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Badshah Ke 3 Sawal | Ghareeb Kisaan Ka beta jeet gya | wazeer ki sazish nakam | emotion matters — Transcript

by Emotion Matters · 4,636 words · 567 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00सल्तनत ए- नूरान में यह बात मशहूर थी कि
  2. 0:03वहां का बादशाह इंसाफ पसंद जरूर था।
  3. 0:05[संगीत] मगर फैसले हमेशा अक्ल की बुनियाद
  4. 0:08पर करता था। दौलत या हसब नसब की बुनियाद
  5. 0:11पर नहीं उसकी एक ही बेटी थी शहजादी मरियम।
  6. 0:15हुस्न वकार और दानाई में उसकी मिसाल पूरे
  7. 0:18मुल्क में नहीं मिलती थी। दूर-दूर के
  8. 0:20शहजादे रईसजादे और अमीर ताज़िर अपने रिश्ते
  9. 0:24भेज चुके थे। मगर बादशाह हर बार एक ही
  10. 0:27जवाब देता। मेरी बेटी का हाथ सिर्फ उसे
  11. 0:29मिलेगा जिसकी अक्ल उसके दिल से बड़ी ना हो
  12. 0:33और जिसका दिल उसकी जुबान से ज्यादा सच्चा
  13. 0:35हो। यह जुमला पूरे मुल्क में मशहूर हो
  14. 0:38चुका था। दरबार के सबसे ताकतवर वजीर वजीर
  15. 0:42आजम मजीद को यह बात हरगिज़ पसंद [संगीत]
  16. 0:44नहीं थी। उसका अपना बेटा सलीम गुरूर में
  17. 0:47डूबा हुआ नौजवान था। मजीद बरसों से यही
  18. 0:50ख्वाब [संगीत] देख रहा था कि एक दिन उसका
  19. 0:53बेटा शहजादी से निकाह करे और फिर
  20. 0:55आहिस्ता-आहिस्ता [संगीत] पूरी सल्तनत पर
  21. 0:58उसका इख्तियार कायम हो जाए। एक शाम दरबार
  22. 1:01खत्म होने के बाद मजीद [संगीत] ने बादशाह
  23. 1:03से कहा बादशाह सलामत आखिर कब तक शहजादी का
  24. 1:06निकाह टालते रहेंगे? सुल्तनत को वली अहद
  25. 1:09[संगीत] की जरूरत है। बादशाह ने खामोशी से
  26. 1:12उसकी तरफ देखा। वली अहद मुझे नहीं चाहिए।
  27. 1:15मुझे ऐसा इंसान चाहिए जिस पर मैं अपनी
  28. 1:17रियाया का मुस्तकबिल छोड़ सकूं। यह जवाब
  29. 1:20सुनकर वजीर के चेहरे पर मुस्कुराहट तो रही
  30. 1:23मगर दिल में [संगीत] आग भड़क उठी। उसी रात
  31. 1:25बादशाह ने एक ऐसा ऐलान करने का फैसला किया
  32. 1:28जिसने पूरे मुल्क में हलचल मचा दी। अगली
  33. 1:31सुबह शाही नक्कारे बजने लगे। मुनादी करने
  34. 1:34वाले हर बाजार, हर गांव और हर काफिले में
  35. 1:37एक ही ऐलान दोहरा रहे थे। सुन लो सल्तनत
  36. 1:40नूरान के रहने वालों। सात दिन बाद शाही
  37. 1:43दरबार में बादशाह तीन सवाल पूछेगा। जो
  38. 1:46शख्स तीनों सवालों [संगीत] का दुरुस्त
  39. 1:48जवाब देगा, उसे बेशुमार दौलत के साथ
  40. 1:51शहजादी मरियम से निकाह का एजाज भी दिया
  41. 1:53जाएगा। यह खबर आग की तरह फैल गई। कई
  42. 1:57शहजादे रवाना हो गए। बड़े-बड़े आलिम,
  43. 2:00फलसफी, ताजिर और मुशीर अपने-अपने जवाब
  44. 2:03तैयार करने लगे। लेकिन एक छोटे से गांव
  45. 2:05में यह ऐलान एक कच्ची झोपड़ी तक भी
  46. 2:07पहुंचा। वहां एक गरीब किसान अब्दुल्लाह
  47. 2:10अपने बेटे हमजा के साथ रहता था। उनकी सारी
  48. 2:13जिंदगी दो वक्त की रोटी के लिए खेतों में
  49. 2:16मेहनत करते गुजरती थी। हमजा ने कभी मदरसे
  50. 2:19में तालीम हासिल नहीं की थी। मगर उसे अपने
  51. 2:22मरहूम दादा की एक बात हमेशा याद रहती थी।
  52. 2:25बेटा अकल किताबों से नहीं सच्चाई से पैदा
  53. 2:29होती है। हमजा अक्सर अपने दादा की नसीहतों
  54. 2:32पर गौर किया करता था। जब उसने बादशाह के
  55. 2:35ऐलान के बारे में सुना तो वह खामोश हो
  56. 2:37गया। अब्दुल्लाह ने हंसते हुए कहा, बेटा
  57. 2:41यह दरबार बड़े लोगों के लिए होते हैं।
  58. 2:43हमारे जैसे गरीब वहां सिर्फ तमाशा देख
  59. 2:45सकते हैं। हमजा ने आहिस्ता से जवाब दिया।
  60. 2:48अब्बा अगर सवाल अकल के हैं तो अमीर और
  61. 2:51गरीब में फर्क क्यों होगा? अब्दुल्लाह ने
  62. 2:54उसकी तरफ देखा। मगर कुछ ना कहा। उधर महल
  63. 2:57में वजीर मजीद ने अपना खेल [संगीत] शुरू
  64. 2:59कर दिया था। उसने अपने बेटे सलीम को
  65. 3:01खुफिया कमरे में बुलाया। अगर कोई और जीत
  66. 3:04गया तो हमारा सब कुछ खत्म हो जाएगा। सलीम
  67. 3:08ने एतमाद से कहा तो फिर जीतने ही ना
  68. 3:10दीजिए। वजीर ने दरवाजा बंद किया और धीमी
  69. 3:13आवाज में बोला जो शख्स भी दरबार में सबसे
  70. 3:17ज्यादा जहीन नजर आए उस पर नजर रखना।
  71. 3:20सवालों से पहले ही उसकी इज्जत खत्म कर
  72. 3:23देनी है। सलीम के चेहरे पर एक खतरनाक
  73. 3:25मुस्कुराहट फैल गई। और अगर वह बेगुनाह हुआ
  74. 3:28वजीर ने ठंडी सांस ली। दरबार में सच नहीं
  75. 3:32सबूत जीतते हैं या अल्फाज सलीम के दिल में
  76. 3:35उतर गए। अगले चंद दिनों में सल्तनत के हर
  77. 3:39रास्ते पर आने वालों का हुजूम बढ़ने लगा।
  78. 3:41हर शख्स समझता था कि वही तीन सवालों का
  79. 3:44जवाब देगा। मगर हमजा ने किसी से कोई बहस
  80. 3:47ना की। वह दिन भर खेत में काम करता और रात
  81. 3:50को अपने दादा की पुरानी नसीहतों पर गौर
  82. 3:52करता। सातवें दिन सुबह सवेरे अब्दुल्लाह
  83. 3:56ने देखा कि हमजा सफर की तैयारी कर रहा है।
  84. 3:59तुम वाकई दरबार जाओगे? हमजा ने सर झुका कर
  85. 4:02कहा अगर मैं नाकाम हुआ तो सिर्फ वापस आ
  86. 4:05जाऊंगा। लेकिन अगर कोशिश ही ना की तो सारी
  87. 4:08उम्र खुद को माफ नहीं कर सकूंगा।
  88. 4:10अब्दुल्लाह ने अपनी बरसों पुरानी चादर
  89. 4:13उसके कंधे पर रख दी। मेरे पास देने के लिए
  90. 4:16यही है। इसे इज्जत के साथ वापस ले आना।
  91. 4:19हमजा ने खामोशी से बाप के हाथ चूमे और महल
  92. 4:22की तरफ रवाना हो गया। उसे खबर नहीं थी कि
  93. 4:25महल पहुंचने से पहले ही कई नजरें उसका
  94. 4:27रास्ता देख रही थी। वजीर मजीद ने अपने
  95. 4:30आदमियों को हुक्म दे दिया था कि दरबार में
  96. 4:32आने वाले हर उम्मीदवार की मुकम्मल खबर रखी
  97. 4:35जाए। दो सिपाहियों ने दूर से हमजा को
  98. 4:37देखा। सादा लिबास, कंधे पर पुरानी चादर और
  99. 4:42चेहरे [संगीत] पर गैर मामूली इत्मीनान।
  100. 4:45उनमें से एक सिपाही फौरन वज़र के पास
  101. 4:47पहुंचा। हुजूर एक गरीब नौजवान आ रहा है।
  102. 4:51उसके पास कुछ नहीं। मगर वह दूसरों की तरह
  103. 4:54घबराया हुआ भी नहीं। [संगीत] वजीर ने चंद
  104. 4:56लम्हे सोचा। फिर उसने आहिस्ता से कहा। ऐसे
  105. 5:00लोग या तो बहुत बड़े अहमक होते हैं या
  106. 5:03बहुत खतरनाक। उसने मेज पर रखी एक छोटी सी
  107. 5:06मखमली थैली उठाई। जिसमें [संगीत] शाही
  108. 5:08खजाने की खास मुहर रखी थी। फिर अपने बेटे
  109. 5:12सलीम की तरफ देखकर बोला कल दरबार शुरू
  110. 5:15होने से पहले यह मुहर उस गरीब नौजवान के
  111. 5:18सामान में पहुंच [संगीत] जानी चाहिए। सलीम
  112. 5:21चौंका। आप उस पर शाही खजाने की चोरी का
  113. 5:24इल्जाम लगाना चाहते हैं। वजीर ने सर्द
  114. 5:26लहजे में जवाब दिया। मैं सिर्फ इतना चाहता
  115. 5:29हूं कि वह तीन सवालों तक पहुंच ही ना सके।
  116. 5:32हमजा उस वक्त महल के दरवाजे से सिर्फ चंद
  117. 5:35कदम दूर था। और उसे जरा भी अंदाजा नहीं था
  118. 5:38कि उसके खिलाफ खेल शुरू हो चुका है। सुबह
  119. 5:41की पहली किरण के साथ शाही महल के दरवाजे
  120. 5:43खुल गए। सल्तनत के हर कोने से आए हुए लोग
  121. 5:47दरबार के बाहर जमा थे। कोई आलिम था, कोई
  122. 5:50रईस, कोई शहजादा और कोई ऐसा शख्स जो सिर्फ
  123. 5:54अपनी कसमत आजमाने आया था। हमजा भी खामोशी
  124. 5:57से कतार में खड़ा था। उसकी नजरें ना महल
  125. 6:00की शान और शौकत पर थी और ना ही इनाम पर।
  126. 6:04वह सिर्फ यह सोच रहा था कि अगर अल्लाह ने
  127. 6:06चाहा तो वह अपने बाप का सर फक्र से बुलंद
  128. 6:09करेगा। दूसरी तरफ वजीर मजीद की नजरें हर
  129. 6:12लम्हा हमजा पर जमी हुई थी। उसने आहिस्ता
  130. 6:15से अपने बेटे सलीम से कहा आज एक गलती भी
  131. 6:18बर्दाश्त नहीं होगी। सलीम ने सर हिलाया और
  132. 6:22भीड़ में गुम हो गया। कुछ देर बाद शाही
  133. 6:24मुहाफिज उम्मीदवारों की तलाशी लेने लगे।
  134. 6:27अचानक एक सिपाही जोर से चिल्लाया। रुक
  135. 6:29जाओ। उसने हमजा की चादर के अंदर हाथ डाला
  136. 6:33और एक मखमली थैली निकाल ली। थैली खुलते ही
  137. 6:36सबकी नजरें उस पर जम गई। [संगीत] उसके
  138. 6:39अंदर शाही खजाने की खास मुहर मौजूद थी।
  139. 6:42दरबार के [संगीत] बाहर सन्नाटा छा गया। एक
  140. 6:45सिपाही ने गुस्से से कहा। यह शाही [संगीत]
  141. 6:48खजाने की मोहर है। यह तुम्हारे पास कैसे
  142. 6:50आई? हमजा हैरत से मोहर को देखता रहा।
  143. 6:54मैंने उसे पहली बार देखा है। सिपाहियों ने
  144. 6:57उसकी एक ना सुनी। चंद लम्हों में खबर
  145. 7:00दरबार तक पहुंच गई। [संगीत] लोग सरगोशियां
  146. 7:03करने लगे। यही है वह गरीब लड़का। देखा
  147. 7:07दौलत का लालच आखिर सामने आ ही गया। ऐसा
  148. 7:10आदमी बादशाह का दामाद बनने आया था। हमजा
  149. 7:13ने सफाई देने की कोशिश की [संगीत] मगर हर
  150. 7:15आवाज शोर में दब गई। उसी वक्त बादशाह
  151. 7:18दरबार में दाखिल हुआ। उसने मुहाफिजों से
  152. 7:21पूरी बात सुनी। फिर हमजा की तरफ देखकर
  153. 7:24[संगीत] बोला अगर तुम बेगुनाह हो तो डरो
  154. 7:26मत। मगर याद रखो
  155. 7:28[संगीत]
  156. 7:28इस दरबार में इंसाफ सिर्फ अल्फाज से नहीं
  157. 7:31होता। हमजा ने झुक कर कहा बादशाह सलामत
  158. 7:35अगर मैं चोर साबित हो जाऊं तो सजा कबूल
  159. 7:38करूंगा लेकिन अगर मैं बेगुनाह हूं तो मुझे
  160. 7:40अपनी बेगुनाही साबित करने का एक मौका जरूर
  161. 7:43दीजिए। बादशाह कुछ लम्हे खामोश रहा। वजीर
  162. 7:46फौरन बोला बादशाह सलामत शाही मोहर उसके
  163. 7:50पास मिली है। इससे बड़ा सबूत क्या होगा?
  164. 7:53बादशाह ने वजीर की बात सुनी मगर फौरन
  165. 7:56फैसला ना किया। उसी लम्हे शहजादी मरियम की
  166. 7:59नजर पहली बार हमजा पर पड़ी। उसने देखा कि
  167. 8:02इतने बड़े इल्जाम के बावजूद उस नौजवान की
  168. 8:05आंखों में ना खौफ था ना लालच। सिर्फ एक
  169. 8:08अजीब सी खामोशी थी। यह खामोशी उसे बेचैन
  170. 8:11कर गई। बादशाह ने [संगीत] ऐलान किया।
  171. 8:14फैसला तीन सवालों के बाद होगा। अगर यह
  172. 8:16नौजवान झूठा साबित हुआ तो सजा भी मिलेगी
  173. 8:20और अगर सच्चा निकला तो इंसाफ भी होगा।
  174. 8:23वजीर के चेहरे पर लम्हा भर के लिए परेशानी
  175. 8:26नुमाया [संगीत] हुई। मगर उसने फौरन खुद को
  176. 8:28संभाल लिया। दरबार शुरू हुआ। बादशाह अपने
  177. 8:32तख्त से उठा और बोला मेरा पहला सवाल पूरी
  178. 8:35सल्तनत के लिए है। हर तरफ खामोशी छा गई।
  179. 8:38बादशाह [संगीत] ने आहिस्ता आवाज में कहा
  180. 8:41बताओ इंसान की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
  181. 8:44दरबार में बैठे बड़े-बड़े आलिम खड़े होने
  182. 8:46लगे। किसी ने कहा दौलत किसी ने कहा फौज।
  183. 8:51किसी ने जवाब दिया इल्म। बादशाह हर जवाब
  184. 8:55सुनकर खामोश रहता। आखिर उसने सर हिला
  185. 8:58दिया। यह मेरा मतलूबा जवाब नहीं। अब
  186. 9:01शहजादे भी जवाब देने लगे। किसी ने ताकत,
  187. 9:04किसी ने हुकूमत, किसी ने खजाने का नाम
  188. 9:06लिया। लेकिन बादशाह हर बार सिर्फ एक लफ्ज
  189. 9:09कहता। नहीं। पूरा दरबार बेचैन हो गया।
  190. 9:13आखिर बादशाह ने हमजा की तरफ देखा। तुम भी
  191. 9:16जवाब [संगीत] देना चाहते हो? हमजा आहिस्ता
  192. 9:19से खड़ा हुआ। इजाजत हो तो अर्ज करूं। करो।
  193. 9:22हमजा ने पूरे दरबार पर नजर डाली। फिर बोला
  194. 9:25[संगीत] इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसका
  195. 9:28इख्तियार दौलत या इल्म नहीं [संगीत] बल्कि
  196. 9:31उसका एतमाद है। दरबार में सरगोशियां शुरू
  197. 9:35हो गई। हमजा ने बात जारी रखी। जिस शख्स पर
  198. 9:39लोग एतमाद करना छोड़ दें, उसकी दौलत भी
  199. 9:41बेकार हो जाती है। उसका इल्म भी और उसकी
  200. 9:44हुकूमत भी। लेकिन जिस पर एतमाद कायम रहे
  201. 9:48वह खाली हाथ होकर भी दिलों पर हुकूमत करता
  202. 9:51है। पूरा दरबार खामोश हो गया। बादशाह की
  203. 9:54आंखों में पहली बार हैरत दिखाई दी। उसने
  204. 9:57आहिस्ता से कहा यही मेरा पहला जवाब था।
  205. 10:01लोग एक दूसरे को देखने लगे। वजीर के चेहरे
  206. 10:04का रंग बदल गया। उसे अंदाजा हो गया कि जिस
  207. 10:07नौजवान को वह दरबार में आने से रोकना
  208. 10:09चाहता था, वह वाकई खतरनाक साबित हो सकता
  209. 10:12है। मगर उसी लम्हे सलीम ने वजीर [संगीत]
  210. 10:14के कान में सरगोशी की। अब्बा हुजूर फिक्र
  211. 10:18ना करें। क्यों? अभी दो सवाल बाकी हैं। और
  212. 10:22इससे पहले मैं ऐसा सबूत लाऊंगा [संगीत] कि
  213. 10:24शहजादी भी उससे नफरत करेगी। वज़र के होठों
  214. 10:28पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई। उधर शहजादी
  215. 10:31मरियम [संगीत] खामोश बैठी हमजा को देख रही
  216. 10:33थी। उसके दिल में पहली बार एक सवाल पैदा
  217. 10:36हुआ। अगर यह वाकई चोर है तो उसकी बातों
  218. 10:40में इतनी सच्चाई क्यों महसूस होती है?
  219. 10:43दरबार खत्म होने का ऐलान हुआ। हमजा महल से
  220. 10:46बाहर निकला। [संगीत] मगर उसे मालूम ना था
  221. 10:48कि रात ढलने से पहले उसके खिलाफ एक और ऐसी
  222. 10:51साजिश तैयार हो चुकी है। जो सिर्फ उसकी
  223. 10:54इज्जत नहीं बल्कि उसकी पूरी जिंदगी
  224. 10:56[संगीत] बदलने वाली थी। पहले सवाल के बाद
  225. 10:59पूरी सल्तनत में सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा
  226. 11:02था। वह गरीब किसान का बेटा बाजारों में
  227. 11:06लोग उसी की बातें कर रहे थे। कुछ उसे गैर
  228. 11:09मामूली अकल वाला नौजवान कहते तो कुछ उसे
  229. 11:12चालाक धोखेबाज समझते। वजीर मजीद [संगीत]
  230. 11:15यह सब सुनकर अंदर ही अंदर जल रहा था। उसे
  231. 11:18यकीन हो चुका था कि अगर हमजा दूसरा सवाल
  232. 11:21भी हल कर गया तो बादशाह अपना वादा पूरा
  233. 11:24करने से कभी पीछे नहीं हटेगा। उसी रात
  234. 11:27उसने अपने बेटे सलीम को महल के एक खुफिया
  235. 11:29कमरे में बुलाया। अब सिर्फ एक इल्जाम काफी
  236. 11:32नहीं होगा। सलीम ने पूछा, फिर क्या करें?
  237. 11:35वज़र ने आहिस्ता से एक मोहर बंद खत मेज पर
  238. 11:39रखा। यह खत ऐसा है कि अगर शहजादी ने पढ़
  239. 11:42लिया तो वह खुद हमजा से नफरत करने लगेगी।
  240. 11:45सलीम मुस्कुराया। इसमें क्या लिखा है?
  241. 11:48वजीर ने जवाब दिया, यह लिखा है कि हमजा ने
  242. 11:51सिर्फ शहजादी से शादी करने के [संगीत] लिए
  243. 11:53दरबार में आने का मंसूबा बनाया है। वह
  244. 11:56बादशाह को बेवकूफ समझता है और निकाह के
  245. 11:59बाद तख्त पर कब्जा करना चाहता है। [संगीत]
  246. 12:01सलीम ने हैरत से कहा, लेकिन यह तो सरासर
  247. 12:04झूठ है। वजीर ने ठंडी आवाज में कहा, दरबार
  248. 12:08में सच से ज्यादा ताकतवर बरवकत बोला गया
  249. 12:12झूठ होता है। उसी रात एक खादिमा को रिश्वत
  250. 12:14[संगीत] देकर वह खत शहजादी मरियम के कमरे
  251. 12:17में पहुंचा दिया गया। सुबह शहजादी [संगीत]
  252. 12:19ने खत खोला। हर लफ्ज़ पढ़ते हुए उसके
  253. 12:22चेहरे का रंग बदलता गया। आखिर में एक
  254. 12:25जुमला लिखा था। हमजा तुमसे [संगीत] नहीं
  255. 12:28सिर्फ ताज से मोहब्बत करता है। शहजादी ने
  256. 12:31खत बंद किया। उसके ज़हन में हमजा की खामोश
  257. 12:34आंखें गर्दिश करने लगी। वह खुद से कहने
  258. 12:37लगी, "अगर यह सब सच है, तो इससे बड़ा
  259. 12:40धोखेबाज [संगीत] कोई नहीं। उसकी आंखों में
  260. 12:43पहली बार नफरत की झलक नुमाया हुई। उधर
  261. 12:46हमजा को उस खत के बारे में कुछ मालूम नहीं
  262. 12:48था। वह महल के बाग [संगीत] में एक दरख्त
  263. 12:51के नीचे बैठा अपने वालिद की दी हुई पुरानी
  264. 12:54चादर तय कर रहा था। इतने में शाही खदिम
  265. 12:57आया। बादशाह सलामत ने फौरन दरबार में तलब
  266. 13:00किया है। आज दरबार पहले से कहीं ज्यादा
  267. 13:03भरा हुआ था। सबको दूसरे सवाल का इंतजार
  268. 13:06था। बादशाह [संगीत] तख्त पर बैठा फिर
  269. 13:09आहिस्ता से बोला। आज का सवाल सिर्फ अकल का
  270. 13:12नहीं किरदार का इम्तिहान भी है। पूरी
  271. 13:16मजलिस खामोश हो गई। बादशाह ने सवाल किया
  272. 13:19वह कौन सी चीज है जो टूट जाए तो आवाज नहीं
  273. 13:22करती मगर इंसान की पूरी जिंदगी बदल देती
  274. 13:25है? एक आलिम फौरन बोला कसम बादशाह [संगीत]
  275. 13:29ने नफी में सर हिलाया। एक शहजादे ने जवाब
  276. 13:32दिया दिल? नहीं। एक ताजिर बोला, "दौलत?
  277. 13:37गलत। कई जवाब आए मगर हर जवाब नाकाम रहा।
  278. 13:40आखिर बादशाह ने हमजा की तरफ देखा। तुम
  279. 13:43क्या कहते हो? हमजा आहिस्ता से खड़ा हुआ।
  280. 13:46चंद लम्हे खामोश रहा। फिर उसने कहा एतमाद
  281. 13:49[संगीत] दरबार में सरगोशियां होने लगी।
  282. 13:52हमजा ने बात मुकम्मल की। एतमाद टूटने की
  283. 13:55कोई आवाज नहीं होती। मगर जब यह टूटता है
  284. 13:57तो रिश्ते, घर, मोहब्बत और सल्तनतें तक
  285. 14:00बिखर जाती हैं। यह सुनते ही बादशाह के
  286. 14:03चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। बिल्कुल
  287. 14:05दुरुस्त। पूरा दरबार हैरान रह गया। दो
  288. 14:08सवाल और दोनों [संगीत] के दुरुस्त जवाब एक
  289. 14:12गरीब किसान के बेटे ने दे दिए थे। मगर उसी
  290. 14:14[संगीत] लम्हे शाहजादी अपनी जगह से खड़ी
  291. 14:17हो गई। उसकी आवाज में सख्ती थी। अब्बा
  292. 14:20हुजूर क्या मैं एक सवाल पूछ सकती हूं?
  293. 14:23बादशाह ने इजाजत दे दी। शहजादी ने पहली
  294. 14:26बार सीधा हमजा की तरफ देखा। जो शख्स एतमाद
  295. 14:30की बात करता है, क्या वह खुद धोखा नहीं दे
  296. 14:33सकता? हमजा हैरान रह गया। मैं आपकी बात
  297. 14:36नहीं समझा। शहजादी शहजादी ने वह खत
  298. 14:39निकाला। अगर कोई शख्स सिर्फ इख्तेदार
  299. 14:42हासिल करने के लिए मोहब्बत का ढोंग करे तो
  300. 14:45क्या उसे भी काबिल एतमाद कहा जाए? पूरा
  301. 14:48दरबार साकित हो गया। हमजा पहली बार समझ
  302. 14:51गया कि उसके खिलाफ कोई नई साजिश हो चुकी
  303. 14:54है। बादशाह ने खत अपने हाथ में लिया। वह
  304. 14:57खामोशी से पढ़ता रहा। उसने फौरन कोई फैसला
  305. 15:00नहीं दिया। मगर उसकी [संगीत] पेशानी पर
  306. 15:02फिक्र की लकीरें नुमाया हो गई। वजीर ने
  307. 15:06मौका गनीमत जाना। बादशाह सलामत मैंने पहले
  308. 15:09ही अर्ज किया था कि हर खामोश चेहरा मासूम
  309. 15:12नहीं होता। हमजा ने बादशाह की तरफ देखकर
  310. 15:15सिर्फ इतना कहा। मैंने यह खत आज पहली बार
  311. 15:19देखा है। अगर एक लफ्ज भी मेरा साबित हो
  312. 15:21जाए तो मैं हमेशा के लिए इस दरबार से चला
  313. 15:24जाऊंगा। शहजादी ने उसकी तरफ देखा। मगर
  314. 15:27उसके दिल में अब शक नफरत में बदलने लगा
  315. 15:30था। [संगीत] बादशाह ने दरबार बर्खास्त
  316. 15:32करते हुए ऐलान किया। आखिरी सवाल कल पूछा
  317. 15:35जाएगा। उसी दिन इस खत की भी मुकम्मल तहकीक
  318. 15:38होगी। इससे पहले कोई फैसला नहीं होगा। सब
  319. 15:41लोग दरबार से निकलने लगे। हमजा खामोशी से
  320. 15:44महल [संगीत] के दरवाजे की तरफ बढ़ा। उसी
  321. 15:46वक्त एक बूढ़ा शाही कातिब जो बरसों से
  322. 15:49दरबार में खामोश खिदमत कर रहा था। उसके
  323. 15:52करीब आया और बहुत धीमी आवाज में बोला।
  324. 15:56बेटा अगर अपनी जान ही नहीं अपनी इज्जत भी
  325. 15:59[संगीत] बचानी है तो आज रात शाही कुतुब
  326. 16:02खाने के बंद दरवाजे के पीछे आना। हमजा ने
  327. 16:05हैरत से उसकी तरफ देखा। बूढ़ा कातिब इतना
  328. 16:08[संगीत] कहकर भीड़ में गुम हो चुका था। और
  329. 16:10हमजा को अंदाजा नहीं था कि वह शख्स वजीर
  330. 16:13की 30 [संगीत] साल पुरानी ऐसी हकीकत जानता
  331. 16:15है जो सिर्फ उसकी बेगुनाही ही नहीं बल्कि
  332. 16:19पूरी सल्तनत की कस्मत बदल सकती थी। उस रात
  333. 16:22महल के हर दरवाजे पर मामूल से ज्यादा पहरा
  334. 16:24था। वजीर मजीद को अंदाजा था कि आखिरी सवाल
  335. 16:28से पहले अगर हमजा को कोई सहारा मिल गया तो
  336. 16:31उसकी बरसों की मेहनत खाक में मिल जाएगी।
  337. 16:34उधर हमजा खामोशी से शाही कुतुबखाने की तरफ
  338. 16:37बढ़ रहा था। वही पुराना कुतुबखाना जहां
  339. 16:41सिर्फ बादशाह शाही कातिब और वजीर को आने
  340. 16:44की इजाजत थी। दरवाजा आहिस्ता से खुला।
  341. 16:47अंदर वही बूढ़ा शाही कातिब चिराग [संगीत]
  342. 16:50की मध्यम रोशनी में खड़ा था। हमजा ने अदब
  343. 16:53से सलाम किया। बूढ़े ने जवाब दिया और
  344. 16:55बोला, "मैं जानता हूं तुम्हारे दिल में
  345. 16:58बहुत से सवाल हैं। लेकिन पहले मेरी एक बात
  346. 17:00गौर से सुनो। हमजा खामोश रहा। कुतुबखाने
  347. 17:04के कोने से बूढ़े ने एक पुराना संदूक
  348. 17:06निकाला। संदूक पर शाही मोहर लगी हुई थी।
  349. 17:09मगर उस पर गर्द की मोटी तह जमी हुई थी।
  350. 17:12बूढ़े ने मोहर तोड़ी। संदूक खोला और उसमें
  351. 17:16से एक पुरानी डायरी और चंद सरकारी
  352. 17:18दस्तावेज निकाले। यह 30 साल पुराना शाही
  353. 17:21रिकॉर्ड है। हमजा ने हैरत से पूछा। इसका
  354. 17:24मुंह से क्या ताल्लुक है? बूढ़े ने गहरी
  355. 17:27सांस ली। तुमसे नहीं वजीर मजीद से। हमजा
  356. 17:32की नजरें फौरन दस्तावेजों पर जम गई। बूढ़ा
  357. 17:35बोला, आज से 30 साल पहले मौजूदा बादशाह ने
  358. 17:38तख्त संभाला था। उस वक्त भी मजीद वजीर था।
  359. 17:42मगर उसके खिलाफ खजाने में खयानत का मुकदमा
  360. 17:44बना था। हमजा चौंक गया। फिर उसे सजा क्यों
  361. 17:47नहीं मिली? बूढ़े ने तल्ख लहजे में कहा
  362. 17:50क्योंकि एक बेगुनाह सिपाही ने वह इल्जाम
  363. 17:53अपने सर ले लिया था। क्यों? इसलिए कि वजीर
  364. 17:56ने धमकी दी थी कि अगर उसने [संगीत] इंकार
  365. 17:59किया तो उसके पूरे खानदान को जेल में डाल
  366. 18:01दिया जाएगा। हमजा खामोश [संगीत] हो गया।
  367. 18:04बूढ़े ने एक और कागज उसके सामने रखा। यह
  368. 18:06उस सिपाही का आखिरी बयान है। उसने मरते
  369. 18:09[संगीत] वक्त सब कुछ लिखवा दिया था। मगर
  370. 18:11वजीर ने यह रिकॉर्ड छुपा दिया। हमजा ने वह
  371. 18:14तहरीर [संगीत] पढ़ी। हर सतर वजीर के जुर्म
  372. 18:17की गवाही दे रही थी। उसने फौरन पूछा, "अगर
  373. 18:20यह सब सच है, तो आपने आज तक बादशाह को
  374. 18:22क्यों नहीं बताया?" बूढ़े की आंखें भर आई।
  375. 18:25मैंने कई बार कोशिश की, [संगीत] मगर हर
  376. 18:27बार वजीर ने मुझे खामोश करा दिया। अब मेरी
  377. 18:30उम्र खत्म होने को है। [संगीत] अगर आज भी
  378. 18:33खामोश रहा, तो अल्लाह को क्या जवाब दूंगा?
  379. 18:35हमजा ने एहतराम से वह कागजात वापस रख दिए।
  380. 18:38यह [संगीत] सबूत बादशाह को दे दीजिए।
  381. 18:40बूढ़े ने सर हिला दिया। नहीं अगर यह मैं
  382. 18:44दूंगा तो वजीर फौरन कहेगा कि मैं जाती
  383. 18:46दुश्मनी निकाल रहा हूं। फिर यह सबूत तुम
  384. 18:50पेश करोगे। हमजा ने इंकार कर दिया। मैं
  385. 18:53अपनी बेगुनाही साबित करने आया हूं। किसी
  386. 18:55से बदला लेने नहीं। बूढ़ा मुस्कुराया।
  387. 18:58इसीलिए तो तुम इस सल्तनत के काबिल हो। उधर
  388. 19:01वजीर मजीद भी खामोश नहीं बैठा था। उसे खबर
  389. 19:04मिल चुकी थी कि बूढ़ा कातिब रात के वक्त
  390. 19:06कुतुब खाने में गया था। उसने सलीम से कहा,
  391. 19:09वह बूढ़ा जरूर कुछ जानता है। क्या करें?
  392. 19:12सुबह होने से पहले वह संदूक मेरे पास होना
  393. 19:15चाहिए। सलीम चंद आदमियों को साथ लेकर
  394. 19:17कुतुब खाने पहुंचा। मगर दरवाजा खोलने पर
  395. 19:20अंदर कोई ना था। संदूक भी गायब था। सलीम
  396. 19:23के चेहरे का रंग उड़ गया। अगली सुबह शाही
  397. 19:26दरबार पहले से कहीं ज्यादा भरा हुआ था।
  398. 19:29पूरे मुल्क की नजरें आखिरी सवाल पर थी।
  399. 19:32बादशाह तख्त पर बैठा। उसके चेहरे से महसूस
  400. 19:35हो रहा था कि रात भर वह भी सो नहीं सका।
  401. 19:39उसने दरबार पर नजर डाली और कहा आज आखिरी
  402. 19:42सवाल होगा। उसके बाद मैं अपना वादा पूरा
  403. 19:44करूंगा या इंसाफ करूंगा। खामोशी छा गई।
  404. 19:48बादशाह ने सवाल किया अगर तुम्हारे सामने
  405. 19:51एक ऐसा शख्स [संगीत] खड़ा हो जिस पर सारे
  406. 19:54सबूत जुर्म साबित करते हो। मगर तुम्हारा
  407. 19:57दिल कहे कि वह बेगुनाह है तो तुम फैसला
  408. 19:59सबूत [संगीत] पर करोगे या अपने दिल पर? यह
  409. 20:02सवाल सुनते ही पूरा दरबार एक दूसरे
  410. 20:04[संगीत] का चेहरा देखने लगा। किसी के पास
  411. 20:07जवाब ना था। एक कलाजी बोला सबूत पर।
  412. 20:11बादशाह खामोश रहा। [संगीत] एक आलिम ने कहा
  413. 20:13दिल पर। बादशाह ने फिर भी कुछ ना कहा।
  414. 20:16आखिर उसने हमजा की तरफ देखा। हमजा आहिस्ता
  415. 20:20से खड़ा हुआ। उसने चंद लम्हे सोचा। फिर
  416. 20:22बोला बादशाह सलामत सिर्फ दिल पर फैसला
  417. 20:26करना जुल्म है और सिर्फ सबूत पर फैसला
  418. 20:29करना भी खतरनाक है। दरबार में मुकम्मल
  419. 20:32खामोशी छा गई। हमजा ने बात जारी रखी।
  420. 20:35इंसाफ यह है कि सबूत को परखा जाए, गवाहों
  421. 20:38को सुना जाए और फिर दिल से पूछा जाए कि
  422. 20:41कहीं सच अभी बाकी तो नहीं। क्योंकि झूठे
  423. 20:44सबूत बनाए जा सकते हैं। मगर मुकम्मल सच
  424. 20:47कभी ज्यादा देर छुप नहीं सकता। यह अल्फाज़
  425. 20:50सुनते ही बादशाह अपनी जगह से खड़ा हो गया।
  426. 20:52उसकी आंखों में हैरत थी। [संगीत] चंद
  427. 20:54लम्हों बाद उसने ऐलान किया। तीनों सवालों
  428. 20:57का सही जवाब हमजा ने दिया है। दरबार
  429. 21:01तालियों से गूंज उठा। मगर उसी लम्हे वजीर
  430. 21:04मजीद बुलंद आवाज में बोला। बादशाह सलामत
  431. 21:07सवाल जीतने से कोई बेगुनाह साबित नहीं हो
  432. 21:10जाता। शाही मोहर भी उसी के पास मिली थी और
  433. 21:13शहजादी के नाम वाला खत भी मौजूद है।
  434. 21:15शहजादी ने भी खामोशी से सर झुका लिया।
  435. 21:19उसके दिल में अभी तक हमजा के लिए एतमाद
  436. 21:21पैदा नहीं हुआ था। हमजा ने आहिस्ता से
  437. 21:24अपनी चादर के अंदर हाथ डाला। फिर उसने वह
  438. 21:26पुराना संदूक निकाल कर बादशाह के सामने रख
  439. 21:29दिया। पूरा दरबार हैरान रह गया। वजीर के
  440. 21:32चेहरे से खून उतर गया। बादशाह ने पूछा
  441. 21:35इसमें क्या है? हमजा ने निहायत अदब से
  442. 21:38जवाब दिया। बादशाह सलामत मेरी बेगुनाही का
  443. 21:42जवाब नहीं बल्कि 30 साल पुराने एक ऐसे
  444. 21:45जुर्म का राज जिसके बाद शायद इस दरबार में
  445. 21:48[संगीत] बहुत से चेहरे पहले जैसे ना रहे
  446. 21:50वजीर मजीद के हाथ कांपने लगे क्योंकि वह
  447. 21:53संदूक खुलते ही सिर्फ एक इल्जाम नहीं
  448. 21:56बल्कि उसकी पूरी जिंदगी [संगीत]
  449. 21:57का सबसे बड़ा झूठ बेनकाब होने वाला था।
  450. 22:00दरबार में ऐसा सन्नाटा था कि किसी की सांस
  451. 22:03की आवाज भी सुनाई दे रही थी। हमजा के
  452. 22:06सामने रखा हुआ पुराना संदूक अब सिर्फ
  453. 22:08लकड़ी का एक डिब्बा नहीं था बल्कि कई
  454. 22:11बरसों से दफना एक सच का बोझ था। बादशाह ने
  455. 22:15खुद आगे बढ़कर संदूक खोला। सबकी नजरें उसी
  456. 22:18पर जमी हुई थी। अंदर से [संगीत] एक पुरानी
  457. 22:21डायरी, शाही मोहरे और चंद सरकारी दस्तावेज
  458. 22:25निकले। बादशाह [संगीत] ने पहली तहरीर
  459. 22:27पढ़नी शुरू की। चंद सतरें पढ़ते ही उसके
  460. 22:31चेहरे का रंग बदल गया। दरबार में बैठे
  461. 22:34लोगों ने पहली बार अपने बादशाह की आंखों
  462. 22:35[संगीत] में हैरत और दुख एक साथ देखा।
  463. 22:38बादशाह ने दस्तावेज वजीर मजीद की तरफ
  464. 22:41बढ़ाया। क्या यह तुम्हारी मोहर है? वजीर
  465. 22:44ने एक नजर डाली। चेहरे पर घबराहट साफ
  466. 22:47दिखाई दे रही [संगीत] थी। मगर वह फौरन
  467. 22:49संभल गया। बादशाह सलामत मुहर तो मेरी है।
  468. 22:53मगर यह कागजात जाली हैं। हमजा खामोश खड़ा
  469. 22:57रहा। वह जानता था कि मजीद इतनी आसानी से
  470. 23:00सच कबूल नहीं करेगा। उसी लम्हे बूढ़ा शाही
  471. 23:03कातिब आगे बढ़ा। उसने झुक कर सलाम किया और
  472. 23:06कहा बादशाह सलामत अगर इजाजत हो तो मैं भी
  473. 23:11कुछ अर्ज करना चाहता हूं। बादशाह ने इस
  474. 23:13बात में सर हिला दिया। कातिब ने पूरी
  475. 23:16दास्तान बयान कर दी कि किस तरह 30 साल
  476. 23:19पहले एक बेगुनाह सिपाही ने वजीर के दबाव
  477. 23:22में आकर झूठा जुर्म अपने सर लिया। किस तरह
  478. 23:26असल रिकॉर्ड शाही कुतुब खाने में छुपा
  479. 23:29दिया गया। और किस तरह हर वह शख्स जो हकीकत
  480. 23:33जान [संगीत] गया खामोश कर दिया गया। दरबार
  481. 23:36में मौजूद कई बूढ़े उमरा एक दूसरे की तरफ
  482. 23:39देखने लगे। उन्हें पुरानी [संगीत] बातें
  483. 23:41याद आने लगी। बादशाह ने वजीर से कहा, क्या
  484. 23:44तुम इस बयान को भी झूठ कहोगे? वजीर ने
  485. 23:47जवाब देने की कोशिश [संगीत] की, मगर
  486. 23:49अल्फाज उसका साथ छोड़ गए। उसी वक्त एक
  487. 23:53सफेद दाढ़ी वाला साबका शाही सिपाही आगे
  488. 23:56आया। वह बरसों पहले मुलाजमत छोड़ चुका था।
  489. 23:59उसने कहा बादशाह सलामत मैं उस बेगुनाह
  490. 24:03सिपाही का साथी था। मैंने अपनी आंखों से
  491. 24:06देखा था कि वह किस खौफ में जीता था। मैं
  492. 24:09खामोश रहा और आज तक उस खामोशी पर शर्मिंदा
  493. 24:12हूं। यह सुनते ही पूरा दरबार बदल गया। अब
  494. 24:16लोगों की नजरें हमजा [संगीत] पर नहीं वजीर
  495. 24:18पर थी। बादशाह ने सख्त लहजे में पूछा और
  496. 24:22शाही मोहर हमजा ने पहली बार खुद जवाब
  497. 24:25दिया। बादशाह सलामत अगर इजाजत हो तो एक
  498. 24:28सवाल मैं भी पूछना चाहता हूं। पूछो। हमजा
  499. 24:32ने वजीर के बेटे सलीम की तरफ देखा। जब
  500. 24:35मेरी तलाशी ली गई [संगीत] उससे चंद लम्हे
  501. 24:37पहले मेरे करीब कौन आया था? मुहाफिज एक
  502. 24:40दूसरे को देखने लगे। एक नौजवान सिपाही आगे
  503. 24:43बढ़ा। वह पहले खामोश था क्योंकि उसे अपनी
  504. 24:46जान का खौफ था। उसने कहा बादशाह सलामत।
  505. 24:50[संगीत] मैंने सलीम को हमजा के करीब देखा
  506. 24:52था। उस वक्त मुझे लगा शायद वह रास्ता दिखा
  507. 24:56रहा हो। मगर अब समझ आ रहा है कि मामला कुछ
  508. 24:58और था। सलीम का रंग उड़ गया। बादशाह ने
  509. 25:02गुस्से से कहा सच बोलो। सलीम के माथे पर
  510. 25:05पसीना आ गया। उसने अपने बाप की तरफ देखा।
  511. 25:09मजीद ने नजरें झुका ली। अब सलीम समझ गया
  512. 25:12कि वह अकेला रह गया है। चंद लम्हों बाद
  513. 25:15उसकी आवाज कांपने लगी। बादशाह सलामत शाही
  514. 25:19मोहर मैंने ही उसकी चादर में रखी थी।
  515. 25:22दरबार में शोर मच गया। शहजादी मरियम के
  516. 25:25हाथ [संगीत] से वह झूठा खत जमीन पर गिर
  517. 25:27गया। उसकी आंखों में आंसू भर आए। उसे
  518. 25:30एहसास हुआ कि जिस [संगीत] शख्स पर उसने
  519. 25:33दिल ही दिल में इल्जाम लगाया वह तो खुद हर
  520. 25:36इल्जाम सहकर भी खामोश रहा। बादशाह ने एक
  521. 25:39और सवाल [संगीत] किया। और यह खत सलीम ने
  522. 25:42सर झुका लिया। वह भी हमने लिखवाया था। यह
  523. 25:46सुनते ही शहजादी [संगीत]
  524. 25:47की हिम्मत जवाब दे गई। वह अपनी जगह से उठी
  525. 25:50और हमजा के सामने आकर रुक गई। चंद लम्हे
  526. 25:53तक कुछ ना बोल सकी। फिर आहिस्ता से कहा,
  527. 25:56मैंने तुम्हें सुने बगैर तुम पर यकीन करना
  528. 25:59छोड़ दिया। [संगीत] मुझे माफ कर दो। हमजा
  529. 26:02ने नजरें झुका ली। शहजादी जिस एतमाद की
  530. 26:06मैंने बात की थी, वह एक बार टूट जाए, तो
  531. 26:08उसे जोड़ने में वक्त लगता है। मगर मैं
  532. 26:11आपसे नाराज नहीं हूं। यह सुनकर दरबार में
  533. 26:14कई लोगों की आंखें नम हो गई। बादशाह तख्त
  534. 26:17से नीचे उतर आया। उसने खुद हमजा का हाथ
  535. 26:20थामा। आज तुमने सिर्फ मेरे सवालों के जवाब
  536. 26:23नहीं दिए बल्कि मुझे भी इंसाफ का सही मतलब
  537. 26:26सिखाया है। फिर उसने बुलंद आवाज में ऐलान
  538. 26:29किया। [संगीत] आज से वज़र मजीद अपने ओहदे
  539. 26:32से बरतरफ है और उसके तमाम इख्तियारात खत्म
  540. 26:35किए जाते हैं। उसके खिलाफ कानून के
  541. 26:38मुताबिक कारवाई होगी। वज़र ने पहली बार सर
  542. 26:41उठाया। उसकी आंखों में गरूर नहीं। सिर्फ
  543. 26:44पछतावा था। वह हमजा के करीब आया और बोला,
  544. 26:48मैंने अपनी ख्वाहिश में अंधा होकर अपने
  545. 26:50बेटे की भी जिंदगी बर्बाद कर दी। अगर वक्त
  546. 26:53वापस आ सकता तो मैं कभी यह रास्ता ना
  547. 26:55चुनता। हमजा ने खामोशी से जवाब दिया,
  548. 26:59इंसान अपने मांझी को नहीं बदल सकता। मगर
  549. 27:01आइंदा किसी और के साथ वही जुल्म ना करे।
  550. 27:05यही सबसे बड़ी तौबा है। बादशाह ने उसी दिन
  551. 27:08पूरे [संगीत] दरबार के सामने अपना वादा
  552. 27:10पूरा किया। शहजादी मरियम का निकाह हमजा से
  553. 27:13तय कर दिया गया। इस बार शहजादी की आंखों
  554. 27:16में शक नहीं एहतराम था। हमजा के वालिद
  555. 27:18[संगीत] अब्दुल्लाह को जब महल में बुलाया
  556. 27:20गया तो वह अपने पुराने कपड़ों ही में
  557. 27:23हाजिर हुए। उन्होंने बेटे को गले लगाया और
  558. 27:26[संगीत] आसमान की तरफ देखकर सिर्फ इतना
  559. 27:28कहा या अल्लाह तूने गरीब [संगीत] के घर की
  560. 27:31इज्जत रख ली। चंद दिन बाद सादगी के साथ
  561. 27:34निकाह हुआ। पूरी सल्तनत [संगीत] में
  562. 27:36खुशियां मनाई गई। लेकिन लोग सबसे ज्यादा
  563. 27:39एक बात याद रखते थे। दौलत इंसान को
  564. 27:42[संगीत] बड़ा नहीं बनाती। सच्चा किरदार
  565. 27:44बनाता है और एतमाद वह दौलत है जो एक बार
  566. 27:47टूट जाए तो पूरी [संगीत] सल्तनत भी उसे
  567. 27:50आसानी से वापस नहीं ला सकती।

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This page contains the full transcript of Badshah Ke 3 Sawal | Ghareeb Kisaan Ka beta jeet gya | wazeer ki sazish nakam | emotion matters by Emotion Matters, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 4,636 words across 567 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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