ACCA Knowledge Level MA | Absorption & Marginal Costing : Management Accounting | Aadhar Batch — Transcript
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- 0:01हेलो स्टूडेंट्स कैसे हैं आप सब लोग? मैं
- 0:04आप लोगों का मेंटर दोस्त एंड गाइड निमेशन
- 0:06हाजिर हूं आप लोगों के सामने हमारे
- 0:08मैनेजमेंट अकाउंटिंग के आधार बैच के
- 0:10नेक्स्ट लेक्चर के साथ में। आज की इस
- 0:13क्लास में इस लेक्चर में मैं आप लोगों के
- 0:14साथ में बातचीत करने वाला हूं एब्सॉर्प्शन
- 0:16एंड मार्जिनल कॉस्टिंग के बारे में।
- 0:18अब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग को लेके मैंने आपको
- 0:20थोड़ा बहुत इंट्रोडक्शन दिया था जब हम
- 0:23अबजॉर्प्शन सॉरी ओवरहेड्स के अंदर हम
- 0:26एलोकेशन अपॉर्शनमेंट और एब्सॉर्प्शन के
- 0:29बारे में बातचीत कर रहे थे। आज आगे की
- 0:31बातचीत करेंगे कि एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग
- 0:32एक्चुअली में और क्या-क्या चीजें हमें
- 0:34बताती है और मार्जिनल कॉस्टिंग नाम की जो
- 0:37दूसरी कॉस्टिंग है, इन दोनों में क्या
- 0:39डिफरेंस है? इन दोनों की क्या मतलब
- 0:41थ्योरिटिकल बैकग्राउंड है? ये किस तरीके
- 0:43से हमारे मैनेजमेंट अकाउंटिंग में हमें
- 0:45कहां-कहां पर हमें हेल्प करती हैं? किस
- 0:47तरीके से इनको यूज़ करा जाता है। ठीक है
- 0:49साहब। चलिए तो बातचीत स्टार्ट करते हैं।
- 0:53अ हमेशा की तरह भाई ये लिंक है इस बैच का
- 0:56आधार बैच का। तो किसी को भी बच्चे को अगर
- 0:58इन सेशंस की पीडीएफ चाहिए, नोट्स की
- 1:00पीडीएफ चाहिए, आपको लेक्चर्स वगैरह और
- 1:03देखने हैं, करने हैं तो आप इस बैच में जा
- 1:05सकते हैं। यहां पर आपको बैच की
- 1:06रिकॉर्डिंग्स वगैरह और पीडीएफ वगैरह मिल
- 1:08जाएगी। क्यूआर कोड स्कैन कर सकते हो। चाहो
- 1:10तो लिंक पे क्लिक कर सकते हो।
- 1:15हां जी। तो सबसे पहले बातचीत स्टार्ट करते
- 1:17हैं एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग के साथ में। हम
- 1:20लोगों ने ओवरहेड्स के चैप्टर में बात करी
- 1:23थी कि एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग क्या होती है
- 1:25साहब? एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग एक कॉस्टिंग
- 1:27का एक ब्रांच है जो ये बोलता है जिसे हम
- 1:30फुल कॉस्टिंग भी कहते हैं। जो ये कहता है
- 1:31किसी प्रोडक्ट की अगर आपको टोटल कॉस्ट
- 1:33निकालनी है। अगर प्रोडक्ट की टोटल कॉस्ट
- 1:35निकालनी है तो आपको
- 1:38जितने भी प्रोडक्शन ओवरहेड्स हैं चाहे वो
- 1:40वेरिएबल नेचर के हो, चाहे वो फिक्स्ड नेचर
- 1:42के हो। आपको सबको ऐड करना पड़ेगा। यह
- 1:46टेक्निकली वेरिएबल और फिक्स की बात तो
- 1:48करता भी नहीं है। अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग को
- 1:50यह कहता है के खर्चे जो है वो दो टाइप के
- 1:53होते हैं। या तो रिलेटेड टू प्रोडक्शन या
- 1:56नॉट रिलेटेड टू प्रोडक्शन। मतलब प्रोडक्शन
- 1:58कॉस्ट या नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट। और जितनी
- 2:01भी प्रोडक्शन कॉस्ट्स हैं वो सारी की सारी
- 2:03आपके इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन के अंदर
- 2:06प्रोडक्शन वैल्यू्यूएशन के अंदर इंक्लूड
- 2:08होनी चाहिए। तो अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का
- 2:11जो बेस है वो क्या कहता है? अब्सॉर्प्शन
- 2:13कॉस्टिंग इज अ मेथड ऑफ शेयरिंग एंड
- 2:15अब्सॉर्बिंग इनडायरेक्ट कॉस्ट जो आपकी
- 2:17ओवरहेड्स हैं इनू टोटल कॉस्ट ऑफ यूनिट ऑफ
- 2:19अ प्रोडक्ट और सर्विस। हम कहते हैं कि ये
- 2:21जो मेथड है ये आपको बताता है किस तरीके से
- 2:23आप शेयर करते हो। किस हिसाब से आप
- 2:25एब्सॉर्ब करते हो आपकी इनडायरेक्ट कॉस्ट
- 2:27को जो आपके ओवरहेड्स हैं इंटू किसमें?
- 2:28इंटू टोटल कॉस्ट। ताकि आप एक यूनिट की
- 2:30टोटल कॉस्ट निकाल सको। यहां पर हम कहते
- 2:33हैं कि आप सारे के सारे ओवरहेड्स चाहे वो
- 2:35वेरिएबल हो चाहे फिक्स्ड हो। उन सबको
- 2:37इंक्लूड करने की कोशिश करते हो। ठीक है?
- 2:40इंक्लूड्स ऑल ओवरहेड कॉस्ट इन अ वेरिएबल
- 2:43और फिक्स्ड इन कॉस्ट फिगर्स सो दैट
- 2:44प्राइसेस एट व्हिच द गुड्स एंड सर्विज आर
- 2:46सोल्ड कैन कवर लॉन्ग टर्म ओवरहेड्स एंड
- 2:49प्राइम कॉस्ट। ऐसा हम क्यों कर रहे हैं?
- 2:51हम क्यों कह रहे हैं कि ओवरहेड्स की कॉस्ट
- 2:53को भी आप इंक्लूड करो। ताकि आपके जो
- 2:55प्रोडक्ट की कॉस्ट है ना वो सिर्फ प्राइम
- 2:58कॉस्ट को कवर नहीं करें। क्योंकि डायरेक्ट
- 3:00मटेरियल, डायरेक्ट लेबर, डायरेक्ट
- 3:01एक्सपेंस ये तो आपकी प्राइम कॉस्ट में
- 3:02आपने इंक्लूड कर दिया है। बट उसके अलावा
- 3:04जो बाकी के एक्सपेंसेस हैं जो प्रोडक्शन
- 3:06में हेल्प करते हैं, जब तक आप उनको
- 3:08इंक्लूड नहीं करोगे तब तक आपको पता ही
- 3:10नहीं पड़ेगा कि भ आपकी फैक्ट्री में आपकी
- 3:12कंपनी में कौन-कौन से एक्सपेंसेस हो रहे
- 3:14हैं और उनका किस तरीके से कि प्रोडक्ट की
- 3:16कॉस्ट पे फर्क पड़ता है। और अगर आपने सारे
- 3:18कॉस्ट को इंक्लूड ही नहीं करा है तो आपकी
- 3:20सेलिंग प्राइस सही नहीं आएगी। सेलिंग
- 3:22प्राइस सही सही नहीं आएगी तो आप अपनी सारी
- 3:24की सारी कॉस्ट को रिकवर ही नहीं कर पाओगे।
- 3:26और जब पूरी की पूरी कॉस्ट रिकवर नहीं होगी
- 3:28तो आपके जो एस्टीेटेड प्रॉफिट के फिगर
- 3:30हैं, ग्रॉस प्रॉफिट के फिगर्स वगैरह है वो
- 3:32ऑब्वियस सी बात है गलत आएंगे। फॉर
- 3:33एग्जांपल मान लो कि आपने सिर्फ प्राइम
- 3:36कॉस्ट को कैलकुलेट करा क्योंकि वो
- 3:37डायरेक्टली ट्रेसेबल होती है। उसको सब
- 3:38कैलकुलेट कर भी लेते हैं। तो वो पता पड़ा
- 3:40किसी प्रोडक्ट को बनाने की डायरेक्ट कॉस्ट
- 3:42आ रही है मान लो 10। ठीक है? आपको लगा सर
- 3:4410 का प्रोडक्ट है। हम इसको 15 में
- 3:46मार्केट में बेच देते हैं। आपको लग रहा है
- 3:48आपने फाइव की मार्जिन कमाई है। ठीक है?
- 3:50कॉस्ट के ऊपर आप 50% का मार्जिन लेके बैठे
- 3:52हो। सेलिंग प्राइस के ऊपर 33.33% का आपका
- 3:56प्रॉफिट मार्जिन है। आपको बढ़िया चीज लग
- 3:57रही है। बट जब रियलिटी सामने ये पता पड़ा
- 4:00कि यार आपने जब प्रॉफिट निकाल के देखा
- 4:01एक्चुअली में पता पड़ा सर हमारा प्रॉफिट
- 4:03तो उतना नहीं आ रहा है। बोले क्यों नहीं आ
- 4:04रहा? जब अपन तो 33.33% की मार्जिन पे सेल
- 4:07कर रहे हैं। हमारी कॉस्ट पे 50% के
- 4:09मार्कअप पे सेल कर रहे हैं। 10 की कॉस्ट
- 4:11है। 15 में बेच रहे हैं। पांच की प्रॉफिट
- 4:13होना चाहिए। पता पड़ेगा कि सर वो कॉस्टिंग
- 4:15गलत थी। वो कुछ दूसरे खर्चे भी तो हैं जो
- 4:17हम इन्हें इंक्लूड ही नहीं करे। तो बोले
- 4:19क्यों इंक्लूड नहीं कर रहे? क्योंकि हम
- 4:20एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग को फॉलो नहीं कर रहे
- 4:22थे। तो एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग इसलिए कहता
- 4:23है कि जब तक आप सारे के सारे एक्सपेंसेस
- 4:25को इंक्लूड नहीं करोगे तो फिर सही प्रॉफिट
- 4:27कहां से आएगा? उसका एस्टीमेट ही नहीं लगा
- 4:28पाओगे। ठीक है? साहब तो इसलिए एब्जॉर्प्शन
- 4:31कॉस्टिंग काम की है। इसलिए इसको अपन फुल
- 4:32कॉस्टिंग भी कहते हैं। इसी में हमने
- 4:34अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का प्रोसेस पढ़ा था।
- 4:35पिछले चैप्टर में ओवरहेड्स में इसमें कहा
- 4:37सबसे पहले कोशिश करते हैं कि खर्चों को
- 4:38एलोकेट कर दो। ठीक है? फिर अपोरर्शन कर
- 4:41दो। अब ये दोनों होने के बाद में
- 4:42री-अपॉर्शनमेंट करा जाता है। पहले आप आपके
- 4:45जो ओवरहेड की कॉस्ट है उसको आप अपने
- 4:47प्रोडक्शन कॉस्ट सेंटर और सर्विस कॉस्ट
- 4:48सेंटर्स पे एलोकेट और अपोरर्शन करने की
- 4:50कोशिश करते हो। फिर उसके बाद में सर्विस
- 4:52सेंटर के जो कॉस्ट है उनको वापस से
- 4:53प्रोडक्शन कॉस्ट सेंटर्स पर ट्रांसफर करते
- 4:55हो रीप्रोचमेंट कहते हैं। और लास्ट में जो
- 4:58आपके पास में प्रोडक्शन कॉस्ट सेंटर के
- 4:59खर्चे हैं उसको आप पर यूनिट में एब्जॉर्ब
- 5:02करने की कोशिश करते हो। उसे अपन
- 5:03एब्जॉर्प्शन कहते हैं ओआर कैलकुलेट करके।
- 5:05ये सब अपन ने ओवरहेड वाले चैप्टर में देख
- 5:07लिया था।
- 5:08अब आता है दूसरा मार्जिनल कॉस्टिंग। चलो
- 5:11एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग तो ये कहता है कि
- 5:13आपको प्रोडक्ट की कॉस्ट निकालने के लिए
- 5:14सारी की सारी कॉस्ट को इंक्लूड करना
- 5:16चाहिए। ठीक है? एक चीज और ध्यान रखना
- 5:18एमसीक्यू में काम आएगी। अब्सॉर्प्शन
- 5:20कॉस्टिंग क्या कहता है? अब्सॉर्प्शन
- 5:22कॉस्टिंग डिवाइड करता है कॉस्ट को इनू
- 5:23प्रोडक्शन एंड नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट।
- 5:47ये कॉस्ट को दो पार्ट में डिवाइड करता है।
- 5:49ये कहता है कि कुल मिला के कंपनी में जो
- 5:51भी खर्चे हो रहे हैं वो दो टाइप के हैं।
- 5:52वन ऑफ़ द टू टाइप। या तो वो प्रोडक्शन में
- 5:54हेल्प कर रहे हैं। किसी तरीके से
- 5:55डायरेक्टली इनडायरेक्टली तो प्रोडक्शन
- 5:57कॉस्ट का पार्ट है। डायरेक्टली कर रहे हैं
- 5:58तो प्राइम कॉस्ट का पार्ट है।
- 6:00इनडायरेक्टली कर रहे हैं तो प्रोडक्शन
- 6:01ओवरहेड का पार्ट है। या फिर
- 6:04कॉस्ट इंकर्ड इंटू प्रोडक्शन कॉस्ट और फिर
- 6:06वह खर्चे जो प्रोडक्शन के काम नहीं आ रहे
- 6:08उन्हें अपन नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट बोल
- 6:10देंगे।
- 6:15ठीक है? तो अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग ये चीज
- 6:17बोलती है कि भ अपनी जितनी भी कॉस्ट आप
- 6:19इंकर कर रहे हो कंपनी में वो दो कैटेगरी
- 6:22में डिवाइड हो सकती है। प्रोडक्शन कॉस्ट
- 6:23नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट। ठीक है सर?
- 6:42अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग क्या कहती है? जो
- 6:43कॉस्ट्स हैं उनको आप दो पार्ट में डिवाइड
- 6:46कर सकते हो। इदर या तो
- 6:50प्रोडक्शन रिलेटेड कॉस्ट या नॉन प्रोडक्शन
- 6:52रिलेटेड कॉस्ट।
- 7:01प्रोडक्शन कॉस्ट को वापस आप दो पार्ट में
- 7:02डिवाइड कर सकते हो। एक आपकी प्राइम कॉस्ट,
- 7:05वो कॉस्ट जो डायरेक्टली ट्रेसेबल है और एक
- 7:08आपके प्रोडक्शन ओवरहेड्स।
- 7:13नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट में आपके बच गए जितने
- 7:15भी नॉन प्रोडक्शन ओवरहेड्स आते हैं।
- 7:20ठीक है? प्रोडक्शन ओवरहेड, नॉन प्रोडक्शन
- 7:22ओवरहेड इन सबके बारे में हमने कॉस्ट
- 7:23क्लासिफिकेशन वाले चैप्टर में बहुत डिटेल
- 7:25में बात कर रखी है। आप उस वाली वीडियो को
- 7:27देख करके इन कांसेप्ट्स को और क्लेरिफाई
- 7:29कर सकते हो। जिन बच्चों को इन कांसेप्ट्स
- 7:30में थोड़े डाउट है तो वो आप एक बार कॉस्ट
- 7:32क्लासिफिकेशन का लेक्चर देख लो। उसमें
- 7:34आपके ये कांसेप्ट्स वहां पे क्लियर हो
- 7:36जाएंगे। ठीक है? फिर आता है मार्जिनल
- 7:39कॉस्टिंग। अब कहते हैं मार्जिनल कॉस्टिंग
- 7:41क्या होती है? तो कहते हैं मार्जिनल
- 7:42कॉस्टिंग इज़ अ कॉस्टिंग मेथड यूज्ड फॉर
- 7:43शॉर्ट टर्म डिसीजन मेकिंग। मार्जिनल
- 7:45कॉस्टिंग में और एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग
- 7:47मतलब जब एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग था और सही
- 7:49भी है। एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग के बारे में
- 7:51अभी हम आगे भी बात करेंगे। एब्जॉर्प्शन
- 7:52कॉस्टिंग एस पर आईएस टू जो अपने अकाउंटिंग
- 7:55स्टैंडर्ड्स की रिक्वायरमेंट है उसको भी
- 7:56फुलफिल करता है। ओवरहेड्स वाले चैप्टर में
- 7:58भी हमने बात करी थी कि एब्जॉर्प्शन
- 8:00कॉस्टिंग की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि
- 8:01आईएस टू की रिक्वायरमेंट होती है कि आप
- 8:03इन्वेंटरी को अपनी फुल कॉस्ट पे रिकॉर्ड
- 8:05करोगे। ठीक है? और फुल कॉस्ट निकालने के
- 8:07लिए ही एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग बना है। तो
- 8:08इसका मतलब एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग जो है वो
- 8:10एकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स की रिक्वायरमेंट को
- 8:11भी फुलफिल करता है। तो फिर ये दूसरा मेथड
- 8:14क्यों बना? मार्जिनल कॉस्टिंग या
- 8:15अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग इतना ही बढ़िया मेथड
- 8:17है। सारी रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट्स को
- 8:19एकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स की रिक्वायरमेंट को
- 8:20फुलफिल भी कर रहा है। सही कॉस्ट निकालने
- 8:22में हम कहते हैं कि अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग
- 8:24ही सही है जो आपको सही कॉस्ट निकाल के भी
- 8:26देगा। तो मार्जिनल कॉस्टिंग की जरूरत
- 8:28क्यों पड़ी? कभी-कभी ये दिमाग में आना
- 8:29चाहिए आपके दिमाग में कि भ जब एक मेथड था
- 8:32तो उसके अगेंस्ट में दूसरा मेथड क्यों
- 8:34क्रिएट करा गया? मे बी कोई प्रॉब्लम रही
- 8:36होगी हमारी एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग की जो
- 8:38शायद एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग सॉल्व नहीं कर
- 8:40पा रही थी। इसीलिए मार्जिनल कॉस्टिंग की
- 8:42जरूरत पड़ी तो यस सर। कुछ प्रॉब्लम्स हैं
- 8:44हमारे पास में। सबसे पहली प्रॉब्लम तो
- 8:46हमारे पास में आती है कि अब्सॉर्प्शन
- 8:47कॉस्टिंग जो है ना साहब वो एक बहुत ही
- 8:50डिटेल्ड बहुत ही कॉम्प्लेक्स मेथड है।
- 8:52उसमें आपको ओआर अब्सॉर्प्शन वगैरह करनी
- 8:55पड़ेगी। उसमें फिर अंडर एब्सॉर्प्शन ओवर
- 8:57अब्सॉर्प्शन का भी इशू वगैरह सब आता है।
- 8:59तो ऑटोमेटिकली अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग जो है
- 9:02वो एक बहुत ही डिटेल्ड अप्रोच की तरह काम
- 9:04करती है। उसमें आपको मेहनत भी बहुत करनी
- 9:08पड़ेगी। टाइम भी लगेगा। सेकंडली
- 9:12अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के अंदर हम फिक्स्ड
- 9:14कॉस्ट वगैरह को भी इंक्लूड कर लेते हैं।
- 9:16और इसमें कुछ ऐसी कॉस्ट होती है जिनका
- 9:18एक्चुअल फिगर आपको लॉन्ग टर्म में जाके
- 9:20पता पड़ता है। या कुछ ऐसी कॉस्ट होती है
- 9:24फिक्स्ड कॉस्ट में स्पेसिफिकली हम कहते
- 9:25हैं जिनका हमारे आउटपुट लेवल पे आउटपुट
- 9:28लेवल से कोई रिलेशन होता भी नहीं है।
- 9:31तो मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स को ये फील हुआ
- 9:34कि यार एक ऐसा मेथड होना चाहिए शॉर्टकट
- 9:36मेथड। इतना डिटेल्ड नहीं अब्सॉर्प्शन
- 9:38कॉस्टिंग जितना जिसमें एडहॉक बेसिस पे जब
- 9:41अर्जेंट बेसिस पे कोई डिसीजन लेना है
- 9:42शॉर्ट टर्म में कोई डिसीजन लेना है तो
- 9:44उसमें हमें हेल्प मिल सके। सेकंडली उनको
- 9:47ये भी समझ में आया कि शॉर्ट टर्म के अंदर
- 9:50जब आप ये कंपनी ये डिसाइड करी कि क्या ये
- 9:52एडिशनल यूनिट्स आपको प्रोड्यूस करने चाहिए
- 9:54या नहीं चाहिए। उस डिसीजन में यह जो
- 9:58फिक्स्ड कॉस्ट है ना इनको अपन कंसीडर भी
- 10:00नहीं करते हैं। फॉर एग्जांपल जैसे आपने एक
- 10:03फैक्ट्री चालू करी एक रेंट पे फैक्ट्री ली
- 10:06वेयर हाउस को रेंट वगैरह पे ले रखा है। सब
- 10:07कुछ हो गया। आपने अपना बिज़नेस स्टार्ट
- 10:09करा। अब आपको एक-एक करके ऑर्डर मिल रहा
- 10:11है। अब मान लो आपके पास में कोई एक कस्टमर
- 10:14आता है जो आपसे कुछ नए गुड्स ऑर्डर करता
- 10:16है और आप उस पे प्राइस पे नेगोशिएट कर रहे
- 10:19हो। या उस टाइम पे जब आप प्राइस नेगोशिएट
- 10:22कर रहे हो। तो क्या आपके दिमाग में ये
- 10:23आएगा कि मुझे फैक्ट्री का रेंट भी रिकवर
- 10:25करना है या मुझे मेरे वेयर हाउस का रेंट
- 10:27भी रिकवर करना है या मुझे मेरे जो दूसरे
- 10:30अकाउंटिंग स्टाफ है उनकी सैलरी भी रिकवर
- 10:32करनी है। आप उस टाइम पे क्या सोचोगे यार
- 10:35इस प्रोडक्ट को बनाने का मेरा खर्चा कितना
- 10:38है जिसे अपन वेरिएबल कॉस्ट कहते हैं। ठीक
- 10:40है? जो डायरेक्टली प्रोडक्शन से रिलेट
- 10:42करती है। एक यूनिट को बनाने में कितना
- 10:44खर्चा होगा? वो वेरिएबल कॉस्ट होती है।
- 10:46ठीक है? तो अगर मान लो 1000 यूनिट्स का
- 10:48ऑर्डर आया। आपको पता है यार एक यूनिट को
- 10:50बनाने में मोटा-मोटे जितने भी वेरिएबल
- 10:51खर्चे हैं वह मिला करके मान लो ₹8 का
- 10:54खर्चा होता है। तो 1000 यूनिट्स को बनाने
- 10:57में 8000 का आपका खर्चा है। अब आप प्राइस
- 11:00पे नेगोशिएट कर रहे हो। मान लो सामने वाला
- 11:01बंदा आपको कह रहा है कि मैं आपको 15 आप 15
- 11:04कोट कर रहे हो वो 12 मांग रहा है। तो आपके
- 11:06दिमाग में क्या चलेगा? अच्छा 12 की अगर
- 11:07प्राइस पे मैं एग्री कर लूं तो 12 - 8 फोर
- 11:10का मेरे पास में बेनिफिट बचा। इसको अपन
- 11:12कंट्रीब्यूशन भी कहते हैं। नॉर्मल दिमाग
- 11:15में यही चलता है सबके। उस पॉइंट पर आप
- 11:17रेंट का हिस्सा आप यह नहीं देखोगे कि
- 11:20अच्छा मेरे बाकी के फिक्स्ड कॉस्ट का
- 11:22कितना हिस्सा इस 1000 यूनिट्स पर जाएगा।
- 11:24यह सब चीजें उस वक्त दिमाग में क्योंकि
- 11:25इतनी कैलकुलेशन करना शॉर्ट टर्म में और उस
- 11:27मूवमेंट पे पॉसिबल नहीं होता है। तो
- 11:29नॉर्मल बिनेस में हमें ये समझ में आया कि
- 11:31नॉर्मल बिनेसमैन जब बेसिक एवरीडे बेसिस पे
- 11:36डिसीजंस ले रहा होता है कि नए ऑर्डर को
- 11:38एक्सेप्ट करना है नहीं करना है। क्या वो
- 11:39प्राइस एक्सेप्टेबल है या नहीं है? तो उस
- 11:42टाइम पे वो अब्सॉर्प्शन कॉस्ट के बारे में
- 11:44नहीं सोचता है। वो सिर्फ वेरिएबल कॉस्ट के
- 11:46बारे में सोचता है क्योंकि उनको ट्रेस
- 11:49करना आसान है। उनको पर यूनिट में कैलकुलेट
- 11:51करना आसान है। तो फिर हमने कहा जब यही चीज
- 11:54यूज़ हो रही है। तो इसी को शॉर्ट टर्म में
- 11:57हम एक बिल्कुल एक फॉर्मल मेथड का नाम दे
- 11:59देते हैं। तो फिर इस जो एक नॉर्मल डे टू
- 12:02डे प्रैक्टिस थी जो ऑलरेडी हमें देखने को
- 12:03मिल रही थी। हमने उसको बस एक नाम दे दिया
- 12:05और उसका नाम हम आज कहते हैं मार्जिनल
- 12:07कॉस्टिंग। तो मार्जिनल कॉस्टिंग कोई अलग
- 12:09से ऐसा मेथड डेवलप नहीं हुआ है। ये बस
- 12:11ऑब्जर्व करा गया कि ओवर टाइम बिजनेस में
- 12:14नॉर्मल डे टू डे एक्टिविटीज में जब
- 12:16बिनेसमैन कोई डिसीजन लेता है तो वो सिर्फ
- 12:18वेरिएबल कॉस्ट को ये कंसीडर करता है। तो
- 12:21फिर हमने कहा कि इसको एक फॉर्मल नाम भी
- 12:22देना चाहिए। तो हमने उस उस टेक्निक को
- 12:25मार्जिनल कॉस्टिंग बोलना स्टार्ट कर दी।
- 12:27तो मार्जिनल कॉस्टिंग को इसलिए हम कहते
- 12:28हैं कि शॉर्ट टर्म डिसीजन मेकिंग में बड़ी
- 12:30काम आती है। ये जो है कॉस्टिंग ये कॉस्ट
- 12:33को डिवाइड करती है फिक्स्ड और वेरिएबल के
- 12:35नेचर पे। एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग फिक्स्ड और
- 12:36वेरिएबल की बात ही नहीं करती। वो तो कहती
- 12:38है खर्चे प्रोडक्शन या नॉन प्रोडक्शन के
- 12:39होते हैं। अब चाहे वो फिक्स्ड हो चाहे
- 12:41वेरिएबल हो उससे उसको फर्क नहीं पड़ रहा।
- 12:42उनका जो मेजर मेजर क्राइटेरिया है वो है
- 12:45प्रोडक्शन और नॉन प्रोडक्शन का। मार्जिनल
- 12:47कॉस्टिंग कहती है नहीं नहीं हमारे लिए
- 12:49कॉस्ट का बिहेवियर कि वो फिक्स्ड है या
- 12:52वेरिएबल है बड़ा इंपॉर्टेंट है। क्योंकि
- 12:55हम दोनों को डिफरेंट तरीके से ट्रीट
- 12:56करेंगे। यहां पे फिक्स्ड कॉस्ट को पीरियड
- 12:58कॉस्ट माना जाता है। क्या होती है पीरियड
- 13:00कॉस्ट अभी बात करेंगे। ठीक है? और वेरिएबल
- 13:02कॉस्ट को डिसीजन मेकिंग में कंसीडर करा
- 13:04जाता है। तो इसलिए ये इंपॉर्टेंट बना। ठीक
- 13:06है साहब। अब क्या कंपैरिजन है? तो हम कहते
- 13:08हैं भज्जॉर्प्शन कॉस्ट मार्जिनल कॉस्टिंग
- 13:10बेसिकली दो डिफरेंट मेथड्स हैं टू डील विद
- 13:13प्रोडक्शन ओवरहेड्स। इन दोनों में डिफरेंस
- 13:14प्रोडक्शन ओवरहेड की डीलिंग को लेकर के
- 13:16है। एज़ अ रिजल्ट जब दोनों मेथड का तरीका
- 13:18अलग है। तो दोनों से जो प्रॉफिट का फिगर
- 13:20आएगा वो भी अलग आएगा। दोनों से इन्वेंटरी
- 13:22का वैल्यूएशन भी अलग-अलग आता है। एज़ अ
- 13:24रिजल्ट दे मे प्रोड्यूस प्रोड्यूस प्रॉफ़िट
- 13:27फिगर्स फॉर एन अकाउंटिंग पीरियड दैट
- 13:28डिफर्स फ्रॉम ईच अदर एंड
- 13:34डिफरेंट इन्वेंटरी वैल्यूएशंस आल्सो इनमें
- 13:36प्रॉफिट और इन्वेंटरी वैल्यूएशन दोनों एक
- 13:38दूसरे से अलग-अलग आते हैं।
- 13:41क्यों आते हैं, कैसे आते हैं वो भी बात
- 13:42करेंगे।
- 13:45इसलिए फिर हमें इन प्रॉफिट्स को रिकंसाइल
- 13:47करने की जरूरत पड़ती है। क्योंकि सही तो
- 13:48एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग ही है। सही प्रॉफिट
- 13:50तो एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग से आ रहा है। तो
- 13:52मार्जिनल के प्रॉफिट को एब्जॉर्प्शन से
- 13:53मैच करने की जरूरत पड़ती है। ठीक है ना?
- 13:56अब इसमें क्यों ये डिफरेंसेस है? इसमें
- 13:58सबसे पहला रीज़न है ट्रीटमेंट ऑफ़ फिक्स्ड
- 14:00ओवरहेड्स जिसे अपन पीरियड कॉस्ट कहते हैं।
- 14:02मार्जिनल कॉस्टिंग ने बोला कि भ ये जो
- 14:04फिक्स्ड ओवरहेड्स है ना इसे हम बोलेंगे
- 14:06पीरियड कॉस्ट। ठीक है? मार्जिनल कॉस्टिंग
- 14:09फिक्स्ड ओवरहेड्स को क्लासिफाई करती है एस
- 14:11पीरियड कॉस्ट। अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग नहीं
- 14:14कहती। अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग तो कहती है भ
- 14:15हमारे तो फिक्स्ड ओवरहेड क्या प्रोडक्शन
- 14:17के काम आ रहे हैं? तो वो प्रोडक्शन कॉस्ट
- 14:18का पार्ट टाइम है। बात खत्म। ये पीरियड
- 14:20कॉस्ट जैसी चीज वो यूज़ नहीं करते।
- 14:22मार्जिनल कॉस्टिंग वालों ने ये टर्म दी कि
- 14:25भाई ये जो फिक्स्ड ओर्स है ना ये एक
- 14:27पीरियड से रिलेट करते हैं। इसलिए इनको
- 14:29पीरियड कॉस्ट कहा जाएगा। कैसे सर? फॉर
- 14:31एग्जांपल रेंट है। रेंट एक फिक्स्ड खर्चा
- 14:33मानते हैं अपन। फिक्स्ड कॉस्ट की तरह
- 14:35मानते हैं। फैक्ट्री का रेंट है तो
- 14:36फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड भी है। अब ये जो
- 14:39फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड है, ये आपके
- 14:42पूरे साल भर का एक आप कॉन्ट्रैक्ट बनाते
- 14:44हो। ठीक है? नॉर्मली उस कॉन्ट्रैक्ट में
- 14:46लिखा होता है। ठीक है? कि भ इतने पीरियड
- 14:48तक का ये रेंट रहेगा। तो ये इतने पीरियड
- 14:51तक का ये रेंट रहेगा। अब वो कॉन्ट्रैक्ट 1
- 14:54साल का हो सकता है, 5 साल का हो सकता है,
- 14:5510 साल का हो सकता है, 11 महीने का हो
- 14:56सकता है, अलग-अलग लेंथ के हो सकते हैं।
- 14:58लेकिन उस पीरियड तक के लिए तो फिक्स हो
- 15:00गया। तो इसका मतलब ये पीरियड कॉस्ट है।
- 15:02पीरियड कॉस्ट का सिंपल लॉजिक है के
- 15:04क्योंकि फिक्स्ड कॉस्ट के एग्रीमेंट किसी
- 15:06एक पर्टिकुलर पीरियड के लिए होते हैं।
- 15:08इसलिए हम इनको पीरियड कॉस्ट बोल देते हैं।
- 15:10जनरली हम अकाउंटिंग में एक साल के हिसाब
- 15:12से बातचीत करते हैं। तो एक साल का यह रेंट
- 15:14है, तो इस साल में यही रेंट रहेगा। अब
- 15:16पूरे ईयर में प्रोडक्शन चाहे कितना भी हो
- 15:18रेंट तो फिक्स है। तो हमने कहा इस रेंट को
- 15:20फिर कंसीडर ही मत करो। ये आपके शॉर्ट टर्म
- 15:24डिसीजन मेकिंग के किसी काम का नहीं है।
- 15:26इसलिए मार्जिनल कॉस्टिंग वाले जितनी भी ये
- 15:28पीरियड कॉस्ट है इनको सीधा पीएनएल में
- 15:30ट्रांसफर कर लेते हैं। इन पीरियड कॉस्ट को
- 15:32प्रोडक्ट की कॉस्ट में इंक्लूड नहीं करते।
- 15:34इन फिक्स्ड कॉस्ट को प्रोडक्ट
- 15:36[नाक से की जाने वाली आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़]
- 15:36की कॉस्ट में इंक्लूड नहीं करते। तो कहते
- 15:38हैं पीरियड कॉस्ट आर एक्सपेंस्ड। ठीक है?
- 15:40आर एक्सपेंसेस इंकर्ड ओवर अ स्पेसिफिक
- 15:43टाइम पीरियड एंड आर नॉट टाइड टू प्रोडक्शन
- 15:45लेवल। मार्जिनल कॉस्टिंग वाले क्या कहते
- 15:46हैं कि भ पीरियड कॉस्ट वो एक्सपेंसेस हैं
- 15:48जो किसी एक स्पेसिफिक टाइम पीरियड से
- 15:49रिलेट करते हैं। जैसे इस ईयर का रेंट रेंट
- 15:51जितना भी आपका होगा। ठीक है? और वो
- 15:53प्रोडक्शन से रिलेट नहीं करते। भ आपने
- 15:55फैक्ट्री रेंट पे ले ली। अब उसमें आपने
- 15:56प्रोडक्शन कितना भी करा उससे रेंट के लेवल
- 15:58पे तो कोई फर्क पड़ेगा नहीं। ठीक है? तो
- 16:00इसलिए मार्जिनल कॉस्टिंग वाले कहते हैं कि
- 16:02जो फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड्स हैं इनको
- 16:04एक्यूमुलेट करो, इकट्ठा करो अपने
- 16:06प्रोडक्शन ओवरहेड अकाउंट में और एट द एंड
- 16:08ऑफ़ द एकाउंटिंग पीरियड इन सारे के सारे
- 16:09एक्सपेंसेस को स्पिट स्टेटमेंट ऑफ़ प्रॉफिट
- 16:11एंड लॉस में एज एक्सपेंसेस बुक कर दो।
- 16:13इसका मतलब इन खर्चों को हम इन्वेंटरी के
- 16:16वैल्यू्यूएशन में इंक्लूड नहीं करेंगे।
- 16:18ठीक है? हम ये भी कह सकते हैं कि इनको अपन
- 16:21इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन में इंक्लूड
- 16:22नहीं करते।
- 16:29ठीक है? और इसी की जगह पर एब्जॉर्प्शन
- 16:30कॉस्टिंग वाले कहते हैं कि एब्जॉर्प्शन
- 16:32कॉस्टिंग एब्जॉर्ब करती है फिक्स्ड
- 16:34ओवरहेड्स को इंटू इन्वेंटरी। तो उनकी जो
- 16:36क्लोजिंग इन्वेंटरी है उसकी कॉस्ट में एक
- 16:38हिस्सा फिक्स्ड ओवरहेड का भी रिकॉर्ड होता
- 16:41है। ठीक है? तो यहां पे मार्जिनल कॉस्टिंग
- 16:44वाले बोलते हैं कि फिक्स प्रोडक्शन
- 16:45ओवरहेड्स जितने भी आपके हैं उनको हम कॉस्ट
- 16:47का पार्ट मान के नहीं चलेंगे।
- 16:51ओवरहेड्स आर नॉट इंक्लूडेड।
- 17:09ठीक है।
- 17:12और यहीं पर जो वेरिएबल कॉस्ट है। अच्छा
- 17:14वेरिएबल कॉस्ट का ट्रीटमेंट मार्जिनल
- 17:16कॉस्टिंग हो चाहे अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग हो
- 17:18दोनों में टेक्निकली सेम है। दोनों
- 17:20वेरिएबल कॉस्ट को तो रिकॉर्ड करने की बात
- 17:22करते ही हैं। ठीक है? बट यहां पे मार्जिनल
- 17:24कॉस्ट थोड़ी अलग जाती है। मार्जिनल
- 17:26कॉस्टिंग ये कहती है कि जब आप मार्जिनल
- 17:29कॉस्ट निकाल रहे हो तो मार्जिनल कॉस्ट में
- 17:32आप वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट को तो लेके
- 17:34चलोगे ही चलोगे। वो तो आपको प्रोडक्शन की
- 17:37कॉस्ट निकाल के देगी। बट अगर आपको
- 17:38कंट्रीब्यूशन निकालना है तो जो वेरिएबल
- 17:41सेलिंग कॉस्ट होती है जो दूसरे खर्चे हैं
- 17:44जो वेरिएबल नेचर के आप उसको भी कंसीडर
- 17:46करते हो। अब इसके पीछे का क्या लॉजिक दिया
- 17:47इन्होंने? इन्होंने बड़ा सिंपल लॉजिक दिया
- 17:49और ये बड़ा वैलिड लॉजिक भी दिया। मान लो
- 17:51उसी बिनेसमैन के एग्जांपल को आगे लेके
- 17:54चलते हैं। आपके पास में एक कस्टमर आया।
- 17:55उसने कहा कि मुझे 1000 गुड्स का ऑर्डर
- 17:57चाहिए। आपको पता है इन 1000 गुड्स को
- 17:58बनाने में वेरिएबल कॉस्ट ₹8 की लगती है।
- 18:02अब उस पर्सन ने आपको कहा कि मुझे यह गुड्स
- 18:04आप डिलीवर करोगे इस लोकेशन पर।
- 18:08ठीक है? अब आप प्राइस पर नेगोशिएट कर रहे
- 18:10हो। आपने प्राइस कोट करी 1000 गुड्स हैं।
- 18:1315 में बेचूंगा 15,000 के गुड्स होंगे।
- 18:15आपके दिमाग में क्या चल रहा है कि भ 8 की
- 18:17तो कॉस्ट है। तो 8000 की तो कॉस्ट हो गई।
- 18:20प्लस कुछ हिस्सा इसके अंदर अपने को ऐड
- 18:23करना पड़ेगा। किसका ऐड करना पड़ेगा? अपनी
- 18:25ट्रांसपोर्ट की कॉस्ट का। तो आप इसमें
- 18:27ट्रांसपोर्ट कॉस्ट ऐड करोगे थोड़ी सी। ये
- 18:29जो ट्रांसपोर्ट कॉस्ट होगी क्योंकि ये
- 18:31वेरिएबल है क्योंकि आपको गुड्स
- 18:33ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंकर करनी पड़
- 18:34रही है इसलिए आप इंक्लूड कर रहे हो और एक
- 18:36नॉर्मल बिजनेसमैन तो करेगा। मान लो आपको
- 18:38पता पड़ा कि भई ₹ 2000 की ट्रांसपोर्टेशन
- 18:40की कॉस्ट लगेगी इन गुड्स को जिस लोकेशन
- 18:42में पहुंचाना है वहां तक पहुंचाने का। तो
- 18:43आपके दिमाग में क्या चल रहा है भई? ₹8 पर
- 18:45यूनिट का तो बनाने का खर्चा है। वेरिएबल
- 18:47कॉस्ट ऑफ़ प्रोडक्शन है। ठीक है? प्राइम
- 18:48कॉस्ट समझ लो बेसिकली। ठीक है? वो खर्चा
- 18:50लगना ही लगना है। प्लस ₹2 का मेरे को
- 18:53ट्रांसपोर्टेशन का कॉस्ट भी देना है। और
- 18:54वो तभी देना पड़ेगा जब मैं ये गुड्स
- 18:57डिलीवर करूंगा। अर्न नहीं करने होते तो
- 18:58इनको कॉस्ट लगती नहीं तो ये वेरिएबल है।
- 19:00ठीक है? तो ये दोनों मिला के 10,000 खर्चा
- 19:02है। अब आपके दिमाग में कॉस्ट चल रही है
- 19:0410,000, सेलिंग प्राइस चल रही है 15। आपके
- 19:06हिसाब से 5,000 का कंट्रीब्यूशन है और
- 19:08इसके हिसाब से आप नेगोशिएट करते हो। तो
- 19:10इसका मतलब जो वेरिएबल सेलिंग कॉस्ट वगैरह
- 19:14है या दूसरी वेरिएबल कॉस्ट्स हैं उनको भी
- 19:17एक बिजनेसमैन कंसीडर करता है जब वो डिसीजन
- 19:21ले रहा होता है। मान लो इसको एक और
- 19:22एग्जांपल लेते हैं। मान लो आपकी कोई बेकरी
- 19:24है। आपके पास में एक क्लाइंट आया बोल रहा
- 19:27है यार हमारे घर में ना एक वेडिंग सेरेमनी
- 19:28है। समथिंग हम चाहते हैं कि आप हमारे लिए
- 19:30एक अच्छी बास्केट बनाओ। आजकल चलता है जैसे
- 19:33केक बास्केट्स वगैरह कपकेक्स वगैरह अलग
- 19:35तरह की उसमें कह लो कि भ चॉकलेट्स होंगी।
- 19:38कुछ कपकेक्स होंगे। छोटा सा कुछ और आइटम
- 19:40होगा। इस तरह का वो चाहते हैं कि बास्केट
- 19:42बनाना चाहते हैं। अब आपका काम केक बनाना
- 19:45वो सब है तो उसकी कॉस्ट तो आपके दिमाग में
- 19:47चल रही है कि यार एक तरह की मफिन बनाने
- 19:49में मुझे इतना खर्चा तो लगता है। प्लस अब
- 19:52वो आपको कह रहे हैं कि आप ना बास्केट भी
- 19:53लेकर के आना उसको अच्छे से डेकोरेट करना
- 19:56उसमें कोई फ्लावर वगैरह लगा देना। तो ये
- 19:58सारी चीजें एक्स्ट्रा है ना। भले ही यह
- 20:00प्रोडक्शन से रिलेटेड नहीं है क्योंकि
- 20:01प्रोडक्शन तो हो रहा है केक्स का, कपकेक्स
- 20:04का, चॉकलेट का। उसकी कॉस्ट तो अलग है। बट
- 20:06ये दूसरी जो कॉस्ट है ये सेलिंग ओवरहेड्स
- 20:09हैं। ये अगर इंकर नहीं करोगे तो कस्टमर
- 20:10आपसे खरीदेगा नहीं। और फिर आप इसको भी तो
- 20:12ऐड करना स्टार्ट करोगे कैलकुलेशन में। ऐसे
- 20:14थोड़ी ना है कि आप सिर्फ केक का पैसा लोगे
- 20:16और बोलोगे भाई ये हम दे देंगे। नहीं आप
- 20:18दिमाग में आप उसको भले ही एक प्राइस कोट
- 20:20करोगे कस्टमर को कि कुल मिला के इतने की
- 20:22आपको बास्केट पड़ेगी। बट दिमाग में
- 20:23कैलकुलेशन क्या चलेगी कि यार बास्केट
- 20:25पड़ेगी मेरे को ₹100 की। पैकिंग मटेरियल
- 20:27वगैरह मिला के पकड़ लो। ₹15 और लग जाएंगे।
- 20:29फ्लावर वगैरह कह रहे हैं तो ₹ ₹1 उसके
- 20:31पकड़ लो। फिर मेरे केक्स की कॉस्टिंग है।
- 20:33ऐसे करते-करते आपके दिमाग में कैलकुलेशन
- 20:34चलेगी बैक ऑफ द माइंड और उसके हिसाब से आप
- 20:36प्राइस कोट करोगे। ठीक है? तो ये क्या है?
- 20:39आप जब कैलकुलेशन कर रहे हो तो सिर्फ
- 20:41वेरिएबल प्रोडक्शन की कॉस्ट जो प्राइम
- 20:43कॉस्ट है उसको कंसीडर नहीं कर रहे हो।
- 20:45साथ-साथ में जो वेरिएबल सेलिंग वाली कॉस्ट
- 20:47है इसको भी तो कंसीडर कर रहे हो। यहां पे
- 20:49मार्जिनल कॉस्टिंग वालों ने एक कांसेप्ट
- 20:50दिया कंट्रीब्यूशन का। उन्होंने कहा कि
- 20:53मार्जिनल कॉस्टिंग में हम सिर्फ वेरिएबल
- 20:55मार्जिनल कॉस्ट के ऊपर ही इन्वेंटरी को
- 20:58वैल्यू करेंगे। मार्जिनल कॉस्ट का
- 21:00उन्होंने डेफिनेशन भी दिया। मार्जिनल
- 21:01कॉस्ट का मतलब होता है कॉस्ट इंकर्ड टू
- 21:03प्रोड्यूस वन मोर यूनिट। इस मार्जिनल
- 21:06कॉस्ट को अपन वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट भी
- 21:09बोलते हैं।
- 21:14हम इसको वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट भी बोलते
- 21:16हैं। कि एक एडिशनल यूनिट को बनाने में
- 21:19कितना खर्चा होगा उसे बोला गया मार्जिनल
- 21:21कॉस्ट। मार्जिनल कॉस्ट की इन्होंने
- 21:23डेफिनेशन भी दी। कैसे निकलेगी? तो बोले
- 21:24प्राइम कॉस्ट तो लेके चलेंगे चलेंगे और जो
- 21:26वेरिएबल नेचर के प्रोडक्शन ओवरहेड्स हैं
- 21:29उनको भी लेके चलेंगे। ठीक है? तो इन्होंने
- 21:31कॉस्ट कार्ड को थोड़ा सा रिीडफाइन करा।
- 21:34इन्होंने कहा कि जो आपकी कॉस्ट शीट होती
- 21:36है जो कॉस्ट कार्ड होता है जिसमें आप
- 21:37कॉस्ट को रिकॉर्ड करते हो उसका थोड़ा सा
- 21:39सिस्टम अभी इन्होंने चेंज करा। इन्होंने
- 21:41कहा कि कॉस्ट कार्ड कुछ ऐसा दिखना चाहिए।
- 21:43इन्होंने कहा डायरेक्ट मटेरियल प्लस
- 21:46डायरेक्ट लेबर प्लस डायरेक्ट एक्सपेंसेस।
- 21:49इससे आपके पास में आती है प्राइम कॉस्ट।
- 21:53इस प्राइम कॉस्ट में अगर आप सिर्फ और
- 21:55सिर्फ
- 21:58वेरिएबल प्रोडक्शन ओवरहेड्स को ऐड करो
- 22:03तो आपके पास में आ जाएगी वेरिएबल
- 22:06प्रोडक्शन कॉस्ट
- 22:09जिसको हम बोलेंगे मार्जिनल कॉस्ट।
- 22:14जिसको इन्होंने नाम दिया क्योंकि मार्जिनल
- 22:16कॉस्टिंग है। इन्होंने कहा अभी हमारा नाम
- 22:17लगेगा। तो मार्जिनल कॉस्ट कहा गया इसको।
- 22:21टेक्निकली यह वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट है।
- 22:23डायरेक्ट कॉस्ट के साथ-साथ वेरिएबल वाले
- 22:25खर्चों को ऐड कर रही है सिर्फ। और फिर
- 22:27इसके अंदर अगर आप फिक्स्ड वाले खर्चे भी
- 22:30ऐड कर दोगे। फिक्स्ड
- 22:34प्रोडक्शन ओवरहेड को भी ऐड कर दोगे तो
- 22:36आपको मिलेगी आपकी फुल प्रोडक्शन कॉस्ट।
- 22:39जिसे हम अब्सॉर्प्शन कॉस्ट भी कहते हैं।
- 22:53एक तो इन्होंने ये सिस्टम दिया नया। बोले
- 22:56कि यार भाई जो तुम्हारा कैलकुलेशन करने का
- 22:58तरीका है पुराना वाला कॉस्ट शीट का उसको
- 23:00हम थोड़ा सा एक्सपैंड करेंगे। ठीक है?
- 23:02आपकी कैलकुलेशन कुछ इस तरीके से होनी
- 23:04चाहिए।
- 23:06तब जाके आपको सही कॉस्ट मिलेगी इनके हिसाब
- 23:09से।
- 23:11ठीक है? तो इसलिए हम ये सिस्टम पढ़ते हैं
- 23:13और इसलिए हम कहते हैं कि मार्जिनल
- 23:14कॉस्टिंग और अब्सॉर्प्शन कॉस्ट के बीच का
- 23:16जो डिफरेंस है वो सिर्फ फिक्स्ड प्रोडक्शन
- 23:18ओवरहेड का ट्रीटमेंट है। फिक्स्ड
- 23:20प्रोडक्शन ओवरहेड को इंक्लूड करोगे तो
- 23:21आपको मिल जाएगी अब्सॉर्प्शन कॉस्ट और नहीं
- 23:23करोगे तो आपको मिलेगी मार्जिनल कॉस्ट। एक
- 23:26कांसेप्ट तो उन्होंने ये दिया। ठीक है
- 23:28साहब? मार्जिनल कॉस्टिंग वालों ने कहा कि
- 23:30जितने भी वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट है उनको
- 23:32इंक्लूड करेंगे इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन के
- 23:34लिए। तो मार्जिनल कॉस्टिंग में इस वैल्यू
- 23:36पे इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन होगा। ये जो
- 23:37प्राइस आई है ये यूज़ होगी दो चीजों के
- 23:40प्रोडक्शन कॉस्ट निकालने के लिए और
- 23:42इन्वेंटरी की वैल्यू्यूएशन के लिए। ठीक
- 23:44है?
- 24:03मार्जिनल कॉस्टिंग में ये वाली जो कॉस्ट
- 24:05है इस कॉस्ट को अपन यूज़ करेंगे फॉर
- 24:09इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन
- 24:16एंड टोटल प्रोडक्शन कॉस्ट
- 24:19दो चीजें कैलकुलेट करने में यह वाली कॉस्ट
- 24:21काम आती है।
- 24:25यूनिट्स को प्रोड्यूस करने में टोटल कितने
- 24:27प्रोडक्शन का खर्चा हुआ वह और इन्वेंटरी
- 24:29के वैल्यू्यूएशन के लिए यह कॉस्ट काम
- 24:31आएगी। और वहीं पे जो एब्सॉर्प्शन कॉस्ट है
- 24:33ये वाली ये एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग में काम
- 24:35आएगी इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन के लिए और
- 24:36प्रोडक्शन ओवरहेड के प्रोडक्शन कॉस्ट के
- 24:38कैलकुलेशन के लिए।
- 25:03इसलिए दोनों के अंदर इन्वेंटरी का
- 25:05वैल्यू्यूएशन और प्रोडक्शन कॉस्ट का
- 25:06वैल्यू्यूएशन डिफरेंस आता है। क्योंकि
- 25:08फिगर ही अलग-अलग है। और इससे अपन यह भी कह
- 25:11सकते हैं कि इसका मतलब इन्वेंटरी का
- 25:14वैल्यू्यूएशन हमेशा एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग
- 25:16में ज्यादा आएगा क्योंकि एब्जॉर्प्शन
- 25:18कॉस्ट ज्यादा है। आप इससे ये बोल सकते हो
- 25:21कंक्लूजन में कि एब्जॉर्प्शन की जो कॉस्ट
- 25:24होगी दैट विल बी मोर देन मार्जिनल कॉस्ट।
- 25:30मार्जिनल कॉस्ट में चार तरह के खर्चे ऐड
- 25:32हो रहे हैं। एब्सॉर्प्शन कॉस्ट में पांच
- 25:34तरह के खर्चे ऐड हो रहे हैं। तो
- 25:35ऑटोमेटिकली एब्जॉर्प्शन कॉस्ट जो है वो
- 25:36मार्जिनल कॉस्ट से ज्यादा होगी। हां। हां
- 25:38अगर फिक्स प्रोडक्शन कवरेट नहीं है तो
- 25:39दोनों एक दूसरे के बराबर हो सकती है।
- 25:41लेकिन नॉर्मली ज्यादा ही होगी और क्योंकि
- 25:43ये ज्यादा होगी तो हम ये कह सकते हैं कि
- 25:45इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन अब्सॉर्प्शन
- 25:46कॉस्टिंग से मार्जिनल कॉस्टिंग के मुकाबले
- 25:48ज्यादा आएगा। एमसीक्यू में आया हुआ है ये
- 25:49कांसेप्ट टेस्टिंग। मैनेजमेंट
- 25:51[गला साफ़ करने की आवाज़][नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 25:51अकाउंटिंग में यही तो कांसेप्ट टेस्ट होते
- 25:52हैं। बच्चे कहते हैं सर क्या-क्या चीजें
- 25:54थ्योरी बहुत थ्योरी आ गई। थ्योरी नहीं आती
- 25:56है। कांसेप्ट टेस्ट हो रहे हैं। और ये
- 25:57क्वेश्चन एग्जाम का है। उसने पूछा हुआ है
- 25:59कि भ इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन एस पर मतलब
- 26:03एस पर एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग विल बी डैश
- 26:05देन मार्जिनल कॉस्टिंग। अब आपको ऑप्शन में
- 26:07सेलेक्ट करना था इक्वल टू हायर दैन और
- 26:09लोअर तो हायर क्योंकि एब्सॉर्प्शन
- 26:12कॉस्टिंग जो है कॉस्ट ही ज्यादा है तो
- 26:14इन्वेंटरी का वैल्यूशन अलग होगा। अब
- 26:15इन्वेंटरी तो दोनों में सेम होगी। ठीक है?
- 26:17मान लो 500 यूनिट की क्लोजिंग इन्वेंटरी
- 26:19है तो आप एक बार 500 को मल्टीप्लाई करोगे
- 26:21इस फिगर से और एक बार 500 को मल्टीप्लाई
- 26:23करोगे इस फिगर से। तो ऑब्वियस सी बात है
- 26:25एब्सॉर्प्शन कॉस्ट के हिसाब से फिगर
- 26:26ज्यादा आएगा।
- 26:40यूजिंग अब्सॉर्प्शन कॉस्ट विल बी हायर देन
- 26:47इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन यूजिंग मार्जिनल
- 26:49कॉस्ट। जब कॉस्ट ही ज्यादा है एब्सॉर्प्शन
- 26:52तो उसके थ्रू इन्वेंटरी का वैल्यूएशन भी
- 26:54ज्यादा होगा। क्योंकि इन्वेंटरी का नंबर
- 26:55चेंज नहीं होगा सब। इन्वेंटरी का फिगर तो
- 26:57सेम रहेगा। क्लोजिंग इन्वेंटरी अगर 500 की
- 26:58है तो चाहे एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग हो चाहे
- 27:00मार्जिनल कॉस्टिंग हो यूनिट तो 500 है।
- 27:02कॉस्ट का फिगर चेंज है। इसकी वजह से
- 27:03वैल्यू्यूएशन ऊपर नीचे आएगा। ठीक है साहब?
- 27:06तो इस चीज का ध्यान में रखना है। तो ये
- 27:08कॉस्ट शीट है साहब हमारी। ठीक है? ये अब
- 27:11ध्यान रखना थोड़ी चेंज हो गई। अभी तक हम
- 27:13लिखते थे प्राइम कॉस्ट प्लस प्रोडक्शन
- 27:15ओवरहेड्स। उससे आ जाती थी हमारे पास
- 27:16प्रोडक्शन कॉस्ट। अब अपन ने प्रोडक्शन
- 27:17ओवरहेड को भी दो पार्ट में डिवाइड कर
- 27:19दिया। वेरिएबल और फिक्स्ड। ठीक है?
- 27:23हां जी। तो अब दोनों में जो जो डिफरेंसेस
- 27:25हैं उनको एक समराइज करें अगर अपन तो
- 27:27अबजॉर्प्शन कॉस्टिंग क्या कहती है कि अगर
- 27:29आपको वैल्यू्यूएशन निकालना है प्रोडक्शन
- 27:31का या इन्वेंटरी का क्लोजिंग इन्वेंटरी का
- 27:33तो आपको फुल प्रोडक्शन कॉस्ट लेके चलनी
- 27:35पड़ती है जिसमें आप प्रोडक्ट फिक्स्ड
- 27:36प्रोडक्शन ओवर को भी इंक्लूड करोगे।
- 27:38मार्जिनल कॉस्टिंग कहती है ना साहब सिर्फ
- 27:40वेरिएबल प्रोडक्शन की कॉस्ट लेके चलेंगे।
- 27:41फिक्स्ड प्रोडक्शन कॉस्ट को इंक्लूड नहीं
- 27:43करा जाएगा। नहीं करोगे तो क्या करोगे इसके
- 27:45साथ में? इसको अपन एक्सपेंस की तरह मान
- 27:47लेंगे। पीरियड कॉस्ट कहती है एब्जॉर्प्शन
- 27:49मार्जिनल कॉस्टिंग अपने फिक्स्ड प्रोडक्शन
- 27:51ओवरहेड्स को। एब्जॉर्प्शन कास्टिंग कहती
- 27:52है ये नहीं साहब ये आपके फिक्स प्रोडक्शन
- 27:54ओवरहेड को भी हम एब्सॉर्ब करेंगे तो इसके
- 27:56लिए आप ओआर वगैरह निकालोगे। अब क्योंकि
- 27:58ओआर वगैरह निकालोगे तो आपके पास में अंडर
- 28:00एब्जॉर्प्शन या ओवर एब्सॉर्प्शन की दिक्कत
- 28:02आती है। एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग में एक
- 28:03दिक्कत आती है कि आपको क्योंकि आप
- 28:04एब्जॉर्ब कर रहे हो ओवरहेड्स को। ठीक है?
- 28:06एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग को फॉलो कर रहे हो
- 28:08तो आपके अंडर एब्सॉर्प्शन या ओवर
- 28:09एब्जॉर्प्शन की दिक्कत आपके सामने आ सकती
- 28:10है। ठीक है? फिर आती है क्या रिलेशनशिप
- 28:13होगा सेलिंग प्राइस का? तो सेलिंग प्राइस
- 28:14जो है उसमें से अगर एब्जॉर्प्शन कॉस्ट को
- 28:16माइनस करोगे तो आपको मिलेगा प्रॉफिट। बट
- 28:18अगर आप सेलिंग प्राइस में से सारे के सारे
- 28:21वेरिएबल कॉस्ट को लेस करोगे तो आपको
- 28:22मिलेगा कॉन्ट्रिब्यूशन।
- 28:24ठीक है? यह एक डिफरेंस है। अभी
- 28:26कॉनंट्रीब्यूशन पे हम थोड़ी और बातचीत
- 28:27करेंगे। ठीक है? और एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग
- 28:30जो है वो आपको टोटल कॉस्ट देती है। तो ये
- 28:31आपको सही सेलिंग प्राइस निकालने में हेल्प
- 28:33करेगी। अगर आपको किसी प्रोडक्ट की सही
- 28:35सेलिंग प्राइस निकालनी है तो आपको सही
- 28:36एब्सॉर्प्शन कॉस्ट आपके पास में होनी
- 28:38चाहिए। तभी आप करेक्ट सेलिंग प्राइस निकाल
- 28:40सकते हो। लेकिन मार्जिनल कॉस्टिंग शॉर्ट
- 28:42टर्म डिसीजन मेकिंग के लिए काम की है और
- 28:43एक एडिशनल यूनिट को बनाने में कितना खर्चा
- 28:45होगा उसको कैलकुलेट करने में हेल्प करती
- 28:47है। ठीक है साहब? तो ये अभी तक जो हमने
- 28:50बातचीत करी उसकी एक समरी। अब आते हैं
- 28:53हमारे नेक्स्ट एक इंपॉर्टेंट कांसेप्ट के
- 28:56ऊपर मार्जिनल कॉस्टिंग के जो है हमारा
- 28:57कंट्रीब्यूशन। ठीक है? अभी तक हमने देखा
- 28:59कि मार्जिनल कॉस्टिंग एब्जॉर्प्शन
- 29:01कॉस्टिंग में डिफरेंसेस क्या है? दोनों
- 29:02कॉस्टिंग के दो तरीके हैं। दोनों प्रोडक्ट
- 29:04की कॉस्ट निकालने के दो तरीके हैं। एक फुल
- 29:06कॉस्टिंग के मेथड पे चलता है। एक से
- 29:07वेरिएबल कॉस्टिंग के मेथड पे चलता है। तो
- 29:09दोनों से इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन अलग
- 29:11आएगा। दोनों से प्रोडक्शन का वैल्यू
- 29:12प्रोडक्शन कॉस्ट का वैल्यूएशन अलग आएगा।
- 29:14दोनों से जो प्रॉफिट का फिगर है वो अलग
- 29:16आएगा। एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के फिगर को
- 29:18अपन प्रॉफिट बोलते हैं। जब सेलिंग प्राइस
- 29:19में से एब्सॉर्प्शन कॉस्ट को माइनस करते
- 29:20हैं तो प्रॉफिट आता है। इसको अपन ग्रॉस
- 29:22प्रॉफिट कहते हैं। बेसिकली वैसे तो
- 29:24एक्चुअल नाम तो इसका ग्रॉस प्रॉफिट होगा।
- 29:30और मार्जिनल कॉस्टिंग में उसको अपन
- 29:31कंट्रीब्यूशन कहते हैं। ठीक है? और
- 29:33अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग टोटल कॉस्ट निकल रही
- 29:35है तो उससे अपनी सेलिंग प्राइस आ जाएगी।
- 29:37मार्जिनल कॉस्टिंग से आपको डिसीजन मेकिंग
- 29:38में हेल्प मिलेगी। शॉर्ट टर्म डिसीजन
- 29:39मेकिंग में हेल्प मिलेगी। ठीक है साहब? ये
- 29:42अपनी बातचीत हुई। अब आते हैं
- 29:43कॉन्ट्रिब्यूशन के ऊपर। मार्जिनल कॉस्टिंग
- 29:45में एक सबसे इंपॉर्टेंट नया कांसेप्ट जो
- 29:46ऐड होता है वो होता है कंट्रीब्यूशन का।
- 29:48ये अपने एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग वगैरह बाकी
- 29:49किसी कॉस्टिंग में यूज़ नहीं होता। लेकिन
- 29:51यह रियल लाइफ का बड़ा इंपॉर्टेंट कांसेप्ट
- 29:53है। मैंने आपको बताया नॉर्मल रियल लाइफ
- 29:54में पर्सन इन्हीं चीजों के बारे में सोच
- 29:56रहा होता है। तो इसका एक फार्मूला है।
- 29:59कॉन्ट्रिब्यूशन का फार्मूला होता है
- 30:00डिफरेंस बिटवीन प्रोडक्ट की सेलिंग प्राइस
- 30:01और मार्जिनल कॉस्ट। तो सेलिंग प्राइस में
- 30:02से मार्जिनल कॉस्ट को माइनस कर दो। आपके
- 30:04पास में कंट्रीब्यूशन आ जाएगा। और टोटल
- 30:06कंट्रीब्यूशन निकालना चाहिए। ये तो पर
- 30:07कंट्रीब्यूशन पर यूनिट का फार्मूला हो
- 30:09गया। के सेलिंग प्राइस में से मैंने
- 30:11मार्जिनल कॉस्ट को लेस करा। जिसमें आपकी
- 30:13टोटल वेरिएबल कॉस्ट आ गई। सारी वेरिएबल
- 30:14कॉस्ट को लेस करके मार्जिनल कॉस्ट बनती
- 30:16है। उससे आपके पास में कॉन्ट्रिब्यूशन
- 30:18आएगा एक यूनिट का। टोटल कंट्रीब्यूशन
- 30:20निकालना हो तो फार्मूला ध्यान में रखना।
- 30:21एक यूनिट का जो कंट्रीब्यूशन है उसको
- 30:23मल्टीप्लाई कर दो। नंबर ऑफ यूनिट्स सोल्ड
- 30:25यानी नंबर ऑफ यूनिट्स सोल्ड नॉट
- 30:27प्रोड्यूस्ड। कॉन्ट्रीब्यूशन आप कमाते हो
- 30:30बेचने। यूनिट्स बेचने के बाद आपने यूनिट्स
- 30:33बना के रख लिए तो उस पे भी कोई कमाई नहीं
- 30:35हुई है। जब वो बिकेंगे तब कमाई होती है।
- 30:37तो कंट्रीब्यूशन आपकी वो एडिशनल कमाई है।
- 30:39ठीक है? जो एक यूनिट को बेच के आपने कमाई
- 30:41है। तो इसके लिए यूनिट सोल्ड से
- 30:42मल्टीप्लाई करना होता है। यूनिट प्रोड्यूस
- 30:44से नहीं। एग्जाम में कितनी बार बच्चों को
- 30:46कंफ्यूज करने के लिए वो प्रोडक्शन और
- 30:48सेल्स दोनों के फिगर दे देता है या उसके
- 30:50ऊपर हिंट दे देता है और बच्चे कितनी बारी
- 30:51गलती करते हैं कि प्रोडक्शन के फिगर से
- 30:53मल्टीप्लाई कर देते हैं। प्रोडक्शन के
- 30:55फिगर से मल्टीप्लाई करके कॉस्ट निकलती है।
- 30:57लेकिन कंट्रीब्यूशन या प्रॉफिट वगैरह जब
- 30:59भी ये बात होगी तो वो सेल के ऊपर बेस्ड
- 31:01होता है। तो यहां पे नंबर ऑफ यूनिट्स
- 31:02सोल्ड से मल्टीप्लाई करना है। ठीक है? अभी
- 31:04क्वेश्चंस वगैरह इस पे अपन देखेंगे।
- 31:07ठीक है? अब यहीं से कॉन्ट्रिब्यूशन का एक
- 31:09ग्राफ आता है। जहां से एक नया कांसेप्ट
- 31:11निकलता है। ब्रेक इवन पॉइंट। देखो
- 31:14कंट्रीब्यूशन क्या है? कंट्रीब्यूशन आपकी
- 31:16सेल प्राइस और वेरिएबल कॉस्ट के बीच का
- 31:18डिफरेंस है। ठीक है? इसमें फिक्स्ड कॉस्ट
- 31:21कवर हुई नहीं है। तो हम कहते हैं कि भ अगर
- 31:24आप अपने कॉन्ट्रिब्यूशन को ड्रॉ करते जाओ
- 31:26ऑन द बेसिस ऑफ़ यूनिट सोल्ड। तो ज़ीरो यूनिट
- 31:28बेचोगे, ज़ीरो कंट्रीब्यूशन है। फिक्स्ड
- 31:30कॉस्ट तो फिर भी लग ही रही है। तो फिक्स्ड
- 31:32कॉस्ट तो लगेगी ही लगेगी। फिर मान लो एक
- 31:34यूनिट पे आपको 5 डॉल का कंट्रीब्यूशन
- 31:37कमाने का मौका मिलता है। तो एक यूनिट
- 31:38बेचोगे, $5 कमाओगे, दो बेचोगे, 10। ऐसे
- 31:40करते-करते आपकी कंट्रीब्यूशन बढ़ता रहेगा।
- 31:42यूनिट्स के साथ बढ़ता रहेगा। ठीक है? एक
- 31:45पॉइंट आएगा जहां पर आपका कंट्रीब्यूशन और
- 31:48फिक्स्ड कॉस्ट एक दूसरे के बराबर होंगे।
- 31:50उस पॉइंट को हम कहते हैं ब्रेक इवन पॉइंट।
- 31:52ब्रेक इवन पॉइंट के आगे जितने भी यूनिट
- 31:55बेचोगे इस पर आपको होगा प्रॉफिट। ये आपका
- 31:58प्रॉफिट ज़ोन होता है।
- 32:01तो ब्रेक इवन यूनिट से ज्यादा यूनिट अगर
- 32:03आपने बेच दिए तो आपको प्रॉफिट होगा और
- 32:05ब्रेक इवन पॉइंट से अगर पीछे कम यूनिट अगर
- 32:08आपने बेचे तो आपको लॉस होगा। ठीक है ना?
- 32:11तो हम इसलिए कोशिश करते हैं कि ब्रेक इवन
- 32:13पॉइंट निकालें और ये ब्रेक इवन पॉइंट से
- 32:15ज्यादा यूनिट बेच दें ताकि अपन ओवरऑल
- 32:16प्रॉफिट में रहेंगे और हर कंपनी इसलिए
- 32:18ब्रेक इवन पॉइंट्स कंट्रीब्यूशन मार्जिनल
- 32:20कॉस्टिंग कैलकुलेट करती है क्योंकि यही वो
- 32:22मेथड है जो आपको ये ब्रेक इवन पॉइंट
- 32:24निकालने में हेल्प करेगा और नॉर्मल बिज़नेस
- 32:26का प्रूडेंस का कांसेप्ट है भाई नॉर्मल
- 32:27बिज़नेस चलाओगे तो आप अपना ब्रेक इवन पॉइंट
- 32:29तो कैलकुलेट करना चाहोगे ही हो कि मिनिमम
- 32:31इतने यूनिट बेचने पर जाकर के ये बिज़नेस
- 32:33प्रॉफिटेबल होना स्टार्ट करेगा। ठीक है?
- 32:36तो इसलिए ब्रेक इवन पॉइंट निकालना बड़ा
- 32:37जरूरी होता था। इसलिए मार्जिनल कॉस्टिंग
- 32:38एज अ कांसेप्ट बड़ा जरूरी था।
- 32:40ठीक है? इसमें हम कहते हैं जब
- 32:42कॉन्ट्रिब्यूशन आपके फिक्स्ड कॉस्ट से कम
- 32:44है तो आपको लॉस होगा। जब कंट्रीब्यूशन और
- 32:46फिक्स्ड कॉस्ट एक दूसरे के बराबर होंगे तब
- 32:47होगा ब्रेक इवन। और कॉन्ट्रिब्यूशन जब
- 32:49फिक्स्ड कॉस्ट से ज्यादा होगा तब होता है
- 32:50हमें प्रॉफिट। तो ब्रेक इवन पॉइंट निकालने
- 32:53के भी फ़ूले हैं साहब हमारे पास में
- 32:54डायरेक्ट कैलकुलेट करने के। अब ये तो
- 32:55ग्राफ है। एग्जाम में तो ग्राफ बनाने
- 32:57बैठेंगे अपन। तो एग्जाम में सर अगर बर बर
- 32:58बर बर बर बर बर बर बर बर इवन पॉइंट
- 32:59निकालने को बोल दिया तो कैसे कैलकुलेट
- 33:00करेंगे? तो हमारे पास में साहब दो फ़ूले
- 33:02हैं। पहला फ़ूला है फिक्स्ड कॉस्ट डिवाइड
- 33:04बाय कंट्रीब्यूशन। इससे आपको ब्रेक इवन
- 33:06पॉइंट यूनिट्स में पता पड़ेगा। फिक्स्ड
- 33:08कॉस्ट डिवाइड बाय कंट्रीब्यूशन। इसका
- 33:10दूसरा फार्मूला होता है इंक्रीमेंटल
- 33:11फिक्स्ड कॉस्ट डिवाइड बाय इंक्रीमेंटल
- 33:12कंट्रीब्यूशन। यह फार्मूला आपके ज्यादा
- 33:14काम आएगा नहीं। इंक्रीमेंटल का मतलब होता
- 33:16है कि भ जैसे आप पहले 1000 यूनिट बेच रहे
- 33:18थे और अब आप 1500 यूनिट बेच रहे हो। तो
- 33:211000 से 1500 पे जाने पर इंक्रीमेंटल
- 33:24कितना फिक्स्ड कॉस्ट बढ़ा और कितने आपके
- 33:26कंट्रीब्यूशन बढ़े उसके हिसाब से होता है।
- 33:27अगर यहां पे ये फार्मूला तब काम आता है जब
- 33:29फिक्स्ड कॉस्ट की जगह स्टेप फिक्स्ड कॉस्ट
- 33:30होती है हमारे पास में। तब यह काम आता है।
- 33:32हमारे लेवल पे एग्जाम में नहीं आएगा। अपने
- 33:34फर्स्ट वाला फार्मूला ध्यान रख लेना।
- 33:35फिक्स्ड कॉस्ट डिवाइड बाय कंट्रीब्यूशन पर
- 33:37यूनिट। ये तब जब यूनिट्स में आंसर चाहिए।
- 33:40मतलब नंबर ऑफ यूनिट कितने बेचने पड़ेंगे
- 33:42मिनिमम? यहीं पे अगर आपको सेल का अमाउंट
- 33:44चाहिए कि मिनिमम कितने अमाउंट की सेल करनी
- 33:47पड़ेगी? आपको ब्रेक इवन पॉइंट चाहिए
- 33:49अमाउंट के टर्म्स में सेल्स वैल्यू के
- 33:51टर्म्स में। तो वो कैसे निकालोगे? तो उसके
- 33:53लिए फार्मूला होता है फिक्स्ड कॉस्ट।
- 33:54न्यूमैरेटर तो सेम है। अब डिनोमिनेटर में
- 33:56कॉन्ट्रिब्यूशन की जगह कंट्रीब्यूशन
- 33:58प्रॉफिट कंट्रीब्यूशन मार्जिन रेश्यो या
- 34:00जिसको अपन प्रॉफिट वॉल्यूम रेशियो कहते
- 34:02हैं वो भी आप निकाल सकते हो। उससे डिवाइड
- 34:04कर दो। अब ये कंट्रीब्यूशन मार्जिन रेशियो
- 34:06या प्रॉफिट वॉल्यूम रेशियो कैसे आएगा? ये
- 34:08रेश्यो होता है आपके कॉन्ट्रिब्यूशन और
- 34:10सेल्स प्राइस के बीच का। तो आप
- 34:12कॉन्ट्रिब्यूशन को डिवाइड करो आपके
- 34:14रेवेन्यू पर यूनिट से मल्टीप्लाई करो 100
- 34:16से। इससे आपके पास में एक रेश्यो आएगा
- 34:17जिसे अपन कंट्रीब्यूशन मार्जिन रेश्यो या
- 34:19प्रॉफिट वॉल्यूम रेशियो बोलते हैं। अगर
- 34:21फिक्स्ड कॉस्ट को आपने इस कंट्रीब्यूशन
- 34:23रेशियो से डिवाइड करा तो भी आपको ब्रेक
- 34:24इवन पॉइंट मिल जाएगा। लेकिन ये अमाउंट के
- 34:26टर्म्स में मिलेगा। और अगर आप नॉर्मल
- 34:28कंट्रीब्यूशन पर यूनिट से डिवाइड करोगे तो
- 34:30आपको जो आंसर मिलेगा वो ब्रेक इवन पॉइंट
- 34:31इन टर्म्स ऑफ़ नंबर ऑफ़ यूनिट्स में मिलेगा।
- 34:33तो डिपेंडिंग ऑन क्वेश्चन की क्या डिमांड
- 34:35है उसके हिसाब से आप दोनों में से एक
- 34:36फार्मूला यूज़ कर सकते हो। ठीक है साहब?
- 34:41अब आते हैं कंट्रीब्यूशन के कैलकुलेशन के
- 34:44क्वेश्चंस के ऊपर। क्वेश्चन बोल रहा है भ
- 34:45ब्रूनर लिमिटेड मेक्स वन प्रोडक्ट द कॉस्ट
- 34:47कार्ड ऑफ व्हिच इज़ एस फॉलोस डायरेक्ट
- 34:49मटेरियल, डायरेक्ट लेबर, वेरिएबल
- 34:50प्रोडक्शन ओवरहेड, फिक्स्ड प्रोडक्शन
- 34:52ओवरहेड और वेरिएबल सेलिंग कॉस्ट। ये सारे
- 34:53खर्चे दे रखे हैं। कुल मिला के सेलिंग
- 34:55प्राइस 25 की है। आपको बोला है और बोल रखा
- 34:58है बजटेड फिक्स्ड ओवरहेड्स आर बेस्ड ऑन
- 34:59बजटेड प्रोडक्शन ऑफ़ 5,000 यूनिट्स। द
- 35:02सेल्स मेड ड्यूरिंग द पीरियड वर 3000
- 35:05यूनिट्स एंड एक्चुअल अ फिक्स्ड प्रोडक्शन
- 35:07ओवरहेड इंकर्ड वर 25,000 यूनिट्स। आपको
- 35:10टोटल कंट्रीब्यूशन एंड टोटल प्रॉफिट
- 35:12निकालना है।
- 35:14अच्छा अब इसके लिए एक और चीज मैं थोड़ा सा
- 35:16आपको बता दूं। मार्जिनल कॉस्टिंग में ये
- 35:20तो हमारे पास में एक कॉस्ट शीट है। बट
- 35:22हमारे पास में एक शॉर्टकट पीएंडएल का
- 35:25फार्मूला भी होता है। फुल मेथड अभी
- 35:26समझेंगे। बट एक शॉर्टकट पीएंडएल का
- 35:29फार्मूला होता है। यह काम करता है सिर्फ
- 35:31मार्जिनल कॉस्टिंग में ध्यान रखना।
- 35:39ये सिर्फ मार्जिनल कॉस्टिंग में काम
- 35:40करेगा। ठीक है? क्या है फार्मूला? हम कहते
- 35:42हैं सेल्स।
- 35:44सेल प्राइस ले लो। सेलिंग प्राइस।
- 35:50इसमें से आप लेस करो। जितने भी वेरिएबल
- 35:53कॉस्ट हैं। ऑल वेरिएबल कॉस्ट्स
- 35:58ठीक है? प्राइम कॉस्ट, ओवरहेड वगैरह जो भी
- 36:00है सब लेस कर दो। इससे आपके पास में आ
- 36:02जाएगा कंट्रीब्यूशन पर यूनिट।
- 36:12इसको मल्टीप्लाई करो नंबर ऑफ यूनिट सोल्ड
- 36:15से।
- 36:20इससे आपके पास में आएगा टोटल
- 36:22कंट्रीब्यूशन।
- 36:29ठीक है? इस टोटल कंट्रीब्यूशन में से लेस
- 36:32कर दो क्या आपकी फिक्स्ड कॉस्ट्स?
- 36:35जितनी भी फिक्स्ड कॉस्ट्स तो आपके पास में
- 36:38आता है टोटल प्रॉफिट।
- 36:46ठीक है? यह शॉर्टकट मेथड है मार्जिनल
- 36:49कॉस्टिंग में प्रॉफिट एंड लॉस निकालने का।
- 36:51ठीक है? सेलिंग प्राइस उसमें से वेरिएबल
- 36:53कॉस्ट को लेस करा। इससे अपने पास में
- 36:56कंट्रीब्यूशन आया पर यूनिट का। इसको
- 36:58मल्टीप्लाई करा नंबर ऑफ यूनिट सोल्ड से।
- 37:00इससे अपने पास में टोटल कंट्रीब्यूशन आ
- 37:02जाएगा। इसमें से अपन वापस फिक्स्ड कॉस्ट
- 37:05को लेस करेंगे तो हमारे पास में टोटल
- 37:07प्रॉफिट या लॉस जो भी आना होगा वो आ
- 37:09जाएगा। ठीक है साहब? ये फॉर्मेट ध्यान में
- 37:12रखना है। शॉर्टकट फार्मूला ध्यान में रखना
- 37:14है। ठीक है ना?
- 37:15चलिए अब इसी से क्वेश्चन को सॉल्व करते
- 37:19हैं। ये क्वेश्चन है। मेरे को सबसे पहले
- 37:20तो निकालना है यहां पे क्या?
- 37:21कंट्रीब्यूशन। मेरे से पूछा भी है। टोटल
- 37:23कॉनंट्रीब्यूशन पूछा है। तो पहले
- 37:24कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट निकालना पड़ेगा।
- 37:26उसके बाद में टोटल कंट्रीब्यूशन आएगा।
- 37:31तो टोटल कॉन्ट्रिब्यूशन निकालने के लिए
- 37:39हम पहले बोलेंगे कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट
- 37:41निकाल दो।
- 37:48और उसको मल्टीप्लाई कर दो नंबर ऑफ यूनिट
- 37:50सोल्ड से।
- 37:58[गला साफ़ करने की आवाज़] अब कंट्रीब्यूशन
- 37:59पर यूनिट के लिए सेलिंग प्राइस माइनस
- 38:01जितनी भी वेरिएबल कॉस्ट है वो लेनी पड़ेगी
- 38:03आपको।
- 38:12सेलिंग प्राइस है 25
- 38:15माइनस जितनी भी वेरिएबल कॉस्ट है ऑल
- 38:18वेरिएबल कॉस्ट ध्यान रखना
- 38:22तो इस क्वेश्चन में वेरिएबल कॉस्ट कितनी
- 38:24है? देखो कुछ नहीं बोल रखा हो तो मटेरियल
- 38:26और लेबर डायरेक्ट मटेरियल डायरेक्ट लेबर
- 38:27इन दोनों को हमेशा वेरिएबल मान के चलना।
- 38:29ये दोनों हमेशा अस्यूम होती हैं। वेरिएबल
- 38:31है। तो ये वेरिएबल होगी। ये वेरिएबल होगी।
- 38:34इसके नाम के आगे लिखा है वेरिएबल। इसके
- 38:35नाम के आगे भी लिखा है वेरिएबल। तो सबको
- 38:37ऐड कर दो। 3 + 6 + 2 + 5
- 38:4516
- 38:50ये आएगा नाइन।
- 38:53ठीक है साहब।
- 38:55ये अपना कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट हो गया।
- 39:03अब इस कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट को
- 39:05मल्टीप्लाई कर दो। नंबर ऑफ़ यूनिट्स सोल्ड
- 39:06उससे आएगा टोटल कॉन्फिशन प्रोड्यूस से
- 39:08नहीं सोल्ड से सोल्ड करें 3000 तो 3000
- 39:12तो इससे अपने पास में
- 39:15अपना टोटल कंट्रीब्यूशन आ गया 27000 का
- 39:21ठीक है
- 39:23फिर B अब अपन निकालेंगे टोटल प्रॉफिट
- 39:32प्रॉफिट के लिए इस टोटल कंट्रीब्यूशन में
- 39:34से फिक्स्ड कॉस्ट को लेस करना है।
- 39:48टोटल कंट्रीब्यूशन है 27,000 का। फिक्स्ड
- 39:52कॉस्ट ध्यान रखना। अच्छा अपने को फिक्स्ड
- 39:54कॉस्ट कंफ्यूज करने के लिए दो दे रखी है।
- 39:55एक दे रखी है फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड पर
- 39:57यूनिट में और एक तुम्हें दे रखा है
- 39:59एक्चुअल फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड। हम
- 40:01हमेशा मार्जिनल कॉस्टिंग में एक्चुअल वाला
- 40:03फिगर लेके चलेंगे। मार्जिनल कॉस्टिंग में
- 40:05एक्चुअल वाला अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग में ये
- 40:07ओआर वाला फिगर लेके चलना पड़ता है।
- 40:09मार्जिनल कॉस्टिंग में आप एक्चुअल फिक्स्ड
- 40:11प्रोडक्शन कॉस्ट को माइनस करते हो।
- 40:12एक्चुअल कॉस्ट 25,000 की है क्योंकि
- 40:15मार्जिनल कॉस्टिंग में अब्सॉर्प्शन नहीं
- 40:17होता। तो यह जो अब्सॉर्प्शन वाले कॉस्ट है
- 40:18यह हमारे किसी काम की नहीं। हमारे काम की
- 40:20एक्चुअल होती है। ठीक है? तो यहां पे आपका
- 40:232000 का प्रॉफिट है।
- 40:26ये आपका 2000 का प्रॉफिट आया। ठीक है
- 40:29साहब? तो ये फॉर्मेट अगर दिमाग में बैठ
- 40:31गया तो अपना काम हो जाएगा। यहां पे ध्यान
- 40:32रखना। फिक्स्ड कॉस्ट हमेशा कौन सी वाली
- 40:34लेके चलनी है? एक्चुअल वाली।
- 40:37ठीक है? एक्चुअल फिक्स्ड कॉस्ट को लेके
- 40:38चलेंगे। ठीक है? तो अपने पास में आंसर आ
- 40:41जाएगा। यह हो गया अभी अपना आंसर फर्स्ट
- 40:43वाला क्वेश्चन। देखिए टोटल कॉन्रिब्यूशन
- 40:45बोला था तो पहले मैंने कंट्रीब्यूशन पर
- 40:46यूनिट निकाला। उसको मल्टीप्लाई करा नंबर
- 40:48ऑफ यूनिट्स सोल्ड से। मेरे पास में टोटल
- 40:49कंट्रीब्यूशन आ गया। फिर इस टोटल
- 40:51कंट्रीब्यूशन में से मैंने एक्चुअल
- 40:52फिक्स्ड कॉस्ट को माइनस करा
- 40:55तो मेरे पास में एक्चुअल मेरा प्रॉफिट आ
- 40:57गया। ठीक है साहब। 2000 का प्रॉफिट है।
- 41:0127,000 का टोटल कंट्रीब्यूशन है। पर यूनिट
- 41:03कंट्रीब्यूशन नाइन का है। वेरिएबल कॉस्ट
- 41:05अपनी 16 की है। यह सब अपन ने कैलकुलेट कर
- 41:07ही लिया।
- 41:10एक क्वेश्चन और देखते हैं। पी क्यूआर
- 41:12सेल्स वन प्रोडक्ट। द कॉस्ट कार्ड फॉर द
- 41:13फॉलोइंग प्रोडक्ट इज गिवन बिलो। डायरेक्ट
- 41:15मटेरियल, डायरेक्ट लेबर, वेरिएबल
- 41:16प्रोडक्शन ओवरहेड, फिक्स्ड प्रोडक्शन
- 41:18ओवरहेड, वेरिएबल सेलिंग कॉस्ट ये सब दे
- 41:20रखा है। द सेलिंग प्राइस पर यूनिट इज़ $20।
- 41:22द बजट फिक्स्ड ओवरहेड आर बेस्ड ऑन बजटेड
- 41:24प्रोडक्शन ऑफ़ 10 $1,000 यूनिट्स। ओपनिंग
- 41:27इन्वेंटरी वाज़ $2000 यूनिट्स एंड क्लोजिंग
- 41:29इन्वेंटरी वाज़ 150 यूनिट्स। सेल्स मेड
- 41:32ड्यूरिंग द ईयर वर 800 यूनिट। तो आपको
- 41:34प्रोडक्शन भी दे रखा है। आपको ओपनिंग
- 41:35इन्वेंटरी, क्लोजिंग इन्वेंटरी दे रखी है।
- 41:37यह बजटेड प्रोडक्शन भी है। आपको ओपनिंग
- 41:39क्लोजिंग दे रखी है। सेल दे रखा है। तो आप
- 41:40इससे एक्चुअल प्रोडक्शन भी निकाल सकते हो।
- 41:42बट जरूरत ही नहीं है। ठीक है ना? अपने को
- 41:45कंट्रीब्यूशन और टोटल प्रॉफिट निकालने के
- 41:47लिए नंबर ऑफ यूनिट सोल्ड ही चाहिए होते
- 41:48हैं। तो इस क्वेश्चन में आपको कंफ्यूज
- 41:49करने के लिए सब देता है वो ताकि आप
- 41:51कंफ्यूज हो और गलत फिगर लेके चलो। ठीक है?
- 41:54एक्चुअल फिक्स्ड ओवरहेड इंकर्ड दे रखे हैं
- 41:561500 के। आपको बोला है टोटल
- 41:58कॉन्ट्रिब्यूशन अर्न कितना? अच्छा सिर्फ
- 41:59कंट्रीब्यूशन ही निकालना है। तो बहुत सारी
- 42:01एक्स्ट्रा इनफार्मेशन दे रखी है। अपने
- 42:03टोटल कॉन्ट्रीब्यूशन के लिए मुझे क्या
- 42:04चाहिए? मुझे चाहिए कंट्रीब्यूशन पर यूनिट
- 42:14इंटू नंबर ऑफ यूनिट्स सोल्ड
- 42:21कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट निकालने के लिए
- 42:22क्या आएगा भाई? सेलिंग प्राइस जो आपकी 20
- 42:24की है माइनस डायरेक्ट मटेरियल, डायरेक्ट
- 42:28लेबर, वेरिएबल प्रोडक्शन ओवर और वेरिएबल
- 42:30सेलिंग कॉस्ट ये सारे वेरिएबल खर्चे भी
- 42:31आएंगे।
- 42:404 + 5
- 42:43+ 3 + 3
- 42:48इन नंबर ऑफ यूनिट सोल्ड नंबर ऑफ यूनिट
- 42:50सोल्ड 800
- 42:59तो फाइव का कंट्रीब्यूशन है। 800 यूनिट
- 43:03आपने सेल करे हैं।
- 43:084000 का आपका कॉन्ट्रिब्यूशन है।
- 43:13ठीक है? यह टोटल कंट्रीब्यूशन है। अगर
- 43:15मेरे से प्रॉफिट बोलता तो इसमें से 1500
- 43:17माइनस करते 4000 में से आंसर 2500 आता।
- 43:20अभी पूछा टोटल कंट्रीब्यूशन है तो मैं
- 43:22कंट्रीब्यूशन पे रुक जाऊंगा। वो प्रॉफिट
- 43:23बोलता तो इस टोटल कंट्रीब्यूशन में से
- 43:25एक्चुअल फिक्स्ड ओवरहेड 1500 लेस करते।
- 43:27आंसर फिर 2500 होता। अभी जो बोला है वो
- 43:30अपना आंसर निकाल के देंगे। ठीक है साहब?
- 43:33ये हो गया काम। फिर अपन ने बात करी ली
- 43:36इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन को लेकर के।
- 43:37इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन दोनों में डिफर
- 43:38करता है साहब। मार्जिनल कॉस्टिंग में आप
- 43:40इन्वेंटरी का वैल्यूएशन सिर्फ मार्जिनल
- 43:41कॉस्ट पे लेके चलते हो जो आपकी वेरिएबल
- 43:43प्रोडक्शन कॉस्ट है उसी के ऊपर और
- 43:44एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के केस में आप फुल
- 43:46एब्सॉर्प्शन कॉस्ट जिसमें आप अपने फिक्स्ड
- 43:48ओवरहेड्स को भी इंक्लूड करते हो उस पर
- 43:50इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन करते हो इसको
- 43:52अगर अपन फॉर्मेट में देखें तो मैंने आपको
- 43:53ये बता ही दिया अगर एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग
- 43:55का पीएनएल बना रहे हो तो उसमें
- 43:57एब्जॉर्प्शन कॉस्ट निकालने के लिए
- 43:58डायरेक्ट मटेरियल डायरेक्ट लेबर डायरेक्ट
- 43:59एक्सपेंस वेरिएबल प्रोडक्शन ओवरहेड और
- 44:01फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड चार पांचों को
- 44:03लेके चलना पड़ेगा तब आपके पास में
- 44:04एब्सॉर्प्शन कॉस्ट आती है अगर एक हटा दो
- 44:07इसमें से फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड हटा
- 44:09सिर्फ वेरिएबल वाले प्रोडक्शन ओवरहेड को
- 44:10ऐड करो प्राइम कॉस्ट के अंदर। तो आपके पास
- 44:12में मार्जिनल कॉस्ट आ जाएगी। मार्जिनल
- 44:14कॉस्ट और अपनी एब्सॉर्प्शन कॉस्ट में
- 44:15सिर्फ एक ही डिफरेंस है आपके फिक्स
- 44:17प्रोडक्शन ओवरहेड का। ठीक है साहब? ये
- 44:20पॉइंट ध्यान में रखना। अभी आगे काम भी
- 44:21आएगा। तो हम ये कह सकते हैं कि टोटल कॉस्ट
- 44:25जो भी आएगी यूनिट्स की क्लोजिंग इन्वेंटरी
- 44:27की वो हमेशा एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग में
- 44:28ज्यादा आएगी एज़ कंपेयर टू मार्जिनल
- 44:30कॉस्टिंग। क्योंकि अपनी एब्जॉर्प्शन कॉस्ट
- 44:32ज्यादा होती है मार्जिनल कॉस्ट से। ठीक है
- 44:34ना? दिस इज़ ड्यू टू फिक्स्ड प्रोडक्शन
- 44:36ओवरहेड्स अब्सॉर्ब्ड इंटू द कॉस्ट यूनिट
- 44:38अंडर एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग। अबॉर्प्शन
- 44:39कॉस्टिंग में जब फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड
- 44:40को ही इंक्लूड कर दिया। जब कॉस्ट ही बढ़ा
- 44:43दी तो उसके हिसाब से इन्वेंटरी का
- 44:44वैल्यू्यूएशन भी ज्यादा आएगा। ये एमसीक्यू
- 44:46के लिए ध्यान रखना। एग्जाम में कांसेप्ट
- 44:48टेस्ट होते हैं। एग्जाम में थ्योरी टेस्ट
- 44:49नहीं होती। ये थ्योरी नहीं है। ये
- 44:50कांसेप्ट है। ये बड़ी गलती होती है बच्चों
- 44:52को कि वो कहते हैं कि सर थ्योरी आ गई
- 44:54एग्जाम में। थ्योरी नहीं आती। तो उस
- 44:55कांसेप्ट टेस्ट हो रहे हैं। कांसेप्ट की
- 44:56टेस्टिंग तो होगी यार। ये कांसेप्ट
- 44:58तुम्हें पता नहीं होगा। तो फिर तुम किस
- 45:00तरीके से इस इस मेथड को रियल लाइफ में यूज़
- 45:03करोगे? तो वो कॉन्सेप्ट टेस्टिंग करता है।
- 45:04थ्योरी टेस्टिंग नहीं करता है। ठीक है
- 45:06साहब। हां जी। इसके ऊपर एक क्वेश्चन करते
- 45:08हैं। एग्जांपल नंबर थ्री देखो क्या कह रहा
- 45:10है। बीकेयू कंपनी इज़ इन प्रोसेस ऑफ़ वैल्यू
- 45:13वन ऑफ़ इट्स प्रोडक्ट प्रोडक्ट XB। द
- 45:15प्रोडक्ट XB हैज़ अ मार्जिनल कॉस्ट ऑफ़ $1
- 45:18पर यूनिट एंड एन अब्सॉर्प्शन कॉस्ट ऑफ़ $1
- 45:21पर यूनिट। एट द एंड ऑफ़ सेप्टेंबर देयर वर
- 45:24$2500 यूनिट्स लेफ्ट इन्वेंटरी। 2500
- 45:27यूनिट थे अपने पास में इन्वेंटरी के अंदर।
- 45:29ठीक है? ठीक है? तो ये क्लोजिंग इन्वेंटरी
- 45:30दे रखी है। मुझे मार्जिनल कॉस्ट दे रखी
- 45:32है। मुझे अब्सॉर्प्शन कॉस्ट दे रखी है।
- 45:33आपको बतानी है व्हाट इज द वैल्यू ऑफ़
- 45:34इन्वेंटरी एट द एंड ऑफ़ सेप्टेंबर इफ
- 45:36बीकेयू यूजज़ मार्जिनल कॉस्टिंग। तो
- 45:38मार्जिनल कॉस्टिंग में 2500 की इन्वेंटरी
- 45:40को मल्टीप्लाई करेंगे मार्जिनल कॉस्ट से।
- 45:42और वहीं पे अगर एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग को
- 45:44यूज़ करते हैं तो फिर 2500 की इन्वेंटरी को
- 45:46आप मल्टीप्लाई करते हैं एब्सॉर्प्शन कॉस्ट
- 45:48से। ठीक है सर?
- 46:05ठीक है सर।
- 46:10हां जी। फिर आता है एग्जांपल नंबर फोर।
- 46:13प्रोडक्शन डाटा फॉर वन आपको एक प्रोडक्ट
- 46:16के लिए दे रखा है प्रोडक्शन डाटा। मटेरियल
- 46:18लगता है 2.4 kg एक यूनिट को बनाने में।
- 46:21ठीक है? और $3 पर केजी का मटेरियल का
- 46:23खर्चा है। तो यहां से अपनी डायरेक्ट
- 46:24मटेरियल की कॉस्ट आ जाती है 2.4 * 3
- 46:347.2
- 46:36और लेबर के लिए 1.5 आवर लगते हैं और लेबर
- 46:39को अपन पेमेंट करते हैं $5 पर आवर का। तो
- 46:421.5 * 5 पर यूनिट की कॉस्ट आ गई 7.5। ठीक
- 46:46है? ये अपनी कॉस्ट पर यूनिट निकाल रहे हैं
- 46:48अपन यहां पे। ठीक है? अभी तो अपने को
- 46:50कॉस्ट दे रखी है पर केजी और पर आवर में।
- 46:51मुझे तो एक यूनिट की एक गोरमे को बनाने की
- 46:54कॉस्ट चाहिए। तो यहां पे अपन निकाल रहे
- 46:56हैं कॉस्ट पर यूनिट।
- 47:02ठीक है? तो ये कॉस्ट पर यूनिट आ गया अपने
- 47:04पास। फिर आता है भाई द वेरिएबल ओवरहेड रेट
- 47:07इज़ $4 पर डायरेक्ट लेबर आवर। द फिक्स्ड
- 47:10ओवरहेड अब्सॉर्प्शन रेट इज़ $7 पर डायरेक्ट
- 47:12लेबर आवर। द बजटेड प्रोडक्शन इज़ 5000
- 47:15गोरमेज़। ठीक है? वेरिएबल ओवरहेड के अलग से
- 47:18खर्चे दे रखे हैं फोर का और फिक्स्ड
- 47:20ओवरहेड की अब्सॉर्प्शन रेट भी दे रखी है
- 47:21सेवन की और 5000 गौरव में बने थे। बजटेड
- 47:25फिक्स्ड ओवरहेड्स आपको दे रखे हैं। नंबर
- 47:26ऑफ यूनिट इंटू नंबर ऑफ़ आवर्स इंटू आवरली
- 47:29रेट। ये अपने
- 47:31सेवन की रेट है पर डायरेक्टली बार आवर। तो
- 47:34यूनिट्स को बनाने में 1.5 आवर लगते हैं।
- 47:36तो इससे एक यूनिट के फिक्स्ड ओवरहेड आ गए।
- 47:39उनको मल्टीप्लाई कर दिया 5000 यूनिट्स से।
- 47:40तो आपके पास में टोटल बजटेड फिक्स्ड ओवर
- 47:42रेट आ गया वो 52 है। डिटरमाइन द कॉस्ट ऑफ
- 47:45गोमे फॉर इन्वेंटरी इवैल्यूएशन पर्पस ऑन
- 47:48मार्जिनल कॉस्टिंग एंड एब्सॉर्प्शन
- 47:49कॉस्टिंग। दोनों बेसिस पे आपको कॉस्ट
- 47:51निकालनी है।
- 47:53अपने को बनानी है कॉस्ट शीट। कॉस्ट शीट
- 47:55कहती है भ डायरेक्ट मटेरियल प्लस डायरेक्ट
- 47:58लेबर प्लस डायरेक्ट एक्सपेंस। इससे आपके
- 48:00पास में आएगी प्राइम कॉस्ट।
- 48:03इस प्राइम कॉस्ट में अगर आपने ऐड कर दिया
- 48:05वेरिएबल।
- 48:11प्रोडक्शन ओवरहेड तो आपके पास में आ जाएगी
- 48:14मार्जिनल कॉस्ट
- 48:18जिसे आप वेरिएबल प्रोडक्शन कॉस्ट भी
- 48:20बोलोगे और उसमें अगर आपने ऐड कर दिया
- 48:22फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड
- 48:30तो आपके पास में आ जाएगी अब्सॉर्प्शन
- 48:32कॉस्ट।
- 48:41अपने को यहां पर कॉस्ट
- 48:44पर यूनिट चाहिए। ठीक है? हां जी। अब
- 48:48डायरेक्ट मटेरियल की कॉस्ट तो अपने निकाल
- 48:50ली थी। एक यूनिट को बनाने में 2.4 kg का
- 48:52रॉ मटेरियल लगता है और 1 kg रॉ मटेरियल की
- 48:55कॉस्ट 3 आ रही थी। तो ये आपके 7.2 है।
- 48:58डायरेक्ट लेबर में एक यूनिट को बनाने में
- 49:001.5 आवर लगते हैं। और लेबर की कॉस्ट $5 पर
- 49:02आवर है। तो इसके हिसाब से खर्चा आ रहा था
- 49:047.5 डायरेक्ट एक्सपेंस कुछ बोल नहीं रखा
- 49:06तो ज़ीरो कर दो। इन दोनों को ऐड करोगे तो
- 49:09आपके पास में प्राइम कॉस्ट आ जाएगी 14.7
- 49:12की।
- 49:15ठीक है? अब आती है वेरिएबल प्रोडक्शन ओवर।
- 49:19वेरिएबल प्रोडक्शन ओवर बोल रखा है $4 पर
- 49:21डायरेक्ट लेबर आवर। एक लेबर आवर पे फोर
- 49:24का। लेकिन एक यूनिट को बनाने में तो 1.5
- 49:26का खर्चा 1.5 आवर लगते हैं। तो वेरिएबल
- 49:28ओवरहेड भी फिर 1.5 आवर के हिसाब से
- 49:30अब्सॉर्ब होंगे। 1.5 * 4 तो वेरिएबल कॉस्ट
- 49:34भी
- 49:37सिक्स। ये हो जाएगी 20.7 ये आपकी मार्जिनल
- 49:41कॉस्ट है। वेरिएबल कॉस्ट ऑफ़ प्रोडक्शन
- 49:42जिसे अपन कहते हैं। और इसी में अगर आप
- 49:44फिक्स्ड ओवरहेड्स को इंक्लूड करोगे।
- 49:46फिक्स्ड ओवरहेड कैसे निकलेंगे? वह दे रखे
- 49:48हैं। $ पर डायरेक्ट लेबर आवर एक लेबर आवर
- 49:511.5 है * 7
- 50:0531.2
- 50:06ये हो गया सब आंसर।
- 50:09इस तरीके से आंसर आ जाएगा। मार्जिनल कॉस्ट
- 50:1220.7 और एब्सॉर्प्शन कॉस्ट 31.2 दोनों आ
- 50:16गया आंसर।
- 50:18ठीक है? ठीक है? तो ये कॉस्ट शीट अपने को
- 50:19ध्यान रखनी है। अगर तुम्हें ये कॉस्ट शीट
- 50:21याद रह गई तो तुम अपने ये एब्सॉर्प्शन
- 50:23कॉस्टिंग और मार्जिनल कॉस्टिंग के
- 50:24क्वेश्चंस वगैरह कैलकुलेट करना। आराम से
- 50:26तुम्हारा काम हो जाएगा। और अब इन्वेंटरी
- 50:28का वैल्यू्यूएशन मार्जिनल कॉस्टिंग में
- 50:3020.7 पे होगा। तो जितने इन्वेंटरी के
- 50:32यूनिट्स हैं उसको मल्टीप्लाई कर देना 20.7
- 50:33से। जितने यूनिट बना है उसके हिसाब से
- 50:35मल्टीप्लाई कर दोगे तो प्रोडक्शन की कॉस्ट
- 50:37आ जाएगी। और एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग में ये
- 50:39वाला अपन फिगर लेके चलेंगे। चाहे अपनी
- 50:41इन्वेंटरी का वैल्यूएशन हो, चाहे अपने
- 50:42प्रोडक्शन कॉस्ट की निकालने की बात हो।
- 50:45ठीक है साहब?
- 50:48हां जी। एक और क्वेश्चन देखते हैं।
- 50:49एग्जांपल फाइव। अ कंपनी प्रोड्यूसेस एंड
- 50:51सेल्स अ सिंगल प्रोडक्ट। वेरिएबल कॉस्ट दे
- 50:53रखी है सिक्स की है। फिक्स्ड कॉस्ट हैव
- 50:55बीन अब्सॉर्ब्ड ओवर अ नॉर्मल लेवल ऑफ़
- 50:57एक्टिविटी ऑफ़ 2 लाख एंड हैव कैलकुलेटेड टू
- 50:58बी टू। करंट सेलिंग प्राइस 10 की है। आपको
- 51:01बताना है कितना कंट्रीब्यूशन अर्न होगा।
- 51:02अगर कंपनी ₹50,000 यूनिट्स बेचती है तो।
- 51:05कॉन्ट्रिब्यूशन निकालना है।
- 51:07कॉन्ट्रिब्यूशन के लिए अपन और टोटल
- 51:09कंट्रीब्यूशन ही दे रखा है यहां पे। तो
- 51:11अपन कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट निकालेंगे
- 51:12पहले।
- 51:22इंटू ध्यान रखना नंबर ऑफ यूनिट्स सोल्ड
- 51:24नॉट प्रोड्यूस्ड यहां पे प्रोड्यूस भी दे
- 51:27रखा है और सोल्ड भी दे रखा है। अपने को
- 51:28सोल्ड वाला फिगर चाहिए।
- 51:32तो कॉन्ट्रिब्यूशन पर यूनिट के लिए 10 की
- 51:33सेलिंग प्राइस है। वेरिएबल कॉस्ट सिक्स की
- 51:35है। तो इससे कंट्रीब्यूशन और नंबर ऑफ
- 51:37यूनिट 250
- 51:41तो आंसर हो गया ₹1 लाख।
- 51:46डी।
- 51:47ठीक है साहब? इस तरीके से आंसर आ जाएगा
- 51:50अपना यहां पे। ठीक है?
- 51:53अब आते हैं मेन मुद्दे पर। सर एब्जॉर्प्शन
- 51:55कॉस्टिंग और मार्जिनल कॉस्टिंग में
- 51:57प्रॉफिट कैसे निकाला जाएगा? उसका फुल
- 51:59फॉर्मेट। अभी जो अपने देखा था वो अपने
- 52:01मार्जिनल कॉस्टिंग का शॉर्ट फॉर्मेट था।
- 52:03ये मार्जिनल कॉस्टिंग का फुल फॉर्मेट है।
- 52:04और यह एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का फुल
- 52:06फॉर्मेट है। यह फुल फॉर्मेट अपने को पता
- 52:08होना चाहिए। एग्जाम में सेक्शन बी में अगर
- 52:10क्वेश्चन आ गया, तो फिर वो यहीं से आएगा
- 52:12इसमें से। ठीक है? और इवन सेक्शन A में भी
- 52:15छोटा क्वेश्चन थोड़ी कम वैल्यू्यूज के साथ
- 52:17में तो आया हुआ है। ठीक है ना? तो
- 52:19कैलकुलेट कैसे करोगे? नॉर्मल जो आप
- 52:21अकाउंट्स में पीएनएल बनाते हो उस फॉर्मेट
- 52:23को दिमाग में रखना। उसी में कुछ चेंजेस
- 52:26करके अपन ने ये फॉर्मेट बनाया। अपन
- 52:28स्टार्ट करते हैं सेल्स रेवेन्यू से। यहां
- 52:29पे भी स्टार्ट करेंगे सेल्स रेवेन्यू से।
- 52:31उधर अपन लिखते हैं अ अपना ओपनिंग
- 52:34इन्वेंटरी प्लस प्रोडक्शन और क्लोजिंग को
- 52:36अपन लिखते हैं क्रेडिट साइड पे। तो
- 52:37क्लोजिंग एक तरह से लेस हो रहा है। यहां
- 52:38भी वही कर रहे हैं। ओपनिंग इन्वेंटरी का
- 52:40वैल्यू्यूएशन। उसमें प्रोडक्शन की कॉस्ट
- 52:42को ऐड करा और उसमें से क्लोजिंग इन्वेंटरी
- 52:43की वैल्यू्यूएशन को लेस करा। तो हमारे पास
- 52:45में आ जाती है कॉस्ट ऑफ़ सेल। अब क्योंकि
- 52:47यह एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग है तो यहां पे
- 52:49इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन, यहां पे
- 52:50प्रोडक्शन का कॉस्ट का वैल्यूएशन सब
- 52:51एब्जॉर्प्शन कॉस्ट पे होगा। फुल
- 52:53एब्सॉर्प्शन कॉस्ट पे होगा। ठीक है? इससे
- 52:55आपके पास में फुल प्रोडक्शन कॉस्ट ऑफ सेल
- 52:57आएगी। उसको आप सेल्स में से माइनस करोगे।
- 52:59आपके पास में एक फिगर आएगा। बट इस फिगर
- 53:01में एक चीज एडजस्ट करने की और जरूरत
- 53:02पड़ेगी। वो है आपका अंडर एब्सॉर्प्शन या
- 53:04ओवर एब्जॉर्प्शन। क्योंकि यहां पे जो आपने
- 53:06फिक्स्ड कॉस्ट ली है वो एब्सॉर्ब्ड बेसिस
- 53:08पे ली है तो उसमें अंडर या ओवर
- 53:09एब्सॉर्प्शन हो सकता है। वो अंडर
- 53:11एब्सॉर्प्शन हुआ अगर आपने कम खर्चे
- 53:13रिकॉर्ड कर रखे हैं तो खर्चे बढ़ाने
- 53:14पड़ेंगे तो अंडर एब्सॉर्प्शन को लेस करते
- 53:15हैं। ओवर एब्सॉर्प्शन हो गया मान लो
- 53:17ज्यादा खर्चे रिकॉर्ड कर लिए तो खर्चे कम
- 53:19करने पड़ेंगे तो इसलिए उसको ऐड बैक करते
- 53:21हैं। इससे आपके पास में आता है आपका ग्रॉस
- 53:23प्रॉफिट। इस ग्रॉस प्रॉफिट में से फिर आप
- 53:25अपने जितने भी फिक्स्ड नॉन प्रोडक्शन
- 53:26ओवरहेड हैं और जितने भी वेरिएबल नॉन
- 53:28प्रोडक्शन ओवरहेड्स हैं उनको लेस करते हो
- 53:30तो आपके पास में एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट आ
- 53:31जाता है। ठीक है साहब? तो यहां क्या कर
- 53:34रहे हैं? पहले सेल्स में से सारी की सारी
- 53:37प्रोडक्शन कॉस्ट को एडजस्ट कर रहे हैं।
- 53:38बाद में नॉन प्रोडक्शन की कॉस्ट को एडजस्ट
- 53:40कर रहे हैं। ठीक है? और क्योंकि इसके अंदर
- 53:42कॉस्ट को एब्सॉर्ब करा था। फिक्स्ड
- 53:44ओवरहेड्स को एब्सॉर्ब कराया जाता है। तो
- 53:45यहां पे अंडर या ओवर एब्सॉर्प्शन का
- 53:46एडजस्टमेंट आएगा। अंडर एब्सॉर्प्शन होगा
- 53:48तो लेस करेंगे। ओवर एजॉर्प्शन होगा तो ऐड
- 53:50करेंगे। यहीं पे जब अपन बात करते हैं
- 53:52मार्जिनल कॉस्टिंग की। मार्जिनल कॉस्टिंग
- 53:54में इनमें से कुछ भी करने की जरूरत आपको
- 53:56नहीं पड़ेगी। ठीक है?
- 53:57[नाक से की जाने वाली आवाज़] कि अंडर
- 53:57एब्सॉर्प्शन ओवर एजॉर्प्शन वगैरह निकालने
- 53:59की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि मार्जिनल
- 54:00कॉस्टिंग में अपन फिक्स्ड कॉस्ट को
- 54:01इंक्लूड ही नहीं करते इन्वेंटरी के
- 54:03वैल्यू्यूएशन में। तो फिर अंडर या ओवर
- 54:04एजॉर्प्शन की दिक्कत ही नहीं आती। अपन तो
- 54:06सीधा एक्चुअल खर्चा बाद में लेस कर देते
- 54:07हैं। तो जब अपन बात करेंगे यहां पे
- 54:09कैलकुलेशन की तो यहां पे सेल्स में से
- 54:10वेरिएबल कॉस्ट ऑफ सेल माइनस हो गई। कॉस्ट
- 54:12ऑफ सेल निकालने का फार्मूला तो वही है।
- 54:14ओपनिंग इन्वेंटरी प्लस प्रोडक्शन कॉस्ट
- 54:16माइनस क्लोजिंग। बट इस बार जो ओपनिंग
- 54:17इन्वेंटरी और प्रोडक्शन का वैल्यू्यूएशन
- 54:19है या क्लोजिंग इन्वेंटरी का वैल्यूएशन है
- 54:20वो मार्जिनल कॉस्ट पर है। वो वेरिएबल
- 54:22कॉस्ट पर है। इस सेल्स में से वेरिएबल
- 54:24कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन और आपकी जितनी भी
- 54:26वेरिएबल नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट है वो लेस
- 54:28करोगे तो आपके पास में आएगा आपका
- 54:29कंट्रीब्यूशन। उसमें से आप अपने एक्चुअल
- 54:32वाले फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड और एक्चुअल
- 54:33वाले फिक्स्ड नॉन प्रोडक्शन ओवरहेड को लेस
- 54:36कर दोगे तो आपके पास में आ जाएगा आपका
- 54:38मार्जिनल का प्रॉफिट। अब ये जो मार्जिनल
- 54:40का प्रॉफिट और अब्सॉर्शन का प्रॉफिट है
- 54:41इसमें डिफरेंस आएगा। ऑब्वियस सी बात है।
- 54:43दोनों सेम नहीं होते हैं। उसको कैसे
- 54:45रिकंसाइल करेंगे? अभी उसके बारे में बात
- 54:47करते हैं। पहले एक क्वेश्चन से इन दोनों
- 54:49का पीएंडएल बनाना सीखते हैं। ये सब
- 54:51एग्जांपल नंबर सिक्स देखो क्या कह रहा है।
- 54:53अ कंपनी कमेंस बिज़नेस ऑन 1 मार्च मेकिंग
- 54:56वन प्रोडक्ट ओनली। अब बिज़नेस स्टार्ट करा
- 54:57है 1 मार्च को। स्टार्ट करा है तो ओपनिंग
- 55:00इन्वेंटरी जीरो है। इसका मतलब
- 55:03ओपनिंग इन्वेंटरी कुछ होगी नहीं। बिज़नेस
- 55:05स्टार्ट करोगे तो ओपनिंग इन्वेंटरी कैसे
- 55:06आएगी? ठीक है ना? तो ओपनिंग इन्वेंटरी है
- 55:10ही नहीं। ज़ीरो है।
- 55:15सिर्फ क्लोजिंग इन्वेंटरी को लेके चलना
- 55:17है। डायरेक्ट लेबर, डायरेक्ट मटेरियल,
- 55:19वेरिएबल प्रोडक्शन ओवरहेड, फिक्स्ड
- 55:20प्रोडक्शन ओवरहेड करते हुए आपके पास में
- 55:21टोटल ये आपकी एब्सॉर्प्शन कॉस्ट है।
- 55:23क्योंकि इसमें फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवर जुड़ा
- 55:25हुआ है। तो ये आपकी एब्सॉर्प्शन कॉस्ट है।
- 55:31यहीं पे अगर आपको मार्जिनल कॉस्ट निकालनी
- 55:35हो
- 55:38तो मार्जिनल कॉस्ट के अंदर सिर्फ वेरिएबल
- 55:40प्रोडक्शन ऑपरेटर तक ही आएगा। तो 5 + 8 +
- 55:442 15 एब्जॉर्प्शन कॉस्ट 20 है और मार्जिनल
- 55:48कॉस्ट 15 है। मार्जिनल कॉस्टिंग के केस
- 55:51में 15 पे इन्वेंटरी का और प्रोडक्शन का
- 55:52वैल्यू्यूएशन होगा और एब्सॉर्प्शन
- 55:54कॉस्टिंग में 20 पे वैल्यू्यूएशन होगा।
- 55:56ठीक है ना? यहां पर लोग कहते हैं फिक्स्ड
- 55:58प्रोडक्शन ओवरहेड फिगर हैज़ बीन कैलकुलेटेड
- 56:00बेस्ड ऑन द नॉर्मल बजटेड नॉर्मल आउटपुट ऑफ
- 56:0236,000 यूनिट्स। फिक्स्ड प्रोडक्शन
- 56:05ओवरहेड्स एक्चुअली इंकर्ड वाज़ 15,000
- 56:10सेलिंग डिस्ट्रीब्यूशन एडमिनिस्ट्रेटिव
- 56:12एक्सपेंसेस। तो ये आपके नॉन प्रोडक्शन
- 56:14ओवरहेड्स हैं। इसका मतलब
- 56:17प्रोडक्शन रिलेटेड नहीं है। यह आपके नॉन
- 56:20प्रोडक्शन ओवरहेड्स हैं।
- 56:26फिक्स्ड वाले 10,000 के सेल वेरिएबल वाले
- 56:2815% ऑफ सेल वैल्यू के तो जो भी सेल वैल्यू
- 56:30निकलेगी ना उसका 15% निकालना पड़ेगा।
- 56:33सेलिंग प्राइस दे रखी है 50 की है। नंबर
- 56:34ऑफ यूनिट प्रोड्यूस 2000 है। सेल्स 1500
- 56:37है। इसमें क्लोजिंग इन्वेंटरी का फिगर
- 56:40आपको निकालना पड़ेगा। इसका मतलब भाई जब
- 56:432000 यूनिट बनाए हैं और 1500 ही बेचे तो
- 56:46इसका मतलब 500 आपके पास में क्लोजिंग में
- 56:48पड़े हुए हैं तो आपको क्लोजिंग इन्वेंटरी
- 56:51के यूनिट्स निकालने पड़ेंगे। ओपनिंग के
- 56:52लिए तो बोल रखा था ज़ीरो है। बिज़नेस
- 56:54स्टार्ट हुआ था। हिंट दे रखा था और कुछ
- 56:56नहीं बोले तो एग्जाम में हमेशा ज़ीरो मान
- 56:58के चलना। कुछ नहीं बोल रखा हो तो ओपनिंग
- 56:59इन्वेंटरी को ज़ीरो मान के चलना। यहां तो
- 57:01हिंट दे रखा है कमेंस बिज़नेट तो ओपनिंग
- 57:02इन्वेंटरी ज़ीरो है। क्लोजिंग के लिए हिंट
- 57:04दे रखा है। बोल नहीं रखा है बट क्लोजिंग
- 57:05निकालनी पड़ेगी अपने को। तो हिंट दे रखा है
- 57:07भाई 2000 बना है। 1500 बेच दिए तो 500 बचे
- 57:10हैं। इसका मतलब वो क्लोजिंग इन्वेंटरी
- 57:11तुम्हारी। आपको एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग और
- 57:13मार्जिनल कॉस्टिंग दोनों से पीएनएल बनाना
- 57:14है। ठीक है साहब? बातचीत स्टार्ट करते
- 57:16हैं।
- 57:33सेल्स रेवेन्यू लिखते हैं सबसे पहले।
- 57:41इसमें से लेस करेंगे।
- 57:54फुल अब्सॉर्प्शन कॉस्ट ऑफ सेल्स
- 57:58ठीक है। इसमें
- 58:02ओपनिंग इन्वेंटरी
- 58:06प्रोडक्शन की कॉस्ट
- 58:09इसमें से क्लोजिंग इन्वेंटरी को माइनस
- 58:11करेंगे।
- 58:13इसमें आप फिर अपने अंडर अब्सॉर्प्शन ओवर
- 58:15अब्सॉर्प्शन को एडजस्ट करोगे। उसके बाद
- 58:17में आपके पास इसमें ग्रॉस प्रॉफिट आएगा।
- 58:18अभी देखते हैं अंडर ओवरॉर्प्शन कितना
- 58:19होगा।
- 58:21हां जी सेल्स रेवेन्यू निकालते हैं। सेल्स
- 58:24रेवेन्यू क्या है साहब? सेल्स रेवेन्यू के
- 58:25लिए $50 की सेलिंग प्राइस है और यूनिट्स
- 58:28आपने बेची है 1500। तो 1500 * 50
- 58:4175000
- 58:43ओपनिंग इन्वेंटरी तो ज़ीरो है सब ओपनिंग
- 58:46ज़ीरो
- 58:49प्रोडक्शन कॉस्ट आपने 2000 यूनिट बनाए और
- 58:52क्योंकि एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग है तो
- 58:54एब्जॉर्प्शन कॉस्ट लेके चलोगे।
- 58:55एब्जॉर्प्शन कॉस्ट 20 आ रही थी।
- 58:57यहां पर 20 यह हो जाएगा 40,000 क्लोजिंग
- 59:01इन्वेंटरी में 500 यूनिट्स हैं 20 के
- 59:04वैल्यू्यूएशन पे तो ये होंगे 10,000
- 59:08यहां आपका आंसर आएगा 30,000 का।
- 59:12ठीक है? अभी देखते हैं अंडर ओवर
- 59:14अब्सॉर्प्शन का क्या एडजस्टमेंट होगा।
- 59:20ओवर अब्सॉर्प्शन को ऐड करते हैं। अंडर
- 59:22अब्सॉर्प्शन को लेस करते हैं।
- 59:44यहां से आएगा ग्रॉस प्रॉफिट। ग्रॉस
- 59:46प्रॉफिट में से फिर आप ऐड लेस अपने
- 59:48फिक्स्ड नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट को मतलब
- 59:50बेसिकली जितनी भी नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट है
- 59:52उनको लेस करा जाएगा।
- 1:00:02इसके अंदर आपके पास में दो हैं
- 1:00:05फिक्स्ड और वेरिएबल।
- 1:00:17फिक्स्ड वालों के लिए तो दे रखा है।
- 1:00:18फिक्स्ड 10,000 पर मंथ है। तो फिक्स्ड
- 1:00:20वाला फिगर तो अपन ले लेंगे एज इट इज।
- 1:00:25वेरिएबल के लिए बोल रखा था 15% ऑफ सेल्स
- 1:00:28वैल्यू तो सेल्स वैल्यू आई थी 75 तो 75000
- 1:00:33का
- 1:00:3415%
- 1:00:39यह हो जाएगा 11250
- 1:00:42इससे आपके पास में आएगा प्रॉफिट
- 1:00:47यह अब्सॉर्प्शन वाला प्रॉफिट है तो इसको
- 1:00:49अपन अब्सॉर्प्शन प्रॉफिट बोल देंगे
- 1:00:56ठीक है? अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग से निकल रहा
- 1:00:57है। इसलिए इसको अब्सॉर्प्शन प्रॉफिट बोल
- 1:00:59दिया जाता है। अच्छा अब यहां पे एक फिगर
- 1:01:02और निकालना है। अंडर ओवर एब्सॉर्प्शन अपने
- 1:01:04बाकी के सारे फिगर आ जाएंगे। अपना आंसर आ
- 1:01:05जाएगा। अब अंडर या ओवर एब्सॉर्प्शन
- 1:01:07निकालने के लिए थोड़ा सा ओवरहेड को
- 1:01:09रिवाइज़ करते हैं। हम कहते हैं कि भ जब
- 1:01:12आपके एब्जॉर्ब्ड ओवरहेड्स जितने ओवरहेड्स
- 1:01:15आपने रिकॉर्ड करे जो आपके एब्सॉर्ब्ड
- 1:01:18ओवरहेड्स थे। जब वह ज्यादा होते हैं
- 1:01:20एक्चुअल ओवरहेड्स से।
- 1:01:30तब हम कहते हैं सिचुएशन आती है ओवर
- 1:01:32एब्सॉर्प्शन की और इसी का उल्टा होगा तो
- 1:01:36सिचुएशन आएगी अंडर एब्जॉर्प्शन की। ठीक
- 1:01:39है?
- 1:01:41अगर एब्जॉर्बड्ड ओवरहेड्स एक्चुअल से कम
- 1:01:44है। एजॉर्ड ओवरहेड का मतलब वो ओवरहेड जो
- 1:01:46आपने पीएनएल में ऑलरेडी रिकॉर्ड कर लिए।
- 1:01:48अगर वह एक्चुअल से कम है तो आपका मतलब
- 1:01:51आपने कम खर्चे रिकॉर्ड करें तो आपको और
- 1:01:52खर्चे रिकॉर्ड करने हैं। यह सिचुएशन अंडर
- 1:01:55अब्सॉर्प्शन की है और जरूरत से ज्यादा
- 1:01:57खर्चे रिकॉर्ड कर लिए तो ओवर एब्सॉर्प्शन
- 1:01:59हो गया।
- 1:02:03अब इसके लिए अपने को दो फिगर चाहिए साहब।
- 1:02:05तभी पता पड़ेगा अंडर एब्सॉर्प्शन हुआ है
- 1:02:07या ओवर एब्सॉर्प्शन हुआ है। एक तो एक्चुअल
- 1:02:08ओवरहेड का फिगर चाहिए और एक एब्जॉर्ब
- 1:02:12ओवरहेड का फिगर चाहिए। एब्सॉर्ब ओवरहेड का
- 1:02:13फार्मूला अपन ने बताया था एक्चुअल बेसिस।
- 1:02:19* OR
- 1:02:22इससे आएगा अब ओवरहेड माइनस जो आपके
- 1:02:24एक्चुअल फिक्स्ड ओवरहेड्स हैं।
- 1:02:36ओआर अपने को क्वेश्चन में दे रखी थी साहब।
- 1:02:38अह यह फाइव की पर यूनिट यह जो कॉस्ट कार्ड
- 1:02:42है, कॉस्ट कार्ड हमेशा पर यूनिट में होता
- 1:02:44है। तो, यह फाइव की प्रोडक्शन ओवरहेड है
- 1:02:46पर यूनिट के। तो, यूनिट के हिसाब से
- 1:02:48जाएंगे। आपने एक्चुअली में यूनिट बनाए
- 1:02:50कितने? 20,000। खर्चा रिकॉर्ड होता है।
- 1:02:51प्रोडक्शन वाले जितने भी खर्चे हैं, वो
- 1:02:53रिकॉर्ड होते हैं प्रोडक्शन कॉस्ट पे।
- 1:02:54आपने यहां पे प्रोडक्शन कॉस्ट में 20,000
- 1:02:56को मल्टीप्लाई करा है 20 से। तो मतलब
- 1:02:57बेसिकली आपने 20,000 को मल्टीप्लाई करा है
- 1:02:59इस फाइव से। क्योंकि इस 20 के अंदर ये
- 1:03:01फाइव इंक्लूडेड है। इस 20 की कॉस्ट में
- 1:03:03फाइव इंक्लूडेड है। तो आपने यहां पर
- 1:03:05प्रोडक्शन कॉस्ट के अंदर फिक्स प्रोडक्शन
- 1:03:07ओवरहेड कितने इंक्लूड कर लिए? 20 * 5
- 1:03:12सॉरी 2000 * 5 ठीक है ना? 2000 यूनिट्स
- 1:03:17बनाए। यहां पर आपने जो है 2000 * 20 करा
- 1:03:20है। ये 20 के अंदर दो पार्ट है। हम कह
- 1:03:22सकते हैं। एक पार्ट है अपने मार्जिनल
- 1:03:24कॉस्ट का 15 का और एक अलग से फिक्स्ड
- 1:03:26प्रोडक्शन ओवरहेड फाइव किया। 15 + 5 20
- 1:03:28बनता है। तो हम ये कह सकते हैं कि आपने इस
- 1:03:3020 की कॉस्ट के अंदर आपने फाइव के फिक्स्ड
- 1:03:33प्रोडक्शन ओवरलेट को इंक्लूड कर लिया। तो
- 1:03:34आपने कितने फिक्स्ड प्रोडक्शन कॉस्ट टोटल
- 1:03:36आपने इंक्लूड करी अपने पीएनएल में आपने
- 1:03:382000 * 5 10,000 की कॉस्ट को इंक्लूड करा
- 1:03:41है। एक्चुअल खर्चा कितना है? जबकि एक्चुअल
- 1:03:44खर्चा अपने को क्वेश्चन में दे रखा था 15
- 1:03:47का। तो आपने तो कम खर्चा रिकॉर्ड करा।
- 1:03:51आपने पीएंडएल में खर्चा रिकॉर्ड करा है
- 1:03:5310,000 जबकि एक्चुअल खर्चा है 15,000 तो
- 1:03:56यह सिचुएशन अंडर अब्सॉर्प्शन की है। यहां
- 1:03:59पे 5000 का अंडर एब्सॉर्प्शन हुआ है।
- 1:04:07और अंडर एब्सॉर्प्शन को अपने को पीएंडएल
- 1:04:10में हटाना पड़ेगा। लेस करना पड़ेगा। खर्चे
- 1:04:12कम रिकॉर्ड हुए। इस 5000 को अपन ने यहां
- 1:04:14से हटा दिया। तो यहां से आ जाएगा मेरे पास
- 1:04:16में ग्रॉस प्रॉफिट। 75 - 30 - 5 40,000 का
- 1:04:22आया ग्रॉस प्रॉफिट। उसमें से मैंने ये
- 1:04:24बाकी के दोनों खर्चे लेस करें। 10,000 एंड
- 1:04:2711250 ये मेरे पास में आ गया अब्जॉर्प्शन
- 1:04:30का प्रॉफिट 188750।
- 1:04:32ये आ गया एब्जॉर्प्शन का प्रॉफिट। ठीक है
- 1:04:35साहब? इस पूरे एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग
- 1:04:37पीएनएल में जो इंपॉर्टेंट चीज है वो ये है
- 1:04:39कि आपने कहां से एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग और
- 1:04:41मार्जिनल कॉस्टिंग का आंसर मतलब सॉरी
- 1:04:43एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग में कैसे आप अंडर
- 1:04:45एब्सॉर्प्शन और ओवर एब्सॉर्प्शन निकाल रहे
- 1:04:46हो। ठीक है ना? यह सबसे इंपॉर्टेंट है। यह
- 1:04:49कैलकुलेशन अगर आपने कर ली तो फिर आपका काम
- 1:04:51हो जाएगा। अब यह कैलकुलेशन उन्हीं बच्चों
- 1:04:53से सही से होगी जिन बच्चों ने एब्जॉर्प्शन
- 1:04:56अंडर एब्सॉर्प्शन ओवर एब्सॉर्प्शन के
- 1:04:57टॉपिक को सही से पढ़ रखा है। हम कहते हैं
- 1:04:59कि भई अंडर एब्सॉर्प्शन ओवर एब्जॉर्प्शन
- 1:05:00कैसे आता है? ये आता है एब्जॉर्ड ओवरहेड्स
- 1:05:02और एक्चुअल ओवरहेड के बीच के रिलेशनशिप्स
- 1:05:04हैं। अगर एब्जॉर्ब्ड
- 1:05:05[गला साफ़ करने की आवाज़] ओवरहेड ज्यादा
- 1:05:06हैं तो आपने जितने खर्चे रिकॉर्ड करे हैं
- 1:05:07प्रोडक्शन कॉस्ट में वो आपके एब्जॉर्ड
- 1:05:09ओवरहेड है। वो ज्यादा हैं एक्चुअल से तो
- 1:05:10ओवर एब्सॉर्प्शन हुआ है आपका। नहीं तो
- 1:05:12अंडर एब्सॉर्प्शन हुआ है। यहां पे हमारे
- 1:05:14पास में अंडर एब्जॉर्प्शन है। क्योंकि
- 1:05:15हमने खर्चे जो रिकॉर्ड करे एब्जॉर्ड ओवरेट
- 1:05:17का मतलब कॉस्ट रिकॉर्डेड मतलब आपके जो
- 1:05:19फिक्स्ड ओवरहेड की कॉस्ट है रिकॉर्डेड इन
- 1:05:21प्रोडक्शन कॉस्ट। प्रोडक्शन कॉस्ट में
- 1:05:22कितने खर्चे रिकॉर्ड कर लिए उसे अपन
- 1:05:24एब्जॉर्ड ओवरहेड कहते हैं। ठीक है?
- 1:05:25एब्जॉर्ड ओवरहेड का मतलब
- 1:05:29कॉस्ट ऑफ फिक्स्ड ओवरहेड्स
- 1:05:37इंक्लूडेड
- 1:05:39इन प्रोडक्शन कॉस्ट।
- 1:05:42किसी गुड्स के प्रोडक्शन कॉस्ट में आपने
- 1:05:44कितना फिक्स्ड ओवरहेड का खर्चा इंक्लूड
- 1:05:46करा उसे अब्सॉर्ब्ड ओवरहेड कहते हैं। तो
- 1:05:48यहां पर हमने कितना इंक्लूड करा? हमने कहा
- 1:05:50अभी 2000 यूनिट थे। हमने कॉस्ट उनकी 20
- 1:05:52पकड़ी है। 20 की कॉस्ट कैसे आई? 15 की तो
- 1:05:54मार्जिनल कॉस्ट है। फाइव का फिक्स्ड
- 1:05:56प्रोडक्शन ओवरहेड है। तो फाइव आपने
- 1:05:57फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड फाइव के लिए
- 1:05:58हैं। कितने यूनिट्स पे लिए हैं? 2000 पे
- 1:06:00लिए। तो आपने प्रोडक्शन कॉस्ट में कितने
- 1:06:02फिक्स्ड ओवरहेड इंक्लूड कर दिए? आपने 20 *
- 1:06:045 10,000 के खर्चे रिकॉर्ड कर लिए। इसमें
- 1:06:07एक्चुअल कितने हैं? 15 है। तो आपने 5000
- 1:06:09का खर्चा कम रिकॉर्ड करा। तो हमने 5000 से
- 1:06:11खर्चा बढ़ा दिया तो आपके प्रॉफिट कम हो गए
- 1:06:135000 से खर्चा बढ़ाना पड़ेगा तो खर्चे
- 1:06:14बढ़ाएं तो हमने पीएनएल में खर्चे को
- 1:06:16नेगेटिव लिखते हैं। ठीक है? एक्सपेंसेस को
- 1:06:18नेगेटिव रिकॉर्ड करते हैं तो नेगेटिव
- 1:06:19रिकॉर्ड करा। हमारा प्रॉफिट आ गया। इसमें
- 1:06:21से हमने बचे हुए जितने भी नॉन प्रोडक्शन
- 1:06:22के खर्चे थे वो लेस करे। हमारे पास में
- 1:06:24एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का प्रॉफिट आ गया।
- 1:06:26ठीक है साहब? अब बात आती है मार्जिनल
- 1:06:29कॉस्टिंग के पीएनएल की।
- 1:06:32वो कंपैरेटिवली ईजी हो जाता है। क्योंकि
- 1:06:35उसमें ये अंडर एब्जॉर्प्शन ओवर
- 1:06:36एब्सॉर्प्शन की जरूरत ही नहीं पड़ती।
- 1:06:38तो जो मैंने स्टार्टिंग में कहा था कि भाई
- 1:06:41मार्जिनल कॉस्टिंग को इन्वेंट करने की या
- 1:06:43नए सिस्टम को बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
- 1:06:45क्योंकि अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग
- 1:06:46कॉम्प्लिकेटेड है। इस वजह से मार्जिनल
- 1:06:48कॉस्टिंग को बनाना पड़ा वो ईजी है।
- 1:06:50स्टार्टिंग पॉइंट यहां पे भी सेम है। आप
- 1:06:51सेल्स रेवेन्यू से स्टार्ट करोगे। इस बार
- 1:06:54आप लेस करोगे इसमें से सिर्फ वेरिएबल
- 1:06:56कॉस्ट ऑफ सेल।
- 1:07:18और इसमें से आप लेस करोगे
- 1:07:21अपने बाकी के जो वेरिएबल खर्चे हैं
- 1:07:33इससे आपके पास में आएगा कंट्रीब्यूशन
- 1:07:37और कंट्रीब्यूशन में से फिर आप अपनी
- 1:07:38एक्चुअल फिक्स्ड कॉस्ट को लेस कर दोगे जो
- 1:07:41भी आपके पास में तो एक्चुअल फिक्स्ड
- 1:07:48प्रोडक्शन वाले ओवरहेड्स और एक्चुअल
- 1:07:51फिक्स्ड नॉन प्रोडक्शन वाले ओवरहेड्स
- 1:08:00जब तक यह फॉर्मेट दिमाग में बैठे। अच्छा
- 1:08:02यह फॉर्मेट वैसे उस शॉर्टकट फॉर्मेट का
- 1:08:04एक्सपेंशन है। शॉर्टकट फॉर्मेट में क्या
- 1:08:06लिखा था? सेल्स रेवेन्यू माइनस जितनी
- 1:08:08[गला साफ़ करने की आवाज़] भी वेरिएबल
- 1:08:09कॉस्ट है उससे आएगा कंट्रीब्यूशन। उसमें
- 1:08:11से जितनी भी एक्चुअल कॉस्ट को लेस करेंगे
- 1:08:12आएगा प्रॉफिट। बस उसी का एक्सपेंशन ही तो
- 1:08:14कर रहे हैं।
- 1:08:19अब ये मार्जिनल का प्रॉफिट अपने
- 1:08:21अब्सॉर्प्शन के प्रॉफिट से अलग आएगा। फिर
- 1:08:23इसलिए अपन सीखेंगे रिकंसिलेशन कि कैसे
- 1:08:25इनको रिकंसाइल करेंगे आपस में अब जो
- 1:08:27डिफरेंस है इस डिफरेंस को
- 1:08:28[गला साफ़ करने की आवाज़] रिकंसाइल तो
- 1:08:28करना पड़ेगा सब तो कैसे आप रिकंसाइल करोगे
- 1:08:31अब उसके बारे में बात करेंगे आगे नेक्स्ट
- 1:08:32टॉपिक अपने वही बच रहा है अब देखिए सेल्स
- 1:08:36का रेवेन्यू अपना सेम रहेगा अभी 75000 तो
- 1:08:38यहां भी आ जाएगा 75000 सेल्स तो चेंज होगी
- 1:08:40नहीं ओपनिंग इन्वेंटरी का फिगर ज़ीरो था
- 1:08:43अभी भी ज़ीरो रहेगा अब प्रोडक्शन का फिगर
- 1:08:45चेंज होगा क्लोजिंग इन्वेंटरी का
- 1:08:46वैल्यूएशन चेंज होगा प्रोडक्शन में 2000
- 1:08:49को अपन मल्टीप्लाई करेंगे मार्जिनल कॉस्ट
- 1:08:50से मार्जिनल कॉस्ट अपनी यहां पे 15 है ठीक
- 1:08:53है? तो यहां पर मार्जिनल कॉस्ट से
- 1:08:54मल्टीप्लाई होंगे। तो ये हो जाएंगे 30,000
- 1:08:56और ऐसे ही क्लोजिंग इन्वेंटरी के जो 500
- 1:08:58यूनिट्स हैं वो भी मल्टीप्लाई होंगे
- 1:09:00मार्जिनल कॉस्ट से। पहले अपन रिकॉर्ड कर
- 1:09:01रहे थे उसको अब्सॉर्प्शन की कॉस्ट पे।
- 1:09:05अब मार्जिनल कॉस्ट पे रिकॉर्ड करेंगे। तो
- 1:09:08यहां पे जो अपनी कॉस्ट ऑफ सेल होगी वो
- 1:09:10होगी 22500
- 1:09:12की। अच्छा वेरिएबल नॉन प्रोडक्शन कॉस्ट
- 1:09:15में अपने पास में वेरिएबल कॉस्ट ऑफ सेल है
- 1:09:18ये। ये वेरिएबल नॉन प्रोडक्शन ओवरहेड है
- 1:09:20अपने पास में 15% ऑफ़ सेल वैल्यू। तो इसको
- 1:09:22लेके चलेंगे तो सेल वैल्यू का 15% तो
- 1:09:2675000 का 15%
- 1:09:30ये अपन ने निकाला था 11250 आ रहा था ये भी
- 1:09:34यहां ले लेंगे 11250 जितने भी वेरिएबल
- 1:09:37नेचर के खर्चे हैं वो लेस कर दिए सेल्स
- 1:09:39में से तो अपने पास में कंट्रीब्यूशन आ
- 1:09:40गया
- 1:09:4641250
- 1:09:48और फिर एक्चुअल फिक्स्ड प्रोडक्शन
- 1:09:49ओवरहेड्स को लेस कर देंगे एक्चुअल वाले
- 1:09:52फिक्स प्रोडक्शन ओवरहेड अपने को दे रखे
- 1:09:53हैं क्वेश्चन में 15 और एक्चुअल नॉन
- 1:09:56प्रोडक्शन ओवरहेड दे रखे हैं 10 तो 10 और
- 1:09:5715 दोनों को लेस कर देंगे।
- 1:10:01[गला साफ़ करने की आवाज़]
- 1:10:09यहां से आपके पास में मार्जिनल का प्रॉफिट
- 1:10:10आ जाएगा।
- 1:10:18ये हो गया 16250
- 1:10:20और इधर आया था 18750
- 1:10:23दोनों अलग-अलग आएंगे। अभी ये अलग-अलग
- 1:10:25क्यों आ रहे हैं? इसके पीछे का रीज़न तो
- 1:10:27हमें पता है कि भ ये जो प्रोडक्शन की
- 1:10:28कॉस्ट है ना और क्लोजिंग इन्वेंटरी का
- 1:10:29वैल्यूएशन है इसमें आपने फिक्स्ड
- 1:10:31प्रोडक्शन ओवर को एक जगह पर इंक्लूड करा
- 1:10:33है। एक जगह पर इंक्लूड नहीं करा है। अब
- 1:10:34इनको रिकंसाइल कैसे करेंगे? अभी उसके बारे
- 1:10:36में बात भी करेंगे आगे। ठीक है? बट, यह
- 1:10:38आंसर आ गया। एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का
- 1:10:40प्रॉफिट 18750 और अपना मार्जिनल कॉस्टिंग
- 1:10:43का प्रॉफिट 16250
- 1:10:46कैलकुलेट करने का ध्यान रखना है साहब। ठीक
- 1:10:48है? एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का आंसर निकालने
- 1:10:50के लिए एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग के पीएनएल के
- 1:10:52फॉर्मेट को फॉलो करा। इसमें बस अंडर
- 1:10:53एब्जॉर्प्शन ओवर एब्सॉर्प्शन इंक्लूड करना
- 1:10:55होता है आपको। वो अलग से आपको वर्किंग नोट
- 1:10:57में कैलकुलेट करना पड़ेगा। उसके लिए अंडर
- 1:10:59एब्सॉर्प्शन ओवर एब्जॉर्प्शन कैसे निकालते
- 1:11:00हैं? इसका कांसेप्ट दिमाग में बैठा होना
- 1:11:01चाहिए। और जब एब्सॉर्ब्ड ओवरहेड एक्चुअल
- 1:11:03से ज्यादा हो तो ओवर एब्जॉर्प्शन उसको ऐड
- 1:11:05बैक कर लेना। जब एब्सॉर्ड ओवरहेड एक्चुअल
- 1:11:06से कम हो तो अंडर एब्सॉर्प्शन उसको लेस कर
- 1:11:08देना। साथ-साथ में हम कहते हैं कि यहां पे
- 1:11:10जब आप प्रोडक्शन कॉस्ट और इन्वेंटरी का
- 1:11:12वैल्यू्यूएशन कर रहे हो तो फुल
- 1:11:13एब्सॉर्प्शन कॉस्ट पे वैल्यू करोगे। जब
- 1:11:15मार्जिनल कॉस्टिंग की बात आएगी तो
- 1:11:16मार्जिनल कॉस्टिंग में कहते हैं जो छोटा
- 1:11:17वाला फॉर्मेट था ना उसी को एक्सपैंड कर
- 1:11:19रहे हैं। छोटा वाला फॉर्मेट क्या कहता था?
- 1:11:20सेल्स माइनस जितनी भी वेरिएबल कॉस्ट है
- 1:11:22इससे आपके पास में आता है कंट्रीब्यूशन।
- 1:11:24इस कॉन्ट्रिब्यूशन में से फिक्स्ड कॉस्ट
- 1:11:26को लेस करोगे तो आपके पास में आता है
- 1:11:28प्रॉफिट।
- 1:11:29ठीक है? बस यहां पे कंट्रीब्यूशन को टोटल
- 1:11:31में कन्वर्ट करना पड़ता है। फिर फिक्स्ड
- 1:11:32कॉस्ट लेस करके प्रॉफिट आता है। इसी को
- 1:11:34एक्सपैंड करा है मैंने यहां पे। मैंने कहा
- 1:11:36भाई सेल्स में से वेरिएबल कॉस्ट ऑफ सेल
- 1:11:37लेस करी और फिर वेरिएबल नॉन प्रोडक्शन
- 1:11:39कॉस्ट। तो सारी वेरिएबल कॉस्ट लेस हो गई।
- 1:11:41इससे आया कंट्रीब्यूशन और फिर सारी की
- 1:11:42सारी फिक्स्ड कॉस्ट को लेस करा। मेरे पास
- 1:11:44में आया मार्जिनल का प्रॉफिट। ठीक है
- 1:11:46साहब? तो इसी शॉर्टकट फॉर्मूले को अपन
- 1:11:48एक्सपैंड कर रहे हैं। ये दोनों फॉर्मेट जब
- 1:11:50तक दिमाग में नहीं बैठेंगे तब तक एग्जाम
- 1:11:52में ऑब्वियस सी बात है आंसर नहीं आएगा।
- 1:11:54ठीक है साहब? तो ये दोनों फॉर्मेट की
- 1:11:55प्रैक्टिस करनी है आपको। अब आते हैं इस
- 1:11:58चैप्टर के अपने मेन मुद्दे पर कि सर यह जो
- 1:12:01डिफरेंस आएगा ना इसको रिकंसाइल कैसे
- 1:12:03करेंगे और इसी के क्वेश्चन में बच्चे
- 1:12:04अटकते हैं एग्जाम में सबसे ज्यादा क्योंकि
- 1:12:06इस चैप्टर में से सेक्शन ए में एमसीक्यू
- 1:12:08में जो क्वेश्चन आते हैं वो इसी
- 1:12:08रिकंसाइलेशन के आते हैं और यही रिकंसिलेशन
- 1:12:11बच्चों को दिक्कत दे जाता है। देखो हमें
- 1:12:13ये तो पता है कि डिफरेंस आएगा अपने
- 1:12:15एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग के प्रॉफिट में और
- 1:12:16मार्जिनल कॉस्टिंग के प्रॉफिट में डिफरेंस
- 1:12:18आएगा। बट ये डिफरेंस आ क्यों रहा है?
- 1:12:20डिफरेंस आ रहा है साहब एक चीज की वजह से।
- 1:12:22क्योंकि आपके इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन
- 1:12:24अलग-अलग है। ठीक है? दोनों मेथड में जो
- 1:12:28आपने इन्वेंटरी का वैल्यू्यूएशन का तरीका
- 1:12:30यूज़ करा है वो आपका अलग-अलग है साहब। तो
- 1:12:33ये जो डिफरेंस है ना ये इसी इन्वेंटरी के
- 1:12:34वैल्यू्यूएशन के डिफरेंस का है। आप ध्यान
- 1:12:37से देखो यहां पे यहां प्रॉफिट आ रहा है
- 1:12:3916250। यहां प्रॉफिट आ रहा है 18750।
- 1:12:42डिफरेंस कितना आ रहा है? चेक करना। 16250
- 1:12:45में से 18750 को हटाऊं। 2500 का डिफरेंस
- 1:12:48है दोनों के प्रॉफिट में। और दोनों में
- 1:12:50क्लोजिंग इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन को
- 1:12:52चेक करो। एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का
- 1:12:54वैल्यू्यूएशन है 10,000। मार्जिनल
- 1:12:56कॉस्टिंग का वैल्यू्यूएशन है 7500 डिफरेंस
- 1:12:59कितना आ रहा है? 2500 यही तो है इन दोनों
- 1:13:01के बीच का रिकंसिलिएशन।
- 1:13:04एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग और मार्जिनल
- 1:13:05कॉस्टिंग के जो पीएनएल का प्रॉफिट का जो
- 1:13:07फिगर है उसका डिफरेंस आपके इन्वेंटरी के
- 1:13:10वैल्यू्यूएशंस के डिफरेंस से मैच करता है।
- 1:13:12इसको निकालने का तरीका भी इसलिए हम कहते
- 1:13:14हैं आप एक काम करो। आप अपने इन्वेंटरी में
- 1:13:16जो डिफरेंस आया है उसको लो। ठीक है? और
- 1:13:19उसको मल्टीप्लाई कर दो आपकी ओवरहेड की
- 1:13:21एब्जॉर्प्शन रेट से। और जो डिफरेंस है, यह
- 1:13:23भी किसका है? ये डिफरेंस आपकी ओआर का है।
- 1:13:26ठीक है? तो आपकी जो फिक्स्ड ओआर है उससे
- 1:13:29आप मल्टीप्लाई कर दो आपकी चेंज इन
- 1:13:30इन्वेंटरी को। तो इससे आपको डिफरेंस इन
- 1:13:32प्रॉफिट का आंसर मिल जाएगा। जैसे इस वाले
- 1:13:34क्वेश्चन में चेंज इन्वेंटरी कितनी है?
- 1:13:36चेंज इन्वेंटरी का मतलब होता है ओपनिंग
- 1:13:37क्लोजिंग के बीच का डिफरेंस। ओपनिंग तो
- 1:13:39यहां कुछ थी नहीं। क्लोजिंग में 500 है तो
- 1:13:41चेंज 500 का हुआ है। मल्टीप्लाई बाय अपनी
- 1:13:43फिक्स्ड ओवरहेड की रेट। एब्सॉर्प्शन की
- 1:13:45रेट वो यहां पे थी फाइव। तो 500 * 5 2500
- 1:13:49का आंसर आ गया। तो जब भी एग्जाम में अपने
- 1:13:51को रिकंसिलेशन करना पड़ेगा। लॉजिक तो
- 1:13:52ध्यान रखना। लॉजिक क्या है? आपके
- 1:13:54इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन का डिफरेंस है।
- 1:13:55डिफरेंस इन प्रॉफिट विल बी इक्वल टू
- 1:13:57डिफरेंस इन आपके इन्वेंटरी क्लोजिंग
- 1:13:58इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन। ठीक है? तो लॉजिक
- 1:14:00आपको मैं दे रहा हूं।
- 1:14:03फ़ूला नीचे है। ठीक है? ये फ़ूला है और ऊपर
- 1:14:06लॉजिक है। अब एग्जाम में देखना पड़ेगा।
- 1:14:08ज्यादातर क्वेश्चंस वैसे फ़ूला से सॉल्व
- 1:14:10होंगे। बट कभी-कभी कोई क्वेश्चन लॉजिक से
- 1:14:12भी सॉल्व होगा। तो लॉजिक तो क्या है?
- 1:14:19डिफरेंस इन प्रॉफिट
- 1:14:22इक्व डिफरेंस
- 1:14:26इन इन्वेंटरी वैल्यू्यूएशन जो भी आपके
- 1:14:29इन्वेंटरी के वैल्यू्यूएशन का डिफरेंस है
- 1:14:33ठीक है उसके बराबर का डिफरेंस इन प्रॉफिट
- 1:14:35आएगा। हां। अब यहां पे एक बात ध्यान रखना
- 1:14:37यहां पे क्लोजिंग इन्वेंटरी ही था। तो
- 1:14:39सिर्फ क्लोजिंग इन्वेंटरी का डिफरेंस
- 1:14:40लिया। अगर ओपनिंग होता तो ओपनिंग का और
- 1:14:42क्लोजिंग का दोनों का डिफरेंस साथ में
- 1:14:43लेना पड़ता। तब जाके डिफरेंस इन प्रॉफिट
- 1:14:45आता। तो इसलिए डिफरेंस इन प्रॉफिट इक्वल्स
- 1:14:47टू डिफरेंस इन इन्वेंटरी वैल्यूएशन। ये
- 1:14:49लॉजिक है। फार्मूला कैसे करेंगे? तो हम
- 1:14:51बोलेंगे अपने ओपनिंग और क्लोजिंग
- 1:14:52इन्वेंटरी के बीच का चेंज निकालो और उसको
- 1:14:54मल्टीप्लाई करो फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड
- 1:14:56की रेट से जो आपने अपनी कॉस्टिंग में
- 1:14:58इंक्लूड करी है। यहां पे हमने फाइव
- 1:14:59इंक्लूड करी थी पिछले क्वेश्चन में। तो
- 1:15:01500 का चेंज है इन्वेंटरी में ओपनिंग ज़ीरो
- 1:15:03है, क्लोजिंग 500 है, चेंज 500 का है और
- 1:15:06अपनी फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड फाइव की
- 1:15:07है। तो 2500 का डिफरेंस इन प्रॉफिट है। अब
- 1:15:11ये बात एक और आती है कि सर अच्छा
- 1:15:12एब्जॉर्प्शन का ज्यादा आएगा या मार्जिनल
- 1:15:15का प्रॉफिट ज्यादा आएगा ये कैसे पता
- 1:15:16पड़ेगा? तो इसके लिए भी एक लॉजिक है साहब।
- 1:15:19ठीक है? ये मैंने आपको बता दिया जो
- 1:15:20डिफरेंस इन प्रॉफिट है वो आपके इन्वेंटरी
- 1:15:22के चेन से डिेंटरी के वैल्यू्यूएशन पे जो
- 1:15:25है डिफरेंस उसकी वजह से आता है। ठीक है
- 1:15:27साहब।
- 1:15:29[नाक से की जाने वाली आवाज़] हां। अब एक
- 1:15:30और ध्यान रखना। अब ये बात करेंगे।
- 1:15:31एब्जॉर्प्शन और मार्जिनल कॉस्टिंग का
- 1:15:32प्रॉफिट सेम होगा। अगर इन्वेंटरी लेवल में
- 1:15:34चेंज नहीं होगा। अभी इसके बारे में बात
- 1:15:35करते हैं। सर ये कैसे पता पड़ेगा कि
- 1:15:38एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग और मार्जिनल
- 1:15:39कॉस्टिंग के प्रॉफिट में से किसका प्रॉफिट
- 1:15:41ज्यादा होगा? किसका कम होगा? इसके लिए एक
- 1:15:43तुम्हें सिंपल सा एक मेथड बताता हूं। ए बी
- 1:15:47सी डी पढ़ी है बचपन में। ठीक है? एक है
- 1:15:50अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग। एक है मार्जिनल
- 1:15:52कॉस्टिंग। और इधर अपने पास में जो
- 1:15:57इन्वेंटरी है उसमें दो हैं क्लोजिंग
- 1:15:59इन्वेंटरी और ओपनिंग इन्वेंटरी। तो A B CD
- 1:16:02में A B C एक लेटर के गैप में A और C
- 1:16:06पासपास में आते हैं। और MN ओ M और N O के
- 1:16:10बीच में भी एक लेटर का गैप होता है। तो हम
- 1:16:12कहते हैं ये दोनों आपस में रिलेटेड हैं।
- 1:16:14एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग क्लोजिंग इन्वेंटरी
- 1:16:16से रिलेट करता है। और मार्जिनल कॉस्टिंग
- 1:16:20ओपनिंग इन्वेंटरी से रिलेट करता है। ठीक
- 1:16:22है? एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग चालू होता है A
- 1:16:24से। क्लोजिंग इन्वेंटरी चालू होता है C
- 1:16:26से। दोनों पास-पास में। तो इन दोनों का
- 1:16:28रिलेशनशिप है और मार्जिनल कॉस्टिंग चालू
- 1:16:30होता है एम से स्पेलिंग में एम आता है।
- 1:16:32ओपनिंग में ओ आता है। एम और ओ पास-पास में
- 1:16:34आते हैं। तो इनका आपस में रिलेशनशिप है।
- 1:16:36अब रिलेशन बड़ा सिंपल है। अगर क्लोजिंग
- 1:16:38इन्वेंटरी और ओपनिंग इन्वेंटरी सेम है तो
- 1:16:40एब्जॉर्प्शन और मार्जिनल सेम होगा। अगर
- 1:16:43यहीं पे
- 1:16:48अगर क्लोजिंग इन्वेंटरी ओपनिंग से ज्यादा
- 1:16:50है तो एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट ओपनिंग से
- 1:16:52ज्यादा मार्जिन से ज्यादा होगा।
- 1:17:04और यहीं पे अगर ओपनिंग इन्वेंटरी क्लोजिंग
- 1:17:07से ज्यादा है तो मार्जिनल का प्रॉफिट
- 1:17:08एब्जॉर्प्शन ज्यादा होगा। मतलब जो
- 1:17:10रिलेशनशिप ओपनिंग और क्लोजिंग इन्वेंटरी
- 1:17:12का है वही एब्जॉर्प्शन मार्जिनल का है। तो
- 1:17:15याद करना भी आसान हो गया। एब्जॉर्प्शन
- 1:17:17कॉस्टिंग का रिलेशनशिप क्लोजिंग से क्यों
- 1:17:18है? क्योंकि ए बी सी डी में ए और सी पास
- 1:17:20में आते हैं। और मार्जिनल का रिलेशनशिप
- 1:17:22ओपनिंग से क्यों क्योंकि मार्जिनल
- 1:17:24कॉस्टिंग के अंदर ओपनिंग ओ एम और ओ पासपास
- 1:17:26में आते हैं। तो ये लॉजिक याद करने में
- 1:17:27आसानी होगी। अब जब दोनों इन्वेंटरी इन
- 1:17:29दोनों के बीच में क्लोजिंग और ओपनिंग
- 1:17:31इन्वेंटरी के बीच का अगर कोई डिफरेंस मतलब
- 1:17:32जो सिंबल आ रहा है वो इन दोनों के बीच का
- 1:17:34सिंबल है। अगर ओपनिंग क्लोजिंग सेम है तो
- 1:17:36फिर आपकी एब्सॉर्प्शन मार्जिनल कॉस्टिंग
- 1:17:38का प्रॉफिट भी सेम है। क्योंकि फिर
- 1:17:39क्लोजिंग इन्वेंटरी के अंदर कोई डिफरेंस
- 1:17:41आया ही नहीं वैल्यूएशन में। ठीक है ना?
- 1:17:43चेंज इन इन्वेंटरी ज़ीरो है तो फिर आपका
- 1:17:45डिफरेंस इन प्रॉफिट ज़ीरो है। और वहीं पे
- 1:17:47अगर क्लोजिंग इन्वेंटरी ज़्यादा है तो
- 1:17:49एब्जॉर्प्शन का प्रॉफ़िट ज़्यादा होगा। और
- 1:17:50वहीं पे अगर एब्जॉर्प्शन अगर क्लोजिंग
- 1:17:51इन्वेंटरी कम है तो एब्सॉर्प्शन का
- 1:17:53प्रॉफिट कम होगा। पिछले वाले क्वेश्चन में
- 1:17:55देखोगे तो अपनी क्लोजिंग इन्वेंटरी 500
- 1:17:57थी। ओपनिंग ज़ीरो थी तो क्लोजिंग ज्यादा
- 1:17:58है। इसलिए एब्जॉर्प्शन का प्रॉफिट ज्यादा
- 1:18:01है। मार्जिनल कम है। मार्जिनल का है
- 1:18:0216250। एब्जॉर्प्शन का ज्यादा होना चाहिए।
- 1:18:04वो है ज्यादा 18750।
- 1:18:07तो ये लॉजिक ध्यान रखना। इसको याद रखने का
- 1:18:10तुम्हें मैंने शॉर्टकट दे दिया। एग्जाम
- 1:18:11में हमेशा एब्जॉर्प्शन मार्जिनल और उसके
- 1:18:13नीचे क्लोजिंग ओपनिंग ये लिखना। ठीक है?
- 1:18:16इन दोनों के बीच में क्या सिंबल है? वही
- 1:18:18सिंबल तुम्हारे एब्सॉर्प्शन और मार्जिनल
- 1:18:19कॉस्टिंग के प्रॉफ़िट के बीच में होगा। तो
- 1:18:21एग्ज़ैक्टली सेम सिंबल फ़ॉलो करते हैं। ठीक
- 1:18:24है साहब? अब इसको क्वेश्चन से समझते हैं।
- 1:18:27हम कहते हैं भ ओपनिंग इन्वेंटरी में अगर
- 1:18:29मान लो 1000 यूनिट्स हैं और क्लोजिंग
- 1:18:31इन्वेंटरी में मान लो 500 यूनिट्स हैं।
- 1:18:32एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का प्रॉफिट आपको दे
- 1:18:34रखा है $2700 यूनिट्स का। फिक्स्ड
- 1:18:36प्रोडक्शन ओवरहेड्स आर एब्सॉर्ब्ड एट
- 1:18:38$2.50 पर यूनिट। ये आपको बोल रखा है। आपको
- 1:18:40बताना है मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट
- 1:18:41क्या होगा? ओपनिंग इन्वेंटरी है 1000 की।
- 1:18:44क्लोजिंग इन्वेंटरी है 500 की। ठीक है?
- 1:18:47अबजॉर्प्शन कॉस्टिंग, मार्जिनल कॉस्टिंग
- 1:18:51अब्सॉर्प्शन का रिलेशनशिप क्लोजिंग के साथ
- 1:18:53है। मार्जिनल का ओपनिंग के साथ है। यहां
- 1:18:55पर ओपनिंग इन्वेंटरी कम है। सॉरी क्लोजिंग
- 1:18:58इन्वेंटरी कम है। ओपनिंग ज्यादा है। तो
- 1:19:00इसका मतलब मार्जिनल प्रॉफिट का ज्यादा जो
- 1:19:02आंसर होगा वो एब्सॉर्प्शन से ज्यादा आएगा।
- 1:19:04दोनों का सिंबल सेम डायरेक्शन में जाता
- 1:19:06है। अब आपको निकालना है डिफरेंस इन
- 1:19:08प्रॉफिट।
- 1:19:19डिफरेंस इन प्रॉफिट कैसे निकालोगे? तो हम
- 1:19:21कहते हैं डिफरेंस इन प्रॉफिट का सिंपल
- 1:19:22फार्मूला है। आपके पास जितने भी ये अ मतलब
- 1:19:26जो भी डिफरेंस इन यूनिट है डिफरेंस इन
- 1:19:28प्रॉफिट निकालने के लिए आपकी चेंज इन
- 1:19:30इन्वेंटरी लेवल निकालो।
- 1:19:35इन्वेंटरी लेवल में कितना चेंज हुआ? इंटू
- 1:19:38आपकी फिक्स्ड ओआर से मल्टीप्लाई कर दो।
- 1:19:40फिक्स्ड ओए अब्सॉर्प्शन रेट कितनी थी? तो
- 1:19:42इन्वेंटरी में चेंज कितना हुआ है? 1000 से
- 1:19:44500 हो गई। 500 का चेंज है। अच्छा सिंबल
- 1:19:47इग्नोर करना। सिंबल को एक बार इग्नोर कर
- 1:19:49देना। तो 500 * एफओआर कितना होगी? फिक्स्ड
- 1:19:53प्रोडक्शन ओवरहेड की रेट दे रखी है 2.5 की
- 1:19:56* 2.50।
- 1:20:05ठीक है? 1250 का डिफरेंस आएगा। मतलब
- 1:20:08अब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग और मार्जिनल
- 1:20:10कॉस्टिंग के प्रॉफिट के बीच में 1250 का
- 1:20:12डिफरेंस होगा। ठीक है? और मुझे पता है कि
- 1:20:14मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट ज्यादा है
- 1:20:16एब्जॉर्प्शन से। एब्जॉर्प्शन का प्रॉफिट
- 1:20:18दे रखा है 27,000। ठीक है? मुझे रिलेशनशिप
- 1:20:21पता है कि यहां पे एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग
- 1:20:23का जो प्रॉफिट है
- 1:20:25वो कम आना चाहिए। वो कम होगा। किससे?
- 1:20:29मार्जिनल कॉस्टिंग के प्रॉफिट से।
- 1:20:32ठीक है? अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का प्रॉफिट
- 1:20:34तुम्हें दे रखा है 27,000 का। तो ये कम
- 1:20:37होना चाहिए मार्जिनल कॉस्टिंग के प्रॉफिट
- 1:20:38से और मार्जिनल कॉस्टिंग के प्रॉफिट और
- 1:20:39अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के प्रॉफिट के बीच
- 1:20:41का डिफरेंस कितना है? 1250 तो इसका मतलब
- 1:20:43मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट कितना होगा?
- 1:20:4527,000 + 1250 जब इन दोनों प्रॉफिट के बीच
- 1:20:49का डिफरेंस 1250 है। तो एब्सॉर्प्शन में
- 1:20:51से मार्जिनल को लेस करेंगे तो 1250 आएगा।
- 1:20:53और मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट ज्यादा
- 1:20:55है। तो इसका मतलब एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग से
- 1:20:58मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट कितना
- 1:20:59ज्यादा होगा? 1250 से ज्यादा होगा। जब
- 1:21:01दोनों के बीच का डिफरेंस 1250 है। तो ऐड
- 1:21:03कर दिया।
- 1:21:0628250
- 1:21:11ठीक है ना? यह रिलेशनशिप ध्यान में रखना
- 1:21:13है। हमने क्वेश्चन में देखा भ ओपनिंग
- 1:21:15इन्वेंटरी ज्यादा थी क्लोजिंग से। तो
- 1:21:17ओपनिंग ज्यादा है, क्लोजिंग से। इसका मतलब
- 1:21:18मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट ज्यादा
- 1:21:19होगा। एब्जॉर्प्शन से। अब मुझे
- 1:21:21एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का प्रॉफिट दे रखा
- 1:21:22है 27। तो मार्जिनल कॉस्टिंग का आंसर 27
- 1:21:25से तो ज्यादा ही आना चाहिए। तभी अपना
- 1:21:27रिलेशनशिप सही बैठेगा। अब कितना ज्यादा
- 1:21:30आना चाहिए? तो मैंने कहा उसके लिए डिफरेंस
- 1:21:31इन प्रॉफिट का फार्मूला है। उससे आंसर पता
- 1:21:33पड़ा चेंज इन्वेंटरी लेवल। इन्वेंटरी लेवल
- 1:21:35का चेंज 1000 और 500 1000 की ओपनिंग थी
- 1:21:38क्लोजिंग 500 की तो 500 की इन्वेंटरी लेवल
- 1:21:41कम हो चुका है। इसमें साइन इग्नोर करा
- 1:21:43करो। ठीक है? चेंज इन्वेंटरी लेवल जो होता
- 1:21:45है उसमें साइन को इग्नोर करो। चाहे
- 1:21:47पॉजिटिव आ रहा हो चाहे नेगेटिव आ रहा हो।
- 1:21:48नॉर्मली अपना फार्मूला लिखा हुआ होता है
- 1:21:49क्लोजिंग माइनस ओपनिंग। यहां पे फार्मूला
- 1:21:51लिखा होता है क्लोजिंग माइनस ओपनिंग। बट
- 1:21:53आप साइन को इग्नोर कर देना। ठीक है? ठीक
- 1:21:55है? तो यहां पे आंसर वैसे तो नेगेटिव 500
- 1:21:57आ रहा है। 500 का क्लोजिंग है। 1000 का
- 1:21:59ओपनिंग है तो 500 - 1000 करोगे तो 500
- 1:22:02नेगेटिव आएगा। बट उस साइन को इग्नोर करते
- 1:22:03हैं अपन हमेशा। इन्वेंटरी लेवल चेंज में
- 1:22:05साइन को इग्नोर कर दो। इसका आंसर आपके पास
- 1:22:08में 2.50 मल्टीप्लाई करोगे फिक्स्ड टू
- 1:22:10वेयर से। आपके पास में डिफरेंस इन प्रॉफिट
- 1:22:11आया 1250। अब एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का जो
- 1:22:14प्रॉफिट है वो 27,000 है। मुझे पता है
- 1:22:17मार्जिनल और एब्जॉर्प्शन के बीच का
- 1:22:18डिफरेंस 1250 है। और मार्जिनल का प्रॉफिट
- 1:22:21ज्यादा होना चाहिए। तो इसका मतलब मार्जिनल
- 1:22:22का प्रॉफिट जो है वो एब्सॉर्प्शन से 1250
- 1:22:24ज्यादा आएगा। तब इन दोनों के बीच का
- 1:22:25डिफरेंस 1250 होगा। तो मैंने ऐड करा मेरे
- 1:22:27पास में मार्जिनल कॉस्टिंग का आंसर आ गया।
- 1:22:29ठीक है साहब? ये फर्स्ट वाला आंसर। सेकंड
- 1:22:32क्या कह रहा है? ओपनिंग इन्वेंटरी इज़ 8000
- 1:22:35यूनिट्स एंड क्लोजिंग इन्वेंटरी इज़ 9500
- 1:22:37यूनिट्स। मार्जिनल कॉस्टिंग अ प्रॉफिट इज़
- 1:22:408420 टू 8,420,000
- 1:22:43एंड फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड आर
- 1:22:45एब्सॉर्ब्ड एट 17 तो फिक्स्ड ओवरहेड दे
- 1:22:47रखी है। आपको एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग का
- 1:22:48प्रॉफिट निकालने से इस बार एब्सॉर्प्शन का
- 1:22:50प्रॉफिट निकालने को बोला है। ठीक है?
- 1:22:52सेकंड पार्ट फिर वही डिफरेंस इन प्रॉफिट
- 1:22:55निकालो। सबसे पहले तो अपना
- 1:23:01चेंज इन इन्वेंटरी लेवल। इस बार इन्वेंटरी
- 1:23:03लेवल चेंज हुआ है 8000 और 9500 1500 से
- 1:23:08फिक्स्ड ओआर आपको दे रखी है 17 की।
- 1:23:13तो यहां से आ गया डिफरेंस इन प्रॉफिट।
- 1:23:2425500
- 1:23:27अब रिलेशनशिप की बात करते हैं।
- 1:23:34ठीक है? हमेशा ऐसे लिख दिया करो साइड में।
- 1:23:35तुम्हारे रफ पेपर होगा। वैसे भी एग्जाम
- 1:23:37में उस पे लिख देना। अब सिंबल लगाओ। इस
- 1:23:39बार क्लोजिंग इन्वेंटरी ज्यादा है।
- 1:23:42क्लोजिंग ज्यादा है ओपनिंग से। इसका मतलब
- 1:23:43एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट का आंसर ज्यादा
- 1:23:45होगा। मार्जिनल से मुझे दे रखा है किसका
- 1:23:47आंसर? मुझे आंसर दे रखा है मार्जिनल
- 1:23:48कॉस्टिंग का प्रॉफिट। तो मतलब मार्जिनल
- 1:23:50कॉस्टिंग का प्रॉफिट दे रखा है। मुझे
- 1:23:51एब्जॉर्प्शन निकालना है। मार्जिनल
- 1:23:52कॉस्टिंग का प्रॉफिट कम होना चाहिए।
- 1:23:54एब्जॉर्प्शन से। कितने से कम होना चाहिए?
- 1:23:55250 तो एब्जॉर्प्शन का प्रॉफिट कितना
- 1:23:57होगा? निकाल लेंगे।
- 1:24:00अपने को एब्जॉर्प्शन का प्रॉफिट निकालना
- 1:24:02है जो मार्जिनल से होना चाहिए ज्यादा।
- 1:24:06ठीक है? मार्जिनल का प्रॉफिट हमें दे रखा
- 1:24:09है 842।
- 1:24:13842
- 1:24:16अब यह निकालना है।
- 1:24:19यह होना ज्यादा चाहिए। तो इसका मतलब 842
- 1:24:22में कुछ ऐड करेंगे तभी ज्यादा फिगर आएगा।
- 1:24:24कितना ऐड करेंगे? डिफरेंस जो है वो ऐड कर
- 1:24:25दो। तो 842 में इन दोनों के बीच में
- 1:24:29डिफरेंस है उसको ऐड कर दो।
- 1:24:40तो ये आंसर आ गया।
- 1:24:42[हंसी]
- 1:24:44867500
- 1:24:46ठीक है साहब ये हो गया आंसर अपना
- 1:24:50अब आते हैं तीसरे पॉइंट पे तीसरा पॉइंट
- 1:24:52क्या कह रहा है ओपनिंग इन्वेंटरी इज़ 12
- 1:24:55एंड क्लोजिंग भी 12000 अच्छा ओपनिंग
- 1:24:56क्लोजिंग बराबर दे रखी है एब्सॉर्प्शन
- 1:24:58कॉस्टिंग का प्रॉफिट 98 है। फिक्स्ड
- 1:25:00प्रोडक्शन ओवरहेड ट्रेड 4.5 की दे रखी है।
- 1:25:01आपको मार्जिनल कॉस्टिंग का प्रॉफिट
- 1:25:03निकालना है। सेम आएगा। जब ओपनिंग और
- 1:25:05क्लोजिंग सेम हो तो चेंज इन इन्वेंटरी
- 1:25:07ज़ीरो है तो इसका मतलब डिफरेंस इन प्रॉफिट
- 1:25:09भी ज़ीरो आएगा। का जब चेंज इन इन्वेंटरी
- 1:25:10ज़ीरो है उसको तुम 4.5 से मल्टीप्लाई करोगे
- 1:25:12तो डिफरेंस इन प्रॉफिट ज़ीरो आएगा। जब
- 1:25:14डिफरेंस इन प्रॉफिट ज़ीरो है तो उसका मतलब
- 1:25:16प्रॉफिट सेम है। तो फिर यहां पे जब इन
- 1:25:18ओपनिंग और क्लोजिंग इन्वेंटरी सेम हो तो
- 1:25:20एब्सॉर्प्शन मार्जिनल कॉस्टिंग दोनों का
- 1:25:21प्रॉफिट सेम होता है। आंसर 98 हो जाएगा।
- 1:25:23ये आ गए भई अपने तीनों आंसर।
- 1:25:27ठीक है जी।
- 1:25:31हां जी। फर्स्ट वाले का आंसर मार्जिनल
- 1:25:32कॉस्टिंग में आ रहा है 28250. 28250।
- 1:25:36सेकंड वाले का आंसर आ रहा है 86750
- 1:25:39867500
- 1:25:41ठीक है और थर्ड वाले में सेम आएगा कोई
- 1:25:44दिक्कत ही नहीं है तो ये ध्यान रखना है
- 1:25:46साहब ये जो कांसेप्ट मैंने अभी तुम्हें
- 1:25:47बताया अगर ये तुम्हारे दिमाग में बैठ गया
- 1:25:49तो मजा आ जाएगा और याद रखने का तरीका भी
- 1:25:51सिंपल है ए बी सी डी ए बी सी डी के अंदर ए
- 1:25:53और सी पासपास में आते हैं तो एब्सॉर्प्शन
- 1:25:54कॉस्टिंग का रिलेशनशिप क्लोजिंग के साथ है
- 1:25:56और मार्जिनल एम एंड ओ साथ-साथ में आते हैं
- 1:25:58तो मार्जिनल का ओपनिंग के साथ है ठीक है
- 1:26:01सर
- 1:26:05इसके ऊपर अब थोड़े क्वेश्चंस करते हैं।
- 1:26:07एग्जाम में क्या होता है? मिसिंग वैल्यू
- 1:26:08वाले क्वेश्चन यहां से आते हैं। मतलब वो
- 1:26:10कुछ इंफॉर्मेशन दे देता है और बाकी
- 1:26:11इंफॉर्मेशनेशन मिसिंग आपसे मांग लेता है।
- 1:26:13जैसे ये क्वेश्चन है। लास्ट मंथ द
- 1:26:15मैन्युफैक्चरर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी
- 1:26:17कंपनीज़ प्रॉफिट वाज़ 2000 कैलकुलेटेड
- 1:26:20यूजिंग अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग। अगर
- 1:26:21अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग से कैलकुलेट करोगे
- 1:26:22तो प्रॉफिट 2000 का है। और इफ मार्जिनल
- 1:26:24कॉस्टिंग प्रिंसिपल हैड बीन यूज़्ड। तो एक
- 1:26:26लॉस होता आपको 3000 का। तो इसका मतलब
- 1:26:30यह अगर मेरा नंबर स्केल है यहां पे ज़ीरो
- 1:26:32है।
- 1:26:35अबजॉर्प्शन कॉस्टिंग से
- 1:26:40जो सॉरी अब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट आ रहा है
- 1:26:42अपने पास में
- 1:26:48वो है 2000 पॉजिटिव
- 1:26:51और मार्जिनल जो प्रॉफिट है मार्जिनल
- 1:26:55कॉस्टिंग से जो प्रॉफिट आ रहा है वह है
- 1:26:573000 का लॉस तो इन दोनों के बीच का
- 1:27:01डिफरेंस कितना है?
- 1:27:075000 का डिफरेंस है ना सब
- 1:27:102000 और ज़ीरो के बीच में 2000 और ज़ीरो से
- 1:27:133000 3000 तो कुल मिला के 5000 का डिफरेंस
- 1:27:15है दोनों के बीच में तो डिफरेंस इन
- 1:27:17प्रॉफिट आ गया मेरे पास में मुझे बोल रखा
- 1:27:19है द कंपनीज़ फिक्स्ड प्रोडक्शन कॉस्ट इज़
- 1:27:21$2 पर यूनिट सेल्स लास्ट मंथ वर $10
- 1:27:26यूनिट्स। सेल का फिगर भी दे रखा है। आपको
- 1:27:28लास्ट मंथ का प्रोडक्शन निकालना है। ठीक
- 1:27:31है? प्रोडक्शन का फिगर निकालना है साहब।
- 1:27:33अपने को सेल दे रखी है। अपने को फिक्स्ड
- 1:27:35प्रोडक्शन कॉस्ट दे रखी है। अपने को दोनों
- 1:27:38तरह के एब्सॉर्प्शन और मार्जिनल कॉस्टिंग
- 1:27:39के प्रॉफिट और लॉस जो भी फिगर है वो दे
- 1:27:41रखे हैं। अपने से लास्ट मंथ का प्रोडक्शन
- 1:27:43पूछ लिया है। अब यहां पे कुछ बच्चों के
- 1:27:46दिमाग में आना चाहिए कि सर ना वो एक
- 1:27:47फार्मूला होता था। ओपनिंग प्लस प्रोडक्शन
- 1:27:51माइनस क्लोजिंग इससे अपने पास में आती थी
- 1:27:55सेल्स। अब अगर सेल दे रखी है तो प्रोडक्शन
- 1:27:57कैसे निकालें? तो इसको अपन थोड़ा सा चेंज
- 1:27:59कर लेते हैं। इसी को अपन रीाइट कर सकते
- 1:28:01हैं। सेल्स
- 1:28:03प्लस क्लोजिंग माइनस ओपनिंग
- 1:28:07इससे आपके पास में प्रोडक्शन आ जाएगा।
- 1:28:11इधर शिफ्ट कर दो। और ये क्या है? ये दोनों
- 1:28:14आपके डिफरेंस इन इन्वेंटरी है। चेंज इन
- 1:28:16इन्वेंटरी लेवल जिसे अपन बोलते हैं।
- 1:28:18क्लोजिंग माइनस ओपनिंग यह आपको क्या देता
- 1:28:20है? यह आपको देता है चेंज इन इन्वेंटरी
- 1:28:22लेवल।
- 1:28:26तो अगर तुम्हें कहीं से चेंज इन इन्वेंटरी
- 1:28:28लेवल मिल जाए उस चेंज को सेल्स में ऐड
- 1:28:30करोगे तो प्रोडक्शन का फिगर आ जाएगा। इसका
- 1:28:32मतलब अब ये दिमाग तुम्हें एग्जाम में
- 1:28:34लगाना पड़ेगा कि ये तो तुम्हें पता होता
- 1:28:36है ओपनिंग प्लस प्रोडक्शन माइनस क्लोजिंग
- 1:28:38इक्वल्स टू सेल्स। अब इसको थोड़ा रिवाइज़
- 1:28:40करा तो सेल्स में अगर मैं क्लोजिंग ऐड
- 1:28:42करूं, ओपनिंग माइनस करूं तो प्रोडक्शन
- 1:28:43आएगा। और क्लोजिंग माइनस ओपनिंग ये तो
- 1:28:46चेंज इन इन्वेंटरी का फ़ूला है। चेंज
- 1:28:47इन्वेंटरी ऐसे तो निकाल रहे हैं अभी अपन।
- 1:28:49भाई चेंज इन्वेंटरी का फ़ूला ये तो लिखा
- 1:28:51अपन ने भाई। चेंज इन इन्वेंटरी निकालना हो
- 1:28:52तो उसके लिए क्लोजिंग और ओपनिंग को आपस
- 1:28:54में माइनस करो। इससे आपके पास में चेंज इन
- 1:28:56इन्वेंटरी आ जाएगी।
- 1:29:03तो चेंज इन इन्वेंटरी को एफओ आर से
- 1:29:04मल्टीप्लाई करोगे तो डिफरेंस इन प्रॉफिट आ
- 1:29:06जाएगा। तो मैंने अब उल्टा दिमाग लगाया।
- 1:29:08मैंने कहा देखो डिफरेंस इन प्रॉफिट मेरे
- 1:29:10पास में है। चेंज इन इन्वेंटरी लेवल
- 1:29:12निकालना है। ठीक है?
- 1:29:25मैं एक दिमाग लगा सकता हूं। मेरे पास एक
- 1:29:28फार्मूला होता है अभी डिफरेंस इन प्रॉफिट
- 1:29:29का। हम कहते हैं कि डिफरेंस इन प्रॉफिट इज़
- 1:29:32इक्वल्स टू चेंज इन इन्वेंटरी लेवल
- 1:29:41इंटर
- 1:29:43फिक्स्ड ओवरहेड अब्सॉर्प्शन रेट। इससे आता
- 1:29:45है डिफरेंस इन प्रॉफ़िट। डिफरेंस एंड
- 1:29:46प्रॉफिट का आंसर मुझे पता है। 5000 का
- 1:29:48डिफरेंस है भाई। एब्सॉर्प्शन मार्जिनल
- 1:29:49कॉस्टिंग के प्रॉफिट में डिफरेंस 5000 का
- 1:29:52है। ठीक है? दोनों के एक्चुअल फिगर दे रखे
- 1:29:54हैं। तो एक्चुअल फिगर से भी माइनस करके
- 1:29:55अपन डिफरेंस निकाल सकते हैं। ठीक है? तो
- 1:29:57ये डिफरेंस 5000 का आ रहा है। ये 5000
- 1:30:02जो है वो चेंज इन इन्वेंटरी
- 1:30:06इंटू एफओआर के बराबर है। और एफओआर मुझे दे
- 1:30:09रखी है क्वेश्चन में टू की। फिक्स्ड
- 1:30:11प्रोडक्शन कॉस्ट पर यूनिट टू की है। तो ये
- 1:30:14टू दे रखी है। तो यहां से मेरे पास में
- 1:30:15चेंज इन इन्वेंटरी आ जाएगा।
- 1:30:20यहां से मेरे पास में चेंज इन इन्वेंटरी आ
- 1:30:22जाएगा। कितना आएगा? 2500
- 1:30:245000 / 2
- 1:30:27देखिए ये इक्वल टू इधर जाएगा तो डिवाइड
- 1:30:29होगा। तो चेंज इन इन्वेंटरी 5000 / 2 तो
- 1:30:31ये हो जाएगी 2500 की चेंज इन इन्वेंटरी।
- 1:30:34अब मुझे पता है सेल्स में से चेंज
- 1:30:36इन्वेंटरी को एडजस्ट करेंगे तो अपने पास
- 1:30:37में प्रोडक्शन आ जाएगा।
- 1:30:41तो सेल्स हुई थी 10,000 की।
- 1:30:46चेंज इन इन्वेंटरी हमें मिल गई
- 1:30:502500 की। इसका मतलब प्रोडक्शन कितने का
- 1:30:54हुआ था?
- 1:30:57₹1,500 का।
- 1:31:01अब ये क्वेश्चन अभी मैंने करा है। तुम्हें
- 1:31:03समझ में आ जाएगा। बट एग्जाम में जाओगे तो
- 1:31:05बिल्कुल नहीं आएगा। यह क्वेश्चन एग्जाम
- 1:31:07में बनता है जिसके लिए बच्चे कहते हैं सर
- 1:31:09पेपर डिफिकल्ट था। इसका डिफिकल्टी लेवल
- 1:31:11हार्ड होगा। यह क्वेश्चन वो है जो एग्जाम
- 1:31:14में डिफिकल्टी लेवल हार्ड के अंदर जाते
- 1:31:16हैं।
- 1:31:18क्योंकि अभी तुम्हें समझ में आ गया। अभी
- 1:31:20तो मैंने बताया जब ये क्वेश्चन एग्जाम में
- 1:31:22आता है तुम्हारे सामने तुम्हारे को समझ
- 1:31:24में नहीं आता कि कहना क्या चाह रहा है वो।
- 1:31:25इसमें बस ये एडजस्टमेंट का ध्यान में रखना
- 1:31:27था। ठीक है ना? तो ये छोटी-छोटी चीजें
- 1:31:29एग्जाम में मिसिंग वैल्यू के नाम पे आती
- 1:31:31है। इस टाइप के क्वेश्चंस की आपको बहुत
- 1:31:32प्रैक्टिस करनी पड़ेगी। ठीक है ना? एक
- 1:31:35क्वेश्चन और इस टाइप का भी करते हैं। ठीक
- 1:31:37है? आंसर अपना बी आ रहा है। ₹1500 बिल्कुल
- 1:31:40सही। ₹1500।
- 1:31:42ठीक है? एक क्वेश्चन और देखो। एग्जांपल
- 1:31:44नंबर नाइन क्या कह रहा है? अ न्यू कंपनी
- 1:31:46हैज़ सेट अप अ मार्जिनल कॉस्टिंग सिस्टम
- 1:31:48एंड अ बजटेड कंट्रीब्यूशन फॉर द पीरियड ऑफ़
- 1:31:5126,000 बेस्ड ऑन द सेल्स ऑफ़ 13,000
- 1:31:54यूनिट्स एंड प्रोडक्शन ऑफ़ 15,000 यूनिट्स।
- 1:31:56दिस लेवल ऑफ़ प्रोडक्शन रिप्रेजेंट्स द
- 1:31:58फर्म्स एक्सपेक्टेड लॉन्ग टर्म लेवल ऑफ़
- 1:32:01प्रोडक्शन। यह फर्म का एक्सपेक्टेड लॉन्ग
- 1:32:04टर्म लेवल ऑफ़ प्रोडक्शन है। ठीक है?
- 1:32:0515,000 आपका कंट्रीब्यूशन आपको लग रहा है
- 1:32:0826 होगा। यह कॉन्ट्रिब्यूशन आपने निकाला
- 1:32:1013,000 की सेल के हिसाब से। तो
- 1:32:12कंट्रीब्यूशन पर यूनिट निकालना चाहो तो
- 1:32:13निकाल सकते हो यहां पे। 30 26 / 30 ठीक
- 1:32:16है? तो $2 का पर यूनिट का कंट्रीब्यूशन
- 1:32:19है। और प्रोडक्शन आपका था 15,000 का। दिस
- 1:32:21लेवल ऑफ़ प्रोडक्शन जो है यह कंपनी के लिए
- 1:32:23लॉन्ग टर्म एक्सपेक्टेड लेवल है। कंपनीज़
- 1:32:25बजटेड फिक्स्ड प्रोडक्शन कॉस्ट आपको दे
- 1:32:27रखी है 33,000 की। व्हाट वुड बी द बजटेड
- 1:32:29प्रॉफ़िट बी? इफ कंपनी वर टू चेंज टू एन
- 1:32:32अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग सिस्टम अगर कंपनी
- 1:32:35अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग को फॉलो करेगी तो
- 1:32:36प्रॉफिट क्या होगा अपने को निकालना है।
- 1:32:38बहुत ही प्यारा क्वेश्चन है ये भी। ये भी
- 1:32:40डिफिकल्टी लेवल हार्ड पे जाएगा।
- 1:32:52क्यों? क्यों? क्योंकि इसमें दिमाग लगाना
- 1:32:53पड़ता है। जहां दिमाग लगाना पड़ता है वो
- 1:32:55अपने आपको अपने आप अपने को अपने आप हार्ड
- 1:32:56रख ले जाते हैं। टेक्निकली ये हार्ड नहीं
- 1:32:58है। अब वही जिस बच्चे ने बहुत प्रैक्टिस
- 1:33:00कर रखी है, मेहनत कर रखी है वो ये
- 1:33:01क्वेश्चन देख के एग्जाम में शायद सॉल्व कर
- 1:33:02भी लेगा। अब वही है दिमाग में क्या आना
- 1:33:04चाहिए? जब भी इस टाइप के क्वेश्चन को
- 1:33:06सॉल्व करना हो मैंने क्या बोला तुम्हें?
- 1:33:07दिमाग में कुछ बेसिक चीजें आनी चाहिए। भाई
- 1:33:10जैसे डिफरेंस इन प्रॉफिट का फार्मूला
- 1:33:12दिमाग में चलना चाहिए।
- 1:33:22कभी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा हो ना तो
- 1:33:23जो जो तुम्हारे को रिलेटेड कांसेप्ट याद
- 1:33:25है उनको लिखना स्टार्ट कर दो कहीं ना कहीं
- 1:33:29से आंसर अपने आप मिल जाएगा या तरीका पता
- 1:33:31पड़ जाएगा तो डिफरेंस इन प्रॉफिट का
- 1:33:33फार्मूला ये होता है। अच्छा एब्जॉर्प्शन
- 1:33:35कॉस्टिंग का प्रॉफिट निकालना है मेरे को
- 1:33:37मेरे को। लेकिन यहां पे दे रखा है
- 1:33:38मार्जिनल कॉस्टिंग का बजटेड
- 1:33:40कॉन्ट्रीब्यूशन।
- 1:33:42मेरे पास मार्जिनल तो प्रॉफिट ही नहीं है।
- 1:33:45अगर मुझे अब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट निकालना
- 1:33:47है तो मुझे पहले मार्जिनल का प्रॉफिट भी
- 1:33:50तो चाहिए। मेरे पास में यहां पे मार्जिनल
- 1:33:52का प्रॉफिट ही नहीं है। साहब सबसे पहले तो
- 1:33:53मार्जिनल का प्रॉफिट निकालो। चलो तो एक
- 1:33:56बार यहां पे एक काम और करते हैं। मार्जिनल
- 1:33:59का प्रॉफिट तो निकालो पहले।
- 1:34:04मार्जिनल प्रॉफिट कैसे निकलेगा? आपके पास
- 1:34:07कंट्रीब्यूशन है। उस कंट्रीब्यूशन में से
- 1:34:10फिक्स्ड कॉस्ट को माइनस कर दो।
- 1:34:13तब जाके प्रॉफिट आएगा। कॉन्ट्रिब्यूशन है
- 1:34:1626
- 1:34:18फिक्स्ड कॉस्ट यहां पे दे रखी है थ्री की।
- 1:34:20तो थ्री तो मार्जिनल का प्रॉफिट 23 है।
- 1:34:24आधे से ज्यादा बच्चे एग्जाम में इस
- 1:34:25क्वेश्चन में गलती ये करेंगे कि वो इस
- 1:34:27कंट्रीब्यूशन में डिफरेंस इन प्रॉफिट को
- 1:34:29ऐड लेस करके मार्जिनल कॉस्टिंग का आंसर
- 1:34:31निकाल देंगे। जबकि यहां पे ऐसा नहीं होगा।
- 1:34:35अब एक और चीज अब मुझे चाहिए चेंज इन
- 1:34:37इन्वेंटरी। मुझे बोल रखा है सेल हुई है
- 1:34:3913,000 की और न्यू कंपनी हैज़ बीन सेट अप।
- 1:34:42न्यू कंपनी मतलब ओपनिंग ज़ीरो है। ठीक है?
- 1:34:45ये एक न्यू कंपनी है।
- 1:34:49न्यू कंपनी होने का मतलब ओपनिंग इन्वेंटरी
- 1:34:51ज़ीरो होती है। भाई सिंपल सी बात है।
- 1:34:57ठीक है? क्लोजिंग इन्वेंटरी कैसे आएगी?
- 1:34:59आपने 15,000 यूनिट्स बनाए और 13,000 आपने
- 1:35:02बेच दिए। तो क्लोजिंग इन्वेंटरी कितनी है?
- 1:35:0420,000 की।
- 1:35:06क्लोजिंग इन्वेंटरी कैसे आएगी भाई? 15,000
- 1:35:09यूनिट्स बना रहे हो और 13,000 यूनिट्स
- 1:35:11आपने बेच दिए। ओपनिंग तो ज़ीरो है। तो इससे
- 1:35:14आपके पास में 2000 की क्लोजिंग इन्वेंटरी
- 1:35:16आ गई सब।
- 1:35:18ठीक है? तो चेंज इन इन्वेंटरी 20,000 है।
- 1:35:22अब मुझे चाहिए फिक्स्ड ओआर। एफओआर दे नहीं
- 1:35:25रखी इसमें। इस क्वेश्चन में फिक्स्ड
- 1:35:27ओवरहेड रेट मिसिंग है। तो ओआर का फार्मूला
- 1:35:30याद होना चाहिए। फिक्स्ड ओआर निकालने का
- 1:35:32फ़ूला। ओआर के लिए कहते हैं अपने जो बजटेड
- 1:35:34कॉस्ट है
- 1:35:37उसको डिवाइड करेंगे किसी एप्रोप्रियट
- 1:35:40बेसिस से
- 1:35:45तो हमारे पास में ओआर आ जाएगी
- 1:35:48बजटेड ओआर दे रखी है 3000 की दे रखा है
- 1:35:51बजटेड फिक्स्ड प्रोडक्शन कॉस्ट 3000 है तो
- 1:35:53बजटेड कॉस्ट दे रखी है 3000 की अब बजट
- 1:35:56बेसिस क्या लें तो बेसिस के लिए अपने को
- 1:35:58एक लाइन दे रखी है अपने को बोल रखा है
- 1:36:00प्रोडक्शन लेवल 15000 है एंड एंड दिस लेवल
- 1:36:02ऑफ प्रोडक्शन रिप्रेजेंट्स द फर्म्स
- 1:36:04एक्सपेक्टेड लॉन्ग टर्म लेवल ऑफ़
- 1:36:06प्रोडक्शन। ये लाइन फालतू में नहीं दे रखी
- 1:36:08है। ये हिंट है कि ये जो 15,000 का लेवल
- 1:36:10है प्रोडक्शन का ये तुम कंपनी के लिए
- 1:36:13अस्यूम कर सकते हो कि लॉन्ग टर्म तक कंपनी
- 1:36:1415-15,000 यूनिट्स ही बनाएगी। तो ये कंपनी
- 1:36:17का एप्रोप्रियट बेस बन जाएगा पर यूनिट की
- 1:36:19ओआर निकालने के लिए। आप यहां पे 15,000 से
- 1:36:22डिवाइड कर सकते हो। तो आपकी ओआर यहां पे
- 1:36:24पर यूनिट की कितनी हो जाएगी? 3000 बाय
- 1:36:2715,000 यह आएगी 0.2 पर यूनिट।
- 1:36:34और इसी को अब यहां पर अपन यूज़ करेंगे। तो
- 1:36:37डिफरेंस इन प्रॉफिट आएगा 400 का। अब बात
- 1:36:40आएगी वही अब्सॉर्प्शन का ज्यादा या
- 1:36:42मार्जिनल का ज्यादा। तो मैंने कहा भाई
- 1:36:43देखो एब्जॉर्प्शन का रिलेशनशिप है
- 1:36:46क्लोजिंग से। मार्जिनल का रिलेशनशिप है
- 1:36:49ओपनिंग से। ओपनिंग तो यहां पे ज़ीरो है।
- 1:36:52ठीक है? ओपनिंग तो न्यू कंपनी है। ओपनिंग
- 1:36:54ज़ीरो है। क्लोजिंग 2000 है तो क्लोजिंग
- 1:36:56ज्यादा है ओपनिंग से। क्लोजिंग ज्यादा है
- 1:36:57तो एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट ज्यादा होगा।
- 1:36:59मुझे मार्जिनल का प्रॉफिट दे रखा है 23 तो
- 1:37:01एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट अब मुझे ज्यादा
- 1:37:03चाहिए
- 1:37:07शुड बी मोर देन मार्जिनल प्रॉफिट और कितने
- 1:37:09से 400 से
- 1:37:14ये अपने को दे रखा है 23
- 1:37:18ये कम होना चाहिए मार्जिनल
- 1:37:20[गला साफ़ करने की आवाज़] का प्रॉफिट
- 1:37:20ज्यादा होना चाहिए तो कितने से तो हमने
- 1:37:21कहा ये निकालने के लिए एक काम करो 23 प्लस
- 1:37:24डिफरेंस 400 को ऐड कर दो आपका आंसर आएगा 2
- 1:37:293400
- 1:37:32ये आ गया आंसर।
- 1:37:3623400
- 1:37:37बी
- 1:37:40बी सही आंसर है। ठीक है साहब। वही दिमाग
- 1:37:43लगाना है। अब मैंने क्या फार्मूला लिखा?
- 1:37:46ये वाला फार्मूला लिख दिया। ये वाला
- 1:37:47फार्मूला लिख दिया। मैंने कहा चलो एक तो
- 1:37:48मार्जिनल प्रॉफिट गायब था। तो मैंने कहा
- 1:37:50पहले प्रॉफिट निकाल लेते हैं। ये ईजी काम
- 1:37:51है। मैंने कहा डिफरेंस इन प्रॉफिट का
- 1:37:53फार्मूला होता है। या तो मुझे दोनों
- 1:37:54प्रॉफिट का फिगर दे दे। उनको लेस करके
- 1:37:56डिफरेंस निकाल दूंगा। दोनों प्रॉफिट के
- 1:37:57फिगर दे ही रखे हैं। तो मैंने कहा चेंज
- 1:37:59इन्वेंटरी इंटू एफओआर कर लेंगे। तो अब
- 1:38:00एफओआर चाहिए या चेंज इन्वेंटरी चाहिए।
- 1:38:02मैंने कहा चेंज इन्वेंटरी के लिए बोल रखा
- 1:38:03है न्यू कंपनी है। तो ओपनिंग ज़ीरो है। सेल
- 1:38:05करी है 13,000 की बनाए 15,000 है। मतलब
- 1:38:0720,000 की क्लोजिंग स्टॉक है। तो चेंज
- 1:38:08इन्वेंटरी 20,000 आ गई। फिर मैंने कहा
- 1:38:10एफओआर नहीं दे रखी है। तो मैंने कहा एफओआर
- 1:38:12के फॉर्मूले के लिए मुझे टोटल कॉस्ट दे
- 1:38:13रखी है। और मुझे हिंट दे रखा है कि ये जो
- 1:38:16प्रोडक्शन का लेवल है ये लॉन्ग टर्म तक
- 1:38:18कंपनी के लिए सेम रहेगा। तो ये कंपनी का
- 1:38:20एप्रोप्रियट बेस हो सकता है। तो इससे मेरे
- 1:38:23को $2 $.2 पर यूनिट की एफओआर की रेट मिल
- 1:38:26गई। उसको मैंने चेंज इन्वेंटरी से
- 1:38:28मल्टीप्लाई करा तो डिफरेंस इन प्रॉफिट आया
- 1:38:30400। अब डिफरेंस इन प्रॉफिट 400 है। मैंने
- 1:38:32कहा भ ओपनिंग ज़ीरो है। क्लोजिंग 2000 है
- 1:38:34तो क्लोजिंग इन्वेंटरी ज्यादा है। ओपनिंग
- 1:38:35से ओपनिंग इन्वेंटरी ज़ीरो है। क्लोजिंग
- 1:38:37इन्वेंटरी में 2000 यूनिट्स हैं। तो इसका
- 1:38:39मतलब अपनी क्लोजिंग इन्वेंटरी ज्यादा है
- 1:38:41साहब। ओपनिंग इन्वेंटरी के मुकाबले। तो
- 1:38:43मार्जिनल का प्रॉफिट जो है वो एब्सॉर्प्शन
- 1:38:45से कम होगा। एब्सॉर्प्शन का प्रॉफिट
- 1:38:46ज्यादा आएगा। मैंने कहा मार्जिन का
- 1:38:47प्रॉफिट 23 है। तो इसका मतलब एब्सॉर्प्शन
- 1:38:49का प्रॉफिट 400 से और ज्यादा होना चाहिए।
- 1:38:51तो ये होना चाहिए 23400।
- 1:38:53ठीक है साहब? तो ये अपन ने बातचीत करी। अब
- 1:38:58जो भी अभी तक पढ़ा है इसमें एडवांटेज
- 1:39:00डिसवांटेज की बात करके इस चैप्टर को करते
- 1:39:02हैं यहां पे ओवर। देखो अब्सॉर्प्शन
- 1:39:04कॉस्टिंग और मार्जिनल कॉस्टिंग में जब हम
- 1:39:06बात करें तो मार्जिनल कॉस्टिंग के फायदे
- 1:39:07क्या है? मार्जिनल कॉस्टिंग की जरूरत
- 1:39:08क्यों पड़ी? क्योंकि एक तो ईजी टू यूज़ है।
- 1:39:10ये मैनेजमेंट को शॉर्ट टर्म डिसीजन मेकिंग
- 1:39:12में हेल्प करता है। एमसीक्यू ध्यान रखना।
- 1:39:14और यह इसमें कोई कॉम्प्लिकेटेड अंडर
- 1:39:16अब्सॉर्प्शन या ओवर अब्सॉर्प्शन को
- 1:39:17कैलकुलेट करने की जरूरत नहीं पड़ती। ठीक
- 1:39:19है? इसके अलावा आप यहां पर अलग-अलग सेल्स
- 1:39:22लेवल पे कितना कंट्रीब्यूशन कमाओगे ये आप
- 1:39:24बहुत फटाफट निकाल सकते हो। और मार्जिनल
- 1:39:27कॉस्टिंग में क्योंकि अपने कोई
- 1:39:28अब्सॉर्बिंग वगैरह इंक्लूड करने की जरूरत
- 1:39:30नहीं होती है। ठीक है? क्योंकि हम यहां पे
- 1:39:32फिक्स्ड प्रोडक्शन ओवरहेड को पीरियड कॉस्ट
- 1:39:34की तरह ट्रीट कर लेते हैं। तो ट्रीटमेंट
- 1:39:35ईजी हो जाता है। तो ये कुछ फायदे हैं सब
- 1:39:38मार्जिनल कॉस्टिंग के। नुकसान क्या है?
- 1:39:39नुकसान ये है कि एक तो ये अकाउंटिंग
- 1:39:41स्टैंडर्ड की रिक्वायरमेंट को फुलफिल नहीं
- 1:39:42करती। एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग आईएस टू की
- 1:39:44रिक्वायरमेंट को फुलफिल करता है। मार्जिनल
- 1:39:46कॉस्टिंग नहीं करती। तो इन्वेंटरी एट द
- 1:39:48एंड ऑफ द पीरियड इज़ नॉट वैल्यूड इन लाइन
- 1:39:50विद द रिलेवेंट इंटरनेशनल एकाउंटिंग
- 1:39:52स्टैंडर्ड। इन सही से अकाउंटिंग के हिसाब
- 1:39:54से वैल्यूएशन निकालने के लिए आपको
- 1:39:55एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग को कैलकुलेट करना ही
- 1:39:57पड़ेगा। प्लस यहां पे जो प्रॉफिट आएंगे
- 1:39:59उसको भी एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग से आपको
- 1:40:00रिकंसाइल करना पड़ेगा क्योंकि एजॉर्प्शन
- 1:40:02कॉस्टिंग वाला प्रॉफिट सही माना जाता है।
- 1:40:04और यहां पे जो प्रोडक्शन कॉस्ट है आप सारी
- 1:40:06की सारी प्रोडक्शन कॉस्ट को तो इंक्लूड ही
- 1:40:08नहीं कर रहे हो। तो यहां पे जो आपकी कॉस्ट
- 1:40:09आ रही है उसके बेसिस पे आप सेलिंग प्राइस
- 1:40:12डिसाइड नहीं कर सकते। वो पार्शियल कॉस्ट
- 1:40:13होती है। ठीक है साहब? तो ये सेलिंग
- 1:40:16प्राइस को डिसाइड करने में हेल्प नहीं
- 1:40:17करती। ठीक है ना? तो नहीं कह सकते डज़ नॉट
- 1:40:21हेल्प इन डिसाइडिंग सेलिंग प्राइस।
- 1:40:37जब एक्चुअल कॉस्ट ही नहीं पता है तो सही
- 1:40:39सेलिंग प्राइस निकाल नहीं पाओगे।
- 1:40:42यहीं पे एब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का फायदा
- 1:40:44क्या है? देखो मार्जिनल कॉस्टिंग में
- 1:40:45डिसवांटेज ये था कि ये IS2 को की
- 1:40:48रिक्वायरमेंट को फुलफिल नहीं करता और ये
- 1:40:49सेलिंग प्राइस निकालने में हेल्प नहीं
- 1:40:50करता। तो एब्जॉर्प्शन ये दोनों काम करेगा।
- 1:40:52तो अब्सॉर्प्शन का फायदा है कि एक तो यह
- 1:40:54आईएस2 की रिक्वायरमेंट को फुलफिल करता है।
- 1:40:56इसके बेसिस पर जो आपका इन्वेंटरी
- 1:40:58वैल्यूएशन आता है वो बिल्कुल अकाउंटिंग
- 1:40:59स्टैंडर्ड्स को फॉलो करता है। दूसरा ये
- 1:41:02आपकी सारी कॉस्ट को इंक्लूड करता है। तो
- 1:41:04इसके बेसिस पे आप अपनी प्रोडक्ट की बेटर
- 1:41:05कॉस्ट वगैरह बेटर प्राइस वगैरह निकाल सकते
- 1:41:07हो। ठीक है? तो प्रोडक्ट की प्राइिंग
- 1:41:09निकालनी हो, प्रोडक्ट की एक्चुअल कॉस्ट
- 1:41:11निकालनी हो, कंपनी का एक्चुअल प्रॉफिट
- 1:41:13निकालना हो, यह सब करने में अब्सॉर्प्शन
- 1:41:14कॉस्टिंग हेल्प करता है। ठीक है ना?
- 1:41:33एक और फायदा ये है। अच्छा अब नुकसान क्या
- 1:41:35होगा? नुकसान ये होगा कि बड़ा भाई ये
- 1:41:36कॉम्प्लिकेटेड है। इसमें टाइम बहुत लगेगा।
- 1:41:38इसमें अंडर एब्सॉर्प्शन ओवर एजॉर्प्शन
- 1:41:40होगा तो कॉम्प्लिकेटेड है। प्लस यह डिसीजन
- 1:41:42मेकिंग में काम ज़्यादा नहीं करता। शॉर्ट
- 1:41:44टर्म डिसीज़ मेकिंग के ज़्यादा काम नहीं
- 1:41:45आता। ठीक है? एक प्रॉफिट और है
- 1:41:48अब्जॉर्प्शन कॉस्टिंग का क्योंकि
- 1:41:49अब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग में अंडर या ओवर
- 1:41:51अब्सॉर्प्शन अपन निकालते हैं। आगे जाके
- 1:41:53अपन इसी टॉपिक को लिंक करेंगे स्टैंडर्ड
- 1:41:55कॉस्टिंग से। स्टैंडर्ड कॉस्टिंग में यही
- 1:41:57अंडर या ओवर एब्सॉर्प्शन आपका वेरियंस
- 1:41:59बनता है। और फिर आप ये भी आइडेंटिफाई करते
- 1:42:01हो कि वेरियंस क्यों आया? क्या हमारी
- 1:42:04कॉस्ट पर यूनिट की कैलकुलेशन खराब थी या
- 1:42:07हमारे आउटपुट की कैलकुलेशन खराब थी। ठीक
- 1:42:10है? उसके बेसिस पे आप नेक्स्ट पीरियड में
- 1:42:12अपनी कॉस्ट को कंट्रोल में रखने की कोशिश
- 1:42:14कर सकते हो या कॉस्ट कंट्रोल को इंप्रूव
- 1:42:16कर सकते हो। ठीक है ना? तो ये अपने को
- 1:42:19कॉस्ट कंट्रोल में भी हेल्प करता है। तो
- 1:42:21इट हेल्प्स टू कंट्रोल कॉस्ट। अंडर एंड
- 1:42:23ओवर एब्सॉर्प्शन इज़ एनालाइज़्ड। ये जो अंडर
- 1:42:24एब्जॉर्प्शन है ना यही अपने को वेरियंस
- 1:42:26बताता है। ये अंडर एब्सॉर्प्शन ओवर
- 1:42:27एब्सॉर्प्शन आगे जाके वेरियंस बनता है। तो
- 1:42:29ये वेरियंस को आप एनालाइज़ करते हो कि
- 1:42:31वेरियंस आया तो क्यों आया? इसके बेसिस पे
- 1:42:32आप अगले पीरियड में बेटर तरीके से काम कर
- 1:42:35पाओगे। कॉस्ट के ऊपर बेटर कंट्रोल रख पाते
- 1:42:37हो। तो ये आपको मोटा-मोटी हेल्प करता है।
- 1:42:39ठीक है? ठीक है? तो ये एडवांटेजेस अपने
- 1:42:41एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के। ये डिसवांटेजेस
- 1:42:43एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग के। और यहीं पे कुछ
- 1:42:44एडवांटेज डिसवांटेज मार्जिनल कॉस्टिंग के
- 1:42:46भी हैं। ठीक है? तो इनको अपने को ध्यान
- 1:42:49में रखना है। ठीक है साहब? इसी के साथ में
- 1:42:53अपना ये लेक्चर होता है सब यहां पे
- 1:42:55कंप्लीट। तो आई होप कि इस लेक्चर को देखने
- 1:42:57के बाद में आपके एब्सॉर्प्शन कॉस्टिंग और
- 1:42:59मार्जिनल कॉस्टिंग को लेके जितने भी
- 1:43:00डाउट्स हैं, जितने भी आपके कह लो कि नॉलेज
- 1:43:02में गैप्स हैं वो फिल हुए होंगे। आपको
- 1:43:04मैंने बहुत बेसिक से कांसेप्ट वगैरह समझाए
- 1:43:06हैं। तो इन कांसेप्ट्स को एक बार अच्छे से
- 1:43:08पढ़ो। इनको अच्छे से कॉपी में नोट करो।
- 1:43:10नोट्स वगैरह बनाओ इनके और फिर इनके
- 1:43:12क्वेश्चंस को सॉल्व करो। आपके अब्सॉर्प्शन
- 1:43:14और मार्जिनल कॉस्टिंग के सारे क्वेश्चंस
- 1:43:15फिर सही होंगे। ठीक है साहब? चलिए तो आज
- 1:43:18के इस लेक्चर को फिर एक बार यहीं पर ओवर
- 1:43:19करते हैं। मिलते हैं आपसे फिर नेक्स्ट
- 1:43:21वीडियो में। थैंक यू सो मच।
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This page contains the full transcript of ACCA Knowledge Level MA | Absorption & Marginal Costing : Management Accounting | Aadhar Batch by ACCA by PW, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 18,271 words across 2,603 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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