AI Complete OneShot Course for Beginners | Learn AI & ML Fundamentals from Scratch — Transcript
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- 0:00हाई एवरीवन एंड वेलकम टु आवर कॉलेज एंड इन
- 0:01टुडे सेशन वी आर गोइंग टु कवर द कोर
- 0:03फंडामेंटल कॉन्सेप्ट्स ऑफ़ आर्टिफिशियल
- 0:05इंटेलिजेंस दैट इज़ एआई। टुडे इफ वी अनलॉक
- 0:08आवर फ़ोन विथ फेस आईडी एंड आस्क सीरी टु
- 0:09टेल अस द वेदर वी आर एक्चुअली यूज़िंग
- 0:12कंप्यूटर विज़न एंड एनएलपी। इफ वी आर
- 0:14इंटरक्टिंग विथ टूल्स लाइक चैट GP ओर JNI
- 0:16वी आर एक्चुअली यूजिंग एलएलएमस लार्ज
- 0:18लैंग्वेज मॉडल्स। आज के डेट में एव्री
- 0:20एप्लीकेशन इज फुल ऑफ रेकमेंडेशन्स। अगर हम
- 0:22Amazon Blinkket यूज़ करते हैं दे रेकमेंड
- 0:24अस व्हाट टू बाय। अगर हम Netflix YouTube
- 0:26यूज करते हैं दे रेकमेंड अस व्हाट टू वॉच।
- 0:28वी हैव एप्स लाइक Google Maps ओर Uber दैट
- 0:31डु ट्रैफिक प्रेडिक्शन फॉर अस। दे आल्सो
- 0:32डु अराइवल टाइम एस्टिमेशन एंड दैट टू विथ
- 0:34अ ग्रेट एक्यूरेसी। इवन इफ वी आर कोडिंग
- 0:37टुडे वी टेक हेल्प फ्रॉम टूल्स लाइक
- 0:38GitHub को पायलेट। सो इफ वी आर यूजिंग
- 0:41टेक्नोलॉजी टुडे देन वी आर एक्चुअली
- 0:43यूजिंग डिफरेंट मल्टीपल फॉर्म्स ऑफ़
- 0:45आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एव्री सिंगल डे।
- 0:47तो आज के सेशन के अंदर वी आर गोइंग टू कवर
- 0:50द कोर फंडामेंटल कॉन्सेप्ट्स ऑफ
- 0:51आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। व्हाट आर द
- 0:53डिफरेंट टाइप्स? व्हाट आर द डिफरेंट
- 0:54सबसेट्स? व्हाट आर द डिफरेंट यूज़ केसेस ऑफ़
- 0:56एआई एंड मच मोर। सो टुडेज़ सेशन इज़ गोइंग
- 0:59टू हैव नो प्रीरक्व्विज़िट्स। मतलब एनीबडी
- 1:02हु वांट्स टू अंडरस्टैंड एआई एनीबडी हु
- 1:04वांट्स टू एक्सप्लोर मोर अबाउट
- 1:06आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैन लर्न फ्रॉम
- 1:08दिस लेक्चर। तो आज के लेक्चर के बाद वी आर
- 1:10एक्चुअली गोइंग टू फील मोर कॉन्फिडेंट एंड
- 1:12वी आर एक्चुअली गोइंग टू अंडरस्टैंड मोर
- 1:14अबाउट द टर्म्स दैट आर रिलेटेड टू एआई।
- 1:16जैसे मशीन लर्निंग हो गई, रीइंफोर्समेंट
- 1:18लर्निंग हो गई, कंप्यूटर विज़न हो गई,
- 1:20एनएलपी हो गई, न्यूरल नेटवर्क्स हो गई एंड
- 1:22मेनी मोर एल्गोरिदम्स लाइक दिस। सो दिस
- 1:25विल बी अ सेशन अबाउट एआई दैट विल हेल्प अस
- 1:27अंडरस्टैंड इट एंड फील मोर कॉन्फिडेंट इन
- 1:29टुडेज़ टाइम। लेट्स स्टार्ट विथ द सेशन।
- 1:31सो, लेट्स स्टार्ट बाय अंडरस्टैंडिंग
- 1:32व्हाट एक्जेक्टली इज़ एआई, आर्टिफिशियल
- 1:34इंटेलिजेंस। एआई इज़ बेसिकली दैट
- 1:36टेक्नोलॉजी दैट अलाउज़ कंप्यूटरर्स और
- 1:38सिस्टम्स टू परफॉर्म टास्क दैट टिपिकली
- 1:40रिक्वायर ह्यूमन इंटेलिजेंस। फॉर एग्जांपल
- 1:43अगर हमारे कोई भी कंप्यूटरटर्स होते हैं,
- 1:45अगर हमारे कोई सिस्टम्स होते हैं जो ऐसे
- 1:46काम परफॉर्म करते हैं जिसके अंदर कुछ ना
- 1:49कुछ लेवल ऑफ ह्यूमन इंटेलिजेंस चाहिए तो
- 1:51वो काम वो परफॉर्म करते हैं विद द हेल्प
- 1:53ऑफ दिस टेक्नोलॉजी व्हिच इज़ एआई। अब ये
- 1:56कैसे काम हो सकते हैं? इसका एक एग्जांपल
- 1:58हो सकता है पैटर्न रिकॉग्निशन। हम एज
- 2:00ह्यूमंस डेटा को देखकर उसके अंदर पैटर्न
- 2:03रिकॉग्नाइज़ करने के अंदर बहुत अच्छे होते
- 2:05हैं। जैसे फॉर एग्जांपल एक सिंपल एग्जांपल
- 2:07लेते हैं। लेट्स सपोज़ हमें किसी ने डेटा
- 2:09दिया कि इनपुट वन के लिए आउटपुट वन होना
- 2:11चाहिए। इनपुट टू के लिए आउटपुट फोर होना
- 2:12चाहिए। इनपुट थ्री के लिए आउटपुट नाइन
- 2:14होना चाहिए। इनपुट फोर के लिए आउटपुट 16
- 2:16होना चाहिए। तो इस डेटा के अंदर हमें एक
- 2:17पैटर्न दिखेगा। एंड उस पैटर्न को एनालाइज
- 2:20करके हमें पता होगा कि अगर कोई इनपुट फाइव
- 2:22देता है तो उसके लिए आउटपुट 25 होना
- 2:24चाहिए। बिकॉज़ ऑल ऑफ़ दीज़ नंबर्स आर
- 2:26स्क्वायर्स ऑफ़ दीज़ नंबर्स। तो फाइव का भी
- 2:28हम स्क्वायर दे देंगे। तो दिस इज़ अ सिंपल
- 2:31एग्जांपल ऑफ़ व्हाट पैटर्न रिकॉग्निशन इज़।
- 2:33तो यही काम अगर हमें मशीन से परफॉर्म
- 2:35कराना है तो वो हम परफॉर्म करा सकते हैं
- 2:37विद द हेल्प ऑफ एआई। उसी तरीके से एक और
- 2:40एग्जांपल होगा ह्यूमन इंटेलिजेंस का स्पीच
- 2:43रिकॉग्निशन। हम एज ह्यूमंस एक दूसरे की
- 2:46अगर लैंग्वेज समझते हैं तो दूसरा व्यक्ति
- 2:48क्या कह रहा है हम उस बात को समझ सकते
- 2:49हैं। हम उसका मीनिंग समझ सकते हैं। हम उस
- 2:51बात का कॉन्टेक्स्ट उसके अंदर क्या इमोशंस
- 2:53हैं वो चीजें भी समझ सकते हैं। तो इसी
- 2:55तरीके की स्पीच रिकॉग्निशन अगर हम मशीन से
- 2:57कराना चाहते हैं तो वो हम कर सकते हैं विद
- 2:59द हेल्प ऑफ एआई। जैसे आज की डेट में हमारे
- 3:00पास Si है, हमारे पास Alexa है। इनफैक्ट
- 3:03विद टूल्स लाइक चैट जीपीटी और जेमिनाई
- 3:05हमारे पास वॉइस ऑप्शन होता है। तो हम इन
- 3:07टूल्स के साथ इंटरेक्ट कर सकते हैं विद
- 3:08आवर वॉइस। तो ये टूल्स कैसे रिकॉग्नाइज़
- 3:10करते हैं कि हम एग्जैक्टली बोल क्या रहे
- 3:12हैं? दिस इज़ हैपनिंग बिकॉज़ ऑफ़ स्पीच
- 3:14रिकॉग्निशन। इसके साथ में वी आल्सो हैव
- 3:16समथिंग कॉल्ड इमेज एनालिसिस। हम इमेजज़ को
- 3:19देखकर उनको एनालाइज़ कर सकते हैं कि इमेज
- 3:21के अंदर डिफरेंट ऑब्जेक्ट्स क्या हैं?
- 3:23इमेज के अंदर अगर कोई नंबर्स लिखे हुए हैं
- 3:25तो वो नंबर्स क्या हैं? इमेज के अंदर कौन
- 3:26सी चीज का क्या मतलब है? ये हम एज़ ह्यूमंस
- 3:28कर सकते हैं ह्यूमन इंटेलिजेंस को यूज़
- 3:30करके। जैसे फॉर एग्जांपल अगर हमें कोई कार
- 3:32की इमेज देगा तो उस कार की इमेज में हम
- 3:34रिकॉग्नाइज़ कर सकते हैं कि नंबर प्लेट
- 3:36कहां पर है और उस नंबर प्लेट पे क्या
- 3:37नंबर्स लिखे हुए हैं। अब यही काम अगर हमें
- 3:39कंप्यूटर से कराना है तो वो हम करेंगे वि
- 3:41द हेल्प ऑफ़ एआई। एंड ये ऐसा प्रैक्टिकल
- 3:43एग्जांपल है जो एक्चुअली एक्सिस्ट करता
- 3:45है। हमारे पास ट्रैफिक डिपार्टमेंट के
- 3:46अंदर ऐसे सिस्टम्स एक्सिस्ट करते हैं जो
- 3:48किसी भी व्हीकल के लिए उसका नंबर प्लेट
- 3:50डिटेक्ट कर सकते हैं एंड ऑटोमेटेड चालांस
- 3:52उन व्हीकल्स को सेंड कर सकते हैं। सो दीज़
- 3:54आर ऑल एग्जांपल्स ऑफ़ टास्क जिनके लिए कुछ
- 3:56ना कुछ ह्यूमन इंटेलिजेंस चाहिए और इन्हीं
- 3:58टास्क को हम एआई की हेल्प से परफॉर्म कर
- 4:00सकते हैं। अब एआई को हमने समझ लिया। एआई
- 4:03की एक ब्रांच को भी समझ लेते हैं। व्हिच
- 4:05इज़ कॉल्ड मशीन लर्निंग। इफ दिस इज़ एi तो
- 4:08एआई की सबसे इंपॉर्टेंट सबडोमेन होती है
- 4:12मशीन लर्निंग। मेजॉरिटी ऑफ एआई जो आज की
- 4:15डेट में हम देखते हैं। मेजॉरिटी ऑफ दैट
- 4:17एआई इज एक्चुअली मशीन लर्निंग। तो मशीन
- 4:19लर्निंग क्या होता है? मशीन लर्निंग आर
- 4:20बेसिकली दोज़ एल्गोरिद्स दैट लर्न फ्रॉम
- 4:22डेटा रादर देन प्रोग्रामिंग। तो मशीन
- 4:24लर्निंग के अंदर डेटा बहुत ज्यादाेंट हो
- 4:27जाता है। एंड इनफैक्ट दैट इज व्हाई इन द
- 4:29लास्ट वन टू टू डेकेड्स मशीन लर्निंग और
- 4:31ज्यादाेंट हुई है। और बहुत सारे ऐसे
- 4:33सिस्टम्स इमर्ज हुए हैं जो एक्चुअली मशीन
- 4:35लर्निंग को यूज़ करते हैं। बिकॉज़ जैसे ही
- 4:37इंटरनेट आया, जैसे ही सारे के सारे लोग्स
- 4:39इंटरनेट पर ऑनबोर्ड हुए तो वैसे ही हमारे
- 4:41पास बहुत सारा डेटा आने लगा। एंड आज की
- 4:43डेट में हर बड़ी कंपनी के पास बहुत सारा
- 4:45डेटा है। एंड दैट इज़ व्हाई वी आर एबल टू
- 4:47सी सो मेनी प्रैक्टिकल एप्लीकेशनेशंस ऑफ़
- 4:49मशीन लर्निंग एल्गोरिथ्म्स। अब सिंस मशीन
- 4:51लर्निंग इज़ अ सबडोमेन ऑफ़ एआई। हम यह कह
- 4:53सकते हैं कि सारी मशीन लर्निंग एआई होती
- 4:55है। बट सारी एआई मशीन लर्निंग नहीं होती।
- 4:58देयर आर सम पार्ट्स ऑफ़ एआई व्हिच आर नॉट
- 5:00मशीन लर्निंग। ये कैसे पार्ट्स हैं? जैसे
- 5:02फॉर एग्जांपल हमारे जो रूल बेस्ड सिस्टम्स
- 5:05होते हैं दे आर पार्ट ऑफ़ एआई। उनके अंदर
- 5:07कुछ ना कुछ लेवल ऑफ इंटेलिजेंस होती है।
- 5:08पर वो मशीन लर्निंग का पार्ट नहीं है।
- 5:10उनके अंदर हम प्रोग्रामिंग करते हैं रादर
- 5:12देन लर्निंग फ्रॉम डेटा। तो रूल बेस्ड
- 5:15सिस्टम्स के अंदर हम एआई को यूज़ करते हैं
- 5:18पर मशीन लर्निंग को यूज़ नहीं करते। वन मोर
- 5:20एग्जांपल कुड बी क्लासिकल रोबोटिक्स जिसके
- 5:22अंदर हम रूल बेस्ड प्रोग्रामिंग ही करते
- 5:23हैं। दैट इज आल्सो एआई बट दैट इज नॉट
- 5:25पार्ट ऑफ़ मशीन लर्निंग। हमारे पास कुछ
- 5:27एल्गोरिदम्स भी होती हैं जैसे वी हैव वन ए
- 5:28स्टार एल्गोरिदम व्हिच इज यूज्ड इन
- 5:30ग्राफ्स व्हिच इज़ पार्ट ऑफ एआई बट नॉट
- 5:31पार्ट ऑफ़ मशीन लर्निंग। उसके साथ में वी
- 5:33आल्सो हैव फजी लॉजिक सिस्टम्स जो हमारे घर
- 5:36के एसीस के अंदर फ्रिज के अंदर यूज़ होते
- 5:38हैं उन फ्रिज को प्रोग्राम करने के लिए
- 5:40उन्हें थोड़े बहुत लेवल ऑफ इंटेलिजेंस देने
- 5:42के लिए। बट दैट इज़ पार्ट ऑफ़ एआई बट नॉट
- 5:44पार्ट ऑफ़ मशीन लर्निंग। बट जो मेजॉरिटी
- 5:46एआई आज की डेट में हम देखते हैं एलएलएम्स
- 5:48के अंदर, Google Maps जैसी, Uber जैसी,
- 5:50Amazon जैसी, ब्लिंकिट जैसी एप्स के ऊपर,
- 5:52मेजॉरिटी ऑफ़ दैट एi इज़ मशीन लर्निंग। तो
- 5:55मशीन लर्निंग के अंदर हमारे पास बहुत सारी
- 5:56अलग-अलग एल्गोरिदम्स होती हैं जिनको हम
- 5:58आगे जाकर देखेंगे। जैसे लीनियर रिग्रेशन
- 6:00हो गया, लॉजिस्टिक रिग्रेशन हो गया,
- 6:01सपोर्ट वेक्टर मशीनंस हो गए, हमारी डिसीजन
- 6:03ट्रीज़ हो गए एंड सो मच मोर। अब मशीन
- 6:06लर्निंग की ही एक और सबडोमेन होती है
- 6:08जिसको हम कहते हैं डीप लर्निंग। एंड डीप
- 6:11लर्निंग इज़ वेरी पॉपुलर टुडे। डीप लर्निंग
- 6:14इज बेसिकली दैट सबडोमेन ऑफ मशीन लर्निंग
- 6:17जिसके अंदर हम न्यूरल नेटवर्क्स के साथ
- 6:19काम करते हैं। न्यूरल नेटवर्क्स को हम
- 6:21मशीनंस के थ्रू क्रिएट कर सकते हैं। एंड
- 6:23दीज़ नेटवर्क्स आर एक्चुअली इंस्पायर्ड
- 6:25फ्रॉम द ह्यूमन ब्रेन। ह्यूमन ब्रेन के
- 6:27अंदर न्यूरॉन्स होते हैं। एंड उन्हीं से
- 6:29इंस्पायर्ड हमारे न्यूरल नेटवर्क्स होते
- 6:31हैं। तो न्यूरल नेटवर्क से ही हमारी कई
- 6:33सारी डिफरेंट एल्गोरिदम्स निकल कर आती
- 6:34हैं। जैसे एफएन हो गई, फीड फॉरवर्ड न्यूरल
- 6:36नेटवर्क्स, आरएनए हो गए, रेकरेंट न्यूरल
- 6:38नेटवर्क्स, कन्वोल्यूशनल न्यूरल
- 6:39नेटवर्क्स। हमारे ट्रांसफॉर्मर्स हो गए जो
- 6:41आज की डेट में चैट जीपीटी जैसे टूल्स के
- 6:43अंदर यूज़ होते हैं। दे आर ऑल पार्ट ऑफ डीप
- 6:46लर्निंग। तो इनको भी आगे जाकर हम डिटेल
- 6:48में एक्सप्लोर करेंगे। एंड डीप लर्निंग का
- 6:50ही एक और एप्लीकेशन या एक और सबडोमेन इसको
- 6:52हम सोच सकते हैं व्हिच इज कॉल्ड जेन एआई।
- 6:55तो जेन एआई इज़ एट द सेंटर ऑफ़ दिस जिसका
- 6:59मतलब है जेरेटिव एआई। जनरेटिव एआई कहने का
- 7:01मतलब है कि जेन एआई के अंदर हम उन
- 7:03टेक्नोलॉजीस के साथ उन सिस्टम्स के साथ
- 7:05डील करते हैं जो नया टेक्स्ट, नई ऑडियो,
- 7:08नई वीडियो, नई इमेजेस को जनरेट करने का
- 7:10काम करते हैं। मतलब अभी तक जितनी भी एआई
- 7:12के साथ हम डील कर रहे थे वो बहुत नया
- 7:14कंटेंट नहीं जनरेट कर रहे थे। बट जब हम
- 7:16ऐसे एआई के साथ ऐसी टेक्नोलॉजीस के साथ
- 7:18एल्गोरिदम्स के साथ डील करना स्टार्ट करते
- 7:20हैं जो नया कंटेंट जनरेट करते हैं। देन वी
- 7:22आर टॉकिंग अबाउट द फील्ड ऑफ जेन एआई। तो
- 7:25इसको भी आगे जाकर हम डिटेल में देखने वाले
- 7:27हैं। तो जब भी हम एआई को सीखने की बात
- 7:29करते हैं, ये डिफरेंट टर्म्स हमें पता
- 7:30होनी चाहिए। प्लस जो मेजॉरिटी एआई
- 7:32फंडामेंटल कांसेप्ट्स को आज हम डिस्कस
- 7:34करेंगे, दे आर एक्चुअली मशीन लर्निंग एंड
- 7:36सबसेट्स ऑफ़ मशीन लर्निंग व्हिच इज़ डीप
- 7:38लर्निंग एंड जेएनएआई। तो एक बार डिटेल में
- 7:40समझते हैं। नाउ व्हाट एग्जैक्टली इज़ मशीन
- 7:42लर्निंग। एमएल के बारे में हम ऑलरेडी बात
- 7:44कर चुके हैं कि एमएल के अंदर हम ऐसे
- 7:45एल्गोरिदम्स को यूज़ करते हैं दैट लर्न
- 7:47फ्रॉम डेटा। तो इसका एक बहुत सिंपल सा
- 7:49एग्जांपल लेते हैं। हमें लाइफ में अगर कोई
- 7:51घर लेना होता है, कोई गाड़ी लेनी होती है,
- 7:52देन वी गो टू अ बैंक एंड वी कैन अप्लाई
- 7:54फॉर अ लोन। अब लेट्स सपोज हम एक बैंक के
- 7:56अंदर काम करते हैं और उस बैंक के अंदर
- 7:58बहुत सारे लोग हैं जो लोन एप्लीकेशन के
- 8:00लिए अप्लाई करते हैं। अब हमें एज अ बैंकर
- 8:03एक ऐसा सिस्टम बनाना है जो प्रेडिक्ट कर
- 8:05सके कि किसी भी एपिकेंट को लोन मिलना
- 8:07चाहिए या नहीं मिलना चाहिए। मतलब शुड द
- 8:10लोन बी एक्सेप्टेड और रिजेक्टेड बाय द
- 8:12बैंक। तो इस सिस्टम को हम कैसे डिज़ाइन
- 8:14करेंगे? तो इस सिस्टम को हम बेसिकली
- 8:16लॉजिकली अपने दिमाग से सोें तो दो स्टेप्स
- 8:18के अंदर डिजाइन कर सकते हैं। सबसे पहला तो
- 8:20हम पुराना डेटा देख सकते हैं कि अभी तक
- 8:21बैंक में कितने एपिकेंट्स ने अप्लाई किया
- 8:23है फॉर द लोन। उन एप्लिकेंट्स के हम
- 8:25डिफरेंट-डिफरेंट कैरेक्टरिस्टिक्स फिगर
- 8:27आउट करने की कोशिश कर सकते हैं। बेसिकली
- 8:29हम पुराना डेटा देखेंगे एंड उसमें देखेंगे
- 8:31कि किन एपिकेंट का लोन एक्सेप्ट हो गया है
- 8:33और कौन से एपिकेंट का लोन रिजेक्ट हो गया
- 8:35है। तो जब हम इस डेटा को एनालाइज़ करेंगे
- 8:37तो हमें कुछ कॉमन पैटर्न्स दिखेंगे। कुछ
- 8:39कॉमन कैरेक्टरिस्टिक्स दिखेंगे। जैसे फॉर
- 8:41एग्जांपल क्रेडिट स्कोर इज समथिंग जो हमें
- 8:44दिखेगा कि क्रेडिट स्कोर की एग्जैक्टली
- 8:45ऐसी क्या वैल्यू है कि लोन एक्सेप्ट या
- 8:47रिजेक्ट हो जाए। उसके साथ में हम हो सकता
- 8:49है अपने एपिकेंट्स की सैलरी के बेसिस पर
- 8:52भी कुछ पैटर्न हमें दिखाई दे। हो सकता है
- 8:54एजुकेशन लेवल के बेसिस पर भी हमें कुछ
- 8:56पैटर्न दिखाई दे। उसके साथ में हो सकता है
- 8:58कि कोलटरल क्या है? उसके बेसिस पर भी हमें
- 9:00कुछ पैटर्न दिखाई दे। तो इस तरीके से वी
- 9:02विल फाइंड मल्टीपल कैरेक्टरिस्टिक्स जिससे
- 9:04हम अपने दिमाग में कुछ एक लॉजिक फॉर्म कर
- 9:06सकते हैं कि किसी भी एप्लीेंट के लिए लोन
- 9:08को रिजेक्ट करना है या एक्सेप्ट करना है।
- 9:10नाउ दिस इज़ द फर्स्ट स्टेप जो मशीन
- 9:13लर्निंग एल्गोरिथम्स भी करती हैं व्हिच इज़
- 9:15कॉल्ड ट्रेनिंग। दिस इज़ द ट्रेनिंग स्टेप।
- 9:18ट्रेनिंग बेसिकली मींस लर्निंग फ्रॉम
- 9:20डेटा। अब एक बार हमने अपने दिमाग में
- 9:22ट्रेनिंग कर ली। अपना लॉजिक फॉर्म कर
- 9:23लिया। उसके बाद आता है हमारा सेकंड स्टेप
- 9:25कि कोई भी अगर न्यू एपिकेंट अब हमारे पास
- 9:28आएगा तो उस एपिकेंट के लिए हम उसके
- 9:30पैरामीटर्स को एनालाइज करेंगे और चेक
- 9:32करेंगे कि लोन एक्सेप्ट होना चाहिए यस और
- 9:35नो। तो इस तरीके से नाउ वी आर एबल टू मेक
- 9:38अ प्रेडिक्शन। तो फर्स्ट स्टेप वास
- 9:40ट्रेनिंग एंड द सेकंड स्टेप इज एक्चुअली
- 9:42कॉल्ड मेकिंग प्रेडिकशंस या इसी स्टेप को
- 9:46हम इनफरेंस भी कहते हैं। इनफ्रेंस कहने का
- 9:48मतलब है कि ट्रेनिंग से हमने जो लॉजिक
- 9:50ढूंढा मतलब ट्रेनिंग से हमने जो मॉडल
- 9:52बनाया कि किसका लोन एक्सेप्ट होना चाहिए,
- 9:54किसका रिजेक्ट होना चाहिए। उस मॉडल को अब
- 9:57हम यूज़ कर रहे हैं टू मेक द प्रेडिकशंस।
- 9:59एंड यही दोनों स्टेप्स हैं जो मेजॉरिटी
- 10:00मशीन लर्निंग मॉडल्स फॉलो करते हैं। यानी
- 10:02मशीन लर्निंग मॉडल्स सबसे पहले स्टेप के
- 10:05अंदर अपने पास्ट डेटा पर ट्रेनिंग करते
- 10:07हैं। एंड उसके बाद जैसे ही वो ट्रेन कर
- 10:09लेते हैं हमारे पास एक तरीके से मॉडल
- 10:11प्रिपेयर हो जाता है। मॉडल इज़ द लॉजिक जो
- 10:13हमने प्रिपेयर किया है आफ्टर एनालाइजिंग द
- 10:15पास्ट डेटा। एंड सेकंड स्टेप में जो भी
- 10:17न्यू डेटा होता है, न्यू इनपुट होता है,
- 10:19उसके बेसिस पर हम प्रेडिक्शंस करते हैं
- 10:20व्हिच इज़ आल्सो कॉल्ड इनफेरेंस। तो यही
- 10:23दोनों स्टेप्स सारी मशीन लर्निंग
- 10:24एल्गोरिदम्स परफॉर्म करती हैं। अब यहां
- 10:26बैंकिंग के अलावा भी हम और डिफरेंट
- 10:27एग्जांपल्स ले सकते हैं जहां पर इसकी
- 10:28एप्लीकेशन है। जैसे फॉर एग्जांपल इफ वी आर
- 10:30वर्किंग इन द मेडिकल फील्ड और हमारे पास
- 10:32बहुत सारे पेशेंट्स के एक्सरेज़ हैं। तो उस
- 10:35डेटा पर हम अपने मॉडल को ट्रेन कर सकते
- 10:36हैं। एंड हम एक ऐसा मॉडल प्रिपेयर कर सकते
- 10:38हैं जो किसी भी नए एक्सरे को देखकर
- 10:40डिटेक्ट कर सकता है कि इफ कैंसर एक्सिस्ट
- 10:42ऑ नॉट। इसके अलावा Gmail इज़ आल्सो अ
- 10:43सर्विस जिसको हम डे टू डे बेसिस पर यूज़
- 10:45करते हैं। तो जितने भी ईमेल्स हमारे पास
- 10:47आते हैं ऑटोमेटिकली Gmail उनके लिए
- 10:49डिटेक्ट कर लेता है कि हमारे पास यह जो
- 10:50ईमेल आया है इज़ दिस स्पैम और इज़ दिस नॉन
- 10:52स्पैम? तो Gmail ने बहुत सारे ईमेल्स के
- 10:55डेटा पर अपने जो मॉडल है उसको ट्रेन किया
- 10:58होगा। एंड अब वो जो मॉडल है वो बहुत अच्छे
- 10:59से प्रिडिक्ट कर पाता है इफ द ईमेल इज़ अ
- 11:02स्पैम ईमेल ऑर नॉट। एंड इसी सेम तरीके से
- 11:04वी डू क्रेडिट कार्ड फ्रॉड डिडक्शन या फिर
- 11:06स्विगी Zomato जैसी एप्लीकेशनेशंस जो
- 11:08डिलीवरी टाइम को एस्टिमेट करती हैं। वहां
- 11:10पर भी हम इन्हीं दो स्टेप्स को यूज़ करते
- 11:12हैं। नाउ इफ आई समराइज़ व्हाट मशीन लर्निंग
- 11:14इज़ मशीन लर्निंग इज़ द प्रोसेस ऑफ़ टीचिंग
- 11:16कंप्यूटरटर्स टू लर्न पैटर्न्स फ्रॉम
- 11:18डेटा। दिस इज़ ट्रेनिंग एंड मेक डिसीजंस
- 11:20बेस्ड ऑन दोज़ पैटर्न्स, दिस इज़ इनफरेंस।
- 11:22अब नेक्स्ट हमारे दिमाग में सवाल आ सकता
- 11:24है। ठीक है, हमने मशीन लर्निंग को समझ
- 11:25लिया। बट हाउ आर मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्स
- 11:28डिफरेंट फ्रॉम नॉर्मल कंप्यूटर साइंस
- 11:29एल्गोरिथ्म्स? तो थोड़ा बहुत भी अगर हमें
- 11:32प्रोग्रामिंग आती है या थोड़ा बहुत भी अगर
- 11:33हम कोड को समझते हैं तो हमें एक बेसिक
- 11:35सेंस पता होगा कि कंप्यूटर साइंस के अंदर
- 11:37प्रोग्राम्स या एल्गोरिदम्स क्या काम करते
- 11:39हैं। ट्रेडिशनल कंप्यूटर साइंस के अंदर
- 11:40जनरली कोई भी प्रोग्राम होता है वो कोई
- 11:42इनपुट लेता है एंड उस प्रोग्राम के अंदर
- 11:45कुछ ना कुछ लॉजिक लिखा होता है। एंड बेस्ड
- 11:47ऑन दैट लॉजिक वो कुछ आउटपुट प्रोड्यूस
- 11:49करता है। तो इस तरीके से हमारा एक नॉर्मल
- 11:52कंप्यूटर साइंस की एल्गोरिदम जो होती है
- 11:53वो वर्क करती है। अब मशीन लर्निंग
- 11:55एल्गोरिथ्म्स कैसे वर्क करती हैं? मशीन
- 11:57लर्निंग के अंदर जो एल्गोरिदम्स होती हैं
- 12:00वो एल्गोरिदम इनपुट एंड आउटपुट दोनों लेती
- 12:04हैं। जो हम डेटा भेजते हैं मशीन लर्निंग
- 12:06एल्गोरिदम्स को उसके अंदर इनपुट एंड
- 12:07आउटपुट दोनों होते हैं। जैसे अगर हम अपनी
- 12:09बैंक लोन एप्लीकेशन का एग्जांपल लें तो
- 12:11उसमें हमें सारे एपिकेंट्स का डेटा देना
- 12:13पड़ेगा व्हिच इज़ बेसिकली द इनपुट। एंड उन
- 12:15सारे डेटा के लिए बताना पड़ेगा इफ द लोन
- 12:17वाज़ अप्रूव्ड ऑ नॉट। दिस इज़ बेसिकली
- 12:20आउटपुट। तो यहां पर जो हम डेटा सेंड
- 12:21करेंगे उसके अंदर इनपुट आउटपुट दोनों
- 12:23होंगे। अब हर मशीन लर्निंग इनपुट आउटपुट
- 12:25दोनों पैरामीटर्स को नहीं लेती। मशीन
- 12:26लर्निंग के अंदर भी डिफरेंट टाइप्स होते
- 12:28हैं जिनको आगे जाकर हम पढ़ेंगे। बट दिस इज़
- 12:30अ सिंपल एग्जांपल जिसको यूज़ करके हम बेसिक
- 12:32सेंस समझ सकते हैं कि कोई भी मशीन लर्निंग
- 12:34एल्गोरिदम इनपुट आउटपुट दोनों लेती है एंड
- 12:36उसके बेसिस पर वो लॉजिक को प्रोड्यूस करती
- 12:38है। एंड दिस लॉजिक इज़ एक्चुअली व्हाट द
- 12:41मशीन लर्निंग मॉडल इज़। वो बेसिकली इस डेटा
- 12:43को एनालाइज़ करती है कि कौन से इनपुट से
- 12:45कौन सा आउटपुट प्रोड्यूस हुआ। एंड उसी
- 12:47लॉजिक को हम अपना मॉडल कह देते हैं। और एक
- 12:50बार अब हमारे पास ये लॉजिक आ गया। तो इसी
- 12:52लॉजिक को हम अपना न्यू इनपुट फीड करते
- 12:55हैं। तो उसके बेसिस पर ये हमें आउटपुट
- 12:57प्रेडिक्शंस करके देता है। सो दिस इज़ हाउ
- 12:59अ नॉर्मल मशीन लर्निंग एल्गोरिदम इज़
- 13:01डिफरेंट फ्रॉम अ ट्रेडिशनल कंप्यूटर साइंस
- 13:03एल्गोरिदम। तो बेसिकली जो भी हमारी मशीन
- 13:05लर्निंग एल्गोरिदम्स हो रही हैं जिनकी हम
- 13:06बात कर रहे हैं वो किसी भी डेटा को इनपुट
- 13:09लेती हैं और वो हमारे लिए एक मॉडल
- 13:10प्रोड्यूस करके देती हैं। ऐसा मॉडल जो अब
- 13:13नए डेटा के लिए प्रेडिक्शनंस कर सकता है।
- 13:15नए डेटा के लिए आउटपुट को प्रोड्यूस कर
- 13:16सकता है। सो इफ वी टॉक अबाउट द टाइप्स ऑफ़
- 13:19मशीन लर्निंग। मशीन लर्निंग के प्राइमरीली
- 13:20तीन मेन टाइप्स होते हैं। वन इज़
- 13:22सुपरवाइज़्ड लर्निंग, वन इज़ अनसपरवाइज़
- 13:24लर्निंग एंड थर्ड इज़ रीइंफोर्समेंट
- 13:25लर्निंग। इन तीनों को एक बार डिटेल में
- 13:27समझते हैं। सबसे पहले हम बात करते हैं
- 13:29अबाउट सुपरवाइज़्ड लर्निंग। सुपरवाइज़
- 13:31लर्निंग इज़ बेसिकली व्हेन आवर मॉडल्स लर्न
- 13:33फ्रॉम लेबल्ड डेटा। अब लेबल्ड डेटा का
- 13:36क्या मतलब है? एग्जांपल के लिए अपना स्पैम
- 13:38डिटेक्शन वाले सिस्टम का एग्जांपल लेते
- 13:40हैं। हमारे स्पैम डिटेक्शन वाले सिस्टम को
- 13:42अगर हम Gmail के अंदर काम करते हैं और
- 13:44हमें Gmail को या Yahoo को ट्रेन करना है
- 13:46टू डिटेक्ट स्पैम। तो उसके लिए उसे हमें
- 13:48कुछ डेटा पर ट्रेन करना पड़ेगा। वो डेटा
- 13:50कुछ ऐसा दिखाई देगा। दिस इज़ द ट्रेनिंग
- 13:52डेटा। इस ट्रेनिंग डेटा के अंदर हमारे पास
- 13:54ईमेल हो सकता है कि एग्जैक्टली क्या ईमेल
- 13:56आया। उसके साथ में हमारे पास सेंडर ईमेल
- 13:58हो सकता है। तो हम देखेंगे सेंडर ईमेल में
- 14:00फेक वेबसाइट, प्रमोशन, सेल्स इस तरीके के
- 14:02कीवर्ड्स होंगे जब भी स्पैम आएगा। हम
- 14:04देखेंगे कोई एक्सटर्नल लिंक है क्या?
- 14:06जनरली स्पैम ईमेल्स के साथ एक लिंक हमारे
- 14:08पास होता है। कितने एक्सक्लेमेशन मार्क्स
- 14:10हैं। दिस कुड ऑल्सो बी एन एग्जांपल ऑफ़ हाउ
- 14:12वी डिटेक्ट स्पैम। क्योंकि स्पैम ईमेल्स
- 14:14जो होती हैं वो जनरली बहुत अनप्रोफेशनल
- 14:16होती हैं। एंड इन सारे के सारे
- 14:17एट्रिब्यूट्स के बेसिस पर हम डिसाइड
- 14:19करेंगे इफ आवर ईमेल इज़ गोइंग टू बी स्पैम
- 14:21ऑर नॉट। तो अपनी ईमेल को हम एक लेबल दे
- 14:23देंगे इफ इट इज़ स्पैम ऑर नॉट स्पैम। तो इस
- 14:25तरीके के डेटा को हम लेबल डेटा कहते हैं।
- 14:27लेबल डेटा इज़ बेसिकली दैट डेटा जिसके अंदर
- 14:30इनपुट आउटपुट दोनों अच्छे से एग्ज़िस्ट
- 14:32करते हैं। एंड दे आर इन अ वेल
- 14:34स्ट्रक्चरर्ड मैनर। जैसे यहां पर ये जो
- 14:36पूरा का पूरा इनपुट हमारे पास है, इसको
- 14:39ट्रेनिंग में हम अपना इनपुट कहते हैं इस
- 14:41डेटा को। एंड दिस इज़ रिप्रेजेंटेड बाय x।
- 14:43एंड ये जो हमारा लेबल है, दिस इज़ बेसिकली
- 14:46आवर आउटपुट व्हिच इज़ रिप्रेजेंटेड बाय Y।
- 14:49एंड इनपुट में ये जो हमारे डिफरेंट कॉलम्स
- 14:51हैं, इन सबको डेटा के अंदर हम कहते हैं
- 14:53हमारे फीचर्स। तो सुपरवाइज लर्निंग में
- 14:55बेसिकली हम प्रिडिक्ट करने की कोशिश करते
- 14:57हैं कि x में इनपुट में ऐसे क्या
- 14:59कैरेक्टरिस्टिक्स हो, ऐसी क्या प्रॉपर्टीज
- 15:01हो जिसके बेसिस पर हम अपने y को प्रेडिक्ट
- 15:04कर दें। तो इसको मैथमेटिकल टर्म्स में अगर
- 15:06सिंपलेस्ट टर्म्स में हम लिखना चाहें तो
- 15:07बेसिकली व्हाट वी वांट टू डू हम अपने y को
- 15:10अपने आउटपुट को प्रेडिक्ट करना चाहते हैं
- 15:12ऑन द बेसिस ऑफ़ सम बिहेवियर्स ऑफ़ x. तो
- 15:15इसको हम सिंपल मैथमेटिकल टर्म्स में कह
- 15:18सकते हैं y = fx वेयर x इज़ द इनपुट y इज़ द
- 15:21आउटपुट। और यहां पर हम बताना चाहते हैं कि
- 15:23हाउ y इज़ अ फंक्शन ऑफ़ x एंड ये जो फंक्शन
- 15:26होता है, ये जो लॉजिक होता है, दिस इज़
- 15:27एग्जैक्टली व्हाट आवर मशीन लर्निंग
- 15:29एल्गोरिदम इज़ गोइंग टू जनरेट आफ्टर
- 15:31ट्रेनिंग। तो यही फंक्शन हमारे एक्चुअली
- 15:33मॉडल के अंदर स्टर्ड होता है जो सारे के
- 15:34सारे प्रेडिक्शनंस करता है। क्योंकि एक
- 15:36बार हमने बिहेवियर समझ लिया, एक बार हमने
- 15:38समझ लिया कि कैसे x के ऊपर क्या फंक्शन
- 15:40अप्लाई करना है कि y की वैल्यू आ जाए। तो
- 15:42हम उसी फंक्शन को किसी भी नए इनपुट पर भी
- 15:44अप्लाई कर सकते हैं। तो हमारे पास नए
- 15:45आउटपुट की, नई प्रेडिक्शन की हमारे पास
- 15:48वैल्यू आ जाएगी। तो हमारे बैक ऑफ द माइंड
- 15:49पे हमें पता होना चाहिए। जब हम मशीन
- 15:50लर्निंग की बात कर रहे हैं। डेफिनेटली हम
- 15:52अभी प्रैक्टिकल एप्लीकेशनेशंस की बात कर
- 15:53रहे हैं। पर बैकग्राउंड में बहुत सारा मैथ
- 15:56है जो एल्गोरिदम्स के अंदर लिखा जाता है,
- 15:57कंप्यूट होता है जो वर्क करता है। अब
- 15:59सुपरवाइज लर्निंग को यूज़ करके हम मशीन
- 16:01लर्निंग की दो डिफरेंट टाइप्स ऑफ़
- 16:02प्रॉब्लम्स को सॉल्व करते हैं। तो अभी तक
- 16:04हमने क्या बात की? अभी तक हमने बात की कि
- 16:06वी हैव मशीन लर्निंग। मशीन लर्निंग के
- 16:08अंदर हमारे पास मल्टीपल टाइप्स ऑफ़ मशीन
- 16:10लर्निंग होती है। जिसमें से वन टाइप इज़
- 16:12सुपरवाइज़ लर्निंग। सुपरवाइज़ लर्निंग के
- 16:14अंदर ही हम दो तरीके की प्रॉब्लम्स को
- 16:15सॉल्व करते हैं। जिसमें से सबसे पहली होती
- 16:17है क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम। एंड सेकंड
- 16:20कैटेगरी होती है रिग्रेशन प्रॉब्लम्स।
- 16:22दोनों को ही हम डिटेल में स्टडी करने वाले
- 16:24हैं। सबसे पहले बात करते हैं क्लासिफिकेशन
- 16:25प्रॉब्लम्स की। क्लासिफिकेशन प्रॉब्लम्स
- 16:27वो होते हैं जहां पर बेस्ड ऑन द इनपुट हम
- 16:29अपने इनपुट को मैप करते हैं टू प्रीडफाइंड
- 16:33कैटेगरीज़
- 16:34और क्लासेस। जैसे फॉर एग्जांपल हमारे पास
- 16:37ईमेल्स हैं। तो डिपेंडिंग अपॉन ईमेल स्पैम
- 16:40है या नहीं है। हम उसको स्पैम या नॉट
- 16:43स्पैम दो कैटेगरीज़ के अंदर डिवाइड कर सकते
- 16:46हैं। दिस इज़ एन एग्जांपल ऑफ़ क्लासिफिकेशन।
- 16:48तो जब भी हमारे पास आउटपुट में कुछ
- 16:50फिक्स्ड नंबर ऑफ कुछ फाइनाइट नंबर ऑफ
- 16:52कैटेगरीज होती हैं, क्लासेस होती हैं,
- 16:53उसको हम कहते हैं क्लासिफिकेशन। जैसे एक
- 16:55और एग्जांपल होगा हमारे लोन अप्रूवल के
- 16:57लिए। हमें पता है कोई भी एप्लीेंट है या
- 16:59तो उसका लोन अप्रूव्ड होगा यस या लोन
- 17:00अप्रूव्ड नहीं होगा। नो। सो देयर आर
- 17:02प्रीडफाइंड क्लासेस जो आउटपुट के अंदर
- 17:04एग्ज़िस्ट कर सकती हैं। ऐसा नहीं है कि
- 17:05आउटपुट कुछ भी हो सकता है। वैल्यू कुछ भी
- 17:07हो सकती है। मतलब जैसे अगर हम Google
- 17:08मैप्स के ऊपर ट्रेवल टाइम देखें तो ट्रेवल
- 17:10टाइम की वैल्यू कुछ भी हो सकती है।
- 17:12डिपेंडिंग अपॉन हमने कहा कि लोकेशन डाली।
- 17:14लेकिन लोन एपिकेंट के लिए आंसर सिर्फ यस
- 17:16या नो ही हो सकता है। बहुत इनफाइनाइट नंबर
- 17:19ऑफ वैल्यू्यूज नहीं है कि वैल्यू कुछ भी आ
- 17:20जाएगी। उसी तरीके से लेट्स सपोज इफ वी आर
- 17:22डूइंग इमेज क्लासिफिकेशन। अगर हमारे पास
- 17:24बहुत सारी इमेजज़ हैं और सारी इमेजज़ के
- 17:26अंदर हमारे पास दो ही कैटेगरी हैं कैट्स
- 17:28एंड डॉग्स। तो या तो हमारी इमेज एक कैट की
- 17:30इमेज हो सकती है या फिर हमारी इमेज एक डॉग
- 17:32की इमेज हो सकती है। तो वी हैव फाइनाइट
- 17:34नंबर ऑफ़ क्लासेस व्हिच आर अवेलेबल फॉर अस।
- 17:36तो क्लासिफिकेशन के अंदर ही हमारे पास दो
- 17:38तरीके का क्लासिफिकेशन होता है। वन इज़
- 17:41बाइनरी क्लासिफिकेशन। बाइनरी क्लासिफिकेशन
- 17:43के ये सब एग्जांपल्स हैं। बाइनरी
- 17:45क्लासिफिकेशन मतलब जब आउटपुट में दो ही
- 17:47वैल्यूज़ हो सकती हैं। आइदर इट कैन बी यस
- 17:49और नो। आइदर इट कैन बी स्पैम ऑ नॉट स्पैम।
- 17:51आइदर इट कैन बी कैट और डॉग। सो दिस इज़
- 17:53कॉल्ड बाइनरी क्लासिफिकेशन। इसके अलावा एक
- 17:55और टाइप ऑफ़ क्लासिफिकेशन होता है व्हिच इज़
- 17:57कॉल्ड मल्टी क्लास क्लासिफिकेशन। जब
- 17:59आउटपुट के अंदर मल्टीपल मोर देन टू
- 18:01कैटेगरीज़ होती हैं। दैट इज़ कॉल्ड मल्टी
- 18:03क्लास क्लासिफिकेशन। जैसे इसका एक
- 18:05एग्ज़ांपल होगा सेंटीमेंट एनालिसिस। फॉर
- 18:07एग्जांपल हम अपने टेक्स्ट पर सेंटीमेंट
- 18:09एनालिसिस करते हैं कि हम उसका इमोशन फाइंड
- 18:11आउट करने की कोशिश करते हैं। किसी ने एक
- 18:13सेंटेंस लिखा दिस इज़ अ बैड डे। दिस इज़ अ
- 18:17सेंटेंस। अब इफ वी आर बिल्डिंग एमएल मॉडल
- 18:19जो किसी भी सेंटेंस को तीन कैटेगरीज़ के
- 18:21अंदर डिवाइड करता है बेस्ड ऑन द
- 18:22सेंटीमेंट। कि सेंटीमेंट पॉजिटिव है,
- 18:25सेंटीमेंट नेगेटिव है या फिर सेंटीमेंट
- 18:28न्यूट्रल है। तो हमें पता है फॉर दिस
- 18:30सेंटेंस द सेंटीमेंट वुड बी नेगेटिव। किसी
- 18:32के लिए पॉजिटिव हो सकता है, किसी के लिए
- 18:33न्यूट्रल हो सकता है। तो आउटपुट में कितनी
- 18:35कैटेगरीज़ आ सकती हैं? आउटपुट में सिर्फ
- 18:37तीन ही कैटेगरीज़ आ सकती हैं। या तो
- 18:39सेंटीमेंट पॉजिटिव होगा, नेगेटिव होगा या
- 18:40न्यूट्रल होगा। तो हमारे पास क्योंकि मोर
- 18:42देन टू क्लासेस हैं। सो दिस इज़ आल्सो एन
- 18:44एग्जांपल ऑफ़ मल्टी क्लास क्लासिफिकेशन। हम
- 18:46एक और एग्जांपल ले सकते हैं व्हिच इज़ अ
- 18:48वेरी पॉपुलर एग्जांपल इन मल्टी क्लास
- 18:50क्लासिफिकेशन। लेट्स सपोज़ हम एक ऐसा
- 18:52सिस्टम बनाना चाहते हैं। एक ऐसा ML मॉडल
- 18:54बनाना चाहते हैं जो हम कुछ भी हाथ से
- 18:56लिखें। लेट्स सपोज मैंने यहां पर हाथ से
- 18:57सेवन लिख दिया। तो वो इसको डिटेक्ट करके
- 18:59बता दे कि ये कौन सा डिजिट है। तो ये मॉडल
- 19:01बनाने के लिए हम क्या डेटा यूज़ करेंगे? हम
- 19:03इस तरीके का हैंड रिटन डिजिट्स का डेटा
- 19:05सेट यूज़ कर सकते हैं जिसके अंदर बहुत सारी
- 19:07पिक्चर्स हैं ऑफ डिजिट्स फ्रॉम ज़ीरो टू न।
- 19:10इस डेटा पर हमारा जो मॉडल है वो ट्रेन हो
- 19:12जाएगा। उसके बाद इस नई पिक्चर को देखेगा
- 19:14और वो डिटेक्ट कर पाएगा व्हिच क्लास इज़
- 19:16दिस। तो हमारे पास इस डेटा के बेसिस पर
- 19:19कितने डिजिट्स हैं? हमारे पास 10 डिजिट्स
- 19:21हैं। वी हैव 10 डिजिट्स इन द डेटा। तो
- 19:23हमारा आउटपुट भी क्या आ सकता है? 10
- 19:25डिफरेंट कैटेगरीज़ हो सकती हैं। तो वी कैन
- 19:27से दैट वी हैव 10 डिफरेंट क्लासेस फॉर दिस
- 19:30पर्टिकुलर एग्जांपल। तो ये भी एग्जांपल हो
- 19:32गया मल्टी क्लास क्लासिफिकेशन का जहां पर
- 19:35हमारे पास 10 कैटेगरीज हैं एज आउटपुट। नाउ
- 19:37लेट्स लुक एट सम क्लासिफिकेशन एल्गोरिदम्स
- 19:39जिसमें हमारे लीनियर क्लासिफायर्स हो गए,
- 19:40लॉजिस्टिक रिग्रेशन हो गया, केएन हो गया,
- 19:42केनियरेस्ट नेबर्स। हमारी सपोर्ट वेक्टर
- 19:44मशीन हो गई। इसी का एक वेरिएशन है
- 19:46रेलेवेंस वेक्टर मशीन। दिस इज़ एन
- 19:47एल्गोिम्मद दैट हैव एक्चुअली यूज़्ड इन वन
- 19:49ऑफ़ माय प्रोजेक्ट्स। उसके साथ में वी हैव
- 19:50रैंडम फॉरेस्ट, वी हैव एक्सजी बूस्ट। तो
- 19:52इस तरीके से हमारे पास बहुत सारी
- 19:53क्लासिफिकेशन एल्गोरिदम्स होती हैं जो
- 19:54एग्ज़िस्ट करती हैं। अब सुपरवाइज़ लर्निंग
- 19:57के अंदर ही एक और टाइप होता है व्हिच आर
- 19:59कॉल्ड रिग्रेशन प्रॉब्लम्स। तो अभी तक
- 20:01हमने मशीन लर्निंग के अंदर अपनी सुपरवाइज
- 20:04लर्निंग में क्लासिफिकेशन को देख लिया है।
- 20:05क्लासिफिकेशन के डिफरेंट टाइप्स देख लिए
- 20:07हैं। अब हम रिग्रेशन को समझने वाले हैं।
- 20:09रिग्रेशंस आर प्रॉब्लम्स जिसके एंड पर वी
- 20:12बेसिकली ट्राई टू प्रिडिक्ट अ न्यूमेरिकल
- 20:14आउटपुट। यहां पर कोई कैटेगरीज नहीं है
- 20:16जिसमें हमें डेटा को डिवाइड करना है। यहां
- 20:18पर कोई न्यूमेरिकल आउटपुट है जिसको हम
- 20:21प्रेडिक्ट करने की कोशिश करते हैं। जैसे
- 20:23लेट्स सपोज हमारे पास Zomato, स्विगी
- 20:24ब्लिंकिट जैसी एप्लीकेशनेशंस हैं जहां पर
- 20:26हमारा एक डिलीवरी टाइम प्रेडिक्ट होता है।
- 20:28अब डिलीवरी टाइम एक न्यूमेरिकल वैल्यू है
- 20:30और इसकी वैल्यू कुछ भी हो सकती है
- 20:32डिपेंडिंग अपॉन द लोकेशन। अब लोकेशन अगर
- 20:34पास में है द टाइम कुड बी 9 मिनट्स, द
- 20:36टाइम कुड बी 15 मिनट्स, 20 मिनट्स दूर है,
- 20:38तो इट कुड बी 43 मिनट्स, 50 मिनट्स, 1
- 20:40ऑवर। तो यहां पर जो मॉडल्स यूज़ हो रहे
- 20:42हैं, वहां पर बेसिकली हम एक टाइम को एक
- 20:44न्यूमेरिकल वैल्यू को एट द एंड प्रेडिक्ट
- 20:45करने की कोशिश कर रहे हैं। और ये हम कैसे
- 20:47कर पाते हैं? ये हम कर पाते हैं विद द
- 20:48हेल्प ऑफ़ पास्ट डिलीवरीज डेटा। पुरानी
- 20:50डिलीवरीज का राइडर्स का हमारे पास डेटा
- 20:51होता है एंड उसके बेसिस पर हमारे
- 20:53प्रेडिकशंस हो पाते हैं। सो दिस इज़ एन
- 20:55एग्जांपल ऑफ़ रिग्रेशन प्रॉब्लम। उसके साथ
- 20:57में वी आल्सो हैव स्टॉक प्राइस
- 20:59फॉरकास्टिंग। वी आल्सो हैव प्रॉपर्टी
- 21:01प्राइस फॉरकास्टिंग। तो ये सब भी अपने
- 21:03पुराने डेटा को एनालाइज करते हैं एंड उसके
- 21:05बेसिस पर कोई प्राइस की वैल्यू कोई
- 21:06न्यूमेरिकल वैल्यू है जिसको एल्गोरिदम
- 21:08प्रेडिक्ट करती है। तो इन प्रॉब्लम के
- 21:10अंदर भी वी बेसिकली ट्राई टू प्रिडिक्ट द
- 21:12रिलेशनशिप बिटवीन द इनपुट एंड द आउटपुट।
- 21:15अब यहां पर जो हमारा इनपुट होता है उसे हम
- 21:17अपना इंडिपेंडेंट वेरिएबल कहते हैं। एंड
- 21:19हमारा जो आउटपुट होता है उसे हम अपना
- 21:21डिपेंडेंट वेरिएबल कहते हैं। एंड
- 21:22इंडिपेंडेंट एंड डिपेंडेंट वेरिएबल हम इन
- 21:24दोनों के बीच का रिलेशन प्रिडिक्ट करने की
- 21:26कोशिश करते हैं। तो दिस रिलेशन विल ऑल्सो
- 21:28बी अ फंक्शन। तो इसको भी हम कह सकते हैं y
- 21:30= fx। अब मैथमेटिकली रिग्रेशन को और थोड़ा
- 21:33सा डिटेल में समझने की कोशिश करते हैं।
- 21:35लेट्स सपोज एक सिंपल सा एग्जांपल ले रहे
- 21:37हैं। हमारे पास बहुत सारे लोगों के हाइट
- 21:38एंड वेट का डेटा है। हाइट इज द इनपुट एंड
- 21:42वेट इज़ द आउटपुट जिसको हम ले रहे हैं। तो
- 21:44हमारे पास इनपुट के अंदर एक सिंगल फीचर है
- 21:46जो एग्ज़िस्ट करता है। व्हिच इज़ द हाइट ऑफ़
- 21:48द पर्सन। एंड इस हाइट के बेसिस पर हमारे
- 21:50पास कुछ डेटा है जिसमें हमें एनालाइज़ करना
- 21:52है कि कौन सी हाइट पर कौन सा वेट आना
- 21:54चाहिए। तो ये कुछ लोगों के हाइट वेट का
- 21:56डेटा हमारे पास ऑलरेडी गिवेन है व्हिच इज
- 21:58द इनपुट डेटा एंड इसके बेसिस पर हम अपने
- 22:00एमएल मॉडल को ट्रेन करेंगे। अब रिग्रेशन
- 22:02में हमें पता है दैट आर डिपेंडेंट वेरिएबल
- 22:04विल बी सम फंक्शन ऑफ द इंडिपेंडेंट
- 22:06वेरिएबल। सो y = fx का कुछ रिलेशन होगा।
- 22:09एंड सबसे सिंपलेस्ट रिलेशन इस पूरे
- 22:11पर्टिकुलर डेटा के लिए क्या हो सकता है?
- 22:13कि y = ax + b दिस इज़ वन ऑफ़ द सिंपलेस्ट
- 22:17रिलेशन जिसको हम प्रेडिक्ट कर सकते हैं।
- 22:19जिसका मतलब है अपने वेट एंड हाइट ग्राफ के
- 22:21अंदर हम एक सिंगल लाइन ड्रॉ कर लेंगे। एक
- 22:24ऐसी लाइन ड्रॉ करेंगे जो मेजॉरिटी डेटा
- 22:26पॉइंट्स के थ्रू होकर जाएगी। एंड अगर ये
- 22:29मेजॉरिटी डेटा पॉइंट्स के थ्रू होकर जा
- 22:30रही है मतलब मेजॉरिटी जो डेटा पॉइंट्स हैं
- 22:32वो इसी लाइन के ऊपर लाई करेंगे या इसके
- 22:34पास में लाई करेंगे। सो व्हाट इज़ दिस
- 22:36लाइन? दिस लाइन इज़ बेसिकली आवर फंक्शन। इट
- 22:38रिप्रेजेंट्स द रिलेशनशिप बिटवीन द इनपुट
- 22:41एंड द आउटपुट वैल्यूज़। तो ये वन ऑफ़ द
- 22:43सिंपलेस्ट रिलेशनशिप है जिसको हम
- 22:44प्रिडिक्ट कर सकते हैं व्हिच इज़ अ स्ट्रेट
- 22:45लाइन। एंड स्ट्रेट लाइन की इक्वेशन होती
- 22:47है y = ax + b जहां पर a इज़ गोइंग टू बी द
- 22:50स्लोप ऑफ द लाइन। मतलब कौन से एंगल पर
- 22:52हमारी लाइन है एंड B इज़ गोइंग टू बी द
- 22:54इंटरसेप्ट कि X एक्सिस पर हमारी ये जो
- 22:57लाइन है ये कहां पर टच कर रही है? दिस
- 22:58पॉइंट इज़ व्हाट वी कॉल B तो मैथमेटिकली अब
- 23:01अगर हमारे पास कोई नया इनपुट आएगा व्हिच
- 23:03कुड बी X डैश तो उसके लिए हम नया आउटपुट
- 23:05प्रोड्यूस कर पाएंगे बेस्ड ऑन दिस
- 23:07पर्टिकुलर फंक्शन वैल्यू व्हिच वुड बी Y
- 23:09डैश। तो इस तरीके से हमारी रिग्रेशन
- 23:11प्रॉब्लम्स वर्क करती हैं कि हम अपने
- 23:12फंक्शन को प्रोड्यूस करते हैं। फिर नए
- 23:14इनपुट पर हम उस फंक्शन को अप्लाई करते हैं
- 23:16और अपना एक नया प्रेडिक्शन या नया आउटपुट
- 23:18जनरेट करते हैं। इफ वी टॉक अबाउट सम
- 23:20रिग्रेशन एल्गोरिदम्स तो वी हैव लीनियर
- 23:22रिग्रेशन, वी हैव लैसो रिग्रेशन, वी हैव
- 23:23मल्टीवेरिएंट रिग्रेशन। एंड इसके अलावा भी
- 23:26बहुत सारी अलग-अलग रिग्रेशन एल्गोरिदम्स
- 23:28हैं जो एग्ज़िस्ट करती हैं। नेक्स्ट टाइप
- 23:29ऑफ़ मशीन लर्निंग इज़ कॉल्ड अनसुपरवाइज़्ड
- 23:31लर्निंग। अनसपरवाइज़्ड लर्निंग में आर
- 23:33मॉडल्स लर्न फ्रॉम अनलेबल डेटा। मतलब
- 23:36हमारे पास एक तरीके से रॉ डेटा आता है
- 23:38जिसके अंदर हम पैटर्न्स रिकॉग्नाइज करने
- 23:40की कोशिश करते हैं। एंड बेस्ड ऑन द फीचर्स
- 23:42दैट आर प्रेजेंट इन द डेटा। हम इस डेटा को
- 23:45डिवाइड करते हैं इंटू क्लस्टर्स।
- 23:47क्लस्टर्स कहने का मतलब है कि हम रिलेटेड
- 23:49डेटा को ग्रुप करने की कोशिश करते हैं।
- 23:52जैसे यहां पर ये सारे डॉट पॉइंट्स जो हैं
- 23:54वो एक तरफ लाई कर रहे हैं तो वी कैन ग्रुप
- 23:56दिस डेटा। ये डॉट्स एक तरफ लाई कर रहे
- 23:58हैं। हम इस डेटा को ग्रुप कर सकते हैं। ये
- 24:00डॉट एक तरफ लाई कर रहे हैं। हम इस डेटा को
- 24:02ग्रुप कर सकते हैं। तो इस तरीके के
- 24:03ग्रुप्स को हम क्लस्टर्स कहते हैं। एंड
- 24:05दिस इज़ हाउ वी ट्राई टू फाइंड पैटर्न्स इन
- 24:08आवर डेटा। अब इसका एक काफी प्रैक्टिकल
- 24:09एग्जांपल होगा। लेट्स सपोज हमारे पास बहुत
- 24:11सारे न्यूज़ आर्टिकल्स हैं। हमारे पास
- 24:12ऑनलाइन जितने भी न्यूज़ आर्टिकल्स हैं, उन
- 24:14सबका हमारे पास डेटा है। अब इस डेटा को हम
- 24:17कैटेगराइज़ करने की कोशिश कर सकते हैं। हम
- 24:19इन आर्टिकल्स को डिवाइड कर सकते हैं इंटू
- 24:20डिफरेंट कैटेगरीज़। जैसे हमारे पास जितने
- 24:23भी टेक रिलेटेड आर्टिकल्स होंगे उनको हम
- 24:25अलग ग्रुप में डालने की कोशिश करेंगे।
- 24:27जितने भी हमारे पास पॉलिटिक्स रिलेटेड
- 24:29आर्टिकल होंगे उनको अलग ग्रुप में डालने
- 24:31की कोशिश करेंगे। जितने भी स्पोर्ट्स
- 24:32रिलेटेड आर्टिकल्स होंगे उनको हम अलग
- 24:34ग्रुप में डालने की कोशिश करेंगे। तो इन
- 24:36अनसपरवाइज्ड लर्निंग हमारे पास कोई
- 24:37फिक्स्ड कैटेगरीज नहीं होती क्योंकि हमारे
- 24:39पास अनलेबल डेटा है। पर फिर भी पैटर्न्स
- 24:41को रिकॉग्नाइज करके हम अपने डेटा को
- 24:43क्लस्टर्स के अंदर या ग्रुप्स के अंदर
- 24:45ऑर्गेनाइज करके उसके अंदर कुछ कैटेगरीज
- 24:47बनाने की कोशिश करते हैं। अब जब भी हम
- 24:49अपने डेटा से इन क्लस्टर्स को फॉर्म करने
- 24:51की कोशिश करते हैं, देयर माइट बी सम डेटा
- 24:53पॉइंट्स व्हिच आर नॉट पार्ट ऑफ़ एनी
- 24:55क्लस्टर। जैसे फॉर एग्जांपल यहां पर इफ वी
- 24:58लुक एट दिस डेटा पॉइंट। तो ये क्या है? ये
- 25:00मेजॉरिटी ग्रुप से थोड़ा सा अलग जाकर है।
- 25:02या अगर हम इस डेटा पॉइंट को देखें तो ये
- 25:04भी मेजॉरिटी ग्रुप से थोड़ा सा अलग जाकर
- 25:06है। तो इस तरीके के जो हमारे डेटा के अंदर
- 25:09पॉइंट्स होते हैं दिस पॉइंट और मे बी दिस
- 25:12पॉइंट इन पॉइंट्स को हम कहते हैं
- 25:14आउटलाइयर्स। इन्हें हम आउटलायर्स भी कह
- 25:16सकते हैं या इन्हें हम एनॉमली कह सकते
- 25:18हैं। तो अनसपरवाइज्ड लर्निंग से हम
- 25:20आउटलाइयर डिटेक्शन या एनॉमली डिटेक्शन को
- 25:22भी परफॉर्म कर सकते हैं। व्हिच इज़ वेरी
- 25:24यूज़फुल इन द फील्ड ऑफ फाइनेंस इन मेडिकल
- 25:27फील्ड एंड उसके साथ में इवन साइबर
- 25:29सिक्योरिटी फील्ड। जैसे एग्जांपल के लिए
- 25:30हमारी साइबर सिक्योरिटी टीम किसी वेबसाइट
- 25:32को एनालाइज़ कर रही है। अब उस वेबसाइट पर
- 25:34बहुत सारे यूज़र्स हैं जो लॉग इन कर रहे
- 25:36हैं। पर हम एक पर्टिकुलर यूजर के लिए
- 25:38डिटेक्ट करते हैं दैट दिस यूजर अंडर 1
- 25:41मिनट के अंदर कोई एक पर्टिकुलर यूजर है
- 25:43जिसने फाइव डिफरेंट सिटीज से लॉग इन किया
- 25:45है। तो व्हाट इज़ दिस? दिस इज़ समथिंग व्हिच
- 25:47इज़ डिफरेंट फ्रॉम नॉर्मल डेटा। सो दिस इज़
- 25:48एनॉमली जिसको हमारा सिस्टम डिटेक्ट कर
- 25:50सकता है। अब जब भी हम अनसपरवाइज्ड लर्निंग
- 25:52की बात करते हैं, उसके अंदर भी वी हैव
- 25:54मल्टीपल टाइप्स ऑफ़ प्रॉब्लम्स दैट वी कैन
- 25:56सॉल्व। जैसे सुपरवाइज लर्निंग के अंदर हम
- 25:58क्लासिफिकेशन एंड रिग्रेशन प्रॉब्लम्स को
- 26:00सॉल्व करते थे। वैसे ही अनसुपरवाइज्ड
- 26:02लर्निंग के अंदर मेन दो टाइप्स की
- 26:03प्रॉब्लम्स हैं जिनको हम सॉल्व करते हैं।
- 26:05क्लस्टरिंग प्रॉब्लम्स एंड एसोसिएशन
- 26:07प्रॉब्लम्स। क्लस्टरिंग प्रॉब्लम्स
- 26:09बेसिकली वो प्रॉब्लम्स होती हैं जिसमें
- 26:10अपने डेटा के अंदर हम कुछ क्लस्टर्स या
- 26:13कुछ ग्रुप्स बनाने की कोशिश करते हैं।
- 26:15जैसे दिस इज़ आवर अनलेबल डेटा। पर इसके
- 26:17अंदर हमने कुछ डिफरेंट-डिफरेंट ग्रुप्स
- 26:19बना दिए। एंड सारे डेटा पॉइंट्स को हमने
- 26:21मल्टीपल क्लस्टर्स के अंदर डिवाइड कर
- 26:23दिया। सो डिफरेंट कलर्स इन दिस ग्राफ
- 26:25रिप्रेजेंट डिफरेंट क्लस्टर्स। तो इसका
- 26:27एग्जांपल हमने ऑलरेडी देख लिया है कि
- 26:29हमारे पास मल्टीपल न्यूज़ आर्टिकल्स हैं।
- 26:30तो उनको हम डिफरेंट क्लस्टर्स या डिफरेंट
- 26:32कैटेगरीज़ में डिवाइड कर सकते हैं। फाइनेंस
- 26:34हो गया, टेक हो गया, स्पोर्ट्स हो गया,
- 26:35पॉलिटिक्स हो गया। वी कैन डिवाइड द डेटा
- 26:37इंटू मल्टीपल क्लस्टर्स। नाउ बेस्ड ऑन द
- 26:39प्रॉब्लम वी कैन डू टू टाइप्स ऑफ़
- 26:40क्लस्टरिंग। एक क्लस्टरिंग होती है हमारी
- 26:43पार्टीशनल क्लस्टरिंग। पार्टीशनल
- 26:45क्लस्टरिंग कहने का मतलब है हमारा कोई भी
- 26:48जो डेटा पॉइंट है जो हमारे डेटा के अंदर
- 26:49एग्जिस्ट करता है वो किसी भी एक क्लस्टर
- 26:52को बिलोंग कर सकता है। तो अगर हम न्यूज़
- 26:53आर्टिकल्स की बात करें तो न्यूज़ आर्टिकल
- 26:55या तो स्पोर्ट्स कैटेगरी का होगा या
- 26:57फाइनेंस कैटेगरी का होगा या पॉलिटिक्स
- 26:58कैटेगरी का होगा वो एक ही कैटेगरी का हो
- 27:00सकता है। मतलब हमारे पास सारे डेटा
- 27:02पॉइंट्स डिफरेंट-डिफरेंट क्लस्टर्स के
- 27:03अंदर अवेलेबल होते हैं। सेकंड टाइप ऑफ़
- 27:05क्लस्टरिंग इज़ कॉल्ड हायरार्किकल
- 27:07क्लस्टरिंग। हायरार्किकल क्लस्टरिंग में
- 27:09सिंगल डेटा पॉइंट कैन बिलॉन्ग टू मल्टीपल
- 27:11क्लस्टर्स। फॉर एग्जांपल हमारे पास एक
- 27:13न्यूज़ आर्टिकल है अबाउट टैक्सेशन ऑन
- 27:15बिटकॉइन इन इंडिया। तो ये पॉलिटिकल
- 27:17आर्टिकल भी हो जाता है। तो ये पॉलिटिक्स
- 27:19क्लस्टर में भी आ सकता है। ये साथ में
- 27:20फाइनेंस क्लस्टर में भी आ सकता है और साथ
- 27:22में टेक क्लस्टर में भी आ सकता है। तो इस
- 27:23तरीके की प्रॉब्लम्स में सिंगल डेटा पॉइंट
- 27:25कैन बिलॉन्ग टू मल्टीपल क्लस्टर्स। तो ये
- 27:27तो हो गई हमारी क्लस्टरिंग प्रॉब्लम्स।
- 27:29उसके साथ में वी आल्सो हैव एसोसिएशन
- 27:31प्रॉब्लम्स। एसोसिएशन प्रॉब्लम्स के अंदर
- 27:32वी ट्राई टू फाइंड रिलेशनशिप्स बिटवीन
- 27:35डिफरेंट एंटिटीज़। और इसका एक काफी पॉपुलर
- 27:37एग्जांपल है मार्केट
- 27:40बास्केट।
- 27:42एनालिसिस
- 27:44जैसे फॉर एग्जांपल Amazon जैसी या कोई भी
- 27:46और ई-कॉमर्स प्लेटफार्म है। इन वेबसाइट्स
- 27:48के पास यूज़र्स कैसे शॉप करते हैं? कौन-कौन
- 27:51से आइटम्स खरीदते हैं? उसका बहुत सारा
- 27:52डेटा होता है। तो उस डेटा को एनालाइज करके
- 27:55ये वेबसाइट्स ये एनालाइज कर सकती हैं कि
- 27:57एक तरीके के आइटम के साथ कौन सा दूसरा
- 27:59आइटम है जो क्लब करके परचेस किया जाता है।
- 28:02फॉर एग्जांपल किसी भी स्टोर के अंदर बहुत
- 28:03सारे कस्टमर्स इफ दे आर परचेसिंग ब्रेड।
- 28:06तो ब्रेड के साथ वो कस्टमर्स मिल्क को भी
- 28:08साथ में परचेस करना प्रेफर करते हैं। नाउ
- 28:10दिस इज अ प्रैक्टिकल एग्जांपल ऑफ मार्केट
- 28:13बास्केट एनालिसिस एंड दिस इज़ समथिंग दैट अ
- 28:15लॉट ऑफ़ वेबसाइट्स लाइक Amazon एंड blink
- 28:16यूज़्ड टू सजेस्ट टू द यूज़र्स व्हाट अदर
- 28:18आइटम्स दे शुड बाय। तो Amazon पे कई बार
- 28:21हमने देखा होगा आइटम्स बोट टुगेदर एक
- 28:24सजेशन आता है कि ये आप आइटम खरीद रहे हो।
- 28:26इसके साथ जनरली ये चीज और हैं जो यूज़र्स
- 28:28खरीदते हैं। सो दैट इज़ एन एसोसिएशन
- 28:30प्रॉब्लम अंडर अनसुपरवाइड लर्निंग। इफ वी
- 28:32टॉक अबाउट सम अनसुपरवाइज्ड लर्निंग
- 28:33एल्गोरिदम्स, देन वी हैव के मींस
- 28:35क्लस्टरिंग, वी हैव हायरार्कल क्लस्टर, वी
- 28:37आल्सो हैव प्रिंसिपल कॉम्पोनेंट एनालिसिस,
- 28:39पीसीए। वी आल्सो हैव डेंसिटी बेस्ड स्पेशल
- 28:41क्लस्टरिंग ऑफ एप्लीकेशंस विद नॉइज़ व्हिच
- 28:43इज़ इन शॉर्ट कॉल्ड डीबी स्कैन। तो इस
- 28:45तरीके की बहुत सारी पॉपुलर एल्गोरिदम्स
- 28:47हैं जो अनसुपरवाइज्ड लर्निंग के अंदर आती
- 28:49हैं। नेक्स्ट वी आर गोइंग टू लर्न अबाउट द
- 28:50थर्ड टाइप ऑफ लर्निंग व्हिच इज़ कॉल्ड
- 28:52रीइंफोर्समेंट लर्निंग। अभी तक हमने
- 28:54सुपरवाइज़्ड लर्निंग को देख लिया। हमने
- 28:56मशीन लर्निंग के अंदर अनसपरवाइज़्ड लर्निंग
- 28:58को देख लिया। अब हम इसके फाइनल मेन टाइप
- 29:00को पढ़ने वाले हैं। व्हिच इज
- 29:01रीइंफोर्समेंट लर्निंग। रीइंफोर्समेंट
- 29:04लर्निंग इज वेरी सिमिलर टू ट्रेनिंग आवर
- 29:06डॉग। हमें अपने डॉग को ट्रेन करना है कि
- 29:08जब हम उसे सेट बोले तो वो बैठ जाए। तो हम
- 29:10में से किसी के पास भी अगर कोई पेट है तो
- 29:12हमें पता होता है। वो हमारी बात मानते हैं
- 29:13तो हम उन्हें कुछ ट्रीट्स देते हैं। हम
- 29:15उन्हें कुछ रिवॉर्ड्स देते हैं। तो इसी
- 29:17तरीके से हम अपनी रीइंफोर्समेंट लर्निंग
- 29:20के अंदर भी अपने मॉडल को ट्रेन करते हैं।
- 29:21तो रीइंफोर्समेंट लर्निंग के अंदर हमारे
- 29:23पास वी हैव द एजेंट व्हिच इज़ बेसिकली द
- 29:25मॉडल दैट लर्न्स टू मेक डिसीजंस बाय
- 29:28इंटरेक्टिंग विद एन एनवायरमेंट। हमारा एक
- 29:30एजेंट होता है जो एनवायरमेंट के साथ
- 29:32इंटरेक्ट करता है। मतलब ये एक एजेंट कुछ
- 29:33प्रेडिक्शनंस करता है और डिपेंडिंग अपॉन
- 29:36प्रेडिक्शन सही है या गलत उसको रिवॉर्ड्स
- 29:38या पेनल्टीज मिलते हैं फॉर इट्स एकशंस।
- 29:41एक्शंस आर बेसिकली प्रेडिकशंस। रिवॉर्ड्स
- 29:43मिलने का मतलब है हम अपने एजेंट को अपने
- 29:45मॉडल को कुछ पॉजिटिव वैल्यू फीड करेंगे।
- 29:48पेनल्टीज मिलने का मतलब है हम अपने एजेंट
- 29:50को नेगेटिव वैल्यू को फीड करेंगे। तो
- 29:52हमारी रीइंफोर्समेंट लर्निंग में एजेंट का
- 29:55जो पर्पस होता है, जो फाइनल पर्पस होता
- 29:57है, दैट इज नॉट टू मेक करेक्ट
- 29:59प्रेडिक्शनंस। एजेंट का पर्पस होता है टू
- 30:01मैक्सिमाइज द रिवॉर्ड्स दैट इट इज़
- 30:04रिसीविंग। और रिवॉर्ड्स कब मिलेंगे? जब
- 30:06करेक्ट प्रेडिक्शनंस होंगे। तो जनरली
- 30:08रीइंफोर्समेंट लर्निंग में जरूरी नहीं है
- 30:09एक सिंगल प्रेडिक्शन होगी। रीइंफोर्समेंट
- 30:11लर्निंग के अंदर हम एक सेट ऑफ
- 30:13प्रेडिक्शनंस करते हैं और अपने आउटपुट को
- 30:15मैक्सिमाइज करते हैं। रीइंफोर्समेंट
- 30:17लर्निंग का जो काफी ज्यादा यूज़ होता है वो
- 30:18गेम्स के अंदर यूज़ होता है। जैसे चेस हमें
- 30:21खेलना है, गो हमें खेलना है तो चेस खेलने
- 30:23के लिए एक सिंगल मूव काफी नहीं है। हमें
- 30:25बहुत सारे मल्टीपल मूव्स करने पड़ेंगे। हो
- 30:27सकता है हमें बीच में अपने किसी स्मॉल
- 30:29प्लेयर को सैक्रिफाइस करना पड़े। बट द
- 30:31पर्पस और द गोल ऑफ़ द एजेंट विल बी टू
- 30:33मैक्सिमाइज़ द रिवॉर्ड। तो ठीक है बीच में
- 30:35एक दो पेनल्टी हो सकती हैं। पर ओवरऑल हम
- 30:37गेम को जीतेंगे तब जब हमारे रिवॉर्ड्स
- 30:39मैक्सिमाइज़ होंगे। तो हमारे एजेंट का गोल
- 30:41होता है टू मैक्सिमाइज़ द रिवॉर्ड्स बाय
- 30:43मेकिंग करेक्ट प्रेडिक्शनंस। तो
- 30:44रीइंफोर्समेंट लर्निंग एग्जैक्टली कैसे
- 30:46वर्क करती है? हमारे पास एक एजेंट होता है
- 30:48जो बेसिकली एक्शंस लेता है मतलब
- 30:50प्रेडिक्शंस करता है। तो द एजेंट
- 30:51इंटरेक्ट्स विद द एनवायरमेंट। और
- 30:54डिपेंडिंग अपॉन द एक्शन अगर वो एक्शन
- 30:56करेक्ट है तो उस केस में हमें रिवॉर्ड
- 30:58मिलता है व्हिच इज़ द पॉजिटिव वैल्यू। पर
- 31:00एक्शन अगर गलत है तो उस केस में रिवॉर्ड
- 31:01की जगह हमें पेनल्टी मिलती है। तो
- 31:03रीइंफोर्समेंट लर्निंग का एक बहुत सिंपल
- 31:05सा एग्जांपल हम ले सकते हैं कि लेट्स सपोज
- 31:07हमें एक ऐसा मॉडल बनाना है जो स्नेक एंड
- 31:10लैडर्स गेम के अंदर हमें जिता सके। तो इस
- 31:13गेम को जीतने के लिए हम रीइंफोर्समेंट
- 31:15लर्निंग को यूज़ कर सकते हैं। तो लेट्स
- 31:16सपोज गेम के अंदर हमने स्नेक को एनकाउंटर
- 31:18किया। मतलब कोई नंबर, कोई डाइस रोल हुआ,
- 31:20कोई नंबर प्रोड्यूस हुआ, स्नेक एनकाउंटर
- 31:22हुआ तो वहां पर हमें पेनल्टी मिलेगी।
- 31:24बिकॉज़ दैट इज़ नॉट अ गुड थिंग फॉर द
- 31:26प्लेयर। पर कभी भी लैडर एनकाउंटर हुआ तो
- 31:28वहां पर हमें रिवॉर्ड मिलेगा। इवेंचुअली
- 31:30गेम के अंदर हम चाहते हैं ज्यादा से
- 31:31ज्यादा लैडर्स को हम क्लाइम करें और एंड
- 31:33पॉइंट तक पहुंच जाएं। तो बेसिकली द
- 31:34ऑब्जेक्टिव इज टू विन द गेम। अब ये तो खैर
- 31:37प्रैक्टिकली ये वाला गेम रियल लाइफ के
- 31:38अंदर काफी ज्यादा लक बेस्ड होता है। पर
- 31:40जैसे चेस हो गया या गो हो गया। इस तरीके
- 31:42के गेम्स जो होते हैं वो स्किल बेस्ड होते
- 31:45हैं या वो पैटर्न बेस्ड होते हैं। तो वहां
- 31:46पर गेम को विन करने के लिए हम
- 31:48रीइंफोर्समेंट लर्निंग को यूज़ कर सकते
- 31:49हैं। इसके अलावा भी रीइंफोर्समेंट लर्निंग
- 31:51की काफी सारी प्रैक्टिकल एप्लीकेशनेशंस
- 31:52हैं। जैसे इट इज़ यूज़्ड इन सेल्फ ड्राइविंग
- 31:54कार्स। इट इज़ आल्सो यूज्ड इन रोबोटिक्स।
- 31:57रोबोट्स किस तरीके से मूव करते हैं, वॉक
- 31:59करते हैं, किस तरीके से ऑब्जेक्ट्स को पिक
- 32:00करते हैं, वहां पर रीइंफोर्समेंट लर्निंग
- 32:02का काफी ज्यादा यूज़ होता है। एंड इफ वी
- 32:04टॉक अबाउट रीइंफोर्समेंट लर्निंग
- 32:05एल्गोरिथ्म्स, तो हमारे पास क्यू लर्निंग
- 32:07है, वी हैव डीप क्यू नेटवर्क्स, वी हैव
- 32:08पॉलिसी ग्रेडियंट मेथड्स एंड प्रॉक्सिल
- 32:10पॉलिसी ऑप्टिमाइजेशन। एंड इसके अलावा भी
- 32:12और भी काफी सारे हमारी रीइंफोर्मेंट
- 32:14लर्निंग के एल्गोरिथ्म्स होते हैं। तो अभी
- 32:16तक हमने मशीन लर्निंग के अंदर सुपरवाइज्ड,
- 32:18अनसुपरवाइज्ड एंड रीइंफोर्समेंट लर्निंग
- 32:20को डिटेल के अंदर कवर कर लिया है। अब यहां
- 32:22तक हमने कांसेप्ट्स को पढ़ लिया है।
- 32:23एप्लीकेशनेशंस को पढ़ लिया है। डिफरेंट
- 32:25एल्गोरिदम्स के नाम पढ़ लिए हैं। पर
- 32:26एक्चुअली प्रैक्टिकली इन डिफरेंट
- 32:28एल्गोरिदम्स को हम इंप्लीमेंट कैसे करते
- 32:30हैं? तो इन डिफरेंट एल्गोरिथ्म्स को
- 32:31इंप्लीमेंट करने के लिए देयर आर मल्टीपल
- 32:33टूल्स दैट वी नीड टू यूज़। इन टूल्स के
- 32:35अंदर सबसे पहली तो हमारी प्रोग्रामिंग
- 32:37लैंग्वेज एक हमें आनी चाहिए। तो उसके अंदर
- 32:39Python इज़ वन ऑफ द मोस्ट पॉपुलर
- 32:40प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जिसको यूज़ करके
- 32:42हमारी हम मशीन लर्निंग एल्गोरिदम्स को
- 32:44लिखते हैं। डेटा पर ट्रेन करते हैं
- 32:45एल्गोरिदम को और प्रेडिकशंस करते हैं। आर
- 32:48इज़ आल्सो अनदर पॉपुलर लैंग्वेज। पर
- 32:50मेजॉरिटी केसेस में आपको पाइथन ही यूज़
- 32:52होते हुए दिखेगी इंडस्ट्री के अंदर भी एंड
- 32:54एकेडमिक्स के अंदर भी। वी हैव अ टूल व्हिच
- 32:56इज़ कॉल्ड जुपिटर नोटबुक। जुपिटर नोटबुक के
- 32:58अंदर हम अपना डिफरेंट पाइथन का कोड लिखते
- 33:00हैं। वी हैव मल्टीपल लाइब्रेरीज़ एंड
- 33:02मॉड्यूल्स जिनको एमएल के अंदर हम यूज़ करते
- 33:04हैं। जैसे नमपाई एंड बांडाज़ को हम यूज़
- 33:05करते हैं फॉर डेटा प्री प्रोसेसिंग। वी
- 33:07यूज़ सीबॉर्न एंड मैट प्लॉट लिब फॉर डेटा
- 33:09विजुअलाइज़ेशन। वी यूज़ लाइब्रेरीज़ लाइक
- 33:11स्काईट लर्न एंड एक्सजी बूस्ट टू ट्रेन
- 33:13आवर मशीन लर्निंग मॉडल्स। तो इन डिफरेंट
- 33:15टूल्स की हेल्प से जितनी भी एल्गोरिदम्स
- 33:16की अभी तक हमने बात की है, हम उनको
- 33:18इंप्लीमेंट करते हैं। नेक्स्ट वी आर गोइंग
- 33:20टू लर्न अबाउट द डिफरेंट कॉन्सेप्ट्स
- 33:22रिलेटेड टू डीप लर्निंग। सो डीप लर्निंग
- 33:24इज़ द सबसेट ऑफ़ मशीन लर्निंग जिसके अंदर वी
- 33:26स्टडी ऑल अबाउट न्यूरल नेटवर्क्स।
- 33:30अभी तक जितनी भी मशीन लर्निंग हमने की है
- 33:33उसे हम कहते हैं स्टैटिस्टिकल मशीन
- 33:35लर्निंग। स्टैटिस्टिकल मशीन लर्निंग
- 33:37एल्गोरिदम्स को जनरली हम अपने स्ट्रक्चर
- 33:39डेटा के ऊपर अप्लाई करते हैं। स्ट्रक्चर
- 33:41डेटा मतलब जो भी टैबुलर डाटा हमारे पास
- 33:42होता है टेबल की फॉर्म में जितने भी डेटा
- 33:45को अभी तक हमने देखा है वो सारा का सारा
- 33:46हमारा ऑलमोस्ट टैबुलर डेटा होता था। तो इस
- 33:49डेटा पर स्टैटिस्टिकल मशीन लर्निंग बहुत
- 33:51अच्छा परफॉर्म करती है। पर जब भी हमारे
- 33:53पास अनस्ट्रक्चरर्ड डेटा आ जाता है वहां
- 33:55पर हमारी स्टैटिस्टिकल मशीन लर्निंग
- 33:56एल्गोरिथ्म्स उतना अच्छा परफॉर्म नहीं
- 33:58करती। अनस्ट्रक्चर डेटा के केस में डीप
- 34:00लर्निंग एल्गोरिदम स्टैटिस्टिकल मशीन
- 34:02लर्निंग से काफी ज्यादा बेटर परफॉर्म करती
- 34:04हैं। क्योंकि उन केसेस के अंदर
- 34:05स्टैटिस्टिकल मशीन लर्निंग में हमें बहुत
- 34:07ज्यादा ह्यूमन इंटरवेंशन करना पड़ता है।
- 34:09नाउ व्हाट एग्जैक्टली डू वी मीन बाय
- 34:10अनस्ट्रक्चरर्ड डेटा। अनस्ट्रक्चर डेटा के
- 34:12एग्जांपल्स हैं। जैसे हमारे पास बहुत सारे
- 34:14कैमरा की रिकॉर्डिंग है या फिर हमारे पास
- 34:16बहुत सारी वीडियो रिकॉर्डिंग्स हैं। फॉर
- 34:18एग्जांपल हम YouTube के अंदर काम करते हैं
- 34:19और YouTube के लिए हमें कोई मशीन लर्निंग
- 34:21मॉडल बिल्ड करना है जो YouTube की ही
- 34:23वीडियोस के डेटा को एज इनपुट लेता है। अब
- 34:26YouTube की जो वीडियोस का डेटा है दैट इज़
- 34:27नॉट टैबुलर डेटा। दैट इज़ अनस्ट्रक्चर्ड
- 34:29डेटा। क्योंकि उसके अंदर बहुत सारे
- 34:31डिफरेंट पैरामीटर्स हैं। या फिर हमारे पास
- 34:33बहुत सारी इमेजेस का डेटा है, हमारे पास
- 34:35बहुत सारी ऑडियो फाइल्स हैं, तो दैट कैन
- 34:36आल्सो बी अनस्ट्रक्चरर्ड डेटा। या फिर अगर
- 34:38हमारे पास किसी एप्लीकेशन के बहुत सारे
- 34:40चैट मैसेजेस हैं व्हिच आर नॉट इन अ
- 34:42फिक्स्ड फॉर्मेट। सो दीज़ आर ऑल एग्जांपल्स
- 34:44ऑफ अनस्ट्रक्चरर्ड डेटा जिसके ऊपर हमारी
- 34:46डीप लर्निंग एल्गोरिदम्स काफी बेटर
- 34:48परफॉर्म करती हैं। जैसे फॉर एग्जांपल अगर
- 34:50हमारे पास कोई भी मॉडल है लेट्स सपोज़ उस
- 34:52मॉडल के अंदर हम बहुत सारी इमेजज़ को फीड
- 34:54करना चाहते हैं। एंड दीज़ आर ऑल ह्यूमन
- 34:56फसेस। तो इस तरीके की एक इमेज का हम
- 34:58एग्जांपल ले सकते हैं जिसमें देयर इज़ अ
- 35:00फेस। अब इस तरीके की इमेज अगर हम किसी
- 35:02नॉर्मल स्टैटिस्टिकल मशीन लर्निंग मॉडल को
- 35:04फील करेंगे तो वहां पर मॉडल का काम होगा
- 35:06टू एनालाइज दिस इमेज। अब इस इमेज को
- 35:09एनालाइज करने के लिए मॉडल को पता होना
- 35:11चाहिए कि आईज एग्जैक्टली होती क्या है? एक
- 35:14नोज एग्जैक्टली क्या होता है? एक माउथ
- 35:16एग्जैक्टली क्या होता है? इस तरीके की
- 35:18चीजें हमें इन टर्म्स ऑफ़ फीचर्स अपने मॉडल
- 35:21को डिफाइन करके बतानी पड़ेंगी। एंड दैट इज़
- 35:23समथिंग व्हिच कैन बी डिफिकल्ट। जैसे फॉर
- 35:25एग्जांपल हम एक मशीन लर्निंग मॉडल को कैसे
- 35:27बताएं एज अ ह्यूमन कैसे प्रोग्राम करें
- 35:29उसके अंदर कि दिस इज एन आई। क्या हम उसे
- 35:32ये बताएं कि फेस के ऊपर जो भी राउंड शेप
- 35:34हो दैट इज़ एन आई बट दैट इज़ नॉट कंप्लीटली
- 35:37एक्यूरेट बिकॉज़ माउथ कैन आल्सो बी राउंड।
- 35:39इनफैक्ट दी एंटायर शेप ऑफ द फेस कैन आल्सो
- 35:42बी राउंड। तो अनस्ट्रक्चरर्ड डेटा के जो
- 35:44फीचर्स होते हैं, वो किसी भी मॉडल के अंदर
- 35:46प्रोग्राम करना कैन बी क्वाइट डिफिकल्ट।
- 35:48तो यहां पर हमारे डीप लर्निंग मॉडल्स बहुत
- 35:50ज्यादा यूज़फुल होते हैं। क्योंकि डीप
- 35:52लर्निंग मॉडल स्पेशलाइज करते हैं इन
- 35:54एक्सट्रैक्टिंग इंफॉर्मेशनेशन फ्रॉम रॉ
- 35:56डेटा। वो बहुत आसानी से इस तरीके के डेटा
- 35:59से जो यूज़फुल इनेशन है उसको एक्सट्रैक्ट
- 36:01कर पाते हैं। एंड हाउ डू दे डू दैट? हाउ
- 36:03डू डीप लर्निंग मॉडल्स वर्क? दे बेसिकली
- 36:06यूज़ न्यूरल नेटवर्क्स। न्यूरल नेटवर्क्स
- 36:08आर नेटवर्क्स व्हिच आर इंस्पायर्ड फ्रॉम द
- 36:10ह्यूमन ब्रेन। हमारे ह्यूमन ब्रेन के अंदर
- 36:12हमारे पास न्यूरॉन्स होते हैं और हमारी
- 36:14ब्रेन के अंदर न्यूरॉन्स के नेटवर्क होते
- 36:16हैं। तो इसी तरीके के आर्टिफिशियल नेटवर्क
- 36:19जब हम बनाते हैं तो उसको कंप्यूटर साइंस
- 36:21के अंदर हम न्यूरल नेटवर्क्स कहते हैं।
- 36:23एंड यही न्यूरल नेटवर्क्स आर एट द कोर ऑफ
- 36:25डीप लर्निंग। इन न्यूरल नेटवर्क्स के अंदर
- 36:27बहुत सारी हिडन लेयर्स होती हैं जो डेटा
- 36:29को बहुत अच्छे तरीके से प्रोसेस करती हैं।
- 36:31लेट्स लर्न इन डेप्थ अबाउट व्हाट न्यूरल
- 36:34नेटवर्क्स आर। तो न्यूरॉन नेटवर्क्स को जब
- 36:35हम विजुअलाइज़ करते हैं, हम उन्हें कुछ इस
- 36:37तरीके से विजुअलाइज़ कर सकते हैं। हमारे
- 36:39पास डिफरेंट-डिफरेंट न्यूरॉन्स होते हैं।
- 36:41हर एक जो सर्कल यहां पर हमें दिख रहा है,
- 36:43दिस इज़ अ न्यूरॉन। दिस इज़ ऑल्सो अ न्यूरॉन
- 36:47एंड दिस इज़ आल्सो अ न्यूरॉन। हर एक जो
- 36:49सर्कल हमें यहां पर दिख रहा है इस नेटवर्क
- 36:52के अंदर, इस एग्जांपल के अंदर, हर एक
- 36:53सर्कल इज़ अ न्यूरॉन। एंड इन न्यूरॉन्स के
- 36:56डिफरेंट-डिफ़ेंट कनेक्शंस होते हैं विद ईच
- 36:58अदर। एंड इन कनेक्शन से ही हमारा प्रॉपर
- 37:00एक न्यूरल नेटवर्क फॉर्म होता है। अब इस
- 37:02न्यूरल नेटवर्क के अंदर डिफरेंट-डिफरेंट
- 37:04लेयर्स होती हैं। जैसे हमारे नेटवर्क के
- 37:06अंदर हमारी जनरली जो इनेशन होती है वो इस
- 37:08डायरेक्शन के अंदर फ्लो करती है। तो जब भी
- 37:10हम अपना इनपुट अपने मॉडल को अपने न्यूरल
- 37:12नेटवर्क को पास करते हैं वो हम पास करते
- 37:14हैं थ्रू द फर्स्ट लेयर एंड दिस फर्स्ट
- 37:17लेयर इज़ कॉल्ड द इनपुट लेयर। ये जो हमारी
- 37:21पूरी लेयर है दिस इज़ कॉल्ड द इनपुट लेयर।
- 37:23एंड हमारी जो लास्ट लेयर है जो फाइनली
- 37:25हमारे लिए आउटपुट को प्रेडिक्ट करती है।
- 37:27कुछ हमारे लिए प्रेडिक्शन देती है। कुछ
- 37:29रिजल्ट देती है। दिस लेयर इज कॉल्ड द
- 37:31आउटपुट लेयर। एंड बीच वाली जितनी भी
- 37:33लेयर्स हैं इनको हम अपनी हिडन लेयर्स कहते
- 37:35हैं। हमारे पास एक नेटवर्क के अंदर कितनी
- 37:37भी हिडन लेयर्स हो सकती हैं। हमने यहां पे
- 37:39सिंगल हिडन लेयर का एग्जांपल लिया है।
- 37:41क्योंकि हमने एक बहुत छोटा न्यूरल नेटवर्क
- 37:42रखा है। पर न्यूरल नेटवर्क्स के अंदर रियल
- 37:44प्रैक्टिकल लाइफ के अंदर मिलियंस,
- 37:46बिलियंस, इवन ट्रिलियंस कनेक्शंस हैं जो
- 37:48एग्ज़िस्ट कर सकते हैं। बट दिस इज़ व्हाट द
- 37:50न्यूरल नेटवर्क लुक्स लाइक इन इट्स
- 37:51सिंपलेस्ट फॉर्म। अब यह तो हमने समझ लिया
- 37:53कि हमारा न्यूरल नेटवर्क दिखता कैसा है।
- 37:55बट हाउ डस दी न्यूरल नेटवर्क एग्जैक्टली
- 37:57वर्क? उसके लिए हम एक सिंपल सा एग्जांपल
- 38:00लेंगे। लेट्स सपोज हम एक कॉलेज के टीचर
- 38:02हैं एंड एज अ टीचर हमें स्टूडेंट्स के लिए
- 38:04उनका सीजीपीए कैलकुलेट करना है। तो हम सब
- 38:07ने देखा होगा, स्कूल के अंदर देखा होगा,
- 38:08कॉलेज के अंदर देखा होगा हमारे डिफरेंट
- 38:10सेट्स ऑफ एग्जाम्स होते हैं और हर एग्जाम
- 38:12के मार्क्स पर हमारे सीजीपीए जो होते हैं
- 38:14वो कैलकुलेट होते हैं। जैसे एग्जांपल के
- 38:16लिए हमारे कॉलेज के अंदर एक हमारे मिड
- 38:18सेमेस्टर्स होते हैं। एक हमारे एंड
- 38:20सेमेस्टर्स होते हैं। तो उसके कुछ मार्क्स
- 38:23हैं और एक हमारे पास होते हैं हमारे कुछ
- 38:25क्लास टेस्ट्स। तुम्हारे कॉलेज ने क्या
- 38:28किया है? हर एक एग्जाम को कुछ ना कुछ
- 38:30वेटेज दिया है। जैसे हो सकता है कॉलेज ने
- 38:33सीजीपीए कैलकुलेशन के लिए मिड सेमेस्टर्स
- 38:35को वेटेज दिया है 0.4 का। हमारे एंड
- 38:38सेमेस्टर्स को भी वेटेज दिया है 0.4 का।
- 38:40क्लास टेस्ट को वेटेज दिया है 0.2 का। तो
- 38:43मिड सेमेस्टर में हमारे जितने भी मार्क्स
- 38:45आते हैं उसको टोटल मार्क्स उसको हम 0.4 से
- 38:47मल्टीप्लाई करेंगे। एंड सेमेस्टर वालों को
- 38:490.4 से मल्टीप्लाई करेंगे। क्लास टेस्ट
- 38:50वालों को 2 से मल्टीप्लाई करेंगे। एंड इस
- 38:52तरीके से कुछ ना कुछ कैलकुलेशन होगी जिसके
- 38:54बाद हमारी सीजीपीए कैलकुलेट होगी। सो दिस
- 38:56इज़ हाउ वी आर ट्राइंग टू कैलकुलेट आ
- 38:58जीपीए। अब इस वेटेज को देखकर काफी सारे
- 39:00स्टूडेंट्स सोचते हैं कि क्लास टेस्ट की
- 39:01तो काफी कम वेटेज है। तो हम क्या करेंगे?
- 39:03मिड सेमेस्टर एंड सेमेस्टर के अंदर तैयारी
- 39:05कर लेंगे और क्लास टेस्ट को स्किप कर लेते
- 39:07हैं। तो जब क्लास टेस्ट को स्टूडेंट्स ने
- 39:09स्किप करना स्टार्ट किया तो स्टूडेंट्स की
- 39:10अटेंडेंस काफी लो हो गई। उससे टीचर्स ने
- 39:12देखा कि स्टूडेंट्स क्लासेस ही नहीं अटेंड
- 39:14कर रहे। तो उन्होंने क्या डिसाइड किया कि
- 39:15हम क्या करेंगे? क्लास टेस्ट की वेटेज हम
- 39:17इंक्रीस कर देंगे। तो इस तरीके से एक
- 39:19पर्टिकुलर पैरामीटर की वेटेज भी इंक्रीस
- 39:22हो सकती है सीजीपीए कैलकुलेट करने के लिए।
- 39:23तो उन्होंने इस वेटेज को इंक्रीस करके कर
- 39:26दिया 0.3 अब इसको इंक्रीस किया है एंड
- 39:28इसको काउंटर करने के लिए मिड सेमेस्टर की
- 39:30वेटेज को डिक्रीज कर दिया टू 0.3 तो अब
- 39:33क्लास टेस्ट की भी काफी अच्छी खासी वेटेज
- 39:36है जिससे टीचर्स को लगा कि नाउ द
- 39:37स्टूडेंट्स आर अटेंडिंग क्लासेस एंड द
- 39:39अटेंडेंस इज़ गोइंग अप। सो नाउ दे आर
- 39:41सेटिस्फाइड। तो इस तरीके का एक सिस्टम
- 39:43हमारे कॉलेज ने डिजाइन किया जिसमें हर एक
- 39:46टाइप ऑफ टेस्ट के लिए एक पर्टिकुलर सेट ऑफ
- 39:48वेटेज है। मिड सेमेस्टर्स की 30% वेटेज
- 39:51है। क्लास टेस्ट की भी 30% वेटेज है।
- 39:53एनसीएम्स की भी 40% वेटेज है। तो ये जो
- 39:56पूरा प्रोसेस अभी हमने डिस्कस किया जिसमें
- 39:58एक कॉलेज के टीचर्स ने लॉजिकली एक
- 40:00ग्रेडिंग सिस्टम बनाने की कोशिश की। हमारे
- 40:02न्यूरल नेटवर्क्स कुछ इसी तरीके से वर्क
- 40:04करते हैं। तो इस प्रोसेस के अंदर कुछ
- 40:06इनपुट गया जो हमारे स्टूडेंट्स के
- 40:07डिफरेंट-डिफरेंट एग्जाम्स में मार्क्स
- 40:09हैं। तो ऐसे ही हमारे न्यूरल नेटवर्क के
- 40:11अंदर भी हम डिफरेंट-डिफरेंट इनपुट्स हैं
- 40:13जिनको पास करते हैं। एंड हर एक जो इनपुट
- 40:16नेक्स्ट लेवल पर पास होता है उसके लिए
- 40:17उसका कुछ पर्टिकुलर वेटेज होता है। तो इफ
- 40:20दीज़ आर आर इनपुट न्यूरॉन्स। हमारी ये जो
- 40:22वैल्यू्यूज हैं जिसको हम वेटेज कह रहे थे
- 40:24अभी तक हमारे न्यूरल नेटवर्क के अंदर इसको
- 40:26हम वेट पैरामीटर कहते हैं। और वेट
- 40:29पैरामीटर बताता है कि ये जो इनपुट वैल्यू
- 40:31है ये कितनी इंपॉर्टेंट है हमारे आउटपुट
- 40:33को कैलकुलेट करने के लिए या फिर नेक्स्ट
- 40:35न्यूरॉन के लिए। तो हमारे न्यूरल
- 40:37नेटवर्क्स में कनेक्शंस के साथ हमारे पास
- 40:38एसोसिएटेड वेट्स होते हैं। और जैसे हमने
- 40:40ये ग्रेडिंग सिस्टम डेवलप किया। हमने काफी
- 40:42ज्यादा ट्रायल एंड एरर यूज़ किया। हमारे
- 40:44पास हो सकता है पहले हमने कोई मिस्टेक कर
- 40:46दी। गलत वैल्यू ले ली। उसके बाद हमने अपने
- 40:48वेट को अपडेट किया। हमने कुछ एडजस्टमेंट्स
- 40:50किए। इसी तरीके से हमारे आर्टिफिशियल
- 40:52न्यूरल नेटवर्क्स भी वर्क करते हैं। मतलब
- 40:54मशीनंस के अंदर जो हम न्यूरल नेटवर्क्स
- 40:55करते हैं उसमें भी हम काफी ज्यादा ट्रायल
- 40:57एंड एरर करते हैं। कई बार हम गलत वेट ले
- 40:59लेते हैं। उसको हम थोड़ा सा करेक्ट करने
- 41:00की कोशिश करते हैं और इवेंचुअली अपने
- 41:02नेटवर्क को इस तरीके से डिजाइन करते हैं
- 41:04कि एट दी एंड हमारे पास जो प्रेडिक्शन आई,
- 41:06जो आउटपुट आई वो एज क्लोज टू द
- 41:09एक्सपेक्टेड वैल्यू हो एज क्लोज एज
- 41:11पॉसिबल। मतलब जितना सही आउटपुट हो सके,
- 41:14जितनी हाई उसकी एक्यूरेसी हो सके, उतना
- 41:16अच्छा हम न्यूरल नेटवर्क बिल्ड करने की
- 41:17कोशिश करते हैं। तो ये हमारा बेसिक आईडिया
- 41:19है अबाउट हाउ डू न्यूरल नेटवर्क्स वर्क?
- 41:21उसके अंदर हम कुछ इनपुट पास करते हैं।
- 41:23अपने वेट्स को एडजस्ट करते हैं। एक
- 41:24फार्मूला बनाने की कोशिश करते हैं। और फिर
- 41:26फाइनली नेक्स्ट टाइम जितने भी इनपुट
- 41:28आएंगे, उसके हिसाब से हम अपनी करेक्ट
- 41:29प्रेडिक्शनंस को कैलकुलेट करेंगे। नाउ
- 41:31लेट्स अंडरस्टैंड द इन डेप्थ प्रोसेस ऑफ़
- 41:34ट्रेनिंग अ न्यूरल नेटवर्क। जब भी न्यूरल
- 41:36नेटवर्क्स को हम ट्रेन करते हैं, उसके
- 41:38अंदर दो इंपॉर्टेंट स्टेप्स हैं जो
- 41:39परफॉर्म होते हैं। सबसे पहला इज फॉरवर्ड
- 41:41प्रोपगेशन व्हिच इज मूविंग फॉरवर्ड इन द
- 41:44न्यूरल नेटवर्क एंड सेकंड स्टेप इज़
- 41:46बैकवर्ड प्रोपगेशन व्हिच इज़ मूविंग
- 41:48बैकवर्ड्स इन द न्यूरल नेटवर्क। तो
- 41:50फॉरवर्ड प्रोपगेशन व्हिच इज़ द फर्स्ट
- 41:52स्टेप। फॉरवर्ड प्रोपगेशन के अंदर हमारे
- 41:54न्यूरल नेटवर्क का काम होता है टू मेक अ
- 41:56गेस या गेस कह सकते हैं इसको या फिर
- 41:59प्रेडिक्शन कह सकते हैं। मतलब बेस्ड ऑन द
- 42:01इनपुट हमारा जो न्यूरल नेटवर्क होता है वो
- 42:03हमारे लिए एक आउटपुट एक प्रेडिक्शन होता
- 42:05है जिसको प्रोड्यूस करता है। सो दिस इज़
- 42:06आवर आउटपुट लेयर जहां से हमारे पास एक
- 42:08प्रेडिक्शन आएगा आंसर आएगा। और सेकंड
- 42:10स्टेप होता है बैकवर्ड प्रोपगेशन। बैकवर्ड
- 42:12प्रोपगेशन में जो भी हमारा प्रेडिक्शन था
- 42:14हम उसको कंपेयर करते हैं विद द
- 42:15एक्सपेक्टेड वैल्यू कि सही आंसर क्या होना
- 42:17चाहिए था। एंड उस हिसाब से अपने नेटवर्क
- 42:20के अंदर हम एडजस्टमेंट्स करते हैं। हम
- 42:22अपने नेटवर्क को एडजस्ट करते हैं। या
- 42:24बेसिकली बैकवर्ड प्रोपगेशन में वी आर
- 42:27लर्निंग फ्रॉम आवर मिस्टेक्स। वी आर
- 42:30लर्निंग फ्रॉम आवर मिस्टेक्स। तो इनिशियली
- 42:32जब हम अपने न्यूरल नेटवर्क को ट्रेन करना
- 42:34स्टार्ट करते हैं। हर एक जो न्यूरॉन होता
- 42:36है एक्सेप्ट फॉर द इनपुट लेयर। हर एक
- 42:38न्यूरॉन के पास अपनी एक स्पेशल वैल्यू
- 42:40होती है। व्हिच इज़ कॉल्ड बायस वैल्यू। तो
- 42:42हर एक न्यूरॉन के पास अपनी एक बायस वैल्यू
- 42:44होती है। लेट्स सपोज एक सिंगल न्यूरॉन का
- 42:46एग्जांपल लेते हैं। लेट्स सपोज दिस इज द
- 42:48न्यूरॉन और इसकी जो बायस वैल्यू है दैट इज
- 42:50b. अब इस न्यूरॉन के पास कहां-कहां से
- 42:52इनेशन आ रही है? एक ये इनपुट वैल्यू है जो
- 42:55यहां पर जा रही है। हम अपने इनपुट्स को
- 42:56कुछ वैल्यूज़ ले लेते हैं। लेट्स सपोज यहां
- 42:58पर x1 इनपुट है। यहां पर x2 इनपुट है।
- 43:00यहां पर x3 इनपुट है। ये सिंगल इनपुट के
- 43:02मल्टीपल पैरामीटर्स हैं जो हम अपने न्यूरल
- 43:04नेटवर्क को फीड कर सकते हैं। तो x1 इनपुट
- 43:06इस चैनल के थ्रू इस कनेक्शन के थ्रू हमारे
- 43:08इस न्यूरॉन तक पहुंचेगा। तो लेट्स सपोज ये
- 43:11जो कनेक्शन है इसका कोई वेट है व्हिच इज़
- 43:13W1 सिमिलरली X2 में भी कुछ एक वेट है फॉर
- 43:17दिस पर्टिकुलर कनेक्शन व्हिच इज़ W2 X3 में
- 43:19भी कुछ वेट है फॉर दिस पर्टिकुलर कनेक्शन
- 43:22व्हिच इज़ W3 तो इस सिंगल न्यूरॉन तक ये
- 43:25तीन डिफरेंट इनपुट्स की जो इनफेशन है वो
- 43:28यहां तक रीच कर रही है। जैसे इस न्यूरॉन
- 43:30के अंदर इनेशन जा रही है वैसे ही
- 43:32इंफॉर्मेशन का फ्लो फॉरवर्ड डायरेक्शन में
- 43:34होता है इन द फर्स्ट स्टेप व्हिच इज़
- 43:35फॉरवर्ड प्रोपगेशन। तो हर एक न्यूरॉन क्या
- 43:37करता है? अपने लेवल पर कुछ ना कुछ
- 43:39कंप्यूटेशंस को परफॉर्म करता है। सबसे
- 43:41जनरल कंप्यूटेशन क्या परफॉर्म होती है? एक
- 43:42न्यूरल नेटवर्क के अंदर। बेसिकली फर्स्ट
- 43:44स्टेप के अंदर एक वेटेड सम होता है जो
- 43:47कैलकुलेट होता है हर एक सिंगल न्यूरॉन के
- 43:49लिए। वेटेड सम कहने का मतलब है अगर हम इस
- 43:50न्यूरॉन का एग्जांपल लें तो हर एक इनपुट
- 43:52का हम वेटेड सम कैलकुलेट करेंगे। व्हिच
- 43:54विल बेसिकली बी x1 * w1 + x2 * w2 + x3 *
- 44:00w3 एंड इस पूरे वेटेड सम के अंदर हम अपनी
- 44:03बायस को भी ऐड कर देते हैं। तो इस तरीके
- 44:05से हमारे पास एक वेटेड सम होता है एंड फिर
- 44:07इस वैल्यू को हम पास करते हैं टू अ स्पेशल
- 44:09फंक्शन व्हिच इज़ कॉल्ड एन एक्टिवेशन
- 44:11फंक्शन। तो ये f कोई भी एक्टिवेशन फंक्शन
- 44:14हो सकता है। हमारे पास मल्टीपल एक्टिवेशन
- 44:16फंक्शनंस हैं जो एग्जिस्ट करते हैं। इनमें
- 44:17से एक काफी कॉमन एक्टिवेशन फंक्शन है
- 44:19हमारा सिग्मोइड फंक्शन व्हिच इज़ बेसिकली 1
- 44:21/ 1 + e टू दी पावर ज़ वी हैव अनदर
- 44:24एक्टिवेशन फंक्शन व्हिच इज़ रेल यू
- 44:26रेक्टिफाइड लीनियर यूनिट। तो इस तरीके से
- 44:28हमारे पास मल्टीपल एक्टिवेशन फंक्शनंस
- 44:29होते हैं। डिपेंडिंग अपॉन हम किस तरीके की
- 44:31प्रॉब्लम है जिसको सॉल्व कर रहे हैं। किस
- 44:33तरीके का मॉडल है जिसको हम बिल्ड कर रहे
- 44:34हैं। तो वेटेड सम को हम कैलकुलेट करके
- 44:36एक्टिवेशन फंक्शन में पास करते हैं। और जो
- 44:38फाइनल वैल्यू आती है फिर उसको हम अपनी
- 44:40नेक्स्ट लेयर की तरफ पास ऑन करते हैं। तो
- 44:42इस तरीके से हर एक जो न्यूरॉन होता है
- 44:44अपने लिए अपनी वैल्यूज़ को कैलकुलेट करता
- 44:46है। कुछ कंप्यूटेशंस, कुछ लॉजिक को
- 44:47परफॉर्म करता है और अपने नेक्स्ट लेवल पर
- 44:49वैल्यूज़ को पास ऑन करता है। तो इस तरीके
- 44:51से एव्री सिंगल न्यूरॉन इज़ मेकिंग सम
- 44:54कंप्यूटेशंस। अ लॉट ऑफ़ कंप्यूटेशंस आर
- 44:55हैपनिंग इन द न्यूरल नेटवर्क। और फाइनली
- 44:57आउटपुट लेयर हमारे लिए कुछ प्रेडिक्शन
- 44:59परफॉर्म करती है। कुछ आउटपुट को जनरेट
- 45:02करती है। सो दिस इज़ फॉरवर्ड प्रोपगेशन
- 45:04जिसमें हमने कुछ इनपुट पास किया और फाइनली
- 45:06हमें कुछ कंप्यूटेशंस के बाद अपना
- 45:08प्रेडिक्शन मिल गया। अब बैकवर्ड प्रोपगेशन
- 45:10में क्या होता है? बैकवर्ड प्रोपगेशन में
- 45:12इस प्रेडिक्शन को हम कंपेयर करते हैं विद
- 45:14व्हाट द एक्सपेक्टेड वैल्यू वाज़। अभी हम
- 45:16ट्रेन कर रहे हैं मॉडल को। मॉडल को जब हम
- 45:18ट्रेन कर रहे हैं, हमारे पास पुराना डेटा
- 45:20है। पुराने डेटा के बेसिस पर हमें पता है
- 45:21कि एक्सपेक्टेड वैल्यू क्या होनी चाहिए।
- 45:23एंड इफ आवर प्रेडिक्शन वाज़ रॉन्ग तो एक
- 45:25तरीके से हम क्वांटिफाई करने की कोशिश
- 45:27करते हैं। ठीक है? हमारा प्रेडिक्शन गलत
- 45:29था पर कितना गलत था। हम बेसिकली अपना लॉस
- 45:32कैलकुलेट करने की कोशिश करते हैं विद अ
- 45:34स्पेशल फंक्शन व्हिच इज़ कॉल्ड अ लॉस
- 45:36फंक्शन। तो लॉस फंक्शन से हम क्वांटिफाई
- 45:39करते हैं कि ठीक है हमारे मॉडल ने गलत
- 45:40प्रेडिक्शन दिया। कंप्लीटली एक्यूरेट
- 45:42प्रेडिक्शन नहीं दिया। क्योंकि कंप्लीटली
- 45:44एक्यूरेट दे देता तो तब तो हमारा मॉडल
- 45:45फुल्ली ट्रेन हो गया। पर हर एक इनपुट के
- 45:47लिए कंप्लीटली एक्यूरेट प्रेडिक्शन नहीं
- 45:49आता। तो प्रेडिक्शन अगर एक्यूरेट नहीं है
- 45:51तो हमें कैलकुलेट करना पड़ेगा कितनी
- 45:52इनक्यूरेसी है। जितनी भी हमारे पास
- 45:54इनक्यूरेसी आएगी मतलब जितना हमारा मॉडल
- 45:56गलत है उसी हिसाब से हम अपने बायस एंड
- 45:58अपने वेट्स को अपडेट करेंगे। एडजस्ट कर
- 46:01देंगे। जैसे हमने अपने सीजीपीए वाले
- 46:03एग्जांपल के अंदर एडजस्टमेंट किए थे वैसे
- 46:05ही हम अपने न्यूरल नेटवर्क के अंदर अपने
- 46:06वेट्स को अपडेट करते हैं। अपनी बायस को
- 46:09एडजस्ट करते हैं। तो अब हम क्या करेंगे?
- 46:11बैकवर्ड प्रोपगेशन में लॉस फंक्शन से वी
- 46:12विल कैलकुलेट आवर लॉस। एंड बैकवर्ड्स हम
- 46:15मूव करेंगे फ्रॉम द आउटपुट लेयर टू द हिडन
- 46:17लेयर्स। मल्टीपल हिडन लेयर्स और हर एक
- 46:20लेवल पर हम अपने वेट्स को बायसेस को
- 46:21एडजस्ट करते हुए चले जाएंगे। पर यह जो
- 46:23एडजस्टमेंट है यह इनपुट लेयर के लिए नहीं
- 46:25होता क्योंकि इनपुट में तो फिक्स्ड इनपुट
- 46:26है जो पास होता है। तो बाकी सारी लेयर्स
- 46:28के लिए हम बैकवर्ड प्रोपगेशन करते हैं और
- 46:30अपनी वैल्यूज को एडजस्ट करते हैं। एंड यही
- 46:32जो फॉरवर्ड बैकवर्ड प्रोपगेशन का प्रोसेस
- 46:34है इसको हम हर एक सिंगल डेटा एंट्री के
- 46:37लिए अपने नेटवर्क के अंदर रिपीट करते हैं।
- 46:38अगर हमारे पास बहुत सारा डेटा है। एक
- 46:40सिंगल एंट्री के लिए फॉरवर्ड प्रोपगेशन भी
- 46:41होगा, बैकवर्ड भी होगा। थोड़ा सा वेट
- 46:43एडजस्ट करेंगे। फिर नेक्स्ट डेटा एंट्री
- 46:44के लिए दोबारा फॉरवर्ड बैकवर्ड प्रोपगेशन
- 46:46होगा। थोड़ा सा एडजस्टमेंट करेंगे। तो इस
- 46:48तरीके से हर बार इस तरीके से हम
- 46:49एडजस्टमेंट करते हैं कि लॉस फंक्शन में जो
- 46:51डेविएशन कैलकुलेट हो रहा है, वी ट्राई टू
- 46:53मिनिमाइज दैट वैल्यू। सो दैट वी कैन गेट
- 46:55मोर एंड मोर करेक्ट प्रेडिक्शन या मोर एंड
- 46:58मोर एक्यूरेट प्रेडिक्शंस। इसीलिए न्यूरल
- 47:00नेटवर्क्स को हम जितना ज्यादा डेटा फीड
- 47:02करते हैं, उतना ज्यादा वो करेक्ट
- 47:04प्रेडिक्शनंस करते हैं। क्योंकि हर बार
- 47:06जैसे-जैसे एक डेटा एंट्री हमारे न्यूरल
- 47:08नेटवर्क को ट्रेन करती है, वैसे-वैसे
- 47:09हमारा मॉडल जो है वो और ज्यादा एक्यूरेट
- 47:12होना स्टार्ट हो जाता है। सो दिस इज़ हाउ
- 47:14वी ट्रेन आवर न्यूरल नेटवर्क। और एक बार
- 47:16ये नेटवर्क ट्रेन हो गया। नेटवर्क ट्रेन
- 47:17होने का मतलब है हमने वेट वैल्यूज़ को फिगर
- 47:20आउट कर लिया। हमने बायस की करेक्ट वैल्यूज़
- 47:21को फिगर आउट कर लिया। उसके बाद वी कैन यूज़
- 47:23दिस मॉडल टू मेक प्रेडिक्शनंस फॉर द न्यू
- 47:25डेटा। तो जैसे हमने ग्रेडिंग सिस्टम
- 47:27डिज़ाइन किया था वैसे ही हम अपने न्यूरल
- 47:29नेटवर्क्स को डिज़ाइन करते हैं। फिर वो नई
- 47:30प्रेडिक्शनंस करते हैं एंड नए कैलकुलेशंस
- 47:32करते हैं। अब व्हाट आर द डिफरेंट टूल्स
- 47:34दैट वी यूज़्ड टू वर्क विद न्यूरल
- 47:35नेटवर्क्स। उसमें दो मेन लाइब्रेरीज़ हमारे
- 47:37पास आ जाती हैं। टेंसर फ्लो एंड पाई
- 47:39टॉर्च। पाई टॉर्च जो है इसको मेटा ने
- 47:41बनाया है। टेंसर फ्लो को Google ने बनाया
- 47:43है। तो ये काफी दो सबसे पॉपुलर लाइब्रेरीज़
- 47:45हैं। टूल्स हैं जिनको हम यूज़ करते हैं
- 47:46न्यूरल नेटवर्क्स के साथ वर्क करने के
- 47:48लिए। इसमें पाई टॉर्च इज़ मोर एकेडमिक एंड
- 47:51टेंसर फ्लो इज़ मोर इंडस्ट्रियल इन नेचर।
- 47:53तो इट इज़ माज़ माय पर्सनल सजेशन कि अगर हम
- 47:55डीप लर्निंग एल्गोरिदम्स को सीख रहे हैं,
- 47:56देन वी शुड स्टार्ट लर्निंग इट विद पाईटच
- 47:58बिकॉज़ इट विल बी मोर सिंपलर एंड मोर
- 48:00इंट्यूटिव फॉर अस एज़ अ बिगिनर। इसके साथ
- 48:02में वी आल्सो हैव अनदर प्लेटफार्म व्हिच
- 48:04इज़ कैगल। कैगल को हम डिफरेंट डेटा सेट्स
- 48:06के लिए यूज़ करते हैं। क्योंकि मशीन
- 48:08लर्निंग एल्गोरिथ्म्स को डीप लर्निंग
- 48:09एल्गोरिथम्स को बहुत सारा डेटा चाहिए होता
- 48:10है। तो ये डेटा एक काफी पॉपुलर वेबसाइट है
- 48:13जिसके ऊपर अवेलेबल होता है। मल्टीपल डेटा
- 48:14सेट्स हैं जिनको हम यूज़ कर सकते हैं। तो
- 48:16कैगल इज़ समथिंग जिसको हम डीप लर्निंग के
- 48:18लिए भी यूज़ करते हैं एंड जिसको हम
- 48:19स्टैटिस्टिकल मशीन लर्निंग के लिए भी यूज़
- 48:20कर सकते हैं। अब उसके साथ में डीप लर्निंग
- 48:22के अंदर क्योंकि बहुत सारा डेटा यूज़ होता
- 48:24है। तो नॉर्मल CPU के अंदर इतना डेटा
- 48:26स्टोर करना पॉसिबल नहीं है। तो जब भी हम
- 48:28न्यूरॉन नेटवर्क्स को ट्रेन करते हैं या
- 48:30तो हमें अपने सिस्टम के अंदर एक्स्ट्रा
- 48:31GPU चाहिए होता है। नहीं तो हम क्लाउड पर
- 48:34मशीनंस हैं जिनको ओरेंट कर सकते हैं। वी
- 48:36कैन यूज़ डिफरेंट प्लेटफॉर्म्स। वी कैन गेट
- 48:38मशीनंस एंड ट्रेन आवर मॉडल्स ऑन क्लाउड।
- 48:40सो दीज़ आर द डिफरेंट टूल्स दैट वी यूज़।
- 48:42नेक्स्ट वी आर गोइंग टू लर्न अबाउट द
- 48:43डिफरेंट न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर्स।
- 48:45न्यूरल नेटवर्क्स के अंदर वी हैव मल्टीपल
- 48:47आर्किटेक्चर्स। जैसे एफएनएन हो गए फीड
- 48:49फॉरवर्ड न्यूरल नेटवर्क, रेकरेंट न्यूरल
- 48:50नेटवर्क्स हो गए, आरएनए, सीएनएन हो गए,
- 48:52कॉन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क्स एंड हमारे
- 48:54ट्रांसफार्मर्स हो गए। दीज़ आर द फोर मोस्ट
- 48:57पॉपुलर एंड मोस्ट यूज़फुल न्यूरल
- 48:58नेटवर्क्स। पर इसके अलावा भी और बहुत सारे
- 49:00यूज़फुल नेटवर्क्स होते हैं। जैसे रेन
- 49:02न्यूरल नेटवर्क्स का ही एक एडवांस्ड वर्जन
- 49:04हमारे पास होते हैं। लॉन्ग शॉर्ट टर्म
- 49:05मेमोरी नेटवर्क्स। उसके अलावा वी आल्सो
- 49:08हैव गैंस व्हिच आर जनरेटिव एडवर्सियल
- 49:10नेटवर्क्स। तो वी हैव अ लॉट ऑफ न्यूरल
- 49:12नेटवर्क टाइप्स। हम चार पॉपुलर नेटवर्क
- 49:14टाइप्स को पढ़ने वाले हैं। सबसे पहले
- 49:16नेटवर्क टाइप है फीड फॉरवर्ड न्यूरल
- 49:18नेटवर्क। एक बार हमारा न्यूरल नेटवर्क
- 49:20ट्रेन हो गया। तो प्रेडिक्शन के टाइम पर
- 49:22जिन नेटवर्क्स के अंदर इंफॉर्मेशन एक ही
- 49:24सिंगल फ्लो के अंदर मूव करती है एंड देयर
- 49:27आर नो लूप्स, नो साइकिल्स। इस तरीके के
- 49:29न्यूरल नेटवर्क्स को हम फीड फॉरवर्ड
- 49:31न्यूरल नेटवर्क कहते हैं एफएन। तो इस
- 49:33न्यूरल नेटवर्क में एक बार हमने अपने डेटा
- 49:35को प्रोसेस किया तो डेटा पाससेस थ्रू
- 49:37मल्टीपल लेयर्स और फाइनली हमारे पास एक
- 49:38प्रेडिक्शन निकल कर आ जाता है। दीज़ टाइप
- 49:40ऑफ़ न्यूरल नेटवर्क्स आर नॉट गुड फॉर
- 49:42सीक्वेंशियल डेटा और टाइम डिपेंडेंट डेटा।
- 49:44तो इन्हें हम जो हमारे सिंपल प्रेडिक्शनंस
- 49:46होते हैं उनके लिए यूज़ करते हैं। जैसे हम
- 49:47इन्हें मेडिकल डायग्नोसिस के लिए यूज़ कर
- 49:49सकते हैं या फिर इफ वी हैव अ लोन अप्रूवल
- 49:51एप्लीकेशन तो उस तरीके के मॉडल्स को बिल्ड
- 49:53करने के लिए हम एफएन को यूज़ कर सकते हैं।
- 49:56सेकंड टाइप ऑफ न्यूरल नेटवर्क्स आर
- 49:57रेकरेंट न्यूरल नेटवर्क्स। रेकरेंट न्यूरल
- 50:00नेटवर्क्स के अंदर देयर इज़ अ स्पेशल थिंग
- 50:03दैट कम्स अप व्हिच इज़ मेमोरी। तो आरएनए जो
- 50:06होते हैं दे रिमेंबर द इनफेशन फ्रॉम
- 50:08प्रीवियस स्टेप्स एंड दैट इनेशन इज़ यूज्ड
- 50:10टू इन्फ्लुएंस द करंट स्टेप्स आउटपुट। तो
- 50:13आरएनएस के अंदर हम लूप बैक कर सकते हैं टू
- 50:15रीयूज द इनफेशन। एंड इसीलिए इन नेटवर्क्स
- 50:17को हम रेकरेंट कहते हैं। तो आरएनएस को
- 50:19हैवली हम सीक्वेंशियल डेटा के लिए यूज़ कर
- 50:21सकते हैं। जहां पर कॉन्टेक्स्ट मैटर करता
- 50:23है। जैसे फॉर एग्जांपल हमारे पास
- 50:24टेक्सचुअल डेटा है। टेक्सचुअल डेटा के
- 50:26अंदर हमारे पास एक सेंटेंस है राज इज़
- 50:28हैप्पी। तो इस तरीके का जो डेटा है इसको
- 50:30हम सीक्वेंशियल डेटा कहेंगे। अब इस डेटा
- 50:32में हमें अगर कॉन्टेक्स्ट ढूंढना है कि
- 50:33ठीक है समबडी इज़ हैप्पी बट वी वांट टू
- 50:35फाइंड आउट द कॉन्टेक्स्ट हु इज़ हैप्पी। तो
- 50:37अगर हमें फिगर आउट करना है हु एग्जैक्टली
- 50:39इज़ हैप्पी। तो उसके लिए हमें प्रीवियस
- 50:41इनेशन की जरूरत पड़ेगी कि राज अ पर्सन इज़
- 50:44द पर्सन हु इज़ हैप्पी इन दिस सेंटेंस। तो
- 50:47इस तरीके का डेटा जहां पर कॉन्टेक्स्ट
- 50:49काफी ज्यादा मैटर करता है वहां पर हम अपने
- 50:51आरएनएस को यूज़ करते हैं। तो आरएनएस को हम
- 50:53लैंग्वेज ट्रांसलेशन के लिए यूज़ कर सकते
- 50:54हैं। स्पीच रिकॉग्निशन के लिए यूज़ कर सकते
- 50:56हैं। इनफैक्ट स्टॉक प्रेडिक्शनंस के लिए
- 50:58भी यूज़ कर सकते हैं। क्योंकि स्टॉक के
- 50:59अंदर हमें पुराना डेटा चाहिए होता है टू
- 51:01मेक सम प्रेडिक्शनंस। अब आरएस का ड्रॉबैक
- 51:04इज़ दैट दे आर गुड इट सीक्वेंसेस बट दे आर
- 51:05बैड एट लॉन्ग टर्म मेमोरी। तो इन्हीं का
- 51:07हम एक एडवांस्ड वर्जन यूज़ करते हैं व्हिच
- 51:08इज़ लॉन्ग शॉर्ट टर्म मेमोरी नेटवर्क। तो
- 51:10इस नेटवर्क को लॉन्ग टर्म मेमोरी के लिए
- 51:12हम ज्यादा यूज़ करते हैं एज़ कंपेयर टू
- 51:13ट्रेडिशनल आरएनएस। थर्ड टाइप ऑफ़ न्यूरल
- 51:16नेटवर्क्स आर कॉनवोल्यूशनल न्यूरल
- 51:17नेटवर्क्स। अब सीएनएन को वैसे इन डेप्थ
- 51:19में समझने में थोड़ा सा टाइम लग सकता है
- 51:20बिकॉज़ दे आर कॉम्प्लेक्स नेटवर्क्स। बट वी
- 51:22विल ट्राई टू गेट एन ओवरव्यू आईडिया ऑफ़
- 51:24व्हाट सीएनएस आर। सीएनएन कॉन्वोल्यूशनल
- 51:27न्यूरल नेटवर्क्स जो होते हैं इनको हम
- 51:28डेडिकेटेडली स्पेशली यूज़ करते हैं फॉर आवर
- 51:31इमेजज़, फॉर आवर वीडियोस। तो इस तरीके का
- 51:33जो डेटा होता है जो ग्रिड की फॉर्म में
- 51:35ग्रिड की फॉर्म में रिप्रेजेंट हो सकता है
- 51:37उस डेटा के लिए सीएनएन बहुत अच्छा परफॉर्म
- 51:39करते हैं। जैसे एक एग्जांपल लेते हैं।
- 51:41लेट्स सपोज़ हमारे पास एक ब्लैक एंड वाइट
- 51:44इमेज है। हमारे पास कोई डेटा है जो ब्लैक
- 51:47एंड वाइट इमेजज़ की फॉर्म में है। और उस
- 51:49डेटा को हम रिप्रेजेंट करते हैं इन द
- 51:51फॉर्म ऑफ़ अ 6/6 ग्रिड। तो हमारी वो ग्रिड
- 51:53कैसी दिखेगी? वो हमारी ग्रिड ऐसी दिखेगी।
- 51:56अब जितनी भी हमारे पास ब्लैक एंड वाइट
- 51:57फोटो होती हैं हमें पता है उन फोटोस को
- 51:59अगर हमें किसी भी नेटवर्क को फीड करना है
- 52:01या अगर हम कंप्यूटर को सिस्टम को अपनी कोई
- 52:03इमेजेस फीड करना चाहते हैं या वीडियोस को
- 52:05भी फीड करना चाहते हैं। अब क्योंकि
- 52:07कंप्यूटरटर्स के पास तो हमारी तरह आईज
- 52:08नहीं होती तो कंप्यूटरटर्स इमेजज़ को
- 52:10वीडियोस को कैसे रीड करता है? वो उन्हें
- 52:12रीड करता है इन द फॉर्म ऑफ़ ग्रिड्स। जैसे
- 52:14इफ दिस एस इफ आई टेक दिस एस एज़ अ पिक्चर
- 52:17तो इस पिक्चर को मेरा जो कंप्यूटर है वो
- 52:20एज़ अ ग्रिड ऑफ़ पिक्सल्स की फॉर्म में रीड
- 52:22करेगा। तो ऐसे ही हम ब्लैक एंड वाइट जो
- 52:24इमेज हैं उनको उनकी एक पिक्सल्स की ग्रिड
- 52:27है उसे इमेजिन कर सकते हैं। अब इस ग्रिड
- 52:28के ऊपर लेट्स सपोज हमारे बहुत सारे नंबर्स
- 52:30हैं। हमने एक फोटो फीड की एंड हमारी जो
- 52:32पिक्चर है उसके ऊपर हमने एक नंबर लिखा हुआ
- 52:34है व्हिच इज़ इक्वल टू वन। तो इस तरीके से
- 52:36वी कैन इमेजिन दिस टू बी अ ब्लैक एंड वाइट
- 52:38पिक्चर जिसके ऊपर एक वन लिखा हुआ है। तो
- 52:41जब हमारी इमेज हमारे सिस्टम के अंदर फीड
- 52:43होगी। इस ग्रिड के अंदर जिन भी पिक्सल्स
- 52:45पर नंबर आ रहा है, दोज़ पिक्सल्स कैन बी
- 52:48डिप्टेड विद वैल्यू वन। कि इन पिक्सल्स
- 52:50में तो ग्रिड के अंदर वैल्यू वन होगी और
- 52:52बाकी सारे पिक्सल्स क्योंकि खाली हैं, तो
- 52:54वो सारे के सारे हमारी वैल्यू ज़ीरो होंगी।
- 52:57तो इस तरीके से हमारी जो ब्लैक एंड वाइट
- 52:58इमेजज़ हैं उनको हम सिस्टम को फीड करते
- 53:00हैं। अब लेट्स सपोज ये जो इमेज का डेटा है
- 53:02इसको हम किसी नॉर्मल न्यूरल नेटवर्क को
- 53:04फीड करना चाहते हैं। तो हमें हर एक पिक्सल
- 53:06का डेटा अपने न्यूरल नेटवर्क को देना
- 53:08पड़ेगा। तो अगर इफ वी हैव अ 6/6 ग्रिड तो
- 53:11हमारे पास कितने पिक्सल्स हो जाएंगे जो
- 53:13हमें फीड करने पड़ेंगे? वी विल हैव 36
- 53:14वैल्यूज़। तो इसके लिए हमें 36 डिफरेंट
- 53:16इनपुट पॉइंट्स चाहिए होंगे टू फीड दिस
- 53:19डेटा टू द नेटवर्क। अब रियल लाइफ के अंदर
- 53:21जो हमारा एक सिंगल इमेज होती है, 6/6 साइज
- 53:24बहुत छोटा होता है उसके अंदर हम इमेज को
- 53:27नहीं लेके आ सकते। हम बहुत बड़ी-बड़ी इमेजज़
- 53:30के साथ डील करते हैं रियल लाइफ के अंदर।
- 53:31तो अगर हम एक बड़ी वैल्यू का भी एग्जांपल
- 53:33लें तो उसमें लेट्स सपोज हमारी जो इमेज का
- 53:35साइज है दैट इज 1000/ 1000 तो उस केस में
- 53:38हमें कितने डिफरेंट इनपुट्स चाहिए होंगे
- 53:39हमें 10 टू दी पावर सिक्स एंड यहां पर ये
- 53:41समझना बहुत जरूरी है कि जब हम 10 टू दी
- 53:43पावर सिक्स वाले नंबर की बात कर रहे हैं
- 53:44जब हमने फॉरवर्ड एंड बैकवर्ड प्रोपगेशन की
- 53:46बात की थी तो हमने देखा था कि किसी भी
- 53:48न्यूरल नेटवर्क के अंदर हिडन लेयर में
- 53:50सिंगल न्यूरॉन के लिए सारे के सारे इनपुट
- 53:52वैल्यूज़ के लिए एक कंप्यूटेशन होता है जो
- 53:54परफॉर्म होता है। तो बिकॉज़ ऑफ़ दिस 10 टू
- 53:56दी पावर सिक्स वैल्यू अ सिंगल न्यूरॉन इन
- 53:58द हिडन लेयर इज गोइंग टू कंप्यूट 10 टू दी
- 54:01पावर सिक्स टाइम्स। तो 10 टू दी पावर
- 54:03सिक्स कंप्यूटेशंस सिर्फ एक सिंगल न्यूरॉन
- 54:05के लिए होंगी। और नेटवर्क के अंदर तो बहुत
- 54:07सारे न्यूरॉन्स हैं जो अलग-अलग
- 54:09कंप्यूटेशंस करती हैं। तो द साइज ऑफ
- 54:11कंप्यूटेशंस इज़ गोइंग टू बी अ लॉट। और ये
- 54:13तो सिर्फ हमने ब्लैक एंड वाइट इमेज का
- 54:15एग्जांपल लिया। यहां पर अगर हमारे पास एक
- 54:16कलर्ड इमेज होती। कलर्ड इमेजज़ को सिस्टम
- 54:19कैसे रिकॉग्नाइज़ करता है? उसके लिए हम
- 54:21आरजीबीस को यूज करते हैं। जैसे अगर हमें
- 54:24कंप्यूटरटर्स को कलर्ड इमेज फीड करनी होती
- 54:26है तो उसके लिए एक सिंगल ग्रिड की जगह
- 54:28ब्लैक एंड वाइट पिक्सल्स की जगह हम रेड,
- 54:31ग्रीन एंड ब्लू तीन अलग-अलग ग्रिड्स हैं
- 54:33जो अपने कंप्यूटर को पास ऑन करते हैं। तो
- 54:35वहां पर ये जो साइज हो जाएगा दिस विल बी 3
- 54:38* 10 टू दी पावर 6। तो हमारी जो नंबर ऑफ
- 54:40कंप्यूटेशंस हैं वो कलर्ड इमेजज़ के लिए और
- 54:42ज्यादा बढ़ गई। और ये तो सिर्फ हमने इमेजज़
- 54:44का एग्जांपल लिया है। अगर हमारे पास
- 54:45वीडियोस हैं तो वीडियोस को हम पास करते
- 54:47हैं इन द फॉर्म ऑफ डिफरेंट फ्रेम्स। हर एक
- 54:49फ्रेम अपने आप में एक बड़ी कलर्ड इमेज
- 54:51होती है। तो इतना सारा डेटा अगर हम नॉर्मल
- 54:53न्यूरल नेटवर्क्स को पास करते हैं, देन
- 54:55दैट इज़ गोइंग टू बी वेरी इंप्रैक्टिकल।
- 54:57एंड यहां पर हमारे सीएनएस हमें बहुत
- 54:59ज्यादा हेल्प करते हैं बाय प्रोसेसिंग ऑल
- 55:01द इमेजज़ एंड प्रोसेसिंग ऑल द वीडियोस इन अ
- 55:03मोर ऑप्टिमाइज्ड फैशन। सीएनएस बेसिकली
- 55:06क्या करते हैं? हमारी इमेज के एक स्मॉल
- 55:08पैच को एक बार में एनालाइज़ करते हैं। उसके
- 55:10अंदर पैटर्न्स देखने की कोशिश करते हैं।
- 55:12रिगार्डिंग कॉर्नर्स, रिगार्डिंग एजेस,
- 55:14रिगार्डिंग शेप्स। एंड उस तरीके से वो
- 55:16इनपुट साइज को रिड्यूस करते हैं जिसकी वजह
- 55:18से डेटा बेटर ऑप्टिमाइज्ड वे में प्रोसेस
- 55:20हो पाता है। सो दैट इज व्हाई वी यूज़
- 55:23सीएनएस एंड दैट इज़ व्हाई सीएनए आर वेरीेंट
- 55:25इन मॉडर्न एप्लीकेशनेशंस ऑफ़ एआई। तो
- 55:26सीएनएस ट्राई टू लुक एट अ स्मॉल पैच ऑफ़ द
- 55:29इमेज एंड दे ट्राई टू एनालाइज़ द ओवरव्यू
- 55:31पिक्चर फ्रॉम इट। अब वी टॉक अबाउट द
- 55:32सीएनएन आर्किटेक्चर, तो वो कुछ इस तरीके
- 55:34का दिखता है जिसके अंदर वी हैव मल्टीपल
- 55:36लेयर्स। तो वी कैन लुक एट द डायग्राम कि
- 55:38यहां पर हमारी जो इमेज है उसके लिए एक
- 55:40स्मॉल पैच को एनालाइज़ किया जा रहा है एट अ
- 55:42टाइम। एंड दिस इज़ डन विथ द हेल्प ऑफ़
- 55:44कर्नल। तो हमारे पास मल्टीपल लेयर्स होती
- 55:45हैं। वी हैव द पुूलिंग लेयर, वी हैव द
- 55:47फुल्ली कनेक्टेड लेयर, वी हैव द
- 55:48कॉन्वोल्यूशन लेयर। एंड इस तरीके से हमारा
- 55:50जो आर्किटेक्चर है वो वर्क करता है। अब वी
- 55:52आर नॉट गोइंग टू डाइव डीप इंटू दिस लेक्चर
- 55:54राइट नाउ बट इफ यू वांट अ डिटेल लेक्चर ऑन
- 55:56हाउ सीएनएन वर्क्स। किस तरीके से
- 55:58आर्किटेक्चर कंप्लीटली वर्क करता है? यू
- 56:00कैन लेट मी नो इन द कमेंट्स एंड वी विल
- 56:01हैव अ सेपरेट लेक्चर अबाउट दिस। तो सीएनएस
- 56:03को हम बहुत हैवीली यूज़ करते हैं फॉर
- 56:05ऑब्जेक्ट क्लासिफिकेशन, फॉर ऑब्जेक्ट
- 56:06डिटेक्शन एंड फॉर वीडियो एनालिसिस।
- 56:08नेक्स्ट टाइप ऑफ न्यूरल नेटवर्क्स जो काफी
- 56:10ज्यादा इंपॉर्टेंट होते हैं। इनफैक्ट आज
- 56:12की डेट में इनका हम काफी ज्यादा यूजेज
- 56:14देखते हैं। दोज़ आर कॉल्ड ट्रांसफॉर्मर्स।
- 56:16ट्रांसफॉर्मर्स बहुत इंपॉर्टेंट टाइप ऑफ
- 56:18न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर होते हैं।
- 56:19इनफैक्ट दे आर द ड्राइविंग फोर्स बिहाइंड
- 56:22जीपीटी। जीपीटी की फुल फॉर्म है जनरेटिव
- 56:26प्रीटेंड
- 56:29ट्रांसफॉर्मर।
- 56:31सो जीपीटी बेसिकली बिहाइंड द सीन
- 56:33ट्रांसफॉर्मर्स को ही यूज़ करता है टू बी
- 56:35एबल टू इंटरेक्ट विद अस। तो
- 56:37ट्रांसफॉर्मर्स को स्पेशली डिजाइन किया
- 56:39गया है टू एनालाइज सीक्वेंशियल डेटा
- 56:41विदाउट आरएनएस। ट्रांसफॉर्मर्स कैसे डिफर
- 56:43करते हैं? ट्रांसफॉर्मर्स हमारे पास इस
- 56:44तरीके का कोई सीक्वशियल डेटा होता है।
- 56:46उसको स्टेप बाय स्टेप एनालाइज़ नहीं करते।
- 56:48वो ओवरऑल डेटा को देखते हैं। एंड फिर
- 56:51बिकॉज़ ऑफ़ अ मैकेनिज़्म व्हिच इज़ कॉल्ड
- 56:53अटेंशन। देयर इज़ अ स्पेशल मैकेनिज़्म इन
- 56:55ट्रांसफॉर्मर्स व्हिच इज़ कॉल्ड अटेंशन। वो
- 56:58डिसाइड करते हैं ओवरऑल डेटा के अंदर कि
- 57:00कौन से पार्ट पर स्पेशल फोकस देना है।
- 57:02व्हाट इज़ गोइंग टू बी मोर रेलेवेंट।
- 57:05बेसिकली न्यूरल नेटवर्क्स के पास अगर कोई
- 57:07भी टेक्स्ट आता है, कोई भी स्ट्रिंग आती
- 57:08है, तो सबसे पहले दिस थिंग इज कनवर्टेड
- 57:10इनू टोकंस। तो कोई भी टेक्स्ट होता है,
- 57:12इसके अंदर हम मल्टीपल टोकंस क्रिएट करते
- 57:15हैं। ये अलग टोकन हो जाएगा, ये अलग टोकन
- 57:16हो जाएगा। तो इस तरीके से एक स्ट्रिंग के
- 57:18अंदर से मल्टीपल टोकंस डिराइव होते हैं।
- 57:20एंड देन फॉर ऑल द टोकंस वी कंप्यूट समथिंग
- 57:22कॉल्ड दी अटेंशन स्कोर। सो फॉर ऑल द टोकंस
- 57:25वी ट्राई टू कैलकुलेट देयर अटेंशन स्कोर
- 57:27विथ ईच अदर। तो उससे हमारे पास जो
- 57:29सीक्वेंशियल डेटा होता है उससे हमारे पास
- 57:30जो टेक्स्ट होता है उसके अंदर हमें
- 57:32कॉन्टेक्स्ट एंड मीनिंग समझने में बहुत
- 57:34ज्यादा हेल्प होती है। जैसे फॉर एग्जांपल
- 57:36यहां पर इफ वी हैव अ सेंटेंस जिसमें द डॉग
- 57:39चज़ द कैट बिकॉज़ इट वाज़ स्केर्ड। तो अगर हम
- 57:41जानना चाहते हैं यहां पर इट कौन है तो
- 57:43उसके लिए कॉन्टेक्स्ट एंड मीनिंग ऑफ़ द
- 57:46डेटा मैटर्स अ लॉट। तो हमें एनालाइज़ करके
- 57:49पता चलेगा इट बेसिकली इज़ रिलेटिंग विथ दिस
- 57:52डॉग कीवर्ड। तो ट्रांसफॉर्मर्स गिव अस अ
- 57:54स्ट्रांग सेंस ऑफ़ द मीनिंग एंड
- 57:56कॉन्टेक्स्ट बिहाइंड द डेटा। इफ वी टॉक
- 57:58अबाउट द आर्किटेक्चर तो ट्रांसफॉर्मर्स का
- 57:59आर्किटेक्चर कुछ ऐसा होता है। इस
- 58:01आर्किटेक्चर को भी अभी हम डिटेल में कवर
- 58:03नहीं करेंगे। इफ यू वांट अ स्पेशल
- 58:05डेडिकेटेड सेशन अबाउट ट्रांसफॉर्मर्स देन
- 58:07यू कैन लेट मी नो इन द कमेंट्स एंड वी विल
- 58:08ब्रिंग अनदर लेक्चर जिसके अंदर वी कैन
- 58:10डेडिकेटेडली टॉक अबाउट द आर्किटेक्चर ऑफ़
- 58:12ट्रांसफॉर्मर्स। सो दिस वाज़ ऑल अबाउट
- 58:13न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर्स। नेक्स्ट वी
- 58:15आर गोइंग टू लर्न अबाउट जनरेटिव एआई। तो
- 58:18अभी तक हमने ओवरव्यू के अंदर अपने एआई की
- 58:21बात की थी। एंड एआई के अंदर हमने मशीन
- 58:23लर्निंग को डिटेल में स्टडी किया। मशीन
- 58:26लर्निंग के अंदर हमने एक और उसके सबडोमेन
- 58:28को डिटेल में डिस्कस किया व्हिच वाज़ डीप
- 58:30लर्निंग जिसमें वी टॉक्ड अबाउट न्यूरल
- 58:32नेटवर्क्स। कैसे उन्हें ट्रेन करते हैं?
- 58:33व्हाट आर द डिफरेंट आर्किटेक्चर्स। एंड
- 58:35इसी की अब एक सबसेट या सबडोमेन या
- 58:37एप्लीकेशनेशंस के बारे में हम डिटेल में
- 58:39बात करने वाले हैं। व्हिच इज़ कॉल्ड जेन
- 58:42एआई। दैट इज़ जनरेटिव एआई। जनरेटिव एआई इज
- 58:45दैट पार्ट ऑफ एआई जिसके अंदर हम टेक्स्ट
- 58:48को, ऑडियो को, वीडियो को, इमेजज़ को जनरेट
- 58:50करने का काम करते हैं। तो अभी तक जितनी भी
- 58:52ट्रेडिशनल मशीन लर्निंग को हमने डिस्कस
- 58:54किया वहां पर हम कुछ ना कुछ इनपुट के
- 58:56बेसिस पर अपनी कुछ क्लासिफिकेशंस कर रहे
- 58:58थे। कुछ हम प्रेडिक्शनंस कर रहे थे बेस्ड
- 58:59ऑन द पैराटर्स। बट जेरेटिव एआई के अंदर हम
- 59:02कोई नई चीज जनरेट करने की कोशिश करते हैं।
- 59:04एंड दैट इज़ हाउ जेन एआई इज़ स्पेशल। एंड आज
- 59:07की डेट में देयर आर अ लॉट ऑफ़ एआई टूल्स
- 59:09व्हिच यूज़ जेन एआई बिहाइंड द सीन्स। इसमें
- 59:11चैट जीपीटी इज़ अ वेरी पॉपुलर एग्जांपल
- 59:13जिसको हम अपने होमवर्क्स सॉल्व करने के
- 59:15लिए यूज़ कर सकते हैं। GitHub कोपायलट इज़
- 59:17आल्सो अनदर पॉपुलर एग्जांपल जो हमारे लिए
- 59:19कोड को जनरेट करता है। सोरा इज़ अनदर
- 59:21पॉपुलर एग्जांपल जो हमारे लिए वीडियोस को
- 59:23जनरेट करता है। तो इस तरीके से वी हैव
- 59:24मल्टीपल टूल्स इन द मार्केट व्हिच जनरेट
- 59:26डिफरेंट काइंड्स ऑफ़ डेटा फॉर अस। सो इफ वी
- 59:28लुक एट ऑल द डिफरेंट टूल्स फॉर जनरेटिव
- 59:30एआई। टेक्स्ट के लिए वी हैव जीपीटी।
- 59:32जीपीडी इज़ क्रिएटेड बाय ओपन एआई एंड ओपन
- 59:34एआई इज़ फंडेड बाय Microsoft. देन वी हैव
- 59:36क्लॉड व्हिच इज़ बिल्ट बाय अ कंपनी कॉल्ड
- 59:38एंथ्रोपिक व्हिच इज़ फंडेड बाय Amazon. देन
- 59:40वी हैव जेमिनाई व्हिच इज़ बिल्ट बाय
- 59:42Google, वी हैव लामा व्हिच इज़ बिल्ट बाय
- 59:44मेटा। एंड इसके अलावा भी बहुत सारी टूल्स
- 59:46हमारे पास अवेलेबल हैं। इमेजेस में वी हैव
- 59:48मिड जर्नी। वी हैव डैली, वी हैव स्टेबल
- 59:50डिफ्यूज़। इसके अंदर स्टेबल डिफ्यूज़न इज़
- 59:52ओपन सोर्स एंड रेस्ट आर क्लोज सोर्स।
- 59:54ऑडियो के लिए वी हैव 11 लैब्स, बार्क,
- 59:56म्यूजिक जैन। वीडियोस के लिए वी हैव सोरा,
- 59:58रनवे, वेहेन। कोड के लिए वी हैव गेट हब को
- 1:00:00पायलट, वी हैव कोड लामा, वी हैव कोड
- 1:00:02विस्पर बाय Amazon व्हिच इज़ स्पेसिफिकली
- 1:00:04फोकस्ड ऑन एडब्ल्यूएस एंड क्लाउड
- 1:00:06डेवलपमेंट। तो इस तरीके से आज की डेट में
- 1:00:08देयर आर अ लॉट ऑफ जनरेटिव एआई टूल्स व्हिच
- 1:00:11आर अवेलेबल इन द मार्केट एंड दैट वी कैन
- 1:00:13यूज़ टू जनरेट न्यू काइंड्स ऑफ़ कंटेंट। अब
- 1:00:15जब भी हम जनरेटिव एआई को समझना चाहते हैं,
- 1:00:17दो और इंपॉर्टेंट टर्म्स हैं जिनको समझना
- 1:00:19बहुत जरूरी है। व्हिच आर एनएलपी एंड
- 1:00:21एलएलएम्स। अब सिंस दीज़ आर बिग कॉन्सेप्ट्स
- 1:00:23वी कांट रियली अंडरस्टैंड एवरीथिंग इन
- 1:00:26डेप्थ अबाउट देम इन अ शॉर्ट पीरियड ऑफ़
- 1:00:27टाइम। बट वी विल ट्राई टू अंडरस्टैंड द
- 1:00:29ओवरव्यू मीनिंग ऑफ एनएलपी एंड एलएलएम्स।
- 1:00:32ताकि नेक्स्ट टाइम जब किसी कन्वर्सेशन के
- 1:00:33अंदर, किसी सेशन के अंदर हम एनएलपी या
- 1:00:35एलएलएम वर्ड्स को सुने तो उनके मतलब उनके
- 1:00:38एक्चुअल इंट्यूशन हमारे अंदर हो। सबसे
- 1:00:40पहले बात करते हैं अबाउट एनएलपी। एनएलपी
- 1:00:42स्टैंड्स फॉर नेचुरल
- 1:00:44लैंग्वेज
- 1:00:46प्रोसेसिंग। एनएलपी इज अ फील्ड इज अ डोमेन
- 1:00:50ऑफ मशीन लर्निंग जिसके अंदर हम लैंग्वेज
- 1:00:53के साथ डील करते हैं। सो दिस इज़ अ फील्ड
- 1:00:55ऑफ मशीन लर्निंग व्हेयर वी टीच मशीनंस टू
- 1:00:57अंडरस्टैंड, इंटरप्रेट एंड जनरेट ह्यूमन
- 1:00:59लैंग्वेजज़। जैसे इंग्लिश हो गई, हिंदी हो
- 1:01:01गई या फ्रेंच हो गई। तो जब भी हम इस तरीके
- 1:01:04के सिस्टम्स के साथ डील करते हैं या इस
- 1:01:05तरीके के मॉडल्स के साथ डील करते हैं जो
- 1:01:07ह्यूमन लैंग्वेज से रिलेट करते हैं।
- 1:01:09ह्यूमन लैंग्वेज को जनरेट करने का काम
- 1:01:11करते हैं। ह्यूमन लैंग्वेज को इंटरप्रेट
- 1:01:13करने का, अंडरस्टैंड करने का काम करते
- 1:01:14हैं। तो बैक ऑफ द माइंड पे हमें ये याद
- 1:01:16रखना है वहां पर हम एनएलपी को यूज़ कर रहे
- 1:01:18हैं व्हिच इज़ नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग।
- 1:01:20एंड एलएलएम्स आर वन टाइप ऑफ़ मॉडल्स व्हिच
- 1:01:22कैन बी यूज़्ड टू सॉल्व एनएलपी टास्क। तो
- 1:01:24एलएलएम्स की फुल फॉर्म होती है लार्ज
- 1:01:27लैंग्वेज मॉडल्स। अब ऐसा नहीं है कि सिर्फ
- 1:01:31एलएलएम्स हैं जो एनएलपी टास्क को सॉल्व
- 1:01:33करने में हेल्प करते हैं। इसके अलावा भी
- 1:01:34हमारे पास काफी सारे मॉडल्स होते हैं जो
- 1:01:36एनएलपी टास्क को सॉल्व करते हैं। व्हिच आर
- 1:01:37नॉट एलएलएम्स। पर एलएलएम्स आर वन ऑफ़ द
- 1:01:40मोस्ट पॉपुलर मॉडल्स इन टुडेज़ टाइम।
- 1:01:42क्योंकि जब भी हम जीपीटी की बात करते हैं,
- 1:01:44जब भी हम क्लॉड की बात करते हैं, वी आर
- 1:01:45बेसिकली यूज़िंग एलएलएम्स। अगर हम जीपीटी
- 1:01:48की बात करें, जीपीटी फोर की बात करें, दिस
- 1:01:49इज़ एन एलएलएम। अगर हम क्लॉड की बात करें,
- 1:01:51दिस इज़ एन एलएलएम। अगर हम लामा की बात
- 1:01:53करें, दिस इज़ एन एलएलएम। तो वी आर
- 1:01:55एक्चुअली यूजिंग अ लॉट ऑफ एलएलएम्स इन द
- 1:01:58फील्ड ऑफ एआई और इन टर्म्स ऑफ़ प्रैक्टिकल
- 1:02:00कंज्यूमर फेसिंग टेक्नोलॉजीस टुडे। तो
- 1:02:02लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स बहुत ज्यादा
- 1:02:03इंपॉर्टेंट टाइप ऑफ टूल होते हैं जिनको हम
- 1:02:05एनएलपी इस फील्ड के अंदर यूज़ करते हैं। तो
- 1:02:08लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स को हम लार्ज क्यों
- 1:02:10कहते हैं? बिकॉज़ एक तो इनके अंदर बहुत
- 1:02:12ज्यादा लार्ज डेटा फीड होता है टू ट्रेन
- 1:02:15देम। दे हैव अ लॉट ऑफ़ डेटा व्हिच दे आर
- 1:02:17ट्रेंड ऑन। अगर हम सिर्फ टेक्स्ट की बात
- 1:02:19करें तो किसी भी एलएलएम को ट्रेन करने के
- 1:02:21लिए हम बहुत सारा इंटरनेट पर जो टेक्स्ट
- 1:02:23अवेलेबल है उसको यूज करते हैं, बुक्स को
- 1:02:25यूज़ करते हैं, आर्टिकल्स को यूज़ करते हैं।
- 1:02:26सो देयर इज़ अ लॉट ऑफ़ डेटा दैट इज़
- 1:02:28कंज्यूम्ड इन ट्रेनिंग दीज़ मॉडल्स। प्लस
- 1:02:30ये जो मॉडल्स होते हैं इनके अंदर लार्ज
- 1:02:32नंबर ऑफ पैराटर्स होते हैं। अगर हम वेट्स
- 1:02:34की बात करें, अगर हम बायसेस की बात करें,
- 1:02:36अगर हम न्यूरॉन्स की बात करें, तो ये जो
- 1:02:37एलएलएम्स के पूरे नेटवर्क होते हैं, बहुत
- 1:02:39बड़े-बड़े नेटवर्क्स होते हैं जिसके अंदर
- 1:02:41बिलियंस एंड इनफैक्ट ट्रिलियंस ऑफ
- 1:02:42पैरामीटर्स भी यूज़ हो सकते हैं। एंड दैट
- 1:02:44इज व्हाई दीज़ मॉडल्स आर कॉल्ड लार्ज
- 1:02:46लैंग्वेज मॉडल्स। तो जब भी हम कहते हैं कि
- 1:02:48हम जेएनएआई को यूज़ कर रहे हैं फॉर
- 1:02:49टेक्स्ट रिलेटेड टास्क। तो वी कैन ऑलमोस्ट
- 1:02:51से विद श्योरिटी कि वहां पर एनएलपी एंड
- 1:02:54एलएलएम्स को यूज किया जा रहा है। सो दैट
- 1:02:56वी आर एबल टू जनरेट टेक्स्चुअल कंटेंट। अब
- 1:02:59जब भी हम एलएलएम्स को यूज़ करने की बात
- 1:03:01करते हैं ऐसा नहीं है कि सिर्फ हमने एक
- 1:03:02सिंगल मॉडल बना लिया। एंड उसके बाद हमारा
- 1:03:04जो मॉडल है हमारा जो एंड यूजर फेसिंग
- 1:03:05प्रोडक्ट है वो प्रिपेयर हो जाता है।
- 1:03:07मल्टीपल कंपनीज़ मल्टीपल डिफरेंट टेक्निक्स
- 1:03:09होती हैं जो एलएलएम्स के साथ में एंप्लॉय
- 1:03:11करती हैं टू मेक देम बेटर एज़ एन एंड यूजर
- 1:03:14फेसिंग प्रोडक्ट। जैसे व्हेन ओपन एआई
- 1:03:16क्रिएटेड चैट जीपीटी तो यह दे यूज़्ड
- 1:03:18समथिंग कॉल्ड आरएलएचएफ व्हिच इज़
- 1:03:20रीइंफोर्समेंट लर्निंग विथ ह्यूमन फ़ीडबैक।
- 1:03:23बेसिकली हमें नहीं पता कि एलएलएम्स
- 1:03:25एक्चुअली क्या आउटपुट है जिसको प्रोड्यूस
- 1:03:27करने वाले हैं क्योंकि इतने सारे
- 1:03:28पैरामीटर्स हो जाते हैं तो उसको कंट्रोल
- 1:03:30करना सारी चीजों को एनालाइज़ करना इज़ नॉट
- 1:03:32वेरी ईजी। तो ओपन एआई ने एक डेडिकेटेड टीम
- 1:03:34रखी जो एलएलएम्स जो भी आउटपुट प्रोड्यूस
- 1:03:36करते हैं उसको एनालाइज़ करने के लिए कि इफ
- 1:03:38दिस आउटपुट इज़ रेलेवेंट और इफ द आउटपुट इज़
- 1:03:41नॉन टॉक्सिक और इट इज़ सूटेबल फॉर द एंड
- 1:03:44यूज़र्स। जैसे फॉर एग्जांपल अगर हम एलएलएम
- 1:03:45को ट्रेन कर रहे हैं और हम उसे कहते हैं
- 1:03:47टू टेल अस अ जोक एंड इफ इट टेल्स अस एन
- 1:03:49ऑफेंसिव जोक जो किसी लेट्स सपोज एथेनिक
- 1:03:52ग्रुप के अगेंस्ट जा रहा है व्हिच इज़
- 1:03:54हर्टिंग द सेंटीमेंट्स ऑफ़ पीपल। तो हमें
- 1:03:56ह्यूमन फीडबैक देना पड़ेगा टू द एलएलएम टू
- 1:03:58रिमूव सच कंटेंट। तो इस तरीके से मल्टीपल
- 1:04:00प्रोसेससेस लाइक रीइंफोर्समेंट लर्निंग
- 1:04:02विद एडिशनल फीडबैक इज़ आल्सो समथिंग दैट
- 1:04:04कैन बी यूज्ड इन द ट्रेनिंग ऑफ़ एलएलएम्स।
- 1:04:06सो दिस वाज़ ऑल अबाउट एनएलपीस एंड
- 1:04:08एलएलएम्स। अब जैसे एनएलपी इज अ फील्ड ऑफ
- 1:04:11मशीन लर्निंग जिसके अंदर हम लैंग्वेजज़ के
- 1:04:12साथ डील करते हैं। वैसे ही वी हैव अनदर
- 1:04:15एआई की ब्रांच एआई की फील्ड जिसके अंदर हम
- 1:04:17इमेजज़ के साथ हम वीडियोस के साथ डील करते
- 1:04:19हैं। व्हिच इज़ कॉल्ड कंप्यूटर विज़न।
- 1:04:21कंप्यूटर विज़न के अंदर वी अलाउ द
- 1:04:23कंप्यूटरटर्स और द सिस्टम्स टू सी एंड
- 1:04:25इंटरप्रेट इमेजज़। जैसे हम अपनी ह्यूमन आईज
- 1:04:28से देखते हैं। तो कंप्यूटर विज़न के अंदर
- 1:04:30जो भी डेटा होता है मेजॉरिटी डेटा जिसके
- 1:04:32साथ डील किया जाता है वो हमारी इमेजज़ होती
- 1:04:35हैं। वो हमारी वीडियोस होती हैं। तो
- 1:04:37बेसिकली ये ऐसा डेटा होता है जिसको हम
- 1:04:38रियल लाइफ के अंदर देखते हैं। तो कंप्यूटर
- 1:04:40विज़न के अंदर सीएनएस आर वेरी पॉपुलर। हमने
- 1:04:43पहले भी बात की थी कि कन्वोल्यूशन एंड
- 1:04:44न्यूरल नेटवर्क्स काफी अच्छे होते हैं एट
- 1:04:46प्रोसेसिंग इमेजेस एंड वीडियोस। तो सीएनएस
- 1:04:49का बहुत ज्यादा रोल होता है कंप्यूटर विज़न
- 1:04:51के अंदर। एंड कंप्यूटर विज़न इज़ अनदर
- 1:04:52ब्रांच ऑफ़ मशीन लर्निंग जिसके अंदर
- 1:04:54डेडिकेटेडली वी टॉक अबाउट द विजुअल्स एंड
- 1:04:56द विजुअल इंटरप्रिटेशंस। तो कंप्यूटर विज़न
- 1:04:58के भी काफी सारे प्रैक्टिकल रियल लाइफ
- 1:04:59एप्लीकेशंस हैं जैसे फेस रिकॉग्निशन हो
- 1:05:01गया या सेल्फ ड्राइविंग कार्स के अंदर भी
- 1:05:03बहुत ज्यादा यूज़ होता है टू एक्चुअली सी द
- 1:05:05रोड टू इंटरप्रेट कि रोड पर क्या-क्या
- 1:05:07ऑब्जेक्ट्स हैं, वेयर आर द पेडेस्ट्रिंस।
- 1:05:09तो इस तरीके की जो इनेशन होती है, उसको हम
- 1:05:11कंप्यूटर विज़न के थ्रू प्रोसेस करते हैं।
- 1:05:12सो नाउ वी हैव रेड अ पॉइंट व्हेयर वी कैन
- 1:05:14कलनेट दिस सेशन। तो आज के सेशन के अंदर आज
- 1:05:16के लेक्चर के अंदर हमने बहुत सारे
- 1:05:18कॉन्सेप्ट्स के बारे में डिटेल में बात
- 1:05:19की। वी स्टार्टेड विद आर्टिफिशियल
- 1:05:21इंटेलिजेंस। उसके बाद हमने मशीन लर्निंग
- 1:05:23को डिटेल में डिस्कस किया। मशीन लर्निंग
- 1:05:24के कौन-कौन से डिफरेंट टाइप्स होते हैं?
- 1:05:26उनके अंदर कौन सी सब प्रॉब्लम्स होती हैं
- 1:05:28जिनको हम सॉल्व करते हैं। उसके बाद वी
- 1:05:29डिस्कस्ड अबाउट डीप लर्निंग। डीप लर्निंग
- 1:05:31में न्यूरल नेटवर्क्स क्या होते हैं? कैसे
- 1:05:33ट्रेन होते हैं? व्हाट आर द डिफरेंट
- 1:05:34आर्किटेक्चर्स एंड देन वी लर्नड अबाउट
- 1:05:36टर्म्स लाइक जनरेटिव एआई, एनएलपी,
- 1:05:38कंप्यूटर विज़न एंड एलएलएम्स। तो आई होप कि
- 1:05:41आज के लेक्चर से हमें डिटेल में समझ में
- 1:05:43आया होगा कि व्हाट एग्जैक्टली इज एi एंड
- 1:05:45हाउ आर द डिफरेंट थिंग्स द डिफरेंट टूल्स
- 1:05:47द डिफरेंट एल्गोरिदम्स व्हिच आर वर्किंग
- 1:05:49इन द फील्ड ऑफ एi एंड किस तरीके से जो भी
- 1:05:52टूल्स जो भी एप्लीकेशनेशंस को आज की डेट
- 1:05:53में हम यूज़ कर रहे हैं जो बैक एंड में एआई
- 1:05:55को मशीन लर्निंग को यूज़ करते हैं वो
- 1:05:57एक्चुअली किस तरीके से वर्क करते हैं और
- 1:05:58उनके बैक एंड में कैसा-कसा लॉजिक है जो
- 1:06:00अप्लाई होता है। तो आई हैव ट्राइड माय
- 1:06:02बेस्ट टू एक्सप्लेन ऑल ऑफ़ द डिफरेंट
- 1:06:03कॉन्सेप्ट्स इन दिस शॉर्ट अमाउंट ऑफ़ टाइम।
- 1:06:05अब इसके अलावा अगर किसी और कॉन्सेप्ट पर
- 1:06:06हमें डेडिकेटेड सेशन चाहिए तो उसके लिए यू
- 1:06:08कैन लेट मी नो इन द कमेंट्स। एंड उसके साथ
- 1:06:10में यू कैन आल्सो लेट मी नो व्हाट वाज़ द
- 1:06:11मोस्ट रेलेवेंट पार्ट फॉर यू इन टुडे
- 1:06:13सेशन। कौन सा पार्ट है? कौन से
- 1:06:14कॉन्सेप्ट्स हैं जिनको सीखने में आज के
- 1:06:16सेशन में हमें सबसे ज्यादा मजा आया एंड
- 1:06:17व्हिच वर मोस्ट यूज़फुल एंड रेलेवेंट टू
- 1:06:19यू। यू कैन लेट मी नो अबाउट देम इन द
- 1:06:21कमेंट टू। आज के लिए इतना ही। मिलते है
- 1:06:22नेक्स्ट सेशन के अंदर। टिल देन कीप
- 1:06:23लर्निंग एंड कीप एक्सप्लोरिंग।
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This page contains the full transcript of AI Complete OneShot Course for Beginners | Learn AI & ML Fundamentals from Scratch by Apna College, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 14,897 words across 1,973 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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