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अनाथ लड़की की करैला बिरयानी | बदसूरत समझकर भाभी ने घर से निकाल दिया,करेला बिरयानी ने ज़िंदगी बना दी। — Transcript

by Pikku ki Duniya · 2,802 words · 383 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00एक छोटे से गांव में एक लड़की रहती थी
  2. 0:02जिसका नाम टीना था। टीना अपने बड़े भाई
  3. 0:05मोहन और भाभी राखी के साथ रहती थी। टीना
  4. 0:08देखने में उतनी सुंदर नहीं थी। उसका रंग
  5. 0:11सांवला था। चेहरे पर कोई बनावटी चमक भी
  6. 0:13नहीं थी। जिसकी वजह से उसे कोई पसंद नहीं
  7. 0:16करता था। शादी के लिए रिश्ते भी आते थे तो
  8. 0:19उसे देखते [संगीत] ही मना कर देते थे।
  9. 0:21उसकी भाभी राखी भी उसे अपना नहीं मानती
  10. 0:23थी। वह उसे हमेशा बोझ समझकर ताना देती थी।
  11. 0:27अम्मा बाऊजी तो चले गए लेकिन इस बोझ को
  12. 0:30हमारे सिर पर डाल कर चले गए। ऊपर से इसकी
  13. 0:32शादी भी नहीं हो रही। कोई इसे पसंद ही
  14. 0:35नहीं करता।
  15. 0:36एक
  16. 0:36टीना अरे टीना कहां मर गई? जल्दी इधर आ।
  17. 0:40जी भाभी जल्दी से नहा धोकर अच्छे कपड़े
  18. 0:43पहन ले। आज फिर लड़के वाले तुझे देखने आने
  19. 0:46वाले हैं।
  20. 0:46जी भाभी। और सुन इस बार भी अगर उन्होंने
  21. 0:49तुझे पसंद नहीं किया ना तो समझ लेना। अब
  22. 0:52मैं तुझे इस घर में एक दिन भी नहीं रहने
  23. 0:53दूंगी।
  24. 0:54टीना की आंखें झुक गई। वह बिना कुछ बोले
  25. 0:56अपने कमरे में चली गई। कुछ देर बाद उसने
  26. 0:58[संगीत] अपनी सबसे अच्छी गुलाबी सलवार
  27. 1:01कमीज पहनी। बालों में तेल लगाकर छोटी
  28. 1:03बनाई।
  29. 1:06चेहरे पर हल्का सा पाउडर लगाया।
  30. 1:10लेकिन आईने में खुद [संगीत] को देखकर उसकी
  31. 1:12आंखें भर आई। उसे अच्छी तरह याद था कि
  32. 1:15पिछले दो सालों में न जाने कितने लोग उसे
  33. 1:17[संगीत] देखने आए थे। और हर बार एक ही
  34. 1:19जवाब मिला था।
  35. 1:21लड़की हमें पसंद नहीं है। दोपहर होते-होते
  36. 1:24लड़के वाले घर पहुंच गए। राखी ने बड़े
  37. 1:26दिखावे से उनका स्वागत किया। आइए आइए
  38. 1:29बैठिए। फिर राखी ने ऊंची आवाज में कहा,
  39. 1:32टीना बेटी जरा इधर आओ। टीना सिर झुकाए
  40. 1:35ट्रे में चाय लेकर कमरे में आई। उसने
  41. 1:38कांपते हाथों से सबको चाय दी। लड़के की
  42. 1:41मां उसे सिर से पांव तक देखने लगी। लड़का
  43. 1:44भी उसे घूर कर देखने लगा। फिर बोला, "जरा
  44. 1:47चेहरा ऊपर कीजिए। टीना ने धीरे से सिर
  45. 1:49उठाया। कमरे में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा
  46. 1:52गया। लड़के की मां ने धीरे से अपने पति के
  47. 1:55कान में कहा,
  48. 1:57रंग तो बहुत दबा हुआ है। आजकल तो लड़कियां
  49. 2:00कितनी स्मार्ट और सुंदर होती हैं।
  50. 2:02मां, चलिए, मुझे यह रिश्ता मंजूर नहीं है।
  51. 2:04राखी ने मुस्कुरा कर बात संभालने की कोशिश
  52. 2:07की।
  53. 2:08लड़की बहुत काम करती है। पूरे घर का काम
  54. 2:11अकेले संभाल लेती है।
  55. 2:12हमें काम करने वाली नहीं, सुंदर बहू
  56. 2:14चाहिए।
  57. 2:15इतना कहकर वे लोग उठे और बिना [संगीत]
  58. 2:17पीछे देखे घर से चले गए। दरवाजा बंद होते
  59. 2:20ही राखी का गुस्सा फूट पड़ा।
  60. 2:22देख लिया फिर से मना करके चले गए। आखिर
  61. 2:24कितनी बार यही तमाशा होगा।
  62. 2:26[नाक से की जाने वाली आवाज़] पता नहीं
  63. 2:27भगवान ने तुझे ऐसा क्यों बनाया ना शक्ल ना
  64. 2:29सूरत
  65. 2:31नहीं। सच कहूं तो तेरे मां-बाप ने भी
  66. 2:34हमारे सिर पर मुसीबत छोड़ दी। अगर तुझे
  67. 2:37बचपन में ही कहीं छोड़ गए होते तो आज हमें
  68. 2:39यह बोझ नहीं उठाना पड़ता।
  69. 2:40यह सुनकर टीना का दिल टूट गया। वह चुपचाप
  70. 2:43[संगीत] रसोई में जाकर बर्तन धोने लगी।
  71. 2:45आंसू लगातार उसके चेहरे से गिरकर पानी में
  72. 2:48मिल रहे थे। उसी रात राखी अपने पति मोहन
  73. 2:52से बोली,
  74. 2:53अब बहुत हो गया। मैं इसे और इस घर में
  75. 2:55नहीं रख सकती। हर बार लोग आते हैं मना
  76. 2:57करके चले जाते हैं। पूरे गांव में हमारी
  77. 2:58बदनामी हो रही है। कल सुबह इसे साफ-साफ कह
  78. 3:00देना यह घर छोड़कर चली जाए। अब मैं इसका
  79. 3:02बोझ नहीं उठाऊंगी।
  80. 3:03ठीक है राखी। तुझे जैसा ठीक लगे वैसा ही
  81. 3:07कर लो तुम।
  82. 3:09अब बहुत हो गया। मैं इसे और इस घर में
  83. 3:11नहीं रख सकती। हर बार लोग आते हैं, मना
  84. 3:13करके चले जाते हैं। पूरे गांव में हमारी
  85. 3:14बदनामी हो रही है। कल सुबह इसे साफ-साफ कह
  86. 3:16देना यह घर छोड़कर चली जाए। अब मैं इसका
  87. 3:18बोझ नहीं उठाऊंगी।
  88. 3:19अगली सुबह टीना हमेशा की तरह तन धो रही
  89. 3:21थी। तभी राखी गुस्से में वहां आई और तेज
  90. 3:24आवाज में बोली।
  91. 3:24बस बहुत हो गया। अपना सामान उठा और इस घर
  92. 3:28से निकल जा। अब इस घर में तेरे लिए कोई
  93. 3:31जगह नहीं है। भाभी मुझसे ऐसी कौन सी गलती
  94. 3:35हो गई? मुझे घर से क्यों निकाल रही हैं?
  95. 3:40तुम्हारे भैया साफ कह कर गए हैं कि शाम तक
  96. 3:42तुम इस घर में दिखाई नहीं देनी चाहिए।
  97. 3:44उनके काम से लौटने से पहले तुम यहां से
  98. 3:47चली जाना।
  99. 3:48भाभी एक बार भैया से मेरी बात तो करा
  100. 3:51दीजिए। शायद उन्हें गलतफहमी हुई हो। मुझे
  101. 3:53कुछ नहीं सुनना। अपना सामान उठाओ और निकल
  102. 3:55जाओ। अब इस घर में तुम्हारे लिए कोई जगह
  103. 3:57नहीं है।
  104. 3:58टीना ने कांपते हाथों से अपना छोटा सा
  105. 4:00कपड़ों का थैला उठाया। उसने एक बार पूरे
  106. 4:03घर को देखा। यही घर था जहां उसने बचपन
  107. 4:06बिताया था। जहां उसे लगता था कि उसके अपने
  108. 4:09रहते हैं। आंखों में आंसू लिए वह चुपचाप
  109. 4:12दरवाजे से बाहर निकल गई। ना किसी ने उसे
  110. 4:15रोका। ना किसी ने पीछे मुड़कर देखा। टीना
  111. 4:18बिना किसी मंजिल के चलती रही। गांव की
  112. 4:21गलियां पीछे छूटती गई। चलते-चलते वह गांव
  113. 4:24के बाहर बहती नदी के किनारे पहुंच गई। वह
  114. 4:28एक बड़े पत्थर पर बैठ गई। सामने बहते
  115. 4:30[संगीत] पानी को देखती रही। फिर उसके सब्र
  116. 4:33का बांध टूट गया। वह फूट-फूट कर रोने लगी।
  117. 4:37आसमान की ओर देखते हुए बोली,
  118. 4:38हे भगवान, मेरी आखिर क्या गलती है? अगर
  119. 4:42आपने मुझे ऐसा रंग रूप दिया है तो इसमें
  120. 4:43मेरा क्या दोष है? लोग मुझे मेरे दिल से
  121. 4:46नहीं मेरे चेहरे से क्यों तौलते हैं? जिस
  122. 4:48बात की मैं कभी गुनहगार ही नहीं थी, उसकी
  123. 4:51सजा मुझे क्यों मिल रही है, क्या इस
  124. 4:53दुनिया में मेरे लिए कहीं भी कोई जगह नहीं
  125. 4:55है।
  126. 4:56जहां [नाक से की जाने वाली आवाज़] मुझे
  127. 4:57सिर्फ इंसान समझकर अपनाया जाए।
  128. 4:59तेज धूप सिर पर चढ़ चुकी थी। टीना अब भी
  129. 5:02नदी किनारे बैठी थी। रोते-रोते उसकी आंखें
  130. 5:05सूझ गई थी।
  131. 5:06बेटी।
  132. 5:07तभी पीछे से किसी की आवाज आई।
  133. 5:10तुम यहां अकेली क्यों बैठी हो?
  134. 5:12सामने लगभग 60 साल की एक बुजुर्ग महिला
  135. 5:14खड़ी थी। चेहरे पर अपनापन था और हाथ में
  136. 5:17सब्जियों की टोकरी। टीना जल्दी से अपने
  137. 5:20आंसू पोंछते हुए बोली,
  138. 5:21कुछ नहीं अम्मा, बस ऐसे ही बैठी हूं।
  139. 5:24बुजुर्ग महिला समझ गई कि बात कुछ और है।
  140. 5:27वह उसके पास बैठ गई और प्यार से बोली,
  141. 5:29जो दर्द आंखें बता देती हैं, उन्हें
  142. 5:31छुपाया नहीं जा सकता। सच-सच बता क्या हुआ
  143. 5:35है?
  144. 5:35इतना सुनते ही टीना खुद को रोक नहीं पाई।
  145. 5:38वह फूट-फूट कर रोने लगी। कुछ देर [संगीत]
  146. 5:41बाद उसने अपने मां-बाप की मौत से लेकर भाई
  147. 5:44भाभी के तानों तक और आज घर से निकाले जाने
  148. 5:47तक की पूरी कहानी [संगीत] सुना दी। सब
  149. 5:49सुनकर बुजुर्ग महिला की आंखें भी नम हो
  150. 5:51गई। वह बोली,
  151. 5:53बेटी, इंसान की पहचान उसके चेहरे से नहीं,
  152. 5:56उसके संस्कारों से होती है। तेरे अपने ही
  153. 5:59तुझे समझ नहीं पाए। अगर तुझे कोई ऐतराज ना
  154. 6:02हो तो मेरे साथ चल। मेरा भी इस दुनिया में
  155. 6:04कोई अपना नहीं है। घर है लेकिन उसमें रहने
  156. 6:07वाला कोई नहीं। तू रहेगी तो मुझे भी सहारा
  157. 6:09मिल जाएगा।
  158. 6:10नहीं अम्मा मैं किसी पर बोझ नहीं बनना
  159. 6:13चाहती। बोझ वो होते हैं जो अपनों का साथ
  160. 6:16छोड़ देते हैं। तू नहीं। चल आज से उस घर
  161. 6:19में तू मेरी बेटी बनकर रहेगी।
  162. 6:21बुजुर्ग महिला उसे अपने साथ ले गई।
  163. 6:23आजा बेटी।
  164. 6:24घर पहुंचते ही बुजुर्ग महिला ने टीना से
  165. 6:26कहा,
  166. 6:27आजा बेटी पहले हाथ मुंह धो लें। सुबह से
  167. 6:30कुछ खाया भी नहीं होगा।
  168. 6:31टीना चुपचाप पानी से हाथ मुंह धोकर आंगन
  169. 6:34में बैठ गई। बुजुर्ग महिला ने चूल्हे पर
  170. 6:36गरम-गरम दाल, चावल और रोटी परोसी।
  171. 6:39कई दिनों बाद टीना ने पेट भरकर खाना खाया।
  172. 6:42खाते-खाते उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े।
  173. 6:45बुजुर्ग महिला ने प्यार से पूछा,
  174. 6:48क्या हुआ बेटी? खाना अच्छा नहीं लगा क्या?
  175. 6:51नहीं [नाक से की जाने वाली आवाज़] अम्मा
  176. 6:52खाना बहुत अच्छा है।
  177. 6:55बहुत दिनों बाद किसी ने इतने प्यार से
  178. 6:57खाना खिलाया है। आज से खुद को अकेला
  179. 6:59[संगीत] मत समझना। यह घर जितना मेरा है,
  180. 7:02उतना ही तुम्हारा भी है। उस रात टीना को
  181. 7:05कई दिनों बाद सुकून की नींद आई। अगली सुबह
  182. 7:08सूरज निकलते ही टीना उठी। उसने आंगन में
  183. 7:11झाड़ू लगाया, पानी भरा और घर के छोटे-मोटे
  184. 7:14काम निपटा दिए। बुजुर्ग महिला या यह सब
  185. 7:16देखकर मुस्कुरा रही थी। थोड़ी देर बाद
  186. 7:19टीना बोली, अम्मा मैं घर में खाली नहीं
  187. 7:22बैठ सकती। मैं भी कोई काम करना चाहती हूं।
  188. 7:25नहीं बेटी अभी तू आराम कर। इतनी तकलीफ
  189. 7:28झेली।
  190. 7:29इतनी तकलीफ झेली है। टीना ने विनम्रता से
  191. 7:31कहा। आराम तो बहुत कर लिया अम्मा। अब अपने
  192. 7:35पैरों पर खड़ा होना चाहती हूं। किसी पर
  193. 7:37बोझ बनकर नहीं रहना चाहती। दोनों इसी बारे
  194. 7:41में बात कर ही रही थी कि अचानक टीना की
  195. 7:43नजर घर के पीछे पड़ी। वहां का नजारा देखकर
  196. 7:46वह हैरान रह गई। बुजुर्ग महिला के छोटे से
  197. 7:49घर के पीछे थोड़ी सी जमीन थी। उस जमीन पर
  198. 7:52बनी बांस की मचान पर हरे-हरे करेलों की
  199. 7:55बेलें इतनी फैल चुकी थी कि छप्पर की छत तक
  200. 7:58ढक गई थी। मोटे-मोटे ताजे करेले गुच्छों
  201. 8:01में लटक रहे थे। इतने करेले थे कि तोड़ने
  202. 8:04वाला कोई नहीं था। टीना ने हैरानी से
  203. 8:06पूछा।
  204. 8:07अम्मा इतने सारे करेले?
  205. 8:09हां बेटी। हर साल बेल खूब फल देती है। मैं
  206. 8:13इतने करेले खा भी नहीं पाती। कुछ
  207. 8:15पड़ोसियों
  208. 8:16कुछ पड़ोसियों को बांट देती हूं और बाकी
  209. 8:18ऐसे ही खराब हो जाते हैं। टीना कुछ देर
  210. 8:20सोचती रही। फिर उसके चेहरे पर हल्की सी
  211. 8:23मुस्कान।
  212. 8:23अम्मा अगर आप कहें तो इन्हीं करेलों से
  213. 8:26कुछ नया बनाकर बेचते हैं। शायद भगवान ने
  214. 8:29हमारे लिए यही रास्ता रखा है।
  215. 8:31क्या बनाओगी बेटी? करेला बिरयानी। ऐसा
  216. 8:35[संगीत] स्वाद बनाऊंगी कि जो एक बार खाएगा
  217. 8:38बार-बार खाने आएगा।
  218. 8:40अगर तुझे अपने हाथों पर भरोसा है तो मुझे
  219. 8:43भी तुझ पर पूरा भरोसा है। कल से हम दोनों
  220. 8:45मिलकर शुरुआत करेंगे।
  221. 8:47अगली सुबह टीना और अम्मा बहुत जल्दी उठ
  222. 8:49गई। दोनों ने मिलकर ताजे करेले तोड़े। टीना
  223. 8:52ने बड़े ध्यान से करेलों को धोया।
  224. 8:54पतले-पतले टुकड़ों में काटा और नमक लगाकर
  225. 8:57कुछ देर रखा ताकि उनकी कड़वाहट कम हो जाए।
  226. 9:01फिर उसने चूल्हे पर मसाले भुने, चावल पकाए
  227. 9:04और अपने हाथों से एक अलग तरह की करेला
  228. 9:06बिरयानी तैयार की। जब बिरयानी की खुशबू
  229. 9:09पूरे आंगन में फैली तो अम्मा भी हैरान रह
  230. 9:11गई। उन्होंने एक और चखते ही कहा, "अरे
  231. 9:14बेटी, मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि
  232. 9:16करेले से इतनी स्वादिष्ट बिरयानी बन सकती
  233. 9:19है।" टीना हल्का सा मुस्कुराई। उसने
  234. 9:22पुराने बर्तन साफ किए। बिरयानी को एक बड़े
  235. 9:24भगोने में भरा। अम्मा के साथ गांव के चौक
  236. 9:27की ओर चल पड़ी। शुरू में लोग नाम सुनकर ही
  237. 9:30हंस रहे।
  238. 9:30करेला बिरयानी।
  239. 9:31क्या करेले की भी बिरयानी होती है? यह
  240. 9:34लड़की कैसी अजीब चीज बेच रही है?
  241. 9:36[हंसी]
  242. 9:37करेला बिरयानी। अरे भाई करेले की भी कोई
  243. 9:40बिरयानी होती है क्या? टीना ने किसी की
  244. 9:42बात का बुरा नहीं माना। उसने विनम्रता से
  245. 9:45कहा, एक बार चख कर देख लीजिए। पसंद ना आए
  246. 9:49तो पैसे मत दीजिएगा।
  247. 9:51एक बूढ़े किसान ने उत्सुकता में थोड़ी सी
  248. 9:54बिरयानी चखी। जैसे ही उसने पहला कौर खाया,
  249. 9:57उसकी आंखें फैल गई। अरे वाह, यह तो कमाल
  250. 10:00का स्वाद है। करेले की कड़वाहट तो बिल्कुल
  251. 10:03महसूस ही नहीं हो रही। उस किसान ने तुरंत
  252. 10:06एक प्लेट और खरीद लिया। उसे खाते देख
  253. 10:09दूसरे लोग भी रुकने लगे। थोड़ी ही देर में
  254. 10:12टीना के भगोने के पास भीड़ लग गई। मेरे
  255. 10:15लिए भी देना। देखते ही देखते दोपहर तक
  256. 10:17सारी बिरयानी बिक गई। टीना ने जब कमाई
  257. 10:20गिनी उसकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए।
  258. 10:23उसने कभी एक दिन में इतने पैसे नहीं देखे
  259. 10:25थे। [हंसी]
  260. 10:27घर लौटते समय उसने सबसे पहले अम्मा के लिए
  261. 10:29दवा खरीदी। फिर घर का राशन और थोड़ी सी
  262. 10:32मिठाई भी ले ली। अम्मा ने मिठाई देखकर
  263. 10:35पूछा। टीना मुस्कुरा कर बोली, आज हमने
  264. 10:38अपनी मेहनत की पहली कमाई की है। अम्मा की
  265. 10:41आंखें भर आई। उन्होंने टीना को गले लगाते
  266. 10:44हुए कहा, जिसे लोग बोझ समझकर घर से निकाल
  267. 10:46देते हैं, वही लड़की आज अपने पैरों पर
  268. 10:49खड़ी हो रही है। भगवान तुझे बहुत खुश रखे
  269. 10:52बेटी। उस दिन के बाद टीना रोज करेले की
  270. 10:54बिरयानी बनाने लगी। धीरे-धीरे उसकी
  271. 10:57बिरयानी पूरे गांव में मशहूर हो गई। लोग
  272. 11:00दूर-दूर से सिर्फ टीना की करेला बिरयानी
  273. 11:02खाने आने लगे। अब उसकी जिंदगी में पहली
  274. 11:05बार उम्मीद की रोशनी दिखाई देने लगी थी।
  275. 11:08कुछ ही दिनों में टीना की करेला बिरयानी
  276. 11:10पूरे गांव में मशहूर हो गई। अब सुबह होते
  277. 11:13ही टीना और अम्मा दोनों मिलकर ताजे करेले
  278. 11:15तोड़ती। टीना बड़े प्यार से बिरयानी बनाती
  279. 11:18और दोनों गांव के चौक पर अपनी छोटी सी
  280. 11:20दुकान लगा देती। धीरे-धीरे कमाई भी अच्छी
  281. 11:23होने लगी। एक दिन दोपहर के समय एक युवक
  282. 11:25बाइक से गांव पहुंचा। उसका नाम अर्जुन था।
  283. 11:28वह किसी काम से शहर से लौट रहा था। गांव
  284. 11:32के चौक पर अचानक उसकी नजर एक छोटी सी
  285. 11:34दुकान पर पड़ी जहां बड़े अक्षरों में लिखा
  286. 11:37था टीना की स्पेशल करेला बिरयानी। अर्जुन
  287. 11:41हैरानी से मुस्कुराया।
  288. 11:43अरे
  289. 11:44करेला और बिरयानी करेले की बिरयानी भी
  290. 11:47बनती है। ऐसा भी होता है क्या?
  291. 11:49जिज्ञासा में उसने अपनी बाइक रोकी और
  292. 11:51दुकान के पास चला आया। टीना मुस्कुरा कर
  293. 11:53बोली एक बार चक्कर देखिए। पसंद ना आए तो
  294. 11:57पैसे मत दीजिएगा। अर्जुन ने एक प्लेट
  295. 11:59मंगाई। पहला कौर खाते ही उसकी आंखें फैल
  296. 12:02गई।
  297. 12:02यह तो सच में कमाल की बिरयानी है। मैंने
  298. 12:05आज तक ऐसी बिरयानी कभी नहीं खाई।
  299. 12:08उसने पूरी प्लेट खत्म कर दी। पैसे देते
  300. 12:11समय उसकी नजर पहली बार टीना पर गई। सांवला
  301. 12:14चेहरा, साधारण सलवार कमीज, बिना किसी
  302. 12:18बनावटीपन के मासूम मुस्कान और आंखों में
  303. 12:21सादगी। टीना दिखने में भले ही बहुत सुंदर
  304. 12:24नहीं थी लेकिन उसके चेहरे पर मेहनत,
  305. 12:27ईमानदारी और आत्मसम्मान साफ दिखाई देता
  306. 12:30था। अर्जुन बिना कुछ कहे वहां से चला गया।
  307. 12:34लेकिन उस दिन के बाद वह लगभग रोज शहर से
  308. 12:36बाइक चलाकर [संगीत] गांव आने लगा। कभी
  309. 12:38बिरयानी खाने के बहाने, कभी अम्मा का हाल
  310. 12:41पूछने के बहाने, धीरे-धीरे उसकी और टीना
  311. 12:44की बातें होने लगी। अर्जुन को टीना का
  312. 12:47स्वभाव बहुत पसंद आने लगा। उसे महसूस हुआ
  313. 12:50कि असली खूबसूरती चेहरे में नहीं इंसान के
  314. 12:53दिल और व्यवहार में होती है। एक दिन दुकान
  315. 12:56बंद होने के बाद अर्जुन ने हिम्मत जुटाकर
  316. 12:58कहा
  317. 13:00टीना मुझे तुमसे एक बात कहनी है।
  318. 13:02जी कहिए।
  319. 13:03मैं तुम्हें दिल से पसंद करने लगा हूं।
  320. 13:05हम
  321. 13:05अगर तुम्हें कोई आपत्ति ना हो तो मैं
  322. 13:07तुमसे शादी करना चाहता हूं।
  323. 13:09यह सुनकर टीना एकदम चुप हो गई। कुछ पल बाद
  324. 13:12उसकी आंखें भर आई। वह धीमी आवाज में बोली
  325. 13:16ऐसा मत कहिए। आप नहीं जानते मेरे साथ
  326. 13:18क्या-क्या हुआ है। बचपन से लेकर आज तक
  327. 13:21मुझे मेरे रंग रूप की वजह से हर किसी ने
  328. 13:23ठुकराया है।
  329. 13:24पता नहीं कितने लोग मुझे देखने आए लेकिन
  330. 13:27हर बार यही कह कर चले गए [संगीत] कि लड़की
  331. 13:29सुंदर नहीं है। मेरी अपनी भाभी ने भी मुझे
  332. 13:32बोझ कहकर घर से निकाल दिया था। [संगीत]
  333. 13:34टीना ने सिर झुका लिया।
  334. 13:35आज आपको मैं अच्छी लग रही हूं। लेकिन कुछ
  335. 13:38दिनों बाद आप भी मुझे छोड़ देंगे। इसलिए
  336. 13:41मुझसे शादी की बात मत कीजिए। टीना मैंने
  337. 13:44तुम्हें तुम्हारे चेहरे से नहीं तुमसे
  338. 13:46प्यार किया है।
  339. 13:47मैंने तुम्हें तुम्हारे चेहरे के लिए नहीं
  340. 13:49तुम्हारे दिल के लिए पसंद किया है।
  341. 13:51जिसने अपमान सहकर भी मेहनत चुनी जो अम्मा
  342. 13:54का सम्मान करती है जो सबका दिल जीत सकती
  343. 13:56है उससे बेहतर जीवन साथी मुझे कहीं नहीं
  344. 13:59मिलेगा।
  345. 13:59फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा
  346. 14:00चेहरे की सुंदरता समय के साथ बदल जाती है।
  347. 14:03लेकिन अच्छे संस्कार [संगीत] और सच्चा दिल
  348. 14:05कभी बूढ़ा नहीं होता।
  349. 14:06टीना की आंखों से आंसू बहने लगे। इस बार
  350. 14:09यह आंसू दर्द के नहीं अपनापन मिलने के थे।
  351. 14:13उसने पहली बार मुस्कुराकर अर्जुन की तरफ
  352. 14:15देखा और धीरे से बोली, "अगर आपको सच में
  353. 14:17मुझ पर इतना भरोसा है, तो मुझे भी आपकी
  354. 14:20बात मंजूर है।" यह सुनते ही अम्मा की
  355. 14:23आंखें खुशी से भर आई। कुछ ही दिनों बाद
  356. 14:26पूरे गांव की मौजूदगी में, टीना और अर्जुन
  357. 14:29की सादगी भरी शादी हो गई। अर्जुन शादी के
  358. 14:32बाद टीना को अपने साथ शहर ले जाने लगा।
  359. 14:34मैं अम्मा को अकेला छोड़कर कहीं नहीं
  360. 14:36जाऊंगी। तो फिर अम्मा भी हमारे साथ
  361. 14:38रहेंगी। आज से वह सिर्फ आपकी नहीं मेरी भी
  362. 14:40मां है।
  363. 14:41कुछ महीनों बाद अर्जुन ने गांव में ही
  364. 14:43टीना के नाम से एक बड़ा रेस्टोरेंट खुलवा
  365. 14:45दिया।
  366. 14:46जहां टीना की स्पेशल करेला बिरयानी सबसे
  367. 14:49मशहूर व्यंजन बन गई।
  368. 14:50जीती रहो बेटी।
  369. 14:52वही लोग जो कभी टीना के रंग रूप का मजाक
  370. 14:54उड़ाते थे। आज उसकी मेहनत और सफलता की
  371. 14:57तारीफ करते नहीं थकते थे। उधर उसकी भाभी
  372. 15:00राखी को भी अपनी गलती का एहसास हुआ। लेकिन
  373. 15:03तब तक बहुत देर हो चुकी थी। टीना ने किसी
  374. 15:06से बदला नहीं लिया। उसने सिर्फ इतना कहा
  375. 15:09इंसान की कीमत उसके चेहरे से नहीं
  376. 15:12उसके कर्मों से होती है।
  377. 15:15उसके चरित्र [संगीत] और मेहनत से होती है।
  378. 15:17इसके बाद टीना, अर्जुन और अम्मा तीनों एक
  379. 15:20परिवार की तरह प्यार और सम्मान से रहने
  380. 15:23लगे। गांव के लोग भी उनकी मिसाल देने लगे
  381. 15:25कि सच्ची खूबसूरती चेहरे में नहीं बल्कि
  382. 15:28इंसान के दिल, मेहनत और व्यवहार में होती
  383. 15:30है।

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This page contains the full transcript of अनाथ लड़की की करैला बिरयानी | बदसूरत समझकर भाभी ने घर से निकाल दिया,करेला बिरयानी ने ज़िंदगी बना दी। by Pikku ki Duniya, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 2,802 words across 383 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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