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301 Days in Antarctica: The Untold Survival Story — Transcript

by Rejuvenate things · 3,000 words · 370 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:047 फरवरी 1983
  2. 0:07अंटार्कटिका का दिल चीरते हुए एक विशाल
  3. 0:10रूसी रिसर्च वेसल पोलारिस डॉन बर्फीले
  4. 0:13पानी में धीरे-धीरे रास्ता बनाता हुआ आगे
  5. 0:17बढ़ रहा था। चारों तरफ पस बर्फ थी। आकाश
  6. 0:20बादलों से ढका हुआ था और दूरियां कहीं
  7. 0:22दिखाई नहीं देती थी। जहाज पर सवार थे 13
  8. 0:25वैज्ञानिक दुनिया के चुने हुए बेहतरीन
  9. 0:28दिमाग। उनके साथ थे दो वफादार शेफर्ड
  10. 0:31डॉग्स, आर्कटिक और लूना। पास था बस एक
  11. 0:34महीने का राशन और अनगिनत सवाल जिनका जवाब
  12. 0:36उन्हें यहां की बर्फ में खोजना था। यह कोई
  13. 0:39साधारण अभियान नहीं था। यह मिशन था उस
  14. 0:42हिस्से तक पहुंचने का। उस बर्फीली जमीन तक
  15. 0:45जिसे अब तक किसी इंसान ने छुआ ही नहीं था।
  16. 0:48हर चेहरे पर आत्मविश्वास था। हर आंखों में
  17. 0:51इतिहास लिखने का सपना। सोचिए दोस्तों, ऐसी
  18. 0:54जगहों पर पहला इंसान होने का गर्व, यह
  19. 0:57एहसास ही किसी को हमेशा के लिए अमर कर
  20. 1:00देता है। जहाज पर माहौल पहले कुछ दिनों तक
  21. 1:03शांत था। कोई अपने कैबिन में मैप्स देख
  22. 1:05रहा था और कैलकुलेशंस बना रहा था। कोई
  23. 1:07समुद्री बर्फ के सैंपल टेस्ट कर रहा था,
  24. 1:10तो कोई बस सीट पर टिक कर डायरी लिख रहा
  25. 1:13था। कप्तान नतालिया वोको ब्रिज पर थी।
  26. 1:16उनका अंदाज कठोर था लेकिन दिल से वह अपनी
  27. 1:19टीम की हर धड़कन को महसूस करती थी। वह
  28. 1:23जानती थी कि इस यात्रा में उनका हर फैसला
  29. 1:26किस कदर कीमती है। युवा वैज्ञानिक लनित
  30. 1:29जहाज का सबसे उत्साही सदस्य था। उसके
  31. 1:32चेहरे पर ना खत्म होने वाली जिज्ञासा थी।
  32. 1:35कैप्टन जरा सोचिए अगर हम उन प्राचीन
  33. 1:39ग्लेशियर के नीचे जीवन रूपों को ढूंढ पाए
  34. 1:42तो इतिहास की किताबों में हमारा नाम हमेशा
  35. 1:46रहेगा। प्रोफेसर ग्रेगोरी जो सबसे
  36. 1:48उम्रदराज थे हल्की मुस्कान से बोले
  37. 1:51हिस्ट्री सिर्फ जीतने वालों को याद रखती
  38. 1:53है बेटे लेकिन यहां जो सफर है यह मेरे लिए
  39. 1:56साइंस से ज्यादा सर्वाइवल का टेस्ट है। यह
  40. 1:59बात धीरे-धीरे सच होती हुई लगने लगी।
  41. 2:02पांचवा दिन दोपहर के ठीक 2:00 बज चुके थे।
  42. 2:06अधिकांश लोग अपने कैबिन में आराम फरमा रहे
  43. 2:09थे। बाहर का मौसम हल्की ठंडक ले हुए लेकिन
  44. 2:12पूरी तरह शांत नजर आ रहा था। ब्रिज पर
  45. 2:15खड़ी कैप्टन नतालिया घंटों से नजरें जमाए
  46. 2:19खड़ी थी। उनकी आईलिड्स भारी हो रही थी।
  47. 2:21उन्होंने सोचा बस एक झपकी एक पल के लिए और
  48. 2:26उसी पल धम एक जोरदार झटका लगा। ऐसा झटका
  49. 2:30जैसे पूरा जहाज किसी दानवी हाथ ने पकड़ कर
  50. 2:32खींच लिया हो। कंपन, चीख और हड़कंप। सारे
  51. 2:36साइंटिस्ट कैबिन से बाहर भागे। क्या हुआ?
  52. 2:40अर्थक्वेक क्या हमने आइसबर्ग को टक्कर मार
  53. 2:42दी? कप्तान ने तुरंत आदेश दिया। इंजन फुल
  54. 2:46अहेड रिवर्स। कोशिश करो। लेकिन हैरानी की
  55. 2:50बात यह थी जहाज जरा भी हिल नहीं रहा था।
  56. 2:53मानो किसी छुपी हुई शक्ति ने उसे जकड़
  57. 2:55लिया हो। टीम ने तुरंत अपने सदस्यों को
  58. 2:58बाहर जांच के लिए भेज दिया। साइंटिस्ट
  59. 3:01एंड्री फ्लैश लाइट लेकर बर्फ पर आगे बढ़ा।
  60. 3:04उसकी सांस उसकी आंखों पर जम रही थी। उसने
  61. 3:07चारों तरफ देखा और होश उड़ गए। जहाज
  62. 3:10पोलारिस टॉन दो विशाल ग्लेशियरों के बीच
  63. 3:13सैंडविच की तरह फंसा था। इससे निकलना
  64. 3:15इंसानी ताकत से नामुमकिन था। हम फंस गए
  65. 3:19हैं। अंड्रे की कांपती आवाज रेडियो पर
  66. 3:22गूंजी। पूरा जहाज सन्नाटे में डूब गया। अब
  67. 3:25एक ही उम्मीद थी रेडियो उन्होंने तुरंत
  68. 3:27पावरफुल ट्रांसमीटर ऑन किया और हेल्प कॉल
  69. 3:30भेजी मैडे मै
  70. 3:33दिस इज रिसर्च वेसल पोलारिस डॉन वेयर
  71. 3:36ट्रैप्ड इन द आइस रिक्वेस्टिंग इमीडिएट
  72. 3:38असिस्टेंस लेकिन दूसरी ओर से सिर्फ
  73. 3:42साइलेंस कुल मिलाकर टेक्नोलॉजी उस समय
  74. 3:45इतनी एडवांस नहीं थी उन्होंने सोचा शायद
  75. 3:48सिग्नल में दिक्कत हो लेकिन असली खतरा
  76. 3:51टेक्नोलॉजी नहीं था असल खतरा था मौसम सब
  77. 3:54दोस्तों अंटार्कटिका का मौसम वो दुश्मन है
  78. 3:58जिसका कोई चेहरा नहीं होता जिस पर कंट्रोल
  79. 4:01नाम की कोई चीज नहीं। शाम ढलते ही आसमान
  80. 4:04का रंग बदलने लगा। सूरज थोड़ी देर पहले तक
  81. 4:07बर्फ पर चमक रहा था अब कहीं गुम हो गया और
  82. 4:11अचानक बाहर हवाएं 300 कि.मी. प्रति घंटे
  83. 4:15की रफ्तार से चीखने लगी। एक स्नोस्टॉर्म
  84. 4:18जिसने पूरे जहाज को अपने शिकंजे में ले
  85. 4:20लिया। कप्तान चिल्लाई। सब लोग जहाज के
  86. 4:23अंदर रहो, डोर्स लॉक करो। टीम के लोग
  87. 4:25केबिन्स में दुबक गए और अगले तीन दिन जहाज
  88. 4:29मौत और जिंदगी के बीच कैद रहा। सोचिए
  89. 4:33दोस्तों, बाहर तूफान जहाज को नोच रहा था।
  90. 4:37उसकी दीवारें कांप रही थी। आवाजें ऐसी आ
  91. 4:40रही थी जैसे कोई दरिंदे ने उसे चबाना शुरू
  92. 4:42कर दिया हो। अंदर लोग एक दूसरे की सांसे
  93. 4:45सुन सकते थे। दिल की धड़कनें गिन सकते थे।
  94. 4:48कोई नहीं जानता था अगला पल उनका आखिरी है
  95. 4:50या नहीं। हर मिनट एक सदियों जैसा भारी। जब
  96. 4:54आखिरकार तूफान थमा वो धीरे-धीरे बाहर
  97. 4:57निकले और जो नजारा उनकी आंखों के सामने
  98. 5:00आया वो अनबिलीवेबल भी था और डरावना भी। हर
  99. 5:04तरफ बस सफेद चादर, अनंत होराइजन। इतना
  100. 5:07शांत जैसे पूरी धरती एक कब्रिस्तान बन गई
  101. 5:10हो। लेकिन इस साइलेंस के बीच सबसे खतरनाक
  102. 5:13चीज थी होपलेसनेस। उन्होंने फिर रेडियो
  103. 5:16ट्राई किया। लेकिन फिर वही साइलेंस, वही
  104. 5:19खामोशी, दिन बीते। 10 दिन, 15 दिन और एक
  105. 5:24भयानक हादसा साइंटिस्ट पैथ्रोफ इंजन कैबिन
  106. 5:27में गया था। उसने सोचा शायद इंजन को
  107. 5:29दोबारा स्टार्ट करके जहाज को बाहर निकाला
  108. 5:32जा सके। उसने जोर लगाया, स्पार्क उठा और
  109. 5:35अचानक जहाज के कमजोर हिस्से में आग लग गई।
  110. 5:39फायर, फायर। पल भर में आग पागलपन की तरह
  111. 5:42फैल गई। टीम दौड़ी पर तब तक बहुत देर हो
  112. 5:45चुकी थी। एक मैसिव धमाका हुआ और पोलारिस
  113. 5:48डॉन दो हिस्सों में टूट गया। भारी आयरन
  114. 5:51प्लेट्स क्रैक करती आवाज के साथ बर्फीले
  115. 5:54समंदर में समा गई। टीम के 12 लोग जैसे
  116. 5:57तैसे बर्फ पर कूद कर बाहर निकले। लेकिन
  117. 6:00साइंटिस्ट बोरिस वहीं फंस गया। उसका चीखना
  118. 6:03सुना सबने लेकिन कोई मदद नहीं कर पाया। वो
  119. 6:06आग और बर्फीले पानी में सदा के लिए गायब
  120. 6:09हो गया। अब उनकी आंखों के सामने सिर्फ दो
  121. 6:12विकल्प थे। या तो मदद का इंतजार करें या
  122. 6:15फिर 200 किलोमीटर दूर मौजूद दूसरे रिसर्च
  123. 6:18बेस तक पैदल निकलें। बुजुर्ग प्रोफेसर
  124. 6:21ग्रेगोरी बोले यह खुदकुशी होगी। बर्फीले
  125. 6:24रेगिस्तान में पैदल चलना मतलब मौत को
  126. 6:27न्योता। लेकिन लनद ने जोर देकर कहा कम से
  127. 6:30कम कोशिश तो करनी चाहिए। यहां बैठे रहना
  128. 6:33तो धीरे-धीरे मरने जैसा है। टीम बट गई।
  129. 6:36कप्तान नतालिया शांत खड़ी थी। फिर
  130. 6:38उन्होंने कहा हमारे पास लिमिटेड रिसोर्सेज
  131. 6:41हैं। इंतजार करेंगे। शायद हमारा मैसेज देर
  132. 6:44से पहुंचे। कोई जरूर आएगा। उन्होंने फिर
  133. 6:47से इंतजार चुना लेकिन फूड बहुत कम बचा था।
  134. 6:50भूख डर और ठंड सब मिलकर हर किसी के नर्व्स
  135. 6:54तोड़ रहे थे। दिन बीते डे 20। अब मदद की
  136. 6:58उम्मीद पूरी तरह टूटी जा रही थी। खाना
  137. 7:01लगभग खत्म। नतालिया ने आखिरकार कठोर फैसला
  138. 7:04लिया। अब और नहीं। जितना है पैक करो। हम
  139. 7:07पैदल निकल रहे हैं। कदम बढ़ाए थे वह एक
  140. 7:10सुनसान सफेद रेगिस्तान में जहां चारों तरफ
  141. 7:13बर्फ का सन्नाटा था और हर सांस फपफकती हुई
  142. 7:16ठंडी हवा लेती। हर खिंचाव हर चलने की
  143. 7:19कोशिश मौत के खिलाफ जंग थी। उनके पास बचा
  144. 7:23हुआ सामान कंधों पर लादकर दो वफादार
  145. 7:26शेफर्ड डॉग्स आर्कटिक और लूना धीमी चाल से
  146. 7:30उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे।
  147. 7:33शुरुआत में उन्हें लगता था कि वह कुछ दूर
  148. 7:35तक चलकर तुरंत रिसर्च बेस तक पहुंच
  149. 7:38जाएंगे। लेकिन अंटार्कटिका का तापमान
  150. 7:41दिन-बदिन घटता ही जा रहा था। हवाएं इतनी
  151. 7:44तेज हो रही थी कि चलता जाना एक दुआ मांगने
  152. 7:48जैसा बन गया था। यदि हम अटक गए तो मरना तो
  153. 7:51निश्चित है। हवाओं की गरज में लनद ने
  154. 7:54घबराते हुए कहा कप्तान नतालिया ने हौसला
  155. 7:57बढ़ाते हुए जवाब दिया भूख हमें तोड़ सकती
  156. 8:00है लेकिन उम्मीद हमें जिंदा रखेगी। दिन
  157. 8:03बीतते गए और भूख ने उनके शरीर को भीतर से
  158. 8:07खोखला कर डाला। राशन खत्म हो चुका था। अब
  159. 8:10शिकार ही उनकी जिंदगी बचा सकता था। पर हवा
  160. 8:13की ठंडक और चमकदार बर्फ के साम्राज्य में
  161. 8:17जानवरों का मिलना इतना आसान नहीं था।
  162. 8:20वीरानी में ऐसा लगता था जैसे वह अकेले इस
  163. 8:22भयावह सफेद मरुस्थल में फंसे हैं। लूना
  164. 8:26कमजोर पड़ चुकी धीरे से उनके पैरों के पास
  165. 8:29बैठती मानो कह रही हो थोड़ा और सहो। खाना
  166. 8:33ढूंढने की कोशिश में वे कई बार सील्स और
  167. 8:35फिश को शिकार करने गए। पर प्राकृति की यह
  168. 8:38आवाज आई उनके लिए पहाड़ जैसी चुनौतियां
  169. 8:41थी। कई बार यानी वे सफल हुए तो कई बार वे
  170. 8:44भूखे प्यासे खाली हाथ लौटे। उनके शरीर
  171. 8:47कमजोर होते गए और मनोबल गिरता गया।
  172. 8:50छोटी-छोटी बातों पर छिड़ने वाले झगड़े आम
  173. 8:53हो गए। भूख, ठंड और अनिश्चितता मिलकर
  174. 8:56कुल्हाड़ी चला रही थी। प्रिय दोस्तों,
  175. 8:59सोचिए, यह मानसिक कारण भी उतने ही खतरनाक
  176. 9:02थे जितना बाहर का ठंडा, तूफान। कभी-कभी
  177. 9:05जीवन नहीं टिकता तब तक जब तक दिमाग टूटता
  178. 9:08है। हर छोटी बहस उनकी दोस्ती, इंसानियत और
  179. 9:12टीम में सामंजस्य को चुनौती देती थी।
  180. 9:1528वें दिन, एक बड़ी चोट लगी जब आर्कटिक
  181. 9:18पहले से कमजोर कुत्ता चल बसा। उन्होंने
  182. 9:21माना कि वह सिर्फ जानवर नहीं था। वो एक
  183. 9:24परिवार का सदस्य था, जो उन्होंने ठंडी
  184. 9:27हवाओं और मौत की लड़ाईयों में अपनाया था।
  185. 9:29कुछ सदस्यों ने डरे हुए मन से कहा, क्या
  186. 9:32हम इसे खा लें जिंदा रहने के लिए? पर बाकी
  187. 9:36ने गरज के साथ इंकार किया। उन्होंने फैसला
  188. 9:38किया कि इंसानियत भूख से पड़ी होनी चाहिए।
  189. 9:42उन्होंने आर्कटिक को बर्फ में दफनाया और
  190. 9:44उसका ऊपर एक पत्थर रखा उसकी याद में।
  191. 9:47काटता हुआ दर्द था यह। भूख के बीच
  192. 9:50इंसानियत के अंतिम काबू की लड़ाई। लेकिन
  193. 9:53यह लड़ाई आसान नहीं थी। 35वें दिन उनकी
  194. 9:57पहली इंसानी मौत हुई। बायोलॉजिस्ट इवान जो
  195. 10:01फ्रॉस्ट बाइट से जूझ रहा था, उसकी ठंडी
  196. 10:03हथेलियों ने दुनिया को छोड़ दिया। आंखों
  197. 10:06के सामने टूटता हुआ पहला गहरा सूनापन।
  198. 10:10उनकी मृत्यु ने उस सन्नाटे पर ठंड की एक
  199. 10:12और परत चढ़ा दी। एक उम्मीद जो अब सिर्फ
  200. 10:16याद बनकर रह गई। पर उसी अंधेरे में एक आशा
  201. 10:19की किरण झलक गई। लनद और नतालिया ने मिलकर
  202. 10:22एक सील का शिकार कर लिया। अब उनके पास
  203. 10:25पूरे 10 दिनों का भोजन सुरक्षित हो गया।
  204. 10:28यह एक छोटी सी जीत थी। मानो मौत पर एक
  205. 10:31वार। थकी हुई जिंदगियों में यह उम्मीद की
  206. 10:34हल्की किरण थी। लेकिन असली जंग अभी बाकी
  207. 10:37थी। दिन बीतते गए। भूख के अलावा अब उनका
  208. 10:41दिमाग भी टूटने लगा था। छोटी-छोटी बातों
  209. 10:44पर बड़ी-बड़ी लड़ाईयां शुरू हुई। एक दिन
  210. 10:47दूर बर्फ पर एक रोशनी मिली। जैसे कोई जहाज
  211. 10:50हो। उनके थके हुए दिलों ने चिल्ला
  212. 10:53चिल्लाकर खुशी से स्वागत किया। लेकिन वो
  213. 10:55खुशियां थोड़ी ही देर टिक सकी क्योंकि वह
  214. 10:58सिर्फ बर्फ पर चमकीली रोशनी का धोखा था।
  215. 11:01एक हलसिनेशन उनके टूटते मस्तिष्क की पहली
  216. 11:05गलती और फिर एक तेज तूफान ने उनका एक टेंट
  217. 11:08फाड़ दिया और कुछ जरूरी दवाइयां उड़ गई।
  218. 11:11भीतर डर था बाहर मौत। 120वें दिन प्रोफेसर
  219. 11:15ग्रगोरी ने बर्फ की एक पतली परत पर गलती
  220. 11:18से पैर रखा। वह अचानक सेकंडों में बर्फीले
  221. 11:22पानी में समा गए। उनके साथ का सबसे बड़ा
  222. 11:24धक्का था यह। अब टीम में मौजूद सबको लगा
  223. 11:27कि इंसानियत और भूख की लड़ाई एकदम चरम पर
  224. 11:31पहुंच गई है। क्या वे अपने मर चुके साथी
  225. 11:33का मांस खाएंगे? यह सवाल उनकी इंसानियत के
  226. 11:36लिए एक बड़ा हमला था। लेकिन उन्होंने था
  227. 11:39ना वे मर जाएंगे पर हैवान नहीं बनेंगे।
  228. 11:42130वें दिन एक हल्की खुशी आई जब उन्होंने
  229. 11:4612 हिरणों का झुंड देखा। उन्होंने जाल
  230. 11:49बिछाया पर भूखे और कमजोर शरीर के साथ तेज
  231. 11:52जानवरों को पकड़ना नामुमकिन था। कैप्टन
  232. 11:56नतालिया ने खुद भी एक हिरण पकड़ने की
  233. 11:58कोशिश की लेकिन गिरकर चोटिल हो गई पर वे
  234. 12:01सफल नहीं हो पाई। रास्ते में वे एक पुराने
  235. 12:05टूटे हुए विमान के मलबे से भी गुजरे जहां
  236. 12:08कोई नहीं था। खाली धातु का ढेर। पर तभी
  237. 12:11उनका सामना हुआ अंटार्कटिका के असली राजा
  238. 12:14से। एक विशाल पोलर बेयर जो नरभक्षी की तरह
  239. 12:17उनसे भिड़ गया। लूना ने अपनी जान की परवाह
  240. 12:20किए बिना उस भालू पर टूट पड़ी। टीम ने भी
  241. 12:23हिम्मत दिखाई। इतना कि फ्लेयर गन से भालू
  242. 12:25को डराकर भागना पड़ा। लेकिन इस लड़ाई में
  243. 12:28लूना को हमेशा के लिए खो दिया। भालू ने एक
  244. 12:31सदस्य पावेल को भी घायल कर दिया। जिसने
  245. 12:34बाद में इनफेक्शन की वजह से जान गवा दी।
  246. 12:37अब उनके पास जान बचाने का आखिरी तरीका था
  247. 12:40लूना का शरीर। भारी मन से आंसुओं के बीच
  248. 12:44उन्होंने अपने उस प्यारे साथी को खाकर
  249. 12:47जिंदगी बचाई। मौतों के आगे अब उनकी
  250. 12:50भावनाएं मर चुकी थी। हर मरने पर पहले जैसा
  251. 12:53दुख नहीं होता था। बस डर था। अगला नंबर
  252. 12:56किसका और फिर वो दिन आ गया जिसको लेकर वो
  253. 12:59सबसे ज्यादा डरे हुए थे। 6 महीने की लंबी
  254. 13:03रात। अब उनके सामने बर्फ के अंधेरे बन थे।
  255. 13:06रात के सिर्फ 6 महीने होंगे। रूह कपा देने
  256. 13:09वाला अंधेरा, अंधकार और भी सघन हो गया और
  257. 13:12वे मार्ग भटक गए। मैप्स के मुताबिक मंजिल
  258. 13:15करीब थी, लेकिन असल में वे उससे बहुत दूर
  259. 13:18जा चुके थे। एक ही रात में दो और सदस्यों
  260. 13:21की मौत हो गई। उनके शरीर थक चुके थे, हारे
  261. 13:25हुए थे। यह टीम अब सिर्फ सात मेंबर्स की
  262. 13:28रह गई थी। यह सब देखकर कैप्टन नतालिया का
  263. 13:31भी सोचने समझने का तरीका बदलने लगा।
  264. 13:34शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से वह
  265. 13:36बीमार पड़ गई। उनका नेतृत्व कमजोर पड़ने
  266. 13:39लगा। एक त्यौहार रात मानसिक रूप से संतुलन
  267. 13:43खो चुकी एलेना अपने टेंट से बाहर निकली और
  268. 13:46उस तूफान में खो गई। काफी दिनों बाद उनकी
  269. 13:49जमी हुई लाश मिली। कुछ दिन बाद टीम के एक
  270. 13:51और बुजुर्ग सदस्य ने अपनी आंखें नहीं
  271. 13:53खोली। अब केवल पांच मेंबर्स बचे थे। 300
  272. 13:57दिन बीत चुके थे। 13 लोगों का सफर जो
  273. 14:00इतिहास बनने निकला था। अब पांच की जिंदा
  274. 14:03लाशों जैसा था। उनके पास बचा था सिर्फ
  275. 14:06हारने का डर और जिंदा रहने की आखिरी
  276. 14:09उम्मीद। अंधेरे का साया अब उनके ऊपर सघन
  277. 14:12बादल की तरह छा चुका था। 6 महीने की लंबी
  278. 14:15रात की शुरुआत हो चुकी थी। आकाश पर सूरज
  279. 14:18की एक किरण तक नजर नहीं आती थी। ठंडी हवा
  280. 14:21ऐसी चलती कि जैसे बर्फीले चाकू हवाओं के
  281. 14:25झोंकों से हवा में तैर रहे हो। चारों तरफ
  282. 14:27बस काली परत फैली थी जो उम्मीदों को
  283. 14:31धीरे-धीरे निगल रही थी। कैप्टन नतालिया और
  284. 14:34बाकी बचा हुआ दल अब मात्र पांच लोग थे।
  285. 14:38पांच जिंदा दिल लेकिन थके हुए इंसान जिनकी
  286. 14:41हड्डियां ठंड से जमी हुई थी और मन टूट
  287. 14:44चुका था। उनके पैरों के निशान बर्फ पर
  288. 14:46धुंधले से बन रहे थे। पर कहीं मंजिल नजर
  289. 14:49नहीं आ रही थी। हम सही रास्ते पर हैं ना?
  290. 14:52लनद ने पूछा पर उसकी आवाज में थकान साफ
  291. 14:56दिख रही थी। मैप तो कहता है कि रिसर्च बेस
  292. 14:59लगभग 20 कि.मी. दूर है, लेकिन यह बर्फ का
  293. 15:02मैदान किसी जाल से कम नहीं। प्रोफेसर
  294. 15:05ग्रिगोरी ने जवाब दिया, उसकी धीमी आवाज
  295. 15:08में हिम्मत हारने की कंध थी। इस लंबे
  296. 15:11अंधकार में उनके भीतर की लड़ाई कम नहीं
  297. 15:14थी। भूख, ठंड और थकान के अलावा मन की
  298. 15:17दीवारें सिर से ऊपर उठ गई थी। छोटे-छोटे
  299. 15:20झगड़े, अजीब हलसिनेशंस और पेतु के ख्याल
  300. 15:23मानसिक अवस्था को बिगाड़ रहे थे। एक रात
  301. 15:27मानसिक रूप से अस्थिर एलेना जो टीम की
  302. 15:29सबसे संवेदनशील सदस्य थी तूफान की चपेट
  303. 15:33में आकर गायब हो गई। उनका परिवार नहीं था
  304. 15:36लेकिन यह लोग जैसे उनका परिवार बन गए थे।
  305. 15:39उनकी जमी हुई लाश कई दिनों बाद वहीं मिली।
  306. 15:42थोड़े दिनों बाद टीम का सबसे अनुभवी सदस्य
  307. 15:46भी अपनी आंखें हमेशा के लिए बंद कर बैठा।
  308. 15:49एक और जिंदगी जो इस लड़ाई में हार गई। अब
  309. 15:52वे सिर्फ 3 बचे थे। 300 दिन बीत चुके थे।
  310. 15:55जो शुरुआत में इतिहास बनाने निकले थे। अब
  311. 15:58जिंदगी की हसरत में लड़ते हुए जिंदा लाशों
  312. 16:01की तरफ बर्फीले समंदर में तैर रहे थे।
  313. 16:04उनके दिलों में डर बस गया था कि अगला कौन
  314. 16:07मौत के शिकंजे में फंसने वाला है। कई लोग
  315. 16:09शारीरिक चोटों और फ्रॉस्ट बाइट के कारण
  316. 16:12उंगलियां खो चुके थे और मानसिक सदमा भी
  317. 16:16साफ झलक रहा था। टेंट में एक सन्नाटा था
  318. 16:19जो हर किसी के अंदर की टूटन दिखा रहा था।
  319. 16:22फिर उसी रात तभी उन्होंने दूर एक हल्की सी
  320. 16:25सीधी रेखा देखी। एक एंटीना एक टावर का
  321. 16:28संकेत यह उनके दिमाग का कोई भ्रम आदर्श हो
  322. 16:31सकता था। पर वह रेखा जमी हुई बर्फ पर थी
  323. 16:34और हिल नहीं रही थी। यह छोटी सी आशा उनके
  324. 16:37भीतर सारी बची खुशियां जगा गई। उनकी जुबान
  325. 16:40पर कहा था कोई बस अब हम बचेंगे। बस अब हम
  326. 16:44बचेंगे। वहां से उनका आखिरी सफर शुरू हुआ।
  327. 16:47गिरते-खिसकते उठते नीचे टिकते एक दूसरे को
  328. 16:50खींचते हुए हर छटका पहाड़ सवारी था। हर
  329. 16:54सांस एक मुकाबला हर कदम मौत से टक्कर थी।
  330. 16:58घंटों की उस मेहनत के बाद वे रिसर्च सेंटर
  331. 17:00तक पहुंचे। कैप्टन नतालिया दो मेंटेनेंस
  332. 17:03वर्कर्स को देखकर बच्चों की तरह रो पड़ी।
  333. 17:06अब तीनों को तुरंत बेस कैंप पर पहुंचा
  334. 17:08दिया गया। इलाज शुरू हुआ। शरीर टूटे थे।
  335. 17:11दिमाग बुरी तरह प्रभावित हो चुका था। कुछ
  336. 17:14शरीर के हिस्से गवाने पड़े और कुछ को पूरे
  337. 17:18जीवन के लिए मानसिक दर्द झेलना पड़ा। कई
  338. 17:21महीनों बाद जब वे मीडिया के सामने आए तो
  339. 17:23उनके चेहरे पर उनकी 300 एक दिन की लड़ाई
  340. 17:27के हर दर्द, हर उम्मीद और हर मौत की कहानी
  341. 17:30साफ झलक रही थी। यह उनकी कहानी थी जो लेखक
  342. 17:34एलेग्जेंडर वोल्कोव ने अपनी किताब द वाइट
  343. 17:37लिब्राथ। यह सिर्फ सर्वाइवल का किस्सा
  344. 17:39नहीं बल्कि इंसानी हिम्मत, जज्बे और
  345. 17:42उम्मीद की कहानी थी। जिसने मौत को भी मात
  346. 17:44दी। 13 लोग निकले थे इतिहास बनाने और खुद
  347. 17:48बन गए इतिहास। दोस्तों, यह कहानी केवल
  348. 17:52बर्फीले तूफान और मौत का मुकाबला नहीं थी
  349. 17:54बल्कि यह थी इंसानियत, हौसले और उम्मीद
  350. 17:57की। जब सब कुछ टूटा, तब भी इन लोगों ने
  351. 18:00हार नहीं मानी। इंसान की सबसे बड़ी ताकत
  352. 18:03है उसका हौसला। हम सबके अंदर भी यही जज्बा
  353. 18:07है जो हमें सबसे अंधेरे में भी आगे बढ़ने
  354. 18:10की हिम्मत देता है। अगर इस कहानी ने आपके
  355. 18:13दिल को छुआ हो तो प्लीज इस वीडियो को लाइक
  356. 18:16जरूर करें ताकि हमें ऐसी और अनसुनी
  357. 18:18कहानियां लेकर आने की ताकत मिले और चैनल
  358. 18:21को सब्सक्राइब करना ना भूलें ताकि नई
  359. 18:23कहानियां आपके पास पहली बार पहुंचे। नीचे
  360. 18:26कमेंट्स में बताइए आपको इस कहानी में सबसे
  361. 18:29ज्यादा कौन सा पल टच किया? क्या आपने कभी
  362. 18:32ऐसी किसी मुश्किल का सामना किया है? आखिर
  363. 18:35में याद रखिए जिंदगी में चाहे कितनी भी
  364. 18:38मुश्किलें आ जाए अगर हौसला और उम्मीद कायम
  365. 18:41रखी जाए तो मुश्किलें भी रास्ता बन जाती
  366. 18:44हैं। हम फिर मिलेंगे अगली कहानी के साथ।
  367. 18:47तब तक के लिए अपना ख्याल रखें और जियो वो
  368. 18:49कहानी जो किसी को हिम्मत दे सके।
  369. 18:52शुक्रिया।
  370. 18:57ओम

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