सतर्क रहें - देश पर पुराने खतरे आज भी हैं || आचार्य प्रशांत (2026) — Transcript
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- 0:00क्योंकि स्वतंत्रता दिवस आने वाला है।
- 0:02स्कूलों में देखूंगा तो मन सजेंगे उत्साह
- 0:04दिखेगा। उस दिन के लिए इतना उत्साह दिखता
- 0:07है। दूसरे ही दिन सड़क पर तिरंगे बिखरे
- 0:10हैं। जो बातें हुई थी उनका कहीं नामोनिशान
- 0:12नहीं दिखेगा। क्या भारत सदा से गुलाम था?
- 0:15बोलो ना। तो ये गुलामी कहां से आ गई?
- 0:18प्रश्न तो यह होना चाहिए कि इतने लंबे समय
- 0:20तक दूसरे लोग आकर के हम पर चढ़े रहे,
- 0:23कब्जा करे रहे। ये कैसे हो गया? सोचो
- 0:25कितनी दूर था ब्रिटेन। वो वहां से पूरा
- 0:28घूम करके अफ्रीका इधर आ गए और कब्जा भी कर
- 0:31लिया। इतने मुट्ठी भर लोग उतनी दूर से आ
- 0:33रहे हैं और उनके पास कुछ विशेष नहीं। आप
- 0:36जरा सा सर्च करिएगा कि अंग्रेजों के आने
- 0:39से पहले पिछले 500 साल में और पिछले 8000
- 0:42साल में भारत में कुल कितने विश्वविद्यालय
- 0:45खुले? आप पाओगे कुछ नहीं। स्कूल कॉलेज
- 0:48कितने बनवा रहे हो? रिसर्च ग्रांट कितनी
- 0:50दे रहे हो? और रिसर्च नहीं करोगे तो
- 0:52टेक्नोलॉजी कहां से आएगी? लड़ाईयां कैसे
- 0:54लड़ोगे? मेडिसिन कैसे आगे बढ़ेगी? जितनी
- 0:57भी यूरोपियन ताकतें थी उनकी जो टेक्नोलॉजी
- 1:00थी वो भारतीय राजाओं की टेक्नोलॉजी से
- 1:03कहीं आगे की थी। क्यों भारतीयों की क्या
- 1:05बुद्धि कम है नहीं बुद्धि नहीं कम है।
- 1:06बुद्धि पर
- 1:08हम इतने सारे हैं और हारते गए। ये गीता
- 1:12पढ़ने वालों के साथ तो नहीं हो सकता। तो
- 1:14बताओ पहले उत्सव मनाऊं या पहले और चौकन्ना
- 1:18होकर के नजर घुमाऊं? बोलो।
- 1:23स्वतंत्रता दिवस को सतर्कता दिवस की तरह
- 1:26मनाइए। खतरा बराबर का है। खतरा अभी बाकी
- 1:29है। और खतरे का कारण
- 1:35प्रणाम आचार्य जी।
- 1:37मेरा नाम कमलेश है। मैं राजस्थान उदयपुर
- 1:40से आया हूं सर।
- 1:42मेरा क्वेश्चन
- 1:44स्वतंत्रता दिवस पर है। क्योंकि
- 1:47स्वतंत्रता दिवस आने वाला है तो
- 1:51मैं अपने गांव से शुरू करूं तो स्कूलों
- 1:55में देखूंगा तो मंच सजेंगे। धूमधाम से
- 1:58मनाया जाएगा। बहुत उत्साह दिखेगा। थोड़ा
- 2:01और बाहर निकलूूंगा तो तहसील लेवल पर या
- 2:05कॉलेजेस को देखूंगा तो वहां पर भी मन
- 2:08सजेंगे। उत्साह दिखेगा। रैलियां निकाली
- 2:11जाएगी। अभियान चलेंगे कि हर घर तिरंगा
- 2:14तिरंगे के साथ रैलियां निकलेंगी। देशभक्ति
- 2:16के नारे लगेंगे सर। तो फिर उस दिन के लिए
- 2:22इतना उत्साह दिखता है। देश के लिए हम देश
- 2:25को बदल देंगे। देश को तरह-तरह से विकास के
- 2:28लिए प्रण लिए जाएंगे और बड़ी-बड़ी बातें
- 2:31होंगी सर। और फिर दूसरे दिन देखूंगा कि
- 2:36सड़क पर तिरंगे बिखरे हैं। जो बातें हुई
- 2:39थी उनका कहीं नामोनिशान नहीं दिखेगा। अ बस
- 2:44वही लोग जो बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे वो
- 2:46या तो रिश्वत देने में संलिप्त रहेंगे या
- 2:49लेने में। वही लोग जो बड़ी-बड़ी बातें कर
- 2:52रहे थे। वही लोग कहीं पर गंदगी फैला रहे
- 2:55होंगे। तो ऐसीऐसी चीजें कर रहे होंगे जो
- 2:57देश को भीतर से खोखला कर रही है। तो मैं
- 3:01ये समझना चाह रहा था कि वास्तव में
- 3:03देशभक्ति कैसी होगी? हमें इस स्वतंत्रता
- 3:06दिवस को कैसे मनाना चाहिए और वास्तव में
- 3:08देशभक्ति का अर्थ क्या होगा?
- 3:11भारत हो या दुनिया का कोई भी अन्य देश
- 3:18जब उसकी स्थापना होती है
- 3:23तब उस दिन वो
- 3:27स्वतंत्र होता है या परतंत्र?
- 3:34स्वतंत्र या परतंत्र?
- 3:38चलो और निकट से शुरू करते हैं।
- 3:44एक इंसान है।
- 3:47ठीक है? एक इंसान है।
- 3:52उसकी स्वाभाविक स्थिति क्या है?
- 3:57मुक्ति या गुलामी?
- 4:01स्वाभाविक।
- 4:04ठीक।
- 4:08इसी तरह से अगर कोई
- 4:12नेशन भी होता है
- 4:16तो जैसा कुछ लोगों ने कहा
- 4:19कि अपने आरंभ में तो वह स्वतंत्र ही होता
- 4:22है ना। स्वतंत्र नहीं होता तो अस्तित्व
- 4:24में कैसे आता?
- 4:26कैसे आता?
- 4:30स्वतंत्रता तो एक डिफॉल्ट है। डिफॉल्ट
- 4:34माने
- 4:35बेसिक स्टेट बेसिक एंड नेचुरल स्टेट
- 4:39स्वाभाविक स्थिति
- 4:44तो स्वतंत्रता दिवस इस दृष्टि से देखो
- 4:50तो बात
- 4:53थोड़ी विचित्र सी लगती है कि हम किस तरीके
- 4:56से मना रहे हैं। स्वतंत्र तो देश को होना
- 5:00ही चाहिए
- 5:02और अस्तित्व में कि मनुष्य हो, नदी हो,
- 5:06पहाड़ हो, पशु-पक्षी हो
- 5:10बनते तो सभी स्वतंत्र हैं। सभी की जो
- 5:13डिफॉल्ट स्टेट है, वो तो स्वतंत्रता की ही
- 5:17है।
- 5:19है ना?
- 5:21जानवर होते हैं जंगल में, जानवर जंगल में
- 5:24है। वहां वो कैसा है?
- 5:27पक्षी आसमान में है वहां वह कैसा है? फिर
- 5:30आप पक्षी को पकड़ लाए उसे पिंजरे में डाल
- 5:32दे तब वह परतंत्र होता है ना या पक्षी
- 5:34पैदा ही परतंत्र होता है?
- 5:37पक्षी को परतंत्र बनाना पड़ता है। बनाना
- 5:40पड़ता है ना। इसी तरीके से राष्ट्र को भी
- 5:45कभी
- 5:47परतंत्रता स्वीकार करनी पड़ी। अन्यथा
- 5:51राष्ट्र की भी स्वाभाविक स्थिति तो
- 5:53स्वतंत्रता की ही है। स्वतंत्रता स्वभाव
- 5:57है। जैसे मनुष्य का स्वभाव है मुक्ति। उसी
- 6:01तरीके से राष्ट्र भी
- 6:04मनुष्य का ही है। अगर मनुष्य का स्वभाव है
- 6:07मुक्ति तो राष्ट्र का भी स्वभाव है।
- 6:09मुक्ति स्वतंत्रता। मनुष्य के लिए मुक्ति
- 6:12तो राष्ट्र के लिए स्वतंत्रता।
- 6:17तो हम यह कहें कि हमने स्वतंत्रता हासिल
- 6:22करी। इसका उत्सव मनाओ या ज्यादा आवश्यक है
- 6:26कि हम यह पूछे कि यह अनहोनी घट कैसे गई कि
- 6:31हम परतंत्र हो गए।
- 6:34बोलो ना।
- 6:36क्योंकि सच पूछो तो स्वतंत्रता तो
- 6:39अस्तित्वगत है।
- 6:42अस्तित्व में ही सब कुछ स्वतंत्र है। कोई
- 6:45किसी का गुलाम नहीं पैदा हुआ।
- 6:49तो पूछना तो यह चाहिए ना कि जब जन्म से सब
- 6:55कुछ आजाद ही है तो फिर आगे चलकर के ये
- 6:59गुलामी नाम की चीज कहां से आ गई?
- 7:03वही ज्यादा ईमानदार और ज्यादा उपयोगी
- 7:05प्रश्न है।
- 7:07ये गुलामी कहां से आ गई? क्या भारत सदा से
- 7:12गुलाम था?
- 7:13बोलो ना।
- 7:15क्या भारत सदा से गुलाम था? नहीं।
- 7:18तो गुलामी कहां से आ गई? प्रश्न तो यह
- 7:20होना चाहिए। आजादी तो नैसर्गिक है, गिवन
- 7:24है, नेचुरल है।
- 7:28प्रश्न तो यह होना चाहिए कि ये गुलामी नाम
- 7:30की चिड़िया कहां से आ गई? इतने बंधन कहां
- 7:32से आए? और कितनी अजीब कितनी विचित्र बात
- 7:34है।
- 7:37कोई 10, 20, 50 या 100 साल की बात नहीं।
- 7:44अगर देखो तो लगभग 1000 साल
- 7:49शुरुआत से लेकर अंत तक कभी कोई हिस्सा और
- 7:53कभी पूरा ही हिस्सा
- 7:56दूसरों के आधिपत्य में ये हो कैसे गया हम
- 7:59सदा से तो गुलाम नहीं थे कि थे
- 8:03ये कैसे हो गया कि इतने लंबे समय तक दूसरे
- 8:08लोग आकर के हम पर चढ़े रहे कब्जा करे रहे
- 8:10ये कैसे हो गया ये तो बहुत अबूझ बात है।
- 8:12ये बड़ी विचित्र बात है। अनहोनी है जो
- 8:14होनी नहीं चाहिए थी। ये हुई कैसे?
- 8:18और जब हम कहते हैं कि दूसरे आकर के भारत
- 8:22देश पर चढ़ बैठे
- 8:26कब्जा कर लिया। परतंत्र बना दिया।
- 8:30तो उसमें भी न जाने कितने लोग हैं। जैसे
- 8:32कि गुलामी का कालखंड बहुत लंबा है। उसी
- 8:36तरीके से उन लोगों की सूची भी बहुत लंबी
- 8:39है। जो आते गए।
- 8:42और कब्जा करते गए।
- 8:45वास्तव में जो कोई आ सकता था सब आए।
- 8:50जो भी आ सकते थे सब आए। एक के बाद एक आते
- 8:53ही गए। आते ही गए।
- 8:57वही नहीं आए जो आ ही नहीं सकते थे।
- 9:01जो नहीं आ सकते थे सिर्फ वही नहीं आए।
- 9:03वरना सभी आए। तुम गिनती गिनो। बताओ कौन सी
- 9:07बड़ी यूरोपियन ताकत थी जो भारत नहीं आई और
- 9:09कब्जा नहीं कर पाई? हमें अंग्रेज याद है।
- 9:13पर आप पुर्तगालियों को ले लो, आप फ्रेंच
- 9:15को ले लो, आप डच को ले लो।
- 9:21ये नहीं आए क्या? इन्होंने कब्जा नहीं
- 9:23करा? बताओ। वहां यूरोप से चले आ रहे हैं
- 9:27और जितने हैं यूरोपियन, सब चले आ रहे हैं
- 9:29एक के बाद एक और सब सफल हुए जा रहे हैं
- 9:31कब्जा करने में। ये अनहोनी कैसे घट गई?
- 9:34फिर आप जब एशिया आ जाते हो तो यहां पास से
- 9:38शुरू करो तो अफगानी
- 9:40ईरानी
- 9:42फिर तुर्क अरब
- 9:45हां
- 9:47सब आते गए सब चढ़ते गए ये कैसे हुआ
- 9:52कैसे
- 9:55और फिर आप मध्य एशिया को ले लो तो वहां से
- 9:57भी एक के बाद एक आ ही रहे थे शक हूण
- 10:01यद्यपि वो भारत को आने के बाद वो भारत में
- 10:04रच बस गए। पर आए वह भी बाहर से थे और वह
- 10:07भी सफलतापूर्वक यहां पर जीते और साम्राज्य
- 10:11स्थापित कर गए अपना। ये कैसे होता गया?
- 10:14कोई तो बात होगी।
- 10:17कोई तो बात होगी।
- 10:20और जब अंग्रेज चढ़े हुए थे उस समय में भी
- 10:22जापानी चढ़ाए थे। लो जैसे अंग्रेज काफी ना
- 10:26हो। अंग्रेजों के होते हुए भी जापानी चढ़े
- 10:30आ रहे क्या आपको पता है जापानियों ने
- 10:31चेन्नई पर भी बम गिराए हुए हैं? सुना नहीं
- 10:33होगा आपने।
- 10:35अजीब बात जापानी चेन्नई पहुंचे हुए थे।
- 10:38हां। द्वितीय विश्व युद्ध में कुछ दिनों
- 10:40के लिए उन्होंने चेन्नई पर भी बमबारी कर
- 10:42दी थी।
- 10:46अंडमान निकोबार हम जानते ही हैं। उधर वो
- 10:48जो मलय का किस्सा भी हम जानते ही हैं।
- 10:56बर्मा को भी हम जानते ही हैं।
- 10:59तब बर्मा
- 11:01ब्रदानवी साम्राज्य का ही हिस्सा था। भारत
- 11:03का द्वार था। सब जापानी वहां चढ़े हुए
- 11:06हैं।
- 11:09कैसे?
- 11:13हिटलर उधर प्लान बनाए बैठा था। क्या?
- 11:18कि जंग जीत जाएंगे।
- 11:20आप क्या सोच रहे थे कि वो कह रहा था
- 11:22अंग्रेजों को हरा करके भारत को फिर आजाद
- 11:25कर देंगे।
- 11:26वह कह रहे थे जब जंग जीत जाएंगे तो यह जो
- 11:29लंबा चौड़ा भारतीय उपमहाद्वीप है इसका
- 11:32विभाजन कर देंगे। कुछ जापानियों के नीचे
- 11:34रहेगा और कुछ जर्मनों के नीचे रहेगा।
- 11:37लो जर्मन बोले हम भी पीछे काहे छूटेंगे।
- 11:41उन्होंने भी अपनी नजर भारत पर डाल ही दी
- 11:44थी। यह तो अब वो हार गए। द्वितीय विश्व
- 11:46युद्ध तो आने नहीं पाए। जापानी तो लगभग आ
- 11:49ही गए थे। वो भी जंग हार गए तो आने नहीं
- 11:52पाए।
- 11:54कुछ तो बात होगी। कोई तो वजह होगी जो कोई
- 11:58आ सकता था आता गया जीतता गया कैसे करता
- 12:01गया बड़ा दुख लगता है आदमी चोटिल अनुभव
- 12:04करता है आपको आपको बुरा नहीं लग रहा है ये
- 12:06सुन के मुझे बहुत बुरा लग रहा है ये बात
- 12:09क्या हमारे लिए सिर्फ तथ्य की तरह है
- 12:13यह बात हमारा सीना चीर क्यों नहीं देती
- 12:18मैं पूछ रहा हूं हमें बुरा क्यों नहीं लग
- 12:21रहा है यह क्या हुआ कैसे हुआ होता ही गया
- 12:23होता ही गया
- 12:26और फिर आजादी के बाद भी चीन आया और जमीन
- 12:28हड़प कर चला गया।
- 12:30होता ही गया।
- 12:33वही तो बात होगी ना।
- 12:39मैं
- 12:42चाहूंगा कि स्वाधीनता दिवस को हम आत्म
- 12:45अवलोकन दिवस की तरह मनाएं। और पूछे अपने
- 12:48आप को कि स्वतंत्रता तो ठीक है पर पहले यह
- 12:50बताओ परतंत्रता कैसे आ गई थी?
- 12:53वो ज्यादा जरूरी सवाल है।
- 12:57स्वतंत्रता के लड्डू खा लेंगे बेशक। पर
- 13:00रखो अभी उन्हें इंतजार करने दो। पहले मैं
- 13:02ये समझना चाहता हूं कि इतना विशाल देश
- 13:08इतने सालों तक इतने अलग-अलग लोगों के अधीन
- 13:13रहा कैसे? बात क्या थी? कारण क्या थे? मैं
- 13:16उन कारणों को जानना चाहूंगा।
- 13:19क्योंकि अगर आपने उन कारणों को नहीं जाना
- 13:23तो यह कैसे आपको निश्चित पता है कि वह
- 13:25कारण आज भी मौजूद नहीं है। बोलो
- 13:28बोलो अगर वो कारण हजार साल तक मौजूद थे
- 13:33तो अभी तो राजनैतिक आजादी मिले कुल 75 साल
- 13:36हुए 47 से अभी तक तो 100 साल भी नहीं
- 13:40बीते।
- 13:42नहीं बीते ना?
- 13:45जो चीज साल से मौजूद थी वह क्या 75 80 साल
- 13:48में चली गई होगी पूरी तरह से
- 13:51जो चीज साल तक मौजूद थी और हमको गुलाम
- 13:54बनवाए रखी क्या वो चीज आपको सचमुच लगता है
- 13:58कि इधर
- 14:0080 78 80 साल में चली गई होगी चली गई होगी
- 14:03वो आज भी मौजूद है और अगर वो आज भी मौजूद
- 14:06है तो कितना बड़ा खतरा है भारत के ऊपर
- 14:10हम वो खतरा नहीं देख रहे हैं हम बिल्कुल
- 14:14शुतुर मूर्ख की तरह
- 14:16[नाक से की जाने वाली आवाज़] रेत में सर
- 14:17गाड़ करके उत्सव मनाना चाहते हैं कि लो
- 14:19आजादी आ गई। हां बहुत अच्छी बात है। आजादी
- 14:21आ गई। हम भी नाचना चाहते हैं। हम भी झूमना
- 14:23चाहते हैं। हम भी खुश होना चाहते हैं। पर
- 14:26मैं कैसे जो सर पर तलवार लटक रही है उसके
- 14:31प्रति अनभिज्ञ होने का अभिनय कर लूं। मुझे
- 14:34वह तलवार लटकती दिखाई दे रही है।
- 14:39कोई चीज एक बार हो, दो बार हो तो आप बोल
- 14:41सकते हो संयोग है।
- 14:44कोई चीज साल तक लगातार हो तो संयोग है
- 14:47क्या? उसमें संयोग है या संरचना है?
- 14:51संरचना है।
- 14:52बोलो।
- 14:53संरचना है।
- 14:53उसके पीछे कोई संरचना है। कोई स्ट्रक्चर
- 14:55है? उसके पीछे कोई स्ट्रक्चरल रीजन है।
- 15:02एक दो लोग आकर के युद्ध में हरा के आपका
- 15:06शोषण कर ले जाएं। तो आप कह सकते हो संयोग
- 15:09है बीच-बीच में कोई आता है कभी हार होती
- 15:11है कभी जीत होती है भाई चलता रहता है पर
- 15:13एक दो लोग नहीं दसियों अलग-अलग तरफ के
- 15:17अलग-अलग राष्ट्रीयता के अलग-अलग लोग आ रहे
- 15:20हैं
- 15:23और हमारा शोषण करते ही जा रहे हैं तो यह
- 15:25संयोग नहीं हो सकता ना क्या हो सकता है पर
- 15:29हम खुद को ये जताना चाहते हैं कि ये तो बस
- 15:31ऐसे ही हो गया हो गया जी हो गया हो नहीं
- 15:35गया
- 15:37डर मुझे यह है कि वो आज भी हो रहा है
- 15:42क्योंकि जो कारण हजार साल तक चलता रहा वो
- 15:4680 साल में हट नहीं गया होगा वो कारण आज
- 15:49भी मौजूद होगा
- 15:52वो कारण आज ही मौजूद होगा। हमें अपने आप
- 15:55से पूछना पड़ेगा वो कारण क्या है जिसने
- 15:58भारत को इतने बुरे दिन देखने पर विवश करा?
- 16:03वो कारण क्या है?
- 16:07क्या वह कारण राजनैतिक हो सकता है? नहीं।
- 16:09कोई राजनैतिक कारण इतने दिनों तक नहीं
- 16:10चलता। क्या वह कारण साहयोगिक हो सकता है?
- 16:12हम पहले ही कह चुके हैं। नहीं।
- 16:16वो कारण तो कुछ ऐसा है कि पीढ़ियां बदलती
- 16:19रही, लोग बदलते रहे पर वो कारण बचा रहा।
- 16:21वो कारण कैसा होगा?
- 16:24वो कारण तो सांस्कृतिक है।
- 16:28कोई ऐसी चीज है जो दुर्भाग्यवश भारत की
- 16:32हवाओं में घुल गई है।
- 16:36और संस्कृति बनकर बैठ गई है और हम उसको
- 16:38पहचान नहीं पा रहे। हम उसको अलग नहीं कर
- 16:40पा रहे।
- 16:43कुछ ऐसा है जो हमें भीतर से ही कमजोर बना
- 16:46रहा है।
- 16:48पर हम उसको बहुत पवित्र माने बैठे हैं। हम
- 16:50उसको हटा नहीं पा रहे अपने भीतर से।
- 16:53मैं उसको लोकधर्म कहता हूं।
- 16:56वह है भारत की परतंत्रता का कारण।
- 17:02और वह जब तक रहेगा
- 17:05तब तक भारत को दुर्बल ही रखेगा और जो
- 17:08दुर्बल होता है
- 17:10उसका शोषण करने तो कोई भी चला आता है।
- 17:13दुनिया में इतने स्वार्थी लोग हैं वो सब
- 17:15लगे हुए हैं कि कोई कमजोर दिखे जाकर के उस
- 17:17पर झपट्टा मार दो।
- 17:24निस्तेज
- 17:28मनुष्यों के साथ क्या तेजस्वी राष्ट्र हो
- 17:32सकता है?
- 17:36दुर्बल नागरिकों के साथ क्या बलि राष्ट्र
- 17:39हो सकता है? और मनुष्य का बल होता है
- 17:42वास्तविक धर्म।
- 17:45वास्तविक धर्म।
- 17:48भारत ने वास्तविक धर्म के साथ जो मजाक करा
- 17:51लोक धर्म के रूप में मुझे डर है कि कहीं
- 17:53उसकी सजा तो नहीं मिली है।
- 17:57नायम आत्मा बल हीनेन लभ्यो
- 18:02आत्मा और बल का बड़ा गहरा रिश्ता है।
- 18:08और अगर कहीं पर आत्मा की ही परिभाषा विकृत
- 18:11कर दी गई हो तो बल कैसे बचेगा? बोलो बल
- 18:16कैसे बचेगा?
- 18:23जहां आत्मा की ही परिभाषा विकृत कर दी गई
- 18:26वहां अब मनुष्य में बल कैसे बचेगा और
- 18:29मनुष्य में बल नहीं तो फिर राष्ट्र में बल
- 18:30नहीं और मनुष्य का बल होता है वास्तविक
- 18:33धर्म
- 18:37वास्तविक धर्म गया तो मनुष्य का बल गया।
- 18:39मनुष्य का बल गया तो राष्ट्र का बल गया और
- 18:42राष्ट्र का बल गया तो राष्ट्र परतंत्र हो
- 18:44गया।
- 18:47मैं बार-बार पूछा करता हूं। फिर पूछ रहा
- 18:49हूं।
- 18:54हम कहते हैं उदाहरण के लिए
- 18:59कि हम
- 19:03अपने महापुरुषों को पूजते हैं।
- 19:09उनको
- 19:11अपना आदर्श अपना रोल मॉडल घोषित करते हैं।
- 19:17आदर्श का तो अर्थ यह होता है ना
- 19:20कि जैसे वह जिए वैसे हम जिएंगे और जो
- 19:23उन्होंने कहा हम उसको समझेंगे। यही होता
- 19:27है ना आदर्श का अर्थ
- 19:31तो अगर श्री कृष्ण हमारे आदर्श हैं
- 19:35तो गीता हमारे जीवन में कैसे नहीं उतरी?
- 19:39और गीता तो कही ही गई है रणक्षेत्र पर।
- 19:43अगर हम वास्तव में श्री कृष्ण को जरा भी
- 19:47सम्मान देते होते
- 19:51तो युद्ध में हल्के कैसे पड़ जाते?
- 19:54गीता तो कहती है युद्धस्व। गीता तो कहती
- 19:58है
- 20:01जीत हार का पता नहीं। साम्राज्य की
- 20:04सिंहासन की परवाह नहीं।
- 20:08पर जो सही है वह कर। निष्काम होकर कर।
- 20:14अंजाम
- 20:17की हमें फिक्र ही नहीं है।
- 20:20जो सही है वह कर और अगर
- 20:23यही सही है कि हम जूझ जाएं तो हम जूझे
- 20:26कैसे नहीं
- 20:28जूझे कैसे नहीं। हम कहते तो यही रह गए कि
- 20:30हम धार्मिक देश हैं। हम धार्मिक देश नहीं
- 20:32है। हम लोक धार्मिक देश हैं। कहा था किसी
- 20:34ने कि इतने भारतीय हैं सब मिलकर के एक जगह
- 20:37थूक भी दें।
- 20:39तो यह जितने आतताई हैं आक्रांता है डूब
- 20:41मरे इसी में
- 20:45ब्रानवी सल्तनत के लिए कहा था
- 20:49हम इतने सारे हैं और हारते गए यह गीता
- 20:53पढ़ने वालों के साथ तो नहीं हो सकता यह
- 20:55कृष्ण के वास्तविक प्रेमियों के साथ तो
- 20:57नहीं हो सकता
- 20:59और कृष्ण का प्रेमी होने का दावा तो हम
- 21:01रोज करते हैं
- 21:04वो दावा झूठा है
- 21:09श्री कृष्ण माने गीता
- 21:12गीता माने आत्मज्ञान
- 21:15और आत्मज्ञान माने जीवन के संघर्ष से कोई
- 21:18पलायन नहीं
- 21:20मर सकते हैं हार थोड़ी मानेंगे
- 21:25मर सकते हैं पर हार थोड़ी मान लेंगे
- 21:30मुट्ठी भर लोगों को अपने ऊपर छा थोड़ी
- 21:32जाने देंगे पर यह आप तभी कह सकते हो जब
- 21:35आपको पता होता है कि आपका जीवन धर्म सम्मत
- 21:38है। तब आप कहते हो कि मेरा जीवन मेरे लिए
- 21:41नहीं है। मेरा जीवन धार्मिक है। मेरा जीवन
- 21:44धर्म के लिए है। तो मेरी हार मेरी हार
- 21:47नहीं होगी। मेरी हार
- 21:49धर्म की हार होगी। इसीलिए हारना मंजूर ही
- 21:51नहीं है। हमने हारना मंजूर कर लिया
- 21:52क्योंकि भीतर ही भीतर हमको पता था कि
- 21:54हमारे जीवन में धर्म तो वैसे भी नहीं
- 21:56मौजूद है। तो हमने बड़ी आसानी से हार मान
- 21:58ली। बड़ी आसानी से हमने घुटने टेक दिए।
- 22:01सोचो कितनी दूर था ब्रिटेन? कितनी दूर था।
- 22:06और जब वह लोग आए थे उस समय स्टीम इंजन भी
- 22:08नहीं होता था।
- 22:13यह हवा इसके भरोसे आए थे। यही पाल, यही
- 22:18पतवार सेल्स इनके भरोसे आए थे।
- 22:23वो वहां से पूरा घूम करके अफ्रीका इधर आ
- 22:27गए और कब्जा भी कर लिया।
- 22:30सोचो कितनी भारी आंतरिक दुर्बलता रही होगी
- 22:34जो हमें यह दुर्दिन देखने पड़े। इतने
- 22:37मुट्ठी भर लोग उतनी दूर से आ रहे हैं और
- 22:39उनके पास कुछ विशेष नहीं।
- 22:43[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 22:47स्टीम इंजन वगैरह बाद में आए हैं। भाई
- 22:50इलेक्ट्रिसिटी तो बहुत दूर की बात है।
- 22:56कुछ पता नहीं।
- 23:03हमें बड़ा अच्छा लगता है यह कहना कि वह तो
- 23:05अंग्रेज आ गए। हम तो भोलेभाले लोग थे।
- 23:07उन्होंने फूट डालकर हम पर राज कर लिया।
- 23:10ऐसे कैसे फूट डाल दी? ऐसे कैसे फूट डाल
- 23:12दी? जहां सत्य होता है वहां ऐसे नहीं फूट
- 23:15डाली जा सकती। इतने मासूम मत बनो। इतनी
- 23:19आसानी से अगर कोई फूट डाल दे तो ना सत्य
- 23:22है ना प्रेम है।
- 23:26आ रहे हैं यहां पर घूस देकर के। प्लासी की
- 23:29लड़ाई तो सीधे-सीधे घूस देकर उन्होंने
- 23:31जीती है। वो लड़ाई मालूम है। वो लड़ाई
- 23:34जीती हुई मानी ही नहीं जाती। वो लड़ाई
- 23:36खरीदी हुई मानी जाती है। द ब्रिटिश
- 23:40बोट द बैटल ऑफ प्लासी।
- 23:47जो घूस पर ईमान बेच दे उसकी जिंदगी में
- 23:50धर्म रहा होगा क्या कहीं
- 23:57उसके बाद बक्सर की लड़ाई लड़ रहे हैं।
- 23:59उसमें तीन राजा इकट्ठे हो रहे हैं। वहां
- 24:01वहां असली लड़ाई हुई थी। उन तीनों में आपस
- 24:04में मनमुटाव है। फूट है। वो तीनों
- 24:06अपना-अपना स्वार्थ देख रहे हैं। तीनों को
- 24:09ही राष्ट्र से, धर्म से, सत्य से कोई मतलब
- 24:12नहीं। अंग्रेजों ने फिर हराया।
- 24:15क्या हम वास्तव में गीता का देश हैं? क्या
- 24:17हम वास्तव में धर्म का देश हैं?
- 24:21हम लोकधर्म का देश है और वो लोकधर्म आज भी
- 24:25हावी है। तो बताओ तलवार आज भी सर पर लटक
- 24:28रही है कि नहीं लटक रही है?
- 24:33दूसरों का दोष बेशक है। जो लोग यहां आ रहे
- 24:36थे वो कोई हमें गले लगाने नहीं आ रहे थे।
- 24:37वो हमारा शोषण ही करने आ रहे थे। दूसरों
- 24:40का दोष तो बेशक है पर क्या हम अपनी
- 24:42कमजोरी, अपनी बीमारी, अपनी बेईमानी की
- 24:45चर्चा नहीं करना चाहेंगे?
- 24:48बोलो।
- 24:51और अतीत में वो सब हमने
- 24:54कमजोरियां दिखा दी। उससे भी मुझे कोई बहुत
- 24:56मतलब नहीं।
- 24:58अतीत की बात, अतीत में पड़ी रहे। पर अतीत
- 25:02की यह बात अतीत की नहीं है। यह अतीत की
- 25:03बात आज भी है। बहुत अर्थ में हम आज भी
- 25:07बिल्कुल वैसे ही हैं।
- 25:10जैसे 16वीं और 17वीं और 18वीं शताब्दी में
- 25:13थे
- 25:19और बल्कि आज और कोशिशें हो रही हैं कि
- 25:21हमें 12वीं शताब्दी में डाल दिया जाए।
- 25:26तो बताओ पहले उत्सव मनाऊं
- 25:31या पहले और चौकन्ना होकर के नजर घुमाऊं?
- 25:35बोलो।
- 25:39स्वतंत्रता दिवस को सतर्कता दिवस की तरह
- 25:42मनाइए।
- 25:44खतरा बराबर का है। खतरा अभी बाकी है और
- 25:48खतरे का कारण आंतरिक है।
- 25:54हमारे ही भीतर, हमारे ही दिल में, हमारी
- 25:57ही हवाओं में, हमारी ही संस्कृति में अभी
- 26:00धर्म का वह विकृत रूप घूम रहा है जिसने
- 26:04अतीत में भी हमारी दुर्दशा करी।
- 26:09पहले भी आपसे चर्चा करी थी। वह आ रहे थे
- 26:12आपके पास एस्ट्रोनॉमी ले। नहीं यहां पहुंच
- 26:14नहीं पाते। लोंगिट्यूड प्रॉब्लम सुनी है
- 26:17आपने? लोंगिट्यूड प्रॉब्लम सुनी है?
- 26:21लोंगिट्यूड प्रॉब्लम ये होती है कि जब आप
- 26:24कहीं को चलते हो तो अपनी स्थिति पता करने
- 26:26के लिए समुद्र में जब आप चलते हो
- 26:28लैटीट्यूड चाहिए, लोंगिट्यूड चाहिए। दो
- 26:30चीजें चाहिए। दोनों पता है तो आप बता सकते
- 26:32हो आप कहां पर हो। लैटीट्यूड बड़ी आसानी
- 26:34से पता चल जाता है। लोंगिट्यूड नहीं पता
- 26:37चलता।
- 26:41लोंगिट्यूड नहीं पता चलता।
- 26:44तो पता ही नहीं होता आपको आप हो कहां पर।
- 26:47ये पता करने के लिए आप अगर लंदन में वहां
- 26:50पर ग्रीनच लैब है वहां जाएंगे तो आपको पता
- 26:53चलेगा ये लोंगिट्यूड पता करने के लिए
- 26:55कितनी रिसर्च करी और कितनी जाने गवाई
- 26:58उन्होंने।
- 27:01और यह करने के बाद अंततः उन्होंने वह
- 27:03उपकरण निकाल लिया जो समुद्र में भी उनको
- 27:06सही लोंगिट्यूड बता पाता था और उसी का
- 27:09इस्तेमाल करके वो भारत तक पहुंच पाए
- 27:12और जब वो ये सब कुछ कर रहे थे तब भारत
- 27:14एस्ट्रोलॉजी कर रहा था। जब वो एस्ट्रोनॉमी
- 27:17में तेजी से आगे बढ़ रहे थे तब भारत
- 27:20मुहूर्त और घंटा घड़ियाल में उलझा हुआ था
- 27:23और आज भी उलझा हुआ है। कितने हजार करोड़
- 27:26की एस्ट्रो एप्स मार्केट में घूम रही हैं।
- 27:30और यही एस्ट्रोलॉजी है। भारत ने
- 27:32एस्ट्रोलॉजी एस्ट्रोनॉमी पर ध्यान दिया
- 27:35होता तो गुलाम नहीं हुआ होता। क्या आज भी
- 27:39कुछ बदल गया है? आज तो ये जजी ये नए-नए
- 27:43लड़के ये भी एस्ट्रो एप्स पर घुसे हुए
- 27:44हैं। खतरा आज भी बराबर का है।
- 27:48दुनिया आगे बढ़ रही है विज्ञान में। हम
- 27:50आगे बढ़ रहे हैं ये कुंडली निकालने में।
- 27:56जिनके जीवन में वास्तव में धर्म होगा,
- 27:58गीता होगी, क्या वह अपने क्षुद्र
- 27:59स्वार्थों की चिंता करेंगे? या तो
- 28:01छोटे-छोटे राजा, उनकी छोटी-छोटी रियासतें
- 28:04वो खुद ही जाकर के अंग्रेजों से मिल जाते
- 28:06थे। क्या पड़ोसी को हराना है? आओ आओ यहां
- 28:08आओ। इसको मिलकर के हराते हैं। ये क्या एक
- 28:11धार्मिक चित्त का लक्षण है?
- 28:15क्या आज भी वैसे ही नहीं है?
- 28:20जातियों में बहुत
- 28:23गंदे और घटिया तरीके से बटा हुआ देश था।
- 28:31इतने ही लोग हैं जो लड़ाई पर जाएंगे। बाकी
- 28:33तो अपना-अपना तुम काम करो। तुम सफाई करो,
- 28:35तुम बर्तन देखो, तुम बाल देखो, तुम खेत
- 28:38देखो, तुम ये करो, तुम वो करो।
- 28:44कहां से मिलेंगे सबसे काबिल लोग लड़ाई
- 28:46लड़ने के लिए? जब आपने जनसंख्या के 90 95%
- 28:51वर्ग को लड़ाई के मैदान से ही बाहर कर
- 28:55दिया। सेना कैसे बनेगी? और सेना बनेगी भी
- 28:59तो क्या उसमें सबसे काबिल लोग प्रवेश
- 29:01पाएंगे? मेरिटोक्रेसी जब है ही नहीं।
- 29:08और क्यों नहीं है? क्योंकि साहब
- 29:12हम कह देंगे हमारे ग्रंथों में हमारी
- 29:13किताबों में लिखा है कि जाति तो भगवान ने
- 29:16बनाई है। श्रुति में लिखा है सचमुच अगर हम
- 29:18धार्मिक लोग होते तो हम किसी भी किताब को
- 29:21शास्त्र कहने से पहले पूछते कि क्या
- 29:25यह किताब श्रुति से मेल खाती है?
- 29:31पुराणों से हम प्रश्न पूछते कि क्या
- 29:33तुम्हारी बातें उपनिषदों के सिद्धांतों से
- 29:36मेल खाती हैं? क्योंकि ये नियम है। यह
- 29:38नियम है कि स्मृति ग्रंथ जिसमें पुराण
- 29:41इत्यादि भी आते हैं कि स्मृति ग्रंथों की
- 29:43बस वही बातें मानी जाएंगी जो श्रुति से
- 29:46मेल खाती हैं। स्मृति की कोई भी बात जो
- 29:48श्रुति से मेल नहीं खाती उसे अस्वीकार
- 29:50हमें करना पड़ेगा। यह सनातन का नियम है।
- 29:54पर श्रुति का हमें कुछ पता नहीं। लोक धर्म
- 29:57तो स्मृति ग्रंथों पर चलता है।
- 30:02कीमत देनी पड़ती है ना। सच्चाई को, तथ्य
- 30:05को जब धर्म ही पूरा कल्पना पर आधारित हो
- 30:07गया हो तो आप तथ्य को कीमत नहीं दोगे। जब
- 30:09तथ्य को कीमत नहीं दोगे तो फिर आप
- 30:12यूनिवर्सिटीज में इन्वेस्ट नहीं करोगे।
- 30:15और जब आप नए विश्वविद्यालय नहीं बनाओगे
- 30:19तो ज्ञान कहां से आएगा?
- 30:23जितनी भी यूरोपियन ताकतें थी
- 30:27उनकी
- 30:29जो टेक्नोलॉजी थी
- 30:33वो भारतीय राजाओं की टेक्नोलॉजी से कहीं
- 30:36आगे की थी। उनकी बंदूके, उनके वाहन, उनके
- 30:40जहाज
- 30:42सब कुछ,
- 30:44उनकी ट्रिग्नोमेट्री,
- 30:48उनकी कार्टोग्राफी
- 30:53सब भारत से बहुत आगे की थी। क्यों?
- 30:55भारतीयों की क्या बुद्धि कम नहीं? बुद्धि
- 30:57नहीं कम है। बुद्धि पर लोकधर्म चढ़ा हुआ
- 31:00है। तो जो पैसा लगना चाहिए था कि उससे
- 31:03यूनिवर्सिटीज बनती और रिसर्च होती वो पैसा
- 31:07कहां लग रहा है?
- 31:10वो कर्मकांड में जा रहा है पैसा सारा। और
- 31:12राजा भी खूब-खूब
- 31:16डोनेशंस दे रहे हैं, चढ़ावा दे रहे हैं।
- 31:18गांव के गांव दे रहे हैं। किनको दे रहे
- 31:20हैं? अंधविश्वास फैलाने वालों को
- 31:26यह है परतंत्रता का कारण।
- 31:31आप जरा सा सर्च करिएगा कि अंग्रेजों के
- 31:36आने से पहले पिछले 500 साल में और पिछले
- 31:398000 साल में भारत में कुल कितने
- 31:42विश्वविद्यालय खुले? आप पाओगे कुछ नहीं।
- 31:46कुछ नहीं।
- 31:53जहां ज्ञान की कदर नहीं वहां गुलामी नहीं
- 31:55आएगी तो और क्या आएगा?
- 32:02मुगल बादशाहों को लेकर भी आप कहते हो अरे
- 32:04उन्होंने मकबरे बनाए, ताजमहल बनवाए। यह तो
- 32:09बताओ विश्वविद्यालय कितने बनवाए? और यह
- 32:12जनता का पैसा है। यह जनता का पैसा है
- 32:14जिससे आप कह रहे हो फलानी मीनार बनवा दो,
- 32:16यह कर दो, वो कर दो। स्कूल कॉलेज कितने
- 32:19बनवा रहे हो?
- 32:21रिसर्च ग्रांट कितनी दे रहे हो? और रिसर्च
- 32:24नहीं करोगे तो टेक्नोलॉजी कहां से आएगी?
- 32:28लड़ाईयां कैसे लड़ोगे?
- 32:31मेडिसिन कैसे आगे बढ़ेगी?
- 32:37यही वो काल था
- 32:41रेनेसा के बाद का। जब ब्रिटेन में विज्ञान
- 32:46तेजी से आगे बढ़ा। भारत में रेनसा हुआ ही
- 32:48नहीं।
- 32:51और रेनसा का संबंध किससे था?
- 32:55स्वतंत्रता से। उन्होंने कहा रेनसा माने
- 32:59विचार की स्वतंत्रता। भारत ने तो उससे आगे
- 33:02की बात कर रखी थी। भारत ने कहा था
- 33:07स्वतंत्रता माने अस्तित्व की मुक्ति।
- 33:10एग्जिस्टेंशियल फ्रीडम। पर उस बात को हमने
- 33:13बिल्कुल दफन कर दिया। हमने कहा हमें
- 33:16श्रुति पढ़नी नहीं। हमें उपनिषद चाहिए
- 33:18नहीं। हमें वेदांत चाहिए नहीं। तो फिर
- 33:20हमें फ्रीडम भी चाहिए ही नहीं।
- 33:30इतनी हमने दुर्दशा कर ली थी। मैकले का नाम
- 33:32तो सुना ही है आपने।
- 33:34उसने एक ऐसा व्यंग मारा था।
- 33:39उसकी चोट आज भी महसूस होती है। उसने कहा
- 33:41था भारत में इस वक्त जितना यह कुल ज्ञान
- 33:43है इससे ज्यादा ज्ञान लंदन की एक स्कूल
- 33:46गोइंग बच्ची को है दसवीं की भारत का कुल
- 33:50ज्ञान ले लो जितना है। कुल ज्ञान भारत का
- 33:55या इसी से कुछ मिलतीजुलती बात आप सर्च
- 33:58करेंगे तो एग्जैक्ट उसके शब्द मिल जाएंगे
- 34:00आपको।
- 34:08ज्ञान की जरूरत क्या है? हमें क्या करना
- 34:10है?
- 34:11कुछ नहीं। बस कल्पना करनी है कि ऐसा
- 34:15कर्मकांड कर दो तो स्वर्ग लोक प्राप्त हो
- 34:17जाएगा। यह कल्पना करनी है हमें। ज्ञान की
- 34:19जरूरत क्या है?
- 34:22और ज्ञान में फिर आत्मज्ञान की तो एकदम ही
- 34:24कोई जरूरत नहीं है।
- 34:35धर्म माने ऊंची से ऊंची स्वतंत्रता और
- 34:39लोकधर्म माने सबका शोषण। सबको दबा के रखो।
- 34:42चाहे महिला हो, चाहे दलित हो, चाहे पशु
- 34:44हो, पक्षी हो और चाहे अपनी ही हस्ती हो,
- 34:47अपना ही दमन कर डालो।
- 35:02हम जब
- 35:04लगे हुए हैं
- 35:08भूत प्रेत जादू टोना धर्म आधारित जाति
- 35:12आधारित राजनीति करने में यहां उत्तर में
- 35:15चीन आगे बढ़ता ही जा रहा है। बढ़ता ही जा
- 35:17रहा है। बढ़ता ही जा रहा है। बहुत आगे
- 35:18बढ़ता जा रहा है। और ज्यादा आगे बस पिछले
- 35:2125 साल में बढ़ा है।
- 35:241990 के दशक पर भी भारत और चीन अगल-बगल ही
- 35:28चल रहे थे। अभी 2530 साल में वो और इतना
- 35:32आगे बढ़ गया चीन। अब जब वो सीमाओं में
- 35:35घुसा चला आएगा तो क्या करोगे वहां पर?
- 35:39मंत्र मारोगे, भस्म मारोगे?
- 35:43उसे कहोगे तुम लोगों की जाति क्या है?
- 35:45पहले अपनी जाति बताओ।
- 35:47उससे कहोगे तुम तो हारोगे क्योंकि तुम तो
- 35:49मुहूर्त देख के आते ही नहीं। तो तुम्हारी
- 35:51तो हार निश्चित है।
- 35:57सामने चला आ रहा उसकी कुंडली मांगोगे कि
- 35:59जा रहे हैं कुंडली बाबा जी को दिखाएंगे कि
- 36:00इसको कैसे वशीभूत करें।
- 36:05क्या करोगे?
- 36:31हम आज भी खतरे में हैं। संभल जाइए, चेत
- 36:34जाइए।
- 36:41और सबसे बड़ा दुश्मन हमारे ही भीतर बैठा
- 36:43है। यहां बगल के घर में नहीं हमारे ही
- 36:46भीतर बैठा है।
- 36:58और एक बताता हूं आने वाले समय में ना
- 37:02गुलामी के लिए जरूरी नहीं है कोई आपकी
- 37:04जमीन पर कब्जा करे। वो बात ओल्ड फैशंड हो
- 37:07गई कि किसी को गुलाम बनाना है तो उसकी
- 37:09जमीन पर कब्जा कर लो। अब जरूरत ही नहीं
- 37:10है।
- 37:12रखो अपनी जमीन।
- 37:15तुम खुद अपनी जमीन पर हमें आमंत्रित
- 37:17करोगे।
- 37:21तुम खुद हमारे दास बनकर हमारे देशों में
- 37:24आओगे, हमारी सेवा करोगे। पहले तो स्लेव
- 37:27ट्रेडिंग करनी पड़ती थी। अब तुम बाकायदा
- 37:29वीजा लेकर आओगे और हमारी सेवा करोगे।
- 37:36पहले तुम किसी को गुलाम बनाओ पकड़ के
- 37:38बेड़ियों में और जहाजों में भर-भर के एक
- 37:41गुलाम जा रहे हैं, स्लेव्स जा रहे हैं। तो
- 37:43बुरा लगता था, देखने में ही बुरा लगता था।
- 37:45अब आप बाकायदा वहां जाते हो। एंबेसी में
- 37:48लाइन लगाकर वीजा लेते हो और खुद अपने आप
- 37:50को हाजिर करते हो। दास हाजिर है मेरे आका।
- 37:52बताइए क्या सेवा करूं? वो बोलते हैं अब
- 37:54तुम हमारे यहां टैक्सी चलाओगे।
- 37:58जब आप ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ को
- 38:00लेते हैं। ग्लोबल नॉर्थ कई गुना ज्यादा
- 38:02अमीर है पर कैपिटा टर्म्स में। लेकिन
- 38:04ड्रेन ऑफ वेल्थ आज भी ग्लोबल साउथ से
- 38:06ग्लोबल नॉर्थ को ही हो रहा है। बिना किसी
- 38:09पॉलिटिकल सब्जुगेशन के खुद ही हो रहा है।
- 38:15जब इंडिया पॉलिटिकली सबजुगेटेड था तब तो
- 38:18हमें पता ही है कि ड्रेन ऑफ वेल्थ हुआ था।
- 38:19जानते ही हो वो ड्रेन ऑफ वेल्थ आज भी हो
- 38:21रहा है।
- 38:23अब बाकायदा डील के माध्यम से हो रहा है।
- 38:26बाकायदा ट्रेड ट्रीटीज के माध्यम से हो
- 38:29रहा है।
- 38:31कोई जरूरी नहीं कि आके अब कोई आपकी जमीन
- 38:33पर कब्जा करे।
- 38:35अब आप विलफुली सरेंडर करोगे। अब आप कहोगे
- 38:38मैं खुद चल के आया हूं आपकी गुलामी करने।
- 38:52भारत का जितना
- 38:56पर कैपिटा कार्बन डाइऑक्साइड एमिशन है ना
- 38:59उसमें से बहुत सारा वो है जो विदेशियों ने
- 39:02भारत को आउटसोर्स कर रखा है।
- 39:06यह है नए किस्म की
- 39:10गुलामी।
- 39:14जब आप यह देखते हो उदाहरण के लिए कि यूरोप
- 39:16का
- 39:18यूरोप का जो यूरोपियन मैन्युफैक्चरिंग और
- 39:21सर्विज हैं उनसे कितना एमिशन है तो एक
- 39:24आंकड़ा आता है। फिर जब आप उसमें ये देखते
- 39:27हो कि वो फुटप्रिंट कितना है जहां
- 39:30उन्होंने एमिशन कहीं और कराया और वो
- 39:32प्रोडक्ट अपने आप मंगा कर खुद यूज़ कर
- 39:34दिया तो वो आंकड़ा लगभग 20 30% बढ़ जाता
- 39:37है। नहीं समझे? सारा गंदा काम दूसरे देश
- 39:41करेंगे। तो सारा एमिशन दूसरे झेलेंगे।
- 39:43सारा पोल्यूशन दूसरे झेलेंगे। और जो माल
- 39:46बना दो माल हमें दे दो साफ-साफ करके।
- 39:49ये है नए किस्म की गुलामी।
- 40:03और इसका भी समाधान वही है। मास बेस्ड
- 40:07एजुकेशन ऑफ द सेल्फ। जब तक व्यक्ति जागृत
- 40:11नहीं होता तब तक राष्ट्र कैसे जागृत होगा?
- 40:16एक-ए व्यक्ति को जगाए बिना हम कैसे कह दें
- 40:18कि एक जागृत राष्ट्र है?
- 40:26आ रही है बात समझ में?
- 40:32सारा जो अपना साधारण काम है, उन्होंने
- 40:37सौंप दिया अब काले और भूरे लोगों को।
- 40:42खुद क्या कर रहे हैं? वैल्यू एडेड वर्क,
- 40:45हाई एंड वर्क, रिसर्च जिससे नई
- 40:48टेक्नोलॉजीस निकल रही हैं, जिससे नया
- 40:51नॉलेज क्रिएट हो रहा है और आप क्या करोगे?
- 40:54आप बर्तन घिसोगे।
- 40:57आप वो सारा काम करो जो लो लेवल का है।
- 41:02तो उनका समय बचता है ताकि वह ऊंचा काम कर
- 41:05पाएं। यह है नया सबजुगेशन, नई गुलामी।
- 41:18और इसमें कोई उन्हें बुरा भी नहीं बोलेगा।
- 41:20क्योंकि आप जो कर रहे हो अब अपनी मर्जी से
- 41:23कर रहे हो। आपको बकायदा पैसे मिल रहे हैं
- 41:24काम करने के।
- 41:29क्या नहीं है भारत के पास? सब कुछ है। सब
- 41:33कुछ है। एक क्रूड ऑयल को छोड़ दो उसके
- 41:35अलावा। पर फिर एनर्जी के दूसरे भी होते
- 41:38हैं। क्रूड ऑयल को छोड़ दो और कुछ रेयर
- 41:40अर्थ्स हैं उनको छोड़ दो। सब कुछ है।
- 41:49उसके बाद भी आज भी हमें क्रूशियल
- 41:53टेक्नोलॉजीस के लिए दूसरे देशों का मुंह
- 41:56क्यों तकना पड़ रहा है? बताओ ना।
- 41:58क्योंकि भीतर अभी कुछ है जो स्वतंत्र नहीं
- 42:01है।
- 42:02वह नकल करने में ज्यादा सुविधा और सुरक्षा
- 42:05मानता है। वो कहता है दूसरे ने कर लिया ना
- 42:07वो नकल कर लो। उसने करा है तो ठीक करा
- 42:10होगा।
- 42:12ठीक वैसे जैसे लोकधर्म कहता है नकल करो
- 42:15नकल करो। परंपरा है ना। परंपरा माने यही
- 42:16तो होता है। उसने करा तुम भी कर लो।
- 42:18क्योंकि वही श्रेष्ठ है। तुम्हारे अलावा
- 42:20जो भी कोई हो श्रेष्ठ है बस उसका जो करा
- 42:22था उसने उसको सही मान के खुद उसकी नकल कर
- 42:24लो।
- 42:26वही चीज हमारी राष्ट्रीय आदत बन गई है।
- 42:29हमारे अलावा जो कोई है वो बेहतर ही है।
- 42:31उसने जो करा उसकी नकल कर लो। टेक्नोलॉजी
- 42:34वो करेंगे। रिसर्च वो करेंगे। हमारा क्या
- 42:36काम है? अधिक से अधिक टेक्नोलॉजी का
- 42:38लाइसेंस ले लो।
- 42:42सामरिक टेक्नोलॉजीस में जो सबसे सेंट्रल
- 42:46मोस्ट क्रूशियल होती हैं वो हमारी सारी की
- 42:48सारी आज भी इंपोर्टेड है।
- 42:56फोर्थ दुनिया सिक्स्थ जनरेशन फाइटर जेट पर
- 42:59पहुंच गई है। हमारे पास फोर्थ जनरेशन का
- 43:01भी अपना इंजन नहीं है। और इंजन ही नहीं है
- 43:04तो क्या है? इंजन ही इंपोर्ट करना पड़ रहा
- 43:07है। युद्ध शुरू होगा। वो वहां से बंद कर
- 43:08देगा एक्सपोर्ट करना इंजन को। क्या कर
- 43:10लोगे?
- 43:13और इंजन में जो फ्यूल डलता है वो भी
- 43:15तुम्हें इंपोर्ट करना पड़ रहा है। इंजन भी
- 43:16इंपोर्ट करना पड़ रहा है। फ्यूल भी
- 43:18इंपोर्ट करना पड़ रहा है। तो अगर सचमुच हो
- 43:20गई आरपार की लड़ाई तो हम कैसे लड़ेंगे?
- 43:23कितनी खतरे की बात है ये? पर हम अल्टरनेट
- 43:26टेक्नोलॉजीस डेवलप ही नहीं कर पाए। क्यों?
- 43:31हम अपनी रिसर्च करके अपने इंज डेवलप ही
- 43:34नहीं कर पाए। क्यों? क्योंकि परंपरा ने
- 43:38हमें अनक्रिएटिव बना दिया है।
- 43:42जिसको आप यह बोल दोगे ना कि जो पीछे से
- 43:44चला आ रहा है बस उसी का पालन कर लो। वो
- 43:47आदमी अब क्रिएटिव नहीं हो सकता।
- 43:57एआई एक मौके की तरह आया था हमारे पास।
- 44:01वह मौका भी लगभग हमने पूरा गवा ही दिया
- 44:03है।
- 44:08एआई में भी छलांग मार के
- 44:12अमेरिका, यूरोप, चीन भी
- 44:16ये निकल गए
- 44:24और कारण
- 44:27तो एक ही है लोकधर्म।
- 44:31वो आपको खतरे नहीं उठाने देगा। वो आपको
- 44:33रिस्क टेकिंग बनने ही नहीं देगा। वो आपसे
- 44:36कहेगा सुरक्षा बड़ी बात है।
- 44:40जैसी हमारी माएं होती हैं कि बच्चे को ले
- 44:43लो कहीं बाहर मत जाना कुछ हो जाएगा।
- 44:49वहां तो वहां होती है। ऐसा कैसे होता है
- 44:50कि अमेरिका की मां 15 साल का हुआ नहीं कि
- 44:52लात मारती है कि जा अपनी रोटी खुद कमा।
- 44:55उनके क्या डीएनए अलग है। वो भी
- 44:58होमोसेपियंस। हम भी पर हमारे यहां तो कुछ
- 45:01है ही नहीं कि नहीं नहीं नहीं। जैसा सबने
- 45:03करा वैसे ही तू भी कर ले और आजा पल्लू के
- 45:06नीचे छुप जा
- 45:17और इस बात पर हमें फक्र भी बहुत रहता है।
- 45:18हम कहते हैं यही तो यही तो हमारी
- 45:23गौरवशाली संस्कृति है। गौरव श्रुति में
- 45:27लीजिए। संस्कृति में नहीं। और संस्कृति
- 45:30में गौरव तब लीजिए जब संस्कृति श्रुति का
- 45:33अनुगमन करती हो। तब जरूर संस्कृति में
- 45:35गौरव ले लीजिएगा। लेकिन आपने जो आज
- 45:37संस्कृति बना रखी है उसमें कहां सनातन और
- 45:40कहां श्रुति कुछ नहीं है। इस संस्कृति पर
- 45:42मैं कैसे गौरव करूं?
- 45:45ये तो लोक धार्मिक संस्कृति है।
- 45:52खेती करते हैं ना हम।
- 45:55खेती में भी जो इनोवेशन हुए हैं वह दूसरे
- 45:57देशों ने करें। आजादी के बाद भी
- 46:03इजराइल को मिली थी बिल्कुल बंजर जमीन कुछ
- 46:06नहीं।
- 46:08उसने खेती के नए-नए तरीके निकाल करके वहां
- 46:10पर काम कर डाला। भारत ने भी कुछ करा है।
- 46:12वहां पर पूसा वगैरह है। नए किस्म के बीज
- 46:14वगैरह हम करते हैं।
- 46:17लेकिन आप आज भी सुनते होंगे जैपनीज मेथड
- 46:18ऑफ राइस कल्टीिवेशन।
- 46:22जो ब्रेक थ्रू इनोवेशंस हैं वह सब बाहर
- 46:25कहीं हो रहे हैं। हमारे यहां कुछ मार्जिनल
- 46:28इंक्रीमेंटल इंप्रूवमेंट हो जाए तो हो
- 46:30जाए। ब्रेक थ्रू कुछ होने नहीं पाता
- 46:32क्योंकि क्योंकि ब्रेकिंग थ्रू के लिए हम
- 46:34तैयार ही नहीं है। हम डरे हुए लोग हैं।
- 46:37हमें डरा दिया गया है कि ऐसा-सा करो नहीं
- 46:39तो शराप लग जाएगा।
- 46:43ऐसासा करो नहीं तो परंपरा टूट जाएगी। लोग
- 46:45नाराज हो जाएंगे।
- 46:52वो पुराना डर बहुत गहरे बैठ गया हमारे
- 46:55जेहन में।
- 47:01हम खेती में भी क्रिएटिव नहीं हो पाए।
- 47:03जिसका मतलब भारत कृषि प्रधान देश है। अरे
- 47:05कृषि प्रधान देश है तो कृषि में ही कुछ
- 47:07नया हमने करा होता। वहां भी नहीं करा।
- 47:18हां, यह जरूर करा है कि मांस के, बीफ के
- 47:22एक्सपोर्ट में हम सबसे आगे हैं।
- 47:29दुनिया के 100 सबसे गर्म शहर ले लो वो
- 47:33भारत में मिलेंगे सब। दुनिया के 100 सबसे
- 47:35प्रदूषित शहर ले लो वो भारत में मिलेंगे
- 47:37सब।
- 47:39उसमें आगे हो गए।
- 47:44और यह खुद करा है हमने अपने साथ। यह किसी
- 47:46और की साजिश नहीं है। और जब तक हमारी
- 47:50संस्कृति आम आदमी
- 47:53की कंडीशनिंग वैसी ही रहेगी जैसी है कोई
- 47:57सुधार नहीं हो सकता। सतर्कता दिवस क्या
- 48:01सतर्कता दिवस
- 48:08हम बोलिए थैंक यू आशा जी। मकोले का कोट जो
- 48:13आपने बताया था
- 48:18इसमें उन्होंने कहा था कि इंडियन टेक्स्ट
- 48:22जो संस्कृत और अरबिक में लिखे थे वो
- 48:26यूरोपियन स्टैंडर्ड्स से इतने पीछे हैं कि
- 48:30एस्ट्रोनॉमी का जो उनका विवरण है दैट वुड
- 48:33ड्रॉ लाफ्टर फ्रॉम इंग्लिश बोर्डिंग स्कूल
- 48:36गर्ल्स। उन्होंने कहा भारत में यह जो
- 48:38तुमने चला रखा है तुम्हारे जो साइंस के
- 48:41लेवल्स हैं और जो तुम यह कुंडलीबाजी करते
- 48:44हो इंग्लिश बोर्डिंग स्कूल गर्ल्स भी
- 48:48हसेंगी इस पर
- 48:50कितने अपमान की बात है ये है कि नहीं और
- 48:52कितने अफसोस की बात है और और ज्यादा अफसोस
- 48:56की बात ये नहीं है कि जो आज की युवा पीढ़ी
- 48:58की गर्ल्स हैं ये आज भी हॉरोस्कोप बनवा
- 49:00रही हैं ऐप पे जाकर के और ये बात मैकोले
- 49:04ने इतने 100 साल पहले बोली थी आज आज भी
- 49:06वही चल रहा है।
- 49:11शुभचिंतक नहीं था वो हमारा। यह उसने क्या
- 49:14करा है? व्यंग करा है हमारे ऊपर।
- 49:17हम पूरी तरह आहत भी नहीं होते।
- 49:27और उन्होंने यह भी बोला कि मेडिकल
- 49:30डॉक्ट्रिंस जो है इंडिया
- 49:31और गर्ल्स भी जानबूझकर बोला है। बॉयज
- 49:33क्यों नहीं बोला?
- 49:37यह दिखाने के लिए कि भारत में तो गर्ल्स
- 49:41पढ़ती ही नहीं है।
- 49:44और वहां पीछे इंग्लैंड में गर्ल्स भी इतना
- 49:48पढ़ती है कि तुम्हारे यहां के बड़े-बड़ों
- 49:50से ज्यादा ज्ञान रखती हैं।
- 50:00क्या करती है गर्ल्स?
- 50:03भारत का जितना फीमेल लेबर फोर्स
- 50:05पार्टिसिपेशन रेट है इससे दुगना है चीन का
- 50:08तो भारत की गर्ल्स क्या कर रही हैं फैमिली
- 50:13फैमिली
- 50:15वहां पर महिलाएं निकल कर काम कर रही हैं
- 50:17राष्ट्र बना रही हैं। नेशन बिल्डिंग कर
- 50:21रही हैं। हमारे यहां महिलाएं फैमिली
- 50:24बिल्डिंग कर रही हैं।
- 50:28एक देश के 50% नागरिकों को तुमने किचन में
- 50:32और बिस्तर में कैद कर दिया है।
- 50:37और दूसरा राष्ट्र है जो अपने स्त्रियों,
- 50:40पुरुषों सबको काम पर लगा रहा है। आगे कौन
- 50:44निकलेगा?
- 50:46आगे कौन निकलेगा?
- 50:53और है कुछ?
- 50:55उन्होंने यह बोला कि जो हमारे मेडिकल
- 50:58डॉक्टेंस हैं उस पे जो विवरण है दैट वुड
- 51:02एंबरेस एन इंग्लिश ब्लैक स्मिथ लुहार की
- 51:06बात कर रहे थे।
- 51:07कह रहे हैं कि तुम जिसको अपनी मेडिसिन
- 51:09बोलते हो
- 51:11इंग्लैंड का एक लोहार भी वो सब सुनेगा तो
- 51:15कहेगा ये क्या है? कैसी बातें बोल रहे हो?
- 51:17अरे इंग्लैंड के लोहार को भी तुमसे ज्यादा
- 51:19ज्ञान है। वो अतिशयोक्ति कर रहा है।
- 51:22मैकोले कोई अच्छा आदमी नहीं है। शुभचिंतक
- 51:24नहीं है हमारा। अतिशयोक्ति कर रहा है। पर
- 51:27क्या हम इंकार कर सकते हैं कि हमने अपनी
- 51:29दुर्दशा कर रखी थी। इसीलिए किसी दूसरे को
- 51:32हक मिला हम पर व्यंग करने का? बोलो।
- 51:41और है कुछ? उन्होंने एक्चुअली लोक धर्म का
- 51:44भी कुछ मेंशन किया कि भारत की ज्योग्राफी
- 51:47तो शहद और मक्खन के सीज डिस्क्राइब करती
- 51:51है।
- 51:52वो कह रहे हैं कि ये जो बाकी सारे
- 51:55डिसिप्लिंस ले रहे हैं। मेडिसिन ले ली,
- 51:57एस्ट्रोनॉमी ले ली। अब ज्योग्राफी ले रहे
- 51:59हैं। कह रहे हैं तुम्हारे यहां पे जो
- 52:01ज्योग्राफी है उसके हिसाब से तो कहीं पर
- 52:05दूध की नदी बहनी चाहिए। कहीं पर मक्खन है,
- 52:07कहीं शहद है, कहीं खीर का सागर है, कहीं
- 52:11कुछ है। कह तुम्हारे यहां यह लेवल है
- 52:14जग्राफी का। यह पढ़ाते हो तुम अपने बच्चों
- 52:17को कि उतनी दूर अगर चले जाओगे तो वहां
- 52:20तुम्हें मक्खन की नदी मिलेगी।
- 52:22कह रहे तुम ये जब पढ़ा रहे हो तो तुम्हारा
- 52:24देश आगे बढ़ेगा क्या? और आज भी क्या हम इन
- 52:26सब बातों में यकीन नहीं करते हैं? बोलिए।
- 52:31जग्राफी में भले ही नहीं पढ़ाया जाता हो
- 52:33पर संस्कृत में मौजूद है कि मरोगे वहां
- 52:36जाओगे तो बीच में फलानी नदी मिलेगी फिर
- 52:38ऐसे पार करोगे फिर दूध आएगा फिर मक्खन
- 52:41आएगा फिर फलाना ढिकाना ये अप्सरा आएगी
- 52:48क्यों हम किसी मैले को मौका दे रहे हैं
- 52:54हमें आहत करने का
- 52:58और मैकाले मर नहीं गया मैकोले आज भी जिंदा
- 53:00है। वो हजार तरीकों से आज भी हम पर व्यंग
- 53:04कर रहा है।
- 53:13और यह हक उसे
- 53:16बहुत अफसोस की बात है। हमने ही दिया है।
- 53:34वेद है हमारे प्राथमिक ग्रंथ ठीक है वैदिक
- 53:38धर्म
- 53:40जिस दिन से वेदांत
- 53:43वेदांत माने वेदों का दर्शन जिस दिन से
- 53:47वेदांत का गलत अर्थ भारत में प्रचलित हुआ
- 53:51उस दिन से भारत की अवनति शुरू शुरू हो गई।
- 53:54बस यह है बात।
- 53:58अगर आप भारत की गुलामी
- 54:01की टाइमलाइन देखेंगे और वेदांत की विकृति
- 54:04की टाइमलाइन देखेंगे तो दोनों बिल्कुल
- 54:07समानांतर है।
- 54:16वेदांत बहुत सीधा है। श्रुति धर्म अद्वैत
- 54:22और भारत ने
- 54:24जब यह स्वीकार कर लिया कि वेदांत को
- 54:26तोड़ना मरोड़ना ठीक है। उसमें इधर-उधर की
- 54:29बातें मान्यताएं डालना ठीक है। जो बात कही
- 54:31ही नहीं जा रही वो बात उस पर प्रक्षेपित
- 54:33करना ठीक है। वहीं से भारत की अवनति शुरू
- 54:36हो गई।
- 54:38ये है कारण।
- 54:45हम
- 54:47आचार्य जी एक अभी खबर भी आई है कि एक
- 54:51मंदिर में एमपी के एक मंदिर में 11 अगस्त
- 54:54को मनेगा स्वतंत्रता दिवस क्योंकि वहां के
- 54:56पुजारी कह रहे हैं कि तिथि देखकर मनाना
- 54:59चाहिए राष्ट्रीय पर्व भी।
- 55:06ट्रेन भले ही शाम को 7:00 बजे आती हो। आप
- 55:09जाइएगा रात में 10:00 बजे।
- 55:13क्योंकि आप तो तब जाएंगे ना जब आपका
- 55:17हिसाब किताब बोलता हो कि अब यह मुहूर्त
- 55:19है।
- 55:21तथ्यों के लिए तो हमारे पास कोई सम्मान ही
- 55:24नहीं है।
- 55:26मेरी धारणा, मेरी मान्यता, मेरी कल्पना
- 55:28मैं उस पर चलूंगा।
- 55:42आपको खुशी होगी इस नाते जो हमारी अपनी ऐप
- 55:46है जिसमें हमारे गीता और बाकी सब
- 55:48कार्यक्रम चलते हैं। यहां पर बुद्ध हैं,
- 55:51गीता है, उपनिषद है, अष्टावक्र हैं। यह
- 55:54मुझे [संगीत] मिले मेरी जिंदगी बदली। यह
- 55:56तुम्हें मिलेंगे तुम्हारी जिंदगी भी
- 55:57बदलेगी। सच पूछिए तो मतलब लाखों नहीं तो
- 56:00कम से कम हजारों जिंदगियां तो हैं जो
- 56:02बिल्कुल बदली हैं।
- 56:032 लाख से अधिक गीता प्रतिभागियों के साथ
- 56:06जुड़े [संगीत] आचार्य प्रशांत ऐप पर। पहला
- 56:09महीना बिल्कुल फ्री गीता मिशन का पूरा
- 56:12एक्सेस ऐप पर आपको मिलेंगे नियमित लाइव
- 56:15सत्र हर दिन आचार्य प्रशांत के विशेष
- 56:18संवाद गीता कम्युनिटी का एक्सेस गीता
- 56:21परीक्षा चयनित समाचार ऑडियो बुक्स कोर्ट्स
- 56:25और भी बहुत कुछ Google Play स्टोर या
- 56:28Apple App स्टोर पर आचार्य प्रशांत सर्च
- 56:31करें और अभी डाउनलोड करें
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This page contains the full transcript of सतर्क रहें - देश पर पुराने खतरे आज भी हैं || आचार्य प्रशांत (2026) by आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 7,051 words across 1,022 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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