नालंदा की पूरी कहानी - creation to its destruction - Full Documentary | Nalanda university — Transcript
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- 0:00साल 1193 [संगीत] बिहार की धरती पर घोड़ों
- 0:03की टापे गूंज रही थीं।
- 0:07धूल का एक [संगीत] विशाल गुबार आसमान तक
- 0:10उठ चुका था और उस धूल के पीछे पड़ रही थी
- 0:13एक सेना। उस सेना का नेतृत्व कर रहा था एक
- 0:16ऐसा नाम जिसे आज भी इतिहास के सबसे
- 0:19विवादित नामों में गिना जाता है। बख्तियार
- 0:21खिलजी। लेकिन अजीब बात यह थी उसके सामने
- 0:25कोई विशाल किला नहीं था। कोई सोने का
- 0:27खजाना नहीं था। कोई शक्तिशाली राजा उसकी
- 0:30राह नहीं रोक रहा था।
- 0:36उसके सामने था ज्ञान। हां, सिर्फ ज्ञान एक
- 0:41ऐसा विश्वविद्यालय जिसके द्वार तक पहुंचने
- 0:44के लिए हजारों किलोमीटर की यात्रा करनी
- 0:46पड़ती थी। एक ऐसी जगह जहां चीन से छात्र
- 0:49आते थे, तिब्बत से विद्वान आते थे, कोरिया
- 0:52से भिक्षु आते थे और [संगीत] भारत के सबसे
- 0:54तेज दिमाग अपना जीवन ज्ञान को समर्पित कर
- 0:57देते थे। यह कोई साधारण विद्यालय नहीं था।
- 1:00यह था नालंदा विश्वविद्यालय, एक ऐसा नाम
- 1:04जो अपने समय में कई राजाओं और साम्राज्यों
- 1:07से भी अधिक प्रसिद्ध था। जब दुनिया के कई
- 1:10हिस्से अज्ञानता और संघर्ष में उलझे हुए
- 1:13थे। तब यहां गणित पढ़ाया जाता था। खगोल
- 1:16शास्त्र पढ़ाया जाता था, चिकित्सा पढ़ाई
- 1:18जाती थी, दर्शन पढ़ाया जाता था और हमारे
- 1:21यहां की किताबों में लिखा गया है कि यहां
- 1:23का ज्ञान इतना विशाल था कि उस किताबों को
- 1:26समेटने के लिए कई विशाल पुस्तकालय बनाए गए
- 1:29थे। लेकिन हमारे मन में एक सवाल उठ रहा है
- 1:31कि इतना महान विश्वविद्यालय को बना कैसे?
- 1:34और किसने इतने विशाल विद्यालय को बनवाया
- 1:37था? कैसे बिहार की यह धरती पूरी दुनिया का
- 1:40ज्ञान केंद्र बन गई? क्या सच में आर्यभट्ट
- 1:43जैसे महान विद्वानों ने यहां ज्ञान की
- 1:46मशाल को और ऊंचा किया? क्या सच में यहां
- 1:48प्रवेश पाना इतना कठिन था कि हर
- 1:51विद्यार्थी सफल नहीं हो पाता था और फिर
- 1:53क्या हुआ उस दिन जब तलवारें किताबों से
- 1:56टकराई जब सत्ता ज्ञान से टकराई जब आग उन
- 2:00किताबों तक पहुंच गई जिन्हें लिखने में
- 2:02पीढ़ियां बीत गई थी। क्या सच में नालंदा
- 2:04की लाइब्रेरी महीनों तक जलती रही? या यह
- 2:07सिर्फ इतिहास की एक कहानी है? और सबसे
- 2:10बड़ा सवाल अगर नालंदा कभी नष्ट ना हुआ
- 2:13होता तो क्या सच में आज दुनिया का इतिहास
- 2:16कुछ और होता आज हम जानेंगे नालंदा की
- 2:19स्थापना से लेकर उसके स्वर्ण युग तक
- 2:21आर्यभट्ट से लेकर दुनिया भर के विद्वानों
- 2:24तक और उस आखिरी दिन तक जिस दिन ज्ञान का
- 2:27एक साम्राज्य राख में बदल गया। तो [संगीत]
- 2:30आइए वीडियो के आगे बढ़ाते हैं और जानते
- 2:32हैं असली सच क्या है।
- 2:39अगर हमें नालंदा जैसी महान जगह के बनने की
- 2:42पूरी सच्चाई को जानना है तो हमें आज से
- 2:45लगभग 10,600 साल पीछे जाना पड़ेगा। साल
- 2:49415 ईसवी चल रहा था। यह वो दौर था जब अखंड
- 2:53भारत की जमीन पर गुप्त राजवंश का झंडा
- 2:55लहरा रहा था।
- 2:58इतिहासकार इस दौर को भारत का स्वर्ण युग
- 3:01कहते हैं। लेकिन भाई क्या आपने कभी सोचा
- 3:04है कि इसे स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है?
- 3:07क्या उस समय सचमुच चारों तरफ सिर्फ सोना
- 3:09ही सोना बिखरा था? असल में इस स्वर्ण युग
- 3:12की नींव कुमारगुप्त प्रथम के दादा महाराजा
- 3:15समुद्रगुप्त ने रखी थी। समुद्रगुप्त एक
- 3:18[संगीत] ऐसे चक्रवर्ती सम्राट थे जिन्हें
- 3:20भारत का नेपोलियन भी कहा जाता है।
- 3:23उन्होंने उत्तर से लेकर दक्षिण तक और
- 3:25पूर्व से लेकर पश्चिम तक लगभग पूरे भारत
- 3:28के राजाओं को युद्ध में हराकर अपने अधीन
- 3:31कर लिया था। उनकी तलवार का खौफ ऐसा था कि
- 3:35विदेशी ताकतें भी उनके सामने हाथ जोड़कर
- 3:38खड़ी रहती थी। जब समुद्रगुप्त के बाद उनके
- 3:41बेटे चंद्रगुप्त द्वितीय गद्दी पर बैठे
- 3:44जिन्हें इतिहास चंद्रगुप्त विक्रमादित्य
- 3:47के नाम से जानता है तो उन्होंने इस
- 3:49साम्राज्य को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा
- 3:52दिया। विक्रमादित्य ने भारत की धरती पर
- 3:55पैर पसार रहे विदेशी शकों को इस तरह खदेड़
- 3:58कर बाहर किया कि आने वाली कई सदियों तक
- 4:01किसी विदेशी ताकत की भारत की तरफ आंख
- 4:03उठाने की हिम्मत नहीं हुई। उन्होंने देश
- 4:06में व्यापार और समृद्धि का एक ऐसा जाल
- 4:09बिछाया कि रोम साम्राज्य से लेकर चीन तक
- 4:12भारतीय सामान्य की मांग होने लगी।
- 4:14विक्रमादित्य के दरबार में नवरत्न बैठते
- 4:17थे जिनमें महाकवि कालिदास, महान गणितज्ञ,
- 4:20वराह और आयुर्वेद के ज्ञाता धनवंतरी शामिल
- 4:24थे। आप सिचुएशन को समझिए भाई। कुमार गुप्त
- 4:27प्रथम एक ऐसे माहौल में बड़े हो रहे थे,
- 4:30जहां एक तरफ देश की सीमाएं लोहे की तरह
- 4:33मजबूत थी, और दूसरी तरफ राजमहल से लेकर आम
- 4:37गलियों तक विज्ञान, कविता, गणित और
- 4:39अध्यात्म पर गहरी चर्चाएं होती थी। साल
- 4:42415 ईसवी में जब चंद्रगुप्त विक्रमादित्य
- 4:46के बाद कुमारगुप्त प्रथम ने मगध के राज
- 4:48सिंहासन को संभाला तो उन्हें एक ऐसा
- 4:51साम्राज्य मिला जहां ना तो पैसों की कोई
- 4:54कमी थी और ना ही किसी दुश्मन का डर चारों
- 4:57तरफ सुख शांति थी। इंटरनेशनल ट्रेड अपने
- 5:00चरम पर था और प्रजा पूरी तरह सुरक्षित थी।
- 5:04राजा बनते ही कुमार गुप्त ने महाराजाधिराज
- 5:07और परम भट्टारक जैसी बड़ी-बड़ी उपाधियां
- 5:10धारण की। लेकिन भाई जब एक राजा के पास
- 5:14दुनिया की सबसे बड़ी सेना हो, तिजोरियों
- 5:17में सोने के सिक्कों का अंबार लगा हो और
- 5:19प्रजा पूरी तरह खुशहाल हो, तो ऐसे में उस
- 5:23राजा के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होती
- 5:26है? कुमार गुप्त के सामने चुनौती यह थी कि
- 5:29इस महासाम्राज्य की समृद्धि को इतिहास के
- 5:32पन्नों में हमेशा के लिए अमर कैसे किया
- 5:34जाए? और इसी शांत लेकिन बेहद समृद्ध
- 5:37सिचुएशन के बीच पाटलिपुत्र के राजमहल में
- 5:40बैठे इस राजा के मन में आईडिया आया जिसने
- 5:44आगे चलकर दुनिया की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी
- 5:47बनवा दिया। अब भाई गुप्त साम्राज्य के उस
- 5:50वैभव को समझने के बाद हमें थोड़ा और गहराई
- 5:53में उतर कर उस समय के मगध के सामाजिक और
- 5:55धार्मिक माहौल को समझना होगा। साल 415
- 5:59ईसवी के आसपास जब कुमारगुप्त प्रथम ने
- 6:02राजपाठ संभाला रहे थे। उस द्वार में मगध
- 6:04में दो बड़ी विचारधाराएं एक साथ फल फूल
- 6:07रही थी। एक तरफ था सनातन धर्म जिसके वेद
- 6:11पुराण और यज्ञों की गूंज [संगीत] राजमहल
- 6:13से लेकर आम घरों तक थी। खुद गुप्त राजा
- 6:16पक्के सनातनी थे। लेकिन वहीं दूसरी तरफ
- 6:18बौद्ध धर्म के विचार भी लोगों के दिलों
- 6:21में गहराई से उतर चुके थे। लेकिन दोस्तों
- 6:24सबसे खूबसूरत बात यह थी कि उस समय इन
- 6:27दोनों धर्मों के विद्वान एक दूसरे के
- 6:29विचारों का सम्मान करते थे और आपस में
- 6:32बैठकर शास्त्रार्थ किया करते थे। लेकिन
- 6:35यहां एक ऐसा विद्वान आता है जिसके बिना
- 6:37नालंदा की कहानी अधूरी है। राजा कुमार
- 6:40गुप्त ने तो नालंदा की इमारतें साल 427
- 6:44ईसवी के आसपास बनवानी शुरू की थी। लेकिन
- 6:46उस मिट्टी में ज्ञान का बीज कई सदियों
- 6:49पहले ही बोया जा चुका था। और वो बीज बोया
- 6:52था बौद्ध धर्म के सबसे महान दार्शनिक और
- 6:55वैज्ञानिक आचार्य नागार्जुन ने। आचार्य
- 6:58नागार्जुन दूसरी शताब्दी के महान दार्शनिक
- 7:01थे। यानी कुमारगुप्त से लगभग दो-20
- 7:04[संगीत] साल पहले वे बौद्ध धर्म की महायान
- 7:07शाखा के सबसे बड़े स्तंभ माने जाते हैं।
- 7:10वे प्राचीन भारत के एक डेंजरस केमिस्ट और
- 7:12मेटलॉजिस्ट हुआ करते थे। उन्होंने ही रस
- 7:15चिकित्सा की खोज की थी जिसका मतलब है
- 7:18मर्यूरी यानी दूसरी धातुओं से भस्म बनाकर
- 7:21बीमारियां ठीक करना। कहा जाता है कि
- 7:24उन्होंने ही सबसे पहले सोने और चांदी की
- 7:27भस्म बनाने की विधि खोजी थी जो मरते हुए
- 7:30इंसान को भी जीवनदान दे दे। नागार्जुन ने
- 7:33माध्यमिक सूत्र नाम का एक ग्रंथ लिखा था
- 7:36जिसमें उन्होंने शून्यता का सिद्धांत दिया
- 7:38था। आज के बड़े-बड़े वैज्ञानिक जब
- 7:41आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी को
- 7:44पढ़ते हैं, तो वे हैरान रह जाते हैं कि
- 7:46ठीक वैसा ही विचार आचार्य नागार्जुन ने आज
- 7:49से 1800 साल पहले ही भारत की मिट्टी में
- 7:52लिख दिया था। अब सीन को समझो। नागार्जुन
- 7:56और उनके शिष्यों ने राजगृह और उसके आसपास
- 7:59के जंगलों में अपने छोटे-छोटे आश्रम और
- 8:02विहार बना रखे थे। वे वहां बैठकर धातुओं
- 8:05पर रिसर्च करते थे, दवाइयां बनाते थे और
- 8:08देश विदेश से आने वाले छात्रों को दर्शन
- 8:11और विज्ञान सिखाते थे। यानी राजा कुमार
- 8:14गुप्त के आने से पहले ही नालंदा नाम की उस
- 8:17जगह पर ज्ञान की चिंगारी सुलग गई थी।
- 8:20दूर-दूर से लोग चले आते थे क्योंकि यहां
- 8:22नागार्जुन जैसी महान परंपरा का वास था। जब
- 8:26कुमारगुप्त प्रथम मगध के सम्राट बने, तो
- 8:28उन्होंने देखा कि उनके चारों तरफ बिखरा
- 8:31हुआ ज्ञान का यह समंदर कितना विशाल है।
- 8:34नागार्जुन की छोड़ी हुई रिसर्च, आचार्यों
- 8:37की पोथियां और ज्ञानियों की वह टोलियां
- 8:39अलग-अलग आश्रमों में बंटी हुई थी। कोई एक
- 8:43ऐसा घर नहीं था, जहां इस पूरी बौद्धिक
- 8:46ताकत को एक साथ समेटा जा सके। राजा राजमहल
- 8:50की बालकनी में खड़े होकर अक्सर यही सोचा
- 8:52करते थे। भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी
- 8:56ताकत उसका दिमाग तो [संगीत] मौजूद था।
- 8:58राजा के मन में एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो
- 9:02चुका था कि इस महासाम्राज्य को अमर कैसे
- 9:05किया जाए? कुमारगुप्त के दादा समुद्रगुप्त
- 9:08और पिता चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने भी
- 9:10अपनी तलवार के दम पर एक विशाल एंपायर खड़ा
- 9:14किया था। लेकिन कुमारगुप्त का दिमाग कुछ
- 9:17अलग ही डेंजर लेवल पर काम कर रहा था।
- 9:20उन्होंने इतिहास को बहुत गहराई से खंगाला
- 9:23था और वे जानते थे कि तलवार के दम पर जो
- 9:26साम्राज्य खड़ा होता है उसकी एक टाइम
- 9:28लिमिट होती है। आज नहीं तो कल कोई दूसरा
- 9:32बाहुबली आएगा। आपकी सेना को हराएगा और
- 9:35आपकी सीमाओं को मिटा देगा। तो फिर ऐसा
- 9:38क्या किया जाए जो कभी खत्म ना हो। राजा को
- 9:41समझ आ गया था कि अगर भारत को पूरी दुनिया
- 9:44का रियल लीडर और हमेशा के लिए विश्व गुरु
- 9:47बनाना है तो हमें जमीन जीतने की बजाय
- 9:50इंसानी दिमाग को जीतना होगा। हमें अपनी
- 9:53मिलिट्री पावर से ज्यादा अपनी नॉलेज पावर
- 9:56पर भरोसा करना होगा। लेकिन यहां पर एक और
- 9:59बहुत बड़ा ट्विस्ट आता है। कुमारगुप्त
- 10:01प्रथम खुद एक पक्के सनातनी राजा थे।
- 10:04ब्राह्मण धर्म के रक्षक थे, और भगवान
- 10:06कार्तिकेय के इतने बड़े उपासक थे, कि
- 10:09उन्होंने अपने सोने के सिक्कों पर भी
- 10:11कार्तिकेय की मूर्ति छपवाई थी। तो फिर
- 10:14उनके मन में बौद्ध धर्म [संगीत] के
- 10:16भिक्षुओं के लिए इतनी विशाल यूनिवर्सिटी
- 10:18बनाने का मोटिव क्यों आया? देखिए, असल में
- 10:22उन्होंने देखा कि उस समय मगध के जंगलों
- 10:24में जो बौद्ध भिक्षु और सनातनी विद्वान रह
- 10:27रहे थे, उनके पास ज्ञान का खजाना तो था,
- 10:30लेकिन वे अलग-अलग गुटों [संगीत] में बंटे
- 10:32हुए थे। कोई आयुर्वेद पर रिसर्च कर रहा
- 10:36था। कोई एस्ट्रोनॉमी समझ रहा था तो कोई
- 10:38सिर्फ दर्शन शास्त्र में उलझा हुआ था।
- 10:41राजा ने भांप लिया था कि जब तक यह ज्ञान
- 10:44बिखरा रहेगा दुनिया को इसका फायदा नहीं
- 10:46मिलेगा। उनका मोटिव था एक ऐसा महाविहार
- 10:50खड़ा करना जो किसी राजा के आलीशान महल को
- 10:53भी पानी पिला दे। एक ऐसी सेंट्रलाइज्ड जगह
- 10:56जहां चीन, तिब्बत, कोरिया और मध्य एशिया
- 10:59के राजकुमार और विद्वान खुद चलकर भारत आए।
- 11:03वे चाहते थे कि जब कोई विदेशी भारत की
- 11:06धरती पर कदम रखे तो वह हमारी सेना देखकर
- 11:09नहीं बल्कि हमारे आचार्यों का दिमाग देखकर
- 11:12दंग रह जाए। राजा का विज़न एकदम साफ था।
- 11:16ईंट पत्थर के किले एक ना एक दिन ढह
- 11:18जाएंगे। लेकिन ज्ञान का जो साम्राज्य खड़ा
- 11:21होगा उसे वक्त की बड़ी से बड़ी खूनी लहर
- 11:24भी कभी मिटा नहीं पाएगी। और इसी कड़क और
- 11:27दूरदर्शी सोच के साथ राजा कुमार गुप्त ने
- 11:30इस पूरे प्रोजेक्ट को हकीकत में बदलने की
- 11:33ठान ली। लेकिन इतने बड़े अजूबे को जमीन पर
- 11:37उतारना कोई बच्चों का खेल नहीं था। अब
- 11:39आर्मचेयर थिंकिंग छोड़कर सीधे एक्शन में
- 11:42आने का वक्त था। राजा ने अपने दरबार के
- 11:45सबसे खास मंत्रियों, खजानचीियों और उस दौर
- 11:48के सबसे बड़े इंजीनियर्स यानी वास्तुकारों
- 11:51की एक गुप्त इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। राजा
- 11:54का आदेश एकदम साफ था। मुझे कोई छोटा-मोटा
- 11:57स्कूल या मठ नहीं चाहिए। मुझे एक ऐसी जगह
- 12:00खड़ी करनी है जो आने वाली सदियों तक पूरी
- 12:03दुनिया का नक्शा बदलकर रख दे। इस महार
- 12:06रणनीति का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण
- 12:09हिस्सा था सही जमीन का चुनाव करना। आखिर
- 12:12[संगीत] इतनी विशाल यूनिवर्सिटी बनेगी
- 12:14कहां? इसके लिए पाटलिपुत्र के कोलाहल से
- 12:17दूर राजगृह आज का राजगीर के पास की एक
- 12:20बेहद खास जमीन को चुना गया। लेकिन [संगीत]
- 12:23यहां पर भी एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक सस्पेंस
- 12:26है। प्राचीन बौद्ध ग्रंथों के अनुसार वो
- 12:28जमीन कोई खाली सरकारी बंजर इलाका नहीं थी।
- 12:32वो असल में एक बहुत ही पवित्र आम का बगीचा
- 12:34था जिसे प्रावारिक आम्रवन कहा जाता था।
- 12:37इतिहास बताता है कि उस जमीन को सदियों
- 12:40पहले मगध के 500 सबसे बड़े और अमीर
- 12:43व्यापारियों ने मिलकर अपनी पूरी दौलत दांव
- 12:46पर लगाकर खरीदा था। और खुद भगवान बुद्ध को
- 12:49उनके रहने और ध्यान करने के लिए दान में
- 12:52दिया था। कुमार गुप्त ने सोचा कि ज्ञान का
- 12:55इतना बड़ा सेंटर बनाने के लिए इससे
- 12:58पवित्र, शांत और ऐतिहासिक रूप से सुरक्षित
- 13:01जगह पूरी दुनिया में कोई दूसरी हो ही नहीं
- 13:04सकती। जमीन फाइनल होते ही भाई राजा कुमार
- 13:07गुप्त ने अपनी कूटनीति का वो सबसे डेंजरस
- 13:10पत्ता फेंका जो आज के मॉडर्न इकोनॉमिस्ट्स
- 13:13के भी होश उड़ा देता है। उन्होंने सोचा कि
- 13:16यार अगर मैं इस यूनिवर्सिटी को पूरी तरह
- 13:18से शाही खजाने यानी सरकारी पैसे के दम पर
- 13:22चलाऊंगा तो इसमें एक बहुत बड़ा रिस्क है।
- 13:25कल को अगर मगध पर कोई संकट आ गया, खजाना
- 13:28खाली हो गया या मेरे बाद कोई ऐसा राजा
- 13:30गद्दी पर बैठ गया जिसे पढ़ाई लिखाई से
- 13:33नफरत हो तो यह यूनिवर्सिटी तो एक झटके में
- 13:36बंद हो जाएगी। नालंदा को हमेशा हमेशा के
- 13:39लिए अमर करने के लिए कुमार गुप्त ने एक
- 13:41ऐसी ढांसू आर्थिक रणनीति तैयार की कि
- 13:44सुनने वाले दंग रह जाएं। उन्होंने नालंदा
- 13:47के आसपास के पूरे 100 सबसे अमीर और समृद्ध
- 13:50गांवों की एक लिस्ट बनाई और एक शाही फरमान
- 13:54यानी कानून पास कर दिया कि इन 100 गांवों
- 13:57से मिलने वाला ₹1 एक टैक्स सारा अनाज,
- 14:00दूध, घी और कपड़ा सीधे राजा के खजाने में
- 14:04आने की बजाय सीधे नालंदा यूनिवर्सिटी के
- 14:06फंड में जाएगा। इस कड़क प्लानिंग का मतलब
- 14:09समझ रहे हैं भाई? इसका मतलब था कि नालंदा
- 14:12को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों, हॉस्टल के
- 14:14खाने-पीने और आचार्यों की सैलरी के लिए
- 14:17कभी भी राजा या सरकार के सामने हाथ फैलाने
- 14:20की जरूरत ही नहीं थी। वो इन 100 गांवों के
- 14:24दम पर खुद में एक पूरी तरह सेल्फ सफिशिएंट
- 14:27और आजाद देश की तरह काम करने वाली थी।
- 14:29गांवों के किसान रोजताज़ा अनाज, फल और दूध
- 14:33नालंदा के गेट पर पहुंचाते थे। जिससे वहां
- 14:35रहने वाले छात्रों और प्रोफेसर्स को पैसों
- 14:38की चिंता छोड़कर सिर्फ और सिर्फ अपनी
- 14:40रिसर्च पर ध्यान देने की पूरी आजादी मिल
- 14:43गई। यह थी कुमार गुप्त की वह कड़क और
- 14:46बेजोड़ स्ट्रेटजी जिसने नालंदा के जन्म का
- 14:48रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया। साल 415
- 14:52ईसवी में राजा बनने के बाद कुमार गुप्त ने
- 14:55पूरे 12 साल सिर्फ जमीन के चुनाव, कागजी
- 14:58कारवाई और 100 गांवों के आर्थिक
- 15:00ब्लूप्रिंट को सेट करने में लगाए। और फिर
- 15:03साल आता है 427 ईसवी। [संगीत]
- 15:06इसी साल नालंदा महाविहार के कंस्ट्रक्शन
- 15:09का काम एकदम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया
- 15:11गया था। राजा ने पानी की तरह पैसा बहाना
- 15:15शुरू किया और मगध के कोने-कोने से हजारों
- 15:18मूर्तिकारों, मजदूरों और इंजीनियरों को इस
- 15:20जगह पर लाकर खड़ा कर दिया। अब बात करते
- 15:24हैं सीधे मुद्दे की यानी इसके कड़क
- 15:27आर्किटेक्चर और बनावट की। जब विदेशी
- 15:30यात्री यहां आए तो वे यहां की इमारतों को
- 15:33देखकर दंग रह गए। इंजीनियर्स ने सबसे पहली
- 15:36रणनीति यह अपनाई कि पूरी यूनिवर्सिटी के
- 15:39चारों तरफ लाल ईंटों की कई फीट चौड़ी और
- 15:42लगभग 30 से 40 फीट ऊंची दीवारें खड़ी की।
- 15:45इसका मतलब यह था कि पूरी यूनिवर्सिटी बाहर
- 15:48से देखने पर एक अभेद्य किले जैसी [संगीत]
- 15:50लगती थी, जिसके अंदर कोई भी दुश्मन या
- 15:53लुटेरा चाहकर भी सीधा हमला नहीं कर सकता
- 15:55था। पूरी यूनिवर्सिटी में अंदर घुसने के
- 15:58लिए सिर्फ एक ही मेन गेट था जिसे महाद्वार
- 16:01कहा जाता था। परिसर के अंदर का नक्शा इतना
- 16:04आधुनिक था कि आज के इंजीनियर्स भी दांतों
- 16:07तले उंगली दबा लें। नालंदा के अंदर कुल आठ
- 16:10बड़े लेक्चर हॉल्स और लगभग 300 से ज्यादा
- 16:13क्लासरूम्स बनाए गए थे। हर क्लासरूम को इस
- 16:17तरह डिजाइन किया गया था कि सूरज की रोशनी
- 16:19और ताजा हवा का वेंटिलेशन एकदम परफेक्ट
- 16:22रहे। आचार्यों के व्याख्यान के लिए हॉल
- 16:25में एक ऊंचा चबूतरा होता था और छात्रों के
- 16:28बैठने के लिए नीचे कतारें बनी होती थी। अब
- 16:31आते हैं हॉस्टल्स और छात्रों के रहने की
- 16:33व्यवस्था पर। नालंदा दुनिया की सबसे पहली
- 16:36पूरी तरह से रेजिडेंशियल यूनिवर्सिटी थी।
- 16:39यहां छात्रों के रहने के लिए कई मंजिला
- 16:42हॉस्टल्स बनाए गए थे। हर छात्र के कमरे
- 16:45में पत्थर की चौकियां बनी थी। जहां वे
- 16:47सोते थे। कमरों की दीवारों में खास तरह के
- 16:50आले या शेलफ बनाए गए थे। जिनमें किताबों
- 16:53और दियों को रखा जाता था। इन कमरों को इस
- 16:55तरह डिजाइन किया गया था कि बरसात के मौसम
- 16:58में भी नमी या सीलन अंदर ना आए जिससे हाथ
- 17:02से लिखी हुई दुर्लभ पोथियां और किताबें
- 17:04दीमक या सड़ने से बची रहे। पूरी
- 17:07यूनिवर्सिटी में पानी की सप्लाई के लिए कई
- 17:09गहरे कुएं [संगीत] खोदे गए थे। लेकिन जो
- 17:12सबसे हैरान करने वाली तकनीक थी वो था यहां
- 17:15का ड्रेनेज सिस्टम। 10,000 से ज्यादा
- 17:18लोगों के नहाने और इस्तेमाल किए गए गंदे
- 17:20पानी को परिसर से बाहर निकालने के लिए लाल
- 17:23ईंटों की ढकी हुई नालियां बनाई गई थी। यह
- 17:26नालियां आपस में जुड़कर सीधे परिसर से दूर
- 17:30एक बहुत बड़े तालाब में जाकर गिरती थी,
- 17:32जिससे यूनिवर्सिटी के अंदर कभी भी गंदगी
- 17:35या बीमारी फैलने का खतरा नहीं रहता था।
- 17:38समय का अनुशासन बनाए रखने के लिए एक और
- 17:41गजब की स्ट्रेटजी इस्तेमाल होती थी। पानी
- 17:44की घड़ी परिसर के केंद्र में एक बहुत बड़ा
- 17:47तांबे का कटोरा पानी के टब में रखा जाता
- 17:50था जिसमें एक छोटा सा छेद होता था। जैसे
- 17:53ही कटोरा पानी से पूरा भर जाता था वो डूब
- 17:56जाता था और उसे एक घंटा माना जाता था।
- 18:00कटोरा डूबते ही वहां तैनात भिक्षु तांबे
- 18:03का एक बहुत बड़ा ड्रम या घंटा बजाता था।
- 18:05जिसकी गूंज पूरे नालंदा में सुनाई देती
- 18:08थी। इसी घंटे की आवाज से आचार्यों की
- 18:11क्लास बदलने का और छात्रों के भोजन का समय
- 18:14तय होता था। साल 427 ईसवी की यह बेजोड़
- 18:18इंजीनियरिंग ही नालंदा की असली रीड थी
- 18:21जिसने इसे दुनिया का सबसे मॉडर्न एजुकेशन
- 18:24हब बना दिया। साल 427 ईसवी में इमारतें तो
- 18:28चकाचक बनकर तैयार हो गई। लेकिन अब राजा
- 18:31कुमार गुप्त और यूनिवर्सिटी के आचार्यों
- 18:34के सामने सबसे बड़ी रणनीति यह थी कि यहां
- 18:37आने वाले छात्रों का लेवल कैसा होना
- 18:39चाहिए। साल 450 ईसवी आते-आते नालंदा का
- 18:43रुतबा पूरी दुनिया में इस कदर फैल चुका था
- 18:46कि चीन, तिब्बत, कोरिया, जापान और मध्य
- 18:50एशिया के राजकुमार और बड़े-बड़े विद्वान
- 18:53यहां आने के लिए तड़पने लगे थे। लेकिन
- 18:56यहां पर नालंदा के मैनेजमेंट ने एक ऐसी
- 18:58कड़क और डेंजरस रणनीति अपनाई जो आज के
- 19:01आईआईटी या यूपीएसएससी के एग्जाम को भी
- 19:04पानी पिला दे। यूनिवर्सिटी का नियम एकदम
- 19:07साफ था। यहां एडमिशन किसी सिफारिश, पैसे
- 19:10या राजा के कोटे से नहीं मिल सकता था।
- 19:12चाहे कोई राजा का बेटा हो या किसी आम
- 19:15किसान का अगर नालंदा के अंदर कदम रखना है
- 19:18तो उसे एक बेहद कठिन परीक्षा से गुजरना ही
- 19:21होगा। और इस परीक्षा को लेने की
- 19:24जिम्मेदारी किसी प्रोफेसर की नहीं बल्कि
- 19:26वहां के द्वार पंडित यानी मेन गेटकीपर की
- 19:29होती थी। अब सीन को गहराई से समझो। जब कोई
- 19:32विदेशी छात्र महीनों का कड़ा और जानलेवा
- 19:35सफर तय करके पहाड़ों और नदियों को पार
- 19:38करके नालंदा के उस विशाल महाद्वार पर
- 19:40पहुंचता था, तो उसका स्वागत माला पहनाकर
- 19:43नहीं किया जाता था। मेन गेट पर ही वहां का
- 19:45द्वार पंडित उसका रास्ता रोक कर खड़ा हो
- 19:48जाता था। और भाई मजे की बात सुनो वो द्वार
- 19:51पंडित कोई मामूली चौकीदार नहीं होता था
- 19:54बल्कि वो यूनिवर्सिटी का बहुत बड़ा और
- 19:56चोटी का विद्वान होता था जिसे व्याकरण
- 19:59दर्शन और तर्कशास्त्र की अगाध नॉलेज होती
- 20:02थी। वो द्वार पंडित गेट पर ही खड़े खड़े
- 20:05छात्र का इंटरव्यू शुरू कर देता था। वह
- 20:07संस्कृत भाषा में दर्शन विज्ञान और लॉजिक
- 20:10के ऐसे पेचीदा और डेंजरस सवाल पूछता था कि
- 20:13अच्छे-अच्छे ज्ञानियों के दिमाग का फ्यूज
- 20:15उड़ जाता था। रिकॉर्ड बताते हैं कि इस गेट
- 20:18कीपिंग टेस्ट का रिजेक्शन रेट इतना खतरनाक
- 20:21था कि परीक्षा देने वाले हर 10 छात्रों
- 20:24में से सात या आठ छात्र तो वहीं फेल होकर
- 20:27रोते हुए वापस लौट जाते थे। केवल सबसे तेज
- 20:31और तीक्ष्ण दिमाग वाले टॉप 20% छात्रों को
- 20:34ही इस गेट के अंदर पैर रखने की इजाजत
- 20:36मिलती थी। लेकिन भाई जो एक बार इस परीक्षा
- 20:40को पास करके अंदर घुस गया उसकी किस्मत का
- 20:43ताला हमेशा के लिए खुल जाता था।
- 20:45यूनिवर्सिटी की सबसे कड़क रणनीति यह थी कि
- 20:48अंदर प्रवेश मिलते ही छात्र से रहने,
- 20:51खाने, कपड़ा ढे, दवाइयों और पढ़ाई का एक
- 20:54भी रुपया नहीं लिया जाता था। सब कुछ एकदम
- 20:57मुफ्त था। वो जो 100 गांवों का लगान आता
- 21:00था उसी से इन टॉपर्स का पूरा खर्चा उठाया
- 21:03जाता था। अंदर का माहौल ऐसा था कि लगभग
- 21:0610,000 छात्र और उन्हें गाइड करने के लिए,
- 21:101500 से ज्यादा आचार्य, 24ों घंटे तैनात
- 21:13रहते थे। हर तीन छात्रों पर एक प्रोफेसर
- 21:16होता था ताकि एक-एक बच्चे पर पूरा ध्यान
- 21:19दिया जा सके। पढ़ाई का तरीका भी रट्टा
- 21:22मारने वाला नहीं था। रोज दोपहर को हॉस्टल
- 21:24में शास्त्रार्थ यानी डिबेट होती थी। अब
- 21:28सीन को गहराई से समझो समझते हैं। साल 476
- 21:32ईसवी के इस दौर तक नालंदा में एस्ट्रोनॉमी
- 21:35और गणित की पढ़ाई तो होती थी, लेकिन समाज
- 21:37और धार्मिक लोगों में पुरानी मान्यताओं का
- 21:40बोलबाला था। लोग मानते थे कि जब राहु और
- 21:43केतु नाम के दो राक्षस सूर्य और चंद्रमा
- 21:45को निगल जाते हैं तब ग्रहण लगता है। लोग
- 21:48यह भी मानते थे कि हमारी पृथ्वी एकदम छपटी
- 21:51है और एक जगह रुकी हुई है। लेकिन आर्यभट्ट
- 21:55ने नालंदा की वेधशाला में बैठकर तारों और
- 21:58नक्षत्रों की पोजीशन को नाप कर एक ऐसी बात
- 22:01कह दी जिसने पूरे भारत के रूढ़िवादी
- 22:03पंडितों और आचार्यों के पैरों तले जमीन
- 22:06खिसका दी। उन्होंने साफ-साफ कह दिया
- 22:09पृथ्वी चपटी नहीं बल्कि गोल है और यह अपनी
- 22:13ही धुरी पर घूमती है जिसके कारण दिन और
- 22:16रात होते हैं। इतना ही नहीं भाई उन्होंने
- 22:19गणितीय फार्मूलों से यह भी साबित कर दिया
- 22:21कि सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण किसी
- 22:24राक्षस के निगलने से नहीं बल्कि पृथ्वी और
- 22:27चंद्रमा की परछाई के एक दूसरे पर पड़ने की
- 22:30वजह से होता है। जैसे ही आर्यभट्ट के यह
- 22:33क्रांतिकारी विचार नालंदा के डिबेट हॉल्स
- 22:36में गूंजे यूनिवर्सिटी दो गुटों में बंट
- 22:38गई। एक तरफ थे वो युवा छात्र और आधुनिक
- 22:41सोच के आचार्य जो आर्यभट्ट के गणित और
- 22:44साइंस के दीवाने हो चुके थे। दूसरी तरफ थे
- 22:47वो पंडित जो धर्म और वेदों के खिलाफ मान
- 22:50रहे थे। लेकिन आर्यभट्ट झुके नहीं।
- 22:53उन्होंने अपने गणितीय फार्मूलों जैसे पाई
- 22:56की वैल्यू 3.1416
- 22:58निकालना और शून्य की खोज से पारंपरिक
- 23:01विद्वानों के तर्कों को पूरी तरह ध्वस्त
- 23:04कर दिया। यह कोई मामूली लड़ाई नहीं थी। यह
- 23:07अंधविश्वास के खिलाफ विज्ञान की सीधी और
- 23:10सबसे पहली जंग थी जो नालंदा की धरती पर
- 23:12लड़ी जा रही थी। आर्यभट्ट की इस दृढ़ता ने
- 23:16नालंदा को सिर्फ एक धार्मिक केंद्र बनने
- 23:18से बचा लिया और इसे दुनिया का सबसे बड़ा
- 23:21साइंटिफिक रिसर्च हब बना दिया। दोस्तों,
- 23:24उसके बाद पूरी दुनिया में यह मैसेज चला
- 23:27गया कि अगर असली साइंस और लॉजिक सीखना है,
- 23:30तो नालंदा ही एकमात्र जरिया है। इसी शोहरत
- 23:33का नतीजा था कि साल 630 ईसवी में चीन से
- 23:36एक ऐसा यात्री महीनों का जानलेवा सफर तय
- 23:39करके नालंदा पहुंचा, जिसका नाम थांग।
- 23:43यह वो दौर था जब उत्तर भारत में महान राजा
- 23:46हर्षवर्धन का शासन था। ह्वेन सांग जब
- 23:49नालंदा के महाद्वार के अंदर घुसा तो वो
- 23:52वहां का तामझाम देखकर एकदम हक्का बक्का रह
- 23:55गया। उसने अपनी डायरी में लिखा कि नालंदा
- 23:58की गगनचुंबी इमारतें बादलों को छूती थी और
- 24:01वहां का अनुशासन लोहे की लकीर जैसा था।
- 24:04लेकिन ह्वेनसांग [संगीत] जिस चीज को देखकर
- 24:07सबसे ज्यादा दंग था वो था नालंदा का असली
- 24:10दिल यानी उसकी विशाल तीन मंजिला लाइब्रेरी
- 24:14जिसका नाम था धर्मगंज। इस लाइब्रेरी के
- 24:17कंस्ट्रक्शन के पीछे का सीक्रेट समझिए।
- 24:19आर्यभट्ट की वैज्ञानिक क्रांति के बाद
- 24:22आचार्यों को समझ आ गया था कि अगर इस अथाह
- 24:25ज्ञान को सुरक्षित नहीं रखा गया तो आने
- 24:27वाली नस्लें बर्बाद हो जाएंगी। इसलिए
- 24:30उन्होंने धर्मगंज के तीन विशाल हिस्से
- 24:33बनाए। पहला रत्नासागर।
- 24:36यह वो नौ मंजिला गगनचुंबी इमारत थी जहां
- 24:39मुख्य रूप से विज्ञान, गणित, खगोल शास्त्र
- 24:42और आर्किटेक्चर के गुप्त ब्लूप्रिंट्स रखे
- 24:44थे। दूसरा रत्नोधि। यहां सनातन वेद,
- 24:47पुराण, उपनिषद और बौद्ध धर्म के सबसे
- 24:50पवित्र और मूल ग्रंथ रखे थे। तीसरा रत्न
- 24:52रंजक। यह वो जादुई हिस्सा था जहां कला,
- 24:56संगीत, व्याकरण और आयुर्वेद के वो गुप्त
- 24:58नुस्खे हाथ से लिखी हुई पांडुलिपियों में
- 25:01दर्ज थे जो मरते हुए इंसान को भी जिंदा कर
- 25:03दें। हु्वेनसांग इस लाइब्रेरी को देखकर
- 25:06इतना दीवाना हो गया कि वो यहां सिर्फ
- 25:08घूमने नहीं आया था बल्कि पूरे 5 साल तक
- 25:11इसी कैंपस में रहा। उसने यहां के कुलपति
- 25:14आचार्य शीलभद्र के चरणों में बैठकर
- 25:16योगशास्त्र, बौद्ध दर्शन और संस्कृत भाषा
- 25:20सीखी। व्वेन सांग लिखता है कि इस
- 25:22लाइब्रेरी में आचार्यों की निगरानी में
- 25:24दिन रात सैकड़ों भिक्षु ताड़ के पत्तों पर
- 25:27किताबों की कॉपियां तैयार करते थे ताकि
- 25:30ज्ञान कभी लुप्त ना हो। ह्वेन सांग ने
- 25:32देखा कि इसी लाइब्रेरी की बदौलत ही नालंदा
- 25:35के आचार्य पूरी दुनिया के विचारों को
- 25:38कंट्रोल कर रहे थे। यह विदेशी यात्री यहां
- 25:41से जो भी सीक्रेट्स और कॉपियां सीख कर
- 25:43अपने देशों में ले जा रहे थे उससे चीन,
- 25:46जापान, तिब्बत और कोरिया का पूरा कल्चर और
- 25:50मेडिकल साइंस बदल रहा था। भारत का ज्ञान
- 25:53पूरी दुनिया पर राज कर रहा था। लेकिन इस
- 25:55भयंकर शोहरत का एक बहुत ही खौफनाक अंजाम
- 25:58भी होने वाला था। जिसकी आहट मगध की धरती
- 26:01पर सुनाई देने लगी थी। साल 673 ईसवी में
- 26:05चीनी यात्रियों के जाने के बाद समय का
- 26:07पहिया तेजी से आगे बढ़ा और हम आकर रुकते
- 26:10हैं साल 1193 ईसवी में।
- 26:17यह वो खौफनाक दौर था जब उत्तर भारत की
- 26:20धरती विदेशी तुर्क आक्रमणकारियों की
- 26:22तलवारों से लहूलुहान हो रही थी। और इसी
- 26:25दौर में बिहार और बंगाल के इलाकों में
- 26:28लूटपाट मचाता हुआ आगे बढ़ रहा था। एक बेहद
- 26:31क्रूर, जाहिल और सन की मिलिट्री कमांडर,
- 26:34जिसका नाम था इख्तियार मोहम्मद बिन
- 26:36बख्तियार खिलजी।
- 26:39अब यहां पर उस छिपे हुए इतिहास और सस्पेंस
- 26:42को गहराई से समझने की कोशिश करते हैं।
- 26:45खिलजी का नालंदा से आमना-सामना किसी जंग
- 26:48के मैदान में नहीं हुआ था, बल्कि इसके
- 26:50पीछे एक बेहद हैरान कर देने वाली और
- 26:53रहस्यमई घटना थी। इतिहासकार बताते हैं कि
- 26:57भारत में लूटपाट मचाने के दौरान बख्तियार
- 27:00खिलजी को अचानक एक भयंकर बीमारी ने घर
- 27:03लिया। उसके पेट और सीने में असहनीय दर्द
- 27:06होता था और उसका शरीर धीरे-धीरे गलने लगा
- 27:09था।
- 27:10फीवर इज हाई। यूज द हीटेड टूल।
- 27:13उसने अपने साथ आए दुनिया भर के सबसे बड़े
- 27:16तुर्की हकीमों और डॉक्टरों को काम पर लगा
- 27:19दिया। हकीमों ने रात-दिन एक कर दिए।
- 27:22दुनिया भर की दवाइयां और कारे पिला दिए,
- 27:25लेकिन खिलजी की बीमारी ठीक होने का नाम ही
- 27:27नहीं ले रही थी। वह मौत के एकदम करीब
- 27:30पहुंच चुका था और बिस्तर से हिलने के
- 27:33काबिल भी नहीं बचा था। तभी खिलजी के एक
- 27:36दरबारी ने उसके कान में आकर फुसफुसाया कि
- 27:39हुजूर आपके यह सारे हकीम फेल हो चुके हैं।
- 27:42लेकिन हमारे बिहार में जो नालंदा
- 27:44यूनिवर्सिटी है ना वहां के आयुर्वेद विभाग
- 27:47के जो हेड हैं आचार्य राहुल श्रीभद्र उनके
- 27:50पास ऐसी चमत्कारी विद्या है जो आपको
- 27:53चुटकियों में ठीक कर सकती है। खिलजी ठहरा
- 27:56एक नंबर का घमंडी और कट्टर इंसान। उसे यह
- 28:00बात बर्दाश्त ही नहीं हुई कि कोई भारतीय
- 28:02वैद्य उसके तुर्की हकीमों से ज्यादा काबिल
- 28:05कैसे हो सकता है। उसने गुस्से में आचार्य
- 28:08राहुल श्रीभद्र को कैदी की तरह अपने दरबार
- 28:11में बुलवाया। लेकिन इलाज शुरू करने से
- 28:13पहले खिलजी ने आचार्य के सामने एक ऐसी
- 28:16डेंजरस और नामुमकिन शर्त रख दी कि वहां
- 28:19खड़े मंत्रियों के होश उड़ गए। खिलजी ने
- 28:22कड़क कर कहा मैं तुम्हारी बनाई हुई कोई भी
- 28:25जड़ी बूटी कार भस्म या कोई भी भारतीय दवा
- 28:28अपने मुंह में नहीं डालूंगा लेकिन तुम्हें
- 28:31मुझे ठीक करना पड़ेगा और याद रखना अगर मैं
- 28:35ठीक नहीं हुआ तो मैं तुम्हारी गर्दन धड़
- 28:37से अलग कर दूंगा। सोच कर देखिए भाई आचार्य
- 28:40राहुल श्रीभद्र के सामने साक्षात मौत खड़ी
- 28:44थी। लेकिन प्राचीन भारत के आचार्यों का
- 28:46दिमाग किस डेंजर लेवल पर काम करता था,
- 28:49उसका अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि आचार्य
- 28:52बिल्कुल भी नहीं घबराएं। उन्होंने ठंडे
- 28:54दिमाग से खिलजी का चेहरा देखा और
- 28:56मुस्कुराते हुए 2 दिन का वक्त मांगा।
- 29:00[घंटी की आवाज़]
- 29:01आचार्य वापस नालंदा आए और अपनी गुप्त लैब
- 29:04यानी रत्न रंजक में जाकर एक बहुत ही
- 29:07दुर्लभ पारदर्शी और बेअसर महक वाली
- 29:10आयुर्वेदिक दवा का लेप तैयार किया। दो दिन
- 29:13बाद वे खिलजी के दरबार में वापस पहुंचे।
- 29:16लेकिन इस बार उनके हाथ में कोई दवा नहीं
- 29:18थी बल्कि इस्लाम की पवित्र किताब कुरान
- 29:21थी। उन्होंने खिलजी से कहा हुजूर आपको कोई
- 29:25कड़वी दवा खाने की जरूरत नहीं है। बस आप
- 29:28कल सुबह से रोज इस कुरान के बताए हुए इन
- 29:30पन्नों को ध्यान से पार्च लिया कीजिए। आप
- 29:34ठीक हो जाएंगे। खिलजी ने आचार्य की बात
- 29:36मान ली। अगले दिन सुबह से उसने बिस्तर पर
- 29:39बैठकर कुरान के पन्ने पलटने शुरू किए। अब
- 29:43यहां आता है वह असली सीक्रेट और मेडिकल
- 29:46साइंस। खिलजी जब भी थूक लगा लगाकर कुरान
- 29:49के पन्नों को पलटता था तो उन पन्नों के
- 29:52कोनों पर लगा हुआ वो अदृश्य आयुर्वेदिक
- 29:54दवा का लेप उसकी जीभ के रास्ते सीधे उसके
- 29:57शरीर के अंदर चला जाता था। देखते ही देखते
- 30:01मात्र एक हफ्ते के भीतर खिलजी का वह
- 30:03असहनीय दर्द गायब हो गया और वह बिस्तर से
- 30:06उठकर एकदम चकाचक खड़ा हो गया। उसकी लालाज
- 30:10बीमारी पूरी तरह ठीक हो चुकी थी। लेकिन
- 30:13जान बचाने के बदले तो किसी भी इंसान को
- 30:15एहसानमंद होना चाहिए ना। लेकिन इस सनकी और
- 30:18जाहिल खिलजी के दिमाग में उल्टा ही भूत
- 30:21सवार हो गया। उसके अंदर एक भयंकर हीन
- 30:24भावना पैदा हो गई। उसने सोचा कि यार जिस
- 30:27बीमारी का इलाज मेरे पूरे मजहब के हकीम
- 30:30मिलकर नहीं ढूंढ पाए उसे इन काफिर
- 30:32भारतीयों ने इतनी आसानी से कैसे कर
- 30:34दिखाया। उसके ज़हन में यह बात बैठ गई कि
- 30:38अगर भारत को हमेशा के लिए गुलाम बनाना है
- 30:40तो इनकी इस ज्ञान की रियर की हड्डी को ही
- 30:43तोड़ना होगा। और इसी खौफनाक और जलन से भरी
- 30:46सोच के साथ साल 1193 ईसवी में बख्तियार
- 30:50खिलजी अपनी खूनी तुर्क सेना लेकर सीधे
- 30:53नालंदा महाविहार के मेन गेट पर पहुंच गया।
- 30:56वहां कोई सेना नहीं थी भाई। सिर्फ निहत्ते
- 30:59बौद्ध भिक्षु और बूढ़े आचार्य थे। खिलजी
- 31:02के क्रूर सैनिकों ने तलवारें निकाली और उन
- 31:05मासूम छात्रों और आचार्यों का कत्लेआम
- 31:07शुरू कर दिया। नालंदा की पवित्र धरती खून
- 31:10से लाल हो गई। हजारों विद्वानों को जिंदा
- 31:13दीवार में चिनवा दिया गया या उनकी गर्दनें
- 31:16काट दी गई। लेकिन खिलजी का वैशी दिल इतने
- 31:19से भी नहीं भरा। वह सीधे बरहा हमारी उस
- 31:22तीन मंजिला गगनचुभी लाइब्रेरी यानी
- 31:25धर्मगंज की तरफ। उसने चिल्लाकर हुक्म दिया
- 31:29आग लगा दो इस पूरे साम्राज्य में। इतिहास
- 31:32का वो सबसे काला और दर्दनाक दिन था जब
- 31:35हमारी 9 लाख से ज्यादा दुर्लभ
- 31:37पांडुलिपियों, एस्ट्रोनॉमी के फार्मूलों,
- 31:39गणित के सिद्धांतों और सदियों की रिसर्च
- 31:42को आग के हवाले कर दिया गया। आग इतनी
- 31:44भयानक थी और किताबों का ढेर लगी लाइब्रेरी
- 31:47हफ्तों या महीनों नहीं। पूरे 3 महीने तक
- 31:51धू-धू कर जलती रही। भारत का अतीत, उसका
- 31:54गौरव और पूरी इंसानियत का भविष्य उस आग की
- 31:57लपटों में झलकर काली राख में बदल गया। साल
- 32:011193 ईसवी में नालंदा की वह जादुई [संगीत]
- 32:04लाइब्रेरी 3 महीने तक जलने के बाद आखिरकार
- 32:07शांत हो गई। इमारतें खंडहर बन चुकी थी।
- 32:11आचार्यों का खून सूख चुका था और हवा में
- 32:14सिर्फ जली हुई किताबों की राख उड़ रही थी।
- 32:17लेकिन आज इस घटना के लगभग 800 साल बाद
- 32:20हमें ठंडे दिमाग से बैठकर सोचना होगा कि
- 32:23खिलजी की उस एक माचिस की तीली ने असल में
- 32:26इस दुनिया का क्या नुकसान किया। जरा सोच
- 32:29कर देखिए खिलजी ने सिर्फ ईंट पत्थर की
- 32:32बिल्डिंग या कागज के पन्ने नहीं जलाए थे।
- 32:35उसने पूरी इंसानियत के भविष्य को आग के
- 32:38हवाले कर दिया था। अगर धर्मगंज लाइब्रेरी
- 32:41की वो 9 लाख दुर्लभ किताबें और
- 32:43पांडुलिपियां न जली होती तो आज मानव
- 32:46इतिहास की तस्वीर कुछ और ही होती।
- 32:49आयुर्वेद के जो गुप्त नुस्खे और रस
- 32:51चिकित्सा के फार्मूले आचार्य नागार्जुन और
- 32:54राहुल श्रीभद्र ने खोजे थे अगर वे
- 32:56सुरक्षित होते तो शायद कैंसर, एड्स और न
- 32:59जाने कितनी लालाज बीमारियों का इलाज भारत
- 33:02सदियों पहले ही ढूंढ चुका होता। हमें
- 33:04आधुनिक दवाओं के लिए किसी और देश का मुंह
- 33:07नहीं ताकना पड़ता। महान खगोल शास्त्री
- 33:09आर्यभट्ट ने जो रिसर्च शुरू की थी, अगर
- 33:12उसके आगे का ब्लूप्रिंट सुरक्षित रहता, तो
- 33:15ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने के लिए आज
- 33:18पूरी दुनिया नासा की तरफ नहीं देख रही
- 33:20होती। भारत सदियों पहले ही अंतरिक्ष
- 33:23विज्ञान में दुनिया से 500 साल आगे निकल
- 33:26चुका होता। जो तकनीक और आविष्कार इंसानों
- 33:29को 15वीं या 16वीं सदी में मिले, वे भारत
- 33:32की मिट्टी में 10वीं सदी से पहले ही लिखे
- 33:35जा चुके थे। बख्तियार खिलजी ने सोचा था कि
- 33:38वो नालंदा को मटियामेट करके भारत के ज्ञान
- 33:41की री हड्डी को हमेशा के लिए तोड़ देगा।
- 33:44पर वो जाहिल एक बात भूल गया था। नालंदा
- 33:47सिर्फ एक इमारत, एक ढांचा या लाल ईंटों की
- 33:50दीवार नहीं थी। नालंदा एक विचार था। एक
- 33:54अमर आत्मा थी। आप तलवारों के दम पर राजाओं
- 33:57को हरा सकते हैं। आप आग लगाकर किताबों को
- 33:59राख कर सकते हैं। लेकिन आप उस कौम के
- 34:02दिमाग को कभी नहीं मिटा सकते जिसके खून
- 34:04में ही वेद, विज्ञान और रिसर्च दौड़ती है।
- 34:07नालंदा की वह आग भले ही साल 1193 में बुझ
- 34:11गई हो, लेकिन उसकी मिट्टी आज भी
- 34:13चिल्ला-चिल्ला कर कहती है कि ज्ञान के उस
- 34:15अमर सूरज को वक्त की कोई भी खूनी और जाहिल
- 34:19आंधी कभी हमेशा के लिए बुझा नहीं सकती। आज
- 34:22जब कोई टूरिस्ट बिहार के उस नालंदा के
- 34:24खंडहरों के बीच से गुजरता है तो वहां की
- 34:26जली हुई लाल ईंटें आज भी चीख-चीख कर हमारे
- 34:30गौरवशाली अतीत की गवाही देती हैं। वो
- 34:33खंडहर हमें याद दिलाते हैं कि हम उस महान
- 34:35देश के वासी हैं जिसने दुनिया को लड़ना
- 34:38नहीं बल्कि पढ़ना सिखाया था।
- 34:43दोस्तों जिस बिहार ने दुनिया को ज्ञान की
- 34:46परिभाषा समझाया आज वही बिहार भारत के
- 34:49अशिक्षित राज्य के मामले में दूसरे नंबर
- 34:51पर आ गया है जिसकी शिक्षित रेट 74.3%
- 34:55है। वही पहले नंबर पर आंध्र प्रदेश है
- 34:58जिसकी शिक्षित रेट 72.6%
- 35:01है। कभी सोचा है जिस बिहार ने दुनिया भर
- 35:04में अपना ज्ञान का प्रसार किया। आज इसकी
- 35:06ऐसी हालत क्यों है? कभी सोचा है जिस बिहार
- 35:10में बड़े-बड़े वीर योद्धा अपने तलवार के
- 35:12दम पर दुश्मनों को थर-थर कंपा देते थे। आज
- 35:15उसी बिहार को लोग कमजोर और असहाय समझते
- 35:18हैं। जिस बिहार में सोना, चांदी, धन, दौलत
- 35:22और अनाज की कमी नहीं थी। आज उसी बिहार को
- 35:25दुनिया गरीब राज्य कहते हैं। बिहार के
- 35:27मिट्टी को मेरा नमन है। जहां हिंदू धर्म
- 35:30के माता सीता, सिख धर्म के 10वें गुरु,
- 35:33गुरु गोविंद सिंह जी, जैन धर्म के 24वें
- 35:36तीर्थंकर भगवान महावीर और बौद्ध धर्म के
- 35:39बुद्ध भगवान ने इस पावन जमीन पर जन्म लिए।
- 35:42बिहार के बारे में आपका क्या कहना है?
- 35:45कमेंट में जरूर बताएं और ऐसी ही वीडियो
- 35:47देखने के लिए चैनल को सब्सक्राइब कीजिए।
- 35:50मिलते हैं अगले वीडियो में। जय हिंद।
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This page contains the full transcript of नालंदा की पूरी कहानी - creation to its destruction - Full Documentary | Nalanda university by kwy true tale, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 5,792 words across 737 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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