एक भारत के दो चेहरे क्यों? विश्वगुरु की पोल खोलते आंकड़े ! | Dibang — Transcript
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- 0:00प्रति व्यक्ति आए ₹22,000
- 0:02पासपोर्ट की दुनिया में रैंकिंग 125वीं।
- 0:06क्या यह एक विश्व गुरु बन रहे देश के
- 0:09आंकड़े हो सकते हैं? इसे और करीब से देखते
- 0:12हैं। दिल्ली में एक आदमी की कमाई सालाना
- 0:17औसतन ₹ लाख यानी ₹00 महीने बिहार में
- 0:23₹93000
- 0:25साल में यानी हर महीने सिर्फ ₹700
- 0:31एक ही देश एक ही संविधान एक ही तिरंगा
- 0:35लेकिन दिल्ली और बिहार के बीच की खाई किसी
- 0:38दो अलग-अलग देशों जैसी है और इस खाई को
- 0:42पार्ट बांटने के लिए जो सबसे जरूरी औजार
- 0:46था जनगणना वो 2011 के बाद हुई ही नहीं। 15
- 0:52साल आज हम 2026 में बैठकर
- 0:572011 के आंकड़ों के आधार पर 2047
- 1:01तक विकसित होने की योजना बना रहे हैं। और
- 1:05पासपोर्ट सरकार कहती है पासपोर्ट सिर्फ
- 1:08ट्रेवल डॉक्यूमेंट है। नागरिकता नहीं
- 1:11बताता। ठीक है?
- 1:13लेकिन जो पासपोर्ट आपकी नागरिकता नहीं
- 1:16बताता वो विश्व रैंकिंग में 125वें नंबर
- 1:20पर आता है। जबकि सरकार का दावा है कि
- 1:23भारतीय पासपोर्ट की रिस्पेक्ट और स्ट्रेंथ
- 1:26बढ़ी है। इसका मतलब क्या है? समझेंगे आगे।
- 1:30और सबसे अहम सवाल क्या सरकार को आंकड़ों
- 1:34से दिक्कत है? या उस सच से जो आंकड़ों में
- 1:38दिखता है जिससे विकास की पोल खुल जाती है।
- 1:43इस पर भी खुलासा आगे। नमस्कार, मैं हूं
- 1:46दिबांग। आप देख रहे हैं दिवंग ऑफिशियल।
- 1:50आगे आंकड़े देखिए और बताइए इनमें से आप
- 1:53किस राज्य में रहते हैं और आईने से क्यों
- 1:57डरती है सरकार? हां, बेल आइकॉन जरूर दबाएं
- 2:01और यह तभी हो पाएगा जब आप सब्सक्राइब
- 2:03करेंगे। आखिर में आपको कुछ संदेश बताएंगे
- 2:08जो आप ही के भेजे हुए हैं। आज हम नितन्याऊ
- 2:11के वीडियो के भी संदेश शामिल करेंगे।
- 2:14बताएंगे इस बारे में आगे। चलते हैं। सच सच
- 2:17होता है और सच से घबराना या लड़ना या डरना
- 2:21नहीं चाहिए। सच को मान लेना चाहिए। तभी
- 2:25आगे का रास्ता खुलता है। इसका एक बड़ा
- 2:28उदाहरण एक बड़ा एग्जांपल पड़ोस में है।
- 2:31श्रीलंका वो 2022 में दिवालिया हो गया था।
- 2:35उसका विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो गया था।
- 2:39पेट्रोल के लिए खाने के लिए लंबी लंबी
- 2:41लाइनें लगी थी। राष्ट्रपति भाग गए थे।
- 2:45श्रीलंका दिवालिया हुआ लेकिन उसने सच का
- 2:49सामना किया। वो आईएमएफ गया। कड़े फैसले
- 2:52लिए। आंकड़े सुधारे और आज वो पड़ोसी देश
- 2:57वर्ल्ड बैंक की अपर मिडिल इनकम कैटेगरी
- 3:01में है भारत से आगे। पिछले दो दिन में दो
- 3:03रिपोर्ट्स आई। ऊपर से दोनों आपस में कोई
- 3:07रिश्ता नहीं दिखाती। एक रिपोर्ट बताती है
- 3:10कि भारत के पांच राज्य प्रति व्यक्ति आय
- 3:12के हिसाब से अपर मिडिल इनकम वाली दुनिया
- 3:15में पहुंच गए हैं। दूसरी रिपोर्ट कहती है
- 3:18कि भारतीय पासपोर्ट का ग्लोबल रैंकिंग में
- 3:22अब 125वा स्थान है। एक रिपोर्ट जेब की बात
- 3:28करती है। दूसरी दुनिया में देश की हैसियत
- 3:31की। लेकिन दोनों को साथ रखिए और फिर तीसरी
- 3:36चीज जोड़िए।
- 3:382011 के बाद भारत की जनगणना नहीं हुई है
- 3:43और फिर आपको भारत की सबसे बड़ी समस्या
- 3:47दिखेगी। हमारे पास नारा है, नक्शा है,
- 3:50जीडीपी है। लेकिन देश की स्थिति की पूरी
- 3:54ताजा और ईमानदार रिपोर्ट नहीं है। यह भी
- 3:58नहीं पता कि वास्तव में हम 2011 के 121
- 4:03करोड़ से बढ़कर कितने हो गए हैं। 130
- 4:07करोड़, 140 करोड़, 150 करोड़ या और
- 4:11ज्यादा। लेकिन असली रिपोर्ट आंकड़ों में
- 4:15छुपी होती है। सरकार आंकड़ों से घबराती
- 4:19दिखती है। क्योंकि आंकड़ों में सच्चाई
- 4:22होती है। वो सच्चाई जिससे सरकार डरती है।
- 4:27पहले बात प्रति व्यक्ति आय की। जिन देशों
- 4:30की प्रति व्यक्ति आय ₹400
- 4:34है, वर्ल्ड बैंक उन्हें अपर मिडिल इनकम
- 4:37वाले देश की श्रेणी में रखता है। और इसको
- 4:41आधार बनाएं तो भारत के कम से कम पांच
- 4:45राज्य इस सीमा को पार कर चुके हैं।
- 4:48₹5,90,000
- 4:50की प्रति व्यक्ति आय के साथ दिल्ली देश
- 4:54में पहले स्थान पर है। ₹5,29,000
- 4:58के साथ कर्नाटक दूसरे, ₹5,13,000
- 5:02के साथ तेलंगाना तीसरे, ₹55,000
- 5:05के साथ तमिलनाडु चौथे और ₹49,000
- 5:10के साथ गुजरात पांचवें नंबर पर है। एक
- 5:14जरूरी बात जिन राज्यों की प्रति व्यक्ति
- 5:17आय आज अपर मिडिल इनकम वाली श्रेणी में है,
- 5:21उनमें कई बातें कॉमन है। क्या है वह बातें
- 5:25बताऊंगा आगे। पहले वह तीन राज्य ऐसे जो
- 5:29अपर मिडिल इनकम में शामिल होते रह गए।
- 5:33महाराष्ट्र सिर्फ ₹750 से उस सीमा से पीछे
- 5:38रह गया। हरियाणा सिर्फ ₹850 से केरल ₹00
- 5:44से यानी भारत के कई राज्य अपर मिडिल इनकम
- 5:48वाले देशों की या तो बराबरी कर रहे हैं या
- 5:51कर चुके हैं। दूसरी तरफ उसी भारत में
- 5:55बिहार का एक व्यक्ति साल भर में 93,000
- 5:59कमाता है। उत्तर प्रदेश का एक व्यक्ति साल
- 6:02भर में ₹1 लाख3,000
- 6:05कमाता है। झारखंड का एक व्यक्ति का औसत है
- 6:09₹1400।
- 6:11इसका मतलब यह हुआ कि इन राज्यों के लोग
- 6:14औसतन हर महीने 7 से लेकर ₹11,000 के बीच
- 6:20कमा पाते हैं। यह आंकड़ा सिर्फ कमाई का
- 6:22अंतर नहीं बताता। दो अलग-अलग भारत दिखाता
- 6:25है। एक भारत जहां स्टार्टअप है, मेट्रो
- 6:29है, टेक पार्क है, एक्सप्रेसवे है, ग्लोबल
- 6:32निवेश है। दूसरा जहां कमाई इतनी कम है कि
- 6:36तुलना नेपाल और कई गरीब अफ्रीकी देशों से
- 6:40इनकी होती है। वहां उद्योग का अभाव है। इन
- 6:44राज्यों में कोई बड़ा इंडस्ट्रियल बेस
- 6:46नहीं है। जो भी इन्वेस्टमेंट आई गुजरात,
- 6:50महाराष्ट्र, तमिलनाडु चली गई। दूसरा
- 6:52शिक्षा और स्वास्थ्य पर इन राज्यों का
- 6:55खर्च और आउटकम दोनों सबसे ज्यादा खराब है।
- 7:00तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बढ़ती जनसंख्या
- 7:04और सबसे जरूरी बात यह कि जो राज्य अपर
- 7:08मिडिल इनकम में है जो ₹400
- 7:13की कमाई वाले हैं उनकी कमाई में पिछले तीन
- 7:17दशकों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। लेकिन
- 7:21जो नीचे के राज्य हैं यह आज भी सारे डबल
- 7:26इंजन सरकारों के दावे के बावजूद पिछड़े
- 7:29हुए हैं। मतलब भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ी
- 7:33है। लेकिन भारत बराबर नहीं हुआ है। पूरे
- 7:37भारत की औसत प्रति व्यक्ति आय ₹62,000
- 7:42है। महीने में लगभग ₹22,000
- 7:46लेकिन उसी भारत के कुछ राज्यों के लोग
- 7:49इससे दो गुजरे से भी ज्यादा कमा रहे हैं।
- 7:52ऐसा इसलिए है क्योंकि जिन राज्यों की
- 7:54प्रति व्यक्ति आय आज अपर मिटल इनकम वाली
- 7:57श्रेणी में है उनमें एक बात कॉमन दिखाई
- 8:00देती है। इन सभी राज्यों ने शिक्षा,
- 8:03स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे
- 8:06ज्यादा ध्यान दिया और अपनी जनसंख्या को
- 8:09कंट्रोल में रखा। जो राज्य इस लिस्ट में
- 8:12है उन सबका टीएफआर अब इसको समझिए जरा यानी
- 8:17टोटल फर्टिलिटी रेट आज रिप्लेसमेंट रेट से
- 8:21कम है। ऐसे समझते हैं कि आबादी को जस का
- 8:25तस अगर रखना हो तो एक मां-बाप के औसतन 2.1
- 8:31बच्चे होने चाहिए। अब 2.1 कैसे हो सकते
- 8:35हैं? आप पूछेंगे तो इसको ऐसे समझिए। 2.1
- 8:39यानी 10 मां-बाप हो तो उनके 21 बच्चे हो।
- 8:43अगर ऐसा होता है तो देश की आबादी जस की तस
- 8:47रहती है। यह बहुत महत्वपूर्ण आंकड़ा है।
- 8:50आने वाले दिनों में इसकी बहुत चर्चा होगी।
- 8:52इसे ध्यान में रखिएगा। आज देश में दिल्ली
- 8:55का टीएफआर सबसे कम है। सिर्फ 1.2
- 9:00और कमाई के मामले में दिल्ली पहले नंबर पर
- 9:03है। जबकि कमाई के मामले में सबसे नीचे
- 9:05खड़े बिहार और उत्तर प्रदेश का टीएफआर
- 9:08पूरे देश में सबसे ज्यादा है। बिहार में
- 9:12आज भी औसतन एक महिला 2.9
- 9:17और यूपी में 2.6
- 9:20बच्चों को जन्म देती है। यानी इन राज्यों
- 9:23की आबादी
- 9:24ज्यादा तो है ही वह तेजी से बढ़ भी रही
- 9:28है। लेकिन देखिए सरकार क्या करने जा रही
- 9:31है। दक्षिण के जो राज्य हैं जिन्होंने
- 9:33शिक्षा पर ध्यान दिया जिन्होंने स्वास्थ्य
- 9:36पर ध्यान दिया। महिलाओं के स्वास्थ्य पर
- 9:38ध्यान दिया। जिन्होंने अपनी आबादी को
- 9:41कंट्रोल में रखा। सरकार डीलिमिटेशन में
- 9:44उनके लिए जो सीटें हैं यानी जो संसद में
- 9:47जो सीटें हैं उनको कम करने या जस का तस
- 9:51रखने वाली है। जबकि जिन राज्यों में
- 9:54जनसंख्या बहुत ज्यादा बढ़ी है वहां वो
- 9:57सीटें काफी बढ़ जाएंगी। इसको लेकर वहां
- 10:00गुस्सा है। जिन राज्यों ने आबादी बढ़ाई,
- 10:04बीमारू राज्य, वह संसद में ज्यादा सीट पाए
- 10:07जाएंगे तो फिर किसी भी पार्टी के लिए
- 10:10हिंदी पट्टी के राज्यों को जीतकर सरकार
- 10:12बनाना आसान हो जाएगा। लेकिन डीलिमिटेशन पर
- 10:16हम बात करेंगे कभी और। आज बात सिर्फ
- 10:20आंकड़ों की सच्चाई से भागती सरकार की है
- 10:24और ऐसा ही एक आंकड़ा है भारत की नई
- 10:28पासपोर्ट रैंकिंग। कुछ दिनों पहले विदेश
- 10:32मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का
- 10:34अंतिम सबूत नहीं है। इस पर मैंने एक
- 10:37वीडियो भी कर रखा है और वो हमारा सबसे
- 10:40ज्यादा देखे जाने वाला वीडियो है। आपने
- 10:43नहीं देखा हो तो जरूर देखिए और आज भारत की
- 10:47पासपोर्ट रैंकिंग देखकर लग रहा है कि
- 10:50अच्छा ही हुआ कि इसे नागरिकता का सबूत
- 10:53नहीं माना गया क्योंकि ग्लोबल पासपोर्ट
- 10:55इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 124वें स्थान
- 10:59से खिसक कर 125वें पर पहुंच गई है। इस
- 11:02इंडेक्स के हिसाब से भारतीय पासपोर्ट के
- 11:04लिए सिर्फ 26 जगहों पर वीजा फ्री पहुंच
- 11:08है। थाईलैंड, बोलीविया, ईरान, इक्वेडोर और
- 11:11इंडोनेशिया जैसे देश भी भारतीयों को वीजा
- 11:15फ्री एंट्री देना बंद कर चुके हैं। वहीं
- 11:18इंडोनेशिया जिसकी यात्रा पर इस वक्त हमारे
- 11:21प्रधानमंत्री गए हुए हैं। फिर वह
- 11:23ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाएंगे।
- 11:26न्यूजीलैंड भारतीय पासपोर्ट रखने वाले 23
- 11:30से 25स
- 11:32लोगों का वीजा एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देता
- 11:35है। ऑस्ट्रेलिया में ऐसा 15 से 20%
- 11:39भारतीयों के साथ होता है। नई रैंकिंग में
- 11:42भारत के पासपोर्ट की स्थिति नामीबिया,
- 11:45घाना और ट्यूनेशिया जैसे देशों से भी खराब
- 11:48है। यह ठीक है कि पासपोर्ट किसी नागरिक की
- 11:52इंसानी कीमत नहीं बताता। कोई रैंकिंग किसी
- 11:55भारतीय की गरिमा तय नहीं कर सकती। लेकिन
- 12:00इससे यह जरूर पता चलता है कि आप कहां जा
- 12:02सकते हैं और कहां नहीं। सिर्फ छुट्टियां
- 12:05मनाने का मामला नहीं है। यह व्यापार है,
- 12:08पढ़ाई है, मरीज का इलाज है। जब लोग
- 12:11अमेरिका जाकर बच्चा पैदा करने की कोशिश
- 12:14करते हैं तो सिर्फ अस्पताल नहीं देखते। वह
- 12:16नागरिकता और पासपोर्ट की ताकत भी देखते
- 12:19हैं। क्योंकि ताकतवर पासपोर्ट का मतलब
- 12:22दुनिया में ज्यादा खुले दरवाजे। तो फिर
- 12:25विश्व गुरु की कहानी में भारतीय पासपोर्ट
- 12:29125वें नंबर पर क्यों है? सरकार विदेशों
- 12:33में भारत की साख के ढोल पीटती है। असलियत
- 12:36यह है कि 2014 में भारत 76वें पोजीशन पर
- 12:40था। 2021 में यह गिरकर 90 हुआ। पासपोर्ट
- 12:45की ताकत बढ़ती क्यों नहीं? इतने दौरों,
- 12:49इतने समझौतों, इतनी वैश्विक बैठकों के बाद
- 12:52भारतीय नागरिक को किसी दूसरे देश में आने
- 12:56जाने की इजाजत आसानी से क्यों नहीं मिलती?
- 12:58शायद इसलिए क्योंकि सरकार रैंकिंग और
- 13:01इंडेक्स वाली यह सच्चाइयां देखना नहीं
- 13:04चाहती। वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026 में
- 13:09भारत का स्थान 116वां। प्रेस फ्रीडम
- 13:12इंडेक्स मेरे लिए बहुत जरूरी। प्रेस के
- 13:14लिए बहुत जरूरी। आपके लिए भी बहुत जरूरी।
- 13:17पिछले साल भारत का स्थान था 151। करप्शन
- 13:22परसेप्शन इंडेक्स में भारत का स्थान है
- 13:2596। लेकिन सरकार इन आंकड़ों को मानती नहीं
- 13:29है। वह इन्हें भारत को बदनाम करने की
- 13:32साजिश कहकर खारिज कर देती है। लेकिन सवाल
- 13:35यह है कि अगर यह आंकड़े भारत विरोध से
- 13:38प्रेरित है तो फिर सच्चे आंकड़ों के लिए
- 13:42भारत सरकार क्या कर रही है? भारत में आखिर
- 13:45पूरी जनगणना 2011 में हुई। 2021 में अगली
- 13:51जनगणना होनी थी लेकिन नहीं हो पाई। कोविड
- 13:54था सही बात है। अब सेंसस 2027 का रेफरेंस
- 14:00डाटा 1 मार्च
- 14:022027 रखा गया है। मतलब 2011 से 2027 तक 16
- 14:08साल का अंतर
- 14:1016 साल में एक बच्चा पैदा हुआ होगा। स्कूल
- 14:13खत्म कर चुका होगा। कॉलेज पहुंच चुका
- 14:16होगा। नौकरी ढूंढ रहा होगा। लेकिन देश के
- 14:19पास उसकी गिनती नहीं होगी। कोविड ने 2021
- 14:24में जनगणना रोक दी। ठीक बात है। कोविड
- 14:26बड़ा संकट था। लेकिन कोविड के बाद भी 5
- 14:30साल निकल गए। 134 देशों ने अपनी जनगणना कर
- 14:35ली है। एक और बात भारत ने इस दौरान कई
- 14:39चुनाव करवाए। वह तो कोविड के दौरान भी
- 14:42नहीं रुके। लेकिन आबादी की पूरी गिनती
- 14:45नहीं हो पाई। भारत में जनगणना की शुरुआत
- 14:47हुई 1881 से। अंग्रेजों ने इसे शुरू
- 14:51करवाया। हर 10 साल बाद गिना जाता है कि
- 14:55देश में कितने लोग हैं। यह लगातार चलता
- 14:58रहा 2011 तक। उसके बाद से गिनती नहीं है।
- 15:03यह महत्वपूर्ण है। कौटिल्य ने भी इस बारे
- 15:06में लिखा है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र का
- 15:09सीधा विचार था कि राज्य को अपनी प्रजा, कर
- 15:13और संसाधनों का हिसाब पता होना चाहिए।
- 15:16क्योंकि बिना गिनती के राज चलाना आंख बंद
- 15:20करके कर वसूलने जैसा है। जनगणना सिर्फ
- 15:24लोगों का नंबर नहीं होता। उससे तय होता है
- 15:27कि कहां स्कूल चाहिए, कहां हॉस्पिटल खुलना
- 15:31चाहिए, कितना राशन चाहिए, किस जिले में
- 15:34कितनी बसें चलनी चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण
- 15:37किस राज्य को कितनी राजनीतिक आवाज मिलनी
- 15:40चाहिए और लोगों को गिने बिना नीति कैसे
- 15:44बना सकते हैं? आप अनुमान के सहारे देश चला
- 15:48सकते हैं। न्याय नहीं कर सकते। जानीमानी
- 15:51पत्रिका द लनसेट ने एक रिपोर्ट लिखी है
- 15:55जिसमें बताया गया है कि जनगणना की देरी से
- 15:58स्वास्थ्य सेवाओं की योजना बनाने
- 16:01कार्यक्रमों को लागू करने पर असर पड़ता
- 16:03है। खासकर स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और यह
- 16:08तय करने में कि किस मद में कितना पैसा
- 16:11खर्च होना चाहिए। लेकिन सेंसस के साथ
- 16:14सरकार क्या कर रही है? आरोप लग रहे हैं कि
- 16:17वहां भी गड़बड़ की जा रही है। जनगणना करने
- 16:20वाले लोगों को गलत आंकड़े फीड करने के लिए
- 16:23मजबूर किया जा रहा है। द हिंदू की रिपोर्ट
- 16:26कहती है कि शौचालयों को लेकर फील्ड
- 16:29वर्कर्स को यह रिपोर्ट करने का दबाव था कि
- 16:32घरों में शौचालय हैं चाहे वे बने हो या
- 16:35नहीं। अगर कोई पड़ोसी का शौचालय इस्तेमाल
- 16:38करता है या सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल
- 16:41करता है तो भी फॉर्म में लिखा जा रहा था
- 16:43कि उसकी शौचालय तक पहुंच है। इसी तरह जिन
- 16:48घरों की छत मिट्टी या टीन की है उनके नाम
- 16:52के आगे पक्का घर लिखा जा रहा है। जिन
- 16:55गांवों में 10 फीसदी घरों में बिजली है,
- 16:59उस पूरे गांव को इलेक्ट्रिफाइड बताया जाता
- 17:02है। यह सरकार की नीति है। जब 2018 में
- 17:06सरकार ने कहा कि हर गांव में बिजली पहुंच
- 17:09चुकी है तो फोब्स पत्रिका ने बताया कि
- 17:12करीब 3 करोड़ 10 लाख घरों में अभी भी
- 17:16अंधेरा है। अगर यह आरोप सही है तो इसका
- 17:20मतलब यह है कि मुश्किल से तो सरकार आंकड़े
- 17:24जमा करती है लेकिन उसमें भी सच्चाई जानने
- 17:28की कोशिश कमी होती है। बल्कि उसे छिपाने
- 17:31की कोशिश ज्यादा होती है। आंकड़े आईना
- 17:35होते हैं। मगर आईने को साफ रखिएगा तभी
- 17:39चेहरा साफ दिखाई देगा। उसे धुंधला रखिएगा
- 17:43तो सिर्फ नारा अच्छा लगेगा। देश वहीं का
- 17:47वहीं रहेगा। क्योंकि लोकतंत्र सिर्फ
- 17:49नंबरों से नहीं चलता जो सरकार को अच्छे
- 17:52लगते हैं। जैसे दिल्ली में कितने सांसद
- 17:55तोड़े जाए, कितने विधायक तोड़े जाए, कितने
- 17:58नंबर हो तो बिल पास हो जाए, दो तह बहुमत
- 18:01कैसे हासिल किया जाए? देश की सच्चाई बिहार
- 18:04में स्कूल ना जाने वाले बच्चों का आंकड़ा
- 18:07बताता है। उत्तर प्रदेश में बेरोजगार
- 18:10युवाओं की संख्या बताती है। मध्य प्रदेश
- 18:13में डॉक्टरों की कमी बताती है। वीजा
- 18:16रिजेक्शन झेलकर हर साल करोड़ों रुपए गवाने
- 18:19वाले भारतीय बताते हैं। भारत को सिर्फ उस
- 18:22बिल बोर्ड के नीचे नहीं खड़ा होना चाहिए
- 18:24जिस पर लिखा हो दुनिया की पांचवी सबसे
- 18:27बड़ी अर्थव्यवस्था। भारत को असली आंकड़ों
- 18:31के आईने के सामने खड़ा होना चाहिए। वो
- 18:34आईना जिसमें फिलहाल सरकार तो खुद को देखना
- 18:37ही नहीं चाहती। शायद इसलिए क्योंकि इस
- 18:40आईने में दिख रही हकीकत डरावनी है। सच से
- 18:44डरने की जरूरत नहीं। सच से ही सही नीति
- 18:48बनती है। सच से ही मजबूत देश बनता है और
- 18:52सच से ही असली विश्व गुरु बनते हैं। आज
- 18:57इतना ही संदेश देखते हैं कल के वीडियो के
- 19:02और नितिन्या के वीडियो के। नतिन्याऊ का
- 19:05वीडियो जिस दिन अपलोड किया 24 घंटे में
- 19:07देखने वालों की संख्या थी सिर्फ 7000।
- 19:11पर आज यह आंकड़ा पहुंच गया है 1 लाख। पहला
- 19:15संदेश है साज कुमार का जो कह रहे हैं खुला
- 19:18बेबाक स्वतंत्र निष्पक्ष विश्लेषण धन्यवाद
- 19:22दिबांग जी धन्यवाद आप ऐसे ही चैनल देखते
- 19:25रहिए और अपने संदेश भेजते रहिए दूसरा
- 19:29संदेश है अनवर खान है कह रहे हैं दिबांग
- 19:31भाई बचपन से देख रहा हूं आपको देख रहा हूं
- 19:34आपके खून का एक-एक बूंद ईमानदारी से कमाया
- 19:38वाला है। वाह अनवर जी आप मुझे बचपन से देख
- 19:41रहे हैं। काफी बदल गया ना मैं। मोहम्मद
- 19:44वसीम अकरम कह रहे हैं आपने जो संदेश दिया
- 19:47हम गौर से सुनते समझते हैं। संदेश बताने
- 19:51के लिए आपका शुक्रिया। और अगला संदेश है
- 19:54शहंशाह हुसैन का। यह लिखते हैं दिवंग जी
- 19:57मेरी नजर में आप हमेशा से खबरों के एक
- 20:00अत्यंत बेबाक, साहसिक और समझदार विश्लेषक
- 20:03रहे। बधाई स्वीकार करें। धन्यवाद हुसैन
- 20:06साहब और अब आखिरी संदेश प्रकाश चौरसिया
- 20:09थाईलैंड से आपकी न्यूज़ देखता हूं तो बहुत
- 20:13अच्छा लगता है। धन्यवाद आप वहीं रहते हैं
- 20:16या घूमने गए हैं बताइएगा। आज इतना ही बेल
- 20:20आइकॉन दबाएं सब्सक्राइब करें। बताएं आपको
- 20:23यह कार्यक्रम कैसा लग रहा है। यह भी बताएं
- 20:25कि आप क्या देखना चाहेंगे और आंकड़ों की
- 20:28बात हुई थी तो आप बताइए कि क्या आपको वजह
- 20:31लगती है कि सरकार आंकड़ों से इतना डरती
- 20:34घबराती है?
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This page contains the full transcript of एक भारत के दो चेहरे क्यों? विश्वगुरु की पोल खोलते आंकड़े ! | Dibang by Dibang Official, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 2,718 words across 357 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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