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Class 12 History Chapter 10 | NCERT | CBSE | इतिहास। आधुनिक भारत का इतिहास । Part - 1 — Transcript

by Ekaksha · 3,398 words · 433 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00तो देखिए बच्चों, आज हम पढ़ेंगे इतिहास
  2. 0:0212वीं क्लास की। 12वीं क्लास की इतिहास की
  3. 0:05जो पाठ्य पुस्तक है, उसके तीन भाग हैं और
  4. 0:07तीसरे भाग का अध्ययन हम शुरू करने जा रहे
  5. 0:10हैं। और जो तीसरा भाग है वह मुख्यत आधुनिक
  6. 0:13भारत का इतिहास है और आधुनिक भारत के
  7. 0:15इतिहास में जो पहला पाठ उसमें आएगा अध्याय
  8. 0:1810 के नाम से जो है वहां पे वो है
  9. 0:21उपनिवेशवाद और देहात। तो उपनिवेशवाद और
  10. 0:24देहात के बारे में हम अभी समझेंगे। ठीक
  11. 0:26है?
  12. 0:28सबसे पहले हम देखेंगे पाठ का परिचय। सबसे
  13. 0:31पहले मैं बात करूंगा कि उपनिवेशवाद क्या
  14. 0:33होता है? तो मैं आपको बता देता हूं कि
  15. 0:34उपनिवेशवाद से तात्पर्य है कि किसी
  16. 0:36शक्तिशाली राष्ट्र के द्वारा निर्बल
  17. 0:39राष्ट्र के ऊपर अपनी ताकत के दम पर, अपनी
  18. 0:41शक्ति के दम पर शासन किया जाता है और वहां
  19. 0:44के संसाधनों का अपने हित में प्रयोग किया
  20. 0:46जाता है। जैसे उदाहरण के लिए लें कि भारत
  21. 0:50के ऊपर लंबे समय तक ब्रिटेन ने शासन किया
  22. 0:52था। तो ब्रिटेन का उपनिवेश हो गया भारत और
  23. 0:56भारत के संसाधनों का अपने हित में उसने
  24. 0:58प्रयोग किया था। तो इस पाठ में हम
  25. 1:00क्या-क्या पढ़ेंगे? सबसे पहले उपनिवेशवाद
  26. 1:02समझेंगे कि जो देहात में रहने वाले लोग
  27. 1:04थे, ग्रामीण लोग थे, भारत जो देश है, इसके
  28. 1:07जो ग्रामीण लोग थे, उनके लिए उपनिवेशवाद
  29. 1:09के क्या मायने थे? उसके बाद हम बढ़ेंगे
  30. 1:13बंगाल की तरफ। बंगाल की तरफ ही सबसे पहले
  31. 1:15क्यों बढ़ेंगे? क्योंकि उपनिवेशवादी शासन
  32. 1:17की शुरुआत सबसे पहले कहां से शुरू हुई
  33. 1:19भारत में? बंगाल से। तो बंगाल में
  34. 1:21अंग्रेजों के द्वारा कुछ नई भू-राजस्व
  35. 1:22व्यवस्थाएं लागू की गई थी। उनके बारे में
  36. 1:24समझेंगे। उनमें एक वर्ग होता था जमींदार।
  37. 1:27तो उसके बाद हम मिलेंगे। बंगाल के
  38. 1:29जमींदारों से हमारी मुलाकात होगी और बंगाल
  39. 1:32के जमींदारों से मिलने के बाद हम
  40. 1:35आगे बढ़ेंगे। बंगाल के जमींदारों के बाद
  41. 1:38इस तरफ की हम यात्रा करेंगे।
  42. 1:41इन पहाड़ियों में पहाड़ी क्षेत्रों में
  43. 1:42आएंगे। झारखंड के पहाड़ी क्षेत्र में
  44. 1:44राजमहल की पहाड़ियों की यात्रा करेंगे और
  45. 1:46संथाल लोगों से मिलेंगे। उसके बाद हम
  46. 1:49दक्कन की तरफ बढ़ेंगे और दक्कन में जो नई
  47. 1:51भू-राजस्व व्यवस्थाएं लागू की गई थी उनके
  48. 1:53बारे में देखेंगे। फिर हम साथ ही यह
  49. 1:55समझेंगे कि इन नई भू-राजस्व व्यवस्था और
  50. 1:57उपनिवेशवादी शासन के कृषकों पर क्या
  51. 2:00प्रभाव पड़े। जब कृषकों को पैसे की जरूरत
  52. 2:03होती थी तो वो किसके पास जाते थे? तो ये
  53. 2:06सारी चीजें हम इसमें पढ़ेंगे। ठीक है? तो
  54. 2:09देखते हैं आगे। सबसे पहले देखते हैं कि
  55. 2:12उपनिवेशवादी शासन क्या था? उपनिवेशवाद की
  56. 2:14परिभाषा क्या होगी? जैसा कि मैंने अभी
  57. 2:16आपको बताया कि किसी शक्तिशाली राष्ट्र के
  58. 2:18द्वारा निर्बल राष्ट्र पर अपनी ताकत, अपनी
  59. 2:21शक्ति के बल पर जो शासन किया जाता है उसके
  60. 2:24संसाधनों का अपने हित में प्रयोग किया
  61. 2:26जाता है। उसे ही क्या कहेंगे? उपनिवेशवाद।
  62. 2:28तो देखते हैं
  63. 2:34किसी समूह व शक्तिशाली राष्ट्र के द्वारा
  64. 2:37अपने विभिन्न हितों को साधने के लिए
  65. 2:39निर्बल राष्ट्र के विभिन्न संसाधनों का
  66. 2:42शक्ति के बल पर उपभोग किया जाता है। जैसे
  67. 2:45हम देखते हैं कि भारत लंबे समय तक किसका
  68. 2:47उपनिवेश रहा था? ब्रिटेन का उपनिवेश रहा
  69. 2:50था। तो भारत उपनिवेश है और ब्रिटेन भारत
  70. 2:52के संसाधनों का अपने हित में प्रयोग करता
  71. 2:54है। उसके बाद हम देखेंगे कि भारत में
  72. 2:57उपनिवेशवादी शासन की सबसे पहले शुरुआत
  73. 2:59कहां से हुई? तो ये शुरुआत हुई बंगाल से।
  74. 3:02बंगाल में अंग्रेज मुख्यतः भारत में ही
  75. 3:04व्यापार करने आए थे। बंगाल में व्यापार
  76. 3:06करते थे और बंगाल में व्यापार में ज्यादा
  77. 3:08मुनाफा कमाने के लिए वहां के नवाब से कुछ
  78. 3:11मतभेद हो गए। और फिर बंगाल के नवाब और
  79. 3:13अंग्रेजों के बीच एक युद्ध हुआ। 23 जून
  80. 3:161757 को प्लासी का युद्ध होता है। ईस्ट
  81. 3:19इंडिया कंपनी मतलब अंग्रेज जीत जाते हैं
  82. 3:22और हार जाता है बंगाल का नवाब
  83. 3:24सिराजुद्दौला। तो यह भी थोड़ा सा ध्यान
  84. 3:26में रखना कि प्लासी के युद्ध में
  85. 3:28अंग्रेजों ने या ईस्ट इंडिया कंपनी ने
  86. 3:31बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को हरा दिया
  87. 3:33और उसके बाद धीरे-धीरे करके एकदम से नहीं
  88. 3:36धीरे-धीरे करके बंगाल के पूरे प्रशासन पे
  89. 3:38अंग्रेजों का प्रभुत्व शुरू हो जाता है।
  90. 3:41तो बंगाल में सबसे पहले उपनिवेशवादी शासन
  91. 3:44की स्थापना हुई। यही है। भारत में
  92. 3:46औनिनिवेशिक शासन की स्थापना सबसे पहले
  93. 3:48कहां हुई? वह हुई बंगाल में। तो बंगाल में
  94. 3:51जब उपनिवेशिक शासन की स्थापना अंग्रेजों
  95. 3:53के द्वारा की गई तो सीधी बात है कि बंगाल
  96. 3:55में बहुत सारे परिवर्तन हुए। बंगाल के
  97. 3:58संसाधनों का अंग्रेज अपने हित में प्रयोग
  98. 4:00करेंगे। वहां की भू-राजस्व व्यवस्था को
  99. 4:01बदला गया। ज्यादा से ज्यादा भू-राजस्व
  100. 4:04प्राप्त करना चाहते थे। उसके लिए हम देखते
  101. 4:06हैं आगे। तो क्या नई भू-राजस्व व्यवस्था
  102. 4:09बंगाल में अंग्रेजों के द्वारा लागू की गई
  103. 4:11थी? अंग्रेजों ने वहां पर एक नई व्यवस्था
  104. 4:13लागू की जिसका नाम है स्थाई बंदोबस्त। उसी
  105. 4:17को कहते हैं जमींदारी व्यवस्था और उसी को
  106. 4:19हमने नाम दिया है स्तमरारी व्यवस्था। कब
  107. 4:22लागू हुई? ये पहली लाइन है। बहुत
  108. 4:24इंपॉर्टेंट है। जरूर अपने को ध्यान देना
  109. 4:26है इस पे। 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस
  110. 4:30बंगाल के गवर्नर जनरल थे ये। उनके द्वारा
  111. 4:32ये व्यवस्था लागू की गई थी। जिसका नाम है
  112. 4:35स्तंभरारी व्यवस्था। इसी को कहते हैं
  113. 4:37जमींदारी व्यवस्था और इसी को नाम दिया गया
  114. 4:39है स्थाई बंदोबस्त। इसमें होता क्या था?
  115. 4:42अच्छे से समझेंगे इसको। थोड़ा ध्यान देना
  116. 4:45समझने का विषय है। कृषक वर्ग था और कृषक
  117. 4:49वर्ग अब लगान किसको देगा? ईस्ट इंडिया
  118. 4:51कंपनी उनसे लगान वसूल करेगी। उनको वो लगान
  119. 4:54देगा। अंग्रेज नहीं चाहते थे। इस सारे
  120. 4:57झमेले से दूर रहना चाहते थे। इतना
  121. 4:59प्रशासनिक खर्चा वह नहीं करना चाहते थे कि
  122. 5:01हम जाएं कृषकों की जमीन की माप करें। लगान
  123. 5:04निश्चित करें और फिर फसल होने के बाद फसल
  124. 5:07कटने के बाद लगान वसूल करने भी जाएं। तो
  125. 5:10इसके लिए अंग्रेज इस पूरी व्यवस्था के लिए
  126. 5:13एक बिचोलिया वर्ग तैयार करना चाहते थे जो
  127. 5:15कि अंग्रेजों से
  128. 5:18बातचीत करेगा और लगान वसूली करके किसानों
  129. 5:20से अंग्रेजों तक पहुंचाएगा। और यह
  130. 5:22बिचोलिया वर्ग ही क्या कहलाया? जमींदार।
  131. 5:25एक नया वर्ग तैयार किया। यह हैं जमींदार।
  132. 5:28और इन्हीं से हम अब मुलाकात करेंगे बंगाल
  133. 5:30के जमींदारों से। तो देखो अब कृषकों से
  134. 5:33लगान वसूल करने की जिम्मेदारी है जमींदार
  135. 5:36की और जमींदार फिर उस लगान को कहां
  136. 5:38पहुंचाएगा? ईस्ट इंडिया कंपनी के पास या
  137. 5:41कह दे सीधे शब्दों में अंग्रेजों के पास।
  138. 5:43तो जमींदार को बदले में क्या मिलेगा? कुछ
  139. 5:45ऐसी व्यवस्था थी कि जैसे मान लो एक बड़ा
  140. 5:49क्षेत्र है। एक बहुत बड़ा क्षेत्र है जहां
  141. 5:52पे किसान खेती करते हैं। यहां पर आपको
  142. 5:55किताब पुस्तक में एक शब्द मिलेगा जिसका
  143. 5:57नाम है रयत। तो रयत से तात्पर्य यहां पर
  144. 6:00किसान ही है। तो रयत से लगान वसूली
  145. 6:04जमींदार करेगा। मान लो एक यह क्षेत्र है
  146. 6:06और अंग्रेजों ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति
  147. 6:09इस क्षेत्र की जमींदारी ले सकता है।
  148. 6:14यह तय हो गया ₹1000 में। ₹1000 में
  149. 6:17जमींदारी ले सकता है। फिर यह तय होता था
  150. 6:20कि जितने इस क्षेत्र से लगान वसूल होगा।
  151. 6:23एक एग्जांपल ले रहे हैं। मान लो ₹1000
  152. 6:25वसूल होता है। तो इस ₹1000 में से 1/10
  153. 6:28हिस्सा तो जमींदार रखता था और 9/10 हिस्सा
  154. 6:32किसको दिया जाता था? कंपनी को पहुंचाया
  155. 6:34जाता था। मतलब यह मान सकते हैं कि 1000
  156. 6:36में से ₹100 तो किसके? जमींदार के। और
  157. 6:41बाकी ₹900 किसके? ईस्ट इंडिया कंपनी के
  158. 6:44पास जाएंगे। तो, यह ध्यान देने की बात है
  159. 6:46कि जमींदार एक बिचोलिया वर्ग था और उसे भी
  160. 6:49कुछ मुनाफे में से हिस्सा मिलता था। अब
  161. 6:52देखो
  162. 6:53कृषकों से लगान वसूली की जिम्मेदारी
  163. 6:56जमींदार की हो गई और जमींदार वहां पर
  164. 6:58पहुंचा देगा। तो कंपनी को अब कोई मतलब
  165. 7:00नहीं है कि जमींदार किसानों से कितना लगान
  166. 7:03ले रहा है। कंपनी की आय फिक्स हो गई।
  167. 7:06निश्चित हो गई कि हमें तो इतना चाहिए।
  168. 7:07चाहे किसान के खेत में कुछ पैदा ना हो।
  169. 7:09अकाल पड़ा हुआ है। तो भी कंपनी को ₹900
  170. 7:13जमींदार को देने होंगे। चाहे वह कृषक से
  171. 7:16वसूल करे या अपनी तरफ से दे। इस तरह से
  172. 7:18कंपनी की आय निश्चित हो गई। ₹900 तो
  173. 7:22इसीलिए इसको क्या कहा गया? स्थाई
  174. 7:24बंदोबस्त। जमींदार थे इसमें बिचोलिया
  175. 7:27इसलिए इसे जमींदारी व्यवस्था की गई कहा
  176. 7:29गया था और इस इसके साथ-साथ इसे इस्तमरारी
  177. 7:32व्यवस्था भी नाम दिया गया है। किसने लागू
  178. 7:35की? लॉर्ड कॉर्नवालिस ने 1793 में। इस
  179. 7:38सारी व्यवस्था के साथ-साथ एक और व्यवस्था
  180. 7:40लागू थी। अगर कोई जमींदार समय पर कंपनी को
  181. 7:43उसके लगान का हिस्सा नहीं पहुंचाएगा तो
  182. 7:46उसकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी। किसी
  183. 7:49दूसरे जमींदार को दे दी जाती थी। यह कैसे
  184. 7:52होता था? इसमें लिखा हुआ है कि एक
  185. 7:54सूर्यास्त कानून भी लागू होता था। यह इसको
  186. 7:56समझते हैं कि यह क्या है? सूर्यास्त कानून
  187. 7:59में तय होता था कि इतनी तारीख तक जैसे आज
  188. 8:02का दिन निश्चित कर दिया कि आज के दिन शाम
  189. 8:04तक सूर्यास्त तक जमींदार को अपनी जमींदारी
  190. 8:07मतलब जो लगान है जमींदारी का वह अंग्रेजों
  191. 8:10को जमा कराना पड़ेगा। अगर सूर्यास्त तक
  192. 8:13नहीं जमा कराता है तो उसकी जमींदारी क्या
  193. 8:15कर दी जाती थी? नीलाम किसी दूसरे जमींदार
  194. 8:18को दे दी जाती थी। तो समझ रहे हो ना
  195. 8:19सूर्यास्त कानून यह जमींदारों को बहुत
  196. 8:21ज्यादा परेशान करती थी। यहां पर कंपनी को
  197. 8:24जमींदारी व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता
  198. 8:26क्या पड़ी यह हम समझेंगे। तो सबसे पहले
  199. 8:28अपन ने समझा था कि कंपनी अपनी आय को
  200. 8:30निश्चित करना चाहती थी। कितना लगान वसूल
  201. 8:32होगा उसे वो निश्चित करना चाहती थी। तो
  202. 8:34पहला वो यह है कि अंग्रेज राजस्व से
  203. 8:37प्राप्त आय को निश्चित करना चाहते थे। तो
  204. 8:41यह पहला कारण था जो यह लागू की गई। दूसरी
  205. 8:44बात है कि जमींदारों के पास कृषि भूमि में
  206. 8:46सुधार करने के लिए कृषि सुधार के लिए
  207. 8:49पूंजी और उद्यम दोनों होंगे। तो कृषि
  208. 8:51सुधार दूसरा कारण था। अंग्रेज नहीं चाहते
  209. 8:53थे कि हम भारत में कृषि में इन्वेस्ट
  210. 8:54करें। कृषि भूमि को सुधारने में इन्वेस्ट
  211. 8:57करें। अब जमींदार भी वहां से कुछ हिस्सा
  212. 8:59ले रहा है। जैसे अपन ने देखा था कि हजार
  213. 9:01में से ₹100। जमींदार का और ₹900 कंपनी
  214. 9:04का। तो जमींदार चाहेगा कि कंपनी का तो
  215. 9:06फिक्स है मुझे ₹900 देना है। अगर थोड़ा
  216. 9:08भूमि में ज्यादा अच्छी पैदा होने लग जाएगी
  217. 9:11तो मेरी भी कुछ इनकम बढ़ जाएगी। इसलिए उस
  218. 9:14₹100 में से जो लगान के वसूल किए जमींदार
  219. 9:17ने कुछ हिस्सा वो चाहता तो वहां लगा सकता
  220. 9:19था कृषि भूमि में ताकि वहां कृषि पैदावार
  221. 9:23बढ़े कृषि का विकास हो और कृषि भूमि में
  222. 9:26इन्वेस्ट करके। तो ये चाहते थे अंग्रेज
  223. 9:29दूसरा कारण ये था कि जमींदार ये सारी
  224. 9:31जिम्मेदारी ले ले कि वो कृषि भूमि में
  225. 9:32सुधार करेगा। अगला है जमींदार वर्ग कंपनी
  226. 9:35के प्रति वफादार बना रहेगा। एक नया वर्ग
  227. 9:37तैयार हो जाएगा जमींदार वर्ग और वो कंपनी
  228. 9:40के प्रति वफादार बना रहेगा। तो ये सारे
  229. 9:42कारण थे कि ये व्यवस्था यहां पर लागू की
  230. 9:44गई। फिर उसके बाद देखते हैं कि 1793 में
  231. 9:48इस्तमरारी बंदोबस्त लागू लागू होने के बाद
  232. 9:51हुआ क्या कि जमींदार वहां के भूस्वामी
  233. 9:54नहीं रहे। बल्कि क्या रह गए?
  234. 9:57राजस्व समाहर्ता मात्र रह गए। मतलब एक
  235. 10:00क्षेत्र जमींदारों को जो दिया गया था उस
  236. 10:02क्षेत्र में अब जमींदारों को केवल लगान
  237. 10:06वसूल करना है और कहां पहुंचा देना है
  238. 10:08अंग्रेजों के पास पहुंचा देना है वो
  239. 10:10जमींदारी या वो भूभाग
  240. 10:13उसका नहीं रहा वो वहां का स्वामी नहीं रहा
  241. 10:15अब क्योंकि अगर वह नहीं जमा करेगा लगान तो
  242. 10:18सूर्यास्त कानून के तहत क्या कर दी जाएगी
  243. 10:20उसकी जमींदारी नीलाम कर दी जाएगी तो केवल
  244. 10:23स्वामी ना रहकर देखते हैं कि भी भूस्वामी
  245. 10:26नहीं रहे बल्कि क्या रह गए राजस्व
  246. 10:28समाहर्ता क्योंकि कि सूर्यास्त कानून के
  247. 10:30तहत उनकी जमींदारी नीलाम भी की जा सकती
  248. 10:33थी। आगे देखते हैं तो जमींदारों की असफलता
  249. 10:36के कारण यह व्यवस्था जो जमींदारी व्यवस्था
  250. 10:38लागू की गई थी बहुत ज्यादा सफल नहीं रही।
  251. 10:40बहुत सारी खामियां थी। तो क्या थी वो हम
  252. 10:43देखते हैं कि जमींदारों को क्या दिक्कत
  253. 10:44इसमें हुई। पहला है कि प्रारंभिक मांगे
  254. 10:47बहुत ऊंची थी।
  255. 10:50कंपनी के द्वारा जो शुरू में निश्चित की
  256. 10:52गई थी। बोली लगाई गई थी। किसी एक क्षेत्र
  257. 10:54की बोली लगाई जाती थी। कह दिया कि इस
  258. 10:56क्षेत्र से ₹1000 से बोली शुरू हुई तो कोई
  259. 10:59भी व्यक्ति आता था कि मैं ₹1000 में यह
  260. 11:01जमींदारी खरीदना चाहता हूं। तो खरीद लेता
  261. 11:04था। अब 1000 में से 900 उसे अंग्रेजों को
  262. 11:06पहुंचाने होते थे। तो ये जो बोली शुरू ही
  263. 11:08हुई थी ये बहुत ऊंची थी। ये सारी मांगे
  264. 11:11बहुत ऊंची थी। इस जमींदार इतना पहुंचा भी
  265. 11:13नहीं पाता था और फिर बाद में उसकी
  266. 11:15जमींदारी नीलाम करनी पड़ती थी। तो पहला हो
  267. 11:17गया। दूसरी परेशानी क्या थी कि यह ऊंची
  268. 11:20मांगे 1790 के दशक में लागू की गई थी जब
  269. 11:23कृषि की उपज की कीमतें नीची थी। खेतों में
  270. 11:25इतना पैदा ही नहीं होता था या जितना पैदा
  271. 11:27हुआ खेतों में जब उसको बाजार में बेका
  272. 11:30जाता था तो उतनी कीमत नहीं मिलती थी कि
  273. 11:32लगान पूरा दिया जा सके तो एक यह भी समस्या
  274. 11:36थी कि जिस समय यह लागू की गई थी उस समय
  275. 11:38उपज की कीमतें बहुत नीची थी ये एक परेशानी
  276. 11:42आई। अगला देखें। अगला है कि राजस्व असमान
  277. 11:46था। यह कोई व्यवस्था नहीं की थी कंपनी ने
  278. 11:49कि किसी वर्ष अकाल पड़ गया। बारिश नहीं
  279. 11:51हुई। खेत में कुछ पैदा नहीं हुआ किसान के
  280. 11:54में तो वह लगान कहां से देगा? यह कोई
  281. 11:56व्यवस्था नहीं की गई थी। कंपनी तो कहती थी
  282. 11:58चाहे अकाल पड़ो चाहे पैदा हो ना हो चाहे
  283. 12:01फसल खराब हो लेकिन जमींदार कंपनी को उसका
  284. 12:04निश्चित लगान प्रतिवर्ष देगा ही देगा। तो
  285. 12:07यह क्या हो गया कि राजस्व असमान था। आगे
  286. 12:10बात करें कि प्रारंभ में जमींदार की शक्ति
  287. 12:13को रयत से राजस्व इकट्ठा करने और अपनी
  288. 12:15जमींदारी का प्रबंध करने तक ही सीमित कर
  289. 12:18दिया गया। स्थानीय न्याय और पुलिस
  290. 12:20व्यवस्था की शक्ति उससे छीन ली गई। इससे
  291. 12:23क्या हुआ कि जमींदार जो है वह अपने
  292. 12:26क्षेत्र में केवल अब राजस्व वसूल करेगा और
  293. 12:29जमींदारी को संभालेगा। अगर कोई रयत कोई
  294. 12:32किसान समय पर लगान नहीं दे रहा है उसको तो
  295. 12:35फिर वह क्या कर सकता है? मुकदमा करेगा
  296. 12:37कलेक्टर साहब के पास जाके और वो मुकदमे
  297. 12:39वर्षों वर्ष चलते रहते थे। कुछ फैसला
  298. 12:42उसमें हो नहीं पाता था। अगर ये न्याय
  299. 12:44व्यवस्था जमींदार के पास होती तो वो कुछ
  300. 12:46अच्छा फैसला मतलब अच्छा काम वहां पे कर
  301. 12:48सकता था। तो ये सारी समस्याएं किस में थी?
  302. 12:51जमींदारी व्यवस्था में ये सारी समस्याएं
  303. 12:53थी। एक और जो नई समस्या थी वो था जोतदार।
  304. 12:58जोतदारों का उदय। ये जोतदार होते कौन थे?
  305. 13:00तो सीधी सी बात है धनी किसानों का एक
  306. 13:03समूह। एक जमींदारी का एक क्षेत्र होता था।
  307. 13:06एक जमींदार के जमींदारी होती थी। उसमें
  308. 13:08बहुत सारे किसान होते थे। कुछ अमीर किसान
  309. 13:10होते थे। वह जो अमीर किसान होते थे जिनके
  310. 13:14पास ज्यादा खेत होते थे ज्यादा पैदा करते
  311. 13:16थे वह गरीब किसानों की फसलें खरीदते थे
  312. 13:20उनको बदले में पैसा देते थे अगर किसान को
  313. 13:23कभी वर्ष के बीच में पैसों की जरूरत हो तो
  314. 13:25वह जोतदार से ले लेता था मतलब यहां हम इस
  315. 13:28चित्र में समझें कि रयत मतलब किसान और साथ
  316. 13:32में जोतदार इनके आपसी संबंध होते थे और ये
  317. 13:36दोनों ही लगान देते थे किसको जमींदार को
  318. 13:38दोनों के दोनों और फिर यह लगान कहां पहुंच
  319. 13:41जाता था। कंपनी के पास यह लगान पहुंचा
  320. 13:43दिया जाता था। तो जोतदार क्या हो गए? सीधी
  321. 13:46सी बात है। धनी किसानों का समूह और यह
  322. 13:49अक्सर सूबेदार से इनकी रंजिश होती थी।
  323. 13:52बनती नहीं थी। उसके खिलाफ होते थे। यह खुद
  324. 13:55सूबेदार को समय पर लगान नहीं देते थे।
  325. 13:58जमींदार को सॉरी जमींदार को समय पर लगान
  326. 14:00नहीं देते थे। और वह लगान फिर जमींदार
  327. 14:03कंपनी को नहीं पहुंचाएगा तो क्या हो
  328. 14:05जाएगा? नीलामी। और इससे इनको अक्सर खुशी
  329. 14:07होती थी। कभी-कभी तो जोतदार इन रयतों को
  330. 14:10भी बोलता था कि समय पर लगान मत पहुंचाओ और
  331. 14:13नहीं पहुंचाया जाता था। आगे देखें कि
  332. 14:16सिकमी रयत क्या होते थे? तो सिकमी रयत
  333. 14:19होते थे एक तरह से वो किसान जिनके पास खुद
  334. 14:23की भूमि नहीं होती थी। वो या तो जोतदारों
  335. 14:25के भूमि लेकर किराए पर खेती करता था या
  336. 14:28फिर इन रयतों से भूमि लेकर खेती करता था।
  337. 14:30तो समझ गए जोतदार भी एक बड़ी समस्या थी।
  338. 14:34इस सारी व्यवस्था में जो स्थाई बंदोबस्त
  339. 14:36था इसमें कि यह जोतदार हैं, धनी किसान थे
  340. 14:39और जमींदार को समय पर लगान नहीं देते थे।
  341. 14:43जमींदारों की ओर से प्रतिरोध। अब जब
  342. 14:45जमींदार की जमींदारी नीलाम की जाएगी तो
  343. 14:47इतनी आसानी से तो वह होने नहीं देंगे
  344. 14:49जमींदारी को नीलामी। वह भी कुछ हथकंडे
  345. 14:51अपनाते थे जब नीलामी होती थी तो उससे बचने
  346. 14:54के लिए। अब वह लोग क्या हथकंडे अपनाते थे?
  347. 14:57उसको हम यहां पर थोड़ा सा समझेंगे। पहले
  348. 15:00पढ़ते हैं कि जमींदारी या भूसंपदा की
  349. 15:02संभावित नीलामी की समस्या से निपटने के
  350. 15:05लिए कई रणनीतियां बनाई जिम्मे जमींदारों
  351. 15:08के द्वारा और वह पहली क्या है? फर्जी
  352. 15:10बिक्री। यह फर्जी बिक्री अपनी जो पाठ्य
  353. 15:14पुस्तक है उसकी कहानी यहीं से शुरू होती
  354. 15:16है कि एक जमींदारी थी बर्धवान।
  355. 15:24एक जमींदारी है। एक क्षेत्र है बर्धवान और
  356. 15:28यहां का जो
  357. 15:30जमींदार है। वह कंपनी को समय पर लगान नहीं
  358. 15:33दे रहा था। अब उसकी नीलामी की बारी आई कि
  359. 15:36सूर्यास्त कानून के तहत इसकी जमींदारी
  360. 15:38छीनी जाएगी। किसी दूसरे को दी जाएगी। बोली
  361. 15:40लगाई जाएगी, नीलाम की जाएगी। तो यहां के
  362. 15:43वर्धमान के जमींदार साहब ने क्या किया कि
  363. 15:45अपनी जमींदारी का कुछ हिस्सा कुछ क्षेत्र
  364. 15:48तो किसके नाम कर दिया? अपनी माता के नाम
  365. 15:50कर दिया।
  366. 15:54कंपनी ने यह रूल बनाया हुआ था। था। यह
  367. 15:56नियम बनाया हुआ था कि महिलाओं की जमीन की
  368. 15:58नीलामी नहीं होगी। इसलिए माता को यह दे
  369. 16:01दिया गया। तो इस जमीन की नीलामी नहीं हुई।
  370. 16:04बाकी की जब नीलामी की गई तो जब नीलामी हो
  371. 16:07रही थी, बोली लग रही थी तो यहां पर कुछ
  372. 16:09खरीदार आते थे।
  373. 16:18तो जो खरीदार आए, वह फर्जी खरीदार थे। वह
  374. 16:21कौन थे? वो जो वर्धमान का जमींदार था उसी
  375. 16:25के भेजे हुए लोग थे और इस बोली में
  376. 16:27इन्होंने सबसे ऊंची बोली लगाकर खरीद लिया
  377. 16:31इसको यहां की जमींदारी को उसी के आदमियों
  378. 16:34ने बहुत ऊंची बोली लगा के खरीद लिया जैसे
  379. 16:37कह दिया कि हम भाई सबसे ज्यादा पैसे देने
  380. 16:39को तैयार हो गए ठीक है सारे डॉक्यूमेंट्स
  381. 16:42तैयार हो गए कागज बना दिए कंपनी ने कि नए
  382. 16:44सूबेदार नए जमींदार अब यहां के कौन होंगे
  383. 16:46वो होंगे वर्धमान के नए खरीदार लेकिन समय
  384. 16:50पर यह लोग जमा नहीं कराते थे कंपनी को
  385. 16:52लगान और जब समय पर जमा नहीं कराया जाता था
  386. 16:55तो फिर दोबारा से नीलामी होती थी। दोबारा
  387. 16:58फिर फर्जी खरीदार आते थे और यह प्रक्रिया
  388. 17:00बार-बार दोहराई जाती थी और यह नीलामी
  389. 17:03बार-बार करते हुए कंपनी के अधिकारी भी थक
  390. 17:06जाते थे। खरीदार भी वहां आने से मना कर
  391. 17:09देते थे। वह भी थक जाते थे और इस तरह बहुत
  392. 17:11ही सस्ते दामों में बहुत ही नीची कीमतों
  393. 17:14पर यह पूरी की पूरी जमींदारी वापस से
  394. 17:16पुराने जमींदार को दे दी जाती थी। बर्धवान
  395. 17:18के जमींदार को वापस देनी पड़ी। तो पहला है
  396. 17:21फर्जी बिक्री। अपनी जमींदारी को नीलाम
  397. 17:24होने के लिए जो हथकंडे अपनाए, जो
  398. 17:26रणनीतियां बनाई, उनमें पहली क्या है?
  399. 17:28फर्जी बिक्री। अगली देखते हैं। नए जमींदार
  400. 17:31को जमीन का कब्जा नहीं देते थे। जो पुराने
  401. 17:33जमींदार हैं, वह अपने क्षेत्र में अपना
  402. 17:35दबदबा रखते थे। नया जमींदार जब वहां पर
  403. 17:38आता था, तो वो उसको कब्जा देने से मना कर
  404. 17:40देता, इनके पास लठैत होते थे। वो उनको
  405. 17:43भेजकर मारपीट करते थे, और उनको उस जमीन से
  406. 17:46निकाल देते थे। तो यह एक हथकंडा यह भी है।
  407. 17:48इसके अलावा तीसरा है कि जो पुराने रयत
  408. 17:51होते थे उस क्षेत्र में रहने वाले किसान
  409. 17:53थे वो नए जमींदार का अक्सर विरोध करते थे।
  410. 17:56उनका पुराने जमींदार से कुछ अच्छा संबंध
  411. 17:58होता था इसलिए वो नए जमींदार को स्वीकार
  412. 18:00नहीं करते थे और इसलिए नीलामी अच्छे से
  413. 18:03नहीं हो पाती थी। तो यह हथकंडे इन्होंने
  414. 18:05अपनाए थे जमींदारों ने अपनी जमींदारी को
  415. 18:07नीलाम होने से बचाने के लिए। आगे देखें कि
  416. 18:1119वीं शताब्दी के प्रारंभ में मंदी की
  417. 18:13स्थिति समाप्त हो गई। मतलब 19वीं शताब्दी
  418. 18:17तक शुरू होने तक जो जमींदार अपनी जमींदारी
  419. 18:20को बचा के रखे फिर उनको कोई आगे दिक्कत
  420. 18:22नहीं आई। क्योंकि बाद में जमींदारों ने
  421. 18:25अपनी सत्ता सुदृढ़ कर ली। हुआ क्या था कि
  422. 18:2819वीं शताब्दी के बाद कृषि से जो फसल पैदा
  423. 18:31होती थी उनकी कीमतें बाजार में अच्छी मिल
  424. 18:33जाती थी। तो लगान अच्छा वसूल हो जाता था।
  425. 18:36तो किसान लगान समय पर देता था और जमींदार
  426. 18:39भी उसको समय पर पहुंचा देता था कंपनी के
  427. 18:41पास। तो उसके बाद फिर जमींदारों की नीलामी
  428. 18:44की समस्या बहुत ज्यादा नहीं रही और
  429. 18:46उन्होंने अपनी स्थिति सुदृढ़ कर ली। ठीक
  430. 18:48है बच्चों? तो इस कक्षा में आप मिले हैं
  431. 18:50बंगाल के जमींदारों से। अगली कक्षा में हम
  432. 18:53देखेंगे कुछ और विषय वह पढ़ेंगे। ठीक है?
  433. 18:56धन्यवाद।

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This page contains the full transcript of Class 12 History Chapter 10 | NCERT | CBSE | इतिहास। आधुनिक भारत का इतिहास । Part - 1 by Ekaksha, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,398 words across 433 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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