Complete Ancient History of India for UPSC 2027 | History Through Animation | Aadesh Singh — Transcript
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- 0:01स्टडी आईक्यू आईएस आपका सिलेक्शन हमारा
- 0:05मिशन। दोस्तों आज हम एंशिएंट इंडियन
- 0:09हिस्ट्री पर मैराथॉन वीडियो शुरू करने जा
- 0:11रहे हैं। इसमें एंशिएंट हिस्ट्री के
- 0:14एंटायर जीएस सिलेबस को हम
- 0:16कॉम्प्रिहेंसिवली कवर करेंगे। प्री
- 0:18हिस्टोरिक इंडिया से शुरू करते हुए इंडस
- 0:21वैली सिविलाइजेशन, वैदिक एज, जैनिज्म,
- 0:24बुद्धिज्म और महाजनपदास जैसे टॉपिक्स को
- 0:27डिस्कस किया जाएगा। साथ ही सभी प्रोमिनेंट
- 0:30एंपायर्स जैसे कि मौर्यन, कुषाणस, गुप्ताज़
- 0:34एटसेट्रा की चर्चा होगी। साउथ इंडियन
- 0:36हिस्ट्री के स्पेसिफिक टॉपिक्स जैसे कि
- 0:39संगमेज और चोला एंपायर को भी डिटेल में
- 0:42कवर करेंगे। यानी इस वीडियो को पूरा देखने
- 0:45के बाद एंशिएंट इंडियन हिस्ट्री के किसी
- 0:47भी टॉपिक में आपको डाउट नहीं रहेगा। तो
- 0:50आइए शुरू करते हैं प्राचीन भारतीय इतिहास
- 0:53का यह सफर। प्री हिस्टोरिक पीरियड ऑफ
- 0:56इंडिया। दोस्तों, हिस्ट्री यानी कि
- 0:59इतिहास। एक ग्रीक वर्ड हिस्टोरिया से बना
- 1:02है जिसका मीनिंग है इंक्वायरी,
- 1:04इन्वेस्टिगेशन या पास्ट नॉलेज। हम सभी
- 1:07जानते हैं कि अतीत का अध्ययन पिछली घटनाओं
- 1:10के साथ-साथ इन घटनाओं से जुड़े खोज,
- 1:13संग्रह और व्याख्या से संबंधित होता है।
- 1:16और इसी कारण हिस्ट्री के रिकंस्ट्रक्शन
- 1:19में हिस्टोरिकल सोर्सेज की एक अहम भूमिका
- 1:21होती है। इन सोर्सेज को दो भागों में
- 1:24विभाजित किया जा सकता है। पहला नॉन
- 1:27लिटरेरी सोर्सेस और दूसरा लिटरेरी
- 1:30सोर्सेस। नॉन लिटरेरी सोर्सेस में कॉइंस,
- 1:34इं्रिप्शंस, मोन्यूमेंट्स और
- 1:36आर्कियोलॉजिकल रिमेंस शामिल होते हैं।
- 1:38हिस्टोरियंस के अनुसार पास्ट की स्टडी को
- 1:41प्री हिस्ट्री, प्रोटो हिस्ट्री और
- 1:43हिस्ट्री में विभाजित किया गया है। प्री
- 1:46हिस्ट्री इतिहास के उस हिस्से से जुड़ा है
- 1:49जब राइटिंग यानी कि लेखन का आविष्कार नहीं
- 1:51हुआ था। इस दौर का उपलब्ध ज्ञान कुछ
- 1:54आर्कियोलॉजिकल एविडेंसेस पर आधारित है।
- 1:57जैसे कि उस समय की पोटरी, आर्टिफेक्ट्स,
- 2:00स्टोन टूल्स और मेटल इंप्लीमेंट्स जो कई
- 2:02प्रीहिस्टोरिक साइट से प्राप्त हुए हैं।
- 2:06वहीं दूसरी तरफ आर्कियोलॉजिकल सोर्सेस के
- 2:08साथ-साथ रिटेन एविडेंस का युग हिस्ट्री का
- 2:11निर्माण करता है। इसके अलावा प्री
- 2:14हिस्ट्री और हिस्ट्री के बीच के दौर को
- 2:16प्रोटो हिस्ट्री के रूप में जाना जाता है।
- 2:18यह उस टाइम पीरियड को इंडिकेट करता है
- 2:21जिसके रिटन रिकॉर्ड्स तो अवेलेबल हैं
- 2:23लेकिन उनकी स्क्रिप्ट डिसाइवर ना होने के
- 2:26कारण हिस्टोरियंस उस इंफॉर्मेशन को डिकोड
- 2:28नहीं कर पाए हैं। आज हम इंडिया के प्री
- 2:31हिस्टोरिक पीरियड के बारे में विस्तार से
- 2:34चर्चा करेंगे। इसमें लगभग 200ाउज बीसी से
- 2:37लेकर 3500 टू 2500 बीसी तक का टाइम पीरियड
- 2:42आता है। माना जाता है कि इस प्रारंभिक काल
- 2:46में भारतीय मानव नेग्रिटो रेस के थे और
- 2:49हंटिंग गैदरिंग जैसी एक्टिविटीज के जरिए
- 2:51अपना जीवन यापन करते थे। प्री हिस्टोरिक
- 2:55एज में डिफरेंट फसेस में धीरे-धीरे मानव
- 2:58सेटल्ड लाइफ की तरफ आगे बढ़ता है। तो आइए
- 3:01विस्तार से समझते हैं ह्यूमन हिस्ट्री की
- 3:03इस फाउंडेशन एज को। प्रीहिस्टोरिक पीरियड।
- 3:07इंडिया में प्री हिस्टोरिक एज की शुरुआत
- 3:10स्टोन एज से होती है। मानव के इस
- 3:13प्रारंभिक काल के बारे में कुछ
- 3:14आर्कियोलॉजिकल एविडेंस मिले हैं। जिनमें
- 3:17पत्थर के औजार यानी कि स्टोन टूल्स सबसे
- 3:20ज्यादा मात्रा में पाए गए हैं। यह संभावना
- 3:23है कि लोगों ने पत्थर, लकड़ी और हड्डी के
- 3:27टूल्स और वेपन्स बनाए और उनका इस्तेमाल
- 3:29किया। जिनमें से स्टोन टूल्स सबसे अच्छे
- 3:32रूप में आज तक संरक्षित हैं। इसीलिए इस
- 3:35काल को लिथिक एज या स्टोन एज कहा जाता है।
- 3:39जियोलॉजिकल एज स्टोन टूल्स के टाइप्स और
- 3:42प्री हिस्टोरिक लोगों के लाइफस्ट के आधार
- 3:44पर स्टोन एज को मुख्य रूप से तीन प्रकार
- 3:47में वर्गीकृत किया गया है। पहला
- 3:50पेियोलिथिक एज यानी ओल्ड स्टोन एज। दूसरा
- 3:54मेजोलिथिक एज यानी मिडिल स्टोन एज और
- 3:57तीसरा नियोलिथिक एज यानी न्यू स्टोन एज।
- 4:01आइए इस दौर को विस्तार से समझते हैं।
- 4:04पेियोलिथिक एज जो कि 300 थाउज बीसी से
- 4:0810000 बीसी के बीच मानी जाती है।
- 4:10पेियोलिथिक शब्द दो ग्रीक वर्ड से बना है।
- 4:14पेियो जिसका अर्थ है पुराना और लिथोस
- 4:18जिसका अर्थ है स्टोन। और इस तरह यह नाम
- 4:21स्टोन टूल्स के महत्व को दर्शाता है।
- 4:24पेियोलिथिक पीरियड की यह लंबी अवधि मानव
- 4:27इतिहास के 99% हिस्से को कवर करती है।
- 4:31भारत में पेियोलिथिक पीरियड के सबसे पहले
- 4:33आर्कियोलॉजिकल एविडेंस की डिस्कवरी का
- 4:35श्रेय ज्योग्राफिकल सर्वे ऑफ इंडिया के
- 4:38जियोलॉजिस्ट रॉबर्ट ब्रूसफुट को दिया जाता
- 4:40है। उन्होंने 1863 में तमिलनाडु राज्य के
- 4:44पल्लवपुरम डिस्ट्रिक्ट में पल्लवरम
- 4:47हैंडेडक्स की खोज की थी। इसी कारण उन्हें
- 4:50फादर ऑफ प्री हिस्टोरिक आर्कियोलॉजी भी
- 4:52कहा जाता है। दोस्तों, प्राचीन लोगों के
- 4:55द्वारा उपयोग किए जाने वाले स्टोन टूल्स
- 4:57और क्लाइमेट के डिफरेंसेस के आधार पर इस
- 5:00युग को तीन फेजेस में बांटा गया है। इसमें
- 5:02पहला फेज है लोअर पेलिथिक एज जो 300ाउज
- 5:06बीसी से 10000 बीसी तक के पीरियड को कवर
- 5:10करता है। यह दौर आईसीएज का था और इस दौर
- 5:14का मानव मुख्य रूप से हंटर और गैदर था।
- 5:17खोजकर्ताओं के अनुसार उस समय ह्यूमंस बिना
- 5:20पॉलिश किए हुए रफ और हैवी स्टोन टूल्स
- 5:23जैसे कि हैंड एक्सेस, चॉपर्स और क्लीवर्स
- 5:26का इस्तेमाल किया करते थे। औजार बनाने के
- 5:28लिए लाइमस्टोंस का भी प्रयोग किया जाता
- 5:30था। महाराष्ट्र राज्य का एक छोटा सा शहर
- 5:34बोरी ओल्डेस्ट लोअर पेलिथिक साइट्स में से
- 5:37एक है। इसके अलावा कश्मीर वैली, राजस्थान
- 5:40के दिवाना डेजर्ट एरिया और थार डेजर्ट में
- 5:43भी अनेक स्थल मिले हैं। क्योंकि इस युग
- 5:46में स्टोन के टूल्स महत्वपूर्ण थे। इसीलिए
- 5:48लोगों ने ऐसी जगहों को खोजने की कोशिश की
- 5:51जहां अच्छी क्वालिटी के स्टोन आसानी से
- 5:54उपलब्ध हो। ऐसी साइट्स पर प्राचीन लोग
- 5:57स्टोन टूल्स बनाते थे और उन्हीं स्थानों
- 5:59को फैक्ट्री साइट्स के रूप में जाना जाता
- 6:02था। इनमें केव्स और शेल्टर्स भी शामिल
- 6:05हैं। जहां लोग लंबे समय तक आश्रय भी लिया
- 6:07करते थे। इन्हें हैबिटेशन कम फैक्ट्री
- 6:10साइट्स कहा जाने लगा। लोगों ने इन नेचुरल
- 6:13केव्स को इसलिए चुना क्योंकि यह बारिश,
- 6:16गर्मी और तेज हवा से उन्हें बचाने की जगह
- 6:19प्रदान करती थी। विंध्याज और डेकन प्लेटो
- 6:22में नेचुरल केव्स और शेल्टर्स पाए जाते
- 6:25हैं। यह रॉक शेल्टर्स नर्मदा घाटी के पास
- 6:28हैं। मध्य प्रदेश में स्थित भीमबेटका
- 6:31केव्स और रॉक शेल्टर्स इन्हीं साइट्स का
- 6:33एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस दौर के
- 6:36विभिन्न प्रकार के स्टोन टूल्स उत्तर
- 6:38प्रदेश की बेलान घाटी में भी पाए गए हैं।
- 6:41जो विंध्यास फुट हिल्स में स्थित है। इसके
- 6:44साथ ही आंध्र प्रदेश के नागार्जुनांडा में
- 6:47भी लोअर पेलिथिक ऐज के साक्ष्य मिलते हैं।
- 6:50इस दौर की अन्य मुख्य साइट्स में गुजरात
- 6:53का सौराष्ट्र रीजन, डेकन प्लेटो और छोटा
- 6:56नागपुर प्लेटो शामिल है। अब बात करते हैं
- 6:59दूसरे फेज यानी मिडिल पेलिथिक एज की। जो
- 7:031ाउज बीसी से 40000 बीसी के बीच का काल
- 7:06था। दोस्तों, मिडिल पेलिथिक एज में
- 7:09ह्यूमंस ने शार्प और पॉइंटेड टूल्स जैसे
- 7:12फ्लेक्स, ब्लेड्स और पॉइंटर्स बनाना शुरू
- 7:15किया था। वे छोटे एनिमल्स को मारने के लिए
- 7:18और मीट कटिंग के लिए इन उपकरणों का
- 7:20इस्तेमाल करते थे। लोअर पेलिथिक एज की
- 7:24तुलना में इस दौर के टूल्स छोटे, हल्के और
- 7:26पतले थे। इस युग के अवशेष नर्मदा नदी के
- 7:30किनारे कई स्थानों पर और तुंगभद्रा नदी के
- 7:33दक्षिण में भी कई स्थानों पर पाए जाते
- 7:36हैं। इसके अलावा राजस्थान की लूनी वैली,
- 7:39यूपी की बेलन वैली और एमपी की भीमबेटका
- 7:42केव्स भी इस दौर के मुख्य स्थलों में
- 7:44शामिल है। तीसरा फेज है अपर पेियोलिथिक एज
- 7:48जो 40000 बीसी से 10,000 बीसी तक का
- 7:51पीरियड था। दोस्तों अपर पेियोलिथिक एज आइस
- 7:55एज के लास्ट फेज के साथ कोइंसाइड करता था।
- 7:58जब क्लाइमेट तुलनात्मक रूप से वार्मर और
- 8:01ह्यूमिडिटी कम हो चुकी थी। इस दौर को
- 8:04आधुनिक लोगों की उपस्थिति का प्रतीक माना
- 8:06जाता है। इस ऐज के साथ ही मॉडर्न ह्यूमन
- 8:09बीइंग स्पीशीज यानी कि होमोसेपियंस का
- 8:12उद्भव हुआ था। इस समय के स्टोन टूल्स में
- 8:15टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट्स देखने को मिलते
- 8:17हैं। नीडल्स, ब्यूरिंस, फिशिंग टूल्स,
- 8:21पैरेलल साइडेड ब्लेड्स और बोरिंग टूल्स
- 8:23जैसे उपकरणों का आविष्कार इस दौर में हुआ।
- 8:26इंडिया में ब्लेड्स और ब्यूरिंस के उपयोग
- 8:29के साक्ष्य आंध्र प्रदेश, कर्नाटका,
- 8:32महाराष्ट्र, एमपी, सदर्न यूपी, झारखंड और
- 8:35आसपास के क्षेत्रों में पाए गए हैं।
- 8:37गुजरात सैंड ड्यूस के अपर लेवल्स में भी
- 8:40ब्लेड्स, स्क्रैपर्स और फ्लेक्स जैसे
- 8:42टूल्स पाए गए हैं। इसके साथ ही बोन टूल्स
- 8:45जैसी विशेषता केवल आंध्र प्रदेश के कुरनूल
- 8:48और मुच्छला चिंतामणि गावी केव साइट्स पर
- 8:50पाए गए हैं। तो दोस्तों, अभी तक हमने
- 8:53पेियोलिथिक एज को समझा। लगभग 12,000 बीसी
- 8:57से लेकर 10,000 बीसी तक की अवधि में
- 8:59क्लाइमेट चेंज के साक्ष्य पाए जाते हैं।
- 9:01इस समय के साथ ही मेजोलिथिक एज की शुरुआत
- 9:05हुई थी। तापमान में वृद्धि और जलवायु
- 9:08परिवर्तन के कारण आइस मेल्टिंग और
- 9:10फ्लोराफोना में कई बदलाव हुए और इसी के
- 9:12साथ ह्यूमंस की जीवनशैली और उपयोग में किए
- 9:15जाने वाले टूल्स में भी एडवांसमेंट्स
- 9:17देखने को मिले। आइए एक नजर डालते हैं
- 9:20मेजोलिथिक एज की विशेषताओं पर।
- 9:23मेजोलिथिक एज 10,000 बीसी टू 6000 बीसी।
- 9:29मेजोलिथिक शब्द दो ग्रीक वर्ड्स मेजो और
- 9:33लिथोस से लिया गया है। लिथोस का अर्थ
- 9:35स्टोन होता है। यह तो हमने पहले ही समझ
- 9:37लिया है। मेजो का अर्थ होता है मिडिल।
- 9:40इसीलिए प्री हिस्ट्री के इस मेजोलिथिक
- 9:43स्टेज को मिडिल स्टोन एज के रूप में भी
- 9:45जाना जाता है। मेजोलिथिक कल्चर पेलिथिक की
- 9:49तुलना में अधिक मॉडर्न और डायवर्सिटी के
- 9:52लिए जाना जाता है। गंगा प्लेेंस में
- 9:54फर्स्ट ह्यूमन कॉलोनाइजेशन इसी अवधि के
- 9:57दौरान हुआ था। इस युग के टूल्स में
- 10:00माइक्रोलिथ्स सबसे प्रमुख उपकरण थे।
- 10:03माइक्रोलिथ्स एक प्रकार के मिनीचर स्टोन
- 10:06टूल्स थे जो आमतौर पर क्रिप्टोक्रिस्टलाइन
- 10:09सिलिका या चर्ट जैसे फाइनली ग्रेन रॉक से
- 10:12बने होते थे। इन माइक्रो लिड्स का
- 10:15इस्तेमाल ह्यूमंस छोटे जानवरों और
- 10:17पक्षियों का शिकार करने के लिए किया करते
- 10:19थे। इसके अलावा इनका कॉम्पोजिट टूल्स
- 10:22बनाने के लिए उपयोग होता था। इन कंपोजिट
- 10:25टूल्स का प्लांट गैदरिंग, हार्वेस्टिंग,
- 10:27ग्रेटिंग इत्यादि जैसे काम के लिए
- 10:29इस्तेमाल किया जाता था।
- 10:31उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर डिस्ट्रिक्ट के
- 10:33रॉक शेल्टर्स में माइक्रोलिथ्स और अन्य
- 10:35मेजोलिथिक टूल्स की सबसे पहली खोज की गई
- 10:38थी। इसके अलावा राजस्थान का बागौर क्षेत्र
- 10:41सबसे बड़ी डॉक्यूमेंटेड मेजोलिथिक साइट्स
- 10:43में से एक है। बागौर कोठारी नदी पर स्थित
- 10:46है। जहां खुदाई में माइक्रोलिथ्स के साथ
- 10:49एनिमल बोनस और शेल्व्स भी प्राप्त हुए।
- 10:52इसके साथ ही यह माइक्रोलिथ्स ताप्ती,
- 10:54साबरमती, नर्मदा और माही नदी की कुछ
- 10:57घाटियों में भी पाए गए हैं। जैसा कि हमने
- 11:00पहले देखा कि मेजोलिथिक युग का आरंभ
- 11:02क्लाइमेट चेंज के साथ हुआ था। तापमान की
- 11:05वृद्धि के कारण कई क्षेत्रों में
- 11:07ग्रासलैंड्स का विकास होने लगा। जिसके
- 11:10परिणाम स्वरूप डियर, एंटीलोब, गोट, शीप और
- 11:13कैटल यानी कि घास पर जीवित रहने वाले
- 11:16जानवरों की संख्या में वृद्धि हुई। जहां
- 11:18अभी तक ह्यूमंस हंटर गैदर के रूप में जीवन
- 11:21बिता रहे थे। अब वह एनिमल डोमेस्टिकेशन,
- 11:24उनके फूड हैबिट्स और ब्रीडिंग सीजंस के
- 11:27बारे में सीखने लगे। मध्य प्रदेश के
- 11:29आदमगढ़ में एनिमल डोमेस्टिकेशन का सबसे
- 11:32पुराना साक्ष्य मिलता है। डोमेस्टिकेटेड
- 11:34एनिमल्स में पहला वाइल्ड डॉग था। इसके
- 11:37अलावा शीप और गोट सबसे आम पालतू जानवर हुआ
- 11:40करते थे। मेजोलिथिक ह्यूमंस ने जानवरों की
- 11:43खाल के बने कपड़े भी पहनना शुरू कर दिया
- 11:45था। इसके साथ-साथ मेजोलिथिक एज वो दौर था
- 11:49जब सबक्टिनेंट के विभिन्न भागों में वीट,
- 11:52बाली और राइस सहित कई और अनाज प्राकृतिक
- 11:55रूप से उगने लगे थे। इसके अलावा मेजोलिथिक
- 11:58लोग आर्ट लवर्स भी थे और उन्होंने रॉक
- 12:01पेंटिंग्स की शुरुआत की। इन पेंटिंग्स की
- 12:04थीम ज्यादातर वाइल्ड एनिमल्स, हंटिंग,
- 12:06डांसिंग जैसी एक्टिविटीज को डिपेक्ट करती
- 12:08है। पूरे इंडिया में लगभग 150 मेजोलिथिक
- 12:12रॉक आर्ट साइट्स हैं। जिनमें एमपी की
- 12:15भीमबेटका केव्स, कारवाड़, जाओरा, उड़ीसा
- 12:18का संभलपुर और सुंदरगढ़ और केरला का एतु,
- 12:22गुहा जैसे समृद्ध साइट्स शामिल हैं। यह
- 12:25रॉक पेंटिंग्स धार्मिक प्रथाओं के विकास
- 12:27को भी दर्शाते हैं। पेियोलिथिक युग के
- 12:29विपरीत इस युग के लोग मृत्यु के बाद जीवन
- 12:32में विश्वास करते थे और इसीलिए उन्होंने
- 12:35ह्यूमन और एनिमल डेड बॉडीज को फूड आइटम्स
- 12:37और दूसरे वस्तुओं के साथ दफनाने का रिचुअल
- 12:40शुरू किया था। गुजरात में स्थित लंगनाज और
- 12:43वेस्ट बंगाल में स्थित बुरहानपुर भी
- 12:45महत्वपूर्ण मेजोलिथिक साइट्स में शामिल
- 12:48हैं। इन साइट्स से वाइल्ड एनिमल्स जैसे कि
- 12:51राइनोसोरस और ब्लैक बग की बोनस और ह्यूमन
- 12:54स्केलेटन्स के साथ बड़ी संख्या में
- 12:56माइक्रोलिथ्स बरामद किए गए हैं। दोस्तों,
- 12:58मेज़ोलिथिक काल के बाद 6000 बीसी से 1000
- 13:02बीसी तक का दौर स्टोन एज के लास्ट फेज
- 13:05नियोलिथिक एज के रूप में जाना जाता है।
- 13:08आइए नियोलिथिक पीरियड की विशेषताओं पर नजर
- 13:11डालते हैं। नियोलिथिक एज 6000 बीसी टू
- 13:151000 बीसी। नियोलिथिक शब्द ग्रीक शब्द
- 13:19नियो से लिया गया है जिसका अर्थ है नया।
- 13:22इस प्रकार नियोलिथिक युग न्यू स्टोन एज को
- 13:25रेफर करता है। प्रसिद्ध आर्कियोलॉजिस्ट
- 13:28गॉडन चाइल्ड ने अपनी किताब मैन मेक्स
- 13:31हिमसेल्फ में लिखा है कि नियोलिथिक युग ने
- 13:34मनुष्य के जीवन में एक क्रांति ला दी।
- 13:37उनके द्वारा इस क्रांति को नियोलिथिक
- 13:39रेवोल्यूशन का नाम दिया गया। जिस प्रकार
- 13:42हमने देखा कि पेलिथिक एज में ह्यूमंस पूरी
- 13:45तरह से नेचर पर डिपेंडेंट और हंटर गैदर थे
- 13:48और मेजोलिथिक ऐज में ह्यूमंस द्वारा एनिमल
- 13:51डोमेस्टिकेशन शुरू हुआ। परिवर्तन और
- 13:54आधुनिकता की इस श्रृंखला में नियोलिथिक ऐज
- 13:56में मानव फूड गैदर से फूड प्रोड्यूसर बन
- 14:00गए। नियोलिथिक पीरियड अपनी एग्रीकल्चरल
- 14:03प्रैक्टिससेस की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण
- 14:05है। यूपी के इलाहाबाद के पास स्थित कोडीवा
- 14:08और महागरा भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया
- 14:11में राइस कल्टीिवेशन का सबसे पुराना
- 14:13प्रमाण प्रदान करते हैं। ओल्ड स्टोन एज के
- 14:16विपरीत इस काल में लोग पॉलिश्ड स्टोन
- 14:19टूल्स और एक्सेस का उपयोग करने लगे।
- 14:21जिन्हें अक्सर के्स कहा जाता है। यह टूल्स
- 14:24पहले के क्रूड फ्लेग्ड स्टोन की तुलना में
- 14:27अधिक रिफाइंड दिखाई देते हैं। इसके साथ ही
- 14:30वे बोन से बने टूल्स भी इस्तेमाल करते थे।
- 14:33जैसे नीडल्स, स्क्रेपर्स, बोरर्स, एरो
- 14:36हेड्स एटसेट्रा। नए पॉलिश्ड टूल्स के
- 14:39उपयोग से ह्यूमंस के लिए खेती, शिकार और
- 14:42अन्य कामों को बेहतर तरीके से करना आसान
- 14:45हो गया। बिहार के चिरांद साइट से बोन से
- 14:48बने वेपंस प्राप्त हुए हैं। अगर हम
- 14:50एग्रीकल्चर की बात करें तो नियोलिथिक एज
- 14:52के लोग फलों के साथ रागी, कॉटन, राइस,
- 14:56वीट, बार्ली और हॉर्स ग्राम ग्रो करते थे।
- 14:59इसके साथ ही डोमेस्टिकेटेड एनिमल्स में
- 15:01कैटल, शीप और गोट शामिल थे। कश्मीर के
- 15:05बुरजा होम साइट की एक बैरियल साइट से
- 15:07ह्यूमन के साथ डॉग की डेड बॉडी भी मिली जो
- 15:10कि डॉग डोमेस्टिकेशन का प्रमाण प्रदान
- 15:12करती है। एग्रोपस्टोरल सोसाइटी के अन्य
- 15:16प्रमाण कर्नाटका के हरलूर, मास्की और
- 15:19ब्रह्मगिरी साइट से प्राप्त हुए हैं।
- 15:21पौधों और जानवरों को पालतू बनाने की
- 15:24शुरुआत से बड़ी मात्रा में फूड ग्रेंस और
- 15:26एनिमल फूड का प्रोडक्शन होने लगा था। और
- 15:28प्रोड्यूस किए गए इन फूड ग्रेंस और कुक्ड
- 15:30फूड को स्टोर करने के लिए मिट्टी के बर्तन
- 15:33यानी कि पोटरी मेकिंग की शुरुआत हुई। और
- 15:36इस प्रकार मिट्टी के बर्तन पहली बार
- 15:38नियोलिथिक एज में दिखाई दिए। इसी काल की
- 15:41पॉटरी को ग्रे वेयर, ब्लैक बर्निश्ड वेयर
- 15:44और मैट इंप्रेस्ड वेयर के तहत क्लासिफाई
- 15:47किया गया था। इनिशियल स्टेज में हैंडमेड
- 15:50पॉटरी बनाए गए थे। लेकिन बाद में फुट
- 15:53व्हील्स का इन्वेंशन हुआ। यह लोग कॉटन और
- 15:55वूल के कपड़े बनाना भी सीख चुके थे। कॉटन
- 15:58का ओल्डेस्ट एविडेंस मेहरगढ़ साइट से
- 16:01प्राप्त हुआ जो वर्तमान में पाकिस्तान में
- 16:03स्थित है। नियोलिथिक युग के लोग मिट्टी के
- 16:06बने रेक्टेंगुलर और सर्कुलर हाउसेस में
- 16:08रहते थे। और इस प्रकार फर्स्ट सेटल्ड
- 16:11सोसाइटी और अर्लियस्ट इंडियन विलेजेस की
- 16:14नीव नियोलिथिक एज में रखी गई थी। इसके साथ
- 16:17ही कश्मीर वैली में पिट ड्वेलिंग के
- 16:20साक्ष्य भी मिले हैं जो यह बताते हैं कि
- 16:22यहां नियोलिथिक लोग पिट्स में रहते थे।
- 16:25हालांकि इस काल में भी लोग पहाड़ी क्षेत्र
- 16:28और रिवर वैली से अधिक दूर नहीं रहते थे।
- 16:31क्योंकि वे तब भी पूरी तरह स्टोन टूल्स और
- 16:33वेपंस पर निर्भर थे। इसके साथ ही
- 16:36एग्रीकल्चर, पॉटरी और एनिमल डोमेस्टिकेशन
- 16:39के लिए नेचर से उन्हें नेचुरल रिसोर्सेज
- 16:41मिलते थे।
- 16:43नियोलिथिक एज के अंत के साथ स्टोन एज का
- 16:46भी अंत हुआ और इसी दौरान कई संस्कृतियों
- 16:49ने धातु यानी कि मेटल्स का उपयोग करना
- 16:52शुरू कर दिया। ज्यादातर यह मेटल्स कॉपर और
- 16:55लो ग्रेड ब्रों्स थे। मेटल्स के उपयोग पर
- 16:58आधारित इस संस्कृति को चालकोलिथिक यानी कि
- 17:01कॉपर स्टोन फेज के रूप में जाना जाने लगा।
- 17:04आइए जानते हैं इसके बारे में। चालकोलिथिक
- 17:07एज 2000 बीसी टू 500 बीसी। यह कल्चर मुख्य
- 17:11रूप से प्री हड़प्पन फेज में देखी गई थी।
- 17:14जहां एनिमल रियरिंग और रूरल सेटलमेंट होने
- 17:17लगे थे। लेकिन कई स्थानों पर यह पोस्ट
- 17:20हड़प्पन फेज तक भी फैली हुई थी। प्री
- 17:22हड़प्पन फेज नियोलिथिक एज और हड़प्पन एज
- 17:25के बीच ट्रांजिशन पीरियड को रिप्रेजेंट
- 17:27करता है। चालकोलिथिक एज वो आधार है जिस पर
- 17:30हड़प्पा सिविलाइजेशन के ग्रेजुअल
- 17:32एववोल्यूशन को समझा जा सकता है। इस युग
- 17:35में कॉपर का उपयोग कर एक्स, फिशिंग हुक्स,
- 17:38चिज़ल्स, पिंस, नाइव्स और रोड्स जैसे टूल्स
- 17:42बनाए जाते थे। इस दौर के घर स्टोंस और मड
- 17:45ब्रिक्स से बनाए गए थे। और अभी तक लोग
- 17:47बर्न ब्रिक्स से परिचित नहीं थे। हालांकि
- 17:50राजस्थान में स्थित गिलुंड साइट एकमात्र
- 17:53स्थान है जहां से बेक्ड ब्रिक्स के कुछ
- 17:55अवशेष मिले हैं। चालकोलिथिक सोसाइटी की
- 17:58संस्कृति शहरी नहीं थी और इन्हें एक विलेज
- 18:01सोसाइटी माना जाता है। इस युग के साथ सोशल
- 18:04इनकलिटीज की भी शुरुआत हुई। जहां एक तरफ
- 18:07विलेज चीफ रेक्टेंगुलर शेप्ड घरों में
- 18:10रहते थे। वहीं आम जनता छोटे राउंड हट्स
- 18:12में रहती थी। घरों के अलावा इस युग के
- 18:15बैरियल्स भी विभिन्न प्रकार के होते थे।
- 18:18जिसमें सिंगल बैरियल से लेकर स्मॉल बॉक्स
- 18:20शेप्ड बैरियल्स और रॉक कट टम्स भी शामिल
- 18:23थे। लोग डेड बॉडीज को पॉट्स और कॉपर
- 18:26ऑब्जेक्ट्स के साथ अपने घरों के फर्श पर
- 18:29नॉर्थ साउथ डायरेक्शन में दफनाया करते थे।
- 18:32वेस्ट महाराष्ट्र में पाए गए बैरियल्स में
- 18:34काफी बड़ी संख्या में छोटे बच्चों को
- 18:37दफनाने के एविडेंस मिले हैं। जो यह स्पष्ट
- 18:40करते हैं कि नियोलिथिक एज में इनफेंट
- 18:42मोटैलिटी रेट काफी अधिक थी। इस दौर में
- 18:45आर्ट और क्राफ्ट में वृद्धि हुई जिसमें
- 18:48कॉपर स्मिथ्स और स्टोन वर्कर्स भी शामिल
- 18:50थे। उन्हें स्पिनिंग, वीविंग और क्लॉथ
- 18:53मैन्युफैक्चरिंग भी आती थी। हालांकि अब तक
- 18:56वह लिखने की कला नहीं जानते थे।
- 18:59चालकोलिथिक काल की मुख्य पहचान पॉलीक्रोम
- 19:02पेंटेड पोटरी है। ब्लैक और रेड पॉटरी उस
- 19:05युग में काफी प्रचलित थी। ओकर कलर्ड पोटरी
- 19:08भी बहुत लोकप्रिय थी।
- 19:10ओका कलर्ड पोटरी के साक्ष्य राजस्थान,
- 19:13पंजाब, हरियाणा और वेस्टर्न यूपी के
- 19:16क्षेत्रों में पाए गए हैं। इसके साथ ही
- 19:18लोग ऑर्नामेंट्स के भी शौकीन थे। इस युग
- 19:21की महिलाएं शेल और बोनस के बने आभूषण
- 19:23पहनती थी। वे सेमी प्रेशर स्टोंस जैसे कि
- 19:26स्टेटाइट और क्वड्स क्रिस्टल से मोतियों
- 19:28की माला का भी निर्माण करते थे।
- 19:31चालकोलिथिक युग अनेक संस्कृतियों के लिए
- 19:33जाना जाता है। इन संस्कृतियों का नामकरण
- 19:36उनकी ज्योग्राफिकल लोकेशन के आधार पर किया
- 19:38गया है। जैसे साउथ ईस्टर्न राजस्थान में
- 19:41स्थित आहार या बनास कल्चर जो बनास घाटी के
- 19:44नाम से लिया गया है जिसमें संस्कृति के
- 19:47अधिकांश साइट्स लोकेटेड हैं। यह भारत में
- 19:50सबसे पुरानी चालकोलेथिक कल्चरर्स में से
- 19:52एक है। इस कल्चर के मेजर एक्सकेवेटेड
- 19:55साइट्स उदयपुर, भीलवाड़ा और राजसमंद
- 19:57डिस्ट्रिक्ट में स्थित है। यहां से स्टोन
- 20:00ब्लेड्स और राइस कल्टीिवेशन के प्रमाण
- 20:02मिले हैं। इसके साथ ही रिच सिरेमिक
- 20:04ट्रेडिशन के भी साक्ष्य मिलते हैं। मेजर
- 20:07कल्चर में अगला नाम एमपी के उज्जैन में
- 20:09स्थित कायथा कल्चर का है। यह चंबल नदी की
- 20:12ट्रिब्यूटरी कालीसिंध के तट पर स्थित है।
- 20:16इसके अलावा सेंट्रल इंडिया का सबसे प्रमुख
- 20:18चालकोलिथिक कल्चर मालवा कल्चर है जो
- 20:20नर्मदा नदी के तट पर पूरे मालवा रीजन में
- 20:23फैला हुआ है। यहां से वीट, बाली, ऑयल सीड,
- 20:27ज्वार, राइस, लेग्यूम्स जैसे फूड ग्रेंस
- 20:29के साथ टेराकोटा से बनी बुल फिगर भी
- 20:32प्राप्त हुए। वेस्टर्न महाराष्ट्र का
- 20:35जोरवे कल्चर प्रावरा नदी के तट पर स्थित
- 20:38है। अहमदनगर का दायमाबाद क्षेत्र जोरवे
- 20:42कल्चर का एक प्रमुख स्थल है। यहां ब्रोंज़
- 20:45के बने एलीिफेंट्स, राइनोसोरस, टू व्हील्ड
- 20:48चैरियट जैसे ऑब्जेक्ट्स प्राप्त हुए। अन्य
- 20:50प्रमुख साइट्स में बिहार का चिरांद, एमपी
- 20:53का निवादा, गुजरात का रंगपुर और
- 20:56महाराष्ट्र का इमाम गांव और नाशिक शामिल
- 20:59है। इस प्रकार कुल मिलाकर भारत में
- 21:01चालकोलिथिक साइट्स रीजनल डायवर्सिटी को
- 21:04दर्शाते हैं। अभी तक हमने स्टोन एज के
- 21:06अलग-अलग फेसेस के बारे में जाना। इन सभी
- 21:09पीरियड्स में जो बात कॉमन थी वो है स्टोन
- 21:12और टूल्स। यानी कि स्टोन का इस्तेमाल
- 21:14टूल्स या फिर वेपन बनाने के लिए किया जाता
- 21:17था। लेकिन 1000 बीसी के आसपास भारत में एक
- 21:20और पीरियड इमर्ज हुआ। जहां स्टोंस का
- 21:23इस्तेमाल टूल्स के अलावा बैरियल्स और
- 21:25मेमोरियल्स यानी कि कब्र और स्मारक बनाने
- 21:28के लिए किया जाता था। और इस फेज को कहते
- 21:30हैं मेगाथिक पीरियड। आइए देखते हैं इस फेज
- 21:34को थोड़े विस्तार से। मेगालिथिक पीरियड
- 21:371000 टू 500 बीसी। मेगालिथ का शाब्दिक
- 21:41अर्थ बिग स्टोंस होता है और इस कल्चर में
- 21:44एक सिंगल लार्ज स्टोन का उपयोग कर
- 21:46बैरियल्स या मेमोरियल्स का निर्माण किया
- 21:48जाता था। इन मेगाथिक स्ट्रक्चर्स को दो
- 21:52श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।
- 21:54एक पॉलीिथिक टाइप और दूसरा मोनोलिथिक
- 21:56टाइप। पॉलीथिक स्ट्रक्चर को बनाने के लिए
- 21:59एक से अधिक स्टोंस का उपयोग किया जाता था।
- 22:02और मोनोलिथिक स्ट्रक्चर में सिर्फ एक ही
- 22:04स्टोन से इस्तेमाल होता था। हालांकि यह
- 22:06स्ट्रक्चर्स भारत में कई जगहों पर पाए गए
- 22:09हैं। लेकिन मेगालिथिक कल्चर विशेष रूप से
- 22:12सदर्न इंडिया की विशेषता है। साउथ इंडिया
- 22:15में बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार के
- 22:16मेगालिथिक ग्रेव्स और मेमोरियल्स पाए गए
- 22:19हैं। जिनमें कर्नाटका के मास्की और
- 22:21गुलबर्गा क्षेत्र में मेनर मेगालिथिक
- 22:24बैरियल्स, आंध्र प्रदेश और केरला के हुड
- 22:27स्टोन मेमोरियल्स, केरला का अंब्रेला
- 22:30स्टोन ग्रेव शामिल है। इसके अलावा
- 22:32कर्नाटका के ब्रह्मगिरी और तमिलनाडु के
- 22:35चिंगला पट्टू में डोलमेन शेप्ड टू और
- 22:38कोचिन के रॉकेट केव मेमोरियल्स पाए गए
- 22:41हैं। नॉर्दर्न इंडिया में ऐसे मेगाट्स
- 22:43कश्मीर के वास्तल और ब्रा और इसके साथ ही
- 22:47उत्तर प्रदेश के बांदा, इलाहाबाद,
- 22:49मिर्जापुर और वाराणसी डिस्ट्रिक्ट्स में
- 22:51पाए गए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में
- 22:54अधिकांश स्मारक विदर्भ रीजन में पाए गए
- 22:57हैं। खोजकर्ताओं को इन सभी बैरियर्स में
- 23:00कुछ कॉमन फीचर्स मिले। आमतौर पर डेड बॉडीज
- 23:04के साथ रेड और ब्लैक वेयर पॉट्स को दफनाया
- 23:06जाता था। इसके अलावा आयरन के बने टूल्स,
- 23:09वेपन्स और स्टोन और गोल्ड के ऑर्नामेंट्स
- 23:12भी मिले। इसके साथ ही कुछ बैरियल्स के
- 23:15स्केलेटन्स के साथ हॉर्स और हॉर्स
- 23:17इक्विपमेंट मिले तो कभी डोमेस्टिक एनिमल्स
- 23:20जैसे कि बफेलो, शीप और गोट। उदाहरण स्वरूप
- 23:23कर्नाटका के ब्रह्मगिरी साइट में स्केलेटन
- 23:26के साथ 33 गोल्ड बीड्स, टू स्टोन बीड्स और
- 23:30फोर कॉपर बैंगल्स मिले। वहीं दूसरी ओर
- 23:33अनेकों साइड से सिर्फ कुछ पॉट्स मिले।
- 23:37स्केलेटन्स के साथ मिली यह वस्तुएं संभवतः
- 23:40उन्हीं डेड पर्सन से जुड़ी रही होंगी। इन
- 23:43खोजों से पता चलता है कि दफनाने वाले
- 23:46लोगों के बीच सोशल स्टेटस का अंतर था। कुछ
- 23:49अमीर थे तो कुछ गरीब, कुछ मुखिया थे तो
- 23:52कुछ आम लोग। इस युग में हाई क्वालिटी रेड
- 23:55और ब्लैक पॉटरी का उपयोग इसकी खास विशेषता
- 23:58है। यह ध्यान देना काफी इंटरेस्टिंग है कि
- 24:01नॉर्थ और साउथ दोनों ही रीजंस में मेगाथिक
- 24:04बैरियर्स के साथ ब्लैक और रेड पॉटरीज
- 24:07मिले। इन पॉटरीज में कुछ रीजनल वेरिएशंस
- 24:10भी जरूर दिखे। लेकिन इन्हें बनाने की
- 24:12तकनीक उसकी साज सज्जा में कोई बड़ा अंतर
- 24:15नहीं था। इसके अलावा इन मेगालिथिक
- 24:17बैरियर्स में आयरन ऑब्जेक्ट्स की खोज से
- 24:20यह पता चलता है कि यह कल्चरल पीरियड आयरन
- 24:23एज से जुड़ा हुआ होगा। आर्कियोलॉजिकल
- 24:26एविडेंस के हिसाब से इंडिया में आयरन का
- 24:28इस्तेमाल 1000 बीसी से 500 बीसी के बीच
- 24:32विस्तृत रूप से होने लगा था। जहां एक ओर
- 24:35इस दौर में आयरन टूल्स और वेपन्स आम हो गए
- 24:38थे। वहीं इसके साथ-साथ डेटेड लिटरेचर भी
- 24:41लिखा जाने लगा था। इस प्रकार मेगालिथिक
- 24:44पीरियड आयरन एज की उस अवधि को मार्क करता
- 24:47है जहां प्री हिस्ट्री की समाप्ति और
- 24:50हिस्ट्री की शुरुआत का एक ट्रांजिशन फेस
- 24:53देखने को मिलता है। कंक्लूजन
- 24:56दोस्तों भारत के प्रीहिस्टोरिक एज में
- 24:58स्टोन एज, कॉपर एज और आयरन एज तीनों शामिल
- 25:02थे। प्री हिस्टोरिक इंडिया ने आइस एज के
- 25:05साथ-साथ होमोसेपियंस के उद्भव को भी देखा।
- 25:08इस चर्चा को कंक्लूड करते हुए हम यह कह
- 25:11सकते हैं कि प्री हिस्टोरिक कल्चर ह्यूमन
- 25:13एवोल्यूशन और डेवलपमेंट के ग्रेजुअल और
- 25:16फंडामेंटल फेज को रेफर करती है। प्री
- 25:19हिस्टोरिक पीरियड के चालकोलिथिक फेज के
- 25:21दौरान ही प्रोटोहिस्टोरिक पीरियड यानी
- 25:24हड़प्पन सिविलाइजेशन की नींव पड़ने लगी
- 25:26थी। इंडस वैली सिविलाइजेशन हिस्ट्री एंड
- 25:30ज्योग्राफी इंडस वैली सिविलाइजेशन यानी
- 25:34आईबीसी आज से लगभग 4500 सालों पहले 2600
- 25:40बीसीई में एक अर्बन सिविलाइजेशन की तरह
- 25:43एकिस्टेंस में आया और जब दुनिया भर में
- 25:46बार्बरिज्म का दौर था तब इंडस वैली सभ्यता
- 25:49के पैमानों को सेट कर रही थी। इंडस वैली
- 25:52सिविलाइजेशन के बारे में जानकारी मिलना
- 25:55हमारे इतिहास का वह पहलू है जिसने
- 25:58कॉलोनियलिज्म जैसे ऑप्रेसिव सिस्टम के
- 26:01कल्चरल हेजेमनी को चैलेंज करने में भी
- 26:03हेल्प किया। वो कल्चरल हैजेमनी जो हमें यह
- 26:07बताती रही कि केवल वेस्ट ही सिविलाइज्ड है
- 26:10और ईस्ट हमेशा से अनसिविलाइज्ड, बार्बेरिक
- 26:14और अनकल्चरर्ड था जिसके पास गर्व करने
- 26:17जैसा कुछ नहीं है। इससे जन्म हुआ वाइट
- 26:20मैनस बर्डन नाम के आईडिया का जिसके बेसिस
- 26:23पर ब्रिटिशर्स अपने 200 साल लंबे रूल को
- 26:26मोरली जस्टिफाई करते रहे। यहां तक कि फेमस
- 26:30इंग्लिश फिलॉसफर जे एस मिल जो डेमोक्रेसी
- 26:33और फ्रीडम के बड़े सपोर्टर थे। उन्होंने
- 26:35भी ब्रिटिश कॉलोनियलिज्म को जस्टिफाई करते
- 26:38हुए टोलरेंट इंपीरियलिज्म को प्रमोट किया
- 26:41और क्लेम किया कि ब्रिटिशर्स इंडिया में
- 26:44हमारी भलाई और हमें सिविलाइज करने के लिए
- 26:47आए थे।
- 26:48लेकिन वेस्ट का यह घमंड तब टूटने लगा जब
- 26:51एलेग्जेंडर कनिंगम ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे
- 26:54ऑफ इंडिया यानी एएसआई ने 19th सेंचुरी में
- 26:58कई मेजर आर्कियोलॉजिकल एक्सकवेशंस किए
- 27:01जिसमें सारनाथ, सांची स्तूपा और महाबोधी
- 27:05टेंपल जैसे ब्रिलियंट एंशिएंट
- 27:07आर्किटेक्चर्स इनवॉल्वड थे। लेकिन इनमें
- 27:09सबसे जबरदस्त डिस्कवरी 1921 में इंडियन
- 27:14आर्कियोलॉजिस्ट दयाराम साहनी ने की। जब
- 27:17उन्होंने हड़प्पा का एक्सटेंसिव एक्सकवेशन
- 27:20किया। इस डिस्कवरी ने दुनिया भर के
- 27:23इतिहासकारों को हैरान करके रख दिया।
- 27:26क्योंकि यह अपने समय में वेल प्लंड
- 27:28अर्बनाइजेशन का एक ऐसा अनोखा नमूना था जो
- 27:32हमें आज भी इंस्पायर करता है। इस डिस्कवरी
- 27:35ने ब्रिटिशर्स का मिथ बस्ट करते हुए यह
- 27:38बताया कि जब यूरोप बार्बरिज्म से जूझ रहा
- 27:41था तब इंडिया में एक अर्बन सिविलाइजेशन हर
- 27:45रोज नई ऊंचाइयां छू रहा था। यह कहानी उसी
- 27:49इंडस वैली सिविलाइजेशन की है जिसने
- 27:52भारतीयों को खुद के इतिहास पर गर्व करने
- 27:55का एक मौका दिया और दुनिया को यह बताया कि
- 27:58सभ्यता पर वेस्ट की मोनोपोली नहीं हो
- 28:01सकती। तो आइए पहले हम इंडस वैली के कुछ
- 28:04मेजर फीचर्स को समझ लेते हैं जो हमें यहां
- 28:08के बाकी पहलुओं को जानने में मददगार
- 28:10होंगे। बेसिक फीचर्स।
- 28:13दोस्तों, इंडस वैली सिविलाइजेशन टाइटल
- 28:17पहली बार जॉन मार्शल ने यूज किया। लेकिन
- 28:20इसे हड़प्पन सिविलाइजेशन भी बोला जाता है।
- 28:24और आईवीसी एशिया के तीन और मेजर
- 28:27सिविलाइजेशंस मेसोपोटेमिया, एंशिएंट
- 28:30इजिप्ट और चाइना का समकालीन था। और इंडस
- 28:34वैली के मेसोपोटेमिया के साथ ट्रेड
- 28:36रिलेशंस के एविडेंसेस भी हैं। इंडस वैली
- 28:39की सिटीज एग्रीकल्चरल सरप्लस पर बेस्ड
- 28:42अर्बन टाउनंस थे। पर यहां की इकॉनमी
- 28:46मरकेंटलिज्म पर भी बेस्ड थी। जहां से
- 28:48मैसिव एक्सपोर्ट्स सी और लैंड रूट्स दोनों
- 28:52से होते थे। इस कॉन्टेक्स्ट में अब हम
- 28:54इंडस वैली के एक्सकेवेशंस के इतिहास को
- 28:57ब्रीफली समझेंगे। एक्सकेवेशंस इन ब्रिटिश
- 29:00इंडिया एंड इंडिपेंडेंट इंडिया। दोस्तों,
- 29:04वैसे तो हड़प्पन रूइंस का सबसे पुराना
- 29:07रिकॉर्ड ईस्ट इंडिया कंपनी के सोल्जर
- 29:10चार्ल्स मेसन की किताब नैरेटिव ऑफ वेरियस
- 29:13जर्नीज़ इन बलूचिस्तान, अफगानिस्तान एंड द
- 29:16पंजाब में मिलता है। जो उन्होंने 1842 में
- 29:20लिखी थी। एक और बात ध्यान देने वाली यह है
- 29:23कि ब्रिटिश इंपेरियलिज्म एक सिस्टमैटिक
- 29:26प्रॉब्लम थी ना कि इंडिविजुअल। ऐसा इसलिए
- 29:30क्योंकि कई ब्रिटिशर्स जैसे एलेग्जेंडर
- 29:32कनिंघम ने इंडिया के एंशिएंट कल्चर और
- 29:35सिविलाइजेशनल हिस्ट्री को महत्व देते हुए
- 29:38उस पर रिसर्च को प्रमोट भी किया। यही वजह
- 29:41है कि 1853 में एलेक्जेंडर कनिघम को भी
- 29:45शायद आईवीसी के बारे में पता चला। जब
- 29:48उन्होंने हड़प्पा को विजिट किया। लेकिन
- 29:50इसका सिग्निफिकेंस वह शायद समझ नहीं पाए।
- 29:54बाद में 1921 में दयाराम साहनी ने हड़प्पा
- 29:58और फिर 1922 में आरडी बनर्जी ने
- 30:02मोहनजोदड़ो का एक्सटेंसिव एक्सकवेशन किया।
- 30:06इसके बाद से लगातार इंडस वैली पर
- 30:09एक्सकवेशंस हो रहे हैं। जिनमें कई
- 30:11प्रोमिनेंट आर्कियोलॉजिस्ट्स जैसे एन जी
- 30:14मजूमदार, अमलानंद घोष, आर एस बिष्ट, जेपी
- 30:19जोशी, आर राव और वसंत शिंद इनवॉल्व्ड रहे।
- 30:23इन्होंने आईबीसी के कई और साइट्स जैसे
- 30:26सुतका गैंडोर, कालीबंगा, लोथल एटसेट्रा को
- 30:29डिस्कवर किया और आज तक 2000 से ज्यादा
- 30:33इंडस वैली साइट्स पाई गई हैं। दोस्तों
- 30:36इंडिपेंडेंट इंडिया के एक्सकवेशंस की बात
- 30:39करें तो उसमें सबसे मेजर डिस्कवरी थी 1990
- 30:43में आर एस बिष्ट की। जब उन्हें ढोलावीरा
- 30:47में स्टोन इं्रिप्शन और इंडस साइन बोर्ड
- 30:50मिले। इंडस साइन बोर्ड वुडन प्लेट में
- 30:53इंडस स्क्रिप्ट का लॉन्गेस्ट इं्रिप्शन है
- 30:56और स्टोन इं्रिप्शन ऐसा पहला हड़प्पन
- 30:59इं्रिप्शन है जो स्टोन में है। इसके पहले
- 31:02मिले इं्रिप्शंस टेराकोटा वुड एटसेट्रा
- 31:05में इंक्राइब्ड थे। इसके अलावा दूसरी मेजर
- 31:08डिस्कवरी थी इंडिया की राखीगढ़ी साइट।
- 31:12जिसे पहली बार अमरेंद्रनाथ ने 1997 में
- 31:16एक्सकेवेट किया। 2014 में वसंत शिंद के
- 31:19एक्सकेवेशन्स ने इसे हड़प्पन सिविलाइजेशन
- 31:22की लार्जेस्ट साइट बना दिया जो लगभग 350
- 31:26हेक्टेयर्स में फैली हुई है और इसने 300
- 31:29हेक्टेयर्स में फैली पाकिस्तान की
- 31:31मोहनजोदड़ो को पीछे छोड़ दिया। खैर अब हम
- 31:35बात करते हैं कि आईबीसी के इतिहास को
- 31:37हिस्टोरियंस कैसे क्लासिफाई करते हैं। फोर
- 31:41स्टेजेस और फोर फेसेस ऑफ एववोल्यूशन।
- 31:45दोस्तों हिस्टोरियंस आईबीसी को जनरली चार
- 31:49फेसेस में डिवाइड करते हैं। इसमें पहला है
- 31:52प्री हड़प्पा जो 3300 बीसीई के पहले का
- 31:56फेज है। इस दौर में नोमेडिक लोग
- 31:59सेटलमेंट्स बनाने लगे और एग्रीकल्चर की
- 32:01शुरुआत हुई। दूसरा है अर्ली हड़प्पा जो
- 32:05लगभग 3300 बीसीई से 2600 बीसीई तक था। इस
- 32:12दौर में हड़प्पा में बड़े-बड़े विलेजेस का
- 32:14इमरजेंस हुआ जो बाद में अर्बन टाउनंस में
- 32:17कन्वर्ट हुए। तीसरा और सबसे इंपॉर्टेंट है
- 32:20मैच्योर हड़प्पन फेज जो 2600 से 1900
- 32:25बीसीई तक एग्जिस्टेंस में रहा। इस दौरान
- 32:29वो ग्रेट सिटीज फ्लोरिश कर रहे थे जो
- 32:32आईवीसी को अर्बन बनाते हैं। और इसी दौर
- 32:35में हड़प्पा में मैरकेंटलिज्म भी अपने चरम
- 32:38पर था। आखिरी फज़ है लेट हड़प्पन फेज जो
- 32:431900 बीसीई से 1300 बीसीई में मिलता है।
- 32:48यहां आईबीसी का डिक्लाइन दिखता है जिसके
- 32:51बाद धीरे-धीरे यह सिविलाइजेशन इतिहास बन
- 32:54गया। चलिए अब आपको लेकर चलते हैं इंडस
- 32:58वैली की जियोग्राफी की ओर और जानते हैं कि
- 33:00यह कहां से कहां तक फैला हुआ था।
- 33:03जियोग्राफी ऑफ हड़प्पन साइंस। इंडस वैली
- 33:07सिविलाइजेशन पंजाब, हरियाणा, सिंध,
- 33:10बलूचिस्तान, गुजरात, राजस्थान और वेस्टर्न
- 33:14यूपी तक फैला हुआ था। यह सारे एरियाज
- 33:17लार्जली इंडस और इंडस की ट्रिब्यूटरीज
- 33:20जैसे रावी के अराउंड लोकेटेड थे। और
- 33:24इसीलिए इसे जॉन मार्शल ने इंडस वैली
- 33:27सिविलाइजेशन बोला। एक थ्योरी के हिसाब से
- 33:30इंडस वैली पहले काफी ज्यादा फर्टाइल था।
- 33:34इसीलिए यहां पर आईवीसी का जन्म हुआ। लेकिन
- 33:37बाद में इंडस वैली की फर्टिलिटी में
- 33:39डिक्लाइन और एनवायरमेंटल चेंजेस के चलते
- 33:42शायद यहां के लोग गंगा वैली में चले गए।
- 33:45जहां बाद में पोस्ट हड़प्पन सेटलमेंट्स,
- 33:48महाजनपद और मगध जैसे किंगडम्स का राइज
- 33:51हुआ। अभी तक के एक्सकवेशन के हिसाब से
- 33:55मांडा नॉर्दर्न मोस्ट, दायमाबाद सदर्न
- 33:58मोस्ट, आलमगीरपुर ईस्टर्न मोस्ट और सुतका
- 34:02गैंडोर वेस्टर्न मोस्ट हड़प्पन साइट्स
- 34:04हैं। इंडस वैली में मिले 2000 से ज्यादा
- 34:08साइट्स में से ज्यादातर प्रेजेंट डे
- 34:10इंडिया और पाकिस्तान में है। लेकिन एक
- 34:13साइट शोरतु घाई अफगानिस्तान में भी है। जो
- 34:16शायद हड़प्पंस का ट्रेडिंग कॉलोनी था।
- 34:19पोर्ट सिटीज में सुरका, लोथल,
- 34:23कुंतासी, गुजरात में, अलादीनो, बालाकोट और
- 34:27सुदका गेंडोर जो अब पाकिस्तान में है नाम
- 34:30की साइट्स आते हैं। जहां से मेजर ट्रेड्स
- 34:33के एविडेंस सूर नाम के मेसोपोटेमियन
- 34:37साइट्स में मिले हड़प्पन सील्स हैं। इसके
- 34:40बाद हम चर्चा करते हैं हड़प्पन
- 34:42सिविलाइजेशन में हुए मेजर एक्सकेवेशंस की
- 34:45जो यहां के इतिहास और समाज को इंटरप्रेट
- 34:48करने के लिए प्राइमरी हिस्टोरिकल सोर्सेस
- 34:51हैं। मेजर एक्सकेवेशंस
- 34:54टाउन प्लानिंग आईबीसी का सबसे इंटरेस्टिंग
- 34:58एलिमेंट है उसका टाउन प्लानिंग जिसके
- 35:01ब्रिलियंस को हम मॉडर्न डे चंडीगढ़ और
- 35:03न्यू रायपुर जैसी प्लंड सिटीज से कंपेयर
- 35:06कर सकते हैं। यह खुद में एक अचीवमेंट है
- 35:09कि आईबीसी ने ऐसा टाउन प्लानिंग 4,500 साल
- 35:13पहले इस्टैब्लिश किया था। आईबीसी के टाउन
- 35:16प्लानिंग का पहला मेजर फीचर यहां का
- 35:19स्ट्रैटिफाइड टाउन प्लानिंग है। कुछ
- 35:21साइट्स को छोड़ दें तो मोस्ट साइट्स के
- 35:24वेस्ट में एक फर्टिफाइड सीटाडेल या किला
- 35:27मिलता है जो शायद रूलिंग क्लास के लिए था
- 35:30और ईस्ट में छोटे ब्रिक हाउसेस जो शायद
- 35:34कॉमनर्स के लिए थे। यह यहां के सोशल
- 35:37स्ट्रैटिफिकेशंस को इंडिकेट करता है और
- 35:40बताता है कि समाज में स्टेटस और पावर के
- 35:42बेसिस पर डिवीजंस हड़प्पन टाइम से थे। पर
- 35:45यह डिवीजंस कास्ट सिस्टम की तरह नहीं थे।
- 35:49धोलावीरा में यह सीटाडेल पत्थरों का था और
- 35:52यहां एक मिडिल टाउन भी था जो शायद मिडिल
- 35:55क्लासेस के लिए था। एक्सेप्शनंस में चानू
- 35:59दाड़ो है। जहां कोई सीटाडेल अब तक नहीं
- 36:02मिला है। और लोथल का सीटाडेल फर्टिफाइड
- 36:05नहीं था बल्कि थोड़ा हाइट पर बनाया गया था।
- 36:08टाउन प्लानिंग का अगला ब्रिलियंट फीचर है
- 36:11ग्रिड सिस्टम। जहां हम मैसिव टेक्नोलॉजिकल
- 36:14इनोवेशंस के बावजूद आज भी वेल प्लंड
- 36:17टाउनंस के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वहीं
- 36:204500 साल पहले हड़प्पंस ने मिनिमल
- 36:24टेक्नोलॉजी यूज करके एक इंस्पायरिंग नमूना
- 36:27पेश किया है। आईवीसी में ऑलमोस्ट सारे
- 36:30स्ट्रीट्स राइट एंगल से एक दूसरे से
- 36:32कनेक्टेड थे। जिनके चारों तरफ शहर बसे थे।
- 36:36तीसरा इंटरेस्टिंग फीचर है ब्रिलियंट
- 36:39अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम। मोहंजदड़ो
- 36:42में सारी स्ट्रीट्स में ड्रेंस मिलते हैं
- 36:45और लगभग सभी घरों में वेस्ट वाटर
- 36:48मैनेजमेंट का इंतजाम भी। इन घरों की
- 36:51दीवारों में वर्टिकल पाइप्स थी जो ड्रेन
- 36:54से कनेक्टेड हैं। इनमें छोटे-छोटे सेटलिंग
- 36:57पोल्स और ट्रैप्स भी हैं जो सेडिमेंट्स को
- 37:00जो ड्रेन को जैम कर सकते हैं, ट्रैप कर
- 37:03सकते थे और इन्हें ईजीली रिमूव किया जा
- 37:05सकता था। मॉडर्न इंडिया में स्वच्छ भारत
- 37:08मिशन के अंडर सैनिटेशन को जोेंस दिया गया
- 37:11है, वह बताता है कि आईवीसी का वेस्ट वाटर
- 37:15मैनेजमेंट कैसे एक फ्यूचरिस्टिक और
- 37:17प्रोग्रेसिव सिस्टम था। इन ड्रेंस का
- 37:20ब्रिलियंस इस वजह से भी है कि यह बेक्ड
- 37:23ब्रिक के थे जो भारत में इसके पहले या कुछ
- 37:26सालों बाद तक के सिविलाइजेशन में भी काफी
- 37:28कम मिलते हैं। अब बात करते हैं यहां के
- 37:32आर्किटेक्चर की। आर्किटेक्चर
- 37:36आईवीसी का सबसे इंपॉर्टेंट आर्किटेक्चरल
- 37:38मास्टर पीस मोहंजदड़ो का द ग्रेट बाथ है।
- 37:43यह बेक्ड ब्रिक्स से बना हुआ 6 * 12 मीटर
- 37:46साइज का स्ट्रक्चर है। जिसका मेन पर्पस
- 37:49शायद रिलीजियस था। जिसे रिचुअल बेदिंग में
- 37:53यूज करते थे। ग्रेट बाथ का फ्लोर और आउटर
- 37:56वॉल्स बिट्यूमिनाइज्ड है जो इसे वाटर
- 37:59प्रूफ बनाता है। यहां स्टोन नहीं दिखता।
- 38:02इसके अलावा एक मैसिव वाटर टैंक धोलावीरा
- 38:06में भी है। अगला स्ट्रक्चर ग्रेनरीज है।
- 38:09मोहनजोदड़ो का ग्रेट ग्रेनरी सबसे मैसिव
- 38:13है। जिसका यूज शायद टैक्स में मिले ग्रेंस
- 38:16के स्टोरेज में होता था। हड़प्पा में भी
- 38:19ऐसे सिक्स ग्रेनरीज मिले हैं। यहां टू रूम
- 38:22बैरिक्स भी थे जहां शायद वर्कर्स रहते थे।
- 38:25आगे देखते हैं हड़प्पा की आर्ट एंड
- 38:28क्राफ्ट की कहानी। आर्ट एंड क्राफ्ट।
- 38:33दोस्तों, आईबीसी अपनी ब्रिलियंट और वेल
- 38:37डेवलप्ड आर्टिफेक्ट्स और स्कल्प्चर्स के
- 38:39लिए भी फेमस है। यह हमें हड़प्पन सोसाइटी
- 38:42में पॉसिबल गॉड वरशिप, लेजर टॉयज,
- 38:45मटेरियल्स इन यूज़ एटसेट्रा के बारे में
- 38:47बताते हैं। वैसे तो यहां क्राफ्ट मेकिंग
- 38:50एक कॉमन प्रैक्टिस थी। लेकिन मोस्ट
- 38:52क्राफ्ट प्रोडक्शन चानूदाड़ो, नागेश्वर और
- 38:56बालाकोट जैसे इंडस्ट्रियल टाउन में होता
- 38:58था। इनमें से कई क्राफ्ट्स आज भी इंडियन
- 39:01और ब्रिटिश म्यूजियम्स में देखे जा सकते
- 39:03हैं। स्टोन स्कल्प्चर्स
- 39:06स्टोन स्कल्प्चर्स की बात करें तो उनमें
- 39:09सबसे फेमस स्कल्प्चर रेड सैंड स्टोन में
- 39:12बना मेल बॉडी के अपर पार्ट या टॉरसो है।
- 39:15टॉर्सो की नेक, शोल्डर्स, हेड्स और आर्म्स
- 39:18में सॉकेट होल्स हैं। और इसकी डिजाइनिंग
- 39:21काफी डिटेल्ड है। इसके अलावा बियर्डेड मैन
- 39:25का स्कल्प्चर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय
- 39:28है। जो स्टीटाइट या सोप रॉक से बना था। यह
- 39:32शायद एक प्रीस्ट था क्योंकि इसके रिपीटेड
- 39:35रिप्रेजेंटेशंस और जगहों में मिलते हैं।
- 39:38यह स्कल्प्चर एक ट्री फॉइल पैटर्न शॉल में
- 39:41लिपटा हुआ है जिसकी आइज इलोंगेटेड और हाफ
- 39:45क्लोज्ड हैं। देखकर लगता है जैसे वो
- 39:47मेडिटेशन में हो। इसका नोज, माउथ, मस्टाश
- 39:52और हेयर काफी डिटेल्ड हैं। हेड के चारों
- 39:56तरफ एक प्लेन वन फिलेट और हैंड में आमलेट
- 39:59भी है। ट्रफोइल पैटर्न शॉल यह इंडिकेट
- 40:02करती है कि यहां एंब्रॉयडरी प्रैक्टिस में
- 40:05थी। ब्रोंज़ कास्टिंग। दोस्तों ब्रोंज़
- 40:10कास्टिंग भी आईबीसी में पॉपुलर था जो
- 40:12इंडिया में एक कंटीन्यूअस ट्रेडिशन में
- 40:15दिखता है। इसका एक एग्जांपल फेमस नटराज
- 40:17स्कल्प्चर है जो 11th सेंचुरी में चोलाज़
- 40:21ने बनवाया था। ब्रोंज़ कास्टिंग के लिए
- 40:23दोनों जगहों में लॉस्ट वैक्स टेक्निक का
- 40:26इस्तेमाल होता है। इंडस वैली के सबसे फेमस
- 40:29ब्रोंज़ेस डांसिंग गर्ल, बफेलो, गोट एनिमल
- 40:33फिगर्स और कालीबंगा और मोहिंजदड़ों के बुल
- 40:36स्कल्प्चर्स हैं। डांसिंग गर्ल एक 4 इंच
- 40:40टॉल फिगर है जो मोहिंजदड़ों में मिली।
- 40:43इसके लॉन्ग हेयर बन में बंधे हुए हैं।
- 40:46आर्म्स, बैंगल्स, ब्रेसलेट्स और एमुलेट से
- 40:49कवर्ड और नेक में कोरी शेल नेकलेस है।
- 40:53सबसे इंटरेस्टिंग बात है डांसिंग गर्ल का
- 40:55त्रिभंगा पोश्चर जो इसके लाइवलीनेस को
- 40:58रिमारकेबल बनाता है। टेराकॉर्टा आर्ट।
- 41:02टेराकॉर्टा यानी कि नेचुरल क्ले से बने
- 41:06रेडिश ब्राउन कलर के फिगर्स भी यहां काफी
- 41:09कॉमन थे। लेकिन टेराकोटा फिगर्स का
- 41:11डिटेलिंग उतना ब्रिलियंट नहीं है जितना
- 41:14ब्रोंज़ और स्टोन स्टैचूस का है। इनमें
- 41:17सबसे फेमस मदर गॉडेस, बियर्डेड मेल्स,
- 41:20मास्क ऑफ हर्ड डेटी, टॉय कार्ड्स और सील्स
- 41:24हैं। सबसे प्रोमिनेंट टेराकोटा फिगर मदर
- 41:27गॉडेस है जो एक क्रूड और स्टैंडिंग फीमेल
- 41:31फिगर है जिसमें नेकलेसेस, लॉयन क्लॉथ और
- 41:34गर्डल्स की सजावट है। इसमें मोस्ट
- 41:37डिस्टिंक्ट फीचर फैन शेप्ड हेड ड्रेस है
- 41:40जिसके दोनों साइड्स में कप लाइक
- 41:42प्रोजेक्शंस हैं। बाकी के फेशियल फीचर्स
- 41:45क्रूड और कम रियलिस्टिक हैं। सील्स की बात
- 41:49करें तो वो टेराकोटा के अलावा स्टी टाइट,
- 41:52एगट, शर्ट, कॉपर, फयन्स, गोल्ड, आइवरी और
- 41:57सिल्वर में भी मिलते हैं। सील्स का
- 42:00इस्तेमाल जनरली ट्रेड में होता था। शायद
- 42:02एज अ प्रूफ ऑफ ऑथेंटिसिटी।
- 42:05इनमें सबसे पॉपुलर मोहनजोदड़ो के पशुपति
- 42:08सील हैं। जिसमें एिफेंट, टाइगर, राइनो,
- 42:11बफलो और दो एंटीलोब्स काव्ड हैं। पॉटरी।
- 42:16अगला इंपॉर्टेंट क्राफ्ट यहां का पॉटरी है
- 42:18जो लार्जली व्हील मेड थे ना कि हैंडमेड।
- 42:22सबसे कॉमन रेड एंड ब्लैक वेयर पॉटरी थे।
- 42:26प्लेन पॉटरी ज्यादा कॉमन है देन
- 42:28ऑर्नामेंटेड पॉटरी। और कुछ रेयर पॉलीक्रोम
- 42:31और इनसाइज्ड वेयर्स भी मिले हैं। पॉटरीज
- 42:34में ग्रेसफुल कर्व्स ज्यादा कॉमन है देन
- 42:37स्ट्रेट और एंगुलर शेप्स। अदर्स इन सबके
- 42:41अलावा यहां क्लॉथ मेकिंग में यूज होने
- 42:43वाले स्पिंडल वर्ल्ड्स कई घरों में मिले
- 42:46जो क्लॉथ मेकिंग के कॉमन प्रैक्टिस के
- 42:48इंडिकेशंस हैं। हड़प्पंस बोट मेकिंग
- 42:51क्राफ्ट भी जानते थे जिसका इस्तेमाल सी
- 42:54ट्रेड में होता था। यहां वेट्स एंड मेजर्स
- 42:57भी डेवलप्ड थे जो शायद 16 के मल्टीपल्स
- 43:00में यूज होते थे। यह मेजरमेंट टेक्निक
- 43:04मॉडर्न इंडिया तक देखने को मिला जहां 16
- 43:07आना ₹1 होता था। तो यह था इंडस वैली
- 43:10सिविलाइजेशन के इतिहास का वो पहलू जिसमें
- 43:13हमने वहां की जियोग्राफी, टाउन प्लानिंग,
- 43:16आर्किटेक्चर और मेजर एक्सकवेशंस और
- 43:19क्राफ्ट्स मेकिंग की बात की। इंडस वैली
- 43:22सिविलाइजेशन पार्ट टू इंपॉर्टेंट साइट्स
- 43:25एंड इनफ्लुएंसेस। दोस्तों, हम बात कर रहे
- 43:29हैं इंडस वैली सिविलाइजेशन की जो भारत के
- 43:32इतिहास का पहला अर्बन सिविलाइजेशन था।
- 43:35पिछले वीडियो में हमने देखा कि इंडस वैली
- 43:38सिविलाइजेशन क्यों इतना इंपॉर्टेंट पार्ट
- 43:40है हमारे इतिहास का और उसमें कौन-कौन से
- 43:43मेजर एक्सकवेशंस आज तक हुए हैं। हमने इंडस
- 43:46वैली के इंपॉर्टेंट आर्किटेक्चरल और
- 43:49कल्चरल एलिमेंट्स के एविडेंसेस को समझने
- 43:51की भी कोशिश की है। इस दूसरे भाग में हम
- 43:54बात करने वाले हैं वहां की कुछ इंपॉर्टेंट
- 43:57साइट्स के बारे में और जानेंगे कि यहां
- 43:59मिले एविडेंसेस हमें इंडस वैली की
- 44:02सोसाइटी, पॉलिटिक्स और इकॉनमी के बारे में
- 44:05क्या बताते हैं। इसके अलावा इंडस वैली के
- 44:09डिक्लाइन को लेकर कई डिस्प्यूट्स हैं
- 44:11जिसके बारे में हम इस वीडियो में जानेंगे।
- 44:14आइए पहले हम बात करते हैं आईबीसी की कुछ
- 44:17मेजर साइट्स की। सम इंपॉर्टेंट साइट्स
- 44:21हड़प्पा।
- 44:22दोस्तों, हड़प्पा रवि के किनारे पाकिस्तान
- 44:26के पंजाब प्रोविंस में है। रवि के पास
- 44:29होने से इसको ट्रेड नेटवर्क, एक्वेटिक फूड
- 44:32और ड्रिंकिंग और कल्टीिवेशन के लिए पानी
- 44:34का एक्सेस था। हड़प्पा ईस्ट से आने वाले
- 44:38ट्रेड रूट्स का मीटिंग पॉइंट भी माना गया
- 44:40है। यहां के मेजर एक्सकवेशंस में ग्रेनरीज
- 44:43विद ब्रिक प्लेटफार्म, वर्कर्स के रूम्स,
- 44:46ब्रोंज़, स्मेल्टिंग एटसेट्रा है। जिसके
- 44:48बारे में हमने पिछले वीडियो में बात की।
- 44:50हड़प्पा इकलौती ऐसी साइट है जहां कॉफिन
- 44:53बैरियर्स का एविडेंस मिला है। अगला साइट
- 44:56है मोहिनजदड़ो
- 44:58जिसका इंग्लिश ट्रांसलेशन माउंट ऑफ द डेड
- 45:01है और यह इंडस के किनारे पाकिस्तान के
- 45:04पंजाब प्रोविंस के लरकाना में है। यहां पर
- 45:08द ग्रेट बाथ, द ग्रेट ग्रेनरी, ब्रोंज़
- 45:12डांसिंग गर्ल, सील ऑफ पशुपति, स्टैचू ऑफ द
- 45:16बियर्डेड मैन, सबसे ज्यादा यूनिकॉर्न
- 45:19सील्स और वन कॉटन के पीसेस मिले हैं।
- 45:22मोहजदड़ो एक यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट
- 45:25भी है। अगला साइट है ढोलावीरा जो गुजरात
- 45:30के रन ऑफ कच्छ में है। रिसेंटली इंडियन
- 45:34गवर्नमेंट ने इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज
- 45:36साइट्स में इंक्लूड करने का प्रपोजल भी
- 45:39भेजा है। यह लार्ज रिजर्व्स और इबोरेट
- 45:42सिस्टम ऑफ वाटर हार्वेस्टिंग के लिए फेमस
- 45:45है। चलिए अब समझते हैं हड़प्पन पॉलिटिकल
- 45:48सिस्टम से रिलेटेड थ्योरीज के बारे में।
- 45:50पॉलिटिकल सिस्टम। दोस्तों, यह काफी
- 45:54इंटरेस्टिंग सवाल है कि कैसे इंडस वैली
- 45:56सिविलाइजेशन इतने पुअर कम्युनिकेशन
- 45:59सिस्टम्स के दौर में भी एक यूनिफॉर्म
- 46:01सिविलाइजेशन की तरह एकिस्ट करता रहा और
- 46:04इतने वास्ट एरिया में फैल गया। थ्योरी ऑफ़
- 46:07सेंट्रलाइज्ड पॉलिटी के हिसाब से कुछ
- 46:10इतिहासकारों का मत है कि इंडस वैली का
- 46:13आर्किटेक्चरल मैग्निफिसेंस और यूनिफॉर्म
- 46:15ब्यूटीफुल स्कल्प्चर्स यहां की रूलिंग
- 46:18क्लास की पावर को दर्शाते हैं। यह दिखाता
- 46:20है कि उनके पास मैसिव स्ट्रक्चर्स और
- 46:23ब्रिलियंट टाउन प्लानिंग के लिए लेबर और
- 46:25टैक्सेस मोबिलाइज करने की कैपेबिलिटी थी।
- 46:28यहां का पॉलिटिकल सिस्टम शायद एक
- 46:30सेंट्रलाइज्ड सिस्टम था जिसकी वजह से ही
- 46:33आईबीसी कल्चर एक यूनिफॉर्म कल्चर था। इसके
- 46:37अलावा इन टाउनंस में मिले सीटडेल्स ही
- 46:40शायद सीट ऑफ पावर थे और मोहनजोदड़ो की
- 46:43ग्रेट ग्रेनरी स्टेट का ट्रेजरी जहां
- 46:46टैक्स के रूप में कलेक्टेड ग्रेंस रखे
- 46:48जाते थे। पॉलिटिकल सिस्टम मैच्योर हड़प्पन
- 46:51फेज में अपने चरम पर था और सबसे ज्यादा
- 46:54वेल डेवलप्ड भी। कई सारे शहर काफी अच्छे
- 46:58से फर्टिफाइड थे और पूरा एरिया वेल
- 47:00पॉपुलेटेड। लेकिन यहां ऑर्गेनाइज्ड
- 47:03मिलिट्री के प्रूफ्स नहीं मिलते हैं। पर
- 47:05शायद एक स्टैंडिंग आर्मी एकिस्ट करती थी।
- 47:08क्योंकि सोल्जर्स के डिप्शंस कई स्टोंस
- 47:11में हैं। यहां किसी भी तरह के टेंपल का
- 47:14आर्कियोलॉजिकल एविडेंस ना मिलना यह
- 47:16इंडिकेट करता है कि शायद यहां प्रीस्ट्स
- 47:19का रूल नहीं था और पॉलिटी सेकुलर थी। यहां
- 47:22के रूलर्स के लिए ट्रेड एंड कॉमर्स ज्यादा
- 47:25इंपॉर्टेंट था देन कॉन्क्वेस्ट्स और शायद
- 47:27यह रूलर्स लार्जली मर्चेंट्स थे। लेकिन
- 47:30पॉलिटी के बारे में यह इनफरेंस कंक्लूसिव
- 47:33नहीं है। क्योंकि दूसरी थ्यरी के हिसाब से
- 47:35शायद यहां सिंगल सेंट्रलाइज्ड स्टेट नहीं
- 47:38था बल्कि हड़प्पन सिटीज में अलग-अलग
- 47:41रूलर्स थे जो हर अर्बन सेंटर को
- 47:44रिप्रेजेंट करते थे। शायद वैसे ही जैसे
- 47:46मिडीवल इटालियन सिटी स्टेट्स जैसे
- 47:49फ्लोरेंस, वेनिस, जेनेवा, मिलान एटसेट्रा
- 47:52थे। खैर किसी भी पॉलिटिकल सिस्टम के लिए
- 47:55यह जरूरी है कि वहां की इकॉनमी भी
- 47:58स्ट्रांग फाउंडेशंस पर बिल्ड हो। इसलिए अब
- 48:01हम चलते हैं यहां की इकॉनमी की तरफ।
- 48:04इकोनमी एग्रीकल्चर। दोस्तों, इंडस वैली
- 48:08में एग्रीकल्चर मेन इकोनॉमिक एक्टिविटी
- 48:11थी। जिसका मेजर कारण इंडस वैली की
- 48:14फर्टिलिटी था। यह फर्टिलिटी इंडस के हर
- 48:18साल ओवरफ्लो की वजह से थी। जिसका एविडेंस
- 48:21बर्न ब्रिक्स के वॉल्स में है जो फ्लड
- 48:24कंट्रोल के लिए यूज होते थे। इंडस वैली के
- 48:27मेन क्रॉप्स में वीट, बाली, राई, सेसमम,
- 48:32मस्टर्ड और पीस हैं। लेकिन लोथल और रंगपुर
- 48:36में राइस के एविडेंसेस भी हैं। आईबीसी के
- 48:39बारे में एक इंटरेस्टिंग बात यह है कि
- 48:41शायद यह कॉटन प्रोड्यूस करने वाले सबसे
- 48:44पहले लोग थे। बुने हुए कॉटन का एविडेंस
- 48:47हमें मोहिंजदड़ो से मिला है। और लगभग हर
- 48:50घर में स्पिंडल वर्ल्ड्स यह बताते हैं कि
- 48:53वीविंग एक कॉमन प्रैक्टिस थी। यहां किसी
- 48:56भी तरह के मेटल के हल या प्लाओ का एविडेंस
- 48:59नहीं मिलता। लेकिन राखीगढ़ी और कालीबंगा
- 49:02के प्लाउड फील्ड्स इंडिकेट करते हैं कि
- 49:05शायद वुडन प्लाउ से यहां प्लाउंग होती थी।
- 49:08और स्टोन के कटिंग टूल से हार्वेस्टिंग।
- 49:10इरीगेशन के लिए शरतुगाई के अलावा कहीं भी
- 49:14मेजर कैनाल्स का एविडेंस नहीं है। लेकिन
- 49:16छोटे वाटर टैंक्स जरूर थे। कालीबंगा के
- 49:20फील्ड्स यह भी बताते हैं कि वहां एक साथ
- 49:23दो क्रॉप्स ग्रो की जाती थी। इसके अलावा
- 49:26एनिमल डोमेस्टिकेशन भी कॉमन था जिसमें
- 49:29ऑक्सक्स, बफेलो, गोट्स, शीप, पिग्स और
- 49:32हमंप्ड बुल मेन एनिमल्स हैं। यहां के लोग
- 49:36डॉग्स, कैट्स, एिफेंट्स, राइनोस से भी
- 49:39अवेयर थे।
- 49:40डोंकी और कैमल्स का यूज प्लाउंग और ट्रेड
- 49:43में होता था। सबसे चौंका देने वाली बात यह
- 49:46है कि हड़प्पंस हॉर्स से अवेयर नहीं थे
- 49:50क्योंकि उस पर कोई कंक्लूसिव एविडेंस नहीं
- 49:52मिला है। मोहिंजदड़ो में एक टेराकोटा का
- 49:55हॉर्स लाइक क्रिएचर और सुरकोटा में हॉर्स
- 49:58लाइक एनिमल के स्केलेटन्स हैं। लेकिन यह
- 50:01दावा नहीं कर सकते कि वो हॉेज ही हैं। खैर
- 50:04विवाद से अलग यह तो साफ है कि फ्यूचर
- 50:07सिविलाइजेशन से अलग हड़प्पन सिविलाइजेशन
- 50:10हॉर्स सेंट्रिक बिल्कुल नहीं था।
- 50:13एग्रीकल्चर के अलावा ट्रेड एंड कॉमर्स भी
- 50:15हड़प्पन इकॉनमी का क्रूशियल कंपोनेंट था।
- 50:18तो आइए अब हम हड़प्पन ट्रेड एंड कॉमर्स के
- 50:22बारे में जानते हैं। इकोनमी ट्रेड एंड
- 50:25कॉमर्स। ग्रेनरीज में मिले सील्स,
- 50:28यूनिफॉर्म स्क्रिप्ट और वेट्स एंड मेजर्स
- 50:31यहां ट्रेड काेंस दिखाते हैं। इस ट्रेड
- 50:34में लोथल इंपॉर्टेंट पोर्ट था जो गल्फ ऑफ
- 50:38खंबार में है। ट्रेड लार्जली बार सिस्टम
- 50:42पर बेस्ड था। यानी कि यहां करेंसी यूज़
- 50:44में नहीं थी। आईबीसी के कमर्शियल लिंग्स
- 50:47टाइगरस और यूफ्रेटीज रिवर्स तक मिलते हैं।
- 50:51मेसोपोटेमिया के रिकॉर्ड्स मेलवा नाम के
- 50:53सिविलाइजेशन का जिक्र करते हैं। जिसमें
- 50:56दिलमुन यानी बहरेन, कुवैत, कतर, ईस्टर्न
- 51:00सऊदी और मगन यानी ओमान इंपॉर्टेंट
- 51:04ट्रेडिंग साइट्स थे। मेलुआ शायद इंडस वैली
- 51:07के लिए ही यूज़ होता था। हड़प्पंस की
- 51:10इंपॉर्टेंट ट्रेडिंग गुड्स में टेराकोटा
- 51:13पॉट्स, गोल्ड, सिल्वर, मेटल्स, बीड्स, सी
- 51:16शेल्स, पर्ल्स, कलर्ड जेम स्टोंस जैसे
- 51:19लैपिस लेजोलाई और टरकॉइस इंक्लूडेड हैं।
- 51:23शरद गाय, लैपिस लेजोलाई के लिए लोथल,
- 51:27कारनेलियन ट्रेड, खेत्री माइंस, कॉपर
- 51:30इंपोर्ट, अफगानिस्तान, टिन और सिल्वर
- 51:34इंपोर्ट और साउथ इंडिया गोल्ड ट्रेड के
- 51:37लिए फेमस थे। चलिए अब समझते हैं कि
- 51:39हड़प्पा में सोसाइटी और रिलीजन के बारे
- 51:42में आर्कियोलॉजिकल एविडेंसेस हमें क्या
- 51:44जानकारी देते हैं। सोसाइटी तो जानते हैं
- 51:48सोसाइटी के बारे में।
- 51:50यहां के समाज में शायद एक वेल
- 51:52एस्टैब्लिश्ड सोशल हायरार्की थी जो सीटडेल
- 51:55और लोअर टाउनंस की एकिस्टेंस में दिखता
- 51:58है। सोशल डिफरेंशिएशन यहां के रेजिडेंशियल
- 52:02स्ट्रक्चर्स के डिफरेंसेस में भी है। कुछ
- 52:04स्ट्रक्चर्स छोटे और कुछ बड़े हैं। गुड
- 52:07क्वालिटी सील्स और स्कल्प्चर और पुअर
- 52:10क्वालिटी टेराकोटा फिगर्स भी यहां के सोशल
- 52:12डिफरेंशिएशन का इंडिकेशन है। वैल्यूएबल
- 52:15मटेरियल्स के रेयर ऑब्जेक्ट्स भी मोस्टली
- 52:17बड़े सेटलमेंट्स में मिले। यानी यहां एक
- 52:20रीजनल डिवाइड भी था। फॉर इंस्टेंस फायन्स
- 52:23के मिनचर पॉट्स सिर्फ हड़प्पा और
- 52:26मोहंजोदड़ो में हैं। लेकिन कालीबंगा जैसी
- 52:29साइट्स में नहीं। हड़प्पंस के फैशन सेंस
- 52:32को भी काफी प्रेज किया जाता है जो यहां के
- 52:34वाइड स्प्रेड बीड्स और ऑर्नामेंट्स में
- 52:36दिखता है। इन बीड्स में नेकलेसेस,
- 52:39फिलेट्स, आर्मलेट्स, फिंगरिंग्स, इयरिंग
- 52:42एटसेट्रा इंक्लूडेड है जो प्रेशियस
- 52:45मेटल्स, जेमस्टोंस, बोनस और बेक्ड क्ले से
- 52:48बनते थे। बीट इंडस्ट्रीज, चंदूदाड़ू और
- 52:52लोथल में फ्लोरिश कर रही थी। यह फैशन सेंस
- 52:55यहां के अलग-अलग तरह के क्लोथ्स, हेयर
- 52:57स्टाइल्स और बियर्ड में भी दिखता है।
- 52:59लिपस्टिक, कॉस्मेटिक्स और फेस पेंट के
- 53:02एविडेंसेस भी हैं जो मॉडर्न डे में भी
- 53:04फैशन आइटम्स हैं। रिलीजन की बात करें तो
- 53:07यहां ग्रेट बाथ के अलावा कोई और रिलीजियस
- 53:10स्ट्रक्चर नहीं मिला। लेकिन यहां के लोगों
- 53:12के रिलीजियस प्रैक्टिससेस के बारे में
- 53:15बाकी के एविडेंसेस से इनफरेंसेस निकाले जा
- 53:18सकते हैं। यहां कई सारे वुमेन टेराकोटा
- 53:20फिगर और एम्ब्रियो और वूमेन का
- 53:23रिप्रेजेंटेशन शायद गॉडेस ऑफ अर्थ को
- 53:25दर्शाते हैं। हड़प्पंस शायद अर्थ को
- 53:28फर्टिलिटी गॉडेस की तरह देखते थे और वरशिप
- 53:30करते थे। इसके अलावा पशुपति महादेव भी
- 53:34शायद एक डेटी थे जो एक सील में थ्री हर्ड
- 53:37हेड के साथ योगिक पोश्चर में दिखते हैं।
- 53:40इसके अलावा स्टोन के बने फैलेस वरशिप के
- 53:44एविडेंसेस भी हैं। हड़प्पंस शायद ट्री
- 53:47वरशिप भी करते थे क्योंकि हमें एक डेटी का
- 53:50डिप्शन पीपल के ब्रांचेस में मिलता है।
- 53:53एनिमल वरशिप का सबसे इंपॉर्टेंट एविडेंस
- 53:56वन हॉर्न यूनिकॉर्न सील है। कई और एनिमल्स
- 53:59का सील्स में रिप्रेजेंटेशन भी एनिमल
- 54:01वरशिप को इंडिकेट करता है। यहां एमुलेट्स
- 54:04का मिलना बताता है कि शायद यह ईवल फोर्सेस
- 54:08में भी विश्वास करते थे। इन सबके बाद सवाल
- 54:11यह उठता है क्या हड़प्पन कल्चर में
- 54:14लैंग्वेज का एकिस्टेंस था? चलिए आइए देखते
- 54:17हैं लैंग्वेज एंड स्क्रिप्ट। दोस्तों
- 54:21हड़प्पन सिविलाइजेशन में लैंग्वेज की बात
- 54:24करें तो यह एक प्रोटोहिस्टोरिक सोसाइटी
- 54:26थी। यानी यहां रिटेन एविडेंसेस तो मिले
- 54:29लेकिन स्क्रिप्ट डिकोड नहीं हुई है।
- 54:31हड़प्पंस ने आर्ट ऑफ राइटिंग को इन्वेंट
- 54:34तो किया लेकिन यह शायद अंडर डेवलप्ड थी।
- 54:38हड़प्पन स्क्रिप्ट लार्जली पिक्टोग्राफिक
- 54:40है। यानी उसमें अल्फाबेट्स की जगह
- 54:43डायग्रामैटिक सिंबल्स हैं। इनकी राइटिंग
- 54:46स्टाइल को बूस्ट्रोफिडोन बोलते हैं जो
- 54:49राइट टू लेफ्ट और फिर लेफ्ट टू राइट लिखी
- 54:52जाती थी। एंशिएंट सिविलाइजेशंस में बैरियल
- 54:55प्रैक्टिससेस को भी काफीेंस दिया जाता है।
- 54:57इसलिए अब हम हड़प्पन बैरियल प्रैक्टिससेस
- 55:00के बारे में जानेंगे। द बैरियल
- 55:02प्रैक्टिससेस।
- 55:03मोहिंजोदड़ो में तीन तरह के बैरियल्स हैं।
- 55:06कंप्लीट बैरियल, फ्रैक्शनल बैरियल्स और
- 55:09पोस्ट क्रिमेशन बैरियल। फ्रैक्शनल
- 55:12बैरियल्स में डेड बॉडी को पहले वाइल्ड
- 55:14बीस्ट्स और बर्ड्स के लिए छोड़ दिया जाता
- 55:16था। और बाद में बचे हुए बोनस को बेरी किया
- 55:19जाता था। सबसे कॉमन बैरियल प्रैक्टिस थी
- 55:22एक्सटेंडेड इनह्यूमेशन की जिसमें हेड
- 55:25जनरली नॉर्थ की तरफ होता था। हड़प्पा में
- 55:28वुडन कॉफिन और रेडिश क्लॉथ में लिपटी
- 55:31बॉडीज मिली हैं और सूट कोटड़ा से पॉट
- 55:33बैरियल के एविडेंसेस। लोथल में डबल बैरियल
- 55:37का एविडेंस मिला है। जहां मेल और फीमेल
- 55:39बॉडीज को साथ में दफन किया गया था। इस
- 55:42पर्टिकुलर केस में फीमेल स्केलेटन में हेड
- 55:45इंजरी है। जिसके चलते क्लेम किया गया कि
- 55:48शायद यहां विडो सैक्रिफाइस जैसी
- 55:50प्रैक्टिससेस थी। लेकिन बाद में राखीगढ़ी
- 55:53में 2019 में मिले डबल बैरियल में ऐसा कोई
- 55:56इंजरी नहीं मिला। ऐसे डबल बैरियल का वाइड
- 55:59स्प्रेड एक्सिस्टेंस ना होना यह इंडिकेट
- 56:02करता है कि विडो सैक्रिफाइस की थ्योरी
- 56:04शायद वीक है। इसके अलावा बैरियल्स में
- 56:08पॉटरी और बाकी के आर्टिफेक्ट्स जैसे
- 56:10बैंगल्स और बीड्स आफ्टर लाइफ में बिलीफ को
- 56:13इंडिकेट करते हैं। बैरियल्स के आर्टिफेक्ट
- 56:16में क्वालिटेटिव डिफरेंसेस यहां सोशल
- 56:19हायरार्की की थ्योरीज को सपोर्ट करते हैं।
- 56:22तो यह थी हड़प्पा की सोसाइटी, कल्चर,
- 56:25पॉलिटी और इकोनॉमिक्स की कहानी। लेकिन
- 56:27दोस्तों, इतनी मैग्निफिसेंट सिविलाइजेशन
- 56:30के बारे में इतिहासकार कहते हैं कि यह
- 56:33मिस्टीरियस तरीके से खत्म हो गया। तो आइए
- 56:36समझते हैं हड़प्पन डिक्लाइन को। थ्योरीज
- 56:39ऑफ डिक्लाइन। दोस्तों हड़प्पन डिक्लाइन पर
- 56:43काफी विवाद है और 100% सर्टेनिटी के साथ
- 56:47कोई भी थ्योरी प्रूव्ड नहीं है। 1900 बीसी
- 56:51के आसपास कई इंडसिटीज खाली हो गई और
- 56:54हिस्टोरियंस मानते हैं कि यह प्रोसेस 1700
- 56:57बीसी के आसपास स्टार्ट हुआ। एक थ्यरी के
- 57:01हिसाब से हड़प्पा का डिस्ट्रक्शन इनवेडर्स
- 57:03ने किया। इसे आर्यन इन्वजन या माइग्रेशन
- 57:07थ्यरी कहा जाता है। कुछ एविडेंसेस बताते
- 57:10हैं कि लोगों ने अपने वैलुएबल आइटम्स घरों
- 57:12में छुपाने चालू कर दिए थे। यह शायद एक
- 57:15इन्वेशन के डर से था। 1920 में मोहनजोदड़ो
- 57:19में 39 मेल, फीमेल और चिल्ड्रन के
- 57:22स्केलेटन्स मिले और यह प्रेडिक्ट किया गया
- 57:24कि शायद यह आउटसाइड इन्वेशन में मारे गए
- 57:27थे। लेकिन बाद में पता चला कि केवल दो
- 57:30स्केलेटन्स में स्वर्ड जैसे अटैक के
- 57:32मार्क्स हैं और वह भी पुराने घाव थे। इसके
- 57:36अलावा यहां किसी भी बैटल का कोई डायरेक्ट
- 57:38एविडेंस नहीं मिलता। हो सकता है कि
- 57:41मोहनजोदड़ो के यह 39 लोग किसी डिजीज से
- 57:44मारे गए हो। आर्यन थ्यरी के ऊपर डिबेट्स
- 57:47आज भी जारी हैं। स्पेशली बायोलॉजी और
- 57:50जेनेटिक स्टडीज में। 2019 में जर्नल्स सेल
- 57:54और साइंस में पब्लिश्ड दो स्टडीज ने आर्यन
- 57:57इन्वेशन थ्यरीज पर डिबेट फिर से शुरू
- 57:59किया। इन जर्नल्स में पब्लिश्ड स्टडीज का
- 58:02इंटरप्रिटेशन मीडिया में अलग-अलग तरीके से
- 58:05हुआ। कुछ ने कहा कि इन स्टडीज ने आर्यन
- 58:07माइग्रेशन को डिस्प्रूव कर दिया। लेकिन
- 58:10कुछ रिपोर्ट्स ने कहा कि इन स्टडीज का
- 58:12मिसरप्रेजेंटेशन हुआ है। स्क्रोल में
- 58:15पब्लिश्ड एक रिपोर्ट के हिसाब से इन
- 58:17स्टडीज में इनवॉल्वड मोस्ट स्कॉलर्स ने
- 58:20आउटराइटली आर्यन थ्योरी को रिजेक्ट नहीं
- 58:23किया है एक्सेप्ट फ्यू। अगली थ्यरी
- 58:25एनवायरमेंटल फैक्टर्स को हड़प्पन डिक्लाइन
- 58:28का जिम्मेदार बताती है। कहते हैं कि 1700
- 58:31बीसीई में यमुना और सतलज दोनों पुराने
- 58:35कोर्सेज को अबेंडन कर नए कोर्स में फ्लो
- 58:38होने लगी और हाकरा घग्गर भी इसी दौर में
- 58:41ड्राई अप हो गई। इसके चलते यहां वाटर
- 58:44सप्लाई कम हो गया। इसके अलावा इस दौर में
- 58:47रेनफॉल भी कम हुई। सोइल की फर्टिलिटी में
- 58:50रिडक्शन ने सीरियल प्रोडक्शन को कम कर
- 58:53दिया और अर्बन लोग स्टार्वेशन से मर गए।
- 58:56कुछ स्कॉलर्स सडन फ्लडिंग को भी जिम्मेदार
- 58:59मानते हैं। रोचेस्टर इंस्टट्यूट ऑफ
- 59:02टेक्नोलॉजी के मैथमेटिशियन और साइंटिस्ट
- 59:05निशांत मलिक ने केओस एंड इंटरडिसिप्लिनरी
- 59:08जर्नल ऑफ नॉन लीनियर साइंस में क्लेम किया
- 59:11कि क्लाइमेट चेंज हड़प्पा के डिक्लाइन का
- 59:14मेन कारण था। यह प्रेडिक्शन एक मैथमेटिकल
- 59:17मॉडलिंग के बेसिस पर था। इसके अलावा
- 59:20स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के
- 59:22जियोफिजिसिस्ट्स मनिका प्रसाद और आमोस नूर
- 59:25के हिसाब से अर्थक्वेक आईबीसी के डिक्लाइन
- 59:28का मेजर रीजन था। वैसे तो यह रीजन
- 59:31टेक्टोनिकली इनएक्टिव माना जाता है। लेकिन
- 59:3420001 में हुए अर्थक्वेक एक्टिविटीज के
- 59:36बाद इन रिसर्चरर्स ने हिस्टोरिक और करंट
- 59:39साइज्मिसिटी के डाटा को यूज करके कहा कि
- 59:42यहां अर्थक्वेक का इतिहास काफी पुराना है।
- 59:45इनका कहना है कि ढोलावीरा में लगभग 2200
- 59:49बीसीई और कालीबंगा में 2900 और 2700 बीसीई
- 59:55में मैसिव अर्थक्वेक्स के आर्कियोलॉजिकल
- 59:58एविडेंसेस भी हैं। ट्रेड कोलैप्स थ्योरी
- 1:00:01की माने तो मेसोपोटेमिया में पॉलिटिकल
- 1:00:04क्राइसिस के चलते ट्रेड नेटवर्क कोलैप्स
- 1:00:06हो गए जो आईबीसी के अर्बन सेंटर्स के
- 1:00:09डिक्लाइन का कारण बना। कारण कुछ भी हो
- 1:00:13लेकिन यह फैक्ट है कि 1900 बीसीई से
- 1:00:16हड़प्पन सिटीज का ग्रैंडर कम होने लगा और
- 1:00:19लोग इंडस वैली से शिफ्ट होकर बाकी के
- 1:00:22एरियाज में फैल गए जहां पोस्ट हड़प्पन
- 1:00:25कल्चर का जन्म हुआ। यह हड़प्पा से काफी
- 1:00:28बैकवर्ड था। इसमें इंपॉर्टेंट कल्चरर्स
- 1:00:31मालवा कल्चर, आहार कल्चर और जोरवे कल्चर
- 1:00:35हैं जो प्राइमरीली चालकोलिथिक यानी कॉपर
- 1:00:39डोमिनेटेड सोसाइटीज थी और यह हड़प्पा से
- 1:00:42काफी अलग थी। आईबीसी के बाद ऐसा
- 1:00:44प्रोमिनेंट सिविलाइजेशनल ग्रोथ हमें 1500
- 1:00:47सालों बाद महाजनपद और मगध में दिखा। लेकिन
- 1:00:52तब तक लार्जली इंडियन सोसाइटी विलेज
- 1:00:54डोमिनेटेड ही रही। अर्ली वैदिक एज। आज हम
- 1:00:58बात करेंगे एंशिएंट हिस्ट्री के एक
- 1:01:00इंपॉर्टेंट पीरियड की जिसकी शुरुआत आर्यंस
- 1:01:03के इंडियन माइग्रेशन से हुई।
- 1:01:06इंडस वैली सिविलाइजेशन अराउंड 1500 बीसी
- 1:01:09में एंड हुआ। इसके बाद वैदिक पीरियड
- 1:01:12नेक्स्ट मेजर सेटलमेंट के रूप में उभर कर
- 1:01:15आया। वैदिक सिविलाइजेशन 1500 बीसी से करीब
- 1:01:19500 बीसी तक चला। जिसको दो पार्ट्स में
- 1:01:22डिवाइड किया जाता है। अर्ली वैदिक एज जो
- 1:01:261500 से 1000 बीसी तक चला। इस पीरियड में
- 1:01:30ऋग्वेद को कंपाइल किया गया। इसलिए इसको ऋग
- 1:01:33वैदिक एज भी कहा जाता है।
- 1:01:36लेटर वैदिक एज जो 1000 से 500 बीसी में
- 1:01:40एंड हुआ। इस एज में ऋग्वेद के अलावा और
- 1:01:43टेक्स्ट्स का कंपोजिशन हुआ। जैसे अदर थ्री
- 1:01:46वेदास, ब्राह्मणास, अरण्यकास, उपनिषद
- 1:01:49एटसेटरा। इस लेक्चर में हम अर्ली वैदिक एज
- 1:01:53के बारे में जानेंगे।
- 1:01:55अराइवल ऑफ इंडो आर्यंस।
- 1:01:58दोस्तों, ऋग वैदिक एज की शुरुआत इंडो
- 1:02:01आर्यंस और इरेनियंस के माइग्रेशन से
- 1:02:03स्टार्ट होती है। आर्यन कल्चर के मेन
- 1:02:06फीचर्स की इंफॉर्मेशन हमको वैदिक, इरेनियन
- 1:02:09और ग्रीक टेक्स्ट्स के माध्यम से मिलती
- 1:02:11है। इसमें मेन टेक्स्ट्स हैं ऋग्वेद,
- 1:02:14जेंडवेस्टर, होमर्स, इलियड और ओडिसी।
- 1:02:18आर्यंस एक सेमी नोमेडिक ट्राइब थी जिनकी
- 1:02:21सोसाइटी पास्टोरल इकॉनमी पर बेस्ड थी।
- 1:02:23आर्यंस कहां से माइग्रेट हुए यह डिबेटेबल
- 1:02:26है। डिफरेंट हिस्टोरियंस और एक्सपर्ट्स ने
- 1:02:29अलग-अलग थ्यरीज दी हैं। कुछ मानते हैं कि
- 1:02:31इनका ओरिजिन सेंट्रल एशिया में था और कुछ
- 1:02:34का मानना है कि यह रशिया के स्टेप्स से
- 1:02:37इंडिया में आए। बाल गंगाधर तिलक की बुक
- 1:02:41विआर्कटिक होम इन द वेदास में उन्होंने
- 1:02:43आर्यंस का ओरिजिन आर्कटिक रीजन को बताया।
- 1:02:46और यह भी माना जाता है कि हिंदूकुश
- 1:02:48माउंटेंस के खबर पास से आर्यंस ने इंडिया
- 1:02:51में एंट्री की। खैर मोस्ट एक्सेप्टेड
- 1:02:54थ्योरी यह है कि आर्यंस इमीग्रेंट्स की
- 1:02:56तरह इंडिया में आए।
- 1:02:59ईस्टर्न अफगानिस्तान, नॉर्थवेस्ट फ्रंटियर
- 1:03:01प्रोविंस, पंजाब और वेस्टर्न यूपी के
- 1:03:03बॉर्डर्स में यह रहते थे।
- 1:03:06अफगानिस्तान के रिवर कुभा और सिंधु यानी
- 1:03:09इंडस रिवर और उसकी पांच डिस्ट्रीब्यूटरीज
- 1:03:12यानी झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलज का
- 1:03:16मेंशन ऋग्वेद में देखने को मिलता है। एक
- 1:03:19और रिवर सरस्वती का मेंशन भी किया गया है
- 1:03:22जो कि हरियाणा राजस्थान के एरिया में थी।
- 1:03:25यह पूरा रीजन जहां इनिशियली आर्यंस ने
- 1:03:28अपना सेटलमेंट किया उसको लैंड ऑफ सेवन
- 1:03:30रिवर्स कहा जाता है। अब नजर डालते हैं
- 1:03:33वैदिक एज के सबसे इंपॉर्टेंट टेक्स्ट पर।
- 1:03:37ऋग्वेद वेदास में ऋग्वेद ही सबसे पहला वेद
- 1:03:41है। इसको यूनेस्को ने वर्ल्ड ह्यूमन
- 1:03:43हेरिटेज में ऐड किया है। इसमें 1228 हिम्स
- 1:03:48हैं जिनको 10 मंडलास में डिवाइड किया गया
- 1:03:51है।
- 1:03:52ऋग्वेद एक प्रेयर्स की कलेक्शन है जो
- 1:03:55अग्नि, इंद्र, मित्र, वरुण और अदर गॉड्स
- 1:03:59को ऑफर की गई है। कुछ पोएट्स और सेजेस की
- 1:04:02फैमिलीज़ ने इन्हें लिखा है। 10 मंडलाज़ में
- 1:04:05से टू से लेकर सेवन तक इसके अर्लियस्ट
- 1:04:08पार्ट्स हैं। मंडलाज़ वन और नाइन लेटेस्ट
- 1:04:11एडिशंस हैं। जैसा कि हमने पहले बताया था
- 1:04:14कि आर्यन कल्चर के रेफरेंसेस हमको दूसरे
- 1:04:16रिलीजियस टेक्स्ट्स में भी देखने को मिलते
- 1:04:18हैं। तो आइए आगे बढ़ने से पहले इस
- 1:04:21एस्पेक्ट पर भी नजर डाल लेते हैं।
- 1:04:24अदर टेक्स्ट्स ज़ेंबेस्टा को रफली 1400
- 1:04:28बीसी और इलियड को 900 से 800 बीसी में
- 1:04:32एट्रिब्यूट किया जाता है। इन सभी
- 1:04:35टेक्स्ट्स का कल्चरल कंटेंट लेट नियोलिथिक
- 1:04:38और अर्ली ब्रोंज़ एजेस में रखा जा सकता है।
- 1:04:42इनके कंटेंट्स ईस्टर्न यूरोप और सेंट्रल
- 1:04:44एशिया को कवर करते हैं जो ज्योग्राफिकली
- 1:04:47इंडिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान,
- 1:04:50इराक, एनटोलिया और ग्रीस से लिंक्ड हैं।
- 1:04:54इस टेरिटरी के एक मेजर पोर्शन में
- 1:04:56कम्युनिटीज इंडो यूरोपियन लैंग्वेज का यूज
- 1:04:59करती आई हैं। इंडो आर्यन लैंग्वेज इंडो
- 1:05:02यूरोपियन लैंग्वेज ग्रुप का ही एक पार्ट
- 1:05:04है। यह जान लें कि ऋग्वेद को इंडो आर्यन
- 1:05:07लैंग्वेज में ही कंपोज किया गया था जिसको
- 1:05:10वैदिक संस्कृत कहा जा सकता है। जो संस्कृत
- 1:05:13आज हम जानते हैं वो वैदिक संस्कृत से ही
- 1:05:16डिराइव हुई।
- 1:05:18इंडो यूरोपियन लैंग्वेज के स्पीकर्स में
- 1:05:20सिमिलर जेनेटिक सिग्नल्स देखने को मिलते
- 1:05:22हैं। जैसे सेंट्रल एशियन स्टेप्स और इंडो
- 1:05:26आर्यन स्पीकर्स में सिमिलर जेनेटिक
- 1:05:28सिग्नल्स मिले।
- 1:05:30हॉर्स आर्यन कल्चर का एक इंपॉर्टेंट ट्रेड
- 1:05:33था। ऋग्वेद में इसको अश्व बोला गया है।
- 1:05:36जिसके सिमिलर वर्ड्स हमको संस्कृत,
- 1:05:38अवस्तान, ग्रीक, लैटिन और अदर इंडो
- 1:05:41यूरोपियन लैंग्वेज में देखने को मिलते
- 1:05:43हैं। अवेस्टा में मिथित्रा की प्रेयर्स
- 1:05:46में लगातार हॉर्स और चैरियट का मेंशन
- 1:05:49देखने को मिलता है। ऋग्वेद में गॉड मित्र
- 1:05:52यही माने जाते हैं। इलियट और ओरिसी में भी
- 1:05:55हॉेज के रेफरेंसेस देखने को मिलते हैं।
- 1:05:58हॉर्स ड्रोन चैरियट्स का वाइड यूज़ सभी
- 1:06:00टेक्स्ट्स में देखने को मिलता है।
- 1:06:03वाजपेय सैक्रिफाइस जिसका मेंशन लेटर वैदिक
- 1:06:06टेक्स्ट्स में मिलता है। एक ग्रीक
- 1:06:09प्रैक्टिस भी हुआ करती थी और होमर ने इसका
- 1:06:12डिटेल डिस्क्रिप्शन दिया है। आर्यन कल्चर
- 1:06:15में हमें बर्ज वुड का यूज़ देखने को मिलता
- 1:06:17है। संस्कृत में बर्ज को भुर्जा कहा गया
- 1:06:20है और इसी के सिमिलर वर्ड्स हमें सिक्स
- 1:06:22इंडो यूरोपियन लैंग्वेज में देखने को
- 1:06:24मिलते हैं। क्रिमेशन भी एक इंपॉर्टेंट
- 1:06:27आर्यन ट्रेट हुआ करता था। यह प्रैक्टिस
- 1:06:30वैदिक, अवस्तान और होममेरिक टेक्स्ट में
- 1:06:32भी देखने को मिलती है। लेकिन इसका कोई भी
- 1:06:35रेफरेंस मैच्योर हड़प्पन कल्चर में देखने
- 1:06:38को नहीं मिला है।
- 1:06:40अवेस्टा और ऋग्वेद दोनों में ही फायर
- 1:06:43वरशिप काफी इंपॉर्टेंट बताई गई है। कल्ट
- 1:06:46ऑफ सोमा जिसको अवेस्टान लैंग्वेज में होमा
- 1:06:49बोला गया है। सिर्फ इरेनियन और वैदिक
- 1:06:52लोगों तक ही कंफ रहे। इसी तरह के कई
- 1:06:54रेफरेंसेस हमको ऋग्वेद और दूसरे रिलीजियस
- 1:06:57टेक्स्ट में देखने को मिलते हैं। अब बढ़ते
- 1:07:00हैं ऋग वैदिक कल्चर के पॉलिटिकल, सोशल और
- 1:07:03इकोनॉमिकल फीचर्स की तरफ। पॉलिटिकल लाइफ
- 1:07:07ऋग वैदिक कल्चर में ट्राइब को जन बोला
- 1:07:10जाता था और ट्राइबल चीफ को राजन, गोपति या
- 1:07:15गोपा यानी प्रोटेक्टर ऑफ काऊ बोला जाता
- 1:07:18था। चीफ क्वीन को महषी कहते थे। राजन की
- 1:07:22मेन रिस्पांसिबिलिटी थी जनक और कैटल को
- 1:07:25एनिमीज़ से प्रोटेक्शन प्रोवाइड करना। इसके
- 1:07:28अलावा जनक के बिहाफ पर गॉड से प्रे करना
- 1:07:31भी उसकी ही रिस्पांसिबिलिटी थी।
- 1:07:33इतिहासकारों की मानें तो ऋग्वदिक पीरियड
- 1:07:36में राजन की पोजीशन हेरिडिटरी थी जो कि एक
- 1:07:39मोनार्कियल सेटअप में होता है। लेकिन
- 1:07:42इलेक्शन के कुछ इंस्टेंसेस भी मिले हैं जो
- 1:07:44कि ट्राइबल असेंबली यानी समिति के द्वारा
- 1:07:47किया जाता था।
- 1:07:49पिटिकल एडमिनिस्ट्रेशन कुछ इस प्रकार था।
- 1:07:52पुरोहित वर्ग मेनली रिचुअल्स कराते थे।
- 1:07:55इसके बदले में उनको दान यानी गिफ्ट्स और
- 1:07:58दक्षिणा दी जाती थी। आर्मी का एक चीफ होता
- 1:08:01था जिसको सेनानी बोलते थे। टेरिटरी को
- 1:08:04कंट्रोल करने के लिए एक ऑफिसर होता था
- 1:08:07जिसको बृजपति बोलते थे। विलेज के लीडर को
- 1:08:10ग्रामीणी कहते थे। दोस्तों, यह जानना
- 1:08:13जरूरी है कि टैक्स कलेक्शन और जस्टिस
- 1:08:16एडमिनिस्टर करने के लिए कोई भी ऑफिसर
- 1:08:18अपॉइंट किया गया हो, इसका कोई एविडेंस
- 1:08:20नहीं मिला है। ऋग्वेद में कई असेंबलीज का
- 1:08:24मेंशन किया गया है। सभा जो कि एलिट्स की
- 1:08:27एक छोटी सी बॉडी थी। समिति जो कि जनरल
- 1:08:31पब्लिक मेंबर्स से बनी एक बड़ी फोक
- 1:08:33असेंबली थी। इसका लीडर राजन हुआ करता था।
- 1:08:36विधाथा जो कि एक ट्राइबल असेंबली थी और गण
- 1:08:40जो कि ट्रूप्स हुआ करते थे। सभा और विधाता
- 1:08:44में वुमेन पार्टिसिपेशन भी देखने को मिलता
- 1:08:46था। राजन के पास कोई रेगुलर आर्मी नहीं
- 1:08:50हुआ करती थी। लेकिन वॉर के समय छोटे-छोटे
- 1:08:52ट्राइबल ग्रुप्स यानी गणों को ज्वॉइ करके
- 1:08:55एक मिलिशिया यानी आम जनता से बनी एक आर्मी
- 1:08:58इकट्ठी की जाती थी। वॉर में स्वर्ड्स,
- 1:09:01बोस, एरोस और हेलमेट्स का यूज किया जाता
- 1:09:04था।
- 1:09:05आर्यंस के सर्वाइवल के लिए उनके सामने
- 1:09:08मेनली दो तरह के कॉन्फ्लिक्ट्स थे। पहला
- 1:09:11जिसमें वह इंडीजीनस लोगों से कॉन्फ्लिक्ट
- 1:09:13में आए। ऋग्वेद में इस तरह की एक बैटल का
- 1:09:17मेंशन किया गया है जिसमें भरत किंग
- 1:09:19देवोदासा ने इंडीजीनस पीपल दासास के रूलर
- 1:09:23संबरा को डिफीट किया। दूसरा कॉन्फ्लिक्ट
- 1:09:26था जिसमें आर्यन कम्युनिटीज खुद ही आपस
- 1:09:29में वॉर्स में इंगेज्ड रहीं। यहां पर बैटल
- 1:09:32ऑफ 10 किंग्स का मेंशन आता है। यह बैटल
- 1:09:35परुशनी यानी रवि रिवर के तट पर हुआ।
- 1:09:40यह बैटल भरत, चीफ, सुदास और 10 दूसरी
- 1:09:44ट्राइब्स के बीच हुआ। इन 10 ट्राइब्स में
- 1:09:46से पांच आर्यन ट्राइब्स थी और पांच नॉन
- 1:09:49आर्यन। पांच आर्यन ट्राइब्स को पंचजना
- 1:09:53बोला जाता था। इसमें इंक्लूडेड थी यदु,
- 1:09:56दुर्वासा, पुरु, अनु और ध्रु युग।
- 1:10:00खैर बैटल ऑफ 10 किंग्स में भरत चीफ सुदास
- 1:10:04ने 10 ट्राइब्स को डिफीट करके अपनी
- 1:10:06सुप्रेसी इस्टैब्लिश की। भारतस ने आगे
- 1:10:08चलकर पुरु ट्राइब से हाथ मिलाकर कुरु
- 1:10:11ट्राइब को इस्टैब्लिश किया और पांचालास के
- 1:10:13साथ मिलकर अपर गजेटिक बेसिन में अपना
- 1:10:16वर्चस्व बनाया। यहां यह बता दें कि इसी
- 1:10:19ऋग्वेद में मेंशन की गई यही भारत ट्राइब
- 1:10:22से ही भारतवर्ष कंट्री का नाम प्रचलित
- 1:10:25हुआ। आइए अब जानते हैं सोशल लाइफ के बारे
- 1:10:28में।
- 1:10:30सोशल लाइफ। दोस्तों, ऋग्वदिक सोसाइटी के
- 1:10:34सोशल स्ट्रक्चर का बेसिस था किनशिप। कुल
- 1:10:38यानी फैमिली बेसिक यूनिट थी और कुलपा
- 1:10:41फैमिली के हेड को बोला जाता था। हर फैमिली
- 1:10:45एक बड़े ग्रुप का हिस्सा थी जिसे विस यानी
- 1:10:48क्लैन बोला जाता था। कुछ क्लैं्स मिलकर जन
- 1:10:52यानी ट्राइब बनाते थे। जन सोसाइटी का
- 1:10:54लार्जेस्ट सोशल यूनिट था। फैमिली एक
- 1:10:58पेट्रियकल फैमिली थी यानी फादर हेड ऑफ द
- 1:11:00फैमिली थे।
- 1:11:02मैरिज एज एन इंस्टीट्यूशन एस्टैब्लिश हो
- 1:11:05चुका था और चाइल्ड मैरिज का भी कोई
- 1:11:07एविडेंस देखने को नहीं मिलता। सती और
- 1:11:10पर्दा सिस्टम भी चलन में नहीं था। रीमैरिज
- 1:11:13के कुछ इंस्टेंसेस मिलते हैं। मैरिजेस
- 1:11:15जनरली मोनोगमस ही थी। यानी एक टाइम पर एक
- 1:11:19ही पर्सन से मैरिज होती थी। लेकिन पॉलीगमी
- 1:11:21के भी कुछ इंस्टेंसेस मिले हैं।
- 1:11:25सोसाइटी कास्ट लाइंस में डिवाइडेड नहीं थी
- 1:11:28और ऑक्यूपेशन बर्थ पर बेस्ड नहीं था।
- 1:11:31अलग-अलग ऑक्यूपेशंस के लोग भी सेम क्लैन
- 1:11:34से बिलोंग करते थे। लोगों के फिजिकल
- 1:11:36अपीयरेंस को लेकर भी ऋग्वेद में थोड़े
- 1:11:38इंस्टेंसेस देखने को मिलते हैं। इनिशियल
- 1:11:41स्टेज में वर्ण को पर्सन के कलर से
- 1:11:44एसोसिएट किया जाता था। कलर डिस्टिंशन के
- 1:11:47चलते ही एक तरह के सोशल ऑर्डर के फॉर्मेशन
- 1:11:50की संभावना हो सकती है।
- 1:11:53सोशल डिवीजंस का मेन फैक्टर इंडीजीनस
- 1:11:56ट्राइब्स के आर्यंस द्वारा किए गए
- 1:11:58कॉन्क्वेस्ट को कहा जा सकता है। ऋग्वेद के
- 1:12:01केवल 10थ मंडला के पुरुषोक्त में ही चार
- 1:12:04वर्णास का मेंशन देखने को मिलता है।
- 1:12:07इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्ण
- 1:12:10सिस्टम मेनली ऋग वैदिक एज के एंड में
- 1:12:13इंट्रोड्यूस हुआ। इस समय की वर्ण व्यवस्था
- 1:12:15में सोशल मोबिलिटी पॉसिबल थी और स्ट्रिक्ट
- 1:12:18सोशल हायरार्की एब्सेंट थी। इसका मतलब है
- 1:12:23कि सोसाइटी अभी भी ट्राइबल थी और
- 1:12:25इगैलिटेरियन यानी समान अधिकारवादी थी। आगे
- 1:12:29बढ़ते हैं और देखते हैं कि ऋग्वदिक
- 1:12:30सोसाइटी का इकोनॉमिक स्ट्रक्चर क्या था।
- 1:12:33ऋग वैदिक इकॉनमी। दोस्तों, ऋग्वेद में काऊ
- 1:12:38और बुल के इतने रेफरेंसेस देखने को मिलते
- 1:12:41हैं कि इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है
- 1:12:43कि ऋग्वदिक पीपल मेनली एक पेस्टोरल पीपल
- 1:12:47थे। वॉर्स का बेसिक पर्पस काऊ कैप्चर करना
- 1:12:50ही था। यानी काऊ ही बेसिक वेल्थ थी। कााउस
- 1:12:54के लिए किए जाने वाले वॉर्स को गविष्टि
- 1:12:57यानी सर्च फॉर कााउस बोला जाता था। कााउस
- 1:13:00काेंस इस बात से पता चलता है कि प्रीस्ट्स
- 1:13:03को डोनेशन यानी दान में कााउस ही दिए जाते
- 1:13:06थे। कभी भी लैंड कोेंस नहीं दिया गया।
- 1:13:10लैंड एक वेल एस्टैब्लिश्ड प्राइवेट
- 1:13:12प्रॉपर्टी नहीं थी। गोल्ड कॉइंस को निक्शा
- 1:13:16बोला जाता था जो करेंसी की एक यूनिट थी।
- 1:13:19कॉइंस का इस्तेमाल जनरली सिर्फ लार्ज
- 1:13:22ट्रांजैक्शंस के लिए ही किया जाता था।
- 1:13:24ट्रेड मोस्टली बार्टर सिस्टम में ही होता
- 1:13:27था और काऊ भी एक वैलएबल यूनिट थी जिसके
- 1:13:30माध्यम से ट्रेड पॉसिबल हो सकता था।
- 1:13:33किंगडम सिर्फ बलि यानी वंटरी ऑफरिंग्स पर
- 1:13:37फंक्शन करता था क्योंकि किसी तरह का
- 1:13:39रेगुलर रेवेन्यू सिस्टम नहीं था। ऋग्वेद
- 1:13:42में कई तरह के क्राफ्ट्स का मेंशन भी किया
- 1:13:44गया है। जैसे कारपेंटर, चैरियट मेकर,
- 1:13:47वीवर, पॉटर, लेदर वर्कर्स एटसेटरा।
- 1:13:51चैरियट रेसिंग और डाइस गैंबलिंग पॉपुलर
- 1:13:54पास्ट टाइम थे। कॉपर और ब्रोंज़ के लिए
- 1:13:57आयास वर्ड का यूज किया गया है। जिससे यह
- 1:13:59पता चलता है कि इस ऐज में इनका यूज किया
- 1:14:02जाता था। हालांकि आयरन टेक्नोलॉजी के यूज
- 1:14:05का कोई एविडेंस नहीं मिला है। ट्रांसपोर्ट
- 1:14:07के लिए बुल कार्ड्स, हॉेज और हॉर्स ड्रोन
- 1:14:10चैरियट्स का यूज किया जाता था। सी और
- 1:14:13बोट्स के भी कुछ रेफरेंसेस देखने को मिलते
- 1:14:15हैं।
- 1:14:17तो दोस्तों, यह तो बात हुई ऋग्वदिक एज की
- 1:14:20सोसाइटी की बेसिक एस्पेक्ट्स यानी
- 1:14:22पॉलिटिकल, सोशल और इकोनॉमिकल एस्पेक्ट्स
- 1:14:25की। इनके अलावा हर सोसाइटी का एक और
- 1:14:28इंपॉर्टेंट एस्पेक्ट होता है रिलिजन। जो
- 1:14:31बेसिकली हर सोसाइटी को पाथ प्रोवाइड कराता
- 1:14:34है। आइए ऋग वैदिक ऐज के रिलीजन पर एक नजर
- 1:14:37डालते हैं।
- 1:14:39ऋग वैदिक रिलिजन। ऋग वैदिक आर्यंस मेनली
- 1:14:42नेचुरल फोर्सेस जैसे अर्थ, फायर, विंड,
- 1:14:46रेन और थंडर को वशिप करते थे। इन नेचुरल
- 1:14:49फोर्सेस को डिफरेंट गॉड्स के रूप में देखा
- 1:14:51जाता था और इन्हीं की पूजा की जाती थी।
- 1:14:54यज्ञ के माध्यम से ही इनकी पूजा की जाती
- 1:14:57थी। आइडल वरशिप और टेंपल्स एकिस्टेंस में
- 1:15:00नहीं थे। प्रेयर्स और सैक्रिफाइसेस ही
- 1:15:04वरशिपिंग का डोमिनेंट मोड थे। यहां यह
- 1:15:06जानना जरूरी है कि आर्यंस गॉड्स को वरशिप
- 1:15:09स्पिरिचुअल अपलिफ्टमेंट के लिए नहीं किया
- 1:15:11करते थे बल्कि प्रजा पशु फूड के लिए किया
- 1:15:15करते थे। ऋग्वेद में वरशिप की जाने वाली
- 1:15:19कुछ डटीज इस प्रकार हैं। इंद्र जो आर्यंस
- 1:15:22के सबसे इंपॉर्टेंट गॉड थे। इनको पुरंधर
- 1:15:26यानी ब्रेकर ऑफ फोर्ट्स भी बोला जाता था।
- 1:15:28इंद्र को रेन गॉड बोला जाता था और इनको
- 1:15:31वॉर लॉर्ड भी माना जाता था जो आर्यन
- 1:15:34सोल्जर्स को लीड करते थे डीमंस के खिलाफ।
- 1:15:38ऋग्वेद में इनको 250 हिम्स डिवोट किए गए
- 1:15:42हैं।
- 1:15:43अग्नि जो कि सेकंड सबसे इंपॉर्टेंट गॉड
- 1:15:46मानी गई हैं। इनको गॉड ऑफ फायर बोला जाता
- 1:15:49था। अग्नि गॉड्स और पीपल के बीच एक तरह के
- 1:15:53इंटरमीडियरी का रोल प्ले करती थी। ऐसा
- 1:15:56माना जाता है कि यज्ञ के समय दी जाने वाली
- 1:15:59आहुति की स्मोक्स सीधे गॉड्स के पास
- 1:16:01पहुंचती हैं। 200 हिम्स इनको एट्रिब्यूट
- 1:16:05किए गए हैं।
- 1:16:07वरुण जो कि तीसरे सबसे इंपॉर्टेंट गॉड
- 1:16:09माने गए हैं। इनको वाटर का प्रतीक माना
- 1:16:12गया है। इनका मेन फंक्शन नेचुरल ऑर्डर को
- 1:16:15अपहोल्ड करना था।
- 1:16:18सोम जिनको प्लांट्स का गॉड बोला गया है।
- 1:16:22मारूट्स जो स्टम का प्रतीक हैं। सरस्वती
- 1:16:26एक इंपॉर्टेंट गॉडेस थी जिनको कई हिम्स
- 1:16:29में मेंशन किया गया है।
- 1:16:31यह सभी नेचुरल फोर्सेस थे जिन्हें डेटी
- 1:16:34माना गया और साथ ही ह्यूमन एक्टिविटीज भी
- 1:16:37इनको असाइन की गई। इनके अलावा कुछ वुमेन
- 1:16:40डिनिटीज भी थी। जैसे अदिति और उषा। लेकिन
- 1:16:44ऋग्वेद में इनका प्रोमिनेंस देखने को नहीं
- 1:16:46मिला।
- 1:16:48सावित्री एक सोलर डेटी थी जिनको फेमस
- 1:16:52गायत्री मंत्र एट्रिब्यूट किया गया है।
- 1:16:54ऋग्वेद में इनको 300 बार मेंशन किया गया
- 1:16:57है। सोसाइटी पेट्रिय्कल होने के कारण मेल
- 1:17:00डेटीज को ही ज्यादाेंस दिया जाता था। कुछ
- 1:17:03डेमीगॉड्स यानी यक्षास का मेंशन भी देखने
- 1:17:06को मिलता है। जैसे गंधर्वास, अप्सरास,
- 1:17:09आर्यमान एटसेटरा।
- 1:17:12तो दोस्तों इस कहानी में हमने देखा अर्ली
- 1:17:15वैदिक एज यानी ऋग वैदिक एज के बारे में।
- 1:17:18हमने समझा कि किस तरह आर्यंस ने इंडियन
- 1:17:21सबक्टिनेंट में माइग्रेट किया ना कि एक
- 1:17:23इनवेडर के रूप में बल्कि सेटलमेंट के
- 1:17:26पर्पस से और इंडियन एंशिएंट हिस्ट्री के
- 1:17:29एक सबसे इंपॉर्टेंट फेज की शुरुआत की। आज
- 1:17:32के मैच्योर इंडियन कल्चर का फाउंडेशन
- 1:17:34स्टोन इसी पीरियड में रखा गया।
- 1:17:37लेटर वैदिक एज वैदिक एज 1500 बीसी से 500
- 1:17:42बीसी तक चली जिसे दो पार्ट्स में डिवाइड
- 1:17:44किया गया है। अर्ली वैदिक एज और लेटर
- 1:17:47वैदिक एज। अर्ली वैदिक एज यानी ऋग वैदिक
- 1:17:50एज 1500 बीसी से लगभग 1000 बीसी तक चली।
- 1:17:54आज के इस लेक्चर में हम लेटर वैदिक एज पर
- 1:17:57फोकस करेंगे और जानेंगे इस एज में किस तरह
- 1:18:00आर्यन कल्चर का एक्सपेंशन हुआ और जानेंगे
- 1:18:03सोसाइटी के बेसिक ट्रेट्स जैसे सोशल,
- 1:18:06पॉलिटिकल और इकोनॉमिक फीचर्स के बारे में।
- 1:18:09और फाइनली यह देखेंगे कि किस तरह इस ऐज को
- 1:18:13एक ट्रांजिशन स्टेज के रूप में देखा जा
- 1:18:15सकता है। जिसमें इंडियन सोसाइटी प्रिमिटिव
- 1:18:18लाइफस्ट से सोशल ऑर्डर्स और प्रॉपर
- 1:18:21स्टेट्स में तब्दील हुई। आइए देखते हैं
- 1:18:23लेटर वैदिक एज में कैसे एक्सपेंशन हुआ।
- 1:18:27एक्सपेंशन इन लेटर वैदिक एज। लेटर वैदिक
- 1:18:30पीरियड की हिस्ट्री मेनली उन वैदिक
- 1:18:33टेक्स्ट्स पर बेस्ड है जो ऋग्वेद के बाद
- 1:18:35कंपोज हुए। ऋग वैदिक संहिता सबसे ओल्डेस्ट
- 1:18:39वैदिक टेक्स्ट है जिसके आधार पर हमें
- 1:18:41अर्ली वैदिक पीरियड के बारे में जानकारी
- 1:18:44मिलती है। वैदिक हिम्स और मंत्राज को
- 1:18:46संहिता बोला जाता है। इसको रिसाइट करने के
- 1:18:50लिए और ट्यून के साथ मिलाने के लिए कुछ
- 1:18:53मॉडिफिकेशंस हुए जिसको सामवेद नाम दिया
- 1:18:56गया।
- 1:18:58यजुर्वेद और अथर्ववेद का कंपोजिशन भी इसी
- 1:19:01पीरियड में हुआ। ब्राहणास भी इसी पीरियड
- 1:19:04में कंपाइल हुए जिनमें रिचुअलिस्टिक
- 1:19:06फार्मूलाज़ और रिचुअल्स का सोशल और
- 1:19:08रिलीजियस मीनिंग बताया गया। यह सारे
- 1:19:10टेक्स्ट अपर गेंजेटिक बेसिन में 1000 से
- 1:19:14500 बीसी के बीच कंपाइल हुए। एक्सटेंसिव
- 1:19:17डिगिंग और एक्सप्लोरेशन के बाद इस रीजन
- 1:19:19में करीब 700 पेंटेड ग्रे वेयर यानी पीजीW
- 1:19:23साइट्स मिली हैं। जिसमें अर्दन ब्स और
- 1:19:26डिशेस मिली। इस रीजन में आयरन वेपन्स का
- 1:19:28यूज भी किया जा रहा था।
- 1:19:31वैदिक टेक्स्ट से मालूम पड़ता है कि
- 1:19:33आर्यंस पंजाब से लेकर लगभग पूरे वेस्टर्न
- 1:19:36यूपी में गंगा यमुना दुआब में एक्सपेंड कर
- 1:19:39चुके थे। भारतस और पुरूस ने मिलकर एक नई
- 1:19:43ट्राइब कुरू को फॉर्म किया। कुरूस ने
- 1:19:46दिल्ली और दुआब के अपर रीजंस को कैप्चर
- 1:19:49किया। इस एरिया को कुरुक्षेत्र यानी लैंड
- 1:19:52ऑफ कुरूस कहा जाने लगा।
- 1:19:55सेंट्रल दुआब में रहने वाले पांचालास के
- 1:19:57साथ एकजुट होकर पूरे रीजन में रूल सेटअप
- 1:20:00किया। आज के हिसाब से यह रीजन बरेली,
- 1:20:03बदायूं और फर्रूखाबाद एरिया में आता है।
- 1:20:06हस्तिनापुर को कैपिटल अनाउंस किया गया जो
- 1:20:09कि मेरठ डिस्ट्रिक्ट में है। लेटर वैदिक
- 1:20:12टाइम्स में लोगों को बर्न ब्रिक्स की
- 1:20:14जानकारी नहीं थी। मोस्टली मड हाउसेस ही
- 1:20:18बनाए जाते थे। पीरियड के एंड होते-होते
- 1:20:21करीब 500 बीसी में इस पीरियड के लोग फर्दर
- 1:20:25ईस्ट यानी कोसाला जो कि ईस्टर्न यूपी में
- 1:20:28है और विदेहा जो कि नॉर्थ बिहार में है तक
- 1:20:31एक्सपेंड कर गए। वो जहां भी गए उन्हें
- 1:20:35कॉपर इंप्लीमेंट्स ब्लैक एंड रेड अर्दन
- 1:20:37पॉट्स और ओकर एंड रेड कलर पॉट्स इस्तेमाल
- 1:20:40करने वाले लोग मिले। इवन लेट हड़प्पन
- 1:20:43कल्चर के लोग भी मिले।
- 1:20:45हॉर्स ड्रोन चैरियट्स और आयरन वेपंस का
- 1:20:48यूज करने के कारण वैदिक पीपल अपने
- 1:20:51एक्सपेंशन के सेकंड फेज में सक्सीड हुए।
- 1:20:54लेटर वैदिक पीरियड को पेंटेड ग्रेवेयर
- 1:20:57पीजीडब्ल्यू आयरन फेज कल्चर भी कहा जाता
- 1:21:00है। यानी इस पीरियड में मेन कल्चर पेंटेड
- 1:21:03ग्रेवेयर का ही था। लेकिन आयन का यूज भी
- 1:21:06कुछ इंस्टेंसेस में देखने को मिलता है।
- 1:21:09आयन का पहला यूज इंडिया में करीब 1500
- 1:21:13बीसी में कर्नाटका और राजस्थान में कॉपर
- 1:21:16स्टोन एज के समय देखने को मिला। इसके बाद
- 1:21:19वैदिक पीरियड के एंड होते-होते आयन की
- 1:21:22नॉलेज ईस्टर्न यूपी और विदेहा में स्प्रेड
- 1:21:25हुई। वैदिक टेक्स्ट में इसको श्यामा और
- 1:21:29कृष्णा आयाज यानी ब्लैक मेटल बोला गया है।
- 1:21:33आगे बढ़ते हैं और देखते हैं लेटर वैदिक
- 1:21:35पीरियड के पॉलिटिकल, सोशल और इकोनॉमिक
- 1:21:38लाइफ के बारे में। सबसे पहले पॉलिटिकल
- 1:21:40लाइफ।
- 1:21:42पॉलिटिकल लाइफ।
- 1:21:45लेटर वैदिक पीरियड में लार्ज किंगडम्स की
- 1:21:47शुरुआत हुई। जन यानी ट्राइब्स का
- 1:21:50एमल्गमेशन हुआ और जनपदास और राष्ट्रास का
- 1:21:54राइज हुआ। यह टर्म पहली बार इसी पीरियड
- 1:21:56में यूज किया गया।
- 1:21:59रॉयल पावर के साथ-साथ किंगडम का साइज भी
- 1:22:02इनक्रीस हुआ। कााउस के साथ-साथ टेरिटरी
- 1:22:05कैप्चर करना भी वॉर्स का मकसद बन गया।
- 1:22:08किंग यूजुअली एक क्षत्रिय वर्णा से बिलोंग
- 1:22:11करता था और मोनाक ऑलमोस्ट हेरिडिटरी
- 1:22:14पोजीशन हो चुकी थी। इलेक्शन के कुछ
- 1:22:16इंस्टेंसेस मिले हैं। पर हेरिडिटरी किनशिप
- 1:22:20ही इमरजेंस में था। ग्रेजुअली सोशल ऑर्डर
- 1:22:23को कंट्रोल करना भी किंग का ही फंक्शन बन
- 1:22:25गया था। किंग को कई तरह के नेम्स से
- 1:22:29एड्रेस किया जाता था। जैसे नॉर्थ में
- 1:22:31विराट, ईस्ट में सम्राट, वेस्ट में स्वराट
- 1:22:35और साउथ में भोज। किंग का इन्फ्लुएंस कई
- 1:22:39तरह के रिचुअल्स के कारण स्ट्रांग होता
- 1:22:41गया। जैसे राजसूय सैक्रिफाइस जिसको करने
- 1:22:44से ऐसा माना जाता था कि किंग को सुप्रीम
- 1:22:47पावर मिलती थी। अश्वमेध जिसमें रॉयल हॉर्स
- 1:22:51दौड़ता था और जितनी टेरिटरी कवर करता था
- 1:22:54उस पर किंग का अनक्वेश्चन कंट्रोल होता
- 1:22:57था। वाजपेय जो कि एक चैरियट रेस थी। इन
- 1:23:01रिचुअल्स के माध्यम से किंग अपनी पावर और
- 1:23:04प्रेस्टीज का प्रदर्शन करता था। लेटर
- 1:23:07वैदिक पीरियड में ट्राइबल असेंबलीज ने
- 1:23:10अपनाेंस खो दिया और इसकी जगह रॉयल पावर
- 1:23:13में मल्टीफोल्ड इनक्रीस हो गया। सभा और
- 1:23:16समिति का एकिस्टेंस तो कंटिन्यू रहा पर
- 1:23:19विधाता यानी ट्राइबल असेंबली कंप्लीटली
- 1:23:22डिसअपीयर हो गई। सभा और समिति में
- 1:23:25प्रिंसेस, नोबल्स और ब्राहस का वर्चस्व
- 1:23:28बढ़ गया और वुमेन अब सभा में बैठने के लिए
- 1:23:31परमिटेड नहीं थी। लेटर वैदिक पीरियड में
- 1:23:34भी किंग किसी तरह की स्टैंडिंग आर्मी
- 1:23:36मेंटेन नहीं करता था। वॉर के समय ट्राइबल
- 1:23:40यूनिट्स को मोबिलाइज किया जाता था जो कि
- 1:23:42एक मिलिशिया की तरह काम करती थी।
- 1:23:46सोशल लाइफ लेटर वैदिक सोसाइटी चार वर्णास
- 1:23:50में डिवाइडेड थी और एंड तक यह डिस्टिंशन
- 1:23:53रिजिड हो चुका था। इस पीरियड में
- 1:23:55सैक्रिफाइसेस का एक कल्ट उभर कर आया जिनके
- 1:23:58कारण ब्राहणास कीेंस और बढ़ गई क्योंकि
- 1:24:01सैक्रिफाइसेस के लिए की जाने वाली
- 1:24:03रिचुअल्स ब्राहणास ही किया करते थे।
- 1:24:05एग्रीकल्चर से रिलेटेड फेस्टिवल्स को भी
- 1:24:08ब्राहस ही ऑफिशिएट करते थे। ऊपर के तीन
- 1:24:11वर्णास में एक कॉमन फीचर था। उपनयना यानी
- 1:24:16सीक्रेट थ्रेड को पहनना विद वैदिक
- 1:24:18मंत्रास। लेटर वैदिक पीरियड में कुछ
- 1:24:21क्राफ्ट ग्रुप्स जैसे रथकारास को एक
- 1:24:24स्पेशल स्टेटस दिया जाता था और यहां तक कि
- 1:24:27उन्हें सीक्रेट थ्रेड पहनने की परमिशन भी
- 1:24:29थी। इससे पता चलता है कि सोशल मोबिलिटी
- 1:24:32पॉसिबल थी। चौथा वर्ण यानी शूद्रास को
- 1:24:36सीक्रेट थ्रेड पहनना अलाउड नहीं था। इसी
- 1:24:39पीरियड में ही शूद्रास पर सोशल
- 1:24:41डिसेबिलिटीज को इनफोर्स करना चालू हुआ। जो
- 1:24:44प्रिंस क्षत्रिय या राजन्या ऑर्डर से
- 1:24:47बिलोंग करता था। बाकी तीन वर्णस पर अपनी
- 1:24:49पावर असर्ट करता था। फैमिलीज में एक
- 1:24:52पैट्रिमोनियल सिस्टम यानी अथॉरिटी ऑफ़ फादर
- 1:24:55डेवलप हुआ और वुमेन को जनरली लोअर पोजीशन
- 1:24:59में रखा जाता था। एक इंटरेस्टिंग बात यह
- 1:25:02थी कि कुछ वुमेन थियोलॉजियंस फिलोसोफिकल
- 1:25:05डिस्कशंस में पार्ट लेती थी और कुछ क्वींस
- 1:25:08भी कोरोनेशन सेरेमनी में पार्टिसिपेट करती
- 1:25:10थी। लेकिन जनरली वुमेन को मेन से इनफीरियर
- 1:25:14और सबोर्डिनेट ही माना जाता था।
- 1:25:17सती और चाइल्ड मैरिज के भी कुछ इंस्टेंसेस
- 1:25:20मिले हैं। गोत्र एज एन इंस्टीट्यूशन लेटर
- 1:25:24वैदिक एज में ही अपीयर हुआ। उस समय गोत्र
- 1:25:27का मीनिंग था काऊ पेन। यानी एक ऐसी जगह
- 1:25:30जहां पर एक क्लैन से बिलोंग करने वाली
- 1:25:33सारी कैटल को रखा जाता था। लेकिन समय के
- 1:25:36साथ इसका मीनिंग बदला और कॉमन एनसेेस्टर
- 1:25:39हो गया। सेम गोत्र से बिलोंग करने वाले
- 1:25:42पर्संस की मैरिज नहीं हो सकती थी। कास्ट
- 1:25:44एग्जोगमी वाइडली प्रैक्टिस की जाती थी।
- 1:25:48आश्रम्स और फोर स्टेजेस ऑफ लाइफ का
- 1:25:50कांसेप्ट वैदिक टाइम्स में वेल
- 1:25:52एस्टैब्लिश्ड नहीं था। पोस्ट वैदिक
- 1:25:55टेक्स्ट्स के हिसाब से चार आश्रमास हुआ
- 1:25:58करते थे। ब्रह्मचारी यानी स्टूडेंट,
- 1:26:01गृहस्थ यानी हाउसहोल्डर, वानप्रस्थ यानी
- 1:26:05पार्शियल रिटायरमेंट और सन्यास यानी
- 1:26:08कंप्लीट रिटायरमेंट फ्रॉम द वर्ल्ड।
- 1:26:11लेटर वैदिक टेक्स्ट्स में फोर्थ स्टेज का
- 1:26:13कोई मेंशन देखने को नहीं मिलता है। अब बात
- 1:26:16करते हैं लेटर वैदिक इकॉनमी की जिसमें
- 1:26:19सबसे पहले बात करेंगे एग्रीकल्चर की।
- 1:26:22एग्रीकल्चर
- 1:26:24टूल्स की बात करें तो आयरन टूल्स कम ही
- 1:26:27दिखाई दिए। ऑक्सिन की मदद से प्लाओ का
- 1:26:29इस्तेमाल किया गया। प्लाओ शेयर वुडन हुआ
- 1:26:32करता था। शतपत ब्राहणा में प्लाउंग
- 1:26:36रिचुअल्स का डिटेल्ड डिस्कशन किया गया है।
- 1:26:38इस पीरियड में किंग्स और प्रिंसेस भी
- 1:26:41प्लाऊ करने से हेजिटेट नहीं करते थे। आगे
- 1:26:44चलकर इवेंचुअली प्लाउंग लोअर ऑर्डर्स को
- 1:26:46असाइन कर दिया गया। वैदिक पीपल का
- 1:26:49प्रॉमिनेंट प्रोडक्शन बार्ले ही था। लेकिन
- 1:26:52लेटर वैदिक पीपल की चीफ क्रॉप्स अब वृही
- 1:26:55यानी राइस और गोधमा यानी वीट हो चुकी थी।
- 1:26:58कई तरह के लेंटिल्स का प्रोडक्शन भी किया
- 1:27:00जाता रहा। एग्रीकल्चर प्रिमिटिव मेथड से
- 1:27:04होते हुए भी उसका वाइड प्रिवेलेंस पर कोई
- 1:27:07डाउट नहीं है। अब बात करते हैं आर्ट्स एंड
- 1:27:10क्राफ्ट्स की। आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स।
- 1:27:13इस पीरियड में हमें स्मिथ्स और स्मेल्टर्स
- 1:27:16के बारे में सुनने को मिलता है। शुरुआत से
- 1:27:19ही वैदिक पीपल कॉपर से फमिलियर रहे।
- 1:27:21वेस्टर्न यूपी और बिहार में कॉपर टूल्स
- 1:27:24मिले हैं। जिससे पता चलता है कि कॉपर
- 1:27:27स्मिथ्स इस पीरियड में थे। इनका यूज़
- 1:27:30ऑर्नामेंट्स और वॉर और हंटिंग के लिए किया
- 1:27:32जाता था। वीविंग मेनली वुमेन तक कनफाइंड
- 1:27:36थी। लेकिन वाइड स्केल में प्रैक्टिस की
- 1:27:39जाती थी। लेटर वैदिक पीपल चार तरह की
- 1:27:42पोटरी से परिचित थे। ब्लैक एंड रेड वेयर,
- 1:27:45ब्लैक स्लिप्ड वेयर, पेंटेड ग्रे वेयर और
- 1:27:49रेड वेयर। ज्वेलर्स का मेंशन भी लेटर
- 1:27:52वैदिक टेक्स्ट्स में देखने को मिलता है।
- 1:27:54जो मेनली एफ्लुएंट सेक्शंस को सर्व करते
- 1:27:57होंगे। सोसाइटी लार्जली रूरल ही थी। लेकिन
- 1:28:00लेटर वैदिक पीरियड के एंड में अर्बनाइजेशन
- 1:28:03की शुरुआत होने लगी। तैतिय अरण्यका में
- 1:28:07नगर वर्ड का मेंशन देखने को मिलता है
- 1:28:09जिसको टाउन के सेंस में ही यूज किया गया
- 1:28:11है। एक्सचेंज मेनली बार में ही होता था।
- 1:28:15लेकिन निष्का एक कन्वीनिएंट यूनिट ऑफ
- 1:28:18वैल्यू की तरह यूज होता था। लेटर वैदिक
- 1:28:21पीरियड में टैक्सेस और ट्रिब्यूट्स का
- 1:28:23कलेक्शन कंपलसरी था। और संघरित्री के
- 1:28:26द्वारा कलेक्ट किया जाता था। दोस्तों
- 1:28:29अर्ली वैदिक पीरियड की तरह यहां पर भी
- 1:28:31रिलजन को समझना जरूरी है क्योंकि रिलीजन
- 1:28:34के थ्रू सोसाइटी के कल्चर को समझना आसान
- 1:28:37होता है। तो आइए चलते हैं रिलजन की ओर।
- 1:28:40लेटर वैदिक एज रिलजन अर्ली वैदिक ऐज के दो
- 1:28:44सबसे इंपॉर्टेंट गॉड्स इंद्र और अग्नि
- 1:28:47काेंस इस ऐज में खत्म हो गया। इनके स्थान
- 1:28:50पर प्रजापति यानी द क्रिएटर ने इस ऐज में
- 1:28:53सुप्रीम पोजीशन गेन कर ली। कुछ ऐसे गॉड्स
- 1:28:56जिनकी पोजीशन ऋग्वदिक पीरियड में माइनर
- 1:28:59थी, वह अब प्रॉमिनेंट हो गए। जैसे रुद्र,
- 1:29:02द गॉड ऑफ एनिमल्स और विष्णु, द प्रिजर्वर
- 1:29:05एंड प्रोटेक्टर ऑफ पीपल। कुछ सोशल ऑर्डर्स
- 1:29:08ने तो अपनी खुद की ड्यूटीज बनाई। जैसे
- 1:29:11पुषाण जो कि कैटल के प्रोटेक्टर थे।
- 1:29:14शूद्रास के मेन गॉड बन गए।
- 1:29:17लेटर वैदिक पीरियड में हमें आइडलेटरी के
- 1:29:20कुछ साइन देखने को मिलते हैं। लेटर वैदिक
- 1:29:23पीरियड में ऋग वैदिक एज के कंपैरिजन में
- 1:29:25ऑलमोस्ट सेम मटेरियल रीज़ंस के कारण गॉड को
- 1:29:28वरशिप किया जाता रहा। लेकिन मोड ऑफ वरशिप
- 1:29:31में सब्सटैंशियल चेंज देखने को मिला।
- 1:29:34प्रेयर्स अभी भी रिसाइट की जाती थी। पर
- 1:29:37वरशिप का डोमिनेंट मोड नहीं थी। इस कल्चर
- 1:29:40का एक कॉर्नर स्टोन था कल्चर ऑफ
- 1:29:42सैक्रिफाइसेस। और यह कल्ट कई तरह के
- 1:29:45रिचुअल्स और फार्मूला से भरा हुआ था।
- 1:29:48सैक्रिफाइसेस काेंस अब सोसाइटी में बढ़
- 1:29:51गया था। सैक्रिफाइसेस दो तरह की होती थी।
- 1:29:54पब्लिक और डोमेस्टिक।
- 1:29:56पब्लिक सैक्रिफाइसेस में किंग और सारी
- 1:29:59कम्युनिटी शामिल होती थी। इंडिविजुअल लेवल
- 1:30:02पर हाउसहोल्ड में भी सैक्रिफाइसेस की जाती
- 1:30:05थी जो कि डोमेस्टिक सैक्रिफाइसेस थी।
- 1:30:08सैक्रिफाइसेस में लार्ज स्केल में एनिमल्स
- 1:30:10की किलिंग इनवॉल्व होती थी। स्पेशली कैटल
- 1:30:13वेल्थ सैक्रिफाइस करने वाले को यजमान कहते
- 1:30:16थे जो यज्ञ को करता था और गेस्ट को घोगना
- 1:30:20कहते थे।
- 1:30:22कुछ इंपॉर्टेंट यज्ञस थे अश्वमेध, वाजपेय
- 1:30:26और राजसूय जिनका सिग्निफिकेंस हम देख चुके
- 1:30:29हैं। प्रीस्टली नॉलेज और एक्सपर्टीज की
- 1:30:32मोनोपोली ब्राह्मणस ने बना रखी थी।
- 1:30:34सैक्रिफाइसेस को पूरा करने के लिए उनको
- 1:30:36अच्छा रिवॉर्ड भी दिया जाता था। कााउस,
- 1:30:39गोल्ड, क्लॉथ और हॉर्सेस दक्षिणास के रूप
- 1:30:42में दिए जाते थे। कई बार तो प्रीस्ट्स
- 1:30:45दक्षिणा के रूप में टेरिटरी का एक पोर्शन
- 1:30:48भी मांग लिया करते थे। लेकिन ऐसी कोई भी
- 1:30:51डिमांड को ग्रांट किए जाने का एविडेंस
- 1:30:53नहीं मिला है। कंक्लूजन तो दोस्तों, हमने
- 1:30:56लेटर वैदिक एज के डिफरेंट एस्पेक्ट्स पर
- 1:30:58बात की। इस पीरियड में सोसाइटी के लोग
- 1:31:00सेमीनोमेडिक की जगह सेटल्ड लाइफ जीने लगे
- 1:31:04थे। लेटर वैदिक पीरियड के एंड में हमें
- 1:31:06प्रीस्टली क्लास के डोमिनेशन के खिलाफ
- 1:31:09स्ट्रांग रिएक्शन देखने को मिला। उपनिषद
- 1:31:12में आत्मन यानी सेल्फ की नॉलेज पर
- 1:31:15एम्फेसाइज किया गया। ब्रह्मा सुप्रीम गॉड
- 1:31:18के रूप में उभर कर आए। लेटर वैदिक फेज में
- 1:31:21कुछ इंपॉर्टेंट चेंजेस देखने को मिले।
- 1:31:24जैसे इसी पीरियड के एंड में टेरिटोरियल
- 1:31:27किंगडम्स की शुरुआत हुई अंडर क्षत्रिय
- 1:31:29रूलर्स। अर्ली वैदिक टाइम्स की
- 1:31:31प्रिडोमिनेंटली पेस्टोरल सोसाइटी अब
- 1:31:34एग्रीकल्चरल सोसाइटी हो चुकी थी। ट्राइबल
- 1:31:36पेस्टोरलिस्ट्स अब फार्मर्स में कन्वर्ट
- 1:31:39हो चुके थे। ट्राइब्स का एक चीफ होता था
- 1:31:41जिसको राजा या जनपदन कहा जाता था। यह
- 1:31:45चीफ्स ट्राइबल पेजेंट्री के एक्सपेंस पर
- 1:31:47ग्रो होते रहे और प्रीस्ट को रिवॉर्ड किया
- 1:31:49करते थे जो उनका सपोर्ट करते थे। कॉमन
- 1:31:52पीपल यानी वैश्यास को गवर्न करने में।
- 1:31:55शूद्रास अभी भी एक स्मॉल सर्विंग ऑर्डर
- 1:31:58था। ओवरऑल अगर देखें तो लेटर वैदिक ऐज की
- 1:32:00सबसे इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट यह थी कि वह एक
- 1:32:03ट्राइबल सोसाइटी से एक वर्ण के आधार पर
- 1:32:06डिवाइडेड सोसाइटी में तब्दील हो गई थी।
- 1:32:11जैनिज्म
- 1:32:13आज मैं आपको इंडियन एंशिएंट हिस्ट्री के
- 1:32:15ऐसे दौर से परिचय कराने वाला हूं जिसने
- 1:32:18इंडियन सोसाइटी को बदल कर रख दिया। न
- 1:32:21सिर्फ रिलीजियस सिनेरियो पर गहन प्रभाव
- 1:32:23छोड़ा बल्कि पॉलिटिकल सेटअप और इवन इकॉनमी
- 1:32:26को भी इंपैक्ट किया। इसका प्रभाव आज भी
- 1:32:29देखने को मिलता है। गांधी जी की बेसिक
- 1:32:31आईडियोलॉजी ऑफ नॉन वायलेंस को यहीं से
- 1:32:34प्रेरणा मिली। दोस्तों, यह कहानी है
- 1:32:36सिक्स्थ और फिफ्थ सेंचुरी बीसी की। जब
- 1:32:39एंशिएंट हिस्ट्री का वैदिक कल्चर अपनी चरम
- 1:32:42सीमा पर पहुंच चुका था। लोग प्रीस्टली
- 1:32:45क्लास यानी पुरोहित वर्ग, कल्ट्स और
- 1:32:47रिचुअल्स के खिलाफ आवाज उठाने लगे थे।
- 1:32:50स्पेशली पांचाल और विदेहा में जहां 600
- 1:32:53बीसी के आसपास उपनिषद्स को कंपाइल किया जा
- 1:32:56रहा था। इन फिलॉसोफिकल टेक्स्ट्स में
- 1:32:59रिचुअल्स को क्रिटिसाइज किया गया और नॉलेज
- 1:33:01पर स्ट्रेस दिया गया। वैदिक फेज के एंड
- 1:33:05में कई इंपॉर्टेंट चेंजेस देखने को मिले।
- 1:33:07जैसे टेरिटोरियल किंगडम्स की शुरुआत हुई
- 1:33:10जिन्हें जनपदास बोला जाता था। यह जनपदास
- 1:33:14क्षत्रिय रूलर के अंडर में थे। युद्ध का
- 1:33:17मकसद अब केवल कैटल को कैप्चर करने तक
- 1:33:19सीमित नहीं था। बल्कि टेरिटरी कैप्चर करना
- 1:33:22भी वॉर का एक इंपॉर्टेंट एस्पेक्ट था।
- 1:33:25महाभारत वॉर भी इसी पीरियड की बताई जाती
- 1:33:28है। पेस्टोरल सोसाइटी यानी चरवाहे अब
- 1:33:31एग्रीकल्चरल सोसाइटी में कन्वर्ट हो रहे
- 1:33:33थे। ऐसे दौर में मिड गेंजेटिक प्लेेंस में
- 1:33:36कई रिलीजियस सेक्स अर्थात संप्रदायों का
- 1:33:39उदय हुआ। कुछ एस्टीमेट्स के हिसाब से करीब
- 1:33:4262 सेक्स राइज हुए। इनमें से सबसे
- 1:33:45इंपॉर्टेंट सेक्ट जैनिज्म और बुद्धिज्म
- 1:33:48सामने उभर कर आए। आज इस कहानी में हम
- 1:33:51जैनिज्म पर फोकस करेंगे। कॉजेस ऑफ ओरिजिन।
- 1:33:55पहले समझते हैं कि इन रिलीजियस ऑर्डर्स के
- 1:33:57स्टार्ट होने के कारण क्या रहे। लेटर
- 1:34:00वैदिक सोसाइटी फोर वर्णनर्स में डिवाइड हो
- 1:34:03गई। और यह डिवीजन धीरे-धीरे रिजिड होता
- 1:34:06चला गया। नेचुरली इस वर्ण व्यवस्था से
- 1:34:08सोसाइटी में टेंशन फैली हुई थी। इसके चलते
- 1:34:11वैश्यास और शूद्रास के क्या रिएक्शंस रहे
- 1:34:14यह पता लगा पाना मुश्किल है। लेकिन
- 1:34:16क्षत्रिय वर्णन ने जरूर ब्राह्मण डोमिनेशन
- 1:34:19के खिलाफ आवाज उठाना शुरू किया। इन्होंने
- 1:34:22वर्ण व्यवस्था में बर्थ केेंस को लेकर एक
- 1:34:25प्रकार के प्रोटेस्ट मूवमेंट को चालू
- 1:34:27किया। क्षत्रियस का यही स्ट्रांग रिएक्शन
- 1:34:30नए रिलीजंस के ओरिजिन का एक कारण रहा।
- 1:34:33लेकिन न्यू रिलीजंस के राइज का रियल कॉज
- 1:34:36था। नॉर्थ ईस्टर्न इंडिया में एक नई तरह
- 1:34:39की एग्रीकल्चरल इकॉनमी का स्प्रेड होना।
- 1:34:42सिक्स्थ सेंचुरी बीसी के एंड होने तक
- 1:34:45ईस्टर्न यूपी, नॉर्थ और साउथ बिहार में
- 1:34:48आयरन का इस्तेमाल शुरू हुआ। जिसके चलते
- 1:34:51डेंस फॉरेस्ट्स को क्लियर करना आसान हो
- 1:34:53गया और लार्ज स्केल में लोग यहां रहने लगे
- 1:34:56और यहां से वाइड स्प्रेड एग्रीकल्चर की
- 1:34:59शुरुआत हुई। 500 बीसी के आसपास नॉर्थ
- 1:35:03ईस्टर्न इंडिया में बड़ी मात्रा में सिटीज
- 1:35:05बसना चालू हुई। जैसे कौशांबी, कुशीनगर,
- 1:35:09वाराणसी, वैशाली, चिरांद, तारादी,
- 1:35:13पाटलिपुत्र, राजगीर और चंपा। वर्धमान
- 1:35:17महावीर इनमें से कई सिटीज से एसोसिएटेड
- 1:35:20रहे। सबसे पहले इसी दौर में ट्रेड और
- 1:35:23कॉमर्स में कॉइंस का यूज किया जाने लगा जो
- 1:35:26कि पंचमार्क्ड वैरायटी के कॉइंस थे। कॉइंस
- 1:35:29के यूज से ट्रेड में अच्छी ग्रोथ हो रही
- 1:35:31थी। जिसके चलते वैश्यास कीेंस सोसाइटी में
- 1:35:34बढ़ने लगी। नेचुरली वैश्य वर्ण ने ऐसे
- 1:35:38रिलीजन को खोजना चालू किया जो उनकी सोशल
- 1:35:41पोजीशन को इंप्रूव कर सके। इसीलिए
- 1:35:43उन्होंने महावीर का सपोर्ट किया। उनके
- 1:35:46सपोर्ट के कई कारण रहे। पहला जैनिज्म ने
- 1:35:50शुरुआत में वर्ण व्यवस्था को इंपोर्टेंस
- 1:35:52नहीं दी। दूसरा जैनिज्म में नॉन वायलेंस
- 1:35:55की बात की गई जिससे वार्ड्स एंड हो जाते
- 1:35:58और ट्रेड और कॉमर्स में इजाफा होता। तीसरा
- 1:36:01ब्राह्मेनिकल लॉ बुक्स जैसे धर्मसूत्राज
- 1:36:04में मनी लेंडिंग की निंदा की गई। इसके
- 1:36:07कारण ट्रेडर्स को नीची नजर से देखा जाने
- 1:36:10लगा और इसी कारण ट्रेडिंग क्लास अपना सोशल
- 1:36:13स्टेटस इंप्रूव करने के लिए नए रिलीजन की
- 1:36:16खोज करने लगी। वहीं दूसरी ओर सोसाइटी के
- 1:36:19ओल्ड फैशंड लोग पुरानी लाइफ की डिमांड
- 1:36:22करने लगे। जैसे मॉडर्न टाइम्स में
- 1:36:25इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन के दौरान पुराने
- 1:36:27लोग चेंजेस को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहे
- 1:36:29थे। नया क्लोथिंग पैटर्न, प्राइवेट
- 1:36:31प्रॉपर्टी और नए तरह के घर उन्हें रास
- 1:36:34नहीं आ रहे थे और वो प्रिमिटिव लाइफस्ट
- 1:36:37चाहते थे। जैनिज्म में सिंपल, प्योर और
- 1:36:41एथेटिक लाइफस्टाइल कोेंस दी गई जिससे लोग
- 1:36:44अट्रैक्ट होने लगे। यही सब कारण रहे कि
- 1:36:47जैनिज्म जैसे न्यू रिलीजंस प्रॉमिसिंग
- 1:36:49लगने लगे और इनका राइज होना इजी हो गया।
- 1:36:55वर्धमान महावीर दोस्तों वर्धमान महावीर
- 1:36:59जैनिज्म के रियल फाउंडर माने जाते हैं।
- 1:37:02जैनास की मान्यताओं के अनुसार उनके सबसे
- 1:37:05इंपॉर्टेंट रिलीजियस टीचर महावीर के 23
- 1:37:08प्रीिडिसेसर्स यानी पूर्वज थे। जिन्हें
- 1:37:12तीर्थंकर बोला जाता है। जैनाज़ का मानना है
- 1:37:14कि जैनिज्म के पहले तीर्थंकर ऋषभदेव थे और
- 1:37:18उन्होंने ही जैनिज्म को इस्टैब्लिश किया।
- 1:37:21ऋषभदेव अयोध्या के माने जाते हैं। अगर
- 1:37:24महावीर को 24 तीर्थंकरा माना जाए तो
- 1:37:27जैनिज्म का ओरिजिन करीब नाइंथ सेंचुरी
- 1:37:30बीसी तक चला जाएगा। जबकि अयोध्या का
- 1:37:33सेटलमेंट 500 बीसी में स्टार्ट हुआ।
- 1:37:36इसीलिए ऋषभदेव के एकिस्टेंस की
- 1:37:38हिस्टोरिसिटी इस्टैब्लिश कर पाना मुश्किल
- 1:37:40है। बाकी सभी तीर्थंकरों की हिस्टोरिसिटी
- 1:37:44भी एक्सट्रीमली डाउटफुल है। जैनिज्म की
- 1:37:47इंपॉर्टेंट टीचिंग्स पार्श्वनाथ से
- 1:37:49स्टार्ट हुई जो कि 23 तीर्थंकर थे। वो
- 1:37:53बनारस के थे। रॉयल लाइफ को अबेंडन किया और
- 1:37:56एक एथेटिक यानी तपस्वी बन गए। लेकिन
- 1:37:59इतिहासकारों की मानें तो पार्श्व के
- 1:38:02स्पिरिचुअल सक्सेसर वर्धमान महावीर ही
- 1:38:05जैनिज्म के रियल फाउंडर हैं। महावीर की
- 1:38:08बर्थ और डेथ की एग्जैक्ट डेट्स का पता
- 1:38:10लगाना संभव नहीं है। लेकिन एक ट्रेडिशन की
- 1:38:13मानें तो उनकी बर्थ 540 बीसी में वैशाली
- 1:38:17में हुई जो कि आज के हिसाब से बिहार के
- 1:38:20वैशाली डिस्ट्रिक्ट में है। उनके फादर
- 1:38:23सिद्धार्थ क्षत्रिय क्लैन के हेड थे और
- 1:38:26उनकी मदर त्रिशाला लिच्छवी चीफ चेतक की
- 1:38:29सिस्टर थी। चेतक की डॉटर की मैरिज
- 1:38:33बिंबिसार से हुई। इससे यह तो साफ है कि
- 1:38:35महावीर की फैमिली मगध की रॉयल फैमिली से
- 1:38:38जुड़ी हुई थी। जिसकी मदद से उनको प्रिंसेस
- 1:38:41और नोबल्स तक अपनी अप्रोच पहुंचाने में
- 1:38:44आसानी हुई। शुरुआत में महावीर एक गृहस्थ
- 1:38:47जीवन जीते रहे। पर ट्रुथ को ढूंढने और
- 1:38:50समझने की राह पर उन्होंने 30 साल की एज
- 1:38:53में दुनिया का त्याग कर दिया और एक तपस्वी
- 1:38:56बन गए। जीवन के 12 साल उन्होंने केवल
- 1:38:59भ्रमण करते हुए निकाले। विलेजेस और टाउनंस
- 1:39:02में कुछ दिन के अलावा नहीं रुकते थे। इन
- 1:39:0512 सालों की लंबी जर्नी में ऐसा कहा जाता
- 1:39:08है कि उन्होंने कभी कपड़े नहीं बदले और 42
- 1:39:11साल की उम्र में जब उन्होंने कैवल्य यानी
- 1:39:13ओमनीिसिएंस को पा लिया। तब उन्होंने पूरी
- 1:39:16तरह से कपड़ों का त्याग कर दिया। कैवल्य
- 1:39:19की मदद से उन्होंने मिजरी और हैप्पीनेस को
- 1:39:22ककर किया। इसी कॉन्क्वेस्ट के कारण उन्हें
- 1:39:26महावीरा यानी ग्रेट हीरो या जीना यानी
- 1:39:30कॉनकरर ऑफ वनसेल्फ बोला गया और उनके
- 1:39:32फॉलोअर्स को जयनाज़। 30 साल तक महावीर ने
- 1:39:36अपने रिलीजन को प्रोपगेट किया। एक्सपेंड
- 1:39:39किया और यह मिशन उनको कौशाल, मगध, मिथिला
- 1:39:44और चंपा जैसी सिटीज में ले गया। 468 बीसी
- 1:39:48में 72 साल की एज में पावापुरी में उनकी
- 1:39:52डेथ हो गई। यानी वह निर्वाण को प्राप्त हो
- 1:39:55गए। बिहार के राजगीर नालंदा डिस्ट्रिक्ट
- 1:39:58में यह जगह है। दोस्तों, आगे बढ़ते हैं और
- 1:40:01जैनिज्म की डॉक्ट्रिंस यानी सिद्धांतों पर
- 1:40:04एक नजर डालते हैं।
- 1:40:07डॉक्ट्रिंस ऑफ जैनिज्म। जैनिज्म में पांच
- 1:40:10सिद्धांतों की बात कही गई है। डू नॉट कमिट
- 1:40:13वायलेंस यानी हिंसा मत करो। डू नॉट टेल अ
- 1:40:16लय यानी झूठ मत बोलो। डू नॉट स्टील यानी
- 1:40:20चोरी मत करो। डू नॉट होड यानी संचय मत
- 1:40:23करो। ऑब्जर्व कॉन्टिनेंस यानी ब्रह्मचर्य
- 1:40:27को अपनाओ। ऐसा कहा जाता है कि सिर्फ
- 1:40:30पांचवा सिद्धांत यानी ब्रह्मचर्य ही
- 1:40:32महावीर ने ऐड किया। बाकी चार उन्होंने
- 1:40:35पिछले तीर्थंकरों से लिए। जैनिज्म का सबसे
- 1:40:39इंपॉर्टेंट डॉक्ट्रिन था अहिंसा यानी नॉन
- 1:40:42इंजरी टू लिविंग बीइंग्स। महावीर के
- 1:40:45प्रिडसेसर यानी पार्श्व ने अपने फॉलोअर्स
- 1:40:48से बॉडी के अपर और लोअर पोर्शनंस को कवर
- 1:40:51करने को कहा। जबकि महावीर ने अपने
- 1:40:53फॉलोअर्स को कपड़े कंप्लीटली अबेंडन करने
- 1:40:56के इंस्ट्रक्शन दिए। इससे पता चलता है कि
- 1:40:59महावीर ने अपने फॉलोअर्स को ज्यादा
- 1:41:01स्ट्रिक्ट और सीधा-साधा जीवन जीने को कहा।
- 1:41:04कई रीज़ंस में से एक यह भी कारण रहा कि आगे
- 1:41:07चलकर जैनिज्म दो सेक्स में डिवाइड हो गया।
- 1:41:10श्वेतांबरस जो वाइट कपड़े पहनने लगे और
- 1:41:13दिगंबरस जिन्होंने कपड़ों का त्याग किया।
- 1:41:16जैनिज्म ने गॉड के एकिस्टेंस को
- 1:41:19रिकॉग्नाइज किया। लेकिन उन्हें जिना की
- 1:41:22श्रेणी से नीचे ही रखा। वर्ण सिस्टम को
- 1:41:25जैनिज्म ने एकदम कंडेम नहीं किया। जिस तरह
- 1:41:28बुद्धिज्म ने किया। महावीर के अनुसार एक
- 1:41:31पर्सन का अपर और लोअर वर्ण में बर्थ होना
- 1:41:34उसके पिछले जन्म में किए गए सिंस और
- 1:41:37वर्च्यूस पर डिपेंडेंट था। इसका मतलब
- 1:41:39महावीर थ्योरी ऑफ कर्मा में बिलीव करते
- 1:41:42थे।
- 1:41:43महावीर के ओपिनियन में लोअर कास्ट के लोग
- 1:41:46प्योर और मेरिटोरियस लाइफ जीते हुए
- 1:41:48लिबरेशन यानी मुक्ति पा सकते थे। फ्रीडम
- 1:41:52फ्रॉम वर्ल्डली बॉन्ड्स यानी दुनियादारी
- 1:41:54से मुक्ति जैनिज्म का मेन मोटिव था।
- 1:41:57स्पष्ट है कि महावीर लिबरेशन ऑफ सोल की
- 1:42:01बात कर रहे थे। ऐसा करने के लिए किसी भी
- 1:42:03तरह के रिचुअल्स की जरूरत नहीं थी। राइट
- 1:42:06नॉलेज, राइट फेथ और राइट एक्शन के थ्रू
- 1:42:09इसको पाया जा सकता था। इनको जैनिज्म का
- 1:42:12त्रिरत्न कहा जाता है। जैनिज्म में वॉर और
- 1:42:16एग्रीकल्चर दोनों को ही प्रोहिबिट किया
- 1:42:18गया क्योंकि दोनों में ही लिविंग बीइंग्स
- 1:42:21की किलिंग इनवॉल्व थी। इसी के चलते
- 1:42:24जैनिज्म मेनली ट्रेड और मर्केंटाइल
- 1:42:26एक्टिविटीज तक ही सीमित रह गया। दोस्तों,
- 1:42:29अब बात करते हैं कि किस तरह जैनिज्म
- 1:42:32स्प्रेड हुआ। स्प्रेड ऑफ जैनिज्म। जैनिज्म
- 1:42:36को स्प्रेड करने के लिए महावीर ने एक
- 1:42:38फॉलोअर्स के ऑर्डर या ग्रुप को तैयार किया
- 1:42:41जिसमें मेन और वुमेन दोनों को एडमिट किया
- 1:42:44जा सकता था। प्राकृत लैंग्वेज का यूज करके
- 1:42:47महावीर ने अपनी टीचिंग्स को कॉमन लोगों तक
- 1:42:49पहुंचाया। ऐसा कहा जाता है कि उनके करीब
- 1:42:5314,000 फॉलोअर्स थे जो कि एक बहुत बड़ी
- 1:42:56संख्या नहीं है। जैनिज्म अपने आप को
- 1:42:59ब्राह्मेनिकल रिलीजन से किसी खास तौर पर
- 1:43:01डिफरेंशिएट नहीं कर पाया। यही कारण रहा कि
- 1:43:04वो मेसेस को अट्रैक्ट नहीं कर पाया। इसके
- 1:43:07बावजूद साउथ और वेस्ट इंडिया में
- 1:43:10ग्रेजुअली स्प्रेड होता रहा। जहां
- 1:43:12ब्राह्मेनिकल रिलिजन थोड़ा वीक था। एक
- 1:43:14ट्रेडिशन की मानें तो कर्नाटका में
- 1:43:16जैनिज्म के स्प्रेड का कारण चंद्रगुप्त
- 1:43:19मौर्य रहे जो मौर्य एंपायर के फर्स्ट रूलर
- 1:43:22थे। पर इसका कोई हिस्टोरिकल एविडेंस नहीं
- 1:43:25है। दूसरा कारण मगध में हुए ग्रेट फेमिन
- 1:43:28को बताया जाता है जो महावीर की डेथ के 2
- 1:43:31साल बाद हुआ। यह फेमिन 12 साल तक चला।
- 1:43:35इससे बचने के लिए जैनाज़ का एक ग्रुप साउथ
- 1:43:38इंडिया में माइग्रेट कर गया। भद्रबाहु की
- 1:43:41लीडरशिप में। इन्हीं के द्वारा साउथ
- 1:43:43इंडिया में जैनिज्म का स्प्रेड हुआ। बचे
- 1:43:45हुए लोग मगध में ही रहे। स्थलबाहु की
- 1:43:48लीडरशिप में। फेमिन खत्म होने के बाद
- 1:43:51दोनों ग्रुप्स में डिफरेंसेस क्रिएट हो
- 1:43:53गए। जैनिज्म के बेसिक कांसेप्ट्स को लेकर।
- 1:43:56इन डिफरेंसेस को रिजॉल्व करने के लिए और
- 1:43:59जैनिज्म की मेन टीचिंग्स को कंपाइल करने
- 1:44:01के लिए एक काउंसिल को कन्वीन किया गया
- 1:44:04पाटलिपुत्र में। लेकिन साउथ से वापस आने
- 1:44:07वाले जैनाज़ ने इस काउंसिल का बॉयकॉट किया।
- 1:44:10इसके बाद से सदर्न ग्रुप को दिगंबरा और
- 1:44:13मगधन ग्रुप को श्वेतांबरास बोला जाने लगा।
- 1:44:16इस तरह से जैनिज्म दो सेक्ट्स में डिवाइड
- 1:44:19हो गया। यह फेमिन थ्योरी की ऑथेंटिसिटी
- 1:44:22डाउटफुल है। पर इतना साफ है कि जैनिज्म दो
- 1:44:25सेक्ट्स में डिवाइड जरूर हो गया था।
- 1:44:28दोस्तों, यहां यह बताना जरूरी है कि
- 1:44:30जैनिज्म की एक काउंसिल आगे चलकर 512 एडी
- 1:44:34में भी हुई। क्षमास रमाना ने इसको
- 1:44:36प्रिसाइड किया था। इस काउंसिल में 12
- 1:44:39अंगाज और 12 उप अंगाज को कंपाइल किया गया।
- 1:44:42जो जैनिज्म के इंपॉर्टेंट रिलीजियस
- 1:44:45स्क्रिप्चर्स हैं। एपीग्राफिक एविडेंस
- 1:44:47यानी पुराले के अनुसार कर्नाटका में
- 1:44:50जैनिज्म का स्प्रेड थर्ड सेंचुरी एडी के
- 1:44:53बाद ही हुआ। फिफ्थ सेंचुरी एडी के बाद कई
- 1:44:56जैना मोनेस्ट्रीज कर्नाटका में भी बनी।
- 1:44:59जिन्हें बसदीज बोला जाता था। कलिंग ओसा की
- 1:45:02बात करें तो यहां पर जैनिज्म का स्प्रेड
- 1:45:05फोर्थ सेंचुरी बीसी में हुआ। फर्स्ट
- 1:45:08सेंचुरी बीसी में कलिंग किंग खारवेला का
- 1:45:10पेट्रिनेज जैनिज्म को मिला। तमिलनाडु के
- 1:45:13सदर्न डिस्ट्रिक्ट्स में इसका स्प्रेड
- 1:45:15सेकंड और फर्स्ट सेंचुरी बीसी में देखने
- 1:45:17को मिला। आने वाली सेंचुरीज में मालवा,
- 1:45:20गुजरात और राजस्थान में जैनिज्म स्प्रेड
- 1:45:23हुआ। जहां आज भी इनकी एक सब्सटैंशियल
- 1:45:26पापुलेशन है। इनका मेन ऑक्यूपेशन आज भी
- 1:45:29ट्रेड और कॉमर्स ही है। यहां एक
- 1:45:31इंटरेस्टिंग बात सामने आती है। भले ही
- 1:45:33जैनिज्म बुद्धिज्म के कंपैरिजन में
- 1:45:35रैपिडली स्प्रेड नहीं हुआ पर आज भी जैन
- 1:45:38पपुलेशन यहां बरकरार है। जबकि बुद्धिज्म
- 1:45:42वर्चुअली डिसअपीयर हो गया। दोस्तों, एक
- 1:45:45नजर जैनिज्म के सोसाइटी में
- 1:45:47कंट्रीब्यूशनंस पर भी डालते हैं।
- 1:45:50कंट्रीब्यूशन ऑफ जैनिज्म। जैनिज्म ऐसा
- 1:45:54फर्स्ट सीरियस अटेमप्ट था जो वर्ण सिस्टम
- 1:45:57और रिचुअलिस्टिक वैदिक रिलीजन के खिलाफ
- 1:45:59लड़ाई लड़ रहा था। शुरुआती जैनाज़ ने
- 1:46:02संस्कृत को डिस्कार किया जो कि ब्राह्मण
- 1:46:04पेट्रिनेज में थी। उन्होंने कॉमन पीपल की
- 1:46:07लैंग्वेज यानी प्राकृत को अडॉप किया अपने
- 1:46:10डॉक्ट्रिन को प्रीच करने के लिए। उनका
- 1:46:12रिलीजियस लिटरेचर अर्धमगधी में लिखा गया
- 1:46:16जो कि सिक्स्थ सेंचुरी एडी में गुजरात की
- 1:46:18एक जगह वल्लभी में कंपाइल हुआ। इसके कारण
- 1:46:22प्राकृत लैंग्वेज की ग्रोथ होने लगी।
- 1:46:24प्राकृत लैंग्वेज से निकलकर कई रीजनल
- 1:46:27लैंग्वेज डेवलप होने लगी। जैसे शौरसेनी
- 1:46:30जिससे मराठी लैंग्वेज डेवलप हुई। शुरुआती
- 1:46:33जैनाज़ ने कुछ इंपॉर्टेंट वर्ड्स अपभ्रंश
- 1:46:36लैंग्वेज में लिखे और इसकी फर्स्ट ग्रामर
- 1:46:39को भी कंपाइल किया। अर्ली मिडीवल एरा में
- 1:46:42जैनास ने संस्कृत में भी कई टेक्स्ट्स
- 1:46:44लिखे और आखिर में देखें तो कन्नडा
- 1:46:47लैंग्वेज की ग्रोथ में भी इनका
- 1:46:49कंट्रीब्यूशन रहा। आर्ट एंड आर्किटेक्चर
- 1:46:52में भी जैनिज्म का योगदान रहा। जैन
- 1:46:55आर्किटेक्चर शुरुआती दौर में बुद्धिस्ट और
- 1:46:57हिंदू आर्किटेक्चर के साथ ही डेवलप हुआ।
- 1:47:00बाद की सेंचुरीज में यह अपनी अलग पहचान
- 1:47:03बना पाया। कई टेंपल्स को बिल्ड किया
- 1:47:05स्पेशली इन वेस्टर्न इंडिया। उदयगिरी और
- 1:47:08खांडागिरी केव्स उड़ीसा जैना आर्किटेक्चर
- 1:47:11का अच्छा एग्जांपल है। जिन्हें 193 से 170
- 1:47:15बीसी में किंग खारवेला ने जैन मंक्स के
- 1:47:18लिए बनाया। श्रावण बेलगोला की गोमतेश्वर
- 1:47:21स्टैचू को तो आप अच्छे से जानते ही हैं।
- 1:47:24जो कि वर्ल्ड की टॉलेस्ट मोनोलिथ स्टैचू
- 1:47:26है। 11th से 13th सेंचुरी के बीच बने
- 1:47:29दिलवाड़ा टेंपल्स राजस्थान में हमें
- 1:47:32तीर्थंकरस पर डेडिकेटेड कार्ब्व्ड
- 1:47:34मार्बल्स देखने को मिलते हैं। जैन
- 1:47:36आर्किटेक्चर का डिटेल्ड डिस्कशन हम अलग
- 1:47:39वीडियो में करेंगे। दोस्तों एक नजर इस पर
- 1:47:43भी डालते हैं कि जैनिज्म डिक्लाइन कैसे
- 1:47:45हुआ यानी मासेस को अट्रैक्ट क्यों नहीं कर
- 1:47:48पाया? इसके कई कारण रहे। आइए जानते हैं।
- 1:47:53डिक्लाइन ऑफ जैनिज्म। पहला यह कि जैनिज्म
- 1:47:57ने ब्राह्मण रिलीजन का फियर्स ऑोजिशन
- 1:47:59किया। जिसके चलते ब्राह्मणस ने इसका
- 1:48:02बहिष्कार किया। दूसरा कारण था रिगरस
- 1:48:05प्रिंसिपल्स जो कि बहुत ही स्ट्रिक्ट थे।
- 1:48:08नॉन वायलेंस के एक्सट्रीम प्रिंसिपल के
- 1:48:11चलते एग्रीकल्चर भी प्रोहिबिटेड था। इसलिए
- 1:48:14एग्रेररियन लोग यानी मासेस इसको एंब्रेस
- 1:48:17नहीं कर पाए। फास्टिंग, रनंसिएशन यानी
- 1:48:20त्याग, तपस्वी जीवन जैसे हार्ड
- 1:48:22प्रिंसिपल्स जनरल हाउसहल्डर फॉलो नहीं कर
- 1:48:25सकता था। तीसरा जो कि सबसे मेन कारण हो
- 1:48:28सकता है वो यह था कि जैनिज्म को कभी
- 1:48:31पॉलिटिकल पेट्रिनेज नहीं मिला। जिस तरह से
- 1:48:34कई रूलर्स जैसे अशोका, कनिष्का एटसेटरा
- 1:48:37बुद्धिज्म से अट्रैक्ट हुए। जैनिज्म ऐसे
- 1:48:39कोई रूलर को अट्रैक्ट नहीं कर पाया।
- 1:48:42फाइनली जैनिज्म के संघ संगठन का
- 1:48:45ऑर्गेनाइजेशनल अरेंजमेंट मोनार्किक था।
- 1:48:48इसके साथ ही जैनिज्म का दो सेक्स में
- 1:48:51डिवाइड होना भी इसके डिक्लाइन का कारण
- 1:48:53बना। कंक्लूजन। तो दोस्तों, हमने देखा कि
- 1:48:57किस तरह जैनिज्म कई तरह की पॉलिटिकल, सोशल
- 1:49:00और इकोनॉमिक कंडीशंस के कारण एक सेट के
- 1:49:03रूप में उभर कर आया और अल्टीमेटली एक
- 1:49:06रिलीजन में कन्वर्ट हो गया। महावीर जैसे
- 1:49:09महान तीर्थंकरों के स्ट्रांग आइडियल्स पर
- 1:49:11बेस्ड होने के कारण माइनर पापुलेशन होने
- 1:49:14के बावजूद जैनिज्म इंडियन हिस्ट्री के हर
- 1:49:17एरा को सर्वाइव करता हुआ आज भी इंडिया का
- 1:49:20इंपॉर्टेंट रिलजन है। बुद्धिज्म।
- 1:49:25दोस्तों, आज मैं आपको ऐसे समय से अवगत
- 1:49:28कराने वाला हूं जिसे इंडियन एंशिएंट
- 1:49:31हिस्ट्री का वाटर शेड मोमेंट बोला जा सकता
- 1:49:33है। यह कहानी है सिक्स्थ और फिफ्थ सेंचुरी
- 1:49:36बीसी की जब नॉर्थ इंडिया के गंगा यमुना के
- 1:49:40अपरदब में आर्यन कल्चर अपने पीक पर पहुंच
- 1:49:43चुका था। दोस्तों जैनिज्म के लेक्चर में
- 1:49:47हमने देखा कि किस प्रकार इस दौर में कई
- 1:49:50तरह के रिलीजियस सेक्स का राइज हुआ। हमने
- 1:49:53देखा कैसे सोसाइटी की सोशल, इकोनॉमिक और
- 1:49:56पिटिकल कंडीशंस किसी भी रिलीजन के राइज
- 1:49:59होने का प्राइमरी कारण होती हैं। इन
- 1:50:01रिलीजियस सेक्स में से जैनिज्म के साथ
- 1:50:04बुद्धिज्म ऐसा दूसरा सेक्ट था जो इंडियन
- 1:50:07सबक्टिनेंट में वाइडली स्प्रेड हो पाया।
- 1:50:10इंडिया में ही नहीं बुद्धिज्म का
- 1:50:12इन्फ्लुएंस आज आपको पूरे वर्ल्ड में देखने
- 1:50:14को मिलेगा। कंपैरिजन के तौर पर देखें तो
- 1:50:17जैनिज्म इंडिया में ही कनफाइंड होकर रह
- 1:50:19गया। तो दोस्तों शुरू करते हैं डिस्कशन
- 1:50:22बुद्धिज्म के कॉजेस ऑफ ओरिजिन से। कॉजेस
- 1:50:25ऑफ ओरिजिन ऑफ बुद्धिज्म।
- 1:50:28दोस्तों क्योंकि बुद्धिज्म और जैनिज्म
- 1:50:31लगभग एक ही समय पर राइज हुए। इसलिए दोनों
- 1:50:34के ओरिजिन के कॉजेस भी सेम ही थे।
- 1:50:36संक्षिप्त में देखें तो लेटर वैदिक कल्चर
- 1:50:39में वर्ण सिस्टम का रिजिड स्ट्रक्चर और
- 1:50:42बर्थ पर बेस्ड होना न्यू रिलीजंस के राइज
- 1:50:44का एक कारण बना। दूसरा और सबसे मेन कॉज था
- 1:50:48मिड गजेटिक प्लेेंस में वाइड स्प्रेड
- 1:50:50एग्रीकल्चर बेस्ड इकॉनमी का राइज होना।
- 1:50:53तीसरा कॉइंस के यूज से ट्रेड और कॉमर्स
- 1:50:56बढ़ा जिससे वैेश्यास का सोसाइटी मेंेंस
- 1:50:59बढ़ता गया और वो अपनी सोशल स्टेटस बढ़ाने
- 1:51:02के लिए नए रिलीजंस की ओर आकर्षित हुए और
- 1:51:05फाइनली सोसाइटी के कंजर्वेटिव लोग पुरानी
- 1:51:09लाइफस्टाइल की मांग करने लगे। दोस्तों, इन
- 1:51:12सभी पॉइंट्स को आप डिटेल में जैनिज्म के
- 1:51:14वीडियो से कवर कर सकते हैं। आइए अब हम बात
- 1:51:18करेंगे बुद्धिज्म के फाउंडर गौतम बुद्ध के
- 1:51:21बारे में। गौतम बुद्ध गौतम बुद्ध महावीर
- 1:51:26के कंटेंपररी थे। उन्हें सिद्धार्थ और
- 1:51:29शाक्य मुनि के नामों से भी जाना जाता है।
- 1:51:32एक ट्रेडिशन के अनुसार उनका बर्थ 567 बीसी
- 1:51:35में एक शाक्य क्षत्रिय फैमिली में
- 1:51:38कपिलवस्तु के पास लुंबिनी में हुआ जो कि
- 1:51:41नेपाल में है। यह जगह आज यूपी के बस्ती
- 1:51:44डिस्ट्रिक्ट से कुछ ही दूरी पर है। गौतम
- 1:51:47बुद्ध के फादर शुद्धोधन कपिलवस्तु के एक
- 1:51:50इलेक्टेड लीडर माने जाते हैं जो शाक्य
- 1:51:53क्लैन के हेड थे। उनकी मदर माया देवी
- 1:51:56कौशलान डायनेस्टी की एक प्रिंसेस थी। इससे
- 1:51:59यह साफ है कि बुद्ध एक नोबल फैमिली से
- 1:52:02बिलोंग करते थे और एक रिपब्लिक स्टेट में
- 1:52:04रहने के कारण इगेलिटेरियन बिलीव्स यानी
- 1:52:07समान अधिकारवादी थे। बचपन से ही उनका
- 1:52:10मेडिटेशन से बड़ा लगाव था।
- 1:52:14उनकी मैरिज अर्ली एज में ही हो गई थी।
- 1:52:16लेकिन उन्हें कभी मैरिड लाइफ में इंटरेस्ट
- 1:52:19नहीं रहा। यहां पर फोर साइट्स के फेमस
- 1:52:22इंसिडेंट का जिक्र आता है। बचपन की एक
- 1:52:25भविष्यवाणी में कहा गया कि सिद्धार्थ या
- 1:52:28तो बुद्ध बनेंगे या फिर एक ग्रेट किंग। अब
- 1:52:30उनके फादर ने उनको ग्रेट किंग बनने की
- 1:52:33मंशा रखते हुए उन्हें पैलेस की लग्जरी में
- 1:52:35बंद करके रखा। 29 साल की ऐज में जब पहली
- 1:52:39बार वो अपनी पैलेस से बाहर निकले तो
- 1:52:41उन्हें चार सीनंस दिखाई दिए। पहले उन्हें
- 1:52:45एक ओल्ड पर्सन दिखाई दिया जिसने उन्हें
- 1:52:47एजिंग के कॉन्सिक्वेंसेस से अवगत कराया।
- 1:52:51दूसरे सीन में उन्हें एक सिक पर्सन मिला
- 1:52:54जिसको कोई डिजीज थी। उसने यह बताया कि
- 1:52:57सारे ह्यूमन बीइंग्स को डिजीज और पेन होना
- 1:53:00निश्चित है। तीसरे सीन में उन्हें एक डेड
- 1:53:03बॉडी दिखाई दी। उनके चैरिटियर ने उन्हें
- 1:53:06बताया कि डेथ को रोकना इंसान के लिए
- 1:53:09नामुमकिन है।
- 1:53:11चौथा सीन एक एथेटिक यानी तपस्वी का था
- 1:53:15जिसने अपने आप को ह्यूमन सफरिंग सर्च करने
- 1:53:18में डिवोट किया हुआ था। इन फोर साइड्स के
- 1:53:20बाद ही उन्हें ह्यूमन सफरिंग को खत्म करने
- 1:53:23और रिब्थ की साइकिल से फ्री होने की
- 1:53:25प्रेरणा मिली।
- 1:53:2729 साल की ऐज में ही उन्होंने अपने घर का
- 1:53:30त्याग कर दिया। समाज के लोगों में फैली
- 1:53:33मिजरी से वह काफी इनफ्लुएंस्ड थे और उसका
- 1:53:36स्यूशन ढूंढना चाहते थे। 7 साल तक वह एक
- 1:53:40जगह से दूसरी जगह भ्रमण करते रहे और 35
- 1:53:44साल की ऐज में उन्होंने एक पीपल ट्री के
- 1:53:47नीचे एनलाइटनमेंट को पाया। इसी कारण से
- 1:53:50जगह का नाम बोधगया पड़ा जो कि आज बिहार
- 1:53:53में है। इसी के बाद उनको दनलाइटन वन यानी
- 1:53:57बुद्ध कहा जाने लगा। अपनी इस लंबी जर्नी
- 1:54:00में उन्होंने लोगों से अपने आइडियाज शेयर
- 1:54:03करना चालू किया जिसे सरमन कहते हैं। पहला
- 1:54:06सामन उन्होंने सारनाथ बनारस में दिया।
- 1:54:09उनकी फिजिक काफी स्ट्रांग थी जिसके कारण
- 1:54:12वो एक दिन में ही काफी लंबी जर्नी कर पाते
- 1:54:14थे। सिर्फ बारिश के सीजन को छोड़कर वह
- 1:54:17लगातार घूमते रहते, मेडिटेट करते और प्रीच
- 1:54:21करते रहते थे। 40 साल तक यही सिलसिला चलता
- 1:54:24रहा। इस दौरान उन्हें दूसरे सेक्स के
- 1:54:27सपोर्टर्स जैसे ब्राह्मण्स भी मिले जिनको
- 1:54:30उन्होंने आसानी से डिबेट्स में डिफीट
- 1:54:32किया।
- 1:54:33उनकी मिशनरी एक्टिविटीज ने कभी भी रिच और
- 1:54:36पुअर हाई और लो मैन और वुमन में
- 1:54:39डिस्क्रिमिनेट नहीं किया जो उनके
- 1:54:41इगेटेरियन बिलीफ्स का एक एग्जांपल है।
- 1:54:44487 बीसी में कुशीनगर में 80 साल की उम्र
- 1:54:48में उनकी डेथ हो गई। यह जगह आज ईस्टर्न
- 1:54:51यूपी के देवरिया डिस्ट्रिक्ट के कसिया नाम
- 1:54:54के विलेज में है।
- 1:54:56यहां यह जानना जरूरी है कि सिक्स्थ
- 1:54:58सेंचुरी बीसी में बुद्ध के एग्जिस्टेंस का
- 1:55:00कोई आर्कियोलॉजिकल एविडेंस अभी तक नहीं
- 1:55:03मिला है। कौशांबी, श्रावस्ती, वाराणसी,
- 1:55:07वैशाली और राजगृह जैसी सिटीज जिनमें बुद्ध
- 1:55:10की प्रेजेंस का दावा किया जाता है, वह सभी
- 1:55:12फिफ्थ सेंचुरी बीसी के बाद ही अर्बनाइज हो
- 1:55:15पाई। दोस्तों आगे बढ़ते हैं और बात करते
- 1:55:18हैं बुद्धिज्म की डॉक्ट्रिंस की।
- 1:55:21डॉक्ट्रिंस ऑफ बुद्धिज्म
- 1:55:24गौतम बुद्ध वास्तव में एक प्रैक्टिकल
- 1:55:26रिफॉर्मर थे जिन्होंने उस समय की सोसाइटी
- 1:55:29की रियलिटीज को एक्सेप्ट किया और उसके
- 1:55:31खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने खुद को समाज
- 1:55:35की सामान्य समस्याओं से जोड़ा जो लोग डेली
- 1:55:38लाइफ में सफर कर रहे थे। उनका यह मानना था
- 1:55:40कि वर्ल्ड सोरो यानी कि शोक से भरा हुआ है
- 1:55:44और लोगों की सफरिंग का मेन कारण उनकी
- 1:55:47डिजायर्स हैं। यदि इन डिजायर्स को ककर कर
- 1:55:50लिया जाए तो इंसान निर्वाणा को पा लेता
- 1:55:53है। जिसके बाद वो बर्थ और डेथ के साइकिल
- 1:55:56से फ्री हो जाता है। उनका कहना था कि
- 1:55:59निर्वाणा कोई प्लेस नहीं है जहां पहुंचा
- 1:56:01जा सकता है। बल्कि यह एक एक्सपीरियंस है
- 1:56:04जिसको इसी लाइफ में पाया जा सकता है।
- 1:56:08बुद्धिज्म में कोई भी सुप्रीम डटी या गॉड
- 1:56:10को इस्टैब्लिश नहीं किया गया। बुद्ध ने
- 1:56:13ह्यूमन मिजरी को एलिमिनेट करने के लिए एट
- 1:56:16फोल्ड पाथ यानी अष्टांगिका मार्ग को
- 1:56:19रेकमेंड किया। थर्ड सेंचुरी बीसी के एक
- 1:56:22टेक्स्ट में इस पाथ का मेंशन किया गया है।
- 1:56:25इस एट फोल्ड पाथ में इंक्लूडेड है राइट
- 1:56:27ऑब्जरवेशन यानी सम्यक दृष्टि, राइट
- 1:56:31डिटरमिनेशन यानी सम्यक संकल्प, राइट स्पीच
- 1:56:35यानी सम्यक वाणी। राइट एक्शन यानी सम्यक
- 1:56:39कर्मांतर। राइट लाइवलीहुड यानी सम्यक
- 1:56:42आजीविका। राइट एफर्ट यानी सम्यक व्यायाम।
- 1:56:46राइट अवेयरनेस यानी सम्यक स्मृति। और राइट
- 1:56:51कंसर्न यानी सम्यक समाधि।
- 1:56:55बुद्ध के अनुसार यदि मनुष्य इस एट फोल्ड
- 1:56:58पाथ को फॉलो करेगा तो वह अपने आप को
- 1:57:00रिचुअल्स को फॉलो करने की नेसेसिटीज से
- 1:57:03दूर रख पाएगा और निर्वाणा की ओर अग्रसर हो
- 1:57:06पाएगा। और ऐसा करके वो अपने फाइनल
- 1:57:09डेस्टिनेशन को पाने में सक्सेसफुल हो
- 1:57:11पाएगा। बुद्ध की सबसे इंपॉर्टेंट
- 1:57:13फिलॉसोफीस में से एक थी मिडिल पाथ। इसके
- 1:57:17हिसाब से इंसान को लग्जरी और ऑस्टेरिटी
- 1:57:19यानी तपस्वी जीवन के बीच में रहने के
- 1:57:22उपदेश दिए। दोनों ही चीजें एक्सेस में
- 1:57:25नहीं होनी चाहिए। यही फिलॉसफी बुद्ध को
- 1:57:28महावीर से अलग बनाती है। जहां महावीर ने
- 1:57:31स्ट्रिक्ट ऑस्टेरिटी को फॉलो करने को कहा।
- 1:57:34बुद्ध ने अपने फॉलोअर्स के लिए एक कोड ऑफ
- 1:57:37कंडक्ट भी बनाया। उसके प्रिंसिपल टेननेट्स
- 1:57:39कुछ इस प्रकार थे। डू नॉट कमिट वायलेंस
- 1:57:42यानी हिंसा मत करो। डू नॉट कवि द
- 1:57:45प्रॉपर्टी ऑफ अदर्स। यानी दूसरों की
- 1:57:47संपत्ति की कामना मत करो। डू नॉट यूज
- 1:57:50इनटॉक्सिकेंट्स यानी मादक द्रव्यों का
- 1:57:53प्रयोग मत करो। डू नॉट टेल अ ल यानी झूठ
- 1:57:56मत बोलो। डू नॉट इंडल्ज इन सेक्सुअल
- 1:57:59मिसकंडक्ट एंड एडल्टरी यानी व्यभिचार से
- 1:58:02दूर रहें। आप देखेंगे कि यह टीचिंग्स हमें
- 1:58:05जैनिज्म में और बाकी सभी रिलीजंस में भी
- 1:58:08देखने को मिलती हैं। बुद्ध के अनुसार हर
- 1:58:11इंसान खुद ही अपनी हैप्पीनेस के लिए
- 1:58:13रिस्पांसिबल होता है। यह फीचर बुद्धिज्म
- 1:58:16के इंडिविजुअलिस्टिक कंपोनेंट को दर्शाता
- 1:58:18है।
- 1:58:20दोस्तों, जैनिज्म और बुद्धिज्म इसी दौर
- 1:58:23में राइज हुए।
- 1:58:25तो एक नजर डालते हैं दोनों के डॉक्ट्रिनस
- 1:58:28के डिफरेंसेस में। कंपैरिजन विद जैनिज्म।
- 1:58:32बुद्धिज्म साइकिल ऑफ बर्थ एंड डेथ में
- 1:58:35बिलीव करता है जो कि सिर्फ निर्वाणा यानी
- 1:58:38इनलाइटनमेंट से ब्रेक हो सकता है। जबकि
- 1:58:41जैनिज्म इंसान के गुड और बैड डीड्स के
- 1:58:43हिसाब से चलता रहेगा जब तक लिबरेशन अचीव
- 1:58:46नहीं होता। बुद्धिज्म में सिन को डिफाइन
- 1:58:49नहीं किया गया है। जबकि जैनिज्म में
- 1:58:52दूसरों को हार्म पहुंचाना सिन बताया गया
- 1:58:54है। बुद्धिस्ट टीचिंग के अनुसार लाइफ को
- 1:58:57सफरिंग बताया गया है। जो डिजायर्स के कारण
- 1:59:00उत्पन्न होती हैं। एट फोल्ड पाथ को फॉलो
- 1:59:03करके इंसान इससे बच सकता है। जैनिज्म सभी
- 1:59:06लिविंग बीइंग्स की रिस्पेक्ट पर स्ट्रेस
- 1:59:08करता है और लिबरेशन का माध्यम फाइव वाओ
- 1:59:12बताए गए हैं। बुद्धिज्म के दो मेन सेक्स
- 1:59:15हैं। महायान और हीनयान। जैनिज्म के दो मेन
- 1:59:19सेट्स हैं श्वेतांबरस एंड दिगांबरस।
- 1:59:23दोस्तों आगे बढ़ते हैं और देखते हैं
- 1:59:26बुद्धिज्म के फीचर्स और यह भी देखेंगे कि
- 1:59:29किस तरह बुद्धिज्म का स्प्रेड हुआ। फीचर्स
- 1:59:32ऑफ बुद्धिज्म एंड कॉजेस ऑफ इट्स स्प्रेड।
- 1:59:36बुद्धिज्म ने गॉड और सोल के एकिस्टेंस को
- 1:59:39डिनाई किया। और यह फीचर इंडियन रिलीजंस की
- 1:59:42हिस्ट्री में एक रेवोल्यूशन की तरह देखा
- 1:59:44जा सकता है। बुद्धिज्म ने वर्ण सिस्टम को
- 1:59:48अटैक किया जिसके कारण वो लोअर स्ट्रेटा के
- 1:59:51लोगों से अटैच हो पाया। इसमें शुरुआती दौर
- 1:59:54में किसी भी तरह के फिलॉसोफिकल डिस्कशन को
- 1:59:56इनकरेज नहीं किया गया। जिसके चलते आम आदमी
- 2:00:00इससे अट्रैक्ट हुए। ब्राह्मणिज्म के
- 2:00:03कंपैरिजन में बुद्धिज्म लिबरल और
- 2:00:05डेमोक्रेटिक रिलजन के तौर पर उभर कर आया।
- 2:00:08बुद्धिज्म ने पर्टिकुलरली नॉन वैदिक
- 2:00:11एरियाज के लोगों को अपील किया। बुद्ध की
- 2:00:13पर्सनालिटी और उनकी प्रीचिंग के मेथड्स के
- 2:00:16कारण बुद्धिज्म का स्प्रेड काफी तेजी से
- 2:00:18हुआ।
- 2:00:20उन्होंने ईविल को गुडनेस से और हेट्रिड को
- 2:00:23लव से फाइट करने की बात कही। विट और
- 2:00:26प्रेजेंस ऑफ माइंड से उन्होंने अपने
- 2:00:28अपोनेंट्स को टैकल किया। पाली लैंग्वेज जो
- 2:00:31कि प्राकृत लैंग्वेज का एक टाइप है। उसने
- 2:00:34कॉमन लोगों के बीच बुद्धिज्म के स्प्रेड
- 2:00:36में कंट्रीब्यूट किया।
- 2:00:38और बुद्ध ने रिलीजियस ऑर्डर यानी संघ को
- 2:00:41ऑर्गेनाइज किया जो हर तरह की कास्ट, ट्रीट
- 2:00:44और सेक्स के लोगों के लिए खुला था। इन
- 2:00:47बुद्धिस्ट ऑर्डर्स यानी संघ में वुमेन को
- 2:00:50भी मेन के बराबर का अधिकार मिला। स्लेव्स
- 2:00:54केवल अपनेस्टर्स की परमिशन के बाद ही
- 2:00:56ज्वॉइ कर सकते थे। संघ को ज्वॉइ करने के
- 2:00:59लिए कॉन्टिनेंस यानी संयम, पॉवर्टी और फेथ
- 2:01:03होना जरूरी था। तो ओवरऑल अगर देखा जाए तो
- 2:01:06बुद्धिज्म के तीन प्रिंसिपल एलिमेंट्स थे।
- 2:01:09बुद्ध, धम्म और संघ। ऑर्गेनाइज्ड प्रीचिंग
- 2:01:13और संघ की मदद से बुद्धिज्म बहुत तेजी से
- 2:01:16प्रोग्रेस करने लगा। मगध, कौशाल और
- 2:01:20कौशांबी जैसे कई रिपब्लिकन स्टेट्स के
- 2:01:22रूलर्स और वहां के लोगों ने बुद्धिज्म को
- 2:01:25अपनाया। बुद्ध की डेथ के 200 साल बाद अशोक
- 2:01:29ने बुद्धिज्म को एंब्रेस किया। अशोक ने
- 2:01:32अपनी मिशनरी एक्टिविटीज से बुद्धिज्म को
- 2:01:34सेंट्रल एशिया, वेस्ट एशिया और श्रीलंका
- 2:01:37तक पहुंचाया और बुद्धिज्म को एक वर्ल्ड
- 2:01:39रिलीजन बना दिया। बुद्धिज्म का ओरिजिन
- 2:01:42जरूर इंडिया में रहा पर यह इंडिया से
- 2:01:44डिसअपीयर हो गया लेकिन साउथ एशियन, साउथ
- 2:01:47ईस्ट एशियन और ईस्ट एशियन कंट्रीज में
- 2:01:49फॉलो किया जाता है। दोस्तों, गौतम बुद्ध
- 2:01:53की डेथ के बाद उनकी टीचिंग्स को कंपाइल
- 2:01:56करने के लिए एक काउंसिल का गठन किया गया।
- 2:01:58आगे चलकर टोटल चार काउंसिल्स बुद्धिज्म
- 2:02:01में हुई। इन काउंसिल्स पर एक नजर डालते
- 2:02:04हैं।
- 2:02:05बुद्धिस्ट काउंसिल्स
- 2:02:08फर्स्ट काउंसिल किंग आजाद शत्रु के
- 2:02:12पेट्रिनेज में 483 बीसी में हुई। मंक
- 2:02:15महाकश्यप ने इसको प्रिसाइड किया। राजगृह
- 2:02:19के सत्यपाणी केव में यह काउंसिल हुई।
- 2:02:22बुद्ध की टीचिंग्स यानी सुत को प्रिजर्व
- 2:02:25करने और डिसाइपल्स के रूल्स बनाने के लिए
- 2:02:27यह काउंसिल हुई। इसी काउंसिल में बुद्ध की
- 2:02:31टीचिंग्स को तीन पितकास में डिवाइड किया
- 2:02:33गया। सेकंड काउंसिल किंग कालाशोका के
- 2:02:37पेट्रिनेज में वैशाली में 383 बीसी में
- 2:02:41हुई। इसको सबामी ने प्रिसाइड किया। थर्ड
- 2:02:45काउंसिल किंग अशोका के पेट्रिनेज में 250
- 2:02:48बीसी में पाटलिपुत्र में हुई। मोगली पुत्र
- 2:02:51तिस्सा ने इसको प्रिसाइड किया। फोर्थ
- 2:02:54काउंसिल कुषाण टेंपल के किंग कनिष्क के
- 2:02:56पेट्रिनेज में 72 एडी में कुंडलवन कश्मीर
- 2:03:00में आयोजित की गई। वासुमित्र ने इसको
- 2:03:03प्रिसाइड किया। फोर्थ काउंसिल इंपॉर्टेंट
- 2:03:06रही क्योंकि इसी काउंसिल में बुद्धिज्म दो
- 2:03:09सेक्स महायान और हीनयान में डिवाइड हो
- 2:03:12गया।
- 2:03:14दोस्तों, आज बुद्धिज्म हजारों सेक्स और
- 2:03:17स्कूल्स ऑफ थॉट्स में डिवाइडेड है। इनमें
- 2:03:19से कुछ इंपॉर्टेंट स्कूल्स और उनकी बेसिक
- 2:03:22आईडियोलॉजी को समझते हैं। स्कूल्स ऑफ
- 2:03:24बुद्धिज्म।
- 2:03:27महायान इसका लिटरल मीनिंग है ग्रेट
- 2:03:30व्हीकल। इसके अंतर्गत बुद्ध को गॉड की
- 2:03:33श्रेणी में रखा गया। बुद्ध की आइडल वरशिप
- 2:03:36कोेंस दी गई। महायान बुद्धिज्म नॉर्थ
- 2:03:39इंडिया और कश्मीर में ओरिजनेट हुआ और बाद
- 2:03:42में सेंट्रल एशिया, ईस्ट एशिया और साउथ
- 2:03:45ईस्ट एशिया में स्प्रेड हुआ। चाइना,
- 2:03:47कोरिया, तिबेट और जापान में इस बुद्धिस्ट
- 2:03:50स्कूल को फॉलो किया जाता है। हीनयान। इसका
- 2:03:54लिटरल मीनिंग है लेसर व्हीकल। इसमें बुद्ध
- 2:03:57की ओरिजिनल टीचिंग्स पर स्ट्रेस दिया गया।
- 2:03:59आइडल वरशिप को रिजेक्ट किया गया। सेल्फ
- 2:04:02डिसिप्लिन और मेडिटेशन के थ्रू इंडिविजुअल
- 2:04:05सेल्वेशन को पाने की बात कही गई। थेरावड़ा
- 2:04:08हीनियान स्कूल का ही सेट है। ओरिजिनल
- 2:04:11बुद्ध टीचिंग्स के सबसे करीब इसको माना
- 2:04:14जाता है। श्रीलंका में इसका डेवलपमेंट हुआ
- 2:04:17और वहां से साउथ ईस्ट एशिया में इसका
- 2:04:19स्प्रेड हुआ।
- 2:04:21कैंबोडिया, लाओस, म्यांमार, श्रीलंका और
- 2:04:24थाईलैंड में यह डोमिनेंट है। वज्रायना
- 2:04:28यानी द व्हीकल ऑफ थंडरब्ट। इसको तांत्रिक
- 2:04:31बुद्धिज्म भी कहा जाता है। 900 सीई में
- 2:04:35इंडिया में यह स्टार्ट हुआ। इसमें कुछ
- 2:04:37स्पेशलाइज्ड नॉलेज वाले लोगों को हीेंस दी
- 2:04:40गई है। इसके काफी स्ट्रिक्ट रिचुअल्स को
- 2:04:42फॉलो किया जाता है। अब एक नजर डालते हैं
- 2:04:45इंपॉर्टेंट बुद्धिस्ट टेक्स्ट्स पर। मेजर
- 2:04:48बुद्धिस्ट टेक्स्ट्स।
- 2:04:51बुद्ध की टीचिंग्स ओरल थी जिसको संघ के
- 2:04:55मेंबर्स ने मेमोराइज किया और स्पेशल
- 2:04:57ओकेशंस में रिसाइड किया। फर्स्ट काउंसिल
- 2:05:00में थ्री पितकास में इसको डिवाइड किया गया
- 2:05:02और 25 बीसी में पाली लैंग्वेज में इनको
- 2:05:05लिखा गया। पहला विनया पितका। इसमें मंक्स
- 2:05:09और नंस के लिए रूल्स ऑफ कंडक्ट और
- 2:05:11मोनेस्टिक लाइफ में फॉलो किए जाने वाले
- 2:05:13डिसिप्लिन को मेंशन किया गया है। दूसरा
- 2:05:16सुत पीतका। इसमें बुद्ध की मेन टीचिंग्स
- 2:05:20यानी धम्म को एक्सप्लेन किया गया है। इसको
- 2:05:23पांच निकायस में डिवाइड किया गया है।
- 2:05:27दघ निकाया, अंगुत्तरा निकाय, खुदका निकाय,
- 2:05:33संयुक्त निकाय और मध्यमा निकाय। तीसरा है
- 2:05:37अभिधम्म पीतका। इसमें मंक्स की टीचिंग्स
- 2:05:40का फिलोसोफिकल एनालिसिस दिया गया है। इसी
- 2:05:43तरह के कुछ और इंपॉर्टेंट बुद्धिस्ट
- 2:05:45टेक्स्ट हैं। जैसे दिव्या वंदना,
- 2:05:48दीपावंसा, महावंसा, मिलिंद पन्हा एसेटरा।
- 2:05:53दोस्तों, जैसा कि हमने देखा कि बुद्धिज्म
- 2:05:56इंडिया से डिसअपीयर हो गया। लेकिन यह किन
- 2:05:59कारणों की वजह से हुआ। आइए जानते हैं
- 2:06:01नेक्स्ट सेक्शन में। कॉजेस ऑफ डिक्लाइन ऑफ़
- 2:06:04बुद्धिज्म।
- 2:06:0712th सेंचुरी के अंत तक बुद्धिज्म इंडिया
- 2:06:10से ऑलमोस्ट एक्सटिंक्ट हो गया। दोस्तों,
- 2:06:13कोई भी रिलजन स्टार्ट होने का बेसिक कारण
- 2:06:15स्पिरिट ऑफ रिफॉर्म होती है। लेकिन समय के
- 2:06:18साथ वो रिचुअल्स और सेरेमनीज़ के सामने झुक
- 2:06:21जाता है। ब्राह्मणिज्म्स के जिन इविल्ल से
- 2:06:24लड़ाई लड़ते हुए बुद्धिज्म का राइज हुआ
- 2:06:26था, वही उसके डिक्लाइन का कारण बना।
- 2:06:29बुद्धिस्ट चैलेंज से लड़ने के लिए
- 2:06:31ब्राह्मणस ने अपने रिलजन को रिफॉर्म किया।
- 2:06:34उन्होंने कैटल वेल्थ को प्रिजर्व करने की
- 2:06:36बात कही और वुमेन और शूद्रास को हेवन में
- 2:06:39एडमिशन का अश्योरेंस दिया। बुद्धिस्ट
- 2:06:42मंक्स धीरे-धीरे मेन स्ट्रीम लोगों से कट
- 2:06:44ऑफ होते चले गए। उन्होंने कॉमन पीपल की
- 2:06:47लैंग्वेज यानी पाली को अबेंडन कर दिया और
- 2:06:49संस्कृत को अपना लिया जो कि
- 2:06:51इंटेलेक्चुअल्स की लैंग्वेज थी। फर्स्ट
- 2:06:54सेंचुरी के बाद से ही मंक्स ने आइडल वरशिप
- 2:06:57प्रैक्टिस करना चालू कर दिया। रिच
- 2:06:59ऑफरिंग्स और रॉयल ग्रांट्स के चलते
- 2:07:01बुद्धिस्ट मोनेस्ट्रीज के मंक्स की लाइफ
- 2:07:03इजी हो गई। कुछ मोनेस्ट्रीज जैसे नालंदा
- 2:07:07ने करीब 200 विलेजेस से रेवेन्यू कलेक्ट
- 2:07:09करना चालू कर दिया। सेवंथ सेंचुरी तक
- 2:07:12बुद्धिस्ट मोनेस्ट्रीज ई लविंग लोगों के
- 2:07:15डोमिनेशन में आ गई और गौतम बुद्ध ने जिन
- 2:07:17करप्ट प्रैक्टिससेस को प्रोहिबिट किया उसी
- 2:07:20का सेंटर बन गई। इस नए तरह के बुद्धिज्म
- 2:07:23को वज्रायन बोला गया। ब्राह्मण रूलर
- 2:07:26पुष्यमित्र शुंग ने बुद्धिस्ट्स को
- 2:07:29पर्सक्यूट किया। इसी तरह के कई इंस्टेंसेस
- 2:07:32हमें हिस्ट्री में देखने को मिलते हैं।
- 2:07:34हुनर किंग मिरर कुल ने 100्स ऑफ
- 2:07:37बुद्धिस्ट्स को मार दिया। शशांक ऑफ गडा ने
- 2:07:40बोधी ट्री को गिरवा दिया। जहां बुद्ध को
- 2:07:42इनलाइटनमेंट मिला। ट्रैवलर हुन सैंग के
- 2:07:46अनुसार करीब 1600 स्तूपास को डिस्ट्रॉय कर
- 2:07:49दिया गया और हजारों मंक्स और फॉलोअर्स को
- 2:07:52मार दिया गया। साउथ इंडिया में शेवाइट्स
- 2:07:55और वैष्णवाइट्स ने अर्ली मिडीवल एरा में
- 2:07:57जैन और बुद्धिस्ट्स दोनों को ही अपोज
- 2:08:00किया। इन कॉन्फ्लिक्ट्स के चलते बुद्धिज्म
- 2:08:03वीक हो गया। मोनेस्ट्रीज के रिच होने के
- 2:08:06बाद टर्किश इनवेडर्स स्पेशली इन्हीं को
- 2:08:08टारगेट करने लगे। उन्होंने मोनेस्ट्रीज को
- 2:08:11लूटा और बुद्धिस्ट की एक बड़ी संख्या को
- 2:08:14मौत के घाट उतार दिया। इन्हीं सब कारणों
- 2:08:17से 12th सेंचुरी तक बुद्धिज्म इंडिया से
- 2:08:19वर्चुअली डिसअपीयर हो गया। लेकिन डिसअपीयर
- 2:08:22होने के बावजूद बुद्धिज्म ने इंडियन
- 2:08:25सोसाइटी और इकॉनमी पर अपनी छाप छोड़ी। आइए
- 2:08:28जानते हैं नेक्स्ट सेक्शन में
- 2:08:30सिग्निफिकेंस एंड इनफ्लुएंस ऑफ़ बुद्धिज्म।
- 2:08:34पहले बात करते हैं इनकलिटी एंड पावर्टी पे
- 2:08:36बुद्धिज्म के व्यूज की। दोस्तों, नॉर्थ
- 2:08:40ईस्ट इंडिया में आयरन प्लाओ शेयर बेस्ड
- 2:08:42एग्रीकल्चर, ट्रेडर्स और कॉइंस के कारण
- 2:08:45ट्रेडर्स और नोबल्स ने अच्छी खासी वेल्थ
- 2:08:48जोड़ ली थी। इसके कारण सोसाइटी में सोशल
- 2:08:50और इकोनॉमिक इनकलिटीज क्रिएट हो गई।
- 2:08:53बुद्धिज्म ने लोगों को वेल्थ ना
- 2:08:55अक्यूमुलेट करने की हिदायत दी। बुद्धिज्म
- 2:08:58के अनुसार पॉवर्टी से हेट्रिड, क्रुल्टी
- 2:09:01और वायलेंस जन्म लेता है। इसीलिए पॉवर्टी
- 2:09:04का खत्म होना जरूरी है। अब बात करते हैं
- 2:09:07वर्ण क्लासिफिकेशन के बेसिस की।
- 2:09:10बुद्धिज्म के हिसाब से वर्ण क्लासिफिकेशन
- 2:09:13इंडिविजुअल एक्शन और क्वालिटीज पर बेस्ड
- 2:09:16था। अनलाइक ब्राह्मनिज्म जिनके लिए वर्ण
- 2:09:18क्लासिफिकेशन बर्थ पर बेस्ड था।
- 2:09:21अनडाउटेडली बुद्धिज्म का मेन ऑब्जेक्टिव
- 2:09:23था सेल्वेशन ऑफ द इंडिविजुअल और निर्वाणा।
- 2:09:27अब बात करते हैं स्टेटस ऑफ वुमेन एंड
- 2:09:29शूद्रास की। बुद्धिज्म का वुमेन और
- 2:09:32शूद्रास के लिए ओपन होना सोसाइटी पर एक
- 2:09:34इंपॉर्टेंट इंपैक्ट कहा जा सकता है।
- 2:09:37क्योंकि वुमेन और शूद्रास को हमेशा ही सेम
- 2:09:39कैटेगरी में रखा जाता था ब्राह्मणिज्म
- 2:09:42में। उन्हें वैदिक टेक्स्ट पढ़ने और
- 2:09:44सीक्रेट थ्रेड को पहनने की आजादी नहीं थी
- 2:09:47और बुद्धिज्म में कन्वर्ट होते ही उन्हें
- 2:09:49इस इनफीरियोरिटी मार्क्स से फ्रीडम मिला।
- 2:09:52वहीं मैनुअल लेबर की बात करें तो
- 2:09:54बुद्धिज्म ने मैनुअल लेबर का विरोध नहीं
- 2:09:57किया। इनफैक्ट बोधगया में मिले एक सेकंड
- 2:10:00सेंचुरी स्कल्प्चर में बुद्ध को प्लाऊ
- 2:10:03करते हुए देखा गया है। अब करते हैं कैटल
- 2:10:06की बात। कैटल कीेंस पर स्ट्रेस देते हुए
- 2:10:10बुद्धिज्म ने कंट्री की कैटल वेल्थ को
- 2:10:12बूस्ट किया। एक अर्ली बुद्धिस्ट टेक्स्ट
- 2:10:15सुतानी पता में कैटल को फूड, ब्यूटी,
- 2:10:19स्ट्रेंथ और हैप्पीनेस अर्थात अन्नदा,
- 2:10:22वनदा, बलदा और सुखद प्रदान करने वाला
- 2:10:25डिक्लेअर किया। और इसी कारण उनकी
- 2:10:28प्रोटेक्शन पर स्ट्रेस दिया। ब्राह्मेनिकल
- 2:10:31फिलॉसफी में काऊ की सीक्रेडनेस और नॉन
- 2:10:33वायलेंस की बात अपेरेंटली बुद्धिस्ट
- 2:10:35टीचिंग से ही इंस्पायर्ड है। अब बात
- 2:10:38करेंगे बुद्धिज्म में रैशनलिज्म की।
- 2:10:41दोस्तों बुद्धिज्म ने लोगों को
- 2:10:42सुपरस्टिट्यूशन से बाहर निकालकर लॉजिक और
- 2:10:45मेरिट के आधार पर अपने जजमेंट्स करने को
- 2:10:48कहा। इसका मतलब बुद्धिज्म ने कहीं ना कहीं
- 2:10:51रैशनलिज्म को प्रमोट किया। वहीं बुद्धिज्म
- 2:10:54ने एक नई तरह की लैंग्वेज हाइब्रिड
- 2:10:56संस्कृत को डेवलप किया जिसमें पाली और
- 2:10:59संस्कृत को ब्लेंड किया गया। ईस्ट इंडिया
- 2:11:02में कुछ टेक्स्ट्स अपभ्रंश लैंग्वेज में
- 2:11:04लिखे गए। बुद्धिस्ट मोनेस्ट्रीज लर्निंग
- 2:11:07के लिए ग्रेट सेंटर्स की तरह उभर कर आई।
- 2:11:09जिन्हें रेजिडेंशियल यूनिवर्सिटीज भी कहा
- 2:11:12जा सकता है। जैसे नालंदा और विक्रमशिला इन
- 2:11:15बिहार, वल्लभी इन गुजरात।
- 2:11:19बुद्धिज्म का इंडियन कल्चर में भी काफी
- 2:11:21कंट्रीब्यूशन रहा। आइए एक नजर डालते हैं।
- 2:11:25कंट्रीब्यूशन टू इंडियन कल्चर।
- 2:11:29बुद्धिज्म का सबसे इंपॉर्टेंट
- 2:11:30कंट्रीब्यूशन रहा कासेप्ट ऑफ अहिंसा जो आज
- 2:11:34भी इंडियन वैल्यूस में दिखाई पड़ता है।
- 2:11:36गांधी जी भी इससे प्रभावित रहे। बुद्धिज्म
- 2:11:39ने एंशिएंट इंडिया के आर्ट पर अपना प्रभाव
- 2:11:42छोड़ा। इतिहासकारों की मानें तो इंडिया
- 2:11:45में वशिप की जाने वाली फर्स्ट ह्यूमन
- 2:11:47स्टैच्यू प्रोबेबबली बुद्ध की ही कही जा
- 2:11:49सकती है। फेथफुल डेविटीज ने बुद्ध की लाइफ
- 2:11:53इवेंट्स को स्टोन में पोट्रे किया।
- 2:11:55बोधगया, सांची और भारत में मिले बुद्धिस्ट
- 2:11:58आर्टिस्टिक एक्टिविटी का एक इलुमिनेटिंग
- 2:12:00एग्जांपल कहे जा सकते हैं। गौतम बुद्ध की
- 2:12:03पैनल इमेजेस फर्स्ट सेंचुरी के बाद से ही
- 2:12:06हमको देखने को मिलती हैं। ग्रीक और इंडियन
- 2:12:08स्कल्प्चर्स ने मिलकर नॉर्थ वेस्ट
- 2:12:11फ्रंटियर में एक नई आर्ट को क्रिएट किया
- 2:12:13जो गांधारा आर्ट के नाम से प्रचलित हुई।
- 2:12:16मंक्स के रेजिडेंस के लिए रक्स में कट
- 2:12:19करके रूम्स बनाए गए। जिसके बाद बर्बर
- 2:12:22हिल्स, गया और वेस्टर्न इंडिया के नासिक
- 2:12:24के आसपास केव आर्किटेक्चर की शुरुआत हुई।
- 2:12:27साउथ के कृष्णा डेल्टा और नॉर्थ में मथुरा
- 2:12:30में भी बुद्धिस्ट आर्किटेक्चर फ्लोरिश
- 2:12:32हुआ।
- 2:12:34कंक्लूजन। तो दोस्तों, यह थी कहानी
- 2:12:38बुद्धिज्म के राइज और उसके इंडिया पर
- 2:12:41इन्फ्लुएंस की। यह सच है कि बुद्धिज्म
- 2:12:43इंडिया से डिसअपीयर हुआ। लेकिन सराहनीय है
- 2:12:46कि वर्ल्ड में आज भी बुद्धिज्म एक
- 2:12:49इंपॉर्टेंट रिलजन है। सिर्फ बुद्धिज्म में
- 2:12:52ही नहीं बुद्ध की टीचिंग्स और उनकी
- 2:12:54आइडियल्स के लिए रिस्पेक्ट आपको हर तबके
- 2:12:56के लोगों में देखने को मिलेगी। ऐसा कहा जा
- 2:12:59सकता है कि बुद्ध ह्यूमैनिटी के लिए एक
- 2:13:02ग्रेट इंस्पिरेशन है। महाजनपदास।
- 2:13:06जब हम बात करते हैं हिस्ट्री की तो हमारे
- 2:13:09दिमाग में अलग-अलग एंपायर्स और राजाओं के
- 2:13:12नाम आते हैं। जैसे कि मौर्यास के अशोका या
- 2:13:15फिर मुगल्स में अकबर या मराठाज़ में
- 2:13:18छत्रपति शिवाजी महाराज। लेकिन एंपायर
- 2:13:20बिल्डिंग के प्रोसेस की शुरुआत कब और कैसे
- 2:13:23हुई? इसका जवाब आपको मिलेगा हमारी इस
- 2:13:26वीडियो में। आज हम जानेंगे महाजनपदाज़ के
- 2:13:29बारे में जिसका लिटरल मीनिंग है लार्ज
- 2:13:32टेरिटोरियल स्टेट्स। तो चलिए सबसे पहले
- 2:13:35समझते हैं कि महाजनपदाज का ओरिजिन कब,
- 2:13:38कहां और कैसे हुआ। ओरिजिन ऑफ महाजनपदास।
- 2:13:43यह बात है सिक्स्थ सेंचुरी बीसी की जब
- 2:13:45पहली बार लार्ज टेरिटोरियल स्टेट्स
- 2:13:48एकिस्टेंस में आते हैं। बहुत से प्राचीन
- 2:13:50ग्रंथ जैसे कि बुद्धिस्ट टेक्स्ट,
- 2:13:53अंगुत्तर निकाय, जैना टेक्स्ट, भगवती
- 2:13:56सूत्र में हमें 16 महाजनपदास के बारे में
- 2:13:59पता लगता है। अगर जियोग्राफी की बात करें
- 2:14:02तो यह विंध्य पर्वत के नॉर्थ में थे।
- 2:14:04एक्सेप्ट वन दैट इज अस। नॉर्थ वेस्ट
- 2:14:08फ्रंटियर से लेकर बिहार तक इनका फैलाव था।
- 2:14:1116 महाजनपदास थे। इस बात पर तो अधिकांश
- 2:14:14एंशिएंट टेक्स्ट एग्री करते हैं। लेकिन वह
- 2:14:1716 कौन से थे? इसमें कुछ मतभेद देखने को
- 2:14:20मिलता है। पर बुद्धिस्ट टेक्स्ट अंगुत्तरा
- 2:14:23निकाय में जो 16 महाजनपदासज की लिस्ट
- 2:14:26मेंशन है उसमें आते हैं काशी कौशाल अंग
- 2:14:31मगध वजी मल चेदी वत्स कुरु पांचाल मच्छ या
- 2:14:39मत्स्य सुरसेना असक अवंती गांधार और कंबोज
- 2:14:47दोस्तों ये तो थे 16 महाजनपदाज के
- 2:14:51लेकिन सिक्स्थ सेंचुरी बीसी में ऐसा क्या
- 2:14:53हुआ कि हम लार्ज टेरिटोरियल स्टेट्स यानी
- 2:14:56महाजनपदास का फॉर्मेशन देखते हैं? आइए
- 2:14:59जानते हैं नेक्स्ट सेक्शन में फैक्टर्स
- 2:15:02फॉर द राइज ऑफ महाजनपदास।
- 2:15:04लेटर वैदिक पीरियड के टाइम से ही
- 2:15:06एग्रीकल्चर एक डोमिनेंट ऑक्यूपेशन बन जाता
- 2:15:09है और सेटल्ड लाइफस्टाइल पैटर्न की शुरुआत
- 2:15:12होती है। उसके साथ ही शुरू होता है
- 2:15:15माइग्रेशन टुवर्ड्स लोअर गेंजेटिक प्लेेंस
- 2:15:17यानी कि ईस्टर्न यूपी और बिहार का रीजन।
- 2:15:20यह रीजन सोर्स था रिच आयरन माइंस का।
- 2:15:24जिसकी वजह से आयरन का यूज बहुत बढ़ जाता
- 2:15:27है इन एग्रीकल्चर एंड वेपनरी। और इसी की
- 2:15:30वजह से हमें एग्रीकल्चर में एक सरप्लस
- 2:15:32देखने को मिलता है। अदर दन वाइड स्प्रेड
- 2:15:35यूज़ ऑफ़ आयन। इस टाइम पीरियड में कुछ
- 2:15:37रिलीजियस डेवलपमेंट्स भी एग्रीकल्चर को
- 2:15:40हेल्प करते हैं। जैसे बुद्धिज्म और
- 2:15:42जैनिज्म जैसे सेक्स का राइज होना जो नॉन
- 2:15:45वायलेंस को सपोर्ट करते थे। इससे कैटल
- 2:15:48वेल्थ बढ़ती है जो उस टाइम एग्रीकल्चर की
- 2:15:50बैकबोन थी। एग्रीकल्चर के बढ़ने से रूलिंग
- 2:15:53क्लास सरप्लस प्रोडक्शन को टैक्सेस के तौर
- 2:15:56पर कलेक्ट करना शुरू करती है। जिससे वह
- 2:15:58अपनी मिलिट्री और एडमिनिस्ट्रेटिव नीड्स
- 2:16:01को पूरा करती है। और दूसरी तरफ आयरन
- 2:16:04वेपन्स के बढ़ते प्रोडक्शन से वॉरियर
- 2:16:06क्लास भी पावरफुल होता है। यह मटेरियल
- 2:16:09एडवांटेजेस इनेबल करते हैं लोगों को अपने
- 2:16:12लैंड से लंबे समय तक अटैच होने में और साथ
- 2:16:15ही एक्सपेंड करने में भी। इनफैक्ट जनपदा
- 2:16:19का लिटरल मीनिंग होता है द फुटहोल्ड ऑफ अ
- 2:16:22ट्राइब। यानी एक ट्राइब का सेटल्ड लाइफ
- 2:16:25जीने के लिए भूमि लेना। और इस तरह से
- 2:16:28बड़े-बड़े स्टेट्स फॉर्म होने लगते हैं वि
- 2:16:31टाउंस एस देयर बेस ऑफ़ ऑपरेशंस। दोस्तों,
- 2:16:34इस पीरियड को सेकंड फेज ऑफ अर्बनाइजेशन भी
- 2:16:37बोला जाता है। आपको बता दें कि हिस्ट्री
- 2:16:40में पहला फेज ऑफ अर्बनाइजेशन हड़प्पन
- 2:16:43सिविलाइजेशन को कहा जाता है। खैर, जब हम
- 2:16:45यह समझ चुके हैं कि महाजनपदास का राइज कब,
- 2:16:48कैसे और क्यों हुआ, आइए जानते हैं इन 16
- 2:16:51महाजनपदास को डिटेल में। द 16 महाजनपदास।
- 2:16:56शुरू करते हैं काशी से। काशी आज के
- 2:16:59वाराणसी डिस्ट्रिक्ट के पास इसका लोकेशन
- 2:17:02था। इसकी कैपिटल थी वाराणसी जो गंगा और
- 2:17:05गोमती रिवर्स के बीच में थी। काशी अपने
- 2:17:08कॉटन टेक्सटाइल्स के लिए फेमस था। एंशिएंट
- 2:17:11इंडिया के जितने भी इंपॉर्टेंट रिलजन थे
- 2:17:13सभी किसी ना किसी रूप में काशी से खुद को
- 2:17:16जोड़ते हैं। जैसे कि जैनास के 23 तीर्थंकर
- 2:17:20पार्श्व के फादर को बनारस का राजा बताया
- 2:17:23गया है। बुद्ध ने भी अपना पहला समन बनारस
- 2:17:26के पास ही सारनाथ में दिया था। लेकिन
- 2:17:29बुद्ध के टाइम तक काशी महाजनपदा को कौशाला
- 2:17:32एनेक्स कर लेता है और यह मगध और कौशाला के
- 2:17:35बीच युद्ध का कारण बनता है। काशी से चलते
- 2:17:38हैं कौशाला की तरफ। कौशाला कौशाला के
- 2:17:42वेस्ट में थी रिवर गोमती और ईस्ट में थी
- 2:17:45रिवर सदानीरा जो विदेह जनपदा से इसकी
- 2:17:48बाउंड्री बनाती थी। इसकी कैपिटल थी
- 2:17:51श्रावस्ती। यह मगध के नॉर्थ वेस्ट में था।
- 2:17:54यहां का फेमस किंग था प्रसेनजीत जो बुद्ध
- 2:17:57और महावीर के कंटेंपररी भी थे। मगध के
- 2:18:01राजा अजात शत्रु और प्रसन्नजीत के बीच में
- 2:18:03सुप्रेमसी के लिए लंबा स्ट्रगल चलता है।
- 2:18:06नेक्स्ट है अंग। अंग महाजनपदा आज के
- 2:18:10मुंगेर और भागलपुर डिस्ट्रिक्ट को कवर
- 2:18:13करता था। यह मगध के ईस्ट में और राजमहल
- 2:18:16हिल्स के वेस्ट में लोकेटेड था। चंपा यहां
- 2:18:19की कैपिटल थी। यह अपने ट्रेड और कॉमर्स के
- 2:18:22लिए फेमस था। सिक्स्थ सेंचुरी बीसी के
- 2:18:24मध्य में इसको मगध एनेक्स कर लेता है। तो
- 2:18:28आइए अब बात करते हैं मगध की। मगध मगध का
- 2:18:32एरिया था पटना और गया के अराउंड साउथ
- 2:18:35बिहार में। नॉर्थ और वेस्ट साइड से रिवर
- 2:18:38सोन और गंगा इसको प्रोटेक्ट करती थी। इसकी
- 2:18:41कैपिटल गिरीवजा या राजगृह थी जो पांच
- 2:18:45हिल्स से घिरी हुई थी। इसलिए इस पर अटैक
- 2:18:47करना बहुत मुश्किल होता था। आगे चलकर मगध
- 2:18:51सबसे पावरफुल महाजनपद बनता है। अब चलते
- 2:18:54हैं वज्जी की ओर। वज्जी बिहार में वैशाली
- 2:18:58डिस्ट्रिक्ट के अराउंड था वज्जी महाजनपदा।
- 2:19:01नॉर्थ में नेपाल के हिल्स तक यह फैला हुआ
- 2:19:03था। गंडक रिवर इसको कौशाल से अलग करती थी।
- 2:19:07वज्जी एक गणसंघ था। गणसंघ का मतलब हम
- 2:19:11नेक्स्ट सेक्शन में डिटेल में समझेंगे।
- 2:19:13वज्जी आठ क्लैं्स की कन्फेडरेसी को
- 2:19:16रिप्रेजेंट करता था। जिसमें विदेहाज़,
- 2:19:20लिच्छवीस और ज्ञत्रिकास भी शामिल थे।
- 2:19:23विदेहाज़ की कैपिटल मिथिला थी। लिच्छवीस की
- 2:19:26वैशाली, ज्ञत्रिकास की कुंदपुरा। जैन
- 2:19:30तीर्थंकर वर्धमान महावीर ज्ञत्रिकास क्लैन
- 2:19:33को बिलोंग करते थे। मगध के राजा अजात
- 2:19:36शत्रु ने इनकी क्फेडरेसी को डिस्ट्रॉय
- 2:19:38किया था। अब बढ़ते हैं मल की ओर। मल। मल को
- 2:19:44भी एक गणसंघ कहा जाता था। इनकी टेरिटरी
- 2:19:47वजी के नॉर्दन बॉर्डर को टच करती थी। इनकी
- 2:19:50एक कैपिटल कुशीनगर में थी जहां गौतम बुद्ध
- 2:19:53की डेथ होती है। ऐसा कहा जाता है कि मल को
- 2:19:57500 चीफ्स रूल करते थे। मल से चलते हैं
- 2:20:01छेदी। छेदी यह आज के बुंदेलखंड के ईस्टर्न
- 2:20:04पार्ट में लोकेटेड था। इसका फैलाव मालवा
- 2:20:07प्लेटो तक कहा जाता है। इसकी कैपिटल थी
- 2:20:10सुक्तिमती। शिशुपाल जो कृष्ण का फेमस
- 2:20:14एनिमी था उसको महाभारत में छेदी का रूलर
- 2:20:17बताया गया है। अब बात करेंगे वत्स की।
- 2:20:21वत्स वत्स की कैपिटल थी कौशांबी। इनकी
- 2:20:25सेटलमेंट मॉडर्न प्रयागराज के अराउंड थी।
- 2:20:27पुराणाज़ में कहा गया है कि पांडवाज़ के
- 2:20:30डिसेंडेंट निछक्सू ने अपनी कैपिटल कौशांबी
- 2:20:33में शिफ्ट की थी। जब हस्तिनापुर में फ्लड
- 2:20:36आ गया था। मतलब वत्स कुरु क्लैन को बिलोंग
- 2:20:38करते थे। आइए अब चलते हैं कुरु देश कुरु
- 2:20:43कुरु दिल्ली मेरठ रीजन के अराउंड था। इनके
- 2:20:46बारे में हम सभी महाभारत की स्टोरी के
- 2:20:48थ्रू जानते हैं। इनकी कैपिटल थी
- 2:20:50हस्तिनापुर। हस्तिनापुर मेरठ से अबाउट 40
- 2:20:54कि.मी. की दूरी पर है। यहां आर्कियोलॉजिकल
- 2:20:57सर्वे ऑफ इंडिया ने बहुत से एक्सकवेशंस
- 2:20:59किए हैं। जिसमें मिले आर्टिफेक्ट्स को
- 2:21:01महाभारत पीरियड से लिंक करके देखा जाता
- 2:21:04है। 2020 के बजट में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया
- 2:21:07ने हस्तिनापुर को आइकॉनिक साइट के रूप में
- 2:21:10डेवलप करने का डिसीजन भी लिया। यहां से
- 2:21:13चलते हैं अब हम पांचाल। पांचाल। पांचाल
- 2:21:16लोकेटेड था रोहिलखंड और सेंट्रल दुआब के
- 2:21:19रीजन में। इनके दो लीनएजेस थे। नॉर्दर्न
- 2:21:23पांचाल जिनकी कैपिटल थी अहिछत्र में और
- 2:21:26सदर्न पांचाल जिनकी कैपिटल थी कंपिलिया।
- 2:21:30इनके क्लोज रिलेशन थे कुरु के साथ।
- 2:21:33महाभारत में पांडवाज की पत्नी द्रोपदी
- 2:21:36पांचाल से ही थी। इसलिए उन्हें पांचाली भी
- 2:21:39कहा गया है। पांचाल से चलते हैं मत्स्य की
- 2:21:42तरफ। मत्स्य। मत्स्य राजस्थान में जयपुर,
- 2:21:46भरतपुर, अलवर रीजन के अराउंड था। कैपिटल
- 2:21:49थी विराट नगर जो फेमस है पांडवों की
- 2:21:52हाइडिंग प्लेस के रूप में। इसको भी
- 2:21:54इवेंचुअली मगध अपने अंडर मिला लेता है।
- 2:21:57यहां से चलते हैं सुरसेना की ओर। सुरसेना
- 2:22:02सुरसेना की कैपिटल थी मथुरा। पुराण और
- 2:22:06महाभारत में मथुरा की रूलिंग फैमिली को
- 2:22:08यदुस कहा जाता है। महाभारत में भगवान
- 2:22:12कृष्ण को यहां का राजा बताया गया है। अब
- 2:22:15चलते हैं साउथ ऑफ विंध्यास असिका की ओर।
- 2:22:18असका अस लोकेटेड था रिवर गोदावरी के
- 2:22:21किनारे पर। यह अकेला महाजनपद है जो विंध्य
- 2:22:24पर्वत के साउथ में था। नियर मॉडर्न पैठान
- 2:22:27इन महाराष्ट्र। कैपिटल थी प्रतिष्ठान जो
- 2:22:31एंशिएंट नाम है पैठन का। अब बात करते हैं
- 2:22:35अवंती की। अवंती। अवंती अपने टाइम का एक
- 2:22:39पावरफुल महाजनपद था। मध्य प्रदेश के
- 2:22:42उज्जैन के पास इसकी लोकेशन थी। रिवर
- 2:22:44नर्मदा तक इसका एरिया फैला हुआ था। इसकी
- 2:22:47नॉर्दन कैपिटल उज्जैन थी और सदर्न
- 2:22:50महिष्मती।
- 2:22:52सिक्स्थ सेंचुरी बीसी में इस पर एक
- 2:22:54पावरफुल राजा प्रद्योता का रूल होता है।
- 2:22:57अब चलते हैं नॉर्थ में गांधार की तरफ।
- 2:23:01गांधार गांधार की लोकेशन काबुल और
- 2:23:05रावलपिंडी के बीच में थी। कैपिटल तक्षशिला
- 2:23:09ट्रेड और लर्निंग सेंटर के रूप में फेमस
- 2:23:11थी। इंपॉर्टेंट किंग थे पुष्कर सरिन।
- 2:23:14गांधार को पर्शियंस ककर कर लेते हैं।
- 2:23:17सिक्स्थ सेंचुरी बीसी के एंड में। महाभारत
- 2:23:20में धृतराष्ट्र की वाइफ गांधारी यहां की
- 2:23:23राजकुमारी थी और फेमस मामा शकुनी गांधार
- 2:23:27के राजा।
- 2:23:29अब चलते हैं कंबोज।
- 2:23:31कंबोज यह गांधार के पास में ही लोकेटेड
- 2:23:34था। प्रेजेंट डे पुछ एरिया के अराउंड।
- 2:23:37कंबोज को ब्राह्मेनिकल टेक्स्ट में
- 2:23:40अनकल्चरर्ड कहा गया है। कैपिटल थी पुछ। तो
- 2:23:44दोस्तों, यह तो बात हुई इंडिविजुअल
- 2:23:46महाजनपद की कुछ हिस्ट्री और ज्योग्राफी
- 2:23:49की। आपने यहां एक नया टर्म सुना गणसंघ। तो
- 2:23:53चलिए अब इस कांसेप्ट को समझते हैं। गणसंघस
- 2:23:57एंड देयर राइज। महाजनपदाज में दो तरह के
- 2:24:01पॉलिटिकल सिस्टम देखने को मिलते हैं।
- 2:24:03मोनोकीज़ एंड नॉन मोनार्कियल स्टेट्स
- 2:24:07जिन्हें कहा जाता है गणसंघ। 16 महाजनपदाज़
- 2:24:11में से दो वज्जी और मल गणसंघ थे। इनके
- 2:24:15अलावा और भी गणसंघ का मेंशन हमें
- 2:24:18बुद्धिस्ट टेक्स्ट में मिलता है। जैसे कि
- 2:24:21साकियाज़ ऑफ कपिलवस्तु, कोलियाज़ ऑफ
- 2:24:23रामग्राम, मौर्यज़ ऑफ पिपललीवाहा एसेटरा।
- 2:24:27इन गणसंघ में पॉलिटिकल पावर ट्राइबल
- 2:24:30ओलिगाकीज़ के पास होती थी। मतलब कोई एक
- 2:24:33पावरफुल राजा ना होकर एक ग्रुप ऑफ पीपल
- 2:24:36रूल करता था। अब मोनार्कियल सिस्टम की जगह
- 2:24:39गणसघ का सिस्टम क्यों आया? इसके पीछे कुछ
- 2:24:42रीजंस थे। जैसे कि पहला यह लेटर वैदिक
- 2:24:45पीरियड में इवॉल्व हुए। लाइफ पैटर्न के
- 2:24:48खिलाफ एक रिएक्शन था। लेटर वैदिक पीरियड
- 2:24:51में बहुत सारी क्लास और कास्ट
- 2:24:53रिस्ट्रिकशंस आ जाती हैं। जिससे लाइफ काफी
- 2:24:55रिजिड हो जाती है। कुछ लोग इसके अगेंस्ट
- 2:24:58होते हैं। इसलिए वह सिंपल ट्राइबल
- 2:25:00लाइफस्टाइल की तरफ जाते हैं जो हमें गणसघ
- 2:25:03में देखने को मिलता है। दूसरा गणसघ
- 2:25:06ब्राहणस की बढ़ती हुई पावर के अगेंस्ट भी
- 2:25:09एक रिएक्शन था। गणसंघ में क्षत्रिय को
- 2:25:12ज्यादा प्रोमिनेंस मिलती है। और तीसरा
- 2:25:15ट्राइबल इक्वलिटी के आईडिया से भी पीपल
- 2:25:18इंस्पायर्ड थे। जिसमें सिंगल राजा कोेंस
- 2:25:21नहीं दी जाती थी। आइए अब जानते हैं कि
- 2:25:24मोनकी और गणसंघ सिस्टम में क्या अंतर था।
- 2:25:28डिफरेंस बिटवीन मोनकी एंड गणसंघस।
- 2:25:32मोनकीज़ में एक ही राजा के पास रेवेन्यू
- 2:25:35लेने का राइट होता था। जबकि गणसंघ में हर
- 2:25:38एक ट्राइबल ओलिगाक के पास यह राइट था।
- 2:25:41मोनकी में एक स्टैंडिंग आर्मी रहती थी।
- 2:25:44लेकिन ट्राइबल ओलिगाकी में हर एक राजा
- 2:25:46अपनी छोटी सी आर्मी रखता था। ब्राह्मणास
- 2:25:49का इन्फ्लुएंस मोनार्कियल सिस्टम में बहुत
- 2:25:52ज्यादा था। लेकिन गणसघ में उन्हें उतनीेंस
- 2:25:55नहीं दी जाती थी। और सबसे बड़ा डिफरेंस तो
- 2:25:58यही था कि गणसंघ में ओलगार्किक असेंबली के
- 2:26:01पास पावर थी ना कि एक इंडिविजुअल के पास
- 2:26:04मोनार्कियल सिस्टम के जैसे। गणसंघ में
- 2:26:07मोनोकी के जैसे किंगशिप हेरिडिटरी भी नहीं
- 2:26:10थी। यहां चीफ यूजुअली इ किया जाता था।
- 2:26:14दोस्तों लेकिन एक सवाल उठता है कि क्या
- 2:26:17गणसंघ डेमोक्रेटिक थे? आइए जानते हैं इसके
- 2:26:20बारे में नेक्स्ट सेक्शन में। वह गण संघस
- 2:26:24डेमोक्रेटिक। कुछ अर्ली स्टडीज में गण संघ
- 2:26:27को डेमोक्रेटिक कहा गया था। लेकिन जब हम
- 2:26:29इनके बारे में डिटेल में समझते हैं तो पता
- 2:26:32चलता है कि यह पूरी तरह डेमोक्रेटिक नहीं
- 2:26:35थे। हां, यह सही है कि यहां का चीफ
- 2:26:38इलेक्शन के थ्रू चुना जाता था। लेकिन इस
- 2:26:40इलेक्शन में सभी लोग पार्टिसिपेट नहीं कर
- 2:26:42सकते थे। सिर्फ कुछ क्षत्रिय फैमिलीज को
- 2:26:45ही यह राइट था। यहां सभी को इक्वल राइट्स
- 2:26:48नहीं थे। जैसे कि वुमेन को असेंबली में
- 2:26:51पार्टिसिपेट नहीं करने दिया जाता था। इनके
- 2:26:54नाम लीडिंग क्षत्रियस लीनिएज के नाम पर ही
- 2:26:57रखे गए थे। क्योंकि उनकी पोजीशन सबसे
- 2:26:59स्ट्रांग होती थी। बाकी क्लासेस को
- 2:27:02सबोर्डिनेट स्टेटस मिला हुआ था। तो हम कह
- 2:27:04सकते हैं कि गणसंघ का नेचर डेमोक्रेटिक ना
- 2:27:07होकर ओलगाकिक फॉर्म का था। हमने गणसंघ के
- 2:27:11सिस्टम को तो समझ लिया। तो अब चलिए समझते
- 2:27:13हैं मोनार्कियल सिस्टम को।
- 2:27:17मोनार्कियल सिस्टम इन किंगडम्स। दोस्तों
- 2:27:20मोनार्कियल सिस्टम्स में एक पावरफुल
- 2:27:22हेरिडिटरी किंग होता था। उसकी
- 2:27:24एडमिनिस्ट्रेशन में हेल्प करने के लिए कुछ
- 2:27:27ऑफिशियल्स भी होते थे। जैसे कि मंत्री,
- 2:27:30सेना नायक, जज, चीफ अकाउंटेंट वगैरह। यह
- 2:27:34एक स्ट्रांग आर्मी मेंटेन करते थे। जिससे
- 2:27:37अपनी टेरिटरी का एक्सपेंशन और प्रोटेक्शन
- 2:27:39दोनों कर सकें। एंशिएंट टाइम में
- 2:27:41मोनार्किकल सिस्टम ही डोमिनेंट फॉर्म ऑफ
- 2:27:44गवर्नमेंट था। सिक्स्थ सेंचुरी का एंड
- 2:27:47होते-होते मोनार्किकल स्टेट्स ऑलमोस्ट सभी
- 2:27:49गणसघ को एनिक्स कर लेते हैं। उसके बाद की
- 2:27:52पॉलिटिकल हिस्ट्री इन सभी स्टेट्स के बीच
- 2:27:55सुप्रेमसी के लिए एक स्ट्रगल कही जा सकती
- 2:27:57है। अल्टीमेटली उस स्ट्रगल में मगध बनता
- 2:28:01है सबसे पावरफुल किंगडम और वो इंडिया का
- 2:28:03सबसे पहला एंपायर कहलाता है। जिसकी बात हम
- 2:28:06अलग लेक्चर में करेंगे। कंक्लूडिंग
- 2:28:09रिमार्क्स दोस्तों, तो यह थे सिक्स्थ
- 2:28:12सेंचुरी टू फोर्थ सेंचुरी बीसी के कुछ
- 2:28:15इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट्स। हम कहीं ना कहीं
- 2:28:18इसे इंडिया की पॉलिटिकल हिस्ट्री की
- 2:28:20शुरुआत कह सकते हैं। महाजनपदास के पीरियड
- 2:28:23में ही पहली बार हमें पावरफुल राजा मिलते
- 2:28:26हैं और प्रॉपर फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट भी जो
- 2:28:28कि एक बेडरॉक है आने वाले एंपायर्स की।
- 2:28:32राइज ऑफ मगध एंड फाउंडेशन ऑफ मौर्यन
- 2:28:35एंपायर। आज हम उस रीजन की बात करने वाले
- 2:28:38हैं जहां एंशिएंट इंडिया का पहला एंपायर
- 2:28:41फॉर्म होता है। जी हां, हम जानेंगे कि
- 2:28:44कैसे मगध का राइज होता है एक महाजनपद से
- 2:28:47एंपायर तक। इसी बीच हम बात करेंगे
- 2:28:50एलेक्जेंडर के फेमस इन्वजन की और फाइनली
- 2:28:53बढ़ेंगे मौर्यन एंपायर के फाउंडेशन की
- 2:28:55तरफ। आइए शुरू करते हैं सबसे पहले मगध की
- 2:28:58ज्योग्राफी से। जियोग्राफी ऑफ मगध।
- 2:29:02मगध 16 महाजनपदास में से एक था। यह आज के
- 2:29:07बिहार स्टेट के पटना, गया, नालंदा और
- 2:29:10शाहबाद डिस्ट्रिक्ट्स को कवर करता था।
- 2:29:13इसके साउथ वेस्ट में अवंती था, नॉर्थ
- 2:29:15वेस्ट में कोसाल और नॉर्थ में वजीन
- 2:29:18फेडरेसी। इसकी अर्ली कैपिटल थी राजगृह जो
- 2:29:22बाद में शिफ्ट होकर बनती है पाटलिपुत्र।
- 2:29:25यह एरिया फर्टाइल सोइल और रिच आयरन माइंस
- 2:29:29का सोर्स था। अब जानते हैं मगध की
- 2:29:32पॉलिटिकल हिस्ट्री के बारे में। पिटिकल
- 2:29:34हिस्ट्री ऑफ मगध। मगध का पहला इंपॉर्टेंट
- 2:29:38रूलर माना जाता है बिंबिसार को जो कि
- 2:29:40बुद्ध के कंटेंपररी थे। बिंबिसार हरियंक
- 2:29:44डायनेस्टी को बिलोंग करते थे। यह 52 इयर्स
- 2:29:47तक मगध के राजा रहते हैं। रफली फ्रॉम 544
- 2:29:50बीसी टू 492 बीसी। बिंबिसार मगध की
- 2:29:54टेरिटरी को बढ़ाते हैं। थ्रू मैरिज अलायसेस
- 2:29:57एंड वॉर। कोसाल की प्रिंसेस के साथ मैरिज
- 2:30:01करने पर इनको काशी का कुछ पार्ट डरी में
- 2:30:03मिलता है। वहीं अंगा को वॉर में जीत लिया
- 2:30:06जाता है। साथ ही वैशाली की लिच्छवी
- 2:30:09प्रिंसेस के साथ शादी करने से मगध की
- 2:30:11डिप्लोमेटिक पावर बढ़ती है। कहा जाता है
- 2:30:14कि बिंबिसार को उनके ही बेटे अजात शत्रु
- 2:30:17इंप्रज कर देते हैं और मार देते हैं।
- 2:30:20लेकिन बिंबिसार की डेथ का मतलब यह नहीं था
- 2:30:22कि मगध की पावर कम हो जाए। मगध की पावर और
- 2:30:26भी ज्यादा बढ़ जाती है अंडर आजाद शत्रु जो
- 2:30:29492 बीसी में मगध की राजगद्दी पर बैठते
- 2:30:33हैं। अजातशत्रु कौशाल के राजा प्रसेनजीत
- 2:30:36पर अटैक करते हैं और पूरे काशी पर अपना
- 2:30:39कंट्रोल इस्टैब्लिश करते हैं। उसके बाद यह
- 2:30:42टारगेट करते हैं वज्जी को जिसमें
- 2:30:44कंस्परेसी की हेल्प से डिसेंशन पैदा कर
- 2:30:47जीत हासिल करते हैं। अजात शत्रु रूल करते
- 2:30:50हैं 460 बीसी तक। उसके बाद मगध के राजा
- 2:30:54बनते हैं उदयन। उदयन गंगा और सोन नदी के
- 2:30:57कॉन्फ्लुएंस पर एक फोर्ट कंस्ट्रक्ट
- 2:31:00करवाते हैं। उदयन के बाद एक नई डायनेस्टी
- 2:31:02आती है मगध में शिशुनाग की। इनका सबसे
- 2:31:06बड़ा अचीवमेंट था अवंती की पावर को
- 2:31:09डिस्ट्रॉय करना। शिशुनाग डायनेस्टी लंबे
- 2:31:12समय तक नहीं रहती और उसकी जगह आती है नंद
- 2:31:15डायनेस्टी। नंद को इंडिया का पहला एंपायर
- 2:31:19बिल्डर भी कहा जाता है। तो अब थोड़ा डिटेल
- 2:31:22में जानते हैं पावरफुल नंद डायनेस्टी के
- 2:31:24बारे में। स्टोरी ऑफ नंद डायनेस्टी। नंद
- 2:31:29डायनेस्टी 343 से 321 बीसी के बीच मगध को
- 2:31:33रूल करती हैं। इसके फाउंडर थे महापद्मंदा।
- 2:31:37पुराणास में महापद्मंदा को क्षत्रिय क्लास
- 2:31:40का सफाया करने वाला कहा गया है। क्योंकि
- 2:31:42इन्होंने नॉर्दन इंडिया की सभी रूलिंग
- 2:31:44डायनेस्टीज जैसे कि पांचालस, कुरूस,
- 2:31:48अस्माकस, इक्षवाकुस, सूर्यसेनास एटसेट्रा
- 2:31:51को हराकर इनके स्टेट्स को एनेक्स कर लिया
- 2:31:54था। इंडिया और ग्रेको रोमन ट्रेडिशंस इनको
- 2:31:57लो बर्थ का बताते हैं। बुद्धिस्ट टेक्स्ट
- 2:32:00में इनको अननोन लीनिएज का बताया गया है।
- 2:32:03सभी सोर्सेज में नंद डायनेस्टी के नाइन
- 2:32:06रूलर्स बताए गए हैं। लेकिन इनके नाम को
- 2:32:09लेकर सभी में डिफरेंस देखने को मिलता है।
- 2:32:11लास्ट नंद किंग धननंद को बताया जाता है जो
- 2:32:15महापद्म नंद के बेटे थे। इनके पास एक
- 2:32:18विशाल सेना थी। ग्रीक सोर्सेस के
- 2:32:20अकॉर्डिंग नंद की सेना में 2000 कैवलरी, 2
- 2:32:24लाख इनफेंट्री, 2000 चैरियट्स और 3000
- 2:32:27एलीिफेंट्स थे। महापद्मंद कलिंग को भी ककर
- 2:32:31कर लेते हैं। लास्ट नंद रूलर धननंद के
- 2:32:34टाइम में ही एलेक्जेंडर का इन्वेशन इंडिया
- 2:32:37पर होता है। लेकिन एलेग्जेंडर की आर्मी
- 2:32:40ईस्ट में मगध की सेना का सामना करने के
- 2:32:42लिए आगे नहीं बढ़ती। इसलिए एलेग्जेंडर और
- 2:32:45धनानंद कभी आमने-सामने नहीं आते। लेकिन
- 2:32:48धनानंद अपने असभ्य स्वभाव और शोषणकारी
- 2:32:51टैक्स पॉलिसीज की वजह से अनपॉपुलर बन जाते
- 2:32:54हैं। और मगध की प्रजा उनके खिलाफ जाकर
- 2:32:57चंद्रगुप्त मौर्य की हेल्प करती है मगध का
- 2:33:00राजा बनने में। चंद्रगुप्त मौर्य धननंद को
- 2:33:03हराकर 321 बीसी में मौर्यन डायनेस्टी की
- 2:33:06शुरुआत करते हैं। जिसकी बात हम आगे डिटेल
- 2:33:09में करेंगे। तो दोस्तों, मगध के राइज को
- 2:33:12तो हमने जान लिया। अब आइए समझते हैं कि
- 2:33:15ऐसे क्या रीजंस थे कि 16 महाजनपदास में से
- 2:33:19मगध ही एक एंपायर फॉर्म करने में
- 2:33:21सक्सेसफुल होता है।
- 2:33:24कॉजेस ऑफ मगधास सक्सेस।
- 2:33:28मगध की सक्सेस के पीछे बहुत सारे फैक्टर्स
- 2:33:30थे। जैसे एक रीजन था एंबिशियस और काबिल
- 2:33:34रूलर्स का होना। चाहे वह बिंबिसार हो या
- 2:33:37महापद्मंदा। यह सभी रूलर्स मगध की पावर
- 2:33:40बढ़ाने के लिए पैशनेट थे। दूसरा फैक्टर था
- 2:33:43मगध की ज्योग्राफिकल लोकेशन। यहां पर रिच
- 2:33:47आयरन माइंस थी जिससे मगध के रूलर्स को
- 2:33:50वेपंस की इजी सप्लाई पॉसिबल थी। मगध का
- 2:33:53रीजन फर्टाइल एरिया था। इसलिए यहां पे
- 2:33:56एग्रीकल्चरल सरप्लस भी ज्यादा अटेन होता
- 2:33:58था। जो रूलर्स ईजीली टैक्स के फॉर्म में
- 2:34:01कलेक्ट कर सकते थे। इस रीजन में एलीिफेंट
- 2:34:04की भी अबंडेंट सप्लाई थी जो हेल्प करती है
- 2:34:06एक पावरफुल आर्मी बनाने में। इसके अलावा
- 2:34:08मगध की कैपिटल्स का स्ट्रेटेजिक पॉइंट पर
- 2:34:11होना भी एक फैक्टर था उनकी सक्सेस का।
- 2:34:14पहली कैपिटल राजगीर पांच हिल्स से
- 2:34:17सराउंडेड थी। इससे उस पर कॉन्क्वेस्ट करना
- 2:34:20मुश्किल था। दूसरी कैपिटल पाटलिपुत्र बहुत
- 2:34:23सी रिवर्स जैसे कि गंगा, गंडक, सोन और
- 2:34:26पुनपुन के कॉन्फ्लुएंस पर थी। इसलिए उसको
- 2:34:29वाटर फ्रंट या जलदुर्ग भी कहा जाता था।
- 2:34:32इसको भी कैप्चर करना इजी नहीं था। यह
- 2:34:34रिवर्स ट्रांसपोर्ट का इजी मीडियम भी थी
- 2:34:37जिससे ट्रेड बढ़ता है। जैसे कि गंगा के
- 2:34:40रास्ते वाराणसी, कौशांबी जैसी सिटीज के
- 2:34:43साथ ट्रेड होता था। इसके अलावा मगध के
- 2:34:46रूलर्स को मैटेलिक मनी के बढ़ते यूसेज और
- 2:34:48टाउनंस के डेवलपमेंट का भी फायदा पहुंचता
- 2:34:50है। क्योंकि ट्रेड और कॉमर्स के डेवलपमेंट
- 2:34:53पर वो टोल टैक्स कलेक्ट कर सकते थे। यह
- 2:34:56टैक्सेस हेल्प करते हैं एक विशाल आर्मी को
- 2:34:58मेंटेन करने में। यह सभी फैक्टर्स मिलकर
- 2:35:01मगध को एंपायर बनने में सक्सेस दिलाते
- 2:35:04हैं। मगध के राइज के टाइम ही एक और
- 2:35:07इंपॉर्टेंट हिस्टोरिकल इवेंट होता है। वो
- 2:35:09था एलेक्जेंडर का इन्वेशन। तो चलिए अब
- 2:35:13उसके बारे में भी जानते हैं।
- 2:35:16एलेक्जेंडर्स इन्वेशन ऑफ इंडिया। मगध
- 2:35:20एंपायर के नॉर्थ वेस्ट बॉर्डर पर था
- 2:35:22इरेनियन एंपायर। यहां फोर्थ सेंचुरी बीसी
- 2:35:25में ग्रीक्स और इरेनियंस के बीच फाइट चल
- 2:35:28रही थी। वर्ल्ड सुप्रेमसी के लिए
- 2:35:31मेसिडोनिया की एलेक्जेंडर की लीडरशिप में
- 2:35:33ग्रीक्स फाइनली इरेनियन एंपायर को
- 2:35:36डिस्ट्रॉय कर देते हैं। एलेक्जेंडर एशिया
- 2:35:38माइनर और इराक को भी जीत चुके होते हैं।
- 2:35:41इसके बाद वह बढ़ते हैं इंडिया की तरफ।
- 2:35:44इंडिया की इमेंस वेल्थ के किस्से उन्होंने
- 2:35:46भी सुने थे जो उनको टेंप्ट करते हैं
- 2:35:48इंडिया के इन्वेशन के लिए। एलेग्जेंडर को
- 2:35:52जियोग्राफिकल नॉलेज और नेचुरल हिस्ट्री के
- 2:35:54लिए भी पैशन था। इंडिया एलेक्जेंडर के
- 2:35:57एंपायर के कंपैरिजन में कहीं ज्यादा
- 2:35:59फर्टाइल और प्रोडक्टिव था। यह भी एक रीजन
- 2:36:02था उनके इंडिया इन्वेशन का। नॉर्थवेस्ट
- 2:36:05इंडिया की पॉलिटिकल कंडीशन भी एलेग्जेंडर
- 2:36:07के प्लान को सूट कर रही थी। क्योंकि यह
- 2:36:09एरिया बहुत सी इंडिपेंडेंट मोनकीज़ और
- 2:36:12ट्राइबल रिपब्लिक के बीच डिवाइडेड था।
- 2:36:15एलेक्जेंडर के लिए इन्हें एक-एक करके
- 2:36:17जीतना आसान था। एलेग्जेंडर काबुल से खबर
- 2:36:21पास के रास्ते 326 बीसी में इंडिया आते
- 2:36:24हैं। उनको 5 महीने लगते हैं इंडस रिवर तक
- 2:36:27पहुंचने में। अंबी जो तक्षशिला के रूलर थे
- 2:36:31एलेक्जेंडर के सामने सरेंडर कर देते हैं
- 2:36:33और बहुत सारे गिफ्ट्स एलेक्जेंडर को देते
- 2:36:36हैं। इसके बाद एलेक्जेंडर जब झेलम पहुंचते
- 2:36:39हैं तब उनका सामना होता है पोरस से। पोरस
- 2:36:43किंगडम ऑफ अभिसार के राजा थे। पोरस और
- 2:36:46एलेग्जेंडर के बीच होता है बैटल ऑफ
- 2:36:48हाइडस्पिस। एलेक्जेंडर पोरस को हरा तो
- 2:36:52देते हैं लेकिन पोरस की बहादुरी और साहस
- 2:36:54से काफी इंप्रेस होते हैं। इसलिए वह पोरस
- 2:36:57को उनका किंगडम वापस कर उनको अपना एलय बना
- 2:37:00लेते हैं। उसके बाद वो ब्यास तक आगे बढ़ते
- 2:37:03हैं। एलेक्जेंडर तो और भी आगे जाना चाहता
- 2:37:06था लेकिन उनकी आर्मी आगे बढ़ने से मना कर
- 2:37:09देती है। ग्रीक सोल्जर्स 10 साल से लगातार
- 2:37:12युद्ध करके परेशान हो चुके थे। इंडिया का
- 2:37:15हॉट क्लाइमेट भी उन्हें पसंद नहीं आ रहा
- 2:37:17था और अब वह बस घर वापस जाना चाहते थे।
- 2:37:21उन्होंने मगध की स्ट्रांग आर्मी के बारे
- 2:37:23में भी सुना था और वह उसका सामना नहीं
- 2:37:25करना चाहते थे। इसलिए एलेक्जेंडर के
- 2:37:28बार-बार कहने पर भी वह नहीं मानते हैं। और
- 2:37:31एलेक्जेंडर जिसे कोई भी दुश्मन हरा नहीं
- 2:37:34सका था, अपने ही सोल्जर्स के सामने हार
- 2:37:37जाते हैं। वापस जाते टाइम एलेक्जेंडर बहुत
- 2:37:40से छोटे-छोटे रिपब्लिक्स सिबोई, एगलसोई,
- 2:37:43क्षुद्रकास, मल्लस को भी डिस्ट्रॉय करते
- 2:37:46हुए जाते हैं। एलेक्जेंडर 323 बीसी में
- 2:37:50बैबीलॉन पहुंचते हैं। जहां फीवर से उनकी
- 2:37:52डेथ हो जाती है। 19 मंथ्स के लिए
- 2:37:55एलेक्जेंडर इंडिया में रहते हैं। ज्यादातर
- 2:37:58जीते हुए स्टेट्स को वो उनके पुराने
- 2:38:00रूलर्स को ही वापस कर देते हैं जब वो उनकी
- 2:38:02अथॉरिटी को एक्सेप्ट कर लेते हैं। अपनी
- 2:38:05टेरिटोरियल पोजेशंस को वो तीन पार्ट्स में
- 2:38:08डिवाइड करते हैं और सब में एक ग्रीक
- 2:38:10गवर्नर अपॉइंट करके जाते हैं। वो कुछ
- 2:38:13सिटीज की भी फाउंडेशन यहां रखते हैं। जैसे
- 2:38:16कि काबुल रीजन में एलेक्जेंड्रिया, झेलम
- 2:38:18पर बुकेफला और सिंध में एलेक्जेंड्रिया।
- 2:38:22तो यह थी एलेक्जेंडर के इन्वेशन की कहानी।
- 2:38:25अब चलिए समझते हैं इसके इफेक्ट्स को।
- 2:38:28इफेक्ट्स ऑफ एलेक्जेंडर्स इन्वेशन।
- 2:38:30एलेक्जेंडर के इन्वेजन की वजह से एंशिएंट
- 2:38:33यूरोप और एंशिएंट इंडिया पहली बार क्लोज
- 2:38:36कांटेक्ट में आते हैं। इस इन्वेशन से चार
- 2:38:39नए लैंड और सी रूट्स खुलते हैं इंडिया और
- 2:38:42ग्रीस के बीच। इससे ग्रीक मर्चेंट्स और
- 2:38:44क्राफ्ट्समैन का इंडिया में आना बढ़ता है
- 2:38:47और ट्रेड फैसिलिटीज और भी ज्यादा बढ़ जाती
- 2:38:49हैं। एलेग्जेंडर ने जो सिटीज फाउंड की थी
- 2:38:52इंडिया में जैसे कि बुकेफेला,
- 2:38:54एलेक्जेंड्रिया एटसेटरा वहां लार्ज नंबर
- 2:38:57में ग्रीक लोग सेटल होते हैं। एलेक्जेंडर
- 2:39:00पहली बार ओशन देखते हैं एट द माउथ ऑफ द
- 2:39:03इंडस। उनको इसकी ज्योग्राफी जानने में डीप
- 2:39:06इंटरेस्ट था। इसलिए वह अपने एक नेवल ऑफिसर
- 2:39:08नियाकस की लीडरशिप में एक फ्लट भेजते हैं
- 2:39:11टू एक्सप्लोर द कोस्ट। ग्रीक हिस्टोरियंस
- 2:39:14ने एलेग्जेंडर के कैंपेन के क्लियरली
- 2:39:16डेटेड रिकॉर्ड्स भी दिए हैं। यह हमें
- 2:39:19हेल्प करते हैं आगे के इवेंट्स की सही
- 2:39:21क्रोनोलॉजी डिसाइड करने में। इसके अलावा
- 2:39:24यह हिस्टोरियंस हमें सोशल और इकोनॉमिक
- 2:39:26कंडीशंस के बारे में भी इंपॉर्टेंट
- 2:39:28इंफॉर्मेशन बताते हैं। जैसे कि सती प्रथा
- 2:39:31के बारे में। नॉर्थ वेस्ट में ऑक्सिन की
- 2:39:34फाइन ब्रीड की इंफॉर्मेशन भी है।
- 2:39:36एलेग्जेंडर यहां से 2 लाख ऑक्सिन
- 2:39:38मेसडोनिया भेजते हैं। नॉर्थ वेस्ट के
- 2:39:41छोटे-छोटे स्टेट्स को डिस्ट्रॉय करके
- 2:39:43एलेक्जेंडर यहां मौर्यन एंपायर के
- 2:39:45एक्सपेंशन का रास्ता भी साफ कर देते हैं।
- 2:39:48तो हम कह सकते हैं कि एलेक्जेंडर के
- 2:39:50इन्वेशन के न सिर्फ पॉलिटिकल बल्कि सोशल,
- 2:39:53इकोनॉमिक और कल्चरल इफेक्ट्स भी देखने को
- 2:39:55मिलते हैं। दोस्तों, अभी तक हमने देखा कि
- 2:39:58कैसे मगध एक महाजनपदा अपनी पावर ग्रेजुअली
- 2:40:02बढ़ाता है और बनता है इंडिया का पहला
- 2:40:04एंपायर अंडर नंद डायनेस्टी। इसकी पावर
- 2:40:08इतनी ज्यादा थी कि एलेक्जेंडर के सोल्जर्स
- 2:40:10भी आगे बढ़ने से डरते हैं। साथ ही हमने
- 2:40:13एलेग्जेंडर के इन्वेशन और उसके लॉन्ग टर्म
- 2:40:16इफेक्ट्स को भी जाना। अब हम बात करेंगे
- 2:40:19मौर्यन एंपायर की जिसने सबसे पहले एक पैन
- 2:40:22इंडिया एंपायर की स्थापना की। तो शुरू
- 2:40:25करते हैं मौर्यन डायनेस्टी के फाउंडर
- 2:40:27चंद्रगुप्त मौर्य की कहानी से जिन्होंने
- 2:40:30अराउंड 321 बीसी में नंद डायनेस्टी के
- 2:40:33लास्ट रूलर धनानंद को हराने के बाद मौर्यन
- 2:40:36डायनेस्टी की शुरुआत की। चंद्रगुप्त
- 2:40:39मौर्य। चंद्रगुप्त मौर्य की बर्थ को लेकर
- 2:40:42हमें अलग-अलग व्यूज मिलते हैं। ज्यादातर
- 2:40:45हिस्टोरियंस मौर्य फैमिली को लो कास्ट या
- 2:40:48ट्राइबल ओरिजिन का बताते हैं। बुद्धिस्ट
- 2:40:51सोर्सेस में चंद्रगुप्त मौर्या को पीपल
- 2:40:54वाहना के मौर्य क्लैन का बताया गया है।
- 2:40:57मौर्य नाम भी इसी मौर्य ट्राइब से डिराइव
- 2:41:00किया गया। पुराणास में मौर्यास को शूद्र
- 2:41:03बताया गया है। ग्रीक सोर्सेज में भी
- 2:41:05चंद्रगुप्त को लो ओरिजिन का कहा जाता है।
- 2:41:09यह भी कहा जाता है कि चंद्रगुप्त मौर्य को
- 2:41:11उनके पेरेंट्स ने छोड़ दिया था और वह एक
- 2:41:14हंबल बैकग्राउंड से थे। अकॉर्डिंग टू द
- 2:41:17लेजेंड उनका पालन एक पास्टरल फैमिली करती
- 2:41:20है। दूसरी तरफ चाणक्य एक ऐसे व्यक्ति को
- 2:41:23ढूंढ रहे थे जो नंद डायनेस्टी को खत्म
- 2:41:25करने में उनकी हेल्प कर सके। चंद्रगुप्त
- 2:41:28अपने दोस्तों के साथ खेल रहे थे। जब
- 2:41:30चाणक्य उन्हें पहली बार देखते हैं।
- 2:41:32चंद्रगुप्त की लीडरशिप स्किल्स से इंप्रेस
- 2:41:34होकर चाणक्य उन्हें अडॉप कर लेते हैं और
- 2:41:37ट्रेनिंग देते हैं। अब जानते हैं कि कैसे
- 2:41:40चंद्रगुप्त बनते हैं मगध के राजा।
- 2:41:43चंद्रगुप्तस राइज टू पावर। चंद्रगुप्त
- 2:41:48चाणक्य की हेल्प से अपनी एक आर्मी बनाते
- 2:41:50हैं। इस आर्मी की हेल्प से वह नॉर्थ वेस्ट
- 2:41:54के एरिया को जीत लेते हैं। यहां
- 2:41:56एलेग्जेंडर के जाने के बाद सिचुएशन ऐसी थी
- 2:41:59कि कोई भी पावरफुल रूलर नहीं था। इसलिए
- 2:42:02इसको जीतना बहुत आसान था। इसके बाद वह नंद
- 2:42:05रूलर धननंद की आर्मी को हराकर 321 बीसी
- 2:42:09में मगध के राजा बनते हैं। धननंद और
- 2:42:12चंद्रगुप्त मौर्य के बीच हुई बैटल की
- 2:42:14डिटेल्स हिस्टोरिकल सोर्सेज में नहीं
- 2:42:16मिलती। हम बस इतना जानते हैं कि
- 2:42:19चंद्रगुप्त मौर्य की जीत होती है और नंद
- 2:42:22डायनेस्टी के शासन का एंड। अब जानते हैं
- 2:42:24चंद्रगुप्त मौर्य के राजा बनने के बाद के
- 2:42:27कुछ अचीवमेंट्स को। चंद्रगुप्त मौर्यास
- 2:42:29अचीवमेंट्स। मिलिट्री फ्रंट पर चंद्रगुप्त
- 2:42:33मौर्य का सबसे पहला चैलेंज था सेल्यूकस
- 2:42:36निकेटर से सामना। 35 बीसी के अराउंड इंडस
- 2:42:40रिवर के वेस्ट के एरियाज में सेल्यूकस
- 2:42:42निकेटर रूल कर रहे थे। यह एलेक्जेंडर के
- 2:42:45गवर्नर थे। चंद्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस
- 2:42:48निकेटर के बीच युद्ध में चंद्रगुप्त जीत
- 2:42:50जाते हैं। अराउंड 33 बीसी में दोनों के
- 2:42:54बीच एक शांति समझौता होता है। जिसमें
- 2:42:57सेल्यूकस निकेटर ईस्टर्न अफगानिस्तान,
- 2:43:00बलूचिस्तान और इंडस के वेस्ट का एरिया
- 2:43:02चंद्रगुप्त मौर्य को दे देते हैं। दोनों
- 2:43:05के बीच एक मैरिज अलायंस भी होता है। कहा
- 2:43:08जाता है कि सेलुकस निकेटर अपनी बेटी की
- 2:43:11शादी चंद्रगुप्त से करते हैं। साथ ही वह
- 2:43:14ग्रीक एंबेसडर मेगस्थनीज को मौर्यन कोर्ट
- 2:43:17में भेजते हैं। मेगस्थनीज काफी सालों तक
- 2:43:20मौर्यन कोर्ट में रहते हैं और इंडिका नाम
- 2:43:23की बुक लिखते हैं। इसके बारे में हम आगे
- 2:43:25जानेंगे क्योंकि यह एक इंपॉर्टेंट
- 2:43:27हिस्टोरिकल सोर्स बन जाता है मौर्यन
- 2:43:29एंपायर का। इसके अलावा हिस्टोरियंस मानते
- 2:43:32हैं कि वेस्टर्न इंडिया और डेक्कन में भी
- 2:43:35चंद्रगुप्त अपना कंट्रोल इस्टैब्लिश करते
- 2:43:37हैं। सिर्फ आज के केरला, तमिलनाडु और ईस्ट
- 2:43:41इंडिया के पार्ट्स चंद्रगुप्त मौर्य के
- 2:43:43एंपायर का हिस्सा नहीं थे। लेकिन अलग-अलग
- 2:43:45पार्ट्स को जीतने की डिटेल्स हमें नहीं
- 2:43:48मिलती। ग्रीक राइटर्स सिर्फ इतना लिखते
- 2:43:51हैं कि 6 लाख की आर्मी से चंद्रगुप्त
- 2:43:53मौर्य पूरे देश को जीत लेते हैं।
- 2:43:56सौराष्ट्र या काठियावाड़ में इनका कंट्रोल
- 2:43:58था। यह बात प्रूव होती है रुद्र दमन के
- 2:44:01जूनागढ़ रॉक इं्रिप्शन से। इसमें लिखा गया
- 2:44:04है कि चंद्रगुप्त मौर्य के गवर्नर
- 2:44:06पुष्यगुप्ता ने यहां फेमस सुदर्शन लेखक को
- 2:44:09बनवाया था। तो हम कह सकते हैं कि
- 2:44:11चंद्रगुप्त मौर्य एक बहुत बड़ा एंपायर
- 2:44:14इस्टैब्लिश करने में सफल होते हैं। फाइनली
- 2:44:17वह अपने बेटे के फेवर में राजगद्दी छोड़
- 2:44:20देते हैं और जैन मंक भद्रबाहु के साथ
- 2:44:23कर्नाटका चले जाते हैं। यहां पर जैन
- 2:44:26रिलीजियस सेंटर श्रावण बेलगोला में वह
- 2:44:28अपनी बाकी की लाइफ स्पेंड करते हैं।
- 2:44:31फाइनली जैन प्रैक्टिस सलखाना यानी स्लो
- 2:44:34स्टारवेशन के द्वारा मृत्यु को प्राप्त
- 2:44:37करते हैं। अब जानते हैं चंद्रगुप्त मौर्य
- 2:44:39के सक्सेसर बिंदुसार के बारे में।
- 2:44:42बिंदुसार
- 2:44:44बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य और उनकी पत्नी
- 2:44:48दुर्धरा की संतान थे। एक लेजेंड के अनुसार
- 2:44:51चाणक्य स्मॉल डोसेज में चंद्रगुप्त मौर्य
- 2:44:54के खाने में पोइजन मिलाते थे। जिससे उनकी
- 2:44:56बॉडी यूज्ड टू हो जाए और एनिमीज़ के द्वारा
- 2:44:59पोइजन देने पर भी चंद्रगुप्त मौर्य की
- 2:45:01मृत्यु ना हो। अनफॉर्चूनेटली प्रेगनेंसी
- 2:45:04की लास्ट स्टेज में क्वीन दुर्धरा
- 2:45:07चंद्रगुप्त मौर्य के लिए बना हुआ खाना खा
- 2:45:09लेती हैं। चाणक्य समझ जाते हैं कि दुर्धरा
- 2:45:12अब नहीं बचेंगे। इसलिए वह अनबॉर्न बच्चे
- 2:45:15को बचाने का डिसीजन लेते हैं और तलवार से
- 2:45:17दुर्धरा के वम को कट करके बच्चे को बचा
- 2:45:21लेते हैं। जिसका नाम बाद में रखा जाता है
- 2:45:23बिंदुसार।
- 2:45:25297 बीसी में चंद्रगुप्त मौर्य के साउथ
- 2:45:28चले जाने के बाद बिंदुसार राजा बनते हैं।
- 2:45:31ग्रीक सोर्सेज में इनको एमिट्रोकटीज कहा
- 2:45:34गया है। इनको स्लेेयर ऑफ फोर्स यानी कि
- 2:45:37दुश्मनों का विनाश करने वाला भी बोला जाता
- 2:45:39है। लेकिन इनकी विक्ट्रीज के बारे में
- 2:45:42हिस्टोरिकल सोर्सेस में डिटेल नहीं मिलती।
- 2:45:45लेकिन यह माना जाता है कि इनके ही रूल के
- 2:45:47टाइम डेक्कन के एरिया पर मौर्यन कंट्रोल
- 2:45:50इस्टैब्लिश होता है। इनके कांटेक्ट्स
- 2:45:53सीरिया के सेलसिड राजा एंटियोकस वन के साथ
- 2:45:56भी थे। यह एंटीियोकस से रिक्वेस्ट करते
- 2:45:59हैं स्वीट वाइन, ड्राइड फिग्स और एक
- 2:46:02सोफिस्ट भेजने के लिए। इनकी रिलीजियस
- 2:46:05लीनिंग्स आजीविकास से की तरफ थी।
- 2:46:08बुद्धिस्ट सोर्सेस के अनुसार इनकी डेथ
- 2:46:10होती है अराउंड 273 से 272 बीसी में।
- 2:46:14इसके बाद 4 साल तक इनके बेटों के बीच
- 2:46:17युद्ध चलता है सक्सेशन के लिए जिसमें
- 2:46:20अल्टीमेटली अशोक को जीत मिलती है और वह
- 2:46:23बनते हैं मौर्यन डायनेस्टी के अगले राजा।
- 2:46:26सम्राट अशोक के बारे में हम विस्तार से
- 2:46:28अगले वीडियो में चर्चा करेंगे। और अब हम
- 2:46:31जानते हैं मौर्यन एडमिनिस्ट्रेशन के बारे
- 2:46:33में। मौर्यन एडमिनिस्ट्रेशन।
- 2:46:37मौर्यन एंपायर चार प्रोविंसेस में विभाजित
- 2:46:40था। उसकी सेंट्रल कैपिटल पाटलिपुत्र में
- 2:46:43थी। चार प्रोविंशियल कैपिटल्स थी टोसाली,
- 2:46:46उज्जैन, सुवर्णगिरी और तक्षशिला। मौर्यन
- 2:46:50एंपायर हाईली सेंट्रलाइज्ड था। मतलब सारी
- 2:46:53पावर का सोर्स सेंट्रल अथॉरिटी के पास था।
- 2:46:56यह सेंट्रल अथॉरिटी किंग होता था। वही
- 2:46:58मंत्रियों और ऑफिशियल्स को अपॉइंट करता
- 2:47:01था। किंग को असिस्ट करने के लिए काउंसिल
- 2:47:03ऑफ मिनिस्टर्स यानी कि एक मंत्री परिषद
- 2:47:06होती थी। मंत्री परिषद के हेड को
- 2:47:09मंत्रीपरिषद अध्यक्ष कहते थे। काउंसिल के
- 2:47:13बाकी मेंबर्स थे युवराज यानी द क्राउन
- 2:47:16प्रिंस पुरोहित यानी द चीफ प्रीस्ट, द
- 2:47:19सेनापति यानी द कमांडर इन चीफ और अमात्य
- 2:47:23यानी कि सिविल सर्वेंट्स एंड फ्यू अदर
- 2:47:26मिनिस्टर्स। इसके अलावा मौर्यन एंपायर में
- 2:47:29बहुत सारे ऑफिसर्स होते थे जो कुछ इस तरह
- 2:47:31कैटेगराइज्ड थे। पहले तीर्थास और अमात्यास
- 2:47:35यह हाई रैंकिंग ऑफिशियल थे आज के
- 2:47:37सेक्रेटरीज की तरह। यह एडमिनिस्ट्रेटिव और
- 2:47:40जुडिशियल रोल निभाते थे। इनकी संख्या 18
- 2:47:44थी। दूसरे अध्यक्ष रैंक में यह तीर्थस के
- 2:47:48बाद आते थे। टोटल 20 अध्यक्ष थे। इनके पास
- 2:47:52मिलिट्री और इकोनॉमिक फंक्शनंस होते थे।
- 2:47:54और थर्ड महामत्त हायर रैंकिंग ऑफिशियलल्स।
- 2:47:59अध्यक्षस मिलकर एक सेक्रेटेरिएट बनाते थे
- 2:48:02जो बहुत से डिपार्टमेंट्स में डिवाइड होता
- 2:48:04था। जैसे कि रेवेन्यू, मिलिट्री,
- 2:48:07एसपीएनआर्ज एंड पुलिस डिपार्टमेंट। इसके
- 2:48:10अलावा प्रोविंशियल एडमिनिस्ट्रेशन में भी
- 2:48:12अलग-अलग ऑफिसर्स होते थे। जैसे कि
- 2:48:15प्रदेशिका यानी मॉडर्न डिस्ट्रिक्ट
- 2:48:17मैजिस्ट्रेट्स। स्थानिका यानी टैक्स
- 2:48:20कलेक्टिंग ऑफिसर अंडर प्रदेशिका।
- 2:48:23दुर्गापाल यानी कि गवर्नर ऑफ फोर्ट।
- 2:48:26अंतपाल यानी गवर्नर ऑफ फ्रंटियर। अक्षय
- 2:48:29पटल यानी अकाउंटेंट जनरल। लीपगार्स यानी
- 2:48:34स्क्राइब्स और गोपास रिस्पांसिबल फॉर
- 2:48:37अकाउंटेंट्स एटसेट्रा। इन सारी इंफॉर्मेशन
- 2:48:39से हम कह सकते हैं कि मौर्यास का
- 2:48:41एडमिनिस्ट्रेशन सिस्टम बहुत डिवप्ड था। अब
- 2:48:44बात करते हैं दो ऐसे सोर्सेस की जिससे
- 2:48:47हमें मौर्यन एंपायर और एडमिनिस्ट्रेशन के
- 2:48:49बारे में इंफॉर्मेशन मिलती है। कौटिल्य का
- 2:48:52अर्थशास्त्र और मेगस्थनीज की इंडिका।
- 2:48:56कौटिल्य एंड हिज अर्थशास्त्र।
- 2:48:59कौटिल्य तक्षशिला यूनिवर्सिटी के स्कॉलर
- 2:49:02थे। इनको चाणक्य या विष्णुगुप्त के नाम से
- 2:49:04भी जाना जाता है। हमने थोड़ी देर पहले
- 2:49:07देखा कि इन्होंने ही चंद्रगुप्त मौर्य की
- 2:49:10हेल्प की थी नंदाज को हराने में। राजा
- 2:49:13बनने के बाद चंद्रगुप्त मौर्य चाणक्य को
- 2:49:15प्राइम मिनिस्टर बनाते हैं। कौटिल्य ने
- 2:49:18लिखी थी अर्थशास्त्र जो कि एक बुक है
- 2:49:21स्टेट क्राफ्ट और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन
- 2:49:23के ऊपर। यह संस्कृत लैंग्वेज में लिखी गई
- 2:49:26थी। ओरिजिनल अर्थशास्त्र को 195 में
- 2:49:31रुद्रप्न श्याम शास्त्री जो एक संस्कृत
- 2:49:33स्कॉलर एंड लाइब्रेरियन थे उन्होंने
- 2:49:36डिस्कवर किया था। अर्थशास्त्र 15 अधिकरणास
- 2:49:39या सेक्शंस में डिवाइडेड है जिसमें पहले
- 2:49:42पांच सेक्शंस डील करते हैं इंटरनल
- 2:49:44एडमिनिस्ट्रेशन के टॉपिक को। नेक्स्ट एट
- 2:49:47सेक्शंस में इंटरस्ट रिलेशंस को डिस्कस
- 2:49:50किया गया है और लास्ट टू सेक्शंस में बाकी
- 2:49:53मिसलेनियस टॉपिक्स मिलते हैं। इसमें
- 2:49:56अराउंड 6000 श्लोकास हैं। इसका कंपैरिजन
- 2:49:59मैकेवली की प्रिंस से किया जाता है।
- 2:50:02अर्थशास्त्र में स्टेट की सप्तांग थ्योरी
- 2:50:05हमें मिलती है। मतलब स्टेट के सात लिम्स
- 2:50:08बताए गए हैं। जैसे कि किंग, मित्र यानी
- 2:50:12फ्रेंड, दंड यानी आर्मी, कोष यानी
- 2:50:15ट्रेजरी, दुर्ग यानी फोर्ट, जनपद यानी
- 2:50:19टेरिटरी और अमात्य यानी मिनिस्टर्स। इसमें
- 2:50:23स्लेव्स के नाइन टाइप्स बताए गए हैं।
- 2:50:25आर्मी को चतुरंग बल कहा गया है। यानी कि
- 2:50:28चार फोर्सेस होते थे। इनफेंट्री, कैवलरी,
- 2:50:31चैरियट्स एंड एलीिफेंट्स। इसके अलावा हमने
- 2:50:34मौर्यन एडमिनिस्ट्रेशन के बारे में जो
- 2:50:36पढ़ा वो इंफॉर्मेशन भी हमें यहीं से मिलती
- 2:50:38है। मौर्यन इकॉनमी के बारे में भी
- 2:50:41अर्थशास्त्र में डिटेल्स मिलती हैं। जैसे
- 2:50:44कि अलग-अलग टाइप्स के टैक्सेस फॉर
- 2:50:46एग्जांपल लैंड रेवेन्यू यानी कि भाग वन
- 2:50:50सिक्स्थ ऑफ प्रोड्यूस होता था। इसके अलावा
- 2:50:52इरीगेशन टैक्स, टोल टैक्स, प्राणीय टैक्स
- 2:50:55एटसेट्रा होते थे। ऑफिसर्स के बारे में हम
- 2:50:58पहले ही डिस्कस कर चुके हैं। उनका नाम भी
- 2:51:00हमें अर्थशास्त्र में मिलता है। इसके
- 2:51:02अलावा राजा की कई ड्यूटीज होती थी। उसको
- 2:51:05कैसे रूल करना चाहिए एटसेट्रा भी
- 2:51:07अर्थशास्त्र डिटेल में डिस्क्राइब करती
- 2:51:09है। इसका रेलेवेंस हम इसी बात से समझ सकते
- 2:51:12हैं कि आज भी पॉलिटिकल थ्योरी में
- 2:51:14अर्थशास्त्र की स्टडी की जाती है। अब बात
- 2:51:17करते हैं दूसरे कंटेंपररी टेक्स्ट यानी कि
- 2:51:20मेगस्थनीज की इंडिका की। मेगस्थनीज इज़
- 2:51:24इंडिका। मेगस्थनीज सेलिकस निकेटर के
- 2:51:27एंबेसडर थे। चंद्रगुप्त मौर्य के कोर्ट
- 2:51:30में। इनकी बुक इंडिका भी इंपॉर्टेंट सोर्स
- 2:51:33है मौर्यन पीरियड के लिए। लेकिन यह
- 2:51:36ओरिजिनल फॉर्म में अवेलेबल नहीं है। हमें
- 2:51:38इसकी इंफॉर्मेशन बाद के ग्रीक और रोमन
- 2:51:41राइटर्स जैसे कि स्त्राबो, जस्टिन, प्ली,
- 2:51:44एरेन एटसेट्रा के वक्स में मिलती है।
- 2:51:47मेगस्थनीज ने मौर्यन कैपिटल पाटलिपुत्र के
- 2:51:50बारे में डिटेल्ड इंफॉर्मेशन दी है।
- 2:51:52क्योंकि उनका ज्यादा समय यहीं पर गुजरा
- 2:51:54था। वह बताते हैं कि पाटलिपुत्र एक मोट
- 2:51:57यानी कि खाई से घिरी हुई थी। पैलेस यानी
- 2:52:01कि चंद्रगुप्त मौर्य का महल वुड का बना
- 2:52:03हुआ था। इंडिका में कुछ ऐसी भी इंफॉर्मेशन
- 2:52:06मिलती है जिसे हम सही नहीं मानते। जैसे कि
- 2:52:09मेगस्थनीज कहते हैं कि यहां कोई स्लेव
- 2:52:12नहीं था। लेकिन हमने देखा कि अर्थशास्त्र
- 2:52:14में नाइन टाइप्स के स्लेव्स के बारे में
- 2:52:17बताया गया है। हम यह कह सकते हैं कि यहां
- 2:52:20स्लेव्स की कंडीशन वेस्टर्न वर्ल्ड के
- 2:52:22जितनी खराब नहीं थी। इसलिए मेगस्थनीज को
- 2:52:24लगता है कि कोई भी स्लेव नहीं है। इसके
- 2:52:27अलावा वह सोसाइटी में सेवन क्लासेस बताते
- 2:52:30हैं ना कि फोर वर्णास। यह सेवन क्लासेस थी
- 2:52:34फिलॉसफर्स, कल्टीवेटर्स, हर्ड्समैन,
- 2:52:37आर्टिजंस एंड ट्रेडर्स, सोल्जर्स,
- 2:52:40ओवरसीयर्स एंड काउंसलर्स। मेगस्थनीज कहते
- 2:52:43हैं कि इंडिया में दो भगवान को पूजा जाता
- 2:52:45है। एक हेरेकलीस यानी कि लॉर्ड कृष्ण और
- 2:52:49दूसरा डायनीस मतलब लॉर्ड शिव। यह कहा जा
- 2:52:54सकता है कि इंडिका से हमें कंटेंपररी
- 2:52:56मॉररियन पीरियड के बारे में काफी जानकारी
- 2:52:58मिलती है। लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह
- 2:53:01है कि इसमें मिली इंफॉर्मेशन को बाकी के
- 2:53:03कंटेंपररी सोर्सेज से एनालाइज करना जरूरी
- 2:53:06है। तभी हम सही और गलत इंफॉर्मेशन में
- 2:53:09फर्क कर सकते हैं। कंक्लूडिंग रिमार्क्स।
- 2:53:12तो दोस्तों, हमने जाना कि कैसे एक हमंबल
- 2:53:14ओरिजिन से शुरुआत करके चंद्रगुप्त मौर्य
- 2:53:17बनाते हैं अपने टाइम का सबसे बड़ा एंपायर।
- 2:53:20और कैसे इस एंपायर में एक स्ट्रांग
- 2:53:23सेंट्रलाइज्ड एडमिनिस्ट्रेशन को मेंटेन
- 2:53:25किया जाता था। कहा जाता है कि उनका एंपायर
- 2:53:28कंपैरिजन में एलेग्जेंडर द ग्रेट के
- 2:53:31एंपायर से कम नहीं था। उनकी ही लेगसी को
- 2:53:33आगे बढ़ाते हैं उनके बेटे बिंदुसार जिनकी
- 2:53:36कहानी हमने जानी और बिंदुसार के बाद आते
- 2:53:39हैं अशोक जिनके बारे में हम नेक्स्ट
- 2:53:42लेक्चर में पढ़ेंगे।
- 2:53:44रेन ऑफ अशोका।
- 2:53:47दोस्तों, हिस्टोरिकल रिकॉर्ड्स दुनिया भर
- 2:53:51के महान राजाओं और उनके ग्लोरी की
- 2:53:53कहानियों से भरे हुए हैं। ऐसी ही एक कहानी
- 2:53:56है भारत के मौर्य डायनेस्टी के रूलर अशोका
- 2:54:00द ग्रेट की। जिन्होंने मौर्य एंपायर को
- 2:54:03एंशिएंट इंडिया का सबसे पावरफुल किंगडम
- 2:54:06बना दिया।
- 2:54:07लेकिन ग्रेट कॉनकरर्स और ग्रेट एंपायर्स
- 2:54:10बिल्ड करने वाले राजाओं की इतिहास में कोई
- 2:54:13कमी नहीं है। तो फिर ऐसा क्या है जो अशोका
- 2:54:17को इतना पॉपुलर और ग्रेट बनाता है? ऐसा
- 2:54:20क्या हुआ कि मॉडर्न हिस्टोरियंस जो
- 2:54:22मोनाक्स को लेकर काफी क्रिटिकल है वो भी
- 2:54:25अशोका की तारीफ करते नहीं थकते। दोस्तों,
- 2:54:29इसका जवाब हमें अशोका की यूनिक लाइफ
- 2:54:32ट्रेजेक्टरी में मिलता है। जिसमें कुछ ऐसी
- 2:54:35अनबिलीवेबल और शानदार चेंजेस हुए जो
- 2:54:39दुनिया भर के लिए मिसाल बन गए। हम आपको
- 2:54:41बता दें कि अशोका के बारे में हिस्टोरिकल
- 2:54:44रिकॉर्ड्स कहते हैं कि पहले वो एक बेहद
- 2:54:47क्रूल और रुथलेस राजा थे। चाइनीस कॉलर
- 2:54:52फाहिन तो यह तक लिखते हैं कि अशोका अपने
- 2:54:55शुरुआती दौर में ऐसे लगते थे जैसे वो खुद
- 2:54:58हेल से अलग-अलग टॉर्चर टेक्निक सीख कर आए
- 2:55:01हो और इसीलिए उनका नाम चंड अशोका पड़ गया
- 2:55:05मीनिंग द ब्रूटल अशोका। दोस्तों, हम इस
- 2:55:09वीडियो में बात करेंगे अशोका की इसी लाइफ
- 2:55:12ट्रेजेजरी के बारे में और समझेंगे कि ऐसा
- 2:55:15कैसे हुआ कि अशोका जो एक टरेंट से कम नहीं
- 2:55:18था उसका बनाया हुआ लायन कैपिटल वर्ल्ड्स
- 2:55:22लार्जेस्ट डेमोक्रेसी का नेशनल एंबलम बन
- 2:55:25गया। हम देखेंगे कि कैसे अशोका अपनी
- 2:55:28रूथलेसनेस और क्रुल्टी को त्याग कर अहिंसा
- 2:55:32और धम्म के प्रचारक बन गए और दुनिया भर
- 2:55:35में शांति संदेश भेजने लगे। यह कहानी है
- 2:55:40अशोका के चंड अशोका से धम्म अशोका बनने की
- 2:55:44और उनके जीवन के उन पहलुओं की जो उन्हें
- 2:55:47मॉडर्न सोसाइटी के पैराटर्स पर भी ग्रेट
- 2:55:50बनाते हैं। आइए बात करते हैं बैकग्राउंड
- 2:55:53की। बात 326 बीसी की है। जब पूरी दुनिया
- 2:55:58को जीतने का सपना लेकर एलेक्जेंडर
- 2:56:00मेसडोनिया से ब्यास तक पहुंचा। लेकिन भारत
- 2:56:04के सबसे पावरफुल किंगडम मगध के नंद
- 2:56:06डायनेस्टी के खौफ से उसकी सेना ने आगे
- 2:56:09जाने से इंकार कर दिया। नतीजतन एलेक्जेंडर
- 2:56:13वापस लौट गया। एलेक्जेंडर भारत में ज्यादा
- 2:56:17कुछ अचीव तो नहीं कर पाया लेकिन उसने
- 2:56:19नॉर्थ वेस्टर्न इंडिया की पिटी को
- 2:56:22डिस्टेबलाइज करके रख दिया। जिसका फायदा
- 2:56:24उठाकर चंद्रगुप्त मौर्य ने 320 बीसी पंजाब
- 2:56:30में मौर्य किंगडम को इस्टैब्लिश किया और
- 2:56:32उसे एक्सपेंड करते हुए नंद डायनेस्टी को
- 2:56:35डिस्ट्रॉय और खुद को मगध का एपरर डिक्लेअर
- 2:56:38कर दिया। मगध की कैपिटल प्रोस्परस सिटी
- 2:56:42पाटली पुत्र थी जो प्रेजेंट डे पटना के
- 2:56:45पास है। अशोका इन्हीं चंद्रगुप्त मौर्य के
- 2:56:50ग्रैंडसन थे और बिंदुसारा के दूसरे बेटे।
- 2:56:54अशोका की कैपेबिलिटीज की कहानियां मगध में
- 2:56:57उनकी यंग एज से ही मशहूर थी। 18 साल में
- 2:57:01ही तक्षशिला के एक मैसिव रिबेलियन को खत्म
- 2:57:04कर वो अवंती के गवर्नर बने। इसके बावजूद
- 2:57:07उनका थ्रोन हासिल करना नामुमकिन था
- 2:57:10क्योंकि उनकी मां एक सिंपल फैमिली से थी।
- 2:57:13जबकि क्राउन प्रिंस बिंदुसारा के बड़े
- 2:57:16बेटे सुसीमा की मां एक प्रिंसेस थी। कुछ
- 2:57:19सालों बाद तक्षशिला में फिर से विरोध हुआ।
- 2:57:23सुशी तक्षशिला भेज दिए गए। जिसके कुछ
- 2:57:26दिनों बाद बिंदुसारा की डेथ हो गई।
- 2:57:29बिंदुसारा के मिनिस्टर्स अशोका को ज्यादा
- 2:57:32कैपेबल मानते थे और इसीलिए उनके सपोर्ट
- 2:57:35में अशोका मगध के एपरर डिक्लेअ कर दिए गए।
- 2:57:39लेकिन जब सुसीमा को यह पता चला तो मगध में
- 2:57:41सक्सेशन को लेकर कॉन्फ्लिक्ट हुआ। इस
- 2:57:44कॉन्फ्लिक्ट का अंत 270 बीसी में अशोका की
- 2:57:48विक्ट्री से हुआ। कुछ टेक्स्ट कहते हैं कि
- 2:57:51अशोका ने अपने 99 ब्रदर्स को ब्रूटली मार
- 2:57:55डाला। लेकिन इसकी हिस्टोरिसिटी कंटेस्टेड
- 2:57:58है।
- 2:58:00आइए बात करते हैं अशोका के रूल की। अशोकास
- 2:58:05रूल सत्ता में आते ही अशोका के रुथलेसनेस
- 2:58:09और डेस्पेटिज्म की कहानी स्टार्ट होती है।
- 2:58:12किंगडम में एक टॉर्चर प्रजन बनाया गया
- 2:58:15जिसको अशोकाज़ हेल कहते थे। जहां प्रजनर्स
- 2:58:19और रेबल्स को टॉर्चरस पनिशमेंट्स दी जाती
- 2:58:22थी। अशोका से उनके वो मिनिस्टर्स भी नाराज
- 2:58:26थे जिन्होंने सक्सेशन में उनको सपोर्ट
- 2:58:28किया था। खैर अशोका ने अपने चक्रवर्तन
- 2:58:32यानी किंग ऑफ किंग्स बनने के सपने के लिए
- 2:58:35एक्सपेंशनरी पॉलिसी फॉलो करते हुए एंपायर
- 2:58:38को उसके चरम पर पहुंचा दिया। जो हिमालय से
- 2:58:41लेकर मैसूर और हिंदू कुश से लेकर
- 2:58:44ब्रह्मपुत्र तक फैल गया। लेकिन अशोका की
- 2:58:48यह पॉलिसी एक विशेस साइकिल थी। इतने बड़े
- 2:58:52एंपायर और राइजिंग मिलिट्री एक्सपेंडिचर
- 2:58:55का मैनेजमेंट पुअर कम्युनिकेशन
- 2:58:57टेक्नोलॉजीस की वजह से काफी एक्सपेंसिव
- 2:58:59था। जिसे कंपनसेट करने के लिए और नए-नए
- 2:59:03टेरिटरीज एनेक्स करना जरूरी हो जाता। और
- 2:59:06यह सब इसलिए क्योंकि लैंड रेवेन्यू ही मेन
- 2:59:09सोर्स ऑफ इनकम था। लगभग 260 से 261 बीसी
- 2:59:14में हुए बैटल ऑफ कलिंगा का कॉज भी यही
- 2:59:17पॉलिसी थी। कलिंगा पाटलिपुत्र के साउथ में
- 2:59:21एक प्रोस्पोरस कोस्टल स्टेट था।
- 2:59:25अशोका ने इस बैटल को पर्सनली लीड किया और
- 2:59:28कलिंग के टफ ऑोजिशन के बाद भी उसे
- 2:59:32कंप्लीटली डिस्ट्रॉय कर दिया। बैटल का
- 2:59:35आउटकम काफी हॉरेिक था जिसमें 1 लाख की
- 2:59:39डेथ, 1.5 लाख से ज्यादा डिस्प्लेस्ड और
- 2:59:43हजारों लोग स्टारवेशन से मर गए।
- 2:59:48कन्वर्जन टू बुद्धिज्म।
- 2:59:51जब अशोका ने कलिंग का डिस्ट्रक्शन देखा तो
- 2:59:54उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया। डेथ और
- 2:59:57डिस्ट्रक्शन के इस हॉरिफिक सीन ने उनको
- 3:00:00झकझोर कर रख दिया था।
- 3:00:03दुनिया के इतिहास में अशोका शायद पहला
- 3:00:06किंग हुआ जिसने विक्ट्री में जश्न नहीं
- 3:00:09दुख व्यक्त किया। यह एक चेंज्ड मैन की
- 3:00:13कहानी है जिसने पावर के लिए शायद अपने 99
- 3:00:17भाइयों का कत्ल कर दिया था। कुछ
- 3:00:18हिस्टोरियंस कहते हैं कि कलिंग वॉर के बाद
- 3:00:21अशोका ने वायलेंस को कंप्लीटली छोड़कर
- 3:00:25बुद्धिज्म को अपना लिया। लेकिन उन्हें
- 3:00:27बुद्धिज्म में कन्वर्ट मोगली पुट तसा ने
- 3:00:30किया या उपगुप्त ने इसको लेकर काफी विवाद
- 3:00:33है। लेकिन श्रीलंकन टेक्स्ट दीपावंसा के
- 3:00:36हिसाब से अशोका पहले ही बुद्धिस्ट मंक और
- 3:00:39सुसीमा के बेटे निग्रोधा के अंडर
- 3:00:42बुद्धिस्ट उपासक बन गए थे। अशोका अलग-अलग
- 3:00:46आइडियाज को हमेशा समझने की कोशिश करते थे।
- 3:00:50लेकिन वह सिर्फ निग्रोध से इंप्रेस हुए जो
- 3:00:53अपने पिता सुशी के मर्डरर अशोका से मिलकर
- 3:00:57बिल्कुल भी नाराज नहीं हुए। यह बात अशोका
- 3:01:01को काफी इंट्रीगिंग लगी। वैसे निग्रोध
- 3:01:04अशोका डायलॉग की हिस्टोरिसिटी भी डाउटफुल
- 3:01:06है। अशोका का कन्वर्शन एग्जजेक्टली कब हुआ
- 3:01:10यह बात डिबेटेबल है। लेकिन यह फैक्ट है कि
- 3:01:13उनका कन्वर्शन ओवरनाइट नहीं हुआ। रोमिला
- 3:01:17थापर कहती हैं कि अशोका एक इडिक्ट में खुद
- 3:01:21लिखते हैं कि वह कलिंगा वॉर के 2 साल बाद
- 3:01:24ही बुद्धिज्म के जेलस डेविटी बने। लेकिन
- 3:01:27वहां भी कन्वर्शन डेट मेंशंड नहीं है। खैर
- 3:01:31कलिंगा वॉर के बाद अशोका बोधी ट्री,
- 3:01:34सारनाथ, लुंबिनी और कुशीनगर के पिल्गिमेज
- 3:01:38पर गए और बुद्धिज्म के मैसेजेस को
- 3:01:40अग्रेसिवली अपनी धम्म की पॉलिसी के थ्रू
- 3:01:43स्प्रेड करने लगे।
- 3:01:45हम आपको बता दें कि बोधी ट्री में गौतम
- 3:01:48बुद्ध ने एनलाइटनमेंट अचीव किया। सारनाथ
- 3:01:52में उन्होंने अपना पहला समन दिया। लुंबिनी
- 3:01:56उनका बर्थ प्लेस है और कुशीनगर में
- 3:01:59उन्होंने निर्वाणा अचीव किया। थर्ड
- 3:02:02बुद्धिस्ट काउंसिल।
- 3:02:04240 बीसी में अशोका ने थर्ड बुद्धिस्ट
- 3:02:08काउंसिल ऑर्गेनाइज किया। इस काउंसिल का
- 3:02:11कॉज था बुद्धिस्ट संघा में करप्शन और 6ाउज
- 3:02:15एलेज्ड ब्राह्मणिक स्पाइस का संघा में
- 3:02:17इनफिल्ट्रेशन।
- 3:02:19काउंसिल में कुछ इंपॉर्टेंट डिसीजंस हुए
- 3:02:22जैसे संघा को रिऑर्गनाइज करना। मोगली पुट
- 3:02:27तस्सा द्वारा कथवा टू स्क्रिप्चर कंपाइल
- 3:02:30किया गया। दुनिया भर में बुद्धिस्ट मिशनंस
- 3:02:33भेजने का डिसीजन भी लिया गया। और अशोका ने
- 3:02:36कश्मीर, गांधारा, बर्मा, सीरिया, इजिप्ट
- 3:02:40और मेसडोनिया तक ऑन वॉइस भेजे। सबसे
- 3:02:44इंपॉर्टेंट मिशन अशोका के चिल्ड्रन
- 3:02:46Mahindra और संघमित्रा का माना जाता है।
- 3:02:50लेजेंड्स संगमित्रा को श्रीलंकन कैपिटल
- 3:02:53अनुराधापुरा में बोधी ट्री प्लांट करने का
- 3:02:56क्रेडिट देते हैं जो वहां आज भी है और एक
- 3:02:59सीक्रेट साइट है। इस पॉलिसी ने बुद्धिज्म
- 3:03:03को श्रीलंका के अलावा तिबेट, चाइना, जापान
- 3:03:07और साउथ ईस्ट एशिया तक पहुंचाया जो बाद
- 3:03:10में एक वर्ल्ड रिलीजन बन गया। यह एक
- 3:03:13मॉडर्न इंडिया की सॉफ्ट पावर का भी सोर्स
- 3:03:15है। इसके बाद इंडिया के फॉरेन कांटेक्ट्स
- 3:03:19एक नए रूप से इस्टैब्लिश हुए और इस फॉरेन
- 3:03:22पॉलिसी ने अशोका को अपने बॉर्डर्स पीसफुली
- 3:03:25सिक्योर करने में भी हेल्प किया। इन
- 3:03:28कांटेक्ट्स का इन्फ्लुएंस अशोकन
- 3:03:29आर्किटेक्चर में भी दिखता है। कुछ
- 3:03:32स्कॉलर्स अशोकन पिलर्स को पर्शियन रूलर
- 3:03:35डेरियस के स्टोन पिलर से ही इंस्पायर्ड
- 3:03:38बताते हैं।
- 3:03:40अशोकास धम्म अशोका के रोल की सबसे
- 3:03:43इंपॉर्टेंट बात उनकी पॉलिसी ऑफ़ धम्म थी।
- 3:03:46जो गौतम बुद्ध की मध्यम मार्ग की फिलॉसफी
- 3:03:49से इन्फ्लुएंस्ड थी। यह हमें एक्सट्रीम
- 3:03:52इंडजेंस इन वर्ल्डली प्लेजर और एक्सट्रीम
- 3:03:55एसेटिज्म दोनों से बचने और मिडिल पाथ
- 3:03:59अडॉप्ट करने का सजेशन देती है। इसीलिए
- 3:04:03अशोका ने सिर्फ एक्सट्रीम मेथड्स को क्विट
- 3:04:06किया लेकिन एसेटिज्म को अडॉप्ट नहीं किया।
- 3:04:10लेकिन अशोका का धम्म सिर्फ बुद्धा की
- 3:04:13टीचिंग नहीं बल्कि एक जनरल कोड ऑफ कंडक्ट
- 3:04:16था।
- 3:04:19यह बात नोट करने लायक है कि कैसे अशोका ने
- 3:04:22बुद्धिस्ट आइडियल्स को यूज कर एक यूनिक और
- 3:04:25इंस्पिरेशनल पॉलिटिकल सिस्टम बनाया। इस
- 3:04:28सिस्टम के अंदर पिटरनल किंगशिप अशोका के
- 3:04:32रूल का गाइडिंग प्रिंसिपल बना जिसमें
- 3:04:34सिटीजंस का वेलफेयर टॉप मोस्ट प्रायोरिटी
- 3:04:37था।
- 3:04:39कहते हैं कि कलिंगा वॉर के बाद अशोका
- 3:04:42पीपल्स किंग बन गए जो अपने सिटीजंस के
- 3:04:45ग्रीवेंसेस को पर्सनली रिड्रेस और वेलफेयर
- 3:04:48एक्टिविटीज प्रमोट करते थे। उन्होंने
- 3:04:50मेडिसिनल ट्रीटमेंट, मेडिसिनल प्लांट्स का
- 3:04:53प्लांटेशन और ट्रैवलर्स के लिए वेल्स, फूड
- 3:04:56और शेड का इंतजाम किया। अशोका ने अहिंसा,
- 3:05:01ट्रुथफुलनेस, रिस्पेक्ट फॉर एल्डर्स,
- 3:05:04ह्यूमन ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स जैसे मैसेजेस
- 3:05:07भी स्प्रेड किए। अशोका की पॉलिसी का एक
- 3:05:10इंपॉर्टेंट हिस्सा रिलीजियस टॉलरेंस भी
- 3:05:13था। भले ही अशोका बुद्धिस्ट थे, लेकिन
- 3:05:17मौर्यन एंपायर बुद्धिस्ट थियोक्रेसी
- 3:05:19बिल्कुल नहीं था। अशोका सभी रिलीजंस को
- 3:05:22जेनरस डोनेशंस देते थे। उन्होंने धम्म
- 3:05:26महामात्ता नाम के स्पेशल ऑफिसर्स भी
- 3:05:28अपॉइंट किए। जिनका जॉब सभी रिलीजियस सेक्स
- 3:05:31का वेलफेयर था। यहां तक कि बर्बर केव्स के
- 3:05:35सुदामा और लोमास ऋषि केव्स को उन्होंने
- 3:05:38आजीविका सेक्ट को डेडिकेट करने के लिए
- 3:05:40बनवाया था। अशोका की इन्हीं काइंडनेस और
- 3:05:43टॉलरेंस की पॉलिसीज की वजह से उनके
- 3:05:46एडिक्ट्स उन्हें देवनाम पिया पियादशी
- 3:05:49बोलते हैं। जिसका मीनिंग बिलवड ऑफ द गॉड्स
- 3:05:52हु ट्रीट्स अदर्स वि काइंडनेस है।
- 3:05:56अदर अचीवमेंट्स
- 3:05:58गवर्नेंस के अलावा अशोका का कंट्रीब्यूशन
- 3:06:00आर्किटेक्चर में भी इमेंस है और उन्हें
- 3:06:03स्टोन स्ट्रक्चर्स का पायर माना जाता है।
- 3:06:07इनमें सबसे इंपॉर्टेंट अशोकन पिलर्स हैं।
- 3:06:10सारनाथ के लायन कैपिटल को तो आप जानते ही
- 3:06:13होंगे। जो हमारे नेशनल एंबलम और उसमें
- 3:06:16कार्वड अशोक चक्र हमारे नेशनल फ्लैग में
- 3:06:19अडॉप्ट किए गए। यह दोनों धम्म के सिंबल्स
- 3:06:23हैं। जिसमें वेलफेयरिज्म एक इंपॉर्टेंट
- 3:06:26एलिमेंट था। जिसको अशोका ने तब अडॉप्ट
- 3:06:29किया जब दूर-दूर तक वेलफेयरिज्म का
- 3:06:32नामोनिशान नहीं था। इसीलिए यह हमारे नेशनल
- 3:06:36सिंबल्स में है। खैर अशोकन पिलर्स चुनार
- 3:06:41सैंड स्टोन के थे जो पूरे मौर्यन एंपायर
- 3:06:44में मिलते हैं। उनका मेन पर्पस धम्म को
- 3:06:48स्प्रेड करना था।
- 3:06:50ऐसा कहते हैं कि यह इं्रिप्शंस डेली एक
- 3:06:53ऑफिसर सारे सिटीजंस के सामने रीड करता था
- 3:06:57और ऐसा लगता था कि शायद एपरर उनसे
- 3:07:00डायरेक्टली बात कर रहे हैं। इसीलिए इनको
- 3:07:03लार्जली लोकल लैंग्वेजेस जैसे पाली,
- 3:07:06प्राकृत और एरोमेक में लिखा गया।
- 3:07:10मेन इं्रिप्शंस में मेजर रॉक एडिक्ट फोर,
- 3:07:1312 और 13 और माइनर एडिक्ट वन है। इडिक्ट
- 3:07:18फोर रूल्स ऑफ मोरालिटी, इडिक्ट 12
- 3:07:22रिलीजियस पॉलिसी, इडिक्ट 13 कलिंग वॉर और
- 3:07:26माइनर एडिक्ट वन अशोका के बुद्धिस्ट उपासक
- 3:07:30होने का डिस्क्रिप्शन देते हैं। कुछ
- 3:07:32लेजेंड्स अशोका को पूरे भारत में 84,000
- 3:07:36से ज्यादा स्तूपास बनाने का क्रेडिट भी
- 3:07:39देते हैं। अशोक वंदना नाम के लेजेंड्स की
- 3:07:42एंथोलॉजी के हिसाब से अशोक ने बुद्ध के
- 3:07:46सेवन रेलिक्स को डिवाइड कर उन्हें 84,000
- 3:07:49बॉक्सेस में रख दिया और उनके ऊपर स्तूपास
- 3:07:52बनाने का ऑर्डर दिया।
- 3:07:55हालांकि हिस्टोरियंस 84,000 स्तूपास को
- 3:07:59एकजुरेशन मानते हैं। लेकिन अशोका ने कुछ
- 3:08:02स्तूपास बनवाए जरूर जिनमें मोस्टेंट
- 3:08:05यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट सांची
- 3:08:08स्तूपा है। जो दुनिया भर में अपने
- 3:08:10ग्रैंडोर के लिए फेमस है। भारहुत स्तूपा,
- 3:08:14धामेक स्तूपा, अमरावती स्तूपा भी अशोका के
- 3:08:18रूल में ही बने। अशोका को यूनेस्को वर्ल्ड
- 3:08:22हेरिटेज साइट महाबोधी टेंपल गया को बनाने
- 3:08:25का क्रेडिट भी दिया जाता है। वेयर गौतम
- 3:08:28बुद्धा गेंड इनलाइटनमेंट। मौर्यन पैलेसेस
- 3:08:32को तो मेगस्थनीज सबसे महान क्रिएशंस में
- 3:08:35मानते हैं और फाहिन इनको गॉड गिफ्टेड
- 3:08:38मोन्यूमेंट्स कहते हैं। इनमें मोस्ट फेमस
- 3:08:41अशोका का पैलेस और पटना के कुम्हार का 80
- 3:08:45पिलर्ड कोर्ट है।
- 3:08:48डेथ एंड लेगसी। अशोका की डेथ पर भी कई
- 3:08:52डिबेट्स हैं। एक लेजेंड के हिसाब से 232
- 3:08:56बीसी में अशोका की एक वाइफ ने बोधी ट्री
- 3:09:00को डिस्ट्रॉय कर दिया था। जिसके शोक में
- 3:09:03उनकी डेथ हो गई। मृत्यु का सच जो भी हो।
- 3:09:07लेकिन अशोका के बाद मौर्य डायनेस्टी की
- 3:09:09ग्लोरी खत्म होने लगी। यह एक हिस्टोरिकल
- 3:09:12फैक्ट है। हिस्टोरियन राय चौधरी इसका कॉज
- 3:09:15अशोका की पेसिफिस्ट पॉलिसी को ही मानते
- 3:09:18हैं। जिसने उनकी मिलिट्री स्ट्रेंथ को
- 3:09:21कमजोर किया। लेकिन रोमिला थापर बोलती हैं
- 3:09:24कि अशोका की पेसिफिस्ट पॉलिसी को ब्लेम
- 3:09:27करना एग्जाजरेशन है। अशोका हमेशा एक
- 3:09:30प्रगमेटिक एपरर रहे। जिनकी पैसिफिज्म का
- 3:09:33मतलब मिलिट्री को डिसबैंड करना नहीं सिर्फ
- 3:09:36मैक्सिमम रिस्ट्रेंट अडॉप्ट करना था।
- 3:09:39मौर्यास के डिक्लाइन के दूसरे रीज़ंस जैसे
- 3:09:42बैक्ट्रियन ग्रीक्स का इन्वेशन और लैक ऑफ
- 3:09:45वर्दी सक्सेसर्स ज्यादा वैलिड माने जाते
- 3:09:48हैं। खैर 185 बीसी में पुष्यमित्र शुंग ने
- 3:09:53लास्ट मौर्य बृहद्रथ को अससिनेट कर मौर्य
- 3:09:57एंपायर का अंत कर दिया। लेकिन अशोका की
- 3:10:01लेगसी ने उसे इतिहास के पन्नों और लोगों
- 3:10:04के दिलों में अमर बना दिया। अमर्त्य सेन
- 3:10:07कहते हैं कि मॉडर्न सोसाइटीज में जहां
- 3:10:10वॉर, वायलेंस और कम्युनलिज्म मेजर
- 3:10:13प्रॉब्लम्स हैं, वहां अशोका की रिलीजियस
- 3:10:16टॉलरेंस, इंडिविजुअल फ्रीडम और पीस की
- 3:10:19पॉलिसीज काफी इंस्पिरेशनल हैं। उनकी लेगसी
- 3:10:23की वजह से ही फेमस इंग्लिश राइटर एच जी
- 3:10:26वेल्स लिखते हैं कि अमिट थाउजेंड्स ऑफ़
- 3:10:29मोनिक्स दैट क्राउड द कॉलम्स ऑफ हिस्ट्री
- 3:10:32द नेम ऑफ़ अशोका शाइन एंड शाइन ऑलमोस्ट
- 3:10:36अलोन लाइक अ स्टार। अशोका के खुद के
- 3:10:39शब्दों में कहें तो उनका सबसे बड़ा लेगसी
- 3:10:42उनका मैसेज द फाइनेस्ट कॉन्क्वेस्ट इज द
- 3:10:45कॉन्क्वेस्ट ऑफ द राइट नॉट माइट था।
- 3:10:49डेवलपमेंट्स ड्यूरिंग 200 बीसी टू 300 एडी
- 3:10:53आज हम कवर करने वाले हैं एंशिएंट इंडियन
- 3:10:55हिस्ट्री का ऐसा पीरियड जिसे कन्वेंशनल
- 3:10:58हिस्ट्री राइटिंग्स में डार्क पीरियड कहा
- 3:11:01जाता है। यानी कि 200 बीसी से 300 एडी तक
- 3:11:05का समय। ऐसा इसलिए क्योंकि 200 बीसी और
- 3:11:08300 एडी के बीच कोई भी बड़ी इंपीरियल
- 3:11:12डायनेस्टी नहीं रहती। बल्कि इस पीरियड के
- 3:11:14दौरान बहुत सारी डायनेस्टीज अलग-अलग रीजन
- 3:11:17में रूल करती हैं। बट क्या इस पीरियड को
- 3:11:20डार्क एज कहना ठीक होगा? यह हम आज इस
- 3:11:22वीडियो में जानने की कोशिश करेंगे। आज हम
- 3:11:25इसी पीरियड की कुछ इंपॉर्टेंट डायनेस्टीज
- 3:11:28को कवर करेंगे। जैसे सुंगास, कनवास,
- 3:11:31इंडोग्रीक्स,
- 3:11:33सकास, पार्थियंस, कुशानास, सातवाहनाज़ और
- 3:11:37इश्वाकुस।
- 3:11:39इसके अलावा हम इस पीरियड में हुई
- 3:11:41इंपॉर्टेंट ट्रेड डेवलपमेंट और ट्रेड
- 3:11:43गिल्ड्स को भी समझेंगे। तो चलिए शुरू करते
- 3:11:46हैं सुंगास एंड कन्वस से। सुंगास एंड
- 3:11:50कन्वस
- 3:11:52नॉर्थ इंडिया में मौर्यन डायनेस्टी के बाद
- 3:11:54आती है शुंग डायनेस्टी। इसके फाउंडर थे
- 3:11:57पुष्यमित्र शुंग जो कि मौर्यन आर्मी में
- 3:12:00एक सेनापति थे। लास्ट मौर्यन रूलर बृहद्रथ
- 3:12:04को अराउंड 180 बीसी में मारने के बाद वह
- 3:12:07शुंग डायनेस्टी को इस्टैब्लिश करते हैं।
- 3:12:10सुंगास को ब्राह्मण वर्ण का माना जाता है।
- 3:12:13कहा जाता है कि यह उज्जैन को बिलोंग करते
- 3:12:16थे। पुष्यमित्र शुंग ने अश्वमेध यज्ञ भी
- 3:12:19परफॉर्म किया था। बुद्धिस्ट सोर्सेस जैसे
- 3:12:22कि दिव्य वादना में पुष्यमित्र्रा को
- 3:12:24बुद्धिस्ट मोनेस्ट्रीज का डिस्ट्रयर कहा
- 3:12:27गया है। पुष्यमित्र शुंग नॉर्थ वेस्ट की
- 3:12:30तरफ से यवनाज यानी कि बैक्ट्रियन ग्रीक्स
- 3:12:33के अटैक्स का भी सामना करते हैं और अपने
- 3:12:35ग्रैंडसन अग्निमित्रा की हेल्प से इनको
- 3:12:38हराने में कामयाब होते हैं। पुरानाज़ के
- 3:12:40अनुसार पुष्यमित्र 36 साल तक रूल करते हैं
- 3:12:44और उनके बाद रूलर बनते हैं अग्निमित्र
- 3:12:46शुंग। अग्निमित्र सुंगा की बात करें तो
- 3:12:50यही कालिदास के फेमस ड्रामा मालविका
- 3:12:53अग्निमित्रम के हीरो हैं। इनके रूल में भी
- 3:12:55बैक्ट्रियन ग्रीक्स के साथ फ्रीक्वेंट
- 3:12:57क्लैशेस होते हैं। कहा जाता है कि यवनाज़
- 3:13:00साकेत यानी कि मॉडर्न अयोध्या तक आ जाते
- 3:13:03हैं। एक और इंपॉर्टेंट सुंग रूलर थे
- 3:13:06बागभद्र। इनके कोर्ट में ही तक्षशिला के
- 3:13:09राजा एंटीियल्किड्स के एंबेसडर हीलियोडोरस
- 3:13:13आते हैं। हीलियोडोरस फेमस हैं अपने गरुड़ा
- 3:13:16या बेसन नगर इं्रिप्शन के लिए। यह भागवत
- 3:13:19रिलीजन अपना लेते हैं और विदिशा में
- 3:13:21गरुड़ा पिलर का कंस्ट्रक्शन करवाते हैं जो
- 3:13:24बागभद्रा की कैपिटल थी। बेसन नगर
- 3:13:27इंक्रिप्शन सबसे पहला इंक्रिप्शनल एविडेंस
- 3:13:30है भागवत रिलीजन का। यह अराउंड 113 बीसी
- 3:13:34में बनवाया गया था। लास्ट सुंग रूलर थे
- 3:13:37देवभूति। यह एक कंस्परेसी का शिकार हो
- 3:13:40जाते हैं। जिसका मास्टरमाइंड खुद इनका ही
- 3:13:43एक ब्राह्मण मंत्री होता है। और वह मंत्री
- 3:13:46थे वासुदेव कनवा जो स्टार्ट करते हैं कनवा
- 3:13:50डायनेस्टी अराउंड 75 बीसी में। लेकिन यह
- 3:13:52डायनेस्टी बहुत लंबे समय तक नहीं रहती।
- 3:13:55अराउंड 30 बीसी में इसका एंड हो जाता है।
- 3:13:58कनवा डायनेस्टी के लास्ट रूलर थे सुशर्मा
- 3:14:01जिन्हें सातवाहना डायनेस्टी के फाउंडर
- 3:14:03सिमुका मार देते हैं। सातवाहना डायनेस्टी
- 3:14:07के बारे में हम थोड़ी देर में डिटेल में
- 3:14:09देखेंगे। दोस्तों, यह तो बात हुई नॉर्थ
- 3:14:11इंडिया के रीजन की। अब चलते हैं नॉर्थ
- 3:14:14वेस्ट की तरफ जहां बहुत से आउटसाइडर्स आकर
- 3:14:16अपना रूल इस्टैब्लिश करते हैं। इनमें सबसे
- 3:14:19पहले थे इंडोग्रीक्स। तो आइए उनके बारे
- 3:14:21में जानते हैं। इंडोग्रीकस।
- 3:14:25इंडो ग्रीक्स को इंडियन सोर्सेज जैसे कि
- 3:14:28पुरानाज में यवनास कहा जाता है। यह
- 3:14:30ओरिजिनली वेस्ट एशिया के सेल्यूसिड एंपायर
- 3:14:33के शत्रप्स यानी कि सबोर्डिनेट्स थे। बाद
- 3:14:37में जब सेल्यूसिड एंपायर कमजोर होने लगता
- 3:14:40है तो अराउंड 250 बीसी में बैक्टीरिया के
- 3:14:42ग्रीक गवर्नर डडोटस रिवोल्ट कर देते हैं
- 3:14:45और एक इंडिपेंडेंट रूलर की तरह बैक्टीरिया
- 3:14:48पर रूल करना शुरू करते हैं। बैक्टीरिया
- 3:14:51सेंट्रल एशिया के एक एंशिएंट रीजन का नाम
- 3:14:54है जो हिंदूकुश माउंटेन रेंज के नॉर्थ और
- 3:14:56ऑक्सिस रिवर के साउथ यानी कि मॉडर्न डे
- 3:14:59अफगानिस्तान के एरिया को कवर करता था।
- 3:15:02सेंट्रल एशिया का एक नोमेडिक ट्राइब जिसका
- 3:15:05नाम सीथियन था बैक्टीियन ग्रीक्स के लिए
- 3:15:08खतरा बना हुआ था। चाइनीस वॉल के
- 3:15:10कंस्ट्रक्शन के बाद सीथियंस चाइना की तरफ
- 3:15:13मूव नहीं कर सकते थे। इसलिए वह बैक्टीरिया
- 3:15:16की तरफ मूव करते हैं और अटैक करना शुरू
- 3:15:18करते हैं। सीथियंस के अटैक से बचने के लिए
- 3:15:21बैक्टीरियन ग्रीक्स इंडिया की तरफ मूव
- 3:15:23करते हैं। और यही बैक्टीरियन ग्रीक्स जो
- 3:15:26इंडिया में अपना एंपायर बनाते हैं
- 3:15:28इंडोग्रीक कहे जाते हैं। सबसे इंपॉर्टेंट
- 3:15:31इंडोग्रीक किंग थे मिनांडा और मिलिंदा।
- 3:15:35इनके टाइम में यानी कि अराउंड 165 बीसी
- 3:15:37में ग्रीक पावर स्वार्थ वैली से पंजाब तक
- 3:15:40फैली हुई थी। पंजाब के सकला यानी मॉडर्न
- 3:15:44सियालकोट में इनकी कैपिटल थी। मिनांडर
- 3:15:47बुद्धिस्ट मंक नागसेना के इन्फ्लुएंस में
- 3:15:50बुद्धिज्म में कन्वर्ट होते हैं। मिनांडर
- 3:15:53नागसेना से बहुत सारे क्वेश्चंस पूछते हैं
- 3:15:56बुद्धिज्म के बारे में। यह क्वेश्चंस और
- 3:15:58उनके आंसर्स एक बुक के फॉर्म में रिकॉर्ड
- 3:16:00किए जाते हैं जिसका नाम है मिलिंद पन्हा।
- 3:16:03इंडोग्रीक पहले ऐसे रूलर्स थे जिन्होंने
- 3:16:06इंडिया में गोल्ड कॉइंस इशू किए थे। यह
- 3:16:09कॉइंस इंडोग्रीक्स की हिस्ट्री का
- 3:16:11वैल्यूुएबल सोर्स भी हैं। कॉइंस के ऊपर
- 3:16:14रूलर का नाम और इमेज होती थी और साथ ही
- 3:16:16उनका टाइम पीरियड भी जिससे हमें इन रूलर्स
- 3:16:19के बारे में जानकारी मिलती है। हमें
- 3:16:22अराउंड 30 इंडोग्रीक रूलर्स के बारे में
- 3:16:24पता चलता है उनके कॉइंस की हेल्प से। इन
- 3:16:28कॉइंस पर इंडियन और ग्रीक में इं्रिप्शंस
- 3:16:31थे और कुछ कॉइंस पर इंडियन डेटीज की
- 3:16:33इमेजेस भी मिलती हैं। इंडो ग्रीक्स के
- 3:16:36टाइम में ही पहली बार बुद्धा की इमेज
- 3:16:39वरशिप शुरू होती है। इसके अलावा सबसे
- 3:16:41ज्यादा ग्रीक इन्फ्लुएंस आर्ट एंड
- 3:16:43स्कल्प्चर में देखने को मिलता है। जैसे कि
- 3:16:45गांधारा स्कूल ऑफ आर्ट। इंडो ग्रीक्स के
- 3:16:47बाद जो डायनेस्टी नॉर्थ वेस्ट एरिया में
- 3:16:49कंट्रोल एस्टैब्लिश करती है, वह थे साकास
- 3:16:53यानी कि सीथियंस। तो आइए अब उनके बारे में
- 3:16:56जानते हैं। साकास साकास सेंट्रल एशिया के
- 3:17:01नोमेडिक ट्राइब्स में से एक थे। सेंट्रल
- 3:17:03एशिया की एक और ट्राइब यूएची साकास को
- 3:17:06अटैक करते हैं। जिसकी वजह से साकास को
- 3:17:09बैक्ट्रियन बॉर्डर छोड़कर इंडिया की तरफ
- 3:17:11माइग्रेट करना पड़ता है। साकास इंडोग्रीक
- 3:17:14रूलर्स को हराकर इंडिया के नॉर्दन और
- 3:17:17नॉर्थ वेस्टर्न रीजन पे अपना कंट्रोल बना
- 3:17:20लेते हैं। साकास फाइव ब्रांचेस में
- 3:17:22डिवाइडेड थे। इनकी एक ब्रांच थी अपर डेकन
- 3:17:26में। सेकंड ब्रांच का इन्फ्लुएंस था पंजाब
- 3:17:28में। इनकी कैपिटल तक्षशिला थी। थर्ड
- 3:17:31ब्रांच का होल्ड वेस्टर्न इंडिया के ऊपर
- 3:17:33था। फोर्थ ब्रांच मथुरा में सेटल थी। और
- 3:17:36फिफ्थ अफगानिस्तान में। मोयज़ और मोगा
- 3:17:40फर्स्ट साका किंग थे। यह गांधारा के ऊपर
- 3:17:43रूल करते हैं। यानी कि आज के पाकिस्तान और
- 3:17:46अफगानिस्तान के रीजन में। इनकी कैपिटल थी
- 3:17:48पाकिस्तानी पंजाब के सिरकप एरिया में।
- 3:17:51इनके पुत्र एज एज वन बाकी की इंडोग्रीक
- 3:17:55टेरिटरीज को भी जीत लेते हैं। आफ्टर
- 3:17:57डिफीटिंग द लास्ट ग्रीक रूलर
- 3:17:59हिपोस्ट्रेटोस्को।
- 3:18:00सबसे ज्यादा लंबे समय तक रूल करते हैं
- 3:18:03वेस्टर्न ब्रांच के साकर्स। यह लगभग फोर
- 3:18:06सेंचुरीज तक पावर में रहते हैं। आइए इनके
- 3:18:09कुछ इंपॉर्टेंट रूलर्स को जानते हैं।
- 3:18:11चष्टाना रेन 78 एडी टू 130 एडी। साकास की
- 3:18:17वेस्टर्न क्षत्रप्स यानी सैट्रप्स
- 3:18:19डायनेस्टी जो उज्जैन से रूल करती थी वहां
- 3:18:22के राजा थे। इनके 78 एडी में पावर में आने
- 3:18:25पर ही साका एरा की शुरुआत मानी जाती है।
- 3:18:29रुद्रदमन वन रेन 130 एडी टू 152 एडी सभी
- 3:18:34शाका रूलर्स में सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट
- 3:18:36माने जाते हैं। यह चष्टाना के ग्रैंडसन
- 3:18:39थे। इनके किंगडम में कुंकण, नर्मदा वैली,
- 3:18:42काठियावाड़, गुजरात और मालवा शामिल थे।
- 3:18:46इन्होंने काठियावाड़ में सुदर्शन लेक को
- 3:18:48रिपेयर कराया था। सुदर्शन लेखक गिरनार हिल
- 3:18:51के मिडिल में लोकेटेड थी। इसको सबसे पहले
- 3:18:54चंद्रगुप्त मौर्य के ऑर्डर पर उनके गवर्नर
- 3:18:57पुष्यगुप्त वैश्या ने कंस्ट्रक्ट कराया
- 3:18:59था। इसके बाद अशोका के टाइम में उनके
- 3:19:02ग्रेट मास्टर तशास्प ने इस लेखक को
- 3:19:04रिबिल्ड और स्ट्रेंथन कराया। यहीं पर
- 3:19:07रुद्र दमन ने संस्कृत का सबसे पहला
- 3:19:09इं्रिप्शन भी इशू किया था। जिसे जूनागढ़
- 3:19:12इं्रिप्शन या गिरनार इं्रिप्शन कहा जाता
- 3:19:15है। यह साका ईयर 72 यानी कि 150 एडी में
- 3:19:19इंक्राइब्ड किया गया था। इसको ब्राह्मी
- 3:19:22स्क्रिप्ट और संस्कृत लैंग्वेज में लिखा
- 3:19:24गया है। इस इं्रिप्शन में 20 लाइंस हैं।
- 3:19:27जिसमें से पहली आठ लाइन सुदर्शन लेक के
- 3:19:30रेस्टोरेशन के बारे में है। इसके अलावा
- 3:19:33इसमें रुद्रदमन के मालवा, सौराष्ट्र,
- 3:19:35नॉर्दन कोंकण और नर्मदा वैली के
- 3:19:38कॉनक्वेस्ट की इंफॉर्मेशन भी मिलती है। यह
- 3:19:41भी बताया गया है कि इन्होंने सातवाहना
- 3:19:43रूलर सातकर्णी को दो बार हराया था। लेकिन
- 3:19:46सातवाहनाज़ की पावर को पूरी तरह डिस्ट्रॉय
- 3:19:49नहीं किया था क्योंकि सातवाहनाज़ के साथ
- 3:19:51इनके मैरिटल रिलेशंस थे। वशिष्ठी पुत्र
- 3:19:54सातकर्णी इनके सन इन लॉ थे। रुद्र दमन के
- 3:19:58बाद इस एरिया में साकाज़ का रूल बना रहता
- 3:20:00है फोर्थ सेंचुरी एडी के एंड तक। इनके रूल
- 3:20:03का एंड होता है जब वेस्टर्न सत्रप के
- 3:20:05लास्ट साका रूलर रुद्रसिम्हा थर्ड को
- 3:20:08गुप्ता डायनेस्टी के चंद्रगुप्त द सेकंड
- 3:20:11हरा देते हैं। नॉर्थ वेस्ट पार्ट के साका
- 3:20:14रूलर्स को सक्सीड करते हैं पार्थियंस।
- 3:20:16चलिए इनके बारे में जानते हैं। पार्थियंस
- 3:20:21ऐसा कहा जाता है कि पार्थियंस ईरान को
- 3:20:24बिलोंग करते थे और वहां से माइग्रेट करके
- 3:20:26यह इंडिया आते हैं। फर्स्ट सेंचुरी एडी
- 3:20:29में नॉर्थ वेस्ट के स्मॉल पोर्शन में यह
- 3:20:31अपना कंट्रोल इस्टैब्लिश कर पाते हैं।
- 3:20:33इनको इंडियन सोर्सेज में पहलावास कहा जाता
- 3:20:36है। सबसे रिनाउंड पार्थियन किंग थे
- 3:20:39गोंडोफर्नीस। इनका रूल काबुल से लेकर
- 3:20:42पंजाब तक था। गोंडो फर्नीस के टाइम में ही
- 3:20:45सेंट टॉमस क्रिश्चियनिटी का प्रचार करने
- 3:20:47के लिए इंडिया आते हैं। पार्थियंस को फॉलो
- 3:20:50करते हैं कुशानास। आइए जानते हैं कुशानास।
- 3:20:55कुशानास भी एक सेंट्रल एशियन ट्राइब थी
- 3:20:58जिन्हें टोकरियंस या यूएचीस भी कहा जाता
- 3:21:01है। इनफैक्ट यूएस ट्राइब फाइव क्लस में
- 3:21:05डिवाइडेड थी। कुशानास इन्हीं में से एक
- 3:21:07क्लैन था। सबसे पहले यह नॉर्थ अफगानिस्तान
- 3:21:10पर कंट्रोल इस्टैब्लिश करते हैं और फिर
- 3:21:12धीरे-धीरे काबुल वैली की तरफ आते हैं और
- 3:21:15गांधारा को कंकर कर लेते हैं। कुषाण
- 3:21:18एंपायर उत्तर प्रदेश के वाराणसी से
- 3:21:20सेंट्रल एशिया के खुरासान तक और ऑक्सस से
- 3:21:24गंगा रिवर तक फैला हुआ था। कुषाण एंपायर
- 3:21:27के फाउंडर थे कुजूल कैडफिसीस। यह काबुल के
- 3:21:31एरिया में रूल करते हैं। अराउंड 50 एडी
- 3:21:34वीमा कैडफसीज जो कुजुल कैटफसीज को सक्सीड
- 3:21:37करते हैं। पहले कुषाण रूलर थे जिन्होंने
- 3:21:40गोल्ड कॉइंस इशू किए थे। इनके कॉइंस पर
- 3:21:43लॉर्ड शिवा और नंदी की इमेज मिलती है।
- 3:21:46सबसे इंपॉर्टेंट कुषाण रूलर माने जाते हैं
- 3:21:49कनिष्क जो रूल करते हैं 78 एडी से 10001
- 3:21:53एडी तक। इनकी कैपिटल थी पुरुषपुर यानी कि
- 3:21:57मॉडर्न पेशावर इन पाकिस्तान। मथुरा इनकी
- 3:22:00सेकंड कैपिटल थी। इनका एंपायर ईस्ट में
- 3:22:02पाटलिपुत्र तक फैला हुआ था और वेस्ट में
- 3:22:05अफगानिस्तान और बैक्टीरिया तक। कनिष्क के
- 3:22:08कोट में पांच फेमस पर्सनालिटीज शामिल थी
- 3:22:12जिन्हें पंचरत्न भी कहते हैं। यह थे
- 3:22:15अश्वघोष, पार्श्व, वासुमित्र, चरक और
- 3:22:19नागार्जुना। इन्होंने देवपुत्र का टाइटल
- 3:22:22अडॉप्ट किया था। कनिष्क ने चाइनीस एपरर के
- 3:22:26खिलाफ दो बार इन्वेशन किया। जिसमें पहली
- 3:22:29बार इनको हार का सामना करना पड़ा था।
- 3:22:31लेकिन दूसरी बार में इनको जीत मिलती है।
- 3:22:34कुशांस ने अपने खुद के टेंपल्स भी बनवाए।
- 3:22:37मतलब इन टेंपल्स में कुषाण राजाओं की पूजा
- 3:22:40होती थी। कनिष्क के टॉरसो का स्टैच्यू
- 3:22:42हमें मथुरा में मिलता है जो मथुरा के ही
- 3:22:45म्यूजियम में रखा गया है। कनिष्क ने
- 3:22:48कश्मीर में फोर्थ बुद्धिस्ट काउंसिल भी
- 3:22:50ऑर्गेनाइज कराई थी। बुद्धिज्म के महायान
- 3:22:53फॉर्म की डॉक्ट्रिंस इसी काउंसिल में
- 3:22:55फाइनललाइज्ड होती हैं। पुरुषपुर में एक
- 3:22:57मोनेस्ट्री और स्तूपा भी कनिष्क ने बनवाया
- 3:23:00था। सिल्क रूट जहां से वर्ल्ड ट्रेड का
- 3:23:03मेजर पोर्शन होकर गुजरता था कनिष्क के
- 3:23:06एंपायर का पार्ट थी। जिससे इन्हें काफी
- 3:23:08रेवेन्यू मिलता था। इनके टाइम पीरियड में
- 3:23:11गांधारा और मथुरा स्कूल अवार्ड काफी
- 3:23:14डेवलप्ड होते हैं। कनिष्क के सक्सेसर्स
- 3:23:17रूल करना कंटिन्यू रखते हैं। लगभग एक और
- 3:23:19सेंचुरी तक। लास्ट इंपॉर्टेंट रूलर माना
- 3:23:22जाता है वासुदेव को। इनके बाद कुषाण
- 3:23:25एंपायर का डिक्लाइन शुरू हो जाता है। थर्ड
- 3:23:28सेंचुरी के मिड में ईरान में ससेनियन पावर
- 3:23:31का राइज होता है जो कुषाण एंपायर के
- 3:23:33अफगानिस्तान और इंडस के वेस्ट वाले
- 3:23:36पार्ट्स को जीत लेते हैं। इसके बाद
- 3:23:38कुशानाज़ की पोजीशन रिड्यूस होकर ससेनियन
- 3:23:40के सबोर्डिनेट्स की रह जाती है। कुशानाज़
- 3:23:43ने अपने टाइम में जो कॉइंस इशू किए वो इस
- 3:23:46टाइम पीरियड और कुषाण रूलर्स के बारे में
- 3:23:48काफी इंपॉर्टेंट इनेशन देते हैं। जैसे कि
- 3:23:51इनके कॉइंस पर अलग-अलग रिलीजियस ट्रेडिशंस
- 3:23:54के मोटिव्स देखने को मिलते हैं। जैसे
- 3:23:56बुद्धा, शिवा, पर्शियन फायर, गॉड अताश,
- 3:24:00ग्रीक डेटीस, हीलियोस और सिलीन एटसेट्रा
- 3:24:03की इमेजेस। इससे कुषाण रूलर्स के रिलीजियस
- 3:24:06टोलरेंट नेचर का पता चलता है। इसके अलावा
- 3:24:09लार्ज नंबर में कॉइंस का इशू होना इनकी
- 3:24:12स्ट्रांग इकोनॉमिक कंडीशंस को भी दर्शाता
- 3:24:14है। इनके कॉइंस हमें एंपायर की बाउंड्री
- 3:24:16के बाहर जैसे कि वेस्टर्न एशिया के रीजंस
- 3:24:19में और रोमन एंपायर तक मिलते हैं जो बताता
- 3:24:22है कि इन एरियाज के साथ कुशानास के ट्रेड
- 3:24:25रिलेशंस थे। दोस्तों, यह तो कहानी थी
- 3:24:28नॉर्दन पार्ट की। अब चलते हैं डेक्कन के
- 3:24:31रीजन की तरफ जहां सातवाहना डायनेस्टी अपना
- 3:24:34एंपायर बनाती है। सातवाहनाज़
- 3:24:38पुरानाज़ में सातवाहनाज़ को आंध्राज़ बोला
- 3:24:41गया है। यह ब्राह्मण वर्ण को बिलोंग करते
- 3:24:44थे। सिमुका को सातवाहनास डायनेस्टी का
- 3:24:46फाउंडर माना जाता है। इनके भाई कृष्णा वन
- 3:24:49या कान्हा के बारे में हमें नासिक के
- 3:24:51इं्रिप्शन से पता चलता है। पहले
- 3:24:54इंपॉर्टेंट रूलर थे सत्कर्णी वन जो 27
- 3:24:57बीसी से 17 बीसी तक रूल करते हैं। इनकी
- 3:25:00वाइफ का नाम था नागनिका। नागनिका ने ही
- 3:25:04नाना घाट इं्रिप्शन इशू किया था। जिससे
- 3:25:07हमें इंपॉर्टेंट सातवाहनाज़ रूलर्स के बारे
- 3:25:09में पता चलता है। सत्कर्णी वन ने अश्वमेध
- 3:25:13यज्ञ भी ऑर्गेनाइज किया था। इस यज्ञ के
- 3:25:15बाद उन्होंने सिल्वर के कॉइंस इशू किए
- 3:25:18जिसमें उनकी वाइफ नागनिका का नाम इनग्रेव
- 3:25:21था। इन्होंने दक्षिण पथपति का टाइटल
- 3:25:24अडॉप्ट किया था। एक और इंपॉर्टेंट रूलर था
- 3:25:26हाला जो फेमस हैं गट सप्तसती के राइटर के
- 3:25:30रूप में। यह प्राकृत लैंग्वेज में लिखी गई
- 3:25:32थी। सातवाहना डायनेस्टी के सबसे
- 3:25:34इंपॉर्टेंट रूलर माने जाते हैं गौतमी
- 3:25:37पुत्र शतकर्णी। इनके बारे में हमें पता
- 3:25:40चलता है नासिक इं्रिप्शन से। नासिक
- 3:25:43इं्रिप्शन इनकी मदर गौतमी बालश्री ने इशू
- 3:25:46किया था। इसमें गौतमी पुत्र सत्कर्णी की
- 3:25:49मिलिट्री कॉन्क्वेस्ट्स की डिटेल्स मिलती
- 3:25:51हैं। यह रूल करते हैं 106 एडी से 130 एडी
- 3:25:56तक। इन्होंने ही वेस्टर्न डेक्कन और
- 3:25:58गुजरात के क्षत्रपज यानी सका रूलर्स को
- 3:26:01हराया था। गौतमी पुत्र शतकर्णी के बाद
- 3:26:04रूलर बनते हैं। इनके पुत्र वशिष्ठ पुत्र
- 3:26:07पुलमावी। इनको सका रूलर रुद्रदमन ने दो
- 3:26:10बार हराया था। यह अपनी कैपिटल चेंज करके
- 3:26:13बनाते हैं पैठन या प्रतिष्ठान इन मॉडर्न
- 3:26:16डे महाराष्ट्र। लास्ट इंपॉर्टेंट सातवाहना
- 3:26:20रूलर थे यज्ञसरी सातकर्णी। इनको भी साका
- 3:26:24रूलर हरा देते हैं। इनके बाद सातवाहना
- 3:26:26किंगडम इनके सक्सेसर्स के बीच डिवाइड हो
- 3:26:29जाता है और धीरे-धीरे डिक्लाइन कर जाता
- 3:26:31है। सातवाहनाज़ ने अमरावती स्कूल अवार्ड को
- 3:26:34पेटनाइज किया था। सातवाहनाज़ को फॉलो करती
- 3:26:37है इवाकू डायनेस्टी। आइए इनके बारे में भी
- 3:26:40जानते हैं। इ्वाकुस।
- 3:26:43सातवाहनाज़ डायनेस्टी के फॉल के बाद आंध्रा
- 3:26:46रीजन में रूल करते हैं इ्वाकुस। मत्स्य
- 3:26:49पुराण के अनुसार इवाको डायनेस्टी के सात
- 3:26:52राजा अराउंड 52 इयर्स तक यहां रूल करते
- 3:26:54हैं। फाउंडर थे श्री संतमूला। इन्होंने
- 3:26:57सातवाहनाज़ के लास्ट किंग पुलमावी द थर्ड
- 3:27:00को हराया था। इनकी कैपिटल थी विजयपुरी।
- 3:27:03श्री संतमूला के पुत्र वीरा पुरुषा दत्ता
- 3:27:06अगले राजा बनते हैं और इन्हें इक्षवाकु
- 3:27:09डायनेस्टी का ग्रेटेस्ट किंग माना जाता है
- 3:27:11और साउथ इंडिया का अशोका भी कहा जाता है।
- 3:27:14इन्हें श्री पर्वताधिपति भी बोला जाता है।
- 3:27:17नागार्जुनाकोंडा, अमरावती, जगाया पेटा,
- 3:27:21उपुग गुंदू एंड अलरू जैसे इं्रिप्शंस इनके
- 3:27:25ग्लोरियस रेन के बारे में इंफॉर्मेशन देते
- 3:27:27हैं। यह शुरुआत में वैदिक रिलजन को फॉलो
- 3:27:31करते थे। लेकिन बाद में बुद्धिज्म अडॉप्ट
- 3:27:33करते हैं। यह बुद्धिज्म फॉलो करने वाले
- 3:27:36इक्षवाकु डायनेस्टी के अकेले राजा थे।
- 3:27:38इनके टाइम पीरियड को महायान बुद्धिज्म का
- 3:27:41गोल्डन पीरियड भी कह सकते हैं। वीर पुरुष
- 3:27:44दत्त के पुत्र थे इवाला संतूमला। यह श्री
- 3:27:47पर्वत यूनिवर्सिटी में पुरुषभद्र टेंपल का
- 3:27:50कंस्ट्रक्शन कंप्लीट कराते हैं। जिसकी
- 3:27:53शुरुआत इनके पिताजी ने की थी। एवला
- 3:27:55संथूमला के पुत्र रुद्र पुरुष दत्त इवाकू
- 3:27:59डायनेस्टी के लास्ट रूलर थे। मंचिक
- 3:28:02इं्रिप्शन के अनुसार इनको पल्लव डायनेस्टी
- 3:28:05के नरसिम वर्मन ने डिफीट किया था।
- 3:28:08दोस्तों, यह तो बात हुई 200 बीसी से 300
- 3:28:12एडी के बीच हुए पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स की।
- 3:28:15इसके अलावा यह पीरियड अपने ट्रेड
- 3:28:17डेवलपमेंट्स के लिए भी जाना जाता है। तो
- 3:28:19आइए अब बात करते हैं इस पीरियड में हुई
- 3:28:22इंपॉर्टेंट ट्रेड डेवलपमेंट्स के बारे
- 3:28:24में। ट्रेड डेवलपमेंट्स फ्रॉम 200 बीसी टू
- 3:28:28300 एडी। दोस्तों, इस पीरियड में ट्रेड
- 3:28:31एंड कॉमर्स का बहुत तेजी से विस्तार होता
- 3:28:33है। इंटरनल और एक्सटर्नल दोनों ही तरह का
- 3:28:36ट्रेड होता था। इंटरनल ट्रेड के लिए दो
- 3:28:39मेन रूट्स थे। उत्तर पथ और दक्षिण पथ।
- 3:28:42उत्तर पथ का मार्ग पुष्कलावती या मॉडर्न
- 3:28:46छरसड्डा से तक्षशिला, मथुरा, कौशांबी,
- 3:28:49वाराणसी होते हुए पाटलिपुत्र और वहां से
- 3:28:52चंपा और चंद्रकेतु गढ़ तक जाता था। दक्षिण
- 3:28:56पथ जो गंगा वैली से गोदावरी वैली तक जाता
- 3:28:59था। साउथ इंडिया के इंपॉर्टेंट ट्रेड
- 3:29:01सेंटर्स जैसे कि प्रतिष्ठाना और टेरर को
- 3:29:04जोड़ता था। इंटरनल ट्रेड का काम करने वाले
- 3:29:07मर्चेंट्स के अलग-अलग नाम हमें कंटेंपररी
- 3:29:09टेक्स्ट में मिलते हैं। जैसे जनरल ट्रेडर
- 3:29:13को वाणिक बोलते थे। फाइनेंसर को सिद्धि और
- 3:29:16कैरवान के लीडर को अर्थवाह कहा जाता था।
- 3:29:19सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट देखने
- 3:29:21को मिलता है एक्सटर्नल ट्रेड में। वेस्ट
- 3:29:24में रोमन एंपायर के साथ और ईस्ट में
- 3:29:26चाइनीस हान एंपायर के साथ ट्रेड रिलेशंस
- 3:29:28मजबूत होते हैं। पेरिप्लस ऑफ एरथ्रियन सी
- 3:29:31में रोमन एंपायर के साथ इंडिया के ट्रेड
- 3:29:34की डिटेल्स मिलती हैं। एक्सपोर्ट के मेन
- 3:29:36आइटम्स थे पेपर, पर्ल्स, सिल्क, सैफरन एंड
- 3:29:40प्रेशियस स्टोंस अमोंग्स अदर्स। रोमन
- 3:29:43एंपायर से इंडिया में इंपोर्ट होने वाले
- 3:29:45आइटम्स थे ग्लासवेयर, टिन, लिनन, वाइन,
- 3:29:49कॉपर एटसेट्रा। इसके अलावा चाइना और रोमन
- 3:29:52एंपायर के बीच सिल्क ट्रेड में इंडियन
- 3:29:55मर्चेंट्स इंटरमीडियरीज का रोल भी निभाते
- 3:29:57थे। एक्सटर्नल ट्रेड का एक रूट बैक्टीरिया
- 3:30:00से होते हुए ब्लैक सी तक जाता था और दूसरा
- 3:30:04रूट कांधार और हेरात से एक बाटना तक जहां
- 3:30:08से फिर ट्रेडर्स लैंड के रास्ते ईस्टर्न
- 3:30:10मेडिटेरेनियन कोस्ट तक पहुंचते थे। ट्रेड
- 3:30:13के डेवलपमेंट में मेजर रोल प्ले करती हैं
- 3:30:15गिल्ड्स। आइए जानते हैं गिल्ड्स के बारे
- 3:30:18में थोड़ा डिटेल में। ट्रेड गिल्ड्स।
- 3:30:22एंशिएंट पीरियड में एक ही जैसे क्राफ्ट और
- 3:30:25ऑक्यूपेशन को फॉलो करने वाले और एक ही
- 3:30:27रीजन में रहने वाले लोग गिल्ड के फॉर्म
- 3:30:30में खुद को ऑर्गेनाइज करते थे। वैसे तो
- 3:30:33गिल्ड्स हमें मौर्यन एंपायर से ही देखने
- 3:30:35को मिलती हैं। लेकिन 200 बीसी के बाद जब
- 3:30:37ट्रेड बढ़ने लगता है तो गिल्ड्स का नंबर
- 3:30:40भी बढ़ता है और इनकी एक्टिविटीज भी।
- 3:30:43गिल्ड्स अपने मेंबर्स को ट्रेनिंग देती
- 3:30:45थी। उनके लिए रॉ मटेरियल प्रोक्योर करती
- 3:30:48थी और सेल के लिए मार्केट भी देखती थी।
- 3:30:51इसके अलावा गिल्ड्स बैंकर्स या ट्रस्टीज
- 3:30:53का रोल भी प्ले करती थी। गिल्ड्स के कुछ
- 3:30:56जुडिशियल फंक्शनंस भी देखने को मिलते हैं।
- 3:30:59जैसे कि यह इंश्योर करते थे कि इनके
- 3:31:01मेंबर्स स्टेट के लॉस को फॉलो करें और
- 3:31:04गिल्ड के अपने रूल्स को भी। गिल्ड्स का एक
- 3:31:07और इंपॉर्टेंट रोल था। वो था रिलीजियस और
- 3:31:10चैरिटेबल एक्टिविटीज में इनका
- 3:31:11कंट्रीब्यूशन। बहुत सारे एग्जांपल्स मिलते
- 3:31:14हैं जहां गिल्ड्स ने टेंपल या मोनेस्ट्री
- 3:31:16को दान दिया हो। जैसे कि मंदसौर इं्रिप्शन
- 3:31:19में लिखा है कि एक सिल्क वीवर्स की गिल्ड
- 3:31:22सूर टेंपल को रनोवेट कराने के लिए हेल्प
- 3:31:24करती है। तो हम कह सकते हैं कि ट्रेड
- 3:31:26गिल्ड्स इस पीरियड में सिर्फ ट्रेड ही
- 3:31:29नहीं बल्कि हर फील्ड में बढ़-चढ़कर हिस्सा
- 3:31:32लेती हैं। कंक्लूजन। दोस्तों, हमने देखा
- 3:31:35कि कैसे 200 बीसी से 300 एडी तक का समय
- 3:31:38किसी एक लार्ज डायनेस्टी का ना होकर बहुत
- 3:31:41सारी डायनेस्टीज का पीरियड था। लेकिन एक
- 3:31:43लार्ज डायनेस्टी ना होने का यह मतलब नहीं
- 3:31:46था कि इस पीरियड में कोई इंपॉर्टेंट
- 3:31:48डेवलपमेंट्स नहीं हुए। बल्कि इस पीरियड
- 3:31:50में जैसा हमने देखा ट्रेड और कॉमर्स में
- 3:31:53काफी डेवलपमेंट्स हुए। इसके अलावा इस
- 3:31:55पीरियड में आर्ट और कल्चर भी डेवलप होता
- 3:31:58है। जिसकी डिटेल्ड डिस्कशन हम आर्ट एंड
- 3:32:01कल्चर सेक्शन में करेंगे। संगम एज सदर्न
- 3:32:05इंडिया में हिस्टोरिकल पीरियड की शुरुआत
- 3:32:07मानी जाती है संगम एज से। ऐसा इसलिए
- 3:32:10क्योंकि उससे पहले तक यहां मेगालिथिक
- 3:32:13पीरियड चल रहा था जो प्री हिस्टोरिक
- 3:32:15पीरियड का हिस्सा है। ज्योग्राफिकली सदर्न
- 3:32:18इंडिया का मतलब हुआ रिवर कृष्णा और
- 3:32:20तुंगभद्रा के साउथ का एरिया। और संगम
- 3:32:23पीरियड की टाइमलाइन की बात करें तो इसे
- 3:32:25थर्ड सेंचुरी बीसी और थर्ड सेंचुरी एडी के
- 3:32:28बीच का पीरियड माना जाता है। तो चलिए शुरू
- 3:32:31करते हैं आज का डिस्कशन जो कि है संगम एज
- 3:32:35पे जिसमें हम डिटेल में इसके वेरियस
- 3:32:37एस्पेक्ट्स को समझेंगे। सबसे पहले जानते
- 3:32:39हैं कि इसको संगम पीरियड क्यों कहा जाता
- 3:32:42है और क्या मतलब है संगम का?
- 3:32:45मीनिंग ऑफ संगम। इस पीरियड का नाम पड़ा है
- 3:32:48यहां होने वाली संगम असेंबलीज यानी कि
- 3:32:51एकेडमी ऑफ तमिल पोएट्स के ऊपर। यह
- 3:32:54असेंबलीज मदुराई के पांड्या किंग्स के
- 3:32:56पेट्रिननेज में ऑर्गेनाइज की गई थी। इन
- 3:32:59संगम्स में बहुत से इंपॉर्टेंट स्कॉलर्स
- 3:33:01असेंबल होते हैं और लिटरेचर का कंपाइलेशन
- 3:33:04करते हैं एंथोलॉजीस के फॉर्म में। यह
- 3:33:06लिटरेरी वक्स द्रविडियन लिटरेचर के सबसे
- 3:33:09पहले स्पेसिमस माने जाते हैं।
- 3:33:12तमिल लेजेंड्स के अनुसार तीन संगम्स
- 3:33:15ऑर्गेनाइज की गई थी। माना जाता है कि
- 3:33:17फर्स्ट संगम मदुराई में हुई थी जिसे अटेंड
- 3:33:20किया था गॉड्स और लेजेंडरी सेजेस ने। इस
- 3:33:23संगम का कोई भी लिटरेरी वर्क अवेलेबल नहीं
- 3:33:26है। सेकंड संगम ऑर्गेनाइज की गई थी
- 3:33:28काबदापुरम में। इस संगम का सिर्फ एक
- 3:33:31लिटरेरी वर्क सर्वाइव करता है जो है
- 3:33:34टोलकापियम। थर्ड संगम भी मदुराई में होती
- 3:33:37है। इसमें लिखे गए बहुत से तमिल लिटरेरी
- 3:33:40वक्स सर्वाइव करते हैं और संगम पीरियड की
- 3:33:43हिस्ट्री को रिकंस्ट्रक्ट करने का यूज़फुल
- 3:33:45सोर्स भी हैं। तो आइए अब जानते हैं संगम
- 3:33:48लिटरेचर के डिटेल्स।
- 3:33:51संगम लिटरेचर। संगम लिटरेचर को अराउंड 300
- 3:33:54से 600 एडी में कंपाइल किया गया था। इसे
- 3:33:58हम रफली दो ग्रुप्स में डिवाइड कर सकते
- 3:34:00हैं। पहला नैरेटिव और दूसरा डैक्टिक।
- 3:34:04नैरेटिव टेक्स्ट्स को मेल कंडकु या 18
- 3:34:08मेजर वर्क्स कहा जाता है। जिसमें एट
- 3:34:11एंथोलॉजीस यानी एक्टोगई और 10 एडल्स
- 3:34:15जिन्हें पट्टूपट्टू कहते हैं। डैक्टिक
- 3:34:18टेक्स्ट को किलकु या 18 माइनर वक्स बोला
- 3:34:22जाता है। सब कुछ मिलाकर संगम लिटरेचर में
- 3:34:26शामिल हैं। टोल का पीएम इट टोगई पट्टू
- 3:34:30पट्टू पतिनेन किल कनक्कू और दो एपिक्स
- 3:34:33सीलपतिकरम
- 3:34:34और मनी मेगल सबसे पहले बात करते हैं
- 3:34:38टोलकपियम की। टोलकपियम को लिखा था टोल
- 3:34:41कपियार ने। इसको सभी तमिल लिटरेचर वर्क्स
- 3:34:44में अर्लियस्ट माना जाता है। वैसे तो यह
- 3:34:47तमिल ग्रामर के बारे में है लेकिन उस टाइम
- 3:34:50की पॉलिटिकल और सोशियो इकोनॉमिक कंडीशंस
- 3:34:52के बारे में भी इससे इंफॉर्मेशन मिलती है।
- 3:34:56अगला है एटोगई मतलब एट एंथोलॉजीस जिसमें
- 3:35:00आते हैं एट वर्क्स जो थे आयन गुरु नरनाई
- 3:35:05अग्नानुरु
- 3:35:07पूर्णानु कुरगई पितोगई परिपल और पदरूप
- 3:35:13नेक्स्ट है पट्टू पट्टू यानी 10 इडल्स जो
- 3:35:1710 वर्क से बनता है इसमें शामिल थे
- 3:35:20तिरुमुगर पढ़ाई पोरु पढ़ाई सिरुपनारू
- 3:35:25पढ़ाई
- 3:35:26पेर पार पई मुिया पट्टू नेदुल मेदुरईजी
- 3:35:32कुरिंजी पट्टू पट्ट ना पई और मई पदुकडम
- 3:35:37इट टोग और पट्टू पट्टू के वक्स को हम
- 3:35:40फर्दर डिवाइड कर सकते हैं थीम के बेसिस पे
- 3:35:42दो पार्ट्स में लव यानी कि अहम और वेलर
- 3:35:46मतलब पुरम।
- 3:35:49नेक्स्ट है पति नेन किल कनक्कू जो कि
- 3:35:52एथिक्स और मोरल्स के ऊपर लिखे गए 18 वक्स
- 3:35:55का कलेक्शन है जिसमें सबसे ज्यादा
- 3:35:58इंपॉर्टेंट है तिरुकुरल जिसको लिखा था
- 3:36:01तिरुव्लवर ने एपिक्स में शीला पट्टिकम के
- 3:36:05राइटर थे इलांगो अगल और मणि मेघालय के
- 3:36:09सितललाई सत्यनार यह एपिक्स भी संगम
- 3:36:12सोसाइटी और पिटी के बारे में वैल्यूुएबल
- 3:36:14डिटेल्स देते हैं। यह एपिक्स अराउंड
- 3:36:17सिक्स्थ सेंचुरी एडी में कंपोज की गई थी।
- 3:36:20शीला पथ्यकरम को अर्ली तमिल लिटरेचर का
- 3:36:22ब्राइटेस्ट जेम माना जाता है। इसमें एक
- 3:36:25कोवलन नाम के पर्सन की स्टोरी है जो अपनी
- 3:36:28वाइफ कन्नगी को छोड़कर कावेरीपट्टनम की
- 3:36:31कोटिजन माधवी से प्यार करता है। दूसरी
- 3:36:35एपिक मणिघलाई को लिखने वाले शीतलाई
- 3:36:38सत्यनार मदुराई के एक ग्रेन मर्चेंट थे।
- 3:36:41इन्होंने कोवलन और माधवी की डॉटर की लाइफ
- 3:36:44के एडवेंचर्स के बारे में लिखा है। संगम
- 3:36:47लिटरेचर के अलावा भी कुछ सोर्सेज हैं जो
- 3:36:49हमें इस पीरियड की इंफॉर्मेशन देते हैं।
- 3:36:52चलिए उनके बारे में भी जानते हैं। अदर
- 3:36:55सोर्सेस संगम पीरियड के बारे में हमें
- 3:36:57अलग-अलग सोर्सेस से डिटेल्स मिलती हैं।
- 3:37:00जैसे कि मेगस्थनीज, स्ट्राबो, प्ली और
- 3:37:03टोलमी जैसे ग्रीक राइटर्स वेस्ट और साउथ
- 3:37:06इंडिया के बीच के ट्रेड कांटेक्ट्स की
- 3:37:08इंफॉर्मेशन देते हैं। अशोकन इं्रिप्शंस
- 3:37:11में चेरा, चोला और पांड्या रूलर्स को
- 3:37:14मौर्यन एंपायर के साउथ में बताया गया है।
- 3:37:17वहीं कलिंग के राजा खारवेला के हाथी गुमफा
- 3:37:20इं्रिप्शन में भी तमिल किंगडम्स का मेंशन
- 3:37:22मिलता है। यह तो बात हुई डिफरेंट सोर्सेस
- 3:37:25की। आइए अब जानते हैं संगम पीरियड की
- 3:37:28पॉलिटिकल सिचुएशन के बारे में। पॉलिटिकल
- 3:37:31हिस्ट्री ऑफ़ संगम पीरियड। संगम एज के
- 3:37:35दौरान साउथ इंडिया को तीन डायनेस्टीज रूल
- 3:37:38करती थी जो थी चेराज, चोलाज़ और पांड्याज।
- 3:37:42एक-एक करके इनके बारे में जानते हैं। शुरू
- 3:37:45करते हैं चेराज से।
- 3:37:48चेराज़। चेराज़ केरला के सेंट्रल और नॉर्दन
- 3:37:51पार्ट्स और तमिलनाडु के कोंगू रीजन को
- 3:37:54कंट्रोल करते थे। इनकी कैपिटल वजी थी।
- 3:37:57वेस्टर्न कोस्ट के पोर्ट्स जैसे कि
- 3:38:00मुसीरीज और टोंडी पर इनका कंट्रोल था।
- 3:38:03चेरा का रॉयल एंबलम बो एंड एरो था। फर्स्ट
- 3:38:06सेंचुरी एडी के पुगलूर इं्रिप्शन में चेरा
- 3:38:09रूलर्स की तीन जनरेशंस का रेफरेंस मिलता
- 3:38:12है। रोमंस के साथ ट्रेड रिलेशंस की वजह से
- 3:38:15चेरास कीेंस बढ़ती है। रोमंस ने चेरा
- 3:38:19किंगडम में ऑगस्टस का टेंपल भी बनवाया था।
- 3:38:22चेरास के ग्रेटेस्ट रूलर थे सिंुतवन
- 3:38:25जिन्हें रेड चेरा या गुड चेरा भी कहते
- 3:38:28हैं। यह सेकंड सेंचुरी एडी को बिलोंग करते
- 3:38:30थे। इनकी मिलिट्री अचीवमेंट्स की डिटेल्स
- 3:38:34हमें एपिक सिलाकरम में मिलती है। इसमें
- 3:38:38इनकी हिमालयन एक्सपिडिशन के बारे में भी
- 3:38:40लिखा गया है। जहां इन्होंने बहुत सारे
- 3:38:42नॉर्थ इंडियन रूलर्स को हराया था।
- 3:38:45सिंघुत्त वन तमिलनाडु में पटनी कल्ट या
- 3:38:49क्नगी की आइडियल वाइफ के रूप में वरशिप
- 3:38:52स्टार्ट करते हैं। यह साउथ इंडिया से
- 3:38:54चाइना के लिए एंबेसी सेंड करने वाले पहले
- 3:38:56राजा थे। आइए अब जानते हैं चोलास के बारे
- 3:39:00में।
- 3:39:02चोलाज़ चोलाज़ तमिलनाडु के नॉर्दन और
- 3:39:05सेंट्रल पार्ट्स को कंट्रोल करते थे। इनके
- 3:39:07रूल का कोर एरिया कावेरी डेल्टा था जिसे
- 3:39:10बाद में चोला मंडलम के नाम से जाना जाता
- 3:39:13है। इनकी कैपिटल तिरुचरपल्ली टाउन के पास
- 3:39:16उयूर में थी।
- 3:39:19पोहार या कावेरीपट्टनम इनका चीफ पोर्ट
- 3:39:22टाउन था। इनका रॉयल एंबलेम था टाइगर।
- 3:39:25चोलाज़ एक एफिशिएंट नेवी भी मेंटेन करते
- 3:39:28थे। संगम चोलास के फेमस किंग थे किंग
- 3:39:31करगड़ा। पट्टन बड़ाई में इनकी लाइफ और
- 3:39:35मिलिट्री कॉन्क्वेस्ट्स का डिस्क्रिप्शन
- 3:39:37मिलता है। बहुत सी संगम पोएम्स बैटल ऑफ
- 3:39:40वेनी को मेंशन करती हैं। जहां इन्होंने
- 3:39:43चेराज़, पांड्याज और 11 माइनर चीफेंस की
- 3:39:46कन्फेडरेसी को डिफीट किया था। करीकड़ा की
- 3:39:49मिलिट्री अचीवमेंट्स इन्हें उस टाइम के
- 3:39:51पूरे तमिल रीजन का ओवरलोड बना देती हैं।
- 3:39:54इनके रूल में ट्रेड एंड कॉमर्स काफी
- 3:39:56फ्लोरिश करता है। करिकला को पोहार पोर्ट
- 3:40:00सिटी का फाउंडर कहा जाता है। इन्होंने
- 3:40:02कावेरी रिवर के अलोंग 160 कि.मी. का
- 3:40:05इंबैंकमेंट भी कंस्ट्रक्ट कराया था।
- 3:40:09आइए अब जानते हैं पांड्याज के बारे में।
- 3:40:12पांड्याज पांड्याज मदुराई से रूल करते थे।
- 3:40:15कोरकई इनका मेन पोर्ट था जो थाम्र प्रपानी
- 3:40:18और बे ऑफ़ बंगाल के कॉन्फ्लुएंस के पास
- 3:40:21लोकेटेड था। यह अपनी पर्ल फिशरी के लिए
- 3:40:23फेमस था। इनका रॉयल एंबलम फिश था।
- 3:40:26इन्होंने ही तमिल संगम्स को पेट्रोनाइज
- 3:40:28किया था और संगम पोएम्स के कंपाइलेशन को
- 3:40:31फैसिलिटेट किया था। यह वैदिक रिलीजन को
- 3:40:35मानते थे और ब्राह्मण प्रीस्ट्स को पिटनेज
- 3:40:37प्रोवाइड करते थे। इनकी पावर कड़ाभ्रास
- 3:40:40नाम के ट्राइब के इन्वजन के बाद डिक्लाइन
- 3:40:43कर जाती है। संगम एज के बाद करीब एक
- 3:40:46सेंचुरी से भी ज्यादा समय तक पांड्य
- 3:40:48डायनेस्टी अपनी सिग्निफिकेंस खो देती है।
- 3:40:51सिक्स्थ सेंचुरी के एंड में फिर एक बार
- 3:40:54इनका राइज होता है।
- 3:40:56दोस्तों, यह तो बात हुई इंपॉर्टेंट
- 3:40:58डायनेस्टीज की। अब संगम एज की ओवरऑल पिटी
- 3:41:02और एडमिनिस्ट्रेशन को भी समझते हैं।
- 3:41:06संगम पॉलिटी एंड एडमिनिस्ट्रेशन। संगम
- 3:41:08पीरियड के टाइम गवर्नमेंट का फॉर्म
- 3:41:11हेरिडिटरी मोनकी था। मतलब कि राजा का बेटा
- 3:41:14ही राजा बनता था। संगम ऐज की सभी
- 3:41:17डायनेस्टीज के अपने रॉयल एंब्स थे। जैसे
- 3:41:20कि हमने पहले देखा चोलास का टाइगर, चेरास
- 3:41:23का बो एंड एरो और पांड्याज का फिश।
- 3:41:27किंग को असिस्ट करने के लिए ऑफिशियल्स की
- 3:41:30एक वाइड बॉडी हुआ करती थी जो फाइव
- 3:41:33काउंसिल्स में कैटेगराइज्ड होती थी। यह
- 3:41:35काउंसिल्स थी मिनिस्टर्स जिन्हें अमाइचर
- 3:41:38कहते थे। प्रीस्ट्स यानी कि अंतनार,
- 3:41:42ऑनवॉइस जिन्हें थार बोला जाता था।
- 3:41:45मिलिट्री कमांडर्स यानी कि सेनापति और
- 3:41:48स्पाइस मतलब ओरार।
- 3:41:51इनका मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन काफी
- 3:41:53एफिशिएंटली ऑर्गेनाइज्ड था और सभी रूलर्स
- 3:41:56के साथ एक रेगुलर आर्मी होती थी। स्टेट की
- 3:41:59इनकम का चीफ सोर्स लैंड रेवेन्यू था और
- 3:42:02फॉरेन ट्रेड पर कस्टम ड्यूटी भी लगाई जाती
- 3:42:04थी। रॉयल ट्रेजरी को भरने का इंपॉर्टेंट
- 3:42:07तरीका वार्ड्स में कैप्चर की गई बूटी होती
- 3:42:10थी। रोड्स और हाईवेज को मेंटेन किया जाता
- 3:42:13था। रॉबरी और स्मगलिंग को रोकने के लिए
- 3:42:16यहां गार्ड्स भी तैनात किए जाते थे। तो
- 3:42:19दोस्तों, यह थी उस टाइम की पॉलिटिकल
- 3:42:21सिचुएशन। अब चलते हैं संगम सोसाइटी की
- 3:42:24तरफ।
- 3:42:26संगम सोसाइटी
- 3:42:28तोड़कापियम में लैंड के पांच डिवीजंस बताए
- 3:42:31गए हैं। यह थी कुरिंजी मतलब कि हिली
- 3:42:35ट्रैक्स, मुरलई यानी कि पेस्टोरल लैंड,
- 3:42:38मुरदम जो एग्रीकल्चरल लैंड होता था। नियडल
- 3:42:42कोस्टल लैंड को बोला जाता था और पई था
- 3:42:46डेजर्ट लैंड। टोल्ड कपियम में चार कास्ट
- 3:42:49का भी मेंशन मिलता है। जैसे कि अरसर मतलब
- 3:42:53रूलिंग क्लास अंधनार जो पॉलिटिकल और
- 3:42:56रिलीजियस फील्ड में इंगेज रहते थे। वगर जो
- 3:43:00ट्रेड एंड कॉमर्स करते थे। वेलार यानी कि
- 3:43:03एग्रीकल्चरिस्ट।
- 3:43:06थोड़ाज़, एरोड़ास, नागाज़ और वेदारस जैसी
- 3:43:10एंशिएंट प्रिमिटिव ट्राइब्स इस पीरियड में
- 3:43:12रहती थी। इसके अलावा संगम लिटरेचर में
- 3:43:15वुमेन की पोजीशन के बारे में काफी
- 3:43:17इंफॉर्मेशन मिलती है। संगम पीरियड में
- 3:43:20वुमेन को रिस्पेक्ट के साथ ट्रीट किया
- 3:43:22जाता था और उनको इंटेलेक्चुअल एक्टिविटीज
- 3:43:24पर्स्यू करना अलाउड था। अबवयार, नचिलयार
- 3:43:28और ककई पड़ेनियार जैसी वुमेन पोएट्स ने
- 3:43:31तमिल लिटरेचर में कंट्रीब्यूशन दिया था।
- 3:43:34वुमेन को अपना लाइफ पार्टनर चूज करने की
- 3:43:36फ्रीडम थी।
- 3:43:38लेकिन विडोस की लाइफ मिज़रेबल होती थी।
- 3:43:41सोसाइटी के हायर स्ट्राटा में सती प्रथा
- 3:43:44का भी प्रचलन देखने को मिलता था। सोसाइटी
- 3:43:46के डिस्कशन के बाद चलिए अब संगम पीरियड के
- 3:43:49दौरान रिलीजियस डेवलपमेंट्स को भी देखते
- 3:43:52हैं।
- 3:43:53रिलीजन ड्यूरिंग संगम एज। संगम पीरियड के
- 3:43:57प्राइमरी डेटी थे लॉर्ड मुर्गन जिन्हें
- 3:44:00तमिल गॉड भी कहा जाता है। संगम लिटरेचर
- 3:44:03में गॉड मुर्गन से रिलेटेड फेस्टिवल्स का
- 3:44:05मेंशन मिलता है। मुर्गन को सिक्स अब से
- 3:44:09ऑनर किया जाता है जो अरुपड़ाई वीडो के नाम
- 3:44:12से फेमस हैं। इनके अलावा संगम पीरियड के
- 3:44:15टाइम वरशिप होती थी गॉड मायन मतलब विष्णु
- 3:44:19की वंदन यानी कि इंद्रन वरुंदन और कौरवई
- 3:44:23की।
- 3:44:25हीरो स्टोन या नाडू कल वशिप भी संगम
- 3:44:28पीरियड में सिग्निफिकेंट था। यह हीरो
- 3:44:30स्टोंस वॉरियर्स के द्वारा वॉर में दिखाई
- 3:44:33गई बहादुरी की याद में इरेक्ट किए जाते
- 3:44:35थे। चलिए अब संगम एज की इकॉनमी को समझते
- 3:44:39हैं। इकोनमी ऑफ द संगम एज।
- 3:44:43एग्रीकल्चर संगम पीरियड का चीफ ऑक्यूपेशन
- 3:44:46था और राइस सबसे कॉमन क्रॉप थी।
- 3:44:49हैंडीक्राफ्ट्स, इंडस्ट्रीज जैसे कि
- 3:44:51वीविंग, मेटल वक्स, कारपेंट्री, शिप
- 3:44:54बिल्डिंग और बीड्स, स्टोंस एंड आइवरी के
- 3:44:57हेल्प से ऑर्नामेंट्स डिजाइन करना संगम
- 3:45:00पीरियड का पार्ट था।
- 3:45:02यहां के हैंडीक्राफ्ट्स के आइटम्स इंटरनल
- 3:45:05और एक्सटर्नल ट्रेड में हाई डिमांड में
- 3:45:07रहते थे। कॉटन और सिल्क क्लॉथ की स्पिनिंग
- 3:45:10और वीविंग में संगम पीपल को एक्सपर्टीज
- 3:45:12हासिल थी। इनकी वेस्टर्न वर्ल्ड में बहुत
- 3:45:15डिमांड रहती थी। स्पेशली उरयूर के कॉटन
- 3:45:18क्लोथ्स की पोहार का पोर्ट फॉरेन ट्रेड का
- 3:45:21इंपॉर्टेंट सेंटर था। इसके अलावा और भी
- 3:45:24इंपॉर्टेंट पोर्ट्स थे जैसे कि टोंडी,
- 3:45:27मोसीरीज, कोरकई और अरकमेडो।
- 3:45:32रोमन एपरर्स जैसे कि ऑगस्टस, टाइबेरियस और
- 3:45:35नीरो के द्वारा इशू किए गए बहुत सारे
- 3:45:38गोल्ड और सिल्वर के कॉइंस तमिलनाडु के सभी
- 3:45:41पार्ट्स में मिलते हैं जो दर्शाते हैं
- 3:45:43फ्लोरिशिंग ट्रेड को। संगम एज में मेजर
- 3:45:46एक्सपोर्ट्स के आइटम्स थे कॉटन फैबिक्स और
- 3:45:49स्पाइसेस जैसे कि पेपर, जिंजर, कार्डेमम,
- 3:45:52सिनेमन और टर्मरिक। साथ ही आइवरी
- 3:45:56प्रोडक्ट्स, पर्ल्स और प्रेशियस स्टोंस।
- 3:45:58मेजर इंपोर्ट्स के आइटम्स थे हॉेज, गोल्ड
- 3:46:02और स्वीट वाइन। तो दोस्तों, यह थी इकॉनमी
- 3:46:05ऑफ़ द संगम एज।
- 3:46:08कंक्लूडिंग रिमार्क्स। थर्ड सेंचुरी एडी
- 3:46:11का एंड होते-होते संगम पीरियड का भी
- 3:46:13डिक्लाइन होने लगता है। संगम पीरियड के
- 3:46:16बाद तमिल कंट्री को 300 एडी से 600 एडी के
- 3:46:20बीच कालाभराज ऑक्यूुपाई कर लेते हैं।
- 3:46:24इनके पीरियड को अर्लियर हिस्टोरियंस एक
- 3:46:27इंटररेगनम या डार्क एज भी कहते हैं।
- 3:46:30दोस्तों संगम पीरियड डिक्लाइन तो कर जाता
- 3:46:32है लेकिन इसकी लेगसी बनी रहती है।
- 3:46:35द्रविडियन लैंग्वेजेस का डेवलपमेंट इसी
- 3:46:37पीरियड से शुरू होता है और संगम लिटरेचर
- 3:46:40के रूप में हमें क्लासिकल लिटरेरी हेरिटेज
- 3:46:43भी मिलता है। इसके साथ ही साउथ इंडिया की
- 3:46:46पॉलिटिकल सोशियो कल्चरल और इकोनॉमिक लाइफ
- 3:46:49की फाउंडेशन भी संगम एज में ही मिलती है।
- 3:46:52गुप्ता एंपायर पिटिकल हिस्ट्री
- 3:46:55एडमिनिस्ट्रेशन एंड सोसाइटी। दोस्तों आज
- 3:46:58हम बात करेंगे भारतीय इतिहास के उन 200
- 3:47:01सालों की जिसमें एक नॉर्थ इंडियन एंपायर
- 3:47:04ने एडमिनिस्ट्रेशन, इकॉनमी, सोशल रिलीजियस
- 3:47:07लाइफ, आर्ट, लिटरेचर, साइंस, मेडिसिन सब
- 3:47:11पर अपनी छाप छोड़ी और इसे पीक पर
- 3:47:14पहुंचाया। जी हां, आज हम बात करेंगे
- 3:47:17गुप्ता एंपायर की जिसे भारत का गोल्डन एज
- 3:47:21भी कहा जाता है। इस वीडियो में हम समझेंगे
- 3:47:24गुप्ताज की पॉलिटिकल हिस्ट्री,
- 3:47:26एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल लाइफ के बारे में।
- 3:47:29तो आइए शुरू करते हैं पॉलिटिकल हिस्ट्री
- 3:47:31से। पिटिकल हिस्ट्री। गुप्ता काल की
- 3:47:35ग्लोरी का पता हमें कई सोर्सेस से चलता
- 3:47:37है। इनमें लिटरेरी सोर्सेस, एपिग्राफिकल
- 3:47:40सोर्सेस जैसे इं्रिप्शन और न्यूस्मैटिक
- 3:47:43सोर्सेस जैसे कॉइंस प्रमुख हैं। पुराना से
- 3:47:47हमें गुप्ताज़ की रॉयल जीनियलॉजी का पता
- 3:47:49चलता है। वहीं वैशाखदत्ता द्वारा लिखित
- 3:47:53देवी चंद्रगुप्तम और मुद्रा राक्षसा में
- 3:47:56गुप्ताज़ के राइज पर बड़ी अच्छी चर्चा की गई
- 3:47:59है। इनके अलावा मेहरौली आयन पिलर
- 3:48:02इंक्रिप्शन और इलाहाबाद पिलर इंक्रिप्शन
- 3:48:05सबसे इंपॉर्टेंट एपीग्राफिक एविडेंसेस
- 3:48:07हैं। इन सोर्सेस के अनुसार मौर्य
- 3:48:10साम्राज्य के डिक्लाइन होने के बाद पूरा
- 3:48:13भारत फिर से छोटे-छोटे किंगडम्स में बंट
- 3:48:16गया था। जहां शुंग, कनवा, सातवाहना और
- 3:48:20छेडी डायनेस्टीज मौर्यास के नेटिव
- 3:48:23सक्सेसर्स थे। वहीं इंडोग्रीक्स, साकाज़,
- 3:48:26पार्थियंस, कुशानाज़ इत्यादि मौर्यन एंपायर
- 3:48:30के फॉरेन सक्सेसर्स थे। इसी सक्सेशन के
- 3:48:32क्रम में गुप्ताज़ का राइज़ होता है। ऑलदो
- 3:48:35कुछ हिस्टोरियंस श्री गुप्ता को गुप्ता
- 3:48:37डायनेस्टी का फाउंडर बताते हैं। पर गुप्ता
- 3:48:40एरा का रियल फाउंडर चंद्रगुप्ता वन को
- 3:48:43माना जाता है। चलिए जानते हैं चंद्रगुप्ता
- 3:48:46वन के बारे में। चंद्रगुप्ता वन रेन फ्रॉम
- 3:48:5039 टू 334 एडी। चंद्रगुप्ता वन पहली बार
- 3:48:55महाराजा अधिराज टाइटल यानी द ग्रेट किंग
- 3:48:58ऑफ किंग्स का इस्तेमाल करते हैं। यह टाइटल
- 3:49:01उनके एक्सटेंसिव कॉन्क्वेस्ट्स को दर्शाता
- 3:49:03है। अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए
- 3:49:06चंद्रगुप्ता वन ने लिच्छवी प्रिंसेस
- 3:49:09कुमारा देवी से शादी की। इससे गुप्ता
- 3:49:12फैमिली की पावर और प्रेस्टीज और बढ़ जाती
- 3:49:14है। चंद्रगुप्ता वन गजेटिक प्लेेंस
- 3:49:17इंक्लूडिंग यूपी, बिहार पार्ट्स ऑफ बंगाल
- 3:49:20पर डायरेक्ट कंट्रोल इस्टैब्लिश करते हैं।
- 3:49:23उनके सामने नॉर्थ का कोई भी रूलर टिक नहीं
- 3:49:26पाता है। इसी कारण से चंद्रगुप्ता वन को
- 3:49:30गुप्ता एरा का रियल फाउंडर भी कहा जाता
- 3:49:32है। गुप्ता एरा उनकी राजगद्दी पर बैठने के
- 3:49:36बाद 319 320 एडी के लगभग शुरू हुआ था।
- 3:49:41चंद्रगुप्ता वन के बाद समुद्रगुप्ता
- 3:49:44गुप्ता डायनेस्टी की कमान संभालते हैं।
- 3:49:46समुद्रगुप्ता रेन फ्रॉम 335 टू 380 एडी।
- 3:49:52समुद्रगुप्ता अपने पिता द्वारा चलाए गए
- 3:49:55विजय रथ को हर तरफ से नॉर्थ साउथ ईस्ट
- 3:49:58वेस्ट में बढ़ाते हैं। कोर्ट पोएट हरिसेना
- 3:50:01द्वारा लिखित प्रयाग प्रशस्ति या इलाहाबाद
- 3:50:05पिलर इं्रिप्शन उनके मिलिट्री कैंपेन का
- 3:50:08डिटेल्ड अकाउंट देता है। उनके कैंपेनेंस
- 3:50:11तीन फेसेस में चले। फर्स्ट फेज में वे
- 3:50:14गेंजेटिक प्लेेंस पर कंप्लीटस्ट्री के लिए
- 3:50:17नागा रूलर अचुदा और कोटा रूलर नागसेना की
- 3:50:21टेरिटरीज को एनेक्स कर लेते हैं। सेकंड फज़
- 3:50:24दक्षिण पथ या साउथ एक्सपिडिशन के नाम से
- 3:50:27फेमस है। इस फेज में समुद्रगुप्ता, साउथ
- 3:50:31के 12 रूलर्स जैसे वेंगी के हस्तिवर्मन,
- 3:50:35पल्लका के उग्रसेना, देवराष्ट्र के कुबेरा
- 3:50:39इत्यादि को हरा देते हैं। पर नॉर्थ इंडिया
- 3:50:42से दूरी होने के कारण वे अपनी सुप्रीमसी
- 3:50:44इस्टैब्लिश करने के बाद इन सारे रूलर्स को
- 3:50:47उनका राज्य लौटा देते हैं। साउथ में अपनी
- 3:50:50सुप्रीमेसी एक्सेप्ट करवाने के बाद
- 3:50:52समुद्रगुप्ता वापस नॉर्थ पर फोकस करते
- 3:50:55हैं। इस थर्ड फेज में वह पूरे नॉर्थ
- 3:50:58इंडिया को अपने कंट्रोल में लेने की ठान
- 3:51:00लेते हैं। इसके लिए वे रुद्रदेवा, मैथिला,
- 3:51:04नागदत्ता जैसे नौ और किंग्स को हराकर उनके
- 3:51:08किंगडम्स एनेक्स कर लेते हैं। इस तरह वे
- 3:51:11मोस्ट ऑफ नॉर्थ इंडिया यानी आर्यवर्त पर
- 3:51:14अपना आधिपत्य स्थापित कर देते हैं। उनका
- 3:51:17साम्राज्य वेस्ट में कुशानास तक और साउथ
- 3:51:20में वकट आकाश तक पहुंच जाता है। उनके इस
- 3:51:24लार्ज स्केल कॉन्क्वेस्ट के कारण
- 3:51:26समुद्रगुप्ता को गुप्ता डायनेस्टी का
- 3:51:29ग्रेटेस्ट किंग माना जाता है। कुछ
- 3:51:31हिस्टोरियंस समुद्रगुप्ता को नेपोलियन ऑफ
- 3:51:34इंडिया की उपाधि भी देते हैं।
- 3:51:36समुद्रगुप्ता के बाद गुप्ता एंपायर के
- 3:51:39अगले महान राजा थे चंद्रगुप्त द सेकंड
- 3:51:43ड्रेन 380 टू 4480
- 3:51:46देवीचंद्र गुप्तम किताब के अनुसार महान
- 3:51:50समुद्रगुप्ता के बाद रामगुप्त गद्दी पर
- 3:51:52बैठते हैं। पर वे बहुत डरपोक राजा थे। वे
- 3:51:55शाका इनवेडर्स के डर से अपनी पत्नी ध्रुव
- 3:51:59देवी को सरेंडर करने के लिए तैयार हो गए
- 3:52:01थे। ऐसी कंडीशन में रामगुप्ता के छोटे भाई
- 3:52:05चंद्रगुप्ता 2 ध्रुव देवी के सम्मान को
- 3:52:08बचाने के लिए साका इनवेडर और रामगुप्ता
- 3:52:11दोनों को खत्म कर देते हैं और राजगद्दी पर
- 3:52:14बैठने के साथ ही वह ध्रुव देवी से शादी भी
- 3:52:17कर लेते हैं। आगे साकास को परमानेंटली
- 3:52:19हराने के लिए वे डिप्लोमेसी और
- 3:52:22मैट्रिमोनियल अलायंस दोनों का सहारा लेते
- 3:52:25हैं। सबसे पहले वे सेंट्रल इंडिया के नागा
- 3:52:28रूलर की बेटी कुबेर नागा से शादी कर लेते
- 3:52:31हैं। इसके अलावा अपनी बेटी प्रभादेवी की
- 3:52:34शादी वगटका प्रिंस रुद्रसेना 2 से कर देते
- 3:52:37हैं। इससे पूरे डेक्कन और सेंट्रल इंडिया
- 3:52:40में उनकी पॉलिटिकल पावर बहुत बढ़ जाती है।
- 3:52:43इस स्ट्रांग अलायंस बिल्डिंग के बाद वो
- 3:52:46पूरे दल बल के साथ वेस्टर्न साका सट्रप्स
- 3:52:49पर हमला कर देते हैं। भीषण युद्ध के बाद
- 3:52:52साका सैट्रप्स हार जाते हैं और मालवा और
- 3:52:55गुजरात का रीजन उनके कंट्रोल में आ जाता
- 3:52:58है। परिणाम स्वरूप पाटलिपुत्र के बाद
- 3:53:02मालवा में उज्जैन उनकी दूसरी कैपिटल बन
- 3:53:05जाती है। इस विक्ट्री के बाद वे साकरी
- 3:53:08यानी डिस्ट्रयर ऑफ साकास का टाइटल लेते
- 3:53:11हैं। साथ ही वह खुद को विक्रमादित्य नाम
- 3:53:14से भी संबोधित करते हैं। इस सिग्निफिकेंट
- 3:53:18कॉन्क्वेस्ट के कारण गुप्ता एंपायर
- 3:53:20अरेबियन सी तक फैल जाता है। भरोच, सोबारा,
- 3:53:24कैंबे जैसे सी पोर्ट से यूरोप तक का ट्रेड
- 3:53:27उनके डायरेक्ट कंट्रोल में आ जाता है।
- 3:53:29मेहरौली आयरन पिलर के अनुसार उन्होंने
- 3:53:32वंगाज़ और वहिलकास जैसे शूरमा किंगडम्स को
- 3:53:36भी हरा दिया था। वे इंडस रिवर पार कर
- 3:53:39बैक्ट्रियंस को पूरी तरह से हरा देते हैं
- 3:53:42और कुशानास को भी सबड्यू कर देते हैं। इन
- 3:53:46विक्ट्री से चंद्रगुप्त द सेकंड के समय
- 3:53:49गुप्ता एंपायर नॉर्थवेस्ट में हिंदूकुश
- 3:53:51माउंटेंस, वेस्ट में गुजरात, मालवा, ईस्ट
- 3:53:55में ईस्टर्न बंगाल और साउथ में नर्मदा नदी
- 3:53:58तक फैल गया था। इसके अलावा साउथ के मोस्ट
- 3:54:02ऑफ द रूलर्स तो उनके पिता की तरह उनकी
- 3:54:04सुसरेनिटी एक्सेप्ट करते ही थे। उनके
- 3:54:07पीरियड के ढेर सारे गोल्ड कॉइंस मिलने से
- 3:54:10पता चलता है कि चंद्रगुप्त विक्रमादित्य
- 3:54:13का साम्राज्य बहुत प्रोस्परस भी था।
- 3:54:16चंद्रगुप्ता 2 के बाद नालंदा यूनिवर्सिटी
- 3:54:19स्थापित करने वाले कुमार गुप्ता का नंबर
- 3:54:21आता है। कुमार गुप्ता रेन फ्रॉम 415 टू
- 3:54:25455 एडी। कुमार गुप्ता ने गुप्ता
- 3:54:28साम्राज्य बढ़ाने से ज्यादा उसे कंसोलिडेट
- 3:54:31करने का काम किया था। उनके काल में जनरल
- 3:54:34पीस एंड प्रोस्पेरिटी मेंटेन रही।
- 3:54:37उन्होंने ढेर सारे कॉइंस इशू किए जो
- 3:54:40साम्राज्य के कोने-कोने से मिलते हैं।
- 3:54:42उन्होंने नालंदा यूनिवर्सिटी की नीव भी
- 3:54:45रखी जो आगे चलकर इंस्टट्यूट ऑफ इंटरनेशनल
- 3:54:48रेपुटेशन बन गया। पर उनके रेन का एंड
- 3:54:51आते-आते नॉर्थ वेस्ट यानी हाइबर पास से ह
- 3:54:55इन्वेज का खतरा मंडराने लगता है। हन एक
- 3:54:58बहुत ही खूंखार सेंट्रल एशियन पेस्टरल
- 3:55:01ट्राइब था जो रिसोर्सेज की तलाश में
- 3:55:04इंडिया पर आक्रमण करने लगा था। इसी खतरे
- 3:55:07के बीच स्कंदगुप्ता गुप्ता साम्राज्य की
- 3:55:10गद्दी पर बैठते हैं। स्कंदगुप्ता रेन
- 3:55:13फ्रॉम 455 टू 467 एडी। स्कंदगुप्ता गुप्ता
- 3:55:19डायनेस्टी के आखिरी महान एपरर थे। उनके
- 3:55:22रेन में हंस का जबरदस्त आक्रमण शुरू हो
- 3:55:25गया। पर वे अपनी विशाल सेना की मदद से हंस
- 3:55:29को हरा देते हैं। लेकिन हंस के कंटीन्यूअस
- 3:55:32अटैक्स के कारण गुप्ता एंपायर वीक होने
- 3:55:35लगा था। ट्रेड रूट्स बुरी तरह
- 3:55:37कॉम्प्रोमाइज हो जाते हैं। जिससे गुप्ता
- 3:55:40इकॉनमी चरमरा जाती है। इस तरह स्कंद
- 3:55:43गुप्ता के मरने के बाद गुप्ता एंपायर का
- 3:55:46डिक्लाइन शुरू हो जाता है। उनके बाद पुरु
- 3:55:49गुप्ता, बुद्ध गुप्ता, नरसिम्हा गुप्ता और
- 3:55:53कुमार गुप्ता थर्ड जैसे कई गुप्ता
- 3:55:55सक्सेसर्स आए। पर कुछ खास कंट्रीब्यूट
- 3:55:58नहीं कर पाए। वीक रूलर्स होने के कारण
- 3:56:01छोटे-छोटे राजा इंडिपेंडेंस डिक्लेअर करने
- 3:56:04लगते हैं। 500 एडी से 530 एडी के बीच
- 3:56:08तोरामना और मिहिर कुल जैसे पावरफुल हंस
- 3:56:12शासक सेंट्रल इंडिया और मालवा तक पहुंच गए
- 3:56:15थे। पर आगे चलकर मालवा में यशोधर्मन नाम
- 3:56:18के महान शासक का राइज होता है जो हंस को
- 3:56:21मालवा से उखाड़ फेंकते हैं। गुप्ता एंपायर
- 3:56:24540 एडी आते-आते ह इन्वेजंस और मालवा में
- 3:56:29यशोधर्मन के राइज के कारण पूरी तरह से
- 3:56:32खत्म हो जाता है। इस तरह गुप्ताज़ की
- 3:56:35पॉलिटिकल हिस्ट्री कम्स टू एन एंड। आइए अब
- 3:56:38बात करते हैं गुप्ता पीरियड के
- 3:56:40एडमिनिस्ट्रेशन की। गुप्ता एडमिनिस्ट्रेशन
- 3:56:44गुप्ता एंपायर के सक्सेस में उनके
- 3:56:47एफिशिएंट एडमिनिस्ट्रेशन का बहुत बड़ा रोल
- 3:56:49था। उनका एडमिनिस्ट्रेशन मौर्यन एंपायर से
- 3:56:53इंस्पायर्ड था। पर उनसे लेस सेंट्रलाइज्ड
- 3:56:55था। ब्यूरोक्रेसी इबोरेट रूप ले चुकी थी
- 3:56:59और हेरेडिटरी लैंड ग्रांट्स फुडलिज्म को
- 3:57:02बढ़ावा देने लगा था। किंग को
- 3:57:04एडमिनिस्ट्रेशन में मदद करने के लिए एक
- 3:57:06काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स यानी मंत्रीपरिषद
- 3:57:09था जिसके हेड चीफ मिनिस्टर थे। इस मंत्री
- 3:57:13परिषद में सेनापति यानी आर्मी के कमांडर
- 3:57:17इन चीफ होते थे। महादंडनायका यानी जस्टिस
- 3:57:21मिनिस्टर, संधि विग्रह यानी फॉरेन अफेयर्स
- 3:57:24या फिर वारेन पीस अफेयर्स। इनके अलावा
- 3:57:28महाप्रतिहारी यानी रॉयल पैलेस के
- 3:57:30केयरटेकर, दंडपाशिका यानी पुलिस
- 3:57:34डिपार्टमेंट के चीफ, विन्यास स्थापक यानी
- 3:57:37रिलीजियस अफेयर्स के चीफ, महाशवापति यानी
- 3:57:41कैवलरी चीफ और महापिलुपति यानी हाथी सेना
- 3:57:45के चीफ होते थे। अब हम गुप्ताज का
- 3:57:48प्रोविंशियल एडमिनिस्ट्रेशन भी देख लेते
- 3:57:50हैं। गुप्ता किंग कुमारात्याज और आयुक्तास
- 3:57:54की मदद से प्रोविंशियल एडमिनिस्ट्रेशन से
- 3:57:57क्लोज कांटेक्ट में रहा करते थे।
- 3:57:59कुमारात्याज़ आज के आईएएस जैसा स्पेशल
- 3:58:03कार्डर होता था। जिससे सारे हायर ऑफिशल्स
- 3:58:06चुने जाते थे। यह कार्डर किंग और
- 3:58:09प्रोविंशियल एडमिनिस्ट्रेशन के बीच एक
- 3:58:11लिंक का काम करता था। गुप्ता एंपायर में
- 3:58:14प्रोविंसेस को भुक्ति कहा जाता था जिसे
- 3:58:17ऊपरी काज गवर्न करते थे। ऊपरी काज मोस्टली
- 3:58:21राजकुमारों में से चुना जाता था। भक्ति का
- 3:58:24विभाजन विषयज या डिस्ट्रिक्ट्स में किया
- 3:58:26जाता था जिसे आयुक्त या विषयपति हेड करते
- 3:58:31थे। वहीं सिटी या म्युनिसिपल
- 3:58:33एडमिनिस्ट्रेशन नगर श्रेष्ठी देखते थे।
- 3:58:36विलेजेस एडमिनिस्ट्रेशन का स्मालेस्ट
- 3:58:39यूनिट होता था जिसके प्रमुख को ग्रामिका
- 3:58:42कहा जाता था। गुप्ता पीरियड में लैंड
- 3:58:45रेवेन्यू आय का प्रमुख सोर्स था। इसके
- 3:58:48अलावा जब भी सेना किसी कंट्री साइड से
- 3:58:50गुजरती थी तब गांव वालों को उनके खानेपीने
- 3:58:54का पूरा ख्याल रखना होता था। इस टैक्स को
- 3:58:56सेना भक्त टैक्स कहते थे और रॉयल आर्मी
- 3:58:59ऑफिशियल्स की सेवा में फोर्स लेबर को
- 3:59:02विष्टि टैक्स कहते थे। पर किंग भी जनता की
- 3:59:05जरूरतों का पूरा ख्याल रखते थे। जूनागढ़
- 3:59:08इं्रिप्शन के अनुसार सौराष्ट्र रीजन में
- 3:59:12वाटर स्केरसिटी को दूर करने के लिए
- 3:59:14स्कंदगुप्ता सुदर्शन लेखक को रिपेयर
- 3:59:17करवाते हैं। दोस्तों यहां आपको यह भी बता
- 3:59:20दूं कि इस सुदर्शन ले को मौर्य काल में
- 3:59:23चंद्रगुप्त मौर्य के आदेश पर बनवाया गया
- 3:59:26था। इसके बाद मौर्यन एपरर अशोका, शाका
- 3:59:30रूलर, रुद्रदमन वन और स्कंदगुप्ता समय-समय
- 3:59:34पर इसे रिपेयर करवाते हैं। गुप्ता पीरियड
- 3:59:36में अग्रहारा और देवग्रहारा नाम से खूब
- 3:59:40लैंड ग्रांट्स भी दिए गए थे। इनमें
- 3:59:42अग्रहारा लैंड ग्रांट ब्राह्मण्स के
- 3:59:45पर्सनल एक्सपेंस के लिए दिया जाता था।
- 3:59:47वहीं देवग्रहारा लैंड ग्रांट टेंपल्स यानी
- 3:59:50रिलीजियस प्लेस के मेंटेनेंस के लिए दिया
- 3:59:53जाता था। चाइनीस ट्रैवलर फाहिन के
- 3:59:56अकाउंट्स में हमें गुप्ता एडमिनिस्ट्रेशन
- 3:59:58के बारे में कई इंपॉर्टेंट बातें पता चलती
- 4:00:01हैं। उनके अनुसार गुप्ता काल में आम जनता
- 4:00:05को काफी पर्सनल फ्रीडम मिला हुआ था। वे
- 4:00:08कहीं भी आ जा सकते थे। स्टेट आम जनता की
- 4:00:11प्राइवेट लाइफ में दखल नहीं देता था।
- 4:00:14पनिशमेंट्स बहुत सीवियर नहीं थे। फाइन
- 4:00:17लगाना कॉमन पनिशमेंट था। रोड्स सेफ थे और
- 4:00:20क्राइम्स नेगलिजिबल थे। फाहिन खुद बड़े
- 4:00:23आराम से पूरे गेंजेटिक प्लेेंस में ट्रैवल
- 4:00:26किया करते थे। अतः ओवरऑल गुप्ता
- 4:00:28एडमिनिस्ट्रेशन मौर्य से ज्यादा लिबरल था।
- 4:00:32एडमिनिस्ट्रेशन के बाद अब हम गुप्ता
- 4:00:35पीरियड की सोशल लाइफ के बारे में जानते
- 4:00:37हैं। सोशल लाइफ गुप्ता काल में सोशल लाइफ
- 4:00:41में काफी चेंजेस आए थे। वर्ण सिस्टम
- 4:00:44मॉडिफाई होने लगा था और इसकी जगह कास्ट
- 4:00:47सिस्टम, सोशल एंड इंपेरिकल रियलिटी बनने
- 4:00:50लगा था। इसके कई कारण थे। पहला गुप्ता
- 4:00:54पीरियड में ब्राह्मणिज्म का राइज। मोस्ट
- 4:00:57ऑफ द गुप्ता रूलर्स वैष्णवाइट थे। वे
- 4:01:00ब्राह्मण्स को रिस्पेक्ट देने के साथ-साथ
- 4:01:02ढेर सारा लैंड ग्रांट्स भी देते थे। इससे
- 4:01:05ब्राह्मणस को सोसाइटी में टॉप पोजीशन मिल
- 4:01:08गई। दूसरा प्री गुप्ता पीरियड से ही ढेर
- 4:01:12सारे फॉरेन इनवेडर्स भारत आकर बसने लगे
- 4:01:15थे। ब्राह्मिस की ब्लेसिंग से उन्हें
- 4:01:17इंडियन सोसाइटी में लेजिटिमसी मिलने लगी।
- 4:01:20उदाहरण के लिए ब्राह्मण्स कुछ फॉरेन
- 4:01:23सेटलर्स को क्षत्रिय वर्ण में जगह देने
- 4:01:25लगे। वहीं कुछ लोकल ट्राइब्स को शूद्र
- 4:01:28वर्ण में जगह दी जाने लगी। तीसरा
- 4:01:31क्राफ्ट्समैन के गिल्ड कास्ट का फॉर्म
- 4:01:33लेने लगे थे। एग्जांपल के लिए जो मिट्टी
- 4:01:36का बर्तन बनाते थे, वह कुम्हार जाति के हो
- 4:01:39गए। जो बाल बनाते थे, वे नाई जाति के हो
- 4:01:42गए। इसी समय अनटचेबिलिटी का राइज भी देखने
- 4:01:45को मिलता है। कात्यायना नाम के स्मृति
- 4:01:48राइटर पहली बार अस्पृश्य शब्द अनटचेबल्स
- 4:01:51के लिए इस्तेमाल करते हैं। चाइनीस ट्रैवलर
- 4:01:54फाहिन के अनुसार चांडाल जाति बड़ी बुरी
- 4:01:58कंडीशन में थी। उन्हें अनटचेबिलिटी के
- 4:02:01आधार पर रेजिडेंशियली सेग्रगेट कर दिया
- 4:02:04गया था। फाहहेन के अनुसार वुमेन की कंडीशन
- 4:02:07भी मिज़रेबल हो गई थी। उनके रिलीजियस
- 4:02:09स्क्रिप्चर्स पढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया
- 4:02:12गया था। स्वयंवर प्रथा समाप्त हो गई थी और
- 4:02:15मनुस्मृति के अनुसार लड़कियों की शादी
- 4:02:18जल्दी हो जानी चाहिए थी। वुमेन का
- 4:02:21प्रॉपर्टी पर से अधिकार खत्म हो गया था।
- 4:02:23वह सिर्फ ज्वेलरी और कपड़ों के फॉर्म में
- 4:02:26स्त्री धन की हकदार रह गई थी। इतना ही
- 4:02:29नहीं 510 एडी के एरन इं्रिप्शन इन
- 4:02:32प्रेजेंट डे मध्य प्रदेश में हमें पहली
- 4:02:34बार सती जैसी दर्दनाक प्रैक्टिस का भी
- 4:02:37एग्जांपल देखने को मिलता है। रिलीजन के
- 4:02:40क्षेत्र में गुप्ता पेट्रिनेज के कारण
- 4:02:43ब्राह्मणिज्म का बहुत विस्तार होने लगा
- 4:02:45था। ब्राह्मिनिज्म के दो ब्रांचेस थे।
- 4:02:48वैष्णविज्म और शैविज्म। मोस्ट गुप्ता
- 4:02:51रूलर्स वैष्णवाइट थे। पर वे बाकी धर्मों
- 4:02:54की भी रिस्पेक्ट करते थे। आइडल वरशिप और
- 4:02:57टेंपल बिल्डिंग भी इसी समय बड़े स्केल पर
- 4:02:59शुरू हुआ था। फाहिन के अनुसार
- 4:03:02ब्राह्मिनिज्म के विस्तार के कारण
- 4:03:04गेंजेटिक वैली में बुद्धिज्म और बुद्धिस्ट
- 4:03:07साइट्स दोनों नेगलेक्ट में जाने लगते हैं।
- 4:03:10जैनिज्म के फॉलोअर्स में भी कमी आई। पर
- 4:03:13वासुबंधू जैसे बुद्धिस्ट स्कॉलर्स को
- 4:03:15गुप्ता किंग्स का पेट्रिनेज प्राप्त था।
- 4:03:18वहीं वेस्टर्न और सदर्न इंडिया में
- 4:03:20जैनिज्म खूब फलफूल रहा था। वल्लभी में इसी
- 4:03:24समय जैन काउंसिल का भी आयोजन हुआ।
- 4:03:27दोस्तों, यह थी गुप्ता एज की पॉलिटिकल
- 4:03:30हिस्ट्री, एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल लाइफ का
- 4:03:33डिस्कशन। आशा करता हूं कि आपको आज का
- 4:03:37डिस्कशन पसंद आया होगा। नेक्स्ट पार्ट में
- 4:03:39हम चर्चा करेंगे गुप्ता पीरियड के
- 4:03:42इकोनॉमिक लाइफ, आर्ट, लिटरेचर और
- 4:03:45साइंटिफिक अचीवमेंट्स की। और यह भी
- 4:03:47जानेंगे कि गुप्ता पीरियड को गोल्डन एज
- 4:03:50क्यों कहते हैं। गुप्ता एंपायर, इकोनमी,
- 4:03:54आर्ट एंड कल्चर।
- 4:03:57दोस्तों, गुप्ता एंपायर के फर्स्ट पार्ट
- 4:04:00में हमने गुप्ता साम्राज्य की पॉलिटिकल
- 4:04:02हिस्ट्री, एडमिनिस्ट्रेटिव जीनियस और सोशल
- 4:04:05लाइफ को समझा था। आज हम बात करेंगे उनकी
- 4:04:08इकोनमी, आर्ट, आर्किटेक्चर, कॉइंस,
- 4:04:11लिटरेचर और साइंटिफिक एडवांसमेंट्स की और
- 4:04:14साथ ही जानेंगे गुप्ता एज की कुछ कमियों
- 4:04:17के बारे में। तो चलिए शुरुआत करते हैं
- 4:04:19इकोनॉमिक लाइफ से। इकोनॉमिक लाइफ। गुप्ता
- 4:04:24एंपायर की इकॉनमी बड़ी रोबस्ट थी।
- 4:04:27एग्रीकल्चर, ट्रेड, क्राफ्ट सभी में तेजी
- 4:04:30आई थी। इसी प्रोस्पेरिटी के कारण गुप्ता
- 4:04:33पीरियड को गोल्डन एज कहा जाता है।
- 4:04:36स्कॉलर्स का मानना है कि गुप्ता पीरियड
- 4:04:38में स्टेट ही सारे लैंड का ओरिजिनल ओनर
- 4:04:41होता था। पहाड़पुर कॉपर प्लेट इं्रिप्शन
- 4:04:44से भी एक्सक्लूसिव स्टेट ओनरशिप का पता
- 4:04:47चलता है। इकोनॉमिक पॉइंट ऑफ व्यू से लैंड
- 4:04:49को फाइव टाइप्स में बांटा गया था।
- 4:04:52क्षेत्रभूमि कल्टीिवेशन के लिए,
- 4:04:55वास्तुभूमि रेजिडेंस के लिए, चारागाह भूमि
- 4:04:58पाश्चर लैंड के लिए अपराहता भूमि फॉरेस्ट
- 4:05:02के लिए और खिला भूमि वेस्ट लैंड होता था।
- 4:05:06पूट इं्रिप्शन के अनुसार रेगुलर लैंड
- 4:05:09सर्वेज भी होते थे और पुस्तपाला नाम के
- 4:05:12ऑफिशियल डिस्ट्रिक्ट में होने वाले सारे
- 4:05:14लैंड ट्रांजैक्शंस का रिकॉर्ड रखते थे।
- 4:05:18ट्रेड एंड कॉमर्स में भी गुप्ता पीरियड
- 4:05:20बहुत आगे था। बंगाल के फाइन क्लोथ्स,
- 4:05:23बिहार का इंडिगो, बनारस सिल्क, हिमालयन
- 4:05:26सेंट्स, साउथ का सैंडलवुड और स्पाइसेस रोम
- 4:05:29से साउथ ईस्ट एशिया तक एक्सपोर्ट होते थे।
- 4:05:32ईस्ट कोस्ट के ताम्रलिप्ती, घंटाशाला,
- 4:05:35कंडूरा पोर्ट से साउथ ईस्ट एशियन ट्रेड
- 4:05:38होता था। वहीं वेस्ट कोस्ट के भरूच,
- 4:05:41सोबारा, कैंबे पोर्ट से मेडिटेरेनियन और
- 4:05:44वेस्ट एशियन ट्रेड होता था। प्रोस्परस
- 4:05:47ट्रेड एंड कॉमर्स के कारण गुप्ता एज अपने
- 4:05:50गोल्ड कॉइंस के लिए बहुत फेमस है। आइए
- 4:05:53देखते हैं गुप्ता कॉइंस।
- 4:05:57गुप्ता रूलर्स ने प्राचीन भारतीय इतिहास
- 4:05:59में सबसे ज्यादा गोल्ड कॉइंस इशू किए थे।
- 4:06:03पर गोल्ड कंटेंट के टर्म्स में गुप्ता
- 4:06:05कॉइंस कुशाना कॉइंस से कम प्योर थे।
- 4:06:08गुप्ताज़ के गोल्ड कॉइंस को दीनार कहा जाता
- 4:06:11था। यह कॉइंस न्यूमिस्मैटिक और आर्टिस्टिक
- 4:06:14एक्सीलेंस के इनक्रेडिबल एग्जांपल्स हैं।
- 4:06:17गुप्ता कॉइंस उस समय के वैल्यूस, बिलीव्स,
- 4:06:20सोशियोइकोनॉमिक लाइफ और प्रोस्पेरिटी के
- 4:06:23सिंबल्स भी हैं। चंद्रगुप्ता द फर्स्ट के
- 4:06:26समय हमें चंद्रगुप्ता द फर्स्ट कुमारा
- 4:06:29देवी टाइप गोल्ड कॉइंस मिलते हैं।
- 4:06:31चंद्रगुप्ता द फर्स्ट के बाद समुद्रगुप्ता
- 4:06:34ने बहुत तरह के कॉइंस इशू किए। उन्होंने
- 4:06:37गरुड़ा या ईगल टाइप कॉइन, धनुरधारी या
- 4:06:40आर्चर टाइप कॉइन, अश्वमेधा या हॉर्स
- 4:06:43सैक्रिफाइस टाइप कॉइन, व्याग्रहन या टाइगर
- 4:06:47स्लेेयर टाइप कॉइन और वीणा वादन यानी वीणा
- 4:06:50प्लेइंग टाइप कॉइंस इशू किए। यह कॉइंस
- 4:06:53उनकी आचरी स्किल्स, करज और लव फॉर म्यूजिक
- 4:06:57को भी दर्शाता है। उनके बाद चंद्रगुप्ता द
- 4:07:00सेकंड ने अश्वारोही टाइप, छत्रधारी टाइप,
- 4:07:04चक्रविक्रमा टाइप इत्यादि कॉइंस इशू किए।
- 4:07:07वहीं कुमार गुप्ता द फर्स्ट ने खड़कधारी
- 4:07:10टाइप, गजरोही टाइप, सिंह निहंता टाइप, खंग
- 4:07:14निहंता टाइप यानी राइनोसरस स्लेयर टाइप,
- 4:07:17कार्तिकेय टाइप कॉइंस इशू किए। इन कॉइंस
- 4:07:20से यह भी पता चलता है कि कुमार गुप्ता द
- 4:07:23फर्स्ट कार्तिकेय भगवान के फॉलोअ थे।
- 4:07:26कुमार गुप्ता द फर्स्ट के बाद स्कंदगुप्ता
- 4:07:29के समय हंस के हमले से इकॉनमी चरमरा गई
- 4:07:32थी। इसीलिए उनके द्वारा कम टाइप के कॉइंस
- 4:07:35इशू किए गए। गुप्ता कॉइंस में कुशाना
- 4:07:38इन्फ्लुएंस तो जरूर दिखता है। पर उन्होंने
- 4:07:41कई नए तरह के कॉइंस भी इशू किए थे।
- 4:07:45उनसे पहले के कॉइंस में जहां किंग, आर्चर,
- 4:07:48लायन, स्लेयर, हॉर्स राइडर इत्यादि मार्शल
- 4:07:51पोज़ में दिखा करते थे, वहीं बाद के कॉइंस
- 4:07:54में मैरिज, वीणा प्लेइंग, अश्वमेधा यज्ञ
- 4:07:57जैसे सीन्स भी देखे जा सकते हैं। इन कॉइंस
- 4:08:00में गॉड्स एंड गॉडेसेस की इमेजेस भी खूब
- 4:08:03मात्रा में देखने को मिलती हैं। ऐसे
- 4:08:05सुपीरियरली डिज़ कॉइंस आगे चलकर पूरे भारत
- 4:08:09में कहीं देखने को नहीं मिलते।
- 4:08:12गोल्ड के अलावा गुप्ता किंग्स ने सिल्वर
- 4:08:15कॉइंस को भी इशू किया। यह कॉइंस लोकल
- 4:08:17एक्सचेंज में अधिक उपयोग होता था। जहां तक
- 4:08:20कॉपर कॉइंस की बात है, कुशानाज़ के
- 4:08:23कंपैरिजन में गुप्ताज़ ने बहुत कम कॉपर
- 4:08:25कॉइंस इशू किए। कॉइंस के बाद अब हम आर्ट
- 4:08:28एंड कल्चर की बात कर लेते हैं। जो गुप्ता
- 4:08:31पीरियड में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया था।
- 4:08:34आर्ट एंड आर्किटेक्चर अंडर गुप्ताज़।
- 4:08:37गुप्ता पीरियड में आर्ट एंड आर्किटेक्चर
- 4:08:39में ट्रेमेंडस प्रोग्रेस देखने को मिलता
- 4:08:41है। कुछ स्कॉलर्स इसे विनेसोंस पीरियड भी
- 4:08:44कहते हैं। पर ध्यान देने वाली बात यह है
- 4:08:47कि इससे पहले कोई डार्क एज नहीं था।
- 4:08:50अनलाइक यूरोप। इसीलिए गुप्ता पीरियड पिछले
- 4:08:53सारे इंटेलेक्चुअल और आर्टिस्टिक ट्रेडिशन
- 4:08:56का कलमिनेशन माना जा सकता है। गुप्ता आर्ट
- 4:08:59एंड आर्किटेक्चर को हम टेंपल्स, स्तूपास
- 4:09:02और स्कल्प्चर के माध्यम से बेहतर समझ सकते
- 4:09:05हैं।
- 4:09:06तो चलिए शुरुआत करते हैं स्ट्रक्चरल टेंपल
- 4:09:09से। गुप्ता पीरियड से पहले रॉकट टेंपल्स
- 4:09:13प्रचलन में थे। पर स्ट्रक्चरल टेंपल के
- 4:09:16एवोल्यूशन के कारण ब्रिक और स्टोन ब्लॉक्स
- 4:09:19की मदद से माउंटेन से दूर भी टेंपल बनाया
- 4:09:21जा सकता था। गौर करने वाली बात है कि नगर
- 4:09:25स्टाइल ऑफ टेंपल आर्किटेक्चर इसी समय
- 4:09:28डेवलप हुआ था। देवगढ़ उत्तर प्रदेश का
- 4:09:31दसावतार टेंपल नगर स्टाइल का वन ऑफ द
- 4:09:34ओल्डेस्ट सर्वाइविंग एग्जांपल है। इसे एक
- 4:09:38रेड्ड रेक्टेंगुलर प्लेटफार्म पर बनाया
- 4:09:40गया है। यहां पंचायतन प्लान का यूज किया
- 4:09:42गया है जिसमें मेन शाइन चार सब्सिडियरी
- 4:09:46शाइन से सराउंडेड होती है। इसी पीरियड में
- 4:09:49भीतर गांव टेंपल का भी कंस्ट्रक्शन हुआ था
- 4:09:52जो एंटायरली ब्रिक से बनाया गया है।
- 4:09:55सेकंडली, टेंपल्स के अलावा गुप्ता पीरियड
- 4:09:57में कई स्तूपाज़ भी बनवाए गए थे। ऑलदो
- 4:10:00गुप्ता पीरियड में स्तूपा कंस्ट्रक्शन में
- 4:10:02डिक्लाइन देखा जाता है, पर सारनाथ का
- 4:10:05धम्मेक स्तूपा गुप्ता आर्किटेक्चर का
- 4:10:07इंपॉर्टेंट एग्जांपल है। इसे ओरिजिनली
- 4:10:10मौर्यन एंपायर अशोका के पीरियड में बनवाया
- 4:10:12गया था। पर गुप्ता पीरियड में इसका लार्ज
- 4:10:15स्केल रेनोवेशन करवाया गया था। थर्डली
- 4:10:19गुप्ता पीरियड अपने स्कल्प्चर्स के लिए
- 4:10:21बहुत फेमस है। इस पीरियड में इंडीजीनस
- 4:10:24मथुरा और सारनाथ स्कूल ऑफ स्कल्प्चर ने
- 4:10:27गांधारा स्कूल को रिप्लेस करना शुरू कर
- 4:10:30दिया था। जहां गांधारा स्कूल में ग्रे
- 4:10:32सैंड स्टोन के साथ ग्रीक इन्फ्लुएंस देखने
- 4:10:35को मिलता था। वहीं मथुरा स्कूल में रेड
- 4:10:37सैंड स्टोन के साथ इंडीजनस स्टाइल का यूज
- 4:10:40होता था। एग्जांपल के लिए मथुरा स्कूल के
- 4:10:43अंदर हमें अभय मुद्रा में बुद्धा के बहुत
- 4:10:47सुंदर स्कल्प्चर्स देखने को मिलते हैं।
- 4:10:49वहीं सारनाथ स्कूल ऑफ स्कल्प्चर को मथुरा
- 4:10:52स्कूल से ज्यादा रिफाइंड माना जाता है।
- 4:10:55मथुरा स्कूल के कंपैरिजन में सारनाथ स्कूल
- 4:10:58में आइडल की ड्रेपरी यानी कपड़ों में बहुत
- 4:11:00कम फोल्ड्स देखने को मिलते हैं। उदाहरण के
- 4:11:04लिए सारनाथ का स्टैंडिंग बुद्धा गुप्ता
- 4:11:06आर्ट का वन ऑफ द बेस्ट स्पेसिमेन है। इस
- 4:11:09पीरियड में हमें पहली बार विष्णु, शिवा और
- 4:11:13अन्य भगवानों की मूर्ति देखने को मिलती
- 4:11:15है। उदयगिरी केव्स के एंट्रेंस पर वराह द
- 4:11:18ग्रेट बोर की मूर्ति भी गुप्ता
- 4:11:20स्कल्प्चर्स का शानदार नमूना है।
- 4:11:24आर्ट एंड आर्किटेक्चर के साथ-साथ गुप्ता
- 4:11:27पीरियड की मेटोलर्जिकल प्रावर्स भी कमाल
- 4:11:30की थी। एग्जांपल के लिए दिल्ली के कुतुब
- 4:11:33कॉम्प्लेक्स में इंस्टॉल्ड आयरन पिलर है।
- 4:11:3699% आयरन से बने होने के बावजूद इसमें
- 4:11:401600 साल बाद भी जंग का नामोनिशान तक नहीं
- 4:11:43है। वहीं लिटरेचर के फील्ड में गुप्ता
- 4:11:46पीरियड आज भी प्रोमिनेंट पोजीशन होल्ड
- 4:11:49करता है। आइए देखते हैं। लिटरेचर इन
- 4:11:53गुप्ता पीरियड। गुप्ता पीरियड में संस्कृत
- 4:11:56वन ऑफ द मोस्ट प्रोमिनेंट लैंग्वेजेस बन
- 4:11:59गई थी। संस्कृत, पोएट्री, ड्रामा, एपिक्स,
- 4:12:02नई ऊंचाइयों को छूने लगी थी। इसके अलावा
- 4:12:05साइंटिफिक लिटरेचर की तो बात ही कुछ अलग
- 4:12:07थी। इसको अच्छे से समझने के लिए हम
- 4:12:10लिटरेचर को तीन पार्ट्स में डिवाइड कर
- 4:12:12सकते हैं। पहला है रिलीजियस लिटरेचर।
- 4:12:16हिंदू टेक्स्ट्स में आज के पुराणास की
- 4:12:19रचना इसी समय हुई थी। इनमें भागवत,
- 4:12:22विष्णु, वायु और मत्स्य पुराण मोस्ट
- 4:12:26इंपोर्टेंट पुराणास हैं। महाभारत और
- 4:12:29रामायण एपिक्स को फाइनल टच इसी पीरियड में
- 4:12:32दिया गया था। इसी प्रकार कई बुद्धिस्ट और
- 4:12:36जैन टेक्स्ट भी इसी समय लिखे गए थे जो आज
- 4:12:39भी रेलेवेंस रखते हैं। एग्जांपल के लिए
- 4:12:42बुद्ध घोष द्वारा लिखित विशुद्धि मगगा और
- 4:12:46जैन ऑथर सिद्ध सेना द्वारा रचित
- 4:12:48न्यायवर्तम प्रमुख हैं।
- 4:12:51दूसरा है सेकुलर लिटरेचर। सेकुलर लिटरेचर
- 4:12:55के फील्ड में आपने किंग चंद्रगुप्ता द
- 4:12:58सेकंड के नवरत्नों में से एक कालिदास का
- 4:13:00नाम तो जरूर सुना होगा। कालिदास के
- 4:13:03ब्रिलियंट कंपोजिशंस के लिए उन्हें
- 4:13:05शेक्सपियर ऑफ इंडिया भी कहा जाता है। उनके
- 4:13:08मास्टरपीस संस्कृत ड्रामा अभिज्ञान
- 4:13:11शाकुंतलम को वर्ल्ड के 100 बेस्ट बुक्स
- 4:13:14में कंसीडर किया जाता है। इस ड्रामा में
- 4:13:17उन्होंने शकुंतला नाम की लेडी की लाइफ में
- 4:13:19चल रहे ओडील्स को बहुत ड्रामेटाइज्ड तरीके
- 4:13:22से पेश किया है। इसके अलावा उन्होंने ऋतु
- 4:13:26संहारा जैसी पोएम्स, मालविका अग्निमित्रम,
- 4:13:29मेघदूतम, कुमार संभवम और रघुवंशम जैसे
- 4:13:33क्लासिकल ड्रामा लिखे। वैशाख दत्ता भी इस
- 4:13:37समय के सेलिब्रेटेड ऑथर में से एक थे।
- 4:13:39जिन्होंने संस्कृत ड्रामा मुद्रा राक्षसा
- 4:13:42और देवी चंद्र गुप्तम लिखा। वहीं कीरत
- 4:13:45अर्जुन्य भैरवी द्वारा काव्यदर्शा दशकुमार
- 4:13:50चरिता दंडन द्वारा पंचतंत्र विष्णु शर्मा
- 4:13:53द्वारा कामसूत्र वात्सयना द्वारा और
- 4:13:57अमरकोष नाम की डिक्शनरी बुद्धिस्ट ऑथर अमर
- 4:14:00सिंहा द्वारा लिखे गए।
- 4:14:03तीसरा सेक्शन है साइंटिफिक लिटरेचर।
- 4:14:07गुप्ता पीरियड मैथमेटिक्स, एस्ट्रोनॉमी,
- 4:14:10एस्ट्रोलॉजी, मेडिसिन के क्षेत्र में भी
- 4:14:13काफी आगे था। आर्यभट्ट ने अपनी किताब
- 4:14:16आर्यभट्टिया में कई महत्वपूर्ण खोज के
- 4:14:19बारे में लिखा था। उनके हिसाब से अर्थ
- 4:14:22स्फेरिकल था और अपने एक्सिस पर घूमता था
- 4:14:26और पाई की वैल्यू 3.14 थी। उन्होंने ही
- 4:14:30दुनिया को जीरो का कांसेप्ट दिया। वहीं
- 4:14:33पंच सिद्धांतिका में वराहरा ने पांच
- 4:14:37एस्ट्रोनॉमिकल सिस्टम्स का जिक्र किया।
- 4:14:39बहद जातका नाम की किताब एस्ट्रोलॉजी के
- 4:14:42फील्ड में उनका रिमारकेबल कंट्रीब्यूशन
- 4:14:44है। इसके अलावा बृहद समिता नाम की पुस्तक
- 4:14:48में उन्होंने वैरायटी ऑफ़ सब्जेक्ट्स
- 4:14:50एस्ट्रोनॉमी, एस्ट्रोलॉजी, ज्योग्राफी,
- 4:14:53आर्किटेक्चर, वेदर, एनिमल्स, मैरिज, वुमस
- 4:14:56इत्यादि पर विस्तार से चर्चा की।
- 4:15:00मेडिसिन के फील्ड में वागभट्टा ने अष्टांग
- 4:15:04संग्रह यानी समरी ऑफ एट ब्रांचेस ऑफ
- 4:15:07मेडिसिन नाम की बुक लिखी जिसके कारण
- 4:15:09उन्हें ग्रेट मेडिकल ट्रियो ओवेंशिएंट
- 4:15:12इंडिया में गिना जाता है। बाकी दो मेडिकल
- 4:15:14जीनियस चरक और सुश्रुत को बोला जाता है।
- 4:15:19अब तक हमने गुप्ता पीरियड के डिफरेंट
- 4:15:21अचीवमेंट्स की बात की। पर इस वजह से क्या
- 4:15:25इसे गोल्डन एज कहा जाना चाहिए?
- 4:15:28आइए देखते हैं गुप्ता पीरियड गोल्डन एज ऑफ
- 4:15:32इंडिया मिथ और रियलिटी
- 4:15:36गहराई में एनालिसिस करने पर पता चलता है
- 4:15:38कि पैन नॉर्थ इंडियन एंपायर फॉरेन रूल से
- 4:15:42फ्रीडम पीस एंड प्रोस्पेरिटी लोअर टैक्स
- 4:15:45बर्डन ऑन पीपल माइल्ड पनिशमेंट रिलीजियस
- 4:15:49टॉलरेंस आर्ट लिटरेचर साइंटिफिक
- 4:15:51एडवांसमेंट के नजरिए से देखा जाए तो
- 4:15:54गुप्ता पीरियड को बिल्कुल एक गोल्डन एज
- 4:15:56कहा जा सकता है पर वुमेन के स्टेटस में
- 4:16:00डिक्लाइन, सती और अनटचेबिलिटी की शुरुआत,
- 4:16:04फ्यूडल टेंडेंसीज का डेवलपमेंट और कास्ट
- 4:16:06रिजिडिटी में बढ़ोतरी की बात करें तो
- 4:16:09गुप्ता पीरियड को सोशल इनजस्टिस और
- 4:16:12इनक्विटी के बिगिनिंग के रूप में भी देखा
- 4:16:14जा सकता है। लेकिन ओवरऑल गुप्ता साम्राज्य
- 4:16:17एंशिएंट इंडिया के ग्लोरियस एंपायर्स में
- 4:16:20से एक था। इस समय शुरू हुए कई
- 4:16:22इंटेलेक्चुअल ट्रेडिशंस आज भी इंडियन
- 4:16:25सोसाइटी, इकॉनमी और वैल्यूस को शेप कर रहे
- 4:16:28हैं।
- 4:16:30द रेन ऑफ हर्षवर्धन।
- 4:16:33दोस्तों, गुप्ता एंपायर के बाद पूरा
- 4:16:36भारतवर्ष फिर से छोटे-छोटे प्रदेशों में
- 4:16:38बंट गया था। लेकिन इसके बावजूद एक ऐसा
- 4:16:41विराट सम्राट हुआ जो पूरे उत्तर भारत में
- 4:16:44अपना साम्राज्य कायम करने में सफल हो गया।
- 4:16:47और साथ ही साथ शिक्षा, साहित्य, धर्म और
- 4:16:51टॉलरेंस की प्रेरणा भी बना। प्रयाग और
- 4:16:55कन्नौज असेंबली जैसे बड़े आयोजन उन्हीं के
- 4:16:58काल में आयोजित किए गए। इस कारण उन्हें
- 4:17:02सकलोत्तरा पथेश्वरा यानी कि लॉर्ड ऑफ द
- 4:17:05नॉर्थ भी कहा जाता है। यह सम्राट कौन थे?
- 4:17:09दोस्तों, यह थे पुष्यभूति वंश के महान
- 4:17:12शासक शिलादित्य हर्षवर्धन जिनकी आज हम बात
- 4:17:17करेंगे। तो आइए शुरू करते हैं पॉलिटिकल
- 4:17:19हिस्ट्री से। पॉलिटिकल हिस्ट्री
- 4:17:23साल है 600 एडी का। हर्षवर्धन 10 साल के
- 4:17:27हो चुके थे। उनके पिता एवं प्रतापी राजा
- 4:17:30प्रभाकर वर्धना थाणेश्वर जो कि प्रेजेंट
- 4:17:33डे हरियाणा रीजन के अराउंड था उसके राजा
- 4:17:36थे।
- 4:17:37वे बेहद सूझबूझ से पुष्यभूति वंश के
- 4:17:40साम्राज्य को विदेशी खतरों से प्रोटेक्ट
- 4:17:43कर रहे थे। पर 65 एडी में उनके पिता
- 4:17:46प्रभाकर वर्धना अनटाइमली गुजर जाते हैं और
- 4:17:50उनकी माता यशोमती सती हो जाती हैं। इस
- 4:17:53मुश्किल घड़ी में हर्षवर्धन के मामा और
- 4:17:56चीफ मिनिस्टर भांडी हर्षवर्धन के बड़े भाई
- 4:18:00राज्यवर्धन को राज सिंहासन पर बैठने के
- 4:18:03लिए मना लेते हैं। लेकिन आगे बढ़ने से
- 4:18:06पहले हम थानेश्वर की जियोग्राफी समझ लेते
- 4:18:09हैं। थानेश्वर आज के हरियाणा राज्य में
- 4:18:13लोकेटेड था। इसके ईस्ट में कान्यकुब्ज या
- 4:18:16कन्नौज था। जहां मुखारी वंश के गृह वर्मन
- 4:18:20का शासन था। वेस्ट में वल्लभी था। जहां
- 4:18:23मैत्रिका वंश के ध्रुवसेना टू का राज था।
- 4:18:26नॉर्थ में कश्मीर था और साउथ एंड साउथ
- 4:18:29वेस्ट में मालवा जहां देवगुप्ता का शासन
- 4:18:33था। और गॉड यानी बंगाल के राजा थे शशांक
- 4:18:37जो देवगुप्ता के दोस्त थे। इसके अलावा फार
- 4:18:41ईस्ट में कामरूप यानी आसाम में भास्कर
- 4:18:44वर्मन का शासन था। थाणेश्वर राज्य के
- 4:18:47इन्फ्लुएंस को बढ़ाने के लिए हर्षवर्धन के
- 4:18:50पिता प्रभाकर वर्धन अपनी बेटी राज्यश्री
- 4:18:53की शादी कन्नौज के राजा गृहवर्मन के साथ
- 4:18:56करवा देते हैं। इस मैट्रिमोनियल अलायंस से
- 4:19:00थाणेश्वर राज्य की प्रतिष्ठा पूरे उत्तर
- 4:19:03भारत में काफी बढ़ जाती है। परंतु प्रभाकर
- 4:19:07वर्धना की मृत्यु के बाद मालवा के राजा
- 4:19:10देवगुप्ता कन्नौज पर आक्रमण कर देते हैं।
- 4:19:13बड़ी क्रूरता से वो गृहवर्मन को मार देते
- 4:19:16हैं और राज्यश्री को बंदी बना लेते हैं।
- 4:19:20बदला लेने के लिए राज्यवर्धन मालवा पर एक
- 4:19:24बड़ी सेना के साथ हमला कर देते हैं और
- 4:19:26देवगुप्ता को हराकर राज्यश्री को छुड़ा
- 4:19:29लेते हैं।
- 4:19:31राज्यवर्धन की विशाल सेना देखकर गौड यानी
- 4:19:35बंगाल का शासक शशांक समझ जाते हैं कि
- 4:19:38राज्यवर्धन को सीधी लड़ाई में हराना
- 4:19:40नामुमकिन है। इसलिए वो छल का सहारा लेकर
- 4:19:43राज्यवर्धन को मार देते हैं। इसके बाद
- 4:19:46राइज होता है राज्यवर्धन के छोटे भाई
- 4:19:50हर्षवर्धन का। आइए देखते हैं।
- 4:19:54राइज ऑफ हर्षवर्धन।
- 4:19:56राज्यवर्धन की अचानक हुई मृत्यु से
- 4:19:58हर्षवर्धन बहुत छोटी उम्र में अकेले पड़
- 4:20:01जाते हैं। पर भांडी मामा को पता था कि
- 4:20:05हर्षवर्धन अपने भैया से कहीं अधिक कुशल,
- 4:20:08पराक्रमी और चतुर राजा बन सकते हैं। इसलिए
- 4:20:11भांडी मामा हर्षवर्धन को ललकारते हुए कहते
- 4:20:14हैं कि यह वक्त आंसू बहाने का नहीं बल्कि
- 4:20:17शत्रुओं का खून बहाने का है। हर्षवर्धन
- 4:20:20सबसे पहले अपनी बहन को विंध्याचल के जंगल
- 4:20:23में सती होने से रोक लेते हैं। और फिर
- 4:20:26शुरू होता है शिव भक्त हर्षवर्धन की लड़ाई
- 4:20:29और जीत का सिलसिला।
- 4:20:32उनके 1 लाख सैनिक और 60 हजार हाथी की
- 4:20:36विशाल सेना के सामने कोई राजा टिक नहीं पा
- 4:20:39रहा था। राज्यवर्धन को छल से मारने वाले
- 4:20:42शशांक भी हर्षवर्धन की सेना को देखकर
- 4:20:45कन्नौज से पीछे हट जाते हैं।
- 4:20:48इसके बाद हर्षवर्धन कन्नौज को ना केवल
- 4:20:52अपने राज्य में मर्ज कर लेते हैं बल्कि
- 4:20:54अपनी कैपिटल थाणेश्वर से कन्नौज शिफ्ट कर
- 4:20:57देते हैं।
- 4:20:59शशांक के छल का बदला लेने के लिए
- 4:21:01हर्षवर्धन भी शतरंज की चाल चलते हैं। पहले
- 4:21:04वह कामरूप यानी आसाम के राजा भास्कर वर्मन
- 4:21:08से एक मैत्री संधि कर लेते हैं। फिर गॉड
- 4:21:11पर दो तरफ़ा आक्रमण कर देते हैं। शशांक
- 4:21:14जैसे तैसे अपनी जान बचाकर कहीं दूर जंगल
- 4:21:17में भाग जाता है। कुछ सालों बाद उसकी
- 4:21:20मृत्यु हो जाती है और पूरा गौड साम्राज्य
- 4:21:23हर्षवर्धन के आधीन हो जाता है। वेस्ट में
- 4:21:27वल्लभी के राजा और पुलककेशिन 2 के मित्र
- 4:21:30ध्रुवसेना 2 को भी हार माननी ही पड़ती है।
- 4:21:34पर बफर स्टेट मेंटेन करने के लिए
- 4:21:37हर्षवर्धन वल्लभी को पूरी तरह एनेक्स करने
- 4:21:40के बजाय ध्रुवसेना टू को वापस गद्दी पर
- 4:21:43बैठा देते हैं। यह हर्षवर्धन की बड़ी जीत
- 4:21:46होने के साथ-साथ उनकी बेहतरीन स्टेट
- 4:21:49क्राफ्ट का नमूना भी था। इस तरह ईस्ट,
- 4:21:52वेस्ट, नॉर्थ, साउथ सब तरफ हर्षवर्धन अपना
- 4:21:56विजय परचम लहरा देते हैं। जिसके परिणाम
- 4:21:59स्वरूप उत्तर में हिमालय, दक्षिण में
- 4:22:01नर्मदा, दक्षिण पश्चिम में अरब सागर,
- 4:22:04दक्षिण पूर्व में बंगाल की खाड़ी और पूरब
- 4:22:07में ब्रह्मपुत्र घाटी तक उनका साम्राज्य
- 4:22:10फैल जाता है।
- 4:22:12लड़ाई, जीत और सूझ-बूझ से हर्षवर्धन
- 4:22:16सकलोत्तरा पथेश्वर यानी लॉर्ड ऑफ द नॉर्थ
- 4:22:19की ख्याति पा लेते हैं। उनके विजय रथ को
- 4:22:23एकमात्र झटका नर्मदा पार करने पर चालुक्य
- 4:22:26शासक पुलकेशन टू द्वारा लगता है। जिसका
- 4:22:30एविडेंस हमें आईहोल इं्रिप्शन में देखने
- 4:22:32को मिलता है। आइए जानते हैं इसके बारे
- 4:22:35में।
- 4:22:37आईहोल इं्रिप्शन हर्षवर्धन और पुलकशन टू
- 4:22:41के बीच हुई महान लड़ाई का वर्णन पुलककेशन
- 4:22:442 के राजकवि रवि कृति द्वारा लिखे आईहोल
- 4:22:47इं्रिप्शन में देखा जा सकता है। आईहोल
- 4:22:51इं्रिप्शंस संस्कृत लैंग्वेज में होने के
- 4:22:53बावजूद कन्नाडा स्क्रिप्ट में लिखा गया
- 4:22:56है। इं्रिप्शन के अनुसार पुलकेशन टू ने
- 4:23:00हर्षवर्धन के अलावा कई और साउथ इंडियन
- 4:23:02किंग्स को भी हरा दिया था। उन्होंने अपनी
- 4:23:05राजधानी आईहोल से बदलकर बदामी कर दी थी।
- 4:23:09इस इं्रिप्शन में कालिदास का भी मेंशन है।
- 4:23:12पुलककेशन 2 के बेहतरीन डिफेंस से
- 4:23:14हर्षवर्धन दक्षिण पथ फतेह करने का इरादा
- 4:23:18छोड़ देते हैं और अपना सारा ध्यान उत्तर
- 4:23:21भारत को कंसोलिडेट करने में लगा देते हैं।
- 4:23:24आगे चलकर हर्षवर्धन 40 साल से भी ज्यादा
- 4:23:28रूल करते हैं। पर लैक ऑफ पावरफुल सक्सेसर,
- 4:23:31प्रयाग असेंबली के समय सारा खजाना खाली कर
- 4:23:34देने की प्रथा और डिक्लाइनिंग ट्रेड एंड
- 4:23:36कॉमर्स के कारण हर्षवर्धन के बाद उनका
- 4:23:39एंपायर टिक नहीं पाता और नॉर्थ इंडिया में
- 4:23:42फिर से इनस्टेबिलिटी आ जाती है। दोस्तों,
- 4:23:46हर्षवर्धन की सफलता में उनके एफिशिएंट
- 4:23:49एडमिनिस्ट्रेशन का बड़ा रोल था। इसलिए आइए
- 4:23:53अब हम उनका एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम देख
- 4:23:55लेते हैं। एडमिनिस्ट्रेशन अंडर हर्षा
- 4:23:59हर्षवर्धन ने मौर्य और गुप्ता काल से
- 4:24:01इंस्पिरेशन लेकर कई एडमिनिस्ट्रेटिव
- 4:24:04रिफॉर्म्स किए। यही कारण था कि वे लगभग 40
- 4:24:08साल तक शासन कर पाए थे। पर गुप्ताज़ के
- 4:24:11कंपैरिजन में उनका एडमिनिस्ट्रेशन ज्यादा
- 4:24:14डीसेंट्रलाइज्ड और फ्यूडल एलिमेंट से भरा
- 4:24:16हुआ था। राजगद्दी संभालने के बाद वह अपनी
- 4:24:20राजधानी थाणेश्वर से बदलकर कन्नौज कर देते
- 4:24:23हैं। इससे कुछ ही सालों में कन्नौज पूरे
- 4:24:26उत्तर भारत का ध्रुवतारा बन जाता है।
- 4:24:29राजकवि बाण भट्ट द्वारा लिखित राजा खुद
- 4:24:33अपनी सेना के कमांडर इन चीफ भी होते थे।
- 4:24:35हर्षवर्धना ने महाराजा अधिराज परम
- 4:24:39भट्टराका परम महेश्वरा जैसे टाइटल भी लिए
- 4:24:42थे। वे एक उदार राजा थे और खुद पर्सनली
- 4:24:46प्रशासन की गतिविधियों पर नजर रखते थे।
- 4:24:49राजा को सलाह देने के लिए एक मंत्री परिषद
- 4:24:52भी होता था जिसको चीफ मिनिस्टर हेड करते
- 4:24:55थे। अवंती नाम के अधिकारी वारेन पीस
- 4:24:58डिपार्टमेंट देखते थे। सिंहनाद मिलिट्री
- 4:25:01हेड होते थे। स्कंदगुप्त हाथी दस्ते के
- 4:25:05हेड होते थे और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के
- 4:25:07प्रमुख को सामंत महाराज बुलाया जाता था।
- 4:25:10पूरे साम्राज्य को प्रदेशों में बांटा गया
- 4:25:12था जिसे भुक्ति बोला जाता था। भुक्ति का
- 4:25:16विभाजन विषयाज़ यानी जिलों में किया गया
- 4:25:19था। गांव प्रशासन की सबसे छोटी यूनिट हुआ
- 4:25:23करती थी। लोगों पर मिनिमम टैक्स बर्डन रखा
- 4:25:26गया था और गुड गवर्नेंस से
- 4:25:28एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपेंसेस को कंट्रोल
- 4:25:30किया गया था। लैंड रेवेन्यू जिसे भाग बोला
- 4:25:34जाता था। साम्राज्य का प्रमुख आय स्रोत
- 4:25:36था। यह उपज का 16 भाग होता था और फसल के
- 4:25:41रूप में ही दिया जाता था। सेल्स टैक्स और
- 4:25:43टोल टैक्स आय के अन्य स्रोत हुआ करते थे।
- 4:25:46इसके अलावा छोटे-छोटे राजा और फ्यूड ट्रीज
- 4:25:49भी एपरर को ट्रिब्यूट दिया करते थे। लॉ
- 4:25:53एंड ऑर्डर अच्छा था। परंतु उसमें कुछ
- 4:25:55कमियां भी थी। उदाहरण स्वरूप सफर के दौरान
- 4:25:59कई बार खुद हुएन सांग के साथ रॉबरी की
- 4:26:02घटना हुई थी। बड़े अधिकारियों को पैसे के
- 4:26:05बदले जमीन दी जाती थी। इसके कारण
- 4:26:07हर्षवर्धन काल में फ्यूडलिज्म को बहुत
- 4:26:10बढ़ावा मिला। एफिशिएंट एडमिनिस्ट्रेशन के
- 4:26:12अलावा हर्षवर्धन की सफलता का श्रेय उनकी
- 4:26:16विशाल और प्रशिक्षित आर्मी को भी जाता है।
- 4:26:18चलिए जानते हैं। आर्मी ह्वीन सैंग के
- 4:26:22अनुसार उनकी सेना में 60 हजार हाथी, 500
- 4:26:27घुड़सवार और 1 लाख थल सेना हुआ करती थी।
- 4:26:30इतनी बड़ी सेना को मेंटेन करने के लिए
- 4:26:33हर्षवर्धन ने कई फ्यूड ट्रीज को लैंड
- 4:26:36ग्रांट्स दिए। एडमिनिस्ट्रेशन और आर्मी की
- 4:26:38खूबियां तो हमने देख ली पर सोशियोइकोनॉमिक
- 4:26:41कंडीशन पर डिस्कशन किए बिना आज की चर्चा
- 4:26:44अधूरी रह जाएगी। आइए पहले देखते हैं
- 4:26:47हर्षवर्धन एंपायर की सोशल लाइफ को। सोशल
- 4:26:52लाइफ
- 4:26:53हर्षवर्धन के समय में वर्ण सिस्टम पूरी
- 4:26:56तरह से मॉडिफाई हो गया था। वर्ण सिस्टम के
- 4:26:59अंदर कास्ट सिस्टम इंपेरिकल रियलिटी बन
- 4:27:03गया था। जन्म के आधार पर विभिन्न जातियों
- 4:27:06में सदस्यता मिलती थी और इसे जन्म के बाद
- 4:27:09बदला नहीं जा सकता था। इंटरकास्ट डाइनिंग
- 4:27:13और मैरिज प्रोहिबिटेड था जिसके लिए कठोर
- 4:27:17दंड का प्रावधान था। अनटचेबिलिटी बड़ा रूप
- 4:27:20ले चुका था। इस समय महिलाओं की स्थिति में
- 4:27:24गुप्ता काल जैसी ही गिरावट देखने को मिलती
- 4:27:26है। सती प्रथा ने विराट रूप ले लिया था।
- 4:27:30हर्षवर्धन अपनी माता यशुमती को तो नहीं पर
- 4:27:33किसी प्रकार अपनी बहन राजश्री को सती होने
- 4:27:36से बचा लेते हैं। परंतु ऊंची जाति की
- 4:27:39महिलाओं के लिए नॉर्मल केसेस में यह
- 4:27:42पॉसिबल नहीं था। पर्दा प्रथा की शुरुआत
- 4:27:45नहीं हुई थी। पर महिलाओं के स्वतंत्र
- 4:27:48घूमने पर ढेर सारे प्रतिबंध थे।
- 4:27:51लेकिन पशुओं के साथ अच्छा व्यवहार करने का
- 4:27:54निर्देश स्वयं महाराजा हर्षवर्धन की तरफ
- 4:27:57से दिया गया था। किसी भी जानवर को मारना
- 4:28:01बड़ा अपराध था। लोकल पापुलेशन सिंपल एंड
- 4:28:04मोरल लिविंग में विश्वास रखती थी। सोसाइटी
- 4:28:07के बाद अब हम हर्षवर्धन एंपायर की इकॉनमी
- 4:28:10पर भी चर्चा कर लेते हैं। इकोनमी अंडर
- 4:28:14हर्षा। वुमेन की कंडीशन डिटीरियोरेट होने
- 4:28:18के साथ-साथ हर्षा काल में ट्रेड एंड
- 4:28:20कॉमर्स में भी डिक्लाइन हुआ था। इस कारण
- 4:28:23से हर्षवर्धन ने गुप्ताज़ के कंपैरिजन में
- 4:28:26बहुत कम कॉइंस इशू किए। पैसे की जगह लैंड
- 4:28:31ग्रांट्स दिया जाता था। जिससे हर्ष पीरियड
- 4:28:34में फ्यूडल इकॉनमी को बहुत बढ़ावा मिला
- 4:28:36था। एक्सकेवेशन में मिले कॉपर प्लेट्स
- 4:28:39इसकी गवाही देते हैं। कन्नौज, प्रयाग यानी
- 4:28:43इलाहाबाद और बनारस हर्षा साम्राज्य के
- 4:28:46बड़े शहरों में गिने जाते थे। इकोनॉमिक
- 4:28:49प्रोस्पेरिटी के साथ-साथ हर्षा काल
- 4:28:52रिलीजियस टॉलरेंस के लिए भी याद किया जाता
- 4:28:54था। आइए देखते हैं। रिलीजियस टॉलरेंस।
- 4:28:59हिंदूज़्म, बुद्धिज्म और जैनिज्म हर्षा काल
- 4:29:03में पॉपुलर रिलीजंस हुआ करते थे।
- 4:29:06प्रयाग जिसे आज प्रयागराज कहा जाता है और
- 4:29:09बनारस हिंदू धर्म के प्रमुख केंद्र हुआ
- 4:29:12करते थे। वहीं महायान बौद्ध धर्म के सबसे
- 4:29:17बड़े सेक्ट के रूप में उभर कर आया था।
- 4:29:20हर्षवर्धन मूलतः शिव भक्त यानी शैवाय थे।
- 4:29:24परंतु हन सेंग के अनुसार वो एक कन्विंस्ड
- 4:29:27महायान बुद्धिस्ट भी थे। उन्होंने गंगा
- 4:29:30नदी के किनारे कई बुद्धिस्ट स्तूपा बनवाए
- 4:29:33थे। कुछ अकाउंट्स के अनुसार एक स्तूपा तो
- 4:29:36100 फीट ऊंचा था। पर वे पूरी तरह से
- 4:29:39बुद्धिज्म में कन्वर्ट हुए थे या नहीं यह
- 4:29:42अभी भी डिबेट का विषय है। सम्राट अशोका की
- 4:29:46तरह उन्होंने भी जीव हत्या पर प्रतिबंध
- 4:29:49लगा दिया था। पुअर और डेस्टिट्यूट के लिए
- 4:29:52मुफ्त खाने और दवाइयों की व्यवस्था की गई
- 4:29:55थी। इसके अलावा वे दिल खोलकर चैरिटी भी
- 4:29:59किया करते थे। उनकी दान प्रवृत्ति के सबसे
- 4:30:02बड़े प्रमाण प्रयाग असेंबली और कन्नौज
- 4:30:05असेंबली का आयोजन थे। चलिए पहले जानते हैं
- 4:30:08प्रयाग असेंबली के बारे में।
- 4:30:11प्रयाग असेंबली हर्षवर्धन हर 5 वर्ष पर
- 4:30:15प्रयाग में एक ग्रैंड धार्मिक सम्मेलन का
- 4:30:18आयोजन करते थे। जिसमें सभी धर्मों के
- 4:30:21स्कॉलर्स को इनविटेशन भेजा जाता था। कई
- 4:30:24शास्त्रार्थ या डिबेट्स का आयोजन किया
- 4:30:27जाता था और सभी स्कॉलर्स को ढेर सारा धन
- 4:30:30दिया जाता था। 5 साल के अंत में जो भी
- 4:30:34खजाने में बचा होता था सब दान कर दिया
- 4:30:36जाता था। प्रयाग असेंबली के बाद अब हम
- 4:30:40कन्नौज असेंबली के बारे में भी जान लेते
- 4:30:42हैं। कन्नौज असेंबली ह्यूएन सैंग ने
- 4:30:47हर्षवर्धन के राज में लगभग 8 साल बिताए
- 4:30:50थे। हर्षवर्धन ह्यूएन सैंग से इतने
- 4:30:53प्रभावित हो गए थे कि उन्होंने उनके
- 4:30:55सम्मान में अलग से 643 एडी में कन्नौज
- 4:31:00असेंबली का आयोजन कर ढेर सारा दान दिया।
- 4:31:04इस असेंबली का मुख्य उद्देश्य महायान
- 4:31:07बुद्धिज्म को पॉपुलराइज करना था। कुछ
- 4:31:10स्कॉलर्स का मानना है कि यह एक्सट्रीम दान
- 4:31:13प्रथा उनके एंपायर के डिक्लाइन का
- 4:31:15इंपॉर्टेंट कारण बनी थी। दान पुण्य के
- 4:31:19अलावा हर्षवर्धन एक महान स्कॉलर भी थे।
- 4:31:22उनके रेन में लर्निंग और लिटरेचर में बहुत
- 4:31:25तरक्की हुई थी। पहले बात करते हैं लिटरेचर
- 4:31:28की। लिटरेचर हर्षवर्धन खुद तीन संस्कृत
- 4:31:33प्लेज़ रत्नावली, प्रियदर्शिका और नागनंद
- 4:31:37के ऑथर थे। उनके समय की बाणभट्ट की रचनाएं
- 4:31:41आज भी फेमस हैं। बाणभट्ट हर्ष के राजकवि
- 4:31:45थे। जिन्होंने कादंबरी और हर्ष चरिता जैसी
- 4:31:48प्रसिद्ध पुस्तकें लिखी थी। हर्षचरिता
- 4:31:52जहां हर्षवर्धन की अर्ली लाइफ के बारे में
- 4:31:54बताता है। वहीं कादंबरी में दो प्रेमियों
- 4:31:58की ट्रैजिक लव स्टोरी डिस्क्राइब की गई
- 4:32:00है। यह थी लिटरेचर की बात। लेकिन लर्निंग
- 4:32:03के क्षेत्र में नालंदा यूनिवर्सिटी को
- 4:32:06कैसे भुलाया जा सकता है? नालंदा
- 4:32:09यूनिवर्सिटी। लिटरेरी प्रावस के साथ-साथ
- 4:32:13गुप्त काल में स्थापित नालंदा यूनिवर्सिटी
- 4:32:16हर्षवर्धन के समय में अपने पीक पर पहुंच
- 4:32:19गया था। देश विदेश से हजारों स्टूडेंट्स
- 4:32:23यहां शिक्षा लेने आते थे। क्यूएन सैंग भी
- 4:32:26यहां पर कुछ समय के लिए स्टूडेंट रहे थे।
- 4:32:28नालंदा यूनिवर्सिटी के इंपैक्ट को देखते
- 4:32:31हुए हर्षवर्धन ने 100 गांव की जमीन
- 4:32:34यूनिवर्सिटी के मेंटेनेंस के लिए दान में
- 4:32:36दी थी। 122 एडी में बख्तियार खलजी ने अपनी
- 4:32:41मिलिट्री एक्सपिडिशन में नालंदा
- 4:32:43यूनिवर्सिटी को आग लगवा दी थी। कहा जाता
- 4:32:46है कि यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी में इतनी
- 4:32:49किताबें थी कि 3 महीने तक आग जलती रही।
- 4:32:53बख्तियार खलजी ने कई बुद्धिस्ट मंक्स को
- 4:32:56भी मरवा दिया था। जिससे भारत में
- 4:32:59बुद्धिज्म को बहुत हानि हुई। हर्षवर्धन की
- 4:33:02पॉपुलैरिटी के साथ-साथ उनको लेकर कुछ
- 4:33:05कंट्रोवर्सीज भी रही हैं। आइए देखते हैं
- 4:33:08कंट्रोवर्सीज।
- 4:33:10पहली कंट्रोवर्सी हर्षवर्धन के वर्ण को
- 4:33:13लेकर है। कुछ हिस्टोरियंस के अनुसार
- 4:33:16पुष्यभूति डायनेस्टी वैश्य वर्ण से संबंध
- 4:33:19रखती थी। परंतु कुछ दूसरे हिस्टोरियंस
- 4:33:22उन्हें क्षत्रिय वर्ण का भी बताते हैं।
- 4:33:25दूसरी कंट्रोवर्सी उन्हें लास्ट ग्रेट
- 4:33:28हिंदू एपरर ऑफ इंडिया बोलने पर रही है।
- 4:33:30कुछ स्कॉलर्स का मानना है कि वे ना तो
- 4:33:33स्टोंस हिंदू थे और ना ही उन्होंने पूरे
- 4:33:36भारत पर राज किया था। तो फिर उन्हें लास्ट
- 4:33:39ग्रेट हिंदू एपरर ऑफ इंडिया कैसे कहा जा
- 4:33:41सकता है? उनकी अथॉरिटी नॉर्थ इंडिया तक ही
- 4:33:45सीमित थी। जिसमें कश्मीर शामिल नहीं था।
- 4:33:48और उनके बाद भी राजपूत, विजयनगर और मराठा
- 4:33:52जैसे कई ग्रेट हिंदू किंगडम्स राइज हुए
- 4:33:54थे। पर इन सारी कंट्रोवर्सीज के बावजूद
- 4:33:57हर्षवर्धन अपनी रिलीजियस टॉलरेंस, एनिमल
- 4:34:01वेलफेयर पॉलिसीज, डोनेशंस और लॉर्ड ऑफ द
- 4:34:04नॉर्थ के नाम से हमेशा याद रखे जाएंगे।
- 4:34:08स्ट्रगल फॉर कन्नौज, बालाज़, प्रतिहाराज़
- 4:34:11एंड राष्ट्रकूताज़। 800 एडी टू 1000 एडी।
- 4:34:16आज इस कहानी में हम डिस्कस करेंगे 800 से
- 4:34:191000 एडी के बीच हुई एक इंपॉर्टेंट
- 4:34:21स्ट्रगल के बारे में। जिसमें तीन एंपायर्स
- 4:34:24यानी पालाज, प्रतिहारास और राष्ट्रकूटास
- 4:34:27नॉर्थ इंडिया में अपने वर्चस्व के लिए लड़
- 4:34:30रहे थे। यह इंडियन मिडिवल हिस्ट्री का एक
- 4:34:33इंपॉर्टेंट फेस था जिसने नॉर्थ इंडिया की
- 4:34:35पॉलिटिक्स और इकोनॉमिक्स में इंपॉर्टेंट
- 4:34:37चेंजेस लाए। और आने वाले समय में नए
- 4:34:41पॉलिटिकल सेंटर्स को क्रिएट किया। सोसाइटी
- 4:34:44और कल्चर पर भी अपना प्रभाव छोड़ा। यह
- 4:34:47कहानी गंगा वैली और कन्नौज के डोमिनेशन से
- 4:34:51स्टार्ट होती है। इसीलिए सबसे पहले हम यह
- 4:34:53जान लेते हैं कि आखिर कन्नौज इतना
- 4:34:56इंपॉर्टेंट क्यों था। डोमिनेशन ओवर कन्नौज
- 4:35:01सेवंथ सेंचुरी में हर्षा के एंपायर के
- 4:35:03डिक्लाइन के बाद नॉर्थ इंडिया डेक्कन और
- 4:35:06साउथ इंडिया में कई लार्ज किंगडम्स उभर कर
- 4:35:09आए। गुप्ता और हर्ष के अंपायर में गंगा
- 4:35:12वैली दोनों एंपायर्स की हेजेमनी का बेसिस
- 4:35:15बनी। गंगा वैली, पपुलेशन और ह्यूज
- 4:35:18रिसोर्सेज के कारण ट्रेड और कॉमर्स का
- 4:35:21सेंटर थी। इस पर रूल करके ही गुप्ता
- 4:35:24रूलर्स और हर्षा ने गुजरात पर अपना
- 4:35:26आधिपत्य जमाया जो कि अपने रिच सीप्स और
- 4:35:29मैन्युफैक्चरर्स के कारण ओवरसीज ट्रेड के
- 4:35:32लिए इंपॉर्टेंट था। मालवा और राजस्थान इन
- 4:35:35दोनों सेंटर्स यानी गंगा वैली और गुजरात
- 4:35:38के बीच एसेंशियल लिंक्स थे। नॉर्थ इंडिया
- 4:35:41में रूल कर रहे किसी भी एंपायर के लिए यही
- 4:35:44ज्योग्राफिकल लिमिट थी। हर्षा के डिक्लाइन
- 4:35:46के बाद गंगा वैली में स्थित कन्नौज एक
- 4:35:48इंपॉर्टेंट स्ट्रेटेजिक सेंटर के रूप में
- 4:35:50उभर कर आया। कन्नौज गंगा के राइट बैंक में
- 4:35:54एक क्लिफ पर बसा हुआ था जो कि हाइट के
- 4:35:57कारण एडवांटेजियस था। हर्षा ने तो कन्नौज
- 4:36:00को सिंबल ऑफ इंपीरियल पावर बनाया। कन्नौज
- 4:36:04ट्रेड, कॉमर्स और कम्युनिकेशन का सेंटर
- 4:36:06बना जहां से इंडिया के सभी डायरेक्शंस में
- 4:36:09जाने वाले ट्रेड रूट्स निकलते थे। यह उसका
- 4:36:12इकोनॉमिकेंस था। इस पर कंट्रोल करके एक
- 4:36:15तरह से पूरी गंगा वैली पर कंट्रोल किया जा
- 4:36:18सकता था। पास्ट के मगध की तरह ही कन्नौज
- 4:36:22अब इंपॉर्टेंट हो चुका था। कन्नौज पर रूल
- 4:36:24करना एक तरह से पूरे नॉर्थ इंडिया पर रूल
- 4:36:27करने का सिंबल था। यह उसका पॉलिटिकलेंस
- 4:36:30था। 750 से 1000 एडी के बीच कई बड़े
- 4:36:34किंगडम्स राइज हुए। जैसे द पाला एंपायर
- 4:36:38जिसने ईस्टर्न इंडिया को डोमिनेट किया मिड
- 4:36:41नाइंथ सेंचुरी तक। द प्रतिहारा एंपायर
- 4:36:45जिसने वेस्टर्न इंडिया और अपर गेंजेटिक
- 4:36:47वैली को मिड 10थ सेंचुरी तक डोमिनेट किया।
- 4:36:50इसको गुर्जर प्रतिहारा एंपायर भी बोला
- 4:36:53जाता है। और द राष्ट्रकूता एंपायर जिसने
- 4:36:57डेक्कन पर अपना डोमिनेशन एस्टैब्लिश किया।
- 4:36:59यह तीन एंपायर्स भले ही आपस में लड़ते रहे
- 4:37:03लेकिन एक बड़े एरिया में उन्होंने लोगों
- 4:37:05को एक स्टेबल लाइफ दी। एग्रीकल्चर को
- 4:37:08एक्सटेंड किया। पोंड्स और कैनाल्स बनाए।
- 4:37:11आर्ट एंड आर्किटेक्चर को पेट्रिनेज दिया
- 4:37:13इंक्लूडिंग टेंपल्स। इन तीनों में से
- 4:37:16राष्ट्रकूटा एंपायर सबसे लंबे समय तक चला
- 4:37:19और नॉर्थ एंड साउथ इंडिया के बीच एक तरह
- 4:37:22से कल्चरल ब्रिज का काम किया। तो यह तो
- 4:37:25बात हुई कन्नौज केेंस की। अब बढ़ते हैं
- 4:37:28स्ट्रगल की तरफ। इसमें हम एक-एक करके
- 4:37:31तीनों एंपायर्स के बारे में बात करते हुए
- 4:37:33उनके आपस के स्ट्रगल्स की भी बात करेंगे।
- 4:37:36शुरू करते हैं पाला से।
- 4:37:39द पाला हर्षा की डेथ के बाद का जो पीरियड
- 4:37:42था एक तरह से पॉलिटिकल कंफ्यूजन का दौर
- 4:37:45था। कश्मीर के कारकोटा डायनेस्टी के रूलर
- 4:37:48ललिता आदित्य 724 से 760 एडी ने कुछ समय
- 4:37:52के लिए पंजाब और इवन कन्नौज पर कंट्रोल
- 4:37:55एस्टैब्लिश किया। कन्नौज उस समय सिंबल ऑफ
- 4:37:58सोवनिटी हुआ करता था। ललित आदित्य ने इसके
- 4:38:01अलावा बंगाल में भी इनवेट किया और वहां के
- 4:38:04राजा को मार दिया। ललित आदित्य ने इस
- 4:38:07दौरान पूरे भारत का भ्रमण किया और कई
- 4:38:09किंग्स को डिफीट भी किया। इस जर्नी के बाद
- 4:38:12वह वापस कश्मीर लौट गए और सभी एरियाज में
- 4:38:15एक तरह का पावर वैक्यूम क्रिएट हो गया। इस
- 4:38:18पावर वैक्यूम के चलते पाला और गुर्जर
- 4:38:21प्रतिहाराज़ का राइज होने लगा। जिसके बाद
- 4:38:24ललित आदित्य की पावर डिक्लाइन हो गई।
- 4:38:27पालाज़ और प्रतिहाराज़ में बनारस से लेकर
- 4:38:29साउथ बिहार के बीच के एरिया को कंट्रोल
- 4:38:32करने के लिए लगातार क्लैश होता रहा। खैर
- 4:38:35750 एडी में पाला एंपायर को गोपाला ने
- 4:38:38फॉर्मली फाउंड किया जो एक इक्टेड लीडर थे।
- 4:38:42ईस्टर्न इंडियन रीजन के नामी लोगों ने
- 4:38:44एनाकी को खत्म करने के लिए गोपाला को किंग
- 4:38:47बनाया। गोपाला का बर्थ किसी हाई रॉयल
- 4:38:50फैमिली में नहीं हुआ था। उनके फादर
- 4:38:52प्रोफेशन से एक सोल्जर थे। गोपाला ने अपने
- 4:38:55रूल में बंगाल को यूनिफाई किया और इवन मगध
- 4:38:59को अपने कंट्रोल में लिया। गोपाल को उनके
- 4:39:02संत धर्मपाला ने 770 एडी में सक्सीड किया।
- 4:39:06जिसने अगले 40 साल यानी 80 एडी तक राज
- 4:39:09किया। ट्राईपाडाइड स्ट्रगल धर्मपाला के
- 4:39:12रेन में ही हुई। धर्मपाला ने प्रतिहारा और
- 4:39:16राष्ट्रकूटा की आपसी लड़ाई का खूब फायदा
- 4:39:18उठाया। जब प्रतिहारा रूलर गॉड यानी बंगाल
- 4:39:22की तरफ एडवांस करने ही वाले थे तब
- 4:39:24प्रतिहारा रूलर को राष्ट्रकूटा रूलर
- 4:39:26ध्रुवा ने डिफीट किया। प्रतिहारा रूलर को
- 4:39:30राजस्थान के डेजर्ट में रेफ्यूज लेना पड़ा
- 4:39:32और ध्रुव वापस डेकन लौट गए। इसके कारण
- 4:39:36कन्नौज एक तरह से वेकेंट हो गया जिसके
- 4:39:38चलते धर्मपाल ने कन्नौज पर कब्जा कर लिया।
- 4:39:42धर्मपाल ने एक ग्रैंड दरबार ऑर्गेनाइज
- 4:39:45किया जिसमें पंजाब, ईस्टर्न राजस्थान
- 4:39:47एटसेट्रा के वेसल स्टेट्स को इनवाइट किया।
- 4:39:50ऐसा बताया जाता है कि धर्मपाल का रूल
- 4:39:53इंडिया के नॉर्थ वेस्ट की फेस्ट लिमिट तक
- 4:39:55फैल गया। जिसमें मालवा और बैरार भी
- 4:39:58इंक्लूडेड थे। लेकिन धर्मपाला ज्यादा समय
- 4:40:01तक अपनी पावर नॉर्थ इंडिया में
- 4:40:03कंसोलिडेटेड नहीं रख पाया। नागभट्टा द
- 4:40:05सेकंड 85 से 833 के रूल में प्रतिहाराज़ ने
- 4:40:10फिर से पावर को रिवाइव किया और धर्मपाला
- 4:40:12को डिफीट किया। बिहार और मॉडर्न ईस्टर्न
- 4:40:15उत्तर प्रदेश दोनों के बीच बोन ऑफ कंटेंशन
- 4:40:18बना रहा। नॉर्थ में हार के बाद पालाज़ को
- 4:40:21दूसरी डायरेक्शंस में रुख करना पड़ा।
- 4:40:24धर्मपाला के सन देवपाला ने उनको सक्सीड
- 4:40:27किया 810 एडी में जिसने प्राज्ञ
- 4:40:31ज्योतिषपुर यानी आसाम और पार्ट्स ऑफ ओसा
- 4:40:34में अपना कंट्रोल एक्सटेंड किया। तो ऐसा
- 4:40:36कहा जा सकता है कि मिड एथ सेंचुरी से लेकर
- 4:40:39मिड नाइंथ सेंचुरी के बीच ईस्टर्न इंडिया
- 4:40:41को पाला रूलर्स ने डोमिनेट किया। ऐसा
- 4:40:45बताया जाता है कि मॉडर्न नेपाल का कुछ
- 4:40:47पार्ट भी उनकी सुसरेनिटी में था। पाला
- 4:40:50रूलर्स बुद्धिस्ट लर्निंग और रिलीजन के
- 4:40:52ग्रेट पैटर्न थे। नालंदा यूनिवर्सिटी जो
- 4:40:56कि ईस्टर्न वर्ल्ड में काफी फेमस थी उसको
- 4:40:58रिवाइव करने का श्रेय धर्मपाला को जाता
- 4:41:01है। विक्रमशिला यूनिवर्सिटी को सेटअप करने
- 4:41:04का श्रेय भी धर्मपाला को जाता है। जो कि
- 4:41:07नालंदा के बाद फेमस होने वाली सिर्फ दूसरी
- 4:41:09यूनिवर्सिटी थी। तिबेट के साथ पाला रूलर्स
- 4:41:12के क्लोज कल्चरल रिलेशंस रहे। नोटेड
- 4:41:15बुद्धिस्ट स्कॉलर्स संत अक्षिता और
- 4:41:19दीपांकरा को तिबेट इनवाइट किया गया। जहां
- 4:41:22पर उन्होंने बुद्धिज्म के एक नए फॉर्म को
- 4:41:24इंट्रोड्यूस किया। जिसके कारण कई तिबेटन
- 4:41:27बुद्धिस्ट नालंदा और विक्रमशिला
- 4:41:29यूनिवर्सिटी में स्टडी के लिए आए।
- 4:41:32बुद्धिज्म के सपोर्टर होते हुए भी पाला ने
- 4:41:34शेवज्म और वैष्णविज्म को पेट्रिनेज दिया।
- 4:41:38यह उनकी रिलीजियस डायवर्सिटी और टॉलरेंस
- 4:41:40को शो करता है। नॉर्थ इंडिया के लार्ज
- 4:41:43नंबर ऑफ ब्राह्मणास को ग्रांट्स दिए जिसके
- 4:41:45चलते वो लोग बंगाल की तरफ जाने लगे। इनके
- 4:41:49आने के कारण बंगाल में कल्टीिवेशन का
- 4:41:51एक्सटेंशन हुआ। बंगाल की बढ़ती
- 4:41:53प्रोस्पेरिटी के कारण साउथ ईस्ट एशिया की
- 4:41:56कंट्रीज जैसे बर्मा, मलया, जावा, सुमात्रा
- 4:41:59एटसेट्रा में ट्रेड और कल्चरल कांटेक्ट्स
- 4:42:02का विस्तार हुआ। बढ़ते ट्रेड और
- 4:42:04प्रोस्पेरिटी के कारण बंगाल में इन
- 4:42:06कंट्रीज से ह्यूज अमाउंट्स में गोल्ड और
- 4:42:09सिल्वर आना चालू हुआ। साउथ ईस्ट की फेमस
- 4:42:12शैलेंद्र डायनेस्टी ने पालाकोट में कई
- 4:42:15एंबेसीज भेजी और इनकी देखभाल के लिए पांच
- 4:42:18विलेजेस की डिमांड पाला रूलर देवपाला से
- 4:42:21की गई। डिमांड मान ली गई जो कि इन दो
- 4:42:24एंपायर्स के क्लोज रिलेशन को दर्शाता है।
- 4:42:27तो दोस्तों अभी तक हमने देखा ईस्टर्न
- 4:42:30इंडिया के पाला एंपायर के बारे में। हमने
- 4:42:32जाना कि किस तरह एंपायर का राइज हुआ और
- 4:42:35कैसे वह ट्राइपटाइट स्ट्रगल का पार्ट बने।
- 4:42:38पालाज़ बुद्धिज्म के ग्रेट पेट्रेंस के रूप
- 4:42:41में उभर कर आए और उनके रूल का सबसे
- 4:42:43स्ट्राइकिंग पॉइंट रहा उनका इंटरनेशनल
- 4:42:46ट्रेड और कॉमर्स। आगे बढ़ते हैं और बात
- 4:42:48करते हैं प्रतिहाराज़ के बारे में। द
- 4:42:51प्रतिहाराज़।
- 4:42:52द प्रतिहाराज़ जिन्होंने कन्नौज पर लंबे
- 4:42:55समय तक राज किया। उन्हें गुर्जर
- 4:42:58प्रतिहाराज़ भी कहा जाता था। कई स्कॉलर्स
- 4:43:00का मानना है कि यह गुर्जर से ओरिजिनेट हुए
- 4:43:03जो कि जाट्स की तरह पैस्टोरलिस्ट और
- 4:43:06फाइटर्स थे। सेंट्रल और ईस्टर्न राजस्थान
- 4:43:09में प्रतिहाराज़ ने एक सीरीज ऑफ
- 4:43:11प्रिंसिपालिटीज को इस एस्टैब्लिश किया।
- 4:43:13मालवा और गुजरात के कंट्रोल के लिए
- 4:43:15राष्ट्रकूटा से क्लैश में शामिल रहे और
- 4:43:18आगे चलकर कन्नौज के कंट्रोल के लिए क्लैश
- 4:43:21हुआ। नागभट्टा द वन 730 टू 760 के अंडर
- 4:43:25में प्रतिहाराज़ ने प्रॉमिनेंस गेन किया और
- 4:43:28सिंध के अरब रूलर्स को कड़ा रेजिस्टेंस
- 4:43:31दिया जो राजस्थान, गुजरात और पंजाब पर
- 4:43:34कब्जा जमाना चाहते थे। भीनमाल में
- 4:43:37प्रतिहाराज़ की पहली कैपिटल थी। जैसा कि
- 4:43:40हमने पालाज की कहानी में देखा कि शुरुआती
- 4:43:43प्रतिहाराज रूलर्स को राष्ट्रकूटा रूलर
- 4:43:46ध्रुवा और गोपाला द थर्ड ने डिफीट किया और
- 4:43:48अपर गंगा वैली को कंट्रोल करने से रोक
- 4:43:51दिया। 790 और 86 और 7 एडी में भी
- 4:43:55राष्ट्रकूटा रूलर्स ने प्रतिहारास को
- 4:43:57डिफीट किया और वापस डेक्कन की ओर चले गए।
- 4:44:01पॉसिबल है कि राष्ट्रकूटा रूलर्स का मेन
- 4:44:03इंटरेस्ट मालवा और गुजरात थे। प्रतिहारा
- 4:44:06एंपायर का रियल फाउंडर और ग्रेटेस्ट रूलर
- 4:44:09किंग भोज को माना जाता है। भोज ने एंपायर
- 4:44:13को रिबिल्ड किया और करीब 836 एडी में
- 4:44:17कन्नौज को रिकवर किया जो कि अगले 100 साल
- 4:44:20तक प्रतिहारा एंपायर की कैपिटल बनी रही।
- 4:44:22भोज ने ईस्ट में अपना एंपायर एक्सटेंड
- 4:44:25करना चाहा लेकिन पाला रूलर देवपाला ने
- 4:44:28उनको डिफीट कर दिया। इस डिफीट के बाद भोज
- 4:44:31ने डेक्कन, सेंट्रल इंडिया और गुजरात की
- 4:44:34तरफ रुख किया। जिसके चलते एक बार फिर
- 4:44:37राष्ट्रकूटा से स्ट्रगल का रिवाइवल हुआ।
- 4:44:40नर्मदा के बैंक्स पर हुई बैटल में भोज ने
- 4:44:43मालवा और गुजरात के कुछ पार्ट्स पर अपना
- 4:44:45आधिपत्य जमाया। लेकिन डेक्कन की तरफ और
- 4:44:48आगे नहीं बढ़ पाने के कारण एक बार फिर
- 4:44:51नॉर्थ की तरफ रुख किया। कुछ इं्रिप्शंस के
- 4:44:54अनुसार उसकी टेरिटरी सतलज के वेस्टर्न
- 4:44:57साइड तक पहुंच चुकी थी। अरब ट्रैवलर्स
- 4:44:59बताते हैं कि प्रतिहारा रूलर्स के पास
- 4:45:02इंडिया की बेस्ट कैवलरी यानी घुड़सवार
- 4:45:04सेना थी। सिल्क रोड की प्रॉक्सिमिटी में
- 4:45:07होने के कारण हॉर्स ट्रेड उस समय का एक
- 4:45:09इंपॉर्टेंट ट्रेड था। देवपाला की डेथ के
- 4:45:13बाद भोज ने ईस्ट में भी अपना एंपायर
- 4:45:15एक्सटेंड किया। भोज विष्णु के डेविटी थे
- 4:45:19और आदिवराह का टाइटल अडॉप किया जिसका
- 4:45:21मेंशन उनके रूल के कई कॉइंस में मिलता है।
- 4:45:24उनको मिहिर भोज भी कहा जाता है। यह जानना
- 4:45:27जरूरी है कि उज्जैन के परमार डायनेस्टी के
- 4:45:30राजा भोज अलग थे जिन्होंने कुछ समय बाद
- 4:45:33रूल किया। भोज की डेथ 885 एडी में हुई और
- 4:45:38उनके सन महेंद्रपाला वन ने उनको सक्सीड
- 4:45:41किया। महेंद्र पाला वन का रूल 989
- 4:45:45एडी तक चला। महेंद्र पाला ने भोज के
- 4:45:48एंपायर को मगध और नॉर्थ बंगाल तक एक्सटेंड
- 4:45:51किया। ईस्ट पंजाब और अवध और काठियावाड़
- 4:45:54में भी उनके इं्रिप्शनंस मिले हैं। तो
- 4:45:56प्रतिहाराज़ ने अर्ली नाइंथ से मिड 10थ
- 4:45:59सेंचुरी के बीच करीब 100 साल तक नॉर्थ
- 4:46:01इंडिया पर राज किया। अल मसूदी जो कि
- 4:46:04बागदाद के नेटिव थे और 9156 में गुजरात
- 4:46:08विजिट करते हैं। प्रतिहारा एंपायर की
- 4:46:10पावर, प्रेस्टीज और वास्टनेस को टेस्टिफाई
- 4:46:13करते हैं। प्रतिहाराज़ लर्निंग और लिटरेचर
- 4:46:16के ग्रेट पैटर्न थे। ग्रेट संस्कृत पोएट
- 4:46:19और ड्रामेटिस्ट राजशेखरा महिपाल के कोर्ट
- 4:46:22में थे जो भोज का ग्रैंडसन था। कन्नौज में
- 4:46:26कई फाइन बिल्डिंग्स और टेंपल्स को बिल्ड
- 4:46:28करवाया। एट्थ और नाइंथ सेंचुरीज में कई
- 4:46:31इंडियन स्कॉलर्स ने बागदाद के कैलिप्स के
- 4:46:34कोर्ट में एज एन एंबेसी ट्रैवल किया। इन
- 4:46:37स्कॉलर्स ने इंडियन साइंसेस स्पेशली
- 4:46:39मैथमेटिक्स, अलजेब्रा और मेडिसिन को अरब
- 4:46:42वर्ल्ड में इंट्रोड्यूस किया। सिंध के अरब
- 4:46:45रूलर्स से हॉस्टेलिटी होते हुए भी
- 4:46:47स्कॉलर्स और गुड्स का आना-जाना कंटिन्यू
- 4:46:50रहा। 915 से 918 एडी के बीच राष्ट्रकूटा
- 4:46:54किंग इंदिरा द थर्ड ने फिर कन्नौज पर अटैक
- 4:46:57किया और सिटी को डिस्ट्रॉय कर दिया। इससे
- 4:47:00प्रतिहारा एंपायर वीक हो गया और गुजरात को
- 4:47:02प्रोबेब्ली राष्ट्रकूटाज ने कैप्चर कर
- 4:47:05लिया। इसके पुख्ता सबूत नहीं है कि गुजरात
- 4:47:07को राष्ट्रकूटाज ने कैप्चर किया या किसी
- 4:47:10दूसरी डायनेस्टी ने। लेकिन इतना कंफर्म है
- 4:47:12कि प्रतिहारा एंपायर के पास अब गुजरात का
- 4:47:15सी कोस्ट नहीं था। गुजरात जो कि ओवरसीज
- 4:47:19ट्रेड का हब था उसको लूज करके प्रतिहारा
- 4:47:22एंपायर को बड़ा झटका लगा। एक और
- 4:47:24राष्ट्रकूटा रूलर कृष्णा द थर्ड ने 1963
- 4:47:28में नॉर्थ इंडिया को इनवेट किया और
- 4:47:30प्रतिहारा रूलर को डिफीट किया। इसके बाद
- 4:47:33ही प्रतिहारा एंपायर का रैपिड डिसोल्यूशन
- 4:47:35चालू हो गया। तो दोस्तों, यह कहानी थी
- 4:47:38प्रतिहाराज़ की जिनके राइज और डिक्लाइन को
- 4:47:41देखते हुए हमने जाना कि ट्राइपाटाइट
- 4:47:44स्ट्रगल में उनकी क्या भूमिका रही।
- 4:47:46प्रतिहाराज़ लर्निंग और लिटरेचर और
- 4:47:49आर्किटेक्चर के ग्रेट पैटर्न्स माने जाते
- 4:47:51हैं। इंडियन साइंसेस को अरब वर्ल्ड में
- 4:47:53इंट्रोड्यूस करना उनके फॉरेन रिलेशंस को
- 4:47:56शो करता है। लेकिन 11th सेंचुरी के
- 4:47:59स्टार्ट में महमूद ऑफ गजनी के रिपीटेड
- 4:48:01इन्वेजंस के चलते यह एंपायर खत्म हो गया।
- 4:48:04आइए अब बात करते हैं राष्ट्रकूटास के बारे
- 4:48:07में। द राष्ट्रकूटास
- 4:48:10जब नॉर्थ इंडिया में पालाज़ और प्रतिहाराज़
- 4:48:13रूल कर रहे थे। उस समय डेक्कन पर
- 4:48:15राष्ट्रकूटास का वर्चस्व था। राष्ट्रकूटास
- 4:48:18एक रिमारकेबल डायनेस्टी थी जिसके हिस्से
- 4:48:20में वॉरियर्स और एबल एडमिनिस्ट्रेटर्स की
- 4:48:23लंबी कतार है। दंती दुर्गा ने इस किंगडम
- 4:48:26को मिड एथ सेंचुरी के आसपास सेटअप किया।
- 4:48:29जिन्होंने अपनी कैपिटल मान्याखेत या
- 4:48:32मालखेड़ में बनाई जो कि मॉडर्न कर्नाटका
- 4:48:35के गुलबर्गा डिस्ट्रिक्ट के नजदीक है।
- 4:48:38सेटअप होने के कुछ समय में ही
- 4:48:40राष्ट्रकूटर्स ने नॉर्दन महाराष्ट्र का
- 4:48:42पूरा एरिया डोमिनेट कर लिया और जैसा कि
- 4:48:45हमने देखा इन्होंने प्रतिहाराज़ के साथ
- 4:48:47गुजरात और मालवा की ओवर लॉर्डशिप के लिए
- 4:48:49लड़ाई लड़ी। भले ही उनकी रेड्स के कारण
- 4:48:52एंपायर का एक्सपेंशन गंगा वैली में नहीं
- 4:48:55हुआ लेकिन रिच प्लंडर से उनका फेम लगातार
- 4:48:58बढ़ता रहा। राष्ट्रकूटास का क्लैश आंध्र
- 4:49:01प्रदेश के ईस्टर्न चालुक्यास ऑफ और वेंग
- 4:49:04से भी लगातार चलता रहा। यही नहीं साउथ के
- 4:49:07पल्लवाज और पांड्या से भी उनका क्लैश चलता
- 4:49:09ही रहा। गोविंदा द थर्ड 793 से 814 और
- 4:49:15अमोग वर्ष 814 से 878 राष्ट्रकूटास के
- 4:49:19सबसे ग्रेटेस्ट रूलर माने जाते हैं। 800
- 4:49:22एडी में प्रतिहारा रूलर नागभट्टा ऑफ
- 4:49:25कन्नौज के खिलाफ सक्सेसफुल कैंपेन के बाद
- 4:49:28और मालवा को एनेक्स करने के बाद गोविंदा द
- 4:49:31थर्ड ने साउथ की तरफ रुख किया। एक
- 4:49:33इं्रिप्शन में बताया गया है कि गोविंदा ने
- 4:49:36केरला, पांड्या और चोला किंग्स को टेरिफाई
- 4:49:39किया और पल्लवास को कमजोर होने पर मजबूर
- 4:49:42कर दिया। कर्नाटका की गंगाज को तो मौत के
- 4:49:45घाट ही उतार दिया। अमोग वर्षा ने 64 साल
- 4:49:49तक राज किया लेकिन उनको वॉर के बजाय
- 4:49:51पर्स्यूट ऑफ रिलजन और लिटरेचर में
- 4:49:53इंटरेस्ट था। वह खुद भी एक ऑथर थे और
- 4:49:56उन्हें कनाडा में पोएटिक्स पर पहली बुक
- 4:49:59लिखने का श्रेय दिया जाता है। कैपिटल सिटी
- 4:50:02मान्यखेद को भी उन्होंने ही बनवाया जो
- 4:50:04उनके ग्रेट बिल्डर होने का प्रमाण है।
- 4:50:07उनके रूल में एंपायर के दूरदराज हिस्सों
- 4:50:10में कई रिबेलियंस हुए और उनकी डेथ के बाद
- 4:50:12फिर से स्टार्ट होने लगे। अमोग वर्षा के
- 4:50:15ग्रैंड सन इंदिरा द थर्ड 915 से 927 ने इन
- 4:50:19रिबेलियंस पर रोक लगाई और एंपायर को
- 4:50:22रीस्टैब्लिश किया। पाला रूलर महिपाल को
- 4:50:25डिफीट करके और 915 में कन्नौज पर कब्जा
- 4:50:28करके इंदिरा द थर्ड उस समय का मोस्ट
- 4:50:31पावरफुल रूलर बना। अल मसूदी की मानें तो
- 4:50:34राष्ट्रकूटा किंग बलहारा और वल्लभ राजा उस
- 4:50:37समय के ग्रेटेस्ट किंग थे और मोस्ट किंग्स
- 4:50:40उनकी सुजरेनिटी को मानते थे। कृष्णा द
- 4:50:43थर्ड 934 से 963 ब्रिलियंट रूलर्स की लाइन
- 4:50:47में लास्ट रूलर थे। वो मेनली मालवा के
- 4:50:50परमार्स और ईस्टर्न चालुक्यास ऑफ वेंग के
- 4:50:53साथ स्ट्रगल में रहे। कृष्णा द थर्ड ने
- 4:50:56चोला किंग परांतका द फर्स्ट को 949 में
- 4:51:00डिफीट किया और चोला एंपायर के नॉर्दन
- 4:51:02पार्ट को कैप्चर किया। उनकी डेथ के बाद
- 4:51:05उनके इन्हीं अपोनेंट्स ने यूनाइट होकर
- 4:51:07राष्ट्रकूटा कैपिटल मालखेड़ पर 979 में
- 4:51:11अटैक किया और डिस्ट्रॉय कर दिया। यहीं पर
- 4:51:14राष्ट्रकूटा एंपायर का एंड हो गया।
- 4:51:16राष्ट्रकूठा एंपायर 200 साल तक यानी 10th
- 4:51:20सेंचुरी के एंड तक चला। वो रिलीजियसली
- 4:51:22टोलरेंट थे और शेवज्म और वैष्णविज्म के
- 4:51:25साथ जैनिज्म को भी पेट्रिनाइज किया। एलोरा
- 4:51:29का फेमस कैलाशनाथ रॉक का टेंपल
- 4:51:31राष्ट्रकूटा किंग कृष्णा द फर्स्ट ने
- 4:51:34बिल्ड करवाया। अमोग वर्षा प्रोबेब्ली
- 4:51:36जैनिज्म फॉलोअर थे। लेकिन उन्होंने दूसरे
- 4:51:39फेथ्स को भी पेट्रिनाइज किया।
- 4:51:42राष्ट्रकूटास ने मुस्लिम ट्रेडर्स को सेटल
- 4:51:44होने को अलव किया और इस्लाम प्रीच करने को
- 4:51:47भी परमिट किया। इस टोलरेंट पॉलिसी से
- 4:51:50फॉरेन ट्रेड प्रमोट हुआ। राष्ट्रकूटास
- 4:51:53आर्ट और लिटरेचर के भी ग्रेट पैट्रन थे।
- 4:51:56उनके कोर्ट में ना सिर्फ संस्कृत स्कॉलर्स
- 4:51:58बल्कि प्राकृत और अपभ्रंश में लिखने वाले
- 4:52:01पोएट्स भी थे। स्वयंभू जो कि अपभ्रंश के
- 4:52:05ग्रेट पोएट थे। प्रोबेबबली राष्ट्रकूटा
- 4:52:07कोर्ट में ही थे। तो दोस्तों, यह कहानी थी
- 4:52:10राष्ट्रकूटास की जो ट्राईपडाइट स्ट्रगल का
- 4:52:13पार्ट रहे। प्रतिहारास की तरह यह भी आर्ट,
- 4:52:16लिटरेचर और रिलीजन के ग्रेट पेट्र्स थे।
- 4:52:19उनका रिलीजियस टॉलरेंस उनके रूल का
- 4:52:22हाईलाइट बन जाता है। आगे बढ़ते हैं और
- 4:52:24देखते हैं इन तीनों किंगडम्स के पॉलिटिकल
- 4:52:26सेटअप, एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल लाइफ के
- 4:52:29बारे में। लाइफ ड्यूरिंग दीज़ थ्री
- 4:52:32किंगडम्स। एडमिनिस्ट्रेशन गुप्ता एंपायर,
- 4:52:35हर्षाज किंगडम और डेकन के चालुक्यास के
- 4:52:37सिमिलर ही था। किंग एडमिनिस्ट्रेशन का हेड
- 4:52:40था और आर्मी का कमांडर इन चीफ था। किंग की
- 4:52:44पोजीशन हेरिडिटरी थी और किंग को असिस्ट
- 4:52:46करने के लिए मिनिस्टर्स थे जैसे रेवेन्यू,
- 4:52:49ट्रेजर, फॉरेन अफेयर्स, सेनापति, चीफ
- 4:52:52जस्टिस और पुरोहिता।
- 4:52:54तीनों किंगडम्स के पास लार्ज और वेल
- 4:52:57ऑर्गेनाइज्ड कैवलरी, इनफेंट्री और
- 4:52:59एिफेंट्स थे। किंग एडमिनिस्टर्ड टेरिटरीज
- 4:53:02को कुछ पार्ट्स में डिवाइड किया गया था।
- 4:53:04जैसे राष्ट्र जिसको राष्ट्रपति या गवर्नर
- 4:53:09सुपरवाइज करता था। भुक्ति प्रोविंसेस का
- 4:53:12ऊपरिका था जो रेवेन्यू भी कलेक्ट करता था
- 4:53:15और लॉ एंड ऑर्डर भी मेंटेन करता था।
- 4:53:18मंडलास या विषया जिसको विषयापति हेड करता
- 4:53:22था। यह बेसिकली डिस्ट्रिक्ट्स की तरह थे।
- 4:53:24पत्तला यानी क्लस्टर ऑफ विलेजेस जिसका हेड
- 4:53:28होता था भोजपति। विलेज का हेड विलेज
- 4:53:32हेडमैन होता था जिसकी पोजीशन हेरिडिटरी
- 4:53:35थी। ग्राम महाजन यानी विलेज एल्डर्स
- 4:53:37हेडमैन को असिस्ट करते थे। ट्रेड एंड
- 4:53:40कॉमर्स में भी कुछ बातें इंपॉर्टेंट हैं।
- 4:53:43ट्रेड एंड कॉमर्स 740 से 1000 एडी के बीच
- 4:53:47नॉर्थ इंडिया में ट्रेड और कॉमर्स में
- 4:53:49ह्यूज डिक्लाइन आया। इसके दो रीज़ंस थे।
- 4:53:52नॉर्थ इंडिया का रोमन एंपायर के साथ अच्छा
- 4:53:54खासा ट्रेड था जिसके कोलैप्स होने के बाद
- 4:53:57ट्रेड पर इंपैक्ट हुआ। इस्लाम के राइज के
- 4:54:00कारण इरेनियन सैसनेट एंपायर का डिक्लाइन
- 4:54:03हुआ और इंडियन ओवरलैंड के फॉरेन ट्रेड को
- 4:54:06बड़ा नुकसान हुआ। इंडिया की गोल्ड और
- 4:54:08सिल्वर वेल्थ का मेन रीजन था फॉरेन ट्रेड।
- 4:54:11फॉरेन ट्रेड के डिक्लाइन होने से गोल्ड
- 4:54:14कॉइंस में कमी आ गई। इंटरेस्टिंग बात रही
- 4:54:17कि इसी पीरियड में साउथ इंडिया और साउथ
- 4:54:19ईस्ट एशियन कंट्रीज के बीच का ट्रेड
- 4:54:21इनक्रीस हुआ।
- 4:54:23उत्तर पथ और दक्षिण पथ में भी ट्रेड काफी
- 4:54:26रोबस्ट था। कंक्लूजन। तो दोस्तों, इस
- 4:54:30कहानी में हमने देखा नॉर्थ इंडिया की
- 4:54:32अर्ली मिडिएवल हिस्ट्री यानी 800 से 1000
- 4:54:36एडी के बारे में। इस पीरियड में तीन
- 4:54:38इंपॉर्टेंट किंगडम्स का राइज हुआ और तीनों
- 4:54:41किंगडम्स आपस में वर्चस्व की लड़ाई में
- 4:54:43लगे रहे। लगातार स्ट्रगल के बाद भी लोगों
- 4:54:46की लाइफ स्टेबल रही और टेंपल्स, आर्ट,
- 4:54:49लिटरेचर का विस्तार हुआ। इस पीरियड में एक
- 4:54:52इफेक्टिव एडमिनिस्ट्रेशन हमें देखने को
- 4:54:54मिला। एट्थ सेंचुरी के एंड में शुरू हुई
- 4:54:56कन्नौज की डोमिनेशन की यह लड़ाई अगले 200
- 4:55:00साल यानी 1000 एडी तक चली। इस लंबी लड़ाई
- 4:55:04में तीनों एंपायर्स ग्रेजुअली वीक होते
- 4:55:06चले गए। इसका रिजल्ट यह हुआ कि नॉर्थ
- 4:55:09इंडिया का पॉलिटिकल डिसइीग्रेशन हो गया।
- 4:55:11इसी दौरान वेस्ट और सेंट्रल एशिया में
- 4:55:14हमको रैपिड पॉलिटिकल चेंजेस देखने को
- 4:55:16मिले। जिसके कारण यहां के इस्लामिक
- 4:55:19इनवेडर्स ने नॉर्थ इंडिया की सिचुएशन को
- 4:55:22देखकर इनवेड किया। इस तरह नॉर्थ इंडिया
- 4:55:25में डोमिनेशन के लिए एक नए फेज की शुरुआत
- 4:55:28हुई।
- 4:55:30द चोला किंगडम।
- 4:55:33हम जानते हैं कि भारत हमेशा से एक डायवर्स
- 4:55:36कल्चरर्स का देश रहा है। जहां कई
- 4:55:39सिविलाइजेशंस और एंपायर्स राइज हुए और
- 4:55:42डिस्ट्रॉय हो गए। मौर्य, गुप्ता और मुगल्स
- 4:55:46तो हमारे कॉन्शियसनेस में आज भी जिंदा
- 4:55:48हैं। लेकिन इनके अलावा कुछ और ग्लोरियस
- 4:55:51एंपायर्स की कहानियां कहीं दब के रह गई।
- 4:55:54बात नाइंथ सेंचुरी की है जब नॉर्थ इंडिया
- 4:55:57की पॉलिटी ट्राइपटाइट स्ट्रगल की वजह से
- 4:55:59डिस्टेबलाइज हो चुकी थी और पाला
- 4:56:02राष्ट्रकूटा और प्रतिहारा कन्नौज के लिए
- 4:56:06लगातार स्ट्रगल कर रहे थे। लेकिन किसी को
- 4:56:08डिसाइसिव विक्ट्री नहीं मिल रही थी। लेकिन
- 4:56:11क्या आपको पता है कि ऐसा ही एक स्ट्रगल
- 4:56:14साउथ में पल्लव, पांड्या और चोला रूलर्स
- 4:56:18के बीच भी हो रहा था जिसमें चोलास इमर्ज
- 4:56:21विक्टोरियस। इस वीडियो में हम देखेंगे उस
- 4:56:24चोला एंपायर के 450 सालों के इतिहास के
- 4:56:28बारे में जिसने साउथ इंडिया पॉलिटी को
- 4:56:30स्टेबलाइज करते हुए अपना डोमिनेंस न सिर्फ
- 4:56:33इंडिया में बढ़ाया बल्कि उसके बिय्ड साउथ
- 4:56:36ईस्ट एशिया में भी। हम यह भी समझेंगे कि
- 4:56:40कैसे अपनी नेवल सुप्रीमसी को यूज कर
- 4:56:43उन्होंने खुद को कावेरी डेल्टा से उठाकर
- 4:56:46इंडियन ओशियन रीजन का रीजनल हैमिन बना
- 4:56:49दिया। और कैसे वो चूल्हा से इंपीरियल
- 4:56:53चूल्हा बन गए।
- 4:56:57ओरिजिन
- 4:57:03वैसे चोलाज़ का इतिहास काफी पुराना है। इस
- 4:57:07नाम के एक किंगडम का इस्टैब्लिशमेंट सबसे
- 4:57:09पहले कावेरी डेल्टा के अराउंड कुछ 300
- 4:57:12बीसी में हुआ। जिसका मेंशन अशोका के
- 4:57:15इडिक्स में भी है। हिस्टोरियंस इन्हें
- 4:57:18अर्ली चोला कहते हैं। लेकिन वह इनके
- 4:57:21किंगडम को एंपायर का दर्जा नहीं देते और
- 4:57:24कहते हैं कि यह कावेरी डेल्टा के अराउंड
- 4:57:26ही लिमिटेड था। हमारे वीडियो का टॉपिक यह
- 4:57:30अर्ली चोला नहीं बल्कि चोला एंपायर या
- 4:57:33इंपीरियल चोलास हैं। जिनकी हिस्ट्री लगभग
- 4:57:37850 एडी में स्टार्ट होती है। इनका अर्ली
- 4:57:40चोलाज़ से कोई लिंक था या नहीं यह बात काफी
- 4:57:44डिस्प्यूटेड है। खैर इंपीरियल चोला
- 4:57:47डायनेस्टी के फाउंडर विजयालया थे। जो
- 4:57:50पल्लवाज़ के फ्यूडिटरी थे। यानी वो पल्लवाज़
- 4:57:53को अपना एलजंस ओ करते थे। सिक्स्थ और
- 4:57:56सेवंथ सेंचुरीज में कावेरी डेल्टा दो
- 4:57:59डायनेस्टीज पल्लवाज ऑफ कांची और पांड्याज
- 4:58:03और मदुराई के बीच डिवाइडेड था। पांड्याज
- 4:58:05मदुराई और केरला के रूलर थे। वहीं पल्लवा
- 4:58:09तेलुगु स्पीकिंग एरियाज के अनडिस्प्यूटेड
- 4:58:11किंग्स। यह वही पल्लवा थे जिनके एक रूलर
- 4:58:15नरसिम्हा वर्मन ने कन्नौज के हर्षवर्धन को
- 4:58:18हराने वाले चालुक्यन किंग पोलोकेशन टू को
- 4:58:21बुरी तरह से डिफीट किया था।
- 4:58:24लेकिन यह किंगडम्स नाइंथ सेंचुरी तक काफी
- 4:58:27वीक हो चुके थे और इनके बीच साउथ इंडिया
- 4:58:30की सुप्रेमसी को लेकर कॉन्फ्लिक्ट चल रहा
- 4:58:32था। विजयालया चोला ने इनकी वीकनेस और
- 4:58:35राइवलरी का फायदा उठाकर खुद को भी इस
- 4:58:37स्ट्रगल में झोंक दिया और पांड्या से
- 4:58:40तंजावरुर को छीनकर अपनी कैपिटल बना लिया।
- 4:58:44बाद में विजयालया के बेटे आदित्य वन ने
- 4:58:47पल्लवा डायनेस्टी को डिस्ट्रॉय और चोला
- 4:58:49एंपायर को फर्दर स्ट्रेंथन किया।
- 4:58:52कंसोलिडेशन ऑफ एंपायर इन इंडिया।
- 4:58:58चोलास के इंडियन एक्सपिडिशंस की बात करें
- 4:59:01तो 925 में परांतक वन ने राष्ट्रकूटा रूलर
- 4:59:06कृष्णा टू को डिफीट किया और अपना
- 4:59:08इन्फ्लुएंस नॉर्दर्न टेरिटरीज में
- 4:59:10एक्सपेंड किया। लेकिन चोला एंपायर के सबसे
- 4:59:13पावरफुल किंग्स राजराजा चोला वन और
- 4:59:16राजेंद्र चोला वन थे। जिन्हें एंपायर के
- 4:59:19कंसोलिडेशन और उसे कावेरी डेल्टा के बिय्ड
- 4:59:22एक्सपेंड करने का क्रेडिट दिया जाता है।
- 4:59:26इनकी बदौलत ही चोलाज़ का कंट्रोल नॉर्थ में
- 4:59:29कृष्णा गोदावरी बेसिन से लेकर साउथ में
- 4:59:31श्रीलंका और मालदीव्स और वेस्ट में
- 4:59:34लक्षद्वीप से लेकर ईस्ट में मलया पेनसुला
- 4:59:38तक फैल गया था। राजेंद्र वन ने राजा को
- 4:59:40सक्सीड किया। जिनका इंडिया में सबसे बड़ा
- 4:59:43अचीवमेंट था गंगा बेसिन का कैंपेन और ओसा
- 4:59:47और पाला रूलर्स पर मैसिव विक्ट्री। इसके
- 4:59:50बाद उन्हें गनीग गई चोला का टाइटल मिला
- 4:59:54जिसका मीनिंग है कंकरर ऑफ द कैंची। इसका
- 4:59:58सेलिब्रेशन चोला एंपायर में काफी धूमधाम
- 5:00:01से हुआ और राजेंद्र ने इस विक्ट्री को
- 5:00:03मार्क करने के लिए गनीगई कोंडा चोलापुरम
- 5:00:07नाम की नई कैपिटल का कंस्ट्रक्शन करवाया
- 5:00:09जो प्रेजेंट डे तमिलनाडु में लोकेटेड है।
- 5:00:13125 एडी से लेकर अगले 250 साल तक यह चोलाज़
- 5:00:18की कैपिटल बनी रही।
- 5:00:20फॉरेन कॉन्क्वेस्ट्स
- 5:00:25चोला किंगडम के सबसे बड़े अचीवमेंट्स उनके
- 5:00:28फॉरेन कॉन्क्व्विस्ट रहे जिसकी वजह से
- 5:00:31उन्हें इंपीरियल चोला का दर्जा दिया गया।
- 5:00:34चोलास को इंपीरियल इसलिए बोला गया क्योंकि
- 5:00:37मॉडर्न इंपीरियल कंट्रीज जैसे यूनाइटेड
- 5:00:39किंगडम की तरह यह भी कुछ फॉरेन टेरिटरीज
- 5:00:42के इकोनॉमिक रिसोर्सेज को अपनी मिलिट्री
- 5:00:45पावर के थ्रू कंट्रोल और वहां के
- 5:00:47रिसोर्सेज को खुद की प्रोस्पेरिटी में यूज
- 5:00:49करते थे। हिस्टोरियंस चोलास के इस
- 5:00:52पॉलिटिकल इकोनॉमिक सिस्टम को सडो
- 5:00:55कॉलोनियलिज्म भी बोलते हैं। खैर चोलाज़ का
- 5:00:58सबसे पहला इंपॉर्टेंट फॉरेन कॉन्क्वेस्ट
- 5:01:01परांतक वन का श्रीलंका कैंपेन था जिसको
- 5:01:05फिनिश राजा ने किया। राजा के श्रीलंकन
- 5:01:09एक्सपिडिशन को लॉर्ड राम के कैंपेन से
- 5:01:11करते हुए तिरुवलंकडू प्लेट्स कहते हैं कि
- 5:01:15ड्रामा वाज़ एक्सेल्ड बाय ह किंग हुस
- 5:01:17पावरफुल आर्मी क्रस्ट द थ ओशन बाय शिप्स
- 5:01:20एंड बर्न अप द किंग ऑफ लंका। इसके साथ
- 5:01:24चोलाज़ ने मल्टीव्स में भी अपना कंट्रोल
- 5:01:26एक्सपेंड किया। वैसे राजा के टाइम ही चोला
- 5:01:30एंपायर काफी ज्यादा एक्सपेंड हो चुका था।
- 5:01:32लेकिन फिर भी राजेंद्र ने साउथ ईस्ट एशिया
- 5:01:35के श्री विजय एंपायर पर एक मैसिव अटैक
- 5:01:38किया। जहां पर विक्ट्री के बाद भी
- 5:01:40उन्होंने सिर्फ इनडायरेक्ट कंट्रोल मेंटेन
- 5:01:43किया। तो सवाल यह है कि इतना रिस्की और
- 5:01:46एक्सपेंसिव कैंपेन राजेंद्र ने लॉन्च ही
- 5:01:48क्यों किया जब डायरेक्ट रूल का कोई प्लान
- 5:01:51नहीं था? वेल, इसका जवाब हमें उस वक्त की
- 5:01:55इकॉनमी, लोकल पॉलिटिक्स और इंटरनेशनल
- 5:01:58पॉलिटिक्स के लिंकेजेस में मिलता है। वैसे
- 5:02:01तो चोलाज़ के श्री विजय पर अटैक का इमीडिएट
- 5:02:04ट्रिगर पॉइंट कैंबोडियन अंकोर डायनेस्टी
- 5:02:07और श्रीविजय एंपायर के बीच का कॉन्फ्लिक्ट
- 5:02:10था। अंकोर चोलास के एलय थे। और जब एंकोर
- 5:02:14और श्री विजय के बीच वॉर हुआ तो राजेंद्र
- 5:02:18ने भी एंकोर के सपोर्ट में श्री विजय पर
- 5:02:20अटैक कर दिया। लेकिन यह फिर भी इतने बड़े
- 5:02:23कैंपेन को जस्टिफाई नहीं करता। दूसरी
- 5:02:27थ्योरी के हिसाब से इसका कॉज तमिल गिल्ड्स
- 5:02:30और मैरिटाइम सिल्क रूट का पॉलिटिक्स था।
- 5:02:33मैरिटाइम सिल्क रूट से अब्बासिद कैलिफेट
- 5:02:37और चाइना के टंग डायनेस्टी के बीच हो रहे
- 5:02:40प्रोस्पेरस ट्रेड में साउथ इंडियन पोर्ट्स
- 5:02:43और मलया पोर्ट्स का काफी इंपॉर्टेंट रोल
- 5:02:45था जो शिप्स के लिए ट्रांजिशन पॉइंट्स थे
- 5:02:48और जहां वो रिफ्यूलिंग के लिए रुकते थे।
- 5:02:51इस ट्रेड का मोनोपोली तमिल गिल्ड्स के पास
- 5:02:54था जिनका कंट्रोल मलयन पोर्ट्स में भी था।
- 5:02:57लेकिन इस दौर में शिप बिल्डिंग टेक्निक्स
- 5:02:59काफी इंप्रूव हुए और अब शिप्स लॉन्ग
- 5:03:02डिस्टेंस ट्रैवल कर सकते थे। जिसकी वजह से
- 5:03:05दो ट्रांजिशन पॉइंट्स फ्यूटाइल हो गए और
- 5:03:08मोस्ट शिप्स केवल मलया पोर्ट्स में रुकने
- 5:03:11लगी। इसकी वजह से इंडियन तमिल गिल्ड्स को
- 5:03:14काफी नुकसान हुआ। बाद में श्री विजय
- 5:03:17एंपायर ने मलया बेस्ड तमिल गिल्ड्स के साथ
- 5:03:20भी डिस्क्रिमिनेशन चालू कर दिया और
- 5:03:22गिल्ड्स की कंडीशन और ज्यादा खराब होने
- 5:03:25लगी। कहते हैं कि इन गिल्ड्स की लॉबिंग
- 5:03:28पावर की वजह से ही शायद राजेंद्र ने श्री
- 5:03:31विजय पर अटैक किया। राजेंद्र को यह भी डर
- 5:03:34था कि कहीं यह गिल्ड्स एनिमी किंगडम्स को
- 5:03:37सपोर्ट ना करने लगे। रीजन कुछ भी हो पर एक
- 5:03:41बात फैक्ट है कि राजेंद्र ने अपनी अनमैच्ड
- 5:03:44नेवल सुप्रेमसी की वजह से साउथ ईस्ट एशिया
- 5:03:47में बड़ी जीत हासिल की। राजेंद्र की नेवी
- 5:03:50इतनी स्ट्रांग थी कि उसकी लेगेसी को
- 5:03:53कमेरेट करने के लिए 1972 में एक नेवल
- 5:03:57ट्रेनिंग एकेडमी का नाम टी एस राजेंद्र
- 5:04:00रखा गया। खैर इस एक्सपिडिशन के बाद साउथ
- 5:04:04ईस्ट एशिया से श्री विजय एंपायर खत्म हो
- 5:04:07गया और वहां छोटे-छोटे किंगडम्स इमर्ज हुए
- 5:04:10जिन्होंने चोलास की सुजरेनिटी और उनकी
- 5:04:13मिलिट्री बेससेस को अपने किंगडम्स में
- 5:04:15एक्सेप्ट किया। इसका फाइनल आउटकम यह हुआ
- 5:04:18कि अगले एक सेंचुरी तक साउथ ईस्ट एशिया
- 5:04:21में तमिल गिल्ड्स का डोमिनेंस बना रहा और
- 5:04:24मैरिटाइम सिल्क रूट पर चोलाज़ की है जेमिनी
- 5:04:28भी।
- 5:04:29द सिविलाइजेशनल गोल्डन एज
- 5:04:35चोला रोल को सिविलाइजेशनल गोल्डन एज भी
- 5:04:38कहा जाता है क्योंकि इस दौर में मैसिव
- 5:04:40इंफ्रास्ट्रक्चर्स, टेंपल्स और फाइन
- 5:04:43ब्रोंज़ स्कल्प्चर्स का ग्रोथ दिखता है।
- 5:04:46चोला रूल में ट्रेमेंडस एग्रेरियन
- 5:04:48एक्सपेंशन की वजह से कावेरी बेसिन में
- 5:04:51मैसिव कैनाल्स बने। जिनमें सबसे फेमस ओया
- 5:04:54कुंडन और राजेंद्रन वयाकल आज भी एकिस्ट
- 5:04:58करते हैं। कैनाल्स के अलावा मैसिव वाटर
- 5:05:02टैंक्स भी बने। जिनमें सबसे इंपॉर्टेंट
- 5:05:04गंगाई चोलापुरम का 16 माइल्स लॉन्ग 16
- 5:05:08गंगम है। जिसको लिक्विड पिलर ऑफ विक्ट्री
- 5:05:12भी कहा जाता है। टेंपल्स की बात करें तो
- 5:05:15राजा वन के पहले के किंग्स ने भी कई
- 5:05:17टेंपल्स बनाए जो साइज में काफी छोटे थे।
- 5:05:21लेकिन चोलाज़ के टेंपल आर्किटेक्चर का
- 5:05:23ब्रिलियंस और मैसिवनेस राजा के रूल में ही
- 5:05:26बढ़ता है। जो चोलास की प्रोस्पेरिटी को
- 5:05:29सिंबलाइज करते हुए ओल्ड टेंपल से लगभग
- 5:05:32पांच गुना ज्यादा बड़े हो गए।
- 5:05:35यूनेस्को ने द ग्रेट लिविंग चोला टेंपल्स
- 5:05:38को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का स्टेटस भी दिया
- 5:05:40है। जिसमें तीन टेंपल्स इंक्लूडेड हैं।
- 5:05:44बृहदेश्वर टेंपल ऑफ तंजापुर इनमें
- 5:05:47ओल्डेस्ट और लार्जेस्ट है। जिसे राजा वन
- 5:05:50ने एडी में बनवाया था। 25 साल बाद उनके
- 5:05:55बेटे राजेंद्र ने सेम नाम का बृहदेश्वर
- 5:05:58टेंपल गंगाईचोलापुरम
- 5:06:01में बनवाया। तीसरा और सबसे छोटा टेंपल
- 5:06:04एरावतेश्वरा ऑफ दसुराम है जिसे राजराजा टू
- 5:06:09ने बनवाया था। चोला टेंपल्स द्रविड़ा
- 5:06:12स्टाइल के बेस्ट एग्जांपल्स हैं। इनमें
- 5:06:14सबसे ब्रिलियंट स्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग
- 5:06:17वंडर तंजापुर का बृहदेश्वर टेंपल है।
- 5:06:21जिसका ग्रेनाइट और बिना मोटार या सीमेंट
- 5:06:24का बना हुआ विमाना 59 मीटर टॉल है और 1000
- 5:06:29साल बाद आज भी एकिस्ट करता है। विमाना
- 5:06:33पिरामिडिकल शेप के स्ट्रक्चर्स हैं जो
- 5:06:35द्रविडियन टेंपल्स के सटम के ऊपर बनाए
- 5:06:38जाते हैं। बृहदेश्वर टेंपल के इस विमाना
- 5:06:41के टॉप मोस्ट स्टोन का वेट 80 टन्स है और
- 5:06:45इंजीनियर्स आज भी इस पर डिबेट करते हैं कि
- 5:06:49बिना मॉडर्न मशीनरी के यह स्टोन 59 मीटर्स
- 5:06:53ऊपर पहुंचा कैसे? खैर चोला रूलर्स शेवाइट
- 5:06:57थे और इसलिए तजाबूर टेंपल के मेन डेटी
- 5:07:00शिवा हैं और यहां पूरे भारत के वन ऑफ द
- 5:07:03लार्जेस्ट शिवलिंग लोकेटेड हैं। यहां पर
- 5:07:06हमें वर्ल्ड फेमस नटराजा का ब्रोंज़
- 5:07:09स्कल्प्चर भी मिलता है जो शिवा के कॉस्मिक
- 5:07:12डांस ऑफ क्रिएशन एंड डिस्ट्रक्शन को
- 5:07:14सिंबलाइज करता है। स्कल्प्चर्स में भोग
- 5:07:18शक्ति और सुब्रमण्य के ब्रोंज़ेस भी मास्टर
- 5:07:20पीसेस माने जाते हैं। वैसे यह चोला
- 5:07:23टेंपल्स मैसिव ग्रांट मिलने की वजह से
- 5:07:26सेंटर्स ऑफ इकोनॉमिक एक्टिविटीज भी थे जो
- 5:07:29साथ में विलेज वेलफेयर के लिए भी काम करते
- 5:07:32थे। लिटरेचर के फील्ड में भी काफी
- 5:07:34डेवलपमेंट्स हुए और पॉपुलर वैष्णव टेक्स्ट
- 5:07:37नलरा दिव्य प्रबंध को भी चोला पीरियड में
- 5:07:4112 अलवर सेंट्स ने कंपाइल किया। चोला
- 5:07:44एडमिनिस्ट्रेशन
- 5:07:48चोला एडमिनिस्ट्रेशन भी उनकी लेगसी का
- 5:07:51सिंबल है। यहां हमें एक फुल्ली डेवलप्ड
- 5:07:54सेक्रेटेरियट की इंफॉर्मेशन भी मिलती है।
- 5:07:57ऐसा कहते हैं कि पाम लीव्स यूज करके चोलास
- 5:08:01ने एक ब्रिलियंट रिकॉर्ड सिस्टम भी बनाया
- 5:08:04जिसमें लैंड रिकॉर्ड से लेकर इंटेलिजेंस
- 5:08:06रिपोर्ट्स तक के रिकॉर्ड्स थे। इसके अलावा
- 5:08:09चोला एंपायर नाइन प्रोविंसेस में डिवाइडेड
- 5:08:12था जिनको मंडलम कहते थे और इनके गवर्नर्स
- 5:08:15स्टैंडिंग आर्मी भी मेंटेन करते थे।
- 5:08:18प्रोविंसेस को नाडू नाम के डिस्ट्रिक्ट्स
- 5:08:20में डिवाइड किया जाता था जिन्हें ऑटोनॉमस
- 5:08:23असेंबली नाटर गवर्न करती थी। वैसे तो चोला
- 5:08:27एडमिनिस्ट्रेशन लार्जली एक सेंट्रलाइज्ड
- 5:08:29पॉलिटिकल सिस्टम था। लेकिन उसमें पावरफुल
- 5:08:32और ऑटोनॉमस लोकल एडमिनिस्ट्रेशन का
- 5:08:34एकिस्टेंस भारत के इतिहास में काफी अनोखा
- 5:08:37और यूनिक इनोवेशन था। जिसका क्रेडिट राजा
- 5:08:41वन को दिया जाता है। यहां के विलेजेस को
- 5:08:44उर और सभा नाम की असेंबलीज गवर्न करती थी
- 5:08:47जो ह्यूज ऑटोनोमी एंजॉय करती थी। उर
- 5:08:49असेंबलीज के बारे में खास बात यह है कि
- 5:08:52वहां सभी कास्ट के लोग रहते थे। जबकि सभा
- 5:08:56असेंबलीज अग्रहारा विलेजेस को गवर्न करती
- 5:08:58थी जो चोला किंग्स द्वारा ब्राह्मण्स को
- 5:09:01ग्रांट किए गए थे। इस सिस्टम की लेगसी और
- 5:09:04इन्फ्लुएंस हमें गांधी जी के विलेज
- 5:09:06रिपब्लिक्स की आईडिया और मॉडर्न इंडिया के
- 5:09:09पंचायती राज सिस्टम में भी दिखाई देती है।
- 5:09:11चोला मिलिट्री की बात करें तो उसमें सबसे
- 5:09:14इंटरेस्टिंग उनकी अनमैच्ड नेवल पावर थी।
- 5:09:18एक और इंटरेस्टिंग बात यह है कि विनेशियन
- 5:09:21ट्रेवलर मार्को पोलो के हिसाब से किंग के
- 5:09:24सारे बॉडीगार्ड्स खुद को डेड किंग के
- 5:09:26फ्यूनरल पायर में सैक्रिफाइस कर देते थे।
- 5:09:30डिक्लाइन
- 5:09:35लेटर चोला डायनेस्टी को कैपेबल रूलर्स
- 5:09:37जैसे कुलोथुंगा वन, विक्रम चोला और
- 5:09:40कुलोथुंगा थ्री ने रूल किया। जिन्होंने
- 5:09:43टेरिटरी की इंटेग्रिटी को मेंटेन रखा।
- 5:09:46लेकिन कुलोथुंगा 3 के समय ही चोलास का
- 5:09:48डिक्लाइन स्टार्ट हुआ। इसका सबसे पहला कॉज
- 5:09:51था श्रीलंका में सिंघला किंगडम का राइज
- 5:09:55जिसने उन्हें श्रीलंका से बैनिश कर दिया।
- 5:09:58दूसरा कॉज था 126 के बाद राजा थ्री और
- 5:10:03राजेंद्र थ्री जैसे वीक रूलर्स। एक
- 5:10:06रिकॉर्ड के हिसाब से राजा थ्री को उनके ही
- 5:10:09एक फ्यूडिडेटरी ने होस्टेज बना लिया था।
- 5:10:12चोलास के डिक्लाइन का थर्ड कॉज पांड्याज
- 5:10:16का राइज और होया सलाज़ का डिवाइसिव
- 5:10:18पॉलिटिक्स रहा। होया सलाज़ ने डिवाइसिव
- 5:10:21पॉलिटिक्स यूज़ करके चोला और पांड्या दोनों
- 5:10:24को राइज होने से रोकने की कोशिश की। चोलाज़
- 5:10:28को रोकने में तो होयासलाज़ सक्सेसफुल रहे।
- 5:10:30लेकिन पांड्याज़ एक फॉर्मेडेबल पावर बन ही
- 5:10:33गए। पांड्याज़ ने पहले होयालाज़ को और फिर
- 5:10:381279 में चोलाज़ को हराया। राजेंद्र 3 के
- 5:10:43टाइम तक पांडयन एंपायर अपने प्रोस्पेरिटी
- 5:10:45के चरम पर था और 1279
- 5:10:49राजेंद्र 3 के रूल की लास्ट रिकॉर्डेड डेट
- 5:10:52हुई जिसके बाद चोलाज़ का भारत से नामोनिशान
- 5:10:55मिट गया। हालांकि चोला डायनेस्टी सिर्फ
- 5:10:59इंडिया में खत्म हुई। लेकिन उसकी एक रेवेल
- 5:11:01ब्रांच फिलीपींस में 16th सेंचुरी तक रही।
- 5:11:05इस डायनेस्टी का फाउंडेशन फिलीपींस की
- 5:11:08सेबू या सुगबू सिटी में एक इंडियन चोला
- 5:11:11प्रिंस राजमुडा लुमया ने किया था जो वहां
- 5:11:15एक मिलिट्री बेस एस्टैब्लिश करने गए थे।
- 5:11:18खैर स्पेनिश इन्वजन के बाद यह किंगडम भी
- 5:11:21खत्म हो गया और चोला एंपायर का ग्लोरियस
- 5:11:24इतिहास बन गया। लेकिन चोलास की लेगसी
- 5:11:27जिंदा है और आज भी वहां के कल्चर, रिलजन
- 5:11:31और टेंपल्स में फल फूल रही है। स्ट्रगल
- 5:11:35फॉर सुप्रेमसी पल्लवास, चालुक्यास एंड
- 5:11:38पांड्याज। आज की इस कहानी में हम आपको ले
- 5:11:41चलते हैं इंडिया के 300 से 750 एडी के
- 5:11:44पेनिनसुलर रीजन में। हिस्टोरियंस की माने
- 5:11:48तो इस पीरियड को विंध्यास के सदर्न रीजंस
- 5:11:51की हिस्ट्री का सेकंड फेज कहा जाता है।
- 5:11:54पहला फेज था 200 बीसी से 300 एडी तक
- 5:11:58जिसमें शुरू होने वाले कुछ प्रोसेससेस
- 5:12:00सेकंड फेज में कंटिन्यू रहे। इसके साथ ही
- 5:12:03इस फेज ने कुछ नए फीचर्स भी डेवलप किए जो
- 5:12:06कि पहले सिग्निफिकेंट नहीं थे। इस कहानी
- 5:12:09में हम इस पीरियड की इंपॉर्टेंट
- 5:12:11कॉन्फ्लिक्ट्स और पिटिकल सिनेरियो के बारे
- 5:12:14में जानेंगे। और अल्टीमेटली इन
- 5:12:16कॉन्फ्लिक्ट्स के कारण सोसाइटी, कल्चर और
- 5:12:19इकॉनमी में क्या चेंजेस आए उनको समझेंगे।
- 5:12:22दोस्तों जैसा कि हमने बताया 300 से 700
- 5:12:26एडी को पेनिनसुला रीजन की हिस्ट्री का
- 5:12:29सेकंड फेज कहा जाता है। पर सेकंड फेज को
- 5:12:32अच्छे से समझने के लिए और इस लेक्चर का
- 5:12:35कॉन्टेक्स्ट सेट करने के लिए यह जानना
- 5:12:37जरूरी है कि सेकंड फेज फर्स्ट फेज से कैसे
- 5:12:41अलग था। आइए जानते हैं हाउ सेकंड फेज वास
- 5:12:45डिफरेंट। फर्स्ट फेज के टाइम की बात करें
- 5:12:48तो डेक्कन में सातवाहनाज ने अपना आधिपत्य
- 5:12:51जमाया और तमिल किंगडम्स ने तमिलनाडु के
- 5:12:54सदर्न किंगडम्स को डोमिनेट किया। इस
- 5:12:57पीरियड में नॉर्दन तमिलनाडु, सदर्न
- 5:13:00कर्नाटका, साउथ महाराष्ट्र और गोदावरी और
- 5:13:03महानदी के बीच के लैंड्स के रूलर्स
- 5:13:05इंडिपेंडेंट नहीं थे। उनका एलजंस रीजन के
- 5:13:09सराउंडिंग रीजंस के पॉलिटिकल अथॉरिटीज की
- 5:13:11तरफ था। सेकंड फेज में इन रीजंस में और
- 5:13:14साथ ही विदर्भ में 300 से 600 एडी के बीच
- 5:13:18लगभग दो डजन स्टेट्स उभर कर आए। इवेंचुअली
- 5:13:21सेवंथ सेंचुरी की शुरुआत में कांची के
- 5:13:24पल्लवस, बादामी के चालुक्यास और मदुराई के
- 5:13:28पांड्याज तीन मेजर स्टेट्स के रूप में उभर
- 5:13:31कर आए। फर्स्ट फेज के कुछ स्पेशल फीचर्स
- 5:13:34रहे जैसे इंटरनल एंड एक्सटर्नल ट्रेड,
- 5:13:38न्यूमरस क्राफ्ट्स, वाइड स्प्रेड यूज़ ऑफ
- 5:13:40कॉइंस और बड़ी संख्या में टाउनंस जैसे
- 5:13:44अमरावती, धानिया कटक, नागार्जुनाकोंडा,
- 5:13:47ब्रोच एटसेटरा। जबकि सेकंड फेज में ट्रेड,
- 5:13:52टाउनंस और कॉइनज का डिक्लाइन होने लगा।
- 5:13:54लेकिन इस फेज में हमें टेंपल्स और ब्राहस
- 5:13:56को दी जाने वाले न्यूमरस लैंड ग्रांट्स
- 5:13:59देखने को मिलते हैं जो कि टैक्स फ्री थे।
- 5:14:02इन ग्रांट्स से पता चलता है कि कई नए
- 5:14:04एरियाज को कल्टीिवेशन और सेटलमेंट के
- 5:14:07अंतर्गत लाया गया। इसलिए इस पीरियड में
- 5:14:10एग्रेररियन इकॉनमी में बड़ी ग्रोथ देखने
- 5:14:12को मिली। फर्स्ट फेज में आंध्रा और
- 5:14:15महाराष्ट्र में एक्सटेंसिव बुद्धिस्ट
- 5:14:17मोन्यूमेंट्स बनाए गए। जैसे आंध्रा का
- 5:14:20अमरावती स्तूपा और महाराष्ट्र की अजंता
- 5:14:23बुद्धिस्ट केव मोन्यूमेंट्स। तमिलनाडु के
- 5:14:26सदर्न डिस्ट्रिक्ट के केव इं्रिप्शन से
- 5:14:28हमको जैनिज्म और बुद्धिज्म दोनों के ही
- 5:14:31इन्फ्लुएंस का प्रमाण मिलता है। मोस्ट
- 5:14:33इं्रिप्शंस मदुराय और तिरुननेल वैली के
- 5:14:36पास मिले हैं। दूसरी तरफ सेकंड फेज में
- 5:14:39ब्राह्मणिज्म का स्प्रेड हुआ। जैनिज्म
- 5:14:42कर्नाटका तक सीमित रहा। पूरे पेनिनसुला
- 5:14:46में ओवरऑल देखें तो किंग्स के द्वारा
- 5:14:48वैदिक सैक्रिफाइसेस के किए जाने के
- 5:14:50न्यूमरस इंस्टेंसेस मिलते हैं। सेकंड फेज
- 5:14:53में ही पल्लवास के अंडर तमिलनाडु और
- 5:14:56चालुक्यास के अंडर कर्नाटका में स्टोन
- 5:14:58टेंपल्स के कंस्ट्रक्शन की शुरुआत हुई जो
- 5:15:01कि शिव और विष्णु के लिए डेडिकेटेड थे।
- 5:15:04सेकंड फेज की शुरुआत में ही साउथ इंडिया
- 5:15:07लैंड ऑफ मेगलिट्स की इमेज को अबेंडन कर
- 5:15:10फेज के एंड तक ऐसे प्रोसेससेस की शुरुआत
- 5:15:13कर पाया जिससे साउथ इंडिया आज लैंड ऑफ
- 5:15:16टेंपल्स कहलाता है। कल्चर की अगर बात करें
- 5:15:19तो फर्स्ट फेज में द्रविडियन एलिमेंट ही
- 5:15:22डोमिनेशन में रहा। लेकिन सेकंड फेज में
- 5:15:24आर्यनाइजेशन और ब्राह्मणाइजेशन फॉर फ्रंट
- 5:15:27में आया। इसका कारण था किंग्स के द्वारा
- 5:15:31दिए जाने वाले लैंड ग्रांट्स जो कि या तो
- 5:15:33ब्राह्मणस को दिए जाते थे या फिर उनको जो
- 5:15:36उनके कॉज को सपोर्ट करते थे। टेंपल लैंड्स
- 5:15:39के मैनेजर्स होने के कारण ब्राहणास कल्चरल
- 5:15:43और रिलीजियस एक्टिविटीज को गाइड करते थे।
- 5:15:46संस्कृत का स्प्रेड किया जो अल्टीमेटली
- 5:15:48ऑफिशियल लैंग्वेज बनी। आंध्रा और कर्नाटका
- 5:15:51में मिलने वाले इं्रिप्शन से हमें पता
- 5:15:53चलता है कि 300 बीसी और 300 एडी के बीच
- 5:15:57लोग प्राकृत लैंग्वेज बोला और लिखा करते
- 5:16:00थे। लेकिन 400 एडी के बाद संस्कृत ही
- 5:16:03ऑफिशियल लैंग्वेज बन गई और मोस्ट चार्टर्स
- 5:16:06संस्कृत में ही कंपोज किए जाते थे।
- 5:16:09दोस्तों आगे बढ़ते हैं और देखते हैं इस
- 5:16:12पीरियड में डेक्कन और साउथ इंडिया में कौन
- 5:16:14से स्टेट्स उभर कर आए।
- 5:16:17स्टेट्स ऑफ द डेक्कन एंड साउथ इंडिया।
- 5:16:20विदर्भ यानी बेरार और नॉर्दन महाराष्ट्र
- 5:16:23में सातवाहनाज़ को वकटकास ने सक्सीड किया
- 5:16:27जो कि एक लोकल पावर थी। करीब 250 एडी में
- 5:16:31विंध्य शक्ति ने इस डायनेस्टी की शुरुआत
- 5:16:33की। वकटकास खुद ब्राहस थे और न्यूमरस कॉपर
- 5:16:38प्लेट लैंड ग्रांट्स उनके द्वारा इशू की
- 5:16:40गई। यह ब्राह्मेनिकल रिलीजन के लीडर थे और
- 5:16:43कई वैदिक सैक्रिफाइसेस को परफॉर्म करते
- 5:16:45थे।
- 5:16:46वकाटगास की पॉलिटिकल हिस्ट्री नॉर्थ
- 5:16:49इंडिया से ज्यादा जुड़ी रही बजाय साउथ
- 5:16:51इंडिया के। कल्चरली अगर बात करें तो
- 5:16:54वकाटगाज़ मेनली ब्राह्मेनिकल आइडियाज और
- 5:16:56सोशल इंस्टीटशंस को साउथ में ट्रांसमिशन
- 5:16:59के एक चैनल की तरह काम करता रहा। वकाटकास
- 5:17:03को बादामी के चालुक्यास ने करीब 500 एडी
- 5:17:06में रिप्लेस किया। जिन्होंने डेकन और साउथ
- 5:17:09इंडिया की हिस्ट्री में इंपॉर्टेंट रोल
- 5:17:11प्ले किया। दो सेंचुरीज यानी 757 एडी तक।
- 5:17:17आइए जानते हैं चालुक्यास के बारे में।
- 5:17:20चालुक्यास चालुक्यास ने अपना डिसेंट
- 5:17:23ब्रह्मा और मनु और द मून को बताया।
- 5:17:27उन्होंने बताया कि उनके एनसेेस्टर्स
- 5:17:29अयोध्या के रूलर्स थे। लेकिन ऐसा सिर्फ
- 5:17:32लेजिटिमेसी और रिस्पेक्टेबिलिटी पाने के
- 5:17:34लिए किया। एक्चुअल में वो एक तनरीज लोग
- 5:17:37थे। जिनको ब्राह्मेनिकल ब्लेसिंग्स के
- 5:17:39कारण रूलिंग वरना में अकोमोडेट किया गया।
- 5:17:42सिक्स्थ सेंचुरी की शुरुआत में वेस्टर्न
- 5:17:45रीजन में चालुक्यास ने अपना किंगडम सेटअप
- 5:17:47किया। वतापी में अपनी कैपिटल एस्टैब्लिश
- 5:17:50की जो कि आज के हिसाब से कर्नाटका के
- 5:17:53बदामी टाउन बीजापुर डिस्ट्रिक्ट में
- 5:17:55लोकेटेड है। आगे चलकर चालुक्यास कई
- 5:17:58ब्रांचेस में कट ऑफ हुए। लेकिन मेन ब्रांच
- 5:18:01ने इस रीजन में 200 साल तक राज किया। इस
- 5:18:04डायनेस्टी के बाद विजयनगर एंपायर ही अगला
- 5:18:07सिग्निफिकेंट एंपायर मिडीवल टाइम्स में
- 5:18:09सेटअप हुआ इस रीजन में।
- 5:18:12अब जानते हैं पेनिनसुला के ईस्टर्न रीजन
- 5:18:14में पल्लवाज़ के बारे में। पल्लवाज़।
- 5:18:18पेनिनसुला के ईस्टर्न पार्ट यानी
- 5:18:20कृष्णागुंटू रीजन में सातवाहनाज़ को
- 5:18:23इशवाकुस ने थर्ड सेंचुरी में सक्सीड किया।
- 5:18:26इवाकू किंग्स शेवाइट्स थे और वैदिक राइट्स
- 5:18:29परफॉर्म करते थे। लेकिन उनके रेन में
- 5:18:32बुद्धिज्म भी फ्लोरिश हुआ। इवाकू क्वींस
- 5:18:35और किंग्स ने प्रेजेंट डे नागार्जुना
- 5:18:37कोंडा और धरनी कोटा में कई मोन्यूमेंट्स
- 5:18:40बनवाए। कृष्णा गुंटू रीजन में इन्होंने ही
- 5:18:43लैंड ग्रांट्स की प्रैक्टिस को चालू किया।
- 5:18:45जहां पर उनसे रिलेटेड कई कॉपर प्लेट
- 5:18:48इं्रिप्शंस मिले हैं। इवाकुस को पल्लवास
- 5:18:52ने 340 एडी में रिप्लेस किया। पल्लवा वर्ड
- 5:18:55का मीनिंग है कपर जो कि तमिल वर्ड तोंडाई
- 5:18:59का संस्कृत वर्जन है। पल्लवाज़ एक लोकल
- 5:19:02ट्राइब थी जिन्होंने तोंडाई नाडू यानी
- 5:19:05लैंड ऑफ कपर्स में अपनी अथॉरिटी
- 5:19:07इस्टैब्लिश की। लेकिन कंप्लीटली
- 5:19:09सिविलाइज्ड और एक्सेप्टेबल बनने में उनको
- 5:19:12थोड़ा टाइम लगा क्योंकि तमिल में पल्लवा
- 5:19:15रॉबर का भी एक सिनोनिम है। पल्लवास की
- 5:19:18अथॉरिटी सदर्न आंध्रा और नॉर्दर्न
- 5:19:20तमिलनाडु तक एक्सटेंड हुई। उन्होंने अपनी
- 5:19:23कैपिटल कांची में सेटअप की जो कि आज के
- 5:19:26हिसाब से कांचीपुरम है। उनके रूल में यह
- 5:19:28सिटी टाउन ऑफ टेंपल्स और वैदिक लर्निंग के
- 5:19:31लिए फेमस हुई। अर्ली पल्लवाज़ का
- 5:19:34कॉन्फ्लिक्ट कदंबा से भी हुआ। जिन्होंने
- 5:19:37अपना रूल नॉर्दन कर्नाटका और कोंकण में
- 5:19:39फोर्थ सेंचुरी में एस्टैब्लिश किया। कदंबा
- 5:19:43किंगडम को मयूर शर्मन ने 345 एडी में
- 5:19:46इस्टैब्लिश किया। इवेंचुअली पल्लवाज ने
- 5:19:49कदंबाज को डिफीट तो किया लेकिन मयूर शर्मन
- 5:19:52को रॉयल इंसिग्निया यानी एक तरह के रॉयल
- 5:19:56सिंबल से नवाजा।
- 5:19:58ऐसा कहा जाता है कि मयूर शर्मन ने 18
- 5:20:01अश्वमेध यानी हॉर्स सैक्रिफाइसेस किए और
- 5:20:04ब्राहणास को कई विलेजेस दान में दिए।
- 5:20:07कदंबाज ने अपनी कैपिटल विजयंती और बनवासी
- 5:20:11में सेटअप की जो कि आज कर्नाटका के कनारा
- 5:20:14डिस्ट्रिक्ट में है। पल्लवाज़ की एक और
- 5:20:17कंटेंपरेरी डायनेस्टी थी गंगाज़ जिन्होंने
- 5:20:20फोर्थ सेंचुरी में सदर्न कर्नाटका में
- 5:20:22अपना किंगडम एस्टैब्लिश किया। गंगाज़ के
- 5:20:25ईस्ट में पल्लवाज़ और वेस्ट में कदमज़ थे।
- 5:20:29यहां यह जानना जरूरी है कि इनको गंगाज ऑफ
- 5:20:31मैसूर या वेस्टर्न गंगाज़ भी बोला जाता है।
- 5:20:34जो कि फिफ्थ सेंचुरी के कलिंग के ईस्टर्न
- 5:20:37गंगा से अलग हैं। अपने रेन के मोस्ट पार्ट
- 5:20:40में वेस्टर्न गंगाज़ पल्लवाज़ के फ्यूडेड
- 5:20:43ट्रीज ही रहे। वेस्टर्न गंगाज़ ने मोस्टली
- 5:20:46जयनाज़ को ही लैंड ग्रांट्स दिए। सिमिलरली
- 5:20:49कदंबाज़ ने भी जयनाज़ को लैंड ग्रांट्स दिए।
- 5:20:51पर उन्होंने ब्राहणास को ज्यादा प्रेफर
- 5:20:54किया। पल्लवास ने मोस्टली ब्राहणास को ही
- 5:20:57लैंड ग्रांट्स दिए जो कि टैक्सेस और स्टेट
- 5:20:59को दिए जाने वाले फोर्स्ड लेबर से
- 5:21:01कंप्लीटली फ्री थे।
- 5:21:04आइए अब जानते हैं पांड्याज के बारे में।
- 5:21:08पांड्याज
- 5:21:10दोस्तों सदर्न इंडिया के तीन मेन लीनिएजेस
- 5:21:12थी द चोलास, द चेरास एंड द पांड्यास। यह
- 5:21:17तीनों डायनेस्टीज संगम एज यानी सिक्स्थ
- 5:21:20सेंचुरी बीसी से थर्ड सेंचुरी एडी के
- 5:21:22शुरुआत में डेवप हुई। पांड्याज ने अपनी
- 5:21:26रेन में पीरियडिकली कई उतार-चढ़ाव फेस
- 5:21:28किए। थर्ड सेंचुरी एडी में कालाभरा
- 5:21:31रिवोल्ट के चलते इनका डिक्लाइन हुआ।
- 5:21:34कालाभरा रिवोल्ट के खत्म होने के बाद किंग
- 5:21:37काडून गोन की लीडरशिप में सिक्स्थ सेंचुरी
- 5:21:39एडी में फिर से इनका राइज हुआ। इन्हीं को
- 5:21:42मिडीवल पांड्याज भी कहा जाता है। पांड्याज
- 5:21:45का पहला मेंशन ग्रीक हिस्टोरियन मेगस्थनीज
- 5:21:48से मिलता है। मेगस्थनीज ने मेंशन किया है
- 5:21:51कि पांड्या डायनेस्टी को एक वुमन ने रूल
- 5:21:53किया। यह पांड्याज के मेट्रियर्कल
- 5:21:56इन्फ्लुएंस को दर्शाता है। इंडियन
- 5:21:58पेनिनसुला के सदर्न मोस्ट और साउथ ईस्टर्न
- 5:22:01पोर्शन पर पांड्याज ने राज किया। मदुराई
- 5:22:04इनकी कैपिटल थी। फर्स्ट सेंचुरी एडी में
- 5:22:07तमिल एकेडमीज़ में कंपाइल हुए संगम लिटरेचर
- 5:22:10में पांड्याज का मेंशन देखने को मिलता है।
- 5:22:12इस लिटरेचर की माने तो स्टेट बहुत ही
- 5:22:15वेल्थी और प्रोस्परस था।
- 5:22:18पांड्या किंग्स का ट्रेड रोमन एंपायर से
- 5:22:20था और रोमन एपरर ऑगस्टस के कोर्ट में
- 5:22:23एंबेसडर्स भी भेजे गए। ब्राह्मणस ने इनके
- 5:22:26रूल में कंसीडरेबल इन्फ्लुएंस एंजॉय किया
- 5:22:29और पांड्या किंग्स भी वैदिक सैक्रिफाइसेस
- 5:22:31परफॉर्म करते थे।
- 5:22:33तो दोस्तों, यह तो बात हुई 300 से 700 एडी
- 5:22:37यानी सदर्न इंडिया के सेकंड हिस्टोरिकल
- 5:22:39फेज में रूल कर रहे तीन किंगडम्स की जो थे
- 5:22:43चालुक्यास ऑफ़ बदामी, पल्लवाज़ ऑफ कांची और
- 5:22:46पांड्याज ऑफ मदुराय।
- 5:22:49आगे बढ़ते हैं और जानते हैं इन किंगडम्स के
- 5:22:51बीच कॉन्फ्लिक्ट्स के बारे में।
- 5:22:54कॉन्फ्लिक्ट्स बिटवीन द थ्री किंगडम्स। इस
- 5:22:57पीरियड में पेनिनसुला इंडिया की पॉलिटिकल
- 5:23:00हिस्ट्री का सबसे मेन इंटरेस्ट रहा।
- 5:23:02सिक्स्थ से एट्थ सेंचुरी के बीच होने वाली
- 5:23:05पल्लवाज़ ऑफ़ कांची और चालुक्याज़ ऑफ़ बादामी
- 5:23:08के बीच होने वाली सुप्रेमसी की लड़ाई।
- 5:23:11पांड्याज जो कि मदुराई और तिरुनल वैली के
- 5:23:14रूलर थे ने यह लड़ाई जॉइ की एज अ पुअर
- 5:23:18थर्ड। इस कॉन्फ्लिक्ट में इनका कोई
- 5:23:20सिग्निफिकेंट रोल नहीं था। भले ही पल्लवाज़
- 5:23:23और चालुक्यास ब्राह्मणिज्म को पेट्रोनाइज
- 5:23:26करते थे, लेकिन दोनों के बीच ब्लंडर,
- 5:23:28प्रेस्टीज और टेरिटोरियल रिसोर्सेज के लिए
- 5:23:31क्वरल होता ही रहता था। कृष्णा और
- 5:23:34तुंगभद्रा रिवर के बीच के लैंड में दोनों
- 5:23:36अपनी सुप्रेमसी सेटअप करना चाहते थे। इस
- 5:23:39लंबी कॉन्फ्लिक्ट में सबसे पहला
- 5:23:41इंपॉर्टेंट इवेंट हुआ चालुक्य किंग
- 5:23:43पुलकेशन द सेकंड 69 से 42 एडी के रेन में।
- 5:23:48आई होल इं्रिप्शन में उनके कोर्ट पोएट रवि
- 5:23:51कीर्ति द्वारा लिखी उनकी योलॉजी के माध्यम
- 5:23:53से उनके बारे में जानकारी मिलती है। इस
- 5:23:56इं्रिप्शन को संस्कृत के पोएटिक एक्सीलेंस
- 5:23:59का एक एग्जांपल कहा जा सकता है। बनवासी
- 5:24:02में इस्टैब्लिश्ड कादंब कैपिटल को उसने
- 5:24:04सब्जुगेट किया और गंगाज ऑफ मैसूर को उसकी
- 5:24:07सुजरेनिटी एक्सेप्ट करने पर मजबूर किया।
- 5:24:10पुलकेशन ने नर्मदा के पास हर्षा की आर्मी
- 5:24:13को डिफीट किया और डेकन की तरफ उसके मार्च
- 5:24:15को रोका। पल्लवाज़ के साथ कॉन्फ्लिक्ट में
- 5:24:18पोलोकेशन ऑलमोस्ट पल्लवा कैपिटल तक पहुंच
- 5:24:21ही चुका था। लेकिन पल्लवाज़ ने अपनी नॉर्दन
- 5:24:24प्रोविंसेस को सीड करके पीस मांगा।
- 5:24:2860 एडी के आसपास कृष्णा और गोदावरी के बीच
- 5:24:32के एरिया को पुलकेशन ने कॉनकर किया जो आगे
- 5:24:35चलकर वेंगी कहलाया। लेकिन पुलकेशन का
- 5:24:38सेकंड इन्वेशन पल्लवा टेरिटरी का फेल हो
- 5:24:41गया। पल्लवा किंग नरसिम्हा वर्मन 630 से
- 5:24:45668 एडी ने चालुक्य कैपिटल वातापी को
- 5:24:49कैप्चर कर लिया 642 एडी में जिसे बैटल ऑफ
- 5:24:52वातापी भी कहा जाता है। इसके बाद नरसिम्हा
- 5:24:55वर्मन ने वातापी गोंडा और ककरर ऑफ वातापी
- 5:24:59का टाइटल अस्यूम किया।
- 5:25:02और ऐसा कहा जाता है कि उसने चोलाज़, चेराज़,
- 5:25:05पांड्याज़ और कालभ्रास को भी डिफीट किया।
- 5:25:09सेवंथ सेंचुरी के एंड में कॉन्फ्लिक्ट में
- 5:25:11एक पॉज आया जो एथ सेंचुरी की शुरुआत में
- 5:25:14फिर से रिज्यूम हुआ। चालुक्य किंग
- 5:25:16विक्रमादित्य 733 से 745 एडी ने पल्लवा
- 5:25:21कैपिटल कांची को तीन बार ओवर रन किया। 740
- 5:25:25एडी में उसने पल्लवाज़ को कंप्लीटली
- 5:25:27डिस्ट्रॉय कर दिया। इस विक्ट्री के बाद
- 5:25:29साउथ इंडिया में पल्लवाज़ की सुप्रेमसी
- 5:25:31कंप्लीटली डिस्ट्रॉय हो गई। हालांकि इस
- 5:25:34विक्ट्री के बाद भी चालुक्यास लंबे समय तक
- 5:25:37रूल नहीं कर पाए क्योंकि उनकी हिजेनी को
- 5:25:40राष्ट्रकूताज़ ने 757 एडी में खत्म कर
- 5:25:43दिया। आगे बढ़ते हैं और देखते हैं इस
- 5:25:46पीरियड में क्या सोशल और कल्चरल चेंजेस
- 5:25:48आए।
- 5:25:50सबसे पहले नजर डालते हैं रिलीजन और टेंपल
- 5:25:53कंस्ट्रक्शन पर।
- 5:25:55रिलीजन एंड टेंपल्स। रिलीजन की बात करें
- 5:25:58तो वैदिक सैक्रिफाइसेस के अलावा ब्रह्मा,
- 5:26:01विष्णु और शिवा की वरशिप पॉपुलर हुई।
- 5:26:04सेवंथ सेंचुरी के बाद अलवरसेस और नयन आर
- 5:26:07सेंस पॉपुलर हुए। अल्वारसेस गॉड विष्णु के
- 5:26:11डेविटीज थे और उनकी वरशिप को पॉपुलर किया।
- 5:26:14नयन आर्स गॉड शिवा के ग्रेट डेविटीज थे।
- 5:26:18सेवंथ सेंचुरी के बाद से भक्ति कल्ट ने
- 5:26:21साउथ इंडियंस की रिलीजियस लाइफ को डोमिनेट
- 5:26:24करना चालू किया। अलवार्स और नायनार्स ने
- 5:26:27इसके प्रोपगेशन में एक बड़ा रोल प्ले
- 5:26:29किया। पल्लवा किंग्स ने सेवंथ और ए्थ
- 5:26:32सेंचुरी में कई स्टोन टेंपल्स का
- 5:26:34कंस्ट्रक्शन किया। इन सभी गॉड्स की
- 5:26:36हाउसिंग के लिए। इनमें से सबसे फेमस है
- 5:26:39महाबलीपुरम के सेवन रथा टेंपल्स जो कि
- 5:26:42चेन्नई से 65 कि.मी. की दूरी पर हैं। इन
- 5:26:46टेंपल्स में महाभारत के इंसिडेंस को
- 5:26:48डिपिक्ट किया गया है।
- 5:26:51महाबलीपुरम एक पोर्ट सिटी थी जिसको
- 5:26:53नरसिम्हा वर्मन ने सेवंथ सेंचुरी एडी में
- 5:26:56फाउंड किया।
- 5:26:57यहां का शोर टेंपल भी बहुत फेमस है। यह एक
- 5:27:00स्ट्रक्चरल टेंपल है जो शिवा और विष्णु को
- 5:27:03डेडिकेटेड है। कांची का कैलाशनाथ टेंपल जो
- 5:27:07कि एट्थ सेंचुरी में बनाया गया एक स्टोन
- 5:27:10बिल्ट आर्किटेक्चर का टेंपल है जिसके मेन
- 5:27:12डटी शिवा हैं। यहां पर 58 छोटे-छोटे शाइन
- 5:27:16भी हैं जो शिवा के वेरियस फॉर्म्स हैं।
- 5:27:20दूसरी तरफ चालुक्यास ने भी आईहोल में कई
- 5:27:23टेंपल्स का कंस्ट्रक्शन किया। बादामी और
- 5:27:25पटाडकल में भी इनके टेंपल्स देखने को
- 5:27:28मिलते हैं। पटाडकल का पापना टेंपल और
- 5:27:32विरुपाक्षा टेंपल सबसे ज्यादा सेलिब्रेटेड
- 5:27:35हैं।
- 5:27:36दोस्तों अब नजर डालते हैं उस टाइम की
- 5:27:38इकॉनमी पर। इकॉनमी।
- 5:27:42इस पीरियड में एक तरह की टेंपल इकॉनमी
- 5:27:45डेवलप हुई। टेंपल्स को मेंटेन करने के लिए
- 5:27:48लैंड ग्रांट्स दिया जाना एक कॉमन
- 5:27:49प्रैक्टिस थी। इन ग्रांड्स को टेंपल्स की
- 5:27:52वॉल्स पर रिकॉर्ड किया जाता था। मोस्ट
- 5:27:55टेंपल्स ब्राहर्स के द्वारा ही मैनेज किए
- 5:27:57जाते थे। अर्ली मेडवल टाइम्स तक इन
- 5:28:00टेंपल्स ने 3 फिफ्थ ऑफ एरेबल लैंड को ओन
- 5:28:04कर रखा था। यह टेंपल्स
- 5:28:08कास्ट बेस्ड आइडियोलॉजी के सेंटर्स बन
- 5:28:10चुके थे। शुरुआती दौर में टेंपल्स को
- 5:28:13मेनली कॉमन पीपल के द्वारा दिए गए टैक्सेस
- 5:28:15से कंस्ट्रक्ट और मेंटेन किया जाता था।
- 5:28:18कर्नाटका में चालुक्यास के अंडर कुछ
- 5:28:20टेंपल्स को जैन ट्रेडर्स ने इरेक्ट किया।
- 5:28:24विलेज गॉड्स को वशिप करने के लिए कॉमन
- 5:28:26पीपल पैडी ऑफर करते थे। कुछ रिच लोग अपना
- 5:28:29स्टेटस बढ़ाने और अपनी रिलीजियस
- 5:28:31क्रेविंग्स को सेटिस्फाई करने के लिए रिच
- 5:28:34ऑफरिंग्स भी दिया करते थे। वॉज, आर्ट और
- 5:28:37लिटरेचर के लिए रिलीजन को प्रमोट करने के
- 5:28:40लिए और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ को मेंटेन
- 5:28:42करने के लिए इनॉर्मस रिसोर्सेज की जरूरत
- 5:28:45थी। जो कि अपेरेंटली पेजेंट्री ही
- 5:28:47प्रोवाइड करती थी। लैंड टैक्स के अलावा
- 5:28:50किंग सीरियल्स और गोल्ड के डोनेशंस की
- 5:28:53डिमांड भी कर सकता था।
- 5:28:56फ्लावर्स और मिल्क, वुड और ग्रास की भी
- 5:28:58डिमांड की जाती थी और विलेजर्स को फ्री ऑफ
- 5:29:01चार्ज लोड्स कैरी करने के लिए कंपेल किया
- 5:29:04जाता था। इससे पता चलता है कि स्टेट
- 5:29:06पेजेंट्री से लेबर और प्रोड्यूस की हैवी
- 5:29:09डिमांड करता था। इस पीरियड में साउथ
- 5:29:12इंडिया में तीन तरह के विलेजेस देखने को
- 5:29:14मिलते हैं। उर, सभा और नगरम। उर यूजुअल
- 5:29:19टाइप के विलेजेस थे जहां प्रेजेंट कास्ट्स
- 5:29:22रहती थी। विलेज हेडमैन टैक्सेस कलेक्ट
- 5:29:25करता था और किंग को पे करता था। सभा
- 5:29:28ब्राहणास को ग्रांट किए जाने वाले विलेजेस
- 5:29:31यानी ब्राह्मदेस और अग्रहाराज़ का ग्रुप
- 5:29:34होता था। नगरम ऐसे विलेजेस थे जहां
- 5:29:38ट्रेडर्स और मर्चेंट्स का सेटलमेंट था।
- 5:29:41चालुक्यास एरिया में रूरल अफेयर्स को
- 5:29:43विलेज एल्डर्स मैनेज करते थे जिनको महाजन
- 5:29:47कहा जाता था। दोस्तों अब बात करते हैं
- 5:29:50सोसाइटल स्ट्रक्चर की। सोसाइटल स्ट्रक्चर
- 5:29:54इस पीरियड की सोसाइटी का बेसिक ट्रेड था
- 5:29:57ब्राह्मणाइजेशन।
- 5:29:59सोसाइटी मेनली प्रिंसेस और प्रीस्ट से
- 5:30:01डोमिनेटेड थी। प्रिंसेस अपना स्टेटस या तो
- 5:30:05क्षत्रिय या ब्राहणा क्लेम करते थे।
- 5:30:07प्रीस्ट्स इन चीफ्स के डिसेंट को सोलर या
- 5:30:10लून्यर डायनेस्टीज के लीनियट से जोड़कर एक
- 5:30:13रिस्पेक्टेबल फैमिली ट्री इन्वेंट किया
- 5:30:15करते थे। जिससे किंग्स को रिस्पेक्ट मिलती
- 5:30:17थी सोसाइटी में। लैंड ग्रांट्स की मदद से
- 5:30:21प्रीस्ट्स, इन्फ्लुएंस और अथॉरिटी गेन
- 5:30:23करते थे। कई साउथ इंडियन रूलर्स खुद को
- 5:30:26ब्राह्मणास की कैटेगरी में रखते थे। जिसका
- 5:30:28मतलब है कि साउथ इंडिया में क्षत्रियस
- 5:30:31ब्राह्मणस जितने इंपॉर्टेंट नहीं थे। साउथ
- 5:30:34इंडिया में वर्णन सिस्टम थोड़ा अलग तरीके
- 5:30:36से ऑपरेट करता था। प्रिंसेस और प्रीस्ट्स
- 5:30:39के नीचे आने वाले पेजेंट्री न्यूमरस
- 5:30:42पेजेंट्री कास्ट में डिवाइडेड थी।
- 5:30:44ब्राह्मेनिकल सिस्टम में जिनको मोस्टली
- 5:30:46शूद्रास कहा जाता था। कंक्लूजन
- 5:30:51तो दोस्तों इस कहानी में हमने साउथ इंडिया
- 5:30:53की हिस्ट्री के सेकंड फेज यानी 300 से 750
- 5:30:57एडी की बात की। इस पीरियड के एंड में
- 5:30:59चालुक्यास ने पल्लवाज और पांड्याज को
- 5:31:02डिफीट करके फाइनल पावर के रूप में उभर कर
- 5:31:04आए। हमने देखा किस तरह से इस पीरियड में
- 5:31:08सोसाइटी का ब्राह्मनाइजेशन हुआ और जाना कि
- 5:31:11यहां का हायरार्किकल स्ट्रक्चर नॉर्थ
- 5:31:13इंडिया से किस प्रकार डिफरेंट रहा। इस ऐज
- 5:31:16में ही टेंपल कंस्ट्रक्शन के कुछ
- 5:31:18प्रोसेससेस स्टार्ट हुए। जिनकी मदद से आगे
- 5:31:21चलकर यह रीजन आज लैंड ऑफ टेंपल्स बन पाया।
- 5:31:27स्टडी आईक्यू आईएस आपका सिलेक्शन हमारा
- 5:31:31मिशन
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