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Balaji Wafers Story | Gareeb Ladke Ne Kaise Banaya ₹5000 Crore Ka Brand — Transcript

by Business Origin Hindi · 1,720 words · 225 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00साल 1982. राजकोट की धूल भरी सड़कों पर एक
  2. 0:04लड़का पुरानी साइकिल लेकर दुकान दुकान घूम
  3. 0:06रहा था। उसकी साइकिल पर लटके थे छोटे-छोटे
  4. 0:09चिप्स के पैकेट। चेहरे पर थकान थी, लेकिन
  5. 0:11आंखों में आग थी। कई दुकानदार उसकी तरफ
  6. 0:14देखते तक नहीं थे। कुछ लोग उसका मजाक
  7. 0:16उड़ाते थे। कुछ सीधे मना कर देते थे।
  8. 0:18लेकिन उस लड़के को खुद पर भरोसा था। उसे
  9. 0:21पता नहीं था कि एक दिन वही लड़का पूरे
  10. 0:23इंडिया का वेफर्स किंग कहलाएगा। यह कहानी
  11. 0:26है बालाजी वेफर्स के फाउंडर चंदूभाई
  12. 0:28वीरानी की। साल 1957 गुजरात के छोटे से
  13. 0:32गांव धुंधराजजी में उनका जन्म हुआ। गांव
  14. 0:35इतना पिछड़ा था कि कई घरों में बिजली तक
  15. 0:38नहीं थी। लोग खेती करके जैसे तैसे जिंदगी
  16. 0:40चला रहे थे। फिर आया साल 1972 गुजरात में
  17. 0:44भयानक सूखा पड़ा। खेत सूख गए। फसलें खत्म
  18. 0:47हो गई और हजारों परिवार बर्बाद हो गए।
  19. 0:50वीरानी परिवार भी उन्हीं में से एक था। घर
  20. 0:52की हालत इतनी खराब हो गई कि चंदू भाई के
  21. 0:55पिता को अपनी पुश्तैनी जमीन बेचनी पड़ी।
  22. 0:58सिर्फ ₹2000 उन्होंने वह पैसे अपने तीन
  23. 1:00बेटों में बांट दिए। 17 साल के चंदू भाई
  24. 1:04अपने भाइयों के साथ गांव छोड़कर राजकोट
  25. 1:06निकल पड़े। जेब में थोड़े पैसे और दिल में
  26. 1:09पड़ा सपना। राजकोट पहुंचकर उन्होंने छोटा
  27. 1:12फर्टिलाइजर बिजनेस शुरू करने की कोशिश की।
  28. 1:15लेकिन शुरुआत में ही धोखा मिल गया।
  29. 1:17सप्लायर नकली माल देकर भाग गया। पूरा पैसा
  30. 1:20डूब गया। अब ना बिजनेस बचा था ना पैसा
  31. 1:22लेकिन चंदू भाई हार मानने वालों में से
  32. 1:24नहीं थे। उन्होंने फैसला किया कुछ भी हो
  33. 1:27जाए खाली हाथ गांव वापस नहीं जाएंगे। काम
  34. 1:30ढूंढते-ढूंढते वह पहुंचे एस्ट्रोन सिनेमा
  35. 1:32और यहीं से उनकी जिंदगी बदलने लगी।
  36. 1:35एस्ट्रोन सिनेमा में उन्हें छोटी नौकरी
  37. 1:37मिली। सैलरी थी सिर्फ ₹90 महीने लेकिन
  38. 1:40चंदू भाई हर काम पूरी ईमानदारी से करते
  39. 1:43थे। पोस्टर लगाना, टिकट चेक करना, सीट साफ
  40. 1:46करना, फटी सीटें रिपेयर करना। वह दिन-रा
  41. 1:49मेहनत करते रहे। उनकी मेहनत देखकर सिनेमा
  42. 1:51मालिक भी इंप्रेस हो गया। एक दिन उसने
  43. 1:54चंदू भाई को कैंटीन का कॉन्ट्रैक्ट दे
  44. 1:56दिया। अब कैंटीन का पूरा प्रॉफिट उनका था।
  45. 1:59यहीं पर उन्होंने एक चीज नोटिस की। सबसे
  46. 2:01ज्यादा बिकता था पोटैटो चिप्स। इंटरवल
  47. 2:04शुरू होते ही लोग चिप्स खरीदने टूट पड़ते
  48. 2:06थे। लेकिन एक समस्या बार-बार आती थी।
  49. 2:09सप्लायर कभी लेट आता, कभी कमाल देता और कई
  50. 2:12बार स्टॉक खत्म हो जाता। जिससे चंदू भाई
  51. 2:15को नुकसान होता था। करीब 6 साल तक यही
  52. 2:17चलता रहा। फिर 1982 में चंदू भाई ने
  53. 2:20जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला लिया। उन्होंने
  54. 2:23सोचा अगर सप्लायर समस्या है तो क्यों ना
  55. 2:26खुद ही चिप्स बनाए जाएं। यही वह पल था
  56. 2:29जिसने इतिहास बदल दिया। उन्होंने अपने घर
  57. 2:31के बाहर छोटा सा शेड बनाया। कुछ पुराने
  58. 2:33पार्ट्स खरीदे और खुद मशीन बनानी शुरू कर
  59. 2:36दी। घर के छोटे से कमरे में पूरा परिवार
  60. 2:39मिलकर काम करता था। कोई आलू छीलता, कोई
  61. 2:41काटता, कोई पैकिंग करता। दिन में चंदू भाई
  62. 2:44कैंटीन संभालते थे और रात में चिप्स तलते
  63. 2:47थे। पैसे कम थे लेकिन मेहनत बढ़ी थी।
  64. 2:50उन्होंने अपने ब्रांड का नाम रखा बालाजी
  65. 2:53वेफर्स। शुरुआत में चिप्स सिर्फ कैंटीन
  66. 2:55में बिकते थे लेकिन लोगों को स्वाद पसंद
  67. 2:57आने लगा। धीरे-धीरे आसपास की दुकानों से
  68. 3:00भी ऑर्डर आने लगे। चंदू भाई खुद साइकिल पर
  69. 3:03चिप्स लेकर दुकानों तक जाते थे। लेकिन कई
  70. 3:05दुकानदार उन्हें गरीब समझकर इग्नोर कर
  71. 3:07देते थे। कुछ लोग हंसते भी थे। लेकिन चंदू
  72. 3:10भाई हर दिन और मजबूत बनते गए। जैसे-जैसे
  73. 3:13डिमांड बढ़ी वैसे-वैसे नई समस्याएं भी आने
  74. 3:16लगी। मैनुअल काम होने की वजह से क्वालिटी
  75. 3:18हर पार एक जैसी नहीं रहती थी। कई पैकेट
  76. 3:21खराब हो जाते थे। कई जगह से शिकायतें आने
  77. 3:23लगी। लेकिन चंदू भाई ने हार नहीं मानी।
  78. 3:26उन्होंने फैसला किया कि अब उन्हें चिप्स
  79. 3:28बनाने की पूरी साइंस सीखनी होगी। चंदू भाई
  80. 3:31ने आलू को समझना शुरू किया। कौन सा आलू
  81. 3:34सबसे अच्छा चिप्स बनाता है? कितनी मोटाई
  82. 3:37में स्लाइस कटनी चाहिए? अनियन का तापमान
  83. 3:39कितना होना चाहिए? उन्होंने हर छोटी चीज
  84. 3:42पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे वह चिप्स बनाने
  85. 3:44में एक्सपर्ट बन गए। अब उनका लक्ष्य सिर्फ
  86. 3:46चिप्स बेचना नहीं था बल्कि सबसे बेहतर
  87. 3:49क्वालिटी देना था। लेकिन चंदू भाई जानते
  88. 3:52थे सिर्फ मेहनत से बड़ा बिजनेस नहीं बनता।
  89. 3:54उन्हें टेक्नोलॉजी की जरूरत थी। इसीलिए
  90. 3:57उन्होंने बड़ा रिस्क लिया। करीब ₹50 लाख
  91. 3:59का लोन लेकर उन्होंने अपना पहला सेमी
  92. 4:01ऑटोमेटिक प्लांट लगाने का फैसला किया। यह
  93. 4:03उनके जीवन का सबसे बड़ा दांव था। अगर यह
  94. 4:06फेल होता तो सब खत्म हो सकता था। फैक्ट्री
  95. 4:09का काम शुरू हुआ। नई मशीनें आने लगी। पूरा
  96. 4:11परिवार सपने देख रहा था। लेकिन तभी कहानी
  97. 4:13में बड़ा ट्विस्ट आया। जो कंपनी प्लांट
  98. 4:15लगा रही थी, वही बीच में बंद हो गई।
  99. 4:18मशीनें अधूरी रह गई। पूरा सेटअप खराब हालत
  100. 4:21में पड़ा था। ₹50 लाख फंस चुके थे और अब
  101. 4:24दिवालियां होने का खतरा सामने था। लेकिन
  102. 4:26चंदू भाई ने हार नहीं मानी। उन्होंने और
  103. 4:28उनके भाइयों ने खुद मशीनों को खोलना शुरू
  104. 4:30किया। हर पार्ट को समझा। हर सिस्टम को
  105. 4:33सीखा। दिनरा मेहनत करके उन्होंने खुद
  106. 4:35मशीनें ठीक कर दी। वह बिजनेसमैन से
  107. 4:37इंजीनियर बन चुके थे और आखिरकार फैक्ट्री
  108. 4:40चालू हो गई। नई फैक्ट्री के साथ सब बदलने
  109. 4:42लगा। अब क्वालिटी पहले से ज्यादा बेहतर
  110. 4:44थी। पैकेजिंग प्रोफेशनल हो गई थी।
  111. 4:46दुकानदारों का भरोसा बढ़ने लगा। बालाजी
  112. 4:48वेफर्स तेजी से राजकोट और आसपास के इलाकों
  113. 4:51में फैलने लगा। हर दिन नए ऑन ऑर्डर आने
  114. 4:53लगे। चंदू भाई को अब समझ आ चुका था कि
  115. 4:56मशीनों और टेक्नोलॉजी में इन्वेस्टमेंट ही
  116. 4:58असली ताकत है। 1995 में उन्होंने एक और
  117. 5:01बड़ा प्लांट लगाया। फिर 2002 में उन्होंने
  118. 5:03भारत की सबसे बड़ी पोटैटो चिप्स फैक्ट्री
  119. 5:05बना दी। अब बालाजी सिर्फ लोकल ब्रांड नहीं
  120. 5:08था। यह एक तेजी से बढ़ता हुआ इंडियन स्नैक
  121. 5:11ब्रांड बन चुका था। कम कीमत ज्यादा
  122. 5:13क्वांटिटी और शानदार टेस्ट। यही बालाजी की
  123. 5:17सबसे बड़ी ताकत बन गई। धीरे-धीरे बालाजी
  124. 5:19ने गुजरात के मार्केट पर कब्जा करना शुरू
  125. 5:21कर दिया। 2006 तक गुजरात में उनका मार्केट
  126. 5:25शेयर लगभग 90% पहुंच चुका था। लेकिन चंदू
  127. 5:28भाई यहीं रुकना नहीं चाहते [संगीत] थे। अब
  128. 5:30उनका सपना था पूरे भारत में फैलना। इसके
  129. 5:33लिए उन्हें नए प्रोडक्ट्स बनाने [संगीत]
  130. 5:35थे। बालाजी ने रिसर्च और डेवलपमेंट पर काम
  131. 5:37शुरू किया। उन्होंने इंडियन टेस्ट को
  132. 5:39समझा। चाट, मसाला, रतलामी सेव, खाखरा,
  133. 5:43बनाना, वेफर्स हर राज्य के स्वाद को ध्यान
  134. 5:46में रखकर नए प्रोडक्ट्स बनाए गए। अब
  135. 5:48बालाजी सिर्फ चिप्स कंपनी नहीं रही। यह
  136. 5:50पूरा स्नैक ब्रांड बन चुका था। लेकिन
  137. 5:52सिर्फ अच्छा प्रोडक्ट काफी नहीं होता।
  138. 5:54लोगों तक सही मैसेज पहुंचाना भी जरूरी
  139. 5:56होता है और यहीं बालाजी ने खेल बदल दिया।
  140. 5:59उन्होंने लोगों की सबसे बड़ी शिकायत पकड़
  141. 6:01ली। मार्केट में कई चिप्स पैकेट्स में हवा
  142. 6:03ज्यादा और चिप्स कम होते थे। बालाजी ने
  143. 6:06अपनी मार्केटिंग लाइन बनाई। हवा कम,
  144. 6:08वेफर्स ज्यादा। यह लाइन लोगों के दिल में
  145. 6:11उतर गई। बालाजी के विज्ञापन मजेदार थे।
  146. 6:14हल्के-फुल्के थे और सीधे आम लोगों से
  147. 6:16जुड़ते थे। धीरे-धीरे बालाजी पूरे भारत
  148. 6:19में तेजी से फैलने लगा। नई फैक्ट्रियां,
  149. 6:21नए प्रोडक्ट्स, नई मार्केट्स हर तरफ सिर्फ
  150. 6:24एक नाम दिखाई देने लगा। बालाजी वेफर्स एक
  151. 6:27समय साइकिल पर चिप्स बेचने वाला लड़का अब
  152. 6:30हजारों करोड़ की कंपनी खड़ी कर चुका था।
  153. 6:32अब बालाजी वेफर्स सिर्फ गुजरात तक सीमित
  154. 6:35नहीं था। कंपनी के ट्रक्स देश के अलग-अलग
  155. 6:37राज्यों में पहुंचने लगे। छोटे गांवों से
  156. 6:39लेकर बड़े शहरों तक हर जगह बालाजी के
  157. 6:42प्रोडक्ट्स दिखाई देने लगे। सुपर मार्केट
  158. 6:44की शेलफ हो या छोटी किराना दुकान। हर जगह
  159. 6:47लोगों की पसंद बन चुका था बालाजी। कंपनी
  160. 6:50ने अपनी फैक्ट्रियों को और आधुनिक बनाना
  161. 6:52शुरू किया। अब मशीनें खुद आलू धोती थी।
  162. 6:54खुद स्लाइस काटती थी, खुद फ्राई करती थी
  163. 6:57और खुद पैकेजिंग भी करती थी। हर चीज
  164. 6:59ऑटोमेटिक हो चुकी थी। लेकिन चंदू भाई आज
  165. 7:02भी हर छोटी चीज पर नजर रखते थे। उनके लिए
  166. 7:05क्वालिटी सबसे ज्यादा जरूरी थी। अब बालाजी
  167. 7:08पूरे भारत में विस्तार की तैयारी कर रहा
  168. 7:10था। ऑफिस में बड़े-बड़े मीटिंग्स होने
  169. 7:12लगे। नई मार्केट्स की प्लानिंग, नई
  170. 7:14फैक्ट्रियों की तैयारी और नए प्रोडक्ट्स
  171. 7:16की रिसर्च। बालाजी ने सिर्फ स्नैक्स नहीं
  172. 7:18बेचे। उन्होंने लोगों के स्वाद को समझा।
  173. 7:21यही वजह थी कि हर उम्र के लोगों के लिए
  174. 7:24उनके पास कुछ ना कुछ था। बालाजी के
  175. 7:26कर्मचारी भी इस कंपनी को अपना परिवार
  176. 7:28मानते थे। फैक्ट्री के मजदूर हो या मैनेजर
  177. 7:31हर किसी को सम्मान मिलता था। चंदू भाई का
  178. 7:33मानना था कि कंपनी सिर्फ मशीनों से नहीं
  179. 7:36लोगों से बनती है और यही सोच बालाजी को
  180. 7:39बाकी कंपनियों से अलग बनाती थी। अब वह दिन
  181. 7:41दूर नहीं था जब बालाजी भारत का सबसे बड़ा
  182. 7:44स्नैक ब्रांड बनने वाला था। धीरे-धीरे
  183. 7:46बालाजी के प्रोडक्ट्स लाखों दुकानों तक
  184. 7:49पहुंच गए। हर दिन हजारों कार्टन
  185. 7:50फैक्ट्रियों से निकलते थे। बच्चे, युवा,
  186. 7:53परिवार, हर कोई बालाजी के स्नैक्स से पसंद
  187. 7:55करने लगा। एक समय जिस लड़के को दुकानदार
  188. 7:58इग्नोर करते थे। आज वही दुकानदार बालाजी
  189. 8:00के प्रोडक्ट्स रखने के लिए लाइन में खड़े
  190. 8:02थे। अब कंपनी ने इंटरनेशनल मार्केट में भी
  191. 8:05कदम रखना शुरू किया। बालाजी के प्रोडक्ट्स
  192. 8:08विदेशों तक पहुंचने लगे। दुनिया के
  193. 8:10अलग-अलग देशों में लोग इंडियन टेस्ट का
  194. 8:12आनंद लेने लगे। यह सिर्फ बिजनेस की जीत
  195. 8:14नहीं थी। यह एक भारतीय सपने की जीत थी और
  196. 8:17उस सपने के पीछे था एक साधारण इंसान का
  197. 8:20असाधारण संघर्ष। चंदू भाई [संगीत] ने कभी
  198. 8:23अपने संघर्ष को नहीं भुलाया। उन्होंने
  199. 8:25किसानों की मदद की। कर्मचारियों का साथ
  200. 8:27दिया और हमेशा जमीन से जुड़े रहे। कंपनी
  201. 8:30जितनी बड़ी होती गई उनकी सोच उतनी ही सरल
  202. 8:32होती गई। यही वजह थी कि लोग सिर्फ बालाजी
  203. 8:35के प्रोडक्ट्स नहीं बल्कि उनकी कहानी से
  204. 8:37भी प्यार करने लगे। आज बालाजी वेफर्स का
  205. 8:40नाम पूरे भारत में जाना जाता है। कंपनी
  206. 8:42हजारों लोगों को रोजगार देती है। उनके
  207. 8:43प्रोडक्ट्स करोड़ों लोगों तक पहुंचते हैं।
  208. 8:46लेकिन इस सफलता के पीछे सिर्फ पैसा नहीं
  209. 8:48था। इसके पीछे थी मेहनत, ईमानदारी। लगातार
  210. 8:51सीखने की आदत और कभी हार ना मानने वाला
  211. 8:54जुनून। सोचिए अगर उस दिन चंदू भाई हार मान
  212. 8:57लेते, अगर वह गांव वापस लौट जाते, अगर वह
  213. 9:00लोगों की बातों से टूट जाते, तो शायद
  214. 9:02बालाजी वेफर्स कभी बनता ही नहीं। उनकी
  215. 9:04कहानी हमें सिखाती है कि शुरुआत छोटी हो
  216. 9:07सकती है लेकिन सपने हमेशा बड़े होने
  217. 9:09चाहिए। एक पुरानी साइकिल से शुरू हुआ सफर
  218. 9:12आज हजारों करोड़ की कंपनी बन चुका है। यह
  219. 9:14सिर्फ एक बिजनेस स्टोरी नहीं है। यह उस
  220. 9:16इंसान की कहानी है जिसने गरीबी को अपनी
  221. 9:18कमजोरी नहीं अपनी ताकत बना लिया और इसी
  222. 9:21वजह से आज बालाजी वेफर्स सिर्फ एक ब्रांड
  223. 9:24नहीं बल्कि भारतीय मेहनत और संघर्ष का
  224. 9:27प्रतीक बन चुका है। यही है बालाजी वेफर्स
  225. 9:30की प्रेरणादायक कहानी।

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