Complete System Design Roadmap 2026 | HLD & LLD by Shradha Ma'am — Transcript
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- 0:00हाई एवरीवन। इन टुडेज़ सेशन, वी आर गोइंग
- 0:01टू कवर द कंप्लीट एन्ड टु एंड गाइड टू
- 0:03लर्निंग सिस्टम डिज़ाइन। आज का जो सेशन
- 0:05होने वाला है, इट्स गोइंग टू बी वन ऑफ़ द
- 0:07मोस्ट इन डेप्थ एज़ वेल एज़ क्रिस्टल क्लियर
- 0:09सेशंस ऑन व्हाट एक्जेक्टली डू वी नीड टू
- 0:11लर्न इन हाई लेवल डिज़ाइन एंड लो लेवल
- 0:13डिज़ाइन। अब जब भी हम सिस्टम डिज़ाइन की बात
- 0:15करते हैं, ये बहुत इंपॉर्टेंट कॉन्सेप्ट
- 0:17है। एस्पेशली अगर हम एसडी टू या हायर
- 0:19रोल्स को टारगेट कर रहे हैं। और इफ वी
- 0:21वांट टू बिकम अ सीटीओ और अ टेक लीड इन द
- 0:23फ्यूचर। क्योंकि सिस्टम डिजाइन के अंदर हम
- 0:25कई सारे ऐसे इंपॉर्टेंट कांसेप्ट्स को कवर
- 0:27करते हैं जो हाईली स्केलेबल रोबस्ट सिस्टम
- 0:29डिजाइन करने के लिए बहुत ज्यादाेंट होते
- 0:31हैं। अब सिस्टम डिजाइन एग्जैक्टली है
- 0:33क्या? ये समझने के लिए हम बेसिक लेमन
- 0:35टर्म्स के अंदर बात करें तो सिस्टम डिज़ाइन
- 0:37इज़ डिज़िंग डे टू डे टेक बेस्ड सिस्टम्स।
- 0:40जैसे डे टू डे बेसिस पर हमने Netflix यूज़
- 0:42किया होगा, Uber यूज़ किया होगा, Instagram
- 0:44यूज़ किया होगा, WhatsApp यूज़ किया होगा।
- 0:46तो सिस्टम डिजाइन इंटरव्यूज के अंदर
- 0:48इन्हीं जैसे किसी एक सिस्टम को हमें
- 0:49डिजाइन करना होता है। जैसे एग्जांपल के
- 0:51लिए इंटरव्यूअर हमें बोल सकते हैं दैट यू
- 0:53हैव टू डिज़ाइन WhatsApp। अब एज अ
- 0:55सॉफ्टवेयर इंजीनियर WhatsApp को डिजाइन
- 0:57करने के लिए कुछ बेसिक टूल्स, कुछ बेसिक
- 0:58कांसेप्ट्स हैं जिनका हमें आईडिया होना
- 1:00चाहिए। एंड इन्हीं टूल्स एंड कांसेप्ट्स
- 1:02को हम सीखते हैं विद इन सिस्टम डिज़ाइन।
- 1:04एंड उसी के अंदर कौन-कौन से कांसेप्ट्स
- 1:06हमें सीखने होते हैं, उसी के बारे में आज
- 1:07हम डिटेल डिस्कशन कर रहे होंगे। तो सिस्टम
- 1:10डिजाइन को हम दो पार्ट्स के अंदर सीखते
- 1:11हैं। सबसे पहला इज हाई लेवल डिजाइन जिसके
- 1:14अंदर हम ओवरव्यू ऑफ द सिस्टम को डिजाइन
- 1:16करते हैं। जैसे एग्जांपल के लिए अगर हम
- 1:18WhatsApp को डिजाइन करेंगे तो उसके अंदर
- 1:20हम कौन सा डेटाबेस यूज़ कर रहे होंगे? किस
- 1:22तरीके से हम मैसेज क्यूज़ को यूज़ करेंगे।
- 1:24किस तरीके से हम कैश को यूज़ कर सकते हैं
- 1:25मे बी। तो इस तरीके से हम एक सिस्टम के
- 1:27डिफरेंट-डिफरेंट कॉम्पोनेंट्स को बताते
- 1:29हैं और एक ओवरऑल सिस्टम को डिज़ाइन करते
- 1:31हैं। यहां पर हमें कुछ भी एज़ सच कोड नहीं
- 1:33करना होता। सेकंड पार्ट ऑफ़ सिस्टम डिज़ाइन
- 1:36इज़ लो लेवल डिज़ाइन। जिसके अंदर हमें
- 1:38एक्चुअली मशीन कोडिंग करनी होती है। जहां
- 1:40पर हम एपीआईस को भी डिजाइन करते हैं। जहां
- 1:41पर हम क्लास डायग्राम्स भी बनाते हैं।
- 1:43जहां पर हम अपने मॉडल्स को भी बताते हैं।
- 1:45तो यहां पर हमारे एक्चुअल जो कोडिंग
- 1:47स्किल्स होते हैं वो टेस्ट हो रहे होते
- 1:48हैं। आज हम एचएलडी एंड एलएलडी दोनों के ही
- 1:50कांसेप्ट्स को डिटेल में कवर कर रहे
- 1:52होंगे। अब देयर इज़ एन इंपॉर्टेंट
- 1:54प्रीररेक्विज़िट बिफोर लर्निंग सिस्टम
- 1:55डिज़ाइन एंड दैट इज़ टू एक्चुअली हैव हैंड्स
- 1:58ऑन एक्सपीरियंस एंड डेवलपमेंट। अगर हम
- 2:00बिना डेवलपमेंट सीखे, बिना कोई प्रोजेक्ट
- 2:02बनाए, बिना किसी कंपनी के अंदर एटलीस्ट
- 2:04एसडी वन लेवल पर थोड़ा बहुत काम किए हुए
- 2:06अगर डायरेक्टली जाकर सिस्टम डिजाइन को
- 2:08सीखते हैं तो बहुत सारे कांसेप्ट्स हमें
- 2:10थ्योरेटिकल लगेंगे। उनकी हमें प्रैक्टिकल
- 2:12अंडरस्टैंडिंग उतनी हो नहीं पाएगी। तो इट
- 2:14इज़ वेरी वेरीरी क्रूशियल कि सिस्टम डिजाइन
- 2:16को सीखने से पहले हमने अपने लिए कुछ बेसिक
- 2:18लेवल पर एटलीस्ट प्रोजेक्ट लेवल पर कुछ
- 2:20सिस्टम्स को डिजाइन किया हो ताकि हम रिलेट
- 2:22कर पाएं कि जब हम डेटाबेस की बात कर रहे
- 2:24हैं। जब हम कैश की बात कर रहे हैं तो उनका
- 2:26क्या एक्चुअल यूजेज होता है एक रियल लाइफ
- 2:28सिस्टम के अंदर। सो इन द फर्स्ट हाफ ऑफ़ द
- 2:30सेशन वी आर गोइंग टू कवर एचएलडी एंड इन द
- 2:32सेकंड हाफ वी आर गोइंग टू कवर एलएलडी। अब
- 2:34सबसे पहले हाई लेवल डिज़ाइन की बात करते
- 2:35हैं। लेट्स सपोज़ हम इंटरव्यू के अंदर बैठे
- 2:38हैं एंड द इंटरव्यूअर आस्क अस टू डिज़ाइन अ
- 2:40Netflix लाइक सिस्टम। या हमें Netflix को
- 2:42ही डिज़ाइन करना है। जिसका मतलब है हमें एक
- 2:44ऐसी सर्विस को डिजाइन करना है व्हिच इज़
- 2:46एबल टू सर्व वीडियो कंटेंट टू मिलियंस ऑफ़
- 2:49यूज़र्स अक्रॉस डिफरेंट कंट्रीज एंड दैट टू
- 2:51सीमलेसली। अब इस सिस्टम को और अच्छे से
- 2:54समझने के लिए हमें दो चीजों को समझना
- 2:56पड़ेगा। व्हिच आर फंक्शनल एंड नॉन फंक्शनल
- 2:58रिक्वायरमेंट्स। फंक्शनल रिक्वायरमेंट्स
- 3:00का मतलब होता है कि सिस्टम के अंदर कौन से
- 3:02एग्जैक्ट फीचर्स हैं जिनको हमें बिल्ड
- 3:04करने की जरूरत है जिन्हें एक्चुअली यूज़र्स
- 3:06आकर यूज़ करेंगे। जैसे Netflix के लिए
- 3:08यूज़र्स के पास फीचर होना चाहिए दैट दे शुड
- 3:10बी एबल टू रजिस्टर एंड लॉग इन टू द
- 3:12सिस्टम। उसके साथ में यूज़र्स शुड ऑल्सो बी
- 3:15एबल टू परचेस द सब्सक्रिप्शन ऑफ़ Netflix।
- 3:17साथ के साथ जो भी यूज़र्स हैं, दे शुड बी
- 3:19एबल टू प्ले एंड पॉज़ द वीडियोज़। तो ये
- 3:21सारे डिफरेंट फीचर्स हैं जो यूज़र्स
- 3:23Netflix के ऊपर यूज़ कर पाएंगे। इसके साथ
- 3:25में अपने सिस्टम की कुछ नॉन फंक्शनल
- 3:27रिक्वायरमेंट्स भी होंगी। नॉन फंक्शनल
- 3:28रिक्वायरमेंट्स का मतलब होता है कि हमारा
- 3:29सिस्टम किस तरीके से परफॉर्म करेगा। उसके
- 3:32अंदर क्या-क्या क्वालिटीज होंगी? जैसे
- 3:33Netflix की अगर बात करें तो इट शुड बी अ
- 3:35सिक्योर सर्विस। जिसका मतलब है सिर्फ पेड
- 3:37यूज़र्स ही जो Netflix का पेड कंटेंट है
- 3:39उसे यूज़ कर पाएं। तो हमारे सिस्टम के अंदर
- 3:41अच्छे से ऑथेंटिकेशन एंड ऑथराइजेशन सेटअप
- 3:44होना चाहिए। उसके साथ में द सिस्टम शुड
- 3:46आल्सो हैव लो लेटेंसी। क्योंकि अगर
- 3:47वीडियोस बहुत ज्यादा डिले लेंगी प्ले करने
- 3:50में तो कोई भी यूजर उसे वॉच नहीं करना
- 3:51चाहेगा। एंड थर्डली हमारा जो सिस्टम है वो
- 3:53स्केलेबल भी होना चाहिए ताकि मिलियंस ऑफ
- 3:55यूज़र्स कॉन्करेंटली सेम मूवी को या सेम
- 3:57टीवी शो को देख पाएं। तो ये सारी की सारी
- 3:59फंक्शनल एंड नॉन फंक्शनल रिक्वायरमेंट्स
- 4:01जैसे ही हम अपने सिस्टम के लिए आइडेंटिफाई
- 4:03कर लेते हैं उसके बाद इन दोनों को ही
- 4:05ध्यान में रखते हुए हमें अपने ओवरऑल
- 4:07सिस्टम को डिजाइन करना होता है। सो अब हम
- 4:09फाइनली बात करने वाले हैं कि हाई लेवल
- 4:11डिज़ाइन के अंदर स्टेप बाय स्टेप हमें
- 4:12कौन-कौन से कॉम्पोनेंट्स हैं, कॉन्सेप्ट्स
- 4:14हैं जिनको सीखना होगा टू बी एबल टू डिज़ाइन
- 4:17दिस Netflix सिस्टम। नाउ द फर्स्ट स्टेप
- 4:19इन एचएलडी इज़ टू लर्न अबाउट सम ऑफ़ द
- 4:20फंडामेंटल्स। जैसे सर्वरस वर्सेस सर्वरफुल
- 4:23आर्किटेक्चर के अंदर क्या डिफरेंसेस होते
- 4:24हैं? फॉर एग्जांपल हमारा Netflix का सर्वर
- 4:26है। उसे अगर हम एडब्ल्यूएस पर डिप्लॉय
- 4:28करना चाहते हैं तो व्हाट इज द डिफरेंस
- 4:30बिटवीन डिप्लॉयंग इट यूजिंग एडब्ल्यूएस
- 4:32लैम्ब्डा वर्सेस डिप्लॉयंग इट यूजिंग
- 4:34एडब्ल्यूएस EC2 लैम्ब्डा हमें सर्वस
- 4:37फैसिलिटी देता है जिसमें एडब्ल्यूएस काफी
- 4:38सारी चीजें हमारे लिए हैंडल कर लेगा। जबकि
- 4:40EC2 पर अगर हम डिप्लॉय करेंगे तो बहुत
- 4:42सारी चीजें हमें ही ओवरसी करनी पड़ेगी।
- 4:45यहां पर कोई भी एक फिक्स्ड आंसर नहीं
- 4:47होता। हमेशा हमें एक ट्रेड ऑफ देखना होता
- 4:49है। जैसे फॉर एग्जांपल अगर हम स्केलेबल
- 4:51सिस्टम की लार्ज सिस्टम्स की बात करें तो
- 4:53वहां पर अगर हम सर्वलेस आर्किटेक्चर को
- 4:54यूज़ करेंगे तो वो काफी कॉस्ट इनफिशिएंट हो
- 4:56जाएगा। तो इस तरीके की चीजें हमें एडवांस
- 4:59में ही सोचनी होती है अबाउट आवर सिस्टम।
- 5:01इसके साथ में व्हाट इज़ द डिफरेंस बिटवीन
- 5:02हॉरिजॉन्टल एंड वर्टिकल स्केलिंग। जैसे
- 5:04शुरुआत में हमारी Netflix ऐप पर हो सकता
- 5:06है 100 यूज़र्स हो, 1000 यूज़र्स हो। तो
- 5:08वहां पर एक ही सर्वर काफी है। अब
- 5:10जैसे-जैसे यूज़र्स इनक्रीस होंगे, हम
- 5:11चाहेंगे कि उसी सर्वर को हम और ज्यादा
- 5:13स्केल कर दें। मतलब उसके अंदर हम रैम
- 5:15इनक्रीस कर दें, स्टोरेज इनक्रीस कर दें
- 5:17ताकि वही सिंगल सर्वर हमारे सारे के सारे
- 5:19यूजर्स का लोड ले पाए। सो दिस टाइप ऑफ
- 5:21स्केलिंग ऑफ अ सिंगल सर्वर इज़ कॉल्ड
- 5:23वर्टिकल स्केलिंग। अब एक लिमिट है जहां तक
- 5:26हम एक सिंगल सर्वर को स्केल कर सकते हैं।
- 5:27एक पॉइंट ऐसा आएगा जिसके बाद हमें मल्टीपल
- 5:29सर्वर्स की जरूरत पड़ेगी जहां पर भी आर
- 5:31गोइंग टू यूज़ अ लॉट ऑफ़ डिफरेंट सर्वर्स
- 5:33एंड एक लोड बैलेंसर को भी हम यूज़ करेंगे
- 5:35इन डिफरेंट सर्वर्स पर लोड डिवाइड करने के
- 5:37लिए। सो दिस इज़ कॉल्ड हॉरिजॉन्टल
- 5:39स्केलिंग। तो दोनों के अंदर फंडामेंटल
- 5:41लेवल पर क्या-क्या डिफरेंसेस होते हैं?
- 5:42व्हाट आर थ्रेड्स, व्हाट आर पेजेस? हाउ डज़
- 5:44दी इंटरनेट एक्चुअली वर्क? किस तरीके से
- 5:46रिक्वेस्ट रिस्पांस साइकिल जो है वो वर्क
- 5:48करती है? किस तरीके से डीएनएस काम करता
- 5:50है? इन सब चीजों की हमारे पास बेसिक नॉलेज
- 5:53होनी चाहिए। उसके बाद द सेकंड स्टेप वुड
- 5:54बी टू लर्न अबाउट डेटा बेसिस। द कोर ऑफ़
- 5:58प्रोग्रामिंग एंड कोडिंग इज़ ऑल अबाउट
- 6:00डेटा। इट इज़ अबाउट ट्रांसफरिंग डेटा, इट
- 6:01इज़ अबाउट मैनपुलेटिंग डेटा। इट इज़ अबाउट
- 6:03स्टोरिंग डेटा। जहां पर स्टोरिंग डेटा
- 6:05प्लेज़ अ वेरीेंट रोल। इसीलिए डेटाबेस
- 6:07बहुतेंट पार्ट होते हैं किसी भी सिस्टम
- 6:09का। तो हमारे पास एसक्यूएल नो एसक्यूएल
- 6:11डेटाबेस में Neo 4G हो गया, मंगो डीबी हो
- 6:13गया। डिफरेंट-डिफरेंट टाइप्स ऑफ डेटाबसेस
- 6:15का हमें पता होना चाहिए। उसमें भी कौन सा
- 6:16डेटाबेस कौन सी कैटेगरी के अंदर फॉल करता
- 6:18है? व्हाट आर द प्रोज़ एंड क्स ऑफ यूजिंग
- 6:20एसक्यूएल एंड नॉन एसक्यूएल डेटाबेस। इसके
- 6:22साथ में वी शुड आल्सो बी अवेयर अबाउट इन
- 6:24मेमोरी डेटाबेसिस। डेटा रेप्लिकेशन एंड
- 6:26माइग्रेशन किस तरीके से होता है? व्हाट इज़
- 6:29डेटा पार्टीशनिंग? व्हाट इज़ शार्डिंग? दिस
- 6:31इज़ आल्सो अ वेरी पॉपुलर इंटरव्यू
- 6:32क्वेश्चन। शार्डिंग इज़ बेसिकली हॉरिजॉन्टल
- 6:35पार्टीशनिंग और डेटा जिसका हमें आईडिया
- 6:37होना चाहिए डिटेल के अंदर क्योंकि कई सारी
- 6:39अच्छी कंपनीज़ हमसे शार्डिंग के बारे में
- 6:40पूछेंगी। नेक्स्ट वी आर गोइंग टू लर्न
- 6:42अबाउट कंसिस्टेंसी एंड अवेलेबिलिटी। यहां
- 6:45पर हम डेटा कंसिस्टेंसी के बारे में सीख
- 6:47रहे होंगे। व्हाट आर द डिफरेंट लेवल्स?
- 6:48जैसे व्हाट इज़ इवेंचुअल कंसिस्टेंसी, कोरम
- 6:50कंसिस्टेंसी और कॉज़ल कंसिस्टेंसी,
- 6:52लीनियराइज़ेबल कंसिस्टेंसी। इसके साथ में
- 6:54वी विल आल्सो लर्न अबाउट आइसोलेशन एंड
- 6:56इट्स लेवल। रीड अनकमिटेड एंड रीड कमिटेड
- 6:58में क्या डिफरेंसेस हैं? व्हाट इज़
- 6:59रिपीटेबल रीड। एंड वी विल आल्सो लर्न
- 7:02अबाउट द कैप थ्योरम। कैप थ्योरम सेज़ कि इन
- 7:03द इवेंट ऑफ़ अ नेटवर्क पार्टीशन वी बेसिकली
- 7:05हैव टू मेक अ चॉइस बिटवीन कंसिस्टेंसी एंड
- 7:07अवेलेबिलिटी। अब कंसिस्टेंसी और
- 7:09अवेलेबिलिटी में से हम कौन सी चीज को
- 7:12ज्यादा प्रेफरेंस दें, कौन सी चीज को पिक
- 7:13करें वो हमारे टाइप ऑफ सिस्टम पे डिपेंड
- 7:16करता है। कंसिस्टेंसी का लेमन टर्म्स के
- 7:17अंदर मतलब होता है कि हमारे पास हमेशा
- 7:19सबसे रीसेंट सबसे सही डेटा आना चाहिए।
- 7:21चाहे उसके अंदर डिले ही क्यों ना लग जाए।
- 7:23सो इट बेसिकली मीनंस दैट एव्री रीड शुड
- 7:25गेट द मोस्ट रीसेंट राइट। सिमिलरली
- 7:27अवेलेबिलिटी का मतलब होता है कि हमारा
- 7:28सिस्टम कोई रिस्पांस भेजेगा ही भेजेगा।
- 7:31चाहे वहां पर हम टेंपरेरीली मोस्ट रीसेंट
- 7:33डेटा को एज अ रिस्पांस ना भेज पाएं इन अ
- 7:35नॉन एरर रिस्पांस। जैसे एग्जांपल के लिए
- 7:37अगर हम Netflix की बात करें तो वहां पर
- 7:39यूजर के पेमेंट के लिए सब्सक्रिप्शन परचेस
- 7:41के लिए जो हम पूरा सिस्टम बिल्ड करेंगे
- 7:43वहां पर हम कंसिस्टेंसी को ज्यादा
- 7:45प्रायोरिटी देंगे एज़ कंपेयर टू
- 7:46अवेलेबिलिटी। क्योंकि पेमेंट सिस्टम्स के
- 7:48अंदर हमें एनश्योर करना होता है कि सारे
- 7:50के सारे लेटेस्ट अपडेट्स हमारे पास हमेशा
- 7:52आनी चाहिए। एंड दैट इज व्हाई इन सिस्टम्स
- 7:54लाइक Paytm या PayPal या PhonePe वहां पर
- 7:56कंसिस्टेंसी को हम ज्यादा प्रायोरिटी देते
- 7:58हैं। उसका एक और कॉन्सक्वेंस ये भी निकल
- 8:00कर आता है कि जनरली पेमेंट सिस्टम्स के
- 8:02अंदर एसक्यूएल को एज अ डेटाबेस ज्यादा
- 8:04प्रेफर किया जाता है एज़ कंपेयर टू नो
- 8:05एसक्यूएल डेटाबेस। जबकि इफ वी टॉक अबाउट अ
- 8:07सिस्टम लाइक WhatsApp तो WhatsApp
- 8:09नोटिफिकेशंस के टाइम पर हम अवेलेबिलिटी को
- 8:11ज्यादा प्रायोरिटी देंगे एज़ कंपेयर टू
- 8:13कंसिस्टेंसी। उसके बाद वी आर गोइंग टू
- 8:15लर्न अबाउट कैश। कैश बेसिकली हमारे लिए उस
- 8:18डेटा को स्टोर कराते हैं जिस डेटा को हम
- 8:19यूज़र्स तक विद अ वेरी लो लेटेंसी जल्दी से
- 8:22पहुंचाना चाहते हैं। तो जनरली ये हमारा
- 8:24मोस्ट फ्रीक्वेंटली यूज़्ड डेटा होता है या
- 8:26फिर ये काफी पॉपुलर डेटा होता है जिसे
- 8:28बहुत सारे यूज़र्स यूज़ करेंगे। कैश के अंदर
- 8:30हम सीखने वाले हैं व्हाट एग्जैक्टली इज़ अ
- 8:32कैश। उसके अंदर डिफरेंट टाइप्स ऑफ़ कैश।
- 8:33रेडिस हो गया, मेम कैश हो गया जो एग्ज़िस्ट
- 8:35करते हैं। किस तरीके से वर्क करते हैं।
- 8:36कैश के अंदर दो इंपॉर्टेंट पॉलिसीज़ होती
- 8:39हैं। एक राइट पॉलिसी एंड एक रिप्लेसमेंट
- 8:41पॉलिसीज़। तो राइट पॉलिसी के अंदर राइट बैक
- 8:44थ्रू एंड अराउंड का क्या मतलब होता है?
- 8:46रिप्लेसमेंट पॉलिसीज में मतलब कैश के अंदर
- 8:48हमारा जो न्यू डेटा आएगा और कौन सा पुराना
- 8:50डेटा रिप्लेस होगा उसका जो डिसीजन है दैट
- 8:52डिपेंड्स ऑन द एल्गोरिदम और द पॉलिसी दैट
- 8:54वी आर यूजिंग। तो वहां पर एलएफयू एलआरयू
- 8:56एंड सेगमेंटेड एलआरयू ये कुछ पॉपुलर
- 8:58ऑप्शंस हैं जिनका हमें पता होना चाहिए हाउ
- 9:00डू दे वर्क। एंड यहां पर कंटेंट डिलीवरी
- 9:02नेटवर्क्स भी हमें बहुत ज्यादा हेल्प करते
- 9:03हैं। बेसिकली सीडी हमारे लिए इंश्योर करते
- 9:06हैं फास्ट डिलीवरी ऑफ़ स्टैटिक डेटा। जैसे
- 9:08एग्जांपल के लिए Netflix पर अगर कोई
- 9:09पॉपुलर शो है जैसे ब्लैक मिरर उसका अगर
- 9:11कोई न्यू सीजन या न्यू एपिसोड आने वाला है
- 9:14तो अगर Netflix पहले से एंटीिसिपेट कर ले
- 9:16कि डिफरेंट कंट्रीज के अंदर बहुत सारे लोग
- 9:18हैं जो इस सीजन के इस एपिसोड को देखेंगे
- 9:20ही देखेंगे तो Netflix उस न्यू सीजन के
- 9:22एपिसोड्स को पहले से अपने सीडीएन के अंदर
- 9:24स्टोर करा सकता है ताकि यूज़र्स को ज्यादा
- 9:26डिले ना देखना पड़े। जल्दी से उनके लिए वो
- 9:28एपिसोड्स प्ले कर पाएं। इसके साथ में वी
- 9:30आर आल्सो गोइंग टू कवर नेटवर्किंग जिसमें
- 9:32बेसिक जो हमारे कांसेप्ट्स होते हैं
- 9:34कंप्यूटर नेटवर्किंग के टीसीपी यूडीपी के
- 9:35अंदर क्या डिफरेंसेस होते हैं? HTTP https
- 9:38के अंदर क्या डिफरेंसेस होता है? व्हाट आर
- 9:39द डिफरेंट वर्जनंस ऑफ़ http? 1 2 3 तीनों
- 9:42के इंप्लीमेंटेशन में बेसिक डिफरेंसेस
- 9:44क्या होते हैं? वेब सॉकेट्स किस लिए यूज़
- 9:45होते हैं? व्हाट इज़ वेब आरटीc? एंड हाउ
- 9:47एग्जैक्टली डू वी यूज़ वेब आरटीसी इन
- 9:49वीडियो स्ट्रीमिंग? ये काफी इंपॉर्टेंट
- 9:52यूज़ केस है। और जब भी हम Google mट या फिर
- 9:54ZM जैसा कोई सिस्टम डिज़ाइन करने की कोशिश
- 9:56करेंगे, तो वहां पर इसकी अंडरस्टैंडिंग
- 9:58हमें काफी ज्यादा हेल्प करेगी। इसके साथ
- 10:00में इट इज़ आल्सोेंट टू लर्न अबाउट लोड
- 10:02बैलेंससेस। हमने हॉरिजॉन्टल वर्टिकल
- 10:04स्केलिंग की बात की तो वहां पर लोड
- 10:06बैलेंसर का एक क्रूशियल रोल है। तो लोड
- 10:08बैलेंसिंग एल्गोरिथ्म्स कौन सी होती हैं?
- 10:09व्हाट इज़ स्टेटलेस एंड स्टेटफुल लोड
- 10:11बैलेंसिंग? लोड बैलेंसिंग में डिफरेंट
- 10:13एल्गोरिदम्स होती हैं। राउंड रबिन हो गई,
- 10:14लीस्ट कनेक्शंस हो गया। व्हाट इज़
- 10:16कंसिस्टेंट है? दिस इज़ एनेंट कंप्यूटर
- 10:18साइंस कॉन्सप्ट। प्रॉक्सी रिवर्स प्रॉक्सी
- 10:20किस तरीके से यूज़ होती है? रेट लिमिटिंग
- 10:22व्हिच इज़ क्रूशियल टू प्रिवेंट अ सिस्टम
- 10:23फ्रॉम डीडॉस अटैक्स। किस तरीके से
- 10:25इंप्लीमेंट होती है। उसके बाद में वी कैन
- 10:27आल्सो लर्न अबाउट मैसेज क्यूज़। एसिंक्रोनस
- 10:29प्रोग्रामिंग के लिए, एसिंक्रोनस
- 10:31प्रोसेसिंग के लिए मैसेज कस बहुत
- 10:32ज्यादाेंट होती हैं। एंड कई सारे सिस्टम्स
- 10:35के अंदर हमें मैसेज क्यूस देखने को मिलती
- 10:37हैं। मैसेज क्यूज़ का बेसिकली काम होता है
- 10:39टू हैंडल द नॉन क्रिटिकल टास्क। नॉन
- 10:41क्रिटिकल टास्क मतलब ऐसे टास्क जो थोड़े से
- 10:43डिले के साथ भी प्रोसेस होंगे तो उसमें
- 10:44कोई खास सिस्टम के ऊपर फर्क नहीं पड़ेगा।
- 10:46जैसे फॉर एग्जांपल WhatsApp पर हम अपना
- 10:48मैसेज तो भेज देते हैं। दैट इज़ अ क्रिटिकल
- 10:50टास्क पर मैसेज के ऊपर डबल टिक आ रहा है
- 10:52या नहीं आ रहा वो थोड़ा सा नॉन क्रिटिकल
- 10:54टास्क है। उसमें अगर थोड़ा सा डिले भी हो
- 10:55जाए तो हमें ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
- 10:57तो इस तरीके के टास्क को हमारी मैसेज
- 10:59क्यूज़ हैंडल करती हैं। वहां पर कैफ का
- 11:00रैबिट एम क्यू आर पॉपुलर ऑप्शन। इट यूजज़ अ
- 11:03वेरी पॉपुलर पब्लिशर सब्सक्राइबर मॉडल
- 11:05जिसके बारे में हम पढ़ सकते हैं। इसके साथ
- 11:07में नेक्स्ट हम पढ़ेंगे अबाउट मोनोलिथ्स
- 11:09एंड माइक्रो सर्विसेस। वन ऑफ़ द टू
- 11:11मोस्टेंट आर्किटेक्चर जब भी हम सिस्टम्स
- 11:13को बिल्ड करने की, डिजाइन करने की बात
- 11:15करते हैं, तो एज़ पर द इंडस्ट्री नॉर्म वी
- 11:17आर इनिशियली गोइंग टू बिल्ड इट एज अ
- 11:19मोनोलिथ। पर धीरे-धीरे उसके अंदर जैसे ही
- 11:21हमारा सिस्टम स्केलेबल होता है, जैसे
- 11:22हमारी टीम्स बहुत बड़ी-बड़ी होती हैं,
- 11:24धीरे-धीरे हमें मोनोलेज से माइक्रो
- 11:26सर्विसेस के अंदर शिफ्ट होना पड़ता है।
- 11:27तो, हमें माइक्रो सर्विसेस की क्यों जरूरत
- 11:29पड़ती है? व्हाट इज़ द कांसेप्ट ऑफ़ सिंगल
- 11:31पॉइंट ऑफ़ फेलियर? कैस्केडिंग फेलियर्स को
- 11:33कैसे अवॉइड करना है? कंटेनराइज़ेशन किस
- 11:35तरीके से वर्क करती है? कंटेनर्स का क्या
- 11:37मतलब होता है? माइक्रो सर्विसेस के अंदर
- 11:38कंटेनर्स बहुतेंट होते हैं। उसके लिए डॉकर
- 11:40इज़ वन ऑफ़ द मोस्ट पॉपुलर सर्विसेस। डॉकर
- 11:43के ऊपर आई हैव आल्सो रिलीज़्ड एन एंड टू
- 11:44एंड ट्यूटोरियल जिसके अंदर हम कंप्लीट
- 11:46डॉकर को सीख सकते हैं एज अ वर्किंग
- 11:48सॉफ्टवेयर डेवलपर। तो उसका लिंक भी आपको
- 11:50नीचे डिस्क्रिप्शन बॉक्स के अंदर मिल
- 11:51जाएगा। एंड फाइनली हाउ डू वी माइग्रेट
- 11:53फ्रॉम मोनोलिथ्स टू माइक्रो सर्विसेस।
- 11:55उसके साथ में मॉनिटरिंग एंड लॉगिंग अ
- 11:57सिस्टम इज़ आल्सो वेरीेंट। फॉर एग्जांपल हम
- 12:00Netflix के ऊपर वी आर डूइंग दिस अ ह्यूज
- 12:02सेल ऑन सब्सक्रिप्शन कि बहुत बड़ा ऑफर चल
- 12:05रहा है एंड द सब्सक्रिप्शन आर गोइंग टू बी
- 12:07वेरी चीप। तो बहुत सारे यूजर्स आएंगे जो
- 12:09हमारे सिस्टम पर आने वाले हैं। अब ऐसे में
- 12:11अगर बहुत हैवी लोड की वजह से हमारे सिस्टम
- 12:13के अंदर कोई प्रॉब्लम आ जाती है तो वहां
- 12:15पर हमारे सिस्टम के जो लॉग्स होते हैं वो
- 12:17बहुत ज्यादा हेल्प करते हैं टू आइडेंटिफाई
- 12:18कि एग्जैक्टली क्या प्रॉब्लम आई सिस्टम के
- 12:20अंदर और नेक्स्ट टाइम से जब भी हमें कोई
- 12:22सेल करनी होगी, कुछ चीज करनी होगी, कोई
- 12:24ऑफर निकालना होगा तो हमें किन चीजों पर
- 12:26ध्यान देना है। तो इट इज़ वेरीेंट टू लॉग
- 12:28इवेंट्स एंड मॉनिटर द मैट्रिक्स ऑफ अ
- 12:30सिस्टम। इसके साथ में एनॉमली डिटेक्शन इज़
- 12:32आल्सो एनेंट कांसेप्ट। तो यहां पर हम
- 12:35एडब्ल्यूएस क्लाउड वॉच ग्रफाना हो गया,
- 12:37प्रोमिथीथियस हो गया। इस तरीके के पॉपुलर
- 12:39टूल्स हैं जिनको यूज़ करते हैं। उसके बाद
- 12:41में द नेक्स्ट स्टेप वुड एसेंशियली बी टू
- 12:43थिंक अबाउट सिक्योरिटी। जैसे हमने ऑलरेडी
- 12:45बात की थी Netflix के अंदर सिर्फ पेड
- 12:47यूज़र्स को ही कंटेंट की एक्सेस होनी
- 12:49चाहिए। उसके लिए स्ट्रांग ऑथराइजेशन,
- 12:51स्ट्रांग ऑथेंटिकेशन हमारे सिस्टम के अंदर
- 12:53होना चाहिए। हम जनरली टोकंस को यूज़ करते
- 12:55हैं। ओ ऑथ का क्या मतलब होता है? वी हैव
- 12:57एक्सेस कंट्रोल लिस्ट टू डिफाइन द एक्सेस
- 13:00एंड डिफरेंट रूल्स फॉर डिफरेंट लेवल्स ऑफ़
- 13:02एक्सेस इनसाइड द सिस्टम। इंक्रिप्शन की हम
- 13:04बात कर रहे होंगे। उसको सीख रहे होंगे। द
- 13:06नेक्स्ट स्टेप वुड बी टू लर्न अबाउट ट्रेड
- 13:08ऑफ्स। अब जब भी हम सिस्टम डिजाइन की बात
- 13:10करते हैं, देयर इज़ नो फिक्स्ड आंसर, देयर
- 13:12इज़ नो सिंगल आंसर, देयर इज़ नो राइट और
- 13:14रॉन्ग आंसर। सिस्टम डिज़ाइन इंटरव्यूज़ के
- 13:16अंदर बेसिकली हमें अपना पॉइंट ऑफ व्यू
- 13:18बताना होता है कि हमने ये थॉट प्रोसेस
- 13:20लगाया प्रॉब्लम को समझकर। एंड उसके हिसाब
- 13:22से हमने ये सॉल्यूशन डिज़ाइन किया है। और
- 13:24फिर जो भी सॉल्यूशन हम डिज़ाइन करते हैं,
- 13:26उसे हमें जस्टिफाई करना होता है। इंटरव्यू
- 13:28और कुछ क्वेश्चंस पूछेंगे उनके हमें
- 13:29आंसर्स देने होते हैं। तो डिज़िंग अ सिस्टम
- 13:31इज़ ऑल अबाउट ट्रेड ऑफ्स। जरूरी नहीं है कि
- 13:33दो लोग सेम सिस्टम को सेम ही तरीके से
- 13:35डिजाइन करेंगे। कोई हो सकता है किसी दूसरी
- 13:37चीज को प्रायोरिटी दे। दूसरा व्यक्ति हो
- 13:39सकता है किसी अलग चीज को प्रायोरिटी दे।
- 13:41तो वहां पर ट्रेड ऑफ्स को समझना बहुत
- 13:42ज्यादा इंपॉर्टेंट है। तो उसके अंदर पुश
- 13:44वर्सेस पुल आर्किटेक्चर का क्या ट्रेड ऑफ
- 13:46होता है? पुश बेसिकली मींस दैट वी हैव टू
- 13:48पुश द डेटा विदाउट द क्लाइंट आस्किंग फॉर
- 13:50इट। पुल आर्किटेक्चर के अंदर वी वेट फॉर द
- 13:52क्लाइंट टू सेंड अ रिक्वेस्ट फॉर द डेटा।
- 13:54एंड उसी के बाद हम अपने डेटा को सेंड करते
- 13:56हैं। कंसिस्टेंसी वर्सेस अवेलेबिलिटी
- 13:58प्रॉब्लम अगेन कैप थ्योरम एसक्यूएल वर्सेस
- 14:01नो एसक्यूएल डेटाबेस के अंदर हमें क्या
- 14:03ट्रेड ऑफ के अंदर डिफरेंसेस आएंगे? मेमोरी
- 14:05वर्सेस लेटेंसी वर्सेस थ्रूपुट वर्सेस
- 14:07एक्यूरेसी इनके अंदर भी हमें चूज़ करना
- 14:09पड़ेगा। तो इन सारे डिफरेंट ट्रेड ऑफ्स की
- 14:11हमारे पास स्ट्रांग अंडरस्टैंडिंग होनी
- 14:13चाहिए। एंड जैसे ही इन सारे कॉन्सेप्ट्स
- 14:15को हमने सीख लिया। फाइनली द लास्ट स्टेप
- 14:18इज़ टू प्रैक्टिस, प्रैक्टिस एंड
- 14:20प्रैक्टिस। द मोर सिस्टम डिजाइन क्वेश्चंस
- 14:22यू प्रैक्टिस द मोर यू बिकम बेटर एट
- 14:24सिस्टम डिजाइनिंग। क्योंकि जनरली जितने भी
- 14:27बड़े सिस्टम के हम एग्जांपल्स लेंगे उनको
- 14:29डिजाइन करना सीखेंगे उन्हीं के अंदर हमारे
- 14:31मेजॉरिटी इंटरव्यू क्वेश्चंस कवर हो
- 14:33जाएंगे। एंड इनफैक्ट डिफरेंट-डिफरेंट
- 14:34सर्विज के सिस्टम डिज़ाइंस देखकर हमें पता
- 14:36लग जाएगा कि कहां पर कौन से केसेस के अंदर
- 14:39हम मैसेज क्यूज़ को यूज़ करेंगे। किस तरीके
- 14:40से हम कैश को यूज़ करेंगे। कहां पर कौन सा
- 14:42डेटाबेस प्रेफर्ड होना चाहिए। कहां पर
- 14:44हमें कंसिस्टेंसी को प्रेफर करना है, कहां
- 14:46पर हमें अवेलेबिलिटी को प्रेफर करना है।
- 14:48तो यहां पर दीज़ आर वन ऑफ़ द मोस्ट पॉपुलर
- 14:5010 सर्विज जिनके मैंने आपको एग्जांपल्स दे
- 14:52दिए हैं व्हिच आर मस्ट डू और मस्ट
- 14:55प्रैक्टिस बिफोर वी गो एंड सट फॉर अ
- 14:57सिस्टम डिज़ाइन इंटरव्यू। तो यहां पर
- 14:59YouTube, Twitter, WhatsApp ये काफी सारे
- 15:01पॉपुलर सिस्टम्स हैं जिनको अगर हम डिजाइन
- 15:03करेंगे तो डिफरेंट-डिफरेंट तरीके के
- 15:04सिस्टम्स का हमें आईडिया लग जाएगा। जैसे
- 15:06Amazon से वी विल गेट टू नो कि ई-कॉमर्स
- 15:08वेबसाइट्स में क्या-क्या चीजें ध्यान रखनी
- 15:10होती हैं। ZM में वी विल गेट टू नो कि
- 15:12वीडियो स्ट्रीमिंग को किस तरीके से देखना
- 15:13होता है। Instagram में वी विल गेट टू नो
- 15:15कि एक सोशल मीडिया एप्लीकेशन दैट इज़
- 15:17डीलिंग विद अ लॉट ऑफ़ फोटो एंड वीडियोस।
- 15:19उसे किस तरीके से डिज़ाइन करना होता है।
- 15:21Uber के अंदर हम डिफरेंट तरीके के यूज़र्स
- 15:24के हिसाब से क्या-क्या चीजें हमें इंश्योर
- 15:25करनी होती हैं। दो तरीके के यूज़र्स Uber
- 15:28पर एक्सिस्ट करेंगे। वन इज़ अ राइडर, वन इज़
- 15:30अ ड्राइवर। दोनों के अलग-अलग फंक्शनल
- 15:31रिक्वायरमेंट्स होंगे जिनको हमें फुलफिल
- 15:33करना होगा। तो इन सारे सिस्टम्स की फाइनली
- 15:35जाकर हमें प्रैक्टिस करनी है। सो फाइनली
- 15:37आफ्टर लर्निंग ऑल ऑफ दीज़ कॉम्पोनेंट्स दिस
- 15:39इज़ व्हाट आवर Netflix सिस्टम इज़ गोइंग टू
- 15:40लुक लाइक जिसमें वी आर गोइंग टू हैव अ
- 15:42कॉम्बिनेशन ऑफ़ सर्वर, सीडीएन एंड लोड
- 15:44बैलेंससेस। अब देयर इज़ अ कॉमन सेइंग इन
- 15:46सिस्टम डिज़ाइन जिसको हम अपने फ्यूचर सेल्फ
- 15:47के लिए याद रख सकते हैं कि इट इज़ बेटर टू
- 15:50सैटिस्फाई सम ऑफ़ द यूज़र्स देन डिसपॉइंट ऑल
- 15:53ऑफ़ देम। और इसी सेइंग को ध्यान में रखते
- 15:55हुए हमें अपने सिस्टम्स को डिजाइन करना
- 15:56है। अब एज अ सॉफ्टवेयर इंजीनियर हो सकता
- 15:58है हमने जो एचएलडी का पूरा का पूरा
- 16:00टॉपिक्स देखे सिलेबस देखा इट सीम्स वेरी
- 16:03ओवरवेल्मिंग एट वंस क्योंकि जनरली जब भी
- 16:05हम अपने पर्सनल प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे
- 16:07होते हैं और वी आर वर्किंग इन अ सर्विस
- 16:09बेस्ड कंपनी और इवन इन अ प्रोडक्ट बेस्ड
- 16:10कंपनी एज अ सिंगल सॉफ्टवेयर इंजीनियर हम
- 16:13इतनी सारी चीजों के साथ एक साथ डील नहीं
- 16:15कर रहे होते एंड इट इज़ कंप्लीटली नॉर्मल
- 16:18टू फील ओवरवेल बाय ऑल ऑफ़ दीज़ कॉनसेप्ट्स।
- 16:20और जब भी हम प्रोडक्ट बेस्ड एमएसी या
- 16:22हाइली स्केलेबल स्टार्टअप्स के अंदर काम
- 16:23करने की बात करते हैं तो वहां पर उनके जो
- 16:25सिस्टम्स होते हैं उसमें जनरली ये सारे के
- 16:28सारे कॉम्पोनेंट्स किसी ना किसी वे में
- 16:30यूज़ हो रहे होते हैं। तो ऐसे में एज अ
- 16:31सॉफ्टवेयर इंजीनियर इवन दो डे टू डे बेसिस
- 16:34पर हम इन सबको यूज़ नहीं कर रहे होंगे। बट
- 16:36फिर भी अगर हमें इनकी अच्छी अंडरस्टैंडिंग
- 16:38होगी तो उन कंपनीज के अंदर अगर हम काम
- 16:40करने जाते हैं तो उनके सिस्टम को समझने
- 16:42में और उन सिस्टम्स के अंदर अच्छे से
- 16:44कंट्रीब्यूट करने में हमें बहुत ज्यादा
- 16:46हेल्प मिलती है। एंड दैट इज़ व्हाई सिस्टम
- 16:48डिज़ाइन प्लेज़ अ वेरीेंट रोल। अब हमने हाई
- 16:51लेवल डिज़ाइन को कवर कर लिया है। नेक्स्ट
- 16:52वी आर गोइंग टू मूव ऑन टू लो लेवल डिज़ाइन
- 16:54व्हिच इज़ ऑल अबाउट मशीन कोडिंग। लो लेवल
- 16:57डिज़ाइन के अंदर वी कैन स्टार्ट विद द
- 16:58फंडामेंटल कॉन्सेप्ट्स ऑफ़ ऊप्स। एलएलटी इज़
- 17:00बेसिकली अबाउट राइटिंग वेल स्ट्रक्चरर्ड
- 17:02कोड व्हिच सॉल्व्स द प्रॉब्लम्स। तो उसके
- 17:04अंदर हमारे जो फोर पिलर्स और ऊप्स होते
- 17:06हैं उन्हें हम कवर कर सकते हैं। वी कैन
- 17:07लर्न अबाउट सॉलिड प्रिंसिपल्स, व्हाट इज़
- 17:09सिंगल रिस्पांसिबिलिटी प्रिंसिपल, व्हाट
- 17:11इज़ ओपन क्लोज प्रिंसिपल? तो इस तरीके से
- 17:12पांच सॉलिड प्रिंसिपल्स होते हैं जिनके
- 17:14बारे में हमें डिटेल में पता होना चाहिए।
- 17:16वी कैन आल्सो स्टडी अबाउट डिज़ाइन
- 17:18पैटर्न्स। अब एलएलडी में यू विल नोटिस दैट
- 17:20एलएलडी के अंदर यू विल फाइंड अ लॉट ऑफ़
- 17:22थिंग्स जिनके साथ हम डे टू डे बेसिस पर एज़
- 17:24अ वर्किंग सॉफ्टवेयर इंजीनियर डील करते
- 17:25हैं। तो इसमें से हो सकता है कुछ पैटर्न्स
- 17:27आपने ऑलरेडी अपने कोड के अंदर यूज़ किए हो
- 17:29कंपनीज़ ने। क्रिएशनल स्ट्रक्चरल एंड
- 17:30बिहेवियरल पैटर्न्स के बारे में हमें
- 17:32डिटेल में पता होना चाहिए। उसके साथ में
- 17:34वी शुड बी रेमिलियर विद द कॉन्सप्ट ऑफ़
- 17:36कॉन्करेंसी एंड थ्रेड सेफ्टी। कॉन्करेंसी
- 17:38बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट होती है जब भी हम
- 17:39कोड की बात करते हैं। तो थ्रेड सेफ
- 17:41इंजेक्शन किस तरीके से होता है? व्हाट इज़
- 17:43द डिफरेंट लॉकिंग मैकेनिज़्म्स फॉर डेटा?
- 17:44व्हाट इज़ प्रोड्यूसर कंज्यूमर मॉडल? क्या
- 17:46रेस कंडीशंस होती हैं? व्हाट इज़
- 17:48सिंक्रोनाइजेशन? ये ऐसी चीजें हैं जो
- 17:49ऑपरेटिंग सिस्टम्स के अंदर हम ऑलरेडी
- 17:51कॉलेज लेवल से पढ़ते हुए आ रहे होंगे। इनको
- 17:53बस हमें थोड़ा सा रिवाइज़ करना है। देन
- 17:55स्टेप फोर वुड बी टू लर्न अबाउट यूएमएल
- 17:57डायग्राम्स। अब यूएमएल डायग्राम्स के अंदर
- 17:59हमारा क्लास डायग्राम, कॉम्पोनेंट
- 18:00डायग्राम ये सारी चीजें कवर होती हैं।
- 18:02यूएमएल डायग्राम इज बेसिकली एन ऑप्शनल
- 18:05कांसेप्ट इफ यू आस्क मी। कुछ कंपनीज़ होती
- 18:07हैं जो आपसे यूएमएल डायग्राम एक्सपेक्ट
- 18:08करेंगी। कुछ होती हैं जिन्हें क्लास
- 18:10डायग्राम्स नहीं बनवाने होते। तो ऐसे में
- 18:12इफ यू हैव एन एलएलडी इंटरव्यू कमिंग अप।
- 18:14तो आप अपने रिक्रूटर से पूछ सकते हैं। आप
- 18:15अपने एचआर से पूछ सकते हैं। इफ दिस इज़
- 18:17समथिंग व्हिच इज़ एक्सपेक्टेड इन द
- 18:18इंटरव्यू ऑ नॉट। इसके साथ में वी आर गोइंग
- 18:20टू लर्न अबाउट एपीआई। किस तरीके से हम
- 18:22अपनी एपीआई को डिज़ाइन करेंगे। रिक्वेस्ट
- 18:24रिस्पांस ऑब्जेक्ट मॉडलिंग। वर्जनिंग हो
- 18:26गई एपीआई की या एक्सटेंसिबिलिटी हो गई
- 18:28हमारे जो डिफरेंट-डिफरेंट क्लीन कोड
- 18:29प्रिंसिपल्स हैं जिसमें से ड्राइव
- 18:31प्रिंसिपल आ जाता है सिंगल
- 18:32रिस्पांसिबिलिटी प्रिंसिपल आ जाता है एंड
- 18:34साथ के साथ हाउ डू वी अवॉयड गॉड क्लासेस
- 18:37इन आवर कोड तो ये सारे इंपॉर्टेंट
- 18:39कांसेप्ट्स हैं जिनको ध्यान में रखते हुए
- 18:41हमें अपने कोड को अपनी एपीआईस को लिखना
- 18:43होता है। उसके बाद वी आर गोइंग टू
- 18:46प्रैक्टिस सम ऑफ़ द कॉमन प्रॉब्लम्स इन
- 18:48एलएलडी। अब एलएलडी एंड एचएलडी प्रॉब्लम्स
- 18:51के अंदर यू विल नोटिस अ डिफरेंस कि एचएलडी
- 18:53के अंदर जनरली हम एक लार्ज सिस्टम को
- 18:55डिजाइन कर रहे होते हैं। एंड एलएलडी के
- 18:56अंदर हमारे पास कंपेरेटिवली एक छोटा
- 18:58सिस्टम होता है जिसे हमें कोड करना होता
- 19:00है। जैसे एक T2 या फिर एक चेस गेम हो गया
- 19:02और मे बी यू आर डिजाइनिंग अ नोटिफिकेशन
- 19:04सिस्टम और अ यूआरएल शॉर्टर। तो इस तरीके
- 19:06से छोटे सिस्टम होते हैं जिन्हें हमें कोड
- 19:08करना होता है। कोई इंटरव्यूज़ के अंदर आपको
- 19:10ये नहीं बोलेगा कि एंड टू एंड यू हैव टू
- 19:12कोड दी एंटायर Netflix एप्लीकेशन बिकॉज़
- 19:14दैट इज़ नॉट पॉसिबल इवन इन योर टाइम और द
- 19:16इंटरव्यूज़ टाइम। सो दिस इज ऑल व्हिच विल
- 19:19बी कवर्ड इन आवर एचएलडी एंड एलएलडी
- 19:22इंटरव्यूज। नाउ इफ वी टॉक अबाउट दी
- 19:23टाइमलाइन फॉर लर्निंग ऑल ऑफ दीज़ थिंग्स।
- 19:25इफ वी आर समबडी हु इज़ अ सॉफ्टवेयर
- 19:27इंजीनियर एंड इज़ एक्टिवली प्रिपेयरिंग फॉर
- 19:28सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग इंटरव्यूज़। और
- 19:30इनमें से कई सारे कॉन्सेप्ट्स हैं जिनको
- 19:31डे टू डे बेसिस पर वो अपने वर्क के अंदर
- 19:33सीखते आ रहे थे, यूज़ करते आ रहे थे। तो
- 19:35ऐसे में हमें टू टू थ्री मंथ्स लगेंगे इन
- 19:37सारे कॉन्सेप्ट्स को सीखने में। बट इफ वी
- 19:39आर समबडी जिसके लिए मेजॉरिटी कॉन्सेप्ट्स
- 19:41नए थे और उन्होंने फर्स्ट टाइम सुने थे।
- 19:43तो ऐसे केस में अ रियलिस्टिक टाइमलाइन वुड
- 19:45बी बिटवीन फोर टू सिक्स मंथ्स। बट द की टू
- 19:48लर्निंग सिस्टम डिजाइन इज ऑलवेज प्रैक्टिस
- 19:50प्रैक्टिस एंड मोर प्रैक्टिस। क्योंकि
- 19:52जितना ज्यादा हम इन कांसेप्ट्स को
- 19:53प्रैक्टिस करेंगे, जितना ज्यादा हम अपने
- 19:55पीओसीस के अंदर इनफैक्ट पर्सनल
- 19:57प्रोजेक्ट्स के अंदर भी इन कांसेप्ट्स को
- 19:58इंप्लीमेंट करने की कोशिश करेंगे, उतना
- 20:00ज्यादा वी विल बी एबल टू डाइव, डीप एंड
- 20:02अंडरस्टैंड सिस्टम डिज़ाइन बेटर। तो, आई
- 20:04होप कि आज का ये जो सेशन है, यह हमें कहीं
- 20:05ना कहीं पॉजिटिवली हेल्प कर रहा होगा
- 20:07हमारे करियर के अंदर। एंड टू माय बेस्ट
- 20:09नॉलेज, दिस इज़ गोइंग टू बी वन ऑफ़ द मोस्ट
- 20:11क्रिस्टल क्लियर। दिस इज़ गोइंग टू बी वन
- 20:13ऑफ़ द मोस्ट कॉम्प्रिहेंसिव सिस्टम डिज़ाइन
- 20:15गाइड और सिस्टम डिज़ाइन सेशंस जो शायद ही
- 20:17कहीं और YouTube पर अवेलेबल होगा। इसके
- 20:19अलावा इफ यू वांट अ डिटेल ट्यूटोरियल ऑन
- 20:21एनी ऑफ़ दीज़ कॉन्सेप्ट्स यू कैन लेट मी नो
- 20:22इन द कमेंट्स। इफ यू फाउंड द सेशन
- 20:24हेल्पफुल देन यू कैन आल्सो शेयर इट विथ मी
- 20:25ऑन Twitter जिसका लिंक आपको नीचे
- 20:27डिस्क्रिप्शन बॉक्स के अंदर मिल जाएगा। आज
- 20:29के लिए इतना ही। मिलते हैं नेक्स्ट सेशन
- 20:30के अंदर। टिल देन कीप लर्निंग एंड कीप
- 20:31एक्सप्लोरिंग।
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