David Goggins Can’t Hurt Me Hindi Summary | 11 Lessons That Will Change Your Mindset #audiobook — Transcript
Full transcript
- 0:00शायद आपकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह नहीं है
- 0:02कि आप कमजोर हैं। शायद प्रॉब्लम यह है कि
- 0:06आपने अपनी [संगीत] वीकनेस के साथ इतना
- 0:08कंफर्टेबल होना सीख लिया है कि अब वो आपको
- 0:11वीकनेस लगती ही नहीं। आप कहते हैं मेरे
- 0:14पास टाइम नहीं है। लेकिन उसी दिन 2 घंटे
- 0:18रील्स देख लेते हैं। कहते हैं मुझसे नहीं
- 0:21होगा। [संगीत]
- 0:23लेकिन कोशिश करने से पहले ही अपने दिमाग
- 0:25में फेलियर की पूरी कहानी लिख देते हैं।
- 0:28कहते हैं मेरी सिचुएशन अलग है और
- 0:32धीरे-धीरे [संगीत] वही सिचुएशन आपकी
- 0:34आइडेंटिटी बन जाती है। सबसे खतरनाक
- 0:37एक्सक्यूज वो नहीं होता जो आप दूसरों से
- 0:40बोलते हैं। सबसे खतरनाक वो होता है जिसे
- 0:43आप खुद सच मानने लगते हैं। क्योंकि जब
- 0:46इंसान किसी लिमिटेशन को सच मान लेता है तो
- 0:49[संगीत] उसे साबित करने के लिए दुनिया की
- 0:51जरूरत नहीं पड़ती। उसका अपना बिहेवियर उस
- 0:54लिमिटेशन को रोज मजबूत करता [संगीत] रहता
- 0:57है। एक दिन आप कम पढ़ते हैं। फिर खुद से
- 1:00कहते हैं कि आज मूड नहीं था। अगले दिन फिर
- 1:04वही [संगीत] होता है। फिर आप कहते हैं कि
- 1:06डिसिप्लिन मेरी चीज नहीं है। कुछ महीनों
- 1:09बाद आप खुद को ऐसा इंसान समझने लगते हैं
- 1:12जो कंसिस्टेंट नहीं रह सकता। लेकिन एक
- 1:15अनकंफर्टेबल [संगीत]
- 1:16सवाल है। अगर आपने अपनी लिमिट्स को कभी
- 1:19प्रॉपर्ली टेस्ट ही नहीं किया तो आपको
- 1:21कैसे पता कि वे आपकी लिमिट्स हैं? अगर
- 1:24आपने डर की वजह से किसी रास्ते पर कदम ही
- 1:26नहीं रखा तो आपको कैसे पता कि आप उस
- 1:30रास्ते पर चल नहीं सकते और अगर आपने हर
- 1:32बार डिसकंफर्ट आने पर पीछे हटना सीख
- 1:34[संगीत] लिया तो क्या आपकी जिंदगी आपकी
- 1:37एक्चुअल कैपेसिटी के हिसाब से चल रही है
- 1:40[संगीत] या आपकी अवॉयडेंस की कैपेसिटी के
- 1:42हिसाब से डेविड गॉगिंस की कहानी इसी सवाल
- 1:46के आसपास घूमती है। एक ऐसा इंसान जिसने
- 1:49अपने पास्ट, अपने शरीर, अपने डर, अपनी
- 1:53फेलियर्स और अपनी सेल्फ इमेज के साथ
- 1:55[संगीत] ऐसी लड़ाईयां लड़ी जिनसे उसकी
- 1:58जिंदगी का डायरेक्शन बदल गया। लेकिन इस
- 2:01कहानी को सिर्फ एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी आदमी
- 2:04की कहानी समझना आसान है। और शायद यही सबसे
- 2:07बड़ी गलती होगी। क्योंकि असली सवाल यह
- 2:11नहीं है कि गॉगिंस ने [संगीत] कितना सहा।
- 2:13असली सवाल यह है कि इंसान अपने बारे में
- 2:16बनाई हुई कहानी को कितना बदल सकता है और
- 2:19उससे भी अनकंफर्टेबल सवाल है। आपने अपने
- 2:22बारे में कौन सी कहानी इतनी बार दोहराई है
- 2:25कि अब आपको वो रियलिटी लगने लगी है।
- 2:28[संगीत] इंट्रोडक्शन डेविड गॉगिंस की
- 2:30कहानी को समझने के लिए सिर्फ उनकी
- 2:33अचीवमेंट्स देखना काफी नहीं है। अगर आप
- 2:36सिर्फ इतना देखें कि उन्होंने मिलिट्री
- 2:38ट्रेनिंग की एंड्रंस इवेंट्स किए। अपने
- 2:41शरीर और माइंड को एक्सट्रीम कंडीशंस में
- 2:43पुश किया तो कहानी इंप्रेसिव जरूर लगेगी
- 2:47लेकिन अधूरी रहेगी। क्योंकि किसी इंसान
- 2:50[संगीत] की सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मेशन उस
- 2:52दिन शुरू नहीं होती जब वो कोई ट्रॉफी
- 2:55जीतता है। वो अक्सर उससे बहुत पहले शुरू
- 2:58होती है। उस समय जब इंसान पहली बार अपने
- 3:02पुराने वर्जन को पहचानता है और समझता है
- 3:05कि जिस तरीके से वो अब तक जी रहा था। वो
- 3:08उसे उस जिंदगी तक नहीं ले जा सकता [संगीत]
- 3:11जिसे वह चाहता है। कांट हर्ट मी में
- 3:14गॉगिंस अपने जीवन को इसी तरह देखते हैं।
- 3:17उनका पास्ट आसान नहीं था। बचपन [संगीत]
- 3:20में उन्होंने घर के भीतर अब्यूज, डर और
- 3:23इनस्टेबिलिटी का [संगीत] सामना किया।
- 3:25उन्होंने डिस्क्रिमिनेशन और आर्थिक
- 3:28कठिनाइयों का भी अनुभव किया। उनके शुरुआती
- 3:31वर्षों ने उनके अंदर ऐसी बिलीव्स पैदा की
- 3:35जिनसे निकलना बाद में उनकी सबसे बड़ी
- 3:37लड़ाईयों में से एक बना। और यही एक
- 3:40इंपॉर्टेंट डिस्टिंशन सामने आता है। पास्ट
- 3:43आपको एक्सप्लेन कर सकता है। लेकिन पास्ट
- 3:46हमेशा आपको डिफाइन नहीं करता। दो इंसानों
- 3:50के साथ सिमिलर सरकमस्ट्ससेस [संगीत] हो
- 3:52सकते हैं। और वे अलग-अलग डायरेक्शंस में
- 3:54जा सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि
- 3:57[संगीत]
- 3:57ट्रॉमा, पावर्टी डिस्क्रिमिनेशन या फैमिली
- 4:01एनवायरमेंट का कोई असर नहीं होता। असर
- 4:04होता है। बहुत गहरा [संगीत] असर हो सकता
- 4:07है। लेकिन कहानी तब बदलती है जब इंसान यह
- 4:10पूछना शुरू करता है कि मेरे साथ क्या हुआ?
- 4:13से आगे अब मैं इसके साथ क्या करूं? तक
- 4:17कैसे पहुंचा जाए?
- 4:19यही अकाउंटेबिलिटी की शुरुआत है और
- 4:21अकाउंटेबिलिटी सुनने में बहुत सिंपल वर्ड
- 4:24लगता है। लेकिन प्रैक्टिकली [संगीत] यह
- 4:26बेहद अनकंफर्टेबल है क्योंकि ब्लेम आपको
- 4:29इमोशनल रिलीफ देता है। [संगीत] अगर मेरी
- 4:32जिंदगी खराब है क्योंकि मेरे पेरेंट्स ने
- 4:34मुझे सपोर्ट नहीं किया क्योंकि मेरी
- 4:37फाइनेंशियल कंडीशन खराब है क्योंकि मेरे
- 4:40कॉलेज में
- 4:41[संगीत]
- 4:41ओपोरर्चुनिटीज कम है क्योंकि दूसरे लोग
- 4:43मुझसे ज्यादा टैलेंटेड है क्योंकि मेरा
- 4:46एनवायरमेंट खराब है। तो कुछ समय के लिए मन
- 4:49को राहत मिलती है क्योंकि अगर प्रॉब्लम
- 4:52पूरी तरह बाहर है तो रिस्पांसिबिलिटी भी
- 4:54बाहर है। लेकिन [संगीत] जिस मोमेंट आप
- 4:57कहते हैं ठीक है शायद मेरे साथ यह सब हुआ।
- 5:01लेकिन अब आगे क्या? उसी मोमेंट कंट्रोल का
- 5:05थोड़ा हिस्सा वापस आपके हाथ में आता है और
- 5:08कंट्रोल के साथ [संगीत] रिस्पांसिबिलिटी
- 5:10आती है। यही वजह है कि अकाउंटेबिलिटी
- 5:12सुनने में एंपावरिंग लगती है लेकिन महसूस
- 5:15होने में पेनफुल हो सकती है क्योंकि अब
- 5:18आपके पास एक्सक्यूसेस कम हो जाते हैं।
- 5:21गगिंस की जर्नी का एक सेंट्रल थीम यही है
- 5:24कि इंसान को अपने माइंड के सामने खड़ा
- 5:27होना पड़ता है। हम अक्सर दूसरों से झूठ
- 5:29बोलने की बात करते हैं। लेकिन इंसान खुद
- 5:32से जो लाइ बोलता है वे कहीं ज्यादा डेंजरस
- 5:36हो सकती है। मैं बस थोड़ा और प्रिपेयर
- 5:39करके शुरू करूंगा। अगले मंडे से रूटीन
- 5:42बनाऊंगा। अभी [संगीत] सरकमस्टेंसेस सही
- 5:45नहीं है। पहले कॉन्फिडेंस आ जाए [संगीत]
- 5:48फिर एक्शन लूंगा। मैं नेचुरली डिसिप्लिंड
- 5:51नहीं हूं। मेरी मेमोरी वीक है। मैं प्रेशर
- 5:55में अच्छा परफॉर्म नहीं करता। इनमें से हर
- 5:58स्टेटमेंट कभी-कभी सच हो सकता है।
- 6:00प्रॉब्लम तब शुरू होती है जब टेंपरेरी
- 6:03कंडीशन परमानेंट आइडेंटिटी बन जाती है। एक
- 6:06स्टूडेंट एक एग्जाम में फेल होता है।
- 6:09फेलियर एक इवेंट था लेकिन वो अपने बारे
- 6:12में कंक्लूजन बना लेता है। मैं इंटेलिजेंट
- 6:15नहीं हूं। अब फेलियर सिर्फ एक रिजल्ट नहीं
- 6:18रहा। वो आइडेंटिटी का हिस्सा बन गया। एक
- 6:21व्यक्ति बिजनेस शुरू करता है और फेल होता
- 6:24है। वो कहता है बिजनेस मेरे बस की चीज
- 6:27नहीं। एक व्यक्ति जिम जाता है। 2 महीने
- 6:31[संगीत] बाद छोड़ देता है। वो कहता है मुझ
- 6:34में कंसिस्टेंसी ही नहीं है। एक व्यक्ति
- 6:36कोडिंग सीखना शुरू करता है। कठिन टॉपिक्स
- 6:39आते हैं [संगीत] और वह रुक जाता है। वो
- 6:42कहता है शायद मेरा टेक्निकल ब्रेन नहीं
- 6:44है। नोटिस करो हर जगह इवेंट से आइडेंटिटी
- 6:48तक जंप हुआ और आइडेंटिटी बिहेवियर को
- 6:51इन्फ्लुएंस करती [संगीत] है। अगर आपको
- 6:53लगता है कि मैं डिसिप्लिंड इंसान नहीं हूं
- 6:56तो एक दिन डिसिप्लिन दिखाना मुश्किल नहीं
- 6:59होगा। [संगीत] मुश्किल यह होगा कि आप अपने
- 7:02पुराने सेल्फ इमेज के खिलाफ जाएं। क्योंकि
- 7:06माइंड कंसिस्टेंसी [संगीत] चाहता है। हम
- 7:08अक्सर अपने बिहेवियर को बदलना चाहते हैं।
- 7:11लेकिन अपनी सेल्फ इमेज को अनटच्ड रखना
- 7:13चाहते हैं। यही कॉन्फ्लिक्ट
- 7:15ट्रांसफॉर्मेशन को कठिन बनाता है। यही
- 7:18कॉन्फ्लिक्ट ट्रांसफॉर्मेशन को कठिन
- 7:20[संगीत] बनाता है। कांट हर्ट मी की जर्नी
- 7:22को इसी लेंस से देखना ज्यादा यूज़फुल है।
- 7:25यह सिर्फ फिजिकल [संगीत] टफनेस की कहानी
- 7:28नहीं है। यह सेल्फ कॉन्फ्रंटेशन की कहानी
- 7:31है। एक इंसान अपने पुराने वर्जन को देखता
- 7:34है। उसकी लिमिटेशंस [संगीत] को पहचानता
- 7:36है। अपने एक्सक्यूज़ेस को एक्सपोज करता है
- 7:39और फिर धीरे-धीरे अपने स्टैंडर्ड्स बदलता
- 7:42है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर
- 7:46प्रॉब्लम [संगीत] का स्यूशन खुद को
- 7:48एक्सट्रीम सफरिंग में डाल देना है। यहां
- 7:50एक इंपॉर्टेंट बाउंड्री है। गगिंस का
- 7:53अप्रोच उनकी पर्सनल फिलॉसफी [संगीत] और
- 7:55एक्सपीरियंसेस से निकला है। इसे यूनिवर्सल
- 7:58मेडिकल या साइंटिफिक लॉ की तरह नहीं देखना
- 8:01चाहिए। पेन और इंजरी एक ही चीज नहीं है।
- 8:05[संगीत] डिसकंफर्ट ग्रोथ का हिस्सा हो
- 8:07सकता है। लेकिन सीरियस फिजिकल डेंजर को
- 8:10इग्नोर करना स्ट्रेंथ नहीं है। इस पूरी
- 8:13जर्नी को समझने का बेहतर तरीका यह है कि
- 8:16हम एक्सट्रीम [संगीत] एग्जांपल्स के पीछे
- 8:18छिपे प्रिंसिपल्स को अलग करें।
- 8:20अकाउंटेबिलिटी,
- 8:22डिसिप्लिन, सेल्फ अवेयरनेस, प्रेपरेशन,
- 8:26डिसकंफर्ट टॉलरेंस, फेलियर से इंफॉर्मेशन
- 8:29निकालना और सबसे महत्वपूर्ण अपनी
- 8:33आइडेंटिटी को कॉन्शियसली रिबिल्ड [संगीत]
- 8:35करना। क्योंकि आपकी जिंदगी में शायद कोई
- 8:38हेल वीक ना आए। आपको मिलिट्री सिलेक्शन का
- 8:41सामना ना करना पड़े। आप अल्ट्रा मराथोन ना
- 8:45दौड़े लेकिन आपके पास अपने छोटे-छोटे
- 8:48बैटल्स जरूर होंगे। सुबह अलार्म बजेगा और
- 8:52माइंड कहेगा 5 मिनट और एग्जाम पास होगा और
- 8:56मन कहेगा आज थोड़ा आराम [संगीत] कर लेते
- 8:59हैं। स्किल डिफिकल्ट होगी और ब्रेन कहेगा
- 9:03शायद यह मेरे लिए नहीं है। फोन सामने होगा
- 9:07और आपका अटेंशन उस स्क्रीन की तरफ
- 9:09खींचेगा। आपको किसी रिजेक्शन का सामना
- 9:12करना पड़ेगा और ईगो कहेगा। मैं दोबारा
- 9:15कोशिश क्यों करूं? यही एवरीडे मोमेंट्स
- 9:18आपकी आइडेंटिटी बनाते हैं। [संगीत] बड़ी
- 9:21ट्रांसफॉर्मेशन अक्सर किसी सिनेमैटिक
- 9:23मोमेंट में नहीं होती। वो बोरिंग डिसीजंस
- 9:26[संगीत] में होती है। वो तब होती है जब
- 9:28कोई देख नहीं रहा होता। जब अप्लॉस नहीं
- 9:32है। जब मोटिवेशन नहीं है। जब रिजल्ट तुरंत
- 9:35नहीं मिल रहा। और जब आपका माइंड आपको कोई
- 9:39रीज़नेबल साउंडिंग एक्सक्यूज दे रहा होता
- 9:41है। गगिंस की कहानी [संगीत] का वैल्यू इस
- 9:44बात में नहीं है कि हर इंसान को उनकी तरह
- 9:47एक्सट्रीम बनना चाहिए। वैल्यू इस बात में
- 9:50है कि उनकी जर्नी हमें अपने कंफर्ट,
- 9:52एक्सक्यूसेस और सेल्फ इंपोज्ड लिमिट्स को
- 9:55क्वेश्चन [संगीत] करने के लिए मजबूर करती
- 9:57है। और शायद इस जर्नी का सबसे अनकंफर्टेबल
- 10:01हिस्सा अभी बाकी है। क्योंकि किसी भी
- 10:04इंसान के लिए अपने एनवायरमेंट को बदलना
- 10:06मुश्किल हो सकता है। लेकिन अपने बारे में
- 10:09बनाई हुई कहानी को बदलना उससे भी मुश्किल
- 10:12है। क्योंकि एनवायरमेंट बाहर होता है।
- 10:15आइडेंटिटी अंदर और अब हमें वहीं जाना है
- 10:18जहां यह कहानी वास्तव में शुरू होती है।
- 10:21उस लड़के के पास जिसने दुनिया को समझने से
- 10:25पहले ही यह सीखना शुरू कर दिया था कि
- 10:28दुनिया हमेशा सुरक्षित जगह नहीं होती।
- 10:31लेसन एक द बॉय WHO [संगीत]
- 10:34शुड हैव बीन अ स्टैटिस्टिक। बचपन में
- 10:36इंसान अपने बारे में ओपिनियंस खुद नहीं
- 10:39बनाता। वो उन्हें अब्सॉर्ब करता है। घर
- 10:42कैसा है?
- 10:43[संगीत]
- 10:43पेरेंट्स कैसे बिहेव करते हैं? लोग आपको
- 10:46कैसे देखते हैं? आपके आसपास फेयर कितना
- 10:49है? पैसा कितना है? सोसाइटी आपको किस नजर
- 10:53से देखती है? [संगीत] यह सब धीरे-धीरे
- 10:55आपके अंदर एक इनविज़िबल मैप बनाते हैं और
- 10:58फिर आप उसी मैप के हिसाब से दुनिया को
- 11:01[संगीत] समझना शुरू कर देते हैं। डेविड
- 11:03गॉगिंस का शुरुआती जीवन इसी तरह की
- 11:06डिफिकल्ट कंडीशनिंग से प्रभावित हुआ। उनके
- 11:10बचपन में अब्यूज था, डर था, इनस्टेबिलिटी
- 11:14थी, फाइनेंशियल स्ट्रगल थी और रेसिज्म तथा
- 11:18डिस्क्रिमिनेशन के एक्सपीरियंसेस भी थे।
- 11:20एक बच्चे के पास इन चीजों को ऑब्जेक्टिवली
- 11:23एनालाइज करने की क्षमता नहीं होती। वो बस
- 11:27एक्सपीरियंस करता है। अगर घर में लगातार
- 11:29डर है तो बच्चा यह नहीं सोचता कि यह
- 11:32एनवायरमेंट डिस्फंक्शनल है और इसका मेरे
- 11:36साइकोलॉजिकल डेवलपमेंट पर प्रभाव पड़ रहा
- 11:38है। वो बस सीखता है। दुनिया डेंजरस है।
- 11:42अगर उसे बार-बार बताया जाता है कि वो
- 11:45पर्याप्त अच्छा नहीं है। तो वो [संगीत]
- 11:47डेवलपमेंटल साइकोलॉजी की लैंग्वेज में
- 11:50सेल्फ इमेज फॉर्मेशन को नहीं समझता। वो बस
- 11:53सीखता [संगीत]
- 11:53है। शायद मेरे अंदर ही कुछ गलत है। यही
- 11:57[संगीत] वजह है कि चाइल्डहुड
- 11:59एक्सपीरियंसेस सिर्फ मेमोरीज नहीं होते।
- 12:02वे कभी-कभी मेंटल फिल्टर्स बन जाते हैं।
- 12:05और एडल्टहुड में इंसान उन्हीं फिल्टर्स के
- 12:07थ्रू खुद को और दुनिया को [संगीत] देखता
- 12:10रहता है। गगिंस की स्टोरी का एक
- 12:12महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि उनका शुरुआती
- 12:15एनवायरमेंट उनके लिए लिमिटेशन [संगीत] बन
- 12:17सकता था। और शायद यही पहला बड़ा लेसन है।
- 12:21आपकी शुरुआत और आपकी डेस्टिनेशन एक ही चीज
- 12:24नहीं है। [संगीत] लेकिन यहां भी हमें ओवर
- 12:27सिंपलीफाई नहीं करना चाहिए। यह कहना आसान
- 12:30है कि अगर चाहो तो सब बदल सकते हो।
- 12:33रियलिटी इतनी सिंपल नहीं है। हर इंसान के
- 12:37रिसोर्सेज अलग होते हैं। हर किसी का
- 12:39साइकोलॉजिकल बर्डन अलग होता है। कुछ लोगों
- 12:42को ओपोरर्चुनिटीज ज्यादा मिलती हैं। कुछ
- 12:45को [संगीत] बहुत कम। कुछ लोगों को सपोर्ट
- 12:48सिस्टम मिलता है कुछ को नहीं। इसलिए
- 12:51ट्रांसफॉर्मेशन की कहानी को विक्टिम
- 12:53ब्लेमिंग में बदलना गलत होगा। अगर किसी
- 12:56इंसान के साथ बुरा हुआ है तो वो उसकी गलती
- 13:00नहीं है। लेकिन हीलिंग और ग्रोथ [संगीत]
- 13:02की जर्नी में एक स्टेज ऐसी आती है जहां
- 13:05सवाल बदलना पड़ता है। यह मेरे साथ क्यों
- 13:08हुआ? से अब मैं अपनी जिंदगी [संगीत] को
- 13:11कहां ले जा सकता हूं? यह डिफरेंस छोटा
- 13:14लगता है। असल में यही एजेंसी [संगीत] का
- 13:16डिफरेंस है। विक्टिम माइंडसेट को समझना भी
- 13:19इसी कॉन्टेक्स्ट में जरूरी है। विक्टिम
- 13:22माइंडसेट का मतलब यह नहीं [संगीत] कि
- 13:24जिसने सफरिंग झेली वो कमजोर है। और नहीं
- 13:28इसका मतलब यह है कि हर विक्टिम अपनी
- 13:31सिचुएशन के लिए रिस्पांसिबल है। विक्टिम
- 13:33माइंडसेट तब प्रॉब्लम बनता है जब पास्ट की
- 13:36एक्सप्लेनेशन फ्यूचर [संगीत] की परमिशन बन
- 13:38जाती है। जब इंसान कहता है मेरे साथ ऐसा
- 13:42[संगीत] हुआ था इसलिए मैं कुछ नहीं कर
- 13:44सकता। यहां पास्ट एक एक्सप्लेनेशन से
- 13:47बदलकर परमानेंट प्रिजन बन जाता है और
- 13:50प्रजन की [संगीत] सबसे डेंजरस बात यह है
- 13:53कि कई बार उसकी दीवारें बाहर नहीं होती।
- 13:56वे बिलीव्स के रूप में अंदर होती है।
- 13:59इमेजिन करो एक स्टूडेंट है [संगीत] जिसने
- 14:01स्कूल में बार-बार पुअर परफॉर्मेंस देखी।
- 14:04धीरे-धीरे उसे लगता है कि वह एकेडमिकली
- 14:06[संगीत]
- 14:06वीक है। कॉलेज में पहुंचने के बाद भी जब
- 14:09कोई डिफिकल्ट सब्जेक्ट आता है, वो पूरी
- 14:12कोशिश करने से पहले ही मान लेता है कि
- 14:14उससे नहीं होगा। अब अगर वह फेल करता है,
- 14:18[संगीत] तो उसका बिलीफ मजबूत हो जाता है।
- 14:20देखा मुझे पता था [संगीत] लेकिन अगर वो
- 14:24कोशिश ही आधी करे, प्रिपरेशन इनकंप्लीट
- 14:27रखे और फिर फेल हो जाए तो फेलियर उसके
- 14:30बिलीफ का प्रूफ नहीं था। उसका बिहेवियर उस
- 14:34बिलीफ से इनफ्लुएंस था। यही सेल्फ
- 14:37फुलफिलिंग साइकिल है। बिलीफ बिहेवियर को
- 14:39शेप करता है। बिहेवियर रिजल्ट को
- 14:42इन्फ्लुएंस करता है। रिजल्ट वापस बिलीफ
- 14:44[संगीत] को रीइंफोर्स करता है और फिर
- 14:47इंसान कहता है मैं ऐसा ही हूं। [संगीत]
- 14:51गगिंस की जर्नी में ट्रांसफॉर्मेशन का
- 14:53महत्व इसलिए है क्योंकि उन्होंने अपने
- 14:56बारे में बनी पुरानी डेफिनेशंस को चैलेंज
- 14:59करना शुरू किया। एक समय ऐसा था जब उनका
- 15:02फिजिकल कंडीशन और लाइफस्ट उनके फ्यूचर की
- 15:06एक अलग तस्वीर दिखाता था। लेकिन फिर उनके
- 15:09सामने मिलिट्री का रास्ता आया और यहां से
- 15:12स्टोरी सिर्फ एंबिशन की नहीं रह जाती
- 15:15क्योंकि एंबिशन कहना आसान है।
- 15:18ट्रांसफॉर्मेशन की कीमत देना मुश्किल है।
- 15:21बहुत लोग कहते हैं मुझे अपनी जिंदगी बदलनी
- 15:25है। लेकिन अगर आप पूछे कि इसके लिए अपनी
- 15:28करंट लाइफस्टाइल में क्या बदलोगे? तो जवाब
- 15:31अचानक कमजोर [संगीत] पड़ जाता है क्योंकि
- 15:33हम रिजल्ट चाहते हैं लेकिन रिजल्ट तक
- 15:36पहुंचने वाली आइडेंटिटी को बदलना नहीं
- 15:38चाहते। आप बेहतर बॉडी चाहते हैं लेकिन
- 15:42रूटीन नहीं। [संगीत]
- 15:43आप बेटर करियर चाहते हैं लेकिन बोरिंग
- 15:46स्किल प्रैक्टिस नहीं। आप फाइनशियल फ्रीडम
- 15:48चाहते हैं लेकिन स्पेंडिंग हैबिट्स नहीं।
- 15:51आप कॉन्फिडेंस चाहते हैं लेकिन रिजेक्शन
- 15:54[संगीत] फेस नहीं करना चाहते। आप स्ट्रांग
- 15:57माइंड चाहते हैं, लेकिन अनकंफर्टेबल
- 15:59सिचुएशन से बचना चाहते हैं। यह
- 16:02कंट्राडिक्शन बहुत कॉमन है और गगिंस की
- 16:05स्टोरी हमें इसी कंट्राडिक्शन के [संगीत]
- 16:07सामने खड़ा करती है। उन्होंने अपने जीवन
- 16:10के एक स्टेज पर यह स्वीकार किया कि जिस
- 16:13तरह [संगीत] से वह जी रहे थे, उससे वह उस
- 16:15फ्यूचर तक नहीं पहुंचेंगे जिसे वह चाहते
- 16:18थे। यह रियलाइजेशन अपने आप में
- 16:21ट्रांसफॉर्मेशन नहीं था।
- 16:23लेकिन ट्रांसफॉर्मेशन [संगीत] की शुरुआत
- 16:25थी क्योंकि अवेयरनेस के बिना चेंज अक्सर
- 16:29सिर्फ टेंपरेरी एक्साइटमेंट होता है। आप
- 16:31एक मोटिवेशनल वीडियो देखते हैं। आपको
- 16:34एनर्जी मिलती है। आप नोटबुक निकालते हैं।
- 16:38गोल्स लिखते हैं। एक नया रूटीन बनाते हैं।
- 16:41तीन दिन सब अच्छा चलता [संगीत] है। फिर
- 16:43पुरानी आइडेंटिटी वापस आती है। क्यों?
- 16:47क्योंकि आपने बिहेवियर को टेंपरेरीली चेंज
- 16:50किया था।
- 16:51लेकिन अंडरलाइन आइडेंटिटी को नहीं आपने
- 16:54खुद से यह नहीं पूछा था मैं वास्तव में
- 16:57किस तरह का इंसान बनना चाहता हूं। [संगीत]
- 17:00यह सवाल गोल से ज्यादा पावरफुल है। गोल
- 17:03कहता है मुझे एक एग्जाम क्लियर करना है।
- 17:06आइडेंटिटी कहती है मैं ऐसा व्यक्ति बनना
- 17:10चाहता हूं जो डिफिकल्ट चीजों से भागता
- 17:13नहीं। गोल कहता है मुझे 10 किलोग्राम वेट
- 17:16कम करना है। आइडेंटिटी कहती है मैं अपने
- 17:20कमिटमेंट्स को सीरियसली लेने वाला इंसान
- 17:22बनना चाहता हूं। [संगीत]
- 17:24गोल कहता है मुझे साइबर सिक्योरिटी सीखनी
- 17:27है। आइडेंटिटी कहती है मैं ऐसा लर्नर बनना
- 17:31चाहता हूं जो कंफ्यूजन आने पर क्विट नहीं
- 17:34करता। डिफरेंस सल है। लेकिन लॉन्ग टर्म
- 17:37बिहेवियर इसी डिफरेंस से बदलता है। गगिंस
- 17:41की जर्नी में फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन दिखाई
- 17:43देती है। लेकिन उसके पीछे आइडेंटिटी
- 17:46ट्रांसफॉर्मेशन ज्यादा महत्वपूर्ण है।
- 17:49क्योंकि शरीर का बदलना विज़िबल है।
- 17:52आइडेंटिटी का बदलना इनविज़िबल। और इनविज़िबल
- 17:56चेंज ही विज़िबल बिहेवियर को [संगीत]
- 17:58टिकाता है। अब एक और अनकंफर्टेबल ट्रुथ
- 18:01देखो। हम अक्सर कहते हैं कि हमें
- 18:04कॉन्फिडेंस चाहिए। [संगीत]
- 18:05लेकिन कॉन्फिडेंस कई बार एक्शन से पहले
- 18:08नहीं आता। कई बार एक्शन कॉन्फिडेंस
- 18:10[संगीत]
- 18:11पैदा करता है। जब आप पहली बार डिफिकल्ट
- 18:14काम करते हो तो आपका ब्रेन अनसर्टेन होता
- 18:17है। दूसरी बार अनसर्टेनिटी थोड़ी कम होती
- 18:20है। बार-बार एक्सपोज़र के बाद आपका ब्रेन
- 18:23एविडेंस [संगीत] कलेक्ट करता है। मैं इस
- 18:26डिफिकल्टी को हैंडल कर सकता हूं।
- 18:28यही सेल्फ एफिकसी बिल होती है। इसलिए
- 18:31कॉन्फिडेंस के इंतजार में बैठे रहना ट्रैप
- 18:34हो सकता है। आप सोचते हो जब मुझे
- 18:37कॉन्फिडेंस [संगीत]
- 18:38आएगा तब मैं शुरू करूंगा। लेकिन
- 18:40कॉन्फिडेंस कहता है पहले एविडेंस दो फिर
- 18:44मैं बढूंगा। यानी आपको कभी-कभी कॉन्फिडेंस
- 18:48से पहले एक्शन लेना पड़ता है। लेकिन एक्शन
- 18:50का [संगीत] मतलब रेकलेस एक्शन नहीं। एक्शन
- 18:53का मतलब कंट्रोलोल्ड एक्सपोज़र है। अगर
- 18:56आपको पब्लिक स्पीकिंग [संगीत] से डर लगता
- 18:58है तो सीधे हजार लोगों के सामने स्पीच
- 19:01देना जरूरी नहीं। पहले एक छोटे ग्रुप में
- 19:04बोलो। फिर क्लासरूम में फिर प्रेजेंटेशन।
- 19:08फिर लार्जर ऑडियंस। माइंड को एविडेंस दो।
- 19:12अगर एग्जाम का डर है तो सिर्फ नोट्स पढ़ते
- 19:15मत रहो। टाइम मॉक टेस्ट दो। [संगीत] अपने
- 19:18कमजोर एरियाज देखो। फेलियर को टोलरेट करो।
- 19:21अगर कोडिंग से डर लगता है तो ट्यूटोरियल
- 19:24देखते रहने की बजाय छोटे प्रोजेक्ट्स
- 19:27बनाओ। गलतियां होंगी, कंफ्यूजन होगा लेकिन
- 19:32वही कंफ्यूजन आपके ब्रेन को नया एविडेंस
- 19:34देगा। मैं स्ट्रगल कर सकता हूं और फिर भी
- 19:38कंटिन्यू कर सकता हूं। यही मेंटल टफनेस की
- 19:42शुरुआती फॉर्म है। मेंटल टफनेस का मतलब यह
- 19:45नहीं कि आपको कुछ फील ही नहीं होता। फियर
- 19:48खत्म नहीं होता। डाउट खत्म नहीं होता।
- 19:51[संगीत]
- 19:52पेन का एकिस्टेंस खत्म नहीं होता। डिफरेंस
- 19:55यह होता है कि इमोशन और एक्शन के बीच
- 19:58थोड़ी स्पेस पैदा [संगीत] हो जाती है। आप
- 20:00डर महसूस कर सकते हो और फिर भी डिसीजन ले
- 20:04सकते हो। आप डाउट महसूस कर सकते हो और फिर
- 20:07भी काम कर सकते हो। आप अनकंफर्टेबल हो
- 20:11सकते हो और फिर भी अपने कमिटमेंट को याद
- 20:14रख सकते हो। यही वो जगह है जहां
- 20:17अकाउंटेबिलिटी और आइडेंटिटी एक दूसरे से
- 20:20जुड़ते हैं। अगर हर बार डिसकंफर्ट आते ही
- 20:22आप कहते हो मैं ऐसा ही हूं तो आपका
- 20:26बिहेवियर आपकी पुरानी आइडेंटिटी को मजबूत
- 20:29करता [संगीत] रहेगा। लेकिन अगर एक दिन आप
- 20:32कहते हो मुझे यह पसंद नहीं है। [संगीत]
- 20:35मुझे डर लग रहा है। मैं अनकंफर्टेबल हूं।
- 20:39लेकिन मैं फिर भी यह छोटा स्टेप करूंगा।
- 20:42तो आप सिर्फ टास्क कंप्लीट नहीं कर रहे।
- 20:45आप अपने ब्रेन को एक नया मैसेज दे रहे हो।
- 20:48मैं [संगीत] डिसकंफर्ट के बावजूद एक्ट कर
- 20:51सकता हूं। एक दिन से आइडेंटिटी नहीं
- 20:54बदलती। लेकिन रिपीटेड एविडेंस आइडेंटिटी
- 20:57को बदल सकता है। यही वजह है कि छोटे
- 21:00कमिटमेंट्स अंडरएस्टिमेट नहीं करने चाहिए।
- 21:03आपको अपनी जिंदगी बदलने के लिए हर दिन कोई
- 21:06हेरोइक एक्ट करने की जरूरत नहीं। कभी-कभी
- 21:10[संगीत] सबसे पावरफुल एक्ट इतना सिंपल
- 21:12होता है कि आपने जो कहा था वही किया। आपने
- 21:16कहा था सुबह पढ़ोगे पढ़ा। कहा था 1 घंटे
- 21:20स्किल प्रैक्टिस करोगे की। कहा था फोन दूर
- 21:24रखोगे। रखा। कहा था मॉक टेस्ट एनालाइज
- 21:28करोगे? किया। यह छोटी चीजें [संगीत] बाहर
- 21:31से इनसिग्निफिकेंट लग सकती है। लेकिन अंदर
- 21:34एक नया सेल्फ इमेज बन रहा होता है। मैं
- 21:37अपने शब्द पर खड़ा रहता हूं। [संगीत]
- 21:40और सेल्फ रिस्पेक्ट अक्सर यहीं से बनती
- 21:42है। एक्सटर्नल वैलिडेशन से नहीं, [संगीत]
- 21:45लाइक से नहीं, दूसरों की अप्रूवल से नहीं
- 21:49बल्कि उस प्राइवेट एविडेंस से कि जब कोई
- 21:51देखने वाला नहीं था तब भी आपने अपने
- 21:54कमिटमेंट को छोड़ा नहीं। गगिंस की [संगीत]
- 21:57स्टोरी को इसी लेंस से देखना जरूरी है
- 22:00क्योंकि उनकी जर्नी का सबसे बड़ा लेसन
- 22:02[संगीत] शायद यह नहीं कि इंसान कितना पेन
- 22:05टोलरेट कर सकता है बल्कि यह है कि इंसान
- 22:09अपने बारे में बनी हुई पुरानी डेफिनेशन को
- 22:12चैलेंज [संगीत] कर सकता है। लेकिन चैलेंज
- 22:14करने के लिए पहले उसे देखना पड़ता है और
- 22:17अपने बारे में सच देखना अनकंफर्टेबल होता
- 22:20है। आपकी प्रॉब्लम टाइम की है या अटेंशन
- 22:23की। आपकी प्रॉब्लम टैलेंट की है या
- 22:26कंसिस्टेंसी की? आपकी प्रॉब्लम
- 22:28सरकमस्ट्ससेस [संगीत]
- 22:29की है या प्रेपरेशन की? आपकी प्रॉब्लम
- 22:32कॉन्फिडेंस की है या एक्शन की कमी की? हर
- 22:35सवाल का जवाब हमेशा आपकी गलती नहीं होगा।
- 22:39लेकिन हर सवाल आपको एक जगह जरूर ले जाएगा।
- 22:43आपके कंट्रोल के दायरे तक और यही
- 22:46अकाउंटेबिलिटी का असली मतलब है। अपने ऊपर
- 22:49अननेसेसरी ब्लेम डालना नहीं। बल्कि जहां
- 22:53आपका कंट्रोल है वहां रिस्पांसिबिलिटी
- 22:55[संगीत] एक्सेप्ट करना क्योंकि ब्लेम आपको
- 22:58अतीत में रखता है। रिस्पांसिबिलिटी आपको
- 23:01फ्यूचर की तरफ धकेलती है। गगिंस की
- 23:04चाइल्डहुड [संगीत] स्टोरी इसलिए
- 23:05इंपॉर्टेंट है क्योंकि वो हमें एक
- 23:08अनकंफर्टेबल पैराडॉक्स दिखाती है। एक
- 23:10इंसान का पास्ट उसके ऊपर बहुत भारी हो
- 23:14सकता है। लेकिन वही इंसान अपने पास्ट
- 23:17[संगीत] के साथ अपने रिलेशनशिप को बदलने
- 23:19की कोशिश भी कर सकता है। पास्ट मिटाया
- 23:22नहीं जा सकता। लेकिन उसके मीनिंग को लेकर
- 23:25आपका रिलेशनशिप [संगीत]
- 23:27बदल सकता है। जो घटना कभी सिर्फ शेम थी वो
- 23:30बाद में वार्निंग बन सकती है। जो फेलियर
- 23:33[संगीत] कभी आइडेंटिटी था वो फीडबैक बन
- 23:36सकता है। जो लिमिटेशन कभी फाइनल वर्डिक
- 23:39लगती थी वो चैलेंज बन सकती है। यह ओवरनाइट
- 23:43ट्रांसफॉर्मेशन नहीं है। और शायद यही बात
- 23:46इसे ज्यादा
- 23:47[संगीत]
- 23:47रील बनाती है। क्योंकि असली चेंज
- 23:49सिनेमैटिक नहीं होता। कई बार वो बोरिंग
- 23:52होता है। रिपीटेड, अनकंफर्टेबल और इतना
- 23:56छोटा कि उस दिन आपको खुद भी पता नहीं चलता
- 24:00कि आप बदल रहे हो। लेकिन कुछ समय बाद पीछे
- 24:04मुड़कर [संगीत] देखने पर आपको एक डिफरेंस
- 24:06दिखाई देता है। आप वही व्यक्ति नहीं रहे।
- 24:09आपकी परिस्थितियां [संगीत] शायद पूरी तरह
- 24:12नहीं बदली।
- 24:13लेकिन सरकमस्ट्ससेस को रिसोंड करने वाला
- 24:16इंसान बदल गया और यही सबसे महत्वपूर्ण
- 24:19शिफ्ट है क्योंकि जिंदगी में हर चीज
- 24:21[संगीत] आपके कंट्रोल में नहीं होगी।
- 24:24लेकिन हर सिचुएशन में आपका रिस्पांस पूरी
- 24:27तरह ऑटोमेटिक होना जरूरी नहीं।
- 24:29[संगीत]
- 24:30और जब इंसान ऑटोमेटिक रिस्पांस और
- 24:33कॉन्शियस चॉइस के बीच स्पेस बनाना सीखता
- 24:36है तब उसकी आइडेंटिटी धीरे-धीरे बदलनी
- 24:39[संगीत] शुरू होती है। लेकिन आइडेंटिटी
- 24:41बदलने के लिए एक और चीज चाहिए। [संगीत]
- 24:44अपने बारे में अनकंफर्टेबल ट्रुथ देखने की
- 24:47विलिंगनेस। क्योंकि अगर आप खुद को हमेशा
- 24:50सही साबित करते रहोगे तो आप खुद को कभी
- 24:53सुधार नहीं पाओगे। और शायद गगिंस की जर्नी
- 24:56का अगला बड़ा मोड़ इसी सवाल से निकलता है।
- 25:00अगर आप खुद से झूठ बोलना बंद कर दें तो
- 25:03आपको अपने बारे में क्या दिखाई देगा? बचपन
- 25:06में जो कुछ आपके साथ होता है उसे आप चुन
- 25:09नहीं सकते। लेकिन एडल्टहुड में एक पॉइंट
- 25:12ऐसा आता है जहां आपको यह डिसाइड करना
- 25:15पड़ता है कि उस पास्ट को अपनी जिंदगी की
- 25:18एक्सप्लेनेशन बनाना है या अपनी पूरी
- 25:20आइडेंटिटी। डेविड [संगीत] गॉगिंस की जर्नी
- 25:23में यही डिस्टिंशन धीरे-धीरे सामने आती
- 25:26है। उनका पास्ट इतना आसान नहीं था कि उसे
- 25:29सिर्फ मुश्किल चाइल्डहुड [संगीत] कहकर आगे
- 25:32बढ़ जाया जाए। घर का डर, पिता का अब्यूज,
- 25:37आर्थिक संघर्ष, रेसिज्म और लगातार
- 25:40इनसिक्योरिटी। इन सब ने उनके माइंड पर असर
- 25:43डाला। ऐसे एक्सपीरियंसेस [संगीत]
- 25:45इंसान के अंदर सिर्फ मेमोरीज नहीं छोड़ते।
- 25:49वे एक्सपेक्टेशंस बनाते हैं। आप दुनिया से
- 25:52क्या एक्सपेक्ट करेंगे? खुद से क्या
- 25:54एक्सपेक्ट करेंगे? फेलियर को कैसे
- 25:56इंटरप्रेट करेंगे? और सबसे [संगीत]
- 25:58महत्वपूर्ण अपनी कैपेसिटी को कितना
- 26:01मानेंगे? इन सब पर पास्ट का असर पड़ सकता
- 26:04है। लेकिन यहां एक सल ट्रैप है। जब कोई
- 26:08इंसान लंबे समय तक सफरिंग में रहता है तो
- 26:11वह अपनी सफरिंग को अपनी पहचान के साथ जोड़
- 26:14सकता है। फिर वो खुद को सिर्फ उस व्यक्ति
- 26:17के रूप में देखता है जिसके साथ बुरा हुआ।
- 26:20मेरे साथ ऐसा हुआ था। मेरे पास यह नहीं
- 26:24था। मुझे कभी मौका नहीं मिला। दूसरों की
- 26:27जिंदगी आसान थी। इन स्टेटमेंट्स में
- 26:30फैक्ट्स हो सकते हैं। प्रॉब्लम फैक्ट्स
- 26:33में नहीं है। प्रॉब्लम तब शुरू होती
- 26:35[संगीत] है जब फैक्ट्स आपकी फ्यूचर
- 26:37डिसिजंस की परमिशन बन जाते हैं। मान लो एक
- 26:40स्टूडेंट के मार्क्स लगातार खराब आते हैं।
- 26:43वो कहता है मेरी स्कूलिंग अच्छी नहीं थी।
- 26:46यह एक्सप्लेनेशन हो सकती है। लेकिन अगर
- 26:49वही स्टूडेंट कॉलेज में भी पढ़ना शुरू
- 26:51करने से पहले मान ले कि मेरी फाउंडेशन
- 26:54खराब है। इसलिए [संगीत] मैं कभी अच्छा
- 26:56नहीं कर सकता तो एक्सप्लेनेशन धीरे-धीरे
- 26:59आइडेंटिटी बन गई। अब वो कठिन चैप्टर
- 27:02[संगीत] आते ही पीछे हटेगा। मॉक टेस्ट से
- 27:05बचेगा। दूसरों से कंपेयर करेगा। शायद
- 27:09पढ़ाई [संगीत] के बजाय फोन पर चला जाएगा।
- 27:12फिर एग्जाम में खराब रिजल्ट आएगा और वह
- 27:15कहेगा देखा मैं पहले से जानता था। ध्यान
- 27:19दो कि यहां फेलियर [संगीत] ने बिलीफ को
- 27:21प्रूव नहीं किया। बिलीफ ने बिहेवियर को
- 27:24इन्फ्लुएंस किया। बिहेवियर ने रिजल्ट को
- 27:27इन्फ्लुएंस किया और रिजल्ट ने बिलीफ को और
- 27:30मजबूत कर दिया। यही साइकोलॉजिकल प्रजन है।
- 27:34और इसकी सबसे डेंजरस बात यह है कि बाहर से
- 27:37देखने पर यह प्रजन दिखाई नहीं देता। कोई
- 27:40दरवाजा नहीं है, कोई लॉक नहीं है, कोई
- 27:44गार्ड नहीं है। आप फिजिकली फ्री हो लेकिन
- 27:47आपके डिसीजंस पहले से तय हैं क्योंकि आपने
- 27:51अपने बारे में एक कहानी [संगीत] स्वीकार
- 27:53कर ली है। गगिंस की कहानी में विक्टिम
- 27:56माइंडसेट का डिस्कशन इसलिए महत्वपूर्ण है
- 27:58क्योंकि उन्होंने खुद अपने पास्ट को लेकर
- 28:01इसी बैटल को फेस किया। इसका मतलब यह नहीं
- 28:05कि उन्होंने जो कुछ झेला वो उनकी गलती थी।
- 28:09बिल्कुल नहीं। अब्यूज विक्टिम की
- 28:12रिस्पांसिबिलिटी नहीं होती। रेसिज्म
- 28:15विक्टिम की रिस्पांसिबिलिटी नहीं होता।
- 28:17पावर्टी चुनना जरूरी नहीं होता। चाइल्डहुड
- 28:20एनवायरमेंट भी बच्चे के कंट्रोल में नहीं
- 28:23होता। [संगीत] लेकिन फ्यूचर का एक हिस्सा
- 28:26धीरे-धीरे आपके कंट्रोल में आने लगता है।
- 28:29यही अकाउंटेबिलिटी है। अकाउंटेबिलिटी का
- 28:31मतलब यह नहीं कि आप खुद को हर चीज [संगीत]
- 28:34के लिए ब्लेम करो। इसका मतलब है कि आप यह
- 28:38आइडेंटिफाई करो कि इस मोमेंट में आपके पास
- 28:41क्या कंट्रोल है। अगर आपका कॉलेज [संगीत]
- 28:43एवरेज है तो शायद आप कॉलेज को आईआईटी नहीं
- 28:46बना सकते। लेकिन आप अपनी स्किल को कितना
- 28:49इंप्रूव करेंगे यह कुछ हद तक आपके कंट्रोल
- 28:52में है। अगर फैमिली फाइनेंशियल प्रेशर है
- 28:55तो आप उसे एक दिन में खत्म नहीं कर सकते।
- 28:58लेकिन आप कौन सी मार्केटेबल स्किल
- 29:00सीखेंगे, कितना काम करेंगे, किन
- 29:03ओपोरर्चुनिटीज को पर्स्यू करेंगे? इन
- 29:06डिसीजंस में आपका हिस्सा है। अगर आपने
- 29:08पहले बहुत टाइम वेस्ट किया है तो वह टाइम
- 29:11वापस नहीं आएगा। लेकिन आज के अगले 2 घंटे
- 29:15अभी भी आपके पास है। यही फर्क है रिग्रेट
- 29:18और रिस्पांसिबिलिटी में। रिग्रेट [संगीत]
- 29:20पीछे देखता है और पूछता है। मैंने ऐसा
- 29:23क्यों किया? रिस्पांसिबिलिटी आगे देखती है
- 29:26और पूछती है। अब क्या किया जा सकता है? और
- 29:30ह्यूमन माइंड नेचुरली [संगीत] पहले वाले
- 29:32सवाल में ज्यादा कंफर्टेबल हो सकता है।
- 29:35क्योंकि रिग्रेट में एक्शन जरूरी नहीं
- 29:37होता। आप सोच सकते हो, एनालाइज कर सकते
- 29:40हो, खुद [संगीत] को ब्लेम कर सकते हो,
- 29:43दूसरों को ब्लेम कर सकते हो और फिर भी कुछ
- 29:46बदलना जरूरी नहीं।
- 29:49लेकिन रिस्पांसिबिलिटी एक्शन मांगती है।
- 29:51इसीलिए अकाउंटेबिलिटी अनकंफर्टेबल होती
- 29:54है। क्योंकि जिस दिन आप [संगीत] सच में
- 29:56मान लेते हो कि कुछ हिस्सा आपके हाथ में
- 29:59है उसी दिन एक्सक्यूसेस की वैल्यू कम
- 30:01[संगीत] हो जाती है। यहां एक और
- 30:04साइकोलॉजिकल ट्रैप आता है सेल्फ पिटी।
- 30:07सेल्फ पिटी शुरुआत में कंफर्टिंग लग सकती
- 30:09है। आपको लगता है मेरे साथ बहुत बुरा हुआ
- 30:12है और शायद सच में हुआ हो।
- 30:15लेकिन अगर आप उसी थॉट में बार-बार वापस
- 30:18जाते हो तो ब्रेन को एक स्ट्रेंज [संगीत]
- 30:20रिवॉर्ड मिलता है। आपको एक्शन लेने की
- 30:23जरूरत नहीं पड़ती। आपकी कहानी आपको
- 30:26इनोसेंस [संगीत]
- 30:26देती रहती है। आप खुद को जज से बचा लेते
- 30:29हो। क्योंकि सारी रिस्पांसिबिलिटी
- 30:32सरकमस्ट्ससेस [संगीत] पर चली जाती है। यह
- 30:35टेंपरेरी इमोशनल रिलीफ हो सकता है। लेकिन
- 30:38लॉन्ग टर्म में यही रिलीफ स्टैग्नेशन
- 30:39[संगीत] बन सकता है। इमेजिन करो कि कोई
- 30:42व्यक्ति हर बार इंटरव्यू में रिजेक्ट होता
- 30:45है। पहली बार रिजेक्शन पेनफुल है। दूसरी
- 30:48बार फ्रस्ट्रेशन है। तीसरी बार वह सोचता
- 30:51है कि शायद मार्केट खराब है। दसवीं बार वह
- 30:54कहना शुरू कर देता है। कंपनीज़ वैसे भी
- 30:57कनेक्शंस वालों को हायर करती है। हो सकता
- 31:00है इसमें कुछ ट्रुथ हो। लेकिन अब अगर वह
- 31:04रिज्यूम इंप्रूव [संगीत] करना बंद कर देता
- 31:06है। इंटरव्यू प्रैक्टिस नहीं करता,
- 31:08कम्युनिकेशन पर काम नहीं करता और
- 31:11एप्लीकेशनेशंस कम कर देता है तो उसका
- 31:13बिलीफ उसके बिहेवियर को कंट्रोल कर रहा
- 31:16है। और फिर हर रिजेक्शन उस बिलीफ का नया
- 31:19प्रूफ बन जाता है। यही कारण है कि विक्टिम
- 31:22माइंडसेट हमेशा लाउड नहीं होता। कई बार वो
- 31:26बहुत लॉजिकल सुनाई देता है। मैं
- 31:28प्रैक्टिकल हूं। मैं रियलिटी समझता हूं।
- 31:32[संगीत]
- 31:32मैं बस एक्सपेक्टेशंस लो रखता हूं। लेकिन
- 31:36कभी-कभी लो एक्सपेक्टेशंस ह्यूमिलिटी नहीं
- 31:39होती। [संगीत] वे डिसअपॉइंटमेंट से बचने
- 31:42की स्ट्रेटजी होती है। अगर आपने पहले से
- 31:44मान लिया कि आप फेल होंगे तो फेल होने पर
- 31:48ईगो को चोट [संगीत] कम लगेगी। अगर आपने
- 31:51कोशिश ही नहीं की तो फेलियर टेक्निकली हुआ
- 31:54ही नहीं। और यही अवॉयडेंस का साइकोलॉजिकल
- 31:57रिवॉर्ड है। आप डिसकंफर्ट से बच गए लेकिन
- 32:01साथ में ग्रोथ [संगीत] से भी बच गए। यही
- 32:03वजह है कि कंफर्ट और सेफ्टी हमेशा एक चीज
- 32:06नहीं होते। कंफर्ट कहता है [संगीत] यहां
- 32:10मत जाओ। यहां अनसर्टेनिटी है। ग्रोथ कहती
- 32:13है अनसर्टेनिटी है इसलिए धीरे-धीरे टेस्ट
- 32:17करो। एक स्टूडेंट को कंपिटिटिव एग्जाम
- 32:20[संगीत] की तैयारी करनी है। वो सिलेबस
- 32:22देखकर ओवरवेल्म हो जाता है। फिर वो
- 32:25प्लानिंग वीडियोस देखता है। टाइम टेबल
- 32:27बनाता है। स्टडी सेटअप खरीदता है।
- 32:30प्रोडक्टिविटी एप्स इंस्टॉल करता है।
- 32:33लेकिन एक्चुअल डिफिकल्ट चैप्टर्स शुरू
- 32:35नहीं करता। बाहर से वो प्रोडक्टिव दिख
- 32:38सकता है। अंदर से वो अवॉयडेंस [संगीत]
- 32:40कर रहा है क्योंकि प्लानिंग सेफ है।
- 32:43स्टडिंग रिस्की है। प्लानिंग में आपको यह
- 32:45पता नहीं चलता कि आप कमजोर हो। मॉक टेस्ट
- 32:49में पता [संगीत] चल सकता है। नोट्स सजाने
- 32:52में ईगो सेफ रहता है। क्वेश्चंस सॉल्व
- 32:55करने में आपकी एक्चुअल कैपेबिलिटी सामने
- 32:57[संगीत] आ सकती है। इसीलिए अकाउंटेबिलिटी
- 33:00का पहला स्टेप कभी-कभी प्रोडक्टिविटी नहीं
- 33:02होता। ट्रुथ होता है। सच-सच [संगीत] देखना
- 33:05कि आप अभी कहां खड़े हो। यहीं से गगिंस के
- 33:09लाइफ में अकाउंटेबिलिटी मिरर का आईडिया
- 33:11महत्वपूर्ण बनता है। हाई स्कूल के दौरान
- 33:14जब उन्हें अपने एकेडमिक सिचुएशन और फ्यूचर
- 33:17[संगीत] के बीच गैप दिखाई देने लगा। तब
- 33:20उन्होंने खुद को कॉन्फ्रेंट करने के लिए
- 33:22मिरर का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने
- 33:24गोल्स और डेली टास्क को विजिबल बनाया। और
- 33:28खुद को लगातार रिमाइंड किया कि सिर्फ
- 33:30[संगीत] ड्रीम करने से कुछ नहीं बदलेगा।
- 33:33उनके लिए यह सेल्फ कंफ्रंटेशन एक टर्निंग
- 33:36पॉइंट बना। उन्होंने पढ़ाई, फिटनेस और
- 33:39डिसिप्लिन पर काम शुरू किया और बाद में
- 33:42एयरफोर्स क्वालिफाइंग एग्जाम पास करने की
- 33:44दिशा में प्रोग्रेस की। लेकिन
- 33:46अकाउंटेबिलिटी मिरर का डीपर मीनिंग मिरर
- 33:49में स्टिकी नोट्स लगाना नहीं है। उसका
- 33:52डीपर मीनिंग है। अपने सेल्फ इमेज और
- 33:55रियलिटी के बीच गैप को देखना। आप खुद को
- 33:58क्या समझते हो और आपके [संगीत] एक्शंस
- 34:01क्या बताते हैं? अगर आप कहते हो कि आप
- 34:03डिसिप्लिन हो लेकिन रोज अपने कमिटमेंट्स
- 34:06तोड़ते हो तो कौन सी बात ज्यादा
- 34:08ट्रस्टवर्दी है? आपकी स्टेटमेंट या आपका
- 34:11बिहेवियर अगर आप कहते हो कि करियर आपके
- 34:14लिए इंपॉर्टेंट है। लेकिन डेली अटेंशन का
- 34:17बड़ा हिस्सा रैंडम कंटेंट कंज्यूम करने
- 34:19में चला जाता है। तो आपकी प्रायोरिटीज
- 34:22वास्तव [संगीत] में कहां है? अगर आप कहते
- 34:24हो कि आप हेल्दी बनना चाहते हो लेकिन
- 34:27स्लीप, फूड और एक्टिविटी को लगातार इग्नोर
- 34:31करते हो तो गुल कितना सीरियस है? यह सवाल
- 34:34इंसल्ट करने के लिए नहीं है। यह
- 34:37डायग्नोस्टिक क्वेश्चंस है क्योंकि चेंज
- 34:39तब शुरू होता है जब परसेप्शन और रियलिटी
- 34:42के बीच का डिफरेंस [संगीत] दिखाई देने
- 34:44लगे। और यहां गगिंस का तरीका इंटेंशनली
- 34:47हर्ष था। [संगीत]
- 34:48उन्होंने खुद से बहुत कठोर भाषा में बात
- 34:51की।
- 34:52लेकिन मॉडर्न लाइफ में इसका मतलब यह नहीं
- 34:55होना [संगीत] चाहिए कि आप खुद को इंसल्ट
- 34:57करके मोटिवेट करो। सेल्फ अब्यूज और
- 35:00अकाउंटेबिलिटी एक ही चीज नहीं है। आप खुद
- 35:04से ब्रूटल ऑनेस्टी रख सकते हो बिना खुद को
- 35:07डिस्ट्रॉय किए। मैं लेजी हूं कहने के
- 35:10बजाय। मैं पिछले 30 दिनों में अपने प्लान
- 35:13स्टडी [संगीत] आज कंसिस्टेंटली पूरा नहीं
- 35:16कर पाया। पहला स्टेटमेंट आइडेंटिटी अटैक
- 35:19है। [संगीत] दूसरा मेजरेबल रियलिटी है।
- 35:22मैं स्टूपिड हूं के बजाय। मेरी मैथमेटिक्स
- 35:24[संगीत]
- 35:25फाउंडेशन कमजोर है और मुझे बेसिक
- 35:28कांसेप्ट्स दोबारा सीखने होंगे। अब आपके
- 35:31पास एक्शन है। यही डिफरेंस बहुत बड़ा है।
- 35:34आइडेंटिटी को इंसल्ट करने से अक्सर शेम
- 35:37बढ़ती है। बिहेवियर को एक्यूरेटली
- 35:40आइडेंटिफाई करने से करेक्शन पॉसिबल होता
- 35:42है। और शायद यही अकाउंटेबिलिटी मिरर का
- 35:45मॉडर्न वर्जन है। आप मिरर के सामने
- 35:47[संगीत] खड़े हो और खुद से पूछो। आज मैंने
- 35:50क्या कहा था कि मैं करूंगा? मैंने वास्तव
- 35:53में क्या किया? मैं कहां एक्सक्यूज बना
- 35:56रहा हूं? मेरी सबसे [संगीत] बड़ी वीकनेस
- 35:59अभी क्या है? और उसका अगला मेजरेबल स्टेप
- 36:02क्या है? बस कोई ड्रामेटिक स्पीच जरूरी
- 36:05नहीं। कोई सेल्फ हेट जरूरी नहीं। कोई फेक
- 36:09पॉजिटिविटी भी नहीं। ट्रुथ, फिर एक्शन,
- 36:13फिर एविडेंस, फिर आइडेंटिटी धीरे-धीरे
- 36:17बदलती है। गगिंस की जर्नी में एक और
- 36:19महत्वपूर्ण बात है। उन्होंने अपने गोल्स
- 36:22को [संगीत] मैनेजेबल एकशंस में तोड़ा।
- 36:25उनका सपना सिर्फ एयरफोर्स में जाना नहीं
- 36:28रहा।
- 36:29[संगीत]
- 36:29उसके नीचे पढ़ाई, फिजिकल प्रिपरेशन,
- 36:32हैबिट्स और डेली टास्क जैसे [संगीत] छोटे
- 36:35कंपोनेंट्स आए। अकाउंटेबिलिटी सिस्टम का
- 36:38यही प्रैक्टिकल वैल्यू है। बड़ा गोल
- 36:40इमोशनल एक्साइटमेंट देता है। लेकिन डेली
- 36:44बिहेवियर ही उसे [संगीत] रियलिटी बनाता
- 36:46है। और यह प्रिंसिपल आज के स्टूडेंट के
- 36:49लिए बेहद रेलेवेंट है। मुझे साइबर [संगीत]
- 36:51सिक्योरिटी सीखनी है। ठीक है? लेकिन आज
- 36:54क्या? एक नेटवर्किंग कांसेप्ट, एक लinक्स
- 36:58कमांड, एक लैब, एक आवर फोकस प्रैक्टिस या
- 37:02सिर्फ YouTube पर साइबर सिक्योरिटी
- 37:04वीडियोस क्योंकि लर्निंग के बारे में एक
- 37:06डेंजरस इल्लुजन है। इंफॉर्मेशन [संगीत]
- 37:09कंज्यूम करना और स्किल डेवलप करना अलग
- 37:12चीजें हैं। आप 10 घंटे वीडियोस देख सकते
- 37:14हो और फिर भी किसी रियल प्रॉब्लम के सामने
- 37:18फ्रीज हो सकते हो। इसी तरह कोई व्यक्ति
- 37:20सेल्फ इंप्रूवमेंट केस वीडियोस देख सकता
- 37:23है और अपनी डेली लाइफ में एक हैबिट भी
- 37:26इंप्लीमेंट ना करें। नॉलेज आपको अवेयर
- 37:29बनाती है। एप्लीकेशन आपको कैपेबल बनाती है
- 37:33और अकाउंटेबिलिटी पूछती है। आज आपने
- 37:36कैपेबिलिटी बढ़ाने के लिए क्या किया? यही
- 37:39विक्टिम माइंडसेट फिर वापस आता है। मेरे
- 37:41पास रिसोर्सेज नहीं है। हो सकता है
- 37:44[संगीत] लेकिन जो अवेलेबल है उससे आपने
- 37:47क्या किया? मेरे पास मेंटो नहीं है। ठीक।
- 37:51क्या आपने अवेलेबल डॉक्यूमेंटेशन पढ़ी?
- 37:54कम्युनिटीज [संगीत] एक्सप्लोर की?
- 37:56प्रोजेक्ट्स बनाए। क्वेश्चंस पूछे। मेरे
- 37:59पास एक्सपेंसिव लैपटॉप नहीं है। हो सकता
- 38:02है यह जेन्युइन लिमिटेशन हो। लेकिन क्या
- 38:05बेसिक कांसेप्ट्स सीखने के लिए वही
- 38:08लिमिटेशन एब्सोल्यूट बैरियर है। यहां
- 38:10केयरफुल रहना जरूरी है। हर प्रॉब्लम को बस
- 38:14मेहनत करो। इसे सॉल्व नहीं किया जा सकता।
- 38:16रिसोर्सेज मैटर करते हैं। लक मैटर करता
- 38:20है। एनवायरमेंट मैटर करता है। सोशल
- 38:23[संगीत] सिस्टम्स मैटर करते हैं। हेल्थ
- 38:25मैटर करती है। फैमिली रिस्पांसिबिलिटीज
- 38:27[संगीत]
- 38:28मैटर करती है। लेकिन इन रियलिटीज को
- 38:31एकनॉलेज करने और इनके पीछे हाइड [संगीत]
- 38:33होने में डिफरेंस है। अकाउंटेबिलिटी
- 38:36रियलिटी को डिनाई नहीं करती। वो पूछती है
- 38:39रियलिटी जैसी भी है। उसमें मेरा नेक्स्ट
- 38:42मूव क्या है? यह क्वेश्चन [संगीत] इंसान
- 38:44को हेल्पलेसनेस से एजेंसी की तरफ ले जाता
- 38:47है। और एजेंसी का मतलब यह नहीं कि आपको
- 38:51तुरंत पावरफुल फील होगा। कई बार एजेंसी
- 38:54बोरिंग होती है। आपको बस एक फॉर्म भरना
- 38:57है। एक [संगीत] एप्लीकेशन भेजनी है। एक
- 39:00चैप्टर पढ़ना है। 1 घंटे फोन दूर रखना है।
- 39:04एक फेल्ड [संगीत] मॉक टेस्ट को एनालाइज
- 39:06करना है। एक डिफिकल्ट कन्वर्सेशन करनी है।
- 39:09एक स्किल [संगीत] को फिर से शुरू करना है।
- 39:12जिसे आपने पहले छोड़ दिया था। यह सब
- 39:15सिनेमैटिक नहीं है, लेकिन जिंदगी [संगीत]
- 39:17की डायरेक्शन इन्हीं डिसिशन से बदलती है।
- 39:20अब इमेजिन करो कि आप अपने जीवन का एक
- 39:23ऑनेस्ट ऑडिट करो। आप अपने एक्सक्यूसेस
- 39:26लिखते हो। टाइम नहीं है, [संगीत] एनर्जी
- 39:29नहीं है, एनवायरमेंट खराब है। मैं नेचुरली
- 39:33डिसिप्लिन नहीं हूं। मेरा बैकग्राउंड
- 39:36[संगीत] वीक है। फिर हर स्टेटमेंट के
- 39:38सामने सिर्फ एक सवाल लिखो। इसमें मेरा
- 39:41कंट्रोल कितना है? कुछ आंसर्स जीरो होंगे।
- 39:45कुछ 10% कुछ 50% कुछ शायद 90% यहीं से
- 39:51क्लेरिटी आएगी। जिस चीज पर आपका कंट्रोल
- 39:54जीरो है, उसे लेकर खुद को टॉर्चर करना
- 39:57बेकार है। जिस चीज पर आपका कंट्रोल है,
- 40:01उसे इग्नोर करना भी बेकार है। यही मैच्योर
- 40:04अकाउंटेबिलिटी है और शायद यही वो पॉइंट है
- 40:07जहां गॉगिंस की कहानी सिर्फ उनकी कहानी
- 40:10नहीं रहती। क्योंकि हर इंसान के पास कोई
- 40:13[संगीत] ना कोई इनविज़िबल वेट होता है।
- 40:16किसी के लिए वर्ब पास्ट है। किसी के लिए
- 40:18फेलियर, किसी [संगीत] के लिए फैमिली
- 40:21एक्सपेक्टेशंस, किसी के लिए फाइनेंशियल
- 40:24प्रेशर, किसी के लिए सोशल [संगीत]
- 40:26कंपैरिजन, किसी के लिए बॉडी इमेज, किसी के
- 40:29लिए रिजेक्शन, और किसी के लिए खुद के बारे
- 40:32[संगीत] में बनी हुई एक पुरानी डेफिनेशन।
- 40:35मैं एवरेज हूं। मैं डिसिप्लिन [संगीत]
- 40:38नहीं हूं।
- 40:40मैं इंटेलिजेंट नहीं हूं। मैं कॉन्फिडेंट
- 40:44नहीं हूं। मैं लकी नहीं हूं। मैं देर से
- 40:48[संगीत] शुरू कर चुका हूं। इन स्टेटमेंट्स
- 40:51को ब्लाइंडली पॉजिटिव स्टेटमेंट्स से
- 40:53रिप्लेस करने की [संगीत] जरूरत नहीं। बस
- 40:56उन्हें टेस्ट करने की जरूरत है। क्योंकि
- 40:58अगर आपने खुद को 10 साल से कहा है कि मैं
- 41:01कंसिस्टेंट [संगीत] नहीं हूं तो एक दिन
- 41:03में खुद को मैं अनस्टोपेबल हूं। बोलने से
- 41:06ब्रेन कॉन्विंस नहीं होगा। उसे एविडेंस
- 41:09[संगीत] चाहिए। एक छोटा कमिटमेंट फिर
- 41:12दूसरा फिर तीसरा। फिर एक दिन ऐसा आता है
- 41:17जब आपका ब्रेन कहता है शायद मैं बदल सकता
- 41:20हूं।
- 41:22यही सेल्फ एफिकसी का सीध है। [संगीत] और
- 41:24यही शायद ट्रांसफॉर्मेशन का सबसे
- 41:26रियलिस्टिक रास्ता है। पास्ट को एरेज करना
- 41:29नहीं। पास्ट को एक्सक्यूज [संगीत] बनने से
- 41:32रोकना। आपके साथ जो हुआ वो आपकी कहानी का
- 41:36हिस्सा हो सकता है। लेकिन पूरी कहानी
- 41:39नहीं। [संगीत] आपका पास्ट आपको समझा सकता
- 41:42है। लेकिन अगर आप उसे हर डिसीजन का फाइनल
- 41:45अथॉरिटी बना देंगे तो वह आपका फ्यूचर भी
- 41:48लिखने लगेगा। [संगीत]
- 41:50और एक दिन आप पीछे मुड़कर देखेंगे तो पता
- 41:53चलेगा कि आपको रोकने वाली चीज [संगीत]
- 41:55सिर्फ परिस्थितियां नहीं थी। कुछ जगहों पर
- 41:59आपने खुद भी अपने लिए सीमा [संगीत] खींची
- 42:01थी और उस सीमा को आपने इतना समय दिया कि
- 42:05वो रियलिटी जैसी [संगीत] लगने लगी। लेकिन
- 42:08रियलिटी और बिलीफ में फर्क है। रियलिटी को
- 42:12टेस्ट [संगीत] किया जा सकता है बिलीफ को
- 42:14भी। और जब आप पहली बार अपने बिलीफ को
- 42:17चैलेंज करते हो तब एक और मुश्किल [संगीत]
- 42:20सामने आती है क्योंकि अकाउंटेबिलिटी सिर्फ
- 42:22यह नहीं पूछती कि आप क्या चाहते हैं? वो
- 42:26यह पूछती है आप वास्तव में उसके लिए कितनी
- 42:29कीमत देने को तैयार हैं और यह सवाल सुनते
- 42:32ही ड्रीम और फैंटसी के बीच का फर्क साफ
- 42:34होने लगता है। सच का सामना करना सुनने में
- 42:38आसान लगता है। लेकिन जब [संगीत] सच आपके
- 42:40बारे में हो तब चीजें बदल जाती है। दूसरों
- 42:44की कमियां देखना आसान है। अपने बिहेवियर
- 42:47में पैटर्न देखना मुश्किल है। दूसरों को
- 42:50बताना आसान है कि उन्होंने क्या गलत किया।
- 42:54खुद [संगीत] से यह पूछना मुश्किल है कि इस
- 42:56सिचुएशन में मेरी गलती कहां थी? क्योंकि
- 42:59जैसे ही सवाल बाहर से हटकर अंदर आता है,
- 43:02ईगो सामने आ जाता है। और ईगो [संगीत] को
- 43:04सबसे ज्यादा डर किस चीज से लगता है? इस
- 43:07बात से कि कहीं उसकी बनाई हुई सेल्फ
- 43:10[संगीत] इमेज टूट ना जाए। आप अपने बारे
- 43:13में एक इमेज रखते हो। शायद आप खुद को
- 43:16इंटेलिजेंट मानते हो। शायद हार्ड वर्किंग,
- 43:20शायद डिसिप्लिन, शायद मैच्योर, शायद
- 43:23एंबिशियस। लेकिन अगर आपका डेली बिहेवियर
- 43:26उस इमेज से मैच नहीं करता तो आपके सामने
- 43:29दो रास्ते होते हैं। या तो आप बिहेवियर
- 43:32बदलो या फिर रियलिटी को एक्सप्लेन करके
- 43:35अपनी पुरानी इमेज बचा लो। अधिकतर लोग
- 43:39दूसरा रास्ता चुनते हैं क्योंकि वह आसान
- 43:42है। अगर आपने तीन दिन पढ़ाई नहीं की तो आप
- 43:45कह सकते हो इस वीक बहुत काम था। अगर आपने
- 43:49पूरा महीना जिम मिस किया तो कह सकते हो
- 43:52अभी स्ेड्यूल [संगीत]
- 43:53ठीक नहीं चल रहा। अगर आपने कोई स्किल शुरू
- 43:56करके छोड़ दी तो कह [संगीत] सकते हो। शायद
- 43:59यह मेरे लिए सही फील्ड नहीं है। अगर आपने
- 44:02किसी ओपोरर्चुनिटी के लिए अप्लाई नहीं
- 44:04किया तो कह सकते हो। वैसे भी कंपटीशन बहुत
- 44:08ज्यादा है। इनमें से हर बात टेक्निकली सही
- 44:10[संगीत] हो सकती है। लेकिन सवाल यह नहीं
- 44:13है कि एक्सक्यूज सच है या झूठ? सवाल यह है
- 44:17कि क्या वो एक्सक्यूज आपको एक्शन से बचा
- 44:19रहा है? यही फर्क है एक्सप्लेनेशन और
- 44:22अवॉयडेंस के बीच। गॉगिंस की जर्नी में
- 44:25अकाउंटेबिलिटी इसी जगह पावरफुल बनती है।
- 44:28उन्होंने अपने लिए एक ऐसा [संगीत] सिस्टम
- 44:30बनाया जिसमें उन्हें अपनी रियलिटी से
- 44:33भागने की जगह उसे सामने देखना पड़ता था।
- 44:37अकाउंटेबिलिटी मिरर इसी आईडिया का प्रतीक
- 44:40बन गया। अपने गोल्स, अपने वीकनेसेस और
- 44:43अपने डेली बिहेवियर को इतना विज़िबल बनाना
- 44:46कि आप खुद से बच ना सके। मिरर का मतलब
- 44:49सिर्फ आईने में चेहरा देखना नहीं है। असल
- 44:52मिरर आपका बिहेवियर है। आप कहते क्या हो
- 44:56और करते क्या हो? यही असली रिफ्लेक्शन है।
- 45:00मान लो कोई स्टूडेंट कहता है मुझे अपने
- 45:02[संगीत] करियर को लेकर बहुत सीरियस होना
- 45:04है। अब उसके पिछले सात दिनों को देखो।
- 45:08उसने कितने घंटे फोकस लर्निंग की? कितने
- 45:11घंटे रैंडम स्क्रोलिंग, कितने घंटे
- 45:13एक्चुअल प्रैक्टिस, [संगीत]
- 45:15कितने घंटे प्लानिंग, कितने घंटे दूसरों
- 45:18की सक्सेस देखने में, अब आंसर अनकंफर्टेबल
- 45:21हो सकता है। लेकिन यही डाटा है और डाटा से
- 45:25भागना आसान है। क्योंकि डाटा आपकी कहानी
- 45:28नहीं [संगीत] सुनता। वो बस दिखाता है कि
- 45:30हुआ क्या? इसीलिए सेल्फ कंफ्रंटेशन
- 45:33कभी-कभी इमोशनल नहीं बल्कि मैथमेटिकल होना
- 45:37चाहिए। आपको खुद से पूछना [संगीत] चाहिए।
- 45:40मैंने कहा था कि मुझे क्या करना है? मैंने
- 45:43वास्तव में क्या किया? और दोनों के बीच
- 45:46गैप कितना है? यही गैप आपकी करंट
- 45:48आइडेंटिटी और डिजायर्ड आइडेंटिटी के बीच
- 45:51का डिस्टेंस है। अब इमेजिन करो कि किसी
- 45:54व्यक्ति ने डिसाइड किया कि वो हर दिन 4
- 45:57घंटे पढ़ेगा। पहले दिन उसने 3 घंटे पढ़ा।
- 46:01दूसरे दिन दो, तीसरे दिन एक। चौथे दिन
- 46:05[संगीत] बिल्कुल नहीं। अगर वो सिर्फ इतना
- 46:08कहे मेरा डिसिप्लिन [संगीत] खराब है तो
- 46:11उसे कोई यूज़फुल इंफॉर्मेशन नहीं मिली।
- 46:13लेकिन अगर वह एनालाइज करे कि चौथे दिन
- 46:16क्या हुआ तो शायद पैटर्न मिले। रात देर तक
- 46:19फोन। सुबह [संगीत] देर से उठना। स्टडी
- 46:23टेबल पर नोटिफिकेशंस। क्लियर टारगेट नहीं।
- 46:26डिफिकल्ट चैप्टर से बचना। फिर बॉडम, फिर
- 46:30[संगीत] स्क्रोलिंग। अब प्रॉब्लम दिखाई दे
- 46:32रही है और जिस प्रॉब्लम का मैकेनिज्म
- 46:35दिखाई दे जाए [संगीत]
- 46:36उसे चेंज करना आसान हो जाता है।
- 46:39अकाउंटेबिलिटी का यही फायदा [संगीत] है।
- 46:41वो आपको मैं खराब हूं उसे निकाल कर मेरा
- 46:44सिस्टम कहां टूट रहा है तक लाती है। यह
- 46:48फर्क बहुत बड़ा है। क्योंकि शेम कहती है
- 46:51तुम में ही प्रॉब्लम है। अकाउंटेबिलिटी
- 46:53कहती है। प्रॉब्लम आइडेंटिफाई करो। शेम
- 46:57आइडेंटिटी पर अटैक करती है। अकाउंटेबिलिटी
- 47:00बिहेवियर को इंस्पेक्ट करती है। और लॉन्ग
- 47:03टर्म चेंज के लिए दूसरा अप्रोच [संगीत]
- 47:05ज्यादा यूजफुल है। क्योंकि अगर आप खुद को
- 47:08हर फेलियर के बाद इंसल्ट करने लगोगे तो
- 47:11आपका ब्रेन धीरे-धीरे फेलियर को थ्रेट
- 47:14समझने लगेगा। फिर आप डिफिकल्ट सिचुएशन से
- 47:17बचोगे। क्योंकि फेलियर सिर्फ रिजल्ट नहीं
- 47:20रहेगा। वो आपके सेल्फ अर्थ पर अटैक बन
- 47:23जाएगा।
- 47:24यही ईगो परफॉर्मेंस का एनिमी बन सकता है।
- 47:28जब आपकी आइडेंटिटी इस बात पर डिपेंड करने
- 47:30लगे कि मैं हमेशा अच्छा परफॉर्म करता हूं
- 47:34तब डिफिकल्ट एनवायरमेंट आपको [संगीत]
- 47:36डराने लगता है क्योंकि वहां फेलियर की
- 47:39पॉसिबिलिटी है। इसलिए कुछ लोग चैलेंज नहीं
- 47:42करते। वे वही काम करते हैं जिसमें वे पहले
- 47:45से अच्छे हैं। वे वही [संगीत] सब्जेक्ट्स
- 47:47पढ़ते हैं जो आसान लगते हैं। वही कंटेंट
- 47:50कंज्यूम करते हैं जिसे पहले से पसंद करते
- 47:53हैं। वही लोगों के साथ रहते हैं जो उन्हें
- 47:56कंफर्टेबल फील कराते हैं। क्यों? क्योंकि
- 47:59कॉम्पिटेंस की फीलिंग [संगीत] सेफ है।
- 48:02लेकिन ग्रोथ अक्सर वही शुरू होती है जहां
- 48:04कॉम्पिटेंस खत्म होती है। जहां आप बिगिनर
- 48:07बनते हो। जहां आप स्टूपिड क्वेश्चंस पूछते
- 48:10हो। जहां आप पहली बार फेल होते हो। जहां
- 48:14कोई दूसरा आपसे बेहतर होता है। जहां आपका
- 48:18ईगो कहता है। मैं यहां अच्छा नहीं हूं।
- 48:21और आपका मैच्योर सेल्फ कहता है। इसीलिए
- 48:24मुझे यहां काम करना है। गगिंस की जर्नी
- 48:27[संगीत] में सेल्फ कॉन्फ्रंटेशन का यही
- 48:29डीपर मीनिंग है। आपको अपने वीकनेसेस से
- 48:32प्यार करने की जरूरत नहीं। लेकिन [संगीत]
- 48:35उन्हें देखने से डरना भी नहीं चाहिए।
- 48:38क्योंकि वीकनेस छिपाने से वो खत्म नहीं
- 48:41होती। वो बस इनविज़िबल हो जाती है और
- 48:44इनविज़िबल वीकनेस सबसे डेंजरस [संगीत]
- 48:47होती है। एक स्टूडेंट को लगता है कि उसकी
- 48:49प्रॉब्लम कंसंट्रेशन है। वो प्रोडक्टिविटी
- 48:52[संगीत] एप्स बदलता है। डेस्क सेटअप बदलता
- 48:55है। स्टडी म्यूजिक बदलता है। [संगीत]
- 48:58लेकिन शायद एक्चुअल प्रॉब्लम यह है कि वो
- 49:00डिफिकल्ट क्वेश्चन से बचता है। एक जॉब
- 49:03सीकर को लगता है कि मार्केट खराब है।
- 49:06लेकिन शायद उसका रिज्यूम वीक है। एक
- 49:08क्रिएटर को लगता है कि एल्गोरिदम उसे पुश
- 49:11नहीं करता। लेकिन शायद उसके वीडियोस का
- 49:14रिटेंशन [संगीत] खराब है। एक बिजनेस ओनर
- 49:17को लगता है कि कस्टमर्स नहीं है। लेकिन
- 49:19शायद ऑफर में कोई स्ट्रांग रीजन टू बाय
- 49:22नहीं है। हर जगह सैम पैटर्न है। हम सरफेस
- 49:26प्रॉब्लम देखते हैं। रूट प्रॉब्लम देखने
- 49:28से बचते हैं। क्योंकि रूट प्रॉब्लम अक्सर
- 49:31हमारी रिस्पांसिबिलिटी [संगीत]
- 49:32के ज्यादा करीब होती है और यही मिरर काम
- 49:35करता है। मिरर आपको यह नहीं बताता कि
- 49:38दुनिया कैसी होनी चाहिए। वो बस यह दिखाता
- 49:41है कि अभी क्या है और जो है उसे स्वीकार
- 49:45करना हार मानना नहीं है। एक्चुअली
- 49:48इंप्रूवमेंट की शुरुआत अक्सर एक्सेप्टेंस
- 49:50से होती है। अगर आप मानते ही नहीं कि आपकी
- 49:54प्रिपरेशन कमजोर है तो आप प्रिपरेशन
- 49:56इंप्रूव कैसे करोगे? अगर आप मानते ही नहीं
- 49:59कि आपका अटेंशन फ्रेगमेंटेड है तो फोकस
- 50:02कैसे बिल्ड करोगे? अगर आप मानते ही नहीं
- 50:05कि आप कंफर्ट के एडिक्टेड हो तो डिसकंफर्ट
- 50:08टॉलरेंस कैसे डेवलप करोगे? अगर आप मानते
- 50:11ही नहीं कि आपका ईगो फीडबैक से बचता है तो
- 50:15फीडबैक कैसे यूज करोगे। इसलिए सेल्फ
- 50:17[संगीत] ऑनेस्टी एक स्किल है और यह स्किल
- 50:20अनकंफर्टेबल प्रैक्टिस मांगती है। आपको हर
- 50:23दिन अपने आप से पूछने [संगीत] की जरूरत
- 50:25नहीं कि मैं कितना महान हूं। कभी-कभी
- 50:29ज्यादा यूज़फुल सवाल है। आज मैंने कहां
- 50:31खुद को धोखा दिया? यह सवाल डेंजरस है
- 50:35लेकिन प्रोडक्टिव भी। हो सकता है आपने कहा
- 50:38हो कि आज सिर्फ 10 मिनट फोन चलाऊंगा। फिर
- 50:411 घंटे निकल गया। हो सकता है आपने कहा हो
- 50:45कि आज एक [संगीत] चैप्टर पूरा करूंगा।
- 50:48लेकिन आपने पूरा समय नोट सजाने में निकाल
- 50:51दिया। हो सकता है आपने कहा हो कि आपको
- 50:55करियर [संगीत] की चिंता है। लेकिन आपने आज
- 50:57भी कोई कॉनंक्रीट स्टेप नहीं लिया। यह
- 51:00छोटी चीजें हैं, लेकिन यही छोटी चीजें
- 51:03आइडेंटिटी को शेप करती है। आप जो बार-बार
- 51:06करते हो, वही धीरे-धीरे नॉर्मल बन जाता है
- 51:10और जो नॉर्मल बन जाता है, वही आपकी
- 51:13आइडेंटिटी जैसा महसूस [संगीत] होने लगता
- 51:15है। अगर आप रोज प्रोक्रास्टिनेट करते हो,
- 51:18तो प्रोक्रेस्टिनेशन [संगीत] सिर्फ हैबिट
- 51:20नहीं रहती। वो सेल्फ इमेज का हिस्सा बन
- 51:23सकती है। आप कहना शुरू कर देते हो।
- 51:25[संगीत]
- 51:26मैं लास्ट मोमेंट में ही काम करता हूं और
- 51:29फिर अगली बार आप उसी बिहेवियर को रिपीट
- 51:32करते हो [संगीत]
- 51:33क्योंकि ब्रेन कंसिस्टेंसी पसंद करता है।
- 51:36आपने अपने बारे में जो कहानी बनाई
- 51:39बिहेवियर उसे मेंटेन करने लगता है। इस
- 51:42साइकिल को तोड़ने के लिए कोई जॉइंट
- 51:44ट्रांसफॉर्मेशन जरूरी नहीं। बस एविडेंस
- 51:47बदलना शुरू करो। आज एक [संगीत] कमिटमेंट
- 51:50पूरा करो। फिर कल दूसरा फिर अगले दिन
- 51:54तीसरा।
- 51:56धीरे-धीरे ब्रेन को नया एविडेंस मिलेगा।
- 51:59मैं अपने डिसीजंस पर एक्ट कर सकता हूं।
- 52:03यही सेल्फ ट्रस्ट बनाता है और सेल्फ
- 52:05ट्रस्ट मोटिवेशन से ज्यादा वैलुएबल हो
- 52:07सकता है। क्योंकि मोटिवेशन कहती है मुझे
- 52:11करना है। सेल्फ ट्रस्ट कहती है मैंने कहा
- 52:14है इसलिए करूंगा। डिफरेंस छोटा लगता है।
- 52:18लेकिन यही डिफरेंस उस दिन सामने आता है जब
- 52:21एक्साइटमेंट खत्म हो जाती है। जब कोई
- 52:24अप्लॉज़ नहीं है। जब कोई Instagram स्टोरी
- 52:27नहीं बनेगी। जब कोई आपको देखकर इंप्रेस
- 52:30नहीं होगा। जब सिर्फ आप और आपका कमिटमेंट
- 52:34होगा। यही अकाउंटेबिलिटी की असली [संगीत]
- 52:36परीक्षा होती है और शायद इसी वजह से गगिंस
- 52:40की कहानी में मिरर एक पावरफुल सिंबल
- 52:42[संगीत] बनता है क्योंकि दुनिया आपको बहुत
- 52:45सारी आइडेंटिटीज दे सकती है। पेरेंट्स कुछ
- 52:48कहेंगे, फ्रेंड्स कुछ कहेंगे, [संगीत]
- 52:50टीचर्स कुछ कहेंगे, सोशल मीडिया आपको
- 52:53बताएगा कि सक्सेसफुल इंसान कैसा दिखता है।
- 52:57लेकिन अंत में आपको अपने बिहेवियर के साथ
- 52:59अकेले रहना पड़ता है। आप रात में सोने से
- 53:02[संगीत] पहले जानते हो कि आपने आज वास्तव
- 53:05में क्या किया। आपको पता है कि आपने कितना
- 53:09काम किया। आपको पता है कि कहां एक्सक्यूज
- 53:12बनाया। आपको पता है कि कहां डर की वजह से
- 53:15पीछे हटे। और आपको यह भी पता है कि कहां
- 53:19आपने अपने कंफर्ट को अपनी प्रायोरिटी बना
- 53:22दिया। यह नॉलेज अनकंफर्टेबल [संगीत]
- 53:24हो सकती है। लेकिन इसी नॉलेज को अगर सही
- 53:27तरीके से यूज किया जाए तो यह गिल्ट नहीं।
- 53:31डायरेक्शन बन सकती है। अब यहां एक और
- 53:34डिस्टिंशन जरूरी है। सेल्फ अवेयरनेस और
- 53:36सेल्फ ऑब्सेशन अलग चीजें हैं। हर समय अपने
- 53:40बारे में सोचते रहना ग्रोथ नहीं है। हर
- 53:42फेलियर का साइकोलॉजिकल एनालिसिस करते रहना
- 53:45भी ग्रोथ नहीं है। [संगीत] अगर एनालिसिस
- 53:48एक्शन में कन्वर्ट नहीं होता तो वह सिर्फ
- 53:51मेंटल नॉइज़ बन सकता है। इसलिए मिरर
- 53:53[संगीत] के सामने खड़े होकर खुद को जज
- 53:56करना उद्देश्य नहीं है। मिरर का उद्देश्य
- 53:59है देखो। स्वीकार करो, करेक्ट करो। फिर
- 54:04आगे बढ़ो। आपने 5 घंटे वेस्ट किए। ठीक। अब
- 54:08छठे घंटे को बचाओ। आपने एक साल गलत
- 54:12डायरेक्शन में लगा दिया। ठीक नहीं है।
- 54:14[संगीत] लेकिन वो वापस भी नहीं आएगा। अब
- 54:17अगला साल किस डायरेक्शन में जाएगा? आपने
- 54:20किसी स्किल को तीन बार छोड़ा। ठीक। अब यह
- 54:24पता करो कि हर बार किस पॉइंट पर छोड़ा।
- 54:27क्या डिफिकल्टी आते ही क्या रिजल्ट स्लो
- 54:30होने पर क्या दूसरों से कंपैरिजन शुरू
- 54:32होने पर क्या इनिशियल एक्साइटमेंट खत्म
- 54:35होने पर फेलियर का पैटर्न अक्सर फेलियर से
- 54:38ज्यादा यूज़फुल होता है और जब आप पैटर्न
- 54:41देख लेते हो तब प्रॉब्लम मिस्टीरियस नहीं
- 54:44रहती यही सेल्फ कॉन्फ्रंटेशन का पावर है।
- 54:47आप अपने माइंड के एक्सक्यूसेस को एनिमी की
- 54:50तरह देखने के बजाय इंफॉर्मेशन की तरह
- 54:52देखना शुरू करते हो। जब ब्रेन कहता है आज
- 54:56मत करो तो तुरंत खुद को वीक कहने की जरूरत
- 54:59नहीं। पूछो आज क्यों नहीं? [संगीत] अगर
- 55:03आंसर है बहुत टायर्ड हूं तो देखो स्लीप
- 55:06कैसी रही। अगर आंसर है काम बहुत है तो
- 55:09स्ेड्यूल देखो। अगर आंसर है, मन नहीं है
- 55:13तो समझो कि मोटिवेशन पर डिपेंडेंस ज्यादा
- 55:15है। अगर आंसर है यह डिफिकल्ट है तो शायद
- 55:19डिफिकल्टी टॉलरेंस कम है। हर रेजिस्टेंस
- 55:22के पीछे कोई पैटर्न हो सकता है और हर
- 55:25पैटर्न को समझना ग्रोथ का हिस्सा है। यहीं
- 55:28से एक बड़ा शिफ्ट आता है। आप अपने माइंड
- 55:31की हर आवाज को कमांड [संगीत] मानना बंद
- 55:33करते हो। माइंड कह सकता है मत करो। आप सुन
- 55:38सकते हो लेकिन आपको ऑटोमेटिकली ओबे करने
- 55:41की जरूरत नहीं। माइंड [संगीत] कह सकता है
- 55:44तुम फेल हो जाओगे। आप एकनॉलेज कर सकते हो
- 55:49लेकिन डिसीजन [संगीत] एविडेंस और
- 55:51स्ट्रेटजी के आधार पर ले सकते हो। माइंड
- 55:54कह सकता है आज आराम कर लो और कभी-कभी सच
- 55:58में आराम जरूरी होगा।
- 56:01लेकिन अगर हर अनकंफर्टेबल काम के समय वही
- 56:03आवाज आती है तो आपको पैटर्न पहचानना होगा।
- 56:07मेंटल टफनेस का मतलब माइंड को चुप कर देना
- 56:10नहीं है। यह समझना है कि माइंड की हर
- 56:13इंपल्स फाइनल इंस्ट्रक्शन नहीं होती।
- 56:15[संगीत] और यही बात आगे आने वाली जर्नी
- 56:18में और इंपॉर्टेंट होगी। क्योंकि [संगीत]
- 56:21जैसे-जैसे चैलेंज बड़ा होता जाएगा
- 56:24वैसे-वैसे इंटरनल रेजिस्टेंस भी बढ़ेगा।
- 56:27जब गोल इंपॉसिबल लगेगा, ब्रेन आपको रीजंस
- 56:30देगा। जब शरीर अनकंफर्टेबल होगा, ब्रेन
- 56:34एस्केप ढूंढेगा। जब फेलियर सामने आएगा,
- 56:38ईगो एक्सप्लेनेशन खोजेगा। और जब कोई दूसरा
- 56:42आपसे बेहतर परफॉर्म करेगा, कंपैरिजन आपको
- 56:45अपनी वर्थ [संगीत] पर डाउट कराएगा। उस समय
- 56:48एक व्यक्ति के पास दो चॉइसेस [संगीत]
- 56:50होंगी। पहली अपने पुराने सेल्फ को
- 56:54प्रोटेक्ट करना। दूसरी अपने पुराने सेल्फ
- 56:57[संगीत] को चैलेंज करना। पहली चॉइस
- 57:00कंफर्टेबल है। दूसरी ट्रांसफॉर्मेशन की
- 57:03शुरुआत है। लेकिन ट्रांसफॉर्मेशन की कीमत
- 57:06एक और चीज है। आपको सिर्फ यह नहीं देखना
- 57:09होगा कि आप कहां कमजोर हैं। आपको यह भी
- 57:12स्वीकार करना होगा कि जिस लाइफ को [संगीत]
- 57:14आप चाहते हैं वो शायद उस वर्जन ऑफ यू से
- 57:18नहीं मिलेगी जिसे आप अभी प्रोटेक्ट कर रहे
- 57:21हैं। और यही रियलाइजेशन अगली लड़ाई शुरू
- 57:24करता है। क्योंकि अब सवाल सिर्फ यह नहीं
- 57:26रह जाता कि मैं कौन हूं? सवाल बन जाता है
- 57:30अगर मुझे आगे [संगीत] जाना है तो मुझे
- 57:33अपने अंदर क्या बदलना पड़ेगा? कभी-कभी
- 57:36जिंदगी में सबसे बड़ा झूठ कोई दूसरा इंसान
- 57:39नहीं बोल रहा होता। वो [संगीत] झूठ आप खुद
- 57:42को बोल रहे होते हो। और प्रॉब्लम यह है कि
- 57:45जब कोई दूसरा झूठ बोलता है तो उसे पकड़ना
- 57:49आसान है। लेकिन जब आपका अपना माइंड आपको
- 57:52प्रोटेक्ट करने के लिए कहानी बनाता है तब
- 57:55उसे पहचानना बहुत मुश्किल हो जाता है।
- 57:57क्योंकि माइंड का एक काम आपको कंफर्टेबल
- 58:00रखना भी है। अगर कोई काम डिफिकल्ट है तो
- 58:03माइंड रीजन देगा कि अभी सही समय नहीं है।
- 58:07अगर फेलियर की संभावना है तो माइंड कहेगा
- 58:10कि शायद यह आपके लिए बना ही नहीं है। अगर
- 58:14कोई वीकनेस सामने आ रही है तो माइंड
- 58:17[संगीत] किसी दूसरे फैक्टर की तरफ अटेंशन
- 58:19मोड़ देगा और धीरे-धीरे इंसान रियलिटी से
- 58:22नहीं। रियलिटी की अपनी एडिटेड वर्जन से
- 58:26जीने लगता है। डेविड गॉगिंस [संगीत] की
- 58:28कहानी में एक पॉइंट ऐसा आया जब यह एडिटेड
- 58:31वर्जन टिक नहीं सका। स्कूल में उनकी
- 58:34[संगीत] परफॉर्मेंस खराब थी। उनकी रीडिंग
- 58:36एबिलिटी उनकी उम्र के हिसाब से बहुत पीछे
- 58:39थी। वो [संगीत] चीटिंग के सहारे अपनी
- 58:42पढ़ाई निकाल रहे थे। एयरफोर्स में जाने का
- 58:45सपना था। लेकिन उस सपने के रास्ते में एक
- 58:48ऐसी रियलिटी खड़ी थी [संगीत] जिसे इग्नोर
- 58:51करना अब संभव नहीं था। उन्हें क्वालिफाइंग
- 58:54टेस्ट पास करना था। और वो टेस्ट ऐसी चीज
- 58:57[संगीत] थी जिसे चीटिंग से पार नहीं किया
- 59:00जा सकता था। यही ड्रीम और रियलिटी
- 59:03आमने-सामने खड़े हो गए। ड्रीम कह रहा था
- 59:06मैं एयरफोर्स में जाना चाहता हूं। रियलिटी
- 59:10पूछ रही थी ठीक है। लेकिन क्या [संगीत]
- 59:12तुम उसके लिए अभी क्वालिफाइड हो? यह सवाल
- 59:16सिंपल है। लेकिन यही सवाल इंसान को अंदर
- 59:19से हिला सकता है। क्योंकि हम गोल्स बनाते
- 59:22समय अक्सर अपनी डिजायर्ड आइडेंटिटी के
- 59:24बारे में सोचते हैं। मैं एंटरप्रेन्योर
- 59:27बनूंगा। मैं एथलीट बनूंगा। मैं टॉप
- 59:30स्टूडेंट बनूंगा। मैं साइबर सिक्योरिटी
- 59:33एक्सपर्ट बनूंगा। मैं कंटेंट क्रिएटर
- 59:36बनूंगा। लेकिन कम लोग यह पूछते हैं क्या
- 59:40मेरा करंट बिहेवियर उस आइडेंटिटी को
- 59:42सपोर्ट करता है? यही गैप अनकंफर्टेबल है।
- 59:46आप फ्यूचर वर्जन के बारे में फेंटसी बना
- 59:48सकते हो। लेकिन करंट वर्जन के एविडेंस को
- 59:51इग्नोर नहीं कर सकते। गगिंस ने जब अपने
- 59:54एकेडमिक रियलिटी को [संगीत] देखना शुरू
- 59:56किया तो प्रॉब्लम सिर्फ यह नहीं थी कि
- 59:59उन्हें ज्यादा पढ़ना था। प्रॉब्लम यह थी
- 1:00:02कि उन्हें स्वीकार करना पड़ा कि उनकी करंट
- 1:00:05स्थिति [संगीत] उनके ड्रीम के लायक नहीं
- 1:00:07थी। यह स्टेटमेंट हर्ष है। लेकिन इसी
- 1:00:10हारशनेस [संगीत]
- 1:00:11में एक यूज़फुल आईडिया छिपा है। अगर आपकी
- 1:00:14करंट परफॉर्मेंस आपके डिजायर्ड रिजल्ट के
- 1:00:16लिए पर्याप्त नहीं है, तो इसे इंसल्ट की
- 1:00:19तरह मत देखो। इसे मेजरमेंट [संगीत] की तरह
- 1:00:22देखो। एक एथलीट स्टॉप वॉच देखता है। एक
- 1:00:25स्टूडेंट मॉक टेस्ट स्कोर देखता है। एक
- 1:00:28बिजनेस ओनर रेवेन्यू देखता है। एक यूबर
- 1:00:31रिटेंशन देखता है। एक प्रोग्रामर
- 1:00:34प्रोजेक्ट देखकर समझता है कि उसकी स्किल
- 1:00:37कहां तक है। नंबर्स ईगो को हर्ट कर सकते
- 1:00:39हैं। लेकिन नंबर्स [संगीत] झूठ कम बोलते
- 1:00:42हैं। यही वजह है कि रियलिटी से सामना करना
- 1:00:45ग्रोथ का प्ररेक्विजिट है। आप जिस चीज को
- 1:00:48मेजर नहीं करना चाहते शायद वही चीज आपको
- 1:00:51सबसे ज्यादा जानी चाहिए। अगर आप कहते हो
- 1:00:54कि आपके पास टाइम नहीं है तो 7 दिन का
- 1:00:57टाइम ऑडिट करो। अगर आप कहते हो कि
- 1:01:00कंसंट्रेशन खराब है तो देखो कि वास्तव में
- 1:01:04कितनी देर फोकस्ड वर्क करते हो। अगर आप
- 1:01:07कहते हो कि आपका करियर स्टक है तो
- 1:01:09एप्लीकेशनेशंस, इंटरव्यूज, स्किल्स और
- 1:01:13प्रिपरेशन का डाटा देखो। अगर आप कहते हो
- 1:01:16कि फिटनेस नहीं बन रही तो रूटीन, [संगीत]
- 1:01:19फूड, स्लीप और कंसिस्टेंसी देखो। रियलिटी
- 1:01:23अनकंफर्टेबल हो सकती है। लेकिन
- 1:01:25अनसर्टेनिटी उससे भी ज्यादा डेंजरस है।
- 1:01:28क्योंकि जब आपको पता ही नहीं कि प्रॉब्लम
- 1:01:31कहां है तो आप रैंडम सशंस ट्राई करते
- 1:01:34रहोगे। आज प्रोडक्टिविटी ऐप, कल नया टाइम
- 1:01:38टेबल, परसों मोटिवेशनल वीडियो, फिर नया
- 1:01:41कोर्स, फिर नया नोटबुक।
- 1:01:44लेकिन [संगीत] रूट प्रॉब्लम अनटच्ड। गगिंस
- 1:01:47के लिए मिरर सिर्फ रिफ्लेक्शन नहीं था।
- 1:01:49[संगीत] वो कॉन्फ्रंटेशन था। उनके बाथरूम
- 1:01:53मिरर पर गोल्स और रिमाइंडर्स लगाए गए। हर
- 1:01:56दिन उन्हें अपने सामने यह देखना पड़ता था
- 1:01:59कि उन्हें क्या करना है। उन्होंने बड़े
- 1:02:01गोल को छोटे एक्शननेबल [संगीत] स्टेप्स
- 1:02:03में तोड़ा और अपनी प्रोग्रेस को डेली
- 1:02:06अकाउंटेबिलिटी से जोड़ा। यहां एक
- 1:02:09इंपॉर्टेंट साइकोलॉजिकल प्रिंसिपल है। गोल
- 1:02:12जब दिमाग में होता है तो वो एब्स्ट्रैक्ट
- 1:02:15होता है। लेकिन जब गोल आपके [संगीत] सामने
- 1:02:17फिजिकली विज़िबल होता है तो वो डिसिशन
- 1:02:20एनवायरमेंट का हिस्सा बन जाता है। आप सुबह
- 1:02:23मिरर [संगीत] देखते हो। आपको याद आता है
- 1:02:26आज क्या करना है? आप रात में मिरर देखते
- 1:02:29हो। अब सवाल बदल जाता है। क्या मैंने
- 1:02:32किया? यानी गोल [संगीत] सिर्फ डिजायर नहीं
- 1:02:35रहा। वो अकाउंटेबिलिटी मैकेनिज्म बन गया
- 1:02:38और अकाउंटेबिलिटी मैकेनिज्म की पावर
- 1:02:41मोटिवेशन से अलग होती है। मोटिवेशन आपको
- 1:02:44काम करने के लिए एक्साइट कर सकती है।
- 1:02:46अकाउंटेबिलिटी आपको काम ना करने पर
- 1:02:49[संगीत] अनकंफर्टेबल बनाती है। दोनों में
- 1:02:52फर्क है। एक पुश करता है। दूसरा एस्केप को
- 1:02:55मुश्किल बनाता है। लेकिन यहां भी गगिंस की
- 1:02:58हर्ष सेल्फ टॉक को ब्लाइंडली कॉपी करना
- 1:03:01जरूरी नहीं है। अपने आप को मेंटली अब्यूज
- 1:03:04करना अकाउंटेबिलिटी नहीं है। अगर आप हर
- 1:03:07फेलियर के बाद खुद को वर्थलेस [संगीत]
- 1:03:09बोलते हो तो इससे डिसिप्लिन जरूरी नहीं कि
- 1:03:12बढ़े। कई लोगों में शेम बढ़ सकती है।
- 1:03:15अवॉयडेंस बढ़ सकता है और फेलियर से डर भी
- 1:03:18बढ़ सकता है। इसलिए लेसन को एक्सट्रैक्ट
- 1:03:21करना जरूरी है। लैंग्वेज को नहीं। आपको
- 1:03:24अपने लिए ब्रूटली ऑनेस्ट होना है। ब्रूटली
- 1:03:27क्रूल नहीं। मान लो आपका [संगीत] टारगेट
- 1:03:30है कि 6 महीने में एक एंप्लॉयबल स्किल्स
- 1:03:32सीखनी है। पहला सवाल क्या आपने सच में
- 1:03:36डेली प्रैक्टिस की? अगर नहीं तो मैं अनलकी
- 1:03:40हूं कहना आसान है। लेकिन शायद ज्यादा
- 1:03:43यूज़फुल स्टेटमेंट होगा। मैंने [संगीत]
- 1:03:45पिछले 14 दिनों में सिर्फ पांच दिन
- 1:03:47प्रैक्टिस की। इसलिए मेरी प्रोग्रेस स्लो
- 1:03:50है। अब आपके पास कंट्रोल है। आप स्ेड्यूल
- 1:03:54बदल सकते हो। एनवायरमेंट बदल सकते हो।
- 1:03:57[संगीत]
- 1:03:57फोन हटाओ, प्रैक्टिस का फिक्स्ड स्लॉट
- 1:04:00बनाओ, टास्क छोटा करो। ट्रैकिंग शुरू करो।
- 1:04:05लेकिन जब तक प्रॉब्लम स्वीकार नहीं करोगे,
- 1:04:08स्यूशन सिर्फ [संगीत] गेस रहेगा। ट्रुथ का
- 1:04:11एक और अनकंफर्टेबल एस्पेक्ट है। कई बार हम
- 1:04:15अपनी [संगीत] वीकनेस जानते हैं। फिर भी
- 1:04:17उसे बदलना नहीं चाहते। क्यों? क्योंकि
- 1:04:20वीकनेस को एक्सेप्ट करना ईगो के लिए
- 1:04:23एक्सपेंसिव हो सकता है। मान लो आपको पता
- 1:04:26है कि आप प्रोक्रेस्टिनेट करते हो। लेकिन
- 1:04:29अगर आप यह मान लेते हो तो आपको यह भी
- 1:04:32मानना पड़ेगा कि आपकी करंट सिचुएशन का कुछ
- 1:04:35हिस्सा आपकी ओन चॉइससेस से बना है। यह
- 1:04:38पेनफुल है। इसलिए माइंड अल्टरनेटिव स्टोरी
- 1:04:41बनाता है। मेरे पास बहुत प्रेशर है। मेरे
- 1:04:44दोस्त [संगीत] डिस्ट्रैक्ट करते हैं। मेरे
- 1:04:46पेरेंट्स सपोर्ट नहीं करते। कॉलेज अच्छा
- 1:04:49नहीं है, एल्गोरिदम खराब है, मार्केट खराब
- 1:04:53है, कंपटीशन बहुत है। और फिर धीरे-धीरे हर
- 1:04:57एक्सटर्नल फैक्टर एक शील्ड बन जाता है।
- 1:04:59लेकिन मैच्योर थिंकिंग का मतलब एक्सटर्नल
- 1:05:02फैक्टर्स को इग्नोर करना नहीं। बल्कि दो
- 1:05:05कॉलम्स बनाना है। क्या मेरे कंट्रोल में
- 1:05:08है? क्या मेरे कंट्रोल में नहीं है, जो
- 1:05:10कंट्रोल में नहीं है, उसके लिए स्ट्रेटजी
- 1:05:13बनाओ। जो कंट्रोल में है उसके लिए
- 1:05:16एक्सक्यूसेस मत बनाओ। यही डिस्टिंशन इंसान
- 1:05:20को इमोशनली ज्यादा [संगीत] स्टेबल बनाती
- 1:05:22है। क्योंकि आप हर चीज को पर्सनल फेलियर
- 1:05:25नहीं मानते। लेकिन जहां एक्शन पॉसिबल है,
- 1:05:29वहां एक्शन भी लेते हो। गगिंस के लिए यह
- 1:05:32शिफ्ट बहुत महत्वपूर्ण था। उन्होंने अपनी
- 1:05:35सिचुएशन को परफेक्ट होने का इंतजार नहीं
- 1:05:38किया। उन्हें पहले अपने डेफिसिट्स को
- 1:05:41देखना पड़ा और फिर उन्हें एड्रेस करना
- 1:05:44पड़ा। उन्होंने रीडिंग और स्टडिंग पर
- 1:05:46इंटेंस [संगीत] एफर्ट लगाया और अपने
- 1:05:49एकेडमिक लेवल को काफी इंप्रूव किया जिससे
- 1:05:52आगे क्वालिफाइंग एग्जाम की दिशा में बढ़
- 1:05:54सके। अब सोचो यह सिर्फ पढ़ाई की कहानी
- 1:05:58नहीं है। यह स्किल एक्विजिशन का फंडामेंटल
- 1:06:01प्रिंसिपल है। आप जिस लेवल पर हो पहले उसे
- 1:06:04[संगीत] स्वीकार करो। फिर डिजायर्ड लेवल
- 1:06:08डिफाइन करो। फिर गैप आइडेंटिफाई करो। फिर
- 1:06:11गैप को छोटे एक्शंस [संगीत] में कन्वर्ट
- 1:06:14करो। फिर एविडेंस कलेक्ट करो। और फिर
- 1:06:17रिपीट करो। यह प्रोसेस [संगीत] ग्लैमरस
- 1:06:20नहीं है। लेकिन यही वास्तविक प्रोग्रेस
- 1:06:23है। प्रॉब्लम तब आती है जब हम गैप देखकर
- 1:06:26शे में चले जाते हैं। मैं इतना पीछे हूं।
- 1:06:30[संगीत]
- 1:06:30दूसरे मुझसे बहुत आगे हैं। मेरे
- 1:06:32क्लासमेट्स ऑलरेडी जॉब्स पा चुके हैं।
- 1:06:35मेरी उम्र निकल रही है। मैं लेट हूं।
- 1:06:39कंपैरिजन गैप को दिखाता है। लेकिन गैप का
- 1:06:42उपयोग दो तरीके [संगीत] से हो सकता है। या
- 1:06:44तो वो आपको फ्रीज कर दे या वो आपको
- 1:06:48डायरेक्शन दे। अगर आपका मॉक टेस्ट स्कोर
- 1:06:5042 है और कट ऑफ 80 के आसपास चाहिए तो 42
- 1:06:55आपकी इंसल्ट नहीं है। वो इंफॉर्मेशन है।
- 1:06:58अब आपको पता है कि 38 पॉइंट्स का गैप है।
- 1:07:01आप एनालिसिस कर सकते हो कि कहां मार्क्स
- 1:07:04जा रहे हैं। कांसेप्ट्स, स्पीड,
- 1:07:07एक्यूरेसी, रिवीजन, क्वेश्चन सिलेक्शन,
- 1:07:10एंजायटी। अब प्रॉब्लम एक्शनेबल हो गई।
- 1:07:14लेकिन अगर आप सिर्फ यह सोचते रहो कि मैं
- 1:07:1642 वाला स्टूडेंट हूं तो आपने स्कोर को
- 1:07:20[संगीत] आइडेंटिटी बना दिया और यही सेल्फ
- 1:07:22इमेज का ट्रैप है। आपका करंट रिजल्ट आपका
- 1:07:25परमानेंट आइडेंटिटी कार्ड नहीं है। लेकिन
- 1:07:28अगर आप करंट रिजल्ट देखने से ही बचते
- 1:07:30[संगीत] रहोगे तो इंप्रूवमेंट की संभावना
- 1:07:33भी कम हो जाएगी। यही वजह है कि ट्रुथ और
- 1:07:36होप एक दूसरे के अपोजिट नहीं है। एक्चुअली
- 1:07:40रील होप अक्सर ट्रुथ से [संगीत] शुरू होती
- 1:07:42है। फेक होप कहती है सब अच्छा हो जाएगा।
- 1:07:47रील होप कहती है अभी अच्छा नहीं है लेकिन
- 1:07:50मुझे पता है कि प्रॉब्लम क्या है और मैं
- 1:07:53नेक्स्ट स्टेप जानता हूं। पहली कंफर्टिंग
- 1:07:56है। दूसरी एंपावरिंग और गगिंस की जर्नी
- 1:08:00में अकाउंटेबिलिटी से जो कॉन्फिडेंस पैदा
- 1:08:02हुआ वो इसी तरह का कॉन्फिडेंस था। बाद में
- 1:08:06उन्होंने अपनी कॉन्फिडेंस को टैलेंट या
- 1:08:08परफेक्ट [संगीत] बैकग्राउंड से नहीं बल्कि
- 1:08:11पर्सनल अकाउंटेबिलिटी और अपने एक्शन से
- 1:08:14जोड़कर देखा। यह बहुत इंपॉर्टेंट है
- 1:08:17क्योंकि कॉन्फिडेंस का सबसे [संगीत] मजबूत
- 1:08:19सोर्स हमेशा प्रेस नहीं होता। एविडेंस
- 1:08:22होता है। आपने खुद को 10 बार प्रॉमिस किया
- 1:08:26और 10 बार पूरा किया सेल्फ ट्रस्ट बढ़ेगा।
- 1:08:30आपने कठिन टॉपिक से भागने के बजाय उसे
- 1:08:33बैठकर समझा सेल्फ ट्रस्ट बढ़ेगा। आपने
- 1:08:36फेलर के बाद दोबारा अटेमप्ट किया सेल्फ
- 1:08:40[संगीत] ट्रस्ट बढ़ेगा। आपने डिस्ट्रैक्शन
- 1:08:42के बावजूद अपना प्लंड वर्क [संगीत] पूरा
- 1:08:44किया सेल्फ ट्रस्ट बढ़ेगा। यह कॉन्फिडेंस
- 1:08:48लाउड नहीं होता। यह अंदर शांत तरीके से
- 1:08:51बनता है और इसी वजह [संगीत] से एक्सटर्नल
- 1:08:54वैलिडेशन की डिपेंडेंसी कम हो सकती है।
- 1:08:57आपको हर बार किसी दूसरे से सुनने की जरूरत
- 1:08:59नहीं पड़ती कि आप कैपेबल हो। आपके पास
- 1:09:03अपना एविडेंस [संगीत] होता है। अब इमेजिन
- 1:09:05करो कि आप अपने लाइफ का एक मिरर बनाओ।
- 1:09:09लेकिन इस बार फिजिकल मिरर नहीं एक
- 1:09:12डॉक्यूमेंट, एक नोटबुक या एक सिंपल पेज।
- 1:09:16ऊपर लिखो मेरी करंट रियलिटी और नीचे
- 1:09:20सिरफक्स। मैं कितने घंटे सोता हूं? मैं
- 1:09:25कितने घंटे फोन यूज करता हूं? मैं कितने
- 1:09:29घंटे फोकस स्टडी करता हूं? मैं कितनी बार
- 1:09:32वर्कआउट करता हूं? मैंने पिछले महीने
- 1:09:36कितने एप्लीकेशनेशंस भेजे? मैंने कितने
- 1:09:39प्रोजेक्ट्स कंप्लीट किए? मैंने कितने मॉक
- 1:09:41टेस्ट दिए? मैंने कितनी बार अपना प्लान
- 1:09:44तोड़ा? ये एक्सरसाइज बोरिंग [संगीत] लग
- 1:09:47सकती है। लेकिन यही बॉटम ट्रुथ का रास्ता
- 1:09:50है क्योंकि ब्रेन स्टोरीज पसंद करता है।
- 1:09:53डाटा स्टोरीज को चैलेंज करता है। आपको लग
- 1:09:56सकता है कि आप रोज 4 घंटे पढ़ते हो।
- 1:10:00ट्रैकर दिखा [संगीत] सकता है कि एवरेज 2
- 1:10:02घंटे 20 मिनट है। आपको लग सकता है कि आप
- 1:10:05बहुत मेहनत कर रहे हो। आउटपुट दिखा सकता
- 1:10:08है कि आपकी प्रैक्टिस का बड़ा हिस्सा
- 1:10:10पैसिव कंसमशन है। आपको लग सकता है कि आपके
- 1:10:14पास कोई ओपोरर्चुनिटी नहीं लेकिन शायद
- 1:10:16आपने पिछले महीने सिर्फ छह एप्लीकेशनेशंस
- 1:10:19भेजे। यह इंफॉर्मेशन पेनफुल हो सकती है।
- 1:10:23लेकिन पेन और इंसल्ट में फर्क है। ट्रुथ
- 1:10:26आपको अटैक करने नहीं आया। ट्रुथ आपको
- 1:10:29ओरिएंट करने आया है। एक पायलट को फ्लाइट
- 1:10:32के दौरान इंस्ट्रूमेंट पैनल [संगीत] पसंद
- 1:10:34आए या ना आए उससे रीडिंग्स बदलती नहीं।
- 1:10:37अगर एटीट्यूड कम है [संगीत] तो पायलट को
- 1:10:40एलटीट्यूड बढ़ाना होगा। उसे इंस्ट्रूमेंट
- 1:10:43पर गुस्सा करने से कोई फायदा नहीं। वैसे
- 1:10:46ही आपका करंट परफॉर्मेंस डाटा आपके ईगो का
- 1:10:50एनिमी नहीं है। वो नेविगेशन सिस्टम है।
- 1:10:53लेकिन इंसान डाटा को पर्सनल बना देता है।
- 1:10:56मेरे मार्क्स कम है। बदलकर मैं डम हूं।
- 1:11:00मेरी फिटनेस खराब है। [संगीत] बदलकर मैं
- 1:11:03वीक हूं। मेरी बिजनेस सेल्स कम है। बदलकर
- 1:11:07मैं [संगीत] बिजनेसमैन नहीं हूं। मेरे
- 1:11:09वीडियोस नहीं चल रहे बदलकर मैं क्रिएटर
- 1:11:12नहीं हूं।
- 1:11:14यहां लैंग्वेज इंपॉर्टेंट है। बिहेवियर और
- 1:11:17आइडेंटिटी को अलग रखना जरूरी है। आपका
- 1:11:20परफॉर्मेंस खराब हो सकता है। आप खराब
- 1:11:23इंसान नहीं बन जाते। आपकी [संगीत] स्किल
- 1:11:25कमजोर हो सकती है। आप इनकेबल इंसान नहीं
- 1:11:28बन जाते। आपका प्लान फेल हो सकता है। आप
- 1:11:32फेलियर नहीं बन जाते। यह डिस्टिंशन
- 1:11:34अकाउंटेबिलिटी को सस्टेनेबल बनाती है।
- 1:11:37क्योंकि अगर हर करेक्शन आपकी आइडेंटिटी पर
- 1:11:40अटैक है तो आप करेक्शन से बचोगे। लेकिन
- 1:11:44अगर करेक्शन सिर्फ इंफॉर्मेशन है तो आप
- 1:11:47उसे यूज कर सकते हो। और यही ग्रोथ
- 1:11:50माइंडसेट की प्रैक्टिकल साइड है। अब वापस
- 1:11:52उस बाथरूम [संगीत] मिरर पर आओ। एक यंग
- 1:11:55व्यक्ति अपने रिफ्लेक्शन के सामने खड़ा
- 1:11:58है। वो जिस वर्जन को देख रहा है, वो उस
- 1:12:00फ्यूचर के लिए तैयार नहीं है जिसका वह
- 1:12:03सपना देखता है। यह मोमेंट अनकंफर्टेबल है।
- 1:12:07लेकिन इसी डिसकंफर्ट में एक डिसीजन पैदा
- 1:12:10होता है। अब और प्रिटेंड नहीं करना। अब
- 1:12:13ड्रीम को सिर्फ ड्रीम नहीं रहने देना। अगर
- 1:12:16एयरफोर्स जाना है तो पढ़ना पड़ेगा। अगर
- 1:12:20टेस्ट पास करना है तो तैयारी [संगीत] करनी
- 1:12:22पड़ेगी। अगर बॉडी बदलनी है तो हैबिट्स
- 1:12:25बदलनी पड़ेंगी। अगर लाइफ बदलनी है तो
- 1:12:29बिहेवियर बदलना पड़ेगा। और यही वो पॉइंट
- 1:12:32है जहां विश और कमिटमेंट अलग होते हैं।
- 1:12:35विश कहती है काश कमिटमेंट पूछती है आज
- 1:12:39क्या? यह छोटा सवाल बहुत पावरफुल है। आज
- 1:12:43क्या? आज कौन सा चैप्टर? आज कितने
- 1:12:46क्वेश्चंस? आज कौन सी स्किल? आज कौन सा
- 1:12:49एप्लीकेशन? आज कौन सा अनकंफर्टेबल टास्क?
- 1:12:53आज किस डिस्ट्रैक्शन को ना कहना है?
- 1:12:56फ्यूचर बहुत बड़ा होता है। आज छोटा होता
- 1:12:59है। लेकिन फ्यूचर की दिशा आज के रिपीटेड
- 1:13:02डिसिशनंस से बनती है। यही कारण [संगीत] है
- 1:13:04कि बड़े गोल्स को छोटे एक्शंस में तोड़ना
- 1:13:07सिर्फ प्रोडक्टिविटी ट्रिक नहीं है। यह
- 1:13:10साइकोलॉजिकल ट्रिक भी है। क्योंकि ब्रेन
- 1:13:13इंपॉसिबल लुकिंग फ्यूचर से डर सकता है।
- 1:13:16लेकिन एक स्पेसिफिक नेक्स्ट [संगीत] स्टेप
- 1:13:18मैनेजेबल लगता है। मुझे अपनी पूरी जिंदगी
- 1:13:21बदलनी है। बहुत बड़ा। आज एक घंटा फोकस
- 1:13:25स्टडी मैनेजेबल मुझे साइबर सिक्योरिटी
- 1:13:28एक्सपर्ट बनना है। बहुत बड़ा [संगीत]
- 1:13:31आज नेटवर्किंग का एक कांसेप्ट समझना और एक
- 1:13:34लैब करना। मैनेजेबल मुझे फाइनेंशियली फ्री
- 1:13:38होना है। बहुत [संगीत] बड़ा। आज इनकम
- 1:13:42बढ़ाने वाली एक स्किल पर काम करना।
- 1:13:44मैनेजेबल एक स्टेप छोटा हो सकता है लेकिन
- 1:13:48रिपीटेड स्टेप्स आइडेंटिटी को बदल सकते
- 1:13:51हैं। और यही एक और ट्रुथ [संगीत] सामने
- 1:13:53आता है। कई बार हमें मोटिवेशन की कमी नहीं
- 1:13:56होती। हमें क्लेरिटी की [संगीत] कमी होती
- 1:13:59है। हमें पता ही नहीं होता कि नेक्स्ट
- 1:14:01एक्शन क्या है। इसलिए हम प्लानिंग करते
- 1:14:04रहते हैं। जब नेक्स्ट स्टेप क्लियर हो
- 1:14:06जाता है। रेजिस्टेंस [संगीत] कम हो सकती
- 1:14:08है। लेकिन क्लेरिटी भी पर्याप्त नहीं।
- 1:14:11क्योंकि कुछ काम क्लियर [संगीत] होने के
- 1:14:13बावजूद अनकंफर्टेबल रहेंगे। और यहीं से
- 1:14:16अगला साइकोलॉजिकल [संगीत] बैटल शुरू होता
- 1:14:19है। क्योंकि जब गगिंस ने अपने एकेडमिक
- 1:14:22डेफिसिट्स को [संगीत] एड्रेस करना शुरू
- 1:14:23किया तब सिर्फ पढ़ाई ही चैलेंज नहीं थी।
- 1:14:27आगे फिजिकल प्रिपरेशन, वाटर का फियर,
- 1:14:30मिलिट्री ट्रेनिंग और ऐसे एनवायरमेंट्स
- 1:14:33आने वाले थे। जहां सिर्फ यह जानना कि क्या
- 1:14:36करना है काफी नहीं था। वहां आपको वो करना
- 1:14:39पड़ता है जो आपका माइंड करना नहीं चाहता।
- 1:14:43और यही डिफरेंस है नॉलेज [संगीत] और
- 1:14:45कैपेसिटी के बीच। आप जानते हो कि क्या
- 1:14:48करना चाहिए। लेकिन क्या आप उसे तब भी कर
- 1:14:51सकते हो जब वो अनकंफर्टेबल हो? यहीं से
- 1:14:54कंफर्ट ज़ोन की असली कहानी शुरू होती है।
- 1:14:57क्योंकि अभी तक लड़ाई मिरर के सामने थी।
- 1:15:01अब लड़ाई मिरर से बाहर शुरू होने वाली थी।
- 1:15:04और इस बार सामने सिर्फ आपकी वीकनेस नहीं
- 1:15:07होगी। सामने एक ऐसा [संगीत] गोल होगा जो
- 1:15:11पहली नजर में इतना बड़ा दिखाई देगा कि
- 1:15:14आपका पूरा माइंड उसे इंपॉसिबल घोषित करने
- 1:15:17लगेगा। कभी-कभी आपकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम
- 1:15:20यह नहीं होती [संगीत] कि गोल मुश्किल है।
- 1:15:23असली प्रॉब्लम यह होती है कि आपका दिमाग
- 1:15:25गोल को शुरू होने से पहले ही इंपॉसिबल
- 1:15:28घोषित कर देता है। आप किसी चीज को देखते
- 1:15:31हैं और तुरंत कैलकुलेशन शुरू हो जाती है।
- 1:15:34[संगीत] इतना बड़ा सिलेबस है। कैसे होगा?
- 1:15:37इतना वेट है। कम कैसे होगा? इतनी कंपटीशन
- 1:15:41है। मेरी सिलेक्शन कैसे [संगीत] होगी?
- 1:15:44मेरे पास रिसोर्सेज नहीं है। मेरे पास
- 1:15:47टाइम नहीं है। मेरी इंग्लिश वीक है। मेरी
- 1:15:50फैमिली सिचुएशन [संगीत] ऐसी है। मैं पहले
- 1:15:52भी फेल हो चुका हूं। और धीरे-धीरे आपका
- 1:15:56ब्रेन एक ऐसी कहानी बना देता है जिसमें
- 1:15:59कोशिश करने से पहले ही हार का फैसला हो
- 1:16:02चुका होता है। [संगीत] ध्यान से देखिए।
- 1:16:05अक्सर हम फेलियर से नहीं डरते। हम उस
- 1:16:08पॉसिबिलिटी से डरते हैं कि कहीं हमने पूरी
- 1:16:10कोशिश कर दी और फिर भी फेल हो गए तो
- 1:16:13क्योंकि अगर आपने कोशिश ही नहीं की तो
- 1:16:16आपके पास एक एक्सक्यूज बचा रहता है। आप कह
- 1:16:19सकते हैं मैं चाहता [संगीत] तो कर सकता
- 1:16:21था। लेकिन जिस दिन आपने पूरी ईमानदारी से
- 1:16:25कोशिश कर दी उस दिन आपके पास यह कंफर्ट भी
- 1:16:29नहीं बचता और शायद इसी वजह से इंपॉसिबल
- 1:16:32गोल इतना अनकंफर्टेबल होता है। वो सिर्फ
- 1:16:35आपकी एबिलिटी को चैलेंज नहीं करता। वो
- 1:16:38आपकी आइडेंटिटी को चैलेंज करता है। वो
- 1:16:41पूछता है तुम वास्तव में कितना कर सकते
- 1:16:44हो? और उससे भी अनकंफर्टेबल [संगीत]
- 1:16:46सवाल तुम अब तक कितना कम कर रहे थे? डेविड
- 1:16:50गॉगिंस की जर्नी में एक ऐसा मोमेंट आया जब
- 1:16:53उसने अपने [संगीत] सामने ऐसा गोल रखा जिसे
- 1:16:56देखकर सामान्य इंसान शायद कैलकुलेशन करने
- 1:16:59के बजाय हंस देता। लगभग 300 पाउंड्स
- 1:17:02[संगीत] का शरीर और लक्ष्य नेवी सील बनना।
- 1:17:06यह सिर्फ एक डिफिकल्ट गोल नहीं था। उस समय
- 1:17:09उसकी फिजिकल कंडीशन और मिलिट्री
- 1:17:11स्टैंडर्ड्स [संगीत] के बीच इतना बड़ा गैप
- 1:17:14था कि गोल प्रैक्टिकली एब्सर दिखाई देता
- 1:17:17था। एक तरफ उसका वर्तमान था। दूसरी तरफ एक
- 1:17:21ऐसी दुनिया जिसमें पहुंचने [संगीत] के लिए
- 1:17:24उसे खुद को पूरी तरह बदलना था। और बीच में
- 1:17:28था एक विशाल गैप। 297 पाउंड्स के आसपास
- 1:17:32वजन से उसने सील बनने [संगीत] का फैसला
- 1:17:35किया। रिक्रूटर तक पहुंचना भी आसान नहीं
- 1:17:38था। आखिरकार उसे यह बताया गया कि अगर उसे
- 1:17:42आगे बढ़ना है तो उसे लगभग 106 पाउंड्स कम
- 1:17:46करके कुछ ही महीनों में स्टैंडर्ड्स के
- 1:17:48भीतर आना होगा। अब जरा इस नंबर को अपने
- 1:17:51जीवन से कंपेयर मत कीजिए। बस इसे महसूस
- 1:17:55कीजिए। 106 [संगीत] पाउंड्स कुछ महीनों
- 1:17:58में जब आपका वर्तमान इतना दूर हो कि गोल
- 1:18:02और रियलिटी के बीच दूरी देखकर दिमाग कहे।
- 1:18:05यह मेरे बस की बात नहीं [संगीत] है। यही
- 1:18:08वो जगह है जहां बहुत से लोग रुक जाते हैं।
- 1:18:11लेकिन यहां एक साइकोलॉजिकल डिफरेंस पैदा
- 1:18:14होता है। कुछ लोग गोल को देखते हैं और
- 1:18:16पूछते हैं [संगीत] क्या यह पॉसिबल है? और
- 1:18:19कुछ लोग पूछते हैं अगर यह करना ही पड़े तो
- 1:18:23मुझे क्या-क्या बदलना होगा? इन दोनों
- 1:18:25[संगीत] क्वेश्चंस में बहुत बड़ा फर्क है।
- 1:18:28पहला क्वेश्चन ब्रेन को परमिशन देता है कि
- 1:18:31वो रीज़ंस [संगीत] खोजे। दूसरा क्वेश्चन
- 1:18:33ब्रेन को प्रॉब्लम सॉल्विंग मोड में
- 1:18:35धकेलता है। जब आप पूछते हैं क्या मैं कर
- 1:18:38सकता हूं? तो आपका दिमाग अनसर्टेनिटी पर
- 1:18:42फोकस करता है। जब [संगीत] आप पूछते हैं
- 1:18:44इसे करने के लिए मुझे क्या करना पड़ेगा?
- 1:18:47तो आपका ध्यान एक्शन पर शिफ्ट होने लगता
- 1:18:50है और यही डिफरेंस किसी भी बड़े
- 1:18:53ट्रांसफॉर्मेशन की शुरुआत हो सकता है।
- 1:18:56लेकिन यहां एक बात बहुत साफ समझनी [संगीत]
- 1:18:59जरूरी है। गगिंस की कहानी को देखकर यह मत
- 1:19:02सोचिए कि हर इंपॉसिबल लुकिंग गोल को उसी
- 1:19:05एक्सट्रीम तरीके [संगीत] से चस करना
- 1:19:07चाहिए। नहीं उसकी कहानी का लेसन यह नहीं
- 1:19:11है कि आप अपने शरीर को तोड़ दें। नींद
- 1:19:14खत्म कर दें या हेल्थ को [संगीत] इग्नोर
- 1:19:17करें। लेसन यह है कि कभी-कभी हमारी
- 1:19:20पर्सव्ड लिमिट और हमारी एक्चुअल कैपेसिटी
- 1:19:23एक ही चीज नहीं होती और यह डिफरेंस समझना
- 1:19:27जरूरी है क्योंकि आपका ब्रेन हमेशा
- 1:19:30ऑब्जेक्टिव मेजरमेंट नहीं देता। वह आपकी
- 1:19:33हिस्ट्री, हैबिट्स, फिय्स और प्रीवियस
- 1:19:36फेलियर्स से प्रेडिक्शन बनाता है। अगर
- 1:19:38आपने 10 बार किसी काम को टाला है तो 11वीं
- 1:19:42बार आपका ब्रेन आपको बताएगा कि आप वैसे ही
- 1:19:45टालेंगे। अगर आपने किसी सब्जेक्ट में
- 1:19:48बार-बार लो मार्क्स देखे हैं तो अगली बार
- 1:19:51बुक [संगीत] खोलने से पहले ही माइंड कह
- 1:19:53सकता है तू इसमें अच्छा नहीं है। अगर आपने
- 1:19:56जिम कई बार शुरू करके छोड़ा [संगीत] है तो
- 1:19:58अगली बार आपका ब्रेन कह सकता है फिर दो
- 1:20:01हफ्ते बाद छोड़ देगा। अगर आपने कोडिंग
- 1:20:04शुरू की और बार-बार कंफ्यूज्ड हुए तो अगली
- 1:20:07बार लैपटॉप खोलते ही रेजिस्टेंस आ सकता
- 1:20:10है। अगर आपने YouTube चैनल शुरू किया और
- 1:20:13व्यूज नहीं आए तो अगली वीडियो अपलोड करने
- 1:20:16से पहले ही माइंड कह सकता है कोई फायदा
- 1:20:18नहीं। यह प्रेडिक्शन रियलिटी नहीं है। यह
- 1:20:22पास्ट डाटा से बना हुआ एक्सपेक्टेशन है।
- 1:20:25और प्रॉब्लम तब शुरू होती है जब हम
- 1:20:28एक्सपेक्टेशन को डेस्टिनी समझ [संगीत]
- 1:20:30लेते हैं। गगिंस के लिए भी एक समय उसकी
- 1:20:33आइडेंटिटी उसके पास्ट से जुड़ी हुई थी।
- 1:20:36लेकिन अब पहली बार उसके सामने एक [संगीत]
- 1:20:39ऐसा टारगेट था जिसे पूरा करने के लिए
- 1:20:42पुराने वर्जन को काम नहीं करना था। उसे
- 1:20:45सिर्फ वजन कम नहीं करना था। उसे अपने
- 1:20:48रिलेशनशिप विद डिसकंफर्ट को बदलना था। उसे
- 1:20:52अपनी डेली रूटीन बदलनी थी। [संगीत]
- 1:20:54उसे अपने खाने, ट्रेनिंग, टाइम और अटेंशन
- 1:20:59को कंट्रोल करना था। उसे अपने बॉडी के
- 1:21:01साथ-साथ अपनी आइडेंटिटी पर काम करना था।
- 1:21:05और यही इंपॉसिबल गोल का असली काम है। एक
- 1:21:09बड़ा गोल आपको सिर्फ डेस्टिनेशन नहीं
- 1:21:11देता। वो आपको यह दिखाता है कि करंट वर्जन
- 1:21:15ऑफ यू उस डेस्टिनेशन के लिए पर्याप्त है
- 1:21:17या नहीं। मान लीजिए [संगीत] कोई स्टूडेंट
- 1:21:20कहता है मुझे अगले अटेम्प्ट में बहुत बड़ा
- 1:21:23रैंक चाहिए। ठीक है अब गोल सामने है लेकिन
- 1:21:27गोल बोलता नहीं। वो सिर्फ मिरर बन जाता
- 1:21:30है। वो पूछता है [संगीत] क्या तुम रोज
- 1:21:33उतना पढ़ते हो जितना तुम्हारी एंबिशन
- 1:21:36डिमांड करती है? क्या तुम्हारा [संगीत]
- 1:21:37फोन तुम्हारे कंट्रोल में है? क्या तुम
- 1:21:40डिफिकल्ट चैप्टर से भागते हो? क्या तुम
- 1:21:42सिर्फ वही पढ़ते हो जो आसान लगता है? क्या
- 1:21:45तुम टेस्ट देने से बचते हो? क्योंकि स्कोर
- 1:21:48खराब आने का डर है? क्या तुम रिवीजन को
- 1:21:50पोस्टपोन करते हो? क्या तुम्हारी
- 1:21:53प्रिपरेशन डाटा पर बेस्ड है या सिर्फ
- 1:21:55फीलिंग पर? अब गोल अनकंफर्टेबल हो गया
- 1:21:59क्योंकि प्रॉब्लम रैंक नहीं रही। प्रॉब्लम
- 1:22:02आइडेंटिटी बन गई। तुम कहते थे मैं सीरियस
- 1:22:05स्टूडेंट हूं। गोल पूछता है एविडेंस कहां
- 1:22:09है? तुम कहते थे मैं मेहनती हूं। गोल
- 1:22:13पूछता है तुम्हारी डेली [संगीत]
- 1:22:15कंसिस्टेंसी कहां है? तुम कहते थे मेरे
- 1:22:18अंदर पोटेंशियल है। गोल पूछता है [संगीत]
- 1:22:21तुमने उस पोटेंशियल को कितनी बार एक्शन
- 1:22:23में कन्वर्ट किया? और यही सवाल
- 1:22:26अनकंफर्टेबल होते हैं क्योंकि इंसान अपने
- 1:22:29बारे में एक पॉजिटिव [संगीत]
- 1:22:31इमेज रखना चाहता है। हम अपने आप को
- 1:22:33इंटेलिजेंट, हार्ड वर्किंग, डिसिप्लिंड और
- 1:22:37कैपेबल [संगीत] मानना चाहते हैं। लेकिन
- 1:22:39सेल्फ इमेज और एविडेंस के बीच गैप हो तो
- 1:22:42अंदर कॉन्फ्लिक्ट पैदा होता है। साइकोलॉजी
- 1:22:45में यह कॉन्फ्लिक्ट बहुत पावरफुल होता है।
- 1:22:48एक तरफ आपका डिजायर्ड आइडेंटिटी है। दूसरी
- 1:22:51तरफ आपका एक्चुअल बिहेवियर। और जब दोनों
- 1:22:55मैच नहीं करते तो दिमाग के पास दो रास्ते
- 1:22:58होते हैं। या तो बिहेवियर बदलो या
- 1:23:01एक्सप्लेनेशन बनाओ। मेरे पास टाइम नहीं
- 1:23:04था। घर का माहौल ठीक नहीं था। टीचर अच्छा
- 1:23:09नहीं था। पेपर डिफिकल्ट था। लक खराब था।
- 1:23:13बाकी लोग मुझसे आगे थे। इनमें [संगीत] से
- 1:23:16कुछ बातें सच भी हो सकती है। लेकिन
- 1:23:18प्रॉब्लम तब होती है जब एक्सप्लेनेशन
- 1:23:21एक्शन [संगीत] को रिप्लेस कर देती है।
- 1:23:23क्योंकि सरकमस्टेंस को एक्सप्लेन करने और
- 1:23:26उससे अपनी आइडेंटिटी डिफाइन करने में बहुत
- 1:23:29फर्क है। [संगीत] गगिंस की जर्नी का एक
- 1:23:31बड़ा लेसन यही है। आपके पास रीज़ंस हो सकते
- 1:23:34हैं। लेकिन रीज़ंस और रिस्पांसिबिलिटी एक
- 1:23:37दूसरे को कैंसिल नहीं करते। आपका पास्ट
- 1:23:40[संगीत] डिफिकल्ट हो सकता है। आपकी
- 1:23:42स्टार्टिंग लाइन अनफेयर हो सकती है। आपके
- 1:23:45पास रिसोर्सेज कम हो सकते हैं। आपको
- 1:23:48दूसरों से ज्यादा ऑब्सकल्स मिल सकते हैं।
- 1:23:51लेकिन अगर आपका लक्ष्य अभी भी आपके सामने
- 1:23:53खड़ा है तो एक पॉइंट पर आपको पूछना
- 1:23:56पड़ेगा। अब मेरे कंट्रोल में क्या है? यही
- 1:23:59अकाउंटेबिलिटी है और यही इंपॉसिबल गोल को
- 1:24:03मैनेजेबल बनाना शुरू करता है क्योंकि 106
- 1:24:06[संगीत] पाउंड्स देखकर ब्रेन पैनिक कर
- 1:24:09सकता है। लेकिन आज क्या करना है? यह
- 1:24:12क्वेश्चन मैनेजेबल है। पूरा फ्यूचर एक
- 1:24:14[संगीत] साथ नहीं जीना। आज का काम करना।
- 1:24:18यही कांसेप्ट आपकी जिंदगी के हर बड़े गोल
- 1:24:21पर लागू हो सकता है। आपको 4 साल की डिग्री
- 1:24:24पूरी करनी है। आज पूरी डिग्री नहीं करनी।
- 1:24:27आपको हजारों पेजेस पढ़ने हैं। आज हजारों
- 1:24:30पेजेस नहीं पढ़ने। आपको जॉब चाहिए। आज
- 1:24:34पूरी करियर नहीं बनानी। आपको फिट होना है।
- 1:24:38आज पूरी [संगीत] बॉडी ट्रांसफॉर्म नहीं
- 1:24:40करनी। आपको बिजनेस बनाना है। आज पूरा
- 1:24:43एंपायर नहीं बनाना। आपको स्किल सीखनी है।
- 1:24:47आज एक्सपर्ट नहीं बनना। आपको बस अगला
- 1:24:50मीनिंगफुल [संगीत]
- 1:24:51स्टेप लेना है। लेकिन यहां एक ट्रैप भी
- 1:24:54है। कई लोग छोटे स्टेप्स [संगीत] की बात
- 1:24:56सुनकर छोटे गोल्स रखने लगते हैं। यह दोनों
- 1:24:59अलग बातें हैं। गोल बड़ा हो सकता है। डेली
- 1:25:03एक्शन छोटा हो सकता है। यही पावरफुल
- 1:25:06कॉम्बिनेशन है। आपकी डेस्टिनेशन एंबिशियस
- 1:25:09हो सकती है। लेकिन आपका आज का काम सिंपल
- 1:25:12हो सकता है। और जब आप इस प्रिंसिपल को
- 1:25:14समझते हैं, तो इंपॉसिबल धीरे-धीरे [संगीत]
- 1:25:17साइकोलॉजिकल कैटेगरी से निकलकर प्रैक्टिकल
- 1:25:20प्रॉब्लम बन जाता है। प्रॉब्लम का मतलब यह
- 1:25:23नहीं कि वह इजी है। प्रॉब्लम का मतलब है
- 1:25:26इसे पार्ट्स में तोड़ा जा सकता है। अब
- 1:25:29इमेजिन कीजिए कि आप किसी पहाड़ के नीचे
- 1:25:32खड़े हैं। आप ऊपर देखते हैं। चोटी दिखाई
- 1:25:35देती है। बहुत दूर। आपका ब्रेन कहता है,
- 1:25:39मैं वहां कैसे पहुंचूंगा? सही क्वेश्चन यह
- 1:25:42नहीं है। सही क्वेश्चन है। पहला कदम कहां
- 1:25:46है? क्योंकि इंसान अक्सर पूरी स्टेयरकेस
- 1:25:49देखकर डर जाता है। [संगीत] लेकिन जिंदगी
- 1:25:52में आपको एक समय पर पूरी स्टेयरकेस क्लाइम
- 1:25:54नहीं करनी होती। आपको सिर्फ अगली सीढ़ी पर
- 1:25:57पैर रखना होता है और फिर अगली [संगीत] और
- 1:26:01फिर अगली यही रीजन है कि बिग गोल्स के लिए
- 1:26:04सिस्टम्स जरूरी होते हैं। मोटिवेशन आपको
- 1:26:07डेस्टिनेशन दिखा सकती है। लेकिन सिस्टम
- 1:26:10आपको आज का बिहेवियर देता है। आप कह सकते
- 1:26:13हैं मुझे साइबर सिक्योरिटी [संगीत]
- 1:26:15एक्सपर्ट बनना है। यह गोल है। लेकिन
- 1:26:18सिस्टम क्या है? आज नेटवर्किंग, कल
- 1:26:21लinक्स, फिर प्रोटोकॉल्स, फिर लैब्स।
- 1:26:25[संगीत]
- 1:26:25फिर ट्रबल शूटिंग, फिर प्रोजेक्ट्स, फिर
- 1:26:29सिक्योरिटी कांसेप्ट्स, फिर रेपेटिशन, फिर
- 1:26:32फेलियर, फिर करेक्शन, फिर डीपर प्रैक्टिस।
- 1:26:37गोल आपको डायरेक्शन देता है। सिस्टम आपको
- 1:26:40मूवमेंट देता है और मूवमेंट के बिना
- 1:26:42एंबिशन सिर्फ इमेजिनेशन है। यही चीज वेट
- 1:26:46लॉस में भी है। मुझे 25 किलो कम करना है।
- 1:26:50यह डेस्टिनेशन है। लेकिन सिस्टम खाने की
- 1:26:53ट्रैकिंग, एक्टिविटी, स्लीप, ट्रेनिंग,
- 1:26:57कंसिस्टेंसी, रिकवरी और रियलिस्टिक
- 1:27:01प्रोग्रेशन। आपको हर सुबह स्केल देखकर यह
- 1:27:04डिसाइड [संगीत] नहीं करना कि आपका सपना
- 1:27:07पॉसिबल है या नहीं। आपको प्रोसेस फॉलो
- 1:27:10करना है। यही बात [संगीत] स्टडी में है।
- 1:27:12मुझे टॉप रैंक चाहिए। ठीक? लेकिन डेली
- 1:27:16सिस्टम, स्टडी [संगीत] ब्लॉग्स, रिवीजन,
- 1:27:20क्वेश्चंस, मॉक टेस्ट्स, एरर एनालिसिस,
- 1:27:23[संगीत]
- 1:27:24वीक टॉपिक्स, स्लीप, रिपीट और सबसे
- 1:27:28इंपॉर्टेंट अपने परफॉर्मेंस [संगीत] डाटा
- 1:27:31से भागना नहीं। क्योंकि इंपॉसिबल गोल का
- 1:27:34सबसे खतरनाक हिस्सा गोल नहीं होता। सबसे
- 1:27:37खतरनाक हिस्सा है कि वो आपको फीडबैक देना
- 1:27:41शुरू कर देता है। अगर आप टेस्ट देते हैं
- 1:27:43और स्कोर कमाता है तो आपका ईगो कह सकता
- 1:27:47है। आज पेपर खराब था। लेकिन आपका सिस्टम
- 1:27:50[संगीत] पूछेगा। गलती कहां हुई? अगर
- 1:27:53वर्कआउट मिस हुआ तो ईगो कह [संगीत] सकता
- 1:27:56है। आज मूड नहीं था। अकाउंटेबिलिटी
- 1:27:59पूछेगी। क्यों? अगर वीडियो अपलोड नहीं हुई
- 1:28:03तो माइंड कह सकता है। टाइम नहीं मिला।
- 1:28:06टाइम ऑडिट पूछेगा। कहा गया यही वो डिफरेंस
- 1:28:10है जो धीरे-धीरे व्यक्ति को बदलता है। आप
- 1:28:13एक्सक्यूसेस खत्म नहीं करते। आप
- 1:28:15एक्सक्यूसेस की अथॉरिटी खत्म करते हैं।
- 1:28:18[संगीत] क्योंकि एक्सक्यूसेस आते रहेंगे।
- 1:28:20फियर भी आएगा, डाउट भी आएगा, लेजीनेस भी
- 1:28:24आएगी, कंपैरिजन भी आएगा। [संगीत]
- 1:28:27लेकिन अब डिसिशन इन फीलिंग्स के हाथ में
- 1:28:29नहीं होगा। और यह बहुत बड़ा साइकोलॉजिकल
- 1:28:33शिफ्ट है। क्योंकि हम अक्सर मानते हैं कि
- 1:28:35एक्शन से पहले कॉन्फिडेंस आना चाहिए।
- 1:28:38लेकिन कई बार रियलिटी उल्टी होती है।
- 1:28:41[संगीत] पहले एक्शन आता है। फिर एविडेंस
- 1:28:44मिलता है। फिर सेल्फ ट्रस्ट बनता है। फिर
- 1:28:47कॉन्फिडेंस बढ़ता है। फिर आइडेंटिटी बदलती
- 1:28:50है। आप पहली बार डिफिकल्ट चैप्टर पढ़ते
- 1:28:53हैं। आपको समझ नहीं आता। आप बैठते हैं,
- 1:28:56दोबारा पढ़ते हैं। क्वेश्चंस सॉल्व करते
- 1:28:59हैं। गलती होती है। फिर करेक्शन करते हैं।
- 1:29:03एक दिन वही चैप्टर थोड़ा आसान लगता है।
- 1:29:06आपका ब्रेन एविडेंस स्टोर करता है। मैं
- 1:29:09मुश्किल चीज से भागे बिना रह सकता हूं। यह
- 1:29:12[संगीत] कॉन्फिडेंस है। आपको पहले
- 1:29:14कॉन्फिडेंस नहीं मिला था। आपने बिहेवियर
- 1:29:18से कॉन्फिडेंस बनाया। इसी तरह कोई व्यक्ति
- 1:29:21पहली बार पब्लिक स्पीकिंग करता है, वॉइस
- 1:29:23शेक करती है, वर्ड्स भूलते हैं।
- 1:29:26एंबरेसमेंट होता है, लेकिन वो फिर करता
- 1:29:29है। फिर तीसरी बार, फिर दसवीं बार। अब
- 1:29:33ब्रेन के पास नया एविडेंस है। मैं
- 1:29:36अनकंफर्टेबल हो सकता हूं और फिर भी
- 1:29:38परफॉर्म कर सकता हूं। यह सेल्फ एफिकसी
- 1:29:41[संगीत]
- 1:29:42है और सेल्फ एफिकसी मोटिवेशनल कोर्ट से
- 1:29:45नहीं बनती। यह रिपीटेड एविडेंस से बनती
- 1:29:48है। गगिंस के ट्रांसफॉर्मेशन में भी यही
- 1:29:50पैटर्न दिखाई देता है। पहले एक इंपॉसिबल
- 1:29:54टारगेट, फिर ब्रूटल रियलिटी, फिर एक्शन,
- 1:29:58फिर एडप्टेशन, फिर फेलियर, फिर करेक्शन,
- 1:30:02फिर दोबारा एक्शन। उसने लगभग 3 महीनों में
- 1:30:06106 [संगीत] पाउंड्स कम किए और बड एस के
- 1:30:09लिए आगे बढ़ा। लेकिन उसके बाद ट्रेनिंग की
- 1:30:11कठिनाई और फिजिकल कॉन्सिक्वेंसेस ने
- 1:30:14[संगीत] यह भी दिखाया। कि किसी लक्ष्य तक
- 1:30:16पहुंच जाना और उसके लिए वास्तव में तैयार
- 1:30:19होना दो अलग बातें हैं। [संगीत] वो हेल
- 1:30:22वीक तक पहुंचा लेकिन स्ट्रेस फ्रैक्चर्स
- 1:30:24और निमोनिया के कारण आगे नहीं बढ़ सका और
- 1:30:27बाद में ट्रेनिंग में फिर से शुरुआत करनी
- 1:30:30पड़ी। यह हिस्सा बहुत इंपॉर्टेंट है।
- 1:30:33क्योंकि अगर हम सिर्फ ट्रांसफॉर्मेशन
- 1:30:35देखकर एक्साइटेड [संगीत] हो जाए तो कहानी
- 1:30:37का आधा हिस्सा मिस कर देंगे। उसने वेट कम
- 1:30:41[संगीत] कर लिया। लेकिन इसका मतलब यह नहीं
- 1:30:44था कि जर्नी खत्म हो गई। एक्चुअली [संगीत]
- 1:30:47एक इंपॉसिबल गोल अचीव करने के बाद अक्सर
- 1:30:50अगला इंपॉसिबल सामने आ जाता है और यही
- 1:30:54जिंदगी [संगीत] है। आप एग्जाम क्लियर करते
- 1:30:56हैं। फिर नेक्स्ट सेमेस्टर आप डिग्री पूरी
- 1:31:00करते हैं। [संगीत] फिर जॉब जॉब मिलती है।
- 1:31:03फिर परफॉर्मेंस बिजनेस शुरू करते हैं। फिर
- 1:31:06सर्वाइवल चैनल शुरू करते हैं। फिर
- 1:31:10कंसिस्टेंसी एक लेवल पर [संगीत] जीतने के
- 1:31:12बाद लाइफ आपको दूसरा लेवल देती है। इसलिए
- 1:31:16गोल का सबसे बड़ा फायदा ट्रॉफी नहीं है।
- 1:31:19गोल आपको [संगीत] स्ट्रांगर प्रोसेस बनाना
- 1:31:21सिखाता है और प्रोसेस के दौरान एक बहुत
- 1:31:24अनकंफर्टेबल चीज होती है। [संगीत] आपको
- 1:31:27अपने बारे में सच पता चलता है। आपको पता
- 1:31:30चलता है कि आप कहां वीक हैं। आप कहां
- 1:31:33इंपेशेंट हैं। आप कहां अटेंशन खोते हैं।
- 1:31:36आप कहां डिसकंफर्ट से भागते हैं। आप कहां
- 1:31:39अप्रूवल चाहते हैं। आप कहां फेलियर से
- 1:31:42डरते हैं? आप कहां अपने पोटेंशियल की बात
- 1:31:45करते हैं लेकिन उसका एविडेंस नहीं देते और
- 1:31:48यही वजह है कि बड़ा गोल कभी-कभी इतना
- 1:31:51पेनफुल होता है क्योंकि वो सिर्फ [संगीत]
- 1:31:53फ्यूचर नहीं दिखाता वो प्रेजेंट भी
- 1:31:56एक्सपोज करता है। आपको अपने फ्यूचर सेल्फ
- 1:31:59का सपना दिखता है और उसी समय आपका करंट
- 1:32:02सेल्फ [संगीत] सामने खड़ा होता है। दोनों
- 1:32:05के बीच डिस्टेंस दिखाई देती है और उस
- 1:32:08डिस्टेंस [संगीत] को देखकर दो रिएक्शंस हो
- 1:32:10सकते हैं। पहला मैं इतना पीछे हूं। छोड़ो।
- 1:32:15दूसरा ठीक है। गैप बड़ा है। अब इसे भरना
- 1:32:19शुरू करते हैं। पहला रिएक्शन इमोशन ड्रिवन
- 1:32:23है। दूसरा रिस्पांस रिस्पांसिबिलिटी
- 1:32:25ड्रिवन है। और यही वो मोमेंट है जहां
- 1:32:28एंबिशन मैच्योर होती है। क्योंकि इमच्योर
- 1:32:31[संगीत] एंबिशन सिर्फ रिजल्ट चाहती है।
- 1:32:33मैच्योर एंबिशन प्रोसेस की कीमत एक्सेप्ट
- 1:32:36करती है। आप कहते हैं मुझे सक्सेसफुल होना
- 1:32:40है। लेकिन सक्सेस की कीमत क्या है? बोरिंग
- 1:32:43रेपटीशन, डिलेड ग्रेटिफिकेशन, रिजेक्टेड
- 1:32:46[संगीत] अटेमप्ट्स, लॉन्ग पीरियड्स विदाउट
- 1:32:49विज़िबल रिजल्ट्स, लर्निंग, फेलियर, सेल्फ
- 1:32:53डाउट के बावजूद एक्शन। कई बार अकेले काम
- 1:32:56करना। और सबसे अनकंफर्टेबल चीज जब कोई
- 1:33:00आपको क्लैप नहीं कर रहा हो, तब भी काम
- 1:33:03करना। यहीं से पता चलता है कि आपका गोल
- 1:33:06वास्तव में आपका है या सिर्फ सोशल
- 1:33:09वैलिडेशन है। अगर आपका गोल सिर्फ इसलिए है
- 1:33:12क्योंकि Instagram पर सक्सेसफुल लोगों को
- 1:33:14देखकर आपको [संगीत] भी वैसा दिखना है तो
- 1:33:17पहली मुश्किल में मोटिवेशन गिर सकती है।
- 1:33:20लेकिन अगर गोल आपकी आइडेंटिटी और वैल्यू
- 1:33:23से जुड़ा है तो कठिन [संगीत] फेज में भी
- 1:33:25डायरेक्शन बची रहती है। और यही हमें एक और
- 1:33:28अनकंफर्टेबल ट्रुथ [संगीत] तक ले जाता है।
- 1:33:31कभी-कभी हमें इंपॉसिबल गोल इसलिए चाहिए
- 1:33:34क्योंकि [संगीत] कंफर्टेबल गोल हमें बदलता
- 1:33:37ही नहीं। अगर आपने ऐसा टारगेट रखा जिसे आप
- 1:33:41बिना रूटीन बदले अचीव कर सकते हैं तो शायद
- 1:33:44आपको अपनी आइडेंटिटी बदलने की जरूरत नहीं
- 1:33:47पड़ेगी। आप वही रहेंगे, वही हैबिट्स, वही
- 1:33:52डिस्ट्रैक्शंस, वही एक्सक्यूसेस, [संगीत]
- 1:33:55वही एनवायरमेंट। लेकिन जब गोल बड़ा होता
- 1:33:58है तो वह आपकी एकिस्टिंग लाइफ स्टाइल से
- 1:34:00टकराता है। आपको चुनना पड़ता है। गोल
- 1:34:04बदलना है या खुद को बदलना है और यहीं से
- 1:34:07ट्रांसफॉर्मेशन शुरू होता है। मान लीजिए
- 1:34:10आप कहते हैं मुझे अपनी लाइफ बदलनी है।
- 1:34:13लेकिन रोज रात 2:00 बजे तक फोन चलाते हैं।
- 1:34:16सुबह उठने में प्रॉब्लम होती है।
- 1:34:18इंपॉर्टेंट काम पोस्टपोन करते हैं।
- 1:34:21डिफिकल्ट चीजों से बचते हैं। फिर कहते हैं
- 1:34:24मेरे पास डिसिप्लिन नहीं है। शायद
- 1:34:27प्रॉब्लम डिसिप्लिन की कमी से ज्यादा
- 1:34:29आइडेंटिटी [संगीत]
- 1:34:29की है। क्योंकि अगर आपकी करंट आइडेंटिटी
- 1:34:32कहती है मैं ऐसा ही हूं। तो हर नया हैबिट
- 1:34:37उस आइडेंटिटी के खिलाफ जाएगा। आप सुबह
- 1:34:40जल्दी उठने की कोशिश करेंगे। ब्रेन कहेगा
- 1:34:44हम तो लेट स्लीपर हैं। आप पढ़ने बैठेंगे।
- 1:34:48ब्रेन कहेगा हमसे कंसिस्टेंसी नहीं होती।
- 1:34:52आप वर्कआउट करेंगे। ब्रेन कहेगा हम जिम
- 1:34:56वाले पर्सन नहीं हैं। आप कंटेंट बनाएंगे।
- 1:34:59ब्रेन कहेगा लोग क्या सोचेंगे? यह इंटरनल
- 1:35:03रेजिस्टेंस है और रेजिस्टेंस का मतलब
- 1:35:06हमेशा यह नहीं कि आप गलत डायरेक्शन में जा
- 1:35:09रहे हैं। कभी-कभी रेजिस्टेंस सिर्फ यह
- 1:35:12सिग्नल होता है कि आप फमिलियर आइडेंटिटी
- 1:35:14से बाहर निकल रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह
- 1:35:18भी नहीं कि हर डिसकंफर्ट बेनिफिशियल है।
- 1:35:21यही बैलेंस समझना [संगीत] जरूरी है।
- 1:35:23हेल्दी डिसकंफर्ट और हार्मफुल डैमेज एक
- 1:35:26चीज नहीं है। ग्रोथ के लिए [संगीत] चैलेंज
- 1:35:29चाहिए। लेकिन इंजरी को इग्नोर करना टफनेस
- 1:35:32नहीं है। एग्जॉशन को ग्लोरिफाई करना
- 1:35:35डिसिप्लिन नहीं है। हेल्थ को डिस्ट्रॉय
- 1:35:38करना कमिटमेंट नहीं है। और यही कारण है कि
- 1:35:41गगिंस की एक्सट्रीम एक्सपीरियंसेस [संगीत]
- 1:35:43को फिलॉसफी की तरह समझना चाहिए। टेंपलेट
- 1:35:46की तरह नहीं। आपको उसके शरीर की लिमिट्स
- 1:35:49[संगीत] कॉपी नहीं करनी है। आपको उसकी
- 1:35:51सेल्फ कंफ्रंटेशन की हैबिट्स समझनी है।
- 1:35:54उसका सवाल समझना है। क्या मैं सच में अपनी
- 1:35:57पूरी कैपेसिटी यूज कर रहा हूं? [संगीत] और
- 1:36:00यह सवाल आपके लिए भी पावरफुल हो सकता है।
- 1:36:03आज रात जब आप अकेले हो अपने आप से पूछिए।
- 1:36:08मेरे लाइफ का कौन सा [संगीत] एरिया सिर्फ
- 1:36:10इसलिए रुका हुआ है क्योंकि मैंने पहले ही
- 1:36:13मान लिया है कि मैं ऐसा ही हूं। कौन सा
- 1:36:16गोल मैं जेनुनली [संगीत] चाहता हूं लेकिन
- 1:36:18उसके लिए अनकंफर्टेबल प्राइस देने से बचता
- 1:36:21हूं। किस चीज के लिए मैं लगातार
- 1:36:24एक्सक्यूसेस देता हूं। कहां मैं अपनी
- 1:36:26सरकमस्ट्ससेस को एक्सप्लेनेशन से
- 1:36:29आइडेंटिटी बना चुका हूं। और सबसे
- 1:36:32इंपॉर्टेंट अगर मैं अगले 12 महीने वही
- 1:36:34हैबिट्स रिपीट करता रहा जो आज कर रहा हूं
- 1:36:38तो मेरी लाइफ कहां पहुंचेगी? यह क्वेश्चन
- 1:36:41डेंजरस इसलिए है क्योंकि इसका आंसर
- 1:36:43मोटिवेशनल नहीं होगा। यह मैथमेटिकल होगा।
- 1:36:47अगर डेली बिहेवियर वही रहेगा तो रिजल्ट भी
- 1:36:50लार्जली वही डायरेक्शन फॉलो करेगा। और
- 1:36:53[संगीत] यहीं से अकाउंटेबिलिटी फिर वापस
- 1:36:56आती है। आप फ्यूचर को कंट्रोल नहीं कर
- 1:36:58सकते। लेकिन फ्यूचर की प्रोबेबिलिटी को
- 1:37:01अपने डेली डिसिशन से इन्फ्लुएंस कर सकते
- 1:37:04हैं। आप यह गारंटी नहीं कर सकते कि आप
- 1:37:07सक्सेसफुल [संगीत] होंगे। लेकिन आप यह तय
- 1:37:10कर सकते हैं कि आप तैयारी कितनी ईमानदारी
- 1:37:13से करेंगे। आप यह गारंटी नहीं कर सकते कि
- 1:37:16कोई आपको सेलेक्ट करेगा। लेकिन आप यह तय
- 1:37:20कर सकते हैं कि आपकी स्किल कितनी [संगीत]
- 1:37:22स्ट्रांग होगी। आप यह गारंटी नहीं कर सकते
- 1:37:25कि वीडियो वायरल होगी। लेकिन आप यह तय कर
- 1:37:28सकते हैं कि आपकी नेक्स्ट वीडियो पिछली
- 1:37:30[संगीत] वीडियो से बेहतर होगी या नहीं। आप
- 1:37:33यह गारंटी नहीं कर सकते कि कंपटीशन कमजोर
- 1:37:36होगा।
- 1:37:37लेकिन आप यह तय कर सकते हैं कि आप खुद
- 1:37:40कितने प्रिपयर्ड होंगे। यही एजेंसी है और
- 1:37:43एजेंसी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह
- 1:37:47आपको विक्टिम पोजीशन से बाहर निकालती है।
- 1:37:50अब आप दुनिया से यह नहीं [संगीत] पूछते।
- 1:37:52मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? आप पूछते हैं। अब
- 1:37:56मैं इसके साथ क्या करूं? यह छोटा सा
- 1:37:58[संगीत] लैंग्वेज शिफ्ट बहुत बड़ा
- 1:38:00साइकोलॉजिकल शिफ्ट हो सकता है। मेरे पास
- 1:38:03टाइम नहीं है। से मुझे अपना टाइम [संगीत]
- 1:38:06कहां से निकालना होगा? मैं इंटेलिजेंट
- 1:38:08नहीं हूं। से [संगीत]
- 1:38:11मुझे किस स्किल पर ज्यादा रेपेटिशंस
- 1:38:13चाहिए? मेरे रिसोर्सेज कम है। [संगीत]
- 1:38:16से अवेलेबल रिसोर्सेज से मैं मैक्सिमम
- 1:38:19क्या कर सकता हूं? [संगीत] मैं पहले फेल
- 1:38:22हो चुका हूं।
- 1:38:24से पिछली फेलियर ने मुझे क्या [संगीत]
- 1:38:26इंफॉर्मेशन दी? यह पॉजिटिव थिंकिंग नहीं
- 1:38:29है। यह रिस्पांसिबिलिटी थिंकिंग है और
- 1:38:32[संगीत] रिस्पांसिबिलिटी हमेशा कंफर्टेबल
- 1:38:34नहीं होती। क्योंकि वंस यू एक्सेप्ट
- 1:38:37रिस्पांसिबिलिटी एक्सक्यूसेस की पावर कम
- 1:38:40हो जाती है। अब ब्लेम करने के लिए कोई
- 1:38:42आसान जगह नहीं बचती। और यही इंपॉसिबल गोल
- 1:38:46[संगीत] धीरे-धीरे एक ट्रेनिंग ग्राउंड बन
- 1:38:48जाता है। आप सिर्फ गोल अचीव करने के लिए
- 1:38:51काम नहीं कर रहे। आप उस व्यक्ति को बिल्ड
- 1:38:54कर रहे हैं जो उस गोल के योग्य हो और यही
- 1:38:58डिफरेंस बहुत डीप है क्योंकि अगर आपने
- 1:39:00सिर्फ रिजल्ट पाया लेकिन प्रोसेस में खुद
- 1:39:03को बिल्ड नहीं किया तो अगली मुश्किल फिर
- 1:39:06आपको वही खड़ा कर देगी। लेकिन अगर प्रोसेस
- 1:39:09ने आपकी डिसिप्लिन, सेल्फ ट्रस्ट, फोकस,
- 1:39:13कंसिस्टेंसी और डिसकंफर्ट टॉलरेंस बढ़ा दी
- 1:39:16तो अगली मुश्किल पहले जैसी नहीं लगेगी। आप
- 1:39:19बदल चुके होंगे और शायद यही गगिंस की
- 1:39:23कहानी का सबसे पावरफुल हिस्सा है। 297
- 1:39:27पाउंड से [संगीत] 191 पाउंड्स तक पहुंचना
- 1:39:30सिर्फ स्केल पर नंबर बदलना नहीं था।
- 1:39:33[संगीत] यह एक पुराने सेल्फ इमेज को
- 1:39:34चैलेंज करना था। लेकिन असली कहानी वेट लॉस
- 1:39:38पर खत्म नहीं हुई। क्योंकि अब सामने एक और
- 1:39:41टेस्ट था। एक ऐसा एनवायरमेंट जहां सिर्फ
- 1:39:45इच्छा काफी नहीं थी। जहां बॉडी, माइंड,
- 1:39:49प्रेपरेशन और प्रेशर एक साथ [संगीत] टेस्ट
- 1:39:51होने वाले थे। जहां आपका ब्रेन बार-बार
- 1:39:55आपको एक ही मैसेज देगा। बस अब बहुत हुआ।
- 1:39:59और अगला लेसन इसी सवाल के सामने खड़ा है।
- 1:40:02जब कंफर्ट छोड़ने का डिसीजन आप खुद लेते
- 1:40:05हैं। तो क्या होता है? जब डिस्कंफर्ट आपकी
- 1:40:08परमिशन के बिना आपकी जिंदगी में घुस
- 1:40:11[संगीत] आता है क्योंकि गोल चुनना एक बात
- 1:40:13है। लेकिन उस गोल की कीमत चुकाते रहना तब
- 1:40:16जब एक्साइटमेंट [संगीत] खत्म हो चुकी हो।
- 1:40:19वो पूरी तरह दूसरी लड़ाई है। हम उस फीलिंग
- 1:40:23से भाग रहे होते हैं जो टास्क हमारे अंदर
- 1:40:26पैदा करता है। यह डिस्टिंशन बहुत
- 1:40:29इंपॉर्टेंट है। क्योंकि अगर प्रॉब्लम
- 1:40:31टास्क होती तो टास्क बदलने से स्यूशन मिल
- 1:40:34जाता। लेकिन अगर प्रॉब्लम, डिस्कंफर्ट,
- 1:40:37टॉलरेंस है तो आप टास्क बदलते रहेंगे और
- 1:40:40पैटर्न वही रहेगा। आज पढ़ाई से भागोगे। कल
- 1:40:44जिम से, परसों बिजनेस [संगीत] से, फिर
- 1:40:47किसी नई स्किल से, फिर किसी रिलेशनशिप की
- 1:40:51डिफिकल्ट कन्वर्सेशन से और हर जगह एक नया
- 1:40:54रीजन मिलेगा। लेकिन अंदर का पैटर्न वही
- 1:40:57रहेगा। जैसे ही [संगीत] अनकंफर्टेबल हुआ
- 1:41:01एस्केप। यही पैटर्न अगर सालों तक चलता रहे
- 1:41:05तो इंसान धीरे-धीरे अपने बारे में एक
- 1:41:08बिलीफ बना लेता है। मैं कंसिस्टेंट नहीं
- 1:41:10हूं। ध्यान दीजिए। पहले बिहेवियर था। फिर
- 1:41:15बिहेवियर रिपीट हुआ। फिर पैटर्न बना। फिर
- 1:41:19पैटर्न से आइडेंटिटी बनी और फिर आइडेंटिटी
- 1:41:23बिहेवियर को कंट्रोल करने लगी। यानी एक
- 1:41:26साइकिल बन गई। आप कहते हो मैं ऐसा ही हूं।
- 1:41:31[संगीत]
- 1:41:31और क्योंकि आप ऐसा मानते हो आप वैसा ही
- 1:41:35बिहेव करते हो। फिर आपका बिहेवियर उस
- 1:41:38बिलीफ को और स्ट्रांग कर देता है। यही
- 1:41:40सेल्फ इमेज का ट्रैप है। इसे तोड़ने के
- 1:41:43लिए आपको पहले दिन से एक्स्ट्राऑर्डिनरी
- 1:41:46बनने की जरूरत नहीं है। आपको सिर्फ साइकिल
- 1:41:49में एक छोटा इंटरप्शन चाहिए। एक ऐसा
- 1:41:52मोमेंट जहां डिसकंफर्ट [संगीत] आए और आप
- 1:41:54तुरंत एस्केप ना करें। मान लीजिए आपका मन
- 1:41:58कह रहा है आज पढ़ाई नहीं होगी। आप पूरा
- 1:42:02दिन प्रोडक्टिव बनने की कोशिश मत कीजिए।
- 1:42:05बस 10 या 20 मिनट बैठ जाइए। माइंड कहेगा
- 1:42:09कुछ समझ नहीं आ रहा। फिर भी थोड़ी देर
- 1:42:12बैठे रहिए। क्वेश्चन सॉल्व नहीं हो रहा।
- 1:42:15एक और अटेम्प्ट गलती हो गई। एरर देखिए।
- 1:42:19आपका उद्देश्य उस दिन जीनियस बनना नहीं
- 1:42:22है। आपका उद्देश्य अपने ब्रेन को एक नया
- 1:42:25एविडेंस देना है। डिसकंफर्ट आते ही मैं
- 1:42:28भागता नहीं हूं। यह छोटा एविडेंस [संगीत]
- 1:42:32फ्यूचर आइडेंटिटी को बदल सकता है। यही
- 1:42:35कारण है कि छोटे चैलेंजेस साइकोलॉजिकली
- 1:42:38पावरफुल होते हैं। क्योंकि आप सिर्फ टास्क
- 1:42:40कंप्लीट नहीं कर रहे। आप अपने ब्रेन को
- 1:42:43ट्रेन कर रहे हैं। हर बार जब आप
- 1:42:46अनकंफर्टेबल सिचुएशन में रहते हैं और
- 1:42:49कंट्रोलोल्ड तरीके से [संगीत] काम पूरा
- 1:42:50करते हैं। आपका सेल्फ इमेज थोड़ा बदलता
- 1:42:53है। पहले आप कहते थे मैं मुश्किल काम नहीं
- 1:42:57कर सकता। फिर एक दिन एविडेंस मिलता है।
- 1:43:00मैं मुश्किल काम कर सकता हूं। भले ही मुझे
- 1:43:03अच्छा फील ना हो। यह कॉन्फिडेंस का ज्यादा
- 1:43:07रियलिस्टिक वर्जन [संगीत] है। कॉन्फिडेंस
- 1:43:09का मतलब यह नहीं कि आपको डर नहीं लगता।
- 1:43:13कॉन्फिडेंस का मतलब कई बार यह होता है
- 1:43:15[संगीत] कि डर के बावजूद आपको पता है कि
- 1:43:18आप एक्शन ले सकते हैं और यही डिफरेंस बहुत
- 1:43:21बड़ा है क्योंकि अगर आप कॉन्फिडेंस आने
- 1:43:24[संगीत] का वेट करेंगे तो हो सकता है आप
- 1:43:27बहुत देर तक वेट करते रहें। नई जॉब के लिए
- 1:43:29अप्लाई करने से पहले कॉन्फिडेंस चाहिए।
- 1:43:32[संगीत]
- 1:43:32इंटरव्यू देने से पहले कॉन्फिडेंस चाहिए।
- 1:43:35वीडियो अपलोड करने से पहले कॉन्फिडेंस
- 1:43:38चाहिए। पब्लिक स्पीकिंग [संगीत] से पहले
- 1:43:40कॉन्फिडेंस चाहिए। जिम जाने से पहले
- 1:43:43कॉन्फिडेंस चाहिए। [संगीत] एग्जाम की
- 1:43:45तैयारी शुरू करने से पहले कॉन्फिडेंस
- 1:43:48चाहिए। लेकिन कॉन्फिडेंस कहां से आएगा?
- 1:43:51एक्शन से। और एक्शन कहां से आएगा? एक छोटे
- 1:43:55डिसिशन से। मैं अभी शुरू करता हूं। बस
- 1:44:00आपका ब्रेन शायद रेजिस्टेंस देगा। लेकिन
- 1:44:03आपको रेजिस्टेंस के साथ नेगोशिएट करना
- 1:44:05सीखना होगा। यहां एक सल डिफरेंस है।
- 1:44:09रेजिस्टेंस को इग्नोर करना। और रेजिस्टेंस
- 1:44:12को समझना अलग [संगीत] चीजें हैं। अगर आप
- 1:44:15थके हुए हैं, रिकवरी चाहिए तो रेस्ट जरूरी
- 1:44:18हो सकता है। अगर शरीर में इंजरी है तो उसे
- 1:44:22इग्नोर करना टफनेस नहीं है। अगर कोई टास्क
- 1:44:25[संगीत] जेनुइनली अनसेफ है तो सिर्फ
- 1:44:27डिसकंफर्ट के नाम पर उसमें कूदना
- 1:44:29स्टुपिडिटी हो सकती है। [संगीत] इसलिए
- 1:44:31डिस्कंफर्ट ट्रेनिंग का मतलब पेन वरशिप
- 1:44:34नहीं है। इसका मतलब है जहां सेफ और
- 1:44:37रीज़नेबल चैलेंज मौजूद है। वहां सिर्फ
- 1:44:40इसलिए पीछे मत हटो क्योंकि वह अनकंफर्टेबल
- 1:44:43है। यह डिस्टिंशन बहुत जरूरी है क्योंकि
- 1:44:46गगिंस की स्टोरी एक्सट्रीम फिजिकल
- 1:44:48एनवायरमेंट्स से जुड़ी हुई है। लेकिन
- 1:44:51व्यूअर के लिए उसका सबसे यूज़फुल लेसन
- 1:44:54किसी एक्सट्रीम फिजिकल चैलेंज को कॉपी
- 1:44:56करना नहीं है। यूज़फुल [संगीत] लेसन है
- 1:44:59अपने डेली लाइफ में कंट्रोल डिसकंफर्ट की
- 1:45:02मात्रा बढ़ाना। आपको हेल वीक नहीं चाहिए।
- 1:45:06आपको अपने फोन के साथ डिसिप्लिन चाहिए।
- 1:45:09आपको 100 माइल रेज नहीं चाहिए। आपको रोज
- 1:45:12का कंसिस्टेंट वर्कआउट चाहिए। आपको
- 1:45:15मिलिट्री ट्रेनिंग नहीं चाहिए। आपको अपने
- 1:45:18कमिटमेंट्स निभाने की हैबिट चाहिए। आपको
- 1:45:21खुद को डिस्ट्रॉय नहीं करना। आपको खुद
- 1:45:24[संगीत] से किए छोटे प्रॉमिससेस तोड़ना
- 1:45:26बंद करना है। यही असली शुरुआत है। सोचिए
- 1:45:30अगर आपने खुद से कहा आज रात 10:00 बजे के
- 1:45:33बाद फोन नहीं और 10:00 बजे फोन हाथ में
- 1:45:36आया [संगीत] तभी असली ट्रेनिंग शुरू होती
- 1:45:39है। उस मोमेंट में कोई ऑडियंस नहीं है।
- 1:45:42कोई कैमरा नहीं। कोई मोटिवेशनल म्यूजिक
- 1:45:45[संगीत] नहीं, कोई अप्लॉस नहीं। बस आप और
- 1:45:49आपका इंपल्स। और अगर उस मोमेंट पर आप
- 1:45:52डिसीजन बदल देते हैं तो बाहर से कुछ नहीं
- 1:45:55हुआ [संगीत] लेकिन अंदर कुछ हुआ। आपने
- 1:45:58अपने ब्रेन को सिग्नल दिया। मेरी इच्छा
- 1:46:02मेरी कमांड नहीं है। अगली बार रेजिस्टेंस
- 1:46:05थोड़ा आसान हो सकता है। फिर एक और बार।
- 1:46:08फिर एक और। यही डिसिप्लिन बिल होती है और
- 1:46:12यही रीजन है कि छोटे नॉन नेगोशिएबल्स
- 1:46:15पावरफुल होते हैं क्योंकि वे आपको अपने
- 1:46:18ऊपर भरोसा करना सिखाते हैं। मान लीजिए
- 1:46:21आपने तय किया कि रोज 30 मिनट स्किल
- 1:46:24प्रैक्टिस करेंगे। एक दिन मोटिवेशन है। आप
- 1:46:2790 मिनट कर लेते हैं। दूसरे दिन मोटिवेशन
- 1:46:30नहीं है। आप जीरो कर देते हैं। इससे आपका
- 1:46:34ब्रेन क्या सीखता है कि आपका बिहेवियर मूड
- 1:46:37पर डिपेंड करता है। अब दूसरा तरीका देखिए।
- 1:46:40आप तय करते हैं मिनिमम 30 मिनट्स। मूड
- 1:46:44अच्छा है 30 से ज्यादा करो। मूड खराब है
- 1:46:48फिर भी मिनिमम पूरा करो। यह बोरिंग लग
- 1:46:51सकता है, लेकिन बोरिंग [संगीत]
- 1:46:53कंसिस्टेंसी ही आइडेंटिटी बदलती है
- 1:46:56क्योंकि अब आप खुद को यह एविडेंस दे रहे
- 1:46:58हैं। मैं अपने मूड का स्लेव नहीं हूं।
- 1:47:02यही वो क्वालिटी है जिसकी जरूरत बड़े
- 1:47:04गोल्स [संगीत] में होती है। क्योंकि बड़े
- 1:47:06गोल्स में एक्साइटमेंट टेंपरेरी होती है।
- 1:47:09पहले दिन नया जिम एक्साइटिंग है। पहले दिन
- 1:47:12नया लैपटॉप एक्साइटिंग है। पहले दिन नया
- 1:47:15कोर्स एक्साइटिंग है। पहले दिन YouTube
- 1:47:18चैनल एक्साइटिंग है। पहले दिन [संगीत]
- 1:47:20बिजनेस आईडिया एक्साइटिंग है। लेकिन कुछ
- 1:47:23हफ्तों बाद नोवेल्टी खत्म हो जाती है। अब
- 1:47:26सिर्फ प्रोसेस [संगीत] बचता है और यही
- 1:47:28अधिकांश लोग डिसअपीयर हो जाते हैं।
- 1:47:31क्योंकि उन्हें रिजल्ट चाहिए था। प्रोसेस
- 1:47:34नहीं। उन्हें ट्रांसफॉर्मेशन की फोटो
- 1:47:36चाहिए थी। ट्रांसफॉर्मेशन [संगीत] के
- 1:47:39बोरिंग डेज नहीं। उन्हें सक्सेस स्टोरी
- 1:47:41चाहिए थी। फेलियर और रेपेटेशन नहीं। लेकिन
- 1:47:45रियलिटी यह है कि आइडेंटिटी
- 1:47:47ट्रांसफॉर्मेशन ग्लैमरस नहीं होती। कई बार
- 1:47:50वो बहुत बोरिंग होती है। सुबह उठना, काम
- 1:47:54करना, गलती करना, सीखना, फिर काम करना फिर
- 1:47:59वही। कोई देख नहीं रहा। कोई तारीफ नहीं कर
- 1:48:03रहा। कोई गारंटी नहीं है कि रिजल्ट आएगा।
- 1:48:07फिर [संगीत] भी आप करते हैं। यही वो पॉइंट
- 1:48:09है जहां डिसिप्लिन मोटिवेशन से अलग
- 1:48:11[संगीत] हो जाती है। मोटिवेशन पूछती है।
- 1:48:14मेरा मन है डिसिप्लिन पूछती है। मेरी
- 1:48:17रिस्पांसिबिलिटी क्या है? और दोनों के बीच
- 1:48:20[संगीत]
- 1:48:20यही डिफरेंस फ्यूचर बनाता है। गगिंस के
- 1:48:23लिए वेट लॉस का फेज सिर्फ फिजिकल [संगीत]
- 1:48:26ट्रांसफॉर्मेशन नहीं था। वो एक तरह का
- 1:48:29फोर्स कॉन्फ्रंटेशन था। उसने अपने पुराने
- 1:48:32लाइफस्टाइल और अपने नए गोल के बीच
- 1:48:34कॉन्फ्लिक्ट देखा। अगर उसे नेवी सील बनना
- 1:48:38था तो उसे अपने करंट हैबिट्स के साथ उस
- 1:48:41गोल को नहीं [संगीत] मिला सकता था। यही
- 1:48:43बात आपकी लाइफ में भी लागू होती है। अगर
- 1:48:46आप कहते हैं मुझे टॉप लेवल करियर चाहिए तो
- 1:48:50शायद आपको टॉप लेवल डिस्ट्रैक्शंस कम करने
- 1:48:53पड़ेंगे। अगर आप कहते हैं मुझे स्ट्रांग
- 1:48:56बॉडी चाहिए तो शायद आपको ईटिंग और
- 1:48:59ट्रेनिंग में कंसिस्टेंसी लानी पड़ेगी।
- 1:49:02अगर आप कहते हैं मुझे फाइनेंशियल फ्रीडम
- 1:49:05चाहिए तो शायद आपको शॉर्ट टर्म
- 1:49:08एंटरटेनमेंट और लॉन्ग टर्म स्किल [संगीत]
- 1:49:10के बीच चॉइससेस करनी होंगी। अगर आप कहते
- 1:49:13हैं मुझे एक सक्सेसफुल चैनल बनाना है तो
- 1:49:16शायद आपको सिर्फ वीडियोस बनाना नहीं बल्कि
- 1:49:19राइटिंग, रिसर्च, थंबनेल्स, [संगीत]
- 1:49:22ऑडियंस साइकोलॉजी, एनालिटिक्स और
- 1:49:25कंसिस्टेंसी सीखनी पड़ेगी। गोल जितना बड़ा
- 1:49:28होगा उतनी ही साफ दिखाई देगी कि आपकी करंट
- 1:49:32आइडेंटिटी कहां तक जा सकती है और यह
- 1:49:34रियलाइजेशन अनकंफर्टेबल हो सकती है।
- 1:49:37क्योंकि तब आप यह नहीं कह सकते। [संगीत]
- 1:49:40मुझे बस एक मौका चाहिए क्योंकि शायद आपको
- 1:49:43मौका मिला हुआ है। आपको बस अपने पुराने
- 1:49:46हैबिट्स छोड़ने पड़ेंगे और यही ईगो
- 1:49:49रेजिस्टेंस करती है क्योंकि ओल्ड हैबिट्स
- 1:49:52सिर्फ एक्शंस नहीं है। वे फमिलियर
- 1:49:55आइडेंटिटी है। अगर आपने 5 साल से
- 1:49:58प्रोक्रेस्टिनेट किया है तो
- 1:49:59प्रोक्रेस्टिनेशन आपके लिए सिर्फ [संगीत]
- 1:50:01हैबिट नहीं रहा। वो फमिलियर एनवायरमेंट बन
- 1:50:04चुका है। अगर आपने हमेशा प्रेशर में काम
- 1:50:07किया है तो लास्ट मिनट प्रिपरेशन भी नॉर्म
- 1:50:10लग सकती है। अगर आपने हर प्रॉब्लम पर
- 1:50:12ब्लेम किया है तो अकाउंटेबिलिटी
- 1:50:15अनकंफर्टेबल लगेगी। अगर आपने हमेशा आसान
- 1:50:18काम चुना है तो डिफिकल्ट वर्क [संगीत]
- 1:50:21अननेसेसरीली पेनफुल लगेगा। और जब आप बदलना
- 1:50:24शुरू करते हैं तो आपका ब्रेन आपको वापस
- 1:50:28फमिलियर टेरिटरी में खींचने की कोशिश कर
- 1:50:30सकता है। इसीलिए शुरुआत में डिसिप्लिन कई
- 1:50:33बार अननेचुरल लगती है। आप गलत नहीं कर रहे
- 1:50:36होते। आप अनफमिलियर बिहेवियर कर रहे होते
- 1:50:39हैं। यह फर्क समझना बहुत इंपॉर्टेंट है।
- 1:50:42[संगीत] जब कोई स्टूडेंट पहली बार रोज
- 1:50:44कंसिस्टेंटली पढ़ना शुरू करता है तो उसे
- 1:50:47लगेगा। मैं इतना डिसिप्लिन कैसे रहूं? जब
- 1:50:51कोई व्यक्ति पहली बार फोन बाउंड्रीज बनाता
- 1:50:53है, उसे लगेगा। इतना बोरिंग क्यों लग रहा
- 1:50:57है? जब कोई क्रिएटर पहली बार बिना व्यूज
- 1:50:59के महीनों तक कंटेंट बनाता है, उसे लगेगा।
- 1:51:03क्या मैं टाइम वेस्ट कर रहा हूं? जब कोई
- 1:51:06जॉब सीकर रिजेक्शन के बाद फिर
- 1:51:08एप्लीकेशनेशंस भेजता है, उसे लगेगा। कितनी
- 1:51:11बार [संगीत] और? यही रेजिस्टेंस है और
- 1:51:14इसका स्यूशन हमेशा मोटिवेशन नहीं होता।
- 1:51:18कभी-कभी स्यूशन [संगीत] सिर्फ यह है कि आप
- 1:51:20डिसीजन को इमोशनल डिबेट ना बनने दें। अगर
- 1:51:23आपने पहले ही तय किया है कि आज 30 मिनट
- 1:51:26पढ़ना है तो 7:00 बजे बैठकर यह डिबेट मत
- 1:51:30शुरू करो कि पढ़ना चाहिए या नहीं। क्योंकि
- 1:51:32अगर हर कमिटमेंट एग्जीक्यूशन से पहले
- 1:51:35नेगोशिएशन बन जाएगा तो आपका ब्रेन हर बार
- 1:51:38इजीिएस्ट ऑप्शन खोजेगा। डिसीजन पहले,
- 1:51:42एक्शन बाद में, इमोशन बाद में आए तो आने
- 1:51:45दो। यही मेंटल टफनेस का एक प्रैक्टिकल
- 1:51:48वर्जन है। आपको अपने इमोशंस को मारना नहीं
- 1:51:51है। आपको उन्हें स्टीयरिंग व्हील [संगीत]
- 1:51:54से हटाना है। क्योंकि फियर यूज़फुल इन दे
- 1:51:57सकता है। डाउट यूज़फुल फीडबैक दे सकता है।
- 1:52:00फटीग रिकवरी की जरूरत बता सकती है। लेकिन
- 1:52:03हर अनकंफर्टेबल फीलिंग को [संगीत] स्टॉप
- 1:52:06कमांड मान लेना प्रॉब्लम है। कभी-कभी
- 1:52:09फीलिंग सिर्फ फीलिंग होती है। आप नर्वस
- 1:52:12है। फिर भी इंटरव्यू दीजिए। आप कंफ्यूज्ड
- 1:52:15हैं। फिर भी सीखना शुरू कीजिए। आप
- 1:52:18एंबरेस्ड हैं। फिर भी क्वेश्चन [संगीत]
- 1:52:21पूछिए। आपको लगता है लोग जज करेंगे। फिर
- 1:52:25भी अपना काम पब्लिश कीजिए। आपको डर है कि
- 1:52:28रिजल्ट खराब आएगा। फिर भी टेस्ट दीजिए।
- 1:52:32क्योंकि अवॉयडेंस शॉर्ट टर्म में ए्जायटी
- 1:52:34कम कर सकती है। लेकिन लॉन्ग टर्म में फियर
- 1:52:37को और मजबूत कर सकती है। जब भी आप किसी डर
- 1:52:40से बचते हैं, ब्रेन को एक सिग्नल मिलता
- 1:52:43है। अच्छा हुआ हम बच [संगीत] गए। यह
- 1:52:46सिचुएशन डेंजरस थी। अगली बार वही सिचुएशन
- 1:52:50और बड़ी लग सकती है। लेकिन जब आप सेफ
- 1:52:52तरीके से [संगीत] उस सिचुएशन का सामना
- 1:52:54करते हैं, ब्रेन को नया एविडेंस मिलता है।
- 1:52:58मैं अनकंफर्टेबल था, [संगीत]
- 1:53:00लेकिन सर्वाइव कर गया। फिर अगली बार
- 1:53:03रेजिस्टेंस थोड़ा कम हो सकता है। यही रीजन
- 1:53:06है कि एक्सपोज़र और रेपेटिशन कई फियर्स के
- 1:53:08साथ काम करते हैं। आपको एक दिन में
- 1:53:11फेयरलेस बनने की जरूरत नहीं। आपको फियर के
- 1:53:14साथ [संगीत] एक्शन लेना सीखना है और यही
- 1:53:17हमें अगले लेवल पर ले जाता है। [संगीत]
- 1:53:19कंफर्ट जोन के बाहर जाने का मतलब यह नहीं
- 1:53:23कि आपको हर दिन अपनी लिमिट तोड़नी है।
- 1:53:26इसका मतलब है कि आपकी लाइफ में कुछ ऐसे
- 1:53:29एक्शंस [संगीत] होने चाहिए जो आपके करंट
- 1:53:31आइडेंटिटी को चैलेंज करें। आज थोड़ा
- 1:53:34डिफिकल्ट पढ़ना। आज एक ऑनेस्ट कन्वर्सेशन
- 1:53:38करना। आज वो टास्क पूरा करना जिसे आप तीन
- 1:53:42दिन से टाल रहे हैं। आज फोन को [संगीत]
- 1:53:44दूसरे कमरे में रखना। आज अपनी परफॉर्मेंस
- 1:53:47का सच देखना। आज किसी वीकनेस पर काम करना।
- 1:53:52आज अपनी फेलियर का एनालिसिस करना। छोटी
- 1:53:55चीजें लेकिन रिपीटेड क्योंकि एक बड़ा
- 1:53:58ड्रामेटिक मोमेंट आपकी जिंदगी बदल सकता
- 1:54:01है। लेकिन कई बार उससे ज्यादा पावरफुल
- 1:54:04छोटे डिसीजंस की रेपेटेशन होती है। और यही
- 1:54:08रेपेटेशन इवेंचुअली आपको उस जगह ले जाती
- 1:54:10है। जहां एक दिन पीछे मुड़कर आप देखते
- 1:54:14हैं। मैं पहले ऐसा [संगीत] नहीं था। यही
- 1:54:17आइडेंटिटी ट्रांसफॉर्मेशन है। आपने खुद को
- 1:54:20फोर्स करके नया इंसान नहीं बनाया। आपने नए
- 1:54:23बिहेवियर को इतना रिपीट किया कि पुरानी
- 1:54:26आइडेंटिटी टिक नहीं पाई। लेकिन
- 1:54:29ट्रांसफॉर्मेशन की शुरुआत एक डिसीजन से
- 1:54:32होती है। वो डिसीजन अक्सर बहुत छोटा होता
- 1:54:34है। आज कंफर्ट चूज़ करना है या ग्रोथ? आज
- 1:54:38[संगीत] एक्सक्यूज चुनना है या
- 1:54:39अकाउंटेबिलिटी। आज इजी ऑप्शन चुनना है या
- 1:54:43थोड़ा अनकंफर्टेबल सही ऑप्शन। आपको हर दिन
- 1:54:46माउंटेन क्लाइम नहीं करनी। कभी-कभी बस
- 1:54:49[संगीत] इतना करना है कि जिस डायरेक्शन
- 1:54:51में आपका फ्यूचर जाना चाहिए उस डायरेक्शन
- 1:54:54में एक कदम लिया जाए। क्योंकि कई बार आपकी
- 1:54:58लाइफ का सबसे इंपॉर्टेंट स्टेप वही
- 1:54:59[संगीत] होता है जिसे लेते समय आपको कोई
- 1:55:02कॉन्फिडेंस नहीं होता। बस एक [संगीत]
- 1:55:05अनकंफर्टेबल डिसीजन और फिर दूसरा और फिर
- 1:55:09तीसरा। लेकिन जैसे-जैसे आप कंफर्ट से बाहर
- 1:55:12रहना सीखते हैं, एक और चीज सामने आती है।
- 1:55:16क्योंकि शुरुआत में डिसकंफर्ट मैनेजेबल
- 1:55:19होता है। फिर चैलेंज [संगीत] बढ़ता है।
- 1:55:21फिर प्रेशर बढ़ता है। फिर शरीर थकता है।
- 1:55:25फिर माइंड एक्सक्यूज़ेस देता है। फिर आपको
- 1:55:28लगता है कि अब शायद आपने अपनी लिमिट्स सच
- 1:55:30में छू ली है। और यही अगली कहानी शुरू
- 1:55:33होती है। क्योंकि असली सवाल यह नहीं कि आप
- 1:55:37कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकल सकते हैं या
- 1:55:39नहीं। असली सवाल यह है जब डिसकंफर्ट इतना
- 1:55:43बढ़ जाए कि आपका पूरा माइंड आपको [संगीत]
- 1:55:46वापस खींचने लगे तब आप किस वर्जन ऑफ
- 1:55:49योरसेल्फ की बात सुनेंगे? किसी इंसान को
- 1:55:51बदलना हो तो सिर्फ उसकी हैबिट्स बदल देना
- 1:55:54काफी नहीं होता। कुछ समय बाद पुरानी
- 1:55:57आइडेंटिटी उसे वापस खींचने [संगीत]
- 1:56:00लगती है। इसलिए असली ट्रांसफॉर्मेशन तब
- 1:56:02शुरू होती है जब आप सिर्फ यह कहना बंद
- 1:56:05करते हैं कि मुझे यह करना है और धीरे-धीरे
- 1:56:08[संगीत] यह मानना शुरू करते हैं कि मैं
- 1:56:11ऐसा इंसान हूं जो यह करता है। यह छोटा सा
- 1:56:15डिफरेंस बहुत बड़ा है। अगर आप कहते हैं
- 1:56:18मुझे पढ़ाई करनी है तो पढ़ाई एक टास्क है।
- 1:56:22लेकिन अगर आप कहते हैं मैं डिसिप्लिन
- 1:56:24स्टूडेंट हूं तो पढ़ाई आपकी आइडेंटिटी का
- 1:56:27हिस्सा बनने लगती है। अगर आप कहते हैं
- 1:56:30मुझे वर्कआउट करना है तो वर्कआउट एक
- 1:56:33एक्टिविटी है। लेकिन अगर आप कहते हैं मैं
- 1:56:36अपने शरीर का ध्यान रखने वाला इंसान हूं
- 1:56:39तो डिसीजन लेने का तरीका बदल जाता है। यही
- 1:56:42आइडेंटिटी शिफ्ट गॉगिन्स की [संगीत] जर्नी
- 1:56:45में दिखाई देता है। लगभग 300 पाउंड्स के
- 1:56:47आसपास का वो व्यक्ति जिसने [संगीत] अपने
- 1:56:50जीवन के एक लंबे फेज में स्ट्रगल, फेयर और
- 1:56:54एस्केप को देखा था। अब अपने आप को एक
- 1:56:57बिल्कुल अलग स्टैंडर्ड के सामने रख रहा
- 1:56:59था। लेकिन यह बदलाव एक दिन में नहीं हुआ।
- 1:57:03वेट कम [संगीत] होना दिखाई देता था। लेकिन
- 1:57:06असली बदलाव दिखाई नहीं देता था। वो उसके
- 1:57:09डिसिशनंस में था। वह सुबह उठने के तरीके
- 1:57:12में था। वो डिसकंफर्ट के सामने रिएक्शन
- 1:57:15[संगीत] में था। वो इस बात में था कि वो
- 1:57:18अपने बारे में क्या बिलीव करने लगा था।
- 1:57:21पहले शायद सवाल [संगीत] था। क्या मैं यह
- 1:57:24कर सकता हूं? अब धीरे-धीरे सवाल बनने लगा।
- 1:57:28मैं इसे करने वाला इंसान कैसे बनूं? और
- 1:57:32यही ट्रांसफॉर्मेशन [संगीत] का डीपर लेवल
- 1:57:34है। क्योंकि अगर आपका पूरा फोकस सिर्फ
- 1:57:37रिजल्ट पर है तो रिजल्ट मिलते ही मोटिवेशन
- 1:57:40खत्म हो सकती है। लेकिन अगर आपने
- 1:57:42आइडेंटिटी बदली है तो बिहेवियर ज्यादा
- 1:57:45स्टेबल हो सकता है। मान लीजिए कोई व्यक्ति
- 1:57:4820 किलो वजन कम करना चाहता है। अगर उसकी
- 1:57:51आइडेंटिटी सिर्फ इतनी है कि मैं डाइट पर
- 1:57:54हूं तो जैसे ही टारगेट अचीव हुआ [संगीत]
- 1:57:56पुरानी हैबिट्स वापस आ सकती है। लेकिन अगर
- 1:57:59आइडेंटिटी बदलकर यह हो गई। मैं ऐसा
- 1:58:03व्यक्ति हूं जो अपने शरीर और खाने के
- 1:58:06डिसीजंस को कॉन्शियसली कंट्रोल करता है तो
- 1:58:09उसका बिहेवियर सिर्फ गोल तक सीमित नहीं
- 1:58:12रहता। यही फर्क टेंपरेरी ट्रांसफॉर्मेशन
- 1:58:15और लास्टिंग ट्रांसफॉर्मेशन के बीच होता
- 1:58:17है और आइडेंटिटी बदलना आसान नहीं है।
- 1:58:21क्योंकि आपका पुराना वर्जन सिर्फ आपकी
- 1:58:24हैबिट्स में नहीं रहता। वो आपकी मेमोरीज
- 1:58:26में रहता है। आपके पुराने फेलियर्स
- 1:58:28[संगीत]
- 1:58:29में रहता है। दूसरों की ओपिनियंस में रहता
- 1:58:32है। आपके पुराने लेबल्स में रहता है। किसी
- 1:58:35टीचर ने कभी [संगीत] कहा था कि आप एवरेज
- 1:58:38हैं। किसी रिलेटिव ने कहा था कि आप कुछ
- 1:58:41बड़ा नहीं कर पाएंगे। किसी दोस्त ने मजाक
- 1:58:44उड़ाया था। आपने खुद कई बार कोई काम शुरू
- 1:58:47[संगीत] करके छोड़ दिया। धीरे-धीरे यह
- 1:58:50एक्सपीरियंसेस आपके अंदर एक इनविज़िबल
- 1:58:53सेंटेंस बना सकते हैं। मैं ऐसा ही हूं। और
- 1:58:57फिर लाइफ में जब भी नया ओपोरर्चुनिटी आता
- 1:59:00है, पुरानी आइडेंटिटी डिसीजन लेने लगती
- 1:59:03है। अगर आपने खुद को वीक माना है तो
- 1:59:05चैलेंज देखकर पीछे हटना नेचुरल लगेगा। अगर
- 1:59:09आपने खुद को इनकंसिस्टेंट [संगीत]
- 1:59:11माना है तो कमिटमेंट टूटना नॉर्मल लगेगा।
- 1:59:14अगर आपने खुद को अनलकी माना है तो फेलियर
- 1:59:18का ब्लेम बाहर जाना आसान लगेगा। अगर आपने
- 1:59:21खुद को एवरेज माना है तो
- 1:59:23एक्स्ट्राऑर्डिनरी [संगीत]
- 1:59:24एफर्ट अननेसेसरी लग सकता है। लेकिन
- 1:59:27आइडेंटिटी कोई पत्थर पर लिखा हुआ फैक्ट
- 1:59:29नहीं है। वो बहुत हद तक रिपीटेड एविडेंस
- 1:59:32से बनती है और यही अच्छी खबर है। अगर
- 1:59:36पुराने बिहेवियर ने एक आइडेंटिटी बनाई है
- 1:59:39तो नए बिहेवियर भी नई आइडेंटिटी बना सकते
- 1:59:42हैं। लेकिन इसमें एक [संगीत] कैच है। नई
- 1:59:44आइडेंटिटी पहले फील नहीं होती। आपको पहले
- 1:59:48एक्ट करना पड़ता है। यही कारण है कि
- 1:59:51शुरुआत में डिसिप्लिन व्यक्ति को
- 1:59:53डिसिप्लिन फेक लग सकती है। पहली बार सुबह
- 1:59:56जल्दी उठते [संगीत] हुए आपको ऐसा नहीं
- 1:59:58लगेगा कि आप नेचुरली डिसिप्लिन हैं। पहली
- 2:00:01बार डिफिकल्ट वर्कआउट करते हुए आपको एथलीट
- 2:00:04जैसा फील नहीं होगा। पहली बार पब्लिक
- 2:00:07स्पीकिंग करते हुए कॉन्फिडेंस नहीं आएगा।
- 2:00:10पहली बार डिफिकल्ट स्किल सीखते हुए
- 2:00:13एक्सपर्ट जैसा महसूस नहीं होगा।
- 2:00:15लेकिन अगर आप रिपीटेड एविडेंस देते रहे तो
- 2:00:18ब्रेन धीरे-धीरे अपडेट होता है। मैंने यह
- 2:00:22किया। फिर मैं यह रेगुलरली [संगीत] कर
- 2:00:25सकता हूं।
- 2:00:26फिर मैं ऐसा इंसान हूं जो कठिन [संगीत]
- 2:00:30काम कर सकता है और यही सेल्फ इमेज का
- 2:00:32रिकंस्ट्रक्शन है। गॉगिंस की कहानी में
- 2:00:35फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन ने एक महत्वपूर्ण
- 2:00:38काम किया। उसने उसके सामने कॉनंक्रीट
- 2:00:41[संगीत] एविडेंस रखा कि पुरानी आइडेंटिटी
- 2:00:43फाइनल नहीं थी।
- 2:00:45जब शरीर बदल सकता है, रूटीन बदल सकता है,
- 2:00:48परफॉर्मेंस बदल सकती है, तो सेल्फ इमेज
- 2:00:51[संगीत] भी चैलेंज हो सकती है। लेकिन यहां
- 2:00:54एक बहुत जरूरी बात है। ट्रांसफॉर्मेशन का
- 2:00:56मतलब यह नहीं कि आपको अपने पुराने सेल्फ
- 2:01:00से नफरत करनी चाहिए। [संगीत] आपका पुराना
- 2:01:03वर्जन शायद कमजोर था। शायद कंफ्यूज था।
- 2:01:07शायद गलत डिसिजंस लेता था। शायद
- 2:01:10एक्सक्यूसेस बनाता था।
- 2:01:12लेकिन वह भी आपकी कहानी का हिस्सा था।
- 2:01:15उसने आपको यहां तक पहुंचाया। इसलिए सेल्फ
- 2:01:18इंप्रूवमेंट का मैच्योर वर्जन अपने पुराने
- 2:01:21सेल्फ को इंसल्ट करना नहीं है। उससे सीखना
- 2:01:25है। क्योंकि अगर आप अपने पुराने सेल्फ से
- 2:01:28सिर्फ नफरत करते हैं तो आपका मोटिवेशन शेम
- 2:01:31पर डिपेंड करेगा। और शेम लंबे समय तक
- 2:01:34स्टेबल फ्यूल नहीं होती। आपको यह कहने
- 2:01:37[संगीत] की जरूरत नहीं। मैं वर्थस था। आप
- 2:01:41कह सकते हैं मैं उस समय अपने स्टैंडर्ड्स
- 2:01:44के हिसाब से नहीं जी [संगीत] रहा था। यह
- 2:01:46सेंटेंस ज्यादा पावरफुल है क्योंकि इसमें
- 2:01:49जजमेंट कम और रिस्पांसिबिलिटी [संगीत]
- 2:01:52ज्यादा है। यही फर्क सेल्फ हेट्रिड और
- 2:01:54सेल्फ कंफ्रंटेशन के बीच है। आप खुद को
- 2:01:57तोड़ने नहीं बैठे। आप खुद को रिबिल्ड
- 2:02:00[संगीत] करने बैठे हैं।
- 2:02:06और रिबिल्ड करने के लिए आपको स्टैंडर्ड्स
- 2:02:09तय करने पड़ते हैं। स्टैंडर्ड्स और गोल्स
- 2:02:11अलग होते हैं। गोल है मुझे एग्जाम में
- 2:02:15अच्छे मार्क्स [संगीत] चाहिए। स्टैंडर्ड
- 2:02:17है मैं बिना तैयारी के एग्जाम हॉल में
- 2:02:20नहीं जाऊंगा। गोल है मुझे फिट होना है।
- 2:02:24स्टैंडर्ड है मैं अपने हेल्थ रिलेटेड
- 2:02:26कमिटमेंट्स को लगातार इग्नोर नहीं करूंगा।
- 2:02:29गोल है मुझे सक्सेसफुल [संगीत] YouTube
- 2:02:32चैनल चाहिए। स्टैंडर्ड है मैं हर वीडियो
- 2:02:35को पिछली वीडियो से [संगीत] बेहतर बनाने
- 2:02:37के लिए कुछ नया सीखूंगा। गोल रिजल्ट है,
- 2:02:40स्टैंडर्ड बिहेवियर है और आइडेंटिटी
- 2:02:43स्टैंडर्ड [संगीत] से बनती है। आप अपने
- 2:02:45बारे में जो कहते हैं, उससे कम। आप रोज
- 2:02:49क्या टोलरेट करते हैं, उससे ज्यादा।
- 2:02:52[संगीत] यह बहुत अनकंफर्टेबल ऑब्जरवेशन
- 2:02:54है। क्योंकि हम कहते हैं, मैं डिसिप्लिन
- 2:02:57हूं। [संगीत]
- 2:02:59लेकिन अगर हमारी लाइफ में लगातार
- 2:03:01प्रोक्रेस्टिनेशन टोलरेटेड है तो बिहेवियर
- 2:03:04कुछ और कह रहा है। हम कहते हैं मैं
- 2:03:07ए्बिशियस हूं।
- 2:03:09लेकिन अगर हम रोज घंटों बिना पर्पस के
- 2:03:11स्क्रोलिंग करते हैं तो बिहेवियर दूसरा
- 2:03:14मैसेज दे रहा है। हम कहते [संगीत] हैं
- 2:03:17मुझे करियर की बहुत चिंता है। लेकिन अगर
- 2:03:20स्किल बिल्डिंग को हर दिन पोस्टपोन करते
- 2:03:22हैं तो बिहेवियर फिर कुछ और कहता [संगीत]
- 2:03:25है। यहां फिर मिरर सामने आता है। और यही
- 2:03:28रीजन है कि गगिंस का अकाउंटेबिलिटी मिरर
- 2:03:31सिर्फ एक मोटिवेशनल ट्रिक नहीं था। उसका
- 2:03:34डीपर मीनिंग था। अपने सेल्फ इमेज [संगीत]
- 2:03:37और एक्चुअल बिहेवियर के बीच गैप देखना। आप
- 2:03:40क्या बनना चाहते हैं और आप रोज क्या कर
- 2:03:43रहे हैं? इन दोनों को सामने रखिए। अगर गैप
- 2:03:47है तो शे में मत जाइए। गैप को इंफॉर्मेशन
- 2:03:50की तरह देखिए क्योंकि इंफॉर्मेशन के बिना
- 2:03:53इंप्रूवमेंट ब्लाइंड होती है। एक स्टूडेंट
- 2:03:56को लगता है कि वो बहुत पढ़ रहा है। लेकिन
- 2:03:59टाइम ऑडिट बताता है कि एक्चुअल फोकस स्टडी
- 2:04:023 घंटे से भी कम है। अब उसके पास प्रॉब्लम
- 2:04:06है। लेकिन साथ में [संगीत] डाटा भी है। एक
- 2:04:08क्रिएटर को लगता है कि वो बहुत कंटेंट बना
- 2:04:11रहा है। लेकिन एनालिटिक्स [संगीत] दिखाती
- 2:04:14है कि वीडियोस इर्रेगुलर हैं। हुक्स वीक
- 2:04:16है और ऑडियंस रिटेंशन [संगीत] शुरुआती
- 2:04:19सेकंड्स में गिर रही है। अब उसके पास
- 2:04:21क्रिटिसिज्म नहीं इंफॉर्मेशन है। एक जॉब
- 2:04:25सीकर कहता है मार्केट खराब है। हो सकता
- 2:04:28है। लेकिन अगर वो [संगीत] 10
- 2:04:30एप्लीकेशनेशंस भेज कर रुक गया तो शायद
- 2:04:32प्रॉब्लम सिर्फ मार्केट नहीं है।
- 2:04:35एप्लीकेशनेशंस की क्वालिटी क्या थी?
- 2:04:37रिज्यूम कैसा था? स्किल्स क्या थी?
- 2:04:40इंटरव्यू प्रिपरेशन कितनी थी? नेटवर्किंग
- 2:04:43कितनी थी? प्रोजेक्ट्स कितने थे? अब
- 2:04:46रियलिटी मेजरेबल बनती है और मेजरेबल
- 2:04:49[संगीत] रियलिटी आइडेंटिटी बदलने का
- 2:04:51रास्ता खोलती है। क्योंकि अब आप वेग नहीं
- 2:04:54रहते। आप कह सकते हैं मैं वीक हूं। लेकिन
- 2:04:58यह सेंटेंस यूज़लेस है। किस चीज में वीक?
- 2:05:02नॉलेज, [संगीत] कंसिस्टेंसी, कम्युनिकेशन,
- 2:05:05फिजिकल फिटनेस, फोकस, टाइम मैनेजमेंट,
- 2:05:09स्ट्रेस हैंडलिंग। [संगीत]
- 2:05:10जब वीकनेस स्पेसिफिक होती है तभी
- 2:05:13इंप्रूवमेंट पॉसिबल होती है। यही
- 2:05:16ट्रांसफॉर्मेशन का प्रैक्टिकल साइड है।
- 2:05:18आपको खुद को बेहतर इंसान बनाने [संगीत] का
- 2:05:21वेग मिशन नहीं चाहिए। आपको स्पेसिफिक
- 2:05:24बिहेवियर्स चाहिए। अगर फोकस वीक है,
- 2:05:28[संगीत] फोकस्ड सेशंस बनाइए। अगर
- 2:05:30कम्युनिकेशन वीक है, डेली स्पीकिंग
- 2:05:33प्रैक्टिस कीजिए। अगर फिटनेस [संगीत] वीक
- 2:05:35है, रियलिस्टिक ट्रेनिंग रूटीन बनाइए। अगर
- 2:05:39डिसिप्लिन वीक है, छोटे नॉन नेगोशिएबल्स
- 2:05:42रखिए। अगर नॉलेज [संगीत] वीक है,
- 2:05:44स्ट्रक्चर लर्निंग कीजिए। अगर फेयर आपको
- 2:05:47रोकता है, सेफ और कंट्रोलोल्ड एक्सपोज़र
- 2:05:50बढ़ाइए। आइडेंटिटी एक्शन [संगीत] से बदलती
- 2:05:53है और एक्शन रेपेटिशन से मजबूत होता है।
- 2:05:57लेकिन रेपेटिशन के दौरान एक और एनिमी
- 2:06:00सामने आता है। ईगो। क्योंकि जब आप नए
- 2:06:03एनवायरमेंट में जाते हैं तो शुरुआत में आप
- 2:06:06कमजोर हो सकते हैं और यह स्वीकार करना ईगो
- 2:06:09के लिए पेनफुल होता है। मान लीजिए आपने
- 2:06:12पहली बार रनिंग शुरू की और 2 कि.मी. के
- 2:06:15बाद [संगीत] थक गए। आपको लगता है मैं तो
- 2:06:18फिट होना चाहता था। लेकिन बॉडी कहती है
- 2:06:22तुम अभी फिट नहीं हो। यह इंसल्ट नहीं है।
- 2:06:25यह इंफॉर्मेशन है। अगर आप ईगो के कारण
- 2:06:28रियलिटी रिजेक्ट कर देंगे तो इंप्रूवमेंट
- 2:06:32रुक जाएगी।
- 2:06:33लेकिन अगर आप स्वीकार [संगीत] करेंगे ठीक
- 2:06:36है मेरी करंट कैपेसिटी इतनी है तो आप
- 2:06:39ट्रेनिंग शुरू कर सकते हैं। यही बात करियर
- 2:06:42में है। आप किसी स्किल में बिगिनर हैं।
- 2:06:45आपसे कम [संगीत] उम्र का व्यक्ति आपसे
- 2:06:47बेहतर कर रहा है। आपका ईगो अनकंफर्टेबल हो
- 2:06:51सकता है। लेकिन कंपैरिजन को इंसल्ट की तरह
- 2:06:54देखने के बजाय डाटा की तरह देखें। उसके
- 2:06:57पास कौन [संगीत] सी स्किल है जो मेरे पास
- 2:06:59नहीं? वो क्या प्रैक्टिस करता है? उसका
- 2:07:02प्रोसेस क्या है? मैं क्या सीख सकता हूं?
- 2:07:05यह माइंडसेट आपको जेलसी से लर्निंग की तरफ
- 2:07:08ले जाता है और यही ट्रांसफॉर्मेशन का
- 2:07:11हिस्सा [संगीत] है। क्योंकि नया वर्जन
- 2:07:13बनने का मतलब सिर्फ अपनी वीकनेसेस फिक्स
- 2:07:16करना नहीं है। कभी-कभी इसका [संगीत] मतलब
- 2:07:19यह भी है कि आपको स्वीकार करना पड़ेगा कि
- 2:07:22दुनिया में बहुत से लोग आपसे बेहतर
- 2:07:24[संगीत] हैं और यह अच्छी बात है क्योंकि
- 2:07:27अगर आप हर समय अपने ईगो को प्रोटेक्ट
- 2:07:30करेंगे तो आप कभी बिगिनर बनने की परमिशन
- 2:07:33खुद को नहीं देंगे और बिगिनर [संगीत] बनने
- 2:07:36से डरने वाला व्यक्ति कभी एक्सपर्ट नहीं
- 2:07:38बनता। गगिंस के जर्नी में भी एक पैटर्न
- 2:07:41बार-बार दिखाई [संगीत] देता है। एक
- 2:07:43स्टैंडर्ड अचीव करने के बाद अगला
- 2:07:46स्टैंडर्ड सामने आ जाता है। आपको लगता
- 2:07:48[संगीत] है अब मैं स्ट्रांग हूं। फिर नया
- 2:07:52चैलेंज आता है। आप सोचते [संगीत] हैं अब
- 2:07:55मैं प्रिपयर्ड हूं।
- 2:07:57फिर एनवायरमेंट आपको दिखाता है कि
- 2:07:59प्रिपरेशन में गैप्स है। यही प्रोसेस आपको
- 2:08:02हम्ल रखता है और शायद यही रीजन है कि
- 2:08:06ट्रांसफॉर्मेशन का अंत नहीं होता। आप कोई
- 2:08:09फाइनल वर्जन [संगीत] नहीं बन जाते। आप बस
- 2:08:11पुराने वर्जन से बेहतर वर्जन बनते हैं।
- 2:08:14फिर वो वर्जन भी इवेंचुअली [संगीत] चैलेंज
- 2:08:16होगा। यह सुनने में एग्जॉस्टिंग लग सकता
- 2:08:19है। लेकिन इसे दूसरे तरीके [संगीत] से
- 2:08:21देखिए। इसका मतलब है कि आपकी आइडेंटिटी
- 2:08:25फिक्स नहीं है। आप हमेशा अपडेट हो सकते
- 2:08:28हैं। आप आज जिस लेवल पर हैं वो परमानेंट
- 2:08:31सेंटेंस नहीं है। लेकिन अपडेट ऑटोमेटिकली
- 2:08:34नहीं होगा। आपको एविडेंस क्रिएट करना
- 2:08:38पड़ेगा। और एविडेंस डेली लाइफ में बनता
- 2:08:41है। जब अलार्म बजता है और आप उठते हैं। जब
- 2:08:45डिफिकल्ट चैप्टर देखकर भी बैठते हैं। जब
- 2:08:47फोन डिस्ट्रैक्शन होते हुए भी उसे दूर
- 2:08:50रखते हैं। जब फेलियर के बाद एनालिसिस करते
- 2:08:53हैं। जब कोई आपको क्रिटिसाइज करता है और
- 2:08:56आप तुरंत डिफेंसिव होने के बजाय सोचते
- 2:08:59हैं। क्या इसमें कुछ सच है? जब कोई दूसरा
- 2:09:02आपसे बेहतर परफॉर्म [संगीत] करता है और आप
- 2:09:05उससे सीखते हैं। जब मोटिवेशन जीरो होती
- 2:09:08है, लेकिन आपका मिनिमम कमिटमेंट पूरा होता
- 2:09:11है। यह छोटे मोमेंट्स [संगीत] बोरिंग
- 2:09:13दिखाई देते हैं। लेकिन इन्हीं मोमेंट्स
- 2:09:16में आइडेंटिटी बन रही होती है। आपको शायद
- 2:09:19उस समय पता भी नहीं चलता। लेकिन आपका
- 2:09:22ब्रेन रिकॉर्ड कर रहा होता है। हमने किया
- 2:09:24और रिपीटेड एविडेंस इवेंचुअली सेल्फ इमेज
- 2:09:27[संगीत] को बदल देता है। यही सेल्फ ट्रस्ट
- 2:09:30का फाउंडेशन है। सेल्फ ट्रस्ट का मतलब यह
- 2:09:33नहीं कि आपको अपने ऊपर ब्लाइंड फेथ है।
- 2:09:36सेल्फ ट्रस्ट का मतलब है आपने अपने
- 2:09:39बिहेवियर से खुद को इनफ एविडेंस दिया है
- 2:09:42कि जरूरत पड़ने पर आप एक्शन ले सकते हैं
- 2:09:45और यही कॉन्फिडेंस ज्यादा स्टेबल होता है
- 2:09:48क्योंकि यह इमेजिनेशन से नहीं आया यह
- 2:09:51एविडेंस से आया लेकिन आइडेंटिटी
- 2:09:54ट्रांसफॉर्मेशन में एक और कठिन फेज
- 2:09:56[संगीत] आता है। वो फेज जब एक्साइटमेंट
- 2:09:59खत्म हो जाती है। शुरुआत में आपने खुद को
- 2:10:02बदलने का फैसला किया। कुछ दिनों तक एनर्जी
- 2:10:05हाई रही। फिर रूटीन बोरिंग लगने लगा। कुछ
- 2:10:09हफ्तों बाद [संगीत] रिजल्ट्स स्लो हो गए।
- 2:10:12फिर डाउट आया। फिर पुरानी हैबिट्स वापस
- 2:10:15बुलाने लगी। [संगीत] और यही पता चलता है
- 2:10:18कि ट्रांसफॉर्मेशन सिर्फ डिसीजन नहीं है।
- 2:10:21यह मेंटेनेंस है। आपने एक बार कंफर्ट ज़ोन
- 2:10:24छोड़ा। लेकिन लाइफ [संगीत] आपको बार-बार
- 2:10:27कंफर्ट ऑफर करेगी। फोन हमेशा अवेलेबल
- 2:10:31रहेगा। इजी एंटरटेनमेंट हमेशा अवेलेबल
- 2:10:34रहेगा। एक्सक्यूसेस हमेशा अवेलेबल रहेंगे
- 2:10:38और आपका पुराना वर्जन भी। वो कहेगा इतना
- 2:10:42काफी है। थोड़ा आराम कर। तू पहले भी इतना
- 2:10:46[संगीत] ही करता था। किसको प्रूव करना है?
- 2:10:49रिजल्ट तो अभी आया नहीं। और उस मोमेंट पर
- 2:10:52आपको याद रखना होगा। आप किसी और से
- 2:10:55कंपटीशन नहीं कर रहे। आप अपने पुराने
- 2:10:58पैटर्न से लड़ रहे हैं। आपका पुराना वर्जन
- 2:11:01[संगीत] चाहता है कि आप फमिलियर रहें। नया
- 2:11:04वर्जन चाहता है कि आप ग्रो करें और दोनों
- 2:11:07के बीच हर दिन छोटे डिसिजंस होंगे। यही
- 2:11:11ट्रांसफॉर्मेशन की असली बैटल फील्ड है।
- 2:11:13कोई ड्रामेटिक बैकग्राउंड म्यूजिक नहीं।
- 2:11:16कोई क्राउड नहीं। बस आपका डेली बिहेवियर।
- 2:11:20और यही रीजन है कि एक बड़ा गोल चुनने के
- 2:11:23बाद अगला काम गोल के बारे में सोचते रहना
- 2:11:26नहीं है। अगला काम है अपने पुराने लाइफस्ट
- 2:11:30और नए गोल के बीच कॉन्फ्लिक्ट [संगीत]
- 2:11:32को पहचानना। कौन सी हैबिट अब आपकी नई
- 2:11:35आइडेंटिटी के साथ फिट नहीं बैठती? कौन सा
- 2:11:38[संगीत] बिहेवियर आपको बार-बार पीछे खींच
- 2:11:40रहा है? कौन सा कंफर्ट आपको वीक नहीं
- 2:11:43डिपेंडेंट बना रहा है। किस चीज [संगीत] को
- 2:11:46छोड़ना पड़ेगा? और किस चीज को शुरू करना
- 2:11:49पड़ेगा? क्योंकि ट्रांसफॉर्मेशन [संगीत]
- 2:11:51सिर्फ जोड़ने से नहीं होती। कभी-कभी
- 2:11:54सबट्रैक्शन ज्यादा जरूरी होती है। कम
- 2:11:56स्क्रोलिंग, कम एक्सक्यूसेस, कम अननेसेसरी
- 2:12:00कंपैरिजन, कम इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन, कम
- 2:12:04[संगीत] प्रॉमिससेस जो आप खुद से करते हैं
- 2:12:06और फिर तोड़ देते हैं। और दूसरी तरफ
- 2:12:10ज्यादा फोकस्ड वर्क, [संगीत] ज्यादा
- 2:12:12कंसिस्टेंसी, ज्यादा ऑनेस्टी, ज्यादा
- 2:12:15प्रिपरेशन, ज्यादा अकाउंटेबिलिटी,
- 2:12:19ज्यादा कंट्रोल डिसकंफर्ट। यही नया
- 2:12:22आइडेंटिटी स्ट्रक्चर बनाता है और जब
- 2:12:24आइडेंटिटी बदलती है तो गोल्स भी बदलने
- 2:12:27लगते हैं। पहले आप सोचते थे मुझे किसी तरह
- 2:12:31यह लेवल हासिल करना है। अब आप सोचते हैं
- 2:12:35मैं ऐसा इंसान कैसे बनूं जो इस लेवल को
- 2:12:38मेंटेन [संगीत] कर सके। यह सवाल ज्यादा
- 2:12:40मैच्योर है। क्योंकि अचीवमेंट एक मोमेंट
- 2:12:43हो सकता है। लेकिन आइडेंटिटी एक लाइफस्ट
- 2:12:46[संगीत] है और इसी आइडेंटिटी की अगली
- 2:12:48परीक्षा अब आने वाली थी। क्योंकि अब तक
- 2:12:51लड़ाई लार्जली पर्सनल थी। अब [संगीत]
- 2:12:54सामने एक ऐसा एनवायरमेंट आने वाला था जहां
- 2:12:57आपकी इच्छा से ज्यादा आपकी प्रिपरेशन मैटर
- 2:13:01करेगी। जहां शरीर [संगीत] थकेगा, जहां
- 2:13:04अनसर्टेनिटी बढ़ेगी, जहां फियर रील लगेगा,
- 2:13:08जहां हर व्यक्ति अपने अंदर की रेजिस्टेंस
- 2:13:11से टकराएगा। और वहां कोई यह नहीं [संगीत]
- 2:13:13पूछेगा कि आप कितना मोटिवेटेड महसूस कर
- 2:13:16रहे हैं। वहां सवाल सिर्फ इतना होगा। जब
- 2:13:20आपका माइंड कहेगा बस अब बहुत हुआ तब क्या
- 2:13:23आपकी नई आइडेंटिटी उस आवाज से बड़ी होगी?
- 2:13:26कुछ चैलेंजेस ऐसे होते हैं जिनके बारे में
- 2:13:30आप पहले से सोचकर तैयारी कर सकते हैं। आप
- 2:13:33स्ेड्यूल बना [संगीत] सकते हैं, ट्रेनिंग
- 2:13:35कर सकते हैं। रिसोर्सेज जुटा सकते हैं और
- 2:13:39खुद को मेंटली तैयार कर सकते हैं। लेकिन
- 2:13:41जब वो मोमेंट वास्तव [संगीत] में सामने
- 2:13:43आता है, तब थ्योरी और रियलिटी के बीच का
- 2:13:46फर्क साफ दिखाई देता है। आपने कमरे में
- 2:13:49बैठकर कितनी भी बार [संगीत] इमेजिन किया
- 2:13:51हो कि प्रेशर में आप काम रहेंगे।
- 2:13:55लेकिन जब प्रेशर वास्तव में आपके सामने
- 2:13:57आता है तभी पता चलता [संगीत] है कि आपका
- 2:14:00माइंड क्या करता है। यही वजह है कि गगिंस
- 2:14:03की कहानी में बड एस और हेल वीक सिर्फ
- 2:14:05मिलिट्री ट्रेनिंग के एपिसोड्स नहीं है।
- 2:14:08वे उस लार्जर क्वेश्चन [संगीत] का
- 2:14:10एग्जांपल बन जाते हैं। जो उसकी पूरी जर्नी
- 2:14:13के बीच में था। जब डिसकंफर्ट बढ़ता है तो
- 2:14:17आपका माइंड आपको क्या [संगीत] कहानी
- 2:14:19सुनाता है? हेल वीक का नाम ही अपने अंदर
- 2:14:22एक साइकोलॉजिकल मैसेज [संगीत] रखता है। यह
- 2:14:25कोई सामान्य फिटनेस टेस्ट नहीं था। इसमें
- 2:14:28एक्सट्रीम फिजिकल और मेंटल स्ट्रेस,
- 2:14:30लगातार ट्रेनिंग, एग्जॉशन और अनसर्टेनिटी
- 2:14:34जैसी परिस्थितियां शामिल थी। गगिंस ने
- 2:14:37हेलवीक को एक बार नहीं बल्कि तीन बार पूरा
- 2:14:41किया। लेकिन पहली कोशिश में वह स्ट्रेस
- 2:14:44फ्रैक्चर और निमोनिया के कारण ट्रेनिंग से
- 2:14:47बाहर हो गया था। और बाद में उसे वापस
- 2:14:50[संगीत] जाकर फिर से शुरुआत करनी पड़ी। अब
- 2:14:53यहां एक चीज समझिए। अगर हम सिर्फ यह सुने
- 2:14:56कि उसने हेलवी तीन बार कंप्लीट किया तो
- 2:14:59कहानी हेरइक लगती है। लेकिन अगर [संगीत]
- 2:15:01हम उस जर्नी को साइकोलॉजिकल लेंस से देखें
- 2:15:04तो ज्यादा इंटरेस्टिंग सवाल सामने आता है।
- 2:15:07पहली बार फेलियर के बाद इंसान अपने बारे
- 2:15:10में क्या डिसाइड करता है? यही पॉइंट
- 2:15:12[संगीत] बहुत इंपॉर्टेंट है। क्योंकि
- 2:15:14फेलियर हमेशा सिर्फ एक इवेंट नहीं होता।
- 2:15:17कई बार फेलियर आइडेंटिटी पर अटैक जैसा
- 2:15:20महसूस होता है। आपने महीनों तैयारी की।
- 2:15:24आपने सपना देखा। आपने अपनी रूटीन बदली।
- 2:15:28आपने सैक्रिफाइसेस [संगीत]
- 2:15:29किए और फिर भी आप फेल हो गए। उस मोमेंट
- 2:15:32में ब्रेन दो चीजों में से एक कर सकता है।
- 2:15:35वो कह सकता है। यह प्रूफ है कि मैं कैपेबल
- 2:15:38नहीं हूं। या वो पूछ सकता है। यह
- 2:15:42इंफॉर्मेशन मुझे क्या बता रही है? पहला
- 2:15:45रिस्पांस [संगीत] आइडेंटिटी को प्रोटेक्ट
- 2:15:47करता है। दूसरा रिस्पांस आइडेंटिटी को
- 2:15:50इंप्रूव करता है। और यही डिफरेंस रेिलियंस
- 2:15:52[संगीत] पैदा करता है। रेिलियंस का मतलब
- 2:15:55यह नहीं कि फेलियर हर्ट नहीं करेगा।
- 2:15:59फेलियर हर्ट करेगा। डिसअपॉइंटमेंट [संगीत]
- 2:16:01होगी, एंगर आएगा, शेम भी आ सकती है।
- 2:16:05कभी-कभी एंबरेसमेंट भी होगी। लेकिन
- 2:16:08रेसिलिएंट व्यक्ति इमोशन को डिनाई नहीं
- 2:16:11करता। वो इमोशन के बाद डिसीजन लेता है और
- 2:16:15यही मैच्योर टफनेस है। आपको दर्द महसूस हो
- 2:16:18सकता है और फिर भी आप एनालिसिस कर सकते
- 2:16:21हैं। आप डिसपॉइंटेड हो सकते हैं और फिर भी
- 2:16:24अगला स्टेप तय कर सकते हैं। आपको डर लग
- 2:16:27सकता है और फिर भी प्रिपरेशन जारी रख सकते
- 2:16:30हैं। यही मेंटल स्ट्रेंथ है। अब अपने जीवन
- 2:16:34का एक छोटा एग्जांपल देखिए। मान लीजिए
- 2:16:37किसी स्टूडेंट [संगीत] का एग्जाम खराब हो
- 2:16:39गया। रिजल्ट देखकर उसके अंदर पहला थॉट आता
- 2:16:42है। मैं बेवकूफ हूं। बस एक एग्जाम का
- 2:16:47रिजल्ट [संगीत] पूरी आइडेंटिटी बन गया। अब
- 2:16:50अगली बार बुक खोलते समय उसके अंदर
- 2:16:52एंग्जायटी आएगी। क्योंकि अब वो सिर्फ पढ़
- 2:16:55नहीं रहा। वो अपनी आइडेंटिटी प्रूव करने
- 2:16:58की कोशिश कर रहा है। हर डिफिकल्ट क्वेश्चन
- 2:17:01उसे थ्रेट जैसा लगेगा। अगर नहीं आया तो।
- 2:17:05देखा मैं नहीं कर सकता। और अगर आया तो
- 2:17:10शायद लग था। यह सेल्फ [संगीत] इमेज का
- 2:17:12ट्रैप है। दूसरी तरफ वही स्टूडेंट रिजल्ट
- 2:17:15देखकर कह सकता है, ठीक है, मेरा स्कोर
- 2:17:19खराब है। अब देखते हैं क्यों। फिर वो गलत
- 2:17:22क्वेश्चंस देखता [संगीत] है। कुछ
- 2:17:24कॉनसेप्चुअल है। कुछ केयरलेस मिस्टेक्स
- 2:17:27हैं। कुछ टाइम मैनेजमेंट की है। कुछ
- 2:17:29चैप्टर्स वीक है। अब फेलियर इमोशनल इवेंट
- 2:17:32से डाटा बन गया और डेटा पर काम किया जा
- 2:17:36सकता है। यही गॉगिंस की जर्नी से मिलने
- 2:17:38वाला एक बड़ा लेसन है। प्रेशर में सिर्फ
- 2:17:41शरीर टेस्ट नहीं होता। आपकी इंटरप्रिटेशन
- 2:17:44भी टेस्ट होती है। एक ही घटना को दो लोग
- 2:17:48अलग तरह से इंटरप्रेट कर सकते हैं। एक
- 2:17:50कहेगा [संगीत] मैं खत्म हो गया। दूसरा
- 2:17:53कहेगा मुझे अभी पता चला कि मुझे कहां काम
- 2:17:57करना है। सिचुएशन सैम मीनिंग अलग और
- 2:18:01मीनिंग बिहेवियर को बदल देता है। यही कारण
- 2:18:04है कि मेंटल टफनेस सिर्फ पेन टॉलरेंस नहीं
- 2:18:08है। यह मीनिंग मेकिंग भी है। आप किसी
- 2:18:11डिफिकल्ट एक्सपीरियंस [संगीत] को अपने
- 2:18:13खिलाफ एविडेंस बना सकते हैं। या उसे
- 2:18:16ट्रेनिंग डाटा बना सकते हैं। लेकिन यहां
- 2:18:18फिर बैलेंस जरूरी है। हर सफरिंग [संगीत]
- 2:18:21को मीनिंगफुल समझ लेना भी सही नहीं। कुछ
- 2:18:24सिचुएशंस जेनुइनली हार्मफुल हो सकती हैं।
- 2:18:28कुछ फेलियर्स एक्सटर्नल सरकमस्ट्ससेस के
- 2:18:30कारण हो सकते हैं। कुछ लॉसेस [संगीत] के
- 2:18:32लिए आपको खुद को ब्लेम नहीं करना चाहिए।
- 2:18:35अकाउंटेबिलिटी का मतलब हर चीज की
- 2:18:38रिस्पांसिबिलिटी अपने सिर पर डालना नहीं
- 2:18:41है। अकाउंटेबिलिटी का मतलब है जहां आपका
- 2:18:44कंट्रोल था वहां ईमानदारी से देखना। और
- 2:18:48जहां कंट्रोल नहीं था वहां रियलिटी
- 2:18:51[संगीत] स्वीकार करना। यही मैच्योरिटी है।
- 2:18:54हेलवीक जैसे एक्सट्रीम एनवायरमेंट में एक
- 2:18:57और साइकोलॉजिकल फिनोमिनन सामने आता है। जब
- 2:19:00शरीर और माइंड दोनों एग्जॉस्टेड होते हैं।
- 2:19:04तब आपकी परसेप्शन बदल सकती है। जो चीज
- 2:19:07नॉर्मल [संगीत] कंडीशन में मैनेजेबल लगती
- 2:19:09है, वही एग्जॉशन में इंपॉसिबल महसूस हो
- 2:19:12सकती है। आपको लगता है बस अब नहीं।
- 2:19:16लेकिन [संगीत] यहां एक सल लेसन है। फीलिंग
- 2:19:19और फैक्ट हमेशा सैम नहीं होते। आपको लग
- 2:19:22सकता है कि आप बिल्कुल इनकेबल हैं। लेकिन
- 2:19:25वो फीलिंग जरूरी नहीं कि ऑब्जेक्टिव
- 2:19:28मेजरमेंट हो। इसी कांसेप्ट को गगिंस अपनी
- 2:19:31फिलॉसोफी में मेंटल लिमिट्स और पर्सव्ड
- 2:19:34कैपेसिटी के संदर्भ में बार-बार एक्सप्लोर
- 2:19:36करते हैं। उनकी फेमस [संगीत] 40% रूल भी
- 2:19:39इसी ब्रॉडर फ्रेमवर्क का हिस्सा है। यह
- 2:19:42उनका पर्सनल फिलॉसफी फ्रेमवर्क है। कोई
- 2:19:45साइंटिफिकली प्रूवन यूनिवर्सल लॉ नहीं।
- 2:19:48इसका प्रैक्टिकल इंटरप्रिटेशन यह नहीं
- 2:19:50होना चाहिए कि शरीर की इंजरी, मेडिकल
- 2:19:54डेंजर या सीरियस एग्जॉशन को [संगीत]
- 2:19:56इग्नोर किया जाए। असल लेसन है जब माइंड
- 2:20:00बहुत जल्दी बस कहे तब एक बार यह चेक करना
- 2:20:04कि क्या सच में कैपेसिटी खत्म हो गई है या
- 2:20:07रेजिस्टेंस बढ़ गई [संगीत] है। यह
- 2:20:09डिस्टिंशन बहुत पावरफुल है क्योंकि कई बार
- 2:20:12हम थके हुए नहीं होते। हम [संगीत] बस
- 2:20:14बोर्ड होते हैं। कई बार हम इनकेबल नहीं
- 2:20:17होते। हम बस अनकंफर्टेबल होते हैं। कई बार
- 2:20:21हमें टाइम नहीं चाहिए। हमें डिस्ट्रैक्शन
- 2:20:24[संगीत] हटानी होती है। कई बार हमें
- 2:20:26मोटिवेशन नहीं चाहिए। हमें डिसीजन चाहिए।
- 2:20:30लेकिन दूसरी तरफ कभी-कभी शरीर सच में
- 2:20:33रिकवरी मांग रहा होता है। इसलिए टफनेस का
- 2:20:36मतलब शरीर की हर वार्निंग को इग्नोर
- 2:20:38[संगीत] करना नहीं है। टफनेस का मतलब
- 2:20:41सिग्नल्स को समझना और सही डिसीजन लेना है।
- 2:20:44और यही मैच्योरिटी [संगीत] एक्सट्रीम
- 2:20:46मोटिवेशन से ज्यादा इंपॉर्टेंट है। अब
- 2:20:49इमेजिन कीजिए कि आप किसी ऐसी सिचुएशन में
- 2:20:52हैं जहां आपको लगातार प्रेशर मिल रहा है।
- 2:20:55आपने प्रेपरेशन की है। लेकिन एनवायरमेंट
- 2:20:58आपकी एक्सपेक्टेशन के मुताबिक नहीं चल
- 2:21:01रहा। आप थक रहे हैं। आपको डाउट हो रहा है।
- 2:21:04आपके आसपास दूसरे लोग भी स्ट्रगल कर रहे
- 2:21:07हैं। अब आपका माइंड नेचुरली एस्केप
- 2:21:10खोजेगा। काश मैं यहां ना होता। काश मैंने
- 2:21:14यह गोल चुना ही ना होता। काश मैं वापस
- 2:21:17अपनी पुरानी लाइफ में चला जाता। और यह थॉट
- 2:21:20बहुत ह्यूमन है। प्रॉब्लम थॉट आने में
- 2:21:23[संगीत] नहीं है। प्रॉब्लम तब है जब थॉट
- 2:21:25डिसिशन बन जाता है। यही डिफरेंस समझना
- 2:21:28जरूरी है। आपके माइंड में क्विट का थॉट आ
- 2:21:31सकता है। लेकिन थॉट कमांड नहीं है। आप उसे
- 2:21:35ऑब्जर्व कर [संगीत] सकते हैं। मेरा ब्रेन
- 2:21:37अभी एस्केप चाहता है। बस इस सेंटेंस में
- 2:21:41बहुत पावर है क्योंकि अब आप
- 2:21:43[संगीत]
- 2:21:44थॉट के अंदर नहीं है। आप थॉट को देख रहे
- 2:21:46हैं। यह सेल्फ अवेयरनेस है। जब आप कहते
- 2:21:50हैं मैं फेलियर हूं। तो आप अपनी आइडेंटिटी
- 2:21:54को थॉट के साथ मिला रहे हैं। जब आप कहते
- 2:21:57हैं मुझे अभी फेलियर फील हो रहा है। तो आप
- 2:22:00इमोशन को ऑब्जर्व कर रहे हैं। डिफरेंस
- 2:22:03छोटा लगता है। लेकिन साइकोलॉजिकल डिस्टेंस
- 2:22:06क्रिएट [संगीत] करता है। और प्रेशर में
- 2:22:08यही डिस्टेंस यूज़फुल होती है। आपको हर
- 2:22:11फीलिंग पर रिएक्ट नहीं करना। आपको पहले
- 2:22:14उसे [संगीत] नोटिस करना है, फिर इवैल्यूएट
- 2:22:17करना है, फिर डिसाइड करना है। यह स्किल्स
- 2:22:20सिर्फ मिलिट्री ट्रेनिंग में नहीं चाहिए।
- 2:22:23इंटरव्यू में चाहिए, एग्जाम हॉल में
- 2:22:25चाहिए, बिजनेस लॉस में चाहिए, रिलेशनशिप
- 2:22:29कॉन्फ्लिक्ट में चाहिए, पब्लिक
- 2:22:31क्रिटिसिज्म में चाहिए, जिम में चाहिए और
- 2:22:35कंटेंट क्रिएशन में भी। मान लीजिए आपने
- 2:22:38वीडियो बनाई। आपने आवर्स लगाए और व्यूज
- 2:22:42नहीं आए। [संगीत]
- 2:22:43पहला रिएक्शन एल्गोरिदम बेकार है। दूसरा
- 2:22:47मेरे साथ ही ऐसा होता है। तीसरा अब वीडियो
- 2:22:51नहीं बनाऊंगा। लेकिन अगर आप थोड़ा
- 2:22:54डिस्टेंस लेकर देखें। हुक कैसा था? थंबनेल
- 2:22:57कितना क्लियर था? टॉपिक ऑडियंस के लिए
- 2:23:00रेलेवेंट था। रिटेंशन [संगीत] कहां गिरा?
- 2:23:03टाइटल क्या प्रॉमिस कर रहा था? क्या
- 2:23:05फर्स्ट 30 सेकंड स्ट्रांग [संगीत] थे? अब
- 2:23:08इमोशनल फेलियर डाटा में बदल गया। यही
- 2:23:11आफ्टर एक्शन थिंकिंग है और इसी माइंडसेट
- 2:23:14की जरूरत [संगीत] बड़े गोल्स में होती है।
- 2:23:16क्योंकि बड़े गोल्स में फेलियर ऑप्शनल
- 2:23:19नहीं है। आप फेलियर से बचने की कोशिश कर
- 2:23:22सकते हैं। लेकिन ग्रोथ के रास्ते में
- 2:23:24अनसर्टेनिटी अनअवॉयडेबल है। इसलिए बेहतर
- 2:23:27स्ट्रेटजी यह नहीं कि मैं फेल नहीं
- 2:23:30करूंगा। बेहतर स्ट्रेटजी है। अगर फेल हुआ
- 2:23:34तो मैं उससे इंफॉर्मेशन निकालूंगा। यह
- 2:23:37माइंडसेट फेयर को पूरी तरह खत्म नहीं
- 2:23:39करता। लेकिन फेयर की पावर कम कर देता है
- 2:23:42क्योंकि अब फेलियर फाइनल जजमेंट नहीं है।
- 2:23:46फीडबैक है और फीडबैक अनकंफर्टेबल हो सकता
- 2:23:49है लेकिन यूज़फुल [संगीत] भी हो सकता है।
- 2:23:52अब एक और इंपॉर्टेंट चीज हेल वीक जैसी
- 2:23:55ट्रेनिंग का साइकोलॉजिकल इफेक्ट [संगीत]
- 2:23:57सिर्फ उस समय नहीं होता जब आप ट्रेनिंग कर
- 2:24:00रहे होते हैं। उससे पहले की प्रिपरेशन भी
- 2:24:03इंपॉर्टेंट होती है। अगर आपने पहले से
- 2:24:05अपने माइंड को कंट्रोल डिसकंफर्ट का
- 2:24:08एक्सपीरियंस दिया है तो अनफेमिलियर प्रेशर
- 2:24:11थोड़ा लेस अनफॅमिलियर हो सकता है। यही
- 2:24:13रीजन है कि प्रेपरेशन सिर्फ स्किल
- 2:24:15बिल्डिंग नहीं है। प्रेपरेशन इमोशनल
- 2:24:18रिहर्सल भी है। आप पहले से इमेजिन कर सकते
- 2:24:21हैं। अगर मैं टायर्ड हुआ तो क्या करूंगा?
- 2:24:24अगर मेरा प्लान फेल हुआ तो अगर कॉन्फिडेंस
- 2:24:27गिरा तो अगर कोई मुझसे बेहतर निकला तो अगर
- 2:24:31रिजल्ट देर से आया तो यह पैसिमिज्म नहीं
- 2:24:34है। यह मेंटल रिहर्सल है। क्योंकि जब आप
- 2:24:37[संगीत] सिर्फ परफेक्ट सिनेरियो की कल्पना
- 2:24:39करते हैं तो अनएक्सेक्टेड प्रॉब्लम आते ही
- 2:24:42आपका माइंड शॉक में जा सकता है। लेकिन अगर
- 2:24:45आपने पहले से डिफिकल्टी के पॉसिबिलिटीज के
- 2:24:48बारे में सोचा है तो आपका ब्रेन कह सकता
- 2:24:51है। यह भी प्रोसेस का हिस्सा है। यही
- 2:24:54प्रेशर प्रिपरेशन है। इसे अपने एग्जाम में
- 2:24:56अप्लाई कीजिए। सिर्फ यह इमेजिन मत कीजिए
- 2:25:00कि पेपर इजी आएगा और आप सारे क्वेश्चंस कर
- 2:25:03देंगे। इमेजिन कीजिए पहले सेक्शन में दो
- 2:25:06क्वेश्चंस नहीं आए। टाइम [संगीत] कम हो
- 2:25:09रहा है। एक क्वेश्चन पर ज्यादा समय चला
- 2:25:12गया। अब क्या? अगर आपने पहले से स्ट्रेटजी
- 2:25:15[संगीत] बनाई है तो पैनिकिक कम हो सकता
- 2:25:18है। बिजनेस में। अगर फर्स्ट मंथ सेल्स
- 2:25:20नहीं आई तो अगर कस्टमर रिजेक्ट कर दे तो
- 2:25:24अगर प्रोडक्ट में फ्लॉ निकले तो अगर
- 2:25:26कॉम्पिटिट बेहतर ल्च कर दे तो करियर में
- 2:25:30अगर इंटरव्यू रिजेक्ट हो जाए अगर फर्स्ट
- 2:25:32जॉब आपकी उम्मीद के मुताबिक ना हो अगर
- 2:25:35स्किल सीखने में ज्यादा समय लगे यह मेंटल
- 2:25:38रिहर्सल आपको नेगेटिव नहीं बनाती यह
- 2:25:41[संगीत] आपको लेस फ्रजाइल बनाती है
- 2:25:43क्योंकि आप हर अनएक्सेक्टेड प्रॉब्लम को
- 2:25:46पर्सनल डिजास्टर की तरह इंटरप्रेट नहीं
- 2:25:49करते आप उसे सिारियो की तरह देखते हैं और
- 2:25:53यही आर्मोद माइंड का फाउंडेशन है। लेकिन
- 2:25:56हेलवी की कहानी का एक और डीप लेसन है। जब
- 2:25:59एनवायरमेंट इतना डिमांडिंग हो जाए कि आपके
- 2:26:02पास डिस्ट्रैक्शंस के लिए एनर्जी ही ना
- 2:26:04बचे तब आपको अपने बारे में बहुत कुछ दिखाई
- 2:26:08दे सकता है। नॉर्मल लाइफ में हम अपने
- 2:26:10वीकनेस छिपा सकते हैं। बिजी होने का
- 2:26:13एक्सक्यूज दे सकते हैं। फोन में एस्केप कर
- 2:26:16सकते हैं। फ्रेंड्स के साथ टाइम पास कर
- 2:26:18सकते हैं। एंटरटेनमेंट में खो सकते हैं।
- 2:26:21लेकिन एक्सट्रीम [संगीत] प्रेशर में
- 2:26:23एस्केप ऑप्शंस कम हो जाते हैं। और तब आपका
- 2:26:26एक्चुअल सेल्फ सामने [संगीत] आ सकता है।
- 2:26:28आप कितना कंप्लेन करते हैं? आप ब्लेम
- 2:26:31कितनी जल्दी करते हैं? आप प्रेशर में
- 2:26:33दूसरों से कंपेयर करते हैं। आप डिसकंफर्ट
- 2:26:36में डिसीजन कैसे लेते हैं? आप फेलियर के
- 2:26:38बाद वापस [संगीत] कैसे आते हैं? यही सेल्फ
- 2:26:41नॉलेज है और सेल्फ नॉलेज कभी-कभी
- 2:26:43अनकंफर्टेबल होती है क्योंकि आप खुद को
- 2:26:46उतना डिसिप्लिन नहीं पाते जितना समझते थे।
- 2:26:50उतना काम नहीं पाते उतना स्ट्रांग नहीं
- 2:26:53पाते उतना प्रिपयर्ड नहीं पाते लेकिन यही
- 2:26:56डिस्कवरी [संगीत] वैल्यूुएबल है। क्योंकि
- 2:26:58वीकनेस को जानना वीकनेस नहीं है। वीकनेस
- 2:27:02को जानकर [संगीत] भी कुछ ना करना प्रॉब्लम
- 2:27:04है। आपको अपनी लिमिट्स के बारे में गलत
- 2:27:06बिलीफ रखने से कोई फायदा [संगीत] नहीं।
- 2:27:09अगर आपकी एंडोरेंस कम है तो उसे ट्रेन
- 2:27:12कीजिए। अगर फोकस कम है तो उसे ट्रेन
- 2:27:15कीजिए। अगर स्ट्रेस हैंडलिंग वीक है तो
- 2:27:18कंट्रोलोल्ड प्रेशर में प्रैक्टिस [संगीत]
- 2:27:19कीजिए। अगर कम्युनिकेशन वीक है तो बोलिए।
- 2:27:23अगर नॉलेज वीक है तो पढ़िए। अगर
- 2:27:26कंसिस्टेंसी वीक है तो छोटे कमिटमेंट्स
- 2:27:29निभाइए। सेल्फ अवेयरनेस तभी यूज़फुल है जब
- 2:27:33वो एक्शन [संगीत] तक जाए। और यही
- 2:27:35ट्रांसफॉर्मेशन का पैटर्न है। अवेयरनेस,
- 2:27:38[संगीत]
- 2:27:38फिर एक्शन, फिर फीडबैक, फिर करेक्शन, फिर
- 2:27:43रेपटीशन, फिर नया एविडेंस, फिर नई
- 2:27:47आइडेंटिटी। यह साइकिल बार-बार चलती है।
- 2:27:51लेकिन एक पॉइंट पर प्रेशर सिर्फ पर्सनल
- 2:27:53नहीं रहता। जब आप किसी कंपिटिटिव
- 2:27:56एनवायरमेंट में होते हैं तब आसपास के लोग
- 2:27:59भी आपकी साइकोलॉजी को अफेक्ट करते हैं। आप
- 2:28:02किसी दूसरे को [संगीत] स्ट्रगल करते देखते
- 2:28:04हैं। फिर किसी को स्ट्रांग देखते हैं।
- 2:28:07किसी की परफॉर्मेंस आपसे बेहतर [संगीत]
- 2:28:10होती है और अचानक आपका फोकस अपने गोल से
- 2:28:13हटकर दूसरे व्यक्ति पर चला जाता है। वो
- 2:28:17मुझसे बेहतर क्यों है? उसके पास क्या है?
- 2:28:19मैं पीछे क्यों हूं?
- 2:28:21यही कंपटीशन की साइकोलॉजी शुरू होती है और
- 2:28:25यही हमें अगले लेसन तक ले जाती है।
- 2:28:27क्योंकि जब प्रेशर बढ़ता है तो सिर्फ यह
- 2:28:30मैटर नहीं करता कि आप खुद को कितना पुश कर
- 2:28:33सकते हैं। कभी-कभी यह भी मैटर करता है कि
- 2:28:36आप दूसरों के सामने कैसे परफॉर्म करते
- 2:28:38हैं। क्या आप कंपैरिजन से टूटते हैं? क्या
- 2:28:41आप ईगो से रिएक्ट करते हैं? या आप दूसरे
- 2:28:44व्यक्ति की स्ट्रेंथ को देखकर अपने
- 2:28:46स्टैंडर्ड को
- 2:28:47[संगीत]
- 2:28:47ऊपर उठाते हैं? गॉगिंस की जर्नी में एक
- 2:28:50कांसेप्ट आता है जिसे वो टेकिंग सोल्स के
- 2:28:53नाम से डिस्क्राइब करते हैं। इसका मतलब
- 2:28:56किसी को फिजिकली हार्म करना नहीं है। यह
- 2:28:59साइकोलॉजिकल और कंपिटिटिव परफॉर्मेंस का
- 2:29:02कांसेप्ट [संगीत]
- 2:29:02है। और अगली लड़ाई यही है। जब सामने वाला
- 2:29:06आपसे ज्यादा टैलेंटेड, ज्यादा कॉन्फिडेंट
- 2:29:09या ज्यादा प्रिपयर्ड दिखाई दे तो क्या आप
- 2:29:12उसके प्रेजेंस में अपनी परफॉर्मेंस खो
- 2:29:14देंगे? या उसकी परफॉर्मेंस को अपने फोकस
- 2:29:17का फ्यूल बना पाएंगे? कंपटीशन का सबसे
- 2:29:20खतरनाक हिस्सा [संगीत] सामने वाला इंसान
- 2:29:22नहीं होता। कई बार सबसे बड़ा प्रॉब्लम वो
- 2:29:25कहानी होती है जो आपका दिमाग सामने वाले
- 2:29:28को देखकर अपने बारे में बनाना शुरू कर
- 2:29:31देता है। आप किसी को अपने से बेहतर
- 2:29:34परफॉर्म [संगीत] करते देखते हैं और तुरंत
- 2:29:36कंपैरिजन शुरू हो जाता है। यह मुझसे आगे
- 2:29:39है। इसके पास मुझसे ज्यादा टैलेंट है।
- 2:29:42इसके पास ज्यादा रिसोर्सेज हैं। यह
- 2:29:45नेचुरली अच्छा है [संगीत] और धीरे-धीरे
- 2:29:48आपका ध्यान अपने काम से हटकर दूसरे इंसान
- 2:29:52पर चला जाता है। यही कंपटीशन आपकी
- 2:29:54परफॉर्मेंस को कमजोर कर सकता है। लेकिन
- 2:29:57कंपटीशन का दूसरा रूप भी है। आप किसी
- 2:30:00बेहतर व्यक्ति को देखकर यह तय कर सकते हैं
- 2:30:03कि आपका करंट स्टैंडर्ड [संगीत] पर्याप्त
- 2:30:06नहीं है। यही फर्क जेलसी और कंपिटिटिव
- 2:30:09ग्रोथ के बीच है। डेविड गॉगिंस की
- 2:30:11फिलॉसोफी में टेकिंग सोल्स इसी
- 2:30:13साइकोलॉजिकल टेरिटरी से जुड़ा कांसेप्ट
- 2:30:16है। इसका मतलब किसी को नुकसान पहुंचाना
- 2:30:19नहीं है। यह उस मेंटल सिचुएशन को
- 2:30:21डिस्क्राइब करता है जहां अब प्रेशर के बीच
- 2:30:24अपनी परफॉर्मेंस से साइकोलॉजिकल एडवांटेज
- 2:30:27क्रिएट [संगीत] करते हैं और इसका सबसे
- 2:30:29इंटरेस्टिंग हिस्सा यह है कि एडवांटेज
- 2:30:32हमेशा [संगीत] स्ट्रेंथ से नहीं आता। कई
- 2:30:34बार वो कंपोजर से आता है। जब बाकी लोग
- 2:30:37पैनिकिक कर रहे हो और आप काम रहें। जब
- 2:30:40बाकी लोग कंप्लेन कर रहे हो और आप काम
- 2:30:43करते रहें। जब कोई आपको अंडरएस्टीमेट करें
- 2:30:47और आप आर्गुममेंट करने के बजाय परफॉर्मेंस
- 2:30:49दें। यही साइकोलॉजिकल एडवांटेज है। लेकिन
- 2:30:53इसके पीछे एक बहुत डीपर लेसन है। आप
- 2:30:56दूसरों [संगीत] को कंट्रोल नहीं कर सकते।
- 2:30:58आप उनकी प्रिपरेशन कंट्रोल नहीं कर सकते।
- 2:31:01आप उनका टैलेंट कंट्रोल नहीं [संगीत] कर
- 2:31:03सकते। आप यह कंट्रोल नहीं कर सकते कि वे
- 2:31:06कितना अच्छा परफॉर्म करेंगे। लेकिन आप यह
- 2:31:10कंट्रोल कर सकते हैं कि उनके परफॉर्मेंस
- 2:31:12को देखकर आपका माइंड क्या करेगा। यही
- 2:31:16इंटरनल [संगीत] कंट्रोल है। मान लीजिए दो
- 2:31:18स्टूडेंट्स एक ही एग्जाम दे रहे हैं। पहला
- 2:31:21स्टूडेंट आसपास के लोगों को देखता है। कोई
- 2:31:24बहुत तेज लिख रहा है। कोई पहले ही आंसर कर
- 2:31:27चुका है। कोई कॉन्फिडेंट दिख रहा है। अब
- 2:31:30उसका ब्रेन पैनिक [संगीत] करता है। सब
- 2:31:32मुझसे आगे है। उसका फोकस क्वेश्चन से हट
- 2:31:36गया। दूसरा स्टूडेंट [संगीत] भी वही चीज
- 2:31:38देखता है। लेकिन वो खुद से कहता है मुझे
- 2:31:41उनके पेपर नहीं देने हैं। मुझे अपना पेपर
- 2:31:44देना है। बस दोनों ने वही एनवायरमेंट देखा
- 2:31:49लेकिन एक कंपैरिजन में चला गया। दूसरा
- 2:31:52एग्जीक्यूशन में कंपटीशन में यही फर्क
- 2:31:55परफॉर्मेंस बदल सकता है। क्योंकि प्रेशर
- 2:31:57के समय आपका अटेंशन एक लिमिटेड रिसोर्स
- 2:32:00है। अगर उसका बड़ा हिस्सा कंपैरिजन में
- 2:32:02चला गया तो एग्जीक्यूशन के लिए कम बचेगा।
- 2:32:05[संगीत]
- 2:32:06इसीलिए हाई परफॉर्मेंस एनवायरमेंट्स में
- 2:32:08एक स्किल बहुत वैल्यूुएबल होती है। अपने
- 2:32:11फोकस को वापस अपने कंट्रोल जोन में लाना।
- 2:32:15आप पूछ सकते हैं मेरे सामने अभी क्या है?
- 2:32:18एक क्वेश्चन, एक टास्क, एक रैप, एक
- 2:32:22डिसीजन, एक इंटरव्यू आंसर, एक कोडिंग
- 2:32:26प्रॉब्लम, एक प्रेजेंटेशन, एक क्लाइंट,
- 2:32:29[संगीत] एक वीडियो, एक पेज। बस आपको पूरी
- 2:32:34दुनिया को हराना नहीं है। आपको उस मोमेंट
- 2:32:37में अपना काम करना है। यही माइंडसेट
- 2:32:40टेकिंग सोल्स को समझने की ज्यादा यूज़फुल
- 2:32:43दिशा देता है। किसी दूसरे को डिस्ट्रॉय
- 2:32:46करना नहीं। अपने कंपोज़र से प्रेशर के बीच
- 2:32:49सुपीरियर एग्जीक्यूशन करना। और यहां ईगो
- 2:32:53बहुत बड़ा रोल प्ले करता है। जब कोई आपको
- 2:32:56चैलेंज करता है, ईगो चाहती है कि आप उसे
- 2:32:59प्रूफ करें कि [संगीत] आप बेहतर हैं।
- 2:33:01लेकिन परफॉर्मेंस हमेशा प्रूफ देने के लिए
- 2:33:04नहीं करनी चाहिए। [संगीत]
- 2:33:05क्योंकि जब आपका फोकस मुझे उसे हराना है
- 2:33:09बन जाता है तो आपका अटेंशन अपोनेंट पर चला
- 2:33:12जाता है। जब फोकस मुझे अपना बेस्ट
- 2:33:15एग्जीक्यूशन करना है, होता है तो अटेंशन
- 2:33:18टास्क पर रहता है। यह डिफरेंस छोटा लगता
- 2:33:21है। लेकिन प्रेशर में यही डिफरेंस बहुत
- 2:33:24बड़ा हो सकता है। इमेजिन कीजिए आप
- 2:33:26इंटरव्यू रूम में हैं। सामने पैनल है।
- 2:33:29आपसे पहले किसी कैंडिडेट ने बहुत
- 2:33:32इंप्रेसिव आंसर दिया। अब आपका ब्रेन कहता
- 2:33:35है मैं तो इतना अच्छा नहीं बोल सकता। अगर
- 2:33:38आप इस थॉट को पकड़ लेते हैं तो अगले
- 2:33:41क्वेश्चन का आंसर देने से पहले ही आप
- 2:33:43साइकोलॉजिकली [संगीत] पीछे जा चुके हैं।
- 2:33:46लेकिन अगर आप सोचते हैं उसका आंसर उसका
- 2:33:49था। अब मेरा आंसर तो कंपैरिजन टूट जाता
- 2:33:53है। आप प्रेजेंट मोमेंट में वापस आते हैं।
- 2:33:56यही कंपिटिटिव कंपोजर है और यह सिर्फ
- 2:33:59कंपटीशन में नहीं चाहिए। सोशल मीडिया ने
- 2:34:02कंपैरिजन को हमारी डेली लाइफ का हिस्सा
- 2:34:04बना दिया है। आप Instagram खोलते हैं।
- 2:34:07किसी की नई कार, किसी की [संगीत] बॉडी
- 2:34:10ट्रांसफॉर्मेशन, किसी का फॉरेन ट्रिप,
- 2:34:13किसी का स्टार्टअप, किसी का रिलेशनशिप,
- 2:34:17किसी [संगीत] की सैलरी, किसी की YouTube
- 2:34:19ग्रोथ, किसी का कॉलेज एडमिशन, किसी की
- 2:34:23अचीवमेंट और कुछ मिनट्स [संगीत] बाद आपको
- 2:34:26अपनी पूरी लाइफ छोटी लगने लगती है। क्यों?
- 2:34:30क्योंकि आप अपनी बिहाइंड द सीन्स [संगीत]
- 2:34:32लाइफ को किसी और की हाईलाइट रील से कंपेयर
- 2:34:35कर रहे हैं। यह कंपैरिजन साइकोलॉजिकली
- 2:34:37अनफेयर है। लेकिन ब्रेन को यह फर्क
- 2:34:40[संगीत] हमेशा नहीं दिखता। वो सिर्फ आउटकम
- 2:34:42देखता है और फिर आपके अंदर इनडडीिक्वसी
- 2:34:46पैदा हो सकती है। मैं पीछे हूं। मैंने कुछ
- 2:34:50नहीं किया। सब आगे निकल गए। लेकिन यहां
- 2:34:53वही कंपिटिटिव प्रिंसिपल लागू होता है।
- 2:34:56दूसरे की लाइफ आपका स्कोरबोर्ड नहीं है।
- 2:34:59आपका स्कोरबोर्ड आपका ओन ट्रेजेजरी है।
- 2:35:02[संगीत] क्या आप पिछले साल से बेहतर हैं?
- 2:35:04क्या आपकी स्किल बढ़ी? क्या आपका
- 2:35:07डिसिप्लिन बढ़ा? क्या आपका फोकस इंप्रूव
- 2:35:09हुआ? क्या आप अपनी मिस्टेक्स जल्दी
- 2:35:12पहचानते हैं? क्या आप प्रेशर में ज्यादा
- 2:35:14स्टेबल हैं? क्या आप अपने कमिटमेंट्स
- 2:35:17ज्यादा कंसिस्टेंटली निभाते हैं? यही
- 2:35:19मीनिंगफुल कंपटीशन है। अपने पुराने
- 2:35:22स्टैंडर्ड [संगीत] से कंपटीशन और यही शायद
- 2:35:25सबसे डिफिकल्ट कंपटीशन भी है। क्योंकि
- 2:35:28दूसरे व्यक्ति [संगीत] से हारने पर आप कह
- 2:35:30सकते हैं वो बेहतर था। लेकिन अपने पुराने
- 2:35:34सेल्फ के सामने एक्सक्यूज बनाना ज्यादा
- 2:35:36मुश्किल होता है। आप जानते हैं कि आपने
- 2:35:39कहां कॉम्प्रोमाइज किया। आप जानते हैं कि
- 2:35:42आपने कितना टाइम वेस्ट किया। आप जानते हैं
- 2:35:45कि कौन सा काम आप कर सकते थे लेकिन नहीं
- 2:35:48किया। यही अकाउंटेबिलिटी वापस आती है और
- 2:35:52अकाउंटेबिलिटी कंपिटिटिव साइकोलॉजी को
- 2:35:55हेल्दी बनाती है। आप दूसरे व्यक्ति को
- 2:35:57देखकर खुद को इंसल्ट नहीं करते। आप उससे
- 2:36:00इंफॉर्मेशन लेते हैं। अगर कोई आपसे बेहतर
- 2:36:03है तो उसके पास शायद कुछ ऐसा है जो आप सीख
- 2:36:07सकते हैं। उसकी डिसिप्लिन, उसका प्रोसेस,
- 2:36:11[संगीत] उसकी प्रेपरेशन, उसका
- 2:36:13कम्युनिकेशन, उसका एक्सपीरियंस, उसका
- 2:36:16एनवायरमेंट, उसका फोकस। आपको उसकी पूरी
- 2:36:20पर्सनालिटी कॉपी नहीं करनी। बस यूजफुल
- 2:36:24बिहेवियर आइडेंटिफाई करना है। यही ग्रोथ
- 2:36:26माइंडसेट का प्रैक्टिकल फॉर्म है। लेकिन
- 2:36:29कभी-कभी कंपटीशन में एक और ट्रैप आता है।
- 2:36:32आप दूसरे व्यक्ति को [संगीत] बीट करने के
- 2:36:34लिए अपनी लिमिट्स इग्नोर करने लगते हैं।
- 2:36:37यही कंपिटिटिव ईगो डेंजरस हो सकती है। अगर
- 2:36:40कोई व्यक्ति 100 पुश अप्स कर रहा है तो
- 2:36:43आपका शरीर [संगीत] तैयार नहीं होने पर
- 2:36:45सिर्फ ईगो के कारण 100 करने की कोशिश करना
- 2:36:48इंटेलिजेंट कंपटीशन नहीं है। अगर कोई रोज
- 2:36:5212 घंटे पढ़ता है तो बिना कॉन्टेक्स्ट
- 2:36:55समझे खुद को भी [संगीत] 12 घंटे बैठाने की
- 2:36:58कोशिश करना जरूरी नहीं। अगर कोई क्रिएटर
- 2:37:00रोज वीडियो अपलोड करता है तो आपकी
- 2:37:03क्वालिटी और [संगीत] कैपेसिटी अलग हो सकती
- 2:37:05है। अगर कोई एंटरप्रेन्योर 16 घंटे काम
- 2:37:08करता है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपको भी
- 2:37:12उसी स्ेड्यूल [संगीत] को कॉपी करना चाहिए।
- 2:37:14कंपटीशन से स्टैंडर्ड्स सीखिए। लेकिन अपनी
- 2:37:17रियलिटी को इग्नोर मत कीजिए। क्योंकि गोल
- 2:37:21दूसरे की आइडेंटिटी बनना नहीं है। गोल
- 2:37:24अपनी कैपेसिटी को डेवलप करना है।
- 2:37:26[संगीत]
- 2:37:26यही वजह है कि टेकिंग सोल्स को लिटरल
- 2:37:29अग्रेशन की तरह समझना गलत होगा। इस
- 2:37:32[संगीत] कांसेप्ट की यूज़फुल इंटरप्रिटेशन
- 2:37:34यह है कि जब कंपटीशन आपको मेंटली प्रेशर
- 2:37:37करे तब अपनी इमोशनल स्टेबिलिटी और
- 2:37:40एग्जीक्यूशन [संगीत] से उस प्रेशर को अपने
- 2:37:43ऊपर हावी मत होने दीजिए। आपको अपोनेंट को
- 2:37:46हेट करने की जरूरत नहीं। आपको उसे [संगीत]
- 2:37:48रिस्पेक्ट करते हुए भी अपने काम पर फोकस्ड
- 2:37:52रहना है। कई बार सबसे पावरफुल कंपिटिटिव
- 2:37:55मूव कोई अग्रेसिव स्टेटमेंट नहीं होता। बस
- 2:37:58कंसिस्टेंसी होती है। दूसरा व्यक्ति आज
- 2:38:01बहुत अच्छा परफॉर्म करता है। [संगीत] आप
- 2:38:03पैनिकिक नहीं करते। आप वापस प्रैक्टिस पर
- 2:38:06जाते हैं। वो कल भी अच्छा परफॉर्म करता
- 2:38:09है। आप फिर प्रैक्टिस करते हैं। एक महीने
- 2:38:12बाद भी वो आगे है। आप फिर प्रैक्टिस करते
- 2:38:15हैं। क्योंकि आपका गोल इमीडिएट इमोशनल
- 2:38:18विक्ट्री नहीं है। आपका गोल लॉन्ग टर्म
- 2:38:21कैपेबिलिटी है। यह पेशेंस कंपिटिटिव
- 2:38:23साइकोलॉजी का अंडररेटेड हिस्सा है।
- 2:38:26क्योंकि ईगो इमीडिएट रिजल्ट चाहती है।
- 2:38:29लेकिन स्किल टाइम लेती है और यही जगह है
- 2:38:32जहां बहुत लोग टूटते हैं। वे देखते हैं कि
- 2:38:35दूसरा व्यक्ति उनसे आगे है। फिर वे तेजी
- 2:38:38से कैचअप करना चाहते हैं। ओवरवर्क करते
- 2:38:40हैं। जल्दी करते हैं। गलत शॉर्टकट्स
- 2:38:43[संगीत] लेते हैं। फिर बर्न आउट आता है।
- 2:38:46फिर कंसिस्टेंसी टूटती है। फिर वे वापस
- 2:38:49वहीं पहुंच जाते हैं। इसलिए कंपटीशन में
- 2:38:52सिर्फ इंटेंसिटी नहीं चाहिए।
- 2:38:54सस्टेनेबिलिटी भी चाहिए। आपको इतना
- 2:38:57स्ट्रांग बनना है कि आप लंबे समय तक गेम
- 2:39:00[संगीत] में रह सकें। क्योंकि कई कंपटीशंस
- 2:39:02टैलेंट से नहीं स्टेइंग पावर से भी डिसाइड
- 2:39:05होते हैं। आप शायद सबसे टैलेंटेड व्यक्ति
- 2:39:08नहीं हैं। लेकिन अगर आप सीखते रहते हैं,
- 2:39:11इंप्रूव करते रहते हैं, मिस्टेक्स करेक्ट
- 2:39:14करते रहते हैं और लंबे समय तक कंसिस्टेंट
- 2:39:17रहते हैं तो आपकी पोजीशन बदल सकती है। यह
- 2:39:21कोई गारंटी नहीं है। लेकिन प्रोबेबिलिटी
- 2:39:24बदलती है और यही रियलिस्टिक एंबिशन है। अब
- 2:39:28एक और अनकंफर्टेबल ट्रुथ। [संगीत] कई बार
- 2:39:31हम दूसरे लोगों से इसलिए डरते हैं क्योंकि
- 2:39:34उनकी प्रेजेंस हमारे एक्सक्यूसेस को
- 2:39:37एक्सपोज कर देती है। आप कहते हैं मेरे पास
- 2:39:40टाइम नहीं है। फिर आप किसी ऐसे व्यक्ति को
- 2:39:43देखते हैं जो लिमिटेड रिसोर्सेज के बावजूद
- 2:39:46काम कर रहा है। आप कहते हैं मेरे पास
- 2:39:49टैलेंट नहीं है। फिर कोई एवरेज शुरुआत
- 2:39:52वाला व्यक्ति लगातार इंप्रूव करता हुआ
- 2:39:54दिखाई देता है। आप कहते हैं [संगीत] मेरे
- 2:39:57पास गाइडेंस नहीं है। फिर कोई व्यक्ति
- 2:40:00बुक्स, फ्री रिसोर्सेज और प्रैक्टिस से
- 2:40:03आगे बढ़ता दिखता है। यह देखकर ईगो
- 2:40:06अनकंफर्टेबल हो सकती है। क्योंकि अब आपकी
- 2:40:09कहानी कमजोर पड़ रही है। लेकिन मैच्योर
- 2:40:12व्यक्ति इस डिसकंफर्ट से भागता नहीं। वो
- 2:40:15पूछता है क्या इस व्यक्ति की जर्नी में
- 2:40:17कोई ऐसी चीज है जिसे मैं सीख सकता हूं?
- 2:40:21यही मोमेंट कंपैरिजन को टीचर बना देता है
- 2:40:24और यही सेल्फ [संगीत] रिस्पेक्ट भी है।
- 2:40:26सेल्फ रिस्पेक्ट का मतलब खुद को हमेशा
- 2:40:28सुपीरियर समझना नहीं है। सेल्फ रिस्पेक्ट
- 2:40:31का मतलब अपनी कमजोरी स्वीकार करके उस पर
- 2:40:35काम करने की क्षमता रखना है। अगर आप हर
- 2:40:38बार किसी बेहतर व्यक्ति को देखकर
- 2:40:40इनसिक्योर हो जाते हैं तो आपका ईगो
- 2:40:43फ्रजाइल है। लेकिन अगर आप बेहतर व्यक्ति
- 2:40:46को देखकर क्यूरियस होते हैं, तो आपका
- 2:40:48माइंडसेट मजबूत हो रहा है। आप कह सकते हैं
- 2:40:52अभी वह मुझसे आगे है। बस अभी यह शब्द
- 2:40:56इंपॉर्टेंट है क्योंकि वह मुझसे बेहतर है।
- 2:41:00आइडेंटिटी स्टेटमेंट बन सकता है। लेकिन वो
- 2:41:03अभी मुझसे बेहतर परफॉर्म कर रहा है। एक
- 2:41:06करंट ऑब्जरवेशन है। ऑब्जरवेशन चेंज
- 2:41:08[संगीत] हो सकती है। आइडेंटिटी को
- 2:41:10अननेसेसरी परमानेंट मत बनाइए। लेकिन इसका
- 2:41:14मतलब यह भी नहीं कि हर कंपटीशन में आपको
- 2:41:18जीतना ही है। कुछ लोग [संगीत] आपसे बेहतर
- 2:41:20होंगे। कुछ सिचुएशंस में आप हारेंगे। कुछ
- 2:41:24फील्ड्स में आप एवरेज रहेंगे। यह नॉर्मल
- 2:41:28है। मेंटल टफनेस [संगीत] का मतलब हर जगह
- 2:41:31नंबर वन होना नहीं। मेंटल टफनेस का मतलब
- 2:41:34हार के बाद अपनी आइडेंटिटी कोलैप्स ना
- 2:41:37होने देना भी है। आप हार सकते हैं [संगीत]
- 2:41:40और फिर भी सीख सकते हैं। आप रिजेक्ट हो
- 2:41:43सकते हैं और फिर भी इंप्रूव कर सकते हैं।
- 2:41:46आप किसी से पीछे हो सकते हैं और फिर भी
- 2:41:49अपने स्टैंडर्ड्स [संगीत] बढ़ा सकते हैं।
- 2:41:51यही इमोशनल स्टेबिलिटी है और जब इमोशनल
- 2:41:55स्टेबिलिटी बढ़ती है तो परफॉर्मेंस भी
- 2:41:57अक्सर बेहतर होती है क्योंकि आप एनर्जी को
- 2:42:00रिएक्शन [संगीत] में खर्च नहीं करते। आप
- 2:42:03उसे एग्जीक्यूशन में लगाते हैं। अब इमेजिन
- 2:42:06कीजिए एक एथलीट रेस के बीच में है। उसे
- 2:42:09पता [संगीत] है कि सामने वाला तेज है। अगर
- 2:42:11वह हर सेकंड पीछे मुड़कर देखता रहेगा तो
- 2:42:15उसका रिदमम टूटेगा। लेकिन अगर वो अपनी
- 2:42:18पेस, ब्रीदीिंग और फॉर्म पर फोकस रखता है
- 2:42:21तो वो अपने एक्चुअल परफॉर्मेंस को
- 2:42:23मैक्सिमाइज कर सकता है। लाइफ भी कुछ
- 2:42:25[संगीत] ऐसी है। आपको कभी-कभी
- 2:42:28कॉम्पिटिटर्स को देखना चाहिए। मार्केट
- 2:42:31समझना चाहिए। [संगीत] स्टैंडर्ड्स समझने
- 2:42:34चाहिए। लेकिन हर मिनट स्कोरबोर्ड देखने से
- 2:42:37परफॉर्मेंस [संगीत] इंप्रूव नहीं होती।
- 2:42:39कभी-कभी आपको स्कोरबोर्ड छोड़कर ट्रेनिंग
- 2:42:42रूम में वापस जाना पड़ता है और यही लेसन
- 2:42:45[संगीत] करियर में भी लागू होता है। आप
- 2:42:47किसी दूसरे की सैलरी देखकर फ्रस्ट्रेटेड
- 2:42:50हो सकते हैं। लेकिन सैलरी देखकर स्किल
- 2:42:53नहीं बढ़ेगी। आपको पूछना होगा उस लेवल तक
- 2:42:57पहुंचने के लिए कौन सी स्किल्स चाहिए?
- 2:42:59[संगीत] कम्युनिकेशन, टेक्निकल नॉलेज,
- 2:43:02लीडरशिप, नेटवर्किंग, एक्सपीरियंस,
- 2:43:06नेगोशिएशन, प्रॉब्लम सॉल्विंग। अब
- 2:43:08कंपैरिजन एक्शनेबल हो गया। यही यूजफुल
- 2:43:12कंपटीशन है। आप किसी दूसरे की सक्सेस को
- 2:43:15अपनी फेलियर की तरह देखना बंद करते हैं।
- 2:43:18आप उसे इंफॉर्मेशन की तरह देखते हैं और
- 2:43:21इंफॉर्मेशन को एक्शन में कन्वर्ट करते
- 2:43:23हैं। यही ट्रांसफॉर्मेशन है। लेकिन
- 2:43:26कंपटीशन का एक और डीपर लेयर है। कभी-कभी
- 2:43:29सामने वाला कोई दूसरा इंसान नहीं होता।
- 2:43:32सामने आपका अपना पुराना वर्जन होता है। वो
- 2:43:36वर्जन जो मुश्किल आते ही क्विट कर देता
- 2:43:38था। वो वर्जन जो अप्रूवल के पीछे भागता
- 2:43:41था। वो वर्जन जो अपने गोल से ज्यादा
- 2:43:44कंफर्ट को प्रोटेक्ट करता था। वो वर्जन जो
- 2:43:48हर फेलियर का रीजन बाहर ढूंढता था। अब आप
- 2:43:51उससे कम्पीट कर रहे हैं। आज आपने फोन दूर
- 2:43:54रखा। आपका पुराना सेल्फ हार गया। आज आपने
- 2:43:58डिफिकल्ट टास्क पूरा किया। पुराना पैटर्न
- 2:44:02कमजोर हुआ। आज आपने फेलियर एनालाइज
- 2:44:05[संगीत] किया। पुरानी अवॉयडेंस थोड़ी
- 2:44:07कमजोर हुई। आज आपने मूड खराब होने के
- 2:44:11बावजूद अपना मिनिमम कमिटमेंट पूरा किया।
- 2:44:14नई आइडेंटिटी मजबूत हुई। यही डेली कंपटीशन
- 2:44:18है और यही सबसे मीनिंगफुल कंपटीशन है।
- 2:44:21क्योंकि अगर आप अपने पुराने सेल्फ से
- 2:44:24लगातार बेहतर डिसीजंस लेते हैं तो कुछ समय
- 2:44:27बाद आपकी पूरी लाइफ का डायरेक्शन [संगीत]
- 2:44:29बदल सकता है। लेकिन यह प्रोसेस एक और कठिन
- 2:44:33सवाल सामने लाता है। क्योंकि कंपटीशन में
- 2:44:36सिर्फ दूसरे लोगों का प्रेशर नहीं होता।
- 2:44:39कभी-कभी आपका अपना माइंड ही अपोनेंट बन
- 2:44:42जाता है। आप गोल जानते हैं। आप स्टैंडर्ड
- 2:44:45जानते हैं। आपको पता है क्या करना है। फिर
- 2:44:48भी एक दिन ऐसा आता [संगीत] है जब मोटिवेशन
- 2:44:51गायब हो जाती है। बॉडी टायर्ड होती है।
- 2:44:54माइंड कहता है आज छोड़ दें। और उस मोमेंट
- 2:44:58में कोई कॉम्पिटिट सामने नहीं [संगीत]
- 2:45:00होता। कोई ऑडियंस नहीं, कोई अप्लॉज़ नहीं,
- 2:45:04कोई एक्सटर्नल [संगीत] प्रेशर नहीं। बस आप
- 2:45:07और आपकी क्विट करने की इच्छा यही पता चलता
- 2:45:10है कि आपकी डिसिप्लिन कितनी रियल है।
- 2:45:13क्योंकि जब बाहर का प्रेशर खत्म हो जाता
- 2:45:15है तब अंदर का प्रेशर शुरू होता है। और
- 2:45:18अगला लेसन इसी इनविज़िबल अपोनेंट के बारे
- 2:45:22में है। जब आपका अपना माइंड आपको कन्विंस
- 2:45:24[संगीत] करने लगे कि अब रुक जाना चाहिए।
- 2:45:27तब आप कैसे पहचानेंगे कि आपको सच में
- 2:45:30रेस्ट चाहिए या आपका ब्रेन सिर्फ
- 2:45:32डिसकंफर्ट से एस्केप चाहता है। जब आपका
- 2:45:35अपना माइंड आपको कन्विंस करने लगे कि अब
- 2:45:38रुक जाना चाहिए तब सबसे मुश्किल [संगीत]
- 2:45:40काम होता है यह समझना कि सामने असली
- 2:45:43लिमिटेशन है या सिर्फ रेजिस्टेंस। क्योंकि
- 2:45:46दोनों की आवाज कई बार एक जैसी सुनाई देती
- 2:45:49है। एक तरफ आपका शरीर कहता है कि उसे
- 2:45:52रिकवरी चाहिए। दूसरी तरफ आपका ब्रेन
- 2:45:56डिसकंफर्ट से बचने के लिए कहता है कि बस
- 2:45:59अब छोड़ दो। और अगर आपने इन दोनों के बीच
- 2:46:02का [संगीत] फर्क समझना नहीं सीखा तो आप या
- 2:46:05तो जरूरत से पहले क्विट करेंगे या जरूरत
- 2:46:08[संगीत] से ज्यादा पुश करेंगे। दोनों ही
- 2:46:11गलत है। गगिंस की जर्नी में एक चीज
- 2:46:14बार-बार दिखाई देती है। जब [संगीत]
- 2:46:16सिचुएशन उसके खिलाफ गई तो उसका पहला
- 2:46:18रिएक्शन हमेशा जीत नहीं था। फेलियर आया,
- 2:46:22सेटबैक आया। बॉडी ने जवाब दिया, ट्रेनिंग
- 2:46:26ने तोड़ा और कई बार उसे वहीं से पीछे
- 2:46:29लौटना पड़ा। लेकिन [संगीत] उसके लिए
- 2:46:32सेटबैक का मतलब यह नहीं था कि पूरी
- 2:46:35आइडेंटिटी [संगीत] खत्म हो गई। यही एक
- 2:46:38बहुत इंपॉर्टेंट साइकोलॉजिकल डिफरेंस है।
- 2:46:40फेलियर और क्विटिंग एक चीज नहीं है।
- 2:46:43फेलियर का मतलब है [संगीत] कि इस अटेम्प्ट
- 2:46:45में आप सफल नहीं हुए। क्विटिंग का मतलब है
- 2:46:48कि आपने तय कर लिया कि अब आगे कोशिश नहीं
- 2:46:52करनी। इन दोनों के [संगीत] बीच बहुत बड़ा
- 2:46:54अंतर है। आप एग्जाम में फेल हो सकते हैं।
- 2:46:57इंटरव्यू में रिजेक्ट हो सकते हैं। बिजनेस
- 2:47:00में नुकसान हो सकता है। YouTube वीडियो
- 2:47:02फ्लॉप हो सकती है। कोडिंग सीखते [संगीत]
- 2:47:05समय बार-बार एरर आ सकती है। लेकिन इनमें
- 2:47:08से कोई भी घटना अपने आप में यह प्रूव नहीं
- 2:47:11करती कि आप इनकैपेबल हैं। वो सिर्फ यह
- 2:47:14बताती है कि आपका करंट मेथड पर्याप्त नहीं
- 2:47:17था। या आपकी प्रिपरेशन अभी उस लेवल तक
- 2:47:20नहीं पहुंची [संगीत] थी। लेकिन हमारा
- 2:47:23माइंड अक्सर डाटा को आइडेंटिटी बना देता
- 2:47:25है। एक फेलियर हुआ और माइंड कहता है मैं
- 2:47:29फेलियर हूं। एक रिजेक्शन मिला और माइंड
- 2:47:33कहता है मेरे अंदर कुछ नहीं है। एक कठिन
- 2:47:36चैप्टर समझ नहीं आया और माइंड कहता है मैं
- 2:47:40पढ़ाई के लायक नहीं हूं।
- 2:47:42यही वो मोमेंट है जहां क्विटिंग शुरू होती
- 2:47:45है। पहले एक्शन रुकता है। फिर कंसिस्टेंसी
- 2:47:48[संगीत] रुकती है। फिर आइडेंटिटी बदलती
- 2:47:50है। और कुछ समय बाद इंसान अपने डिसीजन को
- 2:47:54जस्टिफाई करने के लिए एक कहानी बना लेता
- 2:47:57है। मेरे बस की बात नहीं थी। मेरे पास
- 2:48:00रिसोर्सेज नहीं थे। मेरी किस्मत खराब थी।
- 2:48:04दूसरे लोग ज्यादा टैलेंटेड थे। हो सकता है
- 2:48:07इनमें से कुछ बातें सच हो।
- 2:48:10लेकिन सवाल यह है इनमें से आपके कंट्रोल
- 2:48:13में क्या था? क्योंकि यही अकाउंटेबिलिटी
- 2:48:15का असली टेस्ट है। आप हर परिस्थिति
- 2:48:18कंट्रोल नहीं कर सकते लेकिन अगला रिस्पांस
- 2:48:21अक्सर कंट्रोल कर सकते हैं। गगिंस के
- 2:48:24एक्सपीरियंस से निकलने वाली [संगीत] बड़ी
- 2:48:25लर्निंग यही है कि डिसकंफर्ट के मोमेंट
- 2:48:28में माइंड हमेशा ऑब्जेक्टिव एडवाइजर नहीं
- 2:48:31होता। कई बार माइंड सिर्फ इमीडिएट रिलीफ
- 2:48:34चाहता है। जब पढ़ाई बोरिंग हो जाती है,
- 2:48:37फोन उठाने का मन करता है। जब वर्कआउट
- 2:48:40मुश्किल हो जाता है, सेट छोड़ने का मन
- 2:48:43करता है। जब कोई स्किल्स समझ नहीं आती,
- 2:48:46एंटरटेनमेंट [संगीत] ज्यादा अट्रैक्टिव
- 2:48:48लगने लगता है। जब कई वीडियोस पर व्यूज
- 2:48:50नहीं आते, अपलोड बंद करने का मन करता है।
- 2:48:53और ध्यान से देखो। इन सभी सिचुएशंस में एक
- 2:48:57कॉमन चीज है। माइंड फ्यूचर रिवॉर्ड
- 2:48:59[संगीत] की तुलना में प्रेजेंट डिसकंफर्ट
- 2:49:01को ज्यादा इंपॉर्टेंट बना देता है।
- 2:49:03साइकोलॉजी में इसे समझने का एक सिंपल
- 2:49:06तरीका है। ब्रेन इमीडिएट रिलीफ को बहुत
- 2:49:09पावरफुल मानता है। अगर कोई काम आपको
- 2:49:12अनकंफर्टेबल कर रहा है तो उससे बाहर
- 2:49:14निकलते [संगीत] ही टेंशन कम हो जाती है।
- 2:49:17आपने पढ़ाई छोड़ी, रिलीफ मिला। आपने
- 2:49:20वर्कआउट छोड़ दिया। रिलीफ मिला। आपने
- 2:49:24डिफिकल्ट प्रोजेक्ट पोस्टपोन कर दिया।
- 2:49:26रिलीफ मिला। आपने रिजेक्शन के बाद कोशिश
- 2:49:29बंद कर दी। रिलीफ मिला और ब्रेन ने एक
- 2:49:33लेसन सीख लिया। जब डिसकंफर्ट आए एस्केप
- 2:49:37करो। यही कंफर्ट एडिक्शन बनती है। यह
- 2:49:40एडिक्शन हमेशा किसी सब्सटेंस की तरह दिखाई
- 2:49:43नहीं देती। कभी यह स्क्रोलिंग होती है।
- 2:49:46[संगीत] कभी गेमिंग, कभी लगातार प्लानिंग,
- 2:49:49कभी मोटिवेशन वीडियोस देखना, कभी दूसरों
- 2:49:53की सक्सेस [संगीत] देखना और कभी सिर्फ
- 2:49:56इतना कहना कल से शुरू करूंगा। प्रॉब्लम यह
- 2:50:00नहीं कि आप रेस्ट लेते हैं। प्रॉब्लम यह
- 2:50:02है कि रेस्ट और एस्केप एक जैसे दिखने लगते
- 2:50:05हैं। रील रिकवरी आपको स्ट्रांगर बनाती है।
- 2:50:09एस्केप सिर्फ अनकंफर्टेबल मोमेंट को
- 2:50:11पोस्टपोन करता है। इसलिए अगली बार जब आपका
- 2:50:15माइंड कहे आज नहीं तो तुरंत खुद [संगीत]
- 2:50:18को कमजोर मत बोलो। बस एक सवाल पूछो। क्या
- 2:50:22मुझे सच में रिकवरी चाहिए? या मैं सिर्फ
- 2:50:25डिसकंफर्ट से बचना चाहता हूं? अगर बॉडी
- 2:50:28में सीरियस पेन है, इंजरी [संगीत] का
- 2:50:30रिस्क है, इलनेस है या रिकवरी की वास्तविक
- 2:50:34जरूरत है तो रिस्पांसिबल डिसीजन लेना
- 2:50:37वीकनेस नहीं है। मेंटल टफनेस का मतलब शरीर
- 2:50:40को डैमेज करना नहीं है। मेंटल टफनेस का
- 2:50:43मतलब है डिसकंफर्ट और डेंजर के बीच फर्क
- 2:50:46समझना। लेकिन अगर समस्या सिर्फ बॉडम है,
- 2:50:50अगर प्रॉब्लम सिर्फ फेयर है, अगर प्रॉब्लम
- 2:50:53सिर्फ यह है कि काम मुश्किल हो गया है, तो
- 2:50:56शायद आपको क्विट करने की जरूरत नहीं। शायद
- 2:50:59आपको सिर्फ अगला सेफ स्टेप लेना है। पूरा
- 2:51:02माउंटेन मत देखो। बस अगला कदम देखो। मुझे
- 2:51:06अगले 3 घंटे पढ़ना है। यह सोचकर माइंड
- 2:51:10रेजिस्टेंस पैदा कर सकता है। लेकिन मुझे
- 2:51:13अगले 20 मिनट्स सिर्फ एक टॉपिक पर काम
- 2:51:16करना है। यह मैनेजेबल लगता है। मुझे पूरी
- 2:51:20कोडिंग सीखनी है। माइंड डर सकता है। लेकिन
- 2:51:23मुझे आज सिर्फ यह एक एरर समझनी है। यह
- 2:51:27एक्शन बन जाता है। मुझे पूरी जिंदगी बदलनी
- 2:51:30है। यह ओवरवेल्मिंग है। लेकिन आज मुझे
- 2:51:34अपने पुराने पैटर्न का एक हिस्सा तोड़ना
- 2:51:36है। यह पॉसिबल है। यही स्ट्रेटजी
- 2:51:39डिसकंफर्ट को छोटे पीसेस में डिवाइड
- 2:51:41[संगीत] करती है। और हर बार जब आप एस्केप
- 2:51:45करने के बजाय कॉन्शियसली एक छोटा [संगीत]
- 2:51:47सेफ स्टेप लेते हैं। आप अपने ब्रेन को नया
- 2:51:50एविडेंस देते हैं। डिसकंफर्ट आया और मैं
- 2:51:54फिर भी एक्शन ले पाया। एक बार, फिर दूसरी
- 2:51:57बार, फिर तीसरी बार, धीरे-धीरे आपका सेल्फ
- 2:52:02इमेज [संगीत] बदलता है। आप अपने बारे में
- 2:52:04सिर्फ सोचते नहीं कि आप डिसिप्लिन है।
- 2:52:07आपके पास उसका एविडेंस आने लगता है और
- 2:52:10एविडेंस से कॉन्फिडेंस बनता है। इसीलिए
- 2:52:13कॉन्फिडेंस हमेशा शुरुआत में नहीं आता। कई
- 2:52:16लोग कॉन्फिडेंस का इंतजार करते रहते हैं।
- 2:52:19जब कॉन्फिडेंस आएगा तब शुरू करूंगा। लेकिन
- 2:52:22कई [संगीत] बार सीक्वेंस उल्टा होता है।
- 2:52:25पहले एक्शन आता है। फिर एविडेंस, फिर
- 2:52:28सेल्फ ट्रस्ट, फिर कॉन्फिडेंस और फिर बड़ा
- 2:52:32एक्शन। गगिंस की कहानी [संगीत] में भी
- 2:52:34ट्रांसफॉर्मेशन किसी मैजिकल मोमेंट से
- 2:52:37नहीं बनी। उसने अपने पुराने लिमिट्स को
- 2:52:40बार-बार चैलेंज किया। हर सेटबैक ने एक
- 2:52:43अनकंफर्टेबल क्वेश्चन पूछा। क्या तुम इसे
- 2:52:46फाइनल वर्डिक मानोगे? या फीडबैक? यही सवाल
- 2:52:51आपकी जिंदगी में [संगीत] भी लागू होता है।
- 2:52:53तुम्हारी पिछली मार्कशीट फाइनल वर्डिक्ट
- 2:52:55है? नहीं। तुम्हारा रिजेक्टेड इंटरव्यू
- 2:52:58फाइनल वर्डिक्ट है? नहीं। तुम्हारे पिछले
- 2:53:01[संगीत] फेल्ड अटेम्प्ट्स फाइनल वर्डिक्ट
- 2:53:03है। नहीं। वे एविडेंस है। कुछ अच्छा
- 2:53:07एविडेंस, कुछ खराब एविडेंस। कुछ इनकंप्लीट
- 2:53:11एविडेंस। लेकिन फाइनल आइडेंटिटी नहीं। और
- 2:53:15शायद सबसे डेंजरस क्विटिंग तब होती है जब
- 2:53:18इंसान बाहर से काम कर रहा होता है। लेकिन
- 2:53:21अंदर से पहले ही हार चुका होता है। वो
- 2:53:24क्लास में बैठता है लेकिन मेंटली एब्सेंट
- 2:53:27है। जिम जाता है [संगीत] लेकिन हर सेट से
- 2:53:30पहले एक्सक्यूज ढूंढता है। वीडियो अपलोड
- 2:53:33करता है। लेकिन पहले से मान चुका है कि
- 2:53:36कोई [संगीत] नहीं देखेगा। एग्जाम की
- 2:53:38तैयारी करता है। लेकिन अंदर से कह चुका है
- 2:53:41कि सिलेक्शन [संगीत] नहीं होगा। ऐसे में
- 2:53:44शरीर काम कर रहा होता है। लेकिन आइडेंटिटी
- 2:53:47पीछे हट चुकी होती है। इसलिए कभी-कभी असली
- 2:53:50बैटल टास्क के साथ नहीं होती। बैटल उस
- 2:53:54कहानी के साथ [संगीत] होती है जो आपका
- 2:53:56माइंड उस टास्क के बारे में बना रहा है।
- 2:53:59यह बहुत मुश्किल है। मैं नहीं कर पाऊंगा।
- 2:54:02मेरे पास इनफ टैलेंट नहीं है। इतना टाइम
- 2:54:05[संगीत] लग जाएगा। अगर फेल हो गया तो इन
- 2:54:08थॉट्स को खत्म करना जरूरी नहीं। आपका
- 2:54:11माइंड थॉट्स बनाता रहेगा। आपको हर थॉट पर
- 2:54:15एक्शन लेना बंद करना सीखना है। थॉट आया
- 2:54:18छोड़ दे। आपने सुना लेकिन ओबे नहीं किया।
- 2:54:23यही मेंटल कंट्रोल की शुरुआत है और यही
- 2:54:26धीरे-धीरे उस पुराने पैटर्न को कमजोर
- 2:54:28[संगीत] करता है। जिसमें डिसकंफर्ट आते ही
- 2:54:31एस्केप होता था। अब सवाल यह नहीं रहता कि
- 2:54:35क्या मुझे कभी क्विट करने का मन करेगा?
- 2:54:39बिल्कुल करेगा। सवाल यह है जब वो मोमेंट
- 2:54:42आएगा [संगीत] तब डिसीजन कौन लेगा? आपका
- 2:54:45ट्रेंड माइंड या आपका इमीडिएट इमोशन
- 2:54:49क्योंकि प्रेशर के बीच डिसीजन लेना
- 2:54:51मुश्किल होता है। [संगीत] अगर आपने पहले
- 2:54:54कभी उस सिचुएशन को मेंटली रिहर्स ही नहीं
- 2:54:56किया तो प्रेशर आते ही ब्रेन पुराने
- 2:54:59पैटर्न पर चला जाएगा। [संगीत] इसलिए मेंटल
- 2:55:02टफनेस सिर्फ प्रेशर के समय नहीं बनाई
- 2:55:05जाती। उसे प्रेशर आने से पहले [संगीत]
- 2:55:07तैयार करना पड़ता है। आपको अपने माइंड को
- 2:55:10पहले से दिखाना पड़ता है कि फेलियर कैसा
- 2:55:13दिख सकता है। रिजेक्शन कैसा [संगीत] महसूस
- 2:55:16हो सकता है? फटी में डिसिशन कैसा होगा।
- 2:55:19फियर आने पर आपका रिस्पांस क्या होगा? और
- 2:55:22जब माइंड इन सिचुएशनंस के लिए पहले से
- 2:55:25तैयार होता है तब प्रेशर अचानक आने वाला
- 2:55:28मॉन्सर नहीं रहता। वो एक फमिलियर सिचुएशन
- 2:55:31बन जाता है। यहीं से अगला सवाल पैदा होता
- 2:55:34है। अगर प्रेशर आने के बाद माइंड को
- 2:55:37संभालना है तो क्या होगा? अगर हम प्रेशर
- 2:55:40आने से पहले ही अपने माइंड को ट्रेन करना
- 2:55:42शुरू कर दें। यहीं से शुरू होता है अगला
- 2:55:45लेसन। बिल्डिंग दी आर्मर माइंड। अगर
- 2:55:48प्रेशर आने के बाद [संगीत] माइंड को
- 2:55:50संभालना है तो माइंड को प्रेशर आने से
- 2:55:52पहले ट्रेन करना होगा। क्योंकि जिस मोमेंट
- 2:55:55में जिंदगी आपको सबसे ज्यादा टेस्ट करती
- 2:55:58है, उस मोमेंट पर नया कैरेक्टर बनाना
- 2:56:01मुश्किल होता है। प्रेशर के बीच इंसान
- 2:56:04अक्सर वही बन जाता है जिसकी उसने पहले से
- 2:56:07प्रैक्टिस की होती है। अगर आपने हमेशा
- 2:56:10मुश्किल आते ही एस्केप किया है तो प्रेशर
- 2:56:12में एस्केप नेचुरल लगेगा। अगर आपने
- 2:56:15छोटी-छोटी मुश्किलों में भी खुद को
- 2:56:17संभालना सीखा है तो प्रेशर में भी आपके
- 2:56:20पास एक ट्रेंड रिस्पांस होगा। यही आईडिया
- 2:56:23गगिंस की फिलॉसोफी में मेंटल टफनेस का कोर
- 2:56:26बनता है। एक मजबूत माइंड [संगीत] अचानक
- 2:56:29किसी मोटिवेशनल स्पीच से नहीं बनता। वो
- 2:56:32रिपीटेड एक्सपोज़र से बनता है। छोटी
- 2:56:35डिसकंफर्ट, फिर थोड़ी बड़ी डिसकंफर्ट, फिर
- 2:56:39अनसर्टेनिटी,
- 2:56:40फिर फेलियर, फिर रिकवरी, फिर दोबारा
- 2:56:44कोशिश। हर एक्सपीरियंस आपके माइंड को एक
- 2:56:48मैसेज देता है। मैं अनकंफर्टेबल सिचुएशन
- 2:56:51में भी फंक्शन [संगीत] कर सकता हूं।
- 2:56:54यही साइकोलॉजिकल आर्मोर है। आर्मोर का
- 2:56:56मतलब यह नहीं कि आपको दर्द महसूस नहीं
- 2:57:00होगा। इसका मतलब यह है कि दर्द, फियर या
- 2:57:03डाउट आते ही आपका पूरा सिस्टम [संगीत]
- 2:57:06कोलैप्स नहीं होगा। सोचो किसी एग्जाम से
- 2:57:09एक रात पहले दो स्टूडेंट्स हैं। [संगीत]
- 2:57:11दोनों ने लगभग बराबर प्रिपरेशन की है।
- 2:57:15लेकिन एक स्टूडेंट ने पूरी तैयारी सिर्फ
- 2:57:17कंफर्टेबल एनवायरमेंट में की। [संगीत]
- 2:57:20शांत कमरा, कोई प्रेशर नहीं, कोई टाइमर
- 2:57:23नहीं, कोई डिफिकल्ट मॉक नहीं। दूसरे
- 2:57:27स्टूडेंट ने प्रिपरेशन के दौरान [संगीत]
- 2:57:29कभी-कभी टाइम्ड टेस्ट्स दिए। डिफिकल्ट
- 2:57:32क्वेश्चंस के साथ बैठा। अपनी मिस्टेक्स को
- 2:57:35रिव्यू किया और जानबूझकर ऐसे सेशंस किए
- 2:57:38जहां उसे पता नहीं था कि परफॉर्मेंस कैसी
- 2:57:41होगी। एग्जाम हॉल में दोनों के पास नॉलेज
- 2:57:45हो सकती है लेकिन प्रेशर हैंडलिंग अलग हो
- 2:57:47सकती है क्योंकि दूसरे स्टूडेंट ने सिर्फ
- 2:57:50सब्जेक्ट की प्रैक्टिस [संगीत] नहीं की।
- 2:57:52उसने प्रेशर की भी प्रैक्टिस की। यही
- 2:57:55डिफरेंस बहुत बड़ा है। हम अक्सर प्रिपरेशन
- 2:57:58को सिर्फ इंफॉर्मेशन गैदरिंग समझते
- 2:58:00[संगीत] हैं। लेकिन हाई परफॉर्मेंस में
- 2:58:02प्रेपरेशन का एक दूसरा हिस्सा भी होता है।
- 2:58:05अपने रिस्पांस की प्रिपरेशन। अगर इंटरव्यू
- 2:58:09में टफ क्वेश्चन आए तो क्या करोगे? अगर
- 2:58:11प्रेजेंटेशन के दौरान दिमाग ब्लैंक हो जाए
- 2:58:14तो क्या करोगे? अगर प्रोजेक्ट फेल हो जाए
- 2:58:17तो क्या करोगे? अगर 3 महीने मेहनत के बाद
- 2:58:20एक्सपेक्टेड रिजल्ट [संगीत] ना मिले तो
- 2:58:22क्या करोगे? अगर लोग मजाक उड़ाए तो क्या
- 2:58:25करोगे? अगर कोई दूसरा [संगीत] तुमसे बेहतर
- 2:58:27परफॉर्म करे तो क्या करोगे? इन सवालों के
- 2:58:30जवाब प्रेशर आने के बाद खोजने से बेहतर है
- 2:58:33कि पहले ही सोच [संगीत] लिए जाए। यही
- 2:58:36मेंटल रिहर्सल है। आप अपने माइंड में
- 2:58:38पॉसिबल डिफिकल्टी [संगीत] को पहले से
- 2:58:40इमेजिन करते हो। फिर सिर्फ प्रॉब्लम नहीं
- 2:58:43देखते। आप अपना रिस्पांस भी देखते हो। मान
- 2:58:47लो आप कंपिटिटिव एग्जाम की तैयारी [संगीत]
- 2:58:49कर रहे हो। आप इमेजिन करते हो कि मॉक
- 2:58:53टेस्ट में स्कोर अचानक गिर गया। पहली
- 2:58:55रिएक्शन हो सकती है। मुझसे नहीं होगा।
- 2:58:59लेकिन मेंटल रिहर्सल में आप पहले से तय कर
- 2:59:02सकते हो। स्कोर गिरा तो मैं इमोशनल डिसीजन
- 2:59:05नहीं लूंगा। पेपर एनालाइज करूंगा। गलत
- 2:59:09क्वेश्चंस [संगीत] की कैटेगरी बनाऊंगा।
- 2:59:11फिर अगले टेस्ट में करेक्शन चेक करूंगा।
- 2:59:14अब जब वास्तविक फेलियर आता है, सिचुएशन
- 2:59:17अनफमिलियर नहीं [संगीत] रहती। आपके पास
- 2:59:20रिस्पांस तैयार है। इसी तरह अगर कोई
- 2:59:22इंटरव्यू रिजेक्ट कर देता है तो आप पहले
- 2:59:25से तय कर सकते हो कि रिजेक्शन को पर्सनल
- 2:59:28आइडेंटिटी नहीं बनाना है। फीडबैक मांगना
- 2:59:31है। वीक आंसर्स आइडेंटिफाई करने हैं। फिर
- 2:59:35प्रैक्टिस करनी है। यह सुनने में सिंपल
- 2:59:37लगता है। लेकिन [संगीत] असल में यही
- 2:59:40साइकोलॉजिकल डिसिप्लिन है। क्योंकि हमारा
- 2:59:42माइंड अनसर्टेनिटी [संगीत] से डरता है।
- 2:59:45उसे पता नहीं होता कि आगे क्या होगा।
- 2:59:48इसलिए वो वर्स्ट केस सिनेरियोस बनाता है।
- 2:59:51अगर फेल हो गया तो अगर सबके सामने
- 2:59:54एंबरेसमेंट [संगीत]
- 2:59:55हो गई तो अगर पैसा खत्म हो गया तो अगर
- 2:59:58करियर खराब हो गया तो कई बार हम इन थॉट्स
- 3:00:01को सप्रेस करने की कोशिश करते हैं। लेकिन
- 3:00:04उन्हें दबाने के बजाय उन्हें स्ट्रक्चरर्ड
- 3:00:06[संगीत] तरीके से देखने से एक अलग
- 3:00:08एडवांटेज मिल सकता है। आप पूछ सकते हो।
- 3:00:12ठीक है? अगर यह हुआ तो मेरा नेक्स्ट
- 3:00:14[संगीत] एक्शन क्या होगा? फियर को
- 3:00:17क्वेश्चन में बदल दो। अनसर्टेनिटी को
- 3:00:19प्लान में बदल दो और इमोशन को रिस्पांस
- 3:00:22[संगीत] में बदल दो। यही आर्मोर बनाता है।
- 3:00:26लेकिन यहां एक ट्रैप भी है। मेंटल टफनेस
- 3:00:29का मतलब यह नहीं कि आपको हर पॉसिबल
- 3:00:32डिजास्टर के बारे में पूरे दिन सोचते
- 3:00:34[संगीत] रहना है। ओवरथिंकिंग और प्रिपरेशन
- 3:00:37अलग चीजें हैं। ओवरथिंकिंग में माइंड
- 3:00:39बार-बार प्रॉब्लम देखता है। लेकिन एक्शन
- 3:00:42तय नहीं करता। प्रेपरेशन में प्रॉब्लम
- 3:00:45देखी जाती है और रिस्पांस तय किया जाता
- 3:00:48है। एक आपको कमजोर करता है। दूसरा आपको
- 3:00:51तैयार करता है। इसीलिए गगिंस की अप्रोच
- 3:00:54[संगीत] को सिर्फ दर्द सहो वाली फिलॉसफी
- 3:00:56समझना अधूरा होगा। बड़ा लेसन यह है कि
- 3:01:00अपने माइंड के एस्केप पैटर्न्स को पहचानो।
- 3:01:03[संगीत] जब प्रेशर आएगा आपका माइंड क्या
- 3:01:06करेगा? एक्सक्यूज, एंगर, पैनिकिक,
- 3:01:09डिस्ट्रैक्शन, ब्लेम या काम ऑब्जरवेशन यह
- 3:01:14जानना जरूरी है क्योंकि हर इंसान का
- 3:01:16एस्केप पैटर्न अलग होता है। कोई मुश्किल
- 3:01:19काम से बचने के लिए फोन उठाता है। कोई
- 3:01:22लगातार YouTube पर प्रोडक्टिविटी वीडियोस
- 3:01:24देखता रहता है। कोई प्लानिंग करता रहता
- 3:01:27है, लेकिन एग्जीक्यूशन नहीं करता। कोई
- 3:01:30दूसरों [संगीत] की क्रिटिसिज्म को
- 3:01:32एक्सक्यूज बना लेता है। कोई फेलियर के डर
- 3:01:34से कोशिश ही नहीं करता और कोई इतना
- 3:01:37परफेक्शनिस्ट बन जाता है कि इंपपरफेक्ट
- 3:01:40शुरुआत करना ही अवॉइड करता है। आर्म होल
- 3:01:43बनाने के लिए पहले अपने वीक पॉइंट्स
- 3:01:45पहचानने [संगीत] पड़ते हैं। यही
- 3:01:47अनकंफर्टेबल हिस्सा है। क्योंकि जिस चीज
- 3:01:50को आप देखना नहीं चाहते वही अक्सर आपकी
- 3:01:53ग्रोथ की सबसे बड़ी जगह होती [संगीत] है।
- 3:01:55अगर आपको पता है कि आपका अटेंशन कमजोर है
- 3:01:58तो उसे ट्रेन करना पड़ेगा। अगर डिसिप्लिन
- 3:02:02कमजोर है तो रूटीन बनानी पड़ेगी। अगर
- 3:02:05क्रिटिसिज्म से टूटते हो तो फीडबैक टोलरेट
- 3:02:08करना सीखना पड़ेगा। अगर रिजेक्शन से भागते
- 3:02:11हो तो छोटे रिजेक्शन को नॉर्मल बनाना
- 3:02:14पड़ेगा। अगर अकेले काम नहीं कर सकते तो
- 3:02:17बिना एक्सटर्नल वैलिडेशन के कुछ समय काम
- 3:02:20करना सीखना पड़ेगा। यह सब छोटे
- 3:02:23एक्सपेरिमेंट्स [संगीत] हैं और हर
- 3:02:24एक्सपेरिमेंट आपके नर्वस सिस्टम को एक नया
- 3:02:27अनुभव देता है। मैंने डिसकंफर्ट [संगीत]
- 3:02:30महसूस किया लेकिन मैं संभाल गया। पहली बार
- 3:02:34मुश्किल लगेगा। दूसरी बार भी लेकिन
- 3:02:37रिपीटेड एक्सपोज़र से फैमिलियरिटी बढ़ती है
- 3:02:40और फमिलियरिटी फियर को हमेशा खत्म नहीं
- 3:02:43करती। लेकिन उसे मैनेज करना आसान [संगीत]
- 3:02:46बना सकती है। यही कारण है कि छोटे
- 3:02:48चैलेंजेस महत्वपूर्ण है। आपको हर दिन कोई
- 3:02:52एक्सट्रीम चैलेंज [संगीत] लेने की जरूरत
- 3:02:53नहीं। आप सिर्फ वो काम कर सकते हो जिसे आप
- 3:02:57अननेसेसरीली [संगीत] पोस्टपोन कर रहे हो।
- 3:03:00फोन साइड में रखकर एक फोकस स्टडी सेशन
- 3:03:04डिफिकल्ट चैप्टर से भागने के बजाय उसे
- 3:03:06बैठकर समझना। एक रिजेक्टेड एप्लीकेशन के
- 3:03:10बाद दूसरी एप्लीकेशन भेजना। एक खराब
- 3:03:13वीडियो के बाद एनालिटिक्स देखकर अगली
- 3:03:16वीडियो इंप्रूव करना। जिम्मे [संगीत] ईगो
- 3:03:18के बजाय कंसिस्टेंट ट्रेनिंग करना। किसी
- 3:03:22स्किल में बिगिनर होने की एंबरेसमेंट
- 3:03:24एक्सेप्ट करना। यह छोटे [संगीत] मोमेंट्स
- 3:03:26दिखने में इनसिग्निफिकेंट है। लेकिन
- 3:03:29आइडेंटिटी इन्हीं मोमेंट्स में बनती है।
- 3:03:31क्योंकि जब कोई [संगीत] देख नहीं रहा होता
- 3:03:34और फिर भी आप अपने स्टैंडर्ड के हिसाब से
- 3:03:36एक्शन लेते हो तब इंटरनल वैलिडेशन बनती
- 3:03:39है। आपको हर बार कोई क्लैप करने वाला नहीं
- 3:03:42चाहिए। [संगीत]
- 3:03:43आपको हर बार कोई बोलने वाला नहीं चाहिए।
- 3:03:46गुड जॉब। धीरे-धीरे आपका माइंड खुद जानने
- 3:03:50लगता है कि आपने कमिटमेंट निभाया और यही
- 3:03:53सेल्फ ट्रस्ट है। सेल्फ ट्रस्ट का मतलब यह
- 3:03:57नहीं कि आपको अपने फ्यूचर सक्सेस पर
- 3:03:59ब्लाइंड कॉन्फिडेंस है। इसका मतलब है कि
- 3:04:02आपको अपने रिस्पांस पर भरोसा है। आप यह
- 3:04:05नहीं जानते कि [संगीत] एग्जाम का रिजल्ट
- 3:04:07क्या होगा। लेकिन आपको भरोसा है कि आप
- 3:04:11प्रिपरेशन को सीरियसली लेंगे। आप नहीं
- 3:04:14जानते कि इंटरव्यू सेलेक्ट करेगा या नहीं।
- 3:04:17लेकिन आपको भरोसा है कि रिजेक्शन के बाद
- 3:04:20आप
- 3:04:20[संगीत]
- 3:04:20टूट कर बैठ नहीं जाओगे। आप नहीं जानते कि
- 3:04:23बिजनेस चलेगा या नहीं। लेकिन आपको भरोसा
- 3:04:27[संगीत] है कि नंबर्स देखकर करेक्शन
- 3:04:29करोगे। यही एक आर्म माइंड की पहचान है। वो
- 3:04:33आउटकम कंट्रोल करने की कोशिश [संगीत] नहीं
- 3:04:35करता। वो रिस्पांस को ट्रेन करता है और
- 3:04:38यही माइंडसेट आपको एक डेंजरस इल्लुजन से
- 3:04:42भी बचाता है। कई लोग स्ट्रांग बनने
- 3:04:44[संगीत] के चक्कर में इमोशंस को दबाने
- 3:04:47लगते हैं। उन्हें लगता है कि फियर दिखाना
- 3:04:49वीकनेस है। डाउट महसूस करना वीकनेस है।
- 3:04:53थकान स्वीकार [संगीत] करना वीकनेस है।
- 3:04:56लेकिन इमोशंस को सप्रेस करना मेंटल टफनेस
- 3:04:58नहीं है। आप फियर [संगीत] को महसूस कर
- 3:05:01सकते हो और फिर भी एक्शन ले सकते हो। आप
- 3:05:05डाउट कर सकते हो और फिर भी प्रिपरेशन
- 3:05:07[संगीत] कर सकते हो। आप नर्वस हो सकते हो
- 3:05:11और फिर भी इंटरव्यू दे सकते हो। आप फेलियर
- 3:05:14से हर्ट हो सकते हो और फिर भी एनालिसिस
- 3:05:16[संगीत]
- 3:05:17कर सकते हो। स्ट्रेंथ का मतलब इमोशन की
- 3:05:20एब्सेंस नहीं है। स्ट्रेंथ का मतलब है कि
- 3:05:23इमोशन आपके डिसीजन का अकेला ड्राइवर ना बन
- 3:05:26जाए। और यही स्किल समय के साथ बिल्ड होती
- 3:05:30है। आज आपका माइंड छोटी प्रॉब्लम पर
- 3:05:33डिस्टर्ब होता है। कल वही प्रॉब्लम
- 3:05:35मैनेजेबल लग सकती है। फिर उससे बड़ी
- 3:05:38प्रॉब्लम [संगीत] आती है। फिर आपको फिर से
- 3:05:40अडैप्ट करना पड़ता है। मेंटल टफनेस कोई
- 3:05:43फाइनल डेस्टिनेशन नहीं है। यह एक ऑनगोइंग
- 3:05:46ट्रेनिंग है। आप जितना अपने रिस्पांस को
- 3:05:49ट्रेन [संगीत] करते हो, उतना ही आपका
- 3:05:51कॉन्फिडेंस रियलिटी पर आधारित होता जाता
- 3:05:54है। और फिर एक दिन आपको समझ आता है कि
- 3:05:58प्रेशर से बचना शायद सबसे अच्छी स्ट्रेटजी
- 3:06:01नहीं है। प्रेशर को समझना, उसकी तैयारी
- 3:06:04[संगीत] करना और कंट्रोलोल्ड तरीके से
- 3:06:07उसके अंदर परफॉर्म करना। यह ज्यादा
- 3:06:10पावरफुल स्किल है। क्योंकि जिंदगी आपको
- 3:06:13हमेशा कंफर्टेबल एनवायरमेंट नहीं देगी।
- 3:06:16एग्जाम प्रेशर आएगा, करियर अनसर्टेनिटी
- 3:06:19आएगी, मनी प्रॉब्लम्स आएंगी, कंपटीशन
- 3:06:22आएगा, रिजेक्शन आएगा, कभी फैमिली [संगीत]
- 3:06:25एक्सपेक्टेशंस भारी लगेंगी। कभी खुद से
- 3:06:29डिसअपॉइंटमेंट होगी। और अगर आपका पूरा
- 3:06:32मेंटल सिस्टम सिर्फ कंफर्ट के लिए बनाया
- 3:06:34गया है, तो हर बड़ा चैलेंज [संगीत] आपको
- 3:06:37अंदर से हिला देगा।
- 3:06:39लेकिन अगर आपने पहले से अपने माइंड को
- 3:06:41छोटे [संगीत] प्रेशर में ट्रेन किया है तो
- 3:06:44वही चैलेंजेस आपको अलग तरह से दिखाई देने
- 3:06:46लगेंगे। आप उन्हें पनिशमेंट की तरह नहीं
- 3:06:50ट्रेनिंग की तरह देखना शुरू कर सकते हो।
- 3:06:53और अब एक और सवाल सामने आता है। अगर माइंड
- 3:06:56को प्रेशर के लिए [संगीत] पहले से ट्रेन
- 3:06:58किया जा सकता है। तो क्या प्रेशर को खुद
- 3:07:01भी प्रैक्टिस किया जा सकता है? क्या हम
- 3:07:03ऐसी सिचुएशंस क्रिएट कर सकते हैं जहां
- 3:07:06फेलियर, अनसर्टेनिटी और डिसकंफर्ट
- 3:07:08कंट्रोलोल्ड तरीके से पहले ही एक्सपीरियंस
- 3:07:11हो जाए? क्योंकि असली प्रेशर आने से पहले
- 3:07:14अगर आपने उसकी रिहर्सल कर ली तो बैटल
- 3:07:17[संगीत] फील्ड वही रहेगा। लेकिन आप वही
- 3:07:20इंसान नहीं रहोगे।
About this transcript
This page contains the full transcript of David Goggins Can’t Hurt Me Hindi Summary | 11 Lessons That Will Change Your Mindset #audiobook by Mindup by Kartik , generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 27,488 words across 3,837 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
What you can do with it
Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to choose a caption track available on the video.
Free YouTube transcript tool
YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, caption language selection, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.