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दुकानदारी छोड़ो, ये 5 'कमीशन' वाले धंधे सीखो! — Transcript

by True Wealth Invest · 2,605 words · 319 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00एक कड़वी सच्चाई बताऊं। बाजार में सबसे
  2. 0:03ज्यादा टेंशन में वह आदमी जीता है जिसके
  3. 0:05गोदाम में 10 लाख का माल भरा है। और सबसे
  4. 0:08चैन की नींद वो सोता है जो उस माल को बिना
  5. 0:11खरीदे बेच आता है। कभी अपने शहर की सबसे
  6. 0:13पुरानी थोक मंडी या किसी बड़े इंडस्ट्रियल
  7. 0:16एरिया में दोपहर के 2:00 बजे जाकर खड़े
  8. 0:18होइए। आपको वहां दो तरह के लोग दिखेंगे।
  9. 0:21पहला वह व्यापारी है जिसने अपनी जमीन
  10. 0:24बेचकर या बैंक से 15 लाख का लोन लेकर एक
  11. 0:27बड़ी सी दुकान खोली है। उसके शटर के पीछे
  12. 0:30छत तक माल भरा पड़ा है। बाहर लड़के काम कर
  13. 0:32रहे हैं। बिजली का मीटर घूम रहा है और वो
  14. 0:35व्यापारी गल्ले पर बैठकर माथे का पसीना
  15. 0:37पोछ रहा है। क्यों? क्योंकि पिछले महीने
  16. 0:39जिस पार्टी को उसने 3 लाख का माल उधार
  17. 0:42दिया था, वह अब फोन नहीं उठा रही। ऊपर से
  18. 0:44महीने की पांच सारी खाने वाली है। दुकान
  19. 0:47का किराया, लड़कों की पगार और बैंक की
  20. 0:49किश्त सिर पर खड़ी है। और ठीक उसी दुकान
  21. 0:52के सामने एक छोटी सी चाय की गुमटी पर आपको
  22. 0:55दूसरा आदमी दिखेगा। उसके पास ना कोई दुकान
  23. 0:58है, ना गोदाम है, ना कोई स्टाफ है और ना
  24. 1:01ही किसी बैंक का ₹1 का कर्ज। उसके हाथ में
  25. 1:04बस एक चाय [संगीत] का ग्लास है। जेब में
  26. 1:06एक छोटी सी डायरी है और कान से फोन लगा
  27. 1:09हुआ है। वो फोन पर सिर्फ दो लाइन बोलता है
  28. 1:12कि भाई साहब गाड़ी लोड हो गई है। कांटे की
  29. 1:14पर्ची WhatsApp कर दी है। पेमेंट लगवा
  30. 1:16दीजिए और अगले 10 मिनट में उसके फोन पर
  31. 1:18मैसेज की घंटी बजती है। बिना एक बोरी उठाए
  32. 1:22बिना ₹1 का माल खरीदे उस आदमी ने चाय खत्म
  33. 1:25होने से पहले अपने दिन के ₹2000 पक्के कर
  34. 1:27लिए। हम मिडिल क्लास लोगों के दिमाग में
  35. 1:30बचपन से एक बात ठूंस दी गई है कि जब तक
  36. 1:32शटर वाली दुकान ना हो और लाखों का माल ना
  37. 1:35भरो तब तक वह असली धंधा नहीं है। लेकिन जब
  38. 1:38एक नया इंसान ₹5 लाख लगाकर दुकान खोलता है
  39. 1:41तो उसका सारा पैसा एडवांस, किराए, फर्नीचर
  40. 1:44और माल में ब्लॉक हो जाता है। ग्राहक आएगा
  41. 1:46या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। लेकिन
  42. 1:49किराया और ब्याज हर महीने पक्का आएगा।
  43. 1:52इसलिए अगर जेब में लाखों रुपए नहीं है तो
  44. 1:54मालिक बनने की जिद छोड़कर माध्यम बनने का
  45. 1:57गणित समझिए। आम भाषा में इसे दलाली या
  46. 2:00कमीशन का काम कहते हैं। लेकिन फाइनेंस की
  47. 2:02दुनिया में इसे जीरो इन्वेंटरी आर्बिट्राज
  48. 2:04कहा जाता है। यानी एक तरफ वो इंसान है
  49. 2:07जिसका माल अटका है और दूसरी तरफ वो है
  50. 2:09जिसका काम अटका है। आप बस बीच में खड़े
  51. 2:12होकर दोनों के तार जोड़ते हैं और अपना नकद
  52. 2:14हिस्सा जेब में रख लेते हैं। Uber के पास
  53. 2:16अपनी कारें नहीं है। Airbnबी के पास अपने
  54. 2:19होटल नहीं है। फिर भी वे करोड़ों कमाते
  55. 2:21हैं। आज हम जमीन पर चलने वाले ऐसे ही पांच
  56. 2:24खामोश कमीशन धंधों को छोटे से बड़े लेवल
  57. 2:27के क्रम में समझेंगे और अंत में जानेंगे
  58. 2:29कि पहली डील के बाद लोग आपको बीच से हटाकर
  59. 2:32सीधा सौदा क्यों नहीं कर पाते। नंबर पांच
  60. 2:35कंस्ट्रक्शन रॉ मटेरियल की डायरेक्ट टू
  61. 2:37साइड सप्लाई। यह हमारे पहले लेवल का धंधा
  62. 2:41है और इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें
  63. 2:44पैसा शाम को सूरज ढलने से पहले आपकी जेब
  64. 2:47में आ जाता है। आज भारत के हर छोटे बड़े
  65. 2:50शहर का दायरा बढ़ रहा है। शहर की बाहरी
  66. 2:53इलाकों में नई कॉलोनियां कट रही हैं और हर
  67. 2:55कॉलोनी में रोज 10 से 20 नए मकानों का काम
  68. 2:59चलता है। अब मकान बनवाने वाले मालिक की
  69. 3:01हालत सोचिए। वह आदमी दफ्तर में नौकरी करता
  70. 3:04है या अपनी दुकान चलाता है। उसके पास इतना
  71. 3:08वक्त नहीं होता कि वह छुट्टी लेकर शहर से
  72. 3:1020 कि.मी. दूर ईंट के भट्टे पर जाए या नदी
  73. 3:14के घाट पर जाकर रेत और गिट्टी का भाव
  74. 3:16करें। इसीलिए वो अपने मोहल्ले के किसी
  75. 3:19बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर को ऑर्डर लिखवा
  76. 3:21देता है। लेकिन जिस आदमी को हम कॉलोनी का
  77. 3:23बड़ा सप्लायर समझते हैं, उसके पास ना तो
  78. 3:26अपनी कोई खदान होती है, ना कोई ईंट का
  79. 3:28भट्टा होता है और ना ही खुद का डंपर या
  80. 3:31ट्रैक्टर। उसने बस शहर के बाहर की चार
  81. 3:34खदानों और पांच ईंट के भट्टों के मालिकों
  82. 3:36से अपना थोक रेट फिक्स कर रखा है। यहीं पर
  83. 3:39बिना किसी दुकान के आपकी एंट्री होती है।
  84. 3:42आपको बस शहर के आउटर में जाकर पांच
  85. 3:44अलग-अलग भट्टों के मालिकों और रेत गिट्टी
  86. 3:47के डंपर ड्राइवरों से सीधा थोक रेट लेना
  87. 3:49है। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि भट्टे पर
  88. 3:521000 ईंट का रेट डिलीवरी समेत ₹6000 चल
  89. 3:55रहा है। जबकि बाजार का दुकानदार मकान
  90. 3:58मालिक को वही ईंट 6800 में दे रहा है।
  91. 4:00ध्यान रहे कि हर शहर का रेट अलग होता है।
  92. 4:02इसलिए भाव मत पकड़िए। सिस्टम को पकड़िए।
  93. 4:05अब आपको सुबह के वक्त नई कॉलोनियों में
  94. 4:07घूमना है। जहां भी नीव खुल रही हो, वहां
  95. 4:10मकान मालिक या ठेकेदार से बात करनी है और
  96. 4:12उन्हें ₹6,500 का रेट देना है जो दुकानदार
  97. 4:15से ₹300 सस्ता है। मकान मालिक खुश कि उसे
  98. 4:18सस्ता माल मिला और भट्टे वाला खुश कि उसे
  99. 4:21तुरंत ऑर्डर मिल गया। जैसे ही ट्रॉली साइट
  100. 4:24पर खाली हुई, मकान मालिक से पेमेंट लिया,
  101. 4:276000 भट्टे वाले को भेजे और बीच के ₹500
  102. 4:30आपकी जेब में। महीने में सिर्फ 50 ट्रॉली
  103. 4:33[संगीत] भी लगवा दी तो 25 से ₹00 बिना
  104. 4:37किसी रिस्क के बन जाते हैं। नंबर चार डेड
  105. 4:40माइल ट्रांसपोर्ट और खाली ट्रकों की
  106. 4:42ब्रोकरेज। अब एक लेवल ऊपर चलते हैं जो हर
  107. 4:46शहर की मंडी और ट्रांसपोर्ट नगर की रीड की
  108. 4:48हड्डी है। आपने कभी सोचा है कि जब दूसरे
  109. 4:51शहर से कोई ट्रक, पिकअप या बड़ा लोडर आपके
  110. 4:54शहर में माल उतारने आता है तो माल उतारने
  111. 4:57के बाद उस ड्राइवर की सबसे बड़ी टेंशन
  112. 4:59क्या होती है? उसकी सबसे बड़ी मुसीबत यह
  113. 5:02होती है कि उसकी गाड़ी खाली खड़ी है। अगर
  114. 5:04वह खाली गाड़ी वापस दौड़ाता है तो रास्ते
  115. 5:07का हजारों रुपए का डीजल और टोल टैक्स उसकी
  116. 5:09अपनी जेब से जाएगा। इसलिए वो चाहता है कि
  117. 5:12वापसी के रास्ते के लिए कोई उसे आधे पौने
  118. 5:15रेट पर भी माल दिलवा दे ताकि कम से कम
  119. 5:17डीजल का खर्चा निकल आए। और ठीक उसी वक्त
  120. 5:20आपके शहर के जो छोटे मैन्युफैक्चरर हैं,
  121. 5:22आटा दाल मिल वाले हैं, थोक व्यापारी हैं
  122. 5:25या फल सब्जी के आड़ती हैं, उन्हें दूसरे
  123. 5:28शहर में माल भेजने के लिए सस्ती गाड़ी
  124. 5:30चाहिए होती है। बस यहीं पर ट्रांसपोर्ट
  125. 5:33कमीशन एजेंट का काम शुरू होता है। इसके
  126. 5:35लिए आपको ना 20 लाख कटरा खरीदना है, ना
  127. 5:38ट्रांसपोर्ट कंपनी खोलनी है। आपको बस दो
  128. 5:41जगह अपने नंबर बांटने हैं। पहला शहर के
  129. 5:44बाहरी धर्म कांटा, मंडी और उन ढाबों पर
  130. 5:47जहां बाहरी गाड़ियां आकर रुकती हैं। वहां
  131. 5:49के मुंछियों और चाय वालों [संगीत] से
  132. 5:51दोस्ती करके अपने कार्ड छोड़ दीजिए। दूसरा
  133. 5:54शहर के 20 ऐसे व्यापारियों या फैक्ट्रियों
  134. 5:57के डिस्पैच मैनेजरों से संपर्क रखिए जिनका
  135. 6:00माल रोज बाहर जाता है। जब भी कोई बाहरी
  136. 6:03गाड़ी खाली होती है ड्राइवर आपको फोन करता
  137. 6:05है। आप तुरंत व्यापारी से बात करके बाजार
  138. 6:08से थोड़ा सस्ते भाड़े पर उसका माल उस
  139. 6:10गाड़ी में लोड करवा देते हैं। मान लीजिए
  140. 6:13अनुमान के तौर पर भाड़ा तय हुआ ₹12,000।
  141. 6:16ट्रांसपोर्ट लाइन का एक बंधा हुआ नियम है
  142. 6:18कि 6 से 8% बुकिंग कमीशन एजेंट का होता
  143. 6:21है। यानी 12,000 के भाड़े में से 800 से
  144. 6:25₹900 ड्राइवर आपको वही नकद हाथ में गिनकर
  145. 6:28दे देता है और फिर गाड़ी आगे बढ़ाता है।
  146. 6:31दिन भर में अगर आपने सिर्फ दो या तीन
  147. 6:33गाड़ियां भी लोड करवा दी तो रोज का 1500
  148. 6:36से ₹2000 नकद बनता है। ना गाड़ी की किश्त
  149. 6:40भरनी है, ना टायर फटने की टेंशन है और ना
  150. 6:42पुलिस के चालान का डर। नंबर तीन हैवी
  151. 6:45मशीनरी और अर्थ मूवर रेंटल ब्रोकरेज। अब
  152. 6:48हम रोज के चिल्लर से निकलकर प्रोजेक्ट
  153. 6:51कमीशन की दुनिया में कदम रखते हैं। जब आप
  154. 6:53सड़क पर किसी पीले रंग की जेसीबी मशीन,
  155. 6:56बड़ी पोकलेन, हाइड्रा क्रेन या बड़े
  156. 6:58साइलेंट जनरेटर को काम करते हुए देखते हैं
  157. 7:00तो लगता है कि इसका मालिक कितना पैसा छाप
  158. 7:03रहा होगा। लेकिन कभी उस मशीन मालिक के पास
  159. 7:05बैठकर उसका दर्द सुनिएगा। एक नई जेसीबी या
  160. 7:09कन 30 से ₹40 लाख की आती है। ज्यादातर लोग
  161. 7:12इसे बैंक से लोन पर लेते हैं। हर महीने
  162. 7:1570000 की किश्त और ऑपरेटर की 300 पगार
  163. 7:18फिक्स है। उस मालिक की सबसे बड़ी सिरदर्दी
  164. 7:21यह होती है कि महीने में 10 दिन उसकी मशीन
  165. 7:24बिना काम के खाली खड़ी रहती है। दूसरी तरफ
  166. 7:27आपके शहर के आसपास हर वक्त दर्जनों ऐसे
  167. 7:30काम चल रहे हैं जहां इन मशीनों की सख्त
  168. 7:32जरूरत है। किसी व्यापारी ने गोदाम बनाने
  169. 7:35के लिए बड़ा प्लॉट खरीदा है और उसे मिट्टी
  170. 7:37का भराव या लेवलिंग करवानी है। किसी
  171. 7:39सब्रेक्टर को 15 दिन के लिए खुदाई करवानी
  172. 7:42है या किसी फैक्ट्री में भारी मशीनें
  173. 7:44उतारने के लिए हाइड्रा क्रेन चाहिए।
  174. 7:46समस्या यह है कि मशीन का मालिक बाहरी
  175. 7:49इलाके में बैठा है और काम करवाने वाले को
  176. 7:52पता नहीं है कि सस्ती और तुरंत मशीन किसके
  177. 7:55पास खाली है। यहीं पर आप बिना ₹1 लगाए
  178. 7:58इक्विपमेंट रेंटल ब्रोकर बनते हैं। आपको
  179. 8:01शहर के 15 जेसीबी मालिकों, पांच कन वालों
  180. 8:04और बड़े जनरेटर वालों का नंबर और उनका
  181. 8:07प्रति घंटा रेट अपनी डायरी में रखना है।
  182. 8:09इसके बाद Google My बिनेस, [संगीत] Jस
  183. 8:11डायल और शहर के सिविल ठेकेदारों व
  184. 8:14आर्किटेक्ट्स के बीच अपना कार्ड बांटना
  185. 8:16है। मान लीजिए जेसीबी का बाजार रेट ₹1200
  186. 8:19प्रति घंटा है। आपने मशीन मालिक से ₹150
  187. 8:23तय किए और ₹150 प्रति घंटा अपना कमीशन
  188. 8:26रखा। अगर एक साइड पर मशीन 10 दिन चली और
  189. 8:29रोज 8 घंटे काम हुआ तो 80 घंटे में बिना
  190. 8:32एक बूंद डीजल जलाए ₹12,000 सीधे आपके जेब
  191. 8:36में आ जाते हैं। नंबर दो कमर्शियल स्क्रैप
  192. 8:39और फैक्ट्री डेड स्टॉक लिक्विडेशन। जब भी
  193. 8:42हमारे कान में कबाड़ या स्क्रैप शब्द
  194. 8:45पड़ता है तो हमें गली में ठेला चलाने वाला
  195. 8:47याद आता है। बस इसी भ्रम की [संगीत] वजह
  196. 8:49से पढ़े लिखे लोग इस करोड़ों के बाजार की
  197. 8:52तरफ देखते भी नहीं है। असली खेल गली में
  198. 8:54नहीं बल्कि इंडस्ट्रियल एरिया, बड़े
  199. 8:57अस्पतालों, शॉपिंग मॉल्स, होटलों और बड़ी
  200. 9:00कंस्ट्रक्शन साइट्स पर होता है। हर बड़ी
  201. 9:02बिल्डिंग बनते वक्त अंत में कई टन लोहे के
  202. 9:05सरिए के टुकड़े और शटरिंग की प्लेटें बचती
  203. 9:07हैं। हर बड़े अस्पताल, मॉल या होटल के
  204. 9:11रनोवेशन में पुराने कमर्शियल एसी प्लांट,
  205. 9:14तांबे की केबल, खराब जनरेटर और लोहे के
  206. 9:17रैक निकलते हैं। और बड़े गोदामों से हर
  207. 9:20महीने टनों के हिसाब से गत्ते यानी कार्टन
  208. 9:23का स्क्रैप निकलता है। अब समस्या समझिए।
  209. 9:26किसी बड़ी कंपनी या अस्पताल का मैनेजर गली
  210. 9:29के कबाड़ी को बुलाकर लाखों का माल नहीं
  211. 9:31बेच सकता। उन्हें चाहिए एक प्रोफेशनल आदमी
  212. 9:35जो पूरे लॉट का सही रेट दे। धर्म कांटे की
  213. 9:38पक्की पर्ची दे, तुरंत पेमेंट करें और एक
  214. 9:41ही दिन में अपनी गाड़ी और लेबर लगाकर सारी
  215. 9:44जगह खाली कर दे। दूसरी तरफ शहर के बाहर
  216. 9:47बैठे बड़े स्क्रैप होलसेलर्स और
  217. 9:49रिसाइक्लिंग प्लांट मालिकों के पास इतना
  218. 9:51वक्त नहीं है कि वे शहर की हर फैक्ट्री या
  219. 9:54होटल में घूमकर माल ढूंढे। आप इन दोनों के
  220. 9:57बीच में लिक्विडेशन कंसलटेंट बनते हैं।
  221. 10:00आपको खुद कबाड़ की परख करने की जरूरत नहीं
  222. 10:02है। जब किसी फैक्ट्री या साइट पर माल
  223. 10:04निकले तो जाकर अपने फोन से उसकी चार फोटो
  224. 10:07और वीडियो बनाइए और शहर के तीन बड़े
  225. 10:09स्क्रैप व्यापारियों को WhatsApp कर
  226. 10:11दीजिए। बड़ा व्यापारी फोटो देखकर ही आपको
  227. 10:14भाव बता देगा। मान लीजिए उसने पूरे लौट के
  228. 10:17₹3 लाख लगाए। आपने कंपनी को ₹2,75,000 का
  229. 10:20रेट दिया। जिस दिन माल उठेगा बड़े
  230. 10:23व्यापारी की गाड़ी और लेबर आएगी वही
  231. 10:26पेमेंट करेगा और धर्म कांटे पर गाड़ी
  232. 10:28तुलते ही आपके ₹25,000 सीधे आपके हाथ में
  233. 10:31आ जाएंगे। नंबर एक डार्क स्टोर्स और
  234. 10:34कमर्शियल गोदाम लीजिंग। अब आते हैं इस
  235. 10:36लिस्ट के सबसे बड़े धंधे पर [संगीत]
  236. 10:38जिसमें आपको रोज भागदौड़ नहीं करनी पड़ती।
  237. 10:41लेकिन महीने की सिर्फ एक या दो डील आपको
  238. 10:44₹00 से ₹1 लाख इकट्ठा दे जाती हैं। ध्यान
  239. 10:48रखिए मैं गली मोहल्ले में 5000 का किराए
  240. 10:51का कमरा दिलवाने वाले प्रॉपर्टी डीलर की
  241. 10:53बात बिल्कुल नहीं कर [संगीत] रहा हूं।
  242. 10:54जहां 10 बार चक्कर काटने पड़ते हैं। मैं
  243. 10:57बात कर रहा हूं कमर्शियल गोदामों, कोल्ड
  244. 10:59स्टोरेज और डार्क स्टोर्स की। आज हर
  245. 11:02छोटे-बड़े शहर में blink, zpप्टtो,
  246. 11:05instam, msho, डिलीवरी और दर्जनों फार्मा
  247. 11:09व एफएमसीजी कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन
  248. 11:11सेंटर खुल रहे हैं। जब यह बड़ी कंपनियां
  249. 11:14किसी शहर में आती हैं, तो इनका रीजनल
  250. 11:16मैनेजर गली-गली घूमकर गोदाम नहीं ढूंढता।
  251. 11:19इन्हें चाहिए होता है मुख्य सड़क से थोड़ा
  252. 11:21अंदर 2000 से 5000 स्क्वायर फीट का ऐसा
  253. 11:25हॉल या गोदाम जहां तक लोडर गाड़ी आसानी से
  254. 11:28जा सके। पार्किंग की जगह हो और प्रॉपर्टी
  255. 11:31के कागजात बिल्कुल पक्के हो। आपको अपने
  256. 11:34शहर में घूमते वक्त बस आंखें खुली रखनी
  257. 11:36है। जहां भी आपको बड़ी खाली जगह, बंद पड़ा
  258. 11:40शोरूम, पुरानी फैक्ट्री या बड़ा बेसमेंट
  259. 11:43दिखे उसके मालिक का नंबर, जगह का साइज और
  260. 11:46चार फोटो अपने फोन में सेव कर लीजिए। जब
  261. 11:49आपके पास 30-40 ऐसी जगहों की लिस्ट बन जाए
  262. 11:52तो Lindin पर इन कंपनियों के एक्सपेंशन
  263. 11:55मैनेजर्स को मैसेज कीजिए और 99 एक्स, ओएलx
  264. 11:59व लोकल बिजनेस WhatsApp ग्रुप्स में अपनी
  265. 12:01लिस्ट डाल कर रखिए। जब किसी लॉजिस्टिक्स
  266. 12:04कंपनी या डिस्ट्रीब्यूटर को जगह चाहिए
  267. 12:07होती है और आप उन्हें ₹35,000 महीने के
  268. 12:10किराए वाला गोदाम फाइनल करवा देते हैं तो
  269. 12:13कमर्शियल नियम के हिसाब से एक महीने का
  270. 12:15किराया प्रॉपर्टी मालिक देता है और 1
  271. 12:17महीने का किराया कंपनी देती है। यानी
  272. 12:20सिर्फ एक एग्रीमेंट साइन करवाने पर ₹000
  273. 12:23का सीधा चेक आपके हाथ में आता है। अब आखिर
  274. 12:26में इस धंधे की सबसे जरूरी और कड़वी बात
  275. 12:30समझ लीजिए। बहुत से लोग यह सुनकर कहेंगे
  276. 12:32कि भाई अगर सामने वाले ने पहली बार तो
  277. 12:35हमसे माल, ट्रक या मशीन ले ली और अगली बार
  278. 12:38हमारा कमीशन बचाने के लिए हमको साइड करके
  279. 12:41खुद ही डायरेक्ट बात कर ली तो बिल्कुल सही
  280. 12:44सवाल है और यही फर्क होता है एक अनाड़ी और
  281. 12:47एक पक्के खिलाड़ी में। कमीशन के धंधे में
  282. 12:50लोग आपके पास इसलिए नहीं आते कि उनके पास
  283. 12:52फोन नहीं है। वे आपके पास इसलिए आते हैं
  284. 12:54क्योंकि आपने तीन ऐसे नियम पकड़ रखे हैं
  285. 12:57जो उन्हें आपको बायपास करने ही [संगीत]
  286. 12:58नहीं देते। पहला नियम है विकल्प और
  287. 13:02नियंत्रण। एक मकान मालिक या व्यापारी के
  288. 13:05पास सिर्फ उस एक भट्टे वाले या एक ट्रक
  289. 13:08ड्राइवर का नंबर होगा जिसे आपने पिछली बार
  290. 13:10मिलवाया था। लेकिन आपके पास 10 भट्टे
  291. 13:14वालों, 50 ट्रकों [संगीत] और 15 जेसीबी
  292. 13:16मालिकों के नंबर हैं। सप्लायर को पता होता
  293. 13:19है कि ग्राहक तो साल में एक बार आएगा
  294. 13:21लेकिन आप उसे हर महीने 50 ऑर्डर देने वाले
  295. 13:24हैं। इसलिए अगर सप्लायर ने आपको छोड़कर
  296. 13:27ग्राहक से सीधा सौदा किया या खराब माल
  297. 13:30भेजा तो आप कल से अपने सारे आर्डर उसके
  298. 13:33पड़ोसी को दे देंगे। इसी डर की वजह से
  299. 13:35सप्लायर सबसे सस्ता रेट और बढ़िया माल
  300. 13:38सिर्फ आपको देता है। दूसरा नियम है
  301. 13:41सिरदर्दी की जिम्मेदारी। व्यापारी अपनी
  302. 13:44दुकान और फैक्ट्री संभालेगा या रोज ढाबे
  303. 13:47पर जाकर ट्रक ड्राइवर ढूंढेगा। ठेकेदार
  304. 13:49अपनी साइट देखेगा या आधी रात को जेसीबी
  305. 13:52खराब होने पर दूसरी मशीन खोजेगा। यह सारा
  306. 13:55झंझट आपका होता है और बाजार में लोग आपको
  307. 13:58फोन नंबर का नहीं बल्कि अपनी सिरदर्दी
  308. 14:00खत्म करने का पैसा देते हैं। और तीसरा
  309. 14:03नियम यह है कि जब तक माल की डिलीवरी और
  310. 14:06पेमेंट पूरी ना हो जाए तब तक लेनदेन की
  311. 14:09डोर अपने हाथ में रखिए। इसीलिए अगर आज
  312. 14:11आपकी जेब में व्यापार शुरू करने के लिए
  313. 14:13लाखों रुपए नहीं है तो इस बात का मलाल
  314. 14:15करना बंद कीजिए। पैसे से पैसा बाद में
  315. 14:18बनता है। पहले सही संपर्क, भरोसे और बाजार
  316. 14:21की जानकारी से पैसा बनता है। आपके हाथ में
  317. 14:23जो फोन है वही आपका सबसे बड़ा गोदाम और
  318. 14:26सबसे बड़ी तिजोरी है। बस उसे सही जगह
  319. 14:28इस्तेमाल करना शुरू कीजिए।

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