जगन्नाथ जी और नीलाद्रि का रहस्य 😱 | नील माधव से जगन्नाथ बनने की अद्भुत कथा | जय जगन्नाथ 🙏 — Transcript
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- 0:00क्या आप जानते हैं भगवान जगन्नाथ को
- 0:02नीलाद्री के नाथ क्यों कहा जाता है? इसके
- 0:06पीछे एक ऐसा रहस्य है जिसे सुनकर शायद आप
- 0:09भी सोचने पर मजबूर [संगीत] हो जाएंगे। कहा
- 0:12जाता है कि आज जहां भगवान जगन्नाथ का भव्य
- 0:15धाम है। उसी पवित्र भूमि पर कभी भगवान
- 0:18विष्णु नील माधव [संगीत] के रूप में गुप्त
- 0:20रूप से विराजमान थे। उनकी पूजा एक परम
- 0:24भक्त विश्ववसु किया करते थे। विश्ववसु
- 0:27जंगल के बीच एक ऐसे स्थान पर जाते थे जहां
- 0:31कोई दूसरा व्यक्ति आसानी से पहुंच भी नहीं
- 0:33[संगीत] सकता था। लेकिन एक दिन इस रहस्य
- 0:36की खबर राजा इंद्रदुम्न [संगीत] तक पहुंच
- 0:38गई। राजा के मन में भगवान के दर्शन की ऐसी
- 0:42इच्छा जागी कि उन्होंने नील माधव को खोजने
- 0:45के लिए [संगीत] अपने दूत भेज दिए। बहुत
- 0:48खोज के बाद उन्हें विश्ववसु [संगीत] का
- 0:50पता मिला। कहा जाता है कि विश्ववसु नील
- 0:54माधव की पूजा करने के लिए जाते समय अपनी
- 0:57आंखों पर पट्टी बांध [संगीत] लेते थे ताकि
- 0:59भगवान का गुप्त स्थान किसी को पता ना चल
- 1:02सके। [संगीत]
- 1:03लेकिन राजा के दूत ने रास्ते में चुपके से
- 1:06कुछ बीज गिरा दिए। समय बीता और उन्हीं
- 1:10बीजों से उगे [संगीत] पेड़ों के सहारे
- 1:12भगवान के गुप्त स्थान तक पहुंचने का
- 1:14रास्ता पता चल गया। जब राजा [संगीत] वहां
- 1:16पहुंचे तो उनके सामने भगवान नील माधव नहीं
- 1:19थे। भगवान अंतर्धान [संगीत]
- 1:21हो चुके थे। राजा इंद्रदुम्न टूट गए।
- 1:24उन्होंने भगवान से प्रार्थना की। हे प्रभु
- 1:27यदि मेरी भक्ति [संगीत] सच्ची है तो मुझे
- 1:29अपने दर्शन अवश्य दीजिए। तभी उन्हें दिव्य
- 1:32संकेत मिला कि भगवान [संगीत] अब एक नए रूप
- 1:35में प्रकट होंगे। कुछ समय बाद समुद्र के
- 1:38किनारे एक [संगीत] अद्भुत दिव्य दारू
- 1:40दिखाई दिया। उस लकड़ी पर दिव्य चिन्ह थे
- 1:43और उसे साधारण [संगीत] मनुष्य काट नहीं पा
- 1:45रहा था। तभी राजा समझ गए यह कोई साधारण
- 1:48लकड़ी नहीं स्वयं [संगीत] भगवान की इच्छा
- 1:51है। इसी दिव्य दारू से भगवान जगन्नाथ,
- 1:54बलभद्र और माता सुभद्रा [संगीत] के
- 1:56विग्रहों के प्रकट होने की परंपरा जुड़ी
- 1:58है। और जिस पवित्र नीलाचल भूमि पर भगवान
- 2:01ने अपना निवास बनाया वही भूमि आगे चलकर
- 2:05[संगीत]
- 2:05नीलाद्री के नाम से प्रसिद्ध हुई। इसीलिए
- 2:07भगवान जगन्नाथ केवल पूरी के भगवान नहीं
- 2:10उन्हें कहा जाता है नीलाद्री के [संगीत]
- 2:13नाथ जगत के नाथ। कहा जाता है कि भगवान का
- 2:16स्वरूप आज भी हमें यही संदेश देता है कि
- 2:20भगवान को पाने के लिए धन, शक्ति या दिखावा
- 2:23नहीं केवल सच्ची भक्ति चाहिए। अगर आपकी
- 2:26भक्ति भी सच्ची है तो कमेंट में एक बार
- 2:29जरूर लिखिए जय जगन्नाथ।
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