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सास ने विधवा बहू को उसके 5 साल के बेटे समेत भिखारी को दान कर दिया..फिर जो हुआ उसने सबको हिला दिया 😥🤯 — Transcript

by Bayaan Files · 3,936 words · 704 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:04गोलू बेटा अंदर आजा। धूप बहुत तेज हो रही
  2. 0:08है।
  3. 0:09ओ राधा बच्चे को बाद में देखना। पहले भैंस
  4. 0:12का दूध निकाल फिर बर्तन मांझने हैं और
  5. 0:15उसके बाद रसोई भी संभालनी है।
  6. 0:17जी मां जी अभी करती हूं।
  7. 0:19मां मुझे बहुत भूख लगी है।
  8. 0:22बस बेटा थोड़ा इंतजार कर। काम खत्म होते
  9. 0:26ही तुझे खाना देती हूं।
  10. 0:28राधा
  11. 0:30जी बाबूजी।
  12. 0:31सुबह से शाम होने को आई लेकिन तेरे काम
  13. 0:33खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे। एक काम
  14. 0:35भी समय पर नहीं होता तुझसे।
  15. 0:37रात भर गोलू को तेज बुखार था इसलिए थोड़ी
  16. 0:40देर हो गई। बस यही सुनना बाकी था।
  17. 0:43रोज कोई ना कोई बहाना कभी बच्चा बीमार कभी
  18. 0:46खुद थकी हुई।
  19. 0:47मैं आराम नहीं करती मांझी। सुबह से लगातार
  20. 0:49काम कर रही हूं।
  21. 0:50काम इसे काम कहते हो तुम। खाने वाले दो-दो
  22. 0:54मुंह हैं। लेकिन कमाने वाला कोई नहीं।
  23. 0:57बाबूजी मैं अपनी पूरी कोशिश करती हूं। जिस
  24. 1:00दिन मेरा बेटा मरा था ना उसी दिन से तू
  25. 1:02हमारे पर बोझ बन गई।
  26. 1:03मां जी मेरे पति की मौत में मेरा क्या
  27. 1:05कसूर था?
  28. 1:06चुप अब जबान भी चलाने लगी है।
  29. 1:13इस वक्त कौन आ गया? भगवान के नाम पर कुछ
  30. 1:16खाने को दे दीजिए। दो दिन से पेट में अन्न
  31. 1:18का एक दाना नहीं गया। यहां कोई लंगर नहीं
  32. 1:21लगा है। आगे जाओ।
  33. 1:22मालिक थोड़ा सा बचा हुआ खाना ही दे दीजिए।
  34. 1:25बच्चे जैसा पेट है। बस दो रोटी मिल जाए।
  35. 1:30सुनिए।
  36. 1:31क्या?
  37. 1:32मेरे दिमाग में एक बात आई है।
  38. 1:33कैसी बात?
  39. 1:34अगर इसे भी इसके साथ भेज दें तो हमारा
  40. 1:36रोज-रोज का झंझट हमेशा के लिए खत्म हो
  41. 1:38जाएगा।
  42. 1:39हां बात तो सही है।
  43. 1:43मां जी, आप मेरे बारे में क्या बात कर रही
  44. 1:46हैं?
  45. 1:46तेरे बारे में ही।
  46. 1:48जी।
  47. 1:48आज से तू इस घर में नहीं रहेगी।
  48. 1:50क्या?
  49. 1:51हां।
  50. 1:52सुना नहीं। निकल जा यहां से। लेकिन मां जी
  51. 1:55मैं जाऊंगी कहां? जहां मन करे इसके साथ
  52. 1:57चली जा। यह भीख मांगता है ना। तू भी इसके
  53. 2:00साथ भीख मांग लेना।
  54. 2:01मालकिन ये क्या कह रही हैं आप? मैं तो खुद
  55. 2:04दर-दर भटकता हूं। तो इसे भी अपने साथ ले
  56. 2:07जा। लेकिन मैं
  57. 2:08ज्यादा सवाल मत पूछ।
  58. 2:10बाबू जी मैं आपके बेटे की पत्नी हूं। आप
  59. 2:13मुझे इस तरह कैसे निकाल सकते हैं? मेरा
  60. 2:16बेटा मर चुका है। अब तू भी हमारे लिए कुछ
  61. 2:19नहीं है।
  62. 2:20बाबूजी मेरा छोटा बच्चा है तो उसे भी साथ
  63. 2:24ले जा।
  64. 2:28मां मुझे डर लग रहा है।
  65. 2:32अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो मुझे माफ कर
  66. 2:34दीजिए। लेकिन मेरे बच्चे पे दया कर दीजिए।
  67. 2:37हम कहां जाएंगे? बस बहुत हो गया तेरा
  68. 2:40रोना-धोना। निकल यहां से। मां जी नहीं
  69. 2:44निकली तो धक्के मार कर बाहर निकलवा दूंगी।
  70. 2:46मालिक कम से कम इन्हें कुछ पैसे या खाना
  71. 2:49तो दे दीजिए। हमें किसी से कोई मतलब नहीं
  72. 2:52है। ले जा इन्हें या सड़क पर छोड़ दें।
  73. 2:55हमारा घर आज से इनके लिए बंद है।
  74. 2:59आज की कहानी राधा नाम की एक ऐसी विधवा बहू
  75. 3:03की है जिसे अपने ही ससुराल में कभी सम्मान
  76. 3:05नहीं मिला। उसकी सास सुमन हर दिन उसे ताने
  77. 3:09और अपमान के बीच जीने पर मजबूर करती रही।
  78. 3:13एक दिन सुमन ने राधा को उसके 5 साल बेटे
  79. 3:17गुलू के साथ उसे घर से निकाल दिया और
  80. 3:21दोनों को एक भिखारी शंकर के हवाले कर
  81. 3:24दिया। लेकिन जिस शंकर को दुनिया भिखारी
  82. 3:27समझती थी, उसी ने राधा और गोलू को सहारा
  83. 3:31दिया। आखिर शंकर ने ऐसा क्या किया कि राधा
  84. 3:34और गोलू की जिंदगी बदल गई और सबसे बड़ी
  85. 3:37बात बरसों बाद राधा की सास और ससुर खुद
  86. 3:41राधा के सामने किस हाल में आ खड़े हुए।
  87. 3:44चलिए देखते हैं पूरी कहानी दोस्त।
  88. 3:48गोलू अब हम कहां जाएंगे बेटा?
  89. 3:51मां मत रो। मैं बड़ा होकर बहुत पैसे
  90. 3:55कमाऊंगा। फिर आपको कभी कोई नहीं भगाएगा।
  91. 3:59मेरा बच्चा बहन जी मुझे माफ करना। मैं खुद
  92. 4:04इतना गरीब हूं कि मुझे नहीं पता कल खाना
  93. 4:06मिलेगा या नहीं। लेकिन आपको और इस बच्चे
  94. 4:09को यूं सड़क पर छोड़कर मैं भी नहीं जा
  95. 4:10सकता।
  96. 4:12लेकिन आप तो हमें जानते तक नहीं।
  97. 4:16जानना जरूरी नहीं है। भूख अमीर और गरीब
  98. 4:19में फर्क नहीं करती। दर्द भी नहीं। मेरा
  99. 4:22नाम शंकर है। मैं पास की पुरानी झोपड़ी
  100. 4:24में रात काटता हूं। जगह बहुत छोटी है
  101. 4:26लेकिन आज आप दोनों वहीं रुक जाना। लेकिन
  102. 4:28शंकर जी हम आपका बोझ कैसे बन सकते हैं?
  103. 4:31बोझ आज आप मुसीबत में हैं। कल शायद मैं
  104. 4:34रहूं। जिंदगी किसी को हमेशा ऊपर नहीं
  105. 4:37रखती।
  106. 4:39[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  107. 4:39ठीक है। चलिए।
  108. 4:48यही है मेरा ठिकाना राधा जी। छत जगह-जगह
  109. 4:51से टूट गई है। बारिश में पानी भी टपकता
  110. 4:53है। लेकिन कम से कम सिर छुपाने की जगह है।
  111. 4:56आज अगर आप नहीं मिलते पता नहीं हम दोनों
  112. 4:57कहां रात बिताते।
  113. 4:58यह बच्चे को ओढ़ा दो।
  114. 5:00नहीं शंकर जी आप क्या ओढ़ेंगे?
  115. 5:02मुझे आदत है ठंड की। मां हूं नहीं पर दर्द
  116. 5:06समझता हूं।
  117. 5:10राधा जी उठिए।
  118. 5:12क्या हुआ?
  119. 5:13पानी लाया हूं पास वाले कुएं से। अभी पीने
  120. 5:16के लिए यही है।
  121. 5:18[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  122. 5:19खाने के लिए कुछ है? समझ गई।
  123. 5:21आज मैं फिर निकल जाऊंगी। कुछ भीख मिल गई
  124. 5:23तो रोटी आ जाएगी।
  125. 5:25नहीं।
  126. 5:26नहीं।
  127. 5:26मैं भी आपके साथ चलूंगी।
  128. 5:28लेकिन
  129. 5:29भीख मांग कर पेट तो भर सकता है लेकिन
  130. 5:31जिंदगी नहीं बदल सकती। मैं अपने बेटे को
  131. 5:34हमेशा हाथ फैलाते हुए नहीं देख सकती।
  132. 5:36काम कौन देगा हमें? ना कोई पहचान, ना घर
  133. 5:39का पता, ना किसी की सिफारिश।
  134. 5:41कोई ना कोई तो देगा। अगर किसी ने नहीं
  135. 5:43दिया तो। तब भी कोशिश करेंगे।
  136. 5:48मालिक कोई काम मिल सकता है? सफाई बर्तन
  137. 5:52कुछ भी कर लूंगी।
  138. 5:54नहीं बहन यहां कोई जगह खाली नहीं है।
  139. 5:58मालिक कोई छोटा-मोटा काम दे दीजिए।
  140. 6:01काम पहले खुद को देख। यहां काम करने वाले
  141. 6:04चाहिए। भीख मांगने वाले नहीं।
  142. 6:08हम भीख नहीं मांग रहे हैं। काम मांग रहे
  143. 6:10हैं। जो कहना है बाहर जाकर कहो। ग्राहक
  144. 6:13देख रहे हैं।
  145. 6:15बर्तन धोने का काम दे दीजिए। सुबह से रात
  146. 6:18तक कर दूंगा।
  147. 6:18तुम?
  148. 6:19जी।
  149. 6:20तुम्हें देखकर ही लोग खाना छोड़ देंगे।
  150. 6:22मालिक भूख, जातपात और कपड़े देखकर नहीं
  151. 6:24आती।
  152. 6:25ज्यादा ज्ञान मत दे। निकल यहां से।
  153. 6:34मां।
  154. 6:36क्या हुआ, बेटा?
  155. 6:38बहुत भूख लगी है।
  156. 6:41बस बेटा थोड़ा सब्र कर।
  157. 6:44आज भी कुछ नहीं मिला।
  158. 6:45एक जगह से भी हां नहीं मिली।
  159. 6:48राधा
  160. 6:49जी।
  161. 6:50अगर कोई हमें नौकरी नहीं देता तो क्यों ना
  162. 6:53हम अपना काम शुरू करें?
  163. 6:55अपना काम?
  164. 6:56हां।
  165. 6:57लेकिन हमारे पास पैसे कहां है?
  166. 6:58बहुत पैसे नहीं चाहिए।
  167. 7:00यहां तो आज गोलू के लिए रोटी तक नहीं है।
  168. 7:02आपको चाय बहुत अच्छी बनानी आती है।
  169. 7:04चाय?
  170. 7:04हां।
  171. 7:05सड़क किनारे छोटी सी चाय की दुकान लगा
  172. 7:07लेते हैं। मेरे पास बस यह हैं।
  173. 7:09नहीं
  174. 7:09इन्हें बेच देंगे।
  175. 7:11राधा जी यह आपकी आखिरी निशानी है।
  176. 7:13निशानी पेट नहीं भरती शंकर जी। मेरे पति
  177. 7:16की दी हुई आखिरी चीज है।
  178. 7:19लेकिन मेरा बेटा भूखा है उसके सामने यह
  179. 7:22बालियां ज्यादा कीमती नहीं है।
  180. 7:23ठीक है। लेकिन मेरी भी एक शर्त है।
  181. 7:25कैसी शर्त?
  182. 7:26हम दोनों बराबर मेहनत करेंगे और जो
  183. 7:28कमाएंगे आधा आपका आधा मेरा।
  184. 7:31आप मुझ पर एहसान कर रहे हैं।
  185. 7:32नहीं साथी बन रहा हूं।
  186. 7:34मंजूर है।
  187. 7:43राधा अगर किसी ने यहां से भगा दिया तो
  188. 7:46तो दूसरी जगह बैठ जाएंगे।
  189. 7:47और अगर कोई चाय ही नहीं पी
  190. 7:49तो कल फिर कोशिश करेंगे। शुरुआत छोटी है
  191. 7:53लेकिन हमारी है।
  192. 7:57शंकर जी
  193. 7:58हां।
  194. 7:59आज एक भी कप नहीं बिका।
  195. 8:00कोई बात नहीं। पहला दिन था।
  196. 8:05कितने की चाय?
  197. 8:06₹5
  198. 8:09शंकर जी एक कप बिका।
  199. 8:11देखा शुरुआत हो गई।
  200. 8:14कभी दो कप बिकते कभी पांच और कई बार पूरे
  201. 8:17दिन [संगीत] में एक भी कप नहीं बिकता।
  202. 8:21लेकिन दोनों ने हार नहीं [संगीत] मानी।
  203. 8:23मां
  204. 8:26बहुत भूख लगी है।
  205. 8:28बस बेटा कल कुछ अच्छा जरूर होगा। यह मेरे
  206. 8:31साथ आकर और ज्यादा मुसीबत में फंस गए।
  207. 8:34शायद शायद मुझे इन्हें छोड़ देना चाहिए।
  208. 8:38[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  209. 8:38नहीं अब चाहे जो हो इन दोनों को मैं भूखा
  210. 8:42नहीं सोने दूंगा।
  211. 8:47दो हफ्ते हो गए। ना दुकान ठीक से चली।
  212. 8:51इतनी कमाई हुई कि पेट भर खाना मिल सके।
  213. 8:55मैं इन दोनों को और कितने दिन ऐसे रखूंगा?
  214. 9:01शायद इन्हें मेरी जरूरत ही नहीं है। मैं
  215. 9:04खुद इनके लिए बोझ बन गया हूं।
  216. 9:06बोझ
  217. 9:08राधा जी आप कब आए इन्हें?
  218. 9:11जब तुम खुद को कोस रहे थे।
  219. 9:13मैं तो बस
  220. 9:14झूठ मत बोलो। तुम्हारा चेहरा सब बता रहा
  221. 9:16है।
  222. 9:19सच कहूं?
  223. 9:20कहो।
  224. 9:22मुझे लगता है मैं तुम्हारे और गोलू के लिए
  225. 9:24कुछ नहीं कर पा रहा। शायद मैं तुम दोनों
  226. 9:27का बोझ उठाने के लायक नहीं हूं।
  227. 9:30दोबारा यह शब्द मत बोलना।
  228. 9:33कौन सा?
  229. 9:36बोझ।
  230. 9:39यह शब्द मैंने बहुत सुना है। मेरे ससुराल
  231. 9:43वालों ने बोझ कहा। मेरे पति के जाने के
  232. 9:46बाद मुझे घर से निकाल दिया। लेकिन तुमने
  233. 9:50मुझे और मेरे बच्चे को सड़क पर नहीं
  234. 9:52छोड़ा।
  235. 9:53राधा।
  236. 9:54इसलिए तुम मुझे बोझ कहोगे तो सबसे ज्यादा
  237. 9:57दुख मुझे ही होगा।
  238. 9:59माफ कर दो।
  239. 10:01माफी बाद में मांगना। पहले एक आखिरी कोशिश
  240. 10:04करते हैं।
  241. 10:05कहां?
  242. 10:06बस स्टैंड के पास।
  243. 10:08वहां तो पहले से चाय की कई दुकानें हैं।
  244. 10:11दुकानें हैं। लेकिन हमारी चाय अलग होगी।
  245. 10:15कैसे?
  246. 10:17अदरक और इलायची वाली। ऐसी चाय बनाएंगे कि
  247. 10:21खुशबू से लोग खुद रुक जाएं।
  248. 10:23ठीक है। एक आखिरी कोशिश।
  249. 10:37शंकर अदरक थोड़ा और कूटो।
  250. 10:40इतना?
  251. 10:40हां। खुशबू दूर तक जानी चाहिए।
  252. 10:49अरे भाई
  253. 10:51इतनी अच्छी खुशबू कहां से आ रही है?
  254. 10:55इधर आइए साहब। गरमा गरम चाय है। एक कप
  255. 10:58देना अभी देता हूं।
  256. 11:01अरे वाह। अच्छी है।
  257. 11:04अच्छी है। बहुत बढ़िया। कल से मेरी चाय
  258. 11:07यहीं से।
  259. 11:08अच्छा।
  260. 11:09देखा।
  261. 11:10क्या?
  262. 11:12मेहनत कभी-कभी देर से रंग लाती है लेकिन
  263. 11:15लाती जरूर है।
  264. 11:19एक दो तीन आठ कप।
  265. 11:23आज आठ कप बिके?
  266. 11:24हां।
  267. 11:27आज पहली बार खर्च निकालने के बाद कुछ पैसे
  268. 11:30बचे हैं।
  269. 11:35गोलू,
  270. 11:37हां मां।
  271. 11:38आज तेरे लिए भरपेट खाना बनेगा। सच में?
  272. 11:41हां बेटा।
  273. 11:50ए भिखारी
  274. 11:54सामान समेट और यहां से निकल।
  275. 11:56लेकिन भाई साहब हम यहां कई दिनों से बैठे
  276. 11:58हैं। आपने पहले कभी मना नहीं किया। अब कर
  277. 12:01रहा हूं।
  278. 12:02हमसे कोई गलती हुई है क्या? गलती इतनी है
  279. 12:05कि यह जगह अब मुझे चाहिए। कल तक दुकान हट
  280. 12:08गई चाहिए।
  281. 12:10लेकिन हम जाएं कहां? वो तुम्हारी समस्या
  282. 12:14है।
  283. 12:17भाई साहब हम गरीब हैं लेकिन मेहनत करके खा
  284. 12:20रहे हैं। किसी का हक नहीं मार रहे।
  285. 12:22मुझे औरतों की बातें सुनने का शौक नहीं
  286. 12:24है।
  287. 12:26लेकिन
  288. 12:27कल अगर दुकान यहां दिखी ना, तो सामान
  289. 12:30उठाकर सड़क सड़क पर फेंक दूंगा।
  290. 12:37फिर से नई जगह ढूंढनी पड़ेगी।
  291. 12:40हर बार यही होता है।
  292. 12:44जब लगता है कि अब जिंदगी ठीक हो रही है
  293. 12:46तभी कोई सब छीनने आ जाता है।
  294. 12:48राधा
  295. 12:49सच कहूं? अब हिम्मत टूटने लगी है।
  296. 12:53याद है?
  297. 12:54क्या?
  298. 12:55जिस रात मैं खुद को बोझ समझ रहा था।
  299. 12:58हां।
  300. 12:58तब तुमने कहा था हार मानने से पहले एक बार
  301. 13:01और कोशिश करनी चाहिए। आज वही बात मैं
  302. 13:04तुम्हें कह रहा हूं।
  303. 13:06दुकान जाएगी, जगह जाएगी, पैसे जाएंगे
  304. 13:12लेकिन हिम्मत नहीं जाएगी।
  305. 13:14ठीक है। कल फिर शुरुआत करेंगे।
  306. 13:19देखो राधा, जगह थोड़ी दूर है, लेकिन यहां
  307. 13:22कोई हमें हटाएगा नहीं।
  308. 13:23बाजार से दूर है।
  309. 13:24तो क्या हुआ?
  310. 13:25शुरुआत छोटी होगी लेकिन इस बार अपनी होगी।
  311. 13:29पक्का?
  312. 13:30पक्का।
  313. 13:37भाई तुम्हारी अदरक वाली चाय तो कमाल है।
  314. 13:41सच कह रहे हो शहर में भी ऐसी चाय नहीं
  315. 13:43मिली। मेरी चाय रोज यहीं लगेगी।
  316. 13:48गोलू।
  317. 13:49हां मां।
  318. 13:51अब तेरा पेट कभी खाली नहीं रहेगा।
  319. 13:56और मैं बड़ा होकर आपको बहुत बड़ा घर
  320. 13:58दूंगा।
  321. 14:00राधा एक बात कहूं?
  322. 14:03हां कहो।
  323. 14:03जिस दिन तुमने एक भिखारी पर भरोसा किया
  324. 14:05था, उसी दिन मुझे लगा था कि शायद मेरी
  325. 14:08जिंदगी भी बेकार नहीं है।
  326. 14:09भरोसा सिर्फ मैंने नहीं किया था शंकर।
  327. 14:12मतलब?
  328. 14:12तुमने भी तो एक अजनबी औरत और उसके बच्चे
  329. 14:15को अपने घर में जगह दी थी। लेकिन अभी
  330. 14:18मंजिल बहुत दूर है।
  331. 14:19हां। ये तो बस शुरुआत है।
  332. 14:29राधा आज पूरे 50 कप चाय बिक गई।
  333. 14:3250?
  334. 14:33हां। और देखना कल इससे भी ज्यादा बिकेगी।
  335. 14:37पहले हिसाब पूरा करने दो। ज्यादा सपने मत
  336. 14:39देखो।
  337. 14:40सपने देखने में पैसे थोड़े लगते हैं।
  338. 14:43[हंसी]
  339. 14:45मां।
  340. 14:48आ गया मेरा बेटा।
  341. 14:50आज स्कूल में मास्टर जी ने मेरा नाम पूरी
  342. 14:53क्लास के सामने बोला।
  343. 14:55क्यों?
  344. 14:55क्योंकि मैं सबसे पहले होमवर्क करके गया
  345. 14:57था।
  346. 14:59हमारा गोलू भी अब बाकी बच्चों की तरह
  347. 15:01पढ़ेगा।
  348. 15:02और एक दिन सबसे आगे बैठेगा।
  349. 15:04मां, अब मैं बड़ा होकर बड़ा आदमी बनूंगा।
  350. 15:08बड़ा आदमी नहीं बेटा। अच्छा इंसान बनना।
  351. 15:11पक्का? और मैं बड़ा होकर आपको बहुत बड़ा
  352. 15:15घर दूंगा।
  353. 15:23तो यही है वो दुकान
  354. 15:27जी सेठ जी। आइए चाय पीजिए।
  355. 15:30चाय
  356. 15:32[हंसी] सुना है यहां चाय बहुत बिक रही है।
  357. 15:34जी भगवान की दया है।
  358. 15:36भगवान की दया नहीं मेरी दुकान का धंधा आधा
  359. 15:39हो गया है तुम्हारी वजह से। सेठ जी हम तो
  360. 15:41बस मेहनत करके अपना घर चला रहे हैं।
  361. 15:44तुम चुप रहो। एक भिखारी और उठाकर लाई गई
  362. 15:46औरत।
  363. 15:49सेठ जी क्या?
  364. 15:50मेरी बात सुनिए। मेरे लिए राधा की इज्जत
  365. 15:53से बढ़कर कुछ नहीं।
  366. 15:55इज्जत?
  367. 15:58सड़क किनारे चाय बेचने वालों की भी कोई
  368. 16:00इज्जत होती है?
  369. 16:02होती है सेठ जी। मैं विधवा हूं। मेरा एक
  370. 16:06बच्चा है। अपने बच्चे का पेट पालने के लिए
  371. 16:09मेहनत करती हूं। मुझे शर्म नहीं गर्व है
  372. 16:11कि मैं किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाय
  373. 16:13मेहनत कर रही हूं।
  374. 16:15बहुत भाषण दे लिया।
  375. 16:16मैंने सिर्फ सच कहा है।
  376. 16:18अच्छा।
  377. 16:21तुम्हारी दुकान का कोई लाइसेंस है? नगर
  378. 16:23पालिका में मेरी अच्छी पहचान है। चाहूं तो
  379. 16:25कल ही ये दुकान बंद हो जाएगी।
  380. 16:27सेठ जी हमें थोड़ा समय दे दीजिए।
  381. 16:29समय?
  382. 16:31तुम जैसे लोगों को कौन समय देता है? यह
  383. 16:33आखिरी चेतावनी है।
  384. 16:35या तो दुकान बंद करो या फिर बंद करवाने के
  385. 16:38लिए तैयार रहो। राधा?
  386. 16:41हां।
  387. 16:41अगर उसने सच में नगर पालिका में शिकायत कर
  388. 16:44दी तो
  389. 16:44तो हम लाइसेंस बनवाएंगे।
  390. 16:46लेकिन काम आसान नहीं होगा। आसान होता तो
  391. 16:50इसे जिंदगी नहीं कहते। जिस दिन मेरे
  392. 16:52ससुराल वालों ने मुझे बेटे समेत घर से
  393. 16:54निकाल दिया था। उस दिन मेरे अंदर का डर भी
  394. 16:57वहीं छूट गया था। अब कोई मुझे धमका कर
  395. 17:01पीछे नहीं हटा सकता।
  396. 17:04कागज दिखाओ।
  397. 17:07यह कागज पूरा नहीं है।
  398. 17:08कौन सा कागज चाहिए साहब?
  399. 17:09पहले यह लेके आओ, फिर देखेंगे। फोटो गलत
  400. 17:13है।
  401. 17:14लेकिन साहब, कल तो यही फोटो सही था। अब
  402. 17:16सही नहीं है। अगला
  403. 17:19हस्ताक्षर यहां नहीं, यहां चाहिए।
  404. 17:22साहब, यह भी करवा दूंगी। बस लाइसेंस दे
  405. 17:25दीजिए।
  406. 17:25अगली तारीख पर आना। राधा कितनी बार
  407. 17:28जाएंगे?
  408. 17:29जितनी बार जरूरत पड़े। मुझे लगता है हरि
  409. 17:32ओम ने यहां भी किसी किसी को पैसे खिला दिए
  410. 17:34हैं।
  411. 17:34हो सकता है।
  412. 17:36फिर
  413. 17:37फिर भी हम गलत काम नहीं करेंगे। हमें
  414. 17:39लाइसेंस चाहिए। किसी की मेहरबानी नहीं।
  415. 17:46राधा देवी।
  416. 17:47जी।
  417. 17:48आपका लाइसेंस तैयार है?
  418. 17:50सच?
  419. 17:51हां।
  420. 17:52शुक्रिया साहब।
  421. 17:59राधा
  422. 18:00क्या हुआ?
  423. 18:01अब कोई हमें इतनी आसानी से नहीं हटा सकता।
  424. 18:09दीदी जीजा जी एक बहुत बड़ा मौका है।
  425. 18:12कैसा मौका? शहर में जमीन के दाम बहुत तेजी
  426. 18:15से बढ़ रहे हैं।
  427. 18:16तो?
  428. 18:17अगर अभी पैसा लगा दिया 6 महीने में पैसा
  429. 18:20दोगुना। लेकिन हमारे पास इतना पैसा कहां
  430. 18:23है? घर है, खेत है,
  431. 18:26घर गिरवी रख दो। और अगर पैसा डूब गया तो
  432. 18:30अरे जीजा जी, मैं कोई बाहर वाला हूं क्या?
  433. 18:33मेरा अपना दोस्त है, बड़ा प्रॉपर्टी डीलर
  434. 18:36है। भरोसा है उस पर। मुझ पर भरोसा नहीं है
  435. 18:39क्या?
  436. 18:41मोहन।
  437. 18:42दीदी, ऐसा मौका बार-बार नहीं आता।
  438. 18:47मां
  439. 18:49क्या हुआ बेटा?
  440. 18:51आज टीचर ने पूरी क्लास के सामने मेरी
  441. 18:53तारीफ की।
  442. 18:54क्यों?
  443. 18:54मैंने सबसे सुंदर लिखाई की।
  444. 18:58मेरी मेहनत का असली फल तो तू है बेटा।
  445. 19:01और एक दिन यही बच्चा हम दोनों की किस्मत
  446. 19:05बदल देगा।
  447. 19:07अभी तो हमें खुद अपनी किस्मत बदलनी है।
  448. 19:17राधा।
  449. 19:18क्या हुआ? आज पांचवा वेटर भी रख लिया।
  450. 19:20पांचवा?
  451. 19:20हां, अब काम इतना बढ़ गया है कि हम दोनों
  452. 19:22से अकेले नहीं संभलता।
  453. 19:26कभी हमारे पास एक कप चाय बेचने के पैसे
  454. 19:28नहीं थे और आज लोग हमारी चाय पीते हैं।
  455. 19:30मां।
  456. 19:31क्या हुआ बेटा?
  457. 19:32मेरा रिजल्ट आ गया।
  458. 19:33कितने नंबर आए?
  459. 19:34पूरी क्लास में तीसरा नंबर।
  460. 19:36मुझे पता था मेरा बेटा कर सकता है।
  461. 19:38मां, मैं बड़ा होकर डॉक्टर बनूंगा।
  462. 19:40जरूर बनेगा और गरीबों का मुफ्त इलाज
  463. 19:43करेगा।
  464. 19:43हां। [हंसी]
  465. 19:46राधा,
  466. 19:47हां। हां।
  467. 19:47मुझे कभी यकीन ही नहीं होता।
  468. 19:49किस बात का?
  469. 19:503 साल पहले हम सड़क पर थे।
  470. 19:51और एक छोटी सी जगह हमने उसी से शुरुआत की
  471. 19:54थी।
  472. 19:54और आज इतने लोग हमारे साथ काम कर रहे हैं।
  473. 19:57मेहनत छोटी हो सकती है लेकिन उसका नतीजा
  474. 19:59बड़ा हो सकता है। राधा एक बात कहूं?
  475. 20:03कहो।
  476. 20:04बहुत दिनों से कहना चाहता था।
  477. 20:06ऐसी क्या बात है?
  478. 20:09इन सालों में तुमने मुझे कभी छोटा नहीं
  479. 20:11समझा।
  480. 20:11क्योंकि तुम छोटे हो ही नहीं।
  481. 20:12तुमने मुझे बराबरी दी, इज्जत दी और गोलू
  482. 20:15को अपना बच्चा समझ कर पाला। मैं चाहता हूं
  483. 20:17साफ-साफ कहो शंकर।
  484. 20:18मैं चाहता हूं कि हमारा यह साथ सिर्फ
  485. 20:20दुकान तक ना रहे। राधा क्या तुम मुझसे
  486. 20:22शादी करोगी? मैं जानता हूं मैं कभी सड़क
  487. 20:25पर भीख मांगता था। आज भी कोई बहुत बड़ा
  488. 20:27आदमी नहीं हूं। लेकिन मैं तुम्हें और गोलू
  489. 20:30को पूरी जिंदगी इज्जत और खुशी देने की
  490. 20:32कोशिश करूंगा।
  491. 20:33शंकर।
  492. 20:34हां।
  493. 20:34बड़ा आदमी बनने के लिए बड़ा घर या बहुत
  494. 20:37पैसा जरूरी नहीं होता। जिस रात पूरी
  495. 20:39दुनिया ने मुझे और मेरे बेटे को ठुकरा
  496. 20:41दिया था, अपने टूटे घर दी थी।
  497. 20:43मेरे लिए उससे बड़ी दौलत?
  498. 20:44और कुछ नहीं। तो तुम्हारा जवाब?
  499. 20:48हां, मैं तुमसे शादी करूंगी। लेकिन एक
  500. 20:51शर्त पर।
  501. 20:52कैसी शर्त?
  502. 20:54जैसे हमने जिंदगी शुरू की थी
  503. 20:56बराबरी से मंजूर है।
  504. 20:59मां तो शंकर अंकल अब मेरे पापा बनेंगे।
  505. 21:03हां बेटा।
  506. 21:04पापा
  507. 21:06बेटा।
  508. 21:08[संगीत]
  509. 21:12आज राधा जी और शंकर जी विवाह के पवित्र
  510. 21:14बंधन में बंधने जा रहे हैं। राधा?
  511. 21:16हां।
  512. 21:17याद है जब पहली बार तुमने मेरा नाम पूछा
  513. 21:19था।
  514. 21:20कैसे भूल सकती हूं?
  515. 21:22मैंने कहा था डरिए मत। मेरा नाम शंकर है।
  516. 21:25[संगीत]
  517. 21:26उस दिन मैं अकेला था। आज मेरा परिवार मेरे
  518. 21:29सामने बैठा है। फेरों के लिए खड़े हो
  519. 21:31जाइए।
  520. 21:33पापा, अब आप मुझे कभी छोड़ के मत जाना।
  521. 21:36कभी नहीं बेटा।
  522. 21:40आज मुझे किसी ने दया करके जिंदगी नहीं दी।
  523. 21:43मैंने अपनी जिंदगी खुद बनाई है।
  524. 21:47सुना तुमने क्या मोहन पैसा लेकर भाग गया।
  525. 21:51क्या?
  526. 21:53अरे बाप रे। जमीन के कागज भी उसके पास
  527. 21:56हैं। सुमन देवी जी।
  528. 21:58जी साहब।
  529. 21:59आपके कर्ज की 3 महीने से किस्त नहीं आई
  530. 22:01है।
  531. 22:02साहब थोड़ा समय [संगीत] दे दीजिए। अब समय
  532. 22:04देना हमारे हाथ में नहीं है। कर्ज नहीं
  533. 22:07चुकाया गया तो घर और जमीन दोनों की नीलामी
  534. 22:10होगी।
  535. 22:10नहीं साहब, यह हमारा घर है।
  536. 22:12हमें भी मजबूरी समझिए। [संगीत]
  537. 22:14लेकिन मोहन ने कहा था पैसा दोगुना हो
  538. 22:16जाएगा। आपके भाई का फोन बंद है। [संगीत]
  539. 22:19उसने धोखा दिया।
  540. 22:22अब हम कहां जाएंगे?
  541. 22:24मुझे नहीं पता।
  542. 22:31सुमन।
  543. 22:32क्या?
  544. 22:34याद है हमने राधा के साथ क्या किया था?
  545. 22:37हमने उसे बोझ कहा था। उसके बच्चे को लेकर
  546. 22:40उसे सड़क पर छोड़ दिया था।
  547. 22:41तो
  548. 22:42शायद शायद आज हम उसी का [संगीत] फल भुगत
  549. 22:45रहे हैं।
  550. 22:54[संगीत]
  551. 22:56भाई साहब हां रामलाल जी। कहीं कोई
  552. 22:58छोटा-मोटा उम्र हो गई है लेकिन हाथ पैर
  553. 23:01अभी चलते हैं।
  554. 23:02रामलाल जी इस उम्र में आपको काम कौन देगा?
  555. 23:05कुछ दिन किसी रिश्तेदार के यहां रह जाइए।
  556. 23:08रिश्तेदार
  557. 23:10अब कौन हमें अपनाएगा?
  558. 23:15रिश्तेदार तो दूर शायद अब कोई अपना भी
  559. 23:19नहीं बचा।
  560. 23:22सुमन
  561. 23:24जी
  562. 23:25बहुत भूख लगी है। कुछ खाने को मिल जाए तो
  563. 23:29अब हमें भी भीख मांगनी पड़ेगी। याद है?
  564. 23:32क्या?
  565. 23:33कभी हमने एक भूखे आदमी को दरवाजे से खाना
  566. 23:36मांगते देखा था? और उसी के साथ राधा को भी
  567. 23:39घर से निकाल दिया था।
  568. 23:40वो गलती थी।
  569. 23:41बहुत बड़ी गलती थी।
  570. 23:45सुमन।
  571. 23:46हां। वहां बहुत लोग खाना खा रहे हैं।
  572. 23:49शायद कोई हमें भी कुछ खाने को दे दे।
  573. 23:56बाबा कुछ चाहिए?
  574. 23:57बेटा
  575. 23:59अगर थोड़ा खाना मिल जाए।
  576. 24:01दो दिन से ठीक से कुछ नहीं खाया है। आप
  577. 24:03यहीं रुकिए। मैं मालकिन से पूछता हूं।
  578. 24:06[संगीत]
  579. 24:08मालकिन
  580. 24:08हां।
  581. 24:09बाहर एक बुजुर्ग आदमी और औरत बैठे हैं।
  582. 24:11बहुत भूखे लग रहे हैं। खाना मांग रहे हैं।
  583. 24:14उन्हें अंदर बैठाओ।
  584. 24:15उन्हें अंदर बैठाओ। जी और खाना अच्छे से
  585. 24:18देना। ऐसे लोगों को कभी खाली मत लौटाना।
  586. 24:21हमने भी वो दिन देखे हैं।
  587. 24:28राधा
  588. 24:31राधा हमारी राधा
  589. 24:35[संगीत]
  590. 24:37मां जी
  591. 24:39बाबूजी
  592. 24:41[संगीत]
  593. 24:43तू इतनी बड़ी हो गई
  594. 24:47ये सब तेरा है मेरा और शंकर का
  595. 24:51हमें नहीं पता था हम तो बस भूखे थे
  596. 24:55मुझे पता है
  597. 24:59राधा
  598. 25:01[संगीत]
  599. 25:03राधा हमसे बहुत बड़ी गलती हुई। हमें माफ
  600. 25:07[संगीत] कर दे बेटी।
  601. 25:11मांझी
  602. 25:13जिस दिन आपने मुझे और मेरे बेटे को घर से
  603. 25:16निकाल दिया था, उस दिन आपने सिर्फ मुझे घर
  604. 25:18से नहीं निकाला था। आपने मेरा भरोसा तोड़ा
  605. 25:21था। वो रात
  606. 25:24सड़क पर बैठा [संगीत] मेरा बच्चा
  607. 25:27बंद [नाक से की जाने वाली आवाज़] होता हुआ
  608. 25:28दरवाजा
  609. 25:29और वो एक शब्द बोझ
  610. 25:34मैं सब भूल नहीं सकती।
  611. 25:36हमें माफ कर दे राधा।
  612. 25:38माफी [संगीत]
  613. 25:40माफी मांगना आसान है बाबूजी लेकिन जो दर्द
  614. 25:43सालों तक साथ रहा हो वो एक शब्द से खत्म
  615. 25:46नहीं होता।
  616. 25:47हमारा सब कुछ चला गया राधा। [संगीत]
  617. 25:50क्या हुआ?
  618. 25:51मोहन पैसा लेकर भाग गया। घर गया, जमीन गई,
  619. 25:55सब कुछ चला गया।
  620. 25:57आज हमारे पास कुछ नहीं है।
  621. 25:59लेकिन आपने भी कभी किसी और के बारे में
  622. 26:01नहीं सोचा था। आपने मुझे और मेरे बेटे को
  623. 26:04भी ऐसे ही अकेला छोड़ दिया।
  624. 26:06मां ये कौन है? [संगीत]
  625. 26:16बेटा ये तेरे दादा-दादी हैं।
  626. 26:24[संगीत]
  627. 26:26मेरा पोता
  628. 26:29भगवान हमें माफ करें।
  629. 26:32कितना बड़ा हो गया है।
  630. 26:35मां
  631. 26:36अभी कुछ मत पूछ बेटा।
  632. 26:39राधा
  633. 26:41बाबूजी हाथ मत जोड़िए।
  634. 26:44राधा
  635. 26:45बाबूजी हाथ मत जोड़िए।
  636. 26:47क्या तू हमें माफ कर सकती है? मैं आज भी
  637. 26:50वह सब नहीं भूल सकती।
  638. 26:53शायद कभी पूरी तरह भूल भी ना पाऊं।
  639. 26:57लेकिन मैं आपको सड़क पर नहीं छोड़ सकती।
  640. 27:01क्योंकि अगर मैंने भी आपके साथ वही किया
  641. 27:04तो फिर मुझ में और आप में फर्क ही क्या रह
  642. 27:06जाएगा। ढाबे के पीछे एक कमरा खाली है।
  643. 27:10क्या?
  644. 27:11किन,
  645. 27:12खाना यहीं मिलेगा। बाबूजी चाहें तो हिसाब
  646. 27:15किताब में मेरी मदद कर सकते हैं।
  647. 27:17मां जी रसोई में हाथ बटा सकती हैं। लेकिन
  648. 27:20एक बात [संगीत] साफ है क्या बेटी? यहां
  649. 27:23कोई किसी पर अपना हक अपना हक नहीं जताएगा।
  650. 27:27ना सास का ना ससुर का। यहां सब बराबर हैं।
  651. 27:30मंजूर है। अब हमें कुछ मांगने का हक भी
  652. 27:33नहीं है। राधा ने सही फैसला लिया है।
  653. 27:36रिश्ता टूट सकता है। लेकिन इंसानियत नहीं
  654. 27:39टूटनी चाहिए।
  655. 27:40मां।
  656. 27:41हां बेटा। आपने इन्हें अपने पास रख लिया।
  657. 27:45हां।
  658. 27:45लेकिन इन्होंने आपके साथ बहुत बुरा किया
  659. 27:47था ना।
  660. 27:49किया था बेटा।
  661. 27:50फिर आपने इन्हें माफ कर दिया?
  662. 27:53नहीं। माफ करना और सहारा देना दोनों अलग
  663. 27:56बातें हैं। मैं अपने दर्द को झूठा नहीं
  664. 27:58कहूंगी। लेकिन किसी के बुरे कर्म की वजह
  665. 28:01से मैं खुद बुरी [संगीत] नहीं बनना चाहती।
  666. 28:03मां आप बहुत अच्छी हो।
  667. 28:08रामलाल जी।
  668. 28:10हां।
  669. 28:12देखिए जिसे हमने बोझ समझा था आज वही
  670. 28:16[नाक से की जाने वाली आवाज़] हमारा सहारा
  671. 28:17बन गई है।
  672. 28:19हां सुमन गलती हमारी [संगीत]
  673. 28:21थी
  674. 28:22और सजा भी
  675. 28:24हमने खुद चुनी थी। क्या सोच रही हो?
  676. 28:27बस यही
  677. 28:28क्या?
  678. 28:29कभी-कभी जिंदगी हमें बहुत कुछ छीन कर
  679. 28:31सिखाती है। उस रात मेरे पास घर नहीं था।
  680. 28:35पैसे नहीं [संगीत] थे। पहचान नहीं थी।
  681. 28:40लेकिन आज मेरे पास अपना घर है, अपना काम
  682. 28:43है और अपना [संगीत] परिवार है। मैंने एक
  683. 28:47बात सीखी है। माफी देना जरूरी नहीं है
  684. 28:51लेकिन इंसानियत [संगीत]
  685. 28:52छोड़ देना भी जरूरी नहीं है। किसी को माफ
  686. 28:55ना कर पाना कमजोरी नहीं है। और किसी को
  687. 28:58सहारा देना बदला छोड़ना नहीं है।
  688. 29:04दोस्तों इस कहानी ने हमें एक बहुत बड़ी
  689. 29:07सीख दी है कि किसी इंसान की कीमत उसके
  690. 29:10पैसों, कपड़ों या हैसियत से नहीं बल्कि
  691. 29:14उसके दिल और उसके कर्मों से होती है। जिस
  692. 29:17शंकर को लोग देखकर रास्ता बदल लेते थे।
  693. 29:20उसी ने उस वक्त राधा और गोलू का साथ दिया
  694. 29:24जब उनके अपने ही लोगों ने उनका साथ छोड़
  695. 29:27दिया। वहीं दूसरी तरफ सुमन को भी अपने किए
  696. 29:31का एहसास हुआ। कभी-कभी जिंदगी में हम जिसे
  697. 29:35छोटा समझकर ठुकरा देते हैं, वही इंसान
  698. 29:38हमारे लिए सबसे बड़ा सहारा बन जाता है।
  699. 29:41अगर आपको राधा, गोलू और शंकर की यह कहानी
  700. 29:45पसंद आई हो, तो वीडियो को एक लाइक जरूर कर
  701. 29:48दें। और ऐसे ही भावुक और दिल छू लेने वाली
  702. 29:51कहानियों के लिए हमारे साथ जुड़े रहे।
  703. 29:54मिलते हैं अगले कहानी में। तब तक अपना
  704. 29:57ख्याल रखिए और इंसानियत को सबसे ऊपर रखिए।

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This page contains the full transcript of सास ने विधवा बहू को उसके 5 साल के बेटे समेत भिखारी को दान कर दिया..फिर जो हुआ उसने सबको हिला दिया 😥🤯 by Bayaan Files, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,936 words across 704 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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