Computer Networking Full Course - Internet Explained Step by Step (Real-Life Examples) — Transcript
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- 0:00आज के इस वीडियो के बाद आप क्लियरली समझ
- 0:02पाएंगे इंटरनेट एक्चुअली काम कैसे करता
- 0:04है। क्योंकि इस वीडियो में हम समझेंगे
- 0:06कंप्यूटर नेटवर्क्स स्टेप बाय स्टेप रियल
- 0:09एग्जांपल्स के साथ। अब हो सकता है कि आप
- 0:10ये सोच रहे हो कि ये सिर्फ एक बेसिक सा
- 0:12ओवरव्यू है बिल्कुल भी नहीं। इस वीडियो
- 0:14में मैंने हर एक टॉपिक बहुत ज्यादा डिटेल
- 0:17में जाके समझाया है विद प्रैक्टिकल
- 0:19इंप्लीमेंटेशन। तो इस वीडियो को देखने के
- 0:21बाद आप सिर्फ ये समझोगे नहीं कि इंटरनेट
- 0:23कैसे काम करता है। आप फील भी कर पाओगे कि
- 0:25इंटरनेट सच में कैसे काम करता है। अगर आप
- 0:28एक फर्स्ट ईयर स्टूडेंट हैं और अभी
- 0:30रिसेंटली आपने अपनी प्रोग्रामिंग जर्नी
- 0:32शुरू की है या फिर आप लाइफ के किसी भी मोड
- 0:33पर हो और जेनुइनली इस टॉपिक को डेप्थ में
- 0:36समझना चाहते हैं तो ये वीडियो एक परफेक्ट
- 0:38रिसोर्स है क्योंकि ये वीडियो आपकी हेल्प
- 0:40करेगी आपके कॉलेज एग्जाम के लिए। आपकी
- 0:42प्लेसमेंट प्रिपरेशन के लिए और साथ में इस
- 0:45टॉपिक को डेप्थ में समझने के लिए तो
- 0:46ऑब्वियसली ये वीडियो हेल्प करने ही वाली
- 0:48है। मैं आपसे एक छोटी सी एक्सपेक्टेशन
- 0:49रखता हूं। ये वीडियो आप एक बार नहीं
- 0:51मल्टीपल बार देखोगे। पॉइंट्स को रिवाइज
- 0:54करोगे बार-बार। वीडियो को पॉज करके नोट्स
- 0:56बनाओगे और एक छोटा सा चैलेंज लेके चलोगे
- 0:58कि मुझे इस वीडियो में पढ़ाए हुए हर एक
- 1:00टॉपिक को मास्टर करना है। अगर इस वीडियो
- 1:02को देखने के बाद आपको जेन्युइनली लगता है
- 1:04कि हमारे एफर्ट्स आपकी लाइफ में एक
- 1:06इंपैक्ट पुट कर रहे हैं। हमारा कंटेंट आप
- 1:09लोगों के लिए एक वैल्यूुएबल कंटेंट है तो
- 1:10प्लीज इस वीडियो को शेयर करना Lindin पे,
- 1:13Twitter पे, Instagram पे ताकि लोगों तक
- 1:16हमारा कंटेंट पहुंच सके और प्लीज इस
- 1:18वीडियो के नीचे जाके कमेंट करके बताना
- 1:20लास्ट तक देखने के बाद कि यह वीडियो से
- 1:22आपको क्या सीखने को मिला। दिस इज सार्थक
- 1:24शर्मा। यू आर वाचिंग श्री स्पोर्टिंग
- 1:26स्कूल। लेट्स
- 1:27गो। नमस्ते। तो कंप्यूटर नेटवर्क्स पढ़ना
- 1:30शुरू करते हैं। भले ही वीडियो का टाइटल
- 1:32जरूर था कि हाउ इंटरनेट वर्क्स। लेकिन हाउ
- 1:34इंटरनेट वर्क समझने के लिए आपको कंप्यूटर
- 1:36नेटवर्किंग जो कि एक ब्रॉड टॉपिक है उसको
- 1:38समझना पहले जरूरी है। तो हम इस वीडियो में
- 1:41क्या-क्या पढ़ने वाले हैं? मैं आपको एक
- 1:42छोटा सा ओवरव्यू दे देता हूं। और इस
- 1:43वीडियो में मैं टाइम स्टैंप भी ऐड कर
- 1:45दूंगा जिससे कि आपको अगर कोई स्पेसिफिक
- 1:47टॉपिक पढ़ना है तो आप वहां पर भी
- 1:48डायरेक्टली जा सकते हैं। लेकिन मेरा सजेशन
- 1:50रहेगा वीडियो को ध्यान से देखिएगा। बहुत
- 1:52डिटेल्ड वीडियो होने वाली है। आपको मजा भी
- 1:54आएगा और बहुत कुछ सीखने को मिलेगा आपको इस
- 1:56वीडियो में। तो सबसे पहला टॉपिक है हाउ
- 1:58इंटरनेट वर्क्स। तो इंटरनेट एग्जैक्टली
- 2:00काम कैसे करता है? उसके बाद हम जाएंगे
- 2:02थोड़ी बहुत हिस्ट्री समझने की तरफ क्योंकि
- 2:04एग्जैक्टली इंटरनेट शुरू कैसे हुआ? बहुत
- 2:06इंटरेस्टिंग टॉपिक है। उसका इस इंटरनेट की
- 2:09शुरुआत में कोल्ड वॉर का क्या रोल था?
- 2:10यूएसए का क्या रोल था? रशिया का क्या रोल
- 2:12था? विक्टिम बर्नर्स ली आए जिन्होंने www
- 2:15की शुरुआत की और html बनाया उन्होंने और
- 2:17बहुत सारी चीजें हम समझेंगे कि एग्जैक्टली
- 2:19जरूरत क्यों पड़ी और किस तरीके से टाइम
- 2:21बाय टाइम कितने सारे लोगों का
- 2:23कंट्रीब्यूशन था उस इंटरनेट को बनाने के
- 2:25लिए जिसको आप और मैं अभी यूज कर रहे हैं।
- 2:28उसके बाद हम अगले टॉपिक पे जाएंगे। डेटा
- 2:29किस तरीके से ट्रांसफर होता है? ऑप्टिकल
- 2:31केबल्स के थ्रू एक जगह से दूसरी जगह डेटा
- 2:34जो समुद्रों के बीच में ऑप्टिकल केबल्स से
- 2:36लगी हुई है उनसे डेटा ट्रांसफर किस तरीके
- 2:38से होता है? क्लाउड का क्या रोल होता है?
- 2:40पैकेट्स के फॉर्म में किस तरीके से डेटा
- 2:41ट्रांसफर होता है। आईपी, टीसीp, आईपी
- 2:44प्रोटोकॉल्स क्या-क्या होते हैं? इन सब के
- 2:45बारे में थोड़ा बहुत अपन ब्रीफ नॉलेज
- 2:47लेंगे। बाय द वे वीडियो में आगे जाके हम
- 2:49उनको डिटेल में भी समझेंगे। तो डोंट वरी
- 2:50अबाउट दैट। उसके बाद हम जानेंगे आईपी
- 2:52एड्रेस क्या होता है? आपके कंप्यूटर का एक
- 2:54पर्टिकुलर आईपी एड्रेस है और पोर्ट नंबर
- 2:56बेसिकली आपके एप्लीकेशनेशंस क्या-क्या
- 2:58यूज़ कर रहे हैं? उनका क्या-क्या रोल रहता
- 2:59है। उसके बाद हम जाएंगे टाइप्स ऑफ नेटवर्क
- 3:02समझने की तरफ कि नेटवर्क किस तरीके के
- 3:04होते हैं। अब हमने एक ब्रॉड टॉपिक समझ
- 3:06लिया हाउ लाइक इंटरनेट वर्क्स। किस तरीके
- 3:08से डेटा ट्रांसफर हो रहा है ये भी समझ
- 3:10लिया अपन ने। तो किस तरीके से ऑप्टिकल फे
- 3:12केबल्स के थ्रू डेटा ट्रांसफर होता है।
- 3:14लाइक मजा आएगा उसको समझने में आपको। फिर
- 3:16उसके बाद हम जाएंगे कि टाइप्स ऑफ नेटवर्क
- 3:19जैसे लन, मैन, वैन ये सब क्या होते हैं?
- 3:22लोकल एरिया नेटवर्क और ये सब क्या होता
- 3:24है? डिटेल में हम इस इस टॉपिक पे समझेंगे।
- 3:27उसके बाद हम जाएंगे टोपोलॉजी समझने की
- 3:28तरफ। तो टोपोलॉजीस क्या होती है?
- 3:30एग्जैक्टली बस टोपोलॉजी, मैश टोपोलॉजी इन
- 3:32सब के बारे में जानेंगे डिटेल में। उसके
- 3:34बाद हमारा अगला टॉपिक होने वाला है
- 3:35दोस्तों, लेट्स टेक अ एग्जांपल ऑफ़ Zomato।
- 3:37तो एग्जैक्टली आपने Zomato पे अगर कुछ
- 3:39ऑर्डर करा है तो वह किस तरीके से
- 3:40एग्जीक्यूट होता है? इंटरनेट पे किस तरीके
- 3:42से आपका डाटा ट्रांसफर होता है? कैसे
- 3:44रेस्टोरेंट तक पहुंचता है कि भाई फला जगह
- 3:46पे बैठे बंदे ने मान लेते हैं बिरयानी
- 3:48ऑर्डर करी है। तो सार्थक ने बिरयानी अगर
- 3:50ऑर्डर करी है तो वो बिरयानी किस तरीके से
- 3:52ऑर्डर ट्रांसफर होगा? किस तरीके से सारा
- 3:54काम होने वाला है। मेरी रिक्वेस्ट को किस
- 3:55तरीके से मैनेज किया जाएगा। हम समझेंगे
- 3:57ओएसआई मॉडल के बारे में कि ओएसआई मॉडल
- 4:00क्या होता है? और सेवन लेयर्स ऑफ ओएसआई
- 4:02मॉडल, फिजिकल एप्लीकेशन, सेशन, डेटा लिंक,
- 4:04ट्रांसफर मतलब सबके बारे में लगभग अपन
- 4:06पढ़ने वाले हैं। उसके बाद हम जानेंगे कि
- 4:08कंप्यूटरटर्स कम्युनिकेट कैसे करते हैं?
- 4:10क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर क्या होता है?
- 4:12पीियर टू पीियर आर्किटेक्चर क्या होता है?
- 4:13इन सबके बारे में हम डिटेल में समझने वाले
- 4:15हैं। हम वीडियो में आगे जाएंगे और
- 4:17प्रोटोकॉल्स समझेंगे। देयर आर सम सेट ऑफ
- 4:19रूल्स। जैसे मिलिट्री में रूल्स होते हैं।
- 4:20वैसे यहां पे इंटरनेट पे कुछ रूल्स होते
- 4:22हैं। हम प्रोटोकॉल्स के बारे में समझेंगे।
- 4:23आईपी यानी कि इंटरनेट प्रोटोकॉल के बारे
- 4:25में समझेंगे। टीसीp उसके बारे में भी
- 4:28समझेंगे। यूडीपी उसके बारे में भी
- 4:29समझेंगे। HTP http की मेथड्स क्या-क्या
- 4:31होती हैं? सब कुछ समझेंगे। आपके वेबसाइट्स
- 4:33जो आप देखते हैं इंटरनेट पे उनमें किस
- 4:35तरीके से आपके पास डाटा आया है। आप अगर
- 4:37कोई एप्लीकेशन यूज़ कर रहे हैं। आप अगर कोई
- 4:39गेम खेल रहे हैं ईमेल किस तरीके से
- 4:40ट्रांसफर हो रहा है वो समझेंगे। उसके बाद
- 4:43हम आगे जाएंगे टीसीपी यूडीपी और ये मैंने
- 4:45सिर्फ ओवरव्यू देने के लिए बस ये टॉपिक्स
- 4:47लिखे हुए हैं। इतना ही नहीं होने वाला।
- 4:48काफी सारी नई चीजें भी हम इस वीडियो में
- 4:50पढ़ने वाले हैं। तो प्लीज स्टे ट्यून और
- 4:52कॉपी पेन लेके बैठ जाइए क्योंकि वीडियो
- 4:55लंबी होने वाली है। मजा भी आएगा। नोट्स
- 4:57बनाना चाहे तो बना भी सकते हैं और यह आपको
- 4:58कॉलेज में भी शायद हो सकता है हेल्प करे
- 5:00लेकिन लाइफ में और आगे जाके अगर आप कुछ भी
- 5:03पढ़ते हैं रिलेटेड टू एनी टेक्नोलॉजी ये
- 5:05जो मैं आज आपको पढ़ाने वाला हूं वो आपकी
- 5:07बहुत ज्यादा मदद करने वाला है। तो दिस इज
- 5:09बेसिकली अ फाउंडेशन वीडियो फॉर लाइक
- 5:11एवरीवन जो इस फील्ड में भी आना चाहते हैं
- 5:13तो इस वीडियो को आप चाह तो शेयर भी कर
- 5:14सकते हैं। मुझे लगता है कि हमने बहुत सारी
- 5:16बातचीत कर ली है और अब हमें इस टॉपिक को
- 5:19शुरू करना चाहिए जिसका नाम है कंप्यूटर
- 5:20नेटवर्किंग। चलिए शुरू करते हैं। लेट्स
- 5:22गो। तो यह समझने से पहले हाउ इंटरनेट
- 5:25वर्क्स। हमें एक और चीज के बारे में समझना
- 5:27चाहिए जो कि है इंटरनेट। तो ये शब्द
- 5:29इंटरनेट इसका क्या मतलब होता है? इंटरनेट
- 5:31इज़ बेसिकली अ कनेक्शन बिटवीन दी
- 5:34कंप्यूटरटर्स एंड अ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
- 5:36अवेलेबल ऑन दी इंटरनेट व्हिच इज़ यूज्ड टू
- 5:39ट्रांसफर इनेशन फ्रॉम वन डिवाइस टू अनदर
- 5:42व्हिच फॉलोस सम सेट ऑफ रूल्स। अब मैंने
- 5:44बहुत सारी इंग्लिश डाल दी। लेकिन सुनो
- 5:45ध्यान से मैं क्या कहना चाह रहा हूं। इट
- 5:47इज़ बेसिकली अ कनेक्शन। दैट्स इट। और कुछ
- 5:49नहीं है। मतलब मान लेते हैं कि यहां पर
- 5:50आपके सामने है एक कंप्यूटर ए। मेरी
- 5:52राइटिंग पे ध्यान मत देना क्योंकि बहुत
- 5:54खराब है। लेकिन बस मान लो कि यहां पर है
- 5:56मेरे पास यहां पे तीन कंप्यूटरटर्स हैं।
- 5:58दिस इज़ ए, बी एंड सी। मान लेते हैं मेरे
- 6:00पास एक और कंप्यूटर है डी। और मेरे पास एक
- 6:02और कंप्यूटर है मान लेते हैं ई। अब व्हाट
- 6:06इज़ इंटरनेट? इंटरनेट इज़ बेसिकली अ कनेक्शन
- 6:08बिटवीन दीज़ डिवाइसेस। दैट्स इट। जिसके
- 6:11थ्रू ये लोग डेटा ट्रांसफर कर पाते हैं और
- 6:14यहां पर होते हैं कुछ सेट ऑफ रूल्स फॉलो
- 6:16जिससे कि डेटा सही तरीके से ट्रांसफर हो
- 6:18रहा है या नहीं हो रहा है और या डेटा
- 6:19पहुंच गया या नहीं पहुंचा कहां से निकला
- 6:21कहां को जाएगा ये सारी चीजें इंटरनेट की
- 6:24डेफिनेशन के तौर पर आप समझ सकते हैं। लाइक
- 6:26अगर मैं आपको Google करके दिखाऊं तो यहां
- 6:28पर आप देख सकते हैं अ मैं सर्च करता हूं
- 6:31व्हाट इज इंटरनेट और आप देख पाएंगे व्हाट
- 6:34इज इंटरनेट? अ वर्ल्ड वाइड सिस्टम ऑफ
- 6:36इंटरकनेक्टेड कंप्यूटर नेटवर्क्स एंड
- 6:38इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस दैट कम्युनिकेट विद
- 6:40ईच अदर यूजिंग अस्टैब्लिश्ड सेट ऑफ
- 6:43प्रोटोकॉल्स। प्रोटोकॉल्स क्या होते हैं
- 6:44भैया? दीज़ आर सेट ऑफ रूल्स। मतलब कुछ
- 6:46रूल्स हैं जिसके थ्रू डेटा ट्रांसफर होता
- 6:48है। तो इट इज़ अ वर्ल्ड वाइड सिस्टम नथिंग
- 6:51एल्स। मतलब इट इज़ बेसिकली अ इंटरकनेक्टेड
- 6:53नेटवर्क ऑफ कंप्यूटरटर्स एंड इलेक्ट्रॉनिक
- 6:56डिवाइसेस। दैट्स इट। ठीक है? और यहां पर
- 6:58कुछ मैंने रूल्स की बात करी थी। जैसे कि
- 7:00आपने सुना होगा कभी पहले टाइम में टीसीp
- 7:02ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल इसके थ्रू
- 7:04डेटा पैकेट्स के फॉर्म में डिलीवर होता
- 7:06है। जैसे मान लेते हैं मैंने एक डिवाइस से
- 7:08दूसरे डिवाइस तक डेटा भेजा। मान लेते हैं
- 7:10मैंने एक मैसेज भेजा सार्थक एस ए आर टी एच
- 7:13ए के सार्थक। मैंने यहां से मैसेज भेजा
- 7:15है। तो सार्थक जो है वो इकट्ठा ना जाने की
- 7:17जगह पैकेट्स के फॉर्म में डिलीवर होगा। तो
- 7:19किस तरीके से वो पैकेट्स बनते हैं उनके
- 7:21ऊपर कुछ हेडर नाम की चीज लगाई जाती है।
- 7:23यानी कि इस डिवाइस का आईपी एड्रेस और कहां
- 7:25जाना है? मतलब जैसे मान लेते हैं कि मैंने
- 7:27आप लोगों को जैसे मान लेते हैं चिट्ठी
- 7:29लिखते थे अपन पहले के टाइम पे। तो जब मैं
- 7:31चिट्ठी लिखते थे, लेटर लिखते थे, पोस्टमैन
- 7:33के थ्रू उसको भेजते थे तो उसमें मैं अपना
- 7:35लेटर तो लिखता ही था। साथ में उसके कवर पर
- 7:37मैं अपना एड्रेस और साथ में किसको डिलीवर
- 7:40करना है उसका एड्रेस भी लिखता था। मैंने
- 7:41करी नहीं है कभी। लेकिन लिखते थे कुछ इस
- 7:43तरीके से। ठीक है? वैसे ही यहां पर होता
- 7:45है। पैकेट्स के फॉर्म में डेटा ट्रांसफर
- 7:46होता है और उनके ऊपर हेडर होता है। तो
- 7:48यहां से डेटा ट्रांसफर हुआ और वहां तक
- 7:50डेटा पहुंच गया। और डेटा जो है अगर आपको
- 7:52मैं एग्जांपल दूं तो लेट मी शो यू माय
- 7:53टर्मिनल। तो यहां जाके मैं थोड़ा सा
- 7:55टर्मिनल को बड़ा कर देता हूं ताकि आपको
- 7:56समझ ज्यादा अच्छे से आएगा। तो यहां पर आप
- 7:58देखेंगे तो मैंने यहां पे लिखा है पिंग
- 8:01मान लेते हैं मैंने लिखा है shars.com ये
- 8:03हमारी वेबसाइट है और मैंने ये जैसे ही
- 8:05यहां पर एंटर दबाया तो यहां पर आप देख
- 8:06सकते हैं sharans.com जिसका यहां पर आपको
- 8:09IP एड्रेस भी दिखाई दे रहा होगा। यहां से
- 8:12हम लोग देख सकते हैं कि यहां पर 64 बिट्स
- 8:14में मतलब डेटा पैकेट्स के फॉर्म में 64
- 8:16बिट्स के बाइट्स के पैकेट्स के फॉर्म में
- 8:18यहां पर डेटा हमारे पास आ रहा है और यहां
- 8:20पर कुछ है आईसीएमपी सीक्वेंस क्या है यानी
- 8:22कि ये किस सीक्वेंस में आ रहे हैं साथ में
- 8:24टीटीएल टाइम टू लिव क्या होता है किस टाइम
- 8:26पे आया और किस तरीके से डेटा आ रहा है
- 8:27हमारे सामने कुछ इस तरीके से यहां पर हमको
- 8:29चीजें दिखाई देती हैं। मैं अभी के लिए इस
- 8:31प्रोसेस को कर देता हूं टर्मिनेट अगर हम
- 8:34चाहें तो यहां पर जाके हमारे इंटरनेट पे
- 8:37भी देख सकते हैं। लेट मी शो यू shars.com
- 8:39पे जब मैंने यहां पर वेबसाइट को खोला और
- 8:41मैं इंस्पेक्ट करके यहां पर जाऊंगा
- 8:42नेटवर्क वाले पैनल पे तो यहां पर आप देख
- 8:44सकते हैं अभी तो मुझे कुछ भी नहीं दिखाई
- 8:46दे रहा लेकिन जैसे ही मैं वेबसाइट को
- 8:48करूंगा रीलोड तो यहां पर आपको कुछ चीजें
- 8:49दिखाई देंगी जो कि यहां पर आती हुई दिखी
- 8:51इनका स्टेटस कोड क्या है? आपने सुना होगा
- 8:53स्टेटस कोड क्या होता है? 200 से 300 तक
- 8:56आपका मतलब सक्सेस वाली चीजें रहती हैं।
- 8:58400 से आपका जो भी अगर एरर आई है तो वह
- 9:00बताने के लिए होता है। टाइप यहां पे लिखा
- 9:02हुआ है। आपको ज़ूम करके हमारे एडिटर भैया
- 9:04दिखा देंगे। मैं भी थोड़ा सा कर देता हूं
- 9:06ताकि उनको प्रॉब्लम ना हो। तो यहां पर आप
- 9:07देख सकते हैं आपको इनिशिएटर दिखाई दे रहा
- 9:10है। आपको साइज दिखाई दे रहा है हर एक बिट
- 9:11का क्या-क्या था। हर एक डेटा का जो यहां
- 9:13पर आया है। टाइम कितना लगा यहां पर आपको?
- 9:15तो ये सारी चीजें हमको यहां पर दिखाई देती
- 9:16हैं। जिसके बारे में हम वीडियो के आगे
- 9:18डिटेल में डिस्कस करने वाले हैं। तो डोंट
- 9:19वरी अबाउट दैट। तो इंटरनेट के बारे में
- 9:22समझते हैं। सबसे पहले इंटरनेट इज़ बेसिकली
- 9:24अ कनेक्शन ऑफ कंप्यूटर एंड इंटरनेट
- 9:26डिवाइसेस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस जो कि एक
- 9:28दूसरे को डेटा ट्रांसफर करने के लिए बनाए
- 9:30गए हैं। और इट इज़ बेसिकली अ इंटरकनेक्टेड
- 9:32नेटवर्क। दैट्स इट। अब हम आगे बढ़ते हैं
- 9:35और अगला टॉपिक जो हमें यहां पर समझना है
- 9:36इसके बारे में अपन समझेंगे। टीसीपी क्या
- 9:38होता है? यूडीपी क्या होता है? जैसे कि
- 9:40मैंने आपको टीसीपी के बारे में तो बताया
- 9:42जिसमें डेटा पैकेट्स के फॉर्म में जाता है
- 9:44और यहां पर एक सेट ऑफ रूल बनता है कि भाई
- 9:46साहब डेटा जो यहां से निकला है वहां तक
- 9:47पहुंचना चाहिए। देयर इज़ समथिंग नोन ऐ
- 9:49यूडीपी। यूडीपी में क्या होता है भैया?
- 9:51यूडीपी में डेटा फास्टर ट्रैवल तो करता है
- 9:54लेकिन पहुंचा नहीं पहुंचा उसकी कोई गारंटी
- 9:55नहीं होती। जैसे कि आपने
- 9:57कभी कभी किसी की लाइव स्ट्रीमिंग देखी
- 10:00होगी। फॉर एग्जांपल आप मान लेते हैं
- 10:02शेरियंस कि हम YouTube पे लाइव कर रहे हैं
- 10:04तो आप देखेंगे तो वहां पर आपको डेटा
- 10:06कंप्लीटली पहुंचता हुआ नहीं दिखता। वीडियो
- 10:07की क्वालिटी कभी थोड़ी सी ऊपर नीचे होती
- 10:09है या कुछ पिक्सल्स आपको गायब दिखते हैं
- 10:11या फिर गेम्स वगैरह हम खेलते हैं ऑनलाइन
- 10:13तो उसमें कभी कबभार हमको पिंग हाई होने पे
- 10:15चीजें आीढ़ी दिखाई देने लगती हैं। थोड़े
- 10:17से हमारे पिक्सल्स डिस्टोर्टेड दिखाई देते
- 10:19हैं। तो दे आर फॉलोइंग यूडीपी और टीसीपी
- 10:22इस तरीके से यहां पर काम होता है। भाई
- 10:23साहब इसके बारे में भी समझेंगे क्या होता
- 10:25है। डिटेल में समझेंगे। हमें सबसे पहले ये
- 10:27समझना था इंटरनेट क्या होता है? ये हमें
- 10:28समझ आ गया। अब कैसे काम करता है ये आप
- 10:30प्रोसेस में समझते जाएंगे। ठीक है जी? तो
- 10:32अब थोड़ा हिस्ट्री को समझते हैं कि ये
- 10:33कहानी शुरू कहां से हुई। ये जो इंटरनेट हम
- 10:35आज यूज़ कर रहे हैं ये स्टार्ट कहां से
- 10:37हुआ है उसकी बिगिनिंग के बारे में समझते
- 10:39हैं। तो कहानी शुरू होती है वर्ल्ड वॉर
- 10:41सेकंड के बाद में। वर्ल्ड वॉर सेकंड जैसा
- 10:43कि आप जानते हैं दो कह सकते हो पावर्स थी
- 10:45अलाइड पावर और एक्सिस पावर। एलाइट पावर
- 10:48में हुआ करते थे यूएसए, रशिया, चाइना,
- 10:51ब्रिटेन ये सारी कंट्रीज और एक्सिस पावर
- 10:53में हुआ करती थी जर्मनी, जापान, इटली और
- 10:56ये सब। तो जैसे कि आपको पता होगा अलाइव
- 10:58पावर ये वॉर जीत गई थी। है ना? यूएसए ने
- 11:00न्यूक्लियर अटैक कर दिया था और उसके बाद
- 11:01जो भी आपको कहानी है पता ही है उसके बाद।
- 11:03तो हुआ क्या? रशिया और यूएसए दोनों जीते
- 11:06जरूर थे और साथ में मिलके जीते थे लेकिन
- 11:07दोनों की जो सोचने के तरीके थे, जो उनकी
- 11:09मानसिकताएं थी वो अलग-अलग थी। यूएसए इज़ अ
- 11:12कैपिटलिस्ट कंट्री जो लिबर्टी पे बिलीव
- 11:14करती थी और रशिया इज़ अ कम्युनिस्ट कंट्री।
- 11:16तो दोनों के बीच में सुपर पावर बनने के
- 11:18लिए क्योंकि दोनों बहुत बड़ी-बड़ी कंट्रीज
- 11:20थी। दोनों के बीच में सुपर पावर बनने की
- 11:22एक रेस स्टार्ट हो गई कि भाई हम दोनों में
- 11:23से कौन ज्यादा पावरफुल है और शुरू हुई
- 11:25स्पेस रेस। इस स्पेस रेस को डोमिनेट करा
- 11:28रशिया ने। उन्होंने लॉन्च करा स्पुतनिक और
- 11:30स्पुतनिक वाज़ दी फर्स्ट आर्टिफिशियल
- 11:32मेनमेड सेटेलाइट जो स्पेस में गई थी और
- 11:35वहां से रशिया ने ये वॉर को जीतना स्टार्ट
- 11:38किया। तो अब यूएसए को बहुत बड़ा शौक लगा
- 11:40उस इंसिडेंट के बाद कि भाई हम तो ये वॉर
- 11:42हार रहे हैं। भैया ये जो कोल्ड वॉर हमारे
- 11:43बीच चल रही है जिसको कोल्ड वॉर का आप टर्म
- 11:45सुना होगा आपने कभी। यह जो कोल्ड वॉर चल
- 11:47रही है ये तो रशिया जीत रहा है। हम हार
- 11:48रहे हैं। तो उन्होंने क्या करा? उन्होंने
- 11:50बनाई एक एजेंसी जिसको बोलते हैं एक एजेंसी
- 11:53जिसको बोलते हैं आरपा एडवांस रिसर्च
- 11:57प्रोजेक्ट्स एजेंसी आरपा आरपा बेसिकली
- 12:00क्या करती थी प्रॉब्लम ये थी कि पहले डेटा
- 12:03जो है डेटा के सेंटर्स बने हुए रहते थे
- 12:05मान लेते हैं दिस इज़ सेंटर वन दिस इज़
- 12:07सेंटर टू इस तरीके से डेटा के सेंटर थे तो
- 12:10यूएसए को क्या डर था अगर रशिया ने हम पे
- 12:12न्यूक्लियर अटैक कर दिया तो हमारा तो डेटा
- 12:14सब एक जगह सेंट्रलाइज्ड है अगर इस पे अटैक
- 12:16हो गया तो हमारा तो पूरा डेटा डिस्ट्रॉय
- 12:18हो जाएगा ये तो बहुत बड़ी प्रॉब्लम में तो
- 12:20उससे बचने के लिए उन्होंने क्या करा? ई
- 12:21बनाई आरपा। आरपा का काम था बेसिकली डेटा
- 12:25किस तरीके से मिलिट्रीज के बीच में
- 12:27ट्रांसफर हो रहा है? इसका एक नेटवर्क टाइप
- 12:28का कुछ स्ट्रक्चर बनाना चाहिए इन लोगों को
- 12:30जो कि बाद में जाके बनी
- 12:33डारपा। डारपा क्या है भैया? डारपा इज़
- 12:35बेसिकली आगे डिफेंस लगा दो। बाकी वही
- 12:37पुराना आरपा। मेरा राइटिंग मतलब मुझे बहुत
- 12:40गंदी लगती है भाई। माफ़ करना। लेकिन डारपा
- 12:41लिखा हुआ है वहां पे। तो आरपा से बनी
- 12:44डारपा। अब भैया इसका रोल क्या था यहां पे?
- 12:46आरपा और डारपा। आप इसको कह सकते हैं।
- 12:48इन्होंने क्या करा? इन्होंने स्टार्ट किया
- 12:50इंटरनेट को एक्सप्लोर करना। और डारपा ने
- 12:53यह काम दिया कुछ यूनिवर्सिटीज को इंटरनेट
- 12:56को बनाने के लिए टेक्निकली कहा जाएगा। तो
- 12:58हुआ क्या? कहानी कहां से शुरू हुई? कहानी
- 13:00स्टार्ट होती है जब चार यूनिवर्सिटीज
- 13:04यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया एंड लॉस
- 13:07एंजेलिस, यूसीएलए, यूनिवर्सिटी ऑफ
- 13:10स्टैनफोर्ड,
- 13:12यूनिवर्सिटी ऑफ यूनिवर्सिटी ऑफ
- 13:15कैलिफोर्निया एंड स
- 13:18सेंटा बारबरा करके ऐसा कुछ नाम था और
- 13:20लास्ट में थी यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा। तो ये
- 13:23चार यूनिवर्सिटी को इस नेटवर्क को डेवलप
- 13:26करने का काम दिया और ये सारी यूनिवर्सिटीज
- 13:28इंटरकनेक्टेड हो के एक दूसरे के साथ मिलके
- 13:31इस पूरे प्रोजेक्ट पे काम कर रही थी। तो
- 13:33ये कहानी मुझे लगता है आप लोगों को समझ आई
- 13:35होगी किस तरीके से ये लोग मिलके एक दूसरे
- 13:37के साथ काम कर रहे थे। आरपा का क्या रोल
- 13:39था? उन्होंने किस तरीके से काम किया। तो
- 13:421960 के आसपास ही यूएसए ने आरपा को बनाया।
- 13:46अब वहां से एक साइंटिस्ट हुआ करते थे
- 13:48जिसका नाम था पॉल बैरन। पॉल बैरन ने क्या
- 13:50कहा? हम डेटा को सेंट्रलाइज करने की जगह
- 13:52अलग-अलग जगह पे रखेंगे। जिससे होगा क्या
- 13:54कि अगर किसी एक जगह पे भी अटैक हो गया।
- 13:56मान लो ना मान लेते हैं कि ये चार हमारे
- 13:58डेटा सेंटर्स हैं। तो मान लेते हैं यूसी
- 13:59एलएलए पे अटैक हो गया तो ये तीनों तो
- 14:01इंटरकनेक्टेड हैं ही। तो ये तीनों अपने
- 14:03बीच में डेटा को ट्रांसफर कर पाएंगी। कोई
- 14:04पूरा नेटवर्क डिस्ट्रॉय नहीं होगा। क्या
- 14:06आप समझ पा रहे हैं मेरी बात? आपस में
- 14:07कंटीन्यूअस प्रोसेस में चीजें चलती
- 14:09रहेंगी। तो यहां तक की कहानी तो मुझे लगता
- 14:10है समझ आ रही होगी। उसके बाद क्या हुआ?
- 14:12पॉल बैरन ने कहा कि हम लोग एक काम करते
- 14:15हैं। डेटा जो हम ट्रांसफर कर रहे हैं वो
- 14:16हम एक साथ ट्रांसफर नहीं करेंगे। डेटा को
- 14:18हम ट्रांसफर करेंगे पैकेट्स के फॉर्म में।
- 14:20मतलब हम छोटे-छोटे डेटा के पैकेट्स
- 14:22बनाएंगे और उन डेटा के पैकेट्स को एक जगह
- 14:24से दूसरी जगह हम ट्रांसफर करने की तरफ
- 14:26जाएंगे। क्या आप समझ पा रहे हैं मेरी बात?
- 14:28ठीक है? तो
- 14:291969 में 1969 में यूनिवर्सिटी ऑफ
- 14:35कैलिफोर्निया एंड लॉस एंजेलिस ने एक मैसेज
- 14:38भेजा यूनिवर्सिटी ऑफ स्टैनफोर्ड को।
- 14:43एक मैसेज भेजा। वो मैसेज था भाइयों लॉग
- 14:46इन। इन्होंने एक मैसेज भेजा। दिस वास दी
- 14:49फर्स्ट टाइम जहां पे इंटरनेट की हार्ट बीट
- 14:51सुनाई दी। जहां से इंटरनेट की शुरुआत हुई।
- 14:53है ना? इन्होंने एक मैसेज भेजा एल ओ जी आई
- 14:57एन। ये था वो मैसेज लॉग इन। लेकिन क्या
- 15:00हुआ? पैकेट्स के फॉर्म में डेट ट्रांसफर
- 15:02हो रहा था। तो एल और ओ तो पास हो गए लेकिन
- 15:04जी आई एन पास नहीं हो पाए। तो एल ओ पास
- 15:06हुआ और सिस्टम क्रैश हो गया। जिसके थोड़े
- 15:08समय के बाद पूरा मैसेज भी ट्रांसफर हो गया
- 15:09था। और दिस इज़ नोन ऐज़ स्टार्टिंग ऑफ दी
- 15:11इंटरनेट। तो जो पहला मैसेज एक जगह से
- 15:13दूसरी जगह इंटरनेट की हेल्प से भेजा गया
- 15:15था वो मैसेज था एल ओ लो भेजना क्या चाहते
- 15:18थे? लॉग इन पहुंचा क्या? लो। आई होप आपको
- 15:20ये भी समझ आ रहा है। राइट? चलिए तो यहां
- 15:22तक कोई परेशानी नहीं है। यहां तक समझ आ
- 15:24रहा है कि इंटरनेट की शुरुआत कहां से हुई
- 15:25है। अब अगर हम थोड़ा सा और डिटेल में
- 15:27जाएं। मुझे यहां पर एक और पेज बनाना है।
- 15:30तो ये क्या मैं पेज बना सकता हूं? ऑलराइट।
- 15:32तो मुझे लगता है यहां तक का आपको जो भी
- 15:33मैंने सिखाया ये चीजें थोड़ी बहुत समझ आई
- 15:35होंगी। वीडियो में पीछे जाओगे आ जाएगा
- 15:37समझ। अब यहां पे हुआ क्या? मैसेज तो
- 15:38ट्रांसफर हो गया लेकिन आगे जाके चीजों में
- 15:41थोड़ी सी प्रॉब्लम आने लगी क्योंकि एक
- 15:42सेंट्रलाइज्ड लैंग्वेज नहीं थी कि यहां से
- 15:44यहां तक डाटा भेज रहे हैं तो उसके लिए कोई
- 15:46एक बेसिकली सेट ऑफ रूल्स नहीं थे। तो एक
- 15:48साइंटिस्ट हुआ करते थे विंड सर्फ एंड बॉब
- 15:51कैन उनके आपको यहां पे स्क्रीन पे फोटो
- 15:53दिख रहे होंगे। इन्होंने डेवलप किया 1983
- 15:56में टीसीपीआईपी प्रोटोकॉल। प्रोटोकॉल क्या
- 15:59होते हैं? जैसे मिलिट्री में रूल्स होते
- 16:01हैं। किसी भी चीज को एग्जीक्यूट करने के
- 16:02लिए एक सेट ऑफ रूल बनाया गया है। वैसे ही
- 16:04इन्होंने इंटरनेट को रन करने के लिए एक
- 16:06सेट ऑफ रूल बनाया व्हिच इज नोन एस टीसीपी
- 16:08और आईपी। इसके थ्रू होता क्या था? फॉर
- 16:10एग्जांपल मैंने एक जगह फॉर एग्जांपल मेरा
- 16:12एक बड़ा सा मैसेज था। तो मैंने क्या करा?
- 16:14उस मैसेज को मान लेते हैं पैकेट्स के
- 16:16फॉर्म में तोड़ दिया। अब ये मैसेज मैं
- 16:19यहां से यहां की तरफ भेजना चाहता हूं। तो
- 16:21पहले पहला पैकेट जाएगा। यह पहला पैकेट चला
- 16:23गया। फिर दूसरा पैकेट जाएगा। फिर तीसरा
- 16:24पैकेट जाएगा। फिर चौथा पैकेट जाएगा। और
- 16:26यहां पर जाके उन सारे पैकेट्स जो कि टूटे
- 16:29हुए हैं उनको यहां ले जा के जोड़ दिया
- 16:31जाता है। तो यहां ले जा के मैंने इन
- 16:33पैकेट्स को जोड़ दिया। कुछ इस तरीके से है
- 16:35ना ये मिक्स हो गए जुड़ गए। कुछ इस तरीके
- 16:37से टीसीपीआईपी प्रोटोकॉल बना। उसके बाद
- 16:40नेशनल इंस्टट्यूट ऑफ शायद साइंस साइंस
- 16:42इंस्टट्यूट ऑफ़ अमेरिका कुछ इस तरीके का
- 16:44इंस्टट्यूट था जिन्होंने एनएसएफ नेट
- 16:46बनाया। और हां हां हां एक बहुत इंपॉर्टेंट
- 16:48चीज तो मैं बताना ही भूल गया। ये जो पहली
- 16:50बार में ये चीजें जो डेवलप करी थी आरपा ने
- 16:52जो एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर हो रहा
- 16:54था। दिस थिंग इज नोन एज
- 16:58आरपनेट आरपानेट जो पहले डेवलप हुआ था
- 17:01आरपनेट 1969 के आसपास जो डेवलप हुआ था दिस
- 17:05थिंग इज़ नोन एज आरपनेट आई होप ये समझ आया
- 17:07होगा आप लोगों को और यहां पे टीसीpआपी
- 17:09प्रोटोकॉल्स इंट्रोड्यूस हुए जिससे
- 17:11इंटरनेट को एक सेंट्रलाइज सिस्टम के फॉर्म
- 17:12में डेवलप किया गया जिससे होता था कि आप
- 17:15एक जगह से एक दूसरी जगह तक कोई भी मैसेज
- 17:17ट्रांसफर कर रहे हैं तो वो किस तरीके से
- 17:18ट्रांसफर होगा वहां पर वो डेवलप हुआ। अब
- 17:20ये काम कैसे करता है वो हम डिटेल में आगे
- 17:21जाके समझेंगे। उसके बाद 1990 के
- 17:26आसपास 1990 में देयर वाज़ अ साइंटिस्ट नेम
- 17:29एज टीम बर्नर्स ली। टीम बर्नर्स ली ने
- 17:32क्या करा? मैं उनका नाम शॉर्ट फॉर्म में
- 17:33लिख देता हूं। टी बर्नर्स ली। टीम
- 17:36बर्नर्सली ने डेवलप करी तीन इंपॉर्टेंट
- 17:38चीजें। पहला डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू
- 17:41वर्ल्ड वाइड वेब जिससे कि आप पूरे वर्ल्ड
- 17:44को टेक्निकली एक नेटवर्क के फॉर्म में
- 17:46जोड़ सकते हैं। एक बेसिकली इंटरनेट को
- 17:48ब्राउज़र से जोड़ने का तरीका बना यहां पे।
- 17:50उन्होंने डेवलप करा
- 17:53एचटीपी ये भी आप लोगों ने शायद सुना होगा
- 17:55और एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज भी उन्होंने
- 17:57डेवलप करी जिसका नाम मैं यहां जाके नीचे
- 17:58लिख देता हूं व्हिच इज़
- 18:00एचटीएमएल ये कुछ चीजें जो उन्होंने डेवलप
- 18:03करी थी ब्रिटिश साइंटिस्ट थे जिन्हें आगे
- 18:05जाके नाइटहुड अवार्ड मिला तो उनका नाम हो
- 18:07गया था सर टिम बर्नर्सली तो अगर तुम्हें
- 18:09सर बनना है तो ब्रिटिश का नाइटहुड अवार्ड
- 18:11ले लेना जाके मजाक कर रहा हूं लेकिन 1990
- 18:14के आसपास टिम बर्नर्सली ने ये तीन चीजें
- 18:16डेवलप करीबड http और html इन चीजों से हुआ
- 18:20क्या? इन चीजों से हुआ यह कि आप अब
- 18:23इंटरनेट सबके लिए एक्सेबल हो गया। इंटरनेट
- 18:26सारे लोग अब यूज़ कर सकते थे। इंटरनेट को
- 18:28ब्राउज़र से जोड़ दिया गया जिससे हुआ ये
- 18:30यानी कि उन्होंने एक लैंग्वेज बनाई बनाई
- 18:32जिसका नाम था HTML जो कि ब्राउज़र की
- 18:34लैंग्वेज कह सकते हैं हम लोग अभी के लिए।
- 18:35इन्होंने एक HTTP बनाया जो कि हेल्प करता
- 18:38था ब्राउज़र्स को इंटरनेट से जोड़ने के लिए
- 18:40और एक वर्ल्ड वाइड वेब जो कि बताया मैंने
- 18:42अभी थोड़ी देर पहले हेल्प करता था लोगों
- 18:44को जोड़ने के लिए। http बेसिकली एक
- 18:45प्रोटोकॉल हुआ करता था। और कुछ इस तरीके
- 18:47से उन्होंने चीजें डेवलप की। सबके बारे
- 18:49में पढ़ेंगे समय के साथ। ठीक है? तो ये थी
- 18:51इंटरनेट की एक ब्रीफ हिस्ट्री शॉर्ट में
- 18:53बताई। वैसे है बहुत ज्यादा डिटेल। तो अगर
- 18:54आपको इंटरेस्ट आ रहा है तो आप इसके बारे
- 18:56में एक्सप्लोर जरूर करना कि शुरुआत कहां
- 18:57से हुई थी? शुरुआत हुई थी भाई साहब यहां
- 18:59पे वर्ल्ड वॉर टू के आसपास। यानी कि जो
- 19:02वर्ल्ड वॉर टू हुआ करता था वहां से उसके
- 19:06बाद स्टार्ट हुआ कोल्ड वॉर। कोल्ड वॉर पे
- 19:09यूएस और रशिया के बीच की लड़ाई में डेवलप
- 19:12हुआ इंटरनेट। और वहां पे कितने सारे
- 19:14साइंटिस्ट का रोल था। पहले थे हमारे ऑल
- 19:16बैरन। फिर उसके बाद आए भाई विंडर्फ और
- 19:19बॉबकन। फिर उसके बाद यहां पर आए हमारे
- 19:21टिमनसली और कंटीन्यूअसली इंटरनेट का
- 19:24डेवलपमेंट होता चला गया। मेरा फोन बंद
- 19:27होने वाला है बाय द वे लेकिन कोई बात
- 19:28नहीं। उसके बाद इंटरनेट का कंटीन्यूअस
- 19:29डेवलपमेंट होता चला गया। 2000 के आसपास
- 19:32भाई अपडेट्स और ज्यादा आए। इंटरनेट का बूम
- 19:34आया। फिर उसके बाद उसके बाद भाई क्लाउड
- 19:37कंप्यूटिंग स्ट्रीमिंग सर्विसेस यूडीपी
- 19:39आया है। उसके बाद बहुत सारे डेवलपमेंट
- 19:42हुए। एआई सैस और इन सब चीजों का डेवलपमेंट
- 19:44हुआ। उसकी स्टार्टिंग कहां से हुई अब मुझे
- 19:46लगता है आप लोगों को ये थोड़ा बहुत समझ
- 19:48में आ गया होगा। उसके बाद हम बढ़ते हैं
- 19:50थोड़ा सा आगे की तरफ। हाउ डेटा इज
- 19:52ट्रांसफरर्ड। फॉर एग्जांपल आज के टाइम पे
- 19:54मैं एक जगह से किसी दूसरे बंदे को मैसेज
- 19:56करता हूं। मान लेते हैं कि मैं यहां पर
- 19:58बैठा हुआ हूं भोपाल में और मान लेते हैं
- 20:00कि मेरा दोस्त है अमन जो कि रहता है यूएसए
- 20:03में। तो अगर मैं भोपाल से यूएसए में अमन
- 20:06को मैसेज करना चाहता हूं तो डाटा किस
- 20:07तरीके से ट्रांसफर होता है वो हम समझेंगे
- 20:09बस थोड़ी सी देर में। ठीक है? तो मुझे
- 20:11लगता है यहां तक आप लोगों को कोई परेशानी
- 20:13नहीं होगी। यहां तक जो मैंने बताया वो आप
- 20:15लोगों को समझ आ ही गया होगा। किस तरीके से
- 20:16पैकेट्स के फॉर्म में डेटा ट्रांसफर हुआ
- 20:18करता था। दैट्स इट। ठीक है? अभी के लिए बस
- 20:20इतना काफी है हिस्ट्री में। हमें बढ़ना
- 20:22चाहिए। अब आगे की तरफ। एक जरूरी चीज और हम
- 20:24लोगों ने मतलब हम लोगों ने नहीं सॉरी
- 20:26डेवलपर्स ने IP एड्रेस का आविष्कार किया
- 20:29था। आपने सुना होगा
- 20:31IPV4 के बारे में जिसमें कह सकते हो कि आप
- 20:35डाटा कुछ इस तरीके से होता है
- 20:39255 डॉट दिस इज़ बेसिकली अ 32 बिट सिस्टम
- 20:45255 कुछ इस तरीके से डेटा ट्रांसफर होता
- 20:48था IP एड्रेस में। अब प्रॉब्लम ये थी कि
- 20:50इट इज़ बेसिकली अ वेरी कॉम्प्लेक्स सिस्टम
- 20:52क्योंकि धीरे-धीरे जब इंटरनेट का
- 20:53डेवलपमेंट हो रहा था ना बहुत सारे लोग
- 20:55इंटरनेट के साथ जुड़ रहे थे। अब आप खुद
- 20:57सोच के देखो। पहले के टाइम में कोई किसी
- 20:58का नंबर सेव नहीं करता था। जब वो टेलीफोन
- 21:00चला करते थे तो लोग नंबर याद कर लेते थे
- 21:03क्योंकि लिमिटेड लोगों के पास फोन हुआ
- 21:05करते थे। लेकिन जब फोन के यूज़र्स बढ़े तो
- 21:08आप लोग अब क्या करते हैं? आप किसी का नंबर
- 21:09शायद याद नहीं रखते। आप फोन में उसके नाम
- 21:11से सेव कर लेते हैं। जैसे मेरे को अगर मान
- 21:13लेते हैं कोई नंबर है जिस नंबर है
- 21:1799988। मान लेते हैं ये किसी का नंबर है।
- 21:20अब मान लेते हैं कि मैं इस नंबर को याद
- 21:21नहीं रखना चाहता तो मैं इसको सेव कर
- 21:23लूंगा। फॉर एग्जांपल अमन के नाम से।
- 21:26मान लेते हैं अमन के नाम से। वैसे ही सेम
- 21:28यहां पर था। डेवलप हुआ डी एन एस वि इज नोन
- 21:31एज डोमेन नेम सिस्टम। यानी कि अब हम हर एक
- 21:34बंदे को हर एक एड्रेस को इंटरनेट पे जो
- 21:37अवेलेबल है उसको हम एक डोमेन नेम सिस्टम
- 21:39के थ्रू एक प्रॉपर नाम दे देंगे जिसके
- 21:41थ्रू वो आइडेंटिफाई हो सकता है। जैसे कि
- 21:42अगर हम इंटरनेट पे जाते हैं और हम सर्च
- 21:44करते हैं
- 21:46shars.com तो ये जो shars.com मैंने लिखा
- 21:49है
- 21:50www.sharं.com या http से sharं.com ये जो
- 21:54मैंने यहां पर लिखा है, दिस इज़ बेसिकली अ
- 21:55डोमेन नेम सिस्टम। अगर आप इसका आईपी चेक
- 21:57करना चाहते हैं, मैंने फिर से आपको एक बार
- 21:59और बताया था। एक बार और बता देता हूं। ठीक
- 22:00है? मैंने यहां पे कहा इसको थोड़ा सा बड़ा
- 22:03करके देखते हैं। पहले तो एक बार मैंने
- 22:05यहां पे लिखा मान लेते हैं ping
- 22:09google.com तो आप अगर ध्यान से देखेंगे तो
- 22:12ये जो सामने नंबर लिखा हुआ है ये जो सामने
- 22:15नंबर लिखा हुआ है 1 4 2 और कुछ इस तरीके
- 22:18से ये जो लिखा है ये Google का सर्वर है।
- 22:20आई काइंड ऑफ कह सकते हैं। ये Google का
- 22:21IPपी एड्रेस है। अपन काइंड ऑफ कह सकते
- 22:23हैं। इट इज़ वन ऑफ द सर्वर ऑफ़ Google। ऐसे
- 22:25ही बहुत सारे होते हैं और ऐसे ही आप किसी
- 22:26का भी चेक करना चाह तो कर सकते हैं। तो
- 22:28मुझे लगता है यहां तक आप लोगों को समझ आया
- 22:30होगा किस तरीके से हमारा यहां पर काम होता
- 22:32है। इंटरनेट की हिस्ट्री क्या थी और कहां
- 22:33से चीजों की शुरुआत हुई। अब मुझे लगता है
- 22:36कि हमें चीजों पे आगे बढ़ना चाहिए और अब
- 22:37ये समझना चाहिए कि डेटा एग्जैक्टली किस
- 22:39तरीके से ट्रांसफर होता है। चलिए समझते
- 22:41हैं। लेट्स गो। टेक 32 एक्शन। अब एक बहुत
- 22:45इंपॉर्टेंट टॉपिक के बारे में डिस्कशन
- 22:46करते हैं जो कि है हाउ डेटा इज
- 22:48ट्रांसफरर्ड। यानी कि डेटा किस तरीके से
- 22:50ट्रांसफर होता है। अब यार इसको समझने के
- 22:52लिए ना हमारे पास दो तरीके हैं। पहला
- 22:54तरीका तो ये हो सकता है कि इंटरनली कैसे
- 22:57डेटा ट्रांसफर हो रहा है। ओएसआई मॉडल का
- 22:59क्या रोल है? एप्लीकेशन लेयर, नेटवर्क
- 23:00लेयर, डेटा, लिंक लेयर इन सबका क्या रोल
- 23:02है। उस पे हम थोड़ी देर बाद आएंगे। अभी
- 23:04मैं आपको समझाऊंगा डेटा एक्सटर्नली कैसे
- 23:06ट्रांसफर हो रहा है। यानी कि फॉर
- 23:08एग्जांपल, मैंने अपने मान लेते हैं ये हूं
- 23:11मैं दिस इज़ योर सार्थक भैया। और सार्थक
- 23:15भैया ने मान लेते हैं कि उनका एक दोस्त है
- 23:17अमन। उसको एक मैसेज करा। WhatsApp पे
- 23:20मैसेज करा मान लेते हैं। है ना? अब जब
- 23:22मैंने मैसेज करा तो वो मैसेज किस तरीके से
- 23:24इंटरनेट पर ट्रैवल हुआ है? यहां से राउटर
- 23:27के पास कैसे गया? फिर आईएसपी के पास कैसा
- 23:28गया? सबका क्या-क्या रोल था और उसने कैसे
- 23:31मदद करी मेरे डेटा को ट्रांसफर करने के
- 23:33लिए? हमें पता है क्या लगता है? हमें लगता
- 23:34है कि ये डाटा यहां पर गया। ये गया
- 23:36WhatsApp के पास। बस डाटा पहुंच गया भैया।
- 23:38मैसेज पहुंच गया। ब्लू टिक आ गया। ऐसा
- 23:39नहीं होता काम। थोड़ा सा उसको डिटेल में
- 23:41समझते हैं। आइए लेट्स गो। ठीक है? चलो
- 23:43सुनो ध्यान से। मान लेते हैं कि मैंने अमन
- 23:46को एक मैसेज करा है जो कि
- 23:48है हे मान लेते हैं कि मैंने अमन को मैसेज
- 23:51करा है हे अब सुनो यहां पर होगा क्या सभी
- 23:54चीजों का क्या-क्या रोल है एक-एक करके
- 23:56लाइन बाय लाइन समझते हैं ठीक है सबसे पहले
- 23:58रोल में आएगा मेरे फोन में जो WhatsApp
- 24:00एप्लीकेशन इंस्टॉल्ड है। तो यहां पर मेरा
- 24:02जो हे मैसेज है यह मैसेज WhatsApp के पास
- 24:06जाएगा और WhatsApp फोन का WhatsApp मतलब
- 24:09फोन के अंदर जो मेरे WhatsApp एप्लीकेशन
- 24:11है उसके पास जाएगा और WhatsApp यूज़ करता
- 24:13है एक टेक्निक जो कि कहलाती है एंड टू एंड
- 24:18इंक्रिप्शन। आपने अगर ध्यान से देखा होगा
- 24:20तो हर एक चैट के ऊपर वहां पे लिखा होता है
- 24:23दिस मैसेज इज़ एंड टू एंड इंक्रिप्टेड।
- 24:25यानी कि आपने यहां से मैसेज भेजा है। मान
- 24:27लेते हैं मैंने अमन को मैसेज भेजा है तो
- 24:30WhatsApp भी उसको रीड नहीं कर पाएगा और
- 24:32बीच में कोई थर्ड पार्टी वाला बंदा आ गया
- 24:34तो वो भी नहीं देख पाएगा। जो मैसेज मैं
- 24:36यहां से भेज रहा हूं वो मैसेज अमन के पास
- 24:38पहुंचेगा और सिर्फ अमन ही उसको रीड कर
- 24:39पाएगा। दिस इज़ नोन ऐज़ एंड टू एंड
- 24:41इंक्रिप्शन। अब ये कैसे करता है WhatsApp
- 24:43वो समझते हैं। ठीक है? आपने वर्ड सुना
- 24:45होगा
- 24:49इंक्रिप्शन। और एक और वर्ड सुना होगा
- 24:51डिक्रिप्शन। ठीक है? यानी कि मान लेते हैं
- 24:54कि मैंने कोई मैसेज भेजा यहां से तो मैंने
- 24:56जो मैसेज भेजा है वो कहलाएगा इंक्रिप्शन।
- 24:58और जो अमन के पास मैसेज गया वो है अमन जो
- 25:00करेगा अमन का जो WhatsApp करेगा वो होगा
- 25:03डिक्रिप्शन। ठीक है? लेकिन अब समझते हैं
- 25:04ध्यान से होगा क्या-क्या। मान लेते हैं कि
- 25:06मैंने यहां पर मैसेज WhatsApp के पास सबसे
- 25:08पहले WhatsApp क्या करेगा? मेरे फोन का
- 25:10WhatsApp उस मैसेज को पैकेट्स के फॉर्म
- 25:14में तोड़ेगा।
- 25:16ठीक है? मेरा जो मैसेज था मान लेते हैं
- 25:18मेरा मैसेज था क्या? हे अब उस मैसेज को
- 25:20पैकेट के फॉर्म में तोड़ेगा। मैंने आपको
- 25:22बताया था जब मैंने आपको TCP प्रोटोकॉल
- 25:24बताया था। WhatsApp भी मोस्टली टाइम TCP
- 25:26ही यूज़ करता है। तो वो जो मैसेज है उसको
- 25:28इकट्ठा भेजने की जगह पैकेट्स के फॉर्म में
- 25:30भेजता है और यह मेक श्योर करता है कि वो
- 25:32मैसेज एक जगह से दूसरी जगह तक अच्छे से
- 25:35पहुंच गया। ठीक है जी? अब जो मेरा मैसेज
- 25:38है जो कि पैकेट्स के फॉर्म में यहां से
- 25:40डिलीवर हुआ है। अब वो जो पैकेट है पैकेट्स
- 25:42के ऊपर यहां पर एक लिफाफा टाइप का एक कवर
- 25:46टाइप का ऐड किया जाता है हर एक पैकेट पे
- 25:48जिसमें होता है सेंडर्स का आईपी, रिसीवर्स
- 25:50का आईपी और कुछ मेटा डेटा जैसे ये टाइम
- 25:53स्टेम एंड ऑल। तो यहां पर जाके आपने
- 25:55WhatsApp के ऊपर एक कवर बना लिया हर एक
- 25:57पैकेट के ऊपर कि भाई ये ये इंफॉर्मेशन है।
- 25:59मतलब जैसे मेरा लेटर था तो उसके ऊपर मैंने
- 26:01नहीं लिफाफा लगा दिया था पूरा। वैसे ही
- 26:03कुछ यहां पे। अब WhatsApp ने क्या करा? उस
- 26:05मैसेज के पैकेट्स को उस मैसेज को कह सकते
- 26:08हैं इंक्रिप्ट कर दिया। इंक्रिप्ट कर दिया
- 26:11इन दी फॉर्म ऑफ़ बाइनरी। भैया बाइनरी क्या
- 26:13होता है? बाइनरी आप लोगों को पता है क्या
- 26:15होता है? उस मैसेज को इंक्रिप्ट कर दिया
- 26:16इन दी फॉर्म ऑफ़ बाइनरी। यानी कि अब वो
- 26:18मैसेज कोई नहीं पढ़ सकता। मैंने जो मैसेज
- 26:21भेजा था, अब वो बीच में कोई भी नहीं पढ़
- 26:23सकता। यहां पर मेरा मैसेज जो है वो
- 26:24इंक्रिप्टेड हो चुका है बाइनरी फॉर्मेट
- 26:26में। ठीक है जी? अब WhatsApp का ये जो
- 26:29मैसेज है, मैंने यहां पर यह जो मैसेज करा
- 26:31था। अब यहां पर क्या होगा? इस इस कह सकते
- 26:33हो इस स्टेप में क्या होगा? यह चेक करेगा
- 26:36कि मेरा फोन मेरा जो फोन है वो इंटरनेट से
- 26:39कैसे कनेक्टेड है। क्या मैं कोई सिम के
- 26:41थ्रू डायरेक्ट नेटवर्क को एक्सेस कर रहा
- 26:43हूं जैसे कि 4G 5G जो भी होता है तो या तो
- 26:46आप 4G या 5G का यूज़ करके डायरेक्टली
- 26:49इंटरनेट को एक्सेस कर रहे हैं या फिर आप
- 26:51यूज़ कर रहे हैं वाई-फाई का। तो अगर आप जब
- 26:54वाई-फाई का यूज़ करते हैं तो वाई-फाई
- 26:55राउटर यहां पे लगा रहता है जैसे कि मैं इस
- 26:57रूम में बैठा हूं तो एक वाई-फाई राउटर लगा
- 26:59है बाहर वाले रूम में। ठीक है? तो अब उसका
- 27:01क्या-क्या रोल है? तो उसकी तरफ आते हैं।
- 27:02तो मैं थोड़ा सा इसको सफाई कर देता हूं
- 27:04ताकि आपको देखने में समझ आएगा। समझ आया
- 27:06ना? सबसे पहले क्या हुआ? सबसे पहले मैंने
- 27:08जो हे नाम का मैसेज था वो WhatsApp
- 27:10एप्लीकेशन में जाएगा। वो उसको पैकेट्स के
- 27:12फॉर्म में तोड़ेगा और साथ में मेरे डेटा
- 27:14को कर देगा क्या? मेरे डेटा को कर देगा
- 27:17इंक्रिप्ट। आई होप आपको ये समझ आया होगा
- 27:19किस तरीके से मेरा डेटा यहां पे इंक्रिप्ट
- 27:21हुआ है। अब हम लोग एक काम करते हैं। हम
- 27:23लोग ऐसा मान के चलते हैं। मैं अभी करेंटली
- 27:25वाई-फाई यूज़ कर रहा हूं। तो हम वाई-फाई
- 27:26का एग्जांपल लेते हैं। ठीक है? अब यहां पर
- 27:28मेरा जो डेटा है वो जाएगा मेरे वाई-फाई
- 27:30राउटर के पास और आपके फोन में वाई-फाई की
- 27:34चिप होती है जो कि अलग-अलग फ्रीक्वेंसीज
- 27:36पे काम करती हैं। आपने सुना होगा
- 27:382.4
- 27:41GगाHz और 5
- 27:45GHz सुना होगा आप लोगों ने शायद इसके बारे
- 27:48में। है ना? 2.5 GHz जो होता है वो
- 27:50बेसिकली वाइडर रेंज को सपोर्ट करता
- 27:53है। वाइडर रेंज को सपोर्ट करता है। बट
- 27:56इसके साथ एक प्रॉब्लम होती है। इसके साथ
- 27:57प्रॉब्लम ये होती है कि इसकी स्पीड काफी
- 28:00ज्यादा कम होती है।
- 28:04ठीक है? 2.4 GHz मतलब आप काफी दूर से भी
- 28:07इसको एक्सेस कर पाएंगे। लेकिन स्पीड थोड़ी
- 28:09सी कम होती है। जब हम 5 गीगाहz की बात
- 28:11करते हैं तो इसका लेस रेंज होती है थोड़ी
- 28:13सी कंपेयर टू 2.4 रेंज की स्पेलिंग कुछ इस
- 28:17तरीके से लिख दी मैंने समझ जाना और अगर हम
- 28:20थोड़ा सा और अच्छे से समझें तो इसकी स्पीड
- 28:24हाई होती है।
- 28:27ठीक है? तो आपके फोन में लगी है वाई-फाई
- 28:29चिप जिससे आप डेटा भेजते हैं इन द फॉर्म
- 28:32ऑफ रेडियो वेव्स।
- 28:36मतलब रेडियो वेव्स के फॉर्म में आपका डाटा
- 28:39जो है वह जाएगा आपके वाईफाई के पास। अब
- 28:42आपका जो वाईफाई राउटर है उस पे लगा है
- 28:43एंटीना या फिर अपन उसको रिसीवर बोल सकते
- 28:46हैं। तो यहां से मैंने डेटा भेजा तो सबसे
- 28:48पहले WhatsApp ने उसको इंक्रिप्ट करा
- 28:50पैकेट्स के फॉर्म में तोड़ा। उस पैकेट्स को
- 28:52उन्होंने रेडी करा। इंक्रिप्टेड डेटा को
- 28:54उसने क्या भेजा? राउटर के पास भेजा। अब
- 28:56राउटर जो है मेरा वहां पर जो राउटर लगा
- 28:58हुआ है वो राउटर जो है वो इन दोनों
- 29:01फ्रीक्वेंसीज पे काम करता है। जिस भी चाहे
- 29:03उसमें भी अपन यूज़ कर सकते हैं। आपने देखा
- 29:04भी होगा कई बार। अब ये जो मेरा राउटर है
- 29:07इसका क्या काम है? ये जो राउटर है ये
- 29:10राउटर उस राउटर से कनेक्टेड जितने भी
- 29:13डिवाइसेस हैं उन सबको एक IPपी एड्रेस
- 29:16प्रोवाइड करता
- 29:18है। एड्रेस प्रोवाइड करता है। मैंने
- 29:20एड्रेस में एक डीक कम लगाया। परेशान मत
- 29:21होना। तो यहां पर जा के हमने ये समझा कि
- 29:24सबसे पहले मैसेज WhatsApp ने इंक्रिप्ट
- 29:26करा। फिर उसके बाद राउटर पे गया। अब राउटर
- 29:28का क्या काम है यहां से? राउटर क्या करेगा
- 29:30यहां से? तो उसको समझते हैं। लेकिन उसके
- 29:32पहले मैं चाहता हूं थोड़ा सा IP एड्रेस को
- 29:33बता दूं। मैंने बता भी दिया था बाय द वे
- 29:35एक बार और समझ लेते हैं कि हमारा जो IP
- 29:38एड्रेस होता
- 29:39है वो बेसिकली दो तरीके का होता है। IPV4
- 29:43IPV6 है ना? अभी हम लोग IPV4 यूज़ कर रहे
- 29:46हैं। ज्यादातर लोग V6 के बारे में भी हम
- 29:48डिस्कस करेंगे। लेकिन अब यह जो मेरा मैसेज
- 29:50है जो मेरे राउटर ने मुझे एक लोकल आईपी
- 29:52प्रोवाइड करा था। तो जब मेरा मैसेज गया तो
- 29:54मेरे राउटर के पास मेरी आईपी भी गई और साथ
- 29:57में मेरे राउटर के पास IP के साथ में गया
- 30:00मेरा पोर्ट नंबर। अब भैया पोर्ट का क्या
- 30:02रोल होता है? ये पोर्ट कहां से आ गया?
- 30:04आपने कभी भी अगर HTML यूज़ करा है और HTML
- 30:08अपने कोड को रन करा है। तो रन करते टाइम
- 30:10हम लोग यूज़ करते थे लाइव सर्वर जो कि
- 30:12हमारा पोर्ट देता था 5500 5500 करके हमें
- 30:15पोर्ट दिया करता था हमारा लाइव सर्वर। अब
- 30:17पोर्ट का क्या रोल होता है भाई साहब?
- 30:19पोर्ट बेसिकली हमें बताता है इट इज
- 30:21बेसिकली कितने पोर्ट्स होते हैं भैया?
- 30:2365 मतलब
- 30:2565535 के आसपास पोर्ट्स होते हैं। अब ये
- 30:29जो हमारा पोर्ट है ये बेसिकली क्या डिसाइड
- 30:31करता है कि आपने जो मैसेज भेजा है IP
- 30:33एड्रेस तो पूरे डिवाइस का हो गया। कौन सा
- 30:35एप्लीकेशन वहां पर उस IPपी एड्रेस को कह
- 30:38सकते हो कि भेज रहा है या फिर कौन से
- 30:39एप्लीकेशन के अंदर आपको उसको पास करना है।
- 30:41तो वो बताता है पोर्ट। जैसे एग्जांपल लेके
- 30:43देखते हैं। आप लोगों ने PUBG खेला होगा।
- 30:45PUBG या फिर नहीं भी खेला कोई बात नहीं।
- 30:47लेकिन PUBG में एक मैसेज का ऑप्शन होता
- 30:49था। तो अगर मान लेते हैं कि मैंने PUBG के
- 30:51अंदर किसी को एक मैसेज भेजा तो अब PUBG जो
- 30:54एप्लीकेशन है वो कोई IPपी एड्रेस पे काम
- 30:56कर रहा होगा। क्या कोई IP एड्रेस पे काम
- 30:58कर रहा होगा? ये तो मुझे पता है। लेकिन
- 31:00PUBG का एक पोर्ट नंबर होगा। ठीक है? यानी
- 31:02कि कोई भी एप्लीकेशन जो यूज़ कर रहे हैं
- 31:05उसका होता है पोर्ट नंबर। कितने होते हैं
- 31:06भैया?
- 31:086500 35 के आसपास हमारे पोर्ट्स नंबर होते
- 31:11हैं। जिसमें से
- 31:13ज़ीरो से लेके
- 31:151023 तक कहलाते हैं वेल
- 31:21नोन वेल नोन
- 31:24पोर्ट्स। या फिर आप इनको सिस्टम पोर्ट्स
- 31:27भी कह सकते हैं। ये आपका सिस्टम इनको अपने
- 31:29लिए रिजर्व रखता है। रिजर्व पोर्ट्स भी कह
- 31:30सकते हैं अपन इनको। है ना? फिर उसके बाद
- 31:33उसके
- 31:35बाद अह
- 31:371000 से लेके 49000 के समथिंग मुझे
- 31:40एग्जैक्ट नंबर अच्छे से याद नहीं है। ये
- 31:42बेसिकली एप्लीकेशन पोर्ट्स होते हैं। तो
- 31:44हर एक एप्लीकेशन अलग-अलग पोर्ट पे काम
- 31:45करता है। जैसे आपने देखा होगा जब हम
- 31:47नेक्स्ट जेएस का सर्वर कर क्रिएट करते हैं
- 31:48तो वो पोर्ट 3000 पे काम करता है। जैसे जब
- 31:51हम लाइव सर्वर यूज़ करते हैं तो 5500 जब हम
- 31:53वाइट से बनाते हैं तो
- 31:555 7 32 इस तरीके से कुछ सबके अलग-अलग
- 31:59पोर्ट्स होते हैं। आप समझ पा रहे हैं ना?
- 32:01तो ये पोर्स बेसिकली डिफाइन करते हैं कि
- 32:03किस एप्लीकेशन को आपको यहां पर किस
- 32:05एप्लीकेशन ने आपके मैसेज भेजा है। तो यहां
- 32:08पर जाके आपका राउटर जिसका रोल ये था कि
- 32:11आपका ये जो IP एड्रेस आया है जिसमें पोर्ट
- 32:13नंबर भी है इंक्लूडेड। मतलब यहां से जो
- 32:15डेटा गया था उसने IPपी एड्रेस और पोर्ट
- 32:16नंबर को आइडेंटिफाई कर लिया। अब ये राउटर
- 32:19का क्या काम है? राउटर बेसिकली दो चीज़ें
- 32:22करता है। सिर्फ दो चीज़ें। पहला है मैसेज
- 32:25को रिसीव
- 32:28करना और साथ में उसके अंदर एन ए टी नेट
- 32:32अप्लाई करना। भैया नेट क्या होता है?
- 32:34नेटवर्क एड्रेस ट्रांसलेशन। क्योंकि जो
- 32:37मेरी आईपी एड्रेस थी वो मेरी प्राइवेट
- 32:39IPपी एड्रेस था। वो इंटरनेट पे वैलिड नहीं
- 32:42है। तो उस प्राइवेट IP को कन्वर्ट करेगा
- 32:45किस फॉर्मेट में? पब्लिक IPपी के फॉर्मेट
- 32:47में। ठीक है? जिसको इंटरनेट पे फिर कोई भी
- 32:49देख सकता है। तो यहां जाके मेरा जो IP
- 32:52एड्रेस हुआ करता था कौन सा IPपी एड्रेस
- 32:54था? प्राइवेट। हमारे राउटर ने क्या करा?
- 32:57उसको कन्वर्ट कर दिया। ये नेट अप्लाई करने
- 32:59का मतलब यह होता है मेरे प्राइवेट IPपी
- 33:01एड्रेस को उसने कन्वर्ट कर
- 33:03दिया पब्लिक
- 33:06में। क्योंकि प्राइवेट वाला कोई इंटरनेट
- 33:09पे कोई पहचानता ही नहीं है उसको। लेकिन
- 33:11पब्लिक वाले को सब पहचानते हैं। तो राउटर
- 33:12ने क्या करा? उसको कन्वर्ट कर दिया किस
- 33:15में? एक पब्लिक आईपी के फॉर्म में। यहां
- 33:16तक मुझे कोई परेशानी नहीं है और ना आप
- 33:18लोगों को होगी कि यहां पर अभी तो हमने दो
- 33:20ही स्टेप्स लिखी हैं। यहां पर कुछ ज्यादा
- 33:22नहीं लिखा मैंने। यहां पर हमारा जो डेटा
- 33:24था WhatsApp के पास आया था। पैकेट्स के
- 33:25फॉर्म में WhatsApp ने उसको तोड़ लिया।
- 33:27इंक्रिप्ट कर लिया उसको और पैकेट्स के
- 33:29अंदर जो लिफाफे वगैरह लगाने थे सब लगा
- 33:31दिया उसने। फिर डेटा गया कहां पर? राउटर
- 33:33के पास। राउटर ने रेडियो वेव्स के थ्रू
- 33:36यहां से जो मैंने डेटा भेजा था एंटीना के
- 33:37थ्रू उसको कैच करा। उसको रिसीव करने के
- 33:40बाद उसमें नेट अप्लाई करा। नेट अप्लाई
- 33:41करने से क्या होगा? नेट अप्लाई करने से
- 33:43आपका जो प्राइवेट आईपी था वो कन्वर्ट हो
- 33:46गया किस में? पब्लिक आईपी में। बाय द वे
- 33:48अगला टॉपिक यही था मेरा। तो इसमें आपको
- 33:49हल्काफुल्का अब समझ में आ रहा होगा। मैं
- 33:50थोड़ा सा IPV4, IPV6 के बारे में भी आपको
- 33:53बता दूंगा। अब यहां तक तो कोई परेशानी
- 33:55नहीं है। राउटर के पास हमारे मैसेज चला
- 33:57गया है। राउटर अब क्या करेगा? राउटर ने
- 33:59नेट अप्लाई कर दिया। उसके बाद राउटर हमारे
- 34:02मैसेज को
- 34:05आईएसपी यानी कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर
- 34:09तक पहुंचाएगा। अब ये आईएसपी मैं कौन सा
- 34:11यूज़ कर रहा हूं? मैं मान लेते हैं यूज़ कर
- 34:12रहा हूं Jio
- 34:14का। मान लेते हैं मैं Jio इंटरनेट यूज़ कर
- 34:17रहा हूं। तो मेरे को Jio वालों ने एक अपना
- 34:19राउटर दिया था कनेक्ट करने के लिए यहां पे
- 34:20Wi-Fi राउटर। तो यहां से मेरा ये जो राउटर
- 34:23है ये जाएगा इंटरनेट सर्विस। राउटर का ये
- 34:25जो मैसेज था आई एम रियली सॉरी फॉर दैट। ये
- 34:27जो मैसेज था राउटर से जाएगा इंटरनेट
- 34:29सर्विस प्रोवाइडर तक जो कि मान लेते हैं
- 34:31अभी मेरे पास है Jio या फिर अगर आप में से
- 34:33कोई होगा जो Airtel यूज़ कर रहा है तो
- 34:35Airtel या BSNL और जो भी आप लगाना चाहो
- 34:38लगा सकते हो। तो कुछ इस तरीके से यहां पर
- 34:40हमारे पास आईएसपी के पास डाटा जाएगा। तो
- 34:42मुझे लगता है यहां तक कोई परेशानी नहीं
- 34:44है। एक छोटा सा पॉज लो जो भी मैंने चीजें
- 34:46बताई हैं अभी तक वीडियो में पीछे जाके
- 34:47उनको रिवाइज करो। मुझे लगता है यहां तक
- 34:49कोई इशू नहीं है। तो अब हम आगे बढ़ सकते
- 34:51हैं। मैं थोड़ा सा इस डायग्राम को ठीक
- 34:52करता हूं। उसके बाद हम आगे बढ़ते हैं। तो
- 34:54जैसा कि आप लोगों को याद होगा मैंने यहां
- 34:56से अपने पास से मैसेज मेरे दोस्त अमन को
- 34:59यहां पर भेजा था। मैंने उसकी पोजीशन थोड़ी
- 35:00सी नीचे साइड में कर दी है। डोंट वरी
- 35:02अबाउट दैट। पहले मैसेज गया WhatsApp के
- 35:04पास जिसने इंक्रिप्ट कर दिया और पैकेट्स
- 35:05के फॉर्म में तोड़ा। राउटर के पास गया
- 35:07जिसने रिसीव करा उस पर नेट अप्लाई करा
- 35:09यानी कि प्राइवेट टू पब्लिक आईपी में
- 35:11कन्वर्ट कर दिया और फिर गया था हमारा डाटा
- 35:13आईएसपी के पास। अब यह डाटा कैसे जाता है
- 35:15भैया? यह डाटा जाता है
- 35:17डीएस एल डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन डीएसएल
- 35:22के थ्रू या फिर वायरलेसली जाता है। अब
- 35:24इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर मेरे केस में है
- 35:26Jio। अब ये Jio क्या करेगा? ये बेसिकली
- 35:28जैसे ही मान लेते हैं इंटर इंटरनेट सर्विस
- 35:30प्रोवाइडर के पास मेरा डाटा आया। ये क्या
- 35:32करेगा ना? ये चेक करेगा कि भाई डेस्टिनेशन
- 35:34जहां पर जानी है उसकी आईडी क्या है? कहां
- 35:36से आ रहा है डेटा और साथ में यह देखेगा
- 35:39कुछ मेटा डेटा और ये सबसे शॉर्टेस्ट पाथ
- 35:43ढूंढेगा कि भाई साहब मुझे अमन तक डेटा
- 35:45पहुंचाना है जो कि अमेरिका में बैठा है
- 35:47फॉर एग्जांपल तो शॉर्टेस्ट पाथ क्या होगा?
- 35:49सो शॉर्टेस्ट पाथ पकड़ के ये आगे की तरफ
- 35:51जाएगा डेटा। तो मान लेते हैं कि इसने एक
- 35:53शॉर्टेस्ट पाथ पकड़ा। दिस इज दी अह पोजीशन
- 35:56ए और उसके बाद दिस इज़ पोजीशन बी। इसने
- 36:00शॉर्टेस्ट पाथ पकड़ा कि आपने सुना होगा
- 36:01डिजिक्स एल्गोरिदम करके कुछ-कुछ होती हैं
- 36:04चीजें। तो ये यहीं पे काम आती है। बेसिकली
- 36:06यहां से डेटा गया। शॉर्टेस्ट पाथ पकड़ा और
- 36:08इसके थ्रू डेटा आगे की तरफ जा रहा है। अब
- 36:10यहां से डाटा जाएगा मेरा यह है मेरा
- 36:13WhatsApp
- 36:14का WhatsApp की स्पेलिंग गलत लिख दी अपन
- 36:17ने। WhatsApp ऐप का
- 36:21सर्वर। अब यहां पर मेरे पास डाटा आ चुका
- 36:24है WhatsApp के सर्वर तक। अब WhatsApp के
- 36:27सर्वर पर डेटा आ तो चुका है लेकिन जैसा कि
- 36:29मैंने आप लोगों को बताया था कि मैसेज जो
- 36:31है मेरा वो इंक्रिप्टेड है। तो WhatsApp
- 36:33के सर्वर पे भी वो नहीं पड़ सकता कि डेटा
- 36:35यहां पर आया है। अब WhatsApp का सर्वर
- 36:37कहां है भैया? WhatsApp का सर्वर अभी मुझे
- 36:39जितना याद है उस हिसाब से यूएस में
- 36:42इस्टैब्लिश्ड है WhatsApp का सर्वर। अब
- 36:44इंडिया में नहीं है क्या भैया? नहीं
- 36:45इंडिया में नहीं है। तो भैया ये डाटा किस
- 36:47तरीके से गया? ये डाटा गया ऑप्टिकल फाइबर
- 36:49केबल्स की मदद से। ये कैसी दिखाई देती है?
- 36:51मैं बताऊं अगर आपको तो यहां जाके अगर मैं
- 36:53सम यहां पे लिखता हूं आपको सबमरीन केबल
- 36:55मैप। यहां पर आपको देखने को मिलेगा कि भाई
- 36:58साहब कितनी सारी केबल्स के थ्रू हम लोग
- 37:01कनेक्टेड हैं। मतलब लोग कहते हैं ना कि
- 37:02डेटा भाई साहब क्लाउड में ना इन ऑप्टिकल
- 37:05केबल फाइबर्स के थ्रू जा रहा है डेटा। दिस
- 37:07इज आवर इंडिया। और इंडिया में सबसे बड़ी
- 37:10कह सकते हो एक कंपनी जो कि इन सबको मैनेज
- 37:12कर रही है। उसका नाम है Tata। और आप देख
- 37:14सकते हो यहां पे ये कितनी बड़ी केबल्स हैं।
- 37:16यहां से शुरुआत हो रही है। और यहां से
- 37:18कितने कॉन्टिनेंट्स को कनेक्ट कर रही हैं।
- 37:20आप देख रहे हो यहां पे। है ना? यहां पर
- 37:22जाके मैंने लेट्स सपोज इस पे क्लिक करा।
- 37:23दिस इज़ अपोलो। अब ये जो अपोलो है ये कितनी
- 37:25बड़ी है। कहां से आ रही है? आप चाहो तो
- 37:27क्लिक करके किसी को भी देख सकते हो। देख
- 37:29सकते हो यहां पे। ये कॉन्टिनेंट्स को
- 37:30कनेक्ट कर रही है। 4600 कि.मी. लंबी है।
- 37:33इंडिया में जो आ रही है। यहां पर जाके
- 37:35मैंने मान लेते हैं इस वाली केबल पे क्लिक
- 37:37करा। तो अरे भाई साहब 25,000 यानी कि
- 37:40फ्रांस से यहां से शुरू हुई है और यह जा
- 37:42रही है कहां तक? यह जा रही है चाइना तक।
- 37:44इतनी बड़ी केबल है यहां पे। अब ये दिखाई
- 37:46कैसे देती है भैया?
- 37:49अ ऑप्टिकल केबल फाइबर। ऑप्टिकल फाइबर केबल
- 37:52ये कुछ इस तरीके की दिखाई देती
- 37:55हैं। कुछ इस तरीके की दिखाई देती हैं।
- 38:01ठीक है? कुछ इस तरीके की दिखाई देती हैं
- 38:03भाइयों। आप देख सकते हैं। भैया तो इनको
- 38:04शार्क वगैरह नहीं खाती। नहीं नहीं खाती
- 38:06भाई। टेंशन मत लो। ठीक है? क्योंकि काफी
- 38:08ज्यादा कोटेड होती हैं तो कोई नहीं खाता।
- 38:09परेशान मत हो। तो ये कुछ इस तरीके से आपका
- 38:11डेटा ट्रांसफर होता है। इतनी सारी चीजें
- 38:13होती है इसके अंदर। अब यहां पर समझो ध्यान
- 38:15से। यहां पर जैसे तैसे उसने इधर-उधर करके
- 38:17यहां पर हमारे डेटा को WhatsApp सर्वर तक
- 38:19प्रोवाइड करवा दिया था। अब इसके बाद यहां
- 38:21से आगे की प्रोसेस चालू होती है। WhatsApp
- 38:24के सर्वर पे यहां पर जाके WhatsApp अपने
- 38:26सर्वर पर जाके चेक करेगा कि क्या मेरा
- 38:28दोस्त अमन अभी के टाइम पे ऑनलाइन है। अगर
- 38:33वो ऑनलाइन होगा तो WhatsApp का जो सर्वर
- 38:35है वो इस मैसेज को अमन तक ट्रांसफर कर
- 38:37देगा। भाई ये डायरेक्टली नहीं वही सेम
- 38:38प्रोसेस जाके पहले आईएसपी के पास फिर
- 38:40राउटर एंड ऑल यहां पर चलेगा। अगर मान लेते
- 38:43हैं कि अमन अभी ऑनलाइन नहीं है तो ये अपने
- 38:46पास डेटा को स्टोर करके रखेगा।
- 38:49किस फॉर्मेट में स्टोर करके रखेगा भैया?
- 38:53इंक्रिप्टेड। इंक्रिप्टेड फॉर्म में स्टोर
- 38:55करके रखेगा। और जैसे ही अमन आएगा ऑनलाइन
- 38:58तो वहां पर आपके फोन में देयर इज़ समथिंग
- 39:00नोन ऐ पुश नोटिफिकेशन। वहां पर जाएगा और
- 39:02वहां पर बोलेगा कि भाई इसको एक WhatsApp
- 39:04पे मैसेज आया तो इसको एक नोटिफिकेशन तो
- 39:05भेजो। तो अमन को आएगी एक नोटिफिकेशन कि
- 39:08सार्थक की तरफ से आपको एक मैसेज आया है।
- 39:10क्या आप मेरी बात समझ पा रहे हैं? और जैसे
- 39:12ही यहां पर मैसेज आएगा WhatsApp के सर्वर
- 39:14पर एक कह सकते हो रिस्पांस आ जाएगा कि भाई
- 39:17मैसेज
- 39:19जो है वह डिलीवर हो चुका
- 39:22है। या फिर एक और आ सकता है कि मैसेज जो
- 39:26है आपने देखा होगा ना यार मैसेज सीन वगैरह
- 39:28जो होता है वो सब किस तरीके से काम करता
- 39:30है। तो यहां पर ऐसा होगा तो यहां पर जाके
- 39:32WhatsApp का सर्वर का क्या रोल था ये मुझे
- 39:34लगता है आपको समझाने की जरूरत नहीं है।
- 39:35WhatsApp के सर्वर का यहां पर क्या रोल
- 39:37था? WhatsApp के सर्वर ने क्या काम करा और
- 39:39WhatsApp का सर्वर भी यहां पर जाके डेटा
- 39:41को स्टोर करने का काम करेगा और डेटा को
- 39:42आगे अमन के पास भेजने का काम करेगा। अगर
- 39:44ऑनलाइन नहीं होगा तो अपने पास स्टोर करने
- 39:46का काम करेगा और रिस्पांस आगे जाके मुझे
- 39:49भी दे देगा कि भाई अमन तक मैसेज ट्रांसफर
- 39:51हो गया या नहीं हुआ। इस तरीके से WhatsApp
- 39:52काम करता है। अभी मैंने आपको क्या बताया
- 39:54ये मैंने सिर्फ आपको प्रोसेस बताई है
- 39:56एक्सटर्नली किस तरीके से डेटा ट्रांसफर हो
- 39:58रहा है। और यहां पर जाके WhatsApp के
- 40:00सर्वर के पास भी बहुत सारी चीजें होती है।
- 40:01मतलब WhatsApp के पास एक सर्वर तो होगा
- 40:03नहीं ना एक कंप्यूटर। उसके पास बहुत सारे
- 40:04सर्व्सर्स होंगे। तो वहां पर परफॉर्म होगी
- 40:06लोड बैलेंसिंग जिससे होगा क्या? जिससे कि
- 40:08आपका जो डाटा वहां पर पहुंचा है वो किस
- 40:10सर्वर को भेजा जाना चाहिए जिससे वह बेटर
- 40:13तरीके से उसको बैलेंस कर सके। उसके लोड को
- 40:16बैलेंस कर सके। तो वहां पर वो कार्यक्रम
- 40:18चलेगा साहब और फिर ये डेटा अमन तक
- 40:20पहुंचेगा उन्हीं सेम प्रोसेस से होता हुआ।
- 40:22तो कितनी सारी चीजें यहां पर इनवॉल्व थी।
- 40:24हमें कितना आसान लगता है कि डेटा यहां से
- 40:26आगे गया और यहां पे जाके हमारा काम हो
- 40:27गया। लेकिन यहां पर सीन कुछ ऐसा है नहीं
- 40:29यार। थोड़ा सा और काफी ज्यादा चीजें काम
- 40:32कर रही हैं। मतलब इंटरनेट एक दिन में तो
- 40:33नहीं बना होगा ना। इंटरनेट बनने में समय
- 40:35लगा भाइयों। समझ रहे हैं आप लोग शायद। है
- 40:37ना? तो हम अब अगले टॉपिक की तरफ बढ़ते हैं
- 40:39जो कि था IPपी एड्रेस और यहां जाके मैंने
- 40:41थोड़ा बहुत आपको एक्सप्लेन तो करा है IPपी
- 40:42एड्रेस और आई और पोर्ट्स के बारे में। मैं
- 40:45थोड़ा सा और अच्छे से उसको एक्सप्लेन कर
- 40:46देता हूं कि IPV4 और IPV6 क्या होता है और
- 40:49पोर्ट नंबर क्या होता है। मुझे लगता है कि
- 40:51आपको ये थोड़ा समझना चाहिए। ठीक है? तो इस
- 40:53टॉपिक पे जाएं पहले इससे पहले मुझे बताओ
- 40:55कि क्या तुम अभी तक जिंदा हो? कमेंट
- 40:57सेक्शन खुला हुआ है। समझ आ रहा है या नहीं
- 40:59आ रहा। और यह मैं पता है ना लाइक दिस इज़
- 41:01जस्ट
- 41:02अ 10 और 20% नॉलेज जो मुझे अपने मुझे अभी
- 41:06तक यहां पर इस टॉपिक के बारे में मुझे जिस
- 41:08लेवल का नॉलेज मुझे अभी तक मैंने सीखा है
- 41:10इधर-उधर से मैं वो आप लोगों तक पहुंचा रहा
- 41:12हूं क्योंकि वीडियो फिर लगभग चली जाती
- 41:14नहीं तो यह 10 12 घंटे की बहुत बड़ी
- 41:16वीडियो जाती लेकिन मैं पूरी कोशिश कर रहा
- 41:18हूं कि जितना हो सके आसान तरीके से और
- 41:20मेरे साथ जो मेरा एडिटर बैठा है सोपू उसका
- 41:23नाम भी सार्थक है बाय द वे वो भी बहुत
- 41:25मेहनत कर रहा है तो प्लीज भाई सपोर्ट करना
- 41:27नीचे कमेंट में जाके बताना आईपी एड्रेस तक
- 41:29जाए। उससे पहले एक कमेंट कर दो जल्दी से
- 41:30जाके। फिर हम बढ़ते हैं आगे की तरफ। लेट्स
- 41:32गो। अब थोड़ा सा IPपी एड्रेस और पोर्ट
- 41:34नंबर को थोड़ा सा डिटेल में समझते हैं
- 41:35क्योंकि मैंने वो टॉपिक थोड़ा सा बीच में
- 41:37छोड़ दिया था। तो बात करते हैं IP एड्रेस
- 41:40की। अब सवाल ये है कि भैया IPपी एड्रेस है
- 41:42क्या? इट इज़ बेसिकली अ
- 41:45इंटरनेट
- 41:46प्रोटोकॉल। प्रोटोकॉल जब भी वर्ड आपके
- 41:49सामने आए तो इसको कनेक्ट करके देखना
- 41:52प्रोटोकॉल वर्ड को एज अ रूल्स।
- 41:55मतलब ऐसे समझ लो कि IP एड्रेस या फिर
- 41:59इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस बेसिकली इंटरनेट
- 42:02पर आपका एड्रेस है। यानी कि इंटरनेट पे आप
- 42:04कहां सिचुएटेड हैं? आपकी लोकेशन क्या है?
- 42:06अगर यह पता करना है मुझे तो ये कहां
- 42:08मिलेगा मुझे? IP एड्रेस के अंदर कि मतलब
- 42:12आप इंटरनेट पे अभी कहां पर अवेलेबल है?
- 42:15आपने वीpए का नाम सुना होगा। वर्चुअल
- 42:17प्राइवेट नेटवर्क। बेसिकली ये क्या करता
- 42:19है? ये आपका IPपी एड्रेस चेंज कर देता है।
- 42:20काइंड ऑफ़ इसके बारे में भी बाद में कभी
- 42:22अपन पढ़ेंगे डिटेल में। लेकिन अभी IPपी
- 42:24एड्रेस अब IP एड्रेसेस बेसिकली इंटरनेट पर
- 42:26मेरी लोकेशन है। यहां पर IPपी एड्रेसेस
- 42:28हमारे पास दो तरीके के होते हैं। व्हिच इज
- 42:31IPV4 एंड
- 42:34IPV6 IPV4 का मतलब है कि मतलब यहां पर
- 42:38हमारे पास 32 बिट सिस्टम होता है। 32 बिट
- 42:40सिस्टम ये 32 बिट मतलब यहां पर जाके आपके
- 42:44पास मैंने बताया तो था यार यहां पे
- 42:47255.2 ये मैंने तीन-चार बार बता दिया।
- 42:51लेकिन फिर भी ठीक है। 255 यहां पर आपके
- 42:54पास 0 से लेके तो 25 55 तक की लोकेशनेशंस
- 42:59होती है और इन पे अपन अपना IPपी एड्रेस
- 43:01में कुछ भी हो सकता है। टोटल इसके
- 43:02कॉम्बिनेशंस कितने बनते हैं? तो IPV4 के
- 43:05टोटल कॉम्बिनेशंस बनते हैं 4.3
- 43:09बिलियन। 4.3 बिलियन IPपी एड्रेसेस के
- 43:12कॉम्बिनेशंस बन सकते हैं। बट प्रॉब्लम
- 43:15यहां पर बस इतनी है कि यह भी खत्म हो रहा
- 43:16है। मतलब इतने सारे नए-नए डिवाइसेस ऐड हो
- 43:18रहे हैं। इंटरनेट पे इतने सारे कनेक्शंस
- 43:20बन रहे हैं कि IPV4 समय के साथ धीरे-धीरे
- 43:24खत्म हो रहे हैं। इसीलिए एक फ्यूचर
- 43:26टेक्नोलॉजी को निकाला गया जिसका नाम है
- 43:27IPV6। ये 128 बिट सिस्टम है। 128 बिट
- 43:32सिस्टम का मतलब है कि यहां पर आपके पास
- 43:35बेसिकली आठ पोजीशंस होती हैं। जिसमें आप
- 43:39ज़ीरो से लेके नौ तक का कोई भी नंबर और ए
- 43:42से लेके तो एफ तक का कोई भी अल्फाबेट।
- 43:46यानी कि दिस इज़ अल्फा न्यूममेरिक नंबर।
- 43:48यहां पर जाके आप चार-चार के सेट में रख
- 43:50सकते हैं। तो मान लेते हैं मैंने लिखा 1 2
- 43:523
- 43:54A 1 2 3B
- 43:581 2 3 2 सी और एक और एक और एक और 1 2 3 4
- 44:085 6 7 और आठ मतलब आप समझ रहे हो यहां पे
- 44:12चार-चार के कॉम्बिनेशन चार डिजिट्स रखेंगे
- 44:14यहां पे अपन और जो कि होंगे अल्फा
- 44:17न्यूमेरिकल यानी ए ज़ीरो से लेके तो नौ तक
- 44:20का कोई भी नंबर हो सकता है और ए से लेके
- 44:22एफ तक का कोई भी अल्फाबेट हो सकता है। इट
- 44:24इज़ बेसिकली अ कॉम्बिनेशन ऑफ एव्री दिस
- 44:26टाइप ऑफ थिंग्स। और इनके कितने
- 44:28कॉम्बिनेशंस होते हैं भैया? दीज़ आर 3.4 *
- 44:32बाय 10 की पावर
- 44:3738 समझ रहे हो? 10 की पावर 38 ये बिलियन
- 44:42नहीं है। ये ट्रिलियन भी नहीं है। ये चला
- 44:43गया पता नहीं कितना समझ पा रहे हो? मैं
- 44:46कहना क्या चाह रहा हूं।
- 44:48मतलब 3.4 * 10 की पावर 38 तक चला गया ये।
- 44:52आई होप आपको ये समझ आ रहा है। IPV4 और
- 44:55IPV6 पे अंतर कितना है? क्योंकि जैसे-जैसे
- 44:57समय के साथ आगे बढ़ रहे हैं, नए-नए
- 44:58डिवाइसेस आ रहे हैं, नए-नए नेटवर्क्स आ
- 45:00रहे हैं। तो हमें चाहिए कि हम ज्यादा से
- 45:01ज्यादा लोगों को एक यूनिक IPपी एड्रेस
- 45:04प्रोवाइड कर सकें। इसलिए IPV6 निकाला गया
- 45:07जो कि काफी ज्यादा ज्यादा एडवांस है और ये
- 45:10जल्दी खत्म भी नहीं होने वाला और क्योंकि
- 45:11यूनिक है। ज्यादा एडवांस भी है। ठीक है?
- 45:13चलो। तो मुझे लगता है IPपी एड्रेस थोड़ा
- 45:15बहुत अब समझ में आ रहा है हम लोगों को।
- 45:16क्या होता है? इंटरनेट पे मेरा एक लोकल
- 45:18एड्रेस। अब होता क्या है ना मान लेते हैं
- 45:20कि मैं रहता हूं एक बिल्डिंग में।
- 45:23शेरियन स्कोरिंग स्कूल की बिल्डिंग है
- 45:25जिसमें मैं अभी बैठा हुआ हूं। अब IP
- 45:27एड्रेस से मुझे क्या पता चल गया? मेरी
- 45:29बिल्डिंग का एड्रेस क्या है? अगर मुझे पता
- 45:31करना है कि मेरे रूम का एड्रेस क्या है?
- 45:33मतलब अगर कोई बिल्डिंग में आ गया तो हो
- 45:35सकता है वो बिल्डिंग में आया ना। मेरे रूम
- 45:36तक तो आया नहीं है। तो बिल्डिंग में आएगा
- 45:38दो माला चढ़ेगा। दो माला चढ़ने के बाद फिर
- 45:40वो मेरे रूम तक आएगा। तो अगर मुझे चाहिए
- 45:42कि मुझे IPपी एड्रेस पता करना है तो IPपी
- 45:44एड्रेस बेसिकली मेरे को एड्रेस बता देता
- 45:46है काफी बढ़िया तरीके से। बट हमें अगर
- 45:48चाहिए हमें अगर चाहिए किसी एक पर्टिकुलर
- 45:51एप्लीकेशन का नंबर किसी एक पर्टिकुलर
- 45:54एप्लीकेशन का नंबर तो वो हमें मिलेगा
- 45:57पोर्ट नंबर से पोर्ट नंबर भी मैंने बता
- 45:58दिया था शायद पोर्ट नंबर बेसिकली होते हैं
- 46:00ज़ीरो से लेके तो 65500 समथिंग तक तो अभी
- 46:06उसको ही करते हैं डिस्कस दो मिनट रुको चलो
- 46:08आ जाओ लेट्स गो ठीक है चलो तो अब हम बात
- 46:11करते हैं दिस इज़ दिस वाज़ ऑल अबाउट इसको
- 46:14अभी इतना ही रखते हैं दिस वाज़ ऑल अबाउट IP
- 46:16अब हम बात करते हैं पोर्ट नंबर के बारे
- 46:18में। तो पोर्ट नंबर बेसिकली हमारे
- 46:22एप्लीकेशनेशंस किस पोर्ट पे बैठे हुए हैं
- 46:24वो बताने में हेल्प करते हैं। क्योंकि
- 46:26अलग-अलग एप्लीकेशनेशंस अलग-अलग पोर्ट पे
- 46:27बैठे रहेंगे। ना आईपी एड्रेस तो डिवाइस का
- 46:29होता है पूरे के पूरे। तो पोर्ट नंबर
- 46:30बेसिकली होते हैं 650 500 35 जिसमें से
- 46:37ज़ीरो से लेके तो 100 23 होते हैं रिजर्वड
- 46:41पोर्ट, वेल नोन पोर्ट्स या फिर सिस्टम
- 46:43पोर्ट। यह मैंने बता दिया था। तो इसको मैं
- 46:45फिर से नहीं बता रहा हूं। 1024 से
- 46:4949000 151 मतलब मुझे अच्छे से नंबर याद
- 46:52नहीं है। एक बार रिचेक कर लेना जाके। दीज़
- 46:54आर नोन एस एप्लीकेशन पोर्ट्स जो कि आपके
- 46:56गेम्स एप्लीकेशन वेब पेजेस इन सब पे असाइन
- 46:58होते हैं। और ये इस तरीके से कुछ काम करते
- 47:03हैं।
- 47:0549151 से लेके तो
- 47:0765000 535 तक ये कहलाते हैं टेंपरेरी
- 47:12पोर्ट्स। ठीक है? ठीक है? तो टेंपरेरी
- 47:14पोर्ट्स कहलाते हैं ये। और यहां तक कुछ इस
- 47:16तरीके से आपके आईपी पोर्ट नंबर्स काम करते
- 47:18हैं। जैसे कि आपने देखा होगा http का
- 47:21पोर्ट नंबर होता है 80 और लाइव सर्वर का
- 47:24मैंने बताया था 5500 होता है और वीड का जो
- 47:27सर्वर बनता है उसका होता है 5732 करके कुछ
- 47:30ऐसा 537 मेरे को अच्छे से याद नहीं देख
- 47:33लेना। कुछ इस तरीके से यहां पे काम करते
- 47:34हैं। दिस इज़ अबाउट IPपी एड्रेस एंड पोर्ट
- 47:36नंबर। आपने एक और चीज़ के बारे में सुना
- 47:38होगा व्हिच इज़ नोन एज डीएनएस। भैया डीएनएस
- 47:42क्या होता है? डोमेन नेम सिस्टम
- 47:46ठीक
- 47:47है
- 47:50डोमेन
- 47:51नेम
- 47:53सिस्टम भैया व्हाट इज डीएनएस व्हाट इज
- 47:56डोमेन नेम सिस्टम होता क्या है ना अब IPपी
- 47:58एड्रेस एक नंबर है ठीक है मैंने पहले भी
- 48:00बताया था IP एड्रेस एक नंबर है और नंबर को
- 48:02याद रख पाना बहुत ज्यादा मुश्किल है पहले
- 48:04के टाइम में आसान था कि भाई लिमिटेड लोगों
- 48:06के पास इंटरनेट का एक्सेस है तो हम उनका
- 48:08IP एड्रेस याद रख पाते थे बट इतने सारे
- 48:10लोग हो गए तो बेसिकली डीएनएस क्या करता है
- 48:12डीएन एनएस इज मोर लाइक अ फोन
- 48:14बुक। जैसे आपके फोन में आपको मान लेते हैं
- 48:18कि मान लेते हैं कि मुझे हर्ष भैया का
- 48:21नंबर याद नहीं है। ठीक है? मान लेते हैं
- 48:23कि हर्ष भैया का नंबर है
- 48:25999
- 48:27888। ठीक है? ये हर्ष भैया का मोबाइल नंबर
- 48:30है। अब मुझे ये नंबर याद नहीं है। आसान
- 48:32है। पता है मुझे। लेकिन मान लेते हैं हर्ष
- 48:33भैया का नंबर मुझे याद नहीं है। तो मैं
- 48:35क्या करूंगा? फोन में हर्ष भैया नाम से
- 48:40इसको सेव कर लूंगा। अब इससे क्या हो
- 48:42जाएगा? जब मैं फोन खोलूंगा और वहां पर मैं
- 48:44हर्ष भैया का नाम सर्च करूंगा और वहां
- 48:46जाके हर्ष भैया के नाम पे मैं लगाऊंगा
- 48:47कॉल। तो कॉल बेसिकली किस नंबर पे लगा है?
- 48:50इसी नंबर पे लगा है। दिस इज़ डीएनएस डोमेन
- 48:53नेम सिस्टम। ये कौन प्रोवाइड करता है?
- 48:55देयर इज़ अ इंस्टट्यूट। अ ये बेसिकली नॉन
- 48:58प्रॉफिटेबल है। आई कैन अब इसका फुल फॉर्म
- 49:01एक तो मेरे को फुल फॉर्म नाम याद नहीं
- 49:03होते बड़ी मुश्किल से। इंटरनेट कॉरपोरेशन
- 49:07ऑफ असाइन नेम्स एंड नंबर्स शायद ये है
- 49:10मुझे अच्छे से याद नहीं है। जितना मुझे
- 49:11याद है उस हिसाब से बताया। ये बेसिकली एक
- 49:13नॉन प्रॉफिटेबल ऑर्गेनाइजेशन है जो कि
- 49:15आपके डीएनएस प्रोवाइड करती है। डोमेन नेम
- 49:18सिस्टम प्रोवाइड करती है। ठीक है जी? तो
- 49:20होता क्या है यहां पे? हर एक आईपी का हर
- 49:23एक आईपी का एक डोमेन नेम सिस्टम लिया जाता
- 49:25है। जैसे कि मान लेते हैं कि मैं थोड़ा सा
- 49:28इसको साफ कर देता हूं ताकि ज्यादा अच्छे
- 49:30से हम समझ पाएं। आगे वाली चीजें। मैं
- 49:32बोलता भी जाता हूं। सुनते भी जाओ तुम लोग।
- 49:35डीएनएस यानी कि डोमेन नेम सिस्टम आई कैन
- 49:37प्रोवाइड करता है और एक टाइम पर यह फ्री
- 49:39हुआ करते थे। लेकिन अब इनके पैसे देने
- 49:41पड़ते हैं हमको। जैसे अगर मान लेते हैं
- 49:43मुझे बाय करना है। जैसे अगर मान लेते हैं
- 49:46मुझे अगर बाय करना है
- 49:48सार्थक शर्मा
- 49:52डॉट.com ये है डोमेन नेम सिस्टम। अब मान
- 49:55लेते हैं इसकी एक IP होगी
- 50:00192.168.0.1 मान लेते हैं ये मेरी IP है।
- 50:02तो दिस आई इस IP को याद ना रखना पड़े इसलिए
- 50:06बनाया गया है ये डोमेन नेम सिस्टम जिससे
- 50:08कि होता क्या है कि मैं इस डोमेन नेम के
- 50:09थ्रू इस IP तक डायरेक्टली रीडायरेक्ट हो
- 50:11सकता हूं। अब ये IP जो है ना ओ सॉरी ये जो
- 50:13डोमेन है ना इसके अंदर भी एक कहानी है।
- 50:15अगर मान लेते हैं आपने कई बार ऐसे भी देखी
- 50:17होंगी जैसे
- 50:19अ
- 50:20कोर्सेस डॉट शेरियंस
- 50:27डॉट अब अगर हम इसको थोड़ा सा डिस्ट्रक्चर
- 50:30करें कि भैया इसके अंदर क्या लिखा रहता है
- 50:31जैसे आपने इस तरीके की चीजें देखी होंगी
- 50:33cesरियंस.com तो अगर हम इसको डिस्ट्रक्चर
- 50:35करें दिस पर्टिकुलर थिंग इज़ नोन एज टॉप
- 50:39लेवल डोमेन टीएलडी दिस पर्टिकुलर थिंग इज
- 50:43नोन
- 50:44एज एसएल डी सेकंड लेवल डोमेन एंड दिस
- 50:48पर्टिकुलर थिंग इज नोन एज आई गेस सब
- 50:51डोमेन।
- 50:54ठीक है? ये जो टॉप लेवल डोमेन है ये हमें
- 50:57बताता है कि हमारा जो डोमेन नेम है वो
- 51:01बेसिकली किस कैटेगरी को बिलोंग कर रहा है।
- 51:03जैसे कि मैं लिख भी देता हूं। यहां पर
- 51:06साइड में लिख देता हूं। जैसे कि इज यूज्ड
- 51:09फॉर कमर्शियल
- 51:14थिंग्स बिलोंग्स टू नॉन प्रॉफिटेबल
- 51:17ऑर्गेनाइजेशन
- 51:19नॉन
- 51:21और समझ जाना तुम लिखा है वहां पे ठीक है
- 51:25और डॉट नहीं डॉट
- 51:30यू एस डॉट लगा के यूk ये बेसिकली कंट्री
- 51:35लेवल डोमेनस होते हैं। मतलब अगर मैं अपनी
- 51:38सर्विज किसी एक पर्टिकुलर कंट्रीज में दे
- 51:39रहा हूं तो यह कंट्री लेवल डोमेनस कहलाते
- 51:41हैं। है ना? और कुछ भी होते हैं जैसे कि
- 51:43कुछ नीश डोमेनस होते हैं। जैसे मैं यहां
- 51:45पर लिख देता हूं। जैसे आपने कई बार देखा
- 51:46होगा डॉट डेव या फिर आपने देखा होगा ai या
- 51:50फिर आपने देखा होगा अ कुछ इसी तरह डॉट ऐप।
- 51:53तो ये बेसिकली होते हैं नीश डोमेन। नीच
- 51:57नहीं होते। नीश होते हैं। नीच डोमेनस बेस
- 52:00नीच क्यों बोल रहा हूं मैं? नीश डोमेनस
- 52:01होते हैं जो वो बेसिकली अ किसी एक
- 52:04पर्टिकुलर नीश को सपोर्ट करने के लिए बनाए
- 52:06जाते हैं। अगर मैं कोई एक डेवलपमेंट बेस्ड
- 52:08वेबसाइट बना रहा हूं। वेबसाइट तो नहीं
- 52:09लेकिन डेवलपमेंट बेस्ड प्रोडक्ट या कोई
- 52:10एआई बेस्ड चीजें बना रहा हूं तो वहां पर
- 52:12मैं अपना नीश बेस्ड डोमेन भी जाके ले सकता
- 52:14हूं। अब ये डोमेनस भैया मिलते कहां पर
- 52:16हैं? तो होता क्या है? मैंने जैसा कि आपको
- 52:18बताया था। मैं फिर से इसको थोड़ा सा
- 52:20क्लियर करना चाहूंगा। यार मैं लिखा रहने
- 52:23दूं क्या? तुम लोग यार थोड़ा सा पढ़ लेना
- 52:25इसको। ठीक है? मैं तुम्हें ये प्रोवाइड
- 52:27करवा दूंगा नोट पूरा। ठीक है? तो होता
- 52:30क्या है कि आपका जो आईकैन हुआ करता था
- 52:34इंटरनेशनल इंटरनेट कॉरपोरेशन ऑफ असाइन
- 52:37नंबर्स एंड नेटवर्क यह बेसिकली यह
- 52:40प्रोवाइड करता है रजिस्ट्रार्स को
- 52:43रजिस्ट्रार्स कौन होते हैं भैया
- 52:44रजिस्ट्रार्स होते हैं आपका गो डडी आपने
- 52:47सुना
- 52:48होगा आपने होस्टिंगर सुना
- 52:51होगा आपने बिग रॉक के बारे में सुना
- 52:55होगा ये तो इंडियन कंपनी है तो ये बेसिकली
- 52:58ये सब कहलाते हैं हमारे रजिस्टार्स। ये
- 53:01बेसिकली रजिस्टर्स इस IPपी एड्रेस को लेते
- 53:03हैं और इसके थ्रू सॉरी इसके थ्रू डोमेन
- 53:05नेम सिस्टम को लेते हैं और ये यूज़र्स को
- 53:08प्रोवाइड करवा देते हैं। जैसे 500 या
- 53:12₹1000 या कुछ भी इस हिसाब से इयरली कॉस्ट
- 53:15होती है और यहां जाके आप अपना डोमेन नेम
- 53:17बाय कर सकते हैं। जैसे कि अगर मैं जाता
- 53:18हूं और यहां जाके मैं सर्च करता हूं GD
- 53:21पे।
- 53:27g डडी पर जाके मैं सर्च करता हूं मान लेते
- 53:30हैं सार्थक
- 53:35shma.com सार्थक shma.com इज़ ऑलरेडी टेकन
- 53:38सार्थक shma.in ले सकते हो आप ईयर ₹1
- 53:42लगेगा लेकिन वो थोड़ा सा समझ जाओ मतलब
- 53:44तरीके हैं कुछ पैसा लेने के। ठीक है?
- 53:46रजिस्ट्रेशन अप्लायड कुछ इस तरीके से। तो
- 53:48आप यहां पर जाके कॉस्ट वगैरह देख सकते हैं
- 53:50यहां पे डोमेन नेम्स की। सार्थक शर्मा.
- 53:52Shark शर्मा. क्लब VIP ठीक है जी। तो कुछ
- 53:55इस तरीके से आपके डोमेन नेम्स होते हैं।
- 53:56तो मैं आपको समझा क्या रहा था? सबसे पहले
- 53:59मैंने आपको बताया यह जो हमारा लास्ट वाला
- 54:01चीज थे इसको बोलते हैं टॉप लेवल डोमेन। ये
- 54:03बेसिकली ऑर्गेनाइजेशनल लेवल पे बताता है।
- 54:05ये कहलाता है सेकंड लेवल डोमेन। जैसे कि
- 54:07यहां पे शेरियंस लिखा हुआ है। जैसे सार्थक
- 54:09shma.com तो जो सार्थक शर्मा है ना वो
- 54:11कहलाएगा सेकंड लेवल डोमेन। और ये बेसिकली
- 54:13हमारी वेबसाइट का नाम होता है काइंड ऑफ़ और
- 54:15कुछ नहीं। और उसके पहले ये जो लगा रहे हैं
- 54:17ये सब डोमेन होता है। जैसे कि ये हमारी
- 54:19वेबसाइट के अंदर कोई एक पर्टिकुलर फीचर पे
- 54:20अगर मुझे इसको ले जाना है तो मैं यहां पे
- 54:23सब डोमेन का यूज करूंगा। मैं थोड़ा सा तेज
- 54:25बोलता हूं
- 54:27तो संभाल लेना भाई। ठीक है? और बहुत सारी
- 54:31रिसर्च और बहुत सारी पढ़ाई करके बना रहा
- 54:32हूं ये वाली वीडियो आप लोगों के लिए ताकि
- 54:34कुछ भी छूट ना जाए। तो प्लीज लेट मी नो इफ
- 54:36यू वांट इफ यू लाइक दिस वीडियो। एंड इफ यू
- 54:39वांट एनीथिंग एल्स प्लीज लेट मी नो इन
- 54:40कमेंट सेक्शन। लाइकवाइक कर देना भाई
- 54:42वीडियो को। बस इतना बोल रहा हूं मैं। यहां
- 54:44तक मुझे नहीं लगता कोई इशू होगा। डोमेन
- 54:46नेम सिस्टम आपको समझ आ गया। रजिस्टर से
- 54:48मान लेते हैं आपने यूजर के नाम पर रजिस्टर
- 54:52हो गया कि भाई मैंने सार्थक
- 54:54shma.com खरीद लिया है। अब वो मेरे नाम पे
- 54:57है 1 साल तक के लिए 2 साल तक के लिए जितने
- 54:59टाइम के लिए मेरे नाम पे है। मैंने कुछ
- 55:01कॉस्ट पे करके उसको अपने नाम पे खरीद
- 55:03लिया। अब क्या होगा? अब मैं अपना सर्वर
- 55:05बनाऊंगा। तो मेरे सर्वर की होती है कुछ
- 55:06आईपी। वो आईपी रिॉल्व हो के आ जाएगी मेरे
- 55:10डोमेन नेम के फॉर्म में। तो जब भी कोई
- 55:13डालेगा सार्थक shma.com तो जो मेरा सर्वर
- 55:15था उस सर्वर तक पहुंच जाएंगे हम लोग। ठीक
- 55:18है जी। चलो अब हमने एक्सटर्नली समझा कि
- 55:21भाई साहब डेट डिवाइसेस किस तरीके से
- 55:22कनेक्टेड होते हैं। डेटा किस तरीके से
- 55:24ट्रांसफर होता है। सब कुछ अपन ने बहुत
- 55:26डिटेल में समझा है भाइयों। है ना? और
- 55:27मैंने बताया था ऑप्टिकल केबल्स के थ्रू
- 55:29डेटा एक जगह से दूसरी जगह जाता है।
- 55:3125-25,000 कि.मी. कॉन्टिनेंट्स को जोड़ने
- 55:33वाली ऑप्टिकल केबल्स होती थी जो समुद्र के
- 55:35अंदर से जाती थी। पता है कई बार ना
- 55:38शार्क्स इन पे अटैक कर देती हैं। तो एक
- 55:41बार एक आइलैंड था मुझे अच्छे से उसका नाम
- 55:43नहीं है याद फजी करके कुछ था। उनका कई
- 55:46दिनों के लिए इंटरनेट कनेक्शन ही चला गया
- 55:48था क्योंकि ऑप्टिकल फाइबर केबल्स जो थी वो
- 55:50डिस्ट्रॉय हो गई थी। ठीक है? इसके लिए ना
- 55:53देयर वाज़ अ क्रिएटर ऑन इंटरनेट
- 55:56मुझे क्लियो अब्राहम नाम है उनका। मैं लिख
- 55:59भी देता हूं। इफ यू वांट टू नो हाउ डाटा
- 56:02इज ट्रांसफरर्ड एक्सटर्नली। क्लियो
- 56:04अब्राहम की एक वीडियो है। अभी नहीं देखना
- 56:07अभी पहले इसको पूरा कंप्लीट करो अभी नहीं
- 56:09देखना कंफ्यूज हो जाओगे क्लियोब्राम की एक
- 56:11वीडियो है उन्होंने डाली थी वक्स पे वो
- 56:15देखना हाउ इंटरनेट हाउ डेटा हाउ इंटरनेट
- 56:18वर्क्स करके कुछ ऐसी वीडियो है मुझे भी
- 56:19अच्छे से याद नहीं है उन्होंने बताया
- 56:21एक्सटर्नली डेटा किस तरीके से ट्रांसफर
- 56:23होता है कितने बड़ी-बड़ी कंपनीज़ होती हैं
- 56:24ये सब है तो आप चाहो तो वो भी देख सकते हो
- 56:26अभी के लिए हम बढ़ते हैं टाइप्स ऑफ
- 56:28नेटवर्क की तरफ और टाइप्स ऑफ नेटवर्क में
- 56:30बहुत सारे नेटवर्क आते हैं जैसे कि आपने
- 56:32सुना होगा लन वैन मैन पैन डन वैन बहुत
- 56:34सारे हैं। मैं सबको एक-एक करके समझाऊंगा
- 56:36और मैं आपको थोड़ा सा समझाऊंगा टोपोलॉजीस
- 56:38के बारे में। तो अब हम लोगों ने ये तो समझ
- 56:40लिया कि नेटवर्क क्या होता है। अब किस
- 56:42तरीके से कनेक्टेड होते हैं नेटवर्क्स
- 56:44उनको समझते हैं। पहले मैं चाहता हूं कि आप
- 56:46इनको एक बार रिवाइज़ करें। वीडियो में
- 56:47पीछे जाएं। नोट्स बना रहे हो तो नोट्स
- 56:49बनाएं। फिर हम बढ़ते हैं आगे की तरफ। तो
- 56:51अब डिस्कस करते हैं टाइप्स ऑफ नेटवर्क के
- 56:53बारे में कि नेटवर्क कितने तरीके के होते
- 56:56हैं। जिसमें से सबसे पहला वाला जो हम
- 56:58डिस्कस करेंगे वो है पीए एन यानी कि
- 57:02पर्सनल एरिया नेटवर्क। पर्सनल एरिया
- 57:04नेटवर्क यानी कि मान लेते हैं कि मैं अपने
- 57:06फोन को फॉर एग्जांपल दिस इज माय ब्लूटूथ
- 57:09डिवाइस। यह मेरे इयर बड्स हैं। OnePlus के
- 57:11हैं भाई गरीब हूं थोड़ा सा। तो मान लेते
- 57:13हैं मैं ये यूज़ कर रहा हूं और इसे अगर
- 57:15मुझे अपने फोन से कनेक्ट करना है तो यह
- 57:16बेसिकली ब्लूटूथ का यूज़ करेगा। तो इट इज़
- 57:18बेसिकली
- 57:19अ यह मैंने R बनाया है। समझ लेना पर्सनल
- 57:24एरिया
- 57:26नेटवर्क। दिस इज़ पैन पर्सनल एरिया
- 57:29नेटवर्क। ठीक है? ये बेसिकली काफी कम रेंज
- 57:32के लिए होते हैं और इसके अंदर सिक्योरिटी
- 57:33का थोड़ा सा रिस्क रहता है क्योंकि मेरे
- 57:35इयर बड्स हैं। अब मैंने इयर बड्स को मान
- 57:37लेते हैं अपने फोन से कनेक्ट किया और
- 57:38मैंने वेदांत बाहर बैठा हुआ है हमारा महान
- 57:40एडिटर तो मैंने उसके फोन से भी मान लेते
- 57:42हैं इसको कनेक्ट करा तो मान लेते हैं कि
- 57:44मैं कहीं जाता हूं तो वो मेरे डिवाइस को
- 57:46अपने आप से कनेक्ट कर सकता है। ठीक है? और
- 57:48जो इसकी रेंज होती है वो भी कंपेरेटिवली
- 57:51थोड़ी सी कम होती है। ठीक है जी? तो दिस
- 57:52इज़ पेन। अब मैं लिख नहीं रहा हूं यहां पे।
- 57:54आप लोग समझ जाना कि जो भी चीजें मैं बता
- 57:56रहा हूं आप लोग अपने आप नोट करते रहें।
- 57:58पैन के पास क्या-क्या खासियत होती है?
- 57:59रेंज सबसे पहले तो कम होती है। खासियत ये
- 58:01है बुराई इसकी कि रेंज थोड़ी सी कम होती
- 58:04है। कनेक्शन बहुत जल्दी फास्ट एस्टैब्लिश
- 58:06होता है। बहुत ज्यादा सिक्योर कनेक्शन
- 58:08नहीं होता लेकिन फास्ट होता है और कम रेंज
- 58:12में काम करता है। ज्यादा सेटअप वगैरह की
- 58:14कुछ कॉस्ट नहीं होती। फिर ये ऑफ कोर्स
- 58:15मतलब ब्लूटूथ तो लगा हुआ था ना यार। इसमें
- 58:16अपन ने ब्लूटूथ में थोड़ी ना खर्चा किया
- 58:18कुछ अलग से। ठीक है जी। तो काफी लेस कॉस्ट
- 58:20होती है। सेकंड पे बात करते हैं व्हिच इज़
- 58:22नोन एज एल ए एन लन। इट इज नोन एज
- 58:26लोकल एरिया नेटवर्क। लोकल एरिया नेटवर्क
- 58:29का मतलब क्या होता है भैया? लोकल एरिया
- 58:31नेटवर्क यानी लन। बेसिकली ये क्या करता
- 58:33है? ये एक छोटे से एरिया के लिए होता है।
- 58:35जैसे फॉर एग्जांपल कि मैंने अपने घर में
- 58:37वाई-फाई लगाया है जिससे मैं मेरी मम्मी,
- 58:40मेरे पापा, मेरा छोटा भाई और हम लोगों के
- 58:42जितने भी डिवाइसेस हैं सब कुछ कनेक्ट हो
- 58:44सकता है। दिस इज़ नोन एस लोकल एरिया
- 58:45नेटवर्क। छोटे। जैसे कि हमारा शेरियंस का
- 58:47ऑफिस है तो हम लोगों ने यहां पे एक
- 58:48वाई-फाई लगाया है। अब लोकल एरिया नेटवर्क
- 58:50यानी लन के साथ क्या-क्या खासियत है? तो
- 58:52इसके साथ खासियत ये है कि स्पीड सबसे पहले
- 58:54तो काफी बढ़िया स्पीड मिलती है अपने को।
- 58:56सिक्योरिटी मिलती है फायर वॉल और काफी
- 58:58सारी सिक्योर नेटवर्क्स मिलते हैं अपने को
- 58:59यहां पे। साथ में इसके साथ एक बुराई भी ये
- 59:02है कि अगर मान लेते हैं कि अभी थोड़ी देर
- 59:04पहले हमारे डोजो में लाइट चली गई थी। तो
- 59:05जैसे ही लाइट गई वाई-फाई बंद हो गया तो
- 59:07सबके डिवाइसेस जो कनेक्टेड थे, खत्म। खतम,
- 59:10सब खत्म। ठीक है? तो लन यानी कि लोकल
- 59:13एरिया नेटवर्क एरिया और नेटवर्क यहां पे
- 59:15लिखा है समझ लेना दिस इज यूज्ड इन अ
- 59:18स्मॉलर एरियाज और जैसे कि होम हो गया अपना
- 59:22मतलब घर हो गया जैसे कि स्कूल हो गया जैसे
- 59:24कि ऑफिस हो गया इन सब में आप लोकल एरिया
- 59:26नेटवर्क का यूज़ करते हैं। यहां पर
- 59:28डिवाइसेस जो हैं वो कनेक्ट होते हैं एक
- 59:29दूसरे से कम एरिया के लिए होते हैं। स्पीड
- 59:31थोड़ी सी ज्यादा होती है। सिक्योरिटी रहती
- 59:33है काफी हद तक और काफी बढ़िया भी रहते
- 59:36हैं। दैट्स इट। मतलब छोटे एरिया में काम
- 59:37कर रहे हैं तो कॉस्ट भी थोड़ी सी कम होती
- 59:38है। है ना? मतलब पेन के कंपैरिजन में तो
- 59:41ज्यादा होगी लेकिन कम होती है थोड़ी सी।
- 59:42अगले पे बात करते हैं व्हिच इज नोन एज एम
- 59:44ए एन मैन। मैन मतलब आदमी। नहीं मैन
- 59:49मतलब
- 59:51मेट्रो पॉलिटन। अब एक बार स्पेलिंग चेक कर
- 59:54लेना मुझे अच्छे से याद नहीं।
- 59:55मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क। ये बेसिकली
- 59:58सिटी बेस्ड होते हैं। जैसे कि आपका केबल
- 1:00:00वाला जो अ पूरे सिटी में एक केबल सर्विस
- 1:00:04प्रोवाइड कर रहा है जो कि सभी लोगों तक
- 1:00:06पहुंच रही है। क्या आप मेरी बात समझ पा
- 1:00:07रहे हैं? ये मैन होता है। थोड़ा सा
- 1:00:09कंपेरेटिवली कॉस्टली होता है। स्पीड जो है
- 1:00:11इसकी लन के कंपैरिजन में थोड़ी सी कम होती
- 1:00:13है। सिक्योर होता है और पूरे सिटी वाइज़
- 1:00:17लोगों को डेटा एक्सेस करने में या नेटवर्क
- 1:00:20से कनेक्ट करने में हेल्प करता है। तो
- 1:00:22वाइडर रेंज होती है इसकी। मतलब सबसे कम
- 1:00:24रेंज किसकी थी? पैन की थी। फिर उससे
- 1:00:26ज्यादा रेंज किसकी आई? लन की आई। फिर उससे
- 1:00:28ज्यादा रेंज किसकी आई? मैन की आई। ठीक है?
- 1:00:30तीनों के हमने बेनिफिट्स और तीनों के हमने
- 1:00:32जो भी इंपॉर्टेंट यूज़ केसेस थे वो मैंने
- 1:00:34बताए। नोट करना बहुतेंट चीज है। है ना?
- 1:00:36उसके बाद हम जाते हैं पैन लैन मैन हो गया।
- 1:00:38उसके बाद हम जाते हैं वैन
- 1:00:42पे। वैन का मतलब क्या होता है भैया? वाइड
- 1:00:45एरिया नेटवर्क। वाइड एरिया नेटवर्क का
- 1:00:48क्या मतलब होता है भैया? ये बेसिकली
- 1:00:49कंट्री वाइज्ड होते हैं। जैसे कि हम मान
- 1:00:51लेते हैं इंटरनेट इज़ आल्सो एग्जांपल ऑफ़
- 1:00:53वाइड एरिया नेटवर्क। इंटरनेट क्योंकि पूरे
- 1:00:54देश भर में फैला हुआ है ना। जैसे कि आपने
- 1:00:57मान लेते हैं अ जैसे SBI है। ठीक है? बैंक
- 1:01:01है। अब उसके पूरे देश में बैंक्स खुले हुए
- 1:01:03हैं। उसके पूरे देश में ब्रांचेस हैं। तो
- 1:01:05अब वो उनको कनेक्ट करना चाहती है एक
- 1:01:07नेटवर्क से। तो वो क्या यूज़ करेंगे? वो
- 1:01:08वैन का यूज़ करेंगे। रेंज ऑब्वियसली ज्यादा
- 1:01:11होती है। हैक होने के चांसेस क्योंकि इसके
- 1:01:13ज्यादा भी हैं। है ना? तो रेंज ज्यादा
- 1:01:15होती है। हैक होने के चांसेस होते हैं
- 1:01:16काफी हद तक। और वैसे तो सिक्योरिटी काफी
- 1:01:19सारी लगा सकते हैं जिससे ये कंट्रोल हो
- 1:01:21जाएगा। इफ यू वांट तो अपन इस पे भी एक
- 1:01:22वीडियो बनाएंगे डिटेल्ड। लेकिन वैन यानी
- 1:01:25कि वाइड एरिया नेटवर्क बेसिकली कंट्री
- 1:01:27वाइज चीजों को कंट्रोल करने का काम करती
- 1:01:29है। कंट्री वाइज कनेक्ट करने का। नेटवर्क
- 1:01:31आर दी नेटवर्क मतलब क्या होता है? नेटवर्क
- 1:01:33आर दी नेटवर्क बिटवीन मल्टीपल
- 1:01:35कंप्यूटरटर्स, मल्टीपल डिवाइसेस कनेक्शन
- 1:01:37बिटवीन देम। तो ये कंट्री वाइज लोगों को
- 1:01:39जोड़ने का काम करती है। स्पीड इसकी इन
- 1:01:41तीनों से कम होती है। समझ रहे हैं आप लोग?
- 1:01:44मैं क्या कहना चाह रहा हूं? तो ये हो गया
- 1:01:46व्हेन। उसके बाद आते हैं अगले पे व्हिच इज़
- 1:01:48नोन एज पांचवा मैं यहां पे लिख देता हूं।
- 1:01:51दिस इज कैन कैन इज व्हाट भैया कैंपस एरिया
- 1:01:55नेटवर्क तो इसको मुझे ऊपर लिखना चाहिए था
- 1:01:58लेकिन कोई बात नहीं मतलब ऐसा समझ लीजिए कि
- 1:02:01अगर मुझे अपने पर्सनल मोबाइल को अपने इयर
- 1:02:05बड से कनेक्ट करना है तो यहां पर जो
- 1:02:07नेटवर्क इस्टैब्लिश हुआ है दिस इज़ नोन ऐ
- 1:02:09पर्सनल एरिया नेटवर्क यानी कि पैन ये
- 1:02:12बेसिकली डिवाइसेस छोटे डिवाइसेस के लिए
- 1:02:14मतलब ब्लूटूथ और वायरलेसली भी कनेक्ट हो
- 1:02:16सकते हैं काफी बढ़िया तरीके से फिर आते
- 1:02:18हैं हम लन पे लन क्या होता है भैया लन इज
- 1:02:20अ लोकल एरिया नेटवर्क जैसे कि वाई-फाई
- 1:02:22राउटर यहां पे लगा हुआ है। जैसे कि हमने
- 1:02:24nस लगाया तो उससे सबको कनेक्ट करना है। तो
- 1:02:27वहां पर लोकल एरिया नेटवर्क होता है। पैन
- 1:02:29स्पीड काफी हाई देता है लेकिन सिक्योरिटी
- 1:02:31काफी कम होती है इसमें और रेंज सबसे
- 1:02:33ज्यादा कम होती है। लोकल एरिया नेटवर्क
- 1:02:35यानी कि लन पे बात करें तो लन के अंदर
- 1:02:37स्पीड काफी बढ़िया होती है। जो कह सकते
- 1:02:41हैं हम रेंज होती है वो एक लिमिटेड होती
- 1:02:43है। घर बराबर, स्कूल बराबर या एक छोटा सा
- 1:02:45ऑफिस है उसके बराबर अगर है तो वहां पर
- 1:02:47आएगा। फिर इन तीनों के बाद आपको डिस्क
- 1:02:48अपने को डिस्कस करना चाहिए था कैन बट दिस
- 1:02:50इज़ नोन एज कैंपस एरिया नेटवर्क। ये
- 1:02:53बेसिकली एक कैंपस टाइप होता है। जैसे कि
- 1:02:55देयर इज़ अ कॉलेज इन भोपाल नेम इज
- 1:02:57आरजीपीवी। अब आरजीपीवी कॉलेज बहुत बड़ा है।
- 1:03:00मतलब बहुत सारे एकड़ में फैला हुआ है। और
- 1:03:02उसी कॉलेज में उनके मल्टीपल मान लेते हैं
- 1:03:04ब्रांचेस हैं और हर एक के लिए अलग-अलग
- 1:03:06बिल्डिंग है। समझ रहे हो मेरी बात? है ना?
- 1:03:08तो वहां पर हर एक के अंदर एक इस्टैब्लिश्ड
- 1:03:11नेटवर्क चाहिए होता। जैसे मान लेते हैं एक
- 1:03:12सीएस ब्रांच की अलग बिल्डिंग है। तो वहां
- 1:03:14पर वो लोग लैंड लगा सकते थे। लेकिन अब
- 1:03:16हमको क्या चाहिए? पूरा कैंपस अच्छे से
- 1:03:17कनेक्ट हो जाए एक दूसरे के साथ। हॉस्टल्स
- 1:03:19भी कनेक्ट हो जाए। ठीक है? मेस है वो भी
- 1:03:21कनेक्ट हो जाए। तो वहां पर कौन आएगा काम
- 1:03:23में? वहां पर आएगा कैन। जैसे कि आईआईटी
- 1:03:26दिल्ली हो गया। अब उसको पूरे सब अपने
- 1:03:28जितने भी कह सकते हैं कि जितनी भी
- 1:03:30बिल्डिंग्स हैं, जितनी भी ब्रांचेस हैं
- 1:03:32सबको कनेक्ट करना है। जितने भी हॉस्टल्स
- 1:03:33हैं सबको कनेक्ट करना है। तो वहां पर कौन
- 1:03:35काम में आ जाएगा? कैन काम में आ जाएगा।
- 1:03:37ठीक है? तो इसकी रेंज कंपेरेटिवली लैन से
- 1:03:39थोड़ी सी ज्यादा होती है। मैन से थोड़ी सी
- 1:03:41कम होती है। रेंज आपको समझ आ गई। स्पीड
- 1:03:43काफी बढ़िया रहती है। ले लेन से थोड़ी सी
- 1:03:46ज़्यादा ही रहती है। मतलब सॉरी लेन से
- 1:03:48थोड़ी सी कम होती है लेकिन काफी बढ़िया
- 1:03:49रहती है बाकी लोगों के कंपैरिजन में। ठीक
- 1:03:51है जी? मैन मेट्रोपॉलिटन सिटी बेस्ड पूरा
- 1:03:54कनेक्शन होता है और वैन कंट्री बेस्ड पूरा
- 1:03:56कनेक्शन होता है। और मैंने यहां पर आपके
- 1:03:57सामने एक छोटा सा डायग्राम भी मैंने यहां
- 1:03:59पे निकाला था। तो इसको भी देख के आप समझ
- 1:04:02सकते हैं। पैन की रेंज क्या होती है? एक
- 1:04:04से 10 मीटर स्पीड लो होती है। पर्सनल
- 1:04:06डिवाइसेस, फोन, वॉच और यहां पर उसकी कुछ
- 1:04:08खासियत और उसके कुछ बुराइयां यहां पर लिखी
- 1:04:11हुई हैं। जैसे कि इसकी लो कॉस्ट है। ईजी
- 1:04:13टू यूजर वायरलेसली कनेक्ट हो सकते हैं। तो
- 1:04:15ये खासियत है। बुराई में क्या है? बहुत
- 1:04:16शॉर्ट रेंज है। सिक्योरिटी का थोड़ा सा
- 1:04:18इशू है। लन क्या करती है? एक बिल्डिंग या
- 1:04:21फिर एक छोटी सी लाइक हमारा सारा सेटअप अभी
- 1:04:23एक ही बिल्डिंग में है। काइंड ऑफ़ कह सकते
- 1:04:24हैं। एक दो बिल्डिंग्स और हैं लेकिन आसपास
- 1:04:27में ही है। और स्पीड थोड़ी सी हाई होती
- 1:04:28है। स्कूल्स ऑफिसेस इन सबको कनेक्ट कर
- 1:04:31सकते हैं। फास्ट सिक्योर है। लिमिटेड
- 1:04:33एरिया है। और पढ़ लेना यार यहां पे
- 1:04:34तुम्हारे सामने ये दिखाई दे रहा है। मैं
- 1:04:36इसको थोड़ा सा छोटा कर देता हूं। और सोपू
- 1:04:38भाई इनको दिखा देना अच्छे से। ये जो
- 1:04:40डायग्राम दिख रहा है इनको। चाहिए तो
- 1:04:41स्क्रीनशॉट ले सकते हो। आराम से डिटेल में
- 1:04:43इस इसको पढ़ो। क्या फायदा है? क्या नुकसान
- 1:04:45है इनका? और मेरे हिसाब से शायद बढ़िया
- 1:04:48है। अब हम आगे बढ़ सकते हैं अगले टॉपिक की
- 1:04:50तरफ जिसका नाम है टोपोलॉजी। अब टोपोलॉजीस
- 1:04:52क्या होती है भैया? मान लेते हैं कि हमने
- 1:04:54यहां पे लन लगाया है। लन लगाने के बाद
- 1:04:56हमारे डिवाइसेस किस तरीके से कनेक्टेड हैं
- 1:04:58एक दूसरे से। तो वहां पर आती हैं काम में
- 1:05:00टोपोलॉजीस।
- 1:05:02ठीक है? नेटवर्क बेसिकली वाइडर रेंज में
- 1:05:04बात करता है। अब जैसे शेरियंस में हम लोग
- 1:05:06यूज़ कर रहे हैं। बेसिकली अभी मैश टोपोलॉजी
- 1:05:09जिसमें हर एक डिवाइसेस एक दूसरे से कनेक्ट
- 1:05:10होता है। ठीक है? तो हम एक-एक करके सब कुछ
- 1:05:12समझेंगे। बस टोपोलॉजी क्या होता है? मैश
- 1:05:14टोपोलॉजी स्टार टोपोलॉजी। लेकिन उसके पहले
- 1:05:16मैं चाहता हूं मैन आप सॉरी ये जो नेटवर्क
- 1:05:18टाइप्स ऑफ नेटवर्क है इनको थोड़ा सा
- 1:05:20रिवाइज करिए। मैं एक और चीज के बारे में
- 1:05:21थोड़ा सा बताना भूल गया जल्दीबाजी में तो
- 1:05:23मैं एक बार उसके बारे में भी बता देता
- 1:05:24हूं। मुझे चाहिए कि मैं थोड़ी सी यहां पर
- 1:05:27जगह बनाऊं तुम लोग समझ जाओगे ना यहां पे
- 1:05:29क्या लिखा हुआ है? यहां पर क्या लिखा था?
- 1:05:32समझ जाओगे ना? ठीक है? समझ लेना है ना
- 1:05:33प्लीज। यहां पर हम एक छोटी सी चीज के बारे
- 1:05:36में और बातचीत करते हैं। व्हिच
- 1:05:39इज़
- 1:05:40वीpए। आपने इसके बारे में भी सुना होगा।
- 1:05:42वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क। बेसिकली ये
- 1:05:44क्या होता है ना ये एक तरीके का
- 1:05:46इंक्रिप्टेड नेटवर्क होता है जिसमें होता
- 1:05:49ये है कि मैं मान लेते हैं कि अभी आपके
- 1:05:52सामने शेरियंस पे बैठा हूं और मुझे चाहिए
- 1:05:55कि मैं घर पे चले जाऊं और फिर भी मेरी
- 1:05:58लोकेशन जो है वो शेरियंस दिखाई दे। तो
- 1:06:00यहां पर अपन करते क्या है? अपन एक डेटा
- 1:06:02इंक्रिप्टेड फॉर्म में मान लेते हैं मेरी
- 1:06:04जो आईपी है अब मैंने अपनी खुद की आईपी को
- 1:06:07यूज़ ना करते हुए मैंने वीpए का यूज़ करा और
- 1:06:09जिससे मैं किसी और जगह की आईपी अब वीpए
- 1:06:12क्या ही समझाऊं तुम लोगों ने सबने डाउनलोड
- 1:06:13करा है वीpए और वो सब भी देखा है जो
- 1:06:15तुम्हें पता है जो तुम सोच रहे हो ठीक है
- 1:06:17वीपीएन बेसिकली क्या होता है वीपीएन
- 1:06:20वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी कि मैं
- 1:06:21अपनी आईपी को इंक्रिप्ट कर दूंगा जिसमें
- 1:06:24इंटरनेट पे कोई भी मेरी आईपी को ट्रैक
- 1:06:26नहीं कर पाएगा और मैं किसी और जगह की आईपी
- 1:06:29भी यूज कर सकता हूं ये कहलाता है वीपी एन
- 1:06:32ठीक है और थोड़ा सा अगर तुमको चाहिए ना तो
- 1:06:34अपन डिटेल में भी पढ़ सकते हैं इफ यू वांट
- 1:06:36मतलब काफी सारी चीजें हैं यार यहां पे
- 1:06:38मतलब वीपीए किस तरीके से काम करता है
- 1:06:42और आपने शायद सुना होगा वो ब्रेव में एक
- 1:06:45ऑप्शन होता है वहां पर अपन लाइक टॉर्क का
- 1:06:47यूज़ करके किस तरीके से काम कर सकते हैं
- 1:06:49ये एक अलग टॉपिक है। ठीक है जी। तो इसके
- 1:06:51बारे में भी कभी डिस्कस करेंगे। वीpएन इज़
- 1:06:53अ वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क। मैं यहां पे
- 1:06:54लिख भी देता हूं। छोटा पेन उठाना चाहिए
- 1:06:56मुझे।
- 1:07:00ठीक है? दिस इज बेसिकली अ
- 1:07:05वर्चुअल
- 1:07:07प्राइवेट नेटवर्क। इसमें आप अपने नेटवर्क
- 1:07:11की ट्रॉक्सी बना के कहीं और से कनेक्ट हो
- 1:07:14सकते हैं। तो मान लेते हैं मैं शेरियंस की
- 1:07:16में दिखना चाहता हूं लेकिन मैं बैठा हूं
- 1:07:18अपने होम पे तो मैं यूज़ करूंगा VPN का
- 1:07:20जिससे कि मेरी आईपी इंक्रिप्ट हो जाएगी।
- 1:07:22और अगर मैं चाहता हूं कि मुझे शेरियंस की
- 1:07:23आईपी दिखे तो मैं वहां पर वो भी सेट कर
- 1:07:25सकता हूं और मुझे शेरियंस की आईपी दिखाई
- 1:07:26देने लगेगी। कुछ इस तरीके से काम करता है
- 1:07:28हमारा वीपीएन। आई होप यहां तक सब कुछ
- 1:07:31क्लियर है। कोई परेशानी नहीं होगी। अब
- 1:07:32मुझे लगता है कि हमें बढ़ना चाहिए
- 1:07:34टोपोलॉजीस की तरफ। तो एक बार इस टॉपिक को
- 1:07:35अच्छे से डिटेल में रिवाइज कर लीजिएगा। तो
- 1:07:37अब थोड़ा सा समझते हैं टोपोलॉजीस के बारे
- 1:07:39में। तो टोपोलॉजीस क्या होती हैं? बेसिकली
- 1:07:42हमारे नेटवर्क जो लोकल एरिया नेटवर्क या
- 1:07:44फिर वाइड एरिया नेटवर्क या फिर मैन मान
- 1:07:47लेते हैं मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क इन
- 1:07:49सबको तो अपन ने कनेक्ट कर लिया। लेकिन
- 1:07:50हमारे नोट्स को हमारे डिवाइसेस को हम कैसे
- 1:07:52कनेक्ट करेंगे वो बताता है टोपोलॉजी। ठीक
- 1:07:54है? तो सबसे पहली टोपोलॉजी जो है वो हम
- 1:07:57समझेंगे वि इज नोन एज बस
- 1:07:59टोपोलॉजी। कौन सी टोपोलॉजी? बस टोपोलॉजी।
- 1:08:03भैया बस टोपोलॉजी क्या होती है? इसमें
- 1:08:05होता क्या है कि एक होती है बैकबोन केबल।
- 1:08:08अब इस बैकबोन केबल से मल्टीपल डिवाइसेस
- 1:08:10कनेक्टेड होते हैं। तो दिस इज़ डिवाइस ए,
- 1:08:13दिस इज़ डिवाइस बी, दिस इज़ डिवाइस सी एंड
- 1:08:19दिस इज़ डिवाइस डी। एक बैकबोन केबल। दिस
- 1:08:23पर्टिकुलर केबल इज नोन एज मैं लिख भी देता
- 1:08:25हूं वहां पर।
- 1:08:28बैक
- 1:08:30बोन
- 1:08:32केबल होता क्या है? सारे डिवाइसेस इस एक
- 1:08:35केबल से कनेक्टेड होते हैं और ये काफी
- 1:08:38ज्यादा कॉस्ट इफेक्टिव होती है। अगर नया
- 1:08:39डिवाइस ऐड करना है तो कितना ज्यादा आसान
- 1:08:41है। बस सिंपल यहां जाके नया डिवाइस ऐड
- 1:08:44करना था। लो कर
- 1:08:45लिया। बस खत्म। ये हो गया नेटवर्क में
- 1:08:48कनेक्टेड। तो ज्यादा इसमें कॉस्ट इफेक्टिव
- 1:08:50होता है। ये ज्यादा बड़े नेटवर्क के लिए
- 1:08:52इसको यूज़ नहीं कर सकते। और सारी
- 1:08:54डिपेंडेंसीज होती हैं इस बैकबोन केबल पे।
- 1:08:57अगर ये केबल मान लेते हैं मान लेते हैं ये
- 1:09:01केबल हो गई खराब। मान लेते हैं केबल खराब
- 1:09:03हो गई। अब प्रॉब्लम क्या हो जाएगी?
- 1:09:05प्रॉब्लम ये हो जाएगी पूरा नेटवर्क
- 1:09:06डिस्ट्रॉय हो जाएगा। तो हमारी सारी
- 1:09:08डिपेंडेंसीज इस बैकबोन केबल पे होती हैं।
- 1:09:11और ये बैकबोन केबल के थ्रू ही हमारा पूरा
- 1:09:13नेटवर्क जाता है। छोटे एरियाज के लिए काफी
- 1:09:15बढ़िया है। स्पीड भी काफी बढ़िया होती है।
- 1:09:17और कई बार स्पीड में ना यहां पे चैलेंजेस
- 1:09:19भी मतलब मैं चैलेंजेस और जो भी इसके
- 1:09:21बेनिफिट्स हैं वो सारे वन बाय वन बता रहा
- 1:09:23हूं। तो मतलब तुम अपने हिसाब से उनको
- 1:09:25अरेंज कर लेना। मैं फिर से बता रहा हूं।
- 1:09:26इसका पहला फायदा ये होता है स्पीड काफी
- 1:09:28बढ़िया होती है। छोटे एरियाज के लिए बहुत
- 1:09:30अच्छा होता है ये। और नए डिवाइसेस को ऐड
- 1:09:33करना काफी आसान होता है। कॉस्ट इफेक्टिव
- 1:09:35होती है। नुकसान क्या होते हैं? बैकबोन
- 1:09:37केबल पे पूरी डिपेंडेंसी होती है। साथ में
- 1:09:39एक और दिक्कत होती है यहां पे कि मान लेते
- 1:09:41हैं कि यह डिवाइस बी जो है वह ज्यादा
- 1:09:44इंटरनेट को कंज्यूम कर रहा है। ज्यादा तेज
- 1:09:46उसको चाहिए तो इन डिवाइसेस पे उसका इफेक्ट
- 1:09:49दिखाई देने लगेगा।
- 1:09:51ठीक है? क्योंकि ये सारी चीजें एक ही केबल
- 1:09:53से कनेक्टेड है ना? तो ये केबल जो है ये
- 1:09:54हमारी मेन केबल है। ये जो केबल है ये
- 1:09:57हमारी मेन केबल है। अब इससे ही सब लोग
- 1:09:58कनेक्टेड हैं। अब ये ज्यादा तेज डेटा को
- 1:10:00लेने लगेगा तो बाकी पे तो इफेक्ट पड़ेगा
- 1:10:02ना। समझ रहे हो ना मेरी बात? मैं क्या
- 1:10:04कहना चाह रहा हूं? तो ये प्रॉब्लम होती
- 1:10:05है। सेकंड टोपोलॉजी के बारे में बात करते
- 1:10:08हैं वि इज रिंग टोपोलॉजी।
- 1:10:13ठीक है भैया? रिंग टोपोलॉजी क्या होता है?
- 1:10:15रिंग टोपोलॉजी बाय द वे एक तरीके की
- 1:10:17टोपोलॉजी होती है। मैं डायग्राम को थोड़ा
- 1:10:19सा मिटाना चाहूंगा ताकि मैं यहां पे
- 1:10:20दोबारा दूसरा डायग्राम बना सकूं।
- 1:10:23ठीक है? तो अब समझते हैं रिंग टोपोलॉजी के
- 1:10:25बारे में। इसमें होता क्या है कि आपके
- 1:10:29डिवाइसेस कुछ इस तरीके
- 1:10:32से एक दूसरे के साथ
- 1:10:36इंटरकनेक्टेड होते हैं। यानी कि कुछ इस
- 1:10:41तरीके
- 1:10:43से। अब इसमें क्या-क्या फायदा होता है
- 1:10:45भैया? इसमें फायदा ये होता है मेरे प्यारे
- 1:10:47भाई। ये दिस इज़ नोन एज रिंग टोपोलॉजी। अब
- 1:10:49इसमें फायदा ये होता है कि डेटा काफी
- 1:10:51फास्ट ट्रांसफर करता है। ठीक है? और नए
- 1:10:54डिवाइसेस को ऐड करना थोड़ा सा यहां पर
- 1:10:55मुश्किल होता है क्योंकि सारे लोग
- 1:10:57कनेक्टेड हैं। तो किसी एक को बीच में ले
- 1:10:59आना है तो फिर यहां पर जाकर उसकी
- 1:11:00एडजस्टमेंट वगैरह करनी पड़ेगी। थोड़ा सा
- 1:11:02समझ रहे हो ना मैं कहना क्या चाह रहा हूं।
- 1:11:03रिंग टोपोलॉजी का पहला फायदा मैं फायदा और
- 1:11:05नुकसान मतलब मैं एक साथ में सभी फेंक देता
- 1:11:07हूं। तुम कंफ्यूज हो जाते होगे। तो सुनो।
- 1:11:09रिंग टोपोलॉजी का पहला फायदा यह है। डेटा
- 1:11:11काफी बढ़िया तरीके से ट्रांसफर होता है।
- 1:11:13कॉस्ट इफेक्टिव भी होता है क्योंकि ज्यादा
- 1:11:14खर्चा नहीं होता। स्मॉलर एरियाज के अंदर
- 1:11:17काफी बढ़िया तरीके से काम करता है। स्पीड
- 1:11:19काफी बढ़िया होती है। तो ये कुछ इसके
- 1:11:21फायदे हैं। नुकसान ये है कि मान लेते हैं
- 1:11:23कि डिवाइस भी फेल हो गया। मान लेते हैं
- 1:11:26डिवाइस भी करप्ट हो गया। डिवाइस भी हैक हो
- 1:11:28गया। डिवाइस भी काम नहीं कर रहा है। तो ये
- 1:11:30पूरा नेटवर्क यहां से इफेक्ट होना चालू हो
- 1:11:32जाएगा। क्या आप मेरी बात समझ पा रहे हो?
- 1:11:34तो दिस इज़ इट्स फर्स्ट चैलेंज। और सेकंड
- 1:11:37चैलेंज यह होता है कि नए डिवाइसेस को ऐड
- 1:11:39करना थोड़ा सा कॉम्प्लिकेटेड होता है।
- 1:11:41स्ट्रक्चर इसका बहुत ईजी होता है। तो इसको
- 1:11:43बेनिफिट में लिखना कि इसका स्ट्रक्चर बहुत
- 1:11:45ईजी होता है। लेकिन नए डिवाइसेस को ऐड
- 1:11:47करना थोड़ा सा इसमें कॉम्प्लेक्स टर्म
- 1:11:48कहलाएगा। ठीक है जी? और होता क्या है? मान
- 1:11:52लेते हैं कि मैं डिवाइस ए पे बैठा हुआ
- 1:11:53हूं। मुझे डिवाइस डी को मैसेज भेजना है।
- 1:11:55तो वो बी के पास जाएगा, सी के पास जाएगा
- 1:11:59और फिर उसके बाद डी के पास जाएगा। तो
- 1:12:01इसमें थोड़ा सा सिक्योरिटी कंसर्न भी होता
- 1:12:03है लेकिन सस्ता है तो लोग यूज़ करते हैं।
- 1:12:05कोई परेशानी नहीं है उसमें भी। ठीक है? आई
- 1:12:07होप समझ में आ रहा होगा। रिंग टोपोलॉजी
- 1:12:09क्या होता है? बेनिफिट्स मैं एक बार और
- 1:12:10रिवाइज करवा देता हूं। काफी स्पीड काफी
- 1:12:13बढ़िया रहती है यहां पे और छोटे एरियाज के
- 1:12:15लिए बहुत बढ़िया तरीके से काम करता है।
- 1:12:17कॉस्ट इफेक्टिव होता है। चैलेंजेस
- 1:12:18क्या-क्या होते हैं? कि जब डेटा हॉप्स के
- 1:12:20थ्रू यहां पे मतलब बीच वाले नोट्स के थ्रू
- 1:12:22ट्रांसफर होता है तो बीच वाले नोट्स में
- 1:12:25डेटा लीकेज का खत खतरा यहां पर होता है।
- 1:12:27डेटा हैक होने का खतरा होता है। नए
- 1:12:29डिवाइसेस को ऐड करना थोड़ा सा मुश्किल है।
- 1:12:30और अगर कोई एक डिवाइस बीच में फेल हो गया
- 1:12:32तो पूरा नेटवर्क पे उसका इफेक्ट हमको
- 1:12:34दिखाई देता है। लेकिन एक बेनिफिट भी है
- 1:12:37यहां पे। अगर नेटवर्क में कोई हमें दिक्कत
- 1:12:39समझ आ गई। मान लेते हैं कि बी वाला करप्ट
- 1:12:41हो गया तो वह जल्दी आइडेंटिफाई भी हो जाता
- 1:12:43है। तो एक बेनिफिट भी है। ठीक है? तीसरे
- 1:12:45वाले पर बात करते हैं वि इज
- 1:12:49स्टार
- 1:12:50टोपोलॉजी स्टार्ट भैया आप टेढ़ा क्यों
- 1:12:53लिखते हो? टेढ़ा इसलिए लिखते हो। मेरा हाथ
- 1:12:54टेढ़ा चलता है। पता नहीं क्यों। ठीक है?
- 1:12:56स्टार टोपोलॉजी में क्या होता है? एक होता
- 1:12:58है सेंट्रल केबल। ठीक है? एक सेंट्रल
- 1:13:01सर्वर कह सकते हैं। सेंट्रल डिवाइस कह
- 1:13:02सकते हैं। मैं इतना बड़ा इसको बता बना देता
- 1:13:04हूं। ठीक है? दिस इज़ आवर सेंट्रल डिवाइस।
- 1:13:09और सारे डिवाइसेस जो हैं वो इस सेंटर
- 1:13:12डिवाइस से कनेक्टेड होते हैं।
- 1:13:16ठीक है जी? तो सारे डिवाइसेस इस सेंटर
- 1:13:19डिवाइस से कनेक्टेड होते
- 1:13:22हैं। समझ पा रहे हो? सेंटर डिवाइस काफी
- 1:13:25ज्यादा वाइटल रोल प्ले करता है यहां पे।
- 1:13:27क्योंकि सेंटर डिवाइस से ही सारे डिवाइसेस
- 1:13:29हमारे यहां पे कनेक्टेड हैं। तो अगर सेंटर
- 1:13:31डिवाइस मान लेते हैं करप्ट हो गया या
- 1:13:32सेंटर डिवाइस मान लेते हैं खराब हो गया तो
- 1:13:34ये सारे लोग चैलेंज फेस करेंगे। लेकिन
- 1:13:37इसमें फायदे क्या-क्या हैं? इसका पहला
- 1:13:39फायदा तो ये है कि अगर मुझे कोई नया नोड
- 1:13:41ऐड करना है तो बस ईजी। सब सबसे ज्यादा ईजी
- 1:13:46सबसे ज्यादा ईजी नया डिवाइस ऐड करना है
- 1:13:48इसके साथ कनेक्ट करो डिवाइस ऐड हो गया अब
- 1:13:50और क्या-क्या फायदे होते हैं भैया स्पीड
- 1:13:52काफी बढ़िया होती है लेकिन स्पीड इस पे
- 1:13:53डिपेंडेंट होती है जिसको भी यहां से डेटा
- 1:13:55पास करना है कर सकता है सिक्योरिटी सबसे
- 1:13:57ज्यादा इसी में ही होती है टेक्निकली समझा
- 1:13:59जाए अगर तो क्योंकि सारे लोग इससे
- 1:14:02कनेक्टेड है ना एक दूसरे से तो कनेक्टेड
- 1:14:03नहीं है तो ये जब तक जिंदा है सबको
- 1:14:05कंट्रोल करेगा और ये काफी पावरफुल मशीन
- 1:14:07होती है तो इतनी जल्दी करप्ट नहीं होती है
- 1:14:08लेकिन अगर हो गई तो यह पहला चैलेंज है कि
- 1:14:10अगर सेंटर डिवाइस करप्ट हो गया तो क्या
- 1:14:12करेंगे दूसरा चैलेंज यहां पर यह होता है
- 1:14:15कि थोड़ी सी कंपेरेटिवली रिंग और बस के
- 1:14:17कंपैरिजन में थोड़ा सा ज्यादा कॉस्टली
- 1:14:19होता है। है ना? सेटअप करना थोड़ा सा मतलब
- 1:14:21ये डिवाइस वगैरह बनाना थोड़ा सा कॉस्टली
- 1:14:23हो जाता है। और स्पीड काफी बढ़िया देता
- 1:14:26है। ये तो मैंने ऑलरेडी बता ही दिया है।
- 1:14:28तो ये स्टार टोपोलॉजी होता है। है ना?
- 1:14:30थोड़ा सा भाई अब है ना इतना नहीं है कि
- 1:14:31यार तुम लोग लोगों ने जो भी पढ़ लिया उसको
- 1:14:33पढ़ के भूल गए। हम थोड़ा सा इसको खुद से
- 1:14:35भी Google करके और अच्छे से एक्सप्लोर
- 1:14:36करेंगे। मैं आपको सबके बारे में ब्रीफ
- 1:14:38इंट्रोडक्शन दे रहा हूं। ठीक है जी? तो ये
- 1:14:40मैंने बताया स्टार टोपोलॉजी के बारे में।
- 1:14:41फायदे एक बार और अच्छे से रिवाइज करवा रहा
- 1:14:43हूं कि सेटअप अगर नया डिवाइस ऐड करना है
- 1:14:45तो काफी बढ़िया तरीके से हो जाता है। बहुत
- 1:14:47ईजीली हो जाता है। दूसरा फायदा ये होता है
- 1:14:49स्पीड काफी बढ़िया होती है और तीसरा फायदा
- 1:14:52ये होता है कि अगर कोई एक डिवाइस करप्ट हो
- 1:14:54गया मान लेते हैं जो मेरा ई डिवाइस है ये
- 1:14:56करप्ट हो गया तो बाकियों को उस पे कोई असर
- 1:14:58नहीं दिखेगा। समझ रहे हो ना मैं क्या कह
- 1:14:59रहा हूं। लेकिन मान लेते हैं कि इसके
- 1:15:01नुकसान क्या-क्या है? तो नुकसान यह है कि
- 1:15:04अगर यह सेंटर नोड फेल हो गया तो फिर सब पे
- 1:15:06असर दिखेगा। और क्या-क्या नुकसान होते हैं
- 1:15:08भैया? इसका नुकसान यह होता है कि थोड़ा सा
- 1:15:10कॉस्टली होता है। इसका नुकसान इसका फायदा
- 1:15:13यह होता है। इसका थोड़ा सा मतलब कॉस्ट
- 1:15:14इफेक्टिव तो है ही नुकसान। और सेंटर वाले
- 1:15:16डिवाइस पे काफी डिपेंडेंसी होती है। सेटअप
- 1:15:18बहुत ज्यादा आसान होता है। और दिस इज़
- 1:15:21स्टार टोपोलॉजी। अब एक दो चीजें और बची
- 1:15:23हैं तो उनको भी पढ़ते हैं अपन। ऑलराइट। तो
- 1:15:24बस टोपोलॉजी, रिंग टोपोलॉजी और स्टार
- 1:15:26टोपोलॉजी हम लोगों ने समझ लिया है। अब हम
- 1:15:28अगली टोपोलॉजी की तरफ चलते हैं। व्हिच इज
- 1:15:30नोन
- 1:15:32एज मैश टोपोलॉजी।
- 1:15:38भैया मैश टोपोलॉजी क्या होती है और इसमें
- 1:15:40क्या होता है? तो मान लेते हैं दिस इज आवर
- 1:15:42कंप्यूटर ए दिस इज आवर कंप्यूटर बी
- 1:15:46एंड मान लेते हैं यहां पर एक सी है। यहां
- 1:15:50पर एक डी है। यहां पर एक ई है। मैच
- 1:15:53टोपोलॉजी में ये सारे
- 1:15:56लोग एक दूसरे से इंटरकनेक्टेड होते हैं।
- 1:15:59मतलब अभी तो ये रिंग बन गया। लेकिन अगर
- 1:16:01मैंने ए को ई से भी कनेक्ट कर दिया। ए को
- 1:16:04मैंने डी से भी कर दिया। P को मैंने डी से
- 1:16:07भी कर दिया और C से भी कर दिया
- 1:16:09डायरेक्टली। कुछ इस तरीके से आई एम सॉरी।
- 1:16:12और कुछ इस तरीके से ये जो आप टोपोलॉजी देख
- 1:16:15रहे हैं जिसमें सारे नोड्स हमारे
- 1:16:17इंटरकनेक्टेड हैं। इंटरकनेक्टेड होने का
- 1:16:19मतलब क्या है भैया? इंटरकनेक्टेड होने का
- 1:16:21मतलब कि सारे नोड्स एक दूसरे से कनेक्टेड
- 1:16:23हैं। दिस टोपोलॉजी इज़ नोन एज मैश
- 1:16:25टोपोलॉजी। मैश टोपोलॉजी में क्या होता है
- 1:16:27ना दोस्तों? कुछ इसके फायदे ये हैं कि
- 1:16:29सबसे पहले तो अगर मान लेते हैं कोई एक नोड
- 1:16:31मेरा खराब हो गया। मान लेते हैं मेरा ए
- 1:16:33नंबर का नोट खराब हो गया तो ज्यादा
- 1:16:35प्रॉब्लम नहीं आएगी। पहली चीज तो
- 1:16:36आइडेंटिफाई करना काफी ज्यादा आसान हो
- 1:16:38जाएगा। दूसरी चीज कि मैं अगर यह नोट फेल
- 1:16:41भी हो रहा है तो बाकी आपस में कनेक्टेड है
- 1:16:42तो किसी को कोई परेशानी नहीं होगी। ठीक
- 1:16:44है? मैं चाहूं तो इसको ईजीली रिप्लेस भी
- 1:16:46कर पाऊंगा। कोई उसमें भी परेशानी नहीं
- 1:16:47आएगी। और क्या-क्या फायदे होते हैं भैया?
- 1:16:49डेटा बहुत फास्ट कम्युनिकेट होता है। यहां
- 1:16:51पर डेटा लॉस नहीं होता, कोलीजंस नहीं होते
- 1:16:54और काफी बढ़िया तरीके से ये काम करता है।
- 1:16:57काफी फास्ट डेटा को स्पीड के साथ ट्रांसफर
- 1:16:59करता है। कुछ नुकसान क्या होते हैं इसके
- 1:17:01भैया? कॉस्ट इफेक्टिव नहीं है। बहुत
- 1:17:04ज्यादा पैसे लगते हैं इसको बनाने में। और
- 1:17:06तुम्हें पता है हम लोग शेरियंस में भी मैश
- 1:17:08ही यूज़ कर रहे हैं। मतलब ऐसा ऐसा नहीं कह
- 1:17:10रहा हूं बहुत सारा पैसा खर्च किया। मैं ये
- 1:17:12कहना चाह रहा हूं बस कि मैश टोपोलॉजी में
- 1:17:14अगर कोई एक पर्टिकुलर नोड फेल भी हो गया
- 1:17:16तो बाकी उससे कनेक्टेड रहते हैं। थोड़ा सा
- 1:17:18महंगा होता है और इसकी सेटअप कॉस्ट काफी
- 1:17:20ज्यादा आती है। मेंटेनेंस में भी काफी
- 1:17:22खर्चा होता है और अगर मान लेते हैं मुझे
- 1:17:24कोई नया डिवाइस ऐड करना है तो वो भी एक
- 1:17:26चैलेंज होता है हमारे लिए क्योंकि फिर
- 1:17:27बाकी सारे मान लेते हैं मैंने यहां पर एफ
- 1:17:30बनाया तो अब मुझे एफ को यहां पर वापस से
- 1:17:32सबके साथ जोड़ना पड़ेगा ना
- 1:17:35यार। कितनी सारी केबल्स लगी। कितना सारा
- 1:17:38वापस से मुझे चीजें समझनी पड़ी। तो इसमें
- 1:17:39थोड़ी सी मेहनत लगेगी ना यार। इसलिए थोड़ा
- 1:17:41सा हम ये मान के चल सकते हैं कॉस्ट लगती
- 1:17:44है। नए डिवाइसेस को ऐड करना काफी बड़ा
- 1:17:45चैलेंज होता है लेकिन स्पीड काफी बढ़िया
- 1:17:47होती है और डेटा कोलीजंस का खतरा नहीं
- 1:17:50होता। डेटा लॉस का खतरा नहीं होता और
- 1:17:52एलिमेंट्स एक दूसरे से कनेक्टेड होते हैं।
- 1:17:54कोई एक चला भी गया तो कोई परेशानी नहीं
- 1:17:56होती। अगले वाली की तरफ जाते हैं हम व्हिच
- 1:17:58इज़ स्टार हो गया, मैश हो गया, रिंग हो
- 1:18:01गया, बस हो गया। अगली टोपोलॉजी है भाइयों
- 1:18:04ट्री
- 1:18:06टोपोलॉजी। भैया ट्री टोपोलॉजी में क्या
- 1:18:09होता है? ट्री टोपोलॉजी इज़ बेसिकली अ
- 1:18:10कनेक्शन ऑफ अ कह सकते हो कॉम्बिनेशन ऑफ
- 1:18:13स्टार प्लस बस
- 1:18:15टोपोलॉजी। दिस इज़ ट्री टोपोलॉजी। अब इसमें
- 1:18:18क्या होता है? इसमें होता ये है भाइयों
- 1:18:20मान लेते हैं कि अ मैं छोटे वाले पेन से
- 1:18:22बनाता हूं। ज्यादा अच्छे से बन पाएगा। मान
- 1:18:24लेते हैं कि मेरे पास एक जैसा कि हमारे अ
- 1:18:27किस टोपोलॉजी में हुआ करता था? बस
- 1:18:28टोपोलॉजी में। एक होती थी हमारे पास
- 1:18:30बैकबोन केबल। सो लेट मी मेक अ बैकबोन
- 1:18:32केबल। इसको मैं दूसरे कलर से बनाता हूं। अ
- 1:18:35इस कलर से बनाता हूं। दिस इज़ आवर बैकबोन
- 1:18:38केबल। अब इस बैकबोन केबल से मेरे सारे
- 1:18:40नोट्स कनेक्टेड हैं। लेकिन इस बार सिर्फ
- 1:18:42नोट्स कनेक्टेड नहीं है। इस बार
- 1:18:45मेरा मेन डिवाइस कनेक्टेड है। इसको मैं
- 1:18:48मेन डिवाइस कह देता हूं। जैसे कि स्टार
- 1:18:49टोपोलॉजी में हुआ करता था। सेंटर डिवाइस
- 1:18:51हुआ करता था। और इससे मल्टीपल डिवाइसेस
- 1:18:54कनेक्टेड हैं। मान लेते हैं ये है ए, यह
- 1:18:57है बी, यह है सी और ये है डी। ये
- 1:19:01बड़े-बड़े ऑफिसेस में यूज़ होता है। ठीक
- 1:19:02है? मान लेते हैं मेरा एक और मेन डिवाइस
- 1:19:04कनेक्टेड है। मैं इसको MD2 दे देता हूं।
- 1:19:06और इससे मल्टीपल डिवाइसेस कनेक्टेड हैं।
- 1:19:08जैसे कि ई, जैसे कि एफ, जैसे कि G और एक
- 1:19:13और मान लेते हैं हमने बना लिया
- 1:19:15[संगीत]
- 1:19:17MD3 और इससे भी कुछ इस तरीके से डिवाइसेस
- 1:19:21कनेक्टेड हैं। तो आई होप आपको यह समझ में
- 1:19:24आ रहा है कि स्टार टोपोलॉजी और बस
- 1:19:26टोपोलॉजी का कॉम्बिनेशन कहलाता है ट्री
- 1:19:28टोपोलॉजी। ट्री टोपोलॉजी के अंदर हमारे
- 1:19:30डिवाइसेस एक बैक बोन केबल से कनेक्टेड
- 1:19:33होते हैं। और यहां पर जाके जैसे कि बस
- 1:19:35टोपोलॉजी में हुआ करता था कि यहां पर
- 1:19:37डायरेक्टली एक-एक डिवाइस कनेक्ट होता था।
- 1:19:38अब यहां पर सीन कुछ ऐसा है यहां पर मेन
- 1:19:40डिवाइस कनेक्टेड है और मेन डिवाइसेस से
- 1:19:42मल्टीपल नड्स कनेक्टेड हैं। कुछ इस तरीके
- 1:19:44से। आई होप आपको ये समझ आया होगा कि मेन
- 1:19:47डिवाइसेस कनेक्टेड है और मेन डिवाइसेस से
- 1:19:48मल्टीपल डेटा कनेक्टेड हैं। पहली चीज
- 1:19:50इसमें क्या है कि भाई साहब बैकबोन केबल पे
- 1:19:52बहुत ज्यादा डिपेंडेंसी क्योंकि अगर यह
- 1:19:54फेल हो गई तो सब कुछ फेल हो गया। लेकिन हम
- 1:19:56ऐसा बनाते हैं इसको कि ये फेल ना हो
- 1:19:57ज्यादातर टाइम। दूसरा क्या होता है? इसमें
- 1:19:59फायदा क्या होता है? फायदे पे हम आते हैं
- 1:20:01सबसे पहले तो फायदा ये होता है कि
- 1:20:02बड़े-बड़े डिवाइसेस अगर आप लगा रहे हैं,
- 1:20:04बड़े-बड़े आपके सेटअप्स बनाने हैं तो ये
- 1:20:06काम आता है। और जैसे मान लेते हैं कि अ
- 1:20:09एग्जांपल लेके देखता हूं। मान लेते हैं कि
- 1:20:11शेरियर्स का ऑफिस है जिसमें मल्टीपल
- 1:20:14सेक्टर्स हैं। जैसे कि एक है डेवलपर्स का
- 1:20:16सेक्टर। है ना? सेक्शन है। एक मान लेते
- 1:20:18हैं हमारा एडिटर्स का सेक्शन, एक हमारी
- 1:20:20मार्केटिंग टीम का सेक्शन है। तो हमारे
- 1:20:22पास मल्टीपल सेक्शंस बने हुए हैं। तो
- 1:20:23मैंने क्या करा? एक बैकबोन केबल से यहां
- 1:20:25पे सबको कनेक्ट कर लिया। दिस इज़ फॉर
- 1:20:27डेवलपर, दिस इज़ फॉर एडिटर्स, दिस इज़ फॉर
- 1:20:29मार्केटिंग टीम एंड वन मोर इज़ फॉर कंटेंट
- 1:20:32क्रिएटर्स। ठीक है? तो अब क्या होगा? सारे
- 1:20:34लोग सेपरेटली कनेक्टेड हैं। तो मतलब अब हर
- 1:20:37एक का एक पर्टिकुलर ग्रुप बन गया। जैसे ये
- 1:20:39एक ग्रुप बन गया। ये एक ग्रुप बन गया। ये
- 1:20:41एक ग्रुप बन गया। कुछ इस तरीके से सबका एक
- 1:20:43ग्रुप बन गया है। ठीक है? और इससे फायदा
- 1:20:44क्या होता है भैया? फायदा यह होता है भाई
- 1:20:46साहब कि अब मान लेते हैं कि मेरी एडिटर
- 1:20:49टीम वाला यह वाला सिस्टम करप्ट हो गया। तो
- 1:20:51अब सिर्फ इस पे इफेक्ट पड़ेगा। बाकी के
- 1:20:53लोगों पे कोई इफेक्ट नहीं पड़ेगा। पहली
- 1:20:55चीज यहां पे फायदा ये हो गया। दूसरा फायदा
- 1:20:58क्या हो गया भैया? कि मुझे नए डिवाइसेस को
- 1:20:59ऐड अगर करना है। मुझे एक नया सेक्शन बनाना
- 1:21:01है तो मेरे लिए ज्यादा वो मुश्किल नहीं
- 1:21:03होगा। मैं ईजीली उसको यहां पे इंप्लीमेंट
- 1:21:05कर सकता हूं। क्या मेरी बात समझ पा रहे
- 1:21:07हैं? कॉस्ट कितनी लगती है भैया? तो कॉस्ट
- 1:21:09अच्छी खासी लगती है। मतलब मैश जितनी तो
- 1:21:10नहीं लगती लेकिन अच्छी खासी लगती है। ठीक
- 1:21:12है? दूसरा कि यहां पर जाके एक और फायदा जो
- 1:21:15मुझे लगता है पर्सनली कि अब जब सारे नोड्स
- 1:21:18यहां से कनेक्टेड हैं। तो अगर मान लेते
- 1:21:19हैं कि किसी नोड में प्रॉब्लम आ गई। ये
- 1:21:20मान लेते हैं कि ये जो डी वाला नोड है ये
- 1:21:23हो गया करप्ट। अगर ये करप्ट हो गया तो
- 1:21:26सिर्फ मुझे ये जी वाला नोड कनेक्ट करप्ट
- 1:21:28हुआ है। तो मुझे बाकी पूरे नोड पे कोई
- 1:21:30इफेक्ट नहीं दिखेगा। बाकी सब बढ़िया तरीके
- 1:21:31से अपना काम करते रहेंगे। और मैं ईजीली
- 1:21:34आइडेंटिफाई भी कर लूंगा कि मेरा जी जो नोड
- 1:21:36है वो करप्ट हो चुका है। आई होप आपको ये
- 1:21:38समझ आ रहा है किस तरीके से हो रहा है। ठीक
- 1:21:40है? और इसका एक नुकसान समझते हैं। अब क्या
- 1:21:43है? बैकबोन केबल पे सारी डिपेंडेंसी है।
- 1:21:45तो अगर ये केबल अगर करप्ट हो गई तो ये
- 1:21:48सारे डिपेंडेंसीज में खराब हो जाएगा। और
- 1:21:50यहां पर के जो सेंटर डिवाइस है उसके ऊपर
- 1:21:52भी डिपेंडेंसी होती है। तो अगर यह करप्ट
- 1:21:54हो गया तो इसके सारे नोट्स पे इफ़ेक्ट
- 1:21:56दिखाई देगा। जैसे एडिटर्स का जो सर्वर है
- 1:21:58वही क्रैश हो गया। मतलब जिससे वो सारे लोग
- 1:22:00कनेक्टेड थे। तो पूरे एडिटिंग टीम को उसका
- 1:22:02इफेक्ट देखने को मिलेगा ना यार भाइयों। तो
- 1:22:04ये इसका एक नुकसान हो जाता है। और क्या
- 1:22:06नुकसान होता है? कॉस्ट काफी बाकियों के
- 1:22:09कंपैरिजन में मतलब बस और रिंग टोपोलॉजी के
- 1:22:11कंपैरिजन में थोड़ी सी ज्यादा कॉस्ट होती
- 1:22:12है इसकी। लेकिन काफी फिर भी मतलब
- 1:22:14बड़े-बड़े डिवाइसेस के लिए काम कर रहा है।
- 1:22:16बड़े-बड़े लोगों को ज्यादा लोगों को
- 1:22:18कनेक्ट करने में हेल्प कर रहा है। तो काफी
- 1:22:19बेनिफिशियल है। तो इसको यूज़ करती हैं
- 1:22:21कंपनीज़। है ना? बड़े-बड़े ऑफिसिसेस यूज़
- 1:22:23करते हैं। ठीक है? अगला है मेरा पेन क्यों
- 1:22:26नहीं चल रहा? अगला है मैं स्क्रॉल कर देता
- 1:22:28हूं। अगला है भाइयों व्हिच इज़ नोन एज
- 1:22:31हाइब्रिड। हाइब्रिड इज़ कॉम्बिनेशन ऑफ़
- 1:22:35मल्टीपल
- 1:22:37टोपोलॉजीस। हाइब्रिड टोपोलॉजीस। हाइब्रिड
- 1:22:40बेसिकली कॉम्बिनेशन होता कॉम्बिनेशन होता
- 1:22:42है मल्टीपल टोपोलॉजीस का। जैसे कि आपने
- 1:22:44रिंग टोपोलॉजी और बस टोपोलॉजी को बनाया और
- 1:22:47उससे आपने मान लेते हैं किसी और टोपोलॉजी
- 1:22:49को ऐड कर दिया। स्टार को ऐड कर दिया। तो
- 1:22:50उस केस में यहां पर आप यूज़ करते हैं कौन
- 1:22:53सी टोपोलॉजी? हाइब्रिड। हाइब्रिड मतलब
- 1:22:55मल्टीपल का कॉम्बिनेशन। जैसे कि मान लेते
- 1:22:57हैं कि मैंने यहां पर जाके एक
- 1:23:01अ एक मान लेते हैं मैंने यहां पर बनाई है
- 1:23:05रिंगटो। मेरी राइटिंग पे ध्यान मत देना
- 1:23:07भाई प्लीज। एक मैंने बनाई है रिंग
- 1:23:09टोपोलॉजी और रिंग टोपोलॉजी को मैंने
- 1:23:11कनेक्ट कर दिया मान लेते
- 1:23:13हैं एक स्टार टोपोलॉजी के साथ तो ये बन
- 1:23:16गया हाइब्रिड हाइब्रिड मतलब कॉम्बिनेशन ऑफ़
- 1:23:18मल्टीपल सिंपल है ना कॉम्प्लेक्स होता है
- 1:23:20बस इसका एक ये नुकसान है और ज्यादा कह
- 1:23:22सकते हो कि ज्यादा हम अपने हिसाब से चीजों
- 1:23:25को ऐड कर सकते हैं। जैसे मान लेते हैं कि
- 1:23:27मेरे एडिटर्स को चाहिए रिंग टोपोलॉजी के
- 1:23:29थ्रू उनका काम हो और डेवलपर्स को चाहिए कि
- 1:23:31स्टार टोपोलॉजी के थ्रू उनका काम हो तो हम
- 1:23:33वहां पर ये सेटअप कर सकते हैं। ठीक है जी?
- 1:23:34तो दिस इज हाइब्रिड टोपोलॉजी और मैंने एक
- 1:23:36छोटा सा आप लोगों के लिए डायग्राम भी
- 1:23:38बनाया है। तो इन सबके नोट्स वोट्स बना
- 1:23:39लेना बेहतरीन तरीके से। ठीक है जी? जो
- 1:23:42मैंने बोला वीडियो को पॉज करके आराम आराम
- 1:23:43से उसके नोट्स बनाना। अगर आप डायग्राम को
- 1:23:45देखेंगे तो डायग्राम कुछ ऐसा दिख रहा है।
- 1:23:47बेसिक सा डायग्राम है। मैंने यहां जाके बस
- 1:23:49ये बताया है कि बस टोपोलॉजी कैसी दिखाई
- 1:23:51देती है? स्टार टोपोलॉजी कैसी दिखाई देती
- 1:23:53है? रिंग टोपोलॉजी, मैश टोपोलॉजी, ट्री
- 1:23:56टोपोलॉजी और हाइब्रिड टोपोलॉजी और भी कुछ
- 1:23:58होती हैं जो उतनी ज्यादा मतलब पॉपुलर नहीं
- 1:24:01है। जैसे कि पॉइंट टू पॉइंट टोपोलॉजी
- 1:24:03जिसमें एक पॉइंट से दूसरे पॉइंट को कनेक्ट
- 1:24:05कर दिया जाता है। दिस इज़ पॉइंट टू पॉइंट
- 1:24:07टोपोलॉजी। दैट्स इट। एक होती है जिसको
- 1:24:09बोलते हैं
- 1:24:10डेजी चेन
- 1:24:14टोपोलॉजी। क्या होती है? अब इसके बारे में
- 1:24:17थोड़ा सा आप एक्सप्लोर करिएगा। डेजी चेन
- 1:24:18टोपोलॉजी क्या होती है? चेन के थ्रू सब
- 1:24:20लोग कनेक्टेड होते हैं। ठीक है? तो इन
- 1:24:22सबको थोड़ा सा अच्छे से पढ़िएगा, समझिएगा।
- 1:24:24किस तरीके से ये काम करते हैं। इस चीज को
- 1:24:26एक्सप्लोर करिएगा। ये आपका छोटा सा काम
- 1:24:28होने वाला है। ये आपका होमवर्क होने वाला
- 1:24:29है। मैंने आपको सबके बारे में डिटेल में
- 1:24:31समझाया है हर एक टोपोलॉजी के बारे में।
- 1:24:33अगला जो टॉपिक है वो है एग्जांपल लेके
- 1:24:35देखते हैं Zomato का। लेकिन मैं चाहता हूं
- 1:24:37Zomato का एग्जांपल अपन अभी ना लें। पहले
- 1:24:39मैं आपको एक्सप्लेन करना चाहता हूं ओएसआई
- 1:24:41मॉडल जिसके थ्रू हम समझेंगे इंटरनली यहां
- 1:24:43पे कैसे काम हो रहा है। एक्सटर्नली तो
- 1:24:44मुझे लगता है कि हमने समझ लिया था
- 1:24:46WhatsApp वाले एग्जांपल से। मुझे लगता है
- 1:24:47यहां पे अब हमें ओएसआई मॉडल को थोड़ा सा
- 1:24:49समझना चाहिए और उसके बाद हम सारी लेयर्स
- 1:24:51को समझे उसके बाद हम zomato पे आते हैं।
- 1:24:53ठीक है जी? तो अभी टोपोलॉजीस समझिए,
- 1:24:55रिवाइज कीजिए। उसके बाद हम बढ़ते हैं
- 1:24:56ओएसआई मॉडल की तरफ। कंप्यूटर नेटवर्किंग
- 1:24:59का वन ऑफ द मोस्ट इंपोर्टेंट टॉपिक है
- 1:25:01ओएसआई मॉडल। और अब हम उसको डिटेल में
- 1:25:04समझने वाले हैं। मतलब इतना डिटेल में कि
- 1:25:05अगर आपको कोई नींद से उठा के भी पूछ ले कि
- 1:25:07ओएसआई मॉडल क्या होता है? बताओ। तो आप
- 1:25:09उसका जवाब दे पाएं। इतना डिटेल में
- 1:25:11पढ़ेंगे तो ध्यान से देखिएगा। और एक छोटी
- 1:25:14सी रिक्वेस्ट और है। अगर इस वीडियो को
- 1:25:15यहां तक देख रहे हो तो लास्ट तक देखते
- 1:25:17रहना। मजा आएगा सीखने में और हमें सपोर्ट
- 1:25:20करना यार ताकि ऐसी वीडियोस और इसके जैसी
- 1:25:22और वीडियोस हम आप लोगों के लिए लेके आ पाए
- 1:25:24बहुत डिटेल्ड वीडियो क्योंकि हम चाहते हैं
- 1:25:26कि लोगों तक फ्री ऑफ कॉस्ट अच्छा खासा
- 1:25:27नॉलेज पहुंचा सकें। ठीक है? तो ओएसआई मॉडल
- 1:25:30पे बात करते हैं। ओएसआई यानी कि
- 1:25:33ओपन
- 1:25:34सिस्टम
- 1:25:36इंटर
- 1:25:38कनेक्शन मॉडल। ओएसआई ओपन सिस्टम
- 1:25:42इंटरकनेक्शन मॉडल इट इज बेसिकली अ
- 1:25:44कॉनसेप्चुअल फ्रेमवर्क। क्या मतलब होता है
- 1:25:47भैया इसका? कॉनसेप्चुअल फ्रेमवर्क का मतलब
- 1:25:49है कि ये बेसिकली एक एक स्टैंडर्ड बना हुआ
- 1:25:52है। स्टैंडर्ड क्या होता है भैया?
- 1:25:53स्टैंडर्ड मतलब किस तरीके से एक सिस्टम से
- 1:25:56दूसरे सिस्टम की तरफ डेटा पहुंचेगा। ये एक
- 1:25:58स्टैंडर्ड है कि मैंने अपने सिस्टम से एक
- 1:26:01मैसेज किया है। तो मेरे दोस्त के सिस्टम
- 1:26:03तक कैसे पहुंच रहा है। कंपनीज़ इस
- 1:26:05स्टैंडर्ड को फॉलो करके अपना नेटवर्क
- 1:26:07डेवलप करती हैं। दिस इज़ अ ओएसआई मॉडल। इट
- 1:26:09वास डेवलप्ड बाय
- 1:26:11आईएसओ आईएसओ ओएसआई मतलब उल्टा सीधा करके
- 1:26:15देख लो आईएसओ कंपनी ने इसको बनाया है जिस
- 1:26:181984 में कंपनी नहीं कहेंगे ऑर्गेनाइजेशन
- 1:26:20कहेंगे इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ
- 1:26:23स्टैंडर्डाइजेशन इन्होंने इसको बनाया 1984
- 1:26:25में और इसको बनाने के पीछे मेन रीज़न क्या
- 1:26:28था कंप्यूटरटर्स एक दूसरे के साथ
- 1:26:30कम्युनिकेट कर सके कनेक्ट कर सकें
- 1:26:32कंपैटिबिलिटी का कोई इशू ना हो
- 1:26:34कंपैटिबिलिटी का इशू क्या होता है भैया
- 1:26:36उसको थोड़ी देर में डिस्कस करते हैं बस एक
- 1:26:38चीज याद रखना इट इट इज अ
- 1:26:42स्टैंडर्ड इट इज अ
- 1:26:44स्टैंडर्ड नॉट अ प्रोटोकॉल प्रोटोकॉल तो
- 1:26:48इसके अंदर अपन लोग क्रिएट करते हैं। जैसे
- 1:26:49TCP आईपी ये सब प्रोटोकॉल्स हम लोग क्रिएट
- 1:26:53करते हैं। इट इज़ नॉट अ प्रोटोकॉल। इट इज़ अ
- 1:26:55स्टैंडर्ड। इट इज़ अ मॉडल। ये ये डिफाइन
- 1:26:57करता है कि डेटा किस तरीके से एक जगह से
- 1:26:59दूसरी जगह तक पहुंच रहा है और ढंग से
- 1:27:01पहुंच पा रहा है या नहीं पहुंच पा रहा। हर
- 1:27:03एक लेयर। इसमें टोटल होती हैं सेवन
- 1:27:05लेयर्स।
- 1:27:07सेवन लेयर्स यह डिफाइन करती हैं कि हमारा
- 1:27:10डाटा क्या सही तरीके से बिना किसी लॉस के
- 1:27:14सिक्योरिटी के साथ ढंग से आगे तक पहुंच पा
- 1:27:16रहा है या नहीं पहुंच पा रहा और हम इन
- 1:27:18सातों लेयर्स को डिटेल में डिस्कस करने
- 1:27:20वाले हैं तो परेशान मत होना। बस अभी के
- 1:27:22लिए इतना समझो। ओएसआई मॉडल यानी कि ओपन
- 1:27:24सिस्टम इंटरकनेक्शन मॉडल एक स्टैंडर्ड है।
- 1:27:28एक कह सकते हो कि एक कॉनंसेप्चुअल
- 1:27:30फ्रेमवर्क है जो कि ये डिफाइन करता है
- 1:27:31डेटा एक जगह से कैसी जगह तक दूसरी जगह तक
- 1:27:34कैसे जा रहा है। है ना? स्टैंडर्ड है। कोई
- 1:27:36प्रोटोकॉल नहीं है। ये याद रखना। अब इसका
- 1:27:39यूज़ केस क्या है? इसको बनाया क्यों गया?
- 1:27:41तो मैं यहां पर बताता हूं पहले बिफोर
- 1:27:45ओएसi बिफोर ओएसआई प्रॉब्लम्स क्या-क्या
- 1:27:48होती थी ना? पहली प्रॉब्लम तो ये होती थी
- 1:27:50कि भाई कोई कंपैटिबल नेटवर्क नहीं हुआ
- 1:27:52करता था। तो मान लेते हैं कि Microsoft ने
- 1:27:55अपना एक नेटवर्क बनाया। है ना? Apple ने
- 1:27:57अपना एक नेटवर्क
- 1:27:59बनाया। Apple ने अपना एक नेटवर्क बनाया।
- 1:28:02IBM ने अपना एक नेटवर्क बनाया। तो ये सबके
- 1:28:04अलग-अलग नेटवर्क थे और ये दूसरे के साथ
- 1:28:06इंटरकनेक्ट हो के ढंग से काम नहीं कर पाते
- 1:28:08थे। ये एक प्रॉब्लम हुआ करती थी।
- 1:28:10कंपैटिबिलिटी का इशू आता और अगर अभी तक
- 1:28:12ओएसआई नहीं आता तो प्रॉब्लम्स क्या-क्या
- 1:28:14होती? प्रॉब्लम ये होती है कि मान लेते
- 1:28:16हैं मैं Airtel की सिम यूज़ कर रहा हूं और
- 1:28:18मेरा दोस्त जो है वो Jio की सिम यूज़ कर
- 1:28:19रहा है। तो मैंने अपनी Airtel की सिम से
- 1:28:21उसको कुछ मैसेज किया। तो मेरे मेरी जो
- 1:28:24मेरा जो आप कह सकते हो इंटरनेट सर्विस
- 1:28:26प्रोवाइडर था मेरा जो आईएसपी था उसने अपना
- 1:28:28एक तरीके का नेटवर्क बनाया होगा और मेरा
- 1:28:31जो दूसरा दोस्त का जो नेटवर्क सर्विस
- 1:28:33प्रोवाइडर है उसने एक अपना तरीके से बनाया
- 1:28:35होगा नेटवर्क है ना तो दोनों में
- 1:28:37कंपैटिबिलिटी का इशू आता ये एक प्रॉब्लम
- 1:28:40होती और ये दोनों ढंग से कम्युनिकेट नहीं
- 1:28:42कर पाते ये इशू हो जाता बिफोर ओएसआई अब
- 1:28:44आफ्टर ओएसआई क्या हो गया इन्होंने
- 1:28:47एक कह सकते हैं अपन कि एक स्टैंडर्ड बना
- 1:28:50दिया जिसको अपन बोलते हैं यूनिवर्सल
- 1:28:53सल भाइयों प्लीज डोंट रिलाई ऑन माय नोट्स।
- 1:28:57मतलब मैं तो यहां पे ऐसे ही लिख रहा हूं
- 1:28:59ताकि आप लोगों को समझ आ जाए। इफ यू वांट
- 1:29:01तो आप अपने खुद से नोट्स बनाइए। वो ज्यादा
- 1:29:03बेटर रहेगा। ठीक है? यूनिवर्सल स्टैंडर्ड
- 1:29:06क्रिएट होता है यहां पे। और यूनिवर्सल
- 1:29:09स्टैंडर्ड से क्या फायदा हुआ भैया? अब
- 1:29:10डिफरेंट कंप्यूटरटर्स आपस में कनेक्ट कर
- 1:29:13सकते हैं। चाहे वो डिफरेंट ऑपरेटिंग
- 1:29:14सिस्टम यूज़ कर रहे हो यानी कि Window,
- 1:29:16Linux या Mac कुछ भी यूज़ कर रहे हो। वो
- 1:29:18आपस में ढंग से कम्युनिकेट कर सकते हैं
- 1:29:20इंटरनेट पे और डेटा ढंग से आगे तक पहुंच
- 1:29:23रहा है या नहीं पहुंच रहा उस चीज को भी
- 1:29:24मेक श्योर कर सकते हैं। तो दिस इज़ अबाउट
- 1:29:27ओएसआई मॉडल। ओएसआई मॉडल क्या डिफाइन करता
- 1:29:30है? ओएसआई मॉडल ये डिफाइन करता है कि अगर
- 1:29:32मैंने कोई डेटा एक जगह से दूसरी जगह तक
- 1:29:35पहुंचाया है तो क्या वो डेटा ढंग से पहुंच
- 1:29:37रहा है? एक स्टैंडर्ड बना हुआ है। एक
- 1:29:38फ्रेमवर्क बना हुआ है। एक तरीका बना हुआ
- 1:29:40है कि इस तरीके से डेटा आगे की तरफ जाता
- 1:29:43है। ठीक है जी? तो ये ओएसआई मॉडल के अपन
- 1:29:45ने कुछ फायदे समझ लिए। अब मैंने जैसा कि
- 1:29:47बताया ओएसआई मॉडल के अंदर सेवन लेयर्स
- 1:29:49होते हैं जिसका मैंने यहां पर आपको एक
- 1:29:51डिसेंट सा डायग्राम बनाया है। अब अगर आप
- 1:29:53ध्यान से समझेंगे तो यहां पर आपके सामने
- 1:29:54सेवन लेयर्स हैं। मैं एक-एक करके सबको
- 1:29:56डिटेल में समझाऊंगा। सो डोंट वरी अबाउट
- 1:29:58दैट। सबसे पहली लेयर एप्लीकेशन लेयर और
- 1:30:01अगर आप ध्यान से देखेंगे तो हमारे पास जो
- 1:30:04सात लेयर हैं मान लेते हैं देयर इज़ समवन
- 1:30:07नोन
- 1:30:08एज सेंडर एंड देयर इज़ समवन नोन
- 1:30:14एज रिसीवर। सेंडर से रिसीवर तक डेटा किस
- 1:30:19तरीके से ट्रांसफर होता है? सबसे पहले
- 1:30:21सेंडर इंटरेक्ट करता है एप्लीकेशन लेयर के
- 1:30:24साथ और एप्लीकेशन लेयर उसको आगे भेजती है
- 1:30:26प्रेजेंटेशन लेयर में। प्रेजेंटेशन लेयर
- 1:30:29से वो जाता है और मल्टीपल लेयर से होता
- 1:30:30हुआ लास्ट में फिजिकल लेयर और फिर जब
- 1:30:33हमारा रिसीवर होता है तो अब ध्यान से अगर
- 1:30:34आप देखेंगे ये डायग्राम को क्योंकि मैंने
- 1:30:37कुछ सोच समझ के डायग्राम यहां पे लगाया
- 1:30:39है। अगर आप ध्यान से देखेंगे तो जब मैं
- 1:30:41बात करता हूं सेंडर की तो जब सेंडर की बात
- 1:30:44करता हूं तो डेटा कुछ इस तरीके से टॉप टू
- 1:30:47बॉटम फ्लो होता
- 1:30:49है। दर पॉइंट अगर आप इसमें देख लेते हैं।
- 1:30:52जब आप इसको देखेंगे तो डेटा मेरा टॉप टू
- 1:30:54बॉटम फ्ले फ्लो होता है। यानी कि पहले
- 1:30:56एप्लीकेशन लेयर में आया। फिर प्रेजेंटेशन
- 1:30:58लेयर, फिर सेशन लेयर, फिर ट्रांसपोर्ट
- 1:31:00लेयर, नेटवर्क लेयर, डेटा लिंक लेयर,
- 1:31:01फिजिकल लेयर। समझ आया क्या हुआ? जब मैं
- 1:31:03बात करता हूं रिसीवर की, तो डेटा बॉटम टू
- 1:31:06टॉप है। मतलब फिजिकल लेयर से डेटा आया,
- 1:31:09नेट डेटा लिंक लेयर में, फिर नेटवर्क लेयर
- 1:31:11में, फिर ट्रांसपोर्ट लेयर में, फिर सेशन
- 1:31:13लेयर में, फिर एप्लीकेशन लेयर में, फिर
- 1:31:15मेरे यूजर के सिस्टम मतलब रिसीवर के
- 1:31:17सिस्टम लेयर में। तो अगर आप ध्यान से
- 1:31:19समझेंगे व्हेन वी टॉक अबाउट सेंडर व्हेन
- 1:31:22वी टॉक अबाउट
- 1:31:24सेंडर तो सेंडर इस लेयर के मॉडल को
- 1:31:31टॉप टू बॉटम फॉलो करता
- 1:31:35है और रिसीवर हमारे इन लेयर्स को बॉटम टू
- 1:31:42टॉप फॉलो करता है। ठीक है जी? तो ये आपको
- 1:31:45समझना है। अब मैं इनको सब कुछ को डिटेल
- 1:31:47में बताऊंगा। डोंट वरी अबाउट दैट। हर एक
- 1:31:49लेयर को मैं अच्छे से समझाऊंगा। हर एक
- 1:31:50लेयर में क्या-क्या वनरेबिलिटीज हो सकती
- 1:31:53हैं जिससे अटैक्स होते हैं। जैसे आपने
- 1:31:54सुना होगा ना डॉस अटैक डॉस अटैक, डिनायल
- 1:31:57ऑफ सर्विस अटैक, डीडॉस अटैक क्या होता है?
- 1:31:59एप्लीकेशन लेयर पे लगता है वो। इन सबके
- 1:32:01बारे में अपन अच्छे से समझेंगे। है ना?
- 1:32:03उसके बाद प्रेजेंटेशन लेयर का क्या काम
- 1:32:04है? बाकी हर लेयर का अपन एक-एक करके डिटेल
- 1:32:07में समझने वाले हैं। डोंट वरी अबाउट दैट।
- 1:32:08बस इतना समझ लो कि सेंडर की जब हम बात
- 1:32:11करते हैं तो सेंडर में जैसे हमारा जो
- 1:32:13एप्लीकेशन है मान लेते हैं कि मैंने अपने
- 1:32:16दोस्त को एक मेल लिखा मान लेते हैं है ना
- 1:32:18तो जब मैंने उसको मेल लिखा तो मेरा जो
- 1:32:20ब्राउज़र है व्हिच इज कनेक्टेड टू
- 1:32:22एप्लीकेशन लेयर ब्राउज़र इज़ नॉट एप्लीकेशन
- 1:32:24लेयर ब्राउज़र इज़ कनेक्टेड टू एप्लीकेशन
- 1:32:26लेयर और एप्लीकेशन लेयर से फिर
- 1:32:28प्रेजेंटेशन फिर सेशन फिर ट्रांसपोर्ट फिर
- 1:32:31नेटवर्क फिर डेटा लिंक और फिर फिजिकल
- 1:32:33फिजिकल का मतलब है ये मेरा डेटा जो है वो
- 1:32:36अवेलेबल हो गया मतलब अब पहुंचने के लिए
- 1:32:38तैयार तैयार हो गया। जब मैं बात करूंगा
- 1:32:40रिसीवर की। किसकी बात करूंगा भाइयों?
- 1:32:43जल्दी बताओ जल्दी। किसकी बात करूंगा? मैं
- 1:32:45रिसीवर की बात करूंगा। तो जब हम रिसीवर की
- 1:32:48बात करेंगे तो जो हमारा डेटा है वो फिजिकल
- 1:32:51से होता हुआ डेटा लिंक, फिर नेटवर्क, फिर
- 1:32:53ट्रांसपोर्ट, फिर एप्लीकेशन, फिर
- 1:32:55प्रेजेंटेशन और फिर एप्लीकेशन। यानी कि
- 1:32:57इसके एप्लीकेशन लेयर तक पहुंचेगा। मतलब
- 1:33:00पहले टॉप टू बॉटम, फिर बॉटम टू टॉप। समझ
- 1:33:02आया क्या हुआ? अब इसको अपन प्रैक्टिकल
- 1:33:04एग्जांपल के साथ समझते हैं थोड़ा सा अच्छे
- 1:33:06से कि प्रैक्टिकल भी नहीं। पहले तो मैं
- 1:33:08चाहता हूं एक-एक लेयर को अच्छे से समझा
- 1:33:09दूं एक-एक करके। एप्लीकेशन, प्रेजेंटेशन,
- 1:33:11सेशन, ट्रांसपोर्ट, नेटवर्क, डेटा लिंक और
- 1:33:13लास्ट में फिजिकल। हर एक लेयर को अच्छे से
- 1:33:15समझा देता हूं। हर एक लेयर का रोल समझा
- 1:33:16देता हूं आपको। उसके बाद अपन अच्छे से
- 1:33:18एग्जांपल के थ्रू भी समझ लेंगे। ठीक है?
- 1:33:19चलें आगे। चलो लेट्स गो समझते हैं। मुझे
- 1:33:22यहां पे पेजेस वगैरह क्रिएट करने हैं। तो
- 1:33:23मैं जल्दी से इसको साफ करके आता हूं। रुको
- 1:33:251 मिनट। तो अब एक-एक करके हर लेयर का रोल
- 1:33:27और हर लेयर कीेंस समझते हैं। सबसे पहले
- 1:33:30आती है एप्लीकेशन लेयर। तो भैया आपने
- 1:33:32उल्टी गिनती क्यों लिखी है? क्योंकि इसी
- 1:33:33तरीके से उनको नाम दिया गया है। फिजिकल
- 1:33:35लेयर इज़ नंबर वन। एप्लीकेशन इज़ लेयर इज़
- 1:33:38नंबर सेवन। लेकिन यूजर सबसे पहले मान लेते
- 1:33:40हैं कि मैं इंटरनेट पे गया और मैंने टाइप
- 1:33:42करा
- 1:33:43www.ube.com तो जब मैं youtube.com टाइप
- 1:33:46करता हूं तो सबसे पहले जिस लेयर से मेरा
- 1:33:48इंटरेक्शन होगा वो कहलाएगी एप्लीकेशन
- 1:33:50लेयर। क्योंकि यूजर सबसे ज्यादा इसके ही
- 1:33:52करीब है। तो सबसे पहले मैं चाहता हूं इसी
- 1:33:54को समझे। तो एप्लीकेशन लेयर क्या होता है?
- 1:33:56बेसिकली एप्लीकेशन लेयर आपके कह सकते हो
- 1:33:59एप्लीकेशन से एप्लीकेशन से मान लेते हैं
- 1:34:03दिस इज़ माय एप्लीकेशन। इससे कनेक्ट करने
- 1:34:06का काम कौन करेगी? एप्लीकेशन लेयर। दिस इज
- 1:34:09नॉट अ एप्लीकेशन। मतलब अगर आप सोच रहे हैं
- 1:34:11कि मेरा जो सॉफ्टवेयर है वही मेरा
- 1:34:14एप्लीकेशन लेयर है। वही मेरा इट इज़ इक्वल
- 1:34:17टू एप्लीकेशन लेयर तो दिस इज़ नॉट। दिस इज़
- 1:34:20नॉट। योर सॉफ्टवेयर इज़ नॉट अ एप्लीकेशन
- 1:34:22लेयर। एप्लीकेशन लेयर क्या होती है?
- 1:34:24एप्लीकेशन लेयर एक लेयर है जो कि आपके
- 1:34:27एप्लीकेशन मतलब जो भी आप सॉफ्टवेयर यूज कर
- 1:34:29रहे हैं आप मान लेते हैं किसी को ईमेल
- 1:34:30भेजना चाहते हैं या फिर अपन मान लेते हैं
- 1:34:32कि आप किसी वेबसाइट को एक्सेस करना चाहते
- 1:34:34हैं तो या फिर Google ड्राइव पे जाके कोई
- 1:34:36फाइल कोई डाउनलोड करना चाहते हैं तो वहां
- 1:34:37पर जो लेयर इंटैक्ट करेगी वो कहलाएगी
- 1:34:40एप्लीकेशन लेयर यानी कि यूजर के साथ जो भी
- 1:34:43हमारा यूजर है उसके साथ सबसे पहले
- 1:34:45इंटरेक्ट करता है वो करता है एप्लीकेशन
- 1:34:48लेयर तो इसके अंदर जो प्रोटोकॉल्स यूज़
- 1:34:50होते हैं वो होते हैं http प्रोटोकॉल एस
- 1:34:53एस एमटीपी प्रोटोकॉल ये ईमेल्स के लिए यूज़
- 1:34:56होता है। फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल ये
- 1:34:59हमारी फाइल्स वगैरह को एक्सेस करने को
- 1:35:02अपलोड करने को डिलीट करने को और डाउनलोड
- 1:35:04करने को इन सबके लिए काम आता है। तो हमारे
- 1:35:06जो एप्लीकेशन लेयर है उसके अंदर एचटीटीपी,
- 1:35:09एसएमटीपी, एफटीपी ये सब प्रोटोकॉल्स यूज़
- 1:35:11होते हैं। तो होता क्या है ना मैं आपको
- 1:35:13अगर सिंपली समझाऊं तो एप्लीकेशन लेयर इज़
- 1:35:16यूज़्ड आसान भाषा में समझते हैं। बिल्कुल
- 1:35:18कंफ्यूज मत होना। एप्लीकेशन लेयर इज यूज्ड
- 1:35:21टू कनेक्ट दी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर टू दी
- 1:35:25नेटवर्क। यहां पर जैसे मान लेते हैं मैं
- 1:35:27किसी वेबसाइट पे गया youtube.com तो वहां
- 1:35:29पर http रिक्वेस्ट चलेगी। http रिक्वेस्ट
- 1:35:32चलेगी। तो इसका काम है इस http रिक्वेस्ट
- 1:35:34को रिसीव करना। ये जो http रिक्वेस्ट है
- 1:35:37इसे रिसीव करना। मुझे लगता है ज्यादातर
- 1:35:40लोगों को समझ नहीं आया। तो चलो एक
- 1:35:41एग्जांपल से समझते हैं। मान लेते हैं कि
- 1:35:43मैं किसी रेस्टोर में जाता हूं। अब वह जो
- 1:35:45रेस्टोरेंट में मैं जाके बैठा हूं और
- 1:35:46मैंने बुलाया वेटर को कि वेटर भैया इधर आओ
- 1:35:49और मेरे लिए एक मसाला डोसा लेके आओ। तो अब
- 1:35:51जब मैं वेटर के साथ इंटरेक्ट कर रहा हूं
- 1:35:53दिस पर्टिकुलर थिंग इज नोन एस एप्लीकेशन
- 1:35:55लेयर। क्योंकि जो मेरा वेटर है वो
- 1:35:57एप्लीकेशन लेयर के साथ काम करेगा। वो
- 1:35:59मुझसे यानी कि सॉफ्टवेयर से डायरेक्टली
- 1:36:01कनेक्ट कर रहा है और मुझे और पूरे नेटवर्क
- 1:36:05को जोड़ने का काम कर रहा है। क्या आप मेरी
- 1:36:07बात समझ पा रहे हैं? अभी मैं सब कुछ
- 1:36:09सेंडर्स के पर्सेक्टिव से समझाऊंगा। फिर
- 1:36:10उसके बाद मैं रिसीवर के पर्सपेक्टिव से भी
- 1:36:12समझाऊंगा सारी चीजें। ठीक है? मतलब अभी
- 1:36:14पहले अपन टॉप टू बॉटम जा रहे हैं। 7 6 5 4
- 1:36:183 2 1 फिर वापस से ऊपर चलेंगे 1 2 3 4 5 6
- 1:36:217 तक। ठीक है जी? मजा आएगा उसमें भी। तो
- 1:36:23यहां पर एप्लीकेशन लेयर का क्या रोल था?
- 1:36:25एप्लीकेशन लेयर का रोल था कि आपके
- 1:36:27एप्लीकेशन को आपके सॉफ्टवेयर को एप्लीकेशन
- 1:36:31मतलब नेटवर्क के साथ अटैच करना। उसके साथ
- 1:36:33जोड़ना। यहां से हमारे नेटवर्क की शुरुआत
- 1:36:35होती है। इसको ऐसा समझ लो कि हमने जैसे
- 1:36:37वेटर के साथ इंटरेक्ट करा था। वैसे ही सेम
- 1:36:39यहां पर इसका रोल है। यह हमें नेटवर्क के
- 1:36:41साथ जोड़ने का काम करती है। दिस इज़
- 1:36:43एप्लीकेशन लेयर। ठीक है? कौन-कौन से
- 1:36:45प्रोटोकॉल्स यूज़ होते हैं? एचटीटीपी
- 1:36:47प्रोटोकॉल, एसएमटीपी प्रोटोकॉल और
- 1:36:49क्या-क्या यूज़ होते हैं भैया? यहां पर यूज़
- 1:36:51होते हैं हमारे एफटीपी प्रोटोकॉल। और यहां
- 1:36:53पर ना वो जो आपने सुना होगा ना डीडॉस अटैक
- 1:36:56डीडॉस अटैक होता है या फिर एचटीटीपी फ्लड
- 1:36:58करके कुछ होता है या फिर हमारा यूआरएल
- 1:37:01स्प्ड करके समथिंग कुछ होता है। इन सबको
- 1:37:03थोड़ा सा एक्सप्लोर करना। इफ यू वांट तो
- 1:37:05हम थोड़ा सा आगे जाके इस पे भी एक्सप्लोर
- 1:37:07करेंगे। आगे वाली आने वाली वीडियोस पे।
- 1:37:09ठीक है जी। तो अभी के लिए मैं एप्लीकेशन
- 1:37:11लेयर को यहीं तक बता रहा हूं। अभी वापस
- 1:37:12आएंगे इस पे। जब वापस ऊपर चढ़ेंगे।
- 1:37:14एप्लीकेशन लेयर हमारे सॉफ्टवेयर को
- 1:37:16एप्लीकेशन लेयर से हमारे इंटरनेट से
- 1:37:17कनेक्ट करने का काम कर रही है। ठीक है जी?
- 1:37:19मतलब हमसे मुझसे सबसे इंटरेक्टली सबसे पास
- 1:37:23में कौन सी लेयर है? एप्लीकेशन। चलो फिर
- 1:37:26उसके बाद आते हैं हम प्रेजेंटेशन लेयर पे।
- 1:37:28अब प्रेजेंटेशन लेयर का क्या काम है? अगर
- 1:37:30आपने नोटिस किया होगा तो मैं
- 1:37:34रेस्टोर में गया। मैंने वेटर से बोला कि
- 1:37:37भाई मेरे लिए एक मसाला डोसा ले आओ। अब जो
- 1:37:39हमारे वेटर भैया हैं उन्होंने मेरा आर्डर
- 1:37:41लिख लिया। अब जब वो अंदर जाएंगे और जो शेफ
- 1:37:45है शेफ मान लेते हैं साउथ इंडियन है। तो
- 1:37:47मैंने बोला कि मेरे लिए एक मसाला डोसा
- 1:37:50लेके आना। ऐसे कड़क आवाज में तो शेफ साउथ
- 1:37:53इंडियन है तो वो उसको उनकी भाषा में थोड़ा
- 1:37:55सा कन्वर्ट आई एक मसाला डोसा देना। जी इस
- 1:37:58तरीके से वो कन्वर्ट करके बोल देगा। ठीक
- 1:38:00है जी। तो एप्लीकेशन लेयर में मैंने वेटर
- 1:38:02से बोला था। प्रेजेंटेशन लेयर क्या करेगी?
- 1:38:04उस डेटा को जो भी मेरा डाटा है जो भी मेरी
- 1:38:07रिक्वेस्ट है उसको प्रेजेंट करेगी। जो भी
- 1:38:09मैं भेजना चाहता हूं उसको इस तरीके से
- 1:38:11प्रेजेंट करेगी कि आने वाली आगे वाली
- 1:38:14लेयर्स उसको ठीक तरीके से समझ पाए। अब
- 1:38:15इसके क्या-क्या रोल्स होते हैं भैया? इसका
- 1:38:18पहला रोल तो होता है
- 1:38:20ट्रांसलेशन। तो जिस फॉर्मेट में मैंने
- 1:38:23डेटा भेजा है उसको ट्रांसलेट करना जिसमें
- 1:38:25नेटवर्क उसको ढंग से ढंग से अच्छे तरीके
- 1:38:28से समझ पाए। थोड़ा ना पता है अगर तुम
- 1:38:30पढ़ाईवढ़ाई कर रहे हो तो साथ में हमेशा ना
- 1:38:33एक बोतल ले बैठा करो। मैं तो इतनी बड़ी ले
- 1:38:35बैठता हूं। ठीक है? तो जब भी थोड़ा सा अगर
- 1:38:37तुम्हें ऐसा लगे तो मुझे तो कई बार मतलब
- 1:38:39प्यास लगती है। लेकिन अगर तुम्हें ऐसा लगा
- 1:38:41करे कि यार भैया थक गए यार या फिर मतलब
- 1:38:44नींद आ रही है, बोर हो रहा है। एक घूंट
- 1:38:46पानी पी लो। दिमाग फ्रेश हो जाएगा। ट्राई
- 1:38:48करके देखना इसको। है
- 1:38:49ना? तो प्रेजेंटेशन लेयर का पहला रोल तो
- 1:38:52हमें समझ आ गया। ट्रांसलेशन डाटा जो हमने
- 1:38:54भेजा, हमने जिस तरीके से उसको भेजा, हमारी
- 1:38:56जो रिक्वेस्ट थी उसको ट्रांसलेट करना।
- 1:38:58इसका दूसरा काम ये होता है जो ट्रांसलेशन
- 1:39:00वगैरह तो हो गया यहां पर करना
- 1:39:03कंप्रेशन मतलब डेटा जो मेरा इकट्ठा बहुत
- 1:39:06सारा उसको कंप्रेस अगर कर सकते हैं तो
- 1:39:08कंप्रेस करना और साथ में होता है
- 1:39:13इंक्रिप्शन इंक्रिप्शन मतलब क्या होता है
- 1:39:15भैया इंक्रिप्शन मतलब जो भी मेरा डेटा है
- 1:39:17उसको इंक्रिप्ट करना जैसे WhatsApp में जो
- 1:39:19एंड टू एंड इंक्रिप्शन होता है वो कौन
- 1:39:21करता है वो प्रेजेंटेशन लेयर करती है आपको
- 1:39:23ये समझ आ रहा है ना मैं क्या कहना चाह रहा
- 1:39:25हूं तो प्रेजेंटेशन लेयर का काम क्या है
- 1:39:26ट्रांसलेशन करना कंप्रेशन करना इंक्रिप्शन
- 1:39:29करना जो भी हमारा डेटा है उसको कुछ इस
- 1:39:32तरीके से प्रेजेंट करना उसको इस तरीके से
- 1:39:34इंक्रिप्ट करके तैयार करना कि आगे वाली
- 1:39:37आने वाली जो मेरी लेयर्स हैं उनको इजीली
- 1:39:39समझ में आ सके कि मैंने यहां से क्या भेजा
- 1:39:41है। अब एक और इंपॉर्टेंट चीज फॉर एग्जांपल
- 1:39:43मैं टाइप करता हूं
- 1:39:45www.ube.com अब youtube.com जो है
- 1:39:48youtube.com जो मैंने वहां पे टाइप किया
- 1:39:50वो उसका डोमेन नेम है। अब आपको करना क्या
- 1:39:52है? डोमेन नेम को IP में कन्वर्ट करना है।
- 1:39:54तो अगर आप यह सोच रहे हैं कि यह काम
- 1:39:55प्रेजेंटेशन लेयर करेगा तो ऐसा नहीं है।
- 1:39:57ये काम ऑलरेडी एप्लीकेशन लेयर कर चुका है।
- 1:39:59तो जो डीए एएस से IP में कन्वर्ट करने का
- 1:40:03काम है ये कौन करता है? ये करता है हमारा
- 1:40:05एप्लीकेशन लेयर। तो इसमें कंफ्यूज मत
- 1:40:07होना। इसका काम क्या है? डेटा को
- 1:40:09ट्रांसलेशन करना, डेटा को कंप्रेस करना,
- 1:40:11इंक्रिप्शन करना। ट्रांसलेशन मतलब जो भी
- 1:40:13कोड आया है, उसको आस्क टू यूनिकोड वगैरह
- 1:40:15में कन्वर्ट करना या फिर कंप्रेशन करना।
- 1:40:17जैसे कि जो काफी फैला हुआ डेटा उसको ज़िप
- 1:40:20फाइल में कन्वर्ट करना या जेपीईजी में MB3
- 1:40:22इन सब में कन्वर्ट करना इंक्रिप्शन करना
- 1:40:24डेटा का जैसे एंड टू एंड इंक्रिप्शन होता
- 1:40:26है ना वो सब करना जैसे आपने कभी सुना होगा
- 1:40:29एचटीटीपीएस एचटीटीपीs तो एचटीटीपीएस में
- 1:40:32ये जो एस है ना लास्ट वाला ये जो एस है
- 1:40:34हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल के
- 1:40:36लास्ट में सिक्योर है जो तो वो जो एस है
- 1:40:38वो कौन करता है वो प्रेजेंटेशन लेयर करती
- 1:40:40है मतलब उसको सिक्योर बनाती है सिक्योरिटी
- 1:40:42उसको प्रोवाइड करती है बाय यूजिंग एसएसएल
- 1:40:45एंड टीएसएल एल आई गेस टी टीएलएस या टीएसएल
- 1:40:49टीएलएस है आई गेस है ना सिक्योर सॉकेट
- 1:40:53ट्रांसलेशन ऐसा करके कुछ होता है हम इसको
- 1:40:55भी समझेंगे आगे जाके डिटेल में है ना मुझे
- 1:40:57फुल फॉर्म ज्यादा अच्छे से याद नहीं होते
- 1:40:59भाई मैं एक्सप्लेन कर दूंगा तुम्हें अच्छे
- 1:41:00से लेकिन ठीक है सुनो तो यहां जाके हमने
- 1:41:03समझा प्रेजेंटेशन लेयर का क्या काम है
- 1:41:05डेटा को प्रेजेंट करना अब आते हैं अगली
- 1:41:07चीज पे जो कि और ज्यादा इंपॉर्टेंट भाई
- 1:41:08लिखते रहना ये सब चीजें है ना भूलना नहीं
- 1:41:10है भूलना नहीं है बिल्कुल नहीं भूलना है
- 1:41:12ठीक है अब हम आते हैं अगली इंपॉर्टेंट चीज
- 1:41:14पे मुझे लगता है कि प्रेजेंटेशन लेयर समझ
- 1:41:16आ गया आपको एप्लीकेशन लेयर में क्या हुआ?
- 1:41:18यूजर इंटैक्ट करा। यूजर ने रिक्वेस्ट करा
- 1:41:20कि मुझे फला जगह जाना है या फिर ईमेल भेजा
- 1:41:22क्योंकि मुझे इस जगह ने को ईमेल भेजना है।
- 1:41:24प्रेजेंटेशन लेयर ने क्या करा? उस ईमेल को
- 1:41:27थोड़ा सा प्रेजेंट इस तरीके से किया कि
- 1:41:29आने वाली लेयर्स उसको ढंग से समझ पाएं। अब
- 1:41:31अगली इंपॉर्टेंट लेयर है उसका नाम है सेशन
- 1:41:33लेयर। क्या नाम है भाइयों? सेशन लेयर।
- 1:41:35सेशन लेयर का क्या काम होता है? सेशन लेयर
- 1:41:37का काम होता है सेशन क्रिएट करना। क्या
- 1:41:39क्रिएट करना? सेशन। फॉर एग्जांपल मैंने
- 1:41:42कॉल करा अ डोमिनोज पे और डोमिनोज पे मैंने
- 1:41:47डोमिनोज मेरे को पता नहीं ज्यादा अच्छा
- 1:41:49लगता नहीं है। लापिनोस का खा के देखना
- 1:41:50थोड़ा सा बढ़िया लगता है। मतलब एज़ कंपेयर
- 1:41:52टू डोमिनोज लापिनोस मुझे थोड़ा सा पसंद
- 1:41:54है। तो मान लेते हैं अपन ने लापिनोस पे
- 1:41:56कॉल किया और लापिनोस को कॉल करने के बाद
- 1:41:59मैंने बोला कि भाई मुझे एक स्वीट कॉर्न
- 1:42:01पिज़्ज़ा खाना है। बस स्वीट कॉर्न पिज़्ज़ा।
- 1:42:04अब जब मैंने उसको स्वीट स्वीट कॉर्न
- 1:42:05पिज़्ज़ा कहा तो उन्होंने बोला ठीक है सर 30
- 1:42:07मिनट में डिलीवर हो जाएगा। अब बढ़िया बहुत
- 1:42:10शानदार 30 मिनट में डिलीवर हो रहा है। तो
- 1:42:11अब यहां से क्या हुआ? यहां से एक सेशन
- 1:42:13क्रिएट हुआ। क्या क्रिएट हुआ? सेशन। सेशन
- 1:42:16क्रिएट होने का मतलब क्या है भैया? सेशन
- 1:42:18क्रिएट होने का मतलब है कि भाई कब डेटा
- 1:42:21यहां से ट्रांसफर हो रहा है और कब डेटा
- 1:42:23यहां तक पहुंच रहा है। एक टाइम कह सकते हो
- 1:42:26डिसाइड हो गया कि भाई एक सेशन क्रिएट हो
- 1:42:28गया कि हां भाई ठीक है डेटा यहां से
- 1:42:30पहुंचना शुरू हो चुका है। जब पहुंच जाएगा
- 1:42:32तो हम ये मान लेंगे कि सेशन खत्म हो गया
- 1:42:34है। जैसे मैंने किसी को कॉल किया और जैसे
- 1:42:36ही कॉल कनेक्ट हुआ और मैंने बोला हेलो तो
- 1:42:39जब मैंने हेलो बोला वहां से मेरा सेशन
- 1:42:41स्टार्ट हुआ और मैंने बातचीत करी वो
- 1:42:43बातचीत सेशन के अंदर चली जा रही है और जब
- 1:42:44मैंने कॉल काटा और मैंने बोला बाय तो यहां
- 1:42:47पे सेशन एंड हो गया। तो सेशन लेयर का क्या
- 1:42:49काम होता है? सेशन लेयर का काम होता है कि
- 1:42:52मान लेते हैं कि मैंने किसी को कॉल किया
- 1:42:54है या फिर जब भी मैं डाटा पास कर रहा हूं
- 1:42:56कहीं से तो वहां पर क्रिएट होता है एक
- 1:42:58सेशन कि भाई साहब ये जो डेटा यहां से भेजा
- 1:43:01है ये यहां से आगे बढ़ना चालू हो रहा है।
- 1:43:03अब आप इसको संभालते रहना और सेशन लेयर का
- 1:43:04एक और काम है कि डेटा सही जगह से मतलब मान
- 1:43:08लेते हैं कि सेंडर
- 1:43:10से रिसीवर तक
- 1:43:15डाटा ढंग से पहुंच रहा है कि नहीं पहुंच
- 1:43:17रहा है यह चेक करना। यह ढंग से पहुंच रहा
- 1:43:19है नहीं पहुंच रहा। अब क्या होता है ना कई
- 1:43:21बार जैसे बहुत बड़ा डाटा है जो एक जगह से
- 1:43:23दूसरी जगह तक पहुंचने में थोड़ा सा टाइम
- 1:43:25लग सकता है। तो इसका एक काम और होता है।
- 1:43:27ये चेक पॉइंट्स बना देता
- 1:43:30है। भैया चेक पॉइंट्स क्या होते हैं? चेक
- 1:43:32पॉइंट्स मतलब जैसे बीच-बीच में कुछ ऐसे
- 1:43:35पॉइंट्स बना लिए जैसे कि मान लेते हैं एक
- 1:43:37जगह से दूसरी जगह डेटा ट्रांसफर हुआ। अब
- 1:43:40मान लेते हैं कि डेटा ट्रांसफर होते बीच
- 1:43:41में फेल हो गया। तो ये कहां फेल हुआ? इसने
- 1:43:44क्या करा? बीच में चेक पॉइंट बना लिया कि
- 1:43:45भाई डेटा यार 40% पे तक पहुंच गया था। 40%
- 1:43:48तक पहुंचने के बाद ना 40% पे रुक गया और
- 1:43:51उसके आगे नहीं पहुंच पाया। तो इसका क्या
- 1:43:52काम था? इसका काम था चेक पॉइंट्स बनाने
- 1:43:54का। तो इसने बना लिए थे चेक पॉइंट्स कि
- 1:43:56भाई डेटा ठीक तरीके से पहुंच रहा है या
- 1:43:57नहीं पहुंच रहा है इसको चेक करते रहना और
- 1:43:59कहां पहुंचा? बीच-बीच में चेक पॉइंट्स बना
- 1:44:01के ये इसका छोटा सा काम होता है। तो सेशन
- 1:44:03लेयर का हम लोग रोल समझ चुके हैं। ये
- 1:44:04बेसिकली सेशन क्रिएट करता है सेंडर और
- 1:44:07रिसीवर के बीच में और बीच में बनाता है
- 1:44:09चेक पॉइंट्स। भैया चेक पॉइंट्स क्या होते
- 1:44:11हैं? एक बार मैंने बता दिया था। एक बार और
- 1:44:12बता देता हूं अच्छे से। चेक पॉइंट्स
- 1:44:14बेसिकली क्या होते हैं ना? जैसे मान लेते
- 1:44:15हैं मैंने Flipkart से कोई ऑर्डर किया। अब
- 1:44:17Flipkart से जब मेरा ऑर्डर आ रहा है तो कई
- 1:44:20बार ऐसा होता है ना जैसे Flipkart मान
- 1:44:22लेते हैं मैं भोपाल में बैठा हूं। मैंने
- 1:44:24मुंबई से कुछ ऑर्डर किया है। तो मुंबई से
- 1:44:26वो जो आर्डर है वो पहले तो उनके सर्वर पर
- 1:44:29जाएगा। सर्वर से फिर उनके डेटाबेस पे
- 1:44:30जाएगा। चेंज होगा। फिर वहां पर जाके जो
- 1:44:32वेयर हाउस है वहां पर डाटा जाएगा। वहां पर
- 1:44:35वेयर हाउस से मान लेते हैं कि भोपाल में
- 1:44:38जो Flipkart का सेंटर है वहां पर डाटा
- 1:44:40आया। फिर वहां से सेंटर से फिर मेरे घर तक
- 1:44:42आया। तो कुछ इस तरीके से सेशंस क्रिएट हो
- 1:44:44के काम होता है। तो ऐसा मान लेते हैं कि
- 1:44:46मान लेते हैं मैंने 2 GB की फाइल डाउनलोड
- 1:44:48करी है। एक और दूसरा एग्जांपल है। तो होता
- 1:44:50क्या है ना जीरो से लेके तो 100% तक यहां
- 1:44:53पे चलता है। और अगर मान लेते हैं बीच में
- 1:44:55यहां पे कनेक्शन टूट गया। इंटरनेट चला
- 1:44:57गया। तो वापस फिर ज़ीरो से होता है। लेकिन
- 1:44:59अगर यहां पे सेशन लेयर होती तो हम क्या
- 1:45:01करते? हम यहां पे बना लेते चेक पॉइंट्स।
- 1:45:02जैसे कि ज़ीरो से लेके तो 100 के बीच में
- 1:45:06मैंने क्या करा? एक बीच में मार्कर लगा
- 1:45:08दिया यहां पे 50% पे। तो होगा क्या? पहले
- 1:45:121GB तक डाउनलोड होगा। फिर उसके बाद वापस 1
- 1:45:14GB तक डाउनलोड होगा। और अगर बीच में यहां
- 1:45:16पर कनेक्शन टूट गया तो यहां पर यह बचे हुए
- 1:45:191GB को डाउनलोड कुछ इस तरीके से कर लेगा।
- 1:45:22तो सेशन लेयर का बेसिकली काम होता है
- 1:45:24सेंडर और रिसीवर के बीच में एक सेशन
- 1:45:27क्रिएट करना। डेटा ढंग से पहुंच रहा है या
- 1:45:29नहीं पहुंच रहा। ये मेक श्योर करना कि
- 1:45:31डेटा ढंग से पहुंच रहा है कि नहीं पहुंच
- 1:45:33रहा है। दैट्स इट। अब यहां पे क्या यूज़
- 1:45:34होते हैं भैया? यहां पे प्रोटोकॉल्स जो
- 1:45:36यूज़ होते हैं लेट मी रिमूव इट ऑल। सेशन ले
- 1:45:39यार मतलब समझ रहे हो ना तुम लोग कि भाई
- 1:45:42देखो मैंने लापिनोस से जो पिज़्ज़ा ऑर्डर
- 1:45:44किया था ना अब वो पिज़्ज़ा भाई किस तरीके से
- 1:45:46पहले तो भाई वहां पर बना फिर जो मेरा
- 1:45:50डिलीवरी बॉय है जो भी मेरा मतलब डिलीवरी
- 1:45:52पार्टनर है उन्होंने क्या किया उन्होंने
- 1:45:54उस ऑर्डर को पहले तो मेरे घर के मान लेते
- 1:45:59हैं कि मेरे मोहल्ले में आए मोहल्ले भी
- 1:46:00नहीं मान लेते हैं कि यहां से 5 किमी दूर
- 1:46:03है तो उन्होंने हर एक किलोमीटर पे सेशन
- 1:46:04बना दिया अब मैं कॉल करके उनसे पूछ सकता
- 1:46:06हूं कि भाई कहां तक पहुंचे तो वो वो
- 1:46:08कहेंगे भैया 1 कि.मी. बचा भैया 2 कि.मी.
- 1:46:09बचा। तो इस तरीके से सेशंस होते हैं। वो
- 1:46:11मेक श्योर कर रहे हैं कि ढंग से डेटा
- 1:46:12पहुंच रहा है नहीं पहुंच रहा। अब यहां पे
- 1:46:14जो प्रोटोकॉल्स होते हैं उनमें से एक होता
- 1:46:16है नेट
- 1:46:17बायoस नेटवर्क बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम
- 1:46:22अ रिमोट प्रोसीजर कॉल पी पी टीपी पॉइंट टू
- 1:46:30पॉइंट टर्नलिंग प्रोटोकॉल ये सब कुछ इसके
- 1:46:33होते हैं। इनको एक्सप्लोर करके देखना पढ़
- 1:46:35के देखना कि क्या-क्या प्रोटोकॉल्स काम
- 1:46:37करते हैं सेशन लेयर में। रोल समझ आ गया
- 1:46:39इसका। रोल यही है कि यहां पर यह सेशन को
- 1:46:41क्रिएट करता है और
- 1:46:43मेक श्योर करता है डेट ढंग से पहुंच जाए।
- 1:46:45जैसे कि ज़ूम मीटिंग शुरू हुई तो भाई
- 1:46:47शुरुआत से लेके लास्ट तक का आपका जो सेशन
- 1:46:49बना था वो सेशन लेयर के थ्रू मैनेज हो रहा
- 1:46:51है। तो हमने तीन लेयर समझी अब डिटेल में।
- 1:46:53एक बार क्विकली रिवाइज करवा रहा हूं मैं।
- 1:46:54एप्लीकेशन लेयर का रूल था। एप्लीकेशन पहले
- 1:46:58तो मैं इसको हटा देता हूं। भाइयों मैं
- 1:47:00नोट्स नहीं बनवा रहा हूं। लेकिन आप लोग
- 1:47:01बना लेना है ना प्लीज। मैं ऐसे नहीं बोलता
- 1:47:04हूं। माय नोट्स। इस तरीके से मैं वीडियोस
- 1:47:06अपलोड नहीं करता हूं क्योंकि मुझे पता है
- 1:47:08तुम होशियार हो। मेरी ऑडियंस होशियार है
- 1:47:09और होशियार लोगों को ही हमें पढ़ाने में
- 1:47:11अब मजा आ रहा है भाइयों कि वो लोग अपने
- 1:47:13हिसाब से बना सकते हैं नोट्स है ना तो
- 1:47:14सबसे पहले एप्लीकेशन लेयर जिसका काम क्या
- 1:47:17था मेरी जो वेबसाइट है
- 1:47:21उसको उससे कनेक्ट करने का ठीक है ये किसका
- 1:47:25काम था एप्लीकेशन लेयर का काम था
- 1:47:27एप्लीकेशन लेयर के बारे में हमने समझा था
- 1:47:28हमसे डायरेक्टली इंटक्ट कर रहा है वो वेटर
- 1:47:30वाली एनालॉजी वीडियो में पीछे आना और
- 1:47:32अच्छे से समझ लेना प्रेजेंटेशन लेयर का
- 1:47:34क्या काम था प्रेजेंटेशन लेयर का काम था
- 1:47:35जो मेरे पास डेटा आया है उस डेट डेटा को
- 1:47:39अच्छी तरीके से प्रेजेंट
- 1:47:42करना, उसको इंक्रिप्ट करना, उसका
- 1:47:44ट्रांसलेशन करना, उसका कंप्रेशन करना। ये
- 1:47:47सब काम आता है कौन? ये सब काम करता है
- 1:47:49कौन? प्रेजेंटेशन लेयर। सेशन लेयर का काम
- 1:47:51क्या है? डेटा एक जगह से दूसरी जगह तक
- 1:47:53पहुंच रहा है या नहीं पहुंच रहा, इसका
- 1:47:54सेशन क्रिएट करना। और यह मेक श्योर करना
- 1:47:58कि डेटा एंड टू एंड पहुंच जाए ढंग से। मेक
- 1:48:05श्योर करना कि भाई साहब डेटा ढंग से पहुंच
- 1:48:06रहा है या नहीं पहुंच रहा। वही कि लापिन
- 1:48:08ने उसे ऑर्डर किया डेटा आ रहा है नहीं आ
- 1:48:09रहा कुछ इस तरीके से। ठीक है? प्रेजेंटेशन
- 1:48:12लेयर का क्या रोल था? डेटा को ट्रांसलेट
- 1:48:13करना। मतलब बताना कि भाई आई मसाला डोसा जी
- 1:48:17इस तरीके से बताना डेटा को। ठीक है? मैं
- 1:48:20रेसिस नहीं हूं भाई। मजाक मत उड़ाना मेरा।
- 1:48:22बाकी लेयर समझते हैं। चलो आ जाओ। तो सबसे
- 1:48:24पहले इनके नोट्स रेडी करो। फिर उसके बाद
- 1:48:26हम अगली लेयर पे जाते हैं। चलो। तो शुरुआत
- 1:48:28की तीन लेयर्स हम लोगों को समझ आ गई है।
- 1:48:30पहली एप्लीकेशन, प्रेजेंटेशन, सेशन। अब
- 1:48:32यहां से अगली लेयर है जिसका नाम है
- 1:48:33ट्रांसपोर्ट लेयर। ट्रांसपोर्ट लेयर का
- 1:48:35क्या काम होता है भैया? ट्रांसपोर्ट लेयर
- 1:48:37का काम है डेटा को ट्रांसपोर्ट करना। नहीं
- 1:48:39ट्रांसपोर्ट लेयर का काम है उस डेटा को
- 1:48:41ट्रांसपोर्टेशन के लिए तैयार करना। मतलब
- 1:48:43अगर मैं आपसे कहूं कि इसके क्या-क्या रोल
- 1:48:45हैं तो इसका पहला रोल जो होगा वो है
- 1:48:50सेगमेंटेशन। सेगमेंटेशन का मतलब है डेटा
- 1:48:53को छोटे-छोटे पैकेट्स के फॉर्म में
- 1:48:57तोड़ना। ये इसका पहला रोल है सेगमेंटेशन।
- 1:49:00सेगमेंटेशन मतलब डेटा को बड़े जो हमारा
- 1:49:02डेटा है उसको छोटे-छोटे छोटे-छोटे पैकेट्स
- 1:49:04में तोड़ना। जैसे मान लेते हैं कि मैंने
- 1:49:06टीम इंडिया के लिए 11 लोग हैं। वहां पे 11
- 1:49:09लोगों के लिए शेरियंस की टीशर्ट भेजी। मान
- 1:49:11लेते हैं मानने में क्या बुराई है। मतलब
- 1:49:13शेरियंस के जो 11 नहीं टीम इंडिया के जो
- 1:49:1611 लोग हैं उन 11 लोगों के लिए मैंने
- 1:49:18शेरियंस की 11 टीशर्ट भेजी। अब वो पूरा
- 1:49:20आर्डर एक बार में नहीं। उसने क्या करा? वो
- 1:49:23जो पूरा बड़ा सा मेरा कूरियर बॉक्स था
- 1:49:25उसको तोड़ लिया छोटे-छोटे मल्टीपल
- 1:49:27कूरियर्स में। और हर एक को नाम दे दिया।
- 1:49:28जैसे इसको नाम दे दिया 1 ऑफ 11। इसको नाम
- 1:49:31दे दिया 2 ऑफ़ 11, इसको नाम दे दिया 3 ऑफ़
- 1:49:3411 एंड सो ऑन। इस तरीके से उसने बाकी के
- 1:49:36सबको नाम दे दिए। तो इसका पहला रोल तो
- 1:49:38हमें समझ आ गया जो कि क्या था? पहला रोल
- 1:49:40था सेगमेंटेशन डेटा को पैकेट्स के फॉर्म
- 1:49:42में तोड़ना। मतलब जो मेरा बड़ा सा डेटा
- 1:49:44हुआ करता था उसको छोटे-छोटे पैकेट्स के
- 1:49:47फॉर्म में तोड़ देना। उसका दूसरा काम क्या
- 1:49:49है? इसका दूसरा रोल है
- 1:49:51सीक्वेंसिंग। भैया सीक्वेंसिंग क्या होता
- 1:49:54है? वही तो मैंने जो बताया ना अभी वन ऑफ़
- 1:49:5511, टू ऑफ़ 11 सबकी टीशर्ट उसने अलग-अलग
- 1:49:58उसमें बॉक्स में रख दी थी। ये तो
- 1:49:59सेगमेंटेशन हो गया था। सीक्वेंसिंग उन सब
- 1:50:01पे उसने सीक्वेंसिंग कर दी। और इसका एक और
- 1:50:03क्या काम है? इसका एक और काम ये है।
- 1:50:05ट्रांसपोर्ट की स्पेलिंग क्या गलत है?
- 1:50:06सही। तो स्पेलिंग यही तो होती है
- 1:50:07ट्रांसपोर्ट की स्पेलिंग। सेगमेंटेशन
- 1:50:09सीक्वेंसिंग। इसका एक और काम है कि भाई ये
- 1:50:12मेक श्योर करना कि सारे पैकेट्स डिलीवर हो
- 1:50:14गए हैं या नहीं हो गए हैं। तो यहां पे मैं
- 1:50:16लिख देता हूं एकनॉलेजमेंट। यानी कि मान
- 1:50:19लेते हैं कि मैंने 11 पैकेट्स भेजे थे। 11
- 1:50:21में से पांच नंबर का पैकेट नहीं जा पाया।
- 1:50:24समझ आ रही है मेरी बात? अब पांच नंबर का
- 1:50:26पैकेट जो है वो नहीं जा पाया। तो इसने
- 1:50:28क्या करा? उसको एकनॉलेज करा और उसको
- 1:50:30दोबारा भेजा। समझ रही हो मेरी बात? मैं
- 1:50:32क्या कहना चाह रहा हूं? अब इसको प्रोफेशनल
- 1:50:34भाषा में क्या लिखते हैं? तो अपने हिसाब
- 1:50:35से लिख लेना कि पहला तो था एकनॉलेजमेंट कि
- 1:50:38भाई साहब डेटा पहुंचा या नहीं पहुंचा। उस
- 1:50:39चीज को देखना और डेटा को मैं लिख देता हूं
- 1:50:43रिसेंड करना काइंड ऑफ समझ लो। है ना? तो
- 1:50:45मान लेते हैं पांच नंबर का डेटा जो मेरा
- 1:50:47नहीं पहुंच पाया था। उसने उसको क्या करा?
- 1:50:48उसने उसको रिसेंड कर दिया। दोबारा से उसको
- 1:50:51वापस से ट्रांसपोर्ट लेयर के में भेजने के
- 1:50:53लिए तैयार कर दिया। मतलब तैयार करना कि ये
- 1:50:55भेजा या नहीं भेजा अपन ने। अभी हम सब कुछ
- 1:50:57सेंडर्स के पर्सपेक्टिव से समझ रहे हैं।
- 1:50:58है ना? अभी हम समझेंगे रिसीवर के
- 1:51:00पर्सपेक्टिव से किस तरीके से काम होता है।
- 1:51:02तो यहां पर ट्रांसपोर्ट लेयर ने क्या करा?
- 1:51:04हमारे डेटा को ट्रांसपोर्ट करने के लिए
- 1:51:06रेडी कर लिया कि भाई तोड़ लिया, सीक्वेंस
- 1:51:09कर लिया। जा रहा है नहीं जा रहा ये चेक कर
- 1:51:11रहा है। और अगर नहीं जा रहा तो दोबारा कर
- 1:51:13रहा है सेंड। अब यहां पर जो प्रोटोकॉल्स
- 1:51:16यूज़ होते हैं वो होते हैं द वर्ल्ड फेमस
- 1:51:18टीसीपी
- 1:51:20एंड यूडीपी।
- 1:51:24इनको तो अपन डिटेल में पढ़ने ही वाले हैं।
- 1:51:25इतनी देर से बोल रहा हूं बनाया है। नीचे
- 1:51:27इसका भी स्लाइड है। तो उस पर अपन डिटेल
- 1:51:29में जब आएंगे तब इस पर भी बातचीत करेंगे।
- 1:51:30टीसीपी और यूडीपी प्रोटोकॉल्स क्या होते
- 1:51:32हैं? मैंने थोड़ा सा अभी वीडियो में पहले
- 1:51:34बता भी दिया और आगे जाके डिटेल में बता
- 1:51:36दूंगा। तो दिस इज़ ऑल अबाउट ट्रांसपोर्ट
- 1:51:38लेयर। ठीक है जी? तो मतलब हमारे पास क्या
- 1:51:40हुआ? हमारे पास एप्लीकेशन से हम हमारे
- 1:51:42सॉफ्टवेयर से कनेक्ट हुए एप्लीकेशन लेयर
- 1:51:44के थ्रू। डेटा को प्रेजेंट करके आगे भेजा
- 1:51:46गया। एक सेशन क्रिएट हो गया जिससे कि ये
- 1:51:48पता चल रहा है कि डेटा आगे जा भी रहा है
- 1:51:50कि नहीं जा रहा। और उसके बाद हमारा
- 1:51:52ट्रांसपोर्ट लेयर ने उस डाटा को तैयार कर
- 1:51:54दिया आगे भेजने के लिए। अब आता है नेटवर्क
- 1:51:56लेयर। नेटवर्क लेयर का क्या काम है?
- 1:51:58नेटवर्क लेयर का काम है डेटा को भेजना।
- 1:52:01दैट्स इट। ठीक है? यानी कि ये जो मेरा
- 1:52:04डेटा है
- 1:52:05उसको उसकी राउटिंग करना। उसको रेडी करना
- 1:52:09आगे भेजने के लिए। तो नेटवर्क लेयर का
- 1:52:11पहला रोल तो हमें समझ में आ गया कि ये
- 1:52:12राउटिंग करता है। इसका एक और रोल है। ये
- 1:52:14बेसिकली आईपी प्रोवाइड करता है। तो जैसा
- 1:52:16कि मैंने आप लोगों को बताया था कि देयर इज़
- 1:52:18समथिंग नोन ऐ प्राइवेट आईपी एंड देयर इज़
- 1:52:20समथिंग नोन ऐ पब्लिक आईपी। तो यह पब्लिक
- 1:52:22आईपी प्रोवाइड करता है और यह बताता है कि
- 1:52:24एग्जैक्टली जाना कहां है और यह उसको
- 1:52:26पहुंचाने का भी काम करता है। तो मुझे ऐसा
- 1:52:28लगता है कि मुझे इसको पहले लिखना चाहिए
- 1:52:29था। यह बेसिकली क्या करता है? ये एक IP
- 1:52:32असाइन करता है और साथ में ये क्या करता
- 1:52:35है? ये साथ में करता है राउटिंग कि भाई तब
- 1:52:38कहां जैसे मान लेते हैं कि मैंने
- 1:52:40google.com टाइप करा मान लेते हैं। तो मैं
- 1:52:43google.com पे जा के पहले मेरे को एक आईपी
- 1:52:45मिलेगी और मैं मतलब अब समझना। हम
- 1:52:48ट्रांसपोर्ट लेयर तक पहुंच गए थे।
- 1:52:50ट्रांसपोर्ट लेयर के बाद यहां पे अब क्या
- 1:52:51हो रही राउटिंग मतलब मल्टीपल सर्वर से
- 1:52:53होते हुए इधर से उधर इधर से उधर इधर से
- 1:52:54उधर होते हुए मैं कहां तक पहुंच जाऊंगा?
- 1:52:56मैं पहुंच जाऊंगा Google के सर्वर तक।
- 1:52:58क्या यहां तक समझ आया? हम आई होप आया
- 1:53:02होगा। उसके
- 1:53:04बाद पानी विद कोड। उसके बाद हम आते हैं
- 1:53:08डेटा लिंक लेयर पे। डेटा लिंक लेयर
- 1:53:10बेसिकली क्या करती है? इसका काम क्या था?
- 1:53:12आईपी असाइन करना, राउटिंग करना और डेटा को
- 1:53:14उसकी डिजायर्ड लोकेशन तक पहुंचाना। इस पे
- 1:53:17जो प्रोटोकॉल काम करता है वो है आईपी यानी
- 1:53:19इंटरनेट प्रोटोकॉल। और भी कुछ होते हैं।
- 1:53:21जैसे एक होता है आरआईपी रिप रिप मतलब होता
- 1:53:24है राउटिंग आई इंटरनेट प्रोटोकॉल। तो ये
- 1:53:27कुछ प्रोटोकॉल्स यहां पे काम करते हैं
- 1:53:28नेटवर्क लेयर के अंदर। ज्यादा मतलब इसमें
- 1:53:30कुछ समझने जैसा है नहीं यार। जैसे Google
- 1:53:32MA होता है। तो Google MA में क्या होता
- 1:53:33है? Google मैप में आपकी आपका एड्रेस आपके
- 1:53:36दोस्त का एड्रेस मतलब जहां भी आपको
- 1:53:38डिजायर्ड लोकेशन है वहां तक जाना है तो
- 1:53:39उसका
- 1:53:46एड्रेस पानी विद को ये तो अंदर से मतलब
- 1:53:51मेरे शरीर ने उसको सपोर्ट नहीं करा। मजाक
- 1:53:53कर रहा हूं। सुनो तो यहां पर जाके यह मेरा
- 1:53:55एड्रेस है। यह मेरे दोस्त का एड्रेस है।
- 1:53:57तो यहां जाके आपने क्या करा? आपको आपकी
- 1:53:59आईपी मिल गई। आपको दोस्त की आईपी मिल गई।
- 1:54:01आपने उसको मल्टीपल रास्तों से होते हुए
- 1:54:03इधर-उधर से करते हुए उसको पहुंचा दिया।
- 1:54:05दिस इज़ दी मेन रोल ऑफ़ व्हाट? ट्रांसपोर्ट
- 1:54:08लेयर के बाद जो लेयर आई थी नेटवर्क लेयर।
- 1:54:11ठीक है जी? आईपी प्रोटोकॉल आरआईपी
- 1:54:13प्रोटोकॉल काम करते हैं यहां पे। अगले
- 1:54:15लेयर पे आते हैं जिसका नाम है डेटा लिंक
- 1:54:17लेयर। डेटा लिंक लेयर बेसिकली क्या करता
- 1:54:19है? जैसे मान लेते हैं कि अ मैंने कोई
- 1:54:23ऑर्डर बुक किया
- 1:54:24था। कुछ ऑर्डर किया था मैंने मान लेते हैं
- 1:54:27Flipkart से। अब Flipkart से जो आर्डर है
- 1:54:30वो मेरे सोसाइटी के गेट तक आ गया। तो जो
- 1:54:33आईपी है यह उसको आइडेंटिफाई करेगा और आईपी
- 1:54:36को आइडेंटिफाई करने के बाद ये क्या करेगा?
- 1:54:38आईपी को आइडेंटिफाई करने के। मतलब आईपी से
- 1:54:40क्या होगा ना? जैसे मान लेते हैं मेरी
- 1:54:41सोसाइटी जो है मतलब वैसे मैं तो सोसाइटी
- 1:54:43में नहीं रहता हूं। मैं तो मोहल्ले में
- 1:54:45रहता हूं। लेकिन मान लेते हैं कि हमारा जो
- 1:54:48आईपी है वो बता रहा है कि भाई मेरी
- 1:54:50सोसाइटी में चार ब्लॉक्स हैं। तो ये जो
- 1:54:52आर्डर है ये ए ब्लॉक के अंदर जाएगा। अब ए
- 1:54:54ब्लॉक के अंदर जाना ये तो पता चल गया।
- 1:54:56यहां पर देयर इज़ समथिंग नोन ऐज़ मैक
- 1:54:57एड्रेस। मैक एड्रेस क्या होता है? हर एक
- 1:54:59डिवाइस का एक यूनिक मीडिया एक्सेस कंट्रोल
- 1:55:02एड्रेस होता है जिससे पता चलता है कि ये
- 1:55:03डिवाइस यूनिक है। तो इससे क्या पता चला? ए
- 1:55:06ब्लॉक के अंदर ऑर्डर भेजना है। और मैक
- 1:55:08एड्रेस से क्या पता चला? ए ब्लॉक के अंदर
- 1:55:10फ्लैट नंबर 202 में ये एड्रेस भेजना है।
- 1:55:13तो हमने क्या करा था ना? हमने नेटवर्क
- 1:55:16लेयर की हेल्प से हम सोसाइटी के गेट तक तो
- 1:55:18पहुंच गए थे। अब यहां से डेटा लिंक लेयर
- 1:55:20का काम चालू होता है। यहां पर वो चेक
- 1:55:22करेगा किस आईपी में आपको जाना है और वहां
- 1:55:23पर जाके उसका मैक एड्रेस चेक करेगा और
- 1:55:25उसके थ्रू वो डेटा यहां पर जाके 202 फ्लैट
- 1:55:27नंबर पे ये डेटा पहुंचा देगा। आपको ये समझ
- 1:55:30आया? हर लेयर का अपना-अपना एक रोल है।
- 1:55:33मतलब ट्रांसपोर्ट लेयर ने डेटा को क्या
- 1:55:35करा था? ट्रांसपोर्ट लेयर ने डेटा को भाई
- 1:55:37साहब तैयार कर दिया था। पैकेट्स के फॉर्म
- 1:55:39में तोड़ के सब पे सीक्वेंस वगैरह डाल
- 1:55:41दिया था। वो मेक श्योर कर रहा था कि पहुंच
- 1:55:42रहा है नहीं पहुंच रहा। उसके बाद जो हमारी
- 1:55:45नेटवर्क लेयर थी, नेटवर्क लेयर ने क्या
- 1:55:47करा? उस पर्टिकुलर एड्रेस तक पहुंचाने का
- 1:55:49काम करा है ना जी और हमारा जो डाटा था
- 1:55:52उसको मेक श्योर करा कि वह पहुंचा या नहीं
- 1:55:55पहुंचा किस तरीके से काम कर रहा है
- 1:55:56राउटिंग वगैरह करे ये सब किसका काम था
- 1:55:58नेटवर्क लेयर का पब्लिक आईपी तक पहुंचाने
- 1:56:00के बाद उसके बाद डाटा लिंक लेयर का काम
- 1:56:02यहां से चालू हो जाता है डाटा लिंक लेयर
- 1:56:04का क्या काम था डाटा लिंक लेयर का काम था
- 1:56:05कि जब सोसाइटी तक आ गया सोसाइटी तक आ गया
- 1:56:09तो उसको मेरे ब्लॉक में एंड उसके बाद मेरे
- 1:56:13फ्लैट में पहुंचाने का काम था। समझ आ रहा
- 1:56:15है ना मैं क्या कहना चाह रहा हूं। सो दिस
- 1:56:17इज दी मेन रोल ऑफ नेटवर्क लेयर एंड डेटा
- 1:56:19लिंक लेयर। उसके बाद सबसे ज्यादा
- 1:56:21इंपॉर्टेंट लेयर आती है जो कि है फिजिकल
- 1:56:24लेयर। फिजिकल लेयर क्या होती है भैया?
- 1:56:26फिजिकल लेयर बेसिकली आपका यहां तक का जो
- 1:56:29डेटा आया है उसको कन्वर्ट करेगा काहे में?
- 1:56:33बिट्स में। उसको कन्वर्ट करेगा बिट्स में।
- 1:56:35और बिट्स क्योंकि आपका जो डेटा है वो
- 1:56:38इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स के थ्रू पास होता
- 1:56:39है। रेडियो वेव्स के थ्रू पास होता है।
- 1:56:42अगर पास में कहीं पे भेजना है या फिर अगर
- 1:56:44कहीं दूर भेजना है तो वायर्स के अंदर जो
- 1:56:46हमारी वायर्स होती है उसके अंदर डेटा ज़ीरो
- 1:56:48और वन के फॉर्म में कुछ इस तरीके से पास
- 1:56:51होता है। तो वहां पर काम में आती है
- 1:56:53फिजिकल लेयर। तो यहां पर मेरा जो डेटा है
- 1:56:55वो फिजिकल लेयर के थ्रू बिट्स के फॉर्म
- 1:56:58में टूट जाएगा। ज़ीरोज़ एंड वंस के फॉर्म
- 1:57:00में टूट जाएगा और रेडियो वेव्स के थ्रू
- 1:57:02ट्रैवल करता हुआ मेरी डिजायर्ड डेस्टिनेशन
- 1:57:04तक पहुंच जाएगा। मतलब अगर हम आसान भाषा
- 1:57:06में समझे तो फिजिकल लेयर हमारे रॉ डेटा को
- 1:57:11ट्रांसमिशन करने का काम कर रही है। रॉ
- 1:57:16डेटा ट्रांसमिशन क्या होता है भैया? रॉ
- 1:57:18डेटा ट्रांसमिशन मतलब आप ऐसे समझ के चल
- 1:57:20सकते हैं कि देखो अगर हम स्टार्टिंग से
- 1:57:23चलें बिल्कुल मैं अभी वापस भी मतलब अभी
- 1:57:24सेंटर्स पर्सपेक्टिव से मैंने वहां पर
- 1:57:27टाइप करा google.com प्रेजेंटेशन लेयर ने
- 1:57:29क्या करा? Google.com मतलब टाइप कर रहे हो
- 1:57:31तो IP एड्रेस में कन्वर्ट कर दिया और
- 1:57:33प्रोसेस को स्टार्ट कर दिया। प्रेजेंटेशन
- 1:57:35लेयर ने क्या करा था? उसको प्रेजेंट कर
- 1:57:36दिया था। अगर एचटीटीपी है तो एचटीटीपीएस
- 1:57:38वगैरह लगा के और अगर एचटीटीपीएस है तो
- 1:57:41उसको सिक्योर करके उसको अच्छे से प्रेजेंट
- 1:57:42करके आगे भेजा। सेशन लेयर ने क्या करा?
- 1:57:44सेशन क्रिएट करा कि भाई डेटा पहुंच रहा है
- 1:57:46नहीं पहुंच रहा है इसको मेक श्योर करना।
- 1:57:47बस देखना मल्टीपल चेक पॉइंट्स बनाना। उसके
- 1:57:50बाद ट्रांसपोर्ट लेयर का क्या काम था?
- 1:57:52डेटा को पैकेट्स के फॉर्म में तोड़ना।
- 1:57:54मतलब मेरी रिक्वेस्ट को पैकेट्स के फॉर्म
- 1:57:55में तोड़ना या जो भी मैं भेजना चाहता हूं
- 1:57:57उसको। है ना? और सीक्वेंसिंग करना उसकी।
- 1:58:00नेटवर्क लेयर का क्या काम था? नेटवर्क
- 1:58:01लेयर का काम भी हमको क्लियर है। वहां तक
- 1:58:03उस जगह तक पहुंचाना। अब डेटा लिंक लेयर का
- 1:58:05क्या काम है? डेटा लिंक लेयर का काम है उस
- 1:58:07पर्टिकुलर सर्वर तक उस पर्टिकुलर आईपी तक
- 1:58:09उस पर्टिकुलर जगह तक मैक एड्रेस वगैरह पर
- 1:58:11वहां तक पहुंचाना। अब डेटा हमारे पहुंच
- 1:58:13चुका है फिजिकल लेयर में। डेटा हमारा
- 1:58:16पहुंच चुका है फिजिकल लेयर में। फिजिकल
- 1:58:18लेयर का काम है रॉ ट्रांसमिशन करना। डेटा
- 1:58:20को बिट्स के फॉर्म में भेजना। डेटा को
- 1:58:23वायर्स के अंदर बिट्स के फॉर्म में
- 1:58:25भेजेंगे। तो डेटा की क्या करेंगे हम लोग?
- 1:58:27अब डेटा की करेंगे एनकोडिंग। एनकोडिंग
- 1:58:30मतलब क्या होता है भैया? एनकोडिंग मतलब
- 1:58:32होता है ज़ीरोज़ एंड वंस के फॉर्म में उसको
- 1:58:34कन्वर्ट करना। ये किसका काम होता है? ये
- 1:58:36काम होता है हमारी फिजिकल लेयर का। और इस
- 1:58:38डेटा का रॉ ट्रांसमिशन करना किसका काम
- 1:58:41होता है? फिजिकल लेयर का काम होता है। चलो
- 1:58:43अब यहां तक तो सब कुछ समझ आ गया कि किस
- 1:58:45तरीके से काम हुआ है। अब हम चलते हैं
- 1:58:47थोड़ा सा टाइम में पीछे। मान लेते हैं कि
- 1:58:50अगर मैं अब रिसीवर के पर्सपेक्टिव से बात
- 1:58:51करूं तो क्या होगा। जब मैं रिसीवर के
- 1:58:53पर्सपेक्टिव से बात करूंगा तो अब यहां पर
- 1:58:55फिजिकल लेयर से होते हुए होते हुए होते
- 1:58:57हुए मेरे सर्वर तक डेटा पहुंच चुका है।
- 1:59:00मान लेते हैं कि मैंने यहां से मैसेज किया
- 1:59:03WhatsApp पे मेरे दोस्त अमन को वही पुराना
- 1:59:06वाला एग्जांपल याद रखना। तो अब डेटा
- 1:59:08फिजिकल लेयर तक पहुंच चुका है। यानी कि
- 1:59:10WhatsApp के सर्वर तक वो डेटा जैसे-जैसे
- 1:59:12करके ट्रांसफर हो गया। अब यहां से क्या
- 1:59:14होगा? यहां से डेटा अब उल्टी गिनती में
- 1:59:16जाना चालू होगा। मतलब यहां से डेटा जाएगा
- 1:59:19कहां पर? डेटा लिंक लेयर में। डाटा लिंक
- 1:59:21लेयर का पहले क्या काम हुआ करता था? उस
- 1:59:23डेटा को एक डिजायर्ड लोकेशन तक पहुंचा या
- 1:59:26नहीं पहुंचा वो मेक श्योर करना। तो अब
- 1:59:28इसका काम अब क्या हो जाएगा? अब इसका काम
- 1:59:29हो जाएगा कि भाई साहब हमारे डिवाइस के मैक
- 1:59:32एड्रेस और आईपी को रीड करते हुए ये डिसाइड
- 1:59:36करना कि डेटा कहां तक पहुंचेगा? फिर
- 1:59:38नेटवर्क लेयर का काम क्या है? कि भाई साहब
- 1:59:40मेरी डेस्टिनेशन तक डेटा को एग्जैक्टली
- 1:59:42पहुंचाने का। मतलब अब सर्वर से डेटा आगे
- 1:59:45की तरफ जा रहा है। है ना? फिर ट्रांसपोर्ट
- 1:59:46लेयर का क्या काम है? में ट्रांसपोर्ट
- 1:59:47लेयर का काम है जो मेरे सेगमेंट्स में
- 1:59:50डेटा टूटा हुआ था उसको जोड़ना मतलब जो
- 1:59:52मेरे 11 पैकेट्स नहीं याद तुम लोगों को
- 1:59:55मेरे जो 11 पैकेट्स थे उनको एक बड़े
- 1:59:57कूरियर के अंदर रखना नहीं तो मैंने तो भाई
- 1:59:59एक बड़ा कूरियर भेजा था इसने टुकड़ों में
- 2:00:00भेज दिया ऐसा थोड़ी चलेगा तो उसको वापस से
- 2:00:02तोड़ना सीक्वेंस वाइज अरेंज करना अगर कोई
- 2:00:04सीक्वेंस नहीं पहुंचा अगर कोई पर्टिकुलर
- 2:00:06पैकेट ऑफ डेटा नहीं पहुंचा है तो मेक
- 2:00:08श्योर करना कि वो पहुंच जाए उसके बाद सेशन
- 2:00:10लेयर का ये काम है कि भाई साहब ठीक है
- 2:00:12सेशन में सब कुछ सही रहा कोई परेशानी तो
- 2:00:14नहीं हुई चेक पॉइंट्स में चेक करना सब कुछ
- 2:00:15सही था प्रेजेंटेशन लेयर का काम क्या है?
- 2:00:17वो जो इंक्रिप्टेड डेटा था उसको वापस से
- 2:00:20डिक्रिप्ट करना बाय यूजिंग प्राइवेट की
- 2:00:22एंड पब्लिक की व्हाटएवर वी हैव उसको
- 2:00:24डिक्रिप्ट करना और उसको अगर ज़िप फाइल के
- 2:00:27फॉर्म में तो उसको वापस से कन्वर्ट करना
- 2:00:29जिस भी फॉर्मेट में आप चाहते हैं। है ना?
- 2:00:31उसके बाद एप्लीकेशन लेयर का काम है कि
- 2:00:33हमारे पास जो इन लेयर से होते हुए डेटा आ
- 2:00:35रहा है उसको यूजर के एप्लीकेशन लेयर का
- 2:00:39काम
- 2:00:42है उसको यूजर के सॉफ्टवेयर में पास करना।
- 2:00:47दैट इज़ इट। ये सब काम है। तो अगर मैं आपको
- 2:00:50एक बार फिर से एक क्विक रिवीज़ दूं इन सभी
- 2:00:53चीजों का तो अगर आप ध्यान से देखेंगे तो
- 2:00:55हमारा डेटा जो था वो एप्लीकेशन लेयर से
- 2:00:57होता हुआ प्रेजेंटेशन लेयर में आया था।
- 2:00:58एप्लीकेशन जो सॉफ्टवेयर के साथ इंटरेक्ट
- 2:01:00कर रहा था प्रेजेंटेशन ने उसको अ एक तरीके
- 2:01:03से फ्रेम कर दिया अच्छे तरीके से वही इडली
- 2:01:06डोसा वाला सेशन लेयर ने सेशन क्रिएट करा
- 2:01:08कि डेटा किस तरीके से पहुंच रहा है भाई ये
- 2:01:10मेक श्योर हो जाए डेटा ढंग से पहुंच रहा
- 2:01:12है या नहीं पहुंच रहा है इस चीज को ध्यान
- 2:01:13रखना ट्रांसपोर्ट लेयर ने उस डेटा को
- 2:01:15सेगमेंटेशन करके उसको पैकेट्स के फॉर्म
- 2:01:17में थोड़ा सीक्वेंसिंग की उसकी और कुछ
- 2:01:19नहीं पहुंचा हो तो पहले तो चेक करा
- 2:01:21एकनॉलेज किया नहीं पहुंचा हो तो वापस से
- 2:01:23भेजा नेटवर्क लेयर का काम था कि भाई साहब
- 2:01:26आईपी प्रोवाइड करना पब्लिक और डिजायर्ड
- 2:01:28सर्वर तक उसको पहुंचाना मतलब उसकी राउटिंग
- 2:01:30वगैरह करना। डेटा लिंक लेयर का काम था कि
- 2:01:32भाई साहब डेटा हमारे सर्वर्स तक पहुंच
- 2:01:34चुका है तो उसको एक प्रॉपर एक पर्टिकुलर
- 2:01:35आईपी तक पहुंचाना मैक एड्रेस के थ्रू और
- 2:01:37इन सब चीजों के थ्रू मतलब अगर कोई पास में
- 2:01:39मैं मतलब मैं अपने सिस्टम से तो
- 2:01:42डायरेक्टली अगर मैं अपने क्या बोलते हैं
- 2:01:44उसको प्रिंटर तक कुछ पहुंचाना चाहता हूं
- 2:01:47तो वहां पर डेटा लिंक लेयर का रोल रहेगा।
- 2:01:48वो उसके मैक एड्रेस को फाइंड करके काम
- 2:01:50करेगा। और फिजिकल लेयर का काम है रॉ डेटा
- 2:01:53को आगे की तरफ पास करना। तो ये सभी हमने
- 2:01:56लेयर्स का काम समझा। अब सर्वर तक डेटा
- 2:01:58पहुंच गया था। अब यहां से वापस चालू होगा।
- 2:02:00डेटा लिंक लेयर में जाएगा। आईपी वगैरह
- 2:02:01फाइंड करेगा। नेटवर्क लेयर से मेरे रिसीवर
- 2:02:04तक के आईपी तक का रास्ता ढूंढेगा।
- 2:02:05ट्रांसपोर्ट लेयर से उसको वापस से
- 2:02:07सीक्वेंस वाइज़ अरेंज करेगा। एक बड़ा पैकेट
- 2:02:09बनाएगा। सेशन लेयर में सेशन जाके एंड कर
- 2:02:11देगा कि ठीक है भाई अब पहुंच जाएगा आगे तक
- 2:02:13डेटा। प्रेजेंटेशन लेयर में क्या होगा?
- 2:02:15प्रेजेंटेशन लेयर में जो डेटा का
- 2:02:16इंक्रिप्शन हुआ था उसको डिक्रिप्ट करेगा।
- 2:02:18एप्लीकेशन लेयर तक पहुंचने के बाद फिर
- 2:02:20मेरे यूजर के एप्लीकेशन तक डेटा पहुंच
- 2:02:23जाएगा। दिस इज अबाउट ओएसi मॉडल। अब एक और
- 2:02:28जरूरी चीज अभी के टाइम पर क्या भैया
- 2:02:31धड़ल्ले से ओएसआई मॉडल यूज़ हो रहा है?
- 2:02:33नहीं। क्यों भैया? थोड़ा सा पुराना हो गया।
- 2:02:35तो कुछ नए मॉडल्स आ गए हैं जो कि इससे
- 2:02:37बेटर तरीके से काम करते हैं। थोड़े से इससे
- 2:02:39लेस कॉम्प्लेक्स होते हैं। वो क्या है
- 2:02:41भैया? एक है
- 2:02:43TCP आईपी
- 2:02:47मॉडल। इफ यू वांट तो अपन इसको आगे वीडियो
- 2:02:49में डिस्कस करेंगे। मतलब इफ यू वांट आप
- 2:02:51कैसे बताओगे बीच वीडियो में? अपन इसको
- 2:02:52वीडियो में आगे डिस्कस करेंगे। लेकिन अभी
- 2:02:54भी ओएसआई मॉडल रेलेवेंट है। क्यों
- 2:02:57रेलेवेंट है? क्योंकि अ ट्रबल शूटिंग के
- 2:03:00काम आता है पता करने के लिए कि डेटा कहीं
- 2:03:02अटका या नहीं अटका। है ना? और एक
- 2:03:04स्टैंडर्ड बना हुआ है। तो काफी सारी
- 2:03:05कंपनीज़ अभी भी इसको फॉलो करती है। जो
- 2:03:08पुराने एप्लीकेशनेशंस बने हुए हैं वो इसी
- 2:03:09पे बने हुए हैं। तो हमें ये जरूरी है कि
- 2:03:11हम इसके बारे में समझे। समझ रहे हो ना मैं
- 2:03:13क्या कहना चाह रहा हूं। तो ये था ओएसआई
- 2:03:15मॉडल के बारे में एक डिटेल्ड
- 2:03:17एक्सप्लेनेशन। अब थोड़ा सा हम समझेंगे। अब
- 2:03:20रही बात इसकी एक एग्जांपल जो मैंने ऊपर
- 2:03:22छोड़ दिया था गलती से आप लोगों के लिए कि
- 2:03:24हाउ लेट्स टेक द एग्जांपल ऑफ़ Zomato। तो
- 2:03:26मुझे लगता है कि अब Zomato के एग्जांपल की
- 2:03:28जरूरत नहीं है क्योंकि आप खुद समझ चुके
- 2:03:29हैं कि किस तरीके से डेटा हमारे पास आ रहा
- 2:03:31है। अब मैं चाहता हूं कि ये वाला पार्ट आप
- 2:03:33मेरे लिए प्लीज प्लीज प्लीज खुद से करें
- 2:03:35ताकि आप ये समझ पाएं कि डेटा किस तरीके से
- 2:03:38ट्रांसफर हो रहा है। और वही एग्जांपल जो
- 2:03:39हम लोगों ने लापिनोस और डोमिनोज का लिया
- 2:03:41था ना वही एग्जांपल Zomato पे भी अप्लाई
- 2:03:43हो जाएगा। तो मेक श्योर कि भाई ये वाला
- 2:03:45पार्ट आप खुद से एक बार एक्सप्लोर करें।
- 2:03:47जीपीटी पे छोटा सा प्रॉम डालना कि हाउ अ
- 2:03:50Zomato ट्रांसफर दी ऑर्डर एंड एक्सप्लेन
- 2:03:54इट वाया ओएसआई मॉडल। तो वो आपको एक्सप्लेन
- 2:03:57करके देगा और ये आपका होमवर्क है। तो मुझे
- 2:03:58नीचे कमेंट में जरूर बताना कि क्या आपको
- 2:04:00समझ आया नहीं आया। बाय द वे मुझे नहीं
- 2:04:01लगता अब एग्जांपल की जरूरत है। अब अच्छे
- 2:04:03से क्लियर हो गया। तो चलो आगे की तरफ मूव
- 2:04:05करते हैं। लेट्स गो। तो अब ये समझते हैं
- 2:04:06कि कंप्यूटरटर्स एग्जैक्टली किस तरीके से
- 2:04:08कम्युनिकेट करते हैं। यानी कि क्लाइंट
- 2:04:11सर्वर आर्किटेक्चर के बारे में। आ जाओ
- 2:04:13समझते हैं। बस मैं क्लाइंट सर्वर ही नहीं
- 2:04:15बताऊंगा। मैं एक और बताऊंगा जिसको बोलते
- 2:04:17हैं पीियर टू पीियर आर्किटेक्चर। तो उसको
- 2:04:18बाद में डिस्कस करते हैं। पहले क्लाइंट
- 2:04:20सर्वर को समझते हैं अच्छे से। तो क्लाइंट
- 2:04:21सर्वर आर्किटेक्चर का मतलब क्या है? कि
- 2:04:23कंप्यूटरटर्स इंटरनेट के थ्रू एक दूसरे से
- 2:04:26किस तरीके से कम्युनिकेट कर पा रहे हैं।
- 2:04:28जैसे मान लेते हैं आप किसी वेबसाइट पर
- 2:04:29जाते हैं और उस वेबसाइट पर जाने के बाद आप
- 2:04:32टाइप करते हैं google.com मान लेते हैं
- 2:04:34मैं ब्राउज़र पे गया हूं और ब्राउज़र पे
- 2:04:35जाके मैंने लिखा google.com तो google.com
- 2:04:37ओपन हो जाता है। अब ये कैसे हुआ वो समझते
- 2:04:39हैं। सुनो। मान लेते हैं दिस इज़ कंप्यूटर
- 2:04:42ए दिस इज़ माय कंप्यूटर। ये मैं चला रहा
- 2:04:45हूं। ये मेरा कंप्यूटर है। ठीक है जी।
- 2:04:47देयर फॉर इट इज़ नोन एज क्लाइंट कंप्यूटर।
- 2:04:50इट इज़ नोन ऐज़ क्लाइंट साइट।
- 2:04:54ठीक है? और एक और है बड़ा सा मान लेते हैं।
- 2:04:58दिस इज़ Instagram का सर्वर। इसमें बहुत
- 2:05:01सारी बटंस वगैरह लगी हुई हैं। कुछ इस
- 2:05:02तरीके से। कुछ ऐसा दिखाई दे रहा है। दिस
- 2:05:05इज़ मान लेते हैं Instagram का सर्वर। अब
- 2:05:08मैंने यहां से भेजी एक
- 2:05:12रिक्वेस्ट और यहां से आया मेरे पास एक
- 2:05:17रिस्पांस। दिस इज़ नोन एज क्लाइंट सर्वर
- 2:05:20आर्किटेक्चर। यहां पर आपका
- 2:05:22क्लाइंट सर्वर की तरफ एक रिक्वेस्ट फेंकता
- 2:05:26है। दिस इज़ नोन एज रिक्वेस्ट।
- 2:05:29एंड आपका सर्वर उस रिक्वेस्ट के अकॉर्डिंग
- 2:05:33रिस्पांस करता है। अब मुझे पता है तुम्हें
- 2:05:36बिल्कुल समझ नहीं आ रहा है कि यहां पर
- 2:05:37क्या चल रहा है। तो अपन थोड़ा अपने तरीके
- 2:05:39से समझते
- 2:05:41हैं। छाछित कोड मजाक कर रहा हूं यार।
- 2:05:45वीडियो के शुरुआत में सोचा था कि फुल ऑन
- 2:05:47पढ़ाई प्रोफेशनलिज्म के साथ जाऊंगा। लेकिन
- 2:05:50थोड़ी बहुत तो चलती है। देखो सच बताना है
- 2:05:53ना। आ जाओ देखो फटाफट जल्दी। तो यहां जाके
- 2:05:56हमने कहा क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर क्या
- 2:05:58होता है? कैसा दिखाई देता है। अब मैं
- 2:06:00थोड़ा इसको प्रैक्टिकल एग्जांपल से समझाता
- 2:06:01हूं। मान लेते हैं कि मैं अपने ब्राउज़र पर
- 2:06:04जाता हूं। तो मेरा जो ब्राउज़र है मेरा जो
- 2:06:07सॉफ्टवेयर मान लेते हैं मैं WhatsApp यूज़
- 2:06:08कर रहा हूं या मैं Instagram यूज़ कर रहा
- 2:06:10हूं। ये सब कहलाएंगे क्लाइंट्स। ठीक है?
- 2:06:12अब मैं ब्राउज़र पर जाता हूं और वहां पर
- 2:06:14लिखता हूं
- 2:06:16www.com तो क्या होगा? वहां पर मैंने लिखा
- 2:06:18Instagram का डीएनएस डोमेन नेम सिस्टम के
- 2:06:21थ्रू उसको पहले देखा जाएगा। उसका जो डोमेन
- 2:06:24नेम है वो लिखा मैंने वहां पे। अब उसका
- 2:06:25डोमेन नेम रिज़ॉल्व होगा आईपी में। और अब
- 2:06:28होगा क्या? यहां से मेरी रिक्वेस्ट गई है
- 2:06:31ऊपर। मेरी रिक्वेस्ट क्या है? ये समझो
- 2:06:33ध्यान से। मेरी रिक्वेस्ट है मेरी बहुत
- 2:06:35आसान सी रिक्वेस्ट है। बहुत छोटी सी
- 2:06:37रिक्वेस्ट है भाई। छोटा आदमी हूं मैं।
- 2:06:38मैंने यहां पर कहा मेरी रिक्वेस्ट है
- 2:06:43ओपन
- 2:06:45Instagram। यह मेरी रिक्वेस्ट है। दैट्स
- 2:06:48इट। अब यहां पर आया सर्वर के ऊपर वही चीज।
- 2:06:51अब सर्वर ने क्या किया? सर्वर होता क्या
- 2:06:52है एग्जैक्टली सर्वर क्या कर रहा है वो तो
- 2:06:54बाद में समझेंगे। पहले ये समझते हैं सर्वर
- 2:06:56होता क्या है? मेरे साथ एक इमेजिनरी जर्नी
- 2:06:58पे चलना है 2 मिनट के लिए सबको। ठीक है?
- 2:07:00ध्यान से सुनना मेरी बात। इमेजिन करो एक
- 2:07:04कंप्यूटर। इमेजिन इमेजिन करो एक कंप्यूटर।
- 2:07:08अब कंप्यूटर कैसा दिखाई देता है? आप लोगों
- 2:07:10ने इमेजिन किया होगा कि एक स्क्रीन है।
- 2:07:13मॉनिटर जिसको हम बोलते हैं। एक CPU है
- 2:07:15बढ़िया सा। एक मान लेते हैं कि कीबोर्ड
- 2:07:19है, माउस है, बगल में स्पीकर्स भी रखे हुए
- 2:07:21हैं। और कुछ अगर रखना है तो प्रिंटर एंड
- 2:07:23ऑल यह सब रखना चाहो तो वह सब भी रख सकते
- 2:07:25हो। तो ये मान लेते हैं हमारे पास
- 2:07:26कंप्यूटर है। अब मेरे लिए एक काम करेंगे।
- 2:07:28ध्यान से पूछो क्या? उस कंप्यूटर के अंदर
- 2:07:31से मॉनिटर हटा दो। बोलो हटा दिया। हटा
- 2:07:35दिया। ठीक है? कीबोर्ड माउस हटा दो। हटा
- 2:07:38दिया। स्पीकर लगा था तो वो हटा
- 2:07:42दो। जो भी एक्स्ट्रा एक्सेसरीज थी सब हटा
- 2:07:45दो। क्या बचा? सीपीयू। क्या बचा? सीपीयू।
- 2:07:49अब आपका जो सीपीयू है उसको एक तरीके से
- 2:07:53ऐसे उसको इंटरनेट से कनेक्ट कर दो सबसे
- 2:07:56पहले तो और उसको कुछ इस तरीके से
- 2:07:58प्रोग्राम कर दो जो कि जो भी रिक्वेस्ट आ
- 2:08:00रही है उसके पास उसका कुछ रिस्पांस दे
- 2:08:02सके। दिस इज़ नोन एज सर्वर। दैट्स इट।
- 2:08:06सर्वर आप अगर सोचते हैं ना मन में तो वो
- 2:08:08बड़े-बड़े वो Google के सर्वर्स हमें
- 2:08:10इमेजिन आते हैं मन में आते हैं। लेकिन वो
- 2:08:12भी सर्वर्स हैं। और अभी लेट्स सपोज मेरा
- 2:08:15लैपटॉप यहां पे रखा हुआ है। तो ये भी एक
- 2:08:16तरीके से सर्वर का काम कर सकता है। क्या
- 2:08:18आप मेरी बात समझ पा रहे हैं? तो सर्वर
- 2:08:20बेसिकली क्या है? एक कंप्यूटर सिस्टम है
- 2:08:22व्हिच इज़ कनेक्टेड टू द इंटरनेट व्हिच इज़
- 2:08:24प्रोग्राम टू एक्सेप्ट रिक्वेस्ट एंड सेंड
- 2:08:29बैक रिस्पांस। दैट्स इट। नथिंग एल्स। समझ
- 2:08:32आया क्या हुआ? तो अगर हम पूछे क्लाइंट
- 2:08:33सर्वर क्या होते हैं भैया? तो क्लाइंट
- 2:08:35बेसिकली क्या है? क्लाइंट है मेरा डिवाइस
- 2:08:38जो मैं यूज़ कर रहा हूं अभी करेंटली जिसके
- 2:08:40थ्रू मैं रिक्वेस्ट करने वाला हूं। तो दिस
- 2:08:42इज़ क्लाइंट आई एम अ क्लाइंट। समझ रहे हो?
- 2:08:45और सर्वर क्या है? सर्वर है एक ऐसा डिवाइस
- 2:08:48जो कि मेरी उस रिक्वेस्ट के अकॉर्डिंग
- 2:08:49मुझे रिस्पांस देगा। तो यहां जाके
- 2:08:51रिस्पांस में फॉर एग्जांपल मुझे
- 2:08:54HTML, CSS और js की फाइल्स मिल गई। ये
- 2:08:58क्या मिला मुझे? ये मिला मुझे रिस्पांस।
- 2:09:00तो मैंने रिक्वेस्ट की थी Instagram.com
- 2:09:02से और ये मुझे रिस्पांस देगा। ठीक है? तो
- 2:09:04जैसे ही आपने रिक्वेस्ट की क्या हुआ?
- 2:09:06एचटीटीp जो
- 2:09:09हमारा http hटीtp के थ्रू रिक्वेस्ट गई
- 2:09:13वहां पे। यहां पर जाके रिक्वेस्ट को
- 2:09:14एक्सेप्ट किया गया। यहां पर देखा गया कि
- 2:09:16क्या रिस्पांस देना है और उसके अकॉर्डिंग
- 2:09:18रिस्पांस दे दिया गया। दिस इज़ नोन ऐज़
- 2:09:20क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर। अगर मैं थोड़ा
- 2:09:22सा और अच्छे से बताऊं आपको। फॉर एग्जांपल
- 2:09:26हमने याद करो वो जो रेस्टोरेंट वाला
- 2:09:28एग्जांपल लिया था। दिस इज़
- 2:09:30मी जो मैं रेस्टोरेंट के अंदर गया।
- 2:09:33रेस्टोर के अंदर जाके मैंने कहा कि मुझे
- 2:09:36किचन जो
- 2:09:38है उससे कनेक्ट करना है। ठीक है? मुझे
- 2:09:41किचन जो है उससे कनेक्ट करना है। दिस इज़
- 2:09:43मी यू कैन से आई एम अ क्लाइंट एंड दिस
- 2:09:47किचन इज़ अ सर्वर। समझ आ रही है मेरी बात?
- 2:09:51तो हम दोनों के बीच में ये जो वेटर
- 2:09:54है ये जो वेटर है जो मेरी रिक्वेस्ट को
- 2:09:58वहां तक पहुंचाने का काम कर रहा है और
- 2:10:00उसके रिस्पांस को मुझ तक लेके आने का काम
- 2:10:02कर रहा है। समझ आ रहा है? दिस इज़ इंटरनेट।
- 2:10:06दिस इज़ क्लाइंट सर्वर आर्टिस्ट। किस तरीके
- 2:10:08से? मतलब यह जो वेटर है ना वेटर बेसिकली
- 2:10:10मेरी रिक्वेस्ट को वहां तक जा रही है और
- 2:10:12उसका जो रिस्पांस है वो मुझ तक आ रहा है।
- 2:10:13मैंने खाना ऑर्डर किया है कि भाई आई यो
- 2:10:16इडली डोसा। जी। तो इडली डोसा उसने वहां पर
- 2:10:18जाके कहा कि इडली डोसा मांग रहा है। तो
- 2:10:20उसने कहा हां ठीक है ले जाओ। तो उसने लाके
- 2:10:21मुझे दे दिया। यह किसके थ्रू हो रहा है?
- 2:10:23इंटरनेट के थ्रू हो रहा है। दिस इज़ द रोल
- 2:10:25ऑफ़ इंटरनेट जो मेरे क्लाइंट और मेरे सर्वर
- 2:10:27को जोड़ने का काम कर रही है। समझ आ रहा है
- 2:10:29ना? क्लाइंट और सर्वर आर्किटेक्चर है
- 2:10:31क्या? दिस इज़ जस्ट अ आर्किटेक्चर ऑफ अ
- 2:10:34क्लाइंट अ डिवाइस हु रिक्वेस्ट एनीथिंग
- 2:10:37एंड अ सर्वर व्हिच गिव बैक रिस्पांस। समझ
- 2:10:41आ रही है मेरी बात? अब ऐसा नहीं है कि अ
- 2:10:45सिस्टम के क्लाइंट अलग होता है, सर्वर अलग
- 2:10:47होता है। आपका एक डिवाइस एज अ क्लाइंट और
- 2:10:49एज अ सर्वर दोनों काम कर सकता है। कोई
- 2:10:51इतनी बड़ी चीज नहीं है। बताऊंगा वो भी मैं
- 2:10:53आगे जाके कैसे। लेकिन ये है क्लाइंट सर्वर
- 2:10:55आर्किटेक्चर। क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर
- 2:10:57मतलब कैसे हम अपने कंप्यूटर को सर्वर्स के
- 2:11:00साथ और किस तरीके से किसी ऐसे डिवाइस के
- 2:11:03साथ जोड़ते हैं। दिस इज़ नोन ऐ जो रिस्पांस
- 2:11:05दे रहा है। दिस इज़ नोन ऐज़ क्लाइंट सर्वर
- 2:11:06आर्किटेक्चर। दैट्स इट। आई होप ये समझ आया
- 2:11:08होगा। राइट? अब समझते हैं पीियर टू पीियर
- 2:11:10आर्किटेक्चर क्या होता है। तो अब थोड़ा सा
- 2:11:12पीियर टू पीियर आर्किटेक्चर को भी समझ
- 2:11:13लेते हैं। तो अगर आप ध्यान से समझेंगे तो
- 2:11:16यहां पर जो हमारा क्लाइंट सर्वर
- 2:11:17आर्किटेक्चर था इसमें हमारा जो सर्वर था
- 2:11:20जरूरी नहीं है कि क्लाइंट सर्वर
- 2:11:22आर्किटेक्चर अपन ने अरे यार ये क्या बन
- 2:11:24गया? जरूरी नहीं है कि मैंने यहां पर
- 2:11:26अच्छा सा बनाता हूं थोड़ा सा। ये है मेरा
- 2:11:29मान लेते हैं सेंट्रल सर्वर। ठीक है जी।
- 2:11:31अब सेंट्रल सर्वर जो
- 2:11:33है कुछ इस तरीके से मान लो दिस इज माय
- 2:11:38सर्वर। ठीक है? मैं लिख भी देता हूं यहां
- 2:11:41पे। दिस इज़ माय सर्वर। अब हो सकता है ना
- 2:11:44कि इससे मल्टीपल क्लाइंट्स कनेक्टेड
- 2:11:49हो। समझ रहे हो ना मैं क्या कहना चाह रहा
- 2:11:51हूं? और सारे लोग इससे कनेक्टेड हैं। इसको
- 2:11:54इसने मान लेते हैं। मान लेते हैं कि इसने
- 2:11:56इसको कुछ रिक्वेस्ट भेजी। इसने उसका कुछ
- 2:11:58रिस्पांस दे दिया। फिर इसने कुछ रिक्वेस्ट
- 2:12:00भेजी। इसका कुछ रिस्पांस आ गया। इसने कुछ
- 2:12:03रिक्वेस्ट भेजी। इसका कुछ रिस्पांस आ गया।
- 2:12:05दिस इज़ क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर। आई होप
- 2:12:07आपको ये समझ आया। पीियर टू पीियर
- 2:12:08आर्किटेक्चर में क्या होता है? पीियर टू
- 2:12:10पीियर आर्किटेक्चर में कोई एक सेंट्रल हब
- 2:12:12नहीं होता। सेंट्रल सर्वर नहीं होता। हर
- 2:12:14एक डिवाइस आपस में एज अ क्लाइंट एंड ऐज़ अ
- 2:12:18सर्वर काम करता है। यानी कि ऐसा समझ लीजिए
- 2:12:20कि एक डिवाइस है यहां पे। डिवाइस A एक
- 2:12:24डिवाइस है मान लेते हैं B एक डिवाइस है
- 2:12:28मान लेते हैं C एंड D एंड E तो ये एक
- 2:12:35तरीके से एक मेश के फॉर्म में कनेक्टेड
- 2:12:37होते हैं। कुछ इस तरीके
- 2:12:40से सब आपस में कनेक्टेड हैं।
- 2:12:45ठीक है? अब ये कनेक्टेड है। अब यहां पे
- 2:12:47क्या होता है ना? दिस विल एक्ट एज क्लाइंट
- 2:12:52एंड सर्वर बिकॉज़ दे आर पीियर टू पीियर।
- 2:12:57मतलब ऐसा समझ लो कि पेयर टू पीियर में
- 2:13:00होता क्या है ना जैसे मान लेते हैं ए
- 2:13:02डिवाइस। अब ये क्लाइंट भी है और सर्वर भी
- 2:13:03है। अब इसको अगर कोई डेटा की जरूरत है तो
- 2:13:06ये अपने साथ वालों से मांगेगा कि भाई आपके
- 2:13:09पास किसी के पास फला चीज है क्या? और ये
- 2:13:10साथ वालों के पास अगर होगी तो वो उसको भेज
- 2:13:12देंगे। कुछ इस तरीके से। ठीक है? अगर इसको
- 2:13:14मैं थोड़ा सा और अच्छे एग्जांपल के साथ
- 2:13:16समझाऊं तो फॉर एग्जांपल अ हमारा WhatsApp
- 2:13:19ग्रुप होता है। अब WhatsApp ग्रुप में
- 2:13:21क्या होता है ना दोस्तों का जो ग्रुप होता
- 2:13:23है उसमें क्या होता है ना मैं मैसेज रिसीव
- 2:13:25भी कर सकता हूं। मैं मैसेज कॉल भी मैसेज
- 2:13:27सेंड भी कर सकता हूं। मुझे मैसेज करना है
- 2:13:29कि भाई कल चलोगे क्या घूमने? तो दोस्तों
- 2:13:31का मेरे पास आंसर आ रहा है कि हां भाई
- 2:13:33चलेंगे। कोई कह रहा है नहीं भाई प्लान
- 2:13:34कैंसिल। तो ये है ग्रुप। और इसमें क्या हो
- 2:13:37रहा है? इसमें यह हो रहा है कि हर एक
- 2:13:39इंडिविजुअल मैसेज भेज भी सकता है और मैसेज
- 2:13:41रिसीव भी कर सकता है। और होता है क्लाइंट
- 2:13:43सर्वर आर्किटेक्चर। उसमें क्या होता है?
- 2:13:45सेंट्रल हब है। तो सारे लोग सेंट्रल हब से
- 2:13:46ही कनेक्टेड है। सेंट्रल सर्वर से ही
- 2:13:48कनेक्टेड हैं। लेकिन यहां पे कुछ ऐसा नहीं
- 2:13:49है। अब इसके कुछ फायदे होते हैं। क्या
- 2:13:51सबसे पहले तो सेंट्रल हब पे डिपेंडेंसी
- 2:13:54नहीं होती।
- 2:13:55दूसरा मान लेते हैं कोई एक हब मान लेते
- 2:13:58हैं ये खराब हो गया। मान लेते हैं ये ए
- 2:14:00खराब हो गया तो बाकियों का उस पे कोई
- 2:14:02इफेक्ट नहीं दिखेगा। ठीक है? और क्या-क्या
- 2:14:03अच्छी चीजें होती है भैया इसके अंदर? इसके
- 2:14:05अंदर कॉस्ट इफेक्टिवनेस होती है। काफी
- 2:14:07सस्ता होता है एज कंपेयर टू दिस थिंग।
- 2:14:11क्योंकि इसमें पैसा लगता है खतरनाक
- 2:14:13क्योंकि भाई साहब आपको सेंट्रल सिस्टम ऐसा
- 2:14:15बनाना है ना जो लोगों की रिक्वेस्ट को
- 2:14:16एक्सेप्ट कर सके और उनको रिस्पांस कर सके
- 2:14:18तो उसमें थोड़ी सी मेहनत तो लगेगी ना यार।
- 2:14:20इसमें ऐसा कुछ नहीं होता। और इसमें एक और
- 2:14:22अच्छी चीज़ है नया डिवाइस अगर आपको ऐड करना
- 2:14:24है तो वो भी आप इज़ली कर सकते हैं। उसमें
- 2:14:26भी कोई परेशानी नहीं होती
- 2:14:28है।
- 2:14:30तो क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर आर्किटेक्चर
- 2:14:33एक सेंट्रल सर्वर है जिससे सारे लोग
- 2:14:35कनेक्टेड हैं। पीियर टू पीियर एक दूसरे से
- 2:14:37कनेक्टेड है। तो जो भी डेटा है सबके पास
- 2:14:39कई बार एक छोटे-छोटे छोटे-छोटे फॉर्म में
- 2:14:42अवेलेबल रहता है और सारे लोग उस डेटा को
- 2:14:44किसी एक ने अगर रिक्वेस्ट करी है तो एज अ
- 2:14:46सर्वर एक्ट करके उसको प्रोवाइड करते हैं।
- 2:14:49अब यहां पे कुछ चैलेंजेस भी होते हैं।
- 2:14:50पहला चैलेंज तो यह है कि यहां पर थोड़ा सा
- 2:14:54ना सिक्योरिटी का कंसर्न होता है क्योंकि
- 2:14:56डिसेंट्रलाइज़ होता है ना यह तो थोड़ा सा
- 2:14:58सिक्योरिटी का कंसर्न होता है। उसमें
- 2:15:00सेंट्रलाइज़ था सब कुछ इसमें
- 2:15:01डिसेंट्रलाइज्ड है तो सिक्योरिटी का हो
- 2:15:03सकता। हो सकता है कि मान लेते हैं मैंने
- 2:15:05कहा कि भाई मुझे एक मूवी डाउनलोड करनी है।
- 2:15:07उसका नाम है
- 2:15:09अ मान लेते हैं सिकंदर। अब मुझे सिकंदर
- 2:15:12मूवी डाउनलोड करनी है तो सबके पास सिकंदर
- 2:15:14का थोड़ा-थोड़ा थोड़ा-थोड़ा पार्ट होगा तो
- 2:15:15सब लोग यहां पर जाके इसको भेज देंगे या हो
- 2:15:17सकता है किसी एक के पास हो तो वो भी भेज
- 2:15:19सकता है। तो यहां पर इसने क्या करा? इसने
- 2:15:21एज अ सर्वर एक्ट करा। इसने क्या करा? एज अ
- 2:15:23क्लाइंट एक्ट करा। अब यहां से इसने कुछ
- 2:15:25मांगा तो इसने हो सकता है इन दोनों ने
- 2:15:27मिलके उसको आंसर दिया हो। तो ये दोनों एज
- 2:15:28अ सर्वर एक्ट कर रहे हैं। और ये एज अ
- 2:15:30क्लाइंट एक्ट कर रहा है। समझ आ रहा है ना?
- 2:15:32और किसी केस में इसको डेटा चाहिए और ए से
- 2:15:33चाहिए तो ये सर्वर बन जाएगा। ये क्लाइंट
- 2:15:35बन जाएगा। बस इतना। अब ये यूज़ कहां होता
- 2:15:38है भैया? अरे ये बहुत ज्यादा यूज़ होता है
- 2:15:40भाई। यह कहां-कहां यूज़ हो सकता है? यह यूज़
- 2:15:42हो सकता है भाई साहब। आपने टॉरेंट का अगर
- 2:15:44आपने नाम सुना हो, अगर कोई हमारे बीच
- 2:15:46पुराना खिलाड़ी बैठा हो जिसको टॉरेंट के
- 2:15:47बारे में पता हो, तो bिटरेंट बेसिकली इसी
- 2:15:50टेक पे काम करता था। पीयर टू पीियर
- 2:15:51आर्किटेक्चर पे ही काम करता था। आपने शायद
- 2:15:54ब्लॉकचेन के बारे में सुना होगा। बिटकॉइन,
- 2:15:57इथर इन सब चीजों में क्या चलता है? इन सभी
- 2:16:00चीजों में डीसेंट्रलाइज सिस्टम चलता है।
- 2:16:01पीियर टू पीियर आर्किटेक्चर चलता है। कोई
- 2:16:03सेंट्रल बॉडी नहीं है जो कनेक्ट कर रही है
- 2:16:05सभी लोगों को जो सबको चलाने में हेल्प
- 2:16:07करे। ना सभी लोग एज अ क्लाइंट और एज अ
- 2:16:10सर्वर एक्ट कर रहे हैं वहां पे और एक
- 2:16:12दूसरे के लिए माइनिंग कर रहे हैं भाई
- 2:16:13बेहतरीन लेवल पे। ठीक है? तो दिस इज़ पीियर
- 2:16:15टू पीियर आर्किटेक्चर एंड दिस वाज़ क्लाइंट
- 2:16:17सर्वर आर्किटेक्चर। तो अब थोड़ा डिटेल में
- 2:16:20समझते हैं प्रोटोकॉल्स के बारे में कि
- 2:16:22प्रोटोकॉल्स क्या होते हैं। ठीक है? मैं
- 2:16:25HTTP, TCP,
- 2:16:28यूडीp और आईपी इन सब के बारे में आगे जाके
- 2:16:32बताऊंगा। लेकिन मैं ये जो वर्ड है ना यहां
- 2:16:34पर ये जो लिखा हुआ है प्रोटोकॉल्स इसका
- 2:16:36एग्जैक्टली मतलब क्या होता है? तो
- 2:16:37प्रोटोकॉल्स का मतलब होता है दोस्तों सेट
- 2:16:41ऑफ
- 2:16:43रूल्स। सेट ऑफ रूल्स यानी कि डेटा मेरा
- 2:16:47मतलब डेटा भी छोड़ो। मान लेते हैं इंटरनेट
- 2:16:49पे हमारे कंप्यूटरटर्स हैं। वो किस तरीके
- 2:16:52से कम्युनिकेट करेंगे। वो किस तरीके से एक
- 2:16:54दूसरे को डेटा भेजेंगे। वो किस तरीके से
- 2:16:56दूसरे का डेटा रिसीव करेंगे। इंटरनेट पे
- 2:16:58डेटा किस तरीके से ट्रांसफर होगा? ये सब
- 2:17:01बताते हैं हमारे प्रोटोकॉल्स। प्रोटोकॉल्स
- 2:17:03मतलब होते हैं रूल्स। इंटरनेट पे अवेलेबल
- 2:17:05चीजों को किस तरीके से हमें परफॉर्म करना
- 2:17:07है उनके बनाए हुए रूल्स होते हैं ये
- 2:17:09प्रोटोकॉल्स। ठीक है जी? तो अगर कभी भी
- 2:17:12आपके मन में ये सवाल आता है प्रोटोकॉल्स
- 2:17:14क्या होते हैं? तो प्रोटोकॉल्स का मतलब है
- 2:17:15यूज़ रूल्स जैसे कि मान लेते हैं कि टीसीp
- 2:17:18तो ये एक तरीके का रूल है। ट्रांसमिशन
- 2:17:20कंट्रोल प्रोटोकॉल एक तरीके का रूल है।
- 2:17:22वैसे ही आईपी इंटरनेट प्रोटोकॉल ये एक
- 2:17:23तरीके का रूल है। सिंपल है ना? तो अब एक
- 2:17:25एग्जांपल के साथ समझते हैं। मान लेते हैं
- 2:17:27ये हूं मैं और मान लेते हैं ये है मेरा
- 2:17:30दोस्त। ठीक है? है कोई परेशानी नहीं है।
- 2:17:32अब हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे हैं।
- 2:17:34हम दोनों कम्युनिकेट कर रहे हैं। जैसे मान
- 2:17:36लेते हैं डिवाइसेस हैं इंटरनेट पे वैसे ही
- 2:17:38हम लोग हैं। हम दोनों एक दूसरे से
- 2:17:39कम्युनिकेट कर रहे हैं। तो होता क्या है
- 2:17:40ना? हम दोनों को एक भाषा आती है जिससे हम
- 2:17:42एक मीडियम निकाल पाते हैं बातचीत करने का।
- 2:17:44वो भाषा है मान लेते हैं अभी के लिए
- 2:17:46हिंदी। वैसे तो हमें इंग्लिश भी आती है
- 2:17:48लेकिन अभी हम हिंदी में बात करते हैं। मान
- 2:17:49लेते हैं। है ना? तो मान लेते हैं मैंने
- 2:17:50यहां पर बात करी हिंदी में और इसने मुझे
- 2:17:53आंसर दे दिया अभी के लिए मान लेते हैं
- 2:17:54काहे में? हिंदी में। कोई परेशानी यहां तक
- 2:17:57कोई परेशानी नहीं। तो मैंने कुछ इससे बोला
- 2:17:59हिंदी में। इसने उसको समझा और उसके
- 2:18:01अकॉर्डिंग मुझे रिस्पांस दिया हिंदी में।
- 2:18:03फिर इसने मुझसे कुछ बोला। मैंने उसके
- 2:18:04अकॉर्डिंग इसको रिस्पांस दिया हिंदी में।
- 2:18:05तो हम लोग अभी हिंदी में बात कर रहे हैं।
- 2:18:07लेकिन अगर मान लेते हैं कि मेरे दोस्त को
- 2:18:10हिंदी नहीं आती है। मान लेते हैं उसको आती
- 2:18:13है चाइनीस। और मुझे क्या आती है? मुझे आती
- 2:18:16है हिंदी। तो मैं उससे बोलूंगा हिंदी में
- 2:18:18और मुझे जवाब देगा चाइनीस में। अब इसको
- 2:18:20हिंदी नहीं आती और मुझे चाइनीस नहीं आती।
- 2:18:21तो क्या मैं जो बोलूंगा इसको समझ आने वाला
- 2:18:24है? क्या ये जो बोलेगा क्या वो मुझे समझ
- 2:18:26में आने वाला है? क्या हमारे बीच में
- 2:18:28कम्युनिकेशन हो पाएगी? नहीं हो पाएगी। तो
- 2:18:30वहां पर रोल में आते हैं कौन? हमारे
- 2:18:31प्रोटोकॉल्स। प्रोटोकॉल्स आर दी सेट ऑफ
- 2:18:33रूल्स कि किस भाषा में आप बात करेंगे यह
- 2:18:35डिसाइडेड है पहले से ही। तो इस वजह से
- 2:18:37हमारे इंटरनेट पे कम्युनिकेशन बहुत ज्यादा
- 2:18:39आसान हो जाता है। जस्ट बिकॉज़ ऑफ़
- 2:18:42प्रोटोकॉल्स। बढ़िया। अब प्रोटोकॉल्स का और
- 2:18:44क्या-क्या रोल होता है भैया? प्रोटोकॉल्स
- 2:18:46के और भी कई सारे रोल्स होते हैं। मैं
- 2:18:48आपको एक-एक करके सब कुछ लिख के बता देता
- 2:18:50हूं। लेट मी शो यू। ये तो हमें समझ में आ
- 2:18:51गया कि सेट ऑफ रूल्स कहलाते हैं हमारे
- 2:18:54प्रोटोकॉल्स। और इसका क्या-क्या रोल है?
- 2:18:55इसका पहला रोल है डेटा किस तरीके से एक
- 2:18:58जगह से दूसरी जगह जाएगा यह डिसाइड करना।
- 2:19:02डेटा पहुंचा या नहीं पहुंचा ये चेक करना।
- 2:19:05एकनॉलेज करना। डेटा ढंग से पहुंचा या नहीं
- 2:19:07पहुंचा। है ना? अगर डेटा ढंग से नहीं
- 2:19:09पहुंचा है तो फिर से डेटा को सेंड करना।
- 2:19:12रीसेंड एंड देन फिर एकनॉलेज करना। ये इन
- 2:19:15रूल्स इन प्रोटोकॉल्स का काम होता है।
- 2:19:17रूल्स हैं ना ये बेसिकली। ये चेक करते हैं
- 2:19:19कि भाई साहब डेटा कैसे जाएगा? किस रास्ते
- 2:19:21से जाएगा? क्या राउटिंग लगेगी उसमें?
- 2:19:23एकनॉलेजमेंट करेगा कि भाई पहुंचा या नहीं
- 2:19:25पहुंचा मतलब सक्सेसफुली पहुंच गया नहीं
- 2:19:28पहुंचा तो उसको फिर से भेजेगा है ना
- 2:19:30इंटरनेट पे किस तरीके से हमारे डेटा की
- 2:19:32राउटिंग वगैरह सब होगी ये तो बेसिकली इसका
- 2:19:34काम नहीं है लेकिन ये प्रोटोकॉल्स आपको
- 2:19:36समझ में आ रहे हैं काम किस तरीके से कर
- 2:19:37रहे हैं इंटरनेट पे जो भी कार्यक्रम हमारा
- 2:19:40चल रहा है उसके लिए हमने बनाए हैं कुछ
- 2:19:42रूल्स आपको आई होप ये समझ आ रहा है राइट
- 2:19:44भैया और क्या-क्या यूज़ केस होते हैं इसके
- 2:19:46इसका एक काम और होता है कि भाई आपने जो
- 2:19:48डाटा भेजा है उसको वेरीफाई भी तो करेगा
- 2:19:51वेरीफाई नहीं करेगा क्या कि भाई डेटा
- 2:19:52पहुंच गया तो सही सही सलामत पहुंचा। कोई
- 2:19:54दिक्कत परेशानी तो नहीं है। उसमें सही
- 2:19:55डेटा है या नहीं है ये भी वेरीफाई करने का
- 2:19:57काम करता है। ठीक है? सारा का सारा डेटा
- 2:19:59पहुंच गया नहीं पहुंचा ये भी करने का काम
- 2:20:01करता है हमारा। तो मतलब एग्जांपल सब
- 2:20:03छोड़ो। बस इतना समझो। दीज़ आर
- 2:20:07दी सेट ऑफ कम्युनिकेशन। सेट ऑफ रूल्स
- 2:20:10व्हिच कैन बी हेल्पफुल टू परफॉर्म
- 2:20:13कम्युनिकेशन बिटवीन मल्टीपल डिवाइसेस।
- 2:20:15जैसे मान लेते हैं कि मैंने अपने डिवाइस
- 2:20:17से सर्वर पर कोई रिक्वेस्ट भेजी।
- 2:20:23ठीक है? मान लेते हैं मैंने कोई रिक्वेस्ट
- 2:20:24भेजी। तो मैं जो रिक्वेस्ट भेजूंगा, यह
- 2:20:26किस प्रोटोकॉल से होती हुई जाएगी? यह
- 2:20:27जाएगी एचटीटीp के थ्रू होते हुए। http
- 2:20:30प्रोटोकॉल बोल लेते हैं अभी के लिए। और जो
- 2:20:32रिस्पांस आएगा वो भी मेरे को एचटीटीपी
- 2:20:34प्रोटोकॉल को फॉलो करते हुए ही आएगा। तो
- 2:20:36अब यहां पे क्या हुआ? यहां पे प्रोटोकॉल
- 2:20:38का यूज़ हुआ कि भाई साहब डेटा किस तरीके
- 2:20:40से रिक्वेस्ट जा रही है, रिस्पांस आ रहा
- 2:20:41है। ये एक मैंने एक छोटा सा एग्जांपल
- 2:20:43बताया है। ठीक है? अब हम एक-एक करके सारे
- 2:20:45प्रोटोकॉल्स को समझने की तरफ चलते हैं।
- 2:20:47लेट्स गो। तो इसमें से सबसे पहला एचटीटीपी
- 2:20:50उसके बाद आएगा आईपी उसके बाद आएगा टीसीp
- 2:20:53और लास्ट में आएगा यूडीपी तो एक-एक करके
- 2:20:55सबको समझने की चल तरफ चलते हैं। चलो तो अब
- 2:20:58समझते हैं http और https यानी कि
- 2:21:02हाइपर
- 2:21:04टेक्स्ट
- 2:21:07ट्रांस
- 2:21:10ट्रांसमिशन
- 2:21:13प्रोटो कॉल यह बेसिकली एक एप्लीकेशन लेयर
- 2:21:17प्रोटोकॉल है और एप्लीकेशन लेयर क्या होती
- 2:21:19है यह तो मुझे शायद बताने की जरूरत है ही
- 2:21:21नहीं यह एक एप्लीकेशन लेयर
- 2:21:25प्रोटो कॉल
- 2:21:27है एप्लीकेशन लेयर प्रोटोकॉल भैया
- 2:21:30एप्लीकेशन लेयर क्या होती है ओएसआई मॉडल
- 2:21:32में बताया है ध्यान से देख लेना जाके ठीक
- 2:21:34है जी तो एप्लीकेशन लेयर प्रोटोकॉल यानी
- 2:21:36कि http या फिर एचtटीपीएस ये बेसिकली क्या
- 2:21:39करते हैं ना ये हमारे ब्राउज़र यानी कि
- 2:21:42क्लाइंट को सर्वर से जोड़ने का काम करते
- 2:21:44हैं और ये बेसिकली हमारे बीच में कनेक्शन
- 2:21:47एस्टैब्लिश करने का काम करते हैं। डेटा
- 2:21:48किस तरीके से आगे जा रहा है उस चीज को
- 2:21:50देखते हैं और एक सेट ऑफ रूल्स के थ्रू
- 2:21:52बताते हैं कि भाई डेटा सही तरीके से जा भी
- 2:21:54रहा है या नहीं जा रहा या फिर आ गया डेटा
- 2:21:56या नहीं आया क्या रिस्पांस क्या आया जैसे
- 2:21:57फॉर एग्जांपल फॉर एग्जांपल मैंने कहा दिस
- 2:22:01इज़ मान लेते हैं दिस इज़ मी मैंने कहा कि
- 2:22:05भाई आई वांट टू एक्सेस google.com मैंने
- 2:22:08इससे बोला कि मुझे चाहिए
- 2:22:10भाई
- 2:22:12google कोई परेशानी नहीं अब यह है
- 2:22:15google.com का सर्वर तो यहां से क्या हुआ।
- 2:22:18यहां से क्या हुआ? यहां से आया रिस्पांस
- 2:22:21कि लो भाई
- 2:22:22HTML सीएसएस और जेएस पेज। क्या हुआ यहां
- 2:22:26पे? मैंने रिक्वेस्ट किया
- 2:22:29Google.com का होम पेज खोल के दो। और इसने
- 2:22:32क्या करा? उसने मुझे रिस्पांस में तीनों
- 2:22:34पेजेस दे दिए। मतलब पूरा पेज दे दिया विद
- 2:22:36दीज़ फाइल्स। तो इससे क्या हो जाएगा? इससे
- 2:22:38हो ये जाएगा कि यहां पर मेरे को
- 2:22:39Google.com ओपन होता हुआ दिख जाएगा। अब
- 2:22:41यहां पर यूज़ हुआ है HTTP हाइपर टेक्स्ट
- 2:22:45ट्रांसमिशन प्रोटोकॉल जिसने मेरी
- 2:22:46रिक्वेस्ट को मेक श्योर करा कि वो लास्ट
- 2:22:48तक पहुंच जाए और जो भी मेरा रिस्पांस आया
- 2:22:50वो मेक श्योर करा कि मुझ तक वापस में आ
- 2:22:52जाए। तो ये था HTTP प्रोटोकॉल एप्लीकेशन
- 2:22:55लेयर प्रोटोकॉल होता है। लेकिन HTTPS क्या
- 2:22:57होता है भैया? HTTPS बेसिकली सिक्योर
- 2:23:00वर्जन होता है http का। क्योंकि प्रॉब्लम
- 2:23:03क्या होती है ना? मान लेते हैं कि मैंने
- 2:23:05कोई डेटा की डिमांड करी। मैंने बोला कि
- 2:23:07भाई ठीक है मुझे google.com खोल के दे दो।
- 2:23:10अब दिक्कत क्या होगी ना वह जो डाटा आएगा
- 2:23:11वह प्लेन टेक्स्ट के फॉर्म में आ जाएगा और
- 2:23:13मेरी जो रिक्वेस्ट जा रही है वह भी नॉर्मल
- 2:23:15तरीके से जाएगी। तो प्रॉब्लम बस यह हो
- 2:23:16जाएगी कि कोई हैकर बीच में आके हमारी
- 2:23:19कनेक्शन को तोड़ सकता है। इंफॉर्मेशनेशन
- 2:23:21जो है इंपॉर्टेंट हमारी वो सब ले सकता है।
- 2:23:23ठीक है? तो हम क्या कर सकते हैं? हम वहां
- 2:23:25पर लगाते हैं
- 2:23:28एचटीटीपीएस हाइपर टेक्स्ट ट्रांसमिशन
- 2:23:30प्रोटोकॉल सिक्योर। इट इज़ बेसिकली अ h
- 2:23:34एचtटीp प्लस सिक्योरिटी।
- 2:23:39अच्छा क्या मतलब होता है इसका भैया? इसका
- 2:23:41मतलब यह होता है बेसिकली कि आप जो भी डाटा
- 2:23:44एक जगह से दूसरी जगह भेज रहे हैं यहां पर
- 2:23:46हो जाता है भाई साहब
- 2:23:48इंक्रिप्शन। इंक्रिप्शन क्या होता है
- 2:23:50भैया? इंक्रिप्शन। वही डेटा को भाई साहब
- 2:23:52इस फॉर्म में कन्वर्ट करना कि जो भी मैंने
- 2:23:54रिक्वेस्ट की है वो मेरा सिर्फ सर्वर
- 2:23:56रिॉल्व कर पाए और सर्वर से जो रिस्पांस
- 2:23:58आया है वो सिर्फ मैं रिज़ॉल्व कर पाऊं। ठीक
- 2:24:00है? यहां पर हमारे पास कीज़ होती हैं जिससे
- 2:24:02ऐसा समझ लो कि पहले मैं एक लिफाफा भेज रहा
- 2:24:06था। मान लेते हैं अपने सर्वर पे मैं
- 2:24:08क्लाइंट हूं। मैं एक लिफाफा भेज रहा था
- 2:24:10सर्वर पे। पे वो लिफाफा खुला हुआ था। तो
- 2:24:12बीच में अगर कोई दिमाग वाला इंसान होता तो
- 2:24:14वो उस लिफाफा को बैठ के पढ़ सकता था।
- 2:24:16लेकिन अब मैं जो लिफाफा भेज रहा हूं वो
- 2:24:19मैं एक संदूक के अंदर एक बॉक्स के अंदर
- 2:24:21पैक करके भेज रहा हूं जिसमें मैंने
- 2:24:22पासवर्ड डाल दिया। अब पासवर्ड सिर्फ मेरा
- 2:24:24सर्वर जानता है। तो मैंने यहां से डेटा
- 2:24:26भेजा सर्वर पे और सर्वर मेरी उस रिक्वेस्ट
- 2:24:29को देखेगा। उसके अकॉर्डिंग मेरे को
- 2:24:31रिस्पांस देगा। तो उसने मुझे जो रिस्पांस
- 2:24:33दिया है वो भी मुझे एक बॉक्स के अंदर रख
- 2:24:34के दिया है। तो सिर्फ मुझे ही उसका
- 2:24:36पासवर्ड पता है। तो सिर्फ मैं ही उसको देख
- 2:24:38सकता हूं। तो ये फायदा होता है https का।
- 2:24:41ठीक है? https कहां यूज़ होता है भैया?
- 2:24:43जैसे ही कोई बैंकिंग साइट हो गई या फिर
- 2:24:46कहीं भी जहां पे हमें हमारी साइट को
- 2:24:48सिक्योर बनाना है, हम यूज़ करते हैं https।
- 2:24:51आई होप आपको ये समझ आ रहा है। मतलब अगर हम
- 2:24:53समझे ध्यान से तो HTP सर्वर्स क्या होते
- 2:24:55हैं? एच एचटीटीp प्रोटोकॉल्स क्या होते
- 2:24:57हैं? आई एम रियली सॉरी। तो ये बेसिकली
- 2:24:59कनेक्शन बैठाने का काम करते हैं।
- 2:25:01एप्लीकेशन लेयर प्रोटोकॉल्स होते हैं।
- 2:25:03ब्राउज़र्स पे ज्यादातर काम करते हैं। वेब
- 2:25:05के लिए ही स्पेशली बनाए गए हैं। और HTTP
- 2:25:08काम करता है पोर्ट नंबर 80 पे। ये इसका
- 2:25:11पोर्ट है। पोर्ट बताने की जरूरत है ही
- 2:25:13नहीं अब शायद। और HTTPS काम करता है 443
- 2:25:17पे। ठीक है? ये HTTP एस का है। ये HTTP का
- 2:25:21है। समझ आ रही है मेरी बात? तो ये दोनों
- 2:25:22अलग-अलग पोर्ट्स पे काम करते हैं। HTTP
- 2:25:25क्या करता है? एचटीटीपी भाई साहब कनेक्शन
- 2:25:26इस्टैब्लिश कनेक्शन किस तरीके से चल रहा
- 2:25:29है डाटा पहुंचा नहीं पहुंचा उसको कोई बीच
- 2:25:32में मतलब कोई रीड तो नहीं कर रहा सिक्योर
- 2:25:34है या नहीं है और इन सब चीजों को देखने का
- 2:25:36काम कौन करेगा एचटीटीपी आई सॉरी
- 2:25:37सिक्योरिटी का नहीं करेगा बाकी सबका काम
- 2:25:39करेगा कौन एचटीटीp और https http प्लस
- 2:25:42सिक्योरिटी और ये यूज़ करता है मुझे थोड़ी
- 2:25:46सी जगह बनानी
- 2:25:48चाहिए ये दोनों ही बाय द वे
- 2:25:52हमारे ये दोनों ही बाय द वे हमारे
- 2:25:54एप्लीकेशन में काम करते हैं लाइव
- 2:25:56एप्लीकेशन लेयर में तो यहां पर काम में
- 2:25:58आता है कौन यहां पर काम में आती है
- 2:26:03एसएसएल सिस्टम
- 2:26:11सॉकेट 1 मिनट रुकना बस है
- 2:26:18ना एसएसएल का सिक्योर सॉकेट लेयर
- 2:26:21ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी
- 2:26:24ठीक
- 2:26:26हम तो यहां पर काम में आते हैं तो यहां पर
- 2:26:30काम में आते हैं एसएसएल और टीएसएल। टीएसएल
- 2:26:34बेसिकली एसएसएल का ही एक तरीके से कह सकते
- 2:26:36हैं हम अपग्रेडेड वर्जन है। एसएसएल
- 2:26:37सिक्योर सॉकेट लेयर और टीएसएल होता है
- 2:26:41ट्रांसपोर्ट सिक्योरिटी लेयर। कुछ इस
- 2:26:42तरीके से होता है। मुझे एक बार उसका फुल
- 2:26:44फॉर्म देखना पड़ेगा। लेकिन ये बेसिकली
- 2:26:46क्या करते हैं? ये हमारे जो भी हमारी
- 2:26:49रिक्वेस्ट है या फिर जो भी हमारा रिस्पांस
- 2:26:51है उनको उसको इंक्रिप्ट कर देते हैं और ये
- 2:26:53मेक श्योर करते हैं कि हम जो डेटा यहां से
- 2:26:56वहां तक जा रहा है वो प्राइवेसी के थ्रू
- 2:26:58ढंग से ट्रांसफर हो जाए और नहीं हो रहा है
- 2:27:00तो भाई मुझे बता दो कि भाई ये सिक्योर
- 2:27:02नहीं है मत जाओ इसकी तरफ समझ रहे हो मेरी
- 2:27:03बात क्या है यहां पे तो ये फायदा होता है
- 2:27:05हमारे http प्रोटोकॉल का हम जब वेब पे काम
- 2:27:08करते हैं तो क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर
- 2:27:09में इसका बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट रोल होता
- 2:27:11है। ठीक है जी। तो मैंने आपको जितना अभी
- 2:27:13तक बताया है उससे आपको दिमाग में एक चीज
- 2:27:15तो क्लियर हो गई होगी एचटीटीपी और
- 2:27:16एचटीटीपीएस क्या होता है? आई होप आपको समझ
- 2:27:18आया। अब हम बढ़ते हैं आईपी की तरफ। लेट्स
- 2:27:21गो। मैं जब वीडियो बनाने बैठता हूं ना तो
- 2:27:23मैं साथ में पानी खाने-पीने के लिए कुछ
- 2:27:25जैसे अभी बिस्किट रखे हुए हैं तो वो होगा
- 2:27:27बिस्किट विद कोड। समझो ध्यान से। हम आते
- 2:27:29हैं भाइयों इंटरनेट प्रोटोकॉल के ऊपर।
- 2:27:31इंटरनेट प्रोटोकॉल यानी कि हमने एचटीटीपी
- 2:27:33समझ लिया। इंटरनेट प्रोटोकॉल क्या होता
- 2:27:35है? इट इज बेसिकली अ नेटवर्क
- 2:27:39लेयर प्रोटोकॉल। http क्या था? क्या था?
- 2:27:43क्या था? जल्दी बताओ। एप्लीकेशन लेयर ना?
- 2:27:45ये क्या है? नेटवर्क लेयर प्रोटोकॉल। इसका
- 2:27:47क्या काम है भैया? इसका काम बस इतना है कि
- 2:27:50जैसे मान लेते हैं कि मेरा कोई कूरियर है।
- 2:27:53मान लेते हैं मेरा कोई कूरियर है जो आगे
- 2:27:56ट्रांसफर होना है। तो इसका काम बस ये है
- 2:27:58कि
- 2:27:59उसमें सोर्स का आईपी ऐड करना और
- 2:28:04डेस्टिनेशन का आईपी ऐड
- 2:28:07करना। मतलब कि मान लेते हैं मैं भोपाल से
- 2:28:10मुंबई कोई अ कोई कुछ लेटर भेजना चाहता
- 2:28:14हूं। तो अभी हमने क्या करा है ना? अभी
- 2:28:16हमने सिर्फ उस पे अपना एड्रेस लिखा है।
- 2:28:18कहां पहुंचेगा उसका एड्रेस लिखा है और
- 2:28:20पोस्ट कर दिया। अब पहुंचे नहीं पहुंचे
- 2:28:22नहीं पहुंचे तो क्या करना है? इससे हमें
- 2:28:24कोई मतलब नहीं है। इंटरनेट प्रोटोकॉल का
- 2:28:26काम ही यही है। बस इसका बस यही काम है।
- 2:28:28इसका काम क्या है भैया? इसका काम ये है कि
- 2:28:31एक नेटवर्क लेयर प्रोटोकॉल है। तो इसका
- 2:28:33काम है हमारी सोर्स आईपी, डेस्टिनेशन आईपी
- 2:28:35को बनाना लगाना वहां पे और डेटा को बताना
- 2:28:39कि भाई आपको यहां जाना है और आप यहां से
- 2:28:41निकले हो। तो जब डेटा पहुंचेगा तो वहां पर
- 2:28:43भी सोर्स और डेस्टिनेशन की आईपी और सेम
- 2:28:45इसी तरीके से इंटरनेट प्रोटोकॉल का काम
- 2:28:47होता है। अब इंटरनेट प्रोटोकॉल अलोन इज
- 2:28:49नॉट वेरी पावरफुल बट व्हेन इट कंबाइंस विद
- 2:28:52टीसीपी यानी कि ट्रांसमिशन कंट्रोल
- 2:28:54प्रोटोकॉल तब ये बहुत पावरफुल हो जाता है।
- 2:28:56क्या हो जाता है भैया? टीसीपी तो मतलब ऐसा
- 2:28:58समझ लो कि भाई हमारी स्टोरी का हीरो है।
- 2:29:01मतलब बिल्कुल एकदम ट्रांसमिशन कंट्रोल
- 2:29:03प्रोटोकॉल ऊपर लिखा हुआ है। फुल फॉर्म मैं
- 2:29:05दोबारा नहीं लिख रहा। यह बेसिकली ना बहुत
- 2:29:07ज्यादा रिलायबल और सबसे अच्छा बंदा है।
- 2:29:10मतलब ऐसा समझ लो कि इसके ऊपर डिपेंड होया
- 2:29:14जा सकता है। ही इज़ लाइक विराट कोहली ऑफ़ ऑल
- 2:29:16दी ऑल दी लाइक नेटवर्क है ना कि मतलब TCP
- 2:29:19है तो चलो ठीक है डाटा सही से सिक्योर हो
- 2:29:21जाएगा भाई। मतलब विराट बचा है तो अब बन
- 2:29:23जाएंगे। रन चज़ हो जाएगा। वैसे ही सेम TCP
- 2:29:25के साथ है। TCP इज़ लाइक वेरी रिलायबल। यह
- 2:29:28क्या करता है? इसके क्या-क्या रोल्स होते
- 2:29:29हैं? इसका पहला रोल तो होता है कि डेटा को
- 2:29:31पैकेट्स के फॉर्म में तोड़ना।
- 2:29:34जो पैकेट्स बने हैं सभी पैकेट्स पर
- 2:29:36सीक्वेंसिंग
- 2:29:41करना और क्या करता है भैया ये अ पैकेट्स
- 2:29:44पे सीक्वेंसिंग करता है। पैकेट्स के फॉर्म
- 2:29:46में तोड़ा है डेटा को। एकनॉलेज करता है कि
- 2:29:48डेटा ढंग से पहुंचा या नहीं पहुंचा। और
- 2:29:50अगर नहीं पहुंचा तो फिर से करता है। फिर
- 2:29:54से डेटा को सेंड करता है। मतलब बहुत
- 2:29:56ज्यादा रिलायबल एक तरीके से कह सकते हैं
- 2:29:59अपन लोग डिलीवरी बॉय जो डेटा को ढंग से एक
- 2:30:01जगह से दूसरी जगह पहुंचाना कि का बहुत
- 2:30:03अच्छे से काम करता है। और साथ में ये जो
- 2:30:05पैकेट्स आए हैं इनकी सीक्वेंसिंग करना।
- 2:30:07मतलब पैकेट्स के फॉर्म में डेटा को तोड़
- 2:30:09दिया। मैंने बताया था ना 11 लोगों का बड़ा
- 2:30:11सा कूरियर था। उसको 11 छोटे-छोटे कूरियर्स
- 2:30:13में तोड़ा। सब पे एक-एक करके नाम लिख दिया
- 2:30:15और फिर उसके बाद उसको भेजा। चेक करा कि वो
- 2:30:18ढंग से पहुंचा या नहीं पहुंचा। समझ रहे हो
- 2:30:20ना मैं क्या कहना चाह रहा हूं और याद रखना
- 2:30:21इट इज अ ट्रांसपोर्ट लेयर
- 2:30:25प्रोटोकॉल कौन सा लेयर ट्रांसपोर्ट लेयर
- 2:30:28प्रोटोकॉल भैया ट्रांसपोर्ट लेयर मतलब
- 2:30:30क्या होता है ट्रांसपोर्ट लेयर तुमको बता
- 2:30:31दिया ओएसआई ने मत करो नौटंकी अभी है ना
- 2:30:33पता है तुम लोगों को सुनो तो यहां पर जाके
- 2:30:36मैंने बता दिया पैकेट्स को तोड़ना मतलब वो
- 2:30:39कूरियर्स को तोड़ना सीक्वेंसिंग कर दिया
- 2:30:41उस पे अब ये मेक श्योर करेगा कि वो सब
- 2:30:43अच्छे तरीके से पहुंच जाए अगर कोई एक बीच
- 2:30:45में चारप नंबर का छूट गया या सात नंबर का
- 2:30:47छूट गया हमारे थाला भाई का किट छूट गया
- 2:30:49शेरियंस का। तो हमने क्या करा? हमने उसको
- 2:30:51दोबारा सेंड करा। और जब दोबारा वहां पर
- 2:30:53पहुंचा तो उनको वापस से अरेंज करा अच्छे
- 2:30:55से। वापस से अरेंज करने के बाद सीक्वेंस
- 2:30:57के अकॉर्डिंग उनको मेक श्योर करा कि उसी
- 2:30:59सीक्वेंस में पहुंचे जिस सीक्वेंस में
- 2:31:00सेंडर उनको पहुंचाना चाहता था। समझ रहे हो
- 2:31:03ना मैं कहना क्या चाह रहा हूं? दिस इज दी
- 2:31:05रोल ऑफ़ टीसीपी। और ये बहुत काम की चीज है
- 2:31:08भाई। ठीक है जी। अब ये ऐसा समझ लो कि मान
- 2:31:11लेते हैं कि शादी है और शादी में एक वो जो
- 2:31:14नहीं होते जिनके बेटे की शादी होती है या
- 2:31:16जो ससुर टाइप जो होते हैं जो सब जितने भी
- 2:31:19मेहमान होते हैं उनसे ये बोलते हैं कि
- 2:31:20खाना जरूर खा के जाना। भाई खाना जरूर खा
- 2:31:22के जाना। मतलब वो सबसे यही बोलते हैं खाना
- 2:31:24जरूर खा के जाना। क्यों कर रहे हैं वो
- 2:31:26ऐसा? क्योंकि वो मेक श्योर कर रहे हैं कि
- 2:31:28अगर कोई आया है तो वो जब यहां से निकले तो
- 2:31:31वो खाना जरूर खा के निकले। समझ पा रहे हो
- 2:31:33ना? वैसे ये कुछ ऐसा समझ लो। ये है
- 2:31:35टीसीपी। टीसीपी क्या करता है? दिस इज़
- 2:31:37गोइंग टू मेक श्योर डेटा ढंग से एक जगह से
- 2:31:39दूसरे जगह पहुंच रहा है, नहीं पहुंच रहा,
- 2:31:40सही तरीके से पहुंच रहा है। नहीं पहुंच
- 2:31:42रहा तो फिर से उसको भेज रहा है। और ये है
- 2:31:43बिगड़ा हुआ सा लौंडा। दिस इज़ नोन एज यूडीपी
- 2:31:46यूजर डेटा ग्राम प्रोटोकॉल। ये ऐसा समझ लो
- 2:31:49कि जस्ट अपोजिट है TCP का। ये क्या करता
- 2:31:51है ना डेटा बहुत फास्ट ट्रैवल करेगा। मतलब
- 2:31:55बहुत फास्ट ट्रैवल करेगा। है ना? डेटा को
- 2:31:58पैकेट्स के फॉर्म में तोड़ तो दिया था
- 2:31:59आपने। बहुत अच्छा किया था तोड़ के। आपने उस
- 2:32:02डेटा को भेज भी दिया था। लेकिन यहां पे
- 2:32:04कोई सीक्वेंसिंग नहीं है। मतलब ऐसे समझ
- 2:32:08लो सीक्वेंसिंग मान लेते हैं है ही नहीं
- 2:32:12और यहां पे कोई एकनॉलेजमेंट भी नहीं है।
- 2:32:14और डेटा को फिर से भेजने का तो कोई खेल ही
- 2:32:16नहीं है। मतलब ऐसे समझ लो कि वो जो अंकल
- 2:32:18थे ना वो खाना जरूर खा के जाना बेटा। खाना
- 2:32:20जरूर खा के जाना दोस्तों। खाना जरूर खा के
- 2:32:22जाना। तो वो जो अंकल थे ये उनकी तरह नहीं।
- 2:32:24इसने क्या करा ना? इसने बस एक बार बोल
- 2:32:26दिया माइक में अ खाना बन गया है। जिस-जिस
- 2:32:29को खाना है आ जाओ। अब जिसने सुना वो आ
- 2:32:32जाएगा। जिसने नहीं सुना वो नहीं आएगा।
- 2:32:33मतलब समझ रहे हो ना? इसका काम है डेटा को
- 2:32:35बहुत फास्ट पहुंचाना। एक जगह से दूसरी
- 2:32:37जगह। अब वो पूरी तरीके से पहुंचा नहीं
- 2:32:40पहुंचा ये दिक्कत नहीं है। मतलब ये हमारा
- 2:32:42काम नहीं है। अब ठीक है। पहुंचे तो पहुंचे
- 2:32:44नहीं पहुंचे तो नहीं पहुंचे। अगली बार में
- 2:32:45समझेंगे। लेकिन बहुत फास्ट जा रहा है। तो
- 2:32:47ये भी काफी ज्यादा यूज़ होता है। तो भैया
- 2:32:49दोनों के अलग-अलग यूज़ केस होते हैं। मतलब
- 2:32:51ऐसा हां जी बिल्कुल। ठीक है। तो यूडीपी का
- 2:32:54कोच और अच्छे से बताओ। बता दिया ना वही
- 2:32:56सेम है यार। फास्ट डेटा को ट्रांसफर करता
- 2:32:58है। सीक्वेंसिंग करता है। एकनॉलेज नहीं
- 2:33:00सीक्वेंसिंग नहीं करता। एकनॉलेज भी नहीं
- 2:33:01करता। कुछ छूट गया तो दोबारा भी नहीं
- 2:33:03बेचता। समझ रहे हो मेरी बात? मैं क्या
- 2:33:05कहना चाह रहा हूं? और फास्ट इसलिए यूज़
- 2:33:07किया जाता है। और टीसीपी वही सब करता है
- 2:33:09जो ये नहीं कर रहा। है ना? और थोड़ा सा
- 2:33:11उसके कंपैरिजन में थोड़ा सा स्लो होता है।
- 2:33:14अच्छा। तो अ हम लोग टीसीपी कहां यूज़ करते
- 2:33:17हैं? और यूडीपी कहां यूज़ करते हैं? इसका
- 2:33:20बाय द वे मैंने एक नीचे डायग्राम भी बनाया
- 2:33:22है। लेकिन अभी के लिए समझ लेते हैं। टीसीp
- 2:33:25जहां पर मुझे रिलायबल और सिक्योरिटी के
- 2:33:27साथ मतलब कि भाई मेरे को जो भी डाटा चाहिए
- 2:33:29वो डाटा पूरी तरीके से आ जाए। जैसे कि
- 2:33:31बैंक की वेबसाइट में है ना या फिर कुछ
- 2:33:34ई-कॉमर्स वगैरह में या फिर अगर आपका बड़ा
- 2:33:36ब्रांड है या फिर आप कुछ भी ऐसा कुछ सिक
- 2:33:38मतलब जिसमें डाटा मुझे चाहिए कि भाई लॉस
- 2:33:41का मैं अफोर्ड नहीं कर सकता हूं। तो वहां
- 2:33:42पे डीसीपी ये कहां पर यूज़ होगा? लाइव
- 2:33:44स्ट्रीमिंग में एक दो फ्रेम्स गिर भी रहे
- 2:33:46हैं तो क्या दिक्कत है? मतलब मैं बोल रहा
- 2:33:48हूं और मेरे यहां पर तुमको आजू-बाजू में
- 2:33:49मेरे एक दो फ्रेम्स गायब दिख रहे हैं।
- 2:33:51मेरी एक आंख का फ्रेम गायब हो गया। क्या
- 2:33:52दिक्कत है? लाइव में अगर मान लेते। कहां
- 2:33:55यूज़ होता है? गेम्स
- 2:33:57में। कहां यूज़ होता है? वीडियो कॉल्स में।
- 2:34:01वॉइस कॉल्स में भी कई बार यूज़ होता है।
- 2:34:04ठीक है? वीडियो स्लैश वॉइस कॉल्स में।
- 2:34:06मतलब जैसे तुमने कभी देखा होगा ना कि मैं
- 2:34:07फोन पे बात कर रहा हूं और नेटवर्क का कई
- 2:34:09बार एरर आ जाता है। तो मैं कुछ बोलता हूं।
- 2:34:12हेलो कहां? आगे निकल गए। समझ रहे हो? मेरी
- 2:34:15बात मैं क्या कहना चाह रहा हूं? तो ये
- 2:34:16दोनों के अलग-अलग यूज़ केस हैं। तो मैंने
- 2:34:18एक डायग्राम भी बनाया है। मैं आपको दिखा
- 2:34:20देता हूं। काफी छोटा हो गया यह। तो इसको
- 2:34:22थोड़ा सा बड़ा कर लेते हैं। जस्ट
- 2:34:24अ
- 2:34:30मिनट हम
- 2:34:33ठीक है। बाय द वे मैं ये डायग्राम भी आपको
- 2:34:35प्रोवाइड करवा दूंगा। तो तो फुल फॉर्म तो
- 2:34:37मुझे बताने की जरूरत नहीं है। ट्रांसमिशन
- 2:34:38कंट्रोल प्रोटोकॉल, यूजर डाटा ग्राम
- 2:34:40प्रोटोकॉल, हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर
- 2:34:42प्रोटोकॉल, हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर
- 2:34:43प्रोटोकॉल, सिक्योर और इंटरनेट प्रोटोकॉल।
- 2:34:46अब किस-किस लेयर में काम करते हैं? यूडीपी
- 2:34:48और टीसीp तो अपने को पता ही चल गया।
- 2:34:50ट्रांसपोर्ट लेयर में है। ये एप्लीकेशन
- 2:34:51लेयर्स में हैं दोनों और ये नेटवर्क लेयर
- 2:34:53में है। कनेक्शन भाई कनेक्शन ओरिएंटेड है।
- 2:34:55लेकिन यूडीपी कनेक्शन लेस होता है। भाई
- 2:34:56कनेक्शन बिठाने की जरूरत नहीं। क्योंकि
- 2:34:58TCP में होता है
- 2:35:01थ्री वे हैंडशेक या थ्री स्टेप्स ऑफ
- 2:35:04हैंडशेक। जिसमें पहले क्या करता है? वो
- 2:35:06कनेक्शन बिठाता है। मतलब ऐसा समझ लो कि
- 2:35:08सबसे पहले वो क्या करेगा ना? मैं ये
- 2:35:10जल्दीबाजी में बताना भूल गया। लेकिन कोई
- 2:35:11बात नहीं फिर से बता दे रहा हूं। है ना?
- 2:35:13ये तीन तरीकों से कनेक्शन बिठाता है। पहले
- 2:35:15कि अ क्लाइंट की तरफ से ये कनेक्शन बिठाता
- 2:35:20है कि भाई मेरे को डेटा मांगने वाला हूं।
- 2:35:22मतलब मुझे ये ये डेटा चाहिए। फिर सर्वर की
- 2:35:24साइड से आता है
- 2:35:25रिस्पांस। हां, मैं रेडी हूं। ठीक है? और
- 2:35:28फिर तीसरे नंबर पे यहां पर डाटा का फ्लो
- 2:35:30चालू हो जाता है। तो यह कनेक्शन ओरिएंटेड
- 2:35:32है। और रही बात हमारी यूडीपी की तो इसमें
- 2:35:34कोई कनेक्शन सेटअप ही नहीं होता। तो डाटा
- 2:35:36तभी तो छूट जाता है ना यार मेरे भाई। ठीक
- 2:35:38है? और बाकी भी सब कनेक्शन लेस ही हैं।
- 2:35:40रिलायबल भाई साहब बहुत ज्यादा रिलायबल है।
- 2:35:43यूडीपी तो बिल्कुल भी नहीं है। ये भी नहीं
- 2:35:44है। ये रिलायबल नहीं कहलाते। लेकिन इसको
- 2:35:47अगर टीसीp के साथ ऐड कर दिया जाए तो ये भी
- 2:35:49रिलायबल हो जाते हैं। ठीक है? स्पीड टीसीp
- 2:35:52की कंपेरेटिवली स्लो है। यूडीपी की तो
- 2:35:54बिल्कुल एकदम ब्लेज़िंग फास्ट। ठीक है?
- 2:35:56http hटीtps दोनों का स्पीड थोड़ा सा मतलब
- 2:35:59दिक्कत इसलिए है क्योंकि ये थोड़ा सा बिना
- 2:36:02इंक्रिप्शन के आता है तो फास्ट आता है और
- 2:36:03ये इंक्रिप्शन के साथ आता है तो ये थोड़ा
- 2:36:05सा स्लो आता है। ठीक है और IP एड्रेस तो
- 2:36:08बस उसका काम ही क्या है सोर्स बना बता दो
- 2:36:10और डेस्टिनेशन बता दो बस चले जाऊंगा मैं
- 2:36:13तो बस इतना ही है। ठीक है? और यहां पर
- 2:36:15सारी चीजें लिखी हुई हैं। जैसे कि एरर
- 2:36:17हैंडलिंग सिर्फ टीसीp करता है। बाकी कोई
- 2:36:19नहीं करता। जैसे कि सिक्योरिटी किसी में
- 2:36:21इतनी ज्यादा सिक्योरिटी नहीं होती जितनी
- 2:36:23हमारे https में होती है। दिस इज मेड फॉर
- 2:36:26जस्ट सिक्योरिटी और इसमें भी थोड़ी बहुत
- 2:36:28तो होती हैं क्योंकि इसमें हम और भी कई
- 2:36:30सारे प्रोटोकॉल्स लगाते हैं। जैसे कि ईमेल
- 2:36:31बेच रहे हैं तो एसएमटीपी प्रोटोकॉल लगेगा।
- 2:36:33सिंपल मेल ट्रांसफर प्रोटोकॉल है ना इस
- 2:36:35तरीके से और इनके यूज़ के हिसाब के लिए
- 2:36:37लिखे हुए हैं ईमेल, वेब फाइल ट्रांसफर कर
- 2:36:39रहे हैं तो एफटीपी प्रोटोकॉल, वीडियो कॉल
- 2:36:41गेमिंग और स्ट्रीमिंग के लिए वेबसाइट को
- 2:36:44ब्राउज़ कर रहे हो तो http सिक्योर
- 2:36:45वेबसाइट्स बैंकिंग के लिए कर रहे हो https
- 2:36:48और राउटिंग बिटवीन डिफरेंट नेटवर्क्स। ठीक
- 2:36:49है? और पोर्ट नंबर भी आपके सामने यहां पर
- 2:36:51नीचे लिखे हुए हैं। तो आई होप आपको यहां
- 2:36:55तक प्रोटोकॉल्स समझ आ गए होंगे।
- 2:36:59कांग्रेचुलेशंस आपने ये वीडियो लास्ट तक
- 2:37:01देखा है। तो अब तुम्हें सबूत देना पड़ेगा
- 2:37:03इस बात का। नीचे कमेंट सेक्शन में जाके
- 2:37:05लिखना पड़ेगा। आई हैव कंप्लीटेड दिस
- 2:37:07वीडियो टिल दी एंड। ताकि मुझे पता चल सके
- 2:37:10कि मैंने जो वीडियो आप लोगों के लिए बनाई
- 2:37:12थी वो सच में आपको पसंद आई है और इस
- 2:37:14वीडियो ने आपकी लाइफ में कुछ इंपैक्ट पुट
- 2:37:16किया है। दिस वास सार्थक शर्मा एंड यू हैव
- 2:37:18बीन अ ग्रेट ऑडियंस। और अगर ऐसी ही वीडियो
- 2:37:20आपको और चाहिए प्लीज लेट अस नो इन अ कमेंट
- 2:37:23सेक्शन। थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग दिस
- 2:37:24वीडियो। बाय-ब बाय।
- 2:37:28[संगीत]
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