी के लिए हां कहा था और आप अब है
  1264. 51:50कि बड़े पापा आगे कुछ बोल पाते उससे पहले
  1265. 51:53ही राघव ने उन्हें रोक दिया और वह बोला इस
  1266. 51:56शादी के लिए मैंने अब भी मना नहीं किया है
  1267. 51:58मां चाहती है कि मैं यह शादी करूं तो ऐसा
  1268. 52:00ही होगा लेकिन इस शादी के लिए मेरे
  1269. 52:03साथ-साथ सिया की हांकी उतनी ही जरूरी है
  1270. 52:05कहकर राघव सिया के तरफ मुड़ा और उससे फिर
  1271. 52:07से सवाल करते हुए बोला बताओ सिया तुम्हारा
  1272. 52:10क्या फैसला है क्या तुम मुझसे शादी करोगी
  1273. 52:13क्या तुम मेरी हमसफर बनना चाहोगी होंगी।
  1274. 52:16राघव ने कहते हुए जाने अनजाने ही सही उसके
  1275. 52:19आगे हाथ कर दिया और बिना कुछ कहे ही सिया
  1276. 52:21ने उसका हाथ अपने नाजुक हाथों में थाम
  1277. 52:23लिया। कुछ ही देर में शादी के सभी रस्में
  1278. 52:26हुई और सिया ऑफिशियली सिया से सिया राघव
  1279. 52:28सक्सेना हो गई। देखते ही देखते उसके विदाई
  1280. 52:30का वक्त हो गया और कभी नहीं तो आज। सिया
  1281. 52:33के पापा उसे गले से लगाकर रो पड़े। उसकी
  1282. 52:36मां चाची और बड़ी मां भी बहुत रोई। उसके
  1283. 52:38गले लग और उसका भाई शशांक भी। ऐसे ही आगे
  1284. 52:41बदसिया अपने सभी घर वालों से मिली और आखिर
  1285. 52:43में उसने अपने बड़े पापा के पैर छू लिए।
  1286. 52:45उन्होंने उसे उठाकर अपने गले से लगा लिया
  1287. 52:47और धीरे से बोले तुम जानती हो सिया मैंने
  1288. 52:50अपने सभी बच्चों में सबसे ज्यादा तुम्हें
  1289. 52:52प्यार किया है मगर तुमसे भी बढ़कर मुझे
  1290. 52:55अपने खानदान की इज्जत प्यारी है तुम जब तक
  1291. 52:57उस घर को अपना मानकर अच्छे से रहूंगी तब
  1292. 53:00तक ही तुम्हारे लिए इस घर के दरवाजे खुले
  1293. 53:02हैं जिस दिन किसी भी वजह से मैं फिर से
  1294. 53:04कहता हूं कि अगर किसी भी वजह से तुमने वह
  1295. 53:07घर छोड़ा या फिर कुछ ऐसी हरकत की जिस वजह
  1296. 53:09से हमें शर्मिंदा होना पड़े बस उसी वक्त
  1297. 53:12से तुम हमारे लिए मर जाऊंगी जिस तरह से वह
  1298. 53:14दोनों लड़कियां सिया मर गई। तुम पर यकीन
  1299. 53:16कर तुम्हें विदा कर रहा हूं। सिया मेरे इस
  1300. 53:18यकीन को मत तोड़ो। बड़े पापा ने कहकर सिया
  1301. 53:20के सर पर अपना हाथ रखा और उसे आशीर्वाद
  1302. 53:22देकर गाड़ी तक छोड़ने आ गए। उन्होंने सिया
  1303. 53:25के लिए गाड़ी का दरवाजा खोला और उसे अंदर
  1304. 53:28बैठने का इशारा किया। तभी सिया उनसे बोली,
  1305. 53:31मैं आपका यकीन नहीं तोडूंगी बड़े पापा और
  1306. 53:33घर को पूरे दिल से अपनाऊंगी। बस आप मुझसे
  1307. 53:36नाराज मत रहिए। सिया जानती थी कि उसके
  1308. 53:38बड़े पापा ने बहुत बार अपनी वसूलों को दूर
  1309. 53:41रखकर उन सभी की। स्पेशली सिया की हर एक
  1310. 53:44ख्वाहिश पूरी की थी और हर बार ना चाहते
  1311. 53:46हुए भी सिर्फ उनके खुशियों के लिए
  1312. 53:47उन्होंने हर एक बात मानी थी। मगर जब से
  1313. 53:49सिया की दोनों बड़ी बहनें घर से भाग गए
  1314. 53:52थे। बस तब से ही वह इतना बदल गए थे। सिया
  1315. 53:54ने उनकी तरफ देखते हुए उनका हाथ पकड़ा और
  1316. 53:56अगले ही फिर एक बार उसे अपने सर पर बड़े
  1317. 53:59पापा का हाथ महसूस हुआ और थोड़े रंधे गले
  1318. 54:01से बोले खुश रहो और फिर उन्होंने सिया को
  1319. 54:03अंदर बिठा दिया। वो राघव और सुधा जी के
  1320. 54:07सामने आए और बोले जमाई सा ख्याल रखिएगा
  1321. 54:10उसका। और फिर सुधा जी के तरफ देख उन्होंने
  1322. 54:12अपने हाथ जोड़ दिए। सुधा जी उनसे बोली आप
  1323. 54:15फिक्र मत कीजिएगा संधि जी आपकी बेटी अब
  1324. 54:17हमारी जिम्मेदारी है और हम उसका अच्छे से
  1325. 54:20ख्याल रखेंगे। सुधा जी भी फिर सबसे मिली
  1326. 54:22और उन्होंने उन सब से विदा ले ली। सिया और
  1327. 54:25सुधा जी पीछे बैठे थे और राघव आगे कार
  1328. 54:27ड्राइव कर रहा था। तीनों भी फिलहाल बहुत
  1329. 54:29खामोश थे। उन तीनों के दिल में अलग-अलग
  1330. 54:32बातें चल रही थी। इस वजह से उनमें से किसी
  1331. 54:35ने भी कुछ नहीं कहा। कुछ ही देर में सुधा
  1332. 54:37जी को कविता जी का फोन आया और रिंग होते
  1333. 54:39फोन की वजह से वह अपने ख्यालों से बाहर आ
  1334. 54:41गए जब शादी शुरू थी तभी उन्होंने ने घर पर
  1335. 54:44फोन कर राघव के शादी के बारे में बता दिया
  1336. 54:46था और सिया के वेलकम की छोटी-मोटी तैयारी
  1337. 54:49करने के लिए भी बोल दिया था यह सब सुनकर
  1338. 54:51सब तो बहुत हैरान थे मगर फिर भी उन्होंने
  1339. 54:53थोड़ी बहुत तैयारी कर दी थी सुधा जी ने
  1340. 54:56फोन रिसीव किया और बोले हां कविता बोलो
  1341. 54:59पूर्णविराम उद्धारण चिन्ह सामने से कविता
  1342. 55:02जी बोली जी भाभी आप कब तक आ रही है तैयारी
  1343. 55:05तो वैसे हो गई है और राज, अक्षय और कृष्णा
  1344. 55:08तीनों भी घर आ गए हैं। मगर मोहल्ले की कुछ
  1345. 55:10लेडीज भी आई हुई है। क्या यह ठीक रहगा ना?
  1346. 55:13कविता जी ने थोड़े धीरे से ही कहा। सुधा
  1347. 55:16जी को भी यह समझ आ गया कि वह धीरे से
  1348. 55:18क्यों बात कर रही है। जरूर मोहल्ले की
  1349. 55:19लेडीज वही आसपास ही होंगी। उन्होंने गहरी
  1350. 55:22सांस छोड़ी और फिर कविता जी से बोली, ठीक
  1351. 55:25है, कोई बात नहीं। वैसे भी यह बात आज ना
  1352. 55:27कल सभी को पता चलनी ही है। तो रहने दो और
  1353. 55:30हां, राज से कहकर उनके नाश्ते पानी का देख
  1354. 55:32लो। बाहर से ऑर्डर करना। किचन में मत घुस
  1355. 55:35जाना तुम। समझी सुधा जी ने एक दो और बातें
  1356. 55:37की और फिर कॉल कट कर दी। उनकी नजर चुपचाप
  1357. 55:40बैठे सिया पर और फिर ड्राइव कर रहे राघव
  1358. 55:42पर गई। आराम से बैठो सिया और हां घबराने
  1359. 55:45की जरूरत नहीं है। अब हम एक फैमिली है तो
  1360. 55:47फिल कंफर्टेबल। सुधा जी ने प्यार से सिया
  1361. 55:50से कहा और सिया ने हां में सर हिला दिया।
  1362. 55:52उसके लंबे घुंघट की वजह से उसका चेहरा
  1363. 55:54नहीं दिख रहा था और अब जाकर सुधा जी को
  1364. 55:56सिया का चेहरा देखने की तमन्ना हुई।
  1365. 55:58मिश्रा जी की बातों से यह तो जाहिर था कि
  1366. 56:00सिया बहुत ही संस्कारी और अच्छी बच्ची है।
  1367. 56:02लेकिन वो दिखती कैसी है? यह बात तो उन्हें
  1368. 56:05भी पता नहीं थी। इस वजह से उन्हें उसका
  1369. 56:07चेहरा देखने की तमन्ना हुई जिसे उन्होंने
  1370. 56:09अपने दिल में ही रखा। यह सोचकर कि घर जाकर
  1371. 56:12वह सबसे साथ ही उसकी मुंह दिखाई कर लेंगे।
  1372. 56:15कुछ ही देर में उनकी गाड़ी एक खूबसूरत से
  1373. 56:17घर के गेट के अंदर दाखिल हुई और सुधा जी
  1374. 56:19ने नीचे उतर कर सिया के तरफ का गेट खोल
  1375. 56:22दिया। वो उससे बोली, आओ सिया तुम्हारा
  1376. 56:24हमारे घर में स्वागत है। सुधा जी की बात
  1377. 56:26सुन। सिया धीरे-धीरे बाहर आए और उन्होंने
  1378. 56:28उसे सीधे राघव के पास ले जाकर दरवाजे के
  1379. 56:31सामने खड़ा कर दिया। कविता जी ने आरती की
  1380. 56:34थाल लाकर सुधा जी के पास दे दी और सुधा जी
  1381. 56:37ने आरती उतारकर सिया को चावल के कलश को
  1382. 56:39लाकर अंदर आने के लिए बोला। आसपड़ोस की
  1383. 56:41औरतें बस सिया के नाजुक काया को निहारने
  1384. 56:43में लगी हुई थी। और जब सिया ने कलश को
  1385. 56:46गिराने के लिए अपना पैर आगे किया तब उसके
  1386. 56:48खूबसूरत घोर पैर को देखकर हैरान हो गई या
  1387. 56:50फिर यह कहे कि सिया के गोर पैर में जचते
  1388. 56:52गोल्ड की उस हैवी से पायल को देख हैरान हो
  1389. 56:54गई। कलश को गिराते हुए ही सिया अंदर घर
  1390. 56:57में आए और फिर सुधा जी उसे अंदर ले गई।
  1391. 56:59कविता जी बोली राघव तुम और कविता जी एक पल
  1392. 57:03रुकी। राघव के दुल्हन का नाम क्या था? यह
  1393. 57:06तो उन्हें पता ही नहीं था। उन्हें यूं
  1394. 57:07खामोश हुआ देख राघव ही बोला सिया सिया नाम
  1395. 57:10है इसका। कविता जी मुस्कुराए और हां में
  1396. 57:13सर हिलाकर बोली तुम और सिया जाकर सबसे
  1397. 57:16पहले भगवान जी का आशीर्वाद ले लो। और फिर
  1398. 57:18सभी बड़ों का कविता जी की बात सुन। राघव
  1399. 57:20ने हां में सर हिलाया और आगे जाने के लिए
  1400. 57:22कदम बाए। लेकिन फिर कुछ सोचकर उसने सिया
  1401. 57:25का हाथ अपने हाथ में लिया और उसे घर में
  1402. 57:27बने मंदिर की ओर ले गया। उन दोनों को जाता
  1403. 57:29हुआ सब देखते ही रह गए। राघव सिया ने
  1404. 57:32भगवान के मूर्ति के आगे हाथ जोड़े और तभी
  1405. 57:35राघव उससे बोला डरने की कोई बात नहीं है
  1406. 57:38सिया फील कंफर्टेबल कोई तुमसे कुछ नहीं
  1407. 57:40कहेंगा। ओके। राघव की बात सुन सिया जल्दी
  1408. 57:44से उसकी तरफ मुड़ी और हां में सर हिला
  1409. 57:46दिया। वह खुद ही जानती थी कि कार में
  1410. 57:47बैठने के बाद से उसे कितना डर लग रहा था।
  1411. 57:50लेकिन उसके इस डर को बिना कहे ही राघव ने
  1412. 57:52समझ लिया था और अब उसे हौसला देकर उसे
  1413. 57:55शांत भी करवा दिया। सिया धीरे से
  1414. 57:57बुदबुदाई। थैंक यू। उसके यह लफ्ज इतने
  1415. 57:59धीरे थे कि राघव को कुछ सुनाई ही नहीं
  1416. 58:00दिया और वह उसकी ओर झुक कर बोला कुछ कहा
  1417. 58:03क्या? सिया हट बढ़ा गई। उसके यूं इस तरह
  1418. 58:06करीब आने पर और उसने जल्दी से ना में सर
  1419. 58:08हिलाया और एक कदम पीछे होने को हुई। राघव
  1420. 58:11को भी समझ आ गया कि वह कुछ ज्यादा ही उसके
  1421. 58:13करीब हो गया है। इस वजह से वह दूर हट गया
  1422. 58:16और बोला, "सॉरी वो मेरा तुम्हें डराने का
  1423. 58:18इरादा नहीं था। बस राघव को समझ नहीं आ रहा
  1424. 58:21था कि वह कैसे एक्सप्लेन करें। वह खामोश
  1425. 58:23हो गया। कोई बात नहीं सिया का फिर से वह
  1426. 58:26धीरे से गुनगुनाना जो अब भी राघव के कानों
  1427. 58:28तक नहीं पहुंचा। लेकिन उसने अब उसके करीब
  1428. 58:31झुकने की गलती नहीं की और उसके सामने हाथ
  1429. 58:33कर बोला चले। सिया ने भी फिर अपना हाथ
  1430. 58:36उसके हाथ में दे दिया और अंदर की ओर चले
  1431. 58:38गए। उसी वक्त बाहर हॉल में मोहल्ले की सभी
  1432. 58:41लेडी सिया के बारे में जानने के लिए
  1433. 58:43उत्सुक थी। उन्हीं में से एक मिसेज पटेल
  1434. 58:45बोली मिसेज सक्सेना राघव की शादी ऐसे
  1435. 58:48अचानक कैसे तय कर दिया आपने लव शव का तो
  1436. 58:51कोई चक्कर नहीं था ना नहीं मेरा मतलब ही
  1437. 58:54है कि आपके तीनों बड़े बेटे अब भी शादी के
  1438. 58:56बाकी है और घर के सबसे छोटे बेटे की शादी
  1439. 58:59यह बात कुछ रास नहीं आई मिसेज पटेल की बात
  1440. 59:03से सहमति जताते हुए और एक लेडीज मिसेज शाह
  1441. 59:05बोली लव शव ही होगा या फिर कहीं ऐसा तो
  1442. 59:08नहीं है ना लड़की के घर वालों को इन दोनों
  1443. 59:11के बारे में पता चल गया और फिर गुस्से में
  1444. 59:13उन्होंने ने इस लड़की की क्या नाम था?
  1445. 59:15हासिया की शादी कई और तय कर दी और फिर
  1446. 59:17आपने जाकर मिसेज शाह अपनी बात पूरी कर
  1447. 59:20पाती उससे पहले ही कृष्णा गुस्से से बोला
  1448. 59:22क्या आपको यह कोई फिल्म नजर आ रही है जो
  1449. 59:25इतनी फिल्मी स्टोरी आप बना रही है कृष्णा
  1450. 59:28की गुस्से भरी आवाज सुन सुधा जी ने उसे
  1451. 59:30पुकारा और फिर मिसेज शाह और बाकी सबके तरफ
  1452. 59:33देखकर बोली आजकल के जमाने में कहा अरेंज
  1453. 59:35मैरिज होती है मिसेज शाह और अगर मैं गलत
  1454. 59:38नहीं हूं तो शायद आपके बेटे और हां आपकी
  1455. 59:40बेटी दोनों ने भी लव मैरिज ही की है ना तो
  1456. 59:43फिर मेरे बेटे की लव मैरिज का आप बखेड़ा
  1457. 59:45क्यों खड़ा कर रही है? सुधा जी की वह सख्त
  1458. 59:48आवाज सुन मिसेज शाह को भी गुस्सा आ गया और
  1459. 59:50वह बोली हां कि हे मेरे बच्चों ने लव
  1460. 59:53मैरिज लेकिन उसमें भी दोनों फैमिली की
  1461. 59:55रजामंदी थी आपकी तरह नहीं ऐसे अचानक पूर्ण
  1462. 59:58विराम उद्धारण चिन्ह मिसेज शाह पूरा बोल
  1463. 1:00:01भी नहीं पाई थी तब तक सुधा जी बोली अचानक
  1464. 1:00:04नहीं यह शादी पहले से ही होना तय थी राघव
  1465. 1:00:06ने हमें सिया के बारे में बताया था और हम
  1466. 1:00:09सुधा जी आगे बोल पाती उससे पहले ही शशांक
  1467. 1:00:12और आलोक सिया के भाई दरवाजे पर आ गए
  1468. 1:00:14उन्होंने से सबको नमस्ते बोला और फिर आगे
  1469. 1:00:16आगे आलोक बोला वो हम सीयू का सामान लेकर
  1470. 1:00:19आए थे। सॉरी वो आपका एड्रेस थोड़ा अंदर
  1471. 1:00:21होने की वजह से गाड़ियों की आने में
  1472. 1:00:23दिक्कत हो गई। हम आओ अंदर आओ आलोक और
  1473. 1:00:26शशांक सिया घर के मंदिर में आशीर्वाद लेने
  1474. 1:00:28गई है। आती ही होंगी। अब सुधा जी ने पहले
  1475. 1:00:31आलोक से कहा और शशांक जो इधर-उधर अपनी बहन
  1476. 1:00:33को तलाश रहा था उसे भी बता दिया।
  1477. 1:00:37एपिसोड 11 से 20 डिस्क्लेमर यह कहानी पूरी
  1478. 1:00:41तरह काल्पनिक है। यह सिर्फ दर्शकों के
  1479. 1:00:43मनोरंजन के लिए बनाई गई है। इसमें दर्शाए
  1480. 1:00:46गए सभी पात्र, नाम, उत्पाद और घटनाएं पूरी
  1481. 1:00:49तरह काल्पनिक है। यह कहानी किसी भी तरह से
  1482. 1:00:52किसी भी व्यक्ति के भावनाओं, प्रथाओं,
  1483. 1:00:54परंपराओं और विश्वासों के अपमान नहीं करती
  1484. 1:00:57है। और कहानी में बताए गए सभी चीजों का
  1485. 1:01:00मात्र कहानी के लेखक द्वारा बनाई गई लेखक
  1486. 1:01:02की अपनी एक कल्पना है। बैक टू स्टोरी।
  1487. 1:01:05मिसेज पटेल की बात से सहमति जताते हुए और
  1488. 1:01:08एक लेडीज मिसेज शाह बोली लव शव ही होगा या
  1489. 1:01:11फिर कहीं ऐसा तो नहीं है ना लड़की के घर
  1490. 1:01:13वालों को इन दोनों के बारे में पता चल गया
  1491. 1:01:15और फिर गुस्से में उन्होंने ने इस लड़की
  1492. 1:01:17क्या नाम था हासिया की शादी कहीं और तय कर
  1493. 1:01:20दी और फिर आपने जाकर मिसेज शाह अपनी बात
  1494. 1:01:23पूरी कर पाती उससे पहले ही कृष्णा गुस्से
  1495. 1:01:25से बोला क्या आपको यह कोई फिल्म नजर आ रही
  1496. 1:01:28है जो इतनी फिल्मी स्टोरी आप बना रही है
  1497. 1:01:31कृष्णा की गुस्से भरी आवाज सुन सुधा जी ने
  1498. 1:01:33उसे पुकारा और फिर मिसेज शाह और बाकी सब
  1499. 1:01:36के तरफ देखकर बोली आजकल के जमाने में कहा
  1500. 1:01:38अरेंज मैरिज होती है मिसेज शाह और अगर मैं
  1501. 1:01:41गलत नहीं हूं तो शायद आपके बेटे और हां
  1502. 1:01:43आपकी बेटी दोनों ने भी लव मैरिज ही की है
  1503. 1:01:45ना तो फिर मेरे बेटे की लव मैरिज का आप
  1504. 1:01:48बखेड़ा क्यों खड़ा कर रही है सुधा जी की
  1505. 1:01:51वो सख्त आवाज सुन मिसेज शाह को भी गुस्सा
  1506. 1:01:53आ गया और वह बोली हां कि हे मेरे बच्चों
  1507. 1:01:56ने लव मैरिज लेकिन उसमें भी दोनों फैमिली
  1508. 1:01:58की रजामंदी थी आपकी तरह नहीं ऐसे अचानक
  1509. 1:02:01पूर्ण विराम उद्धारण चिन्ह मिसेज शाह पूरा
  1510. 1:02:04बोल भी नहीं पाई थी। तब तक सुधा जी बोली
  1511. 1:02:07अचानक नहीं यह शादी पहले से ही होना तय
  1512. 1:02:09थी। राघव ने हमें सिया के बारे में बताया
  1513. 1:02:11था और हम सुधा जी आगे बोल पाती उससे पहले
  1514. 1:02:15ही शशांक और आलोक सिया के भाई दरवाजे पर आ
  1515. 1:02:17गए। उन्होंने से सबको नमस्ते बोला और फिर
  1516. 1:02:20आगे आलोक बोला वो हम सीयू का सामान लेकर
  1517. 1:02:22आए थे। सॉरी वो आपका यह ड्रेस थोड़ा अंदर
  1518. 1:02:25होने की वजह से गाड़ियों की आने में दिक्त
  1519. 1:02:26हो गई। हम आओ अंदर आओ आलोक और शशांक सिया
  1520. 1:02:30घर के मंदिर में आशीर्वाद लेने गई है आती
  1521. 1:02:33ही होंगी अब सुधा जी ने पहले आलोक से कहा
  1522. 1:02:35और शशांक जो इधर-उधर अपनी बहन को तलाश रहा
  1523. 1:02:37था उसे भी बता दिया जी नहीं आंटी हम सोच
  1524. 1:02:41रहे हैं कि पहले सारा सामान उतार देते
  1525. 1:02:44हैं। वो गाड़ियों को जाना है ना कहां रखें
  1526. 1:02:46सभी सामान। आलोक ने कहा और तभी उसकी नजर
  1527. 1:02:49राघव का हाथ थाम कर आते हुए सिया पर गई।
  1528. 1:02:52सिया अपने भाई शशांक को देखकर खुश हो गई
  1529. 1:02:54थी और आलोक पर नजर जाते ही थोड़ा डर भी
  1530. 1:02:57गई। शशांक के तरफ जाते उसके कदम रुक गए और
  1531. 1:02:59वह फिर से राघव के पास जाकर खड़ी हो गई।
  1532. 1:03:02आलोक की बात सुन मोहल्ले में की ही एक और
  1533. 1:03:05लेडी बोली सामान ऐसा कितना सामान ले आए हो
  1534. 1:03:08तुम नई दुल्हन का जरा हम भी तो देखे कहते
  1535. 1:03:11हुए वह बाहर की ओर जाने लग गई और उन्हें
  1536. 1:03:13देख बाकी सभी औरतें और घर वाले भी बाहर
  1537. 1:03:15चले गए। गाड़ियों की आवाज तो उन्होंने भी
  1538. 1:03:18सुनी थी। लेकिन वह गाड़ियां उन्हीं के घर
  1539. 1:03:20के सामने आकर खड़ी है। इस बात का अंदाजा
  1540. 1:03:22उन्हें नहीं था। बाहर आने के बाद सभी को
  1541. 1:03:25दो बड़े-बड़े ट्रक पूरी तरह सामान से भरे
  1542. 1:03:27हुए दिखाई दिए और एक ब्रांड न्यूकर भी
  1543. 1:03:29उन्हें दिखाई दी जिसे देख सब हैरान हो गए।
  1544. 1:03:32मिसेज मिश्रा ने सिया के फैमिली से ढेर
  1545. 1:03:34सारे दहेज की डिमांड की थी और उसके घर
  1546. 1:03:36वालों ने भी सभी डिमांड्स को पूरा किया
  1547. 1:03:38था। अब वही सामा उन्होंने राघव के घर भी
  1548. 1:03:40भिजवा दिया था। राघव ने इतने सारे चीजों
  1549. 1:03:43को देखा और गुस्से से बोला, "यह सब क्या
  1550. 1:03:45है आलोक?"
  1551. 1:03:46क्या तुम मुझे बताओगे? शशांक राघव का
  1552. 1:03:49गुस्सा देख डर गया और उसकी नजर सिया पर गई
  1553. 1:03:52जो डर से कांप रही थी। उसे बचपन से ही
  1554. 1:03:54किसी को गुस्से में या फिर ऊंची आवाज में
  1555. 1:03:56बात करता देख बहुत डर लगता था और अब भी
  1556. 1:03:58उसे राघव का गुस्सा देख डर लगने लग गया।
  1557. 1:04:01वह जल्दी से बोला जीजा जी यह सब सब सिया
  1558. 1:04:04के लिए है। हमारे वहां प्रथा होती है। हम
  1559. 1:04:06बेटियों को खाली हाथ ससुराल नहीं भेजते।
  1560. 1:04:08शशांत किसी भी तरह राघव का गुस्सा शांत
  1561. 1:04:11करना चाहता था। राघव के इस रूप को देख उसे
  1562. 1:04:13सिया के लिए बहुत बुरा लग रहा था। तभी
  1563. 1:04:16राघव बोला और हमारे यहां बहुएं अपने साथ
  1564. 1:04:19दहेज नहीं बस सबके लिए दिल में अपनापन और
  1565. 1:04:21बहुत सारा प्यार लेकर आती है। तो यह जो
  1566. 1:04:23कुछ भी सामान तुम लाए हो ना उसे वापस ले
  1567. 1:04:26जाओ। राघव की बात सुन शशांक को अब थोड़ा
  1568. 1:04:28बेहतर महसूस हुआ। तभी आलोक बोला ऐसे कसी
  1569. 1:04:32जीजा जी यह सब तो आलोक उसे समझाना चाहता
  1570. 1:04:35था कि उसका और सिया का इन सारी चीजों पर
  1571. 1:04:37हक है। मगर राघव ने हाथ दिखाकर उसे रोक
  1572. 1:04:40दिया और बोला यह सब वापस जा रहा है आलोक
  1573. 1:04:43और अब मैं कुछ सुनना नहीं चाहता। राघव की
  1574. 1:04:45बात सुन सुधा जी को ही बीच में गिरना पड़ा
  1575. 1:04:47और वह बोली आलोक बेटा राघव सही कह रहा है
  1576. 1:04:50हमें बस स्याही चाहिए तो यह सब तुम वापस
  1577. 1:04:52लेकर जाओ और चलो अब अंदर आओ मैं तुम्हें
  1578. 1:04:55बिना चाय नाश्ता किए हुए नहीं जाने दूंगी
  1579. 1:04:57सुधा जी फिर बाकी सबके साथ उन दोनों को भी
  1580. 1:04:59अंदर लेकर आ गई कविता जी ने राज अक्षय और
  1581. 1:05:03कृष्णा की मदद से सभी को चाय नाश्ता दिया
  1582. 1:05:05और अब सभी सिया का चेहरा देखने के लिए जिद
  1583. 1:05:08करने लगे सुधा जी के साथ-साथ बाकी सभी घर
  1584. 1:05:10वाले यहां तक कि राघव भी सिया का चेहरा
  1585. 1:05:12देखने लिए बेताब हो रहा था। भूनघट के आड़
  1586. 1:05:15में से उसे और सुधा जी को सिया के चेहरे
  1587. 1:05:17की झलक मिली थी। लेकिन उन्होंने भी अब तक
  1588. 1:05:19उसका पूरा चेहरा नहीं देखा था। इसी वजह से
  1589. 1:05:21सभी के बातों का मान रखते हुए सुधा जी आगे
  1590. 1:05:23आए और उन्होंने सिया के घंघट को हटा दिया
  1591. 1:05:26और बस पूरे हॉल में खामोशी छा गई। सिया का
  1592. 1:05:29चांद से भी ज्यादा प्यारा चेहरा देख बेहद
  1593. 1:05:31खूबसूरत चॉकलेटी आंखें। दूध सा गोरा रंग
  1594. 1:05:34और मक्खन सी मुलायम स्किन, छोटे करनेदार
  1595. 1:05:37ओठ और उसके ऊपर जचता वो छोटा सा तिल। मानो
  1596. 1:05:40उसे हर बुरी नजर से बचाने के लिए ही लगाया
  1597. 1:05:42गया हो। कमर तक आते बाल और उस पर सजाए गए
  1598. 1:05:45हुए गजरे। उस लाल रंग के शादी के जोड़े
  1599. 1:05:47में वह किसी खूबसूरत परी की तरह देख रही
  1600. 1:05:49थी। नाक में जचती ना, कानों में बड़े-बड़े
  1601. 1:05:52गोल्ड एयरिंग्स, गले में जचता वो बड़ा सा
  1602. 1:05:54गोल्ड का हार, चोकर और एक लंबा और एक छोटा
  1603. 1:05:57गोल्ड का मंगलसूत्र, हाथ में हरी चुइयों
  1604. 1:05:59के साथ जचते सोने के हैवी कंगन और पैरों
  1605. 1:06:02में भी पहनी हुई गोल्ड की पायल पहनी बैठी
  1606. 1:06:04हुई 18 साल की सिया बेहद खूबसूरत दिखाई दे
  1607. 1:06:06रही थी। वहां मौजूद सभी उसकी खूबसूरती और
  1608. 1:06:09उसने पहने हुए गहने देखकर काफी हैरान थे।
  1609. 1:06:12उन्हें तो क्या सुधा जी को भी बिलीव नहीं
  1610. 1:06:14हो रहा था कि सिया इतनी ज्यादा खूबसूरत
  1611. 1:06:16होंगी। दिल ही दिल उन्हें भी अपने फैसले
  1612. 1:06:18पर गर्व हुआ कि उन्होंने राघव को इस शाई
  1613. 1:06:20के लिए तैयार किया और यह इतनी प्यारी बहू
  1614. 1:06:22उनके घर में आ गई। एक-एक कर सभी सिया को
  1615. 1:06:25करीब आकर देखने लगे और उसकी तारीफ करने
  1616. 1:06:27लगे। वही सिया ने भी एक-एक कर उन सबके पैर
  1617. 1:06:29छूकर उनका दिल और भी जीत लिया। राघव दूर
  1618. 1:06:32से ही खड़ा होकर सिया को देख रहा था। हां,
  1619. 1:06:34वह जानता था कि सिया उम्र में छोटी है।
  1620. 1:06:37लेकिन अब उसके चेहरे को देख वह उसे
  1621. 1:06:39कंफ्यूजन हो गया कि क्या वाकई में उसने 18
  1622. 1:06:42साल भी पूरे किए हैं या नहीं। ऊपर से उसके
  1623. 1:06:44पहने हुए गहने जिसे देख राघव को सिया के
  1624. 1:06:46घर वालों पर बहुत ही गुस्सा आ गया। सिर्फ
  1625. 1:06:49इसीलिए कि उसके बड़ी बहनें अपनी प्यार के
  1626. 1:06:51साथ भाग कर दी गई है। सिया के पेरेंट्स
  1627. 1:06:53उसके साथ इस तरह से बिहेव कर रहे थे। अगर
  1628. 1:06:55वह उसकी शादी कराना ही चाहते थे तो कोई धन
  1629. 1:06:58का अच्छी फैमिली ढूंढते। यह इस तरह दहेज
  1630. 1:07:00के लालची फैमिली से उसका रिश्ता जोड़ने की
  1631. 1:07:02क्या जरूरत थी? बाहर खड़ी हुई सामान से
  1632. 1:07:05भरी हुई गाड़ियां और सिया को इतने ज्यादा
  1633. 1:07:07गहनों में सजा देख राघव को समझते देर नहीं
  1634. 1:07:10लगी कि इस सब की डिमांड भी उसके पहले होने
  1635. 1:07:12वाले ससुराल ने की थी और सिया के घर वालों
  1636. 1:07:14ने वह मान भी ली थी क्या उन्हें सिया को
  1637. 1:07:16कोई फिक्र नहीं थी। ऐसे ही कई सारे सवालात
  1638. 1:07:19उसके दिमाग में घूम रहे थे और अब उसे सर
  1639. 1:07:22दर्द होना शुरू हो गया था। राघव का बस
  1640. 1:07:24चलता तो वह उन सारी गहनों को भी लौटा
  1641. 1:07:26देता। लेकिन वह बिना सिया की मर्जी जाने
  1642. 1:07:28उन्हें वापस करने के लिए नहीं बोल सकता
  1643. 1:07:30था। इस वजह से खामोश ही रहा। अपनी बहन की
  1644. 1:07:33होती तारीफ देख आलोक और शशांक को बहुत
  1645. 1:07:35अच्छा लग रहा था। वहां आए सभी मेहमान भी
  1646. 1:07:38चले गए और अब उन्हें भी देर हो रही थी। इस
  1647. 1:07:40वजह से वह खड़े हुए और सिया के सर पर हाथ
  1648. 1:07:43रखकर उसे आशीर्वाद देकर सभी घर वालों से
  1649. 1:07:45बोले अब हम जाने की इजाजत चाहेंगे वो काफी
  1650. 1:07:48लेट हो रहा है ना। बस इसीलिए आलोक ने सभी
  1651. 1:07:51से इजाजत मांगी और सभी ने हां में सर हिला
  1652. 1:07:53दिया। आलोक फिर शशांत की ओर मुड़ा और बोला
  1653. 1:07:56सिया के कपड़ों की और जरूरतों के सामान की
  1654. 1:07:58बैग लेकर आओ। उसे देकर चलते हैं। उसकी बात
  1655. 1:08:01सुन। शशांक बाहर गया और एक-एक कर चारप बैग
  1656. 1:08:04लेकर आ गया। राघव की तरफ देखते हुए वह
  1657. 1:08:07बोला, वह आपका कमरा कहां है? मैं इतने
  1658. 1:08:09बग्स अंदर रख आता। शशांक की बात सुन
  1659. 1:08:12कृष्णा बोला, नहीं शशांक इसकी जरूरत नहीं
  1660. 1:08:15है। हम सारा सामान अंदर रख आएंगे। कृष्ण
  1661. 1:08:17की बात सुन उसने सिर्फ हां में सर हिलाया
  1662. 1:08:19और आलोक की ओर देखा। उन दोनों ने भी फिर
  1663. 1:08:21सभी बड़ों का आशीर्वाद लिया और चले गए। अब
  1664. 1:08:24सिया वहां अकेली थी और उसे अब थोड़ा डर सा
  1665. 1:08:27लग रहा था। अपने परिवार से दूर अनजान
  1666. 1:08:29लोगों में अनजान घर में रहने के सोच से ही
  1667. 1:08:32वह बेचैन हो रही थी और उसकी यही बेचैनी
  1668. 1:08:34कविता जी ने समझ ली वो उसके करीब आए और
  1669. 1:08:36प्यार से बोली सिया बेटा चलो आओ मैं
  1670. 1:08:39तुम्हें तुम्हारा कमरा दिखाती हूं फ्रेश
  1671. 1:08:41होकर तुम चेंज कर लेना ठीक है कविता जी का
  1672. 1:08:44ममता भरा स्पर्श और बातों में की मिठास
  1673. 1:08:46देख सिया को थोड़ा बेहतर फील हुआ और उसने
  1674. 1:08:48हां में सर हिलाया उनके साथ वह ऊपर के
  1675. 1:08:50मंजिल पर बने राघव के कमरे में गई कविता
  1676. 1:08:53जी ने उसे कमरा दिखाया और बोली जाओ जाकर
  1677. 1:08:56अच्छे से शावर लो और फ्रेश हो जाओ। मैं
  1678. 1:08:58तुम्हारी बैगस किसी से मंगवाती हूं। कविता
  1679. 1:09:00जी ने कहा और वापस जाने के लिए मुनि तब तक
  1680. 1:09:03कृष्णा और अक्षय सारे बैग्स लाकर ऊपर आ गए
  1681. 1:09:06थे। उन्होंने वह बैग दरवाजे में एक तरफ रख
  1682. 1:09:08दी और बाहर चले गए। कविता जी ने भी उसे
  1683. 1:09:10फ्रेश होकर आने का इशारा किया और वह नीचे
  1684. 1:09:12चली गई। सिया ने फिर उसकी बैग में से एक
  1685. 1:09:14साड़ी निकाली और बाथरूम में चली गई। कविता
  1686. 1:09:18जी के नीचे आते ही सुधा जी ने उन्हें और
  1687. 1:09:20बाकी सबको हर एक बात बतानी शुरू कर दी जो
  1688. 1:09:22वह बीती थी और उनकी बातों को सुन कविता जी
  1689. 1:09:25और संजय की को सिया के लिए बुरा लगा तो
  1690. 1:09:27बाकी तीनों भाइयों को गुस्सा आया राज राघव
  1691. 1:09:29के कंधे पर हाथ रखकर बोला आई एम सो प्राउड
  1692. 1:09:32ऑफ यू राघव तूने सिया से शादी कर बहुत ही
  1693. 1:09:34अच्छा काम किया है। राघव राज की बात सुन
  1694. 1:09:37फीकी सी मुस्कान मुस्कुराया और तीनों को
  1695. 1:09:39समझ आ गया कि वह राघव बहुत ही ज्यादा
  1696. 1:09:42डिस्टर्ब है। राघव ने फिर गहरी सांस छोड़ी
  1697. 1:09:44और एक नजर अपनी भाइयों की तरफ देखा।
  1698. 1:09:46कृष्णा से बोला कृष्ण मुझे कुछ काम है
  1699. 1:09:48बाहर चल जाकर आते हैं और फिर इजाजत लेने
  1700. 1:09:51के लिए राघव ने अपने घर के सभी बड़ों की
  1701. 1:09:53तरफ देख इजाजत ली कृष्णा और वह दोनों बाहर
  1702. 1:09:56चले गए वही राज और अक्षय आगे क्या करना है
  1703. 1:09:58यह सोचने लगे अब सिया वहां अकेली थी और
  1704. 1:10:01उसे अब थोड़ा डर सा लग रहा था अपने परिवार
  1705. 1:10:03से दूर अनजान लोगों में अनजान घर में रहने
  1706. 1:10:06के सोच से ही वह बेचैन हो रही थी और उसकी
  1707. 1:10:08यही बेचैनी कविता जी ने समझ ली वो उसके
  1708. 1:10:11करीब आई और प्यार से बोली सिया बेटा चलो
  1709. 1:10:14आओ मैं तुम्हें तुम्हारा कमरा दिखाती हूं
  1710. 1:10:16फ्रेश होकर तुम चेंज कर लेना। ठीक है।
  1711. 1:10:18कविता जी का ममता भरा स्पर्श और बातों में
  1712. 1:10:20की मिठास देख सिया को थोड़ा बेहतर फील हुआ
  1713. 1:10:23और उसने हा में सर हिलाया। उनके साथ वो
  1714. 1:10:25ऊपर के मंजिल पर बने राघव के कमरे में गई।
  1715. 1:10:28कविता जी ने उसे कमरा दिखाया और बोली जाओ
  1716. 1:10:31जाकर अच्छे से शावर लो और फ्रेश हो जाओ।
  1717. 1:10:33मैं तुम्हारी बैग्स किसी से मंगवाती हूं।
  1718. 1:10:35कविता जी ने कहा और वापस जाने के लिए
  1719. 1:10:37मुनी। तब तक कृष्णा और अक्षय सारे बैग्स
  1720. 1:10:40लाकर ऊपर आ गए थे। उन्होंने वह बैग्स
  1721. 1:10:42दरवाजे में एक तरफ रख दी और बाहर चले गए।
  1722. 1:10:44कविता जी ने भी उसे फ्रेश होकर आने का
  1723. 1:10:46इशारा किया और वह नीचे चली गई। सिया ने
  1724. 1:10:48फिर उसकी बैग में से एक साड़ी निकाली और
  1725. 1:10:50बाथरूम में चली गई। कविता जी के नीचे आते
  1726. 1:10:54ही सुधा जी ने उन्हें और बाकी सबको हर एक
  1727. 1:10:56बात बतानी शुरू कर दी जो वह बीती थी और
  1728. 1:10:58उनकी बातों को सुन कविता जी और संजय की
  1729. 1:11:00कुसिया के लिए बुरा लगा तो बाकी तीनों
  1730. 1:11:03भाइयों को गुस्सा आया। राज राघव के कंधे
  1731. 1:11:05पर हाथ रखकर बोला आई एम सो प्राउड ऑफ यू
  1732. 1:11:07राघव तूने सिया से शादी कर बहुत ही अच्छा
  1733. 1:11:09काम किया है। राघव राज की बात सुन फीकी सी
  1734. 1:11:13मुस्कान मुस्कुराया और तीनों को समझ आ गया
  1735. 1:11:15कि वह राघव बहुत ही ज्यादा डिस्टर्ब है।
  1736. 1:11:17राघव ने फिर गहरी सांस छोड़ी और एक नजर
  1737. 1:11:20अपनी भाइयों की तरफ देखा। कृष्णा से बोला
  1738. 1:11:22कृष्ण मुझे कुछ काम है बाहर। चल जाकर आते
  1739. 1:11:25हैं और फिर इजाजत लेने के लिए राघव ने
  1740. 1:11:27अपने घर के सभी बड़ों की तरफ देख इजाजत
  1741. 1:11:29ली। कृष्णा और वह दोनों बाहर चले गए। वही
  1742. 1:11:31राज और अक्षय आगे क्या करना है यह सोचने
  1743. 1:11:34लगे। सिया शावल लेकर बाहर आ गई थी और उसे
  1744. 1:11:37अब बहुत हल्का महसूस हो रहा था। उसका वह
  1745. 1:11:39शादी का जोड़ा और गहने यह कहने में गैर
  1746. 1:11:42नहीं होगा कि वह उसके वजन से ज्यादा थे और
  1747. 1:11:44अब वह सब निकालने के बाद सिया को काफी
  1748. 1:11:46अच्छा महसूस हो रहा था। उसने जल्दी से एक
  1749. 1:11:48लाल रंग की खूबसूरत सी साड़ी पहनी और अपना
  1750. 1:11:51छोटा मंगलसूत्र और बड़ा मंगलसूत्र गले में
  1751. 1:11:53रख बाकी ज्वेलरी अच्छे से बॉक्स एक्स में
  1752. 1:11:55पैक कर दी। सारे बग्स को एक और अच्छे से
  1753. 1:11:57सेट करके रख दिया और बेड पर जाकर बैठ गई।
  1754. 1:12:00उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें।
  1755. 1:12:03उसके पास उसका फोन भी नहीं था जिससे वह
  1756. 1:12:05अपने मां से या फिर अपने फ्रेंड्स से बात
  1757. 1:12:07कर सके। वह उदास सी वही बैठी रही। तभी उसे
  1758. 1:12:10दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी। सिया ने जल्दी
  1759. 1:12:12से अपना सर पल्लू से कवर किया और दरवाजे
  1760. 1:12:14की तरफ आकर उसे खोल दिया। छोटी मां कविता
  1761. 1:12:17की मुस्कुराते हुए अंदर आए और बोली, बहुत
  1762. 1:12:20प्यारी लग रही हो बेटा। लेकिन यह पल्ला
  1763. 1:12:22क्यों लिया? अगर ना भी लो तो कोई मसला
  1764. 1:12:25नहीं है। चलो अब नीचे चलते हैं। तुम्हें
  1765. 1:12:27भी तो पता चलना चाहिए ना कि तुम्हारे इस
  1766. 1:12:29नए घर में कौन-कौन है। छोटी मां के चेहरे
  1767. 1:12:32पर की मुस्कान देख सिया को बहुत ही अच्छा
  1768. 1:12:34और अपनापन महसूस हुआ। उसने हां में सर
  1769. 1:12:36हिलाया और उनके साथ बाहर जाने के लिए
  1770. 1:12:38निकली। तभी उसे कुछ याद आया और वह रुक गई।
  1771. 1:12:41छोटी मां को उसके रुकने का एहसास हुआ। इस
  1772. 1:12:43वजह से उन्होंने पीछे मुड़कर देखा और बोली
  1773. 1:12:46क्या हुआ बेटा? कोई प्रॉब्लम है क्या?
  1774. 1:12:49छोटी मां की बात सुन सिया उसकी मीठी सी
  1775. 1:12:51आवाज में बोली नहीं प्रॉब्लम नहीं है
  1776. 1:12:53लेकिन वो वो मेरी ज्वेलरी आंटी मैं आपको
  1777. 1:12:56क्या कहकर पुकारूं सिया को समझ ही नहीं आ
  1778. 1:12:59रहा था कि वो उन्हें क्या करके पुकारे और
  1779. 1:13:02उसका सवाल सुन छोटी मां मुस्कुराते हुए
  1780. 1:13:04बोली वैसे तो रिश्ते में मैं तुम्हारी
  1781. 1:13:06मामी और बुआ दोनों लगती हूं लेकिन सभी
  1782. 1:13:09बच्चे मुझे छोटी मां कहकर पुकारते हैं तो
  1783. 1:13:12तुम भी वही कहकर पुकारो छोटी मां की बात
  1784. 1:13:14सुन सिया ने हां में सर तो हिलाया लेकिन
  1785. 1:13:16उसके चेहरे पर कंफ्यूजन भी था और उसे
  1786. 1:13:18कंफ्यूज हुआ। देख छोटी मां मुस्कुराते हुए
  1787. 1:13:20बोली सिया मैं राघव की बुआ हूं। संजय भाई
  1788. 1:13:23मेरे सगे बड़े भाई है और सुधा भाभी मेरी
  1789. 1:13:26भाभी है। फिर आगे जाकर सुधा भाभी के भाई
  1790. 1:13:28अजय जी से मेरी शादी हो गई और मैं फिर
  1791. 1:13:30राघव की मामी बन गई। छोटी मां ने कहा और
  1792. 1:13:32फिर वह थोड़ी उदास हो गई। सिया को उनके
  1793. 1:13:35चेहरे पर हुए यह बदलाव समझ आ गए और वह
  1794. 1:13:38बोली क्या मैंने कुछ गलत कह दिया छोटी मां
  1795. 1:13:41आप इतनी उदास क्यों हो गई। सिया को समझ
  1796. 1:13:44नहीं आ रहा था कि उससे ऐसी कौन सी गलती हो
  1797. 1:13:46गई कि छोटी मां इतनी उदास हो गई और फिर
  1798. 1:13:48उसके चेहरे पर भी नाराजगी छा गई। छोटी मां
  1799. 1:13:50को उसका यूं उदास होना बिल्कुल अच्छा नहीं
  1800. 1:13:52लगा। सिया का फुल सा चेहरा एक पल में
  1801. 1:13:55मुरझा गया था। उन्होंने छोटी मां ने उसका
  1802. 1:13:58चेहरा अपने हाथ में थामा और प्यार से
  1803. 1:13:59बोली। नहीं सिया मैं तुम्हारी वजह से उदास
  1804. 1:14:03नहीं हूं। वह तो बस अक्षय और कृष्णा मेरे
  1805. 1:14:05दोनों बच्चे अभी तुम उनसे नीचे मिलूंगी
  1806. 1:14:08ही। वह जब दो साल के थे तब अजय जी का
  1807. 1:14:10देहांत हो गया और फिर हम यही आकर रहने
  1808. 1:14:12लगे। सुधा भाभी ने ही हमें उस वक्त संभाला
  1809. 1:14:14तो बस अब उनकी याद आ गई। इस वजह से थोड़ी
  1810. 1:14:17सी उदास हो गई मैं। वरना तो तुम्हारी वजह
  1811. 1:14:19से कुछ भी नहीं है। चलो अब छोड़ो भी यह
  1812. 1:14:21बातें। अब हम नीचे चलते हैं। छोटी मां आगे
  1813. 1:14:24जाने लगी। तभी सिया ने उन्हें पीछे से
  1814. 1:14:26आवाज दी। सिया फिर हिचकिचाते हुए उनसे
  1815. 1:14:29बोली, वो छोटी मां मेरी ज्वेलरी क्या आप
  1816. 1:14:31यह अपने पास रख देंगी? मुझे डर है कि मैं
  1817. 1:14:34कहीं इसे खो ना दूं। सिया ने मासूमियत से
  1818. 1:14:37कहा और छोटी मां को उस पर बहुत ही प्यार
  1819. 1:14:39आया। जाहिर सी बात है उनके घर में सभी
  1820. 1:14:41लड़के ही थे तो उन्हें लड़की की कमी बहुत
  1821. 1:14:43महसूस होती थी और अब सिया इतनी मासूम थी।
  1822. 1:14:46इतनी प्यारी थी कि बस उसे देखते ही छोटी
  1823. 1:14:48मां को लगा कि उनकी बेटी ना होने की कमी
  1824. 1:14:50पूरी हो गई। छोटी मां मुखसुराई और बोली,
  1825. 1:14:53एक काम करो यह सब तुम मां अपनी सासू मां
  1826. 1:14:56के पास दे दो। उनके कमरे का लॉकर सबसे सेफ
  1827. 1:14:58है तो वह वहां यह सारे ज्वेलरी रख देंगी।
  1828. 1:15:00छोटी मां की बात मानकर सिया ने हां में सर
  1829. 1:15:03हिलाया और सारे ज्वेलरी बॉक्सेस लेकर उनके
  1830. 1:15:05साथ नीचे आ गई। वहीं हॉल में पापा संजय
  1831. 1:15:08जी, मां सुधा जी और उनके साथ राज और अक्षय
  1832. 1:15:11बैठे थे। राघव और कृष्णा अब तक वापस नहीं
  1833. 1:15:13आए थे। सिया को नीचे आता देख सब बस उसे
  1834. 1:15:16देखते ही रह गया। बिना किसी मेकअप के उस
  1835. 1:15:18सिंपल से लुक में भी सिया बहुत अच्छी लग
  1836. 1:15:20रही थी और दिल ही दिल सब ने यह कहा कि
  1837. 1:15:22अच्छा हुआ इतनी कि इतनी प्यारी बच्ची उन
  1838. 1:15:24जल्लादों के घर नहीं गई। सिया ने सबकी तरफ
  1839. 1:15:26मुस्कुरा कर देखा और उसकी मुस्कान देख
  1840. 1:15:29सबके होठों पर भी स्माइल आ गई। सुधा जी ने
  1841. 1:15:32तो उसके करीब जाकर उसे नजर का टीका लगा
  1842. 1:15:34दिया। राघव के वक्त वह भी एक बेटी चाहती
  1843. 1:15:37थी। मगर राघव हो गया और अब उसके बीवी को
  1844. 1:15:40देख सुधा जी को भी ऐसा लगा कि उनके घर में
  1845. 1:15:42की बेटी की कमी पूरी हो गई। सिया ने फिर
  1846. 1:15:44झुककर मां के पैर छुए और अपने तरफ के
  1847. 1:15:46ज्वेलरी बॉक्स उन्हें देते हुए बोली वो यह
  1848. 1:15:48मेरे सारी ज्वेलरी है। मां छोटी मां ने
  1849. 1:15:51कहा कि मैं आपके पास दे दूं। आप आप इसे
  1850. 1:15:53अपने पास रख लीजिए ना। मुझसे यह संभाले
  1851. 1:15:55नहीं जाएंगे। सिया ने किसी तरह से डरते
  1852. 1:15:57हुए मगर प्यार से कहा और सुधा मां के
  1853. 1:15:59चेहरे पर मुस्कान आ गई। वो प्यार से बोली,
  1854. 1:16:02सिया तुम्हारे और राघव के कमरे में भी एक
  1855. 1:16:05लॉकर है। तुम अपनी यह सारी ज्वेलरी वही
  1856. 1:16:07रुको ताकि अगर कभी तुम्हें उसकी जरूरत हो
  1857. 1:16:09तो तुम्हें मुझसे मांगना ना पड़े। आओ मैं
  1858. 1:16:12दिखाती हूं कि वो लॉकर कहां है। मां सिया
  1859. 1:16:14को अपने साथ ले गई। छोटी मां भी उनके साथ
  1860. 1:16:16ही थी। सुधा मोम ने फिर ना सिर्फ सिया को
  1861. 1:16:18लॉकर और उसका कोड बताया बल्कि फिर
  1862. 1:16:20उन्होंने सिया के लिए कबोर्ड में जगह भी
  1863. 1:16:22खाली कर दी और तीनों ने मिलकर फिर सिया के
  1864. 1:16:24दो बैग जमे रखे हुए सामान को इंपैक्ट कर
  1865. 1:16:26दिया और बाकी कल के लिए छोड़ दिया। फिर वह
  1866. 1:16:29तीनों नीचे आए जहां छोटी मां ने उसे सिया
  1867. 1:16:32को पापा से राज और अक्षय से मिलाया। राघव
  1868. 1:16:34और कृष्णा कृष्णा भी उस वक्त आ गए और फिर
  1869. 1:16:37छोटी मां ने सिया को कृष्णा से भी मिला
  1870. 1:16:39दिया। वह दोनों आते वक्त दिन का पार्सल
  1871. 1:16:41लेकर आ गए थे। जिसे मां और छोटी मां दोनों
  1872. 1:16:43ने मिलकर सबको सर्व किया। सिया उनकी हेल्प
  1873. 1:16:46करना चाहती थी मगर उन्होंने उसे ऐसा करने
  1874. 1:16:48से मा कर दिया। हर रोज के जैसे ही हंसते
  1875. 1:16:51बातें करते हुए सबका खाना खत्म हुआ और
  1876. 1:16:54सिया बस उन सबको देखते ही रह गई। उन सभी
  1877. 1:16:56में आपस में बहुत प्यार था और उतनी ही एक
  1878. 1:16:58दूसरे के लिए इज्जत भी थी जो सिया को बहुत
  1879. 1:17:00ही ज्यादा खुश कर गई। मगर सुधा मोम की कही
  1880. 1:17:02आगे की बात उसे काफी डरा गई। वह प्यार से
  1881. 1:17:06बोली सिया तुम्हारे और राघव के कमरे में
  1882. 1:17:08भी एक लॉकर है। तुम अपनी यह सारी ज्वेलरी
  1883. 1:17:10वही रुको ताकि अगर कभी तुम्हें उसकी जरूरत
  1884. 1:17:13हो तो तुम्हें मुझसे मांगना ना पड़े। आओ
  1885. 1:17:15मैं दिखाती हूं कि वह लॉकर कहां है। मां
  1886. 1:17:17सिया को अपने साथ ले गई। छोटी मां भी उनके
  1887. 1:17:19साथ ही थी। सुधा मोम ने फिर ना सिर्फ सिया
  1888. 1:17:22को लॉकर और उसका कोड बताया बल्कि फिर
  1889. 1:17:24उन्होंने सिया के लिए कबोर्ड में जगह भी
  1890. 1:17:26खाली कर दी और तीनों ने मिलकर फिर सिया के
  1891. 1:17:28दो बाइक जमे रखे हुए सामान को इंपैक्ट कर
  1892. 1:17:30दिया और बाकी कल के लिए छोड़ दिया। फिर वह
  1893. 1:17:33तीनों नीचे आए जहां छोटी मां ने उसे सिया
  1894. 1:17:35को पापा से राज और अक्षय से मिलाया। राघव
  1895. 1:17:38और कृष्णा कृष्णा भी उस वक्त आ गए और फिर
  1896. 1:17:40छोटी मां ने सिया को कृष्णा से भी मिला
  1897. 1:17:42दिया। वह दोनों आते वक्त दिन का पार्सल
  1898. 1:17:45लेकर आ गए थे। जिसे मां और छोटी मां दोनों
  1899. 1:17:47ने मिलकर सबको सर्व किया। सिया उनकी हेल्प
  1900. 1:17:50करना चाहती थी। मगर उन्होंने उसे ऐसा करने
  1901. 1:17:52से मा कर दिया। हर रोज के जैसे ही हंसते
  1902. 1:17:55बातें करते हुए सबका खाना खत्म हुआ और
  1903. 1:17:57सिया बस उन सबको देखते ही रह गई। उन सभी
  1904. 1:17:59में आपस में बहुत प्यार था और उतनी ही एक
  1905. 1:18:02दूसरे के लिए इज्जत भी थी जो सिया को बहुत
  1906. 1:18:04ही ज्यादा खुश कर गई। छोटी मां सिया की
  1907. 1:18:06प्लेट में सब्जी डालते हुए बोली सिया तुम
  1908. 1:18:09कुछ खा क्यों नहीं रही हो? चलो जल्दी से
  1909. 1:18:12इसे खत्म करो। कहकर छोटी मां ने एक रोटी
  1910. 1:18:14भी सिया के प्लेट में डाल दी। जिसके बाद
  1911. 1:18:16सिया की शक्ल देखने लायक हो गई थी। पिछले
  1912. 1:18:18कुछ महीनों से वह जिन हालातों से गुजर रही
  1913. 1:18:21थी, उसके बाद उसका खाना बहुत ही कम हो गया
  1914. 1:18:23था। पूरे दिन में वह मुश्किल से एक रोटी
  1915. 1:18:25भी नहीं खाती थी और अब उसे एक ही वक्त में
  1916. 1:18:27अपने प्लेट में रखी गई एक और रोटी खानी
  1917. 1:18:29थी। वह किसी तरह से मुस्कुराई और उसने
  1918. 1:18:32खाने के लिए बाइट उठा दिया। राघव की नजरें
  1919. 1:18:35सिया का नाम सुनने के बाद उस पर ही टिकी
  1920. 1:18:37हुई थी और उसके चेहरे पर के आए एक्सप्रेशन
  1921. 1:18:39देख उसे हंसी आ गई। सिर्फ उसके ही नहीं
  1922. 1:18:41बाकी तीन भाइयों ने भी अपनी हंसी किसी तरह
  1923. 1:18:43से रोकी थी। सबका खाना होने के बाद भी
  1924. 1:18:46सिया अभी तक खाने में लगी हुई थी। एक-एक
  1925. 1:18:48कर सभी उठकर वहां से चले गए और छोटी मां
  1926. 1:18:50ने नजरों से ही राघव को उसके पास बैठने को
  1927. 1:18:52बोल। वो भी वहां से चली गई। सिया ने किसी
  1928. 1:18:55तरह से अपने प्लेट में से एक और बाइट
  1929. 1:18:57उठाया और उसे मुंह में डालने लगी। लेकिन
  1930. 1:18:59तब तक राघव ने उसका हाथ पकड़ लिया। जिससे
  1931. 1:19:02सिया कांप उठी। उसने सहमी नजरों से उसकी
  1932. 1:19:05तरफ देखा। राघव को उसने हुए बदलाव समझ में
  1933. 1:19:07आ गए। इस वजह से उसने उसके हाथ को छोड़ा
  1934. 1:19:10और बोला, "अगर खाया नहीं जा रहा है तो
  1935. 1:19:12रहने दो। जबरदस्ती खाने की कोई जरूरत नहीं
  1936. 1:19:15है।" राघव की बात सुन। सिया ने सिर्फ हां
  1937. 1:19:17में सर हिलाया और पानी का गिलास अपने मुंह
  1938. 1:19:19से लगाकर एक घुंट पानी पिया। वह खड़ी हुई
  1939. 1:19:22और उसने एक-एक कर टेबल पर की सभी प्लेट
  1940. 1:19:24जमा की और अंदर किचन में रखने लग गई। राघव
  1941. 1:19:26खामोशी से उसे देख रहा था। एक टीन एज की
  1942. 1:19:29लड़की में जो चंचलता होनी चाहिए थी। वो
  1943. 1:19:32सिया में दूर-दूर तक नहीं थी और साथ ही
  1944. 1:19:34में उसकी हेल्थ भी उसके एज के हिसाब से वह
  1945. 1:19:36काफी ज्यादा अंडरवेट थी और कमजोर भी। राघव
  1946. 1:19:38उसे तब तक देखता रहा जब तक वह उसके सामने
  1947. 1:19:40आकर खड़ी ना हो गई। राघव की इस तरह की
  1948. 1:19:44नजरों की वजह से सिया को काफी अनकंफर्टेबल
  1949. 1:19:46फील हो रहा था। वह सर झुकाकर उसके सामने
  1950. 1:19:48खड़ी हो गई और अपने साड़ी के आंचल से
  1951. 1:19:50खेलने लग गई। राघव एक पल कंफ्यूज हो गया
  1952. 1:19:53कि वह ऐसी क्यों कर रही है और फिर बाद में
  1953. 1:19:55उसे एहसास हुआ कि वह शायद उसके एक टक
  1954. 1:19:57देखने की वजह से असहज हो गई हो। उसने अपनी
  1955. 1:20:00नजरें फेर दी और उठकर सीधा अपने कमरे की
  1956. 1:20:02तरफ बढ़ गया। सिया को सुझा ही नहीं कि वो
  1957. 1:20:04अब क्या करें। वो हॉल में आ गई जहां छोटी
  1958. 1:20:07मां मोम और पापा बैठे ही कुछ बातें कर रहे
  1959. 1:20:10थे। सुधा मोम ने उसे देखा और मुस्कुरा कर
  1960. 1:20:13बोली सिया यहां आओ और हमारे पास बैठो।
  1961. 1:20:16उनकी बात सुन सिया ने सिर्फ हां में सर
  1962. 1:20:18हिलाया और उनके करीब आकार बैठ गई। कुछ देर
  1963. 1:20:20किसी को कुछ सुझा ही नहीं कि वह क्या कहे
  1964. 1:20:22और क्या नहीं। लेकिन आगे जो सुधा मोम ने
  1965. 1:20:25कहा उसे सुनसिया को थोड़ा डर लगने गया।
  1966. 1:20:27पहले तो उन्होंने नॉर्मल ही बातें सिया को
  1967. 1:20:29कही थी। वही बातें जो उसके मोम ने शादी से
  1968. 1:20:32पहले उसे कही थी। उस वजह से सिया को भी
  1969. 1:20:34कुछ नहीं लगा। लेकिन फिर आगे सुधा मोम ने
  1970. 1:20:36कहा कि अब से उसे और राघव को एक कमरे में
  1971. 1:20:39रहना है। तब जाकर डर की एक ठंडी लकीर उसके
  1972. 1:20:41जिस्म में दौड़ गई। छोटी मां और मोम उसे
  1973. 1:20:43ऊपर उसके और राघव के कमरे के बाहर छोड़कर
  1974. 1:20:46नीचे चली गई और सिया डर से वही कहदी
  1975. 1:20:48कांपती रही। उसे वह वक्त याद आया जब राहुल
  1976. 1:20:51के साथ उसका रिश्ता तय हुआ था। उनके
  1977. 1:20:54शॉपिंग के दौरान राहुल ने उसे किस करने की
  1978. 1:20:56कोशिश की थी। उसकी छुन से सिया को इतना
  1979. 1:20:59गंदा फील हुआ था कि वह किसी को बता भी
  1980. 1:21:01नहीं सकती थी। उसने किसी तरह से उसकी पकड़
  1981. 1:21:03से खुद को छुड़ा तो लिया। लेकिन उसके बाद
  1982. 1:21:06राहुल ने उससे कहा था कि वह उसे उनके
  1983. 1:21:08फर्स्ट नाइट पर बिल्कुल भी नहीं छोड़ेंगा।
  1984. 1:21:09उस हादसे के बाद सिया के दिल में खौफ बैठ
  1985. 1:21:12गया और फिर बची हुई कसर रोहित ने उसके साथ
  1986. 1:21:14बदतमीजी करके पूरी कर दी। रोहित की नजरें
  1987. 1:21:16उसे ऐसे घुर रही थी कि जैसे वह सिया को
  1988. 1:21:18पूरी तरह से खा जाएगा और फिर सिया के दिल
  1989. 1:21:20में बैठा हुआ डर और भी बढ़ गया। डर से
  1990. 1:21:23कांपती हुई सिया लखा गई और उसका धक्का पास
  1991. 1:21:26ही के टेबल को लगा। राघव ने उस चीज की
  1992. 1:21:28आवाज सुनी और जब बाहर आया तो उसे टेबल का
  1993. 1:21:31सहारा लेकर खड़ी हुई सिया दिखाई दी। उसने
  1994. 1:21:33उसे पकड़ कर संभालना चाहा। लेकिन फिर वह
  1995. 1:21:36रुक गया। उसे याद आया कि कैसे उसके छूने
  1996. 1:21:38पर सिया असहज महसूस करती है और अब उसकी जो
  1997. 1:21:41हालत थी उस हालत में वह उसे और असहज महसूस
  1998. 1:21:43नहीं कराना चाहता था। इस वजह से वह धीरे
  1999. 1:21:46से प्यार से उससे बोला सिया क्या तुम ठीक
  2000. 1:21:48हो? राघव की आवाज से सिया ने अपना चेहरा
  2001. 1:21:51ऊपर किया और उसकी आंसुओं से भरी आंखें देख
  2002. 1:21:54राघव को बहुत ही बुरा लगा। राघव बेहद आराम
  2003. 1:21:57से उससे सवाल करते हुए बोला, "क्या हुआ?"
  2004. 1:22:00और उसके लफ्जों में की फिक्र को समझ सिया
  2005. 1:22:02के आंखों से आंसू नीचे लुड आए। वह किसी
  2006. 1:22:04तरह हकलाते हुए बोली वो वो मैं हम मुझे
  2007. 1:22:08कुछ वह वक्त चाहिए सिया को सूझ नहीं रहा
  2008. 1:22:11था कि वह क्या कहे और क्या नहीं उसने
  2009. 1:22:13राहुल के बदतमीजी वाली बात सिर्फ अपने
  2010. 1:22:15दोनों सहेलियों को बताई थी और उसके बाद
  2011. 1:22:17उन्होंने ही उसे समझाया था कि अगर राहुल
  2012. 1:22:20उसके साथ कुछ करने लगे उसे कहना कि वह अभी
  2013. 1:22:22उन सारी चीजों के लिए तैयार नहीं है और
  2014. 1:22:24उसे वक्त चाहिए सिया ने उस बात को याद कर
  2015. 1:22:26राघव से कहा उसे लगा कि शायद वह भी वह सब
  2016. 1:22:29करे जो हर मैरिज का पल करता है। राघव ने
  2017. 1:22:32सवालिया नजरों से उसे देखा और सोचने लगा
  2018. 1:22:35कि वह किस बारे में बात कर रही है। मगर
  2019. 1:22:37उसे कुछ भी समझ नहीं आया। इस वजह से वह
  2020. 1:22:39उससे बोला पहले अंदर चलो और फिर मुझे
  2021. 1:22:42बताना कि तुम्हें किस चीज के लिए वक्त
  2022. 1:22:43चाहिए। राघव अंदर की तरफ आ गया और सिया ने
  2023. 1:22:46भी फिर किसी तरह से हिम्मत की और अंदर
  2024. 1:22:48दाखिल हो गई। वह दिल ही दिल लफ्ज़ों को
  2025. 1:22:50जोड़ रही थी कि राघव से किस तरह से बात
  2026. 1:22:53करें। राघव कुछ मिनट्स खामोशी से उसे
  2027. 1:22:55देखता रहा। मगर सिया कुछ कहने का नाम ही
  2028. 1:22:57नहीं ले रही थी। फिर राघव ने ही गहरी सांस
  2029. 1:23:00छोड़ी और बोला एक काम करो यहां सोते हुए
  2030. 1:23:02आराम से सोचो कि तुम्हें मुझसे क्या कहना
  2031. 1:23:05है और फिर सुबह आराम से बता देना नाउ गुड
  2032. 1:23:07नाइट राघव ने इशारे से उसे बेड के एक साइड
  2033. 1:23:10सोने के लिए बोल दिया और खुद भी जाकर
  2034. 1:23:12दूसरी साइड से सो गया फिलहाल वही कुछ
  2035. 1:23:15सोचने समझने के हालत में नहीं था शादी यह
  2036. 1:23:17लफज तो बहुत दूर का था उसने तो आज तक किसी
  2037. 1:23:20लड़की के बारे में सोचा भी नहीं था उसे तो
  2038. 1:23:22बस बेस्ट से भी बेस्ट डॉक्टर बनना था और
  2039. 1:23:25वह अपने उस सपने को जी रहा था सिया की
  2040. 1:23:27बेचैनी देखकर उसे एक पल लगा कि क्या वह
  2041. 1:23:30उनके शादी की फर्स्ट नाइट को लेकर डर रही
  2042. 1:23:32है। लेकिन फिर अगले ही पल उसने अपनी इस
  2043. 1:23:34सोच को बदल दिया। अब उन्हें मिले कुछ घंटे
  2044. 1:23:36ही हुए थे और भले ही वह शादी जैसे रिश्ते
  2045. 1:23:40में जुड़े हुए थे, लेकिन इतनी जल्दी उस
  2046. 1:23:41रिलेशन को थोड़ी ना शुरू कर सकते थे। उसे
  2047. 1:23:44लगा कि वही गलत सोच रहा है और शायद सिया
  2048. 1:23:46उससे कुछ और कहना चाहती है। इसी वजह से
  2049. 1:23:49उसने सिया को सुबह बताने के लिए बोल दिया।
  2050. 1:23:51कल सुबह-सुबह ही उसकी एक बहुत इंपॉर्टेंट
  2051. 1:23:53अपॉइंटमेंट थी और फिर बाद में बैक टू बैक
  2052. 1:23:56एक बड़ा ऑपरेशन और एक छोटा ऑपरेशन उसकी
  2053. 1:23:58नींद होना जरूरी थी और बस इसी वजह से वह
  2054. 1:24:01सीधा जाकर बेड की दूसरी ओर सो गया। सिया
  2055. 1:24:04अपने आंखों की खोल बंद करते हुए उसे ही
  2056. 1:24:06देखते रह गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह
  2057. 1:24:08कैसे रिएक्ट करें। राघव ने उसके साथ वह
  2058. 1:24:11रिलेशन नहीं बनाए इस वजह से खुश हो जाए।
  2059. 1:24:14या फिर उसने उससे ठीक से बात भी नहीं की।
  2060. 1:24:17इस वजह से नाराज हो जाए। वह वही खड़ी
  2061. 1:24:20सोचती रह गई और फिर राघव अपनी बंद आंखों
  2062. 1:24:22से ही बोला मुझे कल 7:00 बजे ही हॉस्पिटल
  2063. 1:24:24जाना है सिया तो कुआ तुम लाइट्स बंद कर
  2064. 1:24:26सोने की कोशिश करूंगी। राघव की बात सुन
  2065. 1:24:29सिया ने जल्दी से हां में सर हिलाया और झट
  2066. 1:24:32से आकर लाइट्स बंद कर वो बेड के दूसरे
  2067. 1:24:34हिस्से पर सो गई। थकी हुई तो वह भी बहुत
  2068. 1:24:37थी। इसलिए नरम बिस्तर पर गिरते ही उसे
  2069. 1:24:39नींद आ गई और वह महज 5 मिनट में ही गहरे
  2070. 1:24:41नींद में सो गई। उसके शांत चलती सांसों की
  2071. 1:24:43वजह से राघव को पता चल गया कि वह सो रही
  2072. 1:24:46है। उसने धीरे से अपनी आंखें खोली और सिया
  2073. 1:24:48को देखा। गहरी नींद में सोई हुई सिया इतनी
  2074. 1:24:50ज्यादा प्यारी और मासूम लग रही थी कि उसकी
  2075. 1:24:53नजरें बस उस पर ही टिक कर रह गई और ना
  2076. 1:24:55जाने कब उसे देखतेदेखते ही वह भी नींद की
  2077. 1:24:57आगोश में चला गया। अगली सुबह राघव हमेशा
  2078. 1:25:00अपने वक्त पर सुबह 5:30 बजे ही उठ गया।
  2079. 1:25:03उसकी आदत थी वह। रात चाहे वह कितना भी लेट
  2080. 1:25:06क्यों ना सोया हो। वह सुबह जल्दी उठ ही
  2081. 1:25:08जाता और आंखें खोलते ही उसकी नजर सबसे
  2082. 1:25:10पहले सिया पर गई जो उसी के तरफ चेहरा करके
  2083. 1:25:13सो रही थी। उसके चेहरे पर की मासूमियत देख
  2084. 1:25:15राघव के होठों पर भी स्माइल आ गई। वह नहीं
  2085. 1:25:17जानता था कि उनके रिश्ते का फ्यूचर कैसा
  2086. 1:25:19है। उसे आगे क्या करना चाहिए। मगर अब जब
  2087. 1:25:23उसने सिया के होठों पर वह प्यारी सी
  2088. 1:25:25स्माइल देखी तब उसके दिल में बस यही ख्याल
  2089. 1:25:27आया कि वह उसके स्माइल को हमेशा हमेशा
  2090. 1:25:29संभाल कर रखगा। सिया अपने आंखों की खोल
  2091. 1:25:32बंद करते हुए उसे ही देखते रह गई। उसे समझ
  2092. 1:25:35नहीं आ रहा था कि वो कैसे रिएक्ट करें।
  2093. 1:25:37राघव ने उसके साथ वो रिलेशन नहीं बनाए इस
  2094. 1:25:40वजह से खुश हो जाए या फिर उसने उससे ठीक
  2095. 1:25:43से बात भी नहीं की। इस वजह से नाराज हो
  2096. 1:25:45जाए। वो वही खड़ी सोचती रह गई और फिर राघव
  2097. 1:25:48अपनी बंद आंखों से ही बोला मुझे कल 7:00
  2098. 1:25:51बजे ही हॉस्पिटल जाना है सिया तो कुआ तुम
  2099. 1:25:53लाइट्स बंद कर सोने की कोशिश करूंगी। राघव
  2100. 1:25:56की बात सुन सिया ने जल्दी से हां में सर
  2101. 1:25:58हिलाया और झट से आकर लाइट्स बंद कर वह बेड
  2102. 1:26:00के दूसरे हिस्से पर सो गई। थकी हुई तो वह
  2103. 1:26:03भी बहुत थी। इसलिए नरम बिस्तर पर गिरते ही
  2104. 1:26:06उसे नींद आ गई और वह महज 5 मिनट में ही
  2105. 1:26:08गहरी नींद में सो गई। उसके शांत चलती
  2106. 1:26:10सांसों की वजह से राघव को पता चल गया कि
  2107. 1:26:12वह सो रही है। उसने धीरे से अपनी आंखें
  2108. 1:26:15खोली और सिया को देखा। गहरी नींद में सोई
  2109. 1:26:17हुई सिया इतनी ज्यादा प्यारी और मासूम लग
  2110. 1:26:19रही थी कि उसकी नजरें बस उस पर ही टिक कर
  2111. 1:26:21रह गई और ना जाने कब उसे देखतेदेखते ही वह
  2112. 1:26:24भी नींद की आगोश में चला गया। अगली सुबह
  2113. 1:26:27राघव हमेशा अपने वक्त पर सुबह 5:30 बजे ही
  2114. 1:26:30उठ गया। उसकी आदत थी वह रात चाहे वह कितना
  2115. 1:26:32भी लेट क्यों ना सोया हो। वह सुबह जल्दी
  2116. 1:26:35उठ ही जाता और आंखें खोलते ही उसकी नजर
  2117. 1:26:37सबसे पहले सिया पर गई जो उसी के तरफ चेहरा
  2118. 1:26:39करके सो रही थी। उसके चेहरे पर की
  2119. 1:26:41मासूमियत देख राघव के होठों पर भी स्माइल
  2120. 1:26:44आ गई। वह नहीं जानता था कि उनके रिश्ते का
  2121. 1:26:46फ्यूचर कैसा है। उसे आगे क्या करना चाहिए।
  2122. 1:26:49मगर अब जब उसने सिया के होठों पर वह
  2123. 1:26:51प्यारी सी स्माइल देखी तब उसके दिल में बस
  2124. 1:26:54यही ख्याल आया कि वह उसके स्माइल को हमेशा
  2125. 1:26:56हमेशा संभाल कर रखगा। राघव ने किसी तरह से
  2126. 1:26:59अपने आप को सिया के मुंह से निकाला और
  2127. 1:27:01उठकर उसके जिम में चला गया। उसके अक्षय और
  2128. 1:27:04कृष्णा पहले से ही वही थे। राघव के नजरों
  2129. 1:27:06को जब राज नहीं दिखा तब वह बोला राज भाई
  2130. 1:27:09कहां है? क्या वह अभी तक उठे नहीं है?
  2131. 1:27:12राघव का सवाल सुन अक्षय बोला, नहीं रात
  2132. 1:27:14में ही भाई को कोई इमरजेंसी आ गई थी तो वह
  2133. 1:27:17हॉस्पिटल चले गए। अक्षय का जवाब सुन राघव
  2134. 1:27:19ने सिर्फ हां सर हिलाया और अपनी एक्सरसाइज
  2135. 1:27:22करने लग गया। अक्षय और कृष्णा उससे कुछ
  2136. 1:27:25पूछना चाहते थे। लेकिन उनकी हिम्मत नहीं
  2137. 1:27:27हुई और वह भी अपना-अपना वर्कआउट करने में
  2138. 1:27:29लग गए। तकरीबन 1 घंटे तक पसीना बहाने के
  2139. 1:27:32बाद उन्होंने अपना वर्कआउट बंद कर दिया और
  2140. 1:27:34अपने-अपने कमरे की तरफ बढ़ गए। राघव के
  2141. 1:27:36कदम भी उसके कमरे की तरफ जाने लगे। लेकिन
  2142. 1:27:39फिर वह वैसे राज के कमरे की तरफ बढ़ गया।
  2143. 1:27:42वह सिया की नींद खराब नहीं करना चाहता था।
  2144. 1:27:44वह इतनी मासूमी से इतने सुकून के साथ सो
  2145. 1:27:46रही थी कि उसका दिल ही नहीं हुआ कमरे में
  2146. 1:27:48जाकर थोड़ा भी शोर करने का और उसे जगाने
  2147. 1:27:50का। राज के कमरे में फ्रेश होकर उसने उसी
  2148. 1:27:54के कपड़े पहन लिए और उसे आए हुए मेल चेक
  2149. 1:27:56करने में लग गया। तकरीबन 7:00 बजे वह कमरे
  2150. 1:27:58के बाहर निकला और किचन में जाने लगा।
  2151. 1:28:00ब्रेकफास्ट कर उसे तुरंत हॉस्पिटल के लिए
  2152. 1:28:02निकलना था। तेज कदमों से किचन में आते हुए
  2153. 1:28:06राघव सीधे फ्रिज की तरफ गया और जूस की
  2154. 1:28:08बोतल निकालते हुए बोला, छोटी मां मुझे
  2155. 1:28:10ब्रेड टोस्ट करके दे दीजिए। आज जल्दी
  2156. 1:28:13हॉस्पिटल जाना है। और हां कृष्णा भी मेरे
  2157. 1:28:15साथ आने वाला है। तो उसके लिए भी ब्रेड दे
  2158. 1:28:17दीजिए। प्लीज राघव ने कहते हुए पीनट बटर
  2159. 1:28:19निकाला और फ्रिज में से फ्रूट लेकर उन्हें
  2160. 1:28:21वाश करने में लग गया। सिया जो तब से उसकी
  2161. 1:28:24सारी हरकतें देख रही थी। उसे समझते देर
  2162. 1:28:27नहीं लगी कि राघव वो फ्रूट खाने के लिए कट
  2163. 1:28:29कर रहा है। वो उसे रोकते हुए बोली जी
  2164. 1:28:32सुनिए और उसकी उस मीठी सी आवाज से राघव के
  2165. 1:28:34हाथ रुक गए। वो पीछे मुदा और सिया को यहां
  2166. 1:28:37देख हैरान हो गया। हल्के पीले रंग की
  2167. 1:28:39साड़ी। खुले गीले बाल, माथे पर छोटी सी
  2168. 1:28:42बिंदी और उस पर लगाया कुमकुम जो इस बात को
  2169. 1:28:44बता रहा था कि जैसे वह अभी-अभी पूजा करके
  2170. 1:28:47आई है गले में जचता वह लंबा सा मंगलसूत्र
  2171. 1:28:49और सबसे अच्छा जो उसकी खूबसूरती में चार
  2172. 1:28:51चांद लगा रहा था। वह था उसके माथे में भरा
  2173. 1:28:54हुआ वो लाल सिंदूर। राघव की नजरें तो उस
  2174. 1:28:56पर से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी।
  2175. 1:28:58सिया की नेचुरल ब्यूटी तो कल के उस मेकअप
  2176. 1:29:00से भी अच्छी लग रही थी। राघव उसकी सिया की
  2177. 1:29:03खूबसूरती अपने नजरों से पीने में इस कदर
  2178. 1:29:06बिजी था कि उसे एहसास ही नहीं हुआ कि सिया
  2179. 1:29:08उसकी इन नजरों से बेचैन हो रही है। बेचारी
  2180. 1:29:10कहना क्या चाहती थी और उसकी नजरें देख कर
  2181. 1:29:13क्या रही थी जब आखिर उसे उसकी नजरें
  2182. 1:29:15बर्दाश्त नहीं हुई तो वह जल्दी से पलट गई
  2183. 1:29:17और अपनी बढ़ी हुई सांसों को कंट्रोल करने
  2184. 1:29:19लगी। उसके यूझट से पलटने से उसके बालों का
  2185. 1:29:22पानी उड़ा और राघव के चेहरे पर आ गया
  2186. 1:29:24जिससे राघव होश में आया और उसे समझ आ गया
  2187. 1:29:26कि वो क्या कर रहा था। राघव ने किसी तरह
  2188. 1:29:29अपना गला तराशा और बोला वो तुम यहां इतनी
  2189. 1:29:33सुबह क्या कुछ कह रही थी क्या तुम राघव को
  2190. 1:29:36समझ ही नहीं आया कि वह क्या कहे इस वजह से
  2191. 1:29:38उसने एक साथ कई सारे सवाल कर दिए उसके
  2192. 1:29:41इतने सारे सवालों को सुन सिया बिना उसके
  2193. 1:29:44तरफ देखे ही बोली वो आपको जल्दी हॉस्पिटल
  2194. 1:29:46जाना था ना इस वजह से मैं आपके लिए
  2195. 1:29:48ब्रेकफास्ट बनाने आई थी आप आप बस 5 मिनट
  2196. 1:29:51रुकिए मैं अभी सर्व करती हूं सिया ने कहा
  2197. 1:29:53और जल्दी-जल्दी अपने हाथ चलाने लग गई राघव
  2198. 1:29:57ने भी फिर वो फ्रूट्स वही रख दिए और बाहर
  2199. 1:29:59जाकर बैठ गया। कृष्णा और अक्षय भी उसके
  2200. 1:30:01पास आकार बैठ गए। तभी उनकी नजर मॉर्निंग
  2201. 1:30:03वाक से वापस आए। मॉम और डैड पर गई।
  2202. 1:30:05उन्होंने उन दोनों को मॉर्निंग विश किया
  2203. 1:30:07और फिर बैठने के लिए बोल दिया। सिया ने
  2204. 1:30:09किचन की खिड़की से उन्हें आते हुए देख
  2205. 1:30:11लिया था। इस वजह से उसने जल्दी से सबके
  2206. 1:30:13लिए चाय डाल दी और दूसरे काम करने में लग
  2207. 1:30:15गई। कृष्णा छोटी मां को आवाज देते हुए
  2208. 1:30:18बोला मां जल्दी ब्रेकफास्ट लेकर आइए। हमें
  2209. 1:30:21लेट हो रहा है। कृष्णा की आवाज सुन सिया
  2210. 1:30:23की कुछ सुझा ही नहीं कि वह क्या करें और
  2211. 1:30:25वह फिर तेजी से अपने हाथ चलाने लग गई।
  2212. 1:30:28राघव ने ब्रेड टोस्ट करके भी मांगे थे।
  2213. 1:30:30इसीलिए उसे लगा कि शायद उसे वही पसंद है।
  2214. 1:30:32इसी वजह से उसने जल्दी-जल्दी ब्रेड भी
  2215. 1:30:35टोस्ट कर दिए। उसी वक्त छोटी मां भी अपने
  2216. 1:30:37कमरे से बाहर आ गई। उन्होंने कृष्णा का
  2217. 1:30:40आवाज सुनी थी। इस वजह से वह गड़बड़ करते
  2218. 1:30:42हुए आए और बोली, कृष्णा, सॉरी बेटा। मैं
  2219. 1:30:45भूल गई थी कि तुम्हें जल्दी जाना है। बस
  2220. 1:30:47कुछ देर रुको। हां, मैं अभी कुछ
  2221. 1:30:48ब्रेकफास्ट बनाकर लाती हूं। छोटी मां
  2222. 1:30:51जल्दी-जल्दी अंदर किचन में जाने लगी लेकिन
  2223. 1:30:53उन्हें राघव ने रोक दिया और बोला छोटी मां
  2224. 1:30:56आराम से बैठिए अंदर सिया है वो वो
  2225. 1:30:58ब्रेकफास्ट बना रही है और राघव आगे कुछ
  2226. 1:31:01बोल पाता उससे पहले ही उसे पायल के झनकार
  2227. 1:31:04की आवाज आई और फिर सिया दिखाई दी जो अपने
  2228. 1:31:06हाथ में दो बॉल जिसे हा बाउल भी कहते लेकर
  2229. 1:31:09आ रही थी उसने जल्दी से उन्हें टेबले पर
  2230. 1:31:11रखा और फिर से अंदर गई एक के बाद एक कर
  2231. 1:31:13उसने दो-चार बॉल लाकर रखे और आखिर में चाय
  2232. 1:31:16की ट्रे लेकर आ गई। उसकी गड़बड़ सब हैरान
  2233. 1:31:19होकर देख रहे थे। सुधा मोम भी बेह तो
  2234. 1:31:21हैरान थी कि सिया ने इतने कम वक्त में
  2235. 1:31:23कितना कुछ बना दिया। सुबह जब वह मॉर्निंग
  2236. 1:31:26वाक के लिए जा रही थी। तभी सिया उन्हें
  2237. 1:31:28पूरी तरह से तैयार होकर बाहर आई हुई दिखी
  2238. 1:31:31और जब उन्होंने उससे पूछा कि वह इतनी
  2239. 1:31:33जल्दी क्यों उठी तब उसी ने बताया कि राघव
  2240. 1:31:35को जल्दी हॉस्पिटल जाना है। इस वजह से वह
  2241. 1:31:38उनके लिए ब्रेकफास्ट बनने के लिए उठी है।
  2242. 1:31:40सिया ने बहुत ही शर्माते हुए यह बात कही
  2243. 1:31:43थी। जिसे सुन मोम को बहुत ही अच्छा लगा।
  2244. 1:31:45वह उससे फिर बोली हम तुम्हें जो बनाना है
  2245. 1:31:48बनाओ लेकिन मैं और तुम्हारे डैड करीब 7:00
  2246. 1:31:50बजे के आसपास वाक से वापस आएंगे तो उस
  2247. 1:31:53वक्त हमारे लिए भी चाय बनाकर लाना सुधा
  2248. 1:31:55मोम की बात सुन सिया ने हां में सर हिलाया
  2249. 1:31:57और वो किचन की तरफ चली गई। मोम को बिल्कुल
  2250. 1:31:59नहीं लगा था कि सिया इतना कुछ बना देंगी।
  2251. 1:32:02सिया ने सबसे पहले तिन को चाय छान ली और
  2252. 1:32:05सबसे पहले डैड को देकर उनके पैर छू लिए।
  2253. 1:32:07सुधा मोम और छोटी मां को भी उसने चाय दी
  2254. 1:32:10और बारी-बारी उनके पैर छू लिए। फिर वह
  2255. 1:32:12जल्दी से टेबल के पास आए और उसने एक-एक कर
  2256. 1:32:14तीनों को ब्रेकफास्ट सर्व करना शुरू कर
  2257. 1:32:16दिया। उसने आज ब्रेकफास्ट में पोहा और
  2258. 1:32:18ओट्स बनाए थे और टोस्ट को पीनट, बटर और
  2259. 1:32:21जैम लगाकर भी उसने सर्व कर दिए थे। उसने
  2260. 1:32:23एक-एक कर तीनों को सर्व किया और फिर जूस
  2261. 1:32:25का ग्लास भी उन्हें दे दिया। उसका काम
  2262. 1:32:27करने का सलीखा इतना अच्छा और क्लीन था कि
  2263. 1:32:30सभी का दिल उसने एक ही पल में जीत लिया और
  2264. 1:32:32फिर उसके हाथ का ब्रेकफास्ट कर सबका दिल
  2265. 1:32:34तो और भी खुश हो गया। सिया अपने होठों पर
  2266. 1:32:36छोटी सी मुस्कान लिए सबको सर्व कर रही थी।
  2267. 1:32:39और उसकी यही मुस्कान ना सिर्फ उनका पेट
  2268. 1:32:41बल्कि उनके दिल को भी सुकून से भर रही थी।
  2269. 1:32:43सिया में इतनी ज्या पॉजिटिविटी थी कि सबको
  2270. 1:32:46भी उसके आसपास होने से बहुत अच्छा फील
  2271. 1:32:48हुआ। राघव का दिल भी बहुत खुश हो गया और
  2272. 1:32:51फिर पेट भर के ब्रेकफास्ट करने के बाद वह
  2273. 1:32:53ओठों पर स्माइल लिए हुए ही हॉस्पिटल के
  2274. 1:32:55लिए निकल। उसकी गड़बड़ सब हैरान होकर देख
  2275. 1:32:58रहे थे। सुधा मोम भी बहुत हैरान थी कि
  2276. 1:33:01सिया ने इतने कम वक्त में इतना कुछ कैसे
  2277. 1:33:03बना दिया। सुबह जब वह मॉर्निंग वॉक के लिए
  2278. 1:33:05जा रही थी। तभी सिया उन्हें पूरी तरह से
  2279. 1:33:08तैयार होकर बाहर आई हुई दिखी और जब
  2280. 1:33:11उन्होंने उससे पूछा कि वह इतनी जल्दी
  2281. 1:33:12क्यों उठी तब उसी ने बताया कि राघव को
  2282. 1:33:15जल्दी हॉस्पिटल जाना है। इस वजह से वह
  2283. 1:33:17उनके लिए ब्रेकफास्ट बनने के लिए उठी है।
  2284. 1:33:19सिया ने बहुत ही शर्माते हुए यह बात कही
  2285. 1:33:22थी जिसे सुन मोम को बहुत ही अच्छा लगा। वो
  2286. 1:33:24उससे फिर बोली हम तुम्हें जो बनाना है
  2287. 1:33:27बनाओ। लेकिन मैं और तुम्हारे डैड करीब
  2288. 1:33:297:00 बजे के आसपास वाक से वापस आएंगे। तो
  2289. 1:33:32उस वक्त हमारे लिए भी चाय बनाकर लाना।
  2290. 1:33:34सुधा मोम की बात सुन। सिया ने हां में सर
  2291. 1:33:36हिलाया और वह किचन की तरफ चली गई। मोम को
  2292. 1:33:38बिल्कुल नहीं लगा था कि सिया इतना कुछ बना
  2293. 1:33:40देंगी। सिया ने सबसे पहले तिन को चाय छान
  2294. 1:33:44ली और सबसे पहले डैड को देकर उनके पैर छू
  2295. 1:33:46लिए। सुधा मोम और छोटी मां को भी उसने चाय
  2296. 1:33:48दी और बारी-बारी उनके पैर छू लिए। फिर वह
  2297. 1:33:51जल्दी से टेबल के पास आए और उसने एक-एक कर
  2298. 1:33:53तीनों को ब्रेकफास्ट सर्व करना शुरू कर
  2299. 1:33:55दिया। उसने आज ब्रेकफास्ट में पोहा और
  2300. 1:33:57ओट्स बनाए थे। और टोस्ट को पीनट, बटर और
  2301. 1:34:00जैम लगाकर भी उसने सर्व कर दिए थे। उसने
  2302. 1:34:02एक-एक कर तीनों को सर्व किया और फिर जूस
  2303. 1:34:05का ग्लास भी उन्हें दे दिया। उसका काम
  2304. 1:34:06करने का सलीखा इतना अच्छा और क्लीन था कि
  2305. 1:34:09सभी का दिल उसने एक ही पल में जीत लिया और
  2306. 1:34:11फिर उसके हाथ का ब्रेकफास्ट कर सबका दिल
  2307. 1:34:13तो और भी खुश हो गया। सिया अपने होठों पर
  2308. 1:34:15छोटी सी मुस्कान लिए सबको सर्व कर रही थी
  2309. 1:34:18और उसकी यही मुस्कान ना सिर्फ उनका पेट
  2310. 1:34:20बल्कि उनके दिल को भी सुकून से भर रही थी।
  2311. 1:34:23सिया में इतनी ज्यादा पॉजिटिविटी थी कि
  2312. 1:34:25सबको भी उसके आसपास होने से बहुत अच्छा
  2313. 1:34:27फील हुआ। राघव का दिल भी बहुत खुश हो गया
  2314. 1:34:30और फिर पेट भर के ब्रेकफास्ट करने के बाद
  2315. 1:34:32वह होठों पर स्माइल लिए हुए ही हॉस्पिटल
  2316. 1:34:34के लिए निकल गया। वह सिया से बात करना
  2317. 1:34:36चाहता था लेकिन उसे अब जाने के लिए काफी
  2318. 1:34:39लेट हो रहा था। इस वजह से वह बिना कुछ
  2319. 1:34:41बोले ही चला गया। सिया की नजरें राघव को
  2320. 1:34:43तब तक देख रही थी जब तक वह उसकी नजरों से
  2321. 1:34:45ओझल ना हो गया और फिर उसने अपना ध्यान
  2322. 1:34:47अक्षय और बाकी सबके तरफ देना शुरू कर
  2323. 1:34:50दिया। अपने होठों पर प्यारी सी स्माइल लिए
  2324. 1:34:52वह बोली मां आप छोटी मां और डैड कब नाश्ता
  2325. 1:34:55करेंगे? मैं उस हिसाब से आपको सर्व कर
  2326. 1:34:58दूंगी। सिया की बात सुन सुधा मोम ने उसे
  2327. 1:35:00अपने नाश्ते का वक्त बताया। सिया ने उनकी
  2328. 1:35:02बात सुन हमें सर हिलाया और फिर किचन में
  2329. 1:35:05जाने लग गई। राघव का यूं बिना कुछ कहे
  2330. 1:35:08जाना किसी को भी अच्छा नहीं लगा था और उन
  2331. 1:35:10सभी को लगा कि शायद उस वजह से सिया नाराज
  2332. 1:35:12हो गई और अंदर किचन में जा रही है। कृष्णा
  2333. 1:35:14ने एक बार सबको और फिर सिया को जाते हुए
  2334. 1:35:17देखा और उसे आवाज देकर बुलाया सिया। सिया
  2335. 1:35:20उसकी आवाज सुन पीछे पलटी और अपनी नजरें
  2336. 1:35:22नीचे करते हुए बोली जी भैया क्या कुछ
  2337. 1:35:25चाहिए था? सिया का सवाल सुन कृष्णा ने ना
  2338. 1:35:28में सर हिलाया और आगे बोला नहीं वो बस
  2339. 1:35:30बताना चाहता था कि आज का ब्रेकफास्ट बहुत
  2340. 1:35:33अच्छा बना है। तुम बहुत अच्छी शेफ हो।
  2341. 1:35:35कृष्णा की बात से सहमति जताते हुए अक्षय
  2342. 1:35:37भी बोला हां सिया सच में तुमने ब्रेकफास्ट
  2343. 1:35:40बहुत ही अच्छा बनाया है। मजा आ गया खाकर
  2344. 1:35:42उन दोनों की तारीफ सुन सिया के होठों पर
  2345. 1:35:44बड़ी वाली स्माइल आ गई और फिर वो
  2346. 1:35:46मुस्कुराते हुए अंदर किचन में चली गई। खुश
  2347. 1:35:49थी वो क्योंकि आज ना जाने कितने वक्त बाद
  2348. 1:35:52उसने अपनी तारीफ सुनी थी। वैसे तो उसे कोई
  2349. 1:35:54फर्क नहीं गिरता था। कोई उसकी तारीफ करे
  2350. 1:35:56या ना करे और राघव के भी बिना कुछ कहे
  2351. 1:35:58जाने से उसे उतना कुछ नहीं लगा। उसके घर
  2352. 1:36:01में भी कोई जेंट्स किसी लेडीज की तारीफ
  2353. 1:36:03नहीं करता था तो उसके लिए राघव की तारीफ
  2354. 1:36:05करना या ना करना कोई बड़ी बात नहीं थी।
  2355. 1:36:07मगर अब कृष्णा और अक्षय ने की हुई उसकी
  2356. 1:36:09तारीफ उसे बहुत ही खुश कर गई। आखिर अपनी
  2357. 1:36:11तारीफ सुनना किसे पसंद नहीं है? उसके
  2358. 1:36:14पीछेछे छोटी मां भी किचन में आ गई और सिया
  2359. 1:36:17से बोली सिया जाओ बेटा तुम आराम करो।
  2360. 1:36:20शांति 9:00 9:30 तक आ जाएंगी और फिर किचन
  2361. 1:36:23और बर्तन कर लेंगी और कमला भी उसी वक्त तक
  2362. 1:36:25आती ही होंगी। वह सब घर की साफ सफाई और
  2363. 1:36:29कपड़े धो देंगी। वो क्या है ना मुझसे अब
  2364. 1:36:32पहले जैसा काम नहीं होता। इस वजह से भाभी
  2365. 1:36:34ने घर के ऊपर के सारे काम और रोटियां
  2366. 1:36:36बनाने के लिए बाई को लगाया हुआ है। शांति
  2367. 1:36:39ही किचन के सारे काम देखती है और फिर मैं
  2368. 1:36:41सब्जी बनती हूं। उन चारों को ना तो होटल
  2369. 1:36:43का खाना अच्छा लगता है और ना ही किसी और
  2370. 1:36:46के हाथों का। भाभी के हाथ के खाने को भी
  2371. 1:36:48उनकी नानू कुर चलती है। लेकिन क्या है ना
  2372. 1:36:50उनके सामने कोई कुछ बोल नहीं सकता ना। इस
  2373. 1:36:53वजह से सब चुपचाप खा लेते हैं। छोटी मां
  2374. 1:36:55खुशी-खुशी सिया से बात कर रही थी। सिया
  2375. 1:36:58इतनी प्यारी थी कि छोटी मां उससे बात करने
  2376. 1:37:00के लिए अपने आप को रोक ही नहीं पाई। सिया
  2377. 1:37:02भी मुस्कुराकर उनकी बात सुन रही थी। वैसे
  2378. 1:37:05तो उसके दिमाग में कई सवाल थे। लेकिन वह
  2379. 1:37:07थोड़ा झिझक रही थी। वह सवाल वो पूछे या
  2380. 1:37:09फिर ना पूछे। सिया की कशमकश छोटी मां को
  2381. 1:37:12समझ आ गई और उसका हाथ थामकर वह बोली मैं
  2382. 1:37:15ना तुम्हें घर में सबके बारे में बता
  2383. 1:37:17दूंगी लेकिन अभी नहीं थोड़ी देर बाद एक
  2384. 1:37:19बार सबको अपनेप काम पर जाने दो तब जाकर हम
  2385. 1:37:22दोनों आराम से बातें करेंगे हां सिया ने
  2386. 1:37:25उनकी बात सुन हमें सर हिलाया और बोली हम
  2387. 1:37:27चलेंगा छोटी मां लेकिन वो इनके और बाकी
  2388. 1:37:30सबके टिफिन का क्या मेरा मतलब हम कब
  2389. 1:37:33बनाएंगे या फिर यह घर पर ही आएंगे सिया ने
  2390. 1:37:36आखिर अपने दिल में चल रहा सवाल उनसे पूछ
  2391. 1:37:38ही लिया और छोटी मां अपने आप को
  2392. 1:37:40मुस्कुराने से नहीं रोक पाई। सिया ने बहुत
  2393. 1:37:42ही आसानी से ना सिर्फ राघव को बल्कि घर के
  2394. 1:37:45सभी मेंबर्स को अपना लिया था और यह उसके
  2395. 1:37:47बातों में उसके बर्ताव में साफ-साफ झलक
  2396. 1:37:49रहा था। छोटी मां बहुत ही खुश हो गई और
  2397. 1:37:52उससे बोली, तुम टिफिन को लेकर फिक्र मत
  2398. 1:37:54करो। सिया सबको उनका टिफिन वक्त पर मिल
  2399. 1:37:57जाएगा। शांति आने के बाद रोटियां बना
  2400. 1:37:59देंगी और फिर दोपहर 12:00 बजे के आसपास
  2401. 1:38:01में सब्जी बनाकर टिफिन पैक कर दूंगी। वो
  2402. 1:38:04राजू हिना हमारे हॉस्पिटल में ही काम करता
  2403. 1:38:06है। वह आकर सुधा भाभी भैया और बाकी सब का
  2404. 1:38:09टिफिन लेकर चला जाएगा। छोटी मां ने उसे
  2405. 1:38:11बताया और सिया के चेहरे पर शिकन छा गई।
  2406. 1:38:14क्या हुआ? कोई मसला है क्या सिया? छोटी
  2407. 1:38:17मां को समझ ही नहीं आया कि सिया परेशान
  2408. 1:38:19क्यों हो गई? इस वजह से उन्होंने उसका हाथ
  2409. 1:38:22थामते हुए उससे सवाल किया। उन्हें जवाब
  2410. 1:38:24देते हुए सिया बोली वो वो छोटी मां अगर
  2411. 1:38:27रोटियां अभी बनाएंगे तो दोपहर तक ठंडी हो
  2412. 1:38:29जाएंगी ना। क्या हम रोटियां बाद में डाल
  2413. 1:38:32दे? मैं बना दूंगी रोटी और सब्जी भी बना
  2414. 1:38:34दूंगी। आप बस मुझे बताना कि मैं क्या
  2415. 1:38:36बनाऊं और क्या नहीं। सिया जल्दी-जल्दी
  2416. 1:38:39बोली उसके घर में सभी जेंट्स हर वक्त
  2417. 1:38:41गरमगरम ही खाना खाते थे और घर की सभी
  2418. 1:38:44लेडीज भी इस बात का ध्यान रखती थी कि गलती
  2419. 1:38:46से भी उन्हें ठंडा खाना ना जाए। सिया पर
  2420. 1:38:48भी यही संस्कार हुए थे और पिछले कुछ दिनों
  2421. 1:38:50में तो उसे हर वक्त घर कैसा संभालना है और
  2422. 1:38:53कैसे घर की रिस्पांसिबिलिटी निभानी है यही
  2423. 1:38:55बताया जा रहा था। तो उसे भी वही आदत पद गई
  2424. 1:38:58थी। छोटी मां ने अपने सामने खड़ी उस छोटी
  2425. 1:39:01सी लड़की की तरफ देखा और जाने अनजाने ही
  2426. 1:39:03सही उनकी आंखों में आंसुओं की कुछ बूंदे आ
  2427. 1:39:05गई जिसे छिपाने की उन्होंने बड़ी ही
  2428. 1:39:07शिद्दत से कोशिश की लेकिन सिया ने वो आंसू
  2429. 1:39:10देख ही लिए। सिया जल्दी से उनके करीब आई
  2430. 1:39:13और बोली क्या हुआ छोटी मां? मुझसे कोई
  2431. 1:39:16गलती हो गई क्या? मैं सिया को समझ नहीं आ
  2432. 1:39:19रहा था कि वह क्या कहे या फिर क्या करें?
  2433. 1:39:22छोटी मां के आंखों में के आंसू उसे बेचैन
  2434. 1:39:24कर गए और फिर उसकी आंखें भी आंसुओं से भर
  2435. 1:39:26गई। छोटी मां ने सिया का हाथ पकड़ा और
  2436. 1:39:29बोली कुछ नहीं बेटा वो बस मगर आगे वह कुछ
  2437. 1:39:33कह पाती तब तक सुधा मोम वहां आ गई और छोटी
  2438. 1:39:36मां के आंखों में के आंसू उनसे छिप नहीं
  2439. 1:39:38पाए वो जल्दी से उनके पास आए और बोली
  2440. 1:39:40कविता क्या हुआ तुम रो क्यों रही हो और
  2441. 1:39:43सिया तुम भी क्या हुआ यहां सुधा मोम की
  2442. 1:39:46आवाज देखते ही देखते स्ट्रिक्ट हो गई और
  2443. 1:39:48सिया को काफी डर लगने लग गया उसे यूं डरता
  2444. 1:39:51देख छोटी मां जल्दी से बोली कुछ नहीं भाभी
  2445. 1:39:54बस बस में खुश हूं ना इस वजह से यह आंसू आ
  2446. 1:39:56गए वो वो क्या है ना आप सबके जाने के बाद
  2447. 1:39:59मैं घर में अकेले ही रहती थी लेकिन अब
  2448. 1:40:01मेरी बेटी जो आ गई है मेरे साथ इस वजह से
  2449. 1:40:04मैं बहुत ही खुश हूं और यह आंसू मेरे
  2450. 1:40:06आंखों से आ गए छोटी मां की बात सुन सुधा
  2451. 1:40:09मोम ने हां में सर हिलाया और बोली हां ठीक
  2452. 1:40:11है अच्छा कविता मेरा एक काम कर दो मुझे ना
  2453. 1:40:14कुछ सामान चाहिए था शॉप से मैं लिस्ट दे
  2454. 1:40:16देती हूं तुम लेकर आ जाऊंगी अभी फिर हम
  2455. 1:40:19साथ में नाश्ता करते हैं प्लीज सुधा मोम
  2456. 1:40:22की बात सुन छोटी मां ने मुंह बनाया और
  2457. 1:40:24बोली साफ-साफ कहिए ना भाभी मैं आज वॉक पर
  2458. 1:40:27नहीं आई। इस वजह से आप मुझे इस तरह चलने
  2459. 1:40:29को बोल रही है। छोटी मां की बात सुन सुधा
  2460. 1:40:32मोम ने उन्हें घुरा और हां में सर हिलाते
  2461. 1:40:34हुए बोली बिल्कुल सही समझा है तुमने। चलो
  2462. 1:40:37अब जाओ और हां आते हुए ना जरा गरमा गरम
  2463. 1:40:40जलेबी लेकर आना। बहुत दिन हो गए है खाई
  2464. 1:40:42हुई कहकर सुधा मोम सिया के तरफ मुली और
  2465. 1:40:44बोली सिया तुम्हें कौन सी मिठाई पसंद है?
  2466. 1:40:47बताओ जरा। कविता आते हुए लेकर आ जाएंगी।
  2467. 1:40:50सुधा मोम का आया सवाल। सुन सिया को कुछ
  2468. 1:40:52सुझा ही नहीं कि वो क्या कहे। वह बस मासूम
  2469. 1:40:55सी शक्ल लेकर टकमक टकमक करते हुए उन्हें
  2470. 1:40:57देखती ही रह गई। उसकी रिएक्शन देख सुधा
  2471. 1:40:59मोम और छोटी मां दोनों को हंसी आ गई और वह
  2472. 1:41:01हंसने लग गई। छोटी मां किसी तरह से अपनी
  2473. 1:41:05हंसी रोकते हुए बोली शक्ल देखिए भाभी
  2474. 1:41:07इसकी। इसे देखकर तो ऐसा लग रहा है जैसी
  2475. 1:41:09हमने इससे कोई बहुत ही मुश्किल सवाल पूछ
  2476. 1:41:12दिया हो। छोटी मां फिर से हंसने लग गई और
  2477. 1:41:14सिया ने शर्म से अपना चेहरा झुका लिया।
  2478. 1:41:17सुधा मोम फिर उससे बोली शर्माओ मत और बोलो
  2479. 1:41:20कि तुम कौन सी मिठाई खाऊंगी? फिर कविता वह
  2480. 1:41:23हमारे लिए ले आएंगी। क्यों कविता? सुधा
  2481. 1:41:26मोम की बात पर छोटी मां ने हां में सर
  2482. 1:41:28हिलाया और सिया के तरफ देखने लग गई। सिया
  2483. 1:41:30फिर धीरे से बोली मैं मैं जलेबी खा लूंगी।
  2484. 1:41:32मुझे सारी मीठी चीजें पसंद आती है तो मैं
  2485. 1:41:35किसी एक को सिलेलेक्ट नहीं कर सकती। सिया
  2486. 1:41:37ने कहा और उसकी बात सुन। फिर एक बार सुधा
  2487. 1:41:39मोम और छोटी मां हंस पड़ी। छोटी मां फिर
  2488. 1:41:42सिया के गाल हल्के से खींचते हुए बोली।
  2489. 1:41:44तभी भाभी यह इतनी प्यारी और मीठी है। चलो
  2490. 1:41:47फिर आज जलेबी खाते हैं। फिर कल कुछ और खा
  2491. 1:41:49लेंगे। छोटी मां कहकर बाहर चली गई। उनके
  2492. 1:41:52आते ही सुधा मोम ने सिया के तरफ देखा और
  2493. 1:41:55बोली सिया क्या हुआ था? कविता के आंखों
  2494. 1:41:58में आंसू क्यों थे? और जवाब में सिया ने
  2495. 1:42:00उन्हें उनके बीच हुई सारी बातें बता दी।
  2496. 1:42:02वो थोड़ा डर कर ही बोली मुझे मुझे नहीं
  2497. 1:42:05पता मां मैंने उनसे कुछ नहीं कहा और ना ही
  2498. 1:42:07उनसे कोई बदतमीजी की है। आप मेरा यकीन
  2499. 1:42:09कीजिए। सुधा मोम फिर उससे बोली शर्माओ मत
  2500. 1:42:13और बोलो कि तुम कौन सी मिठाई खाऊंगी। फिर
  2501. 1:42:16कविता वो हमारे लिए ले आएंगी। क्यों
  2502. 1:42:18कविता? सुधा मोम की बात पर छोटी मां ने
  2503. 1:42:20हां में सर हिलाया और सिया के तरफ देखने
  2504. 1:42:22लग गई। सिया फिर धीरे से बोली मैं मैं
  2505. 1:42:24जलेबी खा लूंगी। मुझे सारी मीठी चीजें
  2506. 1:42:27पसंद आती है तो मैं किसी एक को सिलेलेक्ट
  2507. 1:42:29नहीं कर सकती। सिया ने कहा और उसकी बात
  2508. 1:42:31सुन। फिर एक बार सुधा मोम और छोटी मां हंस
  2509. 1:42:33पड़ी। छोटी मां फिर सिया के गाल हल्के से
  2510. 1:42:36खींचते हुए बोली। तभी भाभी यह इतनी प्यारी
  2511. 1:42:39और मीठी है। चलो फिर आज जलेबी खाते हैं।
  2512. 1:42:41फिर कल कुछ और खा लेंगे। छोटी मां कहकर
  2513. 1:42:43बाहर चली गई। उनके आते ही सुधा मोम ने
  2514. 1:42:46सिया के तरफ देखा और बोली सिया क्या हुआ
  2515. 1:42:49था? कविता के आंखों में आंसू क्यों थे? और
  2516. 1:42:52जवाब में सिया ने उन्हें उनके बीच हुई
  2517. 1:42:54सारी बातें बता दी। वो थोड़ा डर कर ही
  2518. 1:42:56बोली मुझे मुझे नहीं पता मां। मैंने उनसे
  2519. 1:42:59कुछ नहीं कहा और ना ही उनसे कोई बातमीजी
  2520. 1:43:01की है। आप मेरा यकीन कीजिए। सिया को
  2521. 1:43:04घबराया हुआ देख सुधा मोम ने उसके कंधे पर
  2522. 1:43:06हाथ रखा और बोली। सिया डरो मत बेटा। मैं
  2523. 1:43:10बस पूछ रही हूं। वो कविता मेरे लिए मेरी
  2524. 1:43:12ननंद ही नहीं बल्कि मेरी छोटी बहन के जैसी
  2525. 1:43:14है। पता है। जब मैं शादी करके यहां आई थी
  2526. 1:43:17ना तब वो सिर्फ 15 साल की थी। छोटी होने
  2527. 1:43:20के बाद भी उसने मेरी बहुत हेल्प की। मुझे
  2528. 1:43:22सपोर्ट किया और उसके इसी अच्छाई और अपनेपन
  2529. 1:43:25को देख मेरे पापा ने उसकी और मेरे भाई अजय
  2530. 1:43:27की शादी तय कर दी। सिर्फ 17 साल की थी तो
  2531. 1:43:29तब। मैं मना कर रही थी इस शादी के लिए।
  2532. 1:43:32लेकिन सबके आगे मेरी एक ना चली। वो नहीं
  2533. 1:43:34चाहती थी यह शादी। लेकिन फिर उसने अजय को
  2534. 1:43:37और मेरे मायके को अपना लिया। साल भर के
  2535. 1:43:40अंदर ही उसे अक्षय और कृष्णा हुए। सब कुछ
  2536. 1:43:42अच्छा जा रहा था। राघव के वक्त हम सबको
  2537. 1:43:44लगा कि शायद इस बार हमें लड़की होंगी।
  2538. 1:43:46लेकिन नहीं हमें राघव हुआ। हम सब खुश थे।
  2539. 1:43:49लेकिन एक दिन यह अजय और गहर के सभी बड़े
  2540. 1:43:52हमारे पूना वाले रिश्तेदार के शादी में जा
  2541. 1:43:54रहे थे और रास्ते में उनका बहुत ही बुरा
  2542. 1:43:56एक्सीडेंट हो गया जिसमें सब चल बसे। सिर्फ
  2543. 1:43:59तुम्हारे पापा ही ठीक थे। लेकिन वो कोमा
  2544. 1:44:01में चले गए। सुधा मोम की आंखें कहते कहते
  2545. 1:44:03नम हो गई। उन्होंने अपने आंसू साफ किए और
  2546. 1:44:06बोली जानती हो सिया उस वक्त हम इतने आमिर
  2547. 1:44:09नहीं थे और जो कुछ भी सेवंस थी वो सब
  2548. 1:44:12तुम्हारे पापा के इलाज में चली गई। उन
  2549. 1:44:14दिनों बहुत बुरे हालात देखे हैं हमने।
  2550. 1:44:17क्या करें कुछ सूझ नहीं रहा था। इस वजह से
  2551. 1:44:19फिर मैंने डिसाइड किया कि मैं बाहर काम पर
  2552. 1:44:21जाऊंगी और कविता घर रहकर सबका ध्यान
  2553. 1:44:24रखेंगी। मैं उससे ज्यादा पढ़ी लिखी थी। इस
  2554. 1:44:26वजह से मुझे काम मिलने के ज्यादा चांसेस
  2555. 1:44:29थे। पता है वो थी। इस वजह से ही मैं बाहर
  2556. 1:44:31काम पर पाई। उसने मेरे राज और राघव को
  2557. 1:44:33उतना ही प्यार दिया जो वो अक्षय और कृष्णा
  2558. 1:44:35को देती थी। यहां तक इनका भी बहुत ध्यान
  2559. 1:44:38रखा। यह उसी के बदौलत है कि यह आज चल फिर
  2560. 1:44:40पा रहे हैं। फिर से काम पर जा रहे हैं।
  2561. 1:44:42वरना सुधा मोम आगे कुछ कह ही नहीं। सिया
  2562. 1:44:46के आंखों में भी आंसू आ गए। सुधा मोम फिर
  2563. 1:44:48एक बार उससे बोली। सिया अगर एक पल तुम
  2564. 1:44:51मेरी बात मत मानो। मुझे बुरा भला कह दो।
  2565. 1:44:55लेकिन कविता को कुछ मत कहना। उसने अपनी
  2566. 1:44:57पूरी जिंदगी अकेले ही बिताई है। और बहुत
  2567. 1:45:00अकेली हो गई है वह। और इसी अकेलेपन की वजह
  2568. 1:45:02से बीमार भी। कहने को तो हमसे छोटी है
  2569. 1:45:06सिर्फ 46 साल की लेकिन उसकी बॉडी काफी
  2570. 1:45:08कमजोर हो गई है और बीपी जैसे बीमारी ने भी
  2571. 1:45:11उसे घेर लिया है। इसीलिए हम सब उसका बहुत
  2572. 1:45:13ध्यान रखते हैं और मैं उम्मीद करती हूं कि
  2573. 1:45:16तुम भी उसका ध्यान रखूंगी। सुधा मोम की
  2574. 1:45:18बात सुन सिया ने हां मैं सर हिलाया और
  2575. 1:45:20बोली हां मोम मैं उनका ध्यान रखूंगी।
  2576. 1:45:22उन्हें कभी हर्ट नहीं करूंगी। सिया की
  2577. 1:45:24आंखों में पानी था जिसे सुधा मोम ने प्यार
  2578. 1:45:27से साफ किया और फिर अपने कमरे में चली गई।
  2579. 1:45:29कुछ देर बाद जब छोटी मां आई तब उन सभी ने
  2580. 1:45:32मिलकर नाश्ता किया। सुधा मोम और डैड उनके
  2581. 1:45:34काम पर निकल गए। वही सिया बाकी सब काम
  2582. 1:45:37करने में लग गई। थोड़ी देर बाद जब दोनों
  2583. 1:45:39काम वाली आंटी आई तब कविता जी ने उसका
  2584. 1:45:41इंट्रो उन दोनों से करवा दिया। दोपहर का
  2585. 1:45:43खाना भी सिया ने ही बन था। उसने शांति
  2586. 1:45:45आंटी को मना कर दिया और बाकी काम ही करने
  2587. 1:45:47के लिए बोल दिए और फिर सबके लिए गरमागरम
  2588. 1:45:49टिफिन भिजवा दिया। सिया ने एक पल के लिए
  2589. 1:45:52भी छोटी मां को अकेला नहीं छोड़ा था। उनके
  2590. 1:45:55साथ से वह भी बेहतर फील कर रही थी। दिन भर
  2591. 1:45:57छोटी मां के साथ रहकर उसने सबकी पसंद जान
  2592. 1:45:59ली थी और सबकी आदतें भी शाम होने तक उन
  2593. 1:46:02दोनों ने मिलकर सिया का वार्ड्रोब भी
  2594. 1:46:04अच्छे से सेट कर दिया और फिर वह रात का
  2595. 1:46:05खाना बनाने के लिए किचन में चली गई। सब
  2596. 1:46:08खुश थे उससे बहुत ज्यादा खुश। सुधा मोम और
  2597. 1:46:11डेथ तो सबसे ज्यादा जिस तरह से घर आने के
  2598. 1:46:14बाद उसने सिया ने उनका मुस्कुराकर स्वागत
  2599. 1:46:16किया और फिर उन्हें पानी देकर चाय दी। उस
  2600. 1:46:18वजह से ही उसके संस्कारों का पता चल रहा
  2601. 1:46:21था और फिर दोपहर में उसके हाथ का खाया
  2602. 1:46:23गरम-गरम खाना जिससे उनका आगे का दिन बहुत
  2603. 1:46:26ही अच्छा बीता था। उन दोनों ने भर-भर के
  2604. 1:46:28आशीर्वाद उसे दिए थे। देखते ही देखते राज
  2605. 1:46:31और अक्षय भी आ गए और सिया ने उन्हें भी
  2606. 1:46:33स्माइल देकर कॉफी दी। वह भी बहुत खुश थे।
  2607. 1:46:35आज उनका दिन जो इतना अच्छा बीता था। अब
  2608. 1:46:38सिया की आंखें दरवाजे पर राघव की राह देख
  2609. 1:46:40रही थी। लेकिन जिसका इंतजार उसे था, वह तो
  2610. 1:46:43अभी तक आया ही नहीं था। मायूस होकर वह
  2611. 1:46:45किचन में चली गई और खाना बनाने लग गई। कुछ
  2612. 1:46:48ही देर में किचन से इतनी अच्छी खुशबू आने
  2613. 1:46:50लग गई कि सबके कदम अपने आप डाइनिंग टेबल
  2614. 1:46:52की तरफ बढ़ गए। सिया उन सबको देख थोड़ी
  2615. 1:46:55हैरान ही हो गई। वैसे तो खाना बन चुका था
  2616. 1:46:57लेकिन रोटियां पूरी नहीं बनी थी और इस वजह
  2617. 1:47:00से सिया डर गई। उसने एक बार सबकी तरफ देखा
  2618. 1:47:02और फिर डर कर जल्दी-जल्दी अपने हाथ चलाने
  2619. 1:47:04लग गई। सिया को यह समझ नहीं आ रहा था कि
  2620. 1:47:06वह क्या करें। पहले रोटियां बनाए या फिर
  2621. 1:47:10टेबल अरेंज करें। और इसी गड़बड़ी में ना
  2622. 1:47:12तो उससे रोटी गोल बनी और तवे पर राखी।
  2623. 1:47:14रोटी भी जल गई। उस जली हुई रोटी को देख
  2624. 1:47:16सिया की आंखें नम हो गई और वह जल्दी से
  2625. 1:47:18उसे पलटने को हुई। इससे पहले ही वह रोटी
  2626. 1:47:21पलट पाती या फिर उसका हाथ गर्म तवे को लग
  2627. 1:47:24पाता। उससे पहले ही किसी ने उसका हाथ पकड़
  2628. 1:47:26लिया और उसके बाद उसे सुनाई दिए उस शख्स
  2629. 1:47:29की फिक्र से भरी हुई आवाज आराम से हाथ जल
  2630. 1:47:31जाएगा तुम्हारा। इस आवाज को सुन सिया की
  2631. 1:47:33नजरें उस ओर चली गई और राघव उसे फिक्र से
  2632. 1:47:36देखते हुए फिर से बोला क्या हुआ? लग गई
  2633. 1:47:38क्या? आंखों में आंसू क्यों है तुम्हारे?
  2634. 1:47:41दिखावा जरा। राघव के एक के बाद एक सवाल
  2635. 1:47:44सुन सिया को सुझा ही नहीं वह क्या कहे और
  2636. 1:47:46वह कुछ कह पाती उससे पहले ही वहां सब आ
  2637. 1:47:49गए। छोटी मां जल्दी से उन दोनों के पास आए
  2638. 1:47:52और बोली क्या हुआ? और सिया बेटा तुम रो
  2639. 1:47:55क्यों रही हो? सुधा मोम भी बोली क्या हुआ?
  2640. 1:47:58तुम्हें चोट लगी है क्या? और फिर क्या
  2641. 1:48:00उनके सवाल और सबको देख सिया के आंखों के
  2642. 1:48:03आंसू और भी बहने लगे। सिया इतनी कमजोर कभी
  2643. 1:48:05भी नहीं थी। हां, उसे लोगों के गुस्से से
  2644. 1:48:07डर लगता था। लेकिन इतना डर और रोती वह कभी
  2645. 1:48:10नहीं थी। मगर बीते कुछ महीनों में उसके
  2646. 1:48:12साथ इतना कुछ हो गया था कि वह कमजोर हो गई
  2647. 1:48:14थी और राहुल और रोहित की टोक्सिक फैमिली
  2648. 1:48:16की वजह से उसके अंदर बहुत ही ज्यादा खौफ
  2649. 1:48:18बैठ गया था। राज अक्षय और कृष्णा ने पहले
  2650. 1:48:22उसे सिया को और फिर राघव को देखा। वह
  2651. 1:48:24डॉक्टर्स थे और सिया के बॉडी लैंग्वेज को
  2652. 1:48:26देख वो आसानी से समझ गए थे कि वह इस वक्त
  2653. 1:48:29काफी डरी हुई है। मगर क्यों? यह उन्हें भी
  2654. 1:48:32समझ नहीं आया और इसलिए उन्होंने राघव के
  2655. 1:48:34तरफ देखा। राघव ने गहली सांस ली और बोला
  2656. 1:48:37सिर्फ एक रोटी ही जली है। इस वजह से इतना
  2657. 1:48:39डरने की कोई बात नहीं है सिया कोई तुमसे
  2658. 1:48:42कुछ नहीं कहगा। राघव की बात सुन सिया ने
  2659. 1:48:44किसी तरह ऊपर देखा और सिसकते हुए बोली खा
  2660. 1:48:47ना खाना भी नहीं बना मैं मैं जल्दी जल्दी
  2661. 1:48:50बनाती हूं। आप प्लीज वेट करेंगे थोड़ा।
  2662. 1:48:53सिया ने सिसकते हुए हकलाते हुए किसी तरह
  2663. 1:48:55से कहा। राघव के प्रेजेंस की वजह से ही
  2664. 1:48:57उसमें थोड़ी हिम्मत आ गई थी और उसे लगा कि
  2665. 1:49:00कोई है जो उसे डांटगा नहीं बल्कि उसे
  2666. 1:49:02सपोर्ट करेगा। वह बड़ी ही उम्मीद से उसकी
  2667. 1:49:04तरफ देखने लगी। राघव ने अपने होठों पर एक
  2668. 1:49:07छोटी सी स्माइल लाई और बोला, हां बिल्कुल
  2669. 1:49:10तुम आराम से रोटी बनाओ। हम रुकते हैं एक
  2670. 1:49:12राघव की बात सुन। सिया को अच्छा लगा। तभी
  2671. 1:49:14छोटी मां भी बोली इसमें रोने वाली कोई बात
  2672. 1:49:17नहीं थी सिया कोई तुम्हें नहीं डांटेंगा।
  2673. 1:49:19राघव अक्षय चलो तुम दोनों एक काम करो। यह
  2674. 1:49:22जो सब्जी के बीएओएल है ना उसे बाहर लेकर
  2675. 1:49:24जाओ और कृष्णा पानी और प्लेट्स अरेंज करो।
  2676. 1:49:27राज तुम कृष्णा की हेल्प करो। छोटी मां ने
  2677. 1:49:29सभी को काम बता दिए और सिया उन्हें देखती
  2678. 1:49:31ही रह गई। उसने अपनी आंखें दोचार बार खोल
  2679. 1:49:35बंद की और बड़े ही मासूमी से बोली छोटी
  2680. 1:49:37मां आप उन्हें क्यों काम बोल रही है? वह
  2681. 1:49:40सब यह काम कैसे कर सकते हैं? सिया का सवाल
  2682. 1:49:42सुन सबके चेहरे पर स्माइल आ गई या फिर यूं
  2683. 1:49:45कहे कि उसके अपेक्सेशन देख सबके चेहरे पर
  2684. 1:49:47स्माइल आ गई। उसके सवाल का जवाब देते हुए
  2685. 1:49:50सुधा मोम बोली वो यह काम क्यों नहीं कर
  2686. 1:49:52सकते सिया? यह घर हम सबका है तो यहां किए
  2687. 1:49:56जाने वाले काम भी तो सबके ही हुए ना। सुधा
  2688. 1:49:59मोम की बात सुन सिया धीरे से बोली लेकिन
  2689. 1:50:01वो वो तो लड़के हैं ना तो वह किचन में काम
  2690. 1:50:03कैसे कर सकते हैं सिया ने अपने घर के
  2691. 1:50:06माहौल को याद करते हुए सवाल किया उसके
  2692. 1:50:08यहां तो सभी जेंट्स यहां तक कि उसके भाई
  2693. 1:50:10भी हाथ से एक गिलास पानी तक के नहीं लेते
  2694. 1:50:12थे और यहां उसकी सासू मां और छोटी मां
  2695. 1:50:14उनके सभी बेटों को काम बोल रही थी। सिया
  2696. 1:50:17की बातें जो अब तक सभी सुन रहे थे उन्हें
  2697. 1:50:19अंदाजा हो गया कि शायद सिया के घर पर कोई
  2698. 1:50:22काम ना करता हो और उनके बारे में जो भी
  2699. 1:50:24उन्होंने सुना था उस बात को याद कर इस बात
  2700. 1:50:26का अंदाजा लग गया कि शायद उसके घर लड़के
  2701. 1:50:28और लड़कियों के बीच भेदभाव नहीं होता हो।
  2702. 1:50:31उन्हें यह बात बहुत ही बुरी लगी। सिया को
  2703. 1:50:33समझाते हुए पापा बोले लड़के है तो क्या
  2704. 1:50:35हुआ सिया? किचन और घर के बेसिक काम सभी को
  2705. 1:50:38आने चाहिए ना।
  2706. 1:50:41एपिसोड 21 से 30 डिस्क्लेमर यह कहानी पूरी
  2707. 1:50:45तरह काल्पनिक है। यह सिर्फ दर्शकों के
  2708. 1:50:47मनोरंजन के लिए बनाई गई है। इसमें दर्शाए
  2709. 1:50:50गए सभी पात्र, नाम, उत्पाद और घटनाएं पूरी
  2710. 1:50:53तरह काल्पनिक है। यह कहानी किसी भी तरह से
  2711. 1:50:56किसी भी व्यक्ति के भावनाओं, प्रथाओं,
  2712. 1:50:58परंपराओं और विश्वासों के अपमान नहीं करती
  2713. 1:51:01है। और कहानी में बताए गए सभी चीजों का
  2714. 1:51:04मात्र कहानी के लेखक द्वारा बनाई गई लेखक
  2715. 1:51:07की अपनी एक कल्पना है। बैक टू स्टोरी।
  2716. 1:51:09राघव ने अपने होठों पर एक छोटी सी स्माइल
  2717. 1:51:12लाई और बोला हां बिल्कुल तुम आराम से रोटी
  2718. 1:51:14बनाओ। हम रुकते हैं। एक राघव की बात सुन।
  2719. 1:51:17सिया को अच्छा लगा। तभी छोटी मां भी बोली
  2720. 1:51:19इसमें रोने वाली कोई बात नहीं थी सिया कोई
  2721. 1:51:21तुम्हें नहीं डांटेंगा। राघव अक्षय चलो
  2722. 1:51:24तुम दोनों एक काम करो। यह जो सब्जी के
  2723. 1:51:26बीएओएल है ना उसे बाहर लेकर जाओ और कृष्णा
  2724. 1:51:29पानी और प्लेट्स अरेंज करो। राज तुम
  2725. 1:51:31कृष्णा की हेल्प करो। छोटी मां ने सभी को
  2726. 1:51:33काम बता दिए। और सिया उन्हें देखती ही रह
  2727. 1:51:35गई। उसने अपनी आंखें दो चार बार खोल बंद
  2728. 1:51:38की और बड़े ही मासूमी से बोली छोटी मां आप
  2729. 1:51:41उन्हें क्यों काम बोल रही है? वो सब यह
  2730. 1:51:44काम कैसे कर सकते हैं? सिया का सवाल सुन
  2731. 1:51:46सबके चेहरे पर स्माइल आ गई या फिर यूं कहे
  2732. 1:51:49कि उसके अपेक्सशन देख सबके चेहरे पर
  2733. 1:51:51स्माइल आ गई। उसके सवाल का जवाब देते हुए
  2734. 1:51:54सुधा मोम बोली वो यह काम क्यों नहीं कर
  2735. 1:51:56सकते सिया? यह घर हम सबका है। तो यहां किए
  2736. 1:51:59जाने वाले काम भी तो सबके ही हुए ना। सुधा
  2737. 1:52:02मोम की बात सुन। सुन सिया धीरे से बोली
  2738. 1:52:04लेकिन वो वो तो लड़के हैं ना तो वो किचन
  2739. 1:52:06में काम कैसे कर सकते हैं? सिया ने अपने
  2740. 1:52:09घर के माहौल को याद करते हुए सवाल किया
  2741. 1:52:11उसके यहां तो सभी जेंट्स यहां तक कि उसके
  2742. 1:52:13भाई भी हाथ से एक गिलास पानी तक के नहीं
  2743. 1:52:15लेते थे और यहां उसकी सासू मां और छोटी
  2744. 1:52:18मां उनके सभी बेटों को काम बोल रही थी।
  2745. 1:52:20सिया की बातें जो अब तक सभी सुन रहे थे
  2746. 1:52:23उन्हें अंदाजा हो गया कि शायद सिया के घर
  2747. 1:52:25पर कोई काम ना करता हो और उनके बारे में
  2748. 1:52:27जो भी उन्होंने सुना था उस बात को याद कर
  2749. 1:52:29इस बात का अंदाजा लग गया कि शायद उसके घर
  2750. 1:52:31लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव नहीं
  2751. 1:52:34होता हो उन्हें यह बात बहुत ही बुरी लगी
  2752. 1:52:36सिया को समझाते हुए पापा बोले लड़के है तो
  2753. 1:52:38क्या हुआ सिया किचन और घर के बेसिक काम
  2754. 1:52:41सभी को आने चाहिए ना उद्धण चिन्ह मगर सिया
  2755. 1:52:45फिर भी कुछ बोलना चाहती थी लेकिन वह शांत
  2756. 1:52:47हो गई उसकी चुप्पी को देख पापा बोले मगर
  2757. 1:52:49अगर तुम सोचो बेटा कल के को तुम तीनों
  2758. 1:52:52सुधा मोम छोटी मां और सिया के तरफ इशारी
  2759. 1:52:54करते हुए कहीं बाहर चली गई सपोज टू बी
  2760. 1:52:57कहीं वेकेशन पर चली गई तब हम क्या करेंगे
  2761. 1:53:00पापा और भी आगे बोलने वाले थे लेकिन तब तक
  2762. 1:53:03ही सिया बोल पड़ी नहीं हम आपको छोड़कर
  2763. 1:53:06क्यों जाएंगे भला हम सब साथ ही जाएंगे और
  2764. 1:53:09उसकी वह बात सुन सबके चेहरे पर बड़ी वाली
  2765. 1:53:11स्माइल आ गई चाहे कुछ भी हो उसके घर का
  2766. 1:53:14माहौल कैसा भी हो लेकिन एक बात थी उसके घर
  2767. 1:53:16वालों ने सिया पर संस्कार काफी अच्छे किए
  2768. 1:53:19थे उसकी की बातों से यह साफ जाहिर होता था
  2769. 1:53:21कि वो घर तोड़ने वालों में से नहीं बल्कि
  2770. 1:53:23घर को जोड़कर रखने वालों में से थी। सिया
  2771. 1:53:26ने सबको यूं मुस्कुराते हुए देखा और शर्म
  2772. 1:53:28से अपना चेहरा झुका लिया। उसे समझ नहीं
  2773. 1:53:30आया कि वह सब क्यों मुस्कुरा रहे हैं।
  2774. 1:53:33उसने ऐसी क्या बात कह दी भला जो सब उस पर
  2775. 1:53:36हंस रहे। सिया को बहुत ही शर्मिंदगीगी
  2776. 1:53:38महसूस हुई। उसे समझाते हुए फिर से पापा
  2777. 1:53:41बोले सिया बेटा ठीक है कि हम सब साथ ही
  2778. 1:53:43कहीं घूमने जाएंगे। लेकिन फिर भी कभी कभार
  2779. 1:53:46तुम लेडीज को भी थोड़े बहुत चेंजेस चाहिए।
  2780. 1:53:48होते हैं ना। बस इसी वजह से इन लड़कों को
  2781. 1:53:51भी कुकिंग और बाकी सब छोटे बड़े काम आने
  2782. 1:53:53चाहिए। और एक बात ऐसे कौन से किताब में
  2783. 1:53:55नहीं लिखा कि तुम लेडीज ही घर के सारे काम
  2784. 1:53:57करोगी और हम जेंट्स नहीं हम बताओ जरा हे
  2785. 1:54:01क्या ऐसी कोई किताब में लिखा पापा के सवाल
  2786. 1:54:04पर सिया ने ना में सर हिलाया तो फिर इन
  2787. 1:54:07सबको कम करने दो और तुम जल्दी से रोटियां
  2788. 1:54:09बनाओ। वैसे भी तुम्हारी बनाई हुई सब्जी की
  2789. 1:54:12कहे इतनी अच्छी है कि मुझसे अब भूख
  2790. 1:54:14बर्दाश्त ही नहीं हो रही है। पाप की बात
  2791. 1:54:16सुन सिया मुस्कुराई और फिर से गैस के तरफ
  2792. 1:54:18मुड़ गई। बाकी सब ने अपना-अपना बताया हुआ
  2793. 1:54:20काम किया और छोटी मां सिया की हेल्प करने
  2794. 1:54:22लग गई। सुधा मोम भी सैलाड कट करने में लग
  2795. 1:54:25गई और पापा उनकी हेल्प करने में सिया ने
  2796. 1:54:28फिर जल्दी-जल्दी हाथ चलाया और सभी के लिए
  2797. 1:54:30रोटियां बना दी। उसने छोटी मां से कहा था
  2798. 1:54:33कि वह सब खाने के लिए बैठ जाए। वह गरम-गरम
  2799. 1:54:35रोटियां बनाकर दे देंगी।
  2800. 1:54:38लेकिन उन्होंने मना किया और कहा कि वह सब
  2801. 1:54:40साथ ही में डिनर करने बैठेंगे और आखिर में
  2802. 1:54:42सभी ने एक साथ सिया के हाथों से बने हुए
  2803. 1:54:44खाने का लुफ उठाया और उसकी बहुत तारीफ भी
  2804. 1:54:46की। सिया राघव के पास वाली कुर्सी पर ही
  2805. 1:54:49बैठी थी डिनर करने और सबको क्या चाहिए और
  2806. 1:54:51क्या नहीं इस बात का ध्यान भी रख रही थी।
  2807. 1:54:53तभी कुछ लेने के बहाने से राघव उसके पास
  2808. 1:54:56झुका और धीरे से उससे बोला बहुत ही लजीज
  2809. 1:54:59खाना बना है सिया मुझे बहुत पसंद आया और
  2810. 1:55:01बस राघव के वह चंद लफज सुन सिया के चेहरे
  2811. 1:55:04पर मानो गुलाब खिल गए। उसकी वह छोटी सी
  2812. 1:55:06तारीफ सिया को इतनी खुश कर गई कि वह खुशी
  2813. 1:55:08से फुले ना समाए। सबका डिनर हो जाने के
  2814. 1:55:11बाद सभी ने प्लेट्स और टेबल क्लीन करने
  2815. 1:55:13में उसकी हेल्प की और हॉल में आकर बैठ गए।
  2816. 1:55:15सिया भी किचन के जाकर किचन प्लेटफार्म
  2817. 1:55:17क्लीन करने लगी। तभी सुधा मोम ने उसे आवाज
  2818. 1:55:20देकर हॉल में बुलाया और बोली, बर्तन रहने
  2819. 1:55:22दो सिया। कल शांति उन्हें साफ कर देंगी।
  2820. 1:55:25आओ बैठो हमारे साथ। सुधा मोम की बात सुन।
  2821. 1:55:28सिया बोली, मोम रत भर बर्तन झूठे रखना
  2822. 1:55:30अच्छी बात नहीं है और थोड़े ही बर्तन है।
  2823. 1:55:33मैं उन्हें साफ कर दूंगी। आप फिक्र मत
  2824. 1:55:35कीजिए। सिया की बात सुन। सुधा मोम ने हां
  2825. 1:55:37में सर हिलाया और बोली, ठीक है जैसे तुम
  2826. 1:55:40चाहो लेकिन अभी कुछ देर बैठो। मुझे तुमसे
  2827. 1:55:42इनफेक्टेड सभी से बात करनी है। सुधा मोम
  2828. 1:55:45ने चेहरे पर के एक्सप्रेशन देख सिया भी
  2829. 1:55:46सीरियस होकर वहां बैठ गई। तभी राज बोला
  2830. 1:55:50क्या हुआ मॉम? कोई सीरियस बात है क्या?
  2831. 1:55:53जवाब में सुधा मोम बोली नहीं सीरियस नहीं।
  2832. 1:55:56लेकिन आज दोपहर राघव को गिरीश जी का सिया
  2833. 1:55:58के पापा का कॉल आया था। उन्होंने हम सभी
  2834. 1:56:01को कल दोपहर लंच के लिए उनके घर इनवाइट
  2835. 1:56:03किया है। सुधा मोम ने पहले राज के तरफ और
  2836. 1:56:06फिर सिया के तरफ देखकर कहा और अपने पापा
  2837. 1:56:08का नाम सुन सिया के आंखों में नमी छा गई।
  2838. 1:56:10उसके पापा से उसने कितने दिनों से बात
  2839. 1:56:12नहीं की थी और अब उनका जिक्र सुन सिया को
  2840. 1:56:15उनकी उसकी मां प्रिया की याद आने लग गई।
  2841. 1:56:17उसका फोन तो उससे उसी वक्त छीन लिया था।
  2842. 1:56:19जब उसे घर में कैद करके रखा था। वहां वो
  2843. 1:56:21शशांक का फोन कभी कभार यूज करती थी अपने
  2844. 1:56:24दोस्तों से बात करने के लिए। लेकिन अब
  2845. 1:56:26उसके पास कोई मोबाइल फोन नहीं था। सिया
  2846. 1:56:29सिया सुधा मोम की आवाज सुन सिया होश में
  2847. 1:56:31आए और उसने उनकी तरफ देखा। उसकी आंसुओं से
  2848. 1:56:35भरी हुई आंखें देख उन सभी को बहुत बुरा
  2849. 1:56:37लगा। सुधा मोम आगे बोली अम्मा सिया हम कल
  2850. 1:56:40तुम्हारे घर जाएंगे। जिस तरह से तुम अब
  2851. 1:56:43हमारे घर की बेटी हो। उसी तरह से राघव भी
  2852. 1:56:45अब उस घर का हिस्सा है। तो हम सबका फर्ज
  2853. 1:56:47बनता है कि हम वहां जाए। इसी बहाने सबकी
  2854. 1:56:50पहचान भी उनसे हो जाएंगी। सुधा मोम की बात
  2855. 1:56:52सुन। सिया ने हां में सर हिलाया। सुधा मोम
  2856. 1:56:54फिर बोली ठीक है फिर एक काम करो तुम ना
  2857. 1:56:57गिरीश जी को कॉल कनेक्ट करके दे दो और
  2858. 1:56:59राघव उनसे बात कर उन्हें इनफॉर्म कर दो कि
  2859. 1:57:01हम कल 12:00 बजे तक आ जाएंगे सुधा मोम की
  2860. 1:57:05बात सुन राघव ने हां में सर हिलाया और
  2861. 1:57:07सिया के तरफ देखने लग गया सिया भी उसे देख
  2862. 1:57:09रही थी राघव उससे बोला कॉल कनेक्ट करके दे
  2863. 1:57:12रही हो ना राघव की बात सुन सिया ने ना में
  2864. 1:57:15सर हिलाया और धीरे से बोली मेरे पास मेरे
  2865. 1:57:18पास मेरा फोन नहीं है वो वो मेरा फोन सिया
  2866. 1:57:21को आगे सुझा ही नहीं कि वह क्या कहे है और
  2867. 1:57:24कैसे कहे कि उसके घर वालों ने महीनों पहले
  2868. 1:57:26ही उसका फोन उससे छीन लिया था। राघव शायद
  2869. 1:57:29उसकी यह बात समझ गया और वह बोला अम्मा
  2870. 1:57:32डोंट वरी। मैं अपने फोन से कॉल कनेक्ट
  2871. 1:57:35करता हूं। 1 मिनट हां राघव ने कहा और जाकर
  2872. 1:57:37अपना मोबाइल फोन ले आया। उसने फिर दोपहर
  2873. 1:57:40को आए हुए गिरीश जी के नंबर पर कॉल किया
  2874. 1:57:42और उन्हें इनफॉर्म किया कि वह कल दोपहर तक
  2875. 1:57:44आ जाएंगे। कुछ और बातें करने के बाद उसने
  2876. 1:57:47सिया के तरफ देखा और फिर गिरीश जी से बोला
  2877. 1:57:49मैं सिया के पास सेल देता हूं। आप उससे
  2878. 1:57:52बात कीजिए। राघव ने फिर मोबाइल सिया के
  2879. 1:57:54पास दे दिया और उसे बात करने के लिए
  2880. 1:57:56प्राइवेसी मिले। इस वजह से सब एक-एक कर
  2881. 1:57:58वहां से चले गए। सिया ने अपने कैपते हाथों
  2882. 1:58:01से मोबाइल लिया और किस तरह हिम्मत जुटाकर
  2883. 1:58:03धीरे से बोली हेलो पापा जवाब में गिरीश जी
  2884. 1:58:07की भी धीमी आवाज उसे सुनाई दी। वो उससे
  2885. 1:58:09बोले कैसी हो सी? और उनका सवाल सुन सिया
  2886. 1:58:12के आंखों से आंसू बहने लग गए। उसकी सिसकी
  2887. 1:58:14गिरीश जी को भी साफ-साफ सुनाई दे रही थी।
  2888. 1:58:17वो उससे सिया से बहुत कुछ कहना चाहते थे।
  2889. 1:58:19उसके बारे में पूछना चाहते थे। मगर इन कुछ
  2890. 1:58:22महीनों में उन दोनों के बीच इतनी दूरी आ
  2891. 1:58:24गई थी कि वह आगे कुछ कह ही नहीं पाए।
  2892. 1:58:26दोनों तरफ भी सिर्फ खामोशी थी। अगर कुछ
  2893. 1:58:28सुनाई दे रहा था तो वो थी सिया की
  2894. 1:58:30हल्की-हल्की सिसकिया। मास्टर आध्या के
  2895. 1:58:33गुरु जिन्होंने उसे कराटे, बॉक्सिंग जैसी
  2896. 1:58:35और भी सेल्फ डिफेंस टेक्निक सिखाई और ना
  2897. 1:58:38सिर्फ सिखाई बल्कि उन सभी चीजों में उसे
  2898. 1:58:40एक्सपर्ट भी बना दिया। वह चाहते थे कि
  2899. 1:58:42आध्या आगे उसी में अपना करियर बनाए। लेकिन
  2900. 1:58:45आध्या ने अपने पेरेंट्स के सपनों को चुना
  2901. 1:58:47और उस पर काम करने लगी।
  2902. 1:58:49लेकिन मास्टर के साथ वह अब भी थी। सिद्ध
  2903. 1:58:51के बाद एक वही थे जिनसे आध्या थोड़ी बहुत
  2904. 1:58:54डरती थी। यहां इस बॉक्सिंग रिंग में आध्या
  2905. 1:58:56हमेशा नहीं आती थी। जब उसे पैसों की जरूरत
  2906. 1:58:58होती या फिर जब वह इमोशनली बहुत वीक या
  2907. 1:59:01फिर बहुत गुस्सा होती तभी वह यहां आती थी
  2908. 1:59:04और अपने अंदर के सारे इमोशन को गुस्से को
  2909. 1:59:06उतार देती। सिद्ध को या फिर मास्टर को यह
  2910. 1:59:09बात पता चले। यह आध्या कभी नहीं चाहती थी
  2911. 1:59:11और यही वजह थी कि उसने यहां अपना नाम
  2912. 1:59:13आध्या ना बताकर आर्या बताया था। मार्तन
  2913. 1:59:16ठीक आध्या के पीछे ही था। आध्या बड़े ही
  2914. 1:59:18आसानी से वह मौजूद ऊंची कंपाउंड वॉल पर
  2915. 1:59:20चढ़ गई और पल भर में ही दूसरी ओर जंप कर
  2916. 1:59:22दी। मार्तंड का गुस्सा उसकी यह करतब देख
  2917. 1:59:25और बढ़ गया और उसने भी उसी की तरह वॉल पर
  2918. 1:59:27से छलांग लगाई। आध्या वही पाक की हुई अपने
  2919. 1:59:30बाइक के पास गई और उस पर बैठ उसने बाइक
  2920. 1:59:32स्टॉप की। इससे पहले कि वह आगे बढ़ पाती
  2921. 1:59:34मार्तंड वहां आ गया और उससे कुछ बोलने को
  2922. 1:59:36ही हुआ था कि उससे पहले ही आध्या उससे
  2923. 1:59:38बोली हे मैन क्या कर रहे हो? हटो जल्दी
  2924. 1:59:42पुलिस आ गई ना तो हो गया कांड सिद्ध और
  2925. 1:59:44मास्टर तो मेरी जान ही ले लेंगे आध्या की
  2926. 1:59:47बब सुनकर भी मार्तंड वह से नहीं हटा और
  2927. 1:59:49उसे ऐसे खड़े देख आध्या ने जल्दी से उसका
  2928. 1:59:51हाथ पकड़ लिया और थोड़ा जोर से उसे खींचकर
  2929. 1:59:54अपने पीछे कर बोली चलो बैठो तुम्हें भी
  2930. 1:59:56लिफ्ट देकर यहां से निकालती हूं और आध्या
  2931. 1:59:58ने उसे अपने पीछे बैठने का इशारा कर बाइक
  2932. 2:00:00स्टार्ट कर दी मार्तंड भी बिना कुछ कहे
  2933. 2:00:03आध्या के पीछे बैठ गया उसके होठों पर एक
  2934. 2:00:06मुस्कान आ गई आध्या की वो छोटी सी छुवन पल
  2935. 2:00:08भर के अंदर ही मार्तंड के अंदर पनप रहे
  2936. 2:00:10गुस गुस्से के लावा को शांत कर गई और उसे
  2937. 2:00:12एक अजीब सा सुकून महसूस हुआ। मार्तंड
  2938. 2:00:14आध्या को मना ही नहीं कर पाया और चुपचाप
  2939. 2:00:16आकार उसके पीछे बैठ गया। आध्या ने फुल रेस
  2940. 2:00:19छोड़ते हुए अपनी बाइक स्टॉप की और फिर
  2941. 2:00:21तेजी से वहां से निकल गई। मार्तंड को नहीं
  2942. 2:00:23लगा था कि वह इतनी तेज बाइक चलाएंगी। इस
  2943. 2:00:26वजह से फोर्स से वह थोड़ा पीछे हुआ और
  2944. 2:00:28सपोर्ट के लिए उसने आध्या के कंधों को
  2945. 2:00:30पकड़ लिया। आध्या एक पल तो कुछ नहीं बोली।
  2946. 2:00:33लेकिन जब मार्तंड के हाथ उसके कंधे पर से
  2947. 2:00:36नहीं हटे तो उसने बाइक की स्पीड थोड़ी कम
  2948. 2:00:38कर दी और पीछे की ओर झुककर उससे बोली बड़ी
  2949. 2:00:41बाइक पर बैठने की परमिशन दी है मुझे छूने
  2950. 2:00:44की नहीं 100 हाथ हटाओ आध्या ने जिस
  2951. 2:00:46एटीट्यूड से यह बात कही थी उसे सुन
  2952. 2:00:48मार्तंड के ओठ के किनार ऊपर की और उठ गए
  2953. 2:00:50उसने अपने हाथ नीचे किए और उसी एटीट्यूड
  2954. 2:00:53से बोला आई कनो कि तुमने मुझे बाइक पर
  2955. 2:00:55बैठने की परमिशन दी है ना कि छूने की
  2956. 2:00:58लेकिन तुमने जिस स्पीड से बाइक स्टार्ट की
  2957. 2:01:00थी ना उस वजह से मुझे सपोर्ट के लिए
  2958. 2:01:02तुम्हें छूना ही पड़ा। वो क्या है ना बाइक
  2959. 2:01:04पर किसी से पीछे बैठने का यह मेरा फर्स्ट
  2960. 2:01:06टाइम है। मार्तंड कहकर उससे थोड़ा दूर
  2961. 2:01:09होकर बैठ गया और आध्या मुस्कुराए और बोली
  2962. 2:01:11वेल फर्स्ट टाइम मेरा भी है। किसी को अपने
  2963. 2:01:14पीछे बिठाने का और आधी आने फिर से स्पीड
  2964. 2:01:16बढ़ा दी। इस बात से अनजान होकर कि मार्तंड
  2965. 2:01:19कितना खुश हुआ था। आध्या के लबों से यह
  2966. 2:01:21सुनकर वो वो पहला शख्स है जो उसके आध्या
  2967. 2:01:23के पीछे बाइक पर बैठा था। आगे फिर किसी ने
  2968. 2:01:26कुछ नहीं कहा। मार्तंड मुस्कुराते हुए
  2969. 2:01:29आध्या के प्रेजेंस को फिल कर रहा था। तो
  2970. 2:01:31वही आध्या बाइक चलाने पर कंसंट्रेट कर रही
  2971. 2:01:33थी। वह लोग सिटी जाने वाले हाईवे पर लग गए
  2972. 2:01:36और आगे जाकर एक जगह आध्या ने बाइक रोक दी।
  2973. 2:01:38मार्तंड उस जगह को देख हैरान हो गया और
  2974. 2:01:40उससे आध्या से बोला, "हम यहां क्यों रुके
  2975. 2:01:43हैं?" मार्तंड को वो जगह कुछ ठीक नहीं लग
  2976. 2:01:45रही थी। वो जगह काफी सुनसान थी और रात के
  2977. 2:01:48अंधेरे से घिरी हुई भी। मार्तंड ने आध्या
  2978. 2:01:50के तरफ देखा और फिर उस जगह को गौर से
  2979. 2:01:52देखने लगा। आध्या उसका सवाल सुन कुछ देर
  2980. 2:01:55उसे देखती रह गई और फिर कुछ सोचकर जोर-जोर
  2981. 2:01:58से हंसने लगी। मार्तंड की बातें और आंखें
  2982. 2:02:00साफ-साफ दिखा रही थी कि वह कितना सीरियस
  2983. 2:02:02हो गया है और इसी वजह से आध्या में उसे एक
  2984. 2:02:04पल निहारा और फिर हंसने लगी। मार्तंड ने
  2985. 2:02:07उसे घुरा और बोला तुम्हारे हंसने की वजह
  2986. 2:02:09जान सकता हूं। मार्तंड के सवाल पर अध्या
  2987. 2:02:12झट से बोली बेशक बेशक जान सकते हो। और
  2988. 2:02:15आध्या फिर एक बार हंस पड़ी। मार्तंड ने
  2989. 2:02:17अपने हाथ फोल्ड किए और उसे घूरते हुए
  2990. 2:02:19नजरों से ही बोला कि बताओ क्या रीजन है
  2991. 2:02:21तुम्हारे हंसने का? और आध्या भी उसका सवाल
  2992. 2:02:24समझ गई। उसने अपनी हंसी रोकी और बोली,
  2993. 2:02:27"हंसू नहीं तो क्या करूं यार?"
  2994. 2:02:29तुम मुझे और इस जगह को ऐसे घूर रहे हो
  2995. 2:02:31जैसे मैं तुम्हें यहां धोखे से लेकर आई
  2996. 2:02:33हूं और अब तुम्हें चाकू दिखाकर तुम्हें
  2997. 2:02:35लूटकर तुम्हारा मर्डर कर दूंगी। मतलब इतने
  2998. 2:02:37सीरियस क्यों हो गए यार तुम? उद्धण चिन्ह
  2999. 2:02:41आध्या का सवाल सुन मार्तन ने एक बार उसे
  3000. 2:02:43देखा और फिर जगह को देखा। वो एक कदम आध्या
  3001. 2:02:46के करीब आया और बोला मैं सीरियस इस वजह से
  3002. 2:02:48नहीं हुआ कि मुझे तुमसे कोई खतरा हो बल्कि
  3003. 2:02:51मैं तुम्हारे लिए सीरियस हुआ। इस तरह ऐसे
  3004. 2:02:53अनजान लड़के के साथ रात के वक्त ऐसी
  3005. 2:02:55सुनसान जगह पर रुकना क्या सेफ है? मार्तंड
  3006. 2:02:58आध्या का नाम लेते लेते रुक गया और उसकी
  3007. 2:03:01तरफ देखने लगा। आध्या भी उसे ही देख रही
  3008. 2:03:04थी। अपलक बिना अपने पल के झपकाए हुए और उस
  3009. 2:03:06अनजान शख्स के आंखों में मार्तंड के आंखों
  3010. 2:03:09में झांकने की कोशिश कर रही थी। जिसमें
  3011. 2:03:12उसे अपने लिए फिक्र दिखाई दे रही थी।
  3012. 2:03:14मार्तंड सच में आध्या के सिक्योरिटी को
  3013. 2:03:16लेकर बहुत फिक्रमंद था और थोड़ा डरा हुआ
  3014. 2:03:18भी। कल तक उसके जिंदगी में डर नाम की कोई
  3015. 2:03:20चीज नहीं थी। यहां तक कि उसे जानने वालों
  3016. 2:03:23को भी कोई यह कहता ना कि मार्तंड पाटिल डर
  3017. 2:03:25गया तो कोई उसकी बात पर भरोसा नहीं करता।
  3018. 2:03:28इतना बेखौफ था मार्तंड। मगर आध्या के उसके
  3019. 2:03:30लाइफ में आने के बाद सिर्फ एक दिन में ही
  3020. 2:03:32मार्तंड एक बार नहीं बल्कि कई बार डर गया
  3021. 2:03:35और वो डर वोफिक्र आध्या को अब उसकी आंखों
  3022. 2:03:37में दिखाई दे रही थी। क्या हुआ? ऐसे क्या
  3023. 2:03:40देख रही हो? मार्तंड ने आध्या के चेहरे के
  3024. 2:03:43आगे चुटकी बजाई और सवाल किया। आध्या में
  3025. 2:03:45सिर्फ नाम में सर हिलाया और कुछ ना बोलते
  3026. 2:03:47हुए उससे नजरें चुरा ली। मार्तंड ही फिर
  3027. 2:03:49बोला अब चले यहां से आई डोंट थिंक सो कि
  3028. 2:03:53यहां रुकना सेफ होगा मार्तंड की बात सुन
  3029. 2:03:55आध्या ने उसके तरफ देखा और बोली डोंट वरी
  3030. 2:03:59यह जगह सेफ है। आध्या बाइक के हैंडल को
  3031. 2:04:01थामकर वही पास के कच्चे रास्ते से बाइक
  3032. 2:04:03फोड़ी अंदर लेने लग गई और मार्तंड ने बिना
  3033. 2:04:05कुछ बोले ही उसके हाथ से बाइक अपने हाथ
  3034. 2:04:07में ले ली और उसे आगे चलने का इशारा किया।
  3035. 2:04:10वह रास्ता वाकई में बहुत ही खराब था और
  3036. 2:04:12बाइक के हेडलाइट में साफ-साफ दिखाई दे रहा
  3037. 2:04:14था। मार्तंड किसी तरह से बाइक को थामे।
  3038. 2:04:17आध्या के पीछे जा रहा था। बस कुछ दूरी पर
  3039. 2:04:19जाने के बाद आध्या ने उसे रुकने के लिए
  3040. 2:04:21बोल दिया और गाड़ी को लॉक कर उसने बाइक पर
  3041. 2:04:23लगी साइड बैग से एक और बैग निकाली। चले
  3042. 2:04:26आध्या के सवाल पर मार्तंड ने कुछ नहीं कहा
  3043. 2:04:29और उसके पीछे जाने लगा। मोबाइल फ्लैशाइट
  3044. 2:04:31के उजाले में वह दोनों आगे बढ़ रहे थे और
  3045. 2:04:34जैसे-जैसे वह आगे जा रहे थे, वैसे-वैसे
  3046. 2:04:36मार्तंड को हवा में बढ़ी हुई ठंड का एहसास
  3047. 2:04:39हो रहा था और कुछ ही देर में वह दोनों एक
  3048. 2:04:41खूबसूरत तालाब के किनारे पहुंचे। आसपास
  3049. 2:04:43बिखरे चांद और सितारों की रोशनी में वह
  3050. 2:04:45जगह बहुत ही ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रही
  3051. 2:04:48थी। आध्या में मार्तंड के हाथ में अपना
  3052. 2:04:50सेलफोन दिया और वहां आसपास के छोटी-छोटी
  3053. 2:04:52लकड़ियां जमाकर उसने अपने साथ लाई हुई
  3054. 2:04:54माचिस से उन लकड़ियों में आग जला दी।
  3055. 2:04:57मार्तंड उसे गौर से देख रहा था और उसके हर
  3056. 2:04:59एक हरकत को निहार रहा था। वह जिस तरह वहां
  3057. 2:05:02थोड़ा अंधेरा होने के बावजूद भी हलचल कर
  3058. 2:05:04रही थी ना उससे यह साफ जाहिर था कि वह
  3059. 2:05:06पहले भी कई बार आ चुकी है। आध्या ने फिर
  3060. 2:05:08मार्तंड को बैठने का इशारा किया और साथ
  3061. 2:05:11लाई हुई बैग में से एक टिफिन और थमस
  3062. 2:05:13निकालकर साइड में रख दिया। सुधा मोम की
  3063. 2:05:15बात सुन राघव ने हां में सर हिलाया और
  3064. 2:05:17सिया के तरफ देखने लग गया। सिया भी उसे
  3065. 2:05:20देख रही थी। राघव उससे बोला कॉल कनेक्ट
  3066. 2:05:22करके दे रही हो ना। राघव की बात सुन सिया
  3067. 2:05:25ने ना में सर हिलाया और धीरे से बोली मेरे
  3068. 2:05:28पास मेरे पास मेरा फोन नहीं है। वो वो
  3069. 2:05:30मेरा फोन सिया को आगे सुझा ही नहीं कि वो
  3070. 2:05:34क्या कहे और कैसे कहे कि उसके घर वालों ने
  3071. 2:05:36महीनों पहले ही उसका फोन उससे छीन लिया
  3072. 2:05:38था। राघव शायद उसकी यह बात समझ गया और वह
  3073. 2:05:42बोला अम्मा डोंट वरी। मैं अपने फोन से कॉल
  3074. 2:05:45कनेक्ट करता हूं। 1 मिनट हां राघव ने कहा
  3075. 2:05:48और जाकर अपना मोबाइल फोन ले आया। उसने फिर
  3076. 2:05:50दोपहर को आए हुए गिरीश जी के नंबर पर कॉल
  3077. 2:05:52किया और उन्हें इनफॉर्म किया कि वह कल
  3078. 2:05:54दोपहर तक आ जाएंगे। कुछ और बातें करने के
  3079. 2:05:57बाद उसने सिया के तरफ देखा और फिर गिरीश
  3080. 2:05:59जी से बोला मैं सिया के पास कॉल देता हूं।
  3081. 2:06:02आप उससे बात कीजिए। राघव ने फिर मोबाइल
  3082. 2:06:04सिया के पास दे दिया और उसे बात करने के
  3083. 2:06:06लिए प्राइवेसी मिले। इस वजह से सब एक-एक
  3084. 2:06:08कर वहां से चले गए। सिया ने अपने कैपते
  3085. 2:06:11हाथों से मोबाइल लिया और किस तरह हिम्मत
  3086. 2:06:13जुटाकर धीरे से बोली हेलो पापा जवाब में
  3087. 2:06:17गिरीश जी की भी धीमी आवाज उसे सुनाई दी वो
  3088. 2:06:19उससे बोले कैसी हो सी और उनका सवाल सुन
  3089. 2:06:23सिया के आंखों से आंसू बहने लग गए उसकी
  3090. 2:06:25सिसकी गिरीश जी को भी साफ-साफ सुनाई दे
  3091. 2:06:27रही थी वो उससे सिया से बहुत कुछ कहना
  3092. 2:06:30चाहते थे उसके बारे में पूछना चाहते थे
  3093. 2:06:32मगर इन कुछ महीनों में उन दोनों के बीच
  3094. 2:06:34इतनी दूरी आ गई थी कि वह आगे कुछ कह ही
  3095. 2:06:36नहीं पाए दोनों तरफ सिर्फ खामोशी थी अगर
  3096. 2:06:39कुछ सुनाई दे रहा था तो वो थीसिया की
  3097. 2:06:41हल्की-हल्की सिसकिया आंखें तो गिरीश जी की
  3098. 2:06:44भी नम थी लेकिन फिर भी उन्होंने ने किसी
  3099. 2:06:46तरह अपने आवाज पर कंट्रोल किया और बोले कल
  3100. 2:06:48कल जल्दी आ जाऊंगी ना मैं इंतजार करूंगा
  3101. 2:06:52और उनके सवाल पर सिया ने रोते हुए हां में
  3102. 2:06:54सर हिलाया और सिसकते हुए हो बोली हां हां
  3103. 2:06:57पापा जल्दी जल्दी आऊंगी मैं आप अब मेरा
  3104. 2:06:59इंतजार करना हां मैं आ जाऊंगी सिया खुश थी
  3105. 2:07:02बहुत ज्यादा खुश उसके पापा के कुछ लफ्ज
  3106. 2:07:05उसे कितना खुश कर गए थे यह उसके स्माइल पर
  3107. 2:07:07से पता चल रहा था हम रखता हूं फोन फोन कल
  3108. 2:07:09आ जाना। हां। गिरीश जी ने भावुक होते हुए
  3109. 2:07:11कहा और फिर जल्दी से कॉल काट दी। कॉल कट
  3110. 2:07:14होने के बाद भी सिया ने उसे अपने कान से
  3111. 2:07:16पकड़ रखा था और वह सिसक रही थी। कितने
  3112. 2:07:18महीनों बाद उसके पापा ने उससे बात की थी
  3113. 2:07:21और उनके उन चमद लफ्जों में छिपी ममता सिया
  3114. 2:07:23को समझ आ गई थी। वह वैसे ही रोते हुए उसके
  3115. 2:07:25पापा के कहे हर एक लफ्ज को बार-बार याद कर
  3116. 2:07:28रही थी। राघव जो तब से उसे देख रहा था।
  3117. 2:07:31उसे अब सिया की हालत और देखी नहीं गई।
  3118. 2:07:33गोरी सियारो- रोकर पूरी तरह से लाल हो
  3119. 2:07:35चुकी थी और उसके आंखों पर हल्की सी सूजन
  3120. 2:07:38भी आ चुकी थी। राघव ने उसके सर पर हाथ रखा
  3121. 2:07:40और उसके बालों को सहलाते हुए बोला शस शांत
  3122. 2:07:43हो जाओ सिया इतना नहीं रोते हैं। राघव की
  3123. 2:07:46बात सुन सिया ने उसके तरफ देखा और रोते
  3124. 2:07:48हुए बोली मेरे पापा ने मुझसे बात की और
  3125. 2:07:51आपको पता है उन्होंने मुझे बोला कि कल मैं
  3126. 2:07:53जल्दी आ जाओ। हम कल जाएंगे ना। क्या आप
  3127. 2:07:56मुझे थोड़ा जल्दी उनके पार लेकर जाएंगे।
  3128. 2:07:59प्लीज। सिया राघव की तरफ बहुत उम्मीद से
  3129. 2:08:01देखने लगी और राघव ने हां में सर हिलाया।
  3130. 2:08:04वो बोला, हां, कल हम जल्दी ही जाएंगे। मैं
  3131. 2:08:06लेकर जाऊंगा तुम्हें। राघव की बात सुन।
  3132. 2:08:08सिया सीधे उसके गले लग गई और रोते हुए ही
  3133. 2:08:10उसे थैंक यू बोलने लग गई। राघव हैराना था
  3134. 2:08:14उसके इस मुंह से। मगर उसे अच्छा भी लगा और
  3135. 2:08:16उसने भी अपना हाथ उसके सर पर रख उसके
  3136. 2:08:18बालों को सहलाने लगा। कुछ देर दोनों वैसे
  3137. 2:08:20ही थे। फिर राघव ही होश में आया और उससे
  3138. 2:08:23बोला, "सिया, चलो फ्रेश हो जाओ। देखो तो
  3139. 2:08:25सही। रो-रो कर अपना चेहरा कैसा कर दिया है
  3140. 2:08:27तुमने? सिया उसकी बात सुन उससे दूर हुई और
  3141. 2:08:30और उनकी करीबी को याद कर हल्का सा शर्मा
  3142. 2:08:33गई। वह शर्माते हुए किसी तरह हकलाते हुए
  3143. 2:08:35बोली, मैं मैं अभी आती हूं और अगले ही पल
  3144. 2:08:37सिया वहां से भाग गई। उसे इतनी शर्मा रही
  3145. 2:08:40थी कि राघव से नजरें मिलाने की या फिर
  3146. 2:08:42उसके तरफ देखने की उसमें हिम्मत ही नहीं
  3147. 2:08:44थी। राघव उसे ऐसे भागते देख मुस्कुराया और
  3148. 2:08:46फिर उसके नजरों से ओझल होते ही उसके चेहरे
  3149. 2:08:49पर सीरियस एक्सप्रेशन आ गए। वह समझ नहीं
  3150. 2:08:51पा रहा था सिया के फैमिली को। अगर वाकई
  3151. 2:08:53में वह इतने टॉक्सिक थे तो अब क्या था?
  3152. 2:08:56गिरीश जी ने जब उस सिया से कहा था ना कि
  3153. 2:08:59कल जल्दी आना। उन लफ्जों से राघव को भी
  3154. 2:09:01महसूस हो गया था कि वह अपनी बेटी से बहुत
  3155. 2:09:03प्यार करते हैं। फिर उसकी शादी और बाकी
  3156. 2:09:05सब। क्या सच में उनकी इज्जत उनके बेटी से
  3157. 2:09:08ज्यादा इंपॉर्टेंट थी? यही सवाल राघव को
  3158. 2:09:11रहरह कर आ रहे थे और उस ख्याल में खोया
  3159. 2:09:13हुआ वह कृष्णा की आवाज से होश में आया।
  3160. 2:09:16क्या कुछ कहा तुमने कृष? राघव ने सवाल
  3161. 2:09:19किया और कृष्णा बोला कहां खो गया था तू?
  3162. 2:09:22वो छोड़ बड़ी मॉम तुझे बुला रही है। वो कल
  3163. 2:09:25जाना है नासिया के घर। तो उनका कहना था कि
  3164. 2:09:27उनके कुछ गिफ्ट और पता नहीं क्या जाकर देख
  3165. 2:09:31ले कि वो क्या कह रही थी। कृष्णा ने राघव
  3166. 2:09:34को भेज दिया और फिर राघव सुधा मोम में
  3167. 2:09:36कमरे में चला गया। राघव ने दरवाजे पर नॉक
  3168. 2:09:39करते हुए अंदर आने की इजाजत मांगी और अंदर
  3169. 2:09:41आकर उनसे बोला क्या हुआ मोम? आपने बुलाया।
  3170. 2:09:45सुधा मोम ने उसे बैठने का इशारा किया और
  3171. 2:09:48बोली हां कालसिया के घर खाली हाथ जाना
  3172. 2:09:50अच्छा नहीं लगेगा। तुम एक काम करो कल सुबह
  3173. 2:09:53तुम कृष्णा और राज को लेकर मार्केट चले
  3174. 2:09:55जाओ। सिया को भी अपने साथ ले जाना और उससे
  3175. 2:09:58पूछकर सबके सभी घर वालों के लिए उनके पसंद
  3176. 2:10:00का कुछ ना कुछ ले लेना। इस तरह खाली हाथ
  3177. 2:10:03जाना अच्छा नहीं लगता। और हां कुछ फ्रूट्स
  3178. 2:10:05भी ले आना। लिस्ट में तुम्हें डाल दूंगी।
  3179. 2:10:07बाकी मिठाई हम हमारे हमेशा वाली शॉप से
  3180. 2:10:10लेकर चले जाएंगे। कविता और कुछ रहा तो
  3181. 2:10:12नहीं है ना। याद दिला दो मुझे। और संजय जी
  3182. 2:10:15आप आपसे मैंने कहा था कि सिया के हिस्से
  3183. 2:10:17की ज्वेलरी बैंक लॉकर से निकाल लेंगा।
  3184. 2:10:20लेकिन नहीं आपको तो कुछ याद नहीं रहता। अब
  3185. 2:10:22कल जाते वक्त उसे हमारी तरफ से दिए हुए
  3186. 2:10:24गहने भी पहनने होंगे ना। मगर आप है कि पता
  3187. 2:10:27नहीं कैसे होगा सब कुछ। सुधा मोम अकेली
  3188. 2:10:30है। बड़बड़ाए जा रही थी और उसे ऐसा देख
  3189. 2:10:32अक्षय संजय जी और कविता मुस्कुरा रहे थे।
  3190. 2:10:35हंसने वाले कोई बात नहीं की है मैंने। छह
  3191. 2:10:38आपको कुछ समझ ही नहीं आता है। सुधा मोम ने
  3192. 2:10:41उन्हें डांटते हुए कहा और वह सब खामोश हो
  3193. 2:10:43गए। सुधा मोम की नजर फिर राघव पर गई जो
  3194. 2:10:45किसी सोच में खोया वहां ही खड़ा था। सुधा
  3195. 2:10:47मोम फिर उसके पास आई और फिक्र से बोली
  3196. 2:10:49क्या हुआ राघव कोई बात हुई है क्या जवाब
  3197. 2:10:53में राघव बोला नहीं वह बस सिया में पापा
  3198. 2:10:56चाहते थे कि वो कल थोड़ा जल्दी आ जाए वो
  3199. 2:10:58मोम राघव ने सिया और उसके पापा के बीच हुई
  3200. 2:11:01सारी बातें यहां तक कि जो उसे फील हुआ वो
  3201. 2:11:04भी बता दिया जिसे सुन सुधा मोम एक पल सोच
  3202. 2:11:06में गिर गई क्या हुआ मॉम क्या सोच रही है
  3203. 2:11:10आप राघव का सवाल सुन सुधा मोम मुस्कुराए
  3204. 2:11:13और बोली नहीं कुछ नहीं एक काम करो तुम सब
  3205. 2:11:15ना अभी शॉपिंग के लिए चले जाओ जाओ। वैसे
  3206. 2:11:17भी अभी तक तो 8:30 ही हुए हैं और कुछ
  3207. 2:11:19शॉप्स तो लेट नाइट भी ओपन होती है ना।
  3208. 2:11:22देखो क्या लेते आता है और फिर सुबह तुम और
  3209. 2:11:24सिया आगे जल्दी चले जाना। सुधा मोम की बात
  3210. 2:11:26सुन राघव ने हां में सर हिलाया और अक्षय
  3211. 2:11:29को आवाज देकर वह बाहर चले गए। हंसने वाले
  3212. 2:11:32कोई बात नहीं की है मैंने। छह आपको कुछ
  3213. 2:11:34समझ ही नहीं आता है। सुधा मोम ने उन्हें
  3214. 2:11:37डांटते हुए कहा और वह सब खामोश हो गए।
  3215. 2:11:39सुधा मोम की नजर फिर राघव पर गई। जो किसी
  3216. 2:11:41सोच में खोया वहां ही खड़ा था। सुधा मोम
  3217. 2:11:43फिर उसके पास आई और फिक्र से बोली क्या
  3218. 2:11:45हुआ राघव कोई बात हुई है क्या जवाब में
  3219. 2:11:49राघव बोला नहीं वह बस सिया में पापा चाहते
  3220. 2:11:52थे कि वो कल थोड़ा जल्दी आ जाए वो मोम
  3221. 2:11:55राघव ने सिया और उसके पापा के बीच हुई
  3222. 2:11:57सारी बातें यहां तक कि जो उसे फील हुआ वो
  3223. 2:12:00भी बता दिया जिसे सुन सुधा मोम एक पल सोच
  3224. 2:12:02में गिर गई क्या हुआ मॉम क्या सोच रही है
  3225. 2:12:06आप राघव का सवाल सुन सुधा मोम मुस्कुराए
  3226. 2:12:08और बोली नहीं कुछ नहीं एक काम करो तुम सब
  3227. 2:12:11ना अभी शॉपिंग के लिए चले जाओ जाओ। वैसे
  3228. 2:12:13भी अभी तक तो 8:30 ही हुए हैं और कुछ
  3229. 2:12:15शॉप्स तो लेट नाइट भी ओपन होती है ना।
  3230. 2:12:17देखो क्या लेते आता है और फिर सुबह तुम और
  3231. 2:12:20सिया आगे जल्दी चले जाना। सुधा मोम की बात
  3232. 2:12:22सुन राघव ने हां में सर हिलाया और अक्षय
  3233. 2:12:24को आवाज देकर वह बाहर चले गए। सिया सिया
  3234. 2:12:28राघव ने उसे आवाज देते हुए पुकारा और सिया
  3235. 2:12:30जो कि किचन में बर्तन धो रही थी, वह
  3236. 2:12:32दौड़ते हुए ही बाहर आ गई। अपनी फूली हुई
  3237. 2:12:35सांस को नॉर्मल करते हुए वह बोली, क्या
  3238. 2:12:37हुआ जी? आपा ने बुलाया। उसका सवाल सुनने
  3239. 2:12:40के लिए राघव होश में ही नहीं था। वह तो
  3240. 2:12:42दौड़ती हुई सिया को आता देख फ्रिज होकर एक
  3241. 2:12:45जगह खड़े हो गया। सिया दिखी इतनी खूबसूरत
  3242. 2:12:47रही थी को वो चाहकर भी अपनी आंखें उस पर
  3243. 2:12:49से हटा नहीं पा रहा था। बालों का बंधा
  3244. 2:12:51मेसी बंद जिसमें से कुछ लिटे उसके चेहरे
  3245. 2:12:54पर और गर्दन पर बिखरी हुई थी। दिखाई देती
  3246. 2:12:57वो उसकी खूबसूरत लंबी गोरी गर्दन और उस पर
  3247. 2:12:59जजचता उसका पहना मंगलसूत्र सिया ने अपने
  3248. 2:13:02साड़ी का पल्लो अपने कमर पर बाढ़ रखा था।
  3249. 2:13:04जिस वजह से उसकी गोरी-गोरी कमर साफ दिख
  3250. 2:13:06रही थी। जिसे देख राघव ने अपनी थूक गटक ली
  3251. 2:13:09और कई सारी नाकाम कोशिशें करने के बाद
  3252. 2:13:11आखिर में अपनी नजर वहां से हटा दी। जी
  3253. 2:13:14आपने आपने कुछ कहा नहीं। क्या हुआ? सिया
  3254. 2:13:17ने फिर से पूछा और जवाब में सबसे पहले
  3255. 2:13:19राघव ने उसके कमर पर टक किए हुए उसके
  3256. 2:13:22पल्लों को अलग कर दिया। सिया की आंखें
  3257. 2:13:24हैरानी से बड़ी हो गई। उसकी यह हरकत देख
  3258. 2:13:26और राघव ने उसे अपनी नजरें फेर दी। वो
  3259. 2:13:29धीरे से बोला, "अना काम छोड़ो और तैयार हो
  3260. 2:13:31जाओ। हम शोपिन पर जा रहे हैं घर वालों के
  3261. 2:13:34लिए गिफ्ट लेने है और राघव हवा की तेजी से
  3262. 2:13:36वहां से चला गया। सिया वैसे ही खड़े रही
  3263. 2:13:39और जब उसे एहसास हुआ कि राघव ने अभी क्या
  3264. 2:13:41बोला और क्या किया तब शर्म से उसका चेहरा
  3265. 2:13:44लाल हो गया। साथ ही में वह बहुत खुश भी
  3266. 2:13:46हुई। तभी छोटी मां ने उसे आवाज दी और उसके
  3267. 2:13:49पास आते हुए बोली सिया बेटा काम रहने दो
  3268. 2:13:52और राघव के साथ जाओ। और हां जो तुम्हें
  3269. 2:13:54पसंद है वह सारी चीजें ले लेना। छोटी मां
  3270. 2:13:57की बात सुन। सिया बोली हां छोटी मां बस 10
  3271. 2:14:00मिनट मैं उतने बर्तन जल्दी से साफ करती
  3272. 2:14:02हूं और फिर जाती हूं। सिया कहकर जल्दी से
  3273. 2:14:04किचन के तरफ जाने लग गई। लेकिन छोटी मां
  3274. 2:14:06ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक दिया और सीधे
  3275. 2:14:08तैयार होने के लिए भेज दिया। सिया खुश
  3276. 2:14:11होते हुए उसके कमरे में गई और जल्दी से एक
  3277. 2:14:14अच्छी से रॉयल ब्लू कलर की साड़ी पहनकर
  3278. 2:14:16तैयार हो गई। ब्लैक कलर का छोटी स्लीव्स
  3279. 2:14:18का ब्लाउज और वह डार्क ब्लू कलर की साड़ी
  3280. 2:14:20उसके गोल रंग पर बहुत ही ज्यादा जच रही
  3281. 2:14:22थी। सिया ने अपने बाल खोले। लेकिन फिर उसे
  3282. 2:14:25याद आया कि शॉपिंग करते वक्त उसे उसके
  3283. 2:14:27लंबे बाल कुछ ज्यादा ही परेशान करते हैं।
  3284. 2:14:30इसलिए उसने जल्दी से अपने बालों का जुड़ा
  3285. 2:14:32बंद बनाया और कान में झुमके पहनकर हल्का
  3286. 2:14:34सा मेकअप कर दिया। अपने आंखों में काजल
  3287. 2:14:37सजाकर उसने अपनी पर्स ली और बाहर आकर सुधा
  3288. 2:14:39मोम के कमरे की ओर चली गई। उसने दरवाजे पर
  3289. 2:14:42कनोक करके अंदर आने की इजाजत मांगी और
  3290. 2:14:44उनसे बोली मोम वो वो हम शॉपिंग आपने कहा
  3291. 2:14:47था ना कि हम शॉपिंग पर जाए तो क्या मैं
  3292. 2:14:49जाऊं? सिया ने इजाजत मांगते हुए कहा और
  3293. 2:14:52सुधा मोम ने हां में सर हिलाकर उसे जाने
  3294. 2:14:54के लिए इजाजत दे दी। फिर कुछ सोचकर
  3295. 2:14:57उन्होंने उसे आवाज दी और बोली यह लो कुछ
  3296. 2:14:59पैसे रख लो मेरी तरफ से और तुम्हारा जो
  3297. 2:15:02दिल चाहे अपने लिए खरीद लेना। सुधा मोम ने
  3298. 2:15:04उसके हाथ में पैसे रखकर कहा तभी पापा भी
  3299. 2:15:06सामने आकर बोले और यह मेरी तरफ से मेरी
  3300. 2:15:09बेटी के लिए कुछ अच्छा सा खरीदना। हां।
  3301. 2:15:11पापा ने आंखें मिचकाते हुए कहा और सिया ने
  3302. 2:15:13मुस्कुराकर हां में सर हिलाया। वो जल्दी
  3303. 2:15:15से नीचे झुकी और उनके पैर छूकर आशीर्वाद
  3304. 2:15:17ले लिया। सब जाओ। राघव इंतजार कर रहा
  3305. 2:15:21होगा। सुधा मोम ने उसे भेज दिया और सिया
  3306. 2:15:23भी मुस्कुराती हुई चली गई। राघव ने उसे
  3307. 2:15:25आते हुए देखा और इस बार किसी तरह से अपनी
  3308. 2:15:27नजरों को उस पर से हटा दिया। वो खुद से ही
  3309. 2:15:30बोला यह क्यों हर बार इतनी खूबसूरत दिखती
  3310. 2:15:32है और पता नहीं मेरे नजरों को क्या हो गया
  3311. 2:15:35जो उस पर से हटने का नाम ही नहीं ले रही
  3312. 2:15:37है। राघव खुद से ही बड़बड़ाए जा रहा था।
  3313. 2:15:40तभी सिया के पायल की छिनकार और हाथों के
  3314. 2:15:42चूयों की खनखन उसे सुनाई दी। उसने एक नजर
  3315. 2:15:44फिर से उसे देखा और मुस्कुराकर उसके लिए
  3316. 2:15:46कार का गेट खोल दिया। सिया भी फिर जल्दी
  3317. 2:15:48से गाड़ी में बैठ गई। राघव ने उसके सभी
  3318. 2:15:52भाइयों को उसके साथ आने के लिए कहा था।
  3319. 2:15:54लेकिन राज ने उसे समझाते हुए कहा कि यह
  3320. 2:15:56वक्त उन दोनों को एक दूसरे के साथ ज्यादा
  3321. 2:15:58से ज्यादा बिताना चाहिए ताकि वह दोनों एक
  3322. 2:16:00दूसरे के करीब आ सके। एक दूसरे को समझ
  3323. 2:16:03सके। राघव को भी कहीं ना कहीं उसकी बात
  3324. 2:16:05सही लगी। इसलिए वह अकेला ही साथ जाने के
  3325. 2:16:07लिए तैयार हुआ। राघव के अंदर ड्राइविंग
  3326. 2:16:10सीट पर बैठते ही सिया ने उसके तरफ देखा और
  3327. 2:16:12सवाल करते हुए बोली वो वो बाकी सब नहीं आ
  3328. 2:16:15रहे हैं। छोटी मां ने कहा था कि अक्षय भाई
  3329. 2:16:18और कृष्णा भाई आने वाले थे। सिया की बात
  3330. 2:16:20सुन राघव उससे बोला क्या तुम्हें मेरे साथ
  3331. 2:16:23जाने में डर लग रहा है? नहीं नहीं बिल्कुल
  3332. 2:16:26नहीं। लेकिन हम एक फैमिली है ना तो हम साथ
  3333. 2:16:29जाएंगे ना। और फिर रात भी तो है अगर साथ
  3334. 2:16:31में कोई होता तो। सिया खामोश हो गई और फिर
  3335. 2:16:35अपनी नजरें चुराते हुए बोली आप आप मुझे
  3336. 2:16:37ऐसे मत देखिए ना मैं भूल जाती हूं कि मुझे
  3337. 2:16:40क्या कहना है। सिया ने छोटा सा मुंह बनाते
  3338. 2:16:42हुए कहा और उसके एक्सप्रेशन और बात सुन
  3339. 2:16:44राघव अपनी हंसी नहीं रोक पाया। वो हंसने
  3340. 2:16:47लग गया जिसे देख सिया फिर से बोली मैं
  3341. 2:16:49क्या इतनी फनी हूं। जो आप सब बार-बार मुझ
  3342. 2:16:52पर हंसते हैं। सिया का चेहरा तो और भी
  3343. 2:16:54छोटा हो गया जिसे देख राघव ने ना में सर
  3344. 2:16:57हिलाया और बोला नहीं तुम फनी नहीं बल्कि
  3345. 2:16:59बहुत अच्छी हो। जितनी खूबसूरत हो ना उतनी
  3346. 2:17:02ही समझदार और रिश्तों का मान रखने वाली
  3347. 2:17:04भी। और यह जो एक्सप्रेशन तुम्हारे चेहरे
  3348. 2:17:06पर आते हैं ना उसे देख अपने आप एक सुकून
  3349. 2:17:09वाली मुस्कान चेहरे पर आ जाती है। बहुत
  3350. 2:17:11खुशी होती है मुझे। इस वजह से सिर्फ
  3351. 2:17:13मुस्कुराता नहीं बल्कि खुलकर हंसता हूं।
  3352. 2:17:15राघव ने समझाते हुए कहा और फिर एक बार
  3353. 2:17:18बड़ी सी स्माइल उसे दे दी। सिया ने भी
  3354. 2:17:20समझते हुए उसे मुस्कान दी और बोली तो आप
  3355. 2:17:23उन्हें बुला रहे हैं ना। हम साथ में
  3356. 2:17:25जाएंगे और राज भाई को भी बुला लेना। हम
  3357. 2:17:28साथ में जाएंगे। सिया की बात सुन राघव ने
  3358. 2:17:30राज को कॉल किया और उन तीनों को भी अपने
  3359. 2:17:32साथ आने के लिए बोल दिया। वह दोनों फिर
  3360. 2:17:34गाड़ी से उतरे और उनके बड़ी गाड़ी के तरफ
  3361. 2:17:37चले गए। राज, अक्षय और कृष्णा तीनों भी
  3362. 2:17:40वहां आ गए। राज ने सिया के तरफ देखा और
  3363. 2:17:42बोला, डोंट यू थिंक कि तुम दोनों को अकेले
  3364. 2:17:45जाना चाहिए। तुम्हें उतना। राज के आगे कुछ
  3365. 2:17:48बोलने से पहले ही सिया बोली, भाई, हम सब
  3366. 2:17:50साथ जाते हैं ना। मुझे अच्छा लगेगा अगर आप
  3367. 2:17:53हमारे साथ आओगे तो सिया ने इतने प्यार से
  3368. 2:17:55कहा कि राज का भी दिल नहीं हुआ उसे मना
  3369. 2:17:57करने के लिए। तभी अक्षय बोला सोच लो हां
  3370. 2:18:01सिया हमारा आकर या ना आकर कोई फायदा नहीं
  3371. 2:18:03है क्योंकि हमें शॉपिंग का एस भी नहीं आता
  3372. 2:18:05है। हां कृष्णा तुम्हारी हेल्प कर सकता
  3373. 2:18:07है। मां के साथ आदत है उसे शॉपिंग करने
  3374. 2:18:10की। अक्षय की बात सुन सिया मुस्कुराते हुए
  3375. 2:18:12बोली कोई बात नहीं भाई मैं सब मैनेज कर
  3376. 2:18:15लूंगी। बस आप मेरे साथ चलो। सिया ने कहा
  3377. 2:18:17और फिर उस बड़ी गाड़ी में बैठ मुस्कुराते
  3378. 2:18:19हुए वो पांचो शॉपिंग के लिए निकल गए। या
  3379. 2:18:22ने भी समझते हुए उसे मुस्कान दी और बोली
  3380. 2:18:24तो आप उन्हें बुला रहे हैं ना। हम साथ में
  3381. 2:18:27जाएंगे और राज भाई को भी बुला लेना। हम
  3382. 2:18:30साथ में जाएंगे। सिया की बात सुन राघव ने
  3383. 2:18:32राज को कॉल किया और उन तीनों को भी अपने
  3384. 2:18:34साथ आने के लिए बोल दिया। वो दोनों फिर
  3385. 2:18:36गाड़ी से उतरे और उनके बड़ी गाड़ी के तरफ
  3386. 2:18:38चले गए। राज अक्षय और कृष्णा तीनों भी
  3387. 2:18:42वहां आ गए। राज ने सिया के तरफ देखा और
  3388. 2:18:44बोला डोंट यू थिंक कि तुम दोनों को अकेले
  3389. 2:18:46जाना चाहिए। तुम्हें उतना। राज के आगे कुछ
  3390. 2:18:49बोलने से पहले ही सिया बोली भाई हम सब साथ
  3391. 2:18:52जाते हैं ना। मुझे अच्छा लगेगा अगर आप
  3392. 2:18:55हमारे साथ आओगे तो सिया ने इतने प्यार से
  3393. 2:18:57कहा कि राज का भी दिल नहीं हुआ उसे मना
  3394. 2:18:59करने के लिए। तभी अक्षय बोला सोच लो हां
  3395. 2:19:02सिया हमारा आकर या ना आकर कोई फायदा नहीं
  3396. 2:19:05है क्योंकि हमें शॉपिंग का एस भी नहीं आता
  3397. 2:19:07है। हां कृष्णा तुम्हारी हेल्प कर सकता
  3398. 2:19:09है। मां के साथ आदत है उसे शॉपिंग करने
  3399. 2:19:12की। अक्षय की बात सुन सिया मुस्कुराते हुए
  3400. 2:19:14बोली कोई बात नहीं भाई मैं सब मैनेज कर
  3401. 2:19:16लूंगी। बस आप मेरे साथ चलो। सिया ने कहा
  3402. 2:19:19और फिर उस बड़ी गाड़ी में बैठ मुस्कुराते
  3403. 2:19:21हुए वह पांचो शॉपिंग के लिए निकल गए। राघव
  3404. 2:19:24ने कार मॉल के सामने खड़ी की और उन्हें
  3405. 2:19:26उतरने का बोल वो पार्किंग एरिया में चला
  3406. 2:19:28गया। सिया ने एक पल मॉल के तरफ देखा और
  3407. 2:19:31फिर राघव के आने तक वह वहीं खड़े रहे।
  3408. 2:19:33उसके आते ही वह सब अंदर गए। सिया आगे चल
  3409. 2:19:35रही थी और यह चारों उसके पीछे जैसे उसके
  3410. 2:19:38बॉडीगार्ड्स हो। मॉल में जो थोड़ी बहुत
  3411. 2:19:40गर्दी थी। वो इन सबको बस देखते ही रह गए।
  3412. 2:19:42एक बेहद खूबसूरत लड़की और उसके आसपास खड़े
  3413. 2:19:45चार उतने ही हैंडसम पर्सनालिटी वाले लड़के
  3414. 2:19:47सब बस उन्हें ही देख रहे थे। सिया ने राघव
  3415. 2:19:50के तरफ देखा और बोली, सुनिए ना पहले हम
  3416. 2:19:53जेंट सेक्शन में जाते हैं। वहां सबके लिए
  3417. 2:19:56कपड़े ले लेंगे और फिर लेडीज की शॉपिंग
  3418. 2:19:58करेंगे। मोम ने सभी के लिए कपड़े लेने के
  3419. 2:20:00लिए बोले थे और घड़ी या दूसरा कुछ सिया की
  3420. 2:20:02बात सुन राघव ने सिर्फ हां में सर हिलाया।
  3421. 2:20:05वैसे भी वह सिर्फ पेमेंट करने और बैग
  3422. 2:20:07उठाने के लिए ही आया था। यह शॉपिंग तो
  3423. 2:20:09उसके बस की बात ही नहीं थी। सेम हाल अक्षय
  3424. 2:20:12का भी था। राघव और अक्षय शॉपिंग के मामले
  3425. 2:20:14में बहुत ही आलसी थे। राज का भी वैसा ही
  3426. 2:20:16कुछ हाल था। मगर फिर भी वह कभी कभार कुछ
  3427. 2:20:19ना कुछ खरीद लेता था। इन सब से अलग कृष्णा
  3428. 2:20:21छोटी मां को हेल्प किया करता था शॉपिंग
  3429. 2:20:23में। वो सब थर्ड फ्लोर पर मौजूद जेंट्स
  3430. 2:20:26सेक्शन में गए। कृष्णा यहां से की शॉपिंग
  3431. 2:20:28करता तो वह पहले वही चले गए। राघव राज और
  3432. 2:20:30अक्षय ने एक कोना देखा और जाकर बैठ गए।
  3433. 2:20:33वही सिया और कृष्णा आगे गए। सेल्समैन ने
  3434. 2:20:36उन्हें आते हुए देखा और उन्हें ग्रीट करते
  3435. 2:20:38हुए बोला वेलकम सर मैडम कहिए क्या देखना
  3436. 2:20:41पसंद करेंगे आप? सिया भी मुस्कुराए और
  3437. 2:20:44बोली हमें साधा कुर्ता पजामा का सेट
  3438. 2:20:46दिखाए। सिया ने फिर कृष्णा के तरफ देखा और
  3439. 2:20:48बोली भाई आप कलर सिलेलेक्ट करने में मेरी
  3440. 2:20:51हेल्प कीजिए। ओके सिया की बात सुन कृष्णा
  3441. 2:20:53ने उसे थंब दिखाया और ओके बोला। उसके बाद
  3442. 2:20:56सिया ने शुरुआत की अपने शॉपिंग स्किल्स
  3443. 2:20:58दिखानी की और पांच ही मिनट में उसके बड़े
  3444. 2:21:00पापा के लिए उसने कुर्ता खरीद लिया। उसके
  3445. 2:21:03बड़े पापा हमेशा सादे कपड़े पहनना पसंद
  3446. 2:21:05करते थे। उन्हीं से अलग थे उसके पापा
  3447. 2:21:07जिन्हें सफारी सूट पसंद था। जिसकी शॉपिंग
  3448. 2:21:10भी अगले 5 मिनट में हो गई। सिया को पता था
  3449. 2:21:12कि उसे क्या लेना है और वह उसी हिसाब से
  3450. 2:21:14उस सेल्समैन को बता रही थी जिस वजह से
  3451. 2:21:17उसके दोनों ड्रेस बहुत जल्दी से लेट हो
  3452. 2:21:19गए। सिया ने कुछ सोचा और बोली भैया अब ना
  3453. 2:21:22फॉर्मल विद कोट के दो ड्रेस सेट दिखाए। उस
  3454. 2:21:25पर शर्ट लाइट कलर में होने चाहिए और फिर
  3455. 2:21:27कुछ ही मिनट्स में उसके सामने कुछ सेट्स आ
  3456. 2:21:29गए। जिसमें से सिया और कृष्णा ने दो
  3457. 2:21:32सिलेलेक्ट कर लिए। सेल्समैन भी बहुत खुश
  3458. 2:21:34था सिया और कृष्णा के ऊपर और उसी खुशी में
  3459. 2:21:36वह बोला अरे वाह मैडम आप दोनों भाई बहन
  3460. 2:21:39शॉपिंग के मामले में बहुत ही अच्छे हैं।
  3461. 2:21:41वरना तो चार ड्रेस सेलेक्ट होने में
  3462. 2:21:42कोई-कोई 4 घंटे लगा देता है। उसकी बात सुन
  3463. 2:21:45कृष्णा और सिया ने एक दूसरे के तरफ देखा
  3464. 2:21:47और मुस्कुराए। सिया बोली थैंक यू भैया। आप
  3465. 2:21:51एक काम कीजिए। इसमें से वो ब्लू वाला
  3466. 2:21:52ड्रेस है ना वो साइड में रखिए और पांच
  3467. 2:21:54फॉर्मल ड्रेस दिखाइए। सिया की बात सुन।
  3468. 2:21:56जहां से मैन कम पर लग गया। वही कृष्णा
  3469. 2:21:59थोड़ा काफज हुआ। उसे जहां तक पता था सिया
  3470. 2:22:02को तो तीन ही भाई थे ना। फिर पांच ड्रेस
  3471. 2:22:04मगर उसने उसे कुछ नहीं कहा और उसकी हेल्प
  3472. 2:22:07करने लगा। उन ड्रेसेस के सिलेक्शन के बाद
  3473. 2:22:09सिया ने दो और टीशर्ट और उस पर जींस और
  3474. 2:22:11अरमानी पैंट्स खरीद ली और कृष्णा के तरफ
  3475. 2:22:14देखकर डन बोला। कृष्णा कंफ्यूज था। मगर
  3476. 2:22:16उसने उसे कुछ नहीं कहा। सिया उसे बोली भाई
  3477. 2:22:19आप इन्हें बुलाकर लाएंगे। वो पेमेंट सिया
  3478. 2:22:22की बात सुन कृष्णा ने हां में सर हिलाया
  3479. 2:22:24और राघव को बुलाने के लिए चला गया। सिया
  3480. 2:22:26उस सेल्समैन से बोली भैया आप वह पहला वाला
  3481. 2:22:29कोर्ट सेट और इनमें से यह चार फॉर्मल
  3482. 2:22:31ड्रेस का बिल अलग तैयार कीजिए और इस कार्ड
  3483. 2:22:34से उनकी पेमेंट कर लीजिए। सिया ने एक
  3484. 2:22:36कार्ड उसके तरफ दिया और राघव के आने से
  3485. 2:22:38पहले ही उन ड्रेसेस का बिल कर दिया। राघव
  3486. 2:22:40के आने के बाद वह बिल करके बाहर निकले।
  3487. 2:22:42राघव थोड़ा कंफ्यूज था क्योंकि जितने
  3488. 2:22:45सामान की बग्जा थी उस हिसाब से बिल उसे कम
  3489. 2:22:47ही लग रहा था। मगर उसने कुछ नहीं कहा और
  3490. 2:22:49बग्जा लेकर बाहर चला गया। राज ने बग्जा को
  3491. 2:22:53देखा और बोला इतनी शॉपिंग और वो भी इतने
  3492. 2:22:55कम टाइम में नोट बैड सिया तुम तो बहुत
  3493. 2:22:58स्मार्ट हो राज की तारीफ सुन सिया
  3494. 2:23:00मुस्कुराए और बोली और कृष्णा भाई भी
  3495. 2:23:02उन्होंने ने मेरी बहुत हेल्प की सिया की
  3496. 2:23:04बात सुन कृष्णा मुस्कुराया और फिर वो लेडी
  3497. 2:23:06सेक्शन में गए वह भी सिया ने बहुत ही
  3498. 2:23:09जल्दी-जल्दी पांच साड़ियां खरीद ली और फिर
  3499. 2:23:11वो वॉच खरीदने के लिए गए। अगेन सिया ने
  3500. 2:23:14जल्दी-जल्दी 11 जेंट्स वॉच और पांच लेडीज
  3501. 2:23:16वॉच खरीद ली। जिसमें से कुछ का पेमेंट
  3502. 2:23:18उसने किया और कुछ का राघव के थ्रू करवाया।
  3503. 2:23:21उसे वहां एक हैंडबैग भी पसंद आए और उसने
  3504. 2:23:23वह भी खरीद ली। मगर इस बैग का पेमेंट राघव
  3505. 2:23:25ने किया। उन्होंने वक्त देखा तो अब तक 11
  3506. 2:23:28भी नहीं बजे थे। अक्षय बोला गाइस हमारे
  3507. 2:23:31वाले आइसक्रीम पार्लर चलते हैं अभी भी ओपन
  3508. 2:23:34ही होगा और उसकी बात सुन राघव ने गाड़ी उस
  3509. 2:23:37ओर ले ली। वहां उनका हमेशा आना जाना था और
  3510. 2:23:39वह वेटर भी उनके पहचान का था। इस वजह से
  3511. 2:23:42जैसे ही उसने गाड़ी देखी वो बिना कुछ कहे
  3512. 2:23:44ही उनकी ऑर्डर ले आया और उन्हें सर्व करते
  3513. 2:23:46हुए बोला सर आपकी आर्डर और पार्सल भी रेडी
  3514. 2:23:49करने के लिए बोल दिया है। कहकर ही उसकी
  3515. 2:23:51नजर सिया पर गई और उसने राघव और बाकी सबके
  3516. 2:23:54तरफ देखा। किसी तरह से फिर वह बोला मैम आप
  3517. 2:23:56क्या लेना चाहेंगी? सिया ने फिर राघव के
  3518. 2:23:59तरफ देखा और उसने आंखें मिचकाते हुए अपनी
  3519. 2:24:01आर्डर देने के लिए बोल दिया। सिया ने फिर
  3520. 2:24:04उसे आर्डर देते हुए बोली, आई वांट चोको
  3521. 2:24:06ब्राउनी विद एक्स्ट्रा टॉपिंग्स। सिया ने
  3522. 2:24:09चहकते हुए कहा, उसने काफी दिन हो गए थे।
  3523. 2:24:12उसकी फेवरेट आइसक्रीम नहीं खाई थी। तो वह
  3524. 2:24:14बहुत एक्साइटेड थी और आज इतने दिन बाद ना
  3525. 2:24:17सिर्फ वह बाहर आई थी बल्कि उसने बहुत सारी
  3526. 2:24:19शॉपिंग भी की और अब उसकी फेवरेट आइसक्रीम
  3527. 2:24:22उसकी खुशी तो सातवें आसमान पर थी। उसे
  3528. 2:24:25इतना खुश देख सबको कहीं ना कहीं बहुत
  3529. 2:24:27अच्छा लगा और राघव को तो सबसे ज्यादा काफी
  3530. 2:24:30खुश था। वो सिया को यूं इतना खुश देख और
  3531. 2:24:32बस उसे देखता ही रह गया। और आने के बाद सब
  3532. 2:24:34ने अपनी-अपनी आइसक्रीम एंजॉय की और घर के
  3533. 2:24:36लिए निकल गए। वह भी सिया ने बहुत ही
  3534. 2:24:39जल्दी-जल्दी पांच साड़ियां खरीद ली और फिर
  3535. 2:24:41वह वॉच खरीदने के लिए गए। अगेन सिया ने
  3536. 2:24:44जल्दी-जल्दी 11 जेंट्स वॉच और पांच लेडीज
  3537. 2:24:46वॉच खरीद ली। जिसमें से कुछ का पेमेंट
  3538. 2:24:48उसने किया और कुछ का राघव के थ्रू करवाया।
  3539. 2:24:51उसे वहां एक हैंडबैग भी पसंद आए और उसने
  3540. 2:24:53वह भी खरीद ली। मगर इस बैग का पेमेंट राघव
  3541. 2:24:55ने किया। उन्होंने वक्त देखा तो अब तक 11
  3542. 2:24:58भी नहीं बजे थे। अक्षय बोला गाइस हमारे
  3543. 2:25:02वाले आइसक्रीम पार्लर चलते हैं। अभी भी
  3544. 2:25:04ओपन ही होगा और उसकी बात सुन राघव ने
  3545. 2:25:06गाड़ी उस और ले ली। वहां उनका हमेशा आना
  3546. 2:25:09जाना था और वह वेटर भी उनके पहचान का था।
  3547. 2:25:11इस वजह से जैसे ही उसने गाड़ी देखी वह
  3548. 2:25:13बिना कुछ कहे ही उनकी ऑर्डर ले आया और
  3549. 2:25:15उन्हें सर्व करते हुए बोला सर आपकी आर्डर
  3550. 2:25:18और पार्लल भी रेडी करने के लिए बोल दिया
  3551. 2:25:20है। कहकर ही उसकी नजर सिया पर गई और उसने
  3552. 2:25:22राघव और बाकी सबके तरफ देखा। किसी तरह से
  3553. 2:25:25फिर वह बोला मैम आप क्या लेना चाहेंगी?
  3554. 2:25:28सिया ने फिर राघव की तरफ देखा और उसने
  3555. 2:25:30आंखें मिचकाते हुए अपनी आर्डर देने के लिए
  3556. 2:25:32बोल दिया। सिया ने फिर उसे आर्डर देते हुए
  3557. 2:25:35बोली आई वांट चोको ब्राउनी विद एक्स्ट्रा
  3558. 2:25:37टॉपिंग्स। सिया ने चहते हुए कहा उसने काफी
  3559. 2:25:41दिन हो गए थे। उसकी फेवरेट आइसक्रीम नहीं
  3560. 2:25:43खाई थी। तो वह बहुत एक्साइटेड थी और आज
  3561. 2:25:46इतने दिन बाद ना सिर्फ वह बाहर आई थी
  3562. 2:25:48बल्कि उसने अब बहुत सारी शॉपिंग भी की और
  3563. 2:25:50अब उसकी फेवरेट आइसक्रीम उसकी खुशी तो
  3564. 2:25:53सातवें आसमान पर थी। उसे इतना खुश देख
  3565. 2:25:56सबको कहीं ना कहीं बहुत अच्छा लगा और राघव
  3566. 2:25:58को तो सबसे ज्यादा काफी खुश था। वह सिया
  3567. 2:26:00को यूं इतना खुश देख और बस उसे देखता ही
  3568. 2:26:03रह गया। और आने के बाद सब ने अपनी-अपनी
  3569. 2:26:05आइसक्रीम एंजॉय की और घर के लिए निकल गए।
  3570. 2:26:08राघव सिया और बाकी सब जैसे ही घर के अंदर
  3571. 2:26:10दाखिल हुए तो उन्हें वहां सुधा मोम, पापा
  3572. 2:26:13और छोटी मां बैठे हुए दिखाई दिए। राघव ने
  3573. 2:26:15उन्हें घूर कर देखा और बोला, क्या आप
  3574. 2:26:17लोगों ने वक्त देखा है? 11:30 बजे है और
  3575. 2:26:20आप अब तक जाग रहे हैं। डोंट यू थिंक कि
  3576. 2:26:23आपको अभी तक सो जाना चाहिए था। राघव में
  3577. 2:26:26के खडूस डॉक्टर ने कहा जिसे देख सब बड़ों
  3578. 2:26:28ने अपनी आंखें घुमा दी। छोटी मां ने भी
  3579. 2:26:30उसे इग्नोर किया और सिया के पास आते हुए
  3580. 2:26:32बोली हो गई सब शॉपिंग। कुछ रहा हो तो हमें
  3581. 2:26:35बता देना। मैं और भाभी कल सुबह-सुबह
  3582. 2:26:38मार्केट जाकर ले आएंगे। राज ने मॉल से
  3583. 2:26:41निकलने के बाद घर पर कॉल कर सुधा मोम को
  3584. 2:26:43बता दिया था कि वह लोग आधे घंटे में घर आ
  3585. 2:26:45जाएंगे। उसकी बात सुन सुधा मोम फिक्र में
  3586. 2:26:48पड़ गई। अब इतनी जल्दी इतनी सारी शॉपिंग
  3587. 2:26:50थोड़ी ना हो सकती थी। भला उन्हें लगा कि
  3588. 2:26:53शायद सिया ने सारी चीजें खरीदी नहीं है।
  3589. 2:26:55और यही बात उन्होंने कविता छोटी मां को और
  3590. 2:26:57पापा को बता दी। वह भी फिक्र में पड़ गए
  3591. 2:27:00और उनके घर आने का इंतजार करते हुए बैठे
  3592. 2:27:02रहे। सिया मुस्कुराई और बोली हां हो गई
  3593. 2:27:05छोटी मां। सब कुछ खरीद लिया। मैं दिखाऊं
  3594. 2:27:07आपको। सिया की चहकती हुई आवाज सुन और
  3595. 2:27:10उन्हें शॉपिंग दिखानी की एक्साइटमेंट देख
  3596. 2:27:12राघव ने कुछ बोलने के लिए खोला हुआ अपना
  3597. 2:27:14मुंह बंद कर दिया। वह अभी के अभी सभी को
  3598. 2:27:16जिनके उनके कमरे में भेजना चाहता था और
  3599. 2:27:19सिया को लेकर अपने रूम में जाना चाहता था।
  3600. 2:27:22आज का ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर सभी कुछ सिया
  3601. 2:27:25ने बनाया था और इतना ही नहीं बल्कि उसका
  3602. 2:27:27सारा सामान भी अनपैक करके अच्छे से अरेंज
  3603. 2:27:29करके रख लिया था। इतना सारा काम करने के
  3604. 2:27:32बाद लास्ट में शॉपिंग। इसी वजह से राघव
  3605. 2:27:34चाहता था कि सिया अब जाकर आराम करे। लेकिन
  3606. 2:27:37नहीं उसे तो सोना नहीं था बल्कि अपनी की
  3607. 2:27:39हुई शॉपिंग सभी को बतानी थी। अब छोटी मां
  3608. 2:27:43ने सोचते हुए सुधा मोम के तरफ देखा और
  3609. 2:27:45उन्होंने हां में सर हिला दिया। उन दोनों
  3610. 2:27:47ने सोच लिया था अगर कुछ कम लगेगा तो वह कल
  3611. 2:27:50लेकर आ जाएंगे। छोटी मां फिर सिया के तरफ
  3612. 2:27:52देखकर बोली हां बिल्कुल दिखाओ तो जरा
  3613. 2:27:54क्या-क्या खरीदा है तुमने। और बस उनका
  3614. 2:27:57इतना ही कहना सिया ने चाहते हुए बग्जा
  3615. 2:27:59उठाए और एक-एक बैग खोलकर सभी को सब कुछ
  3616. 2:28:02दिखाने लग गई। उसने अपने परिवार के लिए
  3617. 2:28:04लाए हुए सभी कपड़े और वॉच एक-एक कर दिखाई
  3618. 2:28:06और उसकी शॉपिंग सुधा मोम और छोटी मां
  3619. 2:28:09दोनों को भी बहुत पसंद आई। बहुत ही बारीकी
  3620. 2:28:11से देखकर खरीदा था। उस बे सब कुछ रंग और
  3621. 2:28:13फैब्रिक भी बहुत अच्छा था। सुधा मोम अपने
  3622. 2:28:16आप को उसकी तारीफ करने से रोक नहीं पाए।
  3623. 2:28:19अरे वाह सिया तुम्हारी चॉइस तो बहुत ही
  3624. 2:28:21अच्छी है। सब कुछ बहुत अच्छा है। उनके
  3625. 2:28:23मुंह से अपने लिए तारीफ सुन सिया खुश हुई
  3626. 2:28:25और बोली मोम कृष्णा भाई ने भी इसमें मेरी
  3627. 2:28:28बहुत हेल्प की। अगर वह नहीं होते तो सब
  3628. 2:28:30कुछ इतनी जल्दी नहीं होता। पापा सिया की
  3629. 2:28:33बात सुन बोले मुझे लगा ही था कि सिर्फ
  3630. 2:28:35कृषि तुम्हारी मदद करेगा। वरना यह तीनों
  3631. 2:28:38तो किसी के काम के नहीं है। पापा की बात
  3632. 2:28:40सुन सब मुस्कुरा उठे तो वही बाकी बचे हुए
  3633. 2:28:42तीनों में मुंह बना लिया। कृष्णा सिया के
  3634. 2:28:44तरफ देखकर बोला वैसे सिया उन बग जमे के
  3635. 2:28:47कपड़े किसके लिए है? तुमने बताया नहीं अभी
  3636. 2:28:50तक। कृष्णा ने इतनी देर से अपने मन में चल
  3637. 2:28:53रहे सवाल को पूछ ही लिया और जवाब में सिया
  3638. 2:28:55बोली यह सब आप सबके लिए है। मैंने एक मिनट
  3639. 2:28:58हां, मैं दिखाती हूं। सिया ने जल्दी से
  3640. 2:29:00दूसरी बैग खोली और उसने से सबसे पहले पापा
  3641. 2:29:02के लिए लिया हुआ फॉर्मल ड्रेस विद कोट
  3642. 2:29:04निकालकर उन्हें दे दिया। फिर सुधा मोम और
  3643. 2:29:06छोटी मां की साड़ी और फिर एक-एक कर लिए
  3644. 2:29:08हुए सभी फॉर्मल ड्रेस उसने निकालकर राज
  3645. 2:29:10अक्षय कृष्णा और फिर लास्ट में राघव को दे
  3646. 2:29:13दिए। सिया ने फिर दूसरे बैग में से सबके
  3647. 2:29:16लिए ली हुई घिया निकाली और एक केयर वो भी
  3648. 2:29:18सभी को दे दी और लास्ट में वो पस छोटी मां
  3649. 2:29:20को देते हुए सिया बोली छोटी मां यह पस
  3650. 2:29:23आपके लिए मुझे ना यह आपके लिए बहुत ज्यादा
  3651. 2:29:25पसंद आए और आपके लिए मैंने जो साड़ी ली है
  3652. 2:29:27ना यह उस पर भी मैच हो जाएगी। इसलिए यह
  3653. 2:29:30मैंने ली सिया की बात सुन छोटी मां को
  3654. 2:29:32बहुत ही अच्छा लगा। उन्होंने पस को देखा
  3655. 2:29:34और मुस्कुराते हुए बोली बहुत अच्छी है।
  3656. 2:29:36थैंक यू बेटा छोटी मां यू मुस्कुराते हुए
  3657. 2:29:39देख सभी को बहुत अच्छा लगा। सिया यह सब तो
  3658. 2:29:42ठीक है लेकिन इन सारी चीजों का बिल बहुत
  3659. 2:29:44ही कम आया है। कैसे राघव ने सवाल किया
  3660. 2:29:48जिसे सुन सिया हड़बड़ा गई। वो किसी तरह से
  3661. 2:29:50बोली वो वो आप सबके लिए हुए चीजों का बिल
  3662. 2:29:53मैंने पे कर दिया। वो वो मैं आप सबके लिए
  3663. 2:29:55कुछ ना कुछ लेना लेना चाहती थी ना इस वजह
  3664. 2:29:57से बिल। सिया से आगे कुछ बोला ही नहीं
  3665. 2:30:00गया। जब उसने राघव का गुस्से भरा चेहरा
  3666. 2:30:02देखा। राघव गुस्से से उससे बोला और किससे
  3667. 2:30:06पूछकर तुमने अपने घर वालों के पैसे खर्च
  3668. 2:30:08किए? क्या मैं तुम्हारे खर्चे उठाने के
  3669. 2:30:10लायक नहीं हूं क्या? या फिर मैंने मना करा
  3670. 2:30:13था तुम्हें ज्यादा खर्चा करने के लिए।
  3671. 2:30:15इसलिए तुमने अपने घर वालों में पैसे यूज
  3672. 2:30:17किए। राघव ने बेहद गुस्से में कही थी यह
  3673. 2:30:20बात और थोड़ी तेज आवाज में भी जिसे सुन
  3674. 2:30:22सिया सहम गई और डर से कांपने लगी। उसे यूं
  3675. 2:30:25डरता देख राघव को तो और भी गुस्सा आया और
  3676. 2:30:28वह सख्ती से बोला मैंने ऐसा क्या कह दिया
  3677. 2:30:30सिया कि तुम मुझसे इतना डर रही हो क्या
  3678. 2:30:33मैंने मारा तुम्हें जो तुम मुझे से राघव
  3679. 2:30:36आगे कुछ बोला पाता उससे पहले ही सुधा मोम
  3680. 2:30:38उससे बोली राघव बस करो एक और लफ्ज नहीं और
  3681. 2:30:42उनकी बात मान राघव चुप हो गया और सिया के
  3682. 2:30:44तरफ उसने पीट कर ली पता नहीं क्यों मगर
  3683. 2:30:47सिया उसे इस तरह नहीं देख पाए वो किसी तरह
  3684. 2:30:50हिम्मत करके बोली जी वो यह पैसे ऐसे मेरे
  3685. 2:30:53घर वालों के नहीं थे बल्कि मेरे थे में
  3686. 2:30:56मैं जॉब करती थी ना अकाउंटिंग की तो वह
  3687. 2:30:58प्रोफेसर के पास वो उसके पैसे मेरे मेरे
  3688. 2:31:02हेत सिया को सूझ ही नहीं रहा था कि वो
  3689. 2:31:04कैसे कहे उसे इतना ज्यादा डर लग रहा था कि
  3690. 2:31:07वह लगभग बेहोश होने के कगार पर थी और अंत
  3691. 2:31:10में जब उसका दिमाग यह सारा स्ट्रेस सह
  3692. 2:31:12नहीं पाया तब वह चक्कर खाकर नीचे गिरने को
  3693. 2:31:14हुई। सिया सभी के मुंह से उसी का नाम
  3694. 2:31:17निकला और उसके गिरने से पहले ही अक्षय और
  3695. 2:31:19राज जो उसके करीब थे उन्होंने उसे पकड़
  3696. 2:31:21लिया। इतनी देर से गुस्से में खड़ा राघव
  3697. 2:31:24भी जल्दी से पीछे मुड़ा और जल्दी से सिया
  3698. 2:31:26के पास आ गया। राज ने उसे गुस्से में घुरा
  3699. 2:31:28और कृष्णा से बोला कृष्णा मेरी हेल्प करो
  3700. 2:31:31सिया को अंदर छोटी मां के कमरे में ले
  3701. 2:31:33जाने के लिए और अक्षय जल्दी से मेडिकल किट
  3702. 2:31:35लेकर आओ। राज की बात मान कृष्णा ने एक पला
  3703. 2:31:38राघव को देखा और उसने जैसे ही हां इशारा
  3704. 2:31:40किया कृष्णा ने उसे अपने गोद में उठाकर
  3705. 2:31:42छोटी मां के कमरे में ले गया। वह जाकर राज
  3706. 2:31:44ने उसे चेक किया और फिर इंजेक्शन लगा
  3707. 2:31:46दिया। राघव गुस्से से उससे बोला और किससे
  3708. 2:31:50पूछकर तुमने अपने घर वालों के पैसे खर्च
  3709. 2:31:52किए? क्या मैं तुम्हारे खर्चे उठाने के
  3710. 2:31:54लायक नहीं हूं क्या? या फिर मैंने मना करा
  3711. 2:31:57था तुम्हें ज्यादा खर्चा करने के लिए
  3712. 2:31:59इसलिए तुमने अपने घर वालों में पैसे यूज
  3713. 2:32:01किए। राघव ने बेहद गुस्से में कही थी यह
  3714. 2:32:04बात और थोड़ी तेज आवाज में भी जिसे सुन
  3715. 2:32:06सिया सहम गई और डर से कांपने लगी। उसे यूं
  3716. 2:32:09डरता देख राघव को तो और भी गुस्सा आया और
  3717. 2:32:12वह सख्ती से बोला मैंने ऐसा क्या कह दिया
  3718. 2:32:14सिया कि तुम मुझसे इतना डर रही हो क्या
  3719. 2:32:17मैंने मारा तुम्हें जो तुम मुझे से राघव
  3720. 2:32:20आगे कुछ बोला पाता उससे पहले ही सुधा मोम
  3721. 2:32:22उससे बोली राघव बस करो एक और लफ्ज नहीं और
  3722. 2:32:26उनकी बात मान राघव चुप हो गया और सिया के
  3723. 2:32:28तरफ उसने पीट कर ली पता नहीं क्यों मगर
  3724. 2:32:31सिया उसे इस तरह नहीं देख पाए वो किसी तरह
  3725. 2:32:34हिम्मत करके बोली जी वो यह पैसे ऐसे मेरे
  3726. 2:32:37घर वालों के नहीं थे बल्कि मेरे थे में
  3727. 2:32:40मैं जॉब करती थी ना अकाउंटिंग की तो वह
  3728. 2:32:42प्रोफेसर के पास वो उसके पैसे मेरे मेरे
  3729. 2:32:46एक सिया को सूझ ही नहीं रहा था कि वो कैसे
  3730. 2:32:48कहे उसे इतना ज्यादा डर लग रहा था कि वह
  3731. 2:32:51लगभग बेहोश होने के कगार पर थी और अंत में
  3732. 2:32:54जब उसका दिमाग यह सारा स्ट्रेस सह नहीं
  3733. 2:32:56पाया तब वह चक्कर खाकर नीचे गिरने को हुई।
  3734. 2:32:59सिया सभी के मुंह से उसी का नाम निकला और
  3735. 2:33:02उसके गिरने से पहले ही अक्षय और राज जो
  3736. 2:33:04उसके करीब थे उन्होंने उसे पकड़ लिया।
  3737. 2:33:06इतनी देर से गुस्से में खड़ा राघव भी
  3738. 2:33:08जल्दी से पीछे मुड़ा और जल्दी से सिया के
  3739. 2:33:10पास आ गया। राज ने उसे गुस्से में घुरा और
  3740. 2:33:12कृष्णा से बोला कृष्णा मेरी हेल्प करो
  3741. 2:33:15सिया को अंदर छोटी मां के कमरे में ले
  3742. 2:33:17जाने के लिए और अक्षय जल्दी से मेडिकल किट
  3743. 2:33:19लेकर आओ। राज की बात मान कृष्णा ने एक पला
  3744. 2:33:22राघव को देखा और उसने जैसे ही हां इशारा
  3745. 2:33:24किया कृष्णा ने उसे अपने गोद में उठाकर
  3746. 2:33:26छोटी मां के कमरे में ले गया। वह जाकर राज
  3747. 2:33:28ने उसे चेक किया और फिर इंजेक्शन लगा
  3748. 2:33:30दिया। सिया के चक्कर खाकर गिरने की वजह से
  3749. 2:33:34घर के सभी परेशान हो गए। सुधा मोम फिक्र
  3750. 2:33:36से राज से बोली राज क्या हुआ क्या वो ठीक
  3751. 2:33:39तो है ना राज ने हां में सर हिलाया और
  3752. 2:33:42बोला हां मोम वो ठीक है उसका बीपी बढ़ गया
  3753. 2:33:44था इसी वजह से उसे चक्कर आ गए राज की बात
  3754. 2:33:47सुन राघव फिक्र से बोला हाय ब्लड प्रेशर
  3755. 2:33:50यह कैसे पॉसिबल है भाई वो बस 18 की है और
  3756. 2:33:53इतनी कम उम्र में यह बीमारी थोड़ी हो सकती
  3757. 2:33:55है भला वेट मैं चेक करता हूं राघव सिया के
  3758. 2:33:58पास जाने को हुआ काफी फिक्र हो रही थी उसे
  3759. 2:34:00सिया की और इसी फिक्र में बॉस के पास जाने
  3760. 2:34:02को हुआ मगर राज ने उसका हाथ पकड़ कर उसे
  3761. 2:34:05उसे रोक दिया और गुस्से से उसकी तरफ देखकर
  3762. 2:34:07बोला अब क्यों फिक्र हो रही है तुम्हें
  3763. 2:34:09उसकी कुछ देर पहले तो तुम उसे ऐसे डांट
  3764. 2:34:12रहे थे उस पर ऐसे चीख रहे थे जैसे कि ना
  3765. 2:34:14जाने उसने कौन सा बड़ा गुनाह कर दिया हो
  3766. 2:34:16कितनी बार कहा है मैंने तुमसे राघव अपने
  3767. 2:34:19गुस्से पर तदाका काबू रखो तुम अपने गुस्से
  3768. 2:34:21में ऐसे खोए हुए थे कि तुमने यह तक कि
  3769. 2:34:23ध्यान नहीं दिया कि तुम्हारे बस थोड़े से
  3770. 2:34:25चीखने पर सिया डर से कितना कांप रही थी
  3771. 2:34:27उसका चेहरा देखना चाहिए था तुम्हें जो डर
  3772. 2:34:29से पिला पड़ गया था मगर नहीं यह सब देखने
  3773. 2:34:32की बजाय तुमने उसके तरफ पीट कर दी और
  3774. 2:34:34बेवजह उसे डाट दिया। मैं राघव कुछ बोलने
  3775. 2:34:37को हुआ लेकिन उससे पहले ही सुधा मोम बोली
  3776. 2:34:40तुम क्या राघव तुम क्या और क्या मैंने
  3777. 2:34:43तुम्हें यही सिखाया है? यह इस तरह से
  3778. 2:34:45लड़कियों से बात करना क्या यही सिख दी
  3779. 2:34:47हमने तुम्हें? सुधा मोम भी बहुत गुस्से
  3780. 2:34:50में थी और उन्होंने गुस्से से राघव को
  3781. 2:34:52डांट लगा दी। कृष्णा को बिल्कुल अच्छा
  3782. 2:34:54नहीं लग रहा था। राघव को यूं डांट पड़ती।
  3783. 2:34:56देख वो बोला बड़ी मोम आयकनों की राघव ने
  3784. 2:34:58उसे बहुत बुरी तरह डांट लगाई है। उसे सिया
  3785. 2:35:01से ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी। लेकिन
  3786. 2:35:04कृष्णा ने आगे कुछ बोलने से पहले ही राघव
  3787. 2:35:06बोला मोम मैं नहीं चाहता ही मेरी वाइफ उन
  3788. 2:35:10लोगों का कुछ भी ले या फिर कुछ भी यूज
  3789. 2:35:12करें भले ही वह उसके सो कॉल्ड पेरेंट्स है
  3790. 2:35:15मगर उन्होंने जिस तरह का बिहेव सिया के
  3791. 2:35:17साथ किया था ना उस वजह से मैं उन लोगों की
  3792. 2:35:20शक्ल भी नहीं देखना चाहता सिया उनसे
  3793. 2:35:22रिश्ता रखे या फिर ना रखे यह उसकी मर्जी
  3794. 2:35:24है लेकिन मुझसे उनकी शक्ल देखना भी
  3795. 2:35:26बर्दाश्त नहीं होगा और रहा सवाल कल उनके
  3796. 2:35:28घर जाने का तो मैं बता दूं कि मैं वहां उन
  3797. 2:35:32लोगों ने बुलाया है इस वजह से नहीं जा रहा
  3798. 2:35:34हूं। बल्कि उन लोगों ने जो सिया को ऊपर से
  3799. 2:35:36नीचे तक सोने से गोल्ड से सजाकर दिखावे की
  3800. 2:35:39मूर्ति बनाया था ना उनके उसी गोल्ड को
  3801. 2:35:41वापस देने जा रहा हूं। मोम में नहीं
  3802. 2:35:43चाहता। उन लोगों ने जो कुछ भी सिया के साथ
  3803. 2:35:45किया। उसके बाद वो सिया उनका दिया हुआ कुछ
  3804. 2:35:48भी कीमती सामान इस्तेमाल करें या फिर उनके
  3805. 2:35:51पैसे खर्च करें। तो फिर सोचिए उनके पैसों
  3806. 2:35:53से हमारे लिए की गई हुई शॉपिंग में कैसे
  3807. 2:35:55एक्सेप्ट कर सकता हूं। राघव की बात सुन एक
  3808. 2:35:58पल सभी खामोश हो गया। उनमें से किसी को
  3809. 2:36:00कुछ सुझा ही नहीं कि वह कहे। राघव ने जब
  3810. 2:36:03सिया को पहली बार देखा था तब उसके चेहरे
  3811. 2:36:06पर से ही उसे हुई तकलीफ। उसे हुआ वाला
  3812. 2:36:08दर्द समझ आ रहा था। उसके चेहरे पर की
  3813. 2:36:10उदासी राघव को गैर होने के बावजूद समझ में
  3814. 2:36:12आ गई। फिर उसके अपनी परिवार ने कैसे वह
  3815. 2:36:15तकलीफ वो दर्द इग्नोर कर दिया। बस अपनी सो
  3816. 2:36:17कॉल्ड इज्जत के खातिर उन्होंने मासूम सी
  3817. 2:36:20सिया के बारे में थोड़ा भी नहीं सोचा। जब
  3818. 2:36:22राहुल के घर वाले दहेज की मांग कर रहे थे।
  3819. 2:36:24तभी उन्होंने सिया के लिए स्टैंड क्यों
  3820. 2:36:26नहीं लिया। यही गुस्सा राघव के अंदर शुरू
  3821. 2:36:29से ही था। उसके दिल में सिया के लिए
  3822. 2:36:30हमदर्दी तैयार हुई और फिर उसे दिया हुआ वह
  3823. 2:36:33गाड़ियां भरभ के दहेज। सिर्फ यह जताने के
  3824. 2:36:35लिए वह उनकी बेटी से कितना प्यार करते हैं
  3825. 2:36:37और उसे कितना कुछ दे रहे हैं। राघव को वह
  3826. 2:36:40देखकर ही बहुत गुस्सा आ गया जो घरवाले उसे
  3827. 2:36:43थोड़ा सा प्यार ना दे सके तो उनके दिए हुए
  3828. 2:36:45कीमती सामानों को वह क्यों रखे भला। इस
  3829. 2:36:48वजह से ही राघव ने सोच लिया था कि उसे
  3830. 2:36:50क्या करना है और कल वह जाकर क्या कहना है।
  3831. 2:36:54मगर उससे पहले ही आज सिया ने उसके लिए
  3832. 2:36:56उसके घर वालों के लिए भरभर के शॉपिंग की।
  3833. 2:36:58वह भी उन लोगों के पैसों से। इस वजह से ही
  3834. 2:37:00राघव को गुस्सा आया और हर बार की तरह उसका
  3835. 2:37:03गुस्सा फूट पड़ा। राघव में कई सारी अच्छी
  3836. 2:37:05आदतें थी। मगर उसका गुस्सा उन सारी आदतों
  3837. 2:37:08पर भारी पड़ता था। उसे गुस्से में समझ ही
  3838. 2:37:10नहीं आता था कि वह सामने वाले को कितना
  3839. 2:37:12हर्ट कर रहा है। हां, यह बात थी कि काम के
  3840. 2:37:14अलावा राघव बाकी जगह शांत रहना ही पसंद
  3841. 2:37:16करता था और अपने एंगर को दबाए रखता था।
  3842. 2:37:19मगर कभी कभार उसका गुस्सा फुट ही पड़ता।
  3843. 2:37:22उस खामोशी को चीरते हुए पापा बोले, क्या
  3844. 2:37:24तुमने इस बरे में सिया से बात की थी? क्या
  3845. 2:37:27उसे बताया था कि तुम्हें पसंद नहीं आएगा?
  3846. 2:37:29अगर वह अपने घर वालों के पैसे यूज़ करेंगी
  3847. 2:37:32तो? क्या तुमने उसे यह बातें कि आज के बाद
  3848. 2:37:35उसकी सारी जरूरतों को, सारे खर्चे को तुम
  3849. 2:37:37उठाओगे। राघव के आंखों में आंखें डालकर
  3850. 2:37:40पापा ने सवाल किया और राघव ने अपनी नजरें
  3851. 2:37:42चुरा ली। वह बात करने वाला था। वह आज ही
  3852. 2:37:45उससे बात करने वाला था। मगर उससे पहले ही
  3853. 2:37:47यह सब हो गया। तुमने जवाब नहीं दिया। पापा
  3854. 2:37:50की आई फिर एक बार सख्त आवाज और राघव धीरे
  3855. 2:37:53से बोला। वो मैं आज उससे बात करने वाला
  3856. 2:37:55था। कहकर राघव ने अपना सर झुका लिया। तो
  3857. 2:37:58फिर तुमने उसे डांटने की इस तरह बात करने
  3858. 2:38:00की हिम्मत कैसे की? पापा का सवाल और राघव
  3859. 2:38:04ने शर्म से अपना सर झुका लिया। सिया को
  3860. 2:38:06बेहोश देख उसे एहसास हो गया था कि उसने
  3861. 2:38:08गलत किया है और वो उससे उस चीज के लिए
  3862. 2:38:10माफी भी मांगने वाला था। बट पापा का यूं
  3863. 2:38:13कहना उसे शर्मसार कर गया। पापा फिर हताश
  3864. 2:38:16स्वर में बोले राघव मुझे तुम में से यह
  3865. 2:38:18उम्मीद नहीं थी। मेरे चारों बच्चों में
  3866. 2:38:20मुझे लगता हटा कि तुम सबसे कदा
  3867. 2:38:22रिस्पांसिबल हो। मगर तुम पापा खामोश हो गए
  3868. 2:38:26और फिर से सबकी तरफ देखते हुए बोले सब
  3869. 2:38:29सोने जाओ और सुधा तुम भी कविता और सिया
  3870. 2:38:31साथ रुको। अगर सिया को रात को जरूरत पड़ी
  3871. 2:38:33तो तुम दोनों का होना जरूरी है। पापा ने
  3872. 2:38:35अपने लफज खत्म ही करे थे कि तब तक राघव
  3873. 2:38:38बोला डैड मैं उसे हमारे कमरे में ले जा
  3874. 2:38:40रहा हूं और राघव फिर उनकी बात सुनने के
  3875. 2:38:42लिए रुका भी नहीं। उसने सीधे जाकर सिया को
  3876. 2:38:45अपनी बाहों में उठा लिया और बिना किसी के
  3877. 2:38:47तरफ देखे ही वह उसे लेकर उनके कमरे में
  3878. 2:38:49चला गया। सब उसे जाते हुए देखते ही रह गए।
  3879. 2:38:51फिर पापा ने उन सबको उनके उनके कमरे में
  3880. 2:38:53जाने का इशारा किया। राघव ने बड़ी ही
  3881. 2:38:56नजाकत के साथ आराम से सिया को बिस्तर पर
  3882. 2:38:59सुलाया और उसे देखने लग गया। सिया को इस
  3883. 2:39:01तरह देख उसे बहुत ही बुरा लग रहा था। अपने
  3884. 2:39:03शोर टपर नेचर की वजह से वह इतना रिएक्ट
  3885. 2:39:06हुआ था। वरना तो उसका दिल ही जानता था कि
  3886. 2:39:09उसने सिया से ऐसे बात करने की कभी नहीं
  3887. 2:39:11सोची थी। राघव अगले कुछ पल सिया को देखता
  3888. 2:39:14रहा। कुछ देर पहले खुशी से चहकने वाली
  3889. 2:39:16सिया अब मुरझा गई थी। नींद में बजी उसके
  3890. 2:39:18चेहरे पर उदासी थी और माथे पर शिंकज। राघव
  3891. 2:39:21से उसे इस तरह बिल्कुल भी देखा नहीं गया।
  3892. 2:39:24उसने प्यार से सिया के चेहरे पर हाथ
  3893. 2:39:25घुमाया और नीचे झुककर सिया के माथे को
  3894. 2:39:28आराम से चूम लिया। राघव धीरे से उससे बोला
  3895. 2:39:30आई एम सॉरी। मेरा बिल्कुल भी इंटेंशन नहीं
  3896. 2:39:33था तुम्हें डराने का। लेकिन राघव ने फिर
  3897. 2:39:35गहरी सांस छोड़ी और फिर एक बार उसके माथे
  3898. 2:39:37को चूम लिया। वो वही उसके पास बैठा रहा।
  3899. 2:39:40अगर वह रात में जग गई या फिर डर गई तो उसे
  3900. 2:39:42समझ आए। इस वजह से राघव पूरी रात उसके पास
  3901. 2:39:45बैठा हुआ था और जैसे कि उसे शक था। रात
  3902. 2:39:48में सिया डर से सहम गई। गहरी नींद में
  3903. 2:39:50होने के बावजूद भी उसके बॉडी की थरथराहट
  3904. 2:39:52हो रही थी। जिसे देख राघव को बहुत ही
  3905. 2:39:54ज्यादा बुरा था। उसने हर बार सहलाकर उसे
  3906. 2:39:57शांत किया और सुबह-सुबह उसे भी नींद आ गई।
  3907. 2:40:01एपिसोड 31 से 40 डिस्क्लेमर यह कहानी पूरी
  3908. 2:40:05तरह काल्पनिक है। यह सिर्फ दर्शकों के
  3909. 2:40:08मनोरंजन के लिए बनाई गई है। इसमें दर्शाए
  3910. 2:40:11गए सभी पात्र, नाम, उत्पाद और घटनाएं पूरी
  3911. 2:40:14तरह काल्पनिक है। यह कहानी किसी भी तरह से
  3912. 2:40:18किसी भी व्यक्ति के भावनाओं, प्रथाओं,
  3913. 2:40:20परंपराओं और विश्वासों के अपमान नहीं करती
  3914. 2:40:23है। और कहानी में बताए गए सभी चीजों का
  3915. 2:40:26मात्र कहानी के लेखक द्वारा बनाई गई लेखक
  3916. 2:40:29की अपनी एक कल्पना है बैक टू स्टोरी पापा
  3917. 2:40:33फिर हताश स्वर में बोले राघव मुझे तुमने
  3918. 2:40:36से यह उम्मीद नहीं थी मेरे चारों बच्चों
  3919. 2:40:38में मुझे लगता हटा कि तुम सबसे कदा
  3920. 2:40:41रिस्पांसिबल हो मगर तुम पापा खामोश हो गए
  3921. 2:40:45और फिर से सबकी तरफ देखते हुए बोले सब
  3922. 2:40:48सोने जाओ और सुधा तुम भी कविता और सिया
  3923. 2:40:51साथ रुको अगर सिया को रात को जरूरत पड़ी
  3924. 2:40:53तो तुम दोनों का होना जरूरी है। पापा ने
  3925. 2:40:55अपने लफज खत्म ही करे थे कि तब तक राघव
  3926. 2:40:58बोला डेड मैं उसे हमारे कमरे में ले जा
  3927. 2:41:01रहा हूं और राघव फिर उनकी बात सुनने के
  3928. 2:41:03लिए रुका भी नहीं। उसने सीधे जाकर सिया को
  3929. 2:41:06अपनी बाहों में उठा लिया और बिना किसी के
  3930. 2:41:08तरफ देखे ही वह उसे लेकर उनके कमरे में
  3931. 2:41:11चला गया। सब उसे जाते हुए देखते ही रह गए।
  3932. 2:41:13फिर पापा ने उन सबको उनके उनके कमरे में
  3933. 2:41:16जाने का इशारा किया। राघव ने बड़ी ही
  3934. 2:41:19नजाकत के साथ आराम से सिया को बिस्तर पर
  3935. 2:41:22सुलाया और उसे देखने लग गया। सिया को इस
  3936. 2:41:24तरह देख उसे बहुत ही बुरा लग रहा था। अपने
  3937. 2:41:27शॉर्ट टपर नेचर की वजह से वह इतना रिएक्ट
  3938. 2:41:30हुआ था। वरना तो उसका दिल ही जानता था कि
  3939. 2:41:33उसने सिया से ऐसे बात करने की कभी नहीं
  3940. 2:41:35सोची थी। राघव अगले कुछ पल सिया को देखता
  3941. 2:41:38रहा। कुछ देर पहले खुशी से चहकने वाली
  3942. 2:41:40सिया अब मुरझा गई थी। नींद में बजी उसके
  3943. 2:41:43चेहरे पर उदासी थी और माथे पर शिंकज। राघव
  3944. 2:41:47से उसे इस तरह बिल्कुल भी देखा नहीं गया।
  3945. 2:41:49उसने प्यार से सिया के चेहरे पर हाथ
  3946. 2:41:51घुमाया और नीचे झुककर सिया के माथे को
  3947. 2:41:54आराम से चूम लिया। राघव धीरे से उससे
  3948. 2:41:56बोला, आई एम सॉरी मेरा बिल्कुल भी इंटेंशन
  3949. 2:41:59नहीं था तुम्हें डराने का। लेकिन राघव ने
  3950. 2:42:02फिर गहरी सांस छोड़ी और फिर एक बार उसके
  3951. 2:42:04माथे को चूम लिया। वो वही उसके पास बैठा
  3952. 2:42:08रहा। अगर वह रात में जग गई या फिर डर गई
  3953. 2:42:10तो उसे समझ आई। इस वजह से राघव पूरी रात
  3954. 2:42:13उसके पास बैठा हुआ था और जैसे कि उसे शक
  3955. 2:42:16था। रात में सियाडर से सहम गई। गहरी नींद
  3956. 2:42:19में होने के बावजूद भी उसके बॉडी की
  3957. 2:42:21थरथराहट हो रही थी जिसे देख राघव को बहुत
  3958. 2:42:24ही ज्यादा बुरा था। उसने हर बार सहलाकर
  3959. 2:42:26उसे शांत किया और सुबह-सुबह उसे भी नींद आ
  3960. 2:42:29गई। रोज जल्दी उठने वाले वह दोनों आज 8:00
  3961. 2:42:32बज गए। फिर भी सो रहे थे और उनके सोने के
  3962. 2:42:35लिए वजह भी थी। नींद में ही सिया राघव के
  3963. 2:42:37बाहों में चली गई थी और राघव ने भी फिर
  3964. 2:42:40उसे अपने आगोश में ले लिया था। एक दूसरे
  3965. 2:42:42के करीबी से उन्हें इतना सुकून का एहसास
  3966. 2:42:44हो रहा था कि वह सोए ही रहे। खिड़की से
  3967. 2:42:47आती धूप ने सिया के नींद को डिस्टर्ब किया
  3968. 2:42:50और उसने अपना सर राघव के सीने में छिपाते
  3969. 2:42:53हुए रब किया। राघव जो नींद में था उसे लगा
  3970. 2:42:55कि शायद रात की तरह अब भी सिया डर रही है।
  3971. 2:42:58इसलिए उसने नींद में ही सिया के सर को
  3972. 2:43:00थपथपाया और बोला शांत शांत हो जाओ बच्चा
  3973. 2:43:04तुम ठीक हो। मैं तुम्हें कुछ नहीं होने
  3974. 2:43:06दूंगा डरो मत और फिर राघव लगातार सिया के
  3975. 2:43:09सर को थपथपाते हुए सहलाने लग गया। उसकी
  3976. 2:43:13आवाज से या फिर यूं कहें कि जब राघव का
  3977. 2:43:15हाथ सिया को अपने सर पर महसूस हुआ था। तभी
  3978. 2:43:18सिया की नींद पूरी तरह खुल चुकी थी और फिर
  3979. 2:43:20आगे राघव ने जो कहा उसे सुन सिया के आंखें
  3980. 2:43:23भर आए। उसे यकीन करना मुश्किल जा रहा था
  3981. 2:43:26कि कल उसे डांटने वाला यही शख्स है जो इस
  3982. 2:43:28वक्त इतने प्यार से नींद में होने के
  3983. 2:43:30बावजूद भी उसे समझा रहा है। उसने थोड़ी
  3984. 2:43:33हलचल की और उसके आंखों से बहे आंसू ने
  3985. 2:43:35राघव के सीने को भिगो दिया। उस गीलेपन का
  3986. 2:43:37एहसास होते ही राघव ने अपनी आंखें खोली और
  3987. 2:43:40उसे अपने सीने पर सर रखकर सोई सिया का
  3988. 2:43:42एहसास हुआ। वो एक पल खामोश सा उसे देखता
  3989. 2:43:46रहा और फिर बड़ी हिम्मत करके उसने फिर से
  3990. 2:43:48सिया के सर पर हाथ रख धीरे से उसे पुकारा।
  3991. 2:43:51सिया उसकी आवाज इतनी सॉफ्ट थी, इतनी प्यार
  3992. 2:43:54भरी थी कि सिया के आंखों के आंसू और उस पर
  3993. 2:43:56बरसने लग गए। राघव को उसे ऐसा देख बिल्कुल
  3994. 2:43:59अच्छा नहीं लगा और बोला, "स्टॉप क्राइंग
  3995. 2:44:02बच्चा, यह ऐसे सुबह-सुबह कौन रोता है
  3996. 2:44:04भला।" यू आर अ गुड गर्ल ना। फिर रोना बंद
  3997. 2:44:08करो। राघव को समझ नहीं आ रहा था कि वह ऐसा
  3998. 2:44:11क्या कहे जिससे वह सिया खामोश हो जाए। अब
  3999. 2:44:13तक के अपनी जिंदगी में उसने सिर्फ दो ही
  4000. 2:44:15लेडीज को जाना था। और वह दोनों उसकी मॉम
  4001. 2:44:18थी। सुधा मोम और छोटी मां। उसने अलावा
  4002. 2:44:20राघव का कभी किसी भी लड़की से रिलेशन नहीं
  4003. 2:44:23आया था। यहां तक कि उसकी कोई गर्ल दोस्त
  4004. 2:44:25भी नहीं थी। सिर्फ उसकी ही नहीं बल्कि उन
  4005. 2:44:28चारों भाइयों की भी कोई लड़की दोस्त नहीं
  4006. 2:44:30थी। सुधा मोम और छोटी मां ने कितनी मेहनत
  4007. 2:44:33करके उन्हें संभाला था यह वह जानते थे।
  4008. 2:44:36इसलिए बचपन से ही उन्होंने सिर्फ पढ़ाई
  4009. 2:44:38करने का और अपने पेरेंट्स को अच्छी लाइफ
  4010. 2:44:40देने का ही गोल रखा। यही वजह तो थी कि वह
  4011. 2:44:43इतने कम उम्र में सभी के सभी बेस्ट और टॉप
  4012. 2:44:46डॉक्टर्स में शामिल थे और उनका हॉस्पिटल
  4013. 2:44:48सिटी के जानेमाने हॉस्पिटल्स में शामिल
  4014. 2:44:50था। हां, बाद में जन डेथ ठीक हुए और
  4015. 2:44:53उन्होंने फिर से अपना काम ज्वाइन किया।
  4016. 2:44:55उसके बाद उनके हालत थोड़े अच्छे हो गए थे।
  4017. 2:44:57मगर इसके बावजूद भी उन्होंने कभी अपने गोल
  4018. 2:45:00को नहीं छोड़ा और कम उम्र में ही यहां तक
  4019. 2:45:02पहुंच गए। सिया को इतना रोता देख राघव से
  4020. 2:45:06रहा नहीं गया और वह उसे वैसे हो अपने
  4021. 2:45:08बाहों में लेकर उठकर बैठ गया। सिया उसके
  4022. 2:45:10गोद में बैठी हुई थी और उसके सिने में सर
  4023. 2:45:13छिपा कर रो रही थी। राघव ने फिर एक बार
  4024. 2:45:15उसे पुकारते हुए बोला, "सिया और सिया फिर
  4025. 2:45:18जल्दी जल्दी बोलने लग गई। वो वो मेरे पैसे
  4026. 2:45:22थे। मैं प्रोफेसर नीता हेना उन्हें असिस्ट
  4027. 2:45:25करती थी और और फिर छोटे बच्चों की टशंस भी
  4028. 2:45:28लेती थी और संडे टू संडे योगा क्लासेस भी।
  4029. 2:45:31वो मेरे पैसे थे। मेरे पापा के नहीं सिया
  4030. 2:45:34को डरकर इतने जल्दी-जल्दी बोलता देख राघव
  4031. 2:45:37को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा और उसे एहसास
  4032. 2:45:39भी हो गया कि उसने जो कल उसे डांट लगाई थी
  4033. 2:45:42वह बेफजुल की थी उसे सिया की पूरी बात सुन
  4034. 2:45:45लेनी चाहिए थी और अपना पॉइंट ऑफ व्यू भी
  4035. 2:45:47उसे बताना चाहिए था उसके चेहरे पर गिल छा
  4036. 2:45:49गया सिया फिर से रोते हुए बोली आप आप
  4037. 2:45:53नाराज नहीं है ना मुझसे आई एम आई एम सॉरी
  4038. 2:45:57मैंने आपको पहले बताना सिया के आगे कुछ
  4039. 2:46:00बोलने से पहले ही राघव ने उसे ओठ होठों पर
  4040. 2:46:02अपनी उंगली रख दी और ना में सर हिलाते हुए
  4041. 2:46:05बोला नो नहीं सिया तुम सॉरी मत बोलो बल्कि
  4042. 2:46:08सॉरी मुझे बोलना चाहिए आई एम सॉरी बच्चा
  4043. 2:46:11मैंने बिना सच जाने ही तुम्हें इतना डांट
  4044. 2:46:14दिया और पता नहीं तुमसे क्या-क्या बोला आई
  4045. 2:46:16एम रियली सॉरी राघव ने सिया के आंसू साफ
  4046. 2:46:19किया और उसके सर पर ओठ रख दिए राघव की वह
  4047. 2:46:22छुवन सिया को शांत कर गई उसे बहुत अच्छा
  4048. 2:46:25बहुत सुकून फील हुआ था उस वजह से वह धीरे
  4049. 2:46:28से राघव से बोली आप आप नाराज नहीं है ना
  4050. 2:46:32और मुझसे गुस्सा भी। सिया की बात सुन राघव
  4051. 2:46:35ने नामे सर हिलाया। तभी सिया फिर से बोली,
  4052. 2:46:38आप आप प्लीज अगर हो तो मुझे मार लेना।
  4053. 2:46:41लेकिन मुझ पर चीखना मत। मुझे मुझ बहुत डर
  4054. 2:46:43लगता है फिर मैं में मैं। सिया उसे बताना
  4055. 2:46:47चाहती थी कि किसी की तेज आवाज या फिर
  4056. 2:46:49गुस्से को देखने सुनने के बाद उसे पैनिकिक
  4057. 2:46:51अटैक्स आते थे। उससे वह स्ट्रेस, वो ऊंची
  4058. 2:46:54आवाज बर्दाश्त नहीं होती थी। मगर वह आगे
  4059. 2:46:56कुछ कह ही नहीं पाई और उसके चेहरे पर छाई
  4060. 2:46:58बेचैनी राघव ने समझ ली। कल उसे अंदाजा भी
  4061. 2:47:01हो गया था कि कहीं ना कहीं सिया को ऊंची
  4062. 2:47:04आवाज से डर लगता है और उसे पैनिकिक अटैक्स
  4063. 2:47:06भी आते हैं। राघव ने कुछ नहीं कहा और फिर
  4064. 2:47:08एक बार उसे के बालों को सहलाकर अपने ओठ
  4065. 2:47:11उसके माथे पर रख दिए। वो धीरे से उससे
  4066. 2:47:14बोला कभी नहीं डाटूंगा बच्चा और मैं क्यों
  4067. 2:47:17मारूंगा भला? मुझे तो क्या किसी को कोई भी
  4068. 2:47:20हक नहीं है तुम्हें मारने का और कोई तुम
  4069. 2:47:22हाथ लगाकर तो दिखाए उन सभी को मैं छोडूंगा
  4070. 2:47:25नहीं। फिर वह चाहे मेरी फैमिली हो या फिर
  4071. 2:47:28तुम्हारी फैमिली राघव की बात सुन सिया को
  4072. 2:47:30बहुत अच्छा लगा और उसने उसे कसकर गले लगा
  4073. 2:47:33लिया। राघव कुछ देर तक उसे वैसे ही सहलाते
  4074. 2:47:37रहा और फिर यही समय जानकर उसने उसकी
  4075. 2:47:39ज्वेलरी के बारे में बात करने का सोचा।
  4076. 2:47:42उसने धीरे से उसे पुकारा और उसका ध्यान
  4077. 2:47:44अपने तरफ किया। सिया उससे दूर होकर उसके
  4078. 2:47:47तरफ देखने लग गई और उसके कहने का इंतजार
  4079. 2:47:50करने लगी। रोने की वजह से लाल हुई सिया
  4080. 2:47:53अपनी मासूम शक्ल लेकर राघव की तरफ देख रही
  4081. 2:47:55थी। उस वक्त उसे वह इतनी प्यारी इतनी
  4082. 2:47:58मासूम लगी कि राघव का दिल तेजी से धड़क
  4083. 2:48:00उठा। राघव ने गहरी सांस छोड़ी और उससे
  4084. 2:48:03बोला सिया अगर मैं तुमसे कुछ कहूं तो क्या
  4085. 2:48:06तुम मेरी बात मानोगी? और उसके सवाल पर
  4086. 2:48:09सिया ने बिना एक पल की भी देरी किए हुए
  4087. 2:48:11हां में सर हिला दिया। राघव जब से उसकी
  4088. 2:48:13जिंदगी में आया था तब से उसने उसे सिया को
  4089. 2:48:16इतना कंफर्ट फील करवाया था कि वह चाहे कुछ
  4090. 2:48:18भी कहे सया बिना हिचकिचाहट की उसकी हर एक
  4091. 2:48:21बात मानने के लिए तैयार हो जाती। उसकी
  4092. 2:48:24आईटी ने इंस्टेंट रिएक्शन और मासूम सा
  4093. 2:48:26चेहरा देख राघव काका का दिल उसके गाल
  4094. 2:48:28खींचकर उसे पर करने को कहा। लेकिन उसने
  4095. 2:48:31अपनी इस तमन्ना का दिल में ही दबाए रखा और
  4096. 2:48:33सीरियस चेहरा लेकर बोला सिया मैं चाहता
  4097. 2:48:36हूं कि तुम तुम्हारे परिवार की तरफ से आया
  4098. 2:48:39हुआ कोई भी कीमती सामान अपने पा मत रखो।
  4099. 2:48:41तुम्हारी वह सारी ज्वेलरी तुम उन्हें वापस
  4100. 2:48:44लौटा दो। राघव ने अपनी बात कही और वह सिया
  4101. 2:48:47के जवाब का इंतजार करते हुए उसके तरफ
  4102. 2:48:49देखने लगा। सिया एक पल को सोच में गिर गई।
  4103. 2:48:52मगर अगले ही पल बोली ठीक है मैं उन्हें सब
  4104. 2:48:55लौटा दूंगी लेकिन लेकिन उसमें एक गोल्ड के
  4105. 2:48:58चैन है वो मेरे नानू ने मुझे दी थी उनकी
  4106. 2:49:00आखिरी निशानी के तौर पर क्या मैं उसे अपने
  4107. 2:49:03रख सकती हूं प्लीज सिया ने उसके चेहरे की
  4108. 2:49:07तरफ देखते हुए कहा और राघव समझ गया कि वह
  4109. 2:49:10चैन सिया के लिए बहुत ही खास है। उसने हां
  4110. 2:49:12में सर हिला दिया और सिया मुस्कुराई आगे
  4111. 2:49:14का कुछ वक्त दोनों यूं ही एक दूसरे के
  4112. 2:49:17बाहों में बैठे रहे। बात करते हुए एक
  4113. 2:49:19दूसरे के साथ को महसूस करते हुए वह दोनों
  4114. 2:49:22इतने खो गए थे कि उन्हें एहसास ही नहीं था
  4115. 2:49:24उनके करीबी का सिया राघव के इतने करीब
  4116. 2:49:26उसके गोद में बैठी है यह बात दोनों के भी
  4117. 2:49:29जहन में नहीं आई थी घड़ी का कांटा 9:00
  4118. 2:49:32बजे यह दर्शाने लगा और अब तक उन दोनों के
  4119. 2:49:34फिक्र से आधे होते घर वालों का सबका बांध
  4120. 2:49:37टूट गया सुधा मोम छोटी मां डैड राज अक्षय
  4121. 2:49:40और कृष्णा सभी को बहुत फ़िक्र हो रही थी
  4122. 2:49:43सिया की उसके तबीयत की और इस बात की भी कि
  4123. 2:49:46कहीं राघव उससे कुछ ज्यादा बोल ना दे।
  4124. 2:49:48सुधा मोम से जब रहा नहीं गया तब वह उनके
  4125. 2:49:51कमरे के पास आए और उन्होंने दरवाजा
  4126. 2:49:53खटखटाया और उसी आवाज के साथ एक दूसरे में
  4127. 2:49:56खोए दोनों हटबड़ा गए। सिया ने अपनी आंखें
  4128. 2:49:59खोली और तब जाकर उसे एहसास हुआ कि वो राघव
  4129. 2:50:01के कितने करीब है। वो जल्दी जल्दी उठने को
  4130. 2:50:04हुई लेकिन उसके साड़ी में उसका पैर उलझ
  4131. 2:50:06गया और वो राघव को लेकर बिस्तर पर गिर गई।
  4132. 2:50:09सिया ने दो बार और उठने की कोशिश की लेकिन
  4133. 2:50:11नो यूज़। वो इतना डरी हुई थी कि उससे ठीक
  4134. 2:50:15से उठा भी नहीं जा रहा था। राघव चुपचाप
  4135. 2:50:17उसकी सारी हरकतें देख रहा था और एंजॉय भी
  4136. 2:50:20कर रहा था। मगर जब उसने सिया के
  4137. 2:50:22एक्सप्रेशन चेंज होते हुए देखा तब उससे
  4138. 2:50:24रहा नहीं गया और वह बोला बिल्कुल भी रोना
  4139. 2:50:28नहीं है सिया और वैसे भी तुम अपने हस्बैंड
  4140. 2:50:30के साथ अपने कमरे में हो ना कि तुम्हारे
  4141. 2:50:33बॉयफ्रेंड के साथ जो इतना डर रही हो राघव
  4142. 2:50:35की बात सुन सिया के रोते हुई एक्सप्रेशन
  4143. 2:50:38और रोने जैसे हो गए और वो बोली मेरा कोई
  4144. 2:50:40बॉयफ्रेंड नहीं था सच्ची और क्या मैडम की
  4145. 2:50:43आंखें भी भर आ गई राघव ने ना में सर
  4146. 2:50:47हिलाया और उसे लेकर टर्न हो गया अब वो ऊपर
  4147. 2:50:50और सिया नीचे थी। राघव ने उसके आंखों के
  4148. 2:50:52किनारे पर लगे उस आंसू को अपनी उंगली से
  4149. 2:50:55साफ किया और बोला बच्चा मैंने कब कहा कि
  4150. 2:50:58तुम्हारा बॉयफ्रेंड था। मैं तो कह रहा था
  4151. 2:51:00खैर छोड़ो रिलैक्स हो जाओ और जाकर फ्रेश
  4152. 2:51:03हो जाओ। मैं देखता हूं कि दरवाजे पर कौन
  4153. 2:51:06है और हां इस तरह डरना और बातबात पर रोना
  4154. 2:51:09सही नहीं है। तुम्हें ना अब स्ट्रांग बनने
  4155. 2:51:11की जरूरत है। समझी तो यूना। राघव उससे बोल
  4156. 2:51:15ही रहा था तब तक ही सिया बोली आप हटो ना
  4157. 2:51:18ऊपर से। आप बहुत मोटे हो। मुझसे आपका वेट
  4158. 2:51:20बर्दाश्त नहीं हो रहा है और सिया ने उसे
  4159. 2:51:23धक्का देना स्टार्ट कर दिया। राघव भी फिर
  4160. 2:51:25जल्दी से उसके ऊपर से उठ गया और सिया
  4161. 2:51:28जल्दी से अपनी साड़ी संभालते हुए बाथरूम
  4162. 2:51:30की तरफ भाग गई। राघव हैरानी से उसे भागते
  4163. 2:51:34हुए जाता देखता रह गया और फिर उठकर शीशे
  4164. 2:51:36के सामने गया और अपने आप को देखते हुए
  4165. 2:51:39बोला सीरियसली इसे किस एंगल से मैं मोटा
  4166. 2:51:41दिख रहा हूं। अच्छी खांसी तो बॉडी है मेरी
  4167. 2:51:44और वो कह रही है कि मैं मोटा हूं। राघव
  4168. 2:51:47नाराजगी से खुद से ही बोल रहा था कि तब तक
  4169. 2:51:49उसे फिर एक बार दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी
  4170. 2:51:51और उसने ना में सर हिलाते हुए उस ओर गया
  4171. 2:51:54जहां पूरी फैमिली उसी के इंतजार में बाहर
  4172. 2:51:56खड़ी थी। राघव ने ना में सर हिलाया और उसे
  4173. 2:52:00लेकर टर्न हो गया। अब वो ऊपर और सिया नीचे
  4174. 2:52:03थी। राघव ने उसके आंखों के किनारे पर लगे
  4175. 2:52:05उस आंसू को अपनी उंगली से साफ किया और
  4176. 2:52:08बोला बच्चा मैंने कब कहा कि तुम्हारा
  4177. 2:52:10बॉयफ्रेंड था। मैं तो कह रहा था खैर छोड़ो
  4178. 2:52:13रिलैक्स हो जाओ और जाकर फ्रेश हो जाओ। मैं
  4179. 2:52:16देखता हूं कि दरवाजे पर कौन है और हां इस
  4180. 2:52:19तरह डरना और बात बातबात पर रोना सही नहीं
  4181. 2:52:21है। तुम्हें ना अब स्ट्रांग बनने की जरूरत
  4182. 2:52:23है। समझी तो यूना राघव उससे बोल ही रहा था
  4183. 2:52:27तब तक ही सिया बोली आप हटो ना ऊपर से। आप
  4184. 2:52:30बहुत मोटे हो। मुझसे आपका वेट बर्दाश्त
  4185. 2:52:33नहीं हो रहा है। और सिया ने उसे धक्का
  4186. 2:52:35देना स्टार्ट कर दिया। राघव भी फिर जल्दी
  4187. 2:52:38से उसके ऊपर से उठ गया और सिया जल्दी से
  4188. 2:52:40अपनी साड़ी संभालते हुए बाथरूम की तरफ भाग
  4189. 2:52:43गई। राघव हैरानी से उसे भागते हुए जाता
  4190. 2:52:46देखता रह गया और फिर उठकर शीशे के सामने
  4191. 2:52:49गया और अपने आप को देखते हुए बोला
  4192. 2:52:51सीरियसली इसे किस एंगल से मैं मोटा दिख
  4193. 2:52:54रहा हूं। अच्छी खांसी तो बॉडी है मेरी और
  4194. 2:52:56वह कह रही है कि मैं मोटा हूं। राघव
  4195. 2:52:59नाराजगी से खुद से ही बोल रहा था कि तब तक
  4196. 2:53:01उसे फिर एक बार दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी
  4197. 2:53:03और उसने ना में सर हिलाते हुए उस ओर गया
  4198. 2:53:06जहां पूरी फैमिली उसी के इंतजार में बाहर
  4199. 2:53:08खड़ी थी। राघव सिया कहा हे और तुम दोनों
  4200. 2:53:12अब तक उठे क्यों नहीं? अगर तुमने उसे फिर
  4201. 2:53:15से डांट लगाई होंगी ना तो मैं बता रही
  4202. 2:53:17हूं। मैं तुम्हें थप्पड़ लगा दूंगी। सुधा
  4203. 2:53:20मोम दरवाजा खोलते ही राघव पर बरस पड़ी और
  4204. 2:53:23उसने उन्हें घूर कर देखा। तभी पापा भी
  4205. 2:53:26बोले घरो मत और जवाब दो। कहीं तुमने फिर
  4206. 2:53:29से उसे डांटा तो नहीं ना? और क्या वह ठीक
  4207. 2:53:32से सो पाई थी रात को? पापा के भी एक के
  4208. 2:53:35बाद एक सवाल शुरू हो गए और सेम वही सारे
  4209. 2:53:37सवाल राघव को। बाकी सबके नजरों में भी
  4210. 2:53:39दिखे। उसने ना में सर हिलाया और बोला,
  4211. 2:53:42फ्रेश होने गई है वो। रात को लगे इंजेक्शन
  4212. 2:53:45की वजह से उसकी नींद जल्दी नहीं खुली
  4213. 2:53:47होंगी। और रहा सवाल मेरा तो मैं रात भर
  4214. 2:53:50उसकी केयर करते हुए जगा था। इसलिए मेरी
  4215. 2:53:52नींद नहीं खुली। एंड हां अगला सवाल पूछने
  4216. 2:53:55से पहले ही बता दूं कि मैंने ना ही उसे
  4217. 2:53:57डांट लगाई है और ना ही दूसरा कुछ हम दोनों
  4218. 2:54:00में भी सारी बातें हो गई है तो अगर आपको
  4219. 2:54:02आपके सभी सवालों का जवाब मिल गया होगा तो
  4220. 2:54:05आप जा सकते हैं बाय राघव ने दरवाजे की तरफ
  4221. 2:54:08इशारा किया और उन सबको जाने के लिए बोल
  4222. 2:54:10दिया राज समझ गया था कि यह इशारा उसके लिए
  4223. 2:54:14है इसलिए उसने राघव के सर पर एक चपेट लगाई
  4224. 2:54:17और बोला हां हां मैं समझ गया तू किसे जाने
  4225. 2:54:20के लिए बोल रहा है और फिर राज और उसके
  4226. 2:54:22पीछे पीछेछे अक्षय बाहर चले गए। कृष्णा ने
  4227. 2:54:25भी मुस्कुराते हुए राघव को देखा और चला
  4228. 2:54:28गया। राघव फिर बाकी सब के तरफ मुड़ा और
  4229. 2:54:31बोला, "मैंने सिया से बात कर ली है। वो
  4230. 2:54:33अपनी सारी ज्वेलरी लौटाने के लिए तैयार
  4231. 2:54:35है। इस वजह से आप रिलैक्स रहिए और बाकी की
  4232. 2:54:38तैयारी कीजिए। थोड़ी देर में हम फ्रेश
  4233. 2:54:40होकर नीचे आ जाते हैं। राघव की बात सुन
  4234. 2:54:44छोटी मां बोली, हम वो सब तो ठीक है राघव।
  4235. 2:54:47मगर हमारी बहू इस तरह बिना गहनों के पहली
  4236. 2:54:50बार अपने मायके में जाएंगी। ऐसा अच्छा
  4237. 2:54:52थोड़ी लगता है कविता जी की बात सुन राघव
  4238. 2:54:55कुछ बोलने को हुआ तब तक सुधा मोम बोली
  4239. 2:54:57नहीं बिना गहनों के कैसे जाएंगी संजय जी
  4240. 2:55:00आप ना राघव और सिया को लेकर बैंक चले जाए
  4241. 2:55:03और वह से गहने निकालकर सिया को दे दीजिए
  4242. 2:55:05राघव उसके बाद ही तुम आगे जाना और
  4243. 2:55:08तुम्हारे पापा कृष्णा या फिर अक्षय के साथ
  4244. 2:55:10वापस लौट आएंगे। सुधा मोम की बात सुन राघव
  4245. 2:55:14ने हां में सर हिलाया और बोला ठीक है जैसा
  4246. 2:55:17आप कहे और हां एक बात मैं बताना भूल गया
  4247. 2:55:20वो वो चली मैंने ना मैंने एक गोल्ड सेट
  4248. 2:55:22सिया के लिए ऑर्डर किया था वो बस किसी भी
  4249. 2:55:25वक्त आता ही होगा मैं आपको बताना भूल गया
  4250. 2:55:28राघव ने अपनी जुबान चबाते हुए कहा वह सच
  4251. 2:55:31में भूल गया था यह बात सबको बताना सुधा
  4252. 2:55:34मोम से उसकी इस बारे में बात हुई थी लेकिन
  4253. 2:55:36वह एक दिन जाकर सिया के लिए ज्वेलरी और
  4254. 2:55:39कुछ साड़ियां खरीदेंगे ऐसी बात हुई थी
  4255. 2:55:42सुधा मोम ने उसकी तरफ देखा और वह कुछ बोल
  4256. 2:55:44पति उससे पहले ही राघव बोला यार मोम वो सब
  4257. 2:55:48जल्दी जल्दी हो गया इसलिए बताने का मौका
  4258. 2:55:51नहीं मिला उसने दिया हुआ एक्सप्लेनेशन सुन
  4259. 2:55:53तीनों बड़ों ने कुछ पल उसे घूर कर देखा और
  4260. 2:55:56फिर हंसने लग गए छोटी मॉम मुस्कुराते हुए
  4261. 2:55:58बोली भैया भाभी मुझे लगा था हमें ना राघव
  4262. 2:56:02की शादी के लिए ज्यादा पापड़ बेलने पड़ने
  4263. 2:56:04वाले हैं और फिर बाद में उसकी गृहस्ती ठीक
  4264. 2:56:08हो इस वजह से इसे ढेर सारा ज्ञान भी देना
  4265. 2:56:10पड़ने वाला
  4266. 2:56:12लेकिन यहां देखिए ना सिर्फ इसकी शादी सबसे
  4267. 2:56:14पहले हो गई बल्कि जनाब को तो कुछ सिखाने
  4268. 2:56:17की या बताने की जरूरत ही नहीं पड़ी। छोटी
  4269. 2:56:20मां ने हंसते हुए कहा और उनकी बात सुन डैड
  4270. 2:56:22और सुधा मोम भी मुस्कुराने लगे। वही राघव
  4271. 2:56:25झेप गया और बोला हां ठीक है। ठीक है। अब
  4272. 2:56:28जाइए आप। राघव ने उनका हाथ पकड़ कर ही
  4273. 2:56:31उन्हें बाहर निकाला। बेचारा शर्मा जो गया
  4274. 2:56:33था और उसकी ऐसे हालत देख उन सबको बहुत
  4275. 2:56:36हंसी आ गई। हंसते हुए ही वह बाहर चले गए
  4276. 2:56:39और राघव सीधा आकार बिस्तर पर लेट गया।
  4277. 2:56:42छोटी मां को चिढ़ाते हुए उससे बात करना एल
  4278. 2:56:45अजीब सी फीलिंग दे रहा था उसे। एक ऐसी
  4279. 2:56:48फीलिंग जो उसने कभी भी फील नहीं की थी।
  4280. 2:56:50उसने अपनी आंखें बंद कर ली और उस बंद
  4281. 2:56:52आंखों के पीछे उसे सिया का चेहरा दिखाई
  4282. 2:56:55दिया। और नजर आया थोड़ी देर पहले कि उनकी
  4283. 2:56:58नजदीकी उस वक्त तो उनके ध्यान में नहीं
  4284. 2:57:01आया था कि वह कितने नजदीक थे। लेकिन अब
  4285. 2:57:03जाकर राघव सिया के नजदीकी की को फिल कर पा
  4286. 2:57:06रहा था। उसे एहसास हुआ था कि सियासिया
  4287. 2:57:09उसके कितने करीब थी और उस एहसास से राघव
  4288. 2:57:11के तन बदन में एक अलग सी झुरझुरी फैल गई।
  4289. 2:57:14एक अनजानी मगर अपनी सी फीलिंग उसे महसूस
  4290. 2:57:17हुई और सिया की वो छुवन उसे मदहोश करने लग
  4291. 2:57:19गई। वहीं दूसरी और बाथरूम में सिया राघव
  4292. 2:57:23से छूटकर अंडर भाग तो आई थी लेकिन उसकी
  4293. 2:57:26सांसे बहुत ही तेज-तेज चल रही थी। उसे
  4294. 2:57:29उठने में केद जो हो गया था और ऊपर से
  4295. 2:57:32दरवाजे पर होती दस्तक। सिया ने
  4296. 2:57:34जल्दी-जल्दी शावर ऑन किया और हड़बड़ी में
  4297. 2:57:36उसकी पूरी साड़ी और बाकी के कपड़े भीग गए।
  4298. 2:57:39शिट यह नहीं करना था। सीयू सिया ने अपने
  4299. 2:57:42आप से ही कहा और किसी तरह कपड़े उतार कर
  4300. 2:57:45वो शावर लेने लग गई। उसने जल्दी-जल्दी
  4301. 2:57:48अपने बाल धो दिए और फिर जाकर उसे एहसास
  4302. 2:57:50हुआ कि ना तो उसने आज टॉवल लाया है और ना
  4303. 2:57:53ही दूसरे कपडे सिया टेंशन में आ गई और
  4304. 2:57:56अपनी गीली सादिम लपेट कर इफेर उधर घूमने
  4305. 2:57:59लग गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह राघव
  4306. 2:58:02को आवाज दे या ना दे अगर घर को बाकी सब वह
  4307. 2:58:04हुए तो। नहीं नहीं सोच कर ही वह डर गई और
  4308. 2:58:08कुछ पल वैसे ही खड़े रही। अब अब उसे ठंडी
  4309. 2:58:11लगने लग गई थी और उसके पास राघव को आवाज
  4310. 2:58:14देने के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं था। उसने
  4311. 2:58:17थोड़ा सा दरवाजा खोलकर बाहर से आती आवाजों
  4312. 2:58:20को सुनने की कोशिश की और उसे सिवाय खामोशी
  4313. 2:58:23के और कोई शोर सुनाई नहीं दिया। सिया खुद
  4314. 2:58:25से ही बोली आई थिंक कमरे में कोई नहीं है।
  4315. 2:58:28सिया ने राहत की सांस छोड़ी और फिर कुछ सच
  4316. 2:58:30कर राघव को आवाज लगनी चाहिए। वो धीरे से
  4317. 2:58:33बोली सुनिए सुनिए क्या आप कमरे में है?
  4318. 2:58:36सिया की आवाज इतनी धीमी थी कि राघव तो
  4319. 2:58:39क्या खुद को भी सुनाई दी या नहीं यह
  4320. 2:58:41कंफ्यूजन था। सिया ने अपने ओठ बाहर निकाल
  4321. 2:58:45दिए और फिर एक बार हिम्मत करके बोली सुनिए
  4322. 2:58:47जी क्या आप है यहां? और क्या उसकी आवाज
  4323. 2:58:51सुन उसी के ख्यालों में खोया राघव होश में
  4324. 2:58:53आ गया। इसी मदहोशी में खोया हुआ वो तब होश
  4325. 2:58:57में आया जब सिया की आवाज उसके कानों से
  4326. 2:58:59टकराए अंदर बात। सिया ने अपने ओठ बाहर
  4327. 2:59:03निकाल दिए और फिर एक बार हिम्मत करके बोली
  4328. 2:59:06सुनिए जी क्या आप है यहां और क्या उसकी
  4329. 2:59:09आवाज सुन उसी के ख्यालों में खोया राघव
  4330. 2:59:11होश में आ गया वो जल्दी से उठा और बाथरूम
  4331. 2:59:14के दरवाजे के करीब आकर उसने दरवाजा हल्का
  4332. 2:59:16सा नॉक करते हुए बोला क्या हुआ क्या तुम
  4333. 2:59:20ठीक हो सिया राघव की आवाज सुन सिया हकलाते
  4334. 2:59:23हुए बोली हां वो वो मैंने मैंने अपने
  4335. 2:59:26कपड़े नहीं लिए वो सिया खामोश हो गई और
  4336. 2:59:29राघव के कुछ बोलने का इंतजार करने लगी।
  4337. 2:59:32मगर राघव की तरफ से कोई आवाज नहीं आई।
  4338. 2:59:34सिया खामोश खड़ी रही यह सोचते हुए कि क्या
  4339. 2:59:37सच में राघव वह था या नहीं। अगले दो मिनट
  4340. 2:59:40में ही उसका कंफ्यूजन दूर हुआ। राघव ने
  4341. 2:59:43फिर एक बार दरवाजा का नोक किया और बोला,
  4342. 2:59:46"सिया टॉवल और बाथ रोब यहां रख दिया है और
  4343. 2:59:49मैं बाहर जा रहा हूं। तुम आकर चेंज कर
  4344. 2:59:52लेना। और फिर राघव ने दरवाजे के हैंडल को
  4345. 2:59:55टॉवल टांग दिया और बाहर चला गया। उसकी बात
  4346. 2:59:57सुन सिया के सांस में सांस आए। उसने कुछ
  4347. 3:00:00पल के बाद थोड़ा सा दरवाजा खोला और जल्दी
  4348. 3:00:03से टॉवल और बाथरूम लेकर दरवाजा बंद कर
  4349. 3:00:06दिया। उसने जल्दी से अपने आप को साफ किया
  4350. 3:00:08और बाथरूम पहनकर बाहर आ गई। फिर जल्दी से
  4351. 3:00:11उसने अपनी साड़ी निकाली और उसे पहनकर अपना
  4352. 3:00:14मेकअप कर दिया। उसे लेट हुआ था इस वजह से
  4353. 3:00:17उसने ज्यादा कुछ ना करते हुए बस फेस टेल
  4354. 3:00:19लगाया और आंखों में काजल की धार खींच दी।
  4355. 3:00:22अपने माथे पर बिंदी सजाते हुए उसने मांग
  4356. 3:00:24में लंबा सिंदूर भरा और फिर अपने
  4357. 3:00:26मंगलसूत्र को ठीक कर वो जल्दी-जल्दी बाहर
  4358. 3:00:28चली गई। हॉल में आते ही वो मॉम से बोली
  4359. 3:00:32मॉम सॉरी मैं लेट हो गई। मैं अभी
  4360. 3:00:34ब्रेकफास्ट का देखती हूं। सिया किचन की
  4361. 3:00:37तरफ जाने लग गई। लेकिन सुधा मोम ने उसका
  4362. 3:00:39हाथ पकड़ कर उसे रोका और डाइनिंग टेबल की
  4363. 3:00:42ओर ले गई। सुधा मोम उसे चेयर पर बिठाते
  4364. 3:00:44हुए बोली सब कुछ तैयार है। चलो अब बैठो और
  4365. 3:00:47नाश्ता करो। सुधा मोम ने उसे सर्व करते
  4366. 3:00:49हुए कहा और छोटी मां से कहकर उन दोनों की
  4367. 3:00:52चाय मंगवा ली। वो ये इनका नाश्ता सिया ने
  4368. 3:00:56धीरे से कहा बाकी सबका पता नहीं मगर राघव
  4369. 3:00:59अभी तक उसके साथ था तो उसे पता नहीं था कि
  4370. 3:01:01उसने नाश्ता किया है या नहीं। छोटी मां को
  4371. 3:01:04उसकी आवाज सुनाई नहीं दी। इसलिए वह बोली
  4372. 3:01:07क्या कह रही हो सिया? और सिया ने ना में
  4373. 3:01:10सर हिला दिया। वह वैसे ही बैठी यह देखती
  4374. 3:01:12रही कि राघव आ रहा है या नहीं। क्या हुआ?
  4375. 3:01:16तुम खा क्यों नहीं रही हो? छोटी मां की
  4376. 3:01:18फिर से आए आवाज से सिया ने उनके तरफ देखा
  4377. 3:01:21और बोली वो वो क्या आओ सब ने खा लिया।
  4378. 3:01:24मेरा भाई डैड आप सिया ने राघव का नाम नहीं
  4379. 3:01:28लिया मगर वो दोनों समझ गई और मुस्कुराने
  4380. 3:01:30लग गई। छोटी मां उसे छिड़ते हुए बोली हम
  4381. 3:01:34सब या फिर राघव। किसके बारे में पूछना
  4382. 3:01:37चाहती हो सिया? और क्या उनकी बात सुन सिया
  4383. 3:01:40बुरी तरह से शर्मा गई। उसे इतने शर्मा रही
  4384. 3:01:43थी कि उसने अपना सर झुका लिया। सुधा मोम
  4385. 3:01:45और छोटी मां उसकी हरकत देख हंसने लग गई।
  4386. 3:01:48सुधा मोम बोली अरे राघव आ जाओ देखो
  4387. 3:01:51तुम्हारी बीवी तुम्हारे बिना नाश्ता नहीं
  4388. 3:01:53कर रही है। अब दोनी आराम से नाश्ता करो।
  4389. 3:01:56चलो कविता हम यहां से जाते हैं। सुधा मोम
  4390. 3:01:59ने राघव का आता देख कहा और फिर कविता जी
  4391. 3:02:01के साथ वहां से चली गई। क्या हुआ? राघव को
  4392. 3:02:05समझ नहीं आया कि मोम ने उससे ऐसा कहीं
  4393. 3:02:08किया। इसलिए वह सिया के पास वाली चेयर पर
  4394. 3:02:10बैठते। हुए उसके तरफ झुक कर बोला और सिया
  4395. 3:02:14के शर्म की लाली और बढ़ गई। उसने ना में
  4396. 3:02:17सर हिलाया और राघव के लिए प्लेट में
  4397. 3:02:20ब्रेकफास्ट सर्व कर दिया। उसके बाद उन
  4398. 3:02:23दोनों ने आराम से बैठकर अपना अपना नाश्ता
  4399. 3:02:25खत्म किया और राघव हॉल में तो सिया किचन
  4400. 3:02:27में प्लेट्स और बाकी सब लेकर चली गई।
  4401. 3:02:30थोड़ी देर बाद जब वो आईए तब राघव के कहने
  4402. 3:02:32पर सुधा मोम ने उसका लाया हुआ सेट सिया को
  4403. 3:02:35दे दिया और अच्छे से टायर होकर आने के लिए
  4404. 3:02:37बोल दिया। राघव भी तैयार होने चला गया और
  4405. 3:02:40कल सिया ने उसके लिए लिया हुआ ड्रेस उसने
  4406. 3:02:42पहन लिया। सच में सिया को चॉइस उस पर काफी
  4407. 3:02:44जच रही थी और उसके लुक्स को और भी निखार
  4408. 3:02:47रही थी। सिया भी फिर रेडी होकर वहां आ गई
  4409. 3:02:51और तभी डैड ने उसे बैंक लॉकर से लाए हुए
  4410. 3:02:53ज्वेलरी उसे दे दी। उन्होंने अपने चारों
  4411. 3:02:56बेटों के बहुओं के लिए कुछ ना कुछ बनकर
  4412. 3:02:58रखा रहा और राघव के वाइफ होने के नाते जो
  4413. 3:03:01सिया के हिस्से का था वह सारी ज्वेलरी
  4414. 3:03:03उन्होंने सिया को दे दी। सुधा मोम बोली आओ
  4415. 3:03:06सिया इसे पहन लो और सुधा मोम ने खुद अपने
  4416. 3:03:08हाथों से सिया को तैयार कर दिया। सच में
  4417. 3:03:12हर बार की तरह इस बार भी सिया बहुत ही
  4418. 3:03:14अच्छी दिख रही थी और सब की नजरें उस पर ही
  4419. 3:03:16टिकी थी। छोटी मां ने उसे नजर का टीका
  4420. 3:03:19लगाया और धीरे से राघव से बोली राघव संभाल
  4421. 3:03:22कर ले जाना सिया को और हां वह अपने गुस्से
  4422. 3:03:25पर थोड़ा काबू रखना। राघव ने उनकी बात सुन
  4423. 3:03:27हां में सर हिलाया। क्या हुआ? राघव को समझ
  4424. 3:03:31नहीं आया कि मोम ने उससे ऐसा कहीं किया
  4425. 3:03:34इसलिए वह सिया के पास वाली चेयर पर बैठते
  4426. 3:03:37हुए उसके तरफ झुक कर बोला और सिया के
  4427. 3:03:40चेहरे पर छाई हुई शर्म की लाली और बढ़ गई
  4428. 3:03:43उसने ना में सर हिलाया और राघव के लिए
  4429. 3:03:46प्लेट में ब्रेकफास्ट सर्व कर दिया। उसके
  4430. 3:03:49बाद उन दोनों ने आराम से बैठकर अपना अपना
  4431. 3:03:51नाश्ता खत्म किया और राघव हॉल में तुसिया
  4432. 3:03:53किचन में प्लेट्स और बाकी सब लेकर चली गई।
  4433. 3:03:56थोड़ी देर बाद जब वह आए तब राघव के कहने
  4434. 3:03:59पर सुधा मोम ने उसका लाया हुआ सेट सिया को
  4435. 3:04:01दे दिया और अच्छे से टायर होकर आने के लिए
  4436. 3:04:03बोल दिया। राघव भी तैयार होने चला गया और
  4437. 3:04:06कल सिया ने उसके लिए लिया हुआ ड्रेस उसने
  4438. 3:04:08पहन लिया। सच में सिया को चॉइस उस पर काफी
  4439. 3:04:11जच रही थी और उसके लुक्स को और भी निखार
  4440. 3:04:13रही थी। सिया भी फिर रेडी होकर वहां आ गई
  4441. 3:04:17और तभी डैड ने उसे बैंक लॉकर से लाए हुए
  4442. 3:04:20ज्वेलरी उसे दे दी। उन्होंने अपने चारों
  4443. 3:04:22बेटों के बहुओं के लिए कुछ ना कुछ बनकर
  4444. 3:04:24रखा रहा और राघव के वाइफ होने के नाते जो
  4445. 3:04:27सिया के हिस्से का था वह सारी ज्वेलरी
  4446. 3:04:29उन्होंने सिया को दे दी। सुधा मोम बोली आओ
  4447. 3:04:32सिया इसे पहन लो और सुधा मोम ने खुद अपने
  4448. 3:04:35हाथों से सिया को तैयार कर दिया। सच में
  4449. 3:04:38हर बार की तरह इस बार भी सिया बहुत ही
  4450. 3:04:40अच्छी दिख रही थी और सबकी नजरें उस पर ही
  4451. 3:04:43टिकी थी। छोटी मां ने उसे नजर का टीका
  4452. 3:04:45लगाया और धीरे से राघव से बोली, "राघव
  4453. 3:04:48संभालकर ले जाना सिया को और हां वहां अपने
  4454. 3:04:51गुस्से पर थोड़ा काबू रखना। राघव ने उनकी
  4455. 3:04:53बात सुन हां में सर हिलाया और वह दोनों
  4456. 3:04:56सिया के मायके जाने के लिए निकल गए।
  4457. 3:04:58खामोशी से उनका सफर बीत रहा था। राघव सिया
  4458. 3:05:01से बहुत सारी बातें करना चाहता था। लेकिन
  4459. 3:05:04कहां से शुरू करें, यह उसके समझ के परे था
  4460. 3:05:07और सिया उसके लिए तो राघव का साथ ही काफी
  4461. 3:05:09था। खुशी उसके चेहरे पर साफ-साफ झलक रही
  4462. 3:05:12थी। राघव का साथ इतना अच्छा परिवार और अब
  4463. 3:05:15मायके जाने की खुशी सिया तो ताजे गुलाब की
  4464. 3:05:18तरह खिली खिली लग रही थी। राघव ने एफएम
  4465. 3:05:20शुरू किया और फिर आगे का सफर रोमांटिक
  4466. 3:05:23सोंग को सुनते हुए ही बीतने लगा। सिया
  4467. 3:05:26रहकर उसे देख रही थी जिसका एहसास राघव को
  4468. 3:05:29था। लेकिन उसने कुछ कहा नहीं और ऐसा जताया
  4469. 3:05:33कि उसका पूरा ध्यान ड्राइविंग पर ही
  4470. 3:05:35सिग्नल पर गाड़ी रोकने के बाद राघव ने
  4471. 3:05:37सिया की तरफ देखा। इस उम्मीद से कि शायद
  4472. 3:05:40वह अभी कुछ कहेंगी। लेकिन सिया ने अपनी
  4473. 3:05:43खामोश भी बरकरार राखी और जब उसने कुछ कहने
  4474. 3:05:45के लिए मुंह खोला उसी वक्त कार की खिड़की
  4475. 3:05:48पर दस्तक सुनाई दी। राघव ने सिया की तरफ
  4476. 3:05:51की खिड़की ओपन की और सामने खड़ी बच्ची की
  4477. 3:05:53तरफ देखने लगा जो ताजेताजे फूलों के गजरे
  4478. 3:05:56बेच रही थी। वो बच्ची राघव से बोली साहब
  4479. 3:06:00मिस साहब के लिए गजरे ले लीजिए ना। उनके
  4480. 3:06:02लंबे बालों पर यह गजरे बहोर जचेंगे। उस
  4481. 3:06:05बच्ची की बात सुन राघव ने सिया के तरफ
  4482. 3:06:07देखा जिसके चेहरे का नूर उन गजरों को देख
  4483. 3:06:10और बढ़ गया था। राघव उस बच्ची से बोला ठीक
  4484. 3:06:13है सारे के सारे दे दो और राघव की यह बात
  4485. 3:06:16सिया और वो लड़की दोनों को हैरान कर गई।
  4486. 3:06:18उसके पास बहुत सारे गजरे थे और एक ही वक्त
  4487. 3:06:21पर सब बिक रहे थे। इस वजह से वह बच्ची
  4488. 3:06:23खुशी के मारे हैरान थी तो सिया इतने सारे
  4489. 3:06:26गजरों का क्या करना है? यह सोचकर हैरान
  4490. 3:06:29थी। राघव एक बार सिया को और फिर उस लड़की
  4491. 3:06:32को देखकर बोला दे रही हो ना और उस लड़की
  4492. 3:06:36ने जल्दी-जल्दी हां सर हिलाकर पूरी टोकरी
  4493. 3:06:38ही सिया के पास दे दी। राघव ने फिर उसे
  4494. 3:06:41500 500 के दो नोट दी और खुले उसे ही रखने
  4495. 3:06:44के लिए बोल दिए। वह लड़की खुशी-खुशी वहां
  4496. 3:06:47से चली गई और राघव ने फिर एक बार उनकी
  4497. 3:06:49मंजिल की ओर गाड़ी बढ़ा दी। कुछ दूरी पर
  4498. 3:06:51जाने के बाद राघव ही बोला, क्या तुम्हें
  4499. 3:06:54फूल पसंद नहीं है? उसका अचानक आया सवाल
  4500. 3:06:57सुन सिया हड़बड़ा गई और जल्दीजल्दी बोली
  4501. 3:07:00हां है ना पसंद है तो फिर लगाओ ना उन्हें
  4502. 3:07:03अपने बालों में राघव ने गजरों की तरफ
  4503. 3:07:06इशारा करके कहा और सिया ने हां में सर
  4504. 3:07:08हिला दिया उसने दो-तीन गजरे अपने हाथ में
  4505. 3:07:11लिए तभी राघव बोला जितने तुम्हारे बाल है
  4506. 3:07:14एटलीस्ट उतने तो गजरे लो और राघव ने ही
  4507. 3:07:16हाथ आगे कर उसमें से सात आठ गजरों की लड़
  4508. 3:07:19उठा दी सिया ने मुस्कुराते हुए उन्हें
  4509. 3:07:21लिया और बोली थैंक यू उसकी वो मीठी सी
  4510. 3:07:24आवाज आज राघव को अक्सू तो कर गई लेकिन
  4511. 3:07:27उसका सिया का उसे थैंक यू कहना उसे
  4512. 3:07:29बिल्कुल पसंद नहीं आया। वो कुछ बोलने ही
  4513. 3:07:32वाला था। तब तक ही सिया फिर से बोली थैंक
  4514. 3:07:35यू एवरीथिंग आप और बाकी सभी घर वाले बहुत
  4515. 3:07:38अच्छे हैं। बहुत-बहुत अच्छे। थैंक यू मुझे
  4516. 3:07:41समझने के लिए और मेरा साथ देने के लिए।
  4517. 3:07:43सिया की आंखों में झलक रहा था कि वो कितने
  4518. 3:07:46सच्चे दिल से यह बोल रही है। इस वजह से
  4519. 3:07:49राघव ने उसे आगे कुछ नहीं कहा और मुस्कुरा
  4520. 3:07:51दिया। सिया ने फिर एक-एक कर गजरों को आपस
  4521. 3:07:54में जोड़ दिया और अपना हाथ पीछे करके वह
  4522. 3:07:56बालों में सेट करने लगी। मगर उससे यह हो
  4523. 3:07:58ही नहीं रहा था। उसकी वह नाकाम कोशिश देख
  4524. 3:08:02राघव ने एक और गाड़ी लगा दी और उसके तरफ
  4525. 3:08:05झुककर उसके हाथ को अपने हाथ में थाम लिया।
  4526. 3:08:07वेट में करता हूं राघव बोला और उन गजरों
  4527. 3:08:10को लगाने की कोशिश करने लगा। बिना यह जाने
  4528. 3:08:12कि उसकी यह छुवन सिया के अंदर क्या खलबली
  4529. 3:08:15मचा गई है। राघव की करीबी सिया को कुछ
  4530. 3:08:18हिप्सा महसूस करवा रही थी। मगर वह अजीब
  4531. 3:08:20फीलिंग उसे बहुत अच्छी लग रही थी। उसके
  4532. 3:08:23सांसे बढ़ गई थी राघव के करीबी से जिसे
  4533. 3:08:25अपने सीने पर हाथ रख वो किसी तरह नॉर्मल
  4534. 3:08:28करने की तरह कोशिश कर रही थी। वही राघव का
  4535. 3:08:31हाल भी कुछ वैसा ही था। सिया की करीबी और
  4536. 3:08:33गजरे के अति वो महकीम-मह की खुशबू राघव को
  4537. 3:08:36बहकने के लिए मजबूर कर रहे थे। राघव ने
  4538. 3:08:39गजरों को सिया के बालों में सजा दिया और
  4539. 3:08:41झुककर उसने गहरी सांस लेते हुए वे उस
  4540. 3:08:44खुशबू को अपने सांसों में भर ली और उसकी
  4541. 3:08:46इस हरकत से सिया के हाथों की मुट्ठियां
  4542. 3:08:48उसके साड़ी पर कस गई। उसमें हुआ यह बदलाव
  4543. 3:08:52राघव के भी समझ में आ गया। लेकिन वो वैसे
  4544. 3:08:54ही रहा और थोड़ा सा उसके चेहरे के तरफ
  4545. 3:08:57झुककर उसके सर पर किस करते हुए बोला, "तुम
  4546. 3:09:00बहुत अच्छी दिख रही हो। बच्चा बहुत ही
  4547. 3:09:02खूबसूरत और प्यारी राघव का यह कहना और
  4548. 3:09:04सिया ने उसके तरफ देखा। उन दोनों की आंखें
  4549. 3:09:07आपस में उलझ गई और कुछ ऐसे उलझी कि एक
  4550. 3:09:10दूसरे पर से हटने का नाम ही नहीं ले रही
  4551. 3:09:12थी। आप सिया उसने कुछ कहना चाहती थी लेकिन
  4552. 3:09:15राघव का उसको यूं इतना इंटेंसली देखना
  4553. 3:09:18सिया के लफ्जों को उसके हलक से बाहर
  4554. 3:09:20निकलने ही नहीं दे रहा था। राघव के चेहरे
  4555. 3:09:23पर बड़ी वाली स्माइल आ गई। उसे ऐसे देख और
  4556. 3:09:26उसने सिया का चेहरा अपने हाथों में थाम
  4557. 3:09:28लिया। उसके आंखों में बारी-बारी देखते हुए
  4558. 3:09:30वह बोला चाहे जिस हालत में भी हो लेकिन सच
  4559. 3:09:33यही कि हम दोनों शादी जैसे पवित्र रिश्ते
  4560. 3:09:36में बंध गए तो क्यों ना इस रिश्ते को एक
  4561. 3:09:38मौका दे और हम एक दूसरे के साथ आगे बढ़े
  4562. 3:09:42मेरी हमसफ बनकर क्या तुम मेरे साथ अपने
  4563. 3:09:44जिंदगी का आगे का सफर काटना चाहोगी सिया
  4564. 3:09:48मेरे साथ एक नए शुरुआत करोगी राघव ने अपने
  4565. 3:09:51हाथ से उसके गाल को धीरे से सहलाया और फिर
  4566. 3:09:54उसके आगे कर दिया सिया जो अभी भी उसके
  4567. 3:09:56नजरों में खोई हुई थी उसने ने अपना सरहमे
  4568. 3:09:59हिलाया और उसके हाथ में अपना हाथ दे दिया।
  4569. 3:10:02राघव खुश होते हुए बोला, आई प्रॉमिस
  4570. 3:10:05तुम्हारा यह हाथ मैं कभी नहीं छोडूंगा
  4571. 3:10:07बच्चा और राघव ने फिर उसके हाथ पर किस कर
  4572. 3:10:10दिया। सिया शर्मा गई और उसका शर्माना राघव
  4573. 3:10:12के दिल की धकनों को इतना बढ़ा गया कि उसका
  4574. 3:10:15दिल किया कि सिया के उस लाल रंगत में
  4575. 3:10:17नहाए-हाए चेहरे पर किस की बौछार कर देख।
  4576. 3:10:20किसी तरह अपने जज्बात पर काबू रख। राघव ने
  4577. 3:10:22अपना ध्यान उस पर से हटाया और फिर एक बार
  4578. 3:10:25वह सिया के घर के तरफ निकल पड़े। मगर अब
  4579. 3:10:27इस सफर के बीच भले ही ज्यादा ना सही मगर
  4580. 3:10:30थोड़ी बहुत बातें दोनों में हो रही थी।
  4581. 3:10:32उसमें हुआ यह बदलाव राघव के भी समझ में आ
  4582. 3:10:35गया लेकिन वो वैसे ही रहा और थोड़ा सा
  4583. 3:10:38उसके चेहरे के तरफ झुककर उसके सर पर किस
  4584. 3:10:41करते हुए बोला तुम बहुत अच्छी दिख रही हो
  4585. 3:10:43बच्चा बहुत ही खूबसूरत और प्यारी राघव का
  4586. 3:10:46यह कहना और सिया ने उसके तरफ देखा। उन
  4587. 3:10:48दोनों की आंखें आपस में उलझ गई और कुछ ऐसे
  4588. 3:10:51उलझी कि एक दूसरे पर से हटने का नाम ही
  4589. 3:10:53नहीं ले रही थी। आप सिया उसने कुछ कहना
  4590. 3:10:57चाहती थी लेकिन राघव का उसको यू इतना
  4591. 3:10:59इंटेंसली देखना सिया के लफ्जों को उसके
  4592. 3:11:02हलक से बाहर निकलने ही नहीं दे रहा था।
  4593. 3:11:04राघव के चेहरे पर बड़ी वाली स्माइल आ गई।
  4594. 3:11:07उसे ऐसे देख और उसने सिया का चेहरा अपने
  4595. 3:11:09हाथों में थाम लिया। उसके आंखों में
  4596. 3:11:11बारी-बारी देखते हुए वह बोला चाहे जिस
  4597. 3:11:14हालत में भी हो। लेकिन सच यही है कि हम
  4598. 3:11:16दोनों शादी जैसे पवित्र रिश्ते में बंध गए
  4599. 3:11:19तो क्यों ना इस रिश्ते को एक मौका दे और
  4600. 3:11:21हम एक दूसरे के साथ आगे बढ़े। मेरी हमसफ
  4601. 3:11:25बनकर क्या तुम मेरे साथ अपने जिंदगी का
  4602. 3:11:27आगे का सफर काटना चाहोगी सिया मेरे साथ एक
  4603. 3:11:31नए शुरुआत करोगी राघव ने अपने हाथ से उसके
  4604. 3:11:34गाल को धीरे से सहलाया और फिर उसके आगे कर
  4605. 3:11:37दिया सिया जो अभी भी उसके नजरों में खोई
  4606. 3:11:40हुई थी उसने अपना सरह में हिलाया और उसके
  4607. 3:11:42हाथ में अपना हाथ दे दिया राघव खुश होते
  4608. 3:11:45हुए बोला आई प्रॉमिस तुम्हारा यह हाथ मैं
  4609. 3:11:48कभी नहीं छोडूंगा बच्चा और राघव ने फिर
  4610. 3:11:51उसके हाथ पर किस कर दिया सिया शर्मा ਗਈ और
  4611. 3:11:53उसका शर्माना राघव के दिल की धकनों को
  4612. 3:11:56इतना बढ़ा गया कि उसका दिल किया कि सिया
  4613. 3:11:58के उस लाल रंगत में नहाए चेहरे पर किसकी
  4614. 3:12:01बौछार कर देख किसी तरह अपने जज्बात पर
  4615. 3:12:03काबू रख राघव ने अपना ध्यान उस पर से
  4616. 3:12:06हटाया और फिर एक बार वह सिया के घर के तरफ
  4617. 3:12:08निकल पड़े मगर अब इस सफर के बीच भले ही
  4618. 3:12:11ज्यादा ना सही मगर थोड़ी बहुत बातें दोनों
  4619. 3:12:13में हो रही थी। कुछ देर बाद सिया के बताने
  4620. 3:12:17पर राघव की गाड़ी उसके घर के सामने आकर
  4621. 3:12:19रुकी। शहर से थोड़ा सा बाहर सिया के घर
  4622. 3:12:22वालों की बड़ी सी बेहद खूबसूरत पुश्तैनी
  4623. 3:12:24हवेली थी जिसकी खूबसूरती आज भी सब ने
  4624. 3:12:27मिलकर बरकरार रखी हुई थी। बड़ा सा अलग-अलग
  4625. 3:12:30फूलों के पौधों से और पेड़ों से सजा हुआ
  4626. 3:12:32आंगन और घर के ठीक सामने निकली गई सुंदर
  4627. 3:12:35बड़ी रंगोली देखकर ही राघव के चेहरे पर
  4628. 3:12:38स्माइल आ गई। उसके गाड़ी की आवाज सुनकर घर
  4629. 3:12:41के सभी बाहर आ गए थे। सिया की मां ने आरती
  4630. 3:12:44की थाल लाई हुई थी और दरवाजे पर खड़ी हुई
  4631. 3:12:46उन्हीं के आने का इंतजार कर रही थी। राघव
  4632. 3:12:49ने सिया के लिए दरवाजा खोला और हाथ देते
  4633. 3:12:51हुए उसे आराम से गाड़ी के बाहर निकालकर
  4634. 3:12:54पीछे से बैग भी ले ली। सिया ने भी आगे
  4635. 3:12:56बढ़कर उसकी मदद की और वह बचे हुए गजरों की
  4636. 3:12:59टोकरी अपने साथ ले ली। उन्हें देखकर जल्दी
  4637. 3:13:01से आलोक और प्रियेश आगे आए। वहीं शशांक भी
  4638. 3:13:04दौड़ते हुए छोटी बहन के पास आ गया जो बहुत
  4639. 3:13:06ही प्यारी लग रही थी। आलोक ने राघव के हाथ
  4640. 3:13:10में से बैक की और प्रियेश की तरफ देते हुए
  4641. 3:13:12राघव से बोला जमाई जी आने को कोई तकलीफ तो
  4642. 3:13:16नहीं हुई ना? राघव ना में सर हिलाते हुए
  4643. 3:13:19बोला नहीं कोई तकलीफ नहीं हुई हे उन दोनों
  4644. 3:13:22ने हैंडशेक किया और आगे की ओर बढ़ गए बड़े
  4645. 3:13:25पापा काका और सिया के पापा तीनों भी उसका
  4646. 3:13:28वेलकम करने के लिए आगे आ गए थे राघव ने
  4647. 3:13:31उनके तरफ मुस्कुरा कर देखा हां यह सच था
  4648. 3:13:34कि वह उनसे गुस्सा था उनकी सोच उसे
  4649. 3:13:36बिल्कुल पसंद नहीं थी मगर बावजूद उसके वह
  4650. 3:13:39जान गया था कि सिया की फैमिली उसके लिए
  4651. 3:13:41इंपॉर्टेंट है और सबसे इंपॉर्टेंट वो उसकी
  4652. 3:13:44फैमिली है जिस नाते वह उसकी भी फैमिली बली
  4653. 3:13:46हुई और अपने संस्कारों की वजह से उसने
  4654. 3:13:49बिना कोई मेल मुटाव अपने दिल में लाए हुए
  4655. 3:13:51नीचे झुक गया और उसने सबके पैर छू लिए। उन
  4656. 3:13:55तीनों ने भी उसे सच्चे दिल से आशीर्वाद
  4657. 3:13:57दिया। राघव अब उनके बेटी का हस्बैंड था।
  4658. 3:14:00उनका जमाए जो ना सिर्फ दिखने में अच्छा था
  4659. 3:14:02बल्कि बहुत होनहार और संस्कारी भी था।
  4660. 3:14:05बड़े पापा ने भले ही शादी में उससे ठीक से
  4661. 3:14:07बात नहीं की हो। लेकिन सिया के विदा होने
  4662. 3:14:10के बाद सबसे पहले उन्होंने राघव के बारे
  4663. 3:14:12में जानकारी निकाली थी। सिया की शादी
  4664. 3:14:16उन्होंने मिश्रा जी के अच्छे स्वभाव के
  4665. 3:14:18वजह से ही तय की थी। उन्हें लगा था कि
  4666. 3:14:20राहुल भी उसके पिता की तरह ही होगा लेकिन
  4667. 3:14:23वह गलत थे। उन्हें लाफिलेट राहुल ही
  4668. 3:14:25सच्चाई पता चली जिसे जानने के बाद वह
  4669. 3:14:28चाहकर भी कुछ कर नहीं सकते थे और यही वजह
  4670. 3:14:30थी कि उन्होंने मिसेज मिश्रा को उनका मोह
  4671. 3:14:33मांगा दहेज देने की पहल की थी ताकि आगे
  4672. 3:14:35जाकर उनकी बेटी को कोई तकलीफ ना हो। मगर
  4673. 3:14:38वह यह भूल गए थे कि उनका दिया हुआ दहेज
  4674. 3:14:40उनकी बेटी के लिए और खतरा पैदा कर सकता
  4675. 3:14:43था। खैर, यह सिया की खुशकिस्मती थी कि वह
  4676. 3:14:46उस घर में नहीं गई और सही वक्त रहते राघव
  4677. 3:14:49सिया के लाइफ में आ गया। उन्हें हर तरफ से
  4678. 3:14:52राघव के बारे में अच्छी ही बातें सुनने को
  4679. 3:14:54मिली थी। सिवाय एक बात के और वो एक थी कि
  4680. 3:14:57राघव को गुस्सा थोड़ा ज्यादा ही आता है।
  4681. 3:14:59उसके गुस्से के अलावा उसमें एक भी ऐसी
  4682. 3:15:01खोटी चीज नहीं थी कि जिस वजह से उसे नाम
  4683. 3:15:04रखा जा सके। बड़े पापा पापा सिया ने अपनी
  4684. 3:15:08भरी हुई आंखों से उनकी तरफ देखा और ना
  4685. 3:15:10सिर्फ वह दोनों बल्कि काका भी उनकी घर की
  4686. 3:15:13सबसे छोटी बेटी का यह मित्रो शादीशुदा लुक
  4687. 3:15:16देखकर भावुक हो गए। उनकी नजर सिया पर ही
  4688. 3:15:19रुक गई। उनकी उंगली पकड़ कर इधर से उधर
  4689. 3:15:21उछलने वाली और चहकते हुए उनके घर आंगन को
  4690. 3:15:24महकाने वाली उनकी बेटी आज किसी के घर की
  4691. 3:15:26बहू किसी के पत्नी के रूप में उनके सामने
  4692. 3:15:29खड़ी थी। पिंक कलर की साड़ी नई नवेली
  4693. 3:15:32दुल्हन की तरह पूरा शादी का श्रृंगार
  4694. 3:15:35सिंदूर से भरी मांग, गले में बड़ा और छोटा
  4695. 3:15:38मंगलसूत्र जो दोनों राघव ने उसे दिए थे।
  4696. 3:15:40एक गोल्ड नेकलेस और उसी पर एयरिंग्स। हाथ
  4697. 3:15:44भर पहने हुए चिड़िया जिसके आगे पीछे सोने
  4698. 3:15:46के कंगन थे और मेहंदी की वो रंगत जो उसके
  4699. 3:15:49नाजुक गोर हाथों को और भी खुसबुरद बना रही
  4700. 3:15:52थी। पैरों के मेहंदी पर भी जचती। वो नाजुक
  4701. 3:15:54पायल। कितनी परिपूर्ण लग रही थी। वो ऊपर
  4702. 3:15:57से वो उसके सामने से हेयर स्टाइल करके
  4703. 3:15:59खुले छोड़े हुए बल्ब जिसमें राघव ने कुछ
  4704. 3:16:02ज्यादा ही गजरे लगा दिए थे जो सिया के रूप
  4705. 3:16:04को और निखारने का काम बखूबी निभा रहे थे।
  4706. 3:16:07सिया हर बार की तरह बहुत ही प्यारी लग रही
  4707. 3:16:09थी। उसके आंखों में भी अपने घर वालों को
  4708. 3:16:12सामने देख आंसू छा गए। उसका दिल कर रहा था
  4709. 3:16:15कि दौड़ कर जाए और अपने पापा के बड़े पापा
  4710. 3:16:18के गले लग जाए। मगर उसने अपने आप को रोक
  4711. 3:16:21दिया। बचपन की तरह कोई ट्रॉफी जीत के आने
  4712. 3:16:23पर जैसे वह भाग कर जाती थी। वैसे अब वह
  4713. 3:16:26नहीं जा सकती थी। अब वह बच्ची तो नहीं रही
  4714. 3:16:29थी। इस वजह से सिया वैसे ही खड़ी रही।
  4715. 3:16:31उसके दिल में चल रहे जज्बात शायद उसके
  4716. 3:16:33पापा को समझ आ गए। वो सिया को बाहों में
  4717. 3:16:36लेने के लिए आगे ही बढ़ने वाले थे कि तब
  4718. 3:16:38तक बड़े पापा ने अपने कदम आगे बढ़ा दिए और
  4719. 3:16:41सिया के तरफ चले गए। बड़े पापा सिया ने
  4720. 3:16:44धीरे से उन्हें पुकारा और अगले ही पल बड़े
  4721. 3:16:46पापा ने उसे अपने गले से लगा लिया। सिया
  4722. 3:16:49भी जल्दी से बड़े पापा के पीठ पर हाथ रखे
  4723. 3:16:52और उनके सीने पर सर रखकर रोने लग गई। बड़े
  4724. 3:16:54पापा उसे शांत कराते हुए बिले श रो मत चुप
  4725. 3:16:58हो जाओ और मुझे बताओ कि मेरी लाडो कैसी
  4726. 3:17:00है? ठीक हो ना लाडो बड़े पापा ने उसके सर
  4727. 3:17:04को सहलाया और उसे थोड़ा सा दूर कर उसकी
  4728. 3:17:06आंखों में देखते हुए सवाल किया। सिया ने
  4729. 3:17:09रोते हुए ही हां में सर हिलाया और एक नजर
  4730. 3:17:12राघव पर डाली जो वही खड़े रहकर किसी सोच
  4731. 3:17:14में गम था। पापा अभी तक सिया के पास आ गए
  4732. 3:17:17थे और उन्होंने फिर सिया को अपने गले से
  4733. 3:17:19लगा लिया। सिया भी अपने पापा के गले लगस
  4734. 3:17:21पड़ी। तभी काका उससे बोले सिया ऐसे रोते
  4735. 3:17:25नहीं हे बेटा चलो शांत हो जाओ और अंदर आओ।
  4736. 3:17:28जमाई जी को और कितने देर दरवाजे पर खड़े
  4737. 3:17:31करेंगे। हम चलो अब अंदर काका ने भी प्यार
  4738. 3:17:34से उससे कहा और सिया उनके गले लगकर हां सर
  4739. 3:17:37हिलाया। उन्होंने प्यार से सिया के सर को
  4740. 3:17:39छुमा और उसे लेकर अंदर की तरफ आने लग गए।
  4741. 3:17:42सिया को राघव के करीब खड़े करके उन्होंने
  4742. 3:17:45घर की औरतों को इशारा किया और तभी सिया की
  4743. 3:17:47मम्मा सिया की बड़ी मोम से बोली भाभी आइए
  4744. 3:17:50आरती कीजिए हमारे बेटी जमाई की बड़ी मां
  4745. 3:17:53ने हां में सर हिलाया और अच्छे से दोनों
  4746. 3:17:56की आरती उतारी फिर सिया की मोम की तरफ
  4747. 3:17:58थाली दे दी उन्होंने भी राघव सिया की आरती
  4748. 3:18:01उतारी और अपनी देवरानी की तरफ थाल देकर
  4749. 3:18:04उन्हें भी इशारा किया कि वह भी उन दोनों
  4750. 3:18:06का स्वागत किया। उन्होंने भी फिर दोनों का
  4751. 3:18:08राघव सिया का अच्छे से स्वागत किया और
  4752. 3:18:11उनकी नजर उतारते हुए रोटी टुकड़ा उन पर से
  4753. 3:18:14उतार के फेंक दिया। आइए जमाई जी सिया बड़ी
  4754. 3:18:17मॉम ने पहले राघव की तरफ और फिर सिया के
  4755. 3:18:20तरफ देखकर कहा और उक के अंदर आते ही बाकी
  4756. 3:18:22सब भी अंदर आ गए। अंदर आते ही सिया अपनी
  4757. 3:18:25तीनों मॉम्स के गले लग गई। उन तीनों ने भी
  4758. 3:18:27बचपन से उसे बहुत प्यार दिया था। तो उसने
  4759. 3:18:31तीनों को गले लगा लिया और वह सभी सिस पड़ी
  4760. 3:18:33सिया की मॉम ने तो उसके चेहरे पर किसकी की
  4761. 3:18:36बौछार कर दी। वह प्यार से उसके चेहरे को
  4762. 3:18:38चूम रही थी। उनकी एक लौटी मासूम सी बच्ची
  4763. 3:18:42के साथ बहुत कुछ हुआ था और अब जब वह उसके
  4764. 3:18:45सामने थी तब वह अपना प्यार उस पर लुटाने
  4765. 3:18:48से खुद को नहीं रोक पाए। उन्हें तो उनसे
  4766. 3:18:50बहुत सारी बातें करनी थी। लेकिन अब फिलहाल
  4767. 3:18:53में उनके जमाई की आभगत करना जरूरी था। तो
  4768. 3:18:56वह उसी के तरफ मुड़ गई। बाकी दोनों ने भी
  4769. 3:18:59सिया को प्यार किया और फिर अपना पूरा
  4770. 3:19:01अटेंशन अपने जमी को देते हुए टेबले नाश्ते
  4771. 3:19:04के अलग-अलग चीजों से भरा दिया। चाय, कॉफी
  4772. 3:19:06और व्हाट नॉट कितना कुछ सामने रख दिया
  4773. 3:19:09उन्होंने। राघव के राघव ने बस मुस्कुराकर
  4774. 3:19:11उन सबकी तरफ देखा और एक दो बाइट उठा लिए।
  4775. 3:19:14पापा और बाकी सिया के भाई उससे बातें करने
  4776. 3:19:17में लग गए थे। बड़े पापा भी बीच-बीच में
  4777. 3:19:20कुछ ना कुछ कह रहे थे और सिया बस वही
  4778. 3:19:22बैठकर उनकी बातों को सुन रही थी। कहर के
  4779. 3:19:24लेडी सारे अंदर चले गए थे और उनके पीछे
  4780. 3:19:27सिया भी जाना चाहती थी।
  4781. 3:19:29लेकिन उसकी मॉम ने ना में इशारा कर अंदर
  4782. 3:19:31आने से मना किया और वही उनके जमाई जी यानी
  4783. 3:19:34कि राघव के पास बैठने बोल दिया। अपना मन
  4784. 3:19:36मारकर सिया वही बैठी रही। मगर कुछ ही देर
  4785. 3:19:40में उसकी चुलबुल शुरू हो गई जिसे देख राघव
  4786. 3:19:43उससे बोला सिया जाओ और आंटी की आई मीन मोम
  4787. 3:19:46की हेल्प करा दो थोड़ी बहुत जाओ। राघव ने
  4788. 3:19:49जैसे ही कहा सबकी नजरें उसकी तरफ आ गई।
  4789. 3:19:52सिया तो खुशी से चाहक उठी और खदे होते हुए
  4790. 3:19:54बोली मैं भी यही सोच रही थी कि मैं अंदर
  4791. 3:19:57जाऊं। सिया फिर बिना एक अपने की भेद देरी
  4792. 3:19:59किए हुए वहां से उठी और अंदर की ओर भाग गई
  4793. 3:20:02और उसकी यह बच्चों जैसे हरकत जहां राघव को
  4794. 3:20:05खुश कर गई वही सबको परेशान यह सोचकर कि अब
  4795. 3:20:08उनके जमाई जी क्या सोचेंगे उनके बेटी के
  4796. 3:20:10बारे में उन तीनों ने भी उसे सच्चे दिल से
  4797. 3:20:13आशीर्वाद दिया राघव अब उनके बेटी का
  4798. 3:20:16हस्बैंड था उनका जमाई जो ना सिर्फ दिखने
  4799. 3:20:19में अच्छा था बल्कि बहुत होनहार और
  4800. 3:20:21संस्कारी भी था बड़े पापा ने भले ही शादी
  4801. 3:20:23में उससे ठीक से बात नहीं की हो लेकिन
  4802. 3:20:26सिया के विदा होने के बाद सबसे पहले
  4803. 3:20:28उन्होंने राघव के बारे में जानकारी निकाली
  4804. 3:20:31थी। सिया की शादी उन्होंने मिश्रा जी के
  4805. 3:20:34अच्छे स्वभाव के वजह से ही तय की थी।
  4806. 3:20:36उन्हें लगा था कि राहुल भी उसके पिता की
  4807. 3:20:38तरह ही होगा। लेकिन वह गलत थे। उन्हें
  4808. 3:20:41लाफिलेट राहुल ही सच्चाई पता चली जिसे
  4809. 3:20:44जानने के बाद वह चाहकर भी कुछ कर नहीं
  4810. 3:20:46सकते थे और यही वजह थी कि उन्होंने मिसेज
  4811. 3:20:49मिश्रा को उनका मोह मांगा दहेज देने की
  4812. 3:20:51पहल की थी। ताकि आगे जाकर उनकी बेटी को
  4813. 3:20:54कोई तकलीफ ना हो। मगर वह यह भूल गए थे कि
  4814. 3:20:56उनका दिया हुआ दहेज उनकी बेटी के लिए और
  4815. 3:20:59खतरा पैदा कर सकता था। खैर, यह सिया की
  4816. 3:21:02खुशकिस्मती थी कि वह उस घर में नहीं गई और
  4817. 3:21:05सही वक्त रहते राघव सिया के लाइफ में आ
  4818. 3:21:08गया। उन्हें हर तरफ से राघव के बारे में
  4819. 3:21:10अच्छी ही बातें सुनने को मिली थी। सिवाय
  4820. 3:21:12एक बात के और वह एक थी कि राघव को गुस्सा
  4821. 3:21:15थोड़ा ज्यादा ही आता है। उसके गुस्से के
  4822. 3:21:17अलावा उसमें एक भी ऐसी खोटी चीज नहीं थी
  4823. 3:21:20कि जिस वजह से उसे नाम रखा जा सके। बड़े
  4824. 3:21:23पापा पापा सिया ने अपनी भरी हुई आंखों से
  4825. 3:21:26उनकी तरफ देखा और ना सिर्फ वह दोनों बल्कि
  4826. 3:21:29काका भी उनकी घर की सबसे छोटी बेटी का यह
  4827. 3:21:32मैच्योर शादीशुदा लुक देखकर भावुक हो गए।
  4828. 3:21:34उनकी नजरें सिया पर ही रुक गई। उनकी उंगली
  4829. 3:21:37पकड़ कर इधर से उधर उछलने वाली और चहकते
  4830. 3:21:40हुए उनके घर आंगन को महकाने वाली उनकी
  4831. 3:21:42बेटी आज किसी के घर की बहू किसी के पत्नी
  4832. 3:21:45के रूप में उनके सामने खड़ी थी। पिंक कलर
  4833. 3:21:48की साड़ी, नई नवेली दुल्हन की तरह पूरा
  4834. 3:21:50शादी का श्रृंगार सिंदूर से भरी मांग, गले
  4835. 3:21:54में बड़ा और छोटा मंगलसूत्र जो दोनों राघव
  4836. 3:21:57ने उसे दिए थे। एक गोल्ड नेकलेस और उसी पर
  4837. 3:21:59एयरिंग्स। हाथ भर पहने हुए चिड़िया जिसके
  4838. 3:22:03आगे पीछे सोने के कंगन थे और मेहंदी की वो
  4839. 3:22:05रंगत जो उसके नाजुक गोर हाथों को और भी
  4840. 3:22:08खूबसूरत बना रही थी। पैरों के मेहंदी पर
  4841. 3:22:10भी जचती। वो नाजुक पायल। कितनी परिपूर्ण
  4842. 3:22:13लग रही थी। वो ऊपर से वो उसके सामने से
  4843. 3:22:15हेयर स्टाइल करके खुले छोड़े हुए बल्ब
  4844. 3:22:18जिसमें राघव ने कुछ ज्यादा ही गजरे लगा
  4845. 3:22:20दिए थे जो सिया के रूप को और निखारने का
  4846. 3:22:22काम बखूबी निभा रहे थे। सिया हर बार की
  4847. 3:22:25तरह बहुत ही प्यारी लग रही थी। उसके आंखों
  4848. 3:22:28में भी अपने घर वालों को सामने देख आंसू
  4849. 3:22:30छा गए। उसका दिल कर रहा था कि दौड़ कर जाए
  4850. 3:22:33और अपने पापा के बड़े पापा के गले लग जाए।
  4851. 3:22:36मगर उसने अपने आप को रोक दिया। बचपन की
  4852. 3:22:39तरह कोई ट्रॉफी जीत के आने पर जैसे वह भाग
  4853. 3:22:42कर जाती थी। वैसे अब वह नहीं जा सकती थी।
  4854. 3:22:44अब वह बच्ची तो नहीं रही थी। इस वजह से
  4855. 3:22:47सिया वैसे ही खड़ी रही। उसके दिल में चल
  4856. 3:22:49रहे जज्बात शायद उसके पापा को समझ आ गए।
  4857. 3:22:52वो सिया को बाहों में लेने के लिए आगे ही
  4858. 3:22:54बढ़ने वाले थे कि तब तक बड़े पापा ने अपने
  4859. 3:22:57कदम आगे बढ़ा दिए और सिया के तरफ चले गए।
  4860. 3:23:00बड़े पापा सिया ने धीरे से उन्हें पुकारा
  4861. 3:23:03और अगले ही पल बड़े पापा ने उसे अपने गले
  4862. 3:23:05से लगा लिया। सिया भी जल्दी से बड़े पापा
  4863. 3:23:08के पीठ पर हाथ रखे और उनके सीने पर सर
  4864. 3:23:10रखकर रोने लग गई। बड़े पापा उसे शांत
  4865. 3:23:13कराते हुए बिले श रो मत चुप हो जाओ और
  4866. 3:23:16मुझे बताओ कि मेरी लाडो कैसी है? ठीक हो
  4867. 3:23:19ना लाडो बड़े पापा ने उसके सर को सहलाया
  4868. 3:23:22और उसे थोड़ा सा दूर कर उसकी आंखों में
  4869. 3:23:24देखते हुए सवाल किया। सिया ने रोते हुए ही
  4870. 3:23:27हां में सर हिलाया और एक नजर राघव पर डाली
  4871. 3:23:30जो वही खड़े रहकर किसी सोच में गम था।
  4872. 3:23:32पापा भी तक सिया के पास आ गए थे और
  4873. 3:23:34उन्होंने फिर सिया को अपने गले से लगा
  4874. 3:23:36लिया। सिया भी अपने पापा के गले लगिस
  4875. 3:23:39पड़ी। तभी काका उससे बोले सिया ऐसे रोते
  4876. 3:23:43नहीं हे बेटा चलो शांत हो जाओ और अंदर आओ।
  4877. 3:23:46जमाई जी को और कितने देर दरवाजे पर खड़े
  4878. 3:23:49करेंगे हम। चलो अब अंदर काका ने भी प्यार
  4879. 3:23:51से उससे कहा और सिया उनके गले लगकर हमें
  4880. 3:23:54सर हिलाया। उन्होंने प्यार से सिया के सर
  4881. 3:23:56को छुआमा और उसे लेकर अंदर की तरफ आने लग
  4882. 3:23:59गए। सिया को राघव के करीब खड़े करके
  4883. 3:24:02उन्होंने घर की औरतों को इशारा किया और
  4884. 3:24:04तभी सिया की मम्मा सिया की बड़ी मोम से
  4885. 3:24:06बोली भाभी आइए आरती कीजिए हमारे बेटी जमाई
  4886. 3:24:09की। बड़ी मां ने हां में सर हिलाया और
  4887. 3:24:12अच्छे से दोनों की आरती उतारी। फिर सिया
  4888. 3:24:15की मोम की तरफ थाली दे दी। उन्होंने भी
  4889. 3:24:17राघव सिया की आरती उतारी और अपनी देवरानी
  4890. 3:24:20की तरफ थाल देकर उन्हें भी इशारा किया कि
  4891. 3:24:22वह भी उन दोनों का स्वागत किया। उन्होंने
  4892. 3:24:25भी फिर दोनों का राघव सिया का अच्छे से
  4893. 3:24:27स्वागत किया और उनकी नजर उतारते हुए रोटी
  4894. 3:24:30टुकड़ा उन पर से उतार के फेंक दिया। आइए
  4895. 3:24:33जमाई जी सिया बड़ी मॉम ने पहले राघव की
  4896. 3:24:36तरफ और फिर सिया के तरफ देखकर कहा और उप
  4897. 3:24:38के अंदर आते ही बाकी सब भी अंदर आ गए।
  4898. 3:24:41अंदर आते ही सिया अपनी तीनों मॉम्स के गले
  4899. 3:24:43लग गई। उन तीनों ने भी बचपन से उसे बहुत
  4900. 3:24:46प्यार दिया था। तो उसने तीनों को गले लगा
  4901. 3:24:49लिया और वह सभी सिस पड़ी सिया की मॉम ने
  4902. 3:24:52तो उसके चेहरे पर किसकी बौछार कर दी। वह
  4903. 3:24:54प्यार से उसके चेहरे को चूम रही थी। उनकी
  4904. 3:24:56एक लौटी मासूम सी बच्ची के साथ बहुत कुछ
  4905. 3:25:00हुआ था और अब जब वह उसके सामने थी तब वह
  4906. 3:25:04अपना प्यार उस पर लुटाने से खुद को नहीं
  4907. 3:25:06रोक पाए। उन्हें तो उनसे बहुत सारी बातें
  4908. 3:25:08करनी थी। लेकिन अब फिलहाल में उनके जमाई
  4909. 3:25:11की आभगत करना जरूरी था। तो वह उसी के तरफ
  4910. 3:25:14मुड़ गई। बाकी दोनों ने भी सिया को प्यार
  4911. 3:25:17किया और फिर अपना पूरा अटेंशन अपने जमी को
  4912. 3:25:19देते हुए टेबले नाश्ते के अलग-अलग चीजों
  4913. 3:25:22से भरा दिया। चाय, कॉफी और व्हाट नॉट
  4914. 3:25:24कितना कुछ सामने रख दिया उन्होंने। राघव
  4915. 3:25:27के राघव ने बस मुस्कुराकर उन सबकी तरफ
  4916. 3:25:29देखा और एक दो बाइट उठा लिए। पापा और बाकी
  4917. 3:25:33सिया के भाई उससे बातें करने में लग गए
  4918. 3:25:35थे। बड़े पापा भी बीच-बीच में कुछ ना कुछ
  4919. 3:25:37कह रहे थे और सिया बस वही बैठकर उनकी
  4920. 3:25:40बातों को सुन रही थी। कहर के लेडी सारे
  4921. 3:25:42अंदर चले गए थे और उनके पीछे सिया भी जाना
  4922. 3:25:45चाहती थी।
  4923. 3:25:46लेकिन उसकी मॉम ने ना में इशारा कर अंदर
  4924. 3:25:49आने से मना किया और वही उनके जमाई जी यानी
  4925. 3:25:51कि राघव के पास बैठने बोल दिया। अपना मन
  4926. 3:25:54मारकर सिया वही बैठी रही। मगर कुछ ही देर
  4927. 3:25:57में उसकी चुलबुल शुरू हो गई जिसे देख राघव
  4928. 3:26:00उससे बोला सिया जाओ और आंटी की आई मीन मॉम
  4929. 3:26:03की हेल्प करा दो थोड़ी बहुत जाओ। राघव ने
  4930. 3:26:06जैसे ही कहा सबकी नजरें उसकी तरफ आ गई।
  4931. 3:26:09सिया तो खुशी से चाहक उठी और खदे होते हुए
  4932. 3:26:11बोली मैं भी यही सोच रही थी कि मैं अंदर
  4933. 3:26:14जाऊं। सिया फिर बिना एक अपने की भेद देरी
  4934. 3:26:17किए हुए वहां से उठी और अंदर की ओर भाग गई
  4935. 3:26:19और उसकी यह बच्चों जैसे हरकत जहां राघव को
  4936. 3:26:22खुश कर गई वही सबको परेशान यह सोचकर कि अब
  4937. 3:26:25उनके जमाई जी क्या सोचेंगे उनके बेटी के
  4938. 3:26:27बारे में आइए जमाई जी सिया बड़ी मॉम ने
  4939. 3:26:31पहले राघव के तरफ और फिर सिया के तरफ
  4940. 3:26:33देखकर कहा और उक के अंदर आते ही बाकी सब
  4941. 3:26:36भी अंदर आ गए अंदर आते ही सिया अपनी तीनों
  4942. 3:26:39मॉम्स के गले लग गई उन तीनों ने भी बचपन
  4943. 3:26:41से उसे बहुत प्यार दिया था तो उसने तीन
  4944. 3:26:44तीनों को गले लगा लिया और वो सभी सिस
  4945. 3:26:46परसिया की मोम ने तो उसके चेहरे पर किसकी
  4946. 3:26:49की बौछार कर दी। वो प्यार से उसके चेहरे
  4947. 3:26:51को चूम रही थी। उनकी एक लौटी मासूम सी
  4948. 3:26:55बच्ची के साथ बहुत कुछ हुआ था और अब जब वह
  4949. 3:26:58उसके सामने थी तब वह अपना प्यार उस पर
  4950. 3:27:01लुटाने से खुद को नहीं रोक पाए। उन्हें तो
  4951. 3:27:03उनसे बहुत सारी बातें करनी थी। लेकिन अब
  4952. 3:27:06फिलहाल में उनके जमाई की आभगत करना जरूरी
  4953. 3:27:09था। तो वह उसी के तरफ मुड़ गई। बाकी दोनों
  4954. 3:27:12ने भी सिया को प्यार किया और फिर अपना
  4955. 3:27:14पूरा अटेंशन अपने जमी को देते हुए टेबले
  4956. 3:27:16नाश्ते के अलग-अलग चीजों से भरा दिया।
  4957. 3:27:19चाय, कॉफी और व्हाट नॉट कितना कुछ सामने
  4958. 3:27:21रख दिया उन्होंने। राघव के राघव ने बस
  4959. 3:27:24मुस्कुराकर उन सब की तरफ देखा और एक-दो
  4960. 3:27:26बाइट उठा लिए। पापा और बाकी सिया के भाई
  4961. 3:27:30उससे बातें करने में लग गए थे। बड़े पापा
  4962. 3:27:32भी बीच-बीच में कुछ ना कुछ कह रहे थे और
  4963. 3:27:34सिया बस वही बैठकर उनकी बातों को सुन रही
  4964. 3:27:37थी। कहर के लेडीज सारे अंदर चले गए थे और
  4965. 3:27:39उनके पीछे सिया भी जाना चाहती थी। लेकिन
  4966. 3:27:43उसकी मॉम ने ना में इशारा कर अंदर आने से
  4967. 3:27:45मना किया और वही उनके जमाई जी यानी कि
  4968. 3:27:48राघव के पास बैठने बोल दिया। अपना मन
  4969. 3:27:50मारकर सिया वहीं बैठी रही। मगर कुछ ही देर
  4970. 3:27:53में उसकी चुलबुल शुरू हो गई। जिसे देख
  4971. 3:27:56राघव उससे बोला सिया जाओ और आंटी की आई
  4972. 3:27:59मीन मॉम की हेल्प करा दो। थोड़ी बहुत जाओ।
  4973. 3:28:01राघव ने जैसे ही कहा सबकी नजरें उसकी तरफ
  4974. 3:28:04आ गई। सिया तो खुशी से चहक उठी और खदे
  4975. 3:28:07होते हुए बोली मैं भी यही सोच रही थी कि
  4976. 3:28:10मैं अंदर जाऊं सिया फिर बिना एक अपर की
  4977. 3:28:12भेद देरी किए हुए वहां से उठी और अंदर की
  4978. 3:28:15ओर भाग गई और उसकी यह बच्चों जैसे हरकत
  4979. 3:28:17जहां राघव को खुश कर गई वही सबको परेशान
  4980. 3:28:20यह सोचकर कि अब उनके जमाई जी क्या सोचेंगे
  4981. 3:28:23उनके बेटी के बारे में क्या हुआ राघव को
  4982. 3:28:26समझ नहीं आया कि सभी एक चेहरे के
  4983. 3:28:28एक्सप्रेशन चेंज क्यों हो गए उसने सवाल
  4984. 3:28:32करते हुए सबको देखा बड़े पापा फिर किसी
  4985. 3:28:34तरह से बोले वो वो जमाई जी सिया में ना
  4986. 3:28:37अभी थोड़ा बचपना है वो कभी-कभी ऐसे बच्चों
  4987. 3:28:40वाली हरकत कर देती है आप प्लीज मगर बड़े
  4988. 3:28:44पापा के पूरा बोलने से पहले ही राघव
  4989. 3:28:46उन्हें रोकते हुए बोला कौन सी बच्चों वाली
  4990. 3:28:48हरकत मेरे ख्याल से सिया ने ऐसा कुछ भी
  4991. 3:28:51नहीं किया है और हां अगर आप उसके दौड़ कर
  4992. 3:28:54जाने के बारे में बोल रहे हैं तो मैं बता
  4993. 3:28:56दूं कि मेरी बीवी जो चाहे जैसे चाहे वैसे
  4994. 3:28:59कर सकती है दूसरे क्या कहेंगे इस बारे में
  4995. 3:29:02सोचकर वो खुद को बदले यह मुझे मुझे पसंद
  4996. 3:29:04नहीं आएगा तो आप सब भी ना ही उसे अब कोई
  4997. 3:29:08रोक-टोक करें और ना ही कुछ बोले कहते हुए
  4998. 3:29:10राघव का ओरा थोड़ा स्ट्रांग हो गया था
  4999. 3:29:13जिसे देख खुद बड़े पापा भी खामोश हो गए और
  5000. 3:29:15बाकी सबकी कुछ कहने की हिम्मत ही नहीं
  5001. 3:29:17बची। सिया के पापा किसी तरह से बोले वो
  5002. 3:29:21भाई साहब के बोलने का गलत मतलब नहीं था।
  5003. 3:29:24हम तो बस पापा भी आगे कुछ बोल नहीं पाए।
  5004. 3:29:27राघव ने कुछ ऐसी नजरों से उन सब की तरफ
  5005. 3:29:30देखा कि पल भर के अंदर वहां का माहौल बदल
  5006. 3:29:32गया। उतने में सिया वहां पर जूस का ग्लास
  5007. 3:29:35लेकर आई और जैसे ही उसे वहां हुआ बदलाव
  5008. 3:29:38महसूस हुआ उसके कदम अपने आप धीरे हो गए।
  5009. 3:29:41उसने एक नजर सबकी तरफ और फिर राघव की तरफ
  5010. 3:29:44देखा। सिया के चेहरे पर टेंशन साफ-साफ झलक
  5011. 3:29:47रहा था और उसे ऐसे देखना राघव को बिल्कुल
  5012. 3:29:50अच्छा नहीं लगा। वो मुस्कुराते हुए उससे
  5013. 3:29:52बोला, "सिया क्या हुआ?" इतने धीरे क्यों
  5014. 3:29:56चल रही हो? राघव ने उसका ध्यान अपनी तरफ
  5015. 3:29:58करने के हिसाब से कहा। मगर उसकी आए आवाज
  5016. 3:30:01से सिया थोड़ी सहम गई और उसके हाथ से
  5017. 3:30:03ट्रेन नीचे गिर गया। सब कुछ इतना जल्दी
  5018. 3:30:06हुआ कि सिया भी हड़बड़ा गई और उस ट्रे को
  5019. 3:30:08बचाने के चक्कर में सामने टेबल से टकरा
  5020. 3:30:10गई। सीयूब राघव जल्दी से उसके पास आया और
  5021. 3:30:14उसने उसे संभाला। उसे ठीक से खड़े करते
  5022. 3:30:17हुए राघव फिक्र से बोला ध्यान कहां है
  5023. 3:30:19बच्चा तुम्हारा? कहीं ज्यादा चोट तो नहीं
  5024. 3:30:22लगी हेना। दिखाओ। राघव बोलते बोलते नीचे
  5025. 3:30:25बैठ गया और उसने सिया के उस पैर को जो
  5026. 3:30:28टेबल से टकराया था उसे अपने घुटनों पर
  5027. 3:30:30लेकर चेक करने लगा। उसने यह सब इतनी जल्दी
  5028. 3:30:32किया था कि सिया तो क्या किसी और के भी
  5029. 3:30:34कुछ समझ नहीं आया। आ आप क्या कर रहे हो?
  5030. 3:30:38रने दीजिए। दीजिए ना मैं ठीक हूं। सिया ने
  5031. 3:30:42एक नजर सभा की तरफ देख किसी तरह अपना पैर
  5032. 3:30:44छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा। राघव का
  5033. 3:30:47इस तरह उसके कदमों में बैठना किसी को
  5034. 3:30:49अच्छा नहीं लगता। किसी को तो छोड़ो। उसे
  5035. 3:30:52खुद अच्छा नहीं लगता यह सब। वह बस किसी भी
  5036. 3:30:55तरीके से अपने पैर को छुड़वाना चाहती थी।
  5037. 3:30:57मगर राघव एक ही उसे छोड़ने का नाम ही नहीं
  5038. 3:31:00ले रहा था। सिया ने किसी तरह एक नजर सबको
  5039. 3:31:03और फिर उसे देखा और ठीक उसी वक्त राघव ने
  5040. 3:31:06उसका पैर छोड़ दिया। सिया ने चैन की सांस
  5041. 3:31:08छोड़ी ही थी कि उसे लगा जैसे उसके पैर हवा
  5042. 3:31:11में तैरने लग गए और वह किसी की पकड़ में
  5043. 3:31:13गिरफ थे। एंड शी वाज राइट। राघव ने उसे
  5044. 3:31:16छोड़ने के साथ-साथ अपनी बाहों में उठाकर
  5045. 3:31:18ले लिया था। सिया की हिम्मत नहीं थी। कुछ
  5046. 3:31:22कहने की तो दूर ही अपनी आंखें खोलने की भी
  5047. 3:31:24उसने कास कर अपनी आंखें बंद कर ली। प्रभु
  5048. 3:31:27उसके कानों पर राघव की आवाज टकरा गई। राघव
  5049. 3:31:30उससे बोला तुम्हारा कमरा कहां है? मुझे
  5050. 3:31:33तुम्हें चेक करना है। राघव ने सवाल किया
  5051. 3:31:36मगर सिया तो शर्म से उसके बाहों में अपनी
  5052. 3:31:38आंखें बंद करके लेटी थी। राघव ने फिर उससे
  5053. 3:31:41कुछ नहीं कहा और सामने शशांक की तरफ देखा।
  5054. 3:31:43वो उससे बोला इस और जीजू आइए मैं आपको ले
  5055. 3:31:46चलता हूं। और फिर शशांक के पीछेछे राघव
  5056. 3:31:49सिया को अपने बाहों के झूले में के जाने
  5057. 3:31:51लगा जिसे हजाते हुए हर कोई देख रहा था।
  5058. 3:31:54किस-किस के दिमाग में क्या चल रहा था यह
  5059. 3:31:57तो कोई नहीं जानता था। राघव का पहले सिया
  5060. 3:32:00के पैरों में बैठना फिर उसे बाहों में
  5061. 3:32:02उठाकर ले जाना। घर के जेंट्स को कैसा लगा
  5062. 3:32:06यह तो पता नहीं था। लेकिन घर की लेडीज को
  5063. 3:32:08बहुत ही अच्छा लगा था। उन तीनों ने दिल ही
  5064. 3:32:11दिल अपने भगवान को हाथ जोड़ दिए और यह दुआ
  5065. 3:32:13की कि राघव हमेशा सिया के साथ ऐसा ही रहे
  5066. 3:32:16और उसकी इतनी ही फिक्र करें। सिया की मोम
  5067. 3:32:18प्रिया भी बहुत खुश थी। तभी उनके कानों पर
  5068. 3:32:21गिरीश जी सिया के पापा की आवाज आई। यू
  5069. 3:32:24उनसे बोले प्रिया किसी से कहकर इसे साफ
  5070. 3:32:26करवा दो और मेरे साथ चलो। गिरीश जी ने कहा
  5071. 3:32:29और सिया के कमरे की और फिक्र से बढ़ गए।
  5072. 3:32:31उन्हें डर था कि कहीं सिया को कहीं चोट तो
  5073. 3:32:34नहीं लगी हेना। शशांक ने बाहर से ही राघव
  5074. 3:32:37को कमरा दिखाया और वह वहीं खड़ा रहा। राघव
  5075. 3:32:40फिर आराम से सिया को अंदर ले गया और किसी
  5076. 3:32:42कांच की गुड़िया हम जितने नजाकत के साथ
  5077. 3:32:45रखते हैं ना ठीक उसी तरह से उसने सिया को
  5078. 3:32:47आराम से बिस्तर पर रख दिया। मे सिया उससे
  5079. 3:32:51कुछ कहना चाहती थी। लेकिन राघव ने उसे
  5080. 3:32:53होठों पर उंगली रख दी और नाम में सर
  5081. 3:32:55हिलाते हुए बोला कुछ मत कहो। एंड लेट मी
  5082. 3:32:58चेक कि तुम्हें कहां लगी है। राघव कटे हुए
  5083. 3:33:01फिर से सिया के पैरों के पास बैठ गया और
  5084. 3:33:04उसके पैरों को हाथ लगाने ही वाला था कि
  5085. 3:33:06सिया ने अपने पैर ऊपर की और खींच दिए और
  5086. 3:33:09बोली, नहीं आप मेरे पैरों को हाथ मत लगाओ।
  5087. 3:33:12पति इस तरह से पत्नी के पैरों को हाथ
  5088. 3:33:14लगाते हुए अच्छे नहीं लगते। आप क्या मुझ
  5089. 3:33:16पर पाप चढ़वाना चाहते हो। सिया ने अपने
  5090. 3:33:20पैर को कवर करते हुए कुछ ऐसे कहा कि राघव
  5091. 3:33:22को उसकी बात पर हंसी आने लग गई। किस-किस
  5092. 3:33:25के दिमाग में क्या चल रहा था, यह तो कोई
  5093. 3:33:28नहीं जानता था। राघव का पहले सिया के
  5094. 3:33:31पैरों में बैठना, फिर उसे बाहों में उठाकर
  5095. 3:33:33ले जाना। घर के जेंट्स को कैसा लगा, यह तो
  5096. 3:33:37पता नहीं था, लेकिन घर की लेडीज को बहुत
  5097. 3:33:39ही अच्छा लगा था। उन तीनों ने दिल ही दिल
  5098. 3:33:41अपने भगवान को हाथ जोड़ दिए और यह दुआ की
  5099. 3:33:44कि राघव हमेशा सिया के साथ ऐसा ही रहे और
  5100. 3:33:47उसकी इतनी ही फिक्र करें। सिया की मोम
  5101. 3:33:49प्रिया भी बहुत खुश थी। तभी उनके कानों पर
  5102. 3:33:51गिरीश जीत सिया के पापा की आवाज आई। यो
  5103. 3:33:54उनसे बोले प्रिया किसी से कहकर इसे साफ
  5104. 3:33:57करवा दो और मेरे साथ चलो। गिरीश जी ने कहा
  5105. 3:34:00और सिया के कमरे की ओर फिक्र से बढ़ गए।
  5106. 3:34:02उन्हें डर था कि कहीं सिया को कहीं चोट तो
  5107. 3:34:04नहीं लगी है ना। शशांक ने बाहर से ही राघव
  5108. 3:34:08को कमरा दिखाया और वह वहीं खड़ा रहा। राघव
  5109. 3:34:10फिर आराम से सिया को अंदर ले गया और किसी
  5110. 3:34:13कांच की गुड़िया हम जितने नजाकत के साथ
  5111. 3:34:15रखते हैं ना ठीक उसी तरह से उसने सिया को
  5112. 3:34:18आराम से बिस्तर पर रख दिया। मे सिया उससे
  5113. 3:34:21कुछ कहना चाहती थी। लेकिन राघव ने उसे
  5114. 3:34:24होठों पर उंगली रख दी और नाम में सर
  5115. 3:34:26हिलाते हुए बोला कुछ मत कहो एंड लेट मी
  5116. 3:34:29चेक कि तुम्हें कहां लगी है। राघव कटे हुए
  5117. 3:34:32फिर से सिया के पैरों के पास बैठ गया और
  5118. 3:34:34उसके पैरों को हाथ लगाने ही वाला था कि
  5119. 3:34:37सिया ने अपने पैर ऊपर की और खींच दिए और
  5120. 3:34:39बोली नहीं आप मेरे पैरों को हाथ मत लगाओ।
  5121. 3:34:43पति इस तरह से पत्नी के पैरों को हाथ
  5122. 3:34:45लगाते हुए अच्छे नहीं लगते। आप क्या मुझ
  5123. 3:34:47पर पाप चढ़वाना चाहते हो। सिया ने अपने
  5124. 3:34:50पैर को कवर करते हुए कुछ ऐसे कहा कि राघव
  5125. 3:34:53को उसकी बात पर हंसी आने लग गई। राघव
  5126. 3:34:56जोरजोर से हंसने लगा और सिया बस उसे हंसता
  5127. 3:34:59हुआ देख उसमें ही खो गई। फिर जब उसे याद
  5128. 3:35:02आया कि वह उस पर हंस रहा है तब उसने अपना
  5129. 3:35:04मुंह बना लिया और नाराजगी से बोली आप हंसो
  5130. 3:35:07मत ना मैंने ऐसा क्या कह दिया जिससे आप
  5131. 3:35:09हंस रहे हो। सिया को नाराज होता देख राघव
  5132. 3:35:13ने अपना हंसना कंट्रोल किया और बोला क्या
  5133. 3:35:15किया। सच में बच्चा मतलब कौन से किताब में
  5134. 3:35:19लिखा है कि पति के अपने पत्नी के पैर छूने
  5135. 3:35:21की वजह से पत्नी को पाप चढ़ता है। को भी
  5136. 3:35:24बोलती हो तुम और ऊपर से ऐसे एक्सप्रेशन
  5137. 3:35:27देती हो। सो क्यूट राघव ने कहते हुए सिया
  5138. 3:35:30के गाल को चुटकी काटी और फिर एक बार उसके
  5139. 3:35:33पैर को देखने लगा। सिया का नाजुक गोरा पैर
  5140. 3:35:36उंगलियों की साइड लाल हो चुका था। जिसे
  5141. 3:35:39राघव ने प्यार से अपने उंगलियों से सहलाया
  5142. 3:35:42और सिया सिहर उठी। उसने अपना पैर पीछे की
  5143. 3:35:44और खींचा और राघव से अपनी नजरें चुराने लग
  5144. 3:35:47गई। राघव होले से मुस्कुरा उठा। उसकी
  5145. 3:35:50नजरें सिया पर गई जो शर्म से लाल हो चुकी
  5146. 3:35:52थी। पता नहीं क्यों। लेकिन राघव को उसके
  5147. 3:35:56इस रूप पर बड़ा ही प्यार आया। उसका दिल
  5148. 3:35:58किया कि वह सिया को अपने बाहों में खींच
  5149. 3:36:00ले और अपने अनादर उमड़ रहे सरे जज्बातों
  5150. 3:36:03को उसके सामने बयान करें। उसके उन गुलाबी
  5151. 3:36:06गालों को अपने लबों से छूकर अपनी प्यास
  5152. 3:36:08बुझाए। लेकिन उसने कंट्रोल किया और आराम
  5153. 3:36:10से सिया का पैर छोड़ दिया। सिया के पापा
  5154. 3:36:14ने दरवाजे पर दस्तक दी और बोले क्या मैं
  5155. 3:36:16अंदर आ जाओ। राघव और सिया का ध्यान उनकी
  5156. 3:36:20आवाज के पास गया और राघव अपनी जगह पर से
  5157. 3:36:22उठ खड़ा हुआ। पापा के पीछे सिया की मॉम भी
  5158. 3:36:25खड़ी थी। वो दोनों अंदर आ गए और सोया की
  5159. 3:36:28मां ने उसे गले लगा लिया। वो फिक्र से
  5160. 3:36:30उससे बोली क्या हुआ सीयू? सब ठीक तो है
  5161. 3:36:34ना? ऐसे अचानक कैसे गिर गई तुम? अपनी मॉम
  5162. 3:36:37को यूं फिक्र करता देख सिया उनके गले लग
  5163. 3:36:40गई और बोली मैं ठीक हूं मम्मा। आप फिक्र
  5164. 3:36:42मत करो। सिया की बात सुन मोम कुछ नहीं
  5165. 3:36:45बोली और उसके सर वो वैसे ही सहलाने लग गई।
  5166. 3:36:48तब तक बड़े पापा और घर के बाकी सब भी वहां
  5167. 3:36:51आ गए।

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