AI Complete OneShot Course | Learn AI & Deep Learning from Scratch — Transcript
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- 0:00एवरीवन, एंड टुडे सेशन इज़ गोइंग टू बी ऑल
- 0:01अबाउट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। अब आज के
- 0:03सेशन में देयर आर नो प्रीरक्वज़िट्स। दैट
- 0:05मींस दैट एनीबडी हु इज़ इंटरेस्टेड इन
- 0:07आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और
- 0:09डीप लर्निंग कैन गो थ्रू द सेशन। आज हम
- 0:11कवर करने वाले हैं 23 ऑफ़ द मोस्ट
- 0:13इंपोर्टेंट एआई टर्म्स। व्हिच इंक्लूड्स
- 0:15कॉन्सेप्ट्स लाइक एलएलएम्स, रैग्स,
- 0:17एमसीपी, एआई एजेंट्स, ट्रांसफॉर्मर्स एंड
- 0:20मच मोर। अब सबसे पहले लेट्स ट्राई टू
- 0:22अंडरस्टैंड व्हाई एक्जेक्टली आर दीज़
- 0:24कॉन्सेप्ट्स इंपोर्टेंट। सबसे पहला तो इफ
- 0:26वी आर एनीबडी हु इज इंटरेस्टेड इन द एआई
- 0:28इकोसिस्टम हम जानना चाहते हैं कि एआई
- 0:30इंडस्ट्री किस तरीके से इवॉल्व कर रही है
- 0:32देन इट्स गोइंग टू हेल्प अस डीप इन आवर
- 0:33अंडरस्टैंडिंग देयर सेकंडली इफ वी आर एन
- 0:36इंजीनियर जो डे टू डे बेसिस पर कुछ ऐसे
- 0:37टूल्स के साथ रिसोर्सेज के साथ वर्क करते
- 0:39हैं व्हिच आर एआई बेस्ड तो वहां पर हमारी
- 0:42अंडरस्टैंडिंग बिल्ड होगी प्लस इट्स गोइंग
- 0:44टू हेल्प अस कम्युनिकेट बेटर विद आवर टीम
- 0:46मेंबर्स बिकॉज़ नाउ वी आर गोइंग टू बी
- 0:47फेमिलियर विथ द एआई जॉर्टन एंड थर्डली इफ
- 0:49वी आर समबडी हू इज़ इंटरेस्टेड इन बिल्डिंग
- 0:51अ करियर इन डेटा साइंस एआई इंजीनियरिंग तो
- 0:53ये सारे के सारे कॉन्सेप्ट्स अनडाउटेडली
- 0:55हमारे करियर के लिए तोेंट है ही प्लस उसके
- 0:57साथ में दे आर आल्सोेंट फॉर इंटरव्यू
- 0:59पॉइंट ऑफ व्यू। तो इट्स रियली क्रूशियल टू
- 1:01हैव अ गुड अंडरस्टैंडिंग ऑफ़ दीज़
- 1:02कॉनंसेप्ट्स। एंड नाउ बिफोर वी स्टार्ट द
- 1:04सेशन देयर इज़ एनेंट अनाउंसमेंट अबाउट आवर
- 1:06कंप्लीट एआईएमएल बैच व्हिच इज़ कॉल्ड
- 1:08प्राइम फॉर ऑल द फ्यूचर डेटा साइंटिस्ट
- 1:10एंड एआई इंजीनियर्स। तो प्राइम के अंदर इन
- 1:124.5 मंथ्स हम अपने कंप्लीट एआईएमएल को कवर
- 1:15करने वाले हैं। वी आर गोइंग टू कवर अ लॉट
- 1:17ऑफ़ेंट कॉन्सेप्ट्स रिलेटेड टू मशीन
- 1:18लर्निंग, डीप लर्निंग, जनरेटिव एआई एंड
- 1:21एजेंटिक एआई। एंड प्राइम में हम सिर्फ
- 1:23कांसेप्ट्स को कवर नहीं करेंगे। उसके साथ
- 1:24में वी आर गोइंग टू बिल्ड अ लॉट ऑफ माइनर
- 1:27एंड अ लॉट ऑफ मेजर प्रोजेक्ट्स। माइनर
- 1:29प्रोजेक्ट्स हमारे वो प्रोजेक्ट्स होते
- 1:30हैं जिनको हम अपने कॉन्सेप्ट्स की
- 1:31प्रैक्टिस के लिए बिल्ड करते हैं। एंड
- 1:33मेजर प्रोजेक्ट्स आर द प्रोजेक्ट जिसके
- 1:35अंदर हम अपने एडवांस्ड फीचर्स को बिल्ड
- 1:36करते हैं। जिनको हम डिप्लॉय करते हैं। जिन
- 1:38प्रोजेक्ट्स को हम एंड टू एंड बिल्ड करते
- 1:40हैं। एंड दीज़ आर द इंडस्ट्री ग्रेड
- 1:41प्रोजेक्ट्स जिनको हम अपने रेज़्यूुे के
- 1:43अंदर ऐड कर सकते हैं। टू हैव अ बेटर
- 1:45प्रोफाइल फॉर आवरसेल्स। एंड सिंस आर
- 1:46ऑलरेडी फमिलियर विथ माय टीचिंग स्टाइल। तो
- 1:48प्राइम के अंदर जितने भी हमारे एआईएमएल
- 1:50कांसेप्ट्स हैं वो आप आकर लेक्चर्स के
- 1:51अंदर मेरे साथ सीख रहे होंगे। तो प्राइम
- 1:53का जो लेटेस्ट बैच है व्हिच इज़ प्राइम 3.0
- 1:55उसकी क्लासेस स्टार्ट होने वाली है 17th
- 1:56सितंबर 2026 से एंड फॉर ऑल द स्टूडेंट्स
- 1:59हु आर डेडिकेटेडली रिक्वेस्टिंग अस फॉर
- 2:01[संगीत] इट। देयर इज़ अ स्पेशल स्टूडेंट
- 2:02डिस्काउंट जो रहेगा 15th सितंबर शाम के
- 2:049:00 बजे तक। सो द लिंक फॉर द बैच इज़ इन द
- 2:06डिस्क्रिप्शन बॉक्स। [संगीत] एंड प्राइम
- 2:07के अंदर जो हमारी लर्निंग स्ट्रेटजी रहेगी
- 2:09दैट विल बी लर्निंग बाय डूइंग। मतलब हम
- 2:11प्रैक्टिकल लर्निंग के ऊपर काफी ज्यादा
- 2:13फोकस करेंगे। हम प्रोजेक्ट्स बिल्ड करने
- 2:15के ऊपर, अपने असाइनमेंट प्रॉब्लम्स को
- 2:16सॉल्व करने के ऊपर बहुत सारा कांसेप्ट्स
- 2:18के साथ में उनके इंप्लीमेंटेशन का कोड
- 2:20लिखने के ऊपर फोकस करेंगे। सो दैट वी आर
- 2:23गोइंग टू बिकम इंडस्ट्री [संगीत] रेडी।
- 2:24नाउ एट द स्टार्ट ऑफ़ द सेशन वी आर गोइंग
- 2:26टू बिल्ड अ सॉलिड फ्रेमवर्क अबाउट हाउ एआई
- 2:28लर्न्स। अब हम एस ह्यूमंस हमें कोई भी नई
- 2:31चीज सीखनी होती है तो उसे कैसे सीखते हैं?
- 2:33हमारे एक तो खुद के कुछ एक्सपीरियंसेस
- 2:35होते हैं। उसके साथ में हो सकता है कि हम
- 2:37कुछ बुक्स को रीड कर रहे हैं या फिर वी आर
- 2:39मे बी टॉकिंग टू पीपल अराउंड अस या वी
- 2:40ऑब्ज़र्व सम पीपल अराउंड अस। एंड इस तरीके
- 2:43के हमें लाइफ के अंदर डिफरेंट इनपुट्स
- 2:44मिलते हैं। उसके बेसिस पर हम कुछ कॉमन
- 2:46पैटर्न्स हैं जिनको लाइफ में ऑब्जर्व करते
- 2:48हैं। और फिर उन पैटर्न्स को या उन
- 2:50लर्निंग्स को हम अपने डिसीजंस के अंदर
- 2:52अप्लाई करते हैं। जैसे एग्जांपल के लिए
- 2:54अगर हम बहुत सारे फिट लोगों को जानते हैं।
- 2:56एंड वी ऑब्जर्व दैट मोस्ट ऑफ़ दीज़ फिट पीपल
- 2:59मोस्ट ऑफ़ दीज़ हेल्दी पीपल दे आर ईटिंग अ
- 3:01लॉट ऑफ़ फ्रूट्स। और हम भी हेल्दी होना
- 3:02चाहते हैं तो हम भी अपनी डाइट के अंदर
- 3:04बहुत सारे फ्रूट्स को इंक्लूड करेंगे। तो
- 3:06हमने क्या किया? अपने आसपास जितनी भी
- 3:08अवेलेबल इनेशन थी उससे हमने कुछ पैटर्न्स
- 3:10निकाले, कुछ ऑब्जरवेशंस निकाली एंड फिर
- 3:12उसे अपनी डिसीजन मेकिंग के ऊपर लाइफ में
- 3:14अप्लाई किया। हमारे एआई सिस्टम्स भी ऐसे
- 3:17ही लर्न करते हैं। सो एआई सिस्टम्स को
- 3:20मिलता है लर्निंग के लिए बहुत सारा डेटा।
- 3:22नाउ व्हेन वी आर टॉकिंग अबाउट डेटा वी
- 3:24एक्चुअली मीन अ लॉट ऑफ़ डेटा। आज हम
- 3:27चार्जपीडी को यूज़ करते हैं। जेमिना को यूज़
- 3:28करते हैं, क्लॉड को यूज़ करते हैं। जब इन
- 3:30मॉडल्स को ट्रेन किया जाता है, तो हम एक
- 3:32तरीके से सोच सकते हैं दैट दे आर फेड
- 3:35ऑलमोस्ट दी एंटायरिटी ऑफ़ द इंटरनेट। दे
- 3:37हैव एक्सेस टू ऑलमोस्ट ऑल ऑफ़ द विकिपीडिया
- 3:40पेजेस, दे हैव एक्सेस टू ऑलमोस्ट ऑल ऑफ़ द
- 3:41आर्टिकल्स अवेलेबल पब्लिकली। इनफैक्ट आज
- 3:44की डेट में बहुत सारे ऐसे मॉडल्स हैं
- 3:46जिनको काफी सारी रेयर बुक्स का भी डेटा
- 3:48फीड किया जाता है जो शायद इंटरनेट पर भी
- 3:50पब्लिकली अवेलेबल नहीं है। तो जब हम डेटा
- 3:52की बात कर रहे हैं हम बहुत बड़े साइज के
- 3:54डेटा की बात कर रहे हैं। तो ये जो डेटा
- 3:55होता है ये हमारी मशीनंस को फीड किया जाता
- 3:57है। एंड बेस्ड ऑन दिस डेटा द मशीन इज़
- 4:00गोइंग टू रिकॉग्नाइज़ सम पैटर्न्स। अब ये
- 4:02पैटर्न्स मशीनंस कैसे रिकॉग्नाइज़ करती
- 4:04हैं? उसके लिए देयर इज़ अ लॉट ऑफ़ मैथ दैट
- 4:06हैपेंस बिहाइंड द सीन्स। एंड बेस्ड ऑन दीज़
- 4:09पैटर्न्स एक फ्रेमवर्क रेडी होता है। एक
- 4:11मॉडल रेडी होता है जिसको हम कहते हैं अपना
- 4:13मशीन लर्निंग मॉडल। अब इसको एक एग्जांपल
- 4:16से समझते हैं। लेट्स सपोज वी हैव अ लॉट ऑफ़
- 4:18फोटो। लेट्स सपोज वी हैव 1 मिलियन फोटोज़।
- 4:20उसमें से आधी फोटोज़ के अंदर वी हैव सैड
- 4:22फसेस। आधी फोटोज़ के अंदर वी हैव हैप्पी
- 4:24फसेस। एंड ये सारी की सारी फोटोज़ अगर हम
- 4:26अपनी मशीन को फीड करें, तो इनके बेसिस पर
- 4:28इट्स गोइंग टू रिकॉग्नाइज़ सम पैटर्न्स। मे
- 4:30बी वो पैटर्न रिकॉग्नाइज़ करे कि हैप्पी
- 4:32फोटोज़ के अंदर तो देयर इज़ अ कॉनकेव शेप जो
- 4:35ऊपर की तरफ है। मतलब देयर इज़ अ स्माइली
- 4:37फेस। जबकि सैड फोटोस के अंदर मे बी द आइज
- 4:39आर वॉटरी। तो इस तरीके से कुछ कॉमन
- 4:41पैटर्न्स हैं जो हमारी मशीन ऑब्जर्व करेगी
- 4:43एंड उसके बेसिस पर एक फ्रेमवर्क बनाएगी
- 4:46जिसको हम कहते हैं अपना मशीन लर्निंग
- 4:48मॉडल। अब ये जो मशीन लर्निंग मॉडल होता है
- 4:49इसको हम सिंपली एक मैथमेटिकल फंक्शन समझ
- 4:51सकते हैं जो हमारे लिए अब फ्यूचर
- 4:53प्रेडिक्शनंस कर सकता है। मतलब एक बार
- 4:55हमारे पास अब ये मॉडल आ गया। तो नेक्स्ट
- 4:57टाइम इफ वी हैव सम न्यू डेटा। नेक्स्ट
- 4:59टाइम इफ वी हैव अ न्यू पिक्चर जिसमें सैड
- 5:02फेस भी हो सकता है। हैप्पी फेस भी हो सकता
- 5:03है। जो आज तक हमारे मशीन लर्निंग मॉडल ने
- 5:05देखा नहीं था। मतलब एक ऐसा नई पिक्चर आई
- 5:08जो शायद इस ओरिजिनल डेटा के अंदर अवेलेबल
- 5:10नहीं थी। तो इसके बेसिस पर भी अब हमारा
- 5:12मशीन लर्निंग मॉडल प्रेडिक्ट कर पाएगा इफ
- 5:15द फोटो इज़ सैड ऑ इज़ इट हैप्पी। तो ये जो
- 5:19हमारा पूरा प्रोसेस होता है जिसमें हम
- 5:21बहुत सारा डेटा मशीनंस को फीड करते हैं
- 5:23जिससे मशीनंस पैटर्न रिकॉग्नाइज़ करती है।
- 5:25एंड फिर ये एक फ्रेमवर्क बिल्ड करती है।
- 5:27मशीन लर्निंग मॉडल बिल्ड करती है जो आगे
- 5:29प्रेडिकशंस कर पाएगा। इस पूरे प्रोसेस को
- 5:31हम कहते हैं अपना ट्रेनिंग प्रोसेस। एंड
- 5:34जब एक बार ट्रेनिंग प्रोसेस के बाद हमारे
- 5:36पास मशीन लर्निंग मॉडल आ जाता है व्हिच इज
- 5:38द एक्चुअल मॉडल दैट डस द प्रेडिक्शन फॉर
- 5:40अस नाउ। तो ये मॉडल को जब नया डेटा फीड
- 5:43किया जाएगा और उसके बेसिस पर अब वो हमें
- 5:44प्रेडिक्शन करके दे देगा तो इस प्रोसेस को
- 5:47हम कहते हैं अपना इनफेंस। एंड ये जो हमारा
- 5:50मशीन लर्निंग मॉडल होता है इसको सिंपली हम
- 5:52अपना मैथमेटिकल फंक्शन समझ सकते हैं। मतलब
- 5:55बेस्ड ऑन सम इनपुट x ये हमें हमारा y
- 5:58प्रिडिक्ट करके देगा। तो मैथमेटिकल फंक्शन
- 6:00इज़ दिस fx फंक्शन। अगर हमारे पास कोई नया
- 6:04डेटा x आ गया तो उसके बेसिस पर हमारा
- 6:06आउटपुट y क्या होगा? वो हमें हमारा ये
- 6:09फंक्शन बताएगा व्हिच इज द मशीन लर्निंग
- 6:11मॉडल और द डीप लर्निंग मॉडल। तो इस तरीके
- 6:13से हमारे एआई सिस्टम्स वर्क करते हैं।
- 6:15फर्स्ट ऑफ़ ऑल बाय ट्रेनिंग ऑन अ लॉट ऑफ़
- 6:17डेटा रिकॉग्नाइजिंग डिफरेंट पैटर्न्स। एंड
- 6:19एक बार हमारे पास मशीन लर्निंग का ट्रेन
- 6:21मॉडल आ गया। फिर वो नए डेटा के बेसिस पर
- 6:23हमें नए-नए प्रेडिकशंस करके दे सकता है।
- 6:25नाउ लेट्स टॉक अबाउट आवर फर्स्ट टर्म
- 6:26व्हिच आर न्यूरल नेटवर्क्स। अब न्यूरल
- 6:28नेटवर्क से पहले लेट्स टॉक अबाउट एआई। एआई
- 6:31की जब हम बात करते हैं, तो एआई इनवॉल्व
- 6:33सिस्टम्स दैट परफॉर्म दोज़ टास्क दैट
- 6:35टिपिकली रिक्वायर सम ह्यूमन लेवल
- 6:36इंटेलिजेंस। जैसे हमारे जितने भी हम
- 6:39ह्यूमंस हैं, हम इमेज रिकॉग्निशन कर सकते
- 6:40हैं। हम स्पीच ट्रांसलेशन कर सकते हैं। पर
- 6:43आज की डेट में वही सेम काम हमारे लिए
- 6:44हमारे एआई सिस्टम्स भी कर सकते हैं। अब
- 6:46एआई के अंदर ही एक काफी बड़ी डोमेन होती
- 6:49है जिसको हम कहते हैं मशीन लर्निंग। मशीन
- 6:51लर्निंग के अंदर हम उन सिस्टम्स के साथ
- 6:52डील करते हैं व्हिच रिक्वायर अ लॉट ऑफ़
- 6:55डेटा। सो मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्स वो
- 6:57एल्गोरिदम्स होती हैं जो बहुत सारे डेटा
- 6:59पर ट्रेन होती हैं। पैटर्न्स को
- 7:00रिकॉग्नाइज करती हैं और फिर अपनी डिसीजन
- 7:02मेकिंग करती हैं। जैसे हमारे पास आज की
- 7:04डेट में ईमेल के अंदर स्पैम डिटेक्शन है।
- 7:06तो स्पैम डिटेक्शन कैसे वर्क करता है? देव
- 7:08लुक्ड एट अ लॉट ऑफ़ डेटा रिलेटेड टू
- 7:10ईमेल्स। और वहां से उन्होंने पैटर्न्स
- 7:12निकाले कि कौन सी ईमेल स्पैम है और कौन सी
- 7:15ईमेल्स जेन्युइन है, स्पैम नहीं है। अब
- 7:17मशीन लर्निंग के अंदर ही हमारे पास एक और
- 7:20सबसेट होता है, डोमेन होती है व्हिच इज़
- 7:22रियली पॉपुलर टुडे व्हिच इज़ कॉल्ड डीप
- 7:24लर्निंग। डीप लर्निंग मशीन लर्निंग का वो
- 7:26पार्ट है जहां पर हम न्यूरल नेटवर्क के
- 7:29साथ डील करते हैं। एंड व्हाट एक्सक्टली आर
- 7:31न्यूरल नेटवर्क्स? हमारा जो ह्यूमन ब्रेन
- 7:33होता है उसके अंदर वी हैव न्यूरॉन्स जो
- 7:36हमारे ब्रेन के अंदर एग्ज़िस्ट करते हैं।
- 7:37एंड इन न्यूरॉन्स का हमारे ब्रेन में एक
- 7:40पूरा का पूरा नेटवर्क होता है। जब इसी
- 7:42पूरे नेटवर्क को हम आर्टिफिशियली मशीनंस
- 7:45के अंदर क्रिएट करने की कोशिश करते हैं,
- 7:46तो उसको हम कहते हैं आर्टिफिशियल न्यूरल
- 7:49नेटवर्क्स। तो डीप लर्निंग इज दैट पार्ट
- 7:52ऑफ मशीन लर्निंग और इज दैट पार्ट ऑफ एआई
- 7:54जहां पर हम अपने ह्यूमन ब्रेन को मिमिक
- 7:56करने की कोशिश करते हैं। और ये जो मिमिक
- 7:58होता है वो होता है विद द हेल्प ऑफ दीज़
- 8:00न्यूरल नेटवर्क्स। तो हमारे पास बहुत सारे
- 8:02डिफरेंट टाइप्स ऑफ न्यूरल नेटवर्क्स होते
- 8:04हैं। पर सबसे पहले लेट्स अंडरस्टैंड द
- 8:06ओवरऑल कॉनंसेप्ट ऑफ न्यूरल नेटवर्क्स। तो
- 8:08न्यूरल नेटवर्क्स को जब हम विजुअलाइज़ करते
- 8:10हैं, वी विजुअलाइज़ देम लाइक दिस। यहां पर
- 8:12इस डायग्राम में हमें दिख रहा होगा देयर
- 8:13आर अ लॉट ऑफ़ सर्कल्स एंड देयर आर अ लॉट ऑफ़
- 8:16कनेक्शंस। ये हर एक जो सर्कल है हमारे
- 8:18डायग्राम के अंदर दिस इज कॉल्ड अ न्यूरॉन।
- 8:21तो ये भी एक न्यूरॉन है। ये भी एक न्यूरॉन
- 8:23है। ये भी एक न्यूरॉन है। एंड हमारे
- 8:25डिफरेंट न्यूरॉन्स के कनेक्शंस बनते हैं।
- 8:27सो दीज़ लाइंस आर कनेक्शंस। तब हमारे पास
- 8:29एक न्यूरल नेटवर्क बनता है। अब न्यूरल
- 8:32नेटवर्क के अंदर हमारे पास मल्टीपल लेयर्स
- 8:33होती हैं। जैसे यहां पर दिस पर्टिकुलर
- 8:36लेयर इज़ कॉल्ड एन इनपुट लेयर। इसको हम
- 8:39अपनी इनपुट लेयर कहते हैं। एंड जो न्यूरल
- 8:40नेटवर्क में हमारी लास्ट लेयर होती है
- 8:43उसको हम अपनी आउटपुट लेयर कहते हैं। एंड
- 8:45जनरली हमारे पास बीच में बहुत सारी
- 8:47डिफरेंट लेयर्स होती हैं जिन सबको हम अपनी
- 8:50हिडन लेयर्स कहते हैं। तो न्यूरल नेटवर्क
- 8:52कैन हैव लॉट्स एंड लॉट्स ऑफ हिडन लेयर्स।
- 8:54एंड हमारा जो डेटा होता है वो लेफ्ट साइड
- 8:57से राइट साइड की तरफ प्रोपगेट करता है या
- 8:59हमारी इंफॉर्मेशनेशन लेफ्ट से राइट की तरफ
- 9:00प्रोपगेट करती है। तो इस तरीके का
- 9:02फ्रेमवर्क हमारे सारे न्यूरल नेटवर्क्स
- 9:03फॉलो करते हैं। अब न्यूरल नेटवर्क्स को
- 9:05समझने के लिए एक एग्जांपल लेते हैं। लेट्स
- 9:07सपोज़ हमारे पास कॉलेज के अंदर वी हैव अ
- 9:08लॉट ऑफ़ स्टूडेंट्स एंड इन स्टूडेंट्स के
- 9:10कुछ ना कुछ एग्जाम्स होते रहते हैं। इन
- 9:12स्टूडेंट्स के हमारे पास मिड सेमेस्टर
- 9:14एग्जाम्स हैं। हमारे पास एंड सेमेस्टर
- 9:17एग्जाम्स हैं। एंड हमारे पास इन
- 9:19स्टूडेंट्स के कुछ क्लास टेस्ट्स होते
- 9:21हैं। अब हमें इन पर्टिकुलर एग्जाम से
- 9:23रिलेटेड स्टूडेंट्स के लिए एक सीजीपीए
- 9:25सिस्टम को डिज़ाइन करना है। तो क्या हम कह
- 9:27सकते हैं कि यह हमारी इनपुट वैल्यूज़ हैं
- 9:29x1, x2, x3 जो हमें मिल रही होंगी टू
- 9:31डिज़ाइन द सीजीपीए सिस्टम। अब इनिशियली हो
- 9:34सकता है कि कॉलेज के जो प्रोफेसर्स हैं
- 9:36उन्होंने कुछ रैंडम वेट असाइन कर दिया।
- 9:37मतलब रैंडम वेटेज असाइन कर दी इन
- 9:40पर्टिकुलर इनपुट्स को। जैसे शुरुआत में हो
- 9:42सकता है कि रैंडमली हमने असाइन किया कि
- 9:44मिड सेमेस्टर्स को हम 0.4 वेटेज देंगे।
- 9:46मतलब 40% वेटेज देंगे। एंड सेमेस्टर्स को
- 9:48भी 40% देंगे, क्लास टेस्ट को 20% वेटेज
- 9:51देंगे। एंड इस तरीके से वी विल कैलकुलेट अ
- 9:53फाइनल जीपीए। तो इस तरीके का कुछ सिस्टम
- 9:55है जो हमारे प्रोफेसर्स ने हमारे लिए
- 9:56डिज़ाइन कर दिया। कुछ इसी तरीके का सिस्टम
- 9:59हमारे न्यूरल नेटवर्क्स के अंदर एग्ज़िस्ट
- 10:01करता है। मतलब हर एक न्यूरॉन का जो
- 10:03कनेक्शन होता है, इट हैज़ अ पर्टिकुलर वेट
- 10:05वैल्यू। इसके पास वेट वन होगा, इसके पास
- 10:08वेट टू होगा। होगा। एंड इस तरीके से हर एक
- 10:09कनेक्शन का अपना एक वेटेज होता है। एंड
- 10:12दिस वेट वैल्यू टेल्स द न्यूरल नेटवर्क कि
- 10:14ये जो इनपुट यहां से आ रहा है मतलब अगर
- 10:16यहां से इनपुट x1 आ रहा है। यहां से इनपुट
- 10:18x2 आ रहा है। यहां से इनपुट x3 आ रहा है।
- 10:20तो हर एक पर्टिकुलर इनपुट अगले न्यूरॉन के
- 10:23लिए कितना इंपॉर्टेंट है, कितना
- 10:25सिग्निफिकेंट है। तो वही काम सीजीपी के
- 10:27अंदर जो वेटेज का यहां पर होता है, वैसे
- 10:29ही हमारे पास डेसिमल्स में कुछ वेट
- 10:31वैल्यूज़ होती हैं। अब ये सिस्टम काफी
- 10:32रैंडमली डिज़ाइन हुआ था। तो प्रोफेसर्स ने
- 10:34नोटिस किया कि क्योंकि क्लास टेस्ट की
- 10:36वेटेज बहुत कम है। तो बहुत सारे
- 10:38स्टूडेंट्स हैं जो क्लास को स्किप ही कर
- 10:39देते हैं। तो स्टूडेंट्स को क्लास अटेंड
- 10:40करने के लिए मोटिवेट करने के लिए व्हाट द
- 10:42प्रोफेसर्स डिड इज़ कि उन्होंने क्लास
- 10:44टेस्ट की वेटेज को बढ़ाकर 3 कर दिया। 30%
- 10:47कर दिया। और मिड सेमेस्टर्स की जो वेटेज
- 10:49है उसको उन्होंने रिड्यूस कर दिया। एंड इस
- 10:51तरीके से उन्होंने वेट्स को एडजस्ट कर
- 10:54दिया टू गेट बेटर रिजल्ट्स। यही सेम काम
- 10:57हमारे न्यूरल नेटवर्क्स के अंदर होता है।
- 10:58तो जैसे हमारा सीजीपीए सिस्टम हमने डिजाइन
- 11:01किया बिल्कुल वैसे ही हम अपने न्यूरल
- 11:02नेटवर्क्स को ट्रेन करते हैं। मतलब
- 11:04इनिशियली वी गेट सम डेटा एज इनपुट। डेटा
- 11:07के अंदर जो डिफरेंट पैराटर्स होते हैं वो
- 11:09हमारे डिफरेंट इनपुट वैल्यूज़ बनते हैं। उस
- 11:11डेटा को हम अपने न्यूरल नेटवर्क को फीड
- 11:13करते हैं। एंड में जाकर न्यूरल नेटवर्क
- 11:15हमारे लिए क्या करता है? कुछ ना कुछ
- 11:16प्रेडिक्शन करता है। अगर हम एक बाइनरी
- 11:18क्लासिफिकेशन का केस लें। जैसे एग्जांपल
- 11:20के लिए वी हैव 1 मिलियन पिक्चर्स ऑफ़ सम
- 11:22एनिमल्स। और हमारे न्यूरल नेटवर्क को
- 11:24प्रेडिक्ट करना है कि फोटो के अंदर कैट है
- 11:26या नहीं है। तो या तो वो यस प्रेडिक्ट
- 11:29करेगा या वो नो प्रेडिक्ट करेगा। एंड
- 11:31डिपेंडिंग अपॉन कि फोटो के अंदर
- 11:32एग्जैक्टली क्या है? हमारी प्रेडिक्शन सही
- 11:34भी हो सकती है। हमारी प्रेडिक्शन गलत भी
- 11:36हो सकती है। तो जब हम अपने डेटा को न्यूरल
- 11:38नेटवर्क को फीड करते हैं और सारी इनेशन एक
- 11:40लेयर, एक लेयर, एक लेयर से आगे-आगे की तरफ
- 11:42जाती है और फाइनली हमारे पास कुछ
- 11:44प्रेडिक्शन आता है। इस पूरे प्रोसेस को हम
- 11:46कहते हैं फॉरवर्ड प्रोपगेशन। क्योंकि यह
- 11:49पूरा प्रोसेस फॉरवर्ड डायरेक्शन के अंदर
- 11:51होता है। एंड फाइनली कोई भी प्रेडिक्शन
- 11:53हमारा जो न्यूरल नेटवर्क करता है जरूरी
- 11:54नहीं है कि सारी प्रेडिक्शन सही हो। अगर
- 11:56प्रेडिक्शन गलत है तो हम कैलकुलेट करते
- 11:58हैं कि प्रेडिक्शन कितनी गलत है। एंड उसे
- 12:00हम कैलकुलेट करते हैं इन द फॉर्म ऑफ लॉस।
- 12:02तो हर न्यूरल नेटवर्क प्रोपगेशन के लिए
- 12:04हमारे पास कुछ लॉस वैल्यू आती है कि हमारा
- 12:06न्यूरल नेटवर्क कितना गलत था। अब इसी लॉस
- 12:09को हम दोबारा से अपने नेटवर्क को ऑपोजिट
- 12:11डायरेक्शन में फीड करते हैं टू नाउ एडजस्ट
- 12:14द वेट्स। जैसे हमने सीजीपी का वेटेज
- 12:16एडजस्ट किया था। अब हम अपने न्यूरल
- 12:17नेटवर्क के वेट्स को भी कुछ वैसे ही
- 12:19एडजस्ट करेंगे सो दैट वी गेट बेटर
- 12:21रिजल्ट्स नेक्स्ट टाइम। तो जब बैकवर्ड
- 12:23डायरेक्शन के अंदर जाकर हम अपने सारे के
- 12:25सारे वेट्स को एडजस्ट करते हैं बेस्ड ऑन
- 12:28दिस लॉस वैल्यू। इस प्रोसेस को हम कहते
- 12:30हैं बैकवर्ड प्रोपगेशन। क्योंकि अब हम
- 12:32अपने न्यूरल नेटवर्क को बैकवर्ड डायरेक्शन
- 12:35के अंदर प्रोपगेट करते हैं। ट्रैवल कर रहे
- 12:36हैं। तो जैसे हमारा सीजीपीए सिस्टम वर्क
- 12:39कर रहा था। जब हम फॉरवर्ड डायरेक्शन के
- 12:40अंदर गए, सीजीपीए कैलकुलेट किया। रिजल्ट्स
- 12:42अच्छे नहीं वर्क किए तो हमने वेट को
- 12:44एडजस्ट कर दिया। सेम प्रोसेस न्यूरल
- 12:46नेटवर्क के अंदर वर्क करता है। इफ वी हैव
- 12:481 मिलियन पिक्चर्स तो हर पिक्चर के लिए
- 12:51पहले हम फॉरवर्ड प्रोपगेशन करेंगे। अपने
- 12:53न्यूरल नेटवर्क से प्रेडिक्शन लेंगे। फिर
- 12:54बैकवर्ड प्रोपगेशन करके दोबारा से अपने
- 12:56वेट्स को एडजस्ट करेंगे। सो दैट वी मेक द
- 12:59न्यूरल नेटवर्क स्मार्टर ईच टाइम। तो अगर
- 13:011 मिलियन पिक्चर्स हैं तो 1 मिलियन
- 13:04फॉरवर्ड प्रोपगेशन होंगे। 1 मिलियन
- 13:05बैकवर्ड प्रोपगेशन होंगे। और फाइनली हमारे
- 13:07पास कुछ अच्छी वेट वैल्यूज़ आ जाएंगी।
- 13:10जिसके बाद हमारा न्यूरल नेटवर्क अच्छे से
- 13:11ट्रेन हो जाएगा। अब डेफिनेटली देयर इज अ
- 13:14लॉट ऑफ़ हैवी मैथ व्हिच इज़ इनवॉल्वड इन दिस
- 13:16एंटायर प्रोसेस कि यहां पर ये सिर्फ वेट
- 13:18वैल्यूज़ नहीं होती। इसके साथ-साथ हर एक जो
- 13:20न्यूरॉन होता है उसके पास एक और एडिशनली
- 13:22आर्बिटरी वैल्यू होती है व्हिच इज़ कॉल्ड अ
- 13:24बायस वैल्यू। एंड अगर हम सिंगल न्यूरॉन का
- 13:26एग्जांपल लें। जैसे लेट्स सपोज हम इस
- 13:28न्यूरॉन का एग्जांपल ले रहे हैं। इसके पास
- 13:30अगर ये तीन इनपुट की वैल्यू इन तीन
- 13:32कनेक्शन से आ रही है। तो इसका वेट w1 है,
- 13:35इसका वेट w2 है। इसका वेट w3 है। तो इस
- 13:37न्यूरॉन से क्या आउटपुट निकलेगा? इस
- 13:39न्यूरॉन का जो आउटपुट होगा दैट विल बी x1
- 13:42w1 + x2 w2 + x3 w3 प्लस द बायस वैल्यू
- 13:46एंड इनका समेशन लेके इनके ऊपर हम एक
- 13:49स्पेशल फंक्शन अप्लाई करते हैं व्हिच इज़
- 13:50कॉल्ड द एक्टिवेशन फंक्शन जिसके बहुत सारे
- 13:53डिफरेंट टाइप्स होते हैं डिपेंडिंग अपॉन
- 13:54हम किस तरीके का न्यूरल नेटवर्क ट्रेन
- 13:56करना चाह रहे हैं। तो इसका जो आउटपुट होगा
- 13:58इस पर्टिकुलर न्यूरॉन का दैट इज़ गोइंग टू
- 14:00बी दिस वैल्यू। तो हर एक सिंगल न्यूरॉन के
- 14:03अंदर बहुत सारा मैथ होता है बिहाइंड द
- 14:05सीन। तब जाके हमारा न्यूरल नेटवर्क कुछ ना
- 14:07कुछ प्रेडिक्शंस कर पाता है। तो न्यूरल
- 14:09नेटवर्क्स का जो ट्रेनिंग प्रोसेस होता है
- 14:10दैट कंसिजिस्ट अ लॉट ऑफ़ फॉरवर्ड प्रोपगेशन
- 14:12एंड बैकवर्ड प्रोपगेशन पाससेस। एंड वंस वी
- 14:15हैव अ ट्रेन नेटवर्क एक बार हमारे पास ये
- 14:17पूरा नेटवर्क ट्रेन हो गया। उसके बाद हम
- 14:19इनफेंस कर सकते हैं यानी प्रेडिक्शन कर
- 14:21सकते हैं। तो नेक्स्ट टाइम हमारे पास कोई
- 14:23नया डेटा आएगा। उसके बेसिस पर वेट्स हमारे
- 14:25पास ऑलरेडी अवेलेबल हैं। हम सिर्फ फॉरवर्ड
- 14:27प्रोपगेशन करेंगे और अपने लिए एक
- 14:29प्रेडिक्शन लेकर जाएंगे। नाउ दिस नेटवर्क
- 14:32यहां पर हमने बहुत छोटे नेटवर्क का
- 14:33एग्जांपल लिया है। लेकिन एक्चुअलिटी में
- 14:35आज की डेट में जितने भी न्यूरल नेटवर्क्स
- 14:37हम प्रैक्टिकली देखते हैं, प्रैक्टिकली
- 14:39यूज़ करते हैं, दे हैव अ लॉट ऑफ़ डिफरेंट
- 14:41लेयर्स एंड दे हैव अ लॉट ऑफ नेटवर्क्स। तो
- 14:44उनको हम डीप न्यूरल नेटवर्क्स कहते हैं।
- 14:47क्योंकि उनके अंदर बहुत सारी हिडन लेयर्स
- 14:49होती हैं। बहुत सारे न्यूरॉन्स होते हैं।
- 14:51बहुत सारे पैराटर्स होते हैं। एंड बिकॉज़
- 14:53ऑफ़ दीज़ डीप न्यूरल नेटवर्क्स हम कहते हैं
- 14:55दैट न्यूरल नेटवर्क्स आर नॉट पार्ट ऑफ़
- 14:57जनरल मशीन लर्निंग। दे आर नाउ पार्ट ऑफ़
- 14:59डीप लर्निंग। नाउ द नेक्स्ट टर्म दैट वी
- 15:01आर गोइंग टू अंडरस्टैंड आर लार्ज लैंग्वेज
- 15:03मॉडल्स यानी एलएलएम्स। एलएलएम्स इनफैक्ट
- 15:06आज की डेट में इतनी पॉपुलर टर्म है कि
- 15:07हमें ऑलरेडी आईडिया होगा। अगर हमने जीपीडी
- 15:10सिक्स के बारे में सुना है जीपीडी फाइव
- 15:11जेमिनाई क्लॉड ऑल ऑफ दीज़ आर एग्जांपल्स ऑफ
- 15:14एलएलएम्स और फैमिलीज़ ऑफ़ एलएलएम्स। नाउ
- 15:16व्हाट आर एलएलएम्स? एलएलएम्स हमारे ऐसे
- 15:19डीप लर्निंग मॉडल्स होते हैं या डीप
- 15:21न्यूरल नेटवर्क्स होते हैं व्हिच आर
- 15:23ट्रेंड ऑन लार्ज टेक्स्चुअल डेटा। व्हाट
- 15:26डू वी मीन बाय लार्ज टेक्सचुअल डेटा।
- 15:28लार्ज डेटा कहने का मतलब है कि वी मीन दी
- 15:31एंटायरिटी ऑफ़ विकपीडिया। वी मीन मिलियंस
- 15:33एंड मिलियंस ऑफ़ बुक्स। ऑलमोस्ट दी एंटायर
- 15:35इंटरनेट। तो इतने ज्यादा डेटा पर हमारे
- 15:37एलएलएम्स ट्रेंड होते हैं कि हम उस डेटा
- 15:40को अपना लार्ज डेटा कहते हैं। एंड बिकॉज़
- 15:42दिस डेटा इज मोस्टली टेक्सचुअल इन नेचर।
- 15:44मतलब ये टेक्स्ट ही होते हैं। लैंग्वेजज़
- 15:46ही होती हैं। दैट इज़ व्हाई वी कॉल देम
- 15:48लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स। लार्ज लैंग्वेज
- 15:49मॉडल्स हमारे जो एलएलएम्स होते हैं वो
- 15:51ह्यूमन लैंग्वेज को अंडरस्टैंड करने में,
- 15:52जनरेट करने में, ट्रांसलेट करने में,
- 15:54समराइज़ करने में बहुत ही अच्छे होते हैं।
- 15:57एंड व्हाट एग्जैक्टली डू एलएलएम्स डू? हम
- 15:59सबने एलएलएम्स के साथ इंटरेक्ट किया होगा।
- 16:01अगर हम किसी भी एलएलएम का एग्जांपल लें।
- 16:03जैसे अगर हमने चार जीपीटी यूज़ किया, क्लॉड
- 16:05यूज़ किया तो मतलब हमने एलएलएम्स के साथ
- 16:07इंटरेक्ट किया है। तो हम जनरली अपने
- 16:08एलएलएम को क्या करते हैं? एक क्वेरी देते
- 16:10हैं। एंड बेस्ड ऑन दैट क्वेरी वो हमारे
- 16:13लिए कुछ ना कुछ रिस्पांस है जिसको जनरेट
- 16:15करता है। इट गिव्स अस अ रिस्पांस।
- 16:18जैसे एग्जांपल के लिए इफ वी आस्क इट अ
- 16:20क्वेरी व्हाट इज़ द कैपिटल ऑफ़
- 16:25इंडिया? तो हमारे लिए एक रिस्पांस जनरेट
- 16:27करेगा कि कैपिटल ऑफ़ इंडिया इज़ न्यू
- 16:30दिल्ली। अब एलएलएम्स हमारे लिए रिस्पांस
- 16:32कैसे जनरेट करते हैं? दे जनरेट इट बाय
- 16:34प्रेडिक्टिंग द नेक्स्ट वर्ड और द नेक्स्ट
- 16:36टर्म या इसको टेक्निकली बोल तो द मोस्टेंट
- 16:39थिंग दैट एलएलएम्स डू इज़ प्रेडिक्टिंग द
- 16:41नेक्स्ट टोकन। मतलब अगर हमारे पास ऑलरेडी
- 16:44कैपिटल ऑफ इंडिया लिखा हुआ है तो उसके बाद
- 16:46नेक्स्ट वर्ड क्या होना चाहिए? ये हमारे
- 16:49एलएलएम्स काफी अच्छी एक्यूरेसी के साथ
- 16:51काफी अच्छे प्रसीजन के साथ प्रिडिक्ट करते
- 16:53हैं। एंड उसके बाद हमारे पास हमारा
- 16:55नेक्स्ट वर्ड या नेक्स्ट टोकन प्रिंट होकर
- 16:56आता है। तो आज के बाद व्हेनएवर वी थिंक
- 16:58अबाउट एलएलएम्स वी हैव टू रिमेंबर दैट
- 17:00व्हाट डू दे डू दे प्रिडिक्ट द नेक्स्ट
- 17:03टोकन। एंड हाउ डू दे प्रिडिक्ट द नेक्स्ट
- 17:05टोकन बाय यूजिंग अ लॉट ऑफ़ मैथ। ये बहुत
- 17:08सारी मैथ होती है ये प्रेडिक्ट करने में
- 17:10कि एक वर्ड के बाद कौन सा नेक्स्ट वर्ड है
- 17:12जिसके आने की सबसे ज्यादा हाईएस्ट
- 17:14प्रोबेबिलिटी है। एक तो बहुत ज्यादा मैथ
- 17:16एंड दूसरा बहुत ज्यादा डेटा लगता है टू
- 17:18रिकॉग्नाइज़ पैटर्न्स इन ह्यूमन लैंग्वेज।
- 17:20जिस की वजह से एलएलएम्स पहचान पाते हैं कि
- 17:23अगर कैपिटल ऑफ इंडिया लिखा है तो देयर इज़
- 17:25अ लार्ज प्रोबेबिलिटी कि इसके बाद इज़ ही
- 17:27आना चाहिए। मतलब देयर इज़ अ वेरी लो
- 17:29प्रोबेबिलिटी कि इंडिया के बाद डायरेक्टली
- 17:31एप्पल प्रिंट हो जाएगा या इंडिया के बाद
- 17:33डायरेक्टली मैंगो प्रिंट हो जाएगा। उसकी
- 17:35बहुत कम प्रोबेबिलिटी है। जबकि इज़ प्रिंट
- 17:37होने की ज्यादा प्रोबेबिलिटी है। तो इस
- 17:39तरीके से इट्स ऑल अ गेम ऑफ़ प्रोबेबिलिटीज़
- 17:41कि कौन सा नेक्स्ट बेस्ट वर्ड है जो हमारे
- 17:44प्रॉपर रिस्पांस के अंदर फिट इन करेगा।
- 17:47एंड इसी लॉजिक के ऊपर हमारे एलएलएम्स वर्क
- 17:49करते हैं और वो हमें एक रिस्पांस जनरेट
- 17:51करके देते हैं। तो जितने भी हम अपने
- 17:52एलएलएम्स के साथ इंटरेक्शन करते हैं। चाहे
- 17:54उसमें हमारा इनपुट अंडरस्टैंड करना हो गया
- 17:56या अगर हम एक लैंग्वेज से दूसरी लैंग्वेज
- 17:58के अंदर ट्रांसलेशन करना चाह रहे हैं या
- 18:00हम कोई ईमेल लिखवाना चाह रहे हैं या फिर
- 18:01वी वांट टू डू सम टेक्स्ट समराइजेशन। ऑल
- 18:04ऑफ़ दिस इज़ हैपनिंग विथ दिस पर्टिकुलर वर्क
- 18:07दैट द एलएलएम्स आर कैपेबल ऑफ। नाउ द
- 18:09नेक्स्ट टर्म दैट वी विल फोकस ऑन इज़ टोकन
- 18:12और टोकनाइजेशन। अब हमें पता है हमारे जो
- 18:14भी एलएलएम्स होते हैं या व्हाटएवर मशीनंस
- 18:16वी हैव एलएलएम्स हो गए या डिफरेंट मशीनंस
- 18:19हो गए दे आर नॉट एबल टू अंडरस्टैंड ह्यूमन
- 18:22लैंग्वेज डायरेक्टली। मतलब वो हिंदी को,
- 18:24इंग्लिश को, पंजाबी को, जैपनीज़ को
- 18:26डायरेक्टली अंडरस्टैंड नहीं कर सकते। सो
- 18:27वी नीड टू कन्वर्ट एवरीथिंग, एव्री
- 18:30स्ट्रिंग, एव्री पीस ऑफ़ टेक्स्ट इंटू
- 18:32नंबर्स। अब अगर हमारे बड़े-बड़े पैराग्राफ्स
- 18:34हैं क्योंकि जनरली जब भी हम चार्ट जीपीडी
- 18:36से जब भी हम क्लॉट से बात करते हैं वी
- 18:37राइट अ लॉट ऑफ टेक्स्ट टू कन्वर्ट ऑल ऑफ़
- 18:40दैट टेक्स्ट डायरेक्टली इंटू नंबर्स इज़
- 18:42रियली डिफिकल्ट। सो वी नीड अ सिस्टम टू
- 18:44ब्रेक डाउन दैट टेक्स्ट इंटू स्मॉलर
- 18:46पार्ट्स। तो जब हमारा बहुत सारा टेक्सचुअल
- 18:49डेटा होता है एंड उसको हम स्मॉलर पार्ट्स
- 18:50के अंदर डिवाइड करते हैं। तो वो जो
- 18:52स्मॉलेस्ट यूनिट होता है जिसके अंदर
- 18:54डिवीज़न होता है दोज़ आर कॉल्ड टोकंस। और द
- 18:56स्मालेस्ट यूनिट, द स्मालेस्ट टर्म इज
- 18:58कॉल्ड अ टोकन। टोकन को जब भी हम इमेजिन
- 19:01करते हैं, वी कैन इमेजिन इट 3/4 ऑफ एन
- 19:03इंग्लिश वर्ड। जैसे इंग्लिश के अंदर हम
- 19:05वर्ड्स कहते हैं, वैसे ही जब हम एलएलएम्स
- 19:07की टर्म्स में बात करते हैं, तो हम टोकंस
- 19:09की बात करते हैं। लेट मी शो यू एन
- 19:11एग्जांपल ऑफ़ टोकनाइजेशन। जैसे दिस इज़ द
- 19:13ओपन एआई टोकनाइजर। इसके अंदर आई कैन एंटर
- 19:15सम टेक्स्ट। जैसे आई राइट आई लाइक जनरेटिव
- 19:20एआई। अब ये जो प्रॉपर सेंटेंस है इसको
- 19:24हमारे टोकनाइजर ने फाइव टोकंस के अंदर
- 19:27डिवाइड कर दिया है। आई इज द फर्स्ट टोकन
- 19:29लाइक इज़ द सेकंड टोकन जिसके अंदर स्पेस भी
- 19:32इंक्लूडेड है। जनरेटिव एक इंडिविजुअल
- 19:34सिंगल टोकन नहीं है। ऑलदो ये इंग्लिश के
- 19:36अंदर सिंगल वर्ड है। इट इज़ डिवाइडेड इंटू
- 19:38टू टोकंस व्हिच इज़ जेनर एंड एटिव। एंड देन
- 19:42लास्टली एआई इज़ द फिफ्थ टोकन। नाउ व्हाई
- 19:44डिड इट डिवाइड जेनरेटिव इंटू टू पार्ट्स।
- 19:47क्योंकि जब हम इंग्लिश लैंग्वेज की बात
- 19:48करते हैं तो इंग्लिश के अंदर ये जो एटिव
- 19:51होता है दिस इज अ वेरी पॉपुलर सफिक्स जो
- 19:54मल्टीपल वर्ड्स के अंदर एग्ज़िस्ट करता है।
- 19:56जैसे क्रिएटिव, रिएक्टिव, टॉकेटिव। तो
- 19:58बहुत सारे ऐसे इंग्लिश वर्ड्स हैं जिसके
- 20:00अंदर ये एटिव वाला जो वर्ड है, सफिक्स है,
- 20:02ये बार-बार एग्ज़िस्ट करता है। एंड दैट इज़
- 20:04व्हाई इट्स गोइंग टू हैव अ स्पेसिफिक
- 20:06मीनिंग फॉर द एलएलएम। एंड ऐसे वी हैव मोर
- 20:08सफिक्स एंड प्रीफिक्स इन द इंग्लिश
- 20:09लैंग्वेज। जैसे अगर हम फुल की बात करें तो
- 20:11फुल भी मल्टीपल वर्ड्स के अंदर आता है।
- 20:13जैसे हेल्पफुल हो गया, प्लेफुल हो गया,
- 20:15जॉयफुल हो गया। तो इस तरीके से फुल के लिए
- 20:18देयर इज़ गोइंग टू बी अ स्पेसिफिक मीनिंग
- 20:19फॉर द एलएलएम इन द इंग्लिश लैंग्वेज। तो
- 20:21लैंग्वेज को टोकंस के अंदर ब्रेक डाउन
- 20:23करने का लॉजिक क्या है? सबसे पहला तो इट
- 20:25बिकम्स इज़ियर टू कन्वर्ट ऑल ऑफ़ दैट
- 20:27टेक्स्ट इंटू नंबर्स। एंड सेकंडली टोकंस
- 20:29हेल्प करते हैं किसी भी एलएलएम को उसकी
- 20:32वोकैबलरी बिल्ड करने में या एक तरीके से
- 20:34डिक्शनरी बिल्ड करने में। जैसे हर एक टोकन
- 20:36के साथ एसोसिएटेड एलएलएम के लिए एक टोकन
- 20:38आईडी होती है। जैसे इफ वी लुक एट दीज़
- 20:40टोकंस तो हर टोकन के लिए एक टोकन आईडी है
- 20:43स्पेसिफिक व्हिच इज़ डिसाइडेड। जैसे आई के
- 20:45लिए द टोकन आईडी इज़ 40, लाइक के लिए द
- 20:48टोकन आईडी इज़ 1299। इफ आई चेंज इट टू
- 20:51जनरेटिव एआई की जगह मशीन लर्निंग। तो वी
- 20:54विल सी दैट द टोकन आईडी हैज़ चेंज्ड फॉर द
- 20:57लेटर वर्ड्स। पर स्टार्टिंग के जो वर्ड्स
- 20:59हैं, अभी भी हमारी टोकनाइज़ेशन प्रोसेस में
- 21:01वी हैव आई लाइक मशीन लर्निंग। तो अब हमारे
- 21:04पास चार टोकंस हैं। एंड टोकन आईडी की
- 21:06टर्म्स में आई के लिए अभी भी हमारे पास
- 21:08सेम टोकन आईडी है। तो कोई भी स्पेसिफिक
- 21:10टोकन होता है इन अ पर्टिकुलर एलएलएम हमारे
- 21:12पास सेम टोकन आईडी रहती है। जिससे इट
- 21:14बिकम्स ईज़ियर टू आइडेंटिफाई दैट वर्ड। तो
- 21:16हर एक टोकन के लिए उसकी टोकन आईडी उसके
- 21:18इंडेक्स की तरह होती है। एंड दिस प्रोसेस
- 21:20ऑफ़ कन्वर्टिंग टेक्स्ट टू टोकंस इज़ कॉल्ड
- 21:23टोकनाइज़ेशन। एंड दिस प्रोसेस इज़ डन बाय
- 21:25स्पेशलाइज़्ड एल्गोरिदम्स। द नेक्स्ट टर्म
- 21:27दैट वी विल अंडरस्टैंड इज़ कॉल्ड
- 21:29कॉन्टेक्स्ट विंडो एंड इट्स अ पॉपुलर टर्म
- 21:31इन टर्म्स ऑफ़ एआई। जैसे अगर हम किसी से
- 21:33बात कर रहे होते हैं तो देयर इज़ अ लिमिटेड
- 21:35अमाउंट ऑफ इनफेशन जो एक सिंगल कॉन्वर्सेशन
- 21:37में हम किसी भी ह्यूमन के बारे में
- 21:39रिमेंबर कर सकते हैं। सो सिमिलर इज़ द केस
- 21:42फॉर एन एलएलएम। कोई भी एलएलएम के लिए
- 21:44कॉन्टेक्स्ट विंडो इज़ लाइक देयर रैम। इट्स
- 21:47लाइक देयर वर्किंग मेमोरी फॉर द करंट
- 21:49कन्वर्सेशन। जो भी अभी करंट कॉन्वर्सेशन
- 21:52चल रहा है जिसमें कुछ क्वेरी है उसके बाद
- 21:53एलएलएम कुछ रिस्पांस जनरेट करेगा। फिर
- 21:56दोबारा से यूजर कोई क्वेरी पूछेगा, कोई
- 21:57रिस्पांस जनरेट करेगा। तो एक सिंगल
- 21:59कॉन्वर्सेशन के अंदर किसी भी एलएलएम की एक
- 22:02पर्टिकुलर लिमिट होती है। एक पर्टिकुलर
- 22:04लिमिट होती है ऑफ ट्रैकिंग व्हाट
- 22:06एग्जैक्टली हैज़ हैपन इन द कन्वर्सेशन। एंड
- 22:09इस लिमिट को हम कहते हैं उसकी कॉन्टेक्स्ट
- 22:11विंडो। ये उसकी मेमोरी है फॉर द करंट
- 22:13कॉन्वर्सेशन। एंड ये जो कॉन्टेक्स्ट विंडो
- 22:15होती है, ये जो मेमोरी होती है, लिमिट
- 22:17होती है, इसको ट्रैक करते हैं हम इन नंबर
- 22:19ऑफ़ टोकंस। जैसे फॉर कॉन्टेक्स्ट
- 22:22कॉन्टेक्स्ट विंडो का अगर साइज़ देखें तो
- 22:24जीपीटी वन जब आया था इन 2022 तो जीपीटी वन
- 22:27के लिए द कॉन्टेक्स्ट विंडो साइज वाज़ 512
- 22:30टोकंस। जबकि आज के डेट में व्हेन वी हैव
- 22:32जीपीटी6 अस्तरा जो रिलीज़ हुआ है उसके लिए
- 22:35द कॉन्टेक्स्ट विंडो साइज़ इज़ नियरली 1
- 22:38मिलियन टोकंस। वहीं अगर क्लॉड फेबल की बात
- 22:41करें तो द कॉन्टेक्स्ट विंडो साइज़ देयर इज़
- 22:43आल्सो अराउंड 1 मिलियन टोकंस। तो
- 22:46कॉन्टेक्स्ट विंडो साइज़ आज की डेट में एज़
- 22:48कंपेयर टू द अर्लियर मॉडल्स काफी ज्यादा
- 22:50इंक्रीस हो गया है। अब इस कॉन्टेक्स्ट
- 22:52विंडो में एक जो एलएलएम होता है वो
- 22:53एक्सैक्टली क्या स्टोर करता है? सबसे पहली
- 22:55चीज जो कॉन्टेक्स्ट विंडो के अंदर स्टोर
- 22:56होती है दैट इज द यूजर क्वेरी और द यूजर
- 22:59इनपुट। उसके साथ में हमारे एलएलएम का जो
- 23:02भी रिस्पांस होता है जनरेटेड रिस्पांस वो
- 23:04हमारी कॉन्टेक्स्ट विंडो के अंदर स्टोर
- 23:06होता है। प्लस उसके साथ में ऑल ऑफ द
- 23:08प्रीवियस मैसेजेस ऑफ़ द करंट कॉन्वर्सेशन।
- 23:11मतलब एक कॉन्वर्सेशन ऐसा तो है नहीं कि
- 23:13हमने एलएलएम से पूछा व्हाट इज़ द कैपिटल ऑफ़
- 23:15इंडिया? एंड उसने हमें रिप्लाई करके दे
- 23:17दिया। एंड दैट्स इट। दैट्स द एंटायर
- 23:18कन्वर्सेशन। जनरली जब भी हम अपने चैट
- 23:20बॉक्स के साथ डील करते हैं वी हैव अ सीरीज
- 23:22ऑफ़ मैसेजेस विथ देम। वी हैव एन एंटायर
- 23:25कॉन्वर्सेशन। तो उस कॉन्वर्सेशन के सारे
- 23:27पुराने मैसेजेस भी हमारी कॉन्टेक्स्ट
- 23:29विंडो के अंदर स्ट होते हैं। उसके साथ में
- 23:31अगर हमारा एलएलएम हमारे लिए कुछ
- 23:32डॉक्यूमेंट जनरेट करता है या रिट्रीव करता
- 23:34है या फिर वी आर समबडी हु इज़ अपलोडिंग अ
- 23:36डॉक्यूमेंट अपलोडिंग सम पिक्चर दैट आल्सो
- 23:39बिकम्स पार्ट ऑफ़ द कॉन्टेक्स्ट विंडो। तो
- 23:41ये सारी की सारी इनेशन मिलाकर हमारी
- 23:44कॉन्टेक्स्ट विंडो को फिल अप करती है। तो
- 23:45व्हेन वी स्टार्ट अ न्यू कॉन्वर्सेशन विद
- 23:47जीपीटी और वी स्टार्ट अ न्यू कॉन्वर्सेशन
- 23:49विद क्लॉट। तो इनिशियली हमारी कॉन्टेक्स्ट
- 23:51विंडो खाली होती है। लेकिन धीरे-धीरे
- 23:53जैसे-जैसे कॉन्वर्सेशन के अंदर द नंबर ऑफ
- 23:55मैसेजेस इनक्रीस वैसे-वैसे जो वो टोकंस
- 23:58होते हैं हम चाहे हमारे इनपुट के अंदर
- 23:59चाहे एलएलएम के आउटपुट के अंदर वो हमारी
- 24:01कॉन्टेक्स्ट विंडो को फिल अप करते चले
- 24:03जाते हैं। एंड हमें कभी भी अपनी
- 24:04कॉन्टेक्स्ट विंडो को 80% 85% से ऊपर फिल
- 24:07अप नहीं करना चाहिए। क्योंकि जैसे-जैसे
- 24:09कॉन्टेक्स्ट विंडो फिल अप होती चली जाती
- 24:12है, लास्ट में जाकर द क्वालिटी ऑफ़
- 24:14रिस्पांस ऑफ़ द एलएलएम इट डिग्रेड्स
- 24:17एक्सपोनेंशियली। तो कॉन्टेक्स्ट विंडो को
- 24:19पूरा फिल अप करने से बेटर है कि अगर हमारे
- 24:20पास कोई बहुत कॉम्प्लेक्स टास्क है जिसको
- 24:22हम एलएलएम से सॉल्व करवाना चाहते हैं तो
- 24:24वी ब्रेक डाउन दैट टास्क इंटू मल्टीपल
- 24:27सबटास्क एंड हर एक सबस्क के लिए वी हैव अ
- 24:29सेपरेट कॉन्वर्सेशन या फिर अगर हमारा
- 24:31कॉन्टेक्स्ट विंडो फिल अप होता है तो आज
- 24:33के मॉडर्न टूल्स के अंदर वी हैव एन ऑप्शन
- 24:35टू समराइज़ द कॉन्वर्सेशन ताकि हम अपनी
- 24:37कॉन्टेक्स्ट विंडो को एम्प्टी अप कर सकें।
- 24:39आल्सो देयर आर टू मोर थिंग्स टू रिमेंबर।
- 24:41सबसे पहले तो हमारी जो भी कॉन्टेक्स्ट
- 24:42विंडो होती है एलएलएम के लिए दैट इज़ नॉट
- 24:45परमानेंट। मतलब ऐसा नहीं है कि एक
- 24:47कॉन्वर्सेशन के अंदर हमने जितनी भी यह
- 24:49सारी इनेशन स्टोर करा दी वहां पर वह
- 24:50परमानेंटली स्टोर रहेगी। द कॉन्टेक्स्ट
- 24:53विंडो इज़ ओनली फॉर द करंट एक्टिव
- 24:55कॉन्वर्सेशन। उसके साथ में जनरली अ लार्जर
- 24:58कॉन्टेक्स्ट विंडो डज़ नॉट मीन बेटर
- 25:00परफॉर्मेंस बाय द एलएलएम। बिकॉज़ देयर इज़ अ
- 25:02लिमिटेशन ऑन एलएलएम्स कि वो किसी भी
- 25:04कन्वर्सेशन के कितने पार्ट पर फोकस कर
- 25:06सकते हैं। तो जनरली अगर कॉन्टेक्स्ट विंडो
- 25:08का साइज बहुत बड़ा होता है एंड उसको फिल अप
- 25:10करने के लिए हम बहुत सारा इनपुट एक बार
- 25:12किसी एलएलएम को देते हैं। तो जनरली
- 25:13एलएलएमसी में ये पैटर्न ऑब्ज़र्व किया गया
- 25:15है दैट दे फोकस मोर ऑन द स्टार्ट ऑफ़ द
- 25:17क्वेरी एंड द एंड ऑफ द क्वेरी। एंड बीच
- 25:20वाला जो पार्ट होता है इट बिकम्स अ लिटल
- 25:21बिट फज़ी। तो इट्स इंपोर्टेंट कि जब भी हम
- 25:23अपने एलएलएम को कोई बड़ा कॉम्प्लेक्स इनपुट
- 25:25दे रहे हैं तो वी इंक्लूड द इंपॉर्टेंट
- 25:27बिट्स आइदर एट द स्टार्ट ऑर एट द एंड ऑफ़ द
- 25:29इनपुट। नाउ आफ्टर कॉन्टेक्स्ट विंडो द
- 25:31नेक्स्ट टर्म फॉर अस इज़ वेक्टर्स। नाउ हाउ
- 25:34डू एलएलएम्स एग्जैक्टली अंडरस्टैंड अस?
- 25:36उसके लिए हमने बात कर ली कि जो भी इनपुट
- 25:38हमारे पास होता है जो हम एलएलएम को पास ऑन
- 25:41करते हैं दैट इज़ फर्स्ट कन्व्टेड इंटू
- 25:44टोकंस। मतलब अगर हमने ये इनपुट अपने
- 25:46एलएलएम को पास ऑन किया है, तो इट विल बी
- 25:48कन्वर्टेड इंटू टोकंस। टोक्स में कन्वर्ट
- 25:50होगा, तो हमारे पास एक टोकन आई आ जाएगा।
- 25:52दूसरा टोकन लाइक आ जाएगा। थर्ड टोकन विल
- 25:54बी जिन देन एटिव देन एआई। तो इस तरीके से
- 25:58हमारे पास डिफरेंट टोकंस आ जाएंगे। प्लस
- 26:00हर एक टोकन के लिए वी आर गोइंग टू हैव सम
- 26:02टोकन आईडी। तो हो सकता है डिफरेंट वर्ड्स
- 26:05के लिए वी हैव डिफरेंट टोकन आईडीज़। जैसे
- 26:06लेट्स टेक अ सेपरेट एग्जांपल। हमारे पास
- 26:09तीन वर्ड्स हैं। वी हैव कैट, वी हैव डॉग
- 26:12एंड वी हैव लायन। तो इन तीनों वर्ड्स के
- 26:14लिए हो सकता है हमारे पास कुछ सेपरेट टोकन
- 26:16आईडीज़ हो। जैसे इसके लिए 29 हो सकता है।
- 26:18इसके लिए 42 हो सकता है। इसके लिए 86 हो
- 26:21सकता है। तो वी हैव मल्टीपल टोकन आईडीज़।
- 26:23अब टोकन या टोकन आईडी से हमारी जो एलएलएम
- 26:26है उसको किसी भी इनपुट का मीनिंग पता नहीं
- 26:29चलता। उसे टोकन का एग्जैक्टली मीनिंग या
- 26:31डिफरेंट टोकंस के बीच में जो रिलेशन है
- 26:33उसके मीनिंग पता नहीं चलते। मीनिंग कब पता
- 26:35चलते हैं? जब ये पूरा जो टोकन है दैट इज़
- 26:39कन्व्टेड इंटू वेक्टर्स। नाउ व्हाट इज़ अ
- 26:42वेक्टर? हमने मैथ्स के अंदर पढ़ा होगा कि
- 26:44वेक्टर इज़ एनी क्वांटिटी दैट हैज़ सम
- 26:46मैग्नीट्यूड एंड सम डायरेक्शन। तो उसी
- 26:48तरीके का कांसेप्ट हम एलएलएम्स को देते
- 26:50हैं। बेसिकली अगर हम सिर्फ प्लेन नंबर्स
- 26:52की बात करें तो इनका एज सच कोई रिलेशन
- 26:54नहीं है। बट वी नीड सम वे टू रिलेट और टू
- 26:58कोरिलेट डिफरेंट टोकंस विद ईच अदर ताकि
- 27:00हमारा जो इनपुट है उसके अंदर कुछ मीनिंग आ
- 27:03सके टू फीड टू द एलएलएम। तो हम क्या करते
- 27:05हैं? हम अपने डिफरेंट वर्ड्स को एक तरीके
- 27:07से कह सकते हैं उनके डिफरेंट
- 27:08कैरेक्टरिस्टिक्स के अंदर डिवाइड करते
- 27:10हैं। जैसे एग्जांपल के लिए अगर हम कैट के
- 27:12लिए उसका वेक्टर क्रिएट करेंगे तो वेक्टर
- 27:14इज़ बेसिकली व्हाट? इट्स गोइंग टू बी अ वन
- 27:16डी एरे ऑफ़ डिफरेंट नंबर्स। ये नंबर्स कुछ
- 27:18भी हो सकते हैं। जैसे एग्जांपल के लिए
- 27:200.05 हो गया, 0.3 हो गया, 0.5 हो गया।
- 27:25किसी भी टोकन के लिए हम डिफरेंट सवाल हैं
- 27:27जो उस टोकन को अंडरस्टैंड करने के लिए पूछ
- 27:29सकते हैं। मतलब इज़ इट एन एनिमल और इज़ इट
- 27:31एन ऑब्जेक्ट और इज़ इट अ ह्यूमन बीइंग? या
- 27:33फिर हम पूछ सकते हैं डज़ इट हैव विस्कर्स?
- 27:35डज़ इट हैव हॉर्न्स? इज़ इट वाइट इन कलर? इज़
- 27:38इट ब्लैक इन कलर? तो इस तरीके के मल्टीपल
- 27:40प्रॉपर्टीज हैं जो हर एक टोकन के साथ
- 27:42एसोसिएटेड होते हैं। तो वेक्टर एक तरीके
- 27:44से उन प्रॉपर्टीज को क्वांटिफाई करने का
- 27:47तरीका होता है। वेक्टर्स उन प्रॉपर्टीज को
- 27:49नंबर्स के अंदर कन्वर्ट करने का तरीका
- 27:51होता है। सो दैट द एलएलएम इज़ एबल टू
- 27:54अंडरस्टैंड देम वेल। तो इन शॉर्ट एव्री
- 27:56टोकन इज़ कनवर्टेड इंटू अ सीरीज़ ऑफ़ नंबर्स
- 27:59जिसको हम वेक्टर्स कहते हैं। एंड इन
- 28:01वेक्टर्स को हम विजुअलाइज़ भी कर सकते हैं।
- 28:03अब वैसे तो जनरली जो वेक्टर्स होते हैं वो
- 28:05n डायमेंशनल बनते हैं। मतलब देयर इज़ नॉट
- 28:08जस्ट वन डायमेंशन। ये जो हमारा वन डी
- 28:10एरिया होता है इसके अंदर सिर्फ एक दो या
- 28:12तीन नंबर्स नहीं होते। बहुत सारे मल्टीपल
- 28:14डायमेंशंस होती हैं। बट हम ऐज़ ह्यूमंस
- 28:16मैक्सिमम 3D के अंदर इमेजिन कर सकते हैं।
- 28:18तो फॉर द सेक ऑफ़ सिंपलीसिटी लेट्स इमेजिन
- 28:20अ टू डी स्पेस। अब इस टू डी स्पेस के अंदर
- 28:22जब हम मल्टीपल वैल्यूस के वेक्टर्स को
- 28:25प्लॉट करेंगे तो हम नोटिस करते हैं कि
- 28:27वेक्टर्स इस तरीके से फॉर्म होते हैं।
- 28:29मतलब ये नंबर्स इस तरीके से क्वांटिफाई
- 28:31किए जाते हैं। तो जो रिलेटेड टोकंस होते
- 28:32हैं वो टू डी प्लॉट के ऊपर एक दूसरे के
- 28:34पास प्लॉट होते हैं। मतलब जैसे इफ कैट एंड
- 28:38लायन आर फ्रॉम द सेम फैमिली। तो हमारे टू
- 28:41डी स्पेस के अंदर कैट और लायन के जो
- 28:43वेक्टर्स हैं वो पास-पास होंगे एज़ कंपेयर
- 28:46टू द डॉग वेक्टर। यहीं पर कल को अगर हमारे
- 28:50पास टाइगर वेक्टर भी आ जाए तो टाइगर इज
- 28:52गोइंग टू बी नियरर टू लायन एंड नियरर टू
- 28:55कैट एज कंपेयर टू डॉग। या कल को अगर हमारे
- 28:57पास पेट वर्ड आता है तो पेट इज़ गोइंग टू
- 29:00बी नियरर टू डॉग एंड कैट एज़ कंपेयर टू
- 29:03लायन। तो इस तरीके से अब वेक्टर्स की
- 29:05हेल्प से हमारे टोकंस के अंदर कुछ मीनिंग
- 29:07कुछ कॉन्टेक्स्ट ऐड हो गया है जो हमारे
- 29:09एलएलएम्स को अब डिफरेंट टोकंस के बीच में
- 29:12रिलेशनशिप्स फॉर्म करने में हेल्प करेगा।
- 29:14मतलब इट विल टीच द एलएलएम दैट लायन एंड
- 29:17कैट आर मोर रिलेटेड एज़ कंपेयर टू लायन एंड
- 29:20डॉग। या डॉग एंड पेट आर मोर रिलेटेड एज़
- 29:23कंपेयर टू टाइगर एंड पेट। एंड ये जो पूरा
- 29:26प्रोसेस होता है ऑफ कन्वर्टिंग टोकंस इंटू
- 29:28वेक्टर्स। दिस प्रोसेस इज़ कॉल्ड
- 29:30वेक्टराइज़ेशन। एंड फाइनली, ये जो वेक्टर्स
- 29:32होते हैं, इन्हें हम फीड करते हैं टू आवर
- 29:34पर्टिकुलर एलएलएम। सो, दिस इज़ फाइनली, दैट
- 29:37गेट्स सेंट टू द एलएलएम, जिसके बेसिस पर
- 29:40हमारा एलएलएम अंडरस्टैंड कर पाता है व्हाट
- 29:42एक्जेक्टली वाज़ द इनपुट? अब वेक्टर्स एज़ अ
- 29:44टर्म फिजिक्स के अंदर भी एग्ज़िस्ट करती
- 29:46है, मैथ के अंदर भी एग्ज़िस्ट करती है।
- 29:48लेकिन स्पेसिफिकली जब हम एलएलएम
- 29:49कॉन्टेक्स्ट के अंदर वेक्टर्स की बात कर
- 29:51रहे होते हैं तो वहां पर हम अपने वेक्टर्स
- 29:54को वेक्टर एंबेडिंग्स भी कह देते हैं। सो
- 29:56दैट इज़ हाउ वी यूज़ द टर्म एंबेडिंग्स। तो
- 29:58जब भी हम एंबेडिंग्स की बात कर रहे हैं,
- 29:59वी आर एक्चुअली टॉकिंग अबाउट वेक्टर
- 30:01एंबेडिंग्स इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ़ एलएलएम्स।
- 30:03तो वेक्टर इंडिविजुअली इज जस्ट अ फॉर्मेट
- 30:06ऑफ स्टोरिंग डेटा कि हमारे पास वन डी एरे
- 30:08है जिसके अंदर मल्टीपल नंबर्स हैं।
- 30:10एंबेडिंग्स एक्चुअली हमें बताता है कि ये
- 30:12जो वेक्टर है ये स्पेसिफिकली एलएलएम्स के
- 30:14लिए टोकंस का कुछ ना कुछ मीनिंग कैरी कर
- 30:17रहा है। एंड नाउ लेट्स मूव ऑन टू द
- 30:18नेक्स्ट टर्म व्हिच इज़ कॉल्ड अटेंशन।
- 30:20अटेंशन इज़ प्रॉबब्ली वन ऑफ़ द मोस्ट
- 30:22इंपोर्टेंट टर्म्स व्हेन वी टॉक अबाउट
- 30:24एलएलएम्स। एस्पेशियली हमारे जितने भी
- 30:26मॉडर्न एआई बेस्ड सिस्टम्स, मॉडर्न एआई
- 30:28बेस्ड चैट बॉट्स हैं उनके अंदर अटेंशन का
- 30:30बहुत इंपॉर्टेंट रोल है। लेट्स टेक टू
- 30:32सेंटेंसेस टू अंडरस्टैंड अटेंशन। लेट्स
- 30:34सपोज़ आई से आई कोड इन Python एंड दूसरा
- 30:40सेंटेंस है अ Python बिट मी।
- 30:46अब ये दोनों सेंटेंसेस के अंदर ही अगर हम
- 30:49सिर्फ पाइthन वर्ड को वेक्टर एंबेडिंग्स
- 30:52के अंदर कन्वर्ट करें एंड देन वी फीड इट
- 30:54टू द एलएलएम दैट इज़ नॉट गोइंग टू बी इनफ
- 30:57टू अंडरस्टैंड द मीनिंग बिकॉज़ पाइथन का
- 30:59स्पेलिंग सेम है पाइथन एज अ वर्ड एज अ
- 31:02टोकन सेम है दोनों सेंटेंसेस के अंदर पर
- 31:04उसका जो कॉन्टेक्स्ट है दैट इज़ एंटायरली
- 31:06डिफरेंट फर्स्ट सेंटेंस के अंदर दिस पाइथन
- 31:08इज़ अ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज वेयर ऐज़ इन द
- 31:10सेकंड सेंटेंस दिस पाइथन इज़ अ स्नेक यहां
- 31:13पर एक तीसरा सेंटेंस भी हो सकता था अबाउट
- 31:15मंटी पाइथन व्हिच इज़ अ ब्रिटिश कॉमेडी
- 31:17ग्रुप। तो किसी भी टोकन के लिए सिर्फ
- 31:18वेक्टर एंबेडिंग्स के अंदर कन्वर्ट करना
- 31:20इज़ नॉट इनफ। हमें क्या करना पड़ता है? हमें
- 31:22अंडरस्टैंड करना पड़ता है किसी भी टोकन का
- 31:25कॉन्टेक्स्ट एज़ कंपेयर टू द अदर टोकंस इन
- 31:28द इनपुट। तो, हम क्या करते हैं? हम एक
- 31:31स्पेशल मैकेनिज़्म को यूज़ करते हैं या
- 31:32एलएलएम स्पेशल मैकेनिज़्म को यूज़ करते हैं
- 31:35टू डू दैट व्हिच इज़ कॉल्ड अटेंशन। अटेंशन
- 31:38मैकेनिज्म के अंदर वी बेसिकली डिसाइड कि
- 31:40किसी एक पर्टिकुलर इंडिविजुअल टोकन के लिए
- 31:43कौन से दूसरे रेलेवेंट टोकंस हैं जो हमारे
- 31:45इनपुट सीक्वेंस के अंदर जो हमारे टेक्स्ट
- 31:47के अंदर एग्ज़िस्ट करते हैं एंड कौन सा
- 31:49टोकन कितना इंपॉर्टेंट है टू अंडरस्टैंड द
- 31:52मीनिंग ऑफ़ दिस पाइथन कि एलएलएम समझ पाए कि
- 31:55जब भी पाइथन की बात हो रही है आर वी
- 31:56टॉकिंग अबाउट द प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और
- 31:58द स्नेक तो हाउ डज़ इट वर्क एक हाई लेवल पर
- 32:00बात करें तो लेट्स सपोज़ अगर हमारे पास कोई
- 32:02भी एक सेंटेंस है जिसके अंदर वी वांट टू
- 32:04अंडरस्टैंड द मीनिंग ऑफ़ अ पर्टिकुलर टोकन।
- 32:07तो इसके लिए वी क्रिएट अ स्पेशल वेक्टर
- 32:09जिसको हम कहते हैं अपना क्वेरी वेक्टर।
- 32:11एंड उसके साथ में हमारे जो बाकी टोकंस
- 32:13होते हैं इनके लिए वी क्रिएट समथिंग कॉल्ड
- 32:16द की वेक्टर्स। एंड अपने क्वरी वेक्टर एंड
- 32:19की वेक्टर्स के बीच में देन वी परफॉर्म सम
- 32:21मैथमेटिकल ऑपरेशंस। यह ऑपरेशंस डिफरेंट
- 32:23वेक्टर ऑपरेशंस होते हैं। जैसे डॉट
- 32:25प्रॉडक्ट हो गया। एंड उसके बेसिस पर वी
- 32:27कैलकुलेट समथिंग कॉल्ड दी अटेंशन स्कोर।
- 32:31एंड अटेंशन स्कोर हमें बताता है हाउ
- 32:33रेलेवेंट आर द अदर टोकंस टू दिस ओरिजिनल
- 32:36टोकन। मतलब जितना हायर अटेंशन स्कोर होगा
- 32:39जैसे कोड एंड Python का काफी ज्यादा हाई
- 32:42अटेंशन स्कोर होगा जिसकी वजह से हमें पता
- 32:44चलेगा दैट दिस कोड टोकन इज़ रियली रेलेवेंट
- 32:47टू अंडरस्टैंड द मीनिंग ऑफ़ दिस Python
- 32:49टोकन। क्योंकि अगर हमें पता है कि सेंटेंस
- 32:52के अंदर कोड वर्ड यूज़ किया गया है तो
- 32:53एलएलएम को पता होगा दैट इज़ अ हाई
- 32:55प्रोबेबिलिटी दैट वी आर टॉकिंग अबाउट द
- 32:57पाइथन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज एंड नॉट द
- 32:59स्नेक। उसी तरीक़े से इफ़ वी टेक एन
- 33:01एग्ज़ांपल ऑफ़ दिस सेंटेंस, तो यहां पर इफ़
- 33:03वी क्रिएट द क्वेरी वेक्टर फॉर दिस Python
- 33:06वर्ड, तो बाक़ी सारे वेक्टर्स के लिए हम
- 33:07अपने की वेक्टर को क्रिएट करेंगे। एंड वी
- 33:10विल हैव अ डॉट प्रोडक्ट ऑर सम अदर
- 33:12मैथमेटिकल ऑपरेशंस फॉर द क्वेरी एंड द की
- 33:14वेक्टर्स। एंड फाइनली हमारे पास हमारा
- 33:16अटेंशन स्कोर निकल कर आएगा। एंड इस
- 33:18सेंटेंस के लिए द हाईएस्ट अटेंशन स्कोर इज़
- 33:21गोइंग टू बी फॉर Python एंड बिट। बिकॉज़
- 33:23समबडी इज़ बीइंग बिटन। इट्स अ हाई
- 33:25प्रोबेबिलिटी इट सिग्नल्स टू द एलएलएम दैट
- 33:28दिस पाइथन मीन्स अ स्नेक एंड नॉट द
- 33:30प्रोग्रामिंग लैंग्वेज। एंड ये जो पूरा
- 33:31अटेंशन स्कोर को अटेंशन को कैलकुलेट करने
- 33:33का मैकेनिज्म होता है इसी को हम अपना
- 33:35अटेंशन मैकेनिज्म कहते हैं फॉर आवर
- 33:37एलएलएम्स। अब दिस एंटायर मैकेनिज्म वाज़
- 33:40एक्चुअली इंट्रोड्यूस्ड इन अ लैंडमार्क
- 33:42रिसर्च पेपर जो 2017 के अंदर आया था। एंड
- 33:45इट्स अ रियली पॉपुलर रिसर्च पेपर जिसको आप
- 33:48जाकर पढ़ भी सकते हैं। इनफैक्ट आई विल गिव
- 33:49यू द लिंक इन द डिस्क्रिप्शन बॉक्स। यू
- 33:51कैन गो एंड रीड द पेपर आफ्टर द सेशन। दिस
- 33:53पेपर वाज़ कॉल्ड अटेंशन।
- 33:57इज़ ऑल यू नीड। एंड दिस इज़ प्रॉब्ली वन ऑफ़
- 34:00द मोस्ट पॉपुलर पेपर्स व्हेन वी टॉक अबाउट
- 34:02मॉडर्न ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर्स और
- 34:04मॉडर्न एलएलएम्स इन द एआई वर्ल्ड। एंड इसी
- 34:06इंपॉर्टेंट रिसर्च पेपर के अंदर एक काफी
- 34:08इंपॉर्टेंट न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर
- 34:10इंट्रोड्यूस हुआ था। व्हिच इज़ कॉल्ड द
- 34:12ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर। एंड
- 34:14ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर इज़ बेस्ड ऑन द
- 34:17अटेंशन मैकेनिज़्म। एंड ये ट्रांसफार्मर
- 34:19आर्किटेक्चर इतनाेंट है दैट इट्स यूज्ड इन
- 34:21जेमिनाई। इट्स यूज्ड इन डीप सीक इट्स
- 34:23यूज्ड इन क्लॉड इज़ यूज्ड इन चैट जीपीटी सो
- 34:25एव्री पॉपुलर एलएलएम दैट यू सी आउट देयर
- 34:28इज़ एक्चुअली यूज़िंग द ट्रांसफार्मर
- 34:30आर्किटेक्चर बिहाइंड द सीन्स इन फैक्ट द
- 34:32कॉन्सेप्ट ऑफ एलएलएम्स एंड द कॉन्सेप्ट ऑफ
- 34:36ट्रांसफॉर्मर्स इज़ सो सिमिलर कि अ लॉट ऑफ़
- 34:38पीपल कन्फ्यूज़ देम विद ईच अदर। अभी तक
- 34:41हमने बात की थी कि हमारे जो एलएलएम्स हैं
- 34:42इनका काम होता है टू प्रिडिक्ट द नेक्स्ट
- 34:44टोकन। बट एक्चुअली ये जो काम हमारे लिए
- 34:47करते हैं वो हमारे ट्रांसफॉर्मर्स करते
- 34:49हैं। एंड दैट इज व्हाई कोई भी एलएलएम
- 34:51मॉडर्न एलएलएम अगर हम उठाकर देखें तो उस
- 34:53मॉडर्न एलएलएम के अंदर वी विल ऑब्जर्व दैट
- 34:55वी आर यूजिंग द ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर।
- 34:58तो एक तरीके से एलएलएम एंड ट्रांसफॉर्मर्स
- 35:01के रिलेशन को हम कुछ इस तरीके से समझ सकते
- 35:03हैं। जैसे हमारे पास वी हैव अ लैपटॉप
- 35:05डिवाइस और वी हैव अ फ़ोन। फोन के अंदर वी
- 35:07हैव द एंटायर ऑपरेटिंग सिस्टम। तो
- 35:09ऑपरेटिंग सिस्टम डस द हैवी वर्किंग बट अ
- 35:12फोन इज नॉट जस्ट द ऑपरेटिंग सिस्टम इट हैज़
- 35:16अ लॉट ऑफ़ अदर फीचर्स टू। तो वही सेम
- 35:18रिलेशन हमारे एलएलएम्स एंड ट्रांसफॉर्मर्स
- 35:20का होता है। इट्स लाइक अ कार एंड इट्स
- 35:22इंजन। कि इंजन इंपॉर्टेंट पार्ट होता है
- 35:24एक कार का बट कार हैज़ अदर फंक्शनंस टू। तो
- 35:27वैसे ही हमारे एलएलएम्स के अंदर द
- 35:29मोस्टेंट वर्क इज़ प्रेडिक्टिंग द नेक्स्ट
- 35:31टोकन सो दैट वी आर बी एबल टू जनरेट सम
- 35:33आउटपुट। तो वो काम हमारे लिए हमारे
- 35:34ट्रांसफॉर्मर्स करते हैं एज़ द ऑपरेटिंग
- 35:36सिस्टम फॉर द एलएलएम्स। पर एलएलएम और भी
- 35:38मल्टीपल टास्क हैं जिनको परफॉर्म कर सकते
- 35:40हैं व्हिच आर नॉट पार्ट ऑफ
- 35:42ट्रांसफॉर्मर्स। जैसे कोई भी एलएलएम किसी
- 35:44सर्च इंजन को एक्सेस कर सकते हैं।
- 35:46एक्सटर्नल टूल्स को एक्सेस कर सकते हैं।
- 35:48एक्सटर्नल इनेशन एक्सट्रैक्ट कर सकते हैं।
- 35:50तो इस तरीके के मल्टीपल काम हैं जो
- 35:52ट्रांसफॉर्मर नहीं करते पर एलएलएम एज अ
- 35:54टूल या एलएलएम एज अ सिस्टम परफॉर्म करता
- 35:57है। सो दैट इज़ व्हाट द रिलेशनशिप इज़
- 35:59बिटवीन एलएलएम्स एंड ट्रांसफॉर्मर्स। अब
- 36:01एलएलएम्स हमारे लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स
- 36:03हैं। पर वो मॉडल्स कौन सा आर्किटेक्चर यूज़
- 36:05करते हैं? वो ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर को
- 36:07यूज़ करते हैं। व्हिच इज़ अ न्यूरल नेटवर्क
- 36:09और अ डीप लर्निंग आर्किटेक्चर। अब व्हाट
- 36:11एक्जेक्टली इज़ द ट्रांसफार्मर
- 36:12आर्किटेक्चर? लेट्स डिस्कस द सिंपलीफाइड
- 36:14वर्जन फॉर इट। ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर
- 36:16की बात करें तो इट कंसिस्ट ऑफ टू
- 36:17इंपॉर्टेंट ब्लॉक्स। सबसे पहला ब्लॉक
- 36:20हमारे पास होता है व्हिच इज कॉल्ड द
- 36:22अटेंशन ब्लॉक। जिसके अंदर हम अपनी अटेंशन
- 36:26को कैलकुलेट करते हैं। अब एक्चुअली ये जो
- 36:28अटेंशन कैलकुलेट होती है, वी डीप डाइव
- 36:30इंटू द ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर। तो
- 36:31मल्टीपल टाइप्स ऑफ़ अटेंशन होती है। वी हैव
- 36:33मल्टी हेड अटेंशन, वी हैव सेल्फ अटेंशन।
- 36:35सो देयर आर मल्टीपल टाइप्स टू अटेंशन
- 36:37आल्सो। पर हम काफी हाई लेवल में बात कर
- 36:39रहे हैं। सबसे पहले जो भी हमारे इनपुट
- 36:41टोकंस होते हैं, व्हाटएवर इनपुट टोकंस वी
- 36:43हैव ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर में फर्स्ट
- 36:46ऑफ़ ऑल दे पास थ्रू द अटेंशन ब्लॉक। एंड
- 36:48उसके बाद दे रीच द सेकंड ब्लॉक व्हिच इज़ अ
- 36:52फीड फॉरवर्ड न्यूरल नेटवर्क। एंड उसके बाद
- 36:55फीड फॉरवल न्यूरल नेटवर्क हमें अपना कुछ
- 36:57आउटपुट देता है। एंड दिस इज़ जस्ट द फर्स्ट
- 37:02लेयर ऑफ द ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर। अब
- 37:04इस लेयर का जो भी आउटपुट होता है, इट इज़
- 37:07पास्ड टू द नेक्स्ट लेयर। मतलब यही जो सेम
- 37:09ब्लॉक्स का सेट होता है, इसको हम रिपीट
- 37:11करते हैं। सो, लेट्स क्रिएट अ कॉपी ऑफ़
- 37:14दिस। एंड इसी पूरे प्रोसेस को हम नेक्स्ट
- 37:18लेयर के अंदर रिपीट करेंगे। एंड सिमिलरली
- 37:20इसी सेम प्रोसेस को हम उसकी भी नेक्स्ट
- 37:22लेयर के अंदर रिपीट करेंगे। एंड दिस इज़
- 37:24हाउ द ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर इज़। तो
- 37:26सिंपलीफाइड टर्म्स में कुछ इस तरीके का
- 37:28प्रोसेस हमारे पास रहता है जहां पर हम
- 37:30अपने इनपुट टोकंस को पास करते हैं। उसे
- 37:32अटेंशन ब्लॉक के थ्रू पास करेंगे टू
- 37:33कैलकुलेट द अटेंशन स्कोर एंड अदर वैल्यूज़
- 37:35रिलेटेड टू अटेंशन। सो दैट वी आर एबल टू
- 37:37अंडरस्टैंड द कॉन्टेक्स्ट ऑफ द इनपुट
- 37:39व्हिच इज़ पास्ड टू अस। उसके बाद वी पास इट
- 37:41थ्रू अ फील्ड फॉरवर्ड न्यूरियल नेटवर्क।
- 37:42वी गेट द आउटपुट एंड वी रिपीट दिस
- 37:44प्रोसेस। एंड ये जो पूरा प्रोसेस होता है
- 37:46इसको हम करीबन n टाइम्स रिपीट करते हैं
- 37:49थ्रू ऑलमोस्ट n लेयर्स जो आज की डेट में
- 37:51इन मॉडर्न एलएलएम्स ये नंबर ऑफ लेयर्स इट
- 37:54कैन बी इवन इन 100्स। अब वैसे तो
- 37:56ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर हैज़ डिफरेंट
- 37:57वर्शन्स जिसके लिए हमें एनकोडर्स को भी
- 37:59समझना पड़ेगा। डिकोडर्स को भी समझना पड़ेगा।
- 38:01मल्टी हेड अटेंशन, सेल्फ अटेंशन। बहुत
- 38:03सारी मल्टीपल चीजों को समझना पड़ेगा। बट
- 38:05दिस इज़ द सिंपलीफाइड व्यू। इफ यू वांट अ
- 38:08डेडिकेटेड सेशन अबाउट अंडरस्टैंडिंग द
- 38:10ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर, इफ यू वांट टू
- 38:11अंडरस्टैंड डाइव डीप इंटू इट। डाइव डीप
- 38:14इनटू डिकोडर ओनली आर्किटेक्चर्स या एनकोडर
- 38:16डिकोडर आर्किटेक्चर्स, तो उसके बारे में
- 38:18यू कैन लेट मी नो इन द कमेंट्स एंड वी विल
- 38:19क्रिएट अ सेपरेट सेशन अबाउट
- 38:21ट्रांसफॉर्मर्स। अब हाई लेवल व्यू में
- 38:24व्हाट इज़ द लॉजिक ऑफ़ रिपीटिंग दिस एंटायर
- 38:26प्रोसेस अगेन? मतलब ये मल्टीपल जो हमारे
- 38:28पास n लेयर्स आती हैं ट्रांसफॉर्मर्स में।
- 38:30व्हाट इज़ द लॉजिक फॉर दैट? द लॉजिक इज कि
- 38:33हमारा जो एलएलएम है वो हमारे इनपुट के
- 38:36अंदर कॉन्टेक्स्ट के डिफरेंट न्यूसेस को
- 38:38समझ पाए। जैसे लेट्स टेक एन एग्जांपल ऑफ़
- 38:40एन इनपुट। लेट्स सपोज दिस इज़ माय इनपुट।
- 38:42बैंक अप्रूव्ड द लोन बिकॉज़ कस्टमर हैड अ
- 38:45गुड क्रेडिट स्कोर। अब इस इनपुट को जब हम
- 38:47पास करेंगे फर्स्ट लेयर सारा का सारा
- 38:50कॉन्टेक्स्ट नहीं समझ सकती। मे बी फर्स्ट
- 38:52लेयर के अंदर हमारा एलएलएम अंडरस्टैंड
- 38:53करेगा कि लोन किसने अप्रूव किया? लोन बैंक
- 38:55ने अप्रूव किया। क्रेडिट स्कोर कैसा था?
- 38:58क्रेडिट स्कोर गुड था। ये दो चीजें हो
- 39:00सकता है फर्स्ट लेयर के अंदर अंडरस्टैंड
- 39:01करें। तो फर्स्ट लेयर के अंदर एलएलएम
- 39:03सिर्फ हाई लेवल मीनिंग को समझ पाएगा। जबकि
- 39:05जैसे-जैसे नंबर ऑफ लेयर्स इनक्रीस होंगी
- 39:07वो डीपर इंटू द मीनिंग जाएगा। जैसे सेकंड
- 39:10लेयर के अंदर हो सकता है एलएलएम समझना
- 39:11स्टार्ट करे कि अ गुड क्रेडिट स्कोर विल
- 39:14लीड टू लोन अप्रूवल्स। तो ये एक डीपर लेवल
- 39:17ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग है जो शायद सिर्फ एक
- 39:18सिंगल लेयर के अंदर या सिर्फ टू लेयर्स के
- 39:20अंदर किसी एलएलएम को नहीं मिलेगी। एंड दैट
- 39:22इज़ व्हाई दिस रेपटीशन इज़ेंट इन द
- 39:24ट्रांसफार्मर आर्किटेक्चर। आल्सो अटेंशन
- 39:26ब्लॉक के अंदर जब हमारा अटेंशन स्कोर
- 39:28कैलकुलेट होता है, देन दैट स्कोर इज़
- 39:31कैलकुलेटेड फॉर एव्री टोकन विद एव्री अदर
- 39:34टोकन इंक्लूडिंग इटसेल्फ। तो, हमारे पास
- 39:36एक nस n साइज़ की मैट्रिक्स कैलकुलेट होती
- 39:39है इन टर्म्स ऑफ़ दी अटेंशन स्कोर। एंड एंड
- 39:42दैट इज़ व्हाई वी से दैट द कॉम्प्लेक्सिटी
- 39:44टर्न्स आउट टू बी बिग ऑफ़ n²। जहां पर n आर
- 39:46द नंबर ऑफ़ टोकंस। तो जैसे-जैसे हमारे
- 39:48इनपुट के अंदर द नंबर ऑफ़ टोकंस आर
- 39:50इंक्रीजिंग वैसे ही हम कह सकते हैं कि द
- 39:52कॉम्प्लेक्सिटी ऑफ़ द आर्किटेक्चर और द
- 39:55कॉस्ट ऑफ़ द आर्किटेक्चर इज़ आल्सो बिकमिंग
- 39:57एक्सपेंसिव। दैट इज़ व्हाई वी आल्सो हैव एन
- 40:00अल्टरनेटिव फॉर द ट्रांसफार्मर
- 40:02आर्किटेक्चर जिसको हम कहते हैं अपना स्टेट
- 40:06स्पेस
- 40:08मॉडल्स
- 40:09या एसएसएम्स व्हिच आर यूज़्ड इन मॉडल्स
- 40:13लाइक मेंबर। नेक्स्ट लेट्स अंडरस्टैंड
- 40:15फाइंड गिविंग। अब हमारे पास जो भी
- 40:17एलएलएम्स होते हैं, जो डिफरेंट एआई मॉडल्स
- 40:18होते हैं, दे आर ऑलरेडी ट्रेंड ऑन सम
- 40:20डेटा। बट देयर आर स्पेसिफिक स्पेशलाइज्ड
- 40:23फील्ड्स, देयर आर सम स्पेसिफिक यूज़ केसेस
- 40:25जिसके अंदर वी नीड स्पेशलाइज़्ड मॉडल्स।
- 40:28जैसे अगर हम मेडिकल फील्ड की बात करें या
- 40:30इफ वी टॉक अबाउट फाइनेंस या इफ वी टॉक
- 40:33अबाउट लीगल, तो ये ऐसी फील्ड्स हैं जिसके
- 40:36अंदर वी नीड स्पेशलाइज़्ड एलएलएम्स और वी
- 40:38नीड स्पेशलाइज़्ड मॉडल्स। सो हाउ डू वी
- 40:40अचीव दैट? वी अचीव दैट विथ द प्रोसेस ऑफ़
- 40:43फाइन ट्यूनिंग। फाइन ट्यूनिंग के अंदर वी
- 40:45स्टार्ट विद अ बेस मॉडल। एक हमारे पास बेस
- 40:48मॉडल होता है व्हिच इज़ एन ऑलरेडी
- 40:49प्रीट्रेंड एलएलएम। एंड फिर हम क्या करते
- 40:52हैं? इस बेस मॉडल को हम ट्रेन करते हैं।
- 40:54फर्दर ट्रेन करते हैं या फाइन ट्यून करते
- 40:56हैं ऑन अ स्पेशलाइज्ड डेटा सेट व्हिच इज़
- 41:00रेलेवेंट टू आवर यूज़ केस। मतलब अगर हम एक
- 41:03मेडिकलली स्पेशलाइज़्ड एलएलएम क्रिएट करने
- 41:05की कोशिश कर रहे हैं, तो ये स्पेशलाइज़्ड
- 41:06डेटा सेट स्पेसिफिकली मेडिकल का होगा। सो
- 41:09दैट हमारे पास जो भी फाइनल एलएलएम निकल कर
- 41:12आए इट्स एबल टू अंडरस्टैंड और कन्वर्स इन
- 41:14द मेडिकल जॉर्गन और या लीगल के केस में
- 41:17लीगल जॉर्गन अंडरस्टैंड करने वाला या उस
- 41:20स्पेसिफिक फॉर्मेट के अंदर आउटपुट देने
- 41:22वाला हमारे पास एलएलएम रेडी हो जाएगा। सो
- 41:25स्पेशलाइज़्ड डेटा सेट के ऊपर हम बेस मॉडल
- 41:27को ट्रेन करते हैं। एंड फाइनली व्हाट डू
- 41:28वी गेट? वी गेट अ फाइन ट्यून मॉडल। अब
- 41:33फाइन ट्यून मॉडल के मल्टीपल यूज़ केसेस हो
- 41:35सकते हैं। एक तो हो सकता है कि हम
- 41:36इंडस्ट्री स्पेसिफिक मॉडल को क्रिएट करना
- 41:38चाह रहे हैं। दैट इज व्हाई वी आर डूइंग
- 41:40फाइन ट्यूनिंग। एक हो सकता है कि हम
- 41:41स्पेसिफिक मॉडल बनाना चाह रहे हैं टू
- 41:43परफॉर्म अ पर्टिकुलर टास्क। जैसे एक
- 41:45कस्टमर सपोर्ट के लिए ही स्पेसिफिकली हम
- 41:47एक मॉडल क्रिएट करना चाह रहे हैं। तो उसके
- 41:49लिए भी हम फाइन ट्यून कर सकते हैं। या फिर
- 41:51हम एक पर्टिकुलर स्टाइल के अंदर रिस्पांस
- 41:53जनरेट करने के लिए मॉडल को क्रिएट करना
- 41:55चाह रहे हैं। तब भी हम अपने मॉडल्स की
- 41:56फाइन ट्यूनिंग कर सकते हैं। तो फाइन
- 41:58ट्यूनिंग प्रोसेस का बेनिफिट ये होता है
- 41:59दैट वी डोंट हैव टू ट्रेन अ मॉडल फ्रॉम
- 42:01स्क्रैच। बिकॉज़ दैट इज़ गोइंग टू बी रियली
- 42:03एक्सपेंसिव। वी टेक एन ऑलरेडी ट्रेंड मॉडल
- 42:06व्हिच इज़ कैपेबल ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग ह्यूमन
- 42:07लैंग्वेज जो एक जनरलाइज़्ड मॉडल होता है और
- 42:10उसे हम एक स्पेशलाइज़्ड फाइन ट्यून मॉडल के
- 42:12अंदर कन्वर्ट कर सकते हैं। नाउ द नेक्स्ट
- 42:14कॉन्सेप्ट दैट वी विल अंडरस्टैंड इज़ सेल्फ
- 42:15सुपरवाइज्ड लर्निंग। सेल्फ सुपरवाइज़्ड
- 42:18लर्निंग को इन शॉर्ट अगर बात करें तो इट
- 42:20इज़ द टाइप ऑफ़ लर्निंग जिसके थ्रू हमारे
- 42:22मॉडर्न एलएलएम्स डेटा से पैटर्न्स को लर्न
- 42:25करते हैं। लेट्स अंडरस्टैंड इट इन डेप्थ।
- 42:27जब भी हम डेटा की बात करते हैं जो
- 42:30एलएलएम्स को फीड किया जाता है। इस डेटा को
- 42:32ब्रॉडली हम दो कैटेगरीज के अंदर डिवाइड कर
- 42:34सकते हैं। इट कुड बी आइदर अ लेबल डेटा ऑ
- 42:38इट कुड बी अनलेबल डेटा। लेबल डेटा कहने का
- 42:41मतलब है जहां पर फॉर एनी इनपुट पैरामीटर x
- 42:44वी नो व्हाट द आउटपुट इज़ गोइंग टू बी। वी
- 42:46नो व्हाट द फाइनल रिजल्ट इज़ गोइंग टू बी।
- 42:49जैसे एग्जांपल के लिए हमारे पास बहुत सारे
- 42:51ईमेल्स का सैंपल है। हमारे पास काफी सारे
- 42:54ईमेल्स हैं। एंड हर ईमेल के लिए हमें पता
- 42:56है इफ दिस ईमेल इज़ अ स्पैम और इट इज़ अ नॉट
- 42:59स्पैम। तो हर ईमेल का सैंपल हमारे पास है।
- 43:03लेट्स सपोज़ हमारे पास 1 मिलियन ईमेल्स के
- 43:05सैंपल्स हैं। और हर ईमेल सैंपल के लिए
- 43:07हमें पता है कि ये स्पैम है, नॉट स्पैम
- 43:09है। स्पैम है, नॉट स्पैम है। जो भी उस
- 43:11ईमेल के अंदर कंटेंट है उसके अकॉर्डिंग।
- 43:13अब जब हम इस डेटा को किसी मशीन लर्निंग
- 43:15एल्गोरिदम को या डीप लर्निंग एल्गोरिदम को
- 43:17फीड करते हैं तो हमारा न्यूरल नेटवर्क
- 43:19क्या करेगा? न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर
- 43:21इज़ गोइंग टू ट्राई टू प्रेडिक्ट दिस
- 43:23वैल्यू। इस वैल्यू को हम अपनी टारगेट
- 43:25वैल्यू कहते हैं। दिस इज़ कॉल्ड द टारगेट
- 43:27वैल्यू और द y वैल्यू। मतलब बेस्ड ऑन द
- 43:30इनपुट x कोई भी न्यूरल नेटवर्क टारगेट को
- 43:34प्रिडिक्ट करने की कोशिश करता है। एंड फिर
- 43:36वो देखता है कि वो टारगेट को कितना
- 43:37एक्यूरेटली प्रिडिक्ट कर पाया। अगर
- 43:39एक्यूरेटली प्रिडिक्ट नहीं कर पाया तो फिर
- 43:41हम लॉस कैलकुलेट करते हैं। ऑलरेडी डिस्कस
- 43:43कर चुके हैं। एंड बेस्ड ऑन दैट लॉस दोबारा
- 43:45से हमारा जो न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर
- 43:47है वो इंप्रूव करने की कोशिश करता है। नाउ
- 43:49दिस कैन हैपन वेरी ईजीली विद लेबल्ड डेटा
- 43:52बट नॉट ऑल डेटा कैन बी लेबल्ड। हमारे पास
- 43:55दूसरे तरीके का भी डेटा होता है व्हिच इज़
- 43:56अनलेबल डेटा। जिस डेटा के अंदर बहुत सारे
- 43:59कैरेक्टरिस्टिक्स तो होते हैं। मतलब
- 44:00प्रॉपर्टीज़ तो होती हैं इस डेटा के अंदर।
- 44:02पर हमें नहीं पता कि एग्जैक्टली प्रिडिक्ट
- 44:04क्या करना है। हमें नहीं पता कि एग्जैक्ट
- 44:06व्हाई क्या है? एग्जैक्ट टारगेट वैल्यू
- 44:07क्या है? एंड इनफैक्ट जब हम बात कर रहे थे
- 44:10कि एलएलएम्स के पास लार्ज टेक्सचुअल डेटा
- 44:12है जिसके ऊपर उन्हें ट्रेन किया गया है।
- 44:14मतलब मॉडर्न डे एलएलएम्स आर ट्रेंड ऑन
- 44:16ह्यूज अमाउंट्स ऑफ़ डेटा। तो उसके अंदर
- 44:18डेफिनेटली हर एक चीज को ह्यूमन लेवल पर
- 44:20लेबल करना इज़ नॉट पॉसिबल। तो जो एलएलएम्स
- 44:22हैं उन्हें कोई तरीका चाहिए था टू बी एबल
- 44:25टू ट्रेन देमसेल्व्स ऑन दिस अनलेबल डेटा।
- 44:28तो उन्होंने अपने लिए एक बढ़िया तरीका
- 44:30निकाला व्हिच या रिसर्चर्स ने एक बढ़िया
- 44:32तरीका निकाला व्हिच इज़ सेल्फ सुपरवाइज्ड
- 44:34लर्निंग। सेल्फ सुपरवाइज लर्निंग से पहले
- 44:37एक बार सुपरवाइज लर्निंग की बात करते हैं।
- 44:39सुपरवाइज लर्निंग इज अ मशीन लर्निंग
- 44:41टेक्निक। ये एक मशीन लर्निंग या डीप
- 44:42लर्निंग मॉडल के सीखने का तरीका होता है।
- 44:44जिसमें हम क्या करते हैं? जिसमें हम मशीन
- 44:46लर्निंग मॉडल को इनपुट फीड करते हैं।
- 44:48जिसके बेसिस पे मशीन लर्निंग मॉडल आउटपुट
- 44:50प्रेडिक्ट करने की कोशिश करता है। उसके
- 44:52बाद आउटपुट प्रेडिक्ट होता है या नहीं
- 44:54होता? लॉस कैलकुलेट होता है। एंड दोबारा
- 44:56से वी हैव बैकवर्ड प्रोपगेशन। सो दिस इज़
- 44:58कॉल्ड सुपरवाइज़्ड लर्निंग। देन व्हाट इज़
- 45:01सेल्फ सुपरवाइज़्ड लर्निंग? सेल्फ सुपरवाइज
- 45:03लर्निंग कहने का मतलब है कि हमारा जो
- 45:05एलएलएम है उसे कुछ भी अगर डेटा फीड किया
- 45:07गया है वो क्या करेगा अपने इस डेटा के
- 45:10अंदर कुछ पार्ट को हाइड कर देगा। अब क्या
- 45:13पार्ट हाइड हुआ है? ये एलएलएम को ऑलरेडी
- 45:15पता है। इट नोस दैट ए इज़ हिडन। पर वो क्या
- 45:18करेगा? बेस्ड ऑन द एग्ज़िस्टिंग सीक्वेंस
- 45:20और द एग्ज़िस्टिंग टोकंस वो नेक्स्ट वैल्यू
- 45:23क्या आनी चाहिए थी? उसको प्रेडिक्ट करने
- 45:25की कोशिश करेगा। इट विल ट्राई टू
- 45:27प्रेडिक्ट द टारगेट वैल्यू। एंड फिर वो
- 45:29एनालाइज करेगा कि टारगेट वैल्यू के कितना
- 45:32सही उसका प्रेडिक्शन रहा। इफ इट्स गोइंग
- 45:34टू प्रेडिक्ट ए देन यस द एलएलएम इज़
- 45:37वर्किंग गुड। अगर वो ओ प्रेडिक्ट करेगा तो
- 45:39डेफिनेटली दिस इज़ नॉट अ गुड रिस्पांस। तो
- 45:42ट्रेनिंग प्रोसेस के अंदर मॉडल क्या
- 45:43करेगा? अपने वेट्स एडजस्ट करेगा एंड खुद
- 45:45को बेटर करने की कोशिश करेगा। तो इस तरीके
- 45:48से सारा डेटा इवन दो लेबल्ड नहीं है। तो
- 45:50जो भी डेटा हमने एलएलएम को फीड किया उससे
- 45:53वो टारगेट्स खुद ही बना रहा है। देयर आर
- 45:55नो ह्यूमन गिवन लेबल्स व्हिच आर अवेलेबल
- 45:58टू द एलएलएम। दैट इज़ व्हाई दिस लर्निंग इज
- 46:00कॉल्ड सेल्फ सुपरवाइज्ड लर्निंग। सुपरवाइज
- 46:03लर्निंग थी जिसके अंदर मैनुअली हम ही अपने
- 46:05डेटा सेट के अंदर टारगेट्स अलग से देते
- 46:07हैं। बट बहुत बड़े डेटा को जब हम एलएलएम्स
- 46:09को फीड करते हैं जो कि मॉडर्न डे एलएलएम
- 46:11हर एक केस में होता है। तो इतने बड़े डेटा
- 46:13के अंदर मैनुअली लेबल्स ऐड करना इज़ रियली
- 46:15कॉस्टली एंड उसके साथ में इट्स रियली टाइम
- 46:17कंज्यूमिंग। तो ये एक एफिशिएंट प्रोसेस
- 46:20है। सो दैट द एलएलएम इन द ट्रेनिंग
- 46:22प्रोसेस इज़ एबल टू क्रिएट टारगेट्स ऑन
- 46:24इट्स ओन। एंड इससे अपने साथ वो एक तरीके
- 46:26से एक गेसिंग गेम खेलता है खुद को इंप्रूव
- 46:28करते हुए। एंड दिस इज द प्रोसेस दैट इट
- 46:30रिपीट्स मिलियंस ऑफ टाइम्स टू बिकम बेटर
- 46:33एट थिंग्स। इसको और एक दो एग्जांपल से हम
- 46:36समझ सकते हैं। लेट्स सपोज़ हम किसी इमेजज़
- 46:38के डेटा सेट पर किसी एक एलएलएम को ट्रेन
- 46:40कर रहे हैं। एंड लेट्स सपोज़ इस इमेज के
- 46:42अंदर आई डिसाइड टू हाइड दिस पर्टिकुलर
- 46:45पार्ट। तो एलएलएम क्या करेगा? इस
- 46:47पर्टिकुलर पार्ट को हाइड कर देगा। एंड फिर
- 46:49गेस करने की कोशिश करेगा कि इस इमेज के
- 46:52अंदर यहां पर क्या आना चाहिए? इट विल
- 46:54ट्राई टू प्रेडिक्ट। एंड इफ इट
- 46:56प्रेडिक्ट्स कि यहां पर एक व्हील आना
- 46:57चाहिए। चाहिए देन दैट इज़ गोइंग टू बी अ
- 46:59गुड प्रेडिक्शन। इफ इट प्रेडिक्ट्स कि
- 47:01यहां पर आई डोंट नो एक बिक आनी चाहिए देन
- 47:04दैट इज़ गोइंग टू बी अ बैड प्रेडिक्शन। सेम
- 47:06कैन बी डन विद लैंग्वेजज़ सेम कैन बी डन
- 47:08विद टेक्स्ट। जैसे इफ वी गिव इट सम डेटा
- 47:10इन द फॉर्म ऑफ़ टेक्स्ट। तो इस तरीके का
- 47:12डेटा अगर इसके पास गिवन है तो यहां से इट
- 47:14विल कवर अप सम वर्ड्स फ्रॉम द टेक्स्ट एंड
- 47:16ट्राई टू प्रेडिक्ट देम। तो इट लुक एट द
- 47:18टोकंस। डोंट जज अ बुक बाय इट्स। तो यहां
- 47:22पर नेक्स्ट टोकन क्या आना चाहिए उसको वो
- 47:24प्रेडिक्ट करने की कोशिश करेगा। कवर अगर
- 47:26प्रेडिक्शन के अंदर आएगा देन दैट्स अ गुड
- 47:28प्रेडिक्शन। बट उसकी जगह इफ़ लेट्स सपोज़ इट
- 47:30प्रेडिक्ट्स वॉच देन दैट्स अ बैड
- 47:33प्रेडिक्शन। सो इन शॉर्ट व्हाट इज़ सेल्फ
- 47:35सुपरवाइज़ लर्निंग? सेल्फ सुपरवाइज़ लर्निंग
- 47:37इज़ जब हमारा मॉडल अनलेबल डेटा से खुद ही
- 47:40टारगेट्स को डिराइव करता है देन दैट इज़ द
- 47:42प्रोसेस ऑफ़ सेल्फ सुपरवाइज़ लर्निंग। एंड
- 47:43दिस इज़ द प्रोसेस जिसके थ्रू एक मॉडल कैन
- 47:45लर्न द पैटर्न्स इन द लैंग्वेज। नाउ द
- 47:47नेक्स्टेंट टर्म इज़ रीइंफोर्समेंट
- 47:49लर्निंग। अब जैसे हमारे पास सेल्फ
- 47:51सुपरवाइज लर्निंग था वैसे ही
- 47:52रीइंफोर्समेंट लर्निंग भी एक मॉडल के लर्न
- 47:54करने का ट्रेन करने का एक पर्टिकुलर तरीका
- 47:56है। रीइंफोर्समेंट लर्निंग के अंदर व्हाट
- 47:58डू वी डू इट्स वेरी सिमिलर टू ट्रेनिंग अ
- 48:01पेट। जैसे आई हैव अ पेट डॉग नेम डॉबी एंड
- 48:03व्हेन इट फॉलोस माय कमांड्स आई गिव इट
- 48:05रिवॉर्ड्स। तो वैसा सा ही सिमिलर प्रोसेस
- 48:08हम क्या करते करते हैं रीइंफोर्समेंट
- 48:09लर्निंग के अंदर अपने मॉडल के साथ करते
- 48:10हैं। तो हमारा जो भी मॉडल होता है
- 48:13व्हाटएवर इज़ आवर मॉडल इफ द मॉडल बिहेव्स
- 48:17अकॉर्डिंग टू अस मतलब वो अगर कोई
- 48:19डिज़ायरेबल आउटपुट लेकर आता है तो हम क्या
- 48:21करते हैं? उस मॉडल को फीड करते हैं सम
- 48:23रिवॉर्ड्स। रिवॉर्ड्स कहने का मतलब है अ
- 48:25पॉजिटिव वैल्यू। बट इफ इट डज़ समथिंग बैड।
- 48:29तो फिर हम उसे एक पेनल्टी फीड करते हैं
- 48:31व्हिच इज़ अ नेगेटिव वैल्यू। जैसे एग्जांपल
- 48:34के लिए वी आर ट्रेनिंग अ मशीन लर्निंग और
- 48:36अ डीप लर्निंग मॉडल टू प्ले चेस। अब चेस
- 48:39के अंदर इफ द मॉडल एंड्स अप लूजिंग सम
- 48:41पीसेस। तो जब कोई पर्टिकुलर पीस लूज़ होगा
- 48:44तो उस केस में दैट इज़ गोइंग टू बी अ
- 48:45पेनल्टी एक्शन। जबकि अगर ऑपोजिट प्लेयर का
- 48:48अगर कोई पीस लूज़ होता है तो दैट इज़ अ
- 48:50रिवॉर्ड एक्शन। तो रीइंफोर्समेंट लर्निंग
- 48:53के अंदर जो भी हमारा मॉडल होता है या इसे
- 48:56हम अपना एजेंट कहते हैं। नाउ दिस एजेंट इज़
- 48:59डिफरेंट फ्रॉम एजेंटिक एआई के एआई
- 49:01एजेंट्स। पर रीइंफोर्समेंट लर्निंग के
- 49:03अंदर जो भी हमारा मॉडल होता है जिसको हम
- 49:04ट्रेन कर रहे होते हैं उसको हम एजेंट कहते
- 49:06हैं। इस एजेंट का काम होता है टू
- 49:08मैक्सिमाइज द रिवॉर्ड्स। टू मैक्सिमाइज द
- 49:12रिवॉर्ड्स। तो रिवॉर्ड्स मैक्सिमाइज कैसे
- 49:14होंगे? तो किसी भी चेस गेम के अंदर
- 49:16रिवॉर्ड्स कैसे मैक्सिमाइज़ होंगे? हो सकता
- 49:18है बीच में हमारे कुछ ना कुछ प्लेयर्स लूज़
- 49:20हो रहे हो। पर हमारा इवेंचुअल गोल होना
- 49:22चाहिए कि ऑपोज़िशन के प्लेयर्स ज्यादा लूज़
- 49:24हो। एंड वी इवेंचुअली एंड अप विनिंग द
- 49:26गेम। सो दैट इज़ हाउ द एजेंट और द
- 49:28रीइंफोर्समेंट लर्निंग एजेंट इज़ ट्रेंड।
- 49:30अब ये तो हो गया प्लेन सिंपल
- 49:32रीइंफोर्समेंट लर्निंग। उसके साथ में वी
- 49:33आल्सो हैव अनदर वेरिएशन ऑफ इट जिसको हम
- 49:36कहते हैं रीइंफोर्समेंट लर्निंग विद
- 49:37ह्यूमन फीडबैक। जो जनरली हमने चार्ट
- 49:39जीपीटी के अंदर ऑब्जर्व किया होगा। जैसे
- 49:41चार्ट जीपीटी जब हमें कुछ रिस्पांस देता
- 49:43है। कई बार हमने नोटिस किया होगा दैट इट
- 49:46गिव्स अस टू कॉपीज़ ऑफ़ द सेम आंसर। इट
- 49:50गिव्स अस टू वेरिएशंस ऑफ़ द सेम आंसर। मतलब
- 49:54वी आस्क्ड इट अ क्वेरी। हमने अपने एलएलएम
- 49:57को कोई क्वेरी फीड की एंड रिस्पांस के
- 50:00अंदर उसने हमें दो वर्जन शो किए। फर्स्ट
- 50:03वर्जन के अंदर हो सकता है मे बी इट यूज्ड
- 50:07सम डायग्राम्स सम पिक्चर्स
- 50:10लेट मी शो इट लाइक दिस। कुछ इस तरीके से
- 50:12देयर वाज़ सम डायग्राम देन सम टेक्स्ट।
- 50:14सेकंड के अंदर हो सकता है रिस्पांस। दिस
- 50:16इज़ रिस्पांस वन। दिस इज़ रिस्पांस टू। तो
- 50:21देयर इज़ अ डिफरेंस बिटवीन बोथ द
- 50:22रिस्पों्ससेस बट दोनों के अंदर कंटेंट
- 50:24उसने हमें सेम दिखाया है। तो वो हमसे
- 50:25पूछता है कि व्हिच इज अ बेटर रिस्पांस दैट
- 50:27यू प्रेफर फॉर नेक्स्ट टाइम। तो हो सकता
- 50:29है हमें डायग्राम्स देख के अंडरस्टैंड
- 50:31करने में हेल्प मिलती है तो वी चूज़ दिस
- 50:33रिस्पांस। तो जैसे ही हम वो चूज़ करते हैं
- 50:35इट फीड्स अ पॉजिटिव वैल्यू टू द मॉडल फॉर
- 50:39प्रोड्यूसिंग दिस रिस्पांस व्हेयर ऐज़ इट
- 50:41फीड्स अ नेगेटिव वैल्यू फॉर प्रोड्यूसिंग
- 50:44दिस रिस्पांस। तो इसको हम कहते हैं कि
- 50:46ह्यूमन फीडबैक के बेसिस पर हमारी
- 50:48रीइंफोर्समेंट लर्निंग वर्क कर रही है फॉर
- 50:50द मॉडल। नाउ व्हाई डू वी डू इट? बिकॉज़ हर
- 50:53ऑर्गेनाइजेशन चाहती है कि उनके जो
- 50:54एलएलएम्स हैं वो उस तरीके के आंसर्स को
- 50:56जनरेट करें दैट द ह्यूमंस आर प्रेफरिंग।
- 50:59दैट इज़ व्हाई दे आर ब्रिंगिंग ह्यूमन
- 51:01फीडबैक इंटू दिस एंटायर रिइंफोर्समेंट
- 51:03लर्निंग लूप। अब रीइंफोर्मेंट लर्निंग इज़
- 51:05अ रियली पावरफुल टेक्निक जो गेम्स के अंदर
- 51:07यूज़ होती है, डिफरेंट एलएलएम्स के अंदर
- 51:08यूज़ होती है। इनफैक्ट, रोबोटिक्स के अंदर
- 51:10भी यूज़ होती है टु ट्रेन द डिफरेंट
- 51:11रोबोट्स। नाउ, द नेक्स्ट कॉन्सेप्ट दैट वी
- 51:13आर गोइंग टू अंडरस्टैंड आर रैग्स। व्हिच
- 51:15इज़ रिट्रीवल ऑर्गमेंटेड जनरेशन एंड रैग्स
- 51:17आर वन ऑफ़ द मोस्ट पॉपुलर टर्म्स इन द एi
- 51:19स्पेस। अब इफ़ यू वांट टू अंडरस्टैंड रैग्स
- 51:22इन डेप्थ, देन आई हैव क्रिएटेड अ
- 51:23डेडिकेटेड टुटोरियल अबाउट रैग्स। ऑन द सेम
- 51:25चैनल, सो यू कैन गो एंड वॉच दैट टुटोरियल।
- 51:27उसके अंदर हमने इन डेप्थ बहुत सारी रैग से
- 51:30रिलेटेड डिफरेंट कॉन्सेप्ट्स को डिस्कस
- 51:31किया है। बट यहां पर वी आर गोइंग टू गेट अ
- 51:33हाई लेवल अंडरस्टैंडिंग। रैग्स की जब हम
- 51:35बात करते हैं, उससे पहले लेट्स टॉक अबाउट
- 51:37नॉर्मल एलएलएम्स। कोई भी हमारा एलएलएम है
- 51:40इफ इट्स अ नॉर्मल एलएलएम यूजर क्या करेगा
- 51:43इट विल आस्क सम क्वेरी एंड उसके बेसिस पे
- 51:45द एलएलएम इज़ गोइंग टू जनरेट सम रिस्पांस
- 51:48इसको हम कहते हैं अपनी नॉर्मल जनरेशन द
- 51:50जनरेशन कीवर्ड बट कई बार हमारे जो
- 51:53एलएलएम्स होते हैं दे डू नॉट हैव एक्सेस
- 51:56टू कंपनी स्पेसिफिक डेटा और मे बी सम
- 51:58इंटरनल डॉक्यूमेंटेशंस व्हिच आर
- 52:00रिक्वायर्ड और व्हिच विल ऐड मोर
- 52:02कॉन्टेक्स्ट टू द रिस्पांस फॉर दिस
- 52:04पर्टिकुलर क्वेरी। जैसे एग्जांपल के लिए
- 52:06लेट्स सपोज कोई ड्रोन कंपनी है। अब ड्रोन
- 52:08कंपनी के मल्टीपल प्रोडक्ट्स हैं जो
- 52:10उन्होंने इनह हाउस बिल्ड किए हैं। बट दे
- 52:12हैव नॉट पुट दैट डेटा पब्लिकली ओवर दी
- 52:13इंटरनेट। सो द एलएलएम डजंट नो अबाउट ऑल ऑफ़
- 52:16दैट इनफेशन। अब नाउ इफ दे आर बिल्डिंग सम
- 52:19कस्टमर सपोर्ट एजेंट तो उस कस्टमर सपोर्ट
- 52:21एआई एजेंट के पास इस सारे के सारे ड्रोंस
- 52:23के सारे प्रोडक्ट्स की एक्सेस होनी चाहिए।
- 52:25नाउ हाउ इज़ इट गोइंग टू गेट दैट एक्सेस?
- 52:27क्योंकि कोई भी कस्टमर अगर आकर पूछेगा कि
- 52:30लेट्स सपोज द ड्रोन कंपनीज़ नेम डीजीआई।
- 52:32कोई भी आकर पूछेगा डीजीआई मिनी सीरीज के
- 52:34बारे में टेल मी मोर अबाउट इट एंड इफ दैट
- 52:36इनेशन वाज़ नॉट अवेलेबल इन द ट्रेनिंग डेटा
- 52:39जिसके ऊपर हमारा एलएलएम ट्रेन हुआ था तो
- 52:41वो प्रॉपर रिस्पांस जनरेट नहीं कर पाएगा।
- 52:44दैट इज़ व्हाई कोई भी कंपनी अपने लिए एक
- 52:46रैग पाइपलाइन को सेटअप कर सकती है। नाउ
- 52:48व्हाट डू वी मीन बाय रैग पाइपलाइन? हम
- 52:50बेसिकली कोई भी डेटा जिसकी हम एक्सेस देना
- 52:53चाहते हैं टू द एलएलएम जिस डेटा को हम
- 52:56पब्लिकली पुट इन नहीं करना चाहते। जिस
- 52:58डेटा के ऊपर हम अपने एलएलएम को रिट्रेन
- 53:00नहीं करना चाहते। जस्ट उस डेटा की एक्सेस
- 53:03देना चाहते हैं। ये डेटा कुछ भी हो सकता
- 53:04है। दिस डेटा कुड बी पीडीएफ, दिस डेटा कुड
- 53:06बी अदर डॉक्यूमेंट्स, दिस डेटा कुड बी सम
- 53:08इमेजज़। कुछ भी पर्टिकुलर डेटा हो सकता है।
- 53:11तो इसकी एक्सेस हम अपने एलएलएम को
- 53:14डायरेक्टली दे देते हैं इन द फॉर्म ऑफ़ अ
- 53:16डेटाबेस इन मेजॉरिटी ऑफ़ द केसेस। तो
- 53:19नेक्स्ट टाइम कोई कस्टमर आएगा विथ द सेम
- 53:21क्वेरी। अब एलएलएम क्या करेगा? इस क्वेरी
- 53:24से मैच करने वाले रेलेवेंट डॉक्यूमेंट्स
- 53:26को हमारे डेटाबेस से या इस पर्टिकुलर डेटा
- 53:30से फैच करेगा। एंड नाउ ऑन द बेसिस ऑफ़ दोज़
- 53:33पर्टिकुलर डॉक्यूमेंट्स वो एक बेटर
- 53:36रिस्पांस को जनरेट करेगा। तो दिस इज़ कॉल्ड
- 53:39रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन। व्हाई इज़ इट
- 53:41कॉल्ड रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन? क्योंकि
- 53:44एलएलएम जनरेशन तो अभी भी कर रहा है।
- 53:45रिस्पांस को जनरेट कर रहा है। पर अब वो जो
- 53:48जनरेशन है इट इज़ ऑगमेंटेड और इट इज़
- 53:50सपोर्टेड विद रिट्रीवल। रिट्रीवल कहने का
- 53:53मतलब है कि उसने रेलेवेंट चंक्स ऑफ डेटा
- 53:56इस डेटाबेस से अब रिट्रीव किए टू जनरेट अ
- 53:59बेटर रिस्पांस। एंड दिस इज़ कॉल्ड द रैग
- 54:02आर्किटेक्चर और द रैग पाइपलाइन। अब ये जो
- 54:04डेटा के एक्सेस हम एलएलएम्स को देते हैं,
- 54:06दिस एक्सेस कुड बी गिवेन इन द फॉर्म ऑफ़ अ
- 54:09ग्राफ डेटाबेस। और इट कुड ऑल्सो बी गिवन
- 54:12इन द फॉर्म ऑफ़ एन एसक्यूएल डेटाबेस। या
- 54:14मेजॉरिटी ऑफ़ केसेस में यह जो एक्सेस होती
- 54:17है, वी गिव इट इन द फॉर्म ऑफ़ वेक्टर
- 54:19डेटाबेस। जिसको अभी हम डिस्कस करेंगे। पर
- 54:21मेजॉरिटी रैक पाइपलाइंस के अंदर वी यूज़ अ
- 54:23वेक्टर डेटाबेस एंड इसका एक काफी क्रूशियल
- 54:25रीज़न होता है जिसको अभी हम डिस्कस करेंगे।
- 54:27बट ऑल ऑफ़ दिस इज़ डन और द रैक पाइपालाइन इज़
- 54:29सेट अप सो दैट द एलएलएम कैन जनरेट अ बेटर
- 54:32रिस्पांस फॉर द यूजर क्वेरी। अब कई बार
- 54:34हमने ऑनलाइन कुछ क्लिकबेड वीडियोस देखे
- 54:36होंगे जिसके ऊपर टाइटल आता है रैग इज़ डेड।
- 54:38रैग इज़ नॉट एट ऑल डेड। इनफैक्ट इट इज़
- 54:41इवॉल्विंग एंड इट इज़ ग्रोइंग। अभी जो
- 54:43क्लिकबेड वीडियोस हैं, इनके बनने का एक
- 54:45रीज़न यह होता है कि देयर इज़ अ न्यू एलएलएम
- 54:47और देयर इज़ अ न्यू डीप लर्निंग मॉडल दैट
- 54:49कम्स अप दैट इज़ रिलीज़्ड। एंड जिसका
- 54:51कॉन्टेक्स्ट विंडो काफी बड़ा होता है। तो
- 54:53सम पीपल थिंक कि कॉन्टेक्स्ट विंडो अगर
- 54:56इतना बड़ा है तो ये जो एडिशनल डॉक्यूमेंट्स
- 54:58हैं ये क्यों ना हम किसी एलएलएम के अंदर
- 55:00कॉन्वर्सेशन में अपने कॉन्टेक्स्ट विंडो
- 55:02के अंदर ही स्टोर कर दें। बट दैट इज़
- 55:04डिफरेंट फ्रॉम एक्चुअली रिट्रीविंग द
- 55:07डॉक्यूमेंट। क्योंकि ये जो रिट्रीवल होता
- 55:08है इसके अपने आप में एडेड बेनिफिट्स हैं।
- 55:10जब हम इस तरीके से रैक पाइपलाइन सेटअप
- 55:12करते हैं तो हम अपने पूरे डेटाबेस को एक
- 55:15साथ एलएलएम को एक्सपोज नहीं करते जिसकी
- 55:16वजह से देयर इज़ अ हायर लेवल ऑफ़ डेटा
- 55:18सिक्योरिटी दैट कैन बी मेंटेंड। जैसे अगर
- 55:21किसी हॉस्पिटल का डेटाबेस है एंड हॉस्पिटल
- 55:23अगर अपने डिफरेंट पेशेंट के रिकॉर्ड्स की
- 55:25इनेशन को किसी कस्टमर सपोर्ट एआई एजेंट को
- 55:28देना चाहता है। सो दैट द पेशेंट्स कैन
- 55:30आल्सो टॉक टू द एजेंट एंड रॉल्व देयर
- 55:32क्वेरीज़। तो हॉस्पिटल नहीं चाहेगा कि सारे
- 55:34के सारे पेशेंट रिकॉर्ड्स की इनफेशन एक
- 55:36साथ एलएलएम को दे दी जाए। तो रैक पाइपलाइन
- 55:39इस तरीके से सेटअप होती है कि पूरे
- 55:41डेटाबेस को एलएलएम एक साथ एक्सेस नहीं कर
- 55:43पाता। एक्चुअली वो इस वेक्टर डेटाबेस के
- 55:45कुछ पर्टिकुलर चंक्स को या इनफैक्ट
- 55:47रेलेवेंट डॉक्यूमेंट्स को ही एक टाइम पर
- 55:49एक्सेस कर पाता है। जिसकी वजह से देयर इज़
- 55:51हायर लेवल्स ऑफ़ डेटा प्राइवेसी। नाउ
- 55:52नेक्स्ट लेट्स टॉक अबाउट दिस वेक्टर
- 55:54डेटाबेस व्हिच इज़ यूज़्ड इन द रैक
- 55:56पाइपलाइन। अब रैक पाइपलाइन को अगर हम
- 55:59समराइज़ करें तो वी हैव एन एलएलएम जिसके
- 56:01पास कोई भी क्वेरी हमारा जो यूजर है वह
- 56:05सेंड करता है। बट दिस एलएलएम नाउ हैज़
- 56:07एक्सेस टू अ स्पेशलाइज्ड डेटाबेस जिसको हम
- 56:11अपना वेक्टर डीबी कहते हैं। एंड ऑन द
- 56:15बेसिस ऑफ़ दैट इट जनरेट्स सम रिस्पांस।
- 56:21अब ये जो वेक्टर डेटाबेस होता है, इट इज़
- 56:23डिफरेंट फ्रॉम नॉर्मल डेटाबेस बिकॉज़ इट
- 56:26हैज़ दी एबिलिटी टू परफॉर्म सिमेंटिक सर्च।
- 56:30सिमेंटिक सर्च का मतलब होता है मीनिंग
- 56:32बेस्ड सर्च। मीनिंग बेस्ड सर्च कहने का
- 56:34मतलब है लेट्स सपोज माय क्वेरी इज़ दैट
- 56:36लेट्स सपोज वी हैव एन ई-कॉमर्स वेबसाइट
- 56:38लाइक Flipkart और Amazon जिसके ऊपर कोई
- 56:40यूजर आता है एंड द यूजर सर्चेस फॉर जॉगिंग
- 56:43शूज़। यूजर ने जॉगिंग शूज़ के लिए सर्च
- 56:46किया। अब नॉर्मल डेटाबेस के अंदर अगर किसी
- 56:48भी एलएलएम को या हम भी अगर सर्च करेंगे तो
- 56:51नॉर्मल डेटाबेस में हम इन कीवर्ड्स को
- 56:53सर्च करेंगे कि जॉगिंग कीवर्ड एक्सिस्ट
- 56:55करता है क्या? शूज कीवर्ड एक्सिस्ट करता
- 56:57है क्या? और लेट्स सपोज़ हमारे प्रोडक्ट
- 56:58सेक्शन के अंदर वी हैव अ प्रोडक्ट कॉल्ड
- 57:02NKI
- 57:03लाइट वेट
- 57:06फुटवेयर। तो इस तरीके का हमारे पास कोई
- 57:10प्रोडक्ट है। अब इस प्रोडक्ट के अंदर ना
- 57:12तो जॉगिंग वर्ड आता है ना शूज वर्ड आता
- 57:14है। तो नॉर्मल कोई भी डेटाबेस के अंदर
- 57:16सर्च होगा इट्स गोइंग टू इग्नोर दिस
- 57:18प्रोडक्ट। वेयर ऐज़ वी एज़ ह्यूमंस नो दैट
- 57:20दिस माइट बी रेलेवेंट फॉर दिस पर्टिकुलर
- 57:22क्वेरी। तो, यह जो इंपॉर्टेंट मीनिंग है
- 57:24जो ह्यूमन जजमेंट के अंदर एग्ज़िस्ट करता
- 57:26है, पर नॉर्मल डेटाबेस के अंदर एग्ज़िस्ट
- 57:28नहीं करता। इसको हम वेक्टर डेटाबेस के
- 57:29थ्रू इंप्लीमेंट कर सकते हैं। सिमेंटिक
- 57:31सर्च कहने का मतलब है मीनिंग बेस्ड सर्च।
- 57:33मतलब एक वेक्टर डेटाबेस डिटेक्ट कर सकता
- 57:35है कि जॉगिंग शूज के अंदर शूज। एंड यहां
- 57:38पर फुटवेयर का जो मीनिंग है, इट्स ऑलमोस्ट
- 57:41द सेम। सो, इट्स गोइंग टू गिव दिस ऐज़ अ
- 57:44रेलेवेंट रिजल्ट। नॉर्मल डेटाबेस इसको
- 57:46रेलेवेंट रिजल्ट की तरह नहीं भेजता। जबकि
- 57:48वेक्टर डेटाबेस इसको एज अ रेलेवेंट रिजल्ट
- 57:51की तरह सेंड करेगा बैक टू द एलएलएम। नाउ
- 57:53हाउ डज़ इट वर्क? जो भी हमारे
- 57:55डिफरेंट-डिफरेंट डॉक्यूमेंट्स होते हैं
- 57:57जिनको हमें स्टोर करना होता है इन द
- 57:59डेटाबेस इन द वेक्टर डेटाबेस। लेट्स सपोज़
- 58:01दीज़ आर माय डॉक्यूमेंट्स। तो ये जो
- 58:03डॉक्यूमेंट्स हैं, ये डायरेक्टली वेक्टर
- 58:05डीबी के अंदर जाकर स्टोर नहीं होते। सबसे
- 58:07पहले इन डॉक्यूमेंट्स को हम चंक्स के अंदर
- 58:09डिवाइड करते हैं। मतलब पार्ट्स के अंदर
- 58:11डिवाइड करते हैं। व्हिच इज़ कॉल्ड अ चंकिंग
- 58:13प्रोसेस। एंड एक बार हमारे पास डिफरेंट
- 58:15चंक्स आ जाते हैं। उसके बाद इन चंक्स को
- 58:17भी हम कन्वर्ट करते हैं टू वेक्टर
- 58:19एंबेडिंग्स। जैसे एलएलएम के अंदर फीड होने
- 58:23से पहले हमारी क्वेरी की वेक्टर
- 58:24एंबेडिंग्स क्रिएट होती हैं। वैसे ही
- 58:25एलएलएम इनपुट को प्रोसेस कर पाएगा। दैट वी
- 58:27हैव ऑलरेडी लर्नड। वैसे ही ये जो
- 58:30डॉक्यूमेंट्स हमारे वेक्टर डीबी के अंदर
- 58:32ऐड होते हैं। उसे पहले हम वेक्टर
- 58:34एंबेडिंग्स की फॉर्म में स्टोर करते हैं।
- 58:37एंड द ओरिजिनल डॉक्यूमेंट चंक्स प्लस द
- 58:41वेक्टर एंबेडिंग्स। देन दे आर स्टर्ड इंटू
- 58:44दिस वेक्टर डेटाबेस। दैट इज़ व्हाई इट इज़
- 58:46कॉल्ड अ वेक्टर डेटाबेस। बिकॉज़ इट इज़
- 58:49ऑल्सो स्टोरिंग द वेक्टर एंबेडिंग्स फॉर
- 58:51एव्री पर्टिकुलर डॉक्यूमेंट चंक। एंड उसके
- 58:54बाद क्वेरी के बेसिस पर जो भी रेलेवेंट
- 58:55चंक्स होते हैं वो हमारा वेक्टर डेटाबेस
- 58:57एलएलएम को दे देता है टू जनरेट अ बेटर
- 58:59रिस्पांस। तो वी हैव अ लॉट ऑफ़ पॉपुलर
- 59:01वेक्टर डेटाबेस दैट ऑलरेडी एग्ज़िस्ट फॉर
- 59:03अस। जैसे पाइनको हो गया। क्रोमा इज़ रियली
- 59:07पॉपुलर। वी हैव फ़ॉर अस। तो मल्टीपल वेक्टर
- 59:10डेटाबेस हैं जिनको यूज़ किया जा सकता है टू
- 59:12इंप्लीमेंट द रैक पाइपलाइन। एंड उसके साथ
- 59:14में वी हैव डिफरेंट इंडेक्सिंग
- 59:15एल्गोरिदम्स टू लाइक हायरार्किकल नेविगेबल
- 59:18स्मॉल वर्ल्ड जिनको हम यूज़ कर सकते हैं।
- 59:20एंड द नेक्स्ट कॉन्सेप्ट इज़ अ फ्यू शॉर्ट
- 59:22प्र्पों्टिंग। नाउ दिस इज़ अ प्र्पों्टिंग
- 59:24प्रोसेस व्हिच कैन इंप्रूव द क्वालिटी ऑफ़
- 59:26रिस्पॉन्सेस। फ्यू शॉर्ट प्र्पों्टिंग का
- 59:28क्या मतलब है? जब भी वी सेंड द एलएलएम सम
- 59:31क्वेरी या कुछ प्र्प्ट है जो हम अपने
- 59:34एलएलएम को सेंड करते हैं। तो व्हाट कैन वी
- 59:37डू इस प्र्प्ट के साथ वी कैन इंक्लूड सम
- 59:40रेलेवेंट एग्जांपल्स फ्यू रेलेवेंट
- 59:43एग्जांपल्स ऑफ़ द काइंड ऑफ़ रिस्पांस दैट वी
- 59:45वांट द एलएलएम टू गिव टू अस। एंड उसके
- 59:47बेसिस पर जो एलएलएम का रिस्पांस है दैट इज़
- 59:50गोइंग टू बी मोर रेलेवेंट। जैसे एग्जांपल
- 59:53के लिए वी वांट द एलएलएम टू सजेस्ट सम गुड
- 59:56टीवी शोज़ टु अस। तो वी कैन गिव इट सम
- 59:58एग्जांपल्स ऑफ द टीवी शोज़ दैट वी लाइक।
- 1:00:00जैसे आई कैन टेल इट आई वाच द थ्री बॉडी
- 1:00:02प्रॉब्लम। आई वाच डार्क, आई वाच ड्रिकन
- 1:00:04व्हाटी। सो सजेस्ट सिमिलर टीवी शोज़ टू मी।
- 1:00:06तो अब एलएलएम क्या करेगा? उन एग्जांपल से
- 1:00:08भी कुछ पैटर्न्स निकालेगा एंड इट्स गोइंग
- 1:00:09टू सजेस्ट समय शोज़ टू मी। अब जैसे फ्यू
- 1:00:12शॉर्ट प्र्पों्टिंग होता है वैसे ही वी
- 1:00:14हैव समथिंग कॉल्ड ज़ीरो शॉर्ट
- 1:00:16प्र्पों्टिंग। जिसका मतलब है वी गिव नो
- 1:00:17एग्जांपल्स। वैसे ही फ्यू शॉर्ट
- 1:00:19प्र्पों्टिंग का मतलब है वी गिव फ्यू
- 1:00:21एग्जांपल्स। एंड देयर इज़ आल्सो अ टर्म
- 1:00:23कॉल्ड मेनी शॉर्ट प्र्पों्टिंग वेयर वी
- 1:00:25गिव इट लॉट्स एंड लॉट्स ऑफ एग्जांपल्स। अब
- 1:00:27ये फ्यू शॉर्ट प्र्पों्टिंग हम अपनी
- 1:00:29रेगुलर प्र्पों्टिंग के अंदर तो यूज़ कर ही
- 1:00:30सकते हैं व्हेन वी आर यूजिंग द एआई चैट
- 1:00:32बॉट्स। प्लस ये जो टेक्निक है दिस कैन
- 1:00:34आल्सो बी अप्लाइड व्हेन वी आर बिल्डिंग
- 1:00:36रैक पाइपलाइंस या वी आर बिल्डिंग अदर एआई
- 1:00:39रिलेटेड सिस्टम्स। जैसे रैक पाइपलाइन के
- 1:00:41अंदर जो भी हमारी क्वेरी होती है वो तो हम
- 1:00:43एलएलएम को फीड करते ही हैं। उसके साथ में
- 1:00:45एलएलएम के पास क्या जाता है? रेलेवेंट
- 1:00:47चंक्स जाते हैं। मतलब जो भी हमारी क्वेरी
- 1:00:49से मैचिंग वेक्टर डेटाबेस के अंदर
- 1:00:50रेलेवेंट चंक्स ऑलरेडी स्टर्ड हैं फॉर द
- 1:00:52इंटरनल डॉक्यूमेंट्स वो जाते हैं। जिसको
- 1:00:54हम कहते हैं अपना कॉन्टेक्स्ट। ये जो
- 1:00:56चंक्स यहां से एक्सट्रैक्ट होते हैं दिस
- 1:00:58इज़ कॉल्ड द एडिशनल कॉन्टेक्स्ट व्हिच इज़
- 1:01:00पास्ड विथ द क्वेरी। इसके साथ में व्हाट
- 1:01:03वी कैन डू, वी कैन ऐड फ्यू शॉर्ट
- 1:01:05प्र्पिंग। फ्यू शॉर्ट प्र्टिंग के अंदर जो
- 1:01:07भी हमें रिस्पांस चाहिए हम उससे रिलेटेड
- 1:01:09कुछ रेलेवेंट एग्जांपल्स हैं जिनको
- 1:01:10इंक्लूड कर सकते हैं। एंड देन दिस एंटायर
- 1:01:13इनपुट और दिस एंटायर प्र्प इज़ समथिंग दैट
- 1:01:16वी कैन गिव टू द एलएलएम जिससे हमारे पास
- 1:01:19जो रिस्पांस की क्वालिटी है वो काफी बेटर
- 1:01:21आएगी। सो दैट इज़ हाउ वी यूज़ फ्यू शॉर्ट
- 1:01:23प्र्पों्टिंग इन द इंजीनियरिंग प्रोसेस।
- 1:01:25वी कैन आल्सो कॉल इट इन कॉन्टेक्स्ट
- 1:01:26प्रम्पटिंग ऑर एग्जांपल बेस्ड
- 1:01:28प्रॉपर्टिंग। नाउ द नेक्स्ट कॉन्सेप्ट दैट
- 1:01:29वी गोइंग टु अंडरस्टैंड इज़ आल्सो अ पॉपुलर
- 1:01:31कॉन्सेप्ट व्हिच इज़ एमसीपी। दैट इज मॉडल
- 1:01:34कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल। अब अभी तक वी हैड
- 1:01:37आवर एलएलएम
- 1:01:39एंड इस एलएलएम को इफ वी वर गिविंग इट सम
- 1:01:42क्वेरी उसके बेसिस पे इट जनरेटेड सम
- 1:01:45रिस्पांस फॉर अस। अब इस एलएलएम को अगर
- 1:01:47हमें कुछ इंटरनल डॉक्यूमेंट्स की एक्सेस
- 1:01:49देनी है तो वी नो कि वी कैन यूज़ अ रैक
- 1:01:51पाइपलाइन गिव इट एक्सेस टू सम वेक्टर
- 1:01:53डेटाबेस विथ सम रेलेवेंट चंक्स एंड वेक्टर
- 1:01:55एंबेडिंग्स। तो ये प्रोसेस हमारे लिए
- 1:01:57सॉर्टेड आउट है। नाउ व्हाट इफ दिस एलएलएम
- 1:02:00रिक्वायरर्स एक्सेस टू सम एक्सटर्नल
- 1:02:02रिसोर्स और सम एक्सटर्नल टूल और सम
- 1:02:04एक्सटर्नल वेबसाइट। जैसे इस एलएलएम को अगर
- 1:02:07गेट पर जाकर किसी रेपोजिटरी पर कोड को
- 1:02:09एक्सेस करना हो तो या फिर किसी कस्टमर की
- 1:02:11क्वेरी को रिज़ॉल्व करने के लिए इट नीड्स
- 1:02:13टू एक्सेस द सपोर्ट टिकट ऑन अ प्लेटफार्म
- 1:02:15लाइक Zen desk और फ्रेश वर्क्स। तो किस
- 1:02:18तरीके से हम वो पूरा सेटअप करेंगे? वहां
- 1:02:20पर हमारे पास एमसीपी का कांसेप्ट आता है।
- 1:02:22एमसीपी इज़ अ प्रोटोकॉल। प्रोटोकॉल इज़ अ वे
- 1:02:25टू कम्युनिकेट विद ईच अदर। तो एमसीपी एक
- 1:02:27प्रोटोकॉल है जो डिफाइन करती है कि किसी
- 1:02:30भी मॉडल को एडिशनल एक्सटर्नल कॉन्टेक्स्ट
- 1:02:33कैसे मिलेगा। जैसे एग्जांपल के लिए लेट्स
- 1:02:35सपोज़ एलएलएम नीड्स टू गेट सम डेटा फ्रॉम अ
- 1:02:37गटब रपोज़िटरी। तो इंस्टेड ऑफ़ दिस यूजुअल
- 1:02:40सेटअप, हम क्या कर सकते हैं? वी कैन ऐड एन
- 1:02:43एमसीपी क्लाइंट हियर। हम यहां पर एक
- 1:02:46एमसीपी क्लाइंट को
- 1:02:50एज एन इंटरफेस ऐड कर सकते हैं। एंड यह
- 1:02:52एमसीपी क्लाइंट क्या करेगा? इसका काम है
- 1:02:55डायरेक्टली किसी भी क्वेरी को एलएलएम को
- 1:02:56फॉरवर्ड करना। पर एलएलएम जज करेगा कि इट
- 1:02:59नीड्स सम डेटा फ्रॉम गिट। अब वो डेटा उसे
- 1:03:02गीब से चाहिए। तो वो एमसीपी क्लाइंट को
- 1:03:05बोलेगा टू कनेक्ट टू द एमसीपी
- 1:03:08सर्वर्स
- 1:03:09ऑफ़ GitHub।
- 1:03:11एंड दिस इज़ बेसिकली द एमसीपी सर्वर फॉर
- 1:03:14गेट जहां से इट्स गोइंग टू फच द रेलेवेंट
- 1:03:18इनेशन एंड फिर वो क्वेरी के साथ हमारे
- 1:03:21एलएलएम को पास ऑन होगी जिससे एलएलएम अब
- 1:03:23बेटर रिस्पांस जनरेट कर पाएगा। सो दिस इज़
- 1:03:26दी एंटायर फ्लो जिसके अंदर हमारे पास एक
- 1:03:28एमसीपी क्लाइंट होता है। वी हैव एन एमसीपी
- 1:03:30सर्वर एंड एमसीपी इज़ जस्ट अ प्रोटोकॉल दैट
- 1:03:33डिफाइन हाउ दिस एंटायर फ्लो इज़ गोइंग टू
- 1:03:36टेक प्लेस। लेट्स टेक अनदर एग्जांपल टू
- 1:03:38अंडरस्टैंड दिस। लेट्स सपोज हमारे पास कोई
- 1:03:40यूजर है जो क्वेरी करता है या ये एक कंपनी
- 1:03:43का इंटरनल एआई चैटबॉट है जिसके साथ सम
- 1:03:45मैनेजर इज़ हैविंग अ कन्वर्सेशन एंड द
- 1:03:47मैनेजर आस्क कि देयर इज़ अ कस्टमर रोहित तो
- 1:03:50रोहित के पैकेज का क्या स्टेटस है पैकेज
- 1:03:54का क्या स्टेटस है प्लस वाज़ हिज़ टिकट
- 1:03:57रेल्वड ऑ नॉट कोई कस्टमर सपोर्ट टिकट होगी
- 1:04:00जो रोहित कस्टमर ने क्रिएट की होगी इज़ इट
- 1:04:03रेड्वल्वड ऑ नॉट तो ये जो पूरी की पूरी
- 1:04:05क्वेरी है यह एमसीपी क्लाइंट के थ्रू
- 1:04:08हमारे एलएलएम को पास ऑन होगी। नाउ द
- 1:04:10एलएलएम इट डज़ नॉट हैव डायरेक्ट एक्सेस टू
- 1:04:12द प्लेटफार्म जहां पर पैकेज का स्टेटस है
- 1:04:15किसी भी कस्टमर के। एंड इट आल्सो डज़ नॉट
- 1:04:17हैव डायरेक्ट एक्सेस टू व्हेयर द कस्टमर
- 1:04:20सपोर्ट टिकट्स आर क्रिएटेड। सो द एलएलएम
- 1:04:22इन एन ओवर सिंपलीफाइड वे इट आस्क्क द
- 1:04:24एमसीपी क्लाइंट टू गेट बोथ ऑफ़ दीज़ पीसेस
- 1:04:26ऑफ़ इनफेशन। तो एमसीपी क्लाइंट क्या करेगा?
- 1:04:29सबसे पहले तो लेट्स सपोज़ जो वेबसाइट है इट
- 1:04:32इज़ सेट अप ऑन शॉपिफाई। तो Shopifi के
- 1:04:34एमसीपी सर्वर के पास जाएगा। इट्स गोइंग टू
- 1:04:36गेट द रेलेवेंट इनफेशन। कि जो भी हमारे
- 1:04:38एमसीपी सर्वर्स हैं, वी कैन इमेजिन देम
- 1:04:40लाइक रैपर्स अराउंड द कंपनीज़ डेटाबेस। तो
- 1:04:43यहां से हमारे पास इनेशन आएगी एमसीपी
- 1:04:44क्लाइंट के पास कि रोहित का जो पैकेज है
- 1:04:46वो ओरिजिनली गलत जगह डिलीवर हो गया था। बट
- 1:04:48नाउ वी हैव डिलीवरर्ड इट बैक टू द राइट
- 1:04:50प्लेस। उसके साथ में टिकट के लिए यह क्या
- 1:04:53करेगा? लेट्स सपोज़ दिस कंपनी इज़ यूजिंग
- 1:04:55फ्रेश वर्क्स टू ज़ॉल्व देयर कस्टमर सपोर्ट
- 1:04:57क्वेरीज़। तो यहां से फ्रेश वर्क्स पे पता
- 1:04:59चलेगा कि रोहित का टिकट ऑलरेडी रॉल्व हो
- 1:05:01चुका है। तो यहां से भी एमसीपी सर्वर जो
- 1:05:03रेलेवेंट इनफेशन है वो क्लाइंट को पास ऑन
- 1:05:05कर देगा। एंड इट्स गोइंग टू पास ऑन दैट
- 1:05:07रेलेवेंट इनफेशन टू द एलएलएम हियर। अब
- 1:05:10एलएलएम बेस्ड अपॉन बोथ ऑफ़ दीज़ पीसेस ऑफ़
- 1:05:12इनफेशन एक बेटर रिस्पांस है जिसको जनरेट
- 1:05:16कर पाएगा फॉर द यूजर हु इज़ आस्किंग दिस
- 1:05:19क्वेरी। तो इस तरीके से एमसीपी मॉडल
- 1:05:21कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल क्या करता है?
- 1:05:23हमारे एलएलएम को बेटर कॉन्टेक्स्ट या मोर
- 1:05:26कॉन्टेक्स्ट प्रोवाइड करने में हेल्प करता
- 1:05:28है। नाउ इफ यू वांट अ डेडिकेटेड
- 1:05:29ट्यूटोरियल और अ सेशन टू डाइव डीप इनटू द
- 1:05:31कॉन्सेप्ट ऑफ एमसीबी यू कैन लेट मी नो इन
- 1:05:33द कमेंट्स। एंड अभी तक जितने भी
- 1:05:35कॉनंसेप्ट्स को रिलेटेड टू कॉन्टेक्स्ट
- 1:05:37हमने डिस्कस किया है इन सबको जब हम कंबाइन
- 1:05:39करते हैं तो हमारे पास कॉनंसेप्ट आता है
- 1:05:41ऑफ कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग। व्हाट इज़
- 1:05:43कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग? जो भी हमारा
- 1:05:45एलएलएम है हमने नोटिस किया होगा कि चाहे
- 1:05:47हम रैक पाइपलाइन की बात करें चाहे हम
- 1:05:49एमसीपी की बात करें ऑल द टाइम वी आर
- 1:05:52प्रोवाइडिंग दिस एलएलएम विद सम एडिशनल
- 1:05:55कॉन्टेक्स्ट मतलब एलएलएम को अलोंग विद द
- 1:05:58क्वेरी हम काफी सारी एक्स्ट्रा रेलेवेंट
- 1:06:00इनेशन देने की कोशिश कर रहे हैं ताकि
- 1:06:03एलएलएम का जो रिस्पांस है उसको हम बेटर
- 1:06:05बना सकें। सो द प्रोसेस ऑफ़ डिज़िंग एंड
- 1:06:07मैनेजिंग दिस एडिशनल कॉन्टेक्स्ट, दिस
- 1:06:09एडिशनल इनेशन व्हिच इज़ पास्ड ऑन टू द
- 1:06:11एलएलएम अलोंग विथ द क्वेरी, दिस इज़ कॉल्ड
- 1:06:14कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग। अब इस
- 1:06:16कॉन्टेक्स्ट के अंदर हम क्या-क्या एडिशनल
- 1:06:17चीजें पास ऑन करते हैं? जैसे सबसे पहले
- 1:06:19अगर हम रैक सिस्टम्स का एग्जांपल लें, तो
- 1:06:21रैग सिस्टम्स के अंदर जो हमारे एक्स्ट्रा
- 1:06:24रेलेवेंट डॉक्यूमेंट्स होते हैं जिनको हम
- 1:06:25वेक्टर डेटाबेस से रिट्रीव करते हैं। दैट
- 1:06:27इज़ पार्ट ऑफ़ कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग।
- 1:06:29उसके साथ में व्हेन वी यूज़ फ्यू शॉर्ट
- 1:06:31प्र्प्टिंग। तो फ्यू शॉर्ट प्र्टिंग के
- 1:06:33अंदर जब हम एग्जांपल्स को इंक्लूड करते
- 1:06:35हैं तो दैट इज आल्सो पार्ट ऑफ कॉन्टेक्स्ट
- 1:06:37इंजीनियरिंग। क्योंकि वो जो रेलेवेंट
- 1:06:38एग्जांपल्स हैं वो एलएलएम के रिस्पांस को
- 1:06:40बेटर बनाएंगे। उसकी क्वालिटी को इंप्रूव
- 1:06:42करेंगे। प्लस इफ वी टॉक अबाउट एमसीपी तो
- 1:06:45एमसीपी से जो हम एडिशनल रिसोर्सेज एडिशनल
- 1:06:47इनफार्मेशन लेकर आते हैं दैट इज़ आल्सो
- 1:06:48पार्ट ऑफ़ कॉन्टेक्स्ट इंजीनियरिंग। प्लस
- 1:06:50इसके साथ में हमारी जो भी यूजर के
- 1:06:52प्रेफरेंसेस होते हैं जो हम स्टोर करवाते
- 1:06:55हैं। यूजर प्रेफरेंसेस कहने का मतलब है इफ
- 1:06:57देयर इज़ अ यूजर हु इज़ यूजिंग द एलएलएम और
- 1:06:59इज़ यूजिंग द एआई चैटबॉट और द डिफरेंट एआई
- 1:07:02टूल्स फॉर प्रोड्यूसिंग कोड। तो अब किसी
- 1:07:04यूजर का प्रेफरेंस हो सकता है कि हर बार
- 1:07:06उन्हें कोड जावा के अंदर ही चाहिए। या हर
- 1:07:08बार कोड पाइथन के अंदर ही चाहिए। नाउ इफ
- 1:07:10दिस इनेशन इज़ फेड इंटू द एलएलएम तो यह
- 1:07:13हमारा जो आउटपुट आएगा उसको बेटर बनाएगा
- 1:07:15क्योंकि बाय डिफ़ॉल्ट जो एलएलएम है वह कोड
- 1:07:17को जावा के अंदर या पाइथन के अंदर ही
- 1:07:19प्रोड्यूस करेगा या कोई अगर यूजर है जिसको
- 1:07:21हर बार आउटपुट फ्रेंच के अंदर ही चाहिए तो
- 1:07:23ये इनेशन जब एलएलएम के पास होगी इन द
- 1:07:26फॉर्म ऑफ़ कॉन्टेक्स्ट देन द एलएलएम इज़
- 1:07:27ऑलवेज गोइंग टू गिव द रिस्पांस इन फ्रेंच
- 1:07:29व्हिच इज़ गोइंग टू मेक इट अ मोर क्वालिटी
- 1:07:31रिस्पांस। प्लस इसी के अंदर हमारी
- 1:07:33कॉन्वर्सेशन हिस्ट्री आ जाती है कि पहले
- 1:07:36क्या पास्ट कन्वर्सेशंस रही हैं एलएलएम के
- 1:07:38साथ जिससे एलएलएम काफी और एक्स्ट्रा इनेशन
- 1:07:41उस पर्टिकुलर यूजर के बारे में
- 1:07:42एक्सट्रैक्ट कर सकता है। प्लस इसी में
- 1:07:45हमारे डिफरेंट इंस्ट्रक्शंस आ जाते हैं
- 1:07:47व्हिच आर स्पेसिफिकली डेवलपर इंस्ट्रशंस।
- 1:07:49जैसे डेवलपर कोई पर्टिकुलर इंस्ट्रक्शन है
- 1:07:51जो एलएलएम को सेंड कर सकता है कि हर बार
- 1:07:53जो रिस्पांस आए वो कंपनी पॉलिसीज के साथ
- 1:07:56अलाइन होकर ही आना चाहिए। नाउ दिस इज़ अ
- 1:07:58स्पेसिफिक इंस्ट्रक्शन जो हमें बेटर
- 1:08:00रिस्पांस मतलब जो हमारा डिजायरेबल
- 1:08:02रिस्पांस है वो क्रिएट करने में हेल्प
- 1:08:04करेगा। एंड इसी के साथ में हमारे पास
- 1:08:06कॉन्टेक्स्ट समराइजेशन आ जाता है।
- 1:08:08कॉन्टेक्स्ट समराइजेशन कहने का मतलब है कि
- 1:08:11इफ देयर इज़ अ लॉन्ग कॉन्वर्सेशन दैट
- 1:08:13हैपेंस। हर बार हम नहीं चाहते कि वो
- 1:08:15पुरानी कॉन्वर्सेशन की हर एक डिफरेंट
- 1:08:18मैसेज सेपरेटली हमारे एलएलएम के
- 1:08:19कॉन्टेक्स्ट में जाए। बिकॉज़ एलएलएम हैज़ अ
- 1:08:22फिक्स्ड कॉन्टेक्स्ट विंडो एंड वो फिल अप
- 1:08:25करने का कभी भी हमारा ऑब्जेक्टिव नहीं
- 1:08:27होता। हम चाहते हैं कॉन्टेक्स्ट विंडो
- 1:08:28ज्यादा से ज्यादा फिल अप ना हो। तो एक
- 1:08:30बेटर तरीका मैसेजेस को प्रोसेस करने का या
- 1:08:32मैसेजेस को कॉन्टेक्स्ट के अंदर पास ऑन
- 1:08:33करने का होता है कि हम पुरानी
- 1:08:35कॉन्वर्सेशंस में जो काफी पुरानी
- 1:08:36कॉन्वर्सेशन हो गई है, मैसेज हो गए हैं
- 1:08:38उसको उसी कॉन्वर्सेशन के अंदर समराइज़ कर
- 1:08:40दें। मतलब हम रीसेंट हो सकता है फाइव टू
- 1:08:4210 मैसेजेस को एज़ इट इज़ कॉन्टेक्स्ट के
- 1:08:44अंदर सेंड करें। पर उससे पुराने जितने भी
- 1:08:46मैसेजेस हैं उनको हम फाइव टू 10 लाइंस के
- 1:08:48अंदर समराइज़ करके भेज दें। एज़ कॉन्टेक्स्ट
- 1:08:50का पार्ट। सो दीज़ आर मल्टीपल थिंग्स दैट
- 1:08:52वी कैन यूज़ टू इंप्लीमेंट कॉन्टेक्स्ट
- 1:08:54इंजीनियरिंग इन आवर एंटायर एलएलएम फ्लो।
- 1:08:56नाउ द नेक्स्ट कॉन्सेप्ट दैट वी हैव इज़
- 1:08:58मल्टीमोडल मॉडल। ये ऐसे मॉडल्स होते हैं
- 1:09:01व्हिच आर कैपेबल ऑफ़ प्रोसेसिंग डेटा इन
- 1:09:04मल्टीपल फॉर्म्स। जैसे ओरिजिनली इफ यू
- 1:09:06रिमेंबर जो ओरिजिनल चैट जीपीटी रिलीज़ हुआ
- 1:09:09था इन 2022 इट कुड ओनली प्रोसेस टेक्स्ट।
- 1:09:13उसके अंदर हम इमेजज़ को अपलोड नहीं कर सकते
- 1:09:15थे। बिकॉज़ इट हैड अ सिंगल मॉडेलिटी व्हिच
- 1:09:18वाज़ टेक्स्ट बेस्ड डेटा। जब हम मल्टीमोडल
- 1:09:21मॉडल्स की बात करते हैं तो दीज़ आर मॉडल्स
- 1:09:24व्हिच आर कैपेबल ऑफ प्रोसेसिंग डिफरेंट
- 1:09:27फॉर्म्स ऑफ़ डेटा। डिफरेंट फॉर्म्स कहने का
- 1:09:30मतलब है ये टेक्स्ट डेटा को भी प्रोसेस कर
- 1:09:32सकते हैं या इनफैक्ट जनरेट कर सकते हैं।
- 1:09:34ये इमेजज़ को भी अंडरस्टैंड जनरेट कर सकते
- 1:09:37हैं। ये वीडियोस पर भी वर्क कर सकते हैं
- 1:09:40या ऑडियोज़ पर वर्क कर सकते हैं। तो इस
- 1:09:42तरीके से वी हैव डिफरेंट फॉर्म्स ऑफ़ डेटा
- 1:09:43दैट द मॉडल कैन वर्क विथ। अब आज की डेट
- 1:09:45में मोस्ट ऑफ़ द पॉपुलर एलएलएम्स दैट वी
- 1:09:47वर्क विथ टुडे आर एक्चुअली मल्टीमोडल
- 1:09:49मॉडल्स। तो ओरिजिनल जो चार्ट जीपीटी
- 1:09:51एप्लीकेशन थी उससे हम सिर्फ टेक्स्ट लिखवा
- 1:09:53सकते थे। लेकिन आज की डेट में चार्ज
- 1:09:55जीपीटी हमारे लिए मीम्स भी क्रिएट कर सकता
- 1:09:56है। इनफैक्ट द मीम दैट आई शोल्ड यू
- 1:09:58अर्लियर वाज़ एडिटेड विथ द हेल्प ऑफ़ चार्ट
- 1:10:00जीपीटी। उसके साथ में हमारे पास डिफरेंट
- 1:10:03आज की डेट में एलएलएम्स हैं जो साथ में
- 1:10:05वीडियोस के साथ भी वर्क कर सकते हैं।
- 1:10:06हमारे लिए डिफरेंट-डिफरेंट इमेजज़ को
- 1:10:08प्रोड्यूस कर सकते हैं। हमारे लिए ऑडियोज़
- 1:10:10को भी प्रोड्यूस कर सकते हैं अलोंग विद द
- 1:10:13टेक्स्ट। तो टुडे वी हैव अ लॉट ऑफ मल्टी
- 1:10:16मॉडल मॉडल्स व्हिच आर अवेलेबल टू अस। जब
- 1:10:18भी हम मॉडल वर्ड यूज करते हैं या मॉडेलिटी
- 1:10:20वर्ड यूज़ करते हैं वी आर टॉकिंग अबाउट
- 1:10:22डिफरेंट फॉर्म्स ऑफ डेटा जिसके अंदर हमारा
- 1:10:25डेटा एग्ज़िस्ट कर सकता है। अब डेफिनेटली
- 1:10:27अगर हम इस तरीके के काम हैं जो एलएलएम से
- 1:10:30परफॉर्म कराना चाहते हैं जो काफी मैथ हैवी
- 1:10:32वर्क हैं या टेक्स्ट हैवी वर्क हैं। उसके
- 1:10:36लिए वी शुड प्रेफर कि हम सिंगल मॉडल को
- 1:10:39यूज़ करें। बिकॉज़ दैट इज़ गोइंग टू बी चीपर
- 1:10:40एंड फास्टर फॉर अस। बट अगर हम ऐसे काम
- 1:10:42अपने मॉडल से कराना चाहते हैं जहां पर वी
- 1:10:44नीड सम ग्राफिक्स, वी नीड सम इमेजेस, वी
- 1:10:46नीड डिफरेंट मॉडेलिटीज़ तो वहां पर इट्स
- 1:10:48बेटर टू यूज़ दीज़ पर्टिकुलर मॉडल्स।
- 1:10:52नेक्स्ट लेट्स टॉक अबाउट अनदर इंपॉर्टेंट
- 1:10:53कॉन्सेप्ट व्हिच इज़ एन एआई एजेंट और एन
- 1:10:56एजेंट जिसकी हम एजेंटिक एआई के
- 1:10:58कॉन्टेक्स्ट में बात करते हैं। नाउ इफ वी
- 1:11:00टॉक अबाउट अ ट्रेडिशनल एलएलएम। जनरली
- 1:11:03एलएलएम्स डू नॉट परफॉर्म सम एक्शंस फॉर
- 1:11:06अस। ये सिंपली क्या करते हैं? कुछ क्वेरी
- 1:11:08लेते हैं एंड उसके बेसिस पर दे जनरेट सम
- 1:11:12रिस्पांस फॉर अस। बट समटाइ्स वी नीड द
- 1:11:15एलएलएम टू परफॉर्म सम एक्शन। हम चाहते हैं
- 1:11:17कि वो कोई एक्शन परफॉर्म करें। जैसे किसी
- 1:11:18कोड को गेटब के ऊपर जाकर पुश करना, किसी
- 1:11:20कमिट को क्रिएट करना। तो इस तरीके के जो
- 1:11:23एकशंस हैं वो सिंपल एलएलएम से परफॉर्म
- 1:11:25नहीं हो सकते। तभी वहां पर नीड आती है ऑफ़
- 1:11:28एआई एजेंट्स। एआई एजेंट्स क्या होते हैं?
- 1:11:30एआई एजेंट्स को हम समझ सकते हैं एज अ
- 1:11:33प्रोसेस और एज अ सिस्टम। एंड इस सिस्टम को
- 1:11:36हम क्या देते हैं? हम इन सिस्टम को कुछ
- 1:11:38गोल्स या कुछ टास्क देते हैं। एंड दीज़
- 1:11:41सिस्टम्स दे आल्सो हैव एक्सेस टू सम
- 1:11:44एडिशनल टूल्स प्लस सम एडिशनल रिसोर्सेज
- 1:11:47एंड उनके बेसिस पर दे आर एबल टू
- 1:11:49एग्जीक्यूट टास्क फॉर अस। नाउ दिस इज़ अ
- 1:11:52कैपेबिलिटी जो हमारे सिंपल एलएलएम्स के
- 1:11:54पास नहीं होती। मतलब सिंपल एलएलएम्स
- 1:11:56एक्सटर्नल टूल्स को जाकर एक्सेस नहीं कर
- 1:11:58सकते। टास्क को एग्जीक्यूट नहीं कर सकते।
- 1:12:00बट दैट इज़ अ कैपेबिलिटी दैट एआई एजेंट्स
- 1:12:02हैव। सो दे कैन एग्जीक्यूट टास्क फॉर अस।
- 1:12:04इनफैक्ट ये जो पूरा एजेंटिक एआई का सिस्टम
- 1:12:07होता है ये जो पूरे एआई एजेंट्स होते हैं
- 1:12:09इनका जो ब्रेन बिहाइंड द ऑपरेशन होता है
- 1:12:11जो एग्जैक्ट ब्रेन का काम करता है दैट इज
- 1:12:15एलएलएम तो ऐसा नहीं है कि एलएलएम्स यूज़फुल
- 1:12:18नहीं है एलएलएम्स ही ब्रेन का या पूरा जो
- 1:12:20वो गोल्स को डिफरेंट टास्क के अंदर ब्रेक
- 1:12:23डाउन करना टास्क को सबटास्क के अंदर ब्रेक
- 1:12:25डाउन करना डिपेंडिंग अपॉन द
- 1:12:26कॉम्प्लेक्सिटी ऑफ़ द टास्क क्या एक सिंगल
- 1:12:28इंडिविजुअल एजेंट काम कर कर पाएगा या फिर
- 1:12:30वी नीड टू क्रिएट सब एजेंट्स ये सारी जो
- 1:12:33बिहाइंड द सीन रीज़ रीजनिंग होती है, लॉजिक
- 1:12:35होता है। ये पूरा का पूरा काम हमारे
- 1:12:37एलएलएम्स करते हैं। एंड एलएलएम के अराउंड
- 1:12:40ये जो पूरा सिस्टम बनता है, इसको हम एक
- 1:12:43एआई एजेंट कह देते हैं। जैसे लेट्स टेक एन
- 1:12:45एग्जांपल ऑफ़ एन एजेंटिक एआई सेटअप। यहां
- 1:12:47पर वी हैव क्रिएटेड एन एi इंजीनियरिंग
- 1:12:49एजेंट। जिसको यूजर क्या कर सकता है? यूजर
- 1:12:52डायरेक्टली कुछ क्वेरीज़ दे सकता है, कुछ
- 1:12:53टास्क दे सकता है, कुछ गोल्स दे सकता है।
- 1:12:55नाउ दिस एआई इंजीनियरिंग एजेंट इज़ यूजिंग
- 1:12:58द एमसीपी सेटअप। जिसमें इट इज़ एबल टू पुश
- 1:13:01कोड टू क्रिएट कमिट्स टू क्रिएट पीआर्स
- 1:13:03एंड यह गिट हब के साथ इंटरेक्ट कर सकता
- 1:13:05है। साथ में इट कैन रिसॉल्व टिकट्स ऑन
- 1:13:07जीरा एंड इट कैन आल्सो अपडेट और
- 1:13:09कम्यूनिकेट विद द टीम मेंबर्स ऑन स्लैक।
- 1:13:11तो डिफरेंट कैपेबिलिटीज़ है जो इस सिंगल
- 1:13:14एआई इंजीनियरिंग एजेंट के पास अवेलेबल है।
- 1:13:16एंड द नेक्स्ट कांसेप्ट इज़ चेन ऑफ़ थॉट।
- 1:13:18हमारे पास दो केसेस होते हैं। केस वन वो
- 1:13:21केस है जिसमें अगर हमने किसी एलएलएम के
- 1:13:23साथ इंटरेक्ट किया तो बेस्ड ऑन आवर क्वेरी
- 1:13:25इट गिव्स अस अ डायरेक्ट आंसर। जैसे हो
- 1:13:28सकता है हम उसे कुछ भी बड़ी चीज कैलकुलेट
- 1:13:30करने के लिए दें और वो डायरेक्टली जस्ट
- 1:13:32हमें अपना आंसर थ्रो करके दे दे। सेकंड
- 1:13:34केस है कि जब हम एलएलएम से कोई क्वेरी
- 1:13:37पूछते हैं, कुछ उसे क्वेरी करते हैं, कोई
- 1:13:39इनपुट देते हैं, तो सबसे पहले तो इट शोज़
- 1:13:42अस इट्स थिंकिंग प्रोसेस, इट्स रीजनिंग
- 1:13:45प्रोसेस कि कैसे हमारे एलएलएम ने उस इनपुट
- 1:13:48क्वेरी को मल्टीपल स्टेप्स के अंदर
- 1:13:50ब्रेकडाउन किया। किस तरीके से एग्जैक्टली
- 1:13:52वो फाइनल आंसर तक पहुंचा। तो वो फाइनल जो
- 1:13:56पूरा प्रोसेस है आज की डेट में जो मॉडर्न
- 1:13:57एलएलएम्स हैं वो जनरली हमें वो प्रोसेस
- 1:13:59एक्सप्लेन करते हैं एंड उसके बाद दे गिव
- 1:14:02अस अ फाइनल आंसर। तो ये जो किसी भी क्वेरी
- 1:14:05को प्रोसेस करने का तरीका होता है दिस इज
- 1:14:07कॉल्ड चेन ऑफ थॉट जिसमें द एलएलएम डज़ नॉट
- 1:14:09प्रोड्यूस अ डायरेक्ट आंसर। वो पहले एक
- 1:14:11पर्टिकुलर क्वेरी को एक पर्टिकुलर टास्क
- 1:14:13को इनपुट को ब्रेक डाउन करता है इंटू
- 1:14:16रीजनिंग स्टेप्स। एंड उन स्टेप्स के बेसिस
- 1:14:18पर जो भी फाइनल आंसर आता है फिर उसे यूजर
- 1:14:21को रिटर्न करता है। तो चेन ऑफ थॉट का जो
- 1:14:22कांसेप्ट होता है वो एक एलएलएम को एक बेटर
- 1:14:25प्लानिंग के साथ एक बेटर कैलकुलेशंस करते
- 1:14:27हुए बेटर रीजनिंग के साथ एक हायर क्वालिटी
- 1:14:29रिस्पांस जनरेट करने में हेल्प करता है।
- 1:14:31प्लस ये जो कांसेप्ट है इट कैन आल्सो
- 1:14:32हेल्प एन एलएलएम टू ट्रैक द डिफरेंट
- 1:14:34डिपेंडेंसी थ्रू आउट दिस प्रोसेस। एंड
- 1:14:36उसके साथ में इट कैन आल्सो हेल्प द एलएलएम
- 1:14:38टू ब्रेक डाउन कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम्स।
- 1:14:40जैसे डीपसी की या दूसरे भी कई सारे एआई
- 1:14:42मॉडल्स हैं जिनके पास अगर कोई ज़्यादा
- 1:14:43कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम्स आएगी देन दे आर
- 1:14:45गोइंग टु हैव मोर रीज़निंग स्टेप्स टु रीच
- 1:14:48द फ़ाइनल आंसर। जबकि अगर कोई सिंपलर
- 1:14:50प्रॉब्लम आएगी देन दे आर गोइंग टू हैव लेस
- 1:14:52रीजनिंग स्टेप्स टू रीच द फाइनल आंसर।
- 1:14:54जिसके लिए हम कंट्रोल कर पाते हैं कि
- 1:14:55एलएलएम किसी भी कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम को
- 1:14:57सॉल्व करने के लिए ज्यादा रीजनिंग को यूज़
- 1:15:00कर रहा है। ज्यादा एफर्ट्स डाल रहा है एज़
- 1:15:01कंपेयर टू अ सिंपलर प्रॉब्लम। अब चेन ऑफ़
- 1:15:03थॉट से ही रिलेटेड एक और कांसेप्ट आता है
- 1:15:05ऑफ़ रीजनिंग मॉडल्स। रीजनिंग मॉडल्स वो
- 1:15:08मॉडल्स होते हैं जो अपने फाइनल आंसर को
- 1:15:10प्रोड्यूस करने से पहले अपनी प्रॉब्लम को
- 1:15:12स्टेप बाय स्टेप वर्क थ्रू कर सकते हैं।
- 1:15:14मतलब रीजनिंग के कुछ ना कुछ स्टेप्स रख
- 1:15:16सकते हैं। इंटरमीडिएट स्टेप्स जिससे फाइनल
- 1:15:18आंसर का रिस्पांस बेटर आता है। तो आज की
- 1:15:21डेट में मोस्ट ऑफ द रीजनिंग मॉडल्स आर
- 1:15:23एक्चुअली पॉपुलर एलएलएम्स लाइक जीपीटी
- 1:15:26लाइक जेमिनाई लाइक क्लॉड लाइक डीप सीक। तो
- 1:15:28ये सारे के सारे हमारे रीजनिंग मॉडल्स की
- 1:15:30कैटेगरीज में ही आते हैं। अब रीजनिंग
- 1:15:32मॉडल्स के अंदर रीजनिंग करने के मल्टीपल
- 1:15:34तरीके होते हैं। जैसे चेन ऑफ थॉट किसी
- 1:15:38मॉडल के अंदर होना इज़ वन ऑफ द वेज़ ऑफ़
- 1:15:42हैविंग रीजनिंग और इंप्लीमेंटिंग रीजनिंग
- 1:15:44इन अ मॉडल। इसके साथ में वी आल्सो हैव
- 1:15:46ट्री ऑफ़ थॉट। ट्री ऑफ़ थॉट कहने का मतलब है
- 1:15:49कि एक ट्री फॉर्मेट में हमारा जो मॉडल है
- 1:15:51वो रीजनिंग करता है। जैसे अगर उसे रीजनिंग
- 1:15:53करनी है तो इट स्टार्ट्स विद अ ब्रांच।
- 1:15:55एंड उस ब्रांच में वो आगे-आगे आगे तक
- 1:15:57जाएगा। एंड जहां पर भी देयर इज़ गोइंग टू
- 1:15:59बी अ डेड एंड इट्स गोइंग टू बैक ट्रैक
- 1:16:01रिटर्न बैक एंड देन इट्स गोइंग टू
- 1:16:03एक्सप्लोर अनदर ब्रांच। तो इस तरीके से
- 1:16:06ट्री फॉर्मेट के अंदर रीजनिंग होती है।
- 1:16:08सिमिलरली वी आल्सो हैव ग्राफ ऑफ थॉट
- 1:16:11जिसमें रीजनिंग हैपेंस व्हाई अ ग्राफ
- 1:16:12फ्लो। अब इससे पहले हमने मल्टीमॉडल मॉडल्स
- 1:16:15के बारे में बात की थी। नाउ इन मॉडर्न डे
- 1:16:18एलएलएम्स रीजनिंग मॉडल्स भी हो सकते हैं।
- 1:16:20उसके साथ में मल्टीमोडल मॉडल्स भी हो सकते
- 1:16:22हैं। जैसे चार्ट जीपीटी का एग्जांपल लें
- 1:16:24या अगर हम जेमिनाई का एग्जांपल लें तो ये
- 1:16:26दोनों रीजनिंग मॉडल्स भी हैं और मल्टीमोडल
- 1:16:29मॉडल्स भी हैं। तो एक एलएलएम लार्ज
- 1:16:31लैंग्वेज मॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल होने
- 1:16:33के साथ-साथ में रीजनिंग मॉडल भी हो सकता
- 1:16:34है, मल्टीमॉडल मॉडल भी हो सकता है। सो दीज़
- 1:16:36आर जस्ट डिफरेंट टर्म्स दैट वी हैव गिवन
- 1:16:38टू द डिफरेंट कैपेबिलिटीज़ ऑफ़ द मॉडल्स दैट
- 1:16:40एकज़िस्ट। रीजनिंग मॉडल्स के लिए हमारे पास
- 1:16:42कुछ और अल्टरनेटिव नाम भी होते हैं। जैसे
- 1:16:44इनको हम रीजनिंग लैंग्वेज मॉडल्स भी कह
- 1:16:46सकते हैं या वी कैन आल्सो कॉल देम लार्ज
- 1:16:48रीजनिंग मॉडल्स। सो देयर आर आल्सो
- 1:16:50अल्टरनेट टर्म्स फॉर दीज़। नाउ द नेक्स्ट
- 1:16:52कॉन्सेप्ट इज़ ऑफ़ अ स्मॉल लैंग्वेज मॉडल।
- 1:16:55वी हैव ऑलरेडी सीन लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स।
- 1:16:58लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स क्या करते हैं? वो
- 1:17:00लार्ज डेटा के ऊपर ट्रेंड होते हैं। जबकि
- 1:17:02स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स को जनरली हम स्मॉल
- 1:17:04लैंग्वेज मॉडल्स इसलिए कहते हैं बिकॉज़ दे
- 1:17:07हैव स्मॉलर नंबर ऑफ़ पैराटर्स। जिसकी वजह
- 1:17:11से इनके अंदर कंप्यूटेशन कम लगती है इन द
- 1:17:13इनफेरेंस प्रोसेस। दैट इज व्हाई दे आर
- 1:17:15कॉल्ड स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स। दीज़ आर मोर
- 1:17:17एफिशिएंट। जैसे वी हैव कंडक्टेड अ लॉट ऑफ़
- 1:17:20एआई रिलेटेड वर्कशॉप्स एंड ऑर्गेनाइजेशंस।
- 1:17:22एंड जनरली जो लीगल फील्ड के अंदर कंपनीज़
- 1:17:25होती हैं या मेडिकल फील्ड के अंदर कंपनीज़
- 1:17:27होती हैं या फिर फाइनेंस फील्ड के अंदर
- 1:17:29कंपनीज़ होती हैं, सीएज़ होते हैं। दे
- 1:17:31रिक्वायर मॉडल्स जिनके अंदर एक तो डेटा
- 1:17:33प्राइवेसी मेंटेन हो पाए। द ऑर्गेनाइज़ेशन
- 1:17:35कैन हैव मोर कंट्रोल ओवर देयर डेटा। एंड
- 1:17:38उसके साथ में दे कैन गेट सम सॉर्ट ऑफ
- 1:17:40स्पेशलाइज्ड मॉडल्स। तो वहां पर हम अपने
- 1:17:42स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स को यूज़ करते हैं।
- 1:17:44अब व्हाई आर वी कॉलिंग देम स्मॉल इन द
- 1:17:46कॉन्टेक्स्ट ऑफ एलएलएम्स? जैसे अगर हम एक
- 1:17:48नॉर्मल एलएलएम की बात करें तो जनरली आज की
- 1:17:50डेट में जो एलएलएम्स हमारे पास हैं उसके
- 1:17:52अंदर इफ वी लुक एट द पैरामीटर्स देन द
- 1:17:54नंबर इज़ बिटवीन थ्री टू 100 बिलियन
- 1:17:57पैरामीटर्स दैट आर नॉर्मल एलएलएम पॉपुलर
- 1:18:00एलएलएम टुडे कैन हेव। बट अगर हम स्मॉल
- 1:18:02लैंग्वेज मॉडल्स की बात करें तो इसके अंदर
- 1:18:04द नंबर ऑफ पैरामीटर्स इज जनरली लेस देन 10
- 1:18:07बिलियन। इट कुड बी 1 मिलियन, इट कुड बी
- 1:18:10100 मिलियन, इट कुड बी 400 मिलियन। कुछ भी
- 1:18:12हो सकता है बट जनरली वो जो नंबर है लेस
- 1:18:14देन 10 बिलियन की रेंज का रहता है।
- 1:18:16इनफैक्ट 7 टू 8 बिलियन इज़ द मोस्ट दे गो।
- 1:18:19बट दे फ्यूअर नंबर ऑफ़ पैरामीटर्स एंड लोअर
- 1:18:21कंपटीशन रिक्वायरमेंट। तो लार्ज लैंग्वेज
- 1:18:23मॉडल्स को हम एक जनरलिस्ट की तरह समझ सकते
- 1:18:25हैं। जबकि स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स को हम एक
- 1:18:27स्पेशलिस्ट की तरह समझ सकते हैं। जिसे हम
- 1:18:29किसी पर्टिकुलर यूज़ केस के लिए ट्रेन कर
- 1:18:31सकते हैं। बिकॉज़ दे आर आल्सो चीपर एंड दे
- 1:18:34प्रोवाइड अ हायर लेवल ऑफ़ प्राइवेसी एज़
- 1:18:36कंपेयर टू जनरल एलएलस। अब एक स्मॉल
- 1:18:38लैंग्वेज मॉडल के क्या यूज़ केसेस हो सकते
- 1:18:40हैं? मे बी इफ वी आर बिल्डिंग अ कस्टमर
- 1:18:42सपोर्ट चैटबॉट फॉर अ हॉस्पिटल। तो दैट कुड
- 1:18:44बी वन यूज़ केस। या फिर किसी लीगल फर्म के
- 1:18:46लिए वी वांट अ मॉडल जो कंपनी स्पेसिफिक
- 1:18:48पॉलिसीस के बेसिस पर ही आंसर देगा। तो
- 1:18:50वहां पर वी कैन यूज़ अ स्मॉल लैंग्वेज
- 1:18:52मॉडल। नेक्स्ट लेट्स टॉक अबाउट द कांसेप्ट
- 1:18:55ऑफ डिस्टिलेशन। अब एक स्मॉल लैंग्वेज मॉडल
- 1:18:57को ट्रेन करने के मल्टीपल वेज़ होते हैं।
- 1:18:59वन वे इज़ दैट वी ट्रेन द मॉडल फ्रॉम
- 1:19:01स्क्रैच। अनदर पॉपुलर वे इज़ कॉल्ड
- 1:19:03डिस्टिलेशन। डिस्टिलेशन के अंदर हम क्या
- 1:19:05करते हैं? वी टेक अ लार्ज लैंग्वेज मॉडल।
- 1:19:08ये हमारा लार्ज लैंग्वेज मॉडल है। एंड दिस
- 1:19:11लार्ज लैंग्वेज मॉडल बिकम्स द टीचर फॉर द
- 1:19:14स्मॉल लैंग्वेज मॉडल। वी हैव अ लार्ज
- 1:19:16लैंग्वेज मॉडल एंड वी हैव अ स्मॉल
- 1:19:19लैंग्वेज मॉडल व्हिच इज़ गोइंग टू एक्ट एज
- 1:19:21द स्टूडेंट। अब जो भी हमारे पास डेटा है
- 1:19:24उस डेटा के लिए वी आर गोइंग टू हैव सम
- 1:19:26इनपुट x एंड लार्ज लैंग्वेज मॉडल विल
- 1:19:30प्रोड्यूस सम आउटपुट फॉर इट दिस आउटपुट y
- 1:19:34अब एसएलएम को भी हम क्या करेंगे? यही सेम
- 1:19:37इनपुट फीड करेंगे। बट एसएलएम को क्या करना
- 1:19:40है? इसे इंस्टेड ऑफ़ ट्राइंग टू प्रिडिक्ट
- 1:19:42व्हाट इज़ द करेक्ट आउटपुट? इट हैज़ टू
- 1:19:44ट्राई एंड प्रिडिक्ट द आउटपुट ऑफ़ द लार्ज
- 1:19:47लैंग्वेज मॉडल। मतलब इसके लिए यह जो
- 1:19:49आउटपुट है, दिस पर्टिकुलर वैल्यू, दिस शुड
- 1:19:52बी द सॉफ्ट टारगेट फॉर द स्मॉल लैंग्वेज
- 1:19:56मॉडल। एंड इस तरीके से हमारा स्मॉल
- 1:19:58लैंग्वेज मॉडल क्या करता है? लार्ज
- 1:20:00लैंग्वेज मॉडल की जो रीजनिंग है, उसको
- 1:20:01मिमिक करने की कोशिश करता है। एंड दैट इज़
- 1:20:04हाउ वी क्रिएट अ स्मॉल लैंग्वेज मॉडल विद
- 1:20:07दिस टीचर स्टूडेंट मॉडल व्हिच इज़ कॉल्ड
- 1:20:09डिस्टिलेशन। एंड नाउ द लास्ट टर्म इज़
- 1:20:11क्वांटाइज़ेशन। क्वांटाइजेशन इज़ आल्सो अनदर
- 1:20:13वे टू क्रिएट स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स। जैसे
- 1:20:16इफ वी कंसीडर अ न्यूरल नेटवर्क लाइक दिस।
- 1:20:18दिस न्यूरल नेटवर्क इज़ गोइंग टू हैव अ लॉट
- 1:20:20ऑफ़ वेट वैल्यूज़। यहां पर भी हमारे पास कोई
- 1:20:23वेट W1 वैल्यू होगी, W2 वैल्यू होगी, W3
- 1:20:26वैल्यू होगी। इस तरीके से हमारे पास
- 1:20:27मल्टीपल वेट्स की वैल्यूज़ होंगी। अब ये जो
- 1:20:29वेट वैल्यूज़ हैं, दीज़ आर गोइंग टू बी
- 1:20:31नंबर्स। तो ये किसी न किसी न्यूमेरिकल
- 1:20:33फॉर्मेट के अंदर स्टोर्ड होंगे। तो दिस
- 1:20:34नंबर कुड बी इन एनी फॉर्मेट। मतलब ये 32
- 1:20:37बिट नंबर भी हो सकता है, 16 बिट नंबर भी
- 1:20:39हो सकता है, एट बिट नंबर भी हो सकता है,
- 1:20:40फोर बिट नंबर भी हो सकता है। एंड देयर आर
- 1:20:42मल्टीपल फॉर्मेट्स दैट एकज़िस्ट। अब जितना
- 1:20:45ज्यादा हमारी वेट वैल्यूज़ का साइज़ होगा,
- 1:20:47मतलब जितनी बिट्स हमारी वेट वैल्यू
- 1:20:49ऑक्युपाई करेगी, उतना ज्यादा वी नीड
- 1:20:51मेमोरी, उतना ज्यादा आवर कॉम्पिटेशन इज़
- 1:20:52गोइंग टू बिकम एक्सपेंसिव। बिकॉज़ ऐसा नहीं
- 1:20:55है कि वी हैव अ सिंगल कनेक्शन। वी हैव अ
- 1:20:57सिंगल वेट वैल्यू। वी हैव बिलियंस ऑफ़
- 1:21:00पैरामीटर्स इन मॉडर्न डे एलएलएम्स।
- 1:21:02इनफैक्ट कुछ ऐसे एलएलएम्स भी हैं जिसके
- 1:21:03अंदर देयर आर ट्रिलियंस ऑफ़ पैराटर्स। तो
- 1:21:06इतनी सारी जब हमें कंपटीशन करनी पड़ती है
- 1:21:08इन द ट्रेनिंग प्रोसेस। इनफैक्ट इवन इन द
- 1:21:11इनफेंस प्रोसेस इट मेक्स एवरीथिंग अ बिट
- 1:21:13एक्सपेंसिव। इनफैक्ट इट इज़ नोटेड कि अगर
- 1:21:1532 बिट की जगह वेट वैल्यूज़ को हम लोअर
- 1:21:19डाउन कर दें टू लेट्स से एट बिट। तो 75%
- 1:21:22ऑफ़ द मेमोरी इज़ एक्सपेक्टेड टू बी सेव्ड।
- 1:21:25एंड यहीं पर 32 बिट्स की जगह वी चूज़ टू
- 1:21:27सेव द वेट वैल्यूज़ इन द फोर बिट्स
- 1:21:30फॉर्मेट। तो यहीं पर वी आर एक्सपेक्टेड टू
- 1:21:33सेव मोर देन 87% ऑफ द मेमोरी। तो इतना
- 1:21:36बड़ा इंपैक्ट आता है ऑफ द क्वांटाइजेशन
- 1:21:39प्रोसेस। अब क्वांटाइजेशन को हम जनरली दो
- 1:21:41तरीके से कर सकते हैं। सबसे पहला प्रोसेस
- 1:21:44इज़ कॉल्ड पोस्ट ट्रेनिंग क्वांटाइजेशन।
- 1:21:46पोस्ट ट्रेनिंग क्वांटाइजेशन कहने का मतलब
- 1:21:48है कि वी ट्रेन द मॉडल नॉर्मली
- 1:21:50क्वांटाइजेशन। वी ट्रेन द मॉडल नॉर्मली
- 1:21:53जैसे हमारी नॉर्मल ट्रेनिंग होती है। एंड
- 1:21:54उसके बाद आफ्टर द ट्रेनिंग प्रोसेस वी डू
- 1:21:56दिस क्वांटाइजेशन। इस केस में हमारी जो
- 1:21:59ट्रेनिंग कॉस्ट रहती है दैट रिमेन सेम बट
- 1:22:01हमारी जो इनफेंस कॉस्ट रहती है दैट गोज़
- 1:22:03डाउन। मतलब जब हमारा स्माल लैंग्वेज मॉडल
- 1:22:05एक्चुअली प्रेडिक्शनंस करेगा तो वहां पर
- 1:22:07वी आर गोइंग टू गेट अ लोअर कॉस्ट। एंड
- 1:22:08क्वांटाइजेशन का ही एक पैरेलल तरीका होता
- 1:22:10है। एक अल्टरनेट तरीका होता है व्हिच इज़
- 1:22:12कॉल्ड क्वांटाइजेशन अवेयर ट्रेनिंग।
- 1:22:15क्वांटाइजेशन अवेयर ट्रेनिंग के अंदर वी
- 1:22:17सिमुलेट द लो प्रसीजन ट्रेनिंग बिहेवियर
- 1:22:19इन द एलएलएम ड्यूरिंग द ट्रेनिंग प्रोसेस
- 1:22:21इटसेल्फ। जैसे हमारा जो एलएलएम या एसएलएम
- 1:22:23होता है इट बिकम्स मोर टोलरेंट ऑफ़ द
- 1:22:25क्वांटाइजेशन प्रोसेस। अब ये करना इज
- 1:22:28डेफिनेटली नॉट सिंपल एंड इट्स गोइंग टू
- 1:22:29इंक्रीस द ट्रेनिंग कॉस्ट। बट इसका एक
- 1:22:31एडेड बेनिफिट ये होता है कि जब हमारा मॉडल
- 1:22:34फाइनली ट्रेन हो जाएगा और वो इनफरेंस
- 1:22:36करेगा देन द आउटपुट इज़ गोइंग टू प्रोड्यूस
- 1:22:38इट विल हैव बेटर एक्यूरेसी। तो अगर हमें
- 1:22:41एक्यूरेसी पर ही फोकस करना है। अगर हमें
- 1:22:43बेटर आउटपुट पर ही फोकस करना है। एंड वी
- 1:22:46कैन टॉलरेट द इंक्रीज कॉस्ट इन द ट्रेनिंग
- 1:22:48प्रोसेस, देन वी शुड गो फॉर दिस टाइप ऑफ
- 1:22:50क्वांटाइजेशन। वेयर एस इफ वी वांट अ
- 1:22:53सिंपलर क्वांटाइजेशन प्रोसेस देन पोस्ट
- 1:22:55ट्रेनिंग क्वांटाइजेशन इज आउट देयर। तो
- 1:22:57यहां तक वी हैव कवर्ड सम ऑफ द मोस्टेंट
- 1:22:59एआई रिलेटेड टर्म्स इन द एआई इंडस्ट्री
- 1:23:01टुडे जो हर एक इंजीनियर को अच्छे तरीके से
- 1:23:04पता होनी चाहिए। एट लीस्ट इनके मतलब हमें
- 1:23:06पता होने चाहिए। सो दैट वी आर एबल टू
- 1:23:08अंडरस्टैंड द एआई इकोसिस्टम अराउंड अस
- 1:23:11बेटर। तो डेफिनेटली हर एक सिंगल चीज के
- 1:23:13अंदर डाइव डीप करना इन अ सिंगल सेशन इज़
- 1:23:15नॉट पॉसिबल। सो इफ यू वांट अस टू क्रिएट अ
- 1:23:18डेडिकेटेड सेशन अ डेडिकेटेड ट्यूटोरियल
- 1:23:20अबाउट एनी ऑफ़ दीज कॉन्सेप्ट्स देन यू कैन
- 1:23:22लेट मी नो इन दी कमेंट्स एंड यू कैन आल्सो
- 1:23:23लेट मी नो इनमें से कौन सी ऐसी एआई टर्म
- 1:23:25थी दैट यू फाउंड मोस्ट यूजफुल और मोस्ट
- 1:23:27रेलेवेंट और समथिंग दैट यू जस्ट फाउंड
- 1:23:29इंटरेस्टिंग थ्रूआउट द सेशन। सो आज के लिए
- 1:23:31इतना ही। मिलते है नेक्स्ट सेशन के अंदर।
- 1:23:32टिल देन कीप लर्निंग एंड कीप
- 1:23:34एक्सप्लोरिंग।
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