Class 11th One Shot | Introduction to Accounting | Complete Chapter in One Class | Shivam Lotwani — Transcript
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- 0:00भाई आया सिखा के जाएगा। आज का जो टॉपिक है
- 0:02वह बेहद इंपॉर्टेंट है। अगर आप क्लास 11th
- 0:05कॉमर्स के स्टूडेंट हो। आपके हाफ ईयरली
- 0:07में भी यह चैप्टर आता है। आपके एनुअल
- 0:10एग्जाम फाइनल एग्जाम में भी ये चैप्टर
- 0:11जरूर आता है। इससे पहले कि मैं अकाउंटिंग
- 0:14को इंट्रोड्यूस करूं। अकाउंटिंग का मतलब
- 0:16बताऊं सबसे पहले मैं आपको मिलवाना चाहता
- 0:18हूं इन महाशय से। तो जहां बिज़नेस होगा
- 0:20वहां ट्रांजैक्शंस तो होंगी। हां। लेकिन
- 0:24आपको सिर्फ बिजनेस से रिलेटेड
- 0:26ट्रांजैक्शंस उठानी है। सारी ट्रांजैक्शंस
- 0:28नहीं उठानी। अब एक बिजनेस को खड़ा करने
- 0:30में, एक बिजनेस को मजबूती देने में
- 0:32अकाउंटिंग का क्या रोल है? हेलो एवरीवन
- 0:36एंड वेलकम टू योर ओन YouTube चैनल शिवम
- 0:38लोटवानी अकाउंटेंसी। भाई आया सिखा के
- 0:41जाएगा। आज का जो टॉपिक है वो बेहद
- 0:43इंपॉर्टेंट है। अगर आप क्लास 11th कॉमर्स
- 0:46के स्टूडेंट हो तो आपकी बुक का सबसे पहला
- 0:48चैप्टर इंट्रोडक्शन टू अकाउंटिंग जो कि
- 0:51मैं कहता हूं कि आप शुरू में मत पढ़ा करो।
- 0:53दो चार प्रैक्टिकल चैप्टर पढ़ने के बाद इस
- 0:55चैप्टर को पढ़ा करो ताकि यह चैप्टर और
- 0:57ज्यादा रेलेवेंट हो जाए आपके लिए। बट खैर
- 1:00प्रॉब्लम सिस्टम में यह है कि आपका जो
- 1:02यूटी होता है उसमें स्टार्टिंग में ये आता
- 1:04ही आता है। आपके हाफ ईयरली में भी ये
- 1:07चैप्टर आता है। आपके एनुअल एग्जाम फाइनल
- 1:09एग्जाम में भी ये चैप्टर जरूर आता है। तो
- 1:11ये चैप्टर आपके थ्रूउ क्लास 11th बड़ा
- 1:14इंपॉर्टेंट चैप्टर है। और सिर्फ क्लास
- 1:1711th में ही नहीं बल्कि आपकी पूरी जिंदगी
- 1:19के लिए भी ये चैप्टर बड़ा इंपॉर्टेंट है।
- 1:21क्योंकि आप जिस चीज के स्टूडेंट हो अगर उस
- 1:24चीज को ही अगर आप नहीं जानते तो किस बात
- 1:26के स्टूडेंट हो भाई आप? है ना? तो भैया
- 1:29मेरा नाम शिवम लोटवानी और आज मैं आपको
- 1:31सिखाने आया हूं कक्षा 11वीं का एक बेहद
- 1:34खूबसूरत चैप्टर बड़ा ही बिगिनर लेवल वाला
- 1:36चैप्टर इंट्रोडक्शन टू अकाउंटिंग। शुरू
- 1:39करें। चलो भाई शुरू करते हैं।
- 1:43जो जो लाइन मैं हमेशा बोलता रहता हूं और
- 1:45अगर आपको यह वीडियो एंड तक अच्छी लगे तो
- 1:47एक तो अपने दोस्तों तक पहुंचाना और नीचे
- 1:49कमेंट जरूर करना कि भाई आया है सिखा के
- 1:52जाएगा। चलिए गाइस इससे पहले कि मैं
- 1:56अकाउंटिंग को इंट्रोड्यूस करूं। अकाउंटिंग
- 1:58का मतलब बताऊं। सबसे पहले मैं आपको
- 2:00मिलवाना चाहता हूं इन महाशय से जिनका नाम
- 2:03है ल्यूका पैसियोली और इनको हम प्यार से
- 2:06फादर ऑफ अकाउंटिंग भी कहते हैं। ये
- 2:08अकाउंटिंग के पिताजी हैं। इनको एक बार
- 2:11प्रणाम करेंगे। बाबूजी राम-राम। अकाउंटिंग
- 2:14के पिताजी हैं ये। इन्होंने बहुत पहले एक
- 2:17किताब लिखी थी। 1494 में एक किताब लिखी थी
- 2:20इन्होंने। ठीक है ना? यह इटालियन
- 2:23मैथमेटिशियन थे वैसे तो और इन्होंने एक
- 2:26किताब लिखी थी जिसका नाम था समाद
- 2:28अर्थममेटिका।
- 2:30इस किताब के अंदर यह थे वो पहले शख्स
- 2:33जिन्होंने डबल एंट्री सिस्टम का जिक्र
- 2:36किया था। डबल एंट्री सिस्टम का जिक्र करने
- 2:39वाले पहले शख्स थे लूका पैसिवली। हालांकि
- 2:43लूका पैसियोली ये क्लेम नहीं करते कि डबल
- 2:45एंट्री सिस्टम इन्होंने इन्वेंट करा था।
- 2:47ना जी ना। ही वाज़ नॉट द इन्वेंटर ऑफ़ डबल
- 2:49एंट्री सिस्टम। बट यस इन्होंने यूज करा था
- 2:52अपनी उस किताब में इन्होंने जिक्र किया था
- 2:54डबल एंट्री सिस्टम के बारे में और अगर हम
- 2:57इतिहास में पीछे जाएं तो भैया हमारे यहां
- 3:00भी चाणक्य ने भी जो किताब लिखी थी जिसका
- 3:03नाम था अर्थशास्त्र उसके अंदर भी ऑडिट
- 3:05अकाउंट्स ये सब चीजों का प्रयोग किया गया
- 3:07था। लेकिन हां डबल एंट्री सिस्टम के ऊपर
- 3:10पहली किताब के जनक ये हैं ल्यूका पैसियोली
- 3:13इनका नाम है। तो ये मुझे लगा थोड़ी सी
- 3:14इंफॉर्मेशन आपको देनी चाहिए। हालांकि इससे
- 3:17आपकी यूटी में क्वेश्चन-वोशन नहीं आता।
- 3:19चलते हैं गाइस। यह थोड़ा सा लिखा है इनके
- 3:21बारे में पढ़ लेना। और आज के दौर में जो
- 3:24आप यह शब्द सुनते हो ना डेबिट और क्रेडिट
- 3:26यह डेबिट और क्रेडिट यह शब्द के निर्माता
- 3:29भी यह भाई साहब ही थे। डेबिट और क्रेडिट
- 3:31शब्द का भी निर्माण इन्होंने ही किया था।
- 3:34हालांकि ये डेबिट और क्रेडिट शब्द दूसरे
- 3:36शब्दों से आते हैं। ठीक है? वो भी बताऊंगा
- 3:38मैं आपको। आना मेरे साथ लाइव क्लास में
- 3:40कभी ना कभी जुड़ना। अब सर थोड़ा सा
- 3:42एकाउंटिंग के बारे में पढ़ लेते हैं।
- 3:44अकाउंटिंग क्या होती है? क्योंकि ये
- 3:45चैप्टर इंट्रोडक्शन टू अकाउंटिंग है ऑफ
- 3:47कोर्स। तो अकाउंटिंग के बारे में अगर मैं
- 3:50आपको एक टीचर के तौर पर समझाऊं तो मैं यह
- 3:53कहूंगा कि अकॉर्डिंग टू अमेरिकन
- 3:54इंस्टट्यूट ऑफ सर्टिफाइड पब्लिक
- 3:56अकाउंटेंट्स अकाउंटिंग इज़ एन आर्ट ऑफ़
- 3:57रिकॉर्डिंग क्लासिफाइंग समराइजिंग इन अ
- 3:59सिग्निफिकेंट मैनर एंड इन टर्म्स ऑफ़ मनी
- 4:01ट्रांजैक्शंस एंड इवेंट्स व्हिच आर इन
- 4:02पार्ट एटलीस्ट ऑफ़ फाइनेंसियल कैरेक्टर एंड
- 4:04इंटरप्रिटिंग द रिजल्ट्स देयर ऑफ। अब ऐसे
- 4:06तो समझ में आया नहीं होगा। आई एम डैम
- 4:08श्योर अबाउट दैट। तो अब मैं आपको बड़े भाई
- 4:10की तरह समझाने की कोशिश करता हूं कि
- 4:12अकाउंटिंग है क्या? ठीक है? ये जो
- 4:15डेफिनेशन है इस पे आएंगे थोड़ी देर में।
- 4:17लेकिन पहले मैं थोड़ा सा देसी आदमी हूं।
- 4:18तो थोड़ा देसी भाषा में आपको समझाता हूं।
- 4:20अकाउंटिंग क्या होती है? ध्यान से सुनना
- 4:22भैया। अकाउंटिंग वहीं होगी जहां बिजनेस
- 4:25होगा।
- 4:26और जहां बिजनेस होगा वहां होंगी बहुत सारी
- 4:29ट्रांजैक्शंस। है कि नहीं? वहां होंगी
- 4:32बहुत सारी ट्रांजैक्शंस। बिजनेस होगा तो
- 4:34जाहिर है ट्रांजैक्शंस होंगी।
- 4:36ट्रांजैक्शंस का मतलब क्या होता है? शिवम
- 4:38भैया यह भी बता दो। बिल्कुल बताता हूं
- 4:40बेटा। टेंशन क्यों ले रहा है? ट्रांजैक्शन
- 4:42का मतलब होता है लेनदेन। ठीक है? तो जहां
- 4:45बिजनेस होगा वहां ट्रांजैक्शंस होंगी।
- 4:48आपने अगर कोई बिजनेस करा माल खरीदा, माल
- 4:51बेचा, बिजली का बिल पे करा, वर्कर्स को
- 4:52सैलरी पे करी, ऑडिट कराया, टैक्स पे करा,
- 4:56टैक्स का रिफंड। अरे बहुत सारी
- 4:58ट्रांजैक्शंस होती हैं भाई। तो जहां
- 5:00बिज़नेस होगा वहां ट्रांजैक्शंस तो होंगी।
- 5:02हां। लेकिन आपको सिर्फ बिजनेस से रिलेटेड
- 5:06ट्रांजैक्शंस उठानी है। सारी ट्रांजैक्शंस
- 5:08नहीं उठानी। बिजनेसमैन ने शाम को अपनी
- 5:10दुकान पे ताला लगाया और फिर गर्लफ्रेंड के
- 5:12साथ चाय पीने गया। यह वहां पर जब चाय पीने
- 5:15जाएगा वहां जो ट्रांजैक्शंस होंगी वह
- 5:17हमारे लिए रेलेवेंट नहीं है। तो रेलेवेंट
- 5:19ट्रांजैक्शंस उठानी है। जो हमारे बिजनेस
- 5:21के लिए फाइनशियल ट्रांजैक्शंस हैं वो
- 5:23उठानी है। ठीक है? फाइनशियल ट्रांजैक्शंस
- 5:26को लेना है सिर्फ। यानी वो ट्रांजैक्शंस
- 5:28जिनसे हमारे बिज़नेस पे प्रभाव पड़ रहा हो।
- 5:30जिससे हमारे बिजनेस का कोई ना कोई रिसोर्स
- 5:32चेंज हो रहा हो। कोई एसेट, कोई लायबिलिटी,
- 5:34कोई कैपिटल में फर्क आ रहा हो। तो जहां
- 5:38बिजनेस वहां ट्रांजैक्शंस और जहां
- 5:39ट्रांजैक्शंस वहां याद रखने की एक मजबूरी
- 5:43बन जाती है कि यार ट्रांजैक्शंस याद नहीं
- 5:44रख पा रहे हम। तो याद रखने की जरूरत भी
- 5:46नहीं है। आप ट्रांजैक्शंस को रिकॉर्ड कर
- 5:48लो। क्या दिक्कत है? बिजनेस ट्रांजैक्शंस
- 5:50को रिकॉर्ड कर लो आप। बस बेटा रिकॉर्ड जब
- 5:53आप करोगे तो एक सिस्टमेटिक तरीके से करोगे
- 5:56ना। आप कोई अनपढ़ लाला थोड़ी हो। बिजनेस
- 6:00ट्रांजैक्शंस तो ऐसे थोड़ी रिकॉर्ड करोगे
- 6:02कि आज हमने 5000 का माल खरीदा। आज हमने
- 6:0615,000 का माल बेचा। ऐसे थोड़ी रिकॉर्ड
- 6:09करोगे। सिस्टमेटिक तरीके से रिकॉर्ड
- 6:11करोगे। और वही सिस्टमेटिक तरीका बिजनेस की
- 6:13ट्रांजैक्शंस को रिकॉर्ड करने का कहलाता
- 6:15है अकाउंटिंग। ठीक है? वही सिस्टमैटिक
- 6:19तरीका बिजनेस की ट्रांजैक्शंस को रिकॉर्ड
- 6:22करने का कहलाता है क्या? अरे बोलो ना। उसी
- 6:26को हम कहते हैं प्यार से अकाउंटिंग।
- 6:30क्लियर है बाबा?
- 6:33उसी को हम प्यार से अकाउंटिंग कहते हैं।
- 6:35यह है अकाउंटिंग का मतलब देसी भाषा में।
- 6:37अगर मैं आपकी आंख से आंख मिला के समझाऊं
- 6:39अकाउंटिंग क्या होती है? तो अकाउंटिंग का
- 6:41मतलब है बिजनेस में होने वाली
- 6:44ट्रांजैक्शंस को रिकॉर्ड करने की एक
- 6:46खूबसूरत कला। आर्ट
- 6:50डेफिनेशन भी वही कह रही है यार।
- 6:53डेफिनेशन भी वही कह रही है। ये वाली जो
- 6:54डेफिनेशन है वैसे तो अकाउंटिंग की
- 6:56डेफिनेशन तुम भी बना सकते हो 4 महीने पढ़
- 6:58के। लेकिन ये जो डेफिनेशन है वो एआईसीपीए
- 7:00ने दी एआईसीपीए बोले तो दी अमेरिकन
- 7:02इंस्टट्यूट ऑफ सर्टिफाइड पब्लिक
- 7:04अकाउंटेंट्स। ठीक है? खैर इन्होंने ये
- 7:07डेफिनेशन दी थी और इन्होंने कहा कि
- 7:09अकाउंटिंग इज दी आर्ट। अकाउंटिंग इज दी
- 7:12आर्ट ऑफ व्हाट अकाउंटिंग इज द आर्ट ऑफ
- 7:14रिकॉर्डिंग। सर देखो अकाउंटिंग में बहुत
- 7:17कुछ होता है। लेकिन सबसे जो अहम चीज है
- 7:19अकाउंटिंग के अंदर दैट इज़ रिकॉर्डिंग।
- 7:21अकाउंटिंग इज द आर्ट ऑफ रिकॉर्डिंग।
- 7:24अब रिकॉर्ड कैसे करोगे? आज मौसम बहुत
- 7:27बढ़िया है। यह रिकॉर्ड करोगे?
- 7:30आज आपके फोन पर 51 मिस कॉल्स आई हैं। यह
- 7:32रिकॉर्ड करोगे?
- 7:35क्या रिकॉर्ड करोगे? तो आप रिकॉर्ड करते
- 7:37हो सर ट्रांजैक्शंस को और इवेंट्स को। ठीक
- 7:39है? आप किसे रिकॉर्ड करते हो प्यारे
- 7:41बच्चों? ट्रांजैक्शंस को और इवेंट्स को।
- 7:44हम ट्रांजैक्शंस और इवेंट्स को रिकॉर्ड
- 7:46करते हैं। ओके? क्यूटी? ट्रांजैक्शंस और
- 7:48इवेंट्स। ट्रांजैक्शंस का मतलब मैंने पीछे
- 7:50बताया था लेनदेन। जो हम खुद करते हैं
- 7:52लेनदेन। माल खरीदा, फर्नीचर खरीदा बिज़नेस
- 7:55के लिए, एसी खरीदा बिजनेस के लिए। मोबाइल
- 7:58फोन खरीदा।
- 7:59तो फिर इवेंट्स क्या होते हैं? इवेंट्स वो
- 8:01जो खुद ही हो जाते हैं। हमने माल मंगाया,
- 8:03ओ ट्रक पलट गया, नुकसान हो गया। हमारी
- 8:06फैक्ट्री में आग लग गई, चोरी हो गई।
- 8:08इवेंट। अब ये भी रिकॉर्ड करने पड़ेंगे ना
- 8:10क्योंकि इससे भी हमारे बिजनेस के
- 8:11रिसोर्सेज चेंज हो रहे हैं। तो
- 8:13ट्रांजैक्शन वो जो खुद होती है।
- 8:16ट्रांजैक्शन वो जो हम करते हैं। इवेंट वो
- 8:18जो अपने आप हो जाता है। दोस्ती हम करते
- 8:21हैं। प्यार। खैर
- 8:24यह समझ में आया आपको? अकाउंटिंग इज द आर्ट
- 8:26ऑफ रिकॉर्डिंग। फाइनशियल ट्रांजैक्शंस एंड
- 8:28इवेंट्स। ठीक है? ट्रांजैक्शन एंड इवेंट्स
- 8:30उठाने हैं आपको। लेकिन कौन से फाइनशियल
- 8:33कौन से ट्रांजैक्शंस और इवेंट्स उठाने
- 8:34हैं? फाइनशियल। अब इसका मतलब क्या है
- 8:37बेटा? ट्रांजैक्शन तो यह भी है ना कि आपके
- 8:39पापा ने आपको पॉकेट मनी दी।
- 8:44लेकिन ये दुकान से जुड़ी हुई ट्रांजैक्शन
- 8:46तो नहीं है ना? ट्रांजैक्शन वो जिससे
- 8:49हमारी दुकान, हमारे बिजनेस के किसी
- 8:51रिसोर्स पे फर्क पड़ रहा हो। जैसे फॉर
- 8:54एग्जांपल आपके पापा की एक दुकान है। पापा
- 8:57ने आपको पॉकेट मनी दी दुकान के गल्ले में
- 8:59से पैसा निकाल कर। यह रिकॉर्ड करना पड़ेगा
- 9:01हमें बिजनेस के अंदर क्योंकि इससे हमारे
- 9:03बिजनेस के रिसोर्स पर फर्क पड़ रहा है।
- 9:06ठीक है? और दूसरी ट्रांजैक्शन कि पापा ने
- 9:10आपको अपने पर्सनल कैश में से पॉकेट मनी
- 9:12दी। यह फिर पापा बिजनेस में रिकॉर्ड नहीं
- 9:15करेंगे। आ रही है बात समझ में?
- 9:19और ना सिर्फ रिकॉर्डिंग बल्कि हमें और भी
- 9:21चीजें करनी होती हैं। जैसे कि क्लासिफाइंग
- 9:23भी करनी है। हमें समराइजिंग भी करनी है,
- 9:26समरी भी लिखनी है। है ना? फिर हमें
- 9:28रिजल्ट्स को कम्युनिकेट भी करना है,
- 9:29इंटरप्रेट भी करना है। ये थ्रूउ चलता रहता
- 9:32है एकाउंटिंग के अंदर। तो ये थाउंटिंग का
- 9:34मीनिंग। अब धीरे-धीरे आगे बढ़ाएंगे
- 9:36क्योंकि मैं नहीं चाहता कि ये वीडियो आपके
- 9:38लिए बहुत लंबी हो जाए। बट हां आपका यह
- 9:40चैप्टर यूटी में आ रहा, हाफ ईयरली में आ
- 9:42रहा हो, एनुअल एग्जाम में आ रहा हो या
- 9:43जनरल आप वैसी नॉलेज के लिए पढ़ रहे हो।
- 9:45मैं कोशिश करूंगा कि मैं पूरा धागा खोल
- 9:48दूं इस चैप्टर का आपके लिए। ठीक है? चलो
- 9:52आगे चलते हैं गाइज़।
- 9:54अब हम बात करेंगे एकाउंटिंग के
- 9:56एट्रिब्यूट्स क्या होते हैं? एट्रिब्यूट्स
- 9:58का मतलब फीचर होता है बेटा। जैसे आपके
- 10:00मोबाइल फोन के फीचर होते हैं ना। इतना
- 10:01मेगापिक्सल कैमरा, इतनी रैम, इतना
- 10:03स्टोरेज। ऐसे ही एकाउंटिंग के भी फीचर्स
- 10:06होते हैं। यानी एकाउंटिंग में आपको
- 10:07क्या-क्या देखने को मिलता है। और मैं आपको
- 10:09एक जुगाड़ बताता हूं बेटा। यहां पर मैं
- 10:11आपको एकाउंटिंग के फीचर्स बता रहा हूं।
- 10:13लेकिन मैंने उसी सीरियल में लिखे हैं जिस
- 10:15सीरियल में हम अकाउंटिंग को करते हैं। तो
- 10:17आप यह समझ लीजिए कि एकाउंटिंग की प्रोसेस
- 10:19भी हो जाएगी। ठीक है? अकाउंटिंग की
- 10:22प्रोसेस अगर कोई पूछे तो भी आपको यही
- 10:24बताना है बट सीरियल वाइज बताना है।
- 10:26क्लियर? तो भैया सबसे पहले क्या देखने को
- 10:28मिलता है? सबसे पहले हम क्या करते हैं?
- 10:30सबसे पहले नंबर एक हम आइडेंटिफाई करते हैं
- 10:33कि जो भी ट्रांजैक्शन है, जो भी इवेंट है,
- 10:36वह हमारे लिए रेलेवेंट है या नहीं है।
- 10:39हमें उसे रिकॉर्ड करना जरूरी है या नहीं
- 10:42है। वो ट्रांजैक्शन और इवेंट हमारे लिए
- 10:44फाइनेंसियल है या नहीं है? तो उसका मैंने
- 10:45आपको एग्जांपल दे ही दिया था। ठीक है?
- 10:49हमने आज ₹4 लाख का माल खरीदा। यह एक
- 10:52ट्रांजैक्शन है। हमारे लिए रेलेवेंट है।
- 10:54इसे रिकॉर्ड करना पड़ेगा। दूसरा हमारे
- 10:57पड़ोसी दुकानदार ने आज अपनी एक और ब्रांच
- 11:00खोली। इससे तुम्हारे बिजनेस पर इनडायरेक्ट
- 11:02असर तो पड़ेगा क्योंकि कस्टमर टूटेगा
- 11:04लेकिन यह ट्रांजैक्शन डायरेक्टली तुम्हारे
- 11:06लिए रेलेवेंट नहीं है। क्योंकि तुम्हारे
- 11:08डायरेक्ट रिसोर्स में कोई फर्क नहीं पड़ा।
- 11:11क्लियर हुई बात? तो सबसे पहले वी हैव टू
- 11:13आइडेंटिफाई कि भैया कौन सी ट्रांजैक्शन
- 11:15कौन सा इवेंट आपके लिए फाइनेंसियल है या
- 11:17नहीं है। क्लियर हो गई बात?
- 11:20अब एक और चीज आप बुक्स ऑफ अकाउंट्स के
- 11:23अंदर बुक्स ऑफ अकाउंट्स बेटा जहां पर हम
- 11:25खाते बनाते हैं जहां पर हम चीजों को
- 11:27रिकॉर्ड करते हैं उसको हम बोलते हैं बुक्स
- 11:28ऑफ अकाउंट्स।
- 11:31बुक्स ऑफ अकाउंट्स। आप मेरे साथ आगे
- 11:33पढ़ोगे तो मैं बुक्स ऑफ अकाउंट्स को शॉर्ट
- 11:35फॉर्म में बी ओ ए बोल दिया करूंगा। ठीक
- 11:37है? हमारी बुक्स ऑफ अकाउंट्स के अंदर हम
- 11:40ट्रांजैक्शन को ऐसे ही रिकॉर्ड नहीं कर
- 11:41देते। क्योंकि रिकॉर्ड करने से पहले आपको
- 11:43मेजर करना पड़ेगा ना कि ट्रांजैक्शन की
- 11:45वैल्यू क्या है? मेजर करना पड़ेगा ना
- 11:48बेटा। ट्रांजक्शन की वैल्यू क्या है? अरे
- 11:49भैया रुपए रुपए में डॉलर में आपको पता
- 11:52लगाना पड़ेगा ना ट्रांजक्शन क्या वैल्यू
- 11:54रखती है? आज अगर मैं आपको बोलूं कि हमने
- 11:56अपने बिजनेस के लिए दो ट्रक खरीदे। आप फॉर
- 11:59एग्जांपल मेरे अकाउंटेंट हो और मैं आपको
- 12:01बोलूं हमने आज अपने बिजनेस के लिए दो ट्रक
- 12:03खरीदे। ऐसे कैसे रिकॉर्ड कर दोगे आप? हां,
- 12:06अगर मैं बताता हूं कि दो ट्रक हमें टोटल
- 12:08₹80 लाख के पड़ गए तो आप रिकॉर्ड कर सकते
- 12:10हो। समझ रहे हो? दोनों बातों में फर्क है।
- 12:13तो हमें मॉनिटरी वैल्यू पता होनी चाहिए।
- 12:15रुपए के टर्म्स में, मनी के टर्म्स में जो
- 12:18चीज़ मेजर की जा सकती है, हम उसी को
- 12:20रिकॉर्ड करते हैं। बाकी किसी चीज़ को हम
- 12:22रिकॉर्ड नहीं कर सकते। आपके पिताजी ने
- 12:25आपको ₹2,000 पॉकेट मनी दी। आप इसे रिकॉर्ड
- 12:27कर सकते हो करना चाहो तो। लेकिन आपके
- 12:30पिताजी कितना प्यार करते हैं जिसकी वजह से
- 12:32उन्होंने आपको इतनी पॉकेट मनी दी। वो
- 12:33कितना प्यार करते हैं? तो प्यार का कोई
- 12:35मैग्नीट्यूड थोड़ी होता है। तो अकाउंटिंग
- 12:37के अंदर रिकॉर्ड्स हमें मेंटेन करने हैं।
- 12:39लेकिन रिकॉर्ड हम उसी चीज को कर सकते हैं
- 12:41जिसको हम रुपए में माप सकते हैं। जिसकी
- 12:45कोई मॉनिटरी वैल्यू है। ठीक है? मॉनिटरी
- 12:48वैल्यू यहां पर मैं लिख देता हूं।
- 12:55तो जो मॉनिटरी ट्रांजैक्शंस होती हैं
- 12:57सिर्फ उन्हीं को हम बुक्स ऑफ अकाउंट्स में
- 12:59रिकॉर्ड करते हैं। नॉन मॉनिटरी
- 13:00ट्रांजैक्शंस के लिए हमारी बुक्स ऑफ
- 13:02अकाउंट्स में कोई जगह नहीं है। इसके बाद
- 13:04अगला स्टेप आ जाता है जी ट्रांजैक्शन को
- 13:06रिकॉर्ड करना।
- 13:10ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड कैसे करें भैया?
- 13:12तो भैया ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड करने के
- 13:13लिए आप बनाते हो जर्नल।
- 13:18जर्नल एक किताब होती है। हो सकता है आपने
- 13:20ये चैप्टर पढ़ लिया हो। हो सकता है जर्नल
- 13:22के ऊपर जो मेरी वीडियो है वो आपने देखी हो
- 13:24YouTube पर। तो जर्नल एक किताब है जिसके
- 13:27अंदर आप ट्रांजिशन को पहली बार जब कोई
- 13:28ट्रांजिशन आती है नई नवेली तो हम पहली बार
- 13:31उसे जर्नल में रिकॉर्ड करते हैं या फिर
- 13:36स्पेशल पर्पस बुक्स में रिकॉर्ड करते हैं।
- 13:39स्पेशल पर्पस बुक्स। ठीक है बेटा? जर्नल
- 13:43या फिर स्पेशल पर्पस बुक्स में पहली बार
- 13:45हम ट्रांजैक्शन को रिकॉर्ड किया करते हैं।
- 13:47फिर रिकॉर्ड हो गई ट्रांजैक्शन। इसके बाद
- 13:49इसके बाद हमें क्लासिफाइंग करनी होती है।
- 13:51तो समझ जाओ प्यारे बच्चों कि मैं यहां पर
- 13:53आपको एकाउंटिंग के फीचर्स बता रहा हूं।
- 13:55एकाउंटिंग की कैरेक्टरिस्टिक्स बता रहा
- 13:57हूं और एक तरह से एकाउंटिंग की प्रोसेस भी
- 13:59बता रहा हूं। प्रोसेस मतलब क्रोनोलॉजिकल
- 14:01ऑर्डर में क्या-क्या क्या-क्या करना होता
- 14:02है हमें जब हम एकाउंटिंग करते हैं तो। ठीक
- 14:04है जी? क्लासिफाइंग। क्लासिफाइंग का मतलब
- 14:07होता है सिमिलर ट्रांजैक्शंस को एक जगह पर
- 14:10लिखना। जब आप स्कूल में जाते हो तो ऐसा
- 14:13नहीं होता कि 2000 बंदर इकट्ठे बैठे हुए
- 14:15हैं। वहीं सारी पढ़ाईयां चल रही हैं। एक ए
- 14:17बी सी डी सीख रहा है और उसके पड़ोस वाला
- 14:19बैलेंस शीट बनाना सीख रहा है। ऐसे थोड़ी
- 14:21होता है यार। क्लासिफिकेशन होता है ना
- 14:23अलग-अलग क्लासेस बनी होती है ना क्लासेस
- 14:2511th क्लास 12th क्लास। उसमें भी सेक्शंस
- 14:28वो क्लासिफाइंग ही है। सिमिलर नेचर को एक
- 14:32जगह पर इकट्ठा करना। सिमिलर नेचर को एक
- 14:34जगह पर इकट्ठा करना। तो ऐसे ही हम क्या
- 14:37करते हैं? जैसे मान लो एक तुम्हारा कस्टमर
- 14:39है राम। वह उधार बड़ा ले जाता है तो तुमने
- 14:42उसका खाता खोल दिया ताकि राम से जुड़ी हुई
- 14:45ट्रांजैक्शन आप राम के खाते में रिकॉर्ड
- 14:46करो। खाते को हम अकाउंट बोलते हैं या फिर
- 14:48लेजर बोलते हैं। तो समझ जाओ क्लासिफाइंग
- 14:50कौन सी बुक के अंदर होती है? जिस बुक का
- 14:52नाम है लेजर।
- 14:56आ रही है बात समझ में कि नहीं आ रही?
- 14:57क्लासिफाइंग हमें कहां करनी होती है? लेजर
- 14:59के अंदर करनी होती है। उसके बाद हमें
- 15:02समराइज करना है। चैप्टर के एंड में समरी
- 15:04देनी है ताकि आसान भाषा में बच्चा समझ
- 15:06पाए। तो ऐसी अकाउंटिंग अकाउंटेंट
- 15:09अकाउंटिंग करता है। रिकॉर्ड्स कौन मेंटेन
- 15:12करता है? अकाउंटेंट। लेकिन अकाउंटेंट अपने
- 15:14लिए नहीं मेंटेन करता। यूज़र्स के लिए
- 15:16मेंटेन करता है रिकॉर्ड्स। किसके लिए?
- 15:18यूज़र्स के लिए। मैं आज अगर अकाउंटिंग कर
- 15:21रहा हूं किसी कंपनी की तो अपने लिए थोड़ी
- 15:23कर रहा हूं। मेरे को क्या मतलब है? मेरे
- 15:25को तो सैलरी मिल रही है। मैं जो रिकॉर्ड
- 15:27बना रहा हूं वो किसी के लिए रेलेवेंट है।
- 15:29मैं किसी और इंसान के लिए रिकॉर्ड मेंटेन
- 15:31कर रहा हूं। शायद हो सकता है बिजनेस के
- 15:33ओनर के लिए या यूज़र्स के बारे में बताऊंगा
- 15:35मैं आपको अभी आगे चलके। ठीक है बेटा? तो
- 15:39मुझे यह करना पड़ेगा कि मैं आसान भाषा में
- 15:41उनको समझाऊं। तो आसान भाषा में समझाने के
- 15:43लिए हम क्या करते हैं भाई? हम एक चीज
- 15:45बनाते हैं जिसको हम बोलते हैं ट्रायल
- 15:47बैलेंस।
- 15:52आसान भाषा में चीजों को रिप्रेजेंट करने
- 15:54के लिए। ये भी हो गया। चार और एक पांच
- 15:58स्टेप्स हो गए। छठा स्टेप क्या होता है?
- 16:00छठा स्टेप होता है बेटा एनालिसिस और
- 16:02इंटरप्रिटेशन।
- 16:05एनालिसिस और इंटरप्रिटेशन का मतलब होता है
- 16:07जो भी आपने रिजल्ट्स बनाए हैं उसको आसान
- 16:10भाषा में लिखना। मोटा-मोटा हुआ क्या है?
- 16:11बस आपको यह बताना मोटा-मोटा हुआ क्या है?
- 16:14तो भैया मोटा-मोटा प्रॉफिट कितना हुआ है
- 16:17या लॉस कितना हुआ है? क्योंकि बिल्कुल
- 16:20लेमनैन लैंग्वेज में आप कैसे समझोगे मेरे
- 16:22अकाउंट्स? अब तुम तो कॉमर्स स्टूडेंट हो।
- 16:24कोई साइंस वाला अगर ये सब पढ़ने लगे तो
- 16:26उसका तो दिमाग चकरा जाएगा। है ना? तो
- 16:29बिल्कुल एक आम आदमी को कैसे समझाऊं मैं कि
- 16:31बिज़नेस कैसा जा रहा है? तो आम आदमी को
- 16:33क्या समझ में आता है? प्रॉफिट समझ में आता
- 16:34है, लॉस समझ में आता है या एक और चीज हम
- 16:37बना लेते हैं जिसको हम बोलते हैं बैलेंस
- 16:38शीट। क्या बोलते हैं डार्लिंग? बैलेंस
- 16:41शीट। बैलेंस शीट बना लेते हैं हम।
- 16:46ठीक है बेटे? बैलेंस शीट। और लास्ट बट नॉट
- 16:50द लीस्ट सबसे आखिरी जो स्टेप है वो होता
- 16:52है बेटा कम्युनिकेटिंग। यानी कि रिजल्ट्स
- 16:55जो भी आपने प्रोड्यूस करे हैं उसे
- 16:57कम्युनिकेट कर देना। सामने वाले को पेश कर
- 16:59देना कि ये ये लीजिए भाई साहब। यह एक
- 17:01प्लेट कढ़ी चावल। तो ऐसे ही अकाउंटेंट
- 17:03क्या करता है? कहता है यह लो जी भाई साहब
- 17:05यह रही अकाउंटिंग के रिकॉर्ड्स। अब इसे जो
- 17:07करना है करो ऐश करो। तो कम्युनिकेटिंग इज
- 17:10अ वेरीेंट एंड द लास्ट स्टेप इन द प्रोसेस
- 17:13ऑफ अकाउंटिंग इज कम्युनिकेटिंग। चलें आगे।
- 17:18चलिए गाइज़। अरे ये तो क्वेश्चन आ गया। तो
- 17:21मैंने तो कहा ही था ना भाई आया सिखा के
- 17:23जाएगा। देखो यार इस चैप्टर के ऊपर अगर मैं
- 17:25क्वेश्चंस बनाने बैठूं तो 100 क्वेश्चंस
- 17:26भी बन सकते हैं। लेकिन मुझे जस्ट एक दो
- 17:28तीन-चार क्वेश्चंस ही डाले हैं मैंने ताकि
- 17:30आपको आईडिया लगे कि इस चैप्टर से कैसे
- 17:32क्वेश्चंस आ सकते हैं। एमसीक्यूस मेनली
- 17:34आएंगे। ठीक है? तो क्वेश्चन आपके सामने है
- 17:37और क्वेश्चन आपसे कहता है कि व्हिच ऑफ द
- 17:39फॉलोइंग इज नॉट अ बिज़नेस ट्रांजैक्शन?
- 17:42व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग इज़ नॉट अ बिज़नेस
- 17:44ट्रांजैक्शन? नॉट शब्द। क्वेश्चन को अगर
- 17:45आप आराम से पढ़ सकते हो। अगर आपके अंदर
- 17:48इतनी पेशेंस है कि आप क्वेश्चन को आराम से
- 17:49रीड कर लो, तो आधा काम वहीं पर आसान हो
- 17:51जाता है आपका। ठीक है बेटा। तो निम्नलिखित
- 17:54में से क्या एक बिजनेस ट्रांजैक्शन नहीं
- 17:56है? हमें यह बताना है। तो सबसे पहला बोट
- 17:58फर्नीचर फॉर 10,000 फॉर बिज़नेस। भाई, अपने
- 18:01दुकान के लिए हमने ₹10,000 का फर्नीचर
- 18:03खरीदा। तो, यह तो बिज़नेस सेंशन है।
- 18:04रेलेवेंट है हमारे लिए। रिकॉर्ड करना
- 18:06पड़ेगा इसको। पेड सैलरीज़ टू एम्प्लाइजज़
- 18:085,000। यह भी इंपॉर्टेंट है। रिकॉर्ड करना
- 18:10पड़ेगा। रेलेवेंट है।
- 18:13तीसरा पेड सनंस फीस फ्रॉम पर्सनल बैंक
- 18:16अकाउंट। और चौथा पेड सनंस फी फ्रॉम द
- 18:19बिनेस 20,000
- 18:22दो एग्जांपल हैं। हमने बेटे की फीस पे
- 18:24करी।
- 18:26यहां पर हमने फीस पे करी दुकान के पैसे से
- 18:28और यहां पर हमने फीस पे करी पर्सनल बैंक
- 18:30अकाउंट से। तो भाई साहब पर्सनल बैंक
- 18:31अकाउंट से अगर आप बेटे की फीस पे करोगे तो
- 18:33उससे बिजनेस के किसी रिसोर्स पे फर्क नहीं
- 18:35पड़ेगा। तो इसीलिए सी पार्ट इज़ द आंसर।
- 18:38यही है जो हमारी एक बिजनेस ट्रांजैक्शन
- 18:41नहीं है। यह हमारे लिए फाइनेंशियल
- 18:43ट्रांजैक्शन नहीं है। बात समझ में आ रही
- 18:46है? आ रही है? तो आगे चलें। एक और
- 18:49क्वेश्चन कि वि इज द लास्ट स्टेप ऑफ
- 18:53अकाउंटिंग एज अ प्रोसेस ऑफ इंफॉर्मेशन।
- 18:55लास्ट स्टेप क्या होता है? अभी पीछे बताया
- 18:57था मैंने। रिकॉर्डिंग लास्ट स्टेप होता है
- 18:59क्या? चल बे चल। झूठ बोल रहा है।
- 19:01प्रिपरेशन ऑफ समरीज़ समराइजिंग लास्ट स्टेप
- 19:03होता है क्या? चल बे चल। चौथा एनालिसिस और
- 19:06इंटरप्रिटेशन लास्ट स्टेप होता है क्या?
- 19:07ना जी ना। कम्युनिकेशन होता है। शिवम भैया
- 19:10ने बताया था कम्युनिकेटिंग इज़ द लास्ट
- 19:12स्टेप। इस तरह के क्वेश्चंस आ सकते हैं।
- 19:14लेवल थोड़ा अप भी हो सकता है, थोड़ा डाउन
- 19:15भी हो सकता है। तो किताब की रीडिंग बहुत
- 19:18जरूरी है बेटा। मैं आपको ये डंके की चोट
- 19:20पे बोल रहा हूं कि मैं इस वीडियो के अंदर
- 19:23मैं एनसीईआरटी कवरेज कर रहा हूं। सीबीएसई
- 19:26कवरेज कर रहा हूं। लेकिन फिर भी आपके
- 19:28स्कूल टीचर कहां तक जा सकते हैं? कितना
- 19:30डीप क्वेश्चन पूछ सकते हैं वो मैं नहीं
- 19:32बता सकता। तो इसलिए मैं क्या रेकमेंड
- 19:34करूंगा कि आप अपनी जो भी किताब आपने खरीदी
- 19:36है, उससे क्वेश्चंस की प्रैक्टिस लगाएं
- 19:38बहुत अच्छे से। मैं तो एक वन शॉट वीडियो
- 19:40रिकॉर्ड करने की कोशिश कर रहा हूं ताकि आप
- 19:43टाइम पर यूटी से एक दिन पहले एक रात पहले
- 19:45भी अगर आप पढ़ो तो इस एक वीडियो को देखकर
- 19:47आप फटाफट अपना एग्जाम दे दो। लेकिन अगर
- 19:49वक्त है तो किताब से लाइन बाय लाइन रीडिंग
- 19:51जरूर करना। ठीक है? चलो भाई आगे चलते हैं।
- 19:55अब एकाउंटिंग के ऑब्जेक्टिव्स की बात करते
- 19:57हैं। ऑब्जेक्टिव्स का मतलब उद्देश्य होता
- 19:59है बेटा। एकाउंटिंग के उद्देश्य क्या होते
- 20:01हैं? एकाउंटिंग के ऑब्जेक्टिव्स क्या होते
- 20:03हैं? आइए जरा अब इसके बारे में बात करते
- 20:04हैं। ठीक है? सबसे पहला
- 20:08मेंटेनिंग अकाउंटिंग रिकॉर्ड्स। यार देखो
- 20:11सबसे पहला जो ऑब्जेक्टिव है वो तो
- 20:12रिकॉर्ड्स मेंटेन करना है। अकाउंटिंग का
- 20:16मेन काम क्या है? अकाउंटिंग इज द आर्ट ऑफ
- 20:17क्या? रिकॉर्डिंग। रिकॉर्ड्स मेंटेन करना।
- 20:20बिजनेस में कितनी सेल्स हो रही हैं? कितनी
- 20:22परचेजेस हो रही हैं। तमाम चीजों का
- 20:24बेसिकली रिकॉर्ड मेंटेन करना। क्योंकि
- 20:26रिकॉर्ड नहीं रखोगे तो भूल जाओगे। है ना?
- 20:28तो रिकॉर्ड्स मेंटेन करना। डे टू डे
- 20:30ऑपरेशन की सारी चीजें। हमारे पास कितना
- 20:32कैश है, कितना हमने परचेस करा है माल, है
- 20:35ना? कितना हमने सेल करा है? कितना हमारा
- 20:39कितने हमारे डेटर्स हैं जिनसे हमें पैसा
- 20:42लेना है, तमाम चीजें रिकॉर्ड्स में मेंटेन
- 20:45करना। यह हमारा सबसे पहला काम है।
- 20:48दूसरा फैसिलिटेटिंग मैनेजमेंट। मैनेजमेंट
- 20:51को मदद करना। असल में हमारी मैनेजमेंट टीम
- 20:55जो होती है ना उनको करनी होती है डिसीजन
- 20:57मेकिंग। उन्हें डिसीजंस लेने होते हैं
- 20:59बिजनेस के बारे में। अलग-अलग तरह के
- 21:01डिसीजंस लेने होते हैं। तो उनको डिसीजन
- 21:03मेकिंग करने के लिए कौन मदद करेगा? आज अगर
- 21:07हमारी कंपनी की मैनेजमेंट यह सोच रही है
- 21:09कि हमें एक नया प्रोडक्ट ल्च करना है। अब
- 21:11यह हैवी डिसीजन है। इसमें बहुत पैसा लगेगा
- 21:14तो कैसे लिया जाएगा यह डिसीजन?
- 21:17हम पर्ची डालेंगे राजा मंत्री चोर सिपाही
- 21:20वाली या पुगम करेंगे। क्या करेंगे या
- 21:24सिक्का उछालेंगे? अरे भैया रिकॉर्ड्स को
- 21:26देखेंगे। रिकॉर्ड्स आपको बताएंगे कि पैसा
- 21:29है या नहीं है। लॉन्ग टर्म में यह डिसीजन
- 21:31हमारा बेनिफिशियल रहेगा कि नहीं रहेगा। तो
- 21:32मैनेजमेंट की मदद करना यह दूसरा
- 21:34ऑब्जेक्टिव होता है बेटा अकाउंटेंट का या
- 21:36अकाउंटिंग का। ठीक है? मैनेजमेंट की मदद
- 21:39करना। तीसरा डिटरमाइनिंग प्रॉफिट या लॉस।
- 21:42देखो बिजनेस के जो ओनर्स होते हैं वो बड़े
- 21:44कीन होते हैं। यह जानने में बड़े इच्छुक
- 21:46होते हैं ये जानने में कि हमारा बिजनेस
- 21:48प्रॉफिटेबल जा भी रहा है या नहीं। हम
- 21:50प्रॉफिट कमा पा रहे हैं या नहीं। है ना?
- 21:52तो उसके लिए आपको प्रॉफिट या लॉस कैलकुलेट
- 21:55करके बताना है। जी। प्रॉफिट या लॉस
- 21:58कैलकुलेट करने के लिए हम फाइनल अकाउंट्स
- 21:59बनाते हैं जो कि आप धीरे-धीरे पढ़ोगे मेरे
- 22:01साथ थ्रूउ द ईयर। चौथा फाइनशियल पोजीशन
- 22:04पता लगाना। ना सिर्फ प्रॉफिट या लॉस बल्कि
- 22:07ओनर को यह भी पता लगाना होता है कि हमारे
- 22:09बिजनेस की फाइनेंशियल पोजीशन क्या है?
- 22:12कहां स्टैंड करते हैं हम? आज की डेट में
- 22:14हमारी नेटवर्थ क्या है? हमारे पास एसेट्स
- 22:16कितनी है? लायबिलिटीज कितनी है?
- 22:18तो चौथा जो ऑब्जेक्टिव है वह है जी
- 22:21डिटरमाइनिंग फाइनशियल पोजीशन और पांचवा
- 22:24ऑब्जेक्टिव जो कि प्रोसेस में भी लास्ट
- 22:26बात थी प्रोवाइडिंग इंफॉर्मेशनेशन टू द
- 22:28यूज़र्स। ये वही बात हो गई कम्युनिकेटिंग
- 22:30वाली है ना कम्युनिकेटिंग।
- 22:34तो रिजल्ट्स को कम्युनिकेट करना भी हमारा
- 22:36एक उद्देश्य है। तो ये पांच मोटे-मोटे
- 22:38ऑब्जेक्टिव्स हैं के। ठीक है? ये
- 22:41एनसीईआरटी में भी है। अगर आप टी एस
- 22:43ग्रेवाल पढ़ोगे तो उसमें भी है। डी के
- 22:45गोयल में भी है। तमाम किताबों के अंदर यह
- 22:47टॉपिक कॉमन पाया जाता है। ठीक है? अब इससे
- 22:50पहले कि हम आगे बढ़े हम थोड़ा सा पानी पी
- 22:52के दिखाएंगे आपको क्योंकि पानी भी जरूरी
- 22:54है।
- 22:58हम
- 23:05अब बात करते हैं फंक्शनंस। अब कई बच्चों
- 23:07को बेसिकली समझ में नहीं आता कि फंक्शनंस
- 23:09का मतलब क्या होता है। ठीक है?
- 23:11मेरा ऑब्जेक्टिव था कि मैं तुझे पढ़ा
- 23:13सकूं। उसके मैंने उसके लिए मैंने एक
- 23:15फंक्शन परफॉर्म करा कि मैं अपने स्टूडियो
- 23:18के अंदर आया और मैंने तेरे लिए क्लास
- 23:20रिकॉर्ड करी। तो ऑब्जेक्टिव्स को फुलफिल
- 23:23करने के लिए कुछ फंक्शनंस परफॉर्म करने
- 23:25होते हैं। क्या बोला मैंने? ऑब्जेक्टिव्स
- 23:26को फुलफिल करने के लिए हमें कुछ फंक्शनंस
- 23:28परफॉर्म करने होते हैं। मेरा ऑब्जेक्टिव
- 23:31है। मेरा ऑब्जेक्टिव है कि मुझे रिकॉर्ड्स
- 23:34मेंटेन करने हैं। मैनेजमेंट को मदद करनी
- 23:36है। डिटरमाइन करना है प्रॉफिट या लॉस। ब्ल
- 23:38ब्ल ब्ल उसके लिए मुझे यह सब फंक्शनंस
- 23:40परफॉर्म करने पड़ेंगे। तो सिस्टमेटिक
- 23:43रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए आपको क्या
- 23:45करना पड़ेगा भाई साहब? आपको एक किताब
- 23:46बनानी पड़ेगी जिसका नाम है जर्नल या फिर
- 23:49आपको कैश बुक मेंटेन करनी पड़ेगी। है ना?
- 23:52या फिर आपको अदर बुक्स मेंटेन करनी
- 23:54पड़ेंगी जिससे आपके रिकॉर्ड्स मेंटेन हो
- 23:56जाएंगे। फिर दूसरा एक आपका ऑब्जेक्टिव था
- 24:00प्रॉफिट या लॉस डिटरमाइन करना। है ना?
- 24:04प्रॉफिट या लॉस डिटरमाइन करना। फाइनेंसियल
- 24:06पोजीशन डिटरमाइन करना। ये कैसे होगा? यह
- 24:08सब होगा बेटा फाइनशियल स्टेटमेंट्स बनाकर।
- 24:11फाइनशियल स्टेटमेंट्स आपको बनानी पड़ेंगी।
- 24:13फाइनशियल स्टेटमेंट्स के अंदर हम
- 24:15क्या-क्या बनाते हैं? फाइनशियल
- 24:16स्टेटमेंट्स के अंदर हम बनाते हैं इनकम
- 24:18स्टेटमेंट।
- 24:22इनकम स्टेटमेंट हम बनाते हैं। हम पोजीशन
- 24:24स्टेटमेंट बनाते हैं।
- 24:27ठीक है ना? हम बैलेंस शीट बनाते हैं। तो
- 24:30ये सब आपके फंक्शनंस आपको परफॉर्म करने
- 24:33पड़ेंगे। फिर एक फंक्शन है आपका लीगल
- 24:35रिक्वायरमेंट्स को मीट करना। लीगल
- 24:36रिक्वायरमेंट्स मतलब आपका कितना टैक्स बन
- 24:38रहा है, कितना जीएसटी बन रहा है, सारे
- 24:41कंप्लायंसेस को फुलफिल करना। अगला
- 24:44कम्युनिकेट करना। यह पहले भी था तो यह
- 24:46कॉमन हो गया। कम्युनिकेट करना फाइनेंसियल
- 24:49इंफॉर्मेशन को तो अपने रिकॉर्ड्स को
- 24:51पब्लिश करना। जनरल पब्लिक के लिए भी है
- 24:53ना? अपने रिकॉर्ड्स को पब्लिश करना। आज की
- 24:55डेट में अगर आप Google खोल के देखो तो आप
- 24:58जितनी भी कंपनीज़ हैं, जितनी भी पब्लिक
- 25:00कंपनीज़ हैं, आप उन सबकी बैलेंस शीट वगैरह
- 25:02सारे रिकॉर्ड्स आप चेक कर सकते हो। ठीक
- 25:04है? और अगला बेटा मैनेजमेंट को असिस्ट
- 25:07करना।
- 25:09ये सारे मैंने आपको फंक्शनंस बता दिए। तो
- 25:12कई सारे पॉइंट्स हैं जो आपको कॉमन
- 25:13मिलेंगे। ऑब्जेक्टिव में भी मिल गया,
- 25:15फंक्शन में भी मिल गया। फिर आगे एडवांटेज
- 25:16पढ़ाऊंगा, वहां भी मिल जाएगा।
- 25:20अब एडवांटेजेस पे आ ही गए हम। ये देखो
- 25:22अकाउंटिंग के देखो भाई साहब कितने सारे
- 25:24एडवांटेजेस हैं। आ हा हा मजा ही आ गया।
- 25:28मजा ही आ गया। अब इतने सारे एडवांटेजेस
- 25:30मैं आपको पढ़ाऊंगा। कितने हैं ये?
- 25:31करीब-करीब 10 एडवांटेज मैं आपको पढ़ा के
- 25:34भेजूंगा यहां से। एग्जाम में कैसे
- 25:36क्वेश्चन आएगा? या तो राइट एनी फोर
- 25:39एडवांटेज? तो कोई से भी चार लिख देना। या
- 25:42फिर एक एमसीक्यू आएगा। उसमें तीन एडवांटेज
- 25:45होंगे। चौथा कुछ अलग ही होगा। तो पूछेगा,
- 25:48व्हिच ऑफ़ द फॉलोइंग इज़ नॉट एन एडवांटेज?
- 25:50तो इस तरह से आप कर सकते हो। तो खैर
- 25:52एडवांटेजेस मतलब अकाउंटिंग के फ़ क्या होते
- 25:54हैं? तो फ़ायदे तो हैं ही। तभी तो तूने
- 25:56कॉमर्स लिए है। फायदे नहीं होते तो तू
- 25:57कॉमर्स थोड़ी लेता है ना जी। तो सबसे पहला
- 26:00जी हमें बिजनेस के बारे में फाइनेंशियल
- 26:03इंफॉर्मेशन होती है। ठीक है? फाइनेंशियल
- 26:06इंफॉर्मेशनेशन अबाउट द बिनेस। हमारा
- 26:08बिज़नेस क्या कर रहा है, अच्छा कर रहा है,
- 26:10बुरा कर रहा है, कितनी आज की डेट में
- 26:12हमारी कैपिटल है, कितना हम प्रॉफ़िट मेंटेन
- 26:14कर पा रहे हैं? ये सारी इंफॉर्मेशन आपको
- 26:16पता लग पाती है अकाउंटिंग की वजह से। तो
- 26:18अकाउंटिंग का फायदा ही तो हुआ ही है।
- 26:20दूसरा मैनेजमेंट को मदद मिल पाती है। यह
- 26:23मैंने पीछे भी बताया आपको। हमारे
- 26:24रिकॉर्ड्स मैनेजमेंट के काम में आते हैं
- 26:27डिसीजन मेकिंग के लिए। तीसरा बड़ा
- 26:29इंपॉर्टेंट और बड़ा सुंदर एडवांटेज जो है
- 26:32वो है रिप्लेसेस मेमोरी।
- 26:35आपका जो बेस्ट एंप्लई भी होगा ना जो सबसे
- 26:39ज्यादा बढ़िया एंप्लई भी होगा ना। उससे भी
- 26:42अगर आप पूछोगे ना कि बता 5 दिन पिछले 5
- 26:44दिन में क्या-क्या ट्रांजैक्शंस हुई है
- 26:46हमारे बिजनेस में। वो नहीं बता पाएगा भाई।
- 26:49कहां से बता देगा? तुम्हें याद है चार दिन
- 26:51पहले डिनर में क्या खाया था तुमने? नहीं
- 26:54याद तो कैसे बिजनेस ट्रांजिशंस कैसे याद
- 26:57रख लोगे? तो आपकी मेमोरी जो है उसमें आप
- 27:01अच्छे-अच्छे गाने याद रख करो। कविताएं याद
- 27:03करो। बिज़नेस ट्रांजैशंस याद मत करो।
- 27:05बिज़नेस ट्रांजैक्शन तो आपको अकाउंटिंग बता
- 27:07देगी। तो आपकी मेमोरी रिप्लेस हो सकती है।
- 27:09इससे मेमोरी रिप्लेस होने का मतलब कुछ और
- 27:11नहीं है। मेमोरी रिप्लेस का मतलब है कि
- 27:13आपको हर चीज याद नहीं रखनी पड़ेगी क्योंकि
- 27:15आप रिकॉर्ड्स मेंटेन कर रहे हो क्योंकि आप
- 27:16अकाउंटिंग कर रहे हो। चौथा फैसिलिटेट्स
- 27:19कंपैरेटिव स्टडी। अब कंपैरेटिव स्टडी पे
- 27:22मैं कुछ आपको बताना चाहता हूं। कंपैरेटिव
- 27:24स्टडी का मतलब होता है बेटा कंपैरिजन।
- 27:30अब कंपैरिजन दो तरह का होता है।
- 27:34एक होता है इंटरफर्म कंपैरिजन।
- 27:39और एक होता है इंट्राफर्म कंपैरिजन।
- 27:44फर्ज करो आपके मन में आया कि यार मुझे
- 27:47कंपेयर करना है कि मैं पिछले साल के
- 27:48मुताबिक इस साल इंप्रूव करा है मैंने कि
- 27:51नहीं करा।
- 27:53मैंने 2025 के हिसाब से 2026 में इंप्रूव
- 27:56करा है कि नहीं करा।
- 27:59तो 2025 के रिकॉर्ड्स देख लो और 2026 के
- 28:02रिकॉर्ड्स देख लो और आपस में कंपेयर कर
- 28:04लो। हो गया कंपैरिजन।
- 28:06कंपैरिजन ईजी हो गया ना? क्योंकि तब भी
- 28:08आपने अकाउंटिंग करी थी और आज भी आपने
- 28:10अकाउंटिंग करी है। कर लो कंपैरिजन। या फिर
- 28:12आपको लगता है कि यार मुझे खुद का कंपैरिजन
- 28:14खुद से नहीं करना बल्कि किसी दूसरी कंपनी
- 28:16से करना है। यानी कि मेरे को यह चेक करना
- 28:18है कि x कंपनी और y कंपनी दोनों ही 2026
- 28:22के अंदर इनका प्रॉफिट कितना आया है? तो
- 28:24भैया यहां भी अकाउंटिंग हो रही है। यहां
- 28:26भी अकाउंटिंग हो रही है। कर लो कंपैरिजन।
- 28:28कंपैरिजन ईजी किसने कराया? कंपैरिजन ईजी
- 28:32किसकी वजह से हो पाया? अकाउंटिंग की वजह
- 28:33से हो पाया। है कि नहीं दोस्त? तो यह भी
- 28:36एक एडवांटेज है। अगला है जी फैसिलिटेट
- 28:40सेटलमेंट ऑफ टैक्स लायबिलिटीज। अब इसका
- 28:42मतलब क्या है? यार तुम्हारा कितना टैक्स
- 28:46बनेगा वो डिपेंड करता है तुम्हारी इनकम
- 28:47पे। और इनकम तुम्हें तभी पता चल पाएगी जब
- 28:50तुमने रिकॉर्ड्स मेंटेन करे होंगे और
- 28:52अकाउंटिंग करी होगी। तो अकाउंटिंग की वजह
- 28:55से अपने टैक्स को कैलकुलेट करना और टैक्स
- 28:58की पेमेंट्स कर पाना। फिर चाहे वो इनकम
- 29:01टैक्स हो या जीएसटी हो या किसी और प्रकार
- 29:03का टैक्स हो। यह आसान हो पाता है जस्ट
- 29:05बिकॉज़ ऑफ़ अकाउंटिंग। यह भी फायदा है
- 29:07अकाउंटिंग का। और अगला है जी फैसिलिटेट्स
- 29:10लोनस। जब आप बैंक में जाते हो ना लोन
- 29:13लेने, तो बैंक वाले ऐसे नहीं देखते कि आय
- 29:15हाय हाय हाय कितना हैंडसम आदमी है। यह ले
- 29:17₹1 करोड़ का लोन ले ले। ऐसे नहीं मिलता
- 29:19लोन। आपको अपने रिकॉर्ड्स दिखाने पड़ेंगे।
- 29:22आपको अपनी अकाउंटिंग दिखानी पड़ेगी। दिखाना
- 29:24पड़ेगा। अपनी प्रॉफिटेबिलिटी शो करनी
- 29:26पड़ेगी। आपको अपनी क्रेडिट वर्दीनेस दिखानी
- 29:29पड़ेगी। नाउ व्हाट इज क्रेडिट वर्दीनेस? यह
- 29:31बता देता हूं मैं आपको।
- 29:38बेटा क्रेडिट वर्दीनेस का मतलब होता है
- 29:40उधार चुकाने की क्षमता। आपके अंदर डू यू
- 29:43हैव दी एबिलिटी टू रीपे योर डेप्ट ऑ नॉट।
- 29:46तो वो आपको दिखाना पड़ेगा तभी आपको लोन
- 29:49मिलेगा। तो वो अकाउंटिंग की वजह से ही
- 29:51पॉसिबल है। हम अकाउंटिंग शो कर देंगे।
- 29:52रिकॉर्ड्स दिखा देंगे। ये लो जी हमारे
- 29:54रिकॉर्ड्स देख लो अपने आप। ठीक है? चलो
- 29:58अगला बड़ा इंपॉर्टेंट है। एविडेंस इन
- 30:01कोर्ट।
- 30:04आपका एक रेगुलर सप्लायर है जिससे आप
- 30:07रेगुलरली माल खरीदते हो अपनी दुकान के लिए
- 30:09अपने बिजनेस के लिए उसने आपके ऊपर केस ठोक
- 30:12दिया। क्यों भाई? क्योंकि उसे लग रहा है
- 30:15कि एक दिन एक पेमेंट थी ₹1 लाख की जो आपने
- 30:18शायद नहीं करी है। लेकिन आपको पता है कि
- 30:19आपने वो ₹1 लाख की पेमेंट कर दी थी। उसे
- 30:22लग रहा है कि आपने पेमेंट नहीं करी।
- 30:24क्योंकि वह गधा रिकॉर्ड्स मेंटेन नहीं
- 30:26करता। लेकिन हम रिकॉर्ड्स मेंटेन करते
- 30:28हैं। तो अगर हम रिकॉर्ड्स मेंटेन करते हैं
- 30:29तो हमारे पास एविडेंस मिल जाएगा। हम
- 30:32किताबें पलटेंगे। हमें वह ट्रांजैक्शन दिख
- 30:34जाएगी। हम जज को जज के मुंह पे फेंक के
- 30:37मारेंगे कि ये लो जज साहब भगाओ इसे बाहर।
- 30:41ठीक है? एविडेंस इन कोर्ट। फैसिलिटेट सेल
- 30:44ऑफ बिनेस। इसका मतलब क्या है? हो सकता है
- 30:47मैं अब मुझे मोक्ष चाहिए। मुझे निर्वाणा
- 30:51अचीव करना है। मुझे सब कुछ छोड़छाड़ के
- 30:54पहाड़ों पर बस जाना है।
- 30:57तो मैं अपने बिजनेस को बेचना चाहता हूं।
- 30:59मैं अपने चलते हुए बिजनेस को ही बेचना
- 31:01चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि मेरी चलती
- 31:03हुई दुकान जो बढ़िया चल रही है उसे आके
- 31:05कोई खरीद ले और वो चला ले मेरी दुकान। मैं
- 31:07तो सन्यास ले रहा हूं। तो अगर कोई मेरे
- 31:09बिजनेस को खरीदेगा तो उसे देखना होगा ना
- 31:11कि मेरा बिजनेस प्रॉफिटेबल है या नहीं है।
- 31:14क्या पता मैं उसको चूना लगा के जा रहा
- 31:16हूं। क्या पता मुझे सन्यास लेना ही ना हो।
- 31:19मुझे थाईलैंड जाना हो। तो अगर कोई मेरा
- 31:22बिजनेस खरीदेगा तो उसे तो पता होना चाहिए
- 31:25ना कि मेरा बिजनेस प्रॉफिटेबल है या नहीं
- 31:27है तो वह कैसे पता लगेगा अकाउंटिंग
- 31:28रिकॉर्ड्स दिखा दूंगा मैं कि ये देख छोटू
- 31:322025 में मेरा प्रॉफिट देख कितना था 2024
- 31:34में देख कितना था अब वो मेरा बिजनेस खरीद
- 31:36लेगा और दूसरा यह भी कि वो मेरा बिज़नेस
- 31:40कितने में खरीदेगा जितनी मेरी आज की डेट
- 31:42में बिज़नेस की वर्थ होगी जितनी मेरे
- 31:44बिज़नेस की औकात होगी उतने में खरीदेगा वो
- 31:46तो वो भी रिकॉर्ड से ही पता चल पाएगा
- 31:49नाइंथ असिस्ट िस्टेंस इन द इवेंट ऑफ
- 31:51इनसॉल्वेंसी। कई बार हमारे बिजनेस की हालत
- 31:54इतनी कमजोर हो जाती है कि हमारे कर्जे
- 31:56बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं और हम
- 31:57इनसॉल्वेंट हो जाते हैं। इनसॉल्वेंट का
- 31:59मतलब एक ऐसा आदमी जिसके कर्जे बहुत बढ़
- 32:02गए। जिसकी एबिलिटी बहुत ना के बराबर हो
- 32:04रखी है कर्जा चुकाने की। तो इनसॉल्वेंसी
- 32:06के केस में हमारे रिकॉर्ड्स ही तो हमें
- 32:08बताएंगे कि हमारा कितना-कितना पैसा
- 32:10कहां-कहां पड़ा है आज की डेट में। क्योंकि
- 32:11हमने रिकॉर्ड्स मेंटेन कर रखे हैं। वरना
- 32:14बिना रिकॉर्ड्स मेंटेन करे पता है क्या
- 32:16होता है? मैंने अपनी लाइफ में बहुत से ऐसे
- 32:17लोगों को देखा है जो मेरे सामने बदकिस्मती
- 32:20से मतलब भगवान ना करे कभी किसी के साथ ऐसा
- 32:22पर वह इनसॉल्वेंट हुए हैं। तो
- 32:26जो लोग पैसा मांगने वाले थे वो तो बड़ी
- 32:28जल्दी उनके घर पर आ जाते थे। लेकिन
- 32:32जिनसे उनको पैसा लेना था वो भटकते भी नहीं
- 32:35थे घर के आसपास। कई बार ऐसा होता है।
- 32:39एक हमारे अंकल जी थे मेरे पापा के बहुत
- 32:42बहुत ट्रू फ्रेंड थे। वह इस दुनिया में
- 32:44नहीं है।
- 32:46तो वह अपने अंतिम दिनों से पहले इनॉल्वेंट
- 32:48टाइप हो गए थे। तो उनके घर पर यार
- 32:52जिन्होंने पैसा लेना है वह तो अंकल की डेथ
- 32:55के बाद भी आते रहे। लेकिन जिन्होंने अंकल
- 32:57को देना था पैसा वो दिखे भी नहीं।
- 33:00रिकॉर्ड्स होना जरूरी है। खैर हेल्पफुल इन
- 33:04पार्टनरशिप अकाउंट्स। सपोज़ आप यह डिसीजन
- 33:08लेते हो कि शिवम भैया के साथ पार्टनरशिप
- 33:10करनी है। अब शिवम भैया तो बड़े तेज हैं। हो
- 33:12सकता है आपको धोखाधड़ी कर दें। कुछ
- 33:13घपलेबाजी कर दें। तो पार्टनरशिप अकाउंट्स
- 33:16में आपको हेल्प मिल जाती है अगर आप
- 33:18अकाउंटिंग करते हो। आपको डरना नहीं होगा।
- 33:20आपको यह रहेगा कि नहीं यार सारी चीज का
- 33:22रिकॉर्ड मेंटेंड है कि कहां बिजनेस क्या
- 33:24परफॉर्म कर रहा है? कितना प्रॉफिट हो रहा
- 33:26है, कितना लॉस हो रहा है। तो ये सारे
- 33:27एडवांटेजेस होते हैं बेटा एकाउंटिंग के।
- 33:29लेट्स मूव ऑन फर्दर। अब हम बात करते हैं
- 33:32एकाउंटिंग की कुछ लिमिटेशंस के बारे में।
- 33:34अकाउंटिंग के नुकसान। हां, होते हैं
- 33:36एकाउंटिंग के नुकसान।
- 33:39हर चीज के फायदे नुकसान है भाई। हर चीज के
- 33:43पानी के भी होंगे पता नहीं
- 33:47हम
- 33:53लिमिटेशंस मतलब एकाउंटिंग के
- 33:55डिसएडवांटेजेस वैसे तो देखो एकाउंटिंग
- 33:58बहुत काम की चीज है तभी तो तुम्हें पढ़ाई
- 33:59जा रही है। लेकिन स्टिल अगर हम एकाउंटिंग
- 34:01के नुकसानों के बारे में बात करें भी तो
- 34:03कुछ नुकसान डेफिनेटली सामने आते हैं। सबसे
- 34:06पहला नुकसान
- 34:08सबसे पहला नुकसान यह है कि अकाउंटिंग इज़
- 34:10नॉट फुल्ली एग्जैक्ट। अकाउंटिंग कभी पूरी
- 34:13तरह से एग्जैक्ट हो ही नहीं सकती। क्योंकि
- 34:15अकाउंटिंग के अंदर में कई सारी चीजें
- 34:17एस्टीेटेड बेसिस पे करनी होती है। जैसे
- 34:20आपने एक चीज सुनी होगी। आपने एक चीज सुनी
- 34:22होगी डेप्रिसिएशन करके आपने एक शब्द सुना
- 34:25होगा।
- 34:27सुना है ना? डेप्रिसिएशन। डेप्रिसिएशन का
- 34:29मतलब होता है बेटा कि हमारी किसी एसेट की
- 34:32वैल्यू में गिरावट आना। ठीक है? हमारी
- 34:35किसी एसेट की वैल्यू में गिरावट आना। उसको
- 34:39हम बोलते हैं डेप्रिसिएशन। ठीक है? तो अगर
- 34:42हमारी एसेट की वैल्यू में गिरावट आ रही है
- 34:45तो कितनी गिरावट आ रही है?
- 34:48कितनी गिरावट आ रही है? कैसे पता लगेगा?
- 34:51सोचो।
- 34:53मैं अगर यह फोन मैंने सपोज ₹1 लाख का लिया
- 34:56है और एक साल हो गया तो आज इस फोन की
- 34:59वैल्यू में कितनी गिरावट आई है? 10,000
- 35:0015,000 मुझे मेरे को वो एग्जैक्टली नहीं
- 35:03पता ना यार। तो मुझे एस्टेटेड बेसिस पर
- 35:06उसे रिकॉर्ड करना होता है। तो इसीलिए
- 35:08अकाउंटिंग कभी फुल्ली एग्जैक्ट नहीं हो
- 35:10सकती। ऐसी एक टर्म होता है जिसको हम बोलते
- 35:12हैं बैड डे्स। यह पढ़ोगे आप मेरे साथ बैड
- 35:16डे्स मतलब हमारा पैसा डूबा। तो कई बार
- 35:20क्या होता है? हम बैड डे्स के लिए
- 35:21प्रोविजन बनाते हैं। बताता हूं घबराओ मत।
- 35:25फॉर एग्जांपल आपको लग रहा है कि आपका यह
- 35:27कस्टमर पैसा नहीं देगा तो आप पहले से ही
- 35:29अपना नुकसान घोषित कर देते हो। लेकिन अभी
- 35:31एक्चुअली नुकसान हुआ तो नहीं है ना। तो कई
- 35:34बार हम इतने एडवांस हो जाते हैं अकाउंटिंग
- 35:36में। कई बार हम इतने इतनी चीजें अपने
- 35:39एस्टीमेट के हिसाब से लगाते हैं कि
- 35:41अकाउंटिंग फुल्ली एग्जैक्ट नहीं हो पाती।
- 35:43तो ये अकाउंटिंग का नुकसान है। अगला
- 35:47अगला है जी अकाउंटिंग इग्नोरर्स दी इफेक्ट
- 35:50ऑफ प्राइस लेवल चेंजेस। अकाउंटिंग प्राइस
- 35:53लेवल चेंजेस में जो फर्क आ रहा है उसे
- 35:56इग्नोर कर देती है। मैं आपको बताता हूं।
- 35:58अगर पिछले साल भी आपका प्रॉफिट ₹100 का था
- 36:01और इस साल भी आपका प्रॉफिट ₹100 का है तो
- 36:03अकाउंटिंग तो यह बोलेगी कि हमारी प्रॉफिट
- 36:05प्रॉफिटेबिलिटी पे कोई फर्क नहीं पड़ा। ना
- 36:08हम ऊपर गए हैं ना हम नीचे गए। है ना?
- 36:12पिछले साल भी प्रॉफिट ₹100 का था और इस
- 36:14साल भी प्रॉफिट ₹100 का है। तो अकाउंटिंग
- 36:16तो यही बोलेगी कि हमारा प्रॉफिट बिल्कुल
- 36:17सेम है। लेकिन ऐसा नहीं है। ऐसा क्यों
- 36:21नहीं है? मैं तो कहूंगा आप डाउन गए हो।
- 36:24क्योंकि आपका प्रॉफिट पिछले साल के बराबर
- 36:26है लेकिन महंगाई तो बढ़ गई ना। प्राइस
- 36:28लेवल में तो चेंज हो गया ना। पिछले साल तो
- 36:30₹100 में 1 लीटर पेट्रोल आ जाता था। अब तो
- 36:33नहीं आ रहा।
- 36:35अकाउंटिंग इग्नोरर्स दी इफेक्ट ऑफ प्राइस
- 36:37लेवल चेंजेस। अगला है जी अकाउंटिंग में कई
- 36:40बार अनरियलिस्टिक इंफॉर्मेशन को भी हम
- 36:42रिकॉर्ड कर देते हैं। जैसे कि सबसे बड़ा
- 36:45एग्जांपल मुझे लगता है प्रोविजन फॉर
- 36:47डाउटफुल डे्स। आप एक ऐसे नुकसान को दिखा
- 36:50रहे हो जो अभी हुआ भी नहीं है। तो यह
- 36:52अनरियलिस्टिक ही तो है।
- 36:55और एक और चीज अकाउंटिंग इग्नोर्स दी
- 36:57इफेक्ट ऑफ क्वालिटेटिव एलिमेंट्स। ये भी
- 36:59है एक इंपॉर्टेंट पॉइंट। चौथा पॉइंट। ठीक
- 37:01है? आपकी अगर एक एसेट है ₹100 की तो आप
- 37:06उसे रिकॉर्ड कर रहे हो। लेकिन आपका जो
- 37:09एंप्लई इतना शानदार काम कर रहा है जिसकी
- 37:12वजह से आपको लाखों करोड़ों रुपए का
- 37:13प्रॉफिट हो रहा है तो आप उस एंप्लई को
- 37:15रिकॉर्ड नहीं कर पा रहे क्योंकि एंप्लई की
- 37:17मनी के टर्म्स में कोई वैल्यू नहीं है ना
- 37:19यार इसलिए अकाउंटिंग इग्नोरर्स द
- 37:21क्वालिटेटिव एलिमेंट्स और पांचवा
- 37:24अकाउंटिंग मे लेड टू विंडो ड्रेसिंग देखो
- 37:26अकाउंटिंग क्योंकि पूरी तरह से एग्जैक्ट
- 37:28तो है नहीं तो कहीं ना कहीं लूप होल है
- 37:30अकाउंटिंग के अंदर जिससे हम विंडो
- 37:32ड्रेसिंग भी कर सकते हैं अच्छा अब ये
- 37:34विंडो ड्रेसिंग का मतलब क्या होता है या
- 37:36विंडो ड्रेसिंग का मतलब होता होता है
- 37:37खिड़की पे खड़े हो के कपड़े बदलना। नहीं,
- 37:39विंडो ड्रेसिंग का मतलब यह नहीं होता।
- 37:41विंडो ड्रेसिंग का मतलब होता है अकाउंट्स
- 37:43को मैनपुलेट करना।
- 37:47बात कुछ और थी, बताई कुछ और गई।
- 37:51यानी कई बार हम अपनी एसेट्स और अपनी
- 37:54लायबिलिटीज में ऐसा हेरफेर करते हैं कि हम
- 37:56एसेट्स को ज्यादा और लायबिलिटीज को कम
- 37:58दिखा देते हैं। सो दैट हमें लोन जल्दी मिल
- 38:01जाए। तो, यह अकाउंटिंग का एक नुकसान है कि
- 38:04अकाउंटिंग मे लेड टू विंडो ड्रेसिंग।
- 38:09अब है जी रोल ऑफ अकाउंटिंग इन बिजनेस।
- 38:12आमतौर पर मैंने आपको बताया अकाउंटिंग के
- 38:14ऑब्जेक्टिव्स क्या हैं? अकाउंटिंग के
- 38:15एडवांटेजेस, लिमिटेशंस, प्रोसेस भी मैंने
- 38:18आपको बताई अकाउंटिंग की। एक दो क्वेश्चंस
- 38:19भी हमने देखे। अब एक बिजनेस को खड़ा करने
- 38:22में एक बिजनेस को मजबूती देने में
- 38:24एकाउंटिंग का क्या रोल है? वो मैं आपको
- 38:26बताता हूं। देखो यार बिजनेस जो है ना,
- 38:29बिजनेस को सबसे इंपॉर्टेंट चीज चाहिए होती
- 38:32है सिस्टमेटिक रिकॉर्ड्स।
- 38:35रिकॉर्ड्स
- 38:38अगर आपने किसी चीज को रिकॉर्ड नहीं करा,
- 38:40चाहे आप कितना ही प्रॉफिट कमा लो, आपको
- 38:43सेटिस्फेक्शन नहीं होगी क्योंकि आपको पता
- 38:44ही नहीं चल पाएगा प्रॉफिट है कितना। तो
- 38:47सिस्टमेटिक रिकॉर्ड्स हम मेंटेन कर पाते
- 38:49हैं बेटा जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ अकाउंटिंग। दूसरा
- 38:51मैनेजमेंट को मदद मिल पाती है। मैनेजमेंट
- 38:53को मदद मिलेगी तो मैनेजमेंट के डिसीजंस
- 38:56बेटर हो जाएंगे। और जितने बेटर डिसीजंस
- 38:58उतना ही बेटरमेंट आपके बिजनेस का होगा।
- 39:00असिस्टेंस टू मैनेजमेंट। फिर आप कंपैरिजन
- 39:03कर पाते हो। चाहे इंटरफर्म कंपैरिजन करना
- 39:06हो, चाहे इंट्राफर्म पीछे बताया था। आप
- 39:10पिछले साल के मुताबिक दूसरे से तो
- 39:11कंपैरिजन खैर क्या ही करेंगे। खुद से ही
- 39:13कंपैरिजन कर लो पहले। है ना? अपना
- 39:15कंपैरिजन खुद से ही कर लो कि यार पिछले
- 39:17साल के मुताबिक इस साल हमारी
- 39:18प्रॉफिटेबिलिटी बेटर हुई है कि नहीं हुई
- 39:20है। फिर कोर्ट में हमें काम आ पाती है
- 39:23अकाउंटिंग। कोई डिस्प्यूट अगर हो गया
- 39:25हमारा किसी सप्लायर के साथ, किसी कस्टमर
- 39:28के साथ या इवन अपने एंप्लई के साथ भी तो
- 39:31कोर्ट में हम एविडेंस के तौर पर दिखा सकते
- 39:33हैं कि ये देख रिकॉर्ड्स मेरे को मत चेला।
- 39:36ठीक है? रोल ऑफ अकाउंटिंग इन बिनेस। उसके
- 39:40बाद सर आगे चलते हैं। और अब मैं आपको
- 39:43बताना चाहूंगा एक बहुत ही इंपॉर्टेंट चीज।
- 39:45द थ्री पिलर्स ऑफ अकाउंटिंग। अकाउंटिंग के
- 39:48तीन पिलर्स, तीन स्तंभ अकाउंटिंग के
- 39:51जिन्हें हम अकाउंटिंग की ब्रांचेस भी कहते
- 39:53हैं। अगर अकाउंटिंग एक पेड़ है तो उस पेड़
- 39:57की ब्रांचेस हैं। तो द थ्री पिलर्स ऑफ
- 40:00अकाउंटिंग आल्सो नोन एज द ब्रांचेस ऑफ
- 40:03अकाउंटिंग।
- 40:081 से 1 1/2 मिनट में आपको समझ में आ
- 40:10जाएगा। देखो भाई जब हम अपने बिजनेस के
- 40:14रिकॉर्ड्स मेंटेन कर पाते हैं सो दैट हमें
- 40:16पता लग पाए कि यार हमारे को किससे कितना
- 40:19पैसा लेना है, किसको कितना पैसा देना है।
- 40:20बेसिक प्रॉफिट लॉस का पता लगाना। उस
- 40:23अकाउंटिंग की शाखा को हम बोलते हैं
- 40:24फाइनेंशियल अकाउंटिंग।
- 40:27वहीं दूसरी आती है कॉस्ट अकाउंटिंग। कॉस्ट
- 40:30के अंदर हर एक चीज प्रोडक्ट पे डिपेंड
- 40:32करती है। जैसे अगर आप एक प्रोडक्ट बना रहे
- 40:34हो। हो सकता है आपकी कंपनी में यह बॉटल्स
- 40:37बनाई जाती हैं। तो इस बॉटल को बनाने में
- 40:40कितनी कॉस्ट आ रही है? कितनी लागत लग रही
- 40:42है इस बॉटल को बनाने में? क्योंकि आपको लग
- 40:44रहा है कि बॉटल को बनाने में सिर्फ
- 40:45प्लास्टिक ही लगा है। लेकिन मुझे इस बॉटल
- 40:47को देखकर कुछ एंप्लाइजज़ भी ध्यान में आ
- 40:49रहे हैं। कुछ एंप्लाइजज़ रहे होंगे ना, कुछ
- 40:52वर्कर्स रहे होंगे ना जिन्होंने इस बॉटल
- 40:54को बनाने में मदद करी होगी। तो उनकी सैलरी
- 40:57भी तो जुड़नी चाहिए ना कॉस्ट के अंदर। इस
- 41:00अकाउंटिंग के इस पहलू को हम बोलते हैं
- 41:01बेटा कॉस्ट अकाउंटिंग। किसी प्रोडक्ट की
- 41:04कॉस्ट डिटरमाइन करने के लिए कॉस्ट को
- 41:06कंट्रोल करने के लिए जो अकाउंटिंग की जाती
- 41:08है दैट इज़ कॉस्ट अकाउंटिंग और तीसरी होती
- 41:10है मैनेजमेंट अकाउंटिंग। बेटा मैनेजमेंट
- 41:12अकाउंटिंग जो है वो फाइनेंशियल और कॉस्ट
- 41:15अकाउंटिंग की मदद से ही होती है। इवन
- 41:17कॉस्ट अकाउंटिंग भी फाइनेंसियला की मदद से
- 41:19ही होती है। मैनेजमेंट अकाउंटिंग और एक और
- 41:22चीज मैं आपको बताऊं फाइनशियल जो है वो
- 41:25एक्सटर्नल एज वेल एज इंटरनल वर्ल्ड के लिए
- 41:27होती है। यानी हमारी बिजनेस की बाहरी
- 41:30दुनिया भी यूज करती है फाइनेंसियल
- 41:32अकाउंटिंग को और हमारे जो अंदर के लोग हैं
- 41:34वह तो यूज़ ऑफ कोर्स करते ही हैं। लेकिन यह
- 41:37जो कॉस्ट एकाउंटिंग और मैनेजमेंट
- 41:38अकाउंटिंग है, यह होती है फॉर इंटरनल यूज़
- 41:41ओनली।
- 41:43ऑफ़ कोर्स फॉर इंटरनल यूज़। अब तुम्हें
- 41:45प्लास्टिक बोतल बनाने में कितने की पड़ रही
- 41:47है? वो तुम बाहर पब्लिश कर दोगे क्या? कि
- 41:50हमें तो ₹40 की पड़ रही है। लेकिन हम 100
- 41:52का बेचते हैं। यह पब्लिश करेंगे हम। ऐसी
- 41:56मैनेजमेंट मैनेजमेंट को डिसीजन मेकिंग
- 41:59करनी है। शेयर प्राइस ना हिल जाए। ठीक है
- 42:03ना?
- 42:04फ्यूचर में इन्वेस्टर से कैसा पैसा
- 42:06बटोरेें?
- 42:08फ्यूचर में नए प्रोडक्ट्स ल्च करें कि
- 42:10नहीं करें? नए बिजनेस वेंचर्स में हाथ
- 42:12डालें कि नहीं डालें? इसके लिए हमें मदद
- 42:15लेना होता है। ऑफ कोर्स कॉस्ट अकाउंटिंग
- 42:16और फाइनेंसियला दोनों का। तो डिसीजन
- 42:19मेकिंग और प्लानिंग करने के लिए जो हम
- 42:21मैनेजमेंट अकाउंटिंग जो हम अकाउंटिंग करते
- 42:22हैं, उसको हम बोलते हैं मैनेजमेंटिंग।
- 42:24इसके अंदर हम स्ट्रेटजीज़ बनाते हैं, बजट्स
- 42:26बनाते हैं, कैश फ्लो स्टेटमेंट्स बनाते
- 42:28हैं। ये सब भी आप पढ़ोगे लेकिन हायर स्टडीज़
- 42:30में 11थ में तो नहीं पढ़ोगे। 11th में बाकी
- 42:32मैं आपको बता दूं अभी आपका जो कोर है वो
- 42:35सिर्फ फाइनेंसियलाउंटिंग है। तो इस पेज से
- 42:37पहले और इस पेज के बाद मैं जो कुछ भी बता
- 42:39रहा था वो सिर्फ फाइनेंसियल एकाउंटिंग के
- 42:40बारे में ही बता रहा था।
- 42:42चलते हैं सर आगे।
- 42:45यहां पर मैंने लिख भी दिया है। इसको आप
- 42:47आराम से पढ़ लीजिएगा। ये लो मैं साइड हो
- 42:49जाता हूं। ठीक है? इसको आप आराम से पढ़
- 42:51लेना।
- 42:53ये कॉस्टाउंटिंग के बारे में थोड़ा सा
- 42:55लिखा है मैंने। और ये मैंने मैनेजमेंटिंग
- 42:58के बारे में लिखा है। अब चलते हैं आगे। एक
- 43:00बहुत इंपॉर्टेंट चीज आपने सुना भी होगा
- 43:03इसके बारे में और आपने सुना नहीं तो पढ़ा
- 43:05तो डेफिनेटली होगा। आपकी बुक के कवर पेज
- 43:07पे क्या लिखा है? आपकी बुक का नाम क्या
- 43:09है? डबल एंट्री बुक कीपिंग।
- 43:13बुक कीपिंग आ रहा है उसके अंदर वर्ड। तो
- 43:16ये बुककीपिंग का मतलब क्या होता है सर? यह
- 43:18जो बुककीपिंग है क्या वो अकाउंटिंग ही है?
- 43:20क्या वो अकाउंटिंग का ही दूसरा नाम है?
- 43:22बुक कीपिंग या बुककीपिंग अलग चीज़ है। अलग
- 43:24चीज़ है भाई साहब। अलग चीज़ है बुककीपिंग।
- 43:26बताऊंगा क्या होता है। और अकाउंटेंसी क्या
- 43:28होता है? यह भी बताऊंगा। लेकिन अभी पहले
- 43:30के लिए मैं आपको बताऊं बुक कीपिंग क्या
- 43:32होता है? बेटा अकाउंटिंग ही बुक कीपिंग
- 43:34है। बस यह है कि पहले के जमाने में जो
- 43:38स्कोप था वो बड़ा लिमिटेड था। पहले के
- 43:40जमाने में जो रिकॉर्ड्स मेंटेन करने का
- 43:42स्कोप था वो बड़ा लिमिटेड था। इसलिए उसको
- 43:45हम बुककीपिंग कहते थे। लेकिन धीरे-धीरे
- 43:47धीरे-धीरे क्या हुआ? बिनेसेस बढ़े।
- 43:50बिजनेसेस ने ग्रो करा।
- 43:53कंपनियां बनी,
- 43:55मल्टीीनेशनल कंपनियां बनी। तो बुक कीपिंग
- 43:58धीरे-धीरे अकाउंटिंग बनने लगी।
- 44:02आसान भाषा में अगर मैं आपको समझाऊं
- 44:04अकाउंटिंग की मैंने आपको प्रोसेस बताई थी।
- 44:06आइडेंटिफाई करना फाइनेंसियल ट्रांजैक्शंस
- 44:08और इवेंट्स को मेजर करना उनको मनी के
- 44:10टर्म्स में। फिर उनको रिकॉर्ड करना फिर
- 44:12क्लासिफाई करना।
- 44:14फिर आगे समराइज करना, एनालिसिस और
- 44:17इंटरप्रिटेशन करना, कम्युनिकेट करना। तो
- 44:20जो पूरी प्रोसेस है अगर आप वहां पर सिर्फ
- 44:23रिकॉर्डिंग और क्लासिफाइंग तक अपना काम
- 44:26करते हो तो उतने पार्ट को हम बोलते हैं
- 44:28बुककीपिंग। तो यस बुककीपिंग इज अ पार्ट ऑफ
- 44:30अकाउंटिंग। बुककीपिंग इज अ पार्ट।
- 44:35बुककीपिंग किसका पार्ट है? अकाउंटिंग का।
- 44:37अकाउंटिंग पूरी प्रोसेस है। पूरी कर ली तो
- 44:40अकाउंटिंग और बीच में रुक गए तो उतना
- 44:42कहलाएगा बुककीपिंग। खत्म हो गई बात। तो
- 44:44अकाउंटिंग होल है और बुक कीपिंग उसका
- 44:48पार्ट है। ठीक है? यहां पर मैंने लिखा भी
- 44:50हुआ है कि बुक कीपिंग इज अ प्रोसेस ऑफ
- 44:52आइडेंटिफाइंग फाइनेंसियल ट्रांजैक्शन।
- 44:54यानी बुक कीपिंग के अंदर हम आइडेंटिफाई
- 44:55करेंगे, मेजर करेंगे, रिकॉर्ड करेंगे,
- 44:57क्लासिफाई करेंगे। बस अकाउंटिंग जो है वो
- 45:00बुक कीपिंग का ही एक एक्सटेंशन है, एक
- 45:02एडिशन है कि यहां पर क्लासिफाइंग तक का
- 45:05सारा काम तो होगा लेकिन यहां पर हम
- 45:07समराइजिंग भी करेंगे ताकि सामने वाले को
- 45:09इजीली अंडरस्टैंडेबल हो। है ना? फिर उसके
- 45:11बाद हम कम्युनिकेट भी करेंगे यूज़र्स तक।
- 45:14हम रिजल्ट्स को इंटरप्रेट भी करेंगे। बहुत
- 45:16सारी चीजें करेंगे तो वो अकाउंटिंग बन
- 45:18जाएगी। आपके यूटी में और मतलब कोई भी
- 45:21एग्जाम हो ये डिफरेंस जो है वो बहुतेंट
- 45:24है। द डिफरेंस बिटवीन बुककीपिंग एंड
- 45:25अकाउंटिंग। इसको ध्यान से पढ़ लेना भाई।
- 45:27ठीक है? तो स्टेज बुक कीपिंग ऑफ कोर्स
- 45:30प्राइमरी स्टेज है और अकाउंटिंग सेकेंडरी
- 45:33स्टेज है। अकाउंटिंग क्योंकि शुरू ही वहां
- 45:35होती है। असल अकाउंटिंग। असल अकाउंटिंग तो
- 45:37शुरू ही वहां होती है जहां बुककीपिंग खत्म
- 45:39होती है। क्योंकि जब हम अकाउंटिंग की पूरी
- 45:41प्रोसेस में जब हम रिकॉर्डिंग क्लासिफाइंग
- 45:43तक का काम कर रहे होते हैं तो तब तक तो हम
- 45:44बुक कीपिंग ही कर रहे हैं। इसके बाद
- 45:47ऑब्जेक्टिव क्या है? बुक कीपिंग का
- 45:48ऑब्जेक्टिव है सिर्फ रिकॉर्ड्स मेंटेन
- 45:50करना। जबकि अकाउंटिंग का ऑब्जेक्टिव है
- 45:53फाइनेंशियल पोजीशन पता लगाना, कम्युनिकेट
- 45:56करना। समझ रहे हो? बुक कीपिंग करने से आप
- 45:59सिर्फ कभी प्रॉफिट या लॉस नहीं पता लगा
- 46:01पाओगे। उसके लिए आपको अकाउंटिंग करनी
- 46:03पड़ेगी क्योंकि अकाउंटिंग करने में ही आप
- 46:05समराइजिंग करते हो और एनालिसिस
- 46:06इंटरप्रिटेशन वगैरह निकालते हो। आगे सर
- 46:11बुक कीपिंग तो डेली करनी पड़ेगी आपको
- 46:13क्योंकि ट्रांजैक्शंस तो डेली हो रही हैं
- 46:14हो रही है हो रही है हो रही है। लेकिन हां
- 46:16प्रॉफिट या लॉस का पता हम डेली नहीं
- 46:18लगाते। तो अकाउंटिंग जो है वो एनालिटिकल
- 46:21जॉब है और वो बड़ी डायनेमिक है। वो आप
- 46:23कभी-कभी करते हो। वो डेली नहीं करते।
- 46:24रूटीन वर्क नहीं होता अकाउंटिंग।
- 46:26परफॉर्मेंस बुककीपिंग आसान काम है तो
- 46:29ज्यादा ट्रेंड लोग नहीं चाहिए बुककीपिंग
- 46:32के लिए लेकिन अकाउंटिंग जो है एक
- 46:33स्पेशलाइज्ड फंक्शन है तो आपको ट्रेंड
- 46:35पढ़े लिखे लोग चाहिए इसके बाद लेवल ऑफ
- 46:37स्किल्स ऑफ कोर्स मैकेनिकल चीज है बुक
- 46:39कीपिंग जैसे लकड़ी काटना है ना मैकेनिकल
- 46:42लगे हुए हैं वही काम डेली ऐसी है
- 46:44बुककीपिंग
- 46:45ठीक है ना लेकिन अकाउंटिंग जो है उसके
- 46:48अंदर आपको स्पेशल स्किल्स चाहिए अपना
- 46:50दिमाग लगाना पड़ता है इंटरप्रिटेशन के लिए
- 46:52सर ठीक है बुककीपिंग समझ में आ गई
- 46:54अकाउंटिंग समझ में आ गई अब ये अकाउंट
- 46:56इंटेंसी क्या चीज है? जो इतनी देर से मैं
- 46:58कर रहा हूं ना इस कमरे में इस स्टूडियो
- 47:01में वो अकाउंटिंग है। जो इतनी देर से मैं
- 47:04कर रहा हूं वो अकाउंटिंग है। वो वो
- 47:07अकाउंटेंसी है। अकाउंटेंसी है। क्योंकि इस
- 47:10वक्त कोई बिजनेस तो नहीं चल रहा मेरा और
- 47:12तुम्हारा मैं टीचर हूं। आप स्टूडेंट हो।
- 47:16मैं तो बस आपको पढ़ाने की एजुकेट करने की
- 47:18कोशिश कर रहा हूं ना अकाउंटिंग के बारे
- 47:20में। तो अकाउंटिंग की जो नॉलेज है उसको हम
- 47:23अकाउंटेंसी कहते हैं। ठीक है? अकाउंटिंग
- 47:27इज क्या? अकाउंटेंसी इज़ क्या? द नॉलेज।
- 47:33अकाउंटेंसी इज़ द नॉलेज ऑफ। बोलो ना?
- 47:36अकाउंटेंसी इज़ द नॉलेज ऑफ़ अकाउंटिंग। यानी
- 47:39जब एक सब्जेक्ट मैटर की तरह हम पढ़ते हैं
- 47:41अकाउंटिंग को तो वह अकाउंटेंसी कहलाता है।
- 47:43तो जो यह सब्जेक्ट है जो आप पढ़ रहे हो वह
- 47:45अकाउंटेंसी है। अकाउंटेंसी सब्जेक्ट है
- 47:48जिसका सीबीएसई के अंदर कोड है 05।
- 47:52आ रही है बात समझ में?
- 47:55लेकिन आगे चल के जब हम हायर स्टडीज में
- 47:56पढ़ते हैं तो रहता वो सब्जेक्ट ही है
- 47:58लेकिन नाम हम उसको अकाउंटिंग ही बोल देते
- 47:59हैं। फाइनेंसियला बोल देते हैं। कॉस्ट
- 48:01अकाउंटिंग या मैनेजमेंट अकाउंटिंग चल जाता
- 48:03है काम। इंपॉर्टेंट चीज बताई मैंने आपको।
- 48:06आगे चलते हैं मालिक। यह भी हो गया। अब मैं
- 48:10आपको एक और इंपॉर्टेंट चीज बताता हूं। और
- 48:12यह जो मैं बताऊंगा, यह अल्ट्रा इंपॉर्टेंट
- 48:14चीज है। यह बेहद इंपॉर्टेंट चीज है। यह
- 48:16मैं आपको बताने जा रहा हूं। जी
- 48:18क्वालिटेटिव कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ
- 48:20अकाउंटिंग।
- 48:23क्वालिटेटिव कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ
- 48:24अकाउंटिंग।
- 48:26देखो यार, अकाउंटिंग के अंदर आपने इतनी
- 48:28देर से यही समझा कि अकाउंटिंग के अंदर
- 48:30क्वांटिटीज रिकॉर्ड होती हैं। क्वांटिटीज
- 48:33रुपीज में चीजें रिकॉर्ड होंगी। नंबर ऑफ
- 48:35यूनिट्स में चीजें रिकॉर्ड होंगी।
- 48:38लेकिन जो रिकॉर्ड्स आप मेंटेन कर रहे हो
- 48:42जो अकाउंटिंग रिकॉर्ड्स आप मेंटेन कर रहे
- 48:44हो उसके अंदर यह चार क्वालिटीज भी होनी
- 48:46चाहिए।
- 48:48वैसे तो अकाउंटिंग के अंदर हम क्वांटिटी
- 48:50रिकॉर्ड करते हैं ना एक दो तीन चार पांच 6
- 48:527 आठ 1 लाख 2 लाख 4 लाख 5 लाख 1 करोड़ दो
- 48:55करोड़
- 48:57लेकिन जो रिकॉर्ड्स आपने मेंटेन करे उन
- 48:59रिकॉर्ड्स के अंदर मुझे ये चार खूबियां
- 49:02चार क्वालिटीज दिखनी चाहिए। सो दी आर नोन
- 49:06टू बी द क्वालिटेटिव कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ
- 49:08अकाउंटिंग। अब यह क्या है? सबसे पहला
- 49:12रिलायबिलिटी।
- 49:15मैं आपके द्वारा आप सपोज मेरे यहां
- 49:17अकाउंटेंट के तौर पर काम करते हो और मैं
- 49:20बिजनेस का ओनर हूं या मैं एक आउटसाइड
- 49:22वर्ल्ड का बंदा हूं जो बिज़नेस में
- 49:24इन्वेस्ट करना चाह रहा हूं। तो मैं आपकी
- 49:26अकाउंटिंग पे रिलाई कर सकूं। ऐसी होनी
- 49:28चाहिए आपकी अकाउंटिंग कि मैं रिलाई कर
- 49:30सकूं। अब मैं रिलाई कब कर पाऊंगा?
- 49:33जब आपने अकाउंटिंग एविडेंस के बेसिस पे
- 49:36करी होगी। जब आपने पर्सनल माथापच्ची उसमें
- 49:38नहीं लगाई होगी। जो जैसा है उसको वैसा ही
- 49:41अगर आपने दिखाया होगा तो ही तो मैं रिलाई
- 49:44कर पाऊंगा ना आपके रिकॉर्ड्स पे।
- 49:46रिलायबिलिटी
- 49:49आ रही है बात समझ में? यानी कि आप एक
- 49:51अकाउंटेंट हो और अगर मैं दूसरे किसी
- 49:53अकाउंटेंट से भी रिकॉर्ड्स बनवाऊं तो वह
- 49:55भी सेम ही रिकॉर्ड्स बनाएगा। उसका भी
- 49:56प्रॉफिट सेम ही आएगा तो आपकी इंफॉर्मेशन
- 49:59रिलायबल बनेगी। विश्वसनीय है। ठीक है?
- 50:04दूसरा है जी रेलेवेंस।
- 50:08जो चीजें मेरे काम की हैं, जो मेरे लिए
- 50:10मटेरियल इंफॉर्मेशन है, जो मेरे लिए
- 50:12सिग्निफिकेंट इंफॉर्मेशन है, जो मेरे काम
- 50:14की इंफॉर्मेशन है, वो मुझे दिखनी चाहिए
- 50:16आपके डेटा के अंदर। अगर मैं मालिक हूं और
- 50:19मैंने आपको अकाउंटेंट रखा हुआ है, तो मुझे
- 50:22रेलेवेंट फिगर्स दिखनी चाहिए। बता भाई
- 50:24कितनी एसेट्स हैं? बता भाई हम पर कर्जा
- 50:26कितना है? हमारा इस साल का प्रॉफिट कितना
- 50:28है? तुमने यह सब तो रिकॉर्ड करानी और आपने
- 50:31बाकी सारी चीजें रिकॉर्ड कर दी। नंबर ऑफ
- 50:34एमंप्लाइज रिकॉर्ड कर दिए। वह भी जरूरी
- 50:36है। वह एचआर डिपार्टमेंट का काम है। नंबर
- 50:40ऑफ एम्प्लाइज का मैं क्या करूं यार? मुझे
- 50:42तो प्रॉफिटेबिलिटी देखनी है ना। तो जो
- 50:43इंफॉर्मेशन मुझे चाहिए वो वो रेलेवेंट
- 50:46इंफॉर्मेशन वहां पर गिवन है या नहीं है?
- 50:49दूसरी ये क्वालिटी होनी चाहिए आपकी
- 50:51अकाउंटिंग इनेशन के अंदर। और तीसरी तीसरी
- 50:53है जी अंडरस्टैंडेबिलिटी।
- 50:55अंडरस्टैंडेबिलिटी कैसे आती है?
- 50:58अंडरस्टैंडेबिलिटी तब आती है जब आप आसान
- 51:01भाषा में समझने वाली भाषा में अपने
- 51:04रिकॉर्ड्स को पेश करते हो तो आती है
- 51:06अंडरस्टैंडेबिलिटी।
- 51:09आपने रिकॉर्ड्स मेंटेन करे और मैं उसको
- 51:11समझ ही नहीं पा रहा। जैसे हम कम्युनिकेट
- 51:14करते हैं तो कम्युनिकेशन का एक सबसे बड़ा
- 51:18पिलर क्या है? कम्युनिकेशन का एक सबसे
- 51:21बड़ा रूल क्या है? कि मैंने जैसा समझाना
- 51:24चाहा आपने ठीक वैसा ही समझा। इसी को तो हम
- 51:27बोलेंगे बेस्ट कम्युनिकेशन।
- 51:31जैसे अगर मैं आपको बोलूं कि पिटेगा तू भी
- 51:35यार तो ये मैंने जेनुइनली पीटने के लिए
- 51:37थोड़ी बोला है। आप बाहर स्कूल के ख लड़के
- 51:40बुला के खड़े हो गए। और मैंने बोला कैसे
- 51:42था? पिटेगा क्या तू?
- 51:45ये अंडरस्टैंडेबिलिटी।
- 51:49तो आपने रिकॉर्ड्स जैसे पेश करे हैं, मैं
- 51:52उसको ठीक वैसे ही अंडरस्टैंड कर पा रहा
- 51:54हूं लेमैन होने के नाते। तो
- 51:56अंडरस्टैंडेबिलिटी लाने के लिए हम चीजों
- 51:59को बहुत ही सिंपल भाषा में लिखते हैं।
- 52:01बहुत ज्यादा यू नो कॉम्प्लिकेटेड नहीं
- 52:03होनी चाहिए अकाउंटिंग। और चौथा
- 52:05कंपेरेबिलिटी भी होनी चाहिए सर। यानी कि
- 52:07मैं कंपैरिजन कर पाऊं। कंपैरिजन मैं तभी
- 52:10कर पाऊंगा जब आपने 2025 के अंदर भी सेम
- 52:13मेथोडोलॉजी यूज करी होगी और 2026 के अंदर
- 52:15भी आपने सेम मेथोडोलॉजी यूज़ करी होगी। तभी
- 52:19मेरे लिए कंपैरिजन करना इजी हो पाएगा ना
- 52:21यार। कंपैरिजन गधे का गधे के साथ होता है।
- 52:23घोड़े का घोड़े के साथ होता है। गधे का घोड़े
- 52:26के साथ क्या कंपैरिजन?
- 52:29तो ये चार क्वालिटेटिव कैरेक्टरिस्टिक्स
- 52:31हैं की। क्वेश्चन कैसे बनता है? ध्यान से
- 52:33सुन लेना। एमसीक्यू आता है और पूछते हैं
- 52:36कि वि ऑफ द फॉलोइंग इज नॉट अ क्वालिटेटिव
- 52:40कैरेक्टरिस्टिक ऑफ अकाउंटिंग। तो उसमें
- 52:43चारों में से तीन बातें होती हैं। चौथी
- 52:45कुछ और ही बात होती है।
- 52:48ठीक है? ट्रेननेबिलिटी लिख देंगे। कुछ भी
- 52:50लिख देंगे। चौथी कुछ और ही बात होती है।
- 52:52तो ये चार शब्द जो है टैटू करा लो आज ही।
- 52:55चलें आगे। चलो भाई।
- 52:58और अगर और बेटर समझना है तो ये चार्ट मुझे
- 53:01दिखा था एनसीईआरटी के अंदर। मैंने नहीं
- 53:02बनाया था ये एनसीआरटी के अंदर मुझे ये
- 53:04चार्ट दिखा था। बहुत ही खूबसूरत है। इसको
- 53:07आप समझने की कोशिश करो। क्वालिटेटिव
- 53:09कैरेक्टरिस्टिक्स सबसे पहला डिसीजन मेकर्स
- 53:12को जरूरत होती है एकाउंटिंग की। तो डिसीजन
- 53:14मेकर को अंडरस्टैंडेबिलिटी होनी चाहिए
- 53:16ताकि उनका डिसीजन यूज़फुल साबित हो पाए
- 53:18उनके लिए। ठीक है? तो सबसे पहला
- 53:20अंडरस्टैंडेबिलिटी एक फीचर हो गया जो होना
- 53:22चाहिए आपकी अकाउंटिंग के अंदर। ठीक है? यह
- 53:24अंडरस्टैंडेबिलिटी।
- 53:26क्लियर? अंडरस्टैंडिंग के बाद
- 53:28अंडरस्टैंडेबिलिटी के बाद क्या होना चाहिए
- 53:29सर?
- 53:32कंपेरेबिलिटी
- 53:34जो मैंने आपको पीछे बताया था यहां पर
- 53:36बताया था ना कंपेयरेबिलिटी
- 53:39उसके बाद रेलेवेंस रेलेवेंस के अंदर
- 53:43रेलेवेंट मेरे लिए रिकॉर्ड्स कब रहेंगे जब
- 53:45मुझे टाइमली जो खबर मुझे चाहिए जो मुझे
- 53:47मेरे बिजनेस से के रिकॉर्ड्स से चाहिए वो
- 53:49मुझे टाइमली पता लग जाए तो ही तो इनेशन
- 53:51मेरे लिए रेलेवेंट है यार अगर मुझे 2026
- 53:55के अंदर कोई डिसीजन लेना है तो मुझे 2026
- 53:57के रिकॉर्ड्स चाहिए ना आप मुझे 2024 के
- 53:59रिकॉर्ड्स दे रहे हो तो तो मैं 2026 में
- 54:01डिसीजंस कैसे ले पाऊंगा? है ना? फिर उसके
- 54:03अंदर आपका फीडबैक भी होना चाहिए। एज एन
- 54:05अकाउंटेंट आपका क्या फीडबैक है चीजों को
- 54:07लेकर कि भैया इस साल अगर प्रॉफिट कम हुआ
- 54:10है तो उसका कुछ ना कुछ रीज़न भी तो रहा
- 54:11होगा। वो रीज़ तो इसके लिए हम अकाउंटिंग
- 54:14बनाते वक्त वक्त हम बहुत सारे ना फुट
- 54:16नोट्स भी देते हैं। फुट नोट्स का मतलब
- 54:19क्या होता है? मतलब एक्स्ट्रा इंफॉर्मेशन
- 54:22रेलेवेंट इंफॉर्मेशन बट एक्स्ट्रा
- 54:24इंफॉर्मेशन भी आपको देनी है जो जरूरी है
- 54:26जिससे डिसीजन मेकर के डिसीजन पर फर्क पड़
- 54:28सकता है और फिर डेडिकेटेड वैल्यू सारी
- 54:31वैल्यू्यूज एकदम इंटैक्ट होनी चाहिए
- 54:33बिल्कुल कोई भी फिगर टेढ़ी-मेढ़ी नहीं
- 54:35होनी चाहिए। ठीक है? अगला जी रिलायबिलिटी
- 54:37कैसे आएगी?
- 54:38रिलायबिलिटी तब आएगी जब मैं वेरीफाई करूं
- 54:41तो मैं सेम पाऊं और मेरे को फेथ हो। मेरे
- 54:44को विश्वास हो। फेथफुलनेस।
- 54:46तो चार क्वालिटेटिव कैरेक्टरिस्टिक्स
- 54:48अकाउंटिंग इंफॉर्मेशन की मैंने आपको बताई।
- 54:51रेलेवेंस, रिलायबिलिटी, अंडरस्टैंडेबिलिटी
- 54:54एंड कंपेरेबिलिटी। चारों पे ग्रीन टिक
- 54:56मैंने कर दिया। ओके आगे चलें।
- 54:59चलते हैं भाई साहब आगे। क्वेश्चन आ गया
- 55:01आपके सामने। तो क्वेश्चन कैसा आता है वो
- 55:03आप जरा देख भी लो। इस तरह का क्वेश्चन आ
- 55:05सकता है। पढ़ो जरा इसको ध्यान से।
- 55:09हम
- 55:16कह रहा है वि क्वालिटेटिव कररेक्टरिस्टिक
- 55:18ऑफाउंटिंग इन इज रिफ्लेक्टेड व्हेन
- 55:20अकाउंटिंग इनेशन इज़ क्लियरली प्रेजेंटेड।
- 55:25अगर अकाउंटिंग इनेशन एकदम क्लियर प्रेजेंट
- 55:28है। जिस भाषा में मैं समझता हूं उस भाषा
- 55:31में लिखा हुआ है और एकदम साफ सुथरा लिखा
- 55:33हुआ है। कोई उसमें कॉम्प्लेक्सिटी नहीं
- 55:35है। तो मेरे लिए अंडरस्टैंड करना इजी हो
- 55:38जाएगा। अरे ये तो आंसर ही आ गया।
- 55:39अंडरस्टैंडेबिलिटी इज़ द आंसर। खत्म हो गई
- 55:41बात। तो चारों लिखी वही क्वालिटीज हैं।
- 55:45लेकिन आपको बताया बताना पड़ेगा कि भाई
- 55:48अंडरस्टैंडेबिलिटी ही इसका आंसर है। ना
- 55:49रेलेवेंस ना रिलायबिलिटी ना कंपेरेबिलिटी।
- 55:52ठीक है? अगर यहां लिखा होता कि भ कौन सी
- 55:55कौन सी क्वालिटी झलक झलकती है उस
- 55:58अकाउंटिंग के अंदर जिसके अंदर हमने पर्सनल
- 56:01जजमेंट नहीं लगाया। पर्सनल हमने बायस्डनेस
- 56:04नहीं लगाई तो वहां पर हमारे रिजल्ट जो है
- 56:06वह रेलेवेंट बन जाते हैं। सॉरी रिलायबल बन
- 56:08जाते हैं जिस पर विश्वास कर सके हम। ठीक
- 56:10है?
- 56:15आगे यूज ऑफ कॉमन यूनिट ऑफ मेजरमेंट। कॉमन
- 56:19यूनिट ऑफ मेजरमेंट अगर हम यूज़ कर रहे हैं
- 56:21और कॉमन फॉर्मेट यूज़ कर रहे हैं हर एक चीज
- 56:23को रिपोर्ट करने के लिए तो उससे क्या बेटर
- 56:26हो पाएगा? कंपेरेबिलिटी,
- 56:27अंडरस्टैंडेबिलिटी, रेलेवेंस या
- 56:28रिलायबिलिटी? सर आप अगर कॉमन यूनिट ऑफ
- 56:31मेजरमेंट फॉर एग्जांपल रुपीज में अगर आप
- 56:33मेजर कर रहे हो किसी चीज को तो पिछले साल
- 56:35भी आपने रुपीज में मेजर करा था और इस साल
- 56:37भी आपने रुपए में मेजर मेजर कराया। ऐसा
- 56:39नहीं कि पिछले साल की इनेशन रुपी में थी
- 56:41और इस साल की डॉलर्स में हो गई और आपने
- 56:44फॉर्मेट भी जैसा पहले बनाया था वैसे ही इस
- 56:46बार आपने फॉर्मेट बनाया है। फॉर्मेट्स
- 56:47क्या होते हैं वो अब तुम अकाउंट्स की
- 56:49दुनिया में आ गए हो तो पढ़ते ही रहोगे अब
- 56:50पूरी जिंदगी। तो इससे मुझे लगता है कि
- 56:53कंपेरेबिलिटी ईजी हो जाएगी। कंपेयर करना
- 56:56ईजी हो जाएगा ना। रुपए का रुपए से कंपेयर
- 56:58करना आसान है। रुपए का डॉलर से करने के
- 57:00लिए पहले डॉलर को रुपए में लाना पड़ेगा।
- 57:04इसके बाद
- 57:06अब एक इंपॉर्टेंट चीज मैं आपको बताने जा
- 57:08रहा हूं। यूज़र्स ऑफ अकाउंटिंग मैं आपको
- 57:10बताने जा रहा हूं बेटा। ठीक है? यूज़र्स
- 57:12मतलब अकाउंटिंग को यूज़ करने वाले लोग। कुछ
- 57:15लोग होते हैं ना जिनके काम में आती है
- 57:17अकाउंटिंग।
- 57:20तो, वह लोग कौन होते हैं? उनको यूज़र्स ऑफ़
- 57:23अकाउंटिंग बोलते हैं हम। यूज़र्स दो तरह के
- 57:25होते हैं। इंटरनल और एक्सटर्नल। इंटरनल
- 57:28मतलब ऑर्गेनाइजेशन के अंदर के लोग और
- 57:30एक्सटर्नल मतलब बाहर के लोग।
- 57:33कई किताबें हैं जो एंप्लाइजज़ और वर्कर्स
- 57:35को एक्सटर्नल में रखती हैं। कई किताबें
- 57:38इसको इंटरनल में ही रखती हैं। जैसे अगर आप
- 57:41एनसीईआरटी को देखो तो एंप्लाइजज़ और वर्कर
- 57:44एक्सटर्न इंटरनल में ही आते हैं। टीएस में
- 57:45शायद ये एक्सटर्नल में आते हैं। तो अपनी
- 57:47किताब के हिसाब से देख लेना। कहीं
- 57:49तुम्हारे जो टीचर हैं वो इतने स्पेसिफिक
- 57:51हो इस चीज को लेकर कि इस चीज पर नंबर काट
- 57:52लें तो वो मैं नहीं चाहूंगा अपने छोटे भाई
- 57:54बहन के लिए। है ना? खैर पढ़ाना शुरू करता
- 57:57हूं। ओनर्स और मैनेजमेंट
- 58:00सबसे पहले तो इनको क्या क्या उखाड़ना है?
- 58:02मतलब इनको करना क्या है? ये देख रहे हो
- 58:04अंदर के लोग हैं सारे। इसमें कोई बाहरी
- 58:06जनता नहीं है। ये अपने फैक्ट्री वर्कर्स
- 58:08हो गए। एम्प्लाइज वर्कर्स। ये हमारी
- 58:09मैनेजमेंट टीम हो गई। ये डिसीजन मेकिंग चल
- 58:11रही है।
- 58:13यार ओनर का पैसा लगा है बिनेस के अंदर। तो
- 58:16उसको तो यह देखना ही होना होगा ना कि
- 58:18अकाउंटिंग कैसा परफॉर्म कर रहा है बिजनेस।
- 58:20तो वह अकाउंटिंग से ही पता चलेगा।
- 58:22मैनेजमेंट को क्या करना है? मैनेजमेंट को
- 58:24डिसीजंस लेने हैं। तो इसलिए मैनेजमेंट के
- 58:27लिए भी इंपॉर्टेंट है अकाउंटिंग के
- 58:28रिकॉर्ड्स। डिसीजन मेकिंग आसान हो जाएगी।
- 58:30एंप्लाइजज़ और वर्कर्स को यह देखना है कि
- 58:32यार हमें काम से भगा तो नहीं दिया जाएगा।
- 58:34कॉस्ट कटिंग तो नहीं हो जाएगी। हमें फायर
- 58:37तो नहीं कर दिया जाएगा। हमारे बोनस का
- 58:39क्या? हमें बोनस मिलेगा दिवाली पे इस बार
- 58:41बढ़िया कि नहीं मिलेगा? कहीं ऐसा तो नहीं
- 58:42है कि कंपनी करोड़ों रुपए कमा रही है और
- 58:45हम ठन ठन गोपाल की तरह जिंदगी जी रहे हैं।
- 58:47तो इसलिए इनका अधिकार भी है कि इनको
- 58:50अकाउंटिंग दिखाई जाए। ठीक है? इसलिए
- 58:52बिजनेस को अपने रिकॉर्ड्स पब्लिश करने
- 58:54होते हैं और और ये वो रीजन है जिसकी वजह
- 58:56से ये लोग यूज करते हैं एकाउंटिंग को। तो
- 58:58ये कुछ लोग हैं जो अकाउंटिंग को यूज़ करते
- 59:00हैं। इंटरनल लोग हैं अंदर के लोग हैं। और
- 59:02कुछ होते हैं बेटा एक्सटर्नल यूज़र्स ऑफ
- 59:03अकाउंटिंग। एक्सटर्नल यूज़र्स में आप देख
- 59:06सकते हैं पब्लिक सर्विज, फीडबैक पोर्टल,
- 59:09गवर्नमेंट है, बैंक है। यह सब बाहरी
- 59:11दुनिया के लोग हैं। बाहरी दुनिया के लोगों
- 59:13को हमारे बिजनेस के रिकॉर्ड्स का क्या
- 59:15करना है? करना है। बताता हूं। बैंक्स और
- 59:19फाइनेंसियल इंस्टीटशंस। बेटे, बैंक्स और
- 59:21फाइनेंसियल इंस्टीटश से आप क्या लेते हो?
- 59:23लोन लेते हो। राइट आंसर
- 59:27बैंक्स और फाइनेंसियल इंस्टीटश से आपको
- 59:29लोन लेना होता है। तो लोन आपकी शक्ल देख
- 59:31के तो मिलेगा नहीं। आपकी शक्ल देख के तो
- 59:33हो सकता है आपको उल्टा पैसा देने पड़ जाए
- 59:35बैंक को।
- 59:37सो [नाक से की जाने वाली आवाज़] खैर मजाक
- 59:38की बात अलग है। तो बैंक या कोई फाइनेंसियल
- 59:41इंस्टीट्यूशन किसी भी तरह का लोन आपको तभी
- 59:43देगा ना जब आपके आपकी अंदर क्षमता होगी उस
- 59:46लोन को चुकाने की। तो वो क्षमता आप मुंह
- 59:48से बोलकर नहीं बताओगे। रिकॉर्ड्स के हिसाब
- 59:51से बताओगे। तो इसलिए बैंक्स और फाइनेंसियल
- 59:53इंस्टीटशंस यूज़ करते हैं आपकी अकाउंटिंग
- 59:54इनेशन को। फिर पोटेंशियल इन्वेस्टर्स।
- 59:57पोटेंशियल मतलब होने वाले इन्वेस्टर्स।
- 59:59जिसने हमारे बिज़नेस में इन्वेस्ट कर दिया
- 1:00:00वह तो ओनर ही बन गया। जो करने वाला है
- 1:00:02इन्वेस्ट उसको यह देखना है कि यह कंपनी अब
- 1:00:05तक कैसा परफॉर्म कर रही है। अगर मैं इस
- 1:00:08कंपनी में इन्वेस्ट कर रहा हूं, मैं इस
- 1:00:09कंपनी का शेयर खरीद रहा हूं तो मेरा पैसा
- 1:00:12सेफ और सिक्योर रहेगा कि नहीं रहेगा और
- 1:00:14मुझे टाइमली रिटर्न्स यानी डिविडेंड
- 1:00:16मिलेगा कि नहीं मिलेगा। फिर आते हैं हमारे
- 1:00:18क्रेडिटर्स। क्रेडिटर मतलब जिसने आपको
- 1:00:21क्रेडिट दिया है, जिसने आपको उधार दिया
- 1:00:23है, आपका सप्लायर जिसने आपको माल उधार पे
- 1:00:25बेचा है, उसे सिर्फ इतना देखना है कि यार
- 1:00:27यह बंदा मेरा पैसा टाइम पे चुका पाएगा कि
- 1:00:29नहीं। इसे उधार दूं कि नहीं दूं? इसलिए वह
- 1:00:32आपकी अकाउंटिंग को यूज करेगा। गवर्नमेंट
- 1:00:34को पता है ना आपसे क्या चाहिए? गवर्नमेंट
- 1:00:35और गवर्नमेंट से जुड़ी हुई अथॉरिटीज को
- 1:00:37आपसे टैक्स चाहिए। इसलिए वो भी इंटरेस्टेड
- 1:00:40होती है आपके बिजनेस की अकाउंटिंग
- 1:00:41इंफॉर्मेशन में। पब्लिक इसलिए इंटरेस्टेड
- 1:00:44होती है क्योंकि पब्लिक वेली पब्लिक है।
- 1:00:46यह सब जानती है। पब्लिक है। पब्लिक यह
- 1:00:51देखना चाहती है कि भैया यह बिजनेस कैसा
- 1:00:53परफॉर्म कर रहा है और अगर बहुत बढ़िया
- 1:00:54परफॉर्म कर रहा है तो ये हमारे लिए क्या
- 1:00:56कर रहा है? तो इसलिए बिजनेसेस की एक
- 1:00:58कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी भी होती
- 1:01:00है। सीएसआर कॉरपोर कॉर्पोरेट सोशल
- 1:01:03रिस्पांसिबिलिटीज। मैं टीवी पे एक ऐड देख
- 1:01:05रहा था बचपन में। तो कोई कोई तेल था, कोई
- 1:01:08केश का करके कोई तेल था जिसका 1% जाता है
- 1:01:11बच्चों की शिक्षा की ओर। सब कॉर्पोरेट
- 1:01:14सोशल रिस्पांसिबिलिटीज हैं। बड़ी-बड़ी
- 1:01:16कंपनीज ने आज के दौर में हिंदुस्तान के
- 1:01:19अंदर कई स्कूल्स खुलवा रखे हैं।
- 1:01:21हॉस्पिटल्स खुलवा रखे हैं। कई एजुकेटर्स
- 1:01:24ने भी हॉस्पिटल्स खुलवाए हैं।
- 1:01:28पर यह सिस्टम उनके पीछे पड़ा हुआ है। खैर
- 1:01:33रिसर्चरर्स रिसर्चरर्स मतलब जिनको रिसर्च
- 1:01:36करना है। वेले लोग हैं वह कॉलेज
- 1:01:38स्टूडेंट्स हैं। उनको प्रोजेक्ट मिला है
- 1:01:40तो उनको रिसर्च करना है। तुम्हें भी
- 1:01:42मिलेगा प्रोजेक्ट कि पांच कंपनीज़ के
- 1:01:44रिकॉर्ड्स चेक करो कितने हैं, क्या ऐसे
- 1:01:46हैं, क्या नहीं है। इस तरह का प्रोजेक्ट
- 1:01:47आता है 11th क्लास के अंदर। तो रिसर्चरर्स
- 1:01:50को रिसर्च करनी है इसलिए उनको चाहिए हमारी
- 1:01:52एकाउंटिंग इनेशन। सो ऑल दीज़ वर यूज़र्स ऑफ़
- 1:01:54अकाउंटिंग। ऑलराइट दोस्तों, अब हम बहुत
- 1:01:57एंड पे आ चुके हैं। अब मोटा-मोटा अगर मैं
- 1:02:01एकाउंटिंग इंफॉर्मेशन देखूं, तो कितने तरह
- 1:02:03की होती है एकाउंटिंग इंफॉर्मेशन? तो सर
- 1:02:06अकाउंटिंग इंफॉर्मेशन तीन तरह की होती है।
- 1:02:09सबसे पहला इंफॉर्मेशन रिलेटिंग टू प्रॉफिट
- 1:02:12या फिर सरप्लस। ठीक है?
- 1:02:16प्रॉफिट पता लगाना है। सरप्लस पता लगाना
- 1:02:19है। उसकी इंफॉर्मेशन चाहिए। ये इंफॉर्मेशन
- 1:02:22हमें कैसे पता लगती है? इसके लिए आप बनाते
- 1:02:25हो फाइनशियल स्टेटमेंट्स।
- 1:02:29वैसे सिर्फ फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स नहीं।
- 1:02:31इसके लिए आप बनाते हो ट्रेडिंग अकाउंट।
- 1:02:36साल के एंड में बनाऊंगा मैं प्रॉफिट एंड
- 1:02:39लॉस अकाउंट।
- 1:02:43ठीक है?
- 1:02:45नॉट फॉर प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशंस के अंदर
- 1:02:47बनाया जाता है इनकम एंड एक्सपेंडिचर
- 1:02:48अकाउंट। तो ये एक इंफॉर्मेशन है। इस
- 1:02:50इंफॉर्मेशन को कलेक्ट करने के लिए हम यह
- 1:02:52बनाते हैं। इनकम स्टेटमेंट बनाते हैं। फिर
- 1:02:55फाइनेंसियल पोजीशन पता लगाने के लिए हम
- 1:02:57बनाते हैं बैलेंस शीट।
- 1:03:02उससे हमें पता चल पाता है कि आज की डेट
- 1:03:04में हमारे बिजनेस में कितनी एसेट्स हैं,
- 1:03:07कितनी लायबिलिटीज है, कितना हमारा कैपिटल
- 1:03:09है। और तीसरा जो 11th क्लास में नहीं है,
- 1:03:11लेकिन 12th में पढ़ाऊंगा मैं आपको। 12th
- 1:03:13में आएगा इंफॉर्मेशन अबाउट द कैश फ्लो।
- 1:03:16कैश फ्लो का मतलब प्रॉफिट या लॉस नहीं
- 1:03:17होता। सिर्फ यह होता है कि बिज़नेस में
- 1:03:19हमारे कैश कितना आ रहा है और कितना जा रहा
- 1:03:21है। कई बार होता है हम बहुत प्रॉफिटेबल
- 1:03:23होते हैं, लेकिन हमारे पास कैश नहीं होता।
- 1:03:26हो सकता है ना? तो, इसके लिए हम बनाते हैं
- 1:03:28सीएफएस। सीएफएस बोले तो कैश फ्लो
- 1:03:31स्टेटमेंट।
- 1:03:35तो ये ये तीन सबसे इंपॉर्टेंट रिकॉर्ड्स
- 1:03:38होते हैं किसी बिनेस के लिए। एक प्रॉफिट
- 1:03:40या सरप्लस बताने वाली इंफॉर्मेशन जो कि
- 1:03:42हमें इनकम स्टेटमेंट बताती है जिसमें
- 1:03:45ट्रेडिंग अकाउंट है, प्रॉफिट एंड लॉस
- 1:03:46अकाउंट है। स्टेटमेंट ऑफ प्रॉफिट एंड लॉस
- 1:03:48भी बोलते हैं इसको। दूसरा हमारी
- 1:03:50फाइनेंसियल पोजीशन बताता कौन है भाई?
- 1:03:53फाइनेंसियल पोजीशन हमें बताती है बैलेंस
- 1:03:54शीट। यह एक इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन है जो
- 1:03:57आपको बनानी होती है। और तीसरा कैश का फ्लो
- 1:04:00बताता है कैश फ्लो स्टेटमेंट।
- 1:04:02तो ये अकाउंटिंग के के मेजर तीन
- 1:04:05इंफॉर्मेशनेशंस होती हैं जो हमें प्रेजेंट
- 1:04:07करनी होती हैं। सो दोस्तों ये एक वन शॉट
- 1:04:11वीडियो थी इंट्रोडक्शन टू अकाउंटिंग के
- 1:04:13ऊपर जो मैंने आपको समझाने की कोशिश करी।
- 1:04:17माय नेम इज शिवम लोटवानी। थैंक यू सो मच
- 1:04:19फॉर वाचिंग दिस वीडियो। अगर आपको यह
- 1:04:21वीडियो बहुत अच्छी लगी हो, बहुत क्या
- 1:04:22थोड़ी भी अगर अच्छी लगी हो तो कमेंट
- 1:04:24सेक्शन में अपना प्यार जरूर देना। अपने
- 1:04:26दोस्तों के साथ शेयर जरूर करना। और यह
- 1:04:28पूरी सीरीज मां सरस्वती की कृपा से हमने
- 1:04:30शुरू करी है। तो इसको आगे तक ले जाएंगे।
- 1:04:32तमाम चैप्टर्स के आपको वन शॉट्स देने की
- 1:04:34कोशिश करूंगा ताकि रेलेवेंस, रिलायबिलिटी,
- 1:04:36अंडरस्टैंडेबिलिटी और कंपेरेबिलिटी भी आए।
- 1:04:39ठीक है? ऑलराइट। थैंक यू सो मच। गॉड ब्लेस
- 1:04:41यू। टेक केयर। जय हिंद।
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This page contains the full transcript of Class 11th One Shot | Introduction to Accounting | Complete Chapter in One Class | Shivam Lotwani by Shivam Lotwani Accountancy , generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 11,614 words across 1,604 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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