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ALLAH Se Baat To Kar | Beautiful Spiritual Quotes | Listen the Islam Q.K — Transcript

by Listen the Islam Q.K · 5,468 words · 729 segments · language hi · Watch on YouTube

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  1. 0:13खुदा हम पर रहम फरमा कि हम हालत परेशानी
  2. 0:17में हैं हम खता का और गुनाहगार हैं और इस
  3. 0:21हाल में दीवाना बर फिर रहे
  4. 0:23हैं जिस शख्स की हिफाजत खुद खुदा करता है
  5. 0:28मुर्ग और मछली भी उसकी करने लग जाते
  6. 0:31हैं नादान की बातों का बेहतरीन जवाब
  7. 0:35खामोशी है इंसान का जाहिरी जिस्म मच्छर से
  8. 0:39आजिज आ जाता है लेकिन उसकी रूह सातो
  9. 0:42आसमानों को घेर लेती
  10. 0:44है सच्ची शुरुआत हमेशा सच्चे अंजाम पर
  11. 0:47खत्म होती है और झूठी शुरुआत हमेशा झूठे
  12. 0:51अंजाम
  13. 0:52पर लालच ऐसी प्यास है जिसे समंदर का पानी
  14. 0:57भी नहीं बुझा
  15. 0:58सकता जिस पर अल्लाह राजी है वह लोगों के
  16. 1:02साथ नेकी शुरू कर देता
  17. 1:04है चिराग बुझने से इंकार कर दे तो आंधी भी
  18. 1:09पस पा हो जाती
  19. 1:10है जिंदगी में हर चीज मिलती है बस जिंदगी
  20. 1:14देने वाले रब पर यकीन
  21. 1:16करो जिस्म का हर हिस्सा अल्लाह ताला से
  22. 1:20जबान की तेजी की शिकायत करता
  23. 1:23है आंसू का वजन तो नहीं होता फिर भी उसके
  24. 1:28गिर जाने से दिल हल्का हो जाता
  25. 1:31है कामयाबी का हर सफर एक अच्छी सोच से
  26. 1:35शुरू होता
  27. 1:37है दुनिया का माल तो छोड़ना ही पड़ेगा
  28. 1:40समझदार वह है जो आखिरत का माल जमा
  29. 1:44करें मांगने वाले को देकर एहसान ना जता
  30. 1:48बल्कि एहसान मानो कि उसने कबूल कर
  31. 1:51लिया तुम्हारा रब जिस चीज को तुम्हारे
  32. 1:54करीब कर दे उसमें हिकमत तलाश करो और जिस
  33. 1:58चीज को तुमसे दूर कर दे
  34. 2:00उस पर सब्र इख्तियार
  35. 2:02करो जिस दिल में दीन जिंदा हो वह दिल कभी
  36. 2:06मायूस नहीं
  37. 2:08होता भरोसा करना है तो अल्लाह पर करो सही
  38. 2:12इंसान और सही वक्त वही
  39. 2:15दिखाएगा अल्लाह से नेमतें मांगने वाले यह
  40. 2:18भी ख्याल रखें कि कायनात की सबसे बड़ी
  41. 2:21नेमत अल्लाह का कुर्ब
  42. 2:23है लोग जितना भी दिल दुखाए यह याद रखा
  43. 2:27करें कि जब अल्लाह के बंदे हमें तोड़ते
  44. 2:30हैं तो उनका तोड़ना हमें अल्लाह से जोड़
  45. 2:33देता
  46. 2:34है वह रूह कभी नहीं मुर जाती जिसकी प्यास
  47. 2:38कुराने पाक की तिलावत से बुझती
  48. 2:41हो तुम किसी का कुछ मत बिगाड़ अल्लाह
  49. 2:44तुम्हारा कुछ बिगड़ने नहीं
  50. 2:47देगा जब मामला अल्लाह के सुपुर्द कर दो तो
  51. 2:50अल्लाह और उस मामले के दरमियान से निकल
  52. 2:53जाया
  53. 2:54करो परेशान होने वालों को कभी ना कभी
  54. 2:57सुकून मिल ही जाता है लेकिन न करने वाले
  55. 3:00हमेशा सुकून की तलाश में रहते
  56. 3:03हैं धोखा खाने वाले का पेट तो भर ही जाता
  57. 3:06है लेकिन धोखा देने वाले की भूख कभी खत्म
  58. 3:10नहीं
  59. 3:11होती जबान का ज्यादा चलना अकल के कम होने
  60. 3:15की निशानी
  61. 3:16है एक समझदार आदमी सब कुछ नहीं जानता
  62. 3:21सिर्फ बेवकूफ हर बात जानता
  63. 3:23है जो कील उभरी हुई होती है हथौड़ा उसका
  64. 3:27मुकद्दर होता है हुक्म तो नफ्स मारने का
  65. 3:31था लेकिन हम सबके जमीर मरे हुए हैं हसद से
  66. 3:36बचो क्योंकि आसमानों में सबसे पहले इसी
  67. 3:38गुनाह से अल्लाह ताला की नाफरमानी हुई
  68. 3:42है लोग तुमसे चाहे जो भी छीन ले पर
  69. 3:46तुम्हारा मुकद्दर नहीं छीन
  70. 3:48सकते इंसान जितना भी गुनाहगार हो अल्लाह
  71. 3:52ताला उसके लिए दुआ का रास्ता और रिस्क का
  72. 3:56दरवाजा कभी बंद नहीं
  73. 3:58करता दोस्त को पत्थर समझकर ठोकर ना मारो
  74. 4:02बल्कि उसे तराश कर देखो शायद हीरे से
  75. 4:05ज्यादा अनमोल
  76. 4:06हो अगर तुमसे कोई कुछ मांगे तो हंसकर दे
  77. 4:10दिया करो और शुक्र अदा करो अल्लाह ने
  78. 4:13तुम्हें देने वाला पैदा किया है मांगने
  79. 4:16वाला
  80. 4:17नहीं सबसे बेहतर ईमान यह है कि तुम्हें इस
  81. 4:21बात का यकीन हो कि तुम जहां भी हो खुदा
  82. 4:24तुम्हारे साथ
  83. 4:26है तुम अल्लाह की तरफ रुजू करने के लिए
  84. 4:29कुरान से बढ़कर कोई और जरिया नहीं पा
  85. 4:33सकते जब तुम किसी चीज को छोड़ देते हो तो
  86. 4:36वह मुर्झा जाती हैं लेकिन जब तुम कुरान को
  87. 4:39छोड़ते हो तो तुम खुद मुर्झा जाते
  88. 4:42हो कुरान की यह खूबसूरती है तुम उसे बदल
  89. 4:46नहीं सकते लेकिन यह तुम्हें बदल सकता
  90. 4:50है जब दोस्त अल्लाह हो किताब कुरान करीम
  91. 4:54हो और रास्ता सिरात मुस्तकीम हो गुमराह
  92. 4:58होना नामुमकिन है
  93. 5:01बदबख्त है वह शख्स जिसने अपनी जिंदगी को
  94. 5:04बदलने के लिए हजारों किताबें पढ़ ली लेकिन
  95. 5:07कुरान मजीद उसकी अलमारी पर पड़ा गर्द आलू
  96. 5:10होता
  97. 5:11रहा ऐ इंसान तो कितना खुशकिस्मत है कुराने
  98. 5:15करीम में अल्लाह तुझसे बातें करता
  99. 5:18है अल्लाह की तकसीम और उसकी बातों पर राजी
  100. 5:22रहो उसका इंतिखाब और चुनाव बेहतरीन
  101. 5:26इंतिखाब है जब वह किसी को अपने लिए चुनता
  102. 5:29है
  103. 5:30तो वह बेमिसाल मिसाले कायम कर देता है
  104. 5:34कभी-कभी दुआ बहुत जल्दी कबूल हो जाती हैं
  105. 5:38लेकिन हम उस वक्त भी शुक्र अदा करने के
  106. 5:41बजाय यह बोल देते हैं कि काश कुछ और मांग
  107. 5:46लेते जिंदगी तस्वीर भी है और हकीकत भी
  108. 5:50फर्क है तो रंगों का मनचाहे रंगों से बने
  109. 5:53तो तस्वीर और अनजाने रंगों से बने तो
  110. 5:57तकदीर रिश्ता निभाना है तो दो आंखों की
  111. 6:00तरह निभाओ सात जागती हैं सात सोती हैं सात
  112. 6:05हंसती हैं और सात रोती हैं और फिर एक दिन
  113. 6:08एक साथ ही हमेशा के लिए बंद हो जाती
  114. 6:11हैं दुआ कभी रद नहीं होती बल्कि वह अल्लाह
  115. 6:15के यहां जखीरा रहती हैं और बहुत बेहतरीन
  116. 6:18वक्त पर कुबूल होती
  117. 6:20हैं अगर रास्ता खूबसूरत है तो मालूम करो
  118. 6:24कि किस मंजिल को जाता है लेकिन अगर मंजिल
  119. 6:27खूबसूरत है तो रास्ते की परवाह ना करो कुछ
  120. 6:31लोग अपने लमहे संवारने की खातिर दूसरों की
  121. 6:35जिंदगियां बर्बाद कर देते हैं जिंदगी में
  122. 6:38जब कभी हमारा खुद से सामना होता है तो पता
  123. 6:41चलता है कि हमने बेकार ख्वाहिशों की खातिर
  124. 6:45अपना दिल कितना दुखा रखा
  125. 6:47है गम छोटे आदमी को तोड़ देता है और बड़े
  126. 6:52आदमी को और बड़ा कर देता है जब अल्लाह
  127. 6:55किसी को बेहतरीन से नवाजना चाहता है तो
  128. 6:58पहले उसे बतरी गुजारता है कामयाब लोग बदतर
  129. 7:02हालात से सीखते हैं और बेहतरीन बन जाते
  130. 7:06हैं कुदरत आपकी जिंदगी में आजमाइश आपको
  131. 7:09मुश्किल में डालने के लिए नहीं आपका कद
  132. 7:12बड़ा करने के लिए भेजती
  133. 7:14है आप चाहते हैं कि लोग आपके बारे में
  134. 7:17अच्छा सोचे तो आप अच्छा बोलना शुरू कर
  135. 7:21दें संभाल कर रखी हुई चीज और गौर से सुनी
  136. 7:24हुई बात कभी ना कभी काम आ ही जाती
  137. 7:28है से बड़ा कोई दुश्मन नहीं मोहब्बत से
  138. 7:32अच्छा कोई दोस्त नहीं एहतराम से आला कोई
  139. 7:35वस्फ नहीं अखलाक से बड़ी कोई ताकत
  140. 7:39नहीं पूछा गया सब्र जमील क्या है तो जवाब
  141. 7:42आया जब तुम आजमाए जा रहे हो और तुम्हारा
  142. 7:45दिल कह रहा हो कि मेरे रब का शुक्र है शूर
  143. 7:50का पहला दर्जा खामोश रहने की आदत दूसरा
  144. 7:53दर्जा बदतमीजी का जवाब ना देना और तीसरा
  145. 7:57दर्जा बद अखलाकी का जवाब अखलाक से देना
  146. 8:01है इंसान का माजी चाहे कितने ही गुनाहों
  147. 8:04से भरा हुआ क्यों ना हो उसका मुस्तकबिल
  148. 8:07अभी बिल्कुल पाक है खुदा तौबा को बहुत
  149. 8:10पसंद करता है खामोश रहो या फिर अपने
  150. 8:14लफ्जों को इस काबिल बना लो कि वह खामोशी
  151. 8:18तोड़ने के लायक हो इंसान आखरी लमहे तक
  152. 8:21अपने आप को यकीन दिलाता रहता है कि मौत
  153. 8:24दूसरों को ही आती है मुझे शायद ना
  154. 8:28आए तालीम जरूरी तो है लेकिन तरबियत के
  155. 8:31बगैर तालीम ना मुकम्मल ही नहीं बल्कि बे
  156. 8:34मकसद हो जाती
  157. 8:36है ऐसे शख्स का एहसान कबूल ना करो जो अपने
  158. 8:40घर वालों से अच्छे से पेश ना आता हो इंसान
  159. 8:44मौत से बचने की कोशिश करता है जहन्नम से
  160. 8:47नहीं हालांकि वह जहन्नम से बच सकता है मौत
  161. 8:51से
  162. 8:52नहीं खुदा के रास्ते में कोशिश करो और कभी
  163. 8:55पीछे ना हटो क्योंकि खुदा ने तुमसे कोशिश
  164. 8:58मांगी नतीजा नहीं जिंदगी बहुत मुख्तसर है
  165. 9:04जब समझ आने लगती है तो दुनिया में रहने का
  166. 9:07वक्त बहुत कम रह जाता
  167. 9:09है लोग तुम्हारे ऐ बों के जासूस हैं गुनाह
  168. 9:13किसी ना किसी सूरत दिल को बेकरार रखता
  169. 9:16है तकलीफ और दर्द एक ऐसा तोहफा है जिसमें
  170. 9:21रहमत छुपी हुई
  171. 9:23है जिस खिदमत की तुम में काबिलियत ना हो
  172. 9:26उसे हरगिज कबूल ना करो अगर आप हर रगड़ से
  173. 9:30परेशान होते हैं तो आपका आईना कैसे साफ
  174. 9:35होगा जिसको इल्म ने गुनाहों से पाक ना रखा
  175. 9:39उससे ज्यादा जिया का भला कौन हो सकता है
  176. 9:43ठोकरें आपको मजबूत बनाती हैं हर तकलीफ
  177. 9:46आपके लिए जलती हुई मशाल
  178. 9:49है अगरचे समंदर में गहराई होती है लेकिन
  179. 9:53दिल का साहिल सबसे ज्यादा गहरा होता
  180. 9:56है समझदार लोग बहस नहीं करते क्योंकि वह
  181. 9:59जानते हैं कि सिवाय आपस में रंज और गम
  182. 10:03पैदा होने के इससे कोई फायदेमंद नतीजा
  183. 10:06नहीं
  184. 10:07निकलेगा दूसरों को नसीहत के फूल देते वक्त
  185. 10:11खुद उनकी खुशबू लेना मत
  186. 10:13भूले ज्यादा कसमें खाने वाला झूठा ज्यादा
  187. 10:17चापलूसी करने वाला मुनाफिक ज्यादा बातें
  188. 10:20करने वाला बेवकूफ
  189. 10:22है अपनी जिंदगी में हर किसी को अहमियत दो
  190. 10:26जो अच्छा होगा वह खुशी देगा और जो बुरा
  191. 10:28होगा व सबक
  192. 10:30देगा शूर रखने वाला इंसान वह है जो अपने
  193. 10:34आज को गुजरे हुए कल से बेहतर
  194. 10:37बनाए मुकाबले का पहला मैदान तुम्हारा नफ्स
  195. 10:40है इससे जंग करके आजमा लो कि तुम आजाद हो
  196. 10:44या
  197. 10:45गुलाम दुनिया का सबसे अच्छा तोहफा वक्त
  198. 10:48होता है क्योंकि आप अगर किसी को अपना वक्त
  199. 10:51देते हो तो आप उसे अपनी जिंदगी का वह पल
  200. 10:54देते हो जो कभी लौट कर नहीं
  201. 10:57आएगा अपने को अकले कुल समझने वाला शख्स
  202. 11:01हमेशा दूसरों के बारे में कोई ना कोई गलत
  203. 11:04राय देता रहता
  204. 11:06है अपने इस्तेमाल में आने वाले रिस्क को
  205. 11:10अच्छे से इस्तेमाल करना भी इबादत है
  206. 11:13जल्दबाजी अक्सर इंसान को तबाह कर देती हैं
  207. 11:17चाहे वह किसी भी तरह की हो बाइज्जत अंदाज
  208. 11:21में नाकाम हो जाना बेइज्जत होकर कामयाब
  209. 11:24होने से बेहतर है पैसे की अमीरी तो आम है
  210. 11:28दिल की अमीरी अल्लाह किसी किसी को देता है
  211. 11:32जिसके पास अल्लाह का ख्याल है वही शख्स
  212. 11:35मालामाल
  213. 11:37है हक यह है कि दिल में उसी को रखो जिसने
  214. 11:41दिल बनाया है कुछ रिश्तों के नाम नहीं
  215. 11:45होते और कुछ रिश्ते सिर्फ नाम के होते
  216. 11:49हैं मांगने वालों को दुनिया देती है और
  217. 11:52देने वालों को अल्लाह देता
  218. 11:55है नसीहत की कसरत ने नसीहत को असर कर दिया
  219. 12:00है अच्छी बात का जानना पहला मरहला है इस
  220. 12:04पर अमल करना दूसरा मरहला है अल्लाह के फजल
  221. 12:08से तीसरे मरहले पर कामयाबी आपका इंतजार
  222. 12:12करेगी दलील देकर मोहब्बत को पाया नहीं जा
  223. 12:15सकता मोहब्बत खुद सबसे बड़ी दलील है जिस
  224. 12:20जहन में सवाल उठता है जवाब भी उसी जहन में
  225. 12:24पैदा होता
  226. 12:25है नाकाम लोगों की दो निशानियां है सोचते
  227. 12:29रहते हैं अमल नहीं करते या बगैर सोचे ही
  228. 12:32अमल शुरू कर देते
  229. 12:34हैं किसी को कमजोर और हकीर ना जानो
  230. 12:37क्योंकि रास्ते का छोटा सा पत्थर भी आपको
  231. 12:41मुंह के बल गिरा सकता है अल्लाह और अल्लाह
  232. 12:45के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बात
  233. 12:48को इज्जत दो तो तुम इज्जत वाले बन
  234. 12:51जाओगे अल्लाह उसकी सुन लेता है जो उसकी
  235. 12:54तारीफ करता है इसलिए अल्लाह की तारीफें
  236. 12:58किया करो बेशक तमाम तारीफें अल्लाह के लिए
  237. 13:01हैं जिंदगी में हकीकी आजादी तुम तब महसूस
  238. 13:05करोगे जब तुम्हारी यह सोच बन जाएगी कि
  239. 13:09मैंने तो अल्लाह को राजी करना है बाकी
  240. 13:12जिसे नाराज होना है तो हो
  241. 13:15जाए हम लोग भी अजीब हैं सवाब की खातिर मरे
  242. 13:19हुए इंसान को कंधा जरूर देते हैं मगर
  243. 13:22जिंदा इंसान का सहारा बनने से कतराते
  244. 13:25हैं किसी गुनाह का आम हो जाना उसे हला ल
  245. 13:29नहीं कर देता बल्कि अजाब इलाही का खतरा
  246. 13:32मजीद बढ़ा देता
  247. 13:34है अल्लाह से बढ़कर कोई अपने बंदे का खैर
  248. 13:38खवा
  249. 13:39नहीं अल्लाह का बनाया हुआ हर शख्स मुकम्मल
  250. 13:42और खूबसूरत है खामी और कमी तो हमारे अखलाक
  251. 13:46और रवैयां में है बड़ी तपिश है यह अपने
  252. 13:50गुनाहों की शहर का मौसम खुशगवार नहीं होता
  253. 13:55दिन भर करते हैं नफरत इंसानों से और कहते
  254. 13:59राजी परवरदिगार नहीं
  255. 14:01होता मुत हो तो बदल डालो जमाने का निजाम
  256. 14:06मुंतशिर हो तो मरो शोर मचाते क्यों हो
  257. 14:10अपनी जात से मोहब्बत करने वाला आदमी कभी
  258. 14:12दूसरों से मोहब्बत नहीं कर सकता मोहब्बत
  259. 14:15करेगा भी तो अपनी जरूरत के लिए मतलब पूरा
  260. 14:19होते ही छोड़ जाएगा चाहे दूसरा कितना ही
  261. 14:22वफादार क्यों ना हो हम बड़े घर में रहते
  262. 14:26हैं या किसी झोपड़ी में इससे कोई फर्क
  263. 14:28नहीं नहीं पड़ता हकीकी जिंदगी हमारे अंदर
  264. 14:32ही होती
  265. 14:33है जखम खाकर भी मुस्कुराना और नाखुश होते
  266. 14:37हुए भी खुश रहना दरअसल यही हमारी असल ताकत
  267. 14:42है जो कुछ आपके पास है अगर आप उसे काफी
  268. 14:45समझते हैं तो आपके पास सब कुछ
  269. 14:49है अपनी निगाहे सितारों पर रखिए लेकिन
  270. 14:53ध्यान रहे आपका पैर जमीन पर होना
  271. 14:56चाहिए छोटे-छोटे कामों को को अंजाम देना
  272. 15:00बड़े-बड़े कामों की मंसूबा बंदी से कहीं
  273. 15:03ज्यादा बेहतर है अगर आप किसी और की तरह
  274. 15:07बनने की कोशिश कर रहे हैं तो आप अपने आप
  275. 15:10को जाय कर रहे
  276. 15:12हैं सबसे बड़ा जाहिल वह शख्स है जो अपनी
  277. 15:15पूरी जिंदगी में इस बात को ना जान सका कि
  278. 15:19उसका दुनिया में आने का मकसद क्या है
  279. 15:22गुनाह और सवाब सजा और जजा की भूल बुलैया
  280. 15:26में फंसकर आदमी किसी मसले पर ठंडे दिमाग
  281. 15:29से नहीं सोच
  282. 15:31सकता नफरत को हजार मौके दो कि वह मोहब्बत
  283. 15:34बन जाए लेकिन मोहब्बत को एक मौका भी ना दो
  284. 15:38कि वह नफरत बन
  285. 15:40जाए शिकवे शिकायत की लत लग जाए तो नाशक
  286. 15:44जबान की लज्जत बन जाती है और इंसान हमेशा
  287. 15:47बे सुकून रहता
  288. 15:48है अच्छाई के लिए लाजिम नहीं कि लोगों के
  289. 15:52साथ अच्छा किया जाए यह भी खैर ही है कि बस
  290. 15:56किसी के साथ कुछ बुरा ना किया जाए
  291. 15:59इंसान को किसी की नियत जानने का नहीं
  292. 16:01बल्कि अपनी नियत साफ रखने का अजर
  293. 16:04मिलेगा माफी वही दे सकता है जो अंदर से
  294. 16:07मजबूत हो खोकले इंसान सिर्फ बदले की आग
  295. 16:11में ही जलते रहते हैं किसी की खुशी से हसद
  296. 16:15करने का कोई फायदा नहीं होता सबको वही
  297. 16:18मिलता है जो अल्लाह ने उनके नसीब में लिख
  298. 16:21दिया
  299. 16:21हो जब जबान की इस्लाह हो जाए तो दिल नेक
  300. 16:26हो जाता
  301. 16:27है अगर तुम्हारे रि में से दूसरों की
  302. 16:30जरूरियत पूरी हो रही हैं तो तुम खुश
  303. 16:33किस्मत हो कि तुम्हारा रब तुम्हारा रिस्क
  304. 16:35पाक कर रहा
  305. 16:37है कोशिश करें कि जिंदगी का हर लम्हा अपनी
  306. 16:40तरफ से सबके साथ अच्छे से अच्छा गुजरे
  307. 16:44क्योंकि जिंदगी नहीं रहती लेकिन अच्छी
  308. 16:47यादें हमेशा जिंदा रहती
  309. 16:49हैं जब इंसान खुद गर्ज हो जाए तो वह
  310. 16:52दूसरों से रास्ता छीनकर उसे अपने लिए आखरी
  311. 16:56रास्ता बना लेता
  312. 16:57है गुलाब का कोई भी नाम रख लो मगर पहचान
  313. 17:01खुशबू से होती है इंसान किसी भी रंग रूप
  314. 17:05या जात का हो मगर पहचान अखलाक से ही होती
  315. 17:09है मैंने कहा मेरी आंखें उसने कहा अपना
  316. 17:13रास्ता पहचान मैंने कहा मेरा जिगर उसने
  317. 17:17कहा चीर फेंक मैंने कहा मेरा दिल उसने
  318. 17:22पूछा तेरे दिल में क्या है मैंने कहा तेरा
  319. 17:25दर्द उसने कहा फिर उसकी हिफाजत कर
  320. 17:30कोई भूल जाए तो परेशान मत हुआ करो लोग तो
  321. 17:33अपने हाथों से दफनाए हुए लोगों की कब भूल
  322. 17:36जाते
  323. 17:37हैं मंजिल पर जो पहुंचा हूं तो मालूम हुआ
  324. 17:40है खुद अपने लिए राह की दीवार भी मैं था
  325. 17:45आज फिर दिल ने एक तमन्ना की आज फिर दिल को
  326. 17:48हमने
  327. 17:50समझाया अपने चेहरे से जो जाहिर है छिपाए
  328. 17:53कैसे तेरी मर्जी के मुताबिक नजर आए
  329. 17:57कैसे छोटे गम वावेला करते हैं बड़े गम
  330. 18:01इंसान को चुप लगा देते
  331. 18:03हैं शायद वफा के खेल से उकता गया था वह
  332. 18:07मंजिल के पास आकर जो रास्ता बदल
  333. 18:10गया वक्त गुजरने के साथ हमारे लिए हर
  334. 18:13कहानी का मफू बदल जाता है या ऐसा है कि हम
  335. 18:17पढ़ने वाले खुद बदल जाते हैं हर गुरूब के
  336. 18:21लिए एक नया तुलू मुकद्दर है बशर्ते यह कि
  337. 18:24हम इंसान अपनी शाम को वापस सुबह में
  338. 18:27तब्दील करने का हौसला रखते हो हर दिल जो
  339. 18:31तकलीफ सहता है वह अपने कमाल को पहुंचता है
  340. 18:36जब इंसान को अपनी तलाश के सफर पर निकलना
  341. 18:38पड़े तो उसे तन्हा ही जाना
  342. 18:42चाहिए वफादारी से बढ़कर किसी चीज की
  343. 18:45अहमियत नहीं होती जो रास्ता इंसान छोड़
  344. 18:48देता है तो फिर अल्लाह ताला उसको उस
  345. 18:51रास्ते की वजह से रुसवा नहीं
  346. 18:54करता यह दुनिया बहादुर और दिलेर लोगों के
  347. 18:57लिए है जो आगे बढ़े और इसको अपनी
  348. 19:15मुसब्बर करते हुए इस बात का ख्याल रखना कि
  349. 19:19जिससे मोहब्बत की जाती है फिर उसकी पैरवी
  350. 19:23करना पड़ती है आंसू खालिक और मखलूक के
  351. 19:27दरमियान कोई पर्दा नहीं रहने
  352. 19:30देते जो दिल के साथ चलते हैं उनको कायनात
  353. 19:34में हर कोई दिलबर ही नजर आता
  354. 19:37है इश्क की मस्ती एक ऐसी मस्ती है कि
  355. 19:40जिसके जरिए अल्लाह ताला के दोस्तों ने
  356. 19:43अपनी हस्ती को पा लिया और दुनिया में
  357. 19:46गूंगे और अंधे बन
  358. 19:48गए नुत को खूबसूरत इंसान बना देना अल्लाह
  359. 19:51ताला की कुदरत का एजाज है पानी की बूंद पर
  360. 19:55ऐसे नक्श निगार कोई नहीं बना सकता माशे के
  361. 19:59बदतर लोग वह हैं जो कमजोर की गलती पर तो
  362. 20:03शोर मचाते हैं पर ताकतवर की गलती पर मुजरी
  363. 20:06माना खामोशी इख्तियार कर लेते
  364. 20:09हैं जिंदगी का हर इम्तिहान इंसान जहान और
  365. 20:13मेहनत से पास नहीं कर सकता बाज इम्तिहान
  366. 20:16के लिए किस्मत के अलावा और कोई चीज दरकार
  367. 20:19नहीं
  368. 20:20होती किताब सादा रहेगी कब तक कभी तो आगाज
  369. 20:24बाब होगा जिन्होंने बस्ती उजाड़ डाली कभी
  370. 20:28तो उनका भी हिसाब होगा चुप रहना सीखें
  371. 20:32ताकि फरिश्तों की सरगोशियां सुन सके अपनी
  372. 20:36इबादत में ताकत और कुवत पैदा करें जिस दिल
  373. 20:39में अल्लाह के बंदों की मोहब्बत ना हो वह
  374. 20:41अल्लाह की मोहब्बत से भी महरूम हो जाते
  375. 20:44हैं इसलिए कहा जाता है कि लोगों को हकीर
  376. 20:47ना समझे वरना खालिक की नजरों में हकीर हो
  377. 20:50जाओगे जो लोगों को छोड़कर अल्लाह से करीब
  378. 20:53होना चाहता है वह अल्लाह की कुर्बत से
  379. 20:56महरूम हो जाता है जब फराइज से बढ़कर कोई
  380. 21:00अमल किया जाता है तो यह बहुत पसंदीदा और
  381. 21:04पाकीजा अमल है फूलों की सोहबत से खुशबू
  382. 21:08पैदा होती है और बुजुर्गों की सोहबत से
  383. 21:12बुजुर्ग जब दिल अल्लाह से लग जाए तो दिल
  384. 21:16और दिमाग दोनों सुकून में रहते
  385. 21:19हैं वह एक उंगली जो मुश्किल वक्त में आपके
  386. 21:22आंसू पचती है उन 10 उंगलियों से बेहतर है
  387. 21:26जो आपकी कामयाब हों पर तालियां बजाती
  388. 21:30बाकरा मत है बहुत रात के पिछले लमहे आंसू
  389. 21:34गिरने की भी आवाज सुनी जाती
  390. 21:37है जब खुदा किसी को अपने करीब करना चाहता
  391. 21:40हो तो व उससे उसकी मनपसंद चीज छीन लेता
  392. 21:44है सब्र करने से सब्र आ जाने तक का सफर
  393. 21:49निहायत तकलीफ दे होता है और तुम ताम में
  394. 21:53अल्लाह के सिवा किसी को अपना नहीं
  395. 21:56पाओगे वह उसी को मयस्सर
  396. 21:58है जो उसे पाना चाहता
  397. 22:01है खुदा उन लोगों से हमें महफूज रखे जो
  398. 22:05दिल में दिमाग रखते
  399. 22:07हैं अल्लाह के सिवा कोई भी दिल से खौफ और
  400. 22:11बेचैनी को नहीं मिटा
  401. 22:13सकता जिनके दिल में नतीजे का खौफ हो वह
  402. 22:16किसी के साथ बुरा करने से पहले कई बार
  403. 22:19सोचते हैं और यही डर फिर उन्हें उस बुराई
  404. 22:22से रोक लेता है जिंदगी के इस सफर में सब्र
  405. 22:26इंसान का बेहतरीन साथी है लेकिन जिंदगी
  406. 22:29में कुछ ना करना और हाथ पर हाथ रख के बैठ
  407. 22:32जाना सब्र नहीं बल्कि बुजदिली है और
  408. 22:36अल्लाह पर तवक की कमी है अल्लाह की याद के
  409. 22:40बगैर जिंदगी अधूरी है इंसान सब कुछ पाकर
  410. 22:43भी अधूरा ही रहता है और जब अल्लाह की याद
  411. 22:47साथ हो तो मुश्किल से मुश्किल घाटियों से
  412. 22:49भी इंसान बा आसानी सब्र के घूंट पीकर गुजर
  413. 22:53जाता
  414. 22:54है कुरान की यह तासीर है कि आप जब भी ईमान
  415. 22:59और अच्छी नियत के साथ पढ़े तो वह आपको कुछ
  416. 23:02ना कुछ फायदा जरूर देगा और अगर समझकर
  417. 23:05पढ़ोगे तो कुछ ही आयात में तुम्हें अपने
  418. 23:08कई सवालों के हल मिल
  419. 23:11जाएंगे इंसान के पास कई सलाहियत होती हैं
  420. 23:14जो छिपी हुई होती हैं जिनका इंसान को खुद
  421. 23:18भी पता नहीं होता लेकिन अगर इंसान अल्लाह
  422. 23:21का नाम लेकर आगे बढ़ने की सोच ले तो उसकी
  423. 23:24कई सलाहियत उजागर होना शुरू हो जाती हैं
  424. 23:28इसलिए हिम्मत करो तुम बड़े मैदान फतह कर
  425. 23:31सकते
  426. 23:32हो इंसान के लिए जरूरी है कि वह कुछ बने
  427. 23:36और कुछ बेहतर इस दुनिया में करके जाएं और
  428. 23:39इस सब कुछ के लिए उसे कुछ बुनियादी उसूल
  429. 23:42बनाने पड़ेंगे और फिर एक मुसलसल मेहनत की
  430. 23:45जरूरत
  431. 23:47है अपने बच्चों को अभी से नेक लोगों की
  432. 23:50कहानियां सुनाओ ताकि वह भी बड़े होकर कुछ
  433. 23:54नेक करने की सोचे दुनिया वालों की
  434. 23:57कहानियां सुने तो व ज्यादातर अपने नफ्स को
  435. 24:00खुश करने का ही सोचेंगे इससे आगे कुछ नहीं
  436. 24:04जब खुद के लिए जीकर बोर हो जाओ और उकता
  437. 24:08जाओ तो दूसरों के लिए जीना शुरू कर
  438. 24:11देना जब इंसान अल्लाह की रस्सी यानी दन को
  439. 24:15छोड़ देता है तो वह बे मंजिल हो जाता है
  440. 24:18और जो आदमी बे मंजिल हो उसे खुशी में भी
  441. 24:22एक किस्म की बेचैनी लगी रहती
  442. 24:24है मोहब्बत क्या तकाजा करती है मोहब्बत का
  443. 24:29तकाजा यह है कि जहां से मना किया गया वहां
  444. 24:31मना हो जाओ और जहां चलने का हुकम दिया गया
  445. 24:35है वहां चल
  446. 24:37पड़ो अगर आप छोटों पर शफकत नहीं करते तो
  447. 24:41फिर उनसे एहतराम की उम्मीद भी मत
  448. 24:44रखें मालिक की रिजा की तरफ हर वक्त
  449. 24:54[संगीत]
  450. 24:57मुतजेंस हकीकत में अपने आप पर ही जुल्म
  451. 25:01है जब आखिरत से ताल्लुक टूटता है तो बंदा
  452. 25:06दुनिया के गिर्द ही घूमता रहता है तस्क
  453. 25:10नफ्स अंदर की
  454. 25:13पाकीजा काम है जो इसमें मशगूल हो गया वह
  455. 25:18कामयाब हो
  456. 25:19गया यह नहीं कि वह कामयाब हो
  457. 25:22जाएगा बल्कि वह कामयाब हो
  458. 25:26गया गुनाह गिने नहीं जा
  459. 25:29सकते जो गुनाह आपने समझकर किए वह तो आप
  460. 25:33गिन लेंगे बाज औकात हम अपनी तरफ से नेकी
  461. 25:37कर रहे होते हैं और उसमें गुनाह होता है
  462. 25:42बाज औकात हम परवाह ही नहीं करते एक बात कह
  463. 25:46देते हैं काम कर जाते हैं और वह बड़ा
  464. 25:50गुनाह बन जाता है तो जाने अनजाने में सब
  465. 25:55गुनाहों से माफी मांगनी चाहिए आज हर किसी
  466. 25:59का दिल परेशान
  467. 26:01है इसलिए कि उसमें बंदे के अपने किरदार के
  468. 26:06नफरतों के काटे हैं जो चुप रहे हैं अल्लाह
  469. 26:11के जिक्र से दिल को पाक
  470. 26:14रखो इसमें सिर्फ अल्लाह हो तो यह सुकून पा
  471. 26:20जाएगा इस दुनिया की तकलीफ से इस दुनिया की
  472. 26:23तंगी से राहत हासिल करनी है तो अल्लाह को
  473. 26:27याद करो इन व बाई अमराज मुल्की हालात की
  474. 26:33पेची गियों और इन नजाकत और इन तकाली में
  475. 26:37इसमें अगर राहत चाहिए सुख और सुकून चाहिए
  476. 26:42तो अल्लाह को याद
  477. 26:44करो कोशिश करो शब और रोज अल्लाह की याद
  478. 26:48में बसर हो दीन का काम करते रहो दीन की
  479. 26:53बात करते रहो दीन की बात सुनते रहो दुनिया
  480. 26:58के काम भी जब शरीयत के मुताबिक किए जाएं
  481. 27:02तो वह भी दीन बन जाते
  482. 27:04हैं जुल्म का बदला जुल्म से दिया जाए तो
  483. 27:08जुल्म चलता रहता है इसलिए जुल्म का बदला
  484. 27:12इंसाफ करना है और इंसाफ बतौर सजा नहीं
  485. 27:17होता इंसाफ जिंदगी की हिफाजत के लिए जरूरी
  486. 27:21है जहां से इंसाफ उठ जाता है वहां
  487. 27:25दहशतगर्दी होती
  488. 27:27है हमें अल्लाह से यह शिकायत तो है कि हम
  489. 27:31मुसलमान हैं और हम पर काफिरों को चढ़ा रखा
  490. 27:34है और अल्लाह हमारी मदद नहीं
  491. 27:38करता लेकिन हम यह नहीं देखते कि हमारा
  492. 27:42किरदार कितना गलत है और नतीजा तो अमल पर
  493. 27:46और किरदार पर मुरत
  494. 27:49होगा हर गुनाह हया को खत्म करता है और
  495. 27:53बेहयाई को जन्म देता
  496. 27:55है शैतान अल्लाह के गजब से डरता है जबकि
  497. 28:01मोमिन मोहब्बत इलाही में डरता
  498. 28:05है दीन अल्लाह का दुनिया अल्लाह की हम
  499. 28:10अल्लाह के हर कोई अल्लाह का हर चीज अल्लाह
  500. 28:15की फिर अल्लाह की गैरत को दीन की बेकद्र
  501. 28:20कैसे गवारा हो सकती है ईमान इसे कभी कबूल
  502. 28:24नहीं कर सकता अल्लाह का दीन अल्लाह की
  503. 28:28दुनिया में बुलंद ना हो जबकि दीन का मालिक
  504. 28:32भी अल्लाह और दुनिया का मालिक भी
  505. 28:36अल्लाह क्या तुम्हें मरना याद नहीं और यह
  506. 28:40याद नहीं कि दुनिया आखिरत की खेती और चंद
  507. 28:43रोजा
  508. 28:44है सारा दिन कारोबार के ही पीछे पड़े रहते
  509. 28:48हो कारोबार अपने अपने घरों में किया करो
  510. 28:53और अल्लाह के जिक्र की मजलिस में अल्लाह
  511. 28:55का जिक्र किया करो कुराने करीम तमाम
  512. 28:59इंसानियत के लिए नाजिल फरमाया गया है अब
  513. 29:03यह फैसला इंसान ने करना है कि शुक्र की
  514. 29:06राह इख्तियार करता है या ना शुक्र की बंदा
  515. 29:12मोमिन को अपने हर आने वाले लमहे को अल्लाह
  516. 29:16के सुपुर्द करना चाहिए क्योंकि जब भी कोई
  517. 29:19मुसीबत दुख या तकलीफ आती है तो हम अगर उसे
  518. 29:24अल्लाह की रिजा की सूरत में लेंगे तो दिली
  519. 29:27तौर पर मुतमइन रहेंगे और अगर हम हर तकलीफ
  520. 29:31और परेशानी को जाती हैसियत में लेंगे तो
  521. 29:35फिर हर लमहे हर दिन हमारा दिल
  522. 29:39टूटेगा जो अल्लाह की बारगाह में सजदा रेज
  523. 29:43नहीं हो सकता वह क्या किसी की भलाई का सबब
  524. 29:47बन सकता है तीन बातों का हमेशा ख्याल
  525. 29:51रखो हर हाल में अल्लाह की तरफ
  526. 29:57मुतजेंस एहतमाम करो और ना अहलो की सोहबत
  527. 30:01से परहेज
  528. 30:03करो जब इंसान का दिल साफ होता है तो सबसे
  529. 30:08पहले उसका ईमान मजबूत हो जाता है और जब
  530. 30:12ईमान मजबूत होता है तो यकीन की
  531. 30:18पुख्तून
  532. 30:19कामिल उसे अल्लाह की नाफरमानी नहीं होने
  533. 30:23देता इस दुनिया में सबसे बड़ी मुसीबत
  534. 30:27गुनाह में इत मिलना और उसे सही समझना
  535. 30:31है कौम को रहनुमाओं की नहीं काम करने
  536. 30:35वालों की जरूरत है रहनुमा तो हमारे लिए
  537. 30:38मोहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि
  538. 30:41वसल्लम काफी है हमारे रहनुमा तो मोहम्मद
  539. 30:46रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
  540. 30:49है हमारे रहनुमा तो सहाबा इराम रजि अल्लाह
  541. 30:53अन अजमाइन है जिनसे हमें कुरान और हदीस
  542. 30:58और हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की एक
  543. 31:02एक अदा
  544. 31:03पहुंची मुसलमानी यह है कि सारे के सारे
  545. 31:06इस्लाम के अंदर दाखिल हो जाओ इस्लाम के
  546. 31:10बाहर जो कदम भी होगा वह शैतान के नक्शे
  547. 31:14कदम पर होगा आमाल का मौका मिलना सवाब है
  548. 31:20अगर नमाज बुराई से रोक रही है और मजीद
  549. 31:24अल्लाह की पैरवी पर मजबूर कर रही है तो
  550. 31:28नमाज का सवाब मिल रहा है ये नहीं हो रहा
  551. 31:31तो सवाब कोई पहाड़ नहीं जो जमा हो रहे हैं
  552. 31:35और सिर्फ आखिरत में मिलेंगे ऐसा नहीं है
  553. 31:39इबादत कभी आदत नहीं बनती हर मौके के लिए
  554. 31:43उठना पड़ता है सारी जिंदगी का नमाजी भी
  555. 31:48इसे आदत नहीं बना पाता बल्कि कोशिश करनी
  556. 31:52पड़ती है वजू करना पड़ता है नमाज के लिए
  557. 31:56उठना पड़ता है
  558. 31:58जब हक और बातिल का पहला
  559. 32:01मारका मकाम बद्र पर बरपा हुआ बेसर सामान
  560. 32:06और असबाब के ना होते हुए भी अल्लाह ने फतह
  561. 32:10अता
  562. 32:12फरमाई इस गवे से जो सबसे बड़ा सबक हमें
  563. 32:15मिलता है वह यह है कि अपने तमाम असबाब
  564. 32:19इस्तेमाल करने के बाद अल्लाह से दुआ करनी
  565. 32:23चाहिए क्योंकि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
  566. 32:26ने तमाम असबाब इख्तियार करने के बाद मकाम
  567. 32:32बद्र पर मदद की दुआ
  568. 32:34की खुद को जाती ख्वाहिश और मफा दत से ऊपर
  569. 32:40उठाकर अल्लाह करीम की बारगाह में पनाह लो
  570. 32:44मुकम्मल अल्लाह की तात इख्तियार कर लो फिर
  571. 32:48जब दुआ के लिए हाथ उठाओगे तो वह हाथ खाली
  572. 32:52वापस नहीं
  573. 32:54आएंगे अल्लाह से हर हाल में बख्श तलब करनी
  574. 32:58चाहिए क्योंकि रोज हश्र अगर अल्लाह ने
  575. 33:01हिसाब मांग लिया तो फिर हम में से कोई भी
  576. 33:04इस पर पूरा नहीं उतर
  577. 33:06सकेगा हमारी बख्श सिर्फ इसी सूरत में
  578. 33:10मुमकिन है कि अल्लाह अपना करम फरमा
  579. 33:14दे अकीदत दिल का भरोसा है जिसका तकाजा अदब
  580. 33:19है और अदब इता को चाहता है जब तक इस हयाते
  581. 33:25मुस्ता का एक लम्हा भी सर है इसे हयाते
  582. 33:30जाविद में बदलने की गुंजाइश भी मौजूद है
  583. 33:35जिस दिल में हक की तलब नहीं होती वहां
  584. 33:38सिर्फ दुनिया ही रह जाती
  585. 33:40है ईमान मजबूत हो तो हालात जैसे भी हो
  586. 33:45जाएं बंदा मोमिन साबित कदम रहता
  587. 33:50है रोज महशर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
  588. 33:53की शिफा के लिए दुनिया की जिंदगी में आप
  589. 33:58सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की इतबा लाजिम
  590. 34:02है जिस शख्स को उस्ताद की जात से मोहब्बत
  591. 34:05ना हो उसे या तो बरकात नसीब नहीं होती या
  592. 34:10होती है तो वक्ती तौर पर और लमहा की बात
  593. 34:14होती है बाद में वह यह कैफियत खो बैठता
  594. 34:18है दुनिया के किसी गोशे में बैठा हुआ भी
  595. 34:22जब मुसलसल दरूद पढ़ता चला जाता है तो उसे
  596. 34:26हिफाजत नसीब हो जा जाती है इत्मीनान एक
  597. 34:30कैफियत का नाम है और दिल में करार अल्लाह
  598. 34:35के जिक्र से आता
  599. 34:36है जीने की जो लज्जत है जीने का जो मजा है
  600. 34:42वह तब है कि जिक्र इलाही नसीब हो
  601. 34:45जाए अल्लाह के जिक्र की कसरत और अल्लाह के
  602. 34:49दोस्तों की सोहबत से इंसान के दिल में
  603. 34:53अल्लाह की मोहब्बत पैदा हो जाती है और वह
  604. 34:56कभी बद होकर नहीं
  605. 34:59मरता हर चीज की सफाई होती है और दिलों की
  606. 35:03सफाई अल्लाह का जिक्र है दिल को चमकाओ उसे
  607. 35:08साफ
  608. 35:09करो
  609. 35:17[संगीत]
  610. 35:26रोशनिसेक्स
  611. 35:29अल्लाह के दोस्तों की सोहबत में जाना
  612. 35:32चाहिए लेकिन अल्लाह की पहचान हासिल करने
  613. 35:35के लिए और अल्लाह की मारफ हासिल करने के
  614. 35:39लिए वरना औलाद और रिजक तो अल्लाह जानवरों
  615. 35:43को भी दे रहा
  616. 35:45है दुनिया की मिसाल ऐसी है कि यहां
  617. 35:48पत्थरों पर सोना पड़ता है आदमी समझता है
  618. 35:53यह काम हो जाए तो मेरी मुश्किलें हल हो
  619. 35:56जाएंगी उससे बड़ी मुश्किल और सामने खड़ी
  620. 35:59हो जाती है दुनिया का निजाम ऐसा है लेकिन
  621. 36:04हर मुश्किल के हल की उम्मीद अल्लाह से
  622. 36:06वाबस्ता करें जो हर आन हर लम्हा हर जगह
  623. 36:10मौजूद है और यही दुनिया में आजमाइश
  624. 36:15है जब कुछ लोग बैठकर अल्लाह का जिक्र करते
  625. 36:18हैं तो फरिश्ते उन्हें घेर लेते हैं रहमत
  626. 36:23उन्हें ढप लेती है उन पर सुकून नाजिल होता
  627. 36:26है और अल्लाह अपने यहां फरिश्तों के पास
  628. 36:31उनका जिक्र फरमाता
  629. 36:33है अगर कोई गुनाह को गुनाह समझकर करें तो
  630. 36:37मुमकिन है कि उसे तौबा नसीब हो जाए और अगर
  631. 36:42कोई गुनाह को सवाब समझकर करता रहेगा इबादत
  632. 36:47समझकर करता रहेगा तो उसे तौबा की तौफीक भी
  633. 36:51सलब हो जाती
  634. 36:53है जो कसरत से जिक्र करते हैं व आखरत की
  635. 36:57लज्जत से आशना हो जाते
  636. 37:00हैं दिल में ईमान की कैफियत मौजूद हो तो
  637. 37:05जिंदगी में भी आसा नियां पैदा होती
  638. 37:08हैं और अल्लाह की रहमत शामिल हाल हो जाती
  639. 37:12है फिर यही शब और रोज उसे राहत
  640. 37:15देंगे हमें अपने दिल में अल्लाह की याद का
  641. 37:18चिराग जलाने की बहुत जरूरत है किरदार की
  642. 37:23बुनियाद रिजक हलाल
  643. 37:25है अल्लाह अल्लाह का नसीब होना जहां जाते
  644. 37:30बारी ताला से आशनाई का सबब बनता है वहां
  645. 37:35बहुत बड़ा सबब है अपनी हैसियत को जानने का
  646. 37:40नतीजे कौल पर नहीं अमल पर मुरत होते हैं
  647. 37:45अल्लाह की याद शैतान के
  648. 37:50ववसरी तकसीम पर राजी हो जाओ सब कुछ मिल
  649. 37:55जाएगा जिंदगी तो जिंदगी
  650. 37:58मौत भी खूबसूरत हो
  651. 38:01जाएगी अल्लाह को काफिर भी मानते थे लेकिन
  652. 38:05मानते अपनी मर्जी से थे ईमान यह है कि
  653. 38:08अल्लाह को वैसा माना जाए जैसा अल्लाह और
  654. 38:13उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
  655. 38:17मनवाए मरना होता है फना हो जाना मिट जाना
  656. 38:22और जिंदगी होती है नेक अमल को पीछे छोड़
  657. 38:26जाना
  658. 38:28जहां से उठ जाए वहां कोई ऐसा असर छोड़ जाए
  659. 38:31जिसे मिटाना जमाने के लिए आसान ना हो ऐसे
  660. 38:36लोग मरा नहीं करते इसी को जिंदगी कहते हैं
  661. 38:41होता वही है जो अल्लाह चाहता है इत्तेफाक
  662. 38:45से कुछ नहीं होता कायनात का निजाम बाकायदा
  663. 38:48एक निजाम के तहत चल रहा है कोई किसी का
  664. 38:52बुरा नहीं कर सकता सिर्फ बुराई का इरादा
  665. 38:56कर सकता है
  666. 38:58इसी तरह कोई किसी से भलाई नहीं कर सकता
  667. 39:01सिर्फ भलाई का इरादा कर सकता है इसी फैसले
  668. 39:05पर उसकी आजमाइश
  669. 39:07है अल्लाह की अजमत का इदराक पेशा नियों को
  670. 39:12सजदों के निशानों से सजा देता
  671. 39:15है यह उजर पेश करना कि जमाने का बहाव हमें
  672. 39:19अपने साथ बहा ले गया उस मखलूक को जेब नहीं
  673. 39:23देता जिसे दुनिया का नक्शा बदल देने की
  674. 39:26कुदरत देकर पैदा किया गया
  675. 39:30हो जरायम करते रहना अल्लाह और अल्लाह के
  676. 39:35रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हुक्म की
  677. 39:38खिलाफ वर्जी करते रहना फिर मग्र के आंसू
  678. 39:42बहाकर दुआएं करना गुस्ताखी
  679. 39:46है जिस मुशे में बेहयाई और बदका बढ़ती है
  680. 39:51वहां कत्ल आम होता है और जहां बद दियानत
  681. 39:55होती है वहां रि तंग हो जाता
  682. 39:58है हमारे पास जो कुछ दिया हुआ है वो उस
  683. 40:03मालिक उल मुल्क का है और इस पर उसके अकाम
  684. 40:07के मुताबिक अमल करने पर इनाम है दूसरी
  685. 40:11सूरत अपनी मर्जी करने पर नतीजा सख्त
  686. 40:16होगा अल्लाह का निजाम इतना कमजोर नहीं कि
  687. 40:20जो चाहे इस निजाम में दखल अंदाजी कर
  688. 40:23सके इंसानी हयात का कोई हिस्सा ऐसा नहीं
  689. 40:28जिसकी रहनुमाई कुराने करीम से हासिल ना हो
  690. 40:31सके जब बंदा खालिस नियत
  691. 40:34लेकर अल्लाह की बारगाह में हाजिर हो यह हो
  692. 40:38ही नहीं सकता कि उसे इस बारगाह से ना
  693. 40:42उम्मीदी
  694. 40:44मिले यह सूली बात याद
  695. 40:47रखिएगा कि किसी के छुड़ाने से कोई अल्लाह
  696. 40:50अल्लाह नहीं छोड़ता छूटना इस रिश्ते की
  697. 40:55कमजोरी है जो और बंदे के दरमियान होती
  698. 41:00हैं जब बंदा अल्लाह अल्लाह शुरू करता है
  699. 41:03तो उसके अंदर अल्लाह के फजल से ऐसी कैफियत
  700. 41:08आ जाती है कि गुनाह कड़वा लगना शुरू हो
  701. 41:12जाता है और नेकी पर चलना उसके लिए आसान हो
  702. 41:17जाता
  703. 41:18है आप जितना फासला अपने रब से बढ़ाएंगे
  704. 41:22उतनी ही आपकी मुसीबतों का कद बढ़ता चला
  705. 41:26जाएगा
  706. 41:28दुनिया की तमाम औरतों को बुर्का पहना दो
  707. 41:31फिर भी हिसाब तुम्हारी अपनी आंखों का
  708. 41:34होगा लोगों को ऐसा मजहब ना सिखाओ कि वह
  709. 41:39महरूम हों को किस्मत
  710. 41:40समझे जुल्म को आजमाइश समझकर सब्र कर ले हक
  711. 41:46के लिए आवाज उठाना गुनाह समझे गुलामी को
  712. 41:50अल्लाह की मस्लत करार दे और कत्ल को मौत
  713. 41:55का दिन मयन समझकर चुप र
  714. 41:57रहे ऐ इंसान तू क्या है यह तुझको वक्त
  715. 42:03बतलाए पैरों के तले तेरा यह सर आएगा इतना
  716. 42:08भी घमंड आज हस्ती पे ना कर कल नाम और निशा
  717. 42:12भी तेरा मिट
  718. 42:14जाएगा या सर पर आदमी को बिठाया ना कीजिए
  719. 42:19या फिर नजर से उसको गिराया ना
  720. 42:22कीजिए जांच परक है औरों की यह भी सोचा
  721. 42:27खुद क्या
  722. 42:29हो दुनिया की हालत इत्तेफाक पर और आखिरत
  723. 42:33के हालात तवार पर मबन होते हैं दूर अंदेश
  724. 42:39वह है जिसे दुनिया की
  725. 42:42धोखेबाजी आखिरत के लिए काम करने से ना
  726. 42:48रोके जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी यही है
  727. 42:53कि दुनिया से कोई अपना ईमान सलामत ले कर
  728. 42:57चला
  729. 43:08जाए

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