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Deeni Aur Dunyawi ilm Ki Ahmiyat By Shaikh Abdul Haseeb Madani | Dawat e Haq Conference 2024 Mumbai — Transcript

by iic Mumbai - Islamic Information Centre Mumbai · 5,694 words · 700 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:04अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल
  2. 0:07आलमीन व सलातो सलाम अला अशरफ अंबिया वल
  3. 0:12मुरसलीन
  4. 0:14वाला आलीही वाबी अजमान व मन तब सानि इला
  5. 0:21यमन याय हलन आमन
  6. 0:25कुलाका ला तमना इला वंतुम मुस्लिम
  7. 0:31याय हना सुत र बकमल लक मन वाहिद खल मनहा
  8. 0:38जज
  9. 0:39रिजाल कसीर सा तलाल तल ब
  10. 0:46रम इनल्लाह काना अलीक
  11. 0:49रकीबा यान
  12. 0:53आनला सीदा लक मालक लकन बक मला रसू फ
  13. 1:04फमा अम्मा
  14. 1:06बाद फ बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह
  15. 1:10रहमान
  16. 1:12[संगीत]
  17. 1:13रहीमन यालम नला यालम इनमा यत कर
  18. 1:22अलबाब ला एतराम सदर इजलास म उलमा
  19. 1:28कराम बुजुर्गों नौजवान भाइयों और पर्दा
  20. 1:32नशीन खवातीन
  21. 1:35इस्लाम आज के इस अहम इजलास
  22. 1:39में मुझे जिस उनवान पर इजार ख्याल करने को
  23. 1:43कहा गया
  24. 1:44है व उनवान है शरी व असरी तालीम अहमियत और
  25. 1:53जरूरत आजन
  26. 1:56गिरामी कुरान सुन्नत अल्लाह तबारक का एक
  27. 2:00ऐसा दीन
  28. 2:02है जो दीन इंसान की आखिरत को भी संवारने
  29. 2:06वाली
  30. 2:14तालीमाबाद हम और आपको सिखाता
  31. 2:18है हमारी और आपकी जिंदगी में चाहे वह दीनी
  32. 2:22जिंदगी हो या हमारी और आपकी दुनियावी
  33. 2:25जिंदगी
  34. 2:26हो इसमें इल्म की क्या अहमियत है या हमारी
  35. 2:31जिंदगी में इल्म की जरूरत कितनी है क्यों
  36. 2:34है इसको समझने के लिए बहुत सारे तरीके हो
  37. 2:38सकते
  38. 2:39हैं लेकिन सबसे अच्छा तरीका यही है कि कम
  39. 2:42से कम हम कुरान और सुन्नत के
  40. 2:44बुनियादी नसू पर नजर डाल ले यह नसू खुद हम
  41. 2:49और आपको बता देंगे कि दुनिया की बात हो या
  42. 2:53आखिरत की बात हमारी और आपकी जन्नत और
  43. 2:57जहन्नम का मामला हो या मेरे और आप आपके घर
  44. 3:00और कारोबार का मसला हो दोनों जगह एक बेहतर
  45. 3:04जिंदगी के लिए कुरान और सुन्नत की हिदायत
  46. 3:06के मुताबिक तालीम बुनियादी वसीला बुनियादी
  47. 3:10जरिए की हैसियत रखती है इल्म इंसान को
  48. 3:14क्या देता है और जहालत इंसान से क्या छीन
  49. 3:18है इसको समझने के लिए आप सिर्फ वह आयात
  50. 3:22जिनका ताल्लुक इल्म और उलमा से और वो अदीस
  51. 3:26जिनका ताल्लुक इल्म और जहालत से अगर नु
  52. 3:30सूस को सामने रखकर हम और आप उनकी फिक समझ
  53. 3:34हासिल कर ले और उस पर गौर फिक्र कर लेंगे
  54. 3:37यकीन मानिए यह नसू खुद हम और आपको समझा
  55. 3:40देंगे कि ना दुनिया हमारी बेहतर हो सकती
  56. 3:43है ना हमारी और आपकी आखिरत सवर सकती है
  57. 3:46अगर हमारा और आपका ताल्लुक और रिश्ता सही
  58. 3:49इल्म से ना हो वह इल्म जो दुनिया को सुधार
  59. 3:52दे और वह इल्म जो हमारी और आपकी आखिरत को
  60. 3:55संवार दे आज की इस किताब में मैं आप हजरात
  61. 3:59तीन के सामने कुछ हवाले जिक्र कर देता हूं
  62. 4:02कुछ बातें जिक्र कर देता हूं जो बतौर याद
  63. 4:05दिहानी की आप देखें कि इल्म की अहमियत को
  64. 4:08वाज करने के लिए सबसे बुनियादी मसला यही
  65. 4:11है कि कुरान मजीद की पहली वही जो अल्लाह
  66. 4:14ताला ने प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलही
  67. 4:16वसल्लम पर नाजिल फरमाई पहली वही का पहला
  68. 4:20लफ्ज ही था इ बिस्म रिक लक अल्लाह के नबी
  69. 4:25आप पढ़िए अपने रब के नाम से पढ़िए इब्तिदा
  70. 4:28अल्लाह ताला ने इल्म से की तालीम से की
  71. 4:32अल्लाह ताला ने पढ़ने के हुकुम से इस दीन
  72. 4:35की वही का आगाज फरमाया यह खुद बताता है कि
  73. 4:39हमारे और आपके खैर का हमारी और आपकी
  74. 4:42तरक्की का आगाज सही इल्म से होता है वो
  75. 4:46इल्म जो हमारे और आपके रब के नाम से जुड़ा
  76. 4:49हो इसी से हमारी और आपकी इब्तिदा होती है
  77. 4:52इल्म की अहमियत के लिए आप यह बात देखें
  78. 4:55अंबिया अल सलातो सलाम की जो दुआएं होती वो
  79. 4:58दुनिया व आखिरत के खैर को अपने अंदर समेटे
  80. 5:01हुए होती हैं आप अगर अंबिया अल सलातो सलाम
  81. 5:05की दुआएं देखें तो एक दुआ आपको ऐसी भी
  82. 5:08मिली जो दुआ अल्लाह के नबी ने की लेकिन इस
  83. 5:11दुआ की तलब या यह दुआ मांगने का हुकुम खुद
  84. 5:15अल्लाह ताला ने प्यारे नबी सल्लल्लाहु
  85. 5:17अलैहि वसल्लम को दिया अल्लाह ने फरमाया वक
  86. 5:20रनी इमा अल्लाह के नबी आप कहिए ऐ मेरे रब
  87. 5:25मुझे मजीद इल्म अता फरमा सोच कितना बड़ा
  88. 5:28खैर होगा अल्लाह ने पहले नबूवत अता फरमा
  89. 5:31दी है और नबूवत अता करने के बाद अल्लाह के
  90. 5:34नबी को सिखला रहा है बतला रहा है कि मजीद
  91. 5:38इल्म के हुसूल की आप अल्लाह से दुआ कीजिए
  92. 5:41तलब कीजिए मांगिए और जिस चीज के तलबगार
  93. 5:44अंबिया अल सलातो सलाम हो बल्कि नबियों के
  94. 5:48सरदार प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
  95. 5:50हो उसके खैर होने में किसी को क्या शक और
  96. 5:54शुबा हो सकता है आप देखें कि नबी अली
  97. 5:56सलातो अस्सलाम को अल्लाह ने नबूवत अता
  98. 5:58फरमा दी लेकिन उसके बाद भी अल्लाह के नबी
  99. 6:01सल्लल्लाहु अल वसल्लम को अल्लाह ने हुकम
  100. 6:03दिया तो कहा फलम अ ला इलाहा इल्लल्लाह
  101. 6:07अल्लाह के नबी आप ला इलाहा इल्लल्लाह का
  102. 6:11इल्म हासिल कर लीजिए जान लीजिए अल्लाह के
  103. 6:14नबी आप ला इलाह इल्लल्लाह के मानी और मफा
  104. 6:17से आगाही हासिल कर लीजिए हाजन गिरामी
  105. 6:20कुराने मजीद की बहुत सारी आयतें ऐसी हैं
  106. 6:23जो इस इल्म की फजीलत और अहमियत को बताती
  107. 6:25है और अगर अहा दीस की तरफ हम और आप बढ़े
  108. 6:29प्यारी नबी सल्लल्लाहु अलही वसल्लम ने इस
  109. 6:31इल्म की अहमियत को बताने के लिए बहुत सारी
  110. 6:34बातें कई अदीस अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु
  111. 6:37अल वसल्लम ने इरशाद फरमाई मैं सिर्फ एक
  112. 6:39हदीस का हवाला देता हूं एक हदीस में हुसूल
  113. 6:43इल्म की कितनी फजीलत अल्लाह के नबी ने
  114. 6:45बयान फरमाई सुनन अबी दाऊद वगैरा की रिवायत
  115. 6:49हजरत अबू दरदा र अल्लाह ताला रावी प्यारे
  116. 6:52नबी सल्लल्लाह वसल्लम ने फरमाया
  117. 6:58मन
  118. 7:01जो आदमी तलब इल्म की राह पर निकलता है
  119. 7:05अल्लाह ताला इसके बदले में जन्नत का
  120. 7:08रास्ता उसके लिए आसान कर देता है बाज अम
  121. 7:12ने इस हदीस के टुकड़े की शर करते हुए लिखा
  122. 7:14है कि इसमें यह मतलब नहीं कि अल्लाह तबारक
  123. 7:18ताला बदले में जन्नत का रास्ता आसान करता
  124. 7:21है बल्कि मतलब यह है कि तलब इल्म का
  125. 7:23रास्ता ही जन्नत का रास्ता है तलब इल्म का
  126. 7:26रास्ता ही जन्नत का रास्ता है आगे अल्लाह
  127. 7:29के न सल्लल्लाहु अ वसल्लम ने फरमाया
  128. 7:35ला फरिश्ते अपने पर बिचा देते हैं जब कोई
  129. 7:38तालिब इल्म तलब इल्म की राह में निकलता है
  130. 7:42प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलही वसल्लम ने आगे
  131. 7:44मजीद यह भी बयान फरमाया आप सल्लल्लाहु
  132. 7:47अलही वसल्लम ने फरमाया के आलिम जो इल्म
  133. 7:50वाला होता है उसके लिए आसमानों जमीन वाले
  134. 7:54मगफिरत की दुआ करते हैं आप तलब इल्म में
  135. 7:57लगे रहे आपकी मगफिरत की की दुआ आसमानों के
  136. 8:00फरिश्ते और जमीन की मखलूक अल्लाह तबारक
  137. 8:03ताला से आपके लिए मगफिरत की दुआ करते हैं
  138. 8:06जब तक आप तलब इल्म की राह में लगे रहते
  139. 8:09हैं अल्लाह के नबी ने मजीद फरमाया वल तान
  140. 8:12फी जो फिल ना सिर्फ यह कि आसमान और जमीन
  141. 8:14की मखलूक की बात है बल्कि पसलियां पानी के
  142. 8:18अंदर भी तालिब इल्म के लिए दुआ किया करती
  143. 8:21हैं अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि
  144. 8:23वसल्लम ने आगे यह भी बयान फरमाया कि एक
  145. 8:26आलिम को आबिद पर अल्लाह ताला ने उतनी ही
  146. 8:29फजीलत अता फरमाई यानी एक आलिम दन तलब इल्म
  147. 8:33की राह में लगने वाला इंसान अल्लाह की नजर
  148. 8:35में कितना बलं पाया मुकाम रखता है कहा एक
  149. 8:39इबादत गुजार आम इंसान नहीं एक ऐसा मुसलमान
  150. 8:42जो इबादत गुजार है लेकिन इल्म वाला नहीं
  151. 8:45इबादत गुजार आलिम दन पर फजीलत नहीं रखता
  152. 8:49बल्कि आलिम दन इस इबादत करने वाले पर
  153. 8:52फजीलत रखता है कितनी नबी अ सलातो सलाम ने
  154. 8:58फरमाया
  155. 9:00चवी रात का चांद जिस तरह उस रात में तमाम
  156. 9:04सितारों पर अपनी बरतरी और अपनी फकत रखता
  157. 9:06है एक आलिम दन इबादत गुजार इंसान पर इतनी
  158. 9:10ही ज्यादा फजीलत रखता है और अल्लाह के नबी
  159. 9:12सल्ला अ वसल्लम ने आगे फरमाया
  160. 9:16िया उलमा तो अंबिया के वारिस है इल्म वाले
  161. 9:20तो अंबिया के वारिस है
  162. 9:24नार और अंबिया दिनार दिरहम अपनी वरासत में
  163. 9:27छोड़कर नहीं जाते
  164. 9:31उलमा की शक्ल में या इल्म की शक्ल में
  165. 9:34अंबिया अली सलातो सलाम अपनी वरासत छोड़ कर
  166. 9:37जाते हैं अल्लाह के नबी ने फरमाया
  167. 9:41फनवार जो आदमी यह इल्म ले लेता है यूं
  168. 9:45समझो दुनिया के खैर में से हद वाफिना ले
  169. 9:48लिया यानी एक बड़ा हिस्सा उसने ले लिया
  170. 9:51यूं कहे इस हदीस के आखरी जुमले में अल्लाह
  171. 9:54के नबी ने यह कह दिया इल्म हासिल कर लिया
  172. 9:56तो यूं समझो खजानो की कुंजियां तुम्हारे
  173. 9:58हाथ हाथ में आ गए आखिरत के खजानो की
  174. 10:01कुंजियां दुनिया के खजनों की कुंजियां हर
  175. 10:04तरह का खैर अल्लाह ताला ने हदे वा फिर
  176. 10:06तुम्हें अता कर दिया अगर तुम इल्म वाले हो
  177. 10:09गए हाजन गिरामी इस हदीस का एक-एक टुकड़ा
  178. 10:12प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की
  179. 10:14दीगर अहा दीस की ताई के साथ इस्लामी शरीयत
  180. 10:18के उन रहनुमा खत उन रहनुमा उसूलों की
  181. 10:21हैसियत रखता है कि जो हम और आपको तलब इल्म
  182. 10:24की राह पर लगाते हैं नसू से शरिया बेशुमार
  183. 10:27हैं और अगर मैं नसू से शरिया के बाद कुछ
  184. 10:31वो अकवाले भी आपके सामने जिक्र करना चाहूं
  185. 10:34जो हु कमा ने कहे तजब का लोगों ने कहे
  186. 10:37जहां दीदा आंखों ने जहां दीदा दिमाग ने इस
  187. 10:40कायनात का इस दुनिया का तजुर्बा हासिल
  188. 10:43करने के बाद इल्म की अहमियत के सिलसिले
  189. 10:45में कहे हैं तो एकद जुमले वो भी सुना देता
  190. 10:48हूं बाज लोगों ने लिखा और कहा है कि जहालत
  191. 10:51की मजम्मत और बुराई के लिए यही बात काफी
  192. 10:54है कि जाहिल भी खुद को जाहिल कहलाना पसंद
  193. 10:57नहीं करता और इल्म की फज लत के लिए इतना
  194. 11:00कहना काफी है जो जाहिल है वह भी अपने आप
  195. 11:02को आलिम कहलाना पसंद करता है सुभान अल्लाह
  196. 11:05हाजन गिरामी किसी और ने एक बात कही इल्म
  197. 11:08वो जेवर है जो हर आदमी को खूबसूरत बना
  198. 11:11देता है किसी ने कहा इल्म वो दौलत है जो
  199. 11:15खर्च करने से खत्म नहीं होती दुनिया की हर
  200. 11:17दौलत आप खर्च करेंगे जितना खर्च करेंगे
  201. 11:20उतनी घटती जाएगी लेकिन आप अगर इल्म खर्च
  202. 11:24करेंगे तो यह इल्म जितना खर्च किया जाता
  203. 11:27है उसी कदर ज्यादा ब ता जाता है किसी ने
  204. 11:30कहा इल्म वो दौलत है जो आपसे कोई चुरा
  205. 11:33नहीं सकता आपने सोना रखा पैसा रखा है
  206. 11:36हत्ता के जमीन और जायदाद रखी हत्ता कि आप
  207. 11:39उसी घर में रहते हैं कई बार आदमी के पैरों
  208. 11:41तले जमीन निकल जाती है हालांकि उसी जमीन
  209. 11:44पर खड़ा रहता है आपकी हर दौलत चुराई जा
  210. 11:47सकती लेकिन आपका इल्म एक ऐसी दौलत है जो
  211. 11:49दुनिया में कोई आपसे चुरा नहीं सकता हाजन
  212. 11:53गिरामी ये अकवाले अपनी जगह पे लेकिन इस
  213. 11:55इल्म की हमारी और आपकी जिंदगी में किस कदर
  214. 11:58ज्यादा जरू जरूरत है इसका अंदाजा लगाएं ये
  215. 12:01अकवाले बताते हैं कि इल्म एक जीनत है एक
  216. 12:04जेवर है एक जायद चीज है लेकिन कुरान और
  217. 12:07सुन्नत की
  218. 12:09तालीमाबाद हमारी और आपकी जीनत से ज्यादा
  219. 12:13हमारी और आपकी जरूरत है तलब इल्म में लगना
  220. 12:16हमारी और आपकी मसरूफियत से ज्यादा हमारी
  221. 12:19और आपकी इबादत है तलब इल्म हमारी और आपकी
  222. 12:22तिजारत और हमारी और आपकी दुनिया को
  223. 12:24सुधारने संवारने के जरिए से ज्यादा अल्लाह
  224. 12:28के फजल करम के बाद अल्लाह ताला की बंदगी
  225. 12:30है तलब इल्म इबादत है अल्लाह के बंदों यह
  226. 12:34इल्म इस इल्म का सबसे बड़ा फायदा इंसान को
  227. 12:37यह मिलता है कि यह इल्म आदमी की रूह की
  228. 12:40गिजा बनता है ये इल्म आदमी की रूह की गिज
  229. 12:43बनता है और जब यह रूह की गिजा बनता है तो
  230. 12:46आदमी को अंदर से संवार देता है निखार देता
  231. 12:50है आदमी को अंदर से ऐसे परवान चढ़ा देता
  232. 12:54है कि कद वही है लेकिन सोच और जहन इस कदर
  233. 12:58ज्यादा ऊंचा हो जाता है कि दुनिया के
  234. 13:00मामूली से मुकाम पर बैठा हुआ सारी कायनात
  235. 13:04का गोया वह मुशा हदा करता है सुभान अल्लाह
  236. 13:06कुराने मजीद में अल्लाह ताला ने इस हकीकत
  237. 13:08को के इल्म आदमी को कैसे बदल देता है उसकी
  238. 13:12रूह की कैसी गजा बनता है दिल दिमाग को
  239. 13:14कैसी नशो नुमा अता करता है कितने प्यारे
  240. 13:17अंदाज में अल्लाह ताला ने यह हकीकत समझाई
  241. 13:19देखो अल्लाह ने
  242. 13:24फरमाया अल्लाह के नबी आप कह दीजिए या
  243. 13:27पूछिए इनसे
  244. 13:32जो लोग जानकार हैं और जो लोग इल्म नहीं
  245. 13:34रखते क्या ये दोनों के दोनों बराबर हो
  246. 13:37सकते हैं इस सवाल को कहते हैं इस्तफा में
  247. 13:39इनकारी यानी अल्लाह ताला ने यह कहा है कि
  248. 13:42जान लो अल्लाह के बंदों एक इल्म वाला और
  249. 13:45बे इल्म दोनों बराबर नहीं हो सकते तक मिला
  250. 13:47जो आयत का है वह बड़ा शानदार है कहा
  251. 13:51इनमा अलबाब मसला यह है कि दुनिया में इबरत
  252. 13:55पकड़ना नसीहत हासिल करना तो यह सिर्फ
  253. 13:57अकलमंद का काम है आयत की तक्मी को उसकी
  254. 14:01इब्तिदा से जोड़कर देख लें तो यह बात बताई
  255. 14:04जा रही है कि यह इल्म आपकी अकल की नशो
  256. 14:07नुमा और तरबियत करते-करते उस मुकाम पे ले
  257. 14:10जाता है जहां आपका दिल और दिमाग रोशन हो
  258. 14:12जाता है जहां आप उलल अलबाब में आ जाते हैं
  259. 14:15जहां आपका दिमाग सही सिंथ में काम करने
  260. 14:17लगता है जहां आपका दिमाग सही और गलत का
  261. 14:20सही फैसला करने लगता है जहां आपका दिमाग
  262. 14:23हक और हकीकत को पहचानने वाला बन जाता है
  263. 14:26जहां आप अल्लाह के नबी प्यारे नबी
  264. 14:29सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीमाबाद
  265. 14:34अल्लाह ताला ने वो खैर रखा है कि आदमी को
  266. 14:37अंदर से संवार देता है कुरान मजीद का एक
  267. 14:40और हवाला आपके सामने रखता हूं यह इल्म
  268. 14:43आदमी को महजब बना देता है और कैसी तरबियत
  269. 14:46करता है किस कदर महजब बनाता है यह अल्लाह
  270. 14:49ताला ने हम और आपको एक मामूली से जानवर और
  271. 14:53बल्कि एक नजिस जानवर की मिसाल के जरिए
  272. 14:55अल्लाह ने सिखाया अल्लाह ताला ने सूर
  273. 14:59मायदा के अंदर एक मसला यह बयान किया है कि
  274. 15:02शिकारी कुत्ता जो होता है आम कुत्ता अगर
  275. 15:04शिकार कर ले तो उसका शिकार हराम है लेकिन
  276. 15:08वही अगर तरबियत याफ्ता सधा हुआ कुत्ता
  277. 15:12सिखाया हुआ कुत्ता वोह जिसे तरबियत दी गई
  278. 15:15शिकार की वो अगर शिकार करे तो उसका अपना
  279. 15:18शिकार मुसलमान के लिए हलाल होता है एक
  280. 15:21इस्लामी शरीयत के इस मसले की हकीकत क्या
  281. 15:24है बाज अहले इल्म ने उसकी तफसीर शराह करते
  282. 15:27हुए बड़ी प्यारी बात लिखी कहा कुत्ता जब
  283. 15:29भी शिकार करता है तो अपने लिए शिकार करता
  284. 15:32है और शिकार पे मुंह मारता है तो उसका
  285. 15:35अपना जो लु आब होता है थूक होता है वो ना
  286. 15:38सिर्फ ये कि लगता है बल्कि उसकी अपनी ख
  287. 15:41सासत नफ्स के अंदर जो हम क ना कुत्ता पन
  288. 15:44जो होता है वो उसका पूरी तरह से बेदार
  289. 15:46होता है लेकिन सधा हुआ कुत्ता शिकार करता
  290. 15:49है तो उसके अंदर यह तब्दीली आ जाती है वो
  291. 15:52शिकार करता है तब भी उसे मालूम है कि मेरे
  292. 15:55जज्बात अपनी जगह लेकिन यह शिकार मेरा नहीं
  293. 15:58मेरे माल मालिक का है सुभान अल्लाह जो
  294. 16:00इल्म ये कुत्ते की इतनी तरबियत कर दे कि
  295. 16:03कुत्ता अपने और मालिक के माल में फर्क
  296. 16:06करने वाला हो जाए इंसान की तरबियत ये इल्म
  297. 16:09कैसे कर सकता है मालूम यह हुआ कि ये इल्म
  298. 16:12इंसान को महजब बनाता है उसकी तरबियत करता
  299. 16:15है हाजन गिरामी कुरान मजीद का एक और हवाला
  300. 16:18आपके सामने देता हूं जो बताता है कि यह
  301. 16:21इल्म कमजोर से कमजोर को बड़ा ताकतवर बना
  302. 16:24देता है सुलेमान अलही सलातो व् सलाम का
  303. 16:26वाकिया अल्लाह तबारक ताला ने सूरे
  304. 16:32नमलूक में से था एक दिन हजरत सुलेमान की
  305. 16:35इजाजत के बगैर वो लश्कर से गायब हो गया
  306. 16:38हजरत सुलेमान को पता चला तो सुलेमान अली
  307. 16:41सलातो सलाम ने कहा यह कहां गया अब आपस लौट
  308. 16:44कर आएगा या तो अपनी गैर हाजरी का कोई
  309. 16:46माकूल उजर लेकर आए या अगर उजर नहीं लेकर
  310. 16:49आया
  311. 16:50ल मैं उसको जबाह करके छोडूंगा इसकी सजा
  312. 16:54यही होगी
  313. 16:55फ सुभान अल्लाह कुरान मजीद के अज की गहराई
  314. 16:59को समझो अल्लाह के
  315. 17:01बंदों ज्यादा देर नहीं गुजरी थी कि व
  316. 17:04हुदहुद आया
  317. 17:07फल सुलेमान अ सला सलाम एक ऐसी बात मैं
  318. 17:11जानता हूं जो आप नहीं जानते
  319. 17:15व मैं मलिक सबा का या मुल्के सबा का एक
  320. 17:19यकीनी खबर वहां की एक यकीनी बात लेकर आपके
  321. 17:23पास आया हूं हाने गिरामी हुदहुद एक परिंदा
  322. 17:26है छोटा सा परिंदा है सुलेमान अली सलातो
  323. 17:29अस्सलाम नबी हैं हुक्मरान हैं और इंसानों
  324. 17:32और जिन्नो पर ही नहीं रिंदों परन पर
  325. 17:35हुकूमत करने वाले हुक्मरान है इन दोनों का
  326. 17:37फर्क देखो खदू इजाजत के बगैर गायब हुआ है
  327. 17:40मुजरिम है वापस लौट कर आए तो जाहिर बात है
  328. 17:44डरा हुआ होगा सहमा हुआ होगा उसके अपनी
  329. 17:47हालत बुरी होगी यह सब कुछ होगी लेकिन इतनी
  330. 17:51गई गुजरी हालत में भी वोह कौन सी ताकत है
  331. 17:54जो उसे इतना यकीन दिलाती है कि सुलेमान अल
  332. 17:57सलातो वसलाम ला से वो कहता है मालम ऐ
  333. 18:02सुलेमान अल सलातो सलाम आप जो बात नहीं
  334. 18:05जानते आज ये कैसी बात मुझे मालूम है हाजन
  335. 18:08गिरामी तालीम कमजोर का हथियार है तालीम
  336. 18:12कमजोर से कमजोर तबकात को इस दुनिया में सर
  337. 18:15बुलंद करने का जरिया है और यह इतनी बड़ी
  338. 18:17सच्चाई है कि दुनिया में नहीं आप सिर्फ
  339. 18:21पूरी तारीख से भी परे जाकर सिर्फ इस मुल्क
  340. 18:24के माजी करीब के हालात देख लो माजी करीब
  341. 18:27के हालात देख लो जिन कौम ने या हमारे अपने
  342. 18:30इस मुल्क के मुख्तलिफ समाज जो मौजूद हैं
  343. 18:33इस समाज के जो मुख्तलिफ तबकात हैं इन
  344. 18:35तबकात में से जो दबे कुचले तबकात थे उन
  345. 18:38लोगों ने तालीम पर तवज्जो दी तो आज यह
  346. 18:41सूरत हाल है कि हुकूमत के बड़े छोटे ओहद
  347. 18:45पर वही दबे कुचले लोग आज बैठे हुए हैं कल
  348. 18:48तक जो
  349. 18:54महकूटा वाले बनकर खड़े हैं अल्लाह के ब
  350. 18:58बंद तालीम कमजोर का वह हथियार है जिससे वह
  351. 19:01तरक्की करते हैं आज मुस्लिम कौम के हालात
  352. 19:04हम और आप जानते हैं दुनिया की तालीम या
  353. 19:06असरी तालीम या फिर यह कि वो उलूम जो
  354. 19:09दुनिया के असबाब और
  355. 19:10वसाइन खुद फायदा उठाने दुनिया को फायदा
  356. 19:14पहुंचाने के काबिल बनाने वाले उलूम है वो
  357. 19:17तालीमाबाद के मैदान में देखें मुस्लिम कौम
  358. 19:21बहुत ज्यादा पिछड़ी हुई कौम नजर आती है
  359. 19:24सचर कमेटी की जो रिपोर्ट आई थी ना खद नजर
  360. 19:27इससे कि वो किस कदर ज्यादा काबिले यकीन है
  361. 19:30लेकिन उस रिपोर्ट से एक अगर अंदाजा आप ले
  362. 19:32सकें कहा मुस्लिम कौम की तालीमी सूरते हाल
  363. 19:35ये तालीमी पसमा कीी का हाल यह है आदिवासी
  364. 19:39कौम वो जो किसी जगह रुक कर नहीं पढ़ा करते
  365. 19:42थे आज मुसलमानों की हालत कौमी सतह पर
  366. 19:45तालीम के मैदान में यह है कि मुसलमान
  367. 19:47आदिवासी कौम से भी कहीं ज्यादा पिछड़े हुए
  368. 19:50नजर आते हैं हाजन गिरामी हमारे और आपके
  369. 19:53समाज में तालीम के मैदान पे बड़ी मंसूबा
  370. 19:56बंद तरीके से मेहनत करनी ने की जरूरत है
  371. 19:59अल्लाह के बंदों हम वो लोग हैं जो बड़े
  372. 20:07जल्दबाजी वक्त से रोजगार कमाने वाला बनाना
  373. 20:10चाहते हैं 15 साल 20 साल का हुआ बच्चा तंत
  374. 20:14भी अभी पास नहीं किया है अभी दसवीं जमात
  375. 20:16भी उसने मुकम्मल नहीं की है मां-बाप यह
  376. 20:18सोचने लगते हैं कि बच्चा कहां से कमाए
  377. 20:21कितना कमाए मेरा बोझ कब कलका करेगा अल्लाह
  378. 20:24के बंदों दूसरी कौम जो आपके आसपास ही बचते
  379. 20:27हैं उनको देखा करो हमने देखा है ऐसे भी
  380. 20:31वालीदैन देखे हैं जो अपनी बनी बनाई नौकरी
  381. 20:34जमा जमाया कारोबार छोड़कर करियो से शहर
  382. 20:38मुंत किल हो जाते हैं एक शहर से दूसरे शहर
  383. 20:40मुंत किल हो जाते हैं सिर्फ इसलिए कि उनके
  384. 20:43बच्चों को अच्छी तालीम मिल सके इसलिए कि
  385. 20:46उनको मालूम है आज की उनकी ये कुर्बानियां
  386. 20:49कुर्बानियां नहीं है ये अपने बच्चों पे
  387. 20:51इन्वेस्टमेंट है दुनिया में अपने बच्चों
  388. 20:54पर मेहनत से ज्यादा बेहतर इन्वेस्टमेंट
  389. 20:56नहीं है ये हकीक दूसरी कौम समझ गई और
  390. 21:00तरक्की कर रहे हैं और आज हमारी अपनी कौम
  391. 21:02के बहुत सारे अफराद का यह हाल है कि आज भी
  392. 21:05वह यह समझते हैं हम इन्वेस्टमेंट करने से
  393. 21:08पहले इनकम की फिक्र में लगे हुए हैं और
  394. 21:10चाहते हैं कि हमारे बच्चे हमारे और आपके
  395. 21:12माली हालात दुरुस्त कर दें अल्लाह के
  396. 21:14बंदों बात ज्यादा लंबी नहीं कर सकता मेरे
  397. 21:16पास वक्त ज्यादा नहीं लेकिन कम से कम यह
  398. 21:19बात आपके सामने रख सकता हूं देखो इस
  399. 21:22दुनिया में आप दो तरीके से जी सकते हैं एक
  400. 21:24तरीका यह कि लोग आप पे रहमो करम की नजर
  401. 21:27डालें लोग आप पे तरज खाएं आपके लिए
  402. 21:30रिजर्वेशन की बात हो हुकूमत से मुतालबा हो
  403. 21:33कि मुसलमानों को रिजर्वेशन दिया जाए यकीनन
  404. 21:36जब पसमांदा है तो यकीनन हुकूमत को इसकी
  405. 21:39फिक्र करनी चाहिए कि किसी मख सूस तबके को
  406. 21:42रिजर्वेशन देकर ऊपर उठाया जाए ये हुकूमत
  407. 21:45की अपनी फिक्र होनी चाहिए लेकिन हमारी
  408. 21:47अपनी सोच क्या होनी चाहिए हम रिजर्वेशन या
  409. 21:50किसी के रहमो करम पे जीने वाले बनकर नहीं
  410. 21:53हमारी और आपके नफ्स के अंदर अपने तई इतनी
  411. 21:56खुद तेमा दी हो इस कदर ज्यादा तालीम पर
  412. 21:59मेहनत करो कि तुम किसी के पास काम ढूंढते
  413. 22:03हुए अपने लिए जरिए माश तलब करते हुए ना
  414. 22:06जाओ बल्कि आपके सामने दुनिया आए कि आओ आप
  415. 22:11हमारे पास काम करो मंजिल की जुस्तजू में
  416. 22:14क्यों फिर रहा है राही मंजिल की जुस्तजू
  417. 22:16में क्यों फिर रहा है राही इतना अजीम बन
  418. 22:20जा कि मंजिल तुझे पुकारे अल्लाह के बंदों
  419. 22:23इल्म की राह में आगे बढ़ो हर मैदान को फतह
  420. 22:26करो इतने काबिल ब जाओ कि तुम्हारी
  421. 22:29काबिलियत तुम्हारे पास लोगों को लेकर आए य
  422. 22:32कि आप अपने सामने दुनिया वालों के सामने
  423. 22:34अपनी काबिलियत बताने के लिए जाओ भाइयों
  424. 22:36देखो एक बहुत आसान सी बात बता देता हूं इस
  425. 22:39असरी तालीम के मैदान की एक सच्चाई यह है
  426. 22:42कि आदमी जितना कम पड़ेगा मवा के कम होंगे
  427. 22:46कंपटीशन ज्यादा होगा मवा के अपॉर्चुनिटी
  428. 22:49कम है लेकिन आपके पास कॉम्पिटेशन मुकाबला
  429. 22:53ज्यादा उम्मीदवार ज्यादा आप जितना ज्यादा
  430. 22:56पढ़ते जाएंगे ऊपर होते जाएंगे मवा के
  431. 22:59निस्बत बढ़ते जाएंगे कंपटीशन घटता जाएगा
  432. 23:02आज हमारे और आपके कौम के बच्चे ये जो
  433. 23:05स्कूल का मरहला नहीं पार कर पाते बमुश्किल
  434. 23:07कॉलेज पहुंचते कॉलेज पहुंच गए तो उससे आगे
  435. 23:10यूनिवर्सिटियोफकालीकट
  436. 23:28सारी दुनिया आपके सामने एक ऐसा दस्तरखान
  437. 23:30बन जाए कि आप जहां से जो चाहो उठाओ खाओ
  438. 23:34अपनी पसंद से खाओ तुम तय करो कि तुम्हें
  439. 23:37क्या करना है यह नहीं कि अपने सर्टिफिकेट
  440. 23:39लिए हुए अपनी काबिलियत की गवाया लिए हुए
  441. 23:42इधर-उधर घूमो कि तुम मुझे नौकरी दे दो मैं
  442. 23:45तुम्हें नौकरी नहीं दे सकता अल्लाह के
  443. 23:47बंदों इस कदर काबिल बन जाओ तालीम के जरिए
  444. 23:50कि अल्लाह ताला सारी दुनिया तुम्हारे हाथ
  445. 23:53में रख दे व
  446. 23:56समा अल्लाह ने आसमान और जमीन को तुम्हारे
  447. 24:00लिए मुसर किया है इस के जरिए अपने आप को
  448. 24:03उसके काबिल बना लोने गिरामी यह कुछ बातें
  449. 24:06असरी उलूम के हवाले से मुझे आपके सामने
  450. 24:08रखनी थी जरा हम गुफ्तगू को ख मोड़ते हैं
  451. 24:12शरी तालीम शरी उलूम की तरफ कुराने मजीद
  452. 24:15में अल्लाह ताला ने एक बड़ी प्यारी बात
  453. 24:16कही सुभान अल्लाह अल्लाह ने फरमाया
  454. 24:26लानिया अल्लाह ने कहा लोगों की अक्सर बे
  455. 24:30इल्म है लोगों की अक्सर जानकार नहीं है
  456. 24:34लोगों की अक्सर हकीकत से वाकिफ कार नहीं
  457. 24:37है फिर अल्लाह ने कहा ऐसा नहीं कि यह
  458. 24:39जाहिल
  459. 24:46मुतलुलुक पर कादिर नजर आते हैं यह दुनिया
  460. 24:50में एक कोने से दूसरे कोने तक जाना जानते
  461. 24:54हैं दुनिया लेकिन मसला यह है कि वो इल्म
  462. 24:58जो बा मकसद इल्म हो वो इल्म जो इनकी अपनी
  463. 25:00जिंदगियों का मकसद दे सके
  464. 25:04वल इनका इल्म अधूरा इल्म है इसलिए कि इनका
  465. 25:08इल्म उनको आखिरत की फिक्र नहीं देता उनका
  466. 25:11इल्म उन्हें अपनी आखिरत के अंजाम के
  467. 25:13सिलसिले में फिक्र मंद नहीं बनाता है
  468. 25:15अल्लाह के बंदों इस्लामी शरीयत आपको एक
  469. 25:18बात बताती है दुनिया वाले आखिरत प ईमान
  470. 25:22नहीं रखते होंगे इसलिए वो दुनिया ही को सब
  471. 25:25कुछ समझकर वही इल्म हासिल करेंगे जो सिर्फ
  472. 25:28उनकी दुनिया बना सके आपका ईमान तो आखिरत
  473. 25:30पर है ना और आपका ईमान यह है कि मोमिन की
  474. 25:33आखिरत उसकी दुनिया से ज्यादा अहम है तो
  475. 25:36फिर आपके पास भी यह बात वाज होनी चाहिए
  476. 25:39इल्म के सिलसिले में दुनिया जैसे सोचती है
  477. 25:42आप सिर्फ उतना नहीं सोच सकते आप उनके
  478. 25:45बराबर सोचिए उनसे बढ़कर सोचिए उनसे बेहतर
  479. 25:48सोचिए दुनिया ही के बारे में लेकिन दुनिया
  480. 25:51से आगे बढ़कर आखिरत की फिक्र कीजिए आपकी
  481. 25:54मेरी जिंदगी के अंदर दीनी इल्म की अहमियत
  482. 25:57होनी चाए चाहिए इस कदर होनी चाहिए कि
  483. 26:00हमारी और आपकी बुनियादी दीनी इल्म के लिए
  484. 26:03पहली तरजीह होनी चाहिए मेरा और आपका बच्चा
  485. 26:07डॉक्टर बने इंजीनियर बने साइंटिस्ट बने या
  486. 26:10दुनिया के मुख्तलिफ उलूम फुनन का माहिर
  487. 26:12बने फन्नी महारत हासिल करें करें इस्लाम
  488. 26:15ने आपको मना नहीं किया हुकुम दिया है
  489. 26:18लेकिन अल्लाह के बंदों हमारा बच्चा सबसे
  490. 26:20पहले मुसलमान बने इसकी फिक्र करो अल्लाह
  491. 26:22के बंदों वो इल्म जो आपको मुसलमान ना बना
  492. 26:25सके वो इल्म वाकी नों में अगर खैर भी
  493. 26:28लाएगा वो महदूद खैर लाएगा और अक्सर ऐसे
  494. 26:32होगा कि वह खैर भी लाएगा तो शर से आपके
  495. 26:35बच्चों को बचाने वाला नहीं हो सकता किसी
  496. 26:38ने बड़ी प्यारी बात कही थी कि आज के इंसान
  497. 26:40का मसला यह है कि वह हवाओं में परिंदों की
  498. 26:43तरह उड़ता है समंदर में मछलियों की तरह
  499. 26:46तैरता है लेकिन मसला यह है कि जमीन पर
  500. 26:49इंसानों की तरह उसे चलना नहीं आया शरी
  501. 26:52इल्म दीनी इल्म आपको सबसे पहले एक अच्छा
  502. 26:55इंसान बनाता है अल्लाह का एक अच्छा बंदा
  503. 26:57बनाता है आपकी अपनी जिंदगी का मकसद आपको
  504. 27:00देता है आपके अपनी जिंदगी के मकसद से आपको
  505. 27:03जोड़े रखता है इसीलिए अल्लाह के बंदों वो
  506. 27:06लोग जो अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं
  507. 27:08पढ़ाओ बढ़ाओ बहुत कुछ करो बेटी भी पढ़ाओ
  508. 27:11बेटी भी बढ़ाओ बेटी को भी बचाओ सब करो
  509. 27:14लेकिन सबसे पहले यह करो कि इन बच्चों को
  510. 27:17उनके रब से मिलाओ अल्लाह के बंदों अल्लाह
  511. 27:19के बंदों इनको इनके रब से मिलाओ आज की एक
  512. 27:22बहुत बड़ी सच्चाई यह है कि एक बड़ी तादाद
  513. 27:25ऐसे लोगों की अपनों की बात कर गैरों का तो
  514. 27:28हाल है ही हमारी अपनी कौम के बड़े लोग ऐसे
  515. 27:31हैं जो आज भी अपने रब से कमा हकक वाकिफ
  516. 27:34नहीं अल्लाह के बंदों अल्लाह की तौहीद
  517. 27:36इन्हें नहीं मालूम है अल्लाह ताला का हक
  518. 27:38इन्हें नहीं मालूम है अल्लाह के बंदों
  519. 27:40इन्हें पढ़ाओ इन्हें पढ़ाओ इतना पढ़ाओ कि
  520. 27:43ये अपने रब से रब को पहचान ले सुभान
  521. 27:46अल्लाह आप सोचो यह कैसी बेचैन रूहे हैं ये
  522. 27:50कैसी बेचैन रूहे हैं जो दुनिया तो घूमती
  523. 27:52है बिल्कुल लगता है यह भटकते लोग कभी दाएं
  524. 27:56कभी बाएं कभी मशरिक कभी मगरिब जा रहे हैं
  525. 27:59सारी दुनिया घूम रहे हैं सारी दुनिया उलट
  526. 28:01पलट कर रहे हैं लेकिन इस दुनिया के पैदा
  527. 28:04करने वाले अपने मालिक के हकीकी से इनका
  528. 28:06कोई रिश्ता नहीं रह गया कैसी जिंदगी
  529. 28:08अल्लाह के बंदों इसीलिए मसला याद रखो
  530. 28:11अल्लाह ताला की मारफ प्यारे नबी
  531. 28:14सल्लल्लाहु अल वसल्लम की मारफ और दीन
  532. 28:17इस्लाम की बुनियादी मारफ यह हर मुसलमान पर
  533. 28:20फर्द न है अल्लाह के नबी ने फरमाया तल फला
  534. 28:25मुस्लिम इल्म का हासिल करना हर मुसलमान पे
  535. 28:28फर्ज है ये वही इल्म है जिसे शैखुल इस्लाम
  536. 28:31मोहम्मद बन अब्दुल वहाब रहमतुल्लाह अल ने
  537. 28:33अल उसूल सला सा का नाम दिया अपने रब की
  538. 28:36मारफ अपने नबी की मारफ अपने दीन की मारफ
  539. 28:39आपको होनी चाहिए ये वो सवाल है जो कब्र
  540. 28:42में आपसे किए जाएंगे कब्र में फरिश्ता
  541. 28:45पूछेगा मन रबक तुम्हारा रब कौन है मन नबी
  542. 28:48युक तुम्हारा नबी कौन है मा दनक तेरा दीन
  543. 28:51क्या है अल्लाह के बंदों इसकी तैयारी
  544. 28:53करवाओ कि असल में आप अपने बच्चों को कुछ
  545. 28:56देते हैं सबसे अहम चीज यही देते हैं हाजरी
  546. 29:00गिरामी मैं आपके सामने यह बात जिक्र कर
  547. 29:02रहा था कि अपने बच्चों को वह दीनी तालीम
  548. 29:06जरूर दें जो दीनी तालीम उन्हें उनके अपने
  549. 29:10मकसद जिंदगी का शूर और पहचान दे वो दीनी
  550. 29:14तालीम जो उनको उनके रब से जोड़ दे वो दीनी
  551. 29:17तालीम जो इन बच्चों को उनके अपने नबी से
  552. 29:20जोड़ दे वो दीनी तालीम जो इन बच्चों को
  553. 29:23अपने दीन से जोड़ दे आप अगर उनको दीन से
  554. 29:26जोड़ेंगे अपने रब से जोड़ेंगे अपने नबी से
  555. 29:29जोड़ेंगे यह बच्चे दुनिया में जहां जाएंगे
  556. 29:32रब से नबी से अपने दीन से जुड़े रहेंगे और
  557. 29:36इसी से जुड़े जुड़े जब दुनिया से रुखसत
  558. 29:39होकर आखिरत में जाएंगे तो कब्र में
  559. 29:41फरिश्तों के यह जो सवाल हैं मन रब्ब मन
  560. 29:45नबक मा दनक इनके जवाब भी उनके लिए अल्लाह
  561. 29:48तबारक ताला आसान कर देगा हाजन गिरामी यह
  562. 29:52बात याद रखिए आज हम समाज में बेदनी की बात
  563. 29:56करते हैं इरत की बात करते हैं मुस्लिम
  564. 29:58लड़कियों की समाज से बगावत या घरों से
  565. 30:01बगावत या वालीदैन से बगावत की बात करते
  566. 30:04हैं आप यह बात याद रखें शेख इब्ने बाज
  567. 30:07रहमतुल्लाह अल ने अपने छोटे से रिसाले के
  568. 30:10अंदर बड़ी प्यारी बात लिखी वो लिखते हैं
  569. 30:12कहते हैं कि देखो सारी दुनिया में
  570. 30:15मुसलमानों के अंदर जहां कहीं गुमराही है
  571. 30:18वकायद की गुमराही हो इबादत में खलल हो वोह
  572. 30:21अखलाक और किरदार का मामला हो वह हलाल और
  573. 30:24हराम का मसला हो तमाम मकामा में जो गुमरा
  574. 30:27हियां पाई जाती हैं इन गुमराही हों की
  575. 30:30बुनियादी वजह इस समाज के अंदर पाई जाने
  576. 30:33वाली जहालत ला ला इल्मी है दीन से ना
  577. 30:36वाकिफ उसकी सबसे बड़ी और बुनियादी और पहली
  578. 30:39वजह है इसीलिए भाइयों दीनी इल्म को अपनी
  579. 30:42जिंदगी की जरूरत बनाओ खाना पानी छत कपड़ा
  580. 30:46मकान यह सब आपकी दुनिया की बुनियादी
  581. 30:49जरूरतें हो सकती है लेकिन एक ईमान वाले के
  582. 30:52नजर में इनके साथ बल्कि बसा औकात इनसे
  583. 30:55ज्यादा जरूरी यह है कि उसे वो बुनियादी
  584. 30:57इल्म मिले जो इल्म उसे उसके रब से जोड़े
  585. 31:00रखे उसके अपने मकसद जिंदगी से जोड़े रखे
  586. 31:03हाजन गिरामी इस इल्म को सबसे पहले तो
  587. 31:06बुनियादी दर्जे का इल्म फर्ज के दर्जे में
  588. 31:09हर मुसलमान को देने दिलाने की कोशिश करें
  589. 31:12और दूसरे नंबर पे याद रखो भाइयों इस दीन
  590. 31:15के अंदर अल्लाह ताला ने इतना कमाल रखा है
  591. 31:18कि यह दीन जो आदमी सीखता है ना वो दुनिया
  592. 31:21के हर इंसान के साथ मुम करने का सबसे
  593. 31:25बेहतरीन तरीका सीख लेते एक इंसान है इंसान
  594. 31:29होने के नाते अपने वालिद से उसके मामलात
  595. 31:31हैं अपनी औलाद से मामलात हैं उसकी अपनी
  596. 31:34बीवी से मामलात हैं बीवी है तो शौहर से
  597. 31:36मामलात हैं अपने भाई बहनों से मामलात है
  598. 31:39पड़ोसियों के साथ मामलात हैं कारोबार की
  599. 31:41दुनिया में कई लोगों से कभी अपने से ऊपर
  600. 31:44कभी अपने से नीचे लोगों के साथ मामलात है
  601. 31:47इस्लामी शरीयत तो आपको यह बताती है इंसान
  602. 31:49का सिर्फ इंसानों से मामला नहीं ये कुत्ते
  603. 31:52ये बिल्ली ये चरि और परि हर एक के साथ
  604. 31:54इंसान का मामला इल्म का फायदा यह होगा कि
  605. 31:58यह इल्म आपको उस दीन से जोड़ेगा जो दीन हर
  606. 32:01एक के साथ मामला करने का सबसे बेहतरीन
  607. 32:05तरीका आपको सिखाएगा अल्लाह ने फरमाया
  608. 32:11इल यह कुरान उस रास्ते की तरफ रहनुमाई
  609. 32:14करता है जो रास्ता सबसे ज्यादा सीधा है
  610. 32:18अल्लाह के बंदों दीन सीखो ग कम से कम इतना
  611. 32:21होगा तुम्हारी शख्सियत इतनी निखर जाएगी
  612. 32:24सवर जाएगी अल्लाह ताला आप को इस कदर
  613. 32:27ज्यादा तरबियत याफ्ता बना देगा जिंदगी के
  614. 32:30किसी भी मसले में और जिंदगी के किसी भी
  615. 32:33मैदान में समाज के किसी भी तबके के साथ
  616. 32:36मामला करने का तरीका और सलीका इतना प्यारा
  617. 32:39आपकी जिंदगी में आएगा कि फिर आप जहां
  618. 32:42रहेंगे समाज के लिए खैर का बाइ बनेंगे
  619. 32:45आपसे पूरे समाज का भला होगा वो मुस्लिम
  620. 32:48होगा तो भी आपके साथ फायदे में रहेगा वो
  621. 32:51गैर मुस्लिम भी होगा तो आपकी तरफ से वह
  622. 32:53खैर ही की उम्मीद रखेगा आपने पढ़ा होगा ना
  623. 32:56ता तारीख में ऐसा भी मंजर तारीख ने देखा
  624. 32:59मुसलमानों ने एक मुल्क पर कब्जा कर लिया
  625. 33:02एक इलाके प कब्जा कर लिया अब उसके बाद वो
  626. 33:05सरहदी इलाका था हालात कुछ ऐसे बदले कि
  627. 33:07दुश्मन के हमला करने का पलट कर हमला करने
  628. 33:10का इरादा हुआ दुश्मन के पलट आने का जो डर
  629. 33:13था मौजूद वहां जो तादाद थी वो दुश्मन का
  630. 33:16सामना नहीं कर सकती थी तो उन्होंने यह
  631. 33:18फैसला लिया कि हम यहां से वापस लौट कर चले
  632. 33:21जाएंगे ताकि अपने इलाके में रहकर जंग
  633. 33:24लड़ेंगे क्या हुआ पता है आपको मुसलमानों
  634. 33:27ने उनसे जो जजिया लिया था उनसे जो पैसा
  635. 33:31लिया था वह पैसा वापस कर दिया लोगों के
  636. 33:34लिए ताज्जुब की बात थी वो जो गैर मुस्लिम
  637. 33:36मुसलमानों के माते थे उनके लिए ताज्जुब की
  638. 33:39बात थी लेकिन मुसलमानों ने चंद दिन में जो
  639. 33:41नुकू छोड़े ना तारीख ने यह गवाही लिख कर
  640. 33:44रखी है कि उनके अपने लोगों ने कहा कि जाने
  641. 33:48वालों जल्द लौट कर आना इसलिए कि तुम्हारी
  642. 33:51हुकूमत हमने हमारे अपने लोगों की हमारे
  643. 33:54अपने अपने हुकूमत से ज्यादा बेहतर पाई आप
  644. 33:57यकीन करो आपको यह इस्लाम ऐसे निखार देगा
  645. 34:01कि आप जहां रहेंगे सारे समाज के लिए एक
  646. 34:03रहमत बनकर रहेंगे एक नेमत बनकर रहेंगे ये
  647. 34:06दूसरे दर्जे का इल्म है कि आप दीन सीखें
  648. 34:09जो दीन आपके हर मामले में आपकी तरबियत करे
  649. 34:12आज इसी का अफसोस है दीन सिखाया भी तहा का
  650. 34:15तरीका नहीं मालूम है लोगों के साथ बात
  651. 34:18करने का सलीका नहीं बड़ों का एहतराम नहीं
  652. 34:20मालूम छोटों पे शफकत करने का तरीका नहीं
  653. 34:23मालूम तरबियत करो यह दीन आपकी तरबियत करता
  654. 34:26है और आखरी बात जो इस सिलसिले में कहना
  655. 34:28चाहूंगा वह यह कि यह इल्म फिर आप हासिल
  656. 34:31करते रहेंगे पढ़ते रहेंगे पढ़ते रहेंगे
  657. 34:34आगे बढ़ते रहेंगे तो अल्लाह के फजल करम से
  658. 34:37यकीन मानिए ये इल्म आदमी के अंदर अमल के
  659. 34:40साथ जिस कदर बढ़ता जाएगा अल्लाह ताला की
  660. 34:42खश उतनी ही बढ़ती जाएगी इनमा
  661. 34:46लामा अल्लाह ताला से हकीकत में इल्म वाले
  662. 34:50ही डरते हैं यह इल्म ही खश इलाही के हकीकी
  663. 34:54दरवाजे आप पर और मुझ पर खोलता है अल्लाह
  664. 34:56के के बंदों ये दीनी इल्म हासिल करो पढ़ो
  665. 34:59पढ़ाओ मस्जिदों में पढ़ाओ मकातिब में
  666. 35:02पढ़ाओ सुबह शाम के दुरू उस में पढ़ाओ ऐसे
  667. 35:04प्रोग्रामों में पढ़ाओ मस्जिदों में होने
  668. 35:06वाले तरबियती प्रोग्राम में पढ़ाओ सोशल
  669. 35:09मीडिया के जजर आए वहां से पढ़ाओ हर जगह से
  670. 35:12पढ़ाओ इतना पढ़ाओ कि लोग इस समाज में इस
  671. 35:15कदर ज्यादा दीन पढ़ लिख ले जाएं कि फिर
  672. 35:18जिसे कहते हैं ना अंदर से जब आदमी भर जाए
  673. 35:20तो उबलने लगता है इल्म आपके अंदर भी वैसे
  674. 35:23भर जाए जैसे कि अल्लाह के नबी स वसल्लम ने
  675. 35:26ख्वाब में हजरत उमर के बारे में देखा कि
  676. 35:28हजरत उमर रजि अल्लाह ताला अन्हो ने इतना
  677. 35:30पिया इतना पिया इतना पिया उनके अपने
  678. 35:33उंगलियों से भी पानी दूध बह बह कर निकल
  679. 35:36रहा है अल्लाह के बंदों इल्म इतना हासिल
  680. 35:38करो कि ये इल्म आपको और मुझको अंदर से भर
  681. 35:41दे फिर इसका खैर और बरकत मेरी और आपकी
  682. 35:43जिंदगी में हर जगह नजर आए मैं अपनी
  683. 35:45गुफ्तगू को खत्म करते हुए अल्लाह तबारक
  684. 35:48ताला से दुआ करता हूं कि अल्लाह ताला मुझे
  685. 35:50और आप सभी हजरात को वो दीन का इल्म हो
  686. 35:53दुनिया का इल्म हो जो भी इल्म इल्म नाफ हो
  687. 35:56जो समाज का भला करे जो हमारा भला करे और
  688. 35:59जो हमारी और आपकी दुनिया बेहतर करे जो
  689. 36:01हमारी और आपकी आखिरत को संवार दे ऐसे इल्म
  690. 36:04की अहमियत और जरूरत समझने की तौफीक अता
  691. 36:06फरमाए और जो हम समझते हैं अल्लाह ताला
  692. 36:09अपनी जिंदगियों में उस परे अपनाने और अमल
  693. 36:10करने की तौफीक अता फरमाए आमीन खर दवाना
  694. 36:14हमदुलिल्ला रब्बिल
  695. 36:15आलमीन ऐसे ही फायदेमंद इस्लामिक वीडियोस
  696. 36:19देखने और मनहर सलफ पर किताब व सुन्नत की
  697. 36:25तालीमाबाद नजात जन्नत के हुसूल का सबब साथ
  698. 36:29ही माल में बरकत व इजाफे का जरिया भी बने
  699. 36:32आमीन जजाकल्लाह
  700. 36:35खैर

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