5 करोड़ नाम जपने की विधि रोज कितना जापे और नियम से स्वामी जी के अमृत वचनों से सुने — Transcript
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- 0:03क्या जाप क्या करते हो?
- 0:05जाप तो राम राम का भी करता हूं। श्री
- 0:07कृष्ण गोविंद हरे मुरारी नाथ नारायण दास
- 0:12नियम से करो।
- 0:14नियम से
- 0:16नियम से चालू है।
- 0:17हां। जैसे
- 0:1910,000 नाम
- 0:22रोज जपो।
- 0:25गिन के
- 0:27माला ले लो।
- 0:29और सरनी
- 0:32हां तो
- 0:35एक माला जब पूरी हो गई 108 की
- 0:39एक गुड़िया सरका दी
- 0:42एक माला हो गई तो दूसरी गुड़िया
- 0:45ऐसे
- 0:4727 की गुड़िया होती है और 108 की यह होती
- 0:53है तो 108 डाक जब हो गए तो एक एक गुड़िया
- 0:58हो गई
- 0:59तो ऐसा करके 3000 नाम ये हो जाएंगे
- 1:04ऐसे
- 1:06तो तीन मर्तबा इसको जप दिया करें
- 1:11तो 10,000 डाल रोज
- 1:15तो उसमें मन लगने लगेगा कि हमारा नियम
- 1:18बाकी है और ठंडवा जब अपने बल से कर रहा है
- 1:22तो मन पाजी है बदमाश है थोड़ा बल लगेगा
- 1:27अच्छा ये कर दे जब फिर मन लगेगा जब फिर ये
- 1:31आ गया अच्छा इधर चले या देख ले तो मन को
- 1:36बहकाए रहता है भजन में नहीं लगने देता तो
- 1:40नियम पहले पकड़ो जिद करो इतना हमको करना
- 1:46ही है
- 1:48दिन भर
- 1:49इतना हमको करना ही है तो 10 15000 जितना
- 1:54जप्त कर सको जितने
- 1:58मेहनत करके पूरा हो। इतना रोल नेम बना लो।
- 2:03फिर नाम का नाम जपो।
- 2:06नाम के जपने से मन की गति जो चारों तरफ
- 2:10दौड़ती रहती है वो फिर एकाग्र होती है।
- 2:16ठीक है।
- 2:30तो ऐसे नियम बना दो तो नियम से प्रेम हाथ
- 2:36में आता है। और जब नियम से हम नहीं करते
- 2:41जब मूड आ गया तब कर लेते हैं। सुबह बैठते
- 2:46हैं तो यह मन का यह काम है। जो हमने बुरे
- 2:50कर्म किए हैं वो जमा है। पाप के रूप में
- 2:54तो दिक्कत करते हैं। बल लगने नहीं देते।
- 2:59ढीला हो जाता है। टेंशन रहता है। उधर
- 3:03कमजोरी आने लगती है और इधर खिंचाव होने
- 3:08लगता है। और जब हम जििद कर लेंगे कि इतना
- 3:12हमको जपना है
- 3:1524 घंटे में तो वो फिर पकड़ में आएगा कि
- 3:21हर हालत में जपना है। जपटाए
- 3:24तो जब इतना लगातार जपेंगे तो थोड़ा आसक्ति
- 3:28उधर होगी। जब आसक्ति होगी तो फिर बताना
- 3:35कैसा मन बताता है। मेहनत करना पड़ेगा।
- 3:39सोते सोते करो। चलते चलते करो। बैठे बैठे
- 3:45करो। क्योंकि बुड्ढा शरीर है। थक जाता है
- 3:49एक जैसे रहने। ठीक है?
- 3:53यह सब आसन है। बैठ के करने को सिद्ध आसन
- 3:57कहते हैं।
- 3:59खड़े खड़े कर सकते हैं। चलते चलते कर सकते
- 4:03हैं।
- 4:05मन को तो रोकना है ना। शरीर जो भी करे कर
- 4:10रहे तो इससे क्या मतलब? अगर मन कंट्रोल
- 4:13में आ गया तो शरीर अपने से आ जाएगा। ये
- 4:17बहुत दिक्कत नहीं। इसलिए
- 4:20जिस नाम में आस्था है प्रेम है वो नाम को
- 4:26दिन भर जपो
- 4:30समझे
- 4:3110,000 15,000 जितना ले सकते तो लक्ष्य
- 4:36बना लो।
- 4:38इतने दिन में इतना नाम होगा तो 5 करोड़ नाम
- 4:42अगर ले लिए जाए कोई भी व्यक्ति तो अनाद
- 4:46द्वार खुल जाएगा।
- 4:50नाभि का मन जागृत हो जाएगा।
- 4:54ये जो मूलाधार स्वाधिष्ठान मणप अनाहट
- 4:59विशुद्ध और आज्ञा ये खट कमल है ये हर आदमी
- 5:05के ऐसे रहते हैं अधोगति
- 5:09और जो साधना करते हैं वो धीरेधीरे खुल
- 5:12जाते हैं ऊपर हो जाते उसको कहते कुंडली
- 5:16जागृत हो गई
- 5:19ठीक है तो नाम से होगा
- 5:24नाम लेंगे जब बराबर नाम ले सुनाई पड़ रहा
- 5:28है ठीक से
- 5:31जब बराबर नाम लिया जाएगा
- 5:37तो इससे होता क्या है कि राम राम राम राम
- 5:42राम राम हम नाम ले रहे
- 5:46तो ये बीम चला जाता है वेगों में
- 5:50तरंगों में
- 5:53ठीक है तो जहां स्काई है इधर वहां वहां
- 5:59जाएगा
- 6:01तो राम नाम है
- 6:04और इसका रूप कहां है
- 6:08राम और राम का नाम हुआ और और ये नाम का
- 6:13रूप कहां है
- 6:15उस रूप को बुलाएगा। ये
- 6:19जहां भी होगा उसके पास जाएगा
- 6:24बेवों के द्वारा तरंगों के द्वारा और उससे
- 6:28कहेगा कि अमुक आदमी तुमको बुला रहा है।
- 6:32तुम्हारा नाम ले रहा है बार-बार बार-बार।
- 6:36तो तुम यहां कहां घूम रहे हो? चलो आओ उसके
- 6:38पास।
- 6:42समझ में आया?
- 6:43जितना नाम लिया जाएगा इतना भगवान जैसे कोई
- 6:47बाहर खड़ा है और तुम्हारा साथी उधर चला जा
- 6:51रहा है आवागे ना ऐ इधर आ इधर आ इधर आ कहते
- 6:57हैं ना तो वो लौट आता है ऐसे ही राम राम
- 7:03राम राम ओम ओम जपने से जो हमारा भगवान है
- 7:10ईश्वर है वो खबर खबर मिल जाती है। उसको
- 7:15पता चल जाता है कि गुज बुला रहा है।
- 7:20तो वहां मैगनेट पकड़ती है उसको खती है।
- 7:25तो जब वो आने लगता है तो यहां जो काम है,
- 7:28क्रोध है, लोभ है, मोह है, मद है, अंदर
- 7:32घुसे है ना। समझ में आ रहा है ना?
- 7:36हां। तो ये निकल निकल के भागने लगते हैं
- 7:40क्योंकि सूर्य जहां रहेगा त अंधेरा नहीं
- 7:43रहेगा
- 7:45वो अंधेरा रहेगा त सूर्य नहीं रहेगा
- 7:50तो भगवान प्रकाश है जब आएगा तो ये उल्लू
- 7:55जितने हैं काम क्रोध भाग जाएंगे भाग
- 7:58जाएंगे तो कल्याण हो जाएगा इतना ही मतलब
- 8:01है ना आता है ना समझ में हां
- 8:07तो अब तुम्हारे मन में क्यों नहीं आता समझ
- 8:10में? तो तुमने 100%
- 8:14पैसे में बल लगा दिया है।
- 8:19वह जगह ही नहीं रह गई भगवान के लिए। हमें
- 8:22भगवान की जरूरत नहीं है। हमको पैसे की
- 8:25जरूरत है।
- 8:27हमें खुश रहने की जरूरत है। हमें खाने के
- 8:31पदार्थों की जरूरत है। यह समस्या आ गई है।
- 8:36अब यह भगवान तो हमारा यह है पैसा खाना
- 8:41पीना है सारा
- 8:44और हम कहते हैं उल्टा भगवान को बुलाओ जो
- 8:48एकदम निरी है निर्भय है निर्लेप है उसके
- 8:55पास तो कुछ है नहीं
- 9:00जब उसको आप स्वीकार कर लेंगे तो ये के
- 9:02मालिक बन जाएंगे
- 9:04अब यह पकड़ में नहीं आता ना।
- 9:08अभी लक्ष्मी लक्ष्मी दिन और रात आदमी
- 9:10चिल्ला रहा है थप्पड़ फाड़ के भर दे भर
- 9:15दे। चिल्ला रहा है ना तो भरता है गुहार
- 9:20लगी पड़ी है और जे के यहां भर जाता है वो
- 9:24यहां डाका पड़ जाता है चोर आ जाते हैं
- 9:27सरकार कूद पड़ती है बेईमानी आ जाती है आग
- 9:32ही लग जाती है
- 9:34कहीं गुजर रही है कैसे
- 9:37पैसा लक्ष्य भी आ जाएगी तो घटे में फांसी
- 9:40लग जाएगी
- 9:45तुम्हारा तुम्हारा जीवन सही रहेगा फिर
- 9:48चोरों के बारे नहीं जिंदा रहोगे माइट इज
- 9:52राइट वालों के लिए जिंदा रह दबंगों के
- 9:55बारे रह नहीं पाओगे सरकार के नियमावली के
- 10:00नहीं चल पाओगे पकड़ जाओगे
- 10:04और जो नहीं आता तो गुजर परेशानी आए हैं
- 10:11यही के चक्कर में हम सब लोग परेशान
- 10:16यही है संसार
- 10:21भरभटा रहे है और जितने उपाय है पैसे के
- 10:27हैं और पैसा जब आ गया कि शांति मिल जाएगी
- 10:32आनंद आ जाएगा
- 10:34फ्लैट मिल जाएगा बिल्कुल सोते रहेंगे भला
- 10:39मसाला खाएंगे कहां का दाबी है मुंबई में
- 10:44वह खा जाएंगे रात के जा
- 10:47ऐसी ऐसी कल्पना होती है ना
- 10:52तो फिर वही भाई तब तक हमारी लाइफ पूरी हो
- 10:55जाती है मरने का टाइम आ जाता है और धरे के
- 10:59धरे रह जाते हैं कोने में हमारा बोरिया
- 11:02बिस्तर सट जाता है ऐसा ही है ना
- 11:11कैसे काम चले
- 11:14और अंदर से आत्मा लहाओ लाओ
- 11:20पूरब की कमाई पश्चिम में गवाई आगरा की खेब
- 11:24खबर कुछ नहीं पाई पाई तो दिल्ली के दलालों
- 11:29ने सौदा बिगाड़ दिया
- 11:32पाई कुछ मिलती तो दिल्ली के दलालों ने
- 11:36सौदा बिगाड़ दिया और सबके संघाती के लाहो
- 11:40ला ला
- 11:43लाहौर लाहौर लाहौर
- 11:46लाभा पटियाला होके सहारंगपुर का सहारा
- 11:50लेके और गाड़ी हरिद्वार में आई
- 11:57तो ये आगरा वागरा इनसे मतलब नहीं है।
- 12:00बनाने का तरीका है किसी
- 12:04का मतलब यह है कि आगे की खबर कुछ नहीं
- 12:07पाई।
- 12:08पहले जन्म में हमने जो कमाई की थी वह अब
- 12:12यह जन्म में गवा रहे हैं।
- 12:17ये जन्म में गवा रहे हैं।
- 12:22मनुष्य का धर्म है भगवान को प्राप्त करता
- 12:25है।
- 12:27इसी के लिए अगर जन्म होता है पैदा होता
- 12:29है।
- 12:31लेकिन बीच में भगवान झट डाल देता है कि
- 12:33झंझटों से निकल के जब आई तब ठीक है।
- 12:37परीक्षा लेता है भगवान बगैर परीक्षा के
- 12:40डिग्री नहीं मिलती
- 12:44तो इस तरीके से
- 12:47ज झटों से फस गया तो वही में रह गया
- 12:52अब कोई कोई सोचते हैं सब तो सोचते नहीं तो
- 12:58जब सोचते हैं कि भाई हमें कुछ करना चाहिए
- 13:02पैसा की लाला लगी है तो पैसा आ जाता है तो
- 13:05शांति नहीं मिलती
- 13:08और जिनके पास अरबों खरबों पैसा है उनसे
- 13:11पूछा जाए कि तुम्हें शांति मिली
- 13:16आनंद आया भगवान का आया
- 13:20बहुत दुखी है
- 13:24वो तो बहुत दुखी है
- 13:26तो वो तो और दुखी है
- 13:28हां ज्यादा दुखी
- 13:29वो तो तुमसे यही कह गए कि अरे भैया
- 13:32तुम ठीक हो तुम्हारे पास इतना ही है कि
- 13:35खाना पीना है किसी के पकड़ में नहीं हमारे
- 13:39पास पैसा है तो हम तो सबसे डर रहे हैं
- 13:42परेशानी
- 13:45ये कैसी रवैया है और जिधर शांति मिलती है
- 13:49उधर हम जाना नहीं चाहते
- 13:53शांति मिलती है गरीबी में
- 13:56शांति मिलती है आधा पेट खाने में शांति
- 14:00मिलती है धूल में पड़े रहने में शांति
- 14:05मिलती ये पर घटा के कपड़ा पहन दे
- 14:09कोई पसंद करे
- 14:11कोई पसंद नहीं करता
- 14:15हमारे पास जो कुछ है दूध लुटाओ शांति
- 14:19मिलेगी दूसरों को खिलाने में
- 14:22और हमारा मन पड़ता है कि थाली का ये चले
- 14:25सबका हमारे घर में आ जाए उल्टा कैसी
- 14:31हम जानते फिर उल्टा चल रहे
- 14:36ये पहले हम लोग इसको समझे कि कौन जाल में
- 14:40आ के फस गए हैं और यह बगैर सत्संग के समझ
- 14:45में नहीं आता।
- 14:48बार-बार हम लोग सत्संग करें महात्माओं का
- 14:52जो सुलझे हुए हैं
- 14:55जिन्होंने यह जो जाल है सुलझा लिया है
- 14:59उनके पास बैठे उनसे बात करें तो वो
- 15:03बताएंगे कि कैसे कैसे आपने ये काम किया
- 15:09तो इस तरीके से ये बड़ी भारी समस्या है।
- 15:15अब यह अब को आया कहे महाराज हम बहुत दुखी
- 15:18है। अच्छा दुखी का तो चलो सुखी कैसे हो
- 15:21गए? पैसा मिलने लगे। आशीर्वाद दे दिया कि
- 15:25पैसा मिलेगा। नौकरी लग गई। धंधा चल गया।
- 15:30तो वो पूरी तरह से फस रहा है कि छूट रहा
- 15:33है।
- 15:35वो तो परेशानी में जा रहा है। या कौन
- 15:38आशीर्वाद है? आशीर्वाद तो यह है कि जाल
- 15:42छूटे।
- 15:44और भगवान की तरफ हम अंगुल दो अंगुल चले
- 15:49कदम दो कदम चले
- 15:52त्याग आए
- 15:55इसीलिए इसी को रामायण कहते हैं।
- 16:03करोड़ों रामायण है।
- 16:10रामायण कहते हैं कि राम आयन सा रामायण
- 16:15सबके अंदर राम है
- 16:18हर आदमी के अंदर भगवान है
- 16:25लेकिन होते हुए उसका दमन कर दिया
- 16:29किसने कर दिया क्रोध
- 16:33मोह मोह रूपी रावण क्रोध कुंभकरण
- 16:38काम मेघना लोभ नाराक कपट काल अभिमान रावण
- 16:45इस शरीर में आसक्ति मेरा शरीर यह आसक्ति
- 16:50लक्का है ये संसार समुद्र है विषय पानी है
- 16:57और सोने की लका थी तो मनुष्य से अच्छा कोई
- 17:01और चीज है सब योनियों में सुंदर है उपमा
- 17:06सोने की दी गई
- 17:09यह शरीर के वर्णन किया गया है। यह आत्मा
- 17:13राम है। अजर अमर एक रस व्यापक शुद्ध बुद्ध
- 17:20अजबा चिंतन अरूप अलग अविनाशी है।
- 17:24वो सब में रहते हुए सबसे अलग है।
- 17:30बुरे आदमी के पास है। आत्मा तो निर्लेप
- 17:33है। बुराइयों के पास जाती नहीं।
- 17:39अब मोह आएगा। रावण मोह है। मोह हमारे पास
- 17:43आएगा तो शरीर पर मोह होगा ना। और यहां
- 17:48आकाश में आएगा रावण। यहां तो मोह है नहीं।
- 17:52कोई चीज है ही नहीं। ऐसा परमात्मा है। ऐसा
- 17:58ही हमको बनता है। अभी तो हम स्वामी है।
- 18:02शरीर है। ये पेट है हमारा। ये हाथ है। हम
- 18:06स्वामी है
- 18:09ये धला है ना तो हम तो यह बने हुए नहीं ये
- 18:14इनको समर्पण कर देना है इनसे फुर्सत कर
- 18:18पाओ मरने पर फुर्सत होता है तो पैदा रहते
- 18:24रहते मर जाओ
- 18:27उसका इल्म है साधक कैसे मरा जाए
- 18:34तो इस तरीके से
- 18:38सबसे बड़ी चीज तो यह है कि हमारे अंदर ये
- 18:40पैदा कैसे हो
- 18:42कि हमको करना क्या चाहिए
- 18:47को हम कथित कि जाते हम कौन है हमें क्या
- 18:51करना है हम किस लिए यहां आए थे हम काहे
- 18:55में फंस गए
- 18:57जिधर छूटते हैं उधर हमारी रुचि नहीं होती
- 19:01जाने की और जिधर बंधन में पड़ते उधर भागे
- 19:04चले जा
- 19:07और जो हमारे यहां सतार हो रही है, हमारे
- 19:11यहां सत्तार हो रही है, वो सबको हम बुड्ढे
- 19:14होते हुए भी उनको फंसाते चले जा रहे हैं।
- 19:19और जो तुम्हारे पुरखा थे गरग, गौतम, सांड,
- 19:25ऋषि, मुनि हुए हैं ना
- 19:30जिनका तुम आज गोत्र पूछा जाए तो कोई नाम
- 19:33लेना पड़ेगा ना।
- 19:38उनकी हालत यह नहीं थी।
- 19:41उनको भजन करने के लिए पैदा हुए नहीं भजन
- 19:44करो।
- 19:48भागो माया से भगवान की तरह।
- 19:53ये लग जाती थी। जबरदस्ती ब्रह्मा पैदा
- 19:56करके लड़की जैसे पकड़ा देता था।
- 20:00ऋषि को यह लड़की दी गई।
- 20:04अब वो ध्यान नहीं कर ध्यान लगा हुआ है। अब
- 20:08वो बैठी है।
- 20:11जब उनके चरित्रों को आप पढ़िए देखिए तो ये
- 20:16समझ में आता है। अब वो पति है भगवान है तो
- 20:20पत्नी बैठी है। धीरे धीरे धीरे जब आंख
- 20:24खुली 10 रोज में 15 रोज तो सेवा लेने लगी
- 20:31तो आखिरी उसको ग्रहण करना पड़ा
- 20:35तो उनका प्रेम रहा
- 20:39पत्नी में प्रेम हुआ नहीं हुआ दूसरे लाके
- 20:44बैठा गए हमारी इच्छा नहीं थी
- 20:49और हमारा तो भगवान अलग है फिर बंद कर लेते
- 20:52आगे
- 20:53फिर साल भर की छुट्टी वो बैठी हुई है।
- 20:56हमारी देखरेख कर रही है। हमारा भगवान
- 20:59ज्यादा प्रेम है उसमें।
- 21:02इसलिए हम संतान भी पैदा करते थे और
- 21:06निर्लेप रहते थे।
- 21:11गर गौतम सांडिल और तवा मुनि ऋषि जितने
- 21:17महात्मा हुए फलाने के फलाने के लड़के का
- 21:20नाम यह महात्मा हुआ फिर उसका नाम यह
- 21:23महात्मा हुआ
- 21:27तो वो भी दुनिया में रहे और भी संतान पैदा
- 21:31की और वो निर्लेप रहे
- 21:35अनाशक्त रहे जो करते थे उसका फल ले लेते
- 21:39थे निष्काम होकर काम करते थे।
- 21:44अब हफ्ता नौकरी करते किसी की महीना का
- 21:49बैठे हुए जब वहां 10,000 500 पैसा मिला तो
- 21:56खुशी आती है ना जब गड्डी हाथ में पकड़ तो
- 22:00खुशी के साथ बगली से अहंकार घुस जाता है
- 22:06हमारी समझ में नहीं आता और ईगो घुस जाता
- 22:09है कि मेरा पापा ऐसा
- 22:12फिर हमारा
- 22:14जयकार हुआ तो सिर नीचा हो गया। पतन हो
- 22:18गया। अब कैसे प्रगति कर सकते हैं? ये
- 22:22तरीका नहीं है। तरीका ये है कि हम करें
- 22:27दिन भर झाड़ू लगाए। लेकिन भगवान से शाम
- 22:30सुबह रिपोर्ट करें। भगवान हम इस मेहनत के
- 22:33बदले कुछ चाहते नहीं।
- 22:36हमको निष्कापता मिले। हम सका बदला ही नहीं
- 22:40चाहते।
- 22:42हम तो कर्तव्य करेंगे और कर्तव का फल नहीं
- 22:45लेंगे
- 22:47तो भगवान अपने आप में पकड़ में आ जाएगा।
- 22:51जाएगा कहां? भगवान का तो फायदा ये है कि
- 22:54जब हम लोग कोई पिता है वो बेचार लड़के हैं
- 22:58और रूठते हैं। हमको मीठा दे खाने के बाप
- 23:03मीठा लाओ। दूसरा कहता है पैसा लाओ हमको।
- 23:07वो कहता है नहीं हमको कपड़ा लाओ। अब बाप
- 23:11की लाली बरी है। सबकी इच्छाओं को पूर्ति
- 23:14करना पड़ेगा। करते हैं ना और जब नहीं कर
- 23:19पाते तो वो लड़के नाराज होते
- 23:24तो बाप थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा सबका लहाए
- 23:28रहे।
- 23:33तो जो साधक है वो बच्चे हो गए। पिता
- 23:37परमात्मा हो गया और हम सब लोग उसके पीछे
- 23:40डिमांड कर रहे हैं ना मांग कोई कुछ मांग
- 23:44रहा है कोई कुछ मांग रहा है और भजन करते
- 23:47हैं पों में जाते हैं मुड़ी टेकते हैं नाम
- 23:51जपते हैं उपासना करते हैं के बदले भगवान
- 23:56थोड़ा थोड़ा देता जाता है क्या देता है
- 24:00संसारी माया
- 24:02पैसा
- 24:04धन खाना का पदार्थ, मकान का रहने का,
- 24:09कपड़े का इनसे वो भगाता रहता है लोगों को।
- 24:15ले लो चलो मुझे मेरा जीव छोड़ो। मेरा जीव
- 24:19छोड़ो।
- 24:24और इतने पे जो खुश हो गया तो भगवान तो
- 24:26मिला नहीं। भगवान तो वो चीज हमको दिया जो
- 24:29हमारी घटे फांसी पड़ जाएगी।
- 24:34तो अच्छे साधक वो होते हैं जो भगवान से यह
- 24:38नहीं लेते। भगवान ये आप रखे रहो। ये तो आप
- 24:42ही के पास सुशोभित है ये माया। हमारे पास
- 24:46आएगी तो हमें यह बात डालेगी।
- 24:49हम तो निजी है ना। हमारे पास पावर तो है
- 24:54नहीं। हमारे पास ताकत तो है नहीं। के पाया
- 24:58पर हम कंट्रोल कर सके। ये तो आपकी दासी
- 25:01है।
- 25:03हमारी दासी नहीं है। हमारा तो यह बादशाह
- 25:06बन जाएगी और कत्ल कर देगी।
- 25:09पैसा ध्यान रखेंगे तो भजन भाव चला जाएगा
- 25:12चूना में और पैसा में मन फस जाएगा तो पैसा
- 25:17प्रेर के धर देगा। परेशान करके धर देगा।
- 25:22मन लगेगा भजन में।
- 25:25मन के अंदर तो पैसा घुस गया।
- 25:29वस्तु घुस गई।
- 25:31इसलिए जब भगवान ऐसे बहलाता है तो हम लोग
- 25:35भक्तों को चाहिए कि भगवान हम इन बातों से
- 25:39नहीं पसंद है। हमको हम तो आपको लेना चाहते
- 25:43हैं।
- 25:45हमको पैसे की जरूरत नहीं।
- 25:48हमें खाने पीने की हम तो भूखा मरना चाहते
- 25:51हैं।
- 25:55आप कैसे खुश हो? हम वैसे रहना चाहते हैं।
- 26:02तो कह देगा त्याग करो भाई मेरे लिए तो मैं
- 26:06तो तभी मिलूंगा जब पहले कोई आया मेरे पास
- 26:09नाम देता है तो मैं पैसा देता हूं पद देता
- 26:13हूं ये देता हूं और जो सबसे इनसे कोई कुछ
- 26:17नहीं लेना चाहता है तो मुझे लेना चाहता है
- 26:20तो बहुत भारी ताकत से मेहनत करो
- 26:24त्याग करो उपवास करो बालवी िक बनो
- 26:31वाल्मीिक डाका पड़ता था चोरी करता था सप्त
- 26:35ऋषि महात्माओं से जंगल में भेंट हो गई तो
- 26:39कहा लुटिया डोर चदरी व धर हो गया और भागो
- 26:43इधर से और ये मारे गए चार चार लाठी
- 26:50तो महात्मा जो होते हैं वो निर्भीक होते
- 26:52हैं
- 26:54मुक्त किम लक्षण निर्भयम
- 26:58निर्भय होते तो उन्होंने कहा बोले लुटिया
- 27:01ड तेरा तो का पूरा कर देगी का का उपाय को
- 27:07है तू
- 27:09महात्मा डरते नहीं और डर भगवान भगा देता
- 27:12है
- 27:14तो उससे जब ये ढंग से बोले तो जाते हैं
- 27:18वाणी में प्रेशर होता है माइग्रेट होती है
- 27:23तो वो दबे
- 27:26कितना पावर है बकवास तो भागे वाली जात है
- 27:30मिला मिला नहीं तो भागे
- 27:35तो कहा तो भगवान तो मैं करूं क्या जब आप
- 27:39ऐसे
- 27:41ईश्वर रूप है तो मेरा कल्याण करिए मैं चोर
- 27:44हूं बेईमान हूं बदमाश हूं हर आदमी यही तो
- 27:49है दिन और रात तो यही कर रहा है जब भगवान
- 27:53के खिलाफ जो काम करेगा तो चोरी ही तो है
- 27:56बेईमानी ही तो है सही तो परमात्मा है
- 28:03तो कह बोले बैठो भजन करो
- 28:06क्या करें राम राम कहो राम राम तो नहीं
- 28:10बनेगा मैं तो बार-बार कहता हूं दिन भर
- 28:14मारता हूं रोज दो चार आदमियों को बा डालता
- 28:17हूं हाथ पैर टोल देता हूं कई तब मेरा पेट
- 28:20भरता है
- 28:24कह नहीं अब हम जो कहते हो वो करो तुमको
- 28:27शांति मिलेगी।
- 28:30असली तत्व मिलेगा तो तेरी पूरी कामनाएं हो
- 28:35जाएगी।
- 28:36बैठो
- 28:38राम राम राम राम करो
- 28:41मारा म ही म
- 28:45तो मारो मारो मारा मारा मारा राम राम राम
- 28:49राम वो धीरे राम राम अपने से बच जाता है
- 28:54तो राम राम कहने लगा कह
- 28:58अब 12 साल के बाद आई यही बैठा मिल
- 29:03इतनी लंबी अवध
- 29:09सहन कर जाए साधक
- 29:12देश काल से अंत नहीं
- 29:16समय से मतलब नहीं
- 29:19वो कर पाता है इतना त्याग हो कहा ठीक है
- 29:26सतयुग का प्रकरण है सतयुग में हड्डी में
- 29:30प्राण रहते थे
- 29:33लाख साल की उम्र होती थी उस समय
- 29:38बैठा बैठा फिर करते रह गया आखिर साल दो
- 29:41साल में डीप चढ़ गई भाभी बन गई और अंदर दब
- 29:47गया
- 29:4912 साल में उन्होंने कहा था कि हम आएंगे
- 29:53तब तुमको देखेंगे
- 29:56आए 12 साल में तो कान वाल लगा के सुनेगा
- 30:00कहीं कहीं स्वासा आवाज है क्या है
- 30:05तो कुछ मालूम हुआ तो टोरे उसको भाभी को तो
- 30:10निकला उसने
- 30:15उल्टा लाभ जपा जग जाना और बालिक हुआ
- 30:20ब्रह्म संभाला
- 30:24सबसे बेरी वाला और सबसे उच्च कोटि को
- 30:28प्राप्त कर ब्रह्म से ऊपर कोई
- 30:33क्यों कर लिया? यह है हिम्मत। यह है
- 30:37एग्जांपल। यह है उदाहरण।
- 30:40यह है हमारी पद्धति।
- 30:43इस पर हमें चलना चाहिए।
- 30:46यह है मनुष्य तन पाकर के धर्म करना।
- 30:50बड़े भाग्य मान तन पावा। सुर दुर्लभ सद
- 30:55ग्रंथ गावा। देवी देवता सब चिल्लाते।
- 31:01मानव जो है देवताओं के घोड़े पर पड़ रहा
- 31:03है। चिल्ल बचाए कि हमें कुछ दे दो
- 31:07और देवता चिल्लाए हैं कि हम परेशान है।
- 31:10हमें मनुष्य तन एक मर्तबा मिल जाए तो हम
- 31:13भगवान को प्राप्त कर ले।
- 31:17यह बात हम लोग समझते ही नहीं। बड़े भाग्य
- 31:22बाबा
- 31:24सुर दुर्लभ उनको भी दुर्लभ है।
- 31:31तो इस दृष्टि से
- 31:34पहले हमारे अंदर उत्कंठा जागृत हो, प्रेम
- 31:38जागृत हो,
- 31:41लगन जागृत हो।
- 31:44हमने तो अपने को फिक्स कर लिया है। अब ये
- 31:48है ये कोटि के है। ये लेयर बन गया है।
- 31:54फिर वो लेयर से ऊपर कैसे उठ पाए?
- 31:58जब परिवार में पैदा होते तो एक घर का
- 32:01लेयर, एक कास्ट का लेयर, एक गांव का लेयर,
- 32:06फिर तहसील का लेयर, फिर जिला का लेयर, फिर
- 32:10प्रांत का, फिर देश का, फिर वर्ल्ड का इन
- 32:14लेयरों को पार करना पड़ेगा।
- 32:20ये क्लासों को पार करना पड़ेगा। प्राइमरी
- 32:24में पढ़े पढ़े में काम नहीं चलेगा।
- 32:28शुरू करना है फ्रॉम टू स्टार्ट
- 32:34प्राइमरी में फिर भी फिर हाई स्कूल फिर
- 32:37इंटरमीडिएट
- 32:39फिर बीए फिर एमए फिर रिसर्च
- 32:43लंबा कोर्स है
- 32:47यही विधि इसमें है साधन में
- 32:50सुक्षा सुविचारणा तनुसार सत्वा पक्ष असल
- 32:55शक्ति पदार्थ भावनी जाएगा
- 32:59700 पाद है
- 33:02तो हमको चलना पड़ेगा तब ये ये पूरा सही
- 33:08हमारे दिव्य आंख में चित्रण आ जाए
- 33:13तब बल लगेगा ना तब बल लगने लगेगा
- 33:18आता ही नहीं
- 33:20अब तो भरभटा गए तो कोई कहता है इधर जाओ
- 33:24यहां ठीक हो जाएगा अरे कहां आ गए उधर जाओ
- 33:27वहां ठीक है कहा जाए उधर जाओ ठीक हो जाए
- 33:31उधर जाओ ठीक हो जाओ उधर जाओ ठीक
- 33:35पता ही नहीं है
- 33:38तो इस तरीके से पहले
- 33:42जिन्होंने ये शब्द देखा सुना और तवारा
- 33:47किया साधना मिली ऐसे संत लोग महात्मा लोग
- 33:54के पास बैठो
- 33:57सुनो उनकी वाणी
- 34:00वो लोग डिमांड नहीं करते महात्मा और जो
- 34:04डिमांड करते हैं मांग करते वो महात्मा
- 34:07नहीं होते
- 34:10महात्मा तो तुम्हारे कल्याण के लिए ही
- 34:13जीवन है
- 34:16संत पिटप सरिता गिरधरनी
- 34:20परहित हेतन की करनी
- 34:25वृक्ष जो है फल फूल देता है, लकड़ी देता
- 34:28है। किसके लिए देता है? सब पालव के लिए।
- 34:33और उसे बुरा लगता है।
- 34:39नदियां कहां से ढो के पानी ला रही है?
- 34:44मानव की सेवा के लिए पीने के सींचने के हर
- 34:48चीज के लिए संत बिटप सरिता गिरी पहाड़ ढो
- 34:54के पत्थर ला रहे हैं पगार बना रहे काटते
- 34:57जा रहे हैं उनके शरीर को उन्हें दुख लगता
- 35:01है कभी
- 35:03कभी नहीं परोपकार के लिए
- 35:11परहित हेत इधर की करनी ऐसे संत
- 35:20संत परोपकार करते हैं। पर हित रन की करनी
- 35:26पर हित हेत की करनी पराए का उपकार करो।
- 35:31पराए का उपकार करो। पराए का उपकार करो।
- 35:35हमारे पास जो है वह सब खाओ। हमारे पास ना
- 35:39रह जाए। यह हमारा काम है।
- 35:44हमारा यह काम नहीं है कि वह कब हम ले ले
- 35:47वह का ले ले वो का ले ले
- 35:50लेंगे तो दे नहीं सकता
- 35:56और जो देगा वो ले नहीं सकता
- 36:00तो इस दृष्टि से
- 36:03शुरू करना चाहिए।
- 36:06अब आपके पास इतना बताने से ऐसा मन में आ
- 36:10रहा होगा कि यह प्रश्न बन रहा है कि आखिर
- 36:13हम लोग करें क्या?
- 36:16ऐसा बन रहा है ना
- 36:19तो करना यह है। यह प्रश्न का भी हम उत्तर
- 36:23देते हैं।
- 36:26100 पैसा हम फसे हैं। एक पैसा निकालने का
- 36:31उपाय किया जाए।
- 36:37राम राम राम राम राम राम जब टाइम मिले राम
- 36:41राम जपो
- 36:43राम में वो ताकत है
- 36:46नाम निरूपण नाम जतन से और जिगटत से मूल
- 36:52रतन से
- 36:54रतन यहां रख दिया जाए तो कीमत आगे ना लोग
- 37:00ऐसे नाम जपा जाए तो नाम से
- 37:04ताकत आ जाएगी। अंतकरण पवित्र हो जाएगा। मन
- 37:10रुकने लगेगा।
- 37:13और नाभ की उति है। बै खरी मध्यबा पसंत
- 37:20चार बाड़ है।
- 37:24राम राम राम राम ऐसे जपे
- 37:28इससे ज्यादा फायदा होगा।
- 37:31जिप्या होठ डाले फिर जपे। और ज्यादा फायदा
- 37:34होगा
- 37:36और निरंजन अंदर सबके अंदर ऊपर जाती है
- 37:40स्वासा नीचे जाती है निरंजन बाला घटवे
- 37:44फिरे दिन रात ऊपर जाए तो राह नीचे जाती है
- 37:49तो स्वासा कभी बंद होती है
- 37:53हम सोते हैं खाते हैं पीते हैं पड़े रहते
- 37:58हैं लेकिन स्वासा कभी बंद होती है हर समय
- 38:02नाप जप रही 24 घंटे
- 38:06ऊपर जाती है। राम
- 38:09राम
- 38:11राम
- 38:12राम ये अजपा है। आधा हद इसको लाभ कहते
- 38:18हैं।
- 38:21पराबाणी है।
- 38:25राब में अंतर है। कहीं हीरा कहीं पत्थर
- 38:30है।
- 38:33यह वाणी से राम राम राम राम जपेंगे
- 38:38तो मन इससे बारीक है। ऐसे निकल के बदमाशी
- 38:42करे चला जाएगा। तो पत्थर हो गया ना फिर
- 38:46नाग कोई फायदा करेगा।
- 38:50ये बात समझ में आ रही है।
- 38:53अच्छा
- 38:55और
- 38:58फिर धीरे धीरे बैकरी मध्य
- 39:02पशती परा
- 39:05वो बाड़ियों में बारीक होता चला जाएगा।
- 39:10बारक डाब लिए जग जेव होए तरण तारण डर थे।
- 39:18पराबाणी से अगर एक नाम ले दिया जाएगा
- 39:22तो खुद तर जाएगा और दूसरे को पीठ में लाद
- 39:26के तारने की ताकत आ जाएगी।
- 39:29ओए तरण तारण डरते
- 39:37ये प्रत्यक्ष
- 39:39गीता रामायण पुराण शास्त्र वेद सब में भरा
- 39:44पड़ा है नाम से बढ़ राम ब्रह्म से नाम बढ़
- 39:51राम आके यहां खड़ा हो जाए कुछ नहीं आपको
- 39:54दे पाएगा उससे ज्यादा बड़ा नाम है
- 40:01नाम दे रखा है। नाम को हम जब जपेंगे
- 40:05अपने आप रस्सा मिल जाएगा।
- 40:09मेहनत करो पहले थोड़ा दिक्कत होगी।
- 40:14लड़का रोता हुआ पकड़ के खसेड़ के ले जाते
- 40:17हो ना स्कूल में एडमिट कराने। दो तीन साल
- 40:21का जाता है वो जबरदस्ती ले जाता है माता
- 40:26पिता।
- 40:29और फिर रोएगा गिलगिलाएगा
- 40:32पसंद नहीं आएगा फिर रगड़ते रगड़ते रगड़ते
- 40:37थोड़ा मेहनत पड़ेगी फिर वो ड्रेस रेस लगा के
- 40:41साल लेफ्ट राइट करते हुए फिर चला जाता है
- 40:45साल दो साल के बाद फिर बोलना पड़ता है हां
- 40:49ऐसे आदत बन जाएगी लेकिन लगना पड़ेगा
- 40:56और ये तो सब माया का खेल है।
- 41:00घर में देखते हैं बड़ी छोटी छोटी बिटियाएं
- 41:02होती है। तो उनसे रहा नहीं जाता। तो बड़ी
- 41:06बहनों से सीख लेती है। कपड़े का गुड़िया
- 41:10बनाती है। लड़की बनाती है कपड़े की और
- 41:14लड़का बनाती है कपड़े की। गुड्डा गुड्डी।
- 41:18मुंबई में पता नहीं होता है कि नहीं होता
- 41:21है। है तो दुनिया में ये सब जगह खेल होता
- 41:25है ना? हां
- 41:28और वो खेलती रहती है, शादी करती है, विवाह
- 41:32करती है, भाताल बनाती है, सब करती है
- 41:35जितना वो जान पाती है। और जब खेलते खेलते
- 41:39बड़ी हो गई माता-पिता उठा के शादी करती है
- 41:43तो असली गुड्ड से भेंट हो गई। फिर नकली
- 41:45में जाती है कभी। पता नहीं कौन आंख में
- 41:48पड़ के सड़ के वो गुड्ड गुड कल है
- 41:54ऐसे करना पड़ेगा
- 41:58फिर ससल मिल जाएगी
- 42:02अच्छा अच्छा भाई बोलो गुरुदेव भगवान की
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This page contains the full transcript of 5 करोड़ नाम जपने की विधि रोज कितना जापे और नियम से स्वामी जी के अमृत वचनों से सुने by ParamhansDarbar परमहंस दरबार , generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 4,293 words across 634 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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