Complete Modern History of India Through Animation | Modern History For UPSC GS | StudyIQ IAS — Transcript
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- 0:00दोस्तों, यूपीएससी प्रीलिम्स 2026 का
- 0:03काउंटडाउन शुरू हो चुका है और इसी को
- 0:05ध्यान में रखते हुए आज से हम हिस्ट्री की
- 0:07मैराथन स्टार्ट कर रहे हैं। इस वीडियो में
- 0:09हमने मॉडर्न हिस्ट्री के पूरे जीएस सिलेबस
- 0:12को सिस्टमेटिकली कवर किया है। यह वीडियो
- 0:15तीन पार्ट्स में डिवाइड किया गया है।
- 0:16पार्ट ए में हम इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल के
- 0:19कोर थीम्स और यूरोपियन पावर्स के भारत
- 0:21आगमन को समझेंगे। पार्ट बी में ब्रिटिश
- 0:24गवर्नेंस सिस्टम की कॉम्प्लेक्सिटीज को
- 0:26डिटेल में एनालाइज करेंगे और पार्ट सी में
- 0:28फ्रीडम स्ट्रगल के पैरेलल चलने वाले
- 0:30इंपॉर्टेंट मूवमेंट्स पर फोकस करेंगे।
- 0:33हमारे इस वीडियो की सबसे खास बात यह है कि
- 0:35हम यहां हिस्ट्री को सिर्फ पढ़ेंगे नहीं
- 0:37बल्कि एनिमेशंस के जरिए पूरी तरह डीपली
- 0:41विजुअलाइज करेंगे। जिससे हर इंपॉर्टेंट
- 0:43इवेंट आपके दिमाग में छप जाए। दोस्तों,
- 0:46मुझे पूरा विश्वास है कि यह मैराथन क्लास
- 0:48ना सिर्फ आपके हिस्टोरिकल कांसेप्ट्स को
- 0:50थरली क्लियर करेगी बल्कि यूपीएससी
- 0:52प्रीलिम्स 2026 के ट्रिकी फेक्चुअल और
- 0:56एनालिटिकल क्वेश्चंस को कॉन्फिडेंटली टैकल
- 0:58करने में भी मदद करेगी। तो चलिए शुरू करते
- 1:01हैं।
- 1:03स्टडी आईक्यू आईएस आपका सिलेक्शन हमारा
- 1:07मिशन।
- 1:09दोस्तों, आज हम मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री की
- 1:12मैराथॉन वीडियो शुरू करने जा रहे हैं।
- 1:14जिसमें एंटायर मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री के
- 1:17जीएस सिलेबस को कवर किया जाएगा। यह वीडियो
- 1:20तीन पार्ट्स में डिवाइडेड है। सबसे पहले
- 1:22पार्ट ए में हम मेन स्ट्रीम इंडियन फ्रीडम
- 1:25स्ट्रगल को कवर करेंगे। उसके बाद पार्ट बी
- 1:28में ब्रिटिश गवर्नेंस सिस्टम को डिटेल में
- 1:31जानेंगे और पार्ट सी में मेन स्ट्रीम
- 1:34फ्रीडम स्ट्रगल के साथ चलती कुछ
- 1:36इंपॉर्टेंट पैरेलल मूवमेंट्स की बात
- 1:38करेंगे। तो आइए शुरू करते हैं पार्ट ए
- 1:41यानी इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल से।
- 1:45एडवेंट ऑफ यूरोपियंस इन इंडिया। दोस्तों,
- 1:48यह तो हम सभी जानते हैं कि ब्रिटिशर्स एक
- 1:51ट्रेडिंग कंपनी की तरह इंडिया आते हैं और
- 1:53अल्टीमेटली एक पिटिकल पावर बनकर अपना
- 1:56एंपायर इस्टैब्लिश करते हैं। लेकिन
- 1:58ब्रिटिशर्स के अलावा और भी कुछ यूरोपियन
- 2:00कंपनीज ट्रेड करने के लिए इंडिया आती हैं।
- 2:03पर उनके बारे में बात करने से पहले हम यह
- 2:06जानेंगे कि ऐसी क्या कंडीशंस थी कि
- 2:08यूरोपियन कंपनीज ने इंडिया का रुख किया।
- 2:12व्हाई डिड यूरोपियन कंपनीज़ कम टू इंडिया?
- 2:16दोस्तों एंशिएंट टाइम से ही इंडिया और
- 2:19यूरोप के अच्छे ट्रेड रिलेशंस थे। इंडिया
- 2:22के कॉटन, सिल्क, टेक्सटाइल्स और स्पाइसेस
- 2:24की यूरोप के मार्केट में काफी हाई डिमांड
- 2:26रहती थी। मिडिल एजेस में इस ट्रेड के
- 2:30एशियन पार्ट को अरब मर्चेंट्स और
- 2:32मेडिटेरनियन और यूरोपियन पार्ट को
- 2:34इटालियंस डील करते थे।
- 2:37क्योंकि अभी तक केप ऑफ गुड होप वाला रूट
- 2:39डिस्कवर नहीं हुआ था। तो ट्रेड
- 2:41कॉनस्टेंटिनोपल यानी प्रेजेंट डे
- 2:43इस्तांबुल होकर किया जाता था। लेकिन जब
- 2:46ऑटोमन टर्क्स एशिया माइनर पर कंट्रोल
- 2:48इस्टैब्लिश करते हैं और 1453 में
- 2:51कॉनस्टेंटिनोपल को कैप्चर कर लिया जाता है
- 2:53तब ईस्ट और वेस्ट के बीच के ओल्ड ट्रेड
- 2:56रूट्स भी इनके कंट्रोल में आ जाते हैं।
- 2:59उसके अलावा वेनिस और जेनोवा के मर्चेंट्स
- 3:01कॉन्स्टेंटिनोपल के पास लोकेटेड होने का
- 3:04फायदा उठाकर यूरोप और एशिया के बीच ट्रेड
- 3:07पर अपनी मोनोपोली इस्टैब्लिश कर लेते हैं।
- 3:09और वो किसी नए यूरोपियन नेशन स्टेट को
- 3:12इसमें शेयर नहीं देना चाहते थे। नतीजतन
- 3:15वेस्ट यूरोपियन स्टेट्स और मर्चेंट्स नए
- 3:18और सेफ ट्रेड रूट्स को सर्च करते हैं। वो
- 3:22अरब और विनेशंस की मोनोपोली को तोड़ना,
- 3:24टर्किश हॉस्टिलिटी से बचना और ईस्ट के साथ
- 3:27डायरेक्ट ट्रेड रिलेशंस एस्टैब्लिश करना
- 3:30चाहते थे। इसमें सबसे पहले स्टेप्स लेने
- 3:33वाले थे पोर्चुगल और स्पेन।
- 3:36यहां की गवर्नमेंट्स मर्चेंट्स की सी
- 3:38वॉइजेस को स्पोंसर करती हैं। साथ ही
- 3:41साइंटिफिक डिस्कवरीज जैसे कि मैरना कंपास
- 3:44और लॉन्ग डिस्टेंस शिप्स का इन्वेंशन भी
- 3:46इसमें हेल्प करता है। इन्हीं एफर्ट्स की
- 3:49वजह से 1492 में स्पेन के क्रिस्टोफर को
- 3:52कलंबस वॉइज पर निकलते हैं। पर वो इंडिया
- 3:55पहुंचने की जगह अमेरिका पहुंच जाते हैं।
- 3:58फाइनली 1498 में पोर्चुगल के वास्कोड गामा
- 4:02यूरोप से इंडिया पहुंचने के लिए एक नए सी
- 4:05रूट वाया केप ऑफ गुड होप की डिस्कवरी करते
- 4:08हैं। तो चलिए डिटेल में जानते हैं इनके
- 4:11बारे में।
- 4:13पोर्चुगीज
- 4:15पोर्चुगीज सेलर वास्कोडगामा 20th मई 1498
- 4:19को साउथ वेस्ट इंडिया के एक इंपॉर्टेंट
- 4:21सीपोर्ट कैलकट पहुंचते हैं। किंग जैमोरिन
- 4:25जो कैलकट के लोकल रूलर थे उनका स्वागत
- 4:28करते हैं और ट्रेड को प्रमोट करने के लिए
- 4:31उन्हें कुछ प्रिविलेजेस भी ग्रांट करते
- 4:33हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रेड लेवी लोकल
- 4:37रूलर के लिए इनकम का एक इंपॉर्टेंट सोर्स
- 4:39था। इंडिया में 3 महीने रहने के बाद
- 4:41वास्कोडा गागामा एक रिच कारगो के साथ
- 4:44यूरोप वापस लौट जाते हैं। इस कारगो को वह
- 4:48यूरोप की मार्केट में बहुत हाई रेट पर सेल
- 4:50करते हैं। कहा जाता है कि उनकी पूरी
- 4:52यात्रा की कॉस्ट का 60 टाइम्स रिटर्न
- 4:56उन्हें मिलता है इस सेल से। वास्कोडागामा
- 4:591501 एडी में फिर से इंडिया आते हैं। वो
- 5:02कन्ननोर में एक ट्रेडिंग फैक्ट्री सेटअप
- 5:04करते हैं। यहां से इंडिया और पोर्चुगल के
- 5:07बीच ट्रेड लिंक्स की शुरुआत होती है। और
- 5:10कैलकट, कन्ननोर और कोचिन इंपॉर्टेंट
- 5:13पोर्चुगीज़ ट्रेडिंग सेंटर्स बनकर उभरते
- 5:16हैं। पोर्चुगीज़ की बढ़ती हुई पावर्स और
- 5:19उनकी अनफेयर ट्रेड डिमांड्स जैसे कि
- 5:21अरेबियन सी में मोनोपोली की कोशिश उनके और
- 5:24लोकल रूलर ज़मुरिन के बीच हॉस्टेलिटीज बढ़ा
- 5:28देती हैं। पोर्चुगीज़ ट्रेडर्स डिमांड रखते
- 5:30हैं कि ज़मुरिन अपने एरिया में से मुस्लिम
- 5:33ट्रेडर्स को बाहर कर दे। ज़मुरिन उनकी
- 5:36डिमांड को नहीं मानते। और दोनों के बीच
- 5:39इसी बात को लेकर एक मिलिट्री फेस ऑफ होता
- 5:42है जिसमें ज़मोरिन हार जाते हैं और
- 5:44पोर्चुगीज़ की मिलिट्री सुपीरियरिटी
- 5:46एस्टैब्लिश हो जाती है। इसके बाद से
- 5:48पोर्चुगीज़ पावर का राइज़ होना शुरू होता
- 5:51है। आइए जानते हैं कैसे? राइज़ ऑफ
- 5:54पोर्चुगीज़ पावर इन इंडिया। 155 एडी में
- 5:58पहले पोर्चुगीज़ गवर्नर फ्रांसिस्को ड
- 6:01अल्मीडा अपॉइंट होकर इंडिया आते हैं। इनकी
- 6:03पॉलिसी थी इंडियन ओशन पर अपना कंट्रोल
- 6:06इस्टैब्लिश करना। इसलिए इनकी पॉलिसी को
- 6:08ब्लू वाटर पॉलिसी भी बोला जाता है।
- 6:11कार्टेज सिस्टम इनकी पॉलिसी का सबसे
- 6:13इंपॉर्टेंट फीचर था। कार्टेज एक तरह का
- 6:16नेवल ट्रेड लाइसेंस या पास होता था जो
- 6:19पोर्चुगीज़ कंपनी से बाकी सभी इंडियन और
- 6:22एशियन ट्रेडर्स को इंडियन ओशियन में ट्रेड
- 6:25करने के लिए लेना होता था। साथ ही लंबे
- 6:27रूट्स के शिप्स जो पोर्चुगीज़ के कंट्रोल
- 6:30किए हुए पोर्ट्स पर रुकते हुए स्ट्रेट ऑफ
- 6:32मलक्का की तरफ जाते थे, उन्हें भी यह
- 6:34कार्टेज लेना होता था। जिनके पास यह पास
- 6:37नहीं होता था। उनकी शिप्स और कारगो को
- 6:40पोर्चुगीज़ अपने कब्जे में ले लेते थे। इसे
- 6:43इंप्लीमेंट करने के लिए पोर्चुगीज़ अपने
- 6:45मिलिट्री शिप्स और कैनंस को ट्रेडिंग
- 6:48शिप्स के साथ रखते थे। 159 एडी में
- 6:52अल्मेदा को रिप्लेस करके अल्फजोड अलबका की
- 6:55गवर्नर बनते हैं। यह 1510 एडी में बीजापुर
- 6:59के सुल्तान से गोवा को कैप्चर करते हैं।
- 7:02इनको ही इंडिया में पोर्चुगीज़ पावर का
- 7:04रियल फाउंडर बोला जाता है। अल्बगकी,
- 7:07मलक्का और सिलोन को भी कैप्चर कर लेते हैं
- 7:10और कैलकट में एक फोर्ट बनवाते हैं।
- 7:14इनके बाद गवर्नर बनते हैं नीनो डकूनिया जो
- 7:171530 एडी में पोर्चुगीज़ की इंडियन कैपिटल
- 7:20को कोचीन से गोवा शिफ्ट करते हैं। यह 1534
- 7:25एडी में गुजरात के बहादुर शाह से द और
- 7:28बेसेन एक्वायर कर लेते हैं। और 1559 एडी
- 7:31में दमन को भी। पोर्चुगीज़ का कोस्टल
- 7:35एरियाज पे कंट्रोल और उनकी सुपीरियर नेवल
- 7:37पावर उनको बहुत हेल्प करती है और 16th
- 7:40सेंचुरी का एंड होते-होते पोर्चुगीज़ ना
- 7:43केवल गोवा, दमन, दऊ और सेलसेट पर कैप्चर
- 7:47कर लेते हैं बल्कि इंडियन कोस्ट के अलोंग
- 7:50एक बड़े एरिया पर उनका कंट्रोल होता है।
- 7:53लेकिन फिर 16th सेंचुरी के बाद से इनकी
- 7:55पावर का डिक्लाइन शुरू होता है। 1631 में
- 7:58पोर्चुगीज़ मुगल एपरर शाहजहां के नोबल
- 8:01कासिम खान के हाथों हुगली खो देते हैं।
- 8:05फिर 1661 में पोर्चुगल के किंग बॉम्बे डरी
- 8:09के रूप में इंग्लैंड के चार्ल्स द सेकंड
- 8:11को दे देते हैं।
- 8:131739 में पोर्चुगीज से सेलसेट और बेसेन
- 8:16मराठाज़ जीत लेते हैं। इस तरह पोर्चुगीज़ की
- 8:20पावर काफी कम रह जाती है। लेकिन इसके बाद
- 8:22भी गोवा, द और दमन पर 1961 तक इनका
- 8:27कंट्रोल बना रहता है। आइए अब पोर्चुगीज़ के
- 8:30कुछ इंपॉर्टेंट कंट्रीब्यूशनंस को जानते
- 8:32हैं। पोर्चुगीज़ गिफ्ट्स टू इंडिया।
- 8:38फेमस जेसुएट सेंट फ्रांसिस्को जेवियर
- 8:41पोर्चुगीज गवर्नर अल्फजो डसूजा के साथ
- 8:441542 में इंडिया आते हैं। इन्हें आज भी
- 8:48इंडिया के कैथोलिक क्रिश्चियंस बहुत मानते
- 8:50हैं। टोबैको, टोमेटो, पोटैटो और चिलीज़ का
- 8:54कल्टीिवेशन भी पोर्चुगीज़ ने ही इंडिया में
- 8:56इंट्रोड्यूस किया था। 1556 एडी में
- 9:00इन्होंने इंडिया का फर्स्ट प्रिंटिंग
- 9:02प्रेस एस्टैब्लिश किया था गोवा में।
- 9:04दोस्तों, यह तो बात हुई इंडिया में ट्रेड
- 9:06करने के लिए आने वाली फर्स्ट यूरोपियन
- 9:09पावर की। आइए, अब जानते हैं इनको फॉलो
- 9:12करने वाली नेक्स्ट ट्रेडिंग कंपनी यानी कि
- 9:14डच के बारे में।
- 9:17डच। दोस्तों, यूरोप के नेदरलैंड्स देश में
- 9:21रहने वाले लोगों को डच कहा जाता है। 20th
- 9:24मार्च 162 को डच पार्लियामेंट ने एक
- 9:28चार्टर के द्वारा डच ईस्ट इंडिया कंपनी को
- 9:30इस्टैब्लिश किया था।
- 9:32इस कंपनी को 21 सालों तक इंडिया और ईस्ट
- 9:35के देशों के साथ ट्रेड, इन्वेशन और
- 9:38कॉनक्वेस्ट करने का राइट भी पार्लियामेंट
- 9:40ने दिया था। यह इंडिया में आकर पोर्चुगीज
- 9:43की मोनोपोली को खत्म करते हैं। डच अपनी
- 9:46पहली फैक्ट्री 165 में आंध्र प्रदेश के
- 9:50मसुलीपट्टनम में बनाते हैं। उसके बाद और
- 9:52भी जगह अपनी फैक्ट्रीज को इस्टैब्लिश करते
- 9:55हैं। जैसे कि 1610 में पुलीकट, 1616 में
- 10:00सूरत, 1653 में चिनसुरा, 1659 में पटना,
- 10:05बालासौर, नागापट्टनम, करायकल, कासिम बाजार
- 10:09और 1663 में कोचिन में। इनका हेड क्वार्टर
- 10:13तमिलनाडु के पुलिकट में था।
- 10:1617th सेंचुरी में इंडिया से होने वाले
- 10:18स्पाइस यानी मसालों के व्यापार पर डच अपनी
- 10:21मोनोपोली इस्टैब्लिश करने में कामयाब होते
- 10:24हैं। इसके अलावा कॉटन टेक्सटाइल्स,
- 10:26इंडिगो, सिल्क, ओपियोम एटसेट्रा का भी
- 10:29एक्सपोर्ट डच इंडिया से करते थे। इंग्लिश
- 10:32कंपनी के आने के बाद डच पावर का डिक्लाइन
- 10:34शुरू हो जाता है। 1759 में से इयर्स वॉर
- 10:38के दौरान इंडिया के ईस्ट कोस्ट पर इंग्लिश
- 10:41और डच कंपनीज़ के बीच बैटल ऑफ बेदरा होती
- 10:44है। जिसमें डच को हार का सामना करना पड़ता
- 10:47है। इस बैटल को बैटल ऑफ चिनसुरा या बैटल
- 10:50ऑफ हुगली भी कहा जाता है। फाइनली डच ईस्ट
- 10:54इंडिया कंपनी को 1798 में लिक्विडेट कर
- 10:58दिया जाता है। दोस्तों, अब बात करते हैं
- 11:00सबसे ज्यादा सफल ट्रेडिंग कंपनी की यानी
- 11:03कि इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी की।
- 11:08अराइवल ऑफ इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी।
- 11:12पोर्चुगीज़ और डच ट्रेडर्स की सक्सेस से
- 11:14इंप्रेस होकर इंग्लैंड के मर्चेंट्स के
- 11:17मर्चेंट एडवेंचरर्स नाम के ग्रुप ने 1599
- 11:21में इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी को
- 11:23इस्टैब्लिश किया था। कंपनी का पूरा नाम द
- 11:26गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट्स ऑफ
- 11:28ट्रेडिंग इनू द ईस्ट इंडीज था। 31 दिसंबर
- 11:321600 को इंग्लैंड की क्वीन एलिजाबेथ द
- 11:34फर्स्ट 15 सालों के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी
- 11:37को ईस्टर्न ट्रेड का चार्टर ग्रांट करती
- 11:40हैं। जिसका मतलब यह था कि इस कंपनी को
- 11:43ईस्ट के साथ ट्रेड करने की मोनोपोली होगी।
- 11:46इंग्लैंड से और कोई भी कंपनी यहां ट्रेड
- 11:49नहीं कर सकेगी। 168 में कंपनी कैप्टन
- 11:52विलियम हॉकिंस को मुगल एपरर जहांगीर के
- 11:56दरबार में भेजती है। उनका मकसद जहांगीर से
- 11:59रॉयल फरमान हासिल करना था जिससे वह सूरत
- 12:02में अपनी ट्रेडिंग फैक्ट्री इस्टैब्लिश कर
- 12:04सकें। लेकिन पोर्चुगीज़ के इन ट्रीग्स के
- 12:07चलते हॉकिंस को कोई भी कंसेशन नहीं मिल
- 12:09पाता और उन्हें 1611 में जहांगीर के कोर्ट
- 12:13से वापस जाना पड़ता है। अंग्रेज समझ जाते
- 12:16हैं कि पोर्चुगीज़ के रहते उनका ट्रेड करना
- 12:19मुश्किल है। इसलिए 1611 में सूरत के पास
- 12:23स्वाली होल में एक नेवल बैटल में
- 12:25पोर्चुगीज़ को अंग्रेज हरा देते हैं। इससे
- 12:28जहांगीर को भी अंग्रेजों की पावर का यकीन
- 12:31हो जाता है। और फिर 1613 में जहांगीर
- 12:35उन्हें इंडिया के वेस्ट कोस्ट पर फैक्ट्री
- 12:38इस्टैब्लिश करने की परमिशन भी दे देते
- 12:40हैं। तब अंग्रेज 1613 में सूरत में अपनी
- 12:44पहली फैक्ट्री इस्टैब्लिश करते हैं। फिर
- 12:471615 में इंग्लैंड के एपरर जेम्स द फर्स्ट
- 12:51सर थॉमस रो को जहांगीर के कोर्ट में भेजते
- 12:53हैं। कंपनी के लिए और कंसेशन की डिमांड
- 12:56लेकर। रो अपनी बातों से जहांगीर को मना
- 12:59लेते हैं और वह कंपनी को रॉयल चार्टर
- 13:02ग्रांट करते हैं जिससे कंपनी को मुगल
- 13:05टेरिटरी में कहीं भी व्यापार करने और
- 13:07फैक्ट्री इस्टैब्लिश करने की आजादी मिल
- 13:09जाती है। इसके बाद कंपनी इंडिया में
- 13:12अलग-अलग जगह फैक्ट्रीज इस्टैब्लिश करती
- 13:14है। जैसे कि मसुलीपट्टनम, आगरा, अहमदाबाद,
- 13:18उड़ीसा के बालासोर और हरिहरपुर एटसेट्रा
- 13:21में।
- 13:231639 में कंपनी को मद्रास की लीस मिलती है
- 13:26और यहां फोर्ट स जॉर्ज बनाया जाता है और
- 13:301668 में कंपनी को चार्ल्स द सेकंड से
- 13:33बॉम्बे लीज़ पर मिल जाता है जो चार्ल्स द
- 13:36सेकंड को पोर्चुगीज़ से डरी में मिला था
- 13:39जैसा कि हम पहले देख चुके हैं। 16989
- 13:43में बंगाल के सूबेदार आजम उस शान की
- 13:45परमिशन से सिर्फ ₹12000 देने पर कंपनी को
- 13:49सुतनाती गोविंदपुर और कालीकथा की जमींदारी
- 13:53मिल जाती है। यहां पर ही 1700 में फोर्ट
- 13:57विलियम की स्थापना होती है। इसके बाद 1771
- 14:01में मुगल एपरर फारुख सियार फरमान जारी
- 14:04करके कंपनी को और भी ज्यादा राइट्स दे
- 14:06देते हैं। जैसे कि उन्हें सिर्फ ₹3000
- 14:09वार्षिक कर के बदले में बंगाल में ड्यूटी
- 14:12फ्री व्यापार करने का अधिकार मिलता है। के
- 14:15आसपास की जमीन खरीदने की परमिशन भी दी
- 14:18जाती है। इसके अलावा कंपनी द्वारा बॉम्बे
- 14:20में इशू किए गए कॉइंस को पूरे मुगल राज्य
- 14:23में चलाने की अनुमति भी मिलती है। इसलिए
- 14:26इस फरमान को कंपनी का मैग्नाटा भी कहते
- 14:29हैं। इसके बाद कंपनी की पावर बढ़ती ही
- 14:32जाती है और फाइनली पहली बार बंगाल में
- 14:35कंपनी अपने एंपायर की शुरुआत करती है
- 14:37जिसके बारे में हम अपनी नेक्स्ट वीडियो
- 14:39में डिटेल से डिस्कस करेंगे। अब चलते हैं
- 14:43अगली यूरोपियन कंपनी की तरफ।
- 14:47डेंस
- 14:49डेनमार्क की ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
- 14:511616 में हुई थी। इस कंपनी ने 1620 में
- 14:55तमिलनाडु के ट्रैंकबार और 1676 में बंगाल
- 14:59के सेरमपुर में अपनी फैक्ट्री इस्टैब्लिश
- 15:02की थी। सेरमपुर इनका इंपॉर्टेंट सेंटर और
- 15:05हेड क्वार्टर था। लेकिन यह खुद को इंडिया
- 15:07में ज्यादा स्ट्रांग नहीं बना पाए और 1845
- 15:10में अपनी सभी सेटलमेंट्स ब्रिटिश कंपनी को
- 15:13बेचकर यहां से चले गए। दोस्तों, अब बात
- 15:16करते हैं इंडिया में सबसे लास्ट में आने
- 15:18वाली यूरोपियन कंपनी की।
- 15:23फ्रेंच
- 15:24फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी लकपेनिया दास
- 15:28औरलेस को 1664 में कोलबे के द्वारा फॉर्म
- 15:32किया गया था जो फ्रांस के राजा लुई द 14थ
- 15:35के मंत्री थे। फ्रेंच कंपनी 1668 में सूरत
- 15:39में अपनी पहली फैक्ट्री इस्टैब्लिश करती
- 15:41है। उसके बाद 1669 में गोलकोंडा के
- 15:44सुल्तान से परमिशन लेकर यह अपनी दूसरी
- 15:46फैक्ट्री मसूलीपट्टनम में बनाते हैं। 1673
- 15:50में कंपनी के डायरेक्टर फ्रांसिस मार्टिन
- 15:53ने बालीकुंड डापुर के सूबेदार शेर खान
- 15:56लोधी से पुट्टुचेरी नाम का एक गांव
- 15:58प्राप्त किया। जो बाद में पोंडीचेरी के
- 16:02नाम से फेमस हुआ।
- 16:041692 में बंगाल के मुगल सूबेदार शाहिस्ता
- 16:07खान की अनुमति से फ्रेंच कंपनी ने
- 16:10चंद्रनगर में फैक्ट्री की स्थापना की।
- 16:13उसके बाद फ्रेंच 1724 में मालाबार में
- 16:17माहे को कैप्चर कर लेते हैं और 1739 में
- 16:21तमिलनाडु में कराइयकल को। 1724 में ही
- 16:25फ्रेंच गवर्नर ड्यूप्लेक्स इंडिया आते हैं
- 16:28और उनके साथ ही शुरुआत होती है कहानी
- 16:30एंग्लो फ्रेंच वॉर्स की जिन्हें कर्नाटक
- 16:33वॉर्स भी कहते हैं। कर्नाटक वॉर्स इंग्लिश
- 16:36और फ्रेंच कंपनी के बीच हुए थे जिनके बारे
- 16:39में हम अलग वीडियो में डिटेल से चर्चा
- 16:41करेंगे।
- 16:43कंक्लूजन।
- 16:45तो दोस्तों, हमने देखा कि कैसे इंडिया और
- 16:48यूरोप के बीच होने वाले ट्रेड का फायदा
- 16:50उठाने के लिए अलग-अलग यूरोपियन कंपनीज़
- 16:53इंडिया आती हैं। यह कंपनीज़ ज्यादा से
- 16:56ज्यादा फायदा लेने के लिए अनफेयर ट्रेड
- 16:58प्रैक्टिसेस जैसे कि मोनोपोली, फोर्स का
- 17:01इस्तेमाल, नेवी का यूज करने में भी पीछे
- 17:03नहीं रहती। इन सभी कंपनीज़ के बीच आपस में
- 17:06पावर के लिए स्ट्रगल चलता है। जिसमें
- 17:08फाइनली इंग्लिश कंपनी को सक्सेस मिलती है।
- 17:12इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी कैसे एक
- 17:14ट्रेनिंग कंपनी से शुरू होकर इंडिया में
- 17:16अपना एंपायर खड़ा करती है यह हम अपनी आने
- 17:19वाली वीडियोस में देखेंगे।
- 17:22राइज ऑफ रीजनल पावर्स आफ्टर मुगल्स।
- 17:25दोस्तों, पिछली वीडियो में हमने देखा कि
- 17:28कैसे द माइटी मुगल एंपायर का डिक्लाइन
- 17:31हुआ। हमने देखा कि किस तरह औरंगजेब के रेन
- 17:34के दौरान डिक्लाइन स्टार्ट हुआ और
- 17:37इनकमटेंट सक्सेसर्स के कारण यह एंपायर
- 17:40पूरी तरह से खत्म हो गया। लोकल और रीजनल
- 17:44पॉलिटिकल फोर्सेस का राइज हुआ और उन्होंने
- 17:46खुद को असर्ट करना शुरू कर दिया। यानी लेट
- 17:5017th सेंचुरी में ही पॉलिटिक्स में मेजर
- 17:52चेंजेस देखने को मिले। 18थ सेंचुरी के
- 17:55दौरान कई इंडिपेंडेंट और सेमी इंडिपेंडेंट
- 17:58पावर्स का राइज़ हुआ। जैसे बंगाल, अवध,
- 18:01हैदराबाद, मैसूर और मराठा किंगडम्स। यही
- 18:04वह पावर्स थी जिन्होंने मुगल एंपायर के
- 18:07डिक्लाइन के बाद पॉलिटिकल वॉइड को फिल
- 18:09किया। और इन्हीं पावर्स का सामना करके
- 18:12ब्रिटिशर्स को इंडिया में अपनी सुप्रेमसी
- 18:15सेटअप करनी थी। दोस्तों, आज हम इन्हीं
- 18:17रीजनल पावर्स के बारे में डिस्कस करेंगे
- 18:20जो मुगल एंपायर के बाद राइज हुई। शुरू
- 18:23करते हैं रीजनल स्टेट्स के क्लासिफिकेशन
- 18:25से और देखते हैं इन स्टेट्स के फीचर्स
- 18:28क्या थे। क्लासिफिकेशन ऑफ स्टेट्स। मुगल
- 18:32एंपायर के डिक्लाइन होते ही जो रीजनल
- 18:35पावर्स उभर कर आई उनको तीन कैटेगरीज में
- 18:38डिवाइड किया जा सकता है। पहली सक्सेशन
- 18:41स्टेट्स। यानी ऐसे स्टेट्स जहां के मुगल
- 18:44प्रोविंसेस के गवर्नर्स ने ऑटोनोमी असर्ट
- 18:46करना शुरू किया। जैसे बंगाल, अवध और
- 18:49हैदराबाद। दूसरी न्यू स्टेट्स यानी ऐसे
- 18:53स्टेट्स जहां पर रिबेलियन के चलते लोकल
- 18:56चीफ्स, जमींदार और पेजेंट्स ने अपना स्टेट
- 18:59सेटअप किया। जैसे मराठा, अफगान, जाट और
- 19:03पंजाब। और तीसरी इंडिपेंडेंट स्टेट्स।
- 19:07यानी ऐसे स्टेट्स जहां मुगल इन्फ्लुएंस का
- 19:10बिल्कुल भी पेनिट्रेशन नहीं था। और मुगल
- 19:12एंपायर के डिस्टेबलाइज होते ही इन स्टेट्स
- 19:15ने ऑटोनोमी अनाउंस कर दी। इसमें मेनली
- 19:18साउथवेस्ट और साउथ ईस्ट कोस्ट और नॉर्थ
- 19:21ईस्टर्न इंडिया के स्टेट्स इंक्लूडेड थे।
- 19:23जैसे मसौर, केरला, राजपूत, अ होम्स
- 19:27एटसेटरा। शुरू करते हैं हैदराबाद और
- 19:30कर्नाटक स्टेट के डिस्कशन से। हैदराबाद
- 19:33एंड द कर्नाटक। हैदराबाद स्टेट को निजामुल
- 19:36मुल्क आसफ ने 1724 में इस्टैब्लिश किया।
- 19:41उनको किलज खान के नाम से भी जाना जाता है।
- 19:44निजामुल मुल्क औरंगजेब के एरा के बाद के
- 19:47लीडिंग नोबल्स में से एक थे। 1720 में
- 19:50उनको डेकन की वाइस रॉयल्टी मिली। 1720 से
- 19:541722 के बीच उन्होंने वाइस रॉयल्टी के सभी
- 19:58दावेदारों को डिफीट किया। 1722 से 1724 के
- 20:03बीच वो मुगल एंपायर के वज़र थे। एपरर
- 20:06मोहम्मद शाह की इन कैपेसिटी से फ्रस्ट्रेट
- 20:09होकर उन्होंने डेक्कन में वापस लौटने का
- 20:11फैसला किया। जहां वह अपनी सुप्रेमसी
- 20:14मेंटेन कर सकते थे। यहीं पर उन्होंने
- 20:17हैदराबाद स्टेट का फाउंडेशन रखा। उन्होंने
- 20:20कभी भी अपने इंडिपेंडेंस को ओपनली अनाउंस
- 20:23नहीं किया। लेकिन प्रैक्टिस में वो एक
- 20:25इंडिपेंडेंट रूलर की तरह ही रूल करते रहे।
- 20:28उन्होंने हिंदूस की तरफ टॉलरेंट पॉलिसी को
- 20:31अपनाया। एग्जांपल के तौर पर उन्होंने एक
- 20:34हिंदू पूरनचंद को अपना दीवान बनाया।
- 20:37उन्होंने मुगल पैटर्न पर जागीरदारी सिस्टम
- 20:40को इंप्लीमेंट करके डेक्कन में एक ऑर्डरली
- 20:43एडमिनिस्ट्रेशन को एस्टैब्लिश किया और
- 20:45अपनी पावर को कंसोलिडेट किया।
- 20:48इसी के साथ उन्होंने पावरफुल मराठाज़ को भी
- 20:51अपने डोमिनियन से बाहर ही रखा। 1748 में
- 20:55निजामुल मुल्क की डेथ के बाद हैदराबाद फिर
- 20:58से डिसइीग्रेट हो गया। कर्नाटक की बात
- 21:01करें तो यह रीजन मुगल्स का एक सूबा था और
- 21:04हैदराबाद के निजाम की अथॉरिटी के अंदर आता
- 21:07था। कर्नाटक रीजन आज के तमिलनाडु और सदर्न
- 21:11आंध्र प्रदेश में ईस्टर्न घाट्स और बे ऑफ़
- 21:14बंगाल के बीच का पेनिनसुलर रीजन था। जिस
- 21:17तरह निजाम ने खुद को दिल्ली से अलग किया।
- 21:19वैसे ही कर्नाटक के डेपुटी गवर्नर ने खुद
- 21:22को डेकन के इन्फ्लुएंस से इंडिपेंडेंट कर
- 21:24दिया। जिसके चलते वह अब नवाब ऑफ कर्नाटक
- 21:28कहे जाने लगे और यह ऑफिस भी अब हेरिडिटरी
- 21:31हो गया। सादतुल्लाह खान कर्नाटक के पहले
- 21:34नवाब बने और उन्होंने बिना निजाम की
- 21:37परमिशन के 1732 में अपने नेफ्यू दोस्त अली
- 21:41को अपना सक्सेसर अनाउंस कर दिया। 1740 के
- 21:45बाद नवाब शिव के लिए इंटरनल स्ट्रगल्स
- 21:47होने लगी। जिसका फायदा यूरोपियन ट्रेडिंग
- 21:50कंपनीज ने उठाया और अब वह इंटरनल
- 21:53पॉलिटिक्स में डायरेक्टली इंटरफेयर करने
- 21:55लगे। अब आगे बढ़ते हैं और देखते हैं बंगाल
- 21:58के राइज के बारे में। बंगाल
- 22:02सेंट्रल अथॉरिटी की वीकनेस के चलते
- 22:05एक्सेप्शनल एबिलिटी के दो लोगों ने बंगाल
- 22:07को एक वर्चुअली इंडिपेंडेंट स्टेट बना
- 22:10दिया। और यह दो लोग थे मुर्शिद खली खान और
- 22:13अली वर्दी खान। 1717 में मुर्शिद खली खान
- 22:18बंगाल के गवर्नर बने। उन्होंने बंगाल को
- 22:21इंटरनल और एक्सटर्नल डेंजर से फ्री करके
- 22:24शांति की स्थापना की। बंगाल को जमींदार के
- 22:28द्वारा होने वाली अप्राइिंग से फ्री कर
- 22:30दिया।
- 22:311727 में उनकी डेथ हुई और उनके सन इन लॉ
- 22:35शुजााउद्दीन को सक्सेसर बनाया गया।
- 22:37शुजााउद्दीन ने 1739 तक बंगाल पर रूल
- 22:41किया। 1739 में राजमहल सिटी के फौजदार अली
- 22:46वर्दी खान ने शुजा के सन सरफराज खान को
- 22:48मार दिया और खुद को बंगाल का नवाब डिक्लेअ
- 22:51कर दिया। इन तीनों नवाब्स ने बंगाल को पीस
- 22:55और ऑर्डरली एडमिनिस्ट्रेशन का एक लंबा दौर
- 22:58दिया और ट्रेड एंड इंडस्ट्री को प्रमोट
- 23:00किया।
- 23:02मुर्शिद खुली खान ने बंगाल में रेवेन्यू
- 23:04फार्मिंग के सिस्टम को इंट्रोड्यूस किया।
- 23:07दोस्तों रेवेन्यू फार्मिंग एक रेवेन्यू
- 23:09कलेक्शन का तरीका था जिसमें स्टेट के
- 23:11बिहाफ पर एक रेवेन्यू ऑफिशियल पेज से
- 23:14रेवेन्यू कलेक्ट करता था और एक फिक्स्ड
- 23:17अमाउंट स्टेट को देता था। खान ने लोकल
- 23:20जमींदार और मर्चेंट बैंकर्स से रेवेन्यू
- 23:22फार्मर्स को रिक्रूट किया। उन्होंने
- 23:24डिस्ट्रेस में जी रहे पुअर कल्टीवेटर्स के
- 23:26लिए एग्रीकल्चरल लोंस का प्रोविजन भी रखा
- 23:29जिसको टकावी कहा जाता था।
- 23:32मुर्शिद खान और उनके सक्सेसर्स ने हिंदू
- 23:35और मुस्लिम्स दोनों को ही एंप्लॉयमेंट की
- 23:38इक्वल ओपोरर्चुनिटीज दी। हाईएस्ट सिविल और
- 23:41मिलिट्री पोस्ट्स को बंगाली से फिल किया
- 23:43गया जो मोस्टली हिंदू थे। अली वर्दी खान
- 23:46ने इंग्लिश और फ्रेंच कोलकाता और चंद्रनगर
- 23:49की फैक्ट्रीज को फर्टिफाई करने की परमिशन
- 23:52नहीं दी। लेकिन बंगाल के नवाब्स शॉर्ट
- 23:55साइटेड साबित हुए। उन्होंने इंग्लिश ईस्ट
- 23:58इंडिया कंपनी की बढ़ती टेंडेंसी को
- 23:59इफेक्टिवली एंड नहीं किया। उनका मानना था
- 24:02कि सिर्फ एक ट्रेडिंग कंपनी उनकी पावर को
- 24:05थ्रेटन नहीं कर सकती। बंगाल के नवाब्स ने
- 24:08एक स्ट्रांग आर्मी होने की नीड को
- 24:10अंडरएस्टीमेट किया जिसका उन्हें भारी
- 24:12नुकसान उठाना पड़ा। 175657
- 24:16में अली वर्दी के सक्सेसर सिराजुद्दौला पर
- 24:19जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने वॉर डिक्लेअ किया
- 24:22तब एक स्ट्रांग आर्मी की एब्सेंस के चलते
- 24:24ब्रिटिशर्स की विक्ट्री हुई।
- 24:27अब देखते हैं अवध स्टेट के बारे में। अवध
- 24:31अवध की इंडिपेंडेंट प्रिंसिपालिटी के
- 24:34फाउंडर थे सादत खान बुरहान उल मुल्क जिनको
- 24:381722 में अवध का गवर्नर बनाया गया था।
- 24:41उनके अपॉइंटमेंट के दौरान अवध प्रोविंस
- 24:44में कई जमींदार ने रिबेलियन कर दिया था।
- 24:47कई सालों तक सादत खान को उनसे वॉर करना
- 24:50पड़ा। फाइनली लॉलेलेसनेस और बड़े जमींदार
- 24:53को सप्रेस करने में वह सक्सेसफुल रहे।
- 24:561723 में उन्होंने एक नया रेवेन्यू
- 24:59सेटलमेंट किया। उन्होंने एक्विटेबल लैंड
- 25:02रेवेन्यू को इंट्रोड्यूस करके पेजेंस की
- 25:04कंडीशन में सुधार किया। इसी के साथ
- 25:07उन्होंने पेजेंस को बड़े जमींदार के
- 25:09ऑपरेशन से भी प्रोटेक्शन प्रोवाइड की।
- 25:11बंगाल नवाब्स की तरह उन्होंने भी हिंदू और
- 25:14मुस्लिम्स के बीच डिस्क्रिमिनेशन नहीं
- 25:16किया। ऐसा बताया जाता है कि नादिर शाह के
- 25:191739 के इन्वेशन में बड़ी मात्रा में लूट
- 25:23की डिमांड के चलते उन्होंने सुसाइड कर
- 25:25लिया। उनके नेफ्यू सफदर जंग ने फिर उनको
- 25:28सक्सीड किया। सफदर जंग को 1748 में मुगल
- 25:33एंपायर का वजीर बनाया और उनको इलाहाबाद का
- 25:37प्रोविंस भी ग्रांट किया गया। 1754 में
- 25:40उनकी डेथ हुई। अपनी डेथ के पहले उन्होंने
- 25:43अवध और इलाहाबाद में पीस एस्टैब्लिश किया।
- 25:46उन्होंने मराठा सरदार से भी अलायंस किया
- 25:49जिससे मराठा इंकरजशन से बचा जा सके।
- 25:52राजपूत चीफेंस की लॉयल्टी भी उन्होंने
- 25:55हासिल की। सफदर जंग ने एक एक्विटेबल
- 25:58जस्टिस सिस्टम को भी इस्टैब्लिश किया। आगे
- 26:01बढ़ते हैं और देखते हैं मसौर स्टेट के
- 26:03बारे में। मसौर। दोस्तों, साउथ इंडिया में
- 26:07हैदराबाद के अलावा एक और इंपॉर्टेंट पावर
- 26:10यानी मसौर का राइज हैदर अली के अंडर 18th
- 26:13सेंचुरी में हुआ। विजयनगर एंपायर के एंड
- 26:16होने के बाद से ही मैसौर स्टेट ने अपना
- 26:19इंडिपेंडेंस बनाए रखा। मुगल एंपायर का वह
- 26:22सिर्फ एक नॉमिनल पार्ट था। 1721 में पैदा
- 26:25हुए हैदर अली ने अपने करियर की शुरुआत
- 26:28मसौर आर्मी में एक छोटे से ऑफिसर के रूप
- 26:31में की। वो एक ब्रिलियंट कमांडर थे।
- 26:34उन्होंने वेस्टर्न मिलिट्री ट्रेनिंग
- 26:36कीेंस को समझा और इसे अपने ट्रूप्स में
- 26:38लागू किया। मसौर के रूलर नंजराज को
- 26:41उन्होंने 1761 में ओवर थ्रो कर दिया और
- 26:45अपनी अथॉरिटी एस्टैब्लिश की। नंजराज वडिया
- 26:48डायनेस्टी से बिलोंग करते थे। सभी रेबल्स
- 26:51को उन्होंने कंट्रोल में किया और जल्द ही
- 26:54बिदनूर, सुंडा, सेरा, कनारा और मालाबार को
- 26:57कैप्चर किया।
- 26:59उन्होंने भी रिलीजियस टॉलरेंस की पॉलिसी
- 27:01को अपनाया। वो लगातार मराठा सरदार, निजाम
- 27:05और ब्रिटिश के साथ वॉर में इंगेज्ड रहे।
- 27:071782 में उनकी डेथ हुई और उनके बेटे टीपू
- 27:11सुल्तान ने उनको सक्सीड किया। टीपू
- 27:14सुल्तान ने नए कैलेंडर, कोइनेज सिस्टम और
- 27:16वेट्स और मेजर्स के स्किल्स को भी
- 27:18इंट्रोड्यूस किया। उनकी आर्मी में
- 27:21मस्किट्स और बयनेट्स का इस्तेमाल किया
- 27:23जाता था जो कि यूरोपियन फैशन में बनाए
- 27:26जाते थे और मसूर में ही मैन्युफैक्चर किए
- 27:28जाते थे। 1796 में उन्होंने एक मॉडर्न
- 27:32नेवी को बनाने का भी एफर्ट किया। 1799 में
- 27:36हुए फोर्थ एंग्लो माइससोर वॉर में उनकी
- 27:39डेथ हो गई।
- 27:41अब बढ़ते हैं केरला की तरफ। केरला। 18th
- 27:45सेंचुरी की शुरुआत में केरला लार्ज नंबर
- 27:48ऑफ फ्यूडल चीफ्स और राजास में डिवाइडेड
- 27:50था। किंग मार्तंड वर्मा ने ट्रेवनकोर
- 27:54किंगडम को 1729 के बाद एस्टैब्लिश किया।
- 27:58उनके एंपायर की बाउंड्रीज कन्याकुमारी से
- 28:00कोचिन तक एक्सटेंड करती थी। उन्होंने
- 28:03वेस्टर्न मॉडल पर बेस्ड एक स्ट्रांग आर्मी
- 28:05ऑर्गेनाइज की और मॉडर्न वेपंस का यूज
- 28:08किया। उन्होंने कई इरीगेशन वर्क्स करवाए,
- 28:11रोड्स बनवाई और कम्युनिकेशन के लिए
- 28:13कैनाल्स बनवाए। यहां तक कि फॉरेन ट्रेड को
- 28:17भी एक्टिवली इनकरेज किया। 18th सेंचुरी
- 28:20में मलयालम लिटरेचर का रिमारकेबल रिवाइवल
- 28:22देखने को मिला। यह रिवाइवल केरला के राजाज़
- 28:26और चीफ्स के कारण हुआ। जो लिटरेचर के
- 28:28ग्रेट पेट्रन थे। 18th सेंचुरी के सेकंड
- 28:32हाफ में ट्रिवेंड्रम जो कि ट्रेवनकोर की
- 28:35कैपिटल थी। संस्कृत स्कॉलरशिप के एक फेमस
- 28:38सेंटर के रूप में उभर कर आया। मार्तंड
- 28:41वर्मा को राम वर्मा ने सक्सीड किया और
- 28:44दोनों ने मिलकर ट्रेवनकोर किंगडम में लंबे
- 28:47समय तक पीस एंड प्रोग्रेसिव माहौल बनाए
- 28:50रखा। दोस्तों, अब बात करते हैं दिल्ली के
- 28:53आसपास के एरियाज के बारे में और देखते हैं
- 28:55मुगल एंपायर के डिक्लाइन के बाद इनमें
- 28:58क्या डेवलपमेंट्स हुए। सबसे पहले बात
- 29:00करेंगे राजपूत की।
- 29:03राजपूत
- 29:05दोस्तों मुगल एंपायर की बढ़ती वीकनेस के
- 29:08चलते राजपूत स्टेट्स ने भी अपने आप को
- 29:11वर्चुअली फ्री करने की कोशिश की और साथ ही
- 29:14बाकी के एंपायर में अपने इनफ्लुएंस को
- 29:16बढ़ाने की भी कोशिश की। राजपूताना स्टेट्स
- 29:19अभी भी आपस में डिवाइडेड थे। लगभग सभी
- 29:22बड़े राजपूत स्टेट्स के बीच सिविल वॉर्स
- 29:25होते ही रहते थे। मुगल कोर्ट की तरह यहां
- 29:28भी करप्शन धोखाधड़ी फैली हुई थी। इसी के
- 29:31चलते मारवाड़ के राजा अजीत सिंह को उनके
- 29:34ही बेटे ने 1724 में मार दिया जो वहां के
- 29:39बिगड़ते हालातों का गवाह है। 18th सेंचुरी
- 29:42के सबसे आउटस्टैंडिंग राजपूत रूलर थे राजा
- 29:45सवाई जय सिंह ऑफ अंबेर जिन्होंने 1699 से
- 29:491743 तक रूल किया। वो एक डिस्टिंग्विश्ड
- 29:52स्टेट्समैन, लॉ मेकर और रिफॉर्मर थे। वह
- 29:56जयपुर सिटी के फाउंडर थे और उसको साइंस और
- 29:59आर्ट का एक ग्रेट सेंटर बनाया। जय सिंह एक
- 30:03ग्रेट एस्ट्रोनॉमर भी थे जिन्होंने
- 30:05दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा
- 30:08में एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जरवेटरीज बनवाई।
- 30:11दिल्ली के जंतरमंतर को तो हम सब जानते ही
- 30:14हैं। वो एक सोशल रिफॉर्मर भी थे। अपनी
- 30:17बेटियों की शादी में होने वाले लैविश
- 30:20एक्सपेंडिचर को कम करने के लिए उन्होंने
- 30:22एक लॉ को पास किया। क्योंकि इस प्रैक्टिस
- 30:25ने फीमेल इनफेंटिसाइड जैसी प्रैक्टिस को
- 30:27बढ़ावा दिया। दोस्तों, अब बात करते हैं
- 30:30जाट्स के बारे में। जाट्स। जाट्स एक
- 30:34एग्रीकल्चरिस्ट क्लास थी जो दिल्ली, मथुरा
- 30:37और आगरा के आसपास के रीजन में रहती थी।
- 30:401669 में औरंगजेब के रूल में मथुरा रीजन
- 30:44के जाट पेजेंट्स ने रिवोल्ट किया। और ऐसा
- 30:46ही एक और रिवोल्ट 1688 में दोबारा हुआ। इन
- 30:50रिवोल्ट्स को क्रश तो कर दिया गया लेकिन
- 30:53यह एरिया डिस्टर्बड ही रहा। औरंगजेब की
- 30:56डेथ के बाद दिल्ली के रीजन में वह लगातार
- 30:59डिस्टरबेंसेस क्रिएट करते रहे। भरतपुर एक
- 31:02जाट स्टेट था जिसको चूड़ामन और बदन सिंह
- 31:06ने सेटअप किया था। जो कि आज ईस्टर्न
- 31:08राजस्थान के भरतपुर डिस्ट्रिक्ट में है।
- 31:11सूरजमल के अंडर जाट पावर अपने पीक पर
- 31:14पहुंची। जिन्होंने 1756 से 1763 तक रूल
- 31:18किया। उनकी अथॉरिटी ईस्ट में गंगा से लेकर
- 31:22साउथ में चंबल तक और वेस्ट आगरा सुबह से
- 31:26लेकर दिल्ली के सूबा तक फैली हुई थी। उनके
- 31:29स्टेट में आगरा, मथुरा, मेरठ और अलीगढ़
- 31:32इंक्लूडेड थे। 1763 में उनकी डेथ के बाद
- 31:37जाट स्टेट डिक्लाइन हो गया और पेटी
- 31:40जमींदार में स्प्लिट हो गया। दोस्तों, अब
- 31:43आगे बढ़ते हैं और देखते हैं बंगश, पठान्स
- 31:46और रोहिलास के बारे में। बंगश पठानं एंड
- 31:49रोहिलाज़ मोहम्मद खान बंगश ने मुगल एपरर
- 31:53फारुख सियार और मोहम्मद शाह के रेन के
- 31:56दौरान फर्रूखाबाद के आसपास की टेरिटरी में
- 31:591713 में एक अपना कंट्रोल इस्टैब्लिश
- 32:02किया। यहीं से बंगश पठान की शुरुआत हुई।
- 32:061739 के नादिर शाह के इन्वेशन के दौरान
- 32:09अली मोहम्मद खान ने रूहेलखंड नाम से एक
- 32:12अलग प्रिंसिपालिटी को कार्व आउट किया।
- 32:15रूहिलखंड हिमालयज के फुट हिल्स में था।
- 32:18यानी साउथ में गंगा और नॉर्थ में कुमाऊं
- 32:21हिल्स के बीच यह किंगडम था। अब देखते हैं
- 32:24एक इंपॉर्टेंट रीजनल पावर सिख के बारे
- 32:27में। सिख दोस्तों 10थ और लास्ट सिख गुरु
- 32:32गुरु गोविंद सिंह ने मुगल्स की रिपीटेड
- 32:35अट्रोसिटी से बचने के लिए सिख्स को एक
- 32:38मिलिटेंट सेक्ट में ट्रांसफॉर्म किया।
- 32:40उनकी लीडरशिप में सिख कम्युनिटी एक
- 32:43पॉलिटिकल और मिलिट्री फोर्स बनी। बंदा
- 32:47बहादुर जिन्होंने 178 में लीडरशिप अस्यूम
- 32:50की ने 8 साल तक मुगल आर्मी के अगेंस्ट
- 32:53स्ट्रगल किया और पेजेंस और लोअर कास्ट
- 32:56लोगों के साथ मार्च किया। 1715 में उनको
- 33:00कैप्चर कर लिया गया और मार दिया गया।
- 33:02नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली के लगातार
- 33:05इन्वेजंस और पंजाब एडमिनिस्ट्रेशन के फेल
- 33:08होने से सिक्स को एक बार फिर से राइज होने
- 33:11का मौका मिला।
- 33:131765 से 1800 के बीच सिक्स ने पंजाब और
- 33:17जम्मू को अपने कंट्रोल में ले लिया। सीख्स
- 33:20ने खुद को 12 मिसल्स यानी एक तरह की
- 33:23क्फेडरेसीज में ऑर्गेनाइज किया। यह सभी
- 33:26मिसल्स आपस में कोऑपरेशन में रहते थे।
- 33:3018th सेंचुरी के एंड में सुकर चकिया मिसल
- 33:33के चीफ रणजीत सिंह प्रोमिनेंस में आए। वो
- 33:36एक स्ट्रांग और करेजियस सोल्जर थे और एक
- 33:39एफिशिएंट एडमिनिस्ट्रेटर थे। 1799 में
- 33:43उन्होंने लाहौर और 1802 में अमृतसर को
- 33:46कैप्चर किया। पंजाब के स्ट्रांग किंगडम को
- 33:50सेटअप करने का श्रेय रणजीत सिंह को ही
- 33:52जाता है। उनके किंगडम में सतलज से लेकर
- 33:55झेलम तक एरिया इंक्लूडेड था। उन्होंने
- 33:58अपनी आर्मी को यूरोपियंस की मदद से
- 34:00मॉडर्नाइज किया। ऐसा बताया जाता है कि
- 34:03इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बाद एशिया
- 34:06की सबसे पावरफुल आर्मी उन्हीं के पास थी।
- 34:09उनकी रेन के अंतिम समय में ब्रिटिश ने
- 34:12उनको 1838 में ट्राईपाटा एक ट्रीटी साइन
- 34:15करवाई। जिसमें उन्होंने ब्रिटिश आर्मी को
- 34:18पंजाब से काबुल की तरफ पास होने की परमिशन
- 34:20दी। इसके बाद फर्स्ट एंग्लो अफगान वॉर हुआ
- 34:24जिसमें ईस्ट इंडिया कंपनी और रणजीत सिंह
- 34:27ने कुछ हद तक कोऑपरेट भी किया। 1839 में
- 34:30उनकी डेथ हुई और उनके सक्सेसर्स स्टेट को
- 34:33इंटैक्ट नहीं रख पाए और जल्द ही ब्रिटिश
- 34:36ने उस पर कब्जा कर लिया। अब बात करते हैं
- 34:39लास्ट और एक इंपॉर्टेंट रीजनल पावर यानी
- 34:42मराठाज़ के राइज़ और फॉल के बारे में।
- 34:46राइज़ एंड फॉल ऑफ द मराठाज़।
- 34:48सक्सेशन स्टेट्स में मुगल एंपायर के सामने
- 34:51सबसे बड़ा चैलेंज मराठा किंगडम की तरफ से
- 34:54आया। बल्कि यह कहा जा सकता है कि सिर्फ
- 34:57मराठा किंगडम ही मुगल एंपायर को रिप्लेस
- 34:59करने की स्ट्रेंथ रखता था। लेकिन मराठा
- 35:02सरदार में यूनिटी की कमी थी और एक ऑल
- 35:05इंडिया एंपायर को सेटअप करने के लिए जरूरी
- 35:08आउटलुक और विज़न लैकिंग था।
- 35:11छत्रपति शिवाजी महाराज के ग्रैंडसन शाहू
- 35:151689 से ही औरंगजेब के प्रिजनर थे। 177
- 35:19में औरंगजेब की डेथ के बाद उनको रिलीज कर
- 35:22दिया गया और जल्द ही सतारा के शाहू और
- 35:26कोल्हापुर की ताराबाई के बीच एक सिविल वॉर
- 35:28छिड़ गई। मराठा सरदार में एक फैक्शनलिज्म
- 35:32क्रिएट हो गया। इस कॉन्फ्लिक्ट के बीच
- 35:34बालाजी विश्वनाथ की लीडरशिप में मराठा
- 35:37गवर्नमेंट में एक नए तरह का सिस्टम इवॉल्व
- 35:40हुआ। यह पीरियड पेशवा डोमिनेशन का पीरियड
- 35:43था जिसमें मराठा स्टेट एक एंपायर में
- 35:46ट्रांसफॉर्म हुआ। विश्वनाथ 1713 में पेशवा
- 35:50यानी चीफ मिनिस्टर बने। स्टेट की सारी
- 35:53पावर पेशवा के पास होने लगी। यानी पेशवा
- 35:55एक तरह से मराठा एंपायर का फंक्शनल हेड
- 35:58था। 1719 में विश्वनाथ ने मुगल एपरर फारूक
- 36:02सियार को ओवर थ्रो करने में सैयद ब्रदर्स
- 36:05की भी मदद की। यहां से उनको मुगल एंपायर
- 36:08की वीकनेस का पता चला और अब वो नॉर्थ में
- 36:11एक्सपेंड करने के लिए तैयार हुए। 1720 में
- 36:15बालाजी विश्वनाथ की डेथ हुई और उनके 20
- 36:18साल के बेटे बाजीराव वन ने उनको सक्सीड
- 36:20किया। बाजीराव की लीडरशिप में मराठाज़ ने
- 36:24मुगल एंपायर के अगेंस्ट कई कैंपेन किए।
- 36:261740 में बाजीराव की डेथ तक मराठाज़ ने
- 36:30मालवा, गुजरात और बुंदेलखंड के कुछ
- 36:32पार्ट्स को कंकर कर लिया था। इसी पीरियड
- 36:35में गायवाड़, होलकर, सिंधिया और भोसले
- 36:38मराठा फैमिलीज प्रोमिनेंस में आई। बाजीराव
- 36:41के रेन में किंगडम ऑफ महाराष्ट्र से बढ़कर
- 36:44मराठा स्टेट अब एक एंपायर बन गया था। जो
- 36:47नॉर्थ में एक्सपेंड कर रहा था। लेकिन
- 36:49एडमिनिस्ट्रेशन पर खास ध्यान नहीं दिया
- 36:51गया। 1740 से 1761 के बीच पेशवा थे नाना
- 36:56साहेब यानी बालाजी बाजीराव। 1749 तक स्टेट
- 37:01अफेयर्स अब पेशवा के हाथों में आ चुके थे।
- 37:04पेशवा का ऑफिस भी हेरेडिटरी हो चुका था और
- 37:07पेशवा स्टेट का डे फैक्टो रूलर था। मालवा,
- 37:11गुजरात और बुंदेलखंड को कंसोलिडेट कर दिया
- 37:13गया था। बंगाल को लगातार इनवेड किया गया।
- 37:171751 में बंगाल के नवाब को ओसा को सीड
- 37:21करना पड़ा। साउथ में मैसौर और बाकी माइनर
- 37:24स्टेट्स को भी ट्रिब्यूट पे करने के लिए
- 37:26फोर्स किया गया। मराठास के बारे में हम
- 37:29डिटेल में अपनी नेक्स्ट वीडियो में
- 37:31देखेंगे। अब आते हैं कंक्लूजन पर।
- 37:35कंक्लूजन। तो दोस्तों, हमने देखा कि किस
- 37:38तरह मुगल एंपायर के डिक्लाइन के बाद रीजनल
- 37:41स्टेट्स का राइज हुआ। औरंगजेब के रेन के
- 37:43दौरान ही मुगल एंपायर का डिक्लाइन स्टार्ट
- 37:46हुआ। उनकी कंट्रोवर्शियल रिलीजियस पॉलिसीज
- 37:48के चलते रीजनल स्टेट्स में रिबेलियन होने
- 37:51लगे। और जब सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन में
- 37:54वीक रूलर्स आने लगे तो यह प्रोसेस और भी
- 37:56फास्ट हो गया। वीक सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन
- 38:00के चलते रीजनल पावर्स उभर कर आने लगी और
- 38:03उन्होंने ऑटोनोमी डिक्लेअ कर दी। जल्द ही
- 38:06इंडिया में एंपायर इस्टैब्लिश करने की
- 38:08स्ट्रगल स्टार्ट हुई। इसी बीच ब्रिटिशर्स
- 38:11लगातार अपना स्ट्रांग होल्ड बढ़ाने लगे और
- 38:14ग्रेजुअली इंटरनल पॉलिटिक्स में इंटरफेयर
- 38:17करने लगे और आगे चलकर इन्हीं रीजनल पावर्स
- 38:21और इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच
- 38:24स्ट्रगल स्टार्ट हुआ जिसकी कहानी हम आगे
- 38:27चलकर देखेंगे।
- 38:30द एंग्लो फ्रेंच राइवलरी एंड कर्नाटक
- 38:32वॉर्स। दोस्तों, हमने पिछली वीडियो में
- 38:35डिस्कस किया था कि कैसे इंडिया में ट्रेड
- 38:38करने के लिए अलग-अलग यूरोपियन कंपनीज आती
- 38:40हैं। आज हम उन्हीं में से दो कंपनीज
- 38:43इंग्लिश और फ्रेंच के बीच की राइवलरी को
- 38:45डिस्कस करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं।
- 38:49इंट्रोडक्शन। दोस्तों, वैसे तो ब्रिटिश और
- 38:52फ्रेंच ट्रेड करने के लिए इंडिया आते हैं।
- 38:54लेकिन बाद में यह दोनों इंडिया के
- 38:56पॉलिटिक्स में इन्वॉल्व हो जाते हैं। ऐसा
- 38:58इसलिए क्योंकि यह दोनों ही कंपनीज़
- 39:01मकटलिज्म में यकीन करती थी। जिसके
- 39:03अकॉर्डिंग प्रॉफिट को मैक्सिमाइज करने के
- 39:06लिए ट्रेड में मोनोपोली होना जरूरी माना
- 39:08जाता था। दोनों पावर्स इंडिया में
- 39:10कमर्शियल मोनोपोली चाहती थी। इसलिए दोनों
- 39:13पॉलिटिकल पावर इस्टैब्लिश करने में लग
- 39:15जाते हैं। तो दोनों के बीच राइवलरी होना
- 39:18भी नेचुरल था। इसके साथ ही वर्ल्ड
- 39:20हिस्ट्री में पहले से चली आ रही ट्रेडिशनल
- 39:22एंग्लो फ्रेंच राइवलरी का रिफ्लेक्शन भी
- 39:24इंडिया में देखने को मिलता है। इंडिया में
- 39:27यह राइवलरी तीन कर्नाटिक वॉर्स के फॉर्म
- 39:30में सामने आती है। तो आइए एक-एक करके
- 39:33जानते हैं तीनों कर्नाटक वॉर्स के बारे
- 39:35में। फर्स्ट कर्नाटक वॉर फ्रॉम 1740 टू
- 39:391748
- 39:41बैकग्राउंड।
- 39:43कोरोमंडल कोस्ट और उसके आसपास के एरिया को
- 39:46यूरोपियंस ने कर्नाटक नाम दिया था।
- 39:48इंग्लिश और फ्रेंच के बीच इंडिया में हुए
- 39:51सभी वॉर्स जनरली इसी एरिया में हुए थे।
- 39:54इसीलिए इन्हें कर्नाटिक वॉर्स बोला जाता
- 39:56है। फर्स्ट कर्नाटक वॉर यूरोप में हुए
- 39:59ऑस्ट्रियन वॉर ऑफ सक्सेशन का इंडिया में
- 40:01एक्सटेंशन था। 1740 में यूरोप में
- 40:05ऑस्ट्रिया के सक्सेसर के इशू पर वॉर शुरू
- 40:07होता है। जिसमें इंग्लैंड और फ्रांस
- 40:09आमने-सामने होते हैं।
- 40:12यूरोप की राइवलरी इंडिया में पहुंच जाती
- 40:14है। फर्स्ट कर्नाटिक वॉर के रूप में।
- 40:16फर्स्ट कर्नाटक वॉर के दौरान मद्रास में
- 40:191746 में बैटल ऑफ सेंट थॉमस होता है।
- 40:22जिसमें कर्नाटक के नवाब अनवरुद्दीन और
- 40:25फ्रेंच फोर्सेस आमने-सामने होते हैं। आइए
- 40:27जानते हैं ऐसा क्यों होता है। कोर्स ऑफ द
- 40:31वॉर। इंडिया में इंग्लिश और फ्रेंच कंपनीज़
- 40:34के बीचिटीज की शुरुआत होती है जब 1745 में
- 40:38इंग्लिश नेवी कॉमोडोर कर्टिस बेनेट की
- 40:40लीडरशिप में कुछ फ्रेंचशिप्स को सीज कर
- 40:42लेती है। इसका बदला लेने के लिए फ्रेंच
- 40:45गवर्नर डुप्लेक्स मॉरीशस से एक फ्रेंच
- 40:47फ्लट बुलाते हैं। एडमिरल लाबोदुनवा की
- 40:50लीडरशिप में यह फ्लट अंग्रेजों की मदद्रास
- 40:53फैक्ट्री पर अटैक करती है और आसानी से
- 40:55मद्रास को जीत लिया जाता है। लेकिन इसी
- 40:58बीच कर्नाटक के नवाब अनवरुद्दीन खान
- 41:00फ्रेंच से कहते हैं कि उनकी टेरिटरी में
- 41:03वह इस तरह फाइट नहीं कर सकते और तुरंत
- 41:06मद्रास से वापस जाने का आर्डर देते हैं।
- 41:08पर फ्रेंच गवर्नर डुप्लेक्स उन्हें यह
- 41:10कहकर शांत कर देते हैं कि मद्रास को जीतने
- 41:13के बाद वह उसे नवाब को गिफ्ट कर देंगे। जब
- 41:16फ्रेंच मद्रास जीतने के बाद भी नवाब से
- 41:18किया हुआ अपना प्रॉमिस नहीं पूरा करते तो
- 41:20अनवरुद्दीन अपने बेटे महफूज़ खान की कमांड
- 41:24में 10,000 सोल्जर्स की एक आर्मी मद्रास
- 41:26को कैप्चर करने के लिए भेज देते हैं। फिर
- 41:29फ्रेंच की आर्मी के साथ इनका सामना होता
- 41:31है सेंट थॉमस नाम की जगह पर जो रिवर
- 41:33अडियार के बैंक पर लोकेटेड है।
- 41:36सिग्निफिकेंस
- 41:38यह वॉर यूरोपियंस की आंखें खोल देती है।
- 41:41उनको सेंट थॉमस के बैटल से यह रियलाइज
- 41:43होता है कि इवन एक छोटी सी डिसिप्लिन
- 41:45आर्मी आसानी से एक बड़ी इंडियन आर्मी को
- 41:48हरा सकती है। क्योंकि इस बैटल में फ्रेंच
- 41:51साइड से 230 यूरोपियंस और 700 इंडियन
- 41:55सोल्जर्स मिलकर नेटिव आर्मी की 10000 की
- 41:58फोर्स को हरा देते हैं। उसके अलावा डेकन
- 42:00में चल रहे एंग्लो फ्रेंच कॉन्फ्लिक्ट में
- 42:03नेवल फोर्स कीेंस भी इस वॉर के बाद बहुत
- 42:06क्लियर हो जाती है। दोस्तों एला शपेल की
- 42:09संधि से फर्स्ट कर्नाटक वॉर का एंड तो हो
- 42:12गया लेकिन इनके आपस में रिश्ते इससे
- 42:14फ्रेंडली नहीं बनते हैं। इनकी राइवलरी
- 42:17कंटिन्यू रहती है और जन्म देती है सेकंड
- 42:20कर्नाटिक वॉर को। आइए अब उसके बारे में
- 42:23जानते हैं। सेकंड कर्नाटक वॉर 1749 टू
- 42:281754
- 42:29बैकग्राउंड
- 42:31फर्स्ट कर्नाटिक वॉर के बाद फ्रेंच गवर्नर
- 42:33डुप्लेक्स के पॉलिटिकल एंबिशंस बढ़ जाते
- 42:35हैं। वह सदर्न इंडिया में फ्रेंच की पावर
- 42:38और पॉलिटिकल प्रभाव को बढ़ाने के लिए वहां
- 42:40के लोकल डायनेस्टिक डिस्प्यूट्स में
- 42:42इंटरफेयर करना शुरू करते हैं। उनका एक
- 42:45ऐंग्रेजों की पावर को कम करना भी था। उनको
- 42:49ऐसा करने का मौका मिलता है जब हैदराबाद और
- 42:51कर्नाटक के थ्रोन को लेकर डिस्प्यूट शुरू
- 42:54हो जाता है। हैदराबाद के निजाम आसफ जहां
- 42:57की 21 मई 1748 को मृत्यु हो जाती है और
- 43:00उनके बेटे नसीर जंग हैदराबाद के अगले
- 43:03निजाम बनते हैं। लेकिन इनके नेफ्यू और आसफ
- 43:06जहां के ग्रैंडसन मुजफ्फर जंग इनको चैलेंज
- 43:09करते हैं और खुद निजाम की गद्दी चाहते
- 43:12हैं। उधर दूसरी तरफ कर्नाटक में नवाब
- 43:15अनवरुद्दीन को चैलेंज कर रहे होते हैं।
- 43:17वहां के फॉर्मर नवाब दोस्त अली के सन इन
- 43:20लॉ चंदा साहब। ड्यूप्लेक्स को इसमें अपनी
- 43:23पॉलिटिकल स्कीम्स को आगे बढ़ाने का मौका
- 43:25दिखता है। इसलिए वह डेकन में मुजफ्फर जंग
- 43:28और कर्नाटक की नवाब शिप के लिए चंदा साहिब
- 43:31का सपोर्ट करने का डिसीजन लेते हैं। यह
- 43:34देखने पर इंग्लिश नसीर जंग और अनवरुद्दीन
- 43:37की साइड हो जाते हैं। इस तरह यहां से शुरू
- 43:39होती है सेकंड कर्नाटक वॉर की कहानी जो
- 43:421749 से 1754 तक चलता है। आइए जानते हैं
- 43:46इस वॉर के दौरान क्या-क्या घटनाएं हुई।
- 43:49कोर्स ऑफ द वॉर
- 43:52डुप्लेक्स के प्लान को सक्सेस मिलती है जब
- 43:54मुजफ्फर जंग चंदा साहिब और फ्रेंच की
- 43:56कंबाइंड आर्मी के हाथों 1749 में वेलोर के
- 44:00पास हुई बैटल ऑफ अंबर के दौरान अनवरुद्दीन
- 44:03की हार और मृत्यु हो जाती है और दिसंबर
- 44:061750 में नसीर जंग को भी मार दिया जाता
- 44:09है। मुजफ्फर जंग डेकन के निजाम बन जाते
- 44:12हैं और ड्यूप्लेक्स को रिवॉर्ड के तौर पर
- 44:14रिवर कृष्णा के साउथ की पूरी मुगल टेरिटरी
- 44:17का गवर्नर डिक्लेअर कर देते हैं। इसके
- 44:20अलावा नॉर्दन सरकार्स के कुछ डिस्ट्रिक्ट
- 44:22भी फ्रेंच को दे दिए जाते हैं और निजाम के
- 44:26रिक्वेस्ट पर एक फ्रेंच आर्मी को हैदराबाद
- 44:28में तैनात कर दिया जाता है जिससे वहां
- 44:31फ्रेंच इंटरेस्ट को सुरक्षित रखा जा सके।
- 44:34लेकिन कुछ ही महीनों के बाद मुजफ्फर जंग
- 44:36को मार दिया जाता है और फ्रेंच मुजफ्फर के
- 44:39अंकल सलाबत जंग को नया निजाम बनाते हैं।
- 44:431751 में चंदा साहब कर्नाटक के नवाब बन
- 44:46जाते हैं। इस समय डुप्लेक्स अपनी पॉलिटिकल
- 44:49पावर की हाइट पर होते हैं। लेकिन जल्दी ही
- 44:52कहानी में ट्विस्ट आता है। लेट नवाब
- 44:54अनवरुद्दीन के बेटे मोहम्मद अली
- 44:56ट्रिचनोपली के फोर्ट में रिफ्यूज लिए हुए
- 44:59थे। चंदा साहिब और फ्रेंच के अनेक
- 45:02प्रयासों के बाद भी किला नहीं जीता जाता।
- 45:05अंग्रेज भी शांत नहीं बैठते थे। रॉबर्ट
- 45:07क्लाइव जो मोहम्मद अली को त्रिचनापल्ली
- 45:10में इफेक्टिव रीइंफोर्समेंट नहीं दे पाते
- 45:12गवर्नर सोंडर्स को एक काउंटर मूव सुझाते
- 45:15हैं। जिसके तहत कर्नाटक की कैपिटल एयरकॉट
- 45:19पर एक सरप्राइज अटैक प्लान किया जाता है।
- 45:21जिससे तिरचनापली से प्रेशर को डायवर्ट
- 45:24किया जा सके। प्लान के मुताबिक क्लाइव
- 45:27सिर्फ 210 सोल्जर्स के फोर्स के साथ अगस्त
- 45:301751 में आर्कॉट को कैप्चर कर लेते हैं।
- 45:33चंदा साहिब के द्वारा त्रिचोपली से
- 45:36डायवर्ट करके 4000 की फोर्स भेजी जाती है।
- 45:39लेकिन यह फोर्स आर्कॉट को जीतने में असफल
- 45:42रहती है। आर्कॉट की सफलता के बाद
- 45:45अंग्रेजों का मनोबल और भी बढ़ जाता है। और
- 45:481752 में स्ट्रिंग लॉरेंस एक स्ट्रांग
- 45:51इंग्लिश फोर्स के साथ ट्रिचनोपल्ली में
- 45:53फ्रेंच से सरेंडर करा लेते हैं। और इसी
- 45:56बीच चंदा साहेब को तंजोर के राजा षड्यंत्र
- 45:59करके मार डालते हैं। मोहम्मद अली कर्नाटक
- 46:02के नवाब बन जाते हैं। त्रिचनापल्ली में
- 46:05हुए डिजास्टर के बाद ड्यूप्लेक्स की
- 46:07किस्मत का सितारा डूबने लगता है। फ्रेंच
- 46:10कंपनी के डायरेक्टर्स ड्यूप्लेक्स के
- 46:12पॉलिटिकल एंबिशंस और उस पर हुए खर्च से
- 46:14खुश नहीं होते और उन्हें इंडिया से वापस
- 46:17फ्रांस बुला लिया जाता है। 1754 में
- 46:20ड्यूप्लेक्स को रिप्लेस करके फ्रेंच के नए
- 46:23गवर्नर बनते हैं गॉडहू। यह अंग्रेजों के
- 46:26साथ नेगोशिएशंस शुरू करते हैं और 1755 में
- 46:30ट्रीटी ऑफ पोंडीचेरी साइन करते हैं। इसके
- 46:33साथ ही सेकंड कर्नाटिक वॉर का एंड होता
- 46:35है। आइए अब इस वॉर के क्या इंप्लिकेशंस
- 46:39हुए उसको भी समझते हैं। इंप्लिकेशंस।
- 46:42सेकंड कर्नाटक वॉर से यह साफ हो गया कि
- 46:45यूरोपियन कंपनी को सक्सेस के लिए इंडियन
- 46:47अथॉरिटी के सपोर्ट की जरूरत नहीं है।
- 46:49बल्कि उल्टा इंडियन अथॉरिटी कंपनीज के ऊपर
- 46:53डिपेंडेंट होने लगी थी। कर्नाटक में
- 46:55मोहम्मद अली और हैदराबाद में सलाबत जंग
- 46:59यूरोपियन कंपनीज के पेट्रिन ना होकर
- 47:01क्लाइंट बन गए थे। इंग्लिश और फ्रेंच के
- 47:04बीच कॉन्फ्लिक्ट का यह दूसरा राउंड भी
- 47:06इनकंक्लूसिव रहा। क्योंकि अंग्रेजों के
- 47:08कैंडिडेट मोहम्मद अली कर्नाटक के नवाब तो
- 47:12बन जाते हैं, लेकिन फ्रेंच डेक्कन में अभी
- 47:14भी स्ट्रांग थे। उनके कैंडिडेट सलाबत जंग
- 47:18हैदराबाद के निजाम थे। साथ ही सालाना ₹
- 47:21लाख रेवेन्यू देने वाले नॉर्दन सरकार्स के
- 47:24कुछ इंपॉर्टेंट डिस्ट्रिक्ट्स भी फ्रेंच
- 47:26कंपनी को मिल गए थे। हां, वॉर से पहले की
- 47:29तुलना में साउथ इंडिया में फ्रेंच की
- 47:31पोजीशन कुछ कमजोर और अंग्रेजों की पोजीशन
- 47:34कुछ स्ट्रांग जरूर होती है। इंडिया में
- 47:37एंग्लो फ्रेंच राइवलरी का डिसाइसिव एक्शन
- 47:39होता है थर्ड कर्नाटक वॉर में। तो आइए अब
- 47:42उसके बारे में डिस्कस करते हैं। थर्ड
- 47:45कर्नाटक वॉर और द बैटल ऑफ वांडी वॉश। 1758
- 47:50टू 1763
- 47:52फर्स्ट कर्नाटिक वॉर की तरह ही थर्ड
- 47:54कर्नाटिक वॉर भी यूरोप में चल रहे इंग्लिश
- 47:57और फ्रेंच के स्ट्रगल की इंडिया में गूंज
- 47:59थी। 1756 में यूरोप में से इयर्स वॉर शुरू
- 48:04हो जाता है और फिर से इंग्लैंड और फ्रांस
- 48:06आमने-सामने होते हैं। इसका एक्सटेंशन
- 48:09इंडिया तक होता है। फ्रेंच गवर्नमेंट 1757
- 48:13में जनरल काउंट डिलेली को इंडिया भेजती है
- 48:16जो 12 महीने की यात्रा के बाद 1758 में
- 48:20यहां पहुंचते हैं। इसी बीच ब्रिटिशर्स
- 48:221757 में बंगाल में प्लासी का बैटल जीत
- 48:26चुके होते हैं। जिससे उन्हें इनॉमस
- 48:28रिसोर्सेज मिल जाते हैं और 1758 में ही
- 48:32काउंट डी लाली फोर्ट सेंट डेविड को कैप्चर
- 48:34कर लेते हैं। लाली का नेक्स्ट मूव मद्रास
- 48:37को घेरने का होता है। लेकिन वहां
- 48:39अंग्रेजों की एक स्ट्रांग नेवल फोर्स आ
- 48:41पहुंचती है और लाली को मजबूर होकर घेराव
- 48:44खत्म करना पड़ता है। इसके बाद लाली
- 48:46हैदराबाद से बसी को बुला लेते हैं। यह
- 48:48फ्रेंच की एक बड़ी गलती साबित होती है
- 48:51क्योंकि इससे उनकी लैंड गैरिसन कमजोर पड़
- 48:54गई और इसी बीच पोकॉक के कमांड में इंग्लिश
- 48:57फ्लट फ्रेंच फ्लट को तीन बार हरा देती है
- 49:00और फ्रेंच फ्लट को इंडियन वॉटर्स छोड़कर
- 49:02जाने पर मजबूर कर देते हैं। सी पर कमांड
- 49:05होने के बाद अब अंग्रेजों के लिए जीत का
- 49:07रास्ता खुल जाता है और उनकी फाइनल
- 49:10विक्ट्री में कोई डाउट नहीं रहता। फ्रेंच
- 49:12को 2 जनवरी 1760 को तमिलनाडु में वंडी वॉश
- 49:16की बैटल में सर आयर कूट के हाथों बुरी तरह
- 49:19हार का स्वाद चखना पड़ता है। बसी को
- 49:22प्रिजनर बना लिया जाता है। काउंटडी लैली
- 49:25पोंडीचेरी में रिट्रीट कर जाते हैं। 8
- 49:27महीने के ब्लॉकेड के बाद पोंडीचेरी भी
- 49:30अंग्रेजों द्वारा जीत लिया जाता है और
- 49:3316th जनवरी 1761 को लाली सरेंडर कर देते
- 49:37हैं। उसके बाद जल्दी ही फ्रेंच माहे और
- 49:41गिंगी को भी खो देते हैं। इस तरह साउथ
- 49:44इंडिया में एंग्लो फ्रेंच राइवलरी के
- 49:46ड्रामा का फाइनली पर्दा गिरता है। फ्रेंच
- 49:48की पोजीशन अब वापस उठने लायक नहीं रह गई
- 49:51थी। यूरोप में सेवन इयर्स वॉर का एंड होता
- 49:54है 1763 में ट्रीटी ऑफ़ पेरिस के द्वारा।
- 49:58इसके प्रोविज़ंस के अनुसार फ्रेंच को
- 50:00पोंडीचेरी और कुछ अन्य सेटलमेंट्स वापस कर
- 50:02दिए जाते हैं। लेकिन इस शर्त पर कि इनको
- 50:05कभी भी फोर्टिफाई नहीं किया जाएगा। इस तरह
- 50:08इंडिया में फ्रेंच के पॉलिटिकल एंबिशंस का
- 50:11हमेशा के लिए एंड हो जाता है। दोस्तों, यह
- 50:14तो हमने जान लिया कि फ्रेंच और इंग्लिश
- 50:16कंपनीज़ के कॉन्फ्लिक्ट में फाइनली इंग्लिश
- 50:19को जीत मिलती है और फ्रेंच को हार। पर अब
- 50:22इसके पीछे के कुछ रीज़ंस को भी जानते हैं।
- 50:24कॉजेस फॉर द इंग्लिश सक्सेस एंड द फ्रेंच
- 50:27फेलियर। इंग्लिश सक्सेस का सबसे पहला रीजन
- 50:30था इंग्लिश कंपनी पर लेसर गवर्नमेंटल
- 50:33कंट्रोल। वो एक प्राइवेट कंपनी थी। इसलिए
- 50:36काम कर रहे लोगों में एंथूजियाज्म और
- 50:39सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी नहीं थी। कंपनी
- 50:42इंस्टेंट डिसीजंस भी ले सकती थी क्योंकि
- 50:44उन्हें गवर्नमेंट की परमिशन नहीं चाहिए
- 50:46होती थी। दूसरी तरफ फ्रेंच कंपनी
- 50:49गवर्नमेंट के कंट्रोल में थी। इससे डिसीजन
- 50:51मेकिंग में भी डिले होता था। दूसरा रीजन
- 50:54था अंग्रेजों की सुपीरियर नेवी। इसकी
- 50:57हेल्प से वह सभी इंपॉर्टेंट बैटल्स जीत
- 50:59पाते हैं। साथ ही इंडिया की बड़ी और
- 51:01इंपॉर्टेंट सिटीज पर ब्रिटिश का ही
- 51:03कंट्रोल था। जैसे किलकाता, बॉम्बे और
- 51:06मद्रास। जबकि फ्रेंच के पास सिर्फ
- 51:08पोंडीचेरी ही था। ऐसा कई हिस्टोरियंस का
- 51:12मानना भी है कि इंग्लिशक से शुरू करके
- 51:14पूरे इंडिया को कंट्रोल कर सकते थे। लेकिन
- 51:17पोंडीचेरी से शुरू करके फ्रेंच गया क्या
- 51:19कोई भी ऐसा नहीं कर सकता था। इसके अलावा
- 51:22इंग्लिश कंपनी के पास फंड्स की कमी नहीं
- 51:25थी। कर्नाटक वॉर्स के बीच में ही 1757 में
- 51:28प्लासी का बैटल होता है। जिसमें जीतने पर
- 51:30कंपनी की वेल्थ में और भी ज्यादा इजाफा
- 51:33होता है। लेकिन फ्रेंच के पास फंड्स की
- 51:35शॉर्टेज बनी रहती है। वो पॉलिटिकल एंबिशंस
- 51:37की वजह से कमर्शियल इंटरेस्ट की अनदेखी कर
- 51:40देते हैं। एक और इंपॉर्टेंट रीजन था
- 51:43ब्रिटिश सक्सेस के पीछे अंग्रेजों के
- 51:45सुपीरियर मिलिट्री कमांडर्स। इंग्लिश साइड
- 51:48पर सरायर कूट, मेजर स्ट्रिंग लॉरेंस,
- 51:51रॉबर्ट क्लाइव जैसे लीडर्स की लंबी लिस्ट
- 51:54के कंपैरिजन में फ्रेंच साइड पर सिर्फ
- 51:56ड्यूप्लेक्स का ही नाम याद रहता है।
- 51:58दोस्तों, यह थे कुछ रीज़ंस जिनकी वजह से
- 52:02इंग्लिश फ्रेंच को हराकर इंडिया में अपना
- 52:04डोमिनेंस बनाने में कामयाब होते हैं।
- 52:06कंक्लूजन। थर्ड कर्नाटक वॉर में जीत के
- 52:10बाद इंडिया में इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी
- 52:12का कोई भी यूरोपियन राइवल नहीं बचता और
- 52:15इसके बाद वह अपना पूरा ध्यान इंडिया में
- 52:18एक डोमिनेंट पॉलिटिकल पावर बनने पर लगा
- 52:20देते हैं। ईस्ट इंडिया कंपनी कैसे
- 52:23धीरे-धीरे एक एंपायर सेटअप करती है। यह हम
- 52:26अपनी आने वाली वीडियोस में देखेंगे।
- 52:30रोड टू प्लासी एंड बक्सर। दोस्तों अभी तक
- 52:34हमने देखा कि कैसे इंग्लिश ईस्ट इंडिया
- 52:36कंपनी इंडिया में अपने सभी यूरोपियन
- 52:39राइवल्स को हराकर मोनोपोली इस्टैब्लिश कर
- 52:41लेती है। अब हम जानेंगे कि कंपनी कैसे
- 52:44इंडियन रूलर्स को हराकर इंडिया में एक
- 52:47डोमिनेंट पॉलिटिकल पावर बनकर उभरती है।
- 52:50एक-एक करके इंग्लिश कंपनी बहुत सी इंडियन
- 52:52प्रोविंसेस को जीत लेती है। और इसमें सबसे
- 52:55पहले नंबर आता है बंगाल का। बैटल ऑफ
- 52:58प्लासी और बक्सर को इंडियन हिस्ट्री के
- 53:01मेजर टर्निंग पॉइंट्स में से माना जाता
- 53:03है। तो आज हम इन्हीं गेम चेंजिंग बैटल्स
- 53:06के बारे में डिस्कस करेंगे। तो चलिए शुरू
- 53:09करते हैं। इंट्रोडक्शन
- 53:12बंगाल उस समय के इंडिया के प्रोविंसेस में
- 53:14सबसे ज्यादा फर्टाइल और रिच था। आज के
- 53:17बांग्लादेश, बिहार और ओसा इसके पार्ट होते
- 53:21थे। यहां की इंडस्ट्रीज और कॉमर्स भी वेल
- 53:24डेवलप्ड थी। नाम के लिए तो यह मुगल एंपायर
- 53:27का पार्ट था। लेकिन यहां के नवाब वास्तव
- 53:30में इंडिपेंडेंट रूलर की तरह शासन कर रहे
- 53:32थे। इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी बंगाल में
- 53:35कई जगह अपनी फैक्ट्रीज एस्टैब्लिश करती है
- 53:38औरक में 1696 से 176 के बीच एक फोर्ट का
- 53:43भी कंस्ट्रक्शन कराती है। इस फोर्ट का नाम
- 53:46इंग्लैंड के किंग विलियम द थर्ड के ओनर
- 53:48में फोर्ट विलियम रखा जाता है। बंगाल में
- 53:51कंपनी के ट्रेडिंग इंटरेस्ट को सेफ और
- 53:53सिक्योर रखने के लिए इस फोर्ट का
- 53:55कंस्ट्रक्शन कराया गया था। मतलब यह डिफेंस
- 53:58के पर्पस के लिए बनवाया गया था। बंगाल से
- 54:01कंपनी का काफी प्रॉफिटेबल ट्रेड होता था
- 54:03जिसमें कॉटन और सिल्क टेक्सटाइल्स मेजर
- 54:06ट्रेड आइटम थे। 1717 में मुगल एपरर फारूक
- 54:11सियार अपने फरमान के द्वारा कंपनी को
- 54:14बंगाल में ड्यूटी फ्री ट्रेड करने की
- 54:16परमिशन भी दे देते हैं।
- 54:18हम कह सकते हैं कि बंगाल में कंपनी के
- 54:21काफी स्ट्रांग ट्रेडिंग इंटरेस्ट्स थे।
- 54:24फिर ऐसा क्या हुआ कि कंपनी और बंगाल के
- 54:26नवाब के बीच 1757 में प्लासी की बैटल होती
- 54:30है? आइए जानते हैं बैकग्राउंड टू बैटल ऑफ
- 54:34प्लासी। बंगाल में सिचुएशन तब बदलने लगती
- 54:37है जब 1756 में एक स्ट्रांग रूलर नवाब अली
- 54:41वर्दी खान की मृत्यु हो जाती है और उनके
- 54:44ग्रैंडसन सिराजुद्दौला बंगाल के नवाब बनते
- 54:47हैं। सिराजुद्दौला के कुछ राइवल्स थे जो
- 54:50उनकी जगह खुद नवाब बनना चाहते थे। जैसे कि
- 54:54पूर्णिया की शौकत जंग और ढाका की घसीटी
- 54:57बेगम। इसके साथ ही कर्नाटक वॉारर्स के बाद
- 54:59से ही नवाब इंग्लिश कंपनी के प्लांस को
- 55:02लेकर डाउट में थे। ऐसी सिचुएशन में जब
- 55:04इंग्लिश कंपनी इनडायरेक्टली नवाब की राइबल
- 55:07घसीटी बेगम को सपोर्ट करती है और बंगाल के
- 55:10पॉलिटिकल ऑफेंडर्स को असाइलम भी देती है
- 55:12तो नवाब का गुस्सा और भी बढ़ जाता है।
- 55:16इसके अलावा मुगल फरमान के अनुसार जो दस्तक
- 55:19यानी कि फ्री पाससेस कंपनी को अपने ट्रेड
- 55:22के लिए मिलते थे, कंपनी उनका मिसयूज करना
- 55:24शुरू कर देती है। कंपनी के एंप्लाइजज़
- 55:27कंपनी के ट्रेड के साथ-साथ अपने प्राइवेट
- 55:29ट्रेड में भी इन फ्री पाससेस का यूज करते
- 55:32थे। जबकि मुगल फरमान में सिर्फ कंपनी के
- 55:35ट्रेड को ही यह राइट दिया गया था। इसके
- 55:38अलावा इंडियन मर्चेंट्स को भी पाससेस बेच
- 55:40देते थे। यह एक तरह से चीटिंग थी और इससे
- 55:43नवाब को काफी रेवेन्यू लॉस भी उठाना पड़
- 55:46रहा था। इसी बीच कंपनी फोर्ट विलियम को और
- 55:49भी ज्यादा फोर्टिफाई करने लगती है और
- 55:51फोर्ट की वॉल्स पर गंस तैनात कर दी जाती
- 55:53हैं। क्योंकि अंग्रेजों को डर था कि
- 55:55फ्रेंच से चल रहा कॉन्फ्लिक्ट बंगाल तक
- 55:58एक्सटेंड कर सकता है। यह सब देखने के बाद
- 56:01नवाब कंपनी को वार्निंग देते हैं कि वह
- 56:03ऐसा करना बंद करें। लेकिन कंपनी उनकी बात
- 56:06नहीं सुनती। नवाब को लगता है कि कंपनी
- 56:09उनकी सोवनिटी को चैलेंज कर रही है। इसलिए
- 56:12वह कंपनी के खिलाफ एक्शन लेते हैं औरक की
- 56:15तरफ मार्च करते हुए फोर्ट विलियम को 20th
- 56:18जून 1756 को कैप्चर कर लेते हैं। फिर नवाब
- 56:22अपनी इस आसान जीत को सेलिब्रेट करने के
- 56:24लिए का चार्ज माणिकचंद को देकर अपनी
- 56:28कैपिटल मुर्शिदाबाद लौट जाते हैं। यह नवाब
- 56:31की बहुत बड़ी गलती साबित होती है। वह अपने
- 56:33एनिमी की स्ट्रेंथ को अंडरएस्टीमेट कर
- 56:36लेते हैं। इसका फायदा उठाकर कुछ अंग्रेज
- 56:38अपनी शिप्स के साथ हुगली रिवर के रास्ते
- 56:41भाग जाते हैं। क्योंकि मानिकचंद के पास
- 56:43कोई नेवल फोर्स नहीं थी। इसीलिए वह
- 56:46अंग्रेजों को ऐसा करने से रोक नहीं पाते।
- 56:48इंग्लिश ऑफिशियल्स सी के पास फुल्टा नाम
- 56:51की जगह पर शरण लेते हैं क्योंकि यहां अपनी
- 56:54नेवल स्ट्रेंथ की वजह से वह सेफ रह सकते
- 56:57थे।
- 56:58यहां वह मद्रास से हेल्प आने का वेट करते
- 57:00हैं।क के फॉल की न्यूज़ अगस्त 1756 तक
- 57:04मद्रास पहुंचती है। और फिर कुछ डिले के
- 57:07बाद 16th अक्टूबर 1756 को एडमिरल वाटसन और
- 57:11कर्नल क्लाइव की लीडरशिप में मद्रास से एक
- 57:14स्ट्रांग नेवल और मिलिट्री फोर्स कोलकाता
- 57:17के लिए भेज दी जाती है। यह फोर्स दिसंबर
- 57:201756 मेंक पहुंच जाती है। और इसके बाद
- 57:24सेकंड जनवरी 1757 को ही क्लाइव मानिक चंद
- 57:28को ब्राइब देकर को वापस जीत लेते हैं। और
- 57:31फरवरी 1757 में नवाब सिराजुद्दौला क्लाइव
- 57:36के साथ अलीनगर की ट्रीटी साइन करते हैं।
- 57:38नवाब नेक को जीतने के बाद उसका नाम अलीनगर
- 57:42कर दिया था। इस ट्रीटी के अनुसार नवाब
- 57:44अंग्रेजों को उनके पुराने ट्रेडिंग
- 57:46प्रिविलेजेस वापस कर देते हैं। उनकोक को
- 57:49फर्टिफाई करने की परमिशन दे देते हैं और
- 57:52इस दौरान हुए अंग्रेजों के पूरे नुकसान की
- 57:54भरपाई का भी प्रॉमिस करते हैं। लेकिन इसके
- 57:57बाद भी अंग्रेज संतुष्ट नहीं होते और एक
- 58:00कंस्परेसी प्लान की जाती है जो जन्म देती
- 58:02है बैटल ऑफ प्लासी को। तो आइए जानते हैं
- 58:05इस कंस्परेसी और बैटल ऑफ प्लासी के बारे
- 58:08में। बैटल ऑफ प्लासी। अंग्रेज समझ चुके
- 58:12होते हैं कि सिराजुद्दौला के नवाब रहते
- 58:15हुए उनके ऊपर खतरा हमेशा बना रहेगा। इसलिए
- 58:18वह नवाब के खिलाफ चल रही एक कास्परेसी से
- 58:21जुड़ जाते हैं। इस कंस्परेसी के अनुसार
- 58:24सिराजुद्दौला की जगह उनके ही मीर बख्शी
- 58:26मीर जाफर को नवाब बनाने का प्लान होता है।
- 58:30मीर जाफर के अलावा इसमें शामिल होते हैं
- 58:32माणिकचंद जोलक के ऑफिसर इंचार्ज होते हैं।
- 58:36अमीचंद जो एक रिच मर्चेंट थे। जगत सेठ जो
- 58:39बंगाल के सबसे बड़े बैंकर थे और खादिम खान
- 58:43जो नवाब की आर्मी में कमांडर थे। प्लान के
- 58:46अकॉर्डिंग अंग्रेज नवाब के सामने ऐसी
- 58:48डिमांड्स रखते हैं जिन्हें नवाब कभी नहीं
- 58:50मान सकते थे। नवाब समझ जाते हैं कि अब
- 58:53अंग्रेजों के साथ वॉर के अलावा और कोई
- 58:56रास्ता नहीं है। दोनों साइड्स 23 जून 1757
- 59:00को प्लासी के मैदान पर जो मुर्शिदाबाद से
- 59:03अराउंड 30 कि.मी. की दूरी पर था मिलते
- 59:05हैं। लेकिन प्लासी का बैटल सिर्फ नाम के
- 59:08लिए ही बैटल था। इसमें अंग्रेजों की साइड
- 59:11से 50 से भी कम लोग मारे जाते हैं। जबकि
- 59:14नवाब लगभग अपने 500 आदमी खो देते हैं।
- 59:17नवाब की आर्मी का मेजर पार्ट जो ट्रेटर्स
- 59:20मीर जाफर और राय दुर्लभ की कमांड में था
- 59:23बैटल में कोई हिस्सा ही नहीं लेता। नवाब
- 59:25के सोल्जर्स का सिर्फ एक छोटा सा ग्रुप ही
- 59:28जिसको मीर मदन और मोहनलाल लीड कर रहे थे।
- 59:31बहादुरी के साथ लड़ता है। लेकिन अंत में
- 59:34नवाब मैदान छोड़कर जाने पर मजबूर हो जाते
- 59:36हैं। और मीर जाफर के पुत्र मीरान उनको
- 59:39मुर्शिदाबाद के रास्ते में मार देते हैं।
- 59:42मीर जाफर को बंगाल का नवाब बना दिया जाता
- 59:45है और इनाम के रूप में अंग्रेजों को 24
- 59:47परगना की जमींदारी दी जाती है और साथ हीक
- 59:51पर अटैक के कंपनसेशन के लिए ₹1 करोड़ 77
- 59:54लाख मीर जाफर कंपनी को देते हैं। इसके
- 59:58अलावा बहुत से गिफ्ट्स और ब्राइब कंपनी के
- 1:00:00ऑफिशियल्स को भी दिए जाते हैं। जैसे कि
- 1:00:02क्लाइव को अराउंड 2 मिलियन से भी ज्यादा
- 1:00:05का इनाम मिलता है। दोस्तों, यह तो थी बैटल
- 1:00:08ऑफ प्लासी की कहानी जो अंग्रेजों के लिए
- 1:00:11बंगाल के मास्टर बनने का रास्ता खोल देती
- 1:00:13है। और कैसे मीर जाफर जैसे एक बंदे की
- 1:00:16ट्रेचरी की वजह से इतिहास की दिशा ही बदल
- 1:00:19जाती है। ईस्ट इंडिया कंपनी अब कमर्शियल
- 1:00:21के साथ पॉलिटिकल एंटिटी भी बन जाती है।
- 1:00:24इससे उनकी प्रेस्टीज में भी इजाफा होता है
- 1:00:26और एक ही झटके में वह इंडिया के एंपायर के
- 1:00:30एक मेजर कंटेंडर बन जाते हैं। बंगाल से
- 1:00:33मिलने वाले रेवेन्यू की वजह से ही अंग्रेज
- 1:00:35एक स्ट्रांग आर्मी ऑर्गेनाइज कर पाते हैं
- 1:00:38और देश के बाकी हिस्सों को जीतने का खर्चा
- 1:00:40भी मैनेज कर पाते हैं। इसके अलावा बंगाल
- 1:00:43पर कंट्रोल एंग्लो फ्रेंच स्ट्रगल में भी
- 1:00:46डिसाइसिव रोल निभाता है। जैसा कि हमने
- 1:00:48अपनी पिछली वीडियो में देखा था। तो
- 1:00:50दोस्तों यह तो बात हुई प्लासी के युद्ध
- 1:00:53की। लेकिन बंगाल को जीतने की कहानी यहां
- 1:00:56खत्म नहीं होती। वह खत्म होती है बक्सर के
- 1:00:59युद्ध के बाद। तो चलिए अब उसके बारे में
- 1:01:02भी चर्चा करते हैं। बैटल ऑफ बक्सर। प्लासी
- 1:01:06की बैटल में कंपनी का साथ देने के बदले
- 1:01:09में मीर जाफर को बंगाल की नवाब शिप मिल
- 1:01:11जाती है। लेकिन उन्हें जल्दी ही एहसास
- 1:01:14होता है कि उन्हें यह डील काफी महंगी पड़
- 1:01:17रही है। कंपनी और उसके ऑफिसर्स की डिमांड
- 1:01:20बढ़ती ही रहती है और नवाब की ट्रेजरी
- 1:01:22धीरे-धीरे खाली होने लगती है। कंपनी के
- 1:01:25डायरेक्टर्स ने भी आर्डर दे दिया था कि
- 1:01:27बंगाल से ही बॉम्बे और मद्रास
- 1:01:29प्रेसिडेंसीज का खर्चा भी निकाला जाए और
- 1:01:32बंगाल के रेवेन्यू से ही कंपनी इंडिया से
- 1:01:35होने वाले एक्सपोर्ट्स को परचेस करेगी।
- 1:01:37इसका मतलब कंपनी अब सिर्फ इंडिया से ट्रेड
- 1:01:40नहीं कर रही थी बल्कि बंगाल के नवाब पर
- 1:01:42अपने कंट्रोल का यूज करके वहां की वेल्थ
- 1:01:45को ड्रेन करने में लगी थी। मीर जाफर समझ
- 1:01:49गए कि कंपनी और उसके ऑफिशियल्स की
- 1:01:51डिमांड्स को पूरा करना नामुमकिन है। दूसरी
- 1:01:54तरफ कंपनी के ऑफिशियल्स भी नवाब को
- 1:01:57क्रिटिसाइज करने लगते हैं क्योंकि वह उनकी
- 1:01:59एक्सपेक्टेशंस को पूरा नहीं कर रहे थे।
- 1:02:02इसलिए अक्टूबर 1760 में कंपनी मीर जाफर को
- 1:02:05फोर्स करती है कि वह नवाब की गद्दी अपने
- 1:02:08सन इन लॉ मीर कासिम के फेवर में छोड़ दें।
- 1:02:11और इस तरह मीर जाफर को रिप्लेस करके बंगाल
- 1:02:14के नवाब बन जाते हैं मीर कासिम। मीर कासिम
- 1:02:18बदले में कंपनी को बुर्दवान, मिदनापुर और
- 1:02:21चिटागोंग डिस्ट्रिक्ट्स की जमींदारी दे
- 1:02:23देते हैं। साथ ही इंग्लिश ऑफिशियलल्स को
- 1:02:25करीब ₹9 लाख के प्रेजेंस भी गिफ्ट करते
- 1:02:29हैं। कंपनी ने सोचा था कि मीर कासिम उनके
- 1:02:32पपेट की तरह रहेंगे। लेकिन मीर कासिम
- 1:02:35कंपनी की ऐसी सभी उम्मीदों पर पानी फेर
- 1:02:38देते हैं। वो एक एबल, एफिशिएंट और
- 1:02:41स्ट्रांग रूलर थे। मीर कासिम अपने आप को
- 1:02:44फॉरेन कंट्रोल से फ्री करना चाहते थे।
- 1:02:46उनको यह रियलाइज होता है कि अपनी
- 1:02:48इंडिपेंडेंस को मेंटेन करने के लिए उनके
- 1:02:51पास एक एफिशिएंट आर्मी और फुल ट्रेजरी का
- 1:02:53होना जरूरी है। इसलिए वह अलग-अलग
- 1:02:56रिफॉर्म्स के थ्रू अपनी इनकम बढ़ाने की
- 1:02:58कोशिश करते हैं। जैसे कि रेवेन्यू
- 1:03:00एडमिनिस्ट्रेशन में से करप्शन को खत्म
- 1:03:03करके। इसके साथ ही वह यूरोपियंस की तरह एक
- 1:03:05मॉडर्न और डिसिप्लिंड आर्मी भी बनाने की
- 1:03:08कोशिश करते हैं।
- 1:03:10कंपनी से दूरी बनाने के लिए वह अपनी
- 1:03:13कैपिटल को भी मुर्शिदाबाद से मुंगेर शिफ्ट
- 1:03:15कर लेते हैं। मीर कासिम कंपनी के ऑफिसर्स
- 1:03:18के द्वारा होने वाले दस्तख्स का मिसयूज
- 1:03:20रोकने के लिए एक ड्रास्टिक स्टेप लेते हैं
- 1:03:23और इंटरनल ट्रेड पर लगने वाली सभी ड्यूटीज
- 1:03:26को खत्म कर देते हैं। एक सोवरन रूलर होने
- 1:03:28के नाते वो ऐसा कर सकते थे। इसकी वजह से
- 1:03:31इंडिया के और कंपनी के मर्चेंट्स की
- 1:03:34पोजीशन एक जैसी हो जाती है। यह सब कंपनी
- 1:03:37को बिल्कुल भी पसंद नहीं आता। वो अपने और
- 1:03:39इंडियंस के बीच इक्वलिटी को टोलरेट नहीं
- 1:03:42कर सकते थे। कंपनी नवाब से डिमांड करती है
- 1:03:44कि इंडियन ट्रेडर्स पर फिर से ड्यूटीज
- 1:03:47इंपोज कर दी जाए। इसी बात पर बंगाल के
- 1:03:49नवाब और कंपनी के बीच एक बार फिर बैटल की
- 1:03:52शुरुआत होती है। 1763 में शुरू की कुछ
- 1:03:56बैटल्स में मीर कासिम हार जाते हैं और वह
- 1:03:59अवध चले जाते हैं। अवध में मीर कासिम वहां
- 1:04:03के नवाब सुजााउद्दौला और मुगल एपरर शाह
- 1:04:06आलम टू के साथ अलायंस बनाते हैं। यह तीनों
- 1:04:09मिलकर 22 अक्टूबर 1764 को बक्सर में मेजर
- 1:04:14मनरो की कमांड में कंपनी की आर्मी से
- 1:04:16आमनासामना करते हैं। इन तीनों पावर्स की
- 1:04:19400 से 60 हजार की कंबाइंड आर्मी कंपनी की
- 1:04:23अराउंड 700 की आर्मी से बुरी तरह हार जाती
- 1:04:26है और बक्सर के बैटल में अंग्रेजों की जीत
- 1:04:29होती है। दोस्तों यह तो हुई बक्सर के
- 1:04:32युद्ध की कहानी। आइए अब इसके रिजल्ट्स
- 1:04:35क्या रहे वह भी जानते हैं। आफ्टर मैथ ऑफ
- 1:04:38बक्सर बक्सर का बैटल इंडियन हिस्ट्री की
- 1:04:42मोस्ट डिसाइसिव बैटल्स में से एक माना
- 1:04:44जाता है। इसने दो मेजर इंडियन पावर्स की
- 1:04:47कंबाइंड आर्मी के अगेंस्ट इंग्लिश आर्म्स
- 1:04:49की सुपीरियरिटी को साबित कर दिया था। इसने
- 1:04:52ब्रिटिशर्स को बंगाल, बिहार और ओसा का
- 1:04:55मास्टर बना दिया और अवध को भी इनकी दया पर
- 1:04:58लाकर खड़ा कर दिया। मुगल एपरर शाह आलम 2
- 1:05:01से कंपनी को बंगाल, बिहार और ओसा के
- 1:05:04दीवानी राइट्स मिल जाते हैं। यानी कि यहां
- 1:05:06से रेवेन्यू कलेक्ट करने का राइट अब कंपनी
- 1:05:09के पास होगा। इस तरह बंगाल पर कंपनी का
- 1:05:12कंट्रोल अब लीगलाइज्ड हो जाता है। कंपनी
- 1:05:15इसके बदले में मुगल एपरर को ₹2 लाख की
- 1:05:18सब्सिडी देने का प्रॉमिस करती है और अवध
- 1:05:21के दो डिस्ट्रिक्ट्स कोरा और इलाहाबाद भी
- 1:05:23इन्हें दे देती है। मुगल एपरर छ साल तक
- 1:05:27इलाहाबाद के फोर्ट में एक तरह से
- 1:05:29अंग्रेजों के प्रिजनर के जैसे रहते हैं।
- 1:05:32अवध के नवाब सुजााउद्दौला के साथ 16th
- 1:05:35अगस्त 1765 को इलाहाबाद की ट्रीटी साइन
- 1:05:38होती है। इसके अनुसार नवाब कंपनी को ₹50
- 1:05:42लाख युद्ध के हरर्जाने के रूप में देते
- 1:05:44हैं और साथ ही कोरा और इलाहाबाद के
- 1:05:47डिस्ट्रिक्ट्स एपरर शाह आलम टू को सरेंडर
- 1:05:49कर देते हैं और दोनों के बीच एक अलायंस
- 1:05:52साइन होता है जिसमें कंपनी किसी भी
- 1:05:54आउटसाइड अटैक से नवाब को प्रोटेक्ट करने
- 1:05:57का प्रॉमिस करती है अगर नवाब कंपनी की
- 1:05:59आर्मी का खर्चा उठा लें। इस अलायंस के बाद
- 1:06:02अवध के नवाब कंपनी के डिपेंडेंट बन जाते
- 1:06:05हैं। इस तरह बक्सर के युद्ध के बाद कंपनी
- 1:06:08को ना सिर्फ बंगाल का डायरेक्ट कंट्रोल
- 1:06:10मिल जाता है बल्कि अवध भी इनडायरेक्टली
- 1:06:13इनके कंट्रोल में आ जाता है। दोस्तों, यह
- 1:06:16तो बात हुई अंग्रेजों द्वारा बंगाल के
- 1:06:18कॉन्क्वेस्ट की। प्लासी और फिर बक्सर के
- 1:06:21बैटल से अंग्रेजों ने बंगाल को अपने
- 1:06:24कंट्रोल में कर लिया था। इस सब में एक
- 1:06:26इंपॉर्टेंट पर्सनालिटी का राइज हम देखते
- 1:06:28हैं। वो थे रॉबर्ट क्लाइव जो बंगाल के
- 1:06:32पहले गवर्नर अपॉइंट किए जाते हैं। तो आइए
- 1:06:35उनके राइज को भी डिस्कस कर लेते हैं।
- 1:06:38राइज ऑफ क्लाइव। रॉबर्ट क्लाइव बंगाल
- 1:06:42प्रेसिडेंसी के पहले ब्रिटिश गवर्नर थे।
- 1:06:45क्लाइव का करियर कंपनी के एक ऑर्डिनरी
- 1:06:47एंप्लई के रूप में शुरू होता है और कंपनी
- 1:06:50के सबसे इंपॉर्टेंट प्रेसिडेंसी के गवर्नर
- 1:06:52बनने तक चलता है। सबसे पहले 1744 में
- 1:06:56क्लाइव ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए फैक्टर
- 1:06:58या कंपनी एजेंट के रूप में काम करने के
- 1:07:01लिए मद्रास से सेंट जॉर्ज फोर्ट पहुंचते
- 1:07:03हैं। इसके बाद वह अपनी एबिलिटी साबित करने
- 1:07:06के लिए कंपनी की आर्मी में भर्ती हो जाते
- 1:07:09हैं। सेकंड कर्नाटक वॉर के समय आर्कॉट की
- 1:07:12सीज में ब्रिटिश विक्ट्री में अपने रोल के
- 1:07:15लिए क्लाइव को काफी फेम और प्रशंसा मिलती
- 1:07:18है। फिर 1753 में वह ब्रिटेन लौट जाते
- 1:07:21हैं। लेकिन 1755 में ही उन्हें इंडिया
- 1:07:25वापस बुला लिया जाता है क्योंकि फ्रेंच के
- 1:07:27साथ फिर से युद्ध की सिचुएशन बन रही थी।
- 1:07:30उनको कडलौर में फोर्ट्स एंड डेविड का
- 1:07:32डेपुटी गवर्नर बनाया जाता है। फिर 1757
- 1:07:36में वह एडमिरल वाटसन के साथ मिलकर बंगाल
- 1:07:39के नवाब सिराजुद्दौला सेक को रिककैप्चर
- 1:07:42करते हैं। इसके बाद क्लाइव कंस्परेसी की
- 1:07:45हेल्प से बैटल ऑफ प्लासी में सिराजुद्दौला
- 1:07:48को हरा देते हैं। क्लाइव बंगाल में कुछ
- 1:07:50फ्रेंच पोर्ट्स को भी कैप्चर कर लेते हैं।
- 1:07:53इन अचीवमेंट्स के लिए उन्हें लॉर्ड क्लाइव
- 1:07:55बैरन ऑफ प्लासी का टाइटल दिया जाता है।
- 1:07:58प्लासी की जीत के बाद कंपनी इंडिया में एक
- 1:08:01पैरामाउंट पावर बन जाती है। बंगाल उनका हो
- 1:08:04जाता है जिससे कंपनी के फॉर्च्यून में
- 1:08:06बहुत बड़ा इजाफा होता है। 1760 में क्लाइव
- 1:08:10फिर से इंग्लैंड लौट जाते हैं। इसके बाद
- 1:08:121765 में वह बंगाल के गवर्नर और कमांडर इन
- 1:08:16चीफ के रूप में इंडिया वापस आते हैं।
- 1:08:19क्लाइव ही बक्सर की बैटल के बाद होने वाले
- 1:08:21इलाहाबाद की ट्रीटी को नेगोशिएट और साइन
- 1:08:24करते हैं। क्लाइव समझदारी दिखाते हुए अवध
- 1:08:27को एनेक्स नहीं करते क्योंकि वह अवध को
- 1:08:30ब्रिटिश और मराठाज़ के बीच बफर की तरह यूज
- 1:08:33करना चाहते थे। इसके साथ ही बंगाल में
- 1:08:36क्लाइव सिस्टम ऑफ ड्यूल गवर्नमेंट
- 1:08:38इंट्रोड्यूस करते हैं। इस सिस्टम के
- 1:08:40अनुसार बंगाल में दीवानी राइट तो कंपनी के
- 1:08:43पास रहते हैं लेकिन निजामत यानी कि
- 1:08:45एडमिनिस्ट्रेशन देखने के राइट्स नवाब के
- 1:08:48पास ही रहते हैं। इसका मतलब था कंपनी के
- 1:08:51पास पावर तो पूरी रहेगी लेकिन
- 1:08:53रिस्पांसिबिलिटी कुछ भी नहीं। क्लाइव 1767
- 1:08:57तक बंगाल के गवर्नर रहते हैं। हम कह सकते
- 1:09:00हैं कि इंडिया में कंपनी का एंपायर
- 1:09:02इस्टैब्लिश करने में क्लाइव का काफी
- 1:09:04इंपॉर्टेंट रोल था। कंक्लूजन दोस्तों, यह
- 1:09:09थी अंग्रेजों द्वारा बंगाल के कॉन्क्वेस्ट
- 1:09:11की पूरी हिस्ट्री। जहां एक तरफ प्लासी का
- 1:09:14बैटल इंग्लैंड के लिए बंगाल का दरवाजा
- 1:09:16खोलता है, वहीं बक्सर कंपनी की
- 1:09:19राजनैतिकत्वाकांक्षाओं
- 1:09:20पर एक मोहर लगा देता है। इसके साथ ही हमने
- 1:09:24क्लाइव की स्टोरी को भी समझा जो बंगाल के
- 1:09:27पहले ब्रिटिश गवर्नर बनते हैं। अब आगे आने
- 1:09:29वाली वीडियोस में हम देखेंगे कि इंग्लिश
- 1:09:32ईस्ट इंडिया कंपनी कैसे बंगाल के बाद
- 1:09:34इंडिया के बाकी पार्ट्स पर भी एक-एक करके
- 1:09:37अपना कंट्रोल इस्टैब्लिश करती है। द
- 1:09:41एंग्लो माइससोर वॉर्स। दोस्तों पिछले
- 1:09:44वीडियोस में कर्नाटक वॉर्स, बैटल ऑफ
- 1:09:46प्लासी और बक्सर को डिस्कस करने के बाद आज
- 1:09:49हम साउथ इंडिया के मैसौर रीजन की बात
- 1:09:52करेंगे। और जब मैसौर का नाम लिया जाता है
- 1:09:55तब टाइगर ऑफ मैसौर यानी टीपू सुल्तान की
- 1:09:59बात ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। तो आज
- 1:10:02हम टीपू सुल्तान और अंग्रेजों के साथ उनकी
- 1:10:04राइवलरी को डिस्कस करने वाले हैं। लेकिन
- 1:10:07उससे पहले हम उनके पिता हैदर अली के बारे
- 1:10:09में भी बात करेंगे और डिटेल में समझेंगे
- 1:10:11एंग्लो माइसोर वॉर्स को। एंग्लो माइसोर
- 1:10:14वॉर्स को डिस्कस करने से पहले आइए जान
- 1:10:17लेते हैं माइसोर किंगडम के बैकग्राउंड के
- 1:10:19बारे में। तो आइए शुरू करते हैं।
- 1:10:23किंगडम ऑफ माइसोर। दोस्तों 14th सेंचुरी
- 1:10:26से 17th सेंचुरी के बीच मसो विजयनगर
- 1:10:30एंपायर का सबोर्डिनेट स्टेट हुआ करता था।
- 1:10:33जब विजयनगर एंपायर का डिक्लाइन हो जाता है
- 1:10:36तब बहुत से छोटे-छोटे किंगडम्स इस रीजन
- 1:10:38में इमर्ज होते हैं। ऐसा ही एक
- 1:10:40इंडिपेंडेंट हिंदू किंगडम 1612 में मसौर
- 1:10:44में वोर डायनेस्टी के अंडर इमर्ज होता है।
- 1:10:4817th सेंचुरी में नरस राजा वोर और चिक
- 1:10:51राजा वोडियार के रूल के समय मसौर की
- 1:10:54टेरिटरी का काफी एक्सपेंशन हुआ। इस
- 1:10:56एक्सपेंशन के बाद मसूर की टेरिटरी में
- 1:10:59वेस्टर्न घाट से लेकर कोरोमंडल प्लेन की
- 1:11:01वेस्टर्न बाउंड्रीज तक का एरिया था। यह
- 1:11:04किंगडम बड़ा होता गया और फिर 1734 में
- 1:11:07यहां के राजा बने कृष्ण राजा वडियार द
- 1:11:10सेकंड। इनका इंटरेस्ट राज्य चलाने में
- 1:11:13नहीं था। इसलिए सारी पावर्स इनके दो
- 1:11:15मंत्री नजराज और देवराज के हाथों में थी।
- 1:11:19इसका मतलब था कि कृष्ण राजा वडियार सिर्फ
- 1:11:22एक टाइटलर हेड या पपेट बनकर रह गए थे। इसी
- 1:11:26समय हैदर अली एक हॉर्स राइडर के तौर पर
- 1:11:28मैसूर की आर्मी जॉइ करते हैं। हैदर अली
- 1:11:31पढ़े लिखे तो नहीं थे लेकिन काफी टैलेंटेड
- 1:11:34थे। अपनी बुद्धि, बहादुरी और डिटरमिनेशन
- 1:11:37जैसी क्वालिटीज के चलते वो मैसूर आर्मी
- 1:11:40में प्रमोट होते गए और आगे चलकर कमांडर इन
- 1:11:43चीफ बन गए। हैदर अली ने वेस्टर्न मिलिट्री
- 1:11:47ट्रेनिंग के फायदे को समझा और अपने
- 1:11:49सोल्जर्स को उसमें ट्रेन भी किया। फ्रेंच
- 1:11:51कंपनी के एक्सपर्ट्स की हेल्प से 1755 में
- 1:11:55तमिलनाडु के दिंडीगुल में हैदर अली ने एक
- 1:11:58कैनन फैक्ट्री भी लगाई थी। यहां से हैदर
- 1:12:01अली और फ्रेंच कंपनी के बीच अच्छे रिलेशंस
- 1:12:03की शुरुआत भी होती है। यहां तक कि कर्नाटक
- 1:12:07वॉर्स के समय हैदर अली और उनकी बटालियंस
- 1:12:10ने फ्रेंच कमांडर्स जैसे कि ड्यूप्लेक्स,
- 1:12:12काउंटली ओडबसी के अंडर सर्व भी किया था।
- 1:12:16लेकिन मैसौर में एक वीक रूलर होने की वजह
- 1:12:19से मराठाज़ और हैदराबाद के निजाम मसौर पर
- 1:12:22लगातार हमला कर रहे थे। जिसकी वजह से मसौर
- 1:12:26पॉलिटिकली और फाइनेंशियली वीक होने लगा
- 1:12:28था। इस सिचुएशन में मैसौर को एक स्ट्रांग
- 1:12:31लीडर की जरूरत थी। ऐसे में हैदर अली ने
- 1:12:341761 में तख्ता पलट कर दिया और मैसौर के
- 1:12:38सुल्तान बन गए। फिर 1761 और 1763 के बीच
- 1:12:43हैदर अली दौड़, बल्लापुर, बिदनूर, सेरा और
- 1:12:47मालाबार को कैप्चर कर लेते हैं। वो
- 1:12:50पॉलीगर्स यानी कि साउथ इंडिया के
- 1:12:52जमींदार्स और फ्यूडल लॉर्ड्स पर भी अपना
- 1:12:54कंट्रोल बना लेते हैं। इसके बाद पॉलीगर्स
- 1:12:57टाइम से रेवेन्यू जमा करने लगते हैं। इन
- 1:13:00सब रीज़ंस की वजह से मसौर फिर से एक
- 1:13:03प्रोस्परस स्टेट बनने लगा। दोस्तों, यह तो
- 1:13:06बात हुई मसौर और उसके सुल्तान हैदर अली
- 1:13:08की। आइए अब जानते हैं कि इनकी टक्कर
- 1:13:11अंग्रेजों के साथ कैसे हुई। बात करते हैं
- 1:13:14फर्स्ट एंग्लो माइससोर वॉर की। फर्स्ट
- 1:13:18एंग्लो माइससोर वॉर 1766
- 1:13:21टू 1769। मसौर के फ्रेंच कंपनी के साथ
- 1:13:24अच्छे रिलेशंस और हैदर अली का मालाबार के
- 1:13:27रिच ट्रेड पर कंट्रोल। इंग्लिश ईस्ट
- 1:13:30इंडिया कंपनी को अपने पॉलिटिकल और
- 1:13:32कमर्शियल इंटरेस्ट के लिए खतरा लगने लगते
- 1:13:34हैं। बंगाल के नवाब के खिलाफ बक्सर के
- 1:13:38युद्ध में मिली सफलता के बाद अंग्रेज
- 1:13:40हैदराबाद के निजाम के साथ एक ट्रीटी साइन
- 1:13:43करते हैं। जिसके अनुसार हैदर अली से निजाम
- 1:13:47की सुरक्षा करने के बदले में अंग्रेजों को
- 1:13:50नॉर्दन सरकार्स का डिस्ट्रिक्ट मिल जाता
- 1:13:52है। इसके बाद हैदराबाद का निजाम, मराठाज़
- 1:13:55और अंग्रेज हैदर अली के खिलाफ एक अलायंस
- 1:13:58बनाकर युद्ध करते हैं। लेकिन हैदर अपनी
- 1:14:01डिप्लोमैटिक एबिलिटी का यूज करके मराठाज़
- 1:14:04को युद्ध में न्यूट्रल कर देते हैं और
- 1:14:06निजाम को अपना एलआई बना लेते हैं। हैदर
- 1:14:10अली और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच वॉर
- 1:14:12कंटिन्यू रहता है और लगभग 1 1/2 इयर्स तक
- 1:14:16बिना किसी कंक्लूजन के चलता रहता है। फिर
- 1:14:19हैदर अपनी स्ट्रेटजी चेंज करते हैं और
- 1:14:21अचानक मद्रास के सामने पहुंच जाते हैं।
- 1:14:24इससे मद्रास में कंप्लीट केओस और पैनिकिक
- 1:14:26की सिचुएशन हो जाती है। जिस वजह से
- 1:14:29अंग्रेज मजबूर होकर हैदर अली के साथ 4th
- 1:14:32अप्रैल 1769 को एक ट्रीटी साइन करते हैं।
- 1:14:36जिसे ट्रीटी ऑफ़ मद्रास बोला जाता है।
- 1:14:39ट्रीटी के प्रोविजंस के अनुसार वॉर में जो
- 1:14:42भी प्रिजनर्स बनाए गए थे उनको एक्सचेंज
- 1:14:44करना था और साथ ही कॉनकरर्ड किए हुए
- 1:14:46एरियाज को भी एक दूसरे को लौटाना था। इसके
- 1:14:50साथ ही अंग्रेज हैदर अली से यह भी प्रॉमिस
- 1:14:52करते हैं कि अगर कोई और मसौर पर अटैक करता
- 1:14:55है तो वह हैदर अली को हेल्प प्रोवाइड
- 1:14:57करेंगे। यह प्रोविजन आगे चलकर सेकंड
- 1:15:01एंग्लो माइसोर वॉर का रीजन बनता है। तो
- 1:15:04चलिए समझते हैं ऐसा क्यों होता है। सेकंड
- 1:15:08एंग्लो माइसोर वॉर 1780 टू 84।
- 1:15:12दोस्तों 1769 में फर्स्ट एंग्लो मायसोर
- 1:15:16वॉर एंड होता है और सिर्फ 11 साल बाद ही
- 1:15:191780 में मसौर और ईस्ट इंडिया कंपनी फिर
- 1:15:23से आमने-सामने होते हैं। इसका एक रीजन था
- 1:15:26अंग्रेजों द्वारा मद्रास की ट्रीटी का
- 1:15:29वायलेशन। होता यह है कि 1771 में मराठाज़
- 1:15:33मसौर पर अटैक कर देते हैं। और ऐसे में जब
- 1:15:36हैदर अली ईस्ट इंडिया कंपनी से हेल्प
- 1:15:38मांगते हैं तो वह हेल्प देने से मना कर
- 1:15:41देते हैं।
- 1:15:42इसकी वजह से मराठाज़ मैसौर को बहुत ज्यादा
- 1:15:45नुकसान पहुंचाते हैं और हैदर अली को मजबूर
- 1:15:47होकर मराठाज़ को ₹6 लाख देने पड़ते हैं
- 1:15:51शांति समझौते के लिए। इस वजह से हैदर अली
- 1:15:55ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से बहुत ज्यादा
- 1:15:57नाराज थे। लेकिन कंपनी सिर्फ यहां नहीं
- 1:16:00रुकी। वो 1779 में मैसौर की टेरिटरी माहे
- 1:16:04पर अटैक कर देती है। माहे मालाबार कोस्ट
- 1:16:08पर लोकेटेड था और हैदर अली ने इसे फ्रेंच
- 1:16:10कंपनी को दिया हुआ था। माही के थ्रू ही
- 1:16:13मसौर को फ्रेंच से एडवांस्ड वॉर मटेरियल्स
- 1:16:16जैसे गंस एमुनेशन भी मिलता था। इसके बदले
- 1:16:20में हैदर अली ने माही की प्रोटेक्शन के
- 1:16:22लिए अपने ट्रूप्स वहां डिप्लॉय किए हुए
- 1:16:24थे। माही पर अटैक के बाद हैदर अली ने भी
- 1:16:27वॉर की तैयारी शुरू कर दी।
- 1:16:29उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मराठाज़ और
- 1:16:32निजाम के साथ अलायंस बना लिया। लेकिन
- 1:16:34मराठाज़ और निजाम के साथ तो मैसौर के
- 1:16:37रिश्ते इतने अच्छे नहीं थे। फिर यह एक साथ
- 1:16:39कैसे आ गए? तो दोस्तों, मराठाज़ हैदर अली
- 1:16:43के साथ इसलिए आ जाते हैं क्योंकि इस समय
- 1:16:45यानी कि 1775 में फर्स्ट एंग्लो मराठा वॉर
- 1:16:49भी शुरू हो चुका था। और अंग्रेज मराठाज़ और
- 1:16:52हैदर अली के कॉमन एनिमी बन चुके थे।
- 1:16:55मराठाज़ का तो ठीक पर हैदराबाद मैसूर के
- 1:16:59साथ कैसे आ जाता है? उसका पहला रीजन था
- 1:17:02निजाम अंग्रेजों से नॉर्दन सरकार्स वापस
- 1:17:05लेना चाहते थे। और दूसरा हैदर अली उन्हें
- 1:17:08प्रॉमिस करते हैं कि निजाम के दुश्मन और
- 1:17:10आर्कट के नवाब व्लाजहां पर अटैक करेंगे और
- 1:17:13कैप्चरर्ड टेरिटरी को निजाम के साथ शेयर
- 1:17:16करेंगे। हैदर अली ने जुलाई 1780 में
- 1:17:19आर्कॉट का घेराव कर लिया। आर्कॉट के नवाब
- 1:17:22ईस्ट इंडिया कंपनी से हेल्प मांगते हैं।
- 1:17:24आर्कॉट की हेल्प के लिए कंपनी आर्मी की एक
- 1:17:27कंटिंजेंट मद्रास में तैयार करती है अंडर
- 1:17:30लीडरशिप ऑफ हेक्टरमंड्रो
- 1:17:32और दूसरी टुकड़ी कर्नल विलियम बेली के
- 1:17:35नेतृत्व में गुंटूर में जो कि नॉर्दन
- 1:17:38सरकार्स का पार्ट था। तैयार की जाती है।
- 1:17:40अंग्रेजों का प्लान था कि यह दोनों
- 1:17:42ट्रूप्स कांजीवरम में मिलेंगे और मिलकर
- 1:17:45हैदर अली की आर्मी पर अटैक कर देंगे।
- 1:17:48लेकिन हैदर अली के बेटे टीपू कर्नल बेली
- 1:17:51को कांजीवरम से पहले ही पॉलीलूर नाम की
- 1:17:54जगह पर रोक देते हैं और दोनों ब्रिटिश
- 1:17:56आर्मी को कंबाइन नहीं होने देते। 1780 में
- 1:18:00पोलीलूर की बैटल हुई जिसमें इंग्लिश आर्मी
- 1:18:02को हार का सामना करना पड़ा और कर्नल बेली
- 1:18:05ने सरेंडर कर दिया। दूसरी तरफ हेक्टर मनरो
- 1:18:08की आर्मी पर हैदर अली ने अटैक कर दिया और
- 1:18:11हेक्टर मनरो भागकर अपनी आर्मी के साथ वापस
- 1:18:14मद्रास पहुंच गए।
- 1:18:16हैदर अली मद्रास जाने की जगह वापस आर्कॉट
- 1:18:19की तरफ जाते हैं और घेरे को और मजबूत करते
- 1:18:22हैं। तभी खबर आती है कि मसौर के मालाबार
- 1:18:25कोस्ट को ब्रिटिश आर्मी ने कैप्चर करना
- 1:18:27शुरू कर दिया है। उनको रोकने के लिए टीपू
- 1:18:30मालाबार की तरफ चले जाते हैं। इसी बीच
- 1:18:32बंगाल से एक बहुत बड़ी ब्रिटिश आर्मी सर
- 1:18:35आयरकूट की लीडरशिप में मद्रास पहुंच जाती
- 1:18:38है। सरयकूट मद्रास पहुंचकर सबसे पहले अपनी
- 1:18:42डिप्लोमेटिक स्किल्स को यूज़ करके मराठाज़
- 1:18:45और निजाम को हैदर अली से अलग कर देते हैं।
- 1:18:48और फिर 1781 में हैदर अली और सर आयरकूट के
- 1:18:52बीच कई सारे बैटल्स होते हैं। जिसमें से
- 1:18:54तीन इंपॉर्टेंट बैटल्स बैटल ऑफ पोर्टनोवो,
- 1:18:58पॉलीलूर और शोलिंगूर में सर आयरकूट हैदर
- 1:19:01अली को हरा देते हैं।
- 1:19:04लेकिन इसी बीच 7th दिसंबर 1782 को हैदर
- 1:19:07अली की कैंसर से डेथ हो जाती है। उसके बाद
- 1:19:10उनके बेटे टीपू मैसौर के सुल्तान बनते
- 1:19:13हैं। हैदर अली की डेथ के बाद टीपू और
- 1:19:16कंपनी के बीच लगभग एक और साल तक बैटल्स
- 1:19:19में हारजीत का सिलसिला चलता रहा। इतने समय
- 1:19:23तक वॉर चलने के बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं
- 1:19:25निकल रहा था। इसलिए फाइनली दोनों पार्टी
- 1:19:28पीस करने का फैसला करती हैं और 1784 में
- 1:19:32ट्रीटी ऑफ मैंगलोर साइन की जाती है।
- 1:19:34ट्रीटी के अनुसार दोनों पार्टीज एक दूसरे
- 1:19:37से जीती हुई टेरिटरीज वापस कर देती हैं।
- 1:19:41इस तरह से सेकंड एंग्लो मायसोर वॉर का भी
- 1:19:43एंड हो जाता है। लेकिन माइससोर और इंग्लिश
- 1:19:47कंपनी के बीच कॉन्फ्लिक्ट खत्म नहीं होता
- 1:19:50और 1790 में एक बार फिर से दोनों के बीच
- 1:19:53वॉर शुरू होता है। लेकिन थर्ड एंग्लो
- 1:19:55माइससोर वॉर को डिस्कस करने से पहले हम
- 1:19:58टीपू सुल्तान के बारे में जान लेते हैं।
- 1:20:01टीपू सुल्तान नवंबर 1750 में जन्मे टीपू
- 1:20:05सुल्तान हैदर अली के बेटे और एक ग्रेट
- 1:20:08वॉरियर थे। जिन्हें टाइगर ऑफ मैसूर के नाम
- 1:20:11से भी जाना जाता है। टीपू वेल एजुकेटेड
- 1:20:14थे। जिन्हें अरेबिक, पर्शियन, कैनरीज और
- 1:20:17उर्दू का ज्ञान था।
- 1:20:20अपने फादर हैदर अली की तरह ही टीपू भी एक
- 1:20:22एफिशिएंट मिलिट्री जनरल थे। वह अपनी आर्मी
- 1:20:26को यूरोपियन मॉडल के बेसिस पर ऑर्गेनाइज
- 1:20:28करते हैं। इसके साथ ही वह अपने सोल्जर्स
- 1:20:31को ट्रेन करने में फ्रेंच ऑफिसर्स की
- 1:20:33हेल्प भी लेते हैं। टीपू नेवल फोर्स कीेंस
- 1:20:36को बहुत अच्छी तरह समझते थे। इसलिए 1796
- 1:20:40में वो बोर्ड ऑफ एडमिरालिटी को सेटअप करते
- 1:20:43हैं। उनका प्लान 22 बैटलशिप्स की एक फ्लट
- 1:20:46और 20 बड़े फ्रिगेट्स तैयार करने का था।
- 1:20:50इसके अलावा उन्होंने, वजीदाबाद और
- 1:20:53मौलीदाबाद में तीन डॉकयार्ड भी बनवाए।
- 1:20:56टीपू सुल्तान साइंस एंड टेक्नोलॉजी के भी
- 1:20:59पैटर्न थे। उनको इंडिया में रॉकेट
- 1:21:01टेक्नोलॉजी का पायनियर माना जाता है
- 1:21:03क्योंकि उन्होंने रॉकेट्स के ऑपरेशन को
- 1:21:06एक्सप्लेन करने वाली एक मिलिट्री मैनुअल
- 1:21:08लिखी थी। टीपू लैंड रेवेन्यू सिस्टम में
- 1:21:12भी रिफॉर्म्स लेकर आते हैं और मैसोर में
- 1:21:14सेरीकल्चर को भी प्रमोट करते हैं।
- 1:21:17उन्होंने एक स्टेट कमर्शियल कॉरपोरेशन को
- 1:21:20भी कमीशन किया था। यूरोपियंस की तरह
- 1:21:22फैक्ट्रीज सेटअप करने के लिए। हम कह सकते
- 1:21:25हैं कि टीपू सुल्तान एक एबल मिलिट्री जनरल
- 1:21:28के साथ एक एफिशिएंट एडमिनिस्ट्रेटर भी थे।
- 1:21:32उनका एक कोटेशन है कि टू लिव लाइक अ लायन
- 1:21:35फॉर अ डे इज फार बेटर देन टू लिव 100
- 1:21:37इयर्स लाइक अ जैकल। और अपनी लाइफ और डेथ
- 1:21:40में टीपू इसे पूरा भी करते हैं। तो आइए अब
- 1:21:44वापस चलते हैं टीपू सुल्तान और इंग्लिश
- 1:21:47कंपनी के बीच हुए थर्ड एंग्लो माइससोर वॉर
- 1:21:50पर।
- 1:21:52थर्ड एंग्लो मसूर वॉर 1790 टू 92 मंगलोर
- 1:21:57की ट्रीटी टीपू सुल्तान और अंग्रेजों के
- 1:21:59बीच कॉन्फ्लिक्ट्स को रिजॉल्व करने के लिए
- 1:22:01काफी नहीं थी। दोनों ही डेक्कन के रीजन
- 1:22:05में अपनी पॉलिटिकल सुप्रेमसी इस्टैब्लिश
- 1:22:07करना चाहते थे। थर्ड एंग्लो माइससोर वॉर
- 1:22:10तब शुरू होता है जब टीपू ट्रेवनकोर पर
- 1:22:13अटैक कर देते हैं। ट्रेवन कोर अंग्रेजों
- 1:22:16का एलआई था और ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए
- 1:22:19पेपर का एकमात्र सोर्स भी। ट्रेवन कोर डच
- 1:22:23से जलकोटल और कैननोर परचेस करता है। यह
- 1:22:26दोनों कोचिन स्टेट का पार्ट थे जो कि टीपू
- 1:22:29का फ्यूडेटरी स्टेट था।
- 1:22:32इसलिए टीपू ट्रेवनकोर के इस एक्ट को अपने
- 1:22:35सोवरन राइट्स का वायलेशन मानते हैं और उस
- 1:22:37पर अटैक करते हैं। इसके बाद ब्रिटिश
- 1:22:40ट्रेवनकोर की साइड लेते हुए मसौर पर अटैक
- 1:22:44कर देते हैं। इसके साथ ही निजाम और मराठाज़
- 1:22:47जो कि टीपू की बढ़ती हुई पावर से जेलस थे
- 1:22:50ब्रिटिशर्स को जॉइ कर लेते हैं। 1790 में
- 1:22:54टीपू सुल्तान जनरल मेडोस के अंडर ब्रिटिश
- 1:22:57आर्मी को हरा देते हैं। फिर 1791 में
- 1:23:01लॉर्ड कॉर्नवालिस आर्मी को लीड करते हुए
- 1:23:04श्रीरंगापट्टनम पहुंच जाते हैं जो टीपू की
- 1:23:06कैपिटल थी। मराठाज़ और निजाम के सपोर्ट से
- 1:23:10अंग्रेज श्रीरंगापट्टनम पर अटैक करते हैं।
- 1:23:13टीपू बहादुरी के साथ उनका सामना करते हैं।
- 1:23:16लेकिन तीनों की कंबाइंड पावर के सामने
- 1:23:18फाइनली हार जाते हैं। 1792 में ट्रीटी ऑफ
- 1:23:22श्रीरंगापट्टनम से वॉर कंक्लूड होता है।
- 1:23:26इस ट्रीटी के अंडर मैसूर की लगभग आधी
- 1:23:28टेरिटरी ब्रिटिश निजाम और मराठाज़ के हाथों
- 1:23:32में चली जाती है। बड़ा महल, दिदीगुल और
- 1:23:35मालाबार अंग्रेजों को मिलते हैं। जबकि
- 1:23:38तुंगभद्रा और उसकी ट्रिब्यूटरीज़ के आसपास
- 1:23:40के रीजन मराठाज़ को मिल जाते हैं। और निजाम
- 1:23:43को रिवर कृष्णा से पेन्नार तक का एरिया
- 1:23:46मिलता है। इसके अलावा वॉर डैमेज के रूप
- 1:23:49में टीपू से ₹3 करोड़ भी मांगे जाते हैं।
- 1:23:52जिसमें से हाफ अमाउंट को तुरंत पे करना था
- 1:23:55और बाकी को इंस्टॉलमेंट्स में और इसकी
- 1:23:57गारंटी के लिए अंग्रेज टीपू के दो बेटों
- 1:24:00को अपना होस्टेज बना लेते हैं। थर्ड
- 1:24:03एंग्लो माइससोर वॉर साउथ में टीपू की
- 1:24:05डोमिनेंट पोजीशन को डिस्ट्रॉय कर देता है
- 1:24:07और वहां ब्रिटिश सुप्रेमसी को इस्टैब्लिश
- 1:24:10करता है। टीपू सुल्तान की पावर डिस्ट्रॉय
- 1:24:13तो हुई थी लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं।
- 1:24:16अंग्रेजों को अभी भी उनसे खतरा महसूस होता
- 1:24:19था। इसलिए 1799 में फिर से एक वॉर होता
- 1:24:23है। तो चलिए उसको भी डिस्कस करते हैं।
- 1:24:26फोर्थ एंग्लो माइससोर वॉर 1799
- 1:24:30ट्रीटी ऑफ श्रीरंगापट्टनम में टीपू
- 1:24:32सुल्तान को काफी ह्यूमिलिएट होना पड़ा था।
- 1:24:35लेकिन फिर भी टीपू ट्रीटी की सभी कंडीशंस
- 1:24:38को पूरा करते हैं और ब्रिटिशर्स को वॉर
- 1:24:41कंपनसेशन का बचा हुआ अमाउंट देकर अपने
- 1:24:43बेटों को भी रिलीज करवा लेते हैं। लेकिन
- 1:24:47टीपू को अपने ह्यूमिलिएशन का बदला भी
- 1:24:49चाहिए था। इसलिए वह 1792 से 1799 के बीच
- 1:24:55अपने सभी लॉसेस को रिकवर करते हैं और इसके
- 1:24:58साथ ही वह फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी से
- 1:25:01अपने रिश्ते अच्छे करते हैं। इसके लिए वह
- 1:25:04फ्रेंच ऑफिसर्स के द्वारा मसौर में 1794
- 1:25:07में जैकोबिन क्लब की एस्टैब्लिशमेंट का भी
- 1:25:10सपोर्ट करते हैं। जैकोबिन क्लब फ्रांस की
- 1:25:13एक रेवोल्यूशनरी ऑर्गेनाइजेशन थी जो
- 1:25:15फ्रांस में मोनाकी की जगह रिपब्लिकन
- 1:25:18गवर्नमेंट चाहते थे।
- 1:25:20टीपू खुद भी जैकोबिन क्लब के मेंबर बनते
- 1:25:22हैं और श्रीरंगापट्टनम में ट्री ऑफ
- 1:25:25लिबर्टी भी प्लांट करते हैं। और इसी समय
- 1:25:28टीपू फ्रांस के नेपोलियन बोनापार्ट जो
- 1:25:31इजिप्ट में कैंपेन कर रहे होते हैं उनके
- 1:25:33साथ कांटेक्ट करते हैं। वो उन्हें ब्रिटिश
- 1:25:36ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ साथ में मिलकर
- 1:25:38लड़ने के लिए इनवाइट करते हैं।
- 1:25:42इसके अलावा टीपू सुल्तान अपने एमिसरीज को
- 1:25:45अरेबिया, अफगानिस्तान, मॉरीशियस एटसेट्रा
- 1:25:48भी भेजते हैं। उम्मीद थी कि यहां से भी
- 1:25:51उन्हें सपोर्ट मिलेगा और सब मिलकर
- 1:25:53ब्रिटिशर्स का सफाया कर देंगे। लेकिन
- 1:25:56अंग्रेजों को टीपू के प्लांस के बारे में
- 1:25:58पता चल जाता है। और 1798 में नए गवर्नर
- 1:26:02जनरल लॉर्ड वेलिसली इंडिया में आ चुके
- 1:26:05होते हैं। वेलेलिसली टीपू और फ्रांस के
- 1:26:08बीच बढ़ती हुई दोस्ती को लेकर काफी कंसर्न
- 1:26:10थे।
- 1:26:12टीपू की इंडिपेंडेंस को खत्म करने के लिए
- 1:26:14वेलसली उन्हें सब्सिडियरी अलायंस की
- 1:26:17ट्रीटी पर साइन करने के लिए कहते हैं। जब
- 1:26:19टीपू सुल्तान ऐसी किसी भी ट्रीटी पर साइन
- 1:26:22करने से मना कर देते हैं तब फोर्थ एंग्लो
- 1:26:25माइससोर वॉर की शुरुआत होती है।
- 1:26:28इस वॉर में भी मराठाज़ और निजाम अंग्रेजों
- 1:26:31की हेल्प करते हैं। क्योंकि मराठाज़ को
- 1:26:34टीपू की आधी टेरिटरी देने का प्रॉमिस किया
- 1:26:36जाता है और निजाम पहले ही अंग्रेजों के
- 1:26:39साथ सब्सिडियरी अलायंस साइन कर चुके थे।
- 1:26:42इन 1798
- 1:26:44यह वॉर 17th अप्रैल 1799 को शुरू होती है
- 1:26:48और 4th मई 1799 को श्रीरंगापट्टनम के फॉल
- 1:26:52के साथ खत्म हो जाती है। टीपू अपनी कैपिटल
- 1:26:56को बचाने के लिए बहादुरी से लड़ते हैं और
- 1:26:58इसमें उनकी मृत्यु हो जाती है। उनकी पूरी
- 1:27:01ट्रेजरी पर अंग्रेज कब्जा कर लेते हैं।
- 1:27:04लॉर्ड वेलेसली मैसूर किंगडम के सुंडा और
- 1:27:07हारपनली डिस्ट्रिक्ट्स मराठाज़ को ऑफर करते
- 1:27:10हैं। लेकिन मराठाज़ उन्हें लेने से मना कर
- 1:27:13देते हैं। निजाम को गटी और गुर्रमकोंडा
- 1:27:17डिस्ट्रिक्ट्स दिए जाते हैं और ब्रिटिश
- 1:27:19अपने पास कनारा, वायनाड, कोयंबटोर,
- 1:27:23द्वारापुरम और श्रीरंगापट्टनम को रखते
- 1:27:25हैं। इसके बाद जो भी मैसूर स्टेट में बचता
- 1:27:28है, वह पुरानी हिंदू डायनेस्टी यानी कि
- 1:27:31वोज़ के एक माइनर रूलर कृष्ण राजा द थर्ड
- 1:27:34को दे दिया जाता है। कृष्ण राजा द थर्ड
- 1:27:37अंग्रेजों के साथ सब्सिडियरी अलायंस भी
- 1:27:40साइन कर लेते हैं। कंक्लूजन
- 1:27:43तो दोस्तों आज हमने समझा कि कैसे मसौर और
- 1:27:47इंग्लिश कंपनी के बीच लगभग 32 सालों तक
- 1:27:50कॉन्फ्लिक्ट चला और इनके बीच चार वॉर्स
- 1:27:53हुए। इसके साथ ही अंग्रेज कैसे इंडियन
- 1:27:56स्टेट्स की आपस की राइवलरी का फायदा उठाते
- 1:27:58हैं। यह भी हमें एंग्लो माइससोर वॉर्स में
- 1:28:01देखने को मिलता है। बिना मराठाज़ और निजाम
- 1:28:04की हेल्प के अंग्रेज शायद मसौर को कभी
- 1:28:07नहीं जीत पाते। और हमने टाइगर ऑफ मासर कहे
- 1:28:11जाने वाले टीपू सुल्तान के बारे में भी
- 1:28:13जाना। द एंग्लो मराठा वाज़।
- 1:28:17क्या आप जानते हैं कि मराठा एंपायर जिसके
- 1:28:20फाउंडर छत्रपति शिवाजी महाराज थे जिसे
- 1:28:22बालाजी विश्वनाथ और बाजीराव वन जैसे
- 1:28:25एंबिशियस पेशवा और भी स्ट्रांग पावर बना
- 1:28:27देते हैं। उसका अल्टीमेटली डिक्लाइन कैसे
- 1:28:30होता है? आज हम इसी क्वेश्चन का आंसर अपनी
- 1:28:32इस वीडियो के थ्रू समझेंगे। हम डिस्कस
- 1:28:35करेंगे कि कैसे ब्रिटिशर्स के आने के बाद
- 1:28:38उनका और मराठास का कॉन्फ्लिक्ट शुरू होता
- 1:28:40है। दोनों पावर्स के बीच हुए एंग्लो मराठा
- 1:28:43वॉर्स को भी समझेंगे और देखेंगे कि आखिर
- 1:28:45मराठा एंपायर के डिक्लाइन के पीछे क्या
- 1:28:48रीज़ंस थे। तो आइए शुरू करते हैं। सबसे
- 1:28:51पहले जानते हैं कि ब्रिटिशर्स के साथ
- 1:28:53कॉन्फ्लिक्ट से जस्ट पहले मराठा एंपायर की
- 1:28:56क्या सिचुएशन थी। मराठा एंपायर ड्यूरिंग
- 1:28:59सेकंड हाफ ऑफ द 18th सेंचुरी।
- 1:29:02दोस्तों, आपने थर्ड बैटल ऑफ पानीपत के
- 1:29:05बारे में तो सुना ही होगा। यह बैटल 14th
- 1:29:07जनवरी 1761 को मराठाज़ और अफगान रूलर अहमद
- 1:29:11शाह अब्दाली के फोर्सेस के बीच हुई थी।
- 1:29:14पानीपत में मराठाज़ की हार उनके लिए एक
- 1:29:17डिजास्टर साबित होती है। मराठाज़ पानीपत की
- 1:29:20बैटल में लगभग 28,000 सोल्जर्स और सदाशिव
- 1:29:24राव और विश्वास राव जैसे एबल मिलिट्री
- 1:29:26कमांडर्स को खो देते हैं। इसके साथ ही
- 1:29:28उनकी पॉलिटिकल प्रेस्टीज को भी बड़ा झटका
- 1:29:30लगता है। इस बैटल के समय उनके पेशवा थे
- 1:29:34बालाजी बाजीराव और पानीपत में मिली हार के
- 1:29:37सदमे की वजह से जून 1761 में इनकी भी
- 1:29:40मृत्यु हो जाती है। तब फिर इनके 17 साल के
- 1:29:43बेटे माधवराव वन पेशवा बनते हैं। वो एक
- 1:29:46टैलेंटेड सोल्जर और स्टेट्समैन थे। 11 साल
- 1:29:49के छोटे से पीरियड में ही माधवराव वन
- 1:29:52पानीपत की बैटल के बाद खोई हुई मराठा पावर
- 1:29:54को रिस्टोर करने में कामयाब होते हैं। वो
- 1:29:571762 में हैदराबाद में निजाम को हरा देते
- 1:30:00हैं। मैसौर के हैदर अली को 1767 में
- 1:30:04ट्रिब्यूट पे करने के लिए मजबूर कर देते
- 1:30:06हैं और साथ ही नॉर्थ इंडिया में रोहिलास
- 1:30:08को हराकर राजपूत स्टेट्स और जाट चीफ्स को
- 1:30:11सबजुगेट करके वहां अपने कंट्रोल को
- 1:30:13रीअसर्ट करते हैं। इस तरह एक बार फिर से
- 1:30:16मराठा अंपायर पावरफुल होने लगता है कि तभी
- 1:30:19कहानी में एक और ट्विस्ट आता है। 1772 में
- 1:30:23माधवराव वन की टीबी की बीमारी के कारण
- 1:30:25मृत्यु हो जाती है। इसके बाद मराठाज़ के
- 1:30:28बीच सक्सेशन को लेकर कॉन्फ्लिक्ट शुरू
- 1:30:30होता है और यही फर्स्ट एंग्लो मराठा वॉर
- 1:30:33का बैकग्राउंड बनता है। तो आइए समझते हैं
- 1:30:36इस कॉन्फ्लिक्ट और फर्स्ट एंग्लो मराठा
- 1:30:38वॉर को।
- 1:30:40फर्स्ट एंग्लो मराठा वॉर 1775 टू 1782
- 1:30:46माधवराव की मृत्यु के बाद उनके भाई नारायण
- 1:30:49राव और अंकल रघुनाथ राव के बीच पावर के
- 1:30:52लिए टसल शुरू हो जाता है। नारायण राव
- 1:30:54पेशवा तो बन जाते हैं लेकिन 1773 में ही
- 1:30:58उनको मरवा दिया जाता है। रघुनाथ राव को
- 1:31:01लगता है कि नारायण राव की मृत्यु के बाद
- 1:31:03तो पेशवा की गद्दी उनको ही मिलेगी। लेकिन
- 1:31:06उनके सारे अरमानों पर जल्द ही पानी फिर
- 1:31:08जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नाना फड़नवीस
- 1:31:11और महादजी सिंधिया जैसे प्रोमिनेंट मराठा
- 1:31:14जनरल्स की काउंसिल पेशवा की गद्दी के लिए
- 1:31:16सवाई माधवराव को सपोर्ट करने का डिसीजन
- 1:31:19लेती है। यह काउंसिल 12 मेंबर्स की थी और
- 1:31:22इसे 12 भाई काउंसिल कहा जाता था। इसके
- 1:31:25लीडर नाना फड़नवीस थे। सवाई माधव राव का
- 1:31:28जन्म नारायण राव की मृत्यु के कुछ महीनों
- 1:31:31बाद हुआ था और वह सिर्फ 40 दिन के ही थे
- 1:31:34जब उन्हें पेशवा बना दिया जाता है। इन्हें
- 1:31:37माधवराव 2 के नाम से भी जाना जाता है।
- 1:31:39इसके बाद फ्रस्ट्रेट होकर रघुनाथ राव 1775
- 1:31:43में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की बॉम्बे
- 1:31:46काउंसिल से मिलते हैं और पेशवा बनने के
- 1:31:48लिए उनसे हेल्प मांगते हैं। कंपनी हेल्प
- 1:31:50करने के बदले में सेलसेट और बेसेन को लेने
- 1:31:54की डिमांड करती है और साथ ही सूरत और भरूच
- 1:31:57डिस्ट्रिक्ट से मिलने वाले रेवेन्यू में
- 1:31:59भी शेयर मांग लेती है। रघुनाथ राव इसके
- 1:32:02लिए एग्री हो जाते हैं और बदले में कंपनी
- 1:32:04उन्हें अपने 2500 सोल्जर्स दे देती है। इस
- 1:32:07एग्रीमेंट को ट्रीटी ऑफ सूरत कहा जाता है।
- 1:32:10यहां से शुरुआत होती है फर्स्ट एंग्लो
- 1:32:12मराठा वॉर की। इस ट्रीटी की एक कॉपी कंपनी
- 1:32:15की बंगाल काउंसिल को भी सेंड कर दी जाती
- 1:32:17है। क्योंकि रेगुलेटिंग एक्ट ऑफ 1773 के
- 1:32:20बाद बंगाल काउंसिल के पास बॉम्बे और
- 1:32:22मद्रास काउंसिल के सुपरविजन की पावर थी।
- 1:32:25इसलिए किसी भी डिसीजन का बंगाल काउंसिल से
- 1:32:27रेटिफाई होना जरूरी था। इधर 15th मार्च
- 1:32:301775 को रघुनाथ राव और कर्नल कीटिंग की
- 1:32:34लीडरशिप में ब्रिटिश फोर्सेस बैटल के लिए
- 1:32:36मराठाज़ की तरफ बढ़ने लगती हैं। मराठाज़ की
- 1:32:39तरफ से लीड कर रहे थे हरिपंत फड़के। दोनों
- 1:32:43बैटल फील्ड में आमने-सामने होते हैं और
- 1:32:45फर्स्ट एंग्लो मराठा वॉर की शुरुआत होती
- 1:32:47है। मराठाज़ ने गोरिल्ला वॉर टेक्निक्स का
- 1:32:50यूज करके ब्रिटिश फोर्सेस की हालत खराब कर
- 1:32:53दी। यह वॉर अभी चल ही रही थी कि कंपनी के
- 1:32:56बंगाल काउंसिल के पास सूरत ट्रीटी का लेटर
- 1:32:58पहुंच जाता है। गवर्नर जनरल वारेन
- 1:33:01हेस्टिंग्स ट्रीटी ऑफ सूरत को कंडेम करते
- 1:33:03हैं और बॉम्बे काउंसिल को वॉर रोकने का
- 1:33:05आर्डर दे देते हैं और साथ ही मराठाज़ को भी
- 1:33:08मैसेज भेजते हैं कि वह वॉर ना करके उनसे
- 1:33:11एक फ्रेंडली ट्रीटी करना चाहते हैं। इसके
- 1:33:14लिए वारेन हेस्टिंग्स कर्नल अप्टन को
- 1:33:16मराठाज़ के पास भेजते हैं और 1776 में
- 1:33:20ट्रीटी ऑफ़ पुरंदर साइन करते हैं। इसके
- 1:33:22अकॉर्डिंग ब्रिटिशर्स सवाई माधवराव को ही
- 1:33:25एज पेशवा एक्सेप्ट करते हैं। साथ ही यह
- 1:33:28प्रॉमिस करते हैं कि वह मराठाज़ के किसी भी
- 1:33:30रेबल को सपोर्ट नहीं करेंगे। बदले में वॉर
- 1:33:33के टाइम मराठाज़ ने जिन ब्रिटिश टेरिटरीज
- 1:33:36को जीत लिया था, वो ब्रिटिशर्स को वापस
- 1:33:38मिल जाएगी। लेकिन ट्रीटी ऑफ़ पुरंदर के बाद
- 1:33:40भी फर्स्ट एंग्लो मराठा वॉर खत्म नहीं
- 1:33:42होती। क्योंकि एक तरफ तो बॉम्बे काउंसिल
- 1:33:45ने रघुनाथ राव को अभी भी शरण दी हुई थी।
- 1:33:48और दूसरी तरफ इंग्लैंड में कोर्ट ऑफ
- 1:33:50डायरेक्टर्स पुरंदर की ट्रीटी को एक्सेप्ट
- 1:33:52नहीं करते। इस तरह फिर से वॉर शुरू हो
- 1:33:55जाता है। ब्रिटिशर्स मराठास पर अटैक करते
- 1:33:57हैं और मराठा आर्मी को खुद महादजी सिंधिया
- 1:34:00लीड करते हैं। ताले गांव में दोनों के बीच
- 1:34:03बैटल होता है और ब्रिटिशर्स को यहां हार
- 1:34:05मिलती है। ब्रिटिश आर्मी यहां से भागकर
- 1:34:08वड़गांव पहुंच जाती है। लेकिन महाजी
- 1:34:11सिंधिया की आर्मी वहां भी उन्हें घेर लेती
- 1:34:13है और 1779 में ब्रिटिश आर्मी सरेंडर कर
- 1:34:17देती है। यहां पर ही ट्रीटी ऑफ वड़गांव
- 1:34:19साइन की जाती है। जिसके अकॉर्डिंग ब्रिटिश
- 1:34:22गवर्नमेंट ने मराठाज़ की जितनी भी टेरिटरीज
- 1:34:25ऑक्यूपाई की होती हैं, 1775 से सब वापस
- 1:34:29करनी पड़ती हैं। यह ट्रीटी बॉम्बे काउंसिल
- 1:34:32और मराठाज़ के बीच हुई थी। लेकिन एक बार
- 1:34:35फिर वारेन हेस्टिंग्स बॉम्बे काउंसिल की
- 1:34:37ट्रीटी को एक्सेप्ट नहीं करते औरक से तीन
- 1:34:40डिफरेंट ब्रिटिश फोर्सेस को भेज देते हैं।
- 1:34:43एक कर्नल गोडार्ड की लीडरशिप में, दूसरी
- 1:34:45कैप्टन परफम की और तीसरी जनरल कैमक की
- 1:34:48लीडरशिप में। फरवरी 1779 में कर्नल
- 1:34:52गोडार्ड अहमदाबाद को कैप्चर कर लेते हैं
- 1:34:54और फिर अगस्त 1780 में कैप्टन पोफम
- 1:34:57ग्वालियर को। इसके बाद दिसंबर 1780 में
- 1:35:01कर्नल गोड बेसेन को भी कैप्चर कर लेते
- 1:35:03हैं। और फरवरी 1781 में जनरल केक ने महाजी
- 1:35:07सिंधिया को भी हरा दिया। इसके बाद वारेन
- 1:35:11हेस्टिंग्स मराठास के साथ ट्रीटी साइन
- 1:35:13करने का डिसीजन लेते हैं। यह थी ट्रीटी ऑफ
- 1:35:16सालबाई जो फर्स्ट एंग्लो मराठा वॉर की
- 1:35:18सबसे इंपॉर्टेंट ट्रीटी थी। इसके
- 1:35:20अकॉर्डिंग सेलसेट तो ब्रिटिशर्स के पास ही
- 1:35:23रहेगा। लेकिन ट्रीटी ऑफ़ पुरंदर के बाद
- 1:35:25एक्वायर की हुई बाकी सभी मराठा टेरिटरी
- 1:35:28उन्हें वापस कर दी जाएंगी। साथ ही
- 1:35:30ब्रिटिशर्स रघुनाथ राव का सपोर्ट नहीं
- 1:35:32करेंगे और पेशवा रघुनाथ राव को पेंशन दे
- 1:35:35देंगे। इसके अलावा यह भी डिसाइड होता है
- 1:35:38कि पेशवा और किसी भी यूरोपियन पावर को
- 1:35:41सपोर्ट नहीं करेंगे। इस तरह ट्रीटी ऑफ
- 1:35:43सालबाई से 1782 में फाइनली फर्स्ट एंग्लो
- 1:35:47मराठा वॉर का एंड होता है। सालबाई की
- 1:35:50ट्रीटी के बाद मराठास और ब्रिटिशर्स के
- 1:35:52बीच 20 साल तक तो कोई कॉन्फ्लिक्ट नहीं
- 1:35:54होता। यह टाइम ब्रिटिशर्स मैसौर की
- 1:35:58कॉन्क्वेस्ट को कंप्लीट करने में लगाते
- 1:36:00हैं और दूसरी तरफ मराठा क्फेडरेसी में
- 1:36:03दरार और ज्यादा बढ़ जाती है। क्फेडरेसी की
- 1:36:06बात करें तो दोस्तों पेशवा बाजीराव वन के
- 1:36:09टेन्योर में मराठा एंपायर को चार पावरफुल
- 1:36:12मराठा चीफ्स के बीच डिवाइड कर दिया गया
- 1:36:14था। यह थे ग्वालियर के सिंधिया, नागपुर के
- 1:36:17भोसले, इंदौर के होलकर्स और बरोड़ा के
- 1:36:20गायकवाड़। यह सभी चीफ्स मिलकर मराठा
- 1:36:23कन्फेडरेसी बनाते थे और पेशवा क्फेडरेसी
- 1:36:27के ऑफिशियल हेड होते थे। लेकिन पावर
- 1:36:30स्ट्रगल और म्यूचुअल जेलसीज के चलते चीफ्स
- 1:36:33के बीच हमेशा कॉन्फ्लिक्ट चलता रहता था।
- 1:36:36यह कॉन्फ्लिक्ट पेशवा के वीक होने पर और
- 1:36:38भी ज्यादा बढ़ जाता है। जैसे कि सेकंड
- 1:36:41एंग्लो मराठा वॉर के टाइम देखने को मिलता
- 1:36:43है। तो आइए अब सेकंड एंग्लो मराठा वॉर को
- 1:36:46डिस्कस करते हैं।
- 1:36:48सेकंड एंग्लो मराठा वॉर 1802 टू 185।
- 1:36:53दोस्तों, सेकंड एंग्लो मराठा वॉर को
- 1:36:56डिस्कस करने से पहले इसका बैकग्राउंड जान
- 1:36:58लेते हैं। 1795 में पेशवा माधवराव सेकंड
- 1:37:02सुसाइड कमिट कर लेते हैं। इनकी ऐज सिर्फ
- 1:37:0521 साल ही थी और तब तक इनकी कोई संतान भी
- 1:37:08नहीं थी। रघुनाथ राव जो पेंशन लेकर रिटायर
- 1:37:12हो चुके थे, उनके तीन बेटे थे। बाजीराव
- 1:37:14सेकंड, चिमाजी राव सेकंड और अमृत राव। इन
- 1:37:18कंडीशंस में बाजीराव सेकंड पेशवा बनते
- 1:37:21हैं। बाजीराव सेकंड तो एक वीक पेशवा थे
- 1:37:24लेकिन नाना फडनवीस इनके चीफ मिनिस्टर बनकर
- 1:37:27मराठा पावर को संभाले हुए थे। लेकिन 1800
- 1:37:31में नाना फडनवीस की मृत्यु हो जाती है और
- 1:37:33इसके बाद मराठा क्नफेडरेसी को संभालने
- 1:37:36वाला कोई भी नहीं बचता। मराठा कन्फेडरेसी
- 1:37:39के चीफ्स के बीच आपस में ही वर्चस्व की
- 1:37:41लड़ाई शुरू हो जाती है। उस टाइम सबसे
- 1:37:43पावरफुल चीफ थे इंदौर के जसवंत राव होलकर
- 1:37:47और ग्वालियर के दौलतराव सिंधिया। होलकर और
- 1:37:50सिंधिया के बीच आपस में टकराव होते रहते
- 1:37:53थे और इसमें पेशवा सिंधिया को सपोर्ट कर
- 1:37:55रहे थे। जसवंतराव होलकर बिना पेशवा की
- 1:37:58परमिशन के नॉर्थ की तरफ टेरिटरी एक्वायर
- 1:38:01करने के लिए कैंपेन कर रहे थे। इसके साथ
- 1:38:03ही उन्होंने अपने भाई विट्ठू जी होलकर को
- 1:38:06साउथ की तरफ कैंपेन के लिए भेजा था। लेकिन
- 1:38:09वििट्ठू जी पेशवा की ही टेरिटरी को लूटने
- 1:38:12लगते हैं। तब पेशवा बाजीराव सेकंड उन्हें
- 1:38:14अरेस्ट कर लेते हैं और ऑर्डर देते हैं कि
- 1:38:17विट्ठू जी होलकर को हाथी के पैरों से कुचल
- 1:38:20कर मरवा दिया जाए। यह सुनकर जसवंत राव
- 1:38:22होलकर आग बबूला हो जाते हैं और 182 में
- 1:38:26सिंधिया और पेशवा की कंबाइंड आर्मी पर
- 1:38:28अटैक कर देते हैं। होलकर इनकी आर्मी को
- 1:38:31पूरी तरह से हरा देते हैं। होलकर के डर की
- 1:38:36वजह से बाजीराव सेकंड पुणे छोड़कर बैसीन
- 1:38:39चले जाते हैं। जसवंत राव होलकर पुणे में
- 1:38:42अपने करीबी विनायक राव को पेशवा डिक्लेअ
- 1:38:45कर देते हैं। विनायक राव अमृत राव के बेटे
- 1:38:48और बाजीराव सेकंड के भतीजे थे। बाजीराव
- 1:38:51सेकंड वापस पेशवा बनने के लिए ब्रिटिशर्स
- 1:38:54से हेल्प मांगते हैं। यानी कि जो गलती
- 1:38:56उनके पिताजी रघुनाथ राव ने की थी, यह भी
- 1:38:59वही करते हैं। मराठाज़ के इंटरनल मैटर में
- 1:39:02ब्रिटिश इंटरफेरेंस को इनवाइट करके।
- 1:39:05बाजीराव सेकंड और ब्रिटिशर्स के बीच 1802
- 1:39:08में ट्रीटी ऑफ़ बेसेन साइन होती है। 20 साल
- 1:39:12बाद यह मराठाज़ और ब्रिटिशर्स के बीच फिर
- 1:39:14से एक इंपॉर्टेंट ट्रीटी थी। इसके
- 1:39:16प्रोविजंस के अकॉर्डिंग सूरत ब्रिटिशर्स
- 1:39:18को मिलना था और साथ ही मराठाज़ हैदराबाद के
- 1:39:21निजाम से जो चौथ की डिमांड करते थे वह भी
- 1:39:24बंद करनी थी। इसके बदले में कंपनी 6000
- 1:39:27ट्रूप्स बाजीराव सेकंड को दे रही थी जो
- 1:39:29पेशवा बनने में तो उनकी हेल्प करने ही
- 1:39:31वाले थे लेकिन उसके बाद भी बाजीराव सेकंड
- 1:39:34को इन्हें अपनी टेरिटरी में ही रखना था और
- 1:39:36इनका पूरा खर्चा उठाना था। दूसरे शब्दों
- 1:39:39में कहें तो बाजीराव सेकंड ब्रिटिशर्स के
- 1:39:41साथ एक सब्सिडियरी अलायंस की ट्रीटी साइन
- 1:39:44कर लेते हैं। जिसमें प्रचारक लॉर्ड
- 1:39:46वेलेसली थे। 13th मई 183 को ब्रिटिशर्स के
- 1:39:50प्रोटेक्शन में बाजीराव सेकंड फिर से
- 1:39:52पेशवा बन गए। लेकिन पेशवा अब ब्रिटिशर्स
- 1:39:55के कंट्रोल में हो गए थे। सब्सिडियरी
- 1:39:58अलायंस की यह ट्रीटी किसी भी मराठा चीफ को
- 1:40:00पसंद नहीं आ रही थी। क्योंकि उन्हें अपनी
- 1:40:03फ्रीडम बहुत पसंद थी और सब्सिडियरी अलायंस
- 1:40:06साइन करके पेशवा ने मराठाज़ की फ्रीडम एक
- 1:40:09तरह से ब्रिटिशर्स को दे दी थी और यही
- 1:40:12कारण बनता है सेकंड एंग्लो मराठा वॉर का।
- 1:40:15सिंधिया और भोसले कोशिश करते हैं कि
- 1:40:17ब्रिटिशर्स को हराकर पेशवा को इस ट्रीटी
- 1:40:20के जाल से बाहर निकाला जाए। लेकिन उनकी यह
- 1:40:22कोशिश असफल रहती है। ब्रिटिशर्स इनकी
- 1:40:25फर्सेस को हरा देते हैं और सभी मराठा
- 1:40:28चीफ्स के साथ अलग-अलग ट्रीटी साइन करते
- 1:40:30हैं। भोसले के साथ 17th दिसंबर 183 को
- 1:40:35ट्रीटी ऑफ देवगांव साइन होती है और
- 1:40:37सिंधिया के साथ 30th दिसंबर 183 को ट्रीटी
- 1:40:41ऑफ सुरजी अनजानगांव। सिंधिया से
- 1:40:44ब्रिटिशर्स को रोहतक, गंगा यमुना द्आब,
- 1:40:47गुड़गांव, दिल्ली आगरा रीजन, ब्रोच,
- 1:40:49गुजरात के कुछ डिस्ट्रिक्ट्स, बुंदेलखंड
- 1:40:52का कुछ पार्ट और अहमदनगर का फोर्ट मिलता
- 1:40:54है। और भोसले से कटक, बालासोर और वर्धा
- 1:40:58रिवर के वेस्ट का एरिया इन्हें मिल जाता
- 1:41:00है। 18004 में होलकर भी ब्रिटिशर्स पर
- 1:41:04अटैक करते हैं। लेकिन 185 तक यह भी हार
- 1:41:07जाते हैं। और 186 में इनके साथ होती है
- 1:41:11ट्रीटी ऑफ राजपुर घाट। होलकर से
- 1:41:14ब्रिटिशर्स को टोंक, बूंदी और रामपुरा की
- 1:41:17टेरिटरी मिलती है। दोस्तों, यहां समझने
- 1:41:20वाली बात यह है कि सभी मराठा चीफ्स
- 1:41:22अलग-अलग लड़ रहे थे। इन्होंने यूनाइट होकर
- 1:41:25ब्रिटिशर्स को फेस नहीं किया और इसीलिए
- 1:41:28ब्रिटिशर्स को इन्हें हराने में आसानी हो
- 1:41:30गई। और इस तरह 185 तक सेकंड एंग्लो
- 1:41:34माइससोर वॉर का एंड हो जाता है। इस वॉर
- 1:41:36में मराठाज़ को काफी ज्यादा टेरिटरीज का
- 1:41:38लॉस होता है और साथ ही मराठा चीफ्स
- 1:41:41सब्सिडियरी अलायंस भी एक्सेप्ट कर लेते
- 1:41:43हैं। उनकी पोजीशन अब कंपनी की तुलना में
- 1:41:46कमजोर हो जाती है। लेकिन मराठाज़ और
- 1:41:48ब्रिटिशर्स के बीच का कॉन्फ्लिक्ट यहां भी
- 1:41:51खत्म नहीं होता और दोनों के बीच थर्ड
- 1:41:53एंग्लो मराठा वॉर होती है। तो चलिए अब
- 1:41:56थर्ड एंग्लो मराठा वॉर को डिस्कस करते
- 1:41:58हैं। थर्ड एंग्लो मराठा वॉर 1817 टू 1818।
- 1:42:03दोस्तों, थर्ड एंग्लो मराठा वॉर होती है
- 1:42:06पिंडारीज के इश्यूज पर। मराठाज़ जब भी किसी
- 1:42:09बैटल या एक्सपेंडिचर पर जाते थे, तो
- 1:42:11पिंडारीज को भी अपनी सेना के साथ रखते थे।
- 1:42:14पिंडारीज़ बेसिकली मिलिट्री प्लंडरर्स हुआ
- 1:42:18करते थे। जो मराठा आर्मी के साथ मर्सिनरीज
- 1:42:20की तरह जोड़ते थे। मर्सिनरीज मतलब कि यह
- 1:42:24लोग मराठा से कोई भी फीस चार्ज नहीं करते
- 1:42:26थे। बल्कि जीतने के बाद यह अपना हिस्सा उस
- 1:42:29एरिया को लूट कर वसूल करते थे। मराठाज़ की
- 1:42:33तरफ से इन्हें इस बात की परमिशन थी।
- 1:42:35पिंडारीज कोई एक कास्ट नहीं थी बल्कि
- 1:42:38इनमें अलग-अलग कास्ट और क्लासेस के लोग
- 1:42:40शामिल होते थे। अब होता यह है कि सेकंड
- 1:42:43एंग्लो मराठा वॉर के बाद मराठाज़ काफी वीक
- 1:42:46हो जाते हैं। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी
- 1:42:49का कंट्रोल उनके ऊपर बढ़ता जा रहा था और
- 1:42:51ऐसे में मराठाज़ जब कोई एक्सपिडिशन कर ही
- 1:42:54नहीं रहे थे तो पिंडारीज को भी मराठाज़ से
- 1:42:57कोई काम नहीं मिल पा रहा था। अब रेगुलर
- 1:43:00एंप्लॉयमेंट ना मिलने के कारण पिंडारीज ने
- 1:43:02आसपास की टेरिटरीज को प्लंडर करना शुरू कर
- 1:43:05दिया। उन्होंने हैदराबाद के निजाम,
- 1:43:08कर्नाटक के नवाब, मालाबार और ब्रिटिश ईस्ट
- 1:43:11इंडिया कंपनी की टेरिटरीज में भी लूटपाट
- 1:43:13कर दी। इससे परेशान होकर ब्रिटिश कंपनी के
- 1:43:16गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग ने 1817 में
- 1:43:20पिंडारीज पर अटैक कर दिया। पिंडारीज पर
- 1:43:22अटैक एक तरह से मराठा सोवनिटी पर अटैक था
- 1:43:25और मराठाज़ इसका जवाब ब्रिटिश कंपनी को
- 1:43:28देना चाहते थे। इसके साथ ही सेकंड एंग्लो
- 1:43:31मराठा वॉर के टाइम जो सब्सिडियरी अलायंस
- 1:43:34ट्रीटी साइन हुई थी उसके अकॉर्डिंग
- 1:43:36ब्रिटिश कंपनी ने हर एक मराठा चीफ के
- 1:43:39कोर्ट में रेजिडेंट यानी कि ब्रिटिश एजेंट
- 1:43:42अपॉइंट कर दिया था और यह रेजिडेंट्स मराठा
- 1:43:45चीफ्स पर नजर रखते थे कि वह कोई कंस्परेसी
- 1:43:47ना कर पाएं। मराठाज़ इन रेजिडेंट्स के
- 1:43:50इंटरफेरेंस से भी परेशान थे। ऐसे में
- 1:43:53ब्रिटिशर्स मराठास पर पिंडारीज को हेल्प
- 1:43:56करने का एक्यूज़ेशन भी लगा देते हैं। तब
- 1:43:58पेशवा और मराठा चीफ्स डिसाइड करते हैं कि
- 1:44:01उन्हें ब्रिटिशर्स का मिलकर सामना करना
- 1:44:03चाहिए। पेशवा बाजीराव टू, मल्हार राव
- 1:44:06होलकर और मोधोजी भोसले टू एक यूनाइटेड
- 1:44:09फ्रंट का फॉर्मेशन करते हैं। लेकिन एक बार
- 1:44:12फिर से ब्रिटिशर्स की जीत होती है और
- 1:44:15मराठाज़ के साथ फिर से ट्रीटी साइन की जाती
- 1:44:18हैं। सिंधिया के साथ 1871 में ट्रीटी ऑफ
- 1:44:21ग्वालियर साइन की जाती है। और 1818 में
- 1:44:25होलकर के साथ मंडसौर की ट्रीटी साइन होती
- 1:44:27है। 1818 में पेशवा भी सरेंडर कर देते
- 1:44:31हैं। पेशवा को गद्दी से हटा दिया जाता है
- 1:44:33और पेंशन देकर कानपुर के पास बिट्ठूर भेज
- 1:44:36दिया जाता है। उनकी ज्यादातर टेरिटरी
- 1:44:39बॉम्बे प्रेसिडेंसी का हिस्सा बन जाती है
- 1:44:42और इस तरह थर्ड एंग्लो मराठा वॉर के साथ
- 1:44:44मराठा एंपायर का भी एंड हो जाता है। सभी
- 1:44:48मराठा चीफ्स ब्रिटिशर्स के आगे सरेंडर कर
- 1:44:50देते हैं। और इसके साथ ही पंजाब और सिंध
- 1:44:53के अलावा पूरी इंडियन टेरिटरी पर
- 1:44:56ब्रिटिशर्स का डायरेक्ट या इनडायरेक्ट
- 1:44:58कंट्रोल इस्टैब्लिश हो जाता है। दोस्तों
- 1:45:01यह तो बात हुई एंग्लो मराठा वॉर्स की। अब
- 1:45:03ऐसे कुछ ओवरऑल रीजंस को भी समझते हैं
- 1:45:06जिनकी वजह से मराठाज़ को ब्रिटिशर्स से हार
- 1:45:09का सामना करना पड़ता है। रीज़ंस फॉर मराठा
- 1:45:12लॉस।
- 1:45:14मराठाज़ की हार का सबसे बड़ा कारण था मराठा
- 1:45:17चीफ्स के बीच यूनिटी ना होना। इसके साथ ही
- 1:45:20मराठाज़ के किसी भी और इंडियन प्रिंसेस या
- 1:45:23रूलिंग डायनेस्टी के साथ अच्छे संबंध नहीं
- 1:45:25थे। मराठाज़ अपने नेबर्स से चौथ वसूल करते
- 1:45:29थे। जिसकी वजह से सब इनसे परेशान थे और
- 1:45:31इसलिए बहुत से लोकल चीफ्स और जमींदर्स
- 1:45:34ब्रिटिशर्स की साइड लेने लगते हैं। इसके
- 1:45:37अलावा मराठा ब्रिटिशर्स की पॉलिटिकल और
- 1:45:39डिप्लोमेटिक स्ट्रेंथ्स को भी नहीं समझ
- 1:45:41पाए। हमने देखा कि कैसे हर बार मराठा
- 1:45:44लीडर्स ब्रिटिशर्स के साथ ट्रीटी के झांसे
- 1:45:47में आ जाते हैं। इसके अलावा मराठाज़ की हार
- 1:45:50के पीछे और भी रीज़ंस थे। जैसे कि मराठा
- 1:45:53चीफ्स की इनप्ट लीडरशिप, उनका इनफीरियर
- 1:45:56मिलिट्री सिस्टम, वो गोरिल्ला वॉरफेयर में
- 1:45:58तो माहिर थे लेकिन ब्रिटिशर्स के साथ
- 1:46:00आमने-सामने की बैटल में नहीं। इसके साथ ही
- 1:46:04ब्रिटिशर्स की सुपीरियर डिप्लोमेटिक
- 1:46:05स्किल्स जिसकी हेल्प से वो यह इंश्योर कर
- 1:46:08लेते हैं कि हैदराबाद या मैसौर जैसे
- 1:46:11स्टेट्स मराठाज़ और ब्रिटिशर्स के अफेयर्स
- 1:46:13में कोई इंटरफेरेंस ना करें। यह मराठाज़ की
- 1:46:16हार का एक कारण कही जा सकती हैं। इन सभी
- 1:46:20रीजंस की वजह से अल्टीमेटली मराठाज़
- 1:46:22ब्रिटिशर्स से हार जाते हैं और एंग्लो
- 1:46:24मराठा वॉर्स के बाद उनके एंपायर का फाइनल
- 1:46:27डिक्लाइन होता है। कंक्लूडिंग रिमार्क्स।
- 1:46:31दोस्तों, इस तरह ब्रिटिशर्स ने इंडिया की
- 1:46:34एक और इंपॉर्टेंट पावर मराठाज़ को भी
- 1:46:36रास्ते से हटा दिया। बंगाल और मैसौर पर
- 1:46:39उनकी जीत को हम पहले ही कवर कर चुके हैं।
- 1:46:43जैसा कि हमने पहले भी बताया कि अब पंजाब
- 1:46:45और सिंध को छोड़कर ब्रिटिशर्स का कंट्रोल
- 1:46:48ऑलमोस्ट पूरे इंडिया पर हो चुका था। कुछ
- 1:46:51एरियाज पर डायरेक्ट कंट्रोल था और कुछ पर
- 1:46:53इनडायरेक्ट जैसे कि अवध, हैदराबाद
- 1:46:56एटसेट्रा पर सब्सिडियरी अलायंस की हेल्प
- 1:46:58से। पंजाब और सिंध की उनकी जीत को हम अपनी
- 1:47:02आने वाली वीडियोस में कवर करेंगे। एनशन ऑफ
- 1:47:05सिंध एंड द सिख एंपायर। 1820 आते-आते
- 1:47:09ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी लगभग पूरी
- 1:47:12इंडियन टेरिटरी पर अपना डायरेक्ट या
- 1:47:14इनडायरेक्ट कंट्रोल इस्टैब्लिश कर चुकी
- 1:47:16थी। लेकिन इंडिया का नॉर्थ वेस्टर्न एरिया
- 1:47:18यानी कि सिंध प्रांत और सिख एंपायर अभी भी
- 1:47:22उसके कंट्रोल से बाहर था। आज हम इन्हीं
- 1:47:25दोनों एरियाज के बारे में बात करने वाले
- 1:47:27हैं। हम जानेंगे कि इनके साथ कंपनी के
- 1:47:30रिलेशंस कैसे थे। कंपनी के लिए इन एरियाज
- 1:47:33की क्याेंस थी और इवेंचुअली कंपनी इन्हें
- 1:47:36कब और कैसे एनेक्स कर लेती है। तो आइए
- 1:47:39शुरू करते हैं। सबसे पहले बात करते हैं
- 1:47:41सिंध की एनेक्सेशन ऑफ सिंध बैकग्राउंड।
- 1:47:47दोस्तों सिंध इंडस यानी कि सिंधु रिवर के
- 1:47:51किनारे पर बसा हुआ है। 18th सेंचुरी से ही
- 1:47:54सिंध को कुछ बलोची चीफ्स कलेक्टिवली रूल
- 1:47:57कर रहे थे। जिन्हें अमीरस कहा जाता था।
- 1:48:00ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहां अपनी पहली
- 1:48:02फैक्ट्री 1775 में थट्टा नाम की जगह पर
- 1:48:06इस्टैब्लिश की थी। लेकिन 1792 में
- 1:48:09पॉलिटिकल एंडस्ट और फिसिकल प्रॉब्लम्स की
- 1:48:12वजह से उन्होंने इस फैक्ट्री को छोड़ दिया
- 1:48:14था। इसके बाद 189 में लॉर्ड मिंटो वन ने
- 1:48:18सिंध के अमीर्स के साथ ट्रीटी ऑफ इटरर्नल
- 1:48:20फ्रेंडशिप साइन की थी। इस ट्रीटी के
- 1:48:23अनुसार सिंध के अमीर प्रॉमिस करते हैं कि
- 1:48:26वो सिंध में फ्रेंच को सेटल नहीं होने
- 1:48:28देंगे। 1820 में एक बार फिर से इस ट्रीटी
- 1:48:31को रिन्यू किया जाता है। इस बार अमेरिकनंस
- 1:48:34को भी सिंध से बाहर रखने का प्रोविजन
- 1:48:36ट्रीटी में ऐड कर दिया जाता है। कुछ समय
- 1:48:39बाद ही कंपनी का ध्यान इंडस रिवर की
- 1:48:42कमर्शियल और नेविगेशनल वैल्यू की तरफ
- 1:48:44आकर्षित होता है। 1832 में विलियम बेंटिंग
- 1:48:48आमिर्स के साथ एक नई कमर्शियल ट्रीटी साइन
- 1:48:51करने के लिए कर्नल पॉटिंग को सिंध भेजते
- 1:48:54हैं। साथ ही लेफ्टिनेंट डेलहॉस्ट को लोअर
- 1:48:57इंडस के कोर्स का सर्वे करने के लिए भेज
- 1:48:59दिया जाता है। पॉटिंग सिंध के अमीरस के
- 1:49:03साथ फॉलोइंग टर्म्स पर ट्रीटी साइन करते
- 1:49:05हैं। पहला पॉइंट था कि इंग्लिश ट्रैवलर्स
- 1:49:08और मर्चेंट्स को सिंध से फ्री पैसेज दिया
- 1:49:11जाएगा और रिवर इंडस को कमर्शियल पर्पस के
- 1:49:13लिए यूज करने दिया जाएगा। लेकिन वॉर्स के
- 1:49:16लिए कोई भी शिप या गुड्स इंडस के थ्रू
- 1:49:19नहीं लाए जाएंगे। दूसरा पॉइंट था कि सिंध
- 1:49:22में कोई भी इंग्लिश मर्चेंट सेटल नहीं
- 1:49:24होगा और ट्रैवलर्स को पासपोर्ट रखना होगा।
- 1:49:28तीसरा कि टेरिफ रेट्स अनाउंस किए जाएंगे
- 1:49:30और कोई भी मिलिट्री ड्यूस या टोल्स की
- 1:49:33डिमांड नहीं रखी जाएगी। इसके साथ ही
- 1:49:35फ्रेंडशिप की पुरानी ट्रीटीज को भी कंफर्म
- 1:49:38किया गया और प्रॉमिस किया गया कि दोनों
- 1:49:40पार्टीज एक दूसरे के एरियाज को एनेक्स
- 1:49:43करने की कोशिश नहीं करेंगी। और आखिर में
- 1:49:46कर्नल पॉटिंग कंपनी के पॉलिटिकल एजेंट की
- 1:49:48तरह सिंध में रहेंगे। इसके बाद 1839 में
- 1:49:52सिंध के अमीर को एक बार फिर से फोर्स करके
- 1:49:54उनके साथ सब्सिडियरी अलायंस की ट्रीटी
- 1:49:57साइन की जाती है। यहां भी ब्रिटिशर्स यह
- 1:49:59प्रॉमिस करते हैं कि सिंध को कभी एनिक्स
- 1:50:02नहीं करेंगे। दोस्तों, 1832 और फिर 1839
- 1:50:06की ट्रीटी में तो प्रॉमिस किया गया था कि
- 1:50:09सिंध का कभी एनेक्सेशन नहीं होगा। फिर ऐसा
- 1:50:12क्या हुआ कि 1843 में ब्रिटिशर्स सिंध को
- 1:50:15एनेक्स कर लेते हैं? आइए जानते हैं
- 1:50:19स्टोरी ऑफ एनेक्सेशन।
- 1:50:23दोस्तों, सिंध का एनेक्सेशन करने के पीछे
- 1:50:26स्ट्रेटेजिक और कमर्शियल दोनों ही रीज़ंस
- 1:50:28थे। पहले स्ट्रेटेजिक रीज़ंस को समझते हैं।
- 1:50:321839 से 1842 तक एंग्लो अफगान वॉर हुआ था।
- 1:50:36जिसमें ब्रिटिशर्स की बुरी तरह हार हो
- 1:50:39जाती है। इस हार से ब्रिटिश प्रेस्टीज को
- 1:50:41बहुत बड़ा झटका लगता है। अपनी खोई हुई
- 1:50:44प्रेस्टीज को वापस पाने के लिए कंपनी को
- 1:50:46जरूरत थी एक जीत की और जीतने के लिए पंजाब
- 1:50:50और सिंध ही बचे हुए थे। लेकिन पंजाब में
- 1:50:53राजा रणजीत सिंह जैसे स्ट्रांग रूलर का
- 1:50:55रूल था। कंपनी उनके अगेंस्ट रिस्क नहीं
- 1:50:58लेना चाहती थी। इसलिए वह अपना निशाना
- 1:51:00बनाते हैं पहले से ही कमजोर सिंध को। यह
- 1:51:03तो हुआ पहला स्ट्रेटेजिक रीजन। एक और
- 1:51:06स्ट्रेटेजिक कारण था सिंध के एनेक्सेशन का
- 1:51:09जिसे अक्सर रूसोफोबिया कहा जाता है और वह
- 1:51:12था रशिया के इन्वेशन का डर। ब्रिटिशर्स को
- 1:51:16लगता था कि रशिया इंडिया में उनके एंपायर
- 1:51:19पर अटैक कर सकता है और इसी अटैक को
- 1:51:21प्रिवेंट करने के लिए वह अपने इंडियन
- 1:51:23एंपायर का नॉर्थ वेस्टर्न बॉर्डर स्ट्रांग
- 1:51:26करना चाहते थे। इसके साथ ही ब्रिटिशर्स को
- 1:51:29यह भी डर था कि पंजाब के राजा रणजीत सिंह
- 1:51:32सिंध को जीत सकते हैं और यह वह कभी नहीं
- 1:51:35चाहते थे। इसलिए कंपनी डिसाइड करती है कि
- 1:51:38सिंध उनके डायरेक्ट कंट्रोल में होना
- 1:51:40चाहिए। स्ट्रेटेजिक रीज़ंस के अलावा सिंध
- 1:51:43को एनेक्स करने के कमर्शियल रीज़ंस भी थे।
- 1:51:46सिंध पर कंट्रोल होने से इंडस रिवर के
- 1:51:49थ्रू होने वाले ट्रेड को कंट्रोल किया जा
- 1:51:51सकता था। जिससे कंपनी नॉर्थ वेस्ट इंडिया
- 1:51:54और पंजाब के साथ इजीली ट्रेड कर सकती थी।
- 1:51:57इन्हीं सभी रीजंस की वजह से ब्रिटिशर्स ने
- 1:51:59सिंध को एनेक्स करने का डिसीजन लिया।
- 1:52:02कंपनी सिंध के अमीर पर यह आरोप लगाती है
- 1:52:06कि उन्होंने एंग्लो अफगान वॉर के समय
- 1:52:08ब्रिटिशर्स की हेल्प नहीं की। और इसका
- 1:52:11सेटलमेंट ब्रिटिश रेजिडेंट पर छोड़ने की
- 1:52:13जगह गवर्नर जनरल लॉर्ड एलबर सर चार्ल्स
- 1:52:16नेपियर को कंप्लीट पॉलिटिकल और मिलिट्री
- 1:52:19अथॉरिटी के साथ सिंध भेज देते हैं। सिंध
- 1:52:22पहुंचने के बाद चार्ल्स नेपियर अमीर्स को
- 1:52:25एक बहुत ही हारश ट्रीटी साइन करने के लिए
- 1:52:27फोर्स करते हैं और ज्यादा प्रोवोक करने के
- 1:52:30लिए वो डेजर्ट फोर्ट इमामगढ़ को सीज करके
- 1:52:33डिस्ट्रॉय कर देते हैं। इसके बाद बलोची
- 1:52:35सोल्जर्स रिवोल्ट कर देते हैं और ओपन वॉर
- 1:52:38शुरू हो जाता है। 1843 में बैटल ऑफ मियानी
- 1:52:42में सर चार्ल्स नेबियर की फर्सेस आर्मी की
- 1:52:45आर्मी को हरा देती हैं और सिंध का
- 1:52:47एनेक्सेशन कंप्लीट हो जाता है। इस
- 1:52:50एनेक्सेशन से एंग्लो इंडियन एंपायर को
- 1:52:52वेस्ट की तरफ एक शॉर्टर और सेफर फ्रंटियर
- 1:52:55मिल जाता है। इसके साथ ही इंडस रिवर की
- 1:52:58कमांड भी उनके हाथों में आ जाती है। जिससे
- 1:53:00ब्रिटिशर्स के लिए सेंट्रल एशिया तक एक
- 1:53:03डायरेक्ट कमर्शियल वे ओपन हो जाता है।
- 1:53:06दोस्तों, हालांकि सिंध को ककर करने के यह
- 1:53:08सब फायदे तो हुए, लेकिन ककर करने वाले
- 1:53:11चार्ल्स नेपियर इस एनेक्सेशन की राइटसनेस
- 1:53:14को लेकर कन्विंस नहीं थे। अपनी डायरी में
- 1:53:17उन्होंने लिखा था वी हैव नो राइट टू सी
- 1:53:19सिंध। येट वी शैल डू सो एंड अ वेरी
- 1:53:23एडवांटेजियस यूज़फुल इन ह्यूमन पीस ऑफ़
- 1:53:26रेस्कलिटी इट विल बी। दोस्तों सिंध के
- 1:53:29एनेक्सेशन के बाद अब सिर्फ पंजाब ही ऐसा
- 1:53:32रीजन था जहां कंपनी का कंट्रोल इस्टैब्लिश
- 1:53:35नहीं हुआ था। तो आइए अब पंजाब की स्टोरी
- 1:53:38को समझते हैं। एनेक्सेशन ऑफ पंजाब
- 1:53:41बैकग्राउंड।
- 1:53:43दोस्तों, पंजाब में रूल कर रहे थे महाराजा
- 1:53:46रणजीत सिंह जो कि एक स्ट्रांग और कैपेबल
- 1:53:49लीडर थे। उन्होंने अपनी आर्मी को यूरोपियन
- 1:53:51मॉडल पर ट्रेन किया था। ऐसा कहा जाता है
- 1:53:54कि उनके पास एशिया की सेकंड बेस्ट आर्मी
- 1:53:57थी। मतलब सिर्फ इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी
- 1:54:00की आर्मी उनसे बेटर थी। ईस्ट इंडिया कंपनी
- 1:54:03और महाराजा रणजीत सिंह के बीच रिलेशंस की
- 1:54:06शुरुआत होती है 189 की ट्रीटी ऑफ़ अमृतसर
- 1:54:09से। दोस्तों, ट्रीटी ऑफ़ अमृतसर 187 की
- 1:54:13ट्रीटी ऑफ़ तिलसित से काफी ज्यादा कनेक्टेड
- 1:54:16है। ट्रीटी ऑफ तिलसित फ्रांस के नेपोलियन
- 1:54:19और रशिया के रूलर एलेक्जेंडर द वन के बीच
- 1:54:22हुई थी। और इसमें डिसाइड हुआ था कि यह
- 1:54:25दोनों पावर्स लैंड रूट के थ्रू इंडिया को
- 1:54:27इनवेट करेंगे। इसी पॉसिबल इन्वजन से अपने
- 1:54:31एंपायर को सेव करने के लिए ब्रिटिश गवर्नर
- 1:54:33जनरल लॉर्ड मिंटो वन 187 में सर चार्ल्स
- 1:54:37मेडकाफ को लाहौर भेजते हैं। सर चार्ल्स
- 1:54:40मैडकाफ एक ऑफेंसिव और डिफेंसिव अलायंस का
- 1:54:43प्रपोजल महाराजा रणजीत सिंह के सामने रखते
- 1:54:45हैं। रणजीत सिंह इस प्रपोजल को एक्सेप्ट
- 1:54:48करने के लिए अपनी दो कंडीशंस रखते हैं।
- 1:54:50पहली कि सिख अफगान वॉर के केस में इंग्लिश
- 1:54:54न्यूट्रल रहेंगे। और दूसरी कंडीशन थी कि
- 1:54:57ब्रिटिशर्स रणजीत सिंह को एंटायर पंजाब
- 1:55:00इंक्लूडिंग मालवा टेरिटरीज का सोवन
- 1:55:03एक्सेप्ट कर लेंगे। मालवा टेरिटरीज का
- 1:55:06यहां मतलब है मॉडर्न सदर्न पंजाब और
- 1:55:08हरियाणा का रीजन जिसे सतलज रीजन भी कहा
- 1:55:12जाता था। 187 की यह नेगोशिएशंस तो फेल हो
- 1:55:16जाती हैं। लेकिन 2 साल बाद ही पॉलिटिकल
- 1:55:18सिचुएशन पूरी तरह चेंज हो जाती है। हुआ यह
- 1:55:22था कि महाराजा रणजीत सिंह ने सितंबर 188
- 1:55:25में मालवा रीजन को इनवेड करने की कोशिश की
- 1:55:27थी। लेकिन फरवरी 189 में ईस्ट इंडिया
- 1:55:30कंपनी ने उनके ऊपर अटैक कर दिया। इस अटैक
- 1:55:34में कंपनी को काफी सक्सेस मिलती है। ऐसी
- 1:55:36सिचुएशन में महाराजा रणजीत सिंह को समझ
- 1:55:39में आ गया कि कंपनी के साथ ज्यादा टक्कर
- 1:55:42लेना सही नहीं है और वह अमृतसर की ट्रीटी
- 1:55:44साइन करने के लिए तैयार हो गए। ट्रीटी ऑफ़
- 1:55:47अमृतसर में महाराजा रणजीत सिंह को यह
- 1:55:49एक्सेप्ट करना पड़ा कि वह सतलज रिवर को
- 1:55:51अपनी सदन बाउंड्री मान लेंगे और कभी भी
- 1:55:54इसे बाहर नहीं करेंगे। दोस्तों, ट्रीटी ऑफ़
- 1:55:57अमृतसर के बाद रणजीत सिंह और कंपनी के बीच
- 1:56:00और कोई टकराव देखने को नहीं मिलता। लेकिन
- 1:56:02कहानी में ट्विस्ट आता है जब जून 1839 में
- 1:56:06महाराजा रणजीत सिंह की डेथ हो जाती है।
- 1:56:09उसके बाद कैसे ब्रिटिशर्स पंजाब को एनेक्स
- 1:56:11कर लेते हैं? आइए जानते हैं। फर्स्ट
- 1:56:14एंग्लो सिख वॉर 184546।
- 1:56:18दोस्तों, महाराजा रणजीत सिंह की डेथ के
- 1:56:20बाद उनके बेटे खड़क सिंह राजा बनते हैं।
- 1:56:23लेकिन उनमें अपने पिता जैसी कोई भी खूबी
- 1:56:26नहीं थी। वह नशे के आदि थे और हर वक्त
- 1:56:29शराब और अफीम के नशे में धुत रहते थे और
- 1:56:32जब वह ज्यादातर बीमार रहने लगे तो कुछ
- 1:56:34महीनों बाद ही उनके बेटे नवनिहाल सिंह को
- 1:56:37राजा बना दिया गया। फिर नवंबर 1840 में
- 1:56:40खड़क सिंह की मृत्यु हो गई और उनके
- 1:56:43फ्यूनरल से वापस आते समय महाराजा नवनिहाल
- 1:56:46सिंह के ऊपर गेट के ऊपर से बहुत बड़ा
- 1:56:49पत्थर टूट कर गिर गया और इस तरह उनकी भी
- 1:56:52डेथ हो गई। इसके बाद खड़क सिंह की वाइफ और
- 1:56:55नवनिहाल सिंह की मदद चांद कौर नवनिहाल के
- 1:56:58अनबोर्न चाइल्ड का रीजेंट बनकर गद्दी
- 1:57:01संभालती हैं। लेकिन यह बात रंजीत सिंह के
- 1:57:04एक और बेटे शेर सिंह को पसंद नहीं आ रही
- 1:57:07थी और उन्होंने 70,000 की फौज के साथ
- 1:57:10लाहौर का घेराव कर लिया और जनवरी 1841 में
- 1:57:14खुद को महाराजा डिक्लेअर कर दिया। लेकिन
- 1:57:171843 में शेर सिंह को भी धोखे से मार दिया
- 1:57:20गया। इसके बाद सितंबर 1843 में रणजीत सिंह
- 1:57:24के 5 साल के बेटे दिलीप सिंह को महाराजा
- 1:57:27बनाया जाता है। दलीप सिंह की मदद जिंद कौर
- 1:57:30उनका रीजेंट बनके राजपाट संभालती हैं। इस
- 1:57:34तरह पॉलिटिकल इनस्टेबिलिटी के चलते आर्मी
- 1:57:36भी कमजोर पड़ने लगती है। सोल्जर्स को समय
- 1:57:39से वेतन नहीं मिल पा रहा था और आर्मी में
- 1:57:41इनडिसिप्लिन बढ़ता जा रहा था। दोस्तों
- 1:57:44पंजाब की सिचुएशन पर कंपनी अपनी नजर बनाए
- 1:57:47हुए थी। उन्हें समझ आ गया था कि पंजाब
- 1:57:49किंगडम अब पहले की तरह स्ट्रांग नहीं है।
- 1:57:52इसके साथ ही ब्रिटिशर्स ने 1843 में सिंध
- 1:57:55को तो एनेक्स कर ही लिया था। तो अब बस
- 1:57:57पंजाब ही उनके कंट्रोल से बाहर था। सिंध
- 1:58:00के एनेक्सेशन के बाद पंजाब को भी डर था कि
- 1:58:03कहीं कंपनी उनके ऊपर अटैक ना कर दे।
- 1:58:06सिचुएशन और ज्यादा टेंस होने लगती है जब
- 1:58:081845 में गवर्नर जनरल लॉर्ड हार्डिंग सतलज
- 1:58:12रिवर पर हजारों की संख्या में अपने
- 1:58:14ट्रूप्स भेजने लगते हैं। ऐसे में सिख
- 1:58:17आर्मी को समझ नहीं आ रहा था कि ब्रिटिश
- 1:58:19कंपनी लाहौर पर अटैक करने वाली है या उनका
- 1:58:22कुछ और प्लान है। कंफ्यूजन की सिचुएशन में
- 1:58:25सिख आर्मी के कुछ दस्तों ने यानी बटालियन
- 1:58:28ने 11th दिसंबर 1845 में सतलज रिवर को
- 1:58:31क्रॉस कर दिया। क्योंकि सिख आर्मी का
- 1:58:34मानना था कि अगर ईस्ट इंडिया कंपनी को वॉर
- 1:58:36चाहिए तो वह उनके ही एरिया में होगी ना कि
- 1:58:39पंजाब में। इसलिए वह सतलज को क्रॉस करके
- 1:58:43बहादुरी से अपने दुश्मन का सामना करने
- 1:58:45पहुंच जाते हैं। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया
- 1:58:48कंपनी के हिसाब से सतलज रिवर को क्रॉस
- 1:58:50करना मतलब ट्रीटी ऑफ अमृतसर का वायलेशन
- 1:58:53करना था। इसी को कारण बनाकर दिसंबर 1845
- 1:58:57में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब
- 1:59:00किंगडम पर अटैक कर दिया। सिख आर्मी को लीड
- 1:59:03कर रहे थे उनके जनरल तेजा सिंह और लाल
- 1:59:06सिंह। पहली बात तो यह दोनों ही लीडर्स
- 1:59:09कैपेबल नहीं थे। और दूसरी बात यह कि कंपनी
- 1:59:12से भी मिले हुए थे। तो ऐसी सिचुएशन में जब
- 1:59:15फर्स्ट एंग्लो सिख वॉर हुआ तो सिख आर्मी
- 1:59:17को हर जगह हार का सामना करना पड़ा। यह वॉर
- 1:59:21दिसंबर 1845 में शुरू होकर मार्च 1846 में
- 1:59:25ट्रीटी ऑफ लाहौर के साथ खत्म होती है।
- 1:59:27ट्रीटी ऑफ लाहौर में ब्रिटिश कहते हैं कि
- 1:59:30वह दलित सिंह को पंजाब किंगडम का रूलर और
- 1:59:33रानी जिंदल को उनका रीजेंट एक्सेप्ट करते
- 1:59:36हैं। इसके साथ ही लाल सिंह को वजीर मानने
- 1:59:38के लिए भी तैयार हैं। लेकिन अब पंजाब की
- 1:59:41आर्मी को सिर्फ 20,000 इनफेंट्री और
- 1:59:4312,000 कैवलरी तक सीमित कर दिया जाता है।
- 1:59:46सिख आर्मी का रिऑर्गेनाइजेशन होने तक
- 1:59:49महाराजा और लाहौर के लोगों की सुरक्षा के
- 1:59:51लिए एक ब्रिटिश फोर्स को लाहौर में तैनात
- 1:59:54कर दिया जाता है। इस फोर्स को 1846 के एंड
- 1:59:57तक लाहौर में रहना था। इसके साथ ही सर
- 2:00:01हेनरी लॉरेंस को लाहौर में ब्रिटिश
- 2:00:03रेजिडेंट बना दिया जाता है। कंपनी लाहौर
- 2:00:06किंगडम से ₹1 करोड़ से ज्यादा की वॉर
- 2:00:09इडेमिनिटी की मांग भी करती है। लाहौर
- 2:00:11किंगडम के पास इतना पैसा नहीं था। इसलिए
- 2:00:14कंपनी लाहौर किंगडम के पार्ट जम्मू एंड
- 2:00:17कश्मीर को गुलाब सिंह को बेच देती है।
- 2:00:19गुलाब सिंह इसके बदले में कंपनी को ₹75
- 2:00:22लाख देते हैं। इसके साथ ही ब्यास और सतलज
- 2:00:26के बीच का एरिया जालंधर दुआब को भी
- 2:00:28ब्रिटिश एनिक्स कर लेते हैं। तो दोस्तों,
- 2:00:31यह थी 1846 की ट्रीटी ऑफ़ लाहौर। इस
- 2:00:34ह्यूमिलिएटिंग ट्रीटी से सिख खुश नहीं थे
- 2:00:38और वह रिबेलियन कर देते हैं। कंपनी ईजीली
- 2:00:41इस रिबेलियन को क्रश कर देती है और कहती
- 2:00:43है कि यह रिबेलियन महारानी जिंद के कहने
- 2:00:46पर हुआ है। इसलिए एक और ट्रीटी साइन की
- 2:00:49जाती है जिसके अकॉर्डिंग महारानी जिंद को
- 2:00:51पेंशन देकर बनारस भेज दिया जाता है। और
- 2:00:54ब्रिटिश रेजिडेंट हेनरी लॉरेंस की लीडरशिप
- 2:00:57में एक रीजेंसी काउंसिल बनाई गई जिसमें आठ
- 2:01:00सिख सरदार को रखा गया। कहा गया कि अब से
- 2:01:03यह रीजेंसी काउंसिल महाराजा दलिप सिंह के
- 2:01:05रीजेंट के रूप में काम करेगी। यह थी
- 2:01:08ट्रीटी ऑफ भैररोवाल जो हुई थी दिसंबर 1846
- 2:01:12में। इस ट्रीटी के हिसाब से जो ब्रिटिश
- 2:01:15ट्रूप्स 1846 के एंड में लाहौर से विड्रॉ
- 2:01:18करने वाले थे, उन्हें अब तब तक लाहौर में
- 2:01:21ही रहना था जब तक कि दिलीप सिंह माइनर
- 2:01:23हैं। और इसके बदले में पंजाब को कंपनी को
- 2:01:27हर साल ₹22 लाख भी देने होंगे। दोस्तों,
- 2:01:30इस ट्रीटी के बाद यह साफ हो गया कि पंजाब
- 2:01:33की रियल पावर अब ब्रिटिश रेजिडेंट के हाथ
- 2:01:35में आ चुकी है और पंजाब अब सिर्फ एक वेसल
- 2:01:38स्टेट बन गया है। यहां से पंजाब की इंटरनल
- 2:01:41एडमिनिस्ट्रेशन की रिस्पांसिबिलिटी भी
- 2:01:44ईस्ट इंडिया कंपनी की हो जाती है। लेकिन
- 2:01:46ब्रिटिशर्स यहां भी नहीं रुकते। सिर्फ 2
- 2:01:49साल के बाद ही 1848 में सेकंड एंग्लो सिख
- 2:01:53वॉर के थ्रू वह पंजाब को पूरी तरह एनेक्स
- 2:01:56कर लेते हैं। आइए फिर सेकंड एंग्लो सिख
- 2:01:59वॉर को भी समझते हैं। सेकंड एंग्लो सिख
- 2:02:02वॉर 184849।
- 2:02:05दोस्तों, यह तो हमने समझा कि फर्स्ट
- 2:02:07एंग्लो सिख वॉर के बाद हुई ट्रीटी सिख के
- 2:02:10लिए बहुत ही ह्यूमिलिएटिंग थी और सारी
- 2:02:12पावर्स अब ब्रिटिश रेजिडेंट हेनरी लॉरेंस
- 2:02:15के हाथों में आ चुकी थी। ऐसे में 1848 में
- 2:02:18हेनरी लॉरेंस मुल्तान के गवर्नर दीवान
- 2:02:21मूलराज से इनक्रीज्ड रेवेन्यू की डिमांड
- 2:02:24करते हैं। लेकिन मूलराज ने ना तो बढ़ा हुआ
- 2:02:27रेवेन्यू देने की बात मानी और ना ही
- 2:02:29पुराना हिसाब किताब किया। उन्होंने
- 2:02:31भी अपनी तरफ से तैयारी कर ली थी कि अगर
- 2:02:34ब्रिटिश रेजिडेंट कोई जबरदस्ती करने की
- 2:02:36कोशिश करेंगे तो देख लेंगे। तब ब्रिटिश
- 2:02:39रेजिडेंट डिसाइड करते हैं कि मूल राज को
- 2:02:41रिप्लेस करके किसी और को मुल्तान का
- 2:02:44गवर्नर बना दिया जाए। लेकिन मुल्तान की
- 2:02:46जनता मूलराज के फेवर में थी। इसलिए
- 2:02:49मुल्तान के नए सिख गवर्नर को दो ब्रिटिश
- 2:02:52ऑफिसर्स लेफ्टिनेंट पैट्रिक वैजागन्यू और
- 2:02:55लेफ्टिनेंट एंडसन के साथ मुल्तान भेजा
- 2:02:58गया। जब यह मुल्तान पहुंचे तो वहां की
- 2:03:01जनता पहले से ही भड़की हुई थी। उन्होंने
- 2:03:03इन दोनों ब्रिटिश ऑफिसर्स को मार दिया।
- 2:03:06फर्स्ट एंग्लो सिख वॉर के ह्यूमिलिएशन से
- 2:03:09परेशान पंजाब के लोगों को मूलराज में अपना
- 2:03:12नया लीडर मिल गया और जल्दी ही सिख ट्रूप्स
- 2:03:15ने भी मूलराज को ज्वाइन कर लिया और पंजाब
- 2:03:17में एक ओपन रिबेलियन की शुरुआत हो गई। उस
- 2:03:21समय गवर्नर जनरल थे लॉर्ड डलहौजी। पंजाब
- 2:03:24की स्थिति देखकर लॉर्ड डलहौजी ने डिसाइड
- 2:03:27किया कि यह एक बहुत ही बढ़िया मौका है
- 2:03:29पंजाब को एनेक्स करने का। उन्होंने पंजाब
- 2:03:33पर अटैक कर दिया और इस तरह सेकंड एंग्लो
- 2:03:35सिख वॉर की शुरुआत हो गई। इस वॉर के दौरान
- 2:03:38कुछ इंपॉर्टेंट बैटल्स हुई थी। जैसे कि
- 2:03:41बैटल ऑफ रामनगर, बैटल ऑफ चिलियांवाला और
- 2:03:44बैटल ऑफ गुजरात। यह वॉर 1849 में एंड हुआ
- 2:03:49और सिख आर्मी को सरेंडर करना पड़ा। पंजाब
- 2:03:52को एनेक्स कर लिया गया और अब पंजाब भी
- 2:03:55ब्रिटिश कंपनी की एक टेरिटरी बन गया।
- 2:03:58दोस्तों, पंजाब के एनेक्सेशन के लिए कहा
- 2:04:00जाता है कि द एनेक्सेशन ऑफ पंजाब वास नो
- 2:04:03एनेक्सेशन। इट वास अ सीक्रेट ब्रीच ऑफ
- 2:04:06ट्रस्ट। ऐसा इसलिए क्योंकि 1846 की ट्रीटी
- 2:04:11में भैररोवाल के बाद से ब्रिटिश रेजिडेंट
- 2:04:13ही सही मायने में पंजाब को रूल कर रहे थे।
- 2:04:17सभी सिविल और एडमिनिस्ट्रेटिव पावर्स उनके
- 2:04:19ही हाथों में थी। महाराजा दिलीप सिंह तो
- 2:04:22माइनर थे और उनका सिर्फ नाम ही यूज हो रहा
- 2:04:24था।
- 2:04:26रेबेलियन सिख आर्मी ने किया था ना कि
- 2:04:28महाराजा या उनकी रीजेंसी काउंसिल ने और
- 2:04:31महाराजा का रीजेंट होने के नाते यह
- 2:04:33ब्रिटिश रेजिडेंट की ड्यूटी थी कि वह
- 2:04:36मूलराज और सिख आर्मी के रिबेलियन को
- 2:04:38सप्रेस करें। महाराजा दलिप सिंह को तो
- 2:04:40किसी भी तरह इस रिबेलियन के लिए
- 2:04:42रिस्पांसिबल नहीं माना जा सकता। इसलिए इस
- 2:04:45बेसिस पर उनसे उनका किंगडम छीन लेना पूरी
- 2:04:48तरह अनजस्ट था। कंक्लूजन। तो दोस्तों,
- 2:04:52हमने देखा कि कैसे ब्रिटिश कंपनी ने अपने
- 2:04:55फायदे के लिए पहले सिंध और फिर पंजाब
- 2:04:58दोनों से ही फ्रेंडली रिलेशंस बनाए और
- 2:05:00इसके बाद जब उन्हें सही मौका मिला तब इस
- 2:05:03फ्रेंडशिप को भूलकर उन्होंने इन्हें
- 2:05:05एनेक्स कर लिया। यह ब्रिटिश कंपनी के
- 2:05:08इंडिया में लास्ट एनेक्सेशंस थे। इसके बाद
- 2:05:11लगभग पूरी इंडियन टेरिटरी उनके कंट्रोल
- 2:05:13में आ चुकी थी।
- 2:05:15वारेन हेस्टिंग्स
- 2:05:171772
- 2:05:19टू 1785 हम अपनी पिछली कुछ वीडियोस में
- 2:05:22देख चुके हैं कि कैसे ब्रिटिशर्स इंडिया
- 2:05:24में एज अ ट्रेडिंग कंपनी आते हैं और फिर
- 2:05:27ग्रेजुअली यहां पर अपना एंपायर एस्टैब्लिश
- 2:05:30करते हैं। ब्रिटिशर्स द्वारा एंपायर
- 2:05:32एस्टैब्लिश करने और उसके बाद यहां
- 2:05:34एडमिनिस्ट्रेशन चलाने में बहुत इंपॉर्टेंट
- 2:05:36रोल था ब्रिटिश गवर्नर्स और गवर्नर जनरल्स
- 2:05:39का। हम बंगाल प्रेसिडेंसी के पहले गवर्नर
- 2:05:42रॉबर्ट क्लाइव के बारे में पहले ही डिस्कस
- 2:05:44कर चुके हैं। आज हम बंगाल के नेक्स्ट
- 2:05:46गवर्नर और फर्स्ट गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल
- 2:05:49वारेन हेस्टिंग्स के बारे में बात करने
- 2:05:51वाले हैं। तो आइए शुरू करते हैं।
- 2:05:54इंट्रोडक्शन
- 2:05:58वारेन हेस्टिंग्स 1750 में एज अ क्लार्क
- 2:06:01ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को ज्वॉइ करते
- 2:06:04हैं। कंपनी में डिफरेंट पोजीशंस पर सर्व
- 2:06:06करने के बाद फाइनली 1772 में इन्हें बंगाल
- 2:06:10प्रेसिडेंसी का गवर्नर अपॉइंट किया जाता
- 2:06:12है। बंगाल 1764 में बैटल ऑफ बक्सर के बाद
- 2:06:16ब्रिटिश कंपनी के कंट्रोल में आ चुका था
- 2:06:19और उस समय बंगाल के गवर्नर रॉबर्ट क्लाइव
- 2:06:22थे जो यहां ड्यूल गवर्नमेंट सिस्टम को
- 2:06:24इस्टैब्लिश करते हैं। इसके तहत रेवेन्यू
- 2:06:26कलेक्शन यानी कि दीवानी राइट्स तो कंपनी
- 2:06:29मैनेज करती है लेकिन निजामत राइट्स यानी
- 2:06:31कि एडमिनिस्ट्रेशन संभालने की
- 2:06:33रिस्पांसिबिलिटी बंगाल के नवाब के पास ही
- 2:06:35रहती है। 1772 में गवर्नर बनने के बाद
- 2:06:39वारेन हेस्टिंग्स के सामने सबसे
- 2:06:41इंपॉर्टेंट टास्क था बंगाल में एक स्टेबल
- 2:06:43एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम इस्टैब्लिश करना।
- 2:06:46इसके साथ ही उन्हें कंपनी के फाइनेंससेस
- 2:06:48और कॉमर्स को भी डेवलप करना था। जो कि
- 2:06:51रॉबर्ट क्लाइव की पॉलिसीज की वजह से काफी
- 2:06:54बुरी शेप में आ चुके थे। इनके गवर्नर बनने
- 2:06:57के कुछ समय बाद ही 1773 में ब्रिटिश
- 2:07:00पार्लियामेंट रेगुलेटिंग एक्ट पास करती
- 2:07:02है। दोस्तों, रेगुलेटिंग एक्ट क्यों लाया
- 2:07:04गया था और इसके इंपॉर्टेंट प्रोविजंस क्या
- 2:07:07थे? आइए अपने नेक्स्ट सेक्शन में समझते
- 2:07:09हैं। रेगुलेटिंग एक्ट ऑफ 1773।
- 2:07:15प्लासी और बक्सर के बैटल के बाद ब्रिटिश
- 2:07:18कंपनी बंगाल पर रूल करने लगती है। अब
- 2:07:21कंपनी सिर्फ एक ट्रेडिंग ऑर्गेनाइजेशन ना
- 2:07:23रहकर एक एडमिनिस्ट्रेटिव बॉडी भी थी।
- 2:07:25इसीलिए कंपनी की फंक्शनिंग को रेगुलेट
- 2:07:28करने के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट 1773
- 2:07:31में रेगुलेटिंग एक्ट पास करती है। इस एक्ट
- 2:07:34के अनुसार मद्रास और बॉम्बे की
- 2:07:36प्रेसिडेंसीज बंगाल के कंट्रोल में आ गई।
- 2:07:39बंगाल के गवर्नर की पोस्ट अब गवर्नर जनरल
- 2:07:42की पोस्ट बन गई और इस तरह वारेन
- 2:07:44हेस्टिंग्स पहले गवर्नर जनरल बन गए।
- 2:07:47गवर्नर जनरल को असिस्ट करने के लिए फोर
- 2:07:49मेंबर की एक एग्जीक्यूटिव काउंसिल भी बनाई
- 2:07:52गई। सभी डिसीजंस मेजॉरिटी के बेसिस पर लिए
- 2:07:55जाने थे और गवर्नर जनरल सिर्फ टाई के केस
- 2:07:58में ही वोट कर सकते थे। एक्ट ने कंपनी के
- 2:08:01सर्वेंट्स को प्राइवेट ट्रेड करने और
- 2:08:03नेटिव से ब्राइब्स और प्रेजेंस लेने से भी
- 2:08:06प्रोहिबिट किया। इसके साथ ही फोर्ट
- 2:08:08विलियमक में सुप्रीम कोर्ट को भी
- 2:08:10इस्टैब्लिश किया गया। दोस्तों, यह तो बात
- 2:08:13हुई रेगुलेटिंग एक्ट ऑफ 1773 की जिसने
- 2:08:16वारेन हेस्टिंग्स को गवर्नर जनरल बनाया।
- 2:08:19अब बात करते हैं वारेन हेस्टिंग्स के
- 2:08:21डिफरेंट रिफॉर्म्स की जो उन्होंने गवर्नर
- 2:08:23और गवर्नर जनरल रहते हुए इंट्रोड्यूस किए।
- 2:08:27रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस्ड बाय वारेन
- 2:08:29हेस्टिंग्स। वारेन हेस्टिंग्स अलग-अलग
- 2:08:32फील्ड में रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस करते
- 2:08:34हैं। जैसे कि एडमिनिस्ट्रेटिव, रेवेन्यू,
- 2:08:37जुडिशियल और कमर्शियल। आइए एक-एक करके
- 2:08:40इन्हें डिस्कस करते हैं। सबसे पहले बात
- 2:08:43करते हैं एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स की।
- 2:08:46एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स।
- 2:08:51वारेन हेस्टिंग्स का सबसे इंपॉर्टेंट
- 2:08:53एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म था बंगाल में
- 2:08:55रॉबर्ट क्लाइव द्वारा एस्टैब्लिश्ड ड्यूल
- 2:08:57सिस्टम ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन को अबॉलिश करना।
- 2:09:00दोस्तों, आपको याद होगा कि ड्यूल सिस्टम
- 2:09:02में निजामत राइट्स तो नवाब के पास थे,
- 2:09:04लेकिन जमींदारी राइट्स कंपनी के पास। इसके
- 2:09:07अलावा वारेन हेस्टिंग्स नवाब को अलाउंस भी
- 2:09:1036 लाख से 16 लाख कर देते हैं। बैटल ऑफ
- 2:09:14बक्सर के बाद 1765 की इलाहाबाद ट्रीटी के
- 2:09:17अनुसार कंपनी मुगल एपरर को जो ₹26 लाख
- 2:09:21एनुअली पे कर रही थी हेस्टिंग्स वो पे
- 2:09:24करना भी बंद कर देते हैं। और इलाहाबाद और
- 2:09:26कारा भी मुगल एपरर से वापस लेकर ₹50 लाख
- 2:09:30में अवध को बेच देते हैं। इन सभी एकशंस के
- 2:09:33पीछे रीजन कंपनी की इकॉनमी को बेटर करना
- 2:09:36था। एडमिनिस्ट्रेशन के बाद अब देखते हैं
- 2:09:39रेवेन्यू रिफॉर्म्स को।
- 2:09:42रेवेन्यू रिफॉर्म्स। रेवेन्यू कलेक्शन के
- 2:09:44लिए वारेन हेस्टिंग्सक में एक बोर्ड ऑफ
- 2:09:47रेवेन्यू सेटअप करते हैं। हर एक
- 2:09:49डिस्ट्रिक्ट में एक ब्रिटिश कलेक्टर और
- 2:09:51अकाउंटेंट जनरल अपॉइंट किया जाता है।
- 2:09:54ब्रिटिश ट्रेजरी को मुर्शिदाबाद सेक मूव
- 2:09:56कर दिया जाता है। 1772 मेंक बंगाल की
- 2:10:00कैपिटल डिक्लेअर की जाती है। 1772 में ही
- 2:10:04वारेन हेस्टिंग्स लैंड रेवेन्यू के लिए
- 2:10:06फाइव इयर्स सेटलमेंट की शुरुआत करते हैं।
- 2:10:08इस सिस्टम के अकॉर्डिंग सबसे ऊंची बोली
- 2:10:11लगाने वाले को 5 साल के लिए रेवेन्यू
- 2:10:13कलेक्ट करने का राइट मिल जाता है। इन्हें
- 2:10:16रेवेन्यू फार्मर्स बोला जाता है। लेकिन यह
- 2:10:18सिस्टम फेल हो जाता है। क्योंकि बोली
- 2:10:20लगाने वालों को लैंड में कोई इंटरेस्ट
- 2:10:23नहीं होता था। वो सिर्फ स्पेकुलेटर्स थे
- 2:10:25और इसलिए वो कल्टीवेटर्स से ज्यादा से
- 2:10:28ज्यादा वसूल करने की कोशिश करते थे। इसके
- 2:10:31अलावा लैंड को ओवर असेस भी किया गया था और
- 2:10:33स्टेट की डिमांड बहुत हाई रखी गई थी। इसके
- 2:10:37ऊपर से कलेक्शन का मेथड बहुत हारश था।
- 2:10:39कंपनी के कलेक्टर्स रेवेन्यू फार्मर्स को
- 2:10:42हरेस करते थे। इन सभी रीजंस की वजह से
- 2:10:44रेवेन्यू फार्मर्स पर काफी ज्यादा बकाया
- 2:10:47हो जाता है और बहुत लोगों को डिफॉल्ट के
- 2:10:49लिए अरेस्ट भी किया जाता है। 1776 में जब
- 2:10:53फाइव ईयर सेटलमेंट एक्सपायर हो जाता है तब
- 2:10:55वारेन हेस्टिंग्स वन ईयर सेटलमेंट करते
- 2:10:58हैं। इस बार सेटलमेंट के लिए प्रेफरेंस
- 2:11:00जमींदार को दी जाती है। और इन्हीं
- 2:11:03रिफॉर्म्स से सीख लेकर नेक्स्ट गवर्नर
- 2:11:05जनरल लॉर्ड कॉर्नवालिस के रेवेन्यू
- 2:11:07रिफॉर्म्स एक स्टेप आगे होते हैं। जिनके
- 2:11:10बारे में हम अपनी नेक्स्ट वीडियो में
- 2:11:12डिस्कस करेंगे। तो यह तो थे वारेन
- 2:11:14हेस्टिंग्स के रेवेन्यू फील्ड में
- 2:11:16एक्सपेरिमेंट्स। आइए अब बात करते हैं उनके
- 2:11:19जुडिशियल रिफॉर्म्स की। जुडिशियल
- 2:11:22रिफॉर्म्स दोस्तों, रेवेन्यू रिफॉर्म्स
- 2:11:25में तो वारेन हेस्टिंग्स को ज्यादा सक्सेस
- 2:11:27नहीं मिली। लेकिन उनके जुडिशियल रिफॉर्म्स
- 2:11:30जरूर सक्सेसफुल होते हैं। वारेन
- 2:11:32हेस्टिंग्स का सबसे पहला जुडिशियल रिफॉर्म
- 2:11:35होता है जमींदार की जुडिशियल पावर्स को
- 2:11:38खत्म करना। 1772 में वारेन हेस्टिंग्स
- 2:11:42डिस्ट्रिक्ट लेवल पर दीवानी अदालत और
- 2:11:44फौजदारी अदालत सेटअप करते हैं। दीवानी
- 2:11:47अदालत को कलेक्टर यानी कि यूरोपियन ऑफिसर
- 2:11:49प्रिसाइड करता था और फौजदारी अदालत को
- 2:11:52इंडियन जज। इसके अलावा दीवानी अदालत में
- 2:11:56हिंदूस का केस हिंदू लॉज़ के अकॉर्डिंग
- 2:11:58डिसाइड होता था और मुस्लिम्स का मुस्लिम
- 2:12:00लॉ के अकॉर्डिंग। लेकिन फौजदारी अदालत में
- 2:12:03सभी का डिसीजन मुस्लिम लॉ के अकॉर्डिंग ही
- 2:12:06होता था। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स के डिसीजन
- 2:12:09के अगेंस्ट अपील के लिए सदर दीवानी अदालत
- 2:12:12और सदर निजामत अदालत भी सेटअप की गई थी।
- 2:12:16इसके अलावा वारेन हेस्टिंग्स मुस्लिम्स और
- 2:12:19हिंदू लॉज़ को कोडिफाई करने की कोशिश भी
- 2:12:21करते हैं। 1776 में हिंदू कोड का एक
- 2:12:24इंग्लिश ट्रांसलेशन कोड ऑफ जेंटू लॉज़ के
- 2:12:28नाम से पब्लिश भी हो जाता है। दोस्तों, यह
- 2:12:31थे वारेन हेस्टिंग्स द्वारा इंट्रोड्यूस
- 2:12:33किए गए जुडिशियल रिफॉर्म्स। अब लास्ट में
- 2:12:36उनके कुछ कमर्शियल रिफॉर्म्स को भी जान
- 2:12:38लेते हैं। कमर्शियल रिफॉर्म्स वारेन
- 2:12:41हेस्टिंग्स बंगाल के इंटरनल ट्रेड में
- 2:12:44बॉटल नेक्स को क्लियर करने के लिए कुछ
- 2:12:46स्टेप्स लेते हैं। सबसे पहले वो जमींदारीज
- 2:12:49में चल रहे अनेक कस्टम हाउसेस को सप्रेस
- 2:12:52करते हैं। अब सिर्फ पांच कस्टम हाउसेस
- 2:12:54मेंटेन किए जाते हैं। हुगली, मुर्शिदाबाद,
- 2:12:59ढाका और पटना में। हेस्टिंग्स दस्तक्स के
- 2:13:02मिसयज को भी चेक करते हैं। ड्यूटीज को कम
- 2:13:05करके 2 एंडफ% कर दिया जाता है और यह
- 2:13:08इंडियंस और यूरोपियंस दोनों पर ही लगाई
- 2:13:10जाती हैं। इसके साथ ही यह कंपनी सर्वेंट्स
- 2:13:13के प्राइवेट ट्रेड पर भी रेस्ट्रिकशंस
- 2:13:15लगाते हैं। दोस्तों, वारेन हेस्टिंग्स के
- 2:13:17रिफॉर्म्स की तो बात हो गई। आइए अब उनके
- 2:13:20टाइम पीरियड के कुछ अदर इंपॉर्टेंट
- 2:13:22इवेंट्स पर भी एक नजर डालते हैं।
- 2:13:24इंपॉर्टेंट इवेंट्स ड्यूरिंग वारेन
- 2:13:26हेस्टिंग्स पीरियड 1772 टू 1785। वारेन
- 2:13:31हेस्टिंग्स के 13 साल के कार्यकाल में
- 2:13:33बहुत से इंपॉर्टेंट इवेंट्स हुए थे। एक-एक
- 2:13:36करके उनको डिस्कस करते हैं। सबसे पहला
- 2:13:38इंपॉर्टेंट इवेंट था 1774 में होने वाला
- 2:13:41फर्स्ट रोहिला वॉर। आइए इसको डिटेल में
- 2:13:44समझते हैं।
- 2:13:46फर्स्ट रोहिला वॉर।
- 2:13:49दोस्तों रोहिलास बेसिकली अफगानंस थे जो
- 2:13:5218th सेंचुरी में मुगल एंपायर के डिक्लाइन
- 2:13:55के समय इंडिया आते हैं और रोहिलखंड के
- 2:13:58एरिया पर अपना कंट्रोल इस्टैब्लिश कर लेते
- 2:14:00हैं। 1770 में जब पेशवा माधवराव वन की
- 2:14:04लीडरशिप में मराठा पावर एक बार फिर से
- 2:14:06राइज कर रही थी तब रोहिल्लास को मराठा
- 2:14:09अटैक का डर सताने लगता है। 1772 की शुरुआत
- 2:14:12में मराठाज़ ने रोहिल्ला चीफन जाबेदा खान
- 2:14:16को हराकर उनकी पूरी टेरिटरी पर कब्जा भी
- 2:14:18कर लिया था। ऐसे में रोहिला लीडर हाफिज
- 2:14:21रहमत खान मराठा से प्रोटेक्शन के लिए 17th
- 2:14:25जून 1772 को अवध के नवाब के साथ ट्रीटी
- 2:14:28साइन करते हैं। ट्रीटी के अकॉर्डिंग
- 2:14:30मराठाज़ का अटैक होने पर अवध के नवाब को
- 2:14:33रोहिलाज़ की हेल्प करनी थी और इसके बदले
- 2:14:36में रोहिलाज़ उन्हें ₹40 लाख की पेमेंट
- 2:14:39करने का प्रॉमिस करते हैं। मराठाज़
- 2:14:41रोहिलखंड पर अटैक प्लान भी करते हैं।
- 2:14:44लेकिन तभी पेशवा माधवराव वन की मृत्यु हो
- 2:14:46जाती है। और इस तरह रोहिलखंड मराठा अटैक
- 2:14:49से बच जाता है। मराठाज़ का अटैक तो नहीं
- 2:14:52होता लेकिन अवध के नवाब फिर भी रोहिलाज़ से
- 2:14:56ट्रीटी में प्रॉमिस की गई 40 लाख की
- 2:14:58अमाउंट डिमांड करते हैं। जब रोहिलाज़
- 2:15:00उन्हें पे करने से मना कर देते हैं तब
- 2:15:02नवाब रोहिलखंड को एनेक्स करने का डिसीजन
- 2:15:05लेते हैं। इस एनेक्सेशन के लिए वह ब्रिटिश
- 2:15:08कंपनी से हेल्प मांगते हैं और
- 2:15:10इंटरेस्टिंगली वारेन हेस्टिंग्स 40 लाख के
- 2:15:13पेमेंट के बदले में हेल्प देने के लिए
- 2:15:15तैयार हो जाते हैं। 23 अप्रैल 1774 को
- 2:15:19बैटल ऑफ मीरानपुर कटरा होती है। जिसमें
- 2:15:22कर्नल एलेग्जेंडर चैंपियन की फोर्सेस
- 2:15:24हाफिज रहमत खान की लीडरशिप में रोहिल्लास
- 2:15:26को हरा देते हैं। बैटल में हाफिज रहमत खान
- 2:15:29की मृत्यु हो जाती है और रोहिल्लास लॉर्ड
- 2:15:32डोंग के माउंटेंस की तरफ भाग जाते हैं। इस
- 2:15:35तरह रोहिलखंड अवध को मिल जाता है और फिर
- 2:15:38रोहिला वॉर का एंड हो जाता है। वारेन
- 2:15:41हेस्टिंग्स और कंपनी की हेल्प के बिना यह
- 2:15:43पॉसिबल नहीं था। वारेन हेस्टिंग्स के टाइम
- 2:15:46में ही 1776 से 1782 के बीच फर्स्ट एंग्लो
- 2:15:51मराठा वॉर होती है और 1780 से 1784 के बीच
- 2:15:55सेकंड एंग्लो मासूर वॉर भी होती है। इन
- 2:15:58दोनों टॉपिक्स को हम पहले ही अपनी वीडियोस
- 2:16:00में कवर कर चुके हैं। इसीलिए डिटेल में
- 2:16:03समझने के लिए आप वीडियोस को रेफर कर सकते
- 2:16:05हैं। 1784 में ओरिएंटल स्टडीज को इनकरेज
- 2:16:09करने के लिए एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल की
- 2:16:11फाउंडेशन भी की जाती है। वारेन हेस्टिंग्स
- 2:16:14ने इसकी इस्टैब्लिशमेंट के लिए सर विलियम
- 2:16:17जों्स को इनकरेज और सपोर्ट किया था। 1784
- 2:16:20में ही ब्रिटिश पार्लियामेंट पिट्स इंडिया
- 2:16:22एक्ट भी पास करती है। यह एक्ट 1773 के
- 2:16:26रेगुलेटिंग एक्ट की शॉर्टकमिंग्स को दूर
- 2:16:28करता है। आइए इसको थोड़ा डिटेल में समझते
- 2:16:31हैं। पिट्स इंडिया एक्ट 1784
- 2:16:36पिट्स इंडिया एक्ट कंपनी के पॉलिटिकल और
- 2:16:38कमर्शियल फंक्शनंस को अलग-अलग करता है। यह
- 2:16:41एक्ट इंडिया में ब्रिटिश पोज़ेशंस पर ड्यूल
- 2:16:44कंट्रोल इस्टैब्लिश करता है। मतलब इमीडिएट
- 2:16:47कंट्रोल तो कंपनी का रहेगा लेकिन फाइनल
- 2:16:49अथॉरिटी ब्रिटिश गवर्नमेंट की होगी।
- 2:16:51पॉलिटिकल मैटर्स को देखने के लिए बोर्ड ऑफ
- 2:16:53कंट्रोल इस्टैब्लिश किया जाता है और
- 2:16:55कमर्शियल अफेयर्स के लिए कोर्ट ऑफ
- 2:16:57डायरेक्टर्स को अपॉइंट किया जाता है।
- 2:16:59कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स कंपनी को रिप्रेजेंट
- 2:17:01करते थे और बोर्ड ऑफ कंट्रोल ब्रिटिश
- 2:17:04गवर्नमेंट को। बोर्ड ऑफ कंट्रोल में छह
- 2:17:06मेंबर्स थे। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जो बोर्ड
- 2:17:09के प्रेसिडेंट थे। चांसलर ऑफ द एक्स चेकर
- 2:17:12और चार प्रीवी काउंसलर्स। इसके साथ ही
- 2:17:14एक्ट यह भी मैंडेट करता है कि सभी सिविल
- 2:17:17और मिलिट्री ऑफिसर्स ज्वॉइ करने के दो
- 2:17:19महीनों के अंदर इंडिया और ब्रिटेन में
- 2:17:22अपनी प्रॉपर्टी को डिस्क्लोज करेंगे।
- 2:17:24गवर्नर जनरल्स काउंसिल की स्ट्रेंथ को
- 2:17:26रिड्यूस कर दिया जाता है। चार मेंबर्स से
- 2:17:29अब इसको तीन मेंबर्स का बना दिया जाता है।
- 2:17:31पहले चार मेंबर्स की वजह से गवर्नर जनरल
- 2:17:34को अपने अकॉर्डिंग लेने में काफी समस्या
- 2:17:37होती थी। लेकिन अब उन्हें सिर्फ एक मेंबर
- 2:17:39की सहमति चाहिए थी बड़े डिसीजंस लेने के
- 2:17:42लिए। तीन मेंबर्स में से एक मेंबर की
- 2:17:44पोस्ट इंडिया में ब्रिटिश क्राउन की आर्मी
- 2:17:46के कमांडर इन चीफ को दी जाएगी। इसके साथ
- 2:17:49ही काउंसिल में अब गवर्नर जनरल को वीटो
- 2:17:51पावर भी दे दी गई। मद्रास और बॉम्बे
- 2:17:54प्रेसिडेंसीज को बंगाल प्रेसिडेंसी का
- 2:17:56सबोर्डिनेट डिक्लेअ कर दिया गया औरक अब
- 2:18:00इंडिया में ब्रिटिशर्स की कैपिटल बन गई।
- 2:18:02दोस्तों, पिट्स इंडिया एक्ट इसलिए
- 2:18:04इंपॉर्टेंट हो जाता है क्योंकि इसी एक्ट
- 2:18:06के द्वारा इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन पर
- 2:18:09ब्रिटिश गवर्नमेंट का डायरेक्ट कंट्रोल
- 2:18:11एस्टैब्लिश हुआ था। इससे पहले तक तो सारी
- 2:18:13रिस्पांसिबिलिटी सिर्फ कंपनी की ही थी।
- 2:18:16साथ ही गवर्नर जनरल की पोजीशन अब और
- 2:18:19स्ट्रांग हो जाती है क्योंकि काउंसिल का
- 2:18:21कंट्रोल अब पहले जितना स्ट्रांग नहीं
- 2:18:23रहता। दोस्तों, यह तो हुआ पिट्स इंडिया
- 2:18:26एक्ट का डिस्कशन। आइए अब अपने टॉपिक की
- 2:18:29तरफ वापस चलते हैं। वारेन हेस्टिंग्स का
- 2:18:31टाइम पीरियड उनके कुछ कंट्रोवर्शियल
- 2:18:33डिसीजंस के लिए भी जाना जाता है। तो चलिए
- 2:18:36अब उनके बारे में डिस्कस करते हैं।
- 2:18:39द अफेयर्स ऑफ चैत सिंह एंड बेगम्स ऑफ अवध।
- 2:18:44दोस्तों, चैत सिंह बनारस के राजा हुआ करते
- 2:18:47थे। और बनारस अवध का फ्यूडिडेटरी या
- 2:18:49सबोर्डिनेट स्टेट था। 1775 में जब अवध के
- 2:18:54नवाब सुजााउद्दौला की मृत्यु हो जाती है
- 2:18:56तब उनके बेटे असफुद्दौला नवाब बनते हैं।
- 2:18:59वारेन हेस्टिंग्स इस चेंज का फायदा उठाते
- 2:19:02हैं और नए नवाब को फोर्स करते हैं एक नई
- 2:19:05ट्रीटी साइन करने के लिए। इस ट्रीटी के
- 2:19:07अकॉर्डिंग बनारस कंपनी को ट्रांसफर कर
- 2:19:10दिया जाता है और चैत सिंह अब कंपनी के
- 2:19:13सबोर्डिनेट बन जाते हैं। ट्रीटी में एक
- 2:19:15प्रोविजन यह भी था कि चैत सिंह कंपनी को
- 2:19:18₹22 लाख एनुअली पे करेंगे और इसके अलावा
- 2:19:21उनके ऊपर और कोई डिमांड नहीं रखी जाएगी।
- 2:19:24उनको पीसफुली बनारस में रूल करने दिया
- 2:19:26जाएगा। लेकिन फाइनशियल स्ट्रिंजेंसी की
- 2:19:29वजह से वारेन हेस्टिंग्स इस प्रोविजन को
- 2:19:31वायलेट करते हैं और क्वेश्चनेबल डिमांड्स
- 2:19:34रखने लगते हैं। 1778 में वो चैत सिंह से
- 2:19:38एडिशनल ₹5 लाख डिमांड करते हैं एज अ वॉर
- 2:19:41लेवी। 1779 और 1780 में फिर से यह डिमांड
- 2:19:46रिपीट की जाती है। 1780 में राजा ₹ लाख की
- 2:19:50ब्राइब वारेन हेस्टिंग्स को भेजते हैं।
- 2:19:52जिससे अब आगे और कोई डिमांड ना रखी जाए।
- 2:19:55लेकिन वारेन हेस्टिंग्स फिर भी एक्स्ट्रा
- 2:19:58सब्सिडी और 2000 कैवलरी कंटिंजेंट भेजने
- 2:20:01की डिमांड करते हैं। राजा वारेन
- 2:20:03हेस्टिंग्स को लेटर लिखकर माफी मांगते हैं
- 2:20:05कि वह यह डिमांड पूरी नहीं कर सकते। वारेन
- 2:20:08हेस्टिंग्स राजा चैत सिंह को पनिश करने का
- 2:20:11डिसीजन लेते हैं और उनके ऊपर 50 लाख का
- 2:20:14फाइन इंपोज कर देते हैं। वह खुद बनारस की
- 2:20:17तरफ प्रोसीड करते हैं। राजा उनसे बक्सर
- 2:20:19में आकर मिलते हैं और अपनी टर्बन उनके
- 2:20:22पैरों में रख देते हैं। लेकिन वारेन
- 2:20:24हेस्टिंग्स बनारस पहुंचने से पहले कोई भी
- 2:20:27डिसीजन करने से मना कर देते हैं। और बनारस
- 2:20:30पहुंचने पर वो चैत सिंह को अरेस्ट करवा
- 2:20:33लेते हैं। चैत सिंह के सोल्जर्स अपने राजा
- 2:20:36का अपमान देखने पर ब्रिटिशर्स के खिलाफ
- 2:20:38विद्रोह कर देते हैं। लेकिन उनके रिबेलियन
- 2:20:41को ईजीली सप्रेस कर दिया जाता है। चैत
- 2:20:44सिंह के माइनर नेफ्यू महप नारायण को 22
- 2:20:47लाख की जगह 40 लाख के एनुअल पेमेंट के
- 2:20:50बदले में राजा बना दिया जाता है। बनारस के
- 2:20:52राजा अब सिर्फ कंपनी के पेंशनर बनके रह
- 2:20:55जाते हैं। बनारस के बाद वारेन हेस्टिंग्स
- 2:20:58अवध को निशाना बनाते हैं। अवध के नवाब
- 2:21:01असफुद्दौला पर कंपनी के करीब ₹15 लाख
- 2:21:04बकाया थे। यह अमाउंट उन्हें अवध में
- 2:21:06स्टेशन सब्सिडरी फोर्स के लिए पे करने थे।
- 2:21:09जब कंपनी उनके ऊपर पेमेंट करने के लिए
- 2:21:12दबाव डालती है, तब असफुद्दौला सजेस्ट करते
- 2:21:15हैं कि उन्हें लेट नवाब की वाइफ्स यानी कि
- 2:21:18अवध की बेगम्स का ट्रेजर लेने की परमिशन
- 2:21:21दे दी जाए। इससे पहले भी ब्रिटिश रेजिडेंट
- 2:21:23के इंटरफेरेंस पर नवाब बेगम से 5600
- 2:21:28पाउंड्स ले चुके थे। तबलक काउंसिल ने
- 2:21:31गारंटी दी थी कि इसके बाद बेगम से और कोई
- 2:21:33डिमांड नहीं की जाएगी। लेकिन नवाब के
- 2:21:36सजेशन पर वारेन हेस्टिंग्स अपनी दी हुई
- 2:21:38गारंटी को भूलकर ब्रिटिश रेजिडेंट को बेगम
- 2:21:41से रुपए लेने का ऑर्डर दे देते हैं।
- 2:21:44बेगम्स को प्रेशराइज करके उनसे ₹15 लाख की
- 2:21:48अमाउंट ले ली जाती है। जिसका ज्यादातर
- 2:21:50हिस्सा कंपनी का डेप्ट चुकाने में चला
- 2:21:53जाता है। यह दोनों ही इंसिडेंट्स इतने
- 2:21:55कंट्रोवर्शियल थे कि जब वारेन हेस्टिंग्स
- 2:21:58इंग्लैंड वापस पहुंचते हैं तो वहां की
- 2:22:00पार्लियामेंट उनके ऊपर इंपीचमेंट का केस
- 2:22:03भी चलाती है। यह ट्रायल 1788 से 1795 तक
- 2:22:08चलता है। लेकिन एंड में उन्हें सभी
- 2:22:10चार्जेस से फ्री कर दिया जाता है। क्योंकि
- 2:22:12उन्होंने अपनी कंट्री का तो फायदा ही किया
- 2:22:14था और इंग्लैंड की जनता उन्हें एक हीरो
- 2:22:17मानती थी।
- 2:22:18कंक्लूजन।
- 2:22:21दोस्तों, हम कह सकते हैं कि वारेन
- 2:22:23हेस्टिंग्स ने एक तरफ तो इंडिया में
- 2:22:25ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम की
- 2:22:27फाउंडेशन को बनाया और दूसरी तरफ इंडिया
- 2:22:30में कंपनी की टेरिटरी को और ज्यादा
- 2:22:33इनक्रीस भी किया। फिर चाहे वो फर्स्ट
- 2:22:35एंग्लो मराठा वॉर में जीता हुआ सेलसेट हो
- 2:22:38या अवध से लिया हुआ बनारस। वारेन
- 2:22:41हेस्टिंग्स ने अपनी मिलिट्री और
- 2:22:42डिप्लोमेटिक स्किल्स का यूज करके
- 2:22:45ब्रिटिशर्स के इंडियन एंपायर का एक्सपेंशन
- 2:22:47किया था। उनके बाद गवर्नर जनरल बनते हैं
- 2:22:50लॉर्ड कॉर्नवालिस जिनके बारे में हम अपनी
- 2:22:53आने वाली वीडियो में डिस्कस करेंगे। लॉर्ड
- 2:22:56कॉर्नवालिस 1786 टू 1793।
- 2:23:01दोस्तों, हमने अपनी पिछली वीडियो में
- 2:23:03फर्स्ट गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल वारेन
- 2:23:06हेस्टिंग्स के बारे में डिस्कस किया था।
- 2:23:08आज हम इसी सीरीज को आगे ले जाते हुए
- 2:23:10नेक्स्ट गवर्नर जनरल लॉर्ड कॉर्न वालिस के
- 2:23:13बारे में जानेंगे। लॉर्ड कॉर्न वालिस को
- 2:23:15लोग अक्सर याद करते हैं अमेरिकन
- 2:23:17रेवोल्यूशन के समय उनकी हार के लिए। 28
- 2:23:20सितंबर से 19th अक्टूबर 1781 के बीच
- 2:23:24योकटाउन वर्जनिया में अमेरिकन रेवोल्यूशन
- 2:23:26के लास्ट इंपॉर्टेंट कैंपेन में उन्हें
- 2:23:29अमेरिकन रेवोल्यूशनरीज ने हरा दिया था।
- 2:23:32लेकिन उनकी लाइफ के बेस्ट इयर्स का आना तो
- 2:23:34अभी बाकी था। जो वो इंडिया में गवर्नर
- 2:23:36जनरल बनने के बाद जीते हैं। वैसे तो वारेन
- 2:23:40हेस्टिंग्स के बाद सर जॉन मैकफर्सन फी
- 2:23:421785 से सेप्टेंबर 1786 तक बंगाल के
- 2:23:46एक्टिंग गवर्नर रहे थे। लेकिन उनके इस
- 2:23:49शॉर्ट टाइम पीरियड में कोई इंपॉर्टेंट
- 2:23:51डेवलपमेंट देखने को नहीं मिलता। इसलिए हम
- 2:23:54डायरेक्ट लॉर्ड कॉर्नवालिस के पीरियड की
- 2:23:56तरफ चलते हैं। इंट्रोडक्शन
- 2:24:03दोस्तों लॉर्ड कॉर्नवालिस को 1786 में
- 2:24:06बंगाल प्रेसिडेंसी का गवर्नर जनरल अपॉइंट
- 2:24:09किया जाता है। इसके साथ ही उन्हें ब्रिटिश
- 2:24:12इंडिया के कमांडर इन चीफ की पोस्ट भी दी
- 2:24:14जाती है। इसका मतलब हुआ कि लॉर्ड कंडारिस
- 2:24:17के पास हाईएस्ट सिविल अथॉरिटी के साथ-साथ
- 2:24:20हाईएस्ट मिलिट्री अथॉरिटी की पावर भी आ गई
- 2:24:22थी। कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने उन्हें टास्क
- 2:24:25दिया था कि वो इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव
- 2:24:27सिस्टम को रिऑर्गेनाइज करें और साथ ही
- 2:24:29लैंड रेवेन्यू की समस्या का भी कुछ समाधान
- 2:24:32निकाले। लॉर्ड कॉर्नवालिस अपने प्रिडसेसर
- 2:24:35वारेन हेस्टिंग्स द्वारा इस्टैब्लिश किए
- 2:24:37गए सिस्टम्स को और इंप्रूव करते हैं और
- 2:24:39इंडिया में एडमिनिस्ट्रेशन का एक ऐसा
- 2:24:41सुपरस्ट्रक्चर तैयार करते हैं जो यहां
- 2:24:441858 तक चलता है। तो आइए एक-एक करके लॉर्ड
- 2:24:48कॉर्नवोस द्वारा किए गए रिफॉर्म्स को
- 2:24:50समझते हैं। जुडिशियल रिफॉर्म्स
- 2:24:54वारेन हेस्टिंग्स ने जो जुडिशियल सिस्टम
- 2:24:57इस्टैब्लिश किया था, कॉर्नवस उसमें कुछ
- 2:25:00चेंजेस करते हैं। जैसे कि 1787 में वह
- 2:25:03डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर्स को फिर से दीवानी
- 2:25:05अदालत का जज बना देते हैं। इससे पहले
- 2:25:08वारेन हेस्टिंग्स ने 1774 में कलेक्टर्स
- 2:25:11की जुडिशियल पावर्स को खत्म कर दिया था।
- 2:25:13लॉर्ड कॉर्न वालिस ना सिर्फ कलेक्टर्स की
- 2:25:15जुडिशियल पावर्स को रिस्टोर करते हैं
- 2:25:17बल्कि उन्हें पहले से भी ज्यादा
- 2:25:19मैजिस्टरियल पावर्स दे देते हैं। दूसरा
- 2:25:21रिफॉर्म 1790 से 92 के पीरियड में
- 2:25:24क्रिमिनल एडमिनिस्ट्रेशन की फील्ड में
- 2:25:26इंट्रोड्यूस होता है। डिस्ट्रिक्ट फौजदारी
- 2:25:29अदालत को अबॉलिश करके उनकी जगह चार सर्किट
- 2:25:32कोर्ट्स बनाई जाती हैं। इनमें से तीन
- 2:25:34बंगाल में थी और एक बिहार में। और इन
- 2:25:37सर्किट कोर्ट्स में यूरोपियन ऑफिसर्स को
- 2:25:39ही जज अपॉइंट किया जाता है। और इनको
- 2:25:42असिस्ट करते थे काजीज और मुफ्तीज। इससे
- 2:25:45पहले फौजदारी अदालत में इंडियंस को ही जज
- 2:25:47अपॉइंट किया जाता था। हम कह सकते हैं कि
- 2:25:49यहां से जुडिशियल सिस्टम में से इंडियंस
- 2:25:52को अलग करने की शुरुआत हो जाती है। लॉर्ड
- 2:25:54कॉर्नवालिस का सबसे इंपॉर्टेंट जुडिशियल
- 2:25:57रिफॉर्म था उनका 1793 का कॉर्नवालिस कोड।
- 2:26:01इस कोड में उनके सभी रिफॉर्म्स फाइनल शेप
- 2:26:04लेते हैं और यह प्राइमरीली सेपरेशन ऑफ
- 2:26:06पावर के प्रिंसिपल पर बेस्ड था।
- 2:26:09कॉर्नवोलिस को रियलाइज होता है कि
- 2:26:10कलेक्टर्स के हाथ में जुडिशियल पावर्स
- 2:26:12देना सही डिसीजन नहीं था। क्योंकि जिनके
- 2:26:15पास रेवेन्यू कलेक्शन की पावर थी, वह
- 2:26:18रेवेन्यू के केसेस को इंपार्शियली कैसे
- 2:26:20डिसाइड कर सकते थे? इसलिए कॉर्नवोलिस कोड
- 2:26:23में वह सेपरेशन ऑफ पावर्स के प्रिंसिपल को
- 2:26:25फॉलो करते हैं और कलेक्टर्स की सभी
- 2:26:28जुडिशियल और मैजिस्टरियल पावर्स को खत्म
- 2:26:30कर दिया जाता है। सिविल कोर्ट्स को
- 2:26:33प्रिसाइड करने के लिए डिस्ट्रिक्ट जज नाम
- 2:26:35से एक नई ऑफिसर क्लास की शुरुआत की जाती
- 2:26:38है। इसके अलावा कॉर्नवालिस कोर्ट फीस को
- 2:26:41भी अबॉलिश करते हैं। इस तरह हम कह सकते
- 2:26:43हैं कि कॉर्नवालिस के जुडिशियल रिफॉर्म्स
- 2:26:46इक्वलिटी और जस्टिस के वेस्टर्न आईडिया पर
- 2:26:49बेस्ड थे। इसीलिए रिलीजियस लॉज़ की जगह
- 2:26:52कोडिफाइड सेकुलर लॉ को इंट्रोड्यूस किया
- 2:26:55जाता है। लेकिन यह एकदम नया सिस्टम था और
- 2:26:57आम जनता को इसे समझने में काफी दिक्कत
- 2:26:59होती थी। साथ ही जस्टिस के लिए अब लॉयर्स
- 2:27:02की जरूरत भी होने लगी थी। इसीलिए एक तरह
- 2:27:05से जस्टिस अब एक्सपेंसिव हो गई थी और कॉमन
- 2:27:08मैन की रीच से बाहर भी। दोस्तों, यह तो
- 2:27:11हुई कॉर्नवालिस के जुडिशियल रिफॉर्म्स की
- 2:27:13बात। आइए अब उनके पुलिस रिफॉर्म्स को
- 2:27:15जानते हैं। पुलिस रिफॉर्म्स
- 2:27:20जुडिशियल रिफॉर्म्स को सप्लीमेंट करने के
- 2:27:23लिए पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन में भी कुछ
- 2:27:25इंपॉर्टेंट चेंजेस किए जाते हैं। सबसे
- 2:27:27पहले तो लॉर्ड कॉर्नवालिस जमींदार की
- 2:27:30पुलिस पावर्स को खत्म कर देते हैं। उनकी
- 2:27:32जगह अब डिस्ट्रिक्ट पुलिस का कंट्रोल
- 2:27:34इंग्लिश मैजिस्ट्रेट्स को दिया जाता है।
- 2:27:37हर एक डिस्ट्रिक्ट्स को थानाज़ या पुलिस
- 2:27:39सर्कल में डिवाइड कर दिया जाता है। एक
- 2:27:42सर्कल का एरिया लगभग 20 स्क्वायर माइल्स
- 2:27:44का होता था। थाने का इंचार्ज इंडियन ऑफिसर
- 2:27:47के पास होता था। जिसे दरोगा कहते थे और
- 2:27:50उन्हें असिस्ट करने के लिए बहुत से
- 2:27:52कांस्टेबल्स भी होते थे। हम कह सकते हैं
- 2:27:55कि इंडिया में मॉडर्न पुलिस सिस्टम की
- 2:27:57शुरुआत यहां से होती है। दोस्तों जुडिशियल
- 2:28:00और पुलिस रिफॉर्म्स के साथ ही लॉर्ड
- 2:28:02कॉर्नवालिस अपने एडमिनिस्ट्रेटिव या
- 2:28:05सर्विस रिफॉर्म्स के लिए भी जाने जाते
- 2:28:07हैं। उन्हें फादर ऑफ सिविल सर्विज भी कहा
- 2:28:09जाता है। तो चलिए लॉर्ड कॉर्नवालिस के
- 2:28:12एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स को डिस्कस करते
- 2:28:14हैं। एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स
- 2:28:18कॉर्न वालेस सबसे पहले कंपनी सर्वेंट्स के
- 2:28:21द्वारा किए जाने वाले प्राइवेट ट्रेड की
- 2:28:23प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए स्टेप्स
- 2:28:25लेते हैं। उनको रियलाइज होता है कि कंपनी
- 2:28:28के एंप्लाइजस की सैलरी बहुत कम है और उसको
- 2:28:31सप्लीमेंट करने के लिए ही वो करप्शन या
- 2:28:33इललीगल मींस का यूज करते हैं। इसलिए वो
- 2:28:36एंप्लाइजज़ की सैलरी रेज कर देते हैं। इसके
- 2:28:39साथ ही कॉर्नवोलर्स कंपनी में नेपेटिज्म
- 2:28:42और पॉलिटिकल फेवरेटिज्म को भी कम करते
- 2:28:44हैं। वह मेरिट के बेसिस पर अपॉइंटमेंट
- 2:28:47स्टार्ट करते हैं। यहां तक कि एक बार वह
- 2:28:50प्रिंस ऑफ वेल्स की रेकमेंडेशन को भी मना
- 2:28:52कर देते हैं। लॉर्ड कॉर्नवालिस इंडिया में
- 2:28:54सिविल सर्विज को कॉवनेंटेड सिविल सर्विस
- 2:28:57और अनकवनेंटेड सिविल सर्विस में डिवाइड
- 2:29:00करते हैं। कवेंटेड सर्विज में इंडियंस को
- 2:29:02अपॉइंट नहीं किया जाता था। सभी हायर
- 2:29:06पोस्ट्स अब सिर्फ यूरोपियंस को दी जाती
- 2:29:08थी। इंडियंस को सिर्फ क्लार्क और पियंस
- 2:29:10जैसी लोअर पोस्ट ही ऑफर की जाती थी। इससे
- 2:29:14हमें पता चलता है कि कॉर्नवालिस की पॉलिसी
- 2:29:16रेसिज्म से प्रभावित थी। लॉर्ड कॉर्नवालिस
- 2:29:19ही एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी के
- 2:29:21यूरोपियनाइजेशन के लिए रिस्पांसिबल थे।
- 2:29:24यूरोपियनाइजेशन ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन।
- 2:29:27दोस्तों लॉर्ड कॉर्नवालिस रेशल
- 2:29:30डिस्क्रिमिनेशन के सपोर्टर थे। उनके
- 2:29:32अकॉर्डिंग तो हर एक इंडियन करप्ट था।
- 2:29:35इसलिए सभी हायर सर्विज को वह सिर्फ
- 2:29:37यूरोपियंस के लिए रिजर्व कर देते हैं।
- 2:29:40कॉवनेंटेड सर्विज के दरवाजे भी उन्होंने
- 2:29:43ही इंडियंस के लिए बंद कर दिए थे। आर्मी
- 2:29:46में इंडियंस सूबेदार की पोस्ट से आगे नहीं
- 2:29:48जा सकते थे और सिविल सर्विज में मुंसिफ्स
- 2:29:51या डेपुटी कलेक्टर से ऊपर की पोस्ट पर
- 2:29:54उनका अपॉइंटमेंट नहीं हो सकता था। सोचने
- 2:29:57वाली बात यह है कि उस समय की इंग्लैंड में
- 2:29:59भी एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विज करप्शन से फ्री
- 2:30:02नहीं थी और कंपनी के सर्वेंट्स की
- 2:30:04मोरालिटी से तो हम सभी अच्छे से परिचित
- 2:30:07हैं। फिर भी कॉर्नवालिस सिर्फ इंडियंस को
- 2:30:09ही करप्ट कहते हैं। हायर सर्विज में
- 2:30:12ऑनेस्टी को इंप्रूव करने के लिए तो
- 2:30:14उन्होंने उनकी सैलरी को इनक्रीस कर दिया
- 2:30:16था। लेकिन इंडियन एंप्लाइजस के लिए
- 2:30:18उन्होंने कभी सेम मेथड अप्लाई करने की
- 2:30:20कोशिश भी नहीं की। इससे साफ होता है कि
- 2:30:23लॉर्ड कॉर्नवालिस इंडियंस को लेकर काफी
- 2:30:26ज्यादा प्रजुडिस् थे। उन्होंने ही
- 2:30:28रेशलिज्म की पॉलिसी पर ऑफिशियल मोहर भी
- 2:30:31लगा दी थी और इस रेशलिज्म की पॉलिसी से
- 2:30:34एंग्लो इंडियन रिलेशंस ब्रिटिश रूल के
- 2:30:36आखिरी समय तक ग्रसित रहते हैं। आइए अब
- 2:30:39लॉर्ड कॉर्नवालिस के नेक्स्ट रिफॉर्म्स
- 2:30:41यानी कि कमर्शियल रिफॉर्म्स को डिस्कस कर
- 2:30:43लेते हैं। कमर्शियल रिफॉर्म्स।
- 2:30:47दोस्तों जब कंडवलस इंडिया आते हैं तो
- 2:30:50देखते हैं कि कमर्शियल डिपार्टमेंट में
- 2:30:52करप्शन फैला हुआ है। कंपनी के खुद के
- 2:30:55गुड्स तो यूरोप में कई बार घाटे में बेचे
- 2:30:57जा रहे थे लेकिन कंपनी के सर्वेंट्स जो
- 2:30:59गुड्स खुद यूरोप बेचते थे अपने प्राइवेट
- 2:31:02ट्रेड के लिए उन्हें काफी मुनाफा हो रहा
- 2:31:04था। 1774 मेंक में बोर्ड ऑफ ट्रेड
- 2:31:08इस्टैब्लिश किया गया था और तभी से कंपनी
- 2:31:10अपने गुड्स यूरोपियन और इंडियन
- 2:31:12कॉन्ट्रैक्टर्स के थ्रू प्रोक्योर करती
- 2:31:14थी। यह कॉन्ट्रैक्टर्स यूजुअली गुड्स को
- 2:31:17हाई प्राइसेस पर सप्लाई करते थे और साथ ही
- 2:31:20इनकी क्वालिटी भी इनफीरियर होती थी। बोर्ड
- 2:31:22के मेंबर्स कॉन्ट्रैक्टर्स पर एक्शन लेने
- 2:31:24की जगह ब्राइब और कमीशन एक्सेप्ट करके
- 2:31:27उनका ही साथ दे रहे थे। इसलिए कॉर्नवस
- 2:31:30बोर्ड ऑफ ट्रेड की स्ट्रेंथ 11 से कम करके
- 2:31:33पांच मेंबर्स की कर देते हैं। इसके साथ ही
- 2:31:35कॉन्ट्रैक्ट्स के थ्रू प्रोक्योरमेंट का
- 2:31:37मेथड खत्म कर दिया जाता है। और इसकी जगह
- 2:31:40अब कमर्शियल रेजिडेंट्स और एजेंट्स के
- 2:31:42थ्रू सप्लाई के मेथड को अपना लिया जाता
- 2:31:44है। यह कमर्शियल रेजिडेंट्स
- 2:31:46मैन्युफैक्चरर्स को एडवांस देकर प्राइस
- 2:31:48सेटल कर लेते थे। जिससे कंपनी को सस्ते
- 2:31:51रेट पर सप्लाई मिलने लगी। इस तरह लॉर्ड
- 2:31:54कॉर्नवालिस ने कमर्शियल डिपार्टमेंट की
- 2:31:56फंक्शनिंग को इंप्रूव किया। दोस्तों, आइए
- 2:31:59अब हम कॉर्नवालिस के सबसे इंपॉर्टेंट
- 2:32:01रिफॉर्म यानी कि उनके रेवेन्यू रिफॉर्म्स
- 2:32:04को समझते हैं। रेवेन्यू रिफॉर्म्स एंड
- 2:32:06परमानेंट सेटलमेंट ऑफ बंगाल।
- 2:32:10लैंड रेवेन्यू सिस्टम में सुधार लाना
- 2:32:12कॉर्नवस का सबसे बड़ा कंसर्न था। वारेन
- 2:32:15हेस्टिंग्स के फाइव ईयर और वन ईयर
- 2:32:17सेटलमेंट जो बडिंग सिस्टम पर बेस्ड थे फेल
- 2:32:20हो चुके थे। कंपनी को टाइम पर रेवेन्यू
- 2:32:23नहीं मिल पाता था और उसकी अमाउंट भी फिक्स
- 2:32:25नहीं थी। इसके साथ ही वारेन हेस्टिंग्स के
- 2:32:28बडिंग सिस्टम की वजह से कल्टीवेटर्स भी
- 2:32:30परेशान थे। इन सभी प्रॉब्लम्स को सॉल्व
- 2:32:33करने के लिए कॉर्नवालिस 1793 में बंगाल
- 2:32:36में परमानेंट सेटलमेंट इंट्रोड्यूस करते
- 2:32:38हैं। इस सिस्टम के अकॉर्डिंग जमींदार को
- 2:32:41लैंड ओनर माना गया और उनके साथ 1790 में
- 2:32:4410 साल का सेटलमेंट किया जाता है। जिसे
- 2:32:471793 में परमानेंट कर दिया जाता है।
- 2:32:50जमींदार को लैंड में हेरिडिटरी राइट्स मिल
- 2:32:53गए। मतलब उनके बाद जमींदारी उनके ही
- 2:32:55सक्सेसर्स को ट्रांसफर हो जाएगी। सेटलमेंट
- 2:32:58के अकॉर्डिंग टोटल रेवेन्यू का 89% शेयर
- 2:33:01कंपनी का होगा और 11% जमींदार अपने पास रख
- 2:33:05सकते हैं। इसमें परमानेंट का मतलब था कि
- 2:33:07लैंड रेवेन्यू का अमाउंट हमेशा के लिए
- 2:33:09फिक्स कर दिया गया था। यह अमाउंट लैंड का
- 2:33:12सर्वे करके उसकी प्रोडक्टिविटी और पास्ट
- 2:33:15के रेवेन्यू रिकॉर्ड्स के बेसिस पर फिक्स
- 2:33:17किया जाना था। यानी कि अब रेगुलर बेसिस पर
- 2:33:20लैंड रेवेन्यू की डिमांड चेंज नहीं की
- 2:33:22जाएगी और अमाउंट को बीडिंग से भी डिसाइड
- 2:33:25नहीं किया जाएगा। परमानेंट सेटलमेंट करने
- 2:33:28के पीछे कंपनी का मोटिव था कि उन्हें
- 2:33:30रेगुलर और फिक्स रेवेन्यू मिलता रहे। इसके
- 2:33:33साथ ही कॉर्नवालिस का विचार था कि क्योंकि
- 2:33:35जमींदार अब लैंड ओनर्स थे और
- 2:33:37प्रोडक्टिविटी इनक्रीस करने में उनका अपना
- 2:33:39फायदा था तो वह लैंड में इन्वेस्ट करेंगे।
- 2:33:42साथ ही कल्टीवेटर्स पर भी बडिंग सिस्टम के
- 2:33:44जैसे एक्सेसिव रेवेन्यू का प्रेशर नहीं
- 2:33:47आएगा। एक तरह से लॉर्ड कॉर्नवालिस इंडिया
- 2:33:50के जमींदार को इंग्लैंड के लैंड लॉर्ड्स
- 2:33:52वाला रोल देना चाहते थे। इस सेटलमेंट का
- 2:33:54एक फीचर सनसेट क्लॉज़ भी था। इसका मतलब
- 2:33:58होता है कि जमींदार को फिक्स डेट पर शाम
- 2:34:01होने से पहले रेवेन्यू डिपॉजिट करना होता
- 2:34:03था। अगर वह ऐसा नहीं करते थे तो उनके
- 2:34:06जमींदारी राइट्स को नीलाम कर दिया जाता
- 2:34:08था। हम कह सकते हैं कि परमानेंट सेटलमेंट
- 2:34:11के पीछे इंटेंशन तो अच्छी थी लेकिन फिर भी
- 2:34:14इसमें बहुत सी प्रॉब्लम्स देखने को मिलती
- 2:34:16हैं। सबसे पहली प्रॉब्लम थी कि लैंड
- 2:34:19रेवेन्यू के अमाउंट का रेट बहुत हाई रखा
- 2:34:21गया था क्योंकि कंपनी परमानेंट तौर पर रेट
- 2:34:24फिक्स कर रही थी। इसलिए उनकी कोशिश थी कि
- 2:34:27ज्यादा से ज्यादा रेट रखा जाए। इससे होता
- 2:34:30यह है कि जमींदार इतना रेवेन्यू कलेक्ट
- 2:34:32नहीं कर पाते थे और सनसेट क्लॉज़ के तहत
- 2:34:35उनकी जमींदारी भी चली जाती थी। इसके साथ
- 2:34:38ही जमींदार ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू
- 2:34:40कलेक्ट करने के लिए कल्टीवेटर्स को बहुत
- 2:34:42ज्यादा हरेस भी करने लगते हैं। जमींदार को
- 2:34:45लॉन्ग टर्म के लिए लैंड में इन्वेस्ट करने
- 2:34:47का कोई इंसेंटिव भी इस सिस्टम में नहीं
- 2:34:49था। परमानेंट सेटलमेंट एब्सेंटी लैंड
- 2:34:52लॉर्डिज्म के फिनोमिना को भी जन्म देता
- 2:34:54है। एब्सेंटी लैंड लॉर्डिज्म कहते हैं जब
- 2:34:57लैंड ओनर अपनी लैंड होल्डिंग के पास ना
- 2:35:00रहकर कहीं दूर रहने लगता है। जैसे कि इस
- 2:35:02केस में लैंड लॉर्ड्स सिटी में रहने लग
- 2:35:04जाते हैं। इस सेटलमेंट की वजह से ही पहली
- 2:35:07बार पेजेंट्स लैंड पर अपने राइट्स खो देते
- 2:35:10हैं और टेनेंट्स एट विल बन जाते हैं। हम
- 2:35:13कह सकते हैं कि परमानेंट सेटलमेंट भी लैंड
- 2:35:15रेवेन्यू का परमानेंट स्यूशन नहीं दे
- 2:35:17पाता। और आगे जाकर ब्रिटिशर्स बाकी
- 2:35:20प्रोविंसेस में रेयतवाड़ी और महालवाड़ी
- 2:35:23जैसे लैंड रेवेन्यू सिस्टम्स इंट्रोड्यूस
- 2:35:25करते हैं। दोस्तों, यह तो बात हुई लॉर्ड
- 2:35:28कॉर्ड वालर्स द्वारा इंट्रोड्यूस्ड
- 2:35:29रिफॉर्म्स की। आइए अब उनके टाइम पीरियड के
- 2:35:32कुछ और इवेंट्स को भी जान लेते हैं। अदर
- 2:35:36इंपॉर्टेंट इवेंट्स।
- 2:35:41दोस्तों, लॉर्ड कॉर्नवालिस के टाइम में ही
- 2:35:431790 में थर्ड एंग्लो माइसोर वॉर भी हुआ
- 2:35:46था। इसमें कॉर्नवालिस ने टीपू सुल्तान को
- 2:35:49हराकर उनके साथ 1792 में ट्रीटी ऑफ
- 2:35:52श्रीरंगापट्टनम साइन की थी। एंग्लो
- 2:35:55माइससोर वॉर्स को हम अपनी वीडियो में पहले
- 2:35:57ही कवर कर चुके हैं। डिटेल में समझने के
- 2:35:59लिए आप वो वीडियो रेफर कर सकते हैं। लॉर्ड
- 2:36:02कॉन्वलिस के टाइम में ही 1791 में बनारस
- 2:36:05में संस्कृत कॉलेज स्टार्ट किया गया था।
- 2:36:07जिसके फाउंडर जथन डंकन थे। कंक्लूजन
- 2:36:14दोस्तों लॉर्ड कॉर्नवालिस 1786 से 1793 तक
- 2:36:18गवर्नर जनरल की पोस्ट पर रहते हैं। लेकिन
- 2:36:21इसके साथ ही यह पहले ऐसे गवर्नर जनरल भी
- 2:36:24थे जिन्हें इस पोस्ट पर फिर से अपॉइंट
- 2:36:26किया जाता है। जनवरी 185 में एक बार फिर
- 2:36:30से लॉर्ड गॉडस गवर्नर जनरल अपॉइंट होते
- 2:36:33हैं। लेकिन उनका सेकंड टर्म अनइवेंटफुल
- 2:36:36रहता है। क्योंकि अक्टूबर 185 में इलनेस
- 2:36:39की वजह से प्रेजेंट यूपी के गाजीपुर में
- 2:36:41उनकी मृत्यु हो जाती है। लॉर्ड कॉन्वलिस
- 2:36:44को गाजीपुर में ही बैरी किया गया था और आज
- 2:36:47भी यहां उनका मोसोलियम मौजूद है। तो
- 2:36:50दोस्तों हमने एक और इंपॉर्टेंट ब्रिटिश
- 2:36:52गवर्नर को भी कवर कर लिया है। अब हम अपनी
- 2:36:55नेक्स्ट वीडियो में अगले इंपॉर्टेंट
- 2:36:57गवर्नर लॉर्ड वेलेसली के बारे में डिस्कस
- 2:36:59करेंगे। लॉर्ड वेलसली 1798 टू 185
- 2:37:05एंड लॉर्ड हेस्टिंग्स 1813
- 2:37:08टू 1823।
- 2:37:11दोस्तों आज हम इस वीडियो में दो
- 2:37:13इंपॉर्टेंट ब्रिटिश गवर्नर जनरल्स के बारे
- 2:37:15में बात करने वाले हैं। हमने अपनी पिछली
- 2:37:18वीडियो में लॉर्ड कॉर्न वोस को कवर किया
- 2:37:21था जो 1793 तक गवर्नर जनरल की पोस्ट पर
- 2:37:24रहते हैं। उनके बाद 1793 से लेकर 1798 तक
- 2:37:28गवर्नर जनरल रहे थे सर जॉन शो जिनके टाइम
- 2:37:32पीरियड में कोई खास रोमांचक घटना घटित
- 2:37:34नहीं होती। और इनके बाद 1798 में गवर्नर
- 2:37:38जनरल बनते हैं लॉर्ड वेलेसली जो कि
- 2:37:40इंपॉर्टेंट गवर्नर जनरल्स में से एक हैं।
- 2:37:43और इसीलिए इनके बारे में डिटेल में चर्चा
- 2:37:45करना जरूरी हो जाता है। तो आइए शुरू करते
- 2:37:48हैं लॉर्ड वेलेसली एंड ह पॉलिसी ऑफ़ वॉर्स
- 2:37:51रिचर्ड कोली वेलेसली जिन्हें मार्कोस
- 2:37:55वेलेसली के नाम से भी जाना जाता है।
- 2:37:57गवर्नर जनरल बनने से पहले ब्रिटिश ट्रेजरी
- 2:38:00के लॉर्ड और बोर्ड ऑफ कंट्रोल में कमिश्नर
- 2:38:02की ऑफिस होल्ड कर चुके थे।
- 2:38:04लेकिन इंग्लैंड की पॉलिटिकल लाइफ में वह
- 2:38:06अपना कुछ खास इंप्रेशन नहीं बना पाए थे।
- 2:38:08या फिर यह कह सकते हैं कि उन्हें अभी तक
- 2:38:11ऐसा मौका ही नहीं मिला था जहां वह अपनी
- 2:38:12काबिलियत दिखा पाए। उन्हें यह मौका मिला
- 2:38:15है जब 1798 में उनका अपॉइंटमेंट गवर्नर
- 2:38:18जनरल की पोस्ट पर होता है। वेलसली इंडिया
- 2:38:21में अपने मिशन को लेकर बहुत क्लियर विज़न
- 2:38:23से आए थे। वो कंपनी को इंडिया में सुप्रीम
- 2:38:26पावर बना देना चाहते थे। उसकी टेरिटरीज को
- 2:38:29और भी ज्यादा इनक्रीस करना चाहते थे और
- 2:38:31सभी इंडियन स्टेट्स को कंपनी के डिपेंडेंट
- 2:38:33की पोजीशन में ले आना चाहते थे। वेलसली सर
- 2:38:37जॉन शोर की पीस और नॉन इंटरवेंशन की
- 2:38:39पॉलिसी को छोड़कर वॉर की पॉलिसी शुरू करते
- 2:38:42हैं। उनके अकॉर्डिंग नॉन इंटरवेंशन की
- 2:38:44पॉलिसी से सिर्फ कंपनी के दुश्मनों को ही
- 2:38:47फायदा हो सकता था और उनकी इस फॉरवर्ड
- 2:38:49पॉलिसी को इंग्लैंड की वॉर मिनिस्ट्री भी
- 2:38:51सपोर्ट करती है। लॉर्ड वेलेसली इंडियन
- 2:38:54रूलर्स के अगेंस्ट बहुत ही ऑफेंसिव
- 2:38:56एटीट्यूड अडॉप्ट करते हैं। वो खुद को
- 2:39:00बंगाल टाइगर कहते थे जो हमेशा ही शिकार की
- 2:39:03तलाश में रहता था और बंगाल के इस टाइगर का
- 2:39:06पहला शिकार बनते हैं मसौर के टाइगर टीपू
- 2:39:09सुल्तान। टीपू सुल्तान के साथ 1799 में
- 2:39:13होता है फोर्थ एंग्लो मसूर वॉर। इस वॉर
- 2:39:16में टीपू सुल्तान मारे जाते हैं और मैसूर
- 2:39:18की आधी से ज्यादा टेरिटरी पर कंपनी का
- 2:39:21कब्जा हो जाता है। जो टेरिटरी बचती है
- 2:39:23उसको वोर्ड डायनेस्टी के एक माइनर राजा को
- 2:39:26दे दिया जाता है और उनके साथ सब्सिडरी
- 2:39:29अलायंस की ट्रीटी साइन कर ली जाती है।
- 2:39:31मतलब इनडायरेक्टली पूरा मसौर ही कंपनी के
- 2:39:34कंट्रोल में आ चुका था। मसौर के बाद
- 2:39:37वेलेसली अपना अगला शिकार बनाते हैं मराठाज़
- 2:39:40को। उनके साथ 183 से 185 के बीच होता है।
- 2:39:44सेकंड एंग्लो मराठा वॉर। सेकंड एंग्लो
- 2:39:47मराठा वॉर के एंड होने पर कंपनी पेशवा के
- 2:39:50साथ-साथ होलकर, सिंधिया और भोसले के साथ
- 2:39:53भी सब्सिडियरी अलायंस की ट्रीटीज साइन कर
- 2:39:56लेती है। इसके साथ ही मराठा एंपायर की
- 2:39:59टेरिटरी का एक बड़ा हिस्सा भी कंपनी के
- 2:40:01कब्जे में आ जाता है। तो दोस्तों, यह थे
- 2:40:04लॉर्ड वेलेजली के टाइम पीरियड के दो
- 2:40:06इंपॉर्टेंट वॉर्स। जिनके थ्रू वह उस समय
- 2:40:09इंडिया की सबसे पावरफुल पावर्स कहे जाने
- 2:40:11वाले मैसूर और मराठा एंपायर को डिस्ट्रॉय
- 2:40:14कर देते हैं। आइए अब जानते हैं लॉर्ड
- 2:40:17वेलेजली की सबसे इंपॉर्टेंट पॉलिसी यानी
- 2:40:19कि सब्सिडियरी अलायंस सिस्टम के बारे में।
- 2:40:23सब्सिडियरी अलायंस। दोस्तों सब्सिडियरी
- 2:40:27अलायंस बेसिकली ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी
- 2:40:30और इंडियन स्टेट्स के बीच होने वाली एक
- 2:40:32ऐसी ट्रीटी थी जिसमें इंडियन किंगडम्स
- 2:40:35अपनी सोवनिटी खो देते हैं। इंडिया में
- 2:40:37ब्रिटिश एंपायर को खड़ा करने में
- 2:40:39सब्सिडियरी अलायंस सिस्टम की बड़ी भूमिका
- 2:40:41रहती है। लॉर्ड वेलेजली ने इस सिस्टम को
- 2:40:44फॉर्मली फ्रेम किया था। लेकिन इसका सबसे
- 2:40:47पहली बार यूज़ किया था फ्रेंच गवर्नर
- 2:40:50ड्यूप्ले ने। आपको याद ही होगा कि कैसे
- 2:40:52कर्नाटक वॉारर्स के समय ड्यूप्ले इंडियन
- 2:40:55सिस्टम्स के साथ अलायंस बनाते हैं। जिसमें
- 2:40:58उन्हें प्रोटेक्शन देने के बदले में वो
- 2:41:00उनसे ट्रिब्यूट और टेरिटरीज दोनों ही ले
- 2:41:02लेते हैं। इसके बाद ब्रिटिशर्स के साथ इस
- 2:41:05तरह के अलायंस में आने वाले पहले रूलर थे
- 2:41:08अवध के नवाब सुजााउद्दौला। बैटल ऑफ बक्सर
- 2:41:11के बाद 1765 में हुई इलाहाबाद ट्रीटी के
- 2:41:15जरिए वह एक तरह से सब्सिडियरी अलायंस का
- 2:41:17हिस्सा बन जाते हैं। लेकिन उस समय तक इसे
- 2:41:20एक सिस्टम का रूप नहीं दिया गया था और यह
- 2:41:23काम किया था वेलसली ने। वो सब्सिडियरी
- 2:41:25अलायंस के प्रोविजंस को वेल डिफाइंड बनाते
- 2:41:28हैं और फिर इसे ब्रिटिश एंपायर के
- 2:41:30एक्सपेंशन के लिए एक हथियार की तरह यूज
- 2:41:32करते हैं। आइए अब सब्सिडियरी अलायंस के
- 2:41:35फीचर्स को समझते हैं। फीचर्स ऑफ
- 2:41:38सब्सिडियरी अलायंस। दोस्तों जो इंडियन
- 2:41:41रूलर्स ब्रिटिशर्स के साथ सब्सिडियरी
- 2:41:43अलायंस में एंटर करते थे उन्हें अपनी
- 2:41:46आर्मी को डिॉल्व करके अपनी टेरिटरी में
- 2:41:48ब्रिटिश फोर्स को रखना होता था और इस
- 2:41:51ब्रिटिश आर्मी की मेंटेनेंस का खर्चा भी
- 2:41:53उन्हें ही देना होता था। अगर कोई रूलर
- 2:41:56पेमेंट करने में फेल हो जाता था तो उसकी
- 2:41:58टेरिटरी का कुछ पार्ट कंपनी अपने कब्जे
- 2:42:01में कर लेती थी। इसके बदले में ब्रिटिशर्स
- 2:42:04इंडियन स्टेट को किसी भी फॉरेन अटैक या
- 2:42:07फिर इंटरनल रिवोल्ट से प्रोटेक्शन ऑफर
- 2:42:09करते थे। इंडियन रूलर्स को अपने कोर्ट में
- 2:42:12एक ब्रिटिश रेजिडेंट को भी रखना होता था।
- 2:42:14वैसे तो ट्रीटी में प्रॉमिस किया जाता था
- 2:42:17कि यह रेजिडेंट्स इंडियन स्टेट के इंटरनल
- 2:42:19अफेयर्स में कोई इंटरफेरेंस नहीं करेंगे।
- 2:42:22लेकिन यह प्रॉमिस अक्सर पेपर पर ही रह
- 2:42:24जाता था। इसके साथ ही इंडियन स्टेट किसी
- 2:42:27भी और फॉरेन पावर के साथ कोई अलायंस नहीं
- 2:42:30कर सकता था और ना ही अपने यहां ब्रिटिशर्स
- 2:42:33के अलावा किसी और यूरोपियन को सर्विस पर
- 2:42:36रख सकता था और अगर अलायंस साइन करने से
- 2:42:39पहले कोई यूरोपियन उनके यहां काम कर रहा
- 2:42:41होता था तो उनकी सर्विस को भी टर्मिनेट
- 2:42:44करना होता था। इस प्रोविजन का मोटिव था
- 2:42:46फ्रेंच इन्फ्लुएंस को कम करना। बिना
- 2:42:49ब्रिटिश अप्रूवल के इंडियन रूलर किसी
- 2:42:52दूसरे इंडियन रूलर के साथ भी किसी तरह के
- 2:42:55राजनैतिक संबंध नहीं बना सकते थे। इस तरह
- 2:42:58से इंडियन रूलर अपनी सभी मिलिट्री और
- 2:43:00फॉरेन पावर्स को खो देते हैं। दूसरे
- 2:43:03शब्दों में कहें तो वह अपनी सारी
- 2:43:05इंडिपेंडेंस खोकर ब्रिटिश प्रोटेक्टेट बन
- 2:43:08जाते हैं। और इस तरह धीरे-धीरे इंडिया का
- 2:43:11बहुत सारा पार्ट ब्रिटिश कंट्रोल में आ
- 2:43:13जाता है। लॉर्ड वेलेजली के सब्सिडियरी
- 2:43:16अलायंस को सबसे पहले एक्सेप्ट किया था
- 2:43:181798 में हैदराबाद के निजाम ने। इसके बाद
- 2:43:221799 में मसूर और तंजोर, 1801 में अवध,
- 2:43:281802 में पेशवा, 183 में भोसले और 184 में
- 2:43:32सिंधिया भी सब्सिडियरी अलायंस पर साइन कर
- 2:43:35देते हैं। इसके अलावा जोधपुर, जयपुर,
- 2:43:39मछेरी, बूंदी और भरतपुर के स्टेट्स भी इस
- 2:43:42अलायंस के पार्ट बनते हैं। दोस्तों,
- 2:43:44सब्सिडियरी अलायंस की वजह से इंडिया का एक
- 2:43:47बहुत बड़ा हिस्सा कंपनी के इनडायरेक्ट
- 2:43:50कंट्रोल में आ जाता है। इसके साथ ही अब
- 2:43:53इंडियन रूलर्स के खर्चे पर कंपनी एक लार्ज
- 2:43:55आर्मी को भी मेंटेन कर सकती थी। यही आर्मी
- 2:43:59आगे चलकर इंडिया के बाकी पार्ट्स को जीतने
- 2:44:01में उनकी हेल्प करती है। इसीलिए
- 2:44:04सब्सिडियरी अलायंस इंडिया में ब्रिटिश
- 2:44:06एंपायर के एक्सपेंशन के लिए बहुत
- 2:44:08इंपॉर्टेंट पॉलिसी मानी जाती है। इस तरह
- 2:44:11लॉर्ड वेलेसली अपने विज़न को पूरा करने में
- 2:44:14सफल रहते हैं। उन्होंने ना सिर्फ इंडिया
- 2:44:16में ब्रिटिश एंपायर का टेरिटोरियल
- 2:44:18एक्सपेंशन किया बल्कि कंपनी को इंडिया की
- 2:44:21सुप्रीम मिलिट्री अथॉरिटी भी बना दिया।
- 2:44:24दोस्तों लॉर्ड वेलेसली के बाद एक बार फिर
- 2:44:27से लॉर्ड कॉर्नवस गवर्नर जनरल बनकर इंडिया
- 2:44:30आते हैं। लेकिन जैसा कि हमने अपनी पिछली
- 2:44:32वीडियो में भी आपको बताया था इससे पहले कि
- 2:44:35वह अपने सेकंड टर्म में कुछेंट करते उनकी
- 2:44:37मृत्यु हो जाती है। उनके बाद 185 से 187
- 2:44:42तक जॉर्ज बार्लो गवर्नर जनरल रहे थे। उनके
- 2:44:45टाइम पीरियड की सिर्फ एक ही चीज याद रखने
- 2:44:47लायक है और वो है 186 में हुई वेलोर सिपोई
- 2:44:51म्यूटनी। दोस्तों, यह म्यूटनी वेलोर में
- 2:44:54स्टेशन मद्रास रेजीमेंट के कुछ सिपाहियों
- 2:44:56द्वारा की गई थी। इसके पीछे का कारण था
- 2:44:59ट्रेडिशनल अटायर पर बैन का आर्डर जो
- 2:45:02मद्रास के उस समय के गवर्नर जनरल बेंटिंक
- 2:45:05ने पास किया था। विलियम बेंटिंक ने जल्द
- 2:45:08ही म्यूटिनी को सप्रेस भी कर दिया था।
- 2:45:10इसके बाद 187 से लेकर 1813 तक लॉर्ड मिंटो
- 2:45:15वन गवर्नर जनरल की पोस्ट पर रहते हैं।
- 2:45:17उनका टाइम पीरियड भी हमारे लिए इंपॉर्टेंट
- 2:45:20नहीं है। इसलिए अब हम चलते हैं अगले
- 2:45:22गवर्नर जनरल लॉर्ड हेस्टिंग्स की तरफ।
- 2:45:25लॉर्ड हेस्टिंग्स 1813 टू 1823।
- 2:45:30दोस्तों जहां एक तरफ लॉर्ड वेलेजली ने
- 2:45:33इंडिया में कंपनी की मिलिट्री सुप्रेमसी
- 2:45:35को इस्टैब्लिश किया था। वहीं लॉर्ड
- 2:45:37हेस्टिंग्स ने इंडिया में ब्रिटिश
- 2:45:39पैरामाउंटसी को इंपोज करने का काम किया
- 2:45:42था। लेकिन इंडिया में आने के बाद उनके
- 2:45:44सामने सबसे पहला चैलेंज था गोरखास का। तो
- 2:45:48आइए इसको थोड़ा डिटेल में डिस्कस करते
- 2:45:50हैं। गोर्खा वॉर और द एंग्लो नेपाल वॉर
- 2:45:531814 टू 1816।
- 2:45:56दोस्तों 1768 में गोरखास ने नेपाल पर अपना
- 2:46:00कंट्रोल इस्टैब्लिश कर लिया था। इसके बाद
- 2:46:03वह अपनी डोमिनियन को माउंटेन के आगे
- 2:46:05एक्सपेंड करना शुरू करते हैं। नॉर्थ में
- 2:46:08तो चाइनीस इन्हें एक्सपेंशन करने नहीं
- 2:46:10देते। इसलिए यह बंगाल और अवध की तरफ पुश
- 2:46:13करते हैं। 1801 में जब कंपनी ने गोरखपुर
- 2:46:17डिस्ट्रिक्ट को ऑक्यूुपाई कर लिया तब उनका
- 2:46:19फ्रंटियर गोरखास की टेरिटरी के डायरेक्ट
- 2:46:21टच में आ जाता है। इसके बाद कॉन्फ्लिक्ट
- 2:46:24शुरू होता है जब गोरखास बुतवाल और शिवराज
- 2:46:28डिस्ट्रिक्ट पर कब्जा कर लेते हैं। उस समय
- 2:46:30तो ब्रिटिशर्स बिना किसी ओपन कॉन्फ्लिक्ट
- 2:46:33के इन डिस्ट्रिक्ट्स को रीऑक्यूपाई कर
- 2:46:35लेते हैं। लेकिन मई 1814 में गोरखास एक
- 2:46:38बार फिर से बुटवाल के तीन पुलिस स्टेशंस
- 2:46:42पर अटैक कर देते हैं। लॉर्ड हेस्टिंग्स
- 2:46:44इसे एक चैलेंज की तरह लेते हैं और गुरखास
- 2:46:47के अगेंस्ट ऑफेंसिव लॉन्च करने का डिसीजन
- 2:46:50लेते हैं। 12,000 की गोर्खा आर्मी के
- 2:46:53अगेंस्ट हेस्टिंग्स 34,000 सोल्जर्स की
- 2:46:56लार्ज आर्मी तैयार करते हैं। लेकिन
- 2:46:581814-15 का यह कैंपेन बुरी तरह फील हो
- 2:47:01जाता है। इसके बाद भी ब्रिटिशर्स हार नहीं
- 2:47:04मानते और फिर से कोशिश करते हैं। अप्रैल
- 2:47:071815 में वह कुमाऊं हिल्स में अल्मोड़ा को
- 2:47:10कैप्चर करने में कामयाब होते हैं। और मई
- 2:47:131815 में अमर सिंह थाबा से मालाओं का
- 2:47:16फोर्ट भी जीत लिया जाता है। मालाओं के फॉल
- 2:47:19के बाद गुरखाज़ नेगोशिएशंस करने के लिए
- 2:47:22तैयार हो जाते हैं। लेकिन हेस्टिंग्स की
- 2:47:24डिमांड्स उनके एटीट्यूड चेंज कर देती हैं।
- 2:47:26और एक बार फिर से दोनों के बीच
- 2:47:28हॉस्टेलिटीज शुरू हो जाती हैं। फरवरी 1816
- 2:47:32में नेपलीज़ को मकवानपुर में बुरी तरह हरा
- 2:47:36दिया जाता है। इसके बाद गुरखा समझ जाते
- 2:47:38हैं कि उनके लिए अब ब्रिटिश को और रेजिस्ट
- 2:47:41करना पॉसिबल नहीं है और इसीलिए मार्च 1816
- 2:47:44में वो ट्रीटी ऑफ सगोली को एक्सेप्ट कर
- 2:47:47लेते हैं। ट्रीटी के अकॉर्डिंग गोरखास
- 2:47:50गढ़वाल और कुमाऊं डिस्ट्रिक्ट्स कंपनी को
- 2:47:52सरेंडर कर देते हैं। इसके साथ ही दोनों के
- 2:47:55बीच तराई बाउंड्री को पिलर्स के थ्रू
- 2:47:58मार्क कर दिया जाता है। गोरखास काठमांडू
- 2:48:01में ब्रिटिश रेजिडेंट रखने के लिए भी मान
- 2:48:03जाते हैं और इसके साथ ही सिक्किम से
- 2:48:05परमानेंटली विथड्रॉ करने के लिए तैयार हो
- 2:48:08जाते हैं। ब्रिटिशर्स को हिल स्टेशंस और
- 2:48:11समर कैपिटल्स के लिए साइट भी मिल जाती है।
- 2:48:13जैसे कि शिमला, मसूरी, रानीखेत एटसेटरा।
- 2:48:17इसके साथ ही ब्रिटिशर्स गुरखास को अपनी
- 2:48:20आर्मी में भी शामिल कर लेते हैं जो आगे
- 2:48:22चलके इंडिया में कंपनी की डोमिनियन को
- 2:48:25एक्सपेंड करने में काफी हेल्प करते हैं।
- 2:48:28तो दोस्तों इसके बाद लॉर्ड हेस्टिंग्स का
- 2:48:30नेक्स्ट चैलेंज होता है पिंडारीज का इशू।
- 2:48:34पिंडारीज के बारे में हमने एंग्लो मराठा
- 2:48:36वॉर्स के लेक्चर में डिटेल में डिस्कस
- 2:48:38किया था। इसके अलावा मराठास के साथ 1816
- 2:48:42से 1818 तक थर्ड एंग्लो मराठा वॉर भी
- 2:48:45लॉर्ड हेस्टिंग्स के पीरियड में ही हुआ
- 2:48:47था। थर्ड एंग्लो मराठा वॉर से पहले
- 2:48:49हेस्टिंग्स मराठाज़ के चैलेंज को हमेशा के
- 2:48:52लिए खत्म कर देते हैं। दोस्तों मराठाज़ के
- 2:48:55डिक्लाइन के बाद प्रैक्टिकली तो कंपनी
- 2:48:57इंडिया में सुप्रीम पावर बन गई थी। लेकिन
- 2:49:00अभी भी मुगल रूलर सेरेमोनियल तौर पर
- 2:49:02इंडिया के एपरर थे और गवर्नर जनरल की सील
- 2:49:05पर द सर्वेंट ऑफ एपरर फ्रेज लिखा होता था।
- 2:49:08लॉर्ड हेस्टिंग्स इसे बदलना चाहते थे।
- 2:49:11इसलिए वह अपने नॉर्दन इंडिया के टूर पर
- 2:49:13मुगल एपरर अकबर द सेकंड से मिलने से इंकार
- 2:49:16कर देते हैं। वो साफ कर देते हैं कि मुगल
- 2:49:19एपरर को पहले सभी ऐसी सेरेमनीज़ को खत्म
- 2:49:22करना होगा जो कंपनी के डोमिनियंस पर उनकी
- 2:49:24सुप्रेमसी दर्शाती हो। मतलब कि एपरर को
- 2:49:27कंपनी के साथ इक्वलिटी के स्टेटस पर मिलना
- 2:49:30होगा। हेस्टिंग्स के इस प्रोटेस्ट का
- 2:49:33डिजायर्ड इफेक्ट होता है और मुगल एपरर
- 2:49:35अकबर द सेकंड 1827 में हेस्टिंग्स के
- 2:49:38सक्सेसर लॉर्ड एमहस्ट से इक्वल फुटिंग पर
- 2:49:41मीटिंग करते हैं। इस तरह से लॉर्ड
- 2:49:43हेस्टिंग्स ने ना सिर्फ कंपनी को सुप्रीम
- 2:49:45पावर बनाया बल्कि उसको एक सुप्रीम पावर की
- 2:49:48तरह बिहेव करना भी सिखा दिया। दोस्तों
- 2:49:51वैसे तो लॉर्ड हेस्टिंग्स अपनी वॉर्स के
- 2:49:53लिए ही जाने जाते हैं। लेकिन इनके टाइम
- 2:49:56पीरियड में कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स
- 2:49:58भी हुए थे। आइए उनको भी डिस्कस कर लेते
- 2:50:01हैं। एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स अंडर
- 2:50:04हेस्टिंग्स। दोस्तों लॉर्ड हेस्टिंग्स
- 2:50:07काफी लकी थे क्योंकि उनके पास सर जॉन
- 2:50:10मैलकम, सर थॉमस मनरो, अल्फिंस्टन और
- 2:50:13चार्ल्स मैटकाफ जैसे कैपेबल
- 2:50:15एडमिनिस्ट्रेटर्स मौजूद थे। यही
- 2:50:17एडमिनिस्ट्रेटर्स उनके टाइम पीरियड में
- 2:50:20रिफॉर्म्स को इंट्रोड्यूस करते हैं। जैसे
- 2:50:22कि थॉमस मनरो जो 1820 में मद्रास के
- 2:50:25गवर्नर बनते हैं। मालाबार, कोयंबटो,
- 2:50:28मदुराई और डिंडीगुल में लैंड टेन्योर के
- 2:50:31रेयतवाड़ी सिस्टम को इंट्रोड्यूस करते
- 2:50:33हैं। रेयतवाड़ी सिस्टम में सेटलमेंट
- 2:50:35डायरेक्टली रेयत यानी कि एक्चुअल टेलर के
- 2:50:38साथ किया जाता था। मतलब कल्टीवेटर ही लैंड
- 2:50:42रेवेन्यू का डायरेक्ट पेयर बन जाता है।
- 2:50:44बिना किसी जमींदार या विलेज कम्युनिटी के
- 2:50:47बीच में आए। इसी तरह नॉर्थ वेस्टर्न
- 2:50:49प्रोविंस में महालवाड़ी सिस्टम
- 2:50:51इंट्रोड्यूस किया जाता है। इसके अकॉर्डिंग
- 2:50:53सेटलमेंट विलेज कम्युनिटी या महल के
- 2:50:56रिप्रेजेंटेटिव्स के साथ किया जाता था।
- 2:50:58इंडिविजुअल कल्टीवेटर का शेयर विलेज के
- 2:51:01लोग आपस में सेटल कर सकते थे। दोस्तों
- 2:51:04ट्रियोतवाड़ी और महालवाड़ी सेटलमेंट्स को
- 2:51:06और ज्यादा डिटेल में हम अपनी लैंड
- 2:51:08रेवेन्यू सिस्टम्स की वीडियो में कवर
- 2:51:10करेंगे। लॉर्ड हेस्टिंग्स कॉर्नवालिस के
- 2:51:13जुडिशियल सिस्टम को भी मॉडिफाई करते हैं।
- 2:51:16कॉर्नवालिस ने जुडिशरी और एग्जीक्यूटिव का
- 2:51:18सेपरेशन कर दिया था। लेकिन हेस्टिंग्स फिर
- 2:51:21से कलेक्टर को मैजिस्ट्रेट का ऑफिस देना
- 2:51:24शुरू कर देते हैं। तो यह थे लॉर्ड
- 2:51:26हेस्टिंग्स के समय में होने वाले कुछ
- 2:51:28एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स। कंक्लूजन।
- 2:51:32दोस्तों, इस तरह लॉर्ड वेलेसली और लॉर्ड
- 2:51:34हेस्टिंग्स दोनों ने ही इंडिया में
- 2:51:37ब्रिटिश एंपायर के एक्सपेंशन का काम किया।
- 2:51:39यह दोनों ही वार्ड्स के सपोर्टर थे और
- 2:51:42कंपनी को इंडिया की सुप्रीम पावर बना देना
- 2:51:44चाहते थे। और हमने देखा कि कैसे वह अपने
- 2:51:47इस विजन में कामयाब भी रहते हैं। कंपनी को
- 2:51:51बराबरी की टक्कर देने की क्षमता रखने वाले
- 2:51:53सभी राइवल स्टेट्स का खात्मा करके इंडिया
- 2:51:56में ब्रिटिश पैरामाउंटसी को इस्टैब्लिश
- 2:51:58करने का श्रेय इन्हें ही जाता है। विलियम
- 2:52:01बेंटिंग 1828 टू 1835।
- 2:52:05आज हम एक ऐसे ब्रिटिश गवर्नर जनरल की बात
- 2:52:08करने वाले हैं जो इंडिया में अपने सोशल
- 2:52:10रिफॉर्म्स के लिए जाने जाते हैं। इसके साथ
- 2:52:13ही वो फर्स्ट गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया भी
- 2:52:16थे। जी हां, विलियम बेंटिंग जो जेरेमी
- 2:52:20बेंथम की यूटिलिटेरियन फिलॉसफी के फॉलोअर
- 2:52:23थे। जिसका सिंपल शब्दों में मतलब होता है
- 2:52:25मैक्सिमम गुड फॉर मैक्सिमम पीपल। इसी
- 2:52:28फिलॉसफी से इंस्पायर होकर वह इंडिया में
- 2:52:31अलग-अलग रिफॉर्म्स को इंट्रोड्यूस करते
- 2:52:33हैं। तो आइए शुरू करते हैं इंट्रोडक्शन।
- 2:52:37दोस्तों विलियम बेंटिंग ने अपने करियर की
- 2:52:40शुरुआत आर्मी से की थी। उन्होंने 1791 में
- 2:52:4416 साल की छोटी सी एज में ही आर्मी ज्वॉइ
- 2:52:47कर ली थी और 1798 में कर्नल की रैंक तक भी
- 2:52:50पहुंच गए थे। वो इंग्लैंड में हाउस ऑफ
- 2:52:53कॉमंस के मेंबर भी थे। इंडिया में उनके
- 2:52:56करियर की शुरुआत होती है 183 में जब
- 2:52:59उन्हें मद्रास का गवर्नर अपॉइंट किया जाता
- 2:53:02है। दोस्तों 186 में वेलोर म्यूटनी के समय
- 2:53:06विलियम बेंटिंग ही मद्रास के गवर्नर थे।
- 2:53:08उन्होंने ऑर्डर दिया था कि नेटिव सोल्जर्स
- 2:53:11अपने ट्रेडिशनल अटायर नहीं पहन सकते।
- 2:53:14जिसकी वजह से वेलोर में तैनात कुछ मद्रास
- 2:53:16रेजीमेंट्स विद्रोह कर देती हैं। वेलोर
- 2:53:19म्यूटनी को तो इन्होंने सप्रेस कर दिया
- 2:53:21था। लेकिन इसके बाद 187 में कोर्ट ऑफ
- 2:53:24डायरेक्टर्स इन्हें इंग्लैंड वापस बुला
- 2:53:26लेते हैं। इसके बाद विलियम बेंटिंग 1828
- 2:53:30में गवर्नर जनरल की पोस्ट पर इंडिया वापस
- 2:53:32आते हैं। गवर्नर जनरल रहते हुए उन्होंने
- 2:53:36बहुत सारे रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस किए थे।
- 2:53:38आइए एक-एक करके उनके रिफॉर्म्स को डिस्कस
- 2:53:41करते हैं। सोशल रिफॉर्म्स ऑफ बेंटिंग।
- 2:53:44दोस्तों विलियम बेंटिंग से पहले किसी भी
- 2:53:47गवर्नर जनरल ने इंडिया की सोशल प्रॉब्लम्स
- 2:53:50को टैकल करने की हिम्मत नहीं दिखाई थी।
- 2:53:53बेंटिंग पहले ऐसे गवर्नर जनरल थे जो सोशल
- 2:53:56इविल्स के अगेंस्ट लॉ पास करते हैं। जैसा
- 2:54:00कि आप सब जानते ही होंगे कि इंडिया में
- 2:54:02सती प्रथा का प्रचलन था। इस प्रथा के
- 2:54:05अनुसार हस्बैंड की डेथ के बाद वाइफ को भी
- 2:54:08हस्बैंड की चिता के साथ ही जला दिया जाता
- 2:54:10था। इस प्रथा के खिलाफ राजा राममोहन रॉय
- 2:54:13जैसे सोशल रिफॉर्मर्स कैंपेन शुरू करते
- 2:54:16हैं। इसके साथ ही वह विलियम बेंटिंक पर
- 2:54:18सती प्रथा को इललीगल डिक्लेअ करने का
- 2:54:21प्रेशर भी बनाते हैं। विलियम बेंटिंक इनके
- 2:54:25कैंपेन का सपोर्ट करते हुए दिसंबर 1829
- 2:54:28में रेगुलेशन नंबर 17 पास करते हैं। जिसके
- 2:54:32अनुसार सती प्रथा को इललीगल डिक्लेअ कर
- 2:54:34दिया जाता है और साथ ही इसे एक क्रिमिनल
- 2:54:38ऑफेंस बना दिया जाता है। शुरुआत में यह
- 2:54:40रेगुलेशन सिर्फ बंगाल प्रेसिडेंसी में
- 2:54:43एप्लीकेबल होता है। लेकिन 1830 में इसे
- 2:54:46मद्रास और बॉम्बे प्रेसिडेंसीज में भी
- 2:54:48एक्सटेंड कर दिया जाता है। दोस्तों सती
- 2:54:51प्रथा के अलावा विलियम बेंटिंग
- 2:54:53इनफेंटिसाइड और चाइल्ड सैक्रिफाइसेस जैसी
- 2:54:56सोशल इविल्स को भी सप्रेस करते हैं। बहुत
- 2:54:59सारी कम्युनिटीज में गर्ल चाइल्ड की हत्या
- 2:55:02करने की कुप्रथा चली आ रही थी। वैसे तो
- 2:55:051795 में बंगाल रेगुलेशन 16 और 184 में
- 2:55:09रेगुलेशन 3 ने इनफेंटिसाइड को इललीगल
- 2:55:12डिक्लेअ कर दिया था। फिर भी यह इनह्यूमन
- 2:55:15प्रैक्टिस कंटिन्यूड थी। इसीलिए बेंटिंग
- 2:55:18ने इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए कठोर
- 2:55:20कदम उठाए थे। इसके साथ ही बंगाल के सागर
- 2:55:23आइलैंड पर कुछ स्पेशल ओेशंस पर चाइल्ड
- 2:55:26सैक्रिफाइसेस ऑफर करने की प्रथा थी। जब
- 2:55:28बेंटिंक को इसके बारे में पता चलता है तो
- 2:55:31वह तुरंत इस पर रोक लगाने का आर्डर दे
- 2:55:33देते हैं। दोस्तों विलियम बेंटिंग को ठग्स
- 2:55:37के सप्रेशन का भी श्रेय दिया जाता है। यह
- 2:55:39मोस्टली सेंट्रल इंडिया और बंगाल के रीजन
- 2:55:42में सक्रिय थे। ठग्स ऐसे हेरिडिटरी
- 2:55:44हत्यारे और लुटेरे होते थे जो भोलेभाले और
- 2:55:48डिफेंसलेस ट्रेवलर्स को अपना निशाना बनाते
- 2:55:50थे। इनकी काफी डिसिप्लिन ऑर्गेनाइजेशन थी।
- 2:55:54इनमें से अगर कुछ एक्सपर्ट स्ट्रेंगलर्स
- 2:55:56थे तो कुछ को डेड बॉडीज के क्विक डिस्पोजल
- 2:55:58में महारत हासिल थी और कुछ अच्छे स्पाइस
- 2:56:01और इनफॉर्म्स थे। इनके अपने कोड वर्ड्स और
- 2:56:04साइन होते थे। इनकी ऑर्गेनाइजेशन इतनी
- 2:56:07एफिशिएंट थी कि गवर्नमेंट के नोटिस में
- 2:56:10इनका एक भी फेलियर नहीं आया था। विलियम
- 2:56:13बेंटिंग ठग्स को सप्रेस करने के लिए 1835
- 2:56:16में ठगी एंड डेकोइटी डिपार्टमेंट
- 2:56:19इस्टैब्लिश करते हैं। इस डिपार्टमेंट का
- 2:56:21चार्ज वो कर्नल विलियम स्लीमन को देते
- 2:56:23हैं। इंडियन रूलर्स को भी इस टास्क में
- 2:56:26कोऑपरेट करने के लिए इनवाइट किया जाता है।
- 2:56:29कर्नल स्लीमन करीब 1500 ठग्स को गिरफ्तार
- 2:56:33करते हैं और इन्हें मृत्युदंड या उम्र कैद
- 2:56:36की सजा सुनाई जाती है। इनके एफर्ट्स की
- 2:56:38वजह से 1837 के बाद से ऑर्गेनाइज्ड स्केल
- 2:56:42पर होने वाली ठगी देखने को नहीं मिलती।
- 2:56:44दोस्तों विलियम बेंटिंक के सोशल रिफॉर्म्स
- 2:56:47एक तरह से इनफ्लेक्शन पॉइंट थे और इन
- 2:56:49रिफॉर्म्स की छवि आज तक हमें अपने इंडियन
- 2:56:52सिस्टम में देखने को मिलती है। आइए अब
- 2:56:55उनके टाइम में इंट्रोड्यूस हुए एजुकेशनल
- 2:56:57रिफॉर्म्स की बात करते हैं। एजुकेशनल
- 2:57:00रिफॉर्म्स।
- 2:57:02दोस्तों विलियम बेंटिक के टाइम पीरियड में
- 2:57:05ही 1835 में मकोले मिनट्स ऑफ एजुकेशन
- 2:57:08इंट्रोड्यूस किए गए थे। दरअसल जब 1813 में
- 2:57:12पार्लियामेंट ने कंपनी का चार्टर 20 साल
- 2:57:15के लिए रिन्यू किया था। तब उसमें एक
- 2:57:17प्रोविजन यह भी था कि कंपनी को हर साल ₹1
- 2:57:20लाख नेटिव्स की एजुकेशन पर खर्च करने
- 2:57:22होंगे। इसके लिए कमेटी ऑफ पब्लिक
- 2:57:24इंस्ट्रशंस फॉर्म की जाती है और विलियम
- 2:57:26बेंटिंग लॉर्ड मकोले को कमेटी का
- 2:57:29प्रेसिडेंट अपॉइंट करते हैं। इस कमेटी को
- 2:57:32डिसाइड करना था कि एजुकेशन के लिए आने
- 2:57:34वाली गवर्नमेंट ग्रांट को किस तरह खर्च
- 2:57:36किया जाए। कमेटी के मेंबर्स दो ग्रुप्स
- 2:57:39में डिवाइड हो चुके थे। एक तरफ थे विल्सन
- 2:57:42और प्रिंसेप ब्रदर्स जैसे ओरिएंटलिस्ट्स
- 2:57:45जो ओरिएंटल लैंग्वेज और इंडियन लिटरेचर की
- 2:57:47एजुकेशन को प्रमोट करना चाहते थे। दूसरी
- 2:57:50तरफ थे सर चार्ल्स ट्रेवलियन जैसे
- 2:57:53एंग्लिसिस्ट्स जो वेस्टर्न साइंस और
- 2:57:55लिटरेचर के सपोर्टर थे। मोकोले फेवर करते
- 2:57:58हैं एंग्लिसिस्ट व्यूज को और फरवरी 1835
- 2:58:02के अपने फेमस मिनट में वो वेस्टर्न
- 2:58:04एजुकेशन और इंग्लिश मीडियम में एजुकेशन
- 2:58:07प्रपोज करते हैं। उनके अकॉर्डिंग एक गुड
- 2:58:10यूरोपियन लाइब्रेरी की सिंगल शेल्फी
- 2:58:12इंडिया और अरब की पूरी की पूरी नेटिव
- 2:58:14लिटरेचर के बराबर है। उनके इन व्यूज को
- 2:58:17एक्सेप्ट कर लिया जाता है और सेवंथ मार्च
- 2:58:201835 को एक रेजोल्यूशन पास कर दिया जाता
- 2:58:23है। जिसके अकॉर्डिंग हायर एजुकेशन में
- 2:58:26इंग्लिश मीडियम और वेस्टर्न लिटरेचर को
- 2:58:28प्रमोट करने का डिसीजन लिया जाता है।
- 2:58:31दोस्तों मोगोली मिनट्स इंडिया में मॉडर्न
- 2:58:33एजुकेशन की फाउंडेशन का काम करते हैं। आइए
- 2:58:37अब विलियम बेंटिंग के जुडिशियल रिफॉर्म्स
- 2:58:39की चर्चा करते हैं। जुडिशियल रिफॉर्म्स
- 2:58:42दोस्तों विलियम बेंटिंग लॉर्ड कॉर्नवालिस
- 2:58:46के जुडिशियल सिस्टम में कुछ बदलाव करते
- 2:58:48हैं। जैसे कि वह कॉर्नवालिस द्वारा सेटअप
- 2:58:51प्रोविंशियल कोर्ट्स ऑफ़ अपील और सर्किट
- 2:58:53कोर्ट्स को अबॉलिश कर देते हैं। विलियम
- 2:58:55बेंटिंक इन कोर्ट्स की ड्यूटीज
- 2:58:57मैजिस्ट्रेट्स और कलेक्टर्स को ट्रांसफर
- 2:59:00कर देते हैं और इनके सुपरविजन के लिए
- 2:59:02कमिश्नर ऑफ रेवेन्यू एंड सर्किट अपॉइंट
- 2:59:05करते हैं। इसके अलावा वह इलाहाबाद में
- 2:59:08सेपरेट सदर निजामत अदालत और सदर दीवानी
- 2:59:11अदालत इस्टैब्लिश करते हैं। जिसकी वजह से
- 2:59:14यूपी और दिल्ली के लोगों को अपील के लिए
- 2:59:16अब कोलकाता जाने की जरूरत नहीं रहती।
- 2:59:18दोस्तों, अभी तक कोर्ट की लैंग्वेज
- 2:59:20पर्शियन थी। बेंटिंग हायर कोर्ट्स में
- 2:59:23पर्शियन को इंग्लिश से रिप्लेस कर देते
- 2:59:25हैं। और इसी के साथ ही लोअर कोर्ट्स में
- 2:59:28पर्शियन के साथ-साथ वर्नाकुलर लैंग्वेज
- 2:59:30में केस फाइल करने का ऑप्शन भी दे देते
- 2:59:32हैं। इस तरह से विलियम बेंटिंक ने
- 2:59:35जुडिशियल सिस्टम को इंडियंस के लिए
- 2:59:37एक्सेसिबल बनाने की कोशिश की थी। दोस्तों,
- 2:59:41विलियम बेंटिंक ने कुछ फाइनेंसियल
- 2:59:43रिफॉर्म्स भी इंट्रोड्यूस किए थे। आइए अब
- 2:59:46उनके बारे में जानते हैं। फाइनशियल
- 2:59:48रिफॉर्म्स। कंपनी की फाइनेंसियल कंडीशन को
- 2:59:51बेटर करने के लिए विलियम बेंटिंग बहुत
- 2:59:54सारे स्टेप्स लेते हैं। जैसे कि वो
- 2:59:56मिलिट्री ऑफिसर को मिलने वाले एक्स्ट्रा
- 2:59:58अलाउंस या भत्ते को कम कर देते हैं। नए
- 3:00:01रूल्स के अकॉर्डिंग अगर ट्रूप्सक के 400
- 3:00:04माइल्स के विदिन स्टेशन रहेंगे तो उन्हें
- 3:00:07सिर्फ आधा भत्ता ही दिया जाएगा। इस स्टेप
- 3:00:10से बेंटिंक एक साल में करीब 20,000 पाउंड
- 3:00:13बचा लेते हैं। इसी तरह सिविल सर्वेंट्स के
- 3:00:16अलाउंसेस भी कम कर दिए जाते हैं। साथ ही
- 3:00:19विलियम बेंटिंक जहां भी पॉसिबल था वहां
- 3:00:22हाई पेड यूरोपियंस की जगह इंडियंस को
- 3:00:24एंप्लॉय करते हैं। बेंटिंग ओपीएम ट्रेड को
- 3:00:28भी रेगुलराइज्ड और लाइसेंस्ड करते हैं और
- 3:00:31ओपीएम के एक्सपोर्ट की परमिशन सिर्फ
- 3:00:33बॉम्बे पोर्ट को देते हैं। जिससे कंपनी को
- 3:00:36ड्यूटीज के थ्रू प्रॉफिट में शेयर मिल
- 3:00:38जाता है। विलियम बेंटिंग के इन सभी
- 3:00:41स्टेप्स की वजह से पहले हर साल होने वाला
- 3:00:441 करोड़ का डेफिसिट 1835 तक 2 करोड़ के
- 3:00:48सरप्लस में बदल जाता है। दोस्तों, यह तो
- 3:00:51बात हो गई बेंटिंग के रिफॉर्म्स की। अब
- 3:00:53उनके टाइम पीरियड के कुछ और इंपॉर्टेंट
- 3:00:56इवेंट्स को भी डिस्कस कर लेते हैं। अदर
- 3:00:58इंपॉर्टेंट इवेंट्स। दोस्तों, विलियम
- 3:01:02बेंटिंक के टाइम पीरियड में ही 1833 का
- 3:01:05चार्टर एक्ट पास हुआ था। इस एक्ट के
- 3:01:08इंपॉर्टेंट प्रोविजंस कुछ इस तरह थे।
- 3:01:10गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल को रिीडेजिग्नेट
- 3:01:13करके गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया बना दिया जाता
- 3:01:16है। इस तरह विलियम बेंटिंग फर्स्ट गवर्नर
- 3:01:19जनरल ऑफ इंडिया बनते हैं। एडमिनिस्ट्रेशन
- 3:01:22को यूनिफाइड कर दिया जाता है। मतलब कि
- 3:01:25बॉम्बे और मद्रास के गवर्नर की लेजिसलेटिव
- 3:01:27पावर्स खत्म कर दी जाती हैं और पूरे
- 3:01:30ब्रिटिश इंडिया की लेजिसलेटिव पावर्स
- 3:01:32गवर्नर जनरल को दे दी जाती हैं। कंपनी के
- 3:01:35सिविल और मिलिट्री अफेयर्स को कंट्रोल
- 3:01:38करने के लिए गवर्नर जनरल की काउंसिल फॉर्म
- 3:01:40की जाती है। जिसमें चार मेंबर्स रखे जाते
- 3:01:43हैं। पहली बार गवर्नर जनरल की गवर्नमेंट
- 3:01:46को गवर्नमेंट ऑफ इंडिया कहा जाता है और
- 3:01:48काउंसिल को इंडिया काउंसिल। इस एक्ट के
- 3:01:51थ्रू कंपनी की टी और चाइनीस ट्रेड पर
- 3:01:54मोनोपोली को भी खत्म कर दिया जाता है।
- 3:01:571833 का एक्ट यूरोपियंस को इंडिया में
- 3:02:00प्रॉपर्टी परचेस करने की परमिशन भी दे
- 3:02:02देता है। 1833 के चार्टर एक्ट ने
- 3:02:06एडमिनिस्ट्रेशन को सेंट्रलाइज्ड करने का
- 3:02:08काम किया और गवर्नर जनरल की पोजीशन को और
- 3:02:11भी ज्यादा स्ट्रांग बना दिया। दोस्तों अब
- 3:02:14बात करते हैं विलियम बेंटिंक की इंडियन
- 3:02:17स्टेट्स के साथ रिलेशंस की। रिलेशंस विद
- 3:02:20इंडियन स्टेट्स।
- 3:02:23विलियम बेंटिंग वैसे तो इंडियन स्टेट्स के
- 3:02:26साथ नॉन इंटरफेरेंस की पॉलिसी फॉलो करते
- 3:02:28हैं। जैसे कि जयपुर में ब्रिटिश रेजिडेंट
- 3:02:31पर अटैक होने के बाद भी वो कोई एक्शन नहीं
- 3:02:33लेते। इसी तरह जोधपुर, बूंदी, कोटा और
- 3:02:37भोपाल में भी इंटरफेरेंस के स्ट्रांग
- 3:02:39रीज़ंस होने के बावजूद नॉन इंटरवेंशन की
- 3:02:42पॉलिसी को ही फॉलो करते हैं।
- 3:02:45लेकिन कुछ केसेस में ऐसा नहीं होता। और
- 3:02:471831 में बेंटिंग मसोर को मिस गवर्नेंस की
- 3:02:51प्ली पर एनेक्स कर लेते हैं। इसी तरह 1834
- 3:02:55में वो कुर्ग और कचार को भी एनेक्स कर
- 3:02:58लेते हैं। दोस्तों विलियम बेंटिंक को
- 3:03:01सेंट्रल एशिया में चल रहे रशियन एडवांसेस
- 3:03:03का भी आईडिया था। रशिया के किसी भी पॉसिबल
- 3:03:06इन्वेजन को प्रिवेंट करने के लिए वो पंजाब
- 3:03:09के राजा रणजीत सिंह के साथ 1831 में
- 3:03:12ट्रीटी ऑफ परपेचुअल फ्रेंडशिप साइन करते
- 3:03:15हैं। इसके साथ ही सिंध के अमीर के साथ भी
- 3:03:18एक कमर्शियल कम पॉलिटिकल ट्रीटी कंक्लूड
- 3:03:20करते हैं। कंक्लूजन दोस्तों, विलियम
- 3:03:25बेंटिंक के एडमिनिस्ट्रेशन के यह सात साल
- 3:03:28लगातार चली आ रही वार्ड्स और एनेक्सेशंस
- 3:03:30की पॉलिसी के बीच एक शांतिपूर्ण पीरियड की
- 3:03:33तरह लगते हैं। बेंटिंक को एक बेनेवलेंट
- 3:03:37एडमिनिस्ट्रेटर की तरह देखा जाता है।
- 3:03:39जिन्होंने अपने रिफॉर्म्स के थ्रू इंडिया
- 3:03:41में एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल लाइफ को
- 3:03:44लिबरलाइज करने की कोशिश की।
- 3:03:47लॉर्ड डलहौजी 1848 टू 1856
- 3:03:52दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं गवर्नर
- 3:03:55जनरल लॉर्ड डलहौजी की जिन्हें मेकर ऑफ
- 3:03:58मॉडर्न इंडिया भी कहा जाता है। वैसे तो
- 3:04:01लॉर्ड डलहौजी सबसे ज्यादा फेमस है अपनी
- 3:04:04डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स की पॉलिसी के लिए
- 3:04:06लेकिन इन्होंने बहुत सारे रिफॉर्म्स भी
- 3:04:08इंट्रोड्यूस किए थे। आज हम लॉर्ड डलहौजी
- 3:04:10के सभी रिफॉर्म्स और पॉलिसीज को डिटेल में
- 3:04:13कवर करने वाले हैं। तो आइए शुरू करते हैं।
- 3:04:19इंट्रोडक्शन
- 3:04:25लॉर्ड डलहौजी 1848 से लेकर 1856 तक इंडिया
- 3:04:29के गवर्नर जनरल रहते हैं। यह इंडिया के
- 3:04:32यंगेस्ट गवर्नर जनरल भी रहे थे। इनके टाइम
- 3:04:35पीरियड में एक तरफ तो इंडिया का काफी तेजी
- 3:04:37से मॉडर्नाइजेशन हुआ था और दूसरी तरफ
- 3:04:40इन्होंने अपनी एनेक्सेशन पॉलिसीज से देश
- 3:04:43में एक आग सी लगा दी थी। आइए सबसे पहले हम
- 3:04:47लॉर्ड डलहौजी की इन्हीं एनक्सेशन पॉलिसीज
- 3:04:49के बारे में बात करते हैं।
- 3:04:52एक्सपेंशन ऑफ ब्रिटिश एंपायर बाय लॉर्ड
- 3:04:55डलहौजी।
- 3:04:56दोस्तों लॉर्ड डलहौजी इंडिया में
- 3:04:58इंपीरियलिस्टिक एंबिशंस के साथ आए थे। वो
- 3:05:01इंडिया में ब्रिटिश एंपायर को एक्सपैंड और
- 3:05:04कंसोलिडेट करना चाहते थे और अपने इस एम को
- 3:05:07पूरा करने के लिए डलहौजी अलग-अलग मेथड्स
- 3:05:10अडॉप्ट करते हैं। सबसे पहला मेथड तो
- 3:05:12ऑब्वियसली वॉर ही था। इन्होंने 1848-49
- 3:05:16में सेकंड एंग्लो सिख वॉर के थ्रू पंजाब
- 3:05:18को एनेक्स कर लिया था। जिसकी पूरी कहानी
- 3:05:21हम आपको पहले ही बता चुके हैं। इसके साथ
- 3:05:24ही डलाहौजी के टाइम पीरियड में ही 1852
- 3:05:26में सेकंड एंग्लो बर्मा वॉर भी हुआ था।
- 3:05:29जिसके थ्रू लोअर बर्मा यानी कि पेगू
- 3:05:32एक्वायर कर लिया जाता है। 1850 में लॉर्ड
- 3:05:35डलहौजी सिक्किम के राजा पर दो इंग्लिश
- 3:05:38डॉक्टर्स के साथ दुर्व्यवहार करने और
- 3:05:41उन्हें इंप्रजन करने का आरोप लगाते हैं।
- 3:05:43और इसी आरोप में सिक्किम के कुछ
- 3:05:45डिस्ट्रिक्ट्स को एनेक्स कर लेते हैं।
- 3:05:47जिसमें दार्जिलिंग भी शामिल था। और 1853
- 3:05:51में जब हैदराबाद के निजाम ईस्ट इंडिया
- 3:05:53कंपनी को उनकी ऑक्सिलियरी फोर्स के लिए
- 3:05:56पेमेंट करने में फेल हो जाते हैं, तब
- 3:05:58लॉर्ड डलहौजी निजाम को फोर्स करते हैं कि
- 3:06:01हैदराबाद कंटिंजेंट की मेंटेनेंस के लिए
- 3:06:03वह बेरार और उसके आसपास के कुछ
- 3:06:05डिस्ट्रिक्ट्स जिनका रेवेन्यू लगभग 50 लाख
- 3:06:08का था, कंपनी के हवाले कर दें। इस तरह
- 3:06:11बेरार जो आज के महाराष्ट्र के विदर्भ रीजन
- 3:06:14में लोकेटेड है कंपनी की टेरिटरी बन जाता
- 3:06:16है। दोस्तों एक तरह से कहा जा सकता है कि
- 3:06:20लॉर्ड डलहौजी कैसे भी करके अलग-अलग मेथड्स
- 3:06:23के द्वारा कंपनी की टेरिटरीज को एक्सपेंड
- 3:06:26करने में लगे हुए थे और इसमें सबसे ज्यादा
- 3:06:28सफल मेथड साबित होती है उनकी डॉक्ट्रिन ऑफ़
- 3:06:31लैप्स की पॉलिसी। तो आइए डॉक्ट्रिन ऑफ
- 3:06:34लैप्स की पॉलिसी को डिटेल में समझते हैं।
- 3:06:39डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स।
- 3:06:42दोस्तों अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो
- 3:06:44डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स के अनुसार अडॉप्टेड सन
- 3:06:47यानी कि गोद लिया हुआ बेटा अपने फादर की
- 3:06:50प्राइवेट प्रॉपर्टी का तो एयर हो सकता है
- 3:06:53लेकिन स्टेट का नहीं। यह डिसीजन पैरामाउंट
- 3:06:56पावर मतलब कि ब्रिटिश कंपनी का होगा कि
- 3:06:58स्टेट को अडॉप्टेड सन को दिया जाए या फिर
- 3:07:01उसे एनेक्स कर लिया जाए। अक्सर लॉर्ड
- 3:07:04डलहौजी को ही डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स की इस
- 3:07:06पॉलिसी का इन्वेंटर समझ लिया जाता है।
- 3:07:09लेकिन यह सही नहीं है। दरअसल सच तो यह है
- 3:07:12कि 1834 में ही कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने
- 3:07:15यह साफ कर दिया था कि लीनियल सक्सेसर्स के
- 3:07:18फेलियर के केस में अडॉप्ट करने की परमिशन
- 3:07:20देना कंपनी पर निर्भर करेगा। और यह परमिशन
- 3:07:24एक्सेप्शन की तरह होगी ना कि रूल की तरह।
- 3:07:27मतलब ऐसी परमिशन सिर्फ स्पेशल केसेस में
- 3:07:30ही दी जाएगी। और इसके तहत 1839 में मंडावी
- 3:07:35स्टेट और 1840 में कोलाबा और जालौन स्टेट
- 3:07:38को एनेक्स भी किया गया था। लेकिन बहुत से
- 3:07:41केसेस में अडॉप्टेड सन को रूल करने की
- 3:07:43परमिशन भी दी गई थी। जैसे कि 1827 में
- 3:07:46दौलतराव सिंधिया की डेथ के बाद उनके
- 3:07:48अडॉप्टेड सन जानको जी उनके स्टेट को एयर
- 3:07:52करते हैं। और 1843 में जानको जी की डेथ के
- 3:07:56बाद एक बार फिर से गोद लिए हुए बेटे जयजी
- 3:07:59राव को ही गद्दी मिलती है। जॉन सेलेवन के
- 3:08:02अनुसार 1826 से 1848 के बीच कम से कम 15
- 3:08:06नेटिव रूलर्स को अपने एयर्स अडॉप्ट करने
- 3:08:09की परमिशन दी गई थी। इसका मतलब यह हुआ कि
- 3:08:12लॉर्ड डलहौजी से पहले तक इस पॉलिसी को
- 3:08:15अंग्रेजों द्वारा यूनिफॉर्म तरीके से
- 3:08:17अप्लाई नहीं किया जा रहा था। लेकिन जब
- 3:08:19डलहौजी इंडिया आते हैं तो वह कुछ
- 3:08:21प्रिंसिपल्स अडॉप्ट करते हैं। उन्होंने
- 3:08:24इंडियन स्टेट्स को तीन कैटेगरीज में
- 3:08:26डिवाइड कर दिया। पहली कैटेगरी में वो
- 3:08:28स्टेट्स आते थे जिन्हें डायरेक्टली या
- 3:08:31इनडायरेक्टली ब्रिटिशर्स ने क्रिएट किया
- 3:08:33था। दूसरी कैटेगरी में थे ब्रिटिशर्स के
- 3:08:36डिपेंडेंट स्टेट्स। और तीसरी कैटेगरी थी
- 3:08:39इंडिपेंडेंट स्टेट्स की।
- 3:08:42डलहौजी डिसाइड करते हैं कि पहली कैटेगरी
- 3:08:44के स्टेट्स को किसी भी कंडीशन में अपने
- 3:08:47एयर्स अडॉप्ट करना अलाउड नहीं होगा और
- 3:08:50दूसरी कैटेगरी के स्टेट्स को अडॉप्शन के
- 3:08:52केस में ब्रिटिशर्स से परमिशन लेनी होगी।
- 3:08:55यह परमिशन दी भी जा सकती है और नहीं भी।
- 3:08:59थर्ड कैटेगरी के स्टेट्स पूरी तरह फ्री थे
- 3:09:02अपने एयर्स अडॉप्ट करने के लिए।
- 3:09:05डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स की पॉलिसी को अप्लाई
- 3:09:07करके लॉर्ड डलहौजी ने 1848 में सतारा को,
- 3:09:111849 में जयपुर और सललपुर को, 1850 में बग
- 3:09:15को, 1852 में उदयपुर को, 1853 में झांसी
- 3:09:20को और 1854 में नागपुर को एनेक्स किया था।
- 3:09:24दोस्तों, लॉर्ड डलहौजी बेसिकली एक
- 3:09:27एनेक्सेशनिस्ट थे। डॉक्ट्रिन ऑफ लैब्स की
- 3:09:29पॉलिसी को अप्लाई करके वह इंडिया में अपने
- 3:09:32एंबिशंस पूरा कर रहे थे। और जहां
- 3:09:34डॉक्ट्रिन ऑफ लैब्स अप्लाई नहीं हो पाती,
- 3:09:36वहां किसी और बहाने से उन्होंने एनेक्सेशन
- 3:09:39किया। इसका एग्जांपल है अवध स्टेट का
- 3:09:42एनेक्सेशन। आइए उसके बारे में भी जानते
- 3:09:44हैं। एनेक्सेशन ऑफ अवध।
- 3:09:48दोस्तों, आपको याद होगा कि 1765 में बैटल
- 3:09:52ऑफ बक्सर के बाद अवध के नवाब के साथ
- 3:09:54ब्रिटिशर्स ने ट्रीटी ऑफ़ इलाहाबाद साइन की
- 3:09:57थी। और उसके बाद 1801 में वेलेसली ने अवध
- 3:10:00के साथ सब्सिडियरी अलायंस की ट्रीटी साइन
- 3:10:03कर ली थी। जिसके बाद से ही अवध के नवाब
- 3:10:05एक्सटर्नल डिफेंस और लॉ एंड ऑर्डर की
- 3:10:08मेंटेनेंस के लिए पूरी तरह से कंपनी पर
- 3:10:10डिपेंड हो गए थे। 1856 में लॉर्ड डलहौजी
- 3:10:14अवध को मैल एडमिनिस्ट्रेशन के बेसिस पर
- 3:10:17एनेक्स कर लेते हैं। मतलब यह हुआ कि अवध
- 3:10:20के नवाब पर यह आरोप लगाया जाता है कि वह
- 3:10:23अवध को सही से रूल नहीं कर पा रहे हैं।
- 3:10:26वहां के एडमिनिस्ट्रेशन की स्थिति बहुत
- 3:10:28खराब हो चुकी है और प्रजा परेशान है।
- 3:10:31इसलिए अवध के लोगों को अच्छा
- 3:10:33एडमिनिस्ट्रेशन देने के लिए जरूरी है कि
- 3:10:36वहां नवाब का शासन खत्म करके ब्रिटिश रूल
- 3:10:39इस्टैब्लिश किया जाए। और इस तरह अवध भी
- 3:10:42ब्रिटिश टेरिटरी का हिस्सा बन जाता है।
- 3:10:45दोस्तों, ध्यान देने वाली बात यह है कि
- 3:10:47अवध में शासन की खराब स्थिति के लिए असल
- 3:10:50में ब्रिटिशर्स ही रिस्पांसिबल थे।
- 3:10:52सब्सिडियरी फोर्सेस के मेंटेनेंस के लिए
- 3:10:54अवध का काफी हिस्सा उन्होंने पहले ही
- 3:10:56एनेक्स कर लिया था। अवध के नवाब तो पूरी
- 3:10:59तरह उनके ऊपर ही डिपेंडेंट थे। इसलिए मैल
- 3:11:02एडमिनिस्ट्रेशन को एनेक्सेशन का वैलिड
- 3:11:04रीजन नहीं कहा जा सकता। वह तो बस लॉर्ड
- 3:11:06डलहौजी के लिए एक बहाना था अवध को एनेक्स
- 3:11:09करने का। असल में तो इंग्लैंड में चल रहे
- 3:11:12इंडस्ट्रियलाइजेशन के लिए कॉटन की बहुत
- 3:11:14ज्यादा डिमांड थी और अवध कॉटन प्रोडक्शन
- 3:11:17का एक फर्टाइल ग्राउंड था। लॉर्ड डलहौजी
- 3:11:20की एनेक्सेशन पॉलिसीज की वजह से इंडिया के
- 3:11:23नेटिव रूलर्स और आम जनता में ब्रिटिशर्स
- 3:11:26के अगेंस्ट एक आक्रोश की भावना पैदा हो
- 3:11:28जाती है जो आगे चलकर 1857 की क्रांति का
- 3:11:32एक कारण भी बनती है। खैर फिलहाल हम लॉर्ड
- 3:11:35डलहौजी के रिफॉर्म्स की तरफ चलते हैं।
- 3:11:37सबसे पहले जानते हैं उनके एडमिनिस्ट्रेटिव
- 3:11:39रिफॉर्म्स के बारे में।
- 3:11:43एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स।
- 3:11:47दोस्तों, लॉर्ड डलहौजी के इंडिया आने तक
- 3:11:50गवर्नर जनरल्स ना सिर्फ इंडिया में एंटायर
- 3:11:52ब्रिटिश टेरिटरी का सुपरविजन कर रहे थे,
- 3:11:55बल्कि बंगाल प्रोविंस को गवर्न करने की
- 3:11:57रिस्पांसिबिलिटी भी उन्हीं के हाथों थी।
- 3:12:00इस वजह से उनके ऊपर काम का बर्डन बहुत
- 3:12:03ज्यादा रहता था। इसलिए लॉर्ड डलहौजी ने
- 3:12:06बंगाल के एडमिनिस्ट्रेशन को देखने के लिए
- 3:12:08अलग से एक लेफ्टिनेंट गवर्नर का
- 3:12:10अपॉइंटमेंट कर दिया। इससे गवर्नर जनरल अब
- 3:12:13सिर्फ ऑल इंडिया अफेयर्स पर अपना ध्यान दे
- 3:12:15सकता था। इसी तरह से न्यूली एक्वायर्ड
- 3:12:18टेरिटरीज का चार्ज भी कमिश्नर्स को दे
- 3:12:20दिया गया था। जैसे कि पंजाब के केस में।
- 3:12:23इसके अलावा लॉर्ड डलहौजी से पहले तक
- 3:12:25पब्लिक वर्क्स के कंस्ट्रक्शन का काम
- 3:12:27मिलिट्री बोर्ड ही देखता था। यानी ब्रिज
- 3:12:30बनाना हो या सड़क बनानी हो, मिलिट्री से
- 3:12:33ही सारा काम लिया जाता था। आप समझ सकते
- 3:12:36हैं कि इससे सोल्जर्स की क्या हालत होती
- 3:12:38होगी। इसलिए डेलहौजी ने पब्लिक
- 3:12:40कंस्ट्रक्शन के लिए एक नया डिपार्टमेंट
- 3:12:43शुरू किया जिसे पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट
- 3:12:45यानी कि पीडब्ल्यूडी कहा जाता है। यह
- 3:12:48डिपार्टमेंट आज भी वर्क कर रहा है। डलहौजी
- 3:12:51के पीरियड में पीडब्ल्यूडी के द्वाराक से
- 3:12:55पेशावर तक ग्रैंड ट्रंक रोड का
- 3:12:57रिकंस्ट्रक्शन किया गया था। इसके अलावा
- 3:13:00गेंजीस कैनाल, पंजाब में बड़ी दुआ कैनाल
- 3:13:03और बहुत से ब्रिजेस का कंस्ट्रक्शन भी हुआ
- 3:13:06था। यह तो बात हुई लॉर्ड डलहौजी के
- 3:13:08एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स की। आइए अब
- 3:13:11जानते हैं उनके मिलिट्री रिफॉर्म्स के
- 3:13:13बारे में।
- 3:13:20दोस्तों, डलहौजी के एनेक्सेशंस ने ब्रिटिश
- 3:13:23इंडिया को ईस्ट में बंगाल से लेकर वेस्ट
- 3:13:25में पंजाब और सिंध तक एक्सटेंड कर दिया
- 3:13:28था। अब इतने एक्सटेंसिव एरिया के
- 3:13:30स्ट्रेटेजिक कंट्रोल के लिए ट्रूप्स के
- 3:13:32बेटर डिस्ट्रीब्यूशन की जरूरत भी महसूस
- 3:13:34होती है। इसलिए डलहौसी ने बंगाल आर्टिलरी
- 3:13:38के हेड क्वटर्स कोलकाता से मेरठ शिफ्ट कर
- 3:13:41दिया था। इसके साथ ही आर्मी के परमानेंट
- 3:13:43हेड क्वटर्स को भी शिमला शिफ्ट करने का
- 3:13:45काम शुरू हो जाता है। यह प्रोसेस फाइनली
- 3:13:481865 में कंप्लीट हुआ था। इसके साथ ही
- 3:13:51डलहौजी को यह भी महसूस होता है कि आर्मी
- 3:13:54में इंग्लिश सोल्जर्स की तुलना में इंडियन
- 3:13:56सोल्जर्स का नंबर बहुत ज्यादा बढ़ गया है
- 3:13:59जो कि एंपायर की सुरक्षा के लिए कभी भी
- 3:14:01खतरा बन सकता है। इसलिए वह इंग्लिश
- 3:14:04सोल्जर्स के नंबर को बढ़ाने की कोशिश भी
- 3:14:06करते हैं। इंग्लिश सोल्जर्स की तीन नई
- 3:14:09रेजीमेंट्स रेज की जाती हैं। पंजाब में
- 3:14:12ब्रिटिश ऑफिसर्स के अंडर में एक सिख आर्मी
- 3:14:14को भी रेज करते हैं। इसके अलावा डलहौजी
- 3:14:17इंडियन आर्मी में गोरखास की एक नई
- 3:14:19रेजीमेंट भी फॉर्म करते हैं। और इसमें कोई
- 3:14:22संदेह नहीं कि लॉर्ड डलहौजी के इन मेजर्स
- 3:14:25ने 1857 की क्रांति को सप्रेस करने में
- 3:14:28ब्रिटिशर्स की काफी मदद की थी। लेकिन वो
- 3:14:31कैसे? इसको हम अपनी नेक्स्ट वीडियो में
- 3:14:33समझेंगे। फिलहाल चलते हैं डलहौजी के
- 3:14:36एजुकेशनल रिफॉर्म्स की तरफ।
- 3:14:40एजुकेशनल रिफॉर्म्स।
- 3:14:44दोस्तों, लॉर्ड डलहौजी के टाइम में
- 3:14:46एजुकेशन की फील्ड में कई सारे इंपॉर्टेंट
- 3:14:48रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस किए गए थे। 1853
- 3:14:51में डलहौजी ने प्राइमरी एजुकेशन से
- 3:14:53रिलेटेड रेगुलेशंस पास की थी। यह
- 3:14:56रेगुलेशंस थॉमसोनियन सिस्टम ऑफ वर्नाकुलर
- 3:14:58एजुकेशन पर बेस्ड थी। इसमें कहा गया था कि
- 3:15:02प्राइमरी एजुकेशन वर्नाकुलर यानी कि लोकल
- 3:15:05लैंग्वेज में दी जाए। डलहौजी के समय में
- 3:15:08ही 1854 में वुड्स डिस्पैच भी आया था।
- 3:15:11जिसे इंडिया में इंग्लिश एजुकेशन का
- 3:15:14मैग्नाका भी कहा जाता है। इसमें कहा गया
- 3:15:17था कि हर डिस्ट्रिक्ट में स्कूल्स और
- 3:15:19कॉलेजेस खोले जाए। इसके साथ ही सभी
- 3:15:22प्रेसिडेंसी टाउन में यानी कि बॉम्बे,
- 3:15:24मद्रास औरक में एक यूनिवर्सिटी को
- 3:15:27इस्टैब्लिश किया जाए। इसमें यह भी सजेस्ट
- 3:15:30किया गया था कि गवर्नमेंट प्राइवेट
- 3:15:32ऑर्गेनाइजेशंस और इंडिविजुअल्स को स्कूल्स
- 3:15:34और कॉलेजेस शुरू करने के लिए सब्सिडी देकर
- 3:15:36इनकरेज करें। इसके साथ ही हर डिस्ट्रिक्ट
- 3:15:40में एक इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स होना चाहिए
- 3:15:42और हर एक प्रोविंस में एक डायरेक्टर ऑफ
- 3:15:44एजुकेशन। डलहौजी ने वुड्स डिस्पैच के इन
- 3:15:47सजेशंस को जहां तक संभव था इंप्लीमेंट
- 3:15:50करने की कोशिश की। 1857 मेंक, मद्रास और
- 3:15:54बॉम्बे में यूनिवर्सिटीज इस्टैब्लिश हुई
- 3:15:57थी। इसके साथ ही 1846 में रुड़की में
- 3:16:00इंजीनियरिंग कॉलेज औरक में एग्रीकल्चर
- 3:16:03इंस्टीट्यूशन भी इस्टैब्लिश की गई थी।
- 3:16:06दोस्तों, अब बात करते हैं डलहौजी के उन
- 3:16:08रिफॉर्म्स के बारे में जिसकी वजह से
- 3:16:10उन्हें मेकर ऑफ मॉडर्न इंडिया भी कहा जाता
- 3:16:13है। यानी कि रेलवे, टेलीग्राफ और पोस्टल
- 3:16:16सर्विज के रिफॉर्म्स के बारे में।
- 3:16:20डेवलपमेंट ऑफ रेलवेेज, टेलीग्राफ एंड
- 3:16:22पोस्टल सर्विज।
- 3:16:25दोस्तों, डलहौजी के टाइम पीरियड में
- 3:16:27इंडिया में ब्रिटिश डोमिनियंस को आयरन
- 3:16:29लाइन से जोड़ दिया गया। मतलब कि रेलवे
- 3:16:32लाइंस का डेवलपमेंट शुरू हो जाता है। 1853
- 3:16:36के अपने फेमस रेलवे मिनट में लॉर्ड डेलहजी
- 3:16:39ने स्कीम की ब्रॉड आउटलाइंस को सामने रखा
- 3:16:41था जो इंडिया में फ्यूचर रेलवे एक्सटेंशन
- 3:16:44का बेसिस फॉर्म करती हैं। 1853 में ही
- 3:16:48बॉम्बे से ठाणे तक फर्स्ट रेलवे लाइन को
- 3:16:50तैयार किया गया। इसके अगले साल कोलकाता से
- 3:16:53रानीगंज कोल फील्ड्स तक रेलवे लाइन शुरू
- 3:16:56की गई। ध्यान रखने वाली बात यह है दोस्तों
- 3:16:59कि इंडिया में रेलवेेज का डेवलपमेंट
- 3:17:01प्राइवेट कंपनीज के द्वारा किया जा रहा था
- 3:17:04और वह भी ब्रिटिश कंपनीज। रेलवे में
- 3:17:07इन्वेस्ट करने पर उन्हें ब्रिटिश
- 3:17:08गवर्नमेंट 5% का गारंटीड इंटरेस्ट भी
- 3:17:11प्रॉमिस करती है। रेलवे का डेवलपमेंट
- 3:17:14लॉर्ड डलहौजी इंडिया को मॉडर्नाइज करने के
- 3:17:16लिए नहीं करते। बल्कि उनका मकसद तो
- 3:17:19ब्रिटिश ट्रेड को प्रमोट करना और कॉलोनियल
- 3:17:22इंटरेस्ट को आगे ले जाना ही था। लेकिन फिर
- 3:17:24भी रेल्वेज के डेवलपमेंट ने इंडिया को
- 3:17:27यूनिफाई करने का काम किया और इनडायरेक्टली
- 3:17:30नेशनलिज्म को प्रमोट किया। 1852 में
- 3:17:34इंडिया में इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ सिस्टम
- 3:17:36भी इंट्रोड्यूस किया गया। यह एक बहुत ही
- 3:17:38इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट था क्योंकि
- 3:17:40टेलीग्राफ की मदद से देश के एक कोने से
- 3:17:43दूसरे कोने तक तुरंत मैसेज पहुंचा सकते
- 3:17:45थे। लगभग 4000 माइल्स की इलेक्ट्रिक
- 3:17:49टेलीग्राफ लाइंस कंस्ट्रक्ट की जाती हैं
- 3:17:51जोक को पेशावर, बॉम्बे, मद्रास और देश के
- 3:17:54अन्य हिस्सों से जोड़ देती हैं। इसके
- 3:17:57अलावा 1854 में एक नया पोस्ट ऑफिस एक्ट
- 3:18:00पास हुआ और पहली बार पोस्टेड स्टैंप्स इशू
- 3:18:03किए गए। लेटर को चाहे कितनी भी डिस्टेंस
- 3:18:06के लिए भेजना हो, हर लेटर के लिए आधा आना
- 3:18:10यानी कि 2 पैसे का यूनिफॉर्म रेट फिक्स कर
- 3:18:12दिया गया। इन रिफॉर्म्स की वजह से पोस्ट
- 3:18:15ऑफिस जो अभी तक बस ट्रेजरी को ड्रेन करने
- 3:18:18का काम ही कर रहा था, अब एक सोर्स ऑफ
- 3:18:20रेवेन्यू बन जाता है। दोस्तों, लॉर्ड
- 3:18:23डलहौजी के टाइम पीरियड में हुए इन
- 3:18:25डेवलपमेंट्स ने इंडिया में ट्रांसपोर्ट
- 3:18:27एंड कम्युनिकेशन को मॉडर्नाइज करने का काम
- 3:18:30किया।
- 3:18:31कंक्लूजन
- 3:18:35डलहौजी ने इंडिया में बहुत से रिफॉर्म्स
- 3:18:37इंट्रोड्यूस किए थे। लेकिन उनका प्राइमरी
- 3:18:40मोटिव इंडिया में ब्रिटिश एंपायर को
- 3:18:42सेफगार्ड और कंसोलिडेट करना ही था।
- 3:18:45दोस्तों हमें नहीं भूलना चाहिए कि डलहौजी
- 3:18:48एक इंपीरियलिस्ट थे। उन्हें इंडिया के
- 3:18:51लोगों की विशेस या सेंटीमेंट्स की कोई
- 3:18:53परवाह नहीं थी। इसलिए उन्होंने एनेक्सेशंस
- 3:18:56करते समय किसी भी तरह के मोरल्स को फॉलो
- 3:18:59नहीं किया। फिर बात चाहे पंजाब के साथ
- 3:19:02बिटियल की हो या अवध जैसे पुराने अलय को
- 3:19:05धोखा देने की। डेलहौजी ने ब्रिटिश एंपायर
- 3:19:08को एक्सपेंड करने के लिए साम, दाम, दंड,
- 3:19:11भेद सभी तरह की नीतियों का इस्तेमाल किया।
- 3:19:14और जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं, उनकी
- 3:19:16पॉलिसीज को 1857 की क्रांति का एक
- 3:19:20इंपॉर्टेंट कारण भी माना जाता है। फॉरेन
- 3:19:23पॉलिसी ऑफ द ब्रिटिश।
- 3:19:29दोस्तों इंडिया पर रूल करते समय पड़ोसी
- 3:19:31देश जैसे कि नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान,
- 3:19:34बर्मा एटसेट्रा के साथ भी ब्रिटिशर्स का
- 3:19:36कांटेक्ट होता है। वो कैसे इनके साथ अपने
- 3:19:39रिश्ते निभाते हैं? यानी कि ब्रिटिशर्स की
- 3:19:41फॉरेन पॉलिसी क्या कहती है? इसको भी हम आज
- 3:19:44डिस्कस करने वाले हैं। आइए सबसे पहले
- 3:19:47भूटान के साथ ब्रिटिश रिलेशंस की बात करते
- 3:19:50हैं। एंग्लो भूटनीज रिलेशंस।
- 3:19:5519th सेंचुरी के दौरान ब्रिटिशर्स द्वारा
- 3:19:57बहुत से डिप्लोमेटिक मिशनंस भूटान भेजे
- 3:20:00जाते हैं। इनका ऑफिशियली तो यही कारण
- 3:20:02बताया जाता है कि भूटान क्रॉस बॉर्डर रेड
- 3:20:05कर रहा है या फिर डिसिडेंट्स को शेल्टर दे
- 3:20:08रहा है। लेकिन असली वजह तो ब्रिटिशर्स के
- 3:20:11इंपीरियलिस्ट एंबिशंस थे। भूटान इंडो
- 3:20:14टिबेटन ट्रेड के लिए तो वाइटल था ही। इसके
- 3:20:17अलावा टी प्लांटेशन के लिए द्वार रीजन की
- 3:20:19कमर्शियल वायबिलिटी भी सभी जानते थे। सबसे
- 3:20:22इंपॉर्टेंट पीस मिशन 186364
- 3:20:26में वायसरॉय लॉर्ड एल्जियन द्वारा भेजा
- 3:20:28जाता है। इसे ऐशली ईडन के नेतृत्व में
- 3:20:32भेजा गया था। लेकिन भूटनीज इनके ऑफर को
- 3:20:34रिजेक्ट कर देते हैं। ईडन यह भी क्लेम
- 3:20:37करते हैं कि भूटान में उन्हें मिस्रीट
- 3:20:39किया गया। जिसके बाद नवंबर 1864 में
- 3:20:43ब्रिटिश भूटान के अगेंस्ट वॉर डिक्लेअ कर
- 3:20:45देते हैं। इसे द्वार वॉर कहा जाता है।
- 3:20:49भूटान के पास कोई रेगुलर आर्मी नहीं थी।
- 3:20:52ओस मौजूद थी। वो मैच लॉक्स, बो एंड एरोस,
- 3:20:55स्वर्ड्स, नाइव्स जैसे वेपंस के साथ वेल
- 3:20:58इक्विप्ड ब्रिटिश आर्मी का सामना करती है।
- 3:21:01यह वॉर सिर्फ 5 महीने तक ही चलता है और
- 3:21:04भूटान अपनी लगभग 20% टेरिटरीज में खो देता
- 3:21:07है। इसके साथ ही पिछले बॉर्डर क्लैशेस में
- 3:21:10ऑक्यूुपाई की हुई इंडियन टेरिटरीज को भी
- 3:21:13सरेंडर करता है। इसके बाद 11th नवंबर 1865
- 3:21:17को ट्रीटी ऑफ सिंचुला साइन की जाती है।
- 3:21:20जिसके अनुसार भूटान, असम द्वार्स और बंगाल
- 3:21:23द्वार्स की टेरिटरीज़ ब्रिटिशर्स को दे
- 3:21:25देता है। यही सरेंडर किए हुए
- 3:21:28डिस्ट्रिक्ट्स ब्रिटिशर्स द्वारा टी
- 3:21:29गार्डन्स के रूप में डेवलप किए जाते हैं।
- 3:21:33इसके अलावा साउथ ईस्टर्न भूटान में
- 3:21:35दीवानगिरी की 83 स्क्वायर कि.मी. की
- 3:21:38टेरिटरी भी ब्रिटिशर्स की हो जाती है।
- 3:21:41जिसके बदले में भूटान को ₹0000 की एनुअल
- 3:21:44सब्सिडी देने का प्रॉमिस किया जाता है।
- 3:21:47ट्रीटी ऑफ सिंचुला 1910 तक ऐसे ही बनी
- 3:21:50रहती है। 1910 में इसे रिवाइज करके नई
- 3:21:54ट्रीटी साइन की जाती है जिसे ट्रीटी ऑफ
- 3:21:57पुनाखा कहते हैं। ट्रीटी ऑफ़ पुनाखा 8th
- 3:22:01जनवरी 1910 को साइन की जाती है। इसमें
- 3:22:04ब्रिटेन भूटान को इंडिपेंडेंस की गारंटी
- 3:22:07देता है। साथ ही भूटनीज रॉयल गवर्नमेंट को
- 3:22:10दिए जाने वाला स्टाइपेंड भी बढ़ा देता है
- 3:22:13और बदले में भूटनीज फॉरेन रिलेशंस ब्रिटिश
- 3:22:16इंडिया के कंट्रोल में आ जाते हैं। 1947
- 3:22:20तक ट्रीटी ऑफ पुनाखा ही भूटान के साथ
- 3:22:23ब्रिटिश इंडिया के रिलेशंस को गाइड करती
- 3:22:25है। भूटान के बाद अब दूसरे माउंटेनियस
- 3:22:28नेबर्स यानी कि नेपाल की बात करते हैं।
- 3:22:33एंग्लो नेपलीस रिलेशंस।
- 3:22:36दोस्तों 1768 में गोरखास ने नेपाल पर अपना
- 3:22:39कंट्रोल इस्टैब्लिश कर लिया था। इसके बाद
- 3:22:42वह अपनी डोमिनियन को माउंटेंस के आगे
- 3:22:44एक्सपेंड करना शुरू करते हैं। नॉर्थ में
- 3:22:47तो चाइनीस इन्हें एक्सपेंशन करने नहीं
- 3:22:49देते। इसलिए यह बंगाल और अवध की तरफ पुश
- 3:22:52करते हैं। दूसरी तरफ 1801 में ईस्ट इंडिया
- 3:22:56कंपनी गोरखपुर डिस्ट्रिक्ट को ऑक्यूुपाई
- 3:22:59कर लेती है। जिसके बाद उनका फ्रंटियर
- 3:23:01गोरखास की टेरिटरी के डायरेक्ट टच में आ
- 3:23:04जाता है और दोनों के बीच कॉन्फ्लिक्ट शुरू
- 3:23:06होता है। जब गोरखास बुटवाल और शिवराज
- 3:23:10डिस्ट्रिक्ट्स पर कब्जा कर लेते हैं। उस
- 3:23:12समय तो ब्रिटिशर्स बिना किसी ओपन
- 3:23:14कॉन्फ्लिक्ट के इन डिस्ट्रिक्ट्स को
- 3:23:16रीऑक्यूपाई कर लेते हैं। लेकिन मई 1814
- 3:23:19में गोरखास एक बार फिर से बुटवाल के तीन
- 3:23:23पुलिस स्टेशंस पर अटैक कर देते हैं।
- 3:23:25गवर्नर जनरल लॉर्ड हेस्टिंग्स इसे एक
- 3:23:28चैलेंज की तरह लेते हैं और गोर्खास के
- 3:23:30अगेंस्ट ऑफेंसिव लॉन्च करने का डिसीजन
- 3:23:32लेते हैं। 12,000 की गुर्खा आर्मी के
- 3:23:35अगेंस्ट हेस्टिंग्स 34,000 सोल्जर्स की
- 3:23:38बड़ी आर्मी तैयार करते हैं। लेकिन 1814-15
- 3:23:41का यह कैंपेन बुरी तरह फेल हो जाता है।
- 3:23:44इसके बाद भी ब्रिटिशर्स हार नहीं मानते और
- 3:23:46फिर से कोशिश करते हैं। 1815 में वह
- 3:23:50कुमाऊं हिल्स में अल्मोड़ा को कैप्चर करने
- 3:23:52में कामयाब होते हैं। और मई 1815 में अमर
- 3:23:56सिंह थापा से मालाओं का फोर्ट भी जीत लिया
- 3:23:59जाता है। मालाओं के फॉल के बाद गोरखास
- 3:24:02नेगोशिएशंस करने के लिए तैयार हो जाते
- 3:24:04हैं। लेकिन हेस्टिंग्स की डिमांड्स उनका
- 3:24:07एटीट्यूड चेंज कर देती है और एक बार फिर
- 3:24:10से दोनों के बीच हॉस्टलिटीज शुरू हो जाती
- 3:24:13हैं। फरवरी 1816 में नेपलीज़ को मकवानपुर
- 3:24:17में बुरी तरह हरा दिया जाता है। इसके बाद
- 3:24:20गुरखाज़ समझ जाते हैं कि उनके लिए अब
- 3:24:22ब्रिटिश को और रेजिस्ट करना पॉसिबल नहीं
- 3:24:25है। और इसीलिए मार्च 1816 में वह ट्रीटी
- 3:24:28ऑफ सगोली को एक्सेप्ट कर लेते हैं। ट्रीटी
- 3:24:31के अकॉर्डिंग गुरखाज़ गढ़वाल और कुमाऊं
- 3:24:34डिस्ट्रिक्ट्स कंपनी को सरेंडर कर देते
- 3:24:36हैं। इसके साथ ही दोनों के बीच तराई
- 3:24:38बाउंड्री को पिलर्स के थ्रू मार्क कर दिया
- 3:24:41जाता है। गोरखाज़ काठमांडू में ब्रिटिश
- 3:24:44रेजिडेंट रखने के लिए भी मान जाते हैं और
- 3:24:46इसके साथ ही सिक्किम से परमानेंटली विड्रॉ
- 3:24:49करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
- 3:24:51ब्रिटिशर्स को हिल स्टेशंस और समर
- 3:24:53कैपिटल्स के लिए साइट भी मिल जाती हैं।
- 3:24:56जैसे कि शिमला, मसूरी, रानीखेत एटसेट्रा।
- 3:24:59इसके साथ ही ब्रिटिशर्स गोरखास को अपनी
- 3:25:02आर्मी में भी शामिल कर लेते हैं जो आगे
- 3:25:04चलकर इंडिया में कंपनी के डोमिनियन को
- 3:25:07एक्सपेंड करने में काफी हेल्प करते हैं।
- 3:25:10आइए अब बर्मा यानी कि प्रेजेंट डे
- 3:25:12म्यांमार के साथ ब्रिटिशर्स के रिलेशंस को
- 3:25:15डिस्कस करते हैं।
- 3:25:17एंग्लोबर्मीस रिलेशंस।
- 3:25:2119th सेंचुरी की शुरुआत में बर्मा एक फ्री
- 3:25:24कंट्री हुआ करता था और वेस्ट की तरफ अपनी
- 3:25:27टेरिटरी एक्सपेंड करना चाहता था। लेकिन
- 3:25:29इंडिया में ब्रिटिशर्स का रूल था और वह
- 3:25:31बर्मा पर अपना कंट्रोल इस्टैब्लिश करना
- 3:25:34चाहते थे। इसके पीछे बहुत से कारण थे।
- 3:25:36सबसे पहले तो बर्मा के फॉरेस्ट रिसोर्सेज
- 3:25:39में ब्रिटिशर्स का इंटरेस्ट था। उसके
- 3:25:42अलावा बर्मा ब्रिटिश मैन्युफैक्चरर्स के
- 3:25:44लिए मार्केट भी प्रोवाइड कर सकता था। इसके
- 3:25:47साथ ही ब्रिटिशर्स बर्मा और बाकी के साउथ
- 3:25:50ईस्ट एशिया में फ्रेंच एंबिशंस को
- 3:25:52नियंत्रित भी करना चाहते थे। इसकी वजह से
- 3:25:55तीन एंग्लो बर्मीज़ वॉर होती हैं। और 1885
- 3:25:58में बर्मा को ब्रिटिश इंडिया में एनिक्स
- 3:26:01कर लिया जाता है। आइए एक-एक करके तीनों
- 3:26:03वॉर्स के बारे में जानते हैं। फर्स्ट
- 3:26:06बर्मा वॉर 1824 26।
- 3:26:1019th सेंचुरी की शुरुआत में बर्मीज वेस्ट
- 3:26:13वर्ल्ड यानी कि इंडिया की तरफ एक्सपेंशन
- 3:26:15करने की कोशिश करते हैं। जिसमें वह अराकान
- 3:26:18और मणिपुर को ऑक्यूुपाई कर लेते हैं। साथ
- 3:26:21ही आसाम और ब्रह्मपुत्र वैली को भी लगातार
- 3:26:24थ्रेटन करते हैं। इसकी वजह से ब्रिटिशर्स
- 3:26:26के साथ इनका लगातार गतिरोध बना रहता है।
- 3:26:30और फिर सितंबर 1823 में बर्मा चिटागोंग के
- 3:26:33पास लोकेटेड शालपुरी आइलैंड पर कब्जा कर
- 3:26:36लेता है। इस आइलैंड को ईस्ट इंडिया कंपनी
- 3:26:39अपनी टेरिटरी समझती थी। इसके बाद से ही
- 3:26:42दोनों के बीच बैटल्स का सिलसिला शुरू हो
- 3:26:44जाता है। शुरुआत में यह बैटल्स अराकान और
- 3:26:47मणिपुर के रीजंस में होते हैं। जहां
- 3:26:49बर्मीस फोर्सेस ब्रिटिशर्स पर भारी पड़ती
- 3:26:52हैं। क्योंकि उन्हें यहां के जंगल्स में
- 3:26:54फाइट करने का काफी एक्सपीरियंस था। इसलिए
- 3:26:57ब्रिटिशर्स इस फाइट को बर्मीज मेन लैंड पर
- 3:27:00ले जाते हैं। 11th मई 1824 को अचानक से
- 3:27:03ब्रिटिश नेवल फोर्स यांगोन यानी कि रंगून
- 3:27:06हारबर में एंटर करती है और बर्मीज़ को
- 3:27:09सरप्राइज देती है। इसके बाद लगभग 2 साल तक
- 3:27:12दोनों के बीच इंटेंस बैटल्स होते हैं।
- 3:27:14फाइनली दिसंबर 1825 में बर्मीज़ ब्रिटिशर्स
- 3:27:18के साथ ट्रूस करने के लिए तैयार हो जाते
- 3:27:21हैं। नेगोशिएशंस शुरू होती हैं और फरवरी
- 3:27:241826 में ट्रीटी ऑफ यानडाबो के जरिए दोनों
- 3:27:28के बीच शांति स्थापित होती है। इस ट्रीटी
- 3:27:31के अनुसार बर्मा की गवर्नमेंट ₹1 करोड़
- 3:27:34वॉर कंपनसेशन के रूप में देने के लिए
- 3:27:36तैयार होती है। साथ ही अपने कोस्टल
- 3:27:38प्रोविंसेस अराकान और टेननेसेसरम
- 3:27:41ब्रिटिशर्स को दे देती हैं। इसके अलावा
- 3:27:44आसाम, कछार और जयंतिया पर क्लेम करना भी
- 3:27:47छोड़ देती हैं। और मणिपुर को एक
- 3:27:49इंडिपेंडेंट स्टेट की तरह रिकॉग्नाइज कर
- 3:27:52लेती हैं। इसके अलावा ब्रिटिशर्स के साथ
- 3:27:55कमर्शियल ट्रीटी करने के लिए भी बर्मा
- 3:27:57तैयार हो जाता है और कैपिटल आवा में
- 3:28:00ब्रिटिश रेजिडेंट को एक्सेप्ट करती है।
- 3:28:02साथ हीक में बर्मीज़ ऑनवॉय भी पोस्ट किया
- 3:28:06जाता है। इस वॉर ने ब्रिटिश इंडिया के
- 3:28:09फाइनेंससेस को पूरी तरह बर्बाद कर दिया
- 3:28:11था। लगभग 13 मिलियन पाउंड स्टर्लिंग इस
- 3:28:14वॉर पर खर्च हुए थे और करीब 15,000
- 3:28:17सोल्जर्स की इस पूरे कैंपेन के दौरान डेथ
- 3:28:20हो गई थी। जिसमें मेजॉरिटी इंडियन ट्रूप्स
- 3:28:23की ही थी। इस तरह ब्रिटिशर्स के
- 3:28:25इंपीरियलिस्ट एम्स को पूरा करने के लिए
- 3:28:28इंडियन रेवेन्यू और ह्यूमन रिसोर्सेज को
- 3:28:31एक्सप्लइट किया गया था।
- 3:28:33इसके बाद 1852 में एक और एंग्लो बर्मा वॉर
- 3:28:37होती है। सेकंड बर्मा वॉर 1852
- 3:28:41बर्मा के साथ ब्रिटिशर्स का सेकंड वॉर
- 3:28:43कमर्शियल नीड और लॉर्ड डलहौजी की
- 3:28:45इंपीरियलिस्ट पॉलिसी की वजह से होता है।
- 3:28:48ब्रिटिश मर्चेंट्स अपर बर्मा के टिमबर
- 3:28:51रिसोर्सेज चाहते थे। साथ ही बर्मीज़
- 3:28:53मार्केट में और ज्यादा पेनिट्रेट करना
- 3:28:55चाहते थे। 1852 में लॉर्ड डलहौजी ट्रीटी
- 3:28:59ऑफ यांडाबो से रिलेटेड कुछ माइनर इश्यूज
- 3:29:01को रिॉल्व करने के बहाने कॉमोडोर जॉर्ज
- 3:29:04लैमबर्ट को बर्मा भेजते हैं। बर्मीस तुरंत
- 3:29:07ही इन्हें कंसेशंस दे देते हैं। लेकिन फिर
- 3:29:10भी लैमबर्ट रंगून के पोर्ट को ब्लॉक कर
- 3:29:12देते हैं। और बर्मीस किंग पेगन के रॉयल
- 3:29:15शिप को भी सीज कर लेते हैं। इस तरह वो
- 3:29:18बर्मा को नेवल कॉन्फ्रंटेशन के लिए
- 3:29:20प्रोवोक करते हैं और सेकंड एंग्लो बर्मीज़
- 3:29:23वॉर की शुरुआत हो जाती है। ब्रिटिशर्स को
- 3:29:26बर्मा की तरफ से इंटेंस गोरिल्ला
- 3:29:28रेजिस्टेंस फेस करना पड़ता है। लॉर्ड
- 3:29:30डलहौजी इस समय बर्मा को एनेक्स नहीं करना
- 3:29:33चाहते थे। दिसंबर 1852 में किंग पेगन को
- 3:29:36इन्फॉर्म किया जाता है कि अब से पेगू
- 3:29:38कंपनी डोमिनियन का पार्ट होगा जो कि बर्मा
- 3:29:41का आखिरी कोस्टल प्रोविंस था। 20th जनवरी
- 3:29:451853 को एनेक्सेशन की फॉर्मल प्रोक्लेमेशन
- 3:29:48इशू कर दी जाती है। इस तरह सेकंड एंग्लो
- 3:29:51बर्मीस वॉर बिना किसी ट्रीटी के ही एंड हो
- 3:29:54जाता है। इसके बाद 1885 में एक बार फिर से
- 3:29:58बर्मा के साथ कॉन्फ्लिक्ट शुरू होता है।
- 3:30:02थर्ड बर्मा वॉर 1885।
- 3:30:061880 के दौरान बर्मा और फ्रांस के बीच
- 3:30:09बढ़ती नजदीकियां ब्रिटिशर्स के लिए कंसर्न
- 3:30:11बन जाती हैं। 1885 में फ्रेंच काउंसिल
- 3:30:15एमहास बर्मीज़ गवर्नमेंट के साथ नेगोशिएट
- 3:30:18करने के लिए मेंडले आते हैं। और बर्मा में
- 3:30:21एक फ्रेंच बैंक और मेंडले से ब्रिटिश
- 3:30:23बर्मा के नॉर्दर्न बॉर्डर तक रेल लिंक के
- 3:30:26कंस्ट्रक्शन की बात करते हैं। ब्रिटिशर्स
- 3:30:29यहां अपनी डिप्लोमेटिक पावर्स का यूज करते
- 3:30:31हैं। और फ्रेंच गवर्नमेंट को बर्मा से हास
- 3:30:34को रिकॉल करने के लिए कन्विंस कर लेते
- 3:30:36हैं। इस बार तो फ्रेंच बर्मा से वापस चले
- 3:30:39जाते हैं। लेकिन इस तरह के इवेंट्स
- 3:30:41ब्रिटिशर्स को बर्मा के अगेंस्ट एक्शन
- 3:30:43लेने के लिए कन्विंस कर देते हैं। अब
- 3:30:46उन्हें बस एक मौके की तलाश थी जो जल्द ही
- 3:30:48उन्हें मिल जाता है। बर्मा में काम कर रही
- 3:30:51एक ब्रिटिश टिमबर कंपनी बॉम्बे बर्मा
- 3:30:54ट्रेडिंग कॉरपोरेशन पर बर्मीज़ कोर्ट फाइन
- 3:30:56लगा देती है। क्योंकि इन्होंने बर्मीस टीक
- 3:30:59के एक्सट्रैक्शन को अंडर रिपोर्ट किया था
- 3:31:02और अपने एंप्लाइज को भी पे नहीं किया था।
- 3:31:05बर्मीस ऑफिशियलल्स कंपनी के टिमबर को सीज
- 3:31:07कर लेते हैं। लेकिन कंपनी और ब्रिटिश
- 3:31:10गवर्नमेंट क्लेम करती है कि यह चार्जेस
- 3:31:13गलत हैं और बर्मीज़ कोर्ट्स करप्ट हैं।
- 3:31:16ब्रिटिशर्स बर्मीज़ गवर्नमेंट से डिमांड
- 3:31:18करते हैं कि इस डिस्प्यूट को सेटल करने के
- 3:31:20लिए वह ब्रिटिश अपॉइंटेड आर्बिट्रेटर को
- 3:31:23एक्सेप्ट कर ले। और जब बर्मीज़ ऐसा करने
- 3:31:26से मना कर देते हैं तब 12th अक्टूबर 1885
- 3:31:29को ब्रिटिश गवर्नमेंट एक अल्टीमेटम इशू
- 3:31:32करती है। जिसमें कहा जाता है कि बर्मीज
- 3:31:35में एक नया ब्रिटिश रेजिडेंट एक्सेप्ट
- 3:31:38करें और उसके अराइवल तक कंपनी पर लगा कोई
- 3:31:42भी लीगल एक्शन या फाइन सस्पेंड किया जाए।
- 3:31:45साथ ही बर्मा अपने फॉरेन रिलेशंस ब्रिटिश
- 3:31:48कंट्रोल में दे दें। इसके अलावा नॉर्दन
- 3:31:51बर्मा और चाइना के बीच ट्रेड के विकास के
- 3:31:53लिए ब्रिटिशर्स को कमर्शियल फैसिलिटीज भी
- 3:31:55प्रोवाइड करें। इस अल्टीमेटम को एक्सेप्ट
- 3:31:58करने से बर्मा की रियल इंडिपेंडेंस खत्म
- 3:32:01हो जाती है। इसलिए बर्मीज़ गवर्नमेंट इसे
- 3:32:04मानने से मना कर देती है। जिसके बाद थर्ड
- 3:32:07एंग्लो बर्मीज़ वॉर की शुरुआत हो जाती है।
- 3:32:10नवंबर में ही मैडले पर ब्रिटिशर्स का
- 3:32:12कब्जा हो जाता है और बर्मा के किंग्स
- 3:32:15सरेंडर कर देते हैं। फर्स्ट जनवरी 1886 को
- 3:32:19बर्मा को फॉर्मली ब्रिटिश इंडिया में
- 3:32:21एनेक्स कर लिया जाता है। एनिक्सेशन के कुछ
- 3:32:24समय बाद ही पूरे बर्मा में ब्रिटिशर्स के
- 3:32:26अगेंस्ट एक गोरिल्ला प्राइजिंग शुरू हो
- 3:32:28जाती है जो 1896 तक चलती रहती है और फिर
- 3:32:34फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के बाद यहां नेशनलिस्ट
- 3:32:36मूवमेंट शुरू होता है। बर्मा के नेशनलिस्ट
- 3:32:39इंडियन नेशनल कांग्रेस के साथ हाथ मिला
- 3:32:42लेते हैं। इस लिंक को कमजोर करने के लिए
- 3:32:441935 में बर्मा को इंडिया से सेपरेट कर
- 3:32:48दिया जाता है। उंगसांग की लीडरशिप में
- 3:32:51बर्मीज़ नेशनलिस्ट मूवमेंट और ज्यादा तीव्र
- 3:32:54होता है। और फाइनली 4th जनवरी 1948 को
- 3:32:57बर्मा को इंडिपेंडेंस मिलती है। अब बात
- 3:33:00करते हैं तिबेट के साथ ब्रिटिश रिलेशंस
- 3:33:03की।
- 3:33:06एंग्लो तिबेटियन रिलेशंस।
- 3:33:10तिबेट में थियोक्रेटिक रूल हुआ करता था।
- 3:33:13इसे बुद्धिस्ट मंक्स या लामाज़ रूल कर रहे
- 3:33:16थे और चाइना की सिर्फ नॉमिनल सुजरनिटीज पर
- 3:33:20थी। ब्रिटिशर्स ने काफी कोशिश की थी तिबेट
- 3:33:23के साथ फ्रेंडली और कमर्शियल रिलेशंस
- 3:33:25स्थापित करने की। लेकिन कर्जन के आने तक
- 3:33:28उन्हें इसमें कोई सफलता नहीं मिली थी।
- 3:33:31वाइससरॉय लॉर्ड कर्जन के समय लासा में
- 3:33:34रशियन इन्फ्लुएंस बढ़ता ही जा रहा था।
- 3:33:36तिबेट में रशियन आर्म्स और एमिनेशन आने की
- 3:33:39रिपोर्ट आ रही थी जो कर्जन के लिए चिंता
- 3:33:42की बात थी। इसलिए वह कर्नल यंग हस्बैंड के
- 3:33:44नेतृत्व में एक गुर्खा कंटिंजेंट को तिबेट
- 3:33:47के साथ एग्रीमेंट करने के लिए भेज देते
- 3:33:49हैं। तिबेटियंस नेगोशिएट करने से इंकार कर
- 3:33:52देते हैं और नॉन वायलेंट तरीके से विरोध
- 3:33:55शुरू करते हैं। यंग हस्बैंड अगस्त 194 में
- 3:33:59लासा पहुंच जाते हैं। उस समय के दलाई लामा
- 3:34:02लासा छोड़कर भाग जाने पर मजबूर होते हैं।
- 3:34:05और यंग हस्बैंड तिब्बेटन ऑफिशियल्स के साथ
- 3:34:08फोर्सफुली ट्रीटी साइन करते हैं। जिसे
- 3:34:11ट्रीटी ऑफ़ लासा कहा जाता है। इसके अनुसार
- 3:34:14तिब्बेट को ₹75 लाख की इंडेमनिटी पे करने
- 3:34:17के लिए कहा जाता है। पेमेंट की सिक्योरिटी
- 3:34:19के रूप में 75 साल तक चुंबी वैली को
- 3:34:22ब्रिटिशर्स ऑक्यूुपाई कर लेते हैं। इसके
- 3:34:25साथ ही यातंग, ज्ञानसे और गारतक में ट्रेड
- 3:34:28मार्ट्स ओपन करने के लिए भी कहा जाता है।
- 3:34:31इसके अलावा तिबेट रेल्वेज रोड या
- 3:34:34टेलीग्राफ के लिए किसी भी फॉरेन स्टेट को
- 3:34:36कोई कंसेशन नहीं दे सकता था। सिर्फ ग्रेट
- 3:34:39ब्रिटेन को तिबेट के फॉरेन अफेयर्स में
- 3:34:42कुछ कंट्रोल दिया जाता है। कर्जन की इस
- 3:34:44पॉलिसी की वजह से तिबेट में सभी रशियन
- 3:34:47स्कीम्स को काउंटर एक्ट कर लिया जाता है।
- 3:34:50नॉर्थ के बाद अब नॉर्थ वेस्टर्न फ्रंटियर
- 3:34:52की तरफ चलते हैं और डिस्कस करते हैं
- 3:34:54एंग्लो अफगान रिलेशंस को।
- 3:34:58एंग्लो अफगान रिलेशंस।
- 3:35:02दोस्तों 19th सेंचुरी की शुरुआत में
- 3:35:04परर्शिया में रशियन इनफ्लुएंस काफी बढ़ने
- 3:35:06लगता है और 1828 में हुई ट्रीटी ऑफ
- 3:35:10तुर्कोचाई के बाद ब्रिटिशर्स को लगता है
- 3:35:12कि रशिया उनके इंडियन एंपायर पर अटैक
- 3:35:15प्लान कर रहा है। क्योंकि नॉर्थ वेस्ट के
- 3:35:18पाससेस से इंडिया में इजीली एंटर किया जा
- 3:35:20सकता था। इसलिए अफगानिस्तान में एक
- 3:35:23फ्रेंडली रूलर की जरूरत महसूस की जाती है
- 3:35:25जो ब्रिटिश कंट्रोल में रहे। इसी इंटेंशन
- 3:35:28से एंग्लो अफगान रिलेशंस गाइड होते हैं।
- 3:35:31फॉरवर्ड पॉलिसी ऑफ ऑल
- 3:35:341836 में लॉर्ड ऑकलैंड इंडिया के गवर्नर
- 3:35:37जनरल बनते हैं। और यह फॉरवर्ड पॉलिसी की
- 3:35:40बात करते हैं। इसका मतलब था कि कंपनी खुद
- 3:35:43से इनिशिएटिव लेगी ब्रिटिश इंडिया की
- 3:35:45बाउंड्री को प्रोबेबल रशियन अटैक से
- 3:35:48प्रोटेक्ट करने के लिए। इस ऑब्जेक्टिव को
- 3:35:51दो तरीके से पूरा किया जा सकता था। या तो
- 3:35:54नेबरिंग कंट्रीज के साथ ट्रीटी करके या
- 3:35:57फिर उन्हें पूरी तरह एनिक्स करके।
- 3:35:59अफगानिस्तान के अमीर दोस्त मोहम्मद
- 3:36:02ब्रिटिशर्स के साथ फ्रेंडशिप तो करना
- 3:36:04चाहते थे लेकिन इस शर्त पर कि ब्रिटिश सीख
- 3:36:07से पेशावर को रिकवर करने में उनकी हेल्प
- 3:36:10करें। ब्रिटिशर्स इस कंडीशन को नहीं
- 3:36:13मानते। ऐसे में दोस्त मोहम्मद रशिया और
- 3:36:16परर्शिया से हेल्प लेने जाते हैं। तब 1838
- 3:36:19में ब्रिटिशर्स ट्राईप्टाई ट्रीटी साइन
- 3:36:22करते हैं। सिख लीडर रंजीत सिंह और 189 में
- 3:36:26अफगान थ्रोन से डिपोज्ड हुए शाह शुजा के
- 3:36:29साथ शाह शुजा तब से लुधियाना में ब्रिटिश
- 3:36:32पेंशनर बनके रह रहे थे। इस ट्रीटी में
- 3:36:35डिसाइड होता है कि सिख्स की मिलिट्री
- 3:36:37हेल्प के जरिए शाह शुजा को वापस
- 3:36:40अफगानिस्तान के थ्रोन पर बैठाया जाएगा।
- 3:36:42जिसके बाद शाहशूजा फॉरेन अफेयर्स सिख्स और
- 3:36:46ब्रिटिशर्स की एडवाइस के अनुसार कंडक्ट
- 3:36:48करेंगे। साथ ही वह सिंध के अमीर्स पर अपने
- 3:36:51सोवरन राइट्स भी छोड़ देंगे और रिवर इंडस
- 3:36:54के राइट बैंक पर लोकेटेड अफगान टेरिटरीज
- 3:36:57पर महाराजा रणजीत सिंह के क्लेम को
- 3:36:59एक्सेप्ट कर लेंगे। इसके बाद शुरुआत होती
- 3:37:02है फर्स्ट एंग्लो अफगान वॉर की। आइए जानते
- 3:37:05हैं इसके बारे में। फर्स्ट एंग्लो अफगान
- 3:37:09वॉर 1839 टू 1842।
- 3:37:13ब्रिटिश आर्मी अगस्त 1839 में काबुल में
- 3:37:16एंटर करती है। ज्यादातर ट्राइब्स को
- 3:37:18ब्राइब देकर पहले ही जीत लिया जाता है।
- 3:37:211840 में दोस्त मोहम्मद सरेंडर कर देते
- 3:37:24हैं और शाहशूजा को अफगानिस्तान का अमीर
- 3:37:27बना दिया जाता है। लेकिन अफगानंस शाहशूजा
- 3:37:30को एक्सेप्ट नहीं करते और ब्रिटिशर्स के
- 3:37:32जाते ही विद्रोह कर देते हैं। जिसमें
- 3:37:35काबुल के गैरसन कमांडर की हत्या कर दी
- 3:37:37जाती है। 1841 में ब्रिटिशर्स को अफगान
- 3:37:41चीफ्स के साथ ट्रीटी साइन करनी पड़ती है।
- 3:37:44जिसमें यह अफगानिस्तान को इवाकुएट करने के
- 3:37:46लिए तैयार होते हैं और दोस्त मोहम्मद को
- 3:37:49रिस्टोर भी करते हैं। फर्स्ट अफगान वॉर
- 3:37:51में इंडिया के ₹1.5 करोड़ खर्च हो जाते
- 3:37:54हैं और लगभग ₹00 लोग इसमें मारे जाते हैं।
- 3:37:58जॉन लॉरेंस एंड द पॉलिसी ऑफ़ मास्टरली
- 3:38:01इनएक्टिविटी।
- 3:38:02फर्स्ट अफगान वॉर के डिजास्टर के बाद जॉन
- 3:38:05लॉरेंस मास्टरली इनएक्टिविटी पॉलिसी को
- 3:38:08फॉलो करते हैं। 1863 में दोस्त मोहम्मद की
- 3:38:12डेथ के बाद भी वॉर ऑफ सक्सेशन में कोई
- 3:38:14इंटरफेरेंस नहीं किया जाता। लॉरेंस की
- 3:38:17पॉलिसी दो कंडीशंस पर आधारित थी। पहला
- 3:38:20फ्रंटियर पर पीस डिस्टर्ब ना हो और दूसरा
- 3:38:24सिविल वॉर में कोई भी कैंडिडेट फॉरेन
- 3:38:26हेल्प ना मांगे। इसके बाद शेर अली खुद को
- 3:38:30अफगानिस्तान के थ्रोन पर काबिज करते हैं।
- 3:38:32तो लॉरेंस उनके साथ फ्रेंडशिप कल्टीवेट
- 3:38:35करने की कोशिश करते हैं। लिटन एंड द
- 3:38:38पॉलिसी ऑफ़ प्राउड रिजर्व।
- 3:38:401876 में लिटिन इंडिया के वायसरॉय बनते
- 3:38:44हैं और नई फॉरेन पॉलिसी शुरू करते हैं।
- 3:38:47जिसे प्राउड रिजर्व की नीति कहा जाता है।
- 3:38:50इसका मकसद साइंटिफिक फ्रंटियर्स को मेंटेन
- 3:38:53करना और स्फीयर्स ऑफ इन्फ्लुएंस को
- 3:38:55सेफगार्ड करना था। लिटन के अनुसार
- 3:38:58अफगानिस्तान के साथ रिलेशंस को ए्बिग्यूस
- 3:39:01नहीं रखा जा सकता था और इसीलिए सेकंड
- 3:39:03एंग्लो अफगान वॉर की शुरुआत होती है। आइए
- 3:39:06जानते हैं इसके बारे में भी। सेकंड एंग्लो
- 3:39:09अफगान वॉर 1870 टू 1880।
- 3:39:13लिटिन शेर अली को एक फेवरेबल ट्रीटी का
- 3:39:15ऑफर देते हैं। लेकिन अमीर अपने दोनों
- 3:39:18पावरफुल नेबर्स यानी कि रशिया और ब्रिटिश
- 3:39:21इंडिया के साथ फ्रेंडशिप चाहते थे। साथ ही
- 3:39:24दोनों में से किसी का बहुत ज्यादा
- 3:39:25इंटरफेरेंस भी नहीं होने देना चाहते थे।
- 3:39:28बाद में शेर अली काबुल में ब्रिटिश ऑनवॉय
- 3:39:31रखने से भी मना कर देते हैं। जबकि इससे
- 3:39:33पहले रशियंस को यह कंसेशन दे दिया गया था।
- 3:39:37इस बात से लिटिन बहुत गुस्सा होते हैं और
- 3:39:40जब रशियंस अपना ऑनवॉय काबुल से विड्रॉ कर
- 3:39:43लेते हैं तब लिटिन अफगानिस्तान को इनवेड
- 3:39:46करने का फैसला करते हैं। इन्वेजन की
- 3:39:49स्थिति में शेर अली भाग जाते हैं और
- 3:39:51ब्रिटिशर्स मई 1879 में शेर अली के
- 3:39:54एल्डेस्ट सन याकूब खान के साथ ट्रीटी ऑफ
- 3:39:58गंदमक साइन करते हैं। इसमें डिसाइड होता
- 3:40:01है कि अमीर अपनी फॉरेन पॉलिसी गवर्नमेंट
- 3:40:03ऑफ इंडिया यानी ब्रिटिशर्स की एडवाइस के
- 3:40:06अनुसार कंडक्ट करेंगे। काबुल में परमानेंट
- 3:40:09ब्रिटिश रेजिडेंट तैनात किया जाएगा।
- 3:40:11ब्रिटिश इंडिया गवर्नमेंट फॉरेन अग्रेशन
- 3:40:14के अगेंस्ट अमीर को पूरा सपोर्ट देगी और
- 3:40:16एनुअल सब्सिडी भी देगी। लेकिन जल्द ही
- 3:40:19पॉपुलर प्रेशर्स के कारण याकूब को भी
- 3:40:22थ्रोन छोड़ना पड़ता है और ब्रिटिशर्स को
- 3:40:24काबुल और कांधार रिकैप्चर करने पड़ते हैं।
- 3:40:28अब्दुल रहमान नए अमीर बनते हैं। लिटिन
- 3:40:31अफगानिस्तान को तोड़ने का प्लान बनाते
- 3:40:33हैं। लेकिन इसे इंप्लीमेंट नहीं कर पाते
- 3:40:35और नेक्स्ट वायसरॉय लॉर्ड रिपन इस प्लान
- 3:40:38को फॉलो नहीं करते बल्कि अफगानिस्तान को
- 3:40:41एक बफर स्टेट की तरह ट्रीट करने की पॉलिसी
- 3:40:44अपनाते हैं। रशियन रेवोल्यूशन और फर्स्ट
- 3:40:46वर्ल्ड वॉर के बाद अफगानंस फुल
- 3:40:48इंडिपेंडेंस की डिमांड करते हैं। 199 में
- 3:40:52अब्दुल रहमान के सक्सेसर बने हबीबुल्लाह
- 3:40:55की 1919 में हत्या कर दी जाती है। और नए
- 3:40:58रूलर अमानुल्लाह ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट
- 3:41:01ओपन वॉर डिक्लेअर कर देते हैं। 1921 में
- 3:41:04ब्रिटिशर्स हार मान लेते हैं और
- 3:41:06अफगानिस्तान फॉरेन अफेयर्स में अपनी
- 3:41:09इंडिपेंडेंस रिकवर कर लेता है।
- 3:41:13कंक्लूजन
- 3:41:16दोस्तों, इस तरह ब्रिटिशर्स की फॉरेन
- 3:41:18पॉलिसी उनके इंपीरियलिस्ट एंबिशन से
- 3:41:21गाइडेड थी। एक तो वो किसी भी राइवल पावर
- 3:41:24जैसे कि रशिया या फ्रांस से अपने इंडियन
- 3:41:27एंपायर को प्रोटेक्ट करना चाहते थे और
- 3:41:29दूसरा अपने मार्केट को भी एक्सपेंड करना
- 3:41:31चाहते थे। इन्हीं दोनों मोटिव्स के साथ वह
- 3:41:34फॉरेन पॉलिसी को कंडक्ट करते हैं। लेकिन
- 3:41:37यहां समस्या यह थी कि अपने एंबिशंस को
- 3:41:40पूरा करने के लिए यह इंडियन रेवेन्यू और
- 3:41:42मैन पावर का यूज करते हैं। फिर चाहे
- 3:41:45अफगानिस्तान के साथ वॉर हो या फिर बर्मा
- 3:41:48के साथ इनका कॉन्फ्लिक्ट। इंडियन सोल्जर्स
- 3:41:50ही इनके लिए फाइट करते हैं और लाखों रुपए
- 3:41:54इन वॉर्स पर खर्च कर दिए जाते हैं। सिविल
- 3:41:57अप्राइिंग्स एंड ट्राइबल रिवॉल्व्स 1757
- 3:42:01टू 1856।
- 3:42:04दोस्तों, 1857 की क्रांति के बारे में तो
- 3:42:07हम सभी कुछ ना कुछ जरूर जानते हैं। लेकिन
- 3:42:10उससे पहले भी ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट
- 3:42:12विद्रोह की कई आवाजें उठी थी। जिनके बारे
- 3:42:15में अक्सर लोगों को कम पता होता है। आज हम
- 3:42:18ऐसे ही कुछ रिवोल्ट्स एंड अप्राइिंग्स की
- 3:42:21चर्चा करने वाले हैं। यह रिवोल्ट्स देश के
- 3:42:24अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग समय पर हुए
- 3:42:26थे। मुख्य तौर पर इन रिबेलियंस के तीन
- 3:42:30फॉर्म्स देखे जाते हैं। सिविल
- 3:42:32अप्राइिंग्स, ट्राइबल रिव्ट्स और पेजेंट
- 3:42:35मूवमेंट्स।
- 3:42:36आज की वीडियो में हम पहले दो यानी कि
- 3:42:39सिविल अप्राइिंग्स और ट्राइबल रिवोल्ट्स
- 3:42:42की चर्चा करेंगे। सबसे पहले बात करते हैं
- 3:42:45सिविल अप्राइिंग्स की। ब्रिटिश रूल के
- 3:42:48शुरुआती 100 सालों में यानी कि 1757 से
- 3:42:521856 के बीच हुए इन सिविल रिबेलियंस के
- 3:42:55पीछे कुछ कॉमन कॉजेस थे। सबसे पहले उनको
- 3:42:59समझते हैं। कॉजेस बिहाइंड द सिविल
- 3:43:02रिबेलियंस।
- 3:43:04दोस्तों सिविल अप्राइिंग्स के पीछे सबसे
- 3:43:07बड़ा कारण इकोनमी एडमिनिस्ट्रेशन और लैंड
- 3:43:10रेवेन्यू सिस्टम में ब्रिटिशर्स द्वारा
- 3:43:12तेजी से किया गया बदलाव था। जिसकी वजह से
- 3:43:16एग्रेररियन सोसाइटी पूरी तरह से उथल-पुथल
- 3:43:19हो गई थी। उदाहरण के तौर पर लैंड रेवेन्यू
- 3:43:22रेट्स इतने हाई कर दिए गए थे कि पेजेंट्स
- 3:43:25और जमींदार्स दोनों ही परेशान थे। इसी तरह
- 3:43:28ब्रिटिशर्स ने नया जस्टिस सिस्टम भी
- 3:43:31इंट्रोड्यूस कर दिया था। जिससे जस्टिस ना
- 3:43:34सिर्फ महंगा बल्कि लोगों से दूर हो गया
- 3:43:37था। इंडियन हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्रीज का
- 3:43:40डिक्लाइन होने से हजारों की संख्या में
- 3:43:42आर्टिजंस की रोजीरोटी छीन गई थी। इसके
- 3:43:46अलावा ब्रिटिश रूल का फॉरेन कैरेक्टर भी
- 3:43:48विद्रोह का एक कारण था। लोगों को एक
- 3:43:51विदेशी शक्ति के आधीन होना कभी अच्छा नहीं
- 3:43:54लगता। इंडियंस के प्राइड को भी ब्रिटिश
- 3:43:57रूल ने हर्ट किया था और इसीलिए फॉरेनर्स
- 3:44:00को अपनी जमीन से बाहर करने के बहुत से
- 3:44:02एफर्ट्स देखने को मिलते हैं। ब्रिटिश रूल
- 3:44:06के अगेंस्ट रिबेलियंस उनका बंगाल पर कब्जा
- 3:44:09होने से ही शुरू हो जाता है। शायद ही ऐसा
- 3:44:11कोई साल गया हो जब इनके विरुद्ध कोई
- 3:44:13आर्म्ड रिबेलियन ना हुआ हो। 1763 से 1856
- 3:44:18के बीच 40 से ज्यादा मेजर रिबेलियंस होते
- 3:44:21हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा माइनर वंस
- 3:44:25भी थे। आइए अब अलग-अलग रीजंस में होने
- 3:44:28वाले सिविल रिबेलियंस के कुछ उदाहरण देखते
- 3:44:30हैं। शुरुआत करते हैं बंगाल और ईस्टर्न
- 3:44:33इंडिया से। रिवोल्ट्स इन बंगाल एंड
- 3:44:36ईस्टर्न इंडिया। दोस्तों, ब्रिटिश ईस्ट
- 3:44:39इंडिया कंपनी ने सबसे पहले अपना रूल बंगाल
- 3:44:41में ही इस्टैब्लिश किया था। इसलिए सबसे
- 3:44:44पहला विद्रोह भी यहीं शुरू होता है और वह
- 3:44:47था 1763 में होने वाला सन्यासी रिबेलियन।
- 3:44:52इस रिबेलियन को रिलीजियस मक्स यानी
- 3:44:54सन्यासीज और बेदखल किए हुए जमींदार लीड कर
- 3:44:58रहे थे। और इनका साथ देते हैं पेजेंट्स और
- 3:45:01नेटिव आर्मी से निकले हुए सोल्जर्स।
- 3:45:04सन्यासी रिवोल्ट के पीछे मेन कारण होली
- 3:45:07प्लेसेस को विजिट करने पर लगाई गई
- 3:45:09रिस्ट्रिकशंस थी। सन्यासी अक्सर होली
- 3:45:12श्राइ की यात्रा करते थे और वहीं के लोकल
- 3:45:15जमींदार इन्हें दक्षिणा दिया करते थे।
- 3:45:18लेकिन ब्रिटिशर्स को लगता है कि यह लोग
- 3:45:21उनका हिस्सा ले रहे हैं। साथ ही इतने बड़े
- 3:45:24स्तर पर लोगों का घूमना उन्हें लॉ एंड
- 3:45:26ऑर्डर की प्रॉब्लम लगता था। इसलिए वह
- 3:45:29सन्यासी की विजिट्स पर रिस्ट्रिकशंस लगा
- 3:45:32देते हैं और इसी से नाराज सन्यासी उनके
- 3:45:35खिलाफ विद्रोह कर देते हैं। रिवोल्ट के
- 3:45:38दौरान कंपनी की फैक्ट्रीज और स्टेट
- 3:45:40ट्रेजरीज पर रेड की जाती है। यह लोग कंपनी
- 3:45:43की आर्म्ड फोर्सेस का बहादुरी से सामना
- 3:45:45करते हैं। इनका विद्रोह 1800 तक चलता रहता
- 3:45:49है। बंकिम चंद्र चैटर्जी के नवेल आनंद मठ
- 3:45:52इसी विद्रोह पर बेस्ड है। सन्यासी
- 3:45:55रिबेलियन के बाद 1766 से 1772 तक चुरार
- 3:46:00विद्रोह हुआ था। यह बंगाल और बिहार के
- 3:46:03पांच डिस्ट्रिक्ट्स में फैला था। इसके
- 3:46:06अलावा ईस्टर्न इंडिया के मेजर रिबेलियंस
- 3:46:08में 1783 में होने वाला रंगपुर और
- 3:46:12दिनाजपुर रिबेलियन। 1799 में विष्णुपुर और
- 3:46:16वीरभूम 184 से 17 के बीच ओसा के जमींदार
- 3:46:21का विद्रोह और 1827 से 40 तक चलने वाला
- 3:46:25सललपुर रिवोल्ट आता है। ईस्टर्न इंडिया के
- 3:46:28बाद आइए अब साउथ इंडिया की तरफ चलते हैं।
- 3:46:31रिवोल्ट्स इन साउथ इंडिया। दोस्तों साउथ
- 3:46:34इंडिया में विजय नगरम के राजा 1794 में
- 3:46:38रिवोल्ट करते हैं। 1790 में तमिलनाडु के
- 3:46:42पॉलीगर्स का विद्रोह भी होता है। पॉलीगर्स
- 3:46:45बेसिकली साउथ इंडिया के जमींदर्स को कहा
- 3:46:47जाता था और इनका विद्रोह टैक्सेशन को लेकर
- 3:46:50हुआ था। इसके अलावा 185 में ट्रेवनकोर के
- 3:46:55दीवान वेलू थमपी का हेरइक रिवोल्ट होता
- 3:46:57है। 185 में ब्रिटिश गवर्नर जनरल वेलेसली
- 3:47:02ने ट्रेवनकोर के राजा पर सब्सिडियरी
- 3:47:04अलायंस ट्रीटी इंपोज कर दी थी। लेकिन राजा
- 3:47:07ट्रीटी के हारश टर्म्स की वजह से नाराज हो
- 3:47:10जाते हैं और सब्सिडी पे नहीं करते। ऐसे
- 3:47:13में ब्रिटिश रेजिडेंट जब इन्हें सब्सिडी
- 3:47:16पे करने के लिए फोर्स करने लगता है तो
- 3:47:18उसके एटीट्यूड से लोगों की नाराजगी और
- 3:47:20ज्यादा बढ़ जाती है और दीवान वेलू थामपी
- 3:47:24आर्मी की नयर बटालियन के सपोर्ट से
- 3:47:26रिवोल्ट कर देते हैं। ब्रिटिशर्स को एक
- 3:47:29बड़ी फोर्स डिप्लॉय करनी पड़ती है इस
- 3:47:31विद्रोह को दबाने और यहां शांति स्थापित
- 3:47:34करने के लिए।
- 3:47:36183034 में विशाखापटनम में 1835 में गंजम
- 3:47:41में और 184647
- 3:47:43में कुरनूल में मेजर अप्राइिंग देखने को
- 3:47:46मिलती हैं। अब बात करते हैं वेस्टर्न
- 3:47:48इंडिया की। रिवोल्ट्स इन वेस्टर्न इंडिया।
- 3:47:53दोस्तों, 1816 से 1832 के बीच सौराष्ट्र
- 3:47:57के चीफ्स बार-बार ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट
- 3:47:59विद्रोह करते हैं। इसी तरह गुजरात के
- 3:48:02कोहलीज भी 1824 से 28 तक, 1839 में और फिर
- 3:48:071849 में विद्रोह का बिगुल बजाते हैं।
- 3:48:11इनके विद्रोह का कारण ब्रिटिश रूल का
- 3:48:13इंपोजिशन और उनके द्वारा कोलीज के फोर्ट्स
- 3:48:16को तोड़ा जाना था। इसके अलावा कंपनी
- 3:48:19द्वारा इस्टैब्लिश्ड नए एडमिनिस्ट्रेशन की
- 3:48:22वजह से बड़ी संख्या में यह लोग बेरोजगार
- 3:48:25भी हो गए थे। पेशवा की हार के बाद से ही
- 3:48:28महाराष्ट्र में लगातार विद्रोह का सिलसिला
- 3:48:30चलता रहता है। जिसमें 1818 से 1831 के बीच
- 3:48:34भील अपराइजिंग हुई थी। भील खांडेश के हिल
- 3:48:38रेंजेस में रहते थे और ब्रिटिशर्स ने इनके
- 3:48:41रीजन में इंट्रूड करना शुरू कर दिया था।
- 3:48:44लोकल्स इस इंट्रूजन से नाख थे और उन्होंने
- 3:48:47इस बात का रिवोल्ट किया। इसके साथ ही 1824
- 3:48:51में चनावा द्वारा लेड कितूर अपराइिंग,
- 3:48:541841 की सतारा प्राइिंग और 1844 का गडकरीज
- 3:48:59का रेवोल्यूशन प्रोमिनेंट है। देश के बाकी
- 3:49:02रीजंस की तरह ही नॉर्थ इंडिया भी शांत
- 3:49:04नहीं रहता है। रिवोल्ट्स इन नॉर्थ इंडिया।
- 3:49:09दोस्तों 1824 में आज के यूपी और हरियाणा
- 3:49:13ने ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट हथियार उठा लिए
- 3:49:15थे। इसके अलावा 185 में बिलासपुर का
- 3:49:19विद्रोह, 1814 से 17 के बीच अलीगढ़ के
- 3:49:22तालुकदार का विद्रोह। 1842 में जबलपुर के
- 3:49:26बुंदेलाज़ का रिवोल्ट और 1852 में खानदेश
- 3:49:30में हुआ विद्रोह। मेजर रिबेलियंस की
- 3:49:33कैटेगरी में आते हैं।
- 3:49:35यह तो बात हुई मेजर सिविल रिबेलियंस के
- 3:49:38कुछ उदाहरणों की। आइए अब इनका थोड़ा
- 3:49:40एनालिसिस भी करते हैं। एनालिसिस ऑफ सिविल
- 3:49:43अप्राइिंग्स।
- 3:49:45दोस्तों, देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई
- 3:49:48100 से भी ज्यादा इन सिविल अप्राइिंग्स
- 3:49:50में हमें आम लोगों का करज देखने को मिलता
- 3:49:53है। इससे पता चलता है कि कैसे ब्रिटिश रूल
- 3:49:56के शुरुआती सालों से ही इंडिया के लोग
- 3:49:59इसका विद्रोह करने लगे थे और कैसे इन
- 3:50:02लोगों ने अपने से शक्तिशाली ब्रिटिश
- 3:50:04फोर्सेस का सामना किया था। दोस्तों,
- 3:50:07लगातार चलने वाले यह रिबेलियंस एक साथ
- 3:50:10देखने पर मैसिव लगते हैं। लेकिन असल में
- 3:50:13यह अपने फैलाव में पूरी तरह लोकल थे और एक
- 3:50:16दूसरे से आइसोलेटेड थे। इन सभी का
- 3:50:19कैरेक्टर इसीलिए एक जैसा नहीं था कि यह
- 3:50:22किसी नेशनल या कॉमन एफर्ट को रिप्रेजेंट
- 3:50:25कर रहे थे। बल्कि इसलिए था क्योंकि ये
- 3:50:28कॉमन कंडीशंस को रिप्रेजेंट करते थे।
- 3:50:30लेकिन समय और जगह सबकी अलग-अलग थी। सोशली,
- 3:50:34इकोनॉमिकली और पिटिकली इन रिबेलियंस के
- 3:50:37सेमीफडल लीडर्स बैकवर्ड लुकिंग और
- 3:50:40ट्रेडिशनल आउटलुक वाले थे। जो अभी भी
- 3:50:42पुरानी दुनिया में रह रहे थे। मॉडर्न
- 3:50:45वर्ल्ड की थिंकिंग और अप्रोच से कोसों
- 3:50:47दूर। यह बस पुराने फॉर्म्स ऑफ रूल और सोशल
- 3:50:50रिलेशंस को फिर से एस्टैब्लिश करना चाहते
- 3:50:53थे। ब्रिटिशर्स एक-एक करके सभी रेबल
- 3:50:56एरियाज को शांत कर लेते हैं। कुछ को
- 3:50:58कंसेशंस देकर तो कुछ को पूरी तरह खत्म
- 3:51:01करके। उदाहरण के तौर पर बेलू थाप्पी को
- 3:51:05मृत्यु होने के बाद भी पब्लिकली हैंग किया
- 3:51:08जाता है। जिससे लोगों के मन में एक डर
- 3:51:11पैदा कर सके। इन सिविल रिबेलियंस का
- 3:51:14सप्रेशन एक कारण बनता है कि 1857 की
- 3:51:17क्रांति का असर साउथ इंडिया और ज्यादातर
- 3:51:20वेस्टर्न और ईस्टर्न इंडिया में देखने को
- 3:51:22नहीं मिलता। इनका हिस्टोरिकल सिग्निफिकेंस
- 3:51:25इस बात में है कि यह ब्रिटिश रूल के
- 3:51:28अगेंस्ट विद्रोह का एक स्ट्रांग और
- 3:51:30वैल्यूएबल लोकल ट्रेडिशन इस्टैब्लिश करते
- 3:51:32हैं और आजादी के लिए आगे होने वाले संघर्ष
- 3:51:35में इंडियंस के लिए प्रेरणा का एक सोर्स
- 3:51:38बनते हैं। आइए अब ट्राइबल रिवोल्ट्स की
- 3:51:41बात करते हैं। ट्राइबल रिवोल्ट्स।
- 3:51:45दोस्तों, 19th सेंचुरी के दौरान ट्राइबल
- 3:51:48पीपल भी करीब 100 से ज्यादा रिवोल्ट्स में
- 3:51:50भाग लेते दिखते हैं। बहुत ही साहस के साथ
- 3:51:53यह लोग विद्रोह में अपनी भागीदारी देते
- 3:51:55हैं। ट्राइबल लोगों की नाराजगी के कई कारण
- 3:51:58थे। कॉजेस ऑफ ट्राइबल रिवॉर्ड्स।
- 3:52:02सबसे पहला कारण तो यह था कि कॉलोनियल
- 3:52:05एडमिनिस्ट्रेशन ने इनके रिलेटिव आइसोलेशन
- 3:52:07को खत्म कर दिया था। जहां अभी तक यह अपनी
- 3:52:10कम्युनिटी में पीसफुली रह रहे थे। इनका
- 3:52:13मेन स्ट्रीम सोसाइटी से बहुत ज्यादा लिंक
- 3:52:15नहीं था। वहीं ब्रिटिश रूल के आने के बाद
- 3:52:18ट्राइबल्स को मेन स्ट्रीम एडमिनिस्ट्रेशन
- 3:52:21के साथ तेजी से जोड़ा जाने लगा। कुछ जगह
- 3:52:24पर ब्रिटिशर्स, ट्राइबल चीफ्स को जमींदार
- 3:52:27रेग्नाइज कर लेते हैं और लैंड रेवेन्यू का
- 3:52:30नया सिस्टम इंट्रोड्यूस कर देते हैं।
- 3:52:32ट्राइबल प्रोडक्ट्स पर टैक्स लगा दिया
- 3:52:34जाता है। साथ ही ट्राइबल एरियाज में
- 3:52:36क्रिश्चियन मिशनरीज का आना भी बहुत बढ़
- 3:52:39जाता है। यह लोग ट्राइबल्स को कन्वर्ट
- 3:52:42करने की पूरी कोशिश करते हैं।
- 3:52:44इसके अलावा ब्रिटिश रूल के दौरान
- 3:52:47ट्राइबल्स के बीच मनी लेंडर्स, ट्रेडर्स,
- 3:52:50रेवेन्यू फार्मर्स जैसे मिडिलमैन की
- 3:52:52संख्या बहुत अधिक हो जाती है। यह लोग
- 3:52:55आउटसाइडर्स थे और धीरे-धीरे ट्राइबल्स को
- 3:52:58डे के जाल में फंसाकर उनके लैंड पर कब्जा
- 3:53:01करने लगते हैं। इसकी वजह से ट्राइबल पीपल
- 3:53:04एग्रीकल्चरल लेबरर्स, शेयर क्रॉपर्स और
- 3:53:07टेनेंट्स की पोजीशन में आने लगे थे।
- 3:53:10कॉलोनियलिज्म की वजह से फॉरेस्ट के साथ भी
- 3:53:12ट्राइबल्स की रिलेशनशिप में चेंज आता है।
- 3:53:15ज्यादातर ट्राइबल कम्युनिटीज अपनी
- 3:53:18लाइवलीहुड के लिए फॉरेस्ट रिसोर्सेज पर
- 3:53:20डिपेंड करते थे। लेकिन ब्रिटिशर्स ने इन
- 3:53:23फॉरेस्ट पर भी अपना कब्जा कर लिया था और
- 3:53:25ट्राइबल्स के फॉरेस्ट एरिया एक्सेस करने
- 3:53:28पर रिस्ट्रिकशंस लगा दिए थे। इसके अलावा
- 3:53:31पुलिसमैन और बाकी ऑफिशियलल्स के द्वारा
- 3:53:34शोषण और एक्सटॉशन भी ट्राइबल्स के लिए
- 3:53:36कॉमन हो गया था। रेवेन्यू फार्मर्स और
- 3:53:39गवर्नमेंट एजेंट्स ट्राइबल्स से बेगार
- 3:53:42यानी कि फोर्स्ड अनपेड लेबर का काम भी
- 3:53:45लेते थे। रीजन टू रीजन इंटेंसिटी जरूर
- 3:53:48डिफर करती थी लेकिन ट्राइबल कम्युनिटीज के
- 3:53:51पुराने लिविंग सिस्टम को ब्रिटिश रूल ने
- 3:53:53काफी हद तक डिसरप्ट कर दिया था और यही एक
- 3:53:56कॉमन फैक्टर था सभी ट्राइबल अप्राइिंग्स
- 3:53:59के पीछे। आइए अब ट्राइबल्स के रिवोल्ट के
- 3:54:02तरीके और उसके कुछ उदाहरण को देखते हैं।
- 3:54:06मेथड्स ऑफ ट्राइबल रिवोल्ट्स एंड
- 3:54:08एग्जांपल्स।
- 3:54:10दोस्तों, ज्यादातर ट्राइबल अप्राइिंग्स
- 3:54:13ब्रॉड बेस्ड होती थी। इनमें हजारों की
- 3:54:16संख्या में ट्राइबल्स भाग लेते थे।
- 3:54:18रिबेलियन तब शुरू होता था जब ट्राइबल्स
- 3:54:20शोषण से पूरी तरह दुखी हो जाते थे और
- 3:54:23उन्हें लगता था कि अब उनके पास फाइट करने
- 3:54:26के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं बचा है।
- 3:54:29विद्रोह के दौरान आउटसाइडर्स जैसे कि मनी
- 3:54:31लेंडर्स, जमींदार, गवर्नमेंट ऑफिशियल्स पर
- 3:54:34अटैक किया जाता था। उनकी प्रॉपर्टी को
- 3:54:36लूटा जाता था और उन्हें गांव से बाहर कर
- 3:54:39दिया जाता था। कई जगह पर ट्राइबल रिव्ट्स
- 3:54:42को रिलीजियस और कैरिस्मैटिक लीडर्स ने लीड
- 3:54:45किया था। जिन्हें मसीहा बोला जाता था। यह
- 3:54:49लोग क्लेम करते थे कि इनके पास मैजिकल
- 3:54:52पावर्स हैं। जिनकी हेल्प से यह ब्रिटिशर्स
- 3:54:54को हरा सकते हैं। इनके कहने पर बड़ी
- 3:54:56संख्या में ट्राइबल मासेस विद्रोह से जुड़
- 3:54:59जाते थे। हालांकि ट्राइबल्स और ब्रिटिशर्स
- 3:55:02का मुकाबला बराबरी का नहीं था। एक तरफ सभी
- 3:55:05मॉडर्न वेपन्स के साथ ट्रेंड आर्मी हुआ
- 3:55:08करती थी। तो दूसरी तरफ हाथ में पत्थर,
- 3:55:11भाला, कुल्हाड़ी जैसे हथियार लिए
- 3:55:13ट्राइबल्स। इस अनकल वारफेयर में लाखों की
- 3:55:17संख्या में ट्राइबल्स अपनी लाइफ
- 3:55:19सैक्रिफाइस करते हैं। दोस्तों, मेजर
- 3:55:22ट्राइबल रिवोल्ट्स के कुछ एग्जांपल्स इस
- 3:55:24तरह हैं। पहला ट्राइबल रिबेलियन 1768 में
- 3:55:28बंगाल में हुआ था। इसे चुार रिबेलियन कहा
- 3:55:31जाता है। इसके अलावा बंगाल में ही 1783 का
- 3:55:35रंगपुर रिबेलियन वेस्टर्न महाराष्ट्र में
- 3:55:38सेवाराम की लीडरशिप में 1825 का भील
- 3:55:41रिवोल्ट छोटा नागपुर एरिया में हुई 1832
- 3:55:45की कोल अपराइजिंग और 1855 का संथाल होल
- 3:55:49इंपॉर्टेंट है। ट्राइबल रिवोल्ट्स को और
- 3:55:52अच्छे से समझने के लिए एक केस स्टडी देखते
- 3:55:55हैं। यह केस स्टडी है सबसे बड़े ट्राइबल
- 3:55:58रिवोल्ट कहे जाने वाले सांथाल होल की।
- 3:56:01संथाल होल और अप्राइिंग।
- 3:56:04दोस्तों संथाल्स भागलपुर और राजमहल के बीच
- 3:56:08के एरिया में रहते थे। इसे दमन कोहो कहा
- 3:56:12जाता था। ब्रिटिश रूल के आने के बाद इनके
- 3:56:14एरिया में आउटसाइडर्स यानी कि डिकूस एंटर
- 3:56:18करते हैं और सांथाल्स का शोषण शुरू हो
- 3:56:21जाता है। जमींदार, मनी लेंडर्स और ब्रिटिश
- 3:56:24ऑफिशियलल्स की वजह से संथाल्स की लाइफ
- 3:56:26बदलने लगती है। इनके ऊपर हैवी टैक्सेस लगा
- 3:56:30दिए जाते हैं। जमींदार और गवर्नमेंट
- 3:56:32ऑफिशियल्स तरह-तरह के एक्सटॉशंस करने लगते
- 3:56:35हैं। लोन लेने पर 50 से 500% तक के हाई
- 3:56:39इंटरेस्ट रेट चार्ज किए जाते हैं। अलग-अलग
- 3:56:42तरीकों से संथाल्स की प्रॉपर्टी पर कब्जा
- 3:56:45करना शुरू हो जाता है। मार्केट्स और
- 3:56:47हार्ट्स में इन्हें धोखा देकर ज्यादा
- 3:56:49वसूली की जाती है। इस तरह के शोषण और
- 3:56:53अत्याचारों से परेशान होकर संथाल्स
- 3:56:56विद्रोह करने पर मजबूर होते हैं। 1854 में
- 3:57:00ट्राइबल हेड्स यानी कि माजी और परगनाइट्स
- 3:57:04मिलकर विद्रोह के बारे में प्लानिंग करने
- 3:57:06लगते हैं। जमींदार और मनी लेंडर्स को
- 3:57:09लूटने की कुछ घटनाएं भी शुरू हो जाती हैं।
- 3:57:1230 जून 1855 को ट्राइबल लीडर्स
- 3:57:16भागानिधि विलेज में करीब 6000 संथाल्स की
- 3:57:19असेंबली बुलाते हैं। यह 400 विलेजेस को
- 3:57:22रिप्रेजेंट करती है। यहां पर रिवोल्ट का
- 3:57:25बैनर रेज करने और आउटसाइडर्स को बाहर करने
- 3:57:28का फैसला लिया जाता है। सिद्धू और कानू
- 3:57:30संथाल हुल के मुखिया रेबल लीडर्स थे। यह
- 3:57:34लोग दावा करते हैं कि ठाकुर यानी कि गॉड
- 3:57:37ने खुद इनसे हथियार उठाने और आजादी के लिए
- 3:57:40फाइट करने को कहा है। लीडर्स संथाल मेन और
- 3:57:44वुमेन को बड़ी संख्या में मोबिलाइज करना
- 3:57:46शुरू करते हैं। इसके लिए गांव-गांव में
- 3:57:49प्रोसेशन निकाले जाते हैं। जल्द ही 60
- 3:57:52हजार संथाल्स इन्हें ज्वॉइ कर लेते हैं।
- 3:57:55यह लोग 1500 से 2000 के बैंड्स बनाकर
- 3:57:59जमींदार और महाजंस पर हमला शुरू कर देते
- 3:58:01हैं। इनके घर, पुलिस स्टेशंस, रेलवे
- 3:58:05कंस्ट्रक्शन साइट्स, पोस्ट कैरियर्स
- 3:58:07एटसेट्रा पर अटैक किया जाता है। कहने का
- 3:58:10मतलब यह है कि डिकू एक्सप्लइटेशन और
- 3:58:12कॉलोनियल पावर के सभी सिंबल्स पर अटैक
- 3:58:15होता है। इस विद्रोह में संथाल्स की मदद
- 3:58:18बहुत से नॉन ट्राइबल्स और गरीब डिकूस भी
- 3:58:21करते हैं। जैसे कि मिल्कमैन या ग्वालाज़
- 3:58:24एटसेट्रा। इन्हें प्रोविजंस और सर्विज
- 3:58:27देते हैं। लोहार्ड्स रेबल बैंड्स के साथ
- 3:58:30रहते हैं। उनके वेपन्स को सही शेप में
- 3:58:32रखने के लिए। जैसे ही ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 3:58:35को रिबेलियन के बड़े स्टार के बारे में
- 3:58:38पता चलता है, वह इनके विरुद्ध मिलिट्री
- 3:58:40कैंपेन ल्च कर देती है। आर्मी के 10 से भी
- 3:58:43ज्यादा रेजीमेंट्स को बुलाया जाता है।
- 3:58:46अफेक्टेड एरियाज में मार्शल लॉ डिक्लेअ कर
- 3:58:48दिया जाता है और विद्रोह के नेताओं को
- 3:58:50पकड़ने के लिए ₹100 तक के इनाम की घोषणा
- 3:58:54कर दी जाती है। बहुत ही क्रूरता के साथ
- 3:58:58संथाल्स के विद्रोह को दबा दिया जाता है।
- 3:59:0115,000 से ज्यादा संथाल्स की हत्या कर दी
- 3:59:04जाती है। 10 से भी ज्यादा गांव को पूरी
- 3:59:06तरह तबाह कर दिया जाता है। सिद्धों को
- 3:59:09पकड़कर अगस्त 1855 में मार दिया जाता है।
- 3:59:13वहीं कानू फरवरी 1856 में विद्रोह के
- 3:59:17बिल्कुल अंतिम पड़ाव में एक्सीडेंट के
- 3:59:19जरिए पकड़े जाते हैं। राजमहल हिल्स पूरी
- 3:59:23तरह संथाल के खून में नहा चुके होते हैं।
- 3:59:26संथाल्स ने बहुत ज्यादा साहस का परिचय
- 3:59:28दिया और आखिरी दम तक सरेंडर नहीं किया।
- 3:59:32आखिर में ब्रिटिशर्स को इन्हें शांत करने
- 3:59:34के लिए 1856 में संथाल परगना एक्ट पास
- 3:59:38करना पड़ता है। इसके जरिए संथाल्स के लैंड
- 3:59:41राइट्स को प्रोटेक्ट किया जाता है। एक्ट
- 3:59:44किसी भी नॉन ट्राइबल को संथाल लैंड
- 3:59:46ट्रांसफर करने पर बैन लगा देता है।
- 3:59:49कंक्लूजन।
- 3:59:52तो दोस्तों, यह थी 1857 से पहले के कुछ
- 3:59:55मेजर सिविल और ट्राइबल रिबेलियंस की
- 3:59:57कहानी। इससे पता चलता है कि 1857 की
- 4:00:01क्रांति अचानक से नहीं हुई थी। उसके पीछे
- 4:00:05ब्रिटिश डोमिनेशन के अगेंस्ट विद्रोह करने
- 4:00:07की एक लंबी हिस्ट्री रही थी। फर्क बस इतना
- 4:00:11था कि 1857 से पहले के ज्यादातर विद्रोह
- 4:00:14का स्टार लोकल या रीजनल रहा था। जबकि 1857
- 4:00:18की क्रांति काफी बड़े स्तर पर हुई थी।
- 4:00:23प्रेजेंट मूवमेंट्स।
- 4:00:27दोस्तों, इंडिया में ब्रिटिश रूल के
- 4:00:29इस्टैब्लिशमेंट के बाद बहुत से पॉलिटिकल,
- 4:00:31इकोनॉमिक और एडमिनिस्ट्रेटिव चेंजेस हुए
- 4:00:33थे। और इन चेंजेस का सबसे ज्यादा इफेक्ट
- 4:00:36हमें इंडियन पेजेंट्स पर देखने को मिलता
- 4:00:38है। पेजेंट्स की लाइफ पूरी तरह बदल जाती
- 4:00:41है। हर लेवल पर उनका शोषण होने लगता है।
- 4:00:44और जब इस शोषण का लेवल पेजेंस के टॉलरेंस
- 4:00:47लेवल को पार करता है, तो वह इसके अगेंस्ट
- 4:00:49विद्रोह या आंदोलन करते हैं। आज के वीडियो
- 4:00:52में हम ऐसे ही कुछ इंपॉर्टेंट पेजेंट
- 4:00:54मूवमेंट्स की चर्चा करेंगे। सबसे पहले
- 4:00:57इनके पीछे के जनरल कॉजेस को समझते हैं।
- 4:01:02पेजेंट्री अंडर कॉलोनियलिज्म।
- 4:01:06दोस्तों ब्रिटिश रूल के समय इंडिया का
- 4:01:09एग्रेररियन स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल जाता
- 4:01:11है। इसके बहुत से कारण देखे जा सकते हैं।
- 4:01:14जैसे कि ब्रिटिशर्स की इकोनमिक पॉलिसीज,
- 4:01:17उनके द्वारा किया गया इंडियन
- 4:01:19हैंडीक्राफ्ट्स का रूइन जिसकी वजह से लैंड
- 4:01:21पर प्रेशर बढ़ता है। नए लैंड रेवेन्यू
- 4:01:24सिस्टम्स और कॉलोनियल एडमिनिस्ट्रेटिव और
- 4:01:27जुडिशियल सिस्टम। जमींदारी एरियाज में
- 4:01:30जहां पेजेंट्स को हाई रेंट्स, इललीगल
- 4:01:32ड्यूस, फोर्स एिक्शंस और अनपेड लेबर जैसी
- 4:01:36प्रॉब्लम्स फेस करनी पड़ती थी, वहीं
- 4:01:38रियोवाड़ी एरियाज में खुद गवर्नमेंट ने
- 4:01:40बहुत हाई रेवेन्यू रेट फिक्स किया हुआ था।
- 4:01:44जिसे चुकाने के लिए किसान अक्सर लोकल मनी
- 4:01:46लेंडर से हेल्प लेने को मजबूर होते थे। और
- 4:01:49यह मनी लेंडर्स इनकी मजबूरी का बुरा फायदा
- 4:01:52उठाते थे। किसानों को बहुत हाई इंटरेस्ट
- 4:01:55रेट पर पैसे उधार दिए जाते थे। जिसके लिए
- 4:01:58किसान अपनी जमीन और कैटल को गिरवी रखते
- 4:02:01थे। और जब यह लोन नहीं चुका पाते थे तो
- 4:02:03गिरवी रखी गई प्रॉपर्टी मनी लेंडर की हो
- 4:02:06जाती थी। इस तरह धीरे-धीरे बहुत बड़े
- 4:02:09एरियाज पर एक्चुअल कल्टीवेटर्स सिर्फ
- 4:02:11टेनेंस, शेयर क्रॉपर्स और लैंडलेस लेबरर्स
- 4:02:15में तब्दील हो गए थे। किसान अक्सर इस शोषण
- 4:02:18का विरोध करते थे और कई बार इन हालातों से
- 4:02:21परेशान होकर किसान क्राइम का रास्ता भी
- 4:02:23चुन लेते थे। क्योंकि भूखे मरने से तो वही
- 4:02:26रास्ता अच्छा नजर आता था। इसलिए कुछ किसान
- 4:02:29रॉबरी, डेकोइटी और सोशल बैंडेटरी जैसी
- 4:02:32एक्टिविटीज में भी इनवॉल्व होते दिखते
- 4:02:34हैं। और एक दूसरा रास्ता था साथ मिलकर
- 4:02:37विद्रोह करना। जिसके कुछ एग्जांपल्स को आज
- 4:02:40हम डिस्कस करने वाले हैं। प्रेजेंट
- 4:02:42मूवमेंट्स को हम दो कैटेगरीज में डिवाइड
- 4:02:44कर सकते हैं। 19th सेंचुरी के दौरान हुए
- 4:02:47मूवमेंट्स और 20th सेंचुरी के प्रेजेंट
- 4:02:50मूवमेंट्स। शुरुआत करते हैं 19th सेंचुरी
- 4:02:53से। 19th सेंचुरी प्रेजेंट मूवमेंट्स।
- 4:02:58सबसे पहले हम इस दौरान हुए कुछ इंपॉर्टेंट
- 4:03:00रिवोल्ट्स को डिस्कस करेंगे। उसके बाद
- 4:03:0219th सेंचुरी के पेजेंट रिवोल्ट्स के
- 4:03:05इंपॉर्टेंट फीचर्स को भी समझेंगे। आइए
- 4:03:07सबसे पहले बात करते हैं 1859 में हुए
- 4:03:10इंडिगो रिवोल्ट की।
- 4:03:13इंडिगो रिवोल्ट 18596।
- 4:03:17इंडिगो रिवोल्ट या नील विद्रोह 185960 के
- 4:03:21बीच बंगाल में हुआ था। यहां किसानों ने
- 4:03:24यूरोपियन प्लांटर्स के खिलाफ विद्रोह किया
- 4:03:26था जो उन्हें इंडिगो यानी कि नील की खेती
- 4:03:30करने के लिए फोर्स करते थे। बंगाल में
- 4:03:32इंडिगो का कल्टीिवेशन 1780 के अराउंड शुरू
- 4:03:36हो गया था। उस समय इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन
- 4:03:39की वजह से यूरोप में इंडिगो की डिमांड
- 4:03:41काफी हाई रहती थी। क्योंकि इस ब्लू डाई का
- 4:03:45यूज टेक्सटाइल इंडस्ट्री में किया जाता
- 4:03:47था। इसी का फायदा उठाने के लिए यूरोपियन
- 4:03:50प्लांटर्स इंडिया में इंडिगो कल्टीिवेशन
- 4:03:52करवाते थे। कल्टीिवेशन के दो मेथड्स हुआ
- 4:03:55करते थे। पहला निज और दूसरा रियोथ। निज
- 4:04:00सिस्टम में प्लांटर्स अपनी जमीन पर ही
- 4:04:02इंडिगो कल्टीवेट करते थे और रियोथ सिस्टम
- 4:04:05में प्लांटर्स बंगाल के किसानों की जमीन
- 4:04:07पर इंडिगो की खेती करते थे। इसके लिए यह
- 4:04:11किसानों के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन करते थे
- 4:04:13और उन्हें एडवांस लोन ऑफर करते थे। यह
- 4:04:16पूरा सिस्टम बहुत ही ऑप्रेसिव हुआ करता
- 4:04:19था। किसान को उसकी सबसे अच्छी जमीन पर
- 4:04:21इंडिगो ग्रो करनी पड़ती थी। इसके अलावा
- 4:04:23प्लांटर्स इनके प्रोड्यूस का बहुत ही कम
- 4:04:26रेट ऑफर करते थे। जिस वजह से किसान ना तो
- 4:04:29कभी इनका लोन रिपे कर पाते थे और ना ही इस
- 4:04:32सिस्टम से खुद को बाहर करवाते थे।
- 4:04:34गवर्नमेंट अथॉरिटीज और रूल्स भी प्लांटर्स
- 4:04:37को ही फेवर करते थे। इस शोषण से परेशान
- 4:04:41होकर 1859 में बंगाल के नाडिया
- 4:04:44डिस्ट्रिक्ट के पेजेंट्स इंडिगो कल्टीवेट
- 4:04:46करने से मना कर देते हैं। इन्हें लीड कर
- 4:04:48रहे थे दो भाई दिगंबर विश्वास और विष्णु
- 4:04:52विश्वास और जब प्लांटर्स इन्हें फोर्स
- 4:04:55करने के लिए अपने लठियाल्स भेजते हैं तो
- 4:04:57यह उनके ऊपर काउंटर अटैक कर देते हैं।
- 4:05:00बंगाल की एजुकेटेड क्लास भी इस आंदोलन में
- 4:05:03इंपॉर्टेंट रोल प्ले करती है। न्यूज़पेपर
- 4:05:06कैंपेन, मास मीटिंग्स और पेजेंस के
- 4:05:08ग्रीवेंसेस पर मेमोरेंडा तैयार करके इनके
- 4:05:11कॉज को सपोर्ट किया जाता है। दीन बंधु
- 4:05:14मित्र अपने प्ले नील दर्पण के जरिए
- 4:05:17किसानों की मिज़रेबल कंडीशन को हाईलाइट
- 4:05:20करते हैं और यह रिवोल्ट के लिए एक
- 4:05:22इंपॉर्टेंट सोर्स ऑफ इंस्पिरेशन बन जाता
- 4:05:24है। आंदोलन को तीव्र होता देख ब्रिटिश
- 4:05:26गवर्नमेंट एक नोटिफिकेशन इशू करती है
- 4:05:28जिसमें कहा जाता है कि रियोथ अपनी जमीन पर
- 4:05:32अपनी पसंद की क्रॉप ग्रो करने के लिए फ्री
- 4:05:34हैं। और पुलिस का काम है कि उनके इस राइट
- 4:05:38को प्रोटेक्ट किया जाए। अगर प्लांटर्स को
- 4:05:40लगता है कि किसी ने कॉन्ट्रैक्ट को ब्रीच
- 4:05:42किया है तो वह सिविल कोर्ट में अपील कर
- 4:05:45सकते हैं। इसके अलावा 1860 में इंडिगो
- 4:05:48कमीशन भी अपॉइंट की जाती है और इसकी
- 4:05:50रेकमेंडेशंस को 1860 के एक्ट सिक्स में
- 4:05:53शामिल किया जाता है। इसके बाद इंडिगो
- 4:05:56प्लांटर्स धीरे-धीरे बंगाल से बिहार और
- 4:05:58उत्तर प्रदेश की तरफ मूव कर जाते हैं।
- 4:06:01इंडिगो रिवोल्ट के बाद अब बात करते हैं
- 4:06:04बंगाल में ही हुए एक और आंदोलन की। पावना
- 4:06:07एग्रेरियन लीग्स
- 4:06:091870 और 1880 के दौरान ईस्टर्न बंगाल के
- 4:06:14एक बड़े हिस्से में एग्रेरियन अनरेस्ट
- 4:06:16देखने को मिलता है। इसका मुख्य कारण
- 4:06:19जमींदार की ऑब्रेसिव प्रैक्टिससेस थी।
- 4:06:22जमींदार अक्सर लीगल लिमिट से ज्यादा
- 4:06:25रेवेन्यू डिमांड करते थे। इसके अलावा 1859
- 4:06:28के रेंट एक्ट 10 के अनुसार किसानों को
- 4:06:31ऑक्यूुपेंसी राइट्स भी नहीं लेने देते थे।
- 4:06:34एक्ट के अनुसार अगर लगातार 12 साल तक कोई
- 4:06:37किसान सेम प्लॉट ऑफ लैंड को कल्टीवेट करता
- 4:06:40है तो उसे उस लैंड के ऑक्यूुपेंसी राइट्स
- 4:06:43दिए जाने थे। लेकिन जमींदार ऐसा बिल्कुल
- 4:06:45नहीं चाहते थे और इसीलिए वो अक्सर
- 4:06:48फोर्सफुली किसानों को जमीन से बेदखल कर
- 4:06:50देते थे। उनकी फसल और कैटल को सीज कर लेते
- 4:06:54थे और कोर्ट में लिटिगेशन भी फाइल कर देते
- 4:06:56थे जो काफी लंबा चलते थे और किसान के लिए
- 4:06:59महंगे साबित होते थे। इस सब से परेशान
- 4:07:02होकर पावना डिस्ट्रिक्ट के यूसुफ शाही
- 4:07:05परगना के किसान एग्रेरियन लीग की फॉर्मेशन
- 4:07:08करते हैं। लीग रेंट स्ट्राइक ऑर्गेनाइज
- 4:07:11करती है। यानी कि किसान बढ़ा हुआ रेवेन्यू
- 4:07:14देने से मना कर देते हैं और जमींदार को
- 4:07:16कोर्ट्स में चैलेंज करते हैं। कोर्ट केस
- 4:07:19को फाइट करने के लिए किसान फंड्स जमा करते
- 4:07:21हैं। इनका संघर्ष पूरे पाबना और ईस्टर्न
- 4:07:24बंगाल के कुछ और डिस्ट्रिक्ट्स तक फैल
- 4:07:27जाता है। यहां स्ट्रगल का मेन फॉर्म लीगल
- 4:07:30रेजिस्टेंस ही रहता है और इसीलिए बहुत कम
- 4:07:33वायलेंस देखने को मिलती है। किसानों का
- 4:07:36संघर्ष वैसे तो 1885 तक चलता रहता है
- 4:07:39लेकिन ज्यादातर केसेस थोड़ा ऑफिशियल
- 4:07:41पर्सुएशन और थोड़ा जमींदार के डर की वजह
- 4:07:44से सॉल्व हो जाते हैं। बहुत से पेजेंट्स
- 4:07:46को ऑक्यूुपेंसी राइट्स मिल जाते हैं और
- 4:07:48बढ़ा हुआ रेंट भी नहीं चुकाना पड़ता। इसके
- 4:07:51अलावा गवर्नमेंट जमींदार के ऑपरेशन से
- 4:07:54टेनेंट्स को प्रोटेक्ट करने के लिए कानून
- 4:07:56बनाने का प्रॉमिस भी करती है। और 1885 में
- 4:07:59बंगाल टेनेंसी एक्ट पास किया जाता है।
- 4:08:02पाबना रिवोल्ट के दौरान भी बहुत से इंडियन
- 4:08:05इंटेलेक्चुअल्स ने पेजेंस कॉज को सपोर्ट
- 4:08:07किया था। इसमें बंकिम चंद्र चैटर्जी, आरसी
- 4:08:10दत्त और सुरेंद्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व
- 4:08:13में इंडियन एसोसिएशन शामिल थी। ईस्टर्न
- 4:08:16रीजन के बाद अब चलते हैं वेस्टर्न इंडिया
- 4:08:19की तरफ। डेकन राइट्स
- 4:08:21वेस्टर्न इंडिया के डेक्कन रीजन में
- 4:08:24ब्रिटिशर्स ने रेयतवाड़ी सिस्टम
- 4:08:26इंट्रोड्यूस किया था। यहां के किसान इस
- 4:08:28सिस्टम के तहत लगाए गए हैवी टैक्सेशन से
- 4:08:31परेशान थे। जिसके कारण वह मनी लेंडर के
- 4:08:34जाल में फंस चुके थे। यह मनी लेंडर्स
- 4:08:37ज्यादातर आउटसाइडर्स थे और मारवाड़ी और
- 4:08:40गुजराती कम्युनिटी को बिलोंग करते थे।
- 4:08:421864 में अमेरिकन सिविल वॉर खत्म होने के
- 4:08:46बाद सिचुएशन और खराब हो जाती है क्योंकि
- 4:08:49अमेरिका से एक बार फिर कॉटन की सप्लाई
- 4:08:51होने लगती है और इसलिए कॉटन के दाम काफी
- 4:08:54गिर जाते हैं। ऐसे समय में 1867 में
- 4:08:58गवर्नमेंट लैंड रेवेन्यू को भी 50% तक
- 4:09:01बढ़ा देती है और साथ ही कई साल लगातार
- 4:09:04यहां के किसान क्रॉप फेलियर का सामना करते
- 4:09:06हैं। इन सबके कारण किसान की कंडीशन और
- 4:09:10ज्यादा खराब होने लगती है। 1874 में मनी
- 4:09:13लेंडर्स और किसानों के बीच टकराव बहुत बढ़
- 4:09:16जाता है और किसान आउटसाइडर्स यानी मनी
- 4:09:19लेंडर्स के अगेंस्ट सोशल बॉयकॉट मूवमेंट
- 4:09:22शुरू कर देते हैं। यह लोग उनकी शॉप से
- 4:09:25सामान लेना बंद कर देते हैं। कोई भी किसान
- 4:09:28इनकी जमीन को कल्टीवेट नहीं करता और गांव
- 4:09:31के बाबर्स, वॉशरमैन, शू मेकर्स भी इन्हें
- 4:09:34सर्व करने से मना कर देते हैं। यह सोशल
- 4:09:37बॉयकॉट जल्दी ही पुणे, अहमदनगर, सोलापुर
- 4:09:41और सतारा के गांव तक फैल जाता है और उसके
- 4:09:44बाद सोशल बॉयकॉट एग्रेरियन राइट्स में
- 4:09:47ट्रांसफॉर्म होने लगता है। मनी लेंडर्स के
- 4:09:50घर और दुकान पर अटैक शुरू हो जाते हैं।
- 4:09:53किसान डेड बोंड्स और डीड्स को अपने कब्जे
- 4:09:55में लेकर इन्हें पब्लिकली जला देते हैं।
- 4:09:58लेकिन गवर्नमेंट फोर्स का यूज करके
- 4:10:01मूवमेंट को सप्रेस करने में सफल रहती है।
- 4:10:03कंसिलिएटरी मेजर के तौर पर 1879 में
- 4:10:07डेक्कन एग्रीकल्चरिस्ट रिलीफ एक्ट भी पास
- 4:10:10किया जाता है। इस आंदोलन के दौरान भी
- 4:10:13महाराष्ट्र के इंटेलिजेंसिया ने किसानों
- 4:10:16को सपोर्ट किया था। दोस्तों 19th सेंचुरी
- 4:10:19के कुछ इंपॉर्टेंट पेजेंट मूवमेंट को तो
- 4:10:22हमने डिस्कस कर लिया। आइए अब इनके फीचर्स
- 4:10:25को समझ लेते हैं। कैरेक्टरिस्टिक फीचर्स
- 4:10:28ऑफ 19थ सेंचुरी पेजेंट मूवमेंट्स।
- 4:10:3219th सेंचुरी के दौरान हुए किसान आंदोलन
- 4:10:34में पेजेंस ही मेन फोर्स बनकर उभरते हैं।
- 4:10:37यह लोग डायरेक्टली अपनी डिमांड्स के लिए
- 4:10:40फाइट करते दिखते हैं और इनकी ज्यादातर
- 4:10:42डिमांड्स इकोनॉमिक इश्यूज से संबंधित थी।
- 4:10:45यह आंदोलन किसान के इमीडिएट एनिमीज़ के
- 4:10:48अगेंस्ट डायरेक्टेड थे। फिर चाहे वह फॉरेन
- 4:10:51प्लांटर्स हो, इंडीजीनस जमींदार हो या फिर
- 4:10:54मनी लेंडर्स। इसके अलावा आंदोलन के
- 4:10:57ऑब्जेक्टिव्स भी स्पेसिफिक और लिमिटेड ही
- 4:11:00थे। यह सिर्फ कुछ पर्टिकुलर ग्रीवेंसेस का
- 4:11:02ही रिड्रेसल चाहते थे। इन्होंने डायरेक्ट
- 4:11:05कॉलोनियलिज्म को टारगेट नहीं किया था और
- 4:11:08ना ही इनका एम पेजेंस के एक्सप्लइटेशन या
- 4:11:11सबोर्डिनेशन के सिस्टम को खत्म करना था।
- 4:11:14इन आंदोलनों की टेरिटोरियल रीच भी लिमिटेड
- 4:11:17थी। संघर्ष में कोई कंटिन्यूटी या फिर
- 4:11:20लॉन्ग टर्म ऑर्गेनाइजेशन भी देखने को नहीं
- 4:11:22मिलता। हालांकि पेजेंट्स अपने लीगल राइट्स
- 4:11:26के प्रति स्ट्रांग अवेयरनेस डेवलप करते
- 4:11:28हैं और इन्हें कोर्ट्स के बाहर और अंदर
- 4:11:31असर्ट भी करते हैं। किसान आंदोलन के
- 4:11:34फीचर्स को समझने के बाद इनकी कुछ
- 4:11:36लिमिटेशंस भी जान लेते हैं। लिमिटेशंस
- 4:11:4019th सेंचुरी के किसान आंदोलन के समय
- 4:11:43किसानों को कॉलोनियलिज्म की इतनी ज्यादा
- 4:11:45समझ नहीं थी। इनके पास कोई नई आईडियोलॉजी
- 4:11:49या फिर नया सोशल, इकोनॉमिक और पॉलिटिकल
- 4:11:52प्रोग्राम भी नहीं था। यह संघर्ष मिलिटेंट
- 4:11:56होते हुए भी ओल्ड सोसाइटल ऑर्डर के
- 4:11:58फ्रेमवर्क में ही हुए थे और इनके पास
- 4:12:00अल्टरनेटिव सोसाइटी को लेकर किसी भी तरह
- 4:12:03का कांसेप्ट नहीं था। लेकिन 20th सेंचुरी
- 4:12:06के पेजेंट मूवमेंट्स नेशनल फ्रीडम स्ट्रगल
- 4:12:09से डीपली इन्फ्लुएंस्ड भी थे। और इनका
- 4:12:12इंपैक्ट भी फ्रीडम स्ट्रगल पर देखने को
- 4:12:14मिलता है। तो आइए अब इनके बारे में बात
- 4:12:17करते हैं। 20th सेंचुरी प्रेजेंट
- 4:12:20मूवमेंट्स। 20th सेंचुरी के प्रेजेंट
- 4:12:22मूवमेंट्स में सबसे पहला गांधी जी द्वारा
- 4:12:25लेड 1917 का चंपारण सत्याग्रह और 1918 का
- 4:12:29खेड़ा सत्याग्रह आते हैं। इन्हें हमने
- 4:12:32गांधी जी के इनिशियल मूवमेंट के वीडियोस
- 4:12:34में कवर किया हुआ है। इसके अलावा इस दौरान
- 4:12:37किसान सभा मूवमेंट भी शुरू होता है। आइए
- 4:12:40उसके बारे में जानते हैं। द किसान सभा
- 4:12:42मूवमेंट। किसान सभास को मेनली होम रूल
- 4:12:46एक्टिविस्ट्स के एफर्ट्स के द्वारा यूपी
- 4:12:48में ऑर्गेनाइज किया जाता है। फरवरी 1918
- 4:12:51में गौरी शंकर मिश्रा और इंद्र नारायण
- 4:12:54द्विवेदी यूनाइटेड प्रोविंसेस किसान सभा
- 4:12:57सेटअप करते हैं। मदन मोहन मालवीय भी इनके
- 4:13:01एफर्ट्स को सपोर्ट करते हैं। जून 1919 तक
- 4:13:05यूपी किसान सभा की 450 ब्रांचेस बन जाती
- 4:13:08हैं। इसके साथ झिंगोरी सिंह, दुर्गापाल
- 4:13:12सिंह और बाबा रामचंद्र जैसे प्रोमिनेंट
- 4:13:14लीडर्स भी जुड़ते हैं। जून 1920 में बाबा
- 4:13:18रामचंद्र नेहरू जी से यहां के गांव को
- 4:13:21विजिट करने के लिए कहते हैं। इन्हीं
- 4:13:23विजिट्स के दौरान नेहरू जी गांव के लोगों
- 4:13:26के साथ क्लोज कांटेक्ट्स डेवलप करते हैं।
- 4:13:29फिर अक्टूबर 1920 में अवध किसान सभा की
- 4:13:32फॉर्मेशन होती है। यह किसानों से कहते हैं
- 4:13:35कि वह बेदखली लैंड को टिल ना करें और साथ
- 4:13:39ही बेगार यानी कि अनपेड लेबर ऑफर ना करने
- 4:13:43का भी सुझाव देते हैं। जो लोग इन कंडीशंस
- 4:13:46को नहीं मानते उनका बॉयकॉट किया जाता है
- 4:13:49और सभी डिस्प्यूट्स को पंचायत के द्वारा
- 4:13:51सॉल्व किया जाता है। किसान सभा पहले मास
- 4:13:55मीटिंग्स और मोबिलाइजेशन के द्वारा ही
- 4:13:58प्रोटेस्ट करती है। लेकिन जनवरी 1921 में
- 4:14:01यह पैटर्न चेंज हो जाता है और बाजार, घर
- 4:14:05और अनाज, गोदामों को लूटना शुरू कर दिया
- 4:14:08जाता है। इस दौरान पुलिस के साथ भी इनका
- 4:14:11टकराव होता है। एक्टिविटी के मेजर सेंटर्स
- 4:14:14रायबरेली, फैजाबाद और सुल्तानपुर के
- 4:14:17डिस्ट्रिक्ट्स थे। लेकिन यह आंदोलन जल्दी
- 4:14:20ही डिक्लाइन हो जाता है। कुछ गवर्नमेंट
- 4:14:23रिप्रेशन के कारण और कुछ अवध रेंट
- 4:14:25अमेंडमेंट एक्ट 1921 पास होने की वजह से
- 4:14:29लेकिन कुछ समय बाद ही यूपी में एक और
- 4:14:32किसान आंदोलन शुरू हो जाता है। एका
- 4:14:35मूवमेंट 1921 के एंड में एक बार फिर यूपी
- 4:14:40के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स जैसे कि हरदोई,
- 4:14:43बहराइच और सीतापुर में पेजेंट डिस्कंटेंट
- 4:14:46दिखने लगता है। इसके पीछे कई कारण थे।
- 4:14:49जैसे कि हाई रेंट्स जो कि रिकॉर्डेड रेट
- 4:14:51से 50% हायर था। रेवेन्यू कलेक्शन के
- 4:14:54इंचार्ज द्वारा किसानों का शोषण और शेयर
- 4:14:57रेंट्स की प्रैक्टिस।
- 4:14:59इसके अगेंस्ट शुरू होता है एका या यूनिटी
- 4:15:02मूवमेंट। इसको लीडरशिप देते हैं मदारी
- 4:15:05पासी और बाकी के लो कास्ट लीडर्स। बहुत से
- 4:15:09छोटे जमींदार भी इनका साथ देते हैं। इसकी
- 4:15:12मीटिंग्स में किसानों को प्रतिज्ञा दिलाई
- 4:15:15जाती है कि वह सिर्फ रिकॉर्डेड रेवेन्यू
- 4:15:17को ही पे करेंगे। अपनी जमीन से बेदखल किए
- 4:15:20जाने पर वह वहां से नहीं जाएंगे। फोर्स्ड
- 4:15:24लेबर से इनकार करेंगे और पंचायत के
- 4:15:27डिसीजंस का पालन करेंगे। आंदोलन काफी तेजी
- 4:15:30से फैलता है। लेकिन अथॉरिटीज द्वारा
- 4:15:33सीवियर रिप्रेशन के कारण मार्च 1922 तक इस
- 4:15:36आंदोलन का भी एंड हो जाता है। नॉर्थ के
- 4:15:40बाद अब चलते हैं सदर्न रीजन की तरफ जहां
- 4:15:42किसान आंदोलन नेशनल मूवमेंट के साथ मर्ज
- 4:15:46होता है।
- 4:15:48मपिला रिवोल्ट
- 4:15:50मपिलास मालाबार रीजन में रहने वाले
- 4:15:53मुस्लिम टेनेंट्स थे और यहां ज्यादातर
- 4:15:55जमींदार हिंदू थे। मपिलास ने 19th सेंचुरी
- 4:15:59में भी जमींदार के द्वारा किए जा रहे शोषण
- 4:16:01का विरोध किया था। इनके ग्रीवेंसेस की
- 4:16:04लिस्ट में टेन्योर की सिक्योरिटी ना होना,
- 4:16:07हाई रेंट्स, रिन्यूल फीस और बाकी के
- 4:16:10शोषणकारी इललीगल डिमांड्स आते थे। 1920
- 4:16:14में लोकल कांग्रेस बॉडी टेनेंट लैंड लॉर्ड
- 4:16:17रिलेशंस को रेगुलेट करने के लिए गवर्नमेंट
- 4:16:19से लेजिसलेशन लाने की डिमांड करती है।
- 4:16:22इससे मपिलास का भी हौसला बढ़ता है और
- 4:16:24जल्दी ही इनका आंदोलन उस समय चल रहे
- 4:16:27खिलाफत एजिटेशन के साथ मर्ज हो जाता है।
- 4:16:30खिलाफत आंदोलन के नेता जैसे कि गांधी जी,
- 4:16:33शौकत अली और मौलाना आजाद मपिलाज़ की
- 4:16:36मीटिंग्स को एड्रेस करते हैं। नेशनल
- 4:16:39लीडर्स के अरेस्ट के बाद लीडरशिप लोकल
- 4:16:41मापीला लीडर्स के हाथ में आ जाती है।
- 4:16:44अगस्त 1921 में सिचुएशन खराब होने लगती है
- 4:16:48क्योंकि इनके एक लीडर अली मुसालियार को
- 4:16:50अरेस्ट कर लिया जाता है। जिसके बाद लार्ज
- 4:16:53स्केल राइट्स शुरू हो जाते हैं। शुरुआत
- 4:16:56में तो ब्रिटिश अथॉरिटी के सिंबल्स को
- 4:16:58टारगेट किया जाता है। लेकिन बाद में
- 4:17:00रिबेलियन पूरी तरह अपना कैरेक्टर चेंज कर
- 4:17:03लेता है। मापिलाज़ जमींदार को टारगेट करना
- 4:17:06शुरू कर देते हैं। क्योंकि इन्हें लगता है
- 4:17:08कि जमींदार अथॉरिटी का साथ दे रहे हैं।
- 4:17:11अनफॉर्चूनेटली जैसे हमने देखा कि जमींदार
- 4:17:14ज्यादातर हिंदूस थे और एक एंटी गवर्नमेंट
- 4:17:18और एंटी लैंड लॉर्ड आंदोलन कम्युनल होने
- 4:17:20लगता है इसके बाद गवर्नमेंट अपनी पूरी
- 4:17:23ताकत के साथ इसको सप्रेस करने में लग जाती
- 4:17:26है और दिसंबर 1921 तक आंदोलन पूरी तरह
- 4:17:30खत्म हो जाता है। मापिलास को इस तरह
- 4:17:33सप्रेस किया गया कि आजादी तक उन्होंने फिर
- 4:17:36किसी आंदोलन में भाग नहीं लिया। आइए अब
- 4:17:4020थ सेंचुरी के दौरान हुए बाकी के पेजेंट
- 4:17:43मूवमेंट्स और उनसे रिलेटेड डेवलपमेंट्स को
- 4:17:46ब्रीफ में देखते हैं। अदर इंपॉर्टेंट
- 4:17:47डेवलपमेंट्स।
- 4:17:49दोस्तों, 20थ सेंचुरी के पेजेंट मूवमेंट्स
- 4:17:52में बारदोली सत्याग्रह भी आता है। यह 1926
- 4:17:55में गुजरात के बारदोली डिस्ट्रिक्ट में
- 4:17:58शुरू हुआ था।
- 4:17:59यहां किसान लैंड रेवेन्यू में की गई 30%
- 4:18:02की बढ़ोतरी का विरोध कर रहे थे। इसे सरदार
- 4:18:05वल्लभ भाई पटेल लीड करते हैं। बारदोली की
- 4:18:08वुमेन ने ही उन्हें सरदार का टाइटल दिया
- 4:18:11था। आंदोलन तेज होने पर ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 4:18:14एक कमेटी सेटअप करती है जिसमें रेवेन्यू ह
- 4:18:17को अनजस्ट पाया जाता है और सिर्फ 6.03%
- 4:18:21का ही इनक्रीस किया जाता है। इसके अलावा
- 4:18:24अप्रैल 1936 में लखनऊ में ऑल इंडिया किसान
- 4:18:28सभा फॉर्म की जाती है। स्वामी सहजानंद
- 4:18:31सरस्वती इसके प्रेसिडेंट बनते हैं और एन
- 4:18:34जींगा जनरल सेक्रेटरी। किसान मैनिफेस्टो
- 4:18:37इशू किया जाता है और इंदुलाल याग्निक के
- 4:18:40अंडर पीरियडिकल भी शुरू किया जाता है।
- 4:18:43इसके अलावा आजादी मिलने से ठीक पहले भी
- 4:18:45कुछ पेजेंट मूवमेंट्स देखने को मिलते हैं।
- 4:18:48जिसमें कम्युनिस्ट पार्टीज का रोल बहुत
- 4:18:50ज्यादा रहता है। पहला था 1946 में बंगाल
- 4:18:54में हुआ तिभागा मूवमेंट। यहां बंगाल
- 4:18:57प्रोविंशियल किसान सभा तिभागा यानी कि
- 4:18:59शेयर क्रॉपर्स को 2/3 शेयर देने की डिमांड
- 4:19:02करती है। कम्युनिस्ट कार्डर्स और बहुत से
- 4:19:05यंग स्टूडेंट्स गांव जाकर शेयर क्रॉपर्स
- 4:19:08को ऑर्गेनाइज करते हैं। लेकिन जल्दी ही यह
- 4:19:10आंदोलन कमजोर हो जाता है। इसके पीछे कुछ
- 4:19:13मुख्य कारण थे। जैसे कि मुस्लिम लीग की
- 4:19:16मिनिस्ट्री द्वारा बरगारदरी बिल अनाउंस
- 4:19:18करना जिसमें रेंट पेइंग टेनेंट्स को कुछ
- 4:19:21रिलीफ ऑफर की गई थी। दूसरा आंदोलन जुलाई
- 4:19:241946 में शुरू हुआ था। इसे तेलंगाना
- 4:19:28मूवमेंट बोला जाता है। उस समय यह रीजन
- 4:19:30हैदराबाद के प्रिंसली स्टेट का पार्ट था।
- 4:19:33यह मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री का सबसे बड़ा
- 4:19:35पेजेंट गोरिल्ला वॉर था। इसका इफेक्ट 3000
- 4:19:39गांव और लगभग 30 लाख लोगों पर हुआ था।
- 4:19:42यहां कम्युनिस्ट्स के नेतृत्व में
- 4:19:44पेजेंट्स निजाम की रजाकार फोर्स का
- 4:19:47बहादुरी से सामना करते हैं और लगभग 2 साल
- 4:19:50तक अपना संघर्ष जारी रखते हैं। 1948 में
- 4:19:54इंडियन सिक्योरिटी फोर्सेस द्वारा
- 4:19:56हैदराबाद के टेकओवर के बाद यह आंदोलन
- 4:19:59धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। कंक्लूजन
- 4:20:04दोस्तों, इस तरह पेजेंट मूवमेंट्स के
- 4:20:06द्वारा इंडिया के किसानों ने ब्रिटिश
- 4:20:08अथॉरिटी को लगातार चैलेंज किया था। शुरुआत
- 4:20:11में भले ही इनके टारगेट्स में सिर्फ
- 4:20:13इमीडिएट ओप्रेसर्स हो, लेकिन बाद में यह
- 4:20:16डायरेक्टली ब्रिटिश कॉलोनियल रूल का विरोध
- 4:20:18करते दिखते हैं। इन्होंने नेशनल मूवमेंट
- 4:20:21को भी अपनी प्रेजेंस से स्ट्रेंथन किया।
- 4:20:24किसानों के पार्टिसिपेशन के बिना नेशनल
- 4:20:26मूवमेंट कभी सफल नहीं हो सकता था। यह बात
- 4:20:29गांधी जी बहुत अच्छी तरह समझते थे। और
- 4:20:32इसीलिए उन्होंने पेजेंट्स को डायरेक्टली
- 4:20:34नेशनल मूवमेंट से जोड़ने का काम किया।
- 4:20:37पेजेंट मूवमेंट्स ने पोस्ट इंडिपेंडेंस
- 4:20:40एग्रेरियन रिफॉर्म्स का एटमॉस्फियर भी
- 4:20:42क्रिएट किया। जैसे कि आजादी के बाद
- 4:20:45जमींदारी सिस्टम को अबॉलिश कर दिया जाता
- 4:20:47है। और भी बहुत सारे रिफॉर्म्स
- 4:20:49इंट्रोड्यूस किए जाते हैं जो कहीं ना कहीं
- 4:20:51आजादी से पहले प्रेजेंट मूवमेंट्स की
- 4:20:54डिमांड रहे थे।
- 4:20:56द रिवोल्ट ऑफ 1857 पार्ट वन। दोस्तों आज
- 4:21:00हम बात करने वाले हैं 1857 के रिवोल्ट की
- 4:21:04जिसे म्यूटनी ग्रेट रिबेलियन या फर्स्ट
- 4:21:08वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस जैसे नामों से भी जाना
- 4:21:10जाता है। इस रिवोल्ट की शुरुआत होती है
- 4:21:1310th मई 1857 को मेरठ से और यह धीरे-धीरे
- 4:21:17नॉर्थ में पंजाब से लेकर साउथ में नर्मदा
- 4:21:20तक और ईस्ट में बिहार से लेकर वेस्ट में
- 4:21:23राजपूताना रीजन तक को कवर कर लेता है।
- 4:21:26रिवोल्ट की डिटेल्स में जाने से पहले इसके
- 4:21:29पीछे के कारण समझना जरूरी हो जाता है। तो
- 4:21:32आइए पहले उन्हें समझते हैं। कॉज ऑफ द 1857
- 4:21:35रिवोल्ट।
- 4:21:37दोस्तों 1857 के रिवोल्ट के पीछे कोई एक
- 4:21:41कारण नहीं बल्कि बहुत से कारण जिम्मेदार
- 4:21:43थे। यह रिवोल्ट नतीजा था ब्रिटिश कॉलोनियल
- 4:21:47रूल के 100 साल के अत्याचारों का। जी हां,
- 4:21:501757 की बैटल ऑफ प्लासी के बाद इंडिया में
- 4:21:53ब्रिटिश कॉलोनियल रूल की शुरुआत हुई थी और
- 4:21:56तब से लेकर 1857 आने तक ब्रिटिशर्स ने
- 4:21:59बहुत से ऐसे काम किए थे जिसकी वजह से
- 4:22:01इंडिया के लोगों में उनके खिलाफ आक्रोश
- 4:22:03पैदा हो रहा था। इस आक्रोश को चिंगारी
- 4:22:06मिलती है 1857 में और शुरुआत होती है
- 4:22:09इंडिया के फर्स्ट वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस की।
- 4:22:13आइए पहले आक्रोश के अलग-अलग कारणों को
- 4:22:15समझते हैं। सबसे पहले बात करते हैं
- 4:22:18पॉलिटिकल यानी कि राजनीतिक कारणों की।
- 4:22:21पॉलिटिकल कॉजेस। दोस्तों, ब्रिटिश ईस्ट
- 4:22:25इंडिया कंपनी इंडिया में अपनी पावर और
- 4:22:27प्रेस्टीज को बढ़ाने के लिए जो कुछ भी
- 4:22:29पॉसिबल था कर रही थी। इसके लिए चाहे उसे
- 4:22:32अपने प्रॉमिससेस को तोड़ना पड़े या फिर
- 4:22:35ट्रीटीज को डिसऑनर करना पड़े। इसकी वजह से
- 4:22:37इंडियन रूलर्स को उनकी इंटेंशंस पर डाउट
- 4:22:40होने लगा था। और जब ब्रिटिशर्स सब्सिडियरी
- 4:22:43अलायंस और फिर डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स जैसी
- 4:22:46पॉलिसीज के तहत इंडियन स्टेट्स को एनेक्स
- 4:22:48करना शुरू कर देते हैं, तब जैसे पानी सर
- 4:22:51से ऊपर ही चला जाता है। सभी इंडियन रूलर्स
- 4:22:54के मन में यह डर आ जाता है कि अगला नंबर
- 4:22:57उनका ही हो सकता है। यही वजह थी कि बहुत
- 4:23:00से इंडियन रूलर्स 1857 के रिवॉल्ट के समय
- 4:23:03ब्रिटिशर्स के खिलाफ हथियार उठा लेते हैं।
- 4:23:06अब बात करते हैं 1857 रिवोल्ट के पीछे के
- 4:23:09इकोनॉमिक कॉजेस की। इकोनॉमिक कॉजेस
- 4:23:14दोस्तों ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का मेन
- 4:23:17मोटिव तो इंडिया में ज्यादा से ज्यादा
- 4:23:19प्रॉफिट्स अर्न करना ही था। इसके लिए
- 4:23:21तरीके भले ही उन्होंने अलग-अलग इस्तेमाल
- 4:23:23किए हो। बेसिकली उनकी इकोनॉमिक पॉलिसीज की
- 4:23:26वजह से इंडिया की ट्रेडिशनल इकॉनमी पूरी
- 4:23:29तरह से डिस्ट्रॉय होने लगती है। ऐसी कोई
- 4:23:32भी इकोनमिक क्लास नहीं थी जिसे ब्रिटिश
- 4:23:35रूल में नुकसान नहीं हुआ हो। चाहे फिर वह
- 4:23:37पेजेंट्स हो, मर्चेंट्स हो, आर्टिजंस हो
- 4:23:40या फिर जमींदार ही क्यों ना हो।
- 4:23:42ब्रिटिशर्स ने जो लैंड रेवेन्यू सिस्टम्स
- 4:23:45इंडिया में इंट्रोड्यूस किए थे जैसे कि
- 4:23:47परमानेंट सेटलमेंट, रेतवाड़ी सिस्टम या
- 4:23:49महलवाड़ी सिस्टम सभी में रेवेन्यू रेट्स
- 4:23:52इतने हाई रखे गए थे कि पेजेंट्स की कंडीशन
- 4:23:55मिरेबल हो जाती है। रेवेन्यू चुकाने के
- 4:23:58लिए उन्हें कर्ज लेने की जरूरत पड़ने लगती
- 4:24:00है और इस तरह वह धीरे-धीरे मनी लेंडर्स के
- 4:24:03जाल में फंसने लगते हैं। इसके साथ ही
- 4:24:05एग्रीकल्चर के बढ़ते कमर्शियलाइजेशन ने भी
- 4:24:07पेजेंट्स की हालत खराब कर दी थी। इसी तरह
- 4:24:11ट्रेडिशनल जमींदार को भी रेवेन्यू चुकाने
- 4:24:13में देर होने पर सनसेट क्लॉज़ की वजह से कई
- 4:24:16बार अपनी जमींदारी से हाथ धोना पड़ता था।
- 4:24:19एग्जांपल के तौर पर अवध में 21,000
- 4:24:22तालुकदार जो कि वहां के जमींदार को कहा
- 4:24:25जाता था, उनकी स्टेट्स को कन्फिसकेट कर
- 4:24:27लिया गया था। इसी तरह इंडियन ट्रेड और
- 4:24:30मार्केटाइल क्लास को भी ब्रिटिश पॉलिसीज
- 4:24:32की वजह से नुकसान हो रहा था। ब्रिटिशर्स
- 4:24:35ने इंडिया के गुड्स पर तो हाई टैफ ड्यूटीज
- 4:24:38इंपोज कर दी थी। जबकि इंडिया में ब्रिटिश
- 4:24:40गुड्स के इंपोर्ट पर बहुत ही लो टेरिफ्स
- 4:24:43रखे हुए थे। इसकी वजह से इंडिया से कॉटन
- 4:24:46और सिल्क टेक्सटाइल्स का एक्सपोर्ट पूरी
- 4:24:48तरह खत्म होने की कगार पर आ गया था।
- 4:24:51आर्टिजंस और हैंडीक्राफ्ट के लोगों को भी
- 4:24:53अनइंप्लॉयमेंट का सामना करना पड़ रहा था।
- 4:24:56इंडियन रूलर्स जो इन्हें पेट्रिनेज देने
- 4:24:58का काम करते थे, उनके स्टेट्स को तो
- 4:25:00ब्रिटिशर्स ने एनेक्स कर लिया था। इसके
- 4:25:03साथ ही इंडियन हैंडीक्राफ्ट्स को डिरेज
- 4:25:05करके ब्रिटिश गुड्स को प्रमोट किया जा रहा
- 4:25:07था। जिसके परिणाम स्वरूप इंडियन आर्टिजंस
- 4:25:11एंप्लॉयमेंट के लिए कोई दूसरा रास्ता
- 4:25:13खोजने पर मजबूर हो गए थे और वह मिलना भी
- 4:25:15बहुत मुश्किल हो रहा था क्योंकि मॉडर्न
- 4:25:17इंडस्ट्रीज का डेवलपमेंट भी इंडिया में
- 4:25:20नहीं हो रहा था। इस तरह से ब्रिटिशर्स की
- 4:25:23शोषणकारी आर्थिक नीतियों के कारण इंडिया
- 4:25:26के लोगों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा
- 4:25:28रही थी और यह एक बहुत बड़ा कारण बनती है
- 4:25:311857 के रिवोल्ट का। आइए अब बात करते हैं
- 4:25:35कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव कारणों की।
- 4:25:37एडमिनिस्ट्रेटिव कॉजेस। दोस्तों, कंपनी के
- 4:25:41एडमिनिस्ट्रेशन में बहुत ज्यादा करप्शन
- 4:25:43फैला हुआ था। जिसकी वजह से आम लोग बहुत
- 4:25:46परेशान थे। इसके साथ ही कंपनी का
- 4:25:49एडमिनिस्ट्रेशन इंडिया के लोगों के लिए
- 4:25:51एकदम फॉरेन था। कंपनी के साथ किसी भी तरह
- 4:25:54का कोई रिलेशन लोग महसूस नहीं कर पाते थे।
- 4:25:58साथ ही एडमिनिस्ट्रेशन की भाषा और तौर
- 4:26:00तरीके भी उनके लिए समझना मुश्किल हो रहा
- 4:26:03था। पुलिस हो या जुडिशरी आम जनता की सुनने
- 4:26:07वाला कोई भी नहीं था। इस वजह से भी लोगों
- 4:26:09में ब्रिटिश रूल के खिलाफ असंतोष की भावना
- 4:26:12बनी हुई थी। अब बात करते हैं कंपनी के
- 4:26:15खिलाफ पैदा हुए आक्रोश के पीछे के कुछ
- 4:26:18सोशियो रिलीजियस कॉजेस की।
- 4:26:21सोशियो रिलीजियस कॉजेस दोस्तों ब्रिटिशर्स
- 4:26:25कभी भी इंडियंस को अपने बराबर का नहीं
- 4:26:28समझते थे। उनके एटीट्यूड में रेसिज्म और
- 4:26:31सुपीरियरिटी कॉम्प्लेक्स भरा हुआ था। इसकी
- 4:26:34वजह से एक आक्रोश तो लोगों में था ही।
- 4:26:36इसके साथ ही ब्रिटिशर्स बहुत सी ऐसी सोशल
- 4:26:39रिलीजियस पॉलिसीज फॉलो करते हैं जिसकी वजह
- 4:26:42से यह आक्रोश और भी ज्यादा बढ़ने लगता है।
- 4:26:44इसमें सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है
- 4:26:46क्रिश्चियन मिशनरीज की एक्टिविटीज। वो
- 4:26:49अलग-अलग तरीकों से इंडिया के लोगों को
- 4:26:51कन्वर्ट करने की कोशिश कर रहे थे। जिसकी
- 4:26:54वजह से लोग उन्हें एक खतरे की तरह देखने
- 4:26:56लगे थे। इसके साथ ही ब्रिटिशर्स भी ऐसे
- 4:26:59कुछ कानून बनाते हैं जिससे लोगों को
- 4:27:01विश्वास होने लगता है कि ब्रिटिशर्स उनके
- 4:27:04रिलीजन को चैलेंज कर रहे हैं। इसके
- 4:27:07एग्जांपल्स हैं मंदिर और मस्जिद की जमीन
- 4:27:09पर टैक्स लगाने का डिसीजन। 1856 का
- 4:27:12रिलीजियस डिसेबिलिटीज एक्ट जिसमें कहा गया
- 4:27:15था कि रिलीजन चेंज करने पर भी एनसेेस्ट्रल
- 4:27:18प्रॉपर्टी में हिस्सा बना रहेगा। इसके साथ
- 4:27:20ही ब्रिटिशर्स के द्वारा किए गए कुछ सोशल
- 4:27:23रिलीजियस रिफॉर्म्स को भी लोग अपने
- 4:27:25ट्रेडिशंस में बाहरी दखल की तरह देखते
- 4:27:27हैं। फिर चाहे बात सती प्रथा पर बैन की
- 4:27:30हो, विडोरी मैरिज एक्ट पास करने की या फिर
- 4:27:33वुमेन को एजुकेशन देने की। इन सभी
- 4:27:36रिफॉर्म्स की वजह से भी समाज के एक बड़े
- 4:27:38वर्ग में ब्रिटिशर्स के खिलाफ आक्रोश की
- 4:27:41भावना जन्म ले चुकी थी। दोस्तों, 1857 के
- 4:27:44रिवोल्ट की शुरुआत आर्मी के सेपॉइस के
- 4:27:47द्वारा हुई थी। इसलिए कुछ ऐसे कारणों को
- 4:27:50भी समझ लेते हैं जिनका संबंध सेपॉइस के
- 4:27:53साथ था। रीजंस फॉर सेपॉइस डिस्कंटेंट।
- 4:27:57दोस्तों, सबसे पहले याद रखने वाली बात यह
- 4:27:59है कि सेपॉइस भी असल में पार्ट तो इंडियन
- 4:28:02सोसाइटी के ही थे। इसीलिए जो भी परेशानी
- 4:28:05जनरल सोसाइटी में हो रही थी, वह सब रीजन
- 4:28:08तो सेपॉइज़ में आक्रोश पैदा कर ही रहे थे।
- 4:28:10और इसमें भी सबसे ज्यादा जिस बात का
- 4:28:12उन्हें डर था वह थी कि ब्रिटिशर्स उनका
- 4:28:15धर्म नष्ट करना चाहते हैं। इसके साथ ही
- 4:28:18सेपॉइस के कुछ और ग्रीवेंसेस भी थे। जैसे
- 4:28:21कि इंडियन सेपॉइस और ब्रिटिश सेपॉइस में
- 4:28:24बहुत डिफरेंस देखने को मिलता था। इंडियन
- 4:28:26सेपॉइस के साथ कभी सम्मान का बर्ताव नहीं
- 4:28:29किया जाता था। ऑफिसर्स उन्हें गाली देकर
- 4:28:32बुलाया करते थे। साथ ही इंडियंस के लिए
- 4:28:34आगे बढ़ने के रास्ते भी नहीं खुले थे। वह
- 4:28:37सूबेदार की पोस्ट से आगे नहीं जा सकते थे।
- 4:28:39यह ब्रिटिशर्स के रेसिज्म का एक प्रतीक
- 4:28:42था। सेपॉइस के डिसटिस्फेक्शन का एक रीसेंट
- 4:28:45कारण भी था और वह था ब्रिटिशर्स का एक
- 4:28:49ऑर्डर जिसमें कहा गया था कि सिंध और पंजाब
- 4:28:52में सर्विस के लिए जाने पर सेपॉइस को कोई
- 4:28:54फॉरेन अलाउंस नहीं मिलेगा जैसा कि उन्हें
- 4:28:57अब तक मिलता आया था। इसके साथ ही अवध का
- 4:29:00एनेक्सेशन एक बड़ा कारण था क्योंकि
- 4:29:02ब्रिटिश आर्मी में काम कर रहे बहुत से
- 4:29:05सैनिक अवध को ही बिलोंग करते थे। इसलिए
- 4:29:08उनके लिए अवध को एनेक्स किया जाना उनके घर
- 4:29:10को एनेक्स करना जैसा था। इन सभी रीजंस की
- 4:29:13वजह से सेबॉइज के अंदर ब्रिटिशर्स के
- 4:29:16खिलाफ आक्रोश की आग सुलगने लगी थी। इस आग
- 4:29:20को विस्फोट में बदलने के लिए अब बस एक
- 4:29:22चिंगारी की ही जरूरत थी। और वो चिंगारी कब
- 4:29:25और कैसे मिलती है? आइए जानते हैं। इमीडिएट
- 4:29:28कॉज। दोस्तों 1857 रिवोल्ट के लिए चिंगारी
- 4:29:32का काम किया था एनफील्ड राइफल के
- 4:29:34इंट्रोडक्शन ने। इसके कार्टिजेस पर
- 4:29:37ग्रीस्ड पेपर कवर हुआ करता था जिसे राइफल
- 4:29:40में लोड करने से पहले मुंह से काटकर खोलना
- 4:29:43पड़ता था और यह जो ग्रीस था वह सूअर और
- 4:29:46गाय की चर्बी से बनता था। इससे इंडियन
- 4:29:48सेपॉइस चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम्स
- 4:29:51बहुत गुस्से में आ जाते हैं। उन्हें लगता
- 4:29:54है कि ब्रिटिश गवर्नमेंट जानबूझकर ग्रीस्ट
- 4:29:56कार्ट्रिज के द्वारा उनका धर्म नष्ट करना
- 4:29:59चाहती है। इसका मतलब अब विद्रोह करने का
- 4:30:02समय आ गया है। दोस्तों, यह तो बात हुई
- 4:30:041857 के रिवोल्ट के पीछे के सभी कारणों
- 4:30:07की। आइए, अब यह देखते हैं कि रिवोल्ट आखिर
- 4:30:10कब, कहां और कैसे शुरू हुआ था। द बिगिनिंग
- 4:30:13एंड कोर्स ऑफ रिवोल्ट। दोस्तों जैसा कि
- 4:30:16हमने आपको शुरुआत में ही बताया था 1857 का
- 4:30:19रिवोल्ट 10th मई को मेरठ से शुरू हुआ था
- 4:30:22और उसके बाद नॉर्दन और सेंट्रल इंडिया के
- 4:30:25एक बड़े हिस्से में फैल गया था। लेकिन
- 4:30:27मेरठ में आउटब्रेक से पहले भी विद्रोह के
- 4:30:29साइन दिखने लग गए थे। जैसे कि 29 मार्च
- 4:30:331857 को बैरकपुर में यंग सोल्जर मंगल
- 4:30:36पांडे को फांसी दे दी जाती है। क्योंकि
- 4:30:39उन्होंने ग्रीस्ट कार्ट्रिरेज का यूज करने
- 4:30:41से मना कर दिया था और अपने ब्रिटिश
- 4:30:43ऑफिसर्स पर अटैक कर दिया था। इसी तरह के
- 4:30:46कुछ और भी इंसिडेंट्स यह इशारा कर रहे थे
- 4:30:48कि सेपॉइस में विद्रोह की आग लग चुकी है
- 4:30:52और फिर मेरठ में आखिरकार विस्फोट हो ही
- 4:30:55जाता है। 24 अप्रैल को थर्ड नेटिव गैवलरी
- 4:30:58के 90 जवान ग्रीस्ट कार्ट्रजेस को
- 4:31:01एक्सेप्ट करने से मना कर देते हैं। इसलिए
- 4:31:04नाइंथ मई को उनमें से 85 को आर्मी से
- 4:31:07तत्काल डिसमिस करके 10 साल की सजा सुना दी
- 4:31:10जाती है और जेल में बंद कर दिया जाता है।
- 4:31:13इस घटना से मेरठ में तैनात सभी सिपॉईज के
- 4:31:16दिल में विद्रोह की आग लग जाती है और 10
- 4:31:18मई को वह अपने साथी जवानों को जेल से बाहर
- 4:31:21निकालकर अपने ऑफिसर्स की हत्या करके
- 4:31:24विद्रोह का बिगुल बजा देते हैं। सूरज ढलने
- 4:31:27के बाद सभी जवान दिल्ली की तरफ निकल पड़ते
- 4:31:30हैं। और जब अगली सुबह यह सिपाही दिल्ली
- 4:31:32पहुंचते हैं तो वहां की लोकल इनफेंट्री भी
- 4:31:35इन्हें जॉइ कर लेती है। वो भी अपने
- 4:31:37यूरोपियन ऑफिसर्स को मार के शहर को सीज कर
- 4:31:40लेते हैं। इसके बाद यह सोल्जर्स मुगल एपरर
- 4:31:43बहादुर शाह जफर को इंडिया का एपरर मानते
- 4:31:46हुए उन्हें अपने रिवोल्ट का लीडर चुन लेते
- 4:31:49हैं। इस एक्ट से यह सेपॉइज़ सोल्जर्स की
- 4:31:52म्यूटनी को एक रेवोल्यूशनरी वॉर में
- 4:31:54ट्रांसफॉर्म कर देते हैं। इसके बाद
- 4:31:56अलग-अलग जगह पर सेपॉइस विद्रोह करने लगते
- 4:31:59हैं और सभी दिल्ली की तरफ पहुंचने लगते
- 4:32:02हैं। मुगल एपरर बहादुर शाहब भी सेपॉइस के
- 4:32:05कहने पर और शायद उनके प्रेशर पर इंडिया के
- 4:32:08सभी चीफ्स और रूलर्स को लेटर लिखकर कहते
- 4:32:10हैं कि ब्रिटिश रेजीम के साथ फाइट करने के
- 4:32:13लिए एक क्फेडरेसी को ऑर्गेनाइज किया जाए।
- 4:32:16नॉर्थ और सेंट्रल इंडिया के डिफरेंट
- 4:32:18पार्ट्स में सेपॉइस के रिवोल्ट के साथ-साथ
- 4:32:21सिविल रिवोल्ट्स भी शुरू हो जाते हैं।
- 4:32:23सिविलियन पॉपुलेशन भी हथियार उठा लेती है
- 4:32:26और ब्रिटिशर्स के खिलाफ जंग में सेपॉइस के
- 4:32:29साथ खड़ी हो जाती है और देखते ही देखते
- 4:32:31इंडिया के एक बड़े हिस्से में क्रांति की
- 4:32:34ज्वाला जगने लगती है। 1857 के इस रिवोल्ट
- 4:32:37के स्टॉर्म सेंटर्स बनते हैं दिल्ली,
- 4:32:40कानपुर, लखनऊ, बरेली, झांसी और बिहार।
- 4:32:44दिल्ली में नॉमिनल और सिंबॉलिक लीडरशिप तो
- 4:32:46एपरर बहादुर शाह जफर के पास थी। लेकिन
- 4:32:49रियल कमांड जनरल बख्त खान की लीडरशिप में
- 4:32:52काम कर रहे सोल्जर्स के ग्रुप के हाथों
- 4:32:54में थी। कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व कर
- 4:32:57रहे थे नाना साहेब जो बाजीराव सेकंड के
- 4:33:00अडॉप्टेड सन थे। नाना साहेब कानपुर से
- 4:33:03अंग्रेजों को भगा देते हैं और खुद को
- 4:33:05पेशवा डिक्लेअ करते हैं। नाना साहब का
- 4:33:08यहां साथ देते हैं। उनके सबसे काबिल और
- 4:33:10लॉयल साथी तात्या टोपे। लखनऊ में बेगम
- 4:33:14हजरत महल विद्रोह को लीड कर रही थी।
- 4:33:17उन्होंने अपने बेटे बिजिस कादिर को अवध का
- 4:33:20नवाब डिक्लेअ कर दिया और 1857 के रिवोल्ट
- 4:33:23की सबसे फेमस लीडर रानी लक्ष्मीबाई झांसी
- 4:33:26में अंग्रेजों के खिलाफ जंग कर रही थी।
- 4:33:29बिहार में रिवोल्ट के चीफ ऑर्गेनाइजर थे
- 4:33:31जगदीशपुर के जमींदार कुंवर सिंह। इसके साथ
- 4:33:34ही फैजाबाद के मौलवी अहमद उल्ला भी 1857
- 4:33:38के रिवोल्ट के एक आउटस्टैंडिंग लीडर थे।
- 4:33:41इसके अलावा बरेली के खान बहादुर खान, मेरठ
- 4:33:44के कदम सिंह, संभलपुर यानी कि ओसा के
- 4:33:47सुरेंद्र शाही, मथुरा के देवी सिंह,
- 4:33:50हरियाणा के राव तुलाराम, गोंडवाना किंगडम
- 4:33:53के शंकर शाह और रघुनाथ शाह भी 1857
- 4:33:56रिवोल्ट के इंपॉर्टेंट लीडर्स थे। इन सभी
- 4:34:00लीडर्स की लीडरशिप में सेपॉइज और आम जनता
- 4:34:03एक साथ आकर ब्रिटिशर्स के खिलाफ 1857 की
- 4:34:07क्रांति की आग हर तरफ फैला देते हैं।
- 4:34:09लेकिन जैसा कि आप सब जानते ही होंगे कि
- 4:34:12आखिर में 1857 का रिवोल्ट असफल रहता है।
- 4:34:161859 का एंड होने तक ब्रिटिशर्स इस
- 4:34:19विद्रोह को पूरी तरह से दबाने में सफल
- 4:34:21होते हैं और फिर से अपना कंट्रोल
- 4:34:23एस्टैब्लिश कर लेते हैं। लेकिन ऐसे क्या
- 4:34:25कारण थे जिनकी वजह से 1857 का रिवोल्ट
- 4:34:29विफल हो जाता है और कैसे ब्रिटिशर्स इसे
- 4:34:32सप्रेस करने में सफल होते हैं? इसका जवाब
- 4:34:35आपको हम अपनी अगली वीडियो यानी कि 1857
- 4:34:38रिवोल्ट के पार्ट टू में देंगे। इसके साथ
- 4:34:41ही यह भी बताएंगे कि 1857 रिवोल्ट कीेंस
- 4:34:45क्या है और इसके लॉन्ग टर्म क्या रिजल्ट्स
- 4:34:48रहते हैं। द 1857 रिवोल्ट पार्ट टू
- 4:34:53दोस्तों आज हम 1857 रिवोल्ट के सेकंड
- 4:34:56पार्ट को कवर करेंगे। हम जानेंगे कि कैसे
- 4:34:59ब्रिटिशर्स ने इसे सप्रेस कर दिया था।
- 4:35:02रिवोल्ट की लिमिटेशंस क्या थी और इसके
- 4:35:05नेचर को लेकर जो डिबेट है उसको भी समझने
- 4:35:07की कोशिश करेंगे। साथ ही रिवोल्ट के
- 4:35:10इंपैक्ट्स के बारे में भी बात करेंगे। तो
- 4:35:13आइए शुरू करते हैं। द वीकनेसेस ऑफ द
- 4:35:16रिवोल्ट एंड इट्स सप्रेशनर नाउ। दोस्तों
- 4:35:201857 का रिवोल्ट इंडिया के एक बड़े भाग
- 4:35:23में तो फैला था लेकिन फिर भी समाज के सभी
- 4:35:26लोगों ने इसमें पार्टिसिपेशन नहीं किया
- 4:35:28था। साथ ही पूरे देश में इसका असर देखने
- 4:35:31को नहीं मिला था। यह मेनली नॉर्थ और
- 4:35:34सेंट्रल इंडिया के रीजन तक ही सीमित रह
- 4:35:36जाता है। यह साउथ इंडिया तक नहीं पहुंचता
- 4:35:38और साथ ही ईस्टर्न और वेस्टर्न इंडिया के
- 4:35:40भी ज्यादातर हिस्से इसमें भाग नहीं लेते।
- 4:35:43इसके साथ ही इंडियन स्टेट्स के बहुत से
- 4:35:46रूलर्स और बड़े जमींदार भी इसमें भाग नहीं
- 4:35:48लेते। इसके विपरीत ग्वालियर के सिंधिया,
- 4:35:52इंदौर के होलकर, हैदराबाद के निजाम,
- 4:35:55जोधपुर के राजा, भोपाल के नवाब, पटियाला,
- 4:35:58नाभा और जिंद के रूलर्स, कश्मीर के
- 4:36:00महाराजा, नेपाल के राणा और बहुत से ऐसे
- 4:36:03अन्य रूलर्स ने तो ब्रिटिशर्स को खुला
- 4:36:05सपोर्ट किया था रिवोल्ट को सप्रेस करने
- 4:36:07में। सभी रूलर्स, चीफ्स और जमींदार का
- 4:36:10सपोर्ट ना मिलना ही 1857 रिवोल्ट की पहली
- 4:36:13वीकनेस थी। इसके अलावा मॉडर्न एजुकेटेड
- 4:36:16इंडियंस ने भी 1857 रिवोल्ट को सपोर्ट
- 4:36:19नहीं किया था। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें
- 4:36:21लगता था कि विद्रोह करने वाले राजा
- 4:36:23रजवाड़े तो इंडिया को पीछे की तरफ ही ले
- 4:36:26जाएंगे और इंडिया को मॉडर्न बनाने का काम
- 4:36:29ब्रिटिश रूल में ही हो सकता है। एजुकेटेड
- 4:36:31इंडियंस को यह काफी बाद में एहसास होता है
- 4:36:34कि असल में ब्रिटिश रूल उन्हें मॉडर्न
- 4:36:36बनाने का नहीं बल्कि लूटने का काम कर रहा
- 4:36:39है। इसके साथ ही 1857 के विद्रोहियों के
- 4:36:43पास मॉडर्न वेपंस और युद्ध के बाकी सामान
- 4:36:46की भी कमी थी। ज्यादातर तो तलवार और भाले
- 4:36:49जैसे एंशिएंट वेपन से ही फाइट कर रहे थे।
- 4:36:52विद्रोही पुअरली ऑर्गेनाइज्ड भी थे।
- 4:36:54सेपॉइस बहादुर तो थे लेकिन उनमें भी
- 4:36:56डिसिप्लिन की कमी थी। कई बार वह दंगे करने
- 4:36:59वाले मॉब की तरह बिहेव करते थे ना कि एक
- 4:37:02डिसिप्लिंड आर्मी के जैसे। 1857 के
- 4:37:05विद्रोहियों के पास मिलिट्री एक्शन का ना
- 4:37:08तो कोई कॉमन प्लान था और ना ही कोई
- 4:37:10सेंट्रलाइज्ड लीडरशिप। देश के अलग-अलग
- 4:37:13कोने से उठी अपराइजिंग्स में कोऑर्डिनेशन
- 4:37:15की कमी देखने को मिलती है। और दूसरी तरफ
- 4:37:18ब्रिटिश कंपनी के पास रिसोर्सेज की कोई
- 4:37:20कमी नहीं थी। ब्रिटिश गवर्नमेंट ने बड़ी
- 4:37:23संख्या में मेन, मनी और आर्म्स की सप्लाई
- 4:37:26इंडिया में की और रिवोल्ट को पूरी ताकत के
- 4:37:29साथ सप्रेस कर दिया गया। विद्रोहियों को
- 4:37:32पहला झटका लगता है जब 20th सितंबर 1857 को
- 4:37:35जनरल जॉन निकलसन के नेतृत्व में एक लंबी
- 4:37:38लड़ाई के बाद ब्रिटिश दिल्ली को कैप्चर कर
- 4:37:41लेते हैं। एपरर बहादुर शाह को बंदी बना
- 4:37:44लिया जाता है। रॉयल प्रिंसेस को पकड़ कर
- 4:37:46वहीं मार दिया जाता है। मुगल एपरर के
- 4:37:49खिलाफ केस चलता है और उनको रंगून में
- 4:37:52एग्जाइल की सजा सुना दी जाती है। रंगून
- 4:37:55में ही 1862 में उनकी मृत्यु हो जाती है।
- 4:37:58इस तरह मुगल वंश का पूरी तरह खात्मा हो
- 4:38:01जाता है। दिल्ली के फॉल के साथ रिवोल्ट का
- 4:38:04फोकल पॉइंट तो डिसअपीयर हो जाता है। लेकिन
- 4:38:06रिवोल्ट के बाकी लीडर्स स्ट्रगल जारी रखते
- 4:38:09हैं। लेकिन पावरफुल ब्रिटिश ऑफेंसिव के
- 4:38:12सामने एक-एक करके यह सब भी हार जाते हैं।
- 4:38:16कानपुर में नाना साहेब हार जाते हैं।
- 4:38:18लेकिन वह सरेंडर नहीं करते और 1859 में
- 4:38:21नेपाल भाग जाते हैं। जिसके बाद उनके बारे
- 4:38:24में कुछ पता नहीं चलता। तात्या टोपे
- 4:38:27सेंट्रल इंडिया के जंगल्स की तरफ चले जाते
- 4:38:29हैं और वहां से अप्रैल 1859 तक गोरिल्ला
- 4:38:32वॉरफेयर जारी रखते हैं। लेकिन तभी उनके एक
- 4:38:35जमींदार दोस्त उन्हें धोखा दे देते हैं और
- 4:38:38सोते समय उन्हें पकड़ लिया जाता है और
- 4:38:4015th अप्रैल 1859 को एक हरे ट्रायल के बाद
- 4:38:44उन्हें भी मार दिया जाता है। झांसी की
- 4:38:47रानी लक्ष्मीबाई बहादुरी के साथ अंग्रेजों
- 4:38:50का सामना करती हुई 17th जून 1858 को युद्ध
- 4:38:54भूमि में मार दी गई थी। 1859 तक कुंवर
- 4:38:57सिंह, बख्त खान, खान बहादुर खान, मौलवी
- 4:39:00अहमदुल्लाह जैसे लीडर्स भी मार दिए जाते
- 4:39:03हैं और अवध की बेगम नेपाल में जाकर छुपने
- 4:39:05के लिए मजबूर हो जाती हैं। इस रिवोल्ट के
- 4:39:08सप्रेशन में कुछ ब्रिटिश कमांडर्स जो
- 4:39:10मिलिट्री फेम हासिल करते हैं वो थे जॉन
- 4:39:14लॉरेंस, उट्रम, हैवलॉक, नील, कैमबेल और
- 4:39:18ह्यूरोस।
- 4:39:191859 के एंड होने तक इंडिया में ब्रिटिश
- 4:39:23अथॉरिटी फिर से पूरी तरह इस्टैब्लिश हो
- 4:39:25चुकी थी। लेकिन 1857 का रिवोल्ट बेकार
- 4:39:28नहीं जाता। यह हमारे इतिहास का एक
- 4:39:31ग्लोरियस लैंडमार्क है। 1857 का रिवोल्ट
- 4:39:35ब्रिटिश इंपीरियलिज्म से आजादी के लिए
- 4:39:38भारत के लोगों का पहला ग्रेट स्ट्रगल था।
- 4:39:41आगे आने वाले फ्रीडम स्ट्रगल के लिए 1857
- 4:39:44के रिवोल्ट ने इंस्पिरेशन का काम किया।
- 4:39:47आइए अब इसके इमीडिएट इंपैक्ट्स को डिटेल
- 4:39:50में समझते हैं।
- 4:39:53इंपैक्ट्स ऑफ द 1857 रिवोल्ट।
- 4:39:57दोस्तों 1857 का रिवोल्ट फेल होने के
- 4:40:00बावजूद ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन के लिए एक
- 4:40:03बहुत बड़ा झटका साबित होता है। इसकी वजह
- 4:40:06से ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन में काफी बदलाव
- 4:40:08देखने को मिलते हैं। आइए एक-एक करके उनके
- 4:40:11बारे में जानते हैं। सबसे बड़ा चेंज आता
- 4:40:14है 1858 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के
- 4:40:17थ्रू। यह एक्ट इंडिया को गवर्न करने की
- 4:40:20पावर ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर ब्रिटिश
- 4:40:22क्राउन को ट्रांसफर कर देता है। इससे पहले
- 4:40:25कंपनी के डायरेक्टर्स और बोर्ड ऑफ कंट्रोल
- 4:40:27के पास इंडिया की अथॉरिटी थी। अब यह पावर
- 4:40:30मिल जाती है सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर
- 4:40:32इंडिया को और उसको असिस्ट करने के लिए एक
- 4:40:35काउंसिल भी बना दी जाती है। सेक्रेटरी ऑफ
- 4:40:38स्टेट ब्रिटिश कैबिनेट के एक मेंबर हुआ
- 4:40:40करते थे और इसलिए पार्लियामेंट के प्रति
- 4:40:42इनकी रिस्पांसिबिलिटी थी। इस तरह कह सकते
- 4:40:45हैं कि इंडिया के ऊपर अब अल्टीमेट पावर
- 4:40:48ब्रिटिश पार्लियामेंट की हो गई थी। इंडिया
- 4:40:50में गवर्नमेंट को पहले की तरह गवर्नर जनरल
- 4:40:53को ही देखना था। गवर्नर जनरल को वायसरॉय
- 4:40:56यानी कि क्राउन का पर्सनल रिप्रेजेंटेटिव
- 4:40:59का टाइटल भी दे दिया जाता है। इसके बाद
- 4:41:02दूसरा सबसे ड्रास्टिक चेंज आता है आर्मी
- 4:41:04के ऑर्गेनाइजेशन में। 1857 जैसा फिर से
- 4:41:08कोई रिवोल्ट ना हो इसके लिए आर्मी को
- 4:41:10रिऑर्गेनाइज किया जाता है। सबसे पहले तो
- 4:41:13आर्मी में यूरोपियन सोल्जर्स की संख्या को
- 4:41:15बढ़ाया जाता है। बंगाल आर्मी में हर दो
- 4:41:18इंडियन सोल्जर्स पर एक यूरोपियन सोल्जर और
- 4:41:20मद्रास और बॉम्बे में हर पांच इंडियन
- 4:41:22सोल्जर्स पर दो यूरोपियन सोल्जर्स का
- 4:41:25प्रोपोर्शन फिक्स किया जाता है। इसके साथ
- 4:41:27ही इंपॉर्टेंट ज्योग्राफिकल और मिलिट्री
- 4:41:29पोजीशंस पर सिर्फ यूरोपियन ट्रूप्स को ही
- 4:41:32रखा जाने लगा। आर्मी की क्रूशियल ब्रांचेस
- 4:41:35जैसे कि आर्टिलरी को भी सिर्फ यूरोपियन
- 4:41:37हाथों में ही दिया जाने लगा। इसके अलावा
- 4:41:40डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी को भी फॉलो किया
- 4:41:43जाने लगा। जिससे आगे चलकर सोल्जर्स कभी भी
- 4:41:46किसी एंटी ब्रिटिश अपराइजिंग के लिए
- 4:41:48यूनाइटेड ना हो। इसके लिए आर्मी
- 4:41:51रिक्रूटमेंट में कास्ट, रीजन और रिलीजन के
- 4:41:53बेसिस पर डिस्क्रिमिनेशन शुरू कर दिया
- 4:41:56गया। पंजाबीज, गुरखास और पठान जिन्होंने
- 4:42:001857 के रिवोल्ट को सप्रेस करने में
- 4:42:02ब्रिटिशर्स की मदद की थी उनको मार्शल
- 4:42:05रेसेस डिक्लेअ कर दिया गया और बड़ी संख्या
- 4:42:07में इन्हें आर्मी में लिया जाने लगा। जबकि
- 4:42:111857 रिवोल्ट में भाग लेने वाले रीजन जैसे
- 4:42:14कि अवध, बंगाल और सेंट्रल इंडिया के
- 4:42:16सोल्जर्स को नॉन मार्शल डिक्लेअ कर दिया
- 4:42:19गया और बड़ी संख्या में आर्मी में इनकी
- 4:42:22भर्ती को बंद कर दिया गया। इसके अलावा
- 4:42:24सोल्जर्स में नेशनलिस्ट सेंटीमेंट्स को
- 4:42:27डेवप होने से रोकने के लिए कम्युनल कास्ट
- 4:42:30और रीजनल बेसिस पर रेजीमेंट्स को फॉर्म
- 4:42:32किया गया। इसके साथ ही प्रिंसली स्टेट्स
- 4:42:36के साथ रिलेशंस में भी एक बड़ा बदलाव
- 4:42:38देखने को मिलता है। एनक्सेशन की पॉलिसी को
- 4:42:41छोड़ दिया जाता है। इंडियन स्टेट्स को
- 4:42:43अपना एयर अडॉप्ट करने की परमिशन भी दे दी
- 4:42:46जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि 1857 के
- 4:42:49रिवोल्ट के समय बहुत से इंडियन रूलर्स ने
- 4:42:51ब्रिटिशर्स की हेल्प की थी। बिना उनकी
- 4:42:54हेल्प के 1857 के रिवोल्ट को सप्रेस करना
- 4:42:57मुश्किल हो जाता। इसीलिए इसके बाद से
- 4:43:00ब्रिटिशर्स प्रिंसली स्टेट्स को
- 4:43:02ब्रेकॉटर्स इन द स्टॉर्म की तरह यूज करते
- 4:43:04हैं। इस तरह से हम कह सकते हैं कि 1857 के
- 4:43:08रिवोल्ट की वजह से इंडिया में ब्रिटिश
- 4:43:10एडमिनिस्ट्रेशन का चेहरा पूरी तरह से बदल
- 4:43:13जाता है। दोस्तों, यह तो हुई 1857 के
- 4:43:16रिवोल्ट की पूरी कहानी। अब बात करते हैं
- 4:43:19इसके नेचर को लेकर डिबेट की। नेचर ऑफ द
- 4:43:231857 रिवोल्ट।
- 4:43:26दोस्तों 1857 के रिवोल्ट के नेचर को लेकर
- 4:43:29अलग-अलग ओपिनियन दिए जाते हैं। ज्यादातर
- 4:43:32ब्रिटिश हिस्टोरियंस जैसे कि सीली, लॉरेंस
- 4:43:35एटसेट्रा इसे एक सेपॉय म्यूटनी कहते हैं।
- 4:43:37कुछ इतिहासकारों ने इसे हिंदू और
- 4:43:40मुस्लिम्स की कंस्परेसी भी कह दिया। कोई
- 4:43:42इसे बाबरिज्म और सिविलाइजेशन के बीच का
- 4:43:45स्ट्रगल बताता है तो कोई फ्यूडल्स का
- 4:43:47रिवोल्ट। साथ ही कुछ इसे फर्स्ट वॉर ऑफ
- 4:43:50इंडिपेंडेंस भी कहते हैं। तो आखिर 1857 का
- 4:43:53रिवोल्ट असल में था क्या? क्या यह बस एक
- 4:43:56सिपोई म्यूटनी था या फिर आजादी के लिए
- 4:43:58किया गया पहला संग्राम? आइए समझते हैं।
- 4:44:02ब्रिटिश हिस्टोरियंस इसे एक सिपोई म्यूटनी
- 4:44:05कहकर इसकीेंस को कम करना चाहते थे। हां,
- 4:44:08यह सच है कि 1857 के रिवोल्ट की शुरुआत
- 4:44:11सिपॉइज़ ने ही की थी। लेकिन जैसा कि हम देख
- 4:44:14चुके हैं कि इसमें सेपॉइस के अलावा
- 4:44:16पेजेंस, सिविलियन पापुलेशन और इंडियन
- 4:44:19रूलर्स ने भी भाग लिया था। फिर इसे सिर्फ
- 4:44:21एक सिपॉय म्यूटनी कह देना बिल्कुल गलत
- 4:44:24होगा। वी डी सावरकर ने 1857 के रिवोल्ट को
- 4:44:28फर्स्ट वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस कहा है। इसके
- 4:44:31अगेंस्ट में यह आर्गुमेंट दिया जाता है कि
- 4:44:331857 से पहले तो बहुत से रिवोल्ट्स हुए
- 4:44:36थे। जैसे कि कोल विद्रोह, पाई का विद्रोह,
- 4:44:40संथाल हूल एटसेटरा। फिर यह फर्स्ट कैसे
- 4:44:42हुआ? दोस्तों, यह बिल्कुल सही है कि 1857
- 4:44:46से पहले भी ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट बहुत
- 4:44:48से रिवोल्ट हुए थे। लेकिन यह सभी लोकल
- 4:44:51रिवोल्ट्स थे और बहुत छोटे रीजन तक सीमित
- 4:44:54थे। 1857 को फर्स्ट इसीलिए बोला जाता है
- 4:44:58क्योंकि इतने बड़े स्तर पर यह पहला ही
- 4:45:00रिवोल्ट था। इसके बाद डिबेट होती है कि
- 4:45:04क्या यह सच में इंडिपेंडेंस के लिए
- 4:45:06स्ट्रगल था? कुछ लोगों का कहना है कि यह
- 4:45:09तो फ्यूडल रिवोल्ट था और सभी लीडर्स
- 4:45:12अपनी-अपनी फ्यूडल पावर्स को वापस पाने के
- 4:45:14लिए स्ट्रगल कर रहे थे। ब्रिटिशर्स से
- 4:45:17इंडिपेंडेंस की बात तो कहीं थी ही नहीं।
- 4:45:20यहां याद रखने वाली बात यह है कि शुरुआत
- 4:45:22में भले ही इंडिपेंडेंस का कोई एम ना हो
- 4:45:25लेकिन रिवोल्ट शुरू होने के बाद ब्रिटिश
- 4:45:27रूल को इंडिया से खत्म करने का एम साफ
- 4:45:30दिखता है। मुगल एपरर बहादुर शाह अपने लेटर
- 4:45:33में भी लिखते हैं कि इंडिया से ब्रिटिश
- 4:45:36सत्ता को समाप्त करने के लिए सभी इंडियन
- 4:45:38रूलर्स को एक कन्फेडरेसी बनानी होगी।
- 4:45:41इसलिए इतिहासकार एसए सेन ने भी कहा है कि
- 4:45:441857 का रिवोल्ट शुरू भले ही एक सिबॉय
- 4:45:47म्यूटनी की तरह हुआ था लेकिन खत्म एक वॉर
- 4:45:50ऑफ इंडिपेंडेंस की तरह होता है। यही वजह
- 4:45:53है कि ब्रिटिश पार्लियामेंट के मेंबर
- 4:45:55बेंजामिन इजराइली भी 1857 के रिवोल्ट को
- 4:45:58नेशनल मूवमेंट बोलते हैं। 1857 रिवोल्ट के
- 4:46:02नेचर को लेकर भले ही अलग-अलग ओपिनियन हो
- 4:46:05सकते हैं। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है
- 4:46:07कि यह अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ होने वाला
- 4:46:10एक यादगार रिवोल्ट बन गया था।
- 4:46:14कंक्लूजन
- 4:46:16दोस्तों, 1857 का रिवोल्ट कोई मामूली
- 4:46:19विद्रोह नहीं था। यह इंडियन हिस्ट्री का
- 4:46:22एक इंपॉर्टेंट टर्निंग पॉइंट था। इसके
- 4:46:25हीरोज़ इंडिया के घर-घर में याद किए जाने
- 4:46:28लगे और आने वाली पीढ़ी के लिए इंस्पिरेशन
- 4:46:30बन गए। यहां तक कि आज भी हम बहादुरी के
- 4:46:34लिए इन लीडर्स की मिसाल देते हैं। झांसी
- 4:46:37की रानी आज भी वुमेन एंपावरमेंट का प्रतीक
- 4:46:39मानी जाती हैं। 1857 का यह रिवोल्ट भारतीय
- 4:46:43इतिहास में हमेशा हमेशा के लिए अमर रहेगा।
- 4:46:47सोशियो रिलीजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स।
- 4:46:50दोस्तों, 19th सेंचुरी के दौरान इंडिया
- 4:46:52में कुछ ऐसे आंदोलनों की शुरुआत होती है
- 4:46:55जिनका एम समाज और धर्म में सुधार लाना था।
- 4:46:58इनके फोकस एरिया में सोशल इश्यूज जैसे कि
- 4:47:01सती, फीमेल इनफेंटिसाइड, वुमस एजुकेशन,
- 4:47:04विडोरी मैरिज, कास्टिज्म और अनटचेबिलिटी
- 4:47:08थे। साथ ही रिलीजियस इश्यूज जैसे कि
- 4:47:11आइडलेटरी यानी कि मूर्ति पूजन, पॉलिथीज्म,
- 4:47:15रिलीजियस सुपरस्टिशंस और प्रीस्ट्स के
- 4:47:18द्वारा किया जा रहा एक्सप्लइटेशन भी इनके
- 4:47:21द्वारा कंडेम किया गया था। इन्हें सोशल
- 4:47:23रिलीजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स के नाम से
- 4:47:26जाना जाता है। आज हम समझेंगे कि इनकी
- 4:47:29शुरुआत क्यों होती है? यह कौन से
- 4:47:31रिफॉर्म्स की बात करते हैं और इनका क्या
- 4:47:33प्रभाव रहता है। साथ ही इनकी कुछ
- 4:47:36लिमिटेशंस की भी चर्चा करेंगे। सबसे पहले
- 4:47:39यह जानते हैं कि 19th सेंचुरी में ऐसी
- 4:47:42क्या कंडीशंस बनती हैं कि सोशियो रिलीजियस
- 4:47:44रिफॉर्म मूवमेंट्स शुरू होते हैं। कॉजेस
- 4:47:48बिहाइंड सोशियो रिलीजियस रिफॉर्म
- 4:47:50मूवमेंट्स। दोस्तों पहला और सबसे बड़ा
- 4:47:54कारण था ब्रिटिश रूल और उसका इंडिया की
- 4:47:57पॉलिटिकल, इकोनॉमिक, सोशल और कल्चरल लाइफ
- 4:48:00पर गहरा प्रभाव। ब्रिटिशर्स के साथ ही
- 4:48:03मॉडर्न वेस्टर्न आइडियाज जैसे कि
- 4:48:06इक्वलिटी, लिबर्टी, फ्रेटरनिटी और जस्टिस
- 4:48:09भी इंट्रोड्यूस हुए थे। मॉडर्न एजुकेशन इन
- 4:48:13सभी आइडियाज को स्प्रेड करती है और
- 4:48:16धीरे-धीरे एक एजुकेटेड मिडिल क्लास तैयार
- 4:48:19हो जाती है जो इंडियन सोसाइटी को मॉडर्न
- 4:48:22रैशनलिटी के लेंस से देखना शुरू करती है।
- 4:48:25रिफॉर्म मूवमेंट्स को शुरू करने के पीछे
- 4:48:28दूसरा कारण यूरोपियन ओरिएंटलिस्ट्स के
- 4:48:31एफर्ट्स थे। सब विलियम जों्स, जेम्स
- 4:48:34प्रिंसेप, चार्ल्स विलकिंस, मैक्स म्यूलर
- 4:48:37जैसे ओरिएंटलिस्ट्स के वर्क से इंडिया का
- 4:48:40ग्लोरियस पास्ट लाइमलाइट में आ जाता है जो
- 4:48:43इंडियंस को कॉन्फिडेंस देता है और उन्हें
- 4:48:46रिफॉर्म करने की इंस्पिरेशन भी देता है।
- 4:48:49इसके अलावा एक कारण क्रिश्चियन मिशनरीज का
- 4:48:52प्रभाव भी था। यह लोग इंडियन कस्टम्स और
- 4:48:55रिलीजन को क्रिटिसाइज करते थे और लोगों को
- 4:48:58क्रिश्चियनिटी में कन्वर्ट करने की कोशिश
- 4:49:01कर रहे थे। ऐसी स्थिति में इंडियन
- 4:49:03स्कॉलर्स को लगता है कि इनका मुकाबला करने
- 4:49:06के लिए पहले अपने धर्म और समाज में सुधार
- 4:49:09करने की जरूरत है। इन्हीं सब कारणों से
- 4:49:13सोशियो रिलीजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स की
- 4:49:15शुरुआत होती है। कारण के साथ ही यह समझना
- 4:49:18भी जरूरी है कि यह मूवमेंट्स कितने प्रकार
- 4:49:21के होते थे और रिफॉर्म के लिए कौन-कौन से
- 4:49:25मेथड्स अडॉप किए जाते हैं। टाइप्स एंड
- 4:49:28मेथड्स ऑफ सोशल रिलीजियस रिफॉर्म
- 4:49:30मूवमेंट्स।
- 4:49:32दोस्तों सामाजिक धार्मिक सुधार आंदोलन को
- 4:49:35दो कैटेगरीज में डिवाइड किया जाता है।
- 4:49:37रिफॉर्मिस्ट और रिवाइवलिस्ट। रिफॉर्मिस्ट
- 4:49:40के अंदर वो मूवमेंट्स आते थे जिनका एम
- 4:49:43समाज और धर्म में सुधार लाना होता था। यह
- 4:49:46लोग मॉडर्न आइडियाज जैसे कि रीजन और
- 4:49:49रैशनलिटी के बेसिस पर समाज में चेंज लाना
- 4:49:52चाहते थे। इसके एग्जांपल्स हैं ब्रह्मो
- 4:49:54समाज, प्रार्थना समाज और अलीगढ़ मूवमेंट।
- 4:49:58वहीं रिवाइवलिस्ट उन्हें बोला गया है जो
- 4:50:01इंडिया की पास्ट ग्लोरी में विश्वास करते
- 4:50:04थे और यह वेस्टर्न आइडियाज को अडॉप्ट करने
- 4:50:06की जगह एंशिएंट इंडियन ट्रेडिशंस और थॉट्स
- 4:50:09को रिवाइव करना चाहते थे। इसमें आर्य
- 4:50:12समाज, रामकृष्ण मिशन और देवबंद मूवमेंट का
- 4:50:16एग्जांपल आता है। रिफॉर्म मूवमेंट्स
- 4:50:18रैशनलिज्म और रिलीजियस यूनिवर्सलिज्म की
- 4:50:21आईडियोलॉजी से प्रेरित थे। रिफॉर्म्स
- 4:50:24इंट्रोड्यूस करने के लिए अलग-अलग मेथड्स
- 4:50:26अडॉप किए जाते हैं। जैसे कि न्यूज़पेपर्स
- 4:50:30और जर्नल्स को पब्लिश करना। राजा राममोहन
- 4:50:33रॉय अपना न्यूज़ पेपर संवाद कोमुदी
- 4:50:36निकालते हैं। वहीं दयानंद सरस्वती
- 4:50:39सत्यार्थ प्रकाश के जरिए अपने आइडियाज
- 4:50:42फैलाते हैं।
- 4:50:44दूसरा मेथड था मीटिंग्स बुलाना और
- 4:50:47गवर्नमेंट पर प्रेशर बिल्ड करना। जिसकी
- 4:50:49हेल्प से यह लोग सती प्रथा अबॉलिशन एक्ट,
- 4:50:52विडो रिमैरिज एक्ट जैसे सोशल लेजिसलेशंस
- 4:50:55पास करवा पाते हैं। इसके अलावा रिफॉर्म
- 4:50:58मूवमेंट्स पर्सुएशन का मेथड भी अडॉप्ट
- 4:51:00करती हैं। इसके तहत लोगों को कन्विंस करने
- 4:51:03की कोशिश करते हैं कि वह सोशल इविल्स जैसे
- 4:51:06कि सती या पर्दा सिस्टम का सपोर्ट ना
- 4:51:09करें। इसके लिए रीजन के साथ ही स्क्रिप्चर
- 4:51:12से भी एग्जांपल्स कोट किए जाते हैं। सबसे
- 4:51:15ज्यादा पॉपुलर मेथड जो अडॉप्ट किया जाता
- 4:51:17है वो था लाइक माइंडेड पीपल के साथ मिलकर
- 4:51:20एसोसिएशंस फॉर्म करना। जैसे कि ब्रह्मो
- 4:51:24समाज, आर्य समाज एटसेट्रा। आइए अब ऐसे ही
- 4:51:27कुछ मेजर सोशल रिलीजियस रिफॉर्म एसोसिएशंस
- 4:51:30की चर्चा करते हैं। एग्जांपल्स ऑफ सोशल
- 4:51:33रिलीजियस रिफॉर्म एसोसिएशंस।
- 4:51:35ब्रह्म समाज। दोस्तों ब्रह्म समाज की
- 4:51:39शुरुआत 1828 मेंक में राजा राममोहन रॉय ने
- 4:51:43की थी। इन्हें फादर ऑफ मॉडर्न इंडिया भी
- 4:51:46कहा जाता है। क्योंकि यह पहले ऐसे व्यक्ति
- 4:51:49थे जो इंडिया में मॉडर्न आइडियाज के बेसिस
- 4:51:51पर सोसाइटी फॉर्म करने की कोशिश करते हैं।
- 4:51:55ब्रह्म समाज आइडल वरशिप, पॉलीथीज्म, कास्ट
- 4:51:59ऑप्रेशन और अननेसेसरी रिचुअल्स के अगेंस्ट
- 4:52:02फाइट करता है। इसके अलावा सती, पॉलीगमी,
- 4:52:06पर्दा सिस्टम, चाइल्ड मैरिज एटसेटरा जैसी
- 4:52:09सोशल इवल्स के खिलाफ भी अपनी आवाज उठाता
- 4:52:12है। इन्होंने विडो रीमैरिज और वुमेन की
- 4:52:14एजुकेशन का भी समर्थन किया। राजा राममोहन
- 4:52:18रॉय के एफर्ट से ही 1829 में ब्रिटिश
- 4:52:21गवर्नर जनरल बेंटिंक ने सती प्रथा पर
- 4:52:24कानून लाकर इसे बैन किया था। दोस्तों
- 4:52:28ब्रह्मो समाज मेनली ईस्टर्न इंडिया में
- 4:52:30एक्टिव रहता है। अब बात करते हैं ऐसी
- 4:52:33एसोसिएशन की जिसका इफेक्ट वेस्टर्न इंडिया
- 4:52:36में ज्यादा देखने को मिलता है। आर्य समाज।
- 4:52:40दोस्तों आर्य समाज की स्थापना 1875 में
- 4:52:44बॉम्बे में हुई थी। बाद में इसका हेड
- 4:52:46क्वार्टर्स लाहौर में स्थापित किया गया
- 4:52:49था। इसके फाउंडर स्वामी दयानंद सरस्वती
- 4:52:52थे। इनका ओरिजिनल नाम मूलशंकर था।
- 4:52:56इन्होंने बैक टू वेदास का नारा दिया था।
- 4:52:59आर्य समाज ने आइडलेटरी, पॉलिथीज्म,
- 4:53:03ऑर्थोडॉक्स रिचुअल्स, प्रीस्टहुड, एनिमल
- 4:53:05सैक्रिफाइस, चाइल्ड मैरिज और कास्ट सिस्टम
- 4:53:09का विरोध किया। इसकी फॉलोइंग सबसे ज्यादा
- 4:53:12नॉर्दन और वेस्टर्न इंडिया के एरियाज में
- 4:53:14देखी जाती है। दयानंद सरस्वती जी ने अपने
- 4:53:18विचार सत्यार्थ प्रकाश नाम की किताब में
- 4:53:20लिखे थे। यह इंडिया को एक क्लासलेस और
- 4:53:24कास्टलेस सोसाइटी बनाने का विज़न रखते थे।
- 4:53:27साथ ही फ्री और यूनाइटेड इंडिया देखना
- 4:53:29चाहते थे। दोस्तों, जैसे कि हम पहले बता
- 4:53:32चुके हैं, आर्य समाज रिवाइवलिस्ट कैटेगरी
- 4:53:35में आने वाला एक एसोसिएशन था। आइए अब
- 4:53:37रिवाइवलिस्ट टाइप के ही दूसरे एसोसिएशन की
- 4:53:40भी बात करते हैं। रामकृष्ण मिशन रामकृष्ण
- 4:53:44मिशन स्वामी विवेकानंद द्वारा शुरू किया
- 4:53:47गया था। इसकी स्थापना 1892 मेंक के पास
- 4:53:52बेलूर नाम की जगह पर हुई थी। इसका मकसद
- 4:53:55विवेकानंद जी के गुरु रामकृष्ण परमहंस जी
- 4:53:58की टीचिंग्स का प्रचार प्रसार करना था।
- 4:54:01इन्होंने कास्ट सिस्टम और अनटचेबिलिटी का
- 4:54:04विरोध किया। यह सभी रिलीजंस की
- 4:54:06यूनिवर्सलिटी पर फोकस करते हैं और वेदांता
- 4:54:09को प्रोपगेट करते हैं। स्वामी विवेकानंद
- 4:54:12दरिद्र नारायण के कांसेप्ट को पॉपुलर करते
- 4:54:15हैं। इसके अनुसार हर गरीब व्यक्ति में
- 4:54:18ईश्वर है और इसीलिए इनकी सेवा ईश्वर की
- 4:54:21सेवा के समान है। इसके साथ ही 1893 में
- 4:54:25शिकागो में ऑर्गेनाइज हुई वर्ल्ड रिलीजियस
- 4:54:27कॉन्फ्रेंस में भाग लेकर स्वामी जी ने
- 4:54:30विश्व मंच पर हिंदूइज़्म की फिलॉसफी का
- 4:54:32प्रचार भी किया। दोस्तों, यह तो बात हो गई
- 4:54:36हिंदूइज़्म से रिलेटेड रिफॉर्म एसोसिएशंस
- 4:54:38की। अब कुछ मुस्लिम रिलीजियस रिफॉर्म
- 4:54:41एसोसिएशंस की भी चर्चा करते हैं। इसमें
- 4:54:44सबसे पहले बात करते हैं अलीगढ़ मूवमेंट
- 4:54:46की। अलीगढ़ मूवमेंट। दोस्तों, इसकी शुरुआत
- 4:54:50उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ डिस्ट्रिक्ट में
- 4:54:52सर सैयद अहमद खान द्वारा 186 में की गई
- 4:54:56थी। इसका मकसद मुस्लिम्स के बीच वेस्टर्न
- 4:54:59साइंटिफिक एजुकेशन का प्रसार करना था। इसी
- 4:55:02के तहत 1875 में सैयद अहमद खान ने
- 4:55:06मोहम्मदन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना
- 4:55:08की थी जो 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम
- 4:55:12यूनिवर्सिटी बन जाता है। अपने आइडियाज को
- 4:55:14फैलाने के लिए यह तहदीब उल अखलाक नाम से
- 4:55:17मैगजीीन पब्लिश करते थे। इन्होंने अपनी
- 4:55:20बुक कमेंट्रीज ऑन द कुरान में ट्रेडिशनल
- 4:55:23इंटरप्रेटर्स के नैरो आउटलुक को कंडेम
- 4:55:25किया था और रैशनलिज्म और साइंटिफिक नॉलेज
- 4:55:28के बेसिस पर अपने खुद के व्यूज शेयर किए
- 4:55:31थे। इनका एफेसिस कुरान की स्टडी पर रहता
- 4:55:35है। इन्होंने सूफिज्म को भी कंडेम किया
- 4:55:37था। साथ ही स्लेवरी को भी अनइस्लामिक
- 4:55:41बताया था। अलीगढ़ मूवमेंट के बाद अब इसी
- 4:55:44के पैरेलल में चलने वाले मुस्लिम
- 4:55:45रिवाइवलिस्ट यानी कि देवबंद मूवमेंट की
- 4:55:48बात करते हैं। देवबंद मूवमेंट देवबंद
- 4:55:52मूवमेंट की शुरुआत यूपी के सहारनपुर
- 4:55:55डिस्ट्रिक्ट में देवबंद नाम की जगह से
- 4:55:571867 में हुई थी। इसके फाउंडर मोहम्मद
- 4:56:01कासिम नाना तवी और राशिद अहमद गंगोही थे।
- 4:56:05देवबंद एक रिवाइवलिस्ट मूवमेंट था। यह एक
- 4:56:09एंटी ब्रिटिश मूवमेंट था जिसका एम
- 4:56:11एजुकेशनल एफर्ट्स के थ्रू मुस्लिम्स का
- 4:56:14अपलिफ्टमेंट करना था। इसके ट्विन
- 4:56:16ऑब्जेक्टिव्स थे। पहला मुस्लिम्स के बीच
- 4:56:19कुरान और हदीस की प्योर टीचिंग्स का
- 4:56:21प्रचार प्रसार करना और दूसरा फॉरेन रूलर्स
- 4:56:25के अगेंस्ट जिहाद की स्पिरिट को अलाइव
- 4:56:27रखना।
- 4:56:28लेकिन अलीगढ़ मूवमेंट की तरह यह वेस्टर्न
- 4:56:31एजुकेशन को प्रमोट नहीं करता बल्कि
- 4:56:33ट्रेडिशनल इस्लामिक टीचिंग्स पर फोकस करता
- 4:56:36है। इसके अलावा दोस्तों और भी बहुत सारे
- 4:56:39एसोसिएशंस फॉर्म किए गए थे। जैसे कि
- 4:56:42प्रार्थना समाज, वेदा समाज, विडो रिमैरिज
- 4:56:45एसोसिएशन एटसेटरा। सभी का एम किसी ना किसी
- 4:56:49रूप में समाज में सुधार लाना ही था।
- 4:56:52दोस्तों, आंदोलन के उदाहरण जानने के बाद
- 4:56:55अब इनके प्रभाव को भी समझ लेते हैं।
- 4:56:58इंपैक्ट्स ऑफ रिफॉर्म मूवमेंट्स। सोशल
- 4:57:01रिलीजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स का बहुत ही
- 4:57:03गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। इनके
- 4:57:06एफर्ट से सती प्रथा, विडोरी मैरिज, फीमेल
- 4:57:09इनफेंटिसाइड जैसे सोशल इविल्स को अबॉलिश
- 4:57:12करने के एक्ट्स पास होते हैं। समाज में
- 4:57:15रीजन और रैशनलिटी का प्रसार होता है। साथ
- 4:57:18ही इनके द्वारा बहुत से स्कूल्स और
- 4:57:20कॉलेजेस खोले गए थे। जिससे मॉडर्न एजुकेशन
- 4:57:23का स्प्रेड और ज्यादा इंडिया में होता है।
- 4:57:26इसके अलावा रिफॉर्म मूवमेंट्स का सबसे
- 4:57:29बड़ा प्रभाव नेशनल मूवमेंट पर देखने को
- 4:57:32मिलता है। सोशल रिलीजियस रिफॉर्म
- 4:57:34मूवमेंट्स के प्रयासों से इंडिया में
- 4:57:36नेशनलिज्म प्रमोट होता है। लोग एक बार फिर
- 4:57:40से अपने कल्चर और सिविलाइजेशन पर गर्व
- 4:57:43करने लगते हैं। यह लोग इंडियन कल्चरल
- 4:57:46ट्रेडिशंस पर हो रहे ब्रिटिश क्रिटिसिज्म
- 4:57:48का मुंहतोड़ जवाब देते हैं। जिसकी वजह से
- 4:57:51इंडियंस में कॉन्फिडेंस डेवप होता है और
- 4:57:54नेशनलिज्म की फीलिंग और स्ट्रांग होती है।
- 4:57:57दोस्तों, यह तो बात हुई इनके अचीवमेंट्स
- 4:58:00की, लेकिन रिफॉर्म मूवमेंट्स पूरी तरह सफल
- 4:58:03नहीं होते। कहने का मतलब यह है कि इनके
- 4:58:06प्रभाव में कुछ लिमिटेशंस रह जाती हैं।
- 4:58:10लिमिटेशंस ऑफ रिफॉर्म मूवमेंट्स। सोशल
- 4:58:14रिलीजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स की सबसे बड़ी
- 4:58:16लिमिटेशन यह थी कि इनका सोशल बेस बहुत ही
- 4:58:19नैरो रहता है। मेनली यह एजुकेटेड और अर्बन
- 4:58:23मिडिल क्लासेस को ही अपने साथ जोड़ पाते
- 4:58:25हैं। जबकि रूरल मासेस और अर्बन पुअर इनके
- 4:58:29प्रभाव से ज्यादातर बाहर ही रह जाते हैं।
- 4:58:32इसके अलावा रिफॉर्मर्स की पास्ट की
- 4:58:34ग्रेटनेस को अपील करने की टेंडेंसी और
- 4:58:37स्क्रिप्चरल अथॉरिटी पर रिलाई करना सडो
- 4:58:40साइंटिफिक थिंकिंग को भी जन्म देता है।
- 4:58:42साथ ही हिंदूज़, मुस्लिम्स, सिख्स और
- 4:58:45पारसीज़ को भी अलग-अलग सेक्शंस में डिवाइड
- 4:58:48करने का काम करता है। बहुत से हिंदू
- 4:58:51रिफॉर्मर्स एंशिएंट पीरियड को प्रज़ करते
- 4:58:54हैं और मिडिवल पीरियड को पूरी तरह डेकडेंस
- 4:58:57का युग बता देते हैं। इससे इनडायरेक्टली
- 4:59:00मुस्लिम्स एलियनेट महसूस करते हैं और
- 4:59:02कम्युनल टेंडेंसीज को भी बढ़ावा मिलता है।
- 4:59:05कंक्लूजन। दोस्तों, हम कह सकते हैं कि
- 4:59:09सोशल रिलीजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स पूरी तरह
- 4:59:12समाज को मॉडर्न या रैशन तो नहीं बना पाते,
- 4:59:15लेकिन फिर भी यह एक करेजियस कोशिश जरूर थी
- 4:59:19उस समय के लीडर्स की जो अपने ही समाज के
- 4:59:22अगेंस्ट खड़े होकर उन्हें आईना दिखाने का
- 4:59:25साहसिक काम करते हैं। लिमिटेड ही सही
- 4:59:28लेकिन इनका इंपैक्ट तो इंडियन सोसाइटी पर
- 4:59:30हुआ था। इसके अलावा नेशनलिज्म को प्रमोट
- 4:59:34करके इन्होंने आगे होने वाले नेशनल
- 4:59:36मूवमेंट को भी स्ट्रांग बनाने का काम किया
- 4:59:38था। 19th सेंचुरी के सोश रिलीजियस रिफॉर्म
- 4:59:42मूवमेंट्स की वजह से ही इंडिया मॉडर्न
- 4:59:45नेशन बनने की राह पर अग्रसर होता है। लोअर
- 4:59:49कास्ट मूवमेंट्स।
- 4:59:51दोस्तों 19th सेंचुरी में इंडिया में सोशल
- 4:59:54रिलीजियस रिफॉर्म्स के लिए बहुत सारे
- 4:59:56ऑर्गेनाइजेशनंस फॉर्म किए गए थे। जैसे कि
- 4:59:59ब्रह्म समाज, आर्य समाज, यंग बंगाल
- 5:00:02मूवमेंट, प्रार्थना समाज एटसेटरा। लेकिन
- 5:00:06इनके ज्यादातर लीडर्स अपर कास्ट हिंदू
- 5:00:08कम्युनिटी को बिलोंग करते थे। इन लोगों ने
- 5:00:11कास्ट डिस्क्रिमिनेशन के अगेंस्ट आवाज
- 5:00:14जरूर उठाई थी और अनटचेबिलिटी को भी काफी
- 5:00:17कंडेम किया था। इसके बावजूद कास्ट
- 5:00:20डिस्क्रिमिनेशन को रोकने या अनटचेबल्स की
- 5:00:22कंडीशन में सुधार लाने में इन्हें बहुत
- 5:00:25ज्यादा सफलता नहीं मिली थी। साथ ही 19th
- 5:00:28और 20th सेंचुरीज में कुछ ऐसे
- 5:00:30सरकमस्ट्ससेस बनते हैं जिनकी वजह से लोअर
- 5:00:33कास्ट में क्लास कॉन्शियसनेस डेवलप होने
- 5:00:36लगती है। इसके बाद यह लोग खुद कास्ट
- 5:00:39इक्वलिटी के लिए संघर्ष शुरू करते हैं।
- 5:00:42ब्रिटिशर्स की डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी,
- 5:00:44वेस्टर्न एजुकेशन सिस्टम की ग्रोथ, कॉमन
- 5:00:47इंडियन पीनल कोड और कोड ऑफ क्रिमिनल
- 5:00:49प्रोसीजर का इंट्रोडक्शन, रेलवे नेटवर्क
- 5:00:52का एक्सटेंशन, मॉडर्न पॉलिटिकल थॉट की
- 5:00:54पॉपुलैरिटी जो इक्वलिटी और सोशल
- 5:00:57इगेलिटेरियनिज्म पर बेस्ड था। कुछ ऐसे
- 5:01:00कारण थे जिनकी वजह से कास्ट सिस्टम को
- 5:01:03डिफेंड करना मुश्किल होता जा रहा था। ऐसी
- 5:01:06सिचुएशन में लोअर कास्ट के कुछ लीडर्स
- 5:01:09सामने आते हैं और खुद ही मूवमेंट की
- 5:01:11शुरुआत करते हैं। इनके बारे में बात करने
- 5:01:14से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर लोअर
- 5:01:17कास्ट पीपल को आंदोलन करने की जरूरत भी
- 5:01:20क्यों पड़ती है। कॉजेस ऑफ लोअर कास्ट
- 5:01:23मूवमेंट्स।
- 5:01:25दोस्तों, लोअर कास्ट से यहां हमारा मतलब
- 5:01:28उन कास्ट से है जिन्हें अनटचेबल्स कहा
- 5:01:31जाता था। इन्हें वर्ण सिस्टम से बाहर रखा
- 5:01:34जाता था। इसमें ज्यादातर मिनियल जॉब्स
- 5:01:37करने वाले लोग जैसे लेदर वर्कर्स,
- 5:01:39गार्डनर्स, स्वीपर्स एटसेट्रा आते थे।
- 5:01:43इंडियन सोसाइटी में इन लोगों के साथ बहुत
- 5:01:46ही इनह्यूमेन व्यवहार किया जाता था।
- 5:01:49अबकास्ट लोगों का मानना था कि इनके स्पर्श
- 5:01:52से ही इंसान पोल्यूटेड हो सकता है। इसलिए
- 5:01:55इन्हें ना तो मेन स्ट्रीम कम्युनिटी के
- 5:01:58साथ रहने दिया जाता था और ना ही यह लोग
- 5:02:00मेन सड़क, पब्लिक वेल्स, टेंपल्स आदि का
- 5:02:03यूज कर सकते थे।
- 5:02:06इसके अलावा इन्हें किसी भी तरह के राइट्स
- 5:02:08भी नहीं दिए जाते थे। इसके ऊपर से अपर
- 5:02:11कास्ट के लोग इनका शोषण करते थे। इन्हें
- 5:02:14बहुत ही अपमानजनक शब्दों से बुलाया जाता
- 5:02:17था। इनके साथ कोई भी अच्छे से बात करने के
- 5:02:20लिए तैयार नहीं होता था। इनके साथ खाना या
- 5:02:23पीना तो बहुत दूर की बात थी। इनका दिखना
- 5:02:26भी अशुभ माना जाता था। इस तरह लोअर कास्ट
- 5:02:29के लोग अपने ही देश और समाज में सेकेंडरी
- 5:02:32सिटीजंस की तरह जीते थे। इनकी बस्तियां
- 5:02:35गांव से बाहर होती थी। लेकिन ब्रिटिश रूल
- 5:02:38के साथ जब मॉडर्न एजुकेशन भी इंडिया में
- 5:02:41आती है तो सिचुएशन बदलना शुरू करती है।
- 5:02:44शुरुआत में क्रिश्चियन मिशनरीज इन्हें
- 5:02:47कन्वर्ट करने के लालच में एजुकेशन देना
- 5:02:49शुरू करते हैं। इसके बाद ब्रिटिश
- 5:02:52गवर्नमेंट भी इन्हें स्कॉलरशिप देने लगती
- 5:02:54है। इसके पीछे उनका मकसद जरूर डिवाइड एंड
- 5:02:57रूल था। लेकिन इससे अनटचेबल कम्युनिटी को
- 5:03:01फायदा जरूर होता है। इसके अलावा मॉडर्न
- 5:03:04थॉट्स जैसे लिबर्टी, इक्वलिटी और
- 5:03:06फ्रेटरनिटी पर जब इंडिया में बात होना
- 5:03:08शुरू होती है तो बहुत से सोशल रिफॉर्मर्स
- 5:03:11कास्ट सिस्टम के खिलाफ भी बोलना शुरू करते
- 5:03:14हैं। इससे लोअर कास्ट के लोगों में
- 5:03:16धीरे-धीरे अवेकनिंग आना शुरू हो जाती है।
- 5:03:19इतना सब होने के बाद भी जब कास्ट
- 5:03:22डिस्क्रिमिनेशन खत्म नहीं होता तब लोअर
- 5:03:25कास्ट के कुछ लीडर्स इसे ओपनली चैलेंज
- 5:03:28करने का साहस दिखाते हैं। आइए अब ऐसे ही
- 5:03:31कुछ लीडर्स और उनके मूवमेंट्स के बारे में
- 5:03:33जानते हैं। ज्योतिबा फुले एंड सत्यशोधक
- 5:03:37समाज। दोस्तों, सबसे पहले लोअर कास्ट
- 5:03:41मूवमेंट शुरू करने का श्रेय महाराष्ट्र के
- 5:03:44ज्योतिबा फुले जी को जाता है। इनका जन्म
- 5:03:47माली कास्ट में हुआ था। फ्यूचर कास्ट
- 5:03:50मूवमेंट्स के लिए भी यह इंस्पिरेशन का काम
- 5:03:53करते हैं। 1873 में ज्योतिबा फुले
- 5:03:56सत्यशोधक समाज की स्थापना करते हैं। इस
- 5:03:59ऑर्गेनाइजेशन का एम सोसाइटी के वीकर
- 5:04:02सेक्शंस के लिए सोशल जस्टिस सिक्योर करना
- 5:04:05था। इन्होंने लोअर कास्ट और वुमेन के लिए
- 5:04:08बहुत से स्कूल्स और ऑर्फनेजेस भी ओपन किए
- 5:04:11थे। ज्योतिबा फुले को 1876 में पुणे
- 5:04:16म्यनिसिपल कमेटी का मेंबर भी इ किया गया
- 5:04:18था। यह कांग्रेस को भी क्रिटिसाइज करते
- 5:04:21हैं क्योंकि इनका मानना था कि कांग्रेस
- 5:04:24पूरी तरह नेशनल नहीं बन सकती जब तक वह
- 5:04:26लोअर और बैकवर्ड कास्ट के वेलफेयर में
- 5:04:29अपना इंटरेस्ट ना शो करें। 1888 में
- 5:04:32ज्योतिबा फुले जी को महात्मा की उपाधि से
- 5:04:35सम्मानित किया गया था। फुले जी गुलामगिरी
- 5:04:39इशारा लाइफ ऑफ शिवाजी जैसी बुक्स के ऑथर
- 5:04:42थे। गुलामगिरी को मराठी में लिखा गया था
- 5:04:45और यह कास्ट सिस्टम को क्रिटिसाइज करने
- 5:04:48वाली सबसे पहली बुक्स में से एक मानी जाती
- 5:04:50है। इसे डायलॉग के फॉर्म में लिखा गया था
- 5:04:53जो ज्योतिबा जी और उनके कैरेक्टर धोंडीबा
- 5:04:57के बीच में चलता है। बुक में बेसिकली
- 5:05:00कास्टिज्म की थ्योरी को चैलेंज किया गया
- 5:05:02है। ज्योतिबा फुले और उनके मूवमेंट ने
- 5:05:05अंबेडकर को भी काफी इन्फ्लुएंस किया था।
- 5:05:08महाराष्ट्र के बाद अब बात करते हैं साउथ
- 5:05:11इंडिया की जहां लोअर कास्ट मूवमेंट्स की
- 5:05:13एक स्ट्रांग हिस्ट्री रही है। यहां श्री
- 5:05:16नारायण गुरु और ईवी रामस्वामी नायकर जैसे
- 5:05:20लीडर्स ने लोअर कास्ट के इमसिपेशन के लिए
- 5:05:23काम किया। श्री नारायण धर्म परिपालन योगम
- 5:05:27एसएनडीपीवाई मूवमेंट। दोस्तों श्री नारायण
- 5:05:30गुरु केरला की अनटचेबल कम्युनिटी एडवास या
- 5:05:34एरवास को बिलोंग करते थे। इन्होंने 1923
- 5:05:39में श्री नारायण धर्म परिपालना योगम की
- 5:05:42स्थापना की थी और इसके तहत टेंपल एंट्री
- 5:05:45मूवमेंट्स ल्च किए गए थे। उस समय लोअर
- 5:05:48कास्ट स्पेशली अनटचेबल्स जैसे कि एडवास को
- 5:05:52टेंपल में एंट्री का अधिकार नहीं दिया
- 5:05:54जाता था। इसके अगेंस्ट ही इन्होंने आंदोलन
- 5:05:58किया। श्री नारायण गुरु जी का मानना था कि
- 5:06:01अलग-अलग कास्ट में डिफरेंस सिर्फ
- 5:06:03सुपरफिशियल है। जैसे एक ही ट्री की सभी
- 5:06:06लीव्स का जूस एक जैसा ही होता है। वैसे ही
- 5:06:09अलग-अलग कास्ट को बिलोंग करने वाले भी एक
- 5:06:12ही ईश्वर की संतान हैं। और इसीलिए एक समान
- 5:06:16ही हैं। इसी पर उन्होंने नारा दिया था वन
- 5:06:19रिलीजन, वन कास्ट एंड वन गॉड फॉर
- 5:06:22मैनकाइंड। नारायण गुरु और उनके साथियों ने
- 5:06:25एरवाज़ के अपलिफ्टमेंट के लिए टू पॉइंट
- 5:06:28प्रोग्राम ल्च किया था। इसमें पहला पॉइंट
- 5:06:31यह था कि यह अपनी कास्ट से नीचे की कास्ट
- 5:06:34के प्रति अनटचेबिलिटी की प्रैक्टिस को
- 5:06:36छोड़ देंगे और दूसरे पॉइंट के तहत नारायण
- 5:06:39गुरु बहुत से टेंपल्स बनाते हैं जो सभी
- 5:06:43कास्ट्स के लिए ओपन रखे जाते हैं। इसके
- 5:06:45साथ ही वह मैरिज, वरशिप और फ्यूनरल से
- 5:06:48रिलेटेड रिचुअल्स को भी सिंपल बनाते हैं।
- 5:06:51नारायण गुरु अनटचेबल ग्रुप्स के
- 5:06:53ट्रांसफॉर्मेशन में काफी हद तक सफल रहते
- 5:06:56हैं। अब बात करते हैं साउथ इंडिया के ही
- 5:06:59एक दूसरे कास्ट मूवमेंट की। जस्टिस पार्टी
- 5:07:04दोस्तों 20th नवंबर 1916 को मद्रास के
- 5:07:08लीडिंग नॉन ब्राह्मण सिटीजंस साउथ इंडियन
- 5:07:11लिबरल फेडरेशन की स्थापना करते हैं। इसमें
- 5:07:14डॉ. टी एम नायर, श्री पिट्टी त्याग राजा
- 5:07:17चेतियार और पंगल के राजा शामिल थे। इस
- 5:07:20ऑर्गेनाइजेशन को जस्टिस पार्टी के नाम से
- 5:07:23भी जाना जाता है। यह लोग नॉन ब्राह्मण
- 5:07:26मेनिफेस्टो नाम से एक जॉइंट डिक्लेरेशन
- 5:07:29इशू करते हैं। जिसमें गवर्नमेंट जॉब्स में
- 5:07:32नॉन ब्राह्मण्स के लिए रिजर्वेशन की
- 5:07:34डिमांड रखी जाती है। 1920 में जब मद्रास
- 5:07:37लेजिसलेटिव काउंसिल के इलेक्शंस होते हैं
- 5:07:40तब इनकी पार्टी पावर में आती है। आगे जाकर
- 5:07:43जस्टिस पार्टी ईवी रामस्वामी नायकर की
- 5:07:46लीडरशिप में काम करने लगती है और वो इसे
- 5:07:49एक नई दिशा दिखाते हैं। ईवी रामस्वामी
- 5:07:53नायकर एंड सेल्फ रिस्पेक्ट मूवमेंट।
- 5:07:56दोस्तों एंटी ब्राह्मण मूवमेंट में एक
- 5:07:59बड़ा नाम आता है सेल्फ रिस्पेक्ट मूवमेंट
- 5:08:02का। इसे ईवी रामस्वामी नायकर ने शुरू किया
- 5:08:05था। जिन्हें पेरियार यानी कि ग्रेट सोल के
- 5:08:09नाम से जाना जाता है। नायकर पहले कांग्रेस
- 5:08:12के मेंबर हुआ करते थे। इन्होंने नॉन
- 5:08:14कोऑपरेशन मूवमेंट में भी पार्टिसिपेट किया
- 5:08:17था। लेकिन सोशल जस्टिस और नॉन ब्राह्मणस
- 5:08:20के रिप्रेजेंटेशन के इशू पर कांग्रेस के
- 5:08:22साथ इनका मतभेद हो जाता है। और यह
- 5:08:24कांग्रेस छोड़कर 1925 में सेल्फ रिस्पेक्ट
- 5:08:28मूवमेंट ल्च करते हैं। इस मूवमेंट का ऐ
- 5:08:32नॉन ब्राह्मणस में अवेकनिंग पैदा करना था।
- 5:08:35इन्होंने अपना जर्नल कुड़ियासू भी निकाला
- 5:08:38था। जर्नल और मूवमेंट के द्वारा यह बिना
- 5:08:41ब्राह्मण प्रीस्ट के वेडिंग्स करना,
- 5:08:44जबरदस्ती टेंपल में एंट्री करना और
- 5:08:46मनुस्मृति को जलाने जैसी एक्टिविटीज को
- 5:08:48प्रमोट करते हैं। इनफैक्ट पेरियार साउथ
- 5:08:52इंडिया स्पेशली तमिलनाडु के सभी नॉन
- 5:08:54ब्राह्मणस के लिए एक अंब्रेला मूवमेंट
- 5:08:57प्रोवाइड करने की कोशिश करते हैं। 1937 के
- 5:09:00बाद जस्टिस पार्टी की लीडरशिप इनके हाथों
- 5:09:03में आ जाती है और इन्हें लगता है कि
- 5:09:05इलेक्ट्रोरल पॉलिटिक्स छोड़कर पार्टी को
- 5:09:08नॉन ब्राह्मण मूवमेंट से एक रिफॉर्मिस्ट
- 5:09:10मूवमेंट में चेंज करने की जरूरत है। इसी
- 5:09:13सोच के साथ 1944 में सीलम कॉन्फ्रेंस में
- 5:09:17पार्टी का नाम बदलकर द्रविड़ कड़गम कर
- 5:09:20दिया जाता है और फिर यह रिफॉर्म्स की राह
- 5:09:22पर चल देते हैं। हालांकि सितंबर 1949 में
- 5:09:25यह पार्टी स्प्लिट हो जाती है और अन्ना
- 5:09:27दोराय की लीडरशिप में द्रविड़ मुनेत्र
- 5:09:30कड़गम यानी डीएमके की फॉर्मेशन होती है जो
- 5:09:33एक बार फिर से इलेक्ट्रोरल पॉलिटिक्स जॉइ
- 5:09:36करती है और 1967 में तमिलनाडु में पहली
- 5:09:40बार डीएमके गवर्नमेंट बनती है और
- 5:09:42अन्नादुराय सीएम इ होते हैं। दोस्तों
- 5:09:45नायगर हिंदूज़्म की भी कड़ी आलोचना करते
- 5:09:48हैं। और हिंदू रिलीजन को ब्राह्मणिकल
- 5:09:51कंट्रोल का एक इंस्ट्रूमेंट कहते हैं। वो
- 5:09:54मनु के लॉस को इन ह्यूमन बताते हैं और
- 5:09:57पुराणास को फेयर टेल्स। उन्होंने
- 5:10:00हिंदूइज़्म का उपहास करते हुए कहा था कि
- 5:10:03कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें सुधारा नहीं जा
- 5:10:05सकता। सिर्फ खत्म किया जा सकता है और
- 5:10:08ब्राह्मेनिकल हिंदूइज़्म उन्हीं में से एक
- 5:10:11है। नायकर ने रिलीजन को एक सुपरस्टिशन
- 5:10:14बताया और द्रविडियंस पर हिंदी इंपोज किए
- 5:10:18जाने का भी विरोध किया। वो होटल्स पर लगे
- 5:10:20हुए कास्ट के नाम वाले बोर्ड्स को
- 5:10:22डिस्ट्रॉय कर देते थे। ब्राह्मण्स के होली
- 5:10:25थ्रेड को काट देते थे। डेटीज को चप्पल से
- 5:10:28मारते थे और मूर्तियों को भी तोड़ देते
- 5:10:31थे। पेरियार की लेगेसी आज भी द्रविडियन
- 5:10:34मूवमेंट के लिए इंस्पिरेशन का सोर्स है।
- 5:10:37दोस्तों लोअर कास्ट मूवमेंट्स की बात डॉ.
- 5:10:40बी आर अंबेडकर के बिना पूरी नहीं हो सकती।
- 5:10:43तो आइए उनके ग्रेट कंट्रीब्यूशन के बारे
- 5:10:46में जानते हैं। डॉ. बी आर अंबेडकर एंड
- 5:10:49डिप्रेस्ड क्लासेस मूवमेंट। अंबेडकर जी का
- 5:10:52जन्म 1891 में महाराष्ट्र के महार कास्ट
- 5:10:56में हुआ था। बचपन से ही उन्हें कास्ट
- 5:10:58डिस्क्रिमिनेशन का सामना करना पड़ा था और
- 5:11:01आगे चलकर वह इसके अगेंस्ट बोलने वाले सबसे
- 5:11:04बड़े लीडर बनते हैं। उन्होंने बॉम्बे के
- 5:11:07अल्फिंस्टन कॉलेज से ग्रेजुएशन कंप्लीट की
- 5:11:10और अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से
- 5:11:12अपनी एमए और पीएचडी की डिग्री हासिल की।
- 5:11:16जुलाई 1924 में अंबेडकर जी बॉम्बे में
- 5:11:20बहिष्कृत हितकरणी सभा की स्थापना करते
- 5:11:23हैं। इसका एम अनटचेबल्स की मोरल और
- 5:11:26मटेरियल प्रोग्रेस करना होता है। वो
- 5:11:28एजिटेशन का भी रास्ता अपनाते हैं और
- 5:11:31दिसंबर 1927 में अनटचेबल्स के मंदिर में
- 5:11:34घुसने और पब्लिक वेल्स में से पानी लेने
- 5:11:37के राइट्स के लिए सत्याग्रह लांच करते
- 5:11:39हैं। इसे महाड़ सत्याग्रह के नाम से जाना
- 5:11:42जाता है।
- 5:11:44आगे बढ़ते हुए 1930 में अंबेडकर जी नेशनल
- 5:11:48पॉलिटिक्स में एंटर करते हैं और अनटचेबल्स
- 5:11:51के लिए सेपरेट इलेक्टोरेट्स की डिमांड
- 5:11:53करते हैं। वह ब्रिटिशर्स द्वारा
- 5:11:54ऑर्गेनाइज्ड तीनों राउंड टेबल
- 5:11:56कॉन्फ्रेंसेस में पार्टिसिपेट करते हैं।
- 5:11:591932 में ब्रिटिश पीएम द्वारा अनाउंस्ड
- 5:12:02कम्युनल अवार्ड में अंबेडकर जी की सेपरेट
- 5:12:05इलेक्टोरेट की डिमांड एक्सेप्ट कर ली जाती
- 5:12:07है। लेकिन गांधी जी द्वारा इसका विरोध
- 5:12:10करने और भूख हड़ताल शुरू करने पर अंबेडकर
- 5:12:13जी कंप्रोमाइज करने के लिए तैयार होते हैं
- 5:12:16और उनके और गांधी जी के बीच पूना पैक्ड
- 5:12:18साइन होता है जिसके अकॉर्डिंग सेपरेट
- 5:12:21इलेक्टोरेट की डिमांड वापस ले ली जाती है
- 5:12:24और उसकी जगह जनरल कंस्टीट्यूएंसीज में
- 5:12:27शेड्यूल्ड कास्ट्स को रिजर्वेशन दिया जाता
- 5:12:29है। अप्रैल 1942 में ऑल इंडिया पार्टी के
- 5:12:34रूप में अंबेडकर जी शेड्यूल्ड कास्ट
- 5:12:36फेडरेशन फॉर्म करते हैं। कांग्रेस पार्टी
- 5:12:39द्वारा उन्हें कंस्टिट्यूएंट असेंबली का
- 5:12:41मेंबर बनाया जाता है और फिर हमारे
- 5:12:44कॉन्स्टिट्यूशन की ड्राफ्टिंग कमेटी का
- 5:12:46हेड बनकर अंबेडकर जी अपना अनमोल योगदान
- 5:12:49देते हैं। उनके प्रयासों से इंडिया को ऐसा
- 5:12:52कॉन्स्टिट्यूशन मिलता है जिसमें
- 5:12:54अनटचेबिलिटी को अबॉलिश कर दिया जाता है और
- 5:12:57जो फंडामेंटल राइट्स और इक्वलिटी की
- 5:13:00गारंटी देता है। इंडिपेंडेंस के बाद वह
- 5:13:03गवर्नमेंट में लॉ मेंबर की तरह काम करते
- 5:13:06हैं और हिंदू कोड बिल लेकर आते हैं।
- 5:13:09हालांकि बिल को लेकर जब असेंबली में विरोध
- 5:13:11होता है तो पीएम नेहरू इसे वापस ले लेते
- 5:13:14हैं। इस बात से नाराज होकर अंबेडकर जी
- 5:13:17कैबिनेट से रिजाइन कर देते हैं। हालांकि
- 5:13:19बाद में नेहरू अलग-अलग पार्ट्स में हिंदू
- 5:13:22कोड बिल पास करवा लेते हैं। 1950 में
- 5:13:26अंबेडकर जी अपने फॉलोअर्स के साथ
- 5:13:28बुद्धिज्म अडॉप्ट कर लेते हैं। यह उनका
- 5:13:31तरीका था हिंदू कास्ट सिस्टम को अपोज करने
- 5:13:34का। उनके अनुसार क्योंकि हिंदू रिलजन और
- 5:13:37उसका कास्ट सिस्टम अनटचेबल्स को इक्वल
- 5:13:40राइट्स देने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए
- 5:13:42अनटचेबल्स के पास हिंदूइज़्म को छोड़ने के
- 5:13:45अलावा और कोई ऑप्शन नहीं रहता है। दोस्तों
- 5:13:49अंबेडकर जी आज भी लोअर कास्ट पीपल के लिए
- 5:13:52इंस्पिरेशन का सोर्स हैं। उनके विचार और
- 5:13:55आईडियोलॉजी आज भी देश के युवाओं को
- 5:13:57प्रेरणा देती हैं। कंक्लूजन।
- 5:14:01इस तरह कास्ट डिस्क्रिमिनेशन के अगेंस्ट
- 5:14:03लोअर कास्ट पीपल ने अलग-अलग आंदोलन किए।
- 5:14:06अपने साथ हो रहे इन ह्यूमन बिहेवियर को
- 5:14:09चैलेंज करने का इन्होंने साहस दिखाया।
- 5:14:12इन्हीं के प्रयासों का नतीजा था कि लोअर
- 5:14:15कास्ट पीपल अपने अधिकारों के प्रति सजग
- 5:14:17हुए। हालांकि निराश करने वाली बात यह है
- 5:14:20कि इतने प्रयासों के बाद भी कास्ट
- 5:14:23डिस्क्रिमिनेशन जैसे ईवल से देश आजाद नहीं
- 5:14:27हो सका है। आज भी अनटचेबल्स के अगेंस्ट
- 5:14:30किए जाने वाले क्राइम्स अक्सर न्यूज़ पेपर
- 5:14:32की हेडलाइंस बनते रहते हैं। यकीनन ऐसी
- 5:14:35हेडलाइंस को देखकर ज्योतिबा फुले, पेरियार
- 5:14:38या अंबेडकर जैसे ग्रेट लीडर्स खुश नहीं
- 5:14:41होते।
- 5:14:43हमें जरूरत है। हमें जरूरत है इन ग्रेट
- 5:14:45लीडर्स के विजन को पूरा करने की। एक
- 5:14:48कास्टलेस इक्वल सोसाइटी फॉर्म करने की। यह
- 5:14:51किसी एक लीडर से संभव नहीं होगा बल्कि सभी
- 5:14:54देशवासियों को इसमें साथ आना होगा।
- 5:14:58लॉर्ड लिटन एंड लॉर्ड रिपन।
- 5:15:01दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं दो ऐसे
- 5:15:04ब्रिटिश वाइसस की जिन्हें एक दूसरे का
- 5:15:06ऑोजिट भी कहा जा सकता है। एक तरफ थे लॉर्ड
- 5:15:10लिटन जिन्हें याद किया जाता है उनकी
- 5:15:12रिप्रेसिव पॉलिसीज के लिए और दूसरी तरफ
- 5:15:15लॉर्ड रिपन जिन्हें उनकी लिबरल पॉलिसीज के
- 5:15:19लिए जाना जाता है। आइए शुरू करते हैं
- 5:15:22लॉर्ड लिटन से।
- 5:15:25लॉर्ड लिटन 1876 टू 1880
- 5:15:30दोस्तों लॉर्ड लिटन ने अप्रैल 1876 में
- 5:15:34लॉर्ड नॉर्थ ब्रुक को रिप्लेस करके इंडिया
- 5:15:36के वायसरॉय का चार्ज लिया था। वो प्रोफेशन
- 5:15:39से एक डिप्लोमेट थे और अलग-अलग कैपेसिटीज
- 5:15:42में ब्रिटिश फॉरेन ऑफिस को सर्व कर चुके
- 5:15:44थे। इसके साथ ही वो एक रेपिटेड पोएट,
- 5:15:47नवेलिस्ट और एसेस्ट भी थे और लिटरेरी
- 5:15:50वर्ल्ड में ओवन मेरडथ के नाम से जाने जाते
- 5:15:53थे।
- 5:15:541876 से पहले तक उन्हें एडमिनिस्ट्रेशन का
- 5:15:58कोई एक्सपीरियंस नहीं था और ना ही वह
- 5:16:00इंडियन अफेयर्स के जानकार थे। तो इंडिया
- 5:16:03का वायसरॉय बनने के बाद उन्होंने
- 5:16:05क्या-क्या काम किए? आइए जानते हैं।
- 5:16:09लिटिनस टेन्योर इज वायसरॉय ऑफ इंडिया।
- 5:16:13सबसे पहले जानते हैं 187678
- 5:16:16के फेमिन में लॉर्ड लिटन के रोल को।
- 5:16:20द फेमिन ऑफ 187678
- 5:16:23दोस्तों 1876 से 78 के बीच इंडिया को एक
- 5:16:27सीवियर फेमिन का सामना करना पड़ता है।
- 5:16:30इसका सबसे ज्यादा असर दिखता है मद्रास,
- 5:16:33बॉम्बे, मैसूर, हैदराबाद और सेंट्रल
- 5:16:35इंडिया और पंजाब के कुछ पार्ट्स में। एक
- 5:16:38एस्टीमेट के अनुसार इस फेमिन से एक साल के
- 5:16:41ही अंदर करीब 5 मिलियन लोगों की मृत्यु हो
- 5:16:44गई थी। 1878 में लॉर्ड लिटन रिचर्ड
- 5:16:47स्ट्रेची की प्रेसिडेंटशिप में एक फेमिन
- 5:16:49कमीशन अपॉइंट करते हैं। कमीशन फेमिन रिलीफ
- 5:16:52के लिए अपनी रेकमेंडेशन देती है। जैसे कि
- 5:16:55सभी प्रोविंसेस में एक फेमिन फंड बनाया
- 5:16:57जाए।
- 5:16:59इसके साथ ही इरीगेशन वर्क्स और रेल्वेज का
- 5:17:01डेवलपमेंट भी किया जाए।
- 5:17:04लेकिन इसके बाद भी लिटन के द्वारा कोई
- 5:17:06फेमिन पॉलिसी नहीं बनाई जाती। साथ ही
- 5:17:08फेमिन से प्रभावित हुए किसानों को भी कोई
- 5:17:11कंपनसेशन नहीं मिलता।
- 5:17:13नेक्स्ट बात करते हैं रॉयल टाइटल्स एक्ट
- 5:17:161876 की और 1877 के दिल्ली दरबार की।
- 5:17:22द रॉयल टाइटल्स एक्ट 1876 एंड दिल्ली
- 5:17:25दरबार ऑफ 1877।
- 5:17:28ब्रिटिश पार्लियामेंट 1876 में रॉयल
- 5:17:30टाइटल्स एक्ट पास करती है। जिसके अनुसार
- 5:17:33इंग्लैंड की क्वीन विक्टोरिया को इंडिया
- 5:17:35की एम्रेस होने का टाइटल मिलता है। इसे
- 5:17:38कैसर-ए-ह हिंद भी कहा जाता था। लॉर्ड लिटन
- 5:17:42इंडिया में इसे सेलिब्रेट करने के लिए
- 5:17:441877 में दिल्ली दरबार ऑर्गेनाइज करते
- 5:17:46हैं। जिसमें फॉर्मली क्वीन विक्टोरिया को
- 5:17:49इंडिया की रानी अनाउंस किया जाता है।
- 5:17:52ध्यान देने वाली बात यह है कि यह दरबार तब
- 5:17:54ऑर्गेनाइज किया जा रहा था जब इंडिया में
- 5:17:57फेमिन के कारण लोग भूखे मर रहे थे और ऐसे
- 5:18:00समय में लोगों की हेल्प करने की जगह लिटिन
- 5:18:03दरबार में लाखों खर्च कर देते हैं। इससे
- 5:18:06पता चलता है कि लिटन के मन में इंडिया के
- 5:18:09लोगों के लिए किसी भी तरह की कोई सिंपैथी
- 5:18:12नहीं थी। उनके इस एक्ट से लोगों में
- 5:18:14ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट डिस्कंटेंट बढ़ने
- 5:18:17लगता है और नेशनलिस्ट फीलिंग्स और भी
- 5:18:20प्रखर होती हैं। अब बात करते हैं
- 5:18:22वर्नेकुलर प्रेस एक्ट की। द वर्नेकुलर
- 5:18:25प्रेस एक्ट मार्च 1878।
- 5:18:29दोस्तों लॉर्ड लिटन की इस तरह की अनपॉपुलर
- 5:18:32पॉलिसीज को वर्नाकुलर प्रेस यानी कि
- 5:18:35इंडियन लैंग्वेज में छपने वाले न्यूज़पेपर
- 5:18:37और जर्नल्स ओपनली क्रिटिसाइज करने लगते
- 5:18:40हैं। वनेकुलर प्रेस हाईलाइट करती है कि
- 5:18:43कैसे फेमिन से बुरी तरह अफेक्टेड लोग
- 5:18:45गवर्नमेंट से कोई हेल्प ना मिलने की वजह
- 5:18:47से रॉबरी करने के लिए मजबूर हो गए हैं। कह
- 5:18:51सकते हैं कि वर्नेकुलर प्रेस ब्रिटिश रूल
- 5:18:53की क्रूल पिक्चर सबके सामने लाने का काम
- 5:18:55कर रही थी। इस तरह के भड़काने वाले
- 5:18:58आर्टिकल्स की तेजी से होती ग्रोथ लॉर्ड
- 5:19:00लिटन को परेशान करती है और वह रिप्रेसिव
- 5:19:03पॉलिसी फॉलो करने का डिसीजन लेते हैं।
- 5:19:06मार्च 1878 में वर्नाकुलर प्रेस एक्ट पास
- 5:19:09कर देते हैं। जिसका एम वर्कुलर प्रेस में
- 5:19:12होने वाले गवर्नमेंट के क्रिटिसिज्म को
- 5:19:13रोकना था। एक्ट के अनुसार वनेकुलर
- 5:19:16न्यूज़पेपर्स के पब्लिशर्स को मैजिस्ट्रेट
- 5:19:19के साथ बॉन्ड साइन करना था कि वह ऐसा कोई
- 5:19:22भी आर्टिकल पब्लिश नहीं करेंगे जिससे
- 5:19:24लोगों के अंदर ब्रिटिश गवर्नमेंट के
- 5:19:26अगेंस्ट डिसअफेक्शन पैदा हो और अगर वह
- 5:19:29इसको वायलेट करते हैं तो उनके प्रिंटिंग
- 5:19:31इक्विपमेंट को सीज भी किया जा सकता है।
- 5:19:34मैजिस्ट्रेट के एक्शन के अगेंस्ट कोर्ट
- 5:19:36में कोई अपील भी नहीं की जा सकती थी। इस
- 5:19:39एक्ट के थ्रू लॉर्ड लिटन ने फ्रीडम ऑफ
- 5:19:41स्पीच के राइट को छीन लिया था। और सबसे
- 5:19:44बड़ी बात थी कि यह सिर्फ वनेकुलर प्रेस के
- 5:19:47लिए ही था। एक तरह से डिस्लॉयल नेटिव
- 5:19:50प्रेस और लॉयल एंग्लो इंडियन प्रेस के बीच
- 5:19:52भेदभाव का प्रतीक था। इस तरह के
- 5:19:55डिस्क्रिमिनेशन से लोगों को समझ आने लग
- 5:19:57गया कि ब्रिटिशर्स की थ्योरी ऑफ वाइट मैनस
- 5:20:00बर्डन बस एक दिखावा है। वर्नाकुलर प्रेस
- 5:20:03एक्ट से बचने के लिए अमृत बाजार पत्रिका
- 5:20:06खुद को रातोंरात इंग्लिश पब्लिकेशन बना
- 5:20:09लेती हैं। इस एक्ट से वर्नाकुलर प्रेस को
- 5:20:11तो कंट्रोल कर लिया गया लेकिन गवर्नमेंट
- 5:20:14के अगेंस्ट जो डिस्कंटेंट था वह कम नहीं
- 5:20:16हुआ था। बस उसको ओपनली एक्सप्रेस नहीं
- 5:20:19किया जा रहा था। इससे डिस्कंटेंट अंदर ही
- 5:20:22अंदर और ज्यादा बढ़ता है। अब बात करते हैं
- 5:20:25लिटन के एडमिनिस्ट्रेशन के एक और
- 5:20:27रिप्रेसिव मेजर की जो था 1878 का आर्म्स
- 5:20:31एक्ट। द आर्म्स एक्ट 1878।
- 5:20:34इस एक्ट ने बिना लाइसेंस के हथियार रखने
- 5:20:36या खरीदने बेचने को क्रिमिनल ऑफेंस
- 5:20:39डिक्लेअ कर दिया। लेकिन एक्ट का वर्स्ट
- 5:20:42फीचर था इसमें शामिल रेशल डिस्क्रिमिनेशन।
- 5:20:45क्योंकि यूरोपियंस और एंग्लो इंडियंस पर
- 5:20:47यह एक्ट लागू नहीं होता था। मतलब सिर्फ
- 5:20:50इंडियंस के हथियार रखने से ही परेशानी थी।
- 5:20:53दोस्तों, रेशल डिस्क्रिमिनेशन की बात
- 5:20:55करें, तो यह ब्रिटिशर्स की सभी पॉलिसीज
- 5:20:58में दिखता है और इसका सबसे बड़ा एग्जांपल
- 5:21:00था सिविल सर्विज में इंडियंस की
- 5:21:02अपॉइंटमेंट का इशू। आइए देखते हैं कैसे। द
- 5:21:06स्टचटरी सिविल सर्विस। कहने को तो 1833 के
- 5:21:10चार्टर एक्ट ने इंडियंस के लिए सिविल
- 5:21:12सर्विज का रास्ता खोल दिया था। लेकिन
- 5:21:15रियलिटी में यूरोपियन ब्यूरोक्रेसी कभी भी
- 5:21:18इंडियंस को अपना हिस्सा नहीं बनाना चाहती
- 5:21:20थी। और इसीलिए लॉर्ड लिटन 1878 में
- 5:21:23स्टचटरी सिविल सर्विस का प्लान आगे रखते
- 5:21:26हैं। इसके अनुसार गवर्नमेंट ऑफ इंडिया
- 5:21:28प्रोविंशियल गवर्नमेंट के रेकमेंड करने पर
- 5:21:31कुछ इंडियंस को स्टचटरी सिविल सर्विसेज
- 5:21:33में एंप्लॉय कर सकती थी। लेकिन इसमें भी
- 5:21:36शर्त यह थी कि यह अपॉइंटमेंट्स कवेंड
- 5:21:39सर्विस में होने वाले टोटल अपॉइंटमेंट्स
- 5:21:41के वन सिक्स्थ से ज्यादा नहीं हो सकते थे।
- 5:21:45इसके साथ ही स्टचटरी सिविल सर्विस के
- 5:21:47स्टेटस और सैलरी भी कवेंटेड सर्विज के
- 5:21:51जैसे नहीं थे।
- 5:21:54लॉर्ड लिटन ने तो यह भी प्रपोजल दिया था
- 5:21:56कि कवेंड सर्विज को पूरी तरह से इंडियंस
- 5:21:59के लिए क्लोज कर दिया जाए। लेकिन
- 5:22:01सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट इस प्रपोजल पर अग्री
- 5:22:04नहीं होते। हालांकि इंडियंस को एग्जाम में
- 5:22:06कम्पीट करने से डिसरेज करने के लिए
- 5:22:09मैक्सिमम एज को 21 से घटाकर 19 कर दिया
- 5:22:12जाता है। इस तरह से इंडियंस को सिविल
- 5:22:14सर्विज में आने से रोकने की हर संभव कोशिश
- 5:22:17की गई थी। अब बात करते हैं फ्री ट्रेड की।
- 5:22:20फ्री ट्रेड। दोस्तों, लिटन ने इंग्लैंड की
- 5:22:24टेक्सटाइल इंडस्ट्री के इंटरेस्ट को ध्यान
- 5:22:26में रखते हुए 1879 में कॉटन क्लॉथ पर लगने
- 5:22:30वाली इंपोर्ट ड्यूटीज को अबॉलिश कर दिया
- 5:22:32था। इससे इंडिया में डेवलप हो रही
- 5:22:35टेक्सटाइल इंडस्ट्री को नुकसान होता है और
- 5:22:37ब्रिटिश इंडस्ट्रीज को फायदा। तो दोस्तों,
- 5:22:40यह तो बात हुई लॉर्ड लिटन के टेन्योर की,
- 5:22:42सभी रिप्रेसिव और अनपॉपुलर पॉलिसीज की।
- 5:22:45इसके अलावा इनके टाइम पीरियड में 1878 से
- 5:22:481880 के बीच सेकंड एंग्लो अफगान वॉर भी
- 5:22:51हुआ था। यह वॉर लिटिन के प्रोवोक करने पर
- 5:22:55ही हुआ था और एंड में एक फेलियर साबित
- 5:22:58हुई। इसमें लिटिन इंडिया के रेवेन्यू का
- 5:23:01बड़ा हिस्सा खर्च कर देते हैं। लॉर्ड लिटन
- 5:23:03की इन पॉलिसीज की वजह से इंडियंस को
- 5:23:06ब्रिटिश रूल के ट्रू नेचर का एहसास होने
- 5:23:08लगता है। एजुकेटेड इंडियंस को रियलाइज
- 5:23:10होता है कि ब्रिटिशर्स कैसे उनके साथ
- 5:23:13डिस्क्रिमिनेट कर रहे हैं और इसी वजह से
- 5:23:16नेशनलिज्म की भावना और ज्यादा प्रमोट होती
- 5:23:19है। लॉर्ड लिटन 1880 में वायसरॉय की पोस्ट
- 5:23:23से रिजाइन कर देते हैं और नए वायसरॉय बनते
- 5:23:25हैं लॉर्ड रिपन। तो आइए अब लॉर्ड रिपन के
- 5:23:29बारे में बात करते हैं। लॉर्ड रिपन 1880
- 5:23:34टू 1884।
- 5:23:36दोस्तों 1880 में इंग्लैंड में ग्लडस्टन
- 5:23:39की लीडरशिप में लिबरल पार्टी पावर में आती
- 5:23:42है। ग्लैडस्टन इंडिया के लिए अपनी पॉलिसी
- 5:23:44डिक्लेअ करते हुए कहते हैं कि ब्रिटिशर्स
- 5:23:47का रूल इंडिया के नेटिव लोगों के लिए
- 5:23:49प्रॉफिटेबल होना चाहिए। और हमारी पॉलिसी
- 5:23:52होगी कि हम इंडियंस को यह दिखा और समझा भी
- 5:23:54सकें कि कैसे ब्रिटिश रूल उनके फायदे के
- 5:23:57लिए ही है। और अपनी इस पॉलिसी को
- 5:23:59इंप्लीमेंट करने के लिए ग्लैडस्टन ने
- 5:24:02लॉर्ड रिपन को इंडिया का वायसरॉय अपॉइंट
- 5:24:04किया था। लॉर्ड रिपन ब्रॉड आउटलुक रखने
- 5:24:07वाले एक ऑनेस्ट पर्सन थे। इसके साथ ही वह
- 5:24:10एक ट्रू डेमोक्रेट भी थे। रिपन का
- 5:24:12पॉलिटिकल नजरिया अपने प्रीडिसेसर लॉर्ड
- 5:24:15लिटन से एकदम उल्टा था। यह इंडिया की तरफ
- 5:24:18एक सेंस ऑफ ड्यूटी महसूस करते थे। लॉर्ड
- 5:24:20रिपन इंडिया के एडमिनिस्ट्रेशन को
- 5:24:23लिबरलाइज करने के लिए स्टेप्स लेते हैं।
- 5:24:25आइए जानते हैं उनके स्टेप्स के बारे में।
- 5:24:27शुरू करेंगे इंडिया में आए सबसे पहले
- 5:24:30फैक्ट्री एक्ट से। द फैक्ट्री एक्ट 1881।
- 5:24:35दोस्तों, फैक्ट्री लेबरर्स की कंडीशन
- 5:24:37इंप्रूव करने के लिए लॉर्ड रिपन 1881 में
- 5:24:40पहला फैक्ट्री एक्ट पास करते हैं। यह एक्ट
- 5:24:43100 से ज्यादा वर्कर्स रखने वाली
- 5:24:45फैक्ट्रीज पर लागू होना था। इस एक्ट ने 7
- 5:24:48साल से कम एज के बच्चों के एंप्लॉयमेंट पर
- 5:24:50प्रतिबंध लगा दिया। इसके साथ ही 12 साल से
- 5:24:53कम एज वालों के लिए वर्किंग आवर्स को
- 5:24:56लिमिट कर दिया और डेंजरस मशीनरी को फेंस
- 5:24:59करने के लिए भी कहा। इन मेजर्स के
- 5:25:01इंप्लीमेंटेशन को सुपरवाइज करने के लिए
- 5:25:04इंस्पेक्टर्स को भी अपॉइंट किया गया था।
- 5:25:06यह एक्ट अपने स्कोप में भले ही लिमिटेड
- 5:25:09था, लेकिन इंडिया की इंडस्ट्रियल हिस्ट्री
- 5:25:11में एक नए फेस की शुरुआत करता है। पहली
- 5:25:14बार लेबर लॉज़ को लेकर एक पॉजिटिव खबर हमें
- 5:25:17देखने को मिलती है। आगे चलकर इसी के बेसिस
- 5:25:20पर बेटर लेबर लॉज़ कंट्री में लाए गए। इसके
- 5:25:23बाद लॉर्ड रिपन का मेजर स्टेप था
- 5:25:25वर्नानेकुलर एक्ट को रिपील करना और लोकल
- 5:25:28सेल्फ गवर्नमेंट का रेजोल्यूशन पास करना।
- 5:25:31रिपील ऑफ द वर्नानेकुलर प्रेस एक्ट 1882
- 5:25:34एंड रेजोल्यूशन ऑन लोकल सेल्फ गव 1882।
- 5:25:38दोस्तों लॉर्ड रिपन लिटन की पॉलिसीज की
- 5:25:40वजह से बढ़े हुए डिस्कंटेंट को कम करने की
- 5:25:43कोशिश करते हैं। इसके लिए सबसे पहले वो
- 5:25:46लिटिन द्वारा लाए गए वर्नाकुलर प्रेस एक्ट
- 5:25:48को 1882 में वापस ले लेते हैं। इससे
- 5:25:51वर्नाकुलर प्रेस और बाकी इंडियन प्रेस को
- 5:25:54बराबर की फ्रीडम मिल जाती है। रिपन के इस
- 5:25:57एक्ट से इंडिया में पब्लिक ओपिनियन को
- 5:25:59कंसिलिएट करने में मदद मिलती है। लेकिन
- 5:26:02लॉर्ड रिपन को सबसे ज्यादा याद किए जाने
- 5:26:04वाले काम हैं। उनका 1882 में पास किया गया
- 5:26:08लोकल सेल्फ गवर्नमेंट पर रेजोल्यूशन। इसके
- 5:26:11लिए इन्हें इंडिया में फादर ऑफ लोकल सेल्फ
- 5:26:13गवर्नमेंट भी कहा जाता है। लॉर्ड रिपन
- 5:26:16इंडिया में म्युनिसिपल इंस्टीटशंस की
- 5:26:18शुरुआत करते हैं। जिसका ऐ इंडिया के लोगों
- 5:26:21को पॉलिटिकल एजुकेशन देना था। अब बात करते
- 5:26:24हैं उनके एजुकेशनल रिफॉर्म्स की। एजुकेशनल
- 5:26:27रिफॉर्म्स।
- 5:26:301882 में ही सर विलियम हंटर की चेयरमैनशिप
- 5:26:34में एक एजुकेशन कमीशन को अपॉइंट किया जाता
- 5:26:36है। इसका मैंडेट 1854 के वुड्स डिस्पैच के
- 5:26:40बाद इंडिया में एजुकेशन फील्ड में हुई
- 5:26:42प्रोग्रेस को रिव्यू करना और आगे की
- 5:26:44पॉलिसी के लिए सुझाव देना था।
- 5:26:47कमीशन प्राइमरी एजुकेशन के एक्सपेंशन और
- 5:26:49इंप्रूवमेंट के लिए गवर्नमेंट की स्पेशल
- 5:26:52रिस्पांसिबिलिटी पर जोर देती है। इसका
- 5:26:54सुझाव था कि प्राइमरी एजुकेशन को न्यूली
- 5:26:57एस्टैब्लिश्ड मनसिपल और डिस्ट्रिक्ट
- 5:26:59बोर्ड्स की केयर में दे दिया जाए। इसके
- 5:27:02साथ ही सेकेंडरी एजुकेशन में कोर्सेज को
- 5:27:04दो भाग में बांट दिया जाए। पहला लिटरेरी
- 5:27:08एजुकेशन जो यूनिवर्सिटी के एंट्रेंस
- 5:27:10एग्जाम्स के लिए स्टूडेंट्स को तैयार
- 5:27:12करें। और दूसरा प्रैक्टिकल कोर्स होना
- 5:27:15चाहिए जो कमर्शियल और वोकेशनल करियर के
- 5:27:18लिए तैयार करता हो। इसके अलावा कमीशन
- 5:27:20ग्रांट्स इन एड के सिस्टम को सेकेंडरी और
- 5:27:23हायर एजुकेशन तक एक्सटेंड करने का सुझाव
- 5:27:25भी देती है। कमीशन ने फीमेल एजुकेशन को
- 5:27:28स्प्रेड करने के लिए भी सजेशन दिए थे।
- 5:27:30कमीशन के ज्यादातर सुझावों को गवर्नमेंट
- 5:27:33एक्सेप्ट कर लेती है। इससे देश में काफी
- 5:27:36तेजी से स्कूल्स की ग्रोथ देखने को मिलती
- 5:27:38है। अब बात करते हैं उनकी लैंड रेवेन्यू
- 5:27:41पॉलिसी की। रेजोल्यूशन ऑन लैंड रेवेन्यू
- 5:27:45पॉलिसी। दोस्तों, लॉर्ड रिपन ने वाइसॉय
- 5:27:48रहते हुए लैंड रेवेन्यू पॉलिसी में भी कुछ
- 5:27:51चेंजेस इंट्रोड्यूस करने की कोशिश की थी।
- 5:27:54वह बंगाल के परमानेंट सेटलमेंट में कुछ
- 5:27:56मॉडिफिकेशंस प्रपोज करते हैं। वो रथ को
- 5:27:59परमानेंस और सिक्योरिटी का अश्योरेंस देना
- 5:28:01चाहते थे। इसके साथ ही गवर्नमेंट की तरफ
- 5:28:04से प्राइस राइज के अलावा किसी भी और
- 5:28:06ग्राउंड पर आगे से लैंड रेवेन्यू ना
- 5:28:09बढ़ाने की कमिटमेंट देना चाहते थे। लेकिन
- 5:28:11बंगाल के जमींदार उनके इस मेजर का विरोध
- 5:28:14करते हैं। साथ ही पेजेंट्स का सपोर्ट भी
- 5:28:17उन्हें नहीं मिलता। क्योंकि पेजेंट्स को
- 5:28:19लगता है कि एंग्लो इंडियन ब्यूरोक्रेसी तो
- 5:28:21जमींदार से भी ज्यादा बुरी है। सेक्रेटरी
- 5:28:24ऑफ स्टेट भी रिपन के प्रपोजल को फेवर नहीं
- 5:28:26करते। इसलिए उनका यह रेजोल्यूशन
- 5:28:29इंप्लीमेंट नहीं हो पाता। रेजोल्यूशन
- 5:28:32इंप्लीमेंट भले ही ना हुआ हो, लेकिन इससे
- 5:28:35यह पता चलता है कि लॉर्ड रिपन की इंटेंशंस
- 5:28:37अच्छी थी। वो बंगाल के पेजेंट्स की मदद ही
- 5:28:40करना चाहते थे। अब बात करते हैं इल्बर्ट
- 5:28:44बिल कंट्रोवर्सी की। द इल्बर्ट बिल
- 5:28:46कंट्रोवर्सी 188384
- 5:28:49दोस्तों 1883 में वायसरॉय काउंसिल के लॉ
- 5:28:52मेंबर सर सीपी इल्बर्ट ने एक बिल
- 5:28:54इंट्रोड्यूस किया था जिसे इल्बर्ट बिल के
- 5:28:57नाम से जाना जाता है। इसके इंट्रोडक्शन से
- 5:29:00पहले तक क्रिमिनल केसेस में यूरोपियंस का
- 5:29:02ट्रायल इंडियन मैजिस्ट्रेट्स नहीं कर सकते
- 5:29:05थे। उनका ट्रायल सिर्फ यूरोपियन जजेस ही
- 5:29:08कर सकते थे। इल्बर्ट बिल इसको चेंज करने
- 5:29:11के लिए लाया गया था। इसके अनुसार इंडियन
- 5:29:14जजेस भी यूरोपियंस के केस को प्रिसाइड कर
- 5:29:17सकते थे। लेकिन इल्बर्ट बिल के इस
- 5:29:19प्रोविजन से एक बहुत बड़ी कंट्रोवर्सी
- 5:29:21क्रिएट हो जाती है। यह कंट्रोवर्सी रेशल
- 5:29:24प्रजुडिसेस की वजह से हुई थी। यूरोपियंस
- 5:29:27के अकॉर्डिंग इंडियंस उनसे इनफीरियर थे और
- 5:29:30इसलिए इंडियन जज के सामने ट्रायल फेस करने
- 5:29:33की बात भी गलत थी। इस बिल के अगेंस्टक में
- 5:29:36रहने वाली यूरोपियन बिजनेस कम्युनिटी
- 5:29:38प्रोटेस्ट करना शुरू कर देती है। ऐसा
- 5:29:41इसलिए क्योंकि यह अपने इंडियन सर्वेंट्स
- 5:29:43को इल्ट्रीट करते थे और कई बार उन्हें जान
- 5:29:46से ही मार देते थे। ऐसे केसेस में इंग्लिश
- 5:29:49जजेस तो इन्हें बहुत कम सजा या बिना सजा
- 5:29:51के ही जाने देते थे। इसलिए अपने स्पेशल
- 5:29:54प्रिविलजेस को डिफेंड करने के लिए
- 5:29:55यूरोपियन कम्युनिटी एक डिफेंस एसोसिएशन
- 5:29:58बनाती है। यह लोग ₹15,000 का फंड भी
- 5:30:01कलेक्ट करते हैं। जिसकी मदद से यह इंडिया
- 5:30:04और लंदन दोनों ही जगह बिल के अगेंस्ट
- 5:30:07प्रोपगेंडा शुरू कर देते हैं। यह लोग
- 5:30:09वायसरॉय लॉर्ड रिपन को अब्यूज करना भी
- 5:30:12शुरू कर देते हैं और ब्रिटिश गवर्नमेंट से
- 5:30:14कहते हैं कि रिपन को इंडिया से वापस बुला
- 5:30:17लिया जाए।
- 5:30:18में रेशल राइट्स की संभावना बढ़ने लगती
- 5:30:21है। लंदन के न्यूज़पेपर्स में भी रिपन की
- 5:30:23पॉलिसीज की आलोचना होने लगती है। यहां तक
- 5:30:26कि क्वीन को भी लगता है कि रिपन का यह बिल
- 5:30:28समझदारी से भरा नहीं है। बढ़ती हुई
- 5:30:32प्रोटेस्ट्स के आगे आखिरकार लॉर्ड रिपन को
- 5:30:34ही झुकना पड़ता है। 1884 में बिल में
- 5:30:37चेंजेस कर दिए जाते हैं। जिसके बाद इंडियन
- 5:30:40जजेस किसी यूरोपियन का केस तभी जज कर सकता
- 5:30:43था जब जूरी के एटलीस्ट 50% मेंबर्स
- 5:30:46यूरोपियंस हो।
- 5:30:48इल्बर्ट बिल की कंट्रोवर्सी और
- 5:30:50कॉम्प्रोमाइज ने इंडियंस को ब्रिटिशर्स के
- 5:30:53और ज्यादा अगेंस्ट कर दिया। जिस तरह
- 5:30:55ब्रिटिशर्स ने अपने हक की बात प्रोटेस्ट
- 5:30:58करके मनवा ली थी, उससे इंडियंस भी सीख गए
- 5:31:01कि उन्हें भी इसी रास्ते पर चलना होगा और
- 5:31:04इस वजह से यह इनडायरेक्टली इंडियन नेशनल
- 5:31:07मूवमेंट और 1885 में कांग्रेस की स्थापना
- 5:31:09को प्रमोट करने के लिए रिस्पांसिबल था।
- 5:31:12कंक्लूजन
- 5:31:14दोस्तों कंक्लूजन
- 5:31:17दोस्तों, यह थे वायसरॉय लॉर्ड रिपन के
- 5:31:20इंडिया में किए गए रिफॉर्म्स। हम कह सकते
- 5:31:23हैं कि उन्होंने इंडिया में लिबरल
- 5:31:24एडमिनिस्ट्रेशन को प्रमोट करने की पूरी
- 5:31:27कोशिश की। वो इसमें कितने सफल हुए या नहीं
- 5:31:30यह बात अलग है। लेकिन इंपॉर्टेंट यह है कि
- 5:31:33उनकी इंटेंशंस ह्यूमैनिटेरियन थी और
- 5:31:35इसीलिए उन्हें एक बिनेवलेंट वाइस की तरह
- 5:31:38याद किया जाता है। 1882 में ग्लचस्टन ने
- 5:31:42इजिप्ट के ऑक्यूपेशन को सेंशन कर दिया था।
- 5:31:45और इसके लिए इंडियन ट्रूप्स का कंटिंजेंट
- 5:31:47इजिप्ट भेजा गया था। इस तरह इंपीरियल वॉर
- 5:31:50का बर्डन इंडियन एक्स चेकर पर भी पड़ रहा
- 5:31:53था। रिपड इसके अगेंस्ट प्रोटेस्ट करते
- 5:31:55हैं। उन्हें लगता है कि उनका मिशन इंडिया
- 5:31:58में फेल हो गया है। उसके बाद इल्बर्ट बिल
- 5:32:00कंट्रोवर्सी उन्हें और ज्यादा डिसल्यूजन
- 5:32:03कर देती है। परेशान होकर लॉर्ड रिपन अपना
- 5:32:06टर्म पूरा होने से पहले ही 1884 में
- 5:32:09रिजाइन कर देते हैं और एक हारे हुए इंसान
- 5:32:12की तरह इंग्लैंड लौट जाते हैं। लॉर्ड रिपन
- 5:32:15एक ह्यूमैनिटेरियन और लिबरल थे। लेकिन
- 5:32:18ब्रिटिश कॉलोनियल रूल के इंटरेस्ट को आगे
- 5:32:20ले जाने के लिए उनके जैसे इंसान की जरूरत
- 5:32:22नहीं थी। इसी वजह से इंडिया में उनका मिशन
- 5:32:26फेल रहता है। हालांकि वह हमें ब्रिटिशर्स
- 5:32:28की पॉसिबल ह्यूमन साइड जरूर दिखा जाते
- 5:32:31हैं। दोस्तों, इस समय दुनिया में हर तरफ
- 5:32:34नेशनलिज्म तेजी से स्प्रेड हो रहा था। और
- 5:32:37इंडिया में इस नेशनलिज्म की स्पिरिट को
- 5:32:39जगाने में लॉर्ड लिटन और लॉर्ड रिपन दोनों
- 5:32:42ही इंस्ट्रूमेंटल साबित होते हैं। लिटिन
- 5:32:45जहां एक एडवर्सरी की तरह इंडिया में
- 5:32:47नेशनलिज्म की आग को चिंगारी देते हैं,
- 5:32:50वहीं रिपन एक सिंपथाइजर की तरह इस स्पिरिट
- 5:32:53को आगे ले जाते हैं।
- 5:32:56लॉर्ड गजन 1899 टू 195।
- 5:33:01दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे
- 5:33:04वायसरॉय की जिनका मानना था कि उनका जन्म
- 5:33:08इंडिया का वायसराॉय बनने के लिए ही हुआ
- 5:33:10है। वायसरॉय बनने से पहले ही लॉर्ड कर्जन
- 5:33:13इंडिया के बारे में बहुत कुछ जानते थे। वो
- 5:33:16इससे पहले कई बार इंडिया आ भी चुके थे।
- 5:33:191899 में इंडिया के वायसरॉय की पोस्ट पर
- 5:33:22अपॉइंटमेंट लॉर्ड कर्जन के लिए किसी सपने
- 5:33:25के पूरा होने जैसा था। आइए जानते हैं
- 5:33:28लॉर्ड कर्जन कैसे अपने सपने को सच्चाई में
- 5:33:31बदलते हैं और इंडिया आने के बाद वह
- 5:33:34क्या-क्या करते हैं।
- 5:33:36इंट्रोडक्शन
- 5:33:39दोस्तों इंडिया का वायसरॉय बनना अपने आप
- 5:33:42में एक बहुत बड़ा टास्क तो था ही। इसके
- 5:33:44अलावा 189697
- 5:33:46के फेमिन और उसके बाद ब्यूबोनिक प्लेग ने
- 5:33:49प्रॉब्लम्स और ज्यादा बढ़ा दी थी।
- 5:33:52रेवेन्यूस कम होते जा रहे थे। इसके साथ ही
- 5:33:54एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी को भी समय के साथ
- 5:33:57बदलने की जरूरत महसूस हो रही थी और
- 5:34:00ब्रिटिशर्स के लिए इससे भी ज्यादा गंभीर
- 5:34:02समस्या थी उस समय के इंडिया का पॉलिटिकल
- 5:34:05क्लाइमेट क्योंकि इंडियंस में अवेयरनेस आ
- 5:34:08रही थी और वह अब ब्रिटिशर्स से यह सवाल
- 5:34:10करने लग गए थे कि उन्हें इंडिया पर रूल
- 5:34:13करने का अधिकार आखिर किसने दिया? ऐसी
- 5:34:15सिचुएशन में इंडिया में अपने टास्क का एक
- 5:34:17बहुत क्लियर कट कासेप्शन लॉर्ड कर्जन के
- 5:34:20दिमाग में था। वो पूरी तरह कन्विंस्ड थे
- 5:34:23कि एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी को तुरंत ही एक
- 5:34:26थर रिफॉर्म की जरूरत थी। शायद ही
- 5:34:28गवर्नमेंट का ऐसा कोई डिपार्टमेंट या
- 5:34:30ब्रांच हो जिसमें लॉर्ड कर्ज़न ने कोई
- 5:34:32रिफॉर्म ना किया हो। तो आइए जानते हैं
- 5:34:34उनके रिफॉर्म्स के बारे में। सबसे पहले
- 5:34:37बात करते हैं उनके पुलिस रिफॉर्म्स की।
- 5:34:40पुलिस रिफॉर्म्स।
- 5:34:43दोस्तों, रिफॉर्म्स के लिए कर्जन का मेथड
- 5:34:45था एक एक्सपर्ट कमीशन को अपॉइंट करना। यह
- 5:34:48कमीशन डिपार्टमेंट की वर्किंग की पूरी
- 5:34:49जांच करती थी और फिर इसकी रिपोर्ट के आधार
- 5:34:52पर जरूरी रिफॉर्म्स के लिए कानून बना दिया
- 5:34:55जाता था। 192 में सर एंड्रू फ्रेजर की
- 5:34:59अध्यक्षता में पुलिस कमीशन को अपॉइंट किया
- 5:35:01जाता है। कमीशन अपनी रिपोर्ट 193 में
- 5:35:04सबमिट करती है। जिसमें पुलिस फोर्स के
- 5:35:07इंप्रूवमेंट के लिए कई सारे सुझाव दिए गए
- 5:35:10थे। जैसे कि सभी रैंक्स की सैलरी इनक्रीस
- 5:35:13करना, सभी प्रोविंसेस में पुलिस फोर्स की
- 5:35:15स्ट्रेंथ को बढ़ाना, ऑफिसर्स और
- 5:35:17कास्टेबल्स दोनों के लिए ही ट्रेनिंग
- 5:35:19स्कूल्स खोलना, हायर रैंक्स के लिए
- 5:35:21प्रमोशन की जगह डायरेक्ट रिक्रूटमेंट
- 5:35:23करना, प्रोविंशियल पुलिस सर्विस को सेटअप
- 5:35:26करना, सेंट्रल डिपार्टमेंट ऑफ क्रिमिनल
- 5:35:28इंटेलिजेंस को क्रिएट करना एटसेटरा
- 5:35:30एटसेट्रा। कमीशन के ज्यादातर सुझावों को
- 5:35:33एक्सेप्ट करके इंप्लीमेंट कर दिया जाता
- 5:35:35है। यह तो बात हुई पुलिस रिफॉर्म्स की।
- 5:35:38आइए अब बात करते हैं कर्जन के एजुकेशनल
- 5:35:40रिफॉर्म्स की। एजुकेशनल रिफॉर्म्स
- 5:35:45दोस्तों लॉर्ड कर्जन का मानना था कि
- 5:35:47इंडिया में एजुकेशनल इंस्टीटशंस पॉलिटिकल
- 5:35:50रेवोल्यूशनरीज को जन्म देने वाली
- 5:35:52फैक्ट्रीज बन गई हैं। इसके साथ ही एजुकेशन
- 5:35:55सिस्टम के खराब होते स्टैंडर्ड्स और उसमें
- 5:35:57बढ़ते इनसिप्लिन ने कर्जन को परेशान किया
- 5:36:00हुआ था। इसलिए 192 में वह यूनिवर्सिटी
- 5:36:04कमीशन को अपॉइंट करते हैं। कमीशन की
- 5:36:06रेकमेंडेशंस के आधार पर 194 में इंडियन
- 5:36:10यूनिवर्सिटीज एक्ट पास किया जाता है। इस
- 5:36:13एक्ट के द्वारा यूनिवर्सिटीज के ऊपर
- 5:36:15गवर्नमेंट कंट्रोल को बढ़ा दिया गया था।
- 5:36:18एजुकेटेड इंडियंस ने कमीशन की रिपोर्ट और
- 5:36:21इस एक्ट का काफी विरोध भी किया था। इस तरह
- 5:36:24लॉर्ड कर्ज़न कोशिश करते हैं कि एजुकेशन
- 5:36:27सिस्टम को इंडियन नेशनलिज्म को सपोर्ट
- 5:36:29करने से रोका जाए। लेकिन तब तक शायद देर
- 5:36:32हो चुकी थी। नेशनलिज्म का जिन चिराग से
- 5:36:35बाहर आ चुका था और यूनिवर्सिटीज पर
- 5:36:37कंट्रोल कर लेने से उसको चिराग में वापस
- 5:36:40नहीं भेजा जा सकता था। बल्कि इस एक्ट ने
- 5:36:43तो आग में घी डालने का ही काम किया।
- 5:36:46स्टूडेंट्स और उनके नेशनलिज्म की मिसाल हम
- 5:36:48अगले वीडियो में स्वदेशी मूवमेंट में
- 5:36:51देखेंगे। अब बात करते हैं कर्जन के
- 5:36:53इकोनॉमिक रिफॉर्म्स की। इकोनॉमिक
- 5:36:57रिफॉर्म्स।
- 5:36:58दोस्तों लॉर्ड कर्जन के इकोनॉमिक
- 5:37:01रिफॉर्म्स में आते हैं उनके फेमिन, लैंड
- 5:37:03रेवेन्यू, इरीगेशन, एग्रीकल्चर, रेलवेेज,
- 5:37:06टैक्सेशन और करेंसी एटसेट्रा से रिलेटेड
- 5:37:09लेजिसलेशंस। आइए एक-एक करके इनके बारे में
- 5:37:13जानते हैं। फेमिस
- 5:37:16सबसे पहले बात करते हैं फेमिस की। 1899,
- 5:37:201900 में फेमिनस से साउथ, सेंट्रल और
- 5:37:23वेस्टर्न इंडिया का एक बड़ा हिस्सा
- 5:37:25प्रभावित हुआ था। इस दौरान लॉर्ड कर्जन ने
- 5:37:28अकाल से प्रभावित लोगों की हर संभव मदद की
- 5:37:31थी। हम कह सकते हैं कि यह पहले ऐसे
- 5:37:34वायसरॉय थे जिन्होंने फेमिन की समस्या को
- 5:37:37ह्यूमन टच के साथ टैकल करने की कोशिश की
- 5:37:40थी। कल्टीवेटर्स को रेवेन्यू पेमेंट से भी
- 5:37:42एक्सेंप्ट कर दिया गया था और फेमिन खत्म
- 5:37:45होने के बाद 1901 में सर एंटनी मैकडोनल्ड
- 5:37:49की प्रेसिडेंसी में फेमिन कमीशन अपॉइंट की
- 5:37:51गई थी। इसका काम था फेमिन के समय लिए गए
- 5:37:54मेजर्स की जांच करना कि यह मेजर्स कितने
- 5:37:57प्रभावी रहे और आगे फेमिन की सिचुएशन को
- 5:38:00किस तरह बेटर हैंडल किया जा सकता है।
- 5:38:02कमीशन 1901 में ही अपनी रिपोर्ट सबमिट कर
- 5:38:05देती है। कमीशन का कहना था कि फेमिन के
- 5:38:08समय जो रिलीफ डिस्ट्रीब्यूट की गई थी वह
- 5:38:11बहुत ज्यादा थी। इसके साथ ही ऐसे मेजर्स
- 5:38:13पर जरूरत से ज्यादा एफेसिस किया गया था
- 5:38:16जिनकी जरूरत ही नहीं थी। कमीशन एबल बॉडीड
- 5:38:19पर्सन के लिए टास्क फोर्स से पेमेंट करने
- 5:38:21का सुझाव देती है। साथ ही फोडर फेमिन से
- 5:38:25डील करने के लिए रूल्स भी तैयार करती है।
- 5:38:27यह तो बात हुई लॉर्ड कर्ज़न के फेमिन रिलीफ
- 5:38:30मेजर्स की। आइए बात करते हैं उनके
- 5:38:33एग्रीकल्चर रिलेटेड रिफॉर्म्स की।
- 5:38:36एग्रीकल्चर, लैंड रेवेन्यू एंड इरीगेशन।
- 5:38:40लॉर्ड कर्जन रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन को
- 5:38:42इंप्रूव करने के लिए 16th जनवरी 192 को
- 5:38:46लैंड रेजोल्यूशन इंट्रोड्यूस करते हैं।
- 5:38:49इसमें लैंड रेवेन्यू के लिए तीन
- 5:38:51प्रिंसिपल्स फिक्स किए जाते हैं जो थे
- 5:38:54पहला कि रेवेन्यू को हमेशा ग्रेजुअली ही
- 5:38:57इनक्रीस किया जाएगा। दूसरा प्रिंसिपल था
- 5:38:59कि रेवेन्यू कलेक्ट करते समय एग्रीकल्चर
- 5:39:02को कोई नुकसान ना हो। इसका पूरा ध्यान रखा
- 5:39:05जाए। और तीसरा था कि ड्राउड या और किसी
- 5:39:08मुश्किल के समय पेजेंट की तुरंत हेल्प की
- 5:39:11जाए। इरीगेशन रिलेटेड रिफॉर्म्स के लिए
- 5:39:131901 में सकलन स्कॉट मॉनक्रिएफ की
- 5:39:17चेयरमैनशिप में कमीशन फॉर्म की जाती है।
- 5:39:19कमीशन आने वाले 20 सालों में इरीगेशन के
- 5:39:22ऊपर 4 एंड 1 करोड़ अतिरिक्त खर्च करने का
- 5:39:26सुझाव देती है। कर्जन के समय में झेलम
- 5:39:29कैनाल को कंप्लीट करने के साथ अपर झेलम और
- 5:39:32लोअर बड़ी दुआ कैनाल्स का काम भी शुरू हो
- 5:39:35जाता है। इसके साथ ही 194 में कोऑपरेटिव
- 5:39:38क्रेडिट सोसाइटीज एक्ट के द्वारा
- 5:39:41कल्टीवेटर्स के लिए सस्ते रेट्स पर लोन
- 5:39:43देने का प्रोविजन किया गया था। इंडियन
- 5:39:46एग्रीकल्चर और लाइव स्टॉक के इंप्रूवमेंट
- 5:39:48के लिए लॉर्ड कर्ज़न इंस्पेक्टर जनरल के
- 5:39:50अंडर इंपीरियल एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट भी
- 5:39:53सेटअप करते हैं। जिसका काम कल्टीिवेशन के
- 5:39:56साइंटिफिक मेथड्स को प्रमोट करना था। इस
- 5:39:59तरह लॉर्ड कर्जन इंडिया में एग्रीकल्चर और
- 5:40:01पेजेंस की कंडीशन को इंप्रूव करने की
- 5:40:03कोशिश करते हैं। एग्रीकल्चर रिफॉर्म्स के
- 5:40:06बाद आइए जानते हैं रेलवे रिलेटेड
- 5:40:08रिफॉर्म्स के बारे में।
- 5:40:11रेल्वेज
- 5:40:13दोस्तों, लॉर्ड अलहौजी द्वारा इंट्रोड्यूस
- 5:40:15किए जाने के बाद से ही रेल्वेज का प्रचार
- 5:40:18प्रसार बहुत तेजी से इंडिया में हो रहा
- 5:40:20था। इसको और आगे ले जाने का काम करते हैं
- 5:40:23लॉर्ड कर्ज़न। कर्जन रेलवे के डेवलपमेंट पर
- 5:40:26खास ध्यान देते हैं। उनके समय में रेलवे
- 5:40:29की एकिस्टिंग लाइंस को इंप्रूव किया जाता
- 5:40:31है और साथ ही नई लाइंस पर भी काम शुरू
- 5:40:34किया जाता है। रेलवे की वर्किंग और
- 5:40:36एडमिनिस्ट्रेशन पर एडवाइस देने के लिए
- 5:40:38इंग्लैंड से रेलवे एक्सपर्ट मिस्टर थॉमस
- 5:40:41रॉबर्टसन को बुलाया जाता है। रॉबर्टसन के
- 5:40:44अनुसार रेलवे की कंडीशन अनसटिस्फेक्टरी थी
- 5:40:47और इसमें ऊपर से लेकर नीचे तक रिफॉर्म की
- 5:40:49जरूरत थी। यह कहते हैं कि रेलवे लाइंस को
- 5:40:52कमर्शियल एंटप्राइजेस की तरह बिल्ड किया
- 5:40:55जाना चाहिए। इसके साथ ही रेलवे
- 5:40:57एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े सभी मैटर्स को
- 5:40:59देखने के लिए एक रेलवे बोर्ड सेटअप करने
- 5:41:02का सुझाव भी देते हैं। लॉर्ड कर्जन कमीशन
- 5:41:05की रेकमेंडेशंस को एक्सेप्ट कर लेते हैं
- 5:41:08और रेलवे का मैनेजमेंट जिसे अभी तक पब्लिक
- 5:41:11वर्क्स डिपार्टमेंट देखता था रेलवे बोर्ड
- 5:41:13को ट्रांसफर कर दिया जाता है। अब बात करते
- 5:41:16हैं टैक्सेशन और करेंसी रिलेटेड मेजर्स
- 5:41:19की।
- 5:41:20करेंसी एंड टैक्सेशन।
- 5:41:23दोस्तों 1899 के इंडियन कॉइनेज एंड पेपर
- 5:41:27करेंसी एक्ट के द्वारा ब्रिटिश करेंसी को
- 5:41:29इंडिया में लीगल टेंडर डिक्लेअ कर दिया
- 5:41:32जाता है और 1 पाउंड की कीमत ₹15 के बराबर
- 5:41:35रखी जाती है। इसके साथ ही कर्जन साल्ट्स
- 5:41:38टैक्स का रेट भी कम करते हैं। 2 1/2 पर
- 5:41:41मंड के रेट को कम करके 1/3 पर मंड कर दिया
- 5:41:46जाता है। दोस्तों, यह थे लॉर्ड कर्ज़न के
- 5:41:48इंपॉर्टेंट इकोनॉमिक रिफॉर्म्स। अब हम
- 5:41:51जानते हैं उनके समय में होने वाले आर्मी
- 5:41:53रिफॉर्म्स के बारे में।
- 5:41:56आर्मी रिफॉर्म्स लॉर्ड कर्ज़न के समय में
- 5:41:59हुए आर्मी के रिऑर्गेनाइजेशन का श्रेय
- 5:42:02जाता है लॉर्ड किचनर को। यह 192 से लेकर
- 5:42:06198 तक इंडिया के कमांडर इन चीफ रहे थे।
- 5:42:10इंडियन आर्मी को दो कमांड्स में डिवाइड कर
- 5:42:12दिया जाता है। नॉर्दर्न कमांड और सदर्न
- 5:42:15कमांड। नॉर्दर्न कमांड का हेड क्वार्टर
- 5:42:17मुरी में और सदर्न कमांड का हेड
- 5:42:20क्वार्टर्स पुणे में था। आर्मी की हर
- 5:42:22डिवीजन में तीन ब्रिगेड्स बनाई जाती हैं।
- 5:42:25जिसमें दो ब्रिगेड्स इंडियन बटालियन की और
- 5:42:28एक ब्रिगेड इंग्लिश बटालियन की होती थी।
- 5:42:30इसके साथ ही ऑफिसर्स को ट्रेन करने के लिए
- 5:42:33कोटा में ट्रेनिंग कॉलेज भी सेटअप किया
- 5:42:35जाता है। ब्रिटिश ट्रूप्स को बेटा आर्म्स
- 5:42:38की सप्लाई शुरू होती है। इसके अलावा आर्मी
- 5:42:40की हर बटालियन को एक सीवियर टेस्ट पास
- 5:42:43करना होता था जिसका नाम रखा गया था द
- 5:42:45किचनर टेस्ट। आर्मी के रिऑर्गेनाइजेशन का
- 5:42:49एक मतलब यह भी था कि इस डिपार्टमेंट का
- 5:42:52खर्चा और ज्यादा बढ़ जाता है। दोस्तों,
- 5:42:54लॉर्ड कर्ज़न ने एंशिएंट मोन्यूमेंट्स के
- 5:42:56लिए भी एक एक्ट पास किया था। आइए जानते
- 5:42:58हैं उसके बारे में। एंशिएंट मोन्यूमेंट्स
- 5:43:02एक्ट 194
- 5:43:04लॉर्ड कर्ज़न हिस्ट्री के स्टूडेंट रहे थे
- 5:43:07और आर्कियोलॉजी में उनका डीप इंटरेस्ट था।
- 5:43:09इसीलिए इंडिया के हिस्टोरिकल मोन्यूमेंट्स
- 5:43:12को रिपेयर, रिस्टोर और प्रोटेक्ट करने के
- 5:43:14लिए वो 194 में एंशिएंट मोन्यूमेंट्स एक्ट
- 5:43:18पास करते हैं। हिस्टोरिकल बिल्डिंग्स की
- 5:43:20रिपेयर के लिए 50000 पाउंड्स की अमाउंट
- 5:43:23सेंशन कर दी जाती है। कर्जन इंडियन
- 5:43:25स्टेट्स पर भी प्रेशर डालते हैं कि वह
- 5:43:28अजंता एलोरा और सांची स्तूपा जैसे इंडिया
- 5:43:30के रिच हेरिटेज को प्रिजर्व करने का काम
- 5:43:33करें। 194 का यह एक्ट इंडिया में आज भी
- 5:43:37मोन्यूमेंट कंजर्वेशन के लिए एक बेड रॉक
- 5:43:40की तरह माना जाता है। दोस्तों, इन सभी
- 5:43:42रिफॉर्म्स के अलावा लॉर्ड कर्ज़न ने 1899
- 5:43:45मेंक कॉरपोरेशन एक्ट भी पास किया था। इस
- 5:43:48एक्ट के द्वारा कर्जन लोकल सेल्फ
- 5:43:51गवर्नमेंट के फील्ड में किए गए लॉर्ड रिपन
- 5:43:53के काम को अनडू करना चाहते थे। यह एक्ट
- 5:43:56कॉरपोरेशन में इड मेंबर्स की स्ट्रेंथ को
- 5:43:58कम कर देता है। जिससेक कॉरपोरेशन और उसकी
- 5:44:02कमिटीज में ब्रिटिश एलिमेंट की मेजॉरिटी
- 5:44:04बनी रहती है। इंडियन मेंबर्स एक्ट से खुश
- 5:44:08नहीं थे और 28 मेंबर्स अपना विरोध दिखाने
- 5:44:10के लिए रिजाइन भी कर देते हैं। लेकिन
- 5:44:13कर्जन पर इनकी प्रोटेस्ट का कोई असर नहीं
- 5:44:15पड़ता। बल्कि वह तो अपने काम से इतने खुश
- 5:44:18थे कि 193 में एक बैंकट में कहते हैं कि
- 5:44:22वाइसॉय की पोस्ट से रिटायर होने के बाद
- 5:44:24वोलक का मेयर बनना पसंद करेंगे। यह एक्ट
- 5:44:27अकेला ऐसा काम नहीं था कर्ज़न का जिसने
- 5:44:30इंडियंस को प्रोटेस्ट करने के लिए मजबूर
- 5:44:32किया हो। उनका सबसे कंट्रोवर्शियल डिसीजन
- 5:44:35तो बंगाल का पार्टीशन था। तो आइए उसके
- 5:44:38बारे में जानते हैं। पार्टीशन ऑफ़ बंगाल
- 5:44:41195।
- 5:44:43दोस्तों 195 में बंगाल प्रेसिडेंसी का
- 5:44:46पार्टीशन कर्जन के सबसे ज्यादा क्रिटिसाइज
- 5:44:49होने वाले मूव्स में से एक था। इसका विरोध
- 5:44:53ना सिर्फ बंगाल में बल्कि पूरे भारत में
- 5:44:55किया जाता है। आइए समझते हैं कर्जन ने यह
- 5:44:58डिसीजन आखिर क्यों लिया था। बंगाल
- 5:45:01प्रोविंस उस समय इंडिया का सबसे ज्यादा
- 5:45:03पॉपुलेशन वाला प्रोविंस था। लगभग 8 करोड़
- 5:45:06की जनसंख्या थी बंगाल की जिसमें आज का
- 5:45:09वेस्ट बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़ के कुछ
- 5:45:11हिस्से उड़ीसा, आसाम और आज का बांग्लादेश
- 5:45:14भी शामिल था। कर्जन कहते हैं कि पार्टीशन
- 5:45:18का ऐ इतने बड़े प्रोविंस के
- 5:45:19एडमिनिस्ट्रेशन को इजी बनाना है। लेकिन
- 5:45:22उनका एक्चुअल मोटिव तो बंगाल प्रोविंस से
- 5:45:24उठ रही लाउड पॉलिटिकल वॉइसेस को क्रश करना
- 5:45:27था। और उनके बीच रिलीजियस स्ट्राइफ और
- 5:45:30अपोजिशन को जन्म देना था। इसे समझने के
- 5:45:32लिए पार्टीशन के प्लान को समझना जरूरी है।
- 5:45:35प्लान के अकॉर्डिंग 3.1 करोड़ की पापुलेशन
- 5:45:38के साथ ईस्ट बंगाल एंड आसाम को एक नया
- 5:45:41प्रोविंस बनना था। इसमें मुस्लिम हिंदू
- 5:45:44पापुलेशन का रेश्यो 3:2 था। वेस्टर्न
- 5:45:46बंगाल प्रोविंस में हिंदू मेजॉरिटी रहने
- 5:45:49वाली थी। नेशनलिस्ट लीडर्स कहते हैं कि यह
- 5:45:52स्कीम लोगों को रिलीजियस के बेसिस पर
- 5:45:54डिवाइड करने के लिए बनाई गई थी। इससे
- 5:45:56मुस्लिम्स को हिंदूस के अगेंस्ट खड़ा कर
- 5:45:59दिया जाएगा और उनकी यह बात बेबुनियाद नहीं
- 5:46:02थी। यह साबित होता है ईस्टर्न बंगाल के
- 5:46:04लेफ्टिनेंट गवर्नर की एक डिक्लेरेशन से
- 5:46:07जिसमें वह कहते हैं कि उनकी दो वाइफ्स में
- 5:46:10से मोहम्मदन वाइफ उनकी फेवरेट हैं। इवन
- 5:46:12लॉर्ड कर्ज़न भी ईस्टर्न बंगाल के टूर के
- 5:46:14समय कहते हैं कि पार्टीशन का एक एम
- 5:46:17मोहम्मदन प्रोविंस क्रिएट करना भी है।
- 5:46:19इसके साथ ही यह लिंग्विस्टिक बेसिस पर भी
- 5:46:22डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी थी। क्योंकि
- 5:46:24प्लान के अकॉर्डिंग वेस्ट बंगाल में
- 5:46:26बंगालीज माइनॉरिटी बना दिए गए थे। बंगाल
- 5:46:29पार्टीशन के विरोध में एक बड़ा मूवमेंट
- 5:46:32खड़ा हो जाता है। जिसे हम स्वदेशी मूवमेंट
- 5:46:35के नाम से जानते हैं। कर्जन के इस डिसीजन
- 5:46:38ने हिंदूज और मुस्लिम्स को डिवाइड करने का
- 5:46:40काम भी किया था।
- 5:46:42ईस्टर्न बंगाल के मुस्लिम्स को एक मुस्लिम
- 5:46:44मेजॉरिटी प्रोविंस के पॉलिटिकल और मटेरियल
- 5:46:47एडवांटेजेस का विजन दिखाकर अपनी तरफ किया
- 5:46:49जाता है। लॉर्ड कर्जन तो 195 में ही
- 5:46:53इंडिया से वापस चले जाते हैं। लेकिन उनके
- 5:46:55डिसीजन के अगेंस्ट प्रोटेस्ट आने वाले कई
- 5:46:58साल तक चलते हैं।
- 5:47:00कंक्लूजन
- 5:47:02दोस्तों लॉर्ड कर्ज़न एक ग्रेट
- 5:47:04इंपीरियलिस्ट थे। वो इंडिया में ब्रिटिश
- 5:47:06कंट्रोल को और ज्यादा स्ट्रांग करना चाहते
- 5:47:09थे। उनके ज्यादातर रिफॉर्म्स और एक्ट्स
- 5:47:11इसी मोटिव को फुलफिल करने के लिए थे। इसके
- 5:47:14साथ ही इंडियंस को लेकर उनका ओपिनियन बहुत
- 5:47:17ही खराब था। वो इंडियंस की इंसल्ट करने और
- 5:47:20उनकी डीपेस्ट फीलिंग्स को हर्ट करने का
- 5:47:23कोई भी मौका नहीं जाने देते थे। एक ओकेजन
- 5:47:26पर उन्होंने बंगालीज को डरपोक, हवाबाज और
- 5:47:29बस दिखावा करने वाला देश प्रेमी तक कह
- 5:47:31दिया था। वह इंडियन नेशनल कांग्रेस के
- 5:47:34प्रेसिडेंट से मिलने से भी इंकार कर देते
- 5:47:37हैं और कांग्रेस की एक्टिविटीज को लेटिंग
- 5:47:39ऑफ ऑफ गैस की तरह कैरेक्टराइज करते हैं।
- 5:47:42इस तरह के इंपॉलिटिक अटरेंसेस और
- 5:47:45इंपीरियलिस्ट डिज़ की वजह से कर्जन इंडिया
- 5:47:48के पॉलिटिकल एंड रेस्ट को बस्टिंग पॉइंट
- 5:47:51तक पहुंचा देते हैं। और इससे शुरुआत होती
- 5:47:53है इंडिया में पॉलिटिकल मूवमेंट के एक
- 5:47:56बिल्कुल नए फेस की। कर्जन की टेरेनी की
- 5:47:59वजह से ही इंडियंस में नेशनहुड के और भी
- 5:48:02स्ट्रांग सेंस का जन्म होता है। इस तरह
- 5:48:05देखा जाए तो कर्जन इंडिया के बेनिफक्टर
- 5:48:08प्रूव होते हैं। भले ही उनकी इंटेंशन कभी
- 5:48:11भी ऐसी ना रही हो। राइज ऑफ नेशनलिज्म 1857
- 5:48:16टू 1885।
- 5:48:17दोस्तों, आज हम बात करेंगे इंडियन नेशनल
- 5:48:20मूवमेंट के शुरुआती दौर की। जिसमें हम
- 5:48:23जानेंगे उसकी इमरजेंस के कारण। हम यह भी
- 5:48:26जानेंगे कि 1885 में इंडियन नेशनल
- 5:48:29कांग्रेस के गठन से पहले वो कौन से
- 5:48:32पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशंस थे जिन्होंने
- 5:48:34इंडियन नेशनल मूवमेंट को इनिशियल पुश देने
- 5:48:37का काम किया। लेकिन सबसे पहले एक
- 5:48:39बैकग्राउंड जान लेते हैं।
- 5:48:42बैकग्राउंड
- 5:48:44दोस्तों 1857 की क्रांति के बाद भारत एक
- 5:48:48मेजर पॉलिटिकल और सोशल चेंज के दौर से
- 5:48:50गुजर रहा था। जहां भारत की बागडोर अब ईस्ट
- 5:48:53इंडिया कंपनी के हाथों से ब्रिटिश क्राउन
- 5:48:55के हाथों में चली गई थी। अब इंडिया
- 5:48:58डायरेक्टली ब्रिटिश क्राउन द्वारा गवर्न
- 5:49:00होने वाला था। वैसे तो ईस्ट इंडिया कंपनी
- 5:49:02की पावर्स को कम करने की कोशिश 1773 के
- 5:49:05रेगुलेटिंग एक्ट से चल रही थी। लेकिन 1857
- 5:49:09की क्रांति ने इस पूरे प्रोसेस को
- 5:49:10एक्सलरेट कर दिया और ब्रिटिश ग्राउंड ने
- 5:49:13फाइनली सारी पावर अस्यूम कर ली।
- 5:49:16लेकिन इंडियंस की बात करें तो उनके
- 5:49:17हालातों में इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा
- 5:49:20क्योंकि ब्रिटिश क्राउन ने भी ईस्ट इंडिया
- 5:49:22कंपनी जैसी रिप्रेसिव पॉलिसीज को कंटिन्यू
- 5:49:25रखा जिसकी वजह से सोसाइटी के हर वर्ग जैसे
- 5:49:28आर्टिजंस, पेजेंस, वर्कर्स,
- 5:49:30इंटेलेक्चुअल्स और यहां तक कि
- 5:49:32कैपिटलिस्ट्स भी ब्रिटिशर्स से काफी नाराज
- 5:49:35थे। इस कॉन्टेक्स्ट में अब हम जानते हैं
- 5:49:37कि इंडियन नेशनल मूवमेंट के राइज के कारण
- 5:49:39क्या थे और ऐसी क्या वजह थी जिनके चलते
- 5:49:4219th सेंचुरी के सेकंड हाफ में इंडियंस की
- 5:49:45पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस में बदलाव दिखे।
- 5:49:48फैक्टर्स रिस्पांसिबल फॉर नेशनल मूवमेंट।
- 5:49:52दोस्तों, इंडियन नेशनल मूवमेंट के इमरजेंस
- 5:49:55का सबसे मेन कारण लोगों में यह रियलाइजेशन
- 5:49:57था कि उनके पिछड़ेपन में कॉलोनियल रूल का
- 5:50:01सबसे बड़ा हाथ था। और इस रियलाइजेशन की
- 5:50:03सबसे पहली वजह यह थी कि ब्रिटिश राज ने
- 5:50:06भारत में एक यूनिफाइड स्ट्रक्चर क्रिएट
- 5:50:09किया थ्रू लॉज़ एंड इंस्टीटशंस लाइक सिविल
- 5:50:12सर्विज एंड जुडिशरी एंड मॉडर्न मीन्स ऑफ
- 5:50:14ट्रांसपोर्ट एंड कम्युनिकेशन लाइक
- 5:50:16रेलवेेज, रोड, टेलीग्राफ एटसेटरा। इन सब
- 5:50:20ने इंडियंस के फेट को एक दूसरे से जोड़
- 5:50:22दिया। जिसके चलते एक बंगाली के कंसर्न और
- 5:50:25एक पंजाबी के कंसर्न्स लगभग सिमिलर थे।
- 5:50:28इसके अलावा अलग-अलग जगह के लीडर्स और
- 5:50:30इंटेलेक्चुअल्स को भी आइडियाज के एक्सचेंज
- 5:50:33में मदद मिली। ब्रिटिशर्स द्वारा भारत में
- 5:50:35इंट्रोड्यूस किए गए मॉडर्न एजुकेशन ने
- 5:50:37वेस्टर्न थॉट और आइडियल्स को भी इंडियंस
- 5:50:40के सामने इंट्रोड्यूस किया। इसके चलते कई
- 5:50:43यूरोपियन स्कॉलर्स जैसे रूसो, जॉन
- 5:50:46स्टटमिल, मिल्टन, स्पेंसर एंड वाल्टेयर के
- 5:50:49रैशन, सेकुलर, डेमोक्रेटिक और नेशनलिस्ट
- 5:50:52आइडियाज भी इंडिया में स्प्रेड हुए। जिसकी
- 5:50:55वजह से नेटिव इंटेलेक्चुअल्स की थिंकिंग
- 5:50:58में बदलाव आने लगे। इसके साथ ही सेकंड हाफ
- 5:51:00ऑफ 19th सेंचुरी में प्रेस और लिटरेचर ने
- 5:51:03भी इस रियलाइजेशन में अपना योगदान निभाया।
- 5:51:06इस दौर में लगभग 169 न्यूज़पेपर्स,
- 5:51:09पैंफेट्स और जर्नल्स वनेकुलर लैंग्वेज में
- 5:51:12पब्लिश हो रहे थे जो ब्रिटिश पॉलिसीज का
- 5:51:15जोर शोर से क्रिटिसिज्म कर रहे थे। इनमें
- 5:51:17से कुछ प्रोमिनेंट नेशनलिस्ट न्यूज़पेपर्स
- 5:51:20थे। बंगाल में हिंदू पेट्रियट, अमृत बाजार
- 5:51:23पत्रिका, इंडियन मिरर, बंगाली, सोम प्रकाश
- 5:51:27और संजीवनी। बॉम्बे में रस्त गुफ्तार,
- 5:51:31नेटिव ओपिनियन, इंदु प्रकाश, महारता और
- 5:51:34केसरी। मद्रास में हिंदू, स्वदेश मित्रण,
- 5:51:38आंध्र प्रकाशिका और केरला पत्रिका, यूपी
- 5:51:42में एडवोकेट, हिंदुस्तानी और आजाद। पंजाब
- 5:51:45में ट्रिब्यून, अखबरेआम और कोहिनूर। अगला
- 5:51:49इंपॉर्टेंट कारण था इंडियंस का अपने पास्ट
- 5:51:52का रिस्कवरी। कई यूरोपियन स्कॉलर्स जैसे
- 5:51:55मैक्सम्यूलर, मोने विल्सन, रथ, सस और
- 5:51:59इंडियन स्कॉलर्स जैसे आर जी भंडारकर, आर
- 5:52:02एल मित्र और बाद में स्वामी विवेकानंद ने
- 5:52:05इंडियन हिस्ट्री के आर्ट एंड कल्चर को
- 5:52:07रिसकवर किया। जिसकी वजह से इंडियंस का
- 5:52:10सेल्फ मोटिवेशन और कॉन्फिडेंस बढ़ा। इनमें
- 5:52:13से कई स्कॉलर्स ने इंडियन रूलर्स जैसे
- 5:52:15अशोका, चंद्रगुप्त और अकबर के पॉलिटिकल
- 5:52:18अचीवमेंट्स की कहानियों को लोगों तक
- 5:52:20पहुंचाया। ब्रिटिशर्स ने इंडिया में अपने
- 5:52:23रूल को जस्टिफाई करने के लिए अभी तक वाइट
- 5:52:26मैनस बर्डन थ्यरी के द्वारा इंडियंस को यह
- 5:52:28बताने की कोशिश की थी कि इंडियंस बाबेरिक
- 5:52:31और अनसिविलाइज्ड थे जो खुद को गवर्न नहीं
- 5:52:34कर सकते थे। और ब्रिटिशर्स इंडियंस को
- 5:52:37सिविलाइज करने आए हैं। लेकिन इंडिया के
- 5:52:40ग्लोरियस पास्ट की डिस्कवरी ने इंडियंस के
- 5:52:42कॉन्फिडेंस को बूस्ट किया और उन्हें खुद
- 5:52:44के कल्चर पर गर्व करने का एक मौका दिया।
- 5:52:47जिसके थ्रू वो ब्रिटिश आइडियोलॉजिकल
- 5:52:49डोमिनेंस को चैलेंज कर सकते थे। इसके
- 5:52:52अलावा 19th सेंचुरी के सोशियो रिलीजियस
- 5:52:54रिफॉर्म मूवमेंट ने सोसाइटी के कई वर्गों
- 5:52:57को जागरूक किया। फॉर एग्जांपल सोशल
- 5:52:59रिफॉर्मर्स ने कास्ट सिस्टम को क्रिटिसाइज
- 5:53:02करते हुए कास्ट के बेसिस पर डिवाइडेड
- 5:53:04इंडियन सोसाइटी में एक सेंस ऑफ यूनिटी को
- 5:53:07जन्म देने का प्रयास किया। इसके अलावा
- 5:53:09सोशल रिफॉर्म मूवमेंट में वुमेन
- 5:53:12अपलिफ्टमेंट, वुमेन राइट्स, विडो रिमैरिज
- 5:53:15को यंग बंगाल मूवमेंट के फाउंडर हेनरी
- 5:53:17विवीन डिरोज़ियो ने सावित्रीबाई फुले के
- 5:53:20साथ सत्यशोधक समाज ने, स्वामी दयानंद
- 5:53:24सरस्वती के आर्य समाज ने और ईश्वर चंद्र
- 5:53:27विद्यासागर ने भी प्रमोट किया। इसके अलावा
- 5:53:30ब्रिटिश राज के रेडिकल एोगेंस ने भी
- 5:53:32इंडियंस में ब्रिटिश राज के प्रति एक
- 5:53:35नेगेटिव एटीट्यूड को जन्म दिया।
- 5:53:37हिस्टोरियंस कई ऐसी इंस्टेंसेस की बात
- 5:53:39करते हैं जहां इंग्लिश मैन ओपनली एजुकेटेड
- 5:53:42इंडियंस को इंसल्ट करते थे। 20th सेंचुरी
- 5:53:45में गांधी जी के साथ हुए रेशियल
- 5:53:47डिस्क्रिमिनेशन की कहानी तो हम सभी जानते
- 5:53:49हैं और इसके एग्जांपल्स हमें 19th सेंचुरी
- 5:53:51में भी मिलते हैं। इसके अलावा इंडियंस को
- 5:53:54कई एक्सक्लूसिव इंग्लिशमैन क्लब्स से अलग
- 5:53:57रखा जाता था। और इंडियंस को यूरोपियन
- 5:53:59पैसेंजर्स के साथ ट्रेन कंपार्टमेंट्स में
- 5:54:02ट्रैवल करना भी अलाउड नहीं था। इन सब ने
- 5:54:05इंडियंस की सेल्फ रिस्पेक्ट को हर्ट करने
- 5:54:07का काम किया। इसके अलावा ब्रिटिश राज की
- 5:54:10कई ऑफिशियल रिप्रेसिव पॉलिसीज भी इसका एक
- 5:54:12कारण बनी। वर्नेकुलर प्रेस एक्ट ऑफ 1878
- 5:54:16इसका सबसे अच्छा एग्जांपल है। जिसके थ्रू
- 5:54:19गवर्नमेंट अपने खिलाफ क्रिटिसिज्म को
- 5:54:21रोकना चाहती थी। इसके अलावा 1877 में जब
- 5:54:24भारत एक बेहद खतरनाक फेमिन से गुजर रहा था
- 5:54:27तभी ब्रिटिशर्स ने एक इंपीरियल दरबार को
- 5:54:30ऑर्गेनाइज किया। जिसने इंडियंस को
- 5:54:32ब्रिटिशर्स के सेल्फिश एटीट्यूड को
- 5:54:34एक्सपोज किया। 1878 में लिटन ने इंडियन
- 5:54:37सिविल सर्विज की मैक्सिमम एज को 21 से
- 5:54:40रिड्यूस करके 19 कर दिया। जिससे इंडियंस
- 5:54:43की सिविल सर्विज में एंट्री और भी ज्यादा
- 5:54:45मुश्किल हो गई। 1883 में रिपन की
- 5:54:49वायसरॉयशिप के दौरान हुई इल्बर्ट बिल
- 5:54:51कंट्रोवर्सी कहीं ना कहीं इमीडिएट फ्लैश
- 5:54:54पॉइंट बनी। जिसके चलते इंडिया में
- 5:54:56ऑर्गेनाइज्ड पॉलिटिकल एक्टिविटी में राइज
- 5:54:59हुआ और 1885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस का
- 5:55:02गठन हुआ। इस बिल का मकसद था कि क्रिमिनल
- 5:55:06केसेस में इंडियन डिस्ट्रिक्ट
- 5:55:07मैजिस्ट्रेट्स और सेशन जजेस को यूरोपियंस
- 5:55:10का ट्रायल करने की परमिशन होनी चाहिए।
- 5:55:12लेकिन कई रेसिस्ट यूरोपियंस ने इस बिल के
- 5:55:15खिलाफ मैसिव प्रोटेस्ट ऑर्गेनाइज कर इसे
- 5:55:17रोक दिया और यह डिक्लेअ किया कि इंडियंस
- 5:55:20वर नॉट फिट टू ट्राई देम। फाइनली बिल को
- 5:55:23अमेंड कर दिया गया और ब्रिटिश हिपोक्रेसी
- 5:55:26एक्सपोज हुई। इंडियंस इस ब्रिटिश रेसिज्म
- 5:55:29से हॉरिफाइड थे और उन्होंने भी बिल के
- 5:55:31सपोर्ट में एक ऑल इंडिया कैंपेन ऑर्गेनाइज
- 5:55:34किया। यह एक ऑल इंडिया मूवमेंट था क्योंकि
- 5:55:36इसने इंडियंस को अक्रॉस रीजन और कम्युनिटी
- 5:55:39यूनाइट करने में हेल्प किया था। तो
- 5:55:41दोस्तों, यह थे इंडिया में ऑर्गेनाइज्ड
- 5:55:43नेशनल मूवमेंट के राइज़ के कारण। वैसे तो
- 5:55:47इंडिया में ट्रूली पैन इंडिया ऑर्गेनाइज्ड
- 5:55:49पॉलिटिकल स्ट्रगल की शुरुआत 1885 में
- 5:55:52इंडियन नेशनल कांग्रेस के फॉर्मेशन से
- 5:55:54हुई। लेकिन आईएसी के पहले भी मिड 19th
- 5:55:58सेंचुरी में कई ऐसे ऑर्गेनाइजेशंस
- 5:56:00एस्टैब्लिश हुए जिन्होंने आईएसी के
- 5:56:03फॉर्मेशन को एक बेस प्रोवाइड करने का काम
- 5:56:06किया। तो चलिए अब कुछ इंपॉर्टेंट प्री
- 5:56:09कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशंस की चर्चा करते
- 5:56:11हैं।
- 5:56:12पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशंस बिफोर इंडियन
- 5:56:15नेशनल कांग्रेस।
- 5:56:17दोस्तों, इंडिया में ऑर्गेनाइज्ड पॉलिटिकल
- 5:56:19एक्टिविटीज और इंडियन नेशनल मूवमेंट के
- 5:56:22जनक कहीं ना कहीं राजा राममोहन रॉय को
- 5:56:25माना जाता है। जिन्होंने भारत में सबसे
- 5:56:28पहले सोशल और पॉलिटिकल इश्यूज को
- 5:56:30ब्रिटिशर्स के सामने रखने का काम किया।
- 5:56:32उन्होंने अपने ब्रह्मो समाज के थ्रू वुमेन
- 5:56:35अपलिफ्टमेंट, कास्ट सिस्टम की प्रॉब्लम्स
- 5:56:38और सिविल सर्विज रिफॉर्म्स को लेकर लोगों
- 5:56:40में अवेयरनेस फैलाने का काम किया। इसके
- 5:56:43अलावा 1857 की क्रांति के पहले बंगाल,
- 5:56:46बिहार और ओसा के लैंड लॉर्ड्स ने फर्स्ट
- 5:56:48ऑर्गेनाइज्ड पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन को
- 5:56:511837 मेंक में इस्टैब्लिश किया था। जो
- 5:56:54लैंड लॉर्ड्स के इंटरेस्ट के इश्यूज को
- 5:56:56प्रेजेंट कर रहे थे। यह ऑर्गेनाइजेशन बाद
- 5:56:59में 1851 में बंगाल ब्रिटिश इंडिया
- 5:57:02सोसाइटी के साथ ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन
- 5:57:05में मर्ज कर दिया गया। 1870 में इंडियन
- 5:57:09नेशनल मूवमेंट पहले से ज्यादा मैच्योर फेज
- 5:57:11में बढ़ने लगा और पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशंस
- 5:57:14के क्रिएशन की आवाज और ज्यादा बुलंद हुई।
- 5:57:171866 में ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया कहे
- 5:57:20जाने वाले दादा भाई नौरोजी ने लंदन में
- 5:57:23ईस्ट इंडिया एसोसिएशन को इस्टैब्लिश किया।
- 5:57:25जिसमें उन्होंने इंडियंस की प्रॉब्लम्स को
- 5:57:27ब्रिटिश गवर्नमेंट के सामने रखा। नौरोजी
- 5:57:30ने अपनी किताब पावर्टी एंड अनब्रिटिश रूल
- 5:57:33इन इंडिया और स्कॉलर आर सी दत्त ने अपनी
- 5:57:36किताब द इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया के
- 5:57:38थ्रू इंडियंस के एक्सप्लइटेशन और पावर्टी
- 5:57:41को एक सिस्टमैटिक तरीके से उजागर करने का
- 5:57:44काम किया। उन्होंने ड्रेन ऑफ वेल्थ थ्योरी
- 5:57:46के थ्रू इंडियंस को समझाया कि कैसे
- 5:57:48ब्रिटिशर्स इंडिया को डेवलप नहीं कर रहे
- 5:57:51थे बल्कि उसे एक्सप्लइट कर और गरीब बनाते
- 5:57:54जा रहे थे। इसके अलावा 1876 के समय
- 5:57:57सुरेंद्रनाथ बनर्जी नाम के एक अच्छे राइटर
- 5:58:00और ओरेटर और यंगर नेशनलिस्ट लीडर आनंद
- 5:58:04मोहन बोस ने बंगाल में इंडियन एसोसिएशन को
- 5:58:07इस्टैब्लिश किया। यह आगे बंगाल के कई गांव
- 5:58:09और कस्बों से लोगों को पॉलिटिकली यूनाइट
- 5:58:12करने वाला था। इंडियन सिविल सर्विस
- 5:58:14एग्जामिनेशन में एज लिमिट रिफॉर्म्स,
- 5:58:16आर्म्स एक्ट और वर्नाकुलर प्रेस एक्ट के
- 5:58:19अगेंस्ट एजिटेशन में भी इसी ऑर्गेनाइजेशन
- 5:58:22ने एक्टिवली पार्टिसिपेट किया था। बाद में
- 5:58:25इंडियन एसोसिएशन की कुछ ब्रांचेस बंगाल के
- 5:58:27बाहर भी इस्टैब्लिश हुई जो काफी फेमस हुई
- 5:58:30लेकिन इसे ऑल इंडिया बॉडी का रेग्निशन
- 5:58:32नहीं मिला क्योंकि इनकी डिमांड्स लार्जली
- 5:58:35लोकल रीजंस के इश्यूज तक लिमिटेड थी। बाकी
- 5:58:38की पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन का फंक्शनिंग और
- 5:58:40स्कोप भी काफी नैरो और लिमिटेड था।
- 5:58:43जिन्हें ज्यादा रेग्निशन नहीं मिला। बंगाल
- 5:58:46के अलावा इंडिया के कई और पार्ट्स में
- 5:58:48अलग-अलग ऑर्गेनाइजेशन बने। जिसमें जस्टिस
- 5:58:51राणा डे ने पुणे सार्वजनिक सभा को
- 5:58:54एस्टैब्लिश किया जो ब्रिटिश पॉलिसीज और
- 5:58:56इकोनॉमिक इशूज़ को जर्नल्स के थ्रू रेज कर
- 5:58:59रहे थे। साथ में मद्रास महाजनसभा 1881 और
- 5:59:03बॉम्बे प्रेसिडेंसी एसोसिएशन 1885 ने भी
- 5:59:06ब्रिटिश गवर्नमेंट की एडमिनिस्ट्रेटिव और
- 5:59:09लेजिसलेटिव पॉलिसीज का भरपूर क्रिटिसिज्म
- 5:59:11किया। खैर अब समय आ गया था जहां कई
- 5:59:14नेशनलिस्ट लीडर्स को लगा कि सारे पॉलिटिकल
- 5:59:18ऑर्गेनाइजेशन को एक यूनिफाइड तरीके से
- 5:59:20ब्रिटिश गवर्नमेंट से अपनी मांगों को
- 5:59:23पॉलिटिकल तरीके से मनवा सकते हैं। इसलिए
- 5:59:26इंडियन एसोसिएशन नेक में दिसंबर 1883 को
- 5:59:30एक ऑल इंडिया नेशनल कॉन्फ्रेंस को
- 5:59:32ऑर्गेनाइज किया जिसमें बंगाल के साथ बाहर
- 5:59:36के लीडर्स भी शामिल हुए और फिर फाइनली
- 5:59:381885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस का गठन
- 5:59:42हुआ। चलिए ब्रीफली नजर डालते हैं प्री
- 5:59:44इंडियन नेशनल कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशंस की
- 5:59:47डिमांड्स पर।
- 5:59:50डिमांड्स ऑफ प्री कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशंस।
- 5:59:53दोस्तों प्री कांग्रेस लीडर्स की सबसे
- 5:59:55पहली डिमांड थी पब्लिक एक्सपेंडिचर को कम
- 5:59:58करना जिसके थ्रू ब्रिटिशर्स अपने वॉर्स और
- 6:00:00एक्सपेंशनिस्ट एंबिशंस को फुलफिल कर रहे
- 6:00:03थे। दूसरी डिमांड थी इंडियन सिविल सर्विज
- 6:00:06में रिफॉर्म्स जिसकी चर्चा हमने पहले की।
- 6:00:09इसके अलावा यह ऑर्गेनाइजेशंस लेजिसलेटिव
- 6:00:12काउंसिल में इंडियंस के इनवॉल्वमेंट की
- 6:00:14डिमांड को भी पुश कर रहे थे ताकि इंडियंस
- 6:00:16को अपने देश की गवर्नेंस में
- 6:00:18रिप्रेजेंटेशन मिले। वह लेजिसलेटिव
- 6:00:20काउंसिल को एक पॉलिटिकल प्लेटफार्म की तरह
- 6:00:22यूज कर ब्रिटिश रिप्रेसिव पॉलिसीज का
- 6:00:25पॉलिटिकल विरोध भी करना चाहते थे ताकि
- 6:00:27सिविल लिबर्टीज पर अटैक कम हो सके। वो
- 6:00:31प्रेस की लिबर्टी के भी सपोर्टर थे। इसलिए
- 6:00:34इनमें से कई ऑर्गेनाइजेशंस ब्रिटिश
- 6:00:36गवर्नमेंट के वर्नेकुलर प्रेस एक्ट जैसे
- 6:00:38पॉलिसीज के खिलाफ एजिटेशंस भी कर रहे थे।
- 6:00:42फाइनली उनका डिमांड था कि मॉडर्न एजुकेशन
- 6:00:45को विलेजेस तक पहुंचाया जाए जो अभी तक
- 6:00:48सिर्फ कुछ लिमिटेड सेक्शंस तक ही सीमित
- 6:00:50था।
- 6:00:52कंक्लूजन।
- 6:00:54तो दोस्तों, यह थी कहानी इंडियन नेशनल
- 6:00:57मूवमेंट के शुरुआती दौर की। जहां हमने
- 6:01:00देखा कि कैसे इंडिया में सेकंड हाफ ऑफ
- 6:01:0219th सेंचुरी में एक नेशनल अवेकनिंग के
- 6:01:05चलते इंडियंस ने अपनी प्रॉब्लम्स और
- 6:01:08इश्यूज को रेज किया और साथ में पॉलिटिकल
- 6:01:11रिफॉर्म्स की बात की। अब हम अगले वीडियो
- 6:01:14में इंडियन नेशनल कांग्रेस के फॉर्मेशन और
- 6:01:16उसके अचीवमेंट की बात करेंगे कि कैसे
- 6:01:19आईएसी ने इंडियन नेशनल मूवमेंट को एक
- 6:01:22प्रॉपर प्लेटफार्म दिया और धीरे-धीरे भारत
- 6:01:25के सभी वर्गों को इकट्ठा कर अंग्रेजों को
- 6:01:28भारत से भगाने में सफलता हासिल की। एरा ऑफ
- 6:01:32मॉडरेट्स 1885 टू 195।
- 6:01:36दोस्तों, हमने पिछली वीडियो में देखा कि
- 6:01:39कैसे 1857 की क्रांति के बाद भारत में
- 6:01:43नेशनलिज्म के करंट्स शुरू होते हैं। कैसे
- 6:01:46वेरियस पॉलिटिकल एंड सोशल ऑर्गेनाइजेशंस
- 6:01:48का गठन होता है और किस तरह वो ब्रिटिशर्स
- 6:01:51के एक्सप्लइटेशन को आम जनता के सामने
- 6:01:54उजागर करते हैं। हमने यह भी देखा कि किन
- 6:01:57कारणों से नेशनल मूवमेंट की शुरुआत हुई और
- 6:02:00कैसे इस मूवमेंट ने खुद को सस्टेन किया।
- 6:02:03आइए अब हम बात करेंगे इंडियन नेशनल
- 6:02:05मूवमेंट के नेक्स्ट फेज की जिसमें इंडियन
- 6:02:08नेशनल कांग्रेस का गठन हुआ और जिसने
- 6:02:10इंडियन पॉलिटिक्स को एक नया मोड़ दिया।
- 6:02:13आइए शुरू करते हैं इंडियन नेशनल कांग्रेस
- 6:02:15के फॉर्मेशन की कहानी से। फॉर्मेशन ऑफ
- 6:02:18इंडियन नेशनल कांग्रेस। दोस्तों, इंडियन
- 6:02:21नेशनल कांग्रेस आने वाले समय में इंडियन
- 6:02:24फ्रीडम स्ट्रगल को लीड करने वाला अंब्रेला
- 6:02:26ऑर्गेनाइजेशन बनने वाला था। लेकिन इसके
- 6:02:29फॉर्मेशन का इतिहास काफी इंटरेस्टिंग और
- 6:02:32कंट्रोवर्सी का मुद्दा रहा है। ऐसा इसलिए
- 6:02:34क्योंकि इंडियन नेशनल कांग्रेस के गठन का
- 6:02:37क्रेडिट कई हिस्टोरियंस एक रिटायर्ड
- 6:02:40इंग्लिश सिविल सर्वेंट एओ ह्यूम को देते
- 6:02:42हैं ना कि इंडियन लीडर्स को। इस आर्गुमेंट
- 6:02:45को हम सेफ्टी वेल्व थ्योरी के नाम से
- 6:02:47जानते हैं। दोस्तों, सेफ्टी वेल्व थ्योरी
- 6:02:51कहती है कि ब्रिटिशर्स ने 1857 की क्रांति
- 6:02:54को देखा था और उन्हें यह मालूम था कि
- 6:02:57इंडियन पॉलिटिकल सिचुएशन फिर से ऐसे कई
- 6:03:00मेजर रिबेलियंस को जन्म दे सकती थी। इसलिए
- 6:03:03वह चाहते थे कि ऐसी टेंशंस को अवॉइड किया
- 6:03:06जा सके और इसका सबसे अच्छा तरीका था
- 6:03:08इंडियंस को एक पॉलिटिकल प्लेटफार्म
- 6:03:11प्रोवाइड कर उनके गुस्से और डिसइचेंटमेंट
- 6:03:14को बिल्ड अप होने से रोकना। यह एक
- 6:03:16साइकोलॉजिकल गेम की तरह देखा जा सकता है।
- 6:03:18जहां नाराज इंडियंस अपनी एनर्जी को
- 6:03:21एटलीस्ट डिस्कस कर सकें जो उन्हें एक सेंस
- 6:03:24ऑफ एमावरमेंट देने में हेल्प करेगा। भले
- 6:03:26ही उनकी एक्चुअल कंडीशन में कोई बदलाव आए
- 6:03:29या ना आए। इसलिए इस थ्योरी के प्रमोटर्स
- 6:03:32कहते हैं कि इंडियन नेशनल कांग्रेस का
- 6:03:34फॉर्मेशन एओ ह्यूम द्वारा इंडिया के
- 6:03:37वायसराॉय लॉर्ड डफरिन ने किया था ना कि
- 6:03:39इंडियन नेशनलिस्ट्स ने। ऐसे दावे किए जाते
- 6:03:43हैं कि एओ ह्यूम ने डफिन के अलावा कई और
- 6:03:46ब्रिटिशर्स जैसे सर जेम्स कैड, लॉर्ड
- 6:03:49रिपन, जॉन ब्राइट एटसेट्रा के साथ भी
- 6:03:51मीटिंग्स की थी। इसके अलावा कई ब्रिटिशर्स
- 6:03:54जैसे सर विलियम वेडबर्न, जॉर्ज यूल,
- 6:03:57चार्ल्स ब्रडलो एटसेट्रा ने हमें इस
- 6:04:00एंडेवर में सपोर्ट भी किया था। हालांकि यह
- 6:04:02थ्यरी हिस्टोरियंस द्वारा लार्जली रिजेक्ट
- 6:04:05की जा चुकी है। लेकिन फिर भी इंडियन नेशनल
- 6:04:08कांग्रेस में ब्रिटिश कंट्रीब्यूशन को
- 6:04:10नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ब्रिटिश
- 6:04:13कंट्रीब्यूशन को खुद गोपाल कृष्ण गोखले ने
- 6:04:151913 में डिस्क्राइब किया और कहा था कि
- 6:04:19बिना इंग्लिश सपोर्ट के आईएसी जैसा कोई भी
- 6:04:22पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन फॉर्म नहीं हो पाता
- 6:04:24क्योंकि अगर ब्रिटिश गवर्नमेंट चाहती तो
- 6:04:26किसी भी पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन को ईजीली
- 6:04:28सप्रेस कर सकती थी। इसीलिए गोखले खुद
- 6:04:31लाइटनिंग कंडक्टर थ्योरी में बिलीव करते
- 6:04:33थे। इस थ्योरी के हिसाब से ब्रिटिशर्स ने
- 6:04:36आईएसी को फॉर्म नहीं किया बल्कि इंडियन
- 6:04:38नेशनलिस्ट्स ने ब्रिटिशर्स की सहायता से
- 6:04:41आईएसी को फॉर्म किया ताकि ब्रिटिश
- 6:04:43गवर्नमेंट का इंडियंस के खिलाफ डिस्ट्रस्ट
- 6:04:46के माहौल में भी आईएसी सर्वाइव कर सके और
- 6:04:48इंडियंस के डिमांड्स को वॉइस मिल सके।
- 6:04:51इसके अलावा आईएसी में कई इंडियन लीडर्स का
- 6:04:54रोल क्रूशियल था जो यह बताता है कि एओ
- 6:04:57ह्यूम का आईएसी के फॉर्मेशन में रोल
- 6:04:59लार्जली फैसिलिटेटर की तरह था। इंडियन
- 6:05:02लीडर्स ने ही आईएसी को एक स्ट्रांग
- 6:05:04ऑर्गेनाइजेशन की तरह डेवलप किया। जिसमें
- 6:05:07दादा भाई नौरोजी, बदरुद्दीन तयब जी,
- 6:05:10फिरोजशाह मेहता, आनंद चारू, एसए बनर्जी,
- 6:05:13आरसी दत्त, एएम बोस, गोपाल कृष्ण गोखले,
- 6:05:16जस्टिस राडे और बाल गंगाधर तिलक जैसे
- 6:05:20इंपॉर्टेंट लीडर्स थे। आईएसी में कई वुमेन
- 6:05:23लीडर्स का भी कंट्रीब्यूशन रहा। जैसे 1890
- 6:05:26मेंक यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट कादंबिनी
- 6:05:29गांगुली पहली वुमन बनी जिन्होंने कांग्रेस
- 6:05:32सेशन को एड्रेस किया था। खैर एओ ह्यूम ने
- 6:05:35इंडियन लीडर्स को कांटेक्ट किया और इंडियन
- 6:05:38नेशनल कांग्रेस का पहला सेशन 1885 में
- 6:05:41बॉम्बे में ऑर्गेनाइज किया गया जिसे
- 6:05:43डब्ल्यूसी बनर्जी ने प्रिसाइड किया था।
- 6:05:46इसमें लगभग 72 डेलीगेट्स ने भाग लिया था।
- 6:05:49धीरे-धीरे आईएसी की पॉपुलैरिटी बढ़ने लगी
- 6:05:52और 1889 तक इंडियन डेलीगेट्स की इसमें
- 6:05:56संख्या 2000 तक पहुंच गई। लेकिन आईएसी
- 6:05:58इनिशियली एक एलट ऑर्गेनाइजेशन ही रहा जो
- 6:06:02एजुकेटेड मिडिल क्लासेस द्वारा डोमिनेटेड
- 6:06:04था। आईएसी के लीडर्स लार्जली लॉयर्स,
- 6:06:07जर्नलिस्ट्स, ट्रेडर्स,
- 6:06:09इंडस्ट्रियलिस्ट्स, टीचर्स और लैंड
- 6:06:11लॉर्ड्स क्लासेस से आते थे। आईएसी के एम्स
- 6:06:14की बात करें तो उनका सबसे पहला एम था
- 6:06:16नेशनलिस्ट लीडर्स में फ्रेंडली रिलेशंस को
- 6:06:19प्रमोट करना ताकि पॉलिटिकल यूनिफिकेशन में
- 6:06:22मदद मिले और आईएसी को और स्ट्रेंथ मिले।
- 6:06:25आईएसी का दूसरा एम था नेशनल यूनिटी को
- 6:06:28अक्रॉस कास्ट, क्लास और रिलीजियस लाइंस
- 6:06:31में डेवलप करना ताकि पॉपुलर डिमांड्स को
- 6:06:34ब्रिटिश गवर्नमेंट के सामने एक यूनिफाइड
- 6:06:36तरीके से रखा जा सके और साथ में पब्लिक
- 6:06:39ओपिनियन को ट्रेनिंग के थ्रू ऑर्गेनाइज
- 6:06:41किया जा सके। आईएसी ने अपने फॉर्मेशन के
- 6:06:43बाद कई रिफॉर्म्स की डिमांड्स ब्रिटिशर्स
- 6:06:45के सामने रखी जिनकी चर्चा अब हम करेंगे।
- 6:06:49शुरू करेंगे सबसे इंपॉर्टेंट मुद्दे से ऑफ
- 6:06:52कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म्स।
- 6:06:54कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म्स। दोस्तों आईएसी
- 6:06:58का सबसे पहला मुद्दा था कॉन्स्टिट्यूशनल
- 6:07:00रिफॉर्म्स का। शुरुआती दौर में नेशनलिस्ट
- 6:07:03लीडर्स की डिमांड थी कि गवर्नमेंट में
- 6:07:06उनकी हिस्सेदारी ज्यादा से ज्यादा हो।
- 6:07:08बेस्ड ऑन द प्रिंसिपल ऑफ डेमोक्रेसी। बाद
- 6:07:10में 1885 से 1892 के बीच आईएसी लीडर्स ने
- 6:07:15लेजिसलेटिव काउंसिल में एक्सपेंशन और
- 6:07:17वोटिंग राइट्स की डिमांड की। वो चाहते थे
- 6:07:20कि काउंसिल में इलेक्टेड रिप्रेजेंटेटिव्स
- 6:07:22को मेंबरशिप मिले और साथ में मेंबर्स की
- 6:07:24पावर भी इनक्रीस हो। इसके चलते ही
- 6:07:26ब्रिटिशर्स को इंडियन काउंसिल्स एक्ट ऑफ
- 6:07:291892 को पास करना पड़ा। जिसकी वजह से
- 6:07:31इंपीरियल लेजिसलेटिव काउंसिल एज वेल एज
- 6:07:34प्रोविंशियल काउंसिल्स में मेंबर्स
- 6:07:36इनक्रीस हुए। काउंसिल को एनुअल बजट्स
- 6:07:39डिस्कस करने की ताकत भी दी गई। लेकिन
- 6:07:41वोटिंग पावर नहीं दिया गया। जिसकी वजह से
- 6:07:43नेशनलिस्ट्स एक्ट ऑफ 1892 से डिसटिस्फाइड
- 6:07:47थे और प्रोटेस्ट कर रहे थे। नेशनलिस्ट्स
- 6:07:50की डिमांड थी कि पब्लिक पर्स में इंडियंस
- 6:07:52का कंट्रोल हो ना कि ब्रिटिशर्स का।
- 6:07:55इसीलिए नो टैक्सेशन विदाउट रिप्रेजेंटेशन
- 6:07:58स्लोगन को प्रमोट किया गया जो अमेरिकन
- 6:08:00रेवोल्यूशन से लिया गया था। साथ में सिर्फ
- 6:08:04कुछ मेंबर्स ही इंडियंस द्वारा इ हो सकते
- 6:08:06थे। वह भी इनडायरेक्टली। इसके अलावा अभी
- 6:08:09भी नॉन इेड ऑफिशियल्स की मेजॉरिटी
- 6:08:12कंटिन्यूड रही। बाद में 20थ सेंचुरी की
- 6:08:15शुरुआत में नेशनलिस्ट लीडर्स ने
- 6:08:17ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के सेल्फ गवर्निंग
- 6:08:20मॉडल को इंडिया में स्वराज्य के कांसेप्ट
- 6:08:22के थ्रू रेज किया। सबसे पहले स्वराज्य की
- 6:08:25डिमांड गोखले के बनारस सेशन 195 और दादा
- 6:08:30नौरोजी के कोलकाता सेशन 196 से हुई जिसकी
- 6:08:34चर्चा हम आने वाले वीडियोस में करेंगे।
- 6:08:37आइए अब समझते हैं आईएसी के नेक्स्ट सबसे
- 6:08:39इंपॉर्टेंट एजेंडा को ऑफ इकोनॉमिक
- 6:08:42रिफॉर्म्स।
- 6:08:44इकोनॉमिक रिफॉर्म्स। दोस्तों, अर्ली
- 6:08:47नेशनलिस्ट लीडर्स ने ब्रिटिश इकोनॉमिक
- 6:08:50पॉलिसीज को एक्सपोज किया और समझाया कि
- 6:08:53कैसे वह हमारी इकोनॉमिक बैकवर्डनेस,
- 6:08:55पावर्टी और फेलियर ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड
- 6:08:57मॉडर्न इंडस्ट्री का कारण है। दादाभाई
- 6:09:00नौरोजी ने ड्रेन ऑफ वेल्थ थ्यरी के थ्रू
- 6:09:03यह क्लेम किया कि ब्रिटिशर्स इंडियन वेल्थ
- 6:09:06को इंडिया में इन्वेस्ट करने की बजाय उसे
- 6:09:08इंग्लैंड ले जा रहे थे। यह थ्यरी इंडियन
- 6:09:12नेशनलिस्ट मूवमेंट के इकोनॉमिक एस्पेक्ट
- 6:09:14का फाउंडेशन स्टोन बनी। खैर, अर्ली
- 6:09:17नेशनलिस्ट्स ने पॉवर्टी को इरेडिकेट करने
- 6:09:20के लिए मॉडर्न इंडस्ट्रीज को तेज गति देने
- 6:09:22का सजेशन भी दिया और साथ में नेशनलिस्ट
- 6:09:25चाह रहे थे कि ब्रिटिश गवर्नमेंट, टेरिफ
- 6:09:28और गवर्नमेंट एड के थ्रू मॉडर्न
- 6:09:30इंडस्ट्रीज को प्रमोट करें। इसके अलावा
- 6:09:32लेटर फेज में नेशनलिस्ट लीडर्स ने स्वदेशी
- 6:09:35जैसे न्यू आइडियाज को पॉपुलराइज भी किया
- 6:09:38और ब्रिटिश गुड्स के बॉयकॉट को प्रमोट
- 6:09:40किया। अपनी डिमांड्स को पूरा करने के लिए
- 6:09:43इंडियन लीडर्स ने कई आंदोलन भी किए।
- 6:09:45जिनमें लैंड रेवेन्यू में रिडक्शन,
- 6:09:48प्लांटेशन लेबरर्स के वर्किंग कंडीशंस में
- 6:09:50इंप्रूवमेंट, साल्ट टैक्स का अबोलेशन और
- 6:09:54ब्रिटिश गवर्नमेंट की मिलिट्री
- 6:09:55एक्सपेंडिचर में रिडक्शन जैसी डिमांड्स
- 6:09:58इंक्लूडेड थी। इकोनॉमिक रिफॉर्म्स के बाद
- 6:10:00बात करते हैं एडमिनिस्ट्रेटिव एंड अदर
- 6:10:03रिफॉर्म्स की। एडमिनिस्ट्रेटिव एंड अदर
- 6:10:06रिफॉर्म्स नेशनलिस्ट्स मांग कर रहे थे कि
- 6:10:09सिविल सर्विज में इंडियंस को इंक्लूड किया
- 6:10:12जाए ताकि इंडियंस का गवर्नमेंट में
- 6:10:14रिप्रेजेंटेशन बढ़ सके। वो यह उम्मीद कर
- 6:10:17रहे थे कि इंडियनाइजेशन ऑफ सर्विज ब्रिटिश
- 6:10:20गवर्नमेंट को इंडियन इशज़ पर सेंसिटाइज
- 6:10:22करेगी जिससे उनकी कंडीशंस इंप्रूव हो
- 6:10:25सकेंगी। इसके अलावा फाइनेंशियली बात करें
- 6:10:28तो सर्विज में यूरोपियन मोनोपोली के दो
- 6:10:30मुख्य नुकसान भी थे। जिसके चलते नेशनलिस्ट
- 6:10:33इंडियनाइजेशन की डिमांड कर रहे थे। पहला
- 6:10:36यह था कि सेम क्वालिफिकेशन होने के बाद भी
- 6:10:39यूरोपियन ऑफिशियल्स को काफी ज्यादा सैलरीज
- 6:10:42और इमॉल्यूुमेंट्स मिलते थे। जिसकी वजह से
- 6:10:45इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट काफी ज्यादा
- 6:10:47हो जाता था। वहीं इंडियन ऑफिशियल्स की
- 6:10:50सैलरीज और इमॉलमेंट्स कम होने के कारण
- 6:10:53एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपेंडिचर काफी कम हो
- 6:10:55सकता था। दूसरा यूरोपियन ऑफिशियल्स अपनी
- 6:10:59सैलरीज का ज्यादा हिस्सा और पेंशन को
- 6:11:01इंग्लैंड में भेज देते थे। जिसकी वजह से
- 6:11:04इंडियन ट्रेजरी का ड्रेन होता था। अगर हम
- 6:11:07जुडिशियल रिफॉर्म की बात करें तो
- 6:11:09नेशनलिस्ट्स की एक मेजर डिमांड थी सेपरेशन
- 6:11:11ऑफ पावर्स यानी एग्जीक्यूटिव और जुडिशरी
- 6:11:14का अलग करना। इसके अलावा नेशनलिस्ट्स ने
- 6:11:17यह डिमांड भी रखी कि ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 6:11:20इंडियंस पर ट्रस्ट करें और उन्हें सेल्फ
- 6:11:22डिफेंस के लिए आर्म्स रखने और यूज करने की
- 6:11:25परमिशन दें। बाकी डिमांड्स में इंक्लूडेड
- 6:11:28था वेलफेयर स्टेट का एस्टैब्लिशमेंट,
- 6:11:30मेडिकल और हेल्थ फैसिलिटीज का एक्सपेंशन,
- 6:11:33मॉडर्न एजुकेशन का मास लेवल पर स्प्रेड और
- 6:11:36टेक्निकल एजुकेशन और हायर एजुकेशन का
- 6:11:38प्रमोशन ताकि इंडियंस को ब्रिटिश रूल के
- 6:11:41इंपैक्ट का रियलाइजेशन हो सके। नेशनलिस्ट
- 6:11:45लीडर्स ने पेजेंट्स को मनी लेंडर के
- 6:11:47क्लचेस से बचाने के लिए एग्रीकल्चरल
- 6:11:49बैंक्स को इस्टैब्लिश करने की भी मांग की।
- 6:11:53दोस्तों, यहां यह मेंशन जरूरी है कि
- 6:11:55नेशनलिस्ट का ध्यान ना केवल
- 6:11:56एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स तक सीमित था
- 6:11:59बल्कि पेजेंट्स और फार्मर्स के
- 6:12:01एग्रीकल्चरल रिफॉर्म्स पर भी था। जिसमें
- 6:12:04फार्मर्स को फेमिन से बचाने के लिए
- 6:12:06उन्होंने इरीगेशन को एक्सपेंड करने की
- 6:12:08मांग की। नेशनलिस्ट लीडर्स ने पुलिस
- 6:12:11सिस्टम को भी रिफॉर्म करने की मांग की
- 6:12:13जिससे कि पुलिस ऑनेस्ट और सही तरीके से
- 6:12:16काम करें ताकि लोगों का विश्वास पुलिस पर
- 6:12:18बढ़े। लेटर नेशनलिस्ट लीडर्स ने इंडियन
- 6:12:22वर्कर्स और इंडेंजर्ड लेबरर्स को भी
- 6:12:24डिफेंड किया जो साउथ अफ्रीका, मलेया,
- 6:12:26मॉरीशस, वेस्ट इंडीज और ब्रिटिश गायना में
- 6:12:29काम कर रहे थे। ताकि उनके वर्किंग कंडीशन
- 6:12:32को बेहतर और वेजेस को इनक्रीस किया जा
- 6:12:35सके। इसके अलावा वह डिफेंस और सिविल
- 6:12:38राइट्स की भी मांग कर रहे थे। इसमें
- 6:12:40फ्रीडम ऑफ स्पीच और प्रेस केेंस सबसे
- 6:12:43इंपॉर्टेंट मुद्दे थे। क्योंकि अब तक
- 6:12:45नेशनलिस्ट को इनकीेंस समझ आ गई थी। फॉर
- 6:12:48एग्जांपल 1897 में जब बॉम्बे गवर्नमेंट ने
- 6:12:52बीजी तिलक को ब्रिटिश गवर्नमेंट के
- 6:12:54अगेंस्ट बोलने और लिखने के लिए अरेस्ट कर
- 6:12:56लिया और पुणे के दो लीडर्स नाटो ब्रदर्स
- 6:12:59को भी विदाउट ट्रायल अरेस्ट कर लिया गया।
- 6:13:01तब पूरे देश में प्रोटेस्ट्स देखे गए। इसी
- 6:13:05दौर में तिलक एक पावरफुल लीडर की तरह
- 6:13:07इंडियन पॉलिटिकल सीन में इमर्ज भी हुए थे।
- 6:13:10तो दोस्तों, यह तो बात हुई वेरियस
- 6:13:12रिफॉर्म्स की। अब बात करते हैं इंडियन
- 6:13:14नेशनल कांग्रेस के पॉलिटिकल मेथड्स की
- 6:13:17जिसको नेशनलिस्ट लीडर्स ने अडॉप्ट किया।
- 6:13:19मेथड्स ऑफ इंडियन नेशनल कांग्रेस।
- 6:13:22दोस्तों, 1885 से 195 तक आईएसी में मॉडरेट
- 6:13:26लीडर्स का डोमिनेंस रहा। जैसे दादा भाई
- 6:13:29नौरोजी, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, आरसी दत्त,
- 6:13:32डब्ल्यू सी बनर्जी, फिरोज शाह मेहता,
- 6:13:35गोपाल कृष्ण गोखले, रास बिहारी बोस और एम
- 6:13:38जी राणडे मॉडरेट्स ग्रेजुअल रिफॉर्म्स और
- 6:13:41स्लो चेंज में विश्वास रखते थे। वो
- 6:13:43ब्रिटिश रिप्रेशन से अवेयर थे और इसीलिए
- 6:13:46वो किसी भी तरीके के नॉन कॉन्स्टिट्यूशनल
- 6:13:49स्ट्रगल में विश्वास नहीं करते थे। इसीलिए
- 6:13:52उनके मेथड्स को पिटीशन, प्रेयर्स एंड
- 6:13:54प्रोटेस्ट्स या 3P मॉडल के लेंस से देखा
- 6:13:57जाता था। मॉडरेट लीडर्स अपने इशूज़ को
- 6:14:00जुडिशियल रूट्स, पिटिशन टू गवर्नमेंट और
- 6:14:02राइटिंग इन न्यूज़पेपर्स जैसे टूल्स के
- 6:14:04थ्रू रेज करते थे और यह उम्मीद करते थे कि
- 6:14:07अगर ब्रिटिशर्स को इंडियंस के हालातों के
- 6:14:10बारे में अवेयर करवाया गया तो वह उन्हें
- 6:14:12सुधारने की कोशिश करेंगे। वह अपनी स्पीचेस
- 6:14:15के थ्रू पॉलिटिकल अवेयरनेस को स्प्रेड
- 6:14:17करने के साथ ही साथ पब्लिक ओपिनियन को भी
- 6:14:20रेज करते थे। इससे मॉडरेट लीडर्स ने
- 6:14:22इंडियन फ्रीडम मूवमेंट को फाउंडेशन देने
- 6:14:25का काम किया और डिफरेंट रीजन के लीडर्स को
- 6:14:28एक पॉलिटिकल प्लेटफार्म प्रोवाइड किया इन
- 6:14:30द फॉर्म ऑफ आईएसी। आइए ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 6:14:33के आईएसी के प्रति एटीट्यूड को समझते हैं।
- 6:14:36ब्रिटिश रिएक्शन टू आईएसी। दोस्तों,
- 6:14:39ब्रिटिश गवर्नमेंट शुरू से ही इंडियन
- 6:14:42नेशनल मूवमेंट के प्रति काफी होस्टाइल थी।
- 6:14:45ब्रिटिश ऑफिशियल्स ने नेशनलिस्ट लीडर्स को
- 6:14:48डिस्लॉयल बाबूस, सेडिशियस ब्राह्मिस और
- 6:14:50वायलेंट विलन से संबोधित किया। ब्रिटिश
- 6:14:54गवर्नमेंट ने आईएसी की कुछ डिमांड्स को
- 6:14:56एक्सेप्ट भी किया लेकिन ज्यादातर डिमांड्स
- 6:14:58को नेगलेक्ट किया। साथ में आईएसी के
- 6:15:01प्रोटेस्ट को रिप्रेसिव पुलिस एक्शन के
- 6:15:04थ्रू दबा दिया गया और सेडिशन के चार्ज में
- 6:15:06नेशनलिस्ट लीडर्स को जेल में डाल दिया
- 6:15:08गया। जिसमें तिलक का नाम इंपॉर्टेंट है।
- 6:15:11खैर अब हम इवैल्यूएट करते हैं आईएसी में
- 6:15:14मॉडरेट फेज के सक्सेसेस को। इवैल्यूएशन ऑफ
- 6:15:18मॉडरेट फेस। दोस्तों मॉडरेट लीडर्स की
- 6:15:21सबसे इंपॉर्टेंट सक्सेस थी कि इन्होंने
- 6:15:23नेशनल अवेकनिंग को प्रमोट किया। इसके साथ
- 6:15:26ही ब्रिटिशर्स का असली चेहरा इंडियंस के
- 6:15:29सामने एक्सपोज करने का काम भी किया। नेशनल
- 6:15:32मूवमेंट के मॉडरेट फेज में आईडिया ऑफ
- 6:15:34डेमोक्रेसी को भी प्रोपगेट किया गया था।
- 6:15:37मॉडरेट लीडर्स ने ब्रिटिश रूल के इकोनॉमिक
- 6:15:40कैरेक्टर को एक्सपोज करने के साथ एक कॉमन
- 6:15:43पॉलिटिकल और इकोनॉमिक प्रोग्राम को भी
- 6:15:45इवॉल्व किया। इसके अलावा मॉडरेट फेज ने ही
- 6:15:48इंडियंस को यह मोटिवेशन और कॉन्फिडेंस
- 6:15:51दिया कि वह खुद को गवर्न कर सकते हैं और
- 6:15:53उन्हें ब्रिटिशर्स की कोई जरूरत नहीं है।
- 6:15:56दोस्तों, यह तो हुई कहानी इंडियन नेशनल
- 6:16:00कांग्रेस के फॉर्मेशन से लेकर मॉडरेट फेज
- 6:16:02के अचीवमेंट्स तक की। आने वाली वीडियोस
- 6:16:05में हम इंडियन नेशनल कांग्रेस के
- 6:16:07एक्सट्रीमिस्ट फेज को देखेंगे। जिसने
- 6:16:10नेशनल मूवमेंट को एक नई दिशा दिखाने का
- 6:16:13काम किया।
- 6:16:15एरर ऑफ एक्सट्रीमिस्ट्स 195 टू 198।
- 6:16:21दोस्तों, अपनी पिछली वीडियोस में हमने
- 6:16:23इंडियन नेशनल कांग्रेस यानी आईएसी के
- 6:16:26फॉर्मेशन और उसके मॉडरेट फेस को डिस्कस
- 6:16:29किया था। आज हम बात करेंगे आईएसी के
- 6:16:32नेक्स्ट फेज की जो एक्सट्रीमिस्ट फेज के
- 6:16:35नाम से जाना जाता है। इसके अलावा हम
- 6:16:38स्वदेशी और होमरूल लीग मूवमेंट को भी
- 6:16:40डिटेल में डिस्कस करेंगे। तो आइए शुरू
- 6:16:43करते हैं। इंट्रोडक्शन
- 6:16:47दोस्तों 20th सेंचुरी की शुरुआत में
- 6:16:50इंडिया में नेशनल लीडर्स की एक नई क्लास
- 6:16:53इमर्ज होती है जो मॉडरेट ग्रुप से काफी
- 6:16:56अलग थी। यह ब्रिटिश एंपायर के अगेंस्ट और
- 6:16:59भी ज्यादा अग्रेसिव स्टंस लेते हैं और
- 6:17:01इन्हें एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स के नाम से
- 6:17:03जाना जाता है। इसमें ज्यादातर यंग लीडर्स
- 6:17:06थे और इन्हें मॉडरेट लीडर्स की सॉफ्ट एंड
- 6:17:09पर्सुएसिव अप्रोच पर यकीन नहीं था।
- 6:17:12एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स की लिस्ट में
- 6:17:13मुख्यतः नाम आता है बाल गंगाधर तिलक, लाला
- 6:17:17लाजपत राय, बिपिन चंद्र बाल और अरविंदो
- 6:17:20घोष का। एक्सट्रीमिस्ट फेज के बारे में
- 6:17:23डिटेल में डिस्कस करने से पहले यह समझना
- 6:17:26जरूरी है कि ऐसे क्या कारण थे जिनकी वजह
- 6:17:29से इंडियन नेशनल कांग्रेस में इनका राइज
- 6:17:31होता है। तो आइए समझते हैं एक्सट्रीमिस्ट
- 6:17:35फेज के उदय के कारणों को। कॉजेस फॉर द
- 6:17:38राइज ऑफ़ एक्सट्रीमिज्म।
- 6:17:42दोस्तों, एक्सट्रीमिस्ट फेज के उदय के
- 6:17:44पीछे बहुत से कारण जिम्मेदार थे। आइए
- 6:17:47एक-एक करके उनको समझते हैं। सबसे पहला
- 6:17:50कारण था ब्रिटिश रूल के ट्रू नेचर की
- 6:17:53पहचान होना। अर्ली नेशनलिस्ट लीडर्स ने
- 6:17:56ब्रिटिशर्स को एक्सपोज करने का काम किया
- 6:17:58था। उन्होंने अपनी राइटिंग्स और
- 6:18:01स्टैटिस्टिकल डाटा की हेल्प से यह साबित
- 6:18:03कर दिया था कि ब्रिटिश रूल और उसकी
- 6:18:05पॉलिसीज की वजह से ही इंडिया की इकोनॉमिक
- 6:18:08हालत इतनी खराब हो चुकी है और गरीबी
- 6:18:11दिनरोज़ बढ़ती जा रही है। इसी अवेयरनेस का
- 6:18:14नतीजा था एक्सट्रीमिस्ट आईडियोलॉजी की
- 6:18:17ग्रोथ। इन्हें समझ आ जाता है कि इंडिया की
- 6:18:20प्रोग्रेस ब्रिटिश रूल में पॉसिबल ही नहीं
- 6:18:22है। एक्सट्रीमिज्म के राइज को बढ़ते हुए
- 6:18:25वेस्टनाइजेशन के अगेंस्ट एक रिएक्शन के
- 6:18:28रूप में भी देखा जाता है। क्रिश्चियनिटी
- 6:18:30और यूटिलिटेरियनिज्म इंडियन रिलजन और थॉट
- 6:18:33के लिए एक चैलेंज बन रहे थे।
- 6:18:35मटेरियलिस्टिक और इंडिविजुअलिस्टिक
- 6:18:38वेस्टर्न सिविलाइजेशन इंडियन सिविलाइजेशन
- 6:18:40की वैल्यूस को धीरे-धीरे इरोड करती जा रही
- 6:18:44थी। एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स इंडियन
- 6:18:46स्पिरिचुअल हेरिटेज से इंस्पिरेशन लेते
- 6:18:49हैं। एक्सट्रीमिज्म के राइज का सबसे बड़ा
- 6:18:52कारण था मॉडरेट लीडर्स की लिमिटेशंस।
- 6:18:55मॉडरेट लीडर्स ब्रिटिश अथॉरिटीज से अपनी
- 6:18:58कोई भी सिग्निफिकेंट डिमांड एक्सेप्ट
- 6:19:00कराने में सफल नहीं हुए थे। यहां तक कि
- 6:19:031892 के काउंसिल्स एक्ट में भी उन्हें
- 6:19:06निराशा ही हाथ लगी थी। यही वजह थी कि
- 6:19:09धीरे-धीरे मॉडरेट लीडर्स के मेथड्स पर से
- 6:19:11यंग लीडर्स का भरोसा उठने लगता है।
- 6:19:14एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स मॉडरेट्स के थ्री
- 6:19:17पीस यानी कि पिटीशन, प्रेयर और प्रोटेस्ट
- 6:19:20के मेथड को पॉलिटिकल मेंडिकेंसी का नाम
- 6:19:23देते हैं। तिलक कांग्रेस को कांग्रेस ऑफ
- 6:19:26फ्लैटरर्स और कांग्रेस सेशन को अ हॉलिडे
- 6:19:29रेक्रिएशन बोलते हैं। लाला लाजपत राय का
- 6:19:32मानना था कि कांग्रेस की मीटिंग द एनुअल
- 6:19:34फेस्टिवल ऑफ़ एजुकेटेड इंडियन से ज्यादा
- 6:19:37कुछ भी नहीं है। इस तरह एक्सट्रीमिस्ट
- 6:19:40लीडर्स मॉडरेट्स के स्ट्रांग क्रिटिक्स बन
- 6:19:42जाते हैं। इसके अलावा इंडिया की खराब होती
- 6:19:45इकोनॉमिक कंडीशन भी इंडियन नेशनल
- 6:19:48एक्टिविटी में एक्सट्रीमिज्म के राइज को
- 6:19:50प्रमोट करती है। 1896-97
- 6:19:53और 1899, 1900 की टेरेबल फेमिनेंस के साथ
- 6:19:58महाराष्ट्र में फैले ब्यूबोनिक प्लेग ने
- 6:20:00बड़ी संख्या में लोगों की जान ली थी।
- 6:20:03गवर्नमेंट की रिलीफ मशीनरी पूरी तरह से
- 6:20:05बेकार साबित हो रही थी। तिलक, कैलस और
- 6:20:08ओवरबेरिंग गवर्नमेंट प्लेग कमिश्नर्स को
- 6:20:11क्रिटिसाइज भी करते हैं क्योंकि यह कुछ
- 6:20:13अच्छा करने की जगह सिचुएशन को और ज्यादा
- 6:20:16बुरा बना रहे थे। तिलक कहते हैं कि सरकारी
- 6:20:19उपायों से कम ट्रुअल तो हमारे लिए प्लेग
- 6:20:22है। यह सभी इवेंट्स इंडियंस को एहसास
- 6:20:25दिलाते हैं कि उनकी कंडीशन कितनी हेल्पलेस
- 6:20:27हो गई है। इसके साथ ही बार-बार फैंस का
- 6:20:30आना भी गवर्नमेंट की एंटीनेशनल पॉलिसी का
- 6:20:33ही रिजल्ट था। इसके साथ ही इंडिया के बाहर
- 6:20:36हो रहे इवेंट्स भी यंगर जनरेशन को काफी
- 6:20:38इन्फ्लुएंस करते हैं। जैसे कि ब्रिटिश
- 6:20:41कॉलोनीज स्पेशली साउथ अफ्रीका में इंडियंस
- 6:20:44के साथ होने वाला ह्यूमिलिएटिंग ट्रीटमेंट
- 6:20:46एंटी ब्रिटिश फीलिंग्स क्रिएट करता है।
- 6:20:49साथ ही इजिप्ट, परर्शिया, टर्की और रशिया
- 6:20:52में चल रहे नेशनल मूवमेंट्स भी इंडियंस को
- 6:20:55न्यू होप्स और एस्पिरेशंस देने का काम
- 6:20:57करते हैं। इंडियन नेशनलिस्ट का कॉन्फिडेंस
- 6:21:00और ज्यादा बढ़ जाता है जब 1896 में
- 6:21:04एबसीसीनिया जैसा देश इटालियन आर्मी के
- 6:21:06अटैक को रिपल्स करने में कामयाब रहता है।
- 6:21:09इसके अलावा 195 में रशिया जैसे पावरफुल
- 6:21:13देश पर जापान की शानदार जीत भी इंडियंस को
- 6:21:16इंस्पिरेशन देने का काम करती है। इन सभी
- 6:21:18इवेंट्स की वजह से इंडियन लीडर्स को यह
- 6:21:21विश्वास हो जाता है कि ब्रिटिशर्स
- 6:21:23इनविंसिबल नहीं है और उन्हें भी हराया जा
- 6:21:26सकता है। दोस्तों, एक्सट्रीमिज्म के राइज़
- 6:21:29का अगला इंपॉर्टेंट कारण है लॉर्ड कर्ज़न
- 6:21:31की रिएक्शनरी पॉलिसीज। कर्ज़न के इंडियंस
- 6:21:34को लेकर क्या व्यूज और ओपिनियन थे, यह तो
- 6:21:37आप जान ही चुके हैं। उनके द्वारा लाए गए
- 6:21:40कॉरपोरेशन एक्ट, ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट
- 6:21:43और इंडियन यूनिवर्सिटीज एक्ट ने इंडिया
- 6:21:45में काफी रिेंटमेंट क्रिएट किया था। इसके
- 6:21:48साथ ही लॉर्ड कर्जन 193 में ऐसे समय में
- 6:21:52दिल्ली दरबार ऑर्गेनाइज करते हैं जब
- 6:21:54इंडिया पूरी तरह से 1899 1900 के फेमिन के
- 6:21:58इफेक्ट से बाहर भी नहीं आया था। उनका यह
- 6:22:01एक्ट भी बहुत कंडेम किया जाता है और इसे
- 6:22:04इंटरप्रेट किया जाता है एज अ पमपस पैजेंट
- 6:22:07टू अ स्टारविंग पपुलेशन।
- 6:22:10कर्जन एडमिनिस्ट्रेशन का सबसे ज्यादा हेट
- 6:22:12किया जाने वाला एक्ट था बंगाल का
- 6:22:14पार्टीशन। इस एक्ट ने इंडियंस की आंखें
- 6:22:18खोल दी थी और उन्हें ब्रिटिशर्स का असली
- 6:22:20रंग दिखने लग गया था। पब्लिक प्रोटेस्ट के
- 6:22:23बावजूद पार्टीशन को फोर्स करना दिखाता है
- 6:22:26कि ब्रिटिशर्स को इंडियन पब्लिक ओपिनियन
- 6:22:28की कोई परवाह नहीं थी। इससे यह भी साबित
- 6:22:31होता है कि मॉडरेट्स की पिटीशन, प्रेयर्स
- 6:22:34और प्रोटेस्ट्स की पॉलिसी से तो रिजल्ट्स
- 6:22:36नहीं मिलने वाले थे। इन्हीं सब रीजंस की
- 6:22:39वजह से एक्सट्रीमिस्ट फेस का राइज होता
- 6:22:41है। आइए अब जानते हैं कि एक्सट्रीमिस्ट
- 6:22:44लीडर्स के मेथड्स या प्रोग्राम ऑफ एक्शन
- 6:22:47क्या था।
- 6:22:48मेथड्स ऑफ एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स। दोस्तों,
- 6:22:52एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का गोल स्वराज था।
- 6:22:55जबकि मॉडरेट लीडर्स का गोल तो सिर्फ
- 6:22:57एडमिनिस्ट्रेशन में ज्यादा से ज्यादा
- 6:22:59इंडियंस को शामिल करना था। इसलिए इनके
- 6:23:02मेथड्स भी मॉडरेट लीडर्स से अलग थे।
- 6:23:05मॉडरेट्स के थ्री पीस के मेथड को यह ओपनली
- 6:23:08क्रिटिसाइज कर ही चुके थे। इसीलिए प्रेयर
- 6:23:11और पिटीशन की जगह एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स
- 6:23:14बॉयकॉट और स्वदेशी मेथड्स को अपनाते हैं।
- 6:23:17यह पर्सुएशन से ज्यादा कॉन्फ्रंटेशन में
- 6:23:20बिलीव करते थे। इसके साथ ही ब्रिटिश रूल
- 6:23:22का विरोध करने में भी यह ज्यादा वोकल थे।
- 6:23:25मॉडरेट्स की तरह इन्हें ब्रिटिश जस्टिस
- 6:23:28में कोई विश्वास नहीं था और ना ही यह
- 6:23:30ब्रिटिश क्राउन के प्रति कोई लॉयल्टी रखते
- 6:23:33थे। एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स मास मूवमेंट में
- 6:23:36भी बिलीव करते थे और लोअर मिडिल क्लास को
- 6:23:39नेशनल मूवमेंट से जोड़ना चाहते थे।
- 6:23:41एक्सट्रीमिस्ट के यह मेथड्स सबसे पहली बार
- 6:23:44इंप्लीमेंट हुए थे स्वदेशी मूवमेंट के
- 6:23:47दौरान। तो आइए स्वदेशी मूवमेंट को डिटेल
- 6:23:50में समझते हैं। द स्वदेशी एंड बॉयकॉट
- 6:23:54मूवमेंट। दोस्तों, स्वदेशी मूवमेंट बंगाल
- 6:23:57पार्टीशन के अगेंस्ट ऑर्गेनाइज किया गया
- 6:23:59था। यह इंडियन नेशनल कांग्रेस की तरफ से
- 6:24:02एक मास मूवमेंट करने की पहली कोशिश भी थी।
- 6:24:06लेकिन मास मूवमेंट शुरू होने से पहले
- 6:24:08कांग्रेस ने पार्टीशन का विरोध मॉडरेट
- 6:24:11मेथड से ही किया था। 193 में पार्टीशन का
- 6:24:15प्लान आने पर मॉडरेट लीडर्स पटिशंस और
- 6:24:17प्रेयर्स के द्वारा बंगाल पार्टीशन के
- 6:24:20अगेंस्ट प्रोटेस्ट करते हैं। लेकिन उनकी
- 6:24:22प्रोटेस्ट का ब्रिटिशर्स पर कोई असर नहीं
- 6:24:25होता। और जुलाई 195 में बंगाल पार्टीशन का
- 6:24:29फाइनल अनाउंसमेंट कर दिया जाता है। इसके
- 6:24:32कुछ ही दिन में पूरे बंगाल में जगह-जगह
- 6:24:34प्रोटेस्ट मीटिंग्स ऑर्गेनाइज होना शुरू
- 6:24:36हो जाती हैं। और 7th अगस्त 195 कोलकाता
- 6:24:40टाउन हॉल की मीटिंग में बॉयकॉट रेजोल्यूशन
- 6:24:43के पैसेज के साथ स्वदेशी मूवमेंट का
- 6:24:45फॉर्मल प्रोक्लेमेशन हो जाता है।
- 6:24:4816th अक्टूबर 1905 को जब पार्टीशन फॉर्मली
- 6:24:52फोर्स में आता है तब पूरे बंगाल में उस
- 6:24:55दिन को डे ऑफ मॉर्निंग की तरह मनाया जाता
- 6:24:57है। यूनिटी के सिंबल के रूप में लोग एक
- 6:25:00दूसरे को राखी भी बांधते हैं। प्रोसेशंस
- 6:25:03निकाले जाते हैं जिसमें लोग वंदे मातरम और
- 6:25:06अमार शोनार बांग्ला जैसे गीत गाते हैं।
- 6:25:09पॉलिटिकल लीडर्स बड़ी-बड़ी गैदरिंग्स को
- 6:25:12एड्रेस करते हैं। जल्दी ही मूवमेंट देश के
- 6:25:15बाकी हिस्सों तक स्प्रेड हो जाता है। तिलक
- 6:25:17की लीडरशिप में बॉम्बे और पुणे में लाला
- 6:25:20लाजपत राय और अजीत सिंह के नेतृत्व में
- 6:25:22पंजाब में मूवमेंट स्प्रेड होने लगता है।
- 6:25:25सैयद हैदर रजा दिल्ली में लीडरशिप
- 6:25:27प्रोवाइड करते हैं और चिदंबरम पिल्लई
- 6:25:29मद्रास में। मूवमेंट तो शुरू हो जाता है
- 6:25:33लेकिन कांग्रेस की तरफ से अभी भी इसका कोई
- 6:25:35फॉर्मल प्लान नहीं रखा गया था। आइए जानते
- 6:25:38हैं कांग्रेस में स्वदेशी मूवमेंट को लेकर
- 6:25:41क्या चल रहा था। द कांग्रेस पोजीशन।
- 6:25:45दोस्तों 195 में गोखले की प्रेसिडेंटशिप
- 6:25:48में कांग्रेस की मीटिंग होती है। इसमें
- 6:25:51बंगाल के पार्टीशन और कर्जन के रिएक्शनरी
- 6:25:54पॉलिसीज को कंडेम किया जाता है। साथ ही
- 6:25:57बंगाल में चल रहे स्वदेशी मूवमेंट को
- 6:25:59सपोर्ट करने का फैसला भी लिया जाता है।
- 6:26:01एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स तो मूवमेंट को बंगाल
- 6:26:03से बाहर देश के दूसरे पार्ट्स तक एक्सटेंड
- 6:26:06करना चाहते थे। साथ ही फॉरेन गुड्स के
- 6:26:08बॉयकॉट से आगे बढ़कर एक फुल फ्लेजिड मास
- 6:26:11स्ट्रगल भी शुरू करना चाहते थे। लेकिन उस
- 6:26:14समय कांग्रेस में मॉडरेट लीडर्स का
- 6:26:16डोमिनेंस था और वह इतने आगे नहीं जाना
- 6:26:19चाहते थे। लेकिन नेक्स्ट कांग्रेस सेशन
- 6:26:22में एक बड़ा स्टेप लिया जाता है। इस सेशन
- 6:26:24को हेड कर रहे थे दादाभाई नौरोजी और यहक
- 6:26:28में हुआ था। यहां डिक्लेअ किया जाता है कि
- 6:26:31कांग्रेस का गोल सेल्फ गवर्नमेंट या
- 6:26:33स्वराज है। इस डिक्लेरेशन से
- 6:26:36एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का कॉन्फिडेंस और
- 6:26:38बढ़ जाता है और वह स्वदेशी और बॉयकॉट के
- 6:26:41साथ पैसिव रेजिस्टेंस की कॉल भी दे देते
- 6:26:43हैं। इसमें गवर्नमेंट स्कूल्स और कॉलेजेस
- 6:26:46का, गवर्नमेंट सर्विसेज का, कोर्ट्स का,
- 6:26:48लेजिसलेटिव काउंसिल्स का, म्युनिसिपालिटीज
- 6:26:51का और गवर्नमेंट टाइटल्स का बॉयकॉट शामिल
- 6:26:53था।
- 6:26:55इसके अलावा और कौन-कौन सी एक्टिविटीज
- 6:26:58स्वदेशी मूवमेंट के दौरान हुई थी? आइए
- 6:27:00जानते हैं। न्यू फॉर्म्स ऑफ स्ट्रगल एंड
- 6:27:03इंपैक्ट। दोस्तों, स्वदेशी एंड बॉयकॉट
- 6:27:06मूवमेंट के समय फॉरेन गुड्स को बॉयकॉट
- 6:27:09करने के अलावा भी बहुत सी एक्टिविटीज शुरू
- 6:27:11की जाती हैं। जैसे कि कोर ऑफ वॉलंटियर्स
- 6:27:14या समितिज को ऑर्गेनाइज किया जाता है।
- 6:27:17इसमें अश्विनी कुमार दत्त द्वारा बरिशाल
- 6:27:20में बनाई गई स्वदेश बांधव समिति सबसे
- 6:27:23ज्यादा पॉपुलर होती है। यह समितिज मास
- 6:27:26मोबिलाइजेशन का पावरफुल मींस बन जाती हैं।
- 6:27:29स्वदेशी मूवमेंट के दौरान मासेस तक
- 6:27:31पहुंचने और उनके बीच पॉलिटिकल मैसेज को
- 6:27:34स्प्रेड करने के लिए पॉपुलर फेस्टिवल्स और
- 6:27:37मेलाज का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसका
- 6:27:40सबसे अच्छा उदाहरण है तिलक द्वारा शुरू
- 6:27:42किए गए गणपति और शिवाजी फेस्टिवल। इसके
- 6:27:45अलावा सेल्फ रिलायंस यानी कि आत्मशक्ति के
- 6:27:48ऊपर भी एम्फेसिस किया जाता है। बंगाल
- 6:27:51नेशनल कॉलेज की स्थापना की जाती है औरु
- 6:27:55घोष को इसका प्रिंसिपल बनाया जाता है।
- 6:27:58देखते ही देखते देश के अलग-अलग हिस्सों
- 6:28:00में नेशनल स्कूल और कॉलेजेस खुलना शुरू हो
- 6:28:03जाते हैं। 15th अगस्त 196 को नेशनल
- 6:28:07कंट्रोल में एजुकेशन सिस्टम को ऑर्गेनाइज
- 6:28:10करने के लिए नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन को
- 6:28:12सेटअप किया जाता है। इसके साथ ही बहुत से
- 6:28:15स्वदेशी यानी कि इंडीजीनस एंटरप्राइजेस की
- 6:28:18भी शुरुआत होती है। इसमें सबसे इंपॉर्टेंट
- 6:28:20है चिदंबरम पिल्लई के द्वारा टूटी कोरिन
- 6:28:23में एस्टैब्लिश्ड नेशनल शिप बिल्डिंग
- 6:28:25एंटरप्राइज स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी।
- 6:28:29197 में इंडियन सोसाइटी ऑफ़ ओरिएंटल आर्ट
- 6:28:33भी फॉर्म की जाती है। इसका एम इंडियन
- 6:28:36आर्टिस्ट पर इंग्लिश इन्फ्लुएंस को काउंटर
- 6:28:38करना था। यह चाहते थे कि इंडियन आर्ट
- 6:28:41यूरोपियन आर्टिस्ट से इन्फ्लुएंस ना होकर
- 6:28:43इंडीजनस आर्ट फॉर्म से इंस्पिरेशन ले। इस
- 6:28:46सोसाइटी से स्कॉलरशिप लेने वाले पहले
- 6:28:48रिसिपिएंट बनते हैं नंदलाल बोस। साइंस की
- 6:28:52फील्ड में जगदीश चंद्र बोस, प्रफुल्ल
- 6:28:55चंद्र रॉय जैसे जीनियस ओरिजिनल रिसर्च से
- 6:28:58पूरे विश्व में ख्याति पाते हैं। इस तरह
- 6:29:00हम कह सकते हैं कि स्वदेशी मूवमेंट सिर्फ
- 6:29:03पॉलिटिकल फील्ड तक ही लिमिटेड नहीं था।
- 6:29:05इसका इंपैक्ट हर फील्ड में देखने को मिलता
- 6:29:07है और यह इंडियंस को एक नया कॉन्फिडेंस
- 6:29:10देने का काम करता है। मूवमेंट में
- 6:29:13स्टूडेंट्स का पार्टिसिपेशन बड़े स्केल पर
- 6:29:16देखने को मिलता है। इसके साथ ही वुमेन और
- 6:29:18वर्किंग क्लास भी पहली बार नेशनल मूवमेंट
- 6:29:21से जुड़ते हैं। लेकिन 198 आते-आते स्वदेशी
- 6:29:25मूवमेंट खत्म होने की कगार पर आ जाता है।
- 6:29:28ऐसा क्यों होता है? आइए समझते हैं। द
- 6:29:32मूवमेंट फिज्स आउट। स्वदेशी मूवमेंट के
- 6:29:35डिक्लाइन के पीछे बहुत से कारण थे। सबसे
- 6:29:38पहला कारण था गवर्नमेंट की तरफ से किया
- 6:29:40गया सीिवियर रिप्रेशन। दोस्तों, 198
- 6:29:44आते-आते मूवमेंट लीडरस हो जाता है।
- 6:29:47क्योंकि ज्यादातर लीडर्स को या तो अरेस्ट
- 6:29:50कर लिया जाता है या फिर डिपोर्ट। और बिंदु
- 6:29:52घोष और बिपिन चंद्र पाल तो एक्टिव
- 6:29:55पॉलिटिक्स से रिटायर ही हो जाते हैं। इसके
- 6:29:57अलावा मूवमेंट मोस्टली अपर और मिडिल क्लास
- 6:30:00तक ही सीमित रह जाता है। यह मासेस स्पेशली
- 6:30:04पेजेंट्स को अपने साथ जोड़ने में असफल
- 6:30:06रहता है। और स्वदेशी मूवमेंट के डिक्लाइन
- 6:30:09होने का सबसे बड़ा कारण था लीडर्स के बीच
- 6:30:12की आपसी अनबन। मॉडरेट्स और एक्सट्रीमिस्ट
- 6:30:15लीडर्स मूवमेंट की स्ट्रेटजी को लेकर
- 6:30:18अलग-अलग ओपिनियन रखते थे। उनके बीच की
- 6:30:21तकरार इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि 197 के
- 6:30:25सूरत सेशन में कांग्रेस दो ग्रुप्स में
- 6:30:27स्प्लिट हो जाती है। इसे सूरत स्प्लिट के
- 6:30:30नाम से जानते हैं। आइए सूरत स्प्लिट को
- 6:30:34डिटेल में समझते हैं। सूरत स्प्लिट 197
- 6:30:39कांग्रेस सेशन। दोस्तों 197 का सेशन पहले
- 6:30:43नागपुर में होना था। लेकिन नागपुर
- 6:30:46एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का स्ट्रांग होल्ड
- 6:30:48था। और मॉडरेट लीडर्स को यह डर था कि
- 6:30:51नागपुर में अगर सेशन हुआ तो तिलक
- 6:30:53प्रेसिडेंट बन जाएंगे। इसलिए मॉडरेट लीडर
- 6:30:56गोखले सेशन को सूरत शिफ्ट कर देते हैं।
- 6:30:59सूरत क्योंकि तिलक के होम प्रोविंस में
- 6:31:01आता था इसीलिए रूल के अकॉर्डिंग वो सेशन
- 6:31:04के प्रेसिडेंट नहीं बन सकते थे। इस तरह
- 6:31:07197 के सेशन की शुरुआत मॉडरेट और
- 6:31:11एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स के बीच तकरार के साथ
- 6:31:13होती है। यहां मॉडरेट ग्रुप प्रेसिडेंट के
- 6:31:16लिए रोश बिहारी घोष का नाम आगे करते हैं
- 6:31:19और एक्सट्रीमिस्ट ग्रुप लाला लाजपत राय को
- 6:31:22प्रेसिडेंट बनाना चाहते थे। पहली बार
- 6:31:24प्रेसिडेंट की पोस्ट के लिए इलेक्शन करना
- 6:31:27पड़ता है और फाइनली रास बिहारी घोष ही
- 6:31:30प्रेसिडेंट इ होते हैं। लेकिन इस सबके बीच
- 6:31:33दोनों ग्रुप्स के बीच तकरार इतनी ज्यादा
- 6:31:36बढ़ जाती है कि सेशन को कॉल ऑफ करना पड़ता
- 6:31:38है। एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स को कांग्रेस से
- 6:31:41बाहर कर दिया जाता है और इस तरह कांग्रेस
- 6:31:44स्प्लिट हो जाती है। दोस्तों, कांग्रेस
- 6:31:47में हुई स्प्लिट का फायदा ब्रिटिश
- 6:31:48गवर्नमेंट उठाती है और एक्सट्रीमिस्ट पर
- 6:31:51मैसिव अटैक ल्च कर देती है। आइए देखते हैं
- 6:31:54कैसे। गवर्नमेंट स्ट्रेटजी। एंटी
- 6:31:58गवर्नमेंट एक्टिविटीज को रोकने के लिए 197
- 6:32:01से 191 के बीच ब्रिटिश गवर्नमेंट पांच नए
- 6:32:05लॉज़ लेकर आती है। यह थे सेडिशियस मीटिंग्स
- 6:32:09एक्ट 197। इंडियन न्यूज़पेपर्स इंसाइटमेंट
- 6:32:13टू ऑफेंसेस एक्ट 198,
- 6:32:16क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट 198 एंड द
- 6:32:19इंडियन प्रेस एक्ट 1910
- 6:32:22मेन एक्सट्रीमिस्ट लीडर तिलक के अगेंस्ट
- 6:32:24199 में सेडिशन केस फाइल किया जाता है।
- 6:32:28ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने
- 6:32:30न्यूज़पेपर केसरी में बंगाल के
- 6:32:32क्रांतिकारियों द्वारा मुजफ्फरपुर में
- 6:32:35बॉम्ब फेंके जाने की घटना पर आर्टिकल लिखा
- 6:32:37था। इन्हें गिल्टी मानते हुए ₹1000 का
- 6:32:40फाइन और 6 साल के लिए बर्मा की मंडलिया
- 6:32:43जेल में रहने की सजा सुनाई जाती है। और
- 6:32:46बिंदु और बीसी पाल एक्टिव पॉलिटिक्स से
- 6:32:48रिटायर हो जाते हैं और लाला लाजपत राय
- 6:32:51विदेश चले जाते हैं। लीडर्स की एब्सेंस
- 6:32:54में मूवमेंट कमजोर पड़ने लगता है और कुछ
- 6:32:56समय के लिए खत्म सा हो जाता है। 1914 में
- 6:32:59जब तिलक जेल से बाहर आते हैं तब एक बार
- 6:33:02फिर से मूवमेंट की बागडोर अपने हाथ में
- 6:33:04लेते हैं। इस बीच मॉडरेट्स को खुश करने के
- 6:33:07लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट 199 में इंडियन
- 6:33:10काउंसिल्स एक्ट भी लेकर आती है। इसे मोरली
- 6:33:13मिंटो रिफॉर्म्स के नाम से जाना जाता है।
- 6:33:16एक्ट की डिटेल्स को हम एक अलग वीडियो में
- 6:33:18डिस्कस करेंगे। यहां बस इतना समझ लेते हैं
- 6:33:21कि इस एक्ट के द्वारा मॉडरेट्स और
- 6:33:23मुस्लिम्स को ब्रिटिश गवर्नमेंट अपनी तरफ
- 6:33:26करना चाहती थी। दोस्तों, यह तो बात हुई कि
- 6:33:28ब्रिटिशर्स कैसे अलग-अलग स्ट्रेटजी अपनाते
- 6:33:31हैं एक्सट्रीमिस्ट और मॉडरेट ग्रुप से डील
- 6:33:34करने के लिए। इसे कैरेट एंड स्टिक पॉलिसी
- 6:33:36भी कहा जाता है। 199 के रिफॉर्म्स
- 6:33:40मॉडरेट्स के लिए कैरेट का काम करते हैं और
- 6:33:42रिप्रेसिव लॉज़ एक्सट्रीमिस्ट्स के लिए
- 6:33:45स्टिक की तरह थे। दोस्तों, इसके बाद 1914
- 6:33:48में जब तिलक जेल से बाहर आ जाते हैं, तब
- 6:33:51किस तरह से नेशनल मूवमेंट आगे बढ़ता है,
- 6:33:54आइए जानते हैं।
- 6:33:56फर्स्ट वर्ल्ड वॉर लखनऊ सेशन एंड होम रूल
- 6:34:00लीग मूवमेंट। दोस्तों, 1914 में जब फर्स्ट
- 6:34:04वर्ल्ड वॉर शुरू होती है, तब मॉडरेट
- 6:34:07लीडर्स तो वॉर में ब्रिटिशर्स का सपोर्ट
- 6:34:09एज अ मैटर ऑफ ड्यूटी करते हैं। वहीं तिलक
- 6:34:12जैसे एक्सट्रीमिस्ट यह सोचकर ब्रिटिशर्स
- 6:34:14के वॉर एफर्ट्स को सपोर्ट करते हैं कि इस
- 6:34:17लॉयल्टी के बदले में ब्रिटिशर्स उन्हें
- 6:34:19सेल्फ गवर्नमेंट का तोहफा दे देंगे। लेकिन
- 6:34:22इसके साथ ही लीडर्स को इस बात का भी एहसास
- 6:34:24था कि बिना किसी पॉपुलर प्रेशर के ब्रिटिश
- 6:34:27गवर्नमेंट कभी भी कंसेशंस देने के लिए
- 6:34:30तैयार नहीं होगी। इसलिए लीडर्स की तरफ से
- 6:34:33एक ऑर्गेनाइज्ड एफर्ट तो जरूरी है। कुछ और
- 6:34:36भी कारण थे जिसकी वजह से नेशनल मूवमेंट इस
- 6:34:39दिशा में बढ़ता है। जैसे कि वॉर के दौरान
- 6:34:42इंडिया में गरीब लोगों की हालत और खराब
- 6:34:44होना। क्योंकि वॉर के समय हैवी टैक्सेशन
- 6:34:48इंपोज किया जा रहा था और साथ ही रोजमर्रा
- 6:34:50की चीजों के दाम आसमान छूने लगे थे। इस
- 6:34:53वजह से लोग भी प्रोटेस्ट करने के लिए एक
- 6:34:56अग्रेसिव मूवमेंट के पक्ष में नजर आ रहे
- 6:34:58थे। अब यह मूवमेंट इंडियन नेशनल कांग्रेस
- 6:35:01की लीडरशिप में होना तो मुश्किल लग रहा
- 6:35:03था। क्योंकि मॉडरेट्स की लीडरशिप में
- 6:35:05कांग्रेस एक पैसिव और इनर्ट पॉलिटिकल
- 6:35:08ऑर्गेनाइजेशन बनकर रह गई थी। इसलिए
- 6:35:10कांग्रेस के बाहर से ही मूवमेंट शुरू होता
- 6:35:13है और यह मूवमेंट था होम रूल लीग मूवमेंट।
- 6:35:17होम रूल मूवमेंट बेसिकली आरिश होमरूल
- 6:35:20लीग्स के एग्जांपल को फॉलो करता है। इसकी
- 6:35:23मेन इंस्पिरेशन भी आरिश लेडी एनी बेसेंथ
- 6:35:26ही थी। इंडिया में दो होमरूल लीग्स
- 6:35:29एस्टैब्लिश की जाती हैं। एक एनी बेसन की
- 6:35:32लीडरशिप में और दूसरी तिलक की लीडरशिप
- 6:35:35में। तिलक अपनी इंडियन होम रूल लीग अप्रैल
- 6:35:38196 में सेटअप करते हैं। इसकी पहली मीटिंग
- 6:35:42बेलगांव में होती है और इसका हेड
- 6:35:44क्वार्टर्स पुणे में बनाया जाता है। इनकी
- 6:35:47लीग बॉम्बे सिटी को छोड़कर महाराष्ट्र,
- 6:35:50कर्नाटका, सेंट्रल प्रोविंसेस और बेरार को
- 6:35:53कवर करती हैं। लीग की मेजर डिमांड्स में
- 6:35:56स्वराज्य, लिंग्विस्टिक स्टेट्स का
- 6:35:58फॉर्मेशन और वर्नाकुलर में एजुकेशन देना
- 6:36:00शामिल था। एनी बेसंत अपनी ऑल इंडिया होम
- 6:36:04रूल लीग को सेप्टेंबर 1916 में मद्रास से
- 6:36:07शुरू करती हैं। तिलक के एरियाज को छोड़कर
- 6:36:10पूरे इंडिया को इनकी लीग कवर करती है।
- 6:36:13जॉर्ज अरुणल इसके ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी
- 6:36:16बनाए जाते हैं और इनके अलावा इसमें बी
- 6:36:19डब्ल्यू वाडिया और सीपी रामस्वामी अय्यर
- 6:36:21का भी इंपॉर्टेंट योगदान था।
- 6:36:24इसी बीच 1916 में कांग्रेस का लखनऊ सेशन
- 6:36:28भी होता है। इसमें एक्सट्रीमिस्ट्स को
- 6:36:30वापस कांग्रेस में शामिल कर लिया जाता है।
- 6:36:33ऐसा इसलिए क्योंकि मॉडरेट्स और
- 6:36:35एक्सट्रीमिस्ट्स दोनों को ही यह रियलाइज
- 6:36:37होता है कि उनके बीच स्प्लिट ने पॉलिटिकल
- 6:36:40इनएक्टिविटी को जन्म दे दिया है। साथ ही
- 6:36:42एनी बेसंत और तिलक पिछले कुछ सालों से
- 6:36:45रीयनियन के लिए एफर्ट कर ही रहे थे। इस
- 6:36:48बीच गोखले और फिरोज शाह मेहता जैसे मॉडरेट
- 6:36:51लीडर्स की मृत्यु भी रीयनियन के लिए
- 6:36:53रास्ता बनाने का काम करती है। तो इस तरह
- 6:36:56मॉडरेट्स और एक्सट्रीमिस्ट्स फिर से एक
- 6:36:59साथ काम करने लगते हैं और इस वजह से होम
- 6:37:02रूल लीग मूवमेंट और भी स्ट्रांग हो जाता
- 6:37:04है। इसे मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू,
- 6:37:07भूलाबाई देसाई, मोहम्मद अली जिन्ना, तेज
- 6:37:10बहादुर सप्रू और लाला लाजपत राय जैसे
- 6:37:13लीडर्स भी ज्वॉइ कर लेते हैं। यानी कि
- 6:37:15बहुत से नए लीडर्स इस आंदोलन के दौरान ही
- 6:37:18पहली बार नेशनल स्ट्रगल से जुड़ते हैं।
- 6:37:21होमरूल लीग मूवमेंट का असर पूरे देश में
- 6:37:24दिखने लगता है। जगह-जगह पब्लिक मीटिंग्स
- 6:37:26ऑर्गेनाइज की जाती हैं। न्यूज़पेपर के
- 6:37:29थ्रू प्रोपेगेंडा चलाया जाता है। सोशल
- 6:37:31वर्क्स ऑर्गेनाइज किए जाते हैं। ब्रिटिश
- 6:37:33गवर्नमेंट मूवमेंट के अगेंस्ट सीवियर
- 6:37:36रिप्रेशन शुरू कर देती है। मद्रास में
- 6:37:38स्टूडेंट्स के पॉलिटिकल मीटिंग्स अटेंड
- 6:37:40करने पर बैन लगा दिया जाता है। तिलक को
- 6:37:43पंजाब और दिल्ली जाने से रोक दिया जाता
- 6:37:45है। जून 1917 में एनी बेसन और उनके
- 6:37:49एसोसिएट्स को अरेस्ट कर लिया जाता है।
- 6:37:52इसकी वजह से नेशन वाइड प्रोटेस्ट शुरू हो
- 6:37:55जाते हैं। अपना विरोध जताने के लिए सर
- 6:37:57सुब्रमण्यम अय्यर अपना नाइटहुड रनाउंस कर
- 6:38:00देते हैं और तिलक पैसिव रेजिस्टेंस शुरू
- 6:38:03करने की बात करते हैं। इस तरह एनी बेसेंट
- 6:38:06के अरेस्ट के बाद मूवमेंट और भी ज्यादा
- 6:38:08उग्र होने लगता है। इसलिए ब्रिटिश
- 6:38:11गवर्नमेंट सितंबर 1917 में उन्हें रिहा कर
- 6:38:14देती है। लेकिन 1919 आते-आते यह आंदोलन भी
- 6:38:18कमजोर पड़ने लगता है। इसके पीछे बहुत से
- 6:38:21रीज़ंस थे। जैसे कि इफेक्टिव ऑर्गेनाइजेशन
- 6:38:24का ना होना, 1917-18 के बीच कम्युनल
- 6:38:27राइट्स का होना और अगस्त 1917 की
- 6:38:30मॉन्टेग्यू की डिक्लेरेशन। मॉन्टेग्यू
- 6:38:33इंडिया के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट थे। 20th
- 6:38:36अगस्त 1917 को यह ब्रिटिश पार्लियामेंट
- 6:38:39में डिक्लेअर करते हैं कि इंडिया में
- 6:38:41ब्रिटिशर्स का लॉन्ग टर्म गोल रिस्पांसिबल
- 6:38:43गवर्नमेंट एस्टैब्लिश करना है। इस
- 6:38:45डिक्लेरेशन के बाद मॉडरेट्स और एनी बेसेंट
- 6:38:48को लगता है कि आंदोलन को कंटिन्यू करने की
- 6:38:50जरूरत नहीं है। इसके अलावा सितंबर 1918
- 6:38:54में एक केस के सिलसिले में तिलक भी विदेश
- 6:38:57चले जाते हैं। इस तरह मूवमेंट लीडलेस हो
- 6:39:00जाता है और धीरे-धीरे डिक्लाइन कर जाता
- 6:39:03है। इस बीच गांधी जी भी इंडिया आ चुके
- 6:39:06होते हैं और यहां से नेशनल मूवमेंट के
- 6:39:08गांधियन फेज की शुरुआत होती है जिसके बारे
- 6:39:11में हम अपनी आने वाली वीडियोस में बात
- 6:39:14करेंगे। इवैल्यूएशन ऑफ एक्सट्रीमिस्ट फेज।
- 6:39:18दोस्तों, एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का इंडियन
- 6:39:21नेशनल मूवमेंट में बहुत इंपॉर्टेंट योगदान
- 6:39:23रहा है। इन्हीं लीडर्स की वजह से इंडियंस
- 6:39:26को यह कॉन्फिडेंस आया था कि वह ब्रिटिशर्स
- 6:39:29से स्वराज की डिमांड कर सकते हैं। तिलक का
- 6:39:32स्लोगन स्वराज इज माय बर्थ राइट। जो
- 6:39:35होमरूल मूवमेंट के दौरान दिया गया था।
- 6:39:37घर-घर तक पहुंच जाता है और आगे आने वाली
- 6:39:40पीढ़ी को भी इंस्पायर करने का काम करता
- 6:39:43है। एक्सट्रीमिस्ट फेज के समय ही नेशनल
- 6:39:46एजुकेशन और स्वदेशी एंटरप्राइजेज का
- 6:39:49डेवलपमेंट और तेजी से शुरू होता है। नेशनल
- 6:39:52मूवमेंट को एक नई और जरूरी दिशा देने का
- 6:39:55काम करता है एक्सट्रीमिस्ट फेज। लेकिन
- 6:39:58इसके साथ ही एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स अपने
- 6:40:00स्वराज के गोल को पूरा करने के लिए कोई
- 6:40:02स्ट्रांग एक्शन प्लान नहीं तैयार कर पाते।
- 6:40:05यह यंगस्टर्स में जोश तो जगा देते हैं,
- 6:40:07लेकिन उनकी एनर्जी को सही दिशा में
- 6:40:09चैनलाइज करने में असफल रहते हैं। खासकर
- 6:40:12स्वदेशी मूवमेंट के डिक्लाइन के बाद यूथ
- 6:40:15डायरेक्शनलेस फील करते हैं। इसका ही नतीजा
- 6:40:19था कि कुछ यंगस्टर्स रेवोल्यूशनरी
- 6:40:21एक्टिविटीज की तरफ चले जाते हैं।
- 6:40:23रेवोल्यूशनरी फेज के बारे में हम अपने
- 6:40:25नेक्स्ट वीडियो में चर्चा करेंगे।
- 6:40:28रेवोल्यूशनरी मूवमेंट फर्स्ट फेज।
- 6:40:32दोस्तों, अपनी पिछली वीडियो में हमने
- 6:40:33इंडियन नेशनल कांग्रेस में एक्सट्रीमिस्ट
- 6:40:36लीडर्स के राइज की बात की थी। साथ ही
- 6:40:38बंगाल पार्टीशन के अगेंस्ट शुरू हुए
- 6:40:40स्वदेशी और बॉयकॉट मूवमेंट के बारे में भी
- 6:40:43जाना था। इसके अलावा होमरूल लीग्स को भी
- 6:40:45समझ लिया था। यह सभी डेवलपमेंट्स कहीं ना
- 6:40:48कहीं इंडियन नेशनल कांग्रेस से ही रिलेटेड
- 6:40:51थे। लेकिन देश की आजादी के लिए सिर्फ
- 6:40:53इंडियन नेशनल कांग्रेस ही स्ट्रगल नहीं कर
- 6:40:56रही थी। कांग्रेस के बाहर भी बहुत सारे
- 6:40:59लोग और ऑर्गेनाइजेशंस ब्रिटिश रूल के
- 6:41:01अगेंस्ट खड़े हो चुके थे। इन्हीं में से
- 6:41:04एक स्टैंड है रेवोल्यूशनरीज का। इसलिए आज
- 6:41:07हम रेवोल्यूशनरी मूवमेंट के फर्स्ट फेज को
- 6:41:10डिटेल में डिस्कस करने वाले हैं। तो आइए
- 6:41:13शुरू करते हैं। इंट्रोडक्शन
- 6:41:16रीज़ंस फॉर इमरजेंस।
- 6:41:18दोस्तों रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज की
- 6:41:20शुरुआत मिलिटेंट नेशनलिज्म यानी कि
- 6:41:23एक्सट्रीमिज्म के बाय प्रोडक्ट के रूप में
- 6:41:25ही होती है। एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स ने ही
- 6:41:28शुरुआती दौर में रेवोल्यूशनरीज को
- 6:41:30इंस्पायर किया था। हमने देखा था कि कैसे
- 6:41:33ब्रिटिशर्स के डिप्रेशन के कारण ओपन
- 6:41:35मूवमेंट का डिक्लाइन शुरू हो गया था। ऐसी
- 6:41:38सिचुएशन में बहुत से यंग पेट्रिएट्स थे जो
- 6:41:41चुप नहीं बैठ सकते थे। गवर्नमेंट जब
- 6:41:43शांतिपूर्ण तरीके से विरोध का रास्ता बंद
- 6:41:46कर देती है, तब यह यंग लीडर्स सीक्रेट
- 6:41:49रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज की तरफ चले जाते
- 6:41:51हैं। ब्रिटिशर्स के सीिवियर रिप्रेशन ने
- 6:41:54इनका गुस्सा भी बढ़ा दिया था। इसलिए यह
- 6:41:57उनसे बदला भी लेना चाहते थे। इसके अलावा
- 6:42:01रेवोल्यूशनरी मूवमेंट के शुरू होने का एक
- 6:42:03कारण एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का फेलियर भी
- 6:42:06था। एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स यूथ के जोश को
- 6:42:09सही दिशा दिखाने में असफल हो गए थे।
- 6:42:12ब्रिटिश रिप्रेशन के बाद किस तरह मूवमेंट
- 6:42:15को आगे ले जाना चाहिए? इसका कोई एक्शन
- 6:42:17प्लान इन लीडर्स के पास नहीं था। ऐसी
- 6:42:20सिचुएशन में यूथ को जो भी रास्ता सही लगता
- 6:42:23है, वह उसकी तरफ चल देते हैं। यह रास्ता
- 6:42:26और कुछ नहीं बल्कि क्रांतिकारी पथ ही था।
- 6:42:29आइए, अब समझते हैं रेवोल्यूशनरीज की
- 6:42:32आईडियोलॉजी क्या थी और इनका प्लान ऑफ
- 6:42:34एक्शन क्या था। द रेवोल्यूशनरी प्रोग्राम।
- 6:42:38दोस्तों, क्रांतिकारियों की बेसिक
- 6:42:40आईडियोलॉजी थी ब्रिटिशर्स को फोर्स के
- 6:42:43जरिए इंडिया से बाहर निकालना। इसके लिए वो
- 6:42:46रशियन निहलिस्ट और आइलैंड के नेशनलिस्ट से
- 6:42:49इंस्पिरेशन लेते हैं। यह लोग इंडिविजुअल
- 6:42:52हिरइक डीड्स में यकीन करते थे। इंडियन
- 6:42:55रेवोल्यूशनरीज भी इनके ही दिखाए मार्ग पर
- 6:42:58चलते हैं और अनपॉपुलर ब्रिटिश ऑफिशियल्स
- 6:43:01की हत्या करना शुरू कर देते हैं। इसके
- 6:43:04पीछे उनका एम था ब्रिटिशर्स के दिल और
- 6:43:06दिमाग में टेरर पैदा करना। साथ ही देश के
- 6:43:09लोगों की फीलिंग्स को अराउज करना जिससे वह
- 6:43:12ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट क्रांति करने के
- 6:43:14लिए तैयार हो जाए। इनके एक्शन प्रोग्राम
- 6:43:17में सीक्रेट एसोसिएशंस इस्टैब्लिश करना,
- 6:43:20मिलिट्री ट्रेनिंग प्रोवाइड करना और
- 6:43:22स्वदेशी डेकोटी डालना भी शामिल था। यह तो
- 6:43:25बात हुई रेवोल्यूशनरीज की आईडियोलॉजी और
- 6:43:28उनके बेसिक एक्शन प्लान की। अब बात करते
- 6:43:31हैं इंडिया के अलग-अलग रीजन में होने वाली
- 6:43:33रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज के कुछ
- 6:43:35एग्जांपल्स की। रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज
- 6:43:38इन इंडिया। दोस्तों, इंडिया में
- 6:43:41क्रांतिकारी गतिविधि का ट्रेडिशन कोई नया
- 6:43:43नहीं है। स्वदेशी मूवमेंट से पहले भी हमें
- 6:43:47कुछ रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज के
- 6:43:48एग्जांपल्स देखने को मिलते हैं। इसमें
- 6:43:51सबसे इंपॉर्टेंट रीजन था महाराष्ट्र।
- 6:43:54महाराष्ट्र में ही यूरोपियंस का पहला
- 6:43:56पॉलिटिकल मर्डर कमिट हुआ था। 2 जून 1897
- 6:44:00को बालकृष्ण चापेकर और दामोदर चापेकर पूना
- 6:44:04प्लेग कमेटी के प्रेसिडेंट मिस्टर रैंड को
- 6:44:07गोली मार देते हैं। हालांकि गलती से
- 6:44:09लेफ्टिनेंट एयस्ट जो मिस्टर रैंड के
- 6:44:12मिलिट्री एस्कॉट थे उनको भी गोली लग जाती
- 6:44:14है। इसके बाद चापेकर ब्रदर्स को अरेस्ट
- 6:44:17करके फांसी की सजा सुना दी जाती है।
- 6:44:19चापेकर ब्रदर्स का यह एक्ट रेवोल्यूशनरी
- 6:44:22एक्टिविटी का पहला उदाहरण भी माना जाता
- 6:44:24है। बाल गंगाधर तिलक अपने न्यूज़ पेपर
- 6:44:27केसरी में चापेकर ब्रदर्स के इस एक्शन की
- 6:44:30तारीफ में एक आर्टिकल लिखते हैं। इसके लिए
- 6:44:33ब्रिटिश गवर्नमेंट उनके ऊपर सेडिशन चार्ज
- 6:44:35लगा देती है और तिलक को 18 मंथ्स के रेगरस
- 6:44:38इंप्रिजनमेंट की सजा सुनाई जाती है। 1899
- 6:44:42में वि डी सावरकर और उनके भाई नासिक में
- 6:44:45मित्र मेला नाम से एक सीक्रेट सोसाइटी
- 6:44:48ऑर्गेनाइज करते हैं। मित्र मेला 194 में
- 6:44:51अभिनव भारत नाम की सोसाइटी के साथ मर्ज हो
- 6:44:54जाती है। जल्दी ही नासिक, पुणे और बॉम्बे
- 6:44:58बॉम्ब मैन्युफैक्चर के सेंटर्स के रूप में
- 6:45:00उभरते हैं। 199 में अभिनव भारत के मेंबर
- 6:45:04अनंत लक्ष्मण कान्हारे नासिक के कलेक्टर
- 6:45:07एएमटी जैक्सन की हत्या कर देते हैं।
- 6:45:10ब्रिटिश इंक्वायरी में पाया जाता है कि यह
- 6:45:12हत्या एक बहुत बड़ी कंस्परेसी का हिस्सा
- 6:45:15है। यह कंस्परेसी थी ब्रिटिश गवर्नमेंट के
- 6:45:18अगेंस्ट एक आर्म्ड रेवोल्यूशन ऑर्गेनाइज
- 6:45:20करना। इसमें 38 लोगों को गिरफ्तार किया
- 6:45:24जाता है। साथ ही यह भी पाया जाता है कि
- 6:45:26सावरकर इस कास्परेसी के लीडर हैं। इसलिए
- 6:45:30उन्हें आजीवन देश निकाला की सजा सुना दी
- 6:45:32जाती है और उनकी सारी प्रॉपर्टी ज्त कर ली
- 6:45:35जाती है। इस तरह बंगाल में भी बहुत सी
- 6:45:39क्रांतिकारी गतिविधियां देखने को मिलती
- 6:45:41हैं। 193 में पुलिंद दास ढाका में अनुशीलन
- 6:45:45समिति की पहली ब्रांच शुरू करते हैं।
- 6:45:48पीनाथ मित्र कोलकाता में इसकी एक और
- 6:45:50ब्रांच शुरू करते हैं। 196 में वरिंद्र
- 6:45:54घोष और भूपेंद्रनाथ दत्त मिलकर युगांतर
- 6:45:57समिति इस्टैब्लिश करते हैं। इसी नाम से यह
- 6:46:00एक न्यूज़ेपर भी निकालते हैं। इस
- 6:46:02न्यूज़ेपर में एंटी ब्रिटिश आइडियाज को
- 6:46:05छापा जाता था और लोगों में नेशनलिज्म की
- 6:46:08भावना का प्रसार किया जाता था। 197 में
- 6:46:12ईस्टर्न बंगाल और बंगाल के लेफ्टिनेंट
- 6:46:14गवर्नर को मारने के असफल प्रयास भी किए गए
- 6:46:17थे। इसके बाद 30th अप्रैल 198 को
- 6:46:20मुजफ्फरपुर के जज मिस्टर किंग्सफर्ड की
- 6:46:22हत्या का प्रयास किया जाता है। इनके ऊपर
- 6:46:25बॉम्ब फेंकने की जिम्मेदारी प्रफुल्ल चाकी
- 6:46:28और खुद हीराम बोस को दी गई थी। लेकिन गलती
- 6:46:31से बॉम्ब मिस्टर कैनेडी के कैरेज पर गिर
- 6:46:33जाता है और दो लेडीज इसमें मारी जाती हैं।
- 6:46:36प्रफुल्ल चाकी और बोस को अरेस्ट कर लिया
- 6:46:39जाता है। चाकी तो खुद को ही गोली मार लेते
- 6:46:42हैं। जबकि बोस के खिलाफ ट्रायल होता है और
- 6:46:44उन्हें फांसी दे दी जाती है।
- 6:46:47198 में ही गवर्नमेंटलक में मानिकताला
- 6:46:51गार्डन्स और बाकी जगह अवैध हथियारों की
- 6:46:53तलाशी का अभियान चलाती है। इसमें 34 लोगों
- 6:46:56को गिरफ्तार किया जाता है। जिसमें और घोष
- 6:47:00और उनके भाई बरिंद्र घोष भी शामिल थे। इन
- 6:47:03सभी लोगों के ऊपर अलीपुर कांस्परेसी केस
- 6:47:06चलाया जाता है और बिंदु घोष को एविडेंस ना
- 6:47:09होने की वजह से छोड़ दिया जाता है। लेकिन
- 6:47:11बाकी सभी लोगों को सजा सुनाई जाती है। इस
- 6:47:14तरह बंगाल भी रेवोल्यूशनरी मूवमेंट का एक
- 6:47:17इंपॉर्टेंट सेंटर बन गया था। रेलेट कमेटी
- 6:47:20की रिपोर्ट के अनुसार 196 से 197 के बीच
- 6:47:25बंगाल में डिकइटीज के 110 केसेस रिपोर्ट
- 6:47:28किए गए थे। और 60 से ज्यादा मर्डर
- 6:47:31अटेम्प्ट हुए थे ब्रिटिश ऑफिसर्स पर।
- 6:47:34पंजाब में भी हमें रेवोल्यूशनरी मूवमेंट
- 6:47:36का प्रभाव देखने को मिलता है। यहां लाला
- 6:47:39लाजपत राय और अजीत सिंह मुख्य रूप से लीड
- 6:47:42कर रहे थे। लाला जी जिन्हें पंजाब केसरी
- 6:47:45और लायन ऑफ पंजाब जैसे नाम से जाना जाता
- 6:47:48है। पंजाबी नाम का न्यूज़पेपर निकालते
- 6:47:51हैं। जिसका मोटो होता है किसी भी कीमत पर
- 6:47:53सेल्फ हेल्प। अजीत सिंह जो कि भगत सिंह के
- 6:47:56अंकल थे। वह लाहौर में अंजुमन मौसी बाएं
- 6:48:00वतन नाम से एक क्रांतिकारी संस्था शुरू
- 6:48:02करते हैं। संस्था भारत माता नाम से एक
- 6:48:06जर्नल भी प्रकाशित करती है। लेकिन पंजाब
- 6:48:09में रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज पर जल्दी ही
- 6:48:11रोक लगा दी जाती है। क्योंकि मई 197 में
- 6:48:15गवर्नमेंट पॉलिटिकल मीटिंग्स पर बैन लगाने
- 6:48:18के साथ लाला लाजपत राय और अजीत सिंह को
- 6:48:21डिपोर्ट कर देती है। इसके अलावा दिसंबर
- 6:48:241912 में दिल्ली के चांदनी चौक में भी
- 6:48:27वायसरॉय लॉर्ड हार्डिंग के ऊपर बम फेंका
- 6:48:30गया था। बिहार, उड़ीसा और यूपी में भी
- 6:48:33क्रांतिकारी एक्टिव थे। लेकिन बाकी एरियाज
- 6:48:36के कंपैरिजन में यहां प्रभाव कुछ कम देखने
- 6:48:39को मिलता है। दोस्तों, यह तो बात हुई देश
- 6:48:42के अंदर चल रही क्रांतिकारी गतिविधियों
- 6:48:44की। आइए अब बात करते हैं ऐसे
- 6:48:47क्रांतिकारियों की जो देश के बाहर से
- 6:48:49आंदोलन कर रहे थे। रेवोल्यूशनरी
- 6:48:52एक्टिविटीज अब्रॉड। दोस्तों, गवर्नमेंट के
- 6:48:56रिप्रेशन की वजह से बहुत से क्रांतिकारी
- 6:48:58विदेश चले जाते हैं और वहीं से अपना
- 6:49:00संघर्ष जारी रखते हैं। आइए जानते हैं उनके
- 6:49:03बारे में। 195 में श्यामजी कृष्ण वर्मा
- 6:49:08लंदन में इंडिया हाउस की स्थापना करते
- 6:49:11हैं। यह लंदन में इंडियन स्टूडेंट्स के
- 6:49:13लिए एक सेंटर का काम करता है और इंडिया से
- 6:49:16रेडिकल यूथ को लंदन लाने के लिए एक
- 6:49:19स्कॉलरशिप स्कीम भी शुरू की जाती है।
- 6:49:22श्यामजी कृष्ण वर्मा वे इंडियन
- 6:49:24सोशियोलॉजिस्ट नाम से एक जर्नल भी शुरू
- 6:49:26करते हैं। सावरकर और लाला हरदयाल जैसे
- 6:49:30रेवोल्यूशनरीज इंडिया हाउस का मेंबर बन
- 6:49:32जाते हैं। इसी सर्कल के मदन लाल ढींगरा
- 6:49:35199 में कर्जन वाइली जो कि सेक्रेटरी ऑफ
- 6:49:39स्टेट के पॉलिटिकल एडवाइजर थे कि हत्या कर
- 6:49:42देते हैं। लंदन के अलावा पेरिस में मैडम
- 6:49:45भीकाजी कामा जो कि एक पारसी रेवोल्यूशनरी
- 6:49:48थी। वंदे मातरम नाम का अखबार निकालती हैं।
- 6:49:52मैडम कामा को मदद ऑफ इंडियन रेवोल्यूशनरी
- 6:49:55मूवमेंट भी कहा जाता है। इन्होंने 197 में
- 6:49:59जर्मनी के स्टूड गार्ड में ऑर्गेनाइज्ड
- 6:50:01वर्ल्ड सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस में इंडियन
- 6:50:03फ्लैग को फहराया था। यह फ्लैग मैडम भीकाजी
- 6:50:07कामा और श्यामाजी कृष्ण वर्मा ने मिलकर
- 6:50:09डिजाइन किया था और आगे जाकर यह इंडिया के
- 6:50:12नेशनल फ्लैग के लिए एक टेंपलेट का काम
- 6:50:15करता है। जर्मनी में वीरेंद्रनाथ
- 6:50:18चटोपाध्याय रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज को
- 6:50:21लीड कर रहे थे। इनके न्यूज़पेपर का नाम
- 6:50:23तलवार था। फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के शुरू होने
- 6:50:26के बाद यह जर्मन फॉरेन ऑफिस की हेल्प से
- 6:50:29जिम प्लान बनाते हैं। प्लान के तहत 195
- 6:50:33में बर्लिन कमेटी फॉर इंडियन इंडिपेंडेंस
- 6:50:36इस्टैब्लिश की जाती है। इसमें वीरेंद्रनाथ
- 6:50:39के अलावा भूपेंद्रनाथ दत्ता और लाला
- 6:50:41हरदयाल जैसे रेवोल्यूशनरीज भी शामिल थे।
- 6:50:45इनका प्लान इंडिया में आर्म्ड रिबेलियन
- 6:50:47इंसाइड करना था। इसके लिए यह आर्म्स और
- 6:50:50वालंटियर्स को इंडिया में भेजने की तैयारी
- 6:50:53करते हैं। प्लान के अनुसार उड़ीसा के
- 6:50:55बालासोर में हथियार पहुंचने थे और बंगाल
- 6:50:58के क्रांतिकारी बाघा जतिन इन्हें लेने आने
- 6:51:01वाले थे। लेकिन ब्रिटिशर्स को इनके प्लान
- 6:51:03की भनक लग जाती है और पुलिस फायरिंग में
- 6:51:06बाघा जतिन मारे जाते हैं। दोस्तों इंडिया
- 6:51:10के बाहर सबसे इंपॉर्टेंट रेवोल्यूशनरी
- 6:51:12ग्रुप था गदर पार्टी। आइए इनके बारे में
- 6:51:15डिटेल में जानते हैं। गदर पार्टी दोस्तों
- 6:51:19गदर पार्टी का इनिशियल नाम पेसिफिक कोस्ट
- 6:51:22हिंदुस्तान एसोसिएशन था और इसे 15th जुलाई
- 6:51:251913 को लाला हरदयाल, भगवान सिंह, करतदार
- 6:51:29सिंह सराबा और भाई परमानंद जैसे लीडर्स के
- 6:51:32नेतृत्व में यूएसए में फॉर्म किया गया था।
- 6:51:36इसका हेड क्वार्टर्स सैन फ्रांसिस्को में
- 6:51:38था। यह लोग गदर नाम से एक पत्रिका भी
- 6:51:41पब्लिश करते थे। जिसमें ब्रिटिश रूल के
- 6:51:43अगेंस्ट एक आर्म्ड रेवोल्यूशन की बात होती
- 6:51:46थी। गदर पार्टी इंडिया में क्रांति लाना
- 6:51:49चाहती थी और इनके इस प्लान को प्रोत्साहन
- 6:51:52देने का काम करते हैं 1914 के दो इवेंट्स।
- 6:51:56पहला था कोमांगाटा मारू इंसिडेंट और दूसरा
- 6:51:59फर्स्ट वर्ल्ड वॉर की शुरुआत। फर्स्ट
- 6:52:02वर्ल्ड वॉर के बारे में हम जानते हैं।
- 6:52:04लेकिन कोमागाटा मारू इंसिडेंट की डिटेल्स
- 6:52:07जानना थोड़ा जरूरी है। तो आइए इसको समझते
- 6:52:10हैं। दोस्तों कोमागाटा मारू एक शिप का नाम
- 6:52:13था जो 376 पैसेंजर्स को सिंगापुर से
- 6:52:17वैंकवर यानी कनाडा ले जा रही थी। यह
- 6:52:20पैसेंजर्स मोस्टली सिख और पंजाबी
- 6:52:23मुस्लिम्स थे। जब यह शिप कनाडा के कोस्ट
- 6:52:26पर पहुंचती है तो कनेडियन अथॉरिटीज लोगों
- 6:52:29को शिप से उतरने की परमिशन देने में देरी
- 6:52:31करती है और लगभग 2 महीने तक शिप कोस्ट पर
- 6:52:34ही अटकी रहती है। इसके बाद इन्हें वापस
- 6:52:37जाने के लिए कह दिया जाता है। ध्यान देने
- 6:52:40वाली बात यह है कि कनेडियन अथॉरिटीज ऐसा
- 6:52:43ब्रिटिश गवर्नमेंट के इन्फ्लुएंस में करती
- 6:52:45हैं। शिप सितंबर 1914 मेंक वापस पहुंचती
- 6:52:50है। वहां इन्हें तुरंत पंजाब जाने वाली
- 6:52:52ट्रेन में बैठने का आर्डर दिया जाता है।
- 6:52:55पहले से ही इतनी लंबी यात्रा करने की वजह
- 6:52:57से यह लोग परेशान थे। ऐसे में यह ट्रेन
- 6:53:00में बैठने से मना कर देते हैं और इसी बात
- 6:53:03पर पुलिस के साथ इनका कॉन्फ्लिक्ट शुरू हो
- 6:53:05जाता है। के पास बजब नाम की जगह पर यह
- 6:53:09कॉन्फ्लिक्ट होता है और इसमें 22 लोगों की
- 6:53:12मृत्यु हो जाती है और ब्रिटिश आर्मी के
- 6:53:15इंडियन सोल्जर्स को विद्रोह करने के लिए
- 6:53:17उकसाते हैं। गदर पार्टी 21 फरवरी 1915 को
- 6:53:22फिरोजपुर, लाहौर और रावलपिंडी गैरिसंस में
- 6:53:25आर्म्ड रिवोल्ट की डेट को भी फिक्स कर
- 6:53:27देती है। लेकिन उनका यह प्लान लास्ट
- 6:53:30मोमेंट पर धोखेबाजी की वजह से खराब हो
- 6:53:33जाता है। उनका ही एक मेंबर ब्रिटिश
- 6:53:35अथॉरिटी से जा मिलता है और ब्रिटिशर्स
- 6:53:38फॉरेन एक्शन लेते हुए रिबेलियस रेजीमेंट्स
- 6:53:41को डिसबैंड कर देते हैं। लीडर्स को अरेस्ट
- 6:53:44करके डिपोर्ट कर दिया जाता है और करीब 45
- 6:53:47लोगों को फांसी भी दी जाती है। रोश बिहारी
- 6:53:50बोस जापान भागने में सफल होते हैं और वहां
- 6:53:54से अपना संघर्ष जारी रखते हैं। दोस्तों,
- 6:53:57गदर मूवमेंट कीेंस उनकी आईडियोलॉजी में
- 6:54:00है। यह पूरी तरह से अप्रोच के साथ
- 6:54:03मिलिटेंट नेशनलिज्म की सीख देते हैं।
- 6:54:06पॉलिटिकली और मिलिटरीली तो शायद यह फेल हो
- 6:54:09जाते हैं क्योंकि इनके पास ऑर्गेनाइज्ड
- 6:54:11लीडरशिप की कमी थी। इसके साथ ही यह आर्म्ड
- 6:54:14रिवोल्ट के लिए हर लेवल पर जरूरी
- 6:54:17प्रिपरेशन को भी अंडरएस्टिमेट कर लेते
- 6:54:19हैं। दोस्तों, इस तरह इंडिया से बाहर रहकर
- 6:54:23भी रेवोल्यूशनरीज देश की आजादी के लिए
- 6:54:26संघर्ष करते रहते हैं। कंक्लूजन।
- 6:54:29दोस्तों, यह था रेवोल्यूशनरी मूवमेंट का
- 6:54:32फर्स्ट फेज। रेवोल्यूशनरी भले ही एक बड़ी
- 6:54:36क्रांति करके ब्रिटिशर्स को देश से भगाने
- 6:54:38में असफल रहते हैं, लेकिन इंडियन नेशनल
- 6:54:42मूवमेंट में उनका कंट्रीब्यूशन अनमोल है।
- 6:54:45अपनी एक्टिविटीज से इन्होंने लोगों में
- 6:54:47नेशनलिज्म की भावना को और ज्यादा प्रबल
- 6:54:50बनाया था। इनकी वजह से देशवासियों में
- 6:54:53सेल्फ रिस्पेक्ट और सेल्फ कॉन्फिडेंस की
- 6:54:55वृद्धि होती है। यह इन क्रांतिकारियों की
- 6:54:58एक्टिविटीज का ही नतीजा था कि ब्रिटिश रूल
- 6:55:01का डर लोगों में से निकलना शुरू हो जाता
- 6:55:04है। महात्मा गांधी इन साउथ अफ्रीका।
- 6:55:07दोस्तों, इंडियन नेशनल मूवमेंट का पार्ट
- 6:55:10बनने से पहले गांधीजी साउथ अफ्रीका में
- 6:55:12ब्रिटिश कॉलोनियल रूल को चैलेंज कर चुके
- 6:55:15थे। आज हम उनके साउथ अफ्रीकन कैंपेन को
- 6:55:17डिटेल में डिस्कस करने वाले हैं। हम
- 6:55:20जानेंगे कि कैसे गांधी जी साउथ अफ्रीका
- 6:55:22में एक लीडर के रूप में उभरते हैं और किस
- 6:55:25तरह यहां इंडियंस के राइट्स को प्रोटेक्ट
- 6:55:28करते हैं। आइए शुरू करते हैं।
- 6:55:30इंट्रोडक्शन। दोस्तों गांधी जी का जन्म 2
- 6:55:34अक्टूबर 1869 को गुजरात में पोरबंदर नाम
- 6:55:38की जगह पर हुआ था। यह अपने फादर करमचंद
- 6:55:41गांधी की सबसे छोटी संतान थे। इनकी मदर का
- 6:55:44नाम पुतलीबाई था और वह इनके फादर की फोर्थ
- 6:55:47वाइफ थी। गांधी जी की स्कूलिंग पास के
- 6:55:50राजकोट से हुई थी। जहां उनके फादर लोकल
- 6:55:53रूलर के एडवाइजर के रूप में काम करते थे।
- 6:55:5613 साल की एज में गांधी जी की शादी
- 6:55:58कस्तूरबा से हो जाती है। फिर सितेंंबर
- 6:56:011888 में लॉ पढ़ने के लिए गांधीजी
- 6:56:04इंग्लैंड चले जाते हैं। यहां वो
- 6:56:06सक्सेसफुली अपनी डिग्री कंप्लीट करते हैं
- 6:56:08और 10 जून 1891 को उन्हें बार में बुलाया
- 6:56:12जाता है। गांधीजी लंदन के हाई कोर्ट में
- 6:56:14एनरोल हो जाते हैं। लेकिन उसी साल वो
- 6:56:17इंडिया वापस आ जाते हैं। अगले दो साल तक
- 6:56:20गांधी जी बॉम्बे में अपनी लॉ प्रैक्टिस
- 6:56:22इस्टैब्लिश करने की कोशिश करते हैं। लेकिन
- 6:56:24उन्हें रियलाइज होता है कि ना तो उन्हें
- 6:56:27इंडियन लॉ की इतनी नॉलेज है और ना ही
- 6:56:29ट्रायल फेस करने का सेल्फ कॉन्फिडेंस।
- 6:56:32इसलिए गांधी जी वापस अपने घर पोर बंदर लौट
- 6:56:35जाते हैं। यहां वो अपने फ्यूचर को लेकर
- 6:56:37परेशान ही हो रहे थे कि तभी साउथ अफ्रीका
- 6:56:40में लोकेटेड एक इंडियन बिजनेस फर्म का
- 6:56:42रिप्रेजेंटेटिव इनसे मिलने आता है। वो
- 6:56:45गांधी जी को एंप्लॉयमेंट का ऑफर देता है।
- 6:56:48105 पाउंड्स की फीस में 12 महीने के लिए
- 6:56:51गांधी जी को साउथ अफ्रीका में काम करना
- 6:56:53था। गांधीजी ऑफर को एक्सेप्ट कर लेते हैं
- 6:56:56और साउथ अफ्रीका की उनकी जर्नी शुरू होती
- 6:56:58है। अराइवल इन साउथ अफ्रीका। दोस्तों 24th
- 6:57:02मई 1893 को गांधीजी डरबन पहुंच जाते हैं।
- 6:57:07यहां उन्हें मर्चेंट दादा अब्दुल्ला के
- 6:57:09लिए लीगल काउंसिल का काम करना था। एक
- 6:57:12महीने बाद ही काम के सिलसिले में उन्हें
- 6:57:14ट्रेन से प्रिटोरिया नाम की जगह पर जाना
- 6:57:16होता है। इसी जर्नी के रास्ते में गांधीजी
- 6:57:19नेल के पीटर मैरिट्सबर्ग स्टेशन से भी
- 6:57:22गुजरते हैं। यहां गांधीजी ट्रेन के फर्स्ट
- 6:57:25क्लास कंपार्टमेंट में बैठे हुए थे। तभी
- 6:57:28एक वाइट पर्सन कंपार्टमेंट में एंटर करता
- 6:57:30है और तुरंत रेलवे ऑफिशियल्स को बुला लेता
- 6:57:32है। रेलवे ऑफिशियल्स गांधीजी को थर्ड
- 6:57:36क्लास कंपार्टमेंट में जाने का आर्डर देता
- 6:57:37है क्योंकि इंडियंस और अन्य नॉन वाइड्स को
- 6:57:40फर्स्ट क्लास कंपार्टमेंट में ट्रैवल करने
- 6:57:42की परमिशन नहीं थी। गांधीजी इसका विरोध
- 6:57:45करते हैं और अपना टिकट भी दिखाते हैं जो
- 6:57:48कि फर्स्ट क्लास कंपार्टमेंट का ही था।
- 6:57:50लेकिन ऑफिसर्स कुछ भी सुनने को तैयार नहीं
- 6:57:53थे और गांधी जी के ऑर्डर ना मानने पर वह
- 6:57:56उन्हें ट्रेन से धक्का दे देते हैं। उनके
- 6:57:59लगेज को भी प्लेटफार्म पर ही फेंक दिया
- 6:58:01जाता है। गांधी जी को पूरी रात स्टेशन पर
- 6:58:04ही गुजारनी पड़ती है। यह पहला मौका था जब
- 6:58:06गांधी जी को रेसिज्म का सामना करना पड़ता
- 6:58:09है। गांधीजी इसके अगेंस्ट रेलवे की हायर
- 6:58:12अथॉरिटीज को लिखते हैं। उनके बार-बार लेटर
- 6:58:15और पिटीशन भेजने के बाद अश्योरेंस दिया
- 6:58:18जाता है कि प्रॉपर्ली ड्रेस्ड इंडियंस को
- 6:58:20फर्स्ट एंड सेकंड क्लास टिकट दे दी जाएगी।
- 6:58:23लेकिन ये गांधी जी की सिर्फ पार्शियल
- 6:58:25विक्ट्री ही थी। साउथ अफ्रीका में रह रहे
- 6:58:28इंडियंस के लिए रेशियल डिस्क्रिमिनेशन आम
- 6:58:31बात हो चुकी थी। उन्हें वाइट रेसिज्म की
- 6:58:34वजह से रोजाना ही हूमिलिएशन और कंटेंप्ट
- 6:58:37झेलना पड़ता था। बहुत सी कॉलोनीज में बिना
- 6:58:39परमिट के रात 9:00 बजे के बाद इंडियंस को
- 6:58:42बाहर आने की परमिशंस तक नहीं थी और ना ही
- 6:58:44यह लोग पब्लिक फुटपाथ्स का यूज कर सकते
- 6:58:47थे। प्रिटोरिया पहुंचकर गांधी जी अपना
- 6:58:50लीगल वर्क शुरू कर देते हैं। साथ ही वहां
- 6:58:52रह रहे इंडियंस की मीटिंग बुलाते हैं और
- 6:58:54उन्हें ऑर्गेनाइज होकर शोषण का विरोध करने
- 6:58:57का सुझाव देते हैं। साथ ही प्रेस के थ्रू
- 6:59:00भी गांधी जी अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज
- 6:59:03उठाते हैं। इस समय तक गांधी जी का साउथ
- 6:59:06अफ्रीका में रुकने का कोई प्लान नहीं था।
- 6:59:08लेकिन फिर भी वो अपनी तरफ से रेशुल
- 6:59:11डिसेबिलिटीज के अगेंस्ट इंडियंस को अराउज
- 6:59:13करने की पूरी कोशिश करते हैं। अपने लॉ केस
- 6:59:16को सेटल करने के बाद गांधी जी वापस इंडिया
- 6:59:19जाने की तैयारी करने लगते हैं। लेकिन ऐसा
- 6:59:21होता नहीं है। गांधी जी को साउथ अफ्रीका
- 6:59:24में अभी लंबे समय के लिए रहना था। द
- 6:59:27स्ट्रगल बिगिंस। दोस्तों एक तरफ तो गांधी
- 6:59:30जी 1894 में अपना काम खत्म करके वापस
- 6:59:33इंडिया जाने वाले थे और दूसरी तरफ नेटाल
- 6:59:36की संसद एक ऐसा बिल लाने की तैयारी में थी
- 6:59:39जिसे इंडियन से वोटिंग का अधिकार छीन लिया
- 6:59:42जाता। अप्रैल 1894 में गांधी जी के
- 6:59:45फेयरवेल डिनर के समय इस बिल पर डिस्कशन
- 6:59:48शुरू हो जाता है। गांधी जी अपने साथियों
- 6:59:50से कहते हैं कि किसी भी तरह से इस बिल को
- 6:59:53पास होने से रोकना चाहिए। नहीं तो यह उनके
- 6:59:56कॉफिन की पहली कील बन सकती है। लेकिन वहां
- 7:00:00मौजूद सभी लोगों को लगता है कि गांधी जी
- 7:00:03के बिना वह इस बिल का विरोध नहीं कर
- 7:00:04पाएंगे। इसलिए सभी गांधी जी से और एक
- 7:00:08महीने साउथ अफ्रीका में ही रुकने के लिए
- 7:00:10कहते हैं। गांधी जी भी मान जाते हैं।
- 7:00:13लेकिन यह लोग गांधी जी को ही अपना लीडर
- 7:00:15क्यों बनाना चाहते थे? जो अभी महज 25 साल
- 7:00:18के ही थे। एक्सपीरियंस और एज में उनसे भी
- 7:00:21बड़े-बड़े मर्चेंट्स साउथ अफ्रीका में
- 7:00:24मौजूद थे। ऐसा इसलिए क्योंकि गांधी जी
- 7:00:27इंग्लैंड से पढ़ाई करके लौटे थे। उन्हें
- 7:00:29इंग्लिश की अच्छी नॉलेज थी और साउथ
- 7:00:31अफ्रीका में रह रहे ज्यादातर इंडियंस को
- 7:00:33इंग्लिश नहीं आती थी। साथ ही गांधीजी
- 7:00:36बैरिस्टर भी थे। इसलिए पेटिशंस ड्राफ्ट कर
- 7:00:40सकते थे। एक वही थे जो रूलर्स से उनकी ही
- 7:00:43लैंग्वेज में बात कर सकते थे और इंडियंस
- 7:00:46को उनके सामने रिप्रेजेंट कर सकते थे।
- 7:00:48इसलिए गांधी जी को यह लोग अपना लीडर चुनते
- 7:00:52हैं। उस समय ना इन्हें पता था और ना ही
- 7:00:55गांधी जी को अंदाजा था कि आने वाले 20 साल
- 7:00:58तक वह साउथ अफ्रीका में ही रहकर अपने
- 7:01:00लोगों की स्ट्रगल में बड़ी भूमिका
- 7:01:02निभाएंगे।
- 7:01:031894 टू 196
- 7:01:06मॉडरेट फेज ऑफ द स्ट्रगल। दोस्तों,
- 7:01:09गांधीजी फेयरवेल डिनर को ही एक मीटिंग में
- 7:01:12बदल देते हैं और यहां पर ही एक्शन कमेटी
- 7:01:15फॉर्म कर ली जाती है। यह कमेटी नेल
- 7:01:18लेजिसलेटिव असेंबली के लिए एक पिटीशन
- 7:01:20ड्राफ्ट करती है। वॉलंटियर्स पिटीशन की
- 7:01:23कॉपीज बनाते हैं और पूरी रात उसके ऊपर
- 7:01:26सिग्नेचर्स कलेक्ट करते हैं। पिटीशन को
- 7:01:29अगली सुबह प्रेस में भी अच्छी खासी
- 7:01:31पब्लिसिटी मिलती है। लेकिन इन सभी एफर्ट्स
- 7:01:33के बावजूद असेंबली बिल पास कर देती है।
- 7:01:36गांधी जी फिर भी हार नहीं मानते और एक
- 7:01:39दूसरी पिटीशन पर काम करना शुरू कर देते
- 7:01:41हैं। इस बार पिटीशन लॉर्ड रिपन के लिए
- 7:01:44तैयार की जा रही थी। लॉर्ड रिपन उस समय
- 7:01:46सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट फॉर कॉलोनीज़ की पोस्ट
- 7:01:49होल्ड कर रहे थे। 1 महीने के अंदर ही
- 7:01:5210,000 सिग्नेचर्स के साथ यह पिटीशन लॉर्ड
- 7:01:55रिपन के पास भेज दी जाती है।
- 7:01:57डिस्ट्रीब्यूशन के लिए इसकी 1000 कॉपीज भी
- 7:02:00बनाई जाती हैं। ब्रिटिश डेली न्यूज़पेपर द
- 7:02:03टाइम्स भी इंडियन क्लेम को सही मानता है
- 7:02:06और पहली बार इंडिया के लोगों को साउथ
- 7:02:08अफ्रीका में रह रहे अपने साथियों की हालत
- 7:02:11के बारे में पता चलता है। 2 अगस्त 1894 को
- 7:02:15गांधीजी साउथ अफ्रीका में इंडियंस के
- 7:02:18राइट्स को प्रोटेक्ट करने के लिए नेटाल
- 7:02:20इंडियन कांग्रेस नाम से पहली पॉलिटिकल
- 7:02:22ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना करते हैं। इंडियन
- 7:02:25ओपिनियन नाम से अपना एक न्यूज़पेपर भी
- 7:02:27शुरू करते हैं। 1894 से 196 तक गांधी जी
- 7:02:32की पॉलिटिकल एक्टिविटीज को मॉडरेट फेस
- 7:02:34बोला जा सकता है। क्योंकि इस दौरान
- 7:02:37गांधीजी पिटीशंस और मेमोरेंडम्स भेजने पर
- 7:02:40ही ध्यान देते हैं। यह पिटीशंस साउथ
- 7:02:42अफ्रीकन लेजिस्लेचर्स के साथ लंदन में
- 7:02:45कॉलोनियल सेक्रेटरी और ब्रिटिश
- 7:02:47पार्लियामेंट तक को भेजी जाती हैं। गांधी
- 7:02:50जी को लगता है कि अगर इंपीरियल गवर्नमेंट
- 7:02:52के सामने केस के सभी फैक्ट्स रख दिए जाएं
- 7:02:55तो ब्रिटिश सेंस ऑफ जस्टिस जाग जाएगा और
- 7:02:58इंपीरियल गवर्नमेंट इंडियंस के बिहाफ पर
- 7:03:00साउथ अफ्रीका में जरूर इंटरवीन करेगी।
- 7:03:03क्योंकि इंडियंस आखिर ब्रिटिश सब्जेक्ट्स
- 7:03:06ही तो थे। लेकिन 196 आते-आते गांधी जी सभी
- 7:03:10मॉडरेट मेथड्स को ट्राई कर चुके थे और कोई
- 7:03:14भी सफलता नहीं मिल रही थी। इसलिए उनको
- 7:03:16लगने लगा था कि आगे बढ़ने के लिए किसी और
- 7:03:19मेथड की जरूरत है। तब 196 से पैसिव
- 7:03:23रेजिस्टेंस या सत्याग्रह का फज़ शुरू होता
- 7:03:26है। 196 टू 1914
- 7:03:30फज़ ऑफ पैसिव रेजिस्टेंस और सत्याग्रह।
- 7:03:33दोस्तों, पैसिव रेजिस्टेंस या सत्याग्रह
- 7:03:36का यूज गांधी जी सबसे पहली बार
- 7:03:38रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट्स का विरोध करने
- 7:03:41के लिए करते हैं। 196 में कानून लाया गया
- 7:03:44था जिसके तहत इंडियंस को अपने
- 7:03:47फिंगरप्रिंट्स वाला रजिस्ट्रेशन
- 7:03:48सर्टिफिकेट हमेशा अपने साथ रखना था। 11th
- 7:03:52सितंबर 196 को योहानिसबर्ग के एंपायर
- 7:03:56थिएटर में एक पब्लिक मीटिंग होती है। यहां
- 7:03:59इंडियंस फैसला करते हैं कि वह इस कानून को
- 7:04:02नहीं मानेंगे और उसके परिणाम भुगतने के
- 7:04:04लिए तैयार हैं। गांधीजी कैंपेन को चलाने
- 7:04:08के लिए पैसिव रेजिस्टेंस एसोसिएशन की
- 7:04:10स्थापना करते हैं। रजिस्ट्रेशन की लास्ट
- 7:04:14डेट निकल जाती है। गवर्नमेंट गांधी जी और
- 7:04:17उनके 26ियों के अगेंस्ट कारवाई शुरू करती
- 7:04:20है। यह लोग खुद को गिल्टी प्लीड करते हैं।
- 7:04:23इन्हें कंट्री छोड़ के जाने का आर्डर
- 7:04:25मिलता है और आर्डर ना मानने पर इन्हें जेल
- 7:04:27में डाल दिया जाता है। इसी तरह जेल जाने
- 7:04:30वालों की संख्या बढ़ती जाती है। जल्दी ही
- 7:04:33इनका नंबर 155 पहुंच जाता है। लोगों के मन
- 7:04:36से जेल का डर निकल जाता है। जेल को किंग
- 7:04:39एडवर्ड का होटल कहा जाने लगा था। ऐसे में
- 7:04:42जनरल स्मथ्स जो कि साउथ अफ्रीका में
- 7:04:44डिफेंस और नेटिव अफेयर्स मिनिस्टर थे।
- 7:04:46गांधी जी को बात करने के लिए बुलाते हैं
- 7:04:49और वादा करते हैं कि अगर इंडियंस वंटरली
- 7:04:52रजिस्टर कर लें तो यह कानून वापस ले लिया
- 7:04:55जाएगा।
- 7:04:57गांधी जी इनकी बात मान लेते हैं और सबसे
- 7:05:00पहले खुद ही रजिस्टर करते हैं। लेकिन जनरल
- 7:05:02स्म्स धोखा दे देते हैं और ऑर्डर देते हैं
- 7:05:06कि वंटरी रजिस्ट्रेशनंस को कानून के तहत
- 7:05:08रेटिफाई किया जाए। इसके बदले में इंडियंस
- 7:05:12अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट्स को
- 7:05:14पब्लिकली जला देते हैं। इसी बीच गवर्नमेंट
- 7:05:17एक और कानून लेकर आती है जिसका मकसद साउथ
- 7:05:20अफ्रीका में इंडियन इमीग्रेशन पर
- 7:05:22रिस्ट्रिक्शन लगाना था। इसके अगेंस्ट भी
- 7:05:25इंडियंस प्रोटेस्ट करना शुरू करते हैं।
- 7:05:27गवर्नमेंट प्रोटेस्टर्स को जेल में डालना
- 7:05:30शुरू कर देती है। अक्टूबर 198 में गांधी
- 7:05:33जी को भी जेल हो जाती है। इसके बाद भी इन
- 7:05:36लोगों की स्पिरिट कमजोर नहीं होती। ऐसे
- 7:05:39में गवर्नमेंट इन लोगों को इंडिया डिपोर्ट
- 7:05:42करना शुरू कर देती है। स्पेशली गरीब
- 7:05:44इंडियंस को मर्चेंट्स पर उनके इकोनॉमिक
- 7:05:47इंटरेस्ट का हवाला देकर प्रेशर बनाया जाता
- 7:05:50है। आंदोलन अब कमजोर पड़ने लगता है।
- 7:05:52कमिटेड सत्याग्रहीस का तो जेल से अंदर
- 7:05:55बाहर होना लगा रहता है। लेकिन ज्यादातर
- 7:05:58लोगों में अब थकावट के साइन दिखने लगते
- 7:06:00हैं। आंदोलन बहुत लंबा होता जा रहा था और
- 7:06:04गवर्नमेंट अभी भी इनकी डिमांड्स एक्सेप्ट
- 7:06:06करने के मूड में नहीं थी। सत्याग्रहीस को
- 7:06:09सपोर्ट करने के लिए फंड्स भी खत्म होते जा
- 7:06:12रहे थे। ऐसे में अपने एक जर्मन फ्रेंड
- 7:06:15कैलिन बाग की मदद से गांधीजी 1910 में
- 7:06:19जहानिसबर्ग के पास टॉलस्टॉय फार्म की
- 7:06:22स्थापना करते हैं। इस एक्सपेरिमेंट को
- 7:06:24गांधीजी इंडिया में भी आगे बढ़ाते हैं और
- 7:06:27साबरमती जैसे आश्रम्स की स्थापना करते
- 7:06:30हैं। यहां सत्याग्रही इसकी फैमिली रह सकती
- 7:06:33थी और खुद को सस्टेन कर सकती थी। इसके साथ
- 7:06:36ही इंडिया से भी फंड्स आने लगते हैं। सर
- 7:06:39रतन टाटा ₹25,000 भेजते हैं। कांग्रेस,
- 7:06:43मुस्लिम लीग और हैदराबाद के निजाम भी अपना
- 7:06:45कंट्रीब्यूशन देते हैं। आंदोलन का दायरा
- 7:06:48समय के साथ बढ़ता जाता है। 1913 आते-आते
- 7:06:52इसमें पोल टैक्स का विरोध भी शामिल कर
- 7:06:54लिया जाता है। सभी एक्स इंडेंचर्ड इंडियंस
- 7:06:58के ऊपर 3 पाउंड्स का पोल टैक्स लगाया जाता
- 7:07:01था। एक्स इंडेंचर्ड इंडियंस वो वर्कर्स थे
- 7:07:04जो पहले बॉन्डेड लेबर की तरह काम करते थे।
- 7:07:07इसके अबॉलिशन की डिमांड कैंपेन के बेस को
- 7:07:10और ज्यादा बड़ा कर देती है। क्योंकि
- 7:07:12इंडेंचर्ड और एक्स इंडेंचर्ड लेबरर्स अब
- 7:07:15इससे जुड़ते जाते हैं। अब यह सत्याग्रह
- 7:07:18पूरी तरह से एक मास मूवमेंट बन जाता है।
- 7:07:21इसी बीच सुप्रीम कोर्ट का एक ऑर्डर इंडियन
- 7:07:24मैरिजेस को इनवैलिडेट कर देता है। इस
- 7:07:27ऑर्डर के हिसाब से जो भी शादी क्रिश्चियन
- 7:07:30तरीके से नहीं हुई है और रजिस्ट्रार ऑफ
- 7:07:33मैरिजेस के पास रजिस्टर नहीं है, वह मान्य
- 7:07:36नहीं होगी। इसका मतलब था कि हिंदू,
- 7:07:39मुस्लिम और पारसी मैरिजेस इललीगल हो गई थी
- 7:07:42और ऐसी शादियों से होने वाले बच्चों को
- 7:07:44इललेजिट कहा गया था। इस जजमेंट को इंडियंस
- 7:07:48अपनी वुमेन की इंसल्ट मानते हैं और इस वजह
- 7:07:51से बहुत सारी वुमेन भी अब आंदोलन से जुड़
- 7:07:54जाती हैं। यहां से आंदोलन का फाइनल फेज
- 7:07:57शुरू हो जाता है। इमीग्रेशन कानून को
- 7:08:00तोड़ने के लिए लोग इललीगली बॉर्डर क्रॉस
- 7:08:03करना शुरू करते हैं। माइंस और फैक्ट्रीज
- 7:08:05में स्ट्र्राइक्स की जाती हैं। गांधीजी
- 7:08:08खुद न्यू कासल टाउन पहुंचकर एेजिटेशन को
- 7:08:11लीड करते हैं। न्यू कासल नेताल में एक
- 7:08:14माइनिंग टाउन था। यहां के वर्कर्स ने
- 7:08:16स्ट्राइक कर दी थी। इसलिए एंप्लयरर्स
- 7:08:18वर्कर्स क्वटर्स की इलेक्ट्रिसिटी और वाटर
- 7:08:21कनेक्शन कट कर देते हैं। ऐसे में यहां
- 7:08:24रहने वाले करीब 2000 लोगों को लेकर गांधी
- 7:08:27जी ट्रांसवाल बॉर्डर के लिए मार्च शुरू कर
- 7:08:29देते हैं। यह लोग ट्रांसवाल जेल में जाना
- 7:08:32चाहते थे। मार्च के दौरान दो बार गांधी जी
- 7:08:35को अरेस्ट करके छोड़ दिया जाता है और
- 7:08:38तीसरी बार अरेस्ट होने पर जेल भेज दिया
- 7:08:40जाता है। लेकिन वर्कर्स का मोराल डाउन
- 7:08:43नहीं होता। वह अपना मार्च जारी रखते हैं।
- 7:08:46फिर जबरदस्ती उन्हें ट्रेन से वापस नेटाल
- 7:08:48भेज दिया जाता है। वहां इनको प्रोसीक्यूट
- 7:08:51करके जेल भेज दिया जाता है। इन लोगों को
- 7:08:54जेल में बहुत ही खराब ट्रीटमेंट दिया जाता
- 7:08:57है। जिसमें स्टारवेशन और विपिंग शामिल था।
- 7:09:00साथ ही फोर्सफुली माइंस में भी वर्क कराया
- 7:09:03जाता है। गवर्नमेंट के इस एक्शन से पूरी
- 7:09:06इंडियन कम्युनिटी गुस्से में आ जाती है।
- 7:09:08प्लांटेशंस और माइंस में काम करने वाले
- 7:09:11वर्कर्स स्ट्राइक करने लगते हैं। अर्म्ड
- 7:09:14और पीसफुल मैन एंड वुमेन के अगेंस्ट यूज
- 7:09:16किए जा रहे इस ब्रूटल फोर्स की हर जगह
- 7:09:19निंदा होने लगती है। इवेंचुअली गवर्नमेंट
- 7:09:22गांधी जी के साथ नेगोशिएशंस के लिए तैयार
- 7:09:25हो जाती है। एग्रीमेंट के अनुसार साउथ
- 7:09:29अफ्रीका की गवर्नमेंट मेजर इंडियन
- 7:09:31डिमांड्स को मान लेती है। यानी कि पोल
- 7:09:34टैक्स और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट्स को
- 7:09:36खत्म कर दिया जाता है। इंडियन रीति रिवाज
- 7:09:39से होने वाली शादियों को भी मान्य कर दिया
- 7:09:41जाता है। साथ ही इंडियन इमीग्रेशन के सवाल
- 7:09:44को गवर्नमेंट सिंपैथेटिक मैनर में ट्रीट
- 7:09:47करने का प्रॉमिस करती है। इस तरह साउथ
- 7:09:50अफ्रीका में गांधी जी का आंदोलन सफल रहता
- 7:09:52है। नॉन वायलेंट सिविल डिसओबिडियंस से
- 7:09:55अपने अपोनेंट्स को नेगोशिएटिंग टेबल पर
- 7:09:58आने के लिए मजबूर कर दिया जाता है और
- 7:10:00आंदोलन के दौरान रखी गई डिमांड्स को भी
- 7:10:03पूरा करवा लिया जाता है। कंक्लूजन दोस्तों
- 7:10:07साउथ अफ्रीका के इस स्ट्रगल के दौरान ही
- 7:10:10गांधी जी एक लीडर बनते हैं। यहां पर ही
- 7:10:13उन्होंने अहिंसा पर आधारित सत्याग्रह
- 7:10:16टेक्निक को डिवप किया। इस सत्याग्रह के
- 7:10:18दौरान उन्होंने अलग-अलग कम्युनिटीज के साथ
- 7:10:21काम करना भी सीखा। चाहे वह मुस्लिम्स हो,
- 7:10:24तमिल्स हो, पारसीज हो या फिर हिंदूज। साउथ
- 7:10:28अफ्रीका में गांधी जी को मौका मिलता है
- 7:10:30अपने पॉलिटिकल और लीडरशिप स्टाइल को
- 7:10:32इवॉल्व करने का। यहां पर वो आंदोलन को
- 7:10:36मॉडरेट फेज से गांधीियन फेज तक लेकर गए
- 7:10:39थे। अब ऐसा ही कुछ उन्हें इंडिया में भी
- 7:10:42करना था। 1893 में गांधी जी एक वकील के
- 7:10:46रूप में इंडिया से गए थे। लेकिन 1915 में
- 7:10:49साउथ अफ्रीका से सिर्फ एक वकील नहीं बल्कि
- 7:10:51एक नेशनल हीरो और लीडर लौट कर आता है। जो
- 7:10:54कि आगे चलकर इंडिया के नेशनल मूवमेंट का
- 7:10:57रुख ही बदलने वाला था। आगे आने वाले
- 7:11:00वीडियो में हम देखेंगे कि कैसे गांधी जी
- 7:11:03इंडिया के आंदोलन की लीडरशिप अपने हाथ में
- 7:11:05लेते हैं। अराइवल ऑफ गांधी एंड अर्ली
- 7:11:09मूवमेंट्स।
- 7:11:11दोस्तों, अपनी पिछली वीडियोस में हम
- 7:11:13इंडियन नेशनल मूवमेंट के 1917 से 18 तक के
- 7:11:17इवेंट्स को कवर कर चुके हैं। इसके बाद का
- 7:11:20जो टाइम पीरियड है, उसे गांधियन एरा के
- 7:11:22नाम से जाना जाता है। गांधियन एरा से
- 7:11:25नेशनल मूवमेंट की दिशा तो पूरी तरह बदल ही
- 7:11:28जाती है। साथ ही यह पीरियड आजादी के बाद
- 7:11:31के भारत को भी दिशा दिखाने का काम करता
- 7:11:34है। आज हम इसी को शुरू करने वाले हैं। हम
- 7:11:38जानेंगे कि कैसे गांधी जी इंडिया के नेशनल
- 7:11:40मूवमेंट को एक नई डायरेक्शन देते हैं। साथ
- 7:11:43ही उनकी आईडियोलॉजी और शुरुआत के कुछ
- 7:11:46इंपॉर्टेंट मूवमेंट्स को भी कवर करेंगे।
- 7:11:49तो आइए शुरू करते हैं।
- 7:11:53अराइवल ऑफ गांधीजी।
- 7:11:55दोस्तों गांधी जी जनवरी 1915 में साउथ
- 7:11:59अफ्रीका से इंडिया वापस आते हैं। उनके
- 7:12:02साउथ अफ्रीकन कैंपेन को हम अपनी पिछली
- 7:12:05वीडियो में डिटेल में कवर कर चुके हैं।
- 7:12:07साउथ अफ्रीका में किए गए उनके काम के बारे
- 7:12:10में सिर्फ एजुकेटेड क्लास ही नहीं बल्कि
- 7:12:12आम जनता भी जान गई थी। इसीलिए इंडिया में
- 7:12:15उनकी पहचान एक सफल लीडर के रूप में बन
- 7:12:18चुकी थी।
- 7:12:19साउथ अफ्रीका में संघर्ष के दौरान ही
- 7:12:22नेशनल मूवमेंट के लिए गांधी जी की
- 7:12:24आईडियोलॉजी भी डेवलप होती है। उनकी
- 7:12:26आईडियोलॉजी का बेस सत्य और अहिंसा पर
- 7:12:30आधारित सत्याग्रह था। इसके अलावा गांधी जी
- 7:12:34सर्वोदय यानी कि सभी के विकास में बिलीव
- 7:12:37करते थे। गांधी जी की आईडियोलॉजी प्रेरित
- 7:12:40थी उनकी मदर के आदर्शों से, जैनिज्म
- 7:12:43फिलॉसफी से, हिंदूइज़्म से और लियो
- 7:12:46टॉलस्टॉय के विचारों से। इंडिया आने के
- 7:12:48बाद अपने राजनैतिक गुरु गोखले के कहने पर
- 7:12:51गांधी जी एक साल तक देश घूमते हैं। जिससे
- 7:12:54वह देश और उसके लोगों की हालत को अच्छे से
- 7:12:57समझ सकें। गांधी जी उस समय चल रहे होमरूल
- 7:13:00एजिटेशन के फेवर में नहीं थे। क्योंकि
- 7:13:03उन्हें लगता था कि वॉर के बीच में ब्रिटेन
- 7:13:06से होम रूल की डिमांड करना सही नहीं है।
- 7:13:09यहां तक कि वह वॉर के लिए सोल्जर्स
- 7:13:11रिक्रूट करने में भी ब्रिटिशर्स की हेल्प
- 7:13:13करते हैं। इसके लिए उन्हें रिक्रूटिंग
- 7:13:16सार्जेंट ऑफ द गवर्नमेंट के नाम से भी
- 7:13:18जाना जाता है। साथ ही वॉर में उनकी
- 7:13:21सर्विसेज के लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट उन्हें
- 7:13:23कैसर-ए-ह हिंद मेडल भी देती है। फर्स्ट
- 7:13:26वर्ल्ड वॉर के दौरान ही गांधीजी इंडिया
- 7:13:29में कुछ लोकल लेवल आंदोलन का हिस्सा भी
- 7:13:32बनते हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
- 7:13:37चंपारण, अहमदाबाद एंड खेड़ा सत्याग्रह।
- 7:13:42दोस्तों, बिहार के चंपारण डिस्ट्रिक्ट में
- 7:13:45यूरोपियन प्लांटर्स किसानों को इंडिगो
- 7:13:48यानी कि नील की खेती करने के लिए फोर्स कर
- 7:13:51रहे थे। जिसकी वजह से यहां के किसान बहुत
- 7:13:54परेशान थे। ना तो वह अपनी जरूरत के अनुसार
- 7:13:57फूड क्रॉप्स ग्रो कर सकते थे और ना ही
- 7:14:00उन्हें इंडिगो के लिए सही दाम ही मिलते
- 7:14:02थे। यहां जो सिस्टम चल रहा था उसे तीन
- 7:14:05कठिया सिस्टम कहा जाता था। इसका मतलब था
- 7:14:08कि किसान को कम से कम तीन कट्ठा जमीन पर
- 7:14:11इंडिगो की खेती करनी होती थी। कट्ठा लैंड
- 7:14:14मेजरमेंट की एक यूनिट थी जिसमें 20 कट्ठा
- 7:14:18एक बीघा के बराबर होता था। शुरुआत में तो
- 7:14:21किसानों को इसके अच्छे दाम मिलते थे।
- 7:14:23इसलिए वह इंडिगो की खेती के लिए तैयार हो
- 7:14:25गए थे। लेकिन 19th सेंचुरी के एंड में
- 7:14:29जर्मन सिंथेटिक डाइस इंडिगो को रिप्लेस
- 7:14:31करने लगती हैं। ऐसी सिचुएशन में अपने
- 7:14:34प्रॉफिट्स को मैक्सिमाइज करने के लिए
- 7:14:36यूरोपियन प्लांटर्स किसानों से हाई रेंट्स
- 7:14:39और इललीगल ड्यूस की डिमांड करने लगते हैं।
- 7:14:42साथ ही किसानों को फोर्स किया जाता है कि
- 7:14:44वह यूरोपियंस के द्वारा फिक्स किए गए
- 7:14:46प्राइसेस पर अपने प्रोड्यूस को बेच दे। और
- 7:14:49अगर किसान इंडिगो ग्रो करने से मना करते
- 7:14:52तो पुलिस और जुडिशरी की हेल्प से उन्हें
- 7:14:54डराया धमकाया जाता था। इस वजह से यहां के
- 7:14:58किसानों की हालत बहुत ही खराब हो चुकी थी।
- 7:15:01गांधी जी को इसके बारे में राजकुमार
- 7:15:03शुक्ला नाम के एक व्यक्ति से पता चलता है
- 7:15:05जो चंपारण के ही एक किसान थे। राजकुमार
- 7:15:09शुक्ला गांधी जी से मिलकर उन्हें चंपारण
- 7:15:12के किसानों की मदद करने के लिए कहते हैं।
- 7:15:15उस समय यानी कि 1916 में गांधी जी
- 7:15:18कांग्रेस का सेशन अटेंड करने के लिए लखनऊ
- 7:15:20में थे। उनके पास चंपारण जाने का समय नहीं
- 7:15:23था। लेकिन राजकुमार शुक्ला उनका पीछा नहीं
- 7:15:27छोड़ते। वो गांधी जी को हर जगह फॉलो करते
- 7:15:30हैं और उनसे रिक्वेस्ट करते हैं कि वह एक
- 7:15:33बार चंपारण चलकर किसानों की हालत खुद देख
- 7:15:35लें। फाइनली गांधी जी उन्हें प्रॉमिस करते
- 7:15:39हैं कि वहक की विजिट के बाद चंपारण पहुंच
- 7:15:42जाएंगे।
- 7:15:44गांधी जी जबलक पहुंचते हैं तब राजकुमार
- 7:15:47शुक्ला उन्हें चंपारण ले जाने के लिए वहां
- 7:15:49पहले से ही मौजूद होते हैं। 1917 की
- 7:15:53शुरुआत में गांधी जी चंपारण पहुंच जाते
- 7:15:55हैं। इसके बाद गांधी जी, राजेंद्र प्रसाद,
- 7:15:59नरहरी पारिक, जेबी कृपलानी और महादेव
- 7:16:02देसाई जैसे लोकल लीडर्स के साथ मिलकर एक
- 7:16:05टीम बनाते हैं। यह लोग किसानों की समस्या
- 7:16:08को सही तरीके से समझने के लिए एक सर्वे
- 7:16:11शुरू करते हैं। गांधीजी की एक्टिविटीज को
- 7:16:14देखकर लोकल ब्रिटिश ऑफिसर्स थोड़ा घबरा
- 7:16:16जाते हैं। उन्हें डर लगता है कि कहीं साउथ
- 7:16:19अफ्रीका की तरह गांधी जी यहां भी कोई बड़ा
- 7:16:22आंदोलन ना खड़ा कर दें। इसलिए ब्रिटिश
- 7:16:24गवर्नमेंट इंडिगो कल्टीवेटर्स की समस्या
- 7:16:27का हल निकालने के लिए खुद ही एक कमेटी
- 7:16:29सेटअप करती है। गांधी जी को इस कमेटी का
- 7:16:33मेंबर बनने के लिए इनवाइट किया जाता है।
- 7:16:36गांधीजी कमेटी के मेंबर्स को कन्विंस करने
- 7:16:38में कामयाब होते हैं कि तीन कठिया सिस्टम
- 7:16:41पूरी तरह गलत है और इसे अबॉलिश करने की
- 7:16:44जरूरत है। साथ ही इंडिगो प्लांटर्स के साथ
- 7:16:47एग्रीमेंट करते हैं कि उन्होंने किसानों
- 7:16:49से जो इललीगल ड्यूस वसूल किए थे उसका 25%
- 7:16:54किसानों को कंपनसेशन अमाउंट के रूप में
- 7:16:56वापस करें। इस तरह गांधी जी के इंटरवेंशन
- 7:16:59से चंपारण के किसानों की समस्या हल हो
- 7:17:02जाती है। यहां पर यह समझना जरूरी है कि
- 7:17:05किसानों की फुल कंपनसेशन की डिमांड नहीं
- 7:17:07मानी जाती। लेकिन गांधी जी मिडिल पाथ और
- 7:17:10कॉम्प्रोमाइज में यकीन करते थे। चंपारण के
- 7:17:14बाद गांधी जी को मार्च 1918 में अहमदाबाद
- 7:17:17से बुलावा आ जाता है। यहां कॉटन मिल ओनर्स
- 7:17:20और वर्कर्स के बीच प्लेग बोनस के
- 7:17:22डिस्कंटिन्यूएशन के इशू पर डिस्प्यूट खड़ा
- 7:17:25हो गया था। मिल ओनर्स बोनस खत्म कर देना
- 7:17:28चाहते थे और वर्कर्स की डिमांड थी कि इसके
- 7:17:31बदले में उनके वेजेस में 50% की बढ़ोतरी
- 7:17:34की जाए जिससे वह वॉर टाइम इनफ्लेशन में
- 7:17:37खुद को मैनेज कर सकें। लेकिन मिल ओनर्स
- 7:17:40सिर्फ 20% की बढ़ोतरी के लिए तैयार थे।
- 7:17:43इसलिए वर्कर्स हड़ताल पर चले जाते हैं।
- 7:17:46मिल ओनर्स और वर्कर्स के बीच के रिश्ते और
- 7:17:49खराब होने लगते हैं। जब हड़ताल पर गए
- 7:17:51वर्कर्स को डिसमिस किया जाने लगता है और
- 7:17:54बॉम्बे से व्यूअर्स को बुलाने का डिसीजन
- 7:17:56लिया जाता है। ऐसी सिचुएशन में हेल्प के
- 7:17:58लिए वर्कर्स अनुसूया साराभाई के पास
- 7:18:01पहुंचते हैं। अनुसूया साराभाई एक सोशल
- 7:18:04वर्कर थी और अंबालाल साराभाई की बहन भी
- 7:18:07थी। अंबालाल साराभाई एक मिल ओनर होने के
- 7:18:10साथ-साथ अहमदाबाद मिल ओनर्स एसोसिएशन के
- 7:18:13प्रेसिडेंट भी थे। अनुसूया बहन गांधी जी
- 7:18:17से इस डिस्प्यूट में इंटरवीन करने की
- 7:18:19रिक्वेस्ट करती हैं। वैसे तो गांधीजी
- 7:18:22अंबालाल साराभाई के दोस्त थे। अंबालाल जी
- 7:18:25ने अहमदाबाद में आश्रम बनाने के लिए गांधी
- 7:18:28जी को डोनेशन भी दी थी। लेकिन इसके बावजूद
- 7:18:31गांधी जी यहां वर्कर्स के साथ खड़े होते
- 7:18:34हैं। अनुसूया जी भी वर्कर्स को सपोर्ट
- 7:18:36करती हैं और गांधी जी का पूरा साथ देती
- 7:18:39हैं। गांधी जी वर्कर्स से वेजेस में 50%
- 7:18:43की जगह 35% बढ़ोतरी की डिमांड पर हड़ताल
- 7:18:46करने के लिए कहते हैं। इसके साथ ही हड़ताल
- 7:18:49के दौरान पूरी तरह अहिंसा का पालन करने की
- 7:18:52सलाह भी वर्कर्स को देते हैं। इसके बाद भी
- 7:18:55जब मिल ओनर्स नहीं मानते तो वर्कर्स का
- 7:18:57मनोबल बढ़ाने के लिए गांधी जी खुद आमरण
- 7:19:00अनशन पर बैठ जाते हैं। यह पहला मौका था जब
- 7:19:03इंडिया में किसी पॉलिटिकल कॉज के लिए
- 7:19:06गांधीजी हंगर स्ट्राइक करते हैं। गांधी जी
- 7:19:08के अनशन का असर मिल ओनर्स पर भी होता है
- 7:19:11और फाइनली मिल ओनर्स इशू को ट्राइबनल के
- 7:19:14सामने रखने के लिए मान जाते हैं। हड़ताल
- 7:19:17वापस ले ली जाती है और ट्राइबनल वर्कर्स
- 7:19:20की 35% वेज ह की डिमांड को मान लिया जाता
- 7:19:23है। अहमदाबाद स्ट्राइक के दौरान ही गांधी
- 7:19:27जी को खेड़ा आने का इनविटेशन मिल जाता है।
- 7:19:30यहां पर 1918 में ड्राउट की वजह से
- 7:19:33किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी। रेवेन्यू
- 7:19:35कोड में प्रोविजन था कि नॉर्मल प्रोड्यूस
- 7:19:38की तुलना में अगर 1/4 से भी कम की पैदावार
- 7:19:41होती है तो किसानों का लगान माफ किया जा
- 7:19:44सकता है। किसानों की एक ऑर्गेनाइजेशन
- 7:19:46गुजरात सभा ब्रिटिश अथॉरिटीज के पास
- 7:19:49पिटीशन भेजती है कि साल 1919 के लिए
- 7:19:53रेवेन्यू असेसमेंट को सस्पेंड कर दिया
- 7:19:55जाए। लेकिन गवर्नमेंट कुछ भी सुनने के लिए
- 7:19:57तैयार नहीं थी। वह यहां तक कह देती है कि
- 7:20:00अगर किसान टैक्स नहीं देंगे तो उनकी
- 7:20:03प्रॉपर्टी ज्त कर ली जाएगी। खेड़ा में
- 7:20:06गांधी जी का साथ देने के लिए वल्लभ भाई
- 7:20:08पटेल, नरहरी पारिक, मोहन लाल पांड्या और
- 7:20:11रविशंकर व्यास जैसे लीडर्स मौजूद थे। यह
- 7:20:14लोग गांव-गांव जाकर किसानों को ऑर्गेनाइज
- 7:20:17करते हैं और उन्हें बताते हैं कि क्या
- 7:20:19करना है। खेड़ा सत्याग्रह में टैक्सेस के
- 7:20:22नॉन पेमेंट का डिसीजन लिया गया था। इस
- 7:20:25सत्याग्रह के दौरान किसानों ने शानदार
- 7:20:27अनुशासन और एकता का परिचय दिया था।
- 7:20:32टैक्स पे ना करने की स्थिति में जब
- 7:20:34गवर्नमेंट किसानों की पर्सनल प्रॉपर्टी,
- 7:20:36जमीन एटसेट्रा को ज्त करना शुरू कर देती
- 7:20:38है, तब भी किसान सरदार पटेल का साथ नहीं
- 7:20:41छोड़ते और फर्स्ट नॉन कोऑपरेशन आंदोलन में
- 7:20:44बने रहते हैं। आखिर में गवर्नमेंट किसानों
- 7:20:47के साथ समझौते के लिए मान जाती है। साल
- 7:20:501919 के लिए टैक्स को सस्पेंड कर दिया
- 7:20:53जाता है और किसानों की जो भी प्रॉपर्टी
- 7:20:56सीज की गई थी, वह उन्हें लौटा दी जाती है।
- 7:20:59इस तरह चंपारण, अहमदाबाद और खेड़ा में
- 7:21:02गांधी जी लोगों की समस्या सुलझाने में
- 7:21:05कामयाब होते हैं और किसानों और वर्कर्स के
- 7:21:07बीच अपनी एक पहचान बना लेते हैं। इन लोकल
- 7:21:11लेवल इवेंट्स के बाद अब बारी थी एक ऑल
- 7:21:13इंडिया मूवमेंट की। गांधी जी का पहला ऑल
- 7:21:16इंडिया लेवल का आंदोलन कौन सा था और वह
- 7:21:19किस तरह से होता है, आइए जानते हैं।
- 7:21:23रेलेट सत्याग्रह एंड जलियांवाला बाग
- 7:21:26मैसकर।
- 7:21:29दोस्तों गांधी जी को उम्मीद थी कि वर्ल्ड
- 7:21:32वॉर के एंड होने पर ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 7:21:34इंडिया में जरूर कुछ रिफॉर्म्स लेकर आएगी।
- 7:21:37लेकिन होता इसके उल्टा है। इंडियंस को
- 7:21:39कंसेशंस की जगह मार्च 1919 में रेलेट एक्ट
- 7:21:43का तोहफा मिलता है। आइए रेट एक्ट को थोड़ा
- 7:21:46डिटेल में समझते हैं। वर्ल्ड वॉर के दौरान
- 7:21:50इंडियन रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज को सप्रेस
- 7:21:52करने के लिए ब्रिटिशर्स डिफेंस ऑफ इंडिया
- 7:21:55एक्ट 1915 लेकर आए थे। यह एक इमरजेंसी
- 7:21:58क्रिमिनल लॉ था। मतलब वॉर जैसी इमरजेंसी
- 7:22:02सिचुएशन के दौरान किसी भी तरह की
- 7:22:04रेवोल्यूशनरी एक्टिविटी को रोकने के लिए
- 7:22:06एक हार्श लॉ था। यह एक्ट वर्ल्ड वॉर के
- 7:22:10खत्म होने के 6 महीने बाद तक के लिए लागू
- 7:22:12किया गया था। फर्स्ट वर्ल्ड वॉर नवंबर
- 7:22:151918 में खत्म हो चुका था। इसका मतलब था
- 7:22:18अब 6 महीने बाद डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट को
- 7:22:21भी हटाया जाना था। लेकिन ब्रिटिशर्स को डर
- 7:22:24था कि इस एक्ट को हटाने के बाद इंडियन
- 7:22:27नेशनलिस्ट और रेवोल्यूशनरीज की एक्टिविटीज
- 7:22:30को कंट्रोल करना काफी मुश्किल हो जाएगा।
- 7:22:32इसीलिए सर सिडनी रेट के अंडर में एक कमेट
- 7:22:36बनाई गई जिसका काम था इंडिया की सिचुएशन
- 7:22:39को इवैल्यूएट करना और लॉ में चेंजेस
- 7:22:42सजेस्ट करना।
- 7:22:44इस कमेटी ने इंडिया में मिलिटेंट
- 7:22:46नेशनलिज्म को कंट्रोल करने के लिए डिफेंस
- 7:22:49ऑफ इंडिया एक्ट को इनडेफिनेट टाइम के लिए
- 7:22:51एक्सटेंड करने का रेकमेंडेशन दिया। यही
- 7:22:54एक्ट फिर रेलेट एक्ट के नाम से जाना जाता
- 7:22:57है। हालांकि इसका ऑफिशियल नाम एनार्किकल
- 7:23:00एंड रेवोल्यूशनरी क्राइम्स एक्ट 1919 है।
- 7:23:03इस एक्ट का एम था ब्रिटिशर्स के खिलाफ
- 7:23:06किसी भी कंस्परेसी को शुरू होने से पहले
- 7:23:09ही खत्म कर देना। इसके प्रोविजंस के
- 7:23:12अनुसार पुलिस बिना किसी वारंट के किसी भी
- 7:23:15जगह को सर्च कर सकती थी। इसके अलावा शक के
- 7:23:18आधार पर किसी को भी 2 साल के लिए बिना
- 7:23:21किसी ट्रायल के जेल में डाला जा सकता था।
- 7:23:23स्पेशल कोर्ट बनाए गए रेट एक्ट से रिलेटेड
- 7:23:27जिसमें तीन जज की बेंच फैसला करती थी और
- 7:23:29इनके फैसले के खिलाफ किसी भी तरह की अपील
- 7:23:32नहीं की जा सकती थी। इसलिए इस एक्ट को नो
- 7:23:36अपील, नो दलील कानून भी कहा जाने लगा।
- 7:23:39गांधी जी इसे एक काला कानून कहते हैं और
- 7:23:42इसके अगेंस्ट सत्याग्रह शुरू करने का
- 7:23:44डिसीजन लेते हैं। उन्होंने 24 फरवरी 199
- 7:23:48में बॉम्बे में सत्याग्रह सभा शुरू की।
- 7:23:51आंदोलन को ऑर्गेनाइज करने के लिए गांधी जी
- 7:23:54होम रूल लीग जैसे ऑर्गेनाइजेशन को भी अपने
- 7:23:56साथ जोड़ते हैं। इसके बाद जगह-जगह
- 7:23:59सत्याग्रह सभा की गई और फिर फैसला किया
- 7:24:02गया कि 6th अप्रैल 1919 को रेलेट एक्ट के
- 7:24:06विरोध में पूरे देश में हड़ताल की जाएगी।
- 7:24:09सब कुछ प्लान के हिसाब से ही हो रहा था कि
- 7:24:12तभी खबर आती है कि ब्रिटिशर्स ने पंजाब के
- 7:24:15दो बड़े लीडर्स सैफुद्दीन किचलू और डॉक्टर
- 7:24:18सत्यपाल को अरेस्ट कर लिया है। यह 9th
- 7:24:21अप्रैल 1919 की बात थी। इस खबर के बाद
- 7:24:24पंजाब में माहौल खराब होने में देर नहीं
- 7:24:26लगती। लोग अपने लीडर्स की अरेस्ट के बारे
- 7:24:29में सुनकर गुस्से में आ जाते हैं और
- 7:24:31जगह-जगह हिंसक प्रदर्शन होने लगता है।
- 7:24:34भीड़ गवर्नमेंट प्रॉपर्टी को अपना निशाना
- 7:24:37बनाने लगती है और पूरा पंजाब गुस्से की आग
- 7:24:40में जलने लगता है। सिचुएशन को कंट्रोल
- 7:24:43करने के लिए 11th अप्रैल को पंजाब में
- 7:24:45मार्शल लॉ लगा दिया जाता है और पंजाब की
- 7:24:48जिम्मेदारी जनरल डायर को दे दी जाती है।
- 7:24:51इन सभी बातों से अनजान अमृतसर और उसके
- 7:24:54आसपास के गांव के लोग 13th अप्रैल को
- 7:24:57बैसाखी के पर्व पर जलियांवाला बाग में
- 7:25:00इकट्ठा होते हैं। बड़ी संख्या में लोगों
- 7:25:02के इकट्ठे होने की खबर मिलने पर जनरल डायर
- 7:25:06अपने ट्रूप्स को ओपन फायर करने का आर्डर
- 7:25:08दे देते हैं। फायर करने से पहले पब्लिक को
- 7:25:11किसी भी तरह की वार्निंग भी नहीं दी जाती।
- 7:25:14इसमें हजारों निहत्त्थे लोग मारे जाते
- 7:25:17हैं। इस मांस मैसकर को जलियांवाला बाग
- 7:25:20ट्रेजडी के नाम से जाना जाता है। दूसरी
- 7:25:23तरफ सत्याग्रह के दौरान देश में फैले
- 7:25:26वायलेंस से गांधी जी बहुत निराश हो जाते
- 7:25:29हैं। खासकर बंगाल, पंजाब और गुजरात में
- 7:25:32बहुत ज्यादा हिंसा हो जाती है। हिंसा की
- 7:25:35यह घटनाएं गांधी जी को बहुत आहत कर देती
- 7:25:37हैं। इसलिए 18th अप्रैल 1919 को गांधी जी
- 7:25:42इस आंदोलन को वापस ले लेते हैं और वह इस
- 7:25:45सत्याग्रह को एक हिमालयन ब्लंडर यानी
- 7:25:48हिमालय जितनी बड़ी गलती बताते हैं।
- 7:25:53कंक्लूजन
- 7:25:56दोस्तों इस तरह गांधी जी का पहला ऑल
- 7:25:59इंडिया लेवल का मूवमेंट एक तरह से फेल हो
- 7:26:01जाता है। गांधी जी को रियलाइज होता है कि
- 7:26:04किसी भी बड़े आंदोलन को शुरू करने से पहले
- 7:26:07उन्हें लोगों को अहिंसा और सत्याग्रह में
- 7:26:10ट्रेन करने की जरूरत है और इसके लिए
- 7:26:13उन्हें कांग्रेस जैसे बड़े ऑर्गेनाइजेशन
- 7:26:15की मदद भी चाहिए होगी। इसलिए अपना अगला
- 7:26:18आंदोलन गांधी जी कांग्रेस के बैनर में ही
- 7:26:21शुरू करते हैं और वो आंदोलन था नॉन
- 7:26:23कोऑपरेशन यानी कि असहयोग आंदोलन। इस
- 7:26:27आंदोलन के बारे में हम अपनी नेक्स्ट
- 7:26:30वीडियो में चर्चा करेंगे। खिलाफत एंड नॉन
- 7:26:32कोऑपरेशन मूवमेंट। दोस्तों, आज हम बात
- 7:26:36करने वाले हैं इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल के
- 7:26:38एक ऐसे आंदोलन की जो सिर्फ जन आंदोलन ही
- 7:26:41नहीं बल्कि कई मायनों में एक इंपॉर्टेंट
- 7:26:43टर्निंग पॉइंट भी था। इसे हम खिलाफत एंड
- 7:26:46नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट के नाम से जानते
- 7:26:48हैं। तो आइए डिटेल में समझते हैं खिलाफत
- 7:26:52एंड नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट को। बैकग्राउंड
- 7:26:55एंड कॉजेस ऑफ द मूवमेंट। दोस्तों, 1919
- 7:26:59आते-आते देश में एक बड़े आंदोलन के लिए
- 7:27:02माहौल तैयार होने लगा था। इसके पीछे कई
- 7:27:05कारण थे। आइए एक-एक करके इनके बारे में
- 7:27:08जानते हैं। सबसे पहला कारण देश की बिगड़ती
- 7:27:11इकोनॉमिक सिचुएशन को माना जा सकता है।
- 7:27:14युद्ध के दौरान चीजों के दाम बहुत ज्यादा
- 7:27:17बढ़ चुके थे। साथ ही ब्रिटिश गवर्नमेंट ने
- 7:27:19टैक्सेस और रेंट्स में भी बढ़ोतरी कर दी
- 7:27:22थी। जिसकी वजह से सोसाइटी का लगभग हर
- 7:27:24सेक्शन परेशान था। इस तरह इकोनॉमिक
- 7:27:27हार्डशिप्स ने लोगों में एंटी ब्रिटिश
- 7:27:29एटीट्यूड को और भी मजबूत कर दिया था। इसके
- 7:27:33अलावा अपनी पिछली वीडियो में हम रट एक्ट
- 7:27:36और जलियांवाला बाग हत्याकांड के बारे में
- 7:27:38तो डिस्कस कर ही चुके हैं। यहां अंग्रेजी
- 7:27:41हुकूमत का एक बहुत ही घिनौना चेहरा सामने
- 7:27:44आता है। इन घटनाओं की वजह से जनता में
- 7:27:47ब्रिटिशर्स के खिलाफ आक्रोश की एक प्रबल
- 7:27:49अग्नि फैल गई थी। इसके बाद जलियांवाला बाग
- 7:27:52हत्याकांड की जांच करने के लिए बनाई गई
- 7:27:55हंटर कमेटी आग में घी डालने जैसा काम करती
- 7:27:58है। यह अपनी रिपोर्ट में जनरल डायर के
- 7:28:01एक्शन को सही बताती है। इसके अलावा
- 7:28:04ब्रिटिश संसद और वहां की जनता भी जनरल
- 7:28:07डायर के सपोर्ट में खड़ी दिखती है। इस सब
- 7:28:10ने इंडिया के लोगों के जख्मों पर जैसे नमक
- 7:28:12लगा दिया था। यही वजह थी कि लोग अब
- 7:28:15अंग्रेजों से सीधी टक्कर लेने के लिए
- 7:28:17तैयार दिख रहे थे और आखिर में 1919 में आए
- 7:28:21मॉन्टग्यू चेम्सफर्ड रिफॉर्म्स भी इंडियंस
- 7:28:24की सेल्फ गवर्नमेंट की डिमांड को
- 7:28:25सेटिस्फाई करने में सफल नहीं होते। फर्स्ट
- 7:28:28वर्ल्ड वॉर में लॉयल्टी दिखाने के बाद
- 7:28:30काफी लोगों को उम्मीद थी कि ब्रिटिश
- 7:28:32रिफॉर्म्स और डीप और इंडियंस के लिए
- 7:28:34बेनिफिशियल रहेंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं
- 7:28:37होता। इसके बाद लोगों को भरोसा हो जाता है
- 7:28:39कि अंग्रेज सीधी तरह से तो इंडियंस की कोई
- 7:28:42भी डिमांड नहीं मानने वाले। इसलिए एक बड़े
- 7:28:45आंदोलन की सख्त जरूरत है और इसी समय
- 7:28:48खिलाफत इशू सामने आ जाता है जिसके अराउंड
- 7:28:51आगे चलकर नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट डेवप होता
- 7:28:54है। तो आइए खिलाफत इशू को डिटेल में समझते
- 7:28:57हैं। द खिलाफत इशू हुआ यह था दोस्तों
- 7:29:01फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के दौरान हारने वाले
- 7:29:03देशों में ऑटोमन टर्की भी शामिल था और जीत
- 7:29:06हुई थी ब्रिटेन और उसके एलयस की। सुनने
- 7:29:09में यह आ रहा था कि ऑटोमन टर्की के साथ एक
- 7:29:12हारश ट्रीटी साइन होने जा रही है। आप सोच
- 7:29:15रहे होंगे कि ऑटोमन टर्की से इंडियन नेशनल
- 7:29:18मूवमेंट का क्या कनेक्शन हो सकता है?
- 7:29:20कनेक्शन यह है दोस्तों कि पूरी दुनिया के
- 7:29:22मुस्लिम्स जिसमें इंडिया में रहने वाले
- 7:29:24मुस्लिम्स भी शामिल थे। टर्की के सुल्तान
- 7:29:26को अपना स्पिरिचुअल लीडर यानी कि खलीफा
- 7:29:29मानते थे। इसलिए उनकी सिंपथीज़ टर्की के
- 7:29:32साथ थी। लेकिन वॉर के बाद टर्की से उसका
- 7:29:35बड़ा हिस्सा छीन लिया गया था। और खलीफा को
- 7:29:38भी पावर से हटाया जा रहा था। इसी बात से
- 7:29:41दुनिया भर में रह रही मुस्लिम पॉपुलेशन
- 7:29:43गुस्से में थी। इंडिया के मुस्लिम लीडर्स
- 7:29:46भी ब्रिटिशर्स के सामने कुछ मांग रखते
- 7:29:48हैं। जिसमें पहली मांग थी कि मुस्लिम्स की
- 7:29:51सेक्रेट प्लेसेस पर खलीफा का कंट्रोल बने
- 7:29:54रहने दिया जाए। और दूसरी थी टेरिटोरियल
- 7:29:57अरेंजमेंट्स के बाद खलीफा के पास सफिशिएंट
- 7:30:00टेरिटरीज रहने दी जाएं। ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 7:30:02पर प्रेशर बनाने के लिए 1919 की शुरुआत
- 7:30:06में अली ब्रदर्स, मौलाना आजाद, अजमल खान
- 7:30:09और हसरत मोहानी की लीडरशिप में एक खिलाफत
- 7:30:12कमेटी फॉर्म की जाती है। इस तरह देशव्यापी
- 7:30:15आंदोलन के लिए जमीन तैयार हो जाती है।
- 7:30:18डेवलपमेंट ऑफ द खिलाफत नॉन कोऑपरेशन
- 7:30:21प्रोग्राम। दोस्तों, शुरुआत में तो खिलाफत
- 7:30:23लीडर्स सिर्फ मीटिंग्स, पिटीशंस और
- 7:30:26डेपुटेशंस जैसे मेथड्स को ही यूज करते
- 7:30:28हैं। लेकिन फिर इसमें एक मिलिटेंट ट्रेंड
- 7:30:30इमर्ज होने लगता है। जो एक्टिव एजिटेशन के
- 7:30:33पक्ष में था। यह लोग गांधी जी को अपने साथ
- 7:30:36जोड़ने का फैसला लेते हैं और नवंबर 1919
- 7:30:39में गांधी जी को ऑल इंडिया खिलाफत कमेटी
- 7:30:42का प्रेसिडेंट बना दिया जाता है। गांधीजी
- 7:30:45खिलाफत इशू पर नॉन कोऑपरेशन प्रोग्राम
- 7:30:47शुरू करने का सुझाव देते हैं। फिर नवंबर
- 7:30:501919 में ही दिल्ली में ऑल इंडिया खिलाफत
- 7:30:53कॉन्फ्रेंस में ब्रिटिश गुड्स को बॉयकॉट
- 7:30:55करने की कॉल दी जाती है। इसके साथ ही
- 7:30:58खिलाफत लीडर्स साफ कर देते हैं कि जब तक
- 7:31:01टर्की के साथ फेवरेबल टर्म्स पर ट्रीटी
- 7:31:03साइन नहीं होती, तब तक गवर्नमेंट के साथ
- 7:31:06हर तरह का सहयोग रोक दिया जाएगा। खिलाफत
- 7:31:08इशू में गांधी जी को ब्रिटिश गवर्नमेंट के
- 7:31:10अगेंस्ट एक यूनाइटेड मास मूवमेंट शुरू
- 7:31:13करने की ओपोरर्चुनिटी नजर आती है। इसके
- 7:31:16लिए उन्हें कांग्रेस के सपोर्ट की भी
- 7:31:17जरूरत थी। चलिए जानते हैं कि कांग्रेस
- 7:31:20कैसे इस मूवमेंट के साथ जोड़ती है।
- 7:31:23कांग्रेस स्टैंड ऑन खिलाफत क्वेश्चन।
- 7:31:26दोस्तों खिलाफत के इशू पर मूवमेंट शुरू
- 7:31:28करने को लेकर कांग्रेस एकमत नहीं थी। बहुत
- 7:31:31से लीडर्स को लगता था कि रिलीजियस इशू को
- 7:31:34नेशनल मूवमेंट से नहीं जोड़ना चाहिए। साथ
- 7:31:37ही कुछ लीडर्स गांधी जी के नॉन कोऑपरेशन
- 7:31:40मूवमेंट से भी सहमत नहीं थे। उनके मन में
- 7:31:43सत्याग्रह को लेकर भी कुछ डाउट्स थे।
- 7:31:46लेकिन गांधी जी सभी लीडर्स को कन्विंस
- 7:31:49करने में कामयाब रहते हैं और मूवमेंट के
- 7:31:51लिए कांग्रेस का अप्रूवल मिल जाता है।
- 7:31:54इसके लिए सितंबर 1920 में
- 7:31:56में कांग्रेस का स्पेशल सेशन ऑर्गेनाइज
- 7:31:59किया जाता है। यहां कांग्रेस पंजाब रोंग्स
- 7:32:02और खिलाफत इशू पर नॉन कोऑपरेशन प्रोग्राम
- 7:32:04चलाने का अप्रूवल दे देती है। इसके बाद
- 7:32:08दिसंबर 1920 में नागपुर के रेगुलर सेशन
- 7:32:11में कांग्रेस नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट को
- 7:32:14फॉर्मली एंडोर्स कर देती है। इस सेशन में
- 7:32:17कांग्रेस के कॉन्स्टिट्यूशन में भी बदलाव
- 7:32:19किया जाता है। कांग्रेस का गोल
- 7:32:20कॉन्स्टिट्यूशनल मींस के द्वारा सेल्फ
- 7:32:23गवर्नमेंट अटेन करने की जगह पीसफुल और
- 7:32:26लेजिटमेट मींस से स्वराज अटेन करना कर
- 7:32:29दिया जाता है। इस तरह तीन डिमांड्स के साथ
- 7:32:32नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट शुरू किया जाता है।
- 7:32:35पहली डिमांड थी टर्की के साथ फेवरेबल
- 7:32:38ट्रीटी। दूसरी डिमांड थी पंजाब रोंग्स का
- 7:32:41रिड्रेसल और तीसरी डिमांड थी स्वराज की
- 7:32:44स्थापना। गांधी जी डिक्लेअ करते हैं कि
- 7:32:47अगर पूरी तरह नॉन कोऑपरेशन प्रोग्राम को
- 7:32:50फॉलो किया जाएगा तो एक साल में ही स्वराज
- 7:32:53मिल जाएगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह
- 7:32:55सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट शुरू कर देंगे।
- 7:32:58देखते ही देखते आंदोलन पूरे देश में फैलने
- 7:33:01लगता है। तो आइए आंदोलन के स्प्रेड और इस
- 7:33:04दौरान होने वाली एक्टिविटीज को समझते हैं।
- 7:33:09स्प्रेड ऑफ द मूवमेंट एंड पीपल्स
- 7:33:11पार्टिसिपेशन।
- 7:33:14दोस्तों नॉन कोऑपरेशन प्रोग्राम में
- 7:33:16गवर्नमेंट स्कूल्स और कॉलेजेस, लॉ
- 7:33:19कोर्ट्स, लेजिसलेटिव काउंसिल्स, फॉरेन
- 7:33:21क्लॉथ एटसेट्रा का बॉयकॉट करना शामिल था।
- 7:33:24आंदोलन को घर-घर तक पहुंचाने के लिए गांधी
- 7:33:27जी अली ब्रदर्स के साथ नेशन वाइड टूर करते
- 7:33:31हैं। हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स
- 7:33:33गवर्नमेंट स्कूल्स और कॉलेजेस छोड़कर
- 7:33:35नेशनल स्कूल्स और कॉलेजेस ज्वाइन कर लेते
- 7:33:38हैं। इस दौरान बहुत से एजुकेशनल
- 7:33:40इंस्टीटशंस ऑर्गेनाइज किए गए। जैसे कि
- 7:33:43अलीगढ़ में जामिया मेलिया, काशी
- 7:33:45विद्यापीठ, गुजरात विद्यापीठ और बिहार
- 7:33:47विद्यापीठ। बहुत सारे लॉयर्स अपनी
- 7:33:50प्रैक्टिस छोड़ देते हैं। जिसमें मोतीलाल
- 7:33:52नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, सीआरदास, वल्लभ
- 7:33:55भाई पटेल और राजेंद्र प्रसाद जैसे नाम
- 7:33:58शामिल थे। जगह-जगह विदेशी कपड़ों की होली
- 7:34:01जलाई जाने लगती है और इनका इंपोर्ट लगभग
- 7:34:04आधा हो जाता है। तिलक स्वराज फंड में ₹1
- 7:34:07करोड़ कलेक्ट हो जाते हैं। जुलाई 1921 में
- 7:34:11अली ब्रदर्स मुस्लिम्स को आर्मी से रिजाइन
- 7:34:14करने के लिए कहते हैं। इसके लिए सितेंंबर
- 7:34:16में उन्हें अरेस्ट कर लिया जाता है। फिर
- 7:34:18गांधी जी उनकी बात को दोहराते हैं और लोकल
- 7:34:21कांग्रेस कमिटीज को इसके ऊपर रेजोल्यूशन
- 7:34:24पास करने के लिए कहते हैं। असम में टी
- 7:34:27प्लांटेशंस, स्टीमर सर्विज और असम बंगाल
- 7:34:29रेल्वेज में हड़ताल ऑर्गेनाइज की जाती
- 7:34:31हैं। नवंबर 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स की
- 7:34:35इंडिया विजिट पर जगह-जगह हड़ताल और
- 7:34:38डेमोंस्ट्रेशंस ऑर्गेनाइज होते हैं। नॉन
- 7:34:40कोऑपोरेशन मूवमेंट के दौरान बहुत से लोकल
- 7:34:42मूवमेंट्स भी शुरू होते हैं। जैसे कि यूपी
- 7:34:45में अवध किसान मूवमेंट और एका मूवमेंट,
- 7:34:48मालाबार में मोपला रिव्ट और पंजाब में सिख
- 7:34:51हेजिटेशन। इस आंदोलन में समाज के लगभग हर
- 7:34:55वर्ग ने पार्टिसिपेट किया था। फिर चाहे वह
- 7:34:57मिडिल क्लास हो, बिजनेस क्लास हो, किसान
- 7:35:00हो, स्टूडेंट्स हो या फिर वुमेन। इसके साथ
- 7:35:03ही पहली बार मुस्लिम्स बड़ी संख्या में
- 7:35:05नेशनल मूवमेंट से जुड़े थे। लेकिन इतने
- 7:35:08बड़े आंदोलन के बाद भी ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 7:35:11झुकने को तैयार नहीं थी। वह आंदोलन को
- 7:35:13सप्रेस करना शुरू कर देते हैं। पब्लिक
- 7:35:16मीटिंग्स पर बैन लगा दिया जाता है। प्रेस
- 7:35:18को सेंसर किया जाने लगता है और गांधी जी
- 7:35:21को छोड़कर लगभग सभी लीडर्स को अरेस्ट कर
- 7:35:23लिया जाता है। गवर्नमेंट के रिप्रेशन के
- 7:35:26बाद गांधी जी पर दबाव बनता है कि वह
- 7:35:28आंदोलन का नेक्स्ट फेज यानी कि सिविल
- 7:35:30डिसओबिडियंस शुरू कर दें।
- 7:35:331 फरवरी 1922 को गांधी जी डिक्लेअर करते
- 7:35:36हैं कि अगर पॉलिटिकल प्रिजनर्स को रिहा
- 7:35:39नहीं किया गया और प्रेस पर से कंट्रोल्स
- 7:35:41नहीं हटाए गए तो वह गुजरात के बारदोली से
- 7:35:44सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट शुरू करेंगे।
- 7:35:47लेकिन इससे पहले कि गांधी जी ऐसा कुछ करते
- 7:35:49एक ऐसी घटना होती है जिसके बाद आंदोलन को
- 7:35:52ही वापस ले लिया जाता है।
- 7:35:56चौरीचौरा इंसिडेंट
- 7:35:59दोस्तों यूपी के गोरखपुर डिस्ट्रिक्ट में
- 7:36:02चौरीचौरा नाम का एक छोटा सा गांव है।
- 7:36:04इतिहास में इसे याद रखा जाता है यहां 5th
- 7:36:07फरवरी 1922 को हुई घटना की वजह से। हुआ यह
- 7:36:11था दोस्तों कि आंदोलन के दौरान यहां
- 7:36:13प्रदर्शन कर रहे लोगों के लीडर को पुलिस
- 7:36:15ने काफी मारा था। इससे गुस्से में आए लोग
- 7:36:18पुलिस स्टेशन के सामने प्रोटेस्ट करते
- 7:36:20हैं। पुलिस प्रोटेस्ट कर रहे लोगों के ऊपर
- 7:36:23ओपन फायर करना शुरू कर देती है। इससे
- 7:36:26लोगों में गुस्से की आग और ज्यादा भड़क
- 7:36:28जाती है और वह पुलिस पर हमला बोल देते
- 7:36:30हैं। पुलिसमैन बचने के लिए स्टेशन के अंदर
- 7:36:33छुप जाते हैं। तभी भीड़ स्टेशन को ही आग
- 7:36:36लगा देती है। इस हिंसा में 22 पुलिस वाले
- 7:36:39मारे जाते हैं। हिंसा की इस घटना के बारे
- 7:36:42में सुनने के बाद गांधी जी तुरंत आंदोलन
- 7:36:45को वापस ले लेते हैं। गांधी जी के इस
- 7:36:48फैसले पर बहुत से नेशनलिस्ट लीडर्स जैसे
- 7:36:50कि सीआरदास, मोतीलाल नेहरू, सुभाष बोस
- 7:36:53इत्यादि आश्चर्य जताते हैं। लेकिन गांधी
- 7:36:56जी सिर्फ एक घटना की वजह से पूरे आंदोलन
- 7:37:00को क्यों वापस ले लेते हैं? इसे समझना
- 7:37:02जरूरी है।
- 7:37:05व्हाई गांधीजी विड्र द मूवमेंट?
- 7:37:09दोस्तों गांधी जी को लगता था कि लोग अभी
- 7:37:12पूरी तरह से अहिंसा के मेथड को नहीं समझ
- 7:37:15पाए हैं। चौरीचौरा जैसे इंसिडेंट्स आगे
- 7:37:18चलकर आंदोलन को और ज्यादा हिंसक बना सकते
- 7:37:21थे और एक वायलेंट मूवमेंट को ब्रिटिश
- 7:37:24गवर्नमेंट बहुत आसानी से सप्रेस कर सकती
- 7:37:26थी। इसके साथ ही आंदोलन में अब थकावट के
- 7:37:29साइन भी नजर आने लगे थे और यह स्वाभाविक
- 7:37:31भी था क्योंकि किसी भी आंदोलन को बहुत
- 7:37:34लंबे समय तक हाई पिच पर सस्टेन करना आसान
- 7:37:37नहीं होता। ब्रिटिश गवर्नमेंट भी किसी भी
- 7:37:40तरह की नेगोशिएशंस करने के मूड में नजर
- 7:37:42नहीं आ रही थी। इसलिए सभी बातों को ध्यान
- 7:37:45में रखकर गांधी जी आंदोलन को वापस लेने का
- 7:37:48फैसला करते हैं। इसके बाद मार्च 1922 में
- 7:37:51सरकार के खिलाफ असंतोष फैलाने के चार्ज पर
- 7:37:54गांधी जी को अरेस्ट कर लिया जाता है और
- 7:37:57उन्हें छ साल की सजा सुनाई जाती है। कुछ
- 7:38:00समय बाद खिलाफत इशू भी अपनी सिग्निफिकेंस
- 7:38:03खो देता है और इररेलेवेंट बन जाता है।
- 7:38:06क्योंकि 1924 में टर्की में एक नेशनल
- 7:38:09रेवोल्यूशन होता है और वहां मोनार्की या
- 7:38:12खिलाफत को अबॉलिश कर दिया जाता है। इसके
- 7:38:14बाद इंडिया में भी खिलाफत मूवमेंट डाई
- 7:38:17डाउन हो जाता है। इवैल्यूएशन ऑफ खिलाफत
- 7:38:20नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट।
- 7:38:23दोस्तों नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट अपने स्वराज
- 7:38:26के गोल को तो अचीव नहीं कर पाता लेकिन फिर
- 7:38:29भी यह आंदोलन एक फेलियर नहीं माना जा
- 7:38:31सकता। क्योंकि इसने बहुत कुछ अचीव किया
- 7:38:34था। इस आंदोलन के थ्रू नेशनलिस्ट
- 7:38:37सेंटीमेंट्स देश के कोने-कोने तक पहुंच गए
- 7:38:39थे। बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ते हैं
- 7:38:42और यह सही मायनों में एक मास मूवमेंट बनता
- 7:38:45है। आंदोलन में मिडिल क्लास के कंपैरिजन
- 7:38:48में पेजेंट्स और वर्कर्स का पार्टिसिपेशन
- 7:38:50ज्यादा रहता है। इसके अलावा मद्रास को
- 7:38:53छोड़कर काउंसिल इलेक्शन का बॉयकॉट भी काफी
- 7:38:55हद तक सक्सेसफुल रहता है। पोलिंग एवरेज
- 7:38:58सिर्फ 5 से 8% ही रहता है। इकोनॉमिक
- 7:39:02बॉयकॉट आंदोलन का सबसे इंपॉर्टेंट फैक्टर
- 7:39:04था और यह बहुत कामयाब भी रहता है। फॉरेन
- 7:39:07क्लॉथ के इंपोर्ट्स की वैल्यू 19021 में
- 7:39:11₹10 मिलियन से घटकर 1921 222 में सिर्फ
- 7:39:16₹520 मिलियन ही रह जाती है। नॉन कोऑपरेशन
- 7:39:20के साथ गांधी जी के कुछ सोशल मूवमेंट्स भी
- 7:39:23जुड़े हुए थे। जैसे कि टपरेंस या एंटी
- 7:39:26लीकर कैंपेन इनका भी व्यापक असर देखने को
- 7:39:30मिलता है। पंजाब, मद्रास, बिहार और उड़ीसा
- 7:39:33में लकर एक्साइज रेवेन्यू में
- 7:39:35सिग्निफिकेंस गिरावट होती है। सबसे जरूरी
- 7:39:38बात इस आंदोलन में भाग लेने के बाद लोगों
- 7:39:41का कॉन्फिडेंस बढ़ जाता है और वह ब्रिटिश
- 7:39:43रूल का सामना करने के लिए तैयार होते हैं।
- 7:39:46हम कह सकते हैं कि नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट
- 7:39:49इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल का टर्निंग पॉइंट
- 7:39:51साबित होता है। यहां से मास मूवमेंट की
- 7:39:54शुरुआत होती है। यह आंदोलन आगे होने वाले
- 7:39:57आंदोलन की नीव तैयार करने का काम भी करता
- 7:40:00है। रेवोल्यूशनरी मूवमेंट सेकंड फेज।
- 7:40:04दोस्तों, आज हम बात करने वाले हैं इंडिया
- 7:40:06में रेवोल्यूशनरी मूवमेंट के सेकंड फेज
- 7:40:09की। फर्स्ट फेज को हम अपनी वीडियो में
- 7:40:11पहले ही डिस्कस कर चुके हैं। आज हम
- 7:40:14देखेंगे कि रेवोल्यूशनरी मूवमेंट के सेकंड
- 7:40:16फेज की शुरुआत कब और कैसे होती है और साथ
- 7:40:20ही फर्स्ट और सेकंड फेज के बीच के
- 7:40:22डिफरेंसेस को भी समझने की कोशिश करेंगे।
- 7:40:25तो आइए शुरू करते हैं इंट्रोडक्शन।
- 7:40:28दोस्तों गांधी जी और सीआर दास के कहने पर
- 7:40:31बहुत से रेवोल्यूशनरी ग्रुप्स नॉन
- 7:40:33कोऑपरेशन मूवमेंट में हिस्सा लेते हैं।
- 7:40:36लेकिन जब अचानक से चौरीचौरा के बाद 1922
- 7:40:39में यह आंदोलन वापस ले लिया जाता है तब यह
- 7:40:42लोग बहुत निराश हो जाते हैं। इंडियन नेशनल
- 7:40:45कांग्रेस की लीडरशिप, स्ट्रेटजी और अहिंसा
- 7:40:47पर से इनका भरोसा ही उठ जाता है। फिर यह
- 7:40:50लोग आजादी पाने के लिए किसी दूसरे विकल्प
- 7:40:53की तलाश करने लगते हैं। अब इन्हें ना तो
- 7:40:56स्वराज के पार्लियामेंट्री वर्क में
- 7:40:58इंटरेस्ट था और ना ही नो चेंजर्स के
- 7:41:00कंस्ट्रक्टिव कामों में। इसलिए यह फिर से
- 7:41:03रेवोल्यूशनरी एक्टिविटी को रिवाइव करने का
- 7:41:05फैसला करते हैं। इस दौरान रेवोल्यूशनरी
- 7:41:08ग्रुप्स के दो सेपरेट स्टैंड्स उभरते हैं।
- 7:41:11जिसमें एक पंजाब, यूपी, बिहार के एरिया
- 7:41:14में एक्टिव था और दूसरा बंगाल में। इनके
- 7:41:17बारे में डिटेल में जानना जरूरी है।
- 7:41:19शुरुआत करते हैं पंजाब, यूपी, बिहार वाले
- 7:41:22ग्रुप से। इन पंजाब यूनाइटेड प्रोविंसेस
- 7:41:25बिहार। दोस्तों इस रीजन में रेवोल्यूशनरी
- 7:41:28एक्टिविटी को डोमिनेट करने वाले ग्रुप का
- 7:41:31नाम था हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन या
- 7:41:34आर्मी यानी कि एचआरए।
- 7:41:37एचआरए की फाउंडेशन अक्टूबर 1924 में यूपी
- 7:41:41के कानपुर डिस्ट्रिक्ट में हुई थी। इसके
- 7:41:43पीछे रामप्रसाद बिस्मिल, जोगेश चंद्र
- 7:41:46चैटर्जी और सचिंद्रनाथ सानियाल जैसे
- 7:41:48क्रांतिकारियों का योगदान था। एचआरए का एम
- 7:41:52आर्म्ड रेवोल्यूशन के जरिए कॉलोनियल
- 7:41:54गवर्नमेंट को ओवर थ्रो करना और उसकी जगह
- 7:41:57फेडरल रिपब्लिक ऑफ यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ
- 7:41:59इंडिया को इस्टैब्लिश करना था। आर्म्ड
- 7:42:02रेवोल्यूशन को ऑर्गेनाइज करने के लिए
- 7:42:04इन्हें फंड्स की जरूरत थी। इसका इंतजाम
- 7:42:07करने के लिए यह लोग ब्रिटिश ट्रेजरी को
- 7:42:09लूटने का फैसला करते हैं। और 1925 में
- 7:42:13काकोरी रॉबरी का प्लान तैयार होता है।
- 7:42:16काकोरी लखनऊ के पास एक छोटा सा स्टेशन था।
- 7:42:19जहां 9 अगस्त 1925 को यह लोग एट डाउन
- 7:42:23ट्रेन पर डाका डालते हैं और इसमें रखे
- 7:42:25रेलवे के ऑफिशियल कैश को लूट लेते हैं।
- 7:42:28लेकिन इसके बाद ब्रिटिश गवर्नमेंट इनके
- 7:42:30पीछे लग जाती है और बहुत सारे
- 7:42:32क्रांतिकारियों को अरेस्ट कर लिया जाता है
- 7:42:34जिसमें से 17 को जेल भेज दिया जाता है।
- 7:42:38चार को जीवन भर के लिए देश निकाला की सजा
- 7:42:41दी जाती है और चार क्रांतिकारियों को
- 7:42:44फांसी भी दी जाती है। यह चार क्रांतिकारी
- 7:42:47थे राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खान,
- 7:42:50रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिरी। इस तरह
- 7:42:53काकोरी रॉबरी एचआरए के लिए एक सेटबैक
- 7:42:56प्रूव होती है। बहुत सारे क्रांतिकारी एक
- 7:42:59ही झटके में नेशनल स्ट्रगल से हटा दिए
- 7:43:02जाते हैं। इस सेटबैक से उभरने के लिए युवा
- 7:43:05क्रांतिकारी एचआरए को रिऑर्गेनाइज करने का
- 7:43:07फैसला लेते हैं। सितंबर 1928 में दिल्ली
- 7:43:11के फिरोज शाह कोडला में इनकी मीटिंग होती
- 7:43:14है। जहां चंद्रशेखर आजाद की लीडरशिप में
- 7:43:17एचआरए का नाम बदलकर एचएसआरए
- 7:43:20यानी कि हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन
- 7:43:23एसोसिएशन कर दिया जाता है। इस मीटिंग में
- 7:43:26भगत सिंह, सुखदेव, भगवती चरण बोहरा, विजय
- 7:43:29कुमार सिन्हा, जयदेव कपूर जैसे युवा
- 7:43:32क्रांतिकारी नेता भी शामिल थे। एचएसआरए
- 7:43:35कलेक्टिव लीडरशिप से काम करने और सोशलिज्म
- 7:43:38को ऑफिशियल गोल बनाने का फैसला लेती है।
- 7:43:41इसके कुछ समय बाद ही अक्टूबर 1928 में
- 7:43:45एंटी साइमन कमीशन प्रोसेशन के दौरान लाठी
- 7:43:48चार्ज में लाला लाजपत राय शहीद हो जाते
- 7:43:50हैं। लाला लाजपत राय की इस तरह मृत्यु
- 7:43:53होने से क्रांतिकारियों में आक्रोश की
- 7:43:56भावना जाग जाती है। लाठी चार्ज का आर्डर
- 7:43:59ब्रिटिश सुपरिंटेंडेंट जेपी स्कॉट ने दिया
- 7:44:01था। इसलिए बदला लेने के लिए जेपी स्कॉट की
- 7:44:05हत्या का प्लान बनाया जाता है। इस प्लान
- 7:44:07में भगत सिंह के साथ चंद्रशेखर आजाद,
- 7:44:10सुखदेव और राजगुरु भी शामिल थे। यह लोग
- 7:44:13जेपी स्कॉट को गोली मारने के लिए जाते
- 7:44:15हैं। लेकिन इनके क्रांतिकारी साथी जयगोपाल
- 7:44:19स्कॉट की सही पहचान नहीं कर पाते। जिस वजह
- 7:44:22से एएसपी सोंडर्स की हत्या हो जाती है।
- 7:44:25इसके बाद इनका अगला बड़ा एक्शन होता है
- 7:44:278th अप्रैल 1929 को सेंट्रल लेजिसलेटिव
- 7:44:31असेंबली में बॉम्ब फेंकना। इसके पीछे इनका
- 7:44:34एम असेंबली में पास किया जा रहा ट्रेड
- 7:44:37डिस्प्यूट्स बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल का
- 7:44:40विरोध करना था जो सिविल राइट्स के अगेंस्ट
- 7:44:42था। बॉम्ब को हमलेस बनाया गया था और इसका
- 7:44:46मकसद भगत सिंह के शब्दों में बहरों को
- 7:44:49अपनी बात सुनाना था। बॉम्ब फेंकने के बाद
- 7:44:52भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त वहां से भागने
- 7:44:55की कोशिश नहीं करते बल्कि खुद को अरेस्ट
- 7:44:58कराते हैं। खुद को अरेस्ट कराना भी इनकी
- 7:45:01स्ट्रेटजी का हिस्सा था। यह लोग ट्रायल
- 7:45:03कोर्ट को प्रोपेगेंडा फोरम की तरह यूज
- 7:45:06करना चाहते थे। जिससे लोगों तक इनके
- 7:45:09मूवमेंट और आईडियोलॉजी की जानकारी पहुंच
- 7:45:11जाए और भी बहुत सारे क्रांतिकारियों को
- 7:45:14पुलिस द्वारा अरेस्ट कर लिया जाता है। जेल
- 7:45:17की खराब कंडीशंस के विरोध में
- 7:45:18क्रांतिकारियों द्वारा भूख हड़ताल भी की
- 7:45:21जाती है। यह लोग डिमांड रखते हैं कि इनके
- 7:45:24साथ पॉलिटिकल प्रिजनर्स जैसा बर्ताव किया
- 7:45:26जाए। भूख हड़ताल के 64वें दिन जतिन दास
- 7:45:30नाम के क्रांतिकारी शहीद हो जाते हैं।
- 7:45:33चंद्रशेखर आजाद भी जेल से बाहर थे और
- 7:45:36दिसंबर 1929 में दिल्ली के पास वायसरॉय
- 7:45:39लॉर्ड अर्विन की ट्रेन को बम से उड़ाने की
- 7:45:42कोशिश में भी शामिल थे। 2 साल तक
- 7:45:44ब्रिटिशर्स की नाक में दम करने के बाद
- 7:45:47फरवरी 1931 में एक उन्हीं के साथी उन्हें
- 7:45:51धोखा दे देते हैं और इलाहाबाद के पार्क
- 7:45:53में पुलिस एनकाउंटर के दौरान आजाद शहीद हो
- 7:45:57जाते हैं। ब्रिटिश सरकार भगत सिंह, सुखदेव
- 7:46:00और राजगुरु पर लाहौर कंस्परेसी केस यानी
- 7:46:04कि सडंडर्स मर्डर केस भी चलाती है। इसमें
- 7:46:07इन्हें फांसी की सजा सुनाई जाती है। इस
- 7:46:10तरह 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और
- 7:46:14राजगुरु फांसी के फंदे को हंसते-हंसते गले
- 7:46:18लगा लेते हैं। इनका यह बलिदान आज भी
- 7:46:21इंडियंस के लिए इंस्पिरेशन का काम करता
- 7:46:23है। दोस्तों, यह तो बात हुई पंजाब, यूपी,
- 7:46:27बिहार के रीजन में एक्टिव रेवोल्यूशनरी
- 7:46:30ग्रुप्स की। आइए बंगाल की बात करते हैं।
- 7:46:34इन बंगाल।
- 7:46:36दोस्तों बंगाल में सबसे फेमस रेवोल्यूशनरी
- 7:46:38ग्रुप चिटागोंग ग्रुप था जो सूर्यसेन की
- 7:46:42लीडरशिप में काम कर रहा था। सूर्यसेन भी
- 7:46:44नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट में पार्टिसिपेट कर
- 7:46:47चुके थे और चिटागोंग के नेशनल स्कूल में
- 7:46:50टीचर थे। इसलिए इन्हें प्यार से मास्टर दा
- 7:46:53भी कहा जाता था। रेवोल्यूशनरी एक्टिविटी
- 7:46:56की वजह से 1926 से 1928 तक यह जेल में भी
- 7:47:00रहे थे। इसके बाद यह कांग्रेस में काम
- 7:47:03करना जारी रखते हैं। 1929 में सूर्यसेन
- 7:47:06चिटगोंग डिस्ट्रिक्ट कांग्रेस कमेटी के
- 7:47:08सेक्रेटरी भी थे। सूर्यसेन, अनंत सिंह,
- 7:47:12गणेश घोष और लोकनाथ बाल जैसे अपने साथियों
- 7:47:15के साथ मिलकर एक आर्म्ड रिबेलियन
- 7:47:18ऑर्गेनाइज करने का फैसला करते हैं। इनका
- 7:47:20प्लान चिटागोंग के दो मेन आर्मरीज पर
- 7:47:23कब्जा करना होता है। जहां से यह आर्म्स
- 7:47:25सीज करके रेवोल्यूशनरीज तक पहुंचा सकें।
- 7:47:29प्लान को एग्जीक्यूट करने के लिए सूर्यसेन
- 7:47:31इंडियन रिपब्लिकन आर्मी चिटागोंग ब्रांच
- 7:47:34की फॉर्मेशन करते हैं। 18 अप्रैल 1930 को
- 7:47:37प्लान एक्शन में लाया जाता है। अपने
- 7:47:40साथियों के साथ सेन चिटागोंग की पुलिस
- 7:47:42आर्मरी पर रेड डालते हैं। एक दूसरा ग्रुप
- 7:47:45ऑक्सिलियरी फोर्सेस की आर्मरी को रेड करता
- 7:47:48है। रेड के दौरान इन्हें आर्म्स तो मिल
- 7:47:50जाते हैं लेकिन एमुनेशन लोकेट करने में यह
- 7:47:53फेल हो जाते हैं। हालांकि यह टेलीफोन,
- 7:47:56टेलीग्राफ और रेलवे लाइंस को डिस्ट्रॉय
- 7:47:58करने में जरूर कामयाब होते हैं। सूर्यसेन
- 7:48:01पुलिस आमरी के प्रेमिससेस में इंडियन
- 7:48:03फ्लैग होस्ट करते हैं और यहां प्रोविंशियल
- 7:48:06रेवोल्यूशनरी गवर्नमेंट की प्रोक्लेमेशन
- 7:48:08करते हैं। इसके बाद यह लोग जलालाबाद हिल्स
- 7:48:11की तरफ भाग जाते हैं। 22 अप्रैल को यहां
- 7:48:14पुलिस फ़ोर्स पहुंच जाती है और इनके बीच गन
- 7:48:17बैटल शुरू हो जाता है। जिसमें 12
- 7:48:19क्रांतिकारी शहीद हो जाते हैं और पुलिस के
- 7:48:22लगभग 80 जवान मारे जाते हैं। बाकी
- 7:48:25क्रांतिकारियों के साथ सूर्यसेन यहां से
- 7:48:28भाग निकलते हैं। इसके बाद सूर्यसेन
- 7:48:31अलग-अलग जगह छुप कर रहते हैं। गवर्नमेंट
- 7:48:34की प्रॉपर्टी पर रेट डालने का सिलसिला भी
- 7:48:36जारी रहता है। लेकिन फरवरी 1933 में इनके
- 7:48:39साथी नेत्रसेन इन्हें धोखा दे देते हैं।
- 7:48:43जब सूर्यसेन इनके घर में छुपे हुए थे, तब
- 7:48:45यह ब्रिटिशर्स को खबर कर देते हैं और
- 7:48:47सूर्यसेन को अरेस्ट कर लिया जाता है।
- 7:48:50सूर्यसेन पर पुलिस द्वारा जेल में बहुत
- 7:48:53टॉर्चर किए जाते हैं और 12 जनवरी 1934 को
- 7:48:57इन्हें फांसी दे दी जाती है। इनकी एज उस
- 7:49:00समय मात्र 39 साल थी। इनके बाकी
- 7:49:03क्रांतिकारी साथी भी या तो पुलिस एनकाउंटर
- 7:49:06में मारे जाते हैं या अरेस्ट कर लिए जाते
- 7:49:09हैं। दोस्तों, यह तो बात हुई सेकंड फेज के
- 7:49:12कुछ इंपॉर्टेंट रेवोल्यूशनरी ग्रुप्स और
- 7:49:15उनकी एक्टिविटीज की। आइए अब जानते हैं कि
- 7:49:18सेकंड फेज में रेवोल्यूशनरी मूवमेंट कैसे
- 7:49:21फर्स्ट फेज से अलग था।
- 7:49:23डिफरेंस बिटवीन फर्स्ट एंड सेकंड फेज ऑफ
- 7:49:26रेवोल्यूशनरी मूवमेंट। दोस्तों
- 7:49:29रेवोल्यूशनरी मूवमेंट की बेसिक आईडियोलॉजी
- 7:49:31तो दोनों ही फेस में सेम थी। यही कि
- 7:49:34आर्म्ड रेवोल्यूशन के जरिए इंडिया से
- 7:49:37ब्रिटिश रूल को खत्म करना है। लेकिन इसके
- 7:49:39अलावा दोनों फेजेस में कुछ डिफरेंसेस भी
- 7:49:42देखने को मिलते हैं। आइए एक-एक करके इनके
- 7:49:45बारे में जानते हैं। सबसे पहला डिफरेंस था
- 7:49:48इंडिविजुअल एक्शन की जगह ग्रुप या
- 7:49:51कलेक्टिव एक्शन पर ज्यादा एम्फेसिस।
- 7:49:53इसीलिए सेकंड फेज में हमें एचएसआरए और
- 7:49:56इंडियन रिपब्लिकन आर्मी जैसी ऑर्गेनाइजेशन
- 7:49:58देखने को मिलती हैं। इसके अलावा फर्स्ट
- 7:50:01फेज में जहां सीक्रेट सोसाइटीज ज्यादा
- 7:50:03देखने को मिलती हैं, वहीं सेकंड फेज में
- 7:50:06क्रांतिकारी ओपन मूवमेंट की तरफ ज्यादा
- 7:50:08नजर आते हैं। दूसरा डिफरेंस था वुमेन का
- 7:50:12पार्टिसिपेशन। सेकंड फेज की रेवोल्यूशनरी
- 7:50:15एक्टिविटीज में लार्ज स्केल पर वुमेन का
- 7:50:17पार्टिसिपेशन देखने को मिलता है। जिसमें
- 7:50:19सूर्यसेन ग्रुप की प्रीति लता वाडेडर और
- 7:50:22कल्पना दत्त एचएसआर की दुर्गा भाभी जैसे
- 7:50:26नाम शामिल हैं। इनके अलावा कुमिला के
- 7:50:28डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट को गोली मारने
- 7:50:30वाली दो स्कूल गर्ल्स शांति घोष और सुनीति
- 7:50:34चौधरी और फरवरी 1932 में कॉन्वोकेशन
- 7:50:37सेरेमनी के दौरान गवर्नर पर फायर करने
- 7:50:39वाली बीना दास की बहादुरी के किस्से भी
- 7:50:42याद किए जाते हैं। इसके अलावा दोस्तों
- 7:50:45फर्स्ट फेज के दौरान हिंदू रिलीजसिटी की
- 7:50:48तरफ एक ट्रेंड देखने को मिलता है। जैसे कि
- 7:50:51क्रांतिकारी देवी की प्रतिज्ञा जैसी कुछ
- 7:50:53रस्मों को फॉलो करते थे। लेकिन सेकंड फेज
- 7:50:56में ऐसा देखने को नहीं मिलता। यहां भगत
- 7:50:58सिंह खासकर क्रांतिकारी आंदोलनों में
- 7:51:01सेकुलरिज्म को प्रमोट करते हैं। जिसकी वजह
- 7:51:04से इस फेज में मुस्लिम्स का पार्टिसिपेशन
- 7:51:06भी बढ़ता दिखता है। उदाहरण के तौर पर
- 7:51:09अशफाक उल्लाह खान, सूर्यसेन ग्रुप के मीर
- 7:51:11अहमद, टुनू मियां आदि अपना योगदान देते
- 7:51:14दिखते हैं। दोस्तों, फर्स्ट फेज और सेकंड
- 7:51:17फेज में सबसे बड़ा अंतर जो देखने को मिलता
- 7:51:19है, वह था इनके विज़न में। फर्स्ट फेज के
- 7:51:22दौरान देश में राजनैतिक व्यवस्था को लेकर
- 7:51:25कोई प्रॉपर विज़ क्रांतिकारियों के पास
- 7:51:27नहीं था। जबकि सेकंड फेज के क्रांतिकारी
- 7:51:30इसे लेकर काफी सजग दिखते हैं। वो इंडिया
- 7:51:33में एक सोशलिस्ट और रिपब्लिक सिस्टम
- 7:51:35इस्टैब्लिश करना चाहते थे।
- 7:51:38कंक्लूजन
- 7:51:41दोस्तों क्रांतिकारियों के मेथड्स देश को
- 7:51:44आजादी दिलाने में कितने कारगर साबित होते
- 7:51:46हैं? इस बात का जवाब देना थोड़ा कठिन हो
- 7:51:49सकता है। लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं
- 7:51:52कि इनके योगदान ने आजादी की लड़ाई को और
- 7:51:55मजबूत बनाया। गांधी जी और कांग्रेस भले ही
- 7:51:58इनके तरीके से सहमत नहीं थे लेकिन वह भी
- 7:52:01इनके देश प्रेम का सम्मान जरूर करते थे।
- 7:52:04भगत सिंह के पेट्रिएटिज्म की सराहना करते
- 7:52:06हुए गांधी जी भी कहते हैं भगत सिंह की
- 7:52:10बहादुरी और बलिदान के आगे हम अपना सर
- 7:52:12झुकाते हैं। क्रांतिकारी आंदोलन ने ना
- 7:52:15सिर्फ अंग्रेजी हुकूमत की नींद उड़ा दी थी
- 7:52:18बल्कि देशवासियों के दिल में आजादी की
- 7:52:21ज्वाला जगाने का काम भी किया था। इसीलिए
- 7:52:24आज भी इनके बलिदान को याद करके हम
- 7:52:27गौरवान्वित महसूस करते हैं।
- 7:52:30इवेंट्स बिटवीन नॉन कोऑपरेशन एंड सिविल
- 7:52:33डिसओबिडियंस मूवमेंट।
- 7:52:35दोस्तों, अपनी पिछली वीडियो में हमने
- 7:52:37खिलाफत और नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट को डिस्कस
- 7:52:40किया था। यह भी जाना था कि 1922 में
- 7:52:43चौरीचौरा की घटना के बाद इस आंदोलन को
- 7:52:46ऑफिशियली एंड कर दिया गया था। लेकिन
- 7:52:48आंदोलन खत्म होने के बाद इंडियन नेशनल
- 7:52:51कांग्रेस की क्या एक्टिविटीज रहती हैं?
- 7:52:53फ्रीडम स्ट्रगल को यहां से आगे ले जाने के
- 7:52:56लिए क्या स्ट्रेटजी अडॉप्ट की जाती है? आज
- 7:52:59हम इन सभी सवालों के जवाब जानने की कोशिश
- 7:53:01करेंगे। आइए शुरू करते हैं। प्रो चेंजर्स
- 7:53:05वर्सेस नॉन चेंजर्स डिबेट। दोस्तों नॉन
- 7:53:09कोऑपरेशन मूवमेंट फरवरी 1922 में खत्म हो
- 7:53:12जाता है और मार्च 1922 में गांधी जी को
- 7:53:16अरेस्ट करके छ साल के लिए जेल भेज दिया
- 7:53:19जाता है। इसके बाद कांग्रेस में एक डिबेट
- 7:53:21शुरू हो जाती है। यह डिबेट थी प्रो
- 7:53:24चेंजर्स और नो चेंजर्स के बीच में। होता
- 7:53:27यह है कि कांग्रेस में दो फैशंस बन जाते
- 7:53:30हैं। एक फैक्शन चाहता था कि गांधी जी के
- 7:53:33कंस्ट्रक्टिव प्रोग्राम को ही कंटिन्यू
- 7:53:35किया जाए। गांधी जी की कंस्ट्रक्टिव
- 7:53:37प्रोग्राम में खादी को प्रमोट करना,
- 7:53:40अनटचेबिलिटी के रिमूवल पर काम करना, हिंदू
- 7:53:43मुस्लिम यूनिटी को स्ट्रेंथन करना जैसी
- 7:53:45एक्टिविटीज शामिल थी। इस फैक्शन को नो
- 7:53:49चेंजर्स ग्रुप बोलते हैं। इसको लीड कर रहे
- 7:53:52थे वल्लभ भाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद और सी
- 7:53:55राजगोपालाचारी और दूसरा फैक्शन चाहता था
- 7:53:58कि लेजिसलेटिव काउंसिल्स का बॉयकॉट छोड़कर
- 7:54:01इलेक्शंस में पार्टिसिपेट किया जाए। इस
- 7:54:03ग्रुप को प्रो चेंजर्स का नाम दिया जाता
- 7:54:05है। इसके लीडर्स सीआरदास और मोतीलाल नेहरू
- 7:54:09थे। इनका मानना था कि लेजिसलेटिव असेंबली
- 7:54:12का पार्ट बनकर उसको एक्सपोज करना चाहिए कि
- 7:54:15कैसे वह सिर्फ दिखावे के लिए बनी है।
- 7:54:18सीआरदास और मोतीलाल नेहरू अपना यह प्रपोजल
- 7:54:22दिसंबर 1922 में कांग्रेस के गया सेशन में
- 7:54:25रखते हैं। इस प्रोग्राम को आइदर मेंेंडिंग
- 7:54:28और एंडिंग द काउंसिल्स नाम दिया जाता है।
- 7:54:30लेकिन नो चेंजर्स ग्रुप के अपोजिशन की वजह
- 7:54:33से इनका प्रपोजल हार जाता है। इसके फेवर
- 7:54:36में सिर्फ 890 वोट्स पड़ते हैं। जबकि
- 7:54:39अगेंस्ट में 1748
- 7:54:42इसके बाद दास और मोतीलाल नेहरू कांग्रेस
- 7:54:45में अपनी रिस्पेक्टिव ऑफिसिसेस से रिजाइन
- 7:54:48कर देते हैं और 1 जनवरी 1923 को कांग्रेस
- 7:54:52खिलाफत स्वराज पार्टी के फॉर्मेशन करते
- 7:54:54हैं। जिसे बाद में स्वराज पार्टी के नाम
- 7:54:57से जाना जाता है। दास इस पार्टी के
- 7:55:00प्रेसिडेंट बनते हैं और नेहरू सेक्रेटरी।
- 7:55:03इस तरह कांग्रेस का दो फैशंस में टूटना
- 7:55:06197 की सूरत स्प्लिट की यादें ताजा कर
- 7:55:09देता है। लेकिन इस बार कांग्रेस को
- 7:55:11स्प्लिट होने से बचा लिया जाता है।
- 7:55:13क्योंकि यहां दोनों ही फैशंस को अच्छी तरह
- 7:55:15पता था कि ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट उन्हें
- 7:55:18यूनाइट रहने की जरूरत है। नो चेंजर्स के
- 7:55:21साथ ही स्वराजिस्ट भी समझते थे कि मास
- 7:55:24मूवमेंट के थ्रू ही उनकी डिमांड्स पूरी हो
- 7:55:27सकती हैं। और इसके लिए उनका एक रहना बहुत
- 7:55:30जरूरी है। इसके अलावा दोनों ग्रुप्स के
- 7:55:32लीडर्स गांधी जी की लीडरशिप को जरूरी
- 7:55:35मानते थे। इसलिए सेप्टेंबर 1923 के दिल्ली
- 7:55:39कांग्रेस सेशन में काउंसिल एंट्री के
- 7:55:41अगेंस्ट प्रोपेगेंडा को सस्पेंड कर दिया
- 7:55:43जाता है और कांग्रेस के मेंबर्स को
- 7:55:45इलेक्शन में पार्टिसिपेट करने की परमिशन
- 7:55:48मिल जाती है। नवंबर 1923 में लेजिसलेटिव
- 7:55:52काउंसिल्स के इलेक्शंस होते हैं। स्वराजस
- 7:55:54को इलेक्शन की तैयारी के लिए बहुत कम समय
- 7:55:57मिल पाता है। लेकिन फिर भी इलेक्शंस में
- 7:56:00यह लोग अच्छा प्रदर्शन करते हैं। सेंट्रल
- 7:56:03लेजिसलेटिव असेंबली में 101 इेड सीट्स में
- 7:56:0742 सीट्स पर इनकी जीत होती है। इसके अलावा
- 7:56:10सेंट्रल प्रोविंसेस में भी इन्हें क्लियर
- 7:56:12मेजॉरिटी मिलती है। बंगाल में यह
- 7:56:15लार्जेस्ट पार्टी बनकर उभरते हैं और
- 7:56:17बॉम्बे और यूपी में भी इनका रिजल्ट काफी
- 7:56:20अच्छा रहता है। इलेक्शंस जीतने के बाद
- 7:56:22स्वराज पार्टी की क्या अचीवमेंट्स रहती
- 7:56:24हैं? उनको भी जानते हैं। अचीवमेंट्स ऑफ
- 7:56:27स्वराज पार्टी।
- 7:56:30दोस्तों काउंसिल्स का मेंबर रहते हुए
- 7:56:32स्वराज पार्टी के फॉलोइंग अचीवमेंट्स रहे
- 7:56:35थे। सबसे पहला अचीवमेंट था कि अपने
- 7:56:37कोिलेशन पार्टनर्स के साथ मिलकर कई मौकों
- 7:56:40पर यह लोग गवर्नमेंट को आउटवोट करने में
- 7:56:43कामयाब रहते हैं। काउंसिल्स के अंदर यह
- 7:56:45लोग सेल्फ गवर्नमेंट, सिविल लिबर्टीज और
- 7:56:48इंडस्ट्रियलाइजेशन जैसे मुद्दों पर
- 7:56:50पावरफुल स्पीचेस के थ्रू अपनी बात रखते
- 7:56:52हैं। 1925 में सेंट्रल लेजिसलेटिव के
- 7:56:56स्पीकर के रूप में विट्ठल भाई पटेल को इ
- 7:56:59करने में कामयाब होते हैं। 1928 में यह
- 7:57:02लोग पब्लिक सेफ्टी बिल को हरा देते हैं।
- 7:57:05यह बिल गवर्नमेंट कम्युनिस्ट एक्टिविटीज
- 7:57:07को कंट्रोल करने के लिए लेकर आई थी।
- 7:57:10मॉनफर्ड स्कीम के खोखलेपन को एक्सपोज करने
- 7:57:12का काम भी करते हैं। और ऐसे समय में जब
- 7:57:15नेशनल मूवमेंट अपनी स्ट्रेंथ वापस पाने की
- 7:57:18कोशिश कर रहा था। यह अपनी एक्टिविटीज से
- 7:57:21पिटिकल वैक्यूम फिल करते हैं। यह लोग दिखा
- 7:57:24देते हैं कि काउंसिल्स को क्रिएटिवली भी
- 7:57:27यूज किया जा सकता है। दोस्तों, इसी बीच
- 7:57:30फरवरी 1924 में हेल्थ ग्राउंड्स पर गांधी
- 7:57:33जी को जेल से रिहा कर दिया जाता है। और
- 7:57:36नवंबर 1924 में गांधी जी और दास एक जॉइंट
- 7:57:40स्टेटमेंट साइन करते हैं। इसमें कहा जाता
- 7:57:43है कि स्वराज पार्टी लेजिस्लेचर्स में
- 7:57:46कांग्रेस के बिहाफ पर और उसका इंटीग्रल
- 7:57:48पार्ट रहकर ही काम करेगी। इसके बाद दिसंबर
- 7:57:51में कांग्रेस के बेलगाम सेशन में इस
- 7:57:54डिसीजन को एंडोर्स किया जाता है। यह
- 7:57:56कांग्रेस का अकेला ऐसा सेशन था जिसे गांधी
- 7:57:59जी ने प्रिसाइड किया था। लेकिन अब
- 7:58:01धीरे-धीरे स्वराज पार्टी भी कमजोर पड़ने
- 7:58:04लगती है। वो कैसे? आइए समझते हैं।
- 7:58:07लिमिटेशंस एंड डिक्लाइन ऑफ स्वराज पार्टी।
- 7:58:11दोस्तों 16th जून 1925 को सीआर दास की
- 7:58:15मृत्यु हो जाती है। अपने फाउंडर लीडर को
- 7:58:18खोने के बाद स्वराज पार्टी कमजोर होने
- 7:58:21लगती है। पार्टी के कुछ मेंबर्स पावर को
- 7:58:24रेजिस्ट नहीं कर पाते। इस तरह पार्टी
- 7:58:26रैंक्स में करप्शन भी देखने को मिलता है।
- 7:58:29कोल्यूशन पार्टनर्स के साथ भी मतभेद शुरू
- 7:58:32हो जाते हैं। इसके साथ ही कम्युनल
- 7:58:34इंटरेस्ट भी पार्टी में एंटर कर जाते हैं।
- 7:58:36स्वराज पार्टी रिस्पांसिविस्ट और नॉन
- 7:58:39रिस्पांसिविस्ट में डिवाइड हो जाती है।
- 7:58:42रिस्पांसिविस्ट में लाला लाजपत राय, मदन
- 7:58:45मोहन मालवीय और एनसी केलकर जैसे लीडर्स
- 7:58:48आते थे। यह लोग चाहते थे कि गवर्नमेंट के
- 7:58:51साथ कोऑपरेट किया जाए और जहां भी संभव हो
- 7:58:54ऑफिस होल्ड किया जाए। इसके अलावा यह लोग
- 7:58:57सो कॉल्ड हिंदू इंटरेस्ट्स को भी
- 7:58:59प्रोटेक्ट करना चाहते थे। इस तरह स्वराज
- 7:59:02पार्टी का डिवीजन शुरू हो जाता है और मेन
- 7:59:05लीडरशिप मार्च 1926 में लेजिस्लेचर से खुद
- 7:59:10को विड्रॉ कर लेती है। जबकि स्वराज का एक
- 7:59:13सेक्शन 1926 के इलेक्शन में खड़ा होता है।
- 7:59:17लेकिन इनका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं
- 7:59:19रहता। सेंटर में यह 40 सीट्स जीत लेते
- 7:59:22हैं। लेकिन यूपी, सेंट्रल प्रोविंसेस और
- 7:59:25पंजाब में बुरी तरह हार जाते हैं। 1930
- 7:59:29में लाहौर कांग्रेस रेजोल्यूशन के बाद
- 7:59:31स्वराज्य फाइनली लेजिस्लेचर से वॉकआउ करते
- 7:59:35हैं। इस तरह काउंसिल एंट्री का यह पहला
- 7:59:37एक्सपेरिमेंट 10 साल तक चलता है। यह आईएसी
- 7:59:41और उनके मेंबर्स को बड़ी सीख देके जाता
- 7:59:43है। इस बीच नो चेंजर्स की क्या एक्टिविटीज
- 7:59:46रहती हैं? आइए यह भी जानते हैं।
- 7:59:49कंस्ट्रक्टिव वर्क बाय नो चेंजेस।
- 7:59:53दोस्तों, जिस समय स्वराज काउंसिल्स में
- 7:59:56अपनी स्पीचेस से ब्रिटिश रूल को एक्सपोज
- 7:59:59करने में लगे थे, उस समय नो चेंजर्स अपने
- 8:00:02कंस्ट्रक्टिव वर्क से मासेस के साथ
- 8:00:04कनेक्शन बना रहे थे। यह लोग अलग-अलग जगह
- 8:00:07आश्रम्स की स्थापना करते हैं। जहां खादी
- 8:00:10और चरखा को प्रमोट किया जाता है। इसके साथ
- 8:00:13ही नेशनल स्कूल्स और कॉलेजेस भी सेटअप
- 8:00:16करते हैं। जहां स्टूडेंट्स को नॉन
- 8:00:18कॉलोनियल आईडियोलॉजिकल फ्रेमवर्क में
- 8:00:20ट्रेन किया जाता है। इसके अलावा हिंदू
- 8:00:23मुस्लिम यूनिटी और अनटचेबिलिटी के रिमूवल
- 8:00:26के प्रयास भी इनके द्वारा किए जाते हैं।
- 8:00:28फॉरेन क्लॉथ और लकर का बॉयकॉट भी
- 8:00:31ऑर्गेनाइज करते हैं। फ्लड के टाइम लोगों
- 8:00:34तक मदद पहुंचाने का काम भी करते हैं। इस
- 8:00:37तरह कंस्ट्रक्टिव वर्कर्स आने वाले सिविल
- 8:00:39डिसओबिडियंस के लिए एक्टिव ऑर्गेनाइज़र्स
- 8:00:42का काम करते हैं। दोस्तों, इस तरह नेशनल
- 8:00:45मूवमेंट के पैसिव फेज में स्वराज और नो
- 8:00:48चेंजर्स अपने-अपने तरीके से एक्टिव रहने
- 8:00:51की कोशिश करते हैं। जल्दी ही दोनों
- 8:00:54ग्रुप्स के फिर एक साथ आने का मौका भी आ
- 8:00:57जाता है और यह मौका आता है साइमन कमीशन के
- 8:01:00रूप में। आइए समझते हैं साइमन कमीशन और इस
- 8:01:03मौके को भी अराइवल ऑफ साइमन कमीशन एंड
- 8:01:06इंडियन रिस्पांस। दोस्तों, 1919 के
- 8:01:10गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में प्रोविजन था
- 8:01:13कि गवर्नेंस स्कीम की प्रोग्रेस को चेक
- 8:01:15करने के लिए और नए स्टेप्स का सुझाव देने
- 8:01:18के लिए 10 साल बाद एक कमीशन अपॉइंट की
- 8:01:20जाएगी। इस प्रोविजन के तहत 8th नवंबर 1927
- 8:01:24को यानी शेड्यूल से 2 साल पहले ही ब्रिटिश
- 8:01:28गवर्नमेंट इंडियन स्टचटरी कमीशन सेटअप
- 8:01:30करती है। यह एक ऑल वाइट सेवन मेंबर कमीशन
- 8:01:34थी जिसके चेयरमैन सर जॉन साइमन थे। इसलिए
- 8:01:37इसे पॉपुलरली साइमन कमीशन कहा जाता है।
- 8:01:39कमीशन को सुझाव देना था कि क्या इंडिया
- 8:01:42फर्दर कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म्स के लिए
- 8:01:44तैयार है? और अगर हां, तो यह रिफॉर्म्स
- 8:01:47क्या होने चाहिए? इंडियन लीडर्स इस बात से
- 8:01:50बहुत नाराज होते हैं कि साइमन कमीशन में
- 8:01:53एक भी इंडियन मेंबर नहीं था और फॉरेनर्स
- 8:01:56डिसाइड करेंगे कि इंडिया सेल्फ गवर्नमेंट
- 8:01:59के लिए फिट है या नहीं। इसे सेल्फ
- 8:02:01डिटरमिनेशन प्रिंसिपल का वायलेशन समझा
- 8:02:04जाता है और इंडियंस की सेल्फ रिस्पेक्ट को
- 8:02:07जानबूझकर इंसल्ट करने का एक तरीका है।
- 8:02:10कांग्रेस दिसंबर 1927 के मद्रास सेशन में
- 8:02:14कमीशन को हर स्टेज और हर फॉर्म में बॉयकॉट
- 8:02:16करने का डिसीजन लेती है। कांग्रेस के इस
- 8:02:19डिसीजन का सपोर्ट हिंदू महासभा के
- 8:02:21लिबरल्स, मुस्लिम लीग का मेजॉरिटी फैक्शन
- 8:02:24भी करता है। लेकिन पंजाब की यूनियन पार्टी
- 8:02:27और साउथ की जस्टिस पार्टी इस बॉयकॉट को
- 8:02:30सपोर्ट नहीं करती। थर्ड फरवरी 1928 को
- 8:02:34कमीशन बॉम्बे में लैंड करती है। उस दिन
- 8:02:36पूरे देश में हड़ताल और मांस रैलीज
- 8:02:39ऑर्गेनाइज की जाती हैं। कमीशन का स्वागत
- 8:02:42हर जगह काले झंडे दिखाकर साइमन गो बैक के
- 8:02:45नारे से किया जाता है। साइमन कमीशन के
- 8:02:47अगेंस्ट प्रोटेस्ट में यूथ लीडर्स एक्टिव
- 8:02:50रोल निभाते हैं। जगह-जगह यूथ लीड्स और
- 8:02:53कॉन्फ्रेंसेस ऑर्गेनाइज की जाती हैं।
- 8:02:55नेहरू और सुभाष चंद्र बोस यूथ के लीडर्स
- 8:02:58बनकर उभरते हैं। पूरे देश में प्रोटेस्ट
- 8:03:01का माहौल बन जाता है। पुलिस
- 8:03:03प्रदर्शनकारियों पर लाठी बरसाने लगती है।
- 8:03:06अक्टूबर 1928 में पुलिस की लाठियों से
- 8:03:09लाला लाजपत राय की कंडीशन सीरियस हो जाती
- 8:03:12है और 17th नवंबर 1928 को शेर पंजाब अपनी
- 8:03:17आखिरी सांस लेते हैं। इसके बाद प्रदर्शन
- 8:03:20और भी उग्र होने लगता है। दूसरी तरफ
- 8:03:23क्रांतिकारी संगठन भी एक्टिव हो जाते हैं।
- 8:03:26इसी बीच सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया
- 8:03:29लॉर्ड बर्किन हेड इंडियन लीडर्स को
- 8:03:31कॉन्स्टिट्यूशन ड्राफ्ट करने का चैलेंज दे
- 8:03:34देते हैं। इनका मानना था कि इंडियंस कभी
- 8:03:37एक साथ आकर कॉन्स्टिट्यूशन ड्राफ्ट नहीं
- 8:03:39कर सकते। इंडिया के लीडर्स इनके चैलेंज को
- 8:03:42एक्सेप्ट कर लेते हैं। और इसका जवाब कैसे
- 8:03:44दिया जाता है? आइए जानते हैं। नेहरू
- 8:03:48रिपोर्ट। दोस्तों लॉर्ड बर्किन हेड के
- 8:03:51चैलेंज के जवाब में फरवरी 1928 में एक ऑल
- 8:03:55पार्टीज कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइज की जाती है
- 8:03:57और मोतीलाल नेहरू की चेयरमैनशिप में
- 8:04:00कॉन्स्टिट्यूशन ड्राफ्ट करने के लिए एक
- 8:04:02कमेटी अपॉइंट की जाती है। तेज बहादुर सपू
- 8:04:05सुभाष चंद्र बोस, एमएस एनी, मंगल सिंह,
- 8:04:09अली इमाम, शहाआब कुरैशी और जीआर प्रधान
- 8:04:12कमेटी के मेंबर्स थे। यह इंडियंस द्वारा
- 8:04:15देश के लिए कॉन्स्टिट्यूशनल फ्रेमवर्क
- 8:04:17तैयार करने की पहली कोशिश थी। कमेटी अगस्त
- 8:04:211928 तक अपनी रिपोर्ट फाइनल कर लेती है।
- 8:04:24नेहरू रिपोर्ट की सभी रेकमेंडेशंस एक मत
- 8:04:28से दी गई थी सिर्फ एक एस्पेक्ट को छोड़कर
- 8:04:31और वो यह था कि मेजॉरिटी मेंबर्स तो
- 8:04:33कॉन्स्टिट्यूशन का बेसिस डोमिनियन स्टेटस
- 8:04:36चाहते थे। लेकिन एक सेक्शन कंप्लीट
- 8:04:39इंडिपेंडेंस को बेसिस बनाना चाहता था।
- 8:04:41नेहरू रिपोर्ट की मेजर रेकमेंडेशंस कुछ इस
- 8:04:44तरह से थी। सेल्फ गवर्निंग डोमिनियंस की
- 8:04:47तरह डोमिनियन स्टेटस को इंडियंस की
- 8:04:49डिजायरेबल फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट बताया जाता
- 8:04:51है। सेपरेट इलेक्टोरेट्स की जगह जॉइंट
- 8:04:55इलेक्टोरेट्स जिसमें सेंटर में मुस्लिम्स
- 8:04:58के लिए सीट्स रिजर्व करने का प्रोविजन था।
- 8:05:01साथ ही ऐसी प्रोविंसेस में भी जहां
- 8:05:03मुस्लिम्स माइनॉरिटी में हैं।
- 8:05:05लिंग्विस्टिक प्रोविंसेस बनाने का सुझाव
- 8:05:07भी शामिल था। इसके अलावा 19 फंडामेंटल
- 8:05:10राइट्स जैसे कि इक्वल राइट्स फॉर वुमेन,
- 8:05:13यूनिवर्सल एडल्ट सफिज और यूनियन फॉर्म
- 8:05:16करने का राइट भी नेहरू रिपोर्ट रेकमेंड
- 8:05:18करती है। सेंटर और प्रोविंसेस में
- 8:05:21रिस्पांसिबल गवर्नमेंट का प्रोविजन
- 8:05:23मुस्लिम्स के कल्चरल और रिलीजियस इंटरेस्ट
- 8:05:26के फुल प्रोटेक्शन के साथ स्टेट का रिलीजन
- 8:05:29से पूरी तरह डिसोसिएशन भी इनकी
- 8:05:31रेकमेंडेशंस का हिस्सा था। दोस्तों, नेहरू
- 8:05:35रिपोर्ट की रेकमेंडेशन से सभी पार्टी और
- 8:05:37ग्रुप्स सेटिस्फाई नहीं होते। सबसे पहले
- 8:05:40तो कम्युनल रिप्रेजेंटेशन के सवाल पर
- 8:05:43मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा रिपोर्ट के
- 8:05:45अगेंस्ट चली जाती हैं। यहां नेहरू रिपोर्ट
- 8:05:48के अगेंस्ट जिन्ना अपने 14 पॉइंट्स रखते
- 8:05:51हैं। इसके अलावा कांग्रेस का यंगर सेक्शन
- 8:05:54भी नेहरू रिपोर्ट से नाराज होता है। इनके
- 8:05:57लिए रिपोर्ट में डोमिनियन स्टेटस का
- 8:05:59आईडिया एक कदम पीछे ले जाने जैसा था। 1928
- 8:06:03में कांग्रेस केक सेशन में नेहरू रिपोर्ट
- 8:06:06को अप्रूव किया जाता है। लेकिन जवाहरलाल
- 8:06:09नेहरू और बोस कांग्रेस के डोमिनियन स्टेटस
- 8:06:12के गोल को रिजेक्ट कर देते हैं और मिलकर
- 8:06:15इंडिपेंडेंस फॉर इंडिया लीग सेटअप करते
- 8:06:18हैं। कंक्लूजन
- 8:06:20दोस्तों एक तरफ यंगर सेक्शन पूर्ण स्वराज
- 8:06:24यानी कि कंप्लीट इंडिपेंडेंस को कांग्रेस
- 8:06:26का गोल बनाना चाहता था। दूसरी तरफ ओल्डर
- 8:06:29लीडर्स जैसे कि गांधी जी और मोतीलाल नेहरू
- 8:06:32का मानना था कि डोमिनियन स्टेटस की डिमांड
- 8:06:35को इतनी जल्दी खत्म ना किया जाए क्योंकि
- 8:06:38इसके ऊपर भी कंसेंसस बड़ी मुश्किल से कई
- 8:06:41सालों में जाकर बना था। इसलिए यह लोग
- 8:06:44सुझाव देते हैं कि गवर्नमेंट को डोमिनियन
- 8:06:47स्टेटस की डिमांड एक्सेप्ट करने के लिए 2
- 8:06:50साल का समय दिया जाए। लेकिन यंगर
- 8:06:53एलिमेंट्स के प्रेशर बनाने पर इस समय को
- 8:06:55एक साल कर दिया जाता है और डिसाइड होता है
- 8:06:58कि अगर साल के एंड तक गवर्नमेंट डोमिनियन
- 8:07:01स्टेटस के साथ कॉन्स्टिट्यूशन को एक्सेप्ट
- 8:07:03नहीं करती तो कांग्रेस पूर्ण स्वराज की
- 8:07:06डिमांड के साथ सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट
- 8:07:09ल्च कर देगी। अपनी अगली वीडियो में हम
- 8:07:11देखेंगे कि गवर्नमेंट का क्या रिस्पांस
- 8:07:14रहता है और फिर कांग्रेस किस तरह से सिविल
- 8:07:17डिसओबिडियंस मूवमेंट शुरू करती है।
- 8:07:22सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट फेज वन 1930 31
- 8:07:28दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हमने देखा
- 8:07:31था कि कैसे 1928 में कांग्रेस ब्रिटिश
- 8:07:35गवर्नमेंट को एक साल का समय देती है
- 8:07:37डोमिनियन स्टेटस पर बेस्ड कॉन्स्टिट्यूशन
- 8:07:40को एक्सेप्ट करने के लिए। आज हम देखेंगे
- 8:07:43कि ब्रिटिश गवर्नमेंट इस पर क्या रिसोंड
- 8:07:45करती है और इन टर्न कांग्रेस का क्या
- 8:07:48रिएक्शन रहता है। तो आइए शुरू करते हैं
- 8:07:51इंट्रोडक्शन।
- 8:07:54दोस्तों मई 1929 में ब्रिटेन में रमजे
- 8:07:58मैकडोनल्ड की लीडरशिप में लेबर पार्टी की
- 8:08:00सरकार बनती है और वायसरॉय लॉर्ड अर्विन को
- 8:08:03कंसल्टेशंस के लिए लंदन बुलाया जाता है।
- 8:08:06इसके बाद 31 अक्टूबर को वायसरॉय अनाउंस
- 8:08:09करते हैं कि ब्रिटिश सरकार के अनुसार 1917
- 8:08:13की डिक्लेरेशन में ही साफ कर दिया गया था
- 8:08:16कि उनका एम इंडिया को डोमिनियन स्टेटस की
- 8:08:18तरफ ले जाना है। और साथ ही साइमन कमीशन की
- 8:08:22रिपोर्ट सबमिट होते ही राउंड टेबल
- 8:08:24कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइज करने का प्रॉमिस भी
- 8:08:26करते हैं। इसके दो दिन बाद इंडिया के मेजर
- 8:08:30नेशनल लीडर्स की एक कॉन्फ्रेंस होती है और
- 8:08:32दिल्ली मेनिफेस्टो इशू किया जाता है।
- 8:08:35इसमें यह लोग डिमांड करते हैं कि ब्रिटिश
- 8:08:37गवर्नमेंट राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का पर्पस
- 8:08:40क्लियरली बता दे और पर्पस यह नहीं होना
- 8:08:42चाहिए कि डोमिनियन स्टेटस कब तक दिया
- 8:08:45जाएगा बल्कि उसके इंप्लीमेंटेशन की स्कीम
- 8:08:48फॉर्मुलेट करना होना चाहिए। इसके जवाब में
- 8:08:51फाइनली 23 दिसंबर को लॉर्ड अर्विन गांधी
- 8:08:54जी और बाकी लीडर्स को बताते हैं कि वह ऐसा
- 8:08:57कोई अश्योरेंस नहीं दे सकते। इस तरह
- 8:09:00नेगोशिएशंस की स्टेज खत्म हो जाती है और
- 8:09:03कॉन्फ्रंटेशन की तैयारी शुरू होने लगती
- 8:09:05है।
- 8:09:07लाहौर सेशन एंड गोल ऑफ कंप्लीट
- 8:09:10इंडिपेंडेंस।
- 8:09:12दोस्तों 1929 का कांग्रेस सेशन लाहौर में
- 8:09:15ऑर्गेनाइज किया जाता है। इसके प्रेसिडेंट
- 8:09:18जवाहरलाल नेहरू बनते हैं जो दिखाते हैं कि
- 8:09:21कांग्रेस का ट्रांजिशन यंगर जनरेशन की तरफ
- 8:09:24हो रहा था और यहां पर ही पूर्ण स्वराज को
- 8:09:27कांग्रेस का गोल डिक्लेअ कर दिया जाता है।
- 8:09:30इसके साथ ही 31st दिसंबर 1929 को आधी रात
- 8:09:34के समय रवि नदी के किनारे पर तिरंगा भी
- 8:09:37फहराया जाता है और आने वाली 26 जनवरी को
- 8:09:41पूर्ण स्वराज डे के रूप में मनाने की
- 8:09:43घोषणा की जाती है।
- 8:09:4626 जनवरी 1930 को पूरे देश में पब्लिक
- 8:09:50मीटिंग्स ऑर्गेनाइज की जाती हैं। जिसमें
- 8:09:52इंडिपेंडेंस प्लेज को रीड और अफर्म किया
- 8:09:55जाता है। लाहौर में कांग्रेस वर्किंग
- 8:09:58कमेटी को सिविल डिसओबिडियंस का प्रोग्राम
- 8:10:01ल्च करने के लिए भी ऑथोराइज कर दिया गया
- 8:10:03था। साथ ही लेजिस्लेचर के सभी मेंबर्स को
- 8:10:07अपनी सीट से रिजाइन करने के लिए भी कहा
- 8:10:09गया था। जैसा कि हमने अपनी पिछली वीडियो
- 8:10:12में बताया था स्वराज पार्टी के मेंबर्स
- 8:10:14इसके बाद रिजाइन कर देते हैं। लाहौर
- 8:10:17कांग्रेस का मैंडेट आगे ले जाते हुए गांधी
- 8:10:20जी अपनी 11 डिमांड्स गवर्नमेंट के सामने
- 8:10:22रख देते हैं और इन डिमांड्स को एक्सेप्ट
- 8:10:25या रिजेक्ट करने के लिए 31 जनवरी 1930 को
- 8:10:29अल्टीमेटम देते हैं। ये 11 डिमांड्स कुछ
- 8:10:32इस तरह से थी। फर्स्ट साल्ट टैक्स को
- 8:10:35अबॉलिश किया जाए और साल्ट पर गवर्नमेंट की
- 8:10:38मोनोपोली खत्म की जाए। सेकंड टोटल
- 8:10:41प्रोहिबिशन इंट्रोड्यूस किया जाए यानी कि
- 8:10:44पूरी तरह शराबबंदी।
- 8:10:46थर्ड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट
- 8:10:49सीआईडी में रिफॉर्म्स किए जाए। फोर्थ
- 8:10:52आर्म्स एक्ट को बदला जाए। फिफ्थ पॉलिटिकल
- 8:10:55प्रिजनर्स को रिलीज किया जाए। सिक्स्थ
- 8:10:58पोस्टल रिजर्वेशन बिल एक्सेप्ट किया जाए।
- 8:11:01सेवंथ रूपीस स्टर्लिंग एक्सचेंज रेशियो को
- 8:11:04कम किया जाए जिससे एक्सपोर्ट्स में इंडिया
- 8:11:06को फायदा हो। एट्थ टेक्सटाइल प्रोटेक्शन
- 8:11:10इंट्रोड्यूस किया जाए। नाइंथ कोस्टल
- 8:11:13शिपिंग इंडियंस के लिए रिजर्व हो। 10थ
- 8:11:15लैंड रेवेन्यू में भी 50% की गिरावट की
- 8:11:19जाए। एंड 11th आर्मी और सिविल सर्विज पर
- 8:11:23खर्चे को 50% तक कम किया जाए।
- 8:11:27लेकिन गवर्नमेंट की तरफ से कोई भी पॉजिटिव
- 8:11:29रिस्पांस ना आता देख मिड फरवरी 1930 में
- 8:11:33कांग्रेस की वर्किंग कमेटी साबरमती आश्रम
- 8:11:35में मीटिंग करती है और गांधी जी को फुल
- 8:11:38पावर्स दे देती है कि वह अपनी पसंद की जगह
- 8:11:41और समय पर सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट की
- 8:11:44शुरुआत करें। तो देखते हैं गांधी जी कब और
- 8:11:47कहां से आंदोलन की शुरुआत करते हैं। दांडी
- 8:11:50मार्च एंड साल्ट सत्याग्रह। दोस्तों फरवरी
- 8:11:54एंड तक गांधी जी फैसला ले चुके होते हैं
- 8:11:57कि वह नमक के मुद्दे पर आंदोलन की शुरुआत
- 8:12:00करेंगे। नमक या साल्ट को अपने आंदोलन की
- 8:12:03थीम बनाने का यह फैसला बहुत सोच समझ कर
- 8:12:06लिया गया था। नमक एक ऐसी चीज है जिसकी
- 8:12:09जरूरत सबको है और इस पर टैक्स गरीब लोगों
- 8:12:13के लिए बहुत भारी पड़ता है। साथ ही नमक
- 8:12:15बनाने पर सरकार की मोनोपोली होने से लोगों
- 8:12:19से सेल्फ एंप्लॉयमेंट का एक जरिया भी छीन
- 8:12:21लिया गया था। इसलिए सेकंड मार्च 1930 को
- 8:12:25गांधी जी अपने प्लान की जानकारी वायसरॉय
- 8:12:27को देते हैं। इस प्लान के अकॉर्डिंग गांधी
- 8:12:30जी साबरमती आश्रम से 78 मेंबर्स के साथ
- 8:12:34240 माइल्स की यात्रा करते हुए दांडी के
- 8:12:37कोस्ट पर पहुंचेंगे और वहां पहुंचकर बीच
- 8:12:40से नमक कलेक्ट कर साल्ट लॉ को वायलेट
- 8:12:43करेंगे। इसके साथ ही मार्च के बाद फ्यूचर
- 8:12:45एक्शन के लिए डायरेक्शंस भी गांधी जी
- 8:12:48द्वारा दी जाती हैं जो इस तरह से थी। जहां
- 8:12:51भी पॉसिबल हो नमक कानून को तोड़ा जाए।
- 8:12:54विदेशी कपड़े और शराब की दुकानों की
- 8:12:56पिकिटिंग की जा सकती है। लॉयर्स अपनी
- 8:12:59प्रैक्टिस छोड़ सकते हैं और गवर्नमेंट
- 8:13:02सर्वेंट्स अपनी पोस्ट से रिजाइन कर सकते
- 8:13:04हैं। सत्य और अहिंसा का अडिगता के साथ
- 8:13:07पालन करना होगा और गांधी जी के अरेस्ट
- 8:13:09होने के बाद लोकल लीडर्स को ओबे करना
- 8:13:12होगा। यह ऐतिहासिक दांडी मार्च 12 मार्च
- 8:13:16को साबरमती आश्रम से शुरू होता है। पूरे
- 8:13:19दांडी मार्च को लोकल और इंटरनेशनल
- 8:13:21न्यूज़पेपर्स द्वारा कवर किया गया था।
- 8:13:24हजारों की संख्या में लोग इस मार्च से
- 8:13:26जुड़ते जाते हैं और रास्ते में जगह-जगह
- 8:13:29गांधी जी लोगों को संबोधित भी करते हैं।
- 8:13:32फाइनली 6th अप्रैल को दांडी पहुंचकर गांधी
- 8:13:36जी नमक कानून तोड़ते हैं। इस तरह सिविल
- 8:13:39डिसओबिडियंस मूवमेंट की शुरुआत हो जाती
- 8:13:41है। आइए अब देखते हैं कि यह आंदोलन किस
- 8:13:44तरह पूरे देश में फैलता है। स्प्रेड ऑफ द
- 8:13:47सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट। दोस्तों,
- 8:13:50दांडी में गांधी जी के द्वारा नमक कानून
- 8:13:52तोड़ते ही पूरे देश में जगह-जगह नमक कानून
- 8:13:56टूटना शुरू हो जाता है। सी राजगोपालाचारी
- 8:13:58तिरुचरापल्ली से वेदरण्यम तक मार्च
- 8:14:01ऑर्गेनाइज करते हैं और तंजोर कोस्ट पर
- 8:14:04साल्ट लॉ ब्रेक करते हैं। वहीं मालाबार
- 8:14:07में कांग्रेस लीडर के केलापन नमक कानून का
- 8:14:10उल्लंघन करते हैं। अप्रैल 1930 में नमक
- 8:14:14कानून तोड़ने के लिए नेहरू जी को अरेस्ट
- 8:14:16कर लिया जाता है। इसके विरोध में मद्रास,
- 8:14:19कोलकाता और कराची में प्रोटेस्ट ऑर्गेनाइज
- 8:14:22की जाती हैं। ओसा में गोपाल बंधु चौधरी के
- 8:14:25नेतृत्व में बालासोर, कटक और पूरी
- 8:14:28डिस्ट्रिक्ट्स के कोस्टल रीजंस में साल्ट
- 8:14:30सत्याग्रह ऑर्गेनाइज किया जाता है। इसी
- 8:14:33बीच गांधी जी अनाउंस करते हैं कि वह वेस्ट
- 8:14:36कोस्ट पर धरसाना साल्ट वक्स पर रेड करने
- 8:14:39जा रहे हैं। इसलिए उन्हें भी फोर्थ मई
- 8:14:421930 को अरेस्ट कर लिया जाता है। गांधी जी
- 8:14:46के अरेस्ट होने पर बॉम्बे, दिल्ली,
- 8:14:48कोलकाता और सोलापुर में मैसिव प्रोटेस्ट्स
- 8:14:51देखने को मिलते हैं। गांधी जी की
- 8:14:54गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी
- 8:14:56डिफरेंट एक्शन प्लान को सेंक्शन कर देती
- 8:14:58है जिससे और लोग जुड़ सकें। वो कहते हैं
- 8:15:01कि रेयोतवाड़ी एरियाज में रेवेन्यू पे
- 8:15:04नहीं किया जाए और जमींदारी एरियाज में नो
- 8:15:07चौकीदारी टैक्स कैंपेन शुरू किया जाए। इसी
- 8:15:10के साथ-साथ सेंट्रल प्रोविंसेस में
- 8:15:12फॉरेस्ट लॉज़ का भी वायलेशन शुरू होगा।
- 8:15:16दरसाना साल्ट वक्स पर रेड का अनफिनिश्ड
- 8:15:19टास्क 21 मई 1930 को सरोजिनी नायडू, इमाम
- 8:15:23साहिब और गांधी जी के बेटे मणिलाल पूरा
- 8:15:26करते हैं। यहां अनआर्म्ड और पीसफुल क्राउड
- 8:15:29पर पुलिस ब्रूटल लाठीचार्ज कर देती है। इस
- 8:15:33दौरान दो लोग मारे जाते हैं और 320 लोग
- 8:15:36घायल हो जाते हैं। लेकिन इसके बावजूद
- 8:15:39सत्याग्रही अपनी तरफ से अहिंसा का मार्ग
- 8:15:42नहीं छोड़ते। जैसा कि सीडब्ल्यूसी ने
- 8:15:45मार्गदर्शन किया था। यूनाइटेड प्रोविंस
- 8:15:48में नो रेवेन्यू कैंपेन शुरू हो जाता है।
- 8:15:50वहीं सेंट्रल प्रोविंस में लोग फॉरेस्ट
- 8:15:52लॉज़ का डिफाइंस शुरू कर देते हैं। इस तरह
- 8:15:56देश का लगभग हर हिस्सा आंदोलन में अपनी
- 8:15:58भागीदारी देने लगता है। अब यह समझते हैं
- 8:16:02कि आंदोलन के दौरान मास पार्टिसिपेशन का
- 8:16:05एक्सटेंट क्या रहता है। एक्सटेंट ऑफ मास
- 8:16:08पार्टिसिपेशन।
- 8:16:10दोस्तों, समाज के लगभग हर वर्ग ने इस
- 8:16:13आंदोलन में पार्टिसिपेट किया था। एक-एक
- 8:16:16करके जानते हैं किसकी भागीदारी ज्यादा थी
- 8:16:19और किसकी कुछ कम। सिविल डिसओबिडियंस
- 8:16:22मूवमेंट में वुमेन का पार्टिसिपेशन बड़े
- 8:16:25स्तर पर देखने को मिलता है। दांडी मार्च
- 8:16:28के दौरान जगह-जगह हजारों की संख्या में
- 8:16:30वुमेन गांधी जी को सुनने के लिए आती हैं
- 8:16:33और आंदोलन शुरू हो जाने पर पूरी तरह से
- 8:16:36उससे जुड़ जाती हैं। यह लोग लकर शॉप्स और
- 8:16:39विदेशी कपड़े बेचने वाली दुकानों के आगे
- 8:16:42धरना प्रदर्शन करती हैं। वुमेन के साथ-साथ
- 8:16:45स्टूडेंट्स और यूथ भी आंदोलन में
- 8:16:47बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। सेंट्रल
- 8:16:50प्रोविंसेस, महाराष्ट्र और कर्नाटका में
- 8:16:52ट्राइबल्स इस आंदोलन के एक्टिव
- 8:16:54पार्टिसिपेंट्स थे। वहीं बॉम्बे, कोलकाता,
- 8:16:58मद्रास और सोलापुर आदि स्थानों पर वर्कर्स
- 8:17:01का पार्टिसिपेशन बड़ी संख्या में हुआ था।
- 8:17:04इसके साथ ही मर्चेंट्स और ट्रेडर्स भी
- 8:17:06आंदोलन के दौरान काफी उत्साहित दिखते हैं।
- 8:17:09ट्रेडर्स एसोसिएशंस और कमर्शियल बॉडीज
- 8:17:12बॉयकॉट को इंप्लीमेंट करने में एक्टिव रोल
- 8:17:15निभाते हैं। खासकर पंजाब और तमिलनाडु में
- 8:17:18यूनाइटेड प्रोविंसेस, बिहार और गुजरात से
- 8:17:21पेजेंट्स का पार्टिसिपेशन सबसे ज्यादा
- 8:17:23रहता है। अगर हम मुस्लिम्स की बात करें तो
- 8:17:27आंदोलन में मुस्लिम्स का पार्टिसिपेशन
- 8:17:291920 के नॉन कोऑपोरेशन के जैसा नजर नहीं
- 8:17:33आता क्योंकि मुस्लिम लीडर्स ने आंदोलन से
- 8:17:36अलग रहने की अपील की थी। साथ ही गवर्नमेंट
- 8:17:39भी कम्युनल डिसेंशन को इनकरेज करने में
- 8:17:42एक्टिव थी। लेकिन फिर भी कुछ एरियाज में
- 8:17:45ओवरवेल्मिंग पार्टिसिपेशन देखने को मिलता
- 8:17:47है। जैसे कि नॉर्थवेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस
- 8:17:50में। यहां गांधियन लीडर अब्दुल गफ्फार खान
- 8:17:54के नेतृत्व में मुस्लिम्स बढ़-चढ़कर
- 8:17:56आंदोलन में हिस्सा लेते हैं। इसके साथ ही
- 8:17:59सेनहट्टा, त्रिपुरा, गायब, बागुरा और
- 8:18:03नोवाखली में भी मिडिल क्लास मुस्लिम्स
- 8:18:05आंदोलन में भाग लेते हैं। ढाका में भी
- 8:18:08मुस्लिम लीडर्स, शॉपकीपर्स, लोअर क्लास
- 8:18:11पीपल और अपर क्लास वुमेन आंदोलन में
- 8:18:13एक्टिव रहती हैं। दिल्ली, बिहार और लखनऊ
- 8:18:16में रहने वाली मुस्लिम वीविंग कम्युनिटी
- 8:18:19को भी आंदोलन से इफेक्टिवली जोड़ा गया था।
- 8:18:22इतने बड़े आंदोलन पर ब्रिटिश गवर्नमेंट का
- 8:18:25क्या रिस्पांस रहता है? आइए देखते हैं।
- 8:18:28गवर्नमेंट रिस्पांस एफर्ट्स फॉर ट्रूस।
- 8:18:32दोस्तों, शुरुआत में तो ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 8:18:35का एटीट्यूड ए्बिवेलेंट रहता है। क्योंकि
- 8:18:38वह कंफ्यूजन में थे। अगर वह आंदोलन को
- 8:18:40दबाने के लिए फोर्स का इस्तेमाल करते हैं
- 8:18:42तो कांग्रेस रिप्रेशन के नाम पर गवर्नमेंट
- 8:18:45को क्रिटिसाइज करेगी और अगर वह ऐसा नहीं
- 8:18:48करते तो कांग्रेस इसे अपनी जीत बताएगी।
- 8:18:51दोनों ही कंडीशन में गवर्नमेंट की पावर तो
- 8:18:53कम होनी ही थी। गांधी जी को अरेस्ट करने
- 8:18:56का डिसीजन भी काफी टालमटोल के बाद ही लिया
- 8:18:59गया था। लेकिन जब एक बार गवर्नमेंट
- 8:19:02रिप्रेशन करना शुरू करती है तो अपनी पूरी
- 8:19:04ताकत झोंक देती है। सिविल लिबर्टीज को बैन
- 8:19:07कर दिया जाता है। प्रेस पर पाबंदी लगा दी
- 8:19:10जाती है। सिविल डिसओबिडियंस ऑर्गेनाइजेशंस
- 8:19:13को बैन करने की पूरी आजादी प्रोविंशियल
- 8:19:15गवर्नमेंट को दे दी जाती है। इसके साथ ही
- 8:19:18आंदोलनकारियों पर लाठी चार्ज और फायरिंग
- 8:19:21भी शुरू कर दी जाती है। गांधी जी और बाकी
- 8:19:24कांग्रेस लीडर्स के साथ हजारों की संख्या
- 8:19:26में सत्याग्रहीस को जेल में डाल दिया जाता
- 8:19:29है।
- 8:19:30गवर्नमेंट के रिप्रेशन के बाद आंदोलन कम
- 8:19:33होने की जगह और भी ज्यादा उग्र होने लगता
- 8:19:36है। इसी बीच साइमन कमीशन की रिपोर्ट भी आ
- 8:19:39जाती है और जुलाई 1930 में लॉर्ड अर्विन
- 8:19:42राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइज करने की
- 8:19:44घोषणा कर देते हैं। इसके साथ ही सेंट्रल
- 8:19:47लेजिस्लेचर के 40 मेंबर्स के सजेशन पर
- 8:19:50कांग्रेस के साथ शांति की कोशिश की जाती
- 8:19:53है। इसके लिए तेज बहादुर सप्रू और एमआर
- 8:19:56जयकर को मीडिएटर बनाया जाता है। अगस्त में
- 8:19:59मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू को गांधी
- 8:20:02जी से मिलने के लिए यरवाड़ा जेल ले जाया
- 8:20:05जाता है। लेकिन इस बातचीत का कोई नतीजा
- 8:20:08नहीं निकलता। हां, यह जरूर साफ हो जाता है
- 8:20:11कि नवंबर में लंदन में होने वाली फर्स्ट
- 8:20:13राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में कुछ सेक्शंस
- 8:20:16जरूर हिस्सा लेने वाले हैं। लेकिन
- 8:20:18कांग्रेस इसका हिस्सा नहीं होगी। बिना
- 8:20:21कांग्रेस के राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस भी
- 8:20:23बेनतीजा ही रहती है। वहां मौजूद लगभग हर
- 8:20:26डेलीगेट का यही कहना था कि बिना कांग्रेस
- 8:20:29के कॉन्स्टिट्यूशन पर डिस्कशन करना
- 8:20:31मीनिंगलेस ही है। अब ब्रिटिश गवर्नमेंट को
- 8:20:34समझ आ जाता है कि अगर उसे कॉन्स्टिट्यूशनल
- 8:20:37रिफॉर्म्स के नाम पर सर्वाइव करना है तो
- 8:20:39कांग्रेस को मनाना जरूरी है। इसलिए
- 8:20:42ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर फर्स्ट राउंड
- 8:20:44टेबल कॉन्फ्रेंस के कंक्लूजन में कहते हैं
- 8:20:46कि उन्हें उम्मीद है कि सेकंड राउंड टेबल
- 8:20:49कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस जरूर हिस्सा
- 8:20:51लेगी। वाइसराॉय 25th जनवरी को गांधी जी और
- 8:20:55कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी मेंबर्स की
- 8:20:58बिना शर्त रिहाई अनाउंस कर देते हैं।
- 8:21:00जिससे यह लोग फ्रीली एंड फियरलेसली
- 8:21:03ब्रिटिश पीएम की स्टेटमेंट का जवाब दे
- 8:21:06सकें। अब कांग्रेस का क्या जवाब रहने वाला
- 8:21:08था?
- 8:21:11गांधी अर्बन पैक्ट
- 8:21:15दोस्तों लगभग तीन हफ्ते के आपसी डिस्कशंस
- 8:21:18और डेलीबरेशंस के बाद कांग्रेस वर्किंग
- 8:21:21कमेटी वायसरॉय के साथ बातचीत के लिए गांधी
- 8:21:24जी को ऑथराइज करती है। गांधीजी और वायसरॉय
- 8:21:28लॉर्ड अर्विन के बीच अराउंड दो हफ्तों तक
- 8:21:31डिस्कशंस होते हैं और फाइनली 5िफ्थ मार्च
- 8:21:341931 को गांधी अर्विन पैक्ट पर साइन होते
- 8:21:38हैं। इस फैक्ट के अनुसार हिंसा ना करने
- 8:21:41वाले सभी पॉलिटिकल प्रिजनर्स को रिहा करना
- 8:21:44था। सभी तरह के फाइन जो अभी तक कलेक्ट
- 8:21:47नहीं किए गए थे उन्हें माफ करना था। जब्त
- 8:21:51की हुई जमीन को वापस करना था। साथ ही
- 8:21:54रिजाइन करने वाले गवर्नमेंट सर्वेंट्स को
- 8:21:56लीनियंट ट्रीटमेंट देना था। कोस्ट के
- 8:21:59किनारे वाले गांव में कंजमशन के लिए साल्ट
- 8:22:02बनाने की मंजूरी भी सरकार ने दे दी थी।
- 8:22:05इसके बदले में कांग्रेस सिविल डिसओबिडियंस
- 8:22:07मूवमेंट को रोकने के लिए अग्री होती है और
- 8:22:10साथ ही नेक्स्ट राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में
- 8:22:13पार्टिसिपेट करने के लिए भी तैयार होती
- 8:22:15है। दोस्तों इस तरह सिविल डिसओबिडियंस
- 8:22:18मूवमेंट का फर्स्ट फेज एंड हो जाता है।
- 8:22:21लेकिन इस आंदोलन के इंपैक्ट्स को समझना भी
- 8:22:23जरूरी है। इंपैक्ट्स ऑफ सिविल डिसओबिडियंस
- 8:22:27मूवमेंट।
- 8:22:30दोस्तों, आंदोलन तो गांधी एयरविन पैक्ट से
- 8:22:34खत्म हो गया था। लेकिन यह इस आंदोलन की
- 8:22:37सफलता ही थी कि कांग्रेस पहली बार सरकार
- 8:22:40के साथ बराबरी पर आकर कोई समझौता कर रही
- 8:22:43थी। आंदोलन के दौरान 90 हजार से ज्यादा
- 8:22:46लोग जेल गए थे। यह संख्या नॉन कोऑपरेशन
- 8:22:49मूवमेंट की तुलना में तीन गुनी थी।
- 8:22:51ब्रिटेन से कपड़े का इंपोर्ट आधा हो गया
- 8:22:53था। लेकर एक्साइज और लैंड रेवेन्यू से
- 8:22:56होने वाली सरकार की आमदनी पर भी गहरा असर
- 8:22:59पड़ता है। इंडियन नेशनलिज्म की आग समाज के
- 8:23:02हर वर्ग तक पहुंच जाती है। इस तरह यह
- 8:23:05आंदोलन मासेस को नेशनल मूवमेंट को एक्टिव
- 8:23:08पार्टिसिपेशन बनाने में नॉन कोऑपरेशन
- 8:23:10आंदोलन से भी ज्यादा सफल रहा था। साथ ही
- 8:23:14इस आंदोलन के दौरान हिंसा की कोई बड़ी
- 8:23:16घटना देखने को नहीं मिलती। इसका मतलब था
- 8:23:19कि लोग अब गांधी जी की सत्याग्रह टेक्निक
- 8:23:21को पूरी तरह अपना चुके थे। जिसका सबसे
- 8:23:24अच्छा उदाहरण धरसाना में देखने को मिला
- 8:23:27था। कंक्लूजन
- 8:23:30हम कह सकते हैं कि सिविल डिसओबिडियंस
- 8:23:33मूवमेंट ना सिर्फ इफेक्टिवली ऑर्गेनाइज
- 8:23:35किया गया था बल्कि इसने कांग्रेस को सही
- 8:23:38मायने में मास ऑर्गेनाइजेशन भी बना दिया
- 8:23:41था। यही वजह थी कि ब्रिटिश गवर्नमेंट भी
- 8:23:44कांग्रेस के साथ समझौता करने के लिए झुक
- 8:23:47जाती है।
- 8:23:49सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट फेज टू
- 8:23:53दोस्तों, हमने अपने पिछले वीडियो में
- 8:23:55सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट को डिस्कस किया
- 8:23:58था। 5th मार्च 1931 को हुए गांधी एयरवन
- 8:24:02पैक्ट के बाद आंदोलन का फर्स्ट फेज खत्म
- 8:24:04हो गया था। इसके बाद इंडियन फ्रीडम
- 8:24:07स्ट्रगल किस दिशा में आगे बढ़ता है, आज हम
- 8:24:09यही जानेंगे। आइए शुरू करते हैं मार्च
- 8:24:121931 में हुए इंडियन नेशनल कांग्रेस के
- 8:24:15कराची सेशन से।
- 8:24:17कराची सेशन।
- 8:24:20दोस्तों गांधी एरविन या दिल्ली पैक्ट को
- 8:24:23इंडोर्स करने के लिए 29 मार्च 1931 को
- 8:24:26कांग्रेस का कराची सेशन ऑर्गेनाइज किया
- 8:24:29जाता है। यहां दिल्ली पैक्ट को एंडोर्स
- 8:24:31करने के अलावा फंडामेंटल राइट्स और नेशनल
- 8:24:34इकोनॉमिक प्रोग्राम पर रेजोल्यूशन भी पास
- 8:24:36किया गया था। कांग्रेस डिक्लेअ करती है कि
- 8:24:39लोगों का शोषण खत्म करने के लिए पॉलिटिकल
- 8:24:42फ्रीडम के साथ-साथ इकोनॉमिक फ्रीडम भी
- 8:24:44जरूरी है। फंडामेंटल राइट्स पर रेजोल्यूशन
- 8:24:48बेसिक सिविल राइट्स की गारंटी देता है।
- 8:24:50जिसमें फ्री स्पीच, फ्री प्रेस, फ्री
- 8:24:52असेंबली और फ्रीडम ऑफ एसोसिएशन शामिल थे।
- 8:24:55इसके साथ ही इक्वलिटी बिफोर द लॉ
- 8:24:58इरिस्पेक्टिव ऑफ कास्ट, क्रीड और सेक्स,
- 8:25:00रिलीजियस मैटर्स में स्टेट की
- 8:25:02न्यूट्रलिटी, यूनिवर्सल एडल्ट फ्रेंचाइज
- 8:25:04के बेसिस पर इलेक्शंस और फ्री एंड कंपलसरी
- 8:25:07प्राइमरी एजुकेशन जैसे राइट्स भी इसका
- 8:25:09पार्ट थे। यहां माइनॉरिटीज और डिफरेंट
- 8:25:12लिंग्विस्टिक एरियाज के कल्चर, लैंग्वेज
- 8:25:15और स्क्रिप्ट को प्रोटेक्ट करने की बात भी
- 8:25:17कही गई थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि
- 8:25:20इसी रेजोल्यूशन को हम अपने कॉन्स्टिट्यूशन
- 8:25:23में बाद में फंडामेंटल राइट्स के रूप में
- 8:25:25पार्ट थ्री में अडॉप करते हैं। नेशनल
- 8:25:28इकोनॉमिक प्रोग्राम के तहत रेंट और
- 8:25:30रेवेन्यू में सब्सटैंशियल रिडक्शन प्रॉमिस
- 8:25:32किया गया था। इसके अलावा अनइकोनमिक
- 8:25:35होल्डिंग्स होने पर रेंट से एक्सेंपशन,
- 8:25:37एग्रीकल्चरल इनडेटेडनेस में रिलीफ और
- 8:25:40कंट्रोल ऑफ यूजुअली की बात भी की गई थी।
- 8:25:43इसमें वर्कर्स के लिए लिविंग वेज के साथ
- 8:25:45बेटर कंडीशंस, लिमिटेड आवर्स ऑफ वर्क,
- 8:25:48प्रोटेक्शन ऑफ वुमेन वर्कर्स और यूनियन
- 8:25:50फॉर्म करने का राइट भी शामिल था। यह
- 8:25:53प्रोग्राम की इंडस्ट्रीज, माइंस और मीन्स
- 8:25:56ऑफ ट्रांसपोर्ट पर स्टेट ओनरशिप भी
- 8:25:58प्रॉमिस करता है। इस तरह से कराची
- 8:26:01रेजोल्यूशन कांग्रेस के बेसिक पॉलिटिकल और
- 8:26:04इकोनॉमिक प्रोग्राम को रिप्रेजेंट करता
- 8:26:06है। आजादी के बाद भी कांग्रेस पॉलिसीज में
- 8:26:10इसका एसेंस देखा जा सकता है। कराची सेशन
- 8:26:13में गांधी अर्विन पैक्ट को एंडोर्स किया
- 8:26:16जा चुका था। अब बारी थी सेकंड राउंड टेबल
- 8:26:19कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के पार्टिसिपेशन
- 8:26:21की।
- 8:26:22सेकंड राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस एंड गांधीजीस
- 8:26:25पार्टिसिपेशन।
- 8:26:27दोस्तों 29th अगस्त 1931 को गांधी जी
- 8:26:31सेकंड राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस अटेंड करने
- 8:26:33लंदन के लिए निकल जाते हैं। सेकंड राउंड
- 8:26:36टेबल कॉन्फ्रेंस 7th सितंबर 1931 से 1
- 8:26:40दिसंबर 1931 तक लंदन में आयोजित की जाती
- 8:26:43है। इंडियन नेशनल कांग्रेस की तरफ से
- 8:26:46गांधी जी को सोल रिप्रेजेंटेटिव बनाया गया
- 8:26:49था। इसके अलावा प्रिंसली स्टेट्स के
- 8:26:52रिप्रेजेंटेटिव भी यहां मौजूद थे।
- 8:26:55मुस्लिम्स का प्रतिनिधित्व आगा खान थर्ड,
- 8:26:58मौलाना शौकत अली, मोहम्मद अली जिन्ना,
- 8:27:01मोहम्मद इकबाल जैसे लीडर्स कर रहे थे।
- 8:27:03हिंदू ग्रुप्स को एमआर जयकर, बी एस मुंजी
- 8:27:07और दीवान बहादुर राजा नरेंद्रनाथ
- 8:27:10रेप्रेजेंट कर रहे थे। इसके अलावा लिबरल
- 8:27:13पार्टी से जीएन बसू, तेज बहादुर सप्रू और
- 8:27:16चिमनालाल हरिलाल सीटलवार जैसे लीडर्स
- 8:27:19पहुंचे हुए थे। डिप्रेस्ड क्लासेस का
- 8:27:21रिप्रेजेंटेशन बी आर अंबेडकर और रतमलाई
- 8:27:24श्रीनिवासन कर रहे थे। गवर्नमेंट ऑफ
- 8:27:27इंडिया को रिप्रेजेंट करने के लिए सीपी
- 8:27:29रामस्वामी अय्यर, नरेंद्रनाथ और एम
- 8:27:32रामचंद्र राव गए हुए थे। कहने का मतलब यह
- 8:27:35हुआ कि इंडियन पॉलिटी और सोसाइटी के लगभग
- 8:27:38हर सेक्शन की तरफ से रिप्रेजेंटेटिव्स
- 8:27:41सेकंड राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में पहुंच गए
- 8:27:43थे। यहां मौजूद ज्यादातर डेलीगेट्स
- 8:27:46लॉयलिस्ट, कम्युनलिस्ट, करियरिस्ट्स थे या
- 8:27:49फिर बड़े जमींदार और प्रिंसेस के
- 8:27:51रिप्रेजेंटेटिव्स थे और इन्हें खुद
- 8:27:53गवर्नमेंट ने ही पिक किया हुआ था।
- 8:27:56गवर्नमेंट इनके जरिए यह दिखाना चाहती थी
- 8:27:59कि कांग्रेस सभी इंडियंस के इंटरेस्ट को
- 8:28:02रिप्रेजेंट नहीं करती। कांफ्रेंस में
- 8:28:04गांधी जी कहते हैं कि इंडिया और ब्रिटेन
- 8:28:07के बीच इक्वलिटी के बेसिस पर पार्टनरशिप
- 8:28:10होनी चाहिए और डिमांड रखते हैं कि सेंटर
- 8:28:13और प्रोविंसेस में तुरंत ही रिस्पांसिबल
- 8:28:15गवर्नमेंट एस्टैब्लिश की जाए। इसके साथ ही
- 8:28:18अनटचेबल्स को हिंदू मानते हुए गांधी जी
- 8:28:21कहते हैं कि इन्हें माइनॉरिटी की तरह
- 8:28:23ट्रीट नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए इनके
- 8:28:26लिए सेपरेट इलेक्टोरेट्स के आईडिया को वह
- 8:28:29डिस्कार्ड कर देते हैं। इसके अलावा गांधी
- 8:28:32जी यह भी कहते हैं कि मुस्लिम्स या किसी
- 8:28:35और माइनॉरिटी ग्रुप के लिए भी सेपरेट
- 8:28:37इलेक्टोरेट की जरूरत नहीं है। लेकिन बाकी
- 8:28:40डेलीगेट्स गांधी जी से सहमत नहीं होते। इस
- 8:28:44तरह अलग-अलग डेलीगेट ग्रुप्स के बीच कोई
- 8:28:46एग्रीमेंट नहीं बन पाता और सेकंड राउंड
- 8:28:49टेबल कॉन्फ्रेंस में भी इंडिया के
- 8:28:51कॉन्स्टिट्यूशनल फ्यूचर पर कोई डिसीजन
- 8:28:53नहीं होता। ब्रिटिश गवर्नमेंट इंडिया की
- 8:28:56आजादी की डिमांड को मानने से इंकार कर
- 8:28:59देती है। 28th दिसंबर 1931 को गांधी जी
- 8:29:03हताश होकर वापस इंडिया आ जाते हैं और अगले
- 8:29:06ही दिन कांग्रेस वर्किंग कमेटी सिविल
- 8:29:09डिसओबिडियंस मूवमेंट को रिज्यूम करने का
- 8:29:11डिसीजन लेती है।
- 8:29:15सिविल डिसओबिडियंस रिज्यूम्ड एंड
- 8:29:17गवर्नमेंट्स रिस्पांस।
- 8:29:21दोस्तों इस तरह सिविल डिसओबिडियंस का
- 8:29:24सेकंड फेज शुरू होता है। फर्स्ट फेज के
- 8:29:27दौरान ब्रिटिश गवर्नमेंट आंदोलन के
- 8:29:29अगेंस्ट रिस्पांस को लेकर कंफ्यूजन में
- 8:29:31दिखी थी। लेकिन सेकंड फेज में ऐसा नहीं
- 8:29:34होता। लॉर्ड एरर्विन की जगह लॉर्ड
- 8:29:36विलिंगटन वायसरॉय बन चुके थे और वह
- 8:29:38गांधीजी और उनके आंदोलन को किसी भी तरह की
- 8:29:42ढील देने के मूड में नहीं थे। इसलिए 4th
- 8:29:45जनवरी 1932 को गांधी जी को अरेस्ट कर लिया
- 8:29:49जाता है। साथ ही ऑर्डिनेंस के जरिए
- 8:29:51अथॉरिटीज को अनलिमिटेड पावर दे दी जाती
- 8:29:54हैं। सभी सिविल लिबर्टीज को खत्म कर दिया
- 8:29:57जाता है। अथॉरिटीज अपनी मर्जी से लोगों और
- 8:30:00उनकी प्रॉपर्टी को सीज कर सकती थी। इस तरह
- 8:30:04एक हफ्ते के अंदर ही सभी लीडिंग
- 8:30:06कांग्रेसमैन को जेल में डाल दिया जाता है।
- 8:30:09गवर्नमेंट के इस एक्शन के अगेंस्ट इंडिया
- 8:30:11के लोग गुस्से से रिएक्ट करते हैं।
- 8:30:14कांग्रेस ने भले ही बिना किसी प्रेपरेशन
- 8:30:16के आंदोलन शुरू किया था, लेकिन इसे मैसिव
- 8:30:19पॉपुलर रिस्पांस मिलता है। पहले 4 महीने
- 8:30:22में ही करीब 80,000 सत्याग्रहीस को जेल
- 8:30:26होती है। लाखों लोग लकर और फॉरेन क्लोथ्स
- 8:30:29बेचने वाली शॉप्स की पिकिंग करते हैं।
- 8:30:32इललीगल गैदरिंग्स, नॉन वायलेंट
- 8:30:34डेमोंस्ट्रेशंस जैसे मेथड्स के साथ
- 8:30:36ऑर्डिनेंस का डिफाइंस किया जाने लगता है।
- 8:30:40नॉन वायलेंट आंदोलन को गवर्नमेंट पूरी
- 8:30:42शक्ति से दबाना शुरू कर देती है। कांग्रेस
- 8:30:45और उसकी एलाइड ऑर्गेनाइजेशंस को इललीगल
- 8:30:47डिक्लेअ कर दिया जाता है। साथ ही उनके
- 8:30:50ऑफिसिसेस और फंड्स सीज कर लिए जाते हैं।
- 8:30:53सभी गांधी आश्रम्स पर पुलिस अपना कब्जा कर
- 8:30:56लेती है। पीसफुल पिकेटर्स, सत्याग्रहीस और
- 8:30:59प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया जाता
- 8:31:02है, मारा जाता है और कठोर दंड और फाइन लगा
- 8:31:06दिए जाते हैं। जेल में प्रिजनर्स को बहुत
- 8:31:09ही क्रूरता के साथ ट्रीट किया जाता है।
- 8:31:11सजा के तौर पर कोड़े बरसाना रोज की बात हो
- 8:31:14जाती है। रूरल इंडिया के डिफरेंट पार्ट्स
- 8:31:17में चल रहे नो टैक्स कैंपेन के अगेंस्ट भी
- 8:31:20कठोर कदम लिए जाते हैं। लोगों की जमीन,
- 8:31:22घर, मवेशी, खेती के साधन और बाकी संपत्ति
- 8:31:26को जब्त कर लिया जाता है। पुलिस लोगों का
- 8:31:29अलग-अलग तरीके से शोषण करने लगती है। लोग
- 8:31:32अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते हैं फाइट बैक
- 8:31:35करने की। लेकिन गांधी जी और बाकी लीडर्स
- 8:31:38को मौका ही नहीं मिलता आंदोलन के टेमो को
- 8:31:40बिल्ड करने का। इसलिए ज्यादा लंबे समय तक
- 8:31:44आंदोलन सस्टेन नहीं कर पाता। कुछ ही
- 8:31:46महीनों के अंदर गवर्नमेंट इफेक्टिवली
- 8:31:48आंदोलन को क्रश कर देती है। हालांकि थोड़ी
- 8:31:51बहुत जान आंदोलन में अभी भी बची हुई थी और
- 8:31:54अर्ली अप्रैल 1934 तक यह चलता रहता है और
- 8:31:58फिर फाइनली गांधीजी आंदोलन को विड्रॉ करने
- 8:32:01का डिसीजन लेते हैं। दोस्तों, इस तरह
- 8:32:04सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट का सेकंड फेज
- 8:32:07भी एंड हो जाता है। इस आंदोलन के दौरान ही
- 8:32:10एक और महत्वपूर्ण घटना हुई थी जिसकी चर्चा
- 8:32:13करना जरूरी है। कम्युनल अवार्ड एंड पूना
- 8:32:17पैक्ट। सेकंड राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में
- 8:32:20डिप्रेस्ड क्लासेस की तरफ से सेपरेट
- 8:32:22इलेक्टोरेट की डिमांड की गई थी। जिसका
- 8:32:24गांधी जी ने विरोध भी किया था। लेकिन
- 8:32:26डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी को फॉलो करते
- 8:32:29हुए अगस्त 1932 में ब्रिटिश पीएम
- 8:32:32मैकडोनाल्ड सभी माइनॉरिटीज के लिए सेपरेट
- 8:32:35इलेक्टोरेट की घोषणा कर देते हैं। इसे
- 8:32:37कम्युनल अवार्ड भी कहा जाता है। इसमें
- 8:32:40डिप्रेस्ड क्लासेस को भी माइनॉरिटी
- 8:32:42कम्युनिटी माना गया था। उस समय गांधी जी
- 8:32:45पुणे की यरवाड़ा जेल में थे। ब्रिटिशर्स
- 8:32:48द्वारा हिंदूस को डिवाइड करने की इस कोशिश
- 8:32:51का वह पूरा विरोध करते हैं। इसके लिए
- 8:32:54गांधी जी 20th सितंबर 1932 को आमरण अनशन
- 8:32:58यानी कि फास्ट अनटू डेथ शुरू कर देते हैं।
- 8:33:02उनके अनुसार अगर डिप्रेस्ड क्लासेस को एक
- 8:33:05सेपरेट कम्युनिटी की तरह ट्रीट किया जाने
- 8:33:07लगा तो अनटचेबिलिटी को खत्म करने का सवाल
- 8:33:10ही नहीं रहेगा। और इस दिशा में किए जा रहे
- 8:33:13हिंदू सोशल रिफॉर्म बेकार हो जाएंगे। साथ
- 8:33:16ही हिंदूस भी हमेशा के लिए डिवाइड हो
- 8:33:18जाएंगे। इसलिए गांधी जी चाहते थे कि
- 8:33:22डिप्रेस्ड क्लासेस के रिप्रेजेंटेटिव्स भी
- 8:33:24जनरल इलेक्टोरेट के द्वारा ही चुने जाएं।
- 8:33:27ऐसी सिचुएशन में डिफरेंट पॉलिटिकल
- 8:33:29पर्सुएशन के लीडर्स एक साथ आते हैं।
- 8:33:32जिनमें मदन मोहन मालवीय, एमसी राजा और बी
- 8:33:35आर अंबेडकर शामिल थे। यह लोग आखिर में एक
- 8:33:39समझौते पर राजी हो जाते हैं जिसे पूना
- 8:33:42समझौता या पूना पैक्ट कहा जाता है। पूना
- 8:33:46पैक्ट के अनुसार डिप्रेस्ड क्लासेस के लिए
- 8:33:48सेपरेट इलेक्टोरेट का आईडिया छोड़ दिया
- 8:33:51जाता है और इसकी जगह प्रोविंशियल
- 8:33:53लेजिस्लेचर्स में उनके लिए रिजर्व्ड सीट्स
- 8:33:55की संख्या को 71 से बढ़ाकर 147 कर दिया
- 8:33:59जाता है। साथ ही सेंट्रल लेजिस्लेचर में
- 8:34:02भी टोटल सीट्स का 18% उनके लिए रिजर्व कर
- 8:34:06दिया जाता है। इस तरह से पूना पैक्ट के
- 8:34:08बाद गांधी जी अपना फास्ट तोड़ते हैं। साथ
- 8:34:12ही जेल से बाहर आने पर सभी काम छोड़कर
- 8:34:15लगभग 2 साल तक वो अनटचेबिलिटी के अगेंस्ट
- 8:34:18कैंपेन में ही एक्टिव रहते हैं। इस दौरान
- 8:34:227th नवंबर 1933 से लेकर 29th जुलाई 1934
- 8:34:26तक यानी कि करीब 9 महीने का इंटेंसिव
- 8:34:29हरिजन टूर भी कंडक्ट करते हैं। हरिजन नाम
- 8:34:33गांधी जी ने डिप्रेस्ड क्लासेस को दिया
- 8:34:35था। इस स्टोर के दौरान गांधी जी करीब
- 8:34:3920,000 किलोमीटर की यात्रा करते हैं।
- 8:34:42रिसेंटली फाउंडेड हरिजन सेवक संघ के लिए
- 8:34:45फंड्स कलेक्ट करते हैं। सभी फॉर्म्स में
- 8:34:48अनटचेबिलिटी की प्रैक्टिस को खत्म करने की
- 8:34:50अपील करते हैं और सोशल वर्कर्स से कहते
- 8:34:53हैं कि गांव-गांव जाकर हरिजंस के सोशल,
- 8:34:56इकोनॉमिक, कल्चरल और पॉलिटिकल अपलिफ्टमेंट
- 8:34:59के लिए काम करें। दोस्तों, इस तरह गांधी
- 8:35:02जी अपने इनफ्लुएंस का यूज करके हिंदूस को
- 8:35:05डिवाइड होने से बचा लेते हैं। आइए अब वापस
- 8:35:09नेशनल मूवमेंट की तरफ चला जाए। डिबेट्स
- 8:35:13आफ्टर सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट।
- 8:35:16दोस्तों, बड़े आंदोलन के खत्म होने के बाद
- 8:35:19एक बार फिर से सवाल खड़ा होता है कि आगे
- 8:35:22की स्ट्रेटजी क्या होगी? इसे लेकर
- 8:35:24कांग्रेस में तीन पर्सपेक्टिव्स सामने आते
- 8:35:27हैं। पहला था कि गांधियन लाइंस पर
- 8:35:30कंस्ट्रक्टिव वर्क किया जाए। दूसरा
- 8:35:33पर्सपेक्टिव था कि कॉन्स्टिट्यूशनल
- 8:35:35स्ट्रगल को रिवाइव किया जाए और 1934 में
- 8:35:38होने वाले सेंट्रल लेजिस्लेचर के इलेक्शंस
- 8:35:41में पार्टिसिपेट किया जाए। इसका सपोर्ट
- 8:35:44एमए अंसारी, आसफ अली, भुला भाई देसाई, एस
- 8:35:48सत्यमूर्ति और बीसी रॉय जैसे लीडर्स कर
- 8:35:50रहे थे। इनके अलावा जो तीसरा पर्सपेक्टिव
- 8:35:54सामने आ रहा था वह कांग्रेस में उभरते
- 8:35:56स्ट्रांग लेफ्टिस्ट ट्रेंड का था। इसे
- 8:35:59जवाहरलाल नेहरू जैसे लीडर्स रिप्रेजेंट कर
- 8:36:02रहे थे और यह लोग कंस्ट्रक्टिव वर्क और
- 8:36:05काउंसिल एंट्री दोनों को ही क्रिटिसाइज
- 8:36:07करते हैं। इसकी जगह यह जन आंदोलन को ही
- 8:36:10कंटिन्यू रखने के पक्ष में थे। फाइनली
- 8:36:14काउंसिल एंट्री के फेवर में फैसला लिया
- 8:36:16जाता है। मई 1934 में ऑल इंडिया कांग्रेस
- 8:36:19कमेटी पटना में मिलती है और
- 8:36:21पार्लियामेंट्री बोर्ड सेटअप किया जाता
- 8:36:23है। कांग्रेस के बैनर में ही इलेक्शंस
- 8:36:26फाइट करने का डिसीजन हो जाता है। इसी बीच
- 8:36:29गांधी जी को यह भरोसा हो जाता है कि
- 8:36:32कांग्रेस के पावरफुल ट्रेंड्स के साथ उनके
- 8:36:34अपने विचार नहीं मिलते। लार्ज सेक्शन
- 8:36:37पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स को फेवर कर रहा
- 8:36:39था। गांधीजी इसके पूरी तरह खिलाफ थे। साथ
- 8:36:43ही सोशलिस्ट ग्रुप से भी उनके फंडामेंटल
- 8:36:46डिफरेंसेस थे। इसलिए अक्टूबर 1934 में
- 8:36:50गांधी जी कांग्रेस से रिजाइन कर देते हैं।
- 8:36:53नवंबर 1934 में सेंट्रल लेजिसलेटिव
- 8:36:57असेंबली के इलेक्शंस होते हैं। इसमें टोटल
- 8:37:0075 इलेक्टेड सीट्स में से 45 पर कांग्रेस
- 8:37:04की जीत होती है। लेकिन इससे भी ज्यादा
- 8:37:06इंपॉर्टेंट इलेक्शन होना अभी बाकी था।
- 8:37:10गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 एंड
- 8:37:13इलेक्शंस ऑफ 1937।
- 8:37:16दोस्तों, 1932 के आंदोलन के दौरान ही थर्ड
- 8:37:20राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइज की जाती
- 8:37:22है। इसमें भी कांग्रेस पार्टिसिपेट नहीं
- 8:37:25करती। यहां पर हुए डिस्कशंस के बाद
- 8:37:27ब्रिटिश गवर्नमेंट 1935 का एक्ट पास करती
- 8:37:30है। इस एक्ट में प्रोविंशियल ऑटोनोमी
- 8:37:33इंट्रोड्यूस की गई थी और इसके लिए ही
- 8:37:36अर्ली 1937 में इलेक्शंस डिक्लेअ कर दिए
- 8:37:39जाते हैं। इलेक्शंस को लेकर एक बार फिर से
- 8:37:42कांग्रेस में डिबेट शुरू हो जाती है। सभी
- 8:37:44लीडर्स एग्री करते थे कि 1935 के एक्ट का
- 8:37:48विरोध करना है। लेकिन यह विरोध किस तरह से
- 8:37:51किया जाए इसको लेकर सबकी अलग-अलग राय थी।
- 8:37:55फाइनली 1937 के फैजपुर सेशन में इलेक्शंस
- 8:38:00में पार्टिसिपेट करने पर सहमति बन जाती है
- 8:38:02और ऑफिस एक्सेप्टेंस का फैसला पोस्ट
- 8:38:05इलेक्शन पीरियड पर छोड़ दिया जाता है।
- 8:38:08फरवरी 1937 में इलेक्शंस होते हैं जिसमें
- 8:38:12कांग्रेस शानदार प्रदर्शन करती है। 1161
- 8:38:17कंटेस्टेड सीट्स में से 76 सीट्स पर इनकी
- 8:38:21जीत होती है। कुछ महीनों की टसल के बाद
- 8:38:24कांग्रेस वर्किंग कमेटी ऑफिस एक्सेप्ट
- 8:38:26करने का फैसला लेती है और टोटल 11 में से
- 8:38:29एट प्रोविंसेस में गवर्नमेंट फॉर्म की
- 8:38:32जाती है। जिसमें मद्रास, बॉम्बे, सेंट्रल
- 8:38:35प्रोविंसेस, ओसा, बिहार, यूपी, नॉर्थ
- 8:38:38वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस और आसाम शामिल
- 8:38:41था। आइए जानते हैं गवर्नमेंट फॉर्म करने
- 8:38:44के बाद कांग्रेस मिनिस्ट्रीज का
- 8:38:46परफॉर्मेंस कैसा रहता है।
- 8:38:4928 मंथ्स ऑफ कांग्रेस रूल। दोस्तों,
- 8:38:52कांग्रेस मिनिस्ट्रीज लोगों के वेलफेयर के
- 8:38:55लिए काम करना शुरू करती है। हालांकि इनकी
- 8:38:58पावर्स लिमिटेड थी, फिर भी यह कुछ
- 8:39:00रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस करने की कोशिश करते
- 8:39:02हैं। सिविल लिबर्टीज को रिवाइव करते हुए
- 8:39:05सभी इमरजेंसी पावर्स को रिपील कर दिया
- 8:39:08जाता है। इललीगल डिक्लेअ की गई पॉलिटिकल
- 8:39:11ऑर्गेनाइजेशंस और जर्नल्स पर से बैन हटा
- 8:39:14दिया जाता है। प्रेस पर से सभी
- 8:39:16रिस्ट्रिकशंस रिमूव कर दिए जाते हैं।
- 8:39:18हजारों पॉलिटिकल प्रिजनर्स के रिलीज़ का
- 8:39:21ऑर्डर इशू किया जाता है। इसके साथ ही
- 8:39:24पेज़ेंस और वर्कर्स को इकोनॉमिक रिलीफ देने
- 8:39:27की कोशिश भी की जाती है। हालांकि इस एरिया
- 8:39:30में इन्हें बहुत ज्यादा सफलता नहीं मिलती
- 8:39:33क्योंकि एक तो 1935 के एक्ट के अकॉर्डिंग
- 8:39:35इनके पास लिमिटेड पावर्स ही थी और दूसरा
- 8:39:39फाइनशियल रिसोर्सेज की भी बहुत कमी थी।
- 8:39:41इसके अलावा टाइम भी एक कंस्ट्रेंट बन जाता
- 8:39:44है। कांग्रेस मिनिस्ट्रीज का रूल सिर्फ 28
- 8:39:47मंथ्स तक ही रहता है और यह समय बड़े
- 8:39:50एग्रेररियन या एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स
- 8:39:52के लिए काफी नहीं था। 1939 में सेकंड
- 8:39:56वर्ल्ड वॉर शुरू हो जाता है और ब्रिटेन
- 8:39:59बिना इंडियंस की परमिशन के इंडिया को
- 8:40:01वर्ल्ड वॉर में पार्टिसिपेंट बना देता है।
- 8:40:04इसी के विरोध में कांग्रेस मिनिस्ट्रीज
- 8:40:06अक्टूबर 1939 में रिजाइन कर देती हैं।
- 8:40:10कंक्लूजन
- 8:40:12दोस्तों इलेक्शंस में पार्टिसिपेट करने और
- 8:40:15फिर गवर्नमेंट फॉर्म करने से कांग्रेस
- 8:40:17लीडर्स को पार्लियामेंट्री सिस्टम में काम
- 8:40:19करने का वैल्यूुएबल एक्सपीरियंस मिलता है।
- 8:40:23यही एक्सपीरियंस आजादी के बाद इंडियन
- 8:40:25डेमोक्रेसी को सस्टेन करने में काफी हेल्प
- 8:40:28करता है। अपने आगे आने वाले वीडियोस में
- 8:40:30हम देखेंगे कि कैसे सेकंड वर्ल्ड वॉर के
- 8:40:33दौरान नेशनल मूवमेंट डिसाइसिव फेस में
- 8:40:36पहुंच जाता है। क्रिप्स मिशन टू क्विट
- 8:40:39इंडिया मूवमेंट। दोस्तों, आज हम इंडियन
- 8:40:42नेशनल स्ट्रगल के डिसाइसिव फेज को डिस्कस
- 8:40:45करने जा रहे हैं। यह फेज 1940 से शुरू
- 8:40:49होता है। इस दौरान जहां एक तरफ ब्रिटिश
- 8:40:52गवर्नमेंट की तरफ से अलग-अलग मिशनंस और
- 8:40:54प्लान अनाउंस किए जाते हैं। वहीं इंडियंस
- 8:40:56की तरफ से देश की आजादी के लिए करो या मरो
- 8:40:59की लड़ाई शुरू होती है। आइए शुरू करते हैं
- 8:41:02इसके बैकग्राउंड को समझकर।
- 8:41:05बैकग्राउंड सेकंड वर्ल्ड वॉर एंड कांग्रेस
- 8:41:08रिस्पांस। दोस्तों सेप्टेंबर 1939 में
- 8:41:12सेकंड वर्ल्ड वॉर की शुरुआत होती है और
- 8:41:15ब्रिटिश इंडियन गवर्नमेंट कांग्रेस या
- 8:41:17सेंट्रल लेजिस्लेचर के इलेक्टेड मेंबर से
- 8:41:20कंसल्ट किए बिना ही इंडिया को भी वॉर में
- 8:41:22पार्टिसिपेंट डिक्लेअ कर देती है।
- 8:41:25कांग्रेस पूरी तरह से फैशिस्ट फोर्सेस के
- 8:41:27अगेंस्ट थी और एलाइयड कॉज का सपोर्ट भी
- 8:41:30करना चाहती थी। लेकिन उनका मानना यह था कि
- 8:41:33खुद गुलामी में रहते हुए इंडिया किसी
- 8:41:36दूसरे देश की फ्रीडम की फाइट नहीं कर
- 8:41:38सकता। कांग्रेस के ऑफिशियल स्टैंड को
- 8:41:41डिस्कस करने के लिए 10 से 14 सितंबर के
- 8:41:44बीच वर्धा में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की
- 8:41:46मीटिंग होती है। यहां कांग्रेस लीडर्स के
- 8:41:49अलग-अलग व्यूज सामने आते हैं। गांधीजी एलई
- 8:41:53पावर्स के साथ सिंपैथी शो करते हैं। उनका
- 8:41:55मानना था कि वेस्टर्न यूरोप के
- 8:41:57डेमोक्रेटिक स्टेट्स और हिटलर के नासी
- 8:41:59स्टेट में क्लियर डिफरेंस है। वहीं
- 8:42:02सोशलिस्ट और सुभाष चंद्र बोस का कहना था
- 8:42:05कि यह वॉर एक इंपीरियलिस्ट वॉर है।
- 8:42:08क्योंकि दोनों ही साइड्स कॉलोनियल
- 8:42:10टेरिटरीज को गेन करने या डिफेंड करने के
- 8:42:12लिए ही फाइट कर रही हैं। इसलिए किसी भी
- 8:42:15साइड को सपोर्ट करने का सवाल ही नहीं है।
- 8:42:17बल्कि कांग्रेस को सिचुएशन का फायदा उठाते
- 8:42:20हुए तुरंत ही आजादी के लिए आंदोलन शुरू कर
- 8:42:22देना चाहिए। इन सबके बीच जवाहरलाल नेहरू
- 8:42:26का अपना अलग स्टैंड था। उनके अनुसार
- 8:42:28जस्टिस तो ब्रिटेन, फ्रांस और पोलैंड के
- 8:42:31साथ ही है। लेकिन साथ ही ब्रिटेन और
- 8:42:33फ्रांस इंपीरियलिस्ट कंट्रीज हैं। और यह
- 8:42:36वॉर कैपिटलिज्म के इनर कंट्राडिकशंस का ही
- 8:42:39नतीजा है। इसलिए नेहरू जी का कहना था कि
- 8:42:42फ्रीडम मिलने तक ना तो इंडिया को वॉर जॉइ
- 8:42:45करना चाहिए और ना ही ब्रिटेन की मुश्किल
- 8:42:47का फायदा उठाते हुए अभी कोई आंदोलन ही
- 8:42:49शुरू करना चाहिए। फाइनली नेहरू जी के
- 8:42:52स्टैंड को ही कांग्रेस का ऑफिशियल स्टैंड
- 8:42:54डिक्लेअ किया जाता है। कमेटी अपने
- 8:42:56रेजोल्यूशन पर पोलैंड पर हुए नाजी अटैक को
- 8:42:59कंडेम करती है। साथ ही डिक्लेअ करती है कि
- 8:43:02इंडिया इस वॉर में पार्टी नहीं बन सकती।
- 8:43:05क्योंकि कहने के लिए तो यह वॉर
- 8:43:07डेमोक्रेटिक फ्रीडम के लिए लड़ा जा रहा
- 8:43:09है। लेकिन इंडिया को यही फ्रीडम नहीं दी
- 8:43:12जा रही।
- 8:43:13अगर ब्रिटेन सच में डेमोक्रेसी और फ्रीडम
- 8:43:16की फाइट कर रहा है तो उसे इंडिया में यह
- 8:43:18प्रूव करना चाहिए। पर्टिकुलरली यह साफ
- 8:43:21करना चाहिए कि अपने वॉर एम्स को ब्रिटेन
- 8:43:23इंडिया में कैसे इंप्लीमेंट करेगा। उसके
- 8:43:26बाद इंडियंस खुशी से वॉर में उनका साथ
- 8:43:29देने के लिए तैयार हैं। इस रेजोल्यूशन के
- 8:43:32अगेंस्ट ब्रिटिश गवर्नमेंट का रिस्पांस
- 8:43:34पूरी तरह नेगेटिव रहता है। वायसरॉय लिनगो
- 8:43:3817th अक्टूबर 1939 को एक स्टेटमेंट जारी
- 8:43:41करते हैं। जिसमें वो मुस्लिम लीग और
- 8:43:44प्रिंसेस को कांग्रेस के अगेंस्ट यूज करने
- 8:43:46की कोशिश करते हैं। ब्रिटेन के वॉर एम्स
- 8:43:49को डिफाइन करने से साफ इंकार भी कर देते
- 8:43:51हैं। फ्यूचर को लेकर बस इतना प्रॉमिस करते
- 8:43:54हैं कि वॉर खत्म होने के बाद ब्रिटिश
- 8:43:57गवर्नमेंट इंडिया की सेवरल पार्टीज,
- 8:43:59कम्युनिटीज के रिप्रेजेंटेटिव्स और इंडियन
- 8:44:01प्रिंसेस के साथ कंसल्टेशंस करेगी और
- 8:44:04डिसाइड करेगी कि 1935 एक्ट को कैसे
- 8:44:08मॉडिफाई किया जा सकता है। इसके रिएक्शन
- 8:44:11में गांधी जी कहते हैं कि ब्रिटिश
- 8:44:13गवर्नमेंट अपनी डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी
- 8:44:15को ही कंटिन्यू कर रही है। वायसरॉय की
- 8:44:18डिक्लेरेशन से साफ है कि अगर ब्रिटेन का
- 8:44:20बस चले तो इंडिया में कभी भी डेमोक्रेसी
- 8:44:23नहीं आने देगा। कांग्रेस ने तो ब्रेड
- 8:44:25मांगी थी लेकिन उसे पत्थर मिले हैं। 23
- 8:44:28अक्टूबर को वर्किंग कमेटी वायसराॉय की
- 8:44:31स्टेटमेंट को रिजेक्ट करते हुए कांग्रेस
- 8:44:33मिनिस्ट्री से रिजाइन करने के लिए कहती
- 8:44:35है। लेकिन अभी भी जन आंदोलन शुरू करने की
- 8:44:38कोई बात नहीं होती। गवर्नमेंट कुछ भी
- 8:44:41सुनने के लिए तैयार नहीं थी और एक के बाद
- 8:44:44एक ऑर्डिनेंस जारी करके सिविल लिबर्टीज पर
- 8:44:47रिस्ट्रिकशंस लगाने लगती है। वो टाइम
- 8:44:50मेजर्स की वजह से पहले ही आम आदमी दुखी
- 8:44:52था। इकोनमी की बेसिक नेसेसिटीज भी अवेलेबल
- 8:44:56नहीं थी। फिर धीरे-धीरे कांग्रेस लीडरशिप
- 8:44:58और मासेस का पेशेंस भी खत्म होने लगता है
- 8:45:02और अंग्रेजों को यह बताने का समय आ जाता
- 8:45:04है कि इंडियंस का पेशेंस उनकी कमजोरी की
- 8:45:07निशानी नहीं है। ऑगस्टफर एन इंडिविजुअल
- 8:45:11सत्याग्रह। दोस्तों, 1940 की शुरुआत में
- 8:45:15वर्ल्ड वॉर में हिटलर को सक्सेस मिलती जा
- 8:45:17रही थी। बेल्जियम, हॉलैंड और फ्रांस को
- 8:45:20फास्टेस्ट पावर्स ने जीत लिया था। ऐसे में
- 8:45:23ब्रिटेन कंसिलिएटरी मूड में आ जाता है।
- 8:45:26कांग्रेस भी कॉम्प्रोमाइज के लिए तैयार
- 8:45:28थी। अगर उसे वॉर के दौरान इंटेरिम
- 8:45:30गवर्नमेंट फॉर्म करने दिया जाए। लेकिन
- 8:45:33ब्रिटिश गवर्नमेंट कांग्रेस की डिमांड
- 8:45:35एक्सेप्ट नहीं करती और अपनी तरफ से एक ऑफर
- 8:45:39लेकर आती है जिसे ऑगस्ट ऑफर कहा जाता है।
- 8:45:43वायसरॉय लिन गो इसमें अनाउंस करते हैं कि
- 8:45:47इंडिया को डोमिनियन स्टेटस देना ब्रिटिश
- 8:45:49गवर्नमेंट का ऑब्जेक्टिव है। साथ ही
- 8:45:52वायसरॉय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल को
- 8:45:54एक्सपेंड करने का प्रपोजल भी रखते हैं।
- 8:45:57जिसमें इंडियंस की मेजॉरिटी होगी।
- 8:46:00वॉर के बाद क्स्टिटुएंट असेंबली सेटअप
- 8:46:02करने की बात भी इसमें होती है। लेकिन यह
- 8:46:05भी कहा जाता है कि बिना माइनॉरिटीज की
- 8:46:08कंसेंट के कोई भी फ्यूचर कॉन्स्टिट्यूशन
- 8:46:10अडॉप्ट नहीं किया जाएगा। कांग्रेस इस
- 8:46:14ऑगस्ट ऑफर को रिजेक्ट कर देती है। क्योंकि
- 8:46:16कांग्रेस का गोल अब डोमिनियन स्टेटस नहीं
- 8:46:19बल्कि पूर्ण स्वराज था। जवाहरलाल नेहरू
- 8:46:22कहते हैं कि डोमिनियन स्टेटस का कांसेप्ट
- 8:46:24तो डोर नेल की तरह डेड हो चुका है। इसलिए
- 8:46:281940 के एंड में कांग्रेस एक बार फिर
- 8:46:31गांधी जी से कमांड संभालने के लिए कहती है
- 8:46:34और गांधी जी इंडिविजुअल सत्याग्रह शुरू
- 8:46:37करने का डिसीजन लेते हैं। यह सत्याग्रह हर
- 8:46:40लोकालिटी में कुछ सिलेक्टेड इंडिविजुअल्स
- 8:46:43के द्वारा लिया जाना था। इस सत्याग्रह का
- 8:46:45एम लोगों की फीलिंग को एक्सप्रेस करना था
- 8:46:48कि वह वॉर में इंटरेस्टेड नहीं है। उनके
- 8:46:51लिए नार्जिज्म और इंडिया पर रूल कर रहे
- 8:46:54डबल ऑटोक्रेसी में कोई अंतर नहीं है। साथ
- 8:46:57ही यह सत्याग्रह गवर्नमेंट को एक और मौका
- 8:46:59देता है कि वह पीसफुली कांग्रेस की डिमांड
- 8:47:01मान लें। सत्याग्रही को एंटी वॉर स्पीच
- 8:47:04देनी थी। इस एक्ट से वह वॉर के अगेंस्ट
- 8:47:08अपनी फ्रीडम ऑफ स्पीच की डिमांड करेंगे।
- 8:47:10और अगर गवर्नमेंट उन्हें अरेस्ट नहीं करती
- 8:47:13है तो इसी स्पीच को जगह-जगह जाकर रिपीट
- 8:47:16करेंगे और गांव से होकर दिल्ली के लिए
- 8:47:19मार्च करेंगे। इस तरह एक आंदोलन की शुरुआत
- 8:47:22होती है जिसे दिल्ली चलो आंदोलन भी कहा
- 8:47:25जाता है। इसमें सबसे पहले चुने जाने वाले
- 8:47:28सत्याग्रही विनोबा भावित थे और दूसरे
- 8:47:31सत्याग्रही जवाहरलाल नेहरू बनते हैं। मई
- 8:47:351941 तक 25,000 से भी ज्यादा लोगों को
- 8:47:39इंडिविजुअल सत्याग्रह करने के लिए अरेस्ट
- 8:47:41किया जाता है। हालांकि ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 8:47:44इसके बाद भी कांग्रेस की डिमांड्स मानने
- 8:47:46के लिए तैयार नहीं होती। लेकिन जल्द ही
- 8:47:49ऐसी इंटरनेशनल सिचुएशन बनती है कि उन्हें
- 8:47:52एक और मिशन इंडिया भेजना पड़ता है।
- 8:47:55क्रिप्स मिशन दोस्तों वर्ल्ड वॉर में
- 8:47:58ब्रिटेन की सिचुएशन क्रिटिकल होती जा रही
- 8:48:01थी। 22 जून 1941 को जर्मनी सोवियत यूनियन
- 8:48:05पर अटैक कर देता है और इसके बाद 7 दिसंबर
- 8:48:09को जापान पर्ल हारबर में अमेरिकन फ्लट पर
- 8:48:12सरप्राइज अटैक कर देता है। जल्दी ही जापान
- 8:48:15फिलीपींस, इंडो चाइना, इंडोनेशिया,
- 8:48:17मलेशिया और बर्मा पर कब्जा कर लेता है।
- 8:48:20तेजी से आगे बढ़ते हुए मार्च 1942 में
- 8:48:23रंगून को ऑक्यूपाई कर लिया जाता है। और इस
- 8:48:26तरह वॉर अब इंडिया के दरवाजे पर पहुंच
- 8:48:29जाती है। इंडियन लीडर्स को इंडिया के
- 8:48:32डिफेंस की चिंता होने लगती है। साथ ही वॉर
- 8:48:35की बिगड़ती सिचुएशन को देखते हुए यूएसए के
- 8:48:38प्रेसिडेंट रूबवेल्ट, चाइनीस प्रेसिडेंट
- 8:48:40चकाई शेख और ब्रिटेन की लेबर पार्टी के
- 8:48:43मेंबर्स चर्चिल पर दबाव डालने लगते हैं कि
- 8:48:46वो वॉर में इंडियंस का एक्टिव सपोर्ट लेने
- 8:48:48की कोशिश करें। इसलिए ब्रिटिश पीएम चर्चल
- 8:48:52मार्च 1942 में कैबिनेट मिनिस्टर स्टेफर्ड
- 8:48:55क्रिप्स की लीडरशिप में एक मिशन इंडिया
- 8:48:57भेजते हैं। लेकिन क्रिप्स का प्रपोजल भी
- 8:49:00इंडियन लीडर्स को निराश ही करता है।
- 8:49:03उन्होंने अपने प्रपोजल में वॉर के बाद
- 8:49:05इंडिया को डोमिनियन स्टेटस देने और
- 8:49:07क्स्टिटुएंट असेंबली फॉर्म करने का
- 8:49:09प्रॉमिस किया था। इस कॉन्स्टिटुएंट
- 8:49:12असेंबली के मेंबर्स को प्रोविंशियल
- 8:49:14असेंबलीज द्वारा इ किया जाना था। और
- 8:49:16प्रिंसली स्टेट्स के केस मेंबर्स रूलर्स
- 8:49:19द्वारा नॉमिनेट होने थे। ट्रिप्स प्रपोजल
- 8:49:22में एक प्रोविजन यह भी था कि अगर कोई
- 8:49:25प्रोविंस न्यू कॉन्स्टिट्यूशन को एक्सेप्ट
- 8:49:27नहीं करता तो उसे अधिकार होगा कि वो अपने
- 8:49:30फ्यूचर स्टेटस को लेकर ब्रिटेन के साथ एक
- 8:49:33सेपरेट एग्रीमेंट करें। यह प्रोविजन
- 8:49:36मुस्लिम लीग की सेपरेट स्टेट की डिमांड को
- 8:49:38अकोमोडेट करने के लिए था। क्रिप्स प्रपोजल
- 8:49:41के बारे में जवाहरलाल नेहरू ने लिखा है कि
- 8:49:43जब उन्होंने इसको पहली बार पढ़ा तो वह
- 8:49:46बहुत डिप्रेस्ड हो गए थे। कांग्रेस
- 8:49:48डोमिनियन स्टेटस, इंडिया के पार्टीशन और
- 8:49:51क्सिटुएंट असेंबली में नॉमिनेटेड मेंबर्स
- 8:49:54जैसे प्रोविजंस पर ऐतराज जताती है।
- 8:49:57ब्रिटिश गवर्नमेंट इनकी इमीडिएट ट्रांसफर
- 8:49:59ऑफ इफेक्टिव पावर की डिमांड को भी
- 8:50:01एक्सेप्ट करने से मना कर देती है। और इस
- 8:50:04तरह क्रिप्स मिशन भी फेल हो जाता है। यहां
- 8:50:07ध्यान रखने वाली बात यह है कि ब्रिटिश
- 8:50:09पीएम चर्चिल चाहते ही नहीं थे कि क्रिप्स
- 8:50:12मिशन कामयाब हो। उन्होंने यह मिशन सिर्फ
- 8:50:15इंटरनेशनल कम्युनिटी में दिखावे के लिए ही
- 8:50:17भेजा था। क्रिप्स को साफ बोल दिया गया था
- 8:50:21कि ड्राफ्ट डिक्लेरेशन से अलग वो कुछ भी
- 8:50:23नहीं कर सकते। बागेन और नेगोशिएट करने की
- 8:50:26इन कैपेसिटी की वजह से ही यह मिशन फेलियर
- 8:50:30बनता है। क्रिप्स मिशन के फेलियर ने
- 8:50:33ब्रिटिश गवर्नमेंट की इंटेंशंस को भी साफ
- 8:50:35कर दिया था। इंडियन लीडर्स समझ जाते हैं
- 8:50:38कि अब ब्रिटिशर्स के साथ नेगोशिएशंस का
- 8:50:41कोई फायदा नहीं है। जरूरत है एक बड़े जन
- 8:50:44आंदोलन की। क्विट इंडिया मूवमेंट।
- 8:50:48दोस्तों ट्रिप्स के जाने के बाद गांधीजी
- 8:50:51ब्रिटिश विड्रॉल और जैपनीज इन्वजन के
- 8:50:54अगेंस्ट नॉन वायलेंट नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट
- 8:50:57का रेजोल्यूशन तैयार करते हैं। 14th जुलाई
- 8:51:001942 को वर्धा में कांग्रेस वर्किंग कमेटी
- 8:51:04की मीटिंग में आंदोलन के आईडिया को
- 8:51:06एक्सेप्ट किया जाता है। इस डिसीजन को
- 8:51:09अगस्त में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की
- 8:51:11बॉम्बे मीटिंग में रेटिफाई किया जाना था।
- 8:51:148th अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोवालिया
- 8:51:18टैंक में क्विट इंडिया रेजोल्यूशन पास
- 8:51:21किया जाता है। यहां पर ही गांधी जी करो या
- 8:51:24मरो यानी डू और डाई का नारा देते हैं। वो
- 8:51:28कहते हैं कि या तो हम इंडिया को आजाद कर
- 8:51:31लेंगे या फिर इस कोशिश में अपनी जान दे
- 8:51:33देंगे। लेकिन अब अंग्रेजी राज की गुलामी
- 8:51:37में और नहीं रहेंगे। ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 8:51:39लेकिन ना तो कांग्रेस से नेगोशिएशन के मूड
- 8:51:42में थी और ना ही आंदोलन के फॉर्मली शुरू
- 8:51:45होने का इंतजार करना चाहती थी। इसलिए
- 8:51:47नाइंथ अगस्त की सुबह ही कांग्रेस के सभी
- 8:51:50टॉप लीडर्स को अरेस्ट कर लिया जाता है।
- 8:51:52कांग्रेस की सभी ऑर्गेनाइजेशंस को भी
- 8:51:55इललीगल डिक्लेअ कर दिया जाता है।
- 8:51:57गवर्नमेंट के इस तरह अचानक अटैक करने से
- 8:52:00लोगों में इंस्टेंटेनियस रिएक्शन देखने को
- 8:52:02मिलता है। जैसे ही अरेस्ट की न्यूज़ फैलती
- 8:52:05है, बॉम्बे के ग्वालियर टैंक में लाखों
- 8:52:08लोगों की भीड़ जमा हो जाती है और अथॉरिटीज
- 8:52:12के साथ क्लैशेस होने लगते हैं। इसी तरह के
- 8:52:15डिस्टरबेंसेस 9th अगस्त को अहमदाबाद और
- 8:52:18पुणे में भी देखने को मिलते हैं। और 10
- 8:52:20अगस्त को दिल्ली, यूपी और बिहार के बहुत
- 8:52:23सारे शहरों जैसे कि कानपुर, इलाहाबाद,
- 8:52:26वाराणसी और पटना में हड़ताल्स, पब्लिक
- 8:52:29डेमोंस्ट्रेशंस और प्रोसेशंस किए जाते
- 8:52:32हैं। इसके जवाब में गवर्नमेंट प्रेस पर
- 8:52:34प्रतिबंध लगा देती है। इसी बीच कांग्रेस
- 8:52:38के बहुत से प्रोविंशियल और लोकल लीडर्स जो
- 8:52:40अरेस्ट होने से बच गए थे, अपने-अपने रीजंस
- 8:52:43में पहुंच जाते हैं और रेजिस्टेंस
- 8:52:46ऑर्गेनाइज करने की तैयारी करते हैं।
- 8:52:48आंदोलन की खबर गांव-गांव तक पहुंचने लगती
- 8:52:51है। पूरे देश में इसका असर दिखने लगता है।
- 8:52:55आइए जानते हैं कि पब्लिक किस तरह आंदोलन
- 8:52:58में अपना योगदान देती है।
- 8:53:00पब्लिक ऑन रैंपेज। दोस्तों, क्विट इंडिया
- 8:53:04मूवमेंट के दौरान लोग सिंबल्स ऑफ अथॉरिटी
- 8:53:06को अटैक करना शुरू करते हैं। पुलिस
- 8:53:08स्टेशंस, पोस्ट ऑफिसेस, कोर्ट्स, रेलवे
- 8:53:12स्टेशंस जैसी जगह पर कब्जा करना शुरू कर
- 8:53:14देते हैं। पब्लिक बिल्डिंग्स पर नेशनल
- 8:53:16फ्लैग फहराया जाता है। रेलवे ट्रैक्स
- 8:53:19उखाड़ दिए जाते हैं। टेलीग्राफ लाइंस को
- 8:53:22कट कर दिया जाता है और कई जगह ब्रिजेस
- 8:53:24उड़ा दिए जाते हैं। कई जगह पर सत्याग्रहीस
- 8:53:28के ग्रुप्स तहसील जाकर खुद को अरेस्ट करा
- 8:53:31लेते हैं। पूरे देश में स्टूडेंट्स,
- 8:53:33स्कूल्स और कॉलेजेस की हड़ताल कर देते हैं
- 8:53:36और इललीगल पत्रिकास का डिस्ट्रीब्यूशन
- 8:53:38करने लगते हैं। अहमदाबाद, बॉम्बे,
- 8:53:41जमशेदपुर, अहमदनगर और पुणे में वर्कर्स
- 8:53:44हड़ताल शुरू कर देते हैं। जन आंदोलन बहुत
- 8:53:48ही तीव्र और उग्र होने लगता है। इसे
- 8:53:51सप्रेस करने के लिए सरकार अपना पूरा जोर
- 8:53:54लगा देती है। पुलिस और मिलिट्री को अनाम्ड
- 8:53:58क्राउड्स पर फायरिंग का आर्डर दे दिया
- 8:54:00जाता है। यहां तक कि लो फ्लाइंग
- 8:54:02एयरक्राफ्ट से मशीन गन भी चलाई जाती हैं।
- 8:54:05गांव के लोगों को होस्टेजेस बना लिया जाता
- 8:54:08है। उनके ऊपर करीब ₹90 लाख तक का फाइन
- 8:54:11इंपोज कर दिया जाता है। लोगों की
- 8:54:14बिलॉन्गिंग्स को लूट कर फाइन मौके पर ही
- 8:54:17वसूल भी किया जाता है। सस्पेक्ट्स पर
- 8:54:19कोड़े बरसाए जाते हैं और गांव वालों के
- 8:54:22भाग जाने पर पूरे के पूरे गांव को ही जला
- 8:54:25दिया जाता है। 1942 के एंड होने तक 6ाउज
- 8:54:30से भी ज्यादा लोगों को अरेस्ट कर लिया
- 8:54:32जाता है। इस तरह की ब्रूटल रिप्रेशन की
- 8:54:34वजह से स्ट्रगल का मास फेज छ से सात
- 8:54:37हफ्तों के अंदर ही खत्म कर दिया जाता है।
- 8:54:40इसके बाद शुरुआत होती है अंडरग्राउंड
- 8:54:43एक्टिविटीज की। अंडर ग्राउंड एक्टिविटी
- 8:54:46एंड पैरेलल गवर्नमेंट्स। दोस्तों,
- 8:54:48गवर्नमेंट के रिप्रेशन की वजह से बहुत से
- 8:54:51नेशनलिस्ट अंडरग्राउंड हो जाते हैं और
- 8:54:54वहीं से अपनी एक्टिविटीज जारी रखते हैं।
- 8:54:57इसके प्रोमिनेंट मेंबर्स अचुत पटवर्धन,
- 8:55:00अरुणा आसफ अली, राम मनोहर लोहिया, सुचेता
- 8:55:03कृपलानी, बीजू पटनायक, आरपी गोयका और जेपी
- 8:55:07नारायण जैसे लीडर्स थे। बॉम्बे में उषा
- 8:55:11मेहता अंडरग्राउंड रेडियो ऑपरेट करती हैं।
- 8:55:14यह लोग लोगों के मोराल को बनाए रखने का
- 8:55:16काम करते हैं। पूरे देश के एक्टिविस्ट्स
- 8:55:19को गाइडलाइंस के साथ आर्म्स और एमिनेशन भी
- 8:55:22प्रोवाइड करते हैं। इसी के साथ क्विट
- 8:55:25इंडिया मूवमेंट का एक सिग्निफिकेंट फीचर
- 8:55:28पैरेलल गवर्नमेंट्स की एस्टैब्लिशमेंट था।
- 8:55:30पहली पैरेलल गवर्नमेंट अगस्त 1942 में
- 8:55:34ईस्ट यूपी के बलिया में प्रोक्लेम की गई
- 8:55:36थी। इसके लीडर चित्तू पांडे थे। 17th
- 8:55:40दिसंबर 1942 को बंगाल के मिनापुर
- 8:55:43डिस्ट्रिक्ट में तामलुक नाम की जगह पर
- 8:55:46जतिया सरकार एकिस्टेंस में आती है। यह
- 8:55:49सितंबर 1944 तक चलती है। महाराष्ट्र के
- 8:55:53सतारा में मिड 1943 में प्रति सरकार
- 8:55:56ऑर्गेनाइज की जाती है। यह सबसे लंबे समय
- 8:55:59तक चलने वाली पैरेलल गवर्नमेंट थी। 1945
- 8:56:03तक यह काम करती है। इसको लीड कर रहे थे
- 8:56:06वाईबी चौहान और नाना पाटिल जैसे लीडर्स।
- 8:56:09आइए अब इस आंदोलन में मास पार्टिसिपेशन के
- 8:56:12एक्सटेंट को समझते हैं। एक्सटेंट ऑफ मास
- 8:56:16पार्टिसिपेशन।
- 8:56:18दोस्तों, क्विट इंडिया मूवमेंट में बहुत
- 8:56:20बड़े स्तर पर मास पार्टिसिपेशन देखने को
- 8:56:22मिलता है। जैसा कि हम डिस्कस कर चुके हैं।
- 8:56:26पूरे देश के लोग इस आंदोलन में अपने-अपने
- 8:56:29तरीके से योगदान देते हैं। आंदोलन में यूथ
- 8:56:32स्पेशली स्टूडेंट्स सबसे आगे नजर आते हैं।
- 8:56:35इसके साथ ही वुमेन भी कंधे से कंधा मिलाकर
- 8:56:39आंदोलन में अपनी भागीदारी निभाती हैं।
- 8:56:41वर्कर्स और पेजेंट्स के सहयोग के बिना तो
- 8:56:44आंदोलन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अगर
- 8:56:47पॉलिटिकल पार्टीज की बात की जाए तो
- 8:56:50मुस्लिम लीग इस आंदोलन का विरोध करती है।
- 8:56:52हिंदू महासभा भी क्विट इंडिया का बॉयकॉट
- 8:56:55करने का डिसीजन लेती है। लेकिन इसके बाद
- 8:56:57भी मुस्लिम्स का पार्टिसिपेशन हमें इस
- 8:57:00आंदोलन में नजर आता है। साथ ही आंदोलन के
- 8:57:03दौरान किसी भी तरह के कम्युनल क्लैशेस भी
- 8:57:06नहीं हुए थे। कम्युनिस्ट पार्टी भी आंदोलन
- 8:57:09को ज्वाइन नहीं करती क्योंकि सोवियत रशिया
- 8:57:12पर जर्मनी का अटैक हो चुका था। इसलिए
- 8:57:15कम्युनिस्ट्स वॉर में ब्रिटिश का सपोर्ट
- 8:57:17करने लगते हैं। इंपीरियल वॉर उनके लिए
- 8:57:20पीपल्स वॉर बन जाता है। हालांकि पर्सनल
- 8:57:24लेवल पर बहुत सारे कम्युनिस्ट लीडर्स
- 8:57:26आंदोलन का सपोर्ट भी करते हैं। इस तरह
- 8:57:29क्विट इंडिया मूवमेंट में सोसाइटी का
- 8:57:31ऑलमोस्ट हर सेक्शन पार्टिसिपेट करता है।
- 8:57:33और ब्रिटिशर्स को यह एहसास दिलाते हैं कि
- 8:57:36इंडियंस की विशेस के अगेंस्ट अब इंडिया को
- 8:57:39रूल करना पॉसिबल नहीं है। इस आंदोलन में
- 8:57:42आम लोगों का हिरोइज़्म भी देखने को मिलता
- 8:57:45है। लीडरशिप के अभाव में और गवर्नमेंट के
- 8:57:48ब्रूटल डिप्रेशन के बाद भी वह आंदोलन को
- 8:57:51मरने नहीं देते। कंक्लूजन
- 8:57:55दोस्तों क्विट इंडिया मूवमेंट के बाद यह
- 8:57:58साफ हो गया था कि आजादी को ज्यादा देर तक
- 8:58:01इंडियन से दूर नहीं रखा जा सकता। ब्रिटिश
- 8:58:04गवर्नमेंट समझ गई थी कि अगर फिर से ऐसा एक
- 8:58:07मूवमेंट होता है तो ब्रिटिशर्स के लिए
- 8:58:10रिप्रेस करना पॉसिबल नहीं होगा। आगे आने
- 8:58:13वाली वीडियोस में हम देखेंगे कि किस तरह
- 8:58:15ब्रिटिशर्स पावर ट्रांसफर करने की तैयारी
- 8:58:18करते हैं।
- 8:58:20सुभाष चंद्र बोस एंड आईएनए।
- 8:58:23दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हमने सेकंड
- 8:58:26वर्ल्ड वॉर के दौरान इंडियन नेशनल मूवमेंट
- 8:58:28की प्रोग्रेस को देखा था। और इस दौरान
- 8:58:30शुरू हुए क्विट इंडिया मूवमेंट को भी
- 8:58:32डिस्कस किया था। जिस समय इंडिया में यह सब
- 8:58:35घटनाएं हो रही थी, उस समय इंडियन फ्रीडम
- 8:58:38स्ट्रगल के एक बड़े लीडर यहां मौजूद नहीं
- 8:58:41थे। जी हां, हम बात कर रहे हैं सुभाष
- 8:58:44चंद्र बोस की। नेताजी इस दौरान कहां थे और
- 8:58:47कैसे वहां से आजादी की लड़ाई जारी रखते
- 8:58:50हैं? आज हम इसके बारे में ही चर्चा
- 8:58:52करेंगे। इंट्रोडक्शन
- 8:58:55दोस्तों सुभाष चंद्र बोस ने 1920 में
- 8:58:58इंडियन सिविल सर्विज एग्जामिनेशन में
- 8:59:00फोर्थ पोजीशन सिक्योर की थी। लेकिन 1921
- 8:59:04में ही सिविल सर्विज से रिजाइन करके
- 8:59:07उन्होंने फ्रीडम स्ट्रगल की राह चुन ली थी
- 8:59:09और कांग्रेस के मेंबर बन गए थे। नेताजी के
- 8:59:12पॉलिटिकल गुरु चितरंजन दास थे। जैसा कि
- 8:59:16आपको याद होगा कि 1928 में जब मोतीलाल
- 8:59:20नेहरू जी की रिपोर्ट आती है तो जवाहरलाल
- 8:59:22नेहरू के साथ सुभाष चंद्र बोस ने भी
- 8:59:25डोमिनियन स्टेटस के प्रोविजन का विरोध
- 8:59:27किया था और दोनों ने मिलकर इंडिपेंडेंस
- 8:59:30फॉर इंडिया लीग की स्थापना की थी। दोनों
- 8:59:33लीडर्स अब इंडिपेंडेंस से कम कुछ नहीं
- 8:59:35चाहते थे। 1938 के हरिपुरा सेशन में सुभाष
- 8:59:39चंद्र बोस कांग्रेस के प्रेसिडेंट बनते
- 8:59:41हैं। और इसी समय जवाहरलाल नेहरू की
- 8:59:43अध्यक्षता में नेशनल प्लानिंग कमेटी
- 8:59:46इस्टैब्लिश करते हैं। बोस और नेहरू दोनों
- 8:59:49ही सोशलिज्म के स्ट्रांग सपोर्टर थे और
- 8:59:52कांग्रेस में यंग ब्रिगेड को रिप्रेजेंट
- 8:59:54करते थे। कांग्रेस का अगला सेशन त्रिपुरी
- 8:59:57में होता है। बोस एक बार फिर कांग्रेस
- 8:59:59प्रेसिडेंट के इलेक्शन में खड़े हो जाते
- 9:00:01हैं। इस बार उनके अगेंस्ट गांधीियन
- 9:00:04कैंडिडेट पट्टा भी सीतारमैया खड़े होते
- 9:00:06हैं। इलेक्शन में बोस जीत जाते हैं। लेकिन
- 9:00:09गांधी जी उनके साथ काम करने से मना कर
- 9:00:12देते हैं। क्योंकि दोनों की पॉलिटिकल और
- 9:00:14इकोनॉमिक आईडियोलॉजी मैच नहीं होती थी।
- 9:00:17इकोनॉमिक फ्रंट पर जहां गांधीजी
- 9:00:19ट्रस्टीशिप थ्यरी में विश्वास करते थे,
- 9:00:22वहीं बोस सोशलिज्म को फेवर करते थे। इसी
- 9:00:25तरह गांधी जी की पॉलिटिकल आईडियोलॉजी जहां
- 9:00:28नॉन वायलेंस पर बेस्ड थी, वहीं बोस देश की
- 9:00:30आजादी के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए
- 9:00:33तैयार थे। गांधी जी के साथ इन्हीं
- 9:00:36फंडामेंटल डिफरेंसेस के चलते बोस कांग्रेस
- 9:00:39प्रेसिडेंट की पोस्ट से रिजाइन कर देते
- 9:00:41हैं। कांग्रेस से बाहर बोस 1939 में अपनी
- 9:00:44अलग पार्टी फॉरवर्ड ब्लॉक फॉर्म करते हैं।
- 9:00:47जब सेकंड वर्ल्ड वॉर शुरू होता है तो
- 9:00:50नेताजी का मानना था कि कांग्रेस को मौके
- 9:00:52का फायदा उठाकर एक बड़ा आंदोलन शुरू कर
- 9:00:55देना चाहिए और जब कांग्रेस उनके इस मत से
- 9:00:58सहमत नहीं होती तो बोस कांग्रेस के बाहर
- 9:01:01से ही आंदोलन शुरू करने की कोशिश करते
- 9:01:03हैं।
- 9:01:04मार्च 1940 में रामगढ़ में फॉरवर्ड ब्लॉक
- 9:01:07और किसान सभा के जॉइंट एफर्ट से एक एंटी
- 9:01:10कॉम्प्रोमाइज कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइज की
- 9:01:12जाती है। यहां पर तय होता है कि 6th
- 9:01:15अप्रैल को वर्ल्ड वाइड स्ट्रगल ल्च किया
- 9:01:17जाएगा और मेन, मनी या मटेरियल किसी भी तरह
- 9:01:21से इंडियन रिसोर्सेज को इंपीरियलिस्ट वॉर
- 9:01:24में यूज करने का विरोध किया जाएगा। प्लान
- 9:01:27के अकॉर्डिंग 6th अप्रैल को ल्च हुई
- 9:01:30स्ट्रगल में लोग बढ़-चढ़कर भाग भी लेते
- 9:01:32हैं। इसके बाद जुलाई में बोसलक में एक और
- 9:01:36सत्याग्रह ल्च करने की कोशिश करते हैं। यह
- 9:01:39सत्याग्रह होलवेल मोन्यूमेंट के रिमूवल के
- 9:01:42लिए किया जाना था। लेकिन इससे पहले ही
- 9:01:44ब्रिटिश गवर्नमेंट बोस को अरेस्ट कर लेती
- 9:01:46है। प्रजन में नेताजी हंगर स्ट्राइक शुरू
- 9:01:49कर देते हैं। जिसकी वजह से दिसंबर 1940
- 9:01:52में ब्रिटिशर्स इन्हें हाउस अरेस्ट में रख
- 9:01:55देते हैं। फिर खबर आती है कि बोस हाउस
- 9:01:57अरेस्ट से एस्केप कर चुके हैं। 17th जनवरी
- 9:02:011941 को एक पठान के भेष में बोस ब्रिटिश
- 9:02:05ऑफिसर्स को चकमा देते हुए हाउस अरेस्ट से
- 9:02:08फरार हो जाते हैं। और 26 जनवरी 1941 को
- 9:02:12पेशावर पहुंच जाते हैं और फिर अफगानिस्तान
- 9:02:15के रास्ते रशिया चले जाते हैं। बोस इंडियन
- 9:02:18फ्रीडम स्ट्रगल के लिए सोवियत रशिया की
- 9:02:21हेल्प लेने की कोशिश करते हैं। लेकिन जून
- 9:02:241941 में रशिया वर्ल्ड वॉर में एलआई को
- 9:02:27ज्वाइन कर लेता है। मतलब अब वह खुद
- 9:02:30ब्रिटेन के साथ हो गया था। इस बात से बोस
- 9:02:32काफी निराश हो जाते हैं और यहां से जर्मनी
- 9:02:35के लिए प्रस्थान करते हैं। उन्होंने
- 9:02:37उम्मीद किसी भी समय नहीं छोड़ी और निरंतर
- 9:02:40प्रयास करते रहे। उनका मानना था कि इंडिया
- 9:02:43को आजाद कराने के लिए और ब्रिटिश
- 9:02:45इंपीरियलिस्ट फोर्सेस को हराने के लिए
- 9:02:48वर्ल्ड लेवल पर हेल्प लेनी जरूरी है।
- 9:02:51जर्मनी में बोस अपना नाम ओलैंडो मजोटा
- 9:02:54रखते हैं। जर्मनी और इटली के द्वारा
- 9:02:56कैप्चर किए गए इंडियन ओरिजिन के वॉर
- 9:02:59प्रिजनर्स को लेकर बोस एक आर्मी फॉर्म
- 9:03:02करते हैं। जिसे फ्री इंडिया लीजन कहा जाता
- 9:03:05है। जर्मनी के ड्रेसिन में इसका ऑफिस
- 9:03:08बनाया जाता है। जर्मनी के लोग बोस को
- 9:03:10नेताजी नाम देते हैं और यहां पर ही फ्री
- 9:03:13इंडिया सेंटर में बोस जय हिंद का नारा
- 9:03:16देते हैं। जनवरी 1942 में बर्लिन रेडियो
- 9:03:20से बोस रेगुलर ब्रॉडकास्ट शुरू करते हैं।
- 9:03:23इसे आजाद हिंद रेडियो नाम दिया जाता है।
- 9:03:26मई 1942 में बोस की मुलाकात हिटलर से होती
- 9:03:30है। इस मीटिंग के बाद बोस को जर्मनी की
- 9:03:33इंटेंशंस पर डाउट हो जाता है। इसके साथ ही
- 9:03:36बोस हिटलर के रेसिस्ट व्यूज का भी विरोध
- 9:03:38करते हैं। उन्हें लगने लगता है कि इंडिया
- 9:03:41की आजादी के लिए जर्मन हेल्प से काम नहीं
- 9:03:44चलने वाला। इसलिए फरवरी 1943 में बोस
- 9:03:47जर्मनी छोड़ देते हैं और सबमरींस के
- 9:03:49द्वारा जापान चले जाते हैं और फिर वहां से
- 9:03:52सिंगापुर पहुंचते हैं। सिंगापुर में
- 9:03:54नेताजी रोश बिहारी बोस से इंडियन
- 9:03:57इंडिपेंडेंस मूवमेंट की कमांड अपने हाथों
- 9:03:59में लेते हैं। लेकिन यह इंडियन नेशनल
- 9:04:02आर्मी का सेकंड फेज होता है। और इसे समझने
- 9:04:06से पहले फर्स्ट फेज को समझना जरूरी है।
- 9:04:09ओरिजिन एंड फर्स्ट फज़ ऑफ द इंडियन नेशनल
- 9:04:12आर्मी। दोस्तों, इंडियन प्रिजनर्स ऑफ वॉर
- 9:04:15यानी पीओwस को लेकर आर्मी क्रिएट करने का
- 9:04:18आईडिया ओरिजिनली मोहन सिंह का था। यह
- 9:04:21ब्रिटिश इंडियन आर्मी के ऑफिसर थे।
- 9:04:23जिन्होंने मलेया में रिट्रीटिंग ब्रिटिश
- 9:04:26आर्मी को जॉइ ना करने का फैसला किया था।
- 9:04:28इसके बाद इन्होंने जापानीज से हेल्प मांगी
- 9:04:31थी। जैसा कि हम जानते हैं कि वर्ल्ड वॉर
- 9:04:34टू में ब्रिटेन, यूएसए और रशिया मिलकर लड़
- 9:04:37रहे थे। जर्मनी और जापान के विरुद्ध।
- 9:04:40जापान ने तेजी से बढ़ते हुए साउथ ईस्ट
- 9:04:42एशिया में ब्रिटेन और उसके अलायस को हराया
- 9:04:45था और ब्रिटिश इंडियन सोल्जर्स को
- 9:04:47प्रिजनर्स ऑफ वॉर यानी पीओwस बना लिया था।
- 9:04:51मोहन सिंह द्वारा हेल्प मांगने पर जैपनीज
- 9:04:53इंडियन पीओwस को मोहन सिंह को सौंप देते
- 9:04:57हैं। जिन्हें मोहन सिंह इंडियन नेशनल
- 9:05:00आर्मी में रिक्रूट करने की कोशिश करते
- 9:05:02हैं। बड़ी संख्या में पीओwस इस आर्मी को
- 9:05:05ज्वॉइ करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
- 9:05:07क्योंकि एक तो इनके मन में ब्रिटिशर्स के
- 9:05:10अगेंस्ट गुस्सा था और दूसरा जापान में
- 9:05:13पीओwस कैंप्स की कंडीशंस बहुत खराब थी।
- 9:05:17सेप्टेंबर 1942 में 16,000 से ज्यादा
- 9:05:20सोल्जर्स के साथ आईएनए की फर्स्ट डिवीजन
- 9:05:23तैयार हो जाती है। लेकिन जल्दी ही आईएनए
- 9:05:26के रोल को लेकर मोहन सिंह और जैपनीज के
- 9:05:28बीच डिफरेंसेस इमर्ज हो जाते हैं। जैपनीज
- 9:05:32सिर्फ 2000 सोल्जर्स की एक टोकन फोर्स ही
- 9:05:35रेज करना चाहते थे। जबकि मोहन सिंह का
- 9:05:37प्लान एक बड़ी आर्मी क्रिएट करना था।
- 9:05:41इसके साथ ही आईएनए की ऑटोनोमी को लेकर भी
- 9:05:44जापान और मोहन सिंह के विचार अलग-अलग थे।
- 9:05:47इसलिए जापानीज दिसंबर 1942 में मोहन सिंह
- 9:05:51को अपनी कस्टडी में ले लेते हैं और इसी के
- 9:05:53साथ आईएनए का फर्स्ट फेज एंड हो जाता है।
- 9:05:57अब बात करते हैं सेकंड फेज की जो सुभाष
- 9:06:00चंद्र बोस के सिंगापुर पहुंचने से शुरू
- 9:06:02होता है। सेकंड फेज ऑफ द आईएनए। दोस्तों
- 9:06:06आपको क्रांतिकारी रास बिहारी बोस तो याद
- 9:06:08ही होंगे। इंडिया में इनकी रेवोल्यूशनरी
- 9:06:11एक्टिविटीज को जब ब्रिटिशर्स ने फोर्सफुली
- 9:06:14सप्रेस किया तब 1915 में यह जापान चले गए
- 9:06:17थे और इवेंचुअली जापान के नेचुरलाइज्ड
- 9:06:20सिटीजन बन जाते हैं। यहां वो जापानीज को
- 9:06:23इंडियन इंडिपेंडेंस मूवमेंट में इंटरेस्ट
- 9:06:26दिलाने के लिए बहुत एफर्ट्स करते हैं।
- 9:06:28राहारी बोस पैन एशियन सर्कल्स में एक्टिव
- 9:06:32रहते हैं। टोक्यो में इंडियन क्लब की
- 9:06:34फॉर्मेशन करते हैं और वेस्टर्न
- 9:06:36इंपीरियलिज्म पर लेक्चर भी देते हैं। इसके
- 9:06:39बाद 1942 में जापानीज गवर्नमेंट की हेल्प
- 9:06:42से टोक्यो में रास बिहारी बोस इंडियन
- 9:06:45इंडिपेंडेंस लीग की फॉर्मेशन करते हैं और
- 9:06:48जब मोहन सिंह द्वारा आईएनए क्रिएट की जाती
- 9:06:50है तो यह बहुत एक्साइटेड होते हैं और
- 9:06:52सिंगापुर के लिए निकल जाते हैं। जैपनीज भी
- 9:06:55यह फैसला करते हैं कि आईएनए अब इंडियन
- 9:06:58इंडिपेंडेंस लीग की लीडरशिप में ही काम
- 9:07:00करेगी। इस तरह दिसंबर 1942 से रास बिहारी
- 9:07:04बोस ही आईएनए की कमान संभाल रहे होते हैं।
- 9:07:07जुलाई 1943 में सुभाष चंद्र बोस सिंगापुर
- 9:07:11पहुंच जाते हैं और उनकी मुलाकात राब
- 9:07:14बिहारी बोस से होती है। अब इंडियन
- 9:07:16इंडिपेंडेंस लीग और आईएनए की कमांड सुभाष
- 9:07:19चंद्र बोस को सौंप दी जाती है। 25 अगस्त
- 9:07:23को नेताजी आईएनए के सुप्रीम कमांडर बन
- 9:07:25जाते हैं। मलेया में बोस तुम मुझे खून दो।
- 9:07:29मैं तुम्हें आजादी दूंगा का पॉपुलर नारा
- 9:07:31देते हैं। नेताजी की पॉपुलैरिटी इतनी
- 9:07:34ज्यादा थी कि सिर्फ पीओwस ही नहीं बल्कि
- 9:07:37साउथ ईस्ट एशिया में रह रहे लोकल इंडियंस
- 9:07:39भी आईएनए जॉइ करने लगते हैं। 12 अक्टूबर
- 9:07:431943 को बोस सिंगापुर में प्रोविजनल
- 9:07:46गवर्नमेंट फॉर फ्री इंडिया की फॉर्मेशन
- 9:07:48करते हैं। जिसमें एचसी चैटर्जी को फाइनेंस
- 9:07:51पोर्टफोलियो, एमए अय्यर को ब्रॉडकास्टिंग
- 9:07:54और लक्ष्मी स्वामीनाथन को वुमेन
- 9:07:56डिपार्टमेंट दिया जाता है। यह प्रोविजनल
- 9:07:59गवर्नमेंट ब्रिटेन और यूनाइटेड स्टेट्स पर
- 9:08:01वॉर डिक्लेअर कर देती है। एक्सेस पावर्स
- 9:08:04के द्वारा इसे रिकॉग्नाइज किया जाता है। 6
- 9:08:07नवंबर 1943 को जैपनीज आर्मी एंड एंड
- 9:08:11निकोबार आइलैंड्स आईएनए को दे देती है।
- 9:08:14सुभाष चंद्र बोस इनका नाम बदलकर शहीद और
- 9:08:17स्वराज द्वीप रख देते हैं। आईएनए
- 9:08:20रिक्रूट्स को ट्रेन किया जाता है और फंड्स
- 9:08:22कलेक्ट किए जाते हैं। आईएनए में रानी
- 9:08:26झांसी रेजीमेंट नाम से एक वुमेन रेजीमेंट
- 9:08:28भी फॉर्म की जाती है। जनवरी 1944 में
- 9:08:32आईएनए का हेड क्वार्टर रंगून शिफ्ट कर
- 9:08:34दिया जाता है और यहां से आर्मी रिक्रूट्स
- 9:08:37को इंडिया के लिए मार्च करना था। उनका वॉर
- 9:08:40क्राई होता है चलो दिल्ली।
- 9:08:446्थ जुलाई 1944 को बोस आजाद हिंद रेडियो
- 9:08:48से महात्मा गांधी को फादर ऑफ नेशन कहकर
- 9:08:51एड्रेस करते हैं और गांधी जी से इंडिया की
- 9:08:54आजादी की आखिरी लड़ाई के लिए आशीर्वाद
- 9:08:57मांगते हैं। शाहनवाज की कमांड में आईएनए
- 9:09:00की एक बटालियन जैपनीज आर्मी के साथ
- 9:09:03इंडोबर्मा फ्रंट पर भेज दी जाती है। यह
- 9:09:06लोग इंफाल कैंपेन में पार्टिसिपेट करते
- 9:09:08हैं। लेकिन यहां जैपनीज़ इंडियंस के साथ
- 9:09:11डिस्क्रिमिनेटरी ट्रीटमेंट करने लगते हैं।
- 9:09:14इंडियन सोल्जर्स को राशन नहीं दिया जाता
- 9:09:16है और उनसे जैपनीज़ यूनिट्स के लिए मीनियल
- 9:09:19वर्क कराया जाता है। इससे आईएनए यूनिट्स
- 9:09:22डीमोरलाइज होने लगती हैं। इसके बाद भी 18
- 9:09:25मार्च 1944 को आईएनए बर्मा बॉर्डर क्रॉस
- 9:09:29करके इंडियन सोइल पर अपना कदम रखती है।
- 9:09:33यहां से आईएनए यूनिट्स कोहिमा और इंफाल की
- 9:09:35तरफ बढ़ जाती हैं। 14th अप्रैल को बहादुर
- 9:09:38ग्रुप के कर्नल मलिक मोई रंग में आईएनए
- 9:09:41फ्लैग को होस्ट करते हैं जो आज मणिपुर में
- 9:09:44है। 3 महीने तक आईएनए मोई रंग में
- 9:09:46मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन ड्यूटी संभालती
- 9:09:49है। लेकिन उसके बाद बड़ी संख्या में एलाइड
- 9:09:52फोर्सेस यहां पहुंचने लगती हैं। एलाइड
- 9:09:54फोर्सेस फियर्स फाइट के बाद आईएनए से यह
- 9:09:57टेरिटरी रिक्लेम कर लेती हैं। 18th जुलाई
- 9:10:011944 को आईएनए की सभी ब्रिगेड्स विड्रॉल
- 9:10:04शुरू कर देती हैं। इसके बाद जापानीज आर्मी
- 9:10:07की स्टेडी रिट्रीट के साथ आईएनए द्वारा
- 9:10:10इंडिया को लिबरेट करने की सारी उम्मीद भी
- 9:10:12खत्म हो जाती है। मिड 1945 तक यह रिट्रीट
- 9:10:16जारी रहती है। 15th अगस्त 1945 को सेकंड
- 9:10:21वर्ल्ड वॉर में जापान सरेंडर कर देता है
- 9:10:23और इसी के साथ आईएनए का भी सरेंडर होता
- 9:10:26है। रिपोर्ट्स के अनुसार 18th अगस्त 1945
- 9:10:30को नेताजी की संदिग्ध हालत में टाइपे में
- 9:10:34एक एयर क्रैश के दौरान मृत्यु हो जाती है।
- 9:10:36कंक्लूजन दोस्तों इस तरह आईएनए एक बहादुर
- 9:10:40प्रयास था इंडिया को आजादी दिलाने का। इस
- 9:10:43बात पर डिबेट जरूर होती रहती है कि अगर
- 9:10:46आईएनए सच में जापानीज हेल्प से देश को
- 9:10:48आजाद करा लेती तो क्या होता? कुछ लोगों का
- 9:10:52मानना है कि जापानीज इंपीरियलिज्म ब्रिटिश
- 9:10:55इंपीरियलिज्म से भी ज्यादा भयानक हो सकता
- 9:10:57था। तो क्या फिर सुभाष चंद्र बोस को एक और
- 9:11:01लड़ाई लड़नी पड़ती जापानीज को इंडिया से
- 9:11:03बाहर करने के लिए? शायद ऐसा हो सकता था।
- 9:11:06लेकिन आईएए और जापान दोनों को ही मिलिट्री
- 9:11:10एडवेंचर्स में ब्रिटेन के खिलाफ सफलता
- 9:11:12नहीं मिलती। हालांकि जब आईएनए के सोल्जर्स
- 9:11:15को पीओwस की तरह इंडिया वापस लाया जाता है
- 9:11:18तो इनके डिफेंस में एक बहुत बड़ा मूवमेंट
- 9:11:21खड़ा हो जाता है और इस मूवमेंट का जरूर एक
- 9:11:24इंपॉर्टेंट योगदान था देश की आजादी में।
- 9:11:27इस तरह इनडायरेक्टली आईएनए फ्रीडम मूवमेंट
- 9:11:30में अपना कंट्रीब्यूशन देती है। इसके बारे
- 9:11:33में अपनी नेक्स्ट वीडियो में हम विस्तार
- 9:11:35से चर्चा करेंगे।
- 9:11:38रूट्स टू इंडिपेंडेंस।
- 9:11:40दोस्तों, अपनी पिछली दो वीडियोस में हम
- 9:11:42सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान हुई इंडियन
- 9:11:44फ्रीडम स्ट्रगल की एक्टिविटीज को डिस्कस
- 9:11:47कर चुके हैं। जिसमें क्विट इंडिया मूवमेंट
- 9:11:50और इंडियन नेशनल आर्मी यानी आईएनए सबसे
- 9:11:53ज्यादा इंपॉर्टेंट कही जा सकती हैं। आज हम
- 9:11:55आगे बढ़ते हुए देखेंगे कि वर्ल्ड वॉर के
- 9:11:57खत्म होने के बाद क्या-क्या घटनाएं घटित
- 9:12:00होती हैं। इस समय तक विश्व का और भारत का
- 9:12:02माहौल काफी बदल चुका था। इंपीरियलिस्ट
- 9:12:05फोर्सेस इंक्लूडिंग ब्रिटेन अब वीक हो
- 9:12:08चुकी थी और इंडिया में नेशनलिज्म की
- 9:12:10फीलिंग काफी डीप हो चुकी थी। इसी
- 9:12:13बैकग्राउंड को ध्यान में रखते हुए हम सबसे
- 9:12:15पहले बात करते हैं शिमला कॉन्फ्रेंस की।
- 9:12:19वेवल ऑफर और शिमला कॉन्फ्रेंस। दोस्तों
- 9:12:22अप्रैल 1945 में यूरोप में सेकंड वर्ल्ड
- 9:12:26वॉर का एंड हो जाता है। हालांकि जापान में
- 9:12:28अभी भी वॉर कंटिन्यू था और यहां से इंडिया
- 9:12:31का फ्रीडम स्ट्रगल एक नए फेज में एंटर
- 9:12:34होता है। जून 1945 में ब्रिटिश पीएम
- 9:12:37चर्चिल वायसरॉय वेवल को इंडियन लीडर्स के
- 9:12:40साथ नेगोशिएशन स्टार्ट करने की परमिशन दे
- 9:12:43देते हैं। वाइससरॉय एक ऑफर तैयार करते हैं
- 9:12:46जिसे वेववेल ऑफर के नाम से जाना जाता है।
- 9:12:50वेवल ऑफर पर डिस्कशन करने के लिए शिमला
- 9:12:53कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइज की जाती है और इसमें
- 9:12:55पार्टिसिपेट करने के लिए कांग्रेस लीडर्स
- 9:12:58को जून 1945 में ही जेल से रिलीज कर दिया
- 9:13:01जाता है। यह कॉन्फ्रेंस 25th जून से 14th
- 9:13:04जुलाई 1945 तक चलती है। वायसरॉय के ऑफर
- 9:13:08में इंडियन एग्जीक्यूटिव काउंसिल की
- 9:13:10फॉर्मेशन करना शामिल था। जिसमें वाइस और
- 9:13:13कमांडर इन चीफ को छोड़कर बाकी सभी मेंबर्स
- 9:13:16इंडियन रहेंगे। इसमें कास्ट हिंदूज और
- 9:13:19मुस्लिम्स को इक्वल रिप्रेजेंटेशन दिया
- 9:13:21जाएगा। साथ ही शेड्यूल्ड कास्ट का भी अलग
- 9:13:25से रिप्रेजेंटेशन होगा। इसके अलावा नए
- 9:13:28कॉन्स्टिट्यूशन पर डिस्कशन के दरवाजे भी
- 9:13:30खोले जाएंगे।
- 9:13:32लेकिन शिमला कॉन्फ्रेंस असफल रहती है।
- 9:13:34क्योंकि जिन्ना डिमांड रख देते हैं कि
- 9:13:37कैबिनेट के मुस्लिम मेंबर्स को नॉमिनेट
- 9:13:39करने का राइट सिर्फ लीग के पास ही होना
- 9:13:41चाहिए। कांग्रेस इस डिमांड को एक्सेप्ट
- 9:13:44नहीं करती। इसको एक्सेप्ट करने का मतलब
- 9:13:47होता कि कांग्रेस अपने को सिर्फ कास्ट
- 9:13:49हिंदूस की पार्टी मान लेती। आइरोनिकली उस
- 9:13:52समय कांग्रेस के प्रेसिडेंट खुद एक
- 9:13:54मुस्लिम यानी कि मौलाना अबुल कलाम आजाद
- 9:13:57थे। ऐसी सिचुएशन में वायसरॉय वेवल मीटिंग
- 9:14:01को ही खत्म कर देते हैं। उनका मानना था कि
- 9:14:04बिना लीग के कोिशन गवर्नमेंट काम ही नहीं
- 9:14:06कर सकती। यहां ब्रिटिशर्स एक तरह से
- 9:14:09जिन्ना को वीटो दे देते हैं। वेवेल का यह
- 9:14:12स्टेप आगे चलकर बहुत बड़ी गलती साबित होने
- 9:14:15वाला था। इसी बीच ब्रिटेन में इलेक्शंस हो
- 9:14:18चुके थे और क्लेमेंट एटली के नेतृत्व में
- 9:14:21लेबर पार्टी पावर में आ जाती है और यह
- 9:14:23जल्द से जल्द इंडियन इंडिपेंडेंस के इशू
- 9:14:26को सॉल्व करना चाहते थे। लेकिन उससे पहले
- 9:14:28देश में एक और स्ट्रगल के लिए मंच तैयार
- 9:14:31हो रहा था। एक तरफ तो शिमला कॉन्फ्रेंस
- 9:14:34फेल हो जाती है और दूसरी तरफ ब्रिटिश
- 9:14:37गवर्नमेंट आईएनए के सोल्जर्स और ऑफिसर्स
- 9:14:39के अगेंस्ट ट्रायल अनाउंस कर देती है। इसी
- 9:14:42के विरोध में एक बड़ा मूवमेंट शुरू होता
- 9:14:44है। दी आईएनए ट्रायल्स एंड एजिटेशन।
- 9:14:48दोस्तों, आईएनए के सोल्जर्स और ऑफिसर्स को
- 9:14:51ब्रिटिशर्स ने बंदी बना लिया था और उनके
- 9:14:54अगेंस्ट कोर्ट में ट्रायल शुरू करने जा
- 9:14:56रहे थे। क्योंकि ब्रिटिशर्स के अनुसार इन
- 9:14:59लोगों ने ब्रिटिश क्राउन के प्रति लॉयल्टी
- 9:15:01की ओथ को ब्रेक किया था और इसीलिए यह
- 9:15:04ट्रेटर्स थे। लेकिन इंडिया की जनता इनका
- 9:15:07स्वागत नेशनल हीरोज़ की तरह कर रही थी। और
- 9:15:10जब तीन आईएनए ऑफिसर्स शाहनवाज खान,
- 9:15:14गुरदयाल सिंह ढिलो और प्रेम सहगल के खिलाफ
- 9:15:17दिल्ली के रेडफोर्ट में ट्रायल शुरू करने
- 9:15:19की घोषणा होती है तो इंडियन पब्लिक इसका
- 9:15:22जमकर विरोध करती है। पूरे देश में इनकी
- 9:15:25रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू हो
- 9:15:27जाते हैं। कांग्रेस भी सेप्टेंबर 1945
- 9:15:30बॉम्बे में अपने पहले पोस्ट वॉर सेशन में
- 9:15:33इस कॉज के सपोर्ट में रेज़ोल्यूशन पास
- 9:15:35करती है। और आईएनए प्रिजनर्स के डिफेंस के
- 9:15:38लिए भोलाबाई देसाई, तेज बहादुर सपू, के एन
- 9:15:42काटजू, नेहरू और आसफ अली जैसे लॉयर्स
- 9:15:45कोर्ट पहुंचते हैं। कांग्रेस आईएए रिलीफ
- 9:15:48एंड इंक्वायरी कमेटी भी फॉर्म करती है।
- 9:15:50इसका काम रिलीज होने वाले सोल्जर्स को
- 9:15:53स्मॉल सम ऑफ मनी और फूड देना था। साथ ही
- 9:15:56इनके लिए एंप्लॉयमेंट सिक्योर करने की
- 9:15:58कोशिश करना भी था।
- 9:16:01आईएनए ट्रायल्स के अगेंस्ट होने वाले
- 9:16:03प्रोटेस्ट कई मायनों में ऐतिहासिक थे।
- 9:16:06इससे पहले कोई भी कैंपेन इतनी हाई पिच और
- 9:16:09इंटेंसिटी के साथ नहीं हुआ था। एजिटेशन को
- 9:16:12प्रेस से भी वाइड कवरेज मिलता है। 5 से 11
- 9:16:16नवंबर को आईएनए वीक और 12 नवंबर 1945 को
- 9:16:20आईएनए डे सेलिब्रेट किया गया। यह कैंपेन
- 9:16:23देश के एक बड़े हिस्से में फैलता है और
- 9:16:26डवर्स, सोशल ग्रुप्स और पॉलिटिकल पार्टीज
- 9:16:28इसमें भाग लेते दिखते हैं। एजिटेशन के
- 9:16:31नर्व सेंटर्स तो दिल्ली, बॉम्बे, कोलकाता,
- 9:16:34मद्रास, यूनाइटेड प्रोविंसेस और पंजाब रहे
- 9:16:37थे। लेकिन इसका असर कुर्ग, बलूचिस्तान और
- 9:16:40आसाम जैसे दूरदराज के इलाकों में भी दिखता
- 9:16:43है। कांग्रेस के अलावा मुस्लिम लीग,
- 9:16:46कम्युनिस्ट पार्टी, अकालीज, जस्टिस पार्टी
- 9:16:50और हिंदू महासभा एटसेट्रा भी आईएनए कॉज को
- 9:16:53सपोर्ट करते हैं। यहां तक कि ब्रिटिश राज
- 9:16:56के ट्रेडिशनल बुलवक्स में भी प्रो आईएनए
- 9:16:59सेंटीमेंट्स नजर आने लगते हैं। गवर्नमेंट
- 9:17:02एंप्लाइजज़ आईएनए कॉज के लिए फंड्स कलेक्ट
- 9:17:04करते हैं। लॉयलिस्ट्स ब्रिटिश सरकार से
- 9:17:07अच्छे इंडो ब्रिटिश रिलेशंस का हवाला देकर
- 9:17:10आईएनए ट्रायल्स को अबेंडन करने की अपील
- 9:17:13करते हैं। आर्म्ड फोर्सेस भी आईएनए
- 9:17:15सोल्जर्स के प्रति सिंपैथी शो करते हैं।
- 9:17:18यह लोग मीटिंग्स अटेंड करते हैं। फंड्स
- 9:17:20में कंट्रीब्यूट करते हैं और साथ ही रिलीज
- 9:17:23होने वाले सोल्जर्स को यूनिफार्म में
- 9:17:25रिसीव भी करते हैं। इसी समय ब्रिटेन को भी
- 9:17:27आईएनए इशू की पॉलिटिकल सिग्निफिकेंस समझ
- 9:17:30आने लगती है। और इसीलिए कोर्ट मार्शल में
- 9:17:33गिल्टी करार दिए जाने के बावजूद 3 जनवरी
- 9:17:361946 को आईएनए ऑफिसर्स को फ्री कर दिया
- 9:17:40जाता है। ब्रिटिश गवर्नमेंट के इस चेंज्ड
- 9:17:43एटीट्यूड के पीछे कुछ इंपॉर्टेंट कारण थे
- 9:17:46जिन्हें समझना जरूरी है। रीज़ंस बिहाइंड
- 9:17:49चेंज्ड एटीट्यूड ऑफ द ब्रिटिश। दोस्तों,
- 9:17:52वर्ल्ड वॉर एंड होने के बाद से ही इंडिया
- 9:17:55को लेकर ब्रिटिश गवर्नमेंट के एटीट्यूड
- 9:17:57में बदलाव देखने को मिलता है। इसका एक
- 9:18:00कारण तो हम आपको शुरू में ही बता चुके
- 9:18:02हैं। वो था ब्रिटेन में लेबर पार्टी का
- 9:18:05पावर में आना। इसके बहुत से मेंबर्स
- 9:18:07कांग्रेस की डिमांड्स को सपोर्ट करते थे।
- 9:18:10इसके अलावा वॉर के बाद वर्ल्ड में बैलेंस
- 9:18:13ऑफ पावर भी चेंज हो चुका था। अब ब्रिटेन
- 9:18:16नहीं बल्कि यूएसए और सोवियत यूनियन दुनिया
- 9:18:19की बिग पावर्स बन गए थे। और यह दोनों ही
- 9:18:21इंडिया की फ्रीडम की डिमांड को सपोर्ट कर
- 9:18:24रहे थे। वॉर में ब्रिटेन की जीत भले ही
- 9:18:27हुई थी, लेकिन उसकी इकोनॉमिक और मिलिट्री
- 9:18:29पावर को बहुत बड़ा नुकसान भी हुआ था। खुद
- 9:18:32को रिहबिलिटेट करने में ब्रिटेन को अभी
- 9:18:34सालों लगने वाले थे। ब्रिटिश सोल्जर्स भी
- 9:18:37वॉर के बाद थक चुके थे और इंडियन फ्रीडम
- 9:18:40स्ट्रगल को सप्रेस करने के लिए और ज्यादा
- 9:18:43समय अपने घर से दूर इंडिया में बिताने के
- 9:18:45लिए तैयार नहीं थे। इसके साथ ही नेशनल
- 9:18:48स्ट्रगल को सप्रेस करने के लिए ब्रिटिश
- 9:18:51इंडियन गवर्नमेंट अब सिविल एडमिनिस्ट्रेशन
- 9:18:53और आर्म्ड फोर्सेस के इंडियन पर्सनल पर भी
- 9:18:56पूरी तरह रिलाई नहीं कर सकती थी। क्योंकि
- 9:18:59आईएनए ने दिखा दिया था कि पेट्रियोटिक
- 9:19:01आइडियाज इंडियन आर्मी के रैंक्स में भी
- 9:19:04एंटर कर चुके हैं। इसी समय फरवरी 1946
- 9:19:07बॉम्बे में इंडियन नेवल रेटिंग्स का
- 9:19:10रिवोल्ट भी होता है। यह ब्रिटिश कॉफिन के
- 9:19:13लिए लास्ट नेल की तरह काम करता है। इसको
- 9:19:16डिटेल में हम अपने नेक्स्ट सेक्शन में
- 9:19:18समझेंगे। ब्रिटिश एटीट्यूड में चेंज का
- 9:19:21सबसे बड़ा कारण था इंडियन पीपल का
- 9:19:23कॉन्फिडेंट और डिटरमिंड मूड। जनता अब
- 9:19:26फॉरेन रूल का ह्यूमिलिएशन और लंबे समय तक
- 9:19:29टोलरेट नहीं कर सकती थी। 1945-46
- 9:19:33के बीच नेवल म्यूटनी और आईएनए एजिटेशन के
- 9:19:37अलावा पूरे देश में न्यूमरस एजिटेशंस,
- 9:19:40स्ट्र्राइक्स और डेमोंस्ट्रेशंस भी होते
- 9:19:42हैं। ऐसा लगने लगा था कि लोग आजादी मिलने
- 9:19:45तक अब कोई रेस्ट नहीं करेंगे। इसके साथ ही
- 9:19:49देश भर में लार्ज स्केल लेबर एंड रेस्ट भी
- 9:19:51नजर आता है। शायद ही ऐसी कोई इंडस्ट्री हो
- 9:19:55जहां हड़ताल ना की गई हो। जुलाई 1946 में
- 9:19:58पोस्टल और टेलीग्राफ वर्कर्स द्वारा
- 9:20:01स्ट्राइक की जाती है। साउथ इंडिया में
- 9:20:03अगस्त 1946 में रेलवे वर्कर्स स्ट्राइक पर
- 9:20:07चले जाते हैं। 1945 के बाद पेजेंट
- 9:20:10मूवमेंट्स को भी फ्रेश थ्रस्ट मिलता है।
- 9:20:14इसी दौरान 1946 के शुरुआत में प्रोविंशियल
- 9:20:17असेंबलीज़ के इलेक्शंस भी होते हैं। इसमें
- 9:20:20जनरल सीट्स पर कांग्रेस को ओवरवेल्मिंग
- 9:20:22मेजॉरिटी मिलती है। वहीं मुस्लिम्स के लिए
- 9:20:25रिजर्व सीट्स पर मुस्लिम लीग का प्रदर्शन
- 9:20:28शानदार रहता है। इलेक्शन रिजल्ट्स एक मेजर
- 9:20:31पॉलिटिकल डेवलपमेंट साबित होते हैं। इन
- 9:20:34सभी रीज़ंस को ध्यान में रखते हुए एटली
- 9:20:36गवर्नमेंट फरवरी 1946 में अनाउंस करती है
- 9:20:39कि एक हाई पावर्ड मिशन इंडिया भेजा जाएगा।
- 9:20:43इसे कैबिनेट मिशन के नाम से जाना जाता है।
- 9:20:45लेकिन कैबिनेट मिशन पर डिस्कशन करने से
- 9:20:48पहले फरवरी 1946 में ही हुई एक और बड़ी
- 9:20:51घटना यानी कि नेवल म्यूटनी की चर्चा कर
- 9:20:54लेते हैं।
- 9:20:57आरआई एन म्यूटनी। दोस्तों फरवरी 1946 में
- 9:21:02ब्रिटिश राज को एक बड़ा चैलेंज फेस करना
- 9:21:04पड़ता है और वह था रॉयल इंडियन नेवी में
- 9:21:08ओपन म्यूटनी। इसकी शुरुआत 18th फरवरी को
- 9:21:11बॉम्बे से होती है। यहां पर एचएमआईएस
- 9:21:14तलवार पर तैनात 1100 नेवल रेटिंग्स खराब
- 9:21:18खाने और रेशल डिस्क्रिमिनेशन के इशू पर
- 9:21:20हंगर स्ट्राइक शुरू कर देते हैं। बीसी
- 9:21:23दत्त नाम की रेटिंग को एचएमआईएस तलवार पर
- 9:21:26क्विट इंडिया लिखने के लिए अरेस्ट कर लिया
- 9:21:29जाता है। इसके बाद रेटिंग्स का गुस्सा और
- 9:21:32भी ज्यादा बढ़ जाता है। दूसरे ही दिन कासल
- 9:21:35और फोर्ट बैरिक्स की रेटिंग्स भी स्ट्राइक
- 9:21:37जॉइ कर लेती हैं। इसके बाद सिटी के लोग भी
- 9:21:40इन्हें जॉइ कर लेते हैं। माहौल पूरी तरह
- 9:21:44एंटी ब्रिटिश हो जाता है। बॉम्बे औरक शहर
- 9:21:47पैरालाइज जैसी स्थिति में पहुंच जाते हैं।
- 9:21:50जगह-जगह मीटिंग्स और प्रोसेशंस होते हैं।
- 9:21:53पूरे देश में हड़ताल का सिलसिला शुरू हो
- 9:21:55जाता है। यूरोपियंस पर अटैक होने लगते
- 9:21:58हैं। साथ ही बहुत से पुलिस स्टेशंस, पोस्ट
- 9:22:01ऑफिसेस, शॉप्स, रेलवे स्टेशंस, बैंक्स
- 9:22:03एटसेट्रा को जला दिया जाता है। रॉयल
- 9:22:06इंडियन एयरफोर्स की बॉम्बे, पुणे,
- 9:22:09कोलकाता, जैसोर और अंबाला यूनिट्स भी
- 9:22:11सिंपैथेटिक स्ट्राइक्स करती हैं। वहीं
- 9:22:14जबलपुर के सिपॉइज़ भी स्ट्राइक पर जाते
- 9:22:16हैं। कहने का मतलब यह है कि सभी फोर्सेस
- 9:22:19की तरफ से ब्रिटिश अथॉरिटी को चैलेंज
- 9:22:22मिलना शुरू हो जाता है और इसमें आम जनता
- 9:22:25भी इनका साथ देती है और जैसे कि हम पहले
- 9:22:28ही डिस्कस कर चुके हैं इस म्यूटनी का बड़ा
- 9:22:30रोल रहता है ब्रिटिश गवर्नमेंट के
- 9:22:33एटीट्यूड को चेंज करने में। इसके बाद
- 9:22:36ब्रिटिशर्स समझ गए कि अब नेटिव फोर्सेस पर
- 9:22:39पूरी तरह रिलाई नहीं किया जा सकता और
- 9:22:41नेशनलिज्म की भावना ने डीप रूट्स बना ली
- 9:22:44हैं कंट्री में। आइए अब वापस कैबिनेट मिशन
- 9:22:47की तरफ चलते हैं। कैबिनेट मिशन दोस्तों
- 9:22:51कैबिनेट मिशन के तहत तीन ब्रिटिश कैबिनेट
- 9:22:54मिनिस्टर्स को इंडिया भेजा गया था। इसके
- 9:22:57चेयरमैन पैथिक लॉरेंस थे और बाकी दो
- 9:23:00मेंबर्स थे स्टेफर्ड क्रिप्स और एवी
- 9:23:02एलेक्जेंडर।
- 9:23:04इनका काम पीसफुल तरीके से ट्रांसफर ऑफ
- 9:23:06पावर के नेगोशिएशंस करना था। 24 मार्च
- 9:23:101946 को कैबिनेट मिशन दिल्ली पहुंच जाता
- 9:23:13है। सभी इंडियन पार्टीज और ग्रुप्स के
- 9:23:16लीडर्स के साथ इंटेररिम गवर्नमेंट और नई
- 9:23:19कॉन्स्टिट्यूशन के इशू पर लंबे डिस्कशंस
- 9:23:22होते हैं। इसके बाद मिशन मई 1946 में अपना
- 9:23:26प्लान सामने रखता है। इस प्लान के मेन
- 9:23:29पॉइंट्स कुछ इस तरह थे। पहला यह फुल
- 9:23:33फ्लेजिड पाकिस्तान की डिमांड को रिजेक्ट
- 9:23:35कर देता है। दूसरा एकिस्टिंग प्रोविंशियल
- 9:23:38असेंबलीज को तीन सेक्शंस में डिवाइड किया
- 9:23:41जाएगा। जिसमें सेक्शन ए में हिंदू
- 9:23:43मेजॉरिटी प्रोविंसेस मद्रास, बॉम्बे,
- 9:23:46सेंट्रल प्रोविंसेस, यूनाइटेड प्रोविंसेस,
- 9:23:49बिहार और उड़ीसा को रखा गया था। सेक्शन बी
- 9:23:52में मुस्लिम मेजॉरिटी प्रोविंसेस यानी कि
- 9:23:55पंजाब, नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस और
- 9:23:57सिंध थे। और सेक्शन सी में बंगाल एंड आसाम
- 9:24:01थे। तीनों ग्रुप के मेंबर्स अलग से ग्रुप
- 9:24:05का कॉन्स्टिट्यूशन डिसाइड करेंगे। इसी के
- 9:24:08साथ थ्री टियर स्ट्रक्चर भी प्रपोज किया
- 9:24:10गया था। यानी कि प्रोविंशियल सेक्शन और
- 9:24:13यूनियन लेवल पर अलग-अलग एग्जीक्यूटिव और
- 9:24:16लेजिस्लेचर होंगे। अगला इंपॉर्टेंट पॉइंट
- 9:24:19था कि क्सिटुएंट असेंबली के मेंबर्स को
- 9:24:22प्रोविंशियल असेंबलीज द्वारा इ किया
- 9:24:24जाएगा। एक कॉमन सेंटर होगा जो डिफेंस,
- 9:24:28कम्युनिकेशन और एक्सटर्नल अफेयर्स को
- 9:24:30कंट्रोल करेगा। इसके अलावा प्रोविंसेस को
- 9:24:33फुल ऑटोनोमी दी जाएगी और रेजडुअल पावर्स
- 9:24:36भी उनके पास रहेंगी। प्रिविंसली स्टेट्स
- 9:24:39फ्री होंगे सक्सेसर गवर्नमेंट्स या
- 9:24:41ब्रिटिश गवर्नमेंट के साथ किसी भी
- 9:24:43अरेंजमेंट में एंटर होने के लिए। फर्स्ट
- 9:24:46जनरल इलेक्शंस के बाद प्रोविंसेस ग्रुप से
- 9:24:49बाहर आने के लिए फ्री होंगे। और 10 साल
- 9:24:51बाद ग्रुप या यूनियन कॉन्स्टिट्यूशन को
- 9:24:54रिकंसीडर करने की डिमांड भी प्रोविंस रख
- 9:24:56सकते हैं। और कॉन्स्टिट्यूशन बनने तक एक
- 9:24:59इंटेररिम गवर्नमेंट फॉर्म की जाएगी जिसके
- 9:25:02मेंबर्स कॉन्स्टिट्यूएंट असेंबली से ही
- 9:25:04चुने जाएंगे।
- 9:25:06कैबिनेट मिशन प्लान को मुस्लिम लीग और
- 9:25:08कांग्रेस अपने-अपने तरीके से इंटरप्रेट
- 9:25:11करते हैं। कांग्रेस के अनुसार कैबिनेट
- 9:25:14मिशन ने पाकिस्तान की डिमांड को नकार दिया
- 9:25:17था। वहीं लीग का मानना था कि ग्रुपिंग के
- 9:25:20प्रोविजन में पाकिस्तान की डिमांड भी
- 9:25:23इंप्लाइड है। इसके अलावा कांग्रेस का
- 9:25:26मानना था कि ग्रुपिंग का प्रोविजन ऑप्शनल
- 9:25:28है। वहीं मुस्लिम लीग के अनुसार यह
- 9:25:31मैंडेटरी था। इसलिए इनिशियली दोनों ही
- 9:25:34इसको एक्सेप्ट कर लेते हैं।
- 9:25:37सेवंथ जुलाई को कांग्रेस कमेटी की मीटिंग
- 9:25:39में जवाहरलाल नेहरू कहते हैं कि उन्होंने
- 9:25:42सिर्फ कॉन्स्टिटुएंट असेंबली में जाना
- 9:25:44एक्सेप्ट किया है। बाकी और किसी प्रोविजन
- 9:25:47को मानने के लिए वह बाउंड नहीं है। इसका
- 9:25:50मतलब यह था कि असेंबली एक सोवरन बॉडी होगी
- 9:25:53और खुद रूल्स ऑफ प्रोसीजर पर फैसला लेगी।
- 9:25:56नेहरू की अनाउंसमेंट के बाद 29th जुलाई
- 9:25:591946 को लीग की तरफ से मिशन की
- 9:26:02एक्सेप्टेंस को जिन्ना विड्रॉ कर लेते हैं
- 9:26:05और 16th अगस्त 1946 को डायरेक्ट एक्शन डे
- 9:26:09मनाने की घोषणा कर देते हैं जिसके बाद देश
- 9:26:13भर में स्पेशली कोलकाता में कम्युनल
- 9:26:15राइट्स शुरू हो जाते हैं। नारा दिया जाता
- 9:26:19है लेकर रहेंगे पाकिस्तान लड़ के लेंगे
- 9:26:22पाकिस्तान। इसी बीच सेकंड सितंबर 1946 को
- 9:26:26लीग के मेंबर्स के बिना ही इंटेररिम
- 9:26:28गवर्नमेंट फॉर्म की जाती है और नेहरू इसके
- 9:26:31डे फैक्टो हेड बनते हैं। लेकिन देश में
- 9:26:33सिविल वॉर ना शुरू हो जाए इस डर से
- 9:26:36वायसरॉय लॉर्ड वेवल लीग के अपीजमेंट के
- 9:26:39प्रयास करते हैं। और 26 अक्टूबर 1946 को
- 9:26:44लीग भी इंटेररिम गवर्नमेंट ज्वाइन कर लेती
- 9:26:46है। लीग ने इंटेरिम गवर्नमेंट जॉइ जरूर कर
- 9:26:49ली थी, लेकिन अपने डायरेक्ट एक्शन की नीति
- 9:26:52को भी उन्होंने नहीं छोड़ा था। इसके साथ
- 9:26:55ही लीग के मेंबर्स इंटेरिम गवर्नमेंट के
- 9:26:57काम में कोऑपरेट भी नहीं कर रहे थे। उनकी
- 9:27:00कोशिश हमेशा डिसरप्शन क्रिएट करने की रहती
- 9:27:03थी। दोस्तों, इधर कांग्रेस और मुस्लिम लीग
- 9:27:06में टसल हर दिन बढ़ रहा था और उधर ब्रिटेन
- 9:27:09के पीएम क्लेमेंट एटली पार्लियामेंट में
- 9:27:12एक इंपॉर्टेंट घोषणा करते हैं।
- 9:27:15डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस 20th फरवरी
- 9:27:181947 को ब्रिटिश पीएम एटली अनाउंस करते
- 9:27:22हैं कि 30th जून 1948 तक ब्रिटिश इंडिया
- 9:27:26छोड़ देंगे और साथ ही माउंटबेटन को नया
- 9:27:29वायसरॉय अपॉइंट कर दिया जाता है।
- 9:27:32माउंटबेटन के इंडिया आने पर जहां एक तरफ
- 9:27:35ट्रांसफर ऑफ पावर पर नेगोशिएशंस तेज हो
- 9:27:37जाती हैं, वहीं यह भी साफ हो जाता है कि
- 9:27:40पार्टीशन इनएविटेबल बन चुका है। क्या
- 9:27:43रीज़ंस थे कि इंडियन लीडर्स पार्टीशन के
- 9:27:46लिए तैयार हो जाते हैं। इसकी चर्चा हम
- 9:27:48अपने अगले वीडियो में विस्तार से करेंगे।
- 9:27:51और साथ ही जानेंगे कि फाइनल ट्रांसफर ऑफ
- 9:27:54पावर किस तरह से होता है। कंक्लूजन।
- 9:27:58दोस्तों इस वीडियो में हमने 1940 में हुए
- 9:28:01इंपॉर्टेंट इवेंट्स को कवर कर लिया है।
- 9:28:04वेववेल ऑफर और शिमला कॉन्फ्रेंस से लेकर
- 9:28:06आईएए एजिटेशन, आरआईएन म्यूटनी और कैबिनेट
- 9:28:10मिशन तक की डिटेल्स हमने समझ ली हैं।
- 9:28:13क्योंकि इन इवेंट्स को जान लेने के बाद ही
- 9:28:16हम फाइनल ट्रांसफर ऑफ पावर यानी कि इंडियन
- 9:28:19इंडिपेंडेंस को बेहतर समझ सकते हैं। साथ
- 9:28:22ही हम ब्रिटिशर्स के चेंज्ड एटीट्यूड के
- 9:28:25पीछे के कारण भी जान चुके हैं। जिनकी वजह
- 9:28:28से आखिर 1947 में वो इंडियन इंडिपेंडेंस
- 9:28:32की डिक्लेरेशन करने के लिए मजबूर होते
- 9:28:34हैं। इंडिपेंडेंस एंड पार्टीशन। दोस्तों
- 9:28:39अपनी पिछली वीडियो में हमने देखा था कि
- 9:28:4220th फरवरी 1947 को ब्रिटिश गवर्नमेंट ने
- 9:28:45इंडिया को जून 1948 से पहले आजादी देने की
- 9:28:49घोषणा कर दी थी। और इस प्रोसेस को जल्द से
- 9:28:52जल्द कंप्लीट करने के लिए लॉर्ड माउंटबेटन
- 9:28:54को इंडिया का वायसराॉय बनाया गया था। यह
- 9:28:57इंडियन नेशनल मूवमेंट में एक बड़ा मोमेंट
- 9:29:00था। सालों के स्ट्रगल के बाद फाइनली
- 9:29:03ब्रिटिशर्स अपनी मोरल डिफीट एक्सेप्ट कर
- 9:29:06चुके थे और इंडिया छोड़कर जाने के लिए
- 9:29:08तैयार हो गए थे। आज की वीडियो में हम
- 9:29:11देखेंगे कि वायसरॉय माउंटबैटन किस तरह
- 9:29:14ट्रांसफर ऑफ पावर की नेगोशिएशंस को आगे
- 9:29:17लेकर जाते हैं और क्यों इंडियन लीडर्स
- 9:29:20पार्टीशन को एक्सेप्ट कर लेते हैं। आइए
- 9:29:23शुरू करते हैं।
- 9:29:25टसल बिटवीन मुस्लिम लीग एंड कांग्रेस।
- 9:29:29दोस्तों 1940 के लाहौर सेशन में मुस्लिम
- 9:29:33लीग ने पहली बार एक सेपरेट नेशन यानी कि
- 9:29:35पाकिस्तान की डिमांड रखी थी। और यहां से
- 9:29:38जिन्ना उनके सोल स्पोक्सपर्सन की तरह काम
- 9:29:41करते हैं। अब लीग और जिन्ना के लिए
- 9:29:44मुस्लिम्स को नेशनल आइडेंटिटी और सेल्फ
- 9:29:47डिटरमिनेशन का राइट देना नॉन नेगोशिएबल
- 9:29:49मिनिमम डिमांड्स बन चुकी थी। जिन्ना ने
- 9:29:531942 के क्रिप्स मिशन को भी इसीलिए
- 9:29:55रिजेक्ट कर दिया था क्योंकि उसमें
- 9:29:57मुस्लिम्स के सेल्फ डिटरमिनेशन के राइट को
- 9:29:59रिकॉग्नाइज नहीं किया गया था। इसके बाद
- 9:30:021945 शिमला कॉन्फ्रेंस में वायसरॉय वेवल
- 9:30:06जब जिन्ना के हाथ में वीटो पावर दे देते
- 9:30:08हैं तो उनके हौसले और ज्यादा बुलंद हो
- 9:30:11जाते हैं। इसके बाद कैबिनेट मिशन को लीग
- 9:30:14पहले तो एक्सेप्ट कर लेती है क्योंकि उसके
- 9:30:17अनुसार ग्रुपिंग के प्रोविजन का मतलब
- 9:30:19पाकिस्तान की डिमांड को मानना ही था।
- 9:30:22लेकिन जब कांग्रेस की तरफ से नेहरू साफ
- 9:30:24करते हैं कि वह सिर्फ क्स्टिटुएंट असेंबली
- 9:30:27के प्रोविजन को एक्सेप्ट कर रहे हैं ना कि
- 9:30:29ग्रुपिंग को तो मुस्लिम लीग ना सिर्फ
- 9:30:32कैबिनेट मिशन को नकार देती है बल्कि
- 9:30:34डायरेक्ट एक्शन की कॉल भी देती है। इसकी
- 9:30:37वजह से देश में हिंसा बढ़ती जा रही थी।
- 9:30:40कम्युनल हार्मोनी को बनाए रखना मुश्किल हो
- 9:30:43गया था। यह स्थिति कैसे आ गई थी?
- 9:30:45कम्युनलिज्म इतना ज्यादा कैसे फैला था?
- 9:30:48इसको हम अलग से डिटेल्ड वीडियो में कवर
- 9:30:51करेंगे। यहां इतना समझना जरूरी है कि
- 9:30:54दिनरोज देश का माहौल बिगड़ रहा था और
- 9:30:57दूसरी तरफ ब्रिटिशर्स को देश छोड़ने की
- 9:31:00जल्दी थी। वो किसी भी तरह पावर ट्रांसफर
- 9:31:03करके यहां से जाना चाहते थे। उनका अब कोई
- 9:31:07भी इंटरेस्ट नहीं था देश के कम्युनल माहौल
- 9:31:09को सुलझाने का। इसलिए उनकी तरफ से कोई
- 9:31:12ज्यादा कोशिश भी नहीं की जा रही थी स्थिति
- 9:31:15को संभालने की। ऐसी स्थिति में यह साफ हो
- 9:31:18जाता है कि अगर देश को सिविल वॉर की
- 9:31:20सिचुएशन से बचाना है तो आजादी के साथ
- 9:31:23पार्टीशन भी एक्सेप्ट करना पड़ेगा। इसको
- 9:31:26लेकर क्या प्लांस रखे जाते हैं उनको समझ
- 9:31:29लेते हैं।
- 9:31:31माउंटबन प्लान
- 9:31:33दोस्तों अप्रैल 1947 में कांग्रेस
- 9:31:36प्रेसिडेंट कृपलानी वायसरॉय से कहते हैं
- 9:31:39कि बैटल की अपेक्षा हम उन्हें पाकिस्तान
- 9:31:42देने के लिए तैयार हैं। शर्त बस यह है कि
- 9:31:45आप बंगाल और पंजाब का विभाजन फेयर मैनर
- 9:31:48में होने दें। माउंटबेटन भी तुरंत डिसीजंस
- 9:31:52लेने के लिए तैयार थे। उन्हें ब्रिटिश
- 9:31:54गवर्नमेंट से साफ आदेश मिला था कि जल्द से
- 9:31:56जल्द इंडिया को क्विट किया जाए। इसी के
- 9:31:59साथ इंडिया आते ही उन्हें समझ आ गया था कि
- 9:32:02कैबिनेट मिशन तो एक डेड हॉर्स बन चुका है।
- 9:32:05और जीना एक सोवरन स्टेट से कुछ भी कम पर
- 9:32:08सेटल होने वाले नहीं है। इसलिए यूनाइटेड
- 9:32:11इंडिया को पावर हैंडओवर करना नामुमकिन सा
- 9:32:14हो गया है। ऐसे में अप्रैल 1947 में
- 9:32:18माउंटबैटन एक प्लान बनाते हैं जिसे प्लान
- 9:32:21बोलकन कहा जाता है। इस प्लान के अकॉर्डिंग
- 9:32:24पंजाब और बंगाल का पार्टीशन किया जाना था
- 9:32:27और पावर प्रोविंसेस और सब प्रोविंसेस को
- 9:32:30ट्रांसफर की जानी थी। यह प्रोविंसेस फ्री
- 9:32:32थे कॉन्स्टिटुएंट असेंबली के किसी भी
- 9:32:34ग्रुप को ज्वॉइ करने के लिए। इसके अलावा
- 9:32:37इंटेरिम गवर्नमेंट को जून 1948 तक पावर
- 9:32:40में रहना था। स्ट्रांग सेंटर की एब्सेंस
- 9:32:43में प्रोविंसेस को पावर दे देना इंडिया
- 9:32:45में बल्कनाइजेशन को जन्म दे सकता था। मतलब
- 9:32:48कि यूरोप के बॉलकन रीजन की तरह देश
- 9:32:51छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित हो जाता।
- 9:32:54इसीलिए नेहरू इस प्लान को पूरी तरह
- 9:32:56रिजेक्ट कर देते हैं। उनके अनुसार यह
- 9:32:59प्लान बिना किसी सिक्योरिटी, सर्टेनिटी और
- 9:33:02स्टेबिलिटी के सिर्फ डिसरप्टिव टेंडेंसीज
- 9:33:05को जन्म देने वाला है। ऐसी सिचुएशन में
- 9:33:08माउंटबेटन एक अल्टरनेटिव प्लान प्रपोज
- 9:33:11करते हैं। इस प्लान को उन्हीं के नाम पर
- 9:33:14माउंटबेटन प्लान बोला जाता है। यह प्लान
- 9:33:17थर्ड जून 1947 को अनाउंस किया जाता है।
- 9:33:20इसके अनुसार पावर दो सक्सेसर डोमिनियन
- 9:33:23गवर्नमेंट्स को ट्रांसफर की जाएगी। इंडिया
- 9:33:26और पाकिस्तान। इसके साथ ही पावर ट्रांसफर
- 9:33:29की डेट को जून 1948 से आगे बढ़ाकर 15th
- 9:33:33अगस्त 1947 भी कर दिया जाता है। प्लान में
- 9:33:38पंजाब और बंगाल का पार्टीशन प्रपोज किया
- 9:33:40जाता है। हिंदू मेजॉरिटी प्रोविंसेस जो
- 9:33:44पहले ही एकिस्टिंग क्स्टिटुएंट असेंबली को
- 9:33:46एक्सेप्ट कर चुकी हैं उन्हें कोई भी चॉइस
- 9:33:49नहीं दी जाती। वहीं मुस्लिम मेजॉरिटी
- 9:33:51प्रोविंसेस यानी कि बंगाल, पंजाब, सिंध,
- 9:33:54नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस और
- 9:33:56बलूचिस्तान को डिसाइड करना था कि वह
- 9:33:59एकिस्टिंग क्स्टिटुएंट असेंबली को ज्वॉइ
- 9:34:01करेंगे या फिर पाकिस्तान के लिए बनने वाली
- 9:34:04अलग और नई असेंबली को। यह डिसीजन
- 9:34:07प्रोविंशियल असेंबलीज को लेना था। नॉर्थ
- 9:34:10वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में रेफरेंडम
- 9:34:12किया जाना था और बलूचिस्तान के केस में
- 9:34:15क्वेटा म्युनिसिपालिटी और ट्राइबल
- 9:34:17रेप्रेजेंटेटिव्स के साथ कंसल्टेशंस होनी
- 9:34:20थी। अगले ही दिन नेहरू, जिन्ना और सिख्स
- 9:34:23के बिहाफ पर सरदार बलदेव सिंह इस प्लान को
- 9:34:26एंडोर्स कर देते हैं। इस तरह ट्रांसफर ऑफ
- 9:34:29पावर के लिए तेजी से बढ़ना शुरू हो जाता
- 9:34:31है। यहां एक सवाल यह उठता है कि आखिर
- 9:34:34कांग्रेस ने डोमिनियन स्टेटस को क्यों
- 9:34:36एक्सेप्ट कर लिया था? और दूसरा है कि पावर
- 9:34:40ट्रांसफर की डेट को ब्रिटिशर्स ने क्यों
- 9:34:42एडवांस कर दिया था। आइए एक-एक करके दोनों
- 9:34:46सवालों के जवाब जानते हैं। सबसे पहले बात
- 9:34:48करते हैं कि कांग्रेस ने डोमिनियन स्टेटस
- 9:34:51को क्यों एक्सेप्ट किया?
- 9:34:54व्हाई कांग्रेस एक्सेप्टेड डोमिनियन
- 9:34:56स्टेटस।
- 9:34:58दोस्तों, 1929 की लाहौर कांग्रेस की
- 9:35:01स्पिरिट के अगेंस्ट जाते हुए कांग्रेस
- 9:35:03डोमिनियन स्टेटस को एक्सेप्ट करने के लिए
- 9:35:05तैयार हो जाती है। क्योंकि पहला तो इससे
- 9:35:08पीसफुल और क्विक ट्रांसफर ऑफ पावर इंश्योर
- 9:35:11होना था। दूसरा इस समय देश में बन रही
- 9:35:14एक्सप्लोसिव सिचुएशन को कंट्रोल करने के
- 9:35:17लिए कांग्रेस के पास अथॉरिटी होना जरूरी
- 9:35:19हो गया था। और तीसरा रीजन था कि इससे
- 9:35:22ब्यूरोक्रेसी और आर्मी में कंटिन्यूटी
- 9:35:25मेंटेन रह सकती थी जिसकी बहुत जरूरत थी।
- 9:35:28इन सभी रीज़ंस की वजह से कांग्रेस 1947 में
- 9:35:32डोमिनियन स्टेटस को एक्सेप्ट कर लेती है।
- 9:35:35अब बात करते हैं कि ब्रिटिशर्स को इतनी
- 9:35:37जल्दी क्या थी पावर ट्रांसफर करने की?
- 9:35:41रैशनल फॉरेन अर्ली डेट अगस्त 15, 1947।
- 9:35:46दोस्तों, ब्रिटिशर्स जून 1948 की जगह 15th
- 9:35:50अगस्त 1947 को ही पावर ट्रांसफर करने का
- 9:35:54बड़ा डिसीजन लेते हैं। इसके पीछे पहला
- 9:35:57कारण था कि वह चाहते थे कि कांग्रेस
- 9:35:59डोमिनियन स्टेटस पर एग्री हो जाए। उन्हें
- 9:36:02लगता था कि जल्दी पावर ट्रांसफर करने से
- 9:36:05कांग्रेस डोमिनियन स्टेटस को भी मान लेगी
- 9:36:07और ऐसा हुआ भी। इसके साथ ही ब्रिटिश
- 9:36:10कम्युनल सिचुएशन के रिस्पांसिबिलिटी से भी
- 9:36:13एस्केप करना चाह रही थी। जैसा कि हम पहले
- 9:36:16ही बता चुके हैं कि ब्रिटिशर्स किसी भी
- 9:36:18तरह कम्युनल राइट्स में इंगेज नहीं होना
- 9:36:21चाहते थे। जब उन्हें इंडिया से जाना ही था
- 9:36:24तो वो क्यों अपने रिसोर्सेज और जान यहां
- 9:36:27जोखिम में डालें इसलिए वह फैसला लेते हैं
- 9:36:30कि इस सिचुएशन से इंडियंस को ही निपटने
- 9:36:33दिया जाए। अब बात करते हैं फाइनल ट्रांसफर
- 9:36:36ऑफ पावर की।
- 9:36:39फाइनल ट्रांसफर विद पार्टीशन।
- 9:36:42दोस्तों 20th जून को बंगाल असेंबली और 23
- 9:36:46जून को पंजाब असेंबली पार्टीशन के फेवर
- 9:36:48में फैसला करती हैं। वेस्ट पंजाब और ईस्ट
- 9:36:52बंगाल पाकिस्तान को ज्वॉइ करने वाले थे।
- 9:36:55वहीं बाकी एरियाज यानी कि ईस्ट पंजाब और
- 9:36:58वेस्ट बंगाल इंडिया में ही रहने वाले थे।
- 9:37:01इसके कुछ समय बाद ही सिंध, बलूचिस्तान और
- 9:37:04फिर नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस भी
- 9:37:07पाकिस्तान ज्वॉइ करने का फैसला लेते हैं।
- 9:37:09माउंटबन का अगला टास्क था दो बाउंड्री
- 9:37:12कमीशंस को अपॉइंट करना। एक बंगाल के लिए
- 9:37:15और दूसरी पंजाब के लिए। इंटरनेशनल
- 9:37:19फ्रंटियर्स को डिलीनिएट करने के लिए यह
- 9:37:21दोनों ही कमीशंस सर सेरल रैडक्लिफ के
- 9:37:24नेतृत्व में अपॉइंट की जाती हैं। और इसे
- 9:37:27यह काम करने के लिए सिक्स वीक से ज्यादा
- 9:37:30का समय नहीं मिलता। जो बाउंड्रीज रेडक्लिफ
- 9:37:33अवार्ड के द्वारा प्रिस्राइब की जाती हैं,
- 9:37:36उनके बारे में खुद वायसरॉय भी एडमिट करते
- 9:37:38हैं कि वह दोनों साइड्स के लाखों लोगों के
- 9:37:41लिए पीड़ा का कारण बनने वाली थी। 5th
- 9:37:44जुलाई 1947 को माउंटबेटन प्लान पर बेस्ड
- 9:37:47इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट को ब्रिटिश
- 9:37:50पार्लियामेंट द्वारा पास कर दिया जाता है।
- 9:37:52इस एक्ट को 18th जुलाई 1947 को रॉयल एसेंट
- 9:37:56भी मिल जाती है और फाइनली 15th अगस्त 1947
- 9:38:01को एक्ट इंप्लीमेंट कर दिया जाता है। एक्ट
- 9:38:04के अकॉर्डिंग 15th अगस्त 1947 को दो
- 9:38:08इंडिपेंडेंट डोमिनियंस इंडिया और
- 9:38:11पाकिस्तान का क्रिएशन होता है। दोनों ही
- 9:38:14डोमिनियंस के पास गवर्नर जनरल रहेगा जिसकी
- 9:38:17रिस्पांसिबिलिटी होगी इस एक्ट को
- 9:38:20इफेक्टिवली ऑपरेट करना। दोनों नए
- 9:38:22डोमिनियंस की कंस्टिटुएंट असेंबली उस
- 9:38:24डोमिनियन के लिए लेजिसलेटिव पावर्स को
- 9:38:27एक्सरसाइज करेंगी। एकिस्टिंग सेंट्रल
- 9:38:29लेजिसलेटिव असेंबली और काउंसिल ऑफ स्टेट्स
- 9:38:31ऑटोमेटिकली डिॉल्व हो जाएंगे। ट्रांजिशनल
- 9:38:34पीरियड में यानी कि जब तक कंस्टिट्यूएंट
- 9:38:37असेंबली नया कॉन्स्टिट्यूशन अडॉप नहीं कर
- 9:38:40लेती तब तक दोनों डोमिनियंस में शासन
- 9:38:43गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 के
- 9:38:46अकॉर्डिंग किया जाएगा। 1947 के एक्ट के
- 9:38:49प्रोविजंस के अनुसार 14th अगस्त को
- 9:38:52पाकिस्तान और 15th अगस्त को इंडिया को
- 9:38:55अपनी फ्रीडम मिलती है। जिन्ना पाकिस्तान
- 9:38:58के फर्स्ट गवर्नर जनरल बनते हैं। वहीं
- 9:39:01इंडिया लॉर्ड माउंटबेटन को ही गवर्नर जनरल
- 9:39:03ऑफ इंडिया की तरह कंटिन्यू करने के लिए
- 9:39:05कहता है। 15th अगस्त 1947 मिडनाइट के समय
- 9:39:11इंडिया की कंस्टिट्यूएंट असेंबली का
- 9:39:13स्पेशल सेशन होता है और नेहरू अपनी फेमस
- 9:39:16ट्विस्ट विद डेस्टिनी स्पीच देते हैं।
- 9:39:19दूसरे दिन नेहरू फ्री इंडिया के पहले
- 9:39:22प्राइम मिनिस्टर के रूप में शपथ लेते हैं
- 9:39:24और देश सेलिब्रेशंस में डूब जाता है।
- 9:39:27लेकिन दोस्तों इंडिया में सब सेलिब्रेशन
- 9:39:30के मूड में नहीं थे। इसमें सबसे बड़ा नाम
- 9:39:32था महात्मा गांधी का। वह इस दिन किसी भी
- 9:39:35तरह की सेलिब्रेशन का हिस्सा नहीं बनते और
- 9:39:38पूरा दिन फास्टिंग और प्रेयर में ही
- 9:39:40निकालते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वह
- 9:39:42पार्टीशन के पूरी तरह खिलाफ थे और देश के
- 9:39:45विभाजन के साथ मिली यह आजादी उनके लिए
- 9:39:48अधूरी थी। इसके साथ ही ब्रिटिशर्स के इस
- 9:39:51तरह हेस्टी विड्रॉल से पार्टीशन एक
- 9:39:54दर्दनाक एक्सपीरियंस में बदल जाता है।
- 9:39:57कैसे? आइए समझते हैं।
- 9:40:01प्रॉब्लम्स ऑफ अर्ली विथड्रॉल। दोस्तों,
- 9:40:03माउंटबेटन के समय जिस तेजी से इवेंट्स
- 9:40:06घटित होते हैं, उसमें पार्टीशन की डिटेल्स
- 9:40:09को सही तरीके से अरेंज करने का समय ही
- 9:40:11नहीं मिलता। जिसकी वजह से बड़े स्तर पर
- 9:40:13ब्लड शेड देखने को मिलता है। स्पेशली
- 9:40:16पंजाब मैसिकर को प्रिवेंट करने में यह
- 9:40:18पूरी तरह फेल हो जाते हैं। इसका सबसे बड़ा
- 9:40:21कारण था कि पार्टीशन की प्रॉब्लम्स को
- 9:40:23टैकल करने के लिए कोई भी ट्रांजिशनल
- 9:40:26इंस्टीट्यूशनल स्ट्रक्चर नहीं बनाया गया
- 9:40:28था। माउंट बैटन इस उम्मीद पर थे कि वह
- 9:40:31इंडिया और पाकिस्तान के कॉमन गवर्नर जनरल
- 9:40:34रहेंगे और इस तरह नेसेसरी लिंक प्रोवाइड
- 9:40:37करेंगे। लेकिन जिन्ना ने यह पोजीशन अपने
- 9:40:39लिए रख ली थी। इसके साथ ही बाउंड्री कमीशन
- 9:40:42अवार्ड को अनाउंस करने में भी डिले किया
- 9:40:44गया था। अवार्ड 12th अगस्त 1947 को ही
- 9:40:48तैयार हो चुका था। लेकिन माउंटबेटन इसे
- 9:40:5015th अगस्त के बाद ही पब्लिक करने का
- 9:40:52फैसला लेते हैं। जिससे ब्रिटिशर्स
- 9:40:55डिस्टरबेंसेस की सभी रिस्पांसिबिलिटीज से
- 9:40:57एस्केप कर सकें। इसका नतीजा बहुत ही भयानक
- 9:41:01होता है। सबक्टिनेंट अपनी हिस्ट्री में
- 9:41:04कम्युनल वायलेंस और ह्यूमन डिस्प्लेसमेंट
- 9:41:06का वर्स्ट केस सिनेरियो विटनेस करता है।
- 9:41:09इस दौरान करीब 10 लाख लोगों की हत्या कर
- 9:41:12दी जाती है और 75,000 से भी ज्यादा वुमेन
- 9:41:16का रेप होता है। दोनों ही डायरेक्शंस में
- 9:41:18डेड बॉडीज से भरी हुई ट्रेंस बॉर्डर क्रॉस
- 9:41:21करती हैं। 1 करोड़ से ज्यादा लोग
- 9:41:24डिस्प्लेस होते हैं और रेफ्यूजी कैंप्स
- 9:41:26में आजादी का कड़वा टेस्ट चखने के लिए
- 9:41:29मजबूर होते हैं। इस तरह बहुत से इंडियंस
- 9:41:32के लिए फ्रीडम पार्टीशन के लॉस के साथ आती
- 9:41:35है और इस कम्युनल फ्रेंजी के सबसे बड़े
- 9:41:37विक्टिम खुद फादर ऑफ नेशन बनते हैं। जिनकी
- 9:41:4130th जनवरी 1948 को मिलिटेंट हिंदू
- 9:41:45नेशनलिस्ट द्वारा हत्या कर दी जाती है।
- 9:41:49कंक्लूजन।
- 9:41:50दोस्तों, इस तरह 1947 में एक फंडामेंटल
- 9:41:54शिफ्ट होता है और वह था इंडिया का एक
- 9:41:58सोवरन स्टेट के रूप में उभरना। हालांकि
- 9:42:00आजादी का जश्न पार्टीशन के गम की वजह से
- 9:42:03कुछ फीका जरूर रहता है। इसी के साथ आजादी
- 9:42:07अपने साथ न्यू सेट ऑफ चैलेंजेस भी लेकर
- 9:42:09आई। आगे आने वाले समय में इंडिया के सामने
- 9:42:12ना सिर्फ प्रिंसली स्टेट्स को इंटीग्रेट
- 9:42:15करने का चैलेंज था बल्कि देश की पॉलिटी,
- 9:42:18इकॉनमी और सोसाइटी को भी एक मजबूत
- 9:42:21फाउंडेशन देना था। दोस्तों, पार्ट ए को
- 9:42:24फिनिश करने के बाद आइए अब आगे बढ़ते हैं
- 9:42:27पार्ट बी की तरफ। यानी ब्रिटिश गवर्नेंस
- 9:42:30सिस्टम। इसमें हम ब्रिटिशर्स द्वारा
- 9:42:33इंट्रोड्यूस्ड डिफरेंट लैंड रेवेन्यू
- 9:42:35सिस्टम्स, लोकल सेल्फ गवर्नमेंट्स के साथ
- 9:42:38पुलिस, आर्मी और जुडिशरी में हुए
- 9:42:41डेवलपमेंट्स को कवर करेंगे। साथ ही सभी
- 9:42:44चार्टर और रेगुलेशन एक्ट्स को भी डिस्कस
- 9:42:46करेंगे। आइए शुरू करते हैं पार्ट बी लैंड
- 9:42:50रेवेन्यू सिस्टम्स।
- 9:42:53दोस्तों, लैंड रेवेन्यू ब्रिटिशर्स के लिए
- 9:42:55मेजर सोर्सेस ऑफ इनकम में से एक था। इस
- 9:42:58इनकम को मैक्सिमाइज करने के लिए उन्होंने
- 9:43:00इंडिया में अलग-अलग सिस्टम्स इंट्रोड्यूस
- 9:43:02किए थे। आज हम उनके इंपॉर्टेंट लैंड
- 9:43:05रेवेन्यू सिस्टम्स को डिटेल में कवर
- 9:43:07करेंगे। जानेंगे कि यह सिस्टम्स कब, कहां
- 9:43:10और क्यों लाए गए। साथ ही इंडियन
- 9:43:13एग्रीकल्चर कम्युनिटी पर इनका इंपैक्ट भी
- 9:43:16डिस्कस करेंगे। आइए शुरू करते हैं।
- 9:43:20इंट्रोडक्शन।
- 9:43:24दोस्तों 1765 में बैटल ऑफ प्लासी के बाद
- 9:43:28ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और ओसा
- 9:43:31के दीवानी राइट्स मिले थे और तभी से कंपनी
- 9:43:34के लैंड रेवेन्यू एक्सपेरिमेंट्स भी शुरू
- 9:43:36हो जाते हैं। 1772 में बंगाल के गवर्नर
- 9:43:39वारेन हेस्टिंग्स फार्मिंग सिस्टम
- 9:43:42इंट्रोड्यूस करते हैं। इस सिस्टम के तहत
- 9:43:44रेवेन्यू कलेक्शन का चार्ज तो यूरोपियन
- 9:43:47डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर्स के पास रहता है।
- 9:43:49लेकिन रेवेन्यू कलेक्ट करने का अधिकार
- 9:43:51हाईएस्ट बडर यानी कि सबसे ऊंची बोली लगाने
- 9:43:54वाले को दिया जाता था। फार्मिंग सिस्टम
- 9:43:57बहुत ज्यादा सफल नहीं होता क्योंकि बडर्स
- 9:44:00प्रोडक्शन प्रोसेस की परवाह किए बिना
- 9:44:03ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू एक्सट्रैक्ट
- 9:44:05करने की कोशिश करते हैं और इसकी वजह से
- 9:44:08पेजेंस की हालत बहुत ज्यादा मिज़रेबल होने
- 9:44:10लगती है। इसलिए 1784 में लॉर्ड कॉर्नवालिस
- 9:44:14को रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन को
- 9:44:16स्ट्रीमलाइन करने के स्पेसिफिक मैंडेट के
- 9:44:19साथ इंडिया भेजा जाता है। आइए जानते हैं
- 9:44:22लॉर्ड कॉर्नवालिस लैंड रेवेन्यू समस्या का
- 9:44:24क्या हल निकालते हैं।
- 9:44:27परमानेंट सेटलमेंट और द जमींदारी सिस्टम।
- 9:44:33दोस्तों लॉर्ड कॉर्नवालिस 1793 में
- 9:44:37परमानेंट सेटलमेंट इंट्रोड्यूस करते हैं।
- 9:44:39इसके तहत लैंड रेवेन्यू कलेक्ट करने की
- 9:44:42जिम्मेदारी जमींदार को दी जाती है।
- 9:44:45सेटलमेंट जमींदार के साथ इसलिए किया जाता
- 9:44:48है क्योंकि बहुत सारे पेज से रेवेन्यू
- 9:44:51कलेक्ट करने की तुलना में थोड़े से
- 9:44:53जमींदार से रेवेन्यू कलेक्ट करना ज्यादा
- 9:44:55इजी रहता। साथ ही कंपनी सोसाइटी के एक
- 9:44:58स्ट्रांग सेक्शन को अपने साथ जोड़ना चाहती
- 9:45:01थी। इसमें टोटल लैंड रेवेन्यू का 11%
- 9:45:04जमींदार अपने पास रख सकते थे और 89%
- 9:45:08ब्रिटिश सरकार के पास जमा करना होता था।
- 9:45:11इस सिस्टम में जमींदार को लैंड ओनर्स माना
- 9:45:13गया था। वह जमीन को खरीद और बेच सकते थे।
- 9:45:17इससे पहले तक जमींदार के पास लैंड ओनिंग
- 9:45:20राइट्स नहीं होते थे। उनका काम सिर्फ
- 9:45:23रेवेन्यू कलेक्ट करना होता था। इससे
- 9:45:26एक्चुअल टिलर्स को सिर्फ टेनेंट्स बना
- 9:45:28दिया गया था। जमींदार अपनी मर्जी से कभी
- 9:45:31भी उन्हें जमीन से बेदखल कर सकते थे। इसे
- 9:45:35बंगाल, बिहार, ओसा के अलावा यूनाइटेड
- 9:45:38प्रोविंसेस के बनारस डिवीजन और नॉर्दन
- 9:45:40कर्नाटक में भी लागू किया गया था।
- 9:45:43जमींदारी सिस्टम ब्रिटिश इंडिया के टोटल
- 9:45:45एरिया के लगभग 19% एरिया को कवर करता था।
- 9:45:50परमानेंट सेटलमेंट में सनसेट क्लॉज़ का भी
- 9:45:53प्रोविजन था। इसका मतलब होता था कि एक
- 9:45:56डेफिनेट डेट पर सनसेट होने से पहले
- 9:45:59जमींदार को लैंड रेवेन्यू जमा करना होता
- 9:46:01था। ऐसा ना करने पर उनकी जमींदारी नीलाम
- 9:46:05कर दी जाती थी। परमानेंट सेटलमेंट
- 9:46:08इंट्रोड्यूस करने के पीछे लॉर्ड
- 9:46:09कॉर्नवालिस का मकसद कंपनी के लिए डेफिनेट
- 9:46:12सोर्स ऑफ रेवेन्यू फिक्स करना था। इससे वह
- 9:46:15आने वाले बजट और एक्सपेंडिचर को भी प्लान
- 9:46:18कर सकते थे। इसके अलावा उनका यह भी मानना
- 9:46:21था कि जमींदार लैंड में इन्वेस्ट करेंगे
- 9:46:24जिससे प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी। लेकिन ऐसा
- 9:46:27कुछ भी नहीं होता। सबसे पहले तो रेवेन्यू
- 9:46:30का अमाउंट इतना हाई फिक्स किया गया था कि
- 9:46:33शुरुआत के सालों में जमींदार के लिए उसे
- 9:46:35कलेक्ट करना ही मुश्किल हो जाता है। इसकी
- 9:46:38वजह से बहुत सी जमींदारी नीलाम कर दी जाती
- 9:46:41हैं। इसके बाद जमींदार ज्यादा से ज्यादा
- 9:46:44मुनाफा कमाना चाहते थे। इसलिए वह लैंड में
- 9:46:47भी कोई इन्वेस्टमेंट नहीं करते। जो भी
- 9:46:50रेवेन्यू डिसाइड किया जाता है, वह बिना
- 9:46:52किसी असेसमेंट के एक अंदाजे से किया जाता
- 9:46:55है। नतीजा यह होता है कि पेजेंट्स की
- 9:46:58कंडीशन मिज़रेबल होने लगती है। जमींदार
- 9:47:02उनसे मनमाना कर वसूल करने लगते हैं।
- 9:47:04क्योंकि सेटलमेंट में कहीं भी यह
- 9:47:07स्पेसिफाई नहीं किया गया था कि जमींदार
- 9:47:09कल्टीवेटर्स से कितना रेंट ले सकते हैं।
- 9:47:13इसी का फायदा उठाकर जमींदार कल्टीवेटर्स
- 9:47:15से बहुत सारे इललीगल ड्यूस भी वसूल करने
- 9:47:18लगते हैं। साथ ही यह सिस्टम एब्सेंटी लैंड
- 9:47:22लॉर्डिज्म को भी जन्म देता है। जिसमें
- 9:47:24लैंड लॉर्ड यानी कि जमींदार खुद तो पास की
- 9:47:27किसी सिटी में रहने लगता है और रेवेन्यू
- 9:47:29कलेक्ट करने की जिम्मेदारी किसी दूसरे
- 9:47:32छोटे जमींदार को दे देता है। इससे
- 9:47:34अल्टीमेटली पेजेंट्स पर रेवेन्यू का भार
- 9:47:37बढ़ जाता है। यही वजह है कि आगे चलकर
- 9:47:39जमींदारी एरियाज में बहुत सारे पेजेंट
- 9:47:42रिवॉल्ट्स भी देखने को मिलते हैं। पेजेंट
- 9:47:44रिवोल्ट्स को हम अलग से अपनी वीडियो में
- 9:47:46डिस्कस करेंगे। फिलहाल लैंड रेवेन्यू के
- 9:47:49एक दूसरे सिस्टम यानी कि रेयतवाड़ी सिस्टम
- 9:47:52को समझते हैं।
- 9:47:54रेयतवाड़ी सिस्टम
- 9:47:58दोस्तों समय के साथ ईस्ट इंडिया कंपनी
- 9:48:00अपना रूल्स साउथ और साउथ वेस्टर्न इंडिया
- 9:48:03में भी एक्सटेंड कर लेती है। ऐसे में यहां
- 9:48:06लैंड सेटलमेंट की नई समस्या खड़ी होती है।
- 9:48:08ब्रिटिश ऑफिशियल्स के अनुसार इस एरिया में
- 9:48:11पहले से बड़े जमींदार मौजूद नहीं थे।
- 9:48:14इसलिए जमींदारी सिस्टम को यहां
- 9:48:15इंट्रोड्यूस करना मुश्किल था। साथ ही कुछ
- 9:48:18ब्रिटिशर्स को यह भी लगता था कि परमानेंट
- 9:48:21सेटलमेंट की वजह से कंपनी को फाइनेंशियल
- 9:48:23लॉस हो रहा है। क्योंकि एक तो उन्हें
- 9:48:25जमींदार के साथ रेवेन्यू शेयर करना पड़ता
- 9:48:28है और दूसरा लैंड से बढ़ती हुई इनकम पर वह
- 9:48:31कोई क्लेम नहीं कर सकते। इसके साथ ही
- 9:48:34जमींदार कल्टीवेटर्स का शोषण भी करते थे।
- 9:48:37इसलिए मनरो और रीड जैसे ब्रिटिश ऑफिशियल्स
- 9:48:40सजेस्ट करते हैं कि सेटलमेंट डायरेक्ट
- 9:48:43कल्टीवेटर्स के साथ किया जाए। इसके साथ ही
- 9:48:47सेटलमेंट को परमानेंट ना करके पीरियडिकली
- 9:48:50रिवाइज किया जाने का प्लान था। इस
- 9:48:52सेटलमेंट का नाम रियोवाड़ी रखा गया।
- 9:48:55क्योंकि सेटलमेंट रियो यानी कि कल्टीवेटर
- 9:48:58के साथ होता है। इसे सबसे पहले 1792 में
- 9:49:02बड़ा महल एरिया में एलेक्जेंडर रीड ने
- 9:49:04स्टार्ट किया था। उसके बाद टॉमस मनरो ने
- 9:49:07इसे मद्रास के बाकी एरियाज में एक्सटेंड
- 9:49:10किया। आगे चलकर रेयोतवाड़ी सिस्टम को
- 9:49:12बॉम्बे प्रेसिडेंसी में भी लागू किया गया
- 9:49:15था। दोस्तों रेयोतवाड़ी सिस्टम ने लैंड पर
- 9:49:18पेजेंट ओनरशिप सिस्टम को इस्टैब्लिश नहीं
- 9:49:20किया। असल में बहुत सारे जमींदार की जगह
- 9:49:24एक बड़े जमींदार यानी कि स्टेट ने ले ली
- 9:49:26थी। पेजेंट्स तो सिर्फ गवर्नमेंट के
- 9:49:29टेनेंट्स बन गए थे और समय पर लैंड
- 9:49:31रेवेन्यू ना जमा कर पाने की स्थिति में
- 9:49:33इनका लैंड बेच दिया जाता था। ज्यादातर
- 9:49:37एरियाज में लैंड रेवेन्यू का रेट भी बहुत
- 9:49:39हाई फिक्स किया गया था। जैसे कि मद्रास
- 9:49:42में गवर्नमेंट का क्लेम ग्रॉस प्रोडक्शन
- 9:49:44का 45 से 55% तक फिक्स किया गया था। ऐसी
- 9:49:49ही कुछ हालत बॉम्बे की भी थी। नतीजा यह
- 9:49:52होता है कि बेस्ट सीजंस में भी रेत के पास
- 9:49:55बड़ी मुश्किल से अपने गुजारे लायक ही बचता
- 9:49:58था। इसके साथ ही गवर्नमेंट के पास कभी भी
- 9:50:01लैंड रेवेन्यू बढ़ाने का अधिकार भी था।
- 9:50:04ड्राउट या फ्लड्स के कारण फसल बर्बाद होने
- 9:50:07पर भी किसानों को रेवेन्यू पे करना होता
- 9:50:10था। इस वजह से किसान धीरे-धीरे मनी
- 9:50:13लेंडर्स के जाल में फंसने लगते हैं। इस
- 9:50:15तरह रेयतवाड़ी एरियाज में भी किसानों की
- 9:50:18हालत अच्छी नहीं रहती। ब्रिटिश इंडिया के
- 9:50:21करीब 52% एरिया में इस सिस्टम को
- 9:50:24इंप्लीमेंट किया गया था। इसमें मद्रास और
- 9:50:26बॉम्बे के अलावा सिंध, आसाम और कुर्क भी
- 9:50:29शामिल थे। अब बात करते हैं महालवाड़ी
- 9:50:33सिस्टम की।
- 9:50:35महालवाड़ी सिस्टम।
- 9:50:39दोस्तों, जमींदारी सिस्टम का मॉडिफाइड
- 9:50:42वर्जन गंगा वैली, नॉर्थ वेस्ट प्रोविंसेस,
- 9:50:45सेंट्रल इंडिया के कुछ पार्ट्स और पंजाब
- 9:50:47में इंट्रोड्यूस किया गया था। इसको
- 9:50:49महलवाड़ी सिस्टम कहा जाता है। इसमें
- 9:50:52रेवेन्यू पूरे विलेज या एस्टेट के लिए
- 9:50:55फिक्स किया जाता था और सेटलमेंट गांव के
- 9:50:58मुखिया या जमींदार के साथ होता था। इस
- 9:51:00सेटलमेंट को होल्ड मैकसी और आर एम बर्ड
- 9:51:03जैसे ब्रिटिश ऑफिशियल्स ने इंट्रोड्यूस
- 9:51:06किया था। स्टेट का शेयर इसमें लैंड की नेट
- 9:51:09इनकम का 66% तक रखा गया था और सेटलमेंट 30
- 9:51:13साल के लिए किया गया था। महलवाड़ी सिस्टम
- 9:51:16ब्रिटिश इंडिया के 29% एरिया को कवर करता
- 9:51:20था। इस सिस्टम में भी बाकी सेटलमेंट्स के
- 9:51:23जैसी प्रॉब्लम्स देखने को मिलती हैं।
- 9:51:25इसमें भी लैंड रेवेन्यू का रेट बहुत हाई
- 9:51:27फिक्स किया जाता है और यहां भी प्रॉपर
- 9:51:29असेसमेंट नहीं किया जाता जिसकी वजह से
- 9:51:32पेजेंट्स पर डेप्ट बर्डन बढ़ता जाता है।
- 9:51:35बहुत से एरियाज में लैंड मनी लेंडर्स और
- 9:51:38मर्चेंट्स के हाथों में चला जाता है।
- 9:51:42कंक्लूजन
- 9:51:46दोस्तों, ब्रिटिशर्स द्वारा इंट्रोड्यूस्ड
- 9:51:49लैंड रेवेन्यू सिस्टम्स की वजह से इंडिया
- 9:51:52की रूरल इकॉनमी पूरी तरह डिसरप्ट होने
- 9:51:54लगती है। विलेज कम्युनिटीज का एकिस्टिंग
- 9:51:58पॉलिटिकोइकोनॉमिक सोशल फ्रेमवर्क पूरी तरह
- 9:52:01ब्रेकाडाउन हो जाता है। प्राइवेट
- 9:52:03प्रॉपर्टी का कांसेप्ट लैंड को एक मार्केट
- 9:52:06कमोडिटी में टर्न कर देता है। सोशल
- 9:52:08रिलेशनशिप्स चेंज हो जाती हैं। लैंड
- 9:52:11लॉर्ड, मनी लेंडर, ट्रेडर जैसी नई सोशल
- 9:52:14क्लासेस कीेंस बढ़ जाती है। और पुअर
- 9:52:17पेजेंट्स, टेनेंट्स और एग्रीकल्चरल लेबर
- 9:52:20जैसी क्लास के नंबर्स मल्टीप्लाई हो जाते
- 9:52:22हैं। विलेजेस में कोऑपरेशन का माहौल
- 9:52:26धीरे-धीरे कंपटीशन में बदल जाता है। साथ
- 9:52:29ही इंडिविजुअलिज्म का सिस्टम ग्रो करने
- 9:52:31लगता है। कहने का मतलब यह है कि ट्रेडिशनल
- 9:52:34रूरल एनवायरमेंट पूरी तरह बदल जाता है।
- 9:52:38रेवेन्यू का ओवर असेसमेंट सभी सिस्टम्स का
- 9:52:41एक कॉमन फीचर निकल कर आता है। क्योंकि
- 9:52:43कंपनी का प्राइमरी एम तो रेवेन्यू इनकम को
- 9:52:46मैक्सिमाइज करना ही था। इसकी वजह से किसान
- 9:52:49कर्ज में दबने लगते हैं। जमीन की बिक्री
- 9:52:52बढ़ जाती है और बहुत से किसानों को अपनी
- 9:52:55ही जमीन से बेदखल होना पड़ता है या एक
- 9:52:58टेनेंट की तरह काम करना पड़ता है। इस तरह
- 9:53:02यह रेवेन्यू सिस्टम्स पेजेंट्स में
- 9:53:04ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट आक्रोश को जन्म
- 9:53:06देते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप हमें आने
- 9:53:09वाले समय में बहुत से पेजेंट रिवोल्ट्स
- 9:53:12देखने को मिलते हैं। इकोनॉमिक इंपैक्ट ऑफ
- 9:53:15ब्रिटिश रूल
- 9:53:17दोस्तों, ब्रिटिशर्स द्वारा फॉलो की गई
- 9:53:20पॉलिसीज की वजह से इंडियन इकॉनमी तेजी से
- 9:53:22कॉलोनियल इकॉनमी में ट्रांसफॉर्म हो गई
- 9:53:25थी। जिसका नेचर और स्ट्रक्चर ब्रिटिश
- 9:53:27इकॉनमी की जरूरत के हिसाब से तय होता था।
- 9:53:31ब्रिटिशर्स ने इंडियन इकॉनमी के ट्रेडिशनल
- 9:53:33स्ट्रक्चर को पूरी तरह से डिस्ट्रप्ट कर
- 9:53:35दिया था। साथ ही ब्रिटिशर्स कभी भी इंडियन
- 9:53:39लाइफ का इंटेग्रल पार्ट नहीं बने। वह
- 9:53:41हमेशा ही फॉरेनर्स की तरह यहां रहे और
- 9:53:44इंडियन रिसोर्सेज को एक्सप्लइट करते रहे
- 9:53:46और इंडियन वेल्थ को ट्रिब्यूट की तरह यहां
- 9:53:49से ले जाते रहे। इस तरह इंडियन इकॉनमी को
- 9:53:52ब्रिटिश ट्रेड और इंडस्ट्री के इंटरेस्ट
- 9:53:54का सबोर्डिनेट बना दिया गया था। जिसके
- 9:53:57परिणाम हमें अलग-अलग रूप में देखने को
- 9:54:00मिलते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि
- 9:54:02ब्रिटिशर्स ने लगभग 200 साल तक इंडिया पर
- 9:54:05रूल किया। इतने लंबे समय तक एक्सप्लइटेशन
- 9:54:08का नेचर एक जैसा नहीं रहा था। यह समय के
- 9:54:11साथ चेंज होता रहा और इसी के बेसिस पर
- 9:54:14कॉलोनियल रूल को तीन फेसेस में डिवाइड
- 9:54:16किया जाता है। आइए इन फेसेस को डिटेल में
- 9:54:19समझते हैं।
- 9:54:22थ्री फेसेस ऑफ इकोनॉमिक एक्सप्लॉयटेशन।
- 9:54:25कॉलोनियल रूल के चेंजिंग इकोनॉमिक
- 9:54:27कैरेक्टर को समझने के लिए इंडियन स्कॉलर
- 9:54:30आरपी दत्त ने इसे तीन फेस में डिवाइड किया
- 9:54:33है। पहला फेज लगभग 1757 से 1813 तक चलता
- 9:54:38है और इसे मर्केंटाइलिज्म या कमर्शियल
- 9:54:41कैपिटलिज्म का फेज कहा जाता है। इस फेज
- 9:54:44में ब्रिटिशर्स के दो मेन एम्स थे। एक
- 9:54:47ट्रेड और कॉमर्स पर अपनी मोनोपोली बनाना
- 9:54:49और दूसरा बुलियन की समस्या का समाधान
- 9:54:52ढूंढना। बुलियन की समस्या से हमारा मतलब
- 9:54:55है कि ब्रिटिशर्स को इंडिया से गुड्स
- 9:54:58परचेस करने के लिए अपने यहां के गोल्ड,
- 9:55:00सिल्वर और उनके कॉइंस का यूज करना पड़ता
- 9:55:03था। जो कि मर्केंटाइलिज्म की दृष्टि से
- 9:55:06फेवरेबल नहीं था। मोनोपोली बनाने के लिए
- 9:55:09ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी एक-एक करके
- 9:55:12बाकी की फॉरेन कंपनीज़ को रास्ते से हटा
- 9:55:14देती हैं। और बुलियन की समस्या बैटल ऑफ
- 9:55:17प्लासी के बाद खत्म होती है। जिसे डिटेल
- 9:55:20में हम थोड़ी देर में देखेंगे। बेसिकली इस
- 9:55:23फेज का फोकस इंडिया से ड्रेन ऑफ वेल्थ और
- 9:55:26ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा डायरेक्ट
- 9:55:28कॉलोनियल प्लंडर पर रहता है। यहीं से
- 9:55:31इंडिया की इकॉनमी का कॉलोनियल
- 9:55:33एक्सप्लइटेशन शुरू हो जाता है। इसके बाद
- 9:55:36दूसरा फेज लगभग 1813 से शुरू होकर 1860 तक
- 9:55:41चलता है। इसे इंडस्ट्रियल कैपिटलिज्म का
- 9:55:44फेज कहते हैं। इस समय तक इंग्लैंड में
- 9:55:46इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन की शुरुआत हो चुकी
- 9:55:48थी और वहां बड़े स्केल पर गुड्स
- 9:55:51मैन्युफैक्चर किए जा रहे थे। इन्हीं गुड्स
- 9:55:54को सेल करने के लिए मार्केट की जरूरत थी।
- 9:55:57साथ ही ब्रिटिश इंडस्ट्रीज की और ज्यादा
- 9:55:59ग्रोथ के लिए बड़े स्तर पर रॉ मटेरियल्स
- 9:56:02भी चाहिए थे। 1813 के चार्टर एक्ट के
- 9:56:05द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी की मोनोपोली को
- 9:56:08भी खत्म कर दिया गया था। और इसी के साथ
- 9:56:10कॉलोनियल गवर्नमेंट वन साइडेड फ्री ट्रेड
- 9:56:13पॉलिसी की शुरुआत भी करती है। जिसमें
- 9:56:16ब्रिटेन से इंडिया आने वाले
- 9:56:18मैन्युफैक्चरर्ड गुड्स पर कोई ड्यूटी नहीं
- 9:56:20लगाई जाती। और इंडिया से ब्रिटेन के लिए
- 9:56:23रॉ मटेरियल्स भी बिना किसी ड्यूटी के जाते
- 9:56:26हैं। लेकिन इंग्लैंड में इंडिया से जाने
- 9:56:29वाले किसी भी फिनिश्ड प्रोडक्ट पर हैवी
- 9:56:31ड्यूटी बनी रहती है। उदाहरण के तौर पर
- 9:56:34इंडियन टेक्सटाइल्स पर 300% ड्यूटी इंपोज
- 9:56:38की जाती है। इस तरह इस पीरियड के दौरान
- 9:56:41इंडिया में डीइंडस्ट्रियलाइजेशन और
- 9:56:43रूरलाइजेशन देखने को मिलता है। संक्षेप
- 9:56:46में कहें तो इंडस्ट्रियल कैपिटलिज्म का फज़
- 9:56:49इंडियन इकॉनमी को ब्रिटिश गुड्स के लिए
- 9:56:52मार्केट और रॉ मटेरियल्स के सप्लायर में
- 9:56:54कन्वर्ट कर देता है। तीसरा और आखिरी फज़
- 9:56:57लगभग 1860 से शुरू होकर 1947 तक चलता है।
- 9:57:02इसे फाइनेंशियल कैपिटलिज्म का फज़ बोला
- 9:57:04जाता है। इस दौरान ब्रिटिशर्स इंडिया में
- 9:57:07कैपिटल इन्वेस्ट करना शुरू करते हैं। इसका
- 9:57:10कारण यह था कि अब इंडस्ट्रियलाइजेशन
- 9:57:13दुनिया के बाकी देशों में भी फैलने लगा
- 9:57:15था। जैसे कि जर्मनी, जापान एटसेटरा। इस
- 9:57:19वजह से ब्रिटिश इंडस्ट्रीज के लिए कंपटीशन
- 9:57:22बढ़ जाता है। सर्वाइव करने के लिए कॉस्ट
- 9:57:24ऑफ प्रोडक्शन को कम करने की जरूरत समझी
- 9:57:26जाती है और साथ ही साथ पिछले फेज के दौरान
- 9:57:30प्रॉफिट्स जमा करते-करते ब्रिटिशर्स काफी
- 9:57:32कैपिटल जमा कर लेते हैं। जिसे इन्वेस्ट
- 9:57:35करने की अपॉर्चुनिटीज ढूंढी जा रही थी।
- 9:57:38इसके साथ इंडिया में इन्वेस्ट करने से
- 9:57:40ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट कम होती है। साथ ही
- 9:57:43चीप लेबर भी मिल जाती है। इसलिए इस पीरियड
- 9:57:46में तेजी से ब्रिटिश कैपिटल का फ्लो
- 9:57:48इंडिया में होता है। लेकिन इसका मकसद
- 9:57:51इंडिया में इंडस्ट्रियल ग्रोथ करना नहीं
- 9:57:53रहता बल्कि इंडियन रिसोर्सेज का
- 9:57:56एक्सप्लइटेशन करना होता है। ब्रिटिश
- 9:57:58कैपिटल उन्हीं एक्टिविटीज में लगाई जाती
- 9:58:01है जो ब्रिटिश इंडस्ट्रीज के लिए
- 9:58:03कॉम्प्लीमेंट्री साबित होती हैं। एक
- 9:58:05एस्टीमेट के अनुसार 1914 से पहले तक लगभग
- 9:58:0997% ब्रिटिश कैपिटल रेल्वेज, मर्चेंट
- 9:58:12शिपिंग, माइनिंग और फाइनेंशियल हाउसेस के
- 9:58:15डेवलपमेंट में इन्वेस्ट की गई थी। फेसेस
- 9:58:18को ब्रॉडली समझने के बाद आइए अब अलग-अलग
- 9:58:20स्फेयर्स में हुए इकोनॉमिक इंपैक्ट को
- 9:58:23डिस्कस करते हैं। शुरुआत करते हैं इंडियन
- 9:58:26एग्रीकल्चर से।
- 9:58:29इंपैक्ट ऑन इंडियन एग्रीकल्चर।
- 9:58:32कंपनी ने इंडिया में नए लैंड टेन्योर्स
- 9:58:35जैसे कि परमानेंट सेटलमेंट, रेयतवाड़ी,
- 9:58:37महलवाड़ी सिस्टम एटसेट्रा को इंट्रोड्यूस
- 9:58:40किया था। इन सभी सिस्टम्स में रेवेन्यू
- 9:58:43रेट को बहुत हाई रखा गया था। साथ ही
- 9:58:46रेयतवाड़ी और महलवाड़ी एरियाज में रेगुलर
- 9:58:49इंटरवल पर रेवेन्यू रेट बढ़ा दिए जाते थे।
- 9:58:52इन नई सिस्टम्स की वजह से नई सोशल क्लासेस
- 9:58:56जैसे कि लैंड लॉर्ड्स, मनी लेंडर्स, लैंड
- 9:58:58स्पकुलेटर्स इमर्ज होते हैं। रूरल
- 9:59:01इंडेटेडनेस बढ़ने लगती है और इंडियन
- 9:59:04कल्टीवेटर्स की कंडीशन खराब होती चली जाती
- 9:59:07है। ज्यादातर कल्टीवेटर्स गरीबी रेखा से
- 9:59:11नीचे जीवन बिताने के लिए मजबूर होते हैं।
- 9:59:13लैंड रेवेन्यू सिस्टम्स के इंपैक्ट को और
- 9:59:15डिटेल में हमने अलग से एक वीडियो में कवर
- 9:59:18किया है। कॉलोनियल पॉलिसीज की वजह से
- 9:59:20इंडियन एग्रीकल्चर का कमर्शियलाइजेशन भी
- 9:59:22देखने को मिलता है। स्पेशली सेकंड यानी कि
- 9:59:26इंडस्ट्रियल कैपिटलिज्म वाले फेज के
- 9:59:28दौरान। ब्रिटिश इंडस्ट्रीज को रॉ
- 9:59:30मटेरियल्स चाहिए थे जैसे कि कॉटन, जूट,
- 9:59:34इंडिगो एटसेट्रा। इसलिए इंडिया में फूड
- 9:59:37क्रॉप्स की जगह ऐसी कमर्शियल क्रॉप्स को
- 9:59:39प्रमोट किया जाता है। कई केसेस में तो पेज
- 9:59:42से फोर्सफुली इन्हें कल्टीवेट कराया जाता
- 9:59:44है। जैसे इंडिगो प्लांटेशन के केस में।
- 9:59:47इसकी वजह से पेजेंट्स पर कर्ज तो बढ़ता ही
- 9:59:50है। साथ ही रूरल इकॉनमी की सेल्फ
- 9:59:52डिपेंडेंस खत्म हो जाती है। पेजेंट्स के
- 9:59:55पास खाने को अनाज नहीं रहता है। और ऐसी
- 9:59:58सिचुएशन में फेमिस बहुत कॉमन हो जाते हैं।
- 10:00:01ब्रिटिश कॉलोनियल रूल का एडवर्स इंपैक्ट
- 10:00:04सिर्फ इंडियन एग्रीकल्चर पर ही नहीं होता
- 10:00:07बल्कि ट्रेडिशनल इंडियन इंडस्ट्रीज को भी
- 10:00:10यह पूरी तरह डिस्ट्रॉय कर देता है। आइए
- 10:00:13डिटेल में समझते हैं। डीइंडस्ट्रियलाइजेशन
- 10:00:16रोइन ऑफ़ इंडियन हैंडीक्राफ्ट्स।
- 10:00:20ब्रिटिश रूल का इंडियन हैंडीक्राफ्ट
- 10:00:22इंडस्ट्रीज पर बहुत ही गहरा प्रभाव देखने
- 10:00:24को मिलता है। ब्रिटिशर्स के आने से पहले
- 10:00:27तक इंडिया एक एक्सपोर्टिंग कंट्री हुआ
- 10:00:29करती थी। यहां तक कि ब्रिटिशर्स भी इंडिया
- 10:00:32ट्रेड करने के लिए ही आए थे और वह यहां
- 10:00:35अपने देश के प्रोडक्ट्स का ट्रेड नहीं
- 10:00:37करते थे। बल्कि इंडिया से प्रोडक्ट्स जैसे
- 10:00:40कि टेक्सटाइल्स, स्पाइसेस एटसेट्रा यूरोप
- 10:00:43में एक्सपोर्ट करते थे। मरकेंटाइलिज्म
- 10:00:46यानी कि फर्स्ट फेज के दौरान यही स्थिति
- 10:00:49बनी रहती है। लेकिन सेकंड फेज में शुरू
- 10:00:52होने के बाद इंग्लैंड से बड़ी संख्या में
- 10:00:54मशीन मेड प्रोडक्ट्स इंडिया आने लगते हैं।
- 10:00:57जो कि इंडियन गुड्स से काफी सस्ते होते
- 10:01:00थे। जिसकी वजह से इंडियन हैंडीक्राफ्ट्स
- 10:01:03की डिमांड कम होने लगती है। साथ ही वन
- 10:01:06साइडेड फ्री ट्रेड जैसी पॉलिसीज के कारण
- 10:01:09इंडियन गुड्स पर फॉरेन मार्केट में हैवी
- 10:01:11ड्यूटीज इंपोज की जाती हैं। इस तरह
- 10:01:14डोमेस्टिक और फॉरेन दोनों ही मार्केट में
- 10:01:16इंडियन गुड्स की डिमांड कम हो जाती है।
- 10:01:20इसके अलावा ब्रिटिशर्स इंडिया से रॉ
- 10:01:22मटेरियल जैसे कि कॉटन का एक्सपोर्ट शुरू
- 10:01:25कर देते हैं। इस वजह से इंडियन आर्टिजंस
- 10:01:28को रॉ मटेरियल या तो मिलता नहीं है या फिर
- 10:01:31बहुत महंगे मिलने लगते हैं। इस कारण
- 10:01:34मजबूरी में इंडियन वीवर्स यह काम छोड़ने
- 10:01:37लगते हैं। रेलवेेज का डेवलपमेंट भी
- 10:01:40ट्रेडिशनल इंडस्ट्रीज को नुकसान पहुंचाता
- 10:01:42है। क्योंकि इससे पहले कम से कम रिमोट
- 10:01:44कॉर्नर्स में तो इंडियन गुड्स की डिमांड
- 10:01:46रहती थी।
- 10:01:48लेकिन रेलवेेज के आने के बाद देश के
- 10:01:50कोने-कोने में सस्ते ब्रिटिश गुड्स पहुंच
- 10:01:52जाते हैं। इस तरह हैंडीक्राफ्ट्स
- 10:01:55इंडस्ट्रीज का डिक्लाइन तो तेजी से होता
- 10:01:57है लेकिन मॉडर्न इंडस्ट्रीज की शुरुआत
- 10:01:59इतनी जल्दी नहीं होती। इसलिए ट्रेडिशनल
- 10:02:02इंडस्ट्रीज में काम करने वाले लोग
- 10:02:04बेरोजगार हो जाते हैं। गंजेटिक बिहार का
- 10:02:08स्टैटिस्टिकल डाटा बताता है कि यहां टोटल
- 10:02:10पापुलेशन के मुकाबले इंडस्ट्रियल पापुलेशन
- 10:02:13का प्रोपोर्शन जो 18913
- 10:02:16के समय 18.6% था वो 1901 में घटकर सिर्फ
- 10:02:218.5% रह जाता है। कहा जा सकता है कि
- 10:02:25ब्रिटिश रूल के दौरान इंडस्ट्रियल
- 10:02:27प्रोग्रेस तो दूर उल्टा इंडियन ट्रेडिशनल
- 10:02:30इंडस्ट्रीज का डिक्लाइन होता है। आइए अब
- 10:02:33ब्रिटिश रूल के सबसे बड़े इकोनॉमिक
- 10:02:35इंपैक्ट को समझते हैं जिसे इंडियन
- 10:02:38नेशनलिस्ट लीडर्स ने ड्रेन ऑफ वेल्थ की
- 10:02:40थ्योरी से समझाया है।
- 10:02:44ड्रेन ऑफ वेल्थ फ्रॉम इंडिया।
- 10:02:48इंडियन नेशनल लीडर्स और इकोनॉमिस्ट्स के
- 10:02:50अनुसार इंडिया से इंग्लैंड के लिए होने
- 10:02:53वाला कास्टेंट फ्लो ऑफ वेल्थ जिसके बदले
- 10:02:56में इंडिया को कोई भी इकोनॉमिक कमर्शियल
- 10:02:58या मटेरियल रिटर्न नहीं मिलता था ड्रेन ऑफ
- 10:03:01वेल्थ कहलाता है। यह साल दर साल इंडिया से
- 10:03:05इंपीरियल ब्रिटेन द्वारा लिए जा रहे
- 10:03:07इनडायरेक्ट ट्रिब्यूट की तरह था।
- 10:03:10मर्केंटलिस्ट कांसेप्ट में कहें तो
- 10:03:12इकोनॉमिक ड्रेन तब होता है जब एडवर्स
- 10:03:15बैलेंस ऑफ ट्रेड की वजह से गोल्ड और
- 10:03:18सिल्वर देश से बाहर जाने लगते हैं। बैटल
- 10:03:22ऑफ प्लासी से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी
- 10:03:24इंडिया में ट्रेड करने के लिए ब्रिटेन से
- 10:03:27बुलियन इंपोर्ट करती थी। लेकिन प्लासी के
- 10:03:29बाद सिचुएशन बिल्कुल बदल जाती है। ईस्ट
- 10:03:32इंडिया कंपनी अब इंडिया में टेरिटरीज
- 10:03:35एडमिनिस्टर करना शुरू कर देती है और यहां
- 10:03:37के सरप्लस रेवेन्यूस पर उसका अधिकार हो
- 10:03:40जाता है। अब ब्रिटेन से बुलियन लाने की
- 10:03:43जगह इंडिया के ही रेवेन्यू को यूज करके
- 10:03:45कंपनी अपने एक्सपोर्ट्स को परचेस करती है।
- 10:03:48इस तरह इंडिया के रेवेन्यू को कंपनी पूरी
- 10:03:51तरह अपने फायदे के लिए यूज करती है। जिसके
- 10:03:54बदले में इंडिया को कुछ भी नहीं मिलता है।
- 10:03:57यह सिस्टम 1813 के चार्टर एक्ट से खत्म
- 10:04:00होता है क्योंकि उसमें कंपनी के कमर्शियल
- 10:04:02और टेरिटोरियल रेवेन्यूस को सेपरेट किया
- 10:04:05जाता है। लेकिन इंडिया से इकोनॉमिक ड्रेन
- 10:04:07का एंड यहां भी नहीं होता। बस इसका
- 10:04:10कैरेक्टर थोड़ा बदल जाता है। 1813 के बाद
- 10:04:14ड्रेन एक तरफा एक्सपोर्ट्स के फॉर्म में
- 10:04:16होता है। इस इकोनॉमिक ड्रेन के मेन
- 10:04:19कंस्टीट्यूएंट्स कुछ इस तरह थे। होम
- 10:04:22चार्जेस। होम चार्जेस ऐसे एक्सपेंडिचर को
- 10:04:25बोला जाता था जो इंडिया के बिहाफ पर
- 10:04:28सेक्रेटरी ऑफ स्टेट द्वारा इंग्लैंड में
- 10:04:30किए जाते थे। 1857 के रिवोल्ट से पहले होम
- 10:04:34चार्जेस इंडिया के एनुअल रेवेन्यू का 10
- 10:04:37से 13% हुआ करते थे। 1897 से 1901 के बीच
- 10:04:43यह प्रोपोर्शन बढ़कर 24% हो गया था। और
- 10:04:4619212
- 10:04:48में होम चार्जेस सेंट्रल गवर्नमेंट के
- 10:04:50टोटल रेवेन्यू के 40% तक पहुंच गए थे। होम
- 10:04:54चार्जेस के अंदर ईस्ट इंडिया कंपनी के
- 10:04:57शेयर होल्डर्स को दिए जाने वाला डिविडेंड,
- 10:04:59कंपनी द्वारा इंडिया के बाहर लिए पब्लिक
- 10:05:02डेप्ट पर इंटरेस्ट, सिविल और मिलिट्री
- 10:05:04चार्जेस और इंग्लैंड में किए गए स्टोर
- 10:05:07परचेजेस आते थे। ड्रेन का नेक्स्ट
- 10:05:09कंपोनेंट था फॉरेन कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स
- 10:05:12पर दिया जाने वाला इंटरेस्ट।
- 10:05:15इंटरेस्ट ऑन फॉरेन कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स।
- 10:05:1820th सेंचुरी में ब्रिटेन से फाइनेंस
- 10:05:21कैपिटल इंडिया में एंटर होना शुरू होता
- 10:05:24है। यानी कि थर्ड फेज फाइनेंशियल
- 10:05:27कैपिटलिज्म की शुरुआत। 20th सेंचुरी में
- 10:05:30इंटर वॉर पीरियड के समय इस पर सालाना लगभग
- 10:05:3430 से 60 करोड़ खर्च होते थे। यहां यह याद
- 10:05:38रखना चाहिए कि फॉरेन कैपिटलिस्ट इंडिया के
- 10:05:41इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट में इंटरेस्टेड
- 10:05:43नहीं थे। बल्कि अपने फायदे के लिए इंडियन
- 10:05:46रिसोर्सेज को एक्सप्लइट करना चाहते थे।
- 10:05:49साथ ही इंडीजीनस कैपिटलिस्ट एंटरप्राइज को
- 10:05:52अलग-अलग तरीके से पीछे करने की कोशिश भी
- 10:05:55करते थे। इकोनमिक ड्रेन का एक और कंपोनेंट
- 10:05:58देखा जा सकता है। फॉरेन बैंकिंग,
- 10:06:00इंश्योरेंस एंड शिपिंग कंपनीज़। इंडिया को
- 10:06:04बैंकिंग, इंश्योरेंस और शिपिंग के लिए
- 10:06:06ह्यूज पेमेंट्स करने पड़ते थे। इससे
- 10:06:09इंडियन रिसोर्सेज का ड्रेन तो होता ही था।
- 10:06:11साथ ही इन स्फियर्स में इंडीजनस
- 10:06:14एंटरप्राइजेस की ग्रोथ भी नहीं हो पाई थी।
- 10:06:17इकोनॉमिक ड्रेन के बारे में लिखते हुए
- 10:06:19दादा भाई नौरोजी ने कहा था कि यह इविल ऑफ
- 10:06:22ऑल इव्स है और इंडियन पावर्टी का सबसे
- 10:06:26बड़ा कारण भी है। इनके अनुसार ब्रिटिश रूल
- 10:06:29की शुरुआत से लेकर 18656
- 10:06:32तक कुल 1500 मिलियन पाउंड्स का ड्रेन
- 10:06:36इंडिया से हो चुका था। और 1883 से 1892 के
- 10:06:41बीच करीब ₹59 करोड़ ड्रेन हुए थे। ड्रेन
- 10:06:46ऑफ वेल्थ के जरिए ना सिर्फ ब्रिटिशर्स ने
- 10:06:48इंडिया की वेल्थ को लूटने का काम किया
- 10:06:51बल्कि इसकी वजह से इंडिया में
- 10:06:53इंडस्ट्रियलाइजेशन भी नहीं हो पाया।
- 10:06:55क्योंकि इसके लिए जो जरूरी कैपिटल थी वो
- 10:06:58तो ब्रिटेन ट्रांसफर हो रही थी। यह तो बात
- 10:07:01हो गई कॉलोनियल रूल के दौरान इंडिया पर
- 10:07:04हुए इकोनॉमिक इंपैक्ट्स की।
- 10:07:07लेकिन यह इंपैक्ट्स सिर्फ कॉलोनियल रूल तक
- 10:07:09ही सीमित नहीं रहे बल्कि इनकी लेगसी
- 10:07:13इंडिपेंडेंट इंडिया पर भी देखने को मिलती
- 10:07:15है। कैसे? आइए जानते हैं।
- 10:07:20ब्रिटिश लेगसी ऑफ़ पावर्टी एंड अंडर
- 10:07:23डेवलप्ड इकॉनमी।
- 10:07:25200 साल का ब्रिटिश रूल एक्सट्रीम पावर्टी
- 10:07:28के साथ एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रियल दोनों
- 10:07:31ही सेक्टर्स में इकोनॉमिक बैकवर्डनेस की
- 10:07:34लेगसी छोड़ जाता है। 1947 में जब
- 10:07:38ब्रिटिशर्स इंडिया से गए तब दुनिया की
- 10:07:40सबसे जटिल लैंड प्रॉब्लम पीछे छोड़ गए।
- 10:07:43जिसमें लैंड राइट्स की कॉम्प्लिकेटेड
- 10:07:45हायरार्की थी। लैंड टेन्योर की
- 10:07:48इनसिक्योरिटी थी। कल्टीिवेशन की टेक्निक्स
- 10:07:51प्रिमिटिव बने हुए थे। पर एकड़ यील्ड बहुत
- 10:07:54कम थी। एग्रीकल्चरल होल्डिंग्स
- 10:07:56फ्रेगमेंटेड थी और मनी लेंडर्स का शिकंजा
- 10:07:59रूरल इकॉनमी पर बना हुआ था। इसके साथ ही
- 10:08:03एग्रीकल्चर में इन्वेस्टमेंट तो उन्होंने
- 10:08:05ना के बराबर किया था। कम शब्दों में कहें
- 10:08:08तो देश पर अकाल यानी कि फेमिन का खतरा
- 10:08:11लगातार मंडरा रहा था। इस स्थिति से निकलने
- 10:08:15के लिए देश को कई साल लग गए और एग्रीकल्चर
- 10:08:18की कुछ समस्या जो ब्रिटिश लेगेसी हैं अभी
- 10:08:20तक बनी हुई हैं। इंडस्ट्रियल सेक्टर का
- 10:08:24हाल भी कुछ ऐसा ही था। इंडियन इंडस्ट्रीज
- 10:08:27का लॉब साइडेड डेवलपमेंट हुआ था।
- 10:08:29प्रोडक्शन टेक्निक्स बहुत ही कम थी।
- 10:08:31इंडस्ट्रियल वर्कर्स की हालत भी कुछ खास
- 10:08:34अच्छी नहीं थी। इसके अलावा इंडस्ट्रीज पर
- 10:08:37ब्रिटिश फाइनेंस कैपिटल का दबदबा अभी भी
- 10:08:39बना हुआ था। ब्रिटिशर्स इंडिया को लो पर
- 10:08:43कैपिटा इनकम वाला गरीब देश बनाकर चले गए
- 10:08:46थे। एवरेज इंडियन इनकम कुछ इस तरह थी कि
- 10:08:49लोग तीन मील्स की जगह सिर्फ दो मील्स ही
- 10:08:52अफोर्ड कर सकते थे। वो भी इस शर्त पर कि
- 10:08:55कपड़े की कोई डिमांड ना हो। सर के ऊपर छत
- 10:08:58भी ना हो और किसी तरह का कोई अम्यूजमेंट
- 10:09:01या रेक्रिएशन तो भूल ही जाओ। इस तरह आजादी
- 10:09:05के समय इंडिया को ब्रिटिश लेगेसी के रूप
- 10:09:07में वर्षों के कॉलोनियल एक्सप्लइटेशन के
- 10:09:10नीचे दबी इकॉनमी और गाइडेड अंडर डेवलपमेंट
- 10:09:13मिलता है।
- 10:09:15कंक्लूजन
- 10:09:20दोस्तों हम कह सकते हैं कि ब्रिटिश
- 10:09:22कॉलोनियल रूल का सबसे बड़ा प्रभाव इंडियन
- 10:09:25इकॉनमी पर ही दिखता है। यही वजह थी कि
- 10:09:28इंडियन नेशनलिस्ट ड्रेन ऑफ वेल्थ की
- 10:09:31थ्योरी से कॉलोनियल रूल को एक्सपोज करने
- 10:09:34की कोशिश करते हैं। और इंडिया में
- 10:09:37इकोनॉमिक नेशनलिज्म की शुरुआत होती है।
- 10:09:40कॉलोनियल रूल एक बड़ी वजह थी कि इंडिया
- 10:09:43में इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन नहीं हो पाया।
- 10:09:45इंडियन एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रीज के
- 10:09:47बैकवर्डनेस के लिए भी कॉलोनियल पॉलिसीज ही
- 10:09:50रिस्पांसिबल थी। चार्टर एक्ट्स एंड
- 10:09:53रेगुलेशंस एक्ट टिल 1858।
- 10:09:56दोस्तों जैसा कि हम देख चुके हैं कि 1764
- 10:10:00में हुई बैटल ऑफ बक्सर के बाद ईस्ट इंडिया
- 10:10:03कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की
- 10:10:05दीवानी मिल गई थी। इसके बाद 1765 में
- 10:10:09बंगाल में ड्यूल सिस्टम ऑफ गवर्नमेंट को
- 10:10:12इंट्रोड्यूस किया गया था। जिसके तहत कंपनी
- 10:10:15के पास रेवेन्यू कलेक्ट करने का राइट रहता
- 10:10:17है। लेकिन एडमिनिस्ट्रेशन की
- 10:10:19रिस्पांसिबिलिटी नवाब की रहती है। इस
- 10:10:22सिस्टम के कारण कंपनी के पास बिना किसी
- 10:10:25रिस्पांसिबिलिटी के पूरी अथॉरिटी आ चुकी
- 10:10:27थी। इसका रिजल्ट यह होता है कि कंपनी के
- 10:10:30सर्वेंट्स में करप्शन बहुत ज्यादा बढ़
- 10:10:32जाता है और वह अपने फायदे के लिए प्राइवेट
- 10:10:34ट्रेड में बिजी रहने लगते हैं। इसके साथ
- 10:10:37ही एक्सेसिव रेवेन्यू कलेक्शन की वजह से
- 10:10:40पेसेंट्री का भी शोषण होने लगता है और
- 10:10:42इसके ऊपर से 1772 में कंपनी बैंकरप्स फाइल
- 10:10:47करती है। जबकि उसके एंप्लाइज दिनरा
- 10:10:50फ्लोरिश कर रहे थे। ऐसी सिचुएशन में
- 10:10:53ब्रिटिश गवर्नमेंट फैसला करती है कि कंपनी
- 10:10:55के अफेयर्स को रेगुलेट करने के लिए अब उसे
- 10:10:58ही कोई कदम उठाना पड़ेगा।
- 10:11:00इस दिशा में सबसे पहला कदम होता है 1773
- 10:11:04का रेगुलेटिंग एक्ट। इसके बाद धीरे-धीरे
- 10:11:07कंट्रोलिंग लॉस का नंबर बढ़ने लगता है।
- 10:11:10आइए सबसे पहले रेगुलेटिंग एक्ट के
- 10:11:13प्रोविजंस को समझते हैं।
- 10:11:18रेगुलेटिंग एक्ट 1773
- 10:11:23दोस्तों, इस एक्ट के थ्रू ब्रिटिश कैबिनेट
- 10:11:26पहली बार इंडिया में कंपनी के अफेयर्स पर
- 10:11:29अपना कंट्रोल इस्टैब्लिश करती है। यह एक्ट
- 10:11:32गवर्नर ऑफ बंगाल की पोस्ट को गवर्नर जनरल
- 10:11:35ऑफ बंगाल में चेंज कर देता है। इसके अलावा
- 10:11:38बंगाल के एडमिनिस्ट्रेशन के लिए गवर्नर
- 10:11:40जनरल की चार मेंबर वाली काउंसिल का
- 10:11:42प्रोविजन रखा जाता है। वारेन हेस्टिंग्स
- 10:11:45बंगाल के पहले गवर्नर जनरल बनते हैं।
- 10:11:48रेगुलेटिंग एक्ट के अनुसार बॉम्बे और
- 10:11:51मद्रास के गवर्नर को बंगाल के गवर्नर जनरल
- 10:11:54के अंडर काम करना होता है। इसके साथ ही
- 10:11:57कोलकाता में ओरिजिनल और अपेलेट
- 10:11:59जुरिसडिक्शन वाला सुप्रीम कोर्ट
- 10:12:01इस्टैब्लिश करने का प्रोविजन भी था।
- 10:12:03जिसमें एक चीफ जस्टिस के साथ तीन जजेस को
- 10:12:06अपॉइंट किया जाना था। कंपनी के
- 10:12:09डायरेक्टर्स को रेवेन्यू अफेयर्स और सिविल
- 10:12:11और मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन से रिलेटेड
- 10:12:13सभी कॉरेस्पोंडेंसेस ब्रिटिश गवर्नमेंट के
- 10:12:16साथ शेयर करने के लिए भी कहा गया था।
- 10:12:19इस एक्ट ने कोशिश की थी कि कंपनी के
- 10:12:22अफेयर्स को बेटर तरीके से रेगुलेट किया
- 10:12:24जाए। लेकिन इसमें बहुत ज्यादा सफलता नहीं
- 10:12:26मिलती और 1784 में एक और एक्ट पास करना
- 10:12:30पड़ता है।
- 10:12:35पिट्स इंडिया एक्ट 1784
- 10:12:38पिट्स इंडिया एक्ट ड्यूल सिस्टम को
- 10:12:41इंट्रोड्यूस करता है। यानी कि कंपनी के
- 10:12:43साथ अब ब्रिटिश गवर्नमेंट का कंट्रोल भी
- 10:12:46इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन पर एस्टैब्लिश किया
- 10:12:48जाता है। इंडिया में कंपनी की टेरिटोरियल
- 10:12:51पोज़ेशंस को एक्ट में ब्रिटिश पोज़ेशन बोला
- 10:12:54जाता है। इस तरह कंपनी अब स्टेट का एक
- 10:12:57सबोर्डिनेट डिपार्टमेंट बन जाता है। लेकिन
- 10:12:59कमर्शियल एक्टिविटीज और डे टू डे
- 10:13:01एडमिनिस्ट्रेशन पर कंपनी का अपना कंट्रोल
- 10:13:03बना रहता है। ड्यूल सिस्टम के तहत 1784 का
- 10:13:07यह एक्ट बोर्ड ऑफ कंट्रोल की
- 10:13:09इस्टैब्लिशमेंट करता है। बोर्ड ऑफ कंट्रोल
- 10:13:12का काम कंपनी के सिविल, मिलिट्री और
- 10:13:14रेवेन्यू अफेयर्स पर कंट्रोल करना था।
- 10:13:16चांसलर ऑफ एक्स चेकर, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट
- 10:13:19और क्राउन द्वारा अपॉइंटेड प्रीवी काउंसिल
- 10:13:21के चार मेंबर्स इसका हिस्सा थे। इसके
- 10:13:24अलावा गवर्नर जनरल की काउंसिल की स्ट्रेंथ
- 10:13:26को चार से घटाकर तीन मेंबर्स कर दिया जाता
- 10:13:28है। जिसमें एक मेंबर कमांडर इन चीफ को रखा
- 10:13:32जाता है। साथ ही बॉम्बे और मद्रास की
- 10:13:34प्रेसिडेंसीज को बंगाल के गवर्नर जनरल का
- 10:13:37सबोर्डिनेट बना दिया जाता है। 1784 के
- 10:13:41एक्ट के बाद नेक्स्ट इंपॉर्टेंट एक्ट 1793
- 10:13:44का चार्टर एक्ट था।
- 10:13:50चार्टर एक्ट 1793
- 10:13:54दोस्तों ईस्ट इंडिया कंपनी को इंडिया के
- 10:13:57साथ ट्रेड करने के लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 10:13:59से चार्टर मिला था। जिसके तहत ईस्टर्न
- 10:14:02ट्रेड में इसकी मोनोपोली इस्टैब्लिश की गई
- 10:14:04थी। 1793 का चार्टर एक्ट इसी चार्टर को और
- 10:14:0820 साल के लिए रिन्यू कर देता है। इस एक्ट
- 10:14:11के थ्रू गवर्नर जनरल को काउंसिल के डिसीजन
- 10:14:14को ओवराइड करने की पावर भी दी जाती है।
- 10:14:17इसमें एक प्रोविजन यह भी होता है कि सभी
- 10:14:19सीनियर ऑफिशियल्स जैसे कि गवर्नर जनरल,
- 10:14:22गवर्नर्स और कमांडर इन चीफ की अपॉइंटमेंट
- 10:14:25के लिए रॉयल अप्रूवल लेना मैंडेटरी होगा।
- 10:14:28इसके अलावा एक्ट में बोर्ड ऑफ कंट्रोल के
- 10:14:30मेंबर्स और उसके पूरे स्टाफ का खर्चा अब
- 10:14:33इंडियन रेवेन्यूस से उठाए जाने का
- 10:14:35प्रावधान था। 1793 का यह चार्टर एक्ट
- 10:14:39कंपनी के द्वारा ब्रिटिश गवर्नमेंट को
- 10:14:41एनुअली 5 लाख पाउंड्स देने का प्रोविजन भी
- 10:14:44करता है। 20 साल बाद जब इस चार्टर के
- 10:14:47एक्सपायर होने का समय होता है तब नेक्स्ट
- 10:14:49चार्टर एक्ट पास किया जाता है।
- 10:14:55चार्टर एक्ट 1813
- 10:15:001813 का चार्टर एक्ट कई मायनों में एक
- 10:15:03लैंडमार्क चार्टर एक्ट था। इंग्लिश
- 10:15:05ट्रेडर्स इस समय डिमांड करने लगे थे कि
- 10:15:08उन्हें भी इंडियन ट्रेड में शेयर मिलना
- 10:15:10चाहिए। यानी कि वह ईस्ट इंडिया कंपनी की
- 10:15:13मोनोपोली का विरोध कर रहे थे। इसके पीछे
- 10:15:16दो कारण थे। पहला तो लेजरफेयर की स्पिरिट
- 10:15:19और दूसरा नेपोलियन का कॉन्टिनेंटल सिस्टम
- 10:15:22जिसके तहत बाकी यूरोपियन पोर्ट्स ब्रिटेन
- 10:15:25के लिए क्लोज कर दिए गए थे। इसलिए ब्रिटिश
- 10:15:28ट्रेडर्स चाहते थे कि इंडियन ट्रेड को सभी
- 10:15:31के लिए ओपन कर दिया जाए। इनकी डिमांड्स को
- 10:15:33ध्यान में रखते हुए ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 10:15:361813 का चार्टर एक्ट पास करती है। जिसके
- 10:15:39तहत कंपनी की कमर्शियल मोनोपोली को खत्म
- 10:15:41कर दिया जाता है। लेकिन चाइना के साथ और
- 10:15:44ओवरऑल टी यानी कि चाय के ट्रेड में उसकी
- 10:15:47मोनोपोली बनी रहने दी जाती है। साथ ही
- 10:15:50इंडियन टेरिटरीज और रेवेन्यू को कंपनी और
- 10:15:5320 साल तक रिटेन कर सकती थी। लेकिन क्राउन
- 10:15:56की सोवनिटी के अंदर रहते हुए बोर्ड ऑफ
- 10:15:58कंट्रोल की पावर्स और ज्यादा बढ़ा दी जाती
- 10:16:01हैं। इस एक्ट में इंडिया में एजुकेशन को
- 10:16:04प्रमोट करने के लिए एनुअली ₹1 लाख की
- 10:16:07ग्रांट का प्रोविजन भी था। क्रिश्चियन
- 10:16:10मिशनरीज को भी इंडियन आने और अपना रिलीजन
- 10:16:13प्रीच करने की परमिशन दे दी जाती है।
- 10:16:15दोस्तों, 1813 के चार्टर एक्ट के बाद फिर
- 10:16:18से 20 साल बाद अगला चार्टर एक्ट पास होता
- 10:16:21है।
- 10:16:24चार्टर एक्ट 1833।
- 10:16:281833 के चार्टर एक्ट में कंपनी को
- 10:16:31टेरिटरीज और रेवेन्यू कलेक्शन पर मिली 20
- 10:16:33साल की लीस को फर्दर एक्सटेंड कर दिया
- 10:16:36जाता है। लेकिन चाइना और चाय के ट्रेड पर
- 10:16:39कंपनी की मोनोपोली को इस बार एंड कर दिया
- 10:16:42जाता है। इसके अलावा यूरोपियन इमीग्रेशन
- 10:16:45और इंडिया में प्रॉपर्टी के एक्वज़िशन पर
- 10:16:48सभी रिस्ट्रिक्शंस हटा दी जाती हैं। जिससे
- 10:16:50यूरोपियंस द्वारा इंडिया का कॉलोनाइजेशन
- 10:16:53और तेजी से बढ़ता है। 1833 का यह एक्ट
- 10:16:57गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल की पोस्ट को गवर्नर
- 10:17:00जनरल ऑफ इंडिया की पोस्ट में चेंज कर देता
- 10:17:02है और उसको कंपनी के सभी सिविल और
- 10:17:05मिलिट्री अफेयर्स को कंट्रोल और डायरेक्ट
- 10:17:08करने की पावर दे दी जाती है। सभी
- 10:17:11रेवेन्यूस भी गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया की
- 10:17:13अथॉरिटी में रेज किए जाने थे और
- 10:17:15एक्सपेंडिचर पर भी पूरी तरह उसका कंट्रोल
- 10:17:17इस्टैब्लिश कर दिया जाता है। विलियम
- 10:17:20बेंटिंग पहले गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया बनते
- 10:17:23हैं। इंडियन लॉज़ के कंसोलिडेशन और
- 10:17:26कोडिफिकेशन के लिए एक लॉ कमीशन का
- 10:17:29प्रोविजन भी इस एक्ट में था। एक्ट गवर्नर
- 10:17:32जनरल की काउंसिल में एक फोर्थ मेंबर भी ऐड
- 10:17:35करता है जो कि लॉ मेकिंग में एक लीगल
- 10:17:37एक्सपर्ट हो। इसे लॉ मेंबर भी कहा जाता
- 10:17:40है। पहली बार लॉर्ड मकोले यह पोजीशन लेते
- 10:17:43हैं। इसके साथ ही बॉम्बे और मद्रास
- 10:17:46गवर्नमेंट की लेजिसलेटिव पावर्स पूरी तरह
- 10:17:49खत्म कर दी जाती हैं। अब वह सिर्फ गवर्नर
- 10:17:52जनरल को प्रपोजल भेज सकते थे। फाइनल
- 10:17:55डिसीजन लेने का राइट सिर्फ गवर्नर जनरल के
- 10:17:57पास ही होता है। 1833 का चार्टर एक्ट
- 10:18:01एडमिनिस्ट्रेशन को स्लेवरी अबॉलिश करने के
- 10:18:03स्टेप्स लेने के लिए भी कहता है। आइए अब
- 10:18:06नेक्स्ट चार्टर एक्ट के प्रोविजंस को
- 10:18:08समझते हैं।
- 10:18:11चार्टर एक्ट 1853।
- 10:18:151853 का चार्टर एक्ट डिसाइड करता है कि जब
- 10:18:18तक पार्लियामेंट कोई और कानून नहीं बनाता
- 10:18:21तब तक इंडियन टेरिटरीज का पोजेशन कंपनी के
- 10:18:24पास ही रहेगा। यानी पहली बार लीज़ को 20 और
- 10:18:28सालों के लिए ऑटोमेटिकली एक्सटेंड नहीं
- 10:18:30किया जाता। इसके अलावा सर्विज पर से कंपनी
- 10:18:33का पेट्रनेज खत्म कर दिया जाता है। मतलब
- 10:18:36अब कंपनी अपनी पसंद से सर्विज में
- 10:18:39अपॉइंटमेंट नहीं कर सकती थी। बल्कि इसके
- 10:18:41लिए ओपन कंपटीशन का प्रोविजन किया जाता
- 10:18:44है। लॉ मेंबर को गवर्नर जनरल की
- 10:18:46एग्जीक्यूटिव काउंसिल का फुल मेंबर बना
- 10:18:49दिया जाता है। 1853 का चार्टर एक्ट
- 10:18:52गवर्नमेंट के एग्जीक्यूटिव और लेजिसलेटिव
- 10:18:55फंक्शनंस को भी सेपरेट करता है।
- 10:18:57लेजिसलेटिव पर्पस के लिए सिक्स एडिशनल
- 10:18:59मेंबर्स को शामिल किया जाता है। इस
- 10:19:02लेजिसलेटिव विंग को इंडियन लेजिसलेटिव
- 10:19:05काउंसिल बोला जाता है और इसमें लोकल
- 10:19:07रिप्रेजेंटेशन को भी इंट्रोड्यूस किया
- 10:19:09जाता है। लेकिन फाइनल लॉ के लिए गवर्नर
- 10:19:12जनरल की एसेंट की जरूरत होती है और वो
- 10:19:16लेजिसलेटिव काउंसिल के किसी भी बिल को
- 10:19:18वीटो कर सकता था।
- 10:19:20दोस्तों 1853 का चार्टर एक्ट आखिरी चार्टर
- 10:19:23एक्ट था क्योंकि इसके 4 साल बाद ही 1857
- 10:19:27की क्रांति हो जाती है और उसके बाद पास
- 10:19:29होता है गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858
- 10:19:36गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858
- 10:19:42रिवोल्ट ऑफ 1857 कंपनी के एडमिनिस्ट्रेशन
- 10:19:45को पूरी तरह एक्सपोज कर देता है। उससे
- 10:19:48पहले तक इंडिया में मैल एडमिनिस्ट्रेशन के
- 10:19:50लिए कोई भी अकाउंटेबल नहीं था। ब्रिटिश
- 10:19:53गवर्नमेंट डिसाइड करती है कि इस एनोमली को
- 10:19:56रेक्टिफाई करने का समय आ गया है और यह
- 10:19:59ब्रिटिश गवर्नमेंट के लिए सही मौका था
- 10:20:01कंपनी से इंडियन टेरिटरीज की पोजेशन को
- 10:20:04लेने का। 1858 का एक्ट पिट्स इंडिया एक्ट
- 10:20:08द्वारा इंट्रोड्यूस्ड ड्यूल सिस्टम का एंड
- 10:20:10कर देता है। अब इंडिया को कंपनी नहीं
- 10:20:13बल्कि क्राउन के नाम पर गवर्न किया जाना
- 10:20:15था। इसके लिए सेक्रेटरी ऑफ स्टेट और उसकी
- 10:20:1915 मेंबर की काउंसिल अपॉइंट की जाती है।
- 10:20:22काउंसिल का नेचर सिर्फ एडवाइज़री था। अगस्त
- 10:20:251858 में लॉर्ड स्टैनली पहले सेक्रेटरी ऑफ
- 10:20:29स्टेट बनते हैं।
- 10:20:31गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया के टाइटल को
- 10:20:33रिप्लेस करके वायसरॉय कर दिया जाता है।
- 10:20:36जिसका मतलब था क्राउन का एजेंट और वायसरॉय
- 10:20:39को डायरेक्ट ब्रिटिश गवर्नमेंट अपॉइंट
- 10:20:42करती थी। इसके साथ लॉर्ड कैनिंग इंडिया के
- 10:20:45पहले वायसरॉय बनते हैं। लेकिन दोस्तों
- 10:20:49समझने वाली बात यह है कि इस मोमेंट पर
- 10:20:51क्राउन के द्वारा पावर अस्यूम करना बस एक
- 10:20:54फॉर्मेलिटी ही थी। जैसा कि हम देख चुके
- 10:20:56हैं काफी पहले से ब्रिटिश गवर्नमेंट ही
- 10:20:59इंडियन अफेयर्स को रेगुलेट कर रही थी। कह
- 10:21:01सकते हैं कि इस एक्ट ने ऑलरेडी डेड हॉर्स
- 10:21:04यानी कि कंपनी को एक डिसेंट बैरियल देने
- 10:21:07का काम किया था।
- 10:21:12कंक्लूजन।
- 10:21:15दोस्तों, यह थी 1858 तक पास किए गए
- 10:21:18इंपॉर्टेंट एक्ट्स की समरी। जिसमें हमने
- 10:21:21देखा कि कैसे ग्रेजुअली ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 10:21:24ईस्ट इंडिया कंपनी से इंडियन एंपायर को
- 10:21:27कैप्चर कर लेती है। अपने नेक्स्ट वीडियो
- 10:21:29में हम 1858 के बाद ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 10:21:32द्वारा पास किए गए एक्ट्स को समझेंगे।
- 10:21:36एक्ट्स डेवलपमेंट्स आफ्टर 1858 टिल
- 10:21:40इंडिपेंडेंस।
- 10:21:41दोस्तों, अपनी पिछली वीडियो में हमने 1858
- 10:21:44तक के रेगुलेशंस और चार्टर एक्ट्स को
- 10:21:47डिस्कस किया था। आज हम इसके आगे के एक्ट्स
- 10:21:50के बारे में बात करेंगे। जैसा कि हम देख
- 10:21:53चुके हैं कि 1858 के एक्ट से कंपनी के रूल
- 10:21:57का एंड हो जाता है और इंडिया डायरेक्ट
- 10:22:00क्राउन के एडमिनिस्ट्रेशन में आ जाता है।
- 10:22:02इसके बाद पहला एक्ट पास होता है 1861 में
- 10:22:05जिसे इंडियन काउंसिल एक्ट 1861 बोला जाता
- 10:22:09है। आइए इसके प्रोविजंस को समझते हैं।
- 10:22:14इंडियन काउंसिल एक्ट 1861
- 10:22:18इंडियन काउंसिल एक्ट 1861 ब्रिटिश
- 10:22:22पार्लियामेंट का एक एक्ट था जिसने गवर्नर
- 10:22:24जनरल के काउंसिल में सिग्निफिकेंट चेंजेस
- 10:22:27इंट्रोड्यूस किए थे। काउंसिल के
- 10:22:30एग्जीक्यूटिव फंक्शनंस के लिए फिफ्थ मेंबर
- 10:22:32को ऐड किया जाता है। यह फाइव मेंबर्स होम,
- 10:22:35मिलिट्री, लॉ, रेवेन्यू और फाइनेंस देखते
- 10:22:39थे। इस एक्ट के थ्रू पोर्टफोलियो सिस्टम
- 10:22:42भी इंट्रोड्यूस किया जाता है। जो उस समय
- 10:22:45के वायसरॉय लॉर्ड के का आईडिया था।
- 10:22:48इस सिस्टम में ईच मेंबर को पर्टिकुलर
- 10:22:51डिपार्टमेंट का पोर्टफोलियो असाइन किया
- 10:22:53जाता है। लेजिसलेटिव पर्पससेस के लिए
- 10:22:56गवर्नर जनरल की काउंसिल को एनलार्ज कर
- 10:22:59दिया जाता है। सिक्स मेंबर्स की जगह अब 12
- 10:23:02मेंबर्स इसका पार्ट थे। इन्हें खुद गवर्नर
- 10:23:05जनरल नॉमिनेट करते थे। इनका अपॉइंटमेंट 2
- 10:23:08साल के लिए किया जाता था। और 12 में से कम
- 10:23:11से कम हाफ मेंबर्स का नॉन ऑफिशियल होना
- 10:23:14जरूरी था।
- 10:23:16यहां नॉन ऑफिशियल का मतलब था ऐसे लोग जो
- 10:23:19गवर्नमेंट सर्विज का पार्ट नहीं थे और
- 10:23:21इसमें यूरोपियंस और नेटिव इंडियंस दोनों
- 10:23:24ही शामिल थे। यह एक्ट बॉम्बे और मद्रास के
- 10:23:27गवर्नर्स और उनकी काउंसिल्स की लेजिसलेटिव
- 10:23:30पावर्स को रिस्टोर कर देता है। जिन्हें
- 10:23:331833 के चार्टर एक्ट ने खत्म कर दिया था।
- 10:23:37लेकिन बिना गवर्नर की परमिशन के कोई भी
- 10:23:39बिल पास नहीं हो सकता था। इसके साथ ही
- 10:23:42वायसरॉय के पास काउंसिल के किसी भी डिसीजन
- 10:23:45को ओवराइड करने की पावर भी थी। इमरजेंसीज
- 10:23:48के दौरान वायसरॉय को ऑर्डिनेंस पास करने
- 10:23:50की पावर भी दी जाती है। इस एक्ट के अंदर
- 10:23:54बाकी प्रोविंसेस में भी लेजिसलेटिव
- 10:23:56काउंसिल्स के फॉर्मेशन का प्रोविजन था।
- 10:23:59जिसके तहत 1862 में बंगाल, 1886 में नॉर्थ
- 10:24:04वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस और 1897 में
- 10:24:07पंजाब और बर्मा में लेजिसलेटिव काउंसिल्स
- 10:24:10का फॉर्मेशन होता है। इसके अलावा
- 10:24:13सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट किसी भी लेजिसलेशन को
- 10:24:15डिस्रूव कर सकता था। मतलब लेजिसलेशन पर
- 10:24:19अल्टीमेट पावर ब्रिटेन में बैठे सेक्रेटरी
- 10:24:21के हाथ में थी।
- 10:24:23दोस्तों, इस तरह 1861 के एक्ट ने
- 10:24:27लेजिसलेटिव काउंसिल्स को एनलार्ज तो कर
- 10:24:29दिया, लेकिन उनका रोल लिमिटेड ही था। यह
- 10:24:32मेनली एडवाइज़री था और फाइनेंस यानी कि बजट
- 10:24:36के ऊपर कोई भी डिस्कशन तक करना अलाउड नहीं
- 10:24:38था। आइए अब नेक्स्ट काउंसिल एक्ट की बात
- 10:24:41करते हैं जो 1892 में इंट्रोड्यूस किया
- 10:24:44गया था।
- 10:24:48इंडियन काउंसिल एक्ट 1892
- 10:24:521885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की
- 10:24:55फाउंडेशन हो चुकी थी और कांग्रेस की सबसे
- 10:24:58बड़ी डिमांड लेजिसलेटिव काउंसिल्स का
- 10:25:00रिफॉर्म करना ही थी। इसी डिमांड को ध्यान
- 10:25:03में रखते हुए ब्रिटिश पार्लियामेंट इंडियन
- 10:25:05काउंसिल एक्ट 1892 पास करती है। एक्ट के
- 10:25:09थ्रू गवर्नर जनरल की लेजिसलेटिव काउंसिल
- 10:25:11को फर्दर एन इनलार्ज किया जाता है। साथ ही
- 10:25:14सेंट्रल और प्रोविंशियल दोनों ही जगह नॉन
- 10:25:17ऑफिशियल मेंबर्स की संख्या भी बढ़ा दी
- 10:25:20जाती है। यूनिवर्सिटीज, डिस्ट्रिक्ट
- 10:25:23बोर्ड्स, म्युनिसिपालिटीज, जमींदार, ट्रेड
- 10:25:26बॉडीज और चेंबर्स ऑफ कॉमर्स को
- 10:25:28प्रोविंशियल काउंसिल्स के लिए मेंबर्स
- 10:25:30रेकमेंड करने की पावर दी जाती है। इस तरह
- 10:25:33यह एक्ट पहली बार प्रिंसिपल ऑफ
- 10:25:35रिप्रेजेंटेशन को इंट्रोड्यूस करता है।
- 10:25:38एक्ट में इलेक्शन टर्म का यूज तो नहीं
- 10:25:40किया गया था, लेकिन कुछ नॉन ऑफिशियल
- 10:25:43मेंबर्स के सिलेक्शन में इनडायरेक्ट
- 10:25:45इलेक्शन के एलिमेंट को एक्सेप्ट कर लिया
- 10:25:47गया था। इसके साथ ही लेजिस्लेचर्स को बजट
- 10:25:50पर डिस्कशन करने की पावर भी दी जाती है और
- 10:25:53वह कुछ लिमिट्स के अंदर पब्लिक इंटरेस्ट
- 10:25:56के मैटर्स पर एग्जीक्यूटिव से क्वेश्चन भी
- 10:25:58कर सकते थे। हालांकि इसके लिए उन्हें छ
- 10:26:01दिन पहले नोटिस देना होता था। दोस्तों
- 10:26:041892 का काउंसिल एक्ट कांग्रेस के लिए एक
- 10:26:07अचीवमेंट जरूर था क्योंकि उनकी लेजिसलेटिव
- 10:26:10काउंसिल्स को एनलार्ज करने की डिमांड इसने
- 10:26:12एक्सेप्ट कर ली थी। लेकिन अभी भी यह पूरी
- 10:26:15तरह रिप्रेजेंटेटिव बॉडी नहीं थी। और ना
- 10:26:18ही उनके पास कोई सब्सटैंशियल पावर्स थी।
- 10:26:21इसलिए फर्दर रिफॉर्म्स की डिमांड बनी रहती
- 10:26:23है। और अगला रिफॉर्म एक्ट 199 में पास
- 10:26:27होता है।
- 10:26:30इंडियन काउंसिल्स एक्ट 199
- 10:26:36के काउंसिल्स एक्ट को मोरली मिंटो
- 10:26:38रिफॉर्म्स के नाम से भी जाना जाता है। यह
- 10:26:41इंडिया की गवर्नेंस में रिप्रेजेंटेटिव और
- 10:26:44पॉपुलर एलिमेंट लाने का पहला ब्रिटिश
- 10:26:46अटेमप्ट था।
- 10:26:47इसके थ्रू इंपीरियल लेजिसलेटिव काउंसिल की
- 10:26:50स्ट्रेंथ को 16 मेंबर्स से इनक्रीस करके
- 10:26:53अब 60 मेंबर्स कर दिया जाता है। पहली बार
- 10:26:57वायसरॉय के एग्जीक्यूटिव काउंसिल में एक
- 10:26:59इंडियन मेंबर को शामिल किया जाता है।
- 10:27:02एग्जीक्यूटिव काउंसिल को ज्वाइन करने वाले
- 10:27:04पहले इंडियन सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा बनते
- 10:27:07हैं। उन्होंने लॉ मेंबर के पद पर काउंसिल
- 10:27:09को ज्वाइन किया था। प्रोविंशियल
- 10:27:11एग्जीक्यूटिव काउंसिल्स के मेंबर्स की
- 10:27:13संख्या भी इनक्रीस कर दी जाती है। इसके
- 10:27:17अलावा सेंट्रल और प्रोविंशियल लेजिसलेटिव
- 10:27:19काउंसिल्स को पहले से ज्यादा पावर्स दी
- 10:27:21जाती हैं। प्रोविंशियल लेजिसलेटिव
- 10:27:24काउंसिल्स में नॉन ऑफिशियल मेंबर्स की
- 10:27:26मेजॉरिटी हो जाती है। लेजिसलेटिव
- 10:27:29काउंसिल्स के मेंबर्स अब बजट पर डिस्कशन
- 10:27:31के साथ ही रेजोल्यूशन भी पास कर सकते थे
- 10:27:34और सप्लीमेंट्री क्वेश्चन पूछने का राइट
- 10:27:37भी उन्हें दिया जाता है।
- 10:27:39199 का एक्ट मुस्लिम्स के लिए सेपरेट
- 10:27:42इलेक्टेट का प्रोविजन भी करता है। साथ ही
- 10:27:46इंडियन अफेयर्स के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की
- 10:27:48काउंसिल में भी दो इंडियंस को नॉमिनेट
- 10:27:50किया जाता है। इस तरह मौली मिंटो
- 10:27:53रिफॉर्म्स एक तरफ तो काउंसिल रिफॉर्म्स की
- 10:27:56बात करते हैं। वहीं दूसरी तरफ सेपरेट
- 10:27:58इलेक्टोरेट जैसे प्रोविजंस की हेल्प से
- 10:28:00डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी को आगे लेकर
- 10:28:03जाते हैं। इसके 10 साल बाद ब्रिटिश
- 10:28:05गवर्नमेंट अगला रिफॉर्म एक्ट पास करती है।
- 10:28:11गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1919
- 10:28:16दोस्तों 1919 का एक्ट मॉन्टग्यू
- 10:28:19चेम्सफोर्ड रिफॉर्म्स पर बेस्ड था। अगस्त
- 10:28:221917 में पहली बार ब्रिटिश गवर्नमेंट ने
- 10:28:25डिक्लेअ किया था कि उसका ऑब्जेक्टिव
- 10:28:27इंडिया में ग्रेजुअली रिस्पांसिबल
- 10:28:29गवर्नमेंट इंट्रोड्यूस करना है। यह एक्ट
- 10:28:32उसी दिशा में कदम समझा जा सकता है। इस
- 10:28:34एक्ट ने सेंटर में इंडियन लेजिसलेटिव
- 10:28:37काउंसिल को रिप्लेस करके बायकमरल सिस्टम
- 10:28:39इंट्रोड्यूस किया था। जिसमें काउंसिल ऑफ
- 10:28:42स्टेट यानी कि अप्पर हाउस और लेजिसलेटिव
- 10:28:44असेंबली यानी कि लोअर हाउस था। दोनों ही
- 10:28:48हाउसेस में मेजॉरिटी डायरेक्टली इेड
- 10:28:50मेंबर्स की होती थी। यानी कि 1919 का एक्ट
- 10:28:54पहली बार डायरेक्ट इलेक्शंस का प्रोविजन
- 10:28:57करता है। हालांकि फ्रेंचाइज यानी कि
- 10:28:59वोटिंग का राइट बहुत ही लिमिटेड पॉपुलेशन
- 10:29:02के पास ही था। यह प्रॉपर्टी, टैक्स और
- 10:29:04एजुकेशन जैसी क्वालिफिकेशंस पर बेस्ड था।
- 10:29:08एक्ट में कम्युनल रिप्रेजेंटेशन के
- 10:29:10प्रिंसिपल को भी एक्सटेंड किया गया था और
- 10:29:12मुस्लिम्स के अलावा सिख्स, क्रिश्चियंस और
- 10:29:15एंग्लो इंडियंस को भी सेपरेट इलेक्टोरेट्स
- 10:29:17प्रोवाइड कर दिए गए थे। इसके अलावा
- 10:29:20प्रोविंसेस में डायर्की इंट्रोड्यूस की गई
- 10:29:23थी। जिसके तहत सब्जेक्ट्स को दो लिस्ट में
- 10:29:26डिवाइड किया गया था। रिजर्व्ड और
- 10:29:28ट्रांसफरर्ड। रिजर्व्ड लिस्ट में आने वाले
- 10:29:31सब्जेक्ट्स को गवर्नर द्वारा एडमिनिस्टर
- 10:29:34किया जाना था। इसमें लॉ एंड ऑर्डर,
- 10:29:36फाइनेंस, लैंड रेवेन्यू और इरीगेशन जैसे
- 10:29:39सब्जेक्ट्स को रखा गया था। वहीं
- 10:29:42ट्रांसफरर्ड सब्जेक्ट्स को मिनिस्टर्स
- 10:29:44एडमिनिस्टर करने वाले थे। जिन्हें
- 10:29:46लेजिसलेटिव काउंसिल्स के इलेक्टेड मेंबर्स
- 10:29:48के बीच से नॉमिनेट किया जाना था। इसमें
- 10:29:51एजुकेशन, इंडस्ट्री, एग्रीकल्चर और
- 10:29:55एक्साइज जैसे सब्जेक्ट्स थे। प्रोविंसेस
- 10:29:57में कॉन्स्टिट्यूशनल मशीनरी फेल होने की
- 10:30:00सिचुएशन में गवर्नर ट्रांसफरर्ड
- 10:30:02सब्जेक्ट्स का एडमिनिस्ट्रेशन भी अपने
- 10:30:04अंडर ले सकता था। पहली बार प्रोविंशियल और
- 10:30:07सेंट्रल बजट्स को भी सेपरेट किया गया था।
- 10:30:10यानी कि प्रोविंसेस को अब खुद का बजट
- 10:30:13बनाने की पावर मिल गई थी। एक्ट के एक
- 10:30:16प्रोविजन के अनुसार इंडिया के लिए हाई
- 10:30:18कमिश्नर को अपॉइंट किया जाता है जो लंदन
- 10:30:21में 6 साल तक इस ऑफिस पर रहेगा और उसका
- 10:30:24काम यूरोप में इंडियन ट्रेड को देखना
- 10:30:27होगा। कुछ फंक्शनंस जिन्हें पहले
- 10:30:29सेक्रेटरी ऑफ स्टेट देखते थे अब हाई
- 10:30:31कमिश्नर को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।
- 10:30:33एक्ट में यह फैसला भी किया जाता है कि
- 10:30:36सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जिसे अभी तक इंडियन
- 10:30:39रेवेन्यू से पे किया जाता था। अब ब्रिटिश
- 10:30:41एक्स चेकर से उसकी पेमेंट होगी। इससे होम
- 10:30:44चार्जेस कम होते हैं। इसके साथ दोस्तों
- 10:30:471919 के इस एक्ट की वजह से इंडियन लीडर्स
- 10:30:50को पहली बार कॉन्स्टिट्यूशनल सेटअप में
- 10:30:53काम करने का कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव
- 10:30:55एक्सपीरियंस जरूर मिला था। लेकिन
- 10:30:57रिस्पांसिबल गवर्नमेंट की डिमांड को पूरा
- 10:30:59करने से अभी यह बहुत दूर था। इंडियन
- 10:31:02लेजिस्लेचर अभी भी एक नॉन सोवरन लॉ मेकिंग
- 10:31:06बॉडी थी और गवर्नमेंटल एक्टिविटी के सभी
- 10:31:09स्फीयर्स में एग्जीक्यूटिव के सामने
- 10:31:11पावरलेस बनी हुई थी। दोस्तों, 1919 के
- 10:31:15एक्ट में एक प्रोविजन यह भी था कि 10 साल
- 10:31:18के बाद एक कमीशन अपॉइंट की जाएगी जो 1919
- 10:31:22के रिफॉर्म्स को इवैल्यूएट करेगी और आगे
- 10:31:24के रिफॉर्म्स के बारे में सजेशंस देगी।
- 10:31:28लेकिन नवंबर 1927 में यानी कि शेड्यूल से
- 10:31:312 साल पहले ही इस कमीशन के अपॉइंटमेंट को
- 10:31:34अनाउंस कर दिया जाता है। इंडियन स्टचटरी
- 10:31:37कमीशन जिसे उसके चेयरमैन के नाम पर साइमन
- 10:31:41कमीशन भी कहा जाता है। अपनी रिपोर्ट 1930
- 10:31:44में सबमिट करती है। इसके प्रपोजल्स पर
- 10:31:47डिस्कशन करने के लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट
- 10:31:49तीन राउंड टेबल कॉन्फ्रेंसेस ऑर्गेनाइज
- 10:31:51करती है और उसके बाद एक रिपोर्ट तैयार
- 10:31:54होती है जिसके आधार पर 1935 का एक्ट पास
- 10:31:58किया जाता है।
- 10:32:02गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935
- 10:32:081935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में 451
- 10:32:12क्लॉजेस और 15 शेड्यूल्स थे। इसमें ऑल
- 10:32:16इंडिया फेडरेशन को एस्टैब्लिश करने की बात
- 10:32:18कही गई थी। जिसके तहत गवर्नर्स
- 10:32:20प्रोविंसेस, चीफ कमिश्नर्स प्रोविंसेस और
- 10:32:24इंडियन प्रिंसली स्टेट्स का एक यूनियन
- 10:32:26फॉर्म किया जाना था। इसके साथ ही
- 10:32:28प्रोविंसेस में डायरार्की को खत्म कर दिया
- 10:32:31जाता है। लेकिन सेंट्रल एग्जीक्यूटिव में
- 10:32:34इसे इंट्रोड्यूस किया जाता है। इसमें
- 10:32:36सेंट्रल लेजिसलेटिव हाउसेस के बीच डेडलॉक
- 10:32:39की स्थिति में जॉइंट सेशन का प्रोविजन भी
- 10:32:42इंट्रोड्यूस किया जाता है। इसके साथ ही
- 10:32:45लेजिसलेटिव सब्जेक्ट्स को तीन लिस्ट में
- 10:32:47डिवाइड किया जाता है। फेडरल लिस्ट,
- 10:32:50प्रोविंशियल लिस्ट और ककरेंट लिस्ट।
- 10:32:53रेजिडुरी सब्जेक्ट्स पर लेजिसलेशन की पावर
- 10:32:56वायसरॉय को दी जाती है। फेडरल लेजिस्लेचर
- 10:32:59द्वारा पास बिल को वीटो करने की पावर
- 10:33:01वायसरॉय के पास बनी रहती है। प्रोविंसेस
- 10:33:04को ऑटोनोमी दी जाती है और वहां फुल्ली
- 10:33:06रिस्पांसिबल गवर्नमेंट को इस्टैब्लिश किया
- 10:33:08जाता है। हालांकि कुछ सेफगार्ड्स भी रहते
- 10:33:11हैं। प्रोविंशियल लेजिस्लेचर्स को भी
- 10:33:13फर्दर एक्सपेंड किया जाता है। मद्रास,
- 10:33:16बॉम्बे, बंगाल, यूनाइटेड प्रोविंसेस,
- 10:33:18बिहार और आसाम में बाईकमरल लेजिस्लेचर्स
- 10:33:21इस्टैब्लिश करने का प्रोविजन भी इसमें
- 10:33:23शामिल था। कम्युनल इलेक्टेट्स के
- 10:33:26प्रिंसिपल को एक्सटेंड करते हुए डिप्रेस्ड
- 10:33:29क्लासेस, वुमेन और लेबर क्लास के लिए भी
- 10:33:32इसका प्रोविजन कर दिया जाता है। 1935 का
- 10:33:36एक्ट फ्रेंचाइज को भी एक्सटेंड करता है।
- 10:33:38टोटल पपुलेशन में लगभग 10% को अब वोटिंग
- 10:33:42राइट मिल जाता है। एक्ट में फेडरल कोर्ट
- 10:33:44का प्रोविजन भी था जिसे 1937 में
- 10:33:47इस्टैब्लिश किया जाता है। इसके पास
- 10:33:50ओरिजिनल और अपेलेट पावर्स के साथ इंटरस्ट
- 10:33:53डिस्प्यूट्स को सेटल करने की पावर भी थी।
- 10:33:56इसके अलावा सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की इंडियन
- 10:33:59काउंसिल को अबॉलिश कर दिया जाता है।
- 10:34:02दोस्तों एक्ट में विजुअलाइज्ड ऑल इंडिया
- 10:34:04फेडरेशन तो कभी अस्तित्व में नहीं आ पाता
- 10:34:07क्योंकि इंडिया की डिफरेंट पार्टीज और
- 10:34:09स्पेशली प्रिंसली स्टेट्स इसके अगेंस्ट हो
- 10:34:12गए थे। 1 अप्रैल 1937 को प्रोविंशियल
- 10:34:16ऑटोनोमी के प्रोविजन को इंप्लीमेंट कर
- 10:34:18दिया जाता है।
- 10:34:19लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट कुछ माइनर
- 10:34:21अमेंडमेंट्स के साथ अभी भी 1919 के एक्ट
- 10:34:25के अकॉर्डिंग ही काम करती रहती है। 1935
- 10:34:28के एक्ट का ऑपरेटिव पार्ट आजादी मिलने तक
- 10:34:31यानी कि 15th अगस्त 1947 तक फोर्स में
- 10:34:34रहता है। यह एक्ट एक कोशिश थी इंडिया को
- 10:34:38रिटेन कॉन्स्टिट्यूशन देने की। लेकिन इसके
- 10:34:40क्रिएशन में इंडियंस को इनवॉल्व नहीं किया
- 10:34:43गया था। इसके साथ ही इसमें अमेंडमेंट का
- 10:34:46राइट भी ब्रिटिश पार्लियामेंट को ही दिया
- 10:34:48गया था। इंडिया में इस एक्ट की लगभग सभी
- 10:34:51सेक्शंस ने आलोचना की थी और कांग्रेस ने
- 10:34:55इसे पूरी तरह रिजेक्ट कर दिया था। इसकी
- 10:34:58जगह कांग्रेस एडल्ट फ्रेंचाइज पर आधारित
- 10:35:00कॉन्स्टिटुएंट असेंबली फॉर्म करने की
- 10:35:03डिमांड करती है। और आगे चलकर यह डिमांड भी
- 10:35:05पूरी होती है। लेकिन कॉन्स्टिट्यूशन बनने
- 10:35:08तक 1935 एक्ट के थ्रू ही इंडिया को गवर्न
- 10:35:12किया जाता है। और इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन
- 10:35:15भी इसके काफी सारे प्रोविजंस को बोरो करता
- 10:35:18है।
- 10:35:21कंक्लूजन
- 10:35:23दोस्तों इस तरह 1858 के बाद धीरे-धीरे
- 10:35:28इंडियन कॉन्स्टिट्यूशनल डेवलपमेंट्स हुए
- 10:35:30थे। अलग-अलग एक्ट्स के द्वारा इंडिया में
- 10:35:33कुछ हद तक रिस्पांसिबल फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट
- 10:35:35इंट्रोड्यूस की गई थी। हालांकि पूरी तरह
- 10:35:38इसका फॉर्मेशन आजादी मिलने के बाद ही होता
- 10:35:41है। फिर भी हम कह सकते हैं कि इन एक्ट्स
- 10:35:44के थ्रू इंडियंस कॉन्स्टिट्यूशनल फॉर्म ऑफ
- 10:35:47गवर्नमेंट का इनवैलुएबल एक्सपीरियंस गेन
- 10:35:50करते हैं जो आजादी के बाद इंडियन
- 10:35:53डेमोक्रेसी को सफल बनाने में काफी मदद
- 10:35:55करता है।
- 10:35:58लोकल सेल्फ गवर्नेंस।
- 10:36:02दोस्तों, इंडिया में एंशिएंट टाइम से ही
- 10:36:04लोकल गवर्निंग बॉडीज देखने को मिलती हैं।
- 10:36:07फिर चाहे वो मौर्य एंपायर के दौरान
- 10:36:09पाटलिपुत्र की सिटी काउंसिल्स हो या फिर
- 10:36:12चोला एंपायर की विलेज असेंबलीज। लोकल
- 10:36:15गवर्नमेंट बॉडीज का ट्रेडिशन हमारे यहां
- 10:36:17बहुत पुराना है। लेकिन जिस तरह आज हम लोकल
- 10:36:20बॉडीज यानी कि म्युनिसिपालिटीज को समझते
- 10:36:22हैं। उसका डेवलपमेंट ब्रिटिश रूल के समय
- 10:36:25शुरू हुआ था। आज हम इसी को यानी ब्रिटिश
- 10:36:28कॉलोनियल रूल के दौरान लोकल सेल्फ
- 10:36:31गवर्नमेंट के डेवलपमेंट को डिटेल में
- 10:36:33देखने वाले हैं। लेकिन उसे समझने से पहले
- 10:36:35यह जान लेना जरूरी है कि आखिर ब्रिटिशर्स
- 10:36:38ने इंडिया में लोकल गवर्निंग बॉडीज का
- 10:36:40डेवलपमेंट क्यों शुरू किया था। तो आइए
- 10:36:43जानते हैं रीज़ंस बिहाइंड द ग्रोथ ऑफ लोकल
- 10:36:46बॉडीज।
- 10:36:48बहुत से ऐसे फैक्टर्स थे जिनकी वजह से
- 10:36:51ब्रिटिश गवर्नमेंट इंडिया में लोकल बॉडीज
- 10:36:53को इस्टैब्लिश करने का डिसीजन लेती है।
- 10:36:56इसमें सबसे पहला कारण था ओवर
- 10:36:58सेंट्रलाइजेशन की वजह से आ रही फाइनेंशियल
- 10:37:00डिफिकल्टीज।
- 10:37:02स्पेशली 1857 की क्रांति के बाद कंपनी पर
- 10:37:05फाइनेंशियल प्रेशर बहुत अधिक बढ़ गया था।
- 10:37:08ऐसे में डीसेंट्रलाइजेशन करना जरूरी हो
- 10:37:11गया था। जिससे रोड और पब्लिक वर्क्स की
- 10:37:14रिस्पांसिबिलिटी लोकल बॉडीज को ट्रांसफर
- 10:37:17की जा सके और गवर्नमेंट को एडिशनल
- 10:37:19रेवेन्यू भी मिले। इसके अलावा नेशनलिस्ट
- 10:37:23लीडर्स की भी डिमांड थी कि बेसिक सिविक
- 10:37:25फैसिलिटीज में इंप्रूवमेंट किया जाए जो कि
- 10:37:28लोकल बॉडीज के थ्रू ही बेटर हो सकता था।
- 10:37:31साथ ही कुछ ब्रिटिश पॉलिसी मेकर्स का यह
- 10:37:33भी मानना था कि लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के
- 10:37:36साथ इंडियंस को जोड़ने से ब्रिटिश
- 10:37:38सुप्रेमसी भी अंडरमाइन नहीं होगी और
- 10:37:40इंडियंस में बढ़ते हुए पॉलिटिसाइजेशन को
- 10:37:43भी सीमित किया जा सकेगा। इसके साथ ही लोकल
- 10:37:47वेलफेयर के लिए लोकल टैक्सेस का यूज़ होने
- 10:37:49से ऑलरेडी बर्डन सेंट्रल ट्रेजरी पर
- 10:37:52प्रेशर भी नहीं बनेगा। एक तरह से बेसिक
- 10:37:55सिविक अ कम्युनिटीज की रिस्पांसिबिलिटी
- 10:37:57अभी उनकी नहीं थी। इन सब रीजंस को ध्यान
- 10:38:00में रखते हुए ही ब्रिटिशर्स इंडिया में
- 10:38:02लोकल बॉडीज का डेवलपमेंट शुरू करते हैं।
- 10:38:05आइए अब लोकल गवर्नमेंट के एवोल्यूशन के
- 10:38:07इंपॉर्टेंट स्टेजेस को डिस्कस करते हैं। द
- 10:38:10बिगिनिंग
- 10:38:13सबसे पहले लोकल बॉडीज प्रेसिडेंसी टाउनंस
- 10:38:15में इस्टैब्लिश की जाती हैं। 1687 में
- 10:38:19कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने मद्रास में
- 10:38:21कोऑपोरेशन सेटअप करने का ऑर्डर दिया था।
- 10:38:23यह कोरपोरेशन ब्रिटिश और इंडियन मेंबर्स
- 10:38:26से मिलकर बनी थी और इसे सिटी में गिल्ड
- 10:38:29हॉल, जेल, स्कूल एटसेट्रा बिल्ड करने के
- 10:38:32लिए टैक्स लेवी करने की पावर दी गई थी।
- 10:38:35लेकिन यह एक्सपेरिमेंट फेल हो जाता है
- 10:38:37क्योंकि रेजिडेंट्स डायरेक्ट टैक्सेस देने
- 10:38:40के लिए तैयार नहीं थे। जिस वजह से
- 10:38:42कॉरपोरेशन कोई भी प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर
- 10:38:45पाती। इसके बाद 1726 का चार्टर एक्ट
- 10:38:48कॉरपोरेशन की जगह मेयर्स कोर्ट सेटअप करने
- 10:38:51का प्रोविजन करता है। मेयर्स कोर्ट की
- 10:38:54पावर एडमिनिस्ट्रेटिव से ज्यादा जुडिशियल
- 10:38:57थी। मद्रास के अलावा बॉम्बे औरक में भी
- 10:39:00सिमिलर मेयर्स कोर्ट सेटअप किए जाते हैं।
- 10:39:03इसके बाद 1793 का चार्टर एक्ट पहली बार
- 10:39:07म्यनिसिपल इंस्टीटशंस को स्टचटरी बेसिस
- 10:39:10प्रोवाइड करता है। इसमें गवर्नर जनरल को
- 10:39:12पावर दी जाती है कि वो प्रेसिडेंसी टाउनंस
- 10:39:15में जस्टिस ऑफ पीस को अपॉइंट कर सकते हैं।
- 10:39:18जस्टिसेस ऑफ पीस को पुलिस कॉस्ट मीट करने,
- 10:39:21स्कैवेंजिंग और रोड्स को रिपेयर करने के
- 10:39:24लिए हाउस और लैंड्स पर टैक्स लगाने की
- 10:39:26पावर दी गई थी। इसके अलावा 1850 में एक
- 10:39:30एक्ट पास किया गया था। जिसके बाद
- 10:39:32प्रेसिडेंसी टाउनंस के अलावा दूसरे टाउनंस
- 10:39:35में भी म्यनिसिपल बॉडीज का डेवलपमेंट शुरू
- 10:39:37हो गया था। इसमें म्युनिसिपल बॉडीज को
- 10:39:40इनडायरेक्ट टैक्स लगाने की पावर दी गई थी।
- 10:39:43इसका फायदा उठाकर नॉर्थ वेस्टर्न
- 10:39:45प्रोविंसेस यानी कि मॉडर्न यूपी और बॉम्बे
- 10:39:48के बहुत सारे टाउनंस में म्यनिसिपल कमिटीज
- 10:39:50सेटअप की गई थी। प्रेसिडेंसी टाउनंस में
- 10:39:53रेंटल वैल्यू के 5% रेट पर हाउस टैक्स
- 10:39:56इंपोज किया गया था। 1840 से 1853 के बीच
- 10:40:01टैक्स पे करने वालों को कॉरपोरेशन के
- 10:40:04मेंबर्स को इ करने का राइट भी दे दिया गया
- 10:40:06था।
- 10:40:07लेकिन 1856 में यह सिचुएशन पूरी तरह
- 10:40:10रिवर्स हो जाती है क्योंकि बॉम्बे में
- 10:40:13एग्जीक्यूटिव पावर नॉमिनेटेड कमिश्नर के
- 10:40:15हाथों में कंसंट्रेट कर दी जाती है। ऐसा
- 10:40:18ही प्रोसीजर मद्रास औरक में भी फॉलो होता
- 10:40:21है। इसके बाद लोकल बॉडीज के एववोल्यूशन
- 10:40:24में एक बड़ा डेवलपमेंट 1870 में होता है।
- 10:40:28आइए इस डेवलपमेंट को डिटेल में समझते हैं।
- 10:40:31मेओस रेजोल्यूशन ऑफ 1870।
- 10:40:351870 में वायसरॉय लॉर्ड मेओ एक रेजोल्यूशन
- 10:40:38पास करते हैं। यह रेजोल्यूशन फाइनेंशियल
- 10:40:41डिसेंट्रलाइजेशन से रिलेटेड था।
- 10:40:44एडमिनिस्ट्रेटिव कन्वीनियंस और फाइनशियल
- 10:40:46स्ट्रिंजेंसी को देखते हुए इंपीरियल यानी
- 10:40:49कि सेंट्रल गवर्नमेंट ने एडमिनिस्ट्रेशन
- 10:40:52के कुछ डिपार्टमेंट्स प्रोविंशियल
- 10:40:53गवर्नमेंट्स को ट्रांसफर कर दिए थे। जैसे
- 10:40:56कि एजुकेशन, मेडिकल सर्विज और रोड्स
- 10:40:59एटसेट्रा। इसके लिए इंपीरियल गवर्नमेंट की
- 10:41:02तरफ से प्रोविंसेस को एनुअल ग्रांट दिए
- 10:41:05जाने थे। साथ ही प्रोविंशियल गवर्नमेंट्स
- 10:41:07को अपने बजट को बैलेंस करने के लिए लोकल
- 10:41:10टैक्सेशन का अधिकार भी दिया गया था। लॉर्ड
- 10:41:13मेओ के रेजोल्यूशन में कहा गया था कि
- 10:41:16एजुकेशन, सैनिटेशन, मेडिकल रिलीफ और लोकल
- 10:41:19पब्लिक वर्क्स के लिए डिवोटेड फंड्स को
- 10:41:22सक्सेसफुली मैनेज करने के लिए लोकल
- 10:41:24इंटरेस्ट, केयर और सुपरविजन बहुत ही जरूरी
- 10:41:27है। कहने का मतलब यह हुआ कि लोकल सेल्फ
- 10:41:30गवर्निंग इंस्टीटशंस को स्ट्रेंथन करने की
- 10:41:33जरूरत थी।
- 10:41:34रेजोल्यूशन में आउटलाइन पॉलिसी को
- 10:41:36इंप्लीमेंट करने के लिए कई प्रोविंशियल
- 10:41:39गवर्नेंस म्यनिसिपल एक्ट पास करती है।
- 10:41:42बंगाल डिस्ट्रिक्ट बोर्ड सेस एक्ट 1871
- 10:41:46रूरल बंगाल में लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के
- 10:41:48लिए लिया गया पहला कदम था। सिमिलर एक्ट्स
- 10:41:51मद्रास, नॉर्थवेस्ट प्रोविंसेस और पंजाब
- 10:41:54में भी पास होते हैं। लॉर्ड मेओ के
- 10:41:57रेजोल्यूशन के करीब 12 साल बाद एक और
- 10:41:59वायसरॉय इंडिया में लोकल बॉडीज के
- 10:42:01डेवलपमेंट के लिए प्रोएक्टिव नजर आते हैं।
- 10:42:04आइए जानते हैं उनके बारे में। रिप्स
- 10:42:07रेजोल्यूशन ऑफ 1882।
- 10:42:10लॉर्ड रिपन के समय एडमिनिस्ट्रेशन के हर
- 10:42:13स्फीयर में लिबरलाइजेशन देखने को मिलता
- 10:42:15है। उनका 1882 का रेजोल्यूशन लोकल सेल्फ
- 10:42:19गवर्नमेंट के विकास में एक लैंडमार्क है।
- 10:42:22लॉर्ड रिपन ने जब मेस रेजोल्यूशन के बाद
- 10:42:25लोकल बॉडीज की फील्ड में हुई प्रोग्रेस को
- 10:42:27रिव्यू किया तो पाया कि लोकल रेट्स और
- 10:42:30सेसेस की मदद से एक बड़ी इनकम जनरेट हो
- 10:42:33रही है। और कुछ प्रोविंसेस ने इस इनकम के
- 10:42:36मैनेजमेंट को पूरी तरह लोकल बॉडीज को
- 10:42:39सौंपा हुआ है। इस तरह म्युनिसिपालिटीज का
- 10:42:42मेंबर और यूज़फुलनेस दोनों ही बढ़ गए हैं।
- 10:42:45लेकिन अभी भी देश के अलग-अलग हिस्सों में
- 10:42:48इनकलिटी नजर आ रही है। यानी कि हर जगह
- 10:42:51प्रोग्रेस एक जैसी नहीं थी। बहुत सी
- 10:42:53सर्विज जिन्हें लोकल बॉडीज को दिया जा
- 10:42:56सकता था। अभी भी प्रोविंशियल गवर्नमेंट्स
- 10:42:58के हाथ में ही थी। रिपन चाहते थे कि
- 10:43:01प्रोविंशियल गवर्नेंस लोकल बॉडीज के साथ
- 10:43:03फाइनेंशियल डिसेंट्रलाइजेशन का वही
- 10:43:06प्रिंसिपल यूज करें जो लॉर्ड मेओ ने शुरू
- 10:43:08किया था। अपने कंट्रीब्यूशन के लिए लॉर्ड
- 10:43:11रिपन को फादर ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट भी
- 10:43:14कहा जाता है। लॉर्ड रिपन के रेजोल्यूशन के
- 10:43:17मेन पॉइंट्स कुछ इस तरह थे। लोकल बॉडीज का
- 10:43:21विकास सिर्फ एडमिनिस्ट्रेशन को इंप्रूव
- 10:43:23करने के लिए ही नहीं बल्कि पॉपुलर और
- 10:43:26पॉलिटिकल एजुकेशन के इंस्ट्रूमेंट के तौर
- 10:43:28पर भी होना चाहिए। लोकल अफेयर्स को अर्बन
- 10:43:31और रूरल लोकल बॉडीज के थ्रू एडमिनिस्टर
- 10:43:33करने की पॉलिसी बनाई जाती है। इन्हें
- 10:43:36डेफिनेट ड्यूटीज और रेवेन्यू के सूटेबल
- 10:43:38सोर्सर्सेस भी दिए जाते हैं। इन बॉडीज में
- 10:43:41नॉन ऑफिशियलल्स को मेजॉरिटी में रखा जाता
- 10:43:43है। जिन्हें अपॉइंट करने के लिए इलेक्शंस
- 10:43:46भी ऑर्गेनाइज किए जा सकते थे और लोकल
- 10:43:49बॉडीज के चेयर पर्संस भी सिर्फ नॉन
- 10:43:51ऑफिशियल मेंबर्स ही बन सकते थे। ऑफिशियल
- 10:43:54इंटरफेरेंस को मिनिमम रखने का फैसला किया
- 10:43:56जाता है और इसे सिर्फ लोकल बॉडीज के
- 10:43:59एक्ट्स को रिवाइज और चेक करने के लिए ही
- 10:44:01किया जा सकता था ना कि पॉलिसीज को डिक्टेट
- 10:44:04करने के लिए। कुछ केसेस जैसे कि लोंस रेज
- 10:44:08करना, नई टैक्सेस इंपोज करना, रूल्स और
- 10:44:11बाय लॉज़ को फ्रेम करना एटसेट्रा में
- 10:44:13ऑफिशियल एग्जीक्यूटिव सेंक्शन की जरूरत
- 10:44:16थी।
- 10:44:17इस रेजोल्यूशन के आधार पर 1883 और 1885 के
- 10:44:22बीच बहुत से एक्ट्स पास किए गए थे।
- 10:44:25जिन्होंने इंडिया में म्यनिसिपल बॉडीज के
- 10:44:27कॉन्स्टिट्यूशन, पावर्स और फंक्शनंस को
- 10:44:29बहुत हद तक बदल दिया था। लेकिन अभी भी
- 10:44:32इफेक्टिव लोकल सेल्फ गवर्निंग बॉडीज का
- 10:44:35सपना अधूरा ही था। एकिस्टिंग लोकल बॉडीज
- 10:44:38में बहुत सारी लिमिटेशंस देखने को मिलती
- 10:44:40हैं। जैसे कि सभी डिस्ट्रिक्ट बोर्ड्स और
- 10:44:43बहुत सी म्यनिसिपालिटीज में इलेक्टेड
- 10:44:46मेंबर्स माइनॉरिटी में ही थे। इसके अलावा
- 10:44:49फ्रेंचाइज बहुत ही लिमिटेड थी।
- 10:44:51डिस्ट्रिक्ट बोर्ड्स को अभी भी
- 10:44:53डिस्ट्रिक्ट ऑफिशियल्स ही हेड कर रहे थे।
- 10:44:56साथ ही गवर्नमेंट का स्ट्रिक्ट कंट्रोल
- 10:44:58बना हुआ था। वह कभी भी अपनी मर्जी से इन
- 10:45:01लोकल बॉडीज को सस्पेंड या सुपरसीड कर सकती
- 10:45:04थी। इसके अलावा ब्यूरोक्रेसी के व्यूज
- 10:45:07वायसरॉय की तरह लिबरल नहीं थे। उन्हें
- 10:45:10लगता था कि इंडियंस सेल्फ गवर्नमेंट के
- 10:45:13लिए अनफिट हैं। फिर 19th सेंचुरी के आखिरी
- 10:45:15कुछ डेकेड्स में इंपीरियलिज्म की पॉलिसी
- 10:45:18डोमिनेट करती है और इसी के एक बड़े समर्थक
- 10:45:21लॉर्ड कर्ज़न लोकल बॉडीज पर ऑफिशियल
- 10:45:24कंट्रोल बढ़ाने की दिशा में कदम उठाते
- 10:45:26हैं। इसके बाद 198 में एक बार फिर
- 10:45:30डीसेंट्रलाइजेशन पर कमीशन अपॉइंट की जाती
- 10:45:32है।
- 10:45:34रॉयल कमीशन ऑन डिसेंट्रलाइजेशन 198
- 10:45:39इस कमीशन के अनुसार लोकल बॉडीज की
- 10:45:42इफेक्टिव फंक्शनिंग में सबसे बड़ी समस्या
- 10:45:45फाइनेंशियल रिसोर्सेज की कमी होना है। इसी
- 10:45:48को ध्यान में रखते हुए कमीशन अपने सुझाव
- 10:45:50देती है। जिसमें सबसे पहला सुझाव था कि
- 10:45:53विलेज पंचायत को और ज्यादा पावर्स दी जाए।
- 10:45:56जैसे उन्हें पेटी केसेस में जुडिशियल
- 10:45:59पावर्स मिले। माइनर विलेज वक्स, स्कूल्स,
- 10:46:02फ्यूल और फोडर रिजर्व्स पर खर्च करने की
- 10:46:05पावर मिले। इसके लिए पंचायत को एडिक्वेट
- 10:46:08सोर्स ऑफ इनकम भी प्रोवाइड करना चाहिए।
- 10:46:10इसके अलावा हर एक तालुका या तहसील में सब
- 10:46:13डिस्ट्रिक्ट बोर्ड्स को इस्टैब्लिश करना
- 10:46:15चाहिए। जिनकी पावर्स और रेवेन्यू सोर्सेस
- 10:46:18डिस्ट्रिक्ट बोर्ड से अलग रखने चाहिए।
- 10:46:21टैक्सेशन की पावर्स पर मौजूदा
- 10:46:23रिस्ट्रिकशंस को हटाने का सुझाव भी कमीशन
- 10:46:25देती है। साथ ही प्रोविंशियल गवर्नमेंट्स
- 10:46:28द्वारा रेगुलर ग्रांट्स इन एड को खत्म
- 10:46:31करने की बात भी कहती है। हालांकि बड़े
- 10:46:33प्रोजेक्ट्स के लिए इसे दिया जा सकता था।
- 10:46:37इसके साथ ही म्यनिसिपालिटीज अगर चाहे तो
- 10:46:39प्राइमरी एजुकेशन की रिस्पांसिबिलिटी भी
- 10:46:42ले सकती हैं। लेकिन सेकेंडरी एजुकेशन,
- 10:46:44हॉस्पिटल्स, रिलीफ, पुलिस और वेटरनरी
- 10:46:47वर्क्स जैसे मैटर्स के चार्ज से कमीशन
- 10:46:49लोकल बॉडीज को रिलीव करने के लिए कहती है।
- 10:46:53कमीशन की रेकमेंडेशंस पर ऑफिशियल व्यू
- 10:46:55देते हुए 1915 में गवर्नमेंट का एक
- 10:46:58रेजोल्यूशन कहता है कि लोकल रेवेन्यूस
- 10:47:01इनइलास्टिक हैं और इन्हें फर्दर रिवाइज
- 10:47:04नहीं किया जा सकता। इस तरह
- 10:47:06डीसेंट्रलाइजेशन कमीशन के सुझाव सिर्फ
- 10:47:08पेपर पर ही रह जाते हैं। और लोकल बॉडीज की
- 10:47:11कंडीशन वैसी ही बनी रहती है जैसे रिपन के
- 10:47:14समय में थी। इसके बाद 1918 में लोकल सेल्फ
- 10:47:18बॉडीज से रिलेटेड एक और रेजोल्यूशन पास
- 10:47:21किया जाता है। द रेजोल्यूशन ऑफ मई 1918।
- 10:47:2720th अगस्त 1917 को ब्रिटिश गवर्नमेंट ने
- 10:47:31डिक्लेअ किया था कि उनका एम इंडिया में
- 10:47:34ग्रेजुअली रिस्पांसिबल गवर्नमेंट को डेवप
- 10:47:36करना है और इसके लिए पहला स्टेप लोकल
- 10:47:39सेल्फ गवर्नमेंट के स्फेयर में ही लिया
- 10:47:41जाना था। इसी अनाउंसमेंट को ध्यान में
- 10:47:44रखते हुए मई 1918 का यह रेजोल्यूशन इंडिया
- 10:47:47में लोकल सेल्फ गवर्नमेंट को रिव्यू करता
- 10:47:50है। इसमें सजेस्ट किया जाता है कि लोकल
- 10:47:52बॉडीज के ज्यादा से ज्यादा रिप्रेजेंटेटिव
- 10:47:55बनाए जाए और इन्हें सिर्फ नाम की नहीं
- 10:47:57बल्कि रियल अथॉरिटी भी दी जाए। साथ ही
- 10:48:00प्रोविंशियल गवर्नमेंट्स को विलेज पंचायत
- 10:48:03के डेवलपमेंट की शुरुआत करने के लिए भी
- 10:48:05कहा जाता है। 1918 के रेजोल्यूशन पर कोई
- 10:48:08स्टेप्स लिए जाते इससे पहले ही 1919 का
- 10:48:11गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट पास होता है।
- 10:48:14इसमें लोकल बॉडीज की क्या पोजीशन रहती है?
- 10:48:16आइए जानते हैं। अंडर डायर्की
- 10:48:211919 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में
- 10:48:24लोकल सेल्फ गवर्नमेंट को ट्रांसफरर्ड
- 10:48:27सब्जेक्ट की लिस्ट में रखा गया था। यानी
- 10:48:29कि इस पर इेड मेंबर्स का कंट्रोल था और
- 10:48:33सभी प्रोविंसेस को अपनी-अपनी जरूरत के
- 10:48:35अनुसार लोकल सेल्फ इंस्टीटशंस को डिवप
- 10:48:39करने के लिए कहा गया था। लेकिन फाइनेंस
- 10:48:42रिजर्व सब्जेक्ट था। यानी इस पर गवर्नर या
- 10:48:46एग्जीक्यूटिव काउंसिलर का ही कंट्रोल था
- 10:48:48और फंड्स की कमी के कारण इंडियन
- 10:48:50मिनिस्टर्स लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के
- 10:48:53क्षेत्र में ज्यादा कुछ काम नहीं कर पाते।
- 10:48:561928 के साइमन कमीशन भी अपनी रिपोर्ट में
- 10:49:00यूपी, बंगाल और मद्रास के अलावा और जगह पर
- 10:49:04विलेज पंचायत की प्रोग्रेस ना होने की तरफ
- 10:49:07पॉइंट करती है। इसके साथ ही कमीशन
- 10:49:09एफिशिएंसी के नाम पर लोकल बॉडीज के ऊपर
- 10:49:12प्रोविंशियल कंट्रोल को बढ़ाने जैसा
- 10:49:14रेट्रोग्रेड स्टेप भी सजेस्ट करती है।
- 10:49:16साइमन कमीशन का यह भी मानना था कि
- 10:49:19इलेक्टेड मेंबर्स लोकल टैक्सेस को इंपोज
- 10:49:22करने में रिलक्टेंट रहते हैं और 1919
- 10:49:25रिफॉर्म्स के बाद लोकल बॉडीज के फाइनेंस
- 10:49:27का मैनेजमेंट और खराब हुआ है। इसके बाद
- 10:49:30गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 पास होता
- 10:49:33है। उस समय लोकल बॉडीज की कंडीशन में क्या
- 10:49:36चेंजेस आते हैं? आइए जानते हैं द
- 10:49:38गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 एंड आफ्टर
- 10:49:43गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 में
- 10:49:46प्रोविंशियल ऑटोनोमी प्रोवाइड की जाती है।
- 10:49:48जिसके बाद इंडिया में लोकल सेल्फ गवर्निंग
- 10:49:51इंस्टीटशंस का और तेजी से विकास संभव होता
- 10:49:54है। पोर्टफोलियो फाइनेंस क्योंकि अब इेड
- 10:49:56मिनिस्ट्रीज के पास था। इसलिए लोकल बॉडीज
- 10:49:59को डेवलप करने के लिए फंड्स अवेलेबल किए
- 10:50:02जा सकते थे। इसके साथ ही 1919 के बाद से
- 10:50:05प्रोविंशियल और लोकल टैक्सेशन में चला आ
- 10:50:08रहा डिमार्केशन भी खत्म कर दिया जाता है।
- 10:50:11इस दौरान प्रोविंसेस में नए एक्ट्स पास
- 10:50:13किए जाते हैं जो लोकल बॉडीज को और ज्यादा
- 10:50:16अथॉरिटी देते हैं। लेकिन फाइनशियल
- 10:50:19रिसोर्सेज और टैक्सेशन की पावर्स लगभग उसी
- 10:50:22लेवल पर रहती हैं जैसी रिपन के समय में
- 10:50:24थी। इसके अलावा 1935 के बाद लोकल बॉडीज पर
- 10:50:28कुछ रिस्ट्रिकशंस भी लगा दी जाती हैं।
- 10:50:31जैसे कि ट्रेड्स, कॉलिंग्स, प्रोफेशंस और
- 10:50:34प्रॉपर्टी पर इनकी टैक्सेशन पावर्स को कम
- 10:50:36कर दिया जाता है। मतलब यह हुआ कि आजादी
- 10:50:40मिलने तक लोकल बॉडीज का बहुत ही सीमित
- 10:50:42विकास हुआ था। इनके पास कोई रियल अथॉरिटी
- 10:50:46और पावर्स नहीं थी। ज्यादातर पावर्स
- 10:50:49प्रोविंशियल गवर्नमेंट से ही डिराइव्ड थी।
- 10:50:52कंक्लूजन।
- 10:50:54दोस्तों, इस तरह ब्रिटिश कॉलोनियल रूल के
- 10:50:56समय लोकल बॉडीज को डिवप करने के कुछ
- 10:50:59स्टेप्स तो जरूर लिए गए थे, लेकिन इसके
- 10:51:01पीछे ब्रिटिशर्स का मेन मकसद और ज्यादा
- 10:51:04रेवेन्यू कलेक्ट करना और अपनी
- 10:51:06रिस्पांसिबिलिटी से हाथ छुड़वाना था। ना कि
- 10:51:09इंडिया में लोकल लेवल पर डेमोक्रेसी डेवलप
- 10:51:11करना। लॉर्ड रिपन जरूर कोशिश करते हैं कि
- 10:51:14इंडियंस को लोकल सेल्फ गवर्नमेंट्स के
- 10:51:16जरिए एडमिनिस्ट्रेशन से जोड़ा जाए। लोकल
- 10:51:20बॉडीज का सही मायनों में विकास आजादी के
- 10:51:22बाद ही हो पाता है। इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन
- 10:51:25आर्टिकल 40 के तहत स्टेट गवर्नमेंट्स को
- 10:51:28विलेज पंचायत को ऑर्गेनाइज करने के लिए
- 10:51:31डायरेक्ट करता है। इसके बाद 73 और 74
- 10:51:35अमेंडमेंट एक्ट्स के जरिए रूरल और अर्बन
- 10:51:37लोकल बॉडीज को और स्ट्रेंथन किया जाता है।
- 10:51:40लोकल सेल्फ गवर्नमेंट का डेवलपमेंट आज भी
- 10:51:43एक वर्क इन प्रोग्रेस है और इसमें रेगुलर
- 10:51:46एवोल्यूशन जरूरी है। पुलिस, आर्मी एंड
- 10:51:50जुडिशियल रिफॉर्म्स।
- 10:51:52दोस्तों, आज हम ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन के
- 10:51:55तीन फाउंडेशनल पिलर्स यानी कि पुलिस,
- 10:51:58आर्मी और जुडिशियल सिस्टम के एववोल्यूशन
- 10:52:01को समझेंगे। हम देखेंगे कि किस तरह
- 10:52:04ब्रिटिश कॉलोनियल रूल की जरूरत के हिसाब
- 10:52:07से इनमें समय के साथ चेंजेस किए जाते हैं।
- 10:52:10सबसे पहले बात करते हैं पुलिस सिस्टम के
- 10:52:12एवोल्यूशन की। एवोल्यूशन ऑफ पुलिस सिस्टम
- 10:52:16अंडर ब्रिटिश रूल।
- 10:52:18दोस्तों प्री कॉलोनियल इंडिया में यानी कि
- 10:52:21मुगल्स और दूसरे नेटिव स्टेट्स की
- 10:52:23गवर्नमेंट्स ऑटोक्रेटिक नेचर की होती थी
- 10:52:26और उस समय कोई सेपरेट या फॉर्मल पुलिस
- 10:52:29सिस्टम नहीं हुआ करता था। मुगल रूल के समय
- 10:52:32फौजदार लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन किया करते थे।
- 10:52:35इसके साथ ही सिटीज में यह काम कोतवाल का
- 10:52:38होता था।
- 10:52:39यहां तक कि 1765 से 1772 तक बंगाल में
- 10:52:44ड्यूल रोल के समय भी जमींदार को ही लॉ एंड
- 10:52:47ऑर्डर मेंटेन करने की जिम्मेदारी दी गई
- 10:52:49थी। लेकिन कई बार जमींदार अपनी ड्यूटीज
- 10:52:52नेगलेक्ट कर देते थे और कुछ जमींदार तो
- 10:52:55डेकोइड्स के साथ मिलकर उनकी लूट में शेयर
- 10:52:58भी लेते थे। 1770 में फौजदार की पोस्ट को
- 10:53:03खत्म कर दिया गया था।
- 10:53:05लेकिन 1774 में वारेन हेस्टिंग्स एक बार
- 10:53:09फिर से फौजदार की इंस्टिट्यूशन को रिस्टोर
- 10:53:12करते हैं और जमींदार को इन्हें असिस्ट
- 10:53:15करने के लिए कहा जाता है। 1775 में बड़े
- 10:53:19डिस्ट्रिक्ट्स के मेजर टाउनंस में फौजदार
- 10:53:21थानाज़ को एस्टैब्लिश किया जाता है। और
- 10:53:24बहुत से छोटे पुलिस स्टेशंस इन्हें असिस्ट
- 10:53:27करने के लिए बनाए जाते हैं। लेकिन इंडिया
- 10:53:30में रेगुलर पुलिस फोर्स क्रिएट करने का
- 10:53:32श्रेय लॉर्ड कॉर्नवालिस को जाता है। इसके
- 10:53:35लिए उन्हें फादर ऑफ इंडियन पुलिस सर्विज
- 10:53:38भी कहा जाता है। 1791 में लॉर्ड
- 10:53:41कॉर्नवालिस पुलिस फोर्स को ऑर्गेनाइज करने
- 10:53:44का काम शुरू करते हैं। इसके लिए एक
- 10:53:47डिस्ट्रिक्ट को अलग-अलग थाना यानी कि
- 10:53:49सर्कल्स में डिवाइड किया जाता है। थाने का
- 10:53:52इंचार्ज इंडियन दरोगा को बनाया जाता है और
- 10:53:55डिस्ट्रिक्ट का इंचार्ज सुपरिटेंडेंट ऑफ
- 10:53:58पुलिस यानी कि एसपी को बनाया जाता है।
- 10:54:00जमींदार को उनकी पुलिस ड्यूटीज से रिलीव
- 10:54:04कर दिया जाता है। इस तरह एक इंडिपेंडेंट
- 10:54:07लॉ एंड ऑर्डर मशीनरी एस्टैब्लिश करने की
- 10:54:09कोशिश की जाती है। इसके बाद 188 में लॉर्ड
- 10:54:13मेओ हर डिवीजंस के लिए एक एसपी अपॉइंट कर
- 10:54:17देते हैं। और इनकी हेल्प के लिए बहुत से
- 10:54:20स्पाइस यानी कि गोइंडास को रखा जाता है।
- 10:54:24लेकिन यह स्पाइस लोकल पीपल का काफी शोषण
- 10:54:27करते थे। 1814 में कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स
- 10:54:30के एक ऑर्डर के जरिए दरोगाज़ और उनके
- 10:54:32सबोर्डिनेट्स का अपॉइंटमेंट बंगाल के
- 10:54:35अलावा कंपनी की बाकी सभी टेरिटरीज में
- 10:54:37अबॉलिश कर दिया जाता है। इसके बाद बेंटिंग
- 10:54:41के समय 1828 टू 1835 में एसपी की पोस्ट भी
- 10:54:46अबॉलिश कर दी जाती है। उसकी जगह अब
- 10:54:49कलेक्टर या मैजिस्ट्रेट को पुलिस फोर्स
- 10:54:51हेड करने की रिस्पांसिबिलिटी मिलती है।
- 10:54:54यानी एक बार फिर फ्यूजन ऑफ़ पावर देखने को
- 10:54:57मिलता है और हर डिवीजन के कमिश्नर को एसपी
- 10:55:00की तरह एक्ट करना होता है। यह अरेंजमेंट
- 10:55:03सफल नहीं रहता। इससे पुलिस फोर्स का
- 10:55:06ऑर्गेनाइजेशन खराब हो जाता है और कलेक्टर
- 10:55:09पर बहुत ज्यादा बर्डन आ जाता है। फिर 1860
- 10:55:13में पुलिस कमीशन अपॉइंट की जाती है जिसकी
- 10:55:16रेकमेंडेशंस के आधार पर इंडियन पुलिस एक्ट
- 10:55:191861 पास होता है। इसके अनुसार सिविल
- 10:55:23कास्टेबिलरी का एक सिस्टम तैयार किया जाता
- 10:55:26है। प्रोविंस में इंस्पेक्टर जनरल को
- 10:55:29पुलिस का हेड बनाया जाता है। रेंज में
- 10:55:32डिपुटी इंस्पेक्टर जनरल यह काम देखता है।
- 10:55:35वहीं डिस्ट्रिक्ट का हेड एक बार फिर से
- 10:55:37एसपी को बनाया जाता है। इस ऑर्गेनाइजेशन
- 10:55:41के साथ धीरे-धीरे पुलिस डेकोइटी और ठगी
- 10:55:44जैसे क्रिमिनल एक्ट्स पर लगाम लगाने में
- 10:55:47कामयाब होती है। लेकिन पुलिस से डील करते
- 10:55:50समय इनका एटीट्यूड अनसिंैथेटिक ही रहता
- 10:55:53है। इसके अलावा नेशनल मूवमेंट को सप्रेस
- 10:55:56करने के लिए भी कई इंस्टेंसेस पर
- 10:55:59ब्रिटिशर्स पुलिस का यूज करते हैं।
- 10:56:02ब्रिटिशर्स ने ऑल इंडिया पुलिस का क्रिएशन
- 10:56:04नहीं किया था। 1861 का पुलिस एक्ट सिर्फ
- 10:56:08प्रोविंसेस में पुलिस सेटअप की गाइडलाइंस
- 10:56:10प्रोवाइड करता है। हालांकि इसमें मेंशंड
- 10:56:13रैंक्स को यूनिफॉर्मली पूरे देश में
- 10:56:15इंट्रोड्यूस किया गया था। इसके अलावा
- 10:56:17लॉर्ड कर्जन के समय 192 में एक और पुलिस
- 10:56:21कमीशन फॉर्म की गई थी। इसके हेड एंड्रू
- 10:56:24फ्रेजा थे। कमीशन की रेकमेंडेशंस के आधार
- 10:56:28पर प्रोविंसेस में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन
- 10:56:30डिपार्टमेंट यानी कि सीआईडी और सेंटर में
- 10:56:34सेंट्रल इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी कि सीआईबी
- 10:56:37को इस्टैब्लिश किया गया था। इनका इस्तेमाल
- 10:56:40इंडिया में रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज और
- 10:56:42नेशनल मूवमेंट को सप्रेस करने के लिए किया
- 10:56:45जाता था। दोस्तों, यह तो बात हो गई पुलिस
- 10:56:48फोर्स के एववोल्यूशन की जिसने ब्रिटिश रूल
- 10:56:51को इंडिया में बनाए रखने में काफी हेल्प
- 10:56:54की थी। अब बात करते हैं ऐसी फोर्स की
- 10:56:57जिसकी वजह से ब्रिटिश रूल इंडिया में
- 10:56:59एस्टैब्लिश हो पाया था और इतने समय
- 10:57:02कंटिन्यू रहा था। यानी कि आर्मी।
- 10:57:06ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ आर्मी ड्यूरिंग ब्रिटिश
- 10:57:09रूल। दोस्तों, मिलिट्री इंडिया में कंपनी
- 10:57:12के रूल की बैकबोन हुआ करती थी। 1857 की
- 10:57:16क्रांति से पहले इंडिया में मिलिट्री
- 10:57:18फोर्सेस के दो सेपरेट बोर्ड्स ऑपरेट किया
- 10:57:21करते थे। पहला सेट ऑफ यूनिट जिसे क्वींस
- 10:57:24आर्मी कहा जाता था। इंडिया में ड्यूटी पर
- 10:57:27आए सर्विंग ब्रिटिश ट्रूप्स का था और
- 10:57:29दूसरा कंपनी के ट्रूप्स हुआ करते थे जो
- 10:57:32यूरोपियन और नेटिव रेजिमेंट्स का मिक्सचर
- 10:57:35होते थे। क्वींस आर्मी क्राउन की मिलिट्री
- 10:57:38फोर्स का पार्ट हुआ करती थी। 1857 के बाद
- 10:57:42आर्मी का सिस्टमैटिक रिऑर्गेनाइजेशन किया
- 10:57:45जाता है। इस रिऑर्गेनाइजेशन के पीछे मुख्य
- 10:57:48कारण फिर से 1857 जैसी क्रांति होने से
- 10:57:51रोकना था। सबसे पहले तो यह इंश्योर किया
- 10:57:54जाता है कि आर्मी में यूरोपियन ब्रांच
- 10:57:57न्यूमेरिकली हमेशा इंडियन ब्रांच को
- 10:58:00डोमिनेट करें। इसके लिए बंगाल आर्मी में
- 10:58:03हर दो इंडियन सोल्जर्स पर एक यूरोपियन
- 10:58:05सोल्जर का प्रोपोर्शन फिक्स किया जाता है।
- 10:58:08और बॉम्बे और मद्रास आर्मीज में यह
- 10:58:10प्रोपोर्शन पांच इंडियन सोल्जर्स पर दो
- 10:58:13यूरोपियन सोल्जर्स का रहता है। इसके अलावा
- 10:58:151859 और 1879 की मिलिट्री कमीशंस 1/3 वाइट
- 10:58:20आर्मी के प्रिंसिपल पर इंसिस्ट करती हैं।
- 10:58:23जबकि 1857 से पहले यह वाइट आर्मी सिर्फ
- 10:58:2714% हुआ करती थी। इसके साथ ही की
- 10:58:30जियोग्राफिकल लोकेशनेशंस और डिपार्टमेंट्स
- 10:58:33जैसे कि आर्टिलरी, टैंक्स और आर्म्ड कोर
- 10:58:36में स्ट्रिक्ट यूरोपियन मोनोपोली मेंटेन
- 10:58:38की जाने लगी थी। यहां तक कि साल 1900 तक
- 10:58:42इंडियंस को राइफल्स भी इंफीरियर क्वालिटी
- 10:58:45की दी जाती थी और इन हाईटेक डिपार्टमेंट्स
- 10:58:48में सेकंड वर्ल्ड वॉर तक इंडियंस को
- 10:58:50एंट्री नहीं दी गई थी। कोई भी इंडियन
- 10:58:53ऑफिसर रैंक तक नहीं पहुंच सकता था। 1914
- 10:58:56तक इंडियंस के लिए हाईएस्ट रैंक सूबेदार
- 10:59:00ही हुआ करती थी। दोस्तों आर्मी की इंडियन
- 10:59:04ब्रांच को डिवाइड एंड रूल पॉलिसी के बेसिस
- 10:59:06पर भी रिऑर्गेनाइज किया जाता है। इसके तहत
- 10:59:09मार्शल रेसेस और नॉन मार्शल रेसेस की
- 10:59:12आईडियोलॉजी फॉर्म की जाती है। जिसमें
- 10:59:14बताया जाता है कि अच्छे सोल्जर्स सिर्फ
- 10:59:17स्पेसिफिक कम्युनिटीज से ही आ सकते हैं।
- 10:59:20यह आईडियोलॉजी पर्टिकुलरली लेट 1880 में
- 10:59:24डेवलप होना शुरू होती है। यानी कि 1887 से
- 10:59:281892 तक कमांडर इन चीफ रहे लॉर्ड रॉबर्ट्स
- 10:59:31के समय में। इसके साथ सीख्स, गोरखास और
- 10:59:36पठान्स जैसी कम्युनिटीज से इनडिसिनेट
- 10:59:38रिक्रूटमेंट की पॉलिसी को जस्टिफाई किया
- 10:59:41जाता है। क्योंकि इन ग्रुप्स ने 1857 की
- 10:59:44क्रांति को सप्रेस करने में ब्रिटिशर्स की
- 10:59:47हेल्प की थी और साथ ही यह रिलेटिवली
- 10:59:50मार्जिनल सोशल ग्रुप्स को बिलोंग करते थे।
- 10:59:53इसलिए इन पर नेशनलिज्म का इफेक्ट होने के
- 10:59:55चांसेस भी कम थे। अवध, बिहार, सेंट्रल
- 10:59:59इंडिया और साउथ इंडिया के सोल्जर्स
- 11:00:01जिन्होंने 1857 के रिवोल्ट में भाग लिया
- 11:00:04था, उन्हें नॉन मार्शल डिक्लेअ कर दिया
- 11:00:07जाता है।
- 11:00:08इसके अलावा सभी रेजीमेंट्स में कास्ट और
- 11:00:11कम्युनल कंपनीज़ इंट्रोड्यूस कर दी जाती
- 11:00:14हैं और इंडियन रेजीमेंट्स को सोशियो
- 11:00:16एएथनिक ग्रुप्स का मिक्सचर बना दिया जाता
- 11:00:19है। जिससे यह एक दूसरे को बैलेंस करते रह।
- 11:00:22इसके साथ ही सोल्जर्स में नेशनलिस्ट
- 11:00:25फीलिंग्स की ग्रोथ को रोकने के लिए
- 11:00:27कम्युनल, कास्ट, ट्राइबल और रीजनल
- 11:00:30कॉन्शियसनेस को इनकरेज किया जाता है। इसी
- 11:00:33कॉन्टेक्स्ट में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर
- 11:00:35इंडिया चार्ल्स वुड ने कहा था कि मैं
- 11:00:38डिफरेंट रेजीमेंट्स में अलग-अलग और राइवल
- 11:00:41स्पिरिट चाहता हूं। जिससे जरूरत पड़ने पर
- 11:00:44बिना किसी संकोच के एक सिख हिंदू पर फायर
- 11:00:48कर सके और एक गोर्खा दोनों में से किसी पर
- 11:00:50भी फायर कर सके। इसके अलावा दोस्तों
- 11:00:53ब्रिटिशर्स की तरफ से पूरी कोशिश की जाती
- 11:00:56है कि सोल्जर्स को रेस्ट ऑफ द पापुलेशन की
- 11:00:59लाइफ एंड थॉट से दूर रखा जाए। इसके लिए
- 11:01:03अलग-अलग मेथड्स अपनाए जाते हैं। जैसे कि
- 11:01:05न्यूज़पेपर्स, जर्नल्स और नेशनलिस्ट
- 11:01:08पब्लिकेशंस को सोल्जर्स तक पहुंचने से
- 11:01:11रोका जाता है। इस तरह 1857 के बाद आर्मी
- 11:01:15का पूरी तरह रिऑर्गेनाइजेशन करके यह
- 11:01:18इंश्योर किया जाता है कि इंडिया पर
- 11:01:21ब्रिटिश होल्ड कमजोर ना हो पाए। साथ ही
- 11:01:24इंडियन आर्मी को एशिया और अफ्रीका में
- 11:01:26ब्रिटिश एंपायर के एक्सपेंशन के लिए भी
- 11:01:29यूज किया जाता है। पुलिस और आर्मी जहां
- 11:01:32ब्रिटिश रूल को इस्टैब्लिश और प्रोटेक्ट
- 11:01:34करने का काम करते हैं, वहीं जुडिशियल
- 11:01:36सिस्टम इसे कंसोलिडेट करने में हेल्प करता
- 11:01:39है। इसलिए आइए ब्रिटिश रूल में जुडिशियल
- 11:01:42रिफॉर्म्स को भी समझ लेते हैं। जुडिशियल
- 11:01:46रिफॉर्म्स।
- 11:01:48दोस्तों, ब्रिटिश रूल से पहले इंडिया में
- 11:01:51जुडिशियल सिस्टम का ना कोई प्रॉपर
- 11:01:53प्रोसीजर हुआ करता था और ना ही लॉ कोर्ट्स
- 11:01:56का हाईएस्ट से लोएस्ट ग्रेडेशन में कोई
- 11:01:58प्रॉपर ऑर्गेनाइजेशन।
- 11:02:01हिंदूस के ज्यादातर केसेस को गांव की
- 11:02:03पंचायत या जमींदार संभाल लेते थे और
- 11:02:06मुस्लिम्स के लिए जुडिशियल एडमिनिस्ट्रेशन
- 11:02:08की यूनिट के रूप में उनके रिलीजियस लीडर
- 11:02:11काजी हुआ करते थे। इसके अलावा राजा और
- 11:02:15बादशाह को जस्टिस का फाउंटेन हेड समझा
- 11:02:18जाता था और वह अपनी समझ से न्याय करते थे।
- 11:02:21उसके लिए कोई फिक्स नियम या कानून अक्सर
- 11:02:24नहीं होते थे। रिकॉर्डेड जुडिशियल
- 11:02:26प्रेसिडेंस पर बेस्ड कॉमन लॉ सिस्टम की
- 11:02:28शुरुआत 1726 में होती है। जब मद्रास,
- 11:02:32बॉम्बे औरक में ईस्ट इंडिया कंपनी के
- 11:02:36द्वारा मेयर्स कोर्ट्स इस्टैब्लिश किए
- 11:02:38जाते हैं। इसके बाद कंपनी का ट्रेडिंग
- 11:02:41पावर से रूलिंग पावर में ट्रांसफॉर्मेशन
- 11:02:43होने के साथ जुडिशियल सिस्टम में नए
- 11:02:46एलिमेंट्स ऐड होने शुरू हो जाते हैं। यह
- 11:02:49चेंजेस अलग-अलग गवर्नर जनरल्स द्वारा किए
- 11:02:51गए थे। सबसे पहले बात करते हैं वारेन
- 11:02:54हेस्टिंग्स के समय में हुए रिफॉर्म्स की।
- 11:02:57रिफॉर्म्स अंडर वारेन हेस्टिंग्स 1772 टू
- 11:03:011785।
- 11:03:04दोस्तों, वारेन हेस्टिंग्स का सबसे पहला
- 11:03:06जुडिशियल रिफॉर्म होता है जमींदार की
- 11:03:09जुडिशियल पावर्स को खत्म करना। 1772 में
- 11:03:13वारेन हेस्टिंग्स डिस्ट्रिक्ट लेवल पर
- 11:03:15दीवान अदालत और फौजदारी अदालत सेटअप करते
- 11:03:19हैं। दीवानी अदालत में सिविल केसेस ट्राई
- 11:03:22किए जाते थे और फौजदारी में क्रिमिनल
- 11:03:25केसेस दीवानी अदालत को कलेक्टर यानी कि
- 11:03:28यूरोपियन ऑफिसर प्रिसाइड करता था और
- 11:03:31फौजदारी अदालत को इंडियन जज। इसके अलावा
- 11:03:35दीवानी अदालत में हिंदूस का केस हिंदू लॉज़
- 11:03:38के अकॉर्डिंग डिसाइड होता था और मुस्लिम्स
- 11:03:40का मुस्लिम लॉ के अकॉर्डिंग। लेकिन
- 11:03:43फौजदारी अदालत में सभी का डिसीजन मुस्लिम
- 11:03:46लॉ के अकॉर्डिंग ही होता था। डिस्ट्रिक्ट
- 11:03:49कोर्ट्स के डिसीजन के अगेंस्ट अपील के लिए
- 11:03:53सदर दीवानी अदालत और सदर निजामत अदालत भी
- 11:03:56सेटअप की गई थी। इसके अलावा वारेन
- 11:03:58हेस्टिंग्स मुस्लिम्स और हिंदू लॉज़ को
- 11:04:01कोडिफाई करने की कोशिश भी करते हैं।
- 11:04:041776 में हिंदू कोड का एक इंग्लिश
- 11:04:07ट्रांसलेशन कोड ऑफ जेंटू लॉज़ के नाम से
- 11:04:10पब्लिश भी हो जाता है। दोस्तों, यह थे
- 11:04:14वारेन हेस्टिंग्स द्वारा इंट्रोड्यूस किए
- 11:04:16गए जुडिशियल रिफॉर्म्स। इसके बाद जुडिशियल
- 11:04:19सिस्टम को फर्दर रिफॉर्म लॉर्ड कॉर्नवालिस
- 11:04:21ने किया था। तो आइए उनके रिफॉर्म्स को
- 11:04:24जानते हैं। रिफॉर्म्स अंडर कॉर्नवालिस
- 11:04:271786 टू 1793।
- 11:04:30दोस्तों वारेन हेस्टिंग्स ने जो जुडिशियल
- 11:04:32सिस्टम इस्टैब्लिश किया था कॉर्नवालिस
- 11:04:35उसमें कुछ चेंजेस करते हैं। जैसे कि 1787
- 11:04:39में वो डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर्स को फिर से
- 11:04:42दीवानी अदालत का जज बना देते हैं। लॉर्ड
- 11:04:44कॉर्नवालिस ना सिर्फ कलेक्टर्स की
- 11:04:46जुडिशियल पावर्स को रिस्टोर करते हैं
- 11:04:49बल्कि उन्हें पहले से भी ज्यादा
- 11:04:50मैजिस्टरियल पावर दे देते हैं। यह सेपरेशन
- 11:04:54ऑफ पावर्स के प्रिंसिपल के एकदम उल्टा था।
- 11:04:57दूसरा रिफॉर्म 1792
- 11:04:59के पीरियड में क्रिमिनल एडमिनिस्ट्रेशन की
- 11:05:02फील्ड में इंट्रोड्यूस होता है।
- 11:05:04डिस्ट्रिक्ट फौजदारी अदालत को अबॉलिश करके
- 11:05:07उनकी जगह चार सर्किट कोर्ट्स बनाई जाती
- 11:05:10हैं। इनमें से तीन बंगाल में थी और एक
- 11:05:13बिहार में। और इन सर्किट कोर्ट्स में
- 11:05:17यूरोपियन ऑफिसर्स को ही जज अपॉइंट किया
- 11:05:19जाता है। और इनको असिस्ट करते थे काजीज और
- 11:05:22मुफ्तीज़। इससे पहले फौजदारी अदालत में
- 11:05:26इंडियंस को ही जज अपॉइंट किया जाता था। हम
- 11:05:29कह सकते हैं कि यहां से जुडिशियल सिस्टम
- 11:05:31में से इंडियंस को अलग करने की शुरुआत हो
- 11:05:34जाती है और रेसिज्म की झलक दिखने लगती है।
- 11:05:37लॉर्ड कॉर्नवालिस का सबसे इंपॉर्टेंट
- 11:05:39जुडिशियल रिफॉर्म था उनका 1793 का
- 11:05:42कॉर्नवालिस कोड। इस कोड में उनके सभी
- 11:05:45रिफॉर्म्स फाइनल शेप लेते हैं। और यह
- 11:05:47प्राइमरली सेपरेशन ऑफ पावर के प्रिंसिपल
- 11:05:50पर बेस्ड था। कॉर्नवर्स को रियलाइज होता
- 11:05:53है कि कलेक्टर्स के हाथ में जुडिशियल
- 11:05:56पावर्स देना सही डिसीजन नहीं था। क्योंकि
- 11:05:59जिनके पास रेवेन्यू कलेक्शन की पावर थी,
- 11:06:01क्या वो रेवेन्यू के केसेस को इंपार्शियली
- 11:06:04डिसाइड कर सकते थे? इसलिए कॉर्नवालिस कोड
- 11:06:07में वह सेपरेशन ऑफ पावर्स के प्रिंसिपल को
- 11:06:10फॉलो करते हैं और कलेक्टर्स की सभी
- 11:06:12जुडिशियल और मैजिस्टरियल पावर्स को खत्म
- 11:06:15कर दिया जाता है। इसके अलावा सिविल
- 11:06:18कोर्ट्स को प्रिसाइड करने के लिए
- 11:06:20डिस्ट्रिक्ट जज नाम से एक नए ऑफिसर क्लास
- 11:06:22की शुरुआत की जाती है। साथ ही कॉर्नवोस
- 11:06:26कोर्ट फीस को भी अबॉलिश करते हैं।
- 11:06:28यूरोपियन सब्जेक्ट्स को भी इंडियन
- 11:06:31जुडिशियल सिस्टम के जुरिसडिक्शन में लाया
- 11:06:33जाता है। इसके साथ ही गवर्नमेंट सर्वेंट्स
- 11:06:36को उनके ऑफिशियल एक्शंस के लिए सिविल
- 11:06:38कोर्ट्स में आंसरेबल बनाया जाता है।
- 11:06:42कॉन्वोलिस कोड के जरिए सोवनिटी ऑफ लॉ का
- 11:06:45प्रिंसिपल इस्टैब्लिश होता है। इतने सालों
- 11:06:48से चला आ रहा सिस्टम अब पूरी तरह बदल चुका
- 11:06:51था। कम से कम पेपर पर तो अब कास्ट, क्लास
- 11:06:55या रिलीजन के बेसिस पर भेदभाव नहीं किया
- 11:06:58जा सकता था। कॉर्नवस के बाद विलियम
- 11:07:01बेंटिंक जुडिशरी में कुछ मेजर रिफॉर्म्स
- 11:07:03लेकर आते हैं। रिफॉर्म्स अंडर विलियम
- 11:07:06बेंटिंक 1828 टू 1833।
- 11:07:11दोस्तों, लॉर्ड कॉर्नवालिस के जुडिशियल
- 11:07:13सिस्टम को फर्दर रिफॉर्म करने का काम
- 11:07:15विलियम बेंटिंक ने किया था। सबसे पहले वह
- 11:07:18कॉर्नवस द्वारा सेटअप प्रोविंशियल कोर्ट्स
- 11:07:21ऑफ अपील और सर्किट कोर्ट्स को अबॉलिश कर
- 11:07:23देते हैं। क्योंकि इन कोर्ट्स के पास बहुत
- 11:07:26ज्यादा काम हो गया था और इनमें फॉलो किए
- 11:07:28जाने वाला जुडिशियल प्रोसीजर भी काफी जटिल
- 11:07:31था। जिसकी वजह से अक्सर जस्टिस मिलने में
- 11:07:34डिले होता था और अनसर्टेनिटी भी बनी रहती
- 11:07:37थी। बेंटिंग इन कोर्ट्स की ड्यूटीज
- 11:07:40मैजिस्ट्रेट्स और कलेक्टर्स को ट्रांसफर
- 11:07:43कर देते हैं और इनके सुपरविजन के लिए
- 11:07:46कमिश्नर ऑफ रेवेन्यू एंड सर्किट को अपॉइंट
- 11:07:48करते हैं। इसके अलावा वो इलाहाबाद में
- 11:07:52सेपरेट सदर निजामत अदालत और सदर दीवानी
- 11:07:55अदालत इस्टैब्लिश करते हैं। जिसकी वजह से
- 11:07:58यूपी और दिल्ली के लोगों को अपील के लिए
- 11:08:01अबक जाने की जरूरत नहीं रहती। दोस्तों अभी
- 11:08:05तक कोर्ट की लैंग्वेज पर्शियन थी। बेंटिंग
- 11:08:09हायर कोर्ट्स में पर्शियन को इंग्लिश से
- 11:08:11रिप्लेस कर देते हैं और इसके साथ ही लोअर
- 11:08:14कोर्ट्स में पर्शन के साथ-साथ वर्नाकुलर
- 11:08:17लैंग्वेज में केस फाइल करने का ऑप्शन भी
- 11:08:19दे देते हैं। इस तरह से विलियम बेंटिंक ने
- 11:08:22जुडिशियल सिस्टम को इंडियंस के लिए
- 11:08:25एक्सेसिबल बनाने की कोशिश की थी। बेंटिंग
- 11:08:28के बाद भी जुडिशियल सिस्टम में समय-समय पर
- 11:08:30कुछ रिफॉर्म्स लाए गए थे। आइए उनको भी समझ
- 11:08:33लेते हैं। रिफॉर्म्स आफ्टर बेंटिंग।
- 11:08:38दोस्तों 1833 में इंडियन लॉज़ के
- 11:08:41क्वाडिफिकेशन के लिए लॉर्ड मकोले के
- 11:08:44चेयरमैनशिप में लॉ कमीशन अपॉइंट की गई थी।
- 11:08:47जिसके एफर्ट से 1859 में सिविल प्रोसीजर
- 11:08:50कोड, 1860 में इंडियन पीनल कोड और 1861
- 11:08:55में क्रिमिनल प्रोसीजर कोड तैयार हुआ था।
- 11:08:581865 में सुप्रीम कोर्ट और सदर अदालत को
- 11:09:02मर्ज करके कोलकाता, बॉम्बे और मद्रास में
- 11:09:06तीन हाई कोर्ट्स बना दिए गए थे। इसके बाद
- 11:09:091935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में
- 11:09:12फेडरल कोर्ट एस्टैब्लिश करने का प्रोविजन
- 11:09:14था। इसे 1937 में सेटअप किया गया था। इसका
- 11:09:18जुरिसडिक्शन गवर्नमेंट्स के बीच
- 11:09:21डिस्प्यूट्स को सेटल करना और हाई कोर्ट से
- 11:09:23अपील्स पर सुनवाई करना था। जुडिशियल
- 11:09:26रिफॉर्म्स की चर्चा तो हो गई। अब इनका
- 11:09:28इवैल्यूएशन भी कर लेते हैं। आखिर यह
- 11:09:30रिफॉर्म्स कहां तक सफल थे? इवैल्यूएशन।
- 11:09:36दोस्तों, ब्रिटिश रूल के समय इस्टैब्लिश्ड
- 11:09:39जुडिशियल सिस्टम के कुछ पॉजिटिव
- 11:09:41एस्पेक्ट्स देखे जा सकते हैं। जैसे कि
- 11:09:44इसके द्वारा इंडिया में रूल ऑफ लॉ की
- 11:09:46स्थापना होती है। इसके अलावा रिलीजियस और
- 11:09:49रूलर्स के पर्सनल कानून की जगह कोडिफाइड
- 11:09:52लॉज़ आ जाते हैं। इनके जरिए सोसाइटी में
- 11:09:55प्रवेलेंट डिस्क्रिमिनेशन को कम करने की
- 11:09:58कोशिश की जाती है। जैसे अब कास्ट के बेसिस
- 11:10:01पर अलग कानून नहीं था। लॉ के सामने सब
- 11:10:04बराबर हो जाते हैं। यूरोपियन सब्जेक्ट्स
- 11:10:06को भी इसके जुरिसडिक्शन में लाया गया था।
- 11:10:09हालांकि क्रिमिनल केसेस में सिर्फ
- 11:10:11यूरोपियन जजेस ही उनके केस की सुनवाई कर
- 11:10:14सकते थे। इसके साथ ही गवर्नमेंट सर्वेंट्स
- 11:10:17को भी सिविल कोर्ट्स में आंसरेबल बनाया
- 11:10:19जाता है। लेकिन इसके कुछ नेगेटिव
- 11:10:22एस्पेक्ट्स भी ध्यान में रखने की जरूरत
- 11:10:24है। पहला नेगेटिव यह था कि जुडिशियल
- 11:10:27सिस्टम और ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड और
- 11:10:29एक्सपेंसिव हो जाता है। रिच लोग इसे अपने
- 11:10:32अकॉर्डिंग मैनपुलेट करने लगते हैं। फॉल्स
- 11:10:36एविडेंस और धोखेबाजी का काफी स्कोप नजर
- 11:10:38आता है। लिटिगेशन लंबा समय लेने लगती है।
- 11:10:42जिसका रिजल्ट डिलेड जस्टिस होता है।
- 11:10:45कोर्ट्स ओवरबर्डन होने लगते हैं। इसके
- 11:10:48अलावा यूरोपियन जजेस अक्सर इंडियन यूसेज
- 11:10:51और ट्रेडिशन से फमिलियर नहीं होते थे। साथ
- 11:10:54ही जुडिशियल सिस्टम का यूज कॉलोनियल
- 11:10:57इंटरेस्ट को सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा
- 11:10:59किया जाता है। और नेटिव्स को न्याय देने
- 11:11:02के लिए कम। कंक्लूजन।
- 11:11:07दोस्तों, इस तरह इंडिविजुअल ब्रिटिश
- 11:11:09गवर्नर जनरल्स की समझ और कॉलोनियल
- 11:11:12इंटरेस्ट को ध्यान में रखते हुए पुलिस,
- 11:11:14आर्मी और जुडिशरी का एववोल्यूशन होता है।
- 11:11:17और यह इंडिया में ब्रिटिश एंपायर के मजबूत
- 11:11:20पिलर्स बनकर उभरते हैं। हालांकि पूरी
- 11:11:22कोशिश के बाद भी ब्रिटिशर्स नेशनलिज्म की
- 11:11:26वेव को इन तक पहुंचने से नहीं रोक पाते।
- 11:11:29और फाइनली जब आर्मी और पुलिस फोर्स में
- 11:11:32नेशनलिस्ट फीलिंग्स नजर आने लगती हैं तो
- 11:11:34ब्रिटिशर्स को समझ आ जाता है कि उनका रूल
- 11:11:37अब और ज्यादा नहीं चल सकता।
- 11:11:42डेवलपमेंट ऑफ एजुकेशन
- 11:11:44दोस्तों इंडिया में मॉडर्न एजुकेशन की
- 11:11:47शुरुआत ब्रिटिश कॉलोनियल रूल के दौरान ही
- 11:11:49हुई थी। उससे पहले तक एजुकेशन गुरुकुल्स,
- 11:11:52मदरसास और मकतब्स के थ्रू दी जाती थी।
- 11:11:55जिसमें रिलीजियस एजुकेशन के साथ ग्रामर,
- 11:11:58लॉजिक, मैथमेटिक्स, फिलॉसफी एटसेट्रा जैसे
- 11:12:01सब्जेक्ट्स की शिक्षा दी जाती थी। इसके
- 11:12:04अलावा ट्रेडिशनल कास्ट और आर्टिजंस
- 11:12:06गिल्ड्स के द्वारा वोकेशनल एजुकेशन भी
- 11:12:09प्रोवाइड करते थे।
- 11:12:10लेकिन ब्रिटिशर्स के आने के बाद इंडियन
- 11:12:13एजुकेशन सिस्टम पूरी तरह से बदल जाता है।
- 11:12:16आज हम बात करने वाले हैं ब्रिटिश रूल के
- 11:12:18दौरान किस तरह एजुकेशन सिस्टम का
- 11:12:20डेवलपमेंट इंडिया में होता है और इसके
- 11:12:23क्या फायदे और क्या नुकसान देखने को मिलते
- 11:12:25हैं। आइए शुरू करते हैं।
- 11:12:29इंट्रोडक्शन।
- 11:12:32ब्रिटिश रूल के शुरुआती सालों में
- 11:12:34प्राइवेट इंडिविजुअल्स द्वारा एजुकेशन
- 11:12:36फील्ड में कुछ एफर्ट्स किए जाते हैं। जैसे
- 11:12:39कि 1781 में वारेन हेस्टिंग्स पर्शियन और
- 11:12:42अरेबिक की लर्निंग को प्रमोट करने के लिए
- 11:12:45मददसा की स्थापना करते हैं। और 1791 में
- 11:12:49जनाथन डंकन बनारस में संस्कृत कॉलेज की
- 11:12:52शुरुआत करते हैं। इस दौरान गवर्नमेंट की
- 11:12:55तरफ से एजुकेशन को प्रमोट करने में कोई
- 11:12:57इंटरेस्ट शो नहीं किया जाता। 1800 में
- 11:13:00लॉर्ड वेलेसली ने फोर्ट विलियम कॉलेज
- 11:13:03सेटअप किया था। इसे कंपनी के सिविल
- 11:13:06सर्वेंट्स को ट्रेन करने के लिए बनाया गया
- 11:13:08था। हालांकि 1802 में कोर्ट ऑफ
- 11:13:10डायरेक्टर्स ने इसको क्लोज करने का आर्डर
- 11:13:13दे दिया। ऑफिशियल तौर पर ब्रिटिशर्स
- 11:13:16द्वारा एजुकेशन के डेवलपमेंट की तरफ कदम
- 11:13:181813 के चार्टर एक्ट के बाद लिए जाते हैं।
- 11:13:21क्योंकि इस एक्ट में इंडिया में एजुकेशन
- 11:13:24को प्रमोट करने के लिए एनुअली ₹1 लाख का
- 11:13:27प्रावधान किया गया था। लेकिन इसके साथ ही
- 11:13:30एक डिबेट शुरू हो जाती है। जिसे
- 11:13:32ओरिएंटलिस्ट एंग्लिसिस्ट कंट्रोवर्सी कहा
- 11:13:35जाता है।
- 11:13:38ओरिएंटलिस्ट एंग्लिसिस्ट कंट्रोवर्सी।
- 11:13:42जब बात इंडिया में एजुकेशन के डेवलपमेंट
- 11:13:44की आती है तो सवाल यह उठता है कि यह
- 11:13:46एजुकेशन इंडियन होगी या वेस्टर्न और इसे
- 11:13:50वर्नाकुलर लैंग्वेज में इंपार्ट किया
- 11:13:52जाएगा या इंग्लिश लैंग्वेज में। इसको लेकर
- 11:13:54दो ग्रुप्स बन जाते हैं। एक ग्रुप
- 11:13:57ओरिएंटलिस्ट्स का था और दूसरा
- 11:13:59एंग्लिसिस्ट्स।
- 11:14:01ओरिएंटलिस्ट ग्रुप जिसमें प्रिंसेप
- 11:14:03ब्रदर्स जैसे स्कॉलर्स आते थे। इनका मानना
- 11:14:06था कि इंडियन लैंग्वेज में इंडियन
- 11:14:08सब्जेक्ट्स की नॉलेज को प्रमोट करना
- 11:14:10चाहिए। वहीं एंग्लिसिस्ट इंग्लिश लैंग्वेज
- 11:14:13के मीडियम से वेस्टर्न एजुकेशन स्प्रेड
- 11:14:15करने के सपोर्टर थे। इस डिबेट को सॉल्व
- 11:14:18करने के लिए ब्रिटिश इंडियन गवर्नमेंट
- 11:14:211823 में जनरल कमेट ऑफ पब्लिक
- 11:14:24इंस्ट्रक्शंस अपॉइंट करती है। शुरुआत में
- 11:14:26तो इस कमेटी को ओरिएंटलिस्ट ग्रुप डोमिनेट
- 11:14:29करता है और यह लोगक में संस्कृत कॉलेज
- 11:14:32आगरा और दिल्ली में दो और ओरिएंटल कॉलेजेस
- 11:14:35इस्टैब्लिश करने का प्रोग्राम तैयार करते
- 11:14:37हैं। इसके साथ ही इंडीजीनस लर्निंग को
- 11:14:40प्रमोट करने के लिए गुरुकुल्स और मदरसाज
- 11:14:43को पेट्रोनेज देने का भी फैसला करते हैं।
- 11:14:46लेकिन जल्दी ही सिचुएशन एंग्लिसिस्ट ग्रुप
- 11:14:48के फेवर में टर्न हो जाती है। जब 1828 में
- 11:14:52यूटिलिटेरियन रिफॉर्मिस्ट विलियम बेंटिंग
- 11:14:55गवर्नर जनरल बनते हैं और 1834 में लॉर्ड
- 11:14:58मेगोले को जनरल कमिटी ऑफ पब्लिक
- 11:15:01इंस्ट्रक्शंस का प्रेसिडेंट बना दिया जाता
- 11:15:03है। मेगोले पूरी तरह से इंग्लिश एजुकेशन
- 11:15:06के फेवर में थे। सेकंड फरवरी 1835 को वह
- 11:15:10अपने फेमस मोकोले मिनट्स पब्लिश करते हैं।
- 11:15:13जिसमें इंग्लिश लैंग्वेज और वेस्टर्न
- 11:15:15एजुकेशन को डेवलप करने का फैसला लिया जाता
- 11:15:18है। यह इंडिया में इंग्लिश एजुकेशन के
- 11:15:20इंट्रोडक्शन का ब्लूप्रिंट बनता है। मकोले
- 11:15:23के अनुसार एक अच्छी यूरोपियन लाइब्रेरी की
- 11:15:26सिंगल शेल्फ पूरी ओरिएंटल लिटरेचर के
- 11:15:29बराबर है। बेंटिंग 7 मार्च 1835 को ही
- 11:15:33एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए मकोले के
- 11:15:35प्रपोजल्स को एंडोर्स कर देते हैं। इस तरह
- 11:15:38इंडिया में वेस्टर्न एजुकेशन की शुरुआत
- 11:15:40होती है। एजुकेशन फील्ड में अगली
- 11:15:43डेवलपमेंट 1854 में देखने को मिलती है।
- 11:15:49वुड्स डिस्पैच ऑफ़ 1854।
- 11:15:53चार्ल्स वुड बोर्ड ऑफ कंट्रोल के
- 11:15:55प्रेसिडेंट थे। 1854 में इन्होंने इंडिया
- 11:15:59में फ्यूचर एजुकेशन की स्कीम को लेकर एक
- 11:16:01कॉम्प्रिहेंसिव डिस्पैच या डॉक्यूमेंट
- 11:16:03तैयार किया था। इसे इंडिया में इंग्लिश
- 11:16:06एजुकेशन का मैग्नाका भी कहा जाता है। इसकी
- 11:16:09मेन रेकमेंडेशंस इस तरह से थी। सबसे पहले
- 11:16:13तो यह डिक्लेअ करता है कि गवर्नमेंट की
- 11:16:15एजुकेशन पॉलिसी का एम वेस्टर्न एजुकेशन की
- 11:16:18टीचिंग देना है। मीडियम ऑफ इंस्ट्रक्शन को
- 11:16:21लेकर यह कहता है कि हायर एजुकेशन के लिए
- 11:16:24इंग्लिश लैंग्वेज ही परफेक्ट मीडियम है।
- 11:16:27लेकिन प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन के
- 11:16:29लिए यह वर्नाकुलर लैंग्वेज के मीडियम को
- 11:16:31सजेस्ट करता है। यह विलेज लेवल पर
- 11:16:34वर्नाकुलर प्राइमरी स्कूल्स उसके बाद
- 11:16:37एंग्लो वर्नाकुलर हाई स्कूल्स और फिर
- 11:16:39डिस्ट्रिक्ट लेवल पर एफिलिएटेड कॉलेज
- 11:16:42सेटअप करने का सुझाव देता है। साथ ही
- 11:16:44इसमें एजुकेशन की फील्ड में प्राइवेट
- 11:16:47एंटप्राइज को प्रमोट करने के लिए ग्रांट्स
- 11:16:50इन एड सिस्टम का आईडिया भी प्रपोज किया
- 11:16:52गया था। कंपनी टेरिटरीज के सभी फाइव
- 11:16:55प्रोविंसेस में डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक
- 11:16:57इंस्ट्रक्शन बनाने का सुझाव दिया जाता है।
- 11:17:00इसका काम प्रोविंस में एजुकेशन की
- 11:17:02प्रोग्रेस को रिव्यू करना और गवर्नमेंट को
- 11:17:04एनुअल रिपोर्ट सबमिट करना था। लंदन
- 11:17:07यूनिवर्सिटी के मॉडल परक, मद्रास और
- 11:17:10बॉम्बे में यूनिवर्सिटीज को इस्टैब्लिश
- 11:17:12करने का प्रपोजल दिया गया था। इसके साथ ही
- 11:17:15इसमें वोकेशनल इंस्ट्रक्शन और टेक्निकल
- 11:17:17स्कूल्स और कॉलेजेस इस्टैब्लिश करने पर भी
- 11:17:20एफसाइज किया गया था। वुड्स डिस्पैच वुमेन
- 11:17:24एजुकेशन को प्रमोट करने की बात भी करता
- 11:17:26है। इसकी लगभग सभी रेकमेंडेशंस को
- 11:17:29इंप्लीमेंट किया गया था। वुड्स डिस्पैच के
- 11:17:32आइडियल्स और मेथड्स आने वाले लगभग फाइव
- 11:17:35डेकेड्स तक एजुकेशन की फील्ड को डोमिनेट
- 11:17:37करते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे वेस्टर्न
- 11:17:41सिस्टम इंडीजीनस सिस्टम को रिप्लेस कर
- 11:17:43देता है। एजुकेशन के फील्ड में अगला कमीशन
- 11:17:461882 में फॉर्म किया जाता है। द हंटर
- 11:17:50एजुकेशन कमीशन 188283
- 11:17:551882 में एजुकेशन के फील्ड में वुड्स
- 11:17:58डिस्पैच के बाद हुई प्रोग्रेस को रिव्यू
- 11:18:00करने के लिए गवर्नमेंट एक कमीशन अपॉइंट
- 11:18:03करती है। इसे डब्ल्यूडब्ल्यू हंटर की
- 11:18:06लीडरशिप में फॉर्म किया जाता है। इसलिए
- 11:18:08इसे हंटर कमीशन बोला जाता है। कमीशन को
- 11:18:12मेनली प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन की
- 11:18:14फील्ड में सुझाव देने के लिए कहा गया था।
- 11:18:17इसलिए इंडियन यूनिवर्सिटीज की फंक्शनिंग
- 11:18:19में कमीशन इंक्वायर नहीं करती है। इसकी
- 11:18:22मेन रेकमेंडेशंस कुछ इस तरह थी। प्राइमरी
- 11:18:26एजुकेशन के इंप्रूवमेंट और एक्सटेंशन में
- 11:18:28स्टेट के स्पेशल रोल को ए्फसाइज किया गया
- 11:18:31था। साथ ही प्राइमरी एजुकेशन के कंट्रोल
- 11:18:34को न्यूली सेटअप डिस्ट्रिक्ट और
- 11:18:36म्युनिसिपल बोर्ड्स को देने का प्रस्ताव
- 11:18:38रखा गया था। सेकेंडरी एजुकेशन के लिए दो
- 11:18:42डिवीजंस बनाने का सुझाव था। पहला लिटरेरी
- 11:18:45जो यूनिवर्सिटी तक जाएगा और दूसरा वोकेशनल
- 11:18:48जिसमें कमर्शियल करियर्स की तैयारी कराई
- 11:18:51जाएगी। कमीशन फीमेल एजुकेशन को लेकर
- 11:18:54इनएड्वेट फैसिलिटीज की तरफ भी ध्यान देने
- 11:18:56को कहता है। अगले दो डेकेड्स में तेजी से
- 11:19:00सेकेंडरी एजुकेशन का स्प्रेड होता है।
- 11:19:03जिसमें इंडियंस का रोल भी काफी इंपॉर्टेंट
- 11:19:05रहता है। इसके अलावा 1882 में पंजाब
- 11:19:09यूनिवर्सिटी और 1887 में इलाहाबाद
- 11:19:12यूनिवर्सिटी की स्थापना भी होती है।
- 11:19:15प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन की बात तो
- 11:19:17हंटर कमीशन ने कर ली थी। इसके बाद अब
- 11:19:20नेक्स्ट कमीशन स्पेशली इंडियन
- 11:19:22यूनिवर्सिटीज के लिए फॉर्म किया गया था।
- 11:19:25इंडियन यूनिवर्सिटीज एक्ट 194
- 11:19:3020th सेंचुरी की शुरुआत से ही इंडिया में
- 11:19:32पॉलिटिकल इंटरेस्ट बढ़ने लगता है। ऐसे में
- 11:19:36ब्रिटिशर्स को लगता है कि प्राइवेट
- 11:19:38मैनेजमेंट के अंडर चलने वाले एजुकेशनल
- 11:19:40इंस्टीटशंस का स्तर गिर चुका है और यहां
- 11:19:43से पॉलिटिकल रेवोल्यूशनरीज पैदा हो रहे
- 11:19:46हैं। इसलिए 192 में लॉर्ड कर्जन रेले
- 11:19:51कमीशन अपॉइंट करते हैं। इसका एम इंडियन
- 11:19:54यूनिवर्सिटीज को इंप्रूव करने के लिए मेजर
- 11:19:57सजेस्ट करना था। इसकी रेकमेंडेशंस के आधार
- 11:20:00पर इंडियन यूनिवर्सिटीज एक्ट 194 पास किया
- 11:20:04जाता है। जिसके अनुसार यूनिवर्सिटीज को
- 11:20:08स्टडी और रिसर्च पर ज्यादा ध्यान देने के
- 11:20:10लिए कहा जाता है। यूनिवर्सिटी के फेलोस का
- 11:20:13नंबर कम कर दिया जाता है और ऑफिस में इनका
- 11:20:15पीरियड भी रिड्यूस कर दिया जाता है। साथ
- 11:20:18ही ज्यादातर फेलोस को गवर्नमेंट ही
- 11:20:20नॉमिनेट करती है। इसके अलावा गवर्नमेंट के
- 11:20:23पास यूनिवर्सिटी के रेगुलेशंस को बीटो
- 11:20:26करने और खुद अपनी तरफ से रेगुलेशंस पास
- 11:20:28करने की पावर भी आ जाती है। प्राइवेट
- 11:20:31कॉलेज के एफिलिएशंस की कंडीशंस को और
- 11:20:34स्ट्रिक्ट कर दिया जाता है। साथ ही हायर
- 11:20:36एजुकेशन और यूनिवर्सिटीज को इंप्रूव करने
- 11:20:39के लिए अगले 5 साल तक पर एनम ₹ लाख
- 11:20:43सेंक्शन किए जाते हैं। इस एक्ट के थ्रू
- 11:20:46यूनिवर्सिटीज पर गवर्नमेंट का कंट्रोल
- 11:20:48बहुत ज्यादा बढ़ा दिया जाता है। इसको
- 11:20:51जस्टिफाई करने के लिए कर्जन क्वालिटी और
- 11:20:53एफिशिएंसी का रीजन देते हैं। लेकिन उनका
- 11:20:56असली मकसद तो इंडियन स्टूडेंट्स में
- 11:20:59नेशनलिज्म की फीलिंग को स्प्रेड होने से
- 11:21:01रोकना था। इंडियन लीडर्स इसे इंपीरियलिज्म
- 11:21:05को स्ट्रेंथन करने और नेशनलिस्ट फीलिंग्स
- 11:21:07को सेबोटाज करने का अटेमप्ट मानते हैं।
- 11:21:10गोखले इसे एक रेट्रोग्रेड मेजर कहते हैं।
- 11:21:14इसके बाद 1913 में गवर्नमेंट एजुकेशन
- 11:21:17पॉलिसी को लेकर एक रेजोल्यूशन पास करती
- 11:21:20है।
- 11:21:22गवर्नमेंट रेजोल्यूशन ऑन एजुकेशन पॉलिसी
- 11:21:251913
- 11:21:27हुआ यह था कि 196 में बरोडा के प्रिंसली
- 11:21:31स्टेट ने अपनी टेरिटरीज में कंपलसरी
- 11:21:34प्राइमरी एजुकेशन को इंट्रोड्यूस किया था।
- 11:21:37जिसके बाद नेशनल लीडर्स ब्रिटिश इंडिया
- 11:21:39में भी ऐसा करने के लिए गवर्नमेंट पर
- 11:21:42प्रेशर बना रहे थे। गोखले ने इस इशू को
- 11:21:45लेजिसलेटिव असेंबली में भी रेज किया था।
- 11:21:49लेकिन एजुकेशन पॉलिसी पर अपने 1913 के
- 11:21:52रेजोल्यूशन में गवर्नमेंट कंपलसरी एजुकेशन
- 11:21:55की रिस्पांसिबिलिटी लेने से मना कर देती
- 11:21:57है। हालांकि इलिटरेसी रिमूव करने की
- 11:22:00पॉलिसी को जरूर एक्सेप्ट कर लिया जाता है।
- 11:22:02साथ ही प्रोविंशियल गवर्नमेंट से कहा जाता
- 11:22:05है कि वह पुअरर और बैकवर्ड सेक्शंस को
- 11:22:08फ्री एलिमेंट्री एजुकेशन देने की तैयारी
- 11:22:10करें। इसके लिए प्राइवेट एफर्ट्स को
- 11:22:13इनकरेज करना था और सेकेंडरी स्कूल्स की
- 11:22:15क्वालिटी को भी इंप्रूव करना था। साथ ही
- 11:22:18हर प्रोविंस में यूनिवर्सिटी इस्टैब्लिश
- 11:22:21करने का डिसीजन भी लिया जाता है। इसके बाद
- 11:22:241917 में एक और कमीशन फॉर्म की जाती है।
- 11:22:28सैडलर यूनिवर्सिटी कमीशन 19179
- 11:22:33इस कमीशन कोलकाता यूनिवर्सिटी की
- 11:22:35प्रॉब्लम्स को स्टडी और रिपोर्ट करने के
- 11:22:38लिए फॉर्म किया गया था। लेकिन इसकी
- 11:22:40रेकमेंडेशंस बाकी यूनिवर्सिटीज पर भी
- 11:22:42एप्लीकेबल थी। कमीशन ने स्कूल एजुकेशन से
- 11:22:45लेकर यूनिवर्सिटी एजुकेशन तक एंटायर फील्ड
- 11:22:48को रिव्यू किया था। इसका मानना था कि
- 11:22:51यूनिवर्सिटी एजुकेशन को इंप्रूव करने के
- 11:22:53लिए पहले सेकेंडरी एजुकेशन का इंप्रूव
- 11:22:56होना जरूरी है। अपनी रिपोर्ट में इसने
- 11:22:58बहुत से सुझाव दिए थे। जैसे कि स्कूल
- 11:23:01कोर्स 12 साल का होना चाहिए। स्टूडेंट्स
- 11:23:04को मैट्रिक की जगह इंटरमीडिएट स्टेज के
- 11:23:07बाद यूनिवर्सिटी में थ्री ईयर डिग्री
- 11:23:09कोर्स के लिए एंटर करना चाहिए। साथ ही
- 11:23:12सेकेंडरी और इंटरमीडिएट एजुकेशन के
- 11:23:14एडमिनिस्ट्रेशन और कंट्रोल के लिए एक
- 11:23:17सेपरेट बोर्ड होना चाहिए। इसके अलावा
- 11:23:20यूनिवर्सिटी रेगुलेशंस की फ्रेमिंग में
- 11:23:22रिजिडिटी कम होनी चाहिए और यूनिवर्सिटी को
- 11:23:25सेंट्रलाइज्ड यूनिटरी रेजिडेंशियल टीचिंग
- 11:23:28ऑटोनॉमस बॉडी की तरह फंक्शन करना चाहिए ना
- 11:23:31कि स्कैटर्ड एफिलिएटेड कॉलेजेस की तरह।
- 11:23:35इसके साथ ही फीमेल एजुकेशन, अप्लाइड
- 11:23:37साइंटिफिक और टेक्नोलॉजिकल एजुकेशन,
- 11:23:40टीचर्स ट्रेनिंग और प्रोफेशनल और वोकेशनल
- 11:23:43कॉलेजेस को और ज्यादा एक्सटेंड करना
- 11:23:45चाहिए।
- 11:23:461920 में गवर्नमेंट सैडलर रिपोर्ट की
- 11:23:49रेकमेंडेशंस को प्रोविंशियल गवर्नमेंट्स
- 11:23:51को फॉरवर्ड करती है और इन्हें इंप्लीमेंट
- 11:23:54करने के लिए कहा जाता है। सैडलर कमीशन के
- 11:23:57बाद 1929 में हार्ड डॉग कमेटी का फॉर्मेशन
- 11:24:01होता है। हार्ड डॉग कमेटी 1929
- 11:24:06स्कूल्स और कॉलेजेस की संख्या बहुत ज्यादा
- 11:24:08बढ़ने से एजुकेशन स्टैंडर्ड्स गिरने लगते
- 11:24:11हैं। इसलिए एजुकेशन के डेवलपमेंट पर
- 11:24:14रिपोर्ट देने के लिए हार्ड टॉक कमेटी को
- 11:24:16सेटअप किया जाता है। इसकी मेन रेकमेंडेशंस
- 11:24:19इस तरह से थी। पहला सुझाव था कि प्राइमरी
- 11:24:23एजुकेशन पर जोर देना चाहिए। लेकिन इसके
- 11:24:26लिए किसी कंपल्शन या हेस्टी एक्सपेंशन की
- 11:24:29जरूरत नहीं है। दूसरा यह था कि सिर्फ
- 11:24:32डिर्विंग स्टूडेंट्स को ही हाई स्कूल और
- 11:24:34इंटरमीडिएट स्टेज तक जाना चाहिए। जबकि
- 11:24:37एवरेज स्टूडेंट्स को एट्थ स्टैंडर्ड के
- 11:24:40बाद वोकेशनल कोर्सेज की तरफ डायवर्ट कर
- 11:24:42देना चाहिए। इसके अलावा यूनिवर्सिटी
- 11:24:45एजुकेशन के स्टैंडर्ड्स में इंप्रूवमेंट
- 11:24:47लाने के लिए एडमिशंस को रिस्ट्रिक्ट करने
- 11:24:50की जरूरत है। आइए अब ब्रिटिश रूल के दौरान
- 11:24:53आए लास्ट एजुकेशन प्लान की तरफ चलते हैं।
- 11:24:57साजेंट प्लान ऑफ एजुकेशन।
- 11:25:00साजेंट प्लान को 1944 में सेंट्रल
- 11:25:03एडवाइज़री बोर्ड ऑफ एजुकेशन द्वारा तैयार
- 11:25:06किया गया था। इसकी मेजर रेकमेंडेशंस कुछ
- 11:25:09इस तरह से थी। इसमें 3 से छ साल के एज
- 11:25:12ग्रुप के लिए प्री प्राइमरी एजुकेशन, छ से
- 11:25:1511 साल के एज ग्रुप के लिए फ्री यूनिवर्सल
- 11:25:18और कंपलसरी एलिमेंट्री एजुकेशन, 11 से 17
- 11:25:22साल के सिलेक्टेड चिल्ड्रन के लिए हाई
- 11:25:24स्कूल एजुकेशन और फिर हायर सेकेंडरी के
- 11:25:27बाद तीन साल की यूनिवर्सिटी कोर्स का
- 11:25:29सुझाव था। हाई स्कूल दो तरह के होने थे।
- 11:25:33पहला एकेडमिक और दूसरा टेक्निकल और
- 11:25:36वोकेशनल। इसके अलावा एडिक्वेट टेक्निकल,
- 11:25:40कमर्शियल और आर्ट्स एजुकेशन को रेकमेंड
- 11:25:42किया गया था। इंटरमीडिएट कोर्स को अबॉलिश
- 11:25:46करने का प्रस्ताव था। इसमें 20 साल के
- 11:25:48अंदर एडल्ट लिटरेसी को खत्म करने का
- 11:25:50टारगेट दिया गया था। इसके साथ ही टीचर्स
- 11:25:53ट्रेनिंग, फिजिकल एजुकेशन और फिजिकली और
- 11:25:56मेंटली हैंडीकैप्ड के लिए एजुकेशन पर भी
- 11:25:59स्ट्रेस किया गया था। ऑब्जेक्टिव यह था कि
- 11:26:0240 साल के अंदर इंडिया में इंग्लैंड के
- 11:26:05जैसे लेवल ऑफ एजुकेशन अटेन हो जाना चाहिए।
- 11:26:08यह प्लान काफी बोल्ड और कॉम्प्रिहेंसिव तो
- 11:26:10था लेकिन इसमें इंप्लीमेंटेशन के लिए कोई
- 11:26:13भी मेथोडोलॉजी प्रपोज नहीं की गई थी। यह
- 11:26:16तो बात हो गई एजुकेशन से रिलेटेड डिफरेंट
- 11:26:19कमीशंस और प्लांस की। आइए अब एजुकेशन की
- 11:26:22ब्रिटिश पॉलिसी को इवैल्यूएट करते हैं।
- 11:26:25इवैल्यूएशन ऑफ ब्रिटिश पॉलिसी ऑन एजुकेशन।
- 11:26:29दोस्तों, सबसे पहले तो ब्रिटिशर्स ने
- 11:26:31मॉडर्न एजुकेशन के एक्सपेंशन को लेकर जो
- 11:26:34मेजर्स लिए थे, वह पूरी तरह इनएडीिक्वेट
- 11:26:37थे। और दूसरा इनके पीछे उनका मकसद इंडियंस
- 11:26:40की भलाई करना तो बिल्कुल भी नहीं था। फिर
- 11:26:44क्या रीज़ंस थे कि ब्रिटिशर्स ने इंडिया
- 11:26:46में एजुकेशन को प्रमोट किया? इसमें सबसे
- 11:26:49पहला कारण था इनलाइटेंड इंडियंस,
- 11:26:52क्रिश्चियन मिशनरीज और ह्यूमैनिटेरियन
- 11:26:54ऑफिशियल्स की तरफ से मॉडर्न एजुकेशन के
- 11:26:57फेवर में किया गया एजिटेशन।
- 11:27:00दूसरा कारण था एडमिनिस्ट्रेशन संभालने के
- 11:27:02लिए एजुकेटेड इंडियंस की चीफ सप्लाई। इसके
- 11:27:06अलावा ब्रिटिशर्स का यह भी मानना था कि
- 11:27:09एजुकेटेड इंडियंस ब्रिटिश मैन्युफैक्चरर्ड
- 11:27:11गुड्स के लिए डिमांड भी क्रिएट करेंगे।
- 11:27:14साथ ही एक व्यू यह भी था कि वेस्टर्न
- 11:27:17एजुकेशन इंडियंस को ब्रिटिश रूल एक्सेप्ट
- 11:27:19करने में हेल्प करेगी क्योंकि इसमें
- 11:27:22ब्रिटिश कॉनकरर्स और उनके एडमिनिस्ट्रेशन
- 11:27:24को ग्लोरिफाई किया जाता था। इस तरह
- 11:27:27ब्रिटिशर्स मॉडर्न एजुकेशन का यूज इंडिया
- 11:27:30में अपनी पॉलिटिकल अथॉरिटी को और मजबूत
- 11:27:33करने के लिए करना चाहते थे। वेस्टर्न
- 11:27:35एजुकेशन के डेवलपमेंट के साथ ही इंडियन
- 11:27:38लर्निंग के ट्रेडिशनल सिस्टम का धीरे-धीरे
- 11:27:40डिक्लाइन होने लगता है। क्योंकि इसे किसी
- 11:27:43भी तरह का सपोर्ट नहीं मिल पाता। स्पेशली
- 11:27:461844 के बाद जब यह डिक्लेअ कर दिया जाता
- 11:27:49है कि गवर्नमेंट एंप्लॉयमेंट के लिए
- 11:27:52इंग्लिश की नॉलेज होना कंपलसरी है। इसके
- 11:27:55साथ ही ब्रिटिशर्स मास एजुकेशन को
- 11:27:58नेगलेक्ट करते हैं। जिसकी वजह से बड़े
- 11:28:01स्तर पर इलिटरेसी देखने को मिलती है। 191
- 11:28:05में यह 84% थी और 1921 में 92% क्योंकि
- 11:28:11एजुकेशन के लिए पैसे देने होते थे। इसलिए
- 11:28:14यह सिर्फ अपर और रिचर क्लासेस की मोनोपोली
- 11:28:16बन जाती है और इसकी वजह से एजुकेटेड और
- 11:28:19मासेस के बीच बहुत बड़ा लिंग्विस्टिक और
- 11:28:22कल्चरल गल्फ क्रिएट हो जाता है। इसके
- 11:28:25अलावा ब्रिटिशर्स ने वुमेन की एजुकेशन को
- 11:28:28पूरी तरह नेगलेक्ट किया था। क्योंकि एक तो
- 11:28:30गवर्नमेंट ऑर्थोडॉक्स सेक्शंस को नाराज
- 11:28:33नहीं करना चाहती थी और दूसरा वुमेन को
- 11:28:36एजुकेशन देने से कॉलोनियल रूल को कोई
- 11:28:38फायदा भी नहीं था। साइंटिफिक और टेक्निकल
- 11:28:42एजुकेशन पर भी बहुत ध्यान नहीं दिया गया
- 11:28:44था। 1857 तक सिर्फक, बॉम्बे और मद्रास में
- 11:28:49ही तीन मेडिकल कॉलेजेस थे और सिर्फ एक ही
- 11:28:52अच्छा इंजीनियरिंग कॉलेज था रुड़की में और
- 11:28:55वह भी सिर्फ यूरोपियंस और यूरेशियंस के
- 11:28:57लिए ही ओपन था।
- 11:29:00कंक्लूजन
- 11:29:01इस तरह हम कह सकते हैं कि ब्रिटिशर्स ने
- 11:29:04सिर्फ और सिर्फ अपने फायदे के लिए इंडिया
- 11:29:07में मॉडर्न एजुकेशन की शुरुआत की थी।
- 11:29:10लेकिन इंडियंस ने इसका पूरा फायदा उठाया।
- 11:29:12मॉडर्न एजुकेशन के आइडियाज ने इंडिया में
- 11:29:15जिस एजुकेटेड मिडिल क्लास को तैयार किया,
- 11:29:18वही आगे जाकर इंडियन नेशनल मूवमेंट को लीड
- 11:29:21करती है। दोस्तों, यहां हमारा पार्ट बी भी
- 11:29:25खत्म हुआ। अब वीडियो के लास्ट एंड फाइनल
- 11:29:28पार्ट को शुरू करते हैं। जो बात करता है
- 11:29:31मेन स्ट्रीम फ्रीडम स्ट्रगल के साथ चलती
- 11:29:33पैरेलल मूवमेंट्स की। इसमें हम लेफ्ट के
- 11:29:36राइज, कैपिटलिस्ट क्लास के राइज, वर्कर
- 11:29:39क्लास के मूवमेंट्स और प्रिंसली स्टेट्स
- 11:29:42में चल रहे मूवमेंट्स जैसे टॉपिक्स को कवर
- 11:29:44करने वाले हैं। तो आइए शुरू करते हैं द
- 11:29:47लास्ट सेगमेंट ऑफ दिस वीडियो। द स्टोरी ऑफ़
- 11:29:50पार्टीशन।
- 11:29:52दोस्तों, 14th अगस्त 1947 के खत्म होने
- 11:29:56में बस कुछ ही वक्त बचा था और आधी रात को
- 11:29:59इतिहास लिखा जाना था। नई दिल्ली में स्थित
- 11:30:02क्स्टिटुएंट असेंबली के मिडनाइट सेशन को
- 11:30:05एड्रेस करने आए जवाहरलाल नेहरू ने एक
- 11:30:08ऐतिहासिक भाषण दिया। नाम था ट्रिस्ट वि
- 11:30:12डेस्टिनी। जिस तरह नेहरू आजादी को लेकर
- 11:30:15होपफुल थे वैसे ही उनका भाषण भी बेहद
- 11:30:18होपफुल था। उन्होंने भारत की आजादी को
- 11:30:21अनाउंस किया और कहा एट द स्ट्रोक ऑफ द
- 11:30:24मिडनाइट आवर व्हेन द वर्ल्ड स्लीप्स
- 11:30:27इंडिया विल अवेक टू लाइफ एंड फ्रीडम।
- 11:30:30कॉनस्टिटुएंट असेंबली खचाखच भरी थी। सारे
- 11:30:34दलों के नेता मौजूद थे। लेकिन भारत की
- 11:30:37आजादी के सबसे बड़े नेता महात्मा गांधी
- 11:30:40वहां नहीं थे। तो कहां थे गांधी? दोस्तों
- 11:30:44वो गांधी जिन्हें नेताजी सुभाष चंद्र बोस
- 11:30:47ने आपसी मतभेद के बावजूद राष्ट्रपिता या
- 11:30:50फादर ऑफ द नेशन डिक्लेअर किया। वो दिल्ली
- 11:30:53से हजारों किलोमीटर दूर नोवाखली में थे।
- 11:30:57जी हां, जब देश आजादी का जश्न मना रहा था
- 11:31:01तब गांधी बंगाल के नोआखली में लगी आग को
- 11:31:04बुझाने की कोशिश कर रहे थे। हमारी आज की
- 11:31:07कहानी इसी आग की है जो आजादी के वक्त पूरे
- 11:31:11देश में सुलग रही थी। आज की कहानी उस घटना
- 11:31:13की है जिसने आजादी के जश्न को फीका कर
- 11:31:17दिया। वो घटना जिसने भारत को अंग्रेजी
- 11:31:20हुकूमत से आजादी तो दिलाई लेकिन ऐसी कीमत
- 11:31:23पर जिसका हिसाब भी लगा पाना नामुमकिन था।
- 11:31:27यह कहानी है दो ऐसे मुल्कों की स्थापना की
- 11:31:30जो 75 साल बाद भी एक दूसरे के दुश्मन बने
- 11:31:34हुए हैं। दोस्तों, यह कहानी है भारत के
- 11:31:39विभाजन की। इंडिया डिवाइडेड एट द स्ट्रोक
- 11:31:42ऑफ द मिडनाइट आवर। 15th अगस्त 1947
- 11:31:47लगभग 200 सालों के दमन के बाद ब्रिटिश
- 11:31:50राज्य ने भारत छोड़ा और भारतीय उपमहाद्वीप
- 11:31:54दो आजाद देशों में विभाजित हुआ। हिंदू
- 11:31:57मेजॉरिटी सेकुलर इंडिया और मुस्लिम
- 11:32:00मेजॉरिटी सेकुलर पाकिस्तान। भारत तो आज भी
- 11:32:03सेकुलर है लेकिन पाकिस्तान का सेकुलरिज्म
- 11:32:071955 में खत्म हो गया और वो एक इस्लामिक
- 11:32:11स्टेट बन गया। खैर पार्टीशन का अंदाजा
- 11:32:131947 के पहले ही लगाया जा रहा था। और जब
- 11:32:16ब्रिटिशर्स के इंडिया एग्जिट की अटकलें
- 11:32:19तेज हुई तो हजारों लाखों की संख्या में
- 11:32:22हिंदू, सिख और मुस्लिम्स पाकिस्तान और
- 11:32:25इंडिया के बीच माइग्रेट करने लगे। पर
- 11:32:28इनमें से कई लाखों लोग तो बॉर्डर पर पहुंच
- 11:32:31ही नहीं पाए। पार्टीशन की खबरें तेज हुई
- 11:32:34और ब्रिटेन एक हेस्टी विड्रॉल के प्लांस
- 11:32:36बनाने लगा। परिणाम स्वरूप भारत में
- 11:32:40अव्यवस्था और अराजकता के बादल छा गए। इस
- 11:32:43अराजकता के सबसे बड़े शिकार बने दो बॉर्डर
- 11:32:46प्रोविंसेस पंजाब और बंगाल। जहां दंगों की
- 11:32:50आग सुलगने लगी। अंग्रेजों ने यह विभाजन
- 11:32:54पेपर पर लाइंस खींच कर तो कर दिया। पर ऑन
- 11:32:56ग्राउंड इसका अंजाम था। हजारों लाखों
- 11:33:00लोगों का कत्लेआम और डिस्प्लेसमेंट।
- 11:33:03महिलाओं के साथ रेप्स हुए और बच्चों को
- 11:33:05किडनैप कर बाजारों में बेच दिया गया।
- 11:33:08नरसंहार, सेक्सुअल वायलेंस, डकैती, लूट,
- 11:33:12फोर्स कन्वर्शनंस यह सब आम बात हो गई थी।
- 11:33:16एक रिपोर्ट के हिसाब से लगभग 75,000 औरतों
- 11:33:19का हिंसक भीड़ और दंगाइयों द्वारा रेप
- 11:33:22किया गया और यह सिर्फ रिकॉर्डेड डाटा है।
- 11:33:25इन रियलिटी तो यह नंबर लाखों में था।
- 11:33:28पड़ोसी ही पड़ोसी का दुश्मन बन गया।
- 11:33:31हैवानियत अपने चरम पर थी। फेमस लेखक सादत
- 11:33:35हसन मंटो उस दौर में विभाजन के इस भयावह
- 11:33:38रूप को अपनी कहानियों में बताते रहे।
- 11:33:41खुशवंत सिंह ने भी अपनी किताब अ ट्रेन टू
- 11:33:43पाकिस्तान में पार्टीशन के इस कुरूप चेहरे
- 11:33:46की चर्चा की। देश भर में फैली इस अराजकता
- 11:33:49ने देश को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को
- 11:33:52झकझोर कर रख दिया। हजारों सालों से
- 11:33:56लार्जली एक शांतिपूर्वक माहौल में रह रहे
- 11:33:59लोग अचानक दुश्मन बन गए और उनके बीच
- 11:34:02बॉर्डर्स बना दिए गए। लेकिन दोस्तों, यह
- 11:34:05दुश्मनी अचानक से पैदा नहीं हुई थी। इस
- 11:34:08दुश्मनी का जन्म एक कॉन्शियस प्रोसेस या
- 11:34:11सोची समझी साजिश के तहत हुआ। यह कॉन्शियस
- 11:34:14प्रोसेस क्या था? आगे हम उसकी ही चर्चा
- 11:34:17करेंगे और देखेंगे कहानी भारत की रोड टू
- 11:34:21पार्टीशन की।
- 11:34:23टू नेशन थ्यरी रोड टू पार्टीशन। दोस्तों,
- 11:34:26इंडिया का पार्टीशन उस लास्ट मिनट
- 11:34:29एग्रीमेंट का नतीजा था जिसके तहत
- 11:34:31ब्रिटिशर्स भारत को आजादी देने वाले थे।
- 11:34:35लेकिन इस पार्टीशन के बीज कब बोए गए? इसकी
- 11:34:38कहानी काफी पुरानी है। ब्रिटिशर्स के
- 11:34:40खिलाफ जब आजादी की लड़ाई छेड़ी गई तो
- 11:34:42इंडियन नेशनल कांग्रेस उस लड़ाई का सबसे
- 11:34:45प्रॉमिनेंट ऑर्गेनाइजेशन बनके उभरा। इसका
- 11:34:48फॉर्मेशन 1885 में दादाभाई नौरोजी, एओ
- 11:34:52ह्यूम और डीसी वाचा जैसे नेताओं ने किया
- 11:34:55था। लेकिन पार्टीशन तक आते-आते इसका मेन
- 11:34:58कंट्रोल महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू
- 11:35:00जैसे नेताओं के हाथ में चला गया। इंडियन
- 11:35:03नेशनल कांग्रेस और उसके मोस्ट प्रोमिनेंट
- 11:35:05नेता इंक्लूडिंग महात्मा गांधी वन नेशन के
- 11:35:08आईडिया के सपोर्टर थे। यानी वह मानते थे
- 11:35:12कि देश में रहने वाले अलग-अलग धर्म और
- 11:35:14जाति के लोग एक राष्ट्र बनाते हैं और वह
- 11:35:18उसमें पीसफुली रह सकते हैं। यही वजह थी कि
- 11:35:21महात्मा गांधी पार्टीशन से इतने आहत हुए
- 11:35:24कि जब दिल्ली में कांग्रेस आजादी का जश्न
- 11:35:27मना रही थी तब गांधी नोवाखली जाकर
- 11:35:30दंगाइयों को हथियार रखने के लिए मना रहे
- 11:35:33थे। गांधी का वन नेशन का सपना टूट गया था।
- 11:35:37वह खुद भी टूट गए थे। खैर कांग्रेस और
- 11:35:39गांधी के आइडियाज के खिलाफ सबसे बड़ा
- 11:35:42ऑोजिशन आया राइट विंग पॉलिटिकल ग्रुप से
- 11:35:45जिनका जन्म कांग्रेस के सेकुलरिज्म के
- 11:35:48अगेंस्ट एक रिएक्शन के रूप में हुआ था।
- 11:35:51मुस्लिम लीग जैसे ऑर्गेनाइजेशंस जो
- 11:35:53माइनॉरिटीज को रिप्रेजेंट करने का दावा कर
- 11:35:56रहे थे। उन्होंने स्पेसिफिकली कांग्रेस के
- 11:35:58वन नेशन के आईडिया को चैलेंज किया।
- 11:36:01लीग के सबसे ताकतवर नेता मोहम्मद अली
- 11:36:04जिन्ना ने कांग्रेस को हिंदू ऑर्गेनाइजेशन
- 11:36:07डिक्लेअ कर दिया और गांधी पर हिंदू
- 11:36:09मेजॉरिटेरियनिज्म को प्रमोट करने का आरोप
- 11:36:12लगाया। जिन्ना ने देश के मुस्लिम्स को यह
- 11:36:14बोला किकि 80% लोग भारत में हिंदू हैं और
- 11:36:18डेमोक्रेसी में मेजॉरिटी वोट से ही सरकार
- 11:36:21बनती है। इसलिए आने वाले समय में
- 11:36:23मुस्लिम्स के खिलाफ डिस्क्रिमिनेशन होगा।
- 11:36:26इसलिए मुस्लिम्स को एक अलग देश बनाने की
- 11:36:29जरूरत है। जिन्ना ने अपनी टू नेशन थरी में
- 11:36:32यह भी कहा कि मुस्लिम्स और हिंदूस के
- 11:36:35इंटरेस्ट्स अलग-अलग हैं और इसलिए वह एक
- 11:36:38देश में शांति से कभी रह ही नहीं सकते।
- 11:36:41लीग के अलावा डॉ. शशि थरूर कहते हैं कि
- 11:36:44ऐसे ही सिमिलर आर्गुमेंट्स हिंदू महासभा
- 11:36:47के नेता विनायक दामोदर सावरकर भी दे रहे
- 11:36:50थे।
- 11:36:51डॉ. थरूर अपनी किताब व्हाई आई एम अ हिंदू
- 11:36:53में यह दावा करते हैं कि टू नेशन थ्यरी के
- 11:36:56सबसे पहले दावेदार सावरकर थे। जिन्होंने
- 11:36:591937 में इस थ्योरी को प्रोपाउंड किया। मच
- 11:37:03बिफोर मुस्लिम लीग्स पाकिस्तान रेजोल्यूशन
- 11:37:06ऑफ 1940।
- 11:37:08थ्योरी किसने पहले दी, किसने बाद में या
- 11:37:10किसने दी या किसने नहीं दी या किसकी थ्यरी
- 11:37:13कैसे डिफरेंट थी? इस पर तर्क और वितर्क आज
- 11:37:16भी जारी हैं। लेकिन एक बात साफ है और वह
- 11:37:19यह कि टू नेशन का आईडिया जन्म ले चुका था
- 11:37:23और यह इंडियन पॉलिटिकल अवेकनिंग का वो
- 11:37:25नेगेटिव आउटकम था जो विभाजन का कारण बनने
- 11:37:29वाला था। एक और बात काफी क्रूशियल है टू
- 11:37:32नेशन थ्यरी और देश में बढ़े हिंदू मुस्लिम
- 11:37:35डिवाइड के लिए कांग्रेस मुस्लिम लीग और
- 11:37:38हिंदू महासभा कॉन्फ्लिक्ट से भी ज्यादा
- 11:37:40रिस्पांसिबल ब्रिटिशर्स थे। चलिए देखते
- 11:37:43हैं कैसे। लेइंग द फाउंडेशन, पार्टीशन एंड
- 11:37:47ब्रिटिश डिवाइड एंड रूल। अंग्रेज जब भारत
- 11:37:51आए तो उन्होंने कई रिबेलियंस और रिवोल्ट्स
- 11:37:53फेस किए। 1857 का विद्रोह अंग्रेजी ताकत
- 11:37:57के लिए सबसे बड़ा एग्जिस्टेंशियल थ्रेट
- 11:38:00बना। क्योंकि इसमें हिंदू-मुस्लिम यूनिटी
- 11:38:02बढ़-चढ़कर देखी गई। कई हिंदू लीडर्स ने
- 11:38:05मुगल एपरर बहादुर शाह जफर के अंडर
- 11:38:08अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया था।
- 11:38:11ब्रिटिशर्स ने इस विद्रोह को कुचल तो दिया
- 11:38:14लेकिन उन्होंने यह कंक्लूड किया कि अगर
- 11:38:17उन्हें इंडिया में राज करना है तो उन्हें
- 11:38:19हिंदू मुस्लिम यूनिटी को ब्रेक करना ही
- 11:38:22होगा। इसलिए उन्होंने डिविड एट इंपेरा नाम
- 11:38:25के एक ओल्ड रोमन मैक्सिमम पर बेस्ड डिवाइड
- 11:38:28एंड रूल पॉलिसी अपनाई और अपनी पॉलिसीज के
- 11:38:31थ्रू वो हिंदू मुस्लिम डिवाइड को बढ़ावा
- 11:38:33देने लगे। ऐसा नहीं है कि हिंदू मुस्लिम
- 11:38:36कॉन्फ्लिक्ट पहले नहीं था। लेकिन उसका
- 11:38:39स्केल काफी लोकलाइज्ड था और इतिहासकार
- 11:38:42दावा करते हैं कि लार्जली हिंदू मुस्लिम्स
- 11:38:45इंडिया में पीसफुली ही रहते थे। यही
- 11:38:48भारतीय सिविलाइजेशनल ग्लोरी का प्रतीक
- 11:38:50बना। लेकिन ब्रिटिश डिवाइड एंड रूल पॉलिसी
- 11:38:53ने हिंदू मुस्लिम डिवाइड को एक नेशनल या
- 11:38:55राष्ट्रीय अवतार दे दिया। डिवाइड एंड रूल
- 11:38:59सिर्फ रिलीजियस लाइंस में नहीं हुआ। बल्कि
- 11:39:02हर पॉसिबल एंगल से किया गया। सिख्स को
- 11:39:05मुस्लिम्स के अगेंस्ट, एक कास्ट को दूसरी
- 11:39:07कास्ट के अगेंस्ट, एक रीजन को दूसरे रीजन
- 11:39:10के अगेंस्ट, ट्राइबल्स को नॉन ट्राइबल्स
- 11:39:13के अगेंस्ट एंड सो ऑन। यह डिवाइड एंड रूल
- 11:39:15हमें कई ब्रिटिश पॉलिसीज में दिखता है।
- 11:39:181857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने
- 11:39:21सिख्स, पठान और गुरखाज़ को अपीज़ करने के
- 11:39:24लिए मिलिट्री रिक्रूटमेंट में
- 11:39:26डिस्क्रिमिनेटरी पॉलिसी को अडॉप किया। ऐसा
- 11:39:29इसलिए क्योंकि सिख, पठान और गुरगाज़ ने
- 11:39:32ब्रिटिशर्स को विद्रोह में सपोर्ट किया
- 11:39:34था। जबकि अवध, बिहार और साउथ के सोल्जर्स
- 11:39:38के खिलाफ डिस्क्रिमिनेशन हुआ। क्योंकि यह
- 11:39:401857 विद्रोह के मेन सपोर्टर्स थे। इसके
- 11:39:44अलावा कास्ट बेसिस पर डिवीजन के लिए
- 11:39:46ब्रिटिशर्स ने कास्ट बेस्ड रेजीमेंट्स भी
- 11:39:49क्रिएट किए। ब्रिटिशर्स ने बाकी के
- 11:39:52एडमिनिस्ट्रेटिव जॉब्स में भी
- 11:39:54डिस्क्रिमिनेशन कर स्पेसिफिक कम्युनिटीज
- 11:39:56को अपीज़ करना चालू किया। कई एजुकेटेड और
- 11:39:59इनफ्लुएंशियल लीडर्स को इस्तेमाल करके भी
- 11:40:02ब्रिटिशर्स ने रिलीजियस डिवाइड को फ्यूल
- 11:40:04किया। फॉर एग्जांपल ब्रिटिशर्स ने
- 11:40:07एक्टिवली मुस्लिम रिफॉर्मर सर सैयद अहमद
- 11:40:10खान को पेट्रिनाइज किया और उनसे अर्ज किया
- 11:40:13कि वह मुस्लिम्स को इंडियन नेशनल कांग्रेस
- 11:40:15को बॉयकॉट करने के लिए मनाएं। समय और
- 11:40:18सिचुएशन के हिसाब से जो भी ग्रुप
- 11:40:20अंग्रेजों को फेवरेबल लगता वो उन्हें अपीज़
- 11:40:23करते और सोसाइटी का विभाजन करते। यह पूरी
- 11:40:26डिवाइड एंड रूल पॉलिसी अपने चरम पर तब
- 11:40:28पहुंची जब 199 का मौली मिंटो रिफॉर्म्स
- 11:40:32आया। इसके तहत मुस्लिम्स को सेपरेट
- 11:40:35इलेक्टोरेट दे दिया गया। इसके तहत मुस्लिम
- 11:40:38ही मुस्लिम कैंडिडेट को वोट कर सकता था और
- 11:40:41इसीलिए इसे कम्युनल इलेक्टोरेट भी कहा
- 11:40:44गया। इसने हिंदू मुस्लिम डिफरेंसेस को
- 11:40:46पॉलिटिसाइज और नेशनलाइज कर दिया और अब
- 11:40:50किसी भी प्रकार का रिकंसिलिएशन मुश्किल
- 11:40:52लगने लगा। कुछ हिस्टोरियंस तो यह भी दावा
- 11:40:56करते हैं कि 1857 के बाद हुए ऑलमोस्ट सारे
- 11:40:59दंगों को अंग्रेजों ने ही क्रिएट किया था।
- 11:41:03ब्रिटिश कलेक्टर्स सीक्रेटली हिंदू
- 11:41:05पंडित्स को पैसे देकर मुस्लिम्स के
- 11:41:07अगेंस्ट स्पीच देने को कहते और मौलवियों
- 11:41:10को पैसे देकर हिंदूस के अगेंस्ट स्पीच
- 11:41:13देने को। सिस्टमेटिक कम्युनल पोइजन
- 11:41:16कॉलोनियलिज्म का वो कुरूप चेहरा है जो
- 11:41:19हमारे समाज को आज तक हंट करता है। ना
- 11:41:22सिर्फ भारत में बल्कि पूरे साउथ एशिया
- 11:41:25में। खैर 25% पपुलेशन के साथ मुस्लिम्स
- 11:41:29ब्रिटिश इंडिया के लार्जेस्ट रिलीजियस
- 11:41:31माइनॉरिटी थे। वेस्टर्न प्रोविंसेस जैसे
- 11:41:34सिंध, पंजाब, एनडब्ल्यूएफपी और ईस्ट में
- 11:41:37बंगाल प्रोविंस के कई एरियाज में तो वो
- 11:41:40मेजॉरिटी में भी थे।
- 11:41:42यही वजह है कि मुस्लिम हिंदू डिवाइड
- 11:41:44ब्रिटिश पॉलिसी का प्रायोरिटी रहा।
- 11:41:47इंपीरियल रूल में मुस्लिम्स को कई
- 11:41:49पॉलिटिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव एडवांटेजेस
- 11:41:52दिए गए जिनके प्रति वो 1947 तक अकस्टम्ड
- 11:41:55हो गए थे। उन्हें डर था कि आजादी के बाद
- 11:41:58शायद उनसे यह बेनिफिट्स छीन लिए जाएंगे।
- 11:42:01स्पेशली अगर कांग्रेस पावर में आई तो ऊपर
- 11:42:05से जिन्ना ने ऑलरेडी कांग्रेस को हिंदूस
- 11:42:07की पार्टी डिक्लेअ कर दिया था। 1945-46
- 11:42:11में मुस्लिम लीग को प्रोविंशियल इलेक्शन
- 11:42:13में मेजॉरिटी मुस्लिम वोट्स मिले और अब
- 11:42:16मुस्लिम लीग यह दावा करने लगी कि वो
- 11:42:19मुस्लिम्स की सोल रिप्रेजेंटेटिव बॉडी है।
- 11:42:21चलिए अब देखते हैं कि कैसे ब्रिटिश हेस्टी
- 11:42:24विथड्रॉल ने सिचुएशन को बद से बदतर बना
- 11:42:27दिया। द हेस्टी ब्रिटिश विड्रॉल। दोस्तों,
- 11:42:30वर्ल्ड वॉर टू में सेटबैक्स फेस कर रहा
- 11:42:33ब्रिटिश एंपायर अपनी ग्लोबल हिजेनी ऑलरेडी
- 11:42:36खो चुका था। ऊपर से 1942 में महात्मा
- 11:42:39गांधी ने क्विट इंडिया मूवमेंट में करो या
- 11:42:41मरो का नारा दे दिया था। अंग्रेज वॉर
- 11:42:44जीतने के लिए इंडियंस का सपोर्ट चाहते थे
- 11:42:46और इसलिए उन्हें कांग्रेस के सपोर्ट की
- 11:42:49जरूरत थी। इसीलिए उन्होंने कई एक्टिव
- 11:42:52एफर्ट्स लिए फॉर कॉन्स्टिट्यूशनल
- 11:42:54रिफॉर्म्स। ऑगस्टफर, क्रिप्स मिशन और
- 11:42:57कैबिनेट मिशन। इंडिया में कॉन्स्टिट्यूशनल
- 11:43:00रिफॉर्म्स देने और आजादी की पॉसिबिलिटी को
- 11:43:03एक्सप्लोर करने के लिए भेजे गए। लेकिन इन
- 11:43:06सभी ने पाकिस्तान के फॉर्मेशन को लार्जली
- 11:43:08रिजेक्ट कर दिया। पर मार्च 1940 में
- 11:43:12मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान रेजोल्यूशन को
- 11:43:14पास कर सिचुएशन को काफी ज्यादा
- 11:43:16कॉम्प्लिकेट कर दिया था। लीग के लिए इस
- 11:43:19रेजोल्यूशन को इंप्लीमेंट करवाना एक
- 11:43:21क्रेडिबिलिटी टेस्ट था और ऐसे में
- 11:43:24कॉन्स्टिट्यूशनल एफर्ट्स को लेकर लीग और
- 11:43:27कांग्रेस में सेटलमेंट नामुमकिन लग रहा
- 11:43:30था। 1947 के कैबिनेट मिशन को कांग्रेस और
- 11:43:34लीग दोनों ने रिजेक्ट कर दिया और जिना ने
- 11:43:38पाकिस्तान के लिए डायरेक्ट एक्शन ल्च कर
- 11:43:40दिया। इसका नतीजा था लार्ज स्केल कम्युनल
- 11:43:44वायलेंस। अगस्त 1946 में द ग्रेटक
- 11:43:48किलिंग्स में लगभग 4000 लोग मारे गए और 1
- 11:43:51लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए। उधर मार्च
- 11:43:541947 में माउंटबटन नए वायसरॉय बना दिए गए।
- 11:43:58जिनका ऐ था ब्रिटिशर्स का इंडिया से
- 11:44:00स्पीडी विड्रॉल। आज अमेरिकन स्पीडी
- 11:44:03विड्रॉल ने जिस तरह का केओस अफगानिस्तान
- 11:44:06में क्रिएट किया है, वैसा ही कुछ तब भारत
- 11:44:09में हुआ। जून थर्ड को माउंटबेटन ने
- 11:44:12कांग्रेस और लीग को अल्टीमेटम दे दिया और
- 11:44:14कहा कि अगस्त 1947 तक ब्रिटिशर्स भारत
- 11:44:18छोड़ देंगे। इतने साल के कॉन्फ्लिक्ट के
- 11:44:21बाद अब नेताओं के पास कोई अल्टरनेटिव नहीं
- 11:44:24था। उनके पास केवल दो चॉइसेस थी। या तो वह
- 11:44:27बिना किसी स्यूशन के एक अराजक आजाद भारत
- 11:44:30को एक्सेप्ट करें। जहां प्रिंसली स्टेट्स
- 11:44:33अपनी इंडिपेंडेंस डिक्लेअ कर देश को
- 11:44:35फ्रेगमेंट कर डालें या फिर वो पार्टीशन को
- 11:44:38चूज़ कर केवल दो स्टेट्स बनाकर इस अराजकता
- 11:44:42को अवॉइड करें। मोस्ट लीडर्स जो टू सेपरेट
- 11:44:45स्टेट्स को अपोज कर रहे थे उन्हें भी इस
- 11:44:48सेटलमेंट को मजबूरी में एक्सेप्ट करना
- 11:44:50पड़ा। और इसके मेन कल्पेट थे अंग्रेज।
- 11:44:54उनकी कॉन्शियस डिवाइसिव पॉलिसी और उनका
- 11:44:57इरिस्पांसिबल बिहेवियर। खैर पाकिस्तान को
- 11:45:00सिरल रैडक्लिफ द्वारा डिमार्केटेड
- 11:45:03बाउंड्रीज के तहत सेपरेट कर दिया गया।
- 11:45:05पाकिस्तान ने 14th अगस्त को अपना
- 11:45:07इंडिपेंडेंस सेलिब्रेट किया और इंडिया ने
- 11:45:1015th अगस्त को नए बॉर्डर्स ऑफिशियली 17th
- 11:45:14अगस्त को अप्रूव हुए। लेकिन हेस्टी
- 11:45:17विथड्रॉल का एक और नतीजा था इरिस्पांसिबली
- 11:45:20डिमार्केटेड बाउंड्री। रैडक्लिफ ने बाद
- 11:45:23में एडमिट किया कि उनके द्वारा बनाई गई
- 11:45:26बाउंड्रीज आउट ऑफ डेट मैप्स और सेंसेस
- 11:45:28मटेरियल पर बेस्ड थी। इंडियंस स्ट्रोन
- 11:45:31अपार्ट हु वास रिस्पांसिबल फॉर वायलेंस।
- 11:45:35होना क्या था? पार्टीशन अनाउंस हुआ और
- 11:45:38दंगे भड़क उठे। लाखों लोग सेफर टेरिटरी के
- 11:45:41लिए माइग्रेट करने लगे। मुस्लिम्स
- 11:45:43पाकिस्तान की ओर और हिंदू और सिख इंडिया
- 11:45:46की ओर। एस्टीमेट्स के हिसाब से लगभग 1.5
- 11:45:50करोड़ लोगों को डिस्प्लेसमेंट झेलना पड़ा।
- 11:45:53डेथ्स की बात करें तो लगभग 2 से 20 लाख
- 11:45:56लोगों के मारे जाने की खबरें हैं।
- 11:45:59पार्टीशन ने ना सिर्फ वायलेंट डेथ्स को
- 11:46:01जन्म दिया बल्कि लोग डिजीज, भुखमरी और
- 11:46:04डेप्रिवेशन से भी मरे। कई हिस्टोरियंस तो
- 11:46:07यह भी कहते हैं कि भले ही पार्टीशन को
- 11:46:10अवॉइड कर पाना 1947 में मुश्किल था लेकिन
- 11:46:13वायलेंस, डेथ और डेप्रिवेशन शायद अवॉइड
- 11:46:17किया जा सकता था। जिस तरह से पार्टीशन के
- 11:46:20जिम्मेदार मेनली अंग्रेज थे, वैसे ही इस
- 11:46:23जेनोसाइड और क्राइसिस के जिम्मेदार भी वही
- 11:46:26थे। ब्रिटिशर्स खुद के लोगों को बचाने में
- 11:46:30बिजी रहे और पंजाब और बंगाल में लॉ एंड
- 11:46:33ऑर्डर मेंटेन करने से परहेज करते रहे।
- 11:46:35इसीलिए कहते हैं कि यह मैसिव क्राइसिस
- 11:46:38क्रिएट करने के बाद भी केवल छ से सात
- 11:46:41ब्रिटिशर्स ही इस दौर में मारे गए। चलिए
- 11:46:45अब देखते हैं कि विभाजन ने पोस्ट कॉलोनियल
- 11:46:47साउथ एशिया को कैसे बदल दिया। इंपैक्ट ऑन
- 11:46:51पोस्ट कॉलोनियल साउथ एशिया।
- 11:46:54दोस्तों इस ब्लडी पार्टीशन ने भारत को ही
- 11:46:57नहीं बल्कि पूरे साउथ एशिया को बदल कर रख
- 11:47:00दिया। एक तरफ जहां हजारों साल तक
- 11:47:03डायवर्सिटी इंडियन सबक्टिनेंट का हॉलमार्क
- 11:47:06रही और अलग-अलग कम्युनिटीज के लोग
- 11:47:08सद्भावना से रहते थे। वहीं दूसरी ओर
- 11:47:11पार्टीशन के हॉरर ने एक लॉन्ग लास्टिंग
- 11:47:14ट्रस्ट डेफिसिट को जन्म दिया। यह सिर्फ
- 11:47:17इंडिया में नहीं हुआ बल्कि पाकिस्तान और
- 11:47:19करंट डे बांग्लादेश में भी हुआ। भले ही
- 11:47:22पाकिस्तान सिर्फ मुस्लिम्स के लिए क्रिएट
- 11:47:25किया गया था। लेकिन इन रियलिटी ऐसा हुआ
- 11:47:27नहीं। वेस्ट पाकिस्तान में लगभग 1.6% नॉन
- 11:47:32मुस्लिम्स थे। ईस्ट पाकिस्तान या मॉडर्न
- 11:47:34डे बांग्लादेश में लगभग 22% नॉन मुस्लिम्स
- 11:47:38और इंडिया में लगभग 10% मुस्लिम्स 1951 के
- 11:47:42सेंसस के हिसाब से बच गए। यह सब्सटेंशियल
- 11:47:45नंबर था। स्पेशली इंडिया और बांग्लादेश
- 11:47:48में। पार्टीशन में हुई हिंसा का इंपैक्ट
- 11:47:51इन तीनों देशों में इतना गहरा हुआ कि
- 11:47:53समय-समय पर यह राइट्स के रूप में दिखाई
- 11:47:56देता है। इसी रिलीजियस स्ट्राइव का नतीजा
- 11:47:59था एक रिलीजियस फनेटिक द्वारा राष्ट्रपिता
- 11:48:02महात्मा गांधी की हत्या। अंग्रेज चले गए
- 11:48:05लेकिन उनका फैलाया हुआ जहर रहा। और इसने
- 11:48:08इन देशों में एक्सट्रीम आईडियोलॉजीस को और
- 11:48:11ज्यादा फ्यूल किया और एक्सट्रीमिस्ट
- 11:48:14ऑर्गेनाइजेशंस अपना प्रोपेगेंडा चलाते
- 11:48:16रहे। खैर सबसे ज्यादा खराब कंडीशन थी
- 11:48:19रेफ्यूजीस की जो डेप्रबिएशन फेस करते रहे।
- 11:48:23उनका रिहबिलिटेशन स्टेट के लिए सबसे बड़ा
- 11:48:26चैलेंज बना। दिल्ली रेफ्यूजी क्राइसिस का
- 11:48:29मेजर सेंटर था। रेफ्यूजी क्राइसिस 1947-48
- 11:48:34में कश्मीर को लेकर हुए इंडिया पाक वॉर के
- 11:48:37चलते और ज्यादा इंटेंस हो गई और रेफ्यूजीस
- 11:48:40और ज्यादा तेजी से माइग्रेट करने लगे। लोग
- 11:48:43छोटे-छोटे ग्रुप्स में 196 तक माइग्रेट
- 11:48:47करते रहे। बिकॉज़ ऑफ डिस्क्रिमिनेशन फेस्ड।
- 11:48:50इंडिया ने तो फिर भी ऑफिशियली खुद को
- 11:48:52सेुलर डिक्लेअ कर माइनॉरिटी प्रोटेक्शन का
- 11:48:54जिम्मा उठाया। लेकिन पाकिस्तान में ऐसा
- 11:48:57नहीं हुआ। दोस्तों, यह इतिहास 75 साल बाद
- 11:49:01भी भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को गाइड
- 11:49:03करता है। जहां एलओसी के अक्रॉस आए दिन सीस
- 11:49:07फायर वायलेशंस होते हैं। दोनों देश आज
- 11:49:10न्यूक्लियर आर्म्ड हैं। और इसीलिए दुनिया
- 11:49:13भर के देश न्यूक्लियर वॉर की पॉसिबिलिटी
- 11:49:15से परेशान रहते हैं। और इसीलिए फॉर्मर
- 11:49:18यूएस प्रेसिडेंट बिल क्लिंटन ने एलओसी को
- 11:49:21द मोस्ट डेंजरस प्लेस इन द वर्ल्ड बताया
- 11:49:24था।
- 11:49:25राइज ऑफ लेफ्ट इन इंडिया। दोस्तों, लेफ्ट
- 11:49:29और राइट को एज अ पॉलिटिकल टर्म पहली बार
- 11:49:31फ्रांस में यूज किया गया था। फ्रेंच
- 11:49:34रेवोल्यूशन के दौरान प्रो रेवोल्यूशनरीज
- 11:49:36को लेफ्ट और एंटी रेवोल्यूशनरीज को राइट
- 11:49:39कहकर डिस्टिंग्विश किया जाता था।
- 11:49:41इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन और फिर सोशलिस्ट
- 11:49:44और कम्युनिस्ट आईडियोलॉजी के आने के बाद
- 11:49:46इन टर्म्स का मीनिंग और वाइड हो जाता है।
- 11:49:49आज हम इंडिया में लेफ्ट आईडियोलॉजीस की
- 11:49:51ग्रोथ और इससे रिलेटेड पार्टीज के
- 11:49:53फॉर्मेशन की बात करेंगे। सबसे पहले जानते
- 11:49:56हैं कुछ ऐसी कंडीशंस को जो इंडिया में
- 11:49:59लेफ्ट आईडियोलॉजीस की ग्रोथ को फेवर करती
- 11:50:01हैं। सरकमस्ट्ससेस फेवरिंग ग्रोथ ऑफ लेफ्ट
- 11:50:05आईडियोलॉजीस इन इंडिया।
- 11:50:07फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के एंड के दौरान कुछ
- 11:50:10ऐसे पॉलिटिकनिक सरकमस्ट्ससेस बनते हैं
- 11:50:13जिनकी वजह से इंडिया में लेफ्टिज्म ग्रो
- 11:50:15करता है। जैसे कि वॉर अपने साथ फाइनेंशियल
- 11:50:18बर्डन्स लेकर आता है। डेली नेसेसिटीज की
- 11:50:21चीजों के दाम आसमान छूने लगते हैं। देश
- 11:50:24में फेमिन जैसे हालात बन जाते हैं और ऐसे
- 11:50:26में इंडस्ट्रियलिस्ट अपने मुनाफे में लगे
- 11:50:29होते हैं। इस सबसे इंपीरियलिस्ट
- 11:50:31कैपिटलिस्ट डोमिनेशन के इवल्स एक्सपोज
- 11:50:33होते हैं। इसके अलावा मार्क्स के
- 11:50:36रेवोल्यूशनरी आइडियाज और यूएसएसआर का
- 11:50:38फॉर्मेशन इंडियन इंटेलेक्चुअल्स को
- 11:50:40इंस्पायर करता है। इसी समय गांधी जी
- 11:50:43द्वारा स्वराज और स्वदेशी के मैसेज को देश
- 11:50:46के कोने-कोने में फैलाने की कोशिश की जाती
- 11:50:48है जो पॉलिटिकल मूवमेंट को एक नई दिशा
- 11:50:51देता है। और ऐसे में एक ऑर्गेनाइज्ड और
- 11:50:54आईडियोलॉजिकली इंस्पायर्ड सोशलिस्ट
- 11:50:56मूवमेंट के लिए जमीन तैयार हो जाती है।
- 11:50:59इसके साथ ही एजुकेटेड मिडिल क्लास की एक
- 11:51:01नई जनरेशन अनइंप्लॉयमेंट की वजह से
- 11:51:04लिबरलिज्म में अपना विश्वास खो देती है और
- 11:51:07रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट आईडियोलॉजी की तरफ
- 11:51:09अट्रैक्ट होती है। इस तरह लेफ्टिस्ट
- 11:51:12मूवमेंट की शुरुआत इंडिया में होने लगती
- 11:51:14है। आइए अब इंडिया में इसके डेवलपमेंट को
- 11:51:17डिटेल में देखते हैं। द लेफ्ट मूवमेंट्स।
- 11:51:21इंडिया में लेफ्ट मूवमेंट के इमर्जेंस को
- 11:51:24दो मेन स्ट्रीम्स में डिवाइड किया जा सकता
- 11:51:26है। पहला कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के
- 11:51:29प्लेटफार्म पर कम्युनिस्ट का राइज जो कि
- 11:51:31इंटरनेशनल कम्युनिस्ट मूवमेंट की ब्रांच
- 11:51:34की तरह फंक्शन करते हैं और लार्जली कॉमेंट
- 11:51:37द्वारा ही कंट्रोल किए जाते हैं। दूसरी
- 11:51:40स्ट्रीम में इंडियन नेशनल कांग्रेस के
- 11:51:42विदिन लेफ्ट का राइज आता है। उदाहरण के
- 11:51:45तौर पर 1934 में फॉर्म की गई कांग्रेस
- 11:51:48सोशलिस्ट पार्टी। यह डेमोक्रेटिक सोशलिज्म
- 11:51:52की आईडियोलॉजी से इंस्पायर्ड होते हैं।
- 11:51:54सबसे पहले बात करते हैं फर्स्ट स्ट्रीम
- 11:51:56यानी कि कम्युनिस्ट पार्टी की। द
- 11:51:58कम्युनिस्ट पार्टी
- 11:52:00एमएन रॉय और सात इंडियन एग्रेंट्स अक्टूबर
- 11:52:041920 में ताशकंद में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ
- 11:52:06इंडिया की फॉर्मेशन करते हैं। इसके अलावा
- 11:52:09इंडिया में भी 1920 के बाद बहुत से लेफ्ट
- 11:52:12विंग और कम्युनिस्ट ग्रुप्स एकिस्टेंस में
- 11:52:14आ चुके होते हैं। इनमें से ज्यादातर
- 11:52:17ग्रुप्स दिसंबर 1925 में कानपुर में एक
- 11:52:20साथ आकर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया नाम
- 11:52:22से एक ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन बनाते हैं।
- 11:52:25कम्युनिस्ट मूवमेंट के इतिहास को पांच फेस
- 11:52:28में डिवाइड किया जा सकता है। एक-एक करके
- 11:52:30इनको डिटेल में समझते हैं।
- 11:52:33फर्स्ट फज़ द पीरियड ऑफ थ्री कंस्परेसी
- 11:52:37ट्रायल्स।
- 11:52:39मॉस्को की कम्युनिस्ट यूनिवर्सिटी फॉर
- 11:52:41टॉयलर्स ऑफ द ईस्ट में ट्रेनिंग लेने के
- 11:52:43बाद कम्युनिस्ट रेवोल्यूशनरीज का पहला
- 11:52:46बैंड इंडिया आता है। लेकिन यहां इन्हें
- 11:52:48ब्रिटिश क्राउन के अगेंस्ट कंस्परेसी के
- 11:52:50लिए अक्यूज किया जाता है। जिस वजह से यह
- 11:52:53अपना ज्यादा प्रभाव बना ही नहीं पाते।
- 11:52:55इसके बाद कम्युनिस्ट मूवमेंट तब थोड़ा
- 11:52:58स्ट्रांग बनता है जब ग्रेट ब्रिटेन की
- 11:53:00कम्युनिस्ट पार्टी इंडिया में इसे
- 11:53:02सुपरवाइज करने का फैसला लेती है। इनकी तरफ
- 11:53:04से फिलिप्स स्प्रेट को दिसंबर 1926 में
- 11:53:08इंडिया भेजा जाता है और यहां आकर यह बहुत
- 11:53:10सी यूनियंस ऑर्गेनाइज करते हैं।
- 11:53:12न्यूज़पेपर्स को एडिट करते हैं और कुछ यूथ
- 11:53:15एंड फ्रंट ऑर्गेनाइजेशंस भी ल्च करते हैं।
- 11:53:18इनके प्रयासों से बंगाल, बॉम्बे, पंजाब और
- 11:53:21यूपी में वर्कर्स एंड पेजेंट्स पार्टी
- 11:53:23ऑर्गेनाइज की जाती हैं। दिसंबर 1928 में
- 11:53:26सभी वर्कर्स एंड पेजेंट्स पार्टीज को मर्ज
- 11:53:28करके ऑल इंडिया वर्कर्स एंड पेजेंट्स
- 11:53:31पार्टी का फॉर्मेशन होता है। 1928-29 के
- 11:53:34समय कम्युनिस्ट पार्टी बॉम्बे में बहुत
- 11:53:37सारी इंडस्ट्रियल स्ट्राइक्स ऑर्गेनाइज
- 11:53:38कराती है। इस दौरान कम्युनिस्ट पार्टी की
- 11:53:41सबसे बड़ी सफलता थी ट्रेड यूनियंस पर अपना
- 11:53:44इन्फ्लुएंस बनाना। 1920 से 1928 के बीच
- 11:53:49कम्युनिस्ट का इन्फ्लुएंस वर्कर्स के ऊपर
- 11:53:51बहुत स्ट्रांग हो जाता है। साथ ही
- 11:53:53गवर्नमेंट हर तरह से लेफ्टिस्ट मूवमेंट का
- 11:53:56दमन करने की कोशिश करने लगती है। इस
- 11:53:58पीरियड में कम्युनिस्ट मूवमेंट तीन
- 11:54:01कंस्परेसी ट्रायल्स में इन्वॉल्व होकर
- 11:54:03चर्चा का विषय बन जाता है। 1922-223
- 11:54:06में पेशावर कंस्परेसी ट्रायल, 1924 में
- 11:54:10कानपुर का कंस्परेसी ट्रायल और 1929 में
- 11:54:13मेरठ कांस्परेसी ट्रायल। मेरठ ट्रायल जो 3
- 11:54:17साल से ज्यादा चलता है और 27 लोगों को
- 11:54:19इसमें कन्विक्ट किया जाता है। कम्युनिस्ट
- 11:54:22को मार्टर्स का दर्जा दे देता है। यानी कि
- 11:54:24इन्हें काफी पॉपुलर कर देता है।
- 11:54:26कम्युनिस्ट का एंटी ब्रिटिश स्टांस उन्हें
- 11:54:29नेशनलिस्ट से भी सिंपथी गेन कराता है।
- 11:54:31कांग्रेस वर्किंग कमेटी इनके डिफेंस के
- 11:54:34लिए सेंट्रल डिफेंस कमेटी सेटअप करती है
- 11:54:36और ₹1500 भी सेंक्शन करती है। डिफेंस केस
- 11:54:40जेएल नेहरू, के एन कार्डजू और एफ एच
- 11:54:43अंसारी जैसे नेशनलिस्ट लीडर्स के द्वारा
- 11:54:45प्लीड किया जाता है। 1929 में गांधी जी
- 11:54:49जेल में इनसे मिलने जाते हैं और
- 11:54:51कम्युनिस्ट लीडर्स के प्रति अपनी सिंपैथी
- 11:54:54एक्सप्रेस करते हैं। इस तरह 1934 तक
- 11:54:57कम्युनिस्ट मूवमेंट को इंडिया में काफी
- 11:54:59रिस्पेक्ट मिलने लगती है और कह सकते हैं
- 11:55:02कि कम्युनिस्ट आईडियोलॉजी खुद को यहां
- 11:55:04इस्टैब्लिश कर लेती है। इस तरह 1925 से
- 11:55:081929 के पीरियड में सीपीआई कांग्रेस के
- 11:55:11साथ कोऑपरेट करती है और उसके प्रोग्राम को
- 11:55:14इन्फ्लुएंस करने की कोशिश करती है। लेकिन
- 11:55:17जल्दी ही सिचुएशन रिवर्स हो जाती है जो कि
- 11:55:19सेकंड फेज के अंदर समझा जा सकता है। आइए
- 11:55:22देखते हैं। सेकंड फेज द पीरियड ऑफ
- 11:55:25पॉलिटिकल विड्डनेस।
- 11:55:281929 के बाद जब गांधी जी की लीडरशिप में
- 11:55:31नेशनलिस्ट मूवमेंट तेजी से आगे बढ़ रहा था
- 11:55:34तब सीपीआई ऑर्गेनाइजेशनल और आईडियोलॉजिकल
- 11:55:37दोनों स्तर पर सफर करती है। कम्युनिस्ट
- 11:55:40इंटरनेशनल की सिक्स्थ कांग्रेस में दिए गए
- 11:55:42डायरेक्शन के अनुसार सीपीआई कांग्रेस से
- 11:55:44खुद को अलग कर लेती है। साथ ही 1929 में
- 11:55:48वर्कर्स एंड पेजेंट्स पार्टी को यह कहकर
- 11:55:50डिसॉल्व कर दिया जाता है कि टू क्लास
- 11:55:52पार्टी को डिवेप करना इररेशनल है। सीपीआई
- 11:55:561929 से ही कांग्रेस के राइट और लेफ्ट
- 11:55:59दोनों ही विंग्स को अटैक करने लगती है। इस
- 11:56:01समय कांग्रेस जहां पूर्ण स्वराज का
- 11:56:04रेजोल्यूशन अडॉप्ट करती है और सिविल
- 11:56:06डिसओबिडियंस मूवमेंट को लॉन्च करती है,
- 11:56:08वहीं सीबीआई कांग्रेस की पॉपुलैरिटी को कम
- 11:56:11करने के लिए संघर्ष के ट्रायंगुलर
- 11:56:13कैरेक्टर को हाईलाइट करती है। जिसमें कहा
- 11:56:16जाता है कि वर्कर्स का स्ट्रगल सिर्फ
- 11:56:18फॉरेन इंपीरियलिज्म के अगेंस्ट ही नहीं
- 11:56:20बल्कि इंडियन एक्सप्लइटर्स के अगेंस्ट भी
- 11:56:23है। यह लोग गांधी जी की लीडरशिप को पेटी
- 11:56:26बुरजुआ कहकर अटैक करते हैं और उन्हें
- 11:56:28इंपीरियलिज्म का एक टूल तक बता देते हैं
- 11:56:31जो मासेस के रेवोल्यूशनरी स्ट्रगल को
- 11:56:33बिट्रे कर रहे हैं। यह कांग्रेस के लेफ्ट
- 11:56:35विन की आलोचना करते हैं। कहते हैं कि वह
- 11:56:38एक काउंटर रेवोल्यूशनरी फोर्स है। लेकिन
- 11:56:41सीपीआई की यह टैक्टिकल अप्रोच
- 11:56:42अनरियलिस्टिक साबित होती है। मासेस का
- 11:56:45इनके लिए सपोर्ट कम हो जाता है। नेशनलिस्ट
- 11:56:48लीडरशिप्स के साथ भी इनके रिलेशंस खराब हो
- 11:56:51जाते हैं। ऐसे में ब्रिटिश गवर्नमेंट मौके
- 11:56:53का फायदा उठाकर जुलाई 1934 में सीपीआई को
- 11:56:57इललीगल ऑर्गेनाइजेशन डिक्लेअर कर देती है।
- 11:56:59जिसके बाद कम्युनिस्ट कई ग्रुप्स में
- 11:57:02स्प्लिट हो जाते हैं। अब बात करते हैं
- 11:57:04थर्ड फेज की।
- 11:57:06थर्ड फेज कम्युनिस्ट एंड द एंटी
- 11:57:09इंपीरियलिस्ट यूनाइटेड फ्रंट प्लान।
- 11:57:141935 में पीसी जोशी की लीडरशिप में सीपीआई
- 11:57:17को एक बार फिर रिऑर्गेनाइज किया जाता है।
- 11:57:201935 में हुई कम्युनिस्ट इंटरनेशनल की
- 11:57:23सेवंथ कांग्रेस में कम्युनिस्ट को
- 11:57:25नेशनलिस्ट फोर्सेस के साथ यूनाइटेड फ्रंट
- 11:57:28फॉर्म करने के लिए बोला जाता है। जिसके
- 11:57:30बाद एक बार फिर यह लोग कांग्रेस के साथ
- 11:57:32कोऑपरेशन शुरू कर देते हैं। इस मीटिंग में
- 11:57:35हुई डेलिबेरेशंस के आधार पर मार्च 1936
- 11:57:39में आरपी दत्त और बन ब्रडली अपनी थीसिस
- 11:57:42पब्लिश करते हैं। जिसका नाम था द एंटी
- 11:57:45इंपीरियलिस्ट पीपल्स फ्रंट इन इंडिया।
- 11:57:48दत्त ब्रैडली इंडियन नेशनल कांग्रेस को
- 11:57:50नेशनलिस्ट स्ट्रगल में इंडियंस का
- 11:57:52यूनाइटेड फ्रंट कहते हैं। और कम्युनिस्ट
- 11:57:55को एडवाइस करते हैं कि वो कांग्रेस को
- 11:57:57जॉइन करें। और उसके लेफ्ट विंग को
- 11:58:00स्ट्रेंथन करें और रिएक्शनरी राइट विंग
- 11:58:02एलिमेंट्स को कांग्रेस से बाहर करने की
- 11:58:04कोशिश करें। इसके बाद कम्युनिस्ट,
- 11:58:06कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी और ट्रेड
- 11:58:09यूनियनिस्ट कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के
- 11:58:11बेसिस पर फ्रंट पॉपुलर ऑर्गेनाइज करने का
- 11:58:13प्लान बनाते हैं। लेकिन कम्युनिस्ट
- 11:58:16लीडरशिप मूवमेंट के सोशल बेस को ब्रॉडन
- 11:58:18करने में फेल हो जाती है और पॉपुलर फ्रंट
- 11:58:21कभी एकिस्टेंस में ही नहीं आता। हालांकि
- 11:58:231930 के लैटर हाफ के दौरान मासेस में
- 11:58:26बढ़ती हुई पॉलिटिकल एक्टिविटी का फायदा
- 11:58:28उठाते हुए कम्युनिस्ट अपने पॉलिटिकल
- 11:58:31क्वारेंटीन से बाहर आ जाते हैं और एक बार
- 11:58:33फिर से इंडियन पॉलिटिक्स के रेडिकल
- 11:58:35एलिमेंट्स में अपनी जगह बना लेते हैं।
- 11:58:37इसके बाद सेकंड वर्ल्ड वॉर के साथ फोर्थ
- 11:58:40फज़ की शुरुआत हो जाती है।
- 11:58:43फोर्थ फज़ द सेकंड वर्ल्ड वॉर एंड द
- 11:58:46कम्युनिस्ट सम असॉल्ट।
- 11:58:491939 में जब सेकंड वर्ल्ड वॉर की शुरुआत
- 11:58:52होती है तो कॉमेंटान लीडर्स की एडवाइस के
- 11:58:55अनुसार इंडियन कम्युनिस्ट यूनाइटेड फ्रंट
- 11:58:58पॉलिसी को कंटिन्यू रखते हैं और हर तरह के
- 11:59:01इंपीरियलिज्म का विरोध करते हैं। लेकिन
- 11:59:03जून 1941 में जब हिटलर सोशलिज्म के
- 11:59:06फादरलैंड सोवियत यूनियन पर अटैक कर देता
- 11:59:09है तब कम्युनिस्ट खुद को एक ट्रिकी पोजीशन
- 11:59:11में पाते हैं। इंडियन कम्युनिस्ट यूटर्न
- 11:59:14लेते हुए अब वॉर को पीपल्स वॉर में रीलेबल
- 11:59:17कर देते हैं और एलाइड रशियन वॉर फ्रंट को
- 11:59:20अपना पूरा सपोर्ट अनाउंस करते हैं।
- 11:59:22ब्रिटिश गवर्नमेंट 1942 में सीबीआई को
- 11:59:25लीगल ऑर्गेनाइजेशन डिक्लेअर कर देती है।
- 11:59:28कम्युनिस्ट इस दौरान ब्रिटिश वॉर एफर्ट्स
- 11:59:30को हर संभव सपोर्ट देते हैं। यहां तक कि
- 11:59:331942 में क्विट इंडिया मूवमेंट को सप्रेस
- 11:59:36करने के लिए ब्रिटिशर्स के लिए स्पाइस का
- 11:59:38काम भी करते हैं। कम्युनिस्ट पॉलिसी में
- 11:59:41आए इस सडन शिफ्ट की नेशनलिस्ट सर्कल्स में
- 11:59:44काफी आलोचना की जाती है। कम्युनिस्ट देश
- 11:59:47की आजादी को भी एक फास यानी कि छलावा
- 11:59:50बताते हैं। यहां से फिफ्थ फेज की शुरुआत
- 11:59:53होती है। फिफ्थ फेज द ट्रांसफर ऑफ़ पावर
- 11:59:57नेगोशिएशंस एंड कम्युनिस्ट्स मल्टीीनेशनल
- 12:00:00प्लान। इस पीरियड में सीपीआई का पॉश्चर
- 12:00:03प्रो मुस्लिम रहता है और वह कांग्रेस लीग
- 12:00:06के एलियनेशन को और वाइड करने की कोशिश
- 12:00:09करते हैं। सीपीआई द्वारा सभी सेपरेटिस्ट
- 12:00:11एलिमेंट्स को इनकरेज किया जाता है और
- 12:00:13इंडिया को कई सारे सोवन स्टेट्स में
- 12:00:16डिवाइड करने का काम किया जाता है। इनकी
- 12:00:18स्ट्रेटजी कम से कम एक ऐसे स्टेट पर अपना
- 12:00:21कंट्रोल बनाने और फिर उसे बाकी के इंडियन
- 12:00:24के लिबरेशन के बेस के रूप में यूज करने की
- 12:00:26थी। लेकिन मुस्लिम लीग कम्युनिस्ट के साथ
- 12:00:29अलायंस के आईडिया को नकार देती है और
- 12:00:32सीबीआई एक डिसक्रेडिटेड ऑर्गेनाइजेशन की
- 12:00:35तरह रह जाती है। 1942 में ही सीबीआई ने एक
- 12:00:38रेजोल्यूशन अडॉप्ट किया था जिसमें इंडिया
- 12:00:41को एक मल्टीीनेशनल स्टेट डिक्लेअ किया गया
- 12:00:44था और करीब 16 ऐसे इंडियन नेशंस को
- 12:00:47आइडेंटिफाई किया गया था। 1947 तक
- 12:00:50कम्युनिस्ट मूवमेंट इंडियन पॉलिटिक्स में
- 12:00:53अपनी जगह खो देता है और सीपीआई पूरी तरह
- 12:00:56डिसअरे की सिचुएशन में होती है। जब
- 12:00:58ब्रिटिश इंपीरियलिज्म से आजादी ही देश के
- 12:01:01लोगों का डोमिनेंट इंस्टिंक्ट होता है। उस
- 12:01:04समय सीपीआई की एक्स्ट्रा नेशनल लॉयल्टीज
- 12:01:06और पूरी तरह यूरोपियन मॉडल्स पर डिपेंडेंस
- 12:01:09इसे एक सस्पेक्ट ऑर्गेनाइजेशन बना देता
- 12:01:12है। आइए अब सेकंड स्ट्रीम यानी कि
- 12:01:15कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की बात करते
- 12:01:17हैं। द कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी
- 12:01:21कांग्रेस का लेफ्ट विंग एक रैशनलिस्ट
- 12:01:23रिवोल्ट की तरह इमर्ज होता है। जो एक तरफ
- 12:01:26तो गांधी जी के मिस्टिसिज्म के अगेंस्ट था
- 12:01:28और दूसरी तरफ कम्युनिज्म के डॉग्मैटिज्म
- 12:01:31के भी। इनके आईडियोलॉजिकल इंस्पिरेशन
- 12:01:33मार्क्सिज्म और डेमोक्रेटिक सोशलिज्म से
- 12:01:36आती हैं। और यह एंटी इंपीरियलिज्म,
- 12:01:38नेशनलिज्म और सोशलिज्म के सपोर्टर होते
- 12:01:41हैं। सुभाष चंद्र बोस समझते हैं कि
- 12:01:43कांग्रेस लेफ्टिस्ट सिर्फ एंटी
- 12:01:45इंपीरियलिस्ट ही नहीं बल्कि वह नेशनल लाइफ
- 12:01:48को सोशलिस्ट बेसिस पर रिकंस्ट्रक्ट भी
- 12:01:50करना चाहते हैं। अपने गोल को अचीव करने के
- 12:01:53लिए इन्हें दो फ्रंट्स पर फाइट करना होता
- 12:01:56है। पहला तो फॉरेन इंपीरियलिज्म और उसके
- 12:01:59इंडियन अलायंस के साथ और दूसरा मिल्क वाटर
- 12:02:02नेशनलिस्ट यानी कि राइटिस्ट के साथ जो
- 12:02:04इंपीरियलिज्म के साथ डील करने के लिए
- 12:02:06तैयार हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो यह
- 12:02:09कंप्लीट इंडिपेंडेंस और सोशलिज्म के फेवर
- 12:02:12में थे। यह क्लासेस के लिए नहीं बल्कि
- 12:02:14मासेस के लिए स्वराज चाहते थे। गांधीियन
- 12:02:17आईडियोलॉजी और नेशनलिस्ट स्ट्रगल से इनका
- 12:02:20डिसइल्यूजनमेंट पहली बार तब होता है जब
- 12:02:231922 में गांधी जी ने नॉन कोऑपरेशन
- 12:02:26मूवमेंट को विड्रॉ कर लिया था। वह भी ऐसे
- 12:02:29समय में जब नेशन पॉपुलर रिवोल्ट के बहुत
- 12:02:31पास था। इसी वजह से 1931 में सिविल
- 12:02:35डिसओबिडियंस मूवमेंट को सस्पेंड करना और
- 12:02:37फिर 1934 में इसे कॉल ऑफ करना भी इन्हें
- 12:02:40गांधियन आईडियोलॉजी के अगेंस्ट कर देता
- 12:02:43है। लेफ्ट विंग इस निष्कर्ष पर आता है कि
- 12:02:46हमेशा और हर सिचुएशन में नॉन वायलेंस की
- 12:02:49थ्योरी का प्लान करना अनसस्टेनेबल है और
- 12:02:52स्लिपरी फाउंडेशंस पर बेस्ड है। जुलाई
- 12:02:551931 में जेपी नारायण, फूलन प्रसाद वर्मा
- 12:02:58और कुछ अन्य लीडर्स बिहार सोशलिस्ट पार्टी
- 12:03:01फॉर्म करते हैं। सितंबर 1933 में पंजाब
- 12:03:05सोशलिस्ट पार्टी एकिस्टेंस में आती है।
- 12:03:08इसके बाद अक्टूबर 1934 में ऑल इंडिया
- 12:03:10कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी यानी सीएसपी
- 12:03:13फॉर्मली ऑर्गेनाइज की जाती है। जिसके पीछे
- 12:03:16जेबी नारायण, आचार्य नरेंद्र देव और मीनू
- 12:03:19मसानी जैसे लीडर्स होते हैं। कांग्रेस
- 12:03:21सोशलिस्ट पार्टी कांग्रेस के लिए कोई
- 12:03:23राइवल पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन नहीं थी
- 12:03:26बल्कि इसे कांग्रेस के ही अंदर काम करने
- 12:03:28के लिए फॉर्म किया गया था। लेकिन फिर भी
- 12:03:31कांग्रेस का राइट विंग इन्हें
- 12:03:33इंटरनेशनलिस्ट कहता है और कम्युनिस्ट्स
- 12:03:36इन्हें सोशल फास्टिस्ट्स या फेक सोशलिस्ट
- 12:03:39भी कहते हैं। इसका जवाब देते हुए कांग्रेस
- 12:03:41सोशलिस्ट्स इंडियन कम्युनिस्ट को यूएसएसआर
- 12:03:44की सेटेलाइट्स डिस्क्राइब करते हैं।
- 12:03:47सीएसपी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 को
- 12:03:50भी कंडेम करती है। साथ ही 1937 इलेक्शंस
- 12:03:53के दौरान कांग्रेस द्वारा ऑफिस
- 12:03:55एक्सेप्टेंस की भी आलोचना करती है।
- 12:03:58सोशलिस्ट प्रेशर के ही कारण 1936 के
- 12:04:01कांग्रेस के इलेक्शन मेनिफेस्टो में लोगों
- 12:04:04के सोशियोइकोनॉमिक ग्रीवेंसेस को रिमूव
- 12:04:06करने का प्रोग्राम शामिल किया गया था।
- 12:04:08सेकंड वर्ल्ड वॉर के समय सीएसपी कांग्रेस
- 12:04:11की तरफ से ब्रिटिश वॉर एफर्ट के लिए
- 12:04:14कंडीशनल हेल्प का भी विरोध करती है।
- 12:04:16क्योंकि उनका मानना था कि यह वॉर
- 12:04:18इंपीरियलिज्म के पार्टनर्स के बीच वर्ल्ड
- 12:04:21के रिपार्टिशन के लिए हो रहा है। कांग्रेस
- 12:04:24सोशलिस्ट चाहते थे कि आजादी के लिए
- 12:04:26कांग्रेस रेवोल्यूशनरी वॉर की शुरुआत
- 12:04:28करें। सीएसपी क्विट इंडिया मूवमेंट को
- 12:04:31सपोर्ट करती है और उसे ऑर्गेनाइज करने में
- 12:04:33लीडिंग रोल निभाती है। इसके बाद सीएसपी
- 12:04:36ट्रांसफर ऑफ पावर के लिए नेगोशिएटेड
- 12:04:38सेटलमेंट के फेवर में भी नहीं थी बल्कि यह
- 12:04:41इंडिया में इंपीरियलिज्म, कम्युनलिज्म और
- 12:04:44फ्यूडलिज्म को डिस्ट्रॉय करने के लिए एक
- 12:04:46रेवोल्यूशनरी स्ट्रगल की जरूरत बताते हैं।
- 12:04:50कांग्रेस सोशलिस्ट मुस्लिम लीग को इन लीग
- 12:04:53विद ब्रिटेन कहते हैं और जिन्ना को देश का
- 12:04:56गद्दार और इंपीरियलिस्ट का टूल बोलते हैं।
- 12:04:59यह लोग हिंदू मुस्लिम यूनिटी की आशा करते
- 12:05:01हैं लेकिन टेंपरेरी फैक्ट्स या
- 12:05:03एग्रीमेंट्स के बेसिस पर नहीं बल्कि
- 12:05:05इकोनॉमिक इशूज़ पर एम्फसाइज करके जो हिंदू
- 12:05:09और मुस्लिम्स दोनों को ही अफेक्ट करते
- 12:05:11हैं। सीएसपी इंडिया के पार्टीशन को
- 12:05:14कांग्रेस लीडरशिप का सरेंडर बताती है। साथ
- 12:05:16ही अल्टरनेटिव और पॉजिटिव पॉलिसी ना ला
- 12:05:19पाने का अपना और वाइडर रेवोल्यूशनरी
- 12:05:21मूवमेंट का फेलियर भी एक्सेप्ट करती है।
- 12:05:24सीपीआई और सीएसपी के अलावा कुछ और माइनर
- 12:05:28लेफ्टिस्ट पार्टीज भी इंडिया में फॉर्म
- 12:05:30होती हैं। आइए उनको भी डिस्कस कर लेते
- 12:05:32हैं।
- 12:05:34माइनर लेफ्टिस्ट पार्टीज
- 12:05:37कम्युनिस्ट मूवमेंट के शुरू होने के बाद
- 12:05:4019394 के पीरियड में बहुत सी माइनर
- 12:05:43लेफ्टिस्ट पार्टीज की ग्रोथ भी होती है।
- 12:05:46इनमें से ज्यादातर पार्टीज पर्सनालिटीज के
- 12:05:48अराउंड सेंटर्ड रहती हैं। और एक बार
- 12:05:50सेंट्रल फिगर के गायब होने के बाद यह
- 12:05:52पार्टीज भी डिफंक्ट हो जाती हैं। इनमें
- 12:05:55सबसे पहले बात करते हैं फॉरवर्ड ब्लॉक की।
- 12:05:59द फॉरवर्ड ब्लॉक।
- 12:06:021939 में कांग्रेस और गांधी जी के साथ
- 12:06:05मतभेद होने के बाद सुभाष चंद्र बोस
- 12:06:08फॉरवर्ड ब्लॉक का फॉर्मेशन करते हैं। यह
- 12:06:10कांग्रेस की क्रीड, पॉलिसी और प्रोग्राम
- 12:06:12को तो एक्सेप्ट करते हैं, लेकिन उसकी हाई
- 12:06:15कमांड में कॉन्फिडेंस के लिए खुद को बाउंड
- 12:06:17नहीं करते। इसमें सभी एंटी इंपीरियलिस्ट,
- 12:06:20रेडिकल और प्रोग्रेसिव ग्रुप्स को एक बैनर
- 12:06:23में लाने की कोशिश की जाती है। लेफ्ट
- 12:06:25कंसोलिडेशन कमेटी को ऑर्गेनाइज करने में
- 12:06:27यह अहम रोल निभाता है। बोस ब्रिटिश वॉर
- 12:06:31एफर्ट के साथ कांग्रेस के कोऑपरेशन के
- 12:06:33एटीट्यूड का विरोध करते हैं और इंडिया में
- 12:06:36इंपीरियलिज्म को खत्म करने के लिए विदेश
- 12:06:39से मिलिट्री हेल्प लेने के लिए चले जाते
- 12:06:41हैं। 1947 में ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक
- 12:06:44ट्रांसफर ऑफ पावर को बोगस ट्रांसफर कहता
- 12:06:46है और आरोप लगाता है कि डरा हुआ बुर्ज हुआ
- 12:06:50समाज मास स्ट्रगल को हराने के लिए ब्रिटिश
- 12:06:52इंपीरियलिज्म के साथ पार्टनरशिप के लिए
- 12:06:54तैयार हो गया है। अब बात करते हैं
- 12:06:57रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी की।
- 12:07:01रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी
- 12:07:04अर्ली 20th सेंचुरी के क्रांतिकारी इस
- 12:07:07पार्टी के ऑर्गेनाइजेशन के लिए न्यूक्लियस
- 12:07:09प्रोवाइड करते हैं। इसे 1940 में ल्च किया
- 12:07:12जाता है। यह ब्रिटिश इंपीरियलिज्म के
- 12:07:15वायलेंट ओवर थ्रू और इंडिया में सोशलिज्म
- 12:07:17के इस्टैब्लिशमेंट को सपोर्ट करते हैं।
- 12:07:20आईडियोलॉजिकली यह कम्युनिस्ट पार्टी से
- 12:07:22ज्यादा सीएसपी के क्लोज होते हैं। 1939
- 12:07:25में त्रिपुरी कांग्रेस सेशन के दौरान हुए
- 12:07:28गांधी बोस टसल में यह बूस्ट का साथ देते
- 12:07:30हैं। यह लोग यूएसएसआर के वॉर ज्वाइन करने
- 12:07:33के बाद भी वॉर एफर्ट को सपोर्ट नहीं करते।
- 12:07:36ट्रांसफर ऑफ पावर और पार्टीशन को यह
- 12:07:38कांग्रेस की बोरआ लीडरशिप और इंपीरियलिज्म
- 12:07:41के बीच हुई बैकडोर डील बताते हैं। इसके
- 12:07:44अलावा कुछ और माइनर पार्टीज थी। जैसे कि
- 12:07:471939 में एन दत्त मजूमदार बोलशविक पार्टी
- 12:07:51ऑफ इंडिया इस्टैब्लिश करते हैं। 1942 में
- 12:07:54सोमेंद्रनाथ टैगोर रेवोल्यूशनरी
- 12:07:56कम्युनिस्ट पार्टी ल्च करते हैं। और 1941
- 12:07:59में इंद्रसेन और अजीत रॉय जैसे
- 12:08:01रेवोल्यूशनरीज बोल्टशेविक लेनिस्ट पार्टी
- 12:08:04अनाउंस करते हैं। यह सभी डिसिडेंट
- 12:08:06कम्युनिस्ट ग्रुप थे और हर कोई इंडियन
- 12:08:09रेवोल्यूशन को लीड करने के लिए खुद को
- 12:08:12सबसे फिट पार्टी बताता है। इंडिया में
- 12:08:14कम्युनिस्ट मूवमेंट के पायनियर एमएन रॉय
- 12:08:16का मार्क्सिज्म से पूरी तरह मोह भंग हो
- 12:08:19जाता है और 1940 में वह रेडिकल
- 12:08:22डेमोक्रेटिक पार्टी ऑर्गेनाइज करते हैं।
- 12:08:24इनका कहना था कि इंडिया में रेवोल्यूशन
- 12:08:26अकेले प्रॉलिटेरियट क्लास नहीं ला सकती
- 12:08:29बल्कि यह सिर्फ मल्टी क्लास पार्टी की
- 12:08:31लीडरशिप में ही आ सकता है।
- 12:08:36कंक्लूजन।
- 12:08:39दोस्तों, इस तरह लेफ्टिस्ट मूवमेंट में कई
- 12:08:41अलग-अलग ट्रेंड्स देखने को मिलते हैं।
- 12:08:44लेफ्ट मूवमेंट्स देश में सोशलिस्ट
- 12:08:46आईडियोलॉजी को स्ट्रेंथन करते हैं।
- 12:08:48कांग्रेस के सोशियोइकोनॉमिक प्रोग्राम पर
- 12:08:50इनका गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।
- 12:08:53उदाहरण के तौर पर 1931 के कराची सेशन में
- 12:08:56लाया गया नेशनल इकोनॉमिक प्रोग्राम।
- 12:08:59हालांकि कम्युनिस्ट पार्टीज बहुत ज्यादा
- 12:09:01सफल नहीं दिखती। उसकी बड़ी वजह यह थी कि
- 12:09:04यह अपने को इंडिया की सिचुएशन के अनुसार
- 12:09:07मोल्ड करने की जगह इंटरनेशनल डिक्टम्स और
- 12:09:10फॉरेन आईडियोलॉजी को ही अपना बेस बनाए
- 12:09:12रखते हैं। इसके अलावा अलग-अलग कम्युनिस्ट
- 12:09:16ग्रुप्स में यूनिटी भी नहीं देखी जाती जो
- 12:09:18इंडिया में कम्युनिस्ट मूवमेंट को कमजोर
- 12:09:21कर देता है।
- 12:09:27दोस्तों 19th सेंचुरी के सेकंड हाफ के
- 12:09:29दौरान इंडिया में मॉडर्न इंडस्ट्री की
- 12:09:31शुरुआत होती है। रेलवेेज के कंस्ट्रक्शन
- 12:09:34में काम करने वाले हजारों हाथ मॉडर्न
- 12:09:37इंडियन वर्किंग क्लास का हिस्सा बन जाते
- 12:09:39हैं। रेलवेेज के साथ ही कुछ एंसिलरी
- 12:09:42इंडस्ट्रीज का डेवलपमेंट भी शुरू होता है।
- 12:09:44जैसे कि कोल इंडस्ट्री तेजी से विकास करती
- 12:09:47है और लार्ज वर्किंग ग्लास को रोजगार देती
- 12:09:50है। इसके बाद कॉटन और जूट इंडस्ट्रीज की
- 12:09:52भी शुरुआत देखी जाती है। इन सभी
- 12:09:55इंडस्ट्रीज में काम करने वाले लोग इंडियन
- 12:09:57वर्किंग क्लास का पार्ट कहलाते हैं।
- 12:10:00इंडियन वर्किंग क्लास भी उसी तरह के
- 12:10:02एक्सप्लइटेशन को फेस करती है जैसा कि
- 12:10:04इंडस्ट्रियलाइजेशन के दौरान यूरोपियन
- 12:10:07वर्किंग क्लास द्वारा किया गया था।
- 12:10:10यानी कि लो वेजेस, लॉन्ग वर्किंग आवर्स,
- 12:10:12अनहाइजीनिक और हैज़स वर्किंग कंडीशंस,
- 12:10:15चाइल्ड लेबर और बेसिक अमेनिटीज का अभाव।
- 12:10:18लेकिन इंडिया में कॉलोनियलिज्म का होना
- 12:10:20वर्किंग क्लास मूवमेंट को एक अलग टच देता
- 12:10:22है।
- 12:10:24इंडियन वर्कर्स को दो फोर्सेस का एक साथ
- 12:10:27सामना करना पड़ता है। एक तो इंपीरियलिस्ट
- 12:10:30रूलिंग क्लास और दूसरा कैपिटलिस्ट क्लास
- 12:10:32का इकोनॉमिक एक्सप्लइटेशन जिसमें नेटिव और
- 12:10:36फॉरेन दोनों ही तरह के कैपिटलिस्ट शामिल
- 12:10:38थे। इसलिए वर्किंग क्लास मूवमेंट का
- 12:10:41इंडिपेंडेंस मूवमेंट के साथ डीप कनेक्शन
- 12:10:43देखा जा सकता है। आइए वर्कर क्लास मूवमेंट
- 12:10:46को डिटेल में डिस्कस करते हैं।
- 12:10:49अर्ली एफर्ट्स अर्ली नेशनलिस्ट्स स्पेशली
- 12:10:52मॉडरेट्स लेबर कॉज के प्रति बहुत ज्यादा
- 12:10:55एक्टिव नहीं दिखते। इस समय इंडियन ओड
- 12:10:58फैक्ट्रीज की लेबर और ब्रिटिश ओड
- 12:11:00फैक्ट्रीज की लेबर को अलग-अलग ट्रीट किया
- 12:11:02जाता था। यह भी समझा जाता था कि लेबर
- 12:11:05लेजिसलेशंस इंडियन ओड इंडस्ट्रीज की
- 12:11:08कंपेटिटिव एज को अफेक्ट करेंगे। साथ ही
- 12:11:11अर्ली नेशनलिस्ट क्लास के बेसिस पर
- 12:11:13इंडिपेंडेंस मूवमेंट में डिवीजन नहीं होने
- 12:11:15देना चाहते थे। इस वजह से देखा जाता है कि
- 12:11:18मॉडरेट्स 1881 और 1891 के फैक्ट्री एक्ट्स
- 12:11:22का भी विरोध करते हैं। इस दौरान वर्कर्स
- 12:11:25की इकोनॉमिक कंडीशंस को इंप्रूव करने के
- 12:11:27लिए कुछ फिलथ्रोपिक एफर्ट्स जरूर हुए थे
- 12:11:30और यह स्पेसिफिक लोकल ग्रीवेंसेस को ही एम
- 12:11:33करते थे। ऐसे ही कुछ एफर्ट्स पर नजर डालते
- 12:11:36हैं। 1870 में सासीपाड़ा बनर्जी वर्किंग
- 12:11:40मेंस क्लब की शुरुआत करते हैं और भारत
- 12:11:42श्रमजीवी के नाम से न्यूज़पेपर भी निकालते
- 12:11:45हैं। 1878 में सोराबजी सपूर जी बंगाली
- 12:11:49बॉम्बे लेजिसलेटिव काउंसिल में लेबर की
- 12:11:51बेटर वर्किंग कंडीशंस पर एक बिल पास करने
- 12:11:54की कोशिश करते हैं। 1880 में नारायण
- 12:11:57मेघाजी लोखंडे दीन बंधु न्यूज़पेपर की
- 12:12:00शुरुआत करते हैं और साथ ही बॉम्बे मिल और
- 12:12:03मिल हैंड्स एसोसिएशन को भी सेटअप करते
- 12:12:06हैं। 1899 में ग्रेट इंडियन पेनिनसुला
- 12:12:09रेलवेेज के सिग्नलर्स द्वारा पहली
- 12:12:11स्ट्राइक की जाती है। जिसे काफी सपोर्ट भी
- 12:12:14मिलता है। तिलक कई महीनों से अपने
- 12:12:16न्यूज़पेपर महारता और केसरी में इस
- 12:12:19स्ट्राइक के लिए कैंपेन कर रहे थे। इसके
- 12:12:21अलावा 20th सेंचुरी आते-आते बहुत से
- 12:12:24नेशनलिस्ट लीडर्स जैसे कि बिपिन चंद्रपाल
- 12:12:27और जी सुब्रमण्यम अय्यर भी वर्कर्स के लिए
- 12:12:30बेटर कंडीशंस और प्रो लेबर रिफॉर्म्स की
- 12:12:32डिमांड करने लगते हैं। वर्कर्स मूवमेंट का
- 12:12:35अगला फज़ स्वदेशी आंदोलन के साथ देखा जा
- 12:12:38सकता है।
- 12:12:39ड्यूरिंग स्वदेशी अपसर्ज
- 12:12:42स्वदेशी आंदोलन में वर्कर्स भी भाग लेते
- 12:12:45हैं। अश्विनी कुमार बनर्जी, प्रभात कुमार
- 12:12:47रॉय चौधरी, प्रेमतोष बोस और अपूर्व कुमार
- 12:12:51घोष जैसे लीडर्स के द्वारा जगह-जगह
- 12:12:54स्ट्र्राइक्स ऑर्गेनाइज की जाती हैं। यह
- 12:12:56स्ट्र्राइक्स गवर्नमेंट प्रेस, रेलवेेज और
- 12:12:59जूट इंडस्ट्री में की जाती हैं। सुब्रमण्य
- 12:13:02शिवा और चिदंबरम पिलाई, तोतीन और
- 12:13:05तिरुलवेली में स्ट्राइक लीड करते हुए
- 12:13:08गवर्नमेंट द्वारा अरेस्ट कर लिए जाते हैं।
- 12:13:10इस दौरान ट्रेड यूनियंस को फॉर्म करने की
- 12:13:13कोशिश भी की जाती है। लेकिन इसमें ज्यादा
- 12:13:15सफलता नहीं मिलती। स्वदेशी आंदोलनों के
- 12:13:18बाद वर्कर क्लास मूवमेंट में अगला टर्न
- 12:13:20फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के दौरान होता है। आइए
- 12:13:23समझते हैं किस तरह का टर्न आता है।
- 12:13:26ड्यूरिंग द फर्स्ट वर्ल्ड वॉर एंड आफ्टर।
- 12:13:29वॉर के दौरान एक्सपोर्ट्स काफी बढ़ गए थे।
- 12:13:31चीजों के दाम भी आसमान छूने लगे थे और
- 12:13:34इंडस्ट्रियलिस्ट्स के लिए यह प्रॉफिट
- 12:13:36कमाने का पीरियड साबित हो रहा था। लेकिन
- 12:13:38वर्कर्स को अभी भी लो वेजेस ही दी जा रही
- 12:13:41थी। 1915 से 1924 के दौरान जूट मिल्स
- 12:13:45द्वारा जहां 140% एवरेज डिविडेंड मिल रहा
- 12:13:48था, वहीं इंडस्ट्री में काम करने वाले
- 12:13:50वर्कर्स की एवरेज वेज सिर्फ 12 पाउंड्स पर
- 12:13:53एनम थी। ऐसी सिचुएशन की वजह से वर्कर्स
- 12:13:56में डिस्कंटेंट बढ़ता जा रहा था। इस समय
- 12:13:59इंडिया में गांधी जी के आने से नेशनल
- 12:14:01मूवमेंट और ज्यादा ब्रॉड बेस्ड हो गया था
- 12:14:03और नेशनल कॉज के लिए वर्कर्स और पेजेंट्स
- 12:14:06के मोबिलाइजेशन पर जोर दिया जा रहा था।
- 12:14:09इसके अलावा इंटरनेशनल इवेंट्स जैसे कि
- 12:14:111917 में रशियन रेवोल्यूशन और यूएसएसआर का
- 12:14:14फॉर्मेशन, कॉमेंटान का फॉर्मेशन और आईएलओ
- 12:14:18का सेटअप होना इंडिया की वर्किंग क्लास
- 12:14:20मूवमेंट को एक नई डायमेंशन देता है। इस
- 12:14:23सबके बीच वर्कर्स को ट्रेड यूनियंस में
- 12:14:25ऑर्गेनाइज करने की शुरुआत भी होती है। 31
- 12:14:28अक्टूबर 1920 को ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन
- 12:14:32कांग्रेस का फॉर्मेशन होता है। इसके पहले
- 12:14:34प्रेसिडेंट लाला लाजपत राय बनते हैं और
- 12:14:37दीवान चमन लाल को पहला जनरल सेक्रेटरी
- 12:14:39बनाया जाता है। लाला लाजपत राय कैपिटलिज्म
- 12:14:42को इंपीरियलिज्म से लिंक करते हुए कहते
- 12:14:45हैं कि इंपीरियलिज्म और मिलिट्रीिज्म
- 12:14:47कैपिटलिज्म के जुड़वा बच्चे हैं।
- 12:14:50एआईटीयूसी के तीसरे और चौथे सेशन की
- 12:14:53अध्यक्षता सीआर दास करते हैं। 1922 में
- 12:14:56कांग्रेस के गया सेशन में एआईटीयूसी के
- 12:14:59फॉर्मेशन को वेलकम किया जाता है और उसे
- 12:15:02असिस्ट करने के लिए एक कमेटी भी फॉर्म की
- 12:15:04जाती है। सीआर दास कहते हैं कि कांग्रेस
- 12:15:07को वर्कर्स के कॉज को अपने एजेंडा में
- 12:15:09शामिल करना चाहिए। नहीं तो यह लोग नेशनल
- 12:15:11मूवमेंट से आइसोलेट हो जाएंगे। एआईटीयूसी
- 12:15:15के साथ नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, सीएफ
- 12:15:17एंड्रूस, जीएम सेन गुप्ता, वीवी गिरी और
- 12:15:20सरोजिनी नायडू जैसे लीडर्स भी क्लोज
- 12:15:22कांटेक्ट में रहते हैं। शुरुआत में
- 12:15:24एआईटीयूसी ब्रिटिश लेबर पार्टी के सोशल
- 12:15:27डेमोक्रेटिक आईडिया से इन्फ्लुएंस थी।
- 12:15:30इसके बाद गांधी जी की नॉन वायलेंस,
- 12:15:32ट्रस्टीशिप और क्लास कोलैबोरेशन की
- 12:15:34फिलॉसफी का इस पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
- 12:15:37इससे पहले 198 में अहमदाबाद मिल स्ट्राइक
- 12:15:40के दौरान गांधी जी ने अहमदाबाद टेक्सटाइल
- 12:15:42लेबर एसोसिएशन को भी ऑर्गेनाइज किया था।
- 12:15:45ट्रेड यूनियंस के फॉर्मेशन को बढ़ता देख
- 12:15:481926 में ब्रिटिश गवर्नमेंट ट्रेड यूनियन
- 12:15:51एक्ट लेकर आती है। इस एक्ट में ट्रेड
- 12:15:53यूनियंस को लीगल एसोसिएशंस की तरह
- 12:15:55रिकॉग्नाइज किया जाता है और उनके
- 12:15:57रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशंस के लिए कुछ
- 12:16:00कंडीशंस रखी जाती हैं। यह एक्ट ट्रेड
- 12:16:03यूनियंस को सिविल और क्रिमिनल इम्यूनिटी
- 12:16:05देता है। लेकिन सिर्फ लेजिटमेट एक्टिविटीज
- 12:16:08के लिए इनकी पॉलिटिकल एक्टिविटीज पर
- 12:16:10रिस्ट्रिकशंस लगा दी जाती हैं। इसके बाद
- 12:16:12लेट 1920 का दौर शुरू होता है जब वर्कर
- 12:16:16मूवमेंट और ज्यादा स्ट्रांग होता दिखता
- 12:16:18है। लेट 1920 एंड 1930
- 12:16:25लेट 1920 में वर्कर्स मूवमेंट पर स्ट्रांग
- 12:16:28कम्युनिस्ट इन्फ्लुएंस देखा जा सकता है जो
- 12:16:30इसे पहले से ज्यादा मिलिटेंट और
- 12:16:32रेवोल्यूशनरी बना देता है। कम्युनिस्ट
- 12:16:34इंटरनेशनल की फोर्थ कांग्रेस एआईटीयूसी को
- 12:16:37मैसेज भेजती है कि सिर्फ फेयर वेजेस से ही
- 12:16:40संतुष्ट ना हो बल्कि कैपिटलिज्म और
- 12:16:43इंपीरियलिज्म को उखाड़ फेंकने के लिए काम
- 12:16:45करें। 1928 के दौरान बड़े स्तर पर
- 12:16:48इंडस्ट्रियल अनरेस्ट देखने को मिलता है।
- 12:16:51बॉम्बे टेक्सटाइल मिल्स में गिरनी कामगार
- 12:16:54यूनियन द्वारा 6 महीने लंबी स्ट्राइक
- 12:16:56ऑर्गेनाइज की जाती है। कुल मिलाकर 203
- 12:16:59स्ट्र्राइक्स होती हैं। जिसमें 5 लाख से
- 12:17:01ज्यादा वर्कर्स इनवॉल्व होते हैं। और यह
- 12:17:03स्ट्र्राइक्स इमीडिएट इकोनॉमिक डिमांड से
- 12:17:06ज्यादा पॉलिटिकल आइडियाज से प्रेरित नजर
- 12:17:08आती हैं। इस पीरियड में बहुत से
- 12:17:10कम्युनिस्ट ग्रुप्स का क्रिस्टलाइजेशन भी
- 12:17:12होता है। जिन्हें एस ए डांगे, मुजफ्फर
- 12:17:15अहमद, पीसी जोशी, सोहन सिंह जोशी जैसे
- 12:17:18लीडर्स लीड करते हैं। ट्रेड यूनियन
- 12:17:20मूवमेंट की बढ़ती स्ट्रेंथ से घबराकर
- 12:17:22गवर्नमेंट लेजिसलेटिव रिस्ट्रिक्शंस लेकर
- 12:17:24आती है। 1929 में पब्लिक सेफ्टी ऑर्डिनेंस
- 12:17:28और ट्रेड डिस्प्यूट्स एक्ट इंट्रोड्यूस
- 12:17:30किया जाता है। ट्रेड डिस्प्यूट एक्ट
- 12:17:32इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स को सेटल करने के
- 12:17:34लिए कोर्ट्स ऑफ इंक्वायरी और कंसल्टेशन
- 12:17:36बोर्ड्स का अपॉइंटमेंट कंपलसरी कर देता
- 12:17:39है। साथ ही पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज जैसे
- 12:17:41कि रेलवेेज, वाटर और इलेक्ट्रिसिटी
- 12:17:44बोर्ड्स एटसेट्रा में स्ट्राइक करने के
- 12:17:46लिए हर इंडिविजुअल वर्कर को वन मंथ का
- 12:17:48एडवांस नोटिस एडमिनिस्ट्रेशन को देना
- 12:17:51कंपलसरी कर दिया जाता है। इसके बिना सभी
- 12:17:53स्ट्राइक्स इललीगल डिक्लेअर कर दी जाती
- 12:17:55हैं। इसके अलावा कोर्सिव या प्योरली
- 12:17:58पॉलिटिकल नेचर की ट्रेड यूनियन एक्टिविटीज
- 12:18:01करने से भी इन्हें मना कर दिया जाता है।
- 12:18:03यहां तक कि सिंपैथेटिक स्ट्राइक्स भी नहीं
- 12:18:06की जा सकती थी। ट्रेड यूनियन मूवमेंट को
- 12:18:08और ज्यादा रिस्ट्रिक्ट करने के लिए 1929
- 12:18:11में ही मेरिट कंस्परेसी केस भी फाइल किया
- 12:18:14जाता है। जिसमें गवर्नमेंट 31 लेबर लीडर्स
- 12:18:17को अरेस्ट कर लेती है। और 3 एंड हाफ ईयर
- 12:18:19के ट्रायल के बाद मुजफ्फर अहमद, एस ए
- 12:18:22डांगे, जोगलेकर, फिलिप्स स्प्रेट, बन
- 12:18:24ब्रडली और शौकत उस्मानी जैसे ट्रेड यूनियन
- 12:18:27लीडर्स को कन्विक्ट किया जाता है। इस
- 12:18:30ट्रायल को दुनिया भर में पब्लिसिटी मिलती
- 12:18:32है। लेकिन इससे इंडियन वर्किंग क्लास
- 12:18:34मूवमेंट कमजोर पड़ जाता है। जैसा कि
- 12:18:36गवर्नमेंट का एम भी था। इस बीच 1930 में
- 12:18:39शुरू हुए सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट में
- 12:18:42वर्कर्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
- 12:18:44लेकिन ब्रिटिश गवर्नमेंट इन्हें फोर्सफुली
- 12:18:46दबा देती है। लार्ज स्केल पर वर्कर्स और
- 12:18:49उनके लीडर्स को अरेस्ट किया जाता है।
- 12:18:51लेजिसलेशंस और कमीशंस के थ्रू वर्कर्स को
- 12:18:54विक्टिमाइज किया जाता है। इन डेवलपमेंट्स
- 12:18:56की वजह से यूनियन लीडर्स को यूनिटी कीेंस
- 12:18:59समझ आती है और अक्टूबर 1934 में फॉर्म हुई
- 12:19:02कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी मॉडरेट और
- 12:19:05रेडिकल ट्रेड यूनियंस को यूनाइट करने का
- 12:19:07प्रयास करती है। इसे जयप्रकाश नारायण,
- 12:19:10आचार्य नरेंद्र देव और मीनू मसानी ने
- 12:19:13मिलकर फॉर्म किया था। 1937 के प्रोविंशियल
- 12:19:16इलेक्शंस के दौरान एआईटीयूसी कांग्रेस को
- 12:19:19सपोर्ट करती है। कांग्रेस मिनिस्ट्रीज के
- 12:19:21ट्रेड यूनियंस के प्रति सिंपैथेटिक
- 12:19:23एटीट्यूड के कारण 1938 तक इनकी संख्या
- 12:19:26बढ़कर 296 हो जाती है। बिहार, बॉम्बे,
- 12:19:30यूनाइटेड प्रोविंसेस और सेंट्रल
- 12:19:31प्रोविंसेस में कांग्रेस गवर्नमेंट्स लेबर
- 12:19:34इंक्वायरी कमिटीज भी अपॉइंट करती हैं। जो
- 12:19:36वर्कर्स की कंडीशंस को सुधारने के लिए
- 12:19:38लिबरल रेकमेंडेशंस देती हैं। जिसके बाद
- 12:19:41बॉम्बे इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट
- 12:19:431938, द बॉम्बे शॉप असिस्टेंस एक्ट 1939,
- 12:19:48सीपी मेटरनिटी एक्ट 1939 और बंगाल
- 12:19:51मेटरनिटी एक्ट 1939 जैसे बेनिफिशियल
- 12:19:54लेजिसलेशंस इनक्ट किए जाते हैं। इसके बाद
- 12:19:571939 में सेकंड वर्ल्ड वॉर शुरू हो जाता
- 12:20:00है। जब एक बार फिर वर्कर मूवमेंट नया टर्न
- 12:20:03लेता है। आइए जानते हैं इस दौरान
- 12:20:05क्या-क्या होता है। ड्यूरिंग एंड आफ्टर द
- 12:20:08सेकंड वर्ल्ड वॉर
- 12:20:13सेकंड वर्ल्ड वॉर एक बार फिर से बढ़ते
- 12:20:15प्राइसेस और पिछड़ती वेजेस का दौर लेकर
- 12:20:18आता है। साल 1940 बहुत सी स्ट्र्राइक्स का
- 12:20:21गवाह बनता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि ट्रेड
- 12:20:24यूनियंस उस समय चल रहे पॉलिटिकल डेवलपमेंट
- 12:20:27से खुद को अलग नहीं रख सकती थी। सितंबर
- 12:20:301940 में फैशज्म और इंपीरियलिज्म के
- 12:20:33अगेंस्ट एआईटीयूसी एक रेजोल्यूशन अडॉप्ट
- 12:20:35करती है। इसमें कहा जाता है कि ऐसी किसी
- 12:20:38भी वॉर में शामिल होना जिससे अपने देश में
- 12:20:41फ्रीडम और डेमोक्रेसी इस्टैब्लिश ना होती
- 12:20:43हो ना सिर्फ देश के लिए अहितकारी होगा
- 12:20:46बल्कि इसमें वर्किंग क्लास का भी कोई
- 12:20:48बेनिफिट या हित नहीं हो सकता। इस तरह
- 12:20:51शुरुआत में तो वर्कर्स मूवमेंट वॉर को
- 12:20:53अपोज करता है। लेकिन 1941 में यूएसएसआर के
- 12:20:57एलाइड पावर्स की तरफ से वॉर जॉइ करने के
- 12:21:00बाद कम्युनिस्ट वॉर को पीपल्स वॉर कहते
- 12:21:03हैं और इसे सपोर्ट करने लगते हैं।
- 12:21:05कम्युनिस्ट लीडर एमएन रॉय एआईटीयूसी
- 12:21:08छोड़कर इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर नाम की
- 12:21:10प्रो गवर्नमेंट यूनियन बना लेते हैं।
- 12:21:13ब्रिटिश गवर्नमेंट भी इस लॉयल
- 12:21:14ऑर्गेनाइजेशन के लिए पर मंथ ₹13,000 का
- 12:21:18ग्रांट सेंशन कर देती है। और इसीलिए क्विट
- 12:21:21इंडिया मूवमेंट के दौरान वर्कर्स का
- 12:21:23पार्टिसिपेशन कुछ कम देखने को मिलता है।
- 12:21:25इस दौरान कम्युनिस्ट इंडस्ट्रियल पीस की
- 12:21:28पॉलिसी फॉलो करने की सलाह देते हैं।
- 12:21:30हालांकि ऑर्गेनाइजेशनल सपोर्ट के बाहर
- 12:21:32इंडिविजुअली वर्कर्स जरूर आंदोलन को
- 12:21:35सपोर्ट करते हैं। इसके बाद 1945 से 1947
- 12:21:39के बीच वर्कर्स बड़ी संख्या में पोस्ट वॉर
- 12:21:42नेशनल अप्रजर्स में शामिल होते हैं।
- 12:21:44उदाहरण के तौर पर 1946 में नेवल रेटिंग्स
- 12:21:47के सपोर्ट में जगह-जगह वर्कर्स स्ट्राइक
- 12:21:50पर जाते हैं। फॉरेन रूल के आखिरी साल में
- 12:21:52बहुत सी स्ट्राइक्स देखी जाती हैं जो कि
- 12:21:55पोस्ट्स रेलवेेज जैसी एस्टैब्लिशमेंट्स
- 12:21:57में की गई थी।
- 12:21:59कंक्लूजन।
- 12:22:05दोस्तों, हम कह सकते हैं कि इंडिया में
- 12:22:07वर्कर्स मूवमेंट काफी हद तक आजादी के
- 12:22:10आंदोलन से प्रभावित रहता है। शुरुआत में
- 12:22:12नेशनल लीडर्स ही ट्रेड यूनियंस को लीडरशिप
- 12:22:15प्रोवाइड करते दिखते हैं। लेकिन लेट 1920
- 12:22:18के बाद इसका नेतृत्व कम्युनिस्ट लीडर्स के
- 12:22:21हाथों में चला जाता है। वर्किंग क्लास
- 12:22:23नेशनल मूवमेंट को भी ब्रॉड बेस प्रदान
- 12:22:26करती है। इनके पार्टिसिपेशन के बिना नेशनल
- 12:22:29स्ट्रगल अधूरा ही रह जाता है। राइज ऑफ
- 12:22:32इंडियन कैपिटलिस्ट्स एंड देयर रोल इन
- 12:22:34नेशनल मूवमेंट। दोस्तों, इंडियन फ्रीडम
- 12:22:38मूवमेंट एक ऐसी दास्तान है जिसे सिर्फ एक
- 12:22:41पर्सपेक्टिव से नहीं देखा जाना चाहिए। ये
- 12:22:44एक ऐसी गु्थी है जिसमें बड़े-बड़े नेताओं
- 12:22:47जैसे गोखले, तिलक, गांधी एटसेट्रा के
- 12:22:50साथ-साथ कई ऐसे समुदाय और आईडियोलॉजीस भी
- 12:22:53शामिल रहीं। जिनका जिक्र किए बिना इसको
- 12:22:56समझना मुश्किल होने के साथ ही अधूरा भी
- 12:22:58है। यह कहानी है भारत के कैपिटलिस्ट्स
- 12:23:02अर्थात पूंजीपतियों के राइज और इंडियन
- 12:23:05फ्रीडम मूवमेंट में उनके रोल की जिसने
- 12:23:08हमारी स्ट्रगल में एक अहम भूमिका निभाई।
- 12:23:11लेकिन ये कहानी शुरू करने से पहले जल्दी
- 12:23:14से जानते हैं कुछ बेसिक फैक्ट्स अबाउट
- 12:23:16कैपिटलिज्म।
- 12:23:18कैपिटलिज्म।
- 12:23:20सिंपल टर्म्स में अगर समझा जाए तो
- 12:23:23कैपिटलिज्म अर्थात पूंजीवाद एक ऐसा
- 12:23:26इकोनॉमिक सिस्टम है जिसमें कैपिटल गुड्स
- 12:23:28की ओनरशिप प्राइवेट या कोपरेट के हाथ में
- 12:23:30होती है। कैपिटल गुड्स अर्थात पूंजीगत माल
- 12:23:34मतलब ऐसे गुड्स जिनका यूज़ दूसरे कंज्यूमर
- 12:23:37गुड्स के प्रोडक्शन के लिए होता है।
- 12:23:39प्रोडक्शन प्राइसेस और डिस्ट्रीब्यूशन
- 12:23:41फ्री मार्केट पर डिपेंडेंट होता है। कितना
- 12:23:44प्रोडक्शन करना है, कितना प्राइस रखना है,
- 12:23:47यह सब कुछ प्राइवेट कंपनीज़ डिसाइड करती
- 12:23:49हैं। मार्केट को कंट्रोल करने में सरकार
- 12:23:52का कोई खास रोल नहीं होता। इस सिस्टम को
- 12:23:55कैपिटलिज्म कहते हैं और यह डिफरेंट है
- 12:23:57कम्युनिज्म से जिसमें स्टेट एक मेजर
- 12:24:00कंट्रोलर ऑफ इकोनॉमिक एक्टिविटी होता है।
- 12:24:03आइए अब चलते हैं वापस हमारी कहानी की तरफ
- 12:24:06कि कैसे इंडियन कैपिटलिस्ट क्लास फ्रीडम
- 12:24:09स्ट्रगल में इनवॉल्व हुई और कैसे उसे
- 12:24:12इनफ्लुएंस किया।
- 12:24:14इंट्रोडक्शन
- 12:24:16दोस्तों कॉलोनियलिज्म के दौर में कई
- 12:24:19इंडिविजुअल कैपिटलिस्ट्स ने नेशनल मूवमेंट
- 12:24:22में पार्टिसिपेट किया। उन्होंने न केवल
- 12:24:25कांग्रेस जॉइ किया। जेल भी गए और उस दौर
- 12:24:28की सभी मुश्किलों को एक्सेप्ट किया जो
- 12:24:31कांग्रेसमैन के लिए आम बात थी। जमनालाल
- 12:24:34बजाज, वाड़ीलाल लालू भाई मेहता, लाला शंकर
- 12:24:38लाल, सैमुअल एरन कुछ ऐसे नाम हैं जो इसमें
- 12:24:42वेल नोन रहे। कुछ ऐसे भी इंडिविजुअल
- 12:24:44कैपिटलिस्ट्स थे जिन्होंने कांग्रेस जॉइ
- 12:24:47नहीं किया पर फाइनेंशियल या कोई
- 12:24:49इनडायरेक्ट हेल्प की। जैसे जीडी बिरला,
- 12:24:53अंबालाल साराभाई और वालचंद हीराचंद। कई
- 12:24:56छोटे मर्चेंट्स या ट्रेडर्स ने भी
- 12:24:58एक्टिवली सपोर्ट किया। दूसरी ओर कुछ ऐसे
- 12:25:02इंडिविजुअल कैपिटलिस्ट या सेक्शंस रहे जो
- 12:25:05कि कांग्रेस या नेशनल मूवमेंट की तरफ
- 12:25:08न्यूट्रल रहे और कुछ ने तो एक्टिवली अपोज
- 12:25:11भी किया। यहां पर हम पूरी कैपिटलिस्ट एज अ
- 12:25:14क्लास अर्थात पूरे वर्ग की स्ट्रेटजी पर
- 12:25:17फोकस करेंगे ना कि किसी इंडिविजुअल या
- 12:25:20किसी सेक्शन पर। आइए अब जानते हैं द राइज
- 12:25:23ऑफ कैपिटलिस्ट क्लास इन इंडिया।
- 12:25:27राइज ऑफ कैपिटलिस्ट क्लास।
- 12:25:29पहली इंपॉर्टेंट बात यह है कि अगर दूसरी
- 12:25:32कॉलोनियल इकॉनमी से कंपेयर करें तो इंडियन
- 12:25:35कैपिटलिस्ट्स का इकोनॉमिक डेवलपमेंट काफी
- 12:25:38संपन्न और कई मायनों में उनकी ग्रोथ का
- 12:25:40नेचर काफी अलग भी रहा। जानते हैं कैसे?
- 12:25:44फर्स्टली इंडियन कैपिटलिस्ट्स क्लास मिड
- 12:25:4819th सेंचुरी में ग्रो होना चालू हुई।
- 12:25:51मुख्य बात यह है कि इनकी कैपिटल अर्थात
- 12:25:53पूंजी निजी रूप से स्वतंत्र थी ना कि किसी
- 12:25:57फॉरेन कैपिटल के जूनियर पार्टनर की तरह।
- 12:26:00यह उनकी इंडिपेंडेंट कैपिटल थी। सेकंडली
- 12:26:03इंडियन कैपिटलिस्ट क्लास इकोनॉमिकली या
- 12:26:06पॉलिटिकली कभी भी ऐसे सामंतवादी यानी
- 12:26:09फ्यूडलिस्टिक लोगों के अधीन नहीं रहा जो
- 12:26:12इंपीरियलिज्म के सपोर्ट में थे। बल्कि
- 12:26:151944-45
- 12:26:16के फेमस बॉम्बे प्लान जिनके सिग्नेटरीज जे
- 12:26:20आरडी टाटा और जीडी बिरला जैसे लोग रहे
- 12:26:23उन्होंने डिटेल्ड लैंड रिफॉर्म्स का
- 12:26:25सपोर्ट भी किया जिसमें कोऑपरेटिव्स बनाने
- 12:26:28की बात की गई। थर्डली 1914 से 1947 के
- 12:26:33दौरान कैपिटलिस्ट क्लास ने बहुत तेजी से
- 12:26:36ग्रोथ की। इसके कई कारणों में से एक
- 12:26:39इंपोर्ट सब्सीट्यूशन रहा। जिसके चलते
- 12:26:42स्वदेशी प्रोडक्ट्स को इनकरेज किया गया
- 12:26:44बाय लिमिटिंग इंपोर्ट। आजादी होने तक
- 12:26:47इंडीजीनस या स्वदेशी एंटप्राइजेस का
- 12:26:50डोमेस्टिक मार्केट शेयर 73% तक पहुंच गया
- 12:26:53और ऑर्गेनाइज्ड बैंकिंग सेक्टर के
- 12:26:56डिपॉजिट्स का 80% जो साफ-साफ इनकी ग्रोथ
- 12:26:59को बयान करता है। यहां यह समझना जरूरी है
- 12:27:02कि कैपिटलिस्ट्स की ग्रोथ कॉलोनियलिज्म के
- 12:27:05कारण नहीं हो रही थी। जैसा अक्सर इल्जाम
- 12:27:08लगाया जाता है। बल्कि यह ग्रोथ
- 12:27:10कॉलोनियलिज्म के खिलाफ लगातार स्ट्रगल
- 12:27:13करते हुए हुई। कैपिटलिस्ट्स का ऐसा कोई भी
- 12:27:16इकोनॉमिक इंटरेस्ट नहीं था जो उनके
- 12:27:19इंपीरियलिज्म के खिलाफ लड़ाई के बीच आता।
- 12:27:21बल्कि मिड 1920 तक उन्होंने अपने लॉन्ग
- 12:27:25टर्म क्लास इंटरेस्ट को सेट किया और
- 12:27:28इंपीरियलिज्म के खिलाफ अपनी आवाज को खुलकर
- 12:27:31लोगों तक पहुंचाया। कैपिटलिस्ट क्लास की
- 12:27:34हेजिटेशन सिर्फ यह थी कि इंपीरियलिज्म के
- 12:27:37खिलाफ कौन सा रास्ता चुना जाए? उन्हें यह
- 12:27:40डर था कि स्ट्रगल ऐसा रास्ता ना ले ले
- 12:27:43जिससे उनके यानी कैपिटलिज्म के एकिस्टेंस
- 12:27:46पर ही खतरा आ जाए। इंपीरियलिज्म और एंटी
- 12:27:50इंपीरियलिस्ट मूवमेंट की तुलना में
- 12:27:52कैपिटलिस्ट क्लास की क्या सोच रही? यह
- 12:27:54समझने से पहले एक नजर इस पर डालना जरूरी
- 12:27:57है कि कैपिटलिस्ट क्लास का इमरजेंस एक
- 12:28:00पॉलिटिकल एंटिटी के रूप में कैसे हुआ।
- 12:28:04इमर्जेंस ऑफ द कैपिटलिस्ट क्लास एस अ
- 12:28:06पॉलिटिकल एंटिटी।
- 12:28:091920 की शुरुआत से ही जीडी बिरला और
- 12:28:12पुरुषोत्तम दास जैसे कैपिटलिस्ट्स ने
- 12:28:15इंडिया के कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और
- 12:28:17फाइनेंशियल इंटरेस्ट्स के लिए एक नेशनल
- 12:28:20लेवल की ऑर्गेनाइजेशन को बनाने का प्रयास
- 12:28:22किया। जिसकी मदद से कॉलोनियल गवर्नमेंट के
- 12:28:25सामने अपनी मांगे रख सकें। इन्हीं कोशिशों
- 12:28:28के चलते 1927 में फेडरेशन ऑफ इंडियन
- 12:28:32चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री अर्थात
- 12:28:35फिककी का गठन हुआ। जिसे कॉलोनियल
- 12:28:38गवर्नमेंट और इंडियन पब्लिक ने कैपिटलिस्ट
- 12:28:41क्लास के एक डोमिनेंट ओपिनियन के रूप में
- 12:28:44स्वीकार किया। कैपिटलिस्ट क्लास के लीडर्स
- 12:28:47फिकी को ट्रेड, कॉमर्स और इंडस्ट्री के
- 12:28:49नेशनल गार्डियन के रूप में देखने लगे। इस
- 12:28:52प्रोसेस के दौरान इंडियन कैपिटलिस्ट्स ने
- 12:28:55इंटेलेक्चुअल्स का इस्तेमाल करके
- 12:28:57इंपीरियलिज्म के कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक
- 12:28:59क्रिटिक को डिवप किया। जिसमें उन्होंने
- 12:29:02ट्रेड प्रैक्टिससेस में हो रहे
- 12:29:03एक्सप्लइटेशन को उजागर किया। फिर चाहे वो
- 12:29:06डायरेक्ट एप्रोप्रिएशन यानी सीधे लूट के
- 12:29:09माध्यम से हो या फिर ट्रेड, फाइनेंस,
- 12:29:12करेंसी मैनपुलेशन, दो कंट्रीज के बीच हो
- 12:29:15रहे अनकल एक्सचेंज जैसे माध्यमों से हो।
- 12:29:18कांग्रेस लीडर्स ने उनके ओपिनियन और
- 12:29:20एक्सपर्टीज को हमेशा ही रिस्पेक्ट से
- 12:29:22ट्रीट किया। कैपिटलिस्ट्स ने यह महसूस
- 12:29:25किया कि फिकी लंबे समय तक सिर्फ एक ट्रेड
- 12:29:28यूनियन मात्र नहीं रह सकती। उनका मानना था
- 12:29:31कि अब उनको पॉलिटिक्स में इंटरवीन करना
- 12:29:33चाहिए। 1928 में फिकी के प्रेसिडेंट सर
- 12:29:37पुरुषोत्तम दास ने डिक्लेअर किया वी कैन
- 12:29:40नो मोर सेपरेट आवर पॉलिटिक्स फ्रॉम
- 12:29:42इकोनॉमिक्स। इंडियन नेशनलिज्म में फर्दर
- 12:29:45इनवॉल्व होने की बात कही गई। सिमिलरली
- 12:29:48जीडी बिरला ने 1930 में फ्रीडम फाइटर्स के
- 12:29:52हाथ मजबूत करने की बात कही जिससे
- 12:29:55गवर्नमेंट को अपने समकक्ष लाया जा सके। तो
- 12:29:58वापस आते हैं एंटी इंपीरियलिस्ट मूवमेंट
- 12:30:00के सपोर्ट में कैपिटलिस्ट क्लास के
- 12:30:02तौररीकों पर। वेज़ ऑफ स्ट्रगल अकॉर्डिंग टू
- 12:30:06कैपिटलिस्ट क्लास। कैपिटलिस्ट क्लास का
- 12:30:10शुरू से यह मानना था कि स्ट्रगल के पाथ
- 12:30:12में कभी भी कॉन्स्टिट्यूशनल मीन्स और
- 12:30:15नेगोशिएशंस को अबेंडन नहीं किया जाना
- 12:30:18चाहिए। कैपिटलिस्ट मास सिविल डिसओबिडियंस
- 12:30:21के पक्ष में नहीं थे। इनके कुछ कारणों पर
- 12:30:24नजर डालते हैं। पहला उन्हें डर था कि मास
- 12:30:27सिविल डिसओबिडियंस सोशल सेंस में
- 12:30:29रेवोल्यूशनरी मूवमेंट में कन्वर्ट हो सकता
- 12:30:32है। जिससे कैपिटलिज्म को खतरा होगा। दूसरा
- 12:30:35वह लंबे चलने वाले आंदोलन को सपोर्ट नहीं
- 12:30:38कर सकते थे क्योंकि उनके डे टू डे बिजनेस
- 12:30:41को हानि होती। तीसरा उनके कॉन्स्टिट्यूशनल
- 12:30:44पार्टिसिपेशन और वाइसरॉय की एग्जीक्यूटिव
- 12:30:47काउंसिल में शामिल होने को सरेंडर के तौर
- 12:30:49पर नहीं देखा जाना चाहिए। बल्कि वो
- 12:30:52काउंसिल में रहकर इफेक्टिव अपोजिशन देना
- 12:30:55चाहते थे जिससे ऐसे लोग जो नेशनल इंटरेस्ट
- 12:30:58के लिए काम नहीं कर रहे थे वो अपनी बात ना
- 12:31:01मनवा लें। ऐसा होने से कैपिटलिस्ट क्लास
- 12:31:04और इंडियन इकॉनमी को घाटा हो सकता था। वह
- 12:31:07केवल अपनी शर्तों पर ही पार्टिसिपेट करना
- 12:31:10चाहते थे नेशनल डिमांड्स को अबेंडन किए
- 12:31:13बिना। यही कारण था कि फिकी ने 1934 में
- 12:31:17रिपोर्ट ऑफ जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी
- 12:31:19ऑन कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म्स फॉर इंडिया
- 12:31:21को रिजेक्ट किया। चौथा उन्होंने बिना
- 12:31:24कांग्रेस की इन्वॉल्वमेंट के ब्रिटिश
- 12:31:26गवर्नमेंट से नेगोशिएट करने से इंकार कर
- 12:31:28दिया। राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार
- 12:31:31किया और गांधी जी के इनवॉल्वमेंट को
- 12:31:34नेसेसरी बताया एस अ फ्री मैन। नवंबर 1929
- 12:31:38में सारा भाई ने कहा माइनस द सपोर्ट ऑफ द
- 12:31:42कांग्रेस द गवर्नमेंट विल नॉट लिसन टू यू।
- 12:31:45फाइनली कैपिटलिस्ट क्लास ने फ्रीडम
- 12:31:48स्ट्रगल के और तरीकों को साइडलाइन नहीं
- 12:31:50किया। उनके अनुसार कॉन्स्टिट्यूशनलिज्म
- 12:31:53सिर्फ एक स्टेप था मेन गोल यानी फ्रीडम की
- 12:31:56ओर। एग्जांपल के तौर पर जेडी बिरला ने
- 12:31:59ब्रिटिश गवर्नमेंट को वर्न किया कि
- 12:32:01कांग्रेस अपने गोल्स तक पहुंचने के लिए
- 12:32:04ऑफिस ज्वाइन कर रही है ना कि
- 12:32:05कॉन्स्टिट्यूशन को इनफोर्स करने के लिए और
- 12:32:08अगर दो-ती साल में प्रोग्रेस नहीं हुई तो
- 12:32:11मास सिविल डिसओबिडियंस का डायरेक्ट एक्शन
- 12:32:14लेना जरूरी हो जाएगा। दोस्तों कैपिटलिस्ट
- 12:32:17क्लास का एटीट्यूड सिविल डिसओबिडियंस
- 12:32:20मूवमेंट की ओर काफी उलझा देने वाला था। एक
- 12:32:23नजर इस पर भी डालते हैं।
- 12:32:26कॉम्प्लेक्स एटीट्यूड टुवर्ड्स सिविल
- 12:32:29डिसओबिडियंस मूवमेंट।
- 12:32:32कैपिटलिस्ट क्लास बताए गए कारणों से सिविल
- 12:32:35डिसओबिडियंस मूवमेंट से डरती रही। पर यह
- 12:32:38एक्सेप्ट भी किया कि जो भी अब तक डिमांड्स
- 12:32:41एक्सेप्ट हुई हैं, वो इस मूवमेंट के कारण
- 12:32:43ही थी। जनवरी 1931 में जीडी बिरला ने
- 12:32:47पुरुषोत्तम दास को लिखते हुए यह माना कि
- 12:32:50गांधीजी के कारण ही हमारे ऑफर्स एक्सेप्ट
- 12:32:53किए गए और किसी भी हाल में मूवमेंट को वीक
- 12:32:56नहीं होने दिया जा सकता। जब भी मूवमेंट
- 12:32:59लंबा चलता तो कैपिटलिस्ट क्लास पीस और
- 12:33:02नेगोशिएशन की बात सामने लेकर आती। यही
- 12:33:05उनका ड्यूल ऑब्जेक्टिव था। अचीविंग
- 12:33:07कंसिलिएशन विदाउट वीकनिंग द नेशनल
- 12:33:10मूवमेंट। कैपिटलिस्ट क्लास भले ही सिविल
- 12:33:13डिसओबिडियंस मूवमेंट को कितना भी अपोज
- 12:33:16करें पर उन्होंने कभी कॉलोनियल गवर्नमेंट
- 12:33:18को मूवमेंट सप्रेस करने में सपोर्ट नहीं
- 12:33:21किया बल्कि उन्होंने लगातार गवर्नमेंट को
- 12:33:24प्रेशराइज किया रिप्रेशन को रोकने के लिए।
- 12:33:27समय के साथ इंडियन कैपिटलिस्ट्स के
- 12:33:29एटीट्यूड में भी काफी अंतर दिखाई दिया।
- 12:33:32फॉर एग्जांपल 195 से 198 के स्वदेशी
- 12:33:36मूवमेंट और 1920 के नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट
- 12:33:40को कैपिटलिस्ट्स की एक और टुकड़ी ने अपोज
- 12:33:43किया। लेकिन 1930 के आते-आते कैपिटलिस्ट्स
- 12:33:46ने बड़े पैमाने पर सिविल डिसओबिडियंस
- 12:33:49मूवमेंट का सपोर्ट किया।
- 12:33:525th अगस्त 1942 क्विट इंडिया मूवमेंट के
- 12:33:56चार दिन पहले वाइसॉय से पॉलिटिकल फ्रीडम
- 12:33:58की मांग की। यह तो बात हुई कैपिटलिस्ट
- 12:34:01क्लास और सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट की ओर
- 12:34:04उनके एटीट्यूड की। अब कई बार कांग्रेस पर
- 12:34:08यह इल्जाम लगे कि वह कैपिटलिस्ट क्लास से
- 12:34:10इन्फ्लुएंस्ड हैं। इसको समझते हैं।
- 12:34:14नेशनल मूवमेंट एंड इन्फ्लुएंस ऑफ
- 12:34:16कैपिटलिस्ट्स।
- 12:34:181920 के एंड तक भले ही इंडियन कैपिटलिस्ट
- 12:34:22का एक बड़ा सेक्शन कांग्रेस को सपोर्ट कर
- 12:34:24रहा था। लेकिन यह समझना जरूरी है कि
- 12:34:27इंडियन नेशनल मूवमेंट ना ही इनके द्वारा
- 12:34:29क्रिएट किया गया था और ना ही किसी भी तरह
- 12:34:32से इनके सपोर्ट पर डिपेंडेंट था। बल्कि
- 12:34:35कैपिटलिस्ट क्लास ने हमेशा ही नेशनल
- 12:34:38मूवमेंट की स्ट्रेटजी पर रिएक्ट किया एंड
- 12:34:41कांग्रेस को फॉलो किया। यह भी देखा जाना
- 12:34:44चाहिए कि जो भी कैपिटलिस्ट नेशनल मूवमेंट
- 12:34:47का पार्ट रहे वो जनरली कंजर्वेटिव
- 12:34:50स्पेक्ट्रम में रहे जिनका मूवमेंट की
- 12:34:52स्ट्रेटजीस पर कोई खास इन्फ्लुएंस नहीं
- 12:34:54रहा। फिर भी नेशनल मूवमेंट की ऑटोनोमी पर
- 12:34:58लगातार ही सवाल खड़े होते रहे हैं। ऐसा
- 12:35:00कहा गया कि कैपिटलिस्ट्स ने अपने पैसों के
- 12:35:03दम पर कांग्रेस को प्रेशराइज किया अपनी
- 12:35:06डिमांड्स मनवाने के लिए। जैसे लोअर रूपी
- 12:35:09स्टर्लिंग रेशो जिसे एक्सपोर्ट करने पर
- 12:35:12इंडियन एक्सपोर्टर्स का फायदा होता है।
- 12:35:14टेरिफ प्रोटेक्शन जिसकी मदद से इंपोर्ट
- 12:35:16होने वाले गुड्स की कीमत डोमेस्टिक गुड्स
- 12:35:19से ज्यादा हो जाए और लोकल इंडस्ट्रीज को
- 12:35:21प्रॉफिट हो। मिलिट्री एक्सपेंसेस जो
- 12:35:24कॉलोनियल गवर्नमेंट दूसरी कॉलोनीज बचाने
- 12:35:27के लिए करती थी। इन सभी स्टेप्स से
- 12:35:30कैपिटलिस्ट क्लास का ही फायदा होने वाला
- 12:35:32था। यह भी इल्जाम लगे कि कैपिटलिस्ट्स ने
- 12:35:36इस हद तक इन्फ्लुएंस किया कि किसी भी
- 12:35:38मूवमेंट को कब स्टार्ट और एंड करना है, यह
- 12:35:41भी वही डिसाइड करने लगे। गांधी एयरबन
- 12:35:45पैक्ट के बाद सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट
- 12:35:48को बंद करना इसका ही एक एग्जांपल बताया
- 12:35:50गया। यह सारे एक्यूज़ेशंस रियलिटी को
- 12:35:53रिफ्लेक्ट नहीं करते। आइए जानते हैं
- 12:35:56क्यों। फर्स्ट इकोनॉमिक नेशनलिज्म की
- 12:35:59डिमांड्स जैसे प्रोटेक्शन, फिस्कल और
- 12:36:02मॉनिटरी ऑटोनोमी सिर्फ कैपिटलिस्ट्स को
- 12:36:04फायदा नहीं पहुंचाने वाली थी बल्कि पूरी
- 12:36:07कंट्री की डिमांड थी जो कि एक्सप्लइटेशन
- 12:36:10का शिकार थी। इवन लेफ्टिस्ट्स जैसे नेहरू,
- 12:36:13सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट्स ने भी इन
- 12:36:16डिमांड्स के लिए लड़ाई लड़ी। सेकंड
- 12:36:18इकोनॉमिक नेशनलिज्म की डिमांड कोई नई बात
- 12:36:21नहीं थी। 50 साल पहले से ही नेशनलिस्ट्स
- 12:36:24ने इसकी डिटेल्ड डॉक्ट्रिन डेवलप करनी
- 12:36:27चालू कर दी थी। वो भी तब जब इंडियन
- 12:36:30कैपिटलिस्ट एक क्लास के रूप में उभरा भी
- 12:36:32नहीं था। इसलिए यह कहना गलत है कि
- 12:36:35उन्होंने कांग्रेस को इन्फ्लुएंस किया।
- 12:36:38थर्ड यह बात सच है कि कांग्रेस को फंड्स
- 12:36:41की जरूरत थी और बिजनेस कम्युनिटी से लेते
- 12:36:43भी रहे। खासकर स्ट्रगल के कॉन्स्टिट्यूशनल
- 12:36:46फेज के दौरान। लेकिन इसका कोई सबूत नहीं
- 12:36:49है कि कांग्रेस की पॉलिसीज को कभी
- 12:36:51उन्होंने इन्फ्लुएंस किया। छोटे डोनेशंस
- 12:36:54और मेंबरशिप फीस पर ही लोकल लीडर्स अपना
- 12:36:57गुजारा करते रहे। इस कॉन्टेक्स्ट में
- 12:36:59गांधी जी की पोजीशन पर बात करना जरूरी है।
- 12:37:021922 से ही गांधी जी का यह मानना था कि
- 12:37:05भले ही मर्चेंट्स और मिल ओनर्स से सपोर्ट
- 12:37:08लेना चाहिए पर किसी भी कंडीशन में इस
- 12:37:10मूवमेंट को उन पर डिपेंडेंट नहीं होना
- 12:37:13चाहिए। यह एक मास मैनिफेस्टेशन है। इसलिए
- 12:37:17यह मूवमेंट कैपिटलिस्ट से इंडिपेंडेंट तो
- 12:37:19होना ही चाहिए पर उनके खिलाफ नहीं होना
- 12:37:22चाहिए। हालांकि आगे चलकर गांधी जी का
- 12:37:25एटीट्यूड नेगेटिव हो गया जब वर्ल्ड वॉर टू
- 12:37:27के दौरान कैपिटलिस्ट क्लास प्रॉफिट मेकिंग
- 12:37:30में लगे रहे। जबकि लोग फेमिन से मर रहे
- 12:37:33थे। लास्टली कांग्रेस हमेशा ही बिना
- 12:37:36कैपिटलिस्ट के अप्रूवल के मूवमेंट स्टार्ट
- 12:37:38और एंड करती रही। अपने खुद के स्ट्रेटेजिक
- 12:37:41परसेप्शनंस और मासेस के प्रिपरेडनेस के
- 12:37:43आधार पर। आइए अब जानते हैं कि कैसे फ्रीडम
- 12:37:47स्ट्रगल के चलते कैपिटलिस्ट्स और
- 12:37:49लेफ्टिस्ट्स जिन्हें अक्सर ऑोजिट एंड ऑफ द
- 12:37:52आईडियोलॉजिकल स्पेक्ट्रम में समझा जाता है
- 12:37:54केम टुगेदर फॉर नेशनल गुड।
- 12:37:58कैपिटलिस्ट्स एंड कोऑपरेशन विद
- 12:38:00लेफ्टिस्ट्स।
- 12:38:02दोस्तों इंडियन कैपिटलिस्ट्स ने कभी
- 12:38:06कांग्रेस को अपनी क्लास पार्टी के रूप में
- 12:38:08नहीं देखा बल्कि एक ओपन एंडेड
- 12:38:10ऑर्गेनाइजेशन के रूप में देखा जो कि एक
- 12:38:13पॉपुलर मूवमेंट को लीड कर रही थी। 1930 के
- 12:38:16दशक में नेहरू सोशलिस्ट्स और कम्युनिस्ट्स
- 12:38:19के इन्फ्लुएंस के कारण जब कांग्रेस में
- 12:38:22रेडिकलाइजेशन बढ़ा तब कैपिटलिस्ट्स ने
- 12:38:25पॉलिटिक्स में एक्टिव पार्ट लेने का
- 12:38:27डिसीजन लिया। सराहनीय है कि इसके बावजूद
- 12:38:30भी उन्होंने इंपीरियलिज्म का साथ नहीं
- 12:38:32दिया। ऐसी ही एक कोशिश को इंडियन
- 12:38:35कैपिटलिस्ट्स ने नाकाम कर दिया। जब 1929
- 12:38:38में कुछ कैपिटलिस्ट्स ने यूरोपियन और
- 12:38:41इंडियन कैपिटलिस्ट की एक पार्टी बनाने का
- 12:38:44सुझाव दिया जो कि कम्युनिस्ट एक्टिविटी के
- 12:38:47खिलाफ होने वाली थी। 1928 में भी पब्लिक
- 12:38:50सेफ्टी बिल को सपोर्ट करने से इंकार कर
- 12:38:52दिया। जिसका इस्तेमाल लेफ्टिस्ट को सप्रेस
- 12:38:55करने के लिए किया जाने वाला था।
- 12:38:57कैपिटलिस्ट बोलशेविज्म या कम्युनिज्म खत्म
- 12:39:01करने के लिए डायरेक्ट अटैक नहीं करना
- 12:39:03चाहते थे। बल्कि वह उन लोगों के हाथ सशक्त
- 12:39:06करना चाहते थे जिन्होंने कैपिटलिज्म का
- 12:39:08दायरा नहीं छोड़ा या फिर सोशलिज्म को अपोज
- 12:39:11किया। कैपिटलिस्ट्स जैसे जीएल मेहता जो कि
- 12:39:151943 में फिकी के प्रेसिडेंट थे का यह
- 12:39:18मानना था कि सोशल चेंजेस से लड़ने का सबसे
- 12:39:21अच्छा तरीका है कंसिस्टेंट प्रोग्राम ऑफ
- 12:39:24रिफॉर्म्स। इसी रिफॉर्म पर्सपेक्टिव के
- 12:39:26साथ पोस्ट वॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट कमेटी
- 12:39:29को काम करना था। जिसने फाइनली बॉम्बे
- 12:39:32प्लान को बनाया। वो सब कुछ जो सोशलिस्ट
- 12:39:35मूवमेंट में रीज़नेबल था उसे अकोमोडेट करने
- 12:39:38की कोशिश की गई। बिना कैपिटलिज्म के
- 12:39:41एसेंशियल फीचर्स को सरेंडर किए। आखिरकार
- 12:39:44बॉम्बे प्लान ने पार्शियल नेशनलाइजेशन,
- 12:39:47पब्लिक सेक्टर, लैंड रिफॉर्म और वर्कर्स
- 12:39:50की वेलफेयर स्कीम्स की नेसेसिटी को भी कुछ
- 12:39:52हद तक एक्सेप्ट किया।
- 12:39:55कंक्लूडिंग रिमार्क्स।
- 12:39:57तो दोस्तों, हमने देखा कि इंडियन
- 12:40:00कैपिटलिस्ट क्लास प्रो इंपीरियलिस्ट
- 12:40:03बिल्कुल भी नहीं थी। इंडियन कैपिटलिस्ट
- 12:40:05क्लास ने अपने लॉन्ग टर्म इंटरेस्ट को
- 12:40:08आइडेंटिफाई किया और उसको प्रैगमैटिकली
- 12:40:10पर्स्यू किया। उन्होंने कांग्रेस कीेंस को
- 12:40:14समझते हुए इंडियन नेशनलिज्म का साथ कभी
- 12:40:17नहीं छोड़ा और लगातार अपने क्लास इंटरेस्ट
- 12:40:20को सोसाइटी के इंटरेस्ट के तौर पर उजागर
- 12:40:22किया। इनफैक्ट दिस वास द वेरी ब्यूटी ऑफ़
- 12:40:25आवर फ्रीडम स्ट्रगल। जहां वेरियस
- 12:40:27आईडियोलॉजीस और क्लासेस के लोगों ने मिलकर
- 12:40:30कंट्रीब्यूट किया और भारत देश का इतिहास
- 12:40:33अमर हो गया। पॉपुलर स्ट्रगल्स इन प्रिंसली
- 12:40:37स्टेट्स। दोस्तों, जब हम इंडिया के फ्रीडम
- 12:40:40स्ट्रगल को याद करते हैं, तो यूजुअली
- 12:40:43ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट हुए मूवमेंट्स
- 12:40:44दिमाग में आते हैं। लेकिन क्या आप जानते
- 12:40:47हैं कि ब्रिटिश राज तो इंडिया की खाली 3
- 12:40:50फिफ्थ टेरिटरी को कवर करता था। बाकी की
- 12:40:5325th टेरिटरी को इंडियन रूलर्स जिन्हें
- 12:40:56प्रिंसली स्टेट्स भी कहा जाता था उनके
- 12:40:58अंडर में थी। सरदार पटेल ने कैसे 500 से
- 12:41:02ज्यादा रियासतों का भारत में विलय किया।
- 12:41:04इसके बारे में तो आपने सुना या पढ़ा ही
- 12:41:06होगा। लेकिन आज हम उससे पहले का इतिहास
- 12:41:09जानते हैं। लेकिन उससे पहले जानते हैं
- 12:41:12व्हाट डू वी मीन बाय द टर्म प्रिंसली
- 12:41:15स्टेट्स। प्रिंसली स्टेट्स। ब्रिटिशर्स ने
- 12:41:18जब इंडिया को ककर किया तो कुछ एरियाज पर
- 12:41:21डायरेक्ट कंट्रोल इस्टैब्लिश किया जैसे
- 12:41:23बंगाल, मद्रास या अवध का रीजन। लेकिन एक
- 12:41:26बड़ा एरिया ऐसा भी था जहां डायरेक्ट
- 12:41:28कॉन्क्वेस्ट की जगह इंडियन प्रिंसेस को ही
- 12:41:31रूल करने दिया गया। कंडीशन बस यह थी कि इन
- 12:41:34सभी स्टेट्स को ब्रिटिश पैरामाउंट सी
- 12:41:36एक्सेप्ट करनी होगी। पैरामाउंट सी बेसिकली
- 12:41:40मींस कि यह स्टेट्स ब्रिटिश क्राउन के
- 12:41:42वेसल्स होंगे। दे एक्सेप्ट सब्सिडियरी
- 12:41:45अलायंसेस विद ब्रिटिशर्स। सो डिफेंस और
- 12:41:48फॉरेन रिलेशंस की पावर ब्रिटिश रेजिडेंट्स
- 12:41:51के पास होगी और इंटरनल मैटर्स में स्टेट्स
- 12:41:54फ्री होंगे। देयर वर सम रियली लार्ज
- 12:41:56स्टेट्स सच एज हैदराबाद, मैसौर, कश्मीर,
- 12:42:00जयपुर एटसेटरा एंड मेनी वर स्मॉल लाइक
- 12:42:02बीकानेर, बरोडा, इंदौर, जामनगर, द डेक्कन
- 12:42:06स्टेट्स, अलवर, भरतपुर एटसेटरा। अब ऐसी
- 12:42:10क्या कंडीशंस थी कि इंडियन प्रिंसेस के
- 12:42:12रूल के अगेंस्ट मूवमेंट्स हुई? वेल, बहुत
- 12:42:15से रीजंस थे। आइए जानते हैं। कॉजेस ऑफ
- 12:42:18मूवमेंट्स इन प्रिंसली स्टेट्स। सबसे
- 12:42:21इंपॉर्टेंट रीज़ मोस्ट ऑफ दी इंडियन रूलर्स
- 12:42:24ऑटोक्रेटिक स्टाइल में रूल करते थे।
- 12:42:26ब्रिटिशर्स ने इन्हें किसी भी एक्सटर्नल
- 12:42:29और इंटरनल थ्रेट के अगेंस्ट प्रोटेक्शन भी
- 12:42:31गारंटी की हुई थी। अंडर पैरामाउंट
- 12:42:33प्रिंसिपल। इसलिए मोस्ट ऑफ देम अपनी प्रजा
- 12:42:36को भूलकर बस सेल्फिश इंटरेस्ट को बढ़ा रहे
- 12:42:40थे। दूसरा रीजन था हाई टैक्सेस। आपको
- 12:42:44जानकर हैरानी होगी कि कुछ प्रिंसली
- 12:42:46स्टेट्स में टैक्सेशन रेट्स ब्रिटिश
- 12:42:48इंडिया से भी ज्यादा थे। तीसरा रीजन था
- 12:42:52लैक ऑफ सिविल लिबर्टज। यूं कहिए कि यहां
- 12:42:55रहने वाले लोगों के पास डेमोक्रेटिक
- 12:42:57राइट्स ना के बराबर थे। एक तरफ यह रीजंस
- 12:43:00थे और दूसरी तरफ ब्रिटिश इंडिया में नेशनल
- 12:43:03मूवमेंट तेजी से आगे बढ़ रहा था। उसकी वजह
- 12:43:07से पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस अबाउट
- 12:43:09डेमोक्रेसी, रिस्पांसिबल गवर्नमेंट एंड
- 12:43:11सिविल लिबर्टज भी काफी बढ़ी। एंड दिस वेव
- 12:43:14ऑफ पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस आल्सो रीच द
- 12:43:17स्टेट्स। 20थ सेंचुरी के फर्स्ट और सेकंड
- 12:43:19डेकेड में बहुत से इंडियन रेवोल्यूशनरीज
- 12:43:22इन स्टेट्स में शेल्टर लेने लगे और
- 12:43:24पॉलिटिसाइजेशन के एजेंट्स बने। इसके बाद
- 12:43:27नॉन कोऑपरेशन एंड सिविल डिसओबिडियंस जैसे
- 12:43:30बड़े आंदोलनों ने रियासतों के लोगों को और
- 12:43:33भी ज्यादा इन्फ्लुएंस किया। बहुत से
- 12:43:36स्टेट्स में प्रजामंडल्स या स्टेट्स
- 12:43:38पीपल्स कॉन्फ्रेंसेस ऑर्गेनाइज की गई।
- 12:43:40जैसे कि मैसौर, हैदराबाद, बरोड़ा, जामनगर,
- 12:43:44इंदौर एटसेट्रा में। इस प्रोसेस ने तब चरम
- 12:43:46छुआ जब 1927 में बलवंत राय मेहता, मणिलाल
- 12:43:51कोठारी और जीआर अभियंकर जैसे लीडर्स के
- 12:43:54द्वारा ऑल इंडिया स्टेट्स पीपल्स
- 12:43:56कॉन्फ्रेंस को इस्टैब्लिश किया गया। इससे
- 12:43:59डिफरेंट स्टेट्स में होने वाले स्ट्रगल्स
- 12:44:01को एक यूनाइटेड प्लेटफार्म मिला। पर
- 12:44:03दोस्तों यह सब ऑर्गेनाइजेशंस और
- 12:44:06प्लेटफॉर्म्स तो बने लेकिन सवाल यह उठता
- 12:44:08है कि इन रियासतों में आंदोलनों को लेकर
- 12:44:11इंडियन नेशनल कांग्रेस जो कि फ्रीडम
- 12:44:14स्ट्रगल की सबसे इंपॉर्टेंट नेशनल लेवल
- 12:44:16ऑर्गेनाइजेशन थी उसकी पॉलिसी क्या थी विद
- 12:44:20रिस्पेक्ट टू प्रिंसली स्टेट्स। आइए जानते
- 12:44:22हैं नेक्स्ट सेक्शन में। पॉलिसी ऑफ
- 12:44:25कांग्रेस टुवर्ड्स प्रिंसली स्टेट्स। सबसे
- 12:44:29पहले कांग्रेस ने अपनी पॉलिसी आर्टिकुलेट
- 12:44:31की 1920 के नागपुर सेशन में। इस सेशन में
- 12:44:35कांग्रेस ने इंडियन रूलर्स को अपने
- 12:44:37स्टेट्स में रिस्पांसिबल गवर्नमेंट
- 12:44:39एस्टैब्लिश करने के लिए बोला और प्रिंसली
- 12:44:42स्टेट्स में रहने वाले लोगों को कांग्रेस
- 12:44:44का मेंबर बनने की परमिशन दी। लेकिन वो
- 12:44:47अपने स्टेट में कांग्रेस के नाम से कोई
- 12:44:49आंदोलन शुरू नहीं कर सकते थे। पर ऐसा
- 12:44:52क्यों था कि कांग्रेस प्रिंसली स्टेट्स
- 12:44:54में वन आर्म डिस्टेंस रखना चाह रही थी। तो
- 12:44:56दोस्तों कई हिस्टोरियंस की मानें तो
- 12:44:59कांग्रेस उस समय फॉरेन पावर से लड़ने पर
- 12:45:02फोकस करते हुए इंडिपेंडेंट इंडीजनस रूलर्स
- 12:45:05का अपोजिशन नहीं चाहती थी। साथ ही
- 12:45:08कांग्रेस के कई बड़े लीडर्स मानते थे कि
- 12:45:10डिफरेंट प्रिंसली स्टेट्स रिक्वायर्ड
- 12:45:12डिफरेंट स्ट्रेटजीस टू फाइट अगेंस्ट द
- 12:45:14प्रिंसली रूलर। इसीलिए अनलाइक ब्रिटिश
- 12:45:17इंडिया जहां यूनिफॉर्मिटी थी। प्रिंसली
- 12:45:20स्टेट्स में रेजिस्टेंस एंड फाइट टुवर्ड्स
- 12:45:22पॉपुलर गवर्नमेंट की लड़ाई काफी न्यूस्ड
- 12:45:25होने की जरूरत थी। इसलिए कांग्रेस उस समय
- 12:45:28प्रिंसली स्टेट्स के मैसेज को अपने
- 12:45:30रेजिस्टेंस को खुद बिल्ड अप करने पर फोकस
- 12:45:32करने की पॉलिसी को सपोर्ट करती थी। पर
- 12:45:35जैसे-जैसे फ्रीडम स्ट्रगल और स्ट्रांग हुआ
- 12:45:38तो यह पॉलिसी भी चेंज हुई। 1929 के लाहौर
- 12:45:41सेशन में जवाहरलाल नेहरू कहते हैं कि
- 12:45:44इंडियन स्टेट्स कैन नॉट लिव अपार्ट फ्रॉम
- 12:45:46द रेस्ट ऑफ इंडिया। और यहां के लोगों को
- 12:45:48अपना फ्यूचर डिटरमिन करने का पूरा अधिकार
- 12:45:51है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस एक
- 12:45:54इनडायरेक्ट कैटलिस्ट की तरह थी जो पॉपुलर
- 12:45:57स्ट्रगल इन प्रिंसली स्टेट्स को मैच्योर,
- 12:46:00स्ट्रांग एंड रेिलिएंट बना रही थी। इसके
- 12:46:02बाद कुछ इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट्स हुए
- 12:46:04जिन्होंने सिचुएशन बिल्कुल बदल कर रख दी।
- 12:46:07पहला 1935 का एक्ट जिसके तहत फेडरेशन की
- 12:46:12बात कही गई थी। जिसका हिस्सा प्रिंसली
- 12:46:14स्टेट्स भी थे। प्रिंसली स्टेट्स के
- 12:46:17रिप्रेजेंटेटिव्स को नॉमिनेट किया जाना था
- 12:46:20रूलर्स के द्वारा ना कि पब्लिक से इेड। तो
- 12:46:22इसने रिस्पांसिबल गवर्नमेंट की डिमांड को
- 12:46:25और तेज कर दिया। दूसरा डेवलपमेंट था 1937
- 12:46:29में कांग्रेस मिनिस्ट्रीज का प्रोविंसेस
- 12:46:31में आना और उनका परफॉर्मेंस जिससे लोगों
- 12:46:34को एक नया कॉन्फिडेंस और एक्सपेक्टेशन
- 12:46:36मिली। हम देखते हैं कि 193839
- 12:46:39के पीरियड में और भी तेजी से स्टेट्स में
- 12:46:42प्रजामंडल्स का फॉर्मेशन होता है। इन सभी
- 12:46:45डेवलपमेंट्स के बीच कांग्रेस भी अपनी
- 12:46:47पॉलिसी चेंज करती है। कांग्रेस लीडरशिप यह
- 12:46:50रियलाइज करती है कि इट इज हाई टाइम कि
- 12:46:52प्रिंसली स्टेट्स को भी पूरी तरह आजादी के
- 12:46:55आंदोलन का हिस्सा बनाया जाए। क्योंकि उसके
- 12:46:57बिना एक यूनाइटेड इंडिपेंडेंट डेमोक्रेटिक
- 12:47:00कंट्री का विज़न जो कांग्रेस देख रही थी वो
- 12:47:02अधूरा रहता। इन बदलती हवाओं की झलक हमें
- 12:47:05गांधी जी के टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए
- 12:47:07इंटरव्यू में मिलती है। जिसमें वह कहते
- 12:47:10हैं कि जब तक प्रिंसली स्टेट्स के लोग
- 12:47:12अवेयर नहीं थे तब तक कांग्रेस की नॉन
- 12:47:15इंटरवेंशन परफेक्ट स्टेट्समैनशिप शो करती
- 12:47:18है। लेकिन अब जब मैससेस में ऑल अराउंड
- 12:47:21अवेकनिंग है तो अब सही समय आ गया है
- 12:47:24कांग्रेस को प्रिंसली स्टेट एंड ब्रिटिश
- 12:47:26इंडिया के मैसेज को एक समान मानना।
- 12:47:30इसलिए कांग्रेस के 1939 त्रिपुरी सेशन में
- 12:47:33कांग्रेस प्रिंसली स्टेट्स को अपने बैनर
- 12:47:36के अंडर मूवमेंट करना अलाउ कर देती है।
- 12:47:38इसके बाद शुरू होता है स्ट्रगल का फाइनल
- 12:47:41फज़। आइए जानते हैं फाइनल फज़। अभी तक
- 12:47:45ब्रिटिश इंडिया और प्रिंसली स्टेट्स में
- 12:47:47अलग-अलग चल रहे आंदोलनों को एक किया जाता
- 12:47:50है इस फेज में। 1939 में नेहरू बिकम
- 12:47:53प्रेसिडेंट ऑफ द ऑल इंडिया स्टेट्स पीपल्स
- 12:47:56कॉन्फ्रेंस और वो एफसाइज करते हैं कॉमन
- 12:47:59नेशनल एम्स ऑफ पॉलिटिकल स्ट्रगल्स इन
- 12:48:01ब्रिटिश इंडिया एंड इन द प्रिंसली
- 12:48:03स्टेट्स। सेकंड वर्ल्ड वॉर के स्टार्ट
- 12:48:06होने पर सिचुएशन में ड्रास्टिक चेंज आता
- 12:48:08है। कांग्रेस मिनिस्ट्रीज रिजाइन कर देती
- 12:48:11हैं और क्विट इंडिया मूवमेंट ल्च किया
- 12:48:14जाता है। इसमें कांग्रेस ब्रिटिश इंडिया
- 12:48:16और प्रिंसली स्टेट्स में कोई डिस्टिंशन
- 12:48:18नहीं रखती। पीपल ऑफ प्रिंसली स्टेट्स
- 12:48:21फॉर्मली जॉइ द स्ट्रगल फॉर इंडियन
- 12:48:23इंडिपेंडेंस वि द क्विट इंडिया मूवमेंट।
- 12:48:26यहां गांधीजी प्रिंसली स्टेट के रूलर्स
- 12:48:28एंड मासेस दोनों को बताते हैं। जहां रूलर
- 12:48:30का रोल मासेस को फेयर एंड जस्ट पॉलिसी के
- 12:48:33साथ रूल करना है। वहीं मासेस को डिस्पॉट
- 12:48:37प्रिंसेस के सामने स्ट्रांगली खड़ा होकर
- 12:48:39उनसे अपने राइट्स की डिमांड को रखना
- 12:48:41चाहिए। साथ ही अब कांग्रेस की पॉलिसी में
- 12:48:44इंडिपेंडेंस ऑफ इंडिया के साथ-साथ
- 12:48:46प्रिंसली स्टेट्स को इंडिया का इंटरनल
- 12:48:49मेंबर बनाने की डिमांड एक इंटेग्रल पार्ट
- 12:48:51बन जाती है। इसके साथ ही स्ट्रगल अगेंस्ट
- 12:48:54ब्रिटिश राज में फाइनली स्टेट्स के पॉपुलर
- 12:48:57स्ट्रगल्स को एक इक्वलेंस दी जाती है।
- 12:49:00लेकिन दोस्तों प्रिंसली स्टेट्स का
- 12:49:03कंप्लीट इंडिपेंडेंस ब्रिटिश इंडिया के
- 12:49:05इंडिपेंडेंस से थोड़ा और मुश्किल था।
- 12:49:08प्रिंसली स्टेट्स में पॉपुलर स्ट्रगल्स का
- 12:49:11लास्ट लेग हमें इंडिपेंडेंस के बाद देखने
- 12:49:13को मिलता है। जब सरदार पटेल और वीपी मेनन
- 12:49:16कंप्लीट इंडिया बनाने के लिए स्टेट्स को
- 12:49:19डोमिनियन ऑफ इंडिया में शामिल करने के लिए
- 12:49:21प्लान बनाते हैं। स्टेट्स को इंस्ट्रूमेंट
- 12:49:24ऑफ एक्सेशन दिया जाता है। जिसके द्वारा वो
- 12:49:26डोमिनियन ऑफ इंडिया में इंक्लूड हो सकते
- 12:49:28थे। बट इसमें कुछ प्रिंसली स्टेट्स
- 12:49:31पैरामाउंटसी लैप्स होने के बाद अपने आप को
- 12:49:34डोमिनियन में शामिल ना होकर इंडिपेंडेंट
- 12:49:36रहने की कोशिश करते हैं। इसमें ट्रेवन को,
- 12:49:39कश्मीर, हैदराबाद एटसेट्रा जैसे प्रिंसली
- 12:49:42स्टेट्स शामिल थे। इस एस्पेक्ट को और
- 12:49:45डिटेल में समझने के लिए दो स्टेट्स की
- 12:49:48स्टोरी को डिटेल में जानते हैं। राजकोट
- 12:49:51एंड हैदराबाद। पहले चलते हैं राजकोट।
- 12:49:54स्टोरी ऑफ़ राजकोट। दोस्तों राजकोट में
- 12:49:58राजा लखाजी राज सिंह जी टू के रूल के टाइम
- 12:50:01गवर्नमेंट में पॉपुलर पार्टिसिपेशन इनकरेज
- 12:50:04किया जाता है। फॉर एग्जांपल 1923 में
- 12:50:08राजकोट प्रजा प्रतिनिधि सभा एस्टैब्लिश
- 12:50:10होती है। बट द सिचुएशन चेंज्ड जब 1930 में
- 12:50:14उनके बेटे धर्मेंद्र सिंह जी राजा बनते
- 12:50:17हैं। जो कि पॉपुलर पार्टिसिपेशन इनकरेज
- 12:50:20नहीं करना चाहते थे। ही वास मोर
- 12:50:22इंटरेस्टेड इन हिज ओन प्लेजर्स और उसको
- 12:50:24पूरा करने के लिए स्टेट की इकॉनमी पर काफी
- 12:50:27प्रेशर था। उसके बाद टैक्स इनक्रीस होने
- 12:50:30और प्रतिनिधि सभा के लैप्स होने जैसे रीजन
- 12:50:32से पब्लिक में डिस्कंटेंट और बढ़ता है।
- 12:50:35फिर स्टार्ट होता है स्ट्रगल्स का
- 12:50:37सिलसिला। राजकोट सत्याग्रह का सपोर्ट
- 12:50:41सरदार पटेल और गांधीजी जैसे नेशनल लीडर्स
- 12:50:44भी करते हैं। और फाइनली एक एग्रीमेंट भी
- 12:50:46साइन होता है बिटवीन राज दरबार एंड सरदार
- 12:50:49पटेल। इसमें प्रीवी पर्स पर लिमिट रखी गई
- 12:50:53और एक कमेटी का अपॉइंटमेंट होना था टू
- 12:50:55सजेस्ट फर्दर रिफॉर्म्स। इस कमेटी के सात
- 12:50:58मेंबर्स को सरदार पटेल रेकमेंड करेंगे। यह
- 12:51:01भी डिसाइड होता है। लेकिन यहां पे ब्रिटिश
- 12:51:03गवर्नमेंट इंटरफेयर करती है। वो दरबार को
- 12:51:06सरदार पटेल की लिस्ट ऑफ मेंबर्स को
- 12:51:08रिजेक्ट करने को कहती है। रीजन क्योंकि
- 12:51:11सभी नाम ब्राह्मण और बनिया के थे। नो
- 12:51:14रिप्रेजेंटेशन ऑफ अदर कम्युनिटीज।
- 12:51:17एग्रीमेंट को ऑनर ना करने पर सत्याग्रह
- 12:51:20फिर से शुरू किया जाता है और गांधी जी
- 12:51:22डायरेक्टली इनवॉल्व भी होते हैं। लेकिन
- 12:51:25दरबार की पोजीशन में कोई चेंज नहीं होता।
- 12:51:29दूसरी तरफ आंदोलन वायलेंट और कम्युनल होने
- 12:51:32लगता है। इसकी वजह से गांधी जी सत्याग्रह
- 12:51:35खत्म करने का डिसीजन लेते हैं। इन अ सेंस
- 12:51:38सत्याग्रह फेल्ड बट द स्ट्रगल ऑफ राजकोट
- 12:51:41पीपल कंटिन्यूड। बट जब इंडिपेंडेंस का
- 12:51:44वक्त आता है, द रूलर ऑफ राजकोट न्यू कि अब
- 12:51:47उन्हें प्रोटेक्ट करने के लिए ब्रिटिश
- 12:51:49पावर नहीं है। सो ही डिसाइडेड नॉट टू
- 12:51:51चैलेंज द विल ऑफ ह सब्जेक्ट्स एनीमोर एंड
- 12:51:53ही रेडीली साइन द इंस्ट्रूमेंट ऑफ
- 12:51:56एक्सेशन। एंड फाइनली राजकोट की जनता को
- 12:51:59मिलती है रिस्पांसिबल फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट।
- 12:52:02यह थी राजकोट की कहानी। अब चलते हैं साउथ
- 12:52:05के हैदराबाद में। स्टोरी ऑफ हैदराबाद। द
- 12:52:09स्टोरी ऑफ हैदराबाद इज ऑोजिट ऑफ राजकोट।
- 12:52:12यहां पर निजाम का रूल था। लेकिन पपुलेशन
- 12:52:15हिंदू मेजॉरिटी की थी। निजाम डिस्पोटॉटिक
- 12:52:18रूलर था। कोई भी सिविल लिबर्टीज नहीं थी
- 12:52:21स्टेट में। कांग्रेस को भी बैन कर दिया
- 12:52:23गया था। लेकिन फ्रीडम, स्ट्रगल और
- 12:52:25पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस का असर यहां के
- 12:52:28लोगों तक भी पहुंचा और धीरे-धीरे स्टेट
- 12:52:30में पॉलिटिकल एक्टिविटीज बढ़ी। सत्याग्रह
- 12:52:33स्टार्ट हुए। लेकिन स्टेट ने उनको रिप्रेस
- 12:52:36करने की हमेशा कोशिश की। इसके अलावा
- 12:52:38रिलीजियस और कल्चरल ऑपरेशन भी था। स्टिल
- 12:52:42वह बढ़ती हुई नेशनल कॉन्शियसनेस को रोक
- 12:52:44नहीं पाए और लोगों का स्ट्रगल बढ़ता गया।
- 12:52:47रजाकार जो कि एक पैरामिलिट्री फोर्स थी
- 12:52:50निजाम की उसने स्ट्रगल करने वालों को हरेस
- 12:52:53करना शुरू किया और सिचुएशन बहुत वोलेटाइल
- 12:52:56हो गई। बट फाइनली इंडियन आर्मी के 1948
- 12:52:59ऑपरेशन पोलो की हेल्प से पीपल्स मूवमेंट
- 12:53:02वन कंक्लूजन
- 12:53:04प्रिंसली स्टेट्स की कंडीशंस ब्रिटिश
- 12:53:07इंडिया से काफी डिफरेंट थी। इसलिए यहां
- 12:53:10होने वाले स्ट्रगल्स भी अलग फॉर्म लेते
- 12:53:12हैं। दे वर मोर वायलेंट एट टाइम्स आल्सो
- 12:53:14रिप्रेशन की डिग्री भी ज्यादा थी। बट इन द
- 12:53:17एंड द स्पिरिट ऑफ नेशनलिज्म एंड
- 12:53:19डेमोक्रेसी यहां भी जीत हासिल करती है।
- 12:53:22प्रिंसेस के रूल का एंड होता है और लोगों
- 12:53:25को रिप्रेजेंटेटिव फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट
- 12:53:27मिलती है।
- 12:53:29रूल वुमेन इन इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल।
- 12:53:32दोस्तों वुमेन के कंट्रीब्यूशन को मेंशन
- 12:53:34किए बिना इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल की
- 12:53:36हिस्ट्री अधूरी रहती है। उनके द्वारा किए
- 12:53:40गए सैक्रिफाइस का स्थान सबसे ऊंचा है।
- 12:53:43इंडियन वुमेन ने सच्ची स्पिरिट और अद्भुत
- 12:53:46साहस के साथ आजादी के संघर्ष में अपना
- 12:53:49योगदान दिया। इतिहास में ऐसी भारतीय
- 12:53:52महिलाओं की एक लंबी लिस्ट है जिन्होंने
- 12:53:55अपने देश की आजादी के लिए खुद को डेडिकेट
- 12:53:58किया।
- 12:53:59अपनी आज की इस वीडियो में हम ऐसी ही कुछ
- 12:54:02ग्रेट इंडियन वुमेन के कंट्रीब्यूशन को
- 12:54:04समझेंगे। हम देखेंगे कि कैसे इन्होंने
- 12:54:07नेशनल मूवमेंट के सभी फेसेस में अपना
- 12:54:10अनमोल योगदान दिया। आइए शुरू करते हैं।
- 12:54:14अर्ली स्ट्रगल्स।
- 12:54:17ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट हुए संघर्ष में
- 12:54:20वुमेन का पार्टिसिपेशन 1817 में ही शुरू
- 12:54:23हो गया था। जब भीमाबाई होलकर जो यशवंतराव
- 12:54:27होलकर की बेटी थी। बहादुरी से लड़ते हुए
- 12:54:29ब्रिटिश कर्नल मैलकम को गोरिल्ला वॉरफेयर
- 12:54:32में हरा देती हैं। 19 सेंचुरी में किटूर
- 12:54:36की रानी चेनम्मा भी ब्रिटिश ईस्ट इंडिया
- 12:54:39कंपनी के साथ फाइट करती हैं। यानी कि 1857
- 12:54:43की क्रांति से भी पहले इंडियन वुमेन ने
- 12:54:45ब्रिटिशर्स के साथ टक्कर लेना शुरू कर
- 12:54:47दिया था। अब बात करते हैं 1857 के ग्रेट
- 12:54:51रिवोल्ट में वुमेन पार्टिसिपेशन की।
- 12:54:55द ग्रेट रिवोल्ट ऑफ 1857
- 12:54:59ब्रिटिशर्स ने भले ही 1857 की क्रांति को
- 12:55:02एक साल के अंदर ही क्रश कर दिया हो। लेकिन
- 12:55:05यह सबसे पॉपुलर रिवोल्ट था जिसमें इंडियन
- 12:55:08रूलर्स, मासेस और सोल्जर्स ने बढ़-चढ़कर
- 12:55:10हिस्सा लिया था। इस क्रांति की सबसे बड़ी
- 12:55:13हीरोइन को कौन भूल सकता है? झांसी की रानी
- 12:55:17लक्ष्मीबाई।
- 12:55:191857 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई ने
- 12:55:22अद्भुत साहस, पराक्रम और वीरता का परिचय
- 12:55:25दिया और हमेशा के लिए भारतीयों के दिलों
- 12:55:28में अमर हो गई। उनकी मिसाल आज भी वुमेन
- 12:55:31एंपावरमेंट के लिए दी जाती है। रानी
- 12:55:34लक्ष्मीबाई अकेली ऐसी महिला नहीं थी
- 12:55:37जिन्होंने इस क्रांति में भाग लिया। उनके
- 12:55:39साथ उनकी ही सहेली झलकारी बाई ने भी अपनी
- 12:55:42वीरता का सबूत इस लड़ाई में दिया था। इसके
- 12:55:45अलावा अवध की रानी बेगम हजरत महल ने भी
- 12:55:48विद्रोह का बिगुल बजाया था। इसके बाद
- 12:55:51वुमेन का सबसे बड़ा पार्टिसिपेशन हमें
- 12:55:53गांधियन फेज के दौरान देखने को मिलता है।
- 12:55:56क्योंकि एक तो गांधी जी द्वारा चलाए गए
- 12:55:58आंदोलन नॉन वायलेंट नेचर के होते थे।
- 12:56:01जिसमें वुमेन बढ़-चढ़कर अपना रोल निभा
- 12:56:03सकती थी और दूसरा गांधी जी खुद इंडियन
- 12:56:06वुमेन के पोटेंशियल को समझते थे और इन्हें
- 12:56:09आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित
- 12:56:12करते थे। तो आइए अब गांधियन फेज की चर्चा
- 12:56:15करते हैं। वुमस पार्टिसिपेशन इन गांधियन
- 12:56:19फेस।
- 12:56:21गांधी जी ने जब 1920 में नॉन कोऑपरेशन
- 12:56:24मूवमेंट ल्च किया तो उसमें बड़ी संख्या
- 12:56:27में महिलाओं ने अपनी भागीदारी दी। सरला
- 12:56:30देवी, मुथु लक्ष्मी रेड्डी, सुशीला नायर,
- 12:56:33राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी और
- 12:56:36अरुणा आसफ अली जैसी वुमेन ने नॉन वायलेंट
- 12:56:40मूवमेंट में पार्टिसिपेट किया। वुमेन बड़ी
- 12:56:43संख्या में लेकर शॉप्स के आगे धरना देती
- 12:56:45थी। फॉरेन क्लॉथ की होली जलाती थी और
- 12:56:48रैलीज और माचेस में भी हिस्सा लेती थी।
- 12:56:51गांधी जी की वाइफ कस्तूरबा गांधी और नेहरू
- 12:56:54फैमिली की वुमेन जैसे कमला नेहरू, विजय
- 12:56:57लक्ष्मी पंडित और स्वरूप रानी ने भी नेशनल
- 12:57:00मूवमेंट में बढ़-चढ़कर भाग लिया था।
- 12:57:03लाडो रानी जोत और उनकी डॉटर्स मनमोहिनी
- 12:57:07श्यामा और जनक लाहौर में नॉन कोऑपरेशन
- 12:57:10मूवमेंट को लीड करती हैं। इसके बाद 1930
- 12:57:13में जब साल्ट सत्याग्रह और सिविल
- 12:57:16डिसओबिडियंस मूवमेंट ल्च किया जाता है तो
- 12:57:19कमला देवी चट्टोपाध्याय गांधी जी से
- 12:57:21रिक्वेस्ट करती हैं कि अपने दांडी मार्च
- 12:57:24में वह महिलाओं को भी शामिल करें।
- 12:57:26कर्नाटका के मगोर में जन्मी कमला देवी
- 12:57:30गांधी जी के आइडियाज और नॉन वायलेंस के
- 12:57:32कांसेप्ट से बहुत प्रेरित थी। उन्होंने
- 12:57:35आजादी के संघर्ष में भाग लेने के लिए 1923
- 12:57:38में ही कांग्रेस पार्टी को ज्वाइन कर लिया
- 12:57:40था।
- 12:57:42इसके बाद वुमेन जगह-जगह नमक कानून तोड़कर
- 12:57:45फॉरेस्ट लॉस ब्रेक करके और प्रभात फेरीज
- 12:57:48के जरिए अपनी लिबर्टी की तरफ कदम बढ़ाती
- 12:57:50हैं। मई 1930 में धरसाना साल्ट वक्स पर
- 12:57:54रेड करने के लिए गांधी जी खुद सरोजिनी
- 12:57:57नायडू को नॉमिनेट करते हैं और जिस तरह से
- 12:58:00यह रेड कंडक्ट की जाती है, वह अपने आप में
- 12:58:02इस आंदोलन के अहिंसात्मक नेचर की मिसाल
- 12:58:05है। आंदोलन के दौरान कमला देवी जगह-जगह
- 12:58:09पब्लिक मीटिंग्स एड्रेस करती हैं। नमक
- 12:58:11तैयार करती हैं। फॉरेन क्लॉथ और लिगर
- 12:58:14शॉप्स पर धरना देती हैं। इसी दौरान 26
- 12:58:17जनवरी 1930 को हुई एक घटना से पूरे देश का
- 12:58:21ध्यान उनकी तरफ जाता है। प्रदर्शन के
- 12:58:24दौरान पुलिस हमला बोल देती है और अपने हाथ
- 12:58:27में लिए तिरंगे को बचाने के लिए कमला देवी
- 12:58:30उससे लिपट जाती हैं। पुलिस वाले लाठी
- 12:58:32बरसाते रहते हैं। लेकिन वह एक चट्टान की
- 12:58:35तरह खड़ी रहती हैं। खून बहता रहता है।
- 12:58:39लेकिन कमला देवी तिरंगे को अपने हाथ से
- 12:58:42नहीं जाने देती। दूसरी तरफ मणिपुर में
- 12:58:45रानी गाइडन ल्यू ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट
- 12:58:47नागा नेशनलिस्ट के संघर्ष को लीड करती
- 12:58:50हैं। इसके लिए इन्हें 1932 में अरेस्ट कर
- 12:58:53लिया जाता है। देश की आजादी के बाद इन्हें
- 12:58:56जेल से रिहा किया जाता है और जवाहरलाल
- 12:58:59नेहरू इन्हें रानी ऑफ नागाज़ का टाइटल देते
- 12:59:02हैं। इंडिविजुअल एफर्ट के साथ-साथ वुमेन
- 12:59:05बहुत सी ऑर्गेनाइजेशंस के जरिए भी आंदोलन
- 12:59:07को सपोर्ट करती हैं। उदाहरण के तौर पर
- 12:59:11नारी सत्याग्रह कमेटी, महिला राष्ट्रीय
- 12:59:14संघ और लेडीज पिकेटिंग बोर्ड जैसे ग्रुप्स
- 12:59:16आंदोलन को और मजबूत बनाते हैं। भारतीय
- 12:59:20महिलाओं की भागीदारी सिर्फ नॉन वायलेंट
- 12:59:22मूवमेंट्स तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि वह
- 12:59:24रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज में भी पुरुषों
- 12:59:26के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती नजर आती
- 12:59:29हैं।
- 12:59:32रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज।
- 12:59:36रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज में वुमेन दो तरह
- 12:59:39से अपना योगदान देती हैं। पहला तो पैसिव
- 12:59:41तरीके से था जिसमें यह रेवोल्यूशनरीज को
- 12:59:44छुपने की जगह देती हैं। फंड्स के लिए अपनी
- 12:59:47ज्वेलरी देती हैं। मैसेज और वेपन कोरियर्स
- 12:59:50का काम भी करती हैं और इनडायरेक्टली
- 12:59:52रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज को सपोर्ट करती
- 12:59:54हैं। और दूसरा तरीका एक्टिव था जहां वुमेन
- 12:59:58खुद हाथ में पिस्टल्स लेती नजर आती हैं।
- 13:00:01उदाहरण के तौर पर सूर्यसेन के नेतृत्व में
- 13:00:041930 में हुई चिटागोंग आर्मरी रेड में
- 13:00:08कल्पना दत्त और प्रीतिता वाड़ेदार जैसी
- 13:00:11रेवोल्यूशनरीज शामिल थी। वहीं दिसंबर 1931
- 13:00:15में शांति घोष और सुनीति चौधरी बंगाल के
- 13:00:19कोमिला डिस्ट्रिक्ट के डीएम को गोली मार
- 13:00:21देती हैं। तो 21 साल की बीनास 1932 में
- 13:00:25कॉन्वोकेशन सेरेमनी के दौरान बंगाल के
- 13:00:28गवर्नर को शूट करती हैं। इतना ही नहीं देश
- 13:00:32के बाहर भी वुमेन रेवोल्यूशनरीज आजादी के
- 13:00:35लिए संघर्ष करती हैं। जिसमें सबसे बड़ा
- 13:00:37नाम मैडम भीकाजी कामा का है। इन्हें मदर
- 13:00:40ऑफ इंडियन रेवोल्यूशनरी मूवमेंट भी कहा
- 13:00:43जाता है। इन्होंने 197 में जर्मनी के
- 13:00:46स्टुडगार्ड में ऑर्गेनाइज्ड वर्ल्ड
- 13:00:48सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस में भाग लिया था और
- 13:00:50यहीं पहली बार इंडियन फ्लैग को अनफेल भी
- 13:00:53किया था। इस तरह क्रांतिकारी एक्टिविटीज
- 13:00:56में भी महिलाओं ने आगे बढ़कर हिस्सा लिया
- 13:00:58था। आइए अब आजादी के आखिरी आंदोलन यानी कि
- 13:01:02क्विट इंडिया मूवमेंट में वुमेन के
- 13:01:04पार्टिसिपेशन की बात करते हैं।
- 13:01:07क्विट इंडिया मूवमेंट
- 13:01:101942 के क्विट इंडिया रेजोल्यूशन ने वुमेन
- 13:01:13को इंडियन फ्रीडम के डिसिप्लिन सोल्जर्स
- 13:01:16कहा था। जिनकी जरूरत आजादी के संघर्ष की
- 13:01:19ज्वाला को जलाए रखने के लिए बहुत ही
- 13:01:21ज्यादा थी और इंडियन वुमेन ने ऐसा ही
- 13:01:24किया।
- 13:01:26आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं
- 13:01:29ने भाग लिया। उषा मेहता ने वॉइस ऑफ फ्रीडम
- 13:01:32नाम से सीक्रेट रेडियो ट्रांसमीटर सेटअप
- 13:01:35किया था। जिसके द्वारा आंदोलन से जुड़े
- 13:01:38प्रोटेस्ट और अरेस्ट्स की न्यूज़, यंग
- 13:01:40नेशनलिस्ट्स की एक्टिविटीज और गांधी जी के
- 13:01:43फेमस डू और डाई मैसेज को लोगों के बीच
- 13:01:46सर्कुलेट किया गया था।
- 13:01:48सुचेता कृपलानी नॉन वायलेंट रेजिस्टेंस को
- 13:01:51लीड करती हैं। वहीं अरुणा आसफ अली
- 13:01:54अंडरग्राउंड रेवोल्यूशनरी एक्टिविटीज को
- 13:01:56लीडरशिप प्रोवाइड करती हैं। इन बड़े नामों
- 13:01:59के अलावा हजारों की संख्या में ऐसी रूरल
- 13:02:02वुमेन थी जो आजादी के लिए अपने-अपने स्तर
- 13:02:05पर इनिशिएटिव लेती हैं। देश में जब क्विट
- 13:02:08इंडिया मूवमेंट चल रहा था तब देश के बाहर
- 13:02:11सुभाष चंद्र बोस इंडियन नेशनल आर्मी का
- 13:02:13फॉर्मेशन कर रहे थे। 1943 में फॉर्म हुई
- 13:02:17इस आर्मी में वुमेन रेजीमेंट भी शामिल थी।
- 13:02:20जिसका नाम 1857 क्रांति की लेजेंड्री
- 13:02:24हीरोइन रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखा गया
- 13:02:27था। इसे लगभग 15,000 वुमेन ने ज्वाइन किया
- 13:02:30था। इन्हें फुल मिलिट्री ट्रेनिंग दी गई
- 13:02:33थी और कॉम्बैट ड्यूटीज के लिए तैयार किया
- 13:02:35गया था। लेकिन जब शुरुआत में इन्हें सिर्फ
- 13:02:38नॉन कॉम्बैट रोल दिए जाते हैं तो यह सब
- 13:02:41अपने लीडर से शिकायत करती हैं। जिसके बाद
- 13:02:431945 में इन्हें इंफाल कैंपेन के दौरान
- 13:02:47एक्चुअल वॉर ऑपरेशंस के लिए भेजा जाता है।
- 13:02:51हम कह सकते हैं कि इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल
- 13:02:54का ऐसा कोई भी फ्रंट नहीं था जहां वुमेन
- 13:02:57पार्टिसिपेशन मिसिंग हो। हर मोर्चे पर
- 13:02:59इंडियन वुमेन ने आजादी के इस यज्ञ में
- 13:03:02अपनी आहुति दी थी।
- 13:03:04दोस्तों इंटरेस्टिंग बात यह है कि सिर्फ
- 13:03:07इंडियन वुमेन ने ही नेशनल मूवमेंट में भाग
- 13:03:09नहीं लिया था बल्कि बहुत सी ऐसी फॉरेन
- 13:03:12नेशनल्स भी थी जिन्होंने इंडियन फ्रीडम
- 13:03:14स्ट्रगल को एक्टिवली सपोर्ट किया था। आइए
- 13:03:17ऐसी कुछ वुमेन के बारे में भी बात करते
- 13:03:19हैं।
- 13:03:22फॉरेन वुमेन इन इंडियन नेशनल मूवमेंट।
- 13:03:26जब फ्रीडम स्ट्रगल में नॉन इंडियन वुमेन
- 13:03:28के पार्टिसिपेशन की बात होती है तो उसमें
- 13:03:31सबसे बड़ा नाम आइलैंड की एनी बेसंत का आता
- 13:03:34है। एनी बेसंत इंडिया में थियोसोफिकल
- 13:03:36सोसाइटी की फाउंडर थी। इन्होंने होम रूल
- 13:03:39लीग की भी शुरुआत की थी। जिसका एम आरिश
- 13:03:42होम रूल लीग की तरह इंडिया में होम रूल
- 13:03:45यानी स्वराज के लिए आंदोलन शुरू करना था।
- 13:03:48इसके अलावा 1917 में यह कांग्रेस
- 13:03:51प्रेसिडेंट की पोस्ट पर भी इ हुई थी।
- 13:03:54नेशनल मूवमेंट में एनी बेसंत के अनमोल
- 13:03:57योगदान के लिए इंडिया में आज भी उन्हें
- 13:03:59ग्रेटफुली याद किया जाता है। एक और आरिश
- 13:04:02लेडी का कंट्रीब्यूशन याद रखने लायक है
- 13:04:04जिनका नाम मिस मॉर्गेरेट नोबेल था। यह
- 13:04:08जनवरी 1898 में इंडिया आती हैं और स्वामी
- 13:04:11विवेकानंद की डिसाइपल बनती हैं। इन्हें
- 13:04:14सिस्टर निवेदिता के नाम से जाना जाता है।
- 13:04:17इन्होंने अमेरिका और यूरोप में इंडिया के
- 13:04:20संघर्ष का प्रचार प्रसार किया। सिस्टर
- 13:04:23निवेदिता ने 195 में कांग्रेस का बनारस
- 13:04:27सेशन भी अटेंड किया था और स्वदेशी मूवमेंट
- 13:04:30को सपोर्ट किया था। पेरिस में जन्मी मीरा
- 13:04:33अल्फोंस 1914 में इंडिया आती हैं और श्री
- 13:04:36अरोबिंदो से मिलती हैं। इन्हें यूनिवर्सली
- 13:04:39मदर के नाम से जाना जाता है। पोंडीचेरी के
- 13:04:42पास इंटरनेशनल टाउन ओरोविल की स्थापना के
- 13:04:44पीछे इन्हीं की इंस्पिरेशन है। इन्होंने न
- 13:04:48सिर्फ इंडिया के एज ओल्ड हेरिटेज और कल्चर
- 13:04:50को एनरच किया बल्कि एनी बेसंत और नलिनी
- 13:04:54सेन गुप्ता जैसी वुमेन को इंडिया के लिए
- 13:04:56फाइट करने के लिए मोटिवेट भी किया। इसके
- 13:04:59अलावा महात्मा गांधी की क्लोज एसोसिएट्स
- 13:05:02रही दो इंग्लिश लेडीज मीराबेन और सरला बेन
- 13:05:06को कौन भूल सकता है? मीराबेन का असली नाम
- 13:05:09मेडिलिन स्लेट था और इनका जन्म इंग्लैंड
- 13:05:12में हुआ था। वहीं सरला बेेन का नाम कैथरीन
- 13:05:15मैरी हीलमेन था। इन्हें इंडियन नेम गांधी
- 13:05:19जी द्वारा दिए गए थे।
- 13:05:21मीराबेन गांधी जी के साथ राउंड टेबल
- 13:05:24कॉन्फ्रेंस में गई थी। और इन्होंने रूरल
- 13:05:27एरियाज में सोशल रिफॉर्म्स के लिए बहुत
- 13:05:29काम किया था। वहीं सरला बेन भी एक ग्रेट
- 13:05:32सोशल रिफॉर्मर थी। इन्होंने उत्तराखंड के
- 13:05:35कौसानी में एक आश्रम स्थापित किया था। यह
- 13:05:38गांव-गांव जाकर पॉलिटिकल प्रिजनर्स की
- 13:05:41फैमिलीज को हेल्प किया करती थी। इस तरह
- 13:05:44बहुत सी विदेशी महिलाओं ने इंडिया की
- 13:05:46आजादी में अहम रोल निभाया था। हम कह सकते
- 13:05:49हैं कि भले ही यह इंडिया की सिटीजंस ना
- 13:05:52रही हो, लेकिन दिल से जरूर यह इंडियंस ही
- 13:05:55थी।
- 13:05:57कंक्लूजन
- 13:06:00दोस्तों, इस तरह आजादी के लिए संघर्ष में
- 13:06:03महिलाओं ने अपनी जिम्मेदारी निभाई।
- 13:06:06उन्होंने पब्लिक मीटिंग्स की। फॉरेन क्लॉथ
- 13:06:08और अल्कोहल शॉप्स के आगे धरना दिया। खादी
- 13:06:12को अपनाया और राष्ट्रीय आंदोलनों में
- 13:06:14बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लिया। इस दौरान
- 13:06:17महिलाओं ने पुलिस के बैट्स को भी फेस किया
- 13:06:19और जेल भी गई। हजारों की संख्या में
- 13:06:22भारतीय महिलाओं ने देश की आजादी के लिए
- 13:06:25अपनी जिंदगी समर्पित कर दी और ऐसी सभी
- 13:06:28महान महिला स्वतंत्रता सेनानियों को हमारा
- 13:06:31शतशत नमन।
- 13:06:34स्टडी आईक्यू आईएएस आपका सिलेक्शन हमारा
- 13:06:38मिशन।
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