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Class 12 History Chapter 1 | History Chapter 11 Class 12 | विद्रोही और राज | Part - 1 — Transcript

by Ekaksha · 5,579 words · 705 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00तो बच्चों हम पढ़ रहे थे 12th क्लास की
  2. 0:03इतिहास की पाठ्य पुस्तक का भाग तीन और भाग
  3. 0:06तीन का हमने पहला पाठ पूरा कर लिया था
  4. 0:08पिछली कक्षाओं में जिसका नाम था
  5. 0:10उपनिवेशवाद और देहात तो उसमें हमने समझा
  6. 0:13था कि औपनिवेशिक शासन किस प्रकार से यहां
  7. 0:17पर चल रहा था और किस प्रकार से उन्होंने
  8. 0:19बंगाल के जमींदारी व्यवस्था लागू की थी और
  9. 0:22उन्होंने जनजाति लोग जो आदिवासी लोग जो
  10. 0:26रहते थे पहाड़ी क्षेत्रों में संथाल और
  11. 0:28पहाड़ियां तो बच्चों कहां कहां रहते थे
  12. 0:30वो? वो रहते थे राजमहल की पहाड़ियों में।
  13. 0:32उनके जीवन को कैसे प्रभावित किया और साथ
  14. 0:34ही उसी कक्षा में हमने यह भी पढ़ा था कि
  15. 0:36दक्कन में कौन सी नई भूराजस्व व्यवस्था
  16. 0:39उनके द्वारा लागू की गई थी। तो आज हम अगला
  17. 0:42पाठ का अध्ययन करेंगे और अगले पाठ का नाम
  18. 0:44जैसा कि आप देख रहे हैं विद्रोही और राज्य
  19. 0:47और इसका जो पहला सबसे पहले हम परिचय
  20. 0:50लेंगे। इसमें मुख्यत 1857 की क्रांति के
  21. 0:52बारे में है। तो पहला भाग इसका रहेगा 1857
  22. 0:56का विद्रोह और परिचय। तो ये हम आज पढ़ने
  23. 0:59जा रहे हैं। तो सबसे पहले समझेंगे कि 1857
  24. 1:01की क्रांति थी क्या? तो 1857 की जो
  25. 1:05क्रांति थी उपनिवेशिक शासन ने भारत में
  26. 1:09अपना काम शुरू कर दिया था प्लासी के युद्ध
  27. 1:11के बाद से 1757 से और फिर 100 सालों तक यह
  28. 1:15उनका शासन यहां पर भारत में चलता रहा।
  29. 1:17शोषणपूर्ण शासन था। कैसे उन्होंने भारत की
  30. 1:20अर्थव्यवस्था को लूटा था। तो वह काम 100
  31. 1:22सालों तक चलता रहा। तो देखते हैं कैसे
  32. 1:25देखिए ब्रिटिश शासन का प्रारंभ 1757 में
  33. 1:29प्लासी के युद्ध के बाद शुरू होता है।
  34. 1:31हमने पढ़ा था ना प्लासी का युद्ध कंपनी ने
  35. 1:34ईस्ट इंडिया कंपनी ने हरा दिया था बंगाल
  36. 1:36के नवाब सिराजुद्दौला को। कौन से युद्ध
  37. 1:38में? प्लासी के युद्ध में। तो प्लासी के
  38. 1:41युद्ध के बाद बंगाल पे उन्होंने अपना
  39. 1:42औपनिवेशिक शासन शुरू किया था। मतलब भारत
  40. 1:44में औपनिवेशिक शासन की शुरुआत कब से मानी
  41. 1:46जाती है? 1757 से। और फिर 100 साल हो जाते
  42. 1:50हैं इसको कब? 1857 में। तो 100 वर्ष हो गए
  43. 1:54थे और इस 100 वर्षों में औपनिवेशिक शासन
  44. 1:57ने जिस तरह भारत के संसाधनों का अपने हित
  45. 1:59में प्रयोग किया जिस तरह भारत भारत का
  46. 2:02दोहन किया उन्होंने उन सब के कारण ही फिर
  47. 2:05100 साल बाद हम उससे परेशान हो गए
  48. 2:08औपनिवेशिक शासन के शोषणपूर्ण शासन से उनके
  49. 2:10तरीके से परेशान हो गए और उन्होंने एक
  50. 2:13विद्रोह किया अंग्रेजों के खिलाफ ऐसे
  51. 2:15विद्रोह पहले भी होते रहे इन 100 वर्षों
  52. 2:18के दौरान कब से कब तक 1757 से 1857 के
  53. 2:21दौरान 100 सालों में अनेक छोटे-मोटे
  54. 2:23विद्रोह हुए, क्षेत्रीय विद्रोह है। लेकिन
  55. 2:26एक बड़ा विद्रोह जो हुआ वह 100 साल बाद
  56. 2:28हुआ। और कब हुआ? 1757 में। सॉरी 18 57
  57. 2:34में। तो एक बड़ा विद्रोह जो हुआ वो कब
  58. 2:37हुआ? 1857 में। तो 1857 में क्यों हुआ? तो
  59. 2:40देखिए 1857 में विदेशी शासन के विरुद्ध
  60. 2:44पहला बड़ा आंदोलन भारतीयों के द्वारा किया
  61. 2:47गया। क्यों भाई? पहले क्यों नहीं किया?
  62. 2:49100 साल बाद ही क्यों किया? तो देखते हैं
  63. 2:51आगे कारण कि पिछले 100 वर्षों में कंपनी
  64. 2:55के द्वारा जो अन्यायपूर्ण शासन भारतीयों
  65. 2:57पर किया गया वो सभी इस विद्रोह के कारण
  66. 3:01थे। 100 सालों में जिस तरह का शासन
  67. 3:03इन्होंने किया भारत का जिस तरह अत्याचार
  68. 3:05किए भारतीयों के ऊपर भारतीयों का शोषण
  69. 3:08किया। देखा था हमने जमींदारों की
  70. 3:10जमींदारियां छीन ली जाती थी। जनजातीय
  71. 3:12लोगों को भी अधिक राजस्व वसूल करने के लिए
  72. 3:15दबाव डाला जाता था। पे दक्कन के किसानों
  73. 3:17पर किस तरह नई भूराजस्व व्यवस्था थोप कर
  74. 3:20अधिक से अधिक लगान वसूल किया जा रहा था।
  75. 3:22तो देखिए सबसे पहले हम देख रहे हैं 1857
  76. 3:25की क्रांति के कुछ कारण क्योंकि इसको
  77. 3:27समझने के लिए कि यह विद्रोह क्यों हुआ
  78. 3:29सबसे पहले इसके कारणों को समझना जरूरी है।
  79. 3:31तो देखिए राजनीतिक व प्रशासनिक कारण बहुत
  80. 3:35सारे थे। भारतीय कई चीजों से नाराज थे।
  81. 3:37कुछ धार्मिक कारण थे, कुछ राजनीतिक कारण
  82. 3:40थे, कुछ तात्कालिक कारण थे, कुछ सैनिक
  83. 3:42कारण थे। तो पहला हम कौन सा ले रहे हैं?
  84. 3:44राजनीतिक एवं प्रशासनिक कारण। तो
  85. 3:46अंग्रेजों की साम्राज्यवादी नीति
  86. 3:49साम्राज्यवादी मतलब वह ज्यादा से ज्यादा
  87. 3:52भारत के क्षेत्र पर अपना अधिकार करना
  88. 3:54चाहते थे। अपने साम्राज्य का विस्तार करना
  89. 3:56चाहते थे। कहां से शुरू हुआ औपनेशिक शासन
  90. 3:59भारत में? बंगाल से। अब बंगाल के बाद वह
  91. 4:03अन्य क्षेत्रों पर भी अपना शासन स्थापित
  92. 4:06करना चाहते थे। इसी को क्या कहेंगे उनकी?
  93. 4:08साम्राज्यवादी नीति। और साम्राज्यवादी
  94. 4:10नीति के तहत उन्होंने दो तरीके अपनाए थे।
  95. 4:13एक गवर्नर जनरल था लॉर्ड वेलेजली और लॉर्ड
  96. 4:16वेलेजली एक नया तरीका जो लेके आया था अपने
  97. 4:18साम्राज्यवाद का विस्तार करने के लिए वो
  98. 4:21थी सहायक संधि प्रणाली। पहले इसको समझते
  99. 4:24हैं कि सहायक संधि क्या थी? तो सहायक संधि
  100. 4:27को समझने के लिए थोड़ा सा हमें यहां पर
  101. 4:29ध्यान देना होगा कि यह सहायक संधि प्रणाली
  102. 4:33थी
  103. 4:35क्या? तो देखिए सहायक संधि प्रणाली क्या
  104. 4:38थी? कि जैसे एक तरफ तो कंपनी है मतलब
  105. 4:41अंग्रेजों का राज्य है और सहायक संधि
  106. 4:44स्वीकार करने वाली पहली भारतीय रियासत
  107. 4:46जिसका क्या नाम
  108. 4:50था? हैदराबाद। तो हैदराबाद सबसे पहले
  109. 4:54इन्होंने अंग्रेजों से सहायक संधि स्वीकार
  110. 4:56की थी। इसके तहत होता क्या था? यह होता था
  111. 4:58कि हैदराबाद की किसी भी बाहरी शक्ति से
  112. 5:01सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन ले रही है?
  113. 5:03कंपनी ले रही है। कंपनी मदद करेगी। कोई भी
  114. 5:06अगर बाहरी शक्ति हैदराबाद रियासत के ऊपर
  115. 5:08आक्रमण करती है जैसे मराठा आक्रमण करते थे
  116. 5:11मैसूर में टीपू सुल्तान था वह आक्रमण करता
  117. 5:13था तो अब कोई भी मराठा वगैरह इन पे हमला
  118. 5:16करेंगे तो इसकी सुरक्षा की गारंटी कौन
  119. 5:18लेगी कंपनी इस ये संधि होती थी इसके तहत
  120. 5:21और क्या बातें तय होती थी अब ध्यान देना
  121. 5:23थोड़ा सा क्यों सहायक संधि से भारतीय
  122. 5:25रियासतें नाराज थी क्यों भारतीय जनता इस
  123. 5:28प्रणाली से बड़ी नाराज हुई क्यों हुई
  124. 5:30समझेंगे तो देखिए हैदराबाद से जब सहायक
  125. 5:33संधि की जाएगी तो एक ब्रिट ब्रिटिश टुकड़ी
  126. 5:36एक अंग्रेज सैनिक टुकड़ी हैदराबाद रियासत
  127. 5:39में रखी जाएगी उसकी सुरक्षा के लिए और उस
  128. 5:41अंग्रेज टुकड़ी का खर्चा भी कौन देगा?
  129. 5:44उनकी तनख्वाह वगैरह का जो खर्चा होगा वह
  130. 5:46भी कौन देगा? हैदराबाद के निजाम के द्वारा
  131. 5:49ही दिया जाएगा। यह भी तय होता था कि केवल
  132. 5:52सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की रहेगी।
  133. 5:55आंतरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं
  134. 5:57करेगा। हैदराबाद रियासत के आंतरिक मामलों
  135. 6:00में अंग्रेज किसी तरह के हस्तक्षेप नहीं
  136. 6:02करेंगे। लेकिन बाद में उन्होंने हस्तक्षेप
  137. 6:04भी शुरू कर दिए और धीरे-धीरे हैदराबाद
  138. 6:07रियासत के हर क्षेत्र में अंग्रेजों ने
  139. 6:09अपना वर्चस्व स्थापित करना शुरू कर दिया।
  140. 6:11प्रशासन में भी अपनी हिस्सेदारी यहां पर
  141. 6:13थोप दी गई। तो इस तरह हैदराबाद पर पूरी
  142. 6:17तरह किसका नियंत्रण हो गया था? अंग्रेजों
  143. 6:19का। इससे यहां के निजाम भी नाराज थे। और
  144. 6:22क्योंकि अंग्रेज तो चाहते थे कि ज्यादा से
  145. 6:24ज्यादा राजस्व वसूली हो। तो किसानों पर
  146. 6:27फिर ज्यादा राजस्व वसूली के लिए दबाव डाला
  147. 6:30गया। हैदराबाद रियासत की जनता के ऊपर रयत
  148. 6:33के ऊपर तो फिर जनता भी नाराज होगी क्योंकि
  149. 6:36वह दबाव अंग्रेज डाल रहे हैं। तो यह सहायक
  150. 6:38संधि प्रणाली तो ध्यान रखना पहली बात तो
  151. 6:40कि सहायक संधि प्रणाली कौन लेके आया था?
  152. 6:43लॉर्ड वेलेजली जो गवर्नर जनरल था और सहायक
  153. 6:46संधि स्वीकार करने वाली पहली भारतीय
  154. 6:48रियासत कौन सी हो गई? हैदराबाद। तो और
  155. 6:51देखते हैं हम आगे। आगे क्या देखेंगे कि एक
  156. 6:53गवर्नर जनरल है लॉर्ड डलहौजी। लॉर्ड
  157. 6:56डलहौजी के द्वारा क्या लागू की गई थी? गोद
  158. 6:58निषेध प्रथा सहायक संधि हो जाने के बाद
  159. 7:03काफी सालों बाद फिर एक दूसरे गवर्नर जनरल
  160. 7:05आते हैं जिसके नाम थे लॉर्ड डलहौजी। अब वो
  161. 7:08देख रहे हैं कि सहायक संधि के बाद इन
  162. 7:10रियासतों पर लगभग पूरा नियंत्रण ब्रिटिश
  163. 7:13सरकार का है। अंग्रेजों का है। तो फिर
  164. 7:15क्यों ना इन रियासतों को छीन लिया जाए। इन
  165. 7:17नाम मात्र के शासकों को भी हटा दिया जाए।
  166. 7:20तो एक नई प्रथा लागू की थी जिसे राज्य
  167. 7:23हड़प नीति भी कहते हैं। लॉर्ड डलहौजी की
  168. 7:25राज्य
  169. 7:29हड़प नीति यह भी इसको नाम दिया जाता है और
  170. 7:33इसमें एक चीज होती थी गोद निषेध प्रथा अगर
  171. 7:35कोई राजा है किसी रियासत का जैसे हम एक
  172. 7:38उदाहरण लेते हैं झांसी का आपने खूब नाम
  173. 7:40सुना होगा झांसी की रानी लक्ष्मीबाई तो
  174. 7:43झांसी के राजा कौन थे गंगाधर राव उन्होंने
  175. 7:46अंग्रेजों से सहायक संधि कर रखी थी और
  176. 7:48गंगाधर राव की मृत्यु हो गई थी वहां के
  177. 7:50राजा की और जिस समय मृत्यु हुई उस समय
  178. 7:53उनका कोई जीवित उत्तराधिकारी नहीं था कोई
  179. 7:55लड़का नहीं था। अब क्या करेगी जो रानी थी
  180. 7:59लक्ष्मीबाई उन्होंने किसी लड़के को गोद
  181. 8:01लिया और उसको राजा बनाया तो कंपनी ने उस
  182. 8:04नए राजा को मान्यता नहीं दी क्योंकि एक
  183. 8:07नियम लागू कर दिया गोद निषेध प्रथा गोद
  184. 8:10लिए हुए पुत्रों को उत्तराधिकारियों को
  185. 8:12मान्यता नहीं दी जाएगी और चकि उस रियासत
  186. 8:15में अब कोई उत्तराधिकारी नहीं है इसलिए उस
  187. 8:17रियासत पर कौन कब्जा कर लेगा अंग्रेज
  188. 8:20द्वारा कब्जा कर लिया जाएगा यही क्या थी
  189. 8:22गोद निषेध प्रथा ध्यान रखना कि इस गोद
  190. 8:26निषेध प्रथा के तहत हड़पी गई प्रथम रियासत
  191. 8:29कौन सी थी? तो यह थी
  192. 8:32सतारा। प्रथम भारतीय रियासत जो इस नीति के
  193. 8:35तहत हड़पी गई थी, वह कौन सी थी? सतारा। और
  194. 8:38कौन-कौन सी थी? झांसी भी इसी में आएगी।
  195. 8:41इसी के तहत हड़पी थी लॉर्ड डलहौजी ने।
  196. 8:44नागपुर भी हड़पी
  197. 8:47थी। बाघाट, उदयपुर, जयपुर, सभललपुर यह सब
  198. 8:51नाम है जो किस नीति के तहत लॉर्ड डलहौजी
  199. 8:54द्वारा हड़प लिए गए थे? गोद निषेध प्रथा
  200. 8:56के तहत क्योंकि लॉर्ड डलहौजी तो राज्यों
  201. 8:59को हड़पना चाहते थे। कोई भी नीति लागू कर
  202. 9:01देते थे। इसीलिए इसे राज्य हड़प नीति कहा।
  203. 9:04एक रियासत थी अवध। हम पढ़ेंगे इसी चैप्टर
  204. 9:09में कि अवध की क्या कहानी थी? अवध रियासत
  205. 9:12होती थी। वहां के नवाब के पुत्र भी था।
  206. 9:14उसको नहीं हड़प सकते थे। गोद निषेध प्रथा
  207. 9:16वहां लागू नहीं होती थी। लेकिन लॉर्ड
  208. 9:18डहौजी चाहते थे कि मैं इसे हड़पू। बड़ी
  209. 9:20दौलतमंद रियासत है। अच्छी पैदावार होती
  210. 9:23है। जमीन अच्छी है और पैसे अच्छे हैं उस
  211. 9:24रियासत में। इसलिए हड़पना चाहता था लॉर्ड
  212. 9:27डलहौजी अवध को। तो एक नया ही नियम लगा
  213. 9:30दिया और वो कौन सा था? वो था
  214. 9:35कुशासन। कुशासन का आरोप लगाकर लॉर्ड
  215. 9:39डलहौजी द्वारा किस रियासत को हड़पा गया
  216. 9:41था? अवध को। ठीक है? इसको हम आगे भी
  217. 9:44समझेंगे। लेकिन यहां पर आपको यह जरूर
  218. 9:46ध्यान रखना चाहिए कि कुशासन का आरोप लगाकर
  219. 9:48हड़पी गई एकमात्र रियासत कौन सी थी? अवध
  220. 9:52और इसको लॉर्ड डलहौजी ने कब हड़पा था?
  221. 9:541856 ईस्वी में इसको हड़प लिया था। ठीक
  222. 9:57है? तो ये सारे एक-एक पॉइंट है। जो
  223. 9:59छोटे-छोटे प्रश्न बनते हैं वो यहीं से
  224. 10:01बनते हैं। और देखते हैं कारणों में
  225. 10:04राजनीतिक कारण अपुन पढ़ रहे हैं। भारतीय
  226. 10:06जमींदारों के विरुद्ध अपमानजनक व्यवहार
  227. 10:09किया जाता था। पढ़ी थी ना हमने बंगाल की
  228. 10:11जमींदारी व्यवस्था। किसके द्वारा लागू की
  229. 10:14गई थी? गवर्नर जनरल लॉर्ड कॉर्नवालिस के
  230. 10:16द्वारा वह लागू की गई थी। 1793 में।
  231. 10:19जमींदारी व्यवस्था में एक नियम यह भी था
  232. 10:21कि सूर्यास्त कानून अगर कोई जमींदार समय
  233. 10:24पर अपना लगान जमा नहीं कराता था।
  234. 10:26सूर्यास्त कानून के तहत उसकी जमींदारी
  235. 10:28किसी दूसरे जमींदार को नीलाम कर दी जाती
  236. 10:30थी। और जमींदार फिर अपनी जमींदारी को
  237. 10:32बचाने के लिए विरोध करते थे। और कई सारी
  238. 10:34नीतियां अपनाई थी। पढ़ी थी वह भी हमने।
  239. 10:36कौन-कौन सी नीतियां थी? जिनमें से एक थी
  240. 10:39फर्जी बिक्री की पद्धति। देखिए एक बार।
  241. 10:42तो जमींदारों के साथ अपमानजनक व्यवहार
  242. 10:45होता था। जमींदार तो नाराज थे ही और जनता
  243. 10:48भी जमींदारों को अपना अन्नदाता मानती थी।
  244. 10:51तो जनता भी फिर जमींदारों के साथ-साथ
  245. 10:53अंग्रेजों से बड़ी नाराज हो जाती थी। आगे
  246. 10:55देखो मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के प्रति
  247. 10:58अपमानजनक व्यवहार किया गया और इससे क्या
  248. 11:01हुआ? भारतीय मुसलमानों में बड़ी नाराजगी
  249. 11:04थी। यह क्या है? कि अंतिम मुगल बादशाह था
  250. 11:07बहादुर शाह जफर और बहादुर शाह जफर दिल्ली
  251. 11:10में अपना शासन कर रहा था। अंग्रेजों से
  252. 11:13संधियां कर चुका था और केवल अंग्रेजों की
  253. 11:16पेंशन पे काम चल रहा था उसका। अंग्रेज
  254. 11:18सारा काम अंग्रेज संभालते थे। मुगल बादशाह
  255. 11:20बहादुर शाह जफर को तो पेंशन दे देते थे
  256. 11:23जिससे वो अपना खर्चा चलाता था। अंग्रेजों
  257. 11:25ने अब एक यह रूल लागू कर दिया। द लॉर्ड
  258. 11:28डलहौजी जो है उसने कहा कि मुगल बादशाह जो
  259. 11:31बहादुर शाह जफर है यह अंतिम मुगल बादशाह
  260. 11:33है। अगर इनकी मृत्यु हो जाती है तो इनके
  261. 11:36बाद हम किसी को भी मुगल बादशाह की उपाधि
  262. 11:38नहीं देंगे और लाल किला जहां पर यह रहते
  263. 11:40थे वो भी खाली करना पड़ेगा। इसमें ब्रिटिश
  264. 11:43सेना रहेगी। मतलब मुगल बादशाह की मृत्यु
  265. 11:45के बाद जो अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह
  266. 11:47जफर है इसकी मृत्यु के बाद किसी को भी
  267. 11:49बादशाह नहीं बनाया जाएगा। तो एक अपमानजनक
  268. 11:52व्यवहार उसके साथ हो रहा था और इससे भारत
  269. 11:54के जो मुसलमान थे वो बड़े नाराज थे। आगे
  270. 11:57है अंग्रेजी प्रशासन में भ्रष्टाचार व लूट
  271. 12:01कंपनी जो होती थी ईस्ट इंडिया कंपनी एक
  272. 12:03तरह से बहुत सारे लोगों ने मिलके एक कंपनी
  273. 12:05बनाई हुई थी। उद्देश्य था अधिक से अधिक
  274. 12:08मुनाफा कमाना। तो वो जो अधिकारी होते थे
  275. 12:10वह बड़े भ्रष्टाचारी थे। बहुत सारे लोगों
  276. 12:13से घूस लेकर उनके काम वगैरह निकालना। इस
  277. 12:15तरह से होता था। तो इससे भी बड़ी निराशा
  278. 12:17थी भारतीयों में। 1833 के चार्टर एक्ट के
  279. 12:20प्रावधानों को तथा उसकी अवहेलना की गई।
  280. 12:231833 में कुछ चार्टर एक्ट कुछ नियम लागू
  281. 12:25किए गए थे। उन नियमों को अच्छे से लागू
  282. 12:28नहीं किया गया। आगे बढ़ते हैं। तो भारतीय
  283. 12:32उद्योग धंधों का शोषण व उनको चौपट करना।
  284. 12:35देखिए हम पहुंच गए आर्थिक कारणों पर। तो
  285. 12:37भारतीय उद्योग धंधों का शोषण हो रहा था।
  286. 12:40वह चौपट हो गए थे। बहुत इंपॉर्टेंट चीज
  287. 12:42है। थोड़ी गहराई से समझना कि अंग्रेजी
  288. 12:45अर्थव्यवस्था कैसे काम करती थी। देखिए
  289. 12:48भारत को बहुत सारे लोगों ने लूटा है। भारत
  290. 12:51में बहुत सारे विदेशी लुटेरे आए थे जो
  291. 12:53भारत को लूट ले गए थे। जैसे सिकंदर ने भी
  292. 12:55कुछ क्षेत्र पे हमला किया था। लूटा था
  293. 12:58भारत को। उसके बाद तैमूर का भी नाम आता
  294. 13:00है। चंगेज खान का भी नाम आता है। अहमद शाह
  295. 13:03अब्दाली का भी नाम आता है। नादिर शाह का
  296. 13:06भी नाम आता है। वह आते थे। भारत में
  297. 13:09लूटमार करते थे। भारत में उनको जो भी मिला
  298. 13:12लूट के वह अपने साथ ले जाते थे। ठीक है?
  299. 13:15भारत फिर से भारतीय लोग फिर से मेहनत करते
  300. 13:17थे। अच्छी फसल पैदा करते थे और फिर से
  301. 13:20अपने खजाने भर लेते थे। लेकिन ये अंग्रेज
  302. 13:22लुटेरे ऐसे आए थे कि ये भारत में आए और
  303. 13:27लूट कर ले नहीं गए। 200 सालों तक यहीं रहे
  304. 13:31और यहीं पर रहकर भारतीयों को अच्छे से
  305. 13:34लूटा। मतलब और लुटेरे तो आते थे। दो-चार
  306. 13:37महीने लूटमार करके चले जाते थे। अंग्रेज
  307. 13:39ऐसे लुटेरे आए कि 200 सालों तक कंटिन्यू
  308. 13:43लूटा इन्होंने भारत को। तो इसको हम समझते
  309. 13:45हैं कि कैसे इन्होंने भारतीय उद्योग धंधों
  310. 13:48का विनाश कर दिया था। वो हम इस पॉइंट में
  311. 13:51एक बार समझते हैं कि भारत में उद्योग धंधे
  312. 13:54होते थे। सूती वस्त्र बनता था भारत में
  313. 13:56हाथ
  314. 13:59से। सूती वस्त्र भारत में बहुत ही अच्छा
  315. 14:02बनता था। सूती वस्त्र बनाने के लिए कच्चा
  316. 14:05माल क्या चाहिए भारत में? कपास कपास चाहिए
  317. 14:09और चरखे से यह वस्त्र बनता था। अब क्या
  318. 14:12हुआ है? ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति हो
  319. 14:14गई है। वहां पर सूती वस्त्र बड़ी-बड़ी
  320. 14:17मशीनों से बड़े-बड़े कारखानों में बनने लग
  321. 14:19गया है। और वह सूती वस्त्र बनके कहां आ
  322. 14:22रहा है? भारत में बेच रहे हैं। उनके लिए
  323. 14:25बाजार कहां है? भारत में वहां से बना हुआ
  324. 14:28मालशीनी कपड़े जो कि कीमत में सस्ते होते
  325. 14:32थे भारतीय कपड़ों के मुकाबले यह बिकने आ
  326. 14:34रहे हैं। भारत की सीमा में जब यह कपड़े
  327. 14:37घुसते थे तो इन पर आयात कर लगना चाहिए
  328. 14:40लेकिन किसी प्रकार का कर नहीं लगते थे
  329. 14:42क्योंकि शासन तो किसका है? ब्रिटेन का है।
  330. 14:44तो मतलब विदेशी माल भारतीय माल की तुलना
  331. 14:47में सस्ता है। तो जो भारतीय लोग थे
  332. 14:50उन्होंने कौन सा कपड़ा खरीदा? ब्रिटिश
  333. 14:52कपड़ा ही खरीदना शुरू कर दिया। और जो
  334. 14:54भारतीय सूती वस्त्र था इस इसकी बिक्री
  335. 14:56बहुत कम हो गई और साथ ही आपने यह तो पढ़ा
  336. 14:59ही था कि बाद में कपास भी यहां से निर्यात
  337. 15:02कर दिया जाता था ब्रिटेन। तो धीरे-धीरे
  338. 15:04करके भारतीय जो उद्योग थे वह चौपट होते
  339. 15:07चले
  340. 15:08गए। विदेशों से आए माल के सामने वह नहीं
  341. 15:12टिक पाए क्योंकि अंग्रेजों के द्वारा
  342. 15:14भारतीय वस्त्रों पर तो कर लगा दिया जाता
  343. 15:17था और विदेशी वस्त्रों पर कर भी नहीं
  344. 15:19लगाया जाता था। इसलिए उनके सस्ते भारतीयों
  345. 15:21के महंगे तो सस्ता माल बिकेगा और इस तरह
  346. 15:24जो भारतीय अर्थव्यवस्था थी जो उद्योग थे
  347. 15:26वह चौपट हो गए। अब यहां से जो शहरों में
  348. 15:29छोटे-मोटे कारखाने थे वो बंद हो गए। तो एक
  349. 15:32तरह से यहां से जो मजदूर बेरोजगार हुए वो
  350. 15:35कहां जाएंगे? उनकी निर्भरता किस पर
  351. 15:37बढ़ेगी? कृषि पर। वो कृषि क्षेत्र में
  352. 15:40जाएंगे और कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ता चला
  353. 15:44गया। कहते हैं ना भारत कृषि प्रधान देश
  354. 15:46है। हमेशा से कृषि प्रधान देश नहीं था
  355. 15:48भारत। भारत में तो बहुत अच्छी-अच्छी चीजें
  356. 15:51बनती थी। सिंधु घाटी सभ्यता आपने पढ़ रहे
  357. 15:53होंगे आप जो पहली पाठ्य पुस्तक है इतिहास
  358. 15:55की उसमें हम पढ़ेंगे। अन्य भी बहुत सारी
  359. 15:58चीजें थी तो अब अंग्रेजों के बाद भारत में
  360. 16:01सभी लोगों की निर्भरता किस पर बढ़ती गई?
  361. 16:03कृषि पर और कृषि में भी फिर अंग्रेजों ने
  362. 16:06कहा कि खाद्यान्न फसलें पैदा मत करो।
  363. 16:08व्यापारिक फसलें पैदा करो। कपास, अफीम,
  364. 16:11नील वगैरह इस तरह की उपजाओ। और फिर जब इस
  365. 16:14तरह की फसलें उपजाते थे, खाद्यान्न पैदा
  366. 16:16करना कम हो गया था भारत में। और जब अकाल
  367. 16:19पड़ते थे तो खाद्यान्न भारत में उपलब्ध
  368. 16:21नहीं होता था और अकाल से बहुत सारे लोग मर
  369. 16:24जाते थे। तो भारत में अकाल की भयंकरता
  370. 16:27ब्रिटिश नीति के कारण बढ़ गई थी। इस तरह
  371. 16:30यह पहला पॉइंट हमने समझा कि भारतीय उद्योग
  372. 16:33धंधों का शोषण व उनको चौपट कर दिया गया
  373. 16:36था। अगले पॉइंट देखते हैं। अंग्रेजों
  374. 16:38द्वारा अपनाई गई दोषपूर्ण भू-राजस्व
  375. 16:41पद्धति। हमने देखा था ना कि दक्कन में कौन
  376. 16:43सी भू-राजस्व पद्धति अंग्रेजों के द्वारा
  377. 16:45लागू की गई थी?
  378. 16:47रयतवाड़ी बंदोबस्त लागू किया गया था। उसके
  379. 16:50तहत किसान के खेत में जितना पैदा होता था,
  380. 16:53उसका 50% तो कंपनी को देना होता था।
  381. 16:56भू-राजस्व के रूप में। यह भी तय कर दिया
  382. 16:59गया था कि हर 30 साल बाद फिर से सर्वेक्षण
  383. 17:02किया जाएगा और 30 साल बाद फिर से लगान
  384. 17:04बढ़ा दिया जाएगा। अकाल भी पड़ जाता था तो
  385. 17:07लगान में किसी तरह की कोई रियायत या छूट
  386. 17:09नहीं दी जाती थी। तो यह क्या है? दोषपूर्ण
  387. 17:12भू-राजस्व पद्धति जिससे किसान बड़े
  388. 17:15दुर्दशा हो रही थी। उनकी हालत खराब हो रखी
  389. 17:18थी। आगे देखें। भारत के कपड़ा उद्योग के
  390. 17:21कच्चे माल पर कम निर्यात कर। देखो भारत से
  391. 17:25क्या जा रहा है? कपास। कपास तो भारत को भी
  392. 17:28चाहिए ना सूती वस्त्र बनाने के लिए। अगर
  393. 17:31इसको विदेश में भेज रहे हैं तो भारत को
  394. 17:34थोड़ा मुनाफा तो होना चाहिए। निर्यात कर
  395. 17:36तो लगना चाहिए। निर्यात कर नहीं लगता था
  396. 17:39और भारत से सस्ते दामों में ही कपास
  397. 17:42ब्रिटेन भेज दी। कपड़ा बना या वस्त्र
  398. 17:44निर्माण किया गया। वहां के लोगों को
  399. 17:47रोजगार मिला। ब्रिटेन में जब यह मशीनें
  400. 17:49चली तो लोगों को रोजगार मिला। फिर वही
  401. 17:52भारतीय कपास गई इंग्लैंड। इंग्लैंड में
  402. 17:55उसका कपड़ा बना और फिर महंगे दामों में
  403. 17:58वापस कहां भेज देंगे उसको? भारत में। तो
  404. 18:00इस तरह भारत का पूरी तरह शोषण करते चले
  405. 18:03गए। निर्यात और आयात कर जो लगने चाहिए थे।
  406. 18:06भारत की अर्थव्यवस्था को कुछ फायदा होता
  407. 18:08वह लगते नहीं थे या बहुत कम नाम मात्र के
  408. 18:10लिए लगते थे। आगे देखते हैं। इंग्लैंड की
  409. 18:14औद्योगिक क्रांति के परिणाम स्वरूप भारतीय
  410. 18:18परंपरागत उद्योगों का आर्थिक शोषण। यह
  411. 18:21हमने समझा कि जब वहां औद्योगिक क्रांति
  412. 18:23हुई इंग्लैंड में तो वहां का मशीनी कपड़ा
  413. 18:25भारत में आया जो सस्ता होता था। भारतीय जो
  414. 18:28बुनकर थे वह उनके सामने टिक नहीं पाए।
  415. 18:30कपास के दाम महंगे हो गए। उनको महंगी
  416. 18:33मिलती थी तो बुनकर जो कपड़ा बनाते थे वह
  417. 18:35महंगा बिकता था। जबकि ब्रिटिश कपड़ा सस्ता
  418. 18:38आता था। विदेश से जब कपड़ा आता था तो उस
  419. 18:41पर कोई कर नहीं लगता था। वह उसी दामों में
  420. 18:43बिकता था। इसलिए भारतीय उद्योग चौपट होते
  421. 18:46चले गए। और भारतीय धन का निरंतर निष्कासन।
  422. 18:50यह बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है। आपसे
  423. 18:52पूछेंगे कि जो धन निष्कासन का सिद्धांत
  424. 18:59है। धन निष्कासन का सिद्धांत सबसे पहले
  425. 19:04किसके द्वारा दिया गया था? बताइए बच्चों।
  426. 19:08तो धन निष्कासन का सिद्धांत सबसे पहले
  427. 19:11दिया गया था दादा भाई नौरोजी के द्वारा।
  428. 19:21दादा भाई नौरोजी के द्वारा दिया गया था धन
  429. 19:23निष्कासन का सिद्धांत। क्या कहते थे वो?
  430. 19:26वह कह रहे थे कि एक तरफ तो है भारत। समझना
  431. 19:30इस चीज को। एक तरफ है भारत और भारत पर
  432. 19:33औनिनिवेशिक शासन किसका है? ब्रिटेन का।
  433. 19:38तो एक तरफ है ब्रिटेन। ब्रिटिश लोग भारत
  434. 19:41में शासन कर रहे हैं। भारत के संसाधनों का
  435. 19:44अपने हित में प्रयोग करेंगे। तो भारत से
  436. 19:46बहुत सारा भू-राजस्व वसूल करके बहुत सारे
  437. 19:49पैसे भारत से कहां भेज दिए जाते थे?
  438. 19:52ब्रिटेन भेज दिए जाते थे। तो यह क्या है?
  439. 19:55भारत के धन का बहिर्गमन कहां हो गया?
  440. 19:57ब्रिटेन। और ब्रिटेन के हित में यह प्रयोग
  441. 20:00होगा। थोड़ा सा और गहराई से समझिए कि कौन
  442. 20:03भेज रहा था यह पैसे? ईस्ट इंडिया कंपनी।
  443. 20:05ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी भारत में थे
  444. 20:08और भारत का धन ब्रिटेन भेज देते थे। जो
  445. 20:11कंपनी के मालिक थे ईस्ट इंडिया कंपनी के
  446. 20:14वो बहुत ज्यादा दौलतमंद हो गए। बहुत अमीर
  447. 20:16हो गए। फिर बात आई कि भारत में जैसे रेलवे
  448. 20:19चलानी है। भारत में रेलवे लाइन बिछानी है
  449. 20:22तो प्राइवेट कंपनियों को ठेका दिया जाएगा।
  450. 20:24यह ठेका किनने लिया? यह ठेका उन लोगों ने
  451. 20:27लिया जो भारत के पैसों से अमीर हो गए थे।
  452. 20:29मतलब ईस्ट इंडिया कंपनी के जो लोग थे
  453. 20:32उन्होंने यह ठेका लिया। अब उनके पास बहुत
  454. 20:34सारी पूंजी थी। वह पूंजी आई कहां से? भारत
  455. 20:38से ही। भारत का पैसा इंग्लैंड गया।
  456. 20:40इंग्लैंड अमीर हो गया। फिर इंग्लैंड से
  457. 20:43वही पैसा भारत में इन्वेस्ट किया गया।
  458. 20:46जैसे रेलवे का उदाहरण लेते हैं कि रेलवे
  459. 20:49में वह पैसा इन्वेस्ट कर दिया गया। ट्रेन
  460. 20:52की रेलवे लाइन बिछाने के लिए और गारंटी दी
  461. 20:55गई। यहां की सरकार जो भारत में ब्रिटिश
  462. 20:58सरकार काम कर रही थी। अगर कोई रेलवे में
  463. 21:00पैसा लगाएगा तो उसको नुकसान नहीं होगा। वह
  464. 21:03उसकी जो भी उसकी कमाई होगी वह लेगा और साथ
  465. 21:05में ब्याज दिया जाएगा। समझो एक बार। भारत
  466. 21:09का पैसा ब्रिटेन गया। फिर वही पैसा पूंजी
  467. 21:12के रूप में भारत में इन्वेस्ट कर दिया
  468. 21:14गया। अब इन इन्वेस्ट पैसे पे भारत ब्याज
  469. 21:17देगा। तो भारत का पैसा बाहर गया। फिर वापस
  470. 21:20भारत में आया और फिर उसी पैसे पे भारतीय
  471. 21:23लोग ब्याज दे रहे हैं। भारत के ब्याज जा
  472. 21:25रहा है। तो इस तरह भारत के धन का निष्कासन
  473. 21:28हो रहा है। कहां जा रहा है? ब्रिटेन में।
  474. 21:30और भारत गरीब और गरीब होता चला गया। और
  475. 21:33दादा भाई नौरोजी ने तो यह भी कहा था कि धन
  476. 21:36निष्कासन तो एक बहते हुए घाव के समान है।
  477. 21:40समझ रहे हो? तो धन निष्कासन का सिद्धांत
  478. 21:42किसने दिया था? दादा भाई नौरोजी के द्वारा
  479. 21:45दिया गया। आगे है सामाजिक कारण। समाज में
  480. 21:50भारतीयों की उतनी वैल्यू नहीं थी जितनी कि
  481. 21:52अंग्रेजों की थी। या जो अंग्रेज शिक्षण
  482. 21:54संस्थान में थे उनमें कोई अंग्रेजी शिक्षा
  483. 21:57प्राप्त भारतीय होता था। उसकी अहमियत समाज
  484. 21:59में ज्यादा हो जाती थी। तो इस चीज से भी
  485. 22:01भारतीय लोग बड़े नाराज थे। तो देखिए
  486. 22:04अंग्रेजों द्वारा भारतीयों को घृणा की
  487. 22:06दृष्टि से देखा जाता था। ठीक है? दोषपूर्ण
  488. 22:09पाश्चात्य शिक्षा नीति थी। इनसे भी नाराज
  489. 22:12थे। दोषपूर्ण पाश्चात्य शिक्षा नीति मतलब
  490. 22:15भारतीय शिक्षण संस्थानों को तो खत्म किया
  491. 22:17जा रहा था और अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था
  492. 22:19लागू की जा रही थी। जिसको अंग्रेजी आती
  493. 22:22थी, उसको अच्छी नौकरी मिल जाती थी और उसी
  494. 22:24की वैल्यू ज्यादा बढ़ जाती थी समाज में।
  495. 22:27आगे देखते हैं कुछ धार्मिक कारण। धर्म के
  496. 22:30मामले में भी बड़ी नाराज थे भारतीय उनकी
  497. 22:33धार्मिक जो नीतियां चल रही थी अंग्रेजों
  498. 22:36की उनसे। समझते हैं यह भी इंपॉर्टेंट
  499. 22:39टॉपिक है। धार्मिक कारण वाला भी अंग्रेजों
  500. 22:42द्वारा दोषपूर्ण पैतृक संपत्ति कानून का
  501. 22:45निर्माण। अंग्रेजों ने किया ये अंग्रेज
  502. 22:48ईसाई धर्म प्रचारक आ रहे थे। भारत में
  503. 22:50ईसाई धर्म का प्रचार करने आते थे। तो जब
  504. 22:53वहां के ईसाई मिशनरी भारत में ईसाई धर्म
  505. 22:56का प्रचार करते थे। कुछ अंग्रेजी शिक्षण
  506. 22:58संस्थान में पढ़े हुए भारतीय उनके धर्म से
  507. 23:01प्रभावित थे और वह ईसाई धर्म अपना लेते
  508. 23:03थे। अगर किसी पिता के पुत्र ने ईसाई धर्म
  509. 23:07अपना लिया है तो होता यह था कि वह पुत्र
  510. 23:10वो पिता अपने पुत्र को अपनी संपत्ति से
  511. 23:13बेदखल कर देता था कि तू मेरा बेटा है ही
  512. 23:15नहीं। मेरी संपत्ति में तेरा कोई अधिकार
  513. 23:17नहीं। अंग्रेजों ने यह नियम लागू कर दिया
  514. 23:20कि अब से कोई ईसाई धर्म अपनाएगा तो उसे भी
  515. 23:23पैतृक संपत्ति में उतना ही अधिकार होगा
  516. 23:25जितना कि अन्य पुत्रों और अन्य पुत्रियों
  517. 23:28को है। तो यही क्या है कि दोषपूर्ण पैतृक
  518. 23:32संपत्ति कानून और यह लॉर्ड डलहौजी के
  519. 23:35द्वारा लागू किया गया था
  520. 23:371850 ईस्वी में। ठीक है? तो इससे भारतीयों
  521. 23:41में नाराजगी थी कि यह तो ईसाई बना देंगे।
  522. 23:43सबको ईसाई धर्म का प्रचार कर रहे हैं।
  523. 23:45दूसरा है 1813 के चार्टर एक्ट। ध्यान रखना
  524. 23:491813 के चार्टर एक्ट के तहत ईसाई धर्म के
  525. 23:53प्रचार प्रसार की स्वीकृति प्रदान कर दी।
  526. 23:551813 में एक नया एक्ट लागू किया चार्टर
  527. 23:58एक्ट अंग्रेजों के द्वारा। उसमें हुआ क्या
  528. 24:00था कि ईसाई मिशनरी जो होती थी उनको खुली
  529. 24:03छूट दे दी कि आप जाइए भारत में इंग्लैंड
  530. 24:05से भारत में जाइए और ईसाई धर्म का प्रचार
  531. 24:08प्रसार कीजिए। तो भारतीयों में ये बात फैल
  532. 24:10गई कि ये तो हिंदू और इस्लाम धर्म को तो
  533. 24:13खत्म कर देंगे और हमको सबको ईसाई बना
  534. 24:15देंगे। आगे देखते हैं। अंग्रेजों द्वारा
  535. 24:18मंदिरों एवं मस्जिदों पर संपत्ति कर लगा
  536. 24:21दिया गया था। तो ये कुछ धार्मिक कारण थे।
  537. 24:23आगे देखते
  538. 24:25हैं। अह सैनिक कारण। ठीक है? सेना में
  539. 24:29क्या दुर्भावना थी? अंग्रेजों के खिलाफ
  540. 24:31क्यों नाराज थे? तो कई सारे कारण थे। जैसे
  541. 24:33जो भारतीय सैनिक होता था वह और उसके
  542. 24:36कंपैरिजन में जो ब्रिटिश सैनिक होता था
  543. 24:38अंग्रेज होता था अगर वह एक समान पद पर है
  544. 24:41तो भी अंग्रेज सैनिक का वेतन ज्यादा होता
  545. 24:44था भारतीय सैनिक के मुकाबले एक ही पद पर
  546. 24:47है भारतीय सैनिक और अंग्रेज सैनिक तो भी
  547. 24:49भारतीय सैनिक को सलू्यूट लगाना पड़ता था
  548. 24:52किसको अंग्रेज सैनिक को अंग्रेज सैनिकों
  549. 24:55के रहने खाने की सुविधा अच्छी होती थी
  550. 24:57जबकि भारतीय सैनिकों की उतनी अच्छी नहीं
  551. 24:59होती थी तो ये और भी कुछ कारण हम यहां
  552. 25:02पढ़ेंगे देखिए देखिए 1806 में वेलोर एक
  553. 25:05छावनी थी। वहां की वहां पर जो भारतीय
  554. 25:08सैनिक थे ब्रिटिश सेना में उन्होंने
  555. 25:09विद्रोह किया। 1824 में बैरकपुर में
  556. 25:13विद्रोह हुआ और 1849 में बंगाल की 22वीं
  557. 25:16नेटिव इनफेंट्री के द्वारा भी विद्रोह
  558. 25:19किया गया। यह विद्रोह छोटे-छोटे विद्रोह
  559. 25:21थे जो बाद में जल्दी ही खत्म हो गए। बड़ा
  560. 25:23विद्रोह कब हुआ? 1857 में उसको समझा समझने
  561. 25:27के लिए हम पढ़ रहे हैं उसके कारण। ठीक है?
  562. 25:29तो देखिए वेलोर में हुआ क्या था कि वेलोर
  563. 25:32में कुछ भारतीय सैनिक थे वह अपने माथे पर
  564. 25:35तिलक लगाते थे तो अंग्रेजों ने यह नियम
  565. 25:38बनाया कि किसी भी भारतीय को धार्मिक चिन्ह
  566. 25:42धारण भारतीय सैनिक को धार्मिक चिन्ह धारण
  567. 25:45करने की अनुमति नहीं होगी। तिलक नहीं लगा
  568. 25:48सकता। सिख है तो वह कड़ा वगैरह नहीं पहन
  569. 25:51सकता। इस तरह की तो ऐसे ये छोटे-छोटे कुछ
  570. 25:54विद्रोह हुए थे। आगे देखते हैं कि विभिन्न
  571. 25:57युद्धों में अंग्रेजों की पराजय और भारी
  572. 25:59क्षति हुई। जैसे अफगान युद्ध और क्रीमिया
  573. 26:03युद्ध और पंजाब में युद्ध में अंग्रेज
  574. 26:04हारे थे। पहले भारतीय यह मानते थे कि यह
  575. 26:07अंग्रेज हैं और यह कभी पराजय हो ही नहीं
  576. 26:10सकते। यह कभी नहीं हारते। तो भारतीय थोड़े
  577. 26:13से डरे हुए रहते थे अंग्रेजों से। लेकिन
  578. 26:15इन युद्धों में भारतीयों ने अंग्रेजों की
  579. 26:17भारी पराजय देखी और भारतीयों के मन में यह
  580. 26:19विश्वास बैठ गया कि इनको भी हराया जा सकता
  581. 26:22है। अंग्रेज भी हार सकते हैं। जब वो इन
  582. 26:25युद्धों में हारे थे। आगे है अंग्रेजी
  583. 26:28सेना में भारतीय सैनिकों की बढ़ती संख्या।
  584. 26:31अंग्रेज तो बहुत कम थे। भारत पर शासन कर
  585. 26:33रहे थे। ब्रिटिश सेना में भारतीय सैनिक
  586. 26:36बहुत ज्यादा थे। अंग्रेज सैनिक कम थे।
  587. 26:39भारतीय सैनिक बहुत ज्यादा थे। अगर विद्रोह
  588. 26:41होता है तो भारतीय सैनिक जीत जाएंगे। तो
  589. 26:43भारतीय सैनिक बहुत ज्यादा थे। आगे बात
  590. 26:46करते हैं। बंगाल तथा अवध में बड़ा सैनिक
  591. 26:49विद्रोह था। आगे देखते हैं वेतन भत्ते तथा
  592. 26:52पदोन्नति के संबंध में भारतीय सैनिकों के
  593. 26:55साथ अपमानजनक व्यवहार अभी अपन ने बात की
  594. 26:58थी कि वेतन अंग्रेज सैनिक को ज्यादा मिलता
  595. 27:00था। अंग्रेज सैनिक की पदोन्नति ज्यादा
  596. 27:02होती थी और भारतीय सैनिक को यह सब अधिकार
  597. 27:05प्राप्त नहीं थे। आगे देखते हैं। 1854 में
  598. 27:09लॉर्ड डलहौजी के द्वारा एक नियम बनाया
  599. 27:11गया। 1854 ईस्वी का डाक अधिनियम। इसके तहत
  600. 27:14क्या हुआ? भारतीय सैनिकों को दी जाने वाली
  601. 27:18निशुल्क डाक सुविधा समाप्त कर दी गई। 1854
  602. 27:22में लॉर्ड डलहौजी जो गवर्नर जनरल थे उनके
  603. 27:25द्वारा नियम बनाया कि सैनिकों को फ्री में
  604. 27:28पोस्ट कार्ड मिलते थे और अपने घर में
  605. 27:30चिट्ठी भेज सकते थे। कोई पैसा नहीं लगेगा।
  606. 27:32तो सैनिकों की निशुल्क डाक सुविधा समाप्त
  607. 27:35कर दी। अगर सैनिक भी चिट्ठी भेजेंगे तो
  608. 27:37पैसे लगेंगे। कब? 1854 में। जाहिर है
  609. 27:40नाराज होंगे अंग्रेज सैनिक। सारे भारतीय
  610. 27:43सैनिक अंग्रेजों की नीतियों से नाराज तो
  611. 27:45होंगे ही। आगे 1856 बहुत इंपॉर्टेंट है।
  612. 27:49ध्यान देना। 1856 में गवर्नर जनरल आ जाते
  613. 27:52हैं लॉर्ड कैनिंग। डलहौजी चले गए और लॉर्ड
  614. 27:55कैनिंग नए गवर्नर जनरल बनकर आए। और आते ही
  615. 27:58इन्होंने एक नियम लागू किया।
  616. 28:00सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम सेना में अगर
  617. 28:04भर्ती होना है तो उसके लिए कुछ नियम लागू
  618. 28:06किए गए और इसके तहत क्या था? भारतीय
  619. 28:09सैनिकों को भारत से बाहर युद्ध में भेजा
  620. 28:12जाने लगा। होता क्या था कि भारतीय सैनिक
  621. 28:15हैं जो ब्रिटिश सेना में है। वह भारत में
  622. 28:18ही रहते थे। भारत में ही युद्ध वगैरह करते
  623. 28:21थे वो अंग्रेजों की तरफ से। लेकिन जब
  624. 28:23उन्हें कभी भेजा जाता था कि क्योंकि
  625. 28:25अंग्रेजों का साम्राज्य तो भारत से बाहर
  626. 28:26भी था अन्य देशों में। तो कहीं भारत से
  627. 28:29बाहर जब उनको भेजा जाता था तो सैनिक मना
  628. 28:31कर देते थे क्योंकि भारत के धर्म में उस
  629. 28:35समय यह मान्यता थी कि समुद्र पार नहीं
  630. 28:38करना है। अगर हमने समुद्र के पार कर लिया
  631. 28:40तो हमारा धर्म भ्रष्ट हो
  632. 28:43जाएगा। भारतीय सैनिक जाने से मना कर देते
  633. 28:46थे कि हम विदेश में नहीं जाएंगे लड़ने। अब
  634. 28:49लॉर्ड कैनिंग ने यह नियम लागू किया कि इस
  635. 28:52नए नियम के तहत कोई भी अगर भर्ती होता है
  636. 28:55तो वह विदेश में भी लड़ने जाना पड़ेगा। वह
  637. 28:57मना नहीं कर सकता समुद्र पार जाने के लिए
  638. 29:00और इसके एवज में कोई विशेष भत्ते भी नहीं
  639. 29:03दिए जाएंगे विदेश जाने पर। तो इस चीज से
  640. 29:06सैनिक बड़े नाराज थे। हमने देखा था ना
  641. 29:08धार्मिक कारण कि अंग्रेज ईसाई धर्म को
  642. 29:10थोपना चाह रहे हैं हमारे ऊपर। तो यहां और
  643. 29:12सैनिकों में रोष फैल गया कि देखो हमें
  644. 29:15जबरदस्ती समुद्र पार भेजकर हमारा धर्म
  645. 29:17भ्रष्ट करना चाह रहे हैं। हमें ईसाई बनाना
  646. 29:19चाह रहे हैं। तो ये सब कारण थे सैनिक जिन
  647. 29:22बातों से नाराज थे। आगे देखते हैं कुछ
  648. 29:25तात्कालिक कारण। तो हमने जो कारण पढ़े वो
  649. 29:28तो कारण लंबे समय से चले आ रहे थे। बड़ा
  650. 29:31गुस्सा था भारतीयों में। लेकिन ये गुस्सा
  651. 29:33एकदम से फूटा 1857 में ही क्यों? समझ रहे
  652. 29:38हो? तो ये सब गुस्से तो भारतीयों में बहुत
  653. 29:40समय से थे। सहायक संधि तो लगभग 1700 ईस्वी
  654. 29:44में लागू कर दी थी। ठीक है? तब से राज्य
  655. 29:47हड़प नीति। सबसे पहले 1848 में सतारा को
  656. 29:50हड़पा था। तो लंबे समय से यह शोषण चल रहा
  657. 29:53था। तो लंबे समय से भारतीयों के मन में
  658. 29:56गुस्सा था अंग्रेजों के प्रति। भारतीयों
  659. 29:58के मन में बारूद का ढेर था। उस बारूद के
  660. 30:02ढेर को चिंगारी दिखाने की जरूरत थी। और
  661. 30:05चिंगारी दिखाने का काम कर दिया किसने?
  662. 30:08चर्बी वाले कारतूसों ने। चर्बी वाले
  663. 30:11कारतूसों ने। यह तात्कालिक कारण है। इसको
  664. 30:14भी समझना बहुत जरूरी है। तो देखते हैं।
  665. 30:16इसमें जो कारतूस प्रयोग होते थे, वह ऊपर
  666. 30:19से चिकने होते थे और सैनिकों में यह बात
  667. 30:22फैल गई कि इस कारतूस में गाय व सूअर की
  668. 30:25चर्बी मिली हुई है। और इसको प्रयोग करवा
  669. 30:28के वो हमारा धर्म भ्रष्ट कर देंगे हिंदू
  670. 30:31और मुसलमान दोनों का। ठीक है? तो, इसलिए
  671. 30:34वह एकदम से भड़क गए। उन कारतूसों का
  672. 30:36प्रयोग करने से मना कर दिया और विद्रोह
  673. 30:38फैल गया। देखिए नई एनफील्ड राइफल के
  674. 30:41प्रयोग में प्रयोग होने वाले चर्बी लगे
  675. 30:44कारतूस इनमें कौन सी चर्बी सूअर व गाय
  676. 30:48देखिए सूअर मुसलमानों के लिए एक तरह से वो
  677. 30:52छूते नहीं है सूअर को तो इसलिए उनके लिए
  678. 30:55वर्जित है और गाय हमारे लिए इतना पवित्र
  679. 30:58है हिंदुओं के लिए कि वह उसकी चर्बी को
  680. 31:00हाथ नहीं लगाएंगे तो इस तरह दोनों ही भड़क
  681. 31:02गए इस चीज को लेकर तो इसका प्रयोग किया
  682. 31:06जाता था जिससे वह भड़क गए थे हिंदू हिंदू
  683. 31:08तथा मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस
  684. 31:11पहुंचाने वाला था यह चर्बी वाले कारतूस
  685. 31:14लागू करने की घटना। तो, यह कुछ हमने
  686. 31:16मुख्य-मुख्य कारण पढ़े हैं। इस पाठ को
  687. 31:19समझने के लिए जो हम पढ़ रहे हैं विद्रोह
  688. 31:22और राज। इसको समझने के लिए हमने एक थोड़ा
  689. 31:25सा परिचय लिया है कि कैसे तो विद्रोह
  690. 31:27होगा। क्यों होगा विद्रोह? औपनिवेशिक शासन
  691. 31:31कब से शुरू हुआ? 1757 से। और 100 साल जब
  692. 31:34उन्होंने शासन कर लिया, भारत का शोषण कर
  693. 31:36लिया तो भारतीय जागे और एक विद्रोह के लिए
  694. 31:39उठ खड़े हुए। इन 100 सालों के दरमियान भी
  695. 31:42छोटे-छोटे अनेक विद्रोह हुए, लेकिन ये एक
  696. 31:44बड़ा विद्रोह पहला था। और इस विद्रोह यह
  697. 31:47क्यों हुआ? यह सारी चीजें हम थोड़ा और आगे
  698. 31:49समझेंगे। कुछ कारण देखे हैं यहां पे। यहां
  699. 31:52तक कि विनायक दामोदर सावरकर ने तो यह भी
  700. 31:55लिखा है कि 1857 का जो विद्र था, यह आजादी
  701. 31:58की पहली लड़ाई थी। प्रथम भारतीय
  702. 32:00स्वतंत्रता संग्राम था। तो यह भी हम
  703. 32:03समझेंगे कि यह स्वतंत्रता संग्राम था या
  704. 32:05सैनिक विद्रोह था या क्या था। यह सब भी हम
  705. 32:07अगली कक्षाओं में देखेंगे। ठीक है बच्चों?

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This page contains the full transcript of Class 12 History Chapter 1 | History Chapter 11 Class 12 | विद्रोही और राज | Part - 1 by Ekaksha, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 5,579 words across 705 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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