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राम का स्वरूप और पुराणों का गुप्त ज्ञान | Devdatta Patnayak | Podcast | Tilak Varta — Transcript

by Tilak Varta - The Sanatan Podcast · 5,546 words · 696 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00हमारी संस्कृति, हमारे संस्कार, सदा रहे
  2. 0:03हमारे साथ। सब्सक्राइब करें तिलक।
  3. 0:08भूख अगर समझ लिया तो सनातन समझ में आया।
  4. 0:10हां। क्योंकि सनातन का मतलब है भूख का
  5. 0:13ज्ञान। सरल है। इतना मुश्किल नहीं। आपने
  6. 0:15इतना अध्ययन किया है। सबसे प्राचीन पुराण
  7. 0:17है कौन सा? वेदों में पुराण का उल्लेख
  8. 0:20नहीं है। नहीं है। एक भी पुराण आप नहीं
  9. 0:23समझ पाओगे जब तक दूसरा नहीं पढ़ो। श्री
  10. 0:25कृष्ण भी ना युद्ध रोक पाए ना अपने फैमिली
  11. 0:28को बचा पाए। प्रभास तीर्थ में सब कुछ अपनी
  12. 0:30आंखों के सामने द्वारका को देखा बर्बाद
  13. 0:33होते हुए
  14. 0:38सर नमस्ते नमस्ते आपने बहुत सारी रामायण
  15. 0:42पढ़ी होगी जब आप बहुत सारी रामायण पढ़ रहे
  16. 0:44हैं तो क्या सभी रामायण में कहीं ना कहीं
  17. 0:47राम और सीता के बीच संबंध विच्छेद किया है
  18. 0:50किया गया है कि यह कहीं मैनपुलेट किया गया
  19. 0:53है देखिए जब कोई खाना हजम नहीं होता तब उस
  20. 1:00खाने को हम जहरीला बोलते हैं। प्रॉब्लम
  21. 1:03पाचन शक्ति में है। खाने में नहीं। कहानी
  22. 1:07तो है। क्या आप उसका पाचन कर सकते हो? वो
  23. 1:12बात अलग है। सब में पाचन शक्ति नहीं होती।
  24. 1:16रामायण की कथा राम की कथा है। शुरुआत से
  25. 1:20अंत तक। यानी कि जब से उनका जन्म होता है
  26. 1:24और मृत्यु परंत सरयू नदी में वह जाते हैं
  27. 1:28तब तक यानी कि वह स्वर्ग से आते हैं। यज्ञ
  28. 1:32से उनका जन्म होता है। कौशल्या के गर्भ से
  29. 1:34निकलते हैं। यानी कि मृत्यु लोक में
  30. 1:36प्रवेश करते हैं श्री नारायण। लेकिन
  31. 1:39मृत्यु लोक से जाने के लिए वह सरयू नदी से
  32. 1:41जाते निकलते हैं। तो यह है रामायण। लास्ट
  33. 1:46में सीता उनके साथ नहीं है। वह अकेले हैं।
  34. 1:50महाभारत में भागवत कथा में श्री कृष्ण भी
  35. 1:53अवतरित होते हैं। नारायण वैुंठ से धरती पर
  36. 1:57पधारते हैं। देवकी के गर्भ से यशोदा के घर
  37. 2:01में जाते हैं। फिर पूरी घटना मधुबन
  38. 2:05द्वारका मथुरा सब होते कुरुक्षेत्र के बाद
  39. 2:08प्रभास तीर्थ में अकेले
  40. 2:12वो वापस वैुंठ जाते हैं अकेले तब उनके बगल
  41. 2:16में नान रुक्मणी होती है ना राधा होती है
  42. 2:20वह अकेले जाते हैं राम भी अकेले आए और
  43. 2:23अकेले गए कृष्ण भी अकेले आए और गए यानी कि
  44. 2:28जिंदगी में हमें भगवान को भी अकेला रहना
  45. 2:31करना पड़ता है। हम और आपको भी अकेले
  46. 2:34मृत्यु समय कोई हमारे साथ नहीं होगा।
  47. 2:38रामायण वियोग की कहानी है। शुरुआत में
  48. 2:42कहानी किसकी है? वाल्मीकि जी की वो फेमस
  49. 2:45कथा है कि व्याध एक पक्षी को मारता है और
  50. 2:49पक्षी एक मादा नर को मारता है और मादा
  51. 2:52रोने लगती है। आपको नहीं रामायण की शुरुआत
  52. 2:55ऐसे होती है कि नर एक नर और मादा दो पक्षी
  53. 2:58होते हैं। एक व्याध तीर चलाता है। एक
  54. 3:01पक्षी मरता है। दूसरी पक्षी रोती रहती है।
  55. 3:04रोती रहती है। आई थिंक यह जो है यह विलाप
  56. 3:09है। यह वाल्मीकि जी देखते हैं और कहते हैं
  57. 3:12और वह गुस्से में एक श्राप बोल देते हैं
  58. 3:15व्याध को और वो श्राप श्लोक का रूप लेता
  59. 3:18है क्योंकि शोक से श्लोक निकलता है कि
  60. 3:21तुमने कर क्या दिया तुमने ये बुरा काम
  61. 3:23किया है तुमने नर और मादा को तुमने वियोग
  62. 3:26लाया है इनका संभोग हो रहा था तुमने वियोग
  63. 3:29किया है तुम्हें श्रापित में देता हूं तो
  64. 3:32व्याध कहता है कि देखो मैं अपना धर्म कर
  65. 3:35रहा हूं मैं व्याध हूं मेरे बच्चे भूखे मर
  66. 3:38जाएंगे मेरा खाना है यह पक्षी मैंने पक्षी
  67. 3:41को मारा है तो मेरे बच्चों से मुझे
  68. 3:43आशीर्वाद मिलेगा और इस दूसरे पक्षी से
  69. 3:46मुझे श्राप मिलेगा। तो हर कार्य में कोई
  70. 3:49ना कोई हमें
  71. 3:51आशीर्वाद देता है और कोई ना कोई हमें
  72. 3:53श्राप देता है। आप भी हमने श्राप दे दिया।
  73. 3:56आपको लगता है मैंने बुरा काम किया है।
  74. 3:58लेकिन बच्चों के दृष्टिकोण से देखो। मैंने
  75. 4:00तो उनके लिए खाना लाया। तो रामायण की कथा
  76. 4:03इससे शुरू होती है कि जिंदगी में धर्म और
  77. 4:06धर्म संकट की बातें कि आप एक काम करते हो
  78. 4:09लेकिन उससे कुछ और परिणाम निकलता है।
  79. 4:11अच्छे भी परिणाम होते हैं, बुरे भी परिणाम
  80. 4:12होते हैं। और यह वियोग की कथा रामायण में
  81. 4:15होती है कि सीता राम साथ आते हैं और फिर
  82. 4:19उनका वियोग होता है। कई कई कहते हैं कि
  83. 4:21तुम जंगल जाओ। फिर वो जंगल जाते हैं। वहां
  84. 4:25पर रावण उनका वियोग करता है। फिर वो वापस
  85. 4:27लौटते हैं। फिर अयोध्या नगरी भी उनका
  86. 4:30वियोग करता है। हम तो वियोग वियोग वियोग
  87. 4:33हो रहा है राम की जिंदगी में कि भगवान को
  88. 4:35भी वियोग का अनुभव करना पड़ता है जो उनकी
  89. 4:38सबसे प्रिय है उनसे दूर कैसे दुनिया उनको
  90. 4:42भगाती है साथ नहीं रहने देती राम और सीता
  91. 4:46का वियोग रामायण में केवल वियोग की कथा
  92. 4:48होती है
  93. 4:51सुयोग है वियोग है सुयोग है वियोग तो
  94. 4:55स्वयंवर में सुयोग हुआ फिर कैकई ने वियोग
  95. 4:58किया फिर वो जंगल में वापस सुयोग वियोग
  96. 5:01हुआ। फिर रावण ने वियोग किया। फिर हनुमान
  97. 5:04और सब की मदद से वापस सुयोग हुआ। फिर
  98. 5:07अयोध्या नगरी की बातों से वियोग।
  99. 5:10तो ये है कहानी। क्या बात है? बहुत ही
  100. 5:13खूबसूरत। तो एक तो प्रसन्न करना देवी को,
  101. 5:19शिव को और देवी में कौन सी देवी को सबसे
  102. 5:22ज्यादा आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है?
  103. 5:24और जब देवी पूजा की जाती है तो श्री यंत्र
  104. 5:27जरूरी है कि विग्रह से किया जा सकता है और
  105. 5:30आज के समय में खासतौर से देखिए अगर ज्ञान
  106. 5:33हो तो ना विग्रह चाहिए ना यंत्र चाहिए
  107. 5:38ये तो सगुणी चीजें है ज्ञान निर्गुण होता
  108. 5:41है तो सगुण में अटकना नहीं चाहिए निर्गुण
  109. 5:45में जाना चाहिए सगुण केवल माध्यम है जैसे
  110. 5:48किताबों में हम टेक्स्ट लिखते हैं लेकिन
  111. 5:50ज्ञान थोड़ी ना लेखन में होता है उसके
  112. 5:53अंदर जो अर्थ होता है। अर्थ हमेशा निर्गुण
  113. 5:55होता है। शब्द सगुण होता है। तो यह शब्द
  114. 5:59है। यंत्र विग्रह तो जो करना है जिसको
  115. 6:02जिसके मर्जी से करना है वो शोष के लिए
  116. 6:05अच्छा है। कुछ भी नहीं होगा तो भी भगवान
  117. 6:09प्रकट होते हैं। ये जबरदस्ती का कंफ्यूजन
  118. 6:11है लोगों में। देखिए टाइम पास के लिए लोग
  119. 6:14सब कुछ करते हैं। इतना कुछ मुश्किल नहीं
  120. 6:16है। यात्रा के लिए गुरु अगर आपने
  121. 6:18एक्सप्लेन किया धीरे-धीरे इससे मुक्ति
  122. 6:20प्राप्त करना सबसे बड़ी बात है।
  123. 6:23कि चिन्ह से प्रतिबिंब प्रतिमाओं से
  124. 6:27मुक्ति प्राप्त करना। बचपन में कैसे
  125. 6:30बच्चों को खिलौना चाहिए।
  126. 6:32खिलौने से वो खेलते हैं। धीरे-धीरे बढ़ते
  127. 6:34हैं। लेकिन अगर अगर एक बुढ़ा भी खिलौने से
  128. 6:37खेलने लगे तो हम बोलेंगे कुछ विचित्र है।
  129. 6:39बड़ा नहीं हुआ है। कि एक दिन खिलौना
  130. 6:40छोड़ना पड़ता है। एक दिन स्कूल छोड़ना
  131. 6:43पड़ता है। सब कुछ छोड़ना पड़ता है। वैसे
  132. 6:46ही एक दिन यंत्र छोड़ना पड़ता है। विग्रह
  133. 6:48छोड़ना पड़ता है। तीर्थ यात्रा में यह सब
  134. 6:51छोड़ना देखिए जोड़ना छोड़ना जोड़ना छोड़ना
  135. 6:55जिंदगी यही है। तो जब तक हम त्याग नहीं
  136. 6:59करेंगे
  137. 7:01तब तक ग्रोथ नहीं होगा, वृद्धि नहीं होगी।
  138. 7:04तो शिवजी योग की बात यानी कि त्याग की बात
  139. 7:07होती है और उसको बैलेंस करने के लिए कि
  140. 7:09देखिए ठीक है आपको नहीं चाहिए लेकिन
  141. 7:11दूसरों को चाहिए तो आपने पैसे कमा लिए।
  142. 7:13बोले नहीं मुझे और कमाना नहीं मैं संतोष
  143. 7:15हूं। लेकिन दुनिया को भी कमाना है तो ठीक
  144. 7:18है। मैं बिजनेस करता हूं लेकिन ताकि लोगों
  145. 7:20में आमदनी बढ़े मुझे नहीं चाहिए। तो फिर
  146. 7:24एक ये अलग दृष्टिकोण होता है। तो ये जो
  147. 7:27जैसे देवियां जो होती है उन्हें योगिनी
  148. 7:29कहा जाता है। अगर देवी की पूजा करें बिना
  149. 7:32शिव जी के या बिना विष्णु के तो अगर
  150. 7:35योगिनी आपके घर में आई तो वो आपको तकलीफ
  151. 7:38देगी क्योंकि यानी कि श्री बिना विद्या
  152. 7:42का मतलब है आपको हरिहर का ज्ञान आना। सबसे
  153. 7:46बड़ा ज्ञान हरिहर का ज्ञान होता है और
  154. 7:49सबसे बड़ा विद्या वो है कि अहंकार को काबू
  155. 7:53में कैसे रखना चाहिए कि बकासुर आपको पागल
  156. 7:55ना कर दे क्योंकि जब देवी आएगी वो आपको
  157. 7:58नशे जैसा नशा होता है ना आप एक पहली बार
  158. 8:01लिया तो अच्छा लगा दूसरी बार लिया तो फिर
  159. 8:02और चाहिए और चाहिए फिर जिंदगी को बर्बाद
  160. 8:04कर देता है
  161. 8:07देवियां जो होती 64 देवियां होती है वो
  162. 8:09अलग-अलग प्रकार के नशे
  163. 8:12इसलिए उन्हें भयानक रूप दिया जाता है जंगल
  164. 8:14में रखे जाते हैं
  165. 8:16अगर आप 64 योगिनी के मंदिर देखो तो घर
  166. 8:18हमेशा गांव के बाहर रखा जाता है। जब तक
  167. 8:20उनके बीच में आप शिवलिंग नहीं रखोगे तब तक
  168. 8:23वो बहुत ही भयानक रूप होता है। तब उसे
  169. 8:26बांधा जाता है क्योंकि शिव त्यागी है। तो
  170. 8:29भोग की वस्तु त्याग के साथ हम जोड़ते हैं।
  171. 8:33हमेशा जैसे आप खाना में खट्टा मीठा होता
  172. 8:36है। ज्यादा खट्टा खाओगे तो प्रॉब्लम हो
  173. 8:38जाएगा। ज्यादा मीठा खाओगे तो प्रॉब्लम हो
  174. 8:40जाएगा। शिव और शक्ति ऐसे एक भूख के लिए
  175. 8:43भोग और एक भूख से मुक्ति। क्या चाहिए
  176. 8:47जिंदगी में? इसका आप बोलोगे केवल मुक्ति
  177. 8:50लेकिन बच्चे को तो मुक्ति नहीं बोल सकते
  178. 8:52खाना देना पड़ेगा। तो कब मुक्ति लोगे? किस
  179. 8:55समय मुक्ति लोगे? तो वो बातें हैं। जब
  180. 8:59मुक्ति तुम लेते हो उसके बाद लेकिन दूसरों
  181. 9:01के लिए भोग देना पड़ेगा ना। तो जैसे
  182. 9:04अन्नपूर्णा जो काशी में अन्नपूर्णा है वो
  183. 9:07खाना पकाती है उनका भंडारा है लेकिन उनके
  184. 9:09पति नहीं खाते उनको तो भूख नहीं लगती वो
  185. 9:11तो तपस्वी है तो खाना किसके लिए पका रही
  186. 9:14है भक्तों के लिए पका रही है ताकि एक दिन
  187. 9:18वो शिवजी बने
  188. 9:20लेकिन वो कह रहे हैं कि नहीं हम बकासुर है
  189. 9:22आप खाते देते रहो देते रहो देते रहो देते
  190. 9:25रहो बकासुर हम रहेंगे तो योगिनी जी बोलते
  191. 9:29हैं ठीक है खाते रहो एक दिन अपने बच्चों
  192. 9:31को भी खाओगे एक दिन अपने हाथ पैर भी खाओगे
  193. 9:34और तुम्हारा सर हम लटकाएंगे रंडमाल में
  194. 9:38तो देवी का रंडमाल जो होता है वो ठीक है
  195. 9:42परोसती रहूंगी क्योंकि ये नशा है नशा से
  196. 9:45तुम नहीं छूटोगे शिव जी बचा पाएंगे लेकिन
  197. 9:49हमें श्री चाहिए विद्या नहीं चाहिए शक्ति
  198. 9:52चाहिए शिव नहीं चाहिए मैं देख रहा हूं
  199. 9:55आपकी बातचीत में आप बार-बार काशी चले जाते
  200. 9:58हैं बनारस तो मुझे एक तो समझाइए जब भी शिव
  201. 10:01की बात होगी जी काशी जाना बहुत महत्वपूर्ण
  202. 10:04हो जाता है क्योंकि उनकी कथाएं, उनकी
  203. 10:06कहानियां और उनके बारे में वहां से बात
  204. 10:08शुरू होती है। तो आपके शब्दों में बनारस
  205. 10:12देखिए बनारस एक विचार है। स्थल नहीं है।
  206. 10:16लोग स्थल से अगेन सगुण निर्गुण की बात आ
  207. 10:19गई। हम सगुण में स्थल कोेंस देते हैं।
  208. 10:24काशी एक विचार है। दक्षिण भारत में भी
  209. 10:26काशी होता है। आप जहां जाओ काशी होगा।
  210. 10:30काशी कहीं जगह का नाम नहीं है। जैसे कैलाश
  211. 10:34भी कहीं जगह नहीं है। चाइना में है काशी
  212. 10:37वो तो एक सगुण रूप भी है। देखिए अगर आप
  213. 10:40कैलाश पर्वत में जाओ तो वो पत्थर से बना
  214. 10:42हुआ है और उसके ऊपर बर्फ है। यहां पे
  215. 10:45वनस्पति नहीं उगती है। यहां पेड़ होते हैं
  216. 10:47ना पौधे होते हैं। कुछ नहीं होता है वहां।
  217. 10:49काशी की तरफ आ जाओ। गंगा घाटी है। चारों
  218. 10:53तरफ हरियाली है, खेत है।
  219. 10:56तो यहां पर भोजन है, भोग है। यहां पर
  220. 10:59बाजार है, शशान भूमि है। वहां पर तवायफ
  221. 11:03रहते थे, गणिकाएं रहती थी। यहां पे कलाएं
  222. 11:07होती थी, राजा रहते थे, युद्ध होता था।
  223. 11:10यानी कि सांसारिक जीवन का प्रतीक है। उसे
  224. 11:13प्रतीक के रूप में देखना है। यहां प्रतीक
  225. 11:17है ये सांसारिक जीवन का जहां पे शिवजी
  226. 11:20कोतवाल का काम कर रहे हैं। जिसके पास कोई
  227. 11:22धन नहीं है वो दूसरों का धन प्रोटेक्ट कर
  228. 11:26रहे हैं। कोतवाल का काम कर रहे हैं। क्या
  229. 11:28बात है? कोई नहीं सोचता है। जैसे शिवजी
  230. 11:30कोतवाली कर रहे हैं। उनके पास क्या है? वो
  231. 11:33तो भूत लगा के घूम रहे हैं ना भूत के साथ।
  232. 11:36लेकिन कोतवाली आपके क्योंकि आपको नशा है
  233. 11:38धन का।
  234. 11:39और वो शिवजी अपनी पत्नी के साथ बैठ के
  235. 11:42पूरी रात हंस रहे हैं। देखो यह नशेदी
  236. 11:45हमारे चारों तरफ नशेड़ी है। धन की लालसा
  237. 11:48में हमारी तरफ देख रहे हैं। एक दिन हमारा
  238. 11:51एक और रंडमाल लगेगा। क्योंकि जो पढ़ाना
  239. 11:54चाहते हैं वो नहीं पढ़ेंगे।
  240. 11:58वही चाहते हैं जो उनकी भूख मिटाने की
  241. 12:01दूसरों के बारे में सोच ही नहीं रहे। परोस
  242. 12:04नहीं रहे। खा रहे परोसना जिंदगी में परोस
  243. 12:08मनुष्य ही एक प्राणी है जो परोसता है पशु
  244. 12:12केवल अपने बच्चों को परोसता है
  245. 12:15मनुष्य सब किसी सबको परोस सकता है
  246. 12:19ओपोरर्चुनिटीज बना सकता है तो ये जो बातें
  247. 12:22हैं ये सनातन की बातें
  248. 12:25सबसे प्राचीन पुराण आपको कौन सा मतलब आपने
  249. 12:28इतना अध्ययन किया है सबसे प्राचीन पुराण
  250. 12:30है कौन सा क्या शिव पुराण है या उससे भी
  251. 12:33देखिए
  252. 12:35वेदों में पुराण का उल्लेख नहीं है। नहीं
  253. 12:37है। उपनिषद के समय चांडोग्य उपनिषद में
  254. 12:41पहली बार पंचम वेद की बात होती है और वो
  255. 12:44पुराण इतिहास इतिहास पुराण शब्द इस्तेमाल
  256. 12:46करते हैं साथ में लेकिन ये नहीं बोलते कौन
  257. 12:49सा इतिहास कौन सा पुराण क्योंकि इतिहास
  258. 12:52में मृत्यु लोक की कहानी होती है और पुराण
  259. 12:54में देवलोक की कहानी थी। बस इतना ही अंतर
  260. 12:56है और कुछ नहीं।
  261. 12:57तो इतिहास में रामायण महाभारत क्योंकि
  262. 12:59दोनों मृत्यु लोक में घटते हैं। अयोध्या
  263. 13:02कुरुक्षेत्र और पुराण में तीन प्रकार के
  264. 13:05पुराण होते हैं। शिव पुराण, विष्णु पुराण
  265. 13:08और ब्रह्म पुराण देवी पुराण बोल सकते हैं।
  266. 13:12एक भी पुराण आप नहीं समझ पाओगे जब तक
  267. 13:14दूसरा नहीं पढ़ोगे। जैसे वो जिक्सो पजल
  268. 13:16होता है ना। एक जिक्सो पजल होता है।
  269. 13:18अलग-अलग पीस होते हैं। उसको जॉइ करना
  270. 13:20पड़ता है। हर पीस एक दूसरे से कनेक्टेड
  271. 13:23कनेक्टेड है। तो शिव अगर आपको ब्रह्मा
  272. 13:27समझना है तो आपको देवी समझना पड़ेगा। देवी
  273. 13:30समझना है तो आपको शिव समझना पड़ेगा। शिव
  274. 13:32समझना है तो आपको विष्णु समझना पड़ेगा। जब
  275. 13:35तक ये चार नहीं मिलेंगे ब्रह्मा विष्णु
  276. 13:36शिव एक तरफ और देवी एक तरफ है। तब तक आपको
  277. 13:40पुराण का ज्ञान नहीं मिलेगा। लेकिन पुराण
  278. 13:42ये अलौकिक है। तो उसको धरती पर कैसे ले
  279. 13:45आए? प्रैक्टिकल कैसे लगाएं? तो रामायण
  280. 13:47महाभारत पढ़ना पड़ेगा।
  281. 13:49तो जैसे वेद को समझने के लिए आपको तंत्र
  282. 13:52समझना पड़ेगा। देखिए सब चीज कनेक्टेड है,
  283. 13:54इंटरकनेक्टेड है। अगर आपको बायोलॉजी पढ़ना
  284. 13:57है तो आपको ज़ोलॉजी पे पढ़ना पड़ेगा।
  285. 13:58फिजिक्स पढ़ना है तो केमिस्ट्री। आप जितने
  286. 14:00भी बड़े स्कॉलर हैं वो बोलेंगे कि देखो आप
  287. 14:02फिजिक्स पढ़ते-पढ़ते मुझे केमिस्ट्री
  288. 14:05पढ़ना पड़ता है, मैथ्स पढ़ना पड़ता है।
  289. 14:07अगर आप लिटरेचर पढ़ रहे हो तो धीरे-धीरे
  290. 14:09आप बोलोगे कि नहीं लिटरेचर के साथ मुझे
  291. 14:11मैथमेटिक्स भी पढ़ना पड़ेगा। म्यूजिक भी
  292. 14:14पढ़ना पड़ेगा। तो हर सब्जेक्ट जुड़ा हुआ
  293. 14:17है। ये कौन सी सबसे पुरानी हमें पता नहीं।
  294. 14:21कौन सी लिखित गई, कौन सा पहला निकला? कहते
  295. 14:24हैं कि व्यास जी ने आदि पुराण का निर्माण
  296. 14:26किया था। लेकिन किसी को समझ में नहीं आया।
  297. 14:28इसलिए उन्होंने फाड़ के अलग-अलग भाग में
  298. 14:31किसी को ब्रह्म पुराण दे दिया। 18 भाग बना
  299. 14:33दिए उसके अपने गुरुओं को शिष्यों को बांट
  300. 14:36दिया कि जाके ले लो। जो जिसको जितना हजम
  301. 14:38होता है देते रहो। लेकिन पूरा ज्ञान जब तक
  302. 14:41नहीं आएगा। साथ में सुयोग होना है। ये
  303. 14:44वियोग पहले करेंगे। तो 18 वियोग होता है।
  304. 14:48फिर एक 18 से एक ही निकलेगा। हम तो वैसे
  305. 14:51ही होता है यही जवाब उपनिषदों में भी लागू
  306. 14:54है हमेशा जितने भी उपनिषद होंगे बात से की
  307. 14:58घूम फिर के जब तक भूख नहीं समझोगे और
  308. 15:01किसका भूख मेरा भूख या तुम्हारा भूख देखिए
  309. 15:04भूख शब्द जब तक नहीं समझेंगे आप सुधा
  310. 15:09सनातन ज्ञान जीरो कुछ नहीं समझोगे ना भक्त
  311. 15:12समझोगे ना ज्ञान समझोगे कर्म योग यज्ञ कुछ
  312. 15:16नहीं समझोगे जब तक भूख का ज्ञान और फिर
  313. 15:20किसके भूख के बारे में बात कर रहे हैं?
  314. 15:22इसलिए मैंने जब शुरुआत की मैंने भूख से
  315. 15:25शुरुआत की। जब तक भूख क्योंकि भूख से ही
  316. 15:30हम
  317. 15:31जीव और अजीव का तत्व समझ में आता है कि
  318. 15:34जीवन का अर्थ क्या है? भूख जब तक वो नहीं
  319. 15:38समझे तो काम बोलते हैं काम अग्नि काम
  320. 15:41बोलते ही फिर लोग बहुत एक्साइटेड हो जाते
  321. 15:43हैं। काम शास्त्र याद आता है। लेकिन वो
  322. 15:45भूख की बात कर रहे हैं कि भोग जब होता है
  323. 15:48और उससे फिर वो एडिक्शन जाता है। वो नशा आ
  324. 15:50जाता है और वो नशा में तुम फंस जाओगे। इसे
  325. 15:53हम ऋतु चक्र कहेंगे, संसार कहेंगे, बंधन
  326. 15:56कहेंगे,
  327. 15:58अटक गए। तो फिर शिव आते हैं वहां पे। ये
  328. 16:01सब बातें
  329. 16:03आपकी बातों से हर चीज एकदम सरल होता जा
  330. 16:06रहा है और मुझे लगता है मेरा अगला जो सवाल
  331. 16:08है वो भी आप बहुत सरलता से कह देंगे कि
  332. 16:10ऐसा है नहीं लेकिन सवाल है विष्णु भगवान
  333. 16:14की जब पूजा की जाती है तो बहुत नियम कानून
  334. 16:16है उनकी शुद्धता है उनके अलग नियम उपचार
  335. 16:19है और शिव सरल है जी शिव इतने सरल क्यों
  336. 16:23है और विष्णु इतने टफ क्यों हैं? देखिए
  337. 16:26शिव की दुनिया
  338. 16:28वो वो सन्यासी है। तो वहां शुद्ध अशुद्ध
  339. 16:32की बातें नहीं होती।
  340. 16:34विष्णु की दुनिया सांसारिक जीवन है। यहां
  341. 16:38पर नियम, कानून,
  342. 16:41प्रॉपर्टी की बातें, घर गृहस्ती की बातें
  343. 16:45देखिए रामायण और महाभारत दोनों में जमीन
  344. 16:48जायदाद जोरू वही बात होती है ना जमीन जोरू
  345. 16:51वही बात होती है। रामायण, महाभारत में
  346. 16:53शिवजी को कुछ फर्क नहीं पड़ता है। बोले
  347. 16:55किसका? वो तो जहर पीने वाले हैं। वो दूध
  348. 16:59थोड़ी ना पीते हैं। वो जहर पीते हैं। तो
  349. 17:01जो जहर पीता है उसे क्या समझ में आएगा
  350. 17:03दुनिया इसलिए हम उसे भोलेनाथ कहते हैं। ये
  351. 17:06भोले का मतलब है कि वो आपके दायरों को
  352. 17:10नहीं समझते
  353. 17:12कि ये दायरा है। ये पदानुक्रम है।
  354. 17:15संस्कृति में दायरे होते हैं। पदानुक्रम
  355. 17:19प्रकृति में ना दायरा होता है ना
  356. 17:22पदानुक्रम होता है। शिवजी प्रकृति से
  357. 17:24जुड़े और संस्कृति से विष्णु जुड़े। इसलिए
  358. 17:28राजा के रूप में वह राम होते हैं और
  359. 17:30ग्वाला के रूप में कृष्ण होते हैं। यानी
  360. 17:34कि हमारे वर्ण व्यवस्था में भी आ जाते हैं
  361. 17:36ऊपर नीचे। तो पूरी तरह से बोलते हैं कि
  362. 17:39देखो इसमें फंसो मत। ऐसे तुम्हें नशा देगा
  363. 17:43यह वर्ण व्यवस्था
  364. 17:46राजा बड़ा है। राजा भी अकेला मरेगा।
  365. 17:48ग्वाला भी अकेला मरेगा। राजा भी वियोग में
  366. 17:52मरेगा। ग्वाला भी वियोग में मरेगा।
  367. 17:55तो यह मत सोचो कि राजा बनने से तुम्हें
  368. 17:57सुख मिलने वाला है और यह मत सोचो कि तुम
  369. 18:00सारथी बनने से सुख मिलेगा। श्री कृष्ण भी
  370. 18:03युद्ध को नहीं रोक पाएंगे। महाभारत का
  371. 18:06युद्ध श्री कृष्ण जितना पूरा विश्वू
  372. 18:09दिखाने से भी कुछ योग युद्ध नहीं रुका ना।
  373. 18:12तो अपने आप को इतना बड़ा मत समझो कि तुम
  374. 18:14युद्ध रोक सकोगे। श्री कृष्ण भी ना युद्ध
  375. 18:17रोक पाए ना अपने फैमिली को बचा पाए।
  376. 18:20प्रवास तीर्थ में सब कुछ अपनी आंखों के
  377. 18:22सामने द्वारका को देखा बर्बाद होते हुए
  378. 18:27राम ने राम राज्य का निर्माण किया उसी
  379. 18:29राज्य ने कहा कि आप अपने पत्नी का त्याग
  380. 18:32कीजिए यानी कि मृत्यु लोक की कहानी
  381. 18:37ये भगवान को भी भोगना पड़ता है। ऐसी सनातन
  382. 18:42जिंदगी के बारे में सिंपल है ये और कुछ
  383. 18:45नहीं है। है सिंपल उसका अनुभव करना
  384. 18:49मुश्किल स्वीकार करना लगता है कि नहीं हम
  385. 18:52इसके रावण जैसा ना मैं चीट कर लूंगा लेकिन
  386. 18:56फिर शिवजी आते हैं आपके घर में सरल है ना
  387. 18:59आ गए आपके घर में हां
  388. 19:02आपने उनकी पूछ जला दी आपने उनकी पूछ जला
  389. 19:05दी क्या बात है ज्योतिर्लिंग को समझ लेते
  390. 19:08हैं एक तो इनका महत्व और सबसे पहला या
  391. 19:11पुराना ज्योतिर्लिंग कौन सा रहा होगा यदि
  392. 19:13आपने कहीं पढ़ा हो तो वो हमको समझाइए भग
  393. 19:15भौगोलिक दृष्टिकोण से अगर ज्योतिर्लिंग जो
  394. 19:19है हमारे 12 ज्योतिर्लिंग है उनका महत्व
  395. 19:21बता पाए
  396. 19:23तो ज्योतिर्लिंग की बातें ज्यादातर दक्खन
  397. 19:25में आती है जितने भी सबसे ज्यादा
  398. 19:28ज्योतिर्लिंग दण दिशा में है उत्तर में से
  399. 19:31केवल काशी और कैलाश पर्वत बाकी देखिए
  400. 19:35महाकाल उज्जैन उसके बाद सब त्रंबकेश्वर
  401. 19:39कृष्णेश्वर सब दक्खन में आता है पहले
  402. 19:43आर्यवर्त उत्तर भारत में होता
  403. 19:45फिर धीरे-धीरे आर्यवर्त नीचे की तरफ आने
  404. 19:48लगा तो लोगों ने यह संप्रदाय सब दक्षिण
  405. 19:51भारत में जब आने लगे तब हम देखते हैं कि
  406. 19:54ये ज्योतिर्लिंग की बातें लोग करने लगते
  407. 19:57हैं। तो आप देखेंगे अगर आप भौगोलिक तरीके
  408. 20:00से देखें कहां है ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र
  409. 20:02की तरफ ज्यादा होता है। बहुत ज्यादा सबसे
  410. 20:04ज्यादा महाराष्ट्र में है। गुजरात में कुछ
  411. 20:06है, मध्य प्रदेश में कुछ है। सबसे ज्यादा
  412. 20:09क्योंकि यहां पे चालुक्यों का राज्य था।
  413. 20:11हम यहां पे होयसला राजा थे। तो जब यह नई
  414. 20:17संस्कृति, नई विचार जब आने लगते हैं तो
  415. 20:19लोगों ने कहा कि स्वयंभू कहां है? स्वयंभू
  416. 20:22यानी कि जो अपने ऊपर स्वयं जागृत होने
  417. 20:25वाले मूर्तियां कहां है? तो जो तीर्थ
  418. 20:29यात्री थे, जो ऋषि गण थे उनको पता
  419. 20:31उन्होंने ये स्पॉट्स आइडेंटिफाई किए कि
  420. 20:33देखो ये एक है, ये एक है। ऐसे कई हैं। 12
  421. 20:37हमको याद है। कई है। जैसे शक्ति पीठ के
  422. 20:42जैसे अगर आप बौद्ध धर्म में जाए तो
  423. 20:43बोलेंगे कि 84 हजार जगहों पे स्तूप बने
  424. 20:47हुए हैं। यानी कि बुद्ध सब जगह है। जब आप
  425. 20:50शक्ति की बात करेंगे तो कहेंगे कि शक्ति
  426. 20:53के जो शरीर के कई भाग बनके शक्तिपीठ बने।
  427. 20:56जब शैव लोग कहेंगे कि सब जगह वो स्वयंभू
  428. 20:59रूप में शिवजी आ गए। 12 हमें याद है। है
  429. 21:02हजार वैसे ही विष्णु कहां थे? तो ये धाम
  430. 21:06थे। वो यात्रा उन्होंने यहां की। यहां पर
  431. 21:09वैुंठ जैसे तिरुपति में जाएंगे तो कहेंगे
  432. 21:11वैुंठ आ गए यहां पर धरती पे तो हर जगह एक
  433. 21:15जगह को एक स्थल को हम वैुंठ बना देते हैं
  434. 21:19तो विश्वास से ज्योतिर्लिंग बनता है ना कि
  435. 21:23ज्योतिर्लिंग विश्वास बनाता है जहां आपका
  436. 21:27विश्वास होगा वैसे ही अपने आप शिव पर
  437. 21:30प्रकट हो जाएंगे मार्कंडेय के लिए प्रकट
  438. 21:33हुए थे ना बिल्कुल तो मार्कंडेय बन जाओ आ
  439. 21:37जाएंगे शिव आपने उस पे ने तो किताब लिख दी
  440. 21:39एक है ना मार्कंड्स पे इसी पे केदारनाथ का
  441. 21:44आपने नाम लिया मतलब ऊपर मानसरोवर का नाम
  442. 21:47लिया मानसरोवर से एक और चीज पूछना था कि
  443. 21:49कहते हैं कि आठ मानसरोवर है ना हमारे यहां
  444. 21:52आठ ऐसा कुछ है लेकिन हमको सिर्फ एक
  445. 21:54मानसरोवर की बात होती है बाकी कहां है
  446. 21:57देखिए सनातन धर्म में हमेशा कहेंगे कि
  447. 22:00देखिए हजार पुराण हैं आपको केवल 18 दिए गए
  448. 22:03हैं हजार वेद है आपको केवल चार दिए गए हैं
  449. 22:07हजार शिवलिंग आपको केवल 12 दिए गए हैं।
  450. 22:09इसका यह मतलब है कि नम्रता रखो। सब कुछ
  451. 22:13नहीं दिया जाएगा। अनंत पुराणों में छिपा
  452. 22:16है सनातन सत्य।
  453. 22:19आपको दिए हैं केवल दो।
  454. 22:22वरुण के हैं नयन हजार इंद्र के 100 आपके
  455. 22:25मेरे केवल दो। दो। तो दो से जितना मिलेगा
  456. 22:28उससे संतुष्ट रहो। हम तो यह एक यह कहने का
  457. 22:32एक टेक्निक है। हर चीज में ऐसे बताएंगे कि
  458. 22:35देखो बहुत महाभारत इतना बड़ा था हमारे पास
  459. 22:37इतना ही महाभारत मिला है। रामायण इतना
  460. 22:39बड़ा था हमारे पास इतना ही है। वेद इतना
  461. 22:41बड़ा था हमारे पास इतना ही है।
  462. 22:43ज्योतिर्लिंग इतने थे अभी इतना ही है। ये
  463. 22:45बताने का तरीका है कि ज्ञान कभी समाप्त
  464. 22:48नहीं होता।
  465. 22:50तो किताब अनंत होते हैं। विचार एक ही होता
  466. 22:54है। घूम फिर के विचार एक चीज में आ जाएगा।
  467. 22:58वो पाना थोड़ा मुश्किल है। अमरनाथ और
  468. 23:01केदारनाथ इस पर आपका वक्तव्य
  469. 23:05हिमालय पर्वत से पशुपत होता है। तो पहाड़
  470. 23:09में भगवान एकांत के लिए गए थे। लेकिन अभी
  471. 23:12तीर्थ यात्री उन्हें इतना तंग कर रहे हैं।
  472. 23:15देखिए शिवजी कहां क्यों गए थे अमरनाथ?
  473. 23:17एकांत के लिए। क्यों गए केदारनाथ? एकांत
  474. 23:20के लिए। तो पहले जमाने में वहां देवी
  475. 23:23देवता एकांत के लिए जाते थे। अभी तीर्थ
  476. 23:26यात्रा में इतनी भीड़ जैसे मुंबई में भीड़
  477. 23:27हो गई तो अभी शिव जी पता नहीं कहां चले गए
  478. 23:30एकांत के लिए मुझे बहुत बुरा लगता है
  479. 23:32देवताओं के बारे में सोच के उन्हें एकांत
  480. 23:35कहीं नहीं मिलता
  481. 23:37बिकॉज़ उन्हें वो गए क्यों एकांत में बैठ
  482. 23:40के संवाद करने के लिए वार्तालाप करने के
  483. 23:43लिए अभी वो तीर्थ स्थल बन गया होटल्स बन
  484. 23:45गए रास्ते बन गए पहले जमाने में मुश्किल
  485. 23:48से एक दो यात्री पहुंच जाते थे बाकी तो मर
  486. 23:51जाते थे रास्ते में जैसे पांडव गए थे
  487. 23:53स्वर्ग की खोज करते-करते सभी पांडव मर गए
  488. 23:56रास्ते में। वैसे होता था पहले। आजकल
  489. 23:59हेलीकॉप्टर है, प्लेन है, ट्रेन है, बुलेट
  490. 24:01ट्रेन है।
  491. 24:04हम समझते हैं कि टूरिज्म से ज्ञान मिलेगा।
  492. 24:09टूरिज्म से ज्ञान थोड़ी ना मिलता है। तो
  493. 24:12हम टूरिज्म कर रहे हैं, पिकनिक कर रहे
  494. 24:13हैं। भगवान तो सब जगह है। बट ठीक है। वो
  495. 24:18भी चलेगा। समय के साथ हमको लगता है कि अगर
  496. 24:20हम सब ध्यान चले गए अपने आप से भगवान
  497. 24:23हमारे भीतर प्रकट हो जाएंगे। वो भी सही।
  498. 24:26अच्छा आपने भी यात्राएं की होंगी। कहीं पर
  499. 24:29ऐसा कोई दिव्य अनुभव आपको हुआ हो और आपको
  500. 24:32ऐसा लगा हो कि आप अगर मैं आपसे आज सवाल
  501. 24:34पूछ रहा हूं उस अनुभव के बारे में और शेयर
  502. 24:36करना हो तो कौन सा अनुभव कहां का आप शेयर
  503. 24:39करेंगे? तो मैं बेड़गांव गया था और अभी
  504. 24:44दिव्य अनुभव क्या बोले? तो एक रास्ता है
  505. 24:46तो वहां पे एक मंदिर है
  506. 24:49सौधती में रेणुका मां की मंदिर है और
  507. 24:52लोगों को ज्यादा पता नहीं है। मैं उस
  508. 24:55रास्ते में जा रहा था तो मैंने ड्राइवर से
  509. 24:57जो बीच में फॉर नो रीज़ मैंने पूछा यहां
  510. 24:59सौंधती कहीं पास में है। तो उसने गाड़ी
  511. 25:02रोक दी। तो सर आपने अभी क्यों पूछा? आई
  512. 25:05सेड नहीं जस्ट मन में आया ये बात। तो सर
  513. 25:08अगर मैं और 10 कदम आगे जाता तो हाईवे में
  514. 25:11आपको 100 कि.मी. के बाद ही टर्न मिलता।
  515. 25:13टर्न मिलता। अभी देखिए यह जो टर्निंग है
  516. 25:16यह सौंधती वाला है। हम मैंने देखा भी नहीं
  517. 25:18वहां बोर्डवोड कुछ नहीं था। हम तो फिर हम
  518. 25:21गए और मंदिर में बिल्कुल कोई नहीं था।
  519. 25:23दर्शन किया उसके बाद हजारों की संख्या में
  520. 25:26लोग आ गए।
  521. 25:28अब इसे दिव्य बोलोगे या हम बोलेंगे कि
  522. 25:30बुलावा आया था।
  523. 25:33मैंने सोम धति में दर्शन किया रेणुका जी
  524. 25:35का और वो ना मेरी इष्ट देवता है। मैंने
  525. 25:38उसके बारे में पढ़ा है। लेकिन बहुत ही
  526. 25:41उनकी कहानी बहुत ही अलग कहानी है। देसी
  527. 25:44परंपरा से आती है। मार्गी परंपरा में नहीं
  528. 25:46है ये। तो ये देसी परंपरा की बातें लोगों
  529. 25:48को ज्यादा पता नहीं है। लोक परंपरा है। उस
  530. 25:51स्थल उस बेड़गांव का स्थल पुराण है। लेकिन
  531. 25:54उड़ीसा के लोगों को कुछ नहीं पता होगा
  532. 25:56इसके बारे में। तो आई वास क्वाइट लकी। हम
  533. 26:00गणेश जी के सिर की कथा क्या है? देखिए
  534. 26:07शिव बैरागी है, योगी है। उन्हें दुनिया से
  535. 26:11कोई लेना देना नहीं। उन्हें कुछ नहीं करना
  536. 26:13है। शक्ति आती है। कहती है कि देखो आपको
  537. 26:16दुनिया में शामिल होना है। पार्टिसिपेट
  538. 26:19करना है। शिव जी कहते हैं मुझे क्यों करना
  539. 26:21है? मेरे तो बच्चे नहीं है। मैं तो
  540. 26:23स्वयंभू हूं। मेरे पितृ नहीं है। तो मुझे
  541. 26:26बच्चों की आवश्यकता नहीं है। मुझे बच्चे
  542. 26:29नहीं चाहिए। तो देवी अपने आप से अब एक
  543. 26:32बच्चा का निर्माण करती है अपने शरीर से
  544. 26:35जिसे विनायक नाम दिया जाता है। विना नायक
  545. 26:38जिसका जन्म हुआ है उसे विनायक कहते हैं।
  546. 26:40और उसे घर अपने पास रख देती है। शिवजी उसे
  547. 26:44देखते हैं तो उसे गुस्सा आ जाता है। ये
  548. 26:45कौन है? तो पहली बार शिवजी जो इतने उदासीन
  549. 26:48है उनके अंदर एक
  550. 26:51भावना जागृत होती है कि मेरी यह शक्ति के
  551. 26:55बगल में कौन है कि वह मेरे साथ बात नहीं
  552. 26:57कर रही उसके साथ बात कर रही है। भड़क के
  553. 27:00त्रिशूल से सर काट लेते हैं फिर वो विलाप
  554. 27:03करती है और उसे मनाने के लिए वो वहां हाथी
  555. 27:07का सर लगाते हैं।
  556. 27:10बात है कि जब हम देखते हैं गणेश जी की
  557. 27:13मूर्ति इनके वजह से शिवजी में अलग-अलग
  558. 27:17भावनाओं का उत्पत्ति हुआ क्योंकि ये
  559. 27:20उदासीन जो थे एक बाबा जी थे उदासीन थे
  560. 27:25लेकिन इस माध्यम से उनके अंदर की जो
  561. 27:30फीलिंग्स थी उसे निकाला गया कि देवी ने
  562. 27:35कहा कि यह जो पत्थर का भगवान है जो किसी
  563. 27:38से बात नहीं करता उदासी इसके अंदर मैं भाव
  564. 27:42कैसे जगाऊं रस भाव विचार कैसे उत्पत्ति
  565. 27:47करने के लिए रस उत्पत्ति के लिए उन्होंने
  566. 27:51विनायक का निर्माण किया इसलिए जब हम
  567. 27:54विनायक जी की पूजा करते हैं वो शिव के रस
  568. 27:58से उत्पन्न हुए हैं। ईर्ष्या भाव आई,
  569. 28:02गुस्सा आया, करुणा आई जो हम नवरस कहते
  570. 28:06हैं। सभी रस फिर शांति रस आई कि सब शांत
  571. 28:10में बैठे देखिए जितने भी भाव क्रोध आया
  572. 28:14करुणा आया ये सब भावनाओं से गणेश जी का
  573. 28:18जन्म हुआ तो उदासीन
  574. 28:22बन गए रस भरे आ हा क्या बात है तो ये है
  575. 28:26बात इसलिए गणेश जी हमेशा रस भरा होता है
  576. 28:30हम गणेश जी की बात भी करते हैं तो भावनाओं
  577. 28:33से भरे हुए हैं रस से भरे हुए हैं फूल
  578. 28:36पत्ते
  579. 28:37लगाते हैं। शिव जी के साथ कुछ नहीं होता।
  580. 28:39रुद्राक्ष बस भस्म नीरस कुछ नहीं है वहां
  581. 28:44पे। नीरस बिल्कुल ड्राई बैरन कुछ नहीं है।
  582. 28:48लेकिन एक बार शक्ति आ गई तब जाके विनायक
  583. 28:52का जन्म होता है।
  584. 28:56ये योगी की जो दुनिया होती है। श्रवणों की
  585. 28:59दुनिया से ये विपरीत दांपत्य की दुनिया।
  586. 29:02तो शिवजी योगी को भोगी बनाने का काम देवी
  587. 29:05कर रही है। शिव को शंकर बना रहे हैं। कि
  588. 29:08शिव उदासीन है। शंकर हमेशा शक्ति के साथ
  589. 29:12रहेंगे। इसलिए मंदिर में भी शिव जी की जो
  590. 29:14शिवलिंग होता है वो हमेशा योनि के साथ
  591. 29:16होता है। यानी कि दोनों तत्व होंगे। यानी
  592. 29:20कि आप अकेले जिंदगी में कभी नहीं रह सकते।
  593. 29:22इसका यह मतलब नहीं कि मैन वूमन ऐसा नहीं
  594. 29:25है। कि अकेले उदासीन आप नहीं रह सकते।
  595. 29:28दुनिया में। आपको हर पेड़ को दूसरे पेड़ों
  596. 29:31के साथ रहना पड़ेगा। आपको लोगों के साथ
  597. 29:33रहना पड़ेगा। दुनियादारी दुनिया से भाग
  598. 29:36नहीं सकते आप।
  599. 29:38तो क्योंकि आप काशी पहुंच गए और वहां पर
  600. 29:41आपने बताया था कि माता अन्नपूर्णा के
  601. 29:43स्वरूप में वहां पर आ जाती हैं और मुझे
  602. 29:45ऐसा लगता है कि अर्धनारेश्वर की जो कथा है
  603. 29:47कहीं ना कहीं इससे जुड़ी है। तो मुझे वो
  604. 29:49कहानी समझाकर बताकर पूरी कर दीजिए वो पूरी
  605. 29:52बात।
  606. 29:54देखिए अर्धनारेश्वर
  607. 29:57हमेशा शिव के रूप होती है। देवी का रूप
  608. 30:00नहीं होता। जब हम अर्धनारेश्वर कहते हैं
  609. 30:04तो शिव ने आधा स्त्री रूप लिया है। देवी
  610. 30:09ने आधा पुरुष का रूप नहीं लिया है।
  611. 30:14इसका मतलब क्या है? कि प्रकृति हमेशा
  612. 30:17रहेगी।
  613. 30:19विचार आते रहेंगे, जाते रहेंगे। ज्ञान आता
  614. 30:22रहेगा जाता रहेगा। प्रकृति हमेशा रहेगी।
  615. 30:26तो प्रकृति आधार है।
  616. 30:29और अगर हमें ज्ञान प्राप्ति करना है तो
  617. 30:32प्रकृति को स्वीकार करना पड़ेगा। सो जब
  618. 30:35शिव जी शक्ति को स्वीकार करते हैं तभी
  619. 30:37जाके पूर्ण होते हैं। केवल अपने आप से
  620. 30:41पुरुष जैसे आपका मन जब तक शरीर नहीं होगा
  621. 30:45मन नहीं होगा। मन नहीं होगा। सही बात है।
  622. 30:48ऐसे नहीं कि दुनिया में ऐसे मन है जो शरीर
  623. 30:51को ढूंढ रहे हैं। जब शरीर होता है पात्र
  624. 30:54के अंदर उसके अंदर मन होता है। हम कह सकते
  625. 30:57हैं कि शिवजी मन है और देवी शरीर है और
  626. 31:01दोनों का जब जुड़ जब जुड़ जाते हैं तो
  627. 31:04अर्धनारेश्वर है। तो शरीर जब चला जाएगा तो
  628. 31:08मन कहां गया है? शरीर के बिना मन नहीं
  629. 31:12होगा।
  630. 31:14तो उसे यह बात को समझाने के लिए सरल तरीके
  631. 31:17से उन्होंने अर्धनारेश्वर का रूप लिया है।
  632. 31:19हमेशा याद रखना चाहिए कि हमेशा शिव का रूप
  633. 31:21है। शक्ति का रूप नहीं है। शक्ति केवल
  634. 31:25अर्ध शिव नहीं बनती है। शिव अर्ध शक्ति
  635. 31:29शक्ति को वो स्वीकार कर रहे हैं। जो
  636. 31:31उदासीन बाबा पहाड़ के ऊपर बैठे हुए हैं वो
  637. 31:34काशी आ रहे हैं और देवी को विवाह करके
  638. 31:38स्वीकार करके अर्धनारेश्वर बन रहे हैं।
  639. 31:42फिर एक दिन वो वापस चले जाएंगे पहाड़ के
  640. 31:44ऊपर वापस आएंगे वापस जाएंगे वियोग सुयोग
  641. 31:50यही जिंदगी है ये हर जगह वियोग सुयोग हर
  642. 31:52जगह इसलिए इसे सनातन कहते हैं ना हर जगह
  643. 31:54में वही मिलेगा आपको घूम फिर के मैं वही
  644. 31:57बातों के पास आप देखोगे जितना भी अगर आप
  645. 32:00रिव्यू करेंगे रिवाइंड करेंगे वही बातें
  646. 32:02वापस आ रही है इसे इसलिए इसे सनातन कहा
  647. 32:04जाता है हर चीज घूम फिर के वो वही उस सम
  648. 32:09में आएगा जैसे सा रे गा म प ध नी सा सम
  649. 32:14में आया आ तो सनातन ऐसा सम हमेशा बात सम
  650. 32:19में आएगा तो मेरा सम होता है भूख वो है
  651. 32:22मेन पॉइंट घूम फिर के वो नहीं समझोगे कुछ
  652. 32:26नहीं समझो तो शिव जी के त्रिपुंड तीन ऐसे
  653. 32:30एक तो भस्म उनको भस्म प्रिय है क्यों ये
  654. 32:33जो प्रतीक है वो भस्म के साथ क्यों जोड़ा
  655. 32:36जाता है त्रिपुंड क्यों है त्रिशूल जो है
  656. 32:38उसमें भी तीन वो है बेलपत्र जब चढ़ाते हैं
  657. 32:41वो भी तीन भाग हैं उसके त्रिनेत्र हैं
  658. 32:43उनके तो मुझे ये समझना था ये जो प्रतीक
  659. 32:47चिन्ह है वो हमारे आज के समय से अगर इनको
  660. 32:50जोड़ के देखा जाए तो आज का जीवन दर्शन
  661. 32:52समझने के लिए कनेक्ट कैसे किया जा सकता है
  662. 32:55देखिए जिंदगी में ज्यादातर लोग हमेशा
  663. 32:58कहेंगे ये सही है गलत है सही है गलत है
  664. 33:02शिव जी उसके बीच में खड़े हैं हम कि ना
  665. 33:04कुछ सही है ना कुछ गलत है समय के हिसाब से
  666. 33:07वही बात अमृत हो सकता है समय के हिसाब से
  667. 33:10वही ही बात जहर हो सकता है। ध्यान से
  668. 33:14देखो। जज मत करो। जजमेंट होता है ना कि यह
  669. 33:17बुरा आदमी है। इस समय में इस क्षण में यह
  670. 33:21बुरा है। हमेशा बुरा नहीं है। तो यह बात
  671. 33:25वो त्रिपुंदर से दिखा रहे हैं कि एक तीसरा
  672. 33:27दृष्टिकोण होता है कि केवल वाद विवाद की
  673. 33:31दुनिया से निकल के जब आप संवाद की तरफ
  674. 33:33जाओगे तो फिर तीन निकलता है। वाद विवाद
  675. 33:37संवाद
  676. 33:40नहीं है क्योंकि हम तीसरी हमको हमेशा लगता
  677. 33:44है लड़ाई में कि मैं सही हूं तुम गलत हो
  678. 33:46तो शिव जी वहां आकर बोलते हैं कि तुम कहीं
  679. 33:49दूसरे तरीके से देख सकते हैं कि तुम दोनों
  680. 33:51गलत हो तुम दोनों सही हो या कोई सही नहीं
  681. 33:54कोई गलत नहीं ये जो सोचने का तरीका है वो
  682. 33:58शिव तत्व है। सर सनातन आपका मतलब सबसे
  683. 34:01फेवरेट विषय है और हम सनातन पे काम कर रहे
  684. 34:04हैं। तिलक सनातन पे काम करता है। हम जिस
  685. 34:05तरह के वीडियो के द्वारा हम ये लोगों को
  686. 34:09रोचक जानकारी दे रहे हैं। एक तो तिलक आपने
  687. 34:12जितना देखा समझा है हम कैसा काम कर रहे
  688. 34:14हैं? आपको कैसा लगता है? नहीं आई थिंक
  689. 34:16सनातन का ज्ञान दुनिया भर में पहुंचना
  690. 34:18चाहिए और यह एक माध्यम है और यह माध्यम से
  691. 34:23लोगों में रुचि जाएगी जागृत होगी।
  692. 34:26जिज्ञासा होगा और जब तक जिज्ञासा नहीं
  693. 34:29होगी तब तक सरस्वती नहीं आएगी। तो शायद
  694. 34:31तिलक से लोगों के घर में सरस्वती आएगी।
  695. 34:34यही मेरी आशा है।
  696. 34:37[संगीत]

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This page contains the full transcript of राम का स्वरूप और पुराणों का गुप्त ज्ञान | Devdatta Patnayak | Podcast | Tilak Varta by Tilak Varta - The Sanatan Podcast, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 5,546 words across 696 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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