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ACCA Knowledge Level MA | Absorption & Marginal Costing : Management Accounting | Aadhar Batch — Transcript

by ACCA by PW · 18,271 words · 2,603 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:01हेलो स्टूडेंट्स कैसे हैं आप सब लोग? मैं
  2. 0:04आप लोगों का मेंटर दोस्त एंड गाइड निमेशन
  3. 0:06हाजिर हूं आप लोगों के सामने हमारे
  4. 0:08मैनेजमेंट अकाउंटिंग के आधार बैच के
  5. 0:10नेक्स्ट लेक्चर के साथ में। आज की इस
  6. 0:13क्लास में इस लेक्चर में मैं आप लोगों के
  7. 0:14साथ में बातचीत करने वाला हूं एब्सॉर्प्शन
  8. 0:16एंड मार्जिनल कॉस्टिंग के बारे में।
  9. 0:18अब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग को लेके मैंने आपको
  10. 0:20थोड़ा बहुत इंट्रोडक्शन दिया था जब हम
  11. 0:23अबजॉर्प्शन सॉरी ओवरहेड्स के अंदर हम
  12. 0:26एलोकेशन अपॉर्शनमेंट और एब्सॉर्प्शन के
  13. 0:29बारे में बातचीत कर रहे थे। आज आगे की
  14. 0:31बातचीत करेंगे कि एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग
  15. 0:32एक्चुअली में और क्या-क्या चीजें हमें
  16. 0:34बताती है और मार्जिनल कॉस्टिंग नाम की जो
  17. 0:37दूसरी कॉस्टिंग है, इन दोनों में क्या
  18. 0:39डिफरेंस है? इन दोनों की क्या मतलब
  19. 0:41थ्योरिटिकल बैकग्राउंड है? ये किस तरीके
  20. 0:43से हमारे मैनेजमेंट अकाउंटिंग में हमें
  21. 0:45कहां-कहां पर हमें हेल्प करती हैं? किस
  22. 0:47तरीके से इनको यूज़ करा जाता है। ठीक है
  23. 0:49साहब। चलिए तो बातचीत स्टार्ट करते हैं।
  24. 0:53अ हमेशा की तरह भाई ये लिंक है इस बैच का
  25. 0:56आधार बैच का। तो किसी को भी बच्चे को अगर
  26. 0:58इन सेशंस की पीडीएफ चाहिए, नोट्स की
  27. 1:00पीडीएफ चाहिए, आपको लेक्चर्स वगैरह और
  28. 1:03देखने हैं, करने हैं तो आप इस बैच में जा
  29. 1:05सकते हैं। यहां पर आपको बैच की
  30. 1:06रिकॉर्डिंग्स वगैरह और पीडीएफ वगैरह मिल
  31. 1:08जाएगी। क्यूआर कोड स्कैन कर सकते हो। चाहो
  32. 1:10तो लिंक पे क्लिक कर सकते हो।
  33. 1:15हां जी। तो सबसे पहले बातचीत स्टार्ट करते
  34. 1:17हैं एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग के साथ में। हम
  35. 1:20लोगों ने ओवरहेड्स के चैप्टर में बात करी
  36. 1:23थी कि एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग क्या होती है
  37. 1:25साहब? एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग एक कॉस्टिंग
  38. 1:27का एक ब्रांच है जो ये बोलता है जिसे हम
  39. 1:30फुल कॉस्टिंग भी कहते हैं। जो ये कहता है
  40. 1:31किसी प्रोडक्ट की अगर आपको टोटल कॉस्ट
  41. 1:33निकालनी है। अगर प्रोडक्ट की टोटल कॉस्ट
  42. 1:35निकालनी है तो आपको
  43. 1:38जितने भी प्रोडक्शन ओवरहेड्स हैं चाहे वो
  44. 1:40वेरिएबल नेचर के हो, चाहे वो फिक्स्ड नेचर
  45. 1:42के हो। आपको सबको ऐड करना पड़ेगा। यह
  46. 1:46टेक्निकली वेरिएबल और फिक्स की बात तो
  47. 1:48करता भी नहीं है। अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग को
  48. 1:50यह कहता है के खर्चे जो है वो दो टाइप के
  49. 1:53होते हैं। या तो रिलेटेड टू प्रोडक्शन या
  50. 1:56नॉट रिलेटेड टू प्रोडक्शन। मतलब प्रोडक्शन
  51. 1:58कॉस्ट या नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट। और जितनी
  52. 2:01भी प्रोडक्शन कॉस्ट्स हैं वो सारी की सारी
  53. 2:03आपके इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन के अंदर
  54. 2:06प्रोडक्शन वैल्यू्यूएशन के अंदर इंक्लूड
  55. 2:08होनी चाहिए। तो अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का
  56. 2:11जो बेस है वो क्या कहता है? अब्सॉर्प्शन
  57. 2:13कॉस्टिंग इज अ मेथड ऑफ शेयरिंग एंड
  58. 2:15अब्सॉर्बिंग इनडायरेक्ट कॉस्ट जो आपकी
  59. 2:17ओवरहेड्स हैं इनू टोटल कॉस्ट ऑफ यूनिट ऑफ
  60. 2:19अ प्रोडक्ट और सर्विस। हम कहते हैं कि ये
  61. 2:21जो मेथड है ये आपको बताता है किस तरीके से
  62. 2:23आप शेयर करते हो। किस हिसाब से आप
  63. 2:25एब्सॉर्ब करते हो आपकी इनडायरेक्ट कॉस्ट
  64. 2:27को जो आपके ओवरहेड्स हैं इंटू किसमें?
  65. 2:28इंटू टोटल कॉस्ट। ताकि आप एक यूनिट की
  66. 2:30टोटल कॉस्ट निकाल सको। यहां पर हम कहते
  67. 2:33हैं कि आप सारे के सारे ओवरहेड्स चाहे वो
  68. 2:35वेरिएबल हो चाहे फिक्स्ड हो। उन सबको
  69. 2:37इंक्लूड करने की कोशिश करते हो। ठीक है?
  70. 2:40इंक्लूड्स ऑल ओवरहेड कॉस्ट इन अ वेरिएबल
  71. 2:43और फिक्स्ड इन कॉस्ट फिगर्स सो दैट
  72. 2:44प्राइसेस एट व्हिच द गुड्स एंड सर्विज आर
  73. 2:46सोल्ड कैन कवर लॉन्ग टर्म ओवरहेड्स एंड
  74. 2:49प्राइम कॉस्ट। ऐसा हम क्यों कर रहे हैं?
  75. 2:51हम क्यों कह रहे हैं कि ओवरहेड्स की कॉस्ट
  76. 2:53को भी आप इंक्लूड करो। ताकि आपके जो
  77. 2:55प्रोडक्ट की कॉस्ट है ना वो सिर्फ प्राइम
  78. 2:58कॉस्ट को कवर नहीं करें। क्योंकि डायरेक्ट
  79. 3:00मटेरियल, डायरेक्ट लेबर, डायरेक्ट
  80. 3:01एक्सपेंस ये तो आपकी प्राइम कॉस्ट में
  81. 3:02आपने इंक्लूड कर दिया है। बट उसके अलावा
  82. 3:04जो बाकी के एक्सपेंसेस हैं जो प्रोडक्शन
  83. 3:06में हेल्प करते हैं, जब तक आप उनको
  84. 3:08इंक्लूड नहीं करोगे तब तक आपको पता ही
  85. 3:10नहीं पड़ेगा कि भ आपकी फैक्ट्री में आपकी
  86. 3:12कंपनी में कौन-कौन से एक्सपेंसेस हो रहे
  87. 3:14हैं और उनका किस तरीके से कि प्रोडक्ट की
  88. 3:16कॉस्ट पे फर्क पड़ता है। और अगर आपने सारे
  89. 3:18कॉस्ट को इंक्लूड ही नहीं करा है तो आपकी
  90. 3:20सेलिंग प्राइस सही नहीं आएगी। सेलिंग
  91. 3:22प्राइस सही सही नहीं आएगी तो आप अपनी सारी
  92. 3:24की सारी कॉस्ट को रिकवर ही नहीं कर पाओगे।
  93. 3:26और जब पूरी की पूरी कॉस्ट रिकवर नहीं होगी
  94. 3:28तो आपके जो एस्टीेटेड प्रॉफिट के फिगर
  95. 3:30हैं, ग्रॉस प्रॉफिट के फिगर्स वगैरह है वो
  96. 3:32ऑब्वियस सी बात है गलत आएंगे। फॉर
  97. 3:33एग्जांपल मान लो कि आपने सिर्फ प्राइम
  98. 3:36कॉस्ट को कैलकुलेट करा क्योंकि वो
  99. 3:37डायरेक्टली ट्रेसेबल होती है। उसको सब
  100. 3:38कैलकुलेट कर भी लेते हैं। तो वो पता पड़ा
  101. 3:40किसी प्रोडक्ट को बनाने की डायरेक्ट कॉस्ट
  102. 3:42आ रही है मान लो 10। ठीक है? आपको लगा सर
  103. 3:4410 का प्रोडक्ट है। हम इसको 15 में
  104. 3:46मार्केट में बेच देते हैं। आपको लग रहा है
  105. 3:48आपने फाइव की मार्जिन कमाई है। ठीक है?
  106. 3:50कॉस्ट के ऊपर आप 50% का मार्जिन लेके बैठे
  107. 3:52हो। सेलिंग प्राइस के ऊपर 33.33% का आपका
  108. 3:56प्रॉफिट मार्जिन है। आपको बढ़िया चीज लग
  109. 3:57रही है। बट जब रियलिटी सामने ये पता पड़ा
  110. 4:00कि यार आपने जब प्रॉफिट निकाल के देखा
  111. 4:01एक्चुअली में पता पड़ा सर हमारा प्रॉफिट
  112. 4:03तो उतना नहीं आ रहा है। बोले क्यों नहीं आ
  113. 4:04रहा? जब अपन तो 33.33% की मार्जिन पे सेल
  114. 4:07कर रहे हैं। हमारी कॉस्ट पे 50% के
  115. 4:09मार्कअप पे सेल कर रहे हैं। 10 की कॉस्ट
  116. 4:11है। 15 में बेच रहे हैं। पांच की प्रॉफिट
  117. 4:13होना चाहिए। पता पड़ेगा कि सर वो कॉस्टिंग
  118. 4:15गलत थी। वो कुछ दूसरे खर्चे भी तो हैं जो
  119. 4:17हम इन्हें इंक्लूड ही नहीं करे। तो बोले
  120. 4:19क्यों इंक्लूड नहीं कर रहे? क्योंकि हम
  121. 4:20एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग को फॉलो नहीं कर रहे
  122. 4:22थे। तो एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग इसलिए कहता
  123. 4:23है कि जब तक आप सारे के सारे एक्सपेंसेस
  124. 4:25को इंक्लूड नहीं करोगे तो फिर सही प्रॉफिट
  125. 4:27कहां से आएगा? उसका एस्टीमेट ही नहीं लगा
  126. 4:28पाओगे। ठीक है? साहब तो इसलिए एब्जॉर्प्शन
  127. 4:31कॉस्टिंग काम की है। इसलिए इसको अपन फुल
  128. 4:32कॉस्टिंग भी कहते हैं। इसी में हमने
  129. 4:34अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का प्रोसेस पढ़ा था।
  130. 4:35पिछले चैप्टर में ओवरहेड्स में इसमें कहा
  131. 4:37सबसे पहले कोशिश करते हैं कि खर्चों को
  132. 4:38एलोकेट कर दो। ठीक है? फिर अपोरर्शन कर
  133. 4:41दो। अब ये दोनों होने के बाद में
  134. 4:42री-अपॉर्शनमेंट करा जाता है। पहले आप आपके
  135. 4:45जो ओवरहेड की कॉस्ट है उसको आप अपने
  136. 4:47प्रोडक्शन कॉस्ट सेंटर और सर्विस कॉस्ट
  137. 4:48सेंटर्स पे एलोकेट और अपोरर्शन करने की
  138. 4:50कोशिश करते हो। फिर उसके बाद में सर्विस
  139. 4:52सेंटर के जो कॉस्ट है उनको वापस से
  140. 4:53प्रोडक्शन कॉस्ट सेंटर्स पर ट्रांसफर करते
  141. 4:55हो रीप्रोचमेंट कहते हैं। और लास्ट में जो
  142. 4:58आपके पास में प्रोडक्शन कॉस्ट सेंटर के
  143. 4:59खर्चे हैं उसको आप पर यूनिट में एब्जॉर्ब
  144. 5:02करने की कोशिश करते हो। उसे अपन
  145. 5:03एब्जॉर्प्शन कहते हैं ओआर कैलकुलेट करके।
  146. 5:05ये सब अपन ने ओवरहेड वाले चैप्टर में देख
  147. 5:07लिया था।
  148. 5:08अब आता है दूसरा मार्जिनल कॉस्टिंग। चलो
  149. 5:11एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग तो ये कहता है कि
  150. 5:13आपको प्रोडक्ट की कॉस्ट निकालने के लिए
  151. 5:14सारी की सारी कॉस्ट को इंक्लूड करना
  152. 5:16चाहिए। ठीक है? एक चीज और ध्यान रखना
  153. 5:18एमसीक्यू में काम आएगी। अब्सॉर्प्शन
  154. 5:20कॉस्टिंग क्या कहता है? अब्सॉर्प्शन
  155. 5:22कॉस्टिंग डिवाइड करता है कॉस्ट को इनू
  156. 5:23प्रोडक्शन एंड नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट।
  157. 5:47ये कॉस्ट को दो पार्ट में डिवाइड करता है।
  158. 5:49ये कहता है कि कुल मिला के कंपनी में जो
  159. 5:51भी खर्चे हो रहे हैं वो दो टाइप के हैं।
  160. 5:52वन ऑफ़ द टू टाइप। या तो वो प्रोडक्शन में
  161. 5:54हेल्प कर रहे हैं। किसी तरीके से
  162. 5:55डायरेक्टली इनडायरेक्टली तो प्रोडक्शन
  163. 5:57कॉस्ट का पार्ट है। डायरेक्टली कर रहे हैं
  164. 5:58तो प्राइम कॉस्ट का पार्ट है।
  165. 6:00इनडायरेक्टली कर रहे हैं तो प्रोडक्शन
  166. 6:01ओवरहेड का पार्ट है। या फिर
  167. 6:04कॉस्ट इंकर्ड इंटू प्रोडक्शन कॉस्ट और फिर
  168. 6:06वह खर्चे जो प्रोडक्शन के काम नहीं आ रहे
  169. 6:08उन्हें अपन नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट बोल
  170. 6:10देंगे।
  171. 6:15ठीक है? तो अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग ये चीज
  172. 6:17बोलती है कि भ अपनी जितनी भी कॉस्ट आप
  173. 6:19इंकर कर रहे हो कंपनी में वो दो कैटेगरी
  174. 6:22में डिवाइड हो सकती है। प्रोडक्शन कॉस्ट
  175. 6:23नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट। ठीक है सर?
  176. 6:42अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग क्या कहती है? जो
  177. 6:43कॉस्ट्स हैं उनको आप दो पार्ट में डिवाइड
  178. 6:46कर सकते हो। इदर या तो
  179. 6:50प्रोडक्शन रिलेटेड कॉस्ट या नॉन प्रोडक्शन
  180. 6:52रिलेटेड कॉस्ट।
  181. 7:01प्रोडक्शन कॉस्ट को वापस आप दो पार्ट में
  182. 7:02डिवाइड कर सकते हो। एक आपकी प्राइम कॉस्ट,
  183. 7:05वो कॉस्ट जो डायरेक्टली ट्रेसेबल है और एक
  184. 7:08आपके प्रोडक्शन ओवरहेड्स।
  185. 7:13नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट में आपके बच गए जितने
  186. 7:15भी नॉन प्रोडक्शन ओवरहेड्स आते हैं।
  187. 7:20ठीक है? प्रोडक्शन ओवरहेड, नॉन प्रोडक्शन
  188. 7:22ओवरहेड इन सबके बारे में हमने कॉस्ट
  189. 7:23क्लासिफिकेशन वाले चैप्टर में बहुत डिटेल
  190. 7:25में बात कर रखी है। आप उस वाली वीडियो को
  191. 7:27देख करके इन कांसेप्ट्स को और क्लेरिफाई
  192. 7:29कर सकते हो। जिन बच्चों को इन कांसेप्ट्स
  193. 7:30में थोड़े डाउट है तो वो आप एक बार कॉस्ट
  194. 7:32क्लासिफिकेशन का लेक्चर देख लो। उसमें
  195. 7:34आपके ये कांसेप्ट्स वहां पे क्लियर हो
  196. 7:36जाएंगे। ठीक है? फिर आता है मार्जिनल
  197. 7:39कॉस्टिंग। अब कहते हैं मार्जिनल कॉस्टिंग
  198. 7:41क्या होती है? तो कहते हैं मार्जिनल
  199. 7:42कॉस्टिंग इज़ अ कॉस्टिंग मेथड यूज्ड फॉर
  200. 7:43शॉर्ट टर्म डिसीजन मेकिंग। मार्जिनल
  201. 7:45कॉस्टिंग में और एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग
  202. 7:47मतलब जब एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग था और सही
  203. 7:49भी है। एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग के बारे में
  204. 7:51अभी हम आगे भी बात करेंगे। एब्जॉर्प्शन
  205. 7:52कॉस्टिंग एस पर आईएस टू जो अपने अकाउंटिंग
  206. 7:55स्टैंडर्ड्स की रिक्वायरमेंट है उसको भी
  207. 7:56फुलफिल करता है। ओवरहेड्स वाले चैप्टर में
  208. 7:58भी हमने बात करी थी कि एब्जॉर्प्शन
  209. 8:00कॉस्टिंग की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि
  210. 8:01आईएस टू की रिक्वायरमेंट होती है कि आप
  211. 8:03इन्वेंटरी को अपनी फुल कॉस्ट पे रिकॉर्ड
  212. 8:05करोगे। ठीक है? और फुल कॉस्ट निकालने के
  213. 8:07लिए ही एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग बना है। तो
  214. 8:08इसका मतलब एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग जो है वो
  215. 8:10एकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स की रिक्वायरमेंट को
  216. 8:11भी फुलफिल करता है। तो फिर ये दूसरा मेथड
  217. 8:14क्यों बना? मार्जिनल कॉस्टिंग या
  218. 8:15अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग इतना ही बढ़िया मेथड
  219. 8:17है। सारी रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट्स को
  220. 8:19एकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स की रिक्वायरमेंट को
  221. 8:20फुलफिल भी कर रहा है। सही कॉस्ट निकालने
  222. 8:22में हम कहते हैं कि अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग
  223. 8:24ही सही है जो आपको सही कॉस्ट निकाल के भी
  224. 8:26देगा। तो मार्जिनल कॉस्टिंग की जरूरत
  225. 8:28क्यों पड़ी? कभी-कभी ये दिमाग में आना
  226. 8:29चाहिए आपके दिमाग में कि भ जब एक मेथड था
  227. 8:32तो उसके अगेंस्ट में दूसरा मेथड क्यों
  228. 8:34क्रिएट करा गया? मे बी कोई प्रॉब्लम रही
  229. 8:36होगी हमारी एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग की जो
  230. 8:38शायद एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग सॉल्व नहीं कर
  231. 8:40पा रही थी। इसीलिए मार्जिनल कॉस्टिंग की
  232. 8:42जरूरत पड़ी तो यस सर। कुछ प्रॉब्लम्स हैं
  233. 8:44हमारे पास में। सबसे पहली प्रॉब्लम तो
  234. 8:46हमारे पास में आती है कि अब्सॉर्प्शन
  235. 8:47कॉस्टिंग जो है ना साहब वो एक बहुत ही
  236. 8:50डिटेल्ड बहुत ही कॉम्प्लेक्स मेथड है।
  237. 8:52उसमें आपको ओआर अब्सॉर्प्शन वगैरह करनी
  238. 8:55पड़ेगी। उसमें फिर अंडर एब्सॉर्प्शन ओवर
  239. 8:57अब्सॉर्प्शन का भी इशू वगैरह सब आता है।
  240. 8:59तो ऑटोमेटिकली अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग जो है
  241. 9:02वो एक बहुत ही डिटेल्ड अप्रोच की तरह काम
  242. 9:04करती है। उसमें आपको मेहनत भी बहुत करनी
  243. 9:08पड़ेगी। टाइम भी लगेगा। सेकंडली
  244. 9:12अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के अंदर हम फिक्स्ड
  245. 9:14कॉस्ट वगैरह को भी इंक्लूड कर लेते हैं।
  246. 9:16और इसमें कुछ ऐसी कॉस्ट होती है जिनका
  247. 9:18एक्चुअल फिगर आपको लॉन्ग टर्म में जाके
  248. 9:20पता पड़ता है। या कुछ ऐसी कॉस्ट होती है
  249. 9:24फिक्स्ड कॉस्ट में स्पेसिफिकली हम कहते
  250. 9:25हैं जिनका हमारे आउटपुट लेवल पे आउटपुट
  251. 9:28लेवल से कोई रिलेशन होता भी नहीं है।
  252. 9:31तो मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स को ये फील हुआ
  253. 9:34कि यार एक ऐसा मेथड होना चाहिए शॉर्टकट
  254. 9:36मेथड। इतना डिटेल्ड नहीं अब्सॉर्प्शन
  255. 9:38कॉस्टिंग जितना जिसमें एडहॉक बेसिस पे जब
  256. 9:41अर्जेंट बेसिस पे कोई डिसीजन लेना है
  257. 9:42शॉर्ट टर्म में कोई डिसीजन लेना है तो
  258. 9:44उसमें हमें हेल्प मिल सके। सेकंडली उनको
  259. 9:47ये भी समझ में आया कि शॉर्ट टर्म के अंदर
  260. 9:50जब आप ये कंपनी ये डिसाइड करी कि क्या ये
  261. 9:52एडिशनल यूनिट्स आपको प्रोड्यूस करने चाहिए
  262. 9:54या नहीं चाहिए। उस डिसीजन में यह जो
  263. 9:58फिक्स्ड कॉस्ट है ना इनको अपन कंसीडर भी
  264. 10:00नहीं करते हैं। फॉर एग्जांपल जैसे आपने एक
  265. 10:03फैक्ट्री चालू करी एक रेंट पे फैक्ट्री ली
  266. 10:06वेयर हाउस को रेंट वगैरह पे ले रखा है। सब
  267. 10:07कुछ हो गया। आपने अपना बिज़नेस स्टार्ट
  268. 10:09करा। अब आपको एक-एक करके ऑर्डर मिल रहा
  269. 10:11है। अब मान लो आपके पास में कोई एक कस्टमर
  270. 10:14आता है जो आपसे कुछ नए गुड्स ऑर्डर करता
  271. 10:16है और आप उस पे प्राइस पे नेगोशिएट कर रहे
  272. 10:19हो। या उस टाइम पे जब आप प्राइस नेगोशिएट
  273. 10:22कर रहे हो। तो क्या आपके दिमाग में ये
  274. 10:23आएगा कि मुझे फैक्ट्री का रेंट भी रिकवर
  275. 10:25करना है या मुझे मेरे वेयर हाउस का रेंट
  276. 10:27भी रिकवर करना है या मुझे मेरे जो दूसरे
  277. 10:30अकाउंटिंग स्टाफ है उनकी सैलरी भी रिकवर
  278. 10:32करनी है। आप उस टाइम पे क्या सोचोगे यार
  279. 10:35इस प्रोडक्ट को बनाने का मेरा खर्चा कितना
  280. 10:38है जिसे अपन वेरिएबल कॉस्ट कहते हैं। ठीक
  281. 10:40है? जो डायरेक्टली प्रोडक्शन से रिलेट
  282. 10:42करती है। एक यूनिट को बनाने में कितना
  283. 10:44खर्चा होगा? वो वेरिएबल कॉस्ट होती है।
  284. 10:46ठीक है? तो अगर मान लो 1000 यूनिट्स का
  285. 10:48ऑर्डर आया। आपको पता है यार एक यूनिट को
  286. 10:50बनाने में मोटा-मोटे जितने भी वेरिएबल
  287. 10:51खर्चे हैं वह मिला करके मान लो ₹8 का
  288. 10:54खर्चा होता है। तो 1000 यूनिट्स को बनाने
  289. 10:57में 8000 का आपका खर्चा है। अब आप प्राइस
  290. 11:00पे नेगोशिएट कर रहे हो। मान लो सामने वाला
  291. 11:01बंदा आपको कह रहा है कि मैं आपको 15 आप 15
  292. 11:04कोट कर रहे हो वो 12 मांग रहा है। तो आपके
  293. 11:06दिमाग में क्या चलेगा? अच्छा 12 की अगर
  294. 11:07प्राइस पे मैं एग्री कर लूं तो 12 - 8 फोर
  295. 11:10का मेरे पास में बेनिफिट बचा। इसको अपन
  296. 11:12कंट्रीब्यूशन भी कहते हैं। नॉर्मल दिमाग
  297. 11:15में यही चलता है सबके। उस पॉइंट पर आप
  298. 11:17रेंट का हिस्सा आप यह नहीं देखोगे कि
  299. 11:20अच्छा मेरे बाकी के फिक्स्ड कॉस्ट का
  300. 11:22कितना हिस्सा इस 1000 यूनिट्स पर जाएगा।
  301. 11:24यह सब चीजें उस वक्त दिमाग में क्योंकि
  302. 11:25इतनी कैलकुलेशन करना शॉर्ट टर्म में और उस
  303. 11:27मूवमेंट पे पॉसिबल नहीं होता है। तो
  304. 11:29नॉर्मल बिनेस में हमें ये समझ में आया कि
  305. 11:31नॉर्मल बिनेसमैन जब बेसिक एवरीडे बेसिस पे
  306. 11:36डिसीजंस ले रहा होता है कि नए ऑर्डर को
  307. 11:38एक्सेप्ट करना है नहीं करना है। क्या वो
  308. 11:39प्राइस एक्सेप्टेबल है या नहीं है? तो उस
  309. 11:42टाइम पे वो अब्सॉर्प्शन कॉस्ट के बारे में
  310. 11:44नहीं सोचता है। वो सिर्फ वेरिएबल कॉस्ट के
  311. 11:46बारे में सोचता है क्योंकि उनको ट्रेस
  312. 11:49करना आसान है। उनको पर यूनिट में कैलकुलेट
  313. 11:51करना आसान है। तो फिर हमने कहा जब यही चीज
  314. 11:54यूज़ हो रही है। तो इसी को शॉर्ट टर्म में
  315. 11:57हम एक बिल्कुल एक फॉर्मल मेथड का नाम दे
  316. 11:59देते हैं। तो फिर इस जो एक नॉर्मल डे टू
  317. 12:02डे प्रैक्टिस थी जो ऑलरेडी हमें देखने को
  318. 12:03मिल रही थी। हमने उसको बस एक नाम दे दिया
  319. 12:05और उसका नाम हम आज कहते हैं मार्जिनल
  320. 12:07कॉस्टिंग। तो मार्जिनल कॉस्टिंग कोई अलग
  321. 12:09से ऐसा मेथड डेवलप नहीं हुआ है। ये बस
  322. 12:11ऑब्जर्व करा गया कि ओवर टाइम बिजनेस में
  323. 12:14नॉर्मल डे टू डे एक्टिविटीज में जब
  324. 12:16बिनेसमैन कोई डिसीजन लेता है तो वो सिर्फ
  325. 12:18वेरिएबल कॉस्ट को ये कंसीडर करता है। तो
  326. 12:21फिर हमने कहा कि इसको एक फॉर्मल नाम भी
  327. 12:22देना चाहिए। तो हमने उस उस टेक्निक को
  328. 12:25मार्जिनल कॉस्टिंग बोलना स्टार्ट कर दी।
  329. 12:27तो मार्जिनल कॉस्टिंग को इसलिए हम कहते
  330. 12:28हैं कि शॉर्ट टर्म डिसीजन मेकिंग में बड़ी
  331. 12:30काम आती है। ये जो है कॉस्टिंग ये कॉस्ट
  332. 12:33को डिवाइड करती है फिक्स्ड और वेरिएबल के
  333. 12:35नेचर पे। एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग फिक्स्ड और
  334. 12:36वेरिएबल की बात ही नहीं करती। वो तो कहती
  335. 12:38है खर्चे प्रोडक्शन या नॉन प्रोडक्शन के
  336. 12:39होते हैं। अब चाहे वो फिक्स्ड हो चाहे
  337. 12:41वेरिएबल हो उससे उसको फर्क नहीं पड़ रहा।
  338. 12:42उनका जो मेजर मेजर क्राइटेरिया है वो है
  339. 12:45प्रोडक्शन और नॉन प्रोडक्शन का। मार्जिनल
  340. 12:47कॉस्टिंग कहती है नहीं नहीं हमारे लिए
  341. 12:49कॉस्ट का बिहेवियर कि वो फिक्स्ड है या
  342. 12:52वेरिएबल है बड़ा इंपॉर्टेंट है। क्योंकि
  343. 12:55हम दोनों को डिफरेंट तरीके से ट्रीट
  344. 12:56करेंगे। यहां पे फिक्स्ड कॉस्ट को पीरियड
  345. 12:58कॉस्ट माना जाता है। क्या होती है पीरियड
  346. 13:00कॉस्ट अभी बात करेंगे। ठीक है? और वेरिएबल
  347. 13:02कॉस्ट को डिसीजन मेकिंग में कंसीडर करा
  348. 13:04जाता है। तो इसलिए ये इंपॉर्टेंट बना। ठीक
  349. 13:06है साहब। अब क्या कंपैरिजन है? तो हम कहते
  350. 13:08हैं भज्जॉर्प्शन कॉस्ट मार्जिनल कॉस्टिंग
  351. 13:10बेसिकली दो डिफरेंट मेथड्स हैं टू डील विद
  352. 13:13प्रोडक्शन ओवरहेड्स। इन दोनों में डिफरेंस
  353. 13:14प्रोडक्शन ओवरहेड की डीलिंग को लेकर के
  354. 13:16है। एज़ अ रिजल्ट जब दोनों मेथड का तरीका
  355. 13:18अलग है। तो दोनों से जो प्रॉफिट का फिगर
  356. 13:20आएगा वो भी अलग आएगा। दोनों से इन्वेंटरी
  357. 13:22का वैल्यूएशन भी अलग-अलग आता है। एज़ अ
  358. 13:24रिजल्ट दे मे प्रोड्यूस प्रोड्यूस प्रॉफ़िट
  359. 13:27फिगर्स फॉर एन अकाउंटिंग पीरियड दैट
  360. 13:28डिफर्स फ्रॉम ईच अदर एंड
  361. 13:34डिफरेंट इन्वेंटरी वैल्यूएशंस आल्सो इनमें
  362. 13:36प्रॉफिट और इन्वेंटरी वैल्यूएशन दोनों एक
  363. 13:38दूसरे से अलग-अलग आते हैं।
  364. 13:41क्यों आते हैं, कैसे आते हैं वो भी बात
  365. 13:42करेंगे।
  366. 13:45इसलिए फिर हमें इन प्रॉफिट्स को रिकंसाइल
  367. 13:47करने की जरूरत पड़ती है। क्योंकि सही तो
  368. 13:48एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग ही है। सही प्रॉफिट
  369. 13:50तो एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग से आ रहा है। तो
  370. 13:52मार्जिनल के प्रॉफिट को एब्जॉर्प्शन से
  371. 13:53मैच करने की जरूरत पड़ती है। ठीक है ना?
  372. 13:56अब इसमें क्यों ये डिफरेंसेस है? इसमें
  373. 13:58सबसे पहला रीज़न है ट्रीटमेंट ऑफ़ फिक्स्ड
  374. 14:00ओवरहेड्स जिसे अपन पीरियड कॉस्ट कहते हैं।
  375. 14:02मार्जिनल कॉस्टिंग ने बोला कि भ ये जो
  376. 14:04फिक्स्ड ओवरहेड्स है ना इसे हम बोलेंगे
  377. 14:06पीरियड कॉस्ट। ठीक है? मार्जिनल कॉस्टिंग
  378. 14:09फिक्स्ड ओवरहेड्स को क्लासिफाई करती है एस
  379. 14:11पीरियड कॉस्ट। अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग नहीं
  380. 14:14कहती। अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग तो कहती है भ
  381. 14:15हमारे तो फिक्स्ड ओवरहेड क्या प्रोडक्शन
  382. 14:17के काम आ रहे हैं? तो वो प्रोडक्शन कॉस्ट
  383. 14:18का पार्ट टाइम है। बात खत्म। ये पीरियड
  384. 14:20कॉस्ट जैसी चीज वो यूज़ नहीं करते।
  385. 14:22मार्जिनल कॉस्टिंग वालों ने ये टर्म दी कि
  386. 14:25भाई ये जो फिक्स्ड ओर्स है ना ये एक
  387. 14:27पीरियड से रिलेट करते हैं। इसलिए इनको
  388. 14:29पीरियड कॉस्ट कहा जाएगा। कैसे सर? फॉर
  389. 14:31एग्जांपल रेंट है। रेंट एक फिक्स्ड खर्चा
  390. 14:33मानते हैं अपन। फिक्स्ड कॉस्ट की तरह
  391. 14:35मानते हैं। फैक्ट्री का रेंट है तो
  392. 14:36फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड भी है। अब ये जो
  393. 14:39फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड है, ये आपके
  394. 14:42पूरे साल भर का एक आप कॉन्ट्रैक्ट बनाते
  395. 14:44हो। ठीक है? नॉर्मली उस कॉन्ट्रैक्ट में
  396. 14:46लिखा होता है। ठीक है? कि भ इतने पीरियड
  397. 14:48तक का ये रेंट रहेगा। तो ये इतने पीरियड
  398. 14:51तक का ये रेंट रहेगा। अब वो कॉन्ट्रैक्ट 1
  399. 14:54साल का हो सकता है, 5 साल का हो सकता है,
  400. 14:5510 साल का हो सकता है, 11 महीने का हो
  401. 14:56सकता है, अलग-अलग लेंथ के हो सकते हैं।
  402. 14:58लेकिन उस पीरियड तक के लिए तो फिक्स हो
  403. 15:00गया। तो इसका मतलब ये पीरियड कॉस्ट है।
  404. 15:02पीरियड कॉस्ट का सिंपल लॉजिक है के
  405. 15:04क्योंकि फिक्स्ड कॉस्ट के एग्रीमेंट किसी
  406. 15:06एक पर्टिकुलर पीरियड के लिए होते हैं।
  407. 15:08इसलिए हम इनको पीरियड कॉस्ट बोल देते हैं।
  408. 15:10जनरली हम अकाउंटिंग में एक साल के हिसाब
  409. 15:12से बातचीत करते हैं। तो एक साल का यह रेंट
  410. 15:14है, तो इस साल में यही रेंट रहेगा। अब
  411. 15:16पूरे ईयर में प्रोडक्शन चाहे कितना भी हो
  412. 15:18रेंट तो फिक्स है। तो हमने कहा इस रेंट को
  413. 15:20फिर कंसीडर ही मत करो। ये आपके शॉर्ट टर्म
  414. 15:24डिसीजन मेकिंग के किसी काम का नहीं है।
  415. 15:26इसलिए मार्जिनल कॉस्टिंग वाले जितनी भी ये
  416. 15:28पीरियड कॉस्ट है इनको सीधा पीएनएल में
  417. 15:30ट्रांसफर कर लेते हैं। इन पीरियड कॉस्ट को
  418. 15:32प्रोडक्ट की कॉस्ट में इंक्लूड नहीं करते।
  419. 15:34इन फिक्स्ड कॉस्ट को प्रोडक्ट
  420. 15:36[नाक से की जाने वाली आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़]
  421. 15:36की कॉस्ट में इंक्लूड नहीं करते। तो कहते
  422. 15:38हैं पीरियड कॉस्ट आर एक्सपेंस्ड। ठीक है?
  423. 15:40आर एक्सपेंसेस इंकर्ड ओवर अ स्पेसिफिक
  424. 15:43टाइम पीरियड एंड आर नॉट टाइड टू प्रोडक्शन
  425. 15:45लेवल। मार्जिनल कॉस्टिंग वाले क्या कहते
  426. 15:46हैं कि भ पीरियड कॉस्ट वो एक्सपेंसेस हैं
  427. 15:48जो किसी एक स्पेसिफिक टाइम पीरियड से
  428. 15:49रिलेट करते हैं। जैसे इस ईयर का रेंट रेंट
  429. 15:51जितना भी आपका होगा। ठीक है? और वो
  430. 15:53प्रोडक्शन से रिलेट नहीं करते। भ आपने
  431. 15:55फैक्ट्री रेंट पे ले ली। अब उसमें आपने
  432. 15:56प्रोडक्शन कितना भी करा उससे रेंट के लेवल
  433. 15:58पे तो कोई फर्क पड़ेगा नहीं। ठीक है? तो
  434. 16:00इसलिए मार्जिनल कॉस्टिंग वाले कहते हैं कि
  435. 16:02जो फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड्स हैं इनको
  436. 16:04एक्यूमुलेट करो, इकट्ठा करो अपने
  437. 16:06प्रोडक्शन ओवरहेड अकाउंट में और एट द एंड
  438. 16:08ऑफ़ द एकाउंटिंग पीरियड इन सारे के सारे
  439. 16:09एक्सपेंसेस को स्पिट स्टेटमेंट ऑफ़ प्रॉफिट
  440. 16:11एंड लॉस में एज एक्सपेंसेस बुक कर दो।
  441. 16:13इसका मतलब इन खर्चों को हम इन्वेंटरी के
  442. 16:16वैल्यू्यूएशन में इंक्लूड नहीं करेंगे।
  443. 16:18ठीक है? हम ये भी कह सकते हैं कि इनको अपन
  444. 16:21इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन में इंक्लूड
  445. 16:22नहीं करते।
  446. 16:29ठीक है? और इसी की जगह पर एब्जॉर्प्शन
  447. 16:30कॉस्टिंग वाले कहते हैं कि एब्जॉर्प्शन
  448. 16:32कॉस्टिंग एब्जॉर्ब करती है फिक्स्ड
  449. 16:34ओवरहेड्स को इंटू इन्वेंटरी। तो उनकी जो
  450. 16:36क्लोजिंग इन्वेंटरी है उसकी कॉस्ट में एक
  451. 16:38हिस्सा फिक्स्ड ओवरहेड का भी रिकॉर्ड होता
  452. 16:41है। ठीक है? तो यहां पे मार्जिनल कॉस्टिंग
  453. 16:44वाले बोलते हैं कि फिक्स प्रोडक्शन
  454. 16:45ओवरहेड्स जितने भी आपके हैं उनको हम कॉस्ट
  455. 16:47का पार्ट मान के नहीं चलेंगे।
  456. 16:51ओवरहेड्स आर नॉट इंक्लूडेड।
  457. 17:09ठीक है।
  458. 17:12और यहीं पर जो वेरिएबल कॉस्ट है। अच्छा
  459. 17:14वेरिएबल कॉस्ट का ट्रीटमेंट मार्जिनल
  460. 17:16कॉस्टिंग हो चाहे अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग हो
  461. 17:18दोनों में टेक्निकली सेम है। दोनों
  462. 17:20वेरिएबल कॉस्ट को तो रिकॉर्ड करने की बात
  463. 17:22करते ही हैं। ठीक है? बट यहां पे मार्जिनल
  464. 17:24कॉस्ट थोड़ी अलग जाती है। मार्जिनल
  465. 17:26कॉस्टिंग ये कहती है कि जब आप मार्जिनल
  466. 17:29कॉस्ट निकाल रहे हो तो मार्जिनल कॉस्ट में
  467. 17:32आप वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट को तो लेके
  468. 17:34चलोगे ही चलोगे। वो तो आपको प्रोडक्शन की
  469. 17:37कॉस्ट निकाल के देगी। बट अगर आपको
  470. 17:38कंट्रीब्यूशन निकालना है तो जो वेरिएबल
  471. 17:41सेलिंग कॉस्ट होती है जो दूसरे खर्चे हैं
  472. 17:44जो वेरिएबल नेचर के आप उसको भी कंसीडर
  473. 17:46करते हो। अब इसके पीछे का क्या लॉजिक दिया
  474. 17:47इन्होंने? इन्होंने बड़ा सिंपल लॉजिक दिया
  475. 17:49और ये बड़ा वैलिड लॉजिक भी दिया। मान लो
  476. 17:51उसी बिनेसमैन के एग्जांपल को आगे लेके
  477. 17:54चलते हैं। आपके पास में एक कस्टमर आया।
  478. 17:55उसने कहा कि मुझे 1000 गुड्स का ऑर्डर
  479. 17:57चाहिए। आपको पता है इन 1000 गुड्स को
  480. 17:58बनाने में वेरिएबल कॉस्ट ₹8 की लगती है।
  481. 18:02अब उस पर्सन ने आपको कहा कि मुझे यह गुड्स
  482. 18:04आप डिलीवर करोगे इस लोकेशन पर।
  483. 18:08ठीक है? अब आप प्राइस पर नेगोशिएट कर रहे
  484. 18:10हो। आपने प्राइस कोट करी 1000 गुड्स हैं।
  485. 18:1315 में बेचूंगा 15,000 के गुड्स होंगे।
  486. 18:15आपके दिमाग में क्या चल रहा है कि भ 8 की
  487. 18:17तो कॉस्ट है। तो 8000 की तो कॉस्ट हो गई।
  488. 18:20प्लस कुछ हिस्सा इसके अंदर अपने को ऐड
  489. 18:23करना पड़ेगा। किसका ऐड करना पड़ेगा? अपनी
  490. 18:25ट्रांसपोर्ट की कॉस्ट का। तो आप इसमें
  491. 18:27ट्रांसपोर्ट कॉस्ट ऐड करोगे थोड़ी सी। ये
  492. 18:29जो ट्रांसपोर्ट कॉस्ट होगी क्योंकि ये
  493. 18:31वेरिएबल है क्योंकि आपको गुड्स
  494. 18:33ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंकर करनी पड़
  495. 18:34रही है इसलिए आप इंक्लूड कर रहे हो और एक
  496. 18:36नॉर्मल बिजनेसमैन तो करेगा। मान लो आपको
  497. 18:38पता पड़ा कि भई ₹ 2000 की ट्रांसपोर्टेशन
  498. 18:40की कॉस्ट लगेगी इन गुड्स को जिस लोकेशन
  499. 18:42में पहुंचाना है वहां तक पहुंचाने का। तो
  500. 18:43आपके दिमाग में क्या चल रहा है भई? ₹8 पर
  501. 18:45यूनिट का तो बनाने का खर्चा है। वेरिएबल
  502. 18:47कॉस्ट ऑफ़ प्रोडक्शन है। ठीक है? प्राइम
  503. 18:48कॉस्ट समझ लो बेसिकली। ठीक है? वो खर्चा
  504. 18:50लगना ही लगना है। प्लस ₹2 का मेरे को
  505. 18:53ट्रांसपोर्टेशन का कॉस्ट भी देना है। और
  506. 18:54वो तभी देना पड़ेगा जब मैं ये गुड्स
  507. 18:57डिलीवर करूंगा। अर्न नहीं करने होते तो
  508. 18:58इनको कॉस्ट लगती नहीं तो ये वेरिएबल है।
  509. 19:00ठीक है? तो ये दोनों मिला के 10,000 खर्चा
  510. 19:02है। अब आपके दिमाग में कॉस्ट चल रही है
  511. 19:0410,000, सेलिंग प्राइस चल रही है 15। आपके
  512. 19:06हिसाब से 5,000 का कंट्रीब्यूशन है और
  513. 19:08इसके हिसाब से आप नेगोशिएट करते हो। तो
  514. 19:10इसका मतलब जो वेरिएबल सेलिंग कॉस्ट वगैरह
  515. 19:14है या दूसरी वेरिएबल कॉस्ट्स हैं उनको भी
  516. 19:17एक बिजनेसमैन कंसीडर करता है जब वो डिसीजन
  517. 19:21ले रहा होता है। मान लो इसको एक और
  518. 19:22एग्जांपल लेते हैं। मान लो आपकी कोई बेकरी
  519. 19:24है। आपके पास में एक क्लाइंट आया बोल रहा
  520. 19:27है यार हमारे घर में ना एक वेडिंग सेरेमनी
  521. 19:28है। समथिंग हम चाहते हैं कि आप हमारे लिए
  522. 19:30एक अच्छी बास्केट बनाओ। आजकल चलता है जैसे
  523. 19:33केक बास्केट्स वगैरह कपकेक्स वगैरह अलग
  524. 19:35तरह की उसमें कह लो कि भ चॉकलेट्स होंगी।
  525. 19:38कुछ कपकेक्स होंगे। छोटा सा कुछ और आइटम
  526. 19:40होगा। इस तरह का वो चाहते हैं कि बास्केट
  527. 19:42बनाना चाहते हैं। अब आपका काम केक बनाना
  528. 19:45वो सब है तो उसकी कॉस्ट तो आपके दिमाग में
  529. 19:47चल रही है कि यार एक तरह की मफिन बनाने
  530. 19:49में मुझे इतना खर्चा तो लगता है। प्लस अब
  531. 19:52वो आपको कह रहे हैं कि आप ना बास्केट भी
  532. 19:53लेकर के आना उसको अच्छे से डेकोरेट करना
  533. 19:56उसमें कोई फ्लावर वगैरह लगा देना। तो ये
  534. 19:58सारी चीजें एक्स्ट्रा है ना। भले ही यह
  535. 20:00प्रोडक्शन से रिलेटेड नहीं है क्योंकि
  536. 20:01प्रोडक्शन तो हो रहा है केक्स का, कपकेक्स
  537. 20:04का, चॉकलेट का। उसकी कॉस्ट तो अलग है। बट
  538. 20:06ये दूसरी जो कॉस्ट है ये सेलिंग ओवरहेड्स
  539. 20:09हैं। ये अगर इंकर नहीं करोगे तो कस्टमर
  540. 20:10आपसे खरीदेगा नहीं। और फिर आप इसको भी तो
  541. 20:12ऐड करना स्टार्ट करोगे कैलकुलेशन में। ऐसे
  542. 20:14थोड़ी ना है कि आप सिर्फ केक का पैसा लोगे
  543. 20:16और बोलोगे भाई ये हम दे देंगे। नहीं आप
  544. 20:18दिमाग में आप उसको भले ही एक प्राइस कोट
  545. 20:20करोगे कस्टमर को कि कुल मिला के इतने की
  546. 20:22आपको बास्केट पड़ेगी। बट दिमाग में
  547. 20:23कैलकुलेशन क्या चलेगी कि यार बास्केट
  548. 20:25पड़ेगी मेरे को ₹100 की। पैकिंग मटेरियल
  549. 20:27वगैरह मिला के पकड़ लो। ₹15 और लग जाएंगे।
  550. 20:29फ्लावर वगैरह कह रहे हैं तो ₹ ₹1 उसके
  551. 20:31पकड़ लो। फिर मेरे केक्स की कॉस्टिंग है।
  552. 20:33ऐसे करते-करते आपके दिमाग में कैलकुलेशन
  553. 20:34चलेगी बैक ऑफ द माइंड और उसके हिसाब से आप
  554. 20:36प्राइस कोट करोगे। ठीक है? तो ये क्या है?
  555. 20:39आप जब कैलकुलेशन कर रहे हो तो सिर्फ
  556. 20:41वेरिएबल प्रोडक्शन की कॉस्ट जो प्राइम
  557. 20:43कॉस्ट है उसको कंसीडर नहीं कर रहे हो।
  558. 20:45साथ-साथ में जो वेरिएबल सेलिंग वाली कॉस्ट
  559. 20:47है इसको भी तो कंसीडर कर रहे हो। यहां पे
  560. 20:49मार्जिनल कॉस्टिंग वालों ने एक कांसेप्ट
  561. 20:50दिया कंट्रीब्यूशन का। उन्होंने कहा कि
  562. 20:53मार्जिनल कॉस्टिंग में हम सिर्फ वेरिएबल
  563. 20:55मार्जिनल कॉस्ट के ऊपर ही इन्वेंटरी को
  564. 20:58वैल्यू करेंगे। मार्जिनल कॉस्ट का
  565. 21:00उन्होंने डेफिनेशन भी दिया। मार्जिनल
  566. 21:01कॉस्ट का मतलब होता है कॉस्ट इंकर्ड टू
  567. 21:03प्रोड्यूस वन मोर यूनिट। इस मार्जिनल
  568. 21:06कॉस्ट को अपन वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट भी
  569. 21:09बोलते हैं।
  570. 21:14हम इसको वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट भी बोलते
  571. 21:16हैं। कि एक एडिशनल यूनिट को बनाने में
  572. 21:19कितना खर्चा होगा उसे बोला गया मार्जिनल
  573. 21:21कॉस्ट। मार्जिनल कॉस्ट की इन्होंने
  574. 21:23डेफिनेशन भी दी। कैसे निकलेगी? तो बोले
  575. 21:24प्राइम कॉस्ट तो लेके चलेंगे चलेंगे और जो
  576. 21:26वेरिएबल नेचर के प्रोडक्शन ओवरहेड्स हैं
  577. 21:29उनको भी लेके चलेंगे। ठीक है? तो इन्होंने
  578. 21:31कॉस्ट कार्ड को थोड़ा सा रिीडफाइन करा।
  579. 21:34इन्होंने कहा कि जो आपकी कॉस्ट शीट होती
  580. 21:36है जो कॉस्ट कार्ड होता है जिसमें आप
  581. 21:37कॉस्ट को रिकॉर्ड करते हो उसका थोड़ा सा
  582. 21:39सिस्टम अभी इन्होंने चेंज करा। इन्होंने
  583. 21:41कहा कि कॉस्ट कार्ड कुछ ऐसा दिखना चाहिए।
  584. 21:43इन्होंने कहा डायरेक्ट मटेरियल प्लस
  585. 21:46डायरेक्ट लेबर प्लस डायरेक्ट एक्सपेंसेस।
  586. 21:49इससे आपके पास में आती है प्राइम कॉस्ट।
  587. 21:53इस प्राइम कॉस्ट में अगर आप सिर्फ और
  588. 21:55सिर्फ
  589. 21:58वेरिएबल प्रोडक्शन ओवरहेड्स को ऐड करो
  590. 22:03तो आपके पास में आ जाएगी वेरिएबल
  591. 22:06प्रोडक्शन कॉस्ट
  592. 22:09जिसको हम बोलेंगे मार्जिनल कॉस्ट।
  593. 22:14जिसको इन्होंने नाम दिया क्योंकि मार्जिनल
  594. 22:16कॉस्टिंग है। इन्होंने कहा अभी हमारा नाम
  595. 22:17लगेगा। तो मार्जिनल कॉस्ट कहा गया इसको।
  596. 22:21टेक्निकली यह वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट है।
  597. 22:23डायरेक्ट कॉस्ट के साथ-साथ वेरिएबल वाले
  598. 22:25खर्चों को ऐड कर रही है सिर्फ। और फिर
  599. 22:27इसके अंदर अगर आप फिक्स्ड वाले खर्चे भी
  600. 22:30ऐड कर दोगे। फिक्स्ड
  601. 22:34प्रोडक्शन ओवरहेड को भी ऐड कर दोगे तो
  602. 22:36आपको मिलेगी आपकी फुल प्रोडक्शन कॉस्ट।
  603. 22:39जिसे हम अब्सॉर्प्शन कॉस्ट भी कहते हैं।
  604. 22:53एक तो इन्होंने ये सिस्टम दिया नया। बोले
  605. 22:56कि यार भाई जो तुम्हारा कैलकुलेशन करने का
  606. 22:58तरीका है पुराना वाला कॉस्ट शीट का उसको
  607. 23:00हम थोड़ा सा एक्सपैंड करेंगे। ठीक है?
  608. 23:02आपकी कैलकुलेशन कुछ इस तरीके से होनी
  609. 23:04चाहिए।
  610. 23:06तब जाके आपको सही कॉस्ट मिलेगी इनके हिसाब
  611. 23:09से।
  612. 23:11ठीक है? तो इसलिए हम ये सिस्टम पढ़ते हैं
  613. 23:13और इसलिए हम कहते हैं कि मार्जिनल
  614. 23:14कॉस्टिंग और अब्सॉर्प्शन कॉस्ट के बीच का
  615. 23:16जो डिफरेंस है वो सिर्फ फिक्स्ड प्रोडक्शन
  616. 23:18ओवरहेड का ट्रीटमेंट है। फिक्स्ड
  617. 23:20प्रोडक्शन ओवरहेड को इंक्लूड करोगे तो
  618. 23:21आपको मिल जाएगी अब्सॉर्प्शन कॉस्ट और नहीं
  619. 23:23करोगे तो आपको मिलेगी मार्जिनल कॉस्ट। एक
  620. 23:26कांसेप्ट तो उन्होंने ये दिया। ठीक है
  621. 23:28साहब? मार्जिनल कॉस्टिंग वालों ने कहा कि
  622. 23:30जितने भी वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट है उनको
  623. 23:32इंक्लूड करेंगे इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन के
  624. 23:34लिए। तो मार्जिनल कॉस्टिंग में इस वैल्यू
  625. 23:36पे इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन होगा। ये जो
  626. 23:37प्राइस आई है ये यूज़ होगी दो चीजों के
  627. 23:40प्रोडक्शन कॉस्ट निकालने के लिए और
  628. 23:42इन्वेंटरी की वैल्यू्यूएशन के लिए। ठीक
  629. 23:44है?
  630. 24:03मार्जिनल कॉस्टिंग में ये वाली जो कॉस्ट
  631. 24:05है इस कॉस्ट को अपन यूज़ करेंगे फॉर
  632. 24:09इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन
  633. 24:16एंड टोटल प्रोडक्शन कॉस्ट
  634. 24:19दो चीजें कैलकुलेट करने में यह वाली कॉस्ट
  635. 24:21काम आती है।
  636. 24:25यूनिट्स को प्रोड्यूस करने में टोटल कितने
  637. 24:27प्रोडक्शन का खर्चा हुआ वह और इन्वेंटरी
  638. 24:29के वैल्यू्यूएशन के लिए यह कॉस्ट काम
  639. 24:31आएगी। और वहीं पे जो एब्सॉर्प्शन कॉस्ट है
  640. 24:33ये वाली ये एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग में काम
  641. 24:35आएगी इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन के लिए और
  642. 24:36प्रोडक्शन ओवरहेड के प्रोडक्शन कॉस्ट के
  643. 24:38कैलकुलेशन के लिए।
  644. 25:03इसलिए दोनों के अंदर इन्वेंटरी का
  645. 25:05वैल्यू्यूएशन और प्रोडक्शन कॉस्ट का
  646. 25:06वैल्यू्यूएशन डिफरेंस आता है। क्योंकि
  647. 25:08फिगर ही अलग-अलग है। और इससे अपन यह भी कह
  648. 25:11सकते हैं कि इसका मतलब इन्वेंटरी का
  649. 25:14वैल्यू्यूएशन हमेशा एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग
  650. 25:16में ज्यादा आएगा क्योंकि एब्जॉर्प्शन
  651. 25:18कॉस्ट ज्यादा है। आप इससे ये बोल सकते हो
  652. 25:21कंक्लूजन में कि एब्जॉर्प्शन की जो कॉस्ट
  653. 25:24होगी दैट विल बी मोर देन मार्जिनल कॉस्ट।
  654. 25:30मार्जिनल कॉस्ट में चार तरह के खर्चे ऐड
  655. 25:32हो रहे हैं। एब्सॉर्प्शन कॉस्ट में पांच
  656. 25:34तरह के खर्चे ऐड हो रहे हैं। तो
  657. 25:35ऑटोमेटिकली एब्जॉर्प्शन कॉस्ट जो है वो
  658. 25:36मार्जिनल कॉस्ट से ज्यादा होगी। हां। हां
  659. 25:38अगर फिक्स प्रोडक्शन कवरेट नहीं है तो
  660. 25:39दोनों एक दूसरे के बराबर हो सकती है।
  661. 25:41लेकिन नॉर्मली ज्यादा ही होगी और क्योंकि
  662. 25:43ये ज्यादा होगी तो हम ये कह सकते हैं कि
  663. 25:45इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन अब्सॉर्प्शन
  664. 25:46कॉस्टिंग से मार्जिनल कॉस्टिंग के मुकाबले
  665. 25:48ज्यादा आएगा। एमसीक्यू में आया हुआ है ये
  666. 25:49कांसेप्ट टेस्टिंग। मैनेजमेंट
  667. 25:51[गला साफ़ करने की आवाज़][नाक से की जाने वाली आवाज़]
  668. 25:51अकाउंटिंग में यही तो कांसेप्ट टेस्ट होते
  669. 25:52हैं। बच्चे कहते हैं सर क्या-क्या चीजें
  670. 25:54थ्योरी बहुत थ्योरी आ गई। थ्योरी नहीं आती
  671. 25:56है। कांसेप्ट टेस्ट हो रहे हैं। और ये
  672. 25:57क्वेश्चन एग्जाम का है। उसने पूछा हुआ है
  673. 25:59कि भ इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन एस पर मतलब
  674. 26:03एस पर एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग विल बी डैश
  675. 26:05देन मार्जिनल कॉस्टिंग। अब आपको ऑप्शन में
  676. 26:07सेलेक्ट करना था इक्वल टू हायर दैन और
  677. 26:09लोअर तो हायर क्योंकि एब्सॉर्प्शन
  678. 26:12कॉस्टिंग जो है कॉस्ट ही ज्यादा है तो
  679. 26:14इन्वेंटरी का वैल्यूशन अलग होगा। अब
  680. 26:15इन्वेंटरी तो दोनों में सेम होगी। ठीक है?
  681. 26:17मान लो 500 यूनिट की क्लोजिंग इन्वेंटरी
  682. 26:19है तो आप एक बार 500 को मल्टीप्लाई करोगे
  683. 26:21इस फिगर से और एक बार 500 को मल्टीप्लाई
  684. 26:23करोगे इस फिगर से। तो ऑब्वियस सी बात है
  685. 26:25एब्सॉर्प्शन कॉस्ट के हिसाब से फिगर
  686. 26:26ज्यादा आएगा।
  687. 26:40यूजिंग अब्सॉर्प्शन कॉस्ट विल बी हायर देन
  688. 26:47इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन यूजिंग मार्जिनल
  689. 26:49कॉस्ट। जब कॉस्ट ही ज्यादा है एब्सॉर्प्शन
  690. 26:52तो उसके थ्रू इन्वेंटरी का वैल्यूएशन भी
  691. 26:54ज्यादा होगा। क्योंकि इन्वेंटरी का नंबर
  692. 26:55चेंज नहीं होगा सब। इन्वेंटरी का फिगर तो
  693. 26:57सेम रहेगा। क्लोजिंग इन्वेंटरी अगर 500 की
  694. 26:58है तो चाहे एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग हो चाहे
  695. 27:00मार्जिनल कॉस्टिंग हो यूनिट तो 500 है।
  696. 27:02कॉस्ट का फिगर चेंज है। इसकी वजह से
  697. 27:03वैल्यू्यूएशन ऊपर नीचे आएगा। ठीक है साहब?
  698. 27:06तो इस चीज का ध्यान में रखना है। तो ये
  699. 27:08कॉस्ट शीट है साहब हमारी। ठीक है? ये अब
  700. 27:11ध्यान रखना थोड़ी चेंज हो गई। अभी तक हम
  701. 27:13लिखते थे प्राइम कॉस्ट प्लस प्रोडक्शन
  702. 27:15ओवरहेड्स। उससे आ जाती थी हमारे पास
  703. 27:16प्रोडक्शन कॉस्ट। अब अपन ने प्रोडक्शन
  704. 27:17ओवरहेड को भी दो पार्ट में डिवाइड कर
  705. 27:19दिया। वेरिएबल और फिक्स्ड। ठीक है?
  706. 27:23हां जी। तो अब दोनों में जो जो डिफरेंसेस
  707. 27:25हैं उनको एक समराइज करें अगर अपन तो
  708. 27:27अबजॉर्प्शन कॉस्टिंग क्या कहती है कि अगर
  709. 27:29आपको वैल्यू्यूएशन निकालना है प्रोडक्शन
  710. 27:31का या इन्वेंटरी का क्लोजिंग इन्वेंटरी का
  711. 27:33तो आपको फुल प्रोडक्शन कॉस्ट लेके चलनी
  712. 27:35पड़ती है जिसमें आप प्रोडक्ट फिक्स्ड
  713. 27:36प्रोडक्शन ओवर को भी इंक्लूड करोगे।
  714. 27:38मार्जिनल कॉस्टिंग कहती है ना साहब सिर्फ
  715. 27:40वेरिएबल प्रोडक्शन की कॉस्ट लेके चलेंगे।
  716. 27:41फिक्स्ड प्रोडक्शन कॉस्ट को इंक्लूड नहीं
  717. 27:43करा जाएगा। नहीं करोगे तो क्या करोगे इसके
  718. 27:45साथ में? इसको अपन एक्सपेंस की तरह मान
  719. 27:47लेंगे। पीरियड कॉस्ट कहती है एब्जॉर्प्शन
  720. 27:49मार्जिनल कॉस्टिंग अपने फिक्स्ड प्रोडक्शन
  721. 27:51ओवरहेड्स को। एब्जॉर्प्शन कास्टिंग कहती
  722. 27:52है ये नहीं साहब ये आपके फिक्स प्रोडक्शन
  723. 27:54ओवरहेड को भी हम एब्सॉर्ब करेंगे तो इसके
  724. 27:56लिए आप ओआर वगैरह निकालोगे। अब क्योंकि
  725. 27:58ओआर वगैरह निकालोगे तो आपके पास में अंडर
  726. 28:00एब्जॉर्प्शन या ओवर एब्सॉर्प्शन की दिक्कत
  727. 28:02आती है। एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग में एक
  728. 28:03दिक्कत आती है कि आपको क्योंकि आप
  729. 28:04एब्जॉर्ब कर रहे हो ओवरहेड्स को। ठीक है?
  730. 28:06एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग को फॉलो कर रहे हो
  731. 28:08तो आपके अंडर एब्सॉर्प्शन या ओवर
  732. 28:09एब्जॉर्प्शन की दिक्कत आपके सामने आ सकती
  733. 28:10है। ठीक है? फिर आती है क्या रिलेशनशिप
  734. 28:13होगा सेलिंग प्राइस का? तो सेलिंग प्राइस
  735. 28:14जो है उसमें से अगर एब्जॉर्प्शन कॉस्ट को
  736. 28:16माइनस करोगे तो आपको मिलेगा प्रॉफिट। बट
  737. 28:18अगर आप सेलिंग प्राइस में से सारे के सारे
  738. 28:21वेरिएबल कॉस्ट को लेस करोगे तो आपको
  739. 28:22मिलेगा कॉन्ट्रिब्यूशन।
  740. 28:24ठीक है? यह एक डिफरेंस है। अभी
  741. 28:26कॉनंट्रीब्यूशन पे हम थोड़ी और बातचीत
  742. 28:27करेंगे। ठीक है? और एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग
  743. 28:30जो है वो आपको टोटल कॉस्ट देती है। तो ये
  744. 28:31आपको सही सेलिंग प्राइस निकालने में हेल्प
  745. 28:33करेगी। अगर आपको किसी प्रोडक्ट की सही
  746. 28:35सेलिंग प्राइस निकालनी है तो आपको सही
  747. 28:36एब्सॉर्प्शन कॉस्ट आपके पास में होनी
  748. 28:38चाहिए। तभी आप करेक्ट सेलिंग प्राइस निकाल
  749. 28:40सकते हो। लेकिन मार्जिनल कॉस्टिंग शॉर्ट
  750. 28:42टर्म डिसीजन मेकिंग के लिए काम की है और
  751. 28:43एक एडिशनल यूनिट को बनाने में कितना खर्चा
  752. 28:45होगा उसको कैलकुलेट करने में हेल्प करती
  753. 28:47है। ठीक है साहब? तो ये अभी तक जो हमने
  754. 28:50बातचीत करी उसकी एक समरी। अब आते हैं
  755. 28:53हमारे नेक्स्ट एक इंपॉर्टेंट कांसेप्ट के
  756. 28:56ऊपर मार्जिनल कॉस्टिंग के जो है हमारा
  757. 28:57कंट्रीब्यूशन। ठीक है? अभी तक हमने देखा
  758. 28:59कि मार्जिनल कॉस्टिंग एब्जॉर्प्शन
  759. 29:01कॉस्टिंग में डिफरेंसेस क्या है? दोनों
  760. 29:02कॉस्टिंग के दो तरीके हैं। दोनों प्रोडक्ट
  761. 29:04की कॉस्ट निकालने के दो तरीके हैं। एक फुल
  762. 29:06कॉस्टिंग के मेथड पे चलता है। एक से
  763. 29:07वेरिएबल कॉस्टिंग के मेथड पे चलता है। तो
  764. 29:09दोनों से इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन अलग
  765. 29:11आएगा। दोनों से प्रोडक्शन का वैल्यू
  766. 29:12प्रोडक्शन कॉस्ट का वैल्यूएशन अलग आएगा।
  767. 29:14दोनों से जो प्रॉफिट का फिगर है वो अलग
  768. 29:16आएगा। एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के फिगर को
  769. 29:18अपन प्रॉफिट बोलते हैं। जब सेलिंग प्राइस
  770. 29:19में से एब्सॉर्प्शन कॉस्ट को माइनस करते
  771. 29:20हैं तो प्रॉफिट आता है। इसको अपन ग्रॉस
  772. 29:22प्रॉफिट कहते हैं। बेसिकली वैसे तो
  773. 29:24एक्चुअल नाम तो इसका ग्रॉस प्रॉफिट होगा।
  774. 29:30और मार्जिनल कॉस्टिंग में उसको अपन
  775. 29:31कंट्रीब्यूशन कहते हैं। ठीक है? और
  776. 29:33अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग टोटल कॉस्ट निकल रही
  777. 29:35है तो उससे अपनी सेलिंग प्राइस आ जाएगी।
  778. 29:37मार्जिनल कॉस्टिंग से आपको डिसीजन मेकिंग
  779. 29:38में हेल्प मिलेगी। शॉर्ट टर्म डिसीजन
  780. 29:39मेकिंग में हेल्प मिलेगी। ठीक है साहब? ये
  781. 29:42अपनी बातचीत हुई। अब आते हैं
  782. 29:43कॉन्ट्रिब्यूशन के ऊपर। मार्जिनल कॉस्टिंग
  783. 29:45में एक सबसे इंपॉर्टेंट नया कांसेप्ट जो
  784. 29:46ऐड होता है वो होता है कंट्रीब्यूशन का।
  785. 29:48ये अपने एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग वगैरह बाकी
  786. 29:49किसी कॉस्टिंग में यूज़ नहीं होता। लेकिन
  787. 29:51यह रियल लाइफ का बड़ा इंपॉर्टेंट कांसेप्ट
  788. 29:53है। मैंने आपको बताया नॉर्मल रियल लाइफ
  789. 29:54में पर्सन इन्हीं चीजों के बारे में सोच
  790. 29:56रहा होता है। तो इसका एक फार्मूला है।
  791. 29:59कॉन्ट्रिब्यूशन का फार्मूला होता है
  792. 30:00डिफरेंस बिटवीन प्रोडक्ट की सेलिंग प्राइस
  793. 30:01और मार्जिनल कॉस्ट। तो सेलिंग प्राइस में
  794. 30:02से मार्जिनल कॉस्ट को माइनस कर दो। आपके
  795. 30:04पास में कंट्रीब्यूशन आ जाएगा। और टोटल
  796. 30:06कंट्रीब्यूशन निकालना चाहिए। ये तो पर
  797. 30:07कंट्रीब्यूशन पर यूनिट का फार्मूला हो
  798. 30:09गया। के सेलिंग प्राइस में से मैंने
  799. 30:11मार्जिनल कॉस्ट को लेस करा। जिसमें आपकी
  800. 30:13टोटल वेरिएबल कॉस्ट आ गई। सारी वेरिएबल
  801. 30:14कॉस्ट को लेस करके मार्जिनल कॉस्ट बनती
  802. 30:16है। उससे आपके पास में कॉन्ट्रिब्यूशन
  803. 30:18आएगा एक यूनिट का। टोटल कंट्रीब्यूशन
  804. 30:20निकालना हो तो फार्मूला ध्यान में रखना।
  805. 30:21एक यूनिट का जो कंट्रीब्यूशन है उसको
  806. 30:23मल्टीप्लाई कर दो। नंबर ऑफ यूनिट्स सोल्ड
  807. 30:25यानी नंबर ऑफ यूनिट्स सोल्ड नॉट
  808. 30:27प्रोड्यूस्ड। कॉन्ट्रीब्यूशन आप कमाते हो
  809. 30:30बेचने। यूनिट्स बेचने के बाद आपने यूनिट्स
  810. 30:33बना के रख लिए तो उस पे भी कोई कमाई नहीं
  811. 30:35हुई है। जब वो बिकेंगे तब कमाई होती है।
  812. 30:37तो कंट्रीब्यूशन आपकी वो एडिशनल कमाई है।
  813. 30:39ठीक है? जो एक यूनिट को बेच के आपने कमाई
  814. 30:41है। तो इसके लिए यूनिट सोल्ड से
  815. 30:42मल्टीप्लाई करना होता है। यूनिट प्रोड्यूस
  816. 30:44से नहीं। एग्जाम में कितनी बार बच्चों को
  817. 30:46कंफ्यूज करने के लिए वो प्रोडक्शन और
  818. 30:48सेल्स दोनों के फिगर दे देता है या उसके
  819. 30:50ऊपर हिंट दे देता है और बच्चे कितनी बारी
  820. 30:51गलती करते हैं कि प्रोडक्शन के फिगर से
  821. 30:53मल्टीप्लाई कर देते हैं। प्रोडक्शन के
  822. 30:55फिगर से मल्टीप्लाई करके कॉस्ट निकलती है।
  823. 30:57लेकिन कंट्रीब्यूशन या प्रॉफिट वगैरह जब
  824. 30:59भी ये बात होगी तो वो सेल के ऊपर बेस्ड
  825. 31:01होता है। तो यहां पे नंबर ऑफ यूनिट्स
  826. 31:02सोल्ड से मल्टीप्लाई करना है। ठीक है? अभी
  827. 31:04क्वेश्चंस वगैरह इस पे अपन देखेंगे।
  828. 31:07ठीक है? अब यहीं से कॉन्ट्रिब्यूशन का एक
  829. 31:09ग्राफ आता है। जहां से एक नया कांसेप्ट
  830. 31:11निकलता है। ब्रेक इवन पॉइंट। देखो
  831. 31:14कंट्रीब्यूशन क्या है? कंट्रीब्यूशन आपकी
  832. 31:16सेल प्राइस और वेरिएबल कॉस्ट के बीच का
  833. 31:18डिफरेंस है। ठीक है? इसमें फिक्स्ड कॉस्ट
  834. 31:21कवर हुई नहीं है। तो हम कहते हैं कि भ अगर
  835. 31:24आप अपने कॉन्ट्रिब्यूशन को ड्रॉ करते जाओ
  836. 31:26ऑन द बेसिस ऑफ़ यूनिट सोल्ड। तो ज़ीरो यूनिट
  837. 31:28बेचोगे, ज़ीरो कंट्रीब्यूशन है। फिक्स्ड
  838. 31:30कॉस्ट तो फिर भी लग ही रही है। तो फिक्स्ड
  839. 31:32कॉस्ट तो लगेगी ही लगेगी। फिर मान लो एक
  840. 31:34यूनिट पे आपको 5 डॉल का कंट्रीब्यूशन
  841. 31:37कमाने का मौका मिलता है। तो एक यूनिट
  842. 31:38बेचोगे, $5 कमाओगे, दो बेचोगे, 10। ऐसे
  843. 31:40करते-करते आपकी कंट्रीब्यूशन बढ़ता रहेगा।
  844. 31:42यूनिट्स के साथ बढ़ता रहेगा। ठीक है? एक
  845. 31:45पॉइंट आएगा जहां पर आपका कंट्रीब्यूशन और
  846. 31:48फिक्स्ड कॉस्ट एक दूसरे के बराबर होंगे।
  847. 31:50उस पॉइंट को हम कहते हैं ब्रेक इवन पॉइंट।
  848. 31:52ब्रेक इवन पॉइंट के आगे जितने भी यूनिट
  849. 31:55बेचोगे इस पर आपको होगा प्रॉफिट। ये आपका
  850. 31:58प्रॉफिट ज़ोन होता है।
  851. 32:01तो ब्रेक इवन यूनिट से ज्यादा यूनिट अगर
  852. 32:03आपने बेच दिए तो आपको प्रॉफिट होगा और
  853. 32:05ब्रेक इवन पॉइंट से अगर पीछे कम यूनिट अगर
  854. 32:08आपने बेचे तो आपको लॉस होगा। ठीक है ना?
  855. 32:11तो हम इसलिए कोशिश करते हैं कि ब्रेक इवन
  856. 32:13पॉइंट निकालें और ये ब्रेक इवन पॉइंट से
  857. 32:15ज्यादा यूनिट बेच दें ताकि अपन ओवरऑल
  858. 32:16प्रॉफिट में रहेंगे और हर कंपनी इसलिए
  859. 32:18ब्रेक इवन पॉइंट्स कंट्रीब्यूशन मार्जिनल
  860. 32:20कॉस्टिंग कैलकुलेट करती है क्योंकि यही वो
  861. 32:22मेथड है जो आपको ये ब्रेक इवन पॉइंट
  862. 32:24निकालने में हेल्प करेगा और नॉर्मल बिज़नेस
  863. 32:26का प्रूडेंस का कांसेप्ट है भाई नॉर्मल
  864. 32:27बिज़नेस चलाओगे तो आप अपना ब्रेक इवन पॉइंट
  865. 32:29तो कैलकुलेट करना चाहोगे ही हो कि मिनिमम
  866. 32:31इतने यूनिट बेचने पर जाकर के ये बिज़नेस
  867. 32:33प्रॉफिटेबल होना स्टार्ट करेगा। ठीक है?
  868. 32:36तो इसलिए ब्रेक इवन पॉइंट निकालना बड़ा
  869. 32:37जरूरी होता था। इसलिए मार्जिनल कॉस्टिंग
  870. 32:38एज अ कांसेप्ट बड़ा जरूरी था।
  871. 32:40ठीक है? इसमें हम कहते हैं जब
  872. 32:42कॉन्ट्रिब्यूशन आपके फिक्स्ड कॉस्ट से कम
  873. 32:44है तो आपको लॉस होगा। जब कंट्रीब्यूशन और
  874. 32:46फिक्स्ड कॉस्ट एक दूसरे के बराबर होंगे तब
  875. 32:47होगा ब्रेक इवन। और कॉन्ट्रिब्यूशन जब
  876. 32:49फिक्स्ड कॉस्ट से ज्यादा होगा तब होता है
  877. 32:50हमें प्रॉफिट। तो ब्रेक इवन पॉइंट निकालने
  878. 32:53के भी फ़ूले हैं साहब हमारे पास में
  879. 32:54डायरेक्ट कैलकुलेट करने के। अब ये तो
  880. 32:55ग्राफ है। एग्जाम में तो ग्राफ बनाने
  881. 32:57बैठेंगे अपन। तो एग्जाम में सर अगर बर बर
  882. 32:58बर बर बर बर बर बर बर बर इवन पॉइंट
  883. 32:59निकालने को बोल दिया तो कैसे कैलकुलेट
  884. 33:00करेंगे? तो हमारे पास में साहब दो फ़ूले
  885. 33:02हैं। पहला फ़ूला है फिक्स्ड कॉस्ट डिवाइड
  886. 33:04बाय कंट्रीब्यूशन। इससे आपको ब्रेक इवन
  887. 33:06पॉइंट यूनिट्स में पता पड़ेगा। फिक्स्ड
  888. 33:08कॉस्ट डिवाइड बाय कंट्रीब्यूशन। इसका
  889. 33:10दूसरा फार्मूला होता है इंक्रीमेंटल
  890. 33:11फिक्स्ड कॉस्ट डिवाइड बाय इंक्रीमेंटल
  891. 33:12कंट्रीब्यूशन। यह फार्मूला आपके ज्यादा
  892. 33:14काम आएगा नहीं। इंक्रीमेंटल का मतलब होता
  893. 33:16है कि भ जैसे आप पहले 1000 यूनिट बेच रहे
  894. 33:18थे और अब आप 1500 यूनिट बेच रहे हो। तो
  895. 33:211000 से 1500 पे जाने पर इंक्रीमेंटल
  896. 33:24कितना फिक्स्ड कॉस्ट बढ़ा और कितने आपके
  897. 33:26कंट्रीब्यूशन बढ़े उसके हिसाब से होता है।
  898. 33:27अगर यहां पे ये फार्मूला तब काम आता है जब
  899. 33:29फिक्स्ड कॉस्ट की जगह स्टेप फिक्स्ड कॉस्ट
  900. 33:30होती है हमारे पास में। तब यह काम आता है।
  901. 33:32हमारे लेवल पे एग्जाम में नहीं आएगा। अपने
  902. 33:34फर्स्ट वाला फार्मूला ध्यान रख लेना।
  903. 33:35फिक्स्ड कॉस्ट डिवाइड बाय कंट्रीब्यूशन पर
  904. 33:37यूनिट। ये तब जब यूनिट्स में आंसर चाहिए।
  905. 33:40मतलब नंबर ऑफ यूनिट कितने बेचने पड़ेंगे
  906. 33:42मिनिमम? यहीं पे अगर आपको सेल का अमाउंट
  907. 33:44चाहिए कि मिनिमम कितने अमाउंट की सेल करनी
  908. 33:47पड़ेगी? आपको ब्रेक इवन पॉइंट चाहिए
  909. 33:49अमाउंट के टर्म्स में सेल्स वैल्यू के
  910. 33:51टर्म्स में। तो वो कैसे निकालोगे? तो उसके
  911. 33:53लिए फार्मूला होता है फिक्स्ड कॉस्ट।
  912. 33:54न्यूमैरेटर तो सेम है। अब डिनोमिनेटर में
  913. 33:56कॉन्ट्रिब्यूशन की जगह कंट्रीब्यूशन
  914. 33:58प्रॉफिट कंट्रीब्यूशन मार्जिन रेश्यो या
  915. 34:00जिसको अपन प्रॉफिट वॉल्यूम रेशियो कहते
  916. 34:02हैं वो भी आप निकाल सकते हो। उससे डिवाइड
  917. 34:04कर दो। अब ये कंट्रीब्यूशन मार्जिन रेशियो
  918. 34:06या प्रॉफिट वॉल्यूम रेशियो कैसे आएगा? ये
  919. 34:08रेश्यो होता है आपके कॉन्ट्रिब्यूशन और
  920. 34:10सेल्स प्राइस के बीच का। तो आप
  921. 34:12कॉन्ट्रिब्यूशन को डिवाइड करो आपके
  922. 34:14रेवेन्यू पर यूनिट से मल्टीप्लाई करो 100
  923. 34:16से। इससे आपके पास में एक रेश्यो आएगा
  924. 34:17जिसे अपन कंट्रीब्यूशन मार्जिन रेश्यो या
  925. 34:19प्रॉफिट वॉल्यूम रेशियो बोलते हैं। अगर
  926. 34:21फिक्स्ड कॉस्ट को आपने इस कंट्रीब्यूशन
  927. 34:23रेशियो से डिवाइड करा तो भी आपको ब्रेक
  928. 34:24इवन पॉइंट मिल जाएगा। लेकिन ये अमाउंट के
  929. 34:26टर्म्स में मिलेगा। और अगर आप नॉर्मल
  930. 34:28कंट्रीब्यूशन पर यूनिट से डिवाइड करोगे तो
  931. 34:30आपको जो आंसर मिलेगा वो ब्रेक इवन पॉइंट
  932. 34:31इन टर्म्स ऑफ़ नंबर ऑफ़ यूनिट्स में मिलेगा।
  933. 34:33तो डिपेंडिंग ऑन क्वेश्चन की क्या डिमांड
  934. 34:35है उसके हिसाब से आप दोनों में से एक
  935. 34:36फार्मूला यूज़ कर सकते हो। ठीक है साहब?
  936. 34:41अब आते हैं कंट्रीब्यूशन के कैलकुलेशन के
  937. 34:44क्वेश्चंस के ऊपर। क्वेश्चन बोल रहा है भ
  938. 34:45ब्रूनर लिमिटेड मेक्स वन प्रोडक्ट द कॉस्ट
  939. 34:47कार्ड ऑफ व्हिच इज़ एस फॉलोस डायरेक्ट
  940. 34:49मटेरियल, डायरेक्ट लेबर, वेरिएबल
  941. 34:50प्रोडक्शन ओवरहेड, फिक्स्ड प्रोडक्शन
  942. 34:52ओवरहेड और वेरिएबल सेलिंग कॉस्ट। ये सारे
  943. 34:53खर्चे दे रखे हैं। कुल मिला के सेलिंग
  944. 34:55प्राइस 25 की है। आपको बोला है और बोल रखा
  945. 34:58है बजटेड फिक्स्ड ओवरहेड्स आर बेस्ड ऑन
  946. 34:59बजटेड प्रोडक्शन ऑफ़ 5,000 यूनिट्स। द
  947. 35:02सेल्स मेड ड्यूरिंग द पीरियड वर 3000
  948. 35:05यूनिट्स एंड एक्चुअल अ फिक्स्ड प्रोडक्शन
  949. 35:07ओवरहेड इंकर्ड वर 25,000 यूनिट्स। आपको
  950. 35:10टोटल कंट्रीब्यूशन एंड टोटल प्रॉफिट
  951. 35:12निकालना है।
  952. 35:14अच्छा अब इसके लिए एक और चीज मैं थोड़ा सा
  953. 35:16आपको बता दूं। मार्जिनल कॉस्टिंग में ये
  954. 35:20तो हमारे पास में एक कॉस्ट शीट है। बट
  955. 35:22हमारे पास में एक शॉर्टकट पीएंडएल का
  956. 35:25फार्मूला भी होता है। फुल मेथड अभी
  957. 35:26समझेंगे। बट एक शॉर्टकट पीएंडएल का
  958. 35:29फार्मूला होता है। यह काम करता है सिर्फ
  959. 35:31मार्जिनल कॉस्टिंग में ध्यान रखना।
  960. 35:39ये सिर्फ मार्जिनल कॉस्टिंग में काम
  961. 35:40करेगा। ठीक है? क्या है फार्मूला? हम कहते
  962. 35:42हैं सेल्स।
  963. 35:44सेल प्राइस ले लो। सेलिंग प्राइस।
  964. 35:50इसमें से आप लेस करो। जितने भी वेरिएबल
  965. 35:53कॉस्ट हैं। ऑल वेरिएबल कॉस्ट्स
  966. 35:58ठीक है? प्राइम कॉस्ट, ओवरहेड वगैरह जो भी
  967. 36:00है सब लेस कर दो। इससे आपके पास में आ
  968. 36:02जाएगा कंट्रीब्यूशन पर यूनिट।
  969. 36:12इसको मल्टीप्लाई करो नंबर ऑफ यूनिट सोल्ड
  970. 36:15से।
  971. 36:20इससे आपके पास में आएगा टोटल
  972. 36:22कंट्रीब्यूशन।
  973. 36:29ठीक है? इस टोटल कंट्रीब्यूशन में से लेस
  974. 36:32कर दो क्या आपकी फिक्स्ड कॉस्ट्स?
  975. 36:35जितनी भी फिक्स्ड कॉस्ट्स तो आपके पास में
  976. 36:38आता है टोटल प्रॉफिट।
  977. 36:46ठीक है? यह शॉर्टकट मेथड है मार्जिनल
  978. 36:49कॉस्टिंग में प्रॉफिट एंड लॉस निकालने का।
  979. 36:51ठीक है? सेलिंग प्राइस उसमें से वेरिएबल
  980. 36:53कॉस्ट को लेस करा। इससे अपने पास में
  981. 36:56कंट्रीब्यूशन आया पर यूनिट का। इसको
  982. 36:58मल्टीप्लाई करा नंबर ऑफ यूनिट सोल्ड से।
  983. 37:00इससे अपने पास में टोटल कंट्रीब्यूशन आ
  984. 37:02जाएगा। इसमें से अपन वापस फिक्स्ड कॉस्ट
  985. 37:05को लेस करेंगे तो हमारे पास में टोटल
  986. 37:07प्रॉफिट या लॉस जो भी आना होगा वो आ
  987. 37:09जाएगा। ठीक है साहब? ये फॉर्मेट ध्यान में
  988. 37:12रखना है। शॉर्टकट फार्मूला ध्यान में रखना
  989. 37:14है। ठीक है ना?
  990. 37:15चलिए अब इसी से क्वेश्चन को सॉल्व करते
  991. 37:19हैं। ये क्वेश्चन है। मेरे को सबसे पहले
  992. 37:20तो निकालना है यहां पे क्या?
  993. 37:21कंट्रीब्यूशन। मेरे से पूछा भी है। टोटल
  994. 37:23कॉनंट्रीब्यूशन पूछा है। तो पहले
  995. 37:24कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट निकालना पड़ेगा।
  996. 37:26उसके बाद में टोटल कंट्रीब्यूशन आएगा।
  997. 37:31तो टोटल कॉन्ट्रिब्यूशन निकालने के लिए
  998. 37:39हम पहले बोलेंगे कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट
  999. 37:41निकाल दो।
  1000. 37:48और उसको मल्टीप्लाई कर दो नंबर ऑफ यूनिट
  1001. 37:50सोल्ड से।
  1002. 37:58[गला साफ़ करने की आवाज़] अब कंट्रीब्यूशन
  1003. 37:59पर यूनिट के लिए सेलिंग प्राइस माइनस
  1004. 38:01जितनी भी वेरिएबल कॉस्ट है वो लेनी पड़ेगी
  1005. 38:03आपको।
  1006. 38:12सेलिंग प्राइस है 25
  1007. 38:15माइनस जितनी भी वेरिएबल कॉस्ट है ऑल
  1008. 38:18वेरिएबल कॉस्ट ध्यान रखना
  1009. 38:22तो इस क्वेश्चन में वेरिएबल कॉस्ट कितनी
  1010. 38:24है? देखो कुछ नहीं बोल रखा हो तो मटेरियल
  1011. 38:26और लेबर डायरेक्ट मटेरियल डायरेक्ट लेबर
  1012. 38:27इन दोनों को हमेशा वेरिएबल मान के चलना।
  1013. 38:29ये दोनों हमेशा अस्यूम होती हैं। वेरिएबल
  1014. 38:31है। तो ये वेरिएबल होगी। ये वेरिएबल होगी।
  1015. 38:34इसके नाम के आगे लिखा है वेरिएबल। इसके
  1016. 38:35नाम के आगे भी लिखा है वेरिएबल। तो सबको
  1017. 38:37ऐड कर दो। 3 + 6 + 2 + 5
  1018. 38:4516
  1019. 38:50ये आएगा नाइन।
  1020. 38:53ठीक है साहब।
  1021. 38:55ये अपना कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट हो गया।
  1022. 39:03अब इस कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट को
  1023. 39:05मल्टीप्लाई कर दो। नंबर ऑफ़ यूनिट्स सोल्ड
  1024. 39:06उससे आएगा टोटल कॉन्फिशन प्रोड्यूस से
  1025. 39:08नहीं सोल्ड से सोल्ड करें 3000 तो 3000
  1026. 39:12तो इससे अपने पास में
  1027. 39:15अपना टोटल कंट्रीब्यूशन आ गया 27000 का
  1028. 39:21ठीक है
  1029. 39:23फिर B अब अपन निकालेंगे टोटल प्रॉफिट
  1030. 39:32प्रॉफिट के लिए इस टोटल कंट्रीब्यूशन में
  1031. 39:34से फिक्स्ड कॉस्ट को लेस करना है।
  1032. 39:48टोटल कंट्रीब्यूशन है 27,000 का। फिक्स्ड
  1033. 39:52कॉस्ट ध्यान रखना। अच्छा अपने को फिक्स्ड
  1034. 39:54कॉस्ट कंफ्यूज करने के लिए दो दे रखी है।
  1035. 39:55एक दे रखी है फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड पर
  1036. 39:57यूनिट में और एक तुम्हें दे रखा है
  1037. 39:59एक्चुअल फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड। हम
  1038. 40:01हमेशा मार्जिनल कॉस्टिंग में एक्चुअल वाला
  1039. 40:03फिगर लेके चलेंगे। मार्जिनल कॉस्टिंग में
  1040. 40:05एक्चुअल वाला अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग में ये
  1041. 40:07ओआर वाला फिगर लेके चलना पड़ता है।
  1042. 40:09मार्जिनल कॉस्टिंग में आप एक्चुअल फिक्स्ड
  1043. 40:11प्रोडक्शन कॉस्ट को माइनस करते हो।
  1044. 40:12एक्चुअल कॉस्ट 25,000 की है क्योंकि
  1045. 40:15मार्जिनल कॉस्टिंग में अब्सॉर्प्शन नहीं
  1046. 40:17होता। तो यह जो अब्सॉर्प्शन वाले कॉस्ट है
  1047. 40:18यह हमारे किसी काम की नहीं। हमारे काम की
  1048. 40:20एक्चुअल होती है। ठीक है? तो यहां पे आपका
  1049. 40:232000 का प्रॉफिट है।
  1050. 40:26ये आपका 2000 का प्रॉफिट आया। ठीक है
  1051. 40:29साहब? तो ये फॉर्मेट अगर दिमाग में बैठ
  1052. 40:31गया तो अपना काम हो जाएगा। यहां पे ध्यान
  1053. 40:32रखना। फिक्स्ड कॉस्ट हमेशा कौन सी वाली
  1054. 40:34लेके चलनी है? एक्चुअल वाली।
  1055. 40:37ठीक है? एक्चुअल फिक्स्ड कॉस्ट को लेके
  1056. 40:38चलेंगे। ठीक है? तो अपने पास में आंसर आ
  1057. 40:41जाएगा। यह हो गया अभी अपना आंसर फर्स्ट
  1058. 40:43वाला क्वेश्चन। देखिए टोटल कॉन्रिब्यूशन
  1059. 40:45बोला था तो पहले मैंने कंट्रीब्यूशन पर
  1060. 40:46यूनिट निकाला। उसको मल्टीप्लाई करा नंबर
  1061. 40:48ऑफ यूनिट्स सोल्ड से। मेरे पास में टोटल
  1062. 40:49कंट्रीब्यूशन आ गया। फिर इस टोटल
  1063. 40:51कंट्रीब्यूशन में से मैंने एक्चुअल
  1064. 40:52फिक्स्ड कॉस्ट को माइनस करा
  1065. 40:55तो मेरे पास में एक्चुअल मेरा प्रॉफिट आ
  1066. 40:57गया। ठीक है साहब। 2000 का प्रॉफिट है।
  1067. 41:0127,000 का टोटल कंट्रीब्यूशन है। पर यूनिट
  1068. 41:03कंट्रीब्यूशन नाइन का है। वेरिएबल कॉस्ट
  1069. 41:05अपनी 16 की है। यह सब अपन ने कैलकुलेट कर
  1070. 41:07ही लिया।
  1071. 41:10एक क्वेश्चन और देखते हैं। पी क्यूआर
  1072. 41:12सेल्स वन प्रोडक्ट। द कॉस्ट कार्ड फॉर द
  1073. 41:13फॉलोइंग प्रोडक्ट इज गिवन बिलो। डायरेक्ट
  1074. 41:15मटेरियल, डायरेक्ट लेबर, वेरिएबल
  1075. 41:16प्रोडक्शन ओवरहेड, फिक्स्ड प्रोडक्शन
  1076. 41:18ओवरहेड, वेरिएबल सेलिंग कॉस्ट ये सब दे
  1077. 41:20रखा है। द सेलिंग प्राइस पर यूनिट इज़ $20।
  1078. 41:22द बजट फिक्स्ड ओवरहेड आर बेस्ड ऑन बजटेड
  1079. 41:24प्रोडक्शन ऑफ़ 10 $1,000 यूनिट्स। ओपनिंग
  1080. 41:27इन्वेंटरी वाज़ $2000 यूनिट्स एंड क्लोजिंग
  1081. 41:29इन्वेंटरी वाज़ 150 यूनिट्स। सेल्स मेड
  1082. 41:32ड्यूरिंग द ईयर वर 800 यूनिट। तो आपको
  1083. 41:34प्रोडक्शन भी दे रखा है। आपको ओपनिंग
  1084. 41:35इन्वेंटरी, क्लोजिंग इन्वेंटरी दे रखी है।
  1085. 41:37यह बजटेड प्रोडक्शन भी है। आपको ओपनिंग
  1086. 41:39क्लोजिंग दे रखी है। सेल दे रखा है। तो आप
  1087. 41:40इससे एक्चुअल प्रोडक्शन भी निकाल सकते हो।
  1088. 41:42बट जरूरत ही नहीं है। ठीक है ना? अपने को
  1089. 41:45कंट्रीब्यूशन और टोटल प्रॉफिट निकालने के
  1090. 41:47लिए नंबर ऑफ यूनिट सोल्ड ही चाहिए होते
  1091. 41:48हैं। तो इस क्वेश्चन में आपको कंफ्यूज
  1092. 41:49करने के लिए सब देता है वो ताकि आप
  1093. 41:51कंफ्यूज हो और गलत फिगर लेके चलो। ठीक है?
  1094. 41:54एक्चुअल फिक्स्ड ओवरहेड इंकर्ड दे रखे हैं
  1095. 41:561500 के। आपको बोला है टोटल
  1096. 41:58कॉन्ट्रिब्यूशन अर्न कितना? अच्छा सिर्फ
  1097. 41:59कंट्रीब्यूशन ही निकालना है। तो बहुत सारी
  1098. 42:01एक्स्ट्रा इनफार्मेशन दे रखी है। अपने
  1099. 42:03टोटल कॉन्ट्रीब्यूशन के लिए मुझे क्या
  1100. 42:04चाहिए? मुझे चाहिए कंट्रीब्यूशन पर यूनिट
  1101. 42:14इंटू नंबर ऑफ यूनिट्स सोल्ड
  1102. 42:21कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट निकालने के लिए
  1103. 42:22क्या आएगा भाई? सेलिंग प्राइस जो आपकी 20
  1104. 42:24की है माइनस डायरेक्ट मटेरियल, डायरेक्ट
  1105. 42:28लेबर, वेरिएबल प्रोडक्शन ओवर और वेरिएबल
  1106. 42:30सेलिंग कॉस्ट ये सारे वेरिएबल खर्चे भी
  1107. 42:31आएंगे।
  1108. 42:404 + 5
  1109. 42:43+ 3 + 3
  1110. 42:48इन नंबर ऑफ यूनिट सोल्ड नंबर ऑफ यूनिट
  1111. 42:50सोल्ड 800
  1112. 42:59तो फाइव का कंट्रीब्यूशन है। 800 यूनिट
  1113. 43:03आपने सेल करे हैं।
  1114. 43:084000 का आपका कॉन्ट्रिब्यूशन है।
  1115. 43:13ठीक है? यह टोटल कंट्रीब्यूशन है। अगर
  1116. 43:15मेरे से प्रॉफिट बोलता तो इसमें से 1500
  1117. 43:17माइनस करते 4000 में से आंसर 2500 आता।
  1118. 43:20अभी पूछा टोटल कंट्रीब्यूशन है तो मैं
  1119. 43:22कंट्रीब्यूशन पे रुक जाऊंगा। वो प्रॉफिट
  1120. 43:23बोलता तो इस टोटल कंट्रीब्यूशन में से
  1121. 43:25एक्चुअल फिक्स्ड ओवरहेड 1500 लेस करते।
  1122. 43:27आंसर फिर 2500 होता। अभी जो बोला है वो
  1123. 43:30अपना आंसर निकाल के देंगे। ठीक है साहब?
  1124. 43:33ये हो गया काम। फिर अपन ने बात करी ली
  1125. 43:36इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन को लेकर के।
  1126. 43:37इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन दोनों में डिफर
  1127. 43:38करता है साहब। मार्जिनल कॉस्टिंग में आप
  1128. 43:40इन्वेंटरी का वैल्यूएशन सिर्फ मार्जिनल
  1129. 43:41कॉस्ट पे लेके चलते हो जो आपकी वेरिएबल
  1130. 43:43प्रोडक्शन कॉस्ट है उसी के ऊपर और
  1131. 43:44एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के केस में आप फुल
  1132. 43:46एब्सॉर्प्शन कॉस्ट जिसमें आप अपने फिक्स्ड
  1133. 43:48ओवरहेड्स को भी इंक्लूड करते हो उस पर
  1134. 43:50इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन करते हो इसको
  1135. 43:52अगर अपन फॉर्मेट में देखें तो मैंने आपको
  1136. 43:53ये बता ही दिया अगर एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग
  1137. 43:55का पीएनएल बना रहे हो तो उसमें
  1138. 43:57एब्जॉर्प्शन कॉस्ट निकालने के लिए
  1139. 43:58डायरेक्ट मटेरियल डायरेक्ट लेबर डायरेक्ट
  1140. 43:59एक्सपेंस वेरिएबल प्रोडक्शन ओवरहेड और
  1141. 44:01फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड चार पांचों को
  1142. 44:03लेके चलना पड़ेगा तब आपके पास में
  1143. 44:04एब्सॉर्प्शन कॉस्ट आती है अगर एक हटा दो
  1144. 44:07इसमें से फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड हटा
  1145. 44:09सिर्फ वेरिएबल वाले प्रोडक्शन ओवरहेड को
  1146. 44:10ऐड करो प्राइम कॉस्ट के अंदर। तो आपके पास
  1147. 44:12में मार्जिनल कॉस्ट आ जाएगी। मार्जिनल
  1148. 44:14कॉस्ट और अपनी एब्सॉर्प्शन कॉस्ट में
  1149. 44:15सिर्फ एक ही डिफरेंस है आपके फिक्स
  1150. 44:17प्रोडक्शन ओवरहेड का। ठीक है साहब? ये
  1151. 44:20पॉइंट ध्यान में रखना। अभी आगे काम भी
  1152. 44:21आएगा। तो हम ये कह सकते हैं कि टोटल कॉस्ट
  1153. 44:25जो भी आएगी यूनिट्स की क्लोजिंग इन्वेंटरी
  1154. 44:27की वो हमेशा एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग में
  1155. 44:28ज्यादा आएगी एज़ कंपेयर टू मार्जिनल
  1156. 44:30कॉस्टिंग। क्योंकि अपनी एब्जॉर्प्शन कॉस्ट
  1157. 44:32ज्यादा होती है मार्जिनल कॉस्ट से। ठीक है
  1158. 44:34ना? दिस इज़ ड्यू टू फिक्स्ड प्रोडक्शन
  1159. 44:36ओवरहेड्स अब्सॉर्ब्ड इंटू द कॉस्ट यूनिट
  1160. 44:38अंडर एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग। अबॉर्प्शन
  1161. 44:39कॉस्टिंग में जब फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड
  1162. 44:40को ही इंक्लूड कर दिया। जब कॉस्ट ही बढ़ा
  1163. 44:43दी तो उसके हिसाब से इन्वेंटरी का
  1164. 44:44वैल्यू्यूएशन भी ज्यादा आएगा। ये एमसीक्यू
  1165. 44:46के लिए ध्यान रखना। एग्जाम में कांसेप्ट
  1166. 44:48टेस्ट होते हैं। एग्जाम में थ्योरी टेस्ट
  1167. 44:49नहीं होती। ये थ्योरी नहीं है। ये
  1168. 44:50कांसेप्ट है। ये बड़ी गलती होती है बच्चों
  1169. 44:52को कि वो कहते हैं कि सर थ्योरी आ गई
  1170. 44:54एग्जाम में। थ्योरी नहीं आती। तो उस
  1171. 44:55कांसेप्ट टेस्ट हो रहे हैं। कांसेप्ट की
  1172. 44:56टेस्टिंग तो होगी यार। ये कांसेप्ट
  1173. 44:58तुम्हें पता नहीं होगा। तो फिर तुम किस
  1174. 45:00तरीके से इस इस मेथड को रियल लाइफ में यूज़
  1175. 45:03करोगे? तो वो कॉन्सेप्ट टेस्टिंग करता है।
  1176. 45:04थ्योरी टेस्टिंग नहीं करता है। ठीक है
  1177. 45:06साहब। हां जी। इसके ऊपर एक क्वेश्चन करते
  1178. 45:08हैं। एग्जांपल नंबर थ्री देखो क्या कह रहा
  1179. 45:10है। बीकेयू कंपनी इज़ इन प्रोसेस ऑफ़ वैल्यू
  1180. 45:13वन ऑफ़ इट्स प्रोडक्ट प्रोडक्ट XB। द
  1181. 45:15प्रोडक्ट XB हैज़ अ मार्जिनल कॉस्ट ऑफ़ $1
  1182. 45:18पर यूनिट एंड एन अब्सॉर्प्शन कॉस्ट ऑफ़ $1
  1183. 45:21पर यूनिट। एट द एंड ऑफ़ सेप्टेंबर देयर वर
  1184. 45:24$2500 यूनिट्स लेफ्ट इन्वेंटरी। 2500
  1185. 45:27यूनिट थे अपने पास में इन्वेंटरी के अंदर।
  1186. 45:29ठीक है? ठीक है? तो ये क्लोजिंग इन्वेंटरी
  1187. 45:30दे रखी है। मुझे मार्जिनल कॉस्ट दे रखी
  1188. 45:32है। मुझे अब्सॉर्प्शन कॉस्ट दे रखी है।
  1189. 45:33आपको बतानी है व्हाट इज द वैल्यू ऑफ़
  1190. 45:34इन्वेंटरी एट द एंड ऑफ़ सेप्टेंबर इफ
  1191. 45:36बीकेयू यूजज़ मार्जिनल कॉस्टिंग। तो
  1192. 45:38मार्जिनल कॉस्टिंग में 2500 की इन्वेंटरी
  1193. 45:40को मल्टीप्लाई करेंगे मार्जिनल कॉस्ट से।
  1194. 45:42और वहीं पे अगर एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग को
  1195. 45:44यूज़ करते हैं तो फिर 2500 की इन्वेंटरी को
  1196. 45:46आप मल्टीप्लाई करते हैं एब्सॉर्प्शन कॉस्ट
  1197. 45:48से। ठीक है सर?
  1198. 46:05ठीक है सर।
  1199. 46:10हां जी। फिर आता है एग्जांपल नंबर फोर।
  1200. 46:13प्रोडक्शन डाटा फॉर वन आपको एक प्रोडक्ट
  1201. 46:16के लिए दे रखा है प्रोडक्शन डाटा। मटेरियल
  1202. 46:18लगता है 2.4 kg एक यूनिट को बनाने में।
  1203. 46:21ठीक है? और $3 पर केजी का मटेरियल का
  1204. 46:23खर्चा है। तो यहां से अपनी डायरेक्ट
  1205. 46:24मटेरियल की कॉस्ट आ जाती है 2.4 * 3
  1206. 46:347.2
  1207. 46:36और लेबर के लिए 1.5 आवर लगते हैं और लेबर
  1208. 46:39को अपन पेमेंट करते हैं $5 पर आवर का। तो
  1209. 46:421.5 * 5 पर यूनिट की कॉस्ट आ गई 7.5। ठीक
  1210. 46:46है? ये अपनी कॉस्ट पर यूनिट निकाल रहे हैं
  1211. 46:48अपन यहां पे। ठीक है? अभी तो अपने को
  1212. 46:50कॉस्ट दे रखी है पर केजी और पर आवर में।
  1213. 46:51मुझे तो एक यूनिट की एक गोरमे को बनाने की
  1214. 46:54कॉस्ट चाहिए। तो यहां पे अपन निकाल रहे
  1215. 46:56हैं कॉस्ट पर यूनिट।
  1216. 47:02ठीक है? तो ये कॉस्ट पर यूनिट आ गया अपने
  1217. 47:04पास। फिर आता है भाई द वेरिएबल ओवरहेड रेट
  1218. 47:07इज़ $4 पर डायरेक्ट लेबर आवर। द फिक्स्ड
  1219. 47:10ओवरहेड अब्सॉर्प्शन रेट इज़ $7 पर डायरेक्ट
  1220. 47:12लेबर आवर। द बजटेड प्रोडक्शन इज़ 5000
  1221. 47:15गोरमेज़। ठीक है? वेरिएबल ओवरहेड के अलग से
  1222. 47:18खर्चे दे रखे हैं फोर का और फिक्स्ड
  1223. 47:20ओवरहेड की अब्सॉर्प्शन रेट भी दे रखी है
  1224. 47:21सेवन की और 5000 गौरव में बने थे। बजटेड
  1225. 47:25फिक्स्ड ओवरहेड्स आपको दे रखे हैं। नंबर
  1226. 47:26ऑफ यूनिट इंटू नंबर ऑफ़ आवर्स इंटू आवरली
  1227. 47:29रेट। ये अपने
  1228. 47:31सेवन की रेट है पर डायरेक्टली बार आवर। तो
  1229. 47:34यूनिट्स को बनाने में 1.5 आवर लगते हैं।
  1230. 47:36तो इससे एक यूनिट के फिक्स्ड ओवरहेड आ गए।
  1231. 47:39उनको मल्टीप्लाई कर दिया 5000 यूनिट्स से।
  1232. 47:40तो आपके पास में टोटल बजटेड फिक्स्ड ओवर
  1233. 47:42रेट आ गया वो 52 है। डिटरमाइन द कॉस्ट ऑफ
  1234. 47:45गोमे फॉर इन्वेंटरी इवैल्यूएशन पर्पस ऑन
  1235. 47:48मार्जिनल कॉस्टिंग एंड एब्सॉर्प्शन
  1236. 47:49कॉस्टिंग। दोनों बेसिस पे आपको कॉस्ट
  1237. 47:51निकालनी है।
  1238. 47:53अपने को बनानी है कॉस्ट शीट। कॉस्ट शीट
  1239. 47:55कहती है भ डायरेक्ट मटेरियल प्लस डायरेक्ट
  1240. 47:58लेबर प्लस डायरेक्ट एक्सपेंस। इससे आपके
  1241. 48:00पास में आएगी प्राइम कॉस्ट।
  1242. 48:03इस प्राइम कॉस्ट में अगर आपने ऐड कर दिया
  1243. 48:05वेरिएबल।
  1244. 48:11प्रोडक्शन ओवरहेड तो आपके पास में आ जाएगी
  1245. 48:14मार्जिनल कॉस्ट
  1246. 48:18जिसे आप वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट भी
  1247. 48:20बोलोगे और उसमें अगर आपने ऐड कर दिया
  1248. 48:22फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड
  1249. 48:30तो आपके पास में आ जाएगी अब्सॉर्प्शन
  1250. 48:32कॉस्ट।
  1251. 48:41अपने को यहां पर कॉस्ट
  1252. 48:44पर यूनिट चाहिए। ठीक है? हां जी। अब
  1253. 48:48डायरेक्ट मटेरियल की कॉस्ट तो अपने निकाल
  1254. 48:50ली थी। एक यूनिट को बनाने में 2.4 kg का
  1255. 48:52रॉ मटेरियल लगता है और 1 kg रॉ मटेरियल की
  1256. 48:55कॉस्ट 3 आ रही थी। तो ये आपके 7.2 है।
  1257. 48:58डायरेक्ट लेबर में एक यूनिट को बनाने में
  1258. 49:001.5 आवर लगते हैं। और लेबर की कॉस्ट $5 पर
  1259. 49:02आवर है। तो इसके हिसाब से खर्चा आ रहा था
  1260. 49:047.5 डायरेक्ट एक्सपेंस कुछ बोल नहीं रखा
  1261. 49:06तो ज़ीरो कर दो। इन दोनों को ऐड करोगे तो
  1262. 49:09आपके पास में प्राइम कॉस्ट आ जाएगी 14.7
  1263. 49:12की।
  1264. 49:15ठीक है? अब आती है वेरिएबल प्रोडक्शन ओवर।
  1265. 49:19वेरिएबल प्रोडक्शन ओवर बोल रखा है $4 पर
  1266. 49:21डायरेक्ट लेबर आवर। एक लेबर आवर पे फोर
  1267. 49:24का। लेकिन एक यूनिट को बनाने में तो 1.5
  1268. 49:26का खर्चा 1.5 आवर लगते हैं। तो वेरिएबल
  1269. 49:28ओवरहेड भी फिर 1.5 आवर के हिसाब से
  1270. 49:30अब्सॉर्ब होंगे। 1.5 * 4 तो वेरिएबल कॉस्ट
  1271. 49:34भी
  1272. 49:37सिक्स। ये हो जाएगी 20.7 ये आपकी मार्जिनल
  1273. 49:41कॉस्ट है। वेरिएबल कॉस्ट ऑफ़ प्रोडक्शन
  1274. 49:42जिसे अपन कहते हैं। और इसी में अगर आप
  1275. 49:44फिक्स्ड ओवरहेड्स को इंक्लूड करोगे।
  1276. 49:46फिक्स्ड ओवरहेड कैसे निकलेंगे? वह दे रखे
  1277. 49:48हैं। $ पर डायरेक्ट लेबर आवर एक लेबर आवर
  1278. 49:511.5 है * 7
  1279. 50:0531.2
  1280. 50:06ये हो गया सब आंसर।
  1281. 50:09इस तरीके से आंसर आ जाएगा। मार्जिनल कॉस्ट
  1282. 50:1220.7 और एब्सॉर्प्शन कॉस्ट 31.2 दोनों आ
  1283. 50:16गया आंसर।
  1284. 50:18ठीक है? ठीक है? तो ये कॉस्ट शीट अपने को
  1285. 50:19ध्यान रखनी है। अगर तुम्हें ये कॉस्ट शीट
  1286. 50:21याद रह गई तो तुम अपने ये एब्सॉर्प्शन
  1287. 50:23कॉस्टिंग और मार्जिनल कॉस्टिंग के
  1288. 50:24क्वेश्चंस वगैरह कैलकुलेट करना। आराम से
  1289. 50:26तुम्हारा काम हो जाएगा। और अब इन्वेंटरी
  1290. 50:28का वैल्यू्यूएशन मार्जिनल कॉस्टिंग में
  1291. 50:3020.7 पे होगा। तो जितने इन्वेंटरी के
  1292. 50:32यूनिट्स हैं उसको मल्टीप्लाई कर देना 20.7
  1293. 50:33से। जितने यूनिट बना है उसके हिसाब से
  1294. 50:35मल्टीप्लाई कर दोगे तो प्रोडक्शन की कॉस्ट
  1295. 50:37आ जाएगी। और एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग में ये
  1296. 50:39वाला अपन फिगर लेके चलेंगे। चाहे अपनी
  1297. 50:41इन्वेंटरी का वैल्यूएशन हो, चाहे अपने
  1298. 50:42प्रोडक्शन कॉस्ट की निकालने की बात हो।
  1299. 50:45ठीक है साहब?
  1300. 50:48हां जी। एक और क्वेश्चन देखते हैं।
  1301. 50:49एग्जांपल फाइव। अ कंपनी प्रोड्यूसेस एंड
  1302. 50:51सेल्स अ सिंगल प्रोडक्ट। वेरिएबल कॉस्ट दे
  1303. 50:53रखी है सिक्स की है। फिक्स्ड कॉस्ट हैव
  1304. 50:55बीन अब्सॉर्ब्ड ओवर अ नॉर्मल लेवल ऑफ़
  1305. 50:57एक्टिविटी ऑफ़ 2 लाख एंड हैव कैलकुलेटेड टू
  1306. 50:58बी टू। करंट सेलिंग प्राइस 10 की है। आपको
  1307. 51:01बताना है कितना कंट्रीब्यूशन अर्न होगा।
  1308. 51:02अगर कंपनी ₹50,000 यूनिट्स बेचती है तो।
  1309. 51:05कॉन्ट्रिब्यूशन निकालना है।
  1310. 51:07कॉन्ट्रिब्यूशन के लिए अपन और टोटल
  1311. 51:09कंट्रीब्यूशन ही दे रखा है यहां पे। तो
  1312. 51:11अपन कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट निकालेंगे
  1313. 51:12पहले।
  1314. 51:22इंटू ध्यान रखना नंबर ऑफ यूनिट्स सोल्ड
  1315. 51:24नॉट प्रोड्यूस्ड यहां पे प्रोड्यूस भी दे
  1316. 51:27रखा है और सोल्ड भी दे रखा है। अपने को
  1317. 51:28सोल्ड वाला फिगर चाहिए।
  1318. 51:32तो कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट के लिए 10 की
  1319. 51:33सेलिंग प्राइस है। वेरिएबल कॉस्ट सिक्स की
  1320. 51:35है। तो इससे कंट्रीब्यूशन और नंबर ऑफ
  1321. 51:37यूनिट 250
  1322. 51:41तो आंसर हो गया ₹1 लाख।
  1323. 51:46डी।
  1324. 51:47ठीक है साहब? इस तरीके से आंसर आ जाएगा
  1325. 51:50अपना यहां पे। ठीक है?
  1326. 51:53अब आते हैं मेन मुद्दे पर। सर एब्जॉर्प्शन
  1327. 51:55कॉस्टिंग और मार्जिनल कॉस्टिंग में
  1328. 51:57प्रॉफिट कैसे निकाला जाएगा? उसका फुल
  1329. 51:59फॉर्मेट। अभी जो अपने देखा था वो अपने
  1330. 52:01मार्जिनल कॉस्टिंग का शॉर्ट फॉर्मेट था।
  1331. 52:03ये मार्जिनल कॉस्टिंग का फुल फॉर्मेट है।
  1332. 52:04और यह एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का फुल
  1333. 52:06फॉर्मेट है। यह फुल फॉर्मेट अपने को पता
  1334. 52:08होना चाहिए। एग्जाम में सेक्शन बी में अगर
  1335. 52:10क्वेश्चन आ गया, तो फिर वो यहीं से आएगा
  1336. 52:12इसमें से। ठीक है? और इवन सेक्शन A में भी
  1337. 52:15छोटा क्वेश्चन थोड़ी कम वैल्यू्यूज के साथ
  1338. 52:17में तो आया हुआ है। ठीक है ना? तो
  1339. 52:19कैलकुलेट कैसे करोगे? नॉर्मल जो आप
  1340. 52:21अकाउंट्स में पीएनएल बनाते हो उस फॉर्मेट
  1341. 52:23को दिमाग में रखना। उसी में कुछ चेंजेस
  1342. 52:26करके अपन ने ये फॉर्मेट बनाया। अपन
  1343. 52:28स्टार्ट करते हैं सेल्स रेवेन्यू से। यहां
  1344. 52:29पे भी स्टार्ट करेंगे सेल्स रेवेन्यू से।
  1345. 52:31उधर अपन लिखते हैं अ अपना ओपनिंग
  1346. 52:34इन्वेंटरी प्लस प्रोडक्शन और क्लोजिंग को
  1347. 52:36अपन लिखते हैं क्रेडिट साइड पे। तो
  1348. 52:37क्लोजिंग एक तरह से लेस हो रहा है। यहां
  1349. 52:38भी वही कर रहे हैं। ओपनिंग इन्वेंटरी का
  1350. 52:40वैल्यू्यूएशन। उसमें प्रोडक्शन की कॉस्ट
  1351. 52:42को ऐड करा और उसमें से क्लोजिंग इन्वेंटरी
  1352. 52:43की वैल्यू्यूएशन को लेस करा। तो हमारे पास
  1353. 52:45में आ जाती है कॉस्ट ऑफ़ सेल। अब क्योंकि
  1354. 52:47यह एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग है तो यहां पे
  1355. 52:49इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन, यहां पे
  1356. 52:50प्रोडक्शन का कॉस्ट का वैल्यूएशन सब
  1357. 52:51एब्जॉर्प्शन कॉस्ट पे होगा। फुल
  1358. 52:53एब्सॉर्प्शन कॉस्ट पे होगा। ठीक है? इससे
  1359. 52:55आपके पास में फुल प्रोडक्शन कॉस्ट ऑफ सेल
  1360. 52:57आएगी। उसको आप सेल्स में से माइनस करोगे।
  1361. 52:59आपके पास में एक फिगर आएगा। बट इस फिगर
  1362. 53:01में एक चीज एडजस्ट करने की और जरूरत
  1363. 53:02पड़ेगी। वो है आपका अंडर एब्सॉर्प्शन या
  1364. 53:04ओवर एब्जॉर्प्शन। क्योंकि यहां पे जो आपने
  1365. 53:06फिक्स्ड कॉस्ट ली है वो एब्सॉर्ब्ड बेसिस
  1366. 53:08पे ली है तो उसमें अंडर या ओवर
  1367. 53:09एब्सॉर्प्शन हो सकता है। वो अंडर
  1368. 53:11एब्सॉर्प्शन हुआ अगर आपने कम खर्चे
  1369. 53:13रिकॉर्ड कर रखे हैं तो खर्चे बढ़ाने
  1370. 53:14पड़ेंगे तो अंडर एब्सॉर्प्शन को लेस करते
  1371. 53:15हैं। ओवर एब्सॉर्प्शन हो गया मान लो
  1372. 53:17ज्यादा खर्चे रिकॉर्ड कर लिए तो खर्चे कम
  1373. 53:19करने पड़ेंगे तो इसलिए उसको ऐड बैक करते
  1374. 53:21हैं। इससे आपके पास में आता है आपका ग्रॉस
  1375. 53:23प्रॉफिट। इस ग्रॉस प्रॉफिट में से फिर आप
  1376. 53:25अपने जितने भी फिक्स्ड नॉन प्रोडक्शन
  1377. 53:26ओवरहेड हैं और जितने भी वेरिएबल नॉन
  1378. 53:28प्रोडक्शन ओवरहेड्स हैं उनको लेस करते हो
  1379. 53:30तो आपके पास में एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट आ
  1380. 53:31जाता है। ठीक है साहब? तो यहां क्या कर
  1381. 53:34रहे हैं? पहले सेल्स में से सारी की सारी
  1382. 53:37प्रोडक्शन कॉस्ट को एडजस्ट कर रहे हैं।
  1383. 53:38बाद में नॉन प्रोडक्शन की कॉस्ट को एडजस्ट
  1384. 53:40कर रहे हैं। ठीक है? और क्योंकि इसके अंदर
  1385. 53:42कॉस्ट को एब्सॉर्ब करा था। फिक्स्ड
  1386. 53:44ओवरहेड्स को एब्सॉर्ब कराया जाता है। तो
  1387. 53:45यहां पे अंडर या ओवर एब्सॉर्प्शन का
  1388. 53:46एडजस्टमेंट आएगा। अंडर एब्सॉर्प्शन होगा
  1389. 53:48तो लेस करेंगे। ओवर एजॉर्प्शन होगा तो ऐड
  1390. 53:50करेंगे। यहीं पे जब अपन बात करते हैं
  1391. 53:52मार्जिनल कॉस्टिंग की। मार्जिनल कॉस्टिंग
  1392. 53:54में इनमें से कुछ भी करने की जरूरत आपको
  1393. 53:56नहीं पड़ेगी। ठीक है?
  1394. 53:57[नाक से की जाने वाली आवाज़] कि अंडर
  1395. 53:57एब्सॉर्प्शन ओवर एजॉर्प्शन वगैरह निकालने
  1396. 53:59की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि मार्जिनल
  1397. 54:00कॉस्टिंग में अपन फिक्स्ड कॉस्ट को
  1398. 54:01इंक्लूड ही नहीं करते इन्वेंटरी के
  1399. 54:03वैल्यू्यूएशन में। तो फिर अंडर या ओवर
  1400. 54:04एजॉर्प्शन की दिक्कत ही नहीं आती। अपन तो
  1401. 54:06सीधा एक्चुअल खर्चा बाद में लेस कर देते
  1402. 54:07हैं। तो जब अपन बात करेंगे यहां पे
  1403. 54:09कैलकुलेशन की तो यहां पे सेल्स में से
  1404. 54:10वेरिएबल कॉस्ट ऑफ सेल माइनस हो गई। कॉस्ट
  1405. 54:12ऑफ सेल निकालने का फार्मूला तो वही है।
  1406. 54:14ओपनिंग इन्वेंटरी प्लस प्रोडक्शन कॉस्ट
  1407. 54:16माइनस क्लोजिंग। बट इस बार जो ओपनिंग
  1408. 54:17इन्वेंटरी और प्रोडक्शन का वैल्यू्यूएशन
  1409. 54:19है या क्लोजिंग इन्वेंटरी का वैल्यूएशन है
  1410. 54:20वो मार्जिनल कॉस्ट पर है। वो वेरिएबल
  1411. 54:22कॉस्ट पर है। इस सेल्स में से वेरिएबल
  1412. 54:24कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन और आपकी जितनी भी
  1413. 54:26वेरिएबल नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट है वो लेस
  1414. 54:28करोगे तो आपके पास में आएगा आपका
  1415. 54:29कंट्रीब्यूशन। उसमें से आप अपने एक्चुअल
  1416. 54:32वाले फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड और एक्चुअल
  1417. 54:33वाले फिक्स्ड नॉन प्रोडक्शन ओवरहेड को लेस
  1418. 54:36कर दोगे तो आपके पास में आ जाएगा आपका
  1419. 54:38मार्जिनल का प्रॉफिट। अब ये जो मार्जिनल
  1420. 54:40का प्रॉफिट और अब्सॉर्शन का प्रॉफिट है
  1421. 54:41इसमें डिफरेंस आएगा। ऑब्वियस सी बात है।
  1422. 54:43दोनों सेम नहीं होते हैं। उसको कैसे
  1423. 54:45रिकंसाइल करेंगे? अभी उसके बारे में बात
  1424. 54:47करते हैं। पहले एक क्वेश्चन से इन दोनों
  1425. 54:49का पीएंडएल बनाना सीखते हैं। ये सब
  1426. 54:51एग्जांपल नंबर सिक्स देखो क्या कह रहा है।
  1427. 54:53अ कंपनी कमेंस बिज़नेस ऑन 1 मार्च मेकिंग
  1428. 54:56वन प्रोडक्ट ओनली। अब बिज़नेस स्टार्ट करा
  1429. 54:57है 1 मार्च को। स्टार्ट करा है तो ओपनिंग
  1430. 55:00इन्वेंटरी जीरो है। इसका मतलब
  1431. 55:03ओपनिंग इन्वेंटरी कुछ होगी नहीं। बिज़नेस
  1432. 55:05स्टार्ट करोगे तो ओपनिंग इन्वेंटरी कैसे
  1433. 55:06आएगी? ठीक है ना? तो ओपनिंग इन्वेंटरी है
  1434. 55:10ही नहीं। ज़ीरो है।
  1435. 55:15सिर्फ क्लोजिंग इन्वेंटरी को लेके चलना
  1436. 55:17है। डायरेक्ट लेबर, डायरेक्ट मटेरियल,
  1437. 55:19वेरिएबल प्रोडक्शन ओवरहेड, फिक्स्ड
  1438. 55:20प्रोडक्शन ओवरहेड करते हुए आपके पास में
  1439. 55:21टोटल ये आपकी एब्सॉर्प्शन कॉस्ट है।
  1440. 55:23क्योंकि इसमें फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवर जुड़ा
  1441. 55:25हुआ है। तो ये आपकी एब्सॉर्प्शन कॉस्ट है।
  1442. 55:31यहीं पे अगर आपको मार्जिनल कॉस्ट निकालनी
  1443. 55:35हो
  1444. 55:38तो मार्जिनल कॉस्ट के अंदर सिर्फ वेरिएबल
  1445. 55:40प्रोडक्शन ऑपरेटर तक ही आएगा। तो 5 + 8 +
  1446. 55:442 15 एब्जॉर्प्शन कॉस्ट 20 है और मार्जिनल
  1447. 55:48कॉस्ट 15 है। मार्जिनल कॉस्टिंग के केस
  1448. 55:51में 15 पे इन्वेंटरी का और प्रोडक्शन का
  1449. 55:52वैल्यू्यूएशन होगा और एब्सॉर्प्शन
  1450. 55:54कॉस्टिंग में 20 पे वैल्यू्यूएशन होगा।
  1451. 55:56ठीक है ना? यहां पर लोग कहते हैं फिक्स्ड
  1452. 55:58प्रोडक्शन ओवरहेड फिगर हैज़ बीन कैलकुलेटेड
  1453. 56:00बेस्ड ऑन द नॉर्मल बजटेड नॉर्मल आउटपुट ऑफ
  1454. 56:0236,000 यूनिट्स। फिक्स्ड प्रोडक्शन
  1455. 56:05ओवरहेड्स एक्चुअली इंकर्ड वाज़ 15,000
  1456. 56:10सेलिंग डिस्ट्रीब्यूशन एडमिनिस्ट्रेटिव
  1457. 56:12एक्सपेंसेस। तो ये आपके नॉन प्रोडक्शन
  1458. 56:14ओवरहेड्स हैं। इसका मतलब
  1459. 56:17प्रोडक्शन रिलेटेड नहीं है। यह आपके नॉन
  1460. 56:20प्रोडक्शन ओवरहेड्स हैं।
  1461. 56:26फिक्स्ड वाले 10,000 के सेल वेरिएबल वाले
  1462. 56:2815% ऑफ सेल वैल्यू के तो जो भी सेल वैल्यू
  1463. 56:30निकलेगी ना उसका 15% निकालना पड़ेगा।
  1464. 56:33सेलिंग प्राइस दे रखी है 50 की है। नंबर
  1465. 56:34ऑफ यूनिट प्रोड्यूस 2000 है। सेल्स 1500
  1466. 56:37है। इसमें क्लोजिंग इन्वेंटरी का फिगर
  1467. 56:40आपको निकालना पड़ेगा। इसका मतलब भाई जब
  1468. 56:432000 यूनिट बनाए हैं और 1500 ही बेचे तो
  1469. 56:46इसका मतलब 500 आपके पास में क्लोजिंग में
  1470. 56:48पड़े हुए हैं तो आपको क्लोजिंग इन्वेंटरी
  1471. 56:51के यूनिट्स निकालने पड़ेंगे। ओपनिंग के
  1472. 56:52लिए तो बोल रखा था ज़ीरो है। बिज़नेस
  1473. 56:54स्टार्ट हुआ था। हिंट दे रखा था और कुछ
  1474. 56:56नहीं बोले तो एग्जाम में हमेशा ज़ीरो मान
  1475. 56:58के चलना। कुछ नहीं बोल रखा हो तो ओपनिंग
  1476. 56:59इन्वेंटरी को ज़ीरो मान के चलना। यहां तो
  1477. 57:01हिंट दे रखा है कमेंस बिज़नेट तो ओपनिंग
  1478. 57:02इन्वेंटरी ज़ीरो है। क्लोजिंग के लिए हिंट
  1479. 57:04दे रखा है। बोल नहीं रखा है बट क्लोजिंग
  1480. 57:05निकालनी पड़ेगी अपने को। तो हिंट दे रखा है
  1481. 57:07भाई 2000 बना है। 1500 बेच दिए तो 500 बचे
  1482. 57:10हैं। इसका मतलब वो क्लोजिंग इन्वेंटरी
  1483. 57:11तुम्हारी। आपको एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग और
  1484. 57:13मार्जिनल कॉस्टिंग दोनों से पीएनएल बनाना
  1485. 57:14है। ठीक है साहब? बातचीत स्टार्ट करते
  1486. 57:16हैं।
  1487. 57:33सेल्स रेवेन्यू लिखते हैं सबसे पहले।
  1488. 57:41इसमें से लेस करेंगे।
  1489. 57:54फुल अब्सॉर्प्शन कॉस्ट ऑफ सेल्स
  1490. 57:58ठीक है। इसमें
  1491. 58:02ओपनिंग इन्वेंटरी
  1492. 58:06प्रोडक्शन की कॉस्ट
  1493. 58:09इसमें से क्लोजिंग इन्वेंटरी को माइनस
  1494. 58:11करेंगे।
  1495. 58:13इसमें आप फिर अपने अंडर अब्सॉर्प्शन ओवर
  1496. 58:15अब्सॉर्प्शन को एडजस्ट करोगे। उसके बाद
  1497. 58:17में आपके पास इसमें ग्रॉस प्रॉफिट आएगा।
  1498. 58:18अभी देखते हैं अंडर ओवरॉर्प्शन कितना
  1499. 58:19होगा।
  1500. 58:21हां जी सेल्स रेवेन्यू निकालते हैं। सेल्स
  1501. 58:24रेवेन्यू क्या है साहब? सेल्स रेवेन्यू के
  1502. 58:25लिए $50 की सेलिंग प्राइस है और यूनिट्स
  1503. 58:28आपने बेची है 1500। तो 1500 * 50
  1504. 58:4175000
  1505. 58:43ओपनिंग इन्वेंटरी तो ज़ीरो है सब ओपनिंग
  1506. 58:46ज़ीरो
  1507. 58:49प्रोडक्शन कॉस्ट आपने 2000 यूनिट बनाए और
  1508. 58:52क्योंकि एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग है तो
  1509. 58:54एब्जॉर्प्शन कॉस्ट लेके चलोगे।
  1510. 58:55एब्जॉर्प्शन कॉस्ट 20 आ रही थी।
  1511. 58:57यहां पर 20 यह हो जाएगा 40,000 क्लोजिंग
  1512. 59:01इन्वेंटरी में 500 यूनिट्स हैं 20 के
  1513. 59:04वैल्यू्यूएशन पे तो ये होंगे 10,000
  1514. 59:08यहां आपका आंसर आएगा 30,000 का।
  1515. 59:12ठीक है? अभी देखते हैं अंडर ओवर
  1516. 59:14अब्सॉर्प्शन का क्या एडजस्टमेंट होगा।
  1517. 59:20ओवर अब्सॉर्प्शन को ऐड करते हैं। अंडर
  1518. 59:22अब्सॉर्प्शन को लेस करते हैं।
  1519. 59:44यहां से आएगा ग्रॉस प्रॉफिट। ग्रॉस
  1520. 59:46प्रॉफिट में से फिर आप ऐड लेस अपने
  1521. 59:48फिक्स्ड नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट को मतलब
  1522. 59:50बेसिकली जितनी भी नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट है
  1523. 59:52उनको लेस करा जाएगा।
  1524. 1:00:02इसके अंदर आपके पास में दो हैं
  1525. 1:00:05फिक्स्ड और वेरिएबल।
  1526. 1:00:17फिक्स्ड वालों के लिए तो दे रखा है।
  1527. 1:00:18फिक्स्ड 10,000 पर मंथ है। तो फिक्स्ड
  1528. 1:00:20वाला फिगर तो अपन ले लेंगे एज इट इज।
  1529. 1:00:25वेरिएबल के लिए बोल रखा था 15% ऑफ सेल्स
  1530. 1:00:28वैल्यू तो सेल्स वैल्यू आई थी 75 तो 75000
  1531. 1:00:33का
  1532. 1:00:3415%
  1533. 1:00:39यह हो जाएगा 11250
  1534. 1:00:42इससे आपके पास में आएगा प्रॉफिट
  1535. 1:00:47यह अब्सॉर्प्शन वाला प्रॉफिट है तो इसको
  1536. 1:00:49अपन अब्सॉर्प्शन प्रॉफिट बोल देंगे
  1537. 1:00:56ठीक है? अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग से निकल रहा
  1538. 1:00:57है। इसलिए इसको अब्सॉर्प्शन प्रॉफिट बोल
  1539. 1:00:59दिया जाता है। अच्छा अब यहां पे एक फिगर
  1540. 1:01:02और निकालना है। अंडर ओवर एब्सॉर्प्शन अपने
  1541. 1:01:04बाकी के सारे फिगर आ जाएंगे। अपना आंसर आ
  1542. 1:01:05जाएगा। अब अंडर या ओवर एब्सॉर्प्शन
  1543. 1:01:07निकालने के लिए थोड़ा सा ओवरहेड को
  1544. 1:01:09रिवाइज़ करते हैं। हम कहते हैं कि भ जब
  1545. 1:01:12आपके एब्जॉर्ब्ड ओवरहेड्स जितने ओवरहेड्स
  1546. 1:01:15आपने रिकॉर्ड करे जो आपके एब्सॉर्ब्ड
  1547. 1:01:18ओवरहेड्स थे। जब वह ज्यादा होते हैं
  1548. 1:01:20एक्चुअल ओवरहेड्स से।
  1549. 1:01:30तब हम कहते हैं सिचुएशन आती है ओवर
  1550. 1:01:32एब्सॉर्प्शन की और इसी का उल्टा होगा तो
  1551. 1:01:36सिचुएशन आएगी अंडर एब्जॉर्प्शन की। ठीक
  1552. 1:01:39है?
  1553. 1:01:41अगर एब्जॉर्बड्ड ओवरहेड्स एक्चुअल से कम
  1554. 1:01:44है। एजॉर्ड ओवरहेड का मतलब वो ओवरहेड जो
  1555. 1:01:46आपने पीएनएल में ऑलरेडी रिकॉर्ड कर लिए।
  1556. 1:01:48अगर वह एक्चुअल से कम है तो आपका मतलब
  1557. 1:01:51आपने कम खर्चे रिकॉर्ड करें तो आपको और
  1558. 1:01:52खर्चे रिकॉर्ड करने हैं। यह सिचुएशन अंडर
  1559. 1:01:55अब्सॉर्प्शन की है और जरूरत से ज्यादा
  1560. 1:01:57खर्चे रिकॉर्ड कर लिए तो ओवर एब्सॉर्प्शन
  1561. 1:01:59हो गया।
  1562. 1:02:03अब इसके लिए अपने को दो फिगर चाहिए साहब।
  1563. 1:02:05तभी पता पड़ेगा अंडर एब्सॉर्प्शन हुआ है
  1564. 1:02:07या ओवर एब्सॉर्प्शन हुआ है। एक तो एक्चुअल
  1565. 1:02:08ओवरहेड का फिगर चाहिए और एक एब्जॉर्ब
  1566. 1:02:12ओवरहेड का फिगर चाहिए। एब्सॉर्ब ओवरहेड का
  1567. 1:02:13फार्मूला अपन ने बताया था एक्चुअल बेसिस।
  1568. 1:02:19* OR
  1569. 1:02:22इससे आएगा अब ओवरहेड माइनस जो आपके
  1570. 1:02:24एक्चुअल फिक्स्ड ओवरहेड्स हैं।
  1571. 1:02:36ओआर अपने को क्वेश्चन में दे रखी थी साहब।
  1572. 1:02:38अह यह फाइव की पर यूनिट यह जो कॉस्ट कार्ड
  1573. 1:02:42है, कॉस्ट कार्ड हमेशा पर यूनिट में होता
  1574. 1:02:44है। तो, यह फाइव की प्रोडक्शन ओवरहेड है
  1575. 1:02:46पर यूनिट के। तो, यूनिट के हिसाब से
  1576. 1:02:48जाएंगे। आपने एक्चुअली में यूनिट बनाए
  1577. 1:02:50कितने? 20,000। खर्चा रिकॉर्ड होता है।
  1578. 1:02:51प्रोडक्शन वाले जितने भी खर्चे हैं, वो
  1579. 1:02:53रिकॉर्ड होते हैं प्रोडक्शन कॉस्ट पे।
  1580. 1:02:54आपने यहां पे प्रोडक्शन कॉस्ट में 20,000
  1581. 1:02:56को मल्टीप्लाई करा है 20 से। तो मतलब
  1582. 1:02:57बेसिकली आपने 20,000 को मल्टीप्लाई करा है
  1583. 1:02:59इस फाइव से। क्योंकि इस 20 के अंदर ये
  1584. 1:03:01फाइव इंक्लूडेड है। इस 20 की कॉस्ट में
  1585. 1:03:03फाइव इंक्लूडेड है। तो आपने यहां पर
  1586. 1:03:05प्रोडक्शन कॉस्ट के अंदर फिक्स प्रोडक्शन
  1587. 1:03:07ओवरहेड कितने इंक्लूड कर लिए? 20 * 5
  1588. 1:03:12सॉरी 2000 * 5 ठीक है ना? 2000 यूनिट्स
  1589. 1:03:17बनाए। यहां पर आपने जो है 2000 * 20 करा
  1590. 1:03:20है। ये 20 के अंदर दो पार्ट है। हम कह
  1591. 1:03:22सकते हैं। एक पार्ट है अपने मार्जिनल
  1592. 1:03:24कॉस्ट का 15 का और एक अलग से फिक्स्ड
  1593. 1:03:26प्रोडक्शन ओवरहेड फाइव किया। 15 + 5 20
  1594. 1:03:28बनता है। तो हम ये कह सकते हैं कि आपने इस
  1595. 1:03:3020 की कॉस्ट के अंदर आपने फाइव के फिक्स्ड
  1596. 1:03:33प्रोडक्शन ओवरलेट को इंक्लूड कर लिया। तो
  1597. 1:03:34आपने कितने फिक्स्ड प्रोडक्शन कॉस्ट टोटल
  1598. 1:03:36आपने इंक्लूड करी अपने पीएनएल में आपने
  1599. 1:03:382000 * 5 10,000 की कॉस्ट को इंक्लूड करा
  1600. 1:03:41है। एक्चुअल खर्चा कितना है? जबकि एक्चुअल
  1601. 1:03:44खर्चा अपने को क्वेश्चन में दे रखा था 15
  1602. 1:03:47का। तो आपने तो कम खर्चा रिकॉर्ड करा।
  1603. 1:03:51आपने पीएंडएल में खर्चा रिकॉर्ड करा है
  1604. 1:03:5310,000 जबकि एक्चुअल खर्चा है 15,000 तो
  1605. 1:03:56यह सिचुएशन अंडर अब्सॉर्प्शन की है। यहां
  1606. 1:03:59पे 5000 का अंडर एब्सॉर्प्शन हुआ है।
  1607. 1:04:07और अंडर एब्सॉर्प्शन को अपने को पीएंडएल
  1608. 1:04:10में हटाना पड़ेगा। लेस करना पड़ेगा। खर्चे
  1609. 1:04:12कम रिकॉर्ड हुए। इस 5000 को अपन ने यहां
  1610. 1:04:14से हटा दिया। तो यहां से आ जाएगा मेरे पास
  1611. 1:04:16में ग्रॉस प्रॉफिट। 75 - 30 - 5 40,000 का
  1612. 1:04:22आया ग्रॉस प्रॉफिट। उसमें से मैंने ये
  1613. 1:04:24बाकी के दोनों खर्चे लेस करें। 10,000 एंड
  1614. 1:04:2711250 ये मेरे पास में आ गया अब्जॉर्प्शन
  1615. 1:04:30का प्रॉफिट 188750।
  1616. 1:04:32ये आ गया एब्जॉर्प्शन का प्रॉफिट। ठीक है
  1617. 1:04:35साहब? इस पूरे एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग
  1618. 1:04:37पीएनएल में जो इंपॉर्टेंट चीज है वो ये है
  1619. 1:04:39कि आपने कहां से एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग और
  1620. 1:04:41मार्जिनल कॉस्टिंग का आंसर मतलब सॉरी
  1621. 1:04:43एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग में कैसे आप अंडर
  1622. 1:04:45एब्सॉर्प्शन और ओवर एब्सॉर्प्शन निकाल रहे
  1623. 1:04:46हो। ठीक है ना? यह सबसे इंपॉर्टेंट है। यह
  1624. 1:04:49कैलकुलेशन अगर आपने कर ली तो फिर आपका काम
  1625. 1:04:51हो जाएगा। अब यह कैलकुलेशन उन्हीं बच्चों
  1626. 1:04:53से सही से होगी जिन बच्चों ने एब्जॉर्प्शन
  1627. 1:04:56अंडर एब्सॉर्प्शन ओवर एब्सॉर्प्शन के
  1628. 1:04:57टॉपिक को सही से पढ़ रखा है। हम कहते हैं
  1629. 1:04:59कि भई अंडर एब्सॉर्प्शन ओवर एब्जॉर्प्शन
  1630. 1:05:00कैसे आता है? ये आता है एब्जॉर्ड ओवरहेड्स
  1631. 1:05:02और एक्चुअल ओवरहेड के बीच के रिलेशनशिप्स
  1632. 1:05:04हैं। अगर एब्जॉर्ब्ड
  1633. 1:05:05[गला साफ़ करने की आवाज़] ओवरहेड ज्यादा
  1634. 1:05:06हैं तो आपने जितने खर्चे रिकॉर्ड करे हैं
  1635. 1:05:07प्रोडक्शन कॉस्ट में वो आपके एब्जॉर्ड
  1636. 1:05:09ओवरहेड है। वो ज्यादा हैं एक्चुअल से तो
  1637. 1:05:10ओवर एब्सॉर्प्शन हुआ है आपका। नहीं तो
  1638. 1:05:12अंडर एब्सॉर्प्शन हुआ है। यहां पे हमारे
  1639. 1:05:14पास में अंडर एब्जॉर्प्शन है। क्योंकि
  1640. 1:05:15हमने खर्चे जो रिकॉर्ड करे एब्जॉर्ड ओवरेट
  1641. 1:05:17का मतलब कॉस्ट रिकॉर्डेड मतलब आपके जो
  1642. 1:05:19फिक्स्ड ओवरहेड की कॉस्ट है रिकॉर्डेड इन
  1643. 1:05:21प्रोडक्शन कॉस्ट। प्रोडक्शन कॉस्ट में
  1644. 1:05:22कितने खर्चे रिकॉर्ड कर लिए उसे अपन
  1645. 1:05:24एब्जॉर्ड ओवरहेड कहते हैं। ठीक है?
  1646. 1:05:25एब्जॉर्ड ओवरहेड का मतलब
  1647. 1:05:29कॉस्ट ऑफ फिक्स्ड ओवरहेड्स
  1648. 1:05:37इंक्लूडेड
  1649. 1:05:39इन प्रोडक्शन कॉस्ट।
  1650. 1:05:42किसी गुड्स के प्रोडक्शन कॉस्ट में आपने
  1651. 1:05:44कितना फिक्स्ड ओवरहेड का खर्चा इंक्लूड
  1652. 1:05:46करा उसे अब्सॉर्ब्ड ओवरहेड कहते हैं। तो
  1653. 1:05:48यहां पर हमने कितना इंक्लूड करा? हमने कहा
  1654. 1:05:50अभी 2000 यूनिट थे। हमने कॉस्ट उनकी 20
  1655. 1:05:52पकड़ी है। 20 की कॉस्ट कैसे आई? 15 की तो
  1656. 1:05:54मार्जिनल कॉस्ट है। फाइव का फिक्स्ड
  1657. 1:05:56प्रोडक्शन ओवरहेड है। तो फाइव आपने
  1658. 1:05:57फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड फाइव के लिए
  1659. 1:05:58हैं। कितने यूनिट्स पे लिए हैं? 2000 पे
  1660. 1:06:00लिए। तो आपने प्रोडक्शन कॉस्ट में कितने
  1661. 1:06:02फिक्स्ड ओवरहेड इंक्लूड कर दिए? आपने 20 *
  1662. 1:06:045 10,000 के खर्चे रिकॉर्ड कर लिए। इसमें
  1663. 1:06:07एक्चुअल कितने हैं? 15 है। तो आपने 5000
  1664. 1:06:09का खर्चा कम रिकॉर्ड करा। तो हमने 5000 से
  1665. 1:06:11खर्चा बढ़ा दिया तो आपके प्रॉफिट कम हो गए
  1666. 1:06:135000 से खर्चा बढ़ाना पड़ेगा तो खर्चे
  1667. 1:06:14बढ़ाएं तो हमने पीएनएल में खर्चे को
  1668. 1:06:16नेगेटिव लिखते हैं। ठीक है? एक्सपेंसेस को
  1669. 1:06:18नेगेटिव रिकॉर्ड करते हैं तो नेगेटिव
  1670. 1:06:19रिकॉर्ड करा। हमारा प्रॉफिट आ गया। इसमें
  1671. 1:06:21से हमने बचे हुए जितने भी नॉन प्रोडक्शन
  1672. 1:06:22के खर्चे थे वो लेस करे। हमारे पास में
  1673. 1:06:24एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का प्रॉफिट आ गया।
  1674. 1:06:26ठीक है साहब? अब बात आती है मार्जिनल
  1675. 1:06:29कॉस्टिंग के पीएनएल की।
  1676. 1:06:32वो कंपैरेटिवली ईजी हो जाता है। क्योंकि
  1677. 1:06:35उसमें ये अंडर एब्जॉर्प्शन ओवर
  1678. 1:06:36एब्सॉर्प्शन की जरूरत ही नहीं पड़ती।
  1679. 1:06:38तो जो मैंने स्टार्टिंग में कहा था कि भाई
  1680. 1:06:41मार्जिनल कॉस्टिंग को इन्वेंट करने की या
  1681. 1:06:43नए सिस्टम को बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
  1682. 1:06:45क्योंकि अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग
  1683. 1:06:46कॉम्प्लिकेटेड है। इस वजह से मार्जिनल
  1684. 1:06:48कॉस्टिंग को बनाना पड़ा वो ईजी है।
  1685. 1:06:50स्टार्टिंग पॉइंट यहां पे भी सेम है। आप
  1686. 1:06:51सेल्स रेवेन्यू से स्टार्ट करोगे। इस बार
  1687. 1:06:54आप लेस करोगे इसमें से सिर्फ वेरिएबल
  1688. 1:06:56कॉस्ट ऑफ सेल।
  1689. 1:07:18और इसमें से आप लेस करोगे
  1690. 1:07:21अपने बाकी के जो वेरिएबल खर्चे हैं
  1691. 1:07:33इससे आपके पास में आएगा कंट्रीब्यूशन
  1692. 1:07:37और कंट्रीब्यूशन में से फिर आप अपनी
  1693. 1:07:38एक्चुअल फिक्स्ड कॉस्ट को लेस कर दोगे जो
  1694. 1:07:41भी आपके पास में तो एक्चुअल फिक्स्ड
  1695. 1:07:48प्रोडक्शन वाले ओवरहेड्स और एक्चुअल
  1696. 1:07:51फिक्स्ड नॉन प्रोडक्शन वाले ओवरहेड्स
  1697. 1:08:00जब तक यह फॉर्मेट दिमाग में बैठे। अच्छा
  1698. 1:08:02यह फॉर्मेट वैसे उस शॉर्टकट फॉर्मेट का
  1699. 1:08:04एक्सपेंशन है। शॉर्टकट फॉर्मेट में क्या
  1700. 1:08:06लिखा था? सेल्स रेवेन्यू माइनस जितनी
  1701. 1:08:08[गला साफ़ करने की आवाज़] भी वेरिएबल
  1702. 1:08:09कॉस्ट है उससे आएगा कंट्रीब्यूशन। उसमें
  1703. 1:08:11से जितनी भी एक्चुअल कॉस्ट को लेस करेंगे
  1704. 1:08:12आएगा प्रॉफिट। बस उसी का एक्सपेंशन ही तो
  1705. 1:08:14कर रहे हैं।
  1706. 1:08:19अब ये मार्जिनल का प्रॉफिट अपने
  1707. 1:08:21अब्सॉर्प्शन के प्रॉफिट से अलग आएगा। फिर
  1708. 1:08:23इसलिए अपन सीखेंगे रिकंसिलेशन कि कैसे
  1709. 1:08:25इनको रिकंसाइल करेंगे आपस में अब जो
  1710. 1:08:27डिफरेंस है इस डिफरेंस को
  1711. 1:08:28[गला साफ़ करने की आवाज़] रिकंसाइल तो
  1712. 1:08:28करना पड़ेगा सब तो कैसे आप रिकंसाइल करोगे
  1713. 1:08:31अब उसके बारे में बात करेंगे आगे नेक्स्ट
  1714. 1:08:32टॉपिक अपने वही बच रहा है अब देखिए सेल्स
  1715. 1:08:36का रेवेन्यू अपना सेम रहेगा अभी 75000 तो
  1716. 1:08:38यहां भी आ जाएगा 75000 सेल्स तो चेंज होगी
  1717. 1:08:40नहीं ओपनिंग इन्वेंटरी का फिगर ज़ीरो था
  1718. 1:08:43अभी भी ज़ीरो रहेगा अब प्रोडक्शन का फिगर
  1719. 1:08:45चेंज होगा क्लोजिंग इन्वेंटरी का
  1720. 1:08:46वैल्यूएशन चेंज होगा प्रोडक्शन में 2000
  1721. 1:08:49को अपन मल्टीप्लाई करेंगे मार्जिनल कॉस्ट
  1722. 1:08:50से मार्जिनल कॉस्ट अपनी यहां पे 15 है ठीक
  1723. 1:08:53है? तो यहां पर मार्जिनल कॉस्ट से
  1724. 1:08:54मल्टीप्लाई होंगे। तो ये हो जाएंगे 30,000
  1725. 1:08:56और ऐसे ही क्लोजिंग इन्वेंटरी के जो 500
  1726. 1:08:58यूनिट्स हैं वो भी मल्टीप्लाई होंगे
  1727. 1:09:00मार्जिनल कॉस्ट से। पहले अपन रिकॉर्ड कर
  1728. 1:09:01रहे थे उसको अब्सॉर्प्शन की कॉस्ट पे।
  1729. 1:09:05अब मार्जिनल कॉस्ट पे रिकॉर्ड करेंगे। तो
  1730. 1:09:08यहां पे जो अपनी कॉस्ट ऑफ सेल होगी वो
  1731. 1:09:10होगी 22500
  1732. 1:09:12की। अच्छा वेरिएबल नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट
  1733. 1:09:15में अपने पास में वेरिएबल कॉस्ट ऑफ सेल है
  1734. 1:09:18ये। ये वेरिएबल नॉन प्रोडक्शन ओवरहेड है
  1735. 1:09:20अपने पास में 15% ऑफ़ सेल वैल्यू। तो इसको
  1736. 1:09:22लेके चलेंगे तो सेल वैल्यू का 15% तो
  1737. 1:09:2675000 का 15%
  1738. 1:09:30ये अपन ने निकाला था 11250 आ रहा था ये भी
  1739. 1:09:34यहां ले लेंगे 11250 जितने भी वेरिएबल
  1740. 1:09:37नेचर के खर्चे हैं वो लेस कर दिए सेल्स
  1741. 1:09:39में से तो अपने पास में कंट्रीब्यूशन आ
  1742. 1:09:40गया
  1743. 1:09:4641250
  1744. 1:09:48और फिर एक्चुअल फिक्स्ड प्रोडक्शन
  1745. 1:09:49ओवरहेड्स को लेस कर देंगे एक्चुअल वाले
  1746. 1:09:52फिक्स प्रोडक्शन ओवरहेड अपने को दे रखे
  1747. 1:09:53हैं क्वेश्चन में 15 और एक्चुअल नॉन
  1748. 1:09:56प्रोडक्शन ओवरहेड दे रखे हैं 10 तो 10 और
  1749. 1:09:5715 दोनों को लेस कर देंगे।
  1750. 1:10:01[गला साफ़ करने की आवाज़]
  1751. 1:10:09यहां से आपके पास में मार्जिनल का प्रॉफिट
  1752. 1:10:10आ जाएगा।
  1753. 1:10:18ये हो गया 16250
  1754. 1:10:20और इधर आया था 18750
  1755. 1:10:23दोनों अलग-अलग आएंगे। अभी ये अलग-अलग
  1756. 1:10:25क्यों आ रहे हैं? इसके पीछे का रीज़न तो
  1757. 1:10:27हमें पता है कि भ ये जो प्रोडक्शन की
  1758. 1:10:28कॉस्ट है ना और क्लोजिंग इन्वेंटरी का
  1759. 1:10:29वैल्यूएशन है इसमें आपने फिक्स्ड
  1760. 1:10:31प्रोडक्शन ओवर को एक जगह पर इंक्लूड करा
  1761. 1:10:33है। एक जगह पर इंक्लूड नहीं करा है। अब
  1762. 1:10:34इनको रिकंसाइल कैसे करेंगे? अभी उसके बारे
  1763. 1:10:36में बात भी करेंगे आगे। ठीक है? बट, यह
  1764. 1:10:38आंसर आ गया। एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का
  1765. 1:10:40प्रॉफिट 18750 और अपना मार्जिनल कॉस्टिंग
  1766. 1:10:43का प्रॉफिट 16250
  1767. 1:10:46कैलकुलेट करने का ध्यान रखना है साहब। ठीक
  1768. 1:10:48है? एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का आंसर निकालने
  1769. 1:10:50के लिए एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग के पीएनएल के
  1770. 1:10:52फॉर्मेट को फॉलो करा। इसमें बस अंडर
  1771. 1:10:53एब्जॉर्प्शन ओवर एब्सॉर्प्शन इंक्लूड करना
  1772. 1:10:55होता है आपको। वो अलग से आपको वर्किंग नोट
  1773. 1:10:57में कैलकुलेट करना पड़ेगा। उसके लिए अंडर
  1774. 1:10:59एब्सॉर्प्शन ओवर एब्जॉर्प्शन कैसे निकालते
  1775. 1:11:00हैं? इसका कांसेप्ट दिमाग में बैठा होना
  1776. 1:11:01चाहिए। और जब एब्सॉर्ब्ड ओवरहेड एक्चुअल
  1777. 1:11:03से ज्यादा हो तो ओवर एब्जॉर्प्शन उसको ऐड
  1778. 1:11:05बैक कर लेना। जब एब्सॉर्ड ओवरहेड एक्चुअल
  1779. 1:11:06से कम हो तो अंडर एब्सॉर्प्शन उसको लेस कर
  1780. 1:11:08देना। साथ-साथ में हम कहते हैं कि यहां पे
  1781. 1:11:10जब आप प्रोडक्शन कॉस्ट और इन्वेंटरी का
  1782. 1:11:12वैल्यू्यूएशन कर रहे हो तो फुल
  1783. 1:11:13एब्सॉर्प्शन कॉस्ट पे वैल्यू करोगे। जब
  1784. 1:11:15मार्जिनल कॉस्टिंग की बात आएगी तो
  1785. 1:11:16मार्जिनल कॉस्टिंग में कहते हैं जो छोटा
  1786. 1:11:17वाला फॉर्मेट था ना उसी को एक्सपैंड कर
  1787. 1:11:19रहे हैं। छोटा वाला फॉर्मेट क्या कहता था?
  1788. 1:11:20सेल्स माइनस जितनी भी वेरिएबल कॉस्ट है
  1789. 1:11:22इससे आपके पास में आता है कंट्रीब्यूशन।
  1790. 1:11:24इस कॉन्ट्रिब्यूशन में से फिक्स्ड कॉस्ट
  1791. 1:11:26को लेस करोगे तो आपके पास में आता है
  1792. 1:11:28प्रॉफिट।
  1793. 1:11:29ठीक है? बस यहां पे कंट्रीब्यूशन को टोटल
  1794. 1:11:31में कन्वर्ट करना पड़ता है। फिर फिक्स्ड
  1795. 1:11:32कॉस्ट लेस करके प्रॉफिट आता है। इसी को
  1796. 1:11:34एक्सपैंड करा है मैंने यहां पे। मैंने कहा
  1797. 1:11:36भाई सेल्स में से वेरिएबल कॉस्ट ऑफ सेल
  1798. 1:11:37लेस करी और फिर वेरिएबल नॉन प्रोडक्शन
  1799. 1:11:39कॉस्ट। तो सारी वेरिएबल कॉस्ट लेस हो गई।
  1800. 1:11:41इससे आया कंट्रीब्यूशन और फिर सारी की
  1801. 1:11:42सारी फिक्स्ड कॉस्ट को लेस करा। मेरे पास
  1802. 1:11:44में आया मार्जिनल का प्रॉफिट। ठीक है
  1803. 1:11:46साहब? तो इसी शॉर्टकट फॉर्मूले को अपन
  1804. 1:11:48एक्सपैंड कर रहे हैं। ये दोनों फॉर्मेट जब
  1805. 1:11:50तक दिमाग में नहीं बैठेंगे तब तक एग्जाम
  1806. 1:11:52में ऑब्वियस सी बात है आंसर नहीं आएगा।
  1807. 1:11:54ठीक है साहब? तो ये दोनों फॉर्मेट की
  1808. 1:11:55प्रैक्टिस करनी है आपको। अब आते हैं इस
  1809. 1:11:58चैप्टर के अपने मेन मुद्दे पर कि सर यह जो
  1810. 1:12:01डिफरेंस आएगा ना इसको रिकंसाइल कैसे
  1811. 1:12:03करेंगे और इसी के क्वेश्चन में बच्चे
  1812. 1:12:04अटकते हैं एग्जाम में सबसे ज्यादा क्योंकि
  1813. 1:12:06इस चैप्टर में से सेक्शन ए में एमसीक्यू
  1814. 1:12:08में जो क्वेश्चन आते हैं वो इसी
  1815. 1:12:08रिकंसाइलेशन के आते हैं और यही रिकंसिलेशन
  1816. 1:12:11बच्चों को दिक्कत दे जाता है। देखो हमें
  1817. 1:12:13ये तो पता है कि डिफरेंस आएगा अपने
  1818. 1:12:15एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग के प्रॉफिट में और
  1819. 1:12:16मार्जिनल कॉस्टिंग के प्रॉफिट में डिफरेंस
  1820. 1:12:18आएगा। बट ये डिफरेंस आ क्यों रहा है?
  1821. 1:12:20डिफरेंस आ रहा है साहब एक चीज की वजह से।
  1822. 1:12:22क्योंकि आपके इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन
  1823. 1:12:24अलग-अलग है। ठीक है? दोनों मेथड में जो
  1824. 1:12:28आपने इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन का तरीका
  1825. 1:12:30यूज़ करा है वो आपका अलग-अलग है साहब। तो
  1826. 1:12:33ये जो डिफरेंस है ना ये इसी इन्वेंटरी के
  1827. 1:12:34वैल्यू्यूएशन के डिफरेंस का है। आप ध्यान
  1828. 1:12:37से देखो यहां पे यहां प्रॉफिट आ रहा है
  1829. 1:12:3916250। यहां प्रॉफिट आ रहा है 18750।
  1830. 1:12:42डिफरेंस कितना आ रहा है? चेक करना। 16250
  1831. 1:12:45में से 18750 को हटाऊं। 2500 का डिफरेंस
  1832. 1:12:48है दोनों के प्रॉफिट में। और दोनों में
  1833. 1:12:50क्लोजिंग इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन को
  1834. 1:12:52चेक करो। एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का
  1835. 1:12:54वैल्यू्यूएशन है 10,000। मार्जिनल
  1836. 1:12:56कॉस्टिंग का वैल्यू्यूएशन है 7500 डिफरेंस
  1837. 1:12:59कितना आ रहा है? 2500 यही तो है इन दोनों
  1838. 1:13:01के बीच का रिकंसिलिएशन।
  1839. 1:13:04एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग और मार्जिनल
  1840. 1:13:05कॉस्टिंग के जो पीएनएल का प्रॉफिट का जो
  1841. 1:13:07फिगर है उसका डिफरेंस आपके इन्वेंटरी के
  1842. 1:13:10वैल्यू्यूएशंस के डिफरेंस से मैच करता है।
  1843. 1:13:12इसको निकालने का तरीका भी इसलिए हम कहते
  1844. 1:13:14हैं आप एक काम करो। आप अपने इन्वेंटरी में
  1845. 1:13:16जो डिफरेंस आया है उसको लो। ठीक है? और
  1846. 1:13:19उसको मल्टीप्लाई कर दो आपकी ओवरहेड की
  1847. 1:13:21एब्जॉर्प्शन रेट से। और जो डिफरेंस है, यह
  1848. 1:13:23भी किसका है? ये डिफरेंस आपकी ओआर का है।
  1849. 1:13:26ठीक है? तो आपकी जो फिक्स्ड ओआर है उससे
  1850. 1:13:29आप मल्टीप्लाई कर दो आपकी चेंज इन
  1851. 1:13:30इन्वेंटरी को। तो इससे आपको डिफरेंस इन
  1852. 1:13:32प्रॉफिट का आंसर मिल जाएगा। जैसे इस वाले
  1853. 1:13:34क्वेश्चन में चेंज इन्वेंटरी कितनी है?
  1854. 1:13:36चेंज इन्वेंटरी का मतलब होता है ओपनिंग
  1855. 1:13:37क्लोजिंग के बीच का डिफरेंस। ओपनिंग तो
  1856. 1:13:39यहां कुछ थी नहीं। क्लोजिंग में 500 है तो
  1857. 1:13:41चेंज 500 का हुआ है। मल्टीप्लाई बाय अपनी
  1858. 1:13:43फिक्स्ड ओवरहेड की रेट। एब्सॉर्प्शन की
  1859. 1:13:45रेट वो यहां पे थी फाइव। तो 500 * 5 2500
  1860. 1:13:49का आंसर आ गया। तो जब भी एग्जाम में अपने
  1861. 1:13:51को रिकंसिलेशन करना पड़ेगा। लॉजिक तो
  1862. 1:13:52ध्यान रखना। लॉजिक क्या है? आपके
  1863. 1:13:54इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन का डिफरेंस है।
  1864. 1:13:55डिफरेंस इन प्रॉफिट विल बी इक्वल टू
  1865. 1:13:57डिफरेंस इन आपके इन्वेंटरी क्लोजिंग
  1866. 1:13:58इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन। ठीक है? तो लॉजिक
  1867. 1:14:00आपको मैं दे रहा हूं।
  1868. 1:14:03फ़ूला नीचे है। ठीक है? ये फ़ूला है और ऊपर
  1869. 1:14:06लॉजिक है। अब एग्जाम में देखना पड़ेगा।
  1870. 1:14:08ज्यादातर क्वेश्चंस वैसे फ़ूला से सॉल्व
  1871. 1:14:10होंगे। बट कभी-कभी कोई क्वेश्चन लॉजिक से
  1872. 1:14:12भी सॉल्व होगा। तो लॉजिक तो क्या है?
  1873. 1:14:19डिफरेंस इन प्रॉफिट
  1874. 1:14:22इक्व डिफरेंस
  1875. 1:14:26इन इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन जो भी आपके
  1876. 1:14:29इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन का डिफरेंस है
  1877. 1:14:33ठीक है उसके बराबर का डिफरेंस इन प्रॉफिट
  1878. 1:14:35आएगा। हां। अब यहां पे एक बात ध्यान रखना
  1879. 1:14:37यहां पे क्लोजिंग इन्वेंटरी ही था। तो
  1880. 1:14:39सिर्फ क्लोजिंग इन्वेंटरी का डिफरेंस
  1881. 1:14:40लिया। अगर ओपनिंग होता तो ओपनिंग का और
  1882. 1:14:42क्लोजिंग का दोनों का डिफरेंस साथ में
  1883. 1:14:43लेना पड़ता। तब जाके डिफरेंस इन प्रॉफिट
  1884. 1:14:45आता। तो इसलिए डिफरेंस इन प्रॉफिट इक्वल्स
  1885. 1:14:47टू डिफरेंस इन इन्वेंटरी वैल्यूएशन। ये
  1886. 1:14:49लॉजिक है। फार्मूला कैसे करेंगे? तो हम
  1887. 1:14:51बोलेंगे अपने ओपनिंग और क्लोजिंग
  1888. 1:14:52इन्वेंटरी के बीच का चेंज निकालो और उसको
  1889. 1:14:54मल्टीप्लाई करो फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड
  1890. 1:14:56की रेट से जो आपने अपनी कॉस्टिंग में
  1891. 1:14:58इंक्लूड करी है। यहां पे हमने फाइव
  1892. 1:14:59इंक्लूड करी थी पिछले क्वेश्चन में। तो
  1893. 1:15:01500 का चेंज है इन्वेंटरी में ओपनिंग ज़ीरो
  1894. 1:15:03है, क्लोजिंग 500 है, चेंज 500 का है और
  1895. 1:15:06अपनी फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड फाइव की
  1896. 1:15:07है। तो 2500 का डिफरेंस इन प्रॉफिट है। अब
  1897. 1:15:11ये बात एक और आती है कि सर अच्छा
  1898. 1:15:12एब्जॉर्प्शन का ज्यादा आएगा या मार्जिनल
  1899. 1:15:15का प्रॉफिट ज्यादा आएगा ये कैसे पता
  1900. 1:15:16पड़ेगा? तो इसके लिए भी एक लॉजिक है साहब।
  1901. 1:15:19ठीक है? ये मैंने आपको बता दिया जो
  1902. 1:15:20डिफरेंस इन प्रॉफिट है वो आपके इन्वेंटरी
  1903. 1:15:22के चेन से डिेंटरी के वैल्यू्यूएशन पे जो
  1904. 1:15:25है डिफरेंस उसकी वजह से आता है। ठीक है
  1905. 1:15:27साहब।
  1906. 1:15:29[नाक से की जाने वाली आवाज़] हां। अब एक
  1907. 1:15:30और ध्यान रखना। अब ये बात करेंगे।
  1908. 1:15:31एब्जॉर्प्शन और मार्जिनल कॉस्टिंग का
  1909. 1:15:32प्रॉफिट सेम होगा। अगर इन्वेंटरी लेवल में
  1910. 1:15:34चेंज नहीं होगा। अभी इसके बारे में बात
  1911. 1:15:35करते हैं। सर ये कैसे पता पड़ेगा कि
  1912. 1:15:38एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग और मार्जिनल
  1913. 1:15:39कॉस्टिंग के प्रॉफिट में से किसका प्रॉफिट
  1914. 1:15:41ज्यादा होगा? किसका कम होगा? इसके लिए एक
  1915. 1:15:43तुम्हें सिंपल सा एक मेथड बताता हूं। ए बी
  1916. 1:15:47सी डी पढ़ी है बचपन में। ठीक है? एक है
  1917. 1:15:50अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग। एक है मार्जिनल
  1918. 1:15:52कॉस्टिंग। और इधर अपने पास में जो
  1919. 1:15:57इन्वेंटरी है उसमें दो हैं क्लोजिंग
  1920. 1:15:59इन्वेंटरी और ओपनिंग इन्वेंटरी। तो A B CD
  1921. 1:16:02में A B C एक लेटर के गैप में A और C
  1922. 1:16:06पासपास में आते हैं। और MN ओ M और N O के
  1923. 1:16:10बीच में भी एक लेटर का गैप होता है। तो हम
  1924. 1:16:12कहते हैं ये दोनों आपस में रिलेटेड हैं।
  1925. 1:16:14एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग क्लोजिंग इन्वेंटरी
  1926. 1:16:16से रिलेट करता है। और मार्जिनल कॉस्टिंग
  1927. 1:16:20ओपनिंग इन्वेंटरी से रिलेट करता है। ठीक
  1928. 1:16:22है? एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग चालू होता है A
  1929. 1:16:24से। क्लोजिंग इन्वेंटरी चालू होता है C
  1930. 1:16:26से। दोनों पास-पास में। तो इन दोनों का
  1931. 1:16:28रिलेशनशिप है और मार्जिनल कॉस्टिंग चालू
  1932. 1:16:30होता है एम से स्पेलिंग में एम आता है।
  1933. 1:16:32ओपनिंग में ओ आता है। एम और ओ पास-पास में
  1934. 1:16:34आते हैं। तो इनका आपस में रिलेशनशिप है।
  1935. 1:16:36अब रिलेशन बड़ा सिंपल है। अगर क्लोजिंग
  1936. 1:16:38इन्वेंटरी और ओपनिंग इन्वेंटरी सेम है तो
  1937. 1:16:40एब्जॉर्प्शन और मार्जिनल सेम होगा। अगर
  1938. 1:16:43यहीं पे
  1939. 1:16:48अगर क्लोजिंग इन्वेंटरी ओपनिंग से ज्यादा
  1940. 1:16:50है तो एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट ओपनिंग से
  1941. 1:16:52ज्यादा मार्जिन से ज्यादा होगा।
  1942. 1:17:04और यहीं पे अगर ओपनिंग इन्वेंटरी क्लोजिंग
  1943. 1:17:07से ज्यादा है तो मार्जिनल का प्रॉफिट
  1944. 1:17:08एब्जॉर्प्शन ज्यादा होगा। मतलब जो
  1945. 1:17:10रिलेशनशिप ओपनिंग और क्लोजिंग इन्वेंटरी
  1946. 1:17:12का है वही एब्जॉर्प्शन मार्जिनल का है। तो
  1947. 1:17:15याद करना भी आसान हो गया। एब्जॉर्प्शन
  1948. 1:17:17कॉस्टिंग का रिलेशनशिप क्लोजिंग से क्यों
  1949. 1:17:18है? क्योंकि ए बी सी डी में ए और सी पास
  1950. 1:17:20में आते हैं। और मार्जिनल का रिलेशनशिप
  1951. 1:17:22ओपनिंग से क्यों क्योंकि मार्जिनल
  1952. 1:17:24कॉस्टिंग के अंदर ओपनिंग ओ एम और ओ पासपास
  1953. 1:17:26में आते हैं। तो ये लॉजिक याद करने में
  1954. 1:17:27आसानी होगी। अब जब दोनों इन्वेंटरी इन
  1955. 1:17:29दोनों के बीच में क्लोजिंग और ओपनिंग
  1956. 1:17:31इन्वेंटरी के बीच का अगर कोई डिफरेंस मतलब
  1957. 1:17:32जो सिंबल आ रहा है वो इन दोनों के बीच का
  1958. 1:17:34सिंबल है। अगर ओपनिंग क्लोजिंग सेम है तो
  1959. 1:17:36फिर आपकी एब्सॉर्प्शन मार्जिनल कॉस्टिंग
  1960. 1:17:38का प्रॉफिट भी सेम है। क्योंकि फिर
  1961. 1:17:39क्लोजिंग इन्वेंटरी के अंदर कोई डिफरेंस
  1962. 1:17:41आया ही नहीं वैल्यूएशन में। ठीक है ना?
  1963. 1:17:43चेंज इन इन्वेंटरी ज़ीरो है तो फिर आपका
  1964. 1:17:45डिफरेंस इन प्रॉफिट ज़ीरो है। और वहीं पे
  1965. 1:17:47अगर क्लोजिंग इन्वेंटरी ज़्यादा है तो
  1966. 1:17:49एब्जॉर्प्शन का प्रॉफ़िट ज़्यादा होगा। और
  1967. 1:17:50वहीं पे अगर एब्जॉर्प्शन अगर क्लोजिंग
  1968. 1:17:51इन्वेंटरी कम है तो एब्सॉर्प्शन का
  1969. 1:17:53प्रॉफिट कम होगा। पिछले वाले क्वेश्चन में
  1970. 1:17:55देखोगे तो अपनी क्लोजिंग इन्वेंटरी 500
  1971. 1:17:57थी। ओपनिंग ज़ीरो थी तो क्लोजिंग ज्यादा
  1972. 1:17:58है। इसलिए एब्जॉर्प्शन का प्रॉफिट ज्यादा
  1973. 1:18:01है। मार्जिनल कम है। मार्जिनल का है
  1974. 1:18:0216250। एब्जॉर्प्शन का ज्यादा होना चाहिए।
  1975. 1:18:04वो है ज्यादा 18750।
  1976. 1:18:07तो ये लॉजिक ध्यान रखना। इसको याद रखने का
  1977. 1:18:10तुम्हें मैंने शॉर्टकट दे दिया। एग्जाम
  1978. 1:18:11में हमेशा एब्जॉर्प्शन मार्जिनल और उसके
  1979. 1:18:13नीचे क्लोजिंग ओपनिंग ये लिखना। ठीक है?
  1980. 1:18:16इन दोनों के बीच में क्या सिंबल है? वही
  1981. 1:18:18सिंबल तुम्हारे एब्सॉर्प्शन और मार्जिनल
  1982. 1:18:19कॉस्टिंग के प्रॉफ़िट के बीच में होगा। तो
  1983. 1:18:21एग्ज़ैक्टली सेम सिंबल फ़ॉलो करते हैं। ठीक
  1984. 1:18:24है साहब? अब इसको क्वेश्चन से समझते हैं।
  1985. 1:18:27हम कहते हैं भ ओपनिंग इन्वेंटरी में अगर
  1986. 1:18:29मान लो 1000 यूनिट्स हैं और क्लोजिंग
  1987. 1:18:31इन्वेंटरी में मान लो 500 यूनिट्स हैं।
  1988. 1:18:32एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का प्रॉफिट आपको दे
  1989. 1:18:34रखा है $2700 यूनिट्स का। फिक्स्ड
  1990. 1:18:36प्रोडक्शन ओवरहेड्स आर एब्सॉर्ब्ड एट
  1991. 1:18:38$2.50 पर यूनिट। ये आपको बोल रखा है। आपको
  1992. 1:18:40बताना है मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट
  1993. 1:18:41क्या होगा? ओपनिंग इन्वेंटरी है 1000 की।
  1994. 1:18:44क्लोजिंग इन्वेंटरी है 500 की। ठीक है?
  1995. 1:18:47अबजॉर्प्शन कॉस्टिंग, मार्जिनल कॉस्टिंग
  1996. 1:18:51अब्सॉर्प्शन का रिलेशनशिप क्लोजिंग के साथ
  1997. 1:18:53है। मार्जिनल का ओपनिंग के साथ है। यहां
  1998. 1:18:55पर ओपनिंग इन्वेंटरी कम है। सॉरी क्लोजिंग
  1999. 1:18:58इन्वेंटरी कम है। ओपनिंग ज्यादा है। तो
  2000. 1:19:00इसका मतलब मार्जिनल प्रॉफिट का ज्यादा जो
  2001. 1:19:02आंसर होगा वो एब्सॉर्प्शन से ज्यादा आएगा।
  2002. 1:19:04दोनों का सिंबल सेम डायरेक्शन में जाता
  2003. 1:19:06है। अब आपको निकालना है डिफरेंस इन
  2004. 1:19:08प्रॉफिट।
  2005. 1:19:19डिफरेंस इन प्रॉफिट कैसे निकालोगे? तो हम
  2006. 1:19:21कहते हैं डिफरेंस इन प्रॉफिट का सिंपल
  2007. 1:19:22फार्मूला है। आपके पास जितने भी ये अ मतलब
  2008. 1:19:26जो भी डिफरेंस इन यूनिट है डिफरेंस इन
  2009. 1:19:28प्रॉफिट निकालने के लिए आपकी चेंज इन
  2010. 1:19:30इन्वेंटरी लेवल निकालो।
  2011. 1:19:35इन्वेंटरी लेवल में कितना चेंज हुआ? इंटू
  2012. 1:19:38आपकी फिक्स्ड ओआर से मल्टीप्लाई कर दो।
  2013. 1:19:40फिक्स्ड ओए अब्सॉर्प्शन रेट कितनी थी? तो
  2014. 1:19:42इन्वेंटरी में चेंज कितना हुआ है? 1000 से
  2015. 1:19:44500 हो गई। 500 का चेंज है। अच्छा सिंबल
  2016. 1:19:47इग्नोर करना। सिंबल को एक बार इग्नोर कर
  2017. 1:19:49देना। तो 500 * एफओआर कितना होगी? फिक्स्ड
  2018. 1:19:53प्रोडक्शन ओवरहेड की रेट दे रखी है 2.5 की
  2019. 1:19:56* 2.50।
  2020. 1:20:05ठीक है? 1250 का डिफरेंस आएगा। मतलब
  2021. 1:20:08अब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग और मार्जिनल
  2022. 1:20:10कॉस्टिंग के प्रॉफिट के बीच में 1250 का
  2023. 1:20:12डिफरेंस होगा। ठीक है? और मुझे पता है कि
  2024. 1:20:14मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट ज्यादा है
  2025. 1:20:16एब्जॉर्प्शन से। एब्जॉर्प्शन का प्रॉफिट
  2026. 1:20:18दे रखा है 27,000। ठीक है? मुझे रिलेशनशिप
  2027. 1:20:21पता है कि यहां पे एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग
  2028. 1:20:23का जो प्रॉफिट है
  2029. 1:20:25वो कम आना चाहिए। वो कम होगा। किससे?
  2030. 1:20:29मार्जिनल कॉस्टिंग के प्रॉफिट से।
  2031. 1:20:32ठीक है? अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का प्रॉफिट
  2032. 1:20:34तुम्हें दे रखा है 27,000 का। तो ये कम
  2033. 1:20:37होना चाहिए मार्जिनल कॉस्टिंग के प्रॉफिट
  2034. 1:20:38से और मार्जिनल कॉस्टिंग के प्रॉफिट और
  2035. 1:20:39अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के प्रॉफिट के बीच
  2036. 1:20:41का डिफरेंस कितना है? 1250 तो इसका मतलब
  2037. 1:20:43मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट कितना होगा?
  2038. 1:20:4527,000 + 1250 जब इन दोनों प्रॉफिट के बीच
  2039. 1:20:49का डिफरेंस 1250 है। तो एब्सॉर्प्शन में
  2040. 1:20:51से मार्जिनल को लेस करेंगे तो 1250 आएगा।
  2041. 1:20:53और मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट ज्यादा
  2042. 1:20:55है। तो इसका मतलब एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग से
  2043. 1:20:58मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट कितना
  2044. 1:20:59ज्यादा होगा? 1250 से ज्यादा होगा। जब
  2045. 1:21:01दोनों के बीच का डिफरेंस 1250 है। तो ऐड
  2046. 1:21:03कर दिया।
  2047. 1:21:0628250
  2048. 1:21:11ठीक है ना? यह रिलेशनशिप ध्यान में रखना
  2049. 1:21:13है। हमने क्वेश्चन में देखा भ ओपनिंग
  2050. 1:21:15इन्वेंटरी ज्यादा थी क्लोजिंग से। तो
  2051. 1:21:17ओपनिंग ज्यादा है, क्लोजिंग से। इसका मतलब
  2052. 1:21:18मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट ज्यादा
  2053. 1:21:19होगा। एब्जॉर्प्शन से। अब मुझे
  2054. 1:21:21एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का प्रॉफिट दे रखा
  2055. 1:21:22है 27। तो मार्जिनल कॉस्टिंग का आंसर 27
  2056. 1:21:25से तो ज्यादा ही आना चाहिए। तभी अपना
  2057. 1:21:27रिलेशनशिप सही बैठेगा। अब कितना ज्यादा
  2058. 1:21:30आना चाहिए? तो मैंने कहा उसके लिए डिफरेंस
  2059. 1:21:31इन प्रॉफिट का फार्मूला है। उससे आंसर पता
  2060. 1:21:33पड़ा चेंज इन्वेंटरी लेवल। इन्वेंटरी लेवल
  2061. 1:21:35का चेंज 1000 और 500 1000 की ओपनिंग थी
  2062. 1:21:38क्लोजिंग 500 की तो 500 की इन्वेंटरी लेवल
  2063. 1:21:41कम हो चुका है। इसमें साइन इग्नोर करा
  2064. 1:21:43करो। ठीक है? चेंज इन्वेंटरी लेवल जो होता
  2065. 1:21:45है उसमें साइन को इग्नोर करो। चाहे
  2066. 1:21:47पॉजिटिव आ रहा हो चाहे नेगेटिव आ रहा हो।
  2067. 1:21:48नॉर्मली अपना फार्मूला लिखा हुआ होता है
  2068. 1:21:49क्लोजिंग माइनस ओपनिंग। यहां पे फार्मूला
  2069. 1:21:51लिखा होता है क्लोजिंग माइनस ओपनिंग। बट
  2070. 1:21:53आप साइन को इग्नोर कर देना। ठीक है? ठीक
  2071. 1:21:55है? तो यहां पे आंसर वैसे तो नेगेटिव 500
  2072. 1:21:57आ रहा है। 500 का क्लोजिंग है। 1000 का
  2073. 1:21:59ओपनिंग है तो 500 - 1000 करोगे तो 500
  2074. 1:22:02नेगेटिव आएगा। बट उस साइन को इग्नोर करते
  2075. 1:22:03हैं अपन हमेशा। इन्वेंटरी लेवल चेंज में
  2076. 1:22:05साइन को इग्नोर कर दो। इसका आंसर आपके पास
  2077. 1:22:08में 2.50 मल्टीप्लाई करोगे फिक्स्ड टू
  2078. 1:22:10वेयर से। आपके पास में डिफरेंस इन प्रॉफिट
  2079. 1:22:11आया 1250। अब एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का जो
  2080. 1:22:14प्रॉफिट है वो 27,000 है। मुझे पता है
  2081. 1:22:17मार्जिनल और एब्जॉर्प्शन के बीच का
  2082. 1:22:18डिफरेंस 1250 है। और मार्जिनल का प्रॉफिट
  2083. 1:22:21ज्यादा होना चाहिए। तो इसका मतलब मार्जिनल
  2084. 1:22:22का प्रॉफिट जो है वो एब्सॉर्प्शन से 1250
  2085. 1:22:24ज्यादा आएगा। तब इन दोनों के बीच का
  2086. 1:22:25डिफरेंस 1250 होगा। तो मैंने ऐड करा मेरे
  2087. 1:22:27पास में मार्जिनल कॉस्टिंग का आंसर आ गया।
  2088. 1:22:29ठीक है साहब? ये फर्स्ट वाला आंसर। सेकंड
  2089. 1:22:32क्या कह रहा है? ओपनिंग इन्वेंटरी इज़ 8000
  2090. 1:22:35यूनिट्स एंड क्लोजिंग इन्वेंटरी इज़ 9500
  2091. 1:22:37यूनिट्स। मार्जिनल कॉस्टिंग अ प्रॉफिट इज़
  2092. 1:22:408420 टू 8,420,000
  2093. 1:22:43एंड फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड आर
  2094. 1:22:45एब्सॉर्ब्ड एट 17 तो फिक्स्ड ओवरहेड दे
  2095. 1:22:47रखी है। आपको एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का
  2096. 1:22:48प्रॉफिट निकालने से इस बार एब्सॉर्प्शन का
  2097. 1:22:50प्रॉफिट निकालने को बोला है। ठीक है?
  2098. 1:22:52सेकंड पार्ट फिर वही डिफरेंस इन प्रॉफिट
  2099. 1:22:55निकालो। सबसे पहले तो अपना
  2100. 1:23:01चेंज इन इन्वेंटरी लेवल। इस बार इन्वेंटरी
  2101. 1:23:03लेवल चेंज हुआ है 8000 और 9500 1500 से
  2102. 1:23:08फिक्स्ड ओआर आपको दे रखी है 17 की।
  2103. 1:23:13तो यहां से आ गया डिफरेंस इन प्रॉफिट।
  2104. 1:23:2425500
  2105. 1:23:27अब रिलेशनशिप की बात करते हैं।
  2106. 1:23:34ठीक है? हमेशा ऐसे लिख दिया करो साइड में।
  2107. 1:23:35तुम्हारे रफ पेपर होगा। वैसे भी एग्जाम
  2108. 1:23:37में उस पे लिख देना। अब सिंबल लगाओ। इस
  2109. 1:23:39बार क्लोजिंग इन्वेंटरी ज्यादा है।
  2110. 1:23:42क्लोजिंग ज्यादा है ओपनिंग से। इसका मतलब
  2111. 1:23:43एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट का आंसर ज्यादा
  2112. 1:23:45होगा। मार्जिनल से मुझे दे रखा है किसका
  2113. 1:23:47आंसर? मुझे आंसर दे रखा है मार्जिनल
  2114. 1:23:48कॉस्टिंग का प्रॉफिट। तो मतलब मार्जिनल
  2115. 1:23:50कॉस्टिंग का प्रॉफिट दे रखा है। मुझे
  2116. 1:23:51एब्जॉर्प्शन निकालना है। मार्जिनल
  2117. 1:23:52कॉस्टिंग का प्रॉफिट कम होना चाहिए।
  2118. 1:23:54एब्जॉर्प्शन से। कितने से कम होना चाहिए?
  2119. 1:23:55250 तो एब्जॉर्प्शन का प्रॉफिट कितना
  2120. 1:23:57होगा? निकाल लेंगे।
  2121. 1:24:00अपने को एब्जॉर्प्शन का प्रॉफिट निकालना
  2122. 1:24:02है जो मार्जिनल से होना चाहिए ज्यादा।
  2123. 1:24:06ठीक है? मार्जिनल का प्रॉफिट हमें दे रखा
  2124. 1:24:09है 842।
  2125. 1:24:13842
  2126. 1:24:16अब यह निकालना है।
  2127. 1:24:19यह होना ज्यादा चाहिए। तो इसका मतलब 842
  2128. 1:24:22में कुछ ऐड करेंगे तभी ज्यादा फिगर आएगा।
  2129. 1:24:24कितना ऐड करेंगे? डिफरेंस जो है वो ऐड कर
  2130. 1:24:25दो। तो 842 में इन दोनों के बीच में
  2131. 1:24:29डिफरेंस है उसको ऐड कर दो।
  2132. 1:24:40तो ये आंसर आ गया।
  2133. 1:24:42[हंसी]
  2134. 1:24:44867500
  2135. 1:24:46ठीक है साहब ये हो गया आंसर अपना
  2136. 1:24:50अब आते हैं तीसरे पॉइंट पे तीसरा पॉइंट
  2137. 1:24:52क्या कह रहा है ओपनिंग इन्वेंटरी इज़ 12
  2138. 1:24:55एंड क्लोजिंग भी 12000 अच्छा ओपनिंग
  2139. 1:24:56क्लोजिंग बराबर दे रखी है एब्सॉर्प्शन
  2140. 1:24:58कॉस्टिंग का प्रॉफिट 98 है। फिक्स्ड
  2141. 1:25:00प्रोडक्शन ओवरहेड ट्रेड 4.5 की दे रखी है।
  2142. 1:25:01आपको मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट
  2143. 1:25:03निकालना है। सेम आएगा। जब ओपनिंग और
  2144. 1:25:05क्लोजिंग सेम हो तो चेंज इन इन्वेंटरी
  2145. 1:25:07ज़ीरो है तो इसका मतलब डिफरेंस इन प्रॉफिट
  2146. 1:25:09भी ज़ीरो आएगा। का जब चेंज इन इन्वेंटरी
  2147. 1:25:10ज़ीरो है उसको तुम 4.5 से मल्टीप्लाई करोगे
  2148. 1:25:12तो डिफरेंस इन प्रॉफिट ज़ीरो आएगा। जब
  2149. 1:25:14डिफरेंस इन प्रॉफिट ज़ीरो है तो उसका मतलब
  2150. 1:25:16प्रॉफिट सेम है। तो फिर यहां पे जब इन
  2151. 1:25:18ओपनिंग और क्लोजिंग इन्वेंटरी सेम हो तो
  2152. 1:25:20एब्सॉर्प्शन मार्जिनल कॉस्टिंग दोनों का
  2153. 1:25:21प्रॉफिट सेम होता है। आंसर 98 हो जाएगा।
  2154. 1:25:23ये आ गए भई अपने तीनों आंसर।
  2155. 1:25:27ठीक है जी।
  2156. 1:25:31हां जी। फर्स्ट वाले का आंसर मार्जिनल
  2157. 1:25:32कॉस्टिंग में आ रहा है 28250. 28250।
  2158. 1:25:36सेकंड वाले का आंसर आ रहा है 86750
  2159. 1:25:39867500
  2160. 1:25:41ठीक है और थर्ड वाले में सेम आएगा कोई
  2161. 1:25:44दिक्कत ही नहीं है तो ये ध्यान रखना है
  2162. 1:25:46साहब ये जो कांसेप्ट मैंने अभी तुम्हें
  2163. 1:25:47बताया अगर ये तुम्हारे दिमाग में बैठ गया
  2164. 1:25:49तो मजा आ जाएगा और याद रखने का तरीका भी
  2165. 1:25:51सिंपल है ए बी सी डी ए बी सी डी के अंदर ए
  2166. 1:25:53और सी पासपास में आते हैं तो एब्सॉर्प्शन
  2167. 1:25:54कॉस्टिंग का रिलेशनशिप क्लोजिंग के साथ है
  2168. 1:25:56और मार्जिनल एम एंड ओ साथ-साथ में आते हैं
  2169. 1:25:58तो मार्जिनल का ओपनिंग के साथ है ठीक है
  2170. 1:26:01सर
  2171. 1:26:05इसके ऊपर अब थोड़े क्वेश्चंस करते हैं।
  2172. 1:26:07एग्जाम में क्या होता है? मिसिंग वैल्यू
  2173. 1:26:08वाले क्वेश्चन यहां से आते हैं। मतलब वो
  2174. 1:26:10कुछ इंफॉर्मेशन दे देता है और बाकी
  2175. 1:26:11इंफॉर्मेशनेशन मिसिंग आपसे मांग लेता है।
  2176. 1:26:13जैसे ये क्वेश्चन है। लास्ट मंथ द
  2177. 1:26:15मैन्युफैक्चरर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी
  2178. 1:26:17कंपनीज़ प्रॉफिट वाज़ 2000 कैलकुलेटेड
  2179. 1:26:20यूजिंग अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग। अगर
  2180. 1:26:21अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग से कैलकुलेट करोगे
  2181. 1:26:22तो प्रॉफिट 2000 का है। और इफ मार्जिनल
  2182. 1:26:24कॉस्टिंग प्रिंसिपल हैड बीन यूज़्ड। तो एक
  2183. 1:26:26लॉस होता आपको 3000 का। तो इसका मतलब
  2184. 1:26:30यह अगर मेरा नंबर स्केल है यहां पे ज़ीरो
  2185. 1:26:32है।
  2186. 1:26:35अबजॉर्प्शन कॉस्टिंग से
  2187. 1:26:40जो सॉरी अब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट आ रहा है
  2188. 1:26:42अपने पास में
  2189. 1:26:48वो है 2000 पॉजिटिव
  2190. 1:26:51और मार्जिनल जो प्रॉफिट है मार्जिनल
  2191. 1:26:55कॉस्टिंग से जो प्रॉफिट आ रहा है वह है
  2192. 1:26:573000 का लॉस तो इन दोनों के बीच का
  2193. 1:27:01डिफरेंस कितना है?
  2194. 1:27:075000 का डिफरेंस है ना सब
  2195. 1:27:102000 और ज़ीरो के बीच में 2000 और ज़ीरो से
  2196. 1:27:133000 3000 तो कुल मिला के 5000 का डिफरेंस
  2197. 1:27:15है दोनों के बीच में तो डिफरेंस इन
  2198. 1:27:17प्रॉफिट आ गया मेरे पास में मुझे बोल रखा
  2199. 1:27:19है द कंपनीज़ फिक्स्ड प्रोडक्शन कॉस्ट इज़
  2200. 1:27:21$2 पर यूनिट सेल्स लास्ट मंथ वर $10
  2201. 1:27:26यूनिट्स। सेल का फिगर भी दे रखा है। आपको
  2202. 1:27:28लास्ट मंथ का प्रोडक्शन निकालना है। ठीक
  2203. 1:27:31है? प्रोडक्शन का फिगर निकालना है साहब।
  2204. 1:27:33अपने को सेल दे रखी है। अपने को फिक्स्ड
  2205. 1:27:35प्रोडक्शन कॉस्ट दे रखी है। अपने को दोनों
  2206. 1:27:38तरह के एब्सॉर्प्शन और मार्जिनल कॉस्टिंग
  2207. 1:27:39के प्रॉफिट और लॉस जो भी फिगर है वो दे
  2208. 1:27:41रखे हैं। अपने से लास्ट मंथ का प्रोडक्शन
  2209. 1:27:43पूछ लिया है। अब यहां पे कुछ बच्चों के
  2210. 1:27:46दिमाग में आना चाहिए कि सर ना वो एक
  2211. 1:27:47फार्मूला होता था। ओपनिंग प्लस प्रोडक्शन
  2212. 1:27:51माइनस क्लोजिंग इससे अपने पास में आती थी
  2213. 1:27:55सेल्स। अब अगर सेल दे रखी है तो प्रोडक्शन
  2214. 1:27:57कैसे निकालें? तो इसको अपन थोड़ा सा चेंज
  2215. 1:27:59कर लेते हैं। इसी को अपन रीाइट कर सकते
  2216. 1:28:01हैं। सेल्स
  2217. 1:28:03प्लस क्लोजिंग माइनस ओपनिंग
  2218. 1:28:07इससे आपके पास में प्रोडक्शन आ जाएगा।
  2219. 1:28:11इधर शिफ्ट कर दो। और ये क्या है? ये दोनों
  2220. 1:28:14आपके डिफरेंस इन इन्वेंटरी है। चेंज इन
  2221. 1:28:16इन्वेंटरी लेवल जिसे अपन बोलते हैं।
  2222. 1:28:18क्लोजिंग माइनस ओपनिंग यह आपको क्या देता
  2223. 1:28:20है? यह आपको देता है चेंज इन इन्वेंटरी
  2224. 1:28:22लेवल।
  2225. 1:28:26तो अगर तुम्हें कहीं से चेंज इन इन्वेंटरी
  2226. 1:28:28लेवल मिल जाए उस चेंज को सेल्स में ऐड
  2227. 1:28:30करोगे तो प्रोडक्शन का फिगर आ जाएगा। इसका
  2228. 1:28:32मतलब अब ये दिमाग तुम्हें एग्जाम में
  2229. 1:28:34लगाना पड़ेगा कि ये तो तुम्हें पता होता
  2230. 1:28:36है ओपनिंग प्लस प्रोडक्शन माइनस क्लोजिंग
  2231. 1:28:38इक्वल्स टू सेल्स। अब इसको थोड़ा रिवाइज़
  2232. 1:28:40करा तो सेल्स में अगर मैं क्लोजिंग ऐड
  2233. 1:28:42करूं, ओपनिंग माइनस करूं तो प्रोडक्शन
  2234. 1:28:43आएगा। और क्लोजिंग माइनस ओपनिंग ये तो
  2235. 1:28:46चेंज इन इन्वेंटरी का फ़ूला है। चेंज
  2236. 1:28:47इन्वेंटरी ऐसे तो निकाल रहे हैं अभी अपन।
  2237. 1:28:49भाई चेंज इन्वेंटरी का फ़ूला ये तो लिखा
  2238. 1:28:51अपन ने भाई। चेंज इन इन्वेंटरी निकालना हो
  2239. 1:28:52तो उसके लिए क्लोजिंग और ओपनिंग को आपस
  2240. 1:28:54में माइनस करो। इससे आपके पास में चेंज इन
  2241. 1:28:56इन्वेंटरी आ जाएगी।
  2242. 1:29:03तो चेंज इन इन्वेंटरी को एफओ आर से
  2243. 1:29:04मल्टीप्लाई करोगे तो डिफरेंस इन प्रॉफिट आ
  2244. 1:29:06जाएगा। तो मैंने अब उल्टा दिमाग लगाया।
  2245. 1:29:08मैंने कहा देखो डिफरेंस इन प्रॉफिट मेरे
  2246. 1:29:10पास में है। चेंज इन इन्वेंटरी लेवल
  2247. 1:29:12निकालना है। ठीक है?
  2248. 1:29:25मैं एक दिमाग लगा सकता हूं। मेरे पास एक
  2249. 1:29:28फार्मूला होता है अभी डिफरेंस इन प्रॉफिट
  2250. 1:29:29का। हम कहते हैं कि डिफरेंस इन प्रॉफिट इज़
  2251. 1:29:32इक्वल्स टू चेंज इन इन्वेंटरी लेवल
  2252. 1:29:41इंटर
  2253. 1:29:43फिक्स्ड ओवरहेड अब्सॉर्प्शन रेट। इससे आता
  2254. 1:29:45है डिफरेंस इन प्रॉफ़िट। डिफरेंस एंड
  2255. 1:29:46प्रॉफिट का आंसर मुझे पता है। 5000 का
  2256. 1:29:48डिफरेंस है भाई। एब्सॉर्प्शन मार्जिनल
  2257. 1:29:49कॉस्टिंग के प्रॉफिट में डिफरेंस 5000 का
  2258. 1:29:52है। ठीक है? दोनों के एक्चुअल फिगर दे रखे
  2259. 1:29:54हैं। तो एक्चुअल फिगर से भी माइनस करके
  2260. 1:29:55अपन डिफरेंस निकाल सकते हैं। ठीक है? तो
  2261. 1:29:57ये डिफरेंस 5000 का आ रहा है। ये 5000
  2262. 1:30:02जो है वो चेंज इन इन्वेंटरी
  2263. 1:30:06इंटू एफओआर के बराबर है। और एफओआर मुझे दे
  2264. 1:30:09रखी है क्वेश्चन में टू की। फिक्स्ड
  2265. 1:30:11प्रोडक्शन कॉस्ट पर यूनिट टू की है। तो ये
  2266. 1:30:14टू दे रखी है। तो यहां से मेरे पास में
  2267. 1:30:15चेंज इन इन्वेंटरी आ जाएगा।
  2268. 1:30:20यहां से मेरे पास में चेंज इन इन्वेंटरी आ
  2269. 1:30:22जाएगा। कितना आएगा? 2500
  2270. 1:30:245000 / 2
  2271. 1:30:27देखिए ये इक्वल टू इधर जाएगा तो डिवाइड
  2272. 1:30:29होगा। तो चेंज इन इन्वेंटरी 5000 / 2 तो
  2273. 1:30:31ये हो जाएगी 2500 की चेंज इन इन्वेंटरी।
  2274. 1:30:34अब मुझे पता है सेल्स में से चेंज
  2275. 1:30:36इन्वेंटरी को एडजस्ट करेंगे तो अपने पास
  2276. 1:30:37में प्रोडक्शन आ जाएगा।
  2277. 1:30:41तो सेल्स हुई थी 10,000 की।
  2278. 1:30:46चेंज इन इन्वेंटरी हमें मिल गई
  2279. 1:30:502500 की। इसका मतलब प्रोडक्शन कितने का
  2280. 1:30:54हुआ था?
  2281. 1:30:57₹1,500 का।
  2282. 1:31:01अब ये क्वेश्चन अभी मैंने करा है। तुम्हें
  2283. 1:31:03समझ में आ जाएगा। बट एग्जाम में जाओगे तो
  2284. 1:31:05बिल्कुल नहीं आएगा। यह क्वेश्चन एग्जाम
  2285. 1:31:07में बनता है जिसके लिए बच्चे कहते हैं सर
  2286. 1:31:09पेपर डिफिकल्ट था। इसका डिफिकल्टी लेवल
  2287. 1:31:11हार्ड होगा। यह क्वेश्चन वो है जो एग्जाम
  2288. 1:31:14में डिफिकल्टी लेवल हार्ड के अंदर जाते
  2289. 1:31:16हैं।
  2290. 1:31:18क्योंकि अभी तुम्हें समझ में आ गया। अभी
  2291. 1:31:20तो मैंने बताया जब ये क्वेश्चन एग्जाम में
  2292. 1:31:22आता है तुम्हारे सामने तुम्हारे को समझ
  2293. 1:31:24में नहीं आता कि कहना क्या चाह रहा है वो।
  2294. 1:31:25इसमें बस ये एडजस्टमेंट का ध्यान में रखना
  2295. 1:31:27था। ठीक है ना? तो ये छोटी-छोटी चीजें
  2296. 1:31:29एग्जाम में मिसिंग वैल्यू के नाम पे आती
  2297. 1:31:31है। इस टाइप के क्वेश्चंस की आपको बहुत
  2298. 1:31:32प्रैक्टिस करनी पड़ेगी। ठीक है ना? एक
  2299. 1:31:35क्वेश्चन और इस टाइप का भी करते हैं। ठीक
  2300. 1:31:37है? आंसर अपना बी आ रहा है। ₹1500 बिल्कुल
  2301. 1:31:40सही। ₹1500।
  2302. 1:31:42ठीक है? एक क्वेश्चन और देखो। एग्जांपल
  2303. 1:31:44नंबर नाइन क्या कह रहा है? अ न्यू कंपनी
  2304. 1:31:46हैज़ सेट अप अ मार्जिनल कॉस्टिंग सिस्टम
  2305. 1:31:48एंड अ बजटेड कंट्रीब्यूशन फॉर द पीरियड ऑफ़
  2306. 1:31:5126,000 बेस्ड ऑन द सेल्स ऑफ़ 13,000
  2307. 1:31:54यूनिट्स एंड प्रोडक्शन ऑफ़ 15,000 यूनिट्स।
  2308. 1:31:56दिस लेवल ऑफ़ प्रोडक्शन रिप्रेजेंट्स द
  2309. 1:31:58फर्म्स एक्सपेक्टेड लॉन्ग टर्म लेवल ऑफ़
  2310. 1:32:01प्रोडक्शन। यह फर्म का एक्सपेक्टेड लॉन्ग
  2311. 1:32:04टर्म लेवल ऑफ़ प्रोडक्शन है। ठीक है?
  2312. 1:32:0515,000 आपका कंट्रीब्यूशन आपको लग रहा है
  2313. 1:32:0826 होगा। यह कॉन्ट्रिब्यूशन आपने निकाला
  2314. 1:32:1013,000 की सेल के हिसाब से। तो
  2315. 1:32:12कंट्रीब्यूशन पर यूनिट निकालना चाहो तो
  2316. 1:32:13निकाल सकते हो यहां पे। 30 26 / 30 ठीक
  2317. 1:32:16है? तो $2 का पर यूनिट का कंट्रीब्यूशन
  2318. 1:32:19है। और प्रोडक्शन आपका था 15,000 का। दिस
  2319. 1:32:21लेवल ऑफ़ प्रोडक्शन जो है यह कंपनी के लिए
  2320. 1:32:23लॉन्ग टर्म एक्सपेक्टेड लेवल है। कंपनीज़
  2321. 1:32:25बजटेड फिक्स्ड प्रोडक्शन कॉस्ट आपको दे
  2322. 1:32:27रखी है 33,000 की। व्हाट वुड बी द बजटेड
  2323. 1:32:29प्रॉफ़िट बी? इफ कंपनी वर टू चेंज टू एन
  2324. 1:32:32अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग सिस्टम अगर कंपनी
  2325. 1:32:35अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग को फॉलो करेगी तो
  2326. 1:32:36प्रॉफिट क्या होगा अपने को निकालना है।
  2327. 1:32:38बहुत ही प्यारा क्वेश्चन है ये भी। ये भी
  2328. 1:32:40डिफिकल्टी लेवल हार्ड पे जाएगा।
  2329. 1:32:52क्यों? क्यों? क्योंकि इसमें दिमाग लगाना
  2330. 1:32:53पड़ता है। जहां दिमाग लगाना पड़ता है वो
  2331. 1:32:55अपने आपको अपने आप अपने को अपने आप हार्ड
  2332. 1:32:56रख ले जाते हैं। टेक्निकली ये हार्ड नहीं
  2333. 1:32:58है। अब वही जिस बच्चे ने बहुत प्रैक्टिस
  2334. 1:33:00कर रखी है, मेहनत कर रखी है वो ये
  2335. 1:33:01क्वेश्चन देख के एग्जाम में शायद सॉल्व कर
  2336. 1:33:02भी लेगा। अब वही है दिमाग में क्या आना
  2337. 1:33:04चाहिए? जब भी इस टाइप के क्वेश्चन को
  2338. 1:33:06सॉल्व करना हो मैंने क्या बोला तुम्हें?
  2339. 1:33:07दिमाग में कुछ बेसिक चीजें आनी चाहिए। भाई
  2340. 1:33:10जैसे डिफरेंस इन प्रॉफिट का फार्मूला
  2341. 1:33:12दिमाग में चलना चाहिए।
  2342. 1:33:22कभी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा हो ना तो
  2343. 1:33:23जो जो तुम्हारे को रिलेटेड कांसेप्ट याद
  2344. 1:33:25है उनको लिखना स्टार्ट कर दो कहीं ना कहीं
  2345. 1:33:29से आंसर अपने आप मिल जाएगा या तरीका पता
  2346. 1:33:31पड़ जाएगा तो डिफरेंस इन प्रॉफिट का
  2347. 1:33:33फार्मूला ये होता है। अच्छा एब्जॉर्प्शन
  2348. 1:33:35कॉस्टिंग का प्रॉफिट निकालना है मेरे को
  2349. 1:33:37मेरे को। लेकिन यहां पे दे रखा है
  2350. 1:33:38मार्जिनल कॉस्टिंग का बजटेड
  2351. 1:33:40कॉन्ट्रीब्यूशन।
  2352. 1:33:42मेरे पास मार्जिनल तो प्रॉफिट ही नहीं है।
  2353. 1:33:45अगर मुझे अब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट निकालना
  2354. 1:33:47है तो मुझे पहले मार्जिनल का प्रॉफिट भी
  2355. 1:33:50तो चाहिए। मेरे पास में यहां पे मार्जिनल
  2356. 1:33:52का प्रॉफिट ही नहीं है। साहब सबसे पहले तो
  2357. 1:33:53मार्जिनल का प्रॉफिट निकालो। चलो तो एक
  2358. 1:33:56बार यहां पे एक काम और करते हैं। मार्जिनल
  2359. 1:33:59का प्रॉफिट तो निकालो पहले।
  2360. 1:34:04मार्जिनल प्रॉफिट कैसे निकलेगा? आपके पास
  2361. 1:34:07कंट्रीब्यूशन है। उस कंट्रीब्यूशन में से
  2362. 1:34:10फिक्स्ड कॉस्ट को माइनस कर दो।
  2363. 1:34:13तब जाके प्रॉफिट आएगा। कॉन्ट्रिब्यूशन है
  2364. 1:34:1626
  2365. 1:34:18फिक्स्ड कॉस्ट यहां पे दे रखी है थ्री की।
  2366. 1:34:20तो थ्री तो मार्जिनल का प्रॉफिट 23 है।
  2367. 1:34:24आधे से ज्यादा बच्चे एग्जाम में इस
  2368. 1:34:25क्वेश्चन में गलती ये करेंगे कि वो इस
  2369. 1:34:27कंट्रीब्यूशन में डिफरेंस इन प्रॉफिट को
  2370. 1:34:29ऐड लेस करके मार्जिनल कॉस्टिंग का आंसर
  2371. 1:34:31निकाल देंगे। जबकि यहां पे ऐसा नहीं होगा।
  2372. 1:34:35अब एक और चीज अब मुझे चाहिए चेंज इन
  2373. 1:34:37इन्वेंटरी। मुझे बोल रखा है सेल हुई है
  2374. 1:34:3913,000 की और न्यू कंपनी हैज़ बीन सेट अप।
  2375. 1:34:42न्यू कंपनी मतलब ओपनिंग ज़ीरो है। ठीक है?
  2376. 1:34:45ये एक न्यू कंपनी है।
  2377. 1:34:49न्यू कंपनी होने का मतलब ओपनिंग इन्वेंटरी
  2378. 1:34:51ज़ीरो होती है। भाई सिंपल सी बात है।
  2379. 1:34:57ठीक है? क्लोजिंग इन्वेंटरी कैसे आएगी?
  2380. 1:34:59आपने 15,000 यूनिट्स बनाए और 13,000 आपने
  2381. 1:35:02बेच दिए। तो क्लोजिंग इन्वेंटरी कितनी है?
  2382. 1:35:0420,000 की।
  2383. 1:35:06क्लोजिंग इन्वेंटरी कैसे आएगी भाई? 15,000
  2384. 1:35:09यूनिट्स बना रहे हो और 13,000 यूनिट्स
  2385. 1:35:11आपने बेच दिए। ओपनिंग तो ज़ीरो है। तो इससे
  2386. 1:35:14आपके पास में 2000 की क्लोजिंग इन्वेंटरी
  2387. 1:35:16आ गई सब।
  2388. 1:35:18ठीक है? तो चेंज इन इन्वेंटरी 20,000 है।
  2389. 1:35:22अब मुझे चाहिए फिक्स्ड ओआर। एफओआर दे नहीं
  2390. 1:35:25रखी इसमें। इस क्वेश्चन में फिक्स्ड
  2391. 1:35:27ओवरहेड रेट मिसिंग है। तो ओआर का फार्मूला
  2392. 1:35:30याद होना चाहिए। फिक्स्ड ओआर निकालने का
  2393. 1:35:32फ़ूला। ओआर के लिए कहते हैं अपने जो बजटेड
  2394. 1:35:34कॉस्ट है
  2395. 1:35:37उसको डिवाइड करेंगे किसी एप्रोप्रियट
  2396. 1:35:40बेसिस से
  2397. 1:35:45तो हमारे पास में ओआर आ जाएगी
  2398. 1:35:48बजटेड ओआर दे रखी है 3000 की दे रखा है
  2399. 1:35:51बजटेड फिक्स्ड प्रोडक्शन कॉस्ट 3000 है तो
  2400. 1:35:53बजटेड कॉस्ट दे रखी है 3000 की अब बजट
  2401. 1:35:56बेसिस क्या लें तो बेसिस के लिए अपने को
  2402. 1:35:58एक लाइन दे रखी है अपने को बोल रखा है
  2403. 1:36:00प्रोडक्शन लेवल 15000 है एंड एंड दिस लेवल
  2404. 1:36:02ऑफ प्रोडक्शन रिप्रेजेंट्स द फर्म्स
  2405. 1:36:04एक्सपेक्टेड लॉन्ग टर्म लेवल ऑफ़
  2406. 1:36:06प्रोडक्शन। ये लाइन फालतू में नहीं दे रखी
  2407. 1:36:08है। ये हिंट है कि ये जो 15,000 का लेवल
  2408. 1:36:10है प्रोडक्शन का ये तुम कंपनी के लिए
  2409. 1:36:13अस्यूम कर सकते हो कि लॉन्ग टर्म तक कंपनी
  2410. 1:36:1415-15,000 यूनिट्स ही बनाएगी। तो ये कंपनी
  2411. 1:36:17का एप्रोप्रियट बेस बन जाएगा पर यूनिट की
  2412. 1:36:19ओआर निकालने के लिए। आप यहां पे 15,000 से
  2413. 1:36:22डिवाइड कर सकते हो। तो आपकी ओआर यहां पे
  2414. 1:36:24पर यूनिट की कितनी हो जाएगी? 3000 बाय
  2415. 1:36:2715,000 यह आएगी 0.2 पर यूनिट।
  2416. 1:36:34और इसी को अब यहां पर अपन यूज़ करेंगे। तो
  2417. 1:36:37डिफरेंस इन प्रॉफिट आएगा 400 का। अब बात
  2418. 1:36:40आएगी वही अब्सॉर्प्शन का ज्यादा या
  2419. 1:36:42मार्जिनल का ज्यादा। तो मैंने कहा भाई
  2420. 1:36:43देखो एब्जॉर्प्शन का रिलेशनशिप है
  2421. 1:36:46क्लोजिंग से। मार्जिनल का रिलेशनशिप है
  2422. 1:36:49ओपनिंग से। ओपनिंग तो यहां पे ज़ीरो है।
  2423. 1:36:52ठीक है? ओपनिंग तो न्यू कंपनी है। ओपनिंग
  2424. 1:36:54ज़ीरो है। क्लोजिंग 2000 है तो क्लोजिंग
  2425. 1:36:56ज्यादा है ओपनिंग से। क्लोजिंग ज्यादा है
  2426. 1:36:57तो एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट ज्यादा होगा।
  2427. 1:36:59मुझे मार्जिनल का प्रॉफिट दे रखा है 23 तो
  2428. 1:37:01एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट अब मुझे ज्यादा
  2429. 1:37:03चाहिए
  2430. 1:37:07शुड बी मोर देन मार्जिनल प्रॉफिट और कितने
  2431. 1:37:09से 400 से
  2432. 1:37:14ये अपने को दे रखा है 23
  2433. 1:37:18ये कम होना चाहिए मार्जिनल
  2434. 1:37:20[गला साफ़ करने की आवाज़] का प्रॉफिट
  2435. 1:37:20ज्यादा होना चाहिए तो कितने से तो हमने
  2436. 1:37:21कहा ये निकालने के लिए एक काम करो 23 प्लस
  2437. 1:37:24डिफरेंस 400 को ऐड कर दो आपका आंसर आएगा 2
  2438. 1:37:293400
  2439. 1:37:32ये आ गया आंसर।
  2440. 1:37:3623400
  2441. 1:37:37बी
  2442. 1:37:40बी सही आंसर है। ठीक है साहब। वही दिमाग
  2443. 1:37:43लगाना है। अब मैंने क्या फार्मूला लिखा?
  2444. 1:37:46ये वाला फार्मूला लिख दिया। ये वाला
  2445. 1:37:47फार्मूला लिख दिया। मैंने कहा चलो एक तो
  2446. 1:37:48मार्जिनल प्रॉफिट गायब था। तो मैंने कहा
  2447. 1:37:50पहले प्रॉफिट निकाल लेते हैं। ये ईजी काम
  2448. 1:37:51है। मैंने कहा डिफरेंस इन प्रॉफिट का
  2449. 1:37:53फार्मूला होता है। या तो मुझे दोनों
  2450. 1:37:54प्रॉफिट का फिगर दे दे। उनको लेस करके
  2451. 1:37:56डिफरेंस निकाल दूंगा। दोनों प्रॉफिट के
  2452. 1:37:57फिगर दे ही रखे हैं। तो मैंने कहा चेंज
  2453. 1:37:59इन्वेंटरी इंटू एफओआर कर लेंगे। तो अब
  2454. 1:38:00एफओआर चाहिए या चेंज इन्वेंटरी चाहिए।
  2455. 1:38:02मैंने कहा चेंज इन्वेंटरी के लिए बोल रखा
  2456. 1:38:03है न्यू कंपनी है। तो ओपनिंग ज़ीरो है। सेल
  2457. 1:38:05करी है 13,000 की बनाए 15,000 है। मतलब
  2458. 1:38:0720,000 की क्लोजिंग स्टॉक है। तो चेंज
  2459. 1:38:08इन्वेंटरी 20,000 आ गई। फिर मैंने कहा
  2460. 1:38:10एफओआर नहीं दे रखी है। तो मैंने कहा एफओआर
  2461. 1:38:12के फॉर्मूले के लिए मुझे टोटल कॉस्ट दे
  2462. 1:38:13रखी है। और मुझे हिंट दे रखा है कि ये जो
  2463. 1:38:16प्रोडक्शन का लेवल है ये लॉन्ग टर्म तक
  2464. 1:38:18कंपनी के लिए सेम रहेगा। तो ये कंपनी का
  2465. 1:38:20एप्रोप्रियट बेस हो सकता है। तो इससे मेरे
  2466. 1:38:23को $2 $.2 पर यूनिट की एफओआर की रेट मिल
  2467. 1:38:26गई। उसको मैंने चेंज इन्वेंटरी से
  2468. 1:38:28मल्टीप्लाई करा तो डिफरेंस इन प्रॉफिट आया
  2469. 1:38:30400। अब डिफरेंस इन प्रॉफिट 400 है। मैंने
  2470. 1:38:32कहा भ ओपनिंग ज़ीरो है। क्लोजिंग 2000 है
  2471. 1:38:34तो क्लोजिंग इन्वेंटरी ज्यादा है। ओपनिंग
  2472. 1:38:35से ओपनिंग इन्वेंटरी ज़ीरो है। क्लोजिंग
  2473. 1:38:37इन्वेंटरी में 2000 यूनिट्स हैं। तो इसका
  2474. 1:38:39मतलब अपनी क्लोजिंग इन्वेंटरी ज्यादा है
  2475. 1:38:41साहब। ओपनिंग इन्वेंटरी के मुकाबले। तो
  2476. 1:38:43मार्जिनल का प्रॉफिट जो है वो एब्सॉर्प्शन
  2477. 1:38:45से कम होगा। एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट
  2478. 1:38:46ज्यादा आएगा। मैंने कहा मार्जिन का
  2479. 1:38:47प्रॉफिट 23 है। तो इसका मतलब एब्सॉर्प्शन
  2480. 1:38:49का प्रॉफिट 400 से और ज्यादा होना चाहिए।
  2481. 1:38:51तो ये होना चाहिए 23400।
  2482. 1:38:53ठीक है साहब? तो ये अपन ने बातचीत करी। अब
  2483. 1:38:58जो भी अभी तक पढ़ा है इसमें एडवांटेज
  2484. 1:39:00डिसवांटेज की बात करके इस चैप्टर को करते
  2485. 1:39:02हैं यहां पे ओवर। देखो अब्सॉर्प्शन
  2486. 1:39:04कॉस्टिंग और मार्जिनल कॉस्टिंग में जब हम
  2487. 1:39:06बात करें तो मार्जिनल कॉस्टिंग के फायदे
  2488. 1:39:07क्या है? मार्जिनल कॉस्टिंग की जरूरत
  2489. 1:39:08क्यों पड़ी? क्योंकि एक तो ईजी टू यूज़ है।
  2490. 1:39:10ये मैनेजमेंट को शॉर्ट टर्म डिसीजन मेकिंग
  2491. 1:39:12में हेल्प करता है। एमसीक्यू ध्यान रखना।
  2492. 1:39:14और यह इसमें कोई कॉम्प्लिकेटेड अंडर
  2493. 1:39:16अब्सॉर्प्शन या ओवर अब्सॉर्प्शन को
  2494. 1:39:17कैलकुलेट करने की जरूरत नहीं पड़ती। ठीक
  2495. 1:39:19है? इसके अलावा आप यहां पर अलग-अलग सेल्स
  2496. 1:39:22लेवल पे कितना कंट्रीब्यूशन कमाओगे ये आप
  2497. 1:39:24बहुत फटाफट निकाल सकते हो। और मार्जिनल
  2498. 1:39:27कॉस्टिंग में क्योंकि अपने कोई
  2499. 1:39:28अब्सॉर्बिंग वगैरह इंक्लूड करने की जरूरत
  2500. 1:39:30नहीं होती है। ठीक है? क्योंकि हम यहां पे
  2501. 1:39:32फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड को पीरियड कॉस्ट
  2502. 1:39:34की तरह ट्रीट कर लेते हैं। तो ट्रीटमेंट
  2503. 1:39:35ईजी हो जाता है। तो ये कुछ फायदे हैं सब
  2504. 1:39:38मार्जिनल कॉस्टिंग के। नुकसान क्या है?
  2505. 1:39:39नुकसान ये है कि एक तो ये अकाउंटिंग
  2506. 1:39:41स्टैंडर्ड की रिक्वायरमेंट को फुलफिल नहीं
  2507. 1:39:42करती। एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग आईएस टू की
  2508. 1:39:44रिक्वायरमेंट को फुलफिल करता है। मार्जिनल
  2509. 1:39:46कॉस्टिंग नहीं करती। तो इन्वेंटरी एट द
  2510. 1:39:48एंड ऑफ द पीरियड इज़ नॉट वैल्यूड इन लाइन
  2511. 1:39:50विद द रिलेवेंट इंटरनेशनल एकाउंटिंग
  2512. 1:39:52स्टैंडर्ड। इन सही से अकाउंटिंग के हिसाब
  2513. 1:39:54से वैल्यूएशन निकालने के लिए आपको
  2514. 1:39:55एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग को कैलकुलेट करना ही
  2515. 1:39:57पड़ेगा। प्लस यहां पे जो प्रॉफिट आएंगे
  2516. 1:39:59उसको भी एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग से आपको
  2517. 1:40:00रिकंसाइल करना पड़ेगा क्योंकि एजॉर्प्शन
  2518. 1:40:02कॉस्टिंग वाला प्रॉफिट सही माना जाता है।
  2519. 1:40:04और यहां पे जो प्रोडक्शन कॉस्ट है आप सारी
  2520. 1:40:06की सारी प्रोडक्शन कॉस्ट को तो इंक्लूड ही
  2521. 1:40:08नहीं कर रहे हो। तो यहां पे जो आपकी कॉस्ट
  2522. 1:40:09आ रही है उसके बेसिस पे आप सेलिंग प्राइस
  2523. 1:40:12डिसाइड नहीं कर सकते। वो पार्शियल कॉस्ट
  2524. 1:40:13होती है। ठीक है साहब? तो ये सेलिंग
  2525. 1:40:16प्राइस को डिसाइड करने में हेल्प नहीं
  2526. 1:40:17करती। ठीक है ना? तो नहीं कह सकते डज़ नॉट
  2527. 1:40:21हेल्प इन डिसाइडिंग सेलिंग प्राइस।
  2528. 1:40:37जब एक्चुअल कॉस्ट ही नहीं पता है तो सही
  2529. 1:40:39सेलिंग प्राइस निकाल नहीं पाओगे।
  2530. 1:40:42यहीं पे एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का फायदा
  2531. 1:40:44क्या है? देखो मार्जिनल कॉस्टिंग में
  2532. 1:40:45डिसवांटेज ये था कि ये IS2 को की
  2533. 1:40:48रिक्वायरमेंट को फुलफिल नहीं करता और ये
  2534. 1:40:49सेलिंग प्राइस निकालने में हेल्प नहीं
  2535. 1:40:50करता। तो एब्जॉर्प्शन ये दोनों काम करेगा।
  2536. 1:40:52तो अब्सॉर्प्शन का फायदा है कि एक तो यह
  2537. 1:40:54आईएस2 की रिक्वायरमेंट को फुलफिल करता है।
  2538. 1:40:56इसके बेसिस पर जो आपका इन्वेंटरी
  2539. 1:40:58वैल्यूएशन आता है वो बिल्कुल अकाउंटिंग
  2540. 1:40:59स्टैंडर्ड्स को फॉलो करता है। दूसरा ये
  2541. 1:41:02आपकी सारी कॉस्ट को इंक्लूड करता है। तो
  2542. 1:41:04इसके बेसिस पे आप अपनी प्रोडक्ट की बेटर
  2543. 1:41:05कॉस्ट वगैरह बेटर प्राइस वगैरह निकाल सकते
  2544. 1:41:07हो। ठीक है? तो प्रोडक्ट की प्राइिंग
  2545. 1:41:09निकालनी हो, प्रोडक्ट की एक्चुअल कॉस्ट
  2546. 1:41:11निकालनी हो, कंपनी का एक्चुअल प्रॉफिट
  2547. 1:41:13निकालना हो, यह सब करने में अब्सॉर्प्शन
  2548. 1:41:14कॉस्टिंग हेल्प करता है। ठीक है ना?
  2549. 1:41:33एक और फायदा ये है। अच्छा अब नुकसान क्या
  2550. 1:41:35होगा? नुकसान ये होगा कि बड़ा भाई ये
  2551. 1:41:36कॉम्प्लिकेटेड है। इसमें टाइम बहुत लगेगा।
  2552. 1:41:38इसमें अंडर एब्सॉर्प्शन ओवर एजॉर्प्शन
  2553. 1:41:40होगा तो कॉम्प्लिकेटेड है। प्लस यह डिसीजन
  2554. 1:41:42मेकिंग में काम ज़्यादा नहीं करता। शॉर्ट
  2555. 1:41:44टर्म डिसीज़ मेकिंग के ज़्यादा काम नहीं
  2556. 1:41:45आता। ठीक है? एक प्रॉफिट और है
  2557. 1:41:48अब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का क्योंकि
  2558. 1:41:49अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग में अंडर या ओवर
  2559. 1:41:51अब्सॉर्प्शन अपन निकालते हैं। आगे जाके
  2560. 1:41:53अपन इसी टॉपिक को लिंक करेंगे स्टैंडर्ड
  2561. 1:41:55कॉस्टिंग से। स्टैंडर्ड कॉस्टिंग में यही
  2562. 1:41:57अंडर या ओवर एब्सॉर्प्शन आपका वेरियंस
  2563. 1:41:59बनता है। और फिर आप ये भी आइडेंटिफाई करते
  2564. 1:42:01हो कि वेरियंस क्यों आया? क्या हमारी
  2565. 1:42:04कॉस्ट पर यूनिट की कैलकुलेशन खराब थी या
  2566. 1:42:07हमारे आउटपुट की कैलकुलेशन खराब थी। ठीक
  2567. 1:42:10है? उसके बेसिस पे आप नेक्स्ट पीरियड में
  2568. 1:42:12अपनी कॉस्ट को कंट्रोल में रखने की कोशिश
  2569. 1:42:14कर सकते हो या कॉस्ट कंट्रोल को इंप्रूव
  2570. 1:42:16कर सकते हो। ठीक है ना? तो ये अपने को
  2571. 1:42:19कॉस्ट कंट्रोल में भी हेल्प करता है। तो
  2572. 1:42:21इट हेल्प्स टू कंट्रोल कॉस्ट। अंडर एंड
  2573. 1:42:23ओवर एब्सॉर्प्शन इज़ एनालाइज़्ड। ये जो अंडर
  2574. 1:42:24एब्जॉर्प्शन है ना यही अपने को वेरियंस
  2575. 1:42:26बताता है। ये अंडर एब्सॉर्प्शन ओवर
  2576. 1:42:27एब्सॉर्प्शन आगे जाके वेरियंस बनता है। तो
  2577. 1:42:29ये वेरियंस को आप एनालाइज़ करते हो कि
  2578. 1:42:31वेरियंस आया तो क्यों आया? इसके बेसिस पे
  2579. 1:42:32आप अगले पीरियड में बेटर तरीके से काम कर
  2580. 1:42:35पाओगे। कॉस्ट के ऊपर बेटर कंट्रोल रख पाते
  2581. 1:42:37हो। तो ये आपको मोटा-मोटी हेल्प करता है।
  2582. 1:42:39ठीक है? ठीक है? तो ये एडवांटेजेस अपने
  2583. 1:42:41एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के। ये डिसवांटेजेस
  2584. 1:42:43एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के। और यहीं पे कुछ
  2585. 1:42:44एडवांटेज डिसवांटेज मार्जिनल कॉस्टिंग के
  2586. 1:42:46भी हैं। ठीक है? तो इनको अपने को ध्यान
  2587. 1:42:49में रखना है। ठीक है साहब? इसी के साथ में
  2588. 1:42:53अपना ये लेक्चर होता है सब यहां पे
  2589. 1:42:55कंप्लीट। तो आई होप कि इस लेक्चर को देखने
  2590. 1:42:57के बाद में आपके एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग और
  2591. 1:42:59मार्जिनल कॉस्टिंग को लेके जितने भी
  2592. 1:43:00डाउट्स हैं, जितने भी आपके कह लो कि नॉलेज
  2593. 1:43:02में गैप्स हैं वो फिल हुए होंगे। आपको
  2594. 1:43:04मैंने बहुत बेसिक से कांसेप्ट वगैरह समझाए
  2595. 1:43:06हैं। तो इन कांसेप्ट्स को एक बार अच्छे से
  2596. 1:43:08पढ़ो। इनको अच्छे से कॉपी में नोट करो।
  2597. 1:43:10नोट्स वगैरह बनाओ इनके और फिर इनके
  2598. 1:43:12क्वेश्चंस को सॉल्व करो। आपके अब्सॉर्प्शन
  2599. 1:43:14और मार्जिनल कॉस्टिंग के सारे क्वेश्चंस
  2600. 1:43:15फिर सही होंगे। ठीक है साहब? चलिए तो आज
  2601. 1:43:18के इस लेक्चर को फिर एक बार यहीं पर ओवर
  2602. 1:43:19करते हैं। मिलते हैं आपसे फिर नेक्स्ट
  2603. 1:43:21वीडियो में। थैंक यू सो मच।

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