Allahabad High Court Vacancy 2026 | AHC RO ARO Hindi | RO ARO Hindi Practice Set 09 | Shivani Ma’am — Transcript
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- 1:06करती हूं एकदम स्वस्थ मस्त जबरदस्त होंगे।
- 1:08अपना और अपने परिवार का ख्याल रख रहे
- 1:10होंगे। तो मैं आपसे कहना चाहती थी आज और
- 1:12आपका हिंदी का प्रैक्टिस सेट है। उसके बाद
- 1:14फिर नेक्स्ट वीक में होगा फिर क्योंकि कल
- 1:16से फिर इंग्लिश का प्रैक्टिस सेट है। आ गई
- 1:18आवाज मतलब एकदम ही चिल्ला उठते हो। सदाचार
- 1:22का संधि विच्छेद क्या है? जल्दी से बता
- 1:24दो। सदाचार का संधि विच्छेद क्या है?
- 1:28बताओ
- 1:30अभिनेता में क्या डाउट है?
- 1:35बताओ बताओ। तो हम कहेंगे सदा धन आचार नहीं
- 1:38भैया। सत धन अचार अच्छा अचार बना है। यह
- 1:41कहेंगे क्या? बताइए यह कहेंगे क्या? पूरा
- 1:44बोलो क्या पूछना चाहते हो? सत धन आचार
- 1:49बिल्कुल सही है। वो बिल्कुल ठीक था
- 1:51अभिनेता वाला कल वाला प्रश्न। ठीक है ना?
- 1:54सत धन आचार विल बी द करेक्ट आंसर। कचट तप
- 1:58के बाद क्या आता है? क
- 2:01च
- 2:03त
- 2:06और प के बाद क्या आता है? यदि आता है
- 2:10क्या? हम कहेंगे
- 2:14कोई सघोष कोई सघोष वर्ण सघोष
- 2:20वर्ण सिवाय पंचम वर्ण के सिवाय
- 2:25पंचम वर्ण के सिवाय पंचम वर्ण के
- 2:30पंचम वर्ण की तो क्या होता है? तो हम कहते
- 2:35हैं मैम यह जो का है यह बदल जाता है आप
- 2:39कहेंगे ग में। मतलब अपने ही तृतीय में। च
- 2:42किस में बदलेगा? च, छ, ज में। हम कहेंगे
- 2:46मैम ट किस में बदलेगा? तो ट, ठ, ड में। और
- 2:50हम कहेंगे त किस में बदलेगा? तो त, थ, द
- 2:52में। और प किस में बदलेगा? तो प, फ, ब
- 2:56में। तो ऐसा ही हुआ है यहां पर। यही
- 2:59व्यंजन संधि का नियम है
- 3:03बताइएगा मैम क्लास है
- 3:07क्लास चल रही है
- 3:26चौराहा शब्द में कौन सा समास वैसे तो
- 3:28चौराहा क्या है? चार राहों का समाहार हो
- 3:30रहा है भैया।
- 3:35बताइएगा। नहीं नहीं ऐसा नहीं है।
- 3:40चार राहों का समूह क्या कहलाता है? चौराहा
- 3:44कहलाता है। समाहार कर रहा है तो द्विगु
- 3:47समास है। आप क्या कहेंगे? क्या है? द्विगु
- 3:50समास। द्विगु द्विगु समास में क्या होता
- 3:52है? प्रथम पद संख्यावाची। प्रथम पद
- 3:56संख्यावाची।
- 3:58संख्या
- 3:59वाची
- 4:01और आप कहेंगे द्वितीय पद क्या करता है?
- 4:05समाहार करता है। दूसरा पद समाहार करेगा।
- 4:09समूह बनाएगा। अगर जो समूह नहीं बनाता है
- 4:12तो आप कहेंगे वो कुछ भी है द्विगु समास तो
- 4:15नहीं है। चाहे उसमें आप 10 लगा दो, 20 लगा
- 4:18दो, 50 लगा दो। जब तक समूह का बोध नहीं
- 4:21होगा, जब तक समाभार नहीं होगा, बताइएगा।
- 4:26बताइएगा, समझ गए? निम्नलिखित में से कौन
- 4:29सा शब्द तत्सम संस्कृत के मूल शब्द से आया
- 4:32है? ऐसे बहुत सारे शब्द आपसे पूछे जाते
- 4:35हैं। यह रहा अग्नि। अग्नि को तद्भव में आग
- 4:38कहते हैं। यह जो आंख है, यह तद्भव है।
- 4:42इसका तत्सम एक तो होता है अक्षी।
- 4:46कान का क्या होता है? कर्ण होता है।
- 4:49और जीव का क्या होता है? जीहवा होता है।
- 4:53क्या होता है? जीहवा होता है। समझे? जीव
- 4:57का क्या होता है? जीवा होता है। क्या आपको
- 4:59समझ में आ रहा है? अगर समझ में आ रहा है
- 5:01तो वेल एंड गुड। आगे बढ़ जाते हैं। अगला
- 5:03क्वेश्चन। जंगम का सही विलोम शब्द क्या
- 5:05है? जंगम का अर्थ होता है वह संपत्ति जो
- 5:09एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सके।
- 5:11संपत्ति के लिए प्रयोग होता है खासकर यह
- 5:13शब्द। जैसे आपकी कोई कार हो गई। तो कार एक
- 5:17जगह से दूसरी जगह ले जा सकते हो या नहीं
- 5:19ले जा सकते हो? तो मन में कह रहे होगे मैम
- 5:21कार ले जाने के लिए ही तो बनाई गई होती
- 5:23है। कहीं ले जाने के लिए ही तो कार का
- 5:25निर्माण होता है। खड़ी रहने के लिए थोड़ी
- 5:27होती है। बिल्कुल सही बात है। आभूषण आभूषण
- 5:30पहन के आप कहीं भी जा सकते हैं। आभूषण को
- 5:32आप एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते हैं।
- 5:34आप बोलेंगे ले जा सकते हैं। नगद रुपया
- 5:37बताओ दौलत जो आपके हाथ में है नगद कैश। आप
- 5:40ले जा सकते हैं। आप बोलेंगे हां आप बहुत
- 5:42महंगा फोन खरीद लें। क्या आप उसको एक जगह
- 5:44से दूसरी जगह ले जा सकते हैं? आप कहेंगे
- 5:46बिल्कुल ले जा सकते हैं। सोना चांदी क्या
- 5:49आपने कोई प्लॉट खरीदा आप उसको एक जगह से
- 5:52दूसरी जगह ले जा सकते हैं? बस हां या ना
- 5:54बता दो। आपने कोई घर खरीदा तो आप उसको एक
- 5:57जगह से दूसरी जगह ले जा सकते हैं। आप
- 5:59बोलोगे नहीं ले जा सकते। नहीं ले जा सकते।
- 6:01तो वो हो जाएगा स्थावर। विलोम होता है
- 6:05स्थावर। चंचल होता है गंभीर का विलोम।
- 6:10गंभीर का स्थिर चित्त का स्थिर चित्त का
- 6:14विलोम होता है। क्या? तो आप कहेंगे चंचल।
- 6:17यदि मैं बात करूं जड़। जड़ होता है
- 6:20महामूर्ख व्यक्ति। जड़ होता है जिसकी
- 6:22बुद्धि नहीं चल रही हो उसका क्या हो
- 6:24जाएगा? चेतन हो जाएगा विलोम। ठीक है ना?
- 6:27आगे बढ़ जाते हैं। अरविंद शब्द का
- 6:30पर्यायवाची कौन सा है? अरविंद शब्द का
- 6:33पर्यायवाची शब्द कौन सा है? गुलाब है,
- 6:35कल्पवृक्ष है, कमल है, केवड़ा है? बताओ।
- 6:40बताओ।
- 6:41गुलाब, कल्पवृक्ष, कमल और केवड़ा। तो आप
- 6:44कहेंगे मैम केवड़ा तो है हो नहीं सकता।
- 6:47कल्पवृक्ष क्यों होगा? देखो गुलाब को तो
- 6:49हम पाटल कहते हैं। पाटल कहते हैं। ठीक है
- 6:53ना? कल्पवृक्ष को हम देवद्रुम कहते हैं।
- 6:56देव ध्रुम कहते हैं। पारिजात कहते हैं।
- 7:01पार जात कहते हैं। सुर तरु कहते हैं। देव
- 7:08तरु कहते हैं। देव तरु कहते हैं। समझ गए?
- 7:14लेकिन कल्पवृक्ष को हम और कुछ नहीं कहते।
- 7:22को हम क्या-क्या कहते हैं? बताइए कमल को
- 7:25हम क्या-क्या कहते हैं? तो लिख दो जल्दी
- 7:27से कमल के पर्यायवाची
- 7:34हम
- 7:37कमल अर्थात अरविंद
- 7:40अर्थात तामरस
- 7:43अर्थात शतदल
- 7:47अर्थात उत्पल।
- 7:50उत्पल
- 7:51अर्थात वारिज
- 7:54वारिज
- 7:56तोयज
- 7:59नीरज
- 8:02सरोज
- 8:05सरसज
- 8:07सरसज
- 8:10अंबुज
- 8:12अंबुज
- 8:16जलज
- 8:18जलज सरोवर की रूह होता है। ये ऐसे याद कर
- 8:22लो। सुंदर लगता है ना जो तालाब में कमल
- 8:24खिला हो। तो हम कहेंगे सरोरू है ये। सरो
- 8:29रूह है ये। तामरस तो लिखवा दिया। इंदवर है
- 8:34ये।
- 8:36इंदवर है ये। पुंडरीक है। पुंडरीक है।
- 8:42कोकनद है।
- 8:44कोक नद है। आप कहेंगे मैम कुवलय है।
- 8:51कुव लय है। कुकनद है। कुवलय है। बताएं।
- 8:58ठीक है। बताओ।
- 9:00हां। अंबुज है। वेरी गुड। वेरी गुड। कुवलय
- 9:03है, कुमुद है। ये सब हम किसे कहते हैं? ये
- 9:07सब हम कहते हैं पद्म है। ये सब हम कहते
- 9:11हैं किसे? तो हम कहते हैं कमल को। ठीक है
- 9:16ना? नेक्स्ट देख लीजिएगा। आगे बढ़ जाएंगे।
- 9:19शुद्ध वर्तनी वाला शब्द कौन सा है? शब्द
- 9:23शुद्ध वर्तनी वाला शब्द कौन सा है? तो
- 9:26देखो एक होते हैं कवि। एक होते हैं कवि।
- 9:30जब तक हम स्कूल में थे तो हम कवि की का
- 9:34स्त्रीलिंग समझते थे। कवित्री
- 9:38कवित्री
- 9:40इसी को मानते थे। कवित्री पर धीरे-धीरे
- 9:44भ्रम खत्म हुए। भ्रम खत्म हुए तो फिर इसे
- 9:47मानने लगे। सही। फिर इसका भी भ्रम खत्म हो
- 9:50गया। अब पता चल गया कब इत्री होगा। होता
- 9:53है या नहीं होता है? जी। है ना? तो जब हम
- 9:55पढ़ रहे होते हैं स्कूल में तो बहुत सी
- 9:57चीजों को हम गलत कर रहे होते हैं। हमें
- 9:59पता ही नहीं होता।
- 10:01बताइए क्लियर?
- 10:04हां जी। लेकिन अब भी ये जब कंपटीशन में आ
- 10:07गए तो हमें वर्तनी का महत्व पता चल रहा
- 10:09है। है ना? चल नेक्स्ट देखते हैं। पेड़ से
- 10:13पत्ता गिरा। इस वाक्य में से किस प्रकार
- 10:17का कारक है? जब भी अलगाव का बोध होगा। मैं
- 10:22घर से निकला। गंगा हिमालय से निकली। पत्ता
- 10:26पेड़ से गिरा। बच्चा घर से विद्यालय गया।
- 10:30तो जब भी आप क्या कहेंगे मैम? जब भी अलगाव
- 10:34का बोध हो रहा होगा। यह से पद जब भी अलगाव
- 10:39के बोध के लिए प्रयुक्त होगा।
- 10:44अलगाव का बोध होगा तो आप कहेंगे तब वह
- 10:49अपादान कारक का तब वह अपादान मैम पैट में
- 10:54पूछा गया था हां बिल्कुल सही अपादान कारक
- 10:57में आएगा करण कारक में यह क्या हो जाएगा
- 11:00आप कहेंगे जैसे ही यह जैसे ही यह साधन का
- 11:04बोध कराए क्या साधन है साधन है तो आप
- 11:09कहेंगे इसे हम क्या कहेंगे करण कारक
- 11:13कहेंगे कर्म कारक कौन है? कर्म क्या होता
- 11:15है? जिस पर क्रिया का प्रभाव पड़े। कर्ता
- 11:19या क्रिया दो ही
- 11:22दो ही वस्तुओं पर क्रिया का प्रभाव पड़ता
- 11:26है। एक तो कर्ता पे पड़ेगा। दूसरा तो करण
- 11:29कर्म पर पड़ेगा। अगर क्रिया सकर्मक है तो
- 11:32कर्म पे पड़ेगा। अगर क्रिया अकर्मक है तो
- 11:34कर्ता पे पड़ेगा। बिल्कुल सही बात है और
- 11:37संबंध आप जानते हैं। का की के रा री रे
- 11:42गवार शब्द का तत्सम रूप क्या होगा? गवार
- 11:45का तत्सम रूप क्या होगा? यह जो गामीर लिखा
- 11:48है, यह कोई शब्द नहीं है। यह जो गंभीर
- 11:51लिखा है, यह खुद तत्सम है। गहरा को कहते
- 11:54हैं। गंभीर किसे अह कहते हैं? हम गहरा को
- 11:58कहते हैं। अगर बात की जाए क्या? अगर तो
- 12:02बात की जाती है गवार मतलब ग्राड़ी। हमने
- 12:06सोच लिया गवार कोई गाली है। हम कोई
- 12:09व्यक्ति थोड़ा कम जानकार है उसे गवार कहने
- 12:11लगे। अरे इसके कपड़े देखना गवार कहीं का।
- 12:14गवार का मतलब गांव से संबंधित होता है।
- 12:18समझे?
- 12:20हां। और गवार होना इसका मतलब ग्रामीण होना
- 12:23है और ग्रामीण होना कोई मतलब
- 12:27जरा सी भी शर्म की बात नहीं है। भारत तो
- 12:29गांव में बसता है। महात्मा गांधी ने कहा
- 12:31था। नेक्स्ट देखेंगे जो मापा ना जा सके।
- 12:35अब यहां दो शब्द हैं। अपरंपार। तो आप
- 12:39कहेंगे अपरंपार का अर्थ होता है बहुत
- 12:42ज्यादा।
- 12:43बहुत
- 12:45ज्यादा जिसका पार ना पाया जा सके। है ना
- 12:50ज्यादा जिसका पार ना पाया जा सके मतलब
- 12:54अंदाजा ना लगाया जा सके जिसका
- 12:58पार ना
- 13:00पाया जा सके पाया जा सके उसे हम अपरंपार
- 13:07कहते हैं। ठीक है? अपरिमेय तो क्या
- 13:11कहेंगे? इसे मापा नहीं जा सकता। अन
- 13:13अपेक्षित जिसकी अपेक्षा ना की गई हो।
- 13:16जिसकी
- 13:19अपेक्षा ना की गई हो। अपेक्षा
- 13:23ना की गई हो। ना की गई हो।
- 13:29ठीक है ना? बताएं। अमापित कोई शब्द तो है
- 13:32नहीं। बताएं। आगे बढ़ेंगे। अंधे की लाठी
- 13:36मुहावरे का अर्थ क्या है? अंधे की लठी या
- 13:39अंधे की लकड़ी। तो कोई व्यक्ति ऐसा होता
- 13:42है जिसका कोई एक ही सहारा होता है। अंधे
- 13:45व्यक्ति के पास एक ही लाठी है। वो लाठी के
- 13:48सिवा किस पर निर्भर हो सकता है? आंखें तो
- 13:50उसकी है नहीं जिससे वह चल पाए। जिससे वह
- 13:52देखकर आगे बढ़ पाए तो वो लाठी के सहारे
- 13:54आगे चढ़ता है। तो लाठी के सहारे चलना नहीं
- 13:57होगा। इसका अर्थ शाब्दिक अर्थ नहीं निकलते
- 13:59हैं। मुहावरे और लोकोक्तियों के कभी
- 14:02शाब्दिक अर्थ नहीं निकलते। निकलते हैं
- 14:04सांकेतिक अर्थ रास्ता दिखाना नहीं। अनपढ़
- 14:07होना नहीं। एकमात्र सहारा। एकल सहारा। ठीक
- 14:11है ना? एकमात्र सहारा या एकल सहारा हम इसे
- 14:14कह देंगे। आगे बढ़ेंगे। गरीबों को वस्त्र
- 14:17दो। इस वाक्य में कौन सा कारक है? किसी को
- 14:20कुछ देना है। देना मतलब दान का भाव।
- 14:26दान का भाव और दान का भाव बराबर अपादान।
- 14:31सॉरी संप्रदान। प्रदान दान का भाव
- 14:34संप्रदान। संप्रदान कारक के लिए दो चीजें
- 14:37प्रयुक्त होती हैं। एक तो दान का भाव और
- 14:40दूसरा जिसके लिए क्रिया की जाए जिसके लिए
- 14:46क्रिया की जाए क्रिया
- 14:49की जाए
- 14:50की
- 14:52जाए उसे भी हम क्या कहेंगे? उसे भी हम
- 14:56संप्रदान कारक कहेंगे। नायक शब्द का सही
- 15:00संधि विच्छेद क्या होगा? नायक शब्द का सही
- 15:03संधि विच्छेद क्या होगा? मैम इतने आसान
- 15:05बेटा आपने कर रखे हैं इसलिए आपको आसान लग
- 15:08रहे हैं। पता नहीं क्यों आप क्यों यह
- 15:10सोचते हो कि मतलब पेपर आउट ऑफ द बॉक्स ही
- 15:13आएगा। मतलब ये क्यों मान के बैठे हो पेपर
- 15:16इतना टफ आएगा कि मुझे नहीं आता होगा।
- 15:19क्योंकि आपको आता है इसलिए आपको यह आसान
- 15:22लग रहे हैं। यह आसान नहीं है क्योंकि आपको
- 15:24आते हैं इसलिए आपको यह आसान लग रहे हैं।
- 15:27है ना? नायक शब्द का
- 15:30बताओ।
- 15:37ओ
- 15:42चलो आप कहेंगे न धन अक न धन अक
- 15:48तो हम कहेंगे
- 15:51हम कहेंगे मैम अयादि संधि कहती है ए या ऐ
- 15:56के बाद क्या आता है अन्य स्वर आता है अन्य
- 16:00स्वर
- 16:01कोई भी स्वर पर आपने जो बोला मेरा दिमाग
- 16:04हिल गया उससे कोई स्वर आता है क्या आता है
- 16:07कोई स्वर आता है यदि इसके बाद तो यह ए और
- 16:12ऐ किस में बदल जाता है ये दोनों बदल जाते
- 16:15हैं बेटा यह बदलेगा ऐ में ऐ में ऐसे करके
- 16:21और यह बदलेगा आय में आय में अब यहां क्या
- 16:25हुआ ना पर से यह हटे यह क्या बदलेगा आय
- 16:29में बदलेगा ठीक है और इधर अक लिखा लिखा है
- 16:33अक लिखा है क्योंकि न स्वर रहित है ना को
- 16:36बड़ा आ मिलेगा ना पूरा हो जाएगा या स्वर
- 16:40रहित है या को या मिलेगा तो आ मिलेगा तो
- 16:42यह हो जाएगा तो यह बनेगा नायक
- 16:46ये बनेगा नायक समझ गए कि नहीं समझे अगर
- 16:51समझे समझ गए तो बहुत बढ़िया तो कौन सा हो
- 16:54जाएगा न धन अक बी विल बी द करेक्ट आंसर
- 16:57बताएं बी विल बी द करेक्ट आंसर नयन में ए
- 17:01ऑप्शन होगा। हां, ए ऑप्शन क्या था? ने धन
- 17:04अन था। ने धन अकनयक होगा ना? अन थोड़ी लिखा
- 17:08है नयन में होगा। बताओ पीतांबर में कौन सा
- 17:11समास है? पीला है अंबर जिसका तो पीला है
- 17:14अंबर जिसका लगाओगे तो बहुव्रीहि
- 17:17दो बनते हैं। अगर समास विग्रह दिया जाए
- 17:20पीला है अंबर जिसका। है अंबर जिसका तो यह
- 17:25बहुव्रीहि होगा। अंबर जिसका तो यह क्या
- 17:28है? बहुव्रीहि क्योंकि अर्थात विष्णु
- 17:31अर्थात
- 17:33विष्णु और आपसे बोल दिया जाए पीला है जो
- 17:37अंबर मतलब पीले रंग का वस्त्र अगर आपसे
- 17:40बोला जाए पीला है
- 17:43है जो अंबर मतलब पीले रंग का वस्त्र उसे
- 17:48हम क्या बोलेंगे तो उसे हम बोलते हैं उसे
- 17:54हम बोलते हैं कौन सा समास तो आप कहेंगे
- 17:56मैम कर्मधारय समास अगर अगर इसमें होता तो
- 17:59ये होता कर्मधारय कर्मधारय
- 18:02तो हमें समास विग्रह भी देखना है। अब
- 18:05इसमें तो ऑप्शन में ही कर्मधारय नहीं दिखा
- 18:07है। अब तो इसमें कर्मधारय ऑप्शन में भी
- 18:10नहीं है। तो क्या करेंगे? तो थोड़ी ना
- 18:12कर्मधारय लगाएंगे। तब तो आगे बढ़ेंगे। आगे
- 18:14बढ़ो। निम्नलिखित में से कौन सा शब्द
- 18:16स्त्रीलिंग है? बताओ।
- 18:19हम कहेंगे उत्साह। मुझे उत्साह आ रहा है।
- 18:23किसी कार्य का उत्साह हो रहा है। तो आप
- 18:26कहेंगे
- 18:30हम समझ गई हूं मैं बेटा समझ रही हूं समझ
- 18:32रही हूं अलका
- 18:36चक्रव्यूह रचा जा रहा है संकल्प लिया जा
- 18:39रहा है
- 18:41यही तो बात है
- 18:44ईश्वर की रजा हमें पता नहीं चलती कि क्या
- 18:46है लेकिन बस ईश्वर परिवार को सब्र दे है
- 18:50ना हम कहेंगे उत्साह बिल्कुल सही बात है
- 18:53चक्रव्यूह बिल्कुल सही बात है पुल्लिंग है
- 18:56संकल्प लिया बिल्कुल सही बात है। मृत्यु
- 18:59हुई तो यह क्या है? स्त्रीलिंग है। मृत्यु
- 19:02हुई क्या है? नहीं मैं संकल्प लेती हूं तो
- 19:05अपने लिए बोला है संकल्प। संकल्प लेती हूं
- 19:08तो वो तो तुम हो ना स्त्रीलिंग इसलिए ले
- 19:10रही हो और कोई लड़का है तो मैं संकल्प
- 19:12लेता हूं। है ना? संकल्प तो लिया जाता है।
- 19:15संकल्प ली थोड़ी जाती है। उत्कर्ष शब्द का
- 19:17सही विलोम क्या है? उत्कर्ष का क्या होगा?
- 19:20अपकर्ष होगा। क्या होगा? अपकर्ष होगा।
- 19:23उत्थान का विलोम क्या होता है? पतन होता
- 19:26है। उत्थान का विलोम क्या होता है? पतन
- 19:29होता है। अवनति उन्नति का विलोम है।
- 19:32उन्नति का विलोम क्या है? अवनति है।
- 19:34भ्रष्ट का विलोम क्या होगा? सदाचारी।
- 19:37सदाचारी।
- 19:39ईमानदार।
- 19:42ईमानदार।
- 19:45बताओ।
- 19:47आगे बढ़ेंगे।
- 19:49सूर्य का पर्यायवाची निम्नलिखित में से
- 19:51कौन सा नहीं है? बताओ।
- 19:54हम
- 19:59तो हम कहेंगे दिनकर है दिवाकर है महेंद्र
- 20:02थोड़ी ना है दिनकर है दिवाकर है इसके आगे
- 20:05की देखना अंशुमाली है
- 20:08अंशुमाली है मार्तंड है मार्तंड है
- 20:15सविता है
- 20:18तरणी है यह नए हैं जो आपसे यह दोनों
- 20:22बिल्कुल नए हैं जो आप लोग नहीं समझते और
- 20:25यह बार-बार पूछ भी लिए जा रहे हैं। आजकल
- 20:27ट्रेंड बदल चुका है। हम कहेंगे आदित्य है।
- 20:31आदित्य है। दिनकर है, दिवाकर है, प्रभाकर
- 20:35है, भास्कर है। भास्कर की वर्तनी सही लिखी
- 20:38हुई है। देख लेना। प्रभाकर है, रवि है,
- 20:41अर्क है, भानु है। रवि है, अर्क है, भानु
- 20:44है। भानु भानु है। समझ गए? यह किसके
- 20:48पर्यायवाची हैं? तो कहेंगे सूर्य के
- 20:50पर्यायवाची हैं। बताइएगा।
- 20:54बहुत बढ़िया। नेक्स्ट देखेंगे।
- 20:58ऊंट के मुंह में जीरा का अर्थ क्या है?
- 21:00बताओ। ऊंट के मुंह में जीरा का अर्थ आप
- 21:03बता दोगे। ऊंट को बीमारी होना, बड़े
- 21:05प्राणी को कम भोजन देना, बहुत कम मात्रा
- 21:07में वस्तु मिलना, पेट खराब होना। तो आप
- 21:09कहना अवश्य बड़े प्राणी को कम भोजन देना
- 21:12नहीं। ये भी नहीं। ये नहीं। आप कहेंगे
- 21:15बहुत कम मात्रा में वस्तु मिलना। तो अब ये
- 21:18आ गया ये ऑप्शन। वैसे क्या आ जाएगा?
- 21:21आवश्यकता से आवश्यकता से अधिक आवश्यकता से
- 21:27कम मिलना आवश्यकता से बहुत कम
- 21:32से बहुत कम
- 21:35बहुत कम ठीक है ना चलिए आगे बढ़ जाएंगे
- 21:40नेक्स्ट देखेंगे रामायण शब्द में मूल रूप
- 21:43से कौन सी संधि है अरे इसको बता दो यह एक
- 21:46नया क्वेश्चन है
- 21:50रामायण शब्द में
- 21:54कौन सी संधि है?
- 22:00देखो इसमें संधि बन जाती है तीन संधि।
- 22:04तीन संधि इसमें लगती हैं। दो बताऊंगी मैं
- 22:06तीसरी नहीं बताऊंगी।
- 22:09एक संधि मानी जाती है
- 22:13राम धन आयन जो कि सबसे ज्यादा सही है।
- 22:17मतलब विच्छेद तो इसका यही होगा। विच्छेद
- 22:21तो इसका यही होगा। ठीक? हम कहेंगे इधर आ
- 22:25है मा में इधर आ है बड़ा आ बनेगा। ठीक है?
- 22:28तो यह बनना चाहिए था रामा यन।
- 22:32लेकिन ना क्यों बदला? अगर न से पहले ऋ
- 22:38या श में से कुछ हो इन तीनों व्यंजनों में
- 22:41से यदि कोई भी पहले वर्ण में आता है तो ना
- 22:45किस में बदलता है ना ण में बदलता है यह
- 22:48नियम किसका है व्यंजन संधि का व्यंजन संधि
- 22:52का नियम है जो कि यहां पे लग रहा है और जब
- 22:55लग रहा है तो यह संधि व्यंजन में भी आ
- 22:58जाती है पर हमसे पूछी जाएगी तो दीर्घ ही
- 23:01लगाएंगे मूल रूप से क्यों कहा इन्होंने
- 23:04इन्होंने सीधे क्यों नहीं कहा रामायण में
- 23:06कौन सी संधि है? इन्होंने मूल रूप से
- 23:09क्यों पूछा? क्योंकि इसमें संधि कोई दूसरे
- 23:12भी बनने की संभावना हो रही है। समझे? हम
- 23:21सज्जन का सही संधि विच्छेद सज्जन नहीं।
- 23:24सद्यजन नहीं। सात धनजन नहीं। सत धनजन है।
- 23:28सज्जन का सही संधि विच्छेद क्या होगा?
- 23:31सज्जन होगा। सत धन जन होगा। आगे बढ़े। बताओ
- 23:35कल से तो आपकी इंग्लिश की क्लास होगी। कल
- 23:37से तो आपकी इस टाइम पे इंग्लिश की क्लास
- 23:39होगी। यथाशक्ति में कौन सा समास है? तो
- 23:42यथाशक्ति का अर्थ होता है शक्ति के
- 23:44अनुसार।
- 23:46रिमोट दे जाओ। है ना? हां।
- 23:50शक्ति के अनुसार। और शक्ति के अनुसार का
- 23:53मतलब हो गया यथा यहां क्या है? अव्यय है।
- 23:56तो ये तो आपने बहुत बार कर लिया। ये तो
- 23:58जबरदस्ती आ जाता है। बीच में आ जाता है ये
- 24:00क्वेश्चन। हां। अब बताओ मिठास कौन सी
- 24:03संज्ञा है? मिठास, खटास, कड़वाहट
- 24:07बताओ। खट्टापन, मीठापन
- 24:11बताओ।
- 24:14तीखापन ये सब कौन सी संज्ञाएं हैं? ये
- 24:17सारी की सारी संज्ञाएं कौन सी हैं?
- 24:20भाववाचक संज्ञाएं हैं। मिठास क्या है?
- 24:23भाववाचक संज्ञा है। वहीं पूछा जाए मीठा
- 24:26क्या है? तो कहना विशेषण है। मीठा क्या
- 24:29है? विशेषण है।
- 24:31बताओ अगर आपसे पूछा जाए मिठाई क्या है?
- 24:36मिठाई क्या है? तो आप कहेंगे जातिवाचक
- 24:39संज्ञा है। जाति
- 24:42वाचक
- 24:44संज्ञा है। बताओ जातिवाचक
- 24:49संज्ञा है। क्लियर? हां जी।
- 24:53नेक्स्ट देखेंगे।
- 24:55घड़ो पानी पढ़ना मुहावरे का सही अर्थ क्या
- 24:58है? घड़ो पानी पन्ना। खड़ों पानी पड़ गया
- 25:03बताओ तो जब कभी ऐसा होता है
- 25:07तो एकदम से लज्जा आ जाए तो कहते हैं ना
- 25:09मैंने उनसे जरा सी मदद मांगी और उन्होंने
- 25:13मुझसे साफ मना कर दिया घड़ो पानी पड़ गया
- 25:15मैंने कल आपको एक बताया था ना किसी के
- 25:17यहां बिना बुलाए पहुंच जाओ और उसके यहां
- 25:19चल रहा हो फंक्शन तो घड़ो पानी पड़ जाता
- 25:22है ना तो घड़ों पानी पड़ना बहुत ज्यादा
- 25:26लज्जित हो जाना है ना नेक्स्ट देखेंगे आशी
- 25:30आशीर्वाद का शुद्ध वर्तनी रूप क्या है?
- 25:33ऐसा भी हो सकता है कई बार यह सही देकर ही
- 25:36सही पूछ लें। तो इसका एक तरीका बता दे रही
- 25:38हूं मैं। मैं कहूंगी
- 25:43निर्दोष
- 25:44निर् दोष। यह ऐसे लिखा समझ में आ रही है।
- 25:48आवाज मुझे इसकी निर्दोष पढ़ने में आ रही
- 25:51है। या निर्भय
- 25:53मैं ऐसे ही तो पढ़ रही हूं। तो बस एक चीज
- 25:57याद रखनी है बेटा। यह जो रा की ध्वनि जहां
- 26:01आ रही है यह उससे अगले वाले पर बैठेगा। ये
- 26:04उससे अगले वाले स्वर पर बैठेगा। बैठेगा भी
- 26:08किस पे? स्वर पे। तो इसीलिए यह निरष हो
- 26:13जाता है। निरष हो जाता है। समझे? इसीलिए
- 26:17निरभय हो जाता है। हम कहते हैं आ शीरवाद आ
- 26:24शीरवाद
- 26:26आ शीर वाद तो इसका मतलब ये जो ब के ऊपर आ
- 26:31है उसके ऊपर बैठेगा आ शीर
- 26:35वाद यहां पर इस व के ऊपर बैठेगा श पर नहीं
- 26:39बैठेगा यह एक नियम है। दूसरी दूसरी बात
- 26:42बता दूं आपको मैं इससे एक सिद्धांत निकल
- 26:45के आता है। कि अगर कोई आपसे लिख दे
- 26:48निर्दोष निर्दोष तो देखने में ये बड़ा
- 26:51अच्छा लग सकता है लेकिन रेफ कभी पहले वर्ण
- 26:54पर नहीं लगती। मतलब आप क्या कहेंगे? र कहो
- 26:59स्वर रहित होगा। जब स्वर रहित रहित हो
- 27:05तो वह तो वह प्रथम वर्ण पर प्रथम वर्ण पर
- 27:11नहीं लगेगा। वर्ण पर नहीं आ सकता। पर नहीं
- 27:18आ सकता क्योंकि आ सकता क्योंकि ऐसा तो
- 27:23होगा नहीं कि निर ही तो पढ़ोगे इसे ऋण तो
- 27:26पढ़ोगे नहीं। ऋणी ही तो पढ़ोगे नहीं। तो
- 27:28इसलिए इसको समझने वाली बात है। है ना? तो
- 27:31ए ही शुद्ध है और पहले से ही शुद्ध ही दे
- 27:34रखा था। ए ही शुद्ध है और पहले से भी क्या
- 27:38दे रखा था? जी शुद्ध ही दे रखा था मैम।
- 27:42हां जी।
- 27:44वह धीरेधीरे चल रहा है। मतलब उसकी जो चाल
- 27:49है उसका जो चलना है उसकी विशेषता क्या है?
- 27:51उसकी जो चाल है वो जो चल रहा है उसकी
- 27:54विशेषता क्या है?
- 27:58बताओ। तो आप कहेंगे मैम यह है क्रिया
- 28:03विशेषण। क्रिया की तो विशेषता बताई जा रही
- 28:06है। क्रिया की तो विशेषता बताई जा रही है
- 28:08कि क्रिया कैसे चल रही? तो रीतिवाचक
- 28:11क्रियाविशेण है। रीतिवाचक क्रियाविशेण है।
- 28:14इतनी सी बात है। रीतिवाचक क्रियाविशेण है।
- 28:18ठीक? बहुत बढ़िया। नेक्स्ट देखेंगे जो सब
- 28:21कुछ उदारता से जानता है। धन्यवाद जी। जो
- 28:25सब कुछ उदारता से जानता है उसे हम क्या
- 28:28कहें? देना जानता है। बताओ तो एक तो बड़ी
- 28:32मुश्किल बात है। अपनी हर व्यक्ति की आदत
- 28:34होती है। आज के टाइम में वह एक ऐड आ रहा
- 28:36है। अपना मारियो बचा लेता। हमारा मारियो
- 28:40उड़ा देता। तो व्यक्ति दूसरों की तो हर
- 28:42चीज उड़ाने पे लगा रहता है। अपनी हर चीज
- 28:44बचाने पे लगा रहता है। ऐसे समय में कोई
- 28:46ऐसा मिल जाए जो सब कुछ उदारता से देना
- 28:49जानता हो। मतलब दूसरों पर न्योछावर करना
- 28:52जानता हो। उसे हम क्या कहेंगे? दानी
- 28:53कृपालु आधार दाता परोपकारी।
- 28:56बी क्यों बता रहे हो?
- 28:59कृपालु तो कृपा करने वाला उदारता से देना
- 29:02चाहता है। औदार्य से देना चाहता है। हृदय
- 29:05बड़ा कर लेता है। औदार्य दाता कहलाएगा
- 29:08भैया वो औदार्य दाता। क्या कहलाएगा?
- 29:11औदार्य दाता। दाता दानी नहीं। दानी कौन
- 29:14होता है? दान देने वाला।
- 29:17दान देने वाला। देने
- 29:21वाला। कृपालु कौन कहलाता है? कृपा करने
- 29:25वाला। कृपा करने वाला करने
- 29:31वाला परोपकारी दूसरों परोपकार करने वाला
- 29:35सी विल बी द करेक्ट आंसर धन्यवाद सर हां
- 29:38जी
- 29:44इस क्वेश्चन का आंसर दो
- 30:09कार का सही संधि विच्छेद क्या है?
- 30:12ऊपर आ जाना और भी सब
- 30:14हां अब बस अभी कर लूं मैं।
- 30:17जी अलंकार का सही संधि विच्छेद क्या है?
- 30:21अलम धनकार अलम धनकार
- 30:26इज़ अलंकार अलंकार नहीं अलकार नहीं अलंकार
- 30:31नहीं अलम धनकार ये मा ही बदल जाएगा किस
- 30:34में अनुस्वार में मा किस में बदलेगा बेटा
- 30:38अनुस्वार में बदलेगा अलम धन कार हो जाता
- 30:40है अलंकार पाप पुण्य में कौन सा समास है
- 30:44पाप पुण्य में कौन सा समास है पाप पुण्य
- 30:48मतलब पाप और पुण्य
- 30:50पाप पाप और पुण्य। पाप या पुण्य। पाप या
- 30:55पुण्य। व्यक्ति एक ही काम कर सकता है। सब
- 30:58कुछ तो कर नहीं सकता। द्वंद्व समास है।
- 31:00द्वंदव में भी कौन सा है बेटा? विकल्प
- 31:02द्वंद है। यहां भी कौन सा समास है? विकल्प
- 31:05द्वंद है। विकल्प
- 31:08द्वंदव है।
- 31:11विकल्प द्वंदव है। समझे ना?
- 31:17आगे बढ़ जाते हैं। द्विगु तो है नहीं।
- 31:20क्षणिक का सही विलोम शब्द क्या है? क्षणिक
- 31:23होता है जरा देर का। अल्प शाश्वत सनातन या
- 31:26अमर। अमर तो होगा विलोम नश्वर का। अमर तो
- 31:30विलोम होगा नश्वर का। नश्वर का। ठीक है?
- 31:34सनातन विलोम किसका होगा? वो भी नश्वर का
- 31:37हो जाएगा। क्षणिक होता है सदावर सदा रहने
- 31:41वाला। सॉरी जरा देर में खत्म होने वाला।
- 31:43शाश्वत होता है सदा रहने वाला। अल्प का
- 31:46विलोम अति होता है। अल्प का विलोम क्या
- 31:50होता है? अति बहुत ज्यादा। दूध का दूध
- 31:52पानी का पानी होने का अर्थ क्या है? है
- 31:55ना? कहते हैं सामने आ जाओ। दूध का दूध
- 31:59पानी का पानी हो जाएगा। तो ऐसा थोड़ी ना
- 32:02है कि मतलब दूध और पानी अलग किया जाता है।
- 32:05शाब्दिक अर्थ थोड़ी निकालोगे। शाब्दिक
- 32:08अर्थ थोड़ी निकालोगे। बताओ
- 32:11क्या होगा?
- 32:13तो आप कहेंगे मिलावट करना, धोखा देना, सही
- 32:16न्याय करना या झगड़ा शांत करना
- 32:22बताएं।
- 32:27मिलावट करना, धोखा देना। नहीं, सही-सही
- 32:30न्याय करना। मतलब उचित न्याय करना। यहां
- 32:33आप क्या लिख सकते हो? उचित न्याय करना।
- 32:36उचित न्याय करना। क्या होगा? उचित न्याय
- 32:42करना। ठीक है? बताइए। आगे बढ़ जाते हैं।
- 32:46निम्नलिखित में से बादल का पर्यायवाची
- 32:48शब्द कौन सा है? अंबुज, नीरज, वारिज,
- 32:51पयोज। पयोध बताओ। अंबुज, नीरज, वारिज,
- 32:55पयोज। अयोध
- 32:59[हंसी]
- 33:00वरना हां वरना संसार के सभी दूध वाले
- 33:03पकड़े जाते हैं। क्योंकि यह माना जाता है
- 33:06यह कहावत है कि आपको दुनिया में हर चीज
- 33:10प्योर मिल सकती है। दूध प्योर मिल ही नहीं
- 33:12सकता। यह पता नहीं क्या नेचर बन जाता है।
- 33:16कितना भी महंगा आप दूध ले लो थोड़ी बहुत
- 33:18मिलावट करके ही देते हैं वह। वो आपको
- 33:21प्योर नहीं देंगे। यह तो है वह घी प्योर
- 33:24दे देंगे आपको भले ही पर दूध प्योर नहीं
- 33:26दे सकते बताओ अंबुज नीरज बारिश पयोध बताओ
- 33:31तो अंबुज क्या है आप कहेंगे मैम कमल है
- 33:33बारिश क्या है कमल है नीरज है कमल है पयोध
- 33:36क्या है पयोध बादल है पयोध हो गया पयोधर
- 33:39हो गया पयो धर हो गया जलधर हो गया जल धर
- 33:47हो गया वारी धर हो गया वारी
- 33:52धर हो गया है ना हम कहेंगे नीरत हो गया
- 33:56नीरद है तोयद है
- 34:00तोयद है अंबुद है अंबुद है ये सब क्या हैं
- 34:05ये सब हैं किसके मेघ अर्थात बादल के
- 34:09पर्यायवाची इसे हम मेघ भी कह देते हैं इसे
- 34:13हम मेह भी कह देते हैं। मेघ भी कह देते
- 34:17हैं और मेह भी कह सकते हैं। हां जी। मान
- 34:21नहीं सकते। हां। कभी जीवन में यह मानेंगे
- 34:23नहीं कि हमने पानी मिलाया है। ना प्योर।
- 34:26कसम खा के कहते हैं प्योर। बिल्कुल प्योर।
- 34:29एक बूंद भी नहीं। कमल के पर्यायवाची मैंने
- 34:32लिखवा चुकी हूं। अब ऐसा ही हो कि जल का
- 34:35पर्यायवाची हो और उसमें मिला लगा मिले
- 34:37क्या? घी। तो उसे हम क्या कहेंगे? समुद्र
- 34:40कहेंगे। समुद्र कहेंगे। बताइए। ठीक है ना?
- 34:44नेक्स्ट देखते हैं। उत्कृष्ट का सही विलोम
- 34:47क्या है? उत्कृष्ट ऊपर उठा ऊंचा। बताइए तो
- 34:50क्या हो जाएगा? निकृष्ट हो जाएगा।
- 34:53उत्कृष्ट का सही विलोम क्या है? तो आप
- 34:56कहेंगे मैम निकृष्ट हो जाएगा। विकृष्ट
- 34:58नहीं अवनत किसका विलोम है? उन्नत का है।
- 35:01उन्नत का है। अधम किसका विलोम है? उत्तम
- 35:04का है। उत्तम का विलोम है। अधम बताइए।
- 35:11अन्वेषण का सही संधि विच्छेद क्या है?
- 35:14अन्वेषण का सही संधि विच्छेद क्या है?
- 35:18बताएं अन्वेषण बोलते किसे हैं? यह पता है
- 35:21आपको? खोज पड़ताल करना। है ना? आपने पढ़ा
- 35:26है ना छिद्रान्वषण।
- 35:28छिद्रावेशन तो जांच पड़ताल को कहते हैं
- 35:31अन्वेषण।
- 35:34क्या हो जाएगा? अन्न धन्वषण। नहीं भाई अनु
- 35:37धन एषण। वेरी गुड। मैं जो भी ए बता रहा है
- 35:42मुंडी मोडूंगी। अनु धन ओके नाराज हो गया
- 35:46यह तो बालक
- 35:50अनु धन ईशण हम बोलेंगे ना के साथ जो उ लगा
- 35:54लगा है ना के साथ लगा है उ और ये है ईशण
- 35:58ये उ किस में बदलेगा आप कहोगे मैम व में
- 36:01बदलेगा ठीक है व में बदलेगा न अधूरा रह
- 36:05गया हम कहेंगे बिल्कुल व को ए की मात्रा
- 36:08मिल गईण हो गया यह अन्वेषण हो गया बताओ
- 36:13यही तो आएगा। यही तो आएगा। अगर ठीक है तो
- 36:16बहुत अच्छी बात है। नहीं तो आगे बढ़ते
- 36:18हैं। नीलकंठ में कौन सा समास है? नीलकंठ
- 36:22में कौन सा समास है? द्विगु है, अव्ययीभाव
- 36:25है, बहुव्रीहि है। नीलकंठ का अर्थ हो गया
- 36:27नीला है कंठ जिसका। नीलकंठ का अर्थ हो गया
- 36:31नीला है कंठ जिसका। नीला है कंठ जिसका कभी
- 36:36यह नहीं आएगा। नीला है कंठ जो नहीं कंठ
- 36:39जिसका यह होता है इसका समास विग्रह
- 36:42किन-किन के लिए प्रयोग होता है तो मुख्यता
- 36:45तो यह शिव के लिए प्रयोग होता है क्यों
- 36:47शिव ने हला हलाहल विष पी लिया है और दूसरा
- 36:50यह प्रयोग किसके लिए होता है तो मोर के
- 36:53लिए होता है मोर के लिए होता है किसके लिए
- 36:56होता है मोर के लिए होता है तो क्या हो
- 36:58जाएगा बहुव्रीहि समास हो जाएगा बताइए क्या
- 37:02हो जाएगा बहुव्रीहि समास हो जाएगा ठीक है
- 37:06है ना? बताएं।
- 37:09आगे बढ़ेंगे। नेक्स्ट देखेंगे। शुद्ध वाक्य
- 37:13का चयन कीजिए। सीता ने गीत गाई। अब गीत
- 37:17स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग है? बस इतना
- 37:19बता दो। गीत स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग
- 37:21है?
- 37:23हम कहेंगे मैम पुल्लिंग है। पुल्लिंग है
- 37:24तो इसे काट दो। इसे काट दो। अब मुझे यह
- 37:27बताओ गीत सजीव कर्म है या निर्जीव कर्म
- 37:30है। बताओ। गीत सजीव कर्म है या निर्जीव
- 37:35कर्म है? सीता गीत को गाया। नहीं भाई सीता
- 37:38ने गीत क्या है? निर्जीव कर्म है। निर्जीव
- 37:43कर्म है। वाक्य किस में हो रहा है? पास्ट
- 37:46में हो रहा है। पास्ट में हो रहा है तो ने
- 37:47लगेगा। तो सीता ने गीत गाया। बताओ
- 37:53बताओ। क्लियर? हां जी। सामान्य भूत।
- 38:01खग का सही पर्यायवाची शब्द क्या होगा?
- 38:04बताओ। वृक्ष को हम क्या बोलते हैं? तो हम
- 38:07बोलते हैं बेटा पेड़।
- 38:09हम इसे बोलते हैं विटप।
- 38:12विटप। हम इसे बोलते हैं तरु। हम इसे बोलते
- 38:16हैं क्या? गाज। हम इसे बोलते हैं गाछ। हम
- 38:20इसे बोलते हैं ध्रुम। हम इसे बोलते हैं
- 38:22शाल। यह हम किसे बोलते हैं? वृक्ष को बोल
- 38:26देते हैं। यह हम किसे बोल देते हैं? वृक्ष
- 38:28को बोल देते हैं। मृग और पशु एक ही बात
- 38:31है। यह हम जानवर को बोलते हैं। जानवर
- 38:34ठीक है ना? बताओ हम पक्षी को क्या बोलते
- 38:38हैं? पक्षी को क्या बोलते हैं? बताइए।
- 38:42पक्षी को हम खग बोलते हैं। इसके और
- 38:44पर्यायवाची बताना मैम। इसे हम खेचर
- 38:47बोलेंगे। खेचर बोलेंगे। नवभचर बोलेंगे।
- 38:52नवभचर बोलेंगे। ये दो बार जन्म लेता है।
- 38:55एक बार अपनी मां के उदर से एक बार अंडे से
- 38:58तो अंडज भी बोल सकते हैं मैम। हां कह सकते
- 39:01हैं। पखेरू बोल सकते हैं मैम। पखेरू बोल
- 39:05सकते हैं मैम। बताइए पंछी बोल सकते हैं
- 39:09हम। बताओ बिल्कुल बोल सकते हैं। पंछी बोल
- 39:12सकते हैं। बिल्कुल बोल सकते हैं। शंकुत
- 39:15बोल सकते हैं। बताओ शंकुत बोल सकते हैं।
- 39:18बिल्कुल बोल सकते हैं। आगे बढ़े?
- 39:21हां जी। ये सब तो बोल ही सकते हैं ना।
- 39:24हां। और क्या हो जाएगा? गगनचर कह दो।
- 39:28गगनचर कह दो। गगनचर कह दो। ये सब हम किसे
- 39:32कहते हैं? पक्षी को कहते हैं। देखिएगा
- 39:35तिरियाचरित मुहावरे का सही अर्थ क्या होता
- 39:38है? यह बता दो जरा। तिरियाचरित
- 39:42मुहावरे का अर्थ क्या होता है? मृग हिरण
- 39:45को भी बोल देते हैं। बेटा मृग सभी पशुओं
- 39:48को भी बोल देते हैं। जब हम बोलते हैं किसे
- 39:52मृगेंद्र जब हम बोलते हैं मृगेंद्र किसे
- 39:55सिंह को तो वहां यह मृग किसका बोध कराता
- 39:59है? सभी पशुओं का बोध कराता है। मृग हम
- 40:02किसे कहते हैं? मृग हम हिरण को भी कह देते
- 40:05हैं। मैं एक बार नहीं बहुत बार लिखवा चुकी
- 40:07हूं। ये आपको पता होना चाहिए। ठीक है?
- 40:09महिलाओं का स्वभाव नहीं। नखरे या छल कपट
- 40:14करना। मुख्यत यह छल कपट के लिए प्रयुक्त
- 40:17होता है। जिस व्यक्ति के स्वभाव में छल
- 40:19कपट आदि ज्यादा होता है, तो वह क्या
- 40:22कहलाता है? तिरियाचरित कहलाता है। आगे
- 40:25बढ़ते हैं। जिसकी आशा ना की गई हो
- 40:27वाक्यांश के लिए एक शब्द जिसकी आशा ना की
- 40:30गई हो। अचानक किसे कहते हैं? आकस्मिक।
- 40:35आकस्मिक है ना? एकदम
- 40:39एकदम कुछ हो जाना।
- 40:41एकदम कुछ हो रहा है। है ना?
- 40:44बताओ अप्रत्याशित क्या है? जिसकी आशा ना
- 40:48की गई हो। आशातीत का अर्थ है आशा से अधिक।
- 40:53आशा से अधिक
- 40:59निराशा मतलब आशा ना रहने का भाव। आशा ना
- 41:04रहने का भाव। आशा ना रहना। ठीक है ना?
- 41:10बताइए। आगे बढ़ते हैं। श्रोता शब्द का सही
- 41:13विलोम शब्द क्या होगा? श्रोता हम बोलते
- 41:15हैं सुनने वाले को। तो हम क्या कह देंगे?
- 41:18वक्ता हो जाएगा। बोलने वाला। भैया जब कोई
- 41:21सुनने वाला होता है, कोई बोलने वाला भी
- 41:23होता है। अगले दो क्वेश्चन आपको मैं
- 41:25होमवर्क में देती हूं। ईमानदारी में कौन
- 41:27सी संज्ञा है और
- 41:31स्वागत में कौन सा उपसर्ग लगा है? यह आप
- 41:35मुझे बताइएगा। मेरी छोटी सी एक मीटिंग है।
- 41:37अगली मेरी क्लास भी है इसलिए मैं थोड़ा सा
- 41:39दो 5 मिनट पहले ही छोड़ रही हूं। थैंक यू।
- 41:41थैंक यू सो मच। हैव अ गुड डे। बाय-ब।
- 41:43धन्यवाद।
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