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अखिलेश बहुत आगे निकल रहे! | असली वजह क्या है? | Abhishek Kumar — Transcript

by Abhishek Kumar · 3,252 words · 414 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर गुजरता है
  2. 0:03और लखनऊ का रास्ता नफासत, नजाकत और नफरत
  3. 0:07की सियासत इन तीनों से छन कर गुजरता है।
  4. 0:11लेकिन सियासत के इस खेल के भीतर जब उत्तर
  5. 0:14प्रदेश का चुनाव सामने आ रहा है और उस
  6. 0:17चुनाव के बीच एक तरफ योगी आदित्यनाथ की
  7. 0:20भारतीय जनता पार्टी तो दूसरी तरफ अखिलेश
  8. 0:23यादव की समाजवादी पार्टी सीधे-सीधे
  9. 0:26मुकाबले में दिख रही है। तो आखिर क्यों
  10. 0:29हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं जिसमें
  11. 0:31ब्यूरोक्रेसी से लेकर आम जनमानस के बीच यह
  12. 0:35धारणा करीब-करीब बनती जा रही है कि अखिलेश
  13. 0:38यादव सत्ता के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
  14. 0:41क्या वाकई अखिलेश यादव सत्ता के बेहद करीब
  15. 0:44पहुंच चुके हैं? और अखिलेश यादव यदि सत्ता
  16. 0:47के बेहद करीब पहुंच चुके हैं तो नरेंद्र
  17. 0:49मोदी की भारतीय जनता पार्टी गुजरात लॉबी
  18. 0:53के प्रभुत्व और संसाधन वाली भारतीय जनता
  19. 0:55पार्टी गोरखपुर के सहयोग से आखिर अखिलेश
  20. 0:59यादव का मुकाबला क्यों नहीं कर पा रही है?
  21. 1:01क्या गुजरात और गोरखपुर के बीच की खाई बढ़
  22. 1:04चुकी है? क्या नागपुर इस खाई को बढ़ाने या
  23. 1:08घटाने में कोई भूमिका निभा पा रहा है? और
  24. 1:11इन सब से आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश की
  25. 1:14सियासत में जिस मोड़ पर कमंडल की एंट्री
  26. 1:16हुई उस मोड़ पर मंडल कमजोर होता हुआ दिखाई
  27. 1:19दिया और जिस मोड़ पर बहुजन समाज पार्टी की
  28. 1:22सियासत निस्तेज होनी शुरू हुई उसी मोड़ पर
  29. 1:26चंद्रशेखर रावण का उदय होना शुरू हुआ
  30. 1:28उसमें आने वाली परिस्थितियों में किस तरह
  31. 1:31से सियासत का चाल चरित्र और चेहरा पिछले
  32. 1:3510 सालों की डबल इंजन की भाजपा सरकार में
  33. 1:37बदला इन सारे फैक्टर को यदि यदि हम जोड़
  34. 1:40दें तो उत्तर प्रदेश के चुनाव में अखिलेश
  35. 1:43यादव की वापसी की संभावना क्यों काफी बढ़ी
  36. 1:47हुई दिखाई दे रही है? जरा उसे पड़ताल करने
  37. 1:49की कोशिश करते हैं। चार महत्वपूर्ण कारण
  38. 1:53है दोस्तों और इन चार कारण चार फैक्टर के
  39. 1:56भीतर उत्तर प्रदेश की सियासत में अखिलेश
  40. 1:59यादव का पलड़ा भारी होने की बातें कही जा
  41. 2:02रही है। लोकसभा चुनाव का नतीजा आप सब ने
  42. 2:04देखा और लोकसभा चुनाव के नतीजे ने वोट
  43. 2:08प्रतिशत के मामले में भले ही इंडिया
  44. 2:11अलायंस जो राहुल गांधी और अखिलेश यादव का
  45. 2:14था या भारतीय जनता पार्टी का अलायंस जो
  46. 2:16मोदी और योगी का चेहरा लगाकर चुनाव लड़
  47. 2:18रहा था। अमित शाह का मैनेजमेंट दिखाई दे
  48. 2:21रहा था। उस चुनाव में दोनों गठबंधनों ने
  49. 2:2540% से ऊपर वोट हासिल किए। मोटे तौर पर
  50. 2:28कहें तो दोनों के बीच वोट प्रतिशत के
  51. 2:30मामले में आधे 1% का अंतर ही था। लेकिन
  52. 2:34सीटों के मामले में समाजवादी पार्टी के
  53. 2:36गठबंधन ने बीजेपी को जो बुरी तरह पछाड़ा
  54. 2:39उसने नरेंद्र मोदी को 272 का आंकड़ा छूने
  55. 2:42नहीं दिया।
  56. 2:43लेकिन अब विधानसभा के भीतर जब सरकार बनाने
  57. 2:47के लिए 202 विधायकों की आवश्यकता है। 403
  58. 2:50की असेंबली है तो उन असेंबली के भीतर जो
  59. 2:54चार बड़े कारण है एक-एक कर उनकी पड़ताल
  60. 2:56करने की कोशिश करते हैं। कि आखिर क्यों
  61. 2:58अखिलेश यादव लोकसभा की तरह विधानसभा में
  62. 3:01भी फिलहाल नंबर गेम में आंकड़ों के गेम
  63. 3:05में भारी पड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं।
  64. 3:07पहला कारण डबल इंजन की एंटी इनकंबेंसी।
  65. 3:12डबल इंजन की एंटी इनकंबेंसी का मतलब यह है
  66. 3:15कि 12 सालों से तो केंद्र में मोदी सरकार
  67. 3:18है। लेकिन केंद्र और यूपी दोनों जगह 10
  68. 3:21सालों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है।
  69. 3:24मोदी और योगी की सरकार है। और जब नरेंद्र
  70. 3:27मोदी 2017 में अखिलेश यादव को सत्ता से
  71. 3:30हटाने के लिए उत्तर प्रदेश में कैंप कर
  72. 3:33रहे थे। उस वक्त उनका एक रटा रटाया जुमला
  73. 3:36चलता था। काम नहीं कारनामा बोलता है।
  74. 3:40अखिलेश जी आपका काम नहीं कारनामा बोलता
  75. 3:42है। लेकिन काम बोलता है या कारनामा बोलता
  76. 3:46है। मौजूदा दौर में उत्तर प्रदेश की जनता
  77. 3:48अब 10 साल पीछे की बात नहीं बल्कि इस 10
  78. 3:51साल के कामकाज का लोखा लेखाजोखा लेकर बैठ
  79. 3:55रही है। वो लेखाजोखा परफॉर्मेंस के स्तर
  80. 3:58पर भी है। वो सामाजिक समीकरणों को साधने
  81. 4:01के स्तर पर भी है। वह समाज के अलग-अलग
  82. 4:04क्लास के बीच कास्ट रिप्रेजेंटेशन और
  83. 4:07क्लास की राजनीति के भीतर वर्ग और जाति की
  84. 4:10सियासत को साधने के तरीकों को लेकर भी है
  85. 4:13और चुनावी हिंदुत्व और अयोध्या की चंदा
  86. 4:16चोरी की खबरें सामने आने को लेकर भी है।
  87. 4:19एक्सप्रेसवे बन रहा है तो गड्ढे पड़ रहे
  88. 4:21हैं। कई सारी खबरें ऐसी है जिसमें एंटी
  89. 4:25इनकंबेंसी को सत्ता में रहने वाले दल को
  90. 4:28झेलना पड़ता है। नरेंद्र मोदी को भी 10
  91. 4:30साल के बाद झेलना पड़ा। उनका भी 400 पार
  92. 4:33का नारा पूरा नहीं हुआ। उन्हें भी नीतीश
  93. 4:35नायडू की बैसाखी पर सरकार चल बनानी पड़ी
  94. 4:37और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां
  95. 4:40लोकसभा में बीजेपी मात खा चुकी है सपा
  96. 4:42कांग्रेस अलायंस से वहां एंटी इनकंबेंसी
  97. 4:45मौजूदा परिदृश्य में जब चुनाव लोकसभा की
  98. 4:48तुलना में ज्यादा लोकल होगा। ज्यादा
  99. 4:51स्थानीय मुद्दों पर लड़ा जाएगा। ज्यादा
  100. 4:54विधायकों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी को
  101. 4:56सामने रखकर लड़ा जाएगा। तो कहीं ना कहीं
  102. 4:59वो फैक्टर काम करता दिखेगा जिसे हम एंटी
  103. 5:02इनकंबेंसी कहते हैं। सत्ता विरोधी रुझान
  104. 5:04कहते हैं। अब इस एंटी इनकंबेंसी के कारणों
  105. 5:07में कथित ठाकुरवाद भी एक मुद्दा है कि
  106. 5:09उत्तर प्रदेश में एक जाति विशेष की ज्यादा
  107. 5:12चल रही है। ब्राह्मणों की नाराजगी भी
  108. 5:14मुद्दा है और पिछड़े वर्गों की नाराजगी तो
  109. 5:17मुद्दा है ही। दूसरा कारण नौजवानों का
  110. 5:22गुस्सा, जैन जी का जनाक्रोश। दोस्तों जैन
  111. 5:26जी का जना आक्रोश जाति और संप्रदाय की
  112. 5:28दीवारों को लांग कर नए सिरे से परिभाषा
  113. 5:31गढ़ रहा है और परिभाषा जब नए सिरे से गढ़
  114. 5:34रहा है उस परिभाषा को गढ़ने की प्रक्रिया
  115. 5:36को यदि हम देखते चले तो दो तीन बातें साफ
  116. 5:39होती है पहली कि उत्तर प्रदेश में सरकारी
  117. 5:43वैकेंसियां कैसे भरी गई दूसरी उत्तर
  118. 5:46प्रदेश में बेरोजगारी दूर करने के लिए
  119. 5:48क्या किए गए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट कितना
  120. 5:51आया और वह इन्वेस्टमेंट कितने रोजगार में
  121. 5:53तब्दील हुआ। तीसरा महत्वपूर्ण फैक्टर उसके
  122. 5:56साथ यह जुड़ता है कि नरेंद्र मोदी सरकार
  123. 5:59की जो रोजगार की नीति है, नौजवान अब रील
  124. 6:02बना के रील बनाकर रोजगार प्राप्त कर रहे
  125. 6:05हैं। यह बिहार में जाकर उन्होंने कहा था।
  126. 6:07एक टीवी स्टूडियो में बैठकर
  127. 6:10यहां तक कहा था। उस एंकर से कहा था जिस
  128. 6:13एंकर को ₹15 करोड़ का पैकेज सरकार देकर
  129. 6:16सरकारी चैनल में ले आई है। उस एंकर के साथ
  130. 6:18चर्चा में कहा था कि नौजवान पकोड़े तल के
  131. 6:22भी अब रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। पकोड़ा
  132. 6:25तलना भी एक रोजगार है। यहां तक इस शब्द का
  133. 6:28इस्तेमाल दरअसल किया था। तो अब क्या
  134. 6:31भारतीय जनता पार्टी के द्वारा बनाए गए उस
  135. 6:34सरकार के द्वारा बनाए गए। सुप्रीम कोर्ट
  136. 6:35के आदेश से बनाए गए। राम मंदिर के बाहर
  137. 6:38इतनी जगह बची है कि उत्तर प्रदेश जो 25
  138. 6:40करोड़ लोगों का प्रदेश है वहां के
  139. 6:42नौजवानों को वहां पर पकोड़े तलकर रोजगार
  140. 6:45मिल सके। यह सारे सवाल एक साथ जब नथी होते
  141. 6:49हैं तो फिर कई सारे दूसरे सवालों से सत्ता
  142. 6:53को बचाने की बजाय और ज्यादा मुसीबत में
  143. 6:56डालने के लिए आ जाते हैं। तो जैन जी का
  144. 6:59मुद्दा उसमें ज्ञानेश कुमार की वोट चोरी
  145. 7:01भी मुद्दा है तो पेपर लीक भी मुद्दा है।
  146. 7:04पेपर लीक उत्तर प्रदेश में बहुत बड़े
  147. 7:06पैमाने पर कई सारे एग्जाम में देखने को
  148. 7:08मिला। कई बार तो पीसीएस का मेंस एग्जाम तक
  149. 7:12रद्द करना पड़ा। पेपर लीक के कारण आरक्षण
  150. 7:15एक अलग मुद्दा है ही। तो जेएनजी का जना
  151. 7:18आक्रोश जो ज्ञानेश कुमार और वोट चोरी को
  152. 7:20लेकर चल रहा है। दूसरे मुद्दों से भी जुड़
  153. 7:22रहा है। किसानी के मुद्दों से भी जुड़ रहा
  154. 7:24है। यह मुद्दा भारतीय जनता पार्टी पर भारी
  155. 7:27पड़ रहा है और तभी अखिलेश यादव के लिए
  156. 7:30पूरब से पश्चिम तक एक माहौल बन रहा है।
  157. 7:34लेकिन सिर्फ दो ही मुद्दे नहीं है
  158. 7:35दोस्तों।
  159. 7:37तीसरा फैक्टर भी है और वह तीसरा फैक्टर
  160. 7:40उत्तर प्रदेश की सियासत में यह है कि
  161. 7:43उत्तर प्रदेश का ओबीसी मतदाता क्या कर रहा
  162. 7:46है।
  163. 7:48उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को
  164. 7:50जब भी चुनावी सफलता मिली चाहे 1991 हो जब
  165. 7:54पहली सफलता मिली या मौजूदा दौर के तीन बैक
  166. 7:57टू बैक सफलताओं को ध्यान रखें। 14 का
  167. 8:01लोकसभा चुनाव, 17 का विधानसभा चुनाव और
  168. 8:042019 का लोकसभा चुनाव। इन दोनों में
  169. 8:07भारतीय जनता पार्टी की सक्सेस रेट को तय
  170. 8:09करने वाला जो सबसे बड़ा फैक्टर था वह
  171. 8:11फैक्टर यह था कि उत्तर प्रदेश का चुनाव ही
  172. 8:14यादव बनाम गैर यादव गोलबंदी का चुनाव बन
  173. 8:18गया था। लेकिन 2022 में जो ट्रेलर दिखा कि
  174. 8:22यादव बनाम गैर यादव के बीच जो एक दूरियां
  175. 8:27बनी हुई थी वो दूरियां कम होनी शुरू हुई
  176. 8:29और 2024 के लोकसभा चुनाव आते-आते साफ तौर
  177. 8:33पर दिखने लगा कि यादव बनाम गैर यादव की
  178. 8:36दूरी को काफी हद तक समाजवादी पार्टी पाट
  179. 8:40चुकी है। यादववाद के आरोपों को काफी हद तक
  180. 8:44वह धुलने की स्थिति में है क्योंकि बहुत
  181. 8:46कम यादवों को टिकट दिए गए जो दिए गए उसमें
  182. 8:49ज़्यादातर परिवार के ही लोग थे और ऐसे लोग
  183. 8:52थे जो पहले जीत चुके थे और जीत सकते थे
  184. 8:54स्थानीय समीकरणों में कुर्मी समुदाय उत्तर
  185. 8:57प्रदेश में ओबीसी के भीतर सबसे बड़ा
  186. 8:59इन्फ्लुएंसरर माना जाता है। सबसे बड़ा
  187. 9:02इन्फ्लुएंसरर ओबीसी के भीतर ओबीसी के वोट
  188. 9:04बैंक को दूसरे समुदायों को जोड़ने में
  189. 9:07नैरेटिव सेट करने में वो कुर्मी समुदाय
  190. 9:09भारतीय जनता पार्टी के साथ चला गया था
  191. 9:122014 में। अब उस कुर्मी समुदाय को दिखाई
  192. 9:15दे रहा है कि देश में उसके सबसे बड़े नेता
  193. 9:18नीतीश कुमार से मुख्यमंत्री की कुर्सी एक
  194. 9:20तरह से छीन ली गई। उनके सबसे बड़े नेता को
  195. 9:24कुर्सी से हटा दिया गया। रुखसती कर दी गई
  196. 9:26उनकी। और दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में यादव
  197. 9:31बनाम गैर यादव की एक बाइनरी खड़ी कर ओबीसी
  198. 9:34के भीतर इस तरह की राजनीति को हवा देकर
  199. 9:37कहीं ना कहीं उत्तर प्रदेश के भीतर सत्ता
  200. 9:41एक ठाकुर को सौंप दी गई। यानी ओबीसी को
  201. 9:44आपस में लड़ाकर सत्ता सवर्ण के हाथ में
  202. 9:46चली गई। यह फीलिंग कहीं ना कहीं उत्तर
  203. 9:49प्रदेश के भीतर पिछड़े वर्ग में क्या
  204. 9:51कुर्मी क्या मौर्या क्या कुशवाहा क्या सा
  205. 9:54क्या लो
  206. 9:56हर कम्युनिटी में कहीं कम कहीं ज्यादा
  207. 9:59अंदर तक पैठ करती जा रही है काफी हद तक
  208. 10:02ईबीसी की भी यही स्थिति है और ईबीसी की
  209. 10:05स्थिति को यदि आपको पहचानना हो ओम प्रकाश
  210. 10:08राजभर का साथ जैसे उनके स्वजातीय मतदाताओं
  211. 10:10ने पहले की तरह पिछले लोकसभा चुनाव में
  212. 10:12नहीं दिया उससे भी अंदाजा लगा सकते हैं।
  213. 10:15संजय निषाद के बयानों से भी अंदाजा लगा
  214. 10:17सकते हैं कि आखिर निषाद समाज क्या सोच रहा
  215. 10:20है। कुछ घटनाएं भी हुई है। उसका भी असर
  216. 10:22है।
  217. 10:25चौथा फैक्टर भी एक है। ओबीसी वर्ग की
  218. 10:27गोलबंदी तो उत्तर प्रदेश के भीतर दिखाई दे
  219. 10:30रही है काफी हद तक कि पहले सत्ता ठाकुर
  220. 10:34समाज के हाथ से यानी अपर कास्ट के हाथ से
  221. 10:37खींचनी है और इसके लिए चाहे मुख्यमंत्री
  222. 10:40यादव हो या कोई गैर यादव हो जो भी हो पहले
  223. 10:43वहां से सत्ता लेनी है। फिर आपस की
  224. 10:45राजनीति करनी है। यह फैक्टर कहीं ना कहीं
  225. 10:48बीजेपी को नुकसान पहुंचा रहा है। चौथा
  226. 10:51फैक्टर यह है कि दलित वोटर्स के भीतर
  227. 10:54उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने एंट्री मार
  228. 10:56ली है। दलित और ब्राह्मण दोनों के भीतर
  229. 10:58एंट्री मारी है। अब किस अनुपात में दलित
  230. 11:01कांग्रेस से जुड़ रहे हैं। किस अनुपात में
  231. 11:03ब्राह्मण कांग्रेस से जुड़ रहे हैं? इसको
  232. 11:05लेकर सबकी राय अलग-अलग हो सकती है। लेकिन
  233. 11:08इतना जरूर सत्य है कि जिस ब्राह्मण दलित
  234. 11:11समीकरण ने मायावती को 2007 में अकेले
  235. 11:14बहुमत में ला दिया था वो दलित और ब्राह्मण
  236. 11:17दोनों भारतीय जनता पार्टी में उत्तर
  237. 11:19प्रदेश के शासनकाल में कहीं ना कहीं खुद
  238. 11:22को एक सेंस ऑफ एलियनेशन पॉलिटिकल सेंस ऑफ
  239. 11:25एलिनेशन यानी सत्ता के साथ सौतेले व्यवहार
  240. 11:29की का अनुभव कर रहे हैं।
  241. 11:32ब्राह्मण समाज को लगता है कि सत्ता में
  242. 11:34उसकी पूछ नहीं है। जिस तरह की घटनाएं
  243. 11:36उत्तर प्रदेश में हुई उसको लेकर इस तरह की
  244. 11:38धारणा को और बल मिला। उप मुख्यमंत्री
  245. 11:42बृजेश पाठक का एक इंटरव्यू एक चैनल पर कुछ
  246. 11:44महीने पहले आया जिसमें वह यह कहते नजर आए
  247. 11:47कि अब मेरा मुंह मत खुलवाइए। काफी कुछ
  248. 11:49वहीं से समझ में आने लगा। लोकसभा चुनाव
  249. 11:52में योगी आदित्यनाथ के रहते हुए जो
  250. 11:54परफॉर्मेंस आई उसे भी इसके लिए जिम्मेदार
  251. 11:57माना गया। और दूसरी तरफ जहां तक दलित समाज
  252. 12:00की बात है तो दलित समाज के भीतर स्थिति यह
  253. 12:03है कि बहुजन समाज पार्टी की स्थिति जब तक
  254. 12:06उत्तर प्रदेश से नहीं बल्कि पूरे देश में
  255. 12:08एक सर्व स्वीकार्य दलित पार्टी के तौर पर
  256. 12:10थी। खासकर उत्तर प्रदेश में तो एक तरफा
  257. 12:13वोट मिलता था। वो पार्टी और उसका प्रदर्शन
  258. 12:16लगातार गिरता चला गया। बसपा के भीतर अभी
  259. 12:19एक ही खेल चल रहा है। मायावती के भतीजे
  260. 12:22आकाश आनंद कभी पार्टी में आते हैं, कभी
  261. 12:25पार्टी के पदों से हटा दिए जाते हैं। कभी
  262. 12:28निलंबित कर दिए जाते हैं। कभी आते हैं तो
  263. 12:30कभी जाते हैं, कभी आते हैं तो कभी जाते
  264. 12:32हैं। कितनी बार आए और कितनी बार गए यह
  265. 12:35गिनती शायद मायावती या आकाश आनंद को भी
  266. 12:37याद नहीं हो।
  267. 12:39और उत्तर प्रदेश के भीतर दलित समाज के की
  268. 12:43राजनीति को अगर देखें तो जिस ढंग से
  269. 12:46कांशीराम ने दलित चेतना को जगाया उसके बाद
  270. 12:49से अब दलित समाज को वोट बैंक बनाकर
  271. 12:52पिछलग्गू समाज बनाकर राजनीति में ट्रीट
  272. 12:55नहीं किया जा सकता। यह सबसे बड़ा सत्य है
  273. 12:58उत्तर प्रदेश की राजनीति का। बसपा जब तक
  274. 13:0120% वोटों पर थी तब तक भारतीय जनता पार्टी
  275. 13:04एक कंफर्टेबल पोजीशन में थी क्योंकि
  276. 13:06पिछड़ा दलित एकता हो नहीं पा रही थी और
  277. 13:09भारतीय जनता पार्टी अपने चुनावी हिंदुत्व
  278. 13:12में कामयाब हो रही थी। लेकिन बहुजन समाज
  279. 13:15पार्टी जैसे ही 20% से घटकर 14% पर आई
  280. 13:20वैसे ही उत्तर प्रदेश में 57 सीटें
  281. 13:22विधानसभा में भाजपा की कम हो गई। और जब
  282. 13:2414% से गिरकर 8% पर आई लोकसभा चुनाव के
  283. 13:28दरमियान 2024 में वैसे ही भारतीय जनता
  284. 13:31पार्टी 62 लोकसभा सीटों से गिरकर 33 पर आ
  285. 13:33गई। कहने का मतलब यह है कि संविधान बचाओ
  286. 13:36का नरेटिव, आरक्षण बचाओ की मांग, जाति
  287. 13:40जनगणना की मांग इस तमाम मुद्दे ने जितना
  288. 13:44ओबीसी को प्रभावित किया है उतना ही दलितों
  289. 13:46को प्रभावित किया है। और जब दलितों को इस
  290. 13:49तरह से प्रभावित कर रहा है यह मुद्दा तो
  291. 13:52कहीं ना कहीं कांग्रेस पार्टी जिसके
  292. 13:54राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे
  293. 13:56दलित समाज से ही आते हैं। संविधान बचाव का
  294. 13:59मुद्दा कांग्रेस पार्टी ने हाथों में उठा
  295. 14:01रखा है। राहुल गांधी संविधान की लाल किताब
  296. 14:04लेकर सीधे-सीधे जनता के बीच जा रहे हैं और
  297. 14:07जजी के आक्रोश में दलित जेंजी की आवाज भी
  298. 14:10है तो ओबीसी जेंजी की आवाज भी दिखाई दे
  299. 14:13रही है। तो इन तमाम फैक्टर को एक साथ रखकर
  300. 14:15कहीं ना कहीं दिख रहा है कि दलित वर्ग
  301. 14:18बसपा के खराब परफॉर्मेंस से निराश होकर
  302. 14:21कांग्रेस पार्टी को एक ठिकाने के तौर पर
  303. 14:24देख रहा है। लेकिन ठिकाने के तौर पर कब
  304. 14:27अकेले लड़ने की सूरत में नहीं। क्योंकि
  305. 14:29कोई भी समाज आज की तारीख में अपने वोटों
  306. 14:32को बर्बाद करने की तरफ नहीं जाएगा। अगर
  307. 14:34कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सीटों के मामले
  308. 14:36में सपा के साथ समझौता नहीं हुआ अकेले
  309. 14:39लड़ती है तो परिणाम वही होगा जो लड़की हूं
  310. 14:42लड़ सकती हूं वाले अभियान के बाद यूपी में
  311. 14:44कांग्रेस का हुआ था। तब भी अल्पसंख्यक
  312. 14:47मतदाता कांग्रेस को पसंद कर रहे थे। लेकिन
  313. 14:49कांग्रेस मुकाबले में नहीं है तो वोट नहीं
  314. 14:51दे रहे थे। ब्राह्मण तब भी कांग्रेस को
  315. 14:54पसंद कर रहे थे। लेकिन कांग्रेस मुकाबले
  316. 14:56में नहीं है तो वोट नहीं दे रहे थे। आज की
  317. 14:58स्थिति यह है कि जिस तरह से अखिलेश यादव
  318. 15:02पीडीए का नैरेटिव लेकर के चले हैं। वह
  319. 15:05पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक
  320. 15:07सबकी बात कर रहे हैं। और जिस तरह से राहुल
  321. 15:10गांधी संविधान बचाव का नैरेटिव लेकर चल
  322. 15:12रहे हैं। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण को
  323. 15:14प्रदेश अध्यक्ष और दलित को राजेंद्र पाल
  324. 15:17गौतम को प्रभारी बनाया गया है। विधायिका
  325. 15:19मोना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया
  326. 15:22है। उसके बाद से यूपी की सियासत काफी बदली
  327. 15:25हुई दिख रही है। बसपा वाला प्रयोग काफी हद
  328. 15:29तक मोटे तौर पर कहें तो बसपा को जितने वोट
  329. 15:33ब्राह्मणों और दलितों के 2007 में मिले थे
  330. 15:36उसका 1/3 या 1/ चौथाई वोट भी कांग्रेस
  331. 15:39पार्टी ने अपने गठबंधन के पक्ष में दिलवा
  332. 15:41दिया तो अखिलेश यादव और कांग्रेस का
  333. 15:43गठबंधन 250 सीटों को पार कर सकता। यह आज
  334. 15:46के उत्तर प्रदेश की हकीकत है। उसमें
  335. 15:48स्थानीय समीकरणों को भी देखें तो साफ
  336. 15:51दिखता है कि टिकट बंटवारे का जो फार्मूला
  337. 15:56मुलायम सिंह यादव लगाया करते थे जो
  338. 15:58कांशीराम सोशल इंजीनियरिंग किया करते थे।
  339. 16:00कई चुनावी झटके खाने के बाद अखिलेश यादव
  340. 16:03ने उसे सीख लिया।
  341. 16:05बड़ी होशियारी से वह सवर्णों को भी जनरल
  342. 16:07कैटेगरी को भी टिकट देते हैं। पिछले
  343. 16:09विधानसभा चुनाव में वह देखा गया कि
  344. 16:11ज्यादातर सीटें समाजवादी पार्टी ने जो
  345. 16:14सवर्णों को टिकट दी थी वो क्यों हारी थी?
  346. 16:17ज्यादातर सीटों पर कहीं ब्राह्मण को
  347. 16:19ब्राह्मण के खिलाफ लड़ा दिया। कहीं ठाकुर
  348. 16:21को ठाकुर के खिलाफ लड़ा दिया। इस तरह का
  349. 16:24खेल चल रहा था। इस चुनाव में बेहद कम
  350. 16:27सीटों पर जहां बहुत मजबूत उम्मीदवार होंगे
  351. 16:30वही इस तरह से ब्राह्मण बनाम ब्राह्मण या
  352. 16:32ठाकुर बनाम ठाकुर देखने को मिलेगा। सपा की
  353. 16:35चुनावी सफलता की कहानी को एक छोटे
  354. 16:38एग्जांपल से एक छोटे उदाहरण से समझना है
  355. 16:41तो पूर्वांचल की तीन लोकसभा सीटों को
  356. 16:43देखिए। अखिलेश यादव के कैंडिडेट ब्राह्मण
  357. 16:47कैंडिडेट बलिया में इसलिए कामयाब हुए
  358. 16:50क्योंकि उनका मुकाबला एक नॉन ब्राह्मण से
  359. 16:52था। गैर ब्राह्मण से था। अखिलेश यादव के
  360. 16:55भूमिहार उम्मीदवार
  361. 16:57घसी में इसलिए कामयाब हुए क्योंकि उनका
  362. 16:59मुकाबला एक गैर भूमिहार से था और अखिलेश
  363. 17:02यादव के ठाकुर उम्मीदवार चंदौली में इसलिए
  364. 17:04कामयाब हुए क्योंकि वहां उनका मुकाबला एक
  365. 17:07गैर ठाकुर से था। सजातीय उम्मीदवार से
  366. 17:10सवर्णों में मुकाबले की स्थिति में सपा
  367. 17:11घाटे में रहती है। इस बात को समाजवादी
  368. 17:14पार्टी ने समझ लिया है। कांग्रेस ने भी
  369. 17:17काफी हद तक समझ लिया है। लिहाजा छोड़
  370. 17:19दीजिए वह पोस्टर कि 200 सीट और 150 सीट।
  371. 17:22आज की तारीख में अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश
  372. 17:25की सियासत में क्लास की पॉलिटिक्स में भी
  373. 17:28कास्ट की पॉलिटिक्स में भी इक्वेशनल
  374. 17:31एडवांटेज यानी समीकरणों के आधार पर होने
  375. 17:33वाली राजनीति में भी हर जगह भारी पड़ते
  376. 17:36हुए दिखाई दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी
  377. 17:38के लिए शहरी सीटों पर मुसीबत आ रही है। उन
  378. 17:41शहरी सीटों पर जिन शहरी सीटों ने दुर्दशा
  379. 17:44के दौर में भी भारतीय जनता पार्टी को 2007
  380. 17:47और 12 के चुनाव में जब कोई मुकाबले में
  381. 17:50नहीं मान रहा था तब भी 45-50 विधानसभा
  382. 17:53सीटों पर बचा कर रखा था। अब वह शहरी सीटें
  383. 17:56भी दांव पर है। इसलिए दांव पर है क्योंकि
  384. 17:59जजी विरोध में है। जैन अल्फा विरोध में
  385. 18:02है। नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ ही उत्तर
  386. 18:05प्रदेश नहीं है। क्योंकि शहर शहरी सीटों
  387. 18:08की बात करें तो उज्जवल रमन सिंह बिना किसी
  388. 18:11सामाजिक समीकरण के प्रयागराज या इलाहाबाद
  389. 18:15की लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी को
  390. 18:18हरा सकते हैं। इसी से समझा जा सकता है कि
  391. 18:20उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की
  392. 18:23जमीन कितनी ज़्यादा हिली हुई दिखाई दे रही
  393. 18:26है। आज के दौर में जिस तरह की राजनीति हो
  394. 18:30रही है। ये सारे विश्लेषण दोस्तों हम तभी
  395. 18:32कर रहे हैं जब हम यह उम्मीद कर रहे हैं कि
  396. 18:35इतने सारे खुलासे के बाद ज्ञानेश कुमार का
  397. 18:38एसआईआर उत्तर प्रदेश में वोटर वोटरों के
  398. 18:41नाम काटने की स्थिति में नहीं होगा। नाम
  399. 18:43काटकर तो किसी को जिताया जा सकता है। वोटर
  400. 18:46लिस्ट में अपनी पसंद की जनता चुनकर अपनी
  401. 18:49पसंद की मशीन के द्वारा जिसकी सरकार
  402. 18:52केंद्र में हो उसी की सरकार ओम प्रकाश
  403. 18:54राजभर के हाथ अगर ज्ञानेश कुमार की मशीन
  404. 18:56लग जाए ज्ञानेश कुमार का एसआईआर लग जाए और
  405. 18:59ओम प्रकाश राजभर के कंट्रोल में ही अगर
  406. 19:02ज्ञानेश कुमार का सिस्टम आ जाए ओम प्रकाश
  407. 19:04राजभर भी 403 सीट लड़कर चुनाव जीत सकते
  408. 19:07हैं। लेकिन जो विश्लेषण मैंने आपके सामने
  409. 19:10प्रस्तुत किया वह स्वतंत्र और निष्पक्ष
  410. 19:12चुनाव की अवधारणा के आधार पर किया। ज्ञान
  411. 19:16ज्ञानेश कुमार की अवधारणा के आधार पर नहीं
  412. 19:18किया। देखते जाइए क्या होता है। आज के लिए
  413. 19:21इतना ही।
  414. 19:22नमस्कार।

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