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Dajjal Ke Maa Baap Kaun Hai | Story Of Dajjal Parents | Family Of Dajjal | Almufeed Islamic — Transcript

by Al Mufeed Islamic · 4,606 words · 573 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00दज्जाल के मांबाप का मुकम्मल वाकया दज्जाल
  2. 0:05के साथ कौन से लोग होंगे
  3. 0:07बिस्मिल्लाहिहिर्रहमानिर्रहीम
  4. 0:10अस्सलाम वालेकुम मोजज़ दोस्तों एदे रसालत
  5. 0:14से भी सदियों पहले तारीख के अवराक में एक
  6. 0:18ऐसे जोड़े का तज़रा मिलता है जिसकी शादी को
  7. 0:2131 साल गुजर चुके थे लेकिन उनके यहां कोई
  8. 0:26औलाद नहीं थी। यह कोई आम मियां बीवी नहीं
  9. 0:29थे बल्कि उनके यहां पैदा होने वाले बच्चे
  10. 0:32ने आगे चलकर कायनात का सबसे बड़ा फितना
  11. 0:36यानी दज्जाल बनना था। लेकिन यहां तारीख
  12. 0:40दानों और मोहकन के दरमियान एक ऐसी बहस
  13. 0:43छिड़ जाती है जो अजदाद से चली आ रही है कि
  14. 0:47आखिर इस पुरार बच्चे के वालदैन कौन थे?
  15. 0:50इनका ताल्लुक किस कबीले से था और क्या
  16. 0:54वाकई दज्जाल की पैदाइश का यह वाकया इतना
  17. 0:57ही होलनाक था जितना के रवायत में बयान
  18. 1:00किया जाता है। जब हम इस्लामी तारीख और
  19. 1:03हदीस मुबारका का मुतालिया करते हैं तो
  20. 1:06दज्जाल की निशानियां उसका फितना और उसके
  21. 1:09अंजाम की तफसीलात तो वाज़ मिलती हैं। लेकिन
  22. 1:13उसकी पैदाइश और उसके मांबाप का तजरा एक
  23. 1:16ऐसा राज है जिसकी कड़ियां बिखरी हुई हैं।
  24. 1:19मुस्लिम शरीफ की हदीस में हमें एक ऐसे
  25. 1:22बच्चे का सुराग मिलता है जिसकी पैदाइश ने
  26. 1:26खुद रसूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वही वसल्लम
  27. 1:29और सहाबा इकराम को तशवीश में मुब्तला कर
  28. 1:32दिया था। एक ऐसा बच्चा जिसके बारे में
  29. 1:35सहाबा इकराम कसम खाकर कहते थे कि यही
  30. 1:39दज्जाल है और उसके वालदैन के जो औसाफ बताए
  31. 1:42गए वह रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं।
  32. 1:45लेकिन असल हकीकत यही खत्म नहीं होती।
  33. 1:48दज्जाल के असल वालदैन की यह कड़ी हमें अह
  34. 1:51हदीस से आगे बढ़कर बनी इसराइल के उन कदीम
  35. 1:55तरीन रवायत की तरफ ले जाती है। जहां इसके
  36. 1:58पूरे खानदान का कच्चा चट्ठा मौजूद है। अब
  37. 2:01सवाल यह पैदा होता है अगर दज्जाल के
  38. 2:04वालदैन का यह पूरा वाक्य इतना अहम है तो
  39. 2:07मुस्तद इस्लामी हदीस इस मामले पर क्या
  40. 2:10कहती हैं? वह कौन सी रवायत है जिन्हें हम
  41. 2:13सच मानकर बैठ गए हैं। जबकि उनका ताल्लुक
  42. 2:16बनी इसराइल के किस्सों से है। और सबसे
  43. 2:19बढ़कर यह दज्जाल की मां और उसके बाप की वह
  44. 2:22कौन सी खौफनाक निशानियां थी जो सदियों
  45. 2:25पहले लिख दी गई थी। अजनबी जजीरे पर कैद
  46. 2:29दज्जाल और मदीना की गलियों में पैदा होने
  47. 2:32वाले इस [संगीत] पुरार बच्चे के वालदैन
  48. 2:34में क्या ताल्लुक था? आज की इस वीडियो में
  49. 2:37हमारी रिसर्च टीम उन तमाम अधूरी सच्चाइयों
  50. 2:41से पर्दा उठाने जा रही है ताकि आपके सामने
  51. 2:44हकायक का वह रुख आए जो अब तक आपसे छुपाया
  52. 2:48गया। मौजीज दोस्तों दज्जाल के वालदैन की
  53. 2:50इस असल हकीकत को जानने के लिए और यह समझने
  54. 2:54के लिए कि रवायत में इनका तजरा क्यों और
  55. 2:57कैसे आया। हमें सबसे पहले तारीख के उस
  56. 3:00सबसे बड़े वाक्य का रुख करना होगा जिसने
  57. 3:04मदीना मुनवरा में हलचल मचा दी थी। एक ऐसा
  58. 3:07बच्चा जो दज्जाल के मां-बाप की
  59. 3:09निशानानियों के ऐन मुताबिक पैदा हुआ था और
  60. 3:12जिसे देखकर हजरत उमरे फारूक रज़ अल्लाहहु
  61. 3:14ताला अनो ने अपनी तलवार मायान से निकाल ली
  62. 3:18थी। आइए इस सनसनीखेज सफर का आगाज इसी पहले
  63. 3:22बाप से करते हैं और जानते हैं इबने सैयद
  64. 3:25का वह मुकम्मल और पुरसरार वाकया जो दज्जाल
  65. 3:28की पैदाइश के राजों की पहली कड़ी है।
  66. 3:31मोजिस दोस्तों यह हिजरत के बाद का दौर था
  67. 3:34जब मदीना मुनवरा और इसके मजाफात में रहने
  68. 3:37वाले यहूदियों के एक कबीले में एक बच्चा
  69. 3:40पैदा हुआ। बजाहिर यह एक आम सी वलादत थी।
  70. 3:44लेकिन इस बच्चे की पैदाइश के साथ ही कुछ
  71. 3:46अजीबोगरीब चीजें सामने आने लगी। जिसने
  72. 3:49आसपास के लोगों को खौफजदा कर दिया। इस
  73. 3:53बच्चे का नाम रखा गया साफ जिसे तारीख इबने
  74. 3:56सयाद के नाम से जानती है। इसकी सबसे अजीब
  75. 4:00बात यह थी कि यह बच्चा पैदा होते ही आम
  76. 4:03बच्चों की तरह रोया नहीं बल्कि इसके मुंह
  77. 4:06से बड़ी अजीब सी बुड़बड़ाहट निकल रही थी।
  78. 4:09जैसेजैसे वह बड़ा हुआ, लोगों ने देखा कि
  79. 4:12वह पीठ के बल लेट कर घंटों अकेला हंसता या
  80. 4:16रोता रहता था और जब वह सोता तो उसकी आंखें
  81. 4:19तो बंद होती लेकिन उसका दिल जाग रहा होता
  82. 4:22था और उसके सीने से एक पिघलती हुई देख
  83. 4:26जैसी आवाज आती थी। यह वह वक्त था जब मदीना
  84. 4:29की गलियों में यह अफवाह जंगल की आग की तरह
  85. 4:33फैल गई कि इस बच्चे के अंदर गैब की बातें
  86. 4:36जानने की सलाहियत है और यह कोई आम इंसान
  87. 4:39नहीं है। जब यह खबरें आप सल्लल्लाहहु
  88. 4:42अलैहि वही वसल्लम तक पहुंची तो आप
  89. 4:45सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम के चेहरे पर
  90. 4:48तशवीश के आसार नमूदार हुए। क्यों? क्योंकि
  91. 4:52दज्जाल की जो निशानियां और उसके वालदैन के
  92. 4:54जो औसाफ पहले की किताबों और वही के जरिए
  93. 4:58मालूम हो रहे थे। वह इस बच्चे और इसके
  94. 5:01वालदैन पर हैरतंगेज तौर पर फिट बैठ रहे
  95. 5:04थे। रवायत के मुताबिक दज्जाल का बाप लंबा
  96. 5:07दुबले पतले जिस्म वाला और लंबी नाक वाला
  97. 5:11होना था और उसकी मां भारी जिस्म और लंबी
  98. 5:14छातियों वाली होनी थी। इबने सियाद के
  99. 5:17वालदैन में भी लोगों को ऐसी ही झलक नजर आ
  100. 5:20रही थी। यही वजह थी कि आप सल्लल्लाहहु
  101. 5:22अलैहि वही वसल्लम ने खुद इस मामले की
  102. 5:25हकीकत जानने का फैसला फरमाया। एक दिन नबी
  103. 5:29करीम सल्लल्लाहु अलैहि वही वसल्लम हजरत
  104. 5:31अबी बिन काब रज़ अल्लाहहु ताला अनो को साथ
  105. 5:34लेकर इबने सियाद के घर की तरफ रवाना हुए।
  106. 5:38वो उस वक्त खजूर के एक बाग में लेटा हुआ
  107. 5:40कुछ गुनगुना रहा था। आप सल्लल्लाहु अलैहि
  108. 5:43वही वसल्लम दरख्तों के तने के पीछे छुप
  109. 5:46छुप कर आगे बढ़ रहे थे। ताकि इबने सयाद आप
  110. 5:50सल्लल्लाहो अलैह वही वसल्लम को देख ना सके
  111. 5:53और आप सल्लल्लाहो अलैहि वही वसल्लम उसकी
  112. 5:56हकीकत जान सके। लेकिन इसी दौरान इबने सयाद
  113. 6:00की मां ने वहां मौजूद आप सल्लल्लाहहु
  114. 6:02अलैहि वही वसल्लम को देख लिया। वो तड़प कर
  115. 6:06चिल्लाई ऐसाफ मोहम्मद आ गए। आप
  116. 6:09सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम ने उस वक्त
  117. 6:11फरमाया अगर इसकी मां खामोश रहती तो आज इस
  118. 6:15बच्चे का पूरा सच सामने आ जाता। उसके बाद
  119. 6:18आप सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम उसके
  120. 6:20करीब गए और उसका इम्तहान लेने के लिए पूछा
  121. 6:24क्या तू गवाही देता है कि मैं अल्लाह का
  122. 6:26रसूल हूं। इस पुरार बच्चे ने आप
  123. 6:29सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम की तरफ देखा
  124. 6:32और इंतहाई गुस्ताखाना लहजे में कहा मैं
  125. 6:35गवाही देता हूं कि आप उम्मियों के रसूल
  126. 6:37हैं। फिर उसने आप सल्लल्लाहहु अलैहि वही
  127. 6:40वसल्लम से पूछा क्या आप गवाही देते हैं कि
  128. 6:43मैं अल्लाह का रसूल हूं। इस बच्चे की यह
  129. 6:46जुर्रत देखकर वहां मौजूद हजरत उमरे फारूक
  130. 6:49रज अल्लाहहु ताला अनो का जलाल देखने के
  131. 6:52काबिल था। उन्होंने फरी अपनी तलवार मयान
  132. 6:55से निकाली और अर्ज किया या रसूल्लाह
  133. 6:58सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम मुझे इजाजत
  134. 7:01दीजिए कि मैं इस मुनाफिक की गर्दन उड़ा
  135. 7:04दूं। लेकिन कायनात के सरदार हजरत मोहम्मद
  136. 7:07सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम ने हजरत उमर
  137. 7:10रज़ अल्लाहहु ताला अनो का हाथ रोक दिया और
  138. 7:13एक ऐसा जुमला इरशाद फरमाया जो रहती दुनिया
  139. 7:15तक के लिए एक गहरा राज बन गया। आप
  140. 7:19सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम ने फरमाया ऐ
  141. 7:22उमर अगर यह वही दज्जाल है तो तुम इस पर
  142. 7:24काबू ना पा सकोगे क्योंकि इसे ईसा अलह
  143. 7:27सलाम कत्ल करेंगे और अगर यह वो नहीं है तो
  144. 7:31इसे कत्ल करने में तुम्हारे लिए कोई खैर
  145. 7:33नहीं। इबने सियाद का यह पुर इसरार राज
  146. 7:36यहीं खत्म नहीं होता। वह मदीना में बड़ा
  147. 7:39हुआ। उसने इस्लाम का दावा भी किया। लेकिन
  148. 7:42सहाबा हमेशा उसे शक की निगाह से देखते
  149. 7:45रहे। यहां तक के जंग हिरा के मौका पर वो
  150. 7:48अचानक मदीना से ऐसा गायब हुआ कि तारीख की
  151. 7:51किताबों में उसका दोबारा कोई सुराग नहीं
  152. 7:54मिला। मदीना के इस वाक्य ने सबको हिला कर
  153. 7:58रख दिया था। अगर इबने सयाद दज्जाल था तो
  154. 8:01वह कहां गायब हो गया? और अगर वह दज्जाल
  155. 8:04नहीं था तो फिर असल दज्जाल कहां है? क्या
  156. 8:07वह दुनिया में कहीं कैद है? दोस्तों, इबने
  157. 8:09सयाद के गायब होने के कुछ ही अरसे बाद
  158. 8:12समंदर के खौफनाक तूफान से उबलती हुई एक
  159. 8:16सच्ची दास्तान सामने आई। जिसने दज्जाल के
  160. 8:19वजूद को बिल्कुल नया मोड़ दे दिया। एक ऐसी
  161. 8:22मुलाकात जो बहरे हिंद के गुमनाम जजीरे पर
  162. 8:25जंजीरों में जकड़े हुए असल दज्जाल से हुई।
  163. 8:28आइए चलते हैं इस समंदरी सफर पर और जानते
  164. 8:31हैं हजरत तमीम दारी रज़ अल्लाहहु ताला अनो
  165. 8:34का वह सनसनीखेज और मुस्तद वाकया जिसने
  166. 8:38दज्जाल की कैद का सारा सच खोल कर रख दिया।
  167. 8:41यह हिजरत का दौर था। हजरत तमीम दारी रज़
  168. 8:44अल्लाहहु ताला अनो जो उस वक्त तक ईसाई थे।
  169. 8:48अपने कबीले के 30 अफराद के साथ एक बहरी
  170. 8:51सफर पर रवाना हुए। किसी के वहमोगुमा में
  171. 8:54भी नहीं था कि यह आम सा तजारती सफर तारीख
  172. 8:58के सबसे बड़े राज से पर्दा उठाने वाला है।
  173. 9:01जैसे ही जहाज खुले समंदर में पहुंचा, एक
  174. 9:04खोलनाक तूफान ने उन्हें अपनी लपेट में ले
  175. 9:07लिया। समंदर की बिफरी हुई लहरें एक पूरे
  176. 9:10महीने तक उनके जहाज को फुटबॉल की तरह
  177. 9:13उछालती रही। कोई नहीं जानता था कि वह किस
  178. 9:17समत जा रहे हैं। एक महीने की होलनाक
  179. 9:20मुसाफत के बाद जब तूफान थमा तो सूरज की
  180. 9:23पहली किरण के साथ ही उन्हें समंदर के
  181. 9:25बीचोंबीच एक गुमनाम जजीरा नजर आया।
  182. 9:28उन्होंने जान बचाने के लिए अपनी छोटी
  183. 9:31कश्तियां निकाली और उस पुर इसरार जजीरे के
  184. 9:34साहिल पर उतर गए। साहिल पर कदम रखते ही
  185. 9:37उनका सामना एक ऐसी अजीबोगरीब मखलूक से हुआ
  186. 9:40जिसको देखकर उनके जिस्म में खौफ की लहर
  187. 9:43दौड़ उठी। वो एक ऐसा जानदार था जिसके पूरे
  188. 9:46जिस्म पर इतने घने बाल थे कि यह पहचानना
  189. 9:50नामुमकिन था कि उसका मुंह किस तरफ है और
  190. 9:53पीठ किस तरफ। उस इन मुसाफिरों ने डरतेडरते
  191. 9:57पूछा तेरा सतिया नाज़ हो तू क्या चीज है?
  192. 10:00उस मखलूक ने इंसानों की जुबान में जवाब
  193. 10:03दिया, मैं जसा हूं यानी जासूस। उन्होंने
  194. 10:07पूछा, कैसा जासूस? उसने किसी सवाल का जवाब
  195. 10:11देने की बजाय जंगल के दरमियान मौजूद एक
  196. 10:14पुरानी खानकाह की तरफ इशारा किया और कहा,
  197. 10:17इस खानकाह में एक शख्स मौजूद है जो
  198. 10:19तुम्हारी खबरों का बड़ी बेताबी से इंतजार
  199. 10:21कर रहा है। वहां जाओ। अब मुसाफिरों का खौफ
  200. 10:25दुगना हो चुका था। उन्हें लगा यह मखलूक
  201. 10:27कोई शैतान है। लेकिन तजसुस उन्हें खींच कर
  202. 10:31उस वीरान खानकाह के दरवाजे तक ले गया।
  203. 10:34जैसे ही वह खानकाह के अंदर दाखिल हुए
  204. 10:36उन्होंने जिंदगी का सबसे होलनाक मंजर
  205. 10:39देखा। वहां एक इतने बड़े और भारी जिस्म का
  206. 10:42इंसान मौजूद था जो उन्होंने जिंदगी में
  207. 10:45कभी नहीं देखा था। उसके दोनों हाथ उसकी
  208. 10:48गर्दन के साथ और घुटनों से लेकर टखनों तक
  209. 10:51का हिस्सा लोहे की मोटी मोटी जंजीरों से
  210. 10:54इस तरह जकड़ा हुआ था कि वह हिल भी नहीं
  211. 10:57सकता था। इस कैदी ने इन मुसाफिरों को
  212. 11:00देखकर पहला सवाल किया तुम कहां से आए हो?
  213. 11:03उन्होंने कहा हम अरब के रहने वाले हैं।
  214. 11:06इसके बाद उस पुरार कैदी ने उनसे चंद ऐसे
  215. 11:09सवालात पूछे जिन्होंने दुनिया के
  216. 11:11मुस्तकबिल का नक्शा खींच दिया। उसने पूछा
  217. 11:15मुझे बीसान के खजूर के बागों के बारे में
  218. 11:17बताओ। क्या वह अब भी फल दे रहे हैं?
  219. 11:20उन्होंने कहा हां। उसने कहा अन करीब वो
  220. 11:23वक्त आएगा जब वह फल देना बंद कर देंगे। उस
  221. 11:27कैदी ने फिर पूछा मुझे बोरा तिबरिया और
  222. 11:30जहर के चश्मे के बारे में बताओ। क्या
  223. 11:33उनमें पानी है? उन्होंने कहा हां बहुत
  224. 11:36पानी है। उसने कहा उनका पानी भी अन करीब
  225. 11:39खुश हो जाएगा। फिर उसने वह आखिरी सवाल
  226. 11:42पूछा। जिसने मुसाफिरों के दिलों पर लजा
  227. 11:45तारी कर दिया। उसने पूछा मुझे उम्मियों के
  228. 11:49उस नबी के बारे में बताओ उनका क्या हाल
  229. 11:52है? उन्होंने जवाब दिया वह मक्का से हिजरत
  230. 11:54करके मदीना जा चुके हैं और अरब उनके सामने
  231. 11:58सर तस्लीम गम कर रहा है। यह सुनकर उस
  232. 12:01जंजीरों में जकड़े वजूद की आंखों में एक
  233. 12:03अजीब चमक आई। उसने कहा अगर उन्होंने ऐसा
  234. 12:06किया तो यही उनके लिए बेहतर है। अब सुनो
  235. 12:10मैं ही मसीह दज्जाल हूं और मुझे बहुत जल्द
  236. 12:13यहां से निकलने की इजाजत मिलने वाली है।
  237. 12:15मैं निकलूूंगा और 40 दिन के अंदर मक्का और
  238. 12:18मदीना के अलावा दुनिया की हर जगह पर अपने
  239. 12:20कदम जमा लूंगा। इस वाक्य के बाद तूफान थमा
  240. 12:24और यह लोग किसी तरह वापस मदीना पहुंचे।
  241. 12:27हजरत तमीम तारी रज अल्लाहहु ताला अनो ने
  242. 12:30बारगाहे रिसालत में हाजिर होकर जब यह सारा
  243. 12:32माजरा सुनाया तो नबी करीम सल्लल्लाहहु
  244. 12:35अलैहि वही वसल्लम ने खुशी से अपने मेंबर
  245. 12:37पर हाथ मारा और फरमाया तमीम दारी की इस
  246. 12:41बात ने मेरी इस पेशगोई की तस्दीक कर दी जो
  247. 12:44मैं दज्जाल के बारे में तुम्हें बताता रहा
  248. 12:46कि वह शाम या यमन के समंदर में मौजूद है।
  249. 12:50तमीम दारी रज़ अल्लाहहु ताला अनो का यह
  250. 12:52वाकया साबित करता है कि दज्जाल कोई वहम
  251. 12:55नहीं बल्कि एक जीता जागता वजूद है जो
  252. 12:58सदियों से समंदर के किसी पोशीदा कोने में
  253. 13:00कैद है। लेकिन अब यहां आकर कहानी एक ऐसा
  254. 13:03मोड़ लेती है जहां बड़े-बड़े मुहककीन के
  255. 13:06ज़हन चकरा जाते हैं। अगर दज्जाल एक इंसान
  256. 13:10है और वह सदियों से वहां कैद है तो वह
  257. 13:12पैदा कब हुआ था? इस जजीरे पर कैद होने से
  258. 13:15पहले उसका बचपन कहां गुजरा? और सबसे बड़ा
  259. 13:19सवाल आखिर उसके मां-बाप कौन थे? जिनकी गोद
  260. 13:22में यह कायनात का सबसे बड़ा फितना परवान
  261. 13:25चढ़ा। इंटरनेट पर दज्जाल के वालदैन के
  262. 13:28हवाले से अह हदीस के नाम पर जो कहानियां
  263. 13:30सुनाई जाती हैं। इनकी असल हकीकत क्या है?
  264. 13:34आइए अब चलते हैं इस सफर के सबसे अहम और
  265. 13:36सनसनीखेज हिस्से की तरफ। जहां हम दज्जाल
  266. 13:40के मां-बाप की असल हकीकत और बनी इसराइल की
  267. 13:43रवायत का सारा सच आपके सामने रखने जा रहे
  268. 13:46हैं। मोजीज दोस्तों अगर हम रसूल्लाह
  269. 13:49सल्लल्लाहु अलैहि वही वसल्लम की मुस्तनद
  270. 13:52और सही हदीस मुबारका का मुतालिया करें तो
  271. 13:56दज्जाल के वालदैन के हवाले से कोई तफसीली
  272. 13:58वाकया मौजूद नहीं। नबी करीम सल्लल्लाहो
  273. 14:01अलैह वही वसल्लम ने दज्जाल के फितने इसके
  274. 14:04हुलिए इसके गधे इसकी आंख और इसके अंजाम की
  275. 14:08एक-एक तफसील तो बयान फरमाई लेकिन इसके
  276. 14:11मां-बाप की कोई मुस्तकिल दास्तान से ऐसे
  277. 14:14सित की सही रवायत में नहीं मिलती तो फिर
  278. 14:17सवाल यह पैदा होता है कि दुनिया भर के कि
  279. 14:20दुनिया भर में दज्जाल के मां-बाप का जो
  280. 14:22वाक्य इस कदर मशहूर है वो आखिर आया कहां
  281. 14:25से? इस राज का सुराग हमें तारीख की उन
  282. 14:27किताबों में मिलता है। जिन्हें इसराइलियात
  283. 14:30या बनी इसराइल की रवायत कहा जाता है।
  284. 14:33यहूदियों और ईसाइयों की कदीम तारीख और
  285. 14:36मजहबी किताबों और बाज जईफ या तारीख
  286. 14:39किस्सों में दज्जाल की पैदाइश का एक पूरा
  287. 14:41पसमंजर बयान किया गया है। इन रवायत के
  288. 14:45मुताबिक दज्जाल का ताल्लुक बनी इसराइल के
  289. 14:48एक ऐसे कबीले से था जो अपनी बदमलियों की
  290. 14:51वजह से तबाह हुआ जिसे कबीलादान भी कहा
  291. 14:54जाता है। इन किस्सों में लिखा है कि इसके
  292. 14:57वालदैन ने 30 साल से ज्यादा का अरसा
  293. 14:59बेऔलादी में गुजारा। वह दोनों जिस्मानी
  294. 15:02तौर पर इंतहाई अजीबो गरीब औसाफ के मालिक
  295. 15:05थे और उनके यहां जब बच्चा पैदा हुआ तो वह
  296. 15:08बचपन से ही इंसानों के लिए नुकसानदेह
  297. 15:11साबित होने लगा। क्योंकि यह रवायत बनी
  298. 15:13इसराइल के किस्सों से ली गई है। इसलिए
  299. 15:16इस्लामी उसूल हदीस के मुताबिक हम ना तो
  300. 15:19इनकी मुकम्मल तस्दीक कर सकते हैं और ना ही
  301. 15:21इन्हें झुठला सकते हैं। बल्कि इन्हें
  302. 15:23सिर्फ एक तारीख मालूमाती पसे मंजर के तौर
  303. 15:26पर देखा जाता है। अगर हम उन तमाम कड़ियों
  304. 15:29को आपस में जोड़ें तो तस्वीर बिल्कुल साफ
  305. 15:32हो जाती है। एदे नबी में मदीना के लोग
  306. 15:35इबने सियाद के वालदैन को दज्जाल के
  307. 15:37मां-बाप इसलिए समझ रहे थे क्योंकि उनका
  308. 15:40हुलिया और उनके हालात उनराइली रवायत और
  309. 15:43पेशगोइयों के ऐन मुताबिक थे जो उस दौर के
  310. 15:46यहूदियों में मशहूर थी। लेकिन जैसा कि
  311. 15:49हमने पहले हिस्से में देखा इबने सियाद का
  312. 15:52मामला दज्जाल का एक अलामती फितना था। जबकि
  313. 15:55असल दज्जाल वो पुरार वजूद है जो हजरत तमीम
  314. 15:59दारी रज़ अल्लाहहु ताला अनो के वाक्य के
  315. 16:01मुताबिक समंदर के किसी पोशीदा जजीरे पर
  316. 16:04सदियों से कैद है। लिहाजा दज्जाल की
  317. 16:07पैदाइश और इसके वालदैन की दास्ताने दरअसल
  318. 16:10तारीख इसराइली रवायात और इबने सियाद के
  319. 16:13वाक्य का एक ऐसा अमेजा है जिसे वक्त के
  320. 16:16साथ-साथ एक मुकम्मल कहानी की शक्ल दे दी
  321. 16:19गई। सच यही है कि अल्लाह रब्बुल इज्जत ने
  322. 16:22दज्जाल की पैदाइश के वक्त और इसके वालदैन
  323. 16:25को एक गैबी राज रखा है। ताकि इंसान का
  324. 16:28पूरा ध्यान उसके फितने से बचने पर हो ना
  325. 16:31कि उसके माजी की खोज पर। दोस्तों दज्जाल
  326. 16:34का माजी चाहे कितना ही पुरार हो। लेकिन
  327. 16:36उसका मुस्तकबिल बिल्कुल वाज़ और तयशुदा है।
  328. 16:39वो जब भी अपनी कैद से आजाद होगा जमीन पर
  329. 16:42ऐसा फितना बरपा करेगा जिसकी मिसाल आदम अल
  330. 16:46सलाम से लेकर कयामत तक नहीं मिलती। लेकिन
  331. 16:49एक सच्चे मोमिन के लिए इस फितने से डरने
  332. 16:52की बजाय इन तदाबीर को जानना जरूरी है जो
  333. 16:55कायनात के सरदार हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहहु
  334. 16:58अलैहि वही वसल्लम ने हमें सिखाई। आखिर
  335. 17:01दज्जाल का अंजाम क्या होगा? वह कौन सी सूर
  336. 17:04है जो इसके खिलाफ हमारा सबसे बड़ा हथियार
  337. 17:06है? आइए चलते हैं इस सफर के आखरी और सबसे
  338. 17:10अहम हिस्से की तरफ और जानते हैं फितने
  339. 17:13दज्जाल से बचाव का वह वाहिद रास्ता जो
  340. 17:16हमें इस होलनाकी से महफूज़ रख सकता है।
  341. 17:19दोस्तों जब दज्जाल अपनी कैद से आजाद होगा
  342. 17:21तो वह जमीन पर खुदा होने का दावा करेगा।
  343. 17:24वह मुर्दों को जिंदा करके दिखाएगा। उसके
  344. 17:27इशारे पर बादल बरसेंगे और जमीन अपने खजाने
  345. 17:30उगल देगी। यह फितना इतना यह फितना इतना
  346. 17:34शदीद होगा कि इंसान अपने ईमान को बचाने के
  347. 17:37लिए पहाड़ों का रुख करेंगे। वह दुनिया के
  348. 17:39चक्कर काटता हुआ बिल आखिर शाम और फस्तीन
  349. 17:42की सरहद पर पहुंचेगा। और यही वो जगह होगी
  350. 17:45जहां तारीख का सबसे बड़ा मारका जन्म लेगा।
  351. 17:48जब इंसान मायूस हो चुके होंगे तब दमिश के
  352. 17:51मशरकी सफेद मीनार पर कायनात के एक अज़म
  353. 17:55पैगंबर हजरत ईसा अलह सलाम का नजूल होगा।
  354. 17:58दज्जाल हजरत ईसा अलह सलाम को देखते ही इस
  355. 18:01तरह पिघलना शुरू होगा जैसे नमक पानी में
  356. 18:05पिघलता है। वो अपनी जान बचाने के लिए
  357. 18:09भागेगा लेकिन लुत के मुकाम पर हजरत ईसा अल
  358. 18:12सलाम का नेजा उसके वजूद के आरपार हो
  359. 18:14जाएगा। और इस तरह कायनात के सबसे बड़े
  360. 18:17फितने का हमेशा हमेशा के लिए खात्मा हो
  361. 18:19जाएगा। दज्जाल का अंजाम तो तयशुदा है
  362. 18:22लेकिन हमारे लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि
  363. 18:25हम अपने और अपनी नस्लों के ईमान को इस
  364. 18:27फितने से कैसे महफूज रखें। कायनात के
  365. 18:30सरदार हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु
  366. 18:33अलैहि वही वसल्लम ने हमें अंधेरों में
  367. 18:36नहीं छोड़ा बल्कि इस फितने से बचने का ऐसा
  368. 18:38नुस्खा अता फरमाया जो हर मोमिन की ढाल है।
  369. 18:42आप सल्लल्लाहु अलैहि वही वसल्लम ने फरमाया
  370. 18:45कि जो शख्स हर जुमा के दिन सूर काफ की
  371. 18:48तिलावत करेगा या इसकी पहली और आखरी 10
  372. 18:51आयात को हिफज़ कर लेगा दज्जाल उसका कुछ
  373. 18:54नहीं बिगाड़ सकेगा। इसके अलावा नमाज के
  374. 18:57आखिर में फितने दज्जाल से पनाह मांगने की
  375. 18:59दुआ सिखाई गई। यह वह हथियार हैं जो मादी
  376. 19:02नहीं बल्कि रूहानी है। हर मोमिन को
  377. 19:04अंदरूनी तौर पर मजबूत करेंगे। लेकिन सवाल
  378. 19:07यह पैदा होता है कि जब वो फितना जमीन पर
  379. 19:09मादी तौर पर सामने खड़ा होगा तो जिस्मानी
  380. 19:12हिफाजत के लिए मुसलमानों को क्या करना
  381. 19:15होगा? कायनात के सरदार हजरत मोहम्मद
  382. 19:17सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम ने हमें उस
  383. 19:20वक्त के लिए भी मुतबादल रास्ते बताए हैं।
  384. 19:23आप सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम का पहला और
  385. 19:26सबसे बड़ा हुक्म यह है कि जो शख्स दज्जाल
  386. 19:28की आमद के बारे में सुने वो उसके सामने
  387. 19:31जाने की कोशिश हरगिज़ ना करे बल्कि उससे
  388. 19:34दूर भागे। चाहे उसका ईमान कितना ही मजबूत
  389. 19:38क्यों ना हो। वो दज्जाल के फरेब और जादू
  390. 19:40को देखकर गुमराह हो सकता है। इस वक्त
  391. 19:43दुनिया में सिर्फ दो जगह ऐसी हैं। जहां
  392. 19:45दज्जाल चाहकर भी कदम नहीं रख सकेगा और वह
  393. 19:48है मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा।
  394. 19:51हदीस में आता है कि इन दोनों शहरों के हर
  395. 19:53रास्ते और गली पर फरिश्ते सफे बनाए नंगी
  396. 19:56तलवारों के साथ पहरा दे रहे होंगे।
  397. 19:59जो जो मुसलमान उस वक्त वहां मौजूद होंगे
  398. 20:02वह अमन में होंगे। लेकिन यहां तारीख का एक
  399. 20:05ऐसा सनसनीखेज सच सामने आता है जो बहुत कम
  400. 20:08लोग जानते हैं। लोग समझते हैं कि दज्जाल
  401. 20:11मदीना में दाखिल नहीं हो सकेगा। तो मदीना
  402. 20:14के तमाम लोग बच जाएंगे। लेकिन सच्चाई इससे
  403. 20:17मुख्तलिफ है। रवायत के मुताबिक दज्जाल
  404. 20:20मदीना के बाहर जबले हबशी के पास आकर अपना
  405. 20:23पड़ाव डालेगा और वहां मौजूद एक शरीदा बंजर
  406. 20:27जमीन पर खड़ा होकर मदीना की तरफ इशारा
  407. 20:30करेगा और अपने पैरोकारों से कहेगा क्या
  408. 20:33तुम उस सफेद महल को देख रहे हो? वह अहमद
  409. 20:37मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वही वसल्लम की
  410. 20:40मस्जिद है। इसके बाद मदीने की जमीन पर तीन
  411. 20:43बड़े जलजले आएंगे। यह जलजले किसी तबाही के
  412. 20:47नहीं होंगे बल्कि यह मदीने की जमीन को पाक
  413. 20:50करने के लिए होंगे। इन जलजलों के खौफ से
  414. 20:52जितने भी मुनाफिक कमजोर ईमान इन जलजलों के
  415. 20:56खौफ से जितने भी मुनाफिक कमजोर इन जलजलों
  416. 21:00के खौफ से जितने भी मुनाफिक कमजोर ईमान
  417. 21:02वाले और दज्जाल से मरब होने वाले मर्द और
  418. 21:05औरतें होंगी वो खुद ब खुद मदीना से निकलकर
  419. 21:08दज्जाल के लश्कर में शामिल होंगे। उस दिन
  420. 21:11को तारीख में यमे खल्लास यानी पाक होने का
  421. 21:14दिन कहा गया है। यानी मदीना की हुदूद के
  422. 21:16अंदर सिर्फ वही बच पाएगा जो अपने ईमान में
  423. 21:19सच्चा होगा। अब जरा उन मुसलमानों का सोचिए
  424. 21:22जो मक्का और मदीना से दूर दुनिया के दूसरे
  425. 21:25कोनों में आबाद होंगे। वह अपनी जान और
  426. 21:28ईमान कैसे बचाएंगे? इसके लिए रसूल्लाह
  427. 21:31सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम ने फरमाया
  428. 21:34कि मुसलमान दज्जाल के शर से बचने के लिए
  429. 21:37पहाड़ों की तरफ फरार हो जाए। उल मोमिनीन
  430. 21:40हजरत उम्मे सलमा रज़ अल्लाहहु ताला अन्हा
  431. 21:42फरमाती हैं कि मैंने आप सल्लल्लाहहु अलैहि
  432. 21:45वही वसल्लम से पूछा या रसूल्लाह
  433. 21:48सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम उस दिन अरब के
  434. 21:51लोग कहां होंगे? आप सल्लल्लाहहु अलैहि वही
  435. 21:54वसल्लम ने फरमाया उस दिन अरब के लोग बहुत
  436. 21:57कम होंगे और उनमें से ज्यादातर बैतुल
  437. 22:00मुकद्दस में होंगे।
  438. 22:01लोग अपने घर बार, ऐशो आराम और शहरों को
  439. 22:04छोड़कर पहाड़ों की गारों और कच्चे देहातों
  440. 22:08में पनाह लेने पर मजबूर हो जाएंगे। ताकि
  441. 22:10वह दज्जाल की हुकूमत और इसके कारिंदों की
  442. 22:13नजरों से ओझल रह सके। यह इस बात की निशानी
  443. 22:16है कि दज्जाल के दौर में शहरों का निजाम
  444. 22:19मुकम्मल तौर पर उसके कंट्रोल में होगा जो
  445. 22:22उसकी अतात नहीं करेगा। उसे कैद और भूख का
  446. 22:25सामना करना पड़ेगा। यह वह दौर होगा जब
  447. 22:29दुनिया में दज्जाल की वजह से शदीद तरीन
  448. 22:32कैद पड़ेगा। वह जहां से गुजरेगा अपने
  449. 22:34मानने वालों को ग्ला और सोना देगा और
  450. 22:38नाफरमानों की जमीनें बंजर कर देगा। सबा
  451. 22:41इकराम ने पूछा या रसूल्लाह सल्लल्लाहु
  452. 22:44अलैह वसल्लम अगर ऐसा कहद होगा तो उस वक्त
  453. 22:47मुसलमानों की गजा क्या होगी? वो कैसे
  454. 22:50जिंदा रहेंगे? कायनात के सरदार हजरत
  455. 22:53मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम ने
  456. 22:56एक ऐसा जवाब दिया जो अकल को दंग कर देता
  457. 22:58है। आप सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम ने
  458. 23:01फरमाया उनकी गजा वही होगी जो आसमानों के
  459. 23:04फरिश्तों की गजा है। यानी तस्बी तकदीरस
  460. 23:08तकरीब और तहमीद सुभान अल्लाह
  461. 23:11अल्हम्दुलिल्लाह ला इलाहा इल्लल्लाह
  462. 23:14अल्लाहहु अकबर। जो मुसलमान उस दौर में
  463. 23:17अल्लाह का जिक्र कसरत से करेगा अल्लाह
  464. 23:20ताला उसके जिक्र के अंदर ही वह ताकत रख
  465. 23:22देगा कि इंसान को ना तो भूख का एहसास होगा
  466. 23:25और ना ही प्यास का। यह वो गैबी और मादी
  467. 23:28हकायक हैं जो दज्जाल के निजाम को तोड़ने
  468. 23:31के लिए हर मुसलमान के पास आखिरी हथियार के
  469. 23:35तौर पर मौजूद होंगे। दोस्तों, जब हम
  470. 23:37दज्जाल के मादी निजाम और मुसलमानों के
  471. 23:39हिजरत के हालात को समझ लेते हैं, तो जेहन
  472. 23:42में यह सवाल आता है कि यह फितना आखिर
  473. 23:45दुनिया के किस कोने से अचानक नमूदार होगा?
  474. 23:48रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैह वसल्लम ने इसकी
  475. 23:51जग्राफ लोकेशन भी बिल्कुल वाज़ फरमा दी।
  476. 23:54हदीस मुबारका के मुताबिक दज्जाल मशरिक की
  477. 23:58तरफ से नमूदार होगा और इसके खुज की खास
  478. 24:00जगह ईरान का शहर असफहान होगा। जिसके एक
  479. 24:04मखसूस इलाके को तारीख में यहूदिया कहा गया
  480. 24:07है। जामेरमजी की रिवायत के मुताबिक आप
  481. 24:10सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम ने फरमाया
  482. 24:12कि दज्जाल मशरिक के एक ऐसे मुल्क से
  483. 24:15निकलेगा जिसे खरासान कहा जाता है और इसका
  484. 24:19आगाज असफहान की सर जमीन से होगा। वह अपने
  485. 24:22इब्तदाई सफर में इराक और शाम के दरमियान
  486. 24:25के एक रास्ते पर पहुंचकर बाकायदा अपने
  487. 24:27फितने का ऐलान करेगा और दाएं बाएं हर तरफ
  488. 24:31से तबाही फैलाना शुरू कर देगा। लेकिन
  489. 24:33दज्जाल अकेला नहीं होगा बल्कि इसके साथ एक
  490. 24:37बहुत बड़ा और मुनजम लश्कर होगा। असफहान से
  491. 24:40निकलते ही उसका सबसे पहला और बड़ा हदफ
  492. 24:43वहां के मुकीम लोग होंगे। सही मुस्लिम की
  493. 24:46हदीस में आता है कि असफहान के 70 हजार
  494. 24:49यहूदी दज्जाल का साथ देंगे। जिन्होंने
  495. 24:51अपने सरों और कंधों पर सब रंग की भारी
  496. 24:54चादरें ओढ़ रखी होंगी। जिन्हें तलसा कहा
  497. 24:57जाता है। यह वह लोग होंगे जो सदियों से
  498. 25:00अपनी किताबों की पेशगोइयों के मुताबिक
  499. 25:03अपने एक निजात दंदा या बादशाह का इंतजार
  500. 25:05कर रहे हैं। और जैसे ही दज्जाल गैर मामूली
  501. 25:09शैतानी ताकतों के साथ नमूदार होगा। यह उसे
  502. 25:12अपना वही बादशाह तस्लीम करके उसके झंडे
  503. 25:15तले जमा हो जाएंगे। यह दज्जाल की फौज का
  504. 25:18सबसे मजबूत और मादी बाजू होगा। इन
  505. 25:20यहूदियों के अलावा दज्जाल के लश्कर में दो
  506. 25:23ऐसे गिरोह सबसे ज्यादा तादाद में शामिल
  507. 25:26होंगे जिन्हें देखकर हर मोमिन का दिल दहल
  508. 25:28[संगीत] जाएगा। पहला गिरोह जाहिल बदुओं और
  509. 25:32देहातियों का होगा। दज्जाल उनके पास जाकर
  510. 25:35कहेगा अगर मैं तुम्हारे मरे हुए मां-बाप
  511. 25:37को जिंदा कर दूं तो क्या तुम मुझे रब
  512. 25:39मानोगे? वो कहेंगे हां। तब दज्जाल के
  513. 25:42शयादीन उनके वालदैन की शक्ल इख्तियार करके
  514. 25:46जमीन से निकलेंगे और कहेंगे ए मेरे बेटे
  515. 25:48इसकी अतात करो। यही तुम्हारा रब है। इस
  516. 25:51मादी फरेब में आकर लाखों जाहिल लोग उसके
  517. 25:54पीछे चल पड़ेंगे। और दूसरा सबसे बड़ा
  518. 25:56गिरोह जो दज्जाल का नवाला बनेगा वो खवातीन
  519. 26:00का होगा। आप सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम
  520. 26:03ने फरमाया कि दज्जाल मजे कनात यानी मदीना
  521. 26:07के पास एक जगह में पड़ाव डालेगा तो उसकी
  522. 26:09तरफ भागने वालों में अक्सरियत औरतों की
  523. 26:12होगी। यह फितना इस कदर शदीद नफसियाती होगा
  524. 26:15कि एक गैरतमंद मुसलमान मर्द अपने घर वापस
  525. 26:18जाएगा और अपनी मां बहन बेटी को और अपनी
  526. 26:21बीवी को रस्सियों से बांध देगा ताकि वह
  527. 26:23दज्जाल के फरेब में आकर घर से बाहर ना भाग
  528. 26:26जाए। यह दज्जाल के लश्कर की वह खौफनाक
  529. 26:28हकीकत है जो जाहिर करती है कि उस दौर में
  530. 26:31फितना कितना मादी और कितना नफसियाती होगा।
  531. 26:35हदीस में दज्जाल के लश्कर की एक और अजीब
  532. 26:37निशानी यह बताई गई है कि उसके साथ ऐसे लोग
  533. 26:40भी होंगे जिनके चेहरे तब बत ढाल की तरह
  534. 26:43चौड़े और गोश्तदार होंगे। उनकी नाक चपटी
  535. 26:47होंगी। तारीख दानों और मुककीन के मुताबिक
  536. 26:50यह हुलिया वस्ती एशिया के बाज कदीम जंगजू
  537. 26:53कबीलों जैसे ततारी या मंगोल नस्ल के लोगों
  538. 26:56से मिलताजुलता है। यानी दज्जाल दुनिया के
  539. 26:59मुख्तलिफ खितों से जाहिल लालची मादाप्रस्त
  540. 27:02और कुफ्र पर कायम रहने वाले इंसानों को
  541. 27:05अपने शहर में जकड़ता जाएगा और उसका यह
  542. 27:08लश्कर एक ऐसे सैलाब की तरह बढ़ेगा जिसे
  543. 27:11रोकना उस वक्त की मादी हुकूमतों के बस में
  544. 27:13नहीं रहेगा। बहरहाल दोस्तों दज्जाल का यह
  545. 27:17लश्कर और उसका फितना चाहे कितना ही होलनाक
  546. 27:19क्यों ना हो। एक सच्चे मोमिन का ईमान इन
  547. 27:22तमाम मादी ताकतों पर भारी है। अल्लाह
  548. 27:24रब्बुल इज्जत से दुआ है कि वो हमें हमारी
  549. 27:26नस्लों को और पूरी उम्मत मुस्लिम को फितने
  550. 27:29के इस दौर में अपने हिज्जो अमान में रखे।
  551. 27:32अल्लाह ताला हमारे ईमान को वो मजबूती अता
  552. 27:34फरमाए कि हम सच और झूठ के फर्क को पहचान
  553. 27:36सके। और हमें कायनात के सरदार हजरत
  554. 27:39मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वही वसल्लम की
  555. 27:41बताई हुई तदाबीर पर अमल करने की तौफीक अता
  556. 27:44फरमाए। दोस्तों यह वीडियो हमारी पूरी टीम
  557. 27:47ने दिन रात की मेहनत से सिर्फ इसलिए पेश
  558. 27:50की है ताकि हम सबका ईमान बेदार हो सके।
  559. 27:53अगर आपको हमारी यह मुखलिसाना कोशिश पसंद
  560. 27:55आई है तो इस वीडियो को एक लाइक जरूर दें।
  561. 27:58क्योंकि आपका एक लाइक YouTube के
  562. 28:01एल्गोरििदम को बताता है कि यह मालूमात
  563. 28:03दुनिया भर के मुसलमानों तक भी पहुंचनी
  564. 28:05चाहिए। इस अहमतरीन मालूमात को सदका जिया
  565. 28:08समझकर अपने दोस्तों और फैमिली के साथ जरूर
  566. 28:11शेयर कीजिएगा। क्या मालूम आपके एक शेर की
  567. 28:14वजह से कोई दूसरा मुसलमान सूर काफ की
  568. 28:16तिलावत को अपनी जिंदगी का मामूल बना ले।
  569. 28:19कमेंट सेक्शन में आमीन लिखकर अपनी कीमती
  570. 28:21राय का इजहार जरूर कीजिएगा और बताइएगा
  571. 28:24आपको इस सफर की कौन सी कड़ी सबसे ज्यादा
  572. 28:26हैरानक लगी। अपना और अपने प्यारों का बहुत
  573. 28:29सा ख्याल रखिएगा। अल्लाह हाफिज।

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This page contains the full transcript of Dajjal Ke Maa Baap Kaun Hai | Story Of Dajjal Parents | Family Of Dajjal | Almufeed Islamic by Al Mufeed Islamic, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 4,606 words across 573 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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