दो अनाथ भाइयों की किस्मत | Do Anath Bhaiyo Ki Kismat | Hindi kahaniya | Parivarik Hindi Kahani — Transcript
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- 0:02एक छोटा सा गांव जहां हर कोई दो मासूम
- 0:05अनाथ भाइयों की किस्मत पर तरस खाता था।
- 0:08लेकिन किसी को नहीं पता था कि जिन दो
- 0:11बच्चों को लोग बेबस समझ रहे थे। उन्हीं
- 0:14दोनों की वजह से कुछ दिनों बाद पूरा गांव
- 0:17एक ऐसे सच का गवाह बनने वाला था जिसने
- 0:20लालच में अंधे एक इंसान की जिंदगी हमेशा
- 0:23के लिए बदल दी।
- 0:25भैया क्या सच में यह खेत अब हमारे नहीं
- 0:28रहे? जब तक पिताजी की आखिरी निशानी हमारे
- 0:31साथ है, कोई हमसे हमारी जमीन नहीं छीन
- 0:34सकता। मैं वादा करता हूं।
- 0:37उसी समय दूर खड़ा उनका ताऊ दोनों भाइयों
- 0:40की बातें सुनकर मुस्कुराता है।
- 0:43बच्चे हो तुम अभी दुनिया नहीं देखी। कुछ
- 0:46ही दिनों में यह जमीन भी मेरी होगी और तुम
- 0:49दोनों सड़क पर। कुछ महीने पहले इसी गांव
- 0:52रामपुर में दो भाई अपने माता-पिता के
- 0:55[संगीत] साथ एक छोटी सी लेकिन खुशहाल
- 0:58जिंदगी जी रहे थे। बड़ा भाई आर्यन समझदार
- 1:02और मेहनती था। जबकि छोटा भाई रोहन पूरे
- 1:05गांव की जान था।
- 1:07भैया जल्दी आओ। देखो मैंने आम के पेड़ से
- 1:11सबसे बड़ा आम तोड़ा है।
- 1:13अरे पगले अगर पिताजी ने देख लिया ना तो
- 1:17[संगीत] पहले हमें खेत में काम करवाएंगे
- 1:19फिर आम खाने देंगी।
- 1:21दोनों भाई हंसने लगते हैं। उसी समय उनके
- 1:25पिता रघुवीर खेत से लौटते हैं।
- 1:28अरे शैतानों इतनी ऊर्जा [संगीत] खेत में
- 1:31लगा दिया करो। फसल भी तुम दोनों की तरह
- 1:33मुस्कुराने लगेगी। पिताजी मैं बड़ा होकर
- 1:37आपकी तरह [संगीत] किसान बनूंगा। किसान
- 1:40बनना गर्व की बात है बेटा लेकिन पहले
- 1:43अच्छा इंसान बनना बाकी सब अपने आप मिल
- 1:46जाएगा।
- 1:46मां सीमा पानी का लोटा लेकर आती हैं। बस
- 1:50अब बातें बंद। सब लोग हाथ धोकर खाना खाने
- 1:54आओ। चारों एक साथ आंगन में बैठकर खाना
- 1:58खाते हैं।
- 1:59मां हम हमेशा ऐसे ही साथ रहेंगे ना। अगर
- 2:03परिवार एक दूसरे का साथ कभी ना [संगीत]
- 2:05छोड़े तो दुनिया की कोई ताकत उसे नहीं
- 2:08तोड़ सकती। आर्यन मुस्कुराता है। लेकिन घर
- 2:12के बाहर खड़ा एक आदमी यह सब चुपचाप देख
- 2:16रहा होता है। वो था रघुवीर का बड़ा भाई
- 2:20भैरव। भैरव धीरे-धीरे घर की ओर बढ़ता है।
- 2:25अरे भैया [गला साफ़ करने की आवाज़]
- 2:26आइए आइए। बहुत दिनों बाद आए हैं। बस ऐसे
- 2:30ही सोचा अब छोटे भाई से मिल लूं।
- 2:33सीमा सम्मान से उन्हें खाना परोसती हैं।
- 2:37भैया गरम-गरम रोटी लीजिए।
- 2:40हां रख दो।
- 2:41भैरव की नजर बार-बार घर के सामने फैले
- 2:44हरेभरे खेतों पर जाती है।
- 2:46रघुवीर इस साल तो अच्छी कमाई हुई होगी।
- 2:50भगवान की कृपा है और मेहनत का फल है। जो
- 2:54मिला उसी में खुश हैं। हां।
- 2:58खुश तो दिख ही रहे हो।
- 2:59भैरव वहां से चला जाता है। उसी रात अपने
- 3:04घर में। क्या हुआ? इतनी चुप क्यों हो?
- 3:08देखा तुमने रघुवीर के पास कितनी जमीन है
- 3:11और लोग उसकी कितनी इज्जत करते हैं।
- 3:14दूसरे की खुशियां देखकर जलने से कुछ नहीं
- 3:16मिलेगा।
- 3:17मुझे उसकी खुशियां नहीं। उसकी जमीन चाहिए।
- 3:22ये कैसी बातें कर रहे हो? वो तुम्हारा
- 3:24छोटा भाई है।
- 3:26रिश्ते तब तक अच्छे लगते हैं जब तक उनके
- 3:29बीच दौलत नहीं आती।
- 3:31अगली सुबह रघुवीर को पास के कस्बे में बीज
- 3:35और खेती का सामान लेने जाना था। इस बार
- 3:38सीमा भी उनके साथ जाने वाली थी। आर्यन हम
- 3:42दोपहर तक लौट आएंगे। तुम रोहन का ध्यान
- 3:45रखना।
- 3:46आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए मां। मां मेरे
- 3:50लिए गुड़ वाली रेवड़ी लाना।
- 3:52जरूर लाऊंगी। [संगीत] बेटा घर का बड़ा
- 3:55होने का मतलब सिर्फ उम्र नहीं होता।
- 3:58जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। अपने छोटे
- 4:01भाई का साथ कभी मत छोड़ना।
- 4:04मैं वादा करता हूं पिताजी।
- 4:06रघुवीर मुस्कुराते हैं और दोनों बैलगाड़ी
- 4:10से कस्बे की ओर निकल जाते हैं।
- 4:12भैया चलो खेत में तितलियां पकड़ते हैं।
- 4:15पहले गायों को चारा डाल देते हैं। फिर
- 4:18खेलेंगे। दोनों भाई अपने काम में लग जाते
- 4:21हैं। उसी समय गांव का एक लड़का तेजी से
- 4:25उनकी तरफ दौड़ता हुआ आता है।
- 4:27आर्यन जल्दी चलो। मुख्य सड़क पर तुम्हारे
- 4:31माता-पिता की बैलगाड़ी का बहुत बड़ा हादसा
- 4:33हो गया है।
- 4:34क्या? तू सच बोल रहा है? मुखिया जी ने
- 4:38मुझे तुम्हें बुलाने भेजा है।
- 4:40आर्यन का चेहरा सफेद पड़ जाता है। वो
- 4:43तुरंत रोहन का हाथ पकड़ कर सड़क की ओर
- 4:46दौड़ पड़ता है। गांव के बाहर बहुत बड़ी
- 4:50भीड़ लगी हुई थी। मुखिया कुछ गांव वाले और
- 4:55वैद्य वहां खड़े थे। आर्यन भीड़ को चीरते
- 5:00हुए आगे बढ़ता है।
- 5:01हटिए। मुझे जाने दीजिए। पिताजी मां
- 5:06जैसे ही वो आगे पहुंचता है, उसके कदम वहीं
- 5:09रुक जाते हैं। दोनों की आंखों से आंसू
- 5:12बहने लगते हैं। रोहन कुछ समझ नहीं पाता।
- 5:15भैया मां क्यों नहीं उठ रही? पिताजी सो गए
- 5:19क्या?
- 5:20आर्यन उसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे
- 5:23थे। लेकिन वो अपने छोटे भाई के [संगीत]
- 5:26सामने टूटना नहीं चाहता था।
- 5:28बेटा हिम्मत रखो।
- 5:32[संगीत]
- 5:32तुम्हारे माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं
- 5:34रहे।
- 5:35नहीं यह झूठ है। मां उठो ना। मैं रेवड़ी
- 5:41भी नहीं मांगूंगा। बस एक बार बात करो।
- 5:45रोहन मां को हिलाकर जगाने की कोशिश करता
- 5:48है। यह देखकर वहां खड़े कई गांव वालों की
- 5:51आंखें भी नम हो जाती हैं। हाय राम। इतने
- 5:55छोटे बच्चों पर इतना बड़ा दुख। उसी समय
- 5:59भैरव धीरे-धीरे आगे आता है। उसके चेहरे पर
- 6:03दुख का दिखावा था। लेकिन अंदर ही अंदर
- 6:06उसके मन में कुछ और चल रहा था।
- 6:08बच्चों, अब से मैं ही तुम्हारा सहारा हूं।
- 6:12चलो, [संगीत] मेरे घर चलो। आर्यन आंसू
- 6:16पोंछते हुए अपने ताऊ की तरफ देखता है। उसे
- 6:19नहीं पता था कि जिस इंसान का हाथ उसने
- 6:21सहारे के लिए पकड़ा है, वही इंसान कुछ
- 6:24दिनों बाद उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी
- 6:26परीक्षा बनने वाला है। माता-पिता की अंतिम
- 6:29विदाई के बाद पूरा गांव चाहता था कि दोनों
- 6:33मासूम भाइयों को प्यार और सहारा मिले।
- 6:37इसलिए गांव के मुखिया ने आर्यन और रोहन को
- 6:41उनके ताऊ भैरव के साथ भेज दिया। दोनों भाई
- 6:45अपना छोटा सा संदूक, कुछ कपड़े और अपने
- 6:49माता-पिता की एक पुरानी तस्वीर लेकर ताऊ
- 6:52के घर पहुंचते हैं। आओ बेटा अब यही
- 6:55तुम्हारा घर है।
- 6:57ताई क्या हम यहीं रहेंगे?
- 7:00हां बेटा। जब तक मैं हूं तुम्हें किसी बात
- 7:04की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। शारदा सचमुच
- 7:07दोनों भाइयों से ममता करती थी। लेकिन भैरव
- 7:10की आंखों में वही पुराना लालच था। आर्यन
- 7:14अब तुम बड़े हो गए हो। कल से घर और खेत के
- 7:18काम में हाथ बटाना।
- 7:19जी ताऊ जी। मैं भी काम करूंगा। अरे नहीं
- 7:24तुम अभी छोटे हो। आराम करो।
- 7:27रोहन खुश हो जाता है। लेकिन आर्यन को ताऊ
- 7:32की मुस्कान कुछ अजीब लगती [संगीत] है। उस
- 7:35रात आर्यन की नींद अचानक खुल जाती है। उसे
- 7:40आंगन से धीमी आवाजें सुनाई देती हैं। वो
- 7:43चुपचाप दरवाजे के पास जाकर सुनने लगता है।
- 7:47अब दोनों मेरे घर में हैं। बस जमीन भी
- 7:51मेरे नाम हो जाए फिर कोई चिंता नहीं।
- 7:56लेकिन वो बच्चे हैं। उनके पिता ने सारी
- 7:59उम्र मेहनत करके वो खेत बनाए थे।
- 8:02भावुक मत बनो। 5 एकड़ जमीन की कीमत जानती
- 8:06हो। इतनी जमीन बेच दूं तो पूरी जिंदगी
- 8:09आराम से कट जाएगी। अगर गांव वालों को पता
- 8:12चल गया तो
- 8:13किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। मैं सब सोच
- 8:17चुका हूं।
- 8:18आर्यन ये सब सुनकर सन्न रह जाता है। वो
- 8:22धीरे से वापस कमरे में आता है।
- 8:24भैया तुम जाग रहे हो? हां सो जाओ।
- 8:29क्या हुआ? रोहन आज से हम दोनों को बहुत
- 8:33संभल कर रहना होगा।
- 8:35क्यों? अभी नहीं। समय आने पर सब बताऊंगा।
- 8:39रोहन अपने भाई का हाथ पकड़ कर सो जाता है।
- 8:44लेकिन आर्यन की आंखों से नींद पूरी तरह
- 8:48गायब हो चुकी थी। उसे पहली बार एहसास हो
- 8:51गया था कि उसके माता-पिता की सबसे बड़ी
- 8:55निशानी यानी उनकी जमीन अब खतरे में है।
- 9:00यहीं से दो मासूम भाइयों की असली परीक्षा
- 9:03शुरू होती है। जिस घर को उन्होंने अपना
- 9:06सहारा समझा वही घर धीरे-धीरे उनके लिए
- 9:10संघर्ष का मैदान बनने वाला था।
- 9:14अगली सुबह सब कुछ बिल्कुल सामान्य दिखाई
- 9:17दे रहा था। लेकिन भैरव के मन में एक नई
- 9:21चाल तैयार हो चुकी थी।
- 9:23आर्यन आज से खेत का सारा काम तुम
- 9:27संभालोगे। और हां पढ़ाई लिखाई में समय
- 9:30बर्बाद करने की जरूरत नहीं है। लेकिन
- 9:33ताऊजी पिताजी चाहते थे कि मैं और रोहन
- 9:36दोनों पढ़ें। अब मैं तुम्हारा अभिभावक
- 9:39हूं। जो मैं कहूंगा वही होगा। आर्यन चुप
- 9:43हो जाता है। वो समझ चुका था सीधे विरोध
- 9:46करने का समय अभी नहीं आया है।
- 9:49भैया आज स्कूल नहीं चलेंगे।
- 9:53चलेंगे लेकिन पहले ताऊजी का काम पूरा कर
- 9:56लेते हैं।
- 9:57भैरव दूर खड़ा दोनों भाइयों को देखकर
- 10:01मुस्कुराता है।
- 10:02जितना काम कराऊंगा उतना ही जल्दी ये दोनों
- 10:05टूट जाएंगे।
- 10:07उसी दोपहर भैरव गांव के लेखपाल और एक वकील
- 10:10से मिलने पहुंचता है।
- 10:12कहो भैरव जी कैसे आना हुआ? [संगीत]
- 10:15भाई की मौत के बाद उसकी जमीन का काम
- 10:18करवाना है। जमीन तो दोनों बच्चों के नाम
- 10:21है। जब तक वे बड़े नहीं हो जाते कोई उसे
- 10:24अपने नाम नहीं करा सकता। भैरव कुछ देर चुप
- 10:27रहता है। फिर धीरे से मेज पर रुपयों
- 10:30[संगीत] से भरा एक लिफाफा रख देता है।
- 10:33अगर कोई दूसरा रास्ता निकल आए तो
- 10:37लेखपाल और वकील एक दूसरे की तरफ देखने
- 10:40लगते हैं।
- 10:41काम आसान नहीं है। लेकिन अगर बच्चों के
- 10:43दस्तखत किसी कागज पर मिल जाए तो आगे की
- 10:46राह खुल सकती है। दस्तखत मैं करवा लूंगा।
- 10:50उन्हें पढ़ना भी कहां आता है।
- 10:52तीनों धीरे-धीरे मुस्कुराने लगते हैं।
- 10:55उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनकी यह
- 10:57बातचीत कार्यालय के बाहर खड़ा एक बूढ़ा
- 11:00आदमी सुन चुका था। वो था रामू काका।
- 11:04रघुवीर का सबसे भरोसेमंद दोस्त। [संगीत]
- 11:07भैरव तू इतना नीचे गिर जाएगा मैंने कभी
- 11:11नहीं सोचा था। अगर मैंने समय रहते कुछ
- 11:14नहीं किया तो रघुवीर की आखिरी निशानी भी
- 11:17खत्म हो जाएगी। रामू काका तेज कदमों से
- 11:20वहां से निकल जाते हैं। उन्हें अब सबसे
- 11:23पहले आर्यन और रोहन तक पहुंचना था। अगली
- 11:26सुबह भैरव ने अपने चेहरे पर बनावटी
- 11:29मुस्कान सजाई। आज वो अपनी सबसे बड़ी चाल
- 11:32चलने वाला था।
- 11:34आर्यन [संगीत] बेटा इधर आओ।
- 11:36जी ताऊ जी।
- 11:37सरकार की तरफ से अनाथ बच्चों को हर महीने
- 11:40पैसे मिलते हैं। बस इन कागजों पर तुम्हारे
- 11:43दस्तखत चाहिए। फिर तुम्हें और रोहन को कोई
- 11:46परेशानी नहीं होगी। आर्यन कागज हाथ में
- 11:49लेता है। वो धीरे-धीरे उन्हें देखने लगता
- 11:52है।
- 11:53अरे इतना क्या देख रहे हो? जहां मैंने
- 11:56निशान लगाया है, बस वहीं हस्ताक्षर कर दो।
- 11:59ताऊ जी, पहले मैं पूरा पढूंगा। तुम्हें
- 12:02पढ़ना आता ही कितना है? समय मत खराब करो।
- 12:06उसी समय आर्यन को अपने पिता की एक बात याद
- 12:09आती है।
- 12:10बेटा, कभी भी किसी कागज पर बिना पढ़े
- 12:14हस्ताक्षर मत करना। चाहे सामने अपना ही
- 12:17आदमी क्यों ना हो। माफ कीजिए ताऊ जी। जब
- 12:20तक मुझे सब समझ नहीं आएगा, मैं हस्ताक्षर
- 12:23नहीं करूंगा। मैं तुम्हारा बुरा चाहता हूं
- 12:26क्या? ऐसी बात नहीं है। लेकिन पिताजी की
- 12:29यही सीख थी। भैरव गुस्से में कागज छीन
- 12:32लेता है।
- 12:33लगता है यह लड़का मेरी सोच से ज्यादा
- 12:37समझदार है।
- 12:38उसी शाम घर के बाहर किसी की आवाज आती है।
- 12:42अरे आर्यन बेटा घर पे हो? दोनों भाई दौड़
- 12:47कर बाहर आते हैं।
- 12:48रामू काका आप इतने दिनों बाद आए। तुम
- 12:52दोनों को देखकर रघुवीर की याद आ गई। काका
- 12:57आप अंदर आइए।
- 12:58भैरव भी बाहर आ जाता है।
- 13:00अरे रामू कैसे आना हुआ? बस बच्चों का हाल
- 13:05पूछने आया था। मैं इनका पूरा ध्यान रख रहा
- 13:08हूं। तुम चिंता मत करो। रामू काका एक नजर
- 13:12आर्यन की ओर देखते हैं। आर्यन की आंखें सब
- 13:15कुछ कह देती हैं। रामू काका समझ जाते हैं
- 13:18कि सच्चाई कुछ और है। थोड़ी देर बाद जब
- 13:21भैरव घर के अंदर चला जाता है, रामू काका
- 13:24धीरे से आर्यन के पास आते हैं।
- 13:26बेटा [संगीत] अगर कभी कोई परेशानी हो तो
- 13:29बिना डरे मेरे पास आना। काका, क्या मैं
- 13:32आपसे अकेले में बात कर सकता हूं? रामू
- 13:36काका सिर हिलाते हैं। दोनों घर के पीछे
- 13:39चले जाते हैं।
- 13:40काका ताऊ जी हमें स्कूल नहीं जाने देते और
- 13:44कल वो मुझसे कुछ कागजों पर हस्ताक्षर
- 13:46करवाना चाहते थे। [संगीत]
- 13:48क्या तुमने हस्ताक्षर किए? नहीं।
- 13:51शाबाश बेटा। तुमने बहुत बड़ी गलती होने से
- 13:54रोक दी। अब से कोई भी कागज मेरे बिना मत
- 13:58छूना।
- 13:58आर्यन पहली बार महसूस करता है कि इस कठिन
- 14:02समय में वो अकेला नहीं है।
- 14:05लेकिन भैरव इतनी आसानी से हार मानने वालों
- 14:08में से नहीं था। उसने तय कर लिया था कि
- 14:11अगर प्यार से काम नहीं बना तो अब डर का
- 14:14इस्तेमाल करेगा। जिस दिन आर्यन ने कागजों
- 14:18पर हस्ताक्षर करने से मना किया उसी दिन से
- 14:22भैरव का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। सुबह
- 14:26सूरज निकलने से पहले।
- 14:27आर्यन खेत में पानी लगाना है, गौशाला भी
- 14:31साफ करनी है और लकड़ियां भी लानी है।
- 14:34[संगीत] जी ताऊ जी।
- 14:36आर्यन चुपचाप काम पर लग जाता है। रोहन भी
- 14:39भाई के पीछे-पीछे जाने लगता है।
- 14:42रोहन, तू रसोई में जाकर बर्तन साफ कर।
- 14:45लेकिन मुझे तो स्कूल जाना है। अब स्कूल की
- 14:51नहीं काम की जरूरत है।
- 14:53रोहन उदास होकर सिर झुका लेता है। कुछ देर
- 14:57बाद ताई शारदा दोनों के लिए खाना लेकर आती
- 15:00हैं। लो [संगीत] बेटा गरम रोटी खा लो। तभी
- 15:04भैरव वहां आ जाता है।
- 15:05इतनी रोटियां क्यों दी? काम करेंगे तभी
- 15:09खाना मिलेगा। ताऊ जी मुझे बहुत भूख लगी
- 15:12है। भूख लगी है तो काम और तेज करो।
- 15:15रोहन की आंखों में आंसू आ जाते हैं। आर्यन
- 15:18[संगीत] अपनी आधी रोटी तोड़कर चुपचाप रोहन
- 15:21के हाथ में रख देता है।
- 15:23खा लो। मुझे भूख नहीं है। लेकिन भैया आपने
- 15:27भी तो कुछ नहीं [संगीत] खाया।
- 15:29मुझे सच में भूख नहीं है। तुम खाओ। दूर
- 15:33खड़ी शारदा यह सब [संगीत] देखकर रो पड़ती
- 15:36है। उस रात दोनों भाई आंगन में बिछी
- 15:40पुरानी चारपाई पर [संगीत] लेटे थे। आसमान
- 15:42में चमकते तारों को देखते हुए रोहन धीरे
- 15:45से बोलता है।
- 15:47भैया क्या हम फिर कभी अपने पुराने घर
- 15:50जाएंगे?
- 15:51आर्यन कुछ पल चुप रहता है।
- 15:53जरूर जाएंगे।
- 15:55वो घर, वो खेत सब पिताजी की मेहनत है। हम
- 15:58उन्हें कभी नहीं छोड़ेंगे। अगर ताऊजी ने
- 16:01हमें निकाल दिया तो
- 16:03आर्यन रोहन का हाथ कसकर पकड़ लेता है।
- 16:06जब तक मैं जिंदा हूं तुम्हें कोई कहीं
- 16:09नहीं भेज सकता। यह मेरा वादा है।
- 16:12रोहन अपने भाई के कंधे पर सिर रखकर सो
- 16:15जाता है। लेकिन [संगीत] आर्यन की आंखों
- 16:18में नींद नहीं थी। वो मन ही मन सोच रहा
- 16:21था।
- 16:22पिताजी आपने मुझे जिम्मेदारी दी थी। मैं
- 16:25हर हाल में रोहन और आपकी जमीन दोनों की
- 16:28रक्षा करूंगा। उसी समय घर के अंदर भैरव एक
- 16:32नया फैसला ले चुका था।
- 16:34अब ये दोनों बच्चे मेरे रास्ते का कांटा
- 16:38बन गए हैं। अगर यह घर में रहे, तो जमीन
- 16:41कभी नहीं मिलेगी। मुझे ऐसी चाल चलनी होगी
- 16:45कि यह खुद ही गांव छोड़ दें।
- 16:47भैरव की बात दरवाजे के पास खड़ी शारदा सुन
- 16:50लेती हैं। उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई
- 16:53देता है।
- 16:54हे भगवान, इन मासूम बच्चों की रक्षा करना।
- 16:58भैरव अब सिर्फ जमीन नहीं चाहता था। वो
- 17:01चाहता था कि दोनों भाई उसकी जिंदगी से
- 17:04हमेशा के लिए दूर हो जाएं। लेकिन उसे नहीं
- 17:07पता था कि अगले ही दिन एक ऐसी घटना होने
- 17:10वाली है जो उसकी पूरी योजना को हिला देगी।
- 17:13अगले दिन भैरव किसी काम से पास के कस्बे
- 17:16चला गया। घर में सिर्फ शारदा, आर्यन और
- 17:19रोहन थे। आर्यन बेटा, घर के पीछे वाले
- 17:22पुराने कमरे की सफाई कर दो। कई सालों से
- 17:25किसी ने उसे खोला भी नहीं है।
- 17:27जी ताई। आर्यन और रोहन झाड़ू लेकर पुराने
- 17:32कमरे में पहुंचते हैं। कमरा धूल से भरा
- 17:35हुआ था। दीवारों पर मकड़ी के जाले, कोने
- 17:39में पुराने खेती के औजार और लकड़ी की एक
- 17:42बड़ी संदूकची रखी थी।
- 17:44भैया, यह संदूक तो मैंने पहले कभी नहीं
- 17:46देखा। चलो देखते हैं इसमें क्या है।
- 17:49आर्यन धीरे से संदूक खोलता है। अंदर कुछ
- 17:53पुराने कपड़े, पिताजी की डायरी, एक
- 17:56पारिवारिक फोटो और लाल कपड़े में लिपटा
- 17:59हुआ एक बंडल रखा था।
- 18:00ये लाल कपड़ा खोलो ना।
- 18:02आर्यन कपड़ा खोलता है। उसके अंदर जमीन के
- 18:06असली कागज और बैंक की रसीदें रखी थी। यह
- 18:09तो हमारे खेतों के असली दस्तावेज हैं।
- 18:12उसी समय डायरी के अंदर से एक मुड़ा हुआ
- 18:15लिफाफा नीचे गिरता है। उस पर लिखा था
- 18:19मेरे बेटों आर्यन और रोहन के लिए।
- 18:22दोनों भाई एक दूसरे की तरफ देखने लगते
- 18:24हैं। आर्यन कांपते हाथों से लिफाफा खोलता
- 18:28है।
- 18:28अगर तुम दोनों यह पत्र पढ़ रहे हो तो शायद
- 18:32मैं तुम्हारे साथ नहीं हूं। बेटा जिंदगी
- 18:35में मेहनत कभी मत छोड़ना। और सबसे जरूरी
- 18:38बात इस लाल कपड़े में रखे जमीन के असली
- 18:42कागज हमेशा संभाल कर रखना। अगर कभी कोई
- 18:45इन्हें छीनने की कोशिश करे तो सीधे गांव
- 18:48के मुखिया या अदालत का सहारा लेना।
- 18:51क्योंकि यही कागज तुम्हारे हक का सबसे
- 18:53बड़ा सबूत है। और याद रखना ईमानदारी की
- 18:57जीत देर से होती है लेकिन होती जरूर है।
- 19:00तुम्हारा पिता रघुवीर। पत्र पढ़ते-पढ़ते
- 19:03[संगीत]
- 19:04आर्यन की आंखें भर आती हैं। भैया पिताजी
- 19:08ने हमारे लिए सच में ये सब संभाल कर रखा
- 19:11था।
- 19:12हां और अब ये कागज किसी भी हालत में ताऊ
- 19:15जी के हाथ नहीं लगने चाहिए। उसी समय बाहर
- 19:18से बैलगाड़ी रुकने की आवाज आती है।
- 19:22आर्यन
- 19:23रोहन
- 19:25कहां हो तुम दोनों? तुम दोनों इस संदूक
- 19:28में क्या ढूंढ रहे थे? आर्यन कुछ बोलने ही
- 19:32वाला था कि रोहन डर के मारे आर्यन का हाथ
- 19:35कसकर पकड़ लेता है। भैरव की आंखों में शक
- 19:38साफ दिखाई दे रहा था और यहीं से कहानी
- 19:42अपने सबसे बड़े मोड़ की ओर बढ़ने वाली थी।
- 19:45ताऊ जी ताई ने सफाई करने को कहा था। बस
- 19:48वही कर रहे थे। सफाई
- 19:52या कुछ ढूंढ रहे थे। हमने कुछ नहीं लिया।
- 19:56सच कह रहे हैं। भैरव संदूक के अंदर हाथ
- 20:00डालकर हर सामान उलट-पुलट कर देखने लगता
- 20:03है। पुराने कपड़े, कुछ बर्तन, डायरी रखने
- 20:06की जगह सब कुछ बिखर जाता है। लेकिन उसे
- 20:09कुछ नहीं मिलता क्योंकि असली कागज आर्यन
- 20:13पहले ही अपनी कमीज के अंदर छिपा चुका था।
- 20:16अगर मुझे पता चला कि तुम दोनों मुझसे कुछ
- 20:18छिपा रहे हो तो अच्छा नहीं होगा।
- 20:25भैया मैं तो बहुत डर गया था। डरना नहीं।
- 20:29अब हमें पहले से भी ज्यादा सावधान रहना
- 20:32होगा।
- 20:32उसी शाम रामू काका गांव के मुखिया से
- 20:35मिलने पहुंचते हैं।
- 20:37मुखिया जी मुझे आपसे बहुत जरूरी बात करनी
- 20:40है। कहो रामू क्या बात है? मुझे [संगीत]
- 20:43पूरा यकीन है। भैरव रघुवीर के बच्चों की
- 20:46जमीन हड़पना चाहता है।
- 20:48मुखिया चौंक जाते हैं।
- 20:50तुम्हारे पास कोई सबूत है? अभी नहीं लेकिन
- 20:53मैंने उसे वकील और लेखपाल के साथ बातें
- 20:56करते सुना है। कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर है।
- 20:59सिर्फ सुनी सुनाई बातों पर मैं किसी पर
- 21:01आरोप नहीं लगा सकता। अगर सबूत मिले तो
- 21:04पंचायत तुरंत बैठेगी। मैं सबूत लेकर ही
- 21:07वापस आऊंगा।
- 21:08रामू काका बाहर निकलते हैं। उनके चेहरे पर
- 21:11चिंता भी थी और एक दृढ़ निश्चय भी।
- 21:15रघुवीर
- 21:16मैंने तुझसे वादा किया था तेरे बच्चों को
- 21:20कभी अकेला नहीं छोडूंगा।
- 21:22अब चाहे जो हो मैं उन्हें इंसाफ दिला कर
- 21:26रहूंगा।
- 21:27अब खेल बदल चुका था। एक तरफ भैरव अपनी
- 21:31अगली चाल चलने की तैयारी कर रहा था। दूसरी
- 21:34तरफ आर्यन के पास असली दस्तावेज थे और
- 21:37रामू काका सबूत जुटाने निकल चुके थे।
- 21:40लेकिन किस्मत अभी दोनों भाइयों की और भी
- 21:43कठिन परीक्षा लेने वाली थी। अगली सुबह
- 21:46भैरव ने पूरे गांव के सामने एक नया नाटक
- 21:49शुरू कर दिया। अरे भाइयों, अब यह दोनों
- 21:52बच्चे ही मेरा परिवार हैं। मैं इनकी
- 21:55परवरिश में कोई कमी नहीं छोडूंगा।
- 21:57गांव वाले उसकी बातें सुनकर उसकी तारीफ
- 22:00करने लगे।
- 22:01देखो आज भी ऐसे लोग हैं जो अपने भाई के
- 22:04बच्चों को अपना लेते हैं।
- 22:06भगवान भैरव को खुश रखे।
- 22:12आर्यन। इधर आओ। जी ताऊ जी। घर के मंदिर
- 22:17में रखे ₹5,000 नहीं मिल रहे। तुमने लिए
- 22:20हैं क्या?
- 22:21नहीं ताऊजी मैंने पैसे नहीं लिए। भैया कभी
- 22:25चोरी नहीं कर सकते। तो फिर पैसे गए कहां?
- 22:28घर में तुम दोनों के अलावा और कौन है?
- 22:31तभी भैरव जोर से चिल्लाने लगता है।
- 22:34बचाओ चोरी हो गई। मेरे ही घर में चोरी हो
- 22:38गई।
- 22:39कुछ ही मिनटों में आस-पड़ोस के लोग घर के
- 22:41बाहर इकट्ठा हो जाते हैं।
- 22:43क्या हुआ भैरव? मैंने इन दोनों बच्चों को
- 22:46सहारा दिया और इन्होंने मेरे ही घर में
- 22:49चोरी कर ली।
- 22:50यह सुनते ही रोहन डर कर आर्यन का हाथ पकड़
- 22:54लेता है।
- 22:55भैया सब लोग हमें ऐसे क्यों देख रहे हैं?
- 22:58डरो मत। सच हमारे साथ है।
- 23:01आर्यन, अगर तुमने पैसे नहीं लिए तो सच-सच
- 23:04बताओ।
- 23:05मुखिया जी, मैं झूठ नहीं बोलूंगा। हमने ₹1
- 23:10भी नहीं लिया। अगर नहीं लिया तो अपने कमरे
- 23:13की तलाशी [संगीत] दे दो। जरूर। लेकिन एक
- 23:16शर्त पर। कौन सी शर्त? अगर हमारे कमरे की
- 23:20तलाशी होगी तो ताऊ जी के कमरे की भी होगी।
- 23:23क्योंकि सच सबके सामने आना चाहिए।
- 23:26यह सुनते ही भैरव का चेहरा उतर जाता है।
- 23:29उसे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि एक छोटा सा
- 23:32लड़का इतनी हिम्मत से जवाब देगा।
- 23:34तुम मुझ पर शक कर रहे हो। नहीं। मैं सिर्फ
- 23:38बराबरी चाहता हूं। अगर हम निर्दोष हैं तो
- 23:41आपको भी कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। बात
- 23:44तो सही कह रहा है।
- 23:45हां, तलाशी दोनों कमरों की होनी चाहिए।
- 23:49भैरव पहली बार गांव वालों के सामने घिरता
- 23:51हुआ दिखाई देता है। [संगीत] लेकिन उसे अभी
- 23:54भी पूरा भरोसा था कि उसकी आखिरी चाल सब
- 23:58कुछ बदल देगी।
- 23:59किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। पहले
- 24:02बच्चों का कमरा देखा जाएगा फिर भैरव का।
- 24:05मुझे कोई आपत्ति नहीं है। देख लीजिए।
- 24:08सच्चाई खुद सामने आ जाएगी।
- 24:10दो गांव वाले आर्यन [संगीत] के कमरे की
- 24:13तलाशी लेने लगते हैं। पुराना संदूक, दो
- 24:16जोड़ी कपड़े, कुछ किताबें और माता-पिता की
- 24:19तस्वीर। बस यही सामान मिलता है।
- 24:23मुखिया जी, यहां तो कुछ भी नहीं मिला।
- 24:26अच्छी तरह देखो। जरूर कहीं छिपाया होगा।
- 24:29तलाशी दोबारा होती है लेकिन एक भी नहीं
- 24:33मिलता। अब सब लोग भैरव के कमरे की तरफ
- 24:37बढ़ते हैं।
- 24:38मेरे कमरे में देखने की क्या जरूरत है?
- 24:40मैंने कहा ना पैसे बच्चों ने ही लिए हैं।
- 24:43[संगीत] अभी कुछ देर पहले तुमने खुद
- 24:45बराबरी की बात मानी थी। अब पीछे मत हटो।
- 24:48हे भगवान आज सच सामने आ जाए। दो गांव वाले
- 24:53अलमारी खोलते हैं। उसमें कपड़े, कुछ नकदी
- 24:56और जमीन से जुड़े कई कागज रखे थे। यह तो
- 24:59खेतों के नक्शे हैं। हां, मैं खेती करता
- 25:03हूं, तो कागज तो होंगे ही।
- 25:05तभी अलमारी के नीचे एक छोटी कपड़े की थैली
- 25:08मिलती है।
- 25:09मुखिया जी, यह देखिए।
- 25:11थैली खोली जाती है। उसके अंदर वही ₹5,000
- 25:15रखे थे।
- 25:17भैया, हमने कहा था ना हमने चोरी नहीं की।
- 25:20सच।
- 25:22कभी ज्यादा देर तक छिप नहीं सकता। भैरव का
- 25:25चेहरा उतर जाता है। लेकिन वो तुरंत एक नया
- 25:29झूठ बोल देता है।
- 25:30ये ये पैसे मैंने ही रखे होंगे। मुझसे भूल
- 25:34हो गई।
- 25:35गांव वाले एक दूसरे का चेहरा देखने लगते
- 25:38हैं। अब पहली बार लोगों के मन में भैरव को
- 25:42लेकर शक पैदा होने लगा था। उसी शाम रामू
- 25:45काका पुराने लेखपाल के घर पहुंचते हैं।
- 25:48दरवाजे के बाहर उन्हें लेखपाल का नौकर
- 25:51मिलता है।
- 25:52बेटा लेखपाल जी घर पर हैं?
- 25:54नहीं काका वो शहर गए हैं। रामू काका लौटने
- 25:58ही वाले थे। तभी उनकी नजर कूड़ेदान में
- 26:01पड़े कुछ फटे हुए कागजों पर पड़ती है। वे
- 26:04उन्हें उठाकर देखने लगते हैं। [संगीत]
- 26:07यह तो जमीन की नकल वाले कागज हैं।
- 26:10कुछ हिस्से फटे थे। लेकिन एक कोने पर भैरव
- 26:13का नाम साफ लिखा हुआ था।
- 26:15अब मुझे यकीन हो गया भैरव सचमुच फर्जी
- 26:19कागज बनवा रहा है। लेकिन [संगीत] पंचायत
- 26:22में जीतने के लिए मुझे इससे भी बड़ा सबूत
- 26:25चाहिए।
- 26:26रामू काका वे कागज संभालकर अपने थैले में
- 26:29रख लेते हैं। [संगीत] उनकी आंखों में अब
- 26:32उम्मीद लौट आई थी। पंचायत के सामने
- 26:34बेइज्जत होने के बाद भैरव का गुस्सा
- 26:37सातवें आसमान पर था। आर्यन रोहन दोनों
- 26:41मेरे सामने आओ। [संगीत]
- 26:42दोनों भाई धीरे-धीरे आंगन में आकर खड़े हो
- 26:46जाते हैं।
- 26:47जी ताऊ जी। आज तेरी वजह से पूरे गांव के
- 26:50सामने मेरी बेइज्जती हुई। अब तुम दोनों इस
- 26:53घर में नहीं रहोगे। अपना सामान उठाओ और
- 26:57अभी के अभी निकल जाओ।
- 26:59रोहन घबरा जाता है।
- 27:00ताऊ जी हम कहां जाएंगे? हमारा तो कोई भी
- 27:04नहीं है। यह मेरी समस्या नहीं है। जहां
- 27:07जाना है जाओ। [संगीत]
- 27:08आर्यन अपने छोटे भाई के आगे खड़ा हो जाता
- 27:11है।
- 27:11ताऊ जी अगर हमने कोई गलती की है तो सजा
- 27:15मुझे दीजिए। रोहन का कोई दोष नहीं है।
- 27:18मुझे तुम दोनों से छुटकारा चाहिए।
- 27:22बस बहुत हो गया।
- 27:24तुम बीच में मत बोलो।
- 27:26मैं जरूर बोलूंगी। यह बच्चे अनाथ हैं। कोई
- 27:30बोझ नहीं। इनके माता-पिता की चिता की आग
- 27:34अभी ठंडी भी नहीं हुई और तुम इन्हें घर से
- 27:37निकाल रहे हो।
- 27:38अगर तुम्हें इन पर इतना ही तरस आता है तो
- 27:41तुम भी इनके साथ चली जाओ। शारदा की आंखों
- 27:44में आंसू आ जाते हैं। लेकिन इस बार वो
- 27:46पीछे नहीं हटती।
- 27:48अगर इंसानियत निभाना गलती है तो मुझे यह
- 27:51गलती मंजूर है।
- 27:53आर्यन पहली बार ताई को सम्मान भरी नजरों
- 27:56से देखता है। उसी समय बाहर से किसी की
- 27:59आवाज आती है।
- 28:01रुको। कोई भी बच्चा इस घर से बाहर नहीं
- 28:04जाएगा।
- 28:04सबकी नजर दरवाजे की तरफ जाती है। रामू
- 28:08काका मुखिया के साथ अंदर आते हैं।
- 28:11भैरव, जब तक पंचायत कोई फैसला नहीं
- 28:14सुनाती, तुम बच्चों को घर से नहीं निकाल
- 28:17सकते।
- 28:17यह मेरा घर है। मैं जिसे चाहूं रखूं, जिसे
- 28:21चाहूं निकाल दूं। घर तुम्हारा हो सकता है,
- 28:25लेकिन यह बच्चे इस गांव की जिम्मेदारी भी
- 28:28हैं। कानून भी इनके साथ है।
- 28:30भैरव गुस्से से मुट्ठी भी लेता है। रामू
- 28:34काका आर्यन के पास आते हैं।
- 28:36बेटा डरो मत। अब लड़ाई सिर्फ तुम्हारी
- 28:39नहीं रही। पूरा सच सामने आएगा। काका मेरे
- 28:44पास भी कुछ है।
- 28:45क्या? [संगीत] मुझे पिताजी की संदूकची में
- 28:48जमीन के असली कागज मिले हैं।
- 28:51क्या? अगर यह सच है तो अब भैरव बच नहीं
- 28:54सकता।
- 28:55आर्यन धीरे से सिर हिलाता है। दूर खड़ा
- 28:58भैरव उनकी बातें तो नहीं सुन पाता लेकिन
- 29:02उसे महसूस हो जाता है कि दोनों कुछ बड़ा
- 29:05छिपा रहे हैं।
- 29:06जरूर इनके पास कोई ऐसा राज है जो मेरी
- 29:10सारी मेहनत पर पानी फेर [संगीत] सकता है।
- 29:13मुझे हर हाल में वो पता करना होगा।
- 29:15अब बाजी पूरी तरह बदल चुकी थी। एक तरफ
- 29:19लालच दूसरी तरफ सच। और दोनों के बीच खड़े
- 29:23थे दो मासूम भाई जो सिर्फ अपने माता-पिता
- 29:26की आखिरी निशानी बचाना चाहते थे। उस रात
- 29:30पूरा घर सो चुका था। लेकिन भैरव की आंखों
- 29:34में नींद नहीं थी। उसके मन में सिर्फ एक
- 29:36ही सवाल घूम रहा था। आखिर आर्यन क्या छिपा
- 29:40रहा है? भैरव धीरे-धीरे अपने कमरे से बाहर
- 29:43निकलता है। चारों तरफ नजर घुमाता है और
- 29:46बिना आवाज किए आर्यन के कमरे की तरफ बढ़ता
- 29:49है। दरवाजा धीरे से खुलता है। आर्यन और
- 29:53रोहन दोनों गहरी नींद में थे। भैरव संदूक,
- 29:57कपड़ों की गठरी, किताबें, तकिया सब कुछ
- 30:00टटोलने लगता है।
- 30:02कहां छिपाया है? मुझे मिलकर ही रहेगा।
- 30:06तभी रोहन की आंख खुल जाती है।
- 30:08ताऊ जी।
- 30:10आप हमारे कमरे में क्या कर रहे हैं?
- 30:12भैरव एक पल के लिए घबरा जाता है। फिर
- 30:16तुरंत मुस्कुरा देता है।
- 30:18कुछ नहीं बेटा। मैं तो देखने आया था कि
- 30:20कहीं तुम्हें मच्छर तो नहीं काट रहे। सो
- 30:23जाओ।
- 30:24रोहन आधी नींद में फिर लेट जाता है। लेकिन
- 30:27आर्यन की भी आंख खुल चुकी थी। वो चुपचाप
- 30:30सब देख रहा था। पर कुछ नहीं बोला। भैरव
- 30:34कुछ भी हाथ ना लगने पर गुस्से में कमरे से
- 30:37बाहर चला जाता है।
- 30:38भैया ताऊ जी सच बोल रहे थे?
- 30:41नहीं। वो कुछ ढूंढ रहे थे। अब हमें देर
- 30:45नहीं करनी चाहिए।
- 30:47सुबह होते ही आर्यन रामू काका के घर
- 30:50पहुंचता है।
- 30:51अरे बेटा इतनी सुबह? सब ठीक तो है काका अब
- 30:56असली कागज मेरे पास सुरक्षित नहीं है। ताऊ
- 30:59जी उन्हें ढूंढ रहे हैं।
- 31:01आर्यन लाल कपड़े में लिपटा बंडल रामू काका
- 31:05के हाथ में दे देता है।
- 31:06इन्हें आप रख लीजिए। मुझे आप पर अपने पिता
- 31:10जितना भरोसा है।
- 31:11बेटा मैं अपनी जान दे दूंगा। लेकिन यह
- 31:15कागज किसी गलत हाथ में नहीं जाने दूंगा।
- 31:17तभी रामू काका बंडल खोलते हैं। अंदर जमीन
- 31:21के असली दस्तावेज, रघुवीर की चिट्ठी और एक
- 31:24पुरानी रजिस्ट्री की प्रति रखी थी।
- 31:27बस यही वो सबूत है जिसका हमें इंतजार था।
- 31:31अब पंचायत में सच छिप नहीं पाएगा।
- 31:34उसी समय बाहर से एक आदमी दौड़ता हुआ आता
- 31:37है।
- 31:38रामू काका जल्दी चलिए। गांव में पंचायत
- 31:41बुला ली गई है। भैरव ने सबको इकट्ठा कर
- 31:43लिया है।
- 31:44रामू काका आर्यन की तरफ देखते हैं।
- 31:47आज या तो सच जीतेगा या फिर झूठ हमेशा के
- 31:51लिए जीत जाएगा। चलो बेटा।
- 31:54आर्यन गहरी सांस लेता है और रोहन का हाथ
- 31:57पकड़ कर पंचायत की ओर चल पड़ता है। गांव
- 32:00के चौपाल में सैकड़ों लोग इकट्ठा हो चुके
- 32:03थे। किसी को नहीं पता था कि आज होने वाला
- 32:06फैसला सिर्फ दो भाइयों की किस्मत नहीं
- 32:08बल्कि पूरे गांव की सोच बदलने वाला था।
- 32:12कुछ ही देर में पूरा गांव पंचायत के चौपाल
- 32:14पर इकट्ठा हो गया। मुखिया अपनी जगह पर
- 32:17बैठे थे। सामने भैरव, आर्यन, रोहन, रामू
- 32:21काका और गांव के सभी लोग खड़े थे। आज
- 32:25फैसला सिर्फ जमीन का नहीं सच्चाई और लालच
- 32:28का होने वाला था। पंचायत शुरू की जाती है।
- 32:32सबसे पहले भैरव अपनी बात रखें।
- 32:35मुखिया जी, मैंने अपने भाई के बच्चों को
- 32:37अपने घर में रखा। उनकी परवरिश की। लेकिन
- 32:40अब यह दोनों मेरे खिलाफ झूठ बोल रहे हैं।
- 32:43यह कहते हैं कि मैं इनकी जमीन हड़पना
- 32:46चाहता हूं। अगर ऐसा होता तो मेरे पास यह
- 32:49कागज कैसे आते? यह देखिए जमीन के कागज।
- 32:52इनमें साफ लिखा है कि मेरे भाई ने अपनी
- 32:55मर्जी से जमीन मेरे नाम करने की तैयारी कर
- 32:57दी थी। गांव वाले आपस में बातें करने लगते
- 33:00हैं।
- 33:01अगर कागज असली हैं तो मामला तो अलग है।
- 33:04बेचारे बच्चों ने शायद गलत समझ लिया।
- 33:07रोहन डर कर आर्यन का हाथ पकड़ लेता है।
- 33:11भैया क्या हम हार जाएंगे? नहीं। आज पिताजी
- 33:15का सच बोलेगा।
- 33:17आर्यन तुम्हें कुछ कहना है?
- 33:20जी। लेकिन पहले मैं पंचायत से एक विनती
- 33:22करना चाहता हूं।
- 33:24बोलो बेटा। इन कागजों को गांव के पुराने
- 33:27लेखपाल से जांच करवाइए। जिन्होंने मेरे
- 33:29पिताजी के समय यह जमीन दर्ज की थी। इतने
- 33:32में भीड़ के पीछे से एक बुजुर्ग आवाज आती
- 33:35है।
- 33:36रुकिए इन कागजों को मैं पहचानता हूं। सभी
- 33:39लोग पीछे मुड़कर देखते हैं। गांव के
- 33:42रिटायर हो चुके पुराने लेखपाल आगे आते
- 33:44हैं। मुखिया जी मुझे यह कागज दिखाइए। वे
- 33:48कागज ध्यान से देखते हैं। कुछ पल बाद उनका
- 33:52चेहरा गंभीर हो जाता है। यह दस्तावेज असली
- 33:56नहीं है। आप झूठ बोल रहे हैं। नहीं, इन पर
- 34:00जो सरकारी मोहर लगी है, वह 3 साल पहले
- 34:03बदली जा चुकी थी। तुम्हारे कागज पर पुरानी
- 34:06मोहर की नकल बनाई गई है और यह हस्ताक्षर
- 34:10भी रघुवीर [संगीत]
- 34:10के नहीं है।
- 34:12मतलब यह कागज नकली है।
- 34:14मुखिया जी अगर अनुमति हो तो अब मैं असली
- 34:17कागज पेश करना चाहता हूं।
- 34:19रामू काका लाल कपड़े में लिपटा बंडल खोलते
- 34:22हैं। [संगीत] अंदर से असली रजिस्ट्री, मूल
- 34:25दस्तावेज और रघुवीर का लिखा हुआ पत्र
- 34:27निकालते हैं।
- 34:28यह कागज रघुवीर ने अपने बेटों के लिए
- 34:31संभाल कर रखे थे। और यह [संगीत] रही उनकी
- 34:34आखिरी चिट्ठी।
- 34:36मुखिया चिट्ठी अपने हाथ में लेते हैं।
- 34:38पूरा गांव सांस रोके सच सुनने का इंतजार
- 34:42कर रहा था। सालों से छिपा सच अब कुछ ही
- 34:45पलों में पूरे गांव के सामने आने वाला था
- 34:48और भैरव पहली बार खुद को पूरी तरह घिरा
- 34:52हुआ महसूस कर रहा था।
- 34:54मैं रघुवीर की आखिरी चिट्ठी सबके सामने
- 34:56पढ़ता हूं। अगर कभी मेरे बच्चों के हक पर
- 34:59कोई बुरी नजर डाले तो इस चिट्ठी और इन
- 35:03असली कागजों को पंचायत के सामने जरूर
- 35:05रखना। मेरी जमीन सिर्फ मेरे दोनों [संगीत]
- 35:08बेटों की है। जब तक वे बड़े ना हो जाए कोई
- 35:11भी इसे बेच या अपने नाम नहीं कर सकता।
- 35:15मुझे अपने गांव [संगीत] की पंचायत पर पूरा
- 35:17भरोसा है कि वो मेरे बच्चों के साथ न्याय
- 35:19करेगी। चिट्ठी पढ़ते-पढ़ते कई लोगों की
- 35:23आंखें नम हो जाती हैं। रघुवीर कितना नेक
- 35:26इंसान था। उसी समय भीड़ के पीछे से एक
- 35:30आदमी कांपते हुए आगे आता है। वो था वही
- 35:33लेखपाल जिसने भैरव के कहने पर [संगीत]
- 35:36नकली कागज तैयार किए थे।
- 35:38मुखिया जी, मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई है।
- 35:42भैरव ने मुझे पैसों का लालच दिया था।
- 35:45मैंने नकली कागज बनाने में उसकी मदद की।
- 35:48लेकिन आज इन मासूम बच्चों को देखकर मेरा
- 35:51जमीर मुझे धिक्कार रहा है। मैं अपना अपराध
- 35:54स्वीकार करता हूं। झूठ सब झूठ बोल रहे
- 35:58हैं। नहीं सच यही है। और अगर जरूरत
- 36:01[संगीत] पड़ी तो मैं अदालत में भी यही
- 36:03बयान दूंगा। भैरव के चेहरे का रंग उड़
- 36:06जाता है।
- 36:07भैरव अब तुम्हारे खिलाफ सबूत भी है, गवाह
- 36:11भी और तुम्हारा झूठ भी सबके सामने आ चुका
- 36:15है। पंचायत का फैसला सुनाया जाता है।
- 36:18रघुवीर की पूरी जमीन [संगीत]
- 36:20कानूनी रूप से आर्यन और रोहन की है। जब तक
- 36:24दोनों बड़े नहीं हो जाते, पंचायत और रामू
- 36:27काका मिलकर इसकी देखभाल करेंगे। बिल्कुल
- 36:30सही फैसला। मैं अपनी आखिरी सांस तक इन
- 36:34बच्चों का साथ नहीं छोडूंगा।
- 36:36बेटा मुझे माफ कर देना। मैं चाहकर भी
- 36:39तुम्हें पहले नहीं बचा पाई।
- 36:41ताई आपने हमेशा हमारा साथ दिया। हमें आपसे
- 36:45कोई शिकायत नहीं है।
- 36:47रोहन दौड़ कर शारदा से लिपट जाता है।
- 36:50अब आप भी हमारी मां जैसी हैं।
- 36:56कुछ महीने बाद दोनों भाई फिर से अपने
- 36:59खेतों में खड़े थे। इस बार उनके चेहरों पर
- 37:02डर नहीं आत्मविश्वास था।
- 37:05भैया देखो हमारे खेत फिर से हरे हो गए।
- 37:08हां क्योंकि मेहनत और सच कभी हारते नहीं।
- 37:12रामू काका मुस्कुराते हुए दोनों भाइयों के
- 37:15पास आते हैं। [संगीत]
- 37:16अब आगे क्या करना है बेटा? मैं खूब पढ़ाई
- 37:19करूंगा। बड़ा होकर वकील बनूंगा ताकि किसी
- 37:23भी अनाथ बच्चे के साथ कभी अन्याय ना हो।
- 37:26और मैं भैया का सबसे बड़ा साथी बनूंगा।
- 37:30तीनों [संगीत] हंस पड़ते हैं। दूर हवा में
- 37:33लहलहाती फसल मानो रघुवीर और सीमा की दुआएं
- 37:36अपने [संगीत] बच्चों तक पहुंचा रही थी।
- 37:39लालच इंसान को कुछ समय के लिए जीतता हुआ
- 37:42दिखा सकता है। लेकिन सच्चाई, हिम्मत और
- 37:46ईमानदारी की जीत अंत में निश्चित होती है।
- 37:49जो अपने हक के लिए सही रास्ते पर डटा रहता
- 37:52है। भगवान भी उसका साथ देते हैं। दोस्तों,
- 37:56अगर हमारी यह कहानी आपको जरा सी भी पसंद
- 37:58आई हो, तो कृपया हमारे चैनल को जरूर
- 38:01सब्सक्राइब करें। ऐसी ही दिल छू लेने वाली
- 38:03और मनोरंजक कहानियां देखने के लिए हमारे
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- 38:11करके हमें जरूर बताइए कि आपको यह कहानी
- 38:13कैसी लगी। धन्यवाद।
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