एक बूढ़ी माँ की दर्दभरी कहानी!चार बेटों ने उसे अकेला क्यों छोड़ा? माँ के लिए वीडियो को पुरा देखिये। — Transcript
Full transcript
- 0:00एक गांव में एक बूढ़ी मां रहती थी। चंपा
- 0:03देवी। उसके चार बेटे थे। लेकिन चारों
- 0:07अपने-अपने घर बनाकर अलग रहते थे। उन्होंने
- 0:10अपनी मां के लिए गांव की पुरानी जमीन पर
- 0:13एक छोटी सी झोपड़ी बना दी थी। जहां चंपा
- 0:15देवी अकेली रहती थी। अब उम्र बहुत हो चुकी
- 0:18थी। कमर में हर समय दर्द रहता। हाथ पैर भी
- 0:22साथ नहीं देते थे। पहले जैसे काम अब नहीं
- 0:25होते थे। दिन भर वो झोपड़ी के बाहर बैठकर
- 0:28बस रास्ता देखती रहती। शायद कोई बेटा आए
- 0:32लेकिन वो नहीं आता था। एक दिन चंपा देवी
- 0:36ने सोचा
- 0:37इतने दिन हो गए बेटे बहू से मिले हुए। वो
- 0:41तो आएंगे नहीं। मैं ही चली जाती हूं
- 0:44मिलने।
- 0:45चंपा देवी ने सोचा क्यों ना कुछ दिन बड़े
- 0:48बेटे के घर हो आऊं। वे मुझे देखकर बहुत
- 0:51खुश होंगे। वह धीरे-धीरे लाठी के सहारे
- 0:54उठी और चल पड़ी अपने बड़े बेटे के घर की
- 0:56तरफ। दोपहर की तेज धूप, सूखी जमीन और हवा
- 1:01भी जैसे थम सी गई थी। लाठी के सहारे
- 1:04धीरे-धीरे चलते हुए चंपा देवी अपने बड़े
- 1:07बेटे के घर की तरफ निकल पड़ी। रास्ता बहुत
- 1:10लंबा था। हर कदम पर दर्द जैसे और बढ़ जाता
- 1:13था। कुछ दूर चलने के बाद उनकी सांसे तेज
- 1:18हो गई। पैर कांपने लगे। वो पास ही एक बड़े
- 1:21पेड़ के नीचे बैठ गई। पसीने से उनका पूरा
- 1:24[संगीत] शरीर भीग चुका था। धीरे से अपने
- 1:27घुटनों को पकड़ कर बोली, बस थोड़ा और फिर
- 1:30अपने बेटे के पास पहुंच जाऊंगी। उनकी
- 1:33आंखों में उम्मीद थी कि बेटा देखेगा
- 1:35[संगीत] तो गले लगा लेगा। थोड़ी देर आराम
- 1:38करने के बाद वो फिर उठी लाठी टिकाते हुए।
- 1:42धीरे-धीरे कदम बढ़ाने लगी। हर कदम जैसे
- 1:45दर्द से भरा था।
- 1:47लेकिन दिल में उम्मीद उन्हें आगे बढ़ा रही
- 1:49थी। कई घंटे चलने के बाद उनका गला सूख
- 1:53गया। होठ फटने लगे। उन्हें जोर की प्यास
- 1:57लगी। तभी उन्हें एक घर दिखाई दिया। वो
- 2:00धीरे-धीरे उस घर के आंगन तक पहुंची। और
- 2:03कांपती आवाज में बोली,
- 2:05बेटी, थोड़ा पानी मिल जाएगा। घर से एक
- 2:08महिला बाहर आई। उसने चंपा देवी को देखा तो
- 2:11तुरंत अंदर गई और पानी लेकर आई। अरे अम्मा
- 2:15अम्मा कहां जा रही हो इस तपती धूप में?
- 2:19चंपा देवी ने पानी पिया तो जैसे जान में
- 2:22जान आ गई। फिर धीरे-धीरे बोली
- 2:24अपने बेटे बाहू के घर जा रही हूं।
- 2:28बेटे के घर जा रही हूं।
- 2:29तबीयत ठीक नहीं है।
- 2:31महिला ने चिंता से कहा। इतनी दूर अकेले
- 2:34कोई साथ क्यों नहीं है? चंपा देवी बस
- 2:37हल्की सी मुस्कुरा दी। जवाब उनके पास था
- 2:40पर शब्द नहीं थे। थोड़ी देर बात करने के
- 2:43बाद चंपा देवी फिर उठी। महिला ने कहा
- 2:47अम्मा थोड़ा और आराम कर लो। लेकिन वो बोली
- 2:51नहीं बेटी अब जल्दी पहुंचना है। और फिर वो
- 2:56अपने सफर पर निकल पड़ी। शाम ढलने लगी थी।
- 2:59आखिरकार वो अपने बड़े बेटे के घर पहुंच
- 3:03गई। कांपते हाथों से दरवाजा खटखटाया। कुछ
- 3:06देर बाद बहू बाहर आई। चंपा देवी को देखते
- 3:10ही उसका चेहरा उतर गया। लेकिन फिर झूठी
- 3:14मुस्कान लाकर बोली अरे अम्मा इतनी धूप में
- 3:17आप अकेले आ गई। फिर बनावटी चिंता दिखाते
- 3:20हुए बोली हमें खबर कर देती हम ही आ जाते
- 3:24लेने। चंपा देवी ने थकी हुई आवाज में कहा
- 3:27बेटी तबीयत ठीक नहीं है। सोचा कुछ दिन
- 3:31यहीं रह लूं। बहू अंदर गई और बेटे से बात
- 3:35की। दोनों के चेहरे पर खुशी नहीं थी।
- 3:38लेकिन फिर भी अनमने मन से उन्हें घर में
- 3:41रहने दिया गया। दिन बीतने लगे लेकिन बेटा
- 3:45दिन भर अपने काम में ही व्यस्त रहता। मां
- 3:48के पास बैठने का भी समय नहीं होता। चंपा
- 3:51देवी दरवाजे के पास बैठी रहती। हर आवाज पर
- 3:54सोचती। शायद बेटा आया है। लेकिन वो कभी
- 3:59नहीं [संगीत] आता। बहू भी अपने कामों में
- 4:02ही लगी रहती। कभी आकर दो बातें भी नहीं
- 4:04करती। ना हाल पूछती ना पास बैठती खाना भी
- 4:10समय पर नहीं देती। एक दिन चंपा देवी को
- 4:13दिन भर बहू ने [संगीत] खाना नहीं दिया। तब
- 4:15वह खाना मांगने रसोई घर में जाती है।
- 4:17बहू भूख लगी है। खाना है तो दे दो ना।
- 4:20अम्मा तुम खुद खाना बनाकर खा लो। मैं बहुत
- 4:23व्यस्त हूं।
- 4:25चंपा देवी चुपचाप सुनती रहीं। उनकी आंखें
- 4:28भर आई। उन्होंने सोचा क्या यही वह घर है
- 4:32जहां कभी मेरा बेटा मेरे बिना एक [संगीत]
- 4:34पल नहीं रहता था। रात को वो एक कोने में
- 4:37लेटी रहती। छत को देखते हुए पुराने दिन
- 4:41याद करती। जब बेटा बीमार पड़ता था [संगीत]
- 4:44तो वो रात भर जागती थी। जब उसे भूख लगती
- 4:47थी तो खुद भूखी रह जाती थी। और आज उनके
- 4:51पास [संगीत] बैठने वाला भी कोई नहीं था।
- 4:53कुछ दिन ऐसे ही बीत गए। फिर एक दिन बेटा
- 4:56उनके पास आया। चंपा देवी के चेहरे पर
- 4:59हल्की सी खुशी आई। शायद आज मेरा हाल
- 5:02पूछेगा। लेकिन बेटे ने जो कहा वो उनके दिल
- 5:06को और तोड़ गया। अम्मा आप क्यों नहीं चली
- 5:10जाती दूसरे भाई के घर? वहां आपका अच्छे से
- 5:13ख्याल रखेंगे। हम तो बहुत व्यस्त रहते
- 5:15हैं। चंपा देवी कुछ पल तक चुप रही। उनकी
- 5:19आंखों में आंसू थे। लेकिन आवाज अब भी शांत
- 5:22थी। ठीक है बेटा। और उसी रात वो चुपचाप
- 5:26[संगीत] बैठी रही। सोचती रही। चंपा देवी
- 5:30ने जब बड़े बेटे के घर [संगीत] से जाने का
- 5:32फैसला लिया तो उनके दिल में एक छोटी सी
- 5:34उम्मीद अब भी जिंदा थी। शायद मेरा दूसरा
- 5:37[संगीत] बेटा मुझे समझेगा। अगली सुबह बिना
- 5:40कुछ कहे। वो चुपचाप अपने पुराने झोले में
- 5:43दो जोड़ी कपड़े रखती हैं और धीरे-धीरे
- 5:45[संगीत] दूसरे बेटे के घर की ओर निकल
- 5:48पड़ती हैं। रास्ता फिर वही लंबा। धूप पहले
- 5:51से भी तेज और उम्र अब पहले से भी ज्यादा
- 5:54थकी हुई। चलते-चलते उनके कदम लड़खड़ाते
- 5:57हैं। पर इस बार वो कहीं नहीं रुकती जैसे
- 6:00मन में एक ही बात हो। बस किसी तरह बेटे के
- 6:03घर पहुंच जाऊं। घर का दरवाजा और ठंडी
- 6:07नजरें। काफी देर बाद आ वो दूसरे बेटे के
- 6:10घर पहुंचती हैं। जैसे ही दरवाजा खुलता है,
- 6:13बहू चंपा देवी को ऊपर से नीचे तक देखती
- 6:16है। चेहरे पर ना खुशी, ना अपनापन। बस एक
- 6:19औपचारिक स्वभाव। अरे अम्मा आप अचानक इतने
- 6:24में बेटा भी बाहर आता है। अरे अम्मा आओ
- 6:28आओ। लेकिन उसकी आवाज में वह अपनापन नहीं
- 6:31था जो एक बेटे की आवाज में होना चाहिए।
- 6:34चंपा देवी धीरे से कहती हैं। बेटा तबीयत
- 6:38ठीक नहीं रहती। सोचा कुछ दिन तुम्हारे पास
- 6:40रह लूं। बेटा और बहू एक दूसरे की तरफ
- 6:43देखते हैं। फिर बहू हल्की सी मुस्कान
- 6:46बनाकर कहती है, हां हां अम्मा रहिए। लेकिन
- 6:50वो मुस्कान दिल से नहीं थी। दिन गुजरने
- 6:54लगे पर अकेलापन नहीं गया। शुरू के एकद दिन
- 6:57ठीक रहे। पर फिर वही सिलसिला शुरू हो गया।
- 7:01बेटा सुबह निकल जाता। काम बहुत है अम्मा।
- 7:05और देर रात लौटता
- 7:07थका हुआ। चुप बिना कुछ पूछे। चंपा देवी हर
- 7:11शाम दरवाजे की तरफ देखती रहती। आज शायद
- 7:14बेटा बैठकर दो बातें करेगा। पर वो दिन कभी
- 7:17नहीं आया। दूसरी बहू भी अलग नहीं थी। वो
- 7:20दिन भर घर में रहती जरूर थी। पर चंपा देवी
- 7:23से जैसे कोई मतलब ही नहीं। कभी फोन पर कभी
- 7:27पड़ोस में कभी इधर-उधर घूमने में व्यस्त
- 7:29रहती। अगर चंपा देवी कुछ पूछती तो जवाब
- 7:33मिलता। अम्मा अभी टाइम नहीं है। एक दिन
- 7:35दोपहर हो गई। फिर शाम हो गई। पर किसी ने
- 7:39खाने के लिए नहीं पूछा।
- 7:40आखिर हिम्मत करके चंपा देवी ने कहा,
- 7:43बहू कुछ खाने को मिल जाएगा।
- 7:46बहू झुंझुला कर बोली
- 7:48अम्मा
- 7:49मैं कोई खाली थोड़ी बैठी हूं।
- 7:51आप खुद ही ले लिया करो ना रसोई में रखा
- 7:53है।
- 7:54चंपा देवी धीरे-धीरे उठती हैं। कांपते
- 7:57हाथों से बर्तन उठाती हैं और उनकी आंखों
- 8:00में आंसू आ जाते हैं। रात को चारपाई पर
- 8:03लेटे चंपा देवी छत को देखती रहती। उन्हें
- 8:07याद आता कैसे उन्होंने [संगीत] इन बच्चों
- 8:10को पाला था। खुद भूखी रहकर उन्हें खिलाया
- 8:13था और आज उन्हीं के घर में वो एक बोझ बन
- 8:19गई थी। एक दिन सच सामने आ ही गया। एक शाम
- 8:23जब बेटा काम से लौटा तो चंपा देवी ने
- 8:26हिम्मत करके कहा। बेटा थोड़ी देर बैठ जाओ
- 8:30ना। बात करनी थी। बेटा थोड़ा असहज हो गया।
- 8:34फिर बोला अम्मा अभी बहुत थका हूं कल बात
- 8:38करेंगे लेकिन उसी वक्त बहू बोल पड़ी सुनिए
- 8:42मैं तो पहले ही कह रही थी अम्मा को यहां
- 8:45रखकर हमसे संभल नहीं रहा चंपा देवी यह सब
- 8:48सुन रही थी उनका दिल जैसे अंदर से टूट गया
- 8:51बेटे की वो बात जिसने सब खत्म कर दिया
- 8:54बेटा धीरे से बोला अम्मा आप बुरा मत मानना
- 8:59पर आप क्यों ना तीसरे बेटे के पास चली जाओ
- 9:01वो तो खाली भी रहता है वो वो आपका अच्छा
- 9:04ख्याल रखेगा। यह सुनकर चंपा देवी कुछ नहीं
- 9:07बोली। बस चुपचाप
- 9:10आंखों से आंसू गिरते रहे। उन्हें समझ आ
- 9:13गया था। अब वो मां नहीं बस एक जिम्मेदारी
- 9:16बन चुकी है। दूसरे बेटे के घर से निकलते
- 9:19समय चंपा देवी ने एक बार पीछे मुड़कर
- 9:22देखा। ना कोई रोकने आया। ना किसी ने आवाज
- 9:25दी। बस एक खामोशी थी। जो उनके दिल को
- 9:29चीरती जा रही थी। फिर वही सफर लेकिन अब
- 9:32कदम भारी थे। इस बार रास्ता पहले से भी
- 9:35ज्यादा मुश्किल लग रहा था। धूप उतनी ही थी
- 9:39पर अब उनके अंदर ताकत कम थी। हर कदम पर
- 9:42ऐसा लग रहा था जैसे शरीर साथ छोड़ देगा।
- 9:45चलते-चलते वो एक जगह बैठ गई। हाथों
- 9:48[संगीत] से अपने घुटनों को सहलाते हुए
- 9:50धीरे से बोली। हे भगवान अब कहां जाऊं?
- 9:54लेकिन फिर खुद को संभाला। और तीसरे बेटे
- 9:57के घर की ओर बढ़ गई। जब वो तीसरे बेटे के
- 9:59घर पहुंची उन्होंने दरवाजा खटखटाया दरवाजा
- 10:03खोला तीसरी बहू सामने थी हां कौन फिर जैसे
- 10:08ही उसने देखा अरे अम्मा आप उसने अंदर
- 10:11बुलाया जरूर पर उस बुलावे में अपनापन नहीं
- 10:14था तीसरा बेटा आया अम्मा आप बिना बताए आ
- 10:17गई चंपा देवी ने धीमी आवाज में कहा बेटा
- 10:21तबीयत ठीक नहीं थी सोचा कुछ दिन तुम्हारे
- 10:24पास रह लूं बेटे ने सिर हिलाया हम ठीक ठीक
- 10:28है लेकिन उसके चेहरे पर साफ लिखा था ये भी
- 10:31आ गई घर बड़ा था कमरे भी थे पर चंपा देवी
- 10:36[संगीत] के लिए एक कोना तय किया गया स्टोर
- 10:38रूम के पास एक पुरानी चारपाई जहां ना ठीक
- 10:41से हवा आती थी ना रोशनी [संगीत]
- 10:43सुबह उठते ही चंपा देवी उम्मीद करती आज
- 10:47शायद कोई पूछेगा अम्मा कैसी हो पर यहां भी
- 10:50वही कहानी बहू सुबह से फोन में लगी रहती
- 10:54कभी रील्स कभी कॉल बेटा बाहर निकल जाता
- 10:58काम है पोते पोतियां भी दूर हो गए घर में
- 11:02बच्चे थे पर उन्हें भी सिखा दिया गया था
- 11:05अम्मा के पास मत जाना वो बूढ़ी हैं चंपा
- 11:08देवी दूर से उन्हें खेलते देखती रहती मन
- 11:11करता उन्हें गोद में उठाएं
- 11:13प्यार करें
- 11:14पर कोई पास नहीं आता एक दिन दोपहर में
- 11:18चंपा देवी बहुत देर तक बैठी रही कोई नहीं
- 11:21आया आखिर उन्होंने खुद ही रसोई में जाकर
- 11:24देखा कुछ भी उनके लिए अलग से नहीं रखा था
- 11:27उन्होंने बची हुई सूखी रोटी उठाई और पानी
- 11:30के साथ खा ली। आंखों से आंसू गिरते रहे।
- 11:33एक रात चंपा देवी पानी पीने उठी तो
- 11:36उन्होंने कमरे के बाहर बेटे बहू की बातें
- 11:39सुनी। बहू कह रही थी कब तक रखेंगे इन्हें?
- 11:43ना काम करती हैं। बस पड़ी रहती हैं। बेटा
- 11:46बोला मैं भी सोच रहा हूं क्यों ना चौथे
- 11:49वाले के पास भेज दें। मां का दिल अब टूट
- 11:53चुका था। यह सुनकर चंपा देवी वहीं दीवार
- 11:57के सहारे बैठ गई। आंखों से आंसू [संगीत]
- 11:59बहते रहे। पर इस बार दर्द अलग था। अब
- 12:02उन्हें किसी से उम्मीद नहीं थी। अगली सुबह
- 12:05सुबह होते ही चंपा देवी ने बिना कुछ कहे
- 12:09अपना छोटा सा झोला उठाया और चुपचाप घर से
- 12:12बाहर निकल गई। किसी ने रोका नहीं।
- 12:15किसी ने पूछा नहीं। चंपा देवी धीरे-धीरे
- 12:18चलते हुए थके हुए कदमों से चौथे बेटे के
- 12:22घर की ओर बढ़ रही थी। इस बार उनके मन में
- 12:24डर नहीं था। बस एक अजीब सी शांति थी। अब
- 12:28जो होगा देखा जाएगा। जब वो चौथे बेटे के
- 12:31घर पहुंची तो वहां कोई बड़ा मकान नहीं था।
- 12:34बस मिट्टी की दीवारों से बना एक छोटा सा
- 12:36घर छप्पर की छत। आंगन में टूटी सी चारपाई
- 12:41पर जैसे ही उन्होंने आवाज दी। बेटा अंदर
- 12:45से उनका बेटा दौड़ता हुआ बाहर आया। बेटे
- 12:47की आंखों में आंसू। अरे अम्मा आप उसने
- 12:52तुरंत मां के पैर पकड़ लिए। आंखों में
- 12:54आंसू भर आए।
- 12:55अम्मा पहले क्यों नहीं आई आप? तभी बहू
- 12:58[संगीत] भी बाहर आई। बहू ने तुरंत पानी
- 12:59दिया। सीधे चंपा देवी को गले लगा लिया।
- 13:02अम्मा अंदर आइए। देखिए कितनी कमजोर हो गई
- 13:06हैं आप। उसकी आवाज में कोई बनावट नहीं थी।
- 13:09बस सच्चा अपनापन था। गरीबी थी। लेकिन दिल
- 13:13बहुत बड़ा था। घर में कुछ खास नहीं था। ना
- 13:16बढ़िया बिस्तर, ना अच्छा खाना, लेकिन जो
- 13:19था वो पूरे दिल से था। फिर जल्दी-जल्दी
- 13:22चूल्हा जलाया। अम्मा आज आपके लिए गरम-गरम
- 13:25रोटी बनाऊंगी। तब एक छोटा सा बच्चा भागता
- 13:28हुआ आया। दादी आ गई। दादी आ गई। वो सीधे
- 13:32चंपा देवी की गोद में चढ़ गया। उसे कसकर
- 13:35पकड़ लिया। दादी अब आप कहीं मत जाना। चंपा
- 13:39देवी की आंखों से आंसू बहने लगे। लेकिन इस
- 13:42बार यह आंसू दुख के नहीं खुशी के थे। उस
- 13:45रात बहू ने अपनी ही चारपाई चंपा देवी को
- 13:48दे दी और खुद नीचे चटाई पर सो गई। बेटा
- 13:52बार-बार आकर पूछता अम्मा कुछ चाहिए तो
- 13:55नहीं? चंपा देवी बस उसे देखती रही। सोचती
- 13:58रही धीरे-धीरे बदलने लगी जिंदगी। अब हर
- 14:02दिन अलग था। सुबह बहू उनके पैर दबाती।
- 14:05बेटा काम पर जाने से पहले हाल पूछता और
- 14:08पोता तो हर वक्त उनके साथ ही रहता।
- 14:11दादी कहानी सुनाओ। दादी मेरे साथ खेलो। कम
- 14:15था खाना पर दिल भरा हुआ था। कई बार घर में
- 14:19सिर्फ एक समय का ही खाना होता। तो बहू
- 14:22चुपचाप कह देती अम्मा मेरा पेट भर गया। आप
- 14:26खा लीजिए। लेकिन चंपा देवी समझ जाती थी और
- 14:29आधा खाना पोते को दे देती। आधा खुद खाती।
- 14:33मां का दिल अब शांत था। अब चंपा देवी के
- 14:37चेहरे पर फिर से मुस्कान आने लगी थी।
- 14:39उन्होंने मन ही मन कहा भगवान तूने सब कुछ
- 14:42नहीं दिया पर जो दिया वह सबसे अनमोल है।
- 14:46चंपा देवी अब अपने छोटे बेटे और बहू के
- 14:49साथ खुशी-खुशी रहने लगी थी। समय धीरे-धीरे
- 14:53बीतता गया। साल गुजर गए। लेकिन उम्र ने अब
- 14:56अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। अब शरीर
- 14:59थक चुका था। एक दिन चंपा देवी बिस्तर से
- 15:02उठ ही नहीं पाई। अब वो पूरी तरह बिस्तर
- 15:05पकड़ चुकी थी। चलना फिरना भी मुश्किल हो
- 15:07गया था। बहू दिन रात उनकी सेवा करती। बेटा
- 15:11काम से लौट कर सबसे पहले मां के पास बैठता
- 15:14और उनका पोता अब बड़ा हो चुका था। लेकिन
- 15:18आज भी दादी का हाथ पकड़ कर बैठता था। एक
- 15:20दिन आखिरी बात उस रात चंपा देवी ने धीमी
- 15:24आवाज में कहा, बेटा जरा पास आओ। बेटा और
- 15:28बहू दोनों घबरा कर उनके पास बैठ गए। चंपा
- 15:31देवी मुस्कुराई। पर आंखों में एक अजीब सी
- 15:34शांति थी। बेटा अब मेरे जाने का समय आ गया
- 15:38है। घर में सन्नाटा और आंसू। यह सुनते ही
- 15:43बेटा और बहू दोनों फूट-फूट कर रोने लगे।
- 15:46मां ऐसा मत कहो। हमें कुछ नहीं चाहिए। बस
- 15:50आप हमारे साथ रहो। बहू उनके पैर पकड़ कर
- 15:53रोने लगी। अम्मा आप हमें छोड़कर मत जाओ।
- 15:56चंपा देवी ने उनके सिर पर हाथ रखा। धीरे
- 15:59से बोली, मेरे चार बेटे हैं। फिर भी इस
- 16:03बुढ़ापे में मैं अकेली हो गई थी। उनकी
- 16:06आंखों से आंसू बहने लगे। मैं सबके लिए बोझ
- 16:09बन गई थी। लेकिन तुम दोनों ने मुझे मां
- 16:12समझ कर रखा। मैं तुम दोनों को कुछ देना
- 16:15चाहती हूं। बेटा तुरंत बोला, मां, हमें
- 16:18कुछ नहीं चाहिए। आप ही हमारे लिए सब कुछ
- 16:21हो। चंपा देवी हल्के से मुस्कुराई। बेटा
- 16:25मेरे जाने के बाद तुम्हारे पास मेरी कोई
- 16:28निशानी तो होनी चाहिए। उन्होंने धीरे-धीरे
- 16:30कहा उस पुरानी जमीन पर जहां मेरी झोपड़ी
- 16:34है। घर के कोने में जमीन खोदना। वहां एक
- 16:38पुराना संदूक है। बेटा और बहू चौंक गए। उस
- 16:42संदूक में हमारे पुरखों के सोने के
- 16:44सिक्के, कुछ गहने और मेरी सारी जमा पूंजी
- 16:48है। मैंने उसे सालों से छुपा कर रखा। मैं
- 16:51तुम चारों बेटों की परीक्षा ले रही थी।
- 16:54देखना चाहती थी कौन सच में मेरा अपना है।
- 16:58और बेटा इस परीक्षा में तुम पास हो गए। अब
- 17:02तुम दोनों अच्छे से अपनी जिंदगी जीना। कभी
- 17:06किसी गरीब को खाली हाथ मत लौटाना। और और
- 17:10हमेशा साथ रहना। मां चली गई लेकिन प्यार
- 17:13छोड़ गई। इतना कहकर चंपा देवी की आंखें
- 17:17धीरे-धीरे बंद हो गई। चेहरे पर सुकून था।
- 17:21जैसे उन्हें सब मिल गया हो। अगले दिन बेटा
- 17:24और बहू पुराने घर गए। कांपते हाथों से
- 17:26जमीन खोदी और सच में उन्हें वही संदूक
- 17:30मिला। जब खोला तो अंदर सोने के सिक्के,
- 17:34गहने सब कुछ था। लेकिन सबसे बड़ा खजाना
- 17:38क्या था? बेटे की आंखों से आंसू बहने लगे।
- 17:42यह दौलत नहीं यह मां का प्यार है। आगे
- 17:45क्या हुआ? उन्होंने उस धन से अपना छोटा सा
- 17:49घर ठीक किया। पोते की पढ़ाई करवाई और सबसे
- 17:52बड़ी बात गांव के गरीब लोगों की मदद शुरू
- 17:55कर दी। दूसरे बेटों को जब पता चला तो वह
- 17:59भी दौड़े-दौड़े आए लेकिन अब बहुत देर हो
- 18:01चुकी थी। उन्हें पछतावा हुआ पर मां
- 18:04मां-बाप बोझ नहीं होते। वो हमारी सबसे
- 18:07बड़ी दौलत होते हैं। जो उनका साथ देता है
- 18:11उसे जिंदगी भी साथ देती है। दोस्तों कैसी
- 18:14लगी कहानी आपको? एक प्यार भरा फीडबैक जरूर
- 18:16देना और चैनल पर नए हो तो हमारे चैनल पिकू
- 18:19की दुनिया से जुड़ जाना।
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This page contains the full transcript of एक बूढ़ी माँ की दर्दभरी कहानी!चार बेटों ने उसे अकेला क्यों छोड़ा? माँ के लिए वीडियो को पुरा देखिये। by Pikku ki Duniya, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 2,871 words across 345 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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