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दो अनाथ भाइयों की किस्मत | Do Anath Bhaiyo Ki Kismat | Hindi kahaniya | Parivarik Hindi Kahani — Transcript

by Twine Toons Plus · 5,589 words · 782 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:02एक छोटा सा गांव जहां हर कोई दो मासूम
  2. 0:05अनाथ भाइयों की किस्मत पर तरस खाता था।
  3. 0:08लेकिन किसी को नहीं पता था कि जिन दो
  4. 0:11बच्चों को लोग बेबस समझ रहे थे। उन्हीं
  5. 0:14दोनों की वजह से कुछ दिनों बाद पूरा गांव
  6. 0:17एक ऐसे सच का गवाह बनने वाला था जिसने
  7. 0:20लालच में अंधे एक इंसान की जिंदगी हमेशा
  8. 0:23के लिए बदल दी।
  9. 0:25भैया क्या सच में यह खेत अब हमारे नहीं
  10. 0:28रहे? जब तक पिताजी की आखिरी निशानी हमारे
  11. 0:31साथ है, कोई हमसे हमारी जमीन नहीं छीन
  12. 0:34सकता। मैं वादा करता हूं।
  13. 0:37उसी समय दूर खड़ा उनका ताऊ दोनों भाइयों
  14. 0:40की बातें सुनकर मुस्कुराता है।
  15. 0:43बच्चे हो तुम अभी दुनिया नहीं देखी। कुछ
  16. 0:46ही दिनों में यह जमीन भी मेरी होगी और तुम
  17. 0:49दोनों सड़क पर। कुछ महीने पहले इसी गांव
  18. 0:52रामपुर में दो भाई अपने माता-पिता के
  19. 0:55[संगीत] साथ एक छोटी सी लेकिन खुशहाल
  20. 0:58जिंदगी जी रहे थे। बड़ा भाई आर्यन समझदार
  21. 1:02और मेहनती था। जबकि छोटा भाई रोहन पूरे
  22. 1:05गांव की जान था।
  23. 1:07भैया जल्दी आओ। देखो मैंने आम के पेड़ से
  24. 1:11सबसे बड़ा आम तोड़ा है।
  25. 1:13अरे पगले अगर पिताजी ने देख लिया ना तो
  26. 1:17[संगीत] पहले हमें खेत में काम करवाएंगे
  27. 1:19फिर आम खाने देंगी।
  28. 1:21दोनों भाई हंसने लगते हैं। उसी समय उनके
  29. 1:25पिता रघुवीर खेत से लौटते हैं।
  30. 1:28अरे शैतानों इतनी ऊर्जा [संगीत] खेत में
  31. 1:31लगा दिया करो। फसल भी तुम दोनों की तरह
  32. 1:33मुस्कुराने लगेगी। पिताजी मैं बड़ा होकर
  33. 1:37आपकी तरह [संगीत] किसान बनूंगा। किसान
  34. 1:40बनना गर्व की बात है बेटा लेकिन पहले
  35. 1:43अच्छा इंसान बनना बाकी सब अपने आप मिल
  36. 1:46जाएगा।
  37. 1:46मां सीमा पानी का लोटा लेकर आती हैं। बस
  38. 1:50अब बातें बंद। सब लोग हाथ धोकर खाना खाने
  39. 1:54आओ। चारों एक साथ आंगन में बैठकर खाना
  40. 1:58खाते हैं।
  41. 1:59मां हम हमेशा ऐसे ही साथ रहेंगे ना। अगर
  42. 2:03परिवार एक दूसरे का साथ कभी ना [संगीत]
  43. 2:05छोड़े तो दुनिया की कोई ताकत उसे नहीं
  44. 2:08तोड़ सकती। आर्यन मुस्कुराता है। लेकिन घर
  45. 2:12के बाहर खड़ा एक आदमी यह सब चुपचाप देख
  46. 2:16रहा होता है। वो था रघुवीर का बड़ा भाई
  47. 2:20भैरव। भैरव धीरे-धीरे घर की ओर बढ़ता है।
  48. 2:25अरे भैया [गला साफ़ करने की आवाज़]
  49. 2:26आइए आइए। बहुत दिनों बाद आए हैं। बस ऐसे
  50. 2:30ही सोचा अब छोटे भाई से मिल लूं।
  51. 2:33सीमा सम्मान से उन्हें खाना परोसती हैं।
  52. 2:37भैया गरम-गरम रोटी लीजिए।
  53. 2:40हां रख दो।
  54. 2:41भैरव की नजर बार-बार घर के सामने फैले
  55. 2:44हरेभरे खेतों पर जाती है।
  56. 2:46रघुवीर इस साल तो अच्छी कमाई हुई होगी।
  57. 2:50भगवान की कृपा है और मेहनत का फल है। जो
  58. 2:54मिला उसी में खुश हैं। हां।
  59. 2:58खुश तो दिख ही रहे हो।
  60. 2:59भैरव वहां से चला जाता है। उसी रात अपने
  61. 3:04घर में। क्या हुआ? इतनी चुप क्यों हो?
  62. 3:08देखा तुमने रघुवीर के पास कितनी जमीन है
  63. 3:11और लोग उसकी कितनी इज्जत करते हैं।
  64. 3:14दूसरे की खुशियां देखकर जलने से कुछ नहीं
  65. 3:16मिलेगा।
  66. 3:17मुझे उसकी खुशियां नहीं। उसकी जमीन चाहिए।
  67. 3:22ये कैसी बातें कर रहे हो? वो तुम्हारा
  68. 3:24छोटा भाई है।
  69. 3:26रिश्ते तब तक अच्छे लगते हैं जब तक उनके
  70. 3:29बीच दौलत नहीं आती।
  71. 3:31अगली सुबह रघुवीर को पास के कस्बे में बीज
  72. 3:35और खेती का सामान लेने जाना था। इस बार
  73. 3:38सीमा भी उनके साथ जाने वाली थी। आर्यन हम
  74. 3:42दोपहर तक लौट आएंगे। तुम रोहन का ध्यान
  75. 3:45रखना।
  76. 3:46आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए मां। मां मेरे
  77. 3:50लिए गुड़ वाली रेवड़ी लाना।
  78. 3:52जरूर लाऊंगी। [संगीत] बेटा घर का बड़ा
  79. 3:55होने का मतलब सिर्फ उम्र नहीं होता।
  80. 3:58जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। अपने छोटे
  81. 4:01भाई का साथ कभी मत छोड़ना।
  82. 4:04मैं वादा करता हूं पिताजी।
  83. 4:06रघुवीर मुस्कुराते हैं और दोनों बैलगाड़ी
  84. 4:10से कस्बे की ओर निकल जाते हैं।
  85. 4:12भैया चलो खेत में तितलियां पकड़ते हैं।
  86. 4:15पहले गायों को चारा डाल देते हैं। फिर
  87. 4:18खेलेंगे। दोनों भाई अपने काम में लग जाते
  88. 4:21हैं। उसी समय गांव का एक लड़का तेजी से
  89. 4:25उनकी तरफ दौड़ता हुआ आता है।
  90. 4:27आर्यन जल्दी चलो। मुख्य सड़क पर तुम्हारे
  91. 4:31माता-पिता की बैलगाड़ी का बहुत बड़ा हादसा
  92. 4:33हो गया है।
  93. 4:34क्या? तू सच बोल रहा है? मुखिया जी ने
  94. 4:38मुझे तुम्हें बुलाने भेजा है।
  95. 4:40आर्यन का चेहरा सफेद पड़ जाता है। वो
  96. 4:43तुरंत रोहन का हाथ पकड़ कर सड़क की ओर
  97. 4:46दौड़ पड़ता है। गांव के बाहर बहुत बड़ी
  98. 4:50भीड़ लगी हुई थी। मुखिया कुछ गांव वाले और
  99. 4:55वैद्य वहां खड़े थे। आर्यन भीड़ को चीरते
  100. 5:00हुए आगे बढ़ता है।
  101. 5:01हटिए। मुझे जाने दीजिए। पिताजी मां
  102. 5:06जैसे ही वो आगे पहुंचता है, उसके कदम वहीं
  103. 5:09रुक जाते हैं। दोनों की आंखों से आंसू
  104. 5:12बहने लगते हैं। रोहन कुछ समझ नहीं पाता।
  105. 5:15भैया मां क्यों नहीं उठ रही? पिताजी सो गए
  106. 5:19क्या?
  107. 5:20आर्यन उसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे
  108. 5:23थे। लेकिन वो अपने छोटे भाई के [संगीत]
  109. 5:26सामने टूटना नहीं चाहता था।
  110. 5:28बेटा हिम्मत रखो।
  111. 5:32[संगीत]
  112. 5:32तुम्हारे माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं
  113. 5:34रहे।
  114. 5:35नहीं यह झूठ है। मां उठो ना। मैं रेवड़ी
  115. 5:41भी नहीं मांगूंगा। बस एक बार बात करो।
  116. 5:45रोहन मां को हिलाकर जगाने की कोशिश करता
  117. 5:48है। यह देखकर वहां खड़े कई गांव वालों की
  118. 5:51आंखें भी नम हो जाती हैं। हाय राम। इतने
  119. 5:55छोटे बच्चों पर इतना बड़ा दुख। उसी समय
  120. 5:59भैरव धीरे-धीरे आगे आता है। उसके चेहरे पर
  121. 6:03दुख का दिखावा था। लेकिन अंदर ही अंदर
  122. 6:06उसके मन में कुछ और चल रहा था।
  123. 6:08बच्चों, अब से मैं ही तुम्हारा सहारा हूं।
  124. 6:12चलो, [संगीत] मेरे घर चलो। आर्यन आंसू
  125. 6:16पोंछते हुए अपने ताऊ की तरफ देखता है। उसे
  126. 6:19नहीं पता था कि जिस इंसान का हाथ उसने
  127. 6:21सहारे के लिए पकड़ा है, वही इंसान कुछ
  128. 6:24दिनों बाद उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी
  129. 6:26परीक्षा बनने वाला है। माता-पिता की अंतिम
  130. 6:29विदाई के बाद पूरा गांव चाहता था कि दोनों
  131. 6:33मासूम भाइयों को प्यार और सहारा मिले।
  132. 6:37इसलिए गांव के मुखिया ने आर्यन और रोहन को
  133. 6:41उनके ताऊ भैरव के साथ भेज दिया। दोनों भाई
  134. 6:45अपना छोटा सा संदूक, कुछ कपड़े और अपने
  135. 6:49माता-पिता की एक पुरानी तस्वीर लेकर ताऊ
  136. 6:52के घर पहुंचते हैं। आओ बेटा अब यही
  137. 6:55तुम्हारा घर है।
  138. 6:57ताई क्या हम यहीं रहेंगे?
  139. 7:00हां बेटा। जब तक मैं हूं तुम्हें किसी बात
  140. 7:04की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। शारदा सचमुच
  141. 7:07दोनों भाइयों से ममता करती थी। लेकिन भैरव
  142. 7:10की आंखों में वही पुराना लालच था। आर्यन
  143. 7:14अब तुम बड़े हो गए हो। कल से घर और खेत के
  144. 7:18काम में हाथ बटाना।
  145. 7:19जी ताऊ जी। मैं भी काम करूंगा। अरे नहीं
  146. 7:24तुम अभी छोटे हो। आराम करो।
  147. 7:27रोहन खुश हो जाता है। लेकिन आर्यन को ताऊ
  148. 7:32की मुस्कान कुछ अजीब लगती [संगीत] है। उस
  149. 7:35रात आर्यन की नींद अचानक खुल जाती है। उसे
  150. 7:40आंगन से धीमी आवाजें सुनाई देती हैं। वो
  151. 7:43चुपचाप दरवाजे के पास जाकर सुनने लगता है।
  152. 7:47अब दोनों मेरे घर में हैं। बस जमीन भी
  153. 7:51मेरे नाम हो जाए फिर कोई चिंता नहीं।
  154. 7:56लेकिन वो बच्चे हैं। उनके पिता ने सारी
  155. 7:59उम्र मेहनत करके वो खेत बनाए थे।
  156. 8:02भावुक मत बनो। 5 एकड़ जमीन की कीमत जानती
  157. 8:06हो। इतनी जमीन बेच दूं तो पूरी जिंदगी
  158. 8:09आराम से कट जाएगी। अगर गांव वालों को पता
  159. 8:12चल गया तो
  160. 8:13किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। मैं सब सोच
  161. 8:17चुका हूं।
  162. 8:18आर्यन ये सब सुनकर सन्न रह जाता है। वो
  163. 8:22धीरे से वापस कमरे में आता है।
  164. 8:24भैया तुम जाग रहे हो? हां सो जाओ।
  165. 8:29क्या हुआ? रोहन आज से हम दोनों को बहुत
  166. 8:33संभल कर रहना होगा।
  167. 8:35क्यों? अभी नहीं। समय आने पर सब बताऊंगा।
  168. 8:39रोहन अपने भाई का हाथ पकड़ कर सो जाता है।
  169. 8:44लेकिन आर्यन की आंखों से नींद पूरी तरह
  170. 8:48गायब हो चुकी थी। उसे पहली बार एहसास हो
  171. 8:51गया था कि उसके माता-पिता की सबसे बड़ी
  172. 8:55निशानी यानी उनकी जमीन अब खतरे में है।
  173. 9:00यहीं से दो मासूम भाइयों की असली परीक्षा
  174. 9:03शुरू होती है। जिस घर को उन्होंने अपना
  175. 9:06सहारा समझा वही घर धीरे-धीरे उनके लिए
  176. 9:10संघर्ष का मैदान बनने वाला था।
  177. 9:14अगली सुबह सब कुछ बिल्कुल सामान्य दिखाई
  178. 9:17दे रहा था। लेकिन भैरव के मन में एक नई
  179. 9:21चाल तैयार हो चुकी थी।
  180. 9:23आर्यन आज से खेत का सारा काम तुम
  181. 9:27संभालोगे। और हां पढ़ाई लिखाई में समय
  182. 9:30बर्बाद करने की जरूरत नहीं है। लेकिन
  183. 9:33ताऊजी पिताजी चाहते थे कि मैं और रोहन
  184. 9:36दोनों पढ़ें। अब मैं तुम्हारा अभिभावक
  185. 9:39हूं। जो मैं कहूंगा वही होगा। आर्यन चुप
  186. 9:43हो जाता है। वो समझ चुका था सीधे विरोध
  187. 9:46करने का समय अभी नहीं आया है।
  188. 9:49भैया आज स्कूल नहीं चलेंगे।
  189. 9:53चलेंगे लेकिन पहले ताऊजी का काम पूरा कर
  190. 9:56लेते हैं।
  191. 9:57भैरव दूर खड़ा दोनों भाइयों को देखकर
  192. 10:01मुस्कुराता है।
  193. 10:02जितना काम कराऊंगा उतना ही जल्दी ये दोनों
  194. 10:05टूट जाएंगे।
  195. 10:07उसी दोपहर भैरव गांव के लेखपाल और एक वकील
  196. 10:10से मिलने पहुंचता है।
  197. 10:12कहो भैरव जी कैसे आना हुआ? [संगीत]
  198. 10:15भाई की मौत के बाद उसकी जमीन का काम
  199. 10:18करवाना है। जमीन तो दोनों बच्चों के नाम
  200. 10:21है। जब तक वे बड़े नहीं हो जाते कोई उसे
  201. 10:24अपने नाम नहीं करा सकता। भैरव कुछ देर चुप
  202. 10:27रहता है। फिर धीरे से मेज पर रुपयों
  203. 10:30[संगीत] से भरा एक लिफाफा रख देता है।
  204. 10:33अगर कोई दूसरा रास्ता निकल आए तो
  205. 10:37लेखपाल और वकील एक दूसरे की तरफ देखने
  206. 10:40लगते हैं।
  207. 10:41काम आसान नहीं है। लेकिन अगर बच्चों के
  208. 10:43दस्तखत किसी कागज पर मिल जाए तो आगे की
  209. 10:46राह खुल सकती है। दस्तखत मैं करवा लूंगा।
  210. 10:50उन्हें पढ़ना भी कहां आता है।
  211. 10:52तीनों धीरे-धीरे मुस्कुराने लगते हैं।
  212. 10:55उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनकी यह
  213. 10:57बातचीत कार्यालय के बाहर खड़ा एक बूढ़ा
  214. 11:00आदमी सुन चुका था। वो था रामू काका।
  215. 11:04रघुवीर का सबसे भरोसेमंद दोस्त। [संगीत]
  216. 11:07भैरव तू इतना नीचे गिर जाएगा मैंने कभी
  217. 11:11नहीं सोचा था। अगर मैंने समय रहते कुछ
  218. 11:14नहीं किया तो रघुवीर की आखिरी निशानी भी
  219. 11:17खत्म हो जाएगी। रामू काका तेज कदमों से
  220. 11:20वहां से निकल जाते हैं। उन्हें अब सबसे
  221. 11:23पहले आर्यन और रोहन तक पहुंचना था। अगली
  222. 11:26सुबह भैरव ने अपने चेहरे पर बनावटी
  223. 11:29मुस्कान सजाई। आज वो अपनी सबसे बड़ी चाल
  224. 11:32चलने वाला था।
  225. 11:34आर्यन [संगीत] बेटा इधर आओ।
  226. 11:36जी ताऊ जी।
  227. 11:37सरकार की तरफ से अनाथ बच्चों को हर महीने
  228. 11:40पैसे मिलते हैं। बस इन कागजों पर तुम्हारे
  229. 11:43दस्तखत चाहिए। फिर तुम्हें और रोहन को कोई
  230. 11:46परेशानी नहीं होगी। आर्यन कागज हाथ में
  231. 11:49लेता है। वो धीरे-धीरे उन्हें देखने लगता
  232. 11:52है।
  233. 11:53अरे इतना क्या देख रहे हो? जहां मैंने
  234. 11:56निशान लगाया है, बस वहीं हस्ताक्षर कर दो।
  235. 11:59ताऊ जी, पहले मैं पूरा पढूंगा। तुम्हें
  236. 12:02पढ़ना आता ही कितना है? समय मत खराब करो।
  237. 12:06उसी समय आर्यन को अपने पिता की एक बात याद
  238. 12:09आती है।
  239. 12:10बेटा, कभी भी किसी कागज पर बिना पढ़े
  240. 12:14हस्ताक्षर मत करना। चाहे सामने अपना ही
  241. 12:17आदमी क्यों ना हो। माफ कीजिए ताऊ जी। जब
  242. 12:20तक मुझे सब समझ नहीं आएगा, मैं हस्ताक्षर
  243. 12:23नहीं करूंगा। मैं तुम्हारा बुरा चाहता हूं
  244. 12:26क्या? ऐसी बात नहीं है। लेकिन पिताजी की
  245. 12:29यही सीख थी। भैरव गुस्से में कागज छीन
  246. 12:32लेता है।
  247. 12:33लगता है यह लड़का मेरी सोच से ज्यादा
  248. 12:37समझदार है।
  249. 12:38उसी शाम घर के बाहर किसी की आवाज आती है।
  250. 12:42अरे आर्यन बेटा घर पे हो? दोनों भाई दौड़
  251. 12:47कर बाहर आते हैं।
  252. 12:48रामू काका आप इतने दिनों बाद आए। तुम
  253. 12:52दोनों को देखकर रघुवीर की याद आ गई। काका
  254. 12:57आप अंदर आइए।
  255. 12:58भैरव भी बाहर आ जाता है।
  256. 13:00अरे रामू कैसे आना हुआ? बस बच्चों का हाल
  257. 13:05पूछने आया था। मैं इनका पूरा ध्यान रख रहा
  258. 13:08हूं। तुम चिंता मत करो। रामू काका एक नजर
  259. 13:12आर्यन की ओर देखते हैं। आर्यन की आंखें सब
  260. 13:15कुछ कह देती हैं। रामू काका समझ जाते हैं
  261. 13:18कि सच्चाई कुछ और है। थोड़ी देर बाद जब
  262. 13:21भैरव घर के अंदर चला जाता है, रामू काका
  263. 13:24धीरे से आर्यन के पास आते हैं।
  264. 13:26बेटा [संगीत] अगर कभी कोई परेशानी हो तो
  265. 13:29बिना डरे मेरे पास आना। काका, क्या मैं
  266. 13:32आपसे अकेले में बात कर सकता हूं? रामू
  267. 13:36काका सिर हिलाते हैं। दोनों घर के पीछे
  268. 13:39चले जाते हैं।
  269. 13:40काका ताऊ जी हमें स्कूल नहीं जाने देते और
  270. 13:44कल वो मुझसे कुछ कागजों पर हस्ताक्षर
  271. 13:46करवाना चाहते थे। [संगीत]
  272. 13:48क्या तुमने हस्ताक्षर किए? नहीं।
  273. 13:51शाबाश बेटा। तुमने बहुत बड़ी गलती होने से
  274. 13:54रोक दी। अब से कोई भी कागज मेरे बिना मत
  275. 13:58छूना।
  276. 13:58आर्यन पहली बार महसूस करता है कि इस कठिन
  277. 14:02समय में वो अकेला नहीं है।
  278. 14:05लेकिन भैरव इतनी आसानी से हार मानने वालों
  279. 14:08में से नहीं था। उसने तय कर लिया था कि
  280. 14:11अगर प्यार से काम नहीं बना तो अब डर का
  281. 14:14इस्तेमाल करेगा। जिस दिन आर्यन ने कागजों
  282. 14:18पर हस्ताक्षर करने से मना किया उसी दिन से
  283. 14:22भैरव का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। सुबह
  284. 14:26सूरज निकलने से पहले।
  285. 14:27आर्यन खेत में पानी लगाना है, गौशाला भी
  286. 14:31साफ करनी है और लकड़ियां भी लानी है।
  287. 14:34[संगीत] जी ताऊ जी।
  288. 14:36आर्यन चुपचाप काम पर लग जाता है। रोहन भी
  289. 14:39भाई के पीछे-पीछे जाने लगता है।
  290. 14:42रोहन, तू रसोई में जाकर बर्तन साफ कर।
  291. 14:45लेकिन मुझे तो स्कूल जाना है। अब स्कूल की
  292. 14:51नहीं काम की जरूरत है।
  293. 14:53रोहन उदास होकर सिर झुका लेता है। कुछ देर
  294. 14:57बाद ताई शारदा दोनों के लिए खाना लेकर आती
  295. 15:00हैं। लो [संगीत] बेटा गरम रोटी खा लो। तभी
  296. 15:04भैरव वहां आ जाता है।
  297. 15:05इतनी रोटियां क्यों दी? काम करेंगे तभी
  298. 15:09खाना मिलेगा। ताऊ जी मुझे बहुत भूख लगी
  299. 15:12है। भूख लगी है तो काम और तेज करो।
  300. 15:15रोहन की आंखों में आंसू आ जाते हैं। आर्यन
  301. 15:18[संगीत] अपनी आधी रोटी तोड़कर चुपचाप रोहन
  302. 15:21के हाथ में रख देता है।
  303. 15:23खा लो। मुझे भूख नहीं है। लेकिन भैया आपने
  304. 15:27भी तो कुछ नहीं [संगीत] खाया।
  305. 15:29मुझे सच में भूख नहीं है। तुम खाओ। दूर
  306. 15:33खड़ी शारदा यह सब [संगीत] देखकर रो पड़ती
  307. 15:36है। उस रात दोनों भाई आंगन में बिछी
  308. 15:40पुरानी चारपाई पर [संगीत] लेटे थे। आसमान
  309. 15:42में चमकते तारों को देखते हुए रोहन धीरे
  310. 15:45से बोलता है।
  311. 15:47भैया क्या हम फिर कभी अपने पुराने घर
  312. 15:50जाएंगे?
  313. 15:51आर्यन कुछ पल चुप रहता है।
  314. 15:53जरूर जाएंगे।
  315. 15:55वो घर, वो खेत सब पिताजी की मेहनत है। हम
  316. 15:58उन्हें कभी नहीं छोड़ेंगे। अगर ताऊजी ने
  317. 16:01हमें निकाल दिया तो
  318. 16:03आर्यन रोहन का हाथ कसकर पकड़ लेता है।
  319. 16:06जब तक मैं जिंदा हूं तुम्हें कोई कहीं
  320. 16:09नहीं भेज सकता। यह मेरा वादा है।
  321. 16:12रोहन अपने भाई के कंधे पर सिर रखकर सो
  322. 16:15जाता है। लेकिन [संगीत] आर्यन की आंखों
  323. 16:18में नींद नहीं थी। वो मन ही मन सोच रहा
  324. 16:21था।
  325. 16:22पिताजी आपने मुझे जिम्मेदारी दी थी। मैं
  326. 16:25हर हाल में रोहन और आपकी जमीन दोनों की
  327. 16:28रक्षा करूंगा। उसी समय घर के अंदर भैरव एक
  328. 16:32नया फैसला ले चुका था।
  329. 16:34अब ये दोनों बच्चे मेरे रास्ते का कांटा
  330. 16:38बन गए हैं। अगर यह घर में रहे, तो जमीन
  331. 16:41कभी नहीं मिलेगी। मुझे ऐसी चाल चलनी होगी
  332. 16:45कि यह खुद ही गांव छोड़ दें।
  333. 16:47भैरव की बात दरवाजे के पास खड़ी शारदा सुन
  334. 16:50लेती हैं। उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई
  335. 16:53देता है।
  336. 16:54हे भगवान, इन मासूम बच्चों की रक्षा करना।
  337. 16:58भैरव अब सिर्फ जमीन नहीं चाहता था। वो
  338. 17:01चाहता था कि दोनों भाई उसकी जिंदगी से
  339. 17:04हमेशा के लिए दूर हो जाएं। लेकिन उसे नहीं
  340. 17:07पता था कि अगले ही दिन एक ऐसी घटना होने
  341. 17:10वाली है जो उसकी पूरी योजना को हिला देगी।
  342. 17:13अगले दिन भैरव किसी काम से पास के कस्बे
  343. 17:16चला गया। घर में सिर्फ शारदा, आर्यन और
  344. 17:19रोहन थे। आर्यन बेटा, घर के पीछे वाले
  345. 17:22पुराने कमरे की सफाई कर दो। कई सालों से
  346. 17:25किसी ने उसे खोला भी नहीं है।
  347. 17:27जी ताई। आर्यन और रोहन झाड़ू लेकर पुराने
  348. 17:32कमरे में पहुंचते हैं। कमरा धूल से भरा
  349. 17:35हुआ था। दीवारों पर मकड़ी के जाले, कोने
  350. 17:39में पुराने खेती के औजार और लकड़ी की एक
  351. 17:42बड़ी संदूकची रखी थी।
  352. 17:44भैया, यह संदूक तो मैंने पहले कभी नहीं
  353. 17:46देखा। चलो देखते हैं इसमें क्या है।
  354. 17:49आर्यन धीरे से संदूक खोलता है। अंदर कुछ
  355. 17:53पुराने कपड़े, पिताजी की डायरी, एक
  356. 17:56पारिवारिक फोटो और लाल कपड़े में लिपटा
  357. 17:59हुआ एक बंडल रखा था।
  358. 18:00ये लाल कपड़ा खोलो ना।
  359. 18:02आर्यन कपड़ा खोलता है। उसके अंदर जमीन के
  360. 18:06असली कागज और बैंक की रसीदें रखी थी। यह
  361. 18:09तो हमारे खेतों के असली दस्तावेज हैं।
  362. 18:12उसी समय डायरी के अंदर से एक मुड़ा हुआ
  363. 18:15लिफाफा नीचे गिरता है। उस पर लिखा था
  364. 18:19मेरे बेटों आर्यन और रोहन के लिए।
  365. 18:22दोनों भाई एक दूसरे की तरफ देखने लगते
  366. 18:24हैं। आर्यन कांपते हाथों से लिफाफा खोलता
  367. 18:28है।
  368. 18:28अगर तुम दोनों यह पत्र पढ़ रहे हो तो शायद
  369. 18:32मैं तुम्हारे साथ नहीं हूं। बेटा जिंदगी
  370. 18:35में मेहनत कभी मत छोड़ना। और सबसे जरूरी
  371. 18:38बात इस लाल कपड़े में रखे जमीन के असली
  372. 18:42कागज हमेशा संभाल कर रखना। अगर कभी कोई
  373. 18:45इन्हें छीनने की कोशिश करे तो सीधे गांव
  374. 18:48के मुखिया या अदालत का सहारा लेना।
  375. 18:51क्योंकि यही कागज तुम्हारे हक का सबसे
  376. 18:53बड़ा सबूत है। और याद रखना ईमानदारी की
  377. 18:57जीत देर से होती है लेकिन होती जरूर है।
  378. 19:00तुम्हारा पिता रघुवीर। पत्र पढ़ते-पढ़ते
  379. 19:03[संगीत]
  380. 19:04आर्यन की आंखें भर आती हैं। भैया पिताजी
  381. 19:08ने हमारे लिए सच में ये सब संभाल कर रखा
  382. 19:11था।
  383. 19:12हां और अब ये कागज किसी भी हालत में ताऊ
  384. 19:15जी के हाथ नहीं लगने चाहिए। उसी समय बाहर
  385. 19:18से बैलगाड़ी रुकने की आवाज आती है।
  386. 19:22आर्यन
  387. 19:23रोहन
  388. 19:25कहां हो तुम दोनों? तुम दोनों इस संदूक
  389. 19:28में क्या ढूंढ रहे थे? आर्यन कुछ बोलने ही
  390. 19:32वाला था कि रोहन डर के मारे आर्यन का हाथ
  391. 19:35कसकर पकड़ लेता है। भैरव की आंखों में शक
  392. 19:38साफ दिखाई दे रहा था और यहीं से कहानी
  393. 19:42अपने सबसे बड़े मोड़ की ओर बढ़ने वाली थी।
  394. 19:45ताऊ जी ताई ने सफाई करने को कहा था। बस
  395. 19:48वही कर रहे थे। सफाई
  396. 19:52या कुछ ढूंढ रहे थे। हमने कुछ नहीं लिया।
  397. 19:56सच कह रहे हैं। भैरव संदूक के अंदर हाथ
  398. 20:00डालकर हर सामान उलट-पुलट कर देखने लगता
  399. 20:03है। पुराने कपड़े, कुछ बर्तन, डायरी रखने
  400. 20:06की जगह सब कुछ बिखर जाता है। लेकिन उसे
  401. 20:09कुछ नहीं मिलता क्योंकि असली कागज आर्यन
  402. 20:13पहले ही अपनी कमीज के अंदर छिपा चुका था।
  403. 20:16अगर मुझे पता चला कि तुम दोनों मुझसे कुछ
  404. 20:18छिपा रहे हो तो अच्छा नहीं होगा।
  405. 20:25भैया मैं तो बहुत डर गया था। डरना नहीं।
  406. 20:29अब हमें पहले से भी ज्यादा सावधान रहना
  407. 20:32होगा।
  408. 20:32उसी शाम रामू काका गांव के मुखिया से
  409. 20:35मिलने पहुंचते हैं।
  410. 20:37मुखिया जी मुझे आपसे बहुत जरूरी बात करनी
  411. 20:40है। कहो रामू क्या बात है? मुझे [संगीत]
  412. 20:43पूरा यकीन है। भैरव रघुवीर के बच्चों की
  413. 20:46जमीन हड़पना चाहता है।
  414. 20:48मुखिया चौंक जाते हैं।
  415. 20:50तुम्हारे पास कोई सबूत है? अभी नहीं लेकिन
  416. 20:53मैंने उसे वकील और लेखपाल के साथ बातें
  417. 20:56करते सुना है। कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर है।
  418. 20:59सिर्फ सुनी सुनाई बातों पर मैं किसी पर
  419. 21:01आरोप नहीं लगा सकता। अगर सबूत मिले तो
  420. 21:04पंचायत तुरंत बैठेगी। मैं सबूत लेकर ही
  421. 21:07वापस आऊंगा।
  422. 21:08रामू काका बाहर निकलते हैं। उनके चेहरे पर
  423. 21:11चिंता भी थी और एक दृढ़ निश्चय भी।
  424. 21:15रघुवीर
  425. 21:16मैंने तुझसे वादा किया था तेरे बच्चों को
  426. 21:20कभी अकेला नहीं छोडूंगा।
  427. 21:22अब चाहे जो हो मैं उन्हें इंसाफ दिला कर
  428. 21:26रहूंगा।
  429. 21:27अब खेल बदल चुका था। एक तरफ भैरव अपनी
  430. 21:31अगली चाल चलने की तैयारी कर रहा था। दूसरी
  431. 21:34तरफ आर्यन के पास असली दस्तावेज थे और
  432. 21:37रामू काका सबूत जुटाने निकल चुके थे।
  433. 21:40लेकिन किस्मत अभी दोनों भाइयों की और भी
  434. 21:43कठिन परीक्षा लेने वाली थी। अगली सुबह
  435. 21:46भैरव ने पूरे गांव के सामने एक नया नाटक
  436. 21:49शुरू कर दिया। अरे भाइयों, अब यह दोनों
  437. 21:52बच्चे ही मेरा परिवार हैं। मैं इनकी
  438. 21:55परवरिश में कोई कमी नहीं छोडूंगा।
  439. 21:57गांव वाले उसकी बातें सुनकर उसकी तारीफ
  440. 22:00करने लगे।
  441. 22:01देखो आज भी ऐसे लोग हैं जो अपने भाई के
  442. 22:04बच्चों को अपना लेते हैं।
  443. 22:06भगवान भैरव को खुश रखे।
  444. 22:12आर्यन। इधर आओ। जी ताऊ जी। घर के मंदिर
  445. 22:17में रखे ₹5,000 नहीं मिल रहे। तुमने लिए
  446. 22:20हैं क्या?
  447. 22:21नहीं ताऊजी मैंने पैसे नहीं लिए। भैया कभी
  448. 22:25चोरी नहीं कर सकते। तो फिर पैसे गए कहां?
  449. 22:28घर में तुम दोनों के अलावा और कौन है?
  450. 22:31तभी भैरव जोर से चिल्लाने लगता है।
  451. 22:34बचाओ चोरी हो गई। मेरे ही घर में चोरी हो
  452. 22:38गई।
  453. 22:39कुछ ही मिनटों में आस-पड़ोस के लोग घर के
  454. 22:41बाहर इकट्ठा हो जाते हैं।
  455. 22:43क्या हुआ भैरव? मैंने इन दोनों बच्चों को
  456. 22:46सहारा दिया और इन्होंने मेरे ही घर में
  457. 22:49चोरी कर ली।
  458. 22:50यह सुनते ही रोहन डर कर आर्यन का हाथ पकड़
  459. 22:54लेता है।
  460. 22:55भैया सब लोग हमें ऐसे क्यों देख रहे हैं?
  461. 22:58डरो मत। सच हमारे साथ है।
  462. 23:01आर्यन, अगर तुमने पैसे नहीं लिए तो सच-सच
  463. 23:04बताओ।
  464. 23:05मुखिया जी, मैं झूठ नहीं बोलूंगा। हमने ₹1
  465. 23:10भी नहीं लिया। अगर नहीं लिया तो अपने कमरे
  466. 23:13की तलाशी [संगीत] दे दो। जरूर। लेकिन एक
  467. 23:16शर्त पर। कौन सी शर्त? अगर हमारे कमरे की
  468. 23:20तलाशी होगी तो ताऊ जी के कमरे की भी होगी।
  469. 23:23क्योंकि सच सबके सामने आना चाहिए।
  470. 23:26यह सुनते ही भैरव का चेहरा उतर जाता है।
  471. 23:29उसे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि एक छोटा सा
  472. 23:32लड़का इतनी हिम्मत से जवाब देगा।
  473. 23:34तुम मुझ पर शक कर रहे हो। नहीं। मैं सिर्फ
  474. 23:38बराबरी चाहता हूं। अगर हम निर्दोष हैं तो
  475. 23:41आपको भी कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। बात
  476. 23:44तो सही कह रहा है।
  477. 23:45हां, तलाशी दोनों कमरों की होनी चाहिए।
  478. 23:49भैरव पहली बार गांव वालों के सामने घिरता
  479. 23:51हुआ दिखाई देता है। [संगीत] लेकिन उसे अभी
  480. 23:54भी पूरा भरोसा था कि उसकी आखिरी चाल सब
  481. 23:58कुछ बदल देगी।
  482. 23:59किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। पहले
  483. 24:02बच्चों का कमरा देखा जाएगा फिर भैरव का।
  484. 24:05मुझे कोई आपत्ति नहीं है। देख लीजिए।
  485. 24:08सच्चाई खुद सामने आ जाएगी।
  486. 24:10दो गांव वाले आर्यन [संगीत] के कमरे की
  487. 24:13तलाशी लेने लगते हैं। पुराना संदूक, दो
  488. 24:16जोड़ी कपड़े, कुछ किताबें और माता-पिता की
  489. 24:19तस्वीर। बस यही सामान मिलता है।
  490. 24:23मुखिया जी, यहां तो कुछ भी नहीं मिला।
  491. 24:26अच्छी तरह देखो। जरूर कहीं छिपाया होगा।
  492. 24:29तलाशी दोबारा होती है लेकिन एक भी नहीं
  493. 24:33मिलता। अब सब लोग भैरव के कमरे की तरफ
  494. 24:37बढ़ते हैं।
  495. 24:38मेरे कमरे में देखने की क्या जरूरत है?
  496. 24:40मैंने कहा ना पैसे बच्चों ने ही लिए हैं।
  497. 24:43[संगीत] अभी कुछ देर पहले तुमने खुद
  498. 24:45बराबरी की बात मानी थी। अब पीछे मत हटो।
  499. 24:48हे भगवान आज सच सामने आ जाए। दो गांव वाले
  500. 24:53अलमारी खोलते हैं। उसमें कपड़े, कुछ नकदी
  501. 24:56और जमीन से जुड़े कई कागज रखे थे। यह तो
  502. 24:59खेतों के नक्शे हैं। हां, मैं खेती करता
  503. 25:03हूं, तो कागज तो होंगे ही।
  504. 25:05तभी अलमारी के नीचे एक छोटी कपड़े की थैली
  505. 25:08मिलती है।
  506. 25:09मुखिया जी, यह देखिए।
  507. 25:11थैली खोली जाती है। उसके अंदर वही ₹5,000
  508. 25:15रखे थे।
  509. 25:17भैया, हमने कहा था ना हमने चोरी नहीं की।
  510. 25:20सच।
  511. 25:22कभी ज्यादा देर तक छिप नहीं सकता। भैरव का
  512. 25:25चेहरा उतर जाता है। लेकिन वो तुरंत एक नया
  513. 25:29झूठ बोल देता है।
  514. 25:30ये ये पैसे मैंने ही रखे होंगे। मुझसे भूल
  515. 25:34हो गई।
  516. 25:35गांव वाले एक दूसरे का चेहरा देखने लगते
  517. 25:38हैं। अब पहली बार लोगों के मन में भैरव को
  518. 25:42लेकर शक पैदा होने लगा था। उसी शाम रामू
  519. 25:45काका पुराने लेखपाल के घर पहुंचते हैं।
  520. 25:48दरवाजे के बाहर उन्हें लेखपाल का नौकर
  521. 25:51मिलता है।
  522. 25:52बेटा लेखपाल जी घर पर हैं?
  523. 25:54नहीं काका वो शहर गए हैं। रामू काका लौटने
  524. 25:58ही वाले थे। तभी उनकी नजर कूड़ेदान में
  525. 26:01पड़े कुछ फटे हुए कागजों पर पड़ती है। वे
  526. 26:04उन्हें उठाकर देखने लगते हैं। [संगीत]
  527. 26:07यह तो जमीन की नकल वाले कागज हैं।
  528. 26:10कुछ हिस्से फटे थे। लेकिन एक कोने पर भैरव
  529. 26:13का नाम साफ लिखा हुआ था।
  530. 26:15अब मुझे यकीन हो गया भैरव सचमुच फर्जी
  531. 26:19कागज बनवा रहा है। लेकिन [संगीत] पंचायत
  532. 26:22में जीतने के लिए मुझे इससे भी बड़ा सबूत
  533. 26:25चाहिए।
  534. 26:26रामू काका वे कागज संभालकर अपने थैले में
  535. 26:29रख लेते हैं। [संगीत] उनकी आंखों में अब
  536. 26:32उम्मीद लौट आई थी। पंचायत के सामने
  537. 26:34बेइज्जत होने के बाद भैरव का गुस्सा
  538. 26:37सातवें आसमान पर था। आर्यन रोहन दोनों
  539. 26:41मेरे सामने आओ। [संगीत]
  540. 26:42दोनों भाई धीरे-धीरे आंगन में आकर खड़े हो
  541. 26:46जाते हैं।
  542. 26:47जी ताऊ जी। आज तेरी वजह से पूरे गांव के
  543. 26:50सामने मेरी बेइज्जती हुई। अब तुम दोनों इस
  544. 26:53घर में नहीं रहोगे। अपना सामान उठाओ और
  545. 26:57अभी के अभी निकल जाओ।
  546. 26:59रोहन घबरा जाता है।
  547. 27:00ताऊ जी हम कहां जाएंगे? हमारा तो कोई भी
  548. 27:04नहीं है। यह मेरी समस्या नहीं है। जहां
  549. 27:07जाना है जाओ। [संगीत]
  550. 27:08आर्यन अपने छोटे भाई के आगे खड़ा हो जाता
  551. 27:11है।
  552. 27:11ताऊ जी अगर हमने कोई गलती की है तो सजा
  553. 27:15मुझे दीजिए। रोहन का कोई दोष नहीं है।
  554. 27:18मुझे तुम दोनों से छुटकारा चाहिए।
  555. 27:22बस बहुत हो गया।
  556. 27:24तुम बीच में मत बोलो।
  557. 27:26मैं जरूर बोलूंगी। यह बच्चे अनाथ हैं। कोई
  558. 27:30बोझ नहीं। इनके माता-पिता की चिता की आग
  559. 27:34अभी ठंडी भी नहीं हुई और तुम इन्हें घर से
  560. 27:37निकाल रहे हो।
  561. 27:38अगर तुम्हें इन पर इतना ही तरस आता है तो
  562. 27:41तुम भी इनके साथ चली जाओ। शारदा की आंखों
  563. 27:44में आंसू आ जाते हैं। लेकिन इस बार वो
  564. 27:46पीछे नहीं हटती।
  565. 27:48अगर इंसानियत निभाना गलती है तो मुझे यह
  566. 27:51गलती मंजूर है।
  567. 27:53आर्यन पहली बार ताई को सम्मान भरी नजरों
  568. 27:56से देखता है। उसी समय बाहर से किसी की
  569. 27:59आवाज आती है।
  570. 28:01रुको। कोई भी बच्चा इस घर से बाहर नहीं
  571. 28:04जाएगा।
  572. 28:04सबकी नजर दरवाजे की तरफ जाती है। रामू
  573. 28:08काका मुखिया के साथ अंदर आते हैं।
  574. 28:11भैरव, जब तक पंचायत कोई फैसला नहीं
  575. 28:14सुनाती, तुम बच्चों को घर से नहीं निकाल
  576. 28:17सकते।
  577. 28:17यह मेरा घर है। मैं जिसे चाहूं रखूं, जिसे
  578. 28:21चाहूं निकाल दूं। घर तुम्हारा हो सकता है,
  579. 28:25लेकिन यह बच्चे इस गांव की जिम्मेदारी भी
  580. 28:28हैं। कानून भी इनके साथ है।
  581. 28:30भैरव गुस्से से मुट्ठी भी लेता है। रामू
  582. 28:34काका आर्यन के पास आते हैं।
  583. 28:36बेटा डरो मत। अब लड़ाई सिर्फ तुम्हारी
  584. 28:39नहीं रही। पूरा सच सामने आएगा। काका मेरे
  585. 28:44पास भी कुछ है।
  586. 28:45क्या? [संगीत] मुझे पिताजी की संदूकची में
  587. 28:48जमीन के असली कागज मिले हैं।
  588. 28:51क्या? अगर यह सच है तो अब भैरव बच नहीं
  589. 28:54सकता।
  590. 28:55आर्यन धीरे से सिर हिलाता है। दूर खड़ा
  591. 28:58भैरव उनकी बातें तो नहीं सुन पाता लेकिन
  592. 29:02उसे महसूस हो जाता है कि दोनों कुछ बड़ा
  593. 29:05छिपा रहे हैं।
  594. 29:06जरूर इनके पास कोई ऐसा राज है जो मेरी
  595. 29:10सारी मेहनत पर पानी फेर [संगीत] सकता है।
  596. 29:13मुझे हर हाल में वो पता करना होगा।
  597. 29:15अब बाजी पूरी तरह बदल चुकी थी। एक तरफ
  598. 29:19लालच दूसरी तरफ सच। और दोनों के बीच खड़े
  599. 29:23थे दो मासूम भाई जो सिर्फ अपने माता-पिता
  600. 29:26की आखिरी निशानी बचाना चाहते थे। उस रात
  601. 29:30पूरा घर सो चुका था। लेकिन भैरव की आंखों
  602. 29:34में नींद नहीं थी। उसके मन में सिर्फ एक
  603. 29:36ही सवाल घूम रहा था। आखिर आर्यन क्या छिपा
  604. 29:40रहा है? भैरव धीरे-धीरे अपने कमरे से बाहर
  605. 29:43निकलता है। चारों तरफ नजर घुमाता है और
  606. 29:46बिना आवाज किए आर्यन के कमरे की तरफ बढ़ता
  607. 29:49है। दरवाजा धीरे से खुलता है। आर्यन और
  608. 29:53रोहन दोनों गहरी नींद में थे। भैरव संदूक,
  609. 29:57कपड़ों की गठरी, किताबें, तकिया सब कुछ
  610. 30:00टटोलने लगता है।
  611. 30:02कहां छिपाया है? मुझे मिलकर ही रहेगा।
  612. 30:06तभी रोहन की आंख खुल जाती है।
  613. 30:08ताऊ जी।
  614. 30:10आप हमारे कमरे में क्या कर रहे हैं?
  615. 30:12भैरव एक पल के लिए घबरा जाता है। फिर
  616. 30:16तुरंत मुस्कुरा देता है।
  617. 30:18कुछ नहीं बेटा। मैं तो देखने आया था कि
  618. 30:20कहीं तुम्हें मच्छर तो नहीं काट रहे। सो
  619. 30:23जाओ।
  620. 30:24रोहन आधी नींद में फिर लेट जाता है। लेकिन
  621. 30:27आर्यन की भी आंख खुल चुकी थी। वो चुपचाप
  622. 30:30सब देख रहा था। पर कुछ नहीं बोला। भैरव
  623. 30:34कुछ भी हाथ ना लगने पर गुस्से में कमरे से
  624. 30:37बाहर चला जाता है।
  625. 30:38भैया ताऊ जी सच बोल रहे थे?
  626. 30:41नहीं। वो कुछ ढूंढ रहे थे। अब हमें देर
  627. 30:45नहीं करनी चाहिए।
  628. 30:47सुबह होते ही आर्यन रामू काका के घर
  629. 30:50पहुंचता है।
  630. 30:51अरे बेटा इतनी सुबह? सब ठीक तो है काका अब
  631. 30:56असली कागज मेरे पास सुरक्षित नहीं है। ताऊ
  632. 30:59जी उन्हें ढूंढ रहे हैं।
  633. 31:01आर्यन लाल कपड़े में लिपटा बंडल रामू काका
  634. 31:05के हाथ में दे देता है।
  635. 31:06इन्हें आप रख लीजिए। मुझे आप पर अपने पिता
  636. 31:10जितना भरोसा है।
  637. 31:11बेटा मैं अपनी जान दे दूंगा। लेकिन यह
  638. 31:15कागज किसी गलत हाथ में नहीं जाने दूंगा।
  639. 31:17तभी रामू काका बंडल खोलते हैं। अंदर जमीन
  640. 31:21के असली दस्तावेज, रघुवीर की चिट्ठी और एक
  641. 31:24पुरानी रजिस्ट्री की प्रति रखी थी।
  642. 31:27बस यही वो सबूत है जिसका हमें इंतजार था।
  643. 31:31अब पंचायत में सच छिप नहीं पाएगा।
  644. 31:34उसी समय बाहर से एक आदमी दौड़ता हुआ आता
  645. 31:37है।
  646. 31:38रामू काका जल्दी चलिए। गांव में पंचायत
  647. 31:41बुला ली गई है। भैरव ने सबको इकट्ठा कर
  648. 31:43लिया है।
  649. 31:44रामू काका आर्यन की तरफ देखते हैं।
  650. 31:47आज या तो सच जीतेगा या फिर झूठ हमेशा के
  651. 31:51लिए जीत जाएगा। चलो बेटा।
  652. 31:54आर्यन गहरी सांस लेता है और रोहन का हाथ
  653. 31:57पकड़ कर पंचायत की ओर चल पड़ता है। गांव
  654. 32:00के चौपाल में सैकड़ों लोग इकट्ठा हो चुके
  655. 32:03थे। किसी को नहीं पता था कि आज होने वाला
  656. 32:06फैसला सिर्फ दो भाइयों की किस्मत नहीं
  657. 32:08बल्कि पूरे गांव की सोच बदलने वाला था।
  658. 32:12कुछ ही देर में पूरा गांव पंचायत के चौपाल
  659. 32:14पर इकट्ठा हो गया। मुखिया अपनी जगह पर
  660. 32:17बैठे थे। सामने भैरव, आर्यन, रोहन, रामू
  661. 32:21काका और गांव के सभी लोग खड़े थे। आज
  662. 32:25फैसला सिर्फ जमीन का नहीं सच्चाई और लालच
  663. 32:28का होने वाला था। पंचायत शुरू की जाती है।
  664. 32:32सबसे पहले भैरव अपनी बात रखें।
  665. 32:35मुखिया जी, मैंने अपने भाई के बच्चों को
  666. 32:37अपने घर में रखा। उनकी परवरिश की। लेकिन
  667. 32:40अब यह दोनों मेरे खिलाफ झूठ बोल रहे हैं।
  668. 32:43यह कहते हैं कि मैं इनकी जमीन हड़पना
  669. 32:46चाहता हूं। अगर ऐसा होता तो मेरे पास यह
  670. 32:49कागज कैसे आते? यह देखिए जमीन के कागज।
  671. 32:52इनमें साफ लिखा है कि मेरे भाई ने अपनी
  672. 32:55मर्जी से जमीन मेरे नाम करने की तैयारी कर
  673. 32:57दी थी। गांव वाले आपस में बातें करने लगते
  674. 33:00हैं।
  675. 33:01अगर कागज असली हैं तो मामला तो अलग है।
  676. 33:04बेचारे बच्चों ने शायद गलत समझ लिया।
  677. 33:07रोहन डर कर आर्यन का हाथ पकड़ लेता है।
  678. 33:11भैया क्या हम हार जाएंगे? नहीं। आज पिताजी
  679. 33:15का सच बोलेगा।
  680. 33:17आर्यन तुम्हें कुछ कहना है?
  681. 33:20जी। लेकिन पहले मैं पंचायत से एक विनती
  682. 33:22करना चाहता हूं।
  683. 33:24बोलो बेटा। इन कागजों को गांव के पुराने
  684. 33:27लेखपाल से जांच करवाइए। जिन्होंने मेरे
  685. 33:29पिताजी के समय यह जमीन दर्ज की थी। इतने
  686. 33:32में भीड़ के पीछे से एक बुजुर्ग आवाज आती
  687. 33:35है।
  688. 33:36रुकिए इन कागजों को मैं पहचानता हूं। सभी
  689. 33:39लोग पीछे मुड़कर देखते हैं। गांव के
  690. 33:42रिटायर हो चुके पुराने लेखपाल आगे आते
  691. 33:44हैं। मुखिया जी मुझे यह कागज दिखाइए। वे
  692. 33:48कागज ध्यान से देखते हैं। कुछ पल बाद उनका
  693. 33:52चेहरा गंभीर हो जाता है। यह दस्तावेज असली
  694. 33:56नहीं है। आप झूठ बोल रहे हैं। नहीं, इन पर
  695. 34:00जो सरकारी मोहर लगी है, वह 3 साल पहले
  696. 34:03बदली जा चुकी थी। तुम्हारे कागज पर पुरानी
  697. 34:06मोहर की नकल बनाई गई है और यह हस्ताक्षर
  698. 34:10भी रघुवीर [संगीत]
  699. 34:10के नहीं है।
  700. 34:12मतलब यह कागज नकली है।
  701. 34:14मुखिया जी अगर अनुमति हो तो अब मैं असली
  702. 34:17कागज पेश करना चाहता हूं।
  703. 34:19रामू काका लाल कपड़े में लिपटा बंडल खोलते
  704. 34:22हैं। [संगीत] अंदर से असली रजिस्ट्री, मूल
  705. 34:25दस्तावेज और रघुवीर का लिखा हुआ पत्र
  706. 34:27निकालते हैं।
  707. 34:28यह कागज रघुवीर ने अपने बेटों के लिए
  708. 34:31संभाल कर रखे थे। और यह [संगीत] रही उनकी
  709. 34:34आखिरी चिट्ठी।
  710. 34:36मुखिया चिट्ठी अपने हाथ में लेते हैं।
  711. 34:38पूरा गांव सांस रोके सच सुनने का इंतजार
  712. 34:42कर रहा था। सालों से छिपा सच अब कुछ ही
  713. 34:45पलों में पूरे गांव के सामने आने वाला था
  714. 34:48और भैरव पहली बार खुद को पूरी तरह घिरा
  715. 34:52हुआ महसूस कर रहा था।
  716. 34:54मैं रघुवीर की आखिरी चिट्ठी सबके सामने
  717. 34:56पढ़ता हूं। अगर कभी मेरे बच्चों के हक पर
  718. 34:59कोई बुरी नजर डाले तो इस चिट्ठी और इन
  719. 35:03असली कागजों को पंचायत के सामने जरूर
  720. 35:05रखना। मेरी जमीन सिर्फ मेरे दोनों [संगीत]
  721. 35:08बेटों की है। जब तक वे बड़े ना हो जाए कोई
  722. 35:11भी इसे बेच या अपने नाम नहीं कर सकता।
  723. 35:15मुझे अपने गांव [संगीत] की पंचायत पर पूरा
  724. 35:17भरोसा है कि वो मेरे बच्चों के साथ न्याय
  725. 35:19करेगी। चिट्ठी पढ़ते-पढ़ते कई लोगों की
  726. 35:23आंखें नम हो जाती हैं। रघुवीर कितना नेक
  727. 35:26इंसान था। उसी समय भीड़ के पीछे से एक
  728. 35:30आदमी कांपते हुए आगे आता है। वो था वही
  729. 35:33लेखपाल जिसने भैरव के कहने पर [संगीत]
  730. 35:36नकली कागज तैयार किए थे।
  731. 35:38मुखिया जी, मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई है।
  732. 35:42भैरव ने मुझे पैसों का लालच दिया था।
  733. 35:45मैंने नकली कागज बनाने में उसकी मदद की।
  734. 35:48लेकिन आज इन मासूम बच्चों को देखकर मेरा
  735. 35:51जमीर मुझे धिक्कार रहा है। मैं अपना अपराध
  736. 35:54स्वीकार करता हूं। झूठ सब झूठ बोल रहे
  737. 35:58हैं। नहीं सच यही है। और अगर जरूरत
  738. 36:01[संगीत] पड़ी तो मैं अदालत में भी यही
  739. 36:03बयान दूंगा। भैरव के चेहरे का रंग उड़
  740. 36:06जाता है।
  741. 36:07भैरव अब तुम्हारे खिलाफ सबूत भी है, गवाह
  742. 36:11भी और तुम्हारा झूठ भी सबके सामने आ चुका
  743. 36:15है। पंचायत का फैसला सुनाया जाता है।
  744. 36:18रघुवीर की पूरी जमीन [संगीत]
  745. 36:20कानूनी रूप से आर्यन और रोहन की है। जब तक
  746. 36:24दोनों बड़े नहीं हो जाते, पंचायत और रामू
  747. 36:27काका मिलकर इसकी देखभाल करेंगे। बिल्कुल
  748. 36:30सही फैसला। मैं अपनी आखिरी सांस तक इन
  749. 36:34बच्चों का साथ नहीं छोडूंगा।
  750. 36:36बेटा मुझे माफ कर देना। मैं चाहकर भी
  751. 36:39तुम्हें पहले नहीं बचा पाई।
  752. 36:41ताई आपने हमेशा हमारा साथ दिया। हमें आपसे
  753. 36:45कोई शिकायत नहीं है।
  754. 36:47रोहन दौड़ कर शारदा से लिपट जाता है।
  755. 36:50अब आप भी हमारी मां जैसी हैं।
  756. 36:56कुछ महीने बाद दोनों भाई फिर से अपने
  757. 36:59खेतों में खड़े थे। इस बार उनके चेहरों पर
  758. 37:02डर नहीं आत्मविश्वास था।
  759. 37:05भैया देखो हमारे खेत फिर से हरे हो गए।
  760. 37:08हां क्योंकि मेहनत और सच कभी हारते नहीं।
  761. 37:12रामू काका मुस्कुराते हुए दोनों भाइयों के
  762. 37:15पास आते हैं। [संगीत]
  763. 37:16अब आगे क्या करना है बेटा? मैं खूब पढ़ाई
  764. 37:19करूंगा। बड़ा होकर वकील बनूंगा ताकि किसी
  765. 37:23भी अनाथ बच्चे के साथ कभी अन्याय ना हो।
  766. 37:26और मैं भैया का सबसे बड़ा साथी बनूंगा।
  767. 37:30तीनों [संगीत] हंस पड़ते हैं। दूर हवा में
  768. 37:33लहलहाती फसल मानो रघुवीर और सीमा की दुआएं
  769. 37:36अपने [संगीत] बच्चों तक पहुंचा रही थी।
  770. 37:39लालच इंसान को कुछ समय के लिए जीतता हुआ
  771. 37:42दिखा सकता है। लेकिन सच्चाई, हिम्मत और
  772. 37:46ईमानदारी की जीत अंत में निश्चित होती है।
  773. 37:49जो अपने हक के लिए सही रास्ते पर डटा रहता
  774. 37:52है। भगवान भी उसका साथ देते हैं। दोस्तों,
  775. 37:56अगर हमारी यह कहानी आपको जरा सी भी पसंद
  776. 37:58आई हो, तो कृपया हमारे चैनल को जरूर
  777. 38:01सब्सक्राइब करें। ऐसी ही दिल छू लेने वाली
  778. 38:03और मनोरंजक कहानियां देखने के लिए हमारे
  779. 38:06साथ जुड़े रहें। वीडियो को लाइक करें।
  780. 38:08अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और कमेंट
  781. 38:11करके हमें जरूर बताइए कि आपको यह कहानी
  782. 38:13कैसी लगी। धन्यवाद।

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