Did Bangladesh Score Higher Than India On Per Capita Earning & Health Indicators? | Akash Banerjee — Transcript
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- 0:00इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड के अक्टूबर 2026
- 0:03वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में एक ऐसी बात
- 0:05बता दी गई जिससे भारत में हड़कंप मच गया।
- 0:08इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड के मुताबिक
- 0:10बांग्लादेश की नॉमिनल जीडीपी पर कैपिटा
- 0:12यानी एक बांग्लादेशी की औसतन आमदनी 2026
- 0:16में 2886
- 0:19आकी गई है। इसके मुकाबले एक भारतीय की
- 0:21औसतन आमदनी $749
- 0:25बताई गई है। $37
- 0:28कम एक बांग्लादेशी से। अब यह कोई पहली बार
- 0:30नहीं है कि बांग्लादेश की औसतन आमदनी हमसे
- 0:33ज्यादा हो गई है। 2018 से 2024 के बीच में
- 0:36अक्सर ऐसा हुआ है। एक दूसरे के साथ कांटे
- 0:38की टक्कर चलती रहती है। लेकिन जब भी
- 0:41बांग्लादेश हमें ओवरटेक करता है तो लोग
- 0:43सदमे में आ जाते हैं। मानिए एक वर्ल्ड कप
- 0:46का मैच चल रहा है। एलिमिनेशन राउंड चल रहा
- 0:48है। बांग्लादेश इंडिया को क्रिकेट में हरा
- 0:50देता है। अब लोग पूछेंगे ऐसा हो ही नहीं
- 0:52सकता। इट इज इंपॉसिबल। वैसे ही लोग आज पूछ
- 0:55रहे हैं कि क्या वो बांग्लादेश जहां से
- 0:58आने वाले लोगों को अमित शाह ने टरमाइट्स
- 1:00कहा था। वो बांग्लादेश जो 2024 में सड़कों
- 1:04पर आंदोलन होता है। सरकार गिर जाती है।
- 1:06सिविल वॉर जैसी अवस्था बन जाती है। वो
- 1:08बांग्लादेश जो आईएमएफ से लोन ले रहा है।
- 1:11वो हमसे किसी भी पायदान पर आगे कैसे निकल
- 1:14सकता है? असंभव है। यह जॉर्ज सोरस की
- 1:16साजिश है। जले पर नमक छिड़कने के लिए उसी
- 1:20समय ग्लोबल हंगर इंडेक्स के नए आंकड़े
- 1:22हमारे सामने आ जाते हैं। 112 देशों में
- 1:25100 पायदान पर इंडिया अपने आप को पाती है।
- 1:28बांग्लादेश 84 पोजीशन पर हमसे 16 पोजीशंस
- 1:31ऊपर। अरे बांग्लादेश को तो हम अनाज दिया
- 1:34करते थे और हमारे देश में तो 80 करोड़ लोग
- 1:36फ्री अनाज के हकदार बने बैठे हैं। तो
- 1:38बांग्लादेश हमसे भूख के मामले में बेहतर
- 1:42कैसे हो सकता है? ये जरूर पूरी दुनिया की
- 1:44साजिश है। सब मिलकर हमें नीचा दिखाना
- 1:47चाहते हैं। इसीलिए आप देखिए जेंडर गैप
- 1:49इंडेक्स देख लीजिए। प्रेस फ्रीडम इंडेक्स
- 1:51देख लीजिए। लाइफ एक्सपेक्टेंसी में आप देख
- 1:53लीजिए। सब में बांग्लादेश हमसे ऊपर है।
- 1:55ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स एचडीआई में अभी
- 1:58टाई चल रहा है। लेकिन अगर आप कंस्परेसी के
- 2:01अलावा एक बात को डिटेल में समझने की कोशिश
- 2:04करें कि क्या सच में हमारा ही देश पीछे
- 2:07फंस रहा है, पीछे खिसक रहा है और बाकी की
- 2:11दुनिया आगे बढ़ रही है। हम तो चाइना से
- 2:13मुकाबला करने निकले थे। आज वियतनाम से हार
- 2:16चुके हैं और बांग्लादेश से बराबरी कर रहे
- 2:18हैं। देश में आज डिबेट छिड़ी हुई है कि
- 2:20नहीं नहीं ये आंकड़े फुल्ली एक्यूरेट नहीं
- 2:23है। दरअसल बांग्लादेश से हम ऊपर हैं। आप
- 2:26पीपीपी देख लीजिए तो हम ऊपर अपने आप को
- 2:28पाएंगे। सवाल एक्चुअली ये नहीं है कि
- 2:31थोड़ा सा ऊपर थोड़ा सा नीचे कौन है? सवाल
- 2:33ये है कि बांग्लादेश को और भारत को हम एक
- 2:37पायदान पर कैसे पा रहे हैं? ये बराबरी का
- 2:39पॉइंट कहां से निकल रहा है? क्योंकि हमें
- 2:42तो बताया गया था हम फोर्थ लार्जेस्ट
- 2:43इकॉनमी है। हम तो विश्वुरु बन चुके हैं।
- 2:45हम तो चाइना को हराएंगे। तो ये बांग्लादेश
- 2:47से कंपैरिजन क्यों हो रहा है? हमारे पीछे
- 2:49फिसलने का बेहतरीन उदाहरण वियतनाम से शुरू
- 2:52करते हैं। फिर बांग्लादेश पर आते हैं।
- 2:542014 में वियतनाम का टोटल गुड्स एक्सपोर्ट
- 2:57लगभग $50 बिलियन डॉल था। इंडिया का 321
- 3:01बिलियन। मतलब वियतनाम हमसे आधे से भी कम
- 3:04चीजें एक्सपोर्ट कर रहा था दुनिया भर में।
- 3:072025 आते-आते एक दशक बाद आते-आते वियतनाम
- 3:10ने 475
- 3:12बिलियन मान लीजिए 500 बिलियन का माल
- 3:15दुनिया भर में बेचा। हाफ अ ट्रिलियन
- 3:17इंडिया ने उसी समय 441.8
- 3:20बिलियन का माल इंटरनेशनलली बेचा। जो देश
- 3:23हमारा आधा था एक्सपोर्ट में वो आज हमसे
- 3:26आगे निकल गया है। और ये सब मेक इन इंडिया
- 3:29के बावजूद हो रहा है। ये बात सही है कि आज
- 3:31के डेट में भी अगर आप सर्विज सेक्टर मिला
- 3:33दो तो हम वियतनाम से काफी आगे निकल
- 3:35जाएंगे। लेकिन एआई के आगमन से सर्विज
- 3:38सेक्टर के भी बुरे दिन आने वाले हैं। सबको
- 3:40यह बात पता है। परचेसिंग पावर पैरिटी के
- 3:43मुताबिक तो हम सालों से दशकों से
- 3:45बांग्लादेश से आगे हैं। हमारी
- 3:47अर्थव्यवस्था भी बांग्लादेश से आठ गुना
- 3:49ज्यादा बढ़ी है। तो ये पर पर्सन आमदनी
- 3:52निकालने का मतलब क्या है? क्यों ये फौल्ट
- 3:54निकाला जा रहा है? क्या मतलब रखा हुआ है
- 3:56इसका? ये हो सकता है एक डॉलर रुपया का खेल
- 3:59है जिसकी वजह से बांग्लादेश हमसे आगे निकल
- 4:00गया है। क्या असल में बांग्लादेशी हमारे
- 4:03देश में नहीं घुस रहे हैं? और अगर घुस रहे
- 4:05हैं तो सरकार के पास कोई आंकड़ा तो होगा
- 4:06ना। कितने लोग हमारे देश में घुस रहे हैं।
- 4:08क्या 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने
- 4:11के बाद भी हमारे बच्चे बांग्लादेश के
- 4:13बच्चों से ज्यादा टिंगे और कमजोर हो सकते
- 4:15हैं? इंपॉसिबल है। लेकिन फिर ये स्टंटिंग
- 4:17क्या चीज है जिसको लेकर हमारे ऊपर इतना
- 4:20क्रिटिसिज्म होता है? बांग्लादेश ने ऐसा
- 4:22क्या कर दिया कि सिविल वॉर के हालात के
- 4:25बावजूद वो हमें टक्कर दे रहे हैं और क्या
- 4:28ये तुलना हमें ये दिखाती है कि शहर के
- 4:31जगमगाहट से दूर टीवी के जुमलों के आगे एक
- 4:35और भारत है जिसे हम देखना नहीं चाहते हैं।
- 4:38लेकिन यह वाला भारत एक अंधे खाई के अंदर
- 4:41गिरा पड़ा हुआ है जिसे हम एकनॉलेज नहीं कर
- 4:44रहे हैं।
- 4:44नेता टाइप आधा काम मत करो। सब्सक्राइब के
- 4:48साथ-साथ बेल आइकॉन भी दबाओ। वीडियो में
- 4:51आगे बढ़ने से पहले एंटरप्रेन्यर्स के लिए
- 4:53एक जरूरी बात। आज ओपोरर्चुनिटीज के
- 4:55साथ-साथ कंपटीशन भी काफी बढ़ रहा है।
- 4:58सिर्फ अच्छा प्रोडक्ट बेचना काफी नहीं है।
- 5:00बिजनेस को स्मार्ट तरीके से मैनेज भी करना
- 5:03जरूरी है। अब डायरी के हिसाब से अंदाजे से
- 5:06स्टॉक रखने का जमाना कबका गया। अब जरूरत
- 5:08है एक प्रॉपर सिस्टम की। इसके लिए मैं
- 5:11आपको सजेस्ट करूंगा कि आप उडू का पॉइंट ऑफ
- 5:14सेल रिटेल ऐप ट्राई करिए यानी पीओएस रिटेल
- 5:18ऐप। मान लीजिए आपके कपड़ों की दुकान है तो
- 5:21आप ऐप पर जाओगे बेसिक डिटेल्स फिल आउट
- 5:23कीजिएगा और स्टोर को आप सेटअप कर सकते हो
- 5:26नया स्टॉक आए तो बारकोड्स को आपने स्कैन
- 5:28कर लिया प्रोडक्ट्स बिकते ही इन्वेंटरी
- 5:31ऑटोमेटिकली अपडेट हो जाएगा आप कभी भी इसे
- 5:34चेक कर सकते हैं कि टोटल स्टॉक कितना है
- 5:35किस कैटेगरी में कितना माल है कौन से
- 5:37डिज़ाइंस या कलर्स के कितने पीसेस बचे हुए
- 5:40हैं स्टॉक कम हो जाने पर रिऑर्डर
- 5:42नोटिफिकेशन भी मिल सकता है
- 5:44डिस्ट्रीब्यूटर्स को आप ऐड कर सकते हो और
- 5:46कस्टमर्स के लॉयल्टी पॉइंट्स भी यहीं से
- 5:49मैनेज हो जाते हैं। पेमेंट के लिए कैश,
- 5:51यूपीआई, बैंक पेमेंट या कार्ड जैसे ऑप्शंस
- 5:54इंटीग्रेट कर सकते हो। इंटरनेट ना होने पर
- 5:56सपोर्टेड ऑफलाइन फंक्शनैलिटी के थ्रू आप
- 5:59ऑपरेशंस जारी रख सकते हैं। और सबसे खास
- 6:02बात आपका डाटा उडू के दूसरे बिजनेस एप्स
- 6:05के साथ इंटरकनेक्टेड रहता है। तो रियल
- 6:07टाइम आप अपडेट भी कर सकते हो। इनवॉइसिंग,
- 6:10इन्वेंटरी, मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स
- 6:12स्टोर जैसे हर बिजनेस ऑपरेशन के लिए उडू
- 6:15के इकोसिस्टम में आपको इंटीग्रेटेड एप्स
- 6:18मिल जाते हैं। मतलब हर काम के लिए अलग-अलग
- 6:20सॉफ्टवेयर की अब जरूरत नहीं। और
- 6:23सब्सक्रिप्शन ओनली ₹580
- 6:26पर मंथ से। तो बिजनेस को ग्रो करना है तो
- 6:29सिर्फ मेहनत जुगाड़ से काम नहीं होगा। एक
- 6:32स्मार्ट सिस्टम भी आपको चाहिए। उडू और
- 6:34उसका पीओएस रिटेल ऐप। आप जरूर चेक आउट
- 6:37करिएगा। लिंक इन द डिस्क्रिप्शन। चलिए
- 6:40पहले थोड़ा सा गणित कर लेते हैं।
- 6:42डोंट गेट इनू दोस मैथ्स।
- 6:44अरे पीयूष जी यह मैथ्स जरूरी है क्योंकि
- 6:47ये हमारे टोटल जीडीपी की चकाचौंध को घटाकर
- 6:51देश की असली हालात को दिखाता है। पर
- 6:54कैपिटा जीडीपी का मतलब होता है देश की जो
- 6:57टोटल कमाई है यानी जो जीडीपी जिसको लेकर
- 6:59सरकार भी इतना बोलती रहती है। उसको बस देश
- 7:02की आबादी से आपने डिवाइड कर दिया। बस इतना
- 7:04ही है। कोई ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड मैथ्स
- 7:06नहीं है। इसमें एक्स्ट्रा टू ए भी नहीं
- 7:08लगता है। देश की पूरी कमाई से एक नागरिक
- 7:11का हिस्सा कितना बनता है वो हो जाता है
- 7:14औसतन आमदनी। आईएमएफ के हिसाब से 2026 में
- 7:18इंडिया की जीडीपी लगभग 4.15 ट्रिलियन
- 7:21डॉलर्स होगी और बांग्लादेश की 56 बिलियन
- 7:25डॉलर्स। यानी हमारी इकॉनमी तकरीबन आठ गुना
- 7:27ज्यादा बड़ी है। लेकिन हमारी इकॉनमी हमारी
- 7:31आबादी के वजह से भी तो इतनी बड़ी है। ये
- 7:33बात हमें भूलनी नहीं चाहिए। 140 करोड़
- 7:36लोगों की आबादी है तो जीडीपी बड़ी होगी।
- 7:38और ये बांग्लादेश की आबादी से भी आठ गुना
- 7:41ज्यादा बड़ा है। तो ये आठ गुना का जो अंतर
- 7:44है इसको समान कैसे किया जाए? कैसे समझा
- 7:47जाए कि एक बांग्लादेशी वर्सेस एक इंडियन
- 7:50उसकी कंपैरिजन कैसे की जाए? इसीलिए हम
- 7:52जीडीपी को पपुलेशन से डिवाइड करते हैं। पर
- 7:54कैपिटा इनकम निकालते हैं और यहां
- 7:57बांग्लादेश हमसे आगे निकल रहा है। इसके
- 8:00पीछे कई वजह हैं। यह बात सच है कि ये सारा
- 8:03हिसाब किताब डॉलर में किया जाता है और ये
- 8:06जो डॉलर है फाइनेंसियल ईयर 2026 में रुपया
- 8:09डॉलर के मुकाबले 9.88 मान लीजिए 10% गिर
- 8:13चुका है। 14 सालों में सबसे बड़ी गिरावट
- 8:15अभी आई है। अब इसकी भी वजह है उस पर अभी
- 8:17आते हैं। मई 2026 में ₹96.82
- 8:21का रिकॉर्ड लो टच किया। ₹100 पर डॉलर कभी
- 8:24भी हो सकता है। आरबीआई बस अपना हाथ खींच
- 8:26ले। आपकी जो सैलरी है वो रुपए में आती है।
- 8:29लेकिन अगर आप डॉलर में उसे आकोगे तो आप
- 8:31पाओगे कि आपकी सैलरी ऑलरेडी कम हो रही है।
- 8:33और आईएमएफ का जो नंबर होता है
- 8:35अनफॉर्चुनेटली क्योंकि वो डॉलर में होता
- 8:37है तो वो चेंज हो रहा है। अप्रैल में
- 8:39इंडिया का पर कैपिटा 2812
- 8:42था। अक्टूबर आते-आते ये 2749 हो गया। वही
- 8:47बांग्लादेश वहां जो तगड़ा एक्सपोर्ट चल
- 8:49रहा है, जो रेमिटेंस इकॉनमी है, तो उसकी
- 8:52करेंसी की हालत इतनी खराब नहीं हुई जितनी
- 8:54हमारे रुपया की हुई। उसके ऊपर दिक्कत इस
- 8:57बात में भी आती है कि नंबर्स का तो कोई
- 8:59भरोसा ही नहीं है। आईएमएफ के हिसाब से
- 9:02वहां इनफ्लेशन 8.7% है। इंडिया में तो
- 9:05सिर्फ 5% है और ग्रोथ इंडिया का 7% से
- 9:08ज्यादा है। बांग्लादेश का सिर्फ 3.6% है।
- 9:11परचेसिंग पावर पैरिटी यानी पीपीपी में
- 9:14इंडिया आज भी बांग्लादेश से आगे है। बहुत
- 9:16आगे नहीं है लेकिन थोड़ा बहुत तो आगे है।
- 9:18और आईएमएफ खुद कहता है कि 2029 में नॉमिनल
- 9:21पर कैपिटा जीडीपी में भी इंडिया फिर से
- 9:24बांग्लादेश से आगे निकल जाएगा।
- 9:25एक्सपेक्टेशन है हमारा $361
- 9:29वर्सेस बांग्लादेश इज़ $334
- 9:32तो क्या इसका मतलब है कि सब चंगासी है।
- 9:35बांग्लादेश को एक मौका मिल गया है डॉलर
- 9:37रेट्स के वजह से थोड़ा ऊपर चले गया है
- 9:39पार्टी का लो कल हम बाजी हमारे हाथ में
- 9:41होगी। लेकिन आईएमएफ का डाटा अगर आप देखें
- 9:44तो उसके मुताबिक 2018 से 2024 तक यही
- 9:46सिलसिला चलता आया है। ये एक एक्सीडेंट
- 9:49नहीं है। ये एक पैटर्न है। और ये इसलिए हो
- 9:52रहा है कि हम बांग्लादेश के साथ टक्कर ले
- 9:54रहे हैं ऑन पर कैपिटा क्योंकि हमारी जो
- 9:56वेल्थ इनइकलिटी है, घटते एक्सपोर्ट्स हैं,
- 9:59बढ़ते डॉलर के दाम है, इसी के वजह से
- 10:01बांग्लादेश से हमें कमपीट करना पड़ रहा
- 10:03है। लेकिन हम ये बात मानना नहीं चाहते हैं
- 10:06कि हमारी हालत खस्ता है। अब तो ऐसी बातें
- 10:10हमें दिख रही हैं और कोई छुपा नहीं सकता
- 10:12है कि आरबीआई सरकार को अपेरेंटली कह रही
- 10:14है कि एलआरएस के जरिए बाहर जाने वाला जो
- 10:16पैसा है जो हम डॉलर खरीद रहे हैं उसको रोक
- 10:19दिया जाए। पहले से ही इंटरनेशनल म्यूच्यूल
- 10:21फंड्स बंद हो चुके हैं। गोल्ड खरीदने को
- 10:23रोक दिया गया है। डॉलर रेमिटेंस पर
- 10:25प्रपोजल लगाया गया है कि उसको कम कर दो।
- 10:27दिखा रही है कि हमारी हालत कितनी खस्ता हो
- 10:30चुकी है। लेकिन फिर भी सारी दिक्कतों के
- 10:32बावजूद बांग्लादेश से नीचे जाना भारतीयों
- 10:35को मंजूर नहीं है। अंधभक्त तो बस फिर
- 10:38उल्टी करने लगते हैं। लेकिन वो ये नहीं
- 10:40देखते हैं कि अप्रैल से दिसंबर 2025 के
- 10:44अगर आप आंकड़े देखो तो उसके बीच इंडिया का
- 10:46मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट 250 बिलियन तक
- 10:50पहुंच गया था। सिंपल भाषा में बोले दुनिया
- 10:52को बेचने के लिए हमारे पास कुछ खास नहीं
- 10:54है। बस हम दुनिया भर से चीजें खरीद रहे
- 10:56हैं। जाहिर है कि डॉलर और मजबूत होगा।
- 10:59रुपया और कमजोर होगा। 1980 के बांग्लादेश
- 11:02के पास ना तो तेल था, ना तो गैस का कोई
- 11:04बड़ा खजाना था और ना ही कोई टेक पार्क था।
- 11:06उसके पास था तो बस वही एक चीज सस्ता लेबर
- 11:10और उस लेबर को एक इंडस्ट्री में झोंक दिया
- 11:14गया। रेडीमेड गारमेंट्स। आज डब्ल्यूटीओ के
- 11:17मुताबिक बांग्लादेश के गारमेंट
- 11:19एक्सपोर्ट्स 36 बिलियन डॉलर से ऊपर हैं।
- 11:22देश के कुल एक्सपोर्ट्स का 81% और जीडीपी
- 11:26का लगभग 8% लेकिन असली नंबर यह है। इस
- 11:30इंडस्ट्री में 45 लाख वर्कर्स काम करते
- 11:33हैं और उनमें से 57% से ज्यादा महिलाएं
- 11:37हैं। लाखों घरों में लड़कियों के हाथ में
- 11:39पहली बार सैलरी आती है। शादी देर से होती
- 11:42है। बच्चे कम होते हैं और जो पैसा आता है
- 11:45वो सीधा घर की थाली माने न्यूट्रिशन और
- 11:48बच्चों की पढ़ाई में जाता है। तो ये बात
- 11:51सिर्फ टेक्सटाइल की नहीं है। ये एक पूरी
- 11:53पीढ़ी के लिए एक सीढ़ी बन जाती है। साउथ
- 11:56ईस्ट एशिया के देश उठा लो। तमाम देश उठा
- 11:59लो। इसी प्रोसेस से गुजरे हैं। हार्ड
- 12:01मैन्युफैक्चरिंग, बेटर एजुकेशन, मोर
- 12:03जॉब्स, बेटर इकॉनमी और इसी प्रोसेस से
- 12:06लोगों की जिंदगियां भी सुधरी हैं। भारत भी
- 12:10टेक्सटाइल्स में पुराना खिलाड़ी रहा है।
- 12:12लेकिन एफवाई 2025 में इंडिया का पूरा
- 12:15टेक्सटाइल और अपेरल एक्सपोर्ट आप मिला भी
- 12:18दो तो 36 बिलियन डॉलर बनता है। उसमें
- 12:20अपेरल सिर्फ 16 बिलियन माने बांग्लादेश से
- 12:24आधा। मतलब बांग्लादेश अकेले कपड़े बेचने
- 12:27में उतना कमा लेता है जितना हम धागा कपड़ा
- 12:29अपेरल पूरी इंडस्ट्री मिलाकर कर सकते हैं।
- 12:32लेकिन बांग्लादेश तो एक सेक्टर पर निर्भर
- 12:35है। हैं वो कैसे टिक पाएगा हमारे सामने
- 12:37किसी भी दिन जैसे ही टेक्सटाइल गया उसी
- 12:39दिन बांग्लादेश गया। मैं भी यही सोचा करता
- 12:41था कि हमारा ग्रोथ जो है वो सेुलर है।
- 12:44अच्छा आपको सेुलर शब्द पसंद नहीं है।
- 12:45हमारा ग्रोथ डायवर्सिफाइड है। मुझे ये
- 12:48लगता था लेकिन कुछ हद तक हम भी उसी नाव
- 12:51में है जिसमें आज बांग्लादेश है। भारत की
- 12:54मैन्युफैक्चरिंग का इंजन क्या है? सरकार
- 12:57की नीति आयोग रिपोर्ट्स को ही मैं कोट कर
- 13:00रहा हूं। सरकार के आंकड़ों के हिसाब से
- 13:02ऑटो इंडस्ट्री माने गाड़ियां, टू व्हीलर
- 13:05कंपोनेंट्स अगर आप ऑटो इंडस्ट्री को एज अ
- 13:08होल ले लो तो इंडिया का जीडीपी का 7.1%
- 13:12ये अपने आप बनता है। लेकिन उससे भी ज्यादा
- 13:14चौंका देने वाली बात है कि यही ऑटो
- 13:16मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री हमारे जीडीपी
- 13:19का मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी का 49% है। साफ
- 13:22शब्दों में कहें तो भारत की जो
- 13:24मैन्युफैक्चरिंग स्टोरी है उसका आधा
- 13:26हिस्सा सिर्फ ऑटो सेक्टर पर निर्भर है।
- 13:29इसीलिए आप देखोगे शहर में गाड़ियां ठुसूस
- 13:32कर चल रही हैं। ट्रैफिक जाम हो रहा है।
- 13:34सरकार गाड़ियां नहीं रोक सकती है। क्योंकि
- 13:37अगर गाड़ियों का बनना रोक दे सरकार तो
- 13:39अर्थव्यवस्था ठप पड़ जाएगी। अब ऑटो
- 13:41इंडस्ट्री बुरी चीज नहीं है। एंप्लॉयमेंट
- 13:43जनरेशन हो रहा है। इकॉनमी चल रही है लेकिन
- 13:45बहुत बड़ा फर्क है बांग्लादेश के साथ।
- 13:47गारमेंट जो इंडस्ट्री होती है वो लेबर
- 13:50इंटेंसिव इंडस्ट्री होती है। मशीन है
- 13:52लेकिन उसके साथ-साथ हाथ का काम भी चाहिए।
- 13:55ऑटो इंडस्ट्री ऑन द अदर हैंड कैपिटल
- 13:57इंटेंसिव होती है। मशीन ज्यादा हाथ कम।
- 13:59असेंबली लाइन पर आज रोबोट्स बढ़े ही जा
- 14:02रहे हैं। और ये गाड़ियां बेचते किसको हैं?
- 14:04ज्यादातर मिडिल क्लास को। विदेश नहीं जैसा
- 14:07कि बांग्लादेश करता है। ग्लोबल ट्रेड की
- 14:10अगर हम बात करें तो हमारा पूरा ग्लोबल ऑटो
- 14:12कंपोनेंट्स इंडस्ट्री ग्लोबल ट्रेड का
- 14:14सिर्फ 3% बनता है। और जो फैक्ट्री है वहां
- 14:18जो कमाई हो रही है वो किसके हाथ में जा
- 14:20रही है? आईएलओ की एक स्टडी हमें बताती है
- 14:23कि इंडियन फैक्ट्रीज में वैल्यू एडिशन में
- 14:25वेजेस का हिस्सा जो तनख्वा जाती थी म जो
- 14:29वर्कर्स को वो 19881 में 28.5%
- 14:33था प्रोडक्ट का। फाइनेंसियल ईयर 2012 2013
- 14:36आते-आते ये सिर्फ 11% तक सिकुड़ गया है।
- 14:39इसका मतलब आज तो और भी कम होगा। माने बड़े
- 14:42सेठ के पास प्रॉफिट जा रहा है। पहले जो
- 14:4415% जाया करता था सेठ के पास वो 44% और
- 14:47शायद आज 50% तक जा रहा है। हमारे देश में
- 14:50ऑर्गेनाइज्ड मैन्युफैक्चरिंग में कुल
- 14:52सिर्फ 2 करोड़ लोग हैं। 140 करोड़ के देश
- 14:56में ऑर्गेनाइज्ड मैन्युफैक्चरिंग में
- 14:57सिर्फ दो करोड़ लोग और सरकार का अपना
- 15:00पीरियडिक लेबर फोर्स सर्वे कहता है 2025
- 15:02का डाटा है ये कि नॉन फार्म वर्कर्स है जो
- 15:05लोग फार्म में काम नहीं कर रहे हैं। जो
- 15:07लोग कारखानों में काम कर रहे हैं, शहरों
- 15:09में काम कर रहे हैं। 73.1%
- 15:11इनफॉर्मल एंटरप्राइजेस में काम कर रहे
- 15:13हैं। माने ना कॉन्ट्रैक्ट है ना पीएफ है
- 15:15ना पक्की तनख्वाह है। तो बाहर से
- 15:18इंडस्ट्री बन रही है। बिल्कुल बन रही है।
- 15:20चीजें बन रही है, गाड़ियां बन रही है, बिक
- 15:22रही हैं। बाहर से आप देखो तो Rolls रyce
- 15:24और ferar भी हमारे देश में बिक रही है। एक
- 15:26तबका है जो बहुत अमीर हो चुका है।
- 15:28महंगे-महंगे घर खरीद रहा है। लेकिन जो आम
- 15:31इंसान है वो धीरे-धीरे और गरीब हो रहा है।
- 15:34उसके ऊपर इनफ्लेशन की मार खा रहा है।
- 15:36इसीलिए वेल्थ गैप में हम सबसे ऊंचे पायदान
- 15:39पर हैं पूरी दुनिया में जिसके पास पैसा है
- 15:411% इंडिया और 50% जो खाई में पड़ा हुआ है।
- 15:46अब जब आप पर कैपिटा निकालते हो तो ये जो
- 15:48खाई में बैठे हुए लोग हैं इनको भी आपको
- 15:50दिखाना पड़ता है क्योंकि पॉपुलेशन से आप
- 15:52इसको डिवाइड कर रहे हो। इसीलिए यहां
- 15:54इंडिया का आंकड़ा इतना कम आ रहा है। बात
- 15:56बांग्लादेश की नहीं है। हम कंबोडिया से,
- 15:58कांगो से, केन्या से नीचे हैं ऑन पर
- 16:00कैपिटा इनकम। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026
- 16:03इंडिया का स्कोर रहा 24.1 कैटेगरी सीरियस
- 16:07और ये कैटेगरी हमारा पक्का पता रहा है
- 16:092012 से हम इसी सीरियस कैटेगरी में पड़े
- 16:11हुए हैं। बांग्लादेश का स्कोर 19.2 मॉडरेट
- 16:15कैटेगरी में। अब रैंक हम छोड़ देते हैं और
- 16:17बांग्लादेश के बाद से हम ऐसे में भी भड़क
- 16:19जाते हैं। इंडिया के आंकड़े हम देख लेते
- 16:21हैं। इंडिया में 5 साल से कम उम्र के
- 16:2429.3%
- 16:25बच्चे स्टंटेड निकले हैं। यानी अपनी उम्र
- 16:28के हिसाब से उनका कद छोटा है। बांग्लादेश
- 16:32में यही स्टंटिंग का आंकड़ा 24% है।
- 16:35इंडिया में 19% बच्चे वेस्टेड है। वेस्टेड
- 16:38यानी उनके कद के हिसाब से उनका वजन कम है।
- 16:41यह पूरे साउथ एशिया में सबसे ज्यादा
- 16:44आंकड़ा है। माने सबसे वर्स्ट केस है।
- 16:46बांग्लादेश में ये 12.9%
- 16:49है। अंडर नरिशमेंट की बात करें तो इंडिया
- 16:519.8% पे बांग्लादेश 8.2% पे अंडर फाइव
- 16:55चाइल्ड मोटलिटी में इंडिया थोड़ा सा बेहतर
- 16:57है। 2.7 वर्सेस बांग्लादेश जहां थोड़े और
- 17:00बच्चे मरते हैं 3%। सरकार ने तो पहले ही
- 17:03ग्लोबल हंगर इंडेक्स को डीपली फ्लॉड बोलकर
- 17:05रिजेक्ट कर दिया है। सब कुछ साजिश है भाई
- 17:07हमारे देश के खिलाफ। लेकिन 29.3%
- 17:11का मतलब ये है कि 10 में से लगभग तीन
- 17:14बच्चे हमारे देश में अपनी पूरी लंबाई तक
- 17:17नहीं पहुंच पा रहे हैं। ये कोई रैंकिंग
- 17:19नहीं है। ये एक पूरी पीढ़ी का खुला चिट्ठा
- 17:22है। ये नंगा सच है। जिसे सरकार मानती है
- 17:26सुधारने की कोशिश करती है लेकिन अपनी गलती
- 17:28कबूलती नहीं है। अब लोग भूखे ना मरे तो
- 17:30सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न
- 17:33योजना लांच की थी। 81.35 करोड़ लोग हर
- 17:36महीने 5 किलो मुफ्त अनाज ये दुनिया का
- 17:40सबसे बड़ा फूड स्कीम है। तो हमें तो खुश
- 17:42होना चाहिए। लेकिन एक तरफ हम कहते हैं कि
- 17:45हम फास्टेस्ट ग्रोइंग मेजर इकॉनमी है और
- 17:48दूसरी तरफ हमें 80 करोड़ लोगों को फ्री
- 17:50में राशन भी देना पड़ रहा है। अब इन दोनों
- 17:52के बीच में एक चीज तो सच नहीं हो सकती है।
- 17:54कहीं ना कहीं तो हिपोक्रेसी चल रही है।
- 17:56लेकिन उससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है
- 17:58कि इतना फ्री अनाज देने के बाद भी बच्चे
- 18:01स्टंटेड और मैल नरिश्ड क्यों निकल रहे
- 18:04हैं? क्योंकि स्टंटिंग सिर्फ पेट भरने की
- 18:07बीमारी नहीं है। 5 किलो आपने गेहूं चावल
- 18:10तो दे दिया, कैलोरी दे दिया लेकिन
- 18:12प्रोटीन, अंडा, दूध, दाल ये नहीं दिया और
- 18:16बच्चों का कद तय होता है मां की सेहत से,
- 18:20साफ पानी से, टॉयलेट से और शायद मां कितना
- 18:23पढ़ी लिखी है उससे भी। और यहीं बांग्लादेश
- 18:26ने खेल जीत लिया। कई रिसर्चेस दिखाती है
- 18:29कि बांग्लादेश में गिरती स्टंटिंग के पीछे
- 18:33चार-पांच मेन कारण जरूर हैं जिसे हम भी
- 18:35रेप्लिककेट कर सकते हैं। मां-बाप की पढ़ाई
- 18:38लिखाई खासतौर पर मां की घर की बढ़ती आमदनी
- 18:41हेल्थ सर्विसेज पर ज्यादा जो इस्तेमाल
- 18:43उसका सैनिटेशन और छोटे परिवार और लड़कियों
- 18:47की पढ़ाई पर उन्होंने सच में पैसा लगाया
- 18:49है। 1994 से रूरल बांग्लादेश में फीमेल
- 18:52सेकेंडरी स्कूल स्टाइपेंड स्कीम चलाया
- 18:55गया। शर्त यह थी कि लड़की की स्कूल में
- 18:57हाजिरी 75% से ज्यादा हो और उसकी शादी ना
- 19:02हो। 1994 से 1997 के बीच में लड़कियों का
- 19:05सेकेंडरी एनरोलमेंट 40% पॉइंट बढ़ा।
- 19:07लड़कों का 20% बढ़ा। 1998 तक आते-आते वहां
- 19:12लड़कियां स्कूल में लड़कों से ज्यादा
- 19:14एनरोल करने लगी। इसका असर देखिए। ओआरएफ की
- 19:18एक एनालिसिस दिखाती है कि बांग्लादेश में
- 19:20जिन महिलाओं ने स्कूल का चेहरा नहीं देखा
- 19:22उनके 47% चांस है बच्चा स्टंटेड निकलने
- 19:26का। जिन मांओं ने सेकेंडरी तक पढ़ाई की
- 19:28वहां स्टंटिंग उनके बच्चों की सिर्फ 18%
- 19:31और इंडिया इकोनॉमिक सर्वे 2025 2026 के
- 19:34हिसाब से एजुकेशन पर सरकारी खर्चा
- 19:37फाइनेंसियल ईयर 2020 में जीडीपी का 2.9%
- 19:40था। फाइनेंसियल ईयर 2026 में 2.7% था।
- 19:43हेल्थ पर हम 1.4 टू 1.8% के बीच में ही
- 19:47लटके रहते हैं। ब्रिक्स हमारे जो साथी देश
- 19:50हैं उससे काफी हम पीछे हैं ऑन एजुकेशन एंड
- 19:53हेल्थ केयर एक्सपेंडिचर। तो फर्क काफी
- 19:56सिंपल है। इसमें रॉकेट साइंस नहीं है।
- 19:58बांग्लादेश ने होने वाली जो माएं हैं
- 20:00उन्हें पहले स्कूल भेजा। फैक्ट्री में
- 20:02नौकरियां दी। हमारे यहां हुआ क्या? घर में
- 20:04बैठे-बैठे अनाज का थैला दे दिया गया। अब
- 20:07थैला जरूरी है। इट इज कमेंडेबल। लेकिन
- 20:09थैला आपको कद नहीं देगा। पूरा पोषण नहीं
- 20:12देगा। यह बात सरकार समझने में चूक कर गई।
- 20:1580 साल होने को आ रहे हैं आजादी को और हम
- 20:18बांग्लादेश के साथ जो कंपटीशन कर रहे हैं
- 20:20और इसमें हम ब्लेम करेंगे प्रीवियस सरकार
- 20:23को हम ब्लेम करेंगे बाबर को औरंगजेब को या
- 20:26ये भी सरकार मान सकती है कि पिछले 10
- 20:28सालों में काफी गलतियां हुई हैं और उन
- 20:30गलतियों को सुधारा भी जा सकता है। जैसे
- 20:33लेबर इंटेंसिव जो एक्सपोर्ट्स हुआ करते थे
- 20:36जहां हमारी ऐड थी वो एक्चुअली गिरी है। एक
- 20:39जमाने में हम अपेरल छोड़कर लेदर टेक्सटाइल
- 20:41फुटवेयर में काफी ज्यादा एक्सपोर्ट करते
- 20:43थे। अगर आप देखें आंकड़े 2002 में 0.9% ऑफ
- 20:47द वर्ल्ड एक्सपोर्ट्स हमारा था। 2013 में
- 20:49हम 4.5% ऑफ द ग्लोबल एक्सपोर्ट तक पहुंच
- 20:52गए और उसके बाद 2022 आते-आते 3.5% पर वापस
- 20:55आ गए। अगर आप गारमेंट्स की बात करो तो हम
- 20:58काफी ज्यादा एक्सपोर्ट करते थे। लेकिन हम
- 20:59उसको डबल डाउन नहीं कर पाए। आगे नहीं बढ़
- 21:02पाए। और जो एक्सपोर्ट रिलेटेड जॉब्स हैं
- 21:04वो भी धीरे-धीरे अब गिर रहे हैं। एक समय
- 21:07था 2012 में जब 9.5%
- 21:10हमारा जो टोटल एंप्लॉयमेंट था वो फॉरेन
- 21:12एक्सपोर्ट्स की चीजें बना रहा था 2020
- 21:15आते-आते वो भी 6.5 तक चले आया। मेक इन
- 21:17इंडिया का अपना टारगेट हुआ करता था। बहुत
- 21:20बड़ा एक इंपॉर्टेंट टारगेट हुआ करता था जो
- 21:22कि सेट किया था नरेंद्र मोदी सरकार ने कि
- 21:24मैन्युफैक्चरिंग का जो हिस्सा होगा जीडीपी
- 21:26का 25% होगा। इसको बार-बार रिवाइज भी
- 21:29किया। अरे 2022 तक हो जाएगा। 2025 तक हो
- 21:32जाएगा। 100 मिलियन नौकरियां बनेंग। लेकिन
- 21:34एक्चुअली मैन्युफैक्चरिंग ऑफ शेयर ऑफ़
- 21:36जीडीपी एक्चुअली घटा है। 16.7% ऑफ़ जीडीपी
- 21:40हुआ करता था 2013-14 में और अब 15.9% रह
- 21:44गया 2023 2024 में। मुंगेरी लाल के हसीन
- 21:47सपने तो हम आराम से देख लेते हैं। जब
- 21:49चाइना में आपदा आई तो सब ने कहा कोविड में
- 21:51तो चाइना प्लस वन स्ट्रेटजी होगा। सारे
- 21:53लोग हमारे पास आएंगे। हुआ ऐसा कुछ नहीं।
- 21:56वियतनाम, थाईल, कंबोडिया, मलेशिया सब लोग
- 21:58चले गए। भारत देश नहीं आए। सरकार ने क्या
- 22:00पूछा कि इतना सब कुछ होने के बाद भी यह ये
- 22:03जो कंपनीज़ है चाइना छोड़कर भारत क्यों
- 22:05नहीं आई? इसके बारे में कभी एनालिसिस किया
- 22:07गया है? तो क्या इंडिया बाजी हार चुका है?
- 22:10बिल्कुल नहीं। जब हम किसी चीज में मन
- 22:12लगाकर काम करते हैं तो हम उसे हासिल भी कर
- 22:14लेते हैं। 2005, 2006 से 2015 के बीच में
- 22:18यूएनडीपी का आंकड़ा है। 27 करोड़ लोगों को
- 22:21मल्टीडमेंशनल पॉवर्टी से बाहर निकाला था
- 22:23हमारे देश में। हम कर सकते हैं। हम में वो
- 22:25काबिलियत है। सरकार का इंटेंशन मैटर करता
- 22:29है कि आप लोगों को किस तरीके से फोकस करना
- 22:31चाहते हो। आज भी यह काम हो सकता है। सरकार
- 22:33को दो चार चीजें करनी जरूरी है। पहला
- 22:35नौकरी वाली मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करो।
- 22:37गाड़ियां बनना जरूरी है। लेकिन जूते से
- 22:39लेकर, खिलौने से लेकर फूड प्रोसेसिंग,
- 22:41इलेक्ट्रॉनिक्स में हमने सफलता हासिल की
- 22:42है। तो जो सेक्टर्स में हम अच्छा काम कर
- 22:44सकते हैं उसमें घुसकर एक ग्लोबल लीडर बनने
- 22:48की जरूरत है। जो दुनिया में हमें बोला जा
- 22:51सके कि भैया ये चीज हमने बनाई है। लेकिन
- 22:54यहां होता क्या है कि हर चीज में घूसखोरी
- 22:56होती है। हर चीज में रेड टेप होता है। हर
- 22:58चीज में पॉलिसी पैरालिसिस दिख रहा है।
- 23:00दूसरा लड़कियों को स्कूल भेजना औरतों को
- 23:02काम देना। बांग्लादेश का सबसे सस्ता सबसे
- 23:05असरदार स्कीम यही रहा है कि स्कूल में
- 23:07हाजिरी दो, पढ़ाई पूरी करो, शादी को टालो
- 23:10और इसके लिए आपको पैसे भी मिलेंगे।
- 23:12फैक्ट्री में नौकरी जो मिली है उसके वजह
- 23:14से बांग्लादेश के जो एक्सपोर्ट्स हैं आर
- 23:16चीप गुड क्वालिटी और दुनिया भर में इसीलिए
- 23:18जाने भी जाते हैं। तीसरा कैलोरीज के आगे
- 23:21न्यूट्रिशन देखो। 81 करोड़ फ्री थैली जो
- 23:25आप दे रहे हो जो गेहूं चावल दे रहे हो
- 23:28उसमें आपको देखना पड़ेगा। लोगों को दाल,
- 23:29अंडा, दूध, मां की सेहत, साफ पानी,
- 23:32सैनिटेशन और ईमानदार डाटा आपको दिखाना
- 23:35पड़ेगा। ये जुबलेबाजी से काम नहीं चलने
- 23:38वाला है। चौथा कि भैया जो वर्कर्स का
- 23:40हिस्सा बनता है जब फैक्ट्री में प्रॉफिट
- 23:4344% सेट ले जाएगा, 11% से कम रह जाएगा
- 23:46वर्कर के लिए तो कैसे चलेगा? द प्रिंट एक
- 23:49बहुत बढ़िया आर्टिकल दिखाती है कि कैसे
- 23:51जर्मनी में जो वर्कर्स हैं उन्हें भी हक
- 23:53दिया गया कि ऑटोमेशन कितना लगेगा, ऑटोमेशन
- 23:55कितना नहीं लगेगा? उस पर वर्कर्स का भी एक
- 23:58सेव बनता है। तो इसी तरीके से वर्कर्स के
- 24:01लिए भी सरकार को काम करना पड़ेगा। और
- 24:03लास्ट पांचवा भाई डाटा पर तो आपको भरोसा
- 24:05करना पड़ेगा। क्रिटिक्स की बात आपको सुननी
- 24:07पड़ेगी। हर किसी को बैन और जेल में ठूसने
- 24:10से काम नहीं चलेगा। अब ग्लोबल हंगर
- 24:12इंडेक्स में फ्लॉस जरूर हो सकते हैं। कुछ
- 24:14भी परफेक्ट नहीं है। लेकिन ये बोलना कि सब
- 24:16कुछ कंस्परेसी है और आप में आपके देश में
- 24:18सब चंगा सी चल रहा है। वो भी दिक्कत वाली
- 24:20बात है। लेकिन सबसे पहले मानना तो होगा ना
- 24:23कि भैया हम एक दूसरे को नोच खाए हैं पिछले
- 24:26एक दशक में उसकी वजह से आज देश की जो हालत
- 24:29हो रही है उसकी सच्चाई अब सामने निकल रही
- 24:31है जो सरकार छुपा नहीं पा रही है। सबसे
- 24:34पहले एडमिशन ऑफ गिल्ट। उसके बाद डाटा को
- 24:36देखना मानना और उसके बाद एक मंथ से वॉर
- 24:39फुटिंग पर काम पर लग जाना देर अभी भी मैं
- 24:43कहूंगा बहुत नहीं हुई है। अभी भी हम अचीव
- 24:45कर सकते हैं। लेकिन गलती माननी पड़ेगी और
- 24:48दिक्कत मेरे ख्याल से वहीं है।
- 24:55मेनी थैंक्स टू उडू फॉर मेकिंग दिस एपिसोड
- 24:57पॉसिबल। सरकार को तो बिजनेस का ध्यान रखना
- 25:00पड़ेगा। आपको अपने बिजनेस का भी ध्यान
- 25:02रखना पड़ेगा। कंपटीशन हर तरफ से बढ़ रहा
- 25:04है। इसीलिए उडू का पीओएस रिटेल ऐप जरूर
- 25:07ट्राई आउट करिए जिससे आप अपने स्टॉक को
- 25:10अच्छे से मैनेज कर पाएंगे। लिंक मैंने
- 25:12डिस्क्रिप्शन में देके रखा है। मेनी
- 25:13थैंक्स फॉर वाचिंग मोर एपिसोड्स कमिंग अप।
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