राम का स्वरूप और पुराणों का गुप्त ज्ञान | Devdatta Patnayak | Podcast | Tilak Varta — Transcript
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- 0:00हमारी संस्कृति, हमारे संस्कार सदा रहे
- 0:03हमारे साथ। सब्सक्राइब करें तिलक।
- 0:08राम में कभी आक्रमण नहीं होता। वो हमेशा
- 0:10शांति रहता है। उनके चेहरे में कभी
- 0:12क्रूरता नहीं होगी। कभी गुस्सा नहीं होगा
- 0:15क्योंकि वो सनातन के स्वरूप है। मैं
- 0:17बड़ी-बड़ी बातें बोलता हूं तो लोग बहुत
- 0:19इंप्रेस हो जाते हैं। लेकिन इंप्रेस नहीं
- 0:20करना है मुझे। समझाना है। तो बच्चे को भी
- 0:24समझ में आ जाएगा। श्री विद्या उपासना और
- 0:26श्री विद्या है क्या? जहां शिव और शक्ति
- 0:29का यूनियन होता है और श्री यंत्र इस
- 0:32यूनियन को एक ज्योमेट्रिकल फॉर्म से समझा
- 0:36रहे हैं। इससे उत्पत्ति क्या होती है? दो
- 0:38चीज उत्पत्ति होती है। लक्ष्मी की और
- 0:40सरस्वती की। विद्या मुश्किल है। सरस्वती
- 0:43बहुत ही मुश्किल है। देखिए शिवजी की कहानी
- 0:46क्या है? वो कामांतक है। उन्होंने कामदेव
- 0:50को अपनी तीसरी आंख से जला दिया था। भस्म
- 0:53कर दिया था और भूत अपने शरीर पर उन्होंने
- 0:56लगा दिया था।
- 1:00आज हमारे विशेष अतिथि हैं जानेमाने आख्यान
- 1:03शास्त्री डॉक्टर देवदत्त पटनायक साहब।
- 1:05आपका बहुत-बहुत स्वागत है सर। नमस्ते।
- 1:08नमस्ते सर। नमस्ते। तो क्योंकि आपका शिव
- 1:11में बड़ा अध्ययन है। तो सबसे पहले तो सब
- 1:14समझना है कि शिव तत्व है क्या? लेकिन उससे
- 1:17ठीक पहले क्योंकि कहते हैं शक्ति के बिना
- 1:20शिव भी नहीं है। तो हमको शक्ति के बारे
- 1:23में समझना है आपसे। आपके शब्दों में श्री
- 1:26विद्या, उपासना और श्री विद्या है क्या?
- 1:29देखिए आपने बहुत बड़े-बड़े शब्द इस्तेमाल
- 1:31किए हैं। शिव, शक्ति, श्री विद्या तो ये
- 1:35बहुत बड़े-बड़े शब्द है। हमेशा सरलता से
- 1:38जाना चाहिए। जब हम सनातन की बात करते हैं
- 1:41तो सरलता से शुरुआत होती है। एक अजीव
- 1:44वस्तु और जीव वस्तु में फर्क क्या है? एक
- 1:47अजीब पत्थर होता है। उसमें जीव नहीं है।
- 1:50वृक्ष पेड़ में जीव होता है। तो अगर कहीं
- 1:54पर भी एक हराभरा पेड़ दिख लिया तो आप
- 1:58पूछना है कि वो हम उसे जीवित क्यों कहते
- 2:00हैं? हम इसलिए जीवित कहते हैं क्योंकि उसे
- 2:03भूख लगती है। पर क्योंकि उसे भूख लगती है।
- 2:06उसके पत्ते निकल आते हैं और वो सूरज की
- 2:09तरफ जा रही है। उसके यू नो रूट्स निकलते
- 2:13हैं और वो कहीं पानी की तरफ जा रहे हैं।
- 2:16तो इससे पता चलता है कि यह जीवित है। कोई
- 2:20पशु को हमने देख लिया वह चरने जा रहा है
- 2:23या शिकार करने जा रहा है। हम रोज सुबह
- 2:26उठते हैं हम तो लेटे रह सकते हैं। लेकिन
- 2:29फिर याद रहता है कि घर का घर चलाना है
- 2:32इसलिए जॉब करना है, बिजनेस करना है। यानी
- 2:35कि जहां जीव होता है, वहां भूख होती है।
- 2:41यह याद रखना है। जब हम आत्मज्ञान कहते
- 2:44हैं, यानी कि भूख का ज्ञान। और भूख से ही
- 2:47सब कुछ चलता है।
- 2:50तो भूख को मिटाने के लिए हमें भोज भोग
- 2:53चाहिए।
- 2:56तो भोग को हम शक्ति कहते हैं। लेकिन क्या
- 2:59हम भूख पर विजय प्राप्त कर सकते हैं? उसे
- 3:03हम शिव कहते हैं। तो शिव और शक्ति जब तक
- 3:07आप भूख नहीं समझोगे तब तक ना शिव समझ में
- 3:11आएगा ना शक्ति समझ में आएगा।
- 3:14भूख किसके लिए होती है? आप कहोगे कि मुझे
- 3:18जिंदगी में पैसे चाहिए, पावर चाहिए, फेम
- 3:24चाहिए,
- 3:26ऐश्वर्य चाहिए यानी कि श्री चाहिए।
- 3:30लेकिन दूसरे प्रकार का भूख होता है।
- 3:33जिज्ञासा होती है। मुझे ज्ञान चाहिए। मुझे
- 3:35समझना है दुनिया चलती कैसे है? दुनिया का
- 3:39ये विज्ञान का मतलब क्या है? साइंस का
- 3:42मतलब क्या है? दुनिया में तत्व क्या है?
- 3:45एक क्यूरियोसिटी होती है। हम इन्वेंशन
- 3:49करते हैं, डिस्कवरी करते हैं, टेक्नोलॉजी
- 3:52की तरफ जाते हैं। यानी कि विद्या चाहिए।
- 3:54तो भूख दो प्रकार के होते हैं। एक श्री के
- 3:57लिए, एक विद्या के लिए। लेकिन चाहिए हमें
- 4:01भोग वो है शक्ति। लेकिन अगर भूख से पूरी
- 4:04मुक्ति प्राप्त करनी है तो आपको शिव की
- 4:06तरफ जाना है। बस ये एक चीज भूख अगर समझ
- 4:10लिया तो सनातन समझ में आया। हां। क्योंकि
- 4:13सनातन का मतलब है भूख का ज्ञान। तो भूख
- 4:16हुआ तो वो भोग की तरफ दौड़ता है तो वह
- 4:19भोगी बन गया। वो भूख को मिटाना चाहता है
- 4:23तो वो योगी बन गया। बस उतना ही सरल है।
- 4:26इतना मुश्किल नहीं है। श्री विद्या उपासना
- 4:29गोपनीय क्यों होती है? देखिए जब ज्ञान
- 4:32होता है तो ज्ञान दो प्रकार के होते हैं।
- 4:36एक जिससे लोगों का उद्धार होता है
- 4:40और एक
- 4:43जो आपको बर्बाद कर सकता है। हम जो क्या
- 4:48होता है जब भी कोई भी शक्ति होती है जो भी
- 4:50नॉलेज होता है तो देखिए घर में आपके घर
- 4:53में आकर मैं आपको सिखा दूं पेड़ पौधे में
- 4:58क्या ज्ञान है तो आप उसे औषधि भी बना सकते
- 5:00हैं जहर भी बना सकते हैं। दोनों का ज्ञान
- 5:03होता है। तो हर ज्ञान गुप्त होता है। हम
- 5:06उसी को देते हैं ज्ञान जो इसे संभाल पाए
- 5:09और कुछ नहीं है उसमें बात कि आप में वह
- 5:11क्षमता है उसे संभालने की कि नहीं जैसे
- 5:16अगर आप रामायण देखो तो रामायण में
- 5:19वेदाचार्य संस्कृत ज्ञानी कौन है बताइए
- 5:23बात ही संस्कृत के ज्ञानी हैं चारों वेद
- 5:26के ज्ञान है आयुर्वेद का ज्ञान है ज्योतिष
- 5:30शास्त्र का ज्ञान है कौन है ये पात्र
- 5:32रामायण में हनुमान जी रावण भूल गए अरे हां
- 5:37मतलब रावण तो महाज्ञानी सही बात है। लेकिन
- 5:40रावण के पास भी श्री विद्या है। हनुमान के
- 5:44पास भी श्री विद्या है। लेकिन एक खलनायक
- 5:47है और एक भगवान है। दोनों में अंतर क्या
- 5:51हुआ? दोनों के पास ज्ञान है। दोनों
- 5:54संस्कृत जानते हैं। दोनों वेद जानते हैं।
- 5:57दोनों पुराण जानते हैं। दोनों शास्त्र
- 5:59जानते हैं। अंतर क्या हुआ दोनों में? एक
- 6:02दुरुपयोग कर रहे हैं। क्योंकि एक यह पूरी
- 6:05जो ज्ञान है वह अपना भूख नहीं मिटा पाया।
- 6:09उसका भूख जो है बढ़ता गया बढ़ता गया और जब
- 6:12भूख बढ़ती है तो अहंकार निर्माण करता है।
- 6:16जो भूख पर विजय प्राप्त करता है वो हनुमान
- 6:19की यात्रा करता है। तो बस रामायण की कथा
- 6:22अगर सुने गौर से सुने ये लोग भूल जाते हैं
- 6:26कि संस्कृत बोलने वाले केवल दो है वहां
- 6:28पे। एक हनुमान है जो वन में रहता है जो
- 6:32कुछ नहीं चाहता। अगर हम पूछे कि हनुमान
- 6:33कीत्वाकांक्षा क्या है? आपको कुछ
- 6:36महत्वाकांक्षा नहीं मिलेगी। वो सुखी है
- 6:38जंगल में। वो चाहते तो सुग्रीव को भी पटक
- 6:41के किष्किंदा के राजा बन जाते। रावण को
- 6:44पटक के रावण लंका के राजा बन सकते थे। कुछ
- 6:47नहीं कर रहे। वो सेनापति नहीं है। कुछ
- 6:51नहीं है। बस वहीं पे साधारण रूप में लेकिन
- 6:54हम कहते हैं कि नवनिधि है उनके पास। अष्ट
- 6:57सिद्धि है उनके पास लेकिन कर क्या रहे हैं
- 7:00जंगल में कदड़ी वन में केला खा रहे हैं
- 7:03सुखी है कथा सुन रहे हैं कथा सुन रहे हैं
- 7:07तो वो है हनुमान तो जब लोग कहते हैं मैं
- 7:09श्री विद्या का ज्ञान करता हूं तो मैं
- 7:10हमेशा यह देखता हूं यह रावण की तरफ जा रहा
- 7:12है हनुमान की तरफ जा रहा है ज्यादातर रावण
- 7:16की तरफ जा रहा है क्योंकि वो अहंकार इतनी
- 7:19मायावी है वो ऐसे आपको पकड़ लेगा कि आप
- 7:22अपने आप को समझाने लगोगे नहीं नहीं मैं
- 7:24कुछ बड़ा काम कर रहा हूं
- 7:26इसलिए बहुत गुरु जो होते हैं वो इतने
- 7:28अहंकार से बात करते हैं। आजकल YouTube में
- 7:31बहुत गुरु बात करते हैं कि हमको गढ़ सी
- 7:34देखिए गढ़ता से घमंड आता है कि मेरे पास
- 7:38कुछ है जो तुम्हारे पास नहीं है। मेरे पास
- 7:40वो मोती है। मेरे पास वो कोहिनूर है। मेरे
- 7:43पास वो चीज है। ज्ञान है जो तुम्हारे पास
- 7:45नहीं है। तो ये क्या होता है? इससे एक
- 7:47असमानता आ जाती है कि मैं ज्ञानी तुम
- 7:51अज्ञानी। यह जो असमानता है यह पदानुक्रम
- 7:56जो बनता है हायरार्की बनता है यह अहंकार
- 7:58के चिन्ह है तो कोई भी बातों में अगर आप
- 8:02देख लो कि यह आ रहा है कोई भी गुरु अपने
- 8:04आप को मठाधीश बनाकर ऊपर बैठने लगता है तो
- 8:08फिर रावण की याद रखनी चाहिए कि हनुमान
- 8:10अपनी पूंछ से उसके ऊपर बैठ गया कि मठाधीश
- 8:15मत बनो जो वेद का ज्ञान होता है वो नम्रता
- 8:18लाता है शांति लाता है जहां जाएगा शांति
- 8:22इसलिए हमेशा यज्ञ के पश्चात हम शांति
- 8:24शांति शांति कहते जब शांति नहीं लाएगा वो
- 8:28वेद नहीं है वो श्री विद्या नहीं है ये
- 8:33पूजा ये जो यंत्र होते हैं उनका काम केवल
- 8:37एक है जहां जाए समृद्धि लाएगी शांति लाएगी
- 8:42नहीं लाई तो वो रावण की तरफ आप जा रहे हो
- 8:44ना कि हनुमान की तरफ
- 8:47आपने कहा हनुमान जी पूछ से बता देते हैं
- 8:51और सिखा देते हैं क्या शक्ति है। एक तो
- 8:53हनुमान जी का जो स्वरूप हम पढ़ते आए हैं।
- 8:56क्या वैसा ही हनुमान जी का स्वरूप था कि
- 8:58कुछ अलग था? मतलब वो सच में वानर स्वरूप
- 9:01थे या हमने सिर्फ पढ़ा पढ़ते-पढ़ते और कहा
- 9:03गया कि वन में रहते थे वो वानर हैं। ये
- 9:06थोड़ा सा मैं आपसे समझना चाहता हूं। देखिए
- 9:08रामायण अभी हम जब कहते हैं कि रावण का 10
- 9:12सर है। 20 हाथ है। क्या इसे रूपक के हिसाब
- 9:15से ले या इसे यथार्थ माने?
- 9:20तो यह मनुष्य के ऊपर निर्भर है। कुछ लोगों
- 9:23को रूपक पसंद है। लेकिन अगर आप पिक्चर में
- 9:25बना दोगे तो अच्छा लगता है। स्टाइल लगता
- 9:27है। उसके बिल्कुल विपरीत हम क्या बताएंगे?
- 9:31एक एक तरफ आपने एक रावण को जन्म दिया है
- 9:34जिसके 10 सर हैं। 20 हाथ हैं। पुष्पक
- 9:36विमान में बैठा है। सोने की नगरी में बैठा
- 9:39है। उसको विपरीत अगर आप मनुष्य दिखाएंगे
- 9:42तो राम जी तो खड़े हैं वहां पे। लेकिन जब
- 9:44वाल्मीकि जी कथा लिख रहे हैं वो मनुष्य के
- 9:49जैसे लेकिन मनुष्य से थोड़ा नीचा दिखाना
- 9:53एक ऐसे एक जंतु को दिखाना चाहते हैं लेकिन
- 9:57देखने में बिल्कुल पशु लगता है।
- 10:00लेकिन ज्ञान देवता से ज्यादा है।
- 10:04जैसे आप फिल्म इंडस्ट्री में हम एक पात्र
- 10:06बनाते हैं। तो एक पात्र उन्होंने बनाया कि
- 10:09दिखता है बिल्कुल वानर जैसा इधर-उधर कूद
- 10:11रहा है। लेकिन जब मुंह खोलता है तो आपको
- 10:15लगता है बाप रे कौन है यह सब ज्ञान है
- 10:19उसके पास लेकिन एकदम मनुष्य से भी नीचे
- 10:22चला जा रहा है एकदम पशु की भांति व्यवहार
- 10:26कर रहा है लेकिन है नहीं पशु देखिए जब
- 10:29रावण शिवजी को लाना चाहते थे श्री लंका को
- 10:33बल जबरदस्ती
- 10:35लंका को उठाकर तो शिवजी ने उसे कहा था कि
- 10:39एक दिन मैं स्वयं तुम्हारे यहां आऊंगा
- 10:43और तुम मेरा निरादर करोगे। तो हनुमान जी
- 10:48आए लेकिन इसने क्या किया? पूंछ जला दी।
- 10:52तो भगवान जब स्वयं आते हैं तो अहंकार आपको
- 10:55अंधा बना देता है और आपको दिखता नहीं है
- 10:58कि ईश्वर आए हैं। और बिल्कुल शिवजी जैसा
- 11:01कोई ईगो नहीं, कुछ नहीं। फल चुराते हैं
- 11:05उसके आंगन से ना वो उसके जो गार्डन से तो
- 11:10कहता है कि तुमने रावण के आंगन से चोरी
- 11:12किया है फल तो बोलता है कि तुमने किसी
- 11:14दूसरी की पत्नी की चोरी किया है वो बड़ा
- 11:16चोर है और मुझे चोर बोल रहे हो मैं तो पशु
- 11:19हूं पशु का चोर पशु चोर नहीं बन सकता
- 11:23तुमने ये दायरा बनाया है कि ये मेरा है
- 11:25तुम्हारा है तो संस्कृति शब्द में मेरा
- 11:28तेरा आता है प्रकृति में नहीं ये
- 11:31बड़ी-बड़ी बातें हैं रामायण सरल तरीके से
- 11:34बताया है वाल्मीकि जी ने। इसलिए उसे पंचम
- 11:36वेद कहा जाता है। तो लेकिन हम क्या करते
- 11:39हैं? हम केवल वो ड्रामा देखते हैं, एक्शन
- 11:41देखते हैं, धनुष देखते हैं। ये जो
- 11:44छोटी-छोटी बातें होती है, सूक्ष्म बातें
- 11:47होती है। इसको कोई समझता नहीं। जब वो
- 11:51रामायण का पाठ होता है तो लोगों को ड्रामा
- 11:53पसंद आता है। ड्रामा थोड़ी ना समझना है।
- 11:56रावण समझना है। रावण का अर्थ क्या है? वो
- 11:58रावण हमारे भीतर है। हनुमान भी हमारे भीतर
- 12:01है। राम जी भी हमारे भीतर है। लक्ष्मण भी
- 12:03हमारे भीतर है। किष्किंदा भी हमारे भीतर
- 12:05है। पूरी कहानी जब समझते हैं तब जाके
- 12:08सनातन का ज्ञान आता है। हर समय हर दशक में
- 12:12या सदी में जो उस समय के लोग रहे होंगे,
- 12:17जागरूक लोग रहे होंगे, हमेशा से श्री
- 12:19विद्या की उपासना चाहते होंगे क्योंकि
- 12:21उनको भोग चाहिए होगा। और मुझे लगता है ये
- 12:24इस समय का वो टाइम है जब हर कोई चाहता है।
- 12:27तो जो आज का जो आम व्यक्ति है क्या हर
- 12:30व्यक्ति विद्या की उपासना कर सकता है?
- 12:33देखिए श्री विद्या का यंत्र ठीक से देखना
- 12:37है। यहां पे त्रिकोण होता है। हम
- 12:41उत्तर की दिशा में दक्षिण की दिशा में
- 12:43त्रिकोण होता है। भूपुर होता है। वो
- 12:46तांत्रिक यंत्र होता है। लेकिन ये क्या
- 12:48है? जैसे एक सिग्नल होता है। आजकल हम
- 12:49इमोजी भेजते हैं ना लोगों को यंत्र एक
- 12:52इमोजी है। बस सनातन इमोजी इससे आपको समझ
- 12:56में आएगा एक पिक्चर देखने से मैं अगर मुझे
- 12:59देवी दिखाना है तो मैं एक त्रिकोण बनाऊंगा
- 13:01दक्षिण की दिशा में। हम अगर मुझे शिवजी
- 13:04दिखाना है तो मैं एक त्रिकोण बनाऊंगा
- 13:06उत्तर की दिशा में। तो जैसे कैलाश पर्वत
- 13:08त्रिकोण है उत्तर की दिशा में जाता है।
- 13:11ध्रुव की तारा की तरफ।
- 13:13अगर आप पानी को ऐसे डालेंगे पानी एक ग्लास
- 13:16से अगर मैम ने पानी डाला तो आप देखोगे एक
- 13:18त्रिकोण का आकार बन जाता है नीचे की तरफ
- 13:20जा रहा है तो ये सब यंत्र है अगर आपने
- 13:24विग्रह देखा विग्रह यानी कि मूर्ति देखी
- 13:28श्री यंत्र श्री विद्या की तो वो कामाक्षी
- 13:30देवी के रूप लेती है कामाख्या रूप लेती है
- 13:33हाथ में क्या है उनके हाथ में एक धनुष है
- 13:38लेकिन यह शुगर केन से बनाया है
- 13:43तो शुगर केन को हिंदी में क्या बोलेंगे?
- 13:46गन्ना। गन्ने का गन्ने का वो होता है।
- 13:49मराठी में इु बोलते हैं। तो मुझे मराठी
- 13:51में तो इवाकू शब्द यहां से आता है। तो इु
- 13:55यानी कि गन्ना। अच्छा गन्ने से वो शब्द
- 13:57आया था। हां भारत में वो साउथ ईस्ट एशिया
- 14:00से इंडिया आया था और भारत में हम गन्ना
- 14:02बनाते थे। तो इवाकू को बहुतेंस दिया गया।
- 14:05मीठा निकलता है वहां से। अभी वो एक हाथ
- 14:08में गन्ना है, दूसरे हाथ में फूल है।
- 14:12और यह कामदेव के चिन्ह है। तो देखिए शिवजी
- 14:16की कहानी क्या है? वो कामंतक है। उन्होंने
- 14:19कामदेव को अपनी तीसरी आंख से जला दिया था।
- 14:23भस्म कर दिया था और भूत अपने शरीर पर
- 14:26उन्होंने लगा दिया था। और वह कैलाश पर्वत
- 14:30में चले जाते हैं और बैठ जाते हैं ध्यान
- 14:33करने। तब शक्ति आती है लेकिन उनके हाथ में
- 14:37वही चिन्ह है जो काम के साथ जोड़ा गया है।
- 14:40गन्ना फूल और
- 14:45पैरेट होता है तो सुख तो सुख होगा तो तोता
- 14:51जो होता है तो वो पैरेट है। ये तीन चिन्ह
- 14:54कामदेव के चिन्ह है। वही चिन्ह को देवी
- 14:59अपनाती है और स्त्री के रूप में जाकर शिव
- 15:02के पास जाकर कहती है कि कामांतक बनने से
- 15:06भूख को मिटाने से आप दुनिया को बर्बाद कर
- 15:08दोगे क्योंकि जीव अजीव बन जाता है। जीव के
- 15:13लिए भोग चाहिए। आपको भोग की दुनिया में
- 15:17आना पड़ेगा और वह कामेश्वरी बनती है और
- 15:21शिव जी को कामेश्वर बनाते हैं और उनका
- 15:24विवाह होता है। इसलिए उसे कल्याण कहते हैं
- 15:28जहां शिव और शक्ति का यूनियन होता है और
- 15:31श्री यंत्र इस यूनियन को एक ज्योमेट्रिकल
- 15:35फॉर्म से समझा रहे हैं। वही यूनियन को
- 15:38इससे उत्पत्ति क्या होती है? दो चीज
- 15:40उत्पत्ति होती है। लक्ष्मी की और सरस्वती
- 15:43की। लक्ष्मी को हम श्री कहेंगे, सरस्वती
- 15:46को हम विद्या कहेंगे। तो इसका उपासना
- 15:48किसके लिए कि ज्ञान भी हो और धन भी हो। तो
- 15:52हर आदमी को धन चाहिए। ज्ञान कितने लोगों
- 15:55को चाहिए बताइए?
- 15:57ज्ञान कोई नहीं। आप Instagram देखते हैं,
- 16:00लोग देखते हैं। उनको टीआरपी रेटिंग्स
- 16:02चाहिए। ज्ञान की बातें किसी को नहीं सुनना
- 16:04है। सबको धन चाहिए। धन चाहिए, टाइम पास
- 16:08चाहिए, एंटरटेनमेंट चाहिए, भोग की वस्तु
- 16:10चाहिए। हम कभी ज्ञान को भोग नहीं समझते।
- 16:14नाच गाना पसंद है। लेकिन वो जो कथा के
- 16:19अंदर जो रहस्य होता है ये सीखने की कोई
- 16:22इच्छा नहीं है। मैं कितने फिल्म इंडस्ट्री
- 16:25में तो मुझे बुलाते रहते हैं। हमको सीरियल
- 16:27बनाना है रामायण के ऊपर। लेकिन ज्यादातर
- 16:29खर्चा किस पे होगा? सीजीआई के ऊपर कि वो
- 16:31तीर्थ मैं बोल रहा हूं डायलॉग ठीक नहीं
- 16:34है। सर इससे टीआरपी रेटिंग नहीं चलेगा।
- 16:38ना तो उनको धन से मतलब है। तो मैं हमेशा
- 16:40कहता हूं लोगों को कि टीवी वाले रामायण मत
- 16:42देखो। ठीक है? अभी जो फेमस रामानंद सागर
- 16:46की रामायण है वहां पे अगर आप ध्यान देखें
- 16:49वहां पर तुलसीदास जी के दोहे बताए गए हैं।
- 16:52उससे हमें प्यारा है। जब हम बोल रहे हैं
- 16:55ना वो क्या मंगल भवन तो ये लाइन किसने
- 16:59लिखा है? तुलसीदास जी ने। हम उससे प्रेरित
- 17:02हो रहे हैं। तो वो 400 500 साल पहले लिखी
- 17:06गई भक्ति से लिखी गई जो काव्य है उससे हम
- 17:09प्रेरित हो रहे हैं। आजकल लेखकों को बहुत
- 17:12मुश्किल होता है क्योंकि वो प्रोडक्शन
- 17:14हाउस का डिमांड होता है कि हिट चलनी
- 17:16चाहिए। हीरो बनना चाहिए। हमें लॉर्ड ऑफ द
- 17:18रिंग्स बनाना है। हमें हैरीपॉटर बनाना है।
- 17:21ज्ञान विद्या कौन सोच रहा है? श्री सोच
- 17:23रहा है।
- 17:25विद्या अगर होगी तो वो शांत करेगा।
- 17:27उत्तेजित नहीं करेगा। अगर उत्तेजित नहीं
- 17:29करेगा तो फिर बॉक्स ऑफिस कैसे चलेगी?
- 17:32बॉक्स ऑफिस हमको तो योद्धा चाहिए। योद्धा
- 17:35चाहिए। तो हम राम को भी आक्रमक रूप में
- 17:38दिखाएंगे। राम में कभी आक्रमण नहीं होता।
- 17:40वो हमेशा शांति रहता है। उनके चेहरे में
- 17:43कभी क्रूरता नहीं होगी। कभी गुस्सा नहीं
- 17:46होगा। क्योंकि वो सनातन के स्वरूप है। जो
- 17:49भगवान के स्वरूप है वो कभी गुस्सा क्यों
- 17:51आएगा? वो सब बच्चों के साथ डील कर रहे
- 17:53हैं। क्या बात है? महाशक्तिशाली लेकिन
- 17:55शांत।
- 17:57क्योंकि महाशक्तिशाली इसलिए शांत
- 18:02जो शक्तिशाली के चेहरे में आक्रमण आएगा वह
- 18:04थोड़ी ना शक्तिशाली है। वो तो मूर्ख है।
- 18:09इसलिए असुरों का चेहरा हमेशा गुस्सा भरा
- 18:12होता है। देवताओं के चेहरे में हमेशा शांत
- 18:14होता है। आप एलिफेंटा केव्स में जाइए।
- 18:17वहां पे रुद्र रूप देखेंगे। शिव जी का
- 18:19बड़ा रुद्र रूप का मूर्ति है और हाथ में
- 18:22ऐसे हाथ करके ललिता रूप में अपनी पत्नी को
- 18:25कंफर्ट कर रहे हैं कि टेंशन मत लो ये मेरा
- 18:28लीला है ये जैसे थिएटर में नाच आप हीरो
- 18:32विलेन का रोल करते हो लेकिन सचमुच में
- 18:34गुस्सा थोड़ी ना आता है आप थिएटर में किसी
- 18:36को मार रहे हो बॉक्सिंग कर रहे हो लेकिन
- 18:39अंदर तो शांत है ना वो तो एक्टिंग है तो
- 18:41भगवान भी एक्टिंग कर रहे हैं ताकि बच्चे
- 18:43समझ जाए
- 18:46तो वो जब राम रावण से बात कर रहे हैं तो
- 18:48रावण तो बच्चा है। वो शिवजी को भी नहीं
- 18:51पहचान पाता है। तो राम एक बच्चे से डील कर
- 18:55रहे हैं। हमने उसे बहुत बड़ा माना है। अभी
- 18:58ये सब बातें हमारी टीवी सीरियल में बता
- 19:02नहीं सकते कि देखिए राम लीला कर रहे हैं।
- 19:05अवतरित हुए हैं ताकि रावण का उद्धार हो।
- 19:09अहल्या का उद्धार हो। श्री गौतम ऋषि अपनी
- 19:13पत्नी को क्षमा नहीं कर सक रहे। और राम
- 19:16बोल रहे हैं अरे छोटी-छोटी बातों में इतनी
- 19:18बड़ी गुस्सा क्षमा करो लोगों को क्षमा
- 19:22नहीं करोगे तो तुम
- 19:25दुनिया कैसे चलाओगे
- 19:28राम राज्य बनाते हैं लोगों को लेकिन लोग
- 19:30क्या करते हैं सीता के चरित्र को ले बात
- 19:33करते हैं देखो तुमको श्री दिया गया है राम
- 19:36राज्य दिया गया है तो तुम्हें सुखी
- 19:38ग्रेटट्यूड होना चाहिए ना कृतज्ञता होनी
- 19:40चाहिए कृतज्ञता नहीं है तुम राजा की पत्नी
- 19:45के ऊपर बातें कर रहे हैं। मनुष्य ऐसा है
- 19:48क्योंकि विद्या नहीं है। केवल हम श्री के
- 19:50पीछे भाग रहे हैं। अगर कृतज्ञता होती तो
- 19:54वो राम सियाराम को देख के सुखी रहते राम
- 19:56राज्य में। लेकिन नहीं उन्होंने भी राम और
- 19:59सीता को सेपरेट कर दिया। तो ये सब बातें
- 20:04सनातन वाल्मीकि जी बोल नहीं रहे हैं। बोल
- 20:07रहे समझने वाले को इशारा काफी है। मैं कथा
- 20:10बताऊंगा। कथा का विश्लेषण हम नहीं करेंगे।
- 20:14आख्यान होगा भाष्य नहीं होगा भाष्य आपको
- 20:19करना है तो यह सब जो बातें हैं क्योंकि
- 20:23मैं आख्यान शास्त्री में ये बहुत ही सरल
- 20:25है इतना मुश्किल नहीं है उसका अनुभव करना
- 20:28उससे जीना मुश्किल है बहुत मुश्किल है
- 20:31छोटी हमें भी गुस्सा आ जाता है फिर हम
- 20:33सोचते हैं क्यों गुस्सा कर रहे हो लेकिन
- 20:37हम थोड़ी ना भगवान है हम मनुष्य हैं गलती
- 20:40हो जाती है और पूरी जिंदगी हम वो गलती
- 20:43करते रहते कि शायद ये श्री यंत्र करने से
- 20:47शांत हो जाएंगे। विद्या आएगी। लेकिन हम
- 20:49श्री यंत्र ज्यादातर श्री के लिए करते
- 20:50हैं। विद्या के लिए नहीं करते। विद्या
- 20:53मुश्किल है। सरस्वती बहुत ही मुश्किल है।
- 20:57वो सरस है। सरस यानी कि फ्लोइंग है। पानी
- 21:00जैसा है। पानी को आप हाथ में नहीं रख
- 21:02सकते। बहती रहती है। तो श्री विद्या में
- 21:06विद्या की तरफ ध्यान देना है। जब श्री और
- 21:08शिव और शक्ति जुड़ते हैं यानी कि पुरुष और
- 21:12प्रकृति साथ में आते हैं तो फिर हमें योग
- 21:16और ये सब यू नो मैं बड़ी-बड़ी बातें बोलता
- 21:18हूं तो लोग बहुत इंप्रेस हो जाते हैं।
- 21:20लेकिन इंप्रेस नहीं करना है मुझे। समझाना
- 21:22है तो बच्चे को भी समझ में आ जाएगा। देखो
- 21:26भूख लगती है तो तुम्हें खाना चाहिए। अगर
- 21:29तुम खाते रहोगे, खाते रहोगे, खाते रहोगे
- 21:32तो तुम बकासुर बन जाओगे। और अगर आप
- 21:35Instagram खोलो तो कितने बकासुर दिखते
- 21:38हैं। धनधान्य संपत्ति से लदे हुए बकासुर
- 21:42ही बकासुर। मनुष्य रूपी बकासुर।
- 21:47लेकिन हम उन्हें नहीं देखते। देखो कितना
- 21:50भूख है। मिटती नहीं है। मिटती नहीं है। और
- 21:53चाहिए और लाइक्स और ट्रेंड हो रहा है कि
- 21:56नहीं टॉपिक। वो जो हमारे भीतर की जो भूख
- 22:00है अगर आप शिव जी से पूछे तो शिवजी एक बार
- 22:03बकासुर उसके पास आया कि मुझे भूख लगी है
- 22:05तो खा लो सब कुछ खा देता है उसके बाद कहता
- 22:07है मुझे और खाना है तो अपने आप को खा लो
- 22:10तो अपने आप को खा लेता है बचता केवल सर है
- 22:13तो जितने भी मंदिर है हमारे भारतवर्ष में
- 22:16आप देखोगे एक सर इसको कीर्ति मुख कहते हैं
- 22:19वो बकासुर है जो अपने शरीर को भी खा चुका
- 22:21है और भगवान बोल रहे हैं देखो यही होगा
- 22:24अगर तुम भूख के राह में चलते रहोगे
- 22:27भोग और योग योग से बांध के रखता है कि
- 22:31भैया शांति संतोष कभी ना कभी तो जिंदगी
- 22:35में संतोष लाओ
- 22:37तो श्री विद्या भूख के लिए यंत्र है या
- 22:41संतोष के लिए यंत्र है यह पूछना है एक
- 22:45महत्वाकांक्षा की रास्ता है और एक संतोष
- 22:48कब आप बोलोगे कि नहीं बस बस जैसे खाना जब
- 22:51परोसा जाता है आप कब बोलोगे कि नहीं और
- 22:53नहीं चाहिए या खाते रहोगे खाते रहोगे खाते
- 22:56रहोगे
- 22:57यही हो रहा है आजकल
- 23:00आज का जो मानव है आज जो लोग हैं क्या वो
- 23:03बिना किसी गुरु के
- 23:06श्री विद्या की उपासना कर सकते हैं कि
- 23:08गुरु परम आवश्यक है नहीं गुरु आवश्यक नहीं
- 23:13ये सब पहले जमाने में किताब नहीं थे
- 23:17मौखिक परंपरा थी तो ज्ञान के लिए आपको
- 23:20किसी मनुष्य के पास जाना पड़ता था कोई
- 23:23मनुष्य जिसको ज्ञानी है आप उसके पास जाओगे
- 23:25वो आपके गुरु बन गए
- 23:27आजकल
- 23:29किताबें हैं तो मनुष्य की आवश्यकता नहीं
- 23:33लेकिन किताब समझना को किसने लिखा है इसके
- 23:37लिए हम थोड़ा ट्यूटोरियल्स जाते हैं कोच
- 23:38के पास जाते हैं वीडियोस देखते हैं
- 23:41अलग-अलग माध्यम है पहले जमाने में ये
- 23:43माध्यम नहीं थे इसलिए हम मेले में जाते थे
- 23:47कि बहुत स्कॉलर्स बैठे हुए हैं उनकी बात
- 23:48सुनेंगे मौखिक परंपरा की दुनिया अलग है हम
- 23:51लिखित परंपरा की दुनिया में लेकिन ये
- 23:53हमेशा याद रखना चाहिए जो आदि गुरु हैं
- 23:57उनका नाम दत्तात्रेय है। जो नाथ नवनाथ
- 24:00चरित्र अगर पढ़े तो सबसे बड़े गुरु जो है
- 24:03अत्रेय और अनुसूया के पुत्र दत्तात्रेय
- 24:07हैं। और उनकी जो कहानी अवधूत गीता तो वो
- 24:11छोटी-छोटी चीजों में उनको ज्ञान मिलता है।
- 24:14अग्नि से मुझे यह ज्ञान मिला, पानी से
- 24:16मुझे यह ज्ञान मिला, पेड़ से मुझे यह
- 24:18ज्ञान मिला। पहाड़ से यह ज्ञान मिला है।
- 24:21यानी कि चारों तरफ गुरु बैठे हुए हैं। कोई
- 24:26काम कर रही है तो उसके जो चूड़ियां है
- 24:28उसके आवाज से उसको ज्ञान मिल जाता है। कोई
- 24:32नाच रही है तो उसके जो पायल की खनखन से
- 24:36उनको ज्ञान मिल जाता है। कोई तीर चलाता है
- 24:39तीर की आवाज से उनको ज्ञान मिल जाता है।
- 24:41तो अवधूत ये भागवत पुराण में है अवधूत
- 24:44गीता। तो आप पढ़ लीजिए उसमें। वो बोलते
- 24:46हैं कि ज्ञान तो यह पेड़ों में है, पशु
- 24:48में है, पक्षी में है, भेड़ में है,
- 24:51भेड़िए में है। तो ज्ञान प्रकृति में है।
- 24:55जिसका जिज्ञासा होता है उसे ज्ञान मिल
- 24:58जाएगा। लोगों में प्यास नहीं है। प्यास
- 25:02नहीं है तो उसे पानी देने से क्या फायदा?
- 25:05अगर आप पढ़ते नहीं हो, मैं आपको किताब दे
- 25:07दूं तो क्या फायदा? लोग कहते हैं कि हम
- 25:09गुरु जी के पास बैठेंगे। लेकिन वो गुरु की
- 25:11बात नहीं सुनते। वो केवल बोलते हैं हम
- 25:14आपके आपका पास बैठ के हमें अच्छा लगता है।
- 25:17लेकिन गुरु की बात कोई नहीं सुन रहा है।
- 25:20उसे समझ नहीं रहा है।
- 25:23ज्ञान का मतलब है कि अपने आप को
- 25:26स्वतंत्रता बनाना, स्वतंत्र बनाना कि आप
- 25:29किसी के ऊपर अटैच नहीं हो, डिपेंडेबल नहीं
- 25:32हो कि वही चीज एक नशा बन जाए। गुरु भी नशा
- 25:35बन जाते हैं धीरे-धीरे। गुरु के बिना हम
- 25:38जी नहीं सकते। यानी कि गुरु को आपने अफीम
- 25:41बना दिया कि नहीं गुरु नहीं होंगे तो मैं
- 25:43तड़पता हूं तो फिर अफीम बन गया। गुरु का
- 25:46काम यह नहीं है। गुरु आपको स्वतंत्रता
- 25:48देता है कि तुम अकेले रास्ते में चल सको।
- 25:51कोई टेंशन नहीं है लाइफ में। डर नहीं
- 25:54होगा। भूख को आप मैनेज कर पाओगे। भय को
- 25:57मैनेज कर पाओगे। ये दो चीजें लाइफ में। एक
- 25:59तो भूख मैंने बात की ज्यादा। दूसरा भय
- 26:01होता है। डर लगता है ना जिंदगी में कि कोई
- 26:05मुझे अब पेड़ों में देखिए। पेड़ों में तो
- 26:08एक पत्ता होता है भूख के लिए लेकिन कांटे
- 26:10भी होते हैं अपने बचाव के लिए। हमारे में
- 26:12भी कटा कांटे हैं बचाव के लिए।
- 26:15तो गुरु यह आपको दिखाता है, दर्शन कराता
- 26:18है कि देखो तुम्हारे में यह भूख है।
- 26:20तुम्हारे में यह भय है। और क्या तुम
- 26:22दूसरों में यह भय और भूख देख रहे हो? क्या
- 26:25तुम दर्शन करते हो? हम दूसरों का दर्शन
- 26:29नहीं करते। हम केवल स्वयं दर्शन करते हैं।
- 26:32यू नो मंदिर में जाकर लोग कहते हैं कि
- 26:33भगवान का दर्शन करो। वह जाकर वहां पर हम
- 26:36क्या करते हैं? आंखें बंद कर लेते हैं।
- 26:39ध्यान करते हैं।
- 26:42भीतर का भय और भूख एक होता है। सामने वाले
- 26:44का भूख और भय भी होता है। और शिव शक्ति की
- 26:47बात आप करते हो तो शक्ति शिव से कहती है
- 26:51कि आपने अपने भूख के ऊपर विजय प्राप्त कर
- 26:55ली। बाकी संसार के बारे में आपने नहीं
- 26:59सोचा। भूत प्रेत पिशाच जो घूम रहे हैं
- 27:02तड़प रहे हैं उनके लिए आप क्या कर रहे
- 27:05हैं? तब शिव जी कहते हैं कि यह तो आपने जो
- 27:09बताया वो इंपॉर्टेंट बात है। शक्ति शिव से
- 27:12कहती है कि आपने भूख के ऊपर विजय प्राप्त
- 27:14कर ली। लेकिन आपके चारों तरफ जो भूत पिशाच
- 27:18बैठे हुए हैं उनको जो भूख लग रही है उनके
- 27:21बारे में आप सोच नहीं रहे हो। तब जाके शिव
- 27:24जी कहते हैं कि हां मुझे कैलाश पर्वत से
- 27:27काशी आना पड़ेगा। क्योंकि भूत प्रेत वहां
- 27:29रहते हैं। तो भगवान स्वयं ऊपर से नीचे आ
- 27:32रहे हैं। विवाह कर रहे हैं। दांपत्य जीवन
- 27:36स्वीकार कर रहे हैं। विवाह का मतलब क्या
- 27:38है? लोगों से मिलना। दूसरों का दर्शन करना
- 27:42ना कि विवाह करना। यह एक रूपक है कि भगवान
- 27:46भी दूसरों का दर्शन कर रहे हैं। विवाह का
- 27:50मतलब है जब हम दुनिया का दर्शन करते हैं।
- 27:53ना कि अहंकार में अपनी ही दर्शन करके अपनी
- 27:56बारे में सोचते रहते हैं।
- 27:58यह पूरी दूसरी दुनिया है। जब आप दूसरों के
- 28:01बारे में सोचते हो, उनको भूख लग रही है।
- 28:03उन्हें भूख लग जैसे एक मां अपने बच्चे के
- 28:06बारे में सोचती है, वैसे ही पूरी दुनिया
- 28:08के बारे में जब हम सोचने लगते हैं, इसे
- 28:10विवाह कहते हैं। हां, एकदम नई परिभाषा है।
- 28:16[संगीत]
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This page contains the full transcript of राम का स्वरूप और पुराणों का गुप्त ज्ञान | Devdatta Patnayak | Podcast | Tilak Varta by Tilak Varta - The Sanatan Podcast, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 4,536 words across 559 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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