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सतर्क रहें - देश पर पुराने खतरे आज भी हैं || आचार्य प्रशांत (2026) — Transcript

by आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant · 7,051 words · 1,022 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00क्योंकि स्वतंत्रता दिवस आने वाला है।
  2. 0:02स्कूलों में देखूंगा तो मन सजेंगे उत्साह
  3. 0:04दिखेगा। उस दिन के लिए इतना उत्साह दिखता
  4. 0:07है। दूसरे ही दिन सड़क पर तिरंगे बिखरे
  5. 0:10हैं। जो बातें हुई थी उनका कहीं नामोनिशान
  6. 0:12नहीं दिखेगा। क्या भारत सदा से गुलाम था?
  7. 0:15बोलो ना। तो ये गुलामी कहां से आ गई?
  8. 0:18प्रश्न तो यह होना चाहिए कि इतने लंबे समय
  9. 0:20तक दूसरे लोग आकर के हम पर चढ़े रहे,
  10. 0:23कब्जा करे रहे। ये कैसे हो गया? सोचो
  11. 0:25कितनी दूर था ब्रिटेन। वो वहां से पूरा
  12. 0:28घूम करके अफ्रीका इधर आ गए और कब्जा भी कर
  13. 0:31लिया। इतने मुट्ठी भर लोग उतनी दूर से आ
  14. 0:33रहे हैं और उनके पास कुछ विशेष नहीं। आप
  15. 0:36जरा सा सर्च करिएगा कि अंग्रेजों के आने
  16. 0:39से पहले पिछले 500 साल में और पिछले 8000
  17. 0:42साल में भारत में कुल कितने विश्वविद्यालय
  18. 0:45खुले? आप पाओगे कुछ नहीं। स्कूल कॉलेज
  19. 0:48कितने बनवा रहे हो? रिसर्च ग्रांट कितनी
  20. 0:50दे रहे हो? और रिसर्च नहीं करोगे तो
  21. 0:52टेक्नोलॉजी कहां से आएगी? लड़ाईयां कैसे
  22. 0:54लड़ोगे? मेडिसिन कैसे आगे बढ़ेगी? जितनी
  23. 0:57भी यूरोपियन ताकतें थी उनकी जो टेक्नोलॉजी
  24. 1:00थी वो भारतीय राजाओं की टेक्नोलॉजी से
  25. 1:03कहीं आगे की थी। क्यों भारतीयों की क्या
  26. 1:05बुद्धि कम है नहीं बुद्धि नहीं कम है।
  27. 1:06बुद्धि पर
  28. 1:08हम इतने सारे हैं और हारते गए। ये गीता
  29. 1:12पढ़ने वालों के साथ तो नहीं हो सकता। तो
  30. 1:14बताओ पहले उत्सव मनाऊं या पहले और चौकन्ना
  31. 1:18होकर के नजर घुमाऊं? बोलो।
  32. 1:23स्वतंत्रता दिवस को सतर्कता दिवस की तरह
  33. 1:26मनाइए। खतरा बराबर का है। खतरा अभी बाकी
  34. 1:29है। और खतरे का कारण
  35. 1:35प्रणाम आचार्य जी।
  36. 1:37मेरा नाम कमलेश है। मैं राजस्थान उदयपुर
  37. 1:40से आया हूं सर।
  38. 1:42मेरा क्वेश्चन
  39. 1:44स्वतंत्रता दिवस पर है। क्योंकि
  40. 1:47स्वतंत्रता दिवस आने वाला है तो
  41. 1:51मैं अपने गांव से शुरू करूं तो स्कूलों
  42. 1:55में देखूंगा तो मंच सजेंगे। धूमधाम से
  43. 1:58मनाया जाएगा। बहुत उत्साह दिखेगा। थोड़ा
  44. 2:01और बाहर निकलूूंगा तो तहसील लेवल पर या
  45. 2:05कॉलेजेस को देखूंगा तो वहां पर भी मन
  46. 2:08सजेंगे। उत्साह दिखेगा। रैलियां निकाली
  47. 2:11जाएगी। अभियान चलेंगे कि हर घर तिरंगा
  48. 2:14तिरंगे के साथ रैलियां निकलेंगी। देशभक्ति
  49. 2:16के नारे लगेंगे सर। तो फिर उस दिन के लिए
  50. 2:22इतना उत्साह दिखता है। देश के लिए हम देश
  51. 2:25को बदल देंगे। देश को तरह-तरह से विकास के
  52. 2:28लिए प्रण लिए जाएंगे और बड़ी-बड़ी बातें
  53. 2:31होंगी सर। और फिर दूसरे दिन देखूंगा कि
  54. 2:36सड़क पर तिरंगे बिखरे हैं। जो बातें हुई
  55. 2:39थी उनका कहीं नामोनिशान नहीं दिखेगा। अ बस
  56. 2:44वही लोग जो बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे वो
  57. 2:46या तो रिश्वत देने में संलिप्त रहेंगे या
  58. 2:49लेने में। वही लोग जो बड़ी-बड़ी बातें कर
  59. 2:52रहे थे। वही लोग कहीं पर गंदगी फैला रहे
  60. 2:55होंगे। तो ऐसीऐसी चीजें कर रहे होंगे जो
  61. 2:57देश को भीतर से खोखला कर रही है। तो मैं
  62. 3:01ये समझना चाह रहा था कि वास्तव में
  63. 3:03देशभक्ति कैसी होगी? हमें इस स्वतंत्रता
  64. 3:06दिवस को कैसे मनाना चाहिए और वास्तव में
  65. 3:08देशभक्ति का अर्थ क्या होगा?
  66. 3:11भारत हो या दुनिया का कोई भी अन्य देश
  67. 3:18जब उसकी स्थापना होती है
  68. 3:23तब उस दिन वो
  69. 3:27स्वतंत्र होता है या परतंत्र?
  70. 3:34स्वतंत्र या परतंत्र?
  71. 3:38चलो और निकट से शुरू करते हैं।
  72. 3:44एक इंसान है।
  73. 3:47ठीक है? एक इंसान है।
  74. 3:52उसकी स्वाभाविक स्थिति क्या है?
  75. 3:57मुक्ति या गुलामी?
  76. 4:01स्वाभाविक।
  77. 4:04ठीक।
  78. 4:08इसी तरह से अगर कोई
  79. 4:12नेशन भी होता है
  80. 4:16तो जैसा कुछ लोगों ने कहा
  81. 4:19कि अपने आरंभ में तो वह स्वतंत्र ही होता
  82. 4:22है ना। स्वतंत्र नहीं होता तो अस्तित्व
  83. 4:24में कैसे आता?
  84. 4:26कैसे आता?
  85. 4:30स्वतंत्रता तो एक डिफॉल्ट है। डिफॉल्ट
  86. 4:34माने
  87. 4:35बेसिक स्टेट बेसिक एंड नेचुरल स्टेट
  88. 4:39स्वाभाविक स्थिति
  89. 4:44तो स्वतंत्रता दिवस इस दृष्टि से देखो
  90. 4:50तो बात
  91. 4:53थोड़ी विचित्र सी लगती है कि हम किस तरीके
  92. 4:56से मना रहे हैं। स्वतंत्र तो देश को होना
  93. 5:00ही चाहिए
  94. 5:02और अस्तित्व में कि मनुष्य हो, नदी हो,
  95. 5:06पहाड़ हो, पशु-पक्षी हो
  96. 5:10बनते तो सभी स्वतंत्र हैं। सभी की जो
  97. 5:13डिफॉल्ट स्टेट है, वो तो स्वतंत्रता की ही
  98. 5:17है।
  99. 5:19है ना?
  100. 5:21जानवर होते हैं जंगल में, जानवर जंगल में
  101. 5:24है। वहां वो कैसा है?
  102. 5:27पक्षी आसमान में है वहां वह कैसा है? फिर
  103. 5:30आप पक्षी को पकड़ लाए उसे पिंजरे में डाल
  104. 5:32दे तब वह परतंत्र होता है ना या पक्षी
  105. 5:34पैदा ही परतंत्र होता है?
  106. 5:37पक्षी को परतंत्र बनाना पड़ता है। बनाना
  107. 5:40पड़ता है ना। इसी तरीके से राष्ट्र को भी
  108. 5:45कभी
  109. 5:47परतंत्रता स्वीकार करनी पड़ी। अन्यथा
  110. 5:51राष्ट्र की भी स्वाभाविक स्थिति तो
  111. 5:53स्वतंत्रता की ही है। स्वतंत्रता स्वभाव
  112. 5:57है। जैसे मनुष्य का स्वभाव है मुक्ति। उसी
  113. 6:01तरीके से राष्ट्र भी
  114. 6:04मनुष्य का ही है। अगर मनुष्य का स्वभाव है
  115. 6:07मुक्ति तो राष्ट्र का भी स्वभाव है।
  116. 6:09मुक्ति स्वतंत्रता। मनुष्य के लिए मुक्ति
  117. 6:12तो राष्ट्र के लिए स्वतंत्रता।
  118. 6:17तो हम यह कहें कि हमने स्वतंत्रता हासिल
  119. 6:22करी। इसका उत्सव मनाओ या ज्यादा आवश्यक है
  120. 6:26कि हम यह पूछे कि यह अनहोनी घट कैसे गई कि
  121. 6:31हम परतंत्र हो गए।
  122. 6:34बोलो ना।
  123. 6:36क्योंकि सच पूछो तो स्वतंत्रता तो
  124. 6:39अस्तित्वगत है।
  125. 6:42अस्तित्व में ही सब कुछ स्वतंत्र है। कोई
  126. 6:45किसी का गुलाम नहीं पैदा हुआ।
  127. 6:49तो पूछना तो यह चाहिए ना कि जब जन्म से सब
  128. 6:55कुछ आजाद ही है तो फिर आगे चलकर के ये
  129. 6:59गुलामी नाम की चीज कहां से आ गई?
  130. 7:03वही ज्यादा ईमानदार और ज्यादा उपयोगी
  131. 7:05प्रश्न है।
  132. 7:07ये गुलामी कहां से आ गई? क्या भारत सदा से
  133. 7:12गुलाम था?
  134. 7:13बोलो ना।
  135. 7:15क्या भारत सदा से गुलाम था? नहीं।
  136. 7:18तो गुलामी कहां से आ गई? प्रश्न तो यह
  137. 7:20होना चाहिए। आजादी तो नैसर्गिक है, गिवन
  138. 7:24है, नेचुरल है।
  139. 7:28प्रश्न तो यह होना चाहिए कि ये गुलामी नाम
  140. 7:30की चिड़िया कहां से आ गई? इतने बंधन कहां
  141. 7:32से आए? और कितनी अजीब कितनी विचित्र बात
  142. 7:34है।
  143. 7:37कोई 10, 20, 50 या 100 साल की बात नहीं।
  144. 7:44अगर देखो तो लगभग 1000 साल
  145. 7:49शुरुआत से लेकर अंत तक कभी कोई हिस्सा और
  146. 7:53कभी पूरा ही हिस्सा
  147. 7:56दूसरों के आधिपत्य में ये हो कैसे गया हम
  148. 7:59सदा से तो गुलाम नहीं थे कि थे
  149. 8:03ये कैसे हो गया कि इतने लंबे समय तक दूसरे
  150. 8:08लोग आकर के हम पर चढ़े रहे कब्जा करे रहे
  151. 8:10ये कैसे हो गया ये तो बहुत अबूझ बात है।
  152. 8:12ये बड़ी विचित्र बात है। अनहोनी है जो
  153. 8:14होनी नहीं चाहिए थी। ये हुई कैसे?
  154. 8:18और जब हम कहते हैं कि दूसरे आकर के भारत
  155. 8:22देश पर चढ़ बैठे
  156. 8:26कब्जा कर लिया। परतंत्र बना दिया।
  157. 8:30तो उसमें भी न जाने कितने लोग हैं। जैसे
  158. 8:32कि गुलामी का कालखंड बहुत लंबा है। उसी
  159. 8:36तरीके से उन लोगों की सूची भी बहुत लंबी
  160. 8:39है। जो आते गए।
  161. 8:42और कब्जा करते गए।
  162. 8:45वास्तव में जो कोई आ सकता था सब आए।
  163. 8:50जो भी आ सकते थे सब आए। एक के बाद एक आते
  164. 8:53ही गए। आते ही गए।
  165. 8:57वही नहीं आए जो आ ही नहीं सकते थे।
  166. 9:01जो नहीं आ सकते थे सिर्फ वही नहीं आए।
  167. 9:03वरना सभी आए। तुम गिनती गिनो। बताओ कौन सी
  168. 9:07बड़ी यूरोपियन ताकत थी जो भारत नहीं आई और
  169. 9:09कब्जा नहीं कर पाई? हमें अंग्रेज याद है।
  170. 9:13पर आप पुर्तगालियों को ले लो, आप फ्रेंच
  171. 9:15को ले लो, आप डच को ले लो।
  172. 9:21ये नहीं आए क्या? इन्होंने कब्जा नहीं
  173. 9:23करा? बताओ। वहां यूरोप से चले आ रहे हैं
  174. 9:27और जितने हैं यूरोपियन, सब चले आ रहे हैं
  175. 9:29एक के बाद एक और सब सफल हुए जा रहे हैं
  176. 9:31कब्जा करने में। ये अनहोनी कैसे घट गई?
  177. 9:34फिर आप जब एशिया आ जाते हो तो यहां पास से
  178. 9:38शुरू करो तो अफगानी
  179. 9:40ईरानी
  180. 9:42फिर तुर्क अरब
  181. 9:45हां
  182. 9:47सब आते गए सब चढ़ते गए ये कैसे हुआ
  183. 9:52कैसे
  184. 9:55और फिर आप मध्य एशिया को ले लो तो वहां से
  185. 9:57भी एक के बाद एक आ ही रहे थे शक हूण
  186. 10:01यद्यपि वो भारत को आने के बाद वो भारत में
  187. 10:04रच बस गए। पर आए वह भी बाहर से थे और वह
  188. 10:07भी सफलतापूर्वक यहां पर जीते और साम्राज्य
  189. 10:11स्थापित कर गए अपना। ये कैसे होता गया?
  190. 10:14कोई तो बात होगी।
  191. 10:17कोई तो बात होगी।
  192. 10:20और जब अंग्रेज चढ़े हुए थे उस समय में भी
  193. 10:22जापानी चढ़ाए थे। लो जैसे अंग्रेज काफी ना
  194. 10:26हो। अंग्रेजों के होते हुए भी जापानी चढ़े
  195. 10:30आ रहे क्या आपको पता है जापानियों ने
  196. 10:31चेन्नई पर भी बम गिराए हुए हैं? सुना नहीं
  197. 10:33होगा आपने।
  198. 10:35अजीब बात जापानी चेन्नई पहुंचे हुए थे।
  199. 10:38हां। द्वितीय विश्व युद्ध में कुछ दिनों
  200. 10:40के लिए उन्होंने चेन्नई पर भी बमबारी कर
  201. 10:42दी थी।
  202. 10:46अंडमान निकोबार हम जानते ही हैं। उधर वो
  203. 10:48जो मलय का किस्सा भी हम जानते ही हैं।
  204. 10:56बर्मा को भी हम जानते ही हैं।
  205. 10:59तब बर्मा
  206. 11:01ब्रदानवी साम्राज्य का ही हिस्सा था। भारत
  207. 11:03का द्वार था। सब जापानी वहां चढ़े हुए
  208. 11:06हैं।
  209. 11:09कैसे?
  210. 11:13हिटलर उधर प्लान बनाए बैठा था। क्या?
  211. 11:18कि जंग जीत जाएंगे।
  212. 11:20आप क्या सोच रहे थे कि वो कह रहा था
  213. 11:22अंग्रेजों को हरा करके भारत को फिर आजाद
  214. 11:25कर देंगे।
  215. 11:26वह कह रहे थे जब जंग जीत जाएंगे तो यह जो
  216. 11:29लंबा चौड़ा भारतीय उपमहाद्वीप है इसका
  217. 11:32विभाजन कर देंगे। कुछ जापानियों के नीचे
  218. 11:34रहेगा और कुछ जर्मनों के नीचे रहेगा।
  219. 11:37लो जर्मन बोले हम भी पीछे काहे छूटेंगे।
  220. 11:41उन्होंने भी अपनी नजर भारत पर डाल ही दी
  221. 11:44थी। यह तो अब वो हार गए। द्वितीय विश्व
  222. 11:46युद्ध तो आने नहीं पाए। जापानी तो लगभग आ
  223. 11:49ही गए थे। वो भी जंग हार गए तो आने नहीं
  224. 11:52पाए।
  225. 11:54कुछ तो बात होगी। कोई तो वजह होगी जो कोई
  226. 11:58आ सकता था आता गया जीतता गया कैसे करता
  227. 12:01गया बड़ा दुख लगता है आदमी चोटिल अनुभव
  228. 12:04करता है आपको आपको बुरा नहीं लग रहा है ये
  229. 12:06सुन के मुझे बहुत बुरा लग रहा है ये बात
  230. 12:09क्या हमारे लिए सिर्फ तथ्य की तरह है
  231. 12:13यह बात हमारा सीना चीर क्यों नहीं देती
  232. 12:18मैं पूछ रहा हूं हमें बुरा क्यों नहीं लग
  233. 12:21रहा है यह क्या हुआ कैसे हुआ होता ही गया
  234. 12:23होता ही गया
  235. 12:26और फिर आजादी के बाद भी चीन आया और जमीन
  236. 12:28हड़प कर चला गया।
  237. 12:30होता ही गया।
  238. 12:33वही तो बात होगी ना।
  239. 12:39मैं
  240. 12:42चाहूंगा कि स्वाधीनता दिवस को हम आत्म
  241. 12:45अवलोकन दिवस की तरह मनाएं। और पूछे अपने
  242. 12:48आप को कि स्वतंत्रता तो ठीक है पर पहले यह
  243. 12:50बताओ परतंत्रता कैसे आ गई थी?
  244. 12:53वो ज्यादा जरूरी सवाल है।
  245. 12:57स्वतंत्रता के लड्डू खा लेंगे बेशक। पर
  246. 13:00रखो अभी उन्हें इंतजार करने दो। पहले मैं
  247. 13:02ये समझना चाहता हूं कि इतना विशाल देश
  248. 13:08इतने सालों तक इतने अलग-अलग लोगों के अधीन
  249. 13:13रहा कैसे? बात क्या थी? कारण क्या थे? मैं
  250. 13:16उन कारणों को जानना चाहूंगा।
  251. 13:19क्योंकि अगर आपने उन कारणों को नहीं जाना
  252. 13:23तो यह कैसे आपको निश्चित पता है कि वह
  253. 13:25कारण आज भी मौजूद नहीं है। बोलो
  254. 13:28बोलो अगर वो कारण हजार साल तक मौजूद थे
  255. 13:33तो अभी तो राजनैतिक आजादी मिले कुल 75 साल
  256. 13:36हुए 47 से अभी तक तो 100 साल भी नहीं
  257. 13:40बीते।
  258. 13:42नहीं बीते ना?
  259. 13:45जो चीज साल से मौजूद थी वह क्या 75 80 साल
  260. 13:48में चली गई होगी पूरी तरह से
  261. 13:51जो चीज साल तक मौजूद थी और हमको गुलाम
  262. 13:54बनवाए रखी क्या वो चीज आपको सचमुच लगता है
  263. 13:58कि इधर
  264. 14:0080 78 80 साल में चली गई होगी चली गई होगी
  265. 14:03वो आज भी मौजूद है और अगर वो आज भी मौजूद
  266. 14:06है तो कितना बड़ा खतरा है भारत के ऊपर
  267. 14:10हम वो खतरा नहीं देख रहे हैं हम बिल्कुल
  268. 14:14शुतुर मूर्ख की तरह
  269. 14:16[नाक से की जाने वाली आवाज़] रेत में सर
  270. 14:17गाड़ करके उत्सव मनाना चाहते हैं कि लो
  271. 14:19आजादी आ गई। हां बहुत अच्छी बात है। आजादी
  272. 14:21आ गई। हम भी नाचना चाहते हैं। हम भी झूमना
  273. 14:23चाहते हैं। हम भी खुश होना चाहते हैं। पर
  274. 14:26मैं कैसे जो सर पर तलवार लटक रही है उसके
  275. 14:31प्रति अनभिज्ञ होने का अभिनय कर लूं। मुझे
  276. 14:34वह तलवार लटकती दिखाई दे रही है।
  277. 14:39कोई चीज एक बार हो, दो बार हो तो आप बोल
  278. 14:41सकते हो संयोग है।
  279. 14:44कोई चीज साल तक लगातार हो तो संयोग है
  280. 14:47क्या? उसमें संयोग है या संरचना है?
  281. 14:51संरचना है।
  282. 14:52बोलो।
  283. 14:53संरचना है।
  284. 14:53उसके पीछे कोई संरचना है। कोई स्ट्रक्चर
  285. 14:55है? उसके पीछे कोई स्ट्रक्चरल रीजन है।
  286. 15:02एक दो लोग आकर के युद्ध में हरा के आपका
  287. 15:06शोषण कर ले जाएं। तो आप कह सकते हो संयोग
  288. 15:09है बीच-बीच में कोई आता है कभी हार होती
  289. 15:11है कभी जीत होती है भाई चलता रहता है पर
  290. 15:13एक दो लोग नहीं दसियों अलग-अलग तरफ के
  291. 15:17अलग-अलग राष्ट्रीयता के अलग-अलग लोग आ रहे
  292. 15:20हैं
  293. 15:23और हमारा शोषण करते ही जा रहे हैं तो यह
  294. 15:25संयोग नहीं हो सकता ना क्या हो सकता है पर
  295. 15:29हम खुद को ये जताना चाहते हैं कि ये तो बस
  296. 15:31ऐसे ही हो गया हो गया जी हो गया हो नहीं
  297. 15:35गया
  298. 15:37डर मुझे यह है कि वो आज भी हो रहा है
  299. 15:42क्योंकि जो कारण हजार साल तक चलता रहा वो
  300. 15:4680 साल में हट नहीं गया होगा वो कारण आज
  301. 15:49भी मौजूद होगा
  302. 15:52वो कारण आज ही मौजूद होगा। हमें अपने आप
  303. 15:55से पूछना पड़ेगा वो कारण क्या है जिसने
  304. 15:58भारत को इतने बुरे दिन देखने पर विवश करा?
  305. 16:03वो कारण क्या है?
  306. 16:07क्या वह कारण राजनैतिक हो सकता है? नहीं।
  307. 16:09कोई राजनैतिक कारण इतने दिनों तक नहीं
  308. 16:10चलता। क्या वह कारण साहयोगिक हो सकता है?
  309. 16:12हम पहले ही कह चुके हैं। नहीं।
  310. 16:16वो कारण तो कुछ ऐसा है कि पीढ़ियां बदलती
  311. 16:19रही, लोग बदलते रहे पर वो कारण बचा रहा।
  312. 16:21वो कारण कैसा होगा?
  313. 16:24वो कारण तो सांस्कृतिक है।
  314. 16:28कोई ऐसी चीज है जो दुर्भाग्यवश भारत की
  315. 16:32हवाओं में घुल गई है।
  316. 16:36और संस्कृति बनकर बैठ गई है और हम उसको
  317. 16:38पहचान नहीं पा रहे। हम उसको अलग नहीं कर
  318. 16:40पा रहे।
  319. 16:43कुछ ऐसा है जो हमें भीतर से ही कमजोर बना
  320. 16:46रहा है।
  321. 16:48पर हम उसको बहुत पवित्र माने बैठे हैं। हम
  322. 16:50उसको हटा नहीं पा रहे अपने भीतर से।
  323. 16:53मैं उसको लोकधर्म कहता हूं।
  324. 16:56वह है भारत की परतंत्रता का कारण।
  325. 17:02और वह जब तक रहेगा
  326. 17:05तब तक भारत को दुर्बल ही रखेगा और जो
  327. 17:08दुर्बल होता है
  328. 17:10उसका शोषण करने तो कोई भी चला आता है।
  329. 17:13दुनिया में इतने स्वार्थी लोग हैं वो सब
  330. 17:15लगे हुए हैं कि कोई कमजोर दिखे जाकर के उस
  331. 17:17पर झपट्टा मार दो।
  332. 17:24निस्तेज
  333. 17:28मनुष्यों के साथ क्या तेजस्वी राष्ट्र हो
  334. 17:32सकता है?
  335. 17:36दुर्बल नागरिकों के साथ क्या बलि राष्ट्र
  336. 17:39हो सकता है? और मनुष्य का बल होता है
  337. 17:42वास्तविक धर्म।
  338. 17:45वास्तविक धर्म।
  339. 17:48भारत ने वास्तविक धर्म के साथ जो मजाक करा
  340. 17:51लोक धर्म के रूप में मुझे डर है कि कहीं
  341. 17:53उसकी सजा तो नहीं मिली है।
  342. 17:57नायम आत्मा बल हीनेन लभ्यो
  343. 18:02आत्मा और बल का बड़ा गहरा रिश्ता है।
  344. 18:08और अगर कहीं पर आत्मा की ही परिभाषा विकृत
  345. 18:11कर दी गई हो तो बल कैसे बचेगा? बोलो बल
  346. 18:16कैसे बचेगा?
  347. 18:23जहां आत्मा की ही परिभाषा विकृत कर दी गई
  348. 18:26वहां अब मनुष्य में बल कैसे बचेगा और
  349. 18:29मनुष्य में बल नहीं तो फिर राष्ट्र में बल
  350. 18:30नहीं और मनुष्य का बल होता है वास्तविक
  351. 18:33धर्म
  352. 18:37वास्तविक धर्म गया तो मनुष्य का बल गया।
  353. 18:39मनुष्य का बल गया तो राष्ट्र का बल गया और
  354. 18:42राष्ट्र का बल गया तो राष्ट्र परतंत्र हो
  355. 18:44गया।
  356. 18:47मैं बार-बार पूछा करता हूं। फिर पूछ रहा
  357. 18:49हूं।
  358. 18:54हम कहते हैं उदाहरण के लिए
  359. 18:59कि हम
  360. 19:03अपने महापुरुषों को पूजते हैं।
  361. 19:09उनको
  362. 19:11अपना आदर्श अपना रोल मॉडल घोषित करते हैं।
  363. 19:17आदर्श का तो अर्थ यह होता है ना
  364. 19:20कि जैसे वह जिए वैसे हम जिएंगे और जो
  365. 19:23उन्होंने कहा हम उसको समझेंगे। यही होता
  366. 19:27है ना आदर्श का अर्थ
  367. 19:31तो अगर श्री कृष्ण हमारे आदर्श हैं
  368. 19:35तो गीता हमारे जीवन में कैसे नहीं उतरी?
  369. 19:39और गीता तो कही ही गई है रणक्षेत्र पर।
  370. 19:43अगर हम वास्तव में श्री कृष्ण को जरा भी
  371. 19:47सम्मान देते होते
  372. 19:51तो युद्ध में हल्के कैसे पड़ जाते?
  373. 19:54गीता तो कहती है युद्धस्व। गीता तो कहती
  374. 19:58है
  375. 20:01जीत हार का पता नहीं। साम्राज्य की
  376. 20:04सिंहासन की परवाह नहीं।
  377. 20:08पर जो सही है वह कर। निष्काम होकर कर।
  378. 20:14अंजाम
  379. 20:17की हमें फिक्र ही नहीं है।
  380. 20:20जो सही है वह कर और अगर
  381. 20:23यही सही है कि हम जूझ जाएं तो हम जूझे
  382. 20:26कैसे नहीं
  383. 20:28जूझे कैसे नहीं। हम कहते तो यही रह गए कि
  384. 20:30हम धार्मिक देश हैं। हम धार्मिक देश नहीं
  385. 20:32है। हम लोक धार्मिक देश हैं। कहा था किसी
  386. 20:34ने कि इतने भारतीय हैं सब मिलकर के एक जगह
  387. 20:37थूक भी दें।
  388. 20:39तो यह जितने आतताई हैं आक्रांता है डूब
  389. 20:41मरे इसी में
  390. 20:45ब्रानवी सल्तनत के लिए कहा था
  391. 20:49हम इतने सारे हैं और हारते गए यह गीता
  392. 20:53पढ़ने वालों के साथ तो नहीं हो सकता यह
  393. 20:55कृष्ण के वास्तविक प्रेमियों के साथ तो
  394. 20:57नहीं हो सकता
  395. 20:59और कृष्ण का प्रेमी होने का दावा तो हम
  396. 21:01रोज करते हैं
  397. 21:04वो दावा झूठा है
  398. 21:09श्री कृष्ण माने गीता
  399. 21:12गीता माने आत्मज्ञान
  400. 21:15और आत्मज्ञान माने जीवन के संघर्ष से कोई
  401. 21:18पलायन नहीं
  402. 21:20मर सकते हैं हार थोड़ी मानेंगे
  403. 21:25मर सकते हैं पर हार थोड़ी मान लेंगे
  404. 21:30मुट्ठी भर लोगों को अपने ऊपर छा थोड़ी
  405. 21:32जाने देंगे पर यह आप तभी कह सकते हो जब
  406. 21:35आपको पता होता है कि आपका जीवन धर्म सम्मत
  407. 21:38है। तब आप कहते हो कि मेरा जीवन मेरे लिए
  408. 21:41नहीं है। मेरा जीवन धार्मिक है। मेरा जीवन
  409. 21:44धर्म के लिए है। तो मेरी हार मेरी हार
  410. 21:47नहीं होगी। मेरी हार
  411. 21:49धर्म की हार होगी। इसीलिए हारना मंजूर ही
  412. 21:51नहीं है। हमने हारना मंजूर कर लिया
  413. 21:52क्योंकि भीतर ही भीतर हमको पता था कि
  414. 21:54हमारे जीवन में धर्म तो वैसे भी नहीं
  415. 21:56मौजूद है। तो हमने बड़ी आसानी से हार मान
  416. 21:58ली। बड़ी आसानी से हमने घुटने टेक दिए।
  417. 22:01सोचो कितनी दूर था ब्रिटेन? कितनी दूर था।
  418. 22:06और जब वह लोग आए थे उस समय स्टीम इंजन भी
  419. 22:08नहीं होता था।
  420. 22:13यह हवा इसके भरोसे आए थे। यही पाल, यही
  421. 22:18पतवार सेल्स इनके भरोसे आए थे।
  422. 22:23वो वहां से पूरा घूम करके अफ्रीका इधर आ
  423. 22:27गए और कब्जा भी कर लिया।
  424. 22:30सोचो कितनी भारी आंतरिक दुर्बलता रही होगी
  425. 22:34जो हमें यह दुर्दिन देखने पड़े। इतने
  426. 22:37मुट्ठी भर लोग उतनी दूर से आ रहे हैं और
  427. 22:39उनके पास कुछ विशेष नहीं।
  428. 22:43[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  429. 22:47स्टीम इंजन वगैरह बाद में आए हैं। भाई
  430. 22:50इलेक्ट्रिसिटी तो बहुत दूर की बात है।
  431. 22:56कुछ पता नहीं।
  432. 23:03हमें बड़ा अच्छा लगता है यह कहना कि वह तो
  433. 23:05अंग्रेज आ गए। हम तो भोलेभाले लोग थे।
  434. 23:07उन्होंने फूट डालकर हम पर राज कर लिया।
  435. 23:10ऐसे कैसे फूट डाल दी? ऐसे कैसे फूट डाल
  436. 23:12दी? जहां सत्य होता है वहां ऐसे नहीं फूट
  437. 23:15डाली जा सकती। इतने मासूम मत बनो। इतनी
  438. 23:19आसानी से अगर कोई फूट डाल दे तो ना सत्य
  439. 23:22है ना प्रेम है।
  440. 23:26आ रहे हैं यहां पर घूस देकर के। प्लासी की
  441. 23:29लड़ाई तो सीधे-सीधे घूस देकर उन्होंने
  442. 23:31जीती है। वो लड़ाई मालूम है। वो लड़ाई
  443. 23:34जीती हुई मानी ही नहीं जाती। वो लड़ाई
  444. 23:36खरीदी हुई मानी जाती है। द ब्रिटिश
  445. 23:40बोट द बैटल ऑफ प्लासी।
  446. 23:47जो घूस पर ईमान बेच दे उसकी जिंदगी में
  447. 23:50धर्म रहा होगा क्या कहीं
  448. 23:57उसके बाद बक्सर की लड़ाई लड़ रहे हैं।
  449. 23:59उसमें तीन राजा इकट्ठे हो रहे हैं। वहां
  450. 24:01वहां असली लड़ाई हुई थी। उन तीनों में आपस
  451. 24:04में मनमुटाव है। फूट है। वो तीनों
  452. 24:06अपना-अपना स्वार्थ देख रहे हैं। तीनों को
  453. 24:09ही राष्ट्र से, धर्म से, सत्य से कोई मतलब
  454. 24:12नहीं। अंग्रेजों ने फिर हराया।
  455. 24:15क्या हम वास्तव में गीता का देश हैं? क्या
  456. 24:17हम वास्तव में धर्म का देश हैं?
  457. 24:21हम लोकधर्म का देश है और वो लोकधर्म आज भी
  458. 24:25हावी है। तो बताओ तलवार आज भी सर पर लटक
  459. 24:28रही है कि नहीं लटक रही है?
  460. 24:33दूसरों का दोष बेशक है। जो लोग यहां आ रहे
  461. 24:36थे वो कोई हमें गले लगाने नहीं आ रहे थे।
  462. 24:37वो हमारा शोषण ही करने आ रहे थे। दूसरों
  463. 24:40का दोष तो बेशक है पर क्या हम अपनी
  464. 24:42कमजोरी, अपनी बीमारी, अपनी बेईमानी की
  465. 24:45चर्चा नहीं करना चाहेंगे?
  466. 24:48बोलो।
  467. 24:51और अतीत में वो सब हमने
  468. 24:54कमजोरियां दिखा दी। उससे भी मुझे कोई बहुत
  469. 24:56मतलब नहीं।
  470. 24:58अतीत की बात, अतीत में पड़ी रहे। पर अतीत
  471. 25:02की यह बात अतीत की नहीं है। यह अतीत की
  472. 25:03बात आज भी है। बहुत अर्थ में हम आज भी
  473. 25:07बिल्कुल वैसे ही हैं।
  474. 25:10जैसे 16वीं और 17वीं और 18वीं शताब्दी में
  475. 25:13थे
  476. 25:19और बल्कि आज और कोशिशें हो रही हैं कि
  477. 25:21हमें 12वीं शताब्दी में डाल दिया जाए।
  478. 25:26तो बताओ पहले उत्सव मनाऊं
  479. 25:31या पहले और चौकन्ना होकर के नजर घुमाऊं?
  480. 25:35बोलो।
  481. 25:39स्वतंत्रता दिवस को सतर्कता दिवस की तरह
  482. 25:42मनाइए।
  483. 25:44खतरा बराबर का है। खतरा अभी बाकी है और
  484. 25:48खतरे का कारण आंतरिक है।
  485. 25:54हमारे ही भीतर, हमारे ही दिल में, हमारी
  486. 25:57ही हवाओं में, हमारी ही संस्कृति में अभी
  487. 26:00धर्म का वह विकृत रूप घूम रहा है जिसने
  488. 26:04अतीत में भी हमारी दुर्दशा करी।
  489. 26:09पहले भी आपसे चर्चा करी थी। वह आ रहे थे
  490. 26:12आपके पास एस्ट्रोनॉमी ले। नहीं यहां पहुंच
  491. 26:14नहीं पाते। लोंगिट्यूड प्रॉब्लम सुनी है
  492. 26:17आपने? लोंगिट्यूड प्रॉब्लम सुनी है?
  493. 26:21लोंगिट्यूड प्रॉब्लम ये होती है कि जब आप
  494. 26:24कहीं को चलते हो तो अपनी स्थिति पता करने
  495. 26:26के लिए समुद्र में जब आप चलते हो
  496. 26:28लैटीट्यूड चाहिए, लोंगिट्यूड चाहिए। दो
  497. 26:30चीजें चाहिए। दोनों पता है तो आप बता सकते
  498. 26:32हो आप कहां पर हो। लैटीट्यूड बड़ी आसानी
  499. 26:34से पता चल जाता है। लोंगिट्यूड नहीं पता
  500. 26:37चलता।
  501. 26:41लोंगिट्यूड नहीं पता चलता।
  502. 26:44तो पता ही नहीं होता आपको आप हो कहां पर।
  503. 26:47ये पता करने के लिए आप अगर लंदन में वहां
  504. 26:50पर ग्रीनच लैब है वहां जाएंगे तो आपको पता
  505. 26:53चलेगा ये लोंगिट्यूड पता करने के लिए
  506. 26:55कितनी रिसर्च करी और कितनी जाने गवाई
  507. 26:58उन्होंने।
  508. 27:01और यह करने के बाद अंततः उन्होंने वह
  509. 27:03उपकरण निकाल लिया जो समुद्र में भी उनको
  510. 27:06सही लोंगिट्यूड बता पाता था और उसी का
  511. 27:09इस्तेमाल करके वो भारत तक पहुंच पाए
  512. 27:12और जब वो ये सब कुछ कर रहे थे तब भारत
  513. 27:14एस्ट्रोलॉजी कर रहा था। जब वो एस्ट्रोनॉमी
  514. 27:17में तेजी से आगे बढ़ रहे थे तब भारत
  515. 27:20मुहूर्त और घंटा घड़ियाल में उलझा हुआ था
  516. 27:23और आज भी उलझा हुआ है। कितने हजार करोड़
  517. 27:26की एस्ट्रो एप्स मार्केट में घूम रही हैं।
  518. 27:30और यही एस्ट्रोलॉजी है। भारत ने
  519. 27:32एस्ट्रोलॉजी एस्ट्रोनॉमी पर ध्यान दिया
  520. 27:35होता तो गुलाम नहीं हुआ होता। क्या आज भी
  521. 27:39कुछ बदल गया है? आज तो ये जजी ये नए-नए
  522. 27:43लड़के ये भी एस्ट्रो एप्स पर घुसे हुए
  523. 27:44हैं। खतरा आज भी बराबर का है।
  524. 27:48दुनिया आगे बढ़ रही है विज्ञान में। हम
  525. 27:50आगे बढ़ रहे हैं ये कुंडली निकालने में।
  526. 27:56जिनके जीवन में वास्तव में धर्म होगा,
  527. 27:58गीता होगी, क्या वह अपने क्षुद्र
  528. 27:59स्वार्थों की चिंता करेंगे? या तो
  529. 28:01छोटे-छोटे राजा, उनकी छोटी-छोटी रियासतें
  530. 28:04वो खुद ही जाकर के अंग्रेजों से मिल जाते
  531. 28:06थे। क्या पड़ोसी को हराना है? आओ आओ यहां
  532. 28:08आओ। इसको मिलकर के हराते हैं। ये क्या एक
  533. 28:11धार्मिक चित्त का लक्षण है?
  534. 28:15क्या आज भी वैसे ही नहीं है?
  535. 28:20जातियों में बहुत
  536. 28:23गंदे और घटिया तरीके से बटा हुआ देश था।
  537. 28:31इतने ही लोग हैं जो लड़ाई पर जाएंगे। बाकी
  538. 28:33तो अपना-अपना तुम काम करो। तुम सफाई करो,
  539. 28:35तुम बर्तन देखो, तुम बाल देखो, तुम खेत
  540. 28:38देखो, तुम ये करो, तुम वो करो।
  541. 28:44कहां से मिलेंगे सबसे काबिल लोग लड़ाई
  542. 28:46लड़ने के लिए? जब आपने जनसंख्या के 90 95%
  543. 28:51वर्ग को लड़ाई के मैदान से ही बाहर कर
  544. 28:55दिया। सेना कैसे बनेगी? और सेना बनेगी भी
  545. 28:59तो क्या उसमें सबसे काबिल लोग प्रवेश
  546. 29:01पाएंगे? मेरिटोक्रेसी जब है ही नहीं।
  547. 29:08और क्यों नहीं है? क्योंकि साहब
  548. 29:12हम कह देंगे हमारे ग्रंथों में हमारी
  549. 29:13किताबों में लिखा है कि जाति तो भगवान ने
  550. 29:16बनाई है। श्रुति में लिखा है सचमुच अगर हम
  551. 29:18धार्मिक लोग होते तो हम किसी भी किताब को
  552. 29:21शास्त्र कहने से पहले पूछते कि क्या
  553. 29:25यह किताब श्रुति से मेल खाती है?
  554. 29:31पुराणों से हम प्रश्न पूछते कि क्या
  555. 29:33तुम्हारी बातें उपनिषदों के सिद्धांतों से
  556. 29:36मेल खाती हैं? क्योंकि ये नियम है। यह
  557. 29:38नियम है कि स्मृति ग्रंथ जिसमें पुराण
  558. 29:41इत्यादि भी आते हैं कि स्मृति ग्रंथों की
  559. 29:43बस वही बातें मानी जाएंगी जो श्रुति से
  560. 29:46मेल खाती हैं। स्मृति की कोई भी बात जो
  561. 29:48श्रुति से मेल नहीं खाती उसे अस्वीकार
  562. 29:50हमें करना पड़ेगा। यह सनातन का नियम है।
  563. 29:54पर श्रुति का हमें कुछ पता नहीं। लोक धर्म
  564. 29:57तो स्मृति ग्रंथों पर चलता है।
  565. 30:02कीमत देनी पड़ती है ना। सच्चाई को, तथ्य
  566. 30:05को जब धर्म ही पूरा कल्पना पर आधारित हो
  567. 30:07गया हो तो आप तथ्य को कीमत नहीं दोगे। जब
  568. 30:09तथ्य को कीमत नहीं दोगे तो फिर आप
  569. 30:12यूनिवर्सिटीज में इन्वेस्ट नहीं करोगे।
  570. 30:15और जब आप नए विश्वविद्यालय नहीं बनाओगे
  571. 30:19तो ज्ञान कहां से आएगा?
  572. 30:23जितनी भी यूरोपियन ताकतें थी
  573. 30:27उनकी
  574. 30:29जो टेक्नोलॉजी थी
  575. 30:33वो भारतीय राजाओं की टेक्नोलॉजी से कहीं
  576. 30:36आगे की थी। उनकी बंदूके, उनके वाहन, उनके
  577. 30:40जहाज
  578. 30:42सब कुछ,
  579. 30:44उनकी ट्रिग्नोमेट्री,
  580. 30:48उनकी कार्टोग्राफी
  581. 30:53सब भारत से बहुत आगे की थी। क्यों?
  582. 30:55भारतीयों की क्या बुद्धि कम नहीं? बुद्धि
  583. 30:57नहीं कम है। बुद्धि पर लोकधर्म चढ़ा हुआ
  584. 31:00है। तो जो पैसा लगना चाहिए था कि उससे
  585. 31:03यूनिवर्सिटीज बनती और रिसर्च होती वो पैसा
  586. 31:07कहां लग रहा है?
  587. 31:10वो कर्मकांड में जा रहा है पैसा सारा। और
  588. 31:12राजा भी खूब-खूब
  589. 31:16डोनेशंस दे रहे हैं, चढ़ावा दे रहे हैं।
  590. 31:18गांव के गांव दे रहे हैं। किनको दे रहे
  591. 31:20हैं? अंधविश्वास फैलाने वालों को
  592. 31:26यह है परतंत्रता का कारण।
  593. 31:31आप जरा सा सर्च करिएगा कि अंग्रेजों के
  594. 31:36आने से पहले पिछले 500 साल में और पिछले
  595. 31:398000 साल में भारत में कुल कितने
  596. 31:42विश्वविद्यालय खुले? आप पाओगे कुछ नहीं।
  597. 31:46कुछ नहीं।
  598. 31:53जहां ज्ञान की कदर नहीं वहां गुलामी नहीं
  599. 31:55आएगी तो और क्या आएगा?
  600. 32:02मुगल बादशाहों को लेकर भी आप कहते हो अरे
  601. 32:04उन्होंने मकबरे बनाए, ताजमहल बनवाए। यह तो
  602. 32:09बताओ विश्वविद्यालय कितने बनवाए? और यह
  603. 32:12जनता का पैसा है। यह जनता का पैसा है
  604. 32:14जिससे आप कह रहे हो फलानी मीनार बनवा दो,
  605. 32:16यह कर दो, वो कर दो। स्कूल कॉलेज कितने
  606. 32:19बनवा रहे हो?
  607. 32:21रिसर्च ग्रांट कितनी दे रहे हो? और रिसर्च
  608. 32:24नहीं करोगे तो टेक्नोलॉजी कहां से आएगी?
  609. 32:28लड़ाईयां कैसे लड़ोगे?
  610. 32:31मेडिसिन कैसे आगे बढ़ेगी?
  611. 32:37यही वो काल था
  612. 32:41रेनेसा के बाद का। जब ब्रिटेन में विज्ञान
  613. 32:46तेजी से आगे बढ़ा। भारत में रेनसा हुआ ही
  614. 32:48नहीं।
  615. 32:51और रेनसा का संबंध किससे था?
  616. 32:55स्वतंत्रता से। उन्होंने कहा रेनसा माने
  617. 32:59विचार की स्वतंत्रता। भारत ने तो उससे आगे
  618. 33:02की बात कर रखी थी। भारत ने कहा था
  619. 33:07स्वतंत्रता माने अस्तित्व की मुक्ति।
  620. 33:10एग्जिस्टेंशियल फ्रीडम। पर उस बात को हमने
  621. 33:13बिल्कुल दफन कर दिया। हमने कहा हमें
  622. 33:16श्रुति पढ़नी नहीं। हमें उपनिषद चाहिए
  623. 33:18नहीं। हमें वेदांत चाहिए नहीं। तो फिर
  624. 33:20हमें फ्रीडम भी चाहिए ही नहीं।
  625. 33:30इतनी हमने दुर्दशा कर ली थी। मैकले का नाम
  626. 33:32तो सुना ही है आपने।
  627. 33:34उसने एक ऐसा व्यंग मारा था।
  628. 33:39उसकी चोट आज भी महसूस होती है। उसने कहा
  629. 33:41था भारत में इस वक्त जितना यह कुल ज्ञान
  630. 33:43है इससे ज्यादा ज्ञान लंदन की एक स्कूल
  631. 33:46गोइंग बच्ची को है दसवीं की भारत का कुल
  632. 33:50ज्ञान ले लो जितना है। कुल ज्ञान भारत का
  633. 33:55या इसी से कुछ मिलतीजुलती बात आप सर्च
  634. 33:58करेंगे तो एग्जैक्ट उसके शब्द मिल जाएंगे
  635. 34:00आपको।
  636. 34:08ज्ञान की जरूरत क्या है? हमें क्या करना
  637. 34:10है?
  638. 34:11कुछ नहीं। बस कल्पना करनी है कि ऐसा
  639. 34:15कर्मकांड कर दो तो स्वर्ग लोक प्राप्त हो
  640. 34:17जाएगा। यह कल्पना करनी है हमें। ज्ञान की
  641. 34:19जरूरत क्या है?
  642. 34:22और ज्ञान में फिर आत्मज्ञान की तो एकदम ही
  643. 34:24कोई जरूरत नहीं है।
  644. 34:35धर्म माने ऊंची से ऊंची स्वतंत्रता और
  645. 34:39लोकधर्म माने सबका शोषण। सबको दबा के रखो।
  646. 34:42चाहे महिला हो, चाहे दलित हो, चाहे पशु
  647. 34:44हो, पक्षी हो और चाहे अपनी ही हस्ती हो,
  648. 34:47अपना ही दमन कर डालो।
  649. 35:02हम जब
  650. 35:04लगे हुए हैं
  651. 35:08भूत प्रेत जादू टोना धर्म आधारित जाति
  652. 35:12आधारित राजनीति करने में यहां उत्तर में
  653. 35:15चीन आगे बढ़ता ही जा रहा है। बढ़ता ही जा
  654. 35:17रहा है। बढ़ता ही जा रहा है। बहुत आगे
  655. 35:18बढ़ता जा रहा है। और ज्यादा आगे बस पिछले
  656. 35:2125 साल में बढ़ा है।
  657. 35:241990 के दशक पर भी भारत और चीन अगल-बगल ही
  658. 35:28चल रहे थे। अभी 2530 साल में वो और इतना
  659. 35:32आगे बढ़ गया चीन। अब जब वो सीमाओं में
  660. 35:35घुसा चला आएगा तो क्या करोगे वहां पर?
  661. 35:39मंत्र मारोगे, भस्म मारोगे?
  662. 35:43उसे कहोगे तुम लोगों की जाति क्या है?
  663. 35:45पहले अपनी जाति बताओ।
  664. 35:47उससे कहोगे तुम तो हारोगे क्योंकि तुम तो
  665. 35:49मुहूर्त देख के आते ही नहीं। तो तुम्हारी
  666. 35:51तो हार निश्चित है।
  667. 35:57सामने चला आ रहा उसकी कुंडली मांगोगे कि
  668. 35:59जा रहे हैं कुंडली बाबा जी को दिखाएंगे कि
  669. 36:00इसको कैसे वशीभूत करें।
  670. 36:05क्या करोगे?
  671. 36:31हम आज भी खतरे में हैं। संभल जाइए, चेत
  672. 36:34जाइए।
  673. 36:41और सबसे बड़ा दुश्मन हमारे ही भीतर बैठा
  674. 36:43है। यहां बगल के घर में नहीं हमारे ही
  675. 36:46भीतर बैठा है।
  676. 36:58और एक बताता हूं आने वाले समय में ना
  677. 37:02गुलामी के लिए जरूरी नहीं है कोई आपकी
  678. 37:04जमीन पर कब्जा करे। वो बात ओल्ड फैशंड हो
  679. 37:07गई कि किसी को गुलाम बनाना है तो उसकी
  680. 37:09जमीन पर कब्जा कर लो। अब जरूरत ही नहीं
  681. 37:10है।
  682. 37:12रखो अपनी जमीन।
  683. 37:15तुम खुद अपनी जमीन पर हमें आमंत्रित
  684. 37:17करोगे।
  685. 37:21तुम खुद हमारे दास बनकर हमारे देशों में
  686. 37:24आओगे, हमारी सेवा करोगे। पहले तो स्लेव
  687. 37:27ट्रेडिंग करनी पड़ती थी। अब तुम बाकायदा
  688. 37:29वीजा लेकर आओगे और हमारी सेवा करोगे।
  689. 37:36पहले तुम किसी को गुलाम बनाओ पकड़ के
  690. 37:38बेड़ियों में और जहाजों में भर-भर के एक
  691. 37:41गुलाम जा रहे हैं, स्लेव्स जा रहे हैं। तो
  692. 37:43बुरा लगता था, देखने में ही बुरा लगता था।
  693. 37:45अब आप बाकायदा वहां जाते हो। एंबेसी में
  694. 37:48लाइन लगाकर वीजा लेते हो और खुद अपने आप
  695. 37:50को हाजिर करते हो। दास हाजिर है मेरे आका।
  696. 37:52बताइए क्या सेवा करूं? वो बोलते हैं अब
  697. 37:54तुम हमारे यहां टैक्सी चलाओगे।
  698. 37:58जब आप ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ को
  699. 38:00लेते हैं। ग्लोबल नॉर्थ कई गुना ज्यादा
  700. 38:02अमीर है पर कैपिटा टर्म्स में। लेकिन
  701. 38:04ड्रेन ऑफ वेल्थ आज भी ग्लोबल साउथ से
  702. 38:06ग्लोबल नॉर्थ को ही हो रहा है। बिना किसी
  703. 38:09पॉलिटिकल सब्जुगेशन के खुद ही हो रहा है।
  704. 38:15जब इंडिया पॉलिटिकली सबजुगेटेड था तब तो
  705. 38:18हमें पता ही है कि ड्रेन ऑफ वेल्थ हुआ था।
  706. 38:19जानते ही हो वो ड्रेन ऑफ वेल्थ आज भी हो
  707. 38:21रहा है।
  708. 38:23अब बाकायदा डील के माध्यम से हो रहा है।
  709. 38:26बाकायदा ट्रेड ट्रीटीज के माध्यम से हो
  710. 38:29रहा है।
  711. 38:31कोई जरूरी नहीं कि आके अब कोई आपकी जमीन
  712. 38:33पर कब्जा करे।
  713. 38:35अब आप विलफुली सरेंडर करोगे। अब आप कहोगे
  714. 38:38मैं खुद चल के आया हूं आपकी गुलामी करने।
  715. 38:52भारत का जितना
  716. 38:56पर कैपिटा कार्बन डाइऑक्साइड एमिशन है ना
  717. 38:59उसमें से बहुत सारा वो है जो विदेशियों ने
  718. 39:02भारत को आउटसोर्स कर रखा है।
  719. 39:06यह है नए किस्म की
  720. 39:10गुलामी।
  721. 39:14जब आप यह देखते हो उदाहरण के लिए कि यूरोप
  722. 39:16का
  723. 39:18यूरोप का जो यूरोपियन मैन्युफैक्चरिंग और
  724. 39:21सर्विज हैं उनसे कितना एमिशन है तो एक
  725. 39:24आंकड़ा आता है। फिर जब आप उसमें ये देखते
  726. 39:27हो कि वो फुटप्रिंट कितना है जहां
  727. 39:30उन्होंने एमिशन कहीं और कराया और वो
  728. 39:32प्रोडक्ट अपने आप मंगा कर खुद यूज़ कर
  729. 39:34दिया तो वो आंकड़ा लगभग 20 30% बढ़ जाता
  730. 39:37है। नहीं समझे? सारा गंदा काम दूसरे देश
  731. 39:41करेंगे। तो सारा एमिशन दूसरे झेलेंगे।
  732. 39:43सारा पोल्यूशन दूसरे झेलेंगे। और जो माल
  733. 39:46बना दो माल हमें दे दो साफ-साफ करके।
  734. 39:49ये है नए किस्म की गुलामी।
  735. 40:03और इसका भी समाधान वही है। मास बेस्ड
  736. 40:07एजुकेशन ऑफ द सेल्फ। जब तक व्यक्ति जागृत
  737. 40:11नहीं होता तब तक राष्ट्र कैसे जागृत होगा?
  738. 40:16एक-ए व्यक्ति को जगाए बिना हम कैसे कह दें
  739. 40:18कि एक जागृत राष्ट्र है?
  740. 40:26आ रही है बात समझ में?
  741. 40:32सारा जो अपना साधारण काम है, उन्होंने
  742. 40:37सौंप दिया अब काले और भूरे लोगों को।
  743. 40:42खुद क्या कर रहे हैं? वैल्यू एडेड वर्क,
  744. 40:45हाई एंड वर्क, रिसर्च जिससे नई
  745. 40:48टेक्नोलॉजीस निकल रही हैं, जिससे नया
  746. 40:51नॉलेज क्रिएट हो रहा है और आप क्या करोगे?
  747. 40:54आप बर्तन घिसोगे।
  748. 40:57आप वो सारा काम करो जो लो लेवल का है।
  749. 41:02तो उनका समय बचता है ताकि वह ऊंचा काम कर
  750. 41:05पाएं। यह है नया सबजुगेशन, नई गुलामी।
  751. 41:18और इसमें कोई उन्हें बुरा भी नहीं बोलेगा।
  752. 41:20क्योंकि आप जो कर रहे हो अब अपनी मर्जी से
  753. 41:23कर रहे हो। आपको बकायदा पैसे मिल रहे हैं
  754. 41:24काम करने के।
  755. 41:29क्या नहीं है भारत के पास? सब कुछ है। सब
  756. 41:33कुछ है। एक क्रूड ऑयल को छोड़ दो उसके
  757. 41:35अलावा। पर फिर एनर्जी के दूसरे भी होते
  758. 41:38हैं। क्रूड ऑयल को छोड़ दो और कुछ रेयर
  759. 41:40अर्थ्स हैं उनको छोड़ दो। सब कुछ है।
  760. 41:49उसके बाद भी आज भी हमें क्रूशियल
  761. 41:53टेक्नोलॉजीस के लिए दूसरे देशों का मुंह
  762. 41:56क्यों तकना पड़ रहा है? बताओ ना।
  763. 41:58क्योंकि भीतर अभी कुछ है जो स्वतंत्र नहीं
  764. 42:01है।
  765. 42:02वह नकल करने में ज्यादा सुविधा और सुरक्षा
  766. 42:05मानता है। वो कहता है दूसरे ने कर लिया ना
  767. 42:07वो नकल कर लो। उसने करा है तो ठीक करा
  768. 42:10होगा।
  769. 42:12ठीक वैसे जैसे लोकधर्म कहता है नकल करो
  770. 42:15नकल करो। परंपरा है ना। परंपरा माने यही
  771. 42:16तो होता है। उसने करा तुम भी कर लो।
  772. 42:18क्योंकि वही श्रेष्ठ है। तुम्हारे अलावा
  773. 42:20जो भी कोई हो श्रेष्ठ है बस उसका जो करा
  774. 42:22था उसने उसको सही मान के खुद उसकी नकल कर
  775. 42:24लो।
  776. 42:26वही चीज हमारी राष्ट्रीय आदत बन गई है।
  777. 42:29हमारे अलावा जो कोई है वो बेहतर ही है।
  778. 42:31उसने जो करा उसकी नकल कर लो। टेक्नोलॉजी
  779. 42:34वो करेंगे। रिसर्च वो करेंगे। हमारा क्या
  780. 42:36काम है? अधिक से अधिक टेक्नोलॉजी का
  781. 42:38लाइसेंस ले लो।
  782. 42:42सामरिक टेक्नोलॉजीस में जो सबसे सेंट्रल
  783. 42:46मोस्ट क्रूशियल होती हैं वो हमारी सारी की
  784. 42:48सारी आज भी इंपोर्टेड है।
  785. 42:56फोर्थ दुनिया सिक्स्थ जनरेशन फाइटर जेट पर
  786. 42:59पहुंच गई है। हमारे पास फोर्थ जनरेशन का
  787. 43:01भी अपना इंजन नहीं है। और इंजन ही नहीं है
  788. 43:04तो क्या है? इंजन ही इंपोर्ट करना पड़ रहा
  789. 43:07है। युद्ध शुरू होगा। वो वहां से बंद कर
  790. 43:08देगा एक्सपोर्ट करना इंजन को। क्या कर
  791. 43:10लोगे?
  792. 43:13और इंजन में जो फ्यूल डलता है वो भी
  793. 43:15तुम्हें इंपोर्ट करना पड़ रहा है। इंजन भी
  794. 43:16इंपोर्ट करना पड़ रहा है। फ्यूल भी
  795. 43:18इंपोर्ट करना पड़ रहा है। तो अगर सचमुच हो
  796. 43:20गई आरपार की लड़ाई तो हम कैसे लड़ेंगे?
  797. 43:23कितनी खतरे की बात है ये? पर हम अल्टरनेट
  798. 43:26टेक्नोलॉजीस डेवलप ही नहीं कर पाए। क्यों?
  799. 43:31हम अपनी रिसर्च करके अपने इंज डेवलप ही
  800. 43:34नहीं कर पाए। क्यों? क्योंकि परंपरा ने
  801. 43:38हमें अनक्रिएटिव बना दिया है।
  802. 43:42जिसको आप यह बोल दोगे ना कि जो पीछे से
  803. 43:44चला आ रहा है बस उसी का पालन कर लो। वो
  804. 43:47आदमी अब क्रिएटिव नहीं हो सकता।
  805. 43:57एआई एक मौके की तरह आया था हमारे पास।
  806. 44:01वह मौका भी लगभग हमने पूरा गवा ही दिया
  807. 44:03है।
  808. 44:08एआई में भी छलांग मार के
  809. 44:12अमेरिका, यूरोप, चीन भी
  810. 44:16ये निकल गए
  811. 44:24और कारण
  812. 44:27तो एक ही है लोकधर्म।
  813. 44:31वो आपको खतरे नहीं उठाने देगा। वो आपको
  814. 44:33रिस्क टेकिंग बनने ही नहीं देगा। वो आपसे
  815. 44:36कहेगा सुरक्षा बड़ी बात है।
  816. 44:40जैसी हमारी माएं होती हैं कि बच्चे को ले
  817. 44:43लो कहीं बाहर मत जाना कुछ हो जाएगा।
  818. 44:49वहां तो वहां होती है। ऐसा कैसे होता है
  819. 44:50कि अमेरिका की मां 15 साल का हुआ नहीं कि
  820. 44:52लात मारती है कि जा अपनी रोटी खुद कमा।
  821. 44:55उनके क्या डीएनए अलग है। वो भी
  822. 44:58होमोसेपियंस। हम भी पर हमारे यहां तो कुछ
  823. 45:01है ही नहीं कि नहीं नहीं नहीं। जैसा सबने
  824. 45:03करा वैसे ही तू भी कर ले और आजा पल्लू के
  825. 45:06नीचे छुप जा
  826. 45:17और इस बात पर हमें फक्र भी बहुत रहता है।
  827. 45:18हम कहते हैं यही तो यही तो हमारी
  828. 45:23गौरवशाली संस्कृति है। गौरव श्रुति में
  829. 45:27लीजिए। संस्कृति में नहीं। और संस्कृति
  830. 45:30में गौरव तब लीजिए जब संस्कृति श्रुति का
  831. 45:33अनुगमन करती हो। तब जरूर संस्कृति में
  832. 45:35गौरव ले लीजिएगा। लेकिन आपने जो आज
  833. 45:37संस्कृति बना रखी है उसमें कहां सनातन और
  834. 45:40कहां श्रुति कुछ नहीं है। इस संस्कृति पर
  835. 45:42मैं कैसे गौरव करूं?
  836. 45:45ये तो लोक धार्मिक संस्कृति है।
  837. 45:52खेती करते हैं ना हम।
  838. 45:55खेती में भी जो इनोवेशन हुए हैं वह दूसरे
  839. 45:57देशों ने करें। आजादी के बाद भी
  840. 46:03इजराइल को मिली थी बिल्कुल बंजर जमीन कुछ
  841. 46:06नहीं।
  842. 46:08उसने खेती के नए-नए तरीके निकाल करके वहां
  843. 46:10पर काम कर डाला। भारत ने भी कुछ करा है।
  844. 46:12वहां पर पूसा वगैरह है। नए किस्म के बीज
  845. 46:14वगैरह हम करते हैं।
  846. 46:17लेकिन आप आज भी सुनते होंगे जैपनीज मेथड
  847. 46:18ऑफ राइस कल्टीिवेशन।
  848. 46:22जो ब्रेक थ्रू इनोवेशंस हैं वह सब बाहर
  849. 46:25कहीं हो रहे हैं। हमारे यहां कुछ मार्जिनल
  850. 46:28इंक्रीमेंटल इंप्रूवमेंट हो जाए तो हो
  851. 46:30जाए। ब्रेक थ्रू कुछ होने नहीं पाता
  852. 46:32क्योंकि क्योंकि ब्रेकिंग थ्रू के लिए हम
  853. 46:34तैयार ही नहीं है। हम डरे हुए लोग हैं।
  854. 46:37हमें डरा दिया गया है कि ऐसा-सा करो नहीं
  855. 46:39तो शराप लग जाएगा।
  856. 46:43ऐसासा करो नहीं तो परंपरा टूट जाएगी। लोग
  857. 46:45नाराज हो जाएंगे।
  858. 46:52वो पुराना डर बहुत गहरे बैठ गया हमारे
  859. 46:55जेहन में।
  860. 47:01हम खेती में भी क्रिएटिव नहीं हो पाए।
  861. 47:03जिसका मतलब भारत कृषि प्रधान देश है। अरे
  862. 47:05कृषि प्रधान देश है तो कृषि में ही कुछ
  863. 47:07नया हमने करा होता। वहां भी नहीं करा।
  864. 47:18हां, यह जरूर करा है कि मांस के, बीफ के
  865. 47:22एक्सपोर्ट में हम सबसे आगे हैं।
  866. 47:29दुनिया के 100 सबसे गर्म शहर ले लो वो
  867. 47:33भारत में मिलेंगे सब। दुनिया के 100 सबसे
  868. 47:35प्रदूषित शहर ले लो वो भारत में मिलेंगे
  869. 47:37सब।
  870. 47:39उसमें आगे हो गए।
  871. 47:44और यह खुद करा है हमने अपने साथ। यह किसी
  872. 47:46और की साजिश नहीं है। और जब तक हमारी
  873. 47:50संस्कृति आम आदमी
  874. 47:53की कंडीशनिंग वैसी ही रहेगी जैसी है कोई
  875. 47:57सुधार नहीं हो सकता। सतर्कता दिवस क्या
  876. 48:01सतर्कता दिवस
  877. 48:08हम बोलिए थैंक यू आशा जी। मकोले का कोट जो
  878. 48:13आपने बताया था
  879. 48:18इसमें उन्होंने कहा था कि इंडियन टेक्स्ट
  880. 48:22जो संस्कृत और अरबिक में लिखे थे वो
  881. 48:26यूरोपियन स्टैंडर्ड्स से इतने पीछे हैं कि
  882. 48:30एस्ट्रोनॉमी का जो उनका विवरण है दैट वुड
  883. 48:33ड्रॉ लाफ्टर फ्रॉम इंग्लिश बोर्डिंग स्कूल
  884. 48:36गर्ल्स। उन्होंने कहा भारत में यह जो
  885. 48:38तुमने चला रखा है तुम्हारे जो साइंस के
  886. 48:41लेवल्स हैं और जो तुम यह कुंडलीबाजी करते
  887. 48:44हो इंग्लिश बोर्डिंग स्कूल गर्ल्स भी
  888. 48:48हसेंगी इस पर
  889. 48:50कितने अपमान की बात है ये है कि नहीं और
  890. 48:52कितने अफसोस की बात है और और ज्यादा अफसोस
  891. 48:56की बात ये नहीं है कि जो आज की युवा पीढ़ी
  892. 48:58की गर्ल्स हैं ये आज भी हॉरोस्कोप बनवा
  893. 49:00रही हैं ऐप पे जाकर के और ये बात मैकोले
  894. 49:04ने इतने 100 साल पहले बोली थी आज आज भी
  895. 49:06वही चल रहा है।
  896. 49:11शुभचिंतक नहीं था वो हमारा। यह उसने क्या
  897. 49:14करा है? व्यंग करा है हमारे ऊपर।
  898. 49:17हम पूरी तरह आहत भी नहीं होते।
  899. 49:27और उन्होंने यह भी बोला कि मेडिकल
  900. 49:30डॉक्ट्रिंस जो है इंडिया
  901. 49:31और गर्ल्स भी जानबूझकर बोला है। बॉयज
  902. 49:33क्यों नहीं बोला?
  903. 49:37यह दिखाने के लिए कि भारत में तो गर्ल्स
  904. 49:41पढ़ती ही नहीं है।
  905. 49:44और वहां पीछे इंग्लैंड में गर्ल्स भी इतना
  906. 49:48पढ़ती है कि तुम्हारे यहां के बड़े-बड़ों
  907. 49:50से ज्यादा ज्ञान रखती हैं।
  908. 50:00क्या करती है गर्ल्स?
  909. 50:03भारत का जितना फीमेल लेबर फोर्स
  910. 50:05पार्टिसिपेशन रेट है इससे दुगना है चीन का
  911. 50:08तो भारत की गर्ल्स क्या कर रही हैं फैमिली
  912. 50:13फैमिली
  913. 50:15वहां पर महिलाएं निकल कर काम कर रही हैं
  914. 50:17राष्ट्र बना रही हैं। नेशन बिल्डिंग कर
  915. 50:21रही हैं। हमारे यहां महिलाएं फैमिली
  916. 50:24बिल्डिंग कर रही हैं।
  917. 50:28एक देश के 50% नागरिकों को तुमने किचन में
  918. 50:32और बिस्तर में कैद कर दिया है।
  919. 50:37और दूसरा राष्ट्र है जो अपने स्त्रियों,
  920. 50:40पुरुषों सबको काम पर लगा रहा है। आगे कौन
  921. 50:44निकलेगा?
  922. 50:46आगे कौन निकलेगा?
  923. 50:53और है कुछ?
  924. 50:55उन्होंने यह बोला कि जो हमारे मेडिकल
  925. 50:58डॉक्टेंस हैं उस पे जो विवरण है दैट वुड
  926. 51:02एंबरेस एन इंग्लिश ब्लैक स्मिथ लुहार की
  927. 51:06बात कर रहे थे।
  928. 51:07कह रहे हैं कि तुम जिसको अपनी मेडिसिन
  929. 51:09बोलते हो
  930. 51:11इंग्लैंड का एक लोहार भी वो सब सुनेगा तो
  931. 51:15कहेगा ये क्या है? कैसी बातें बोल रहे हो?
  932. 51:17अरे इंग्लैंड के लोहार को भी तुमसे ज्यादा
  933. 51:19ज्ञान है। वो अतिशयोक्ति कर रहा है।
  934. 51:22मैकोले कोई अच्छा आदमी नहीं है। शुभचिंतक
  935. 51:24नहीं है हमारा। अतिशयोक्ति कर रहा है। पर
  936. 51:27क्या हम इंकार कर सकते हैं कि हमने अपनी
  937. 51:29दुर्दशा कर रखी थी। इसीलिए किसी दूसरे को
  938. 51:32हक मिला हम पर व्यंग करने का? बोलो।
  939. 51:41और है कुछ? उन्होंने एक्चुअली लोक धर्म का
  940. 51:44भी कुछ मेंशन किया कि भारत की ज्योग्राफी
  941. 51:47तो शहद और मक्खन के सीज डिस्क्राइब करती
  942. 51:51है।
  943. 51:52वो कह रहे हैं कि ये जो बाकी सारे
  944. 51:55डिसिप्लिंस ले रहे हैं। मेडिसिन ले ली,
  945. 51:57एस्ट्रोनॉमी ले ली। अब ज्योग्राफी ले रहे
  946. 51:59हैं। कह रहे हैं तुम्हारे यहां पे जो
  947. 52:01ज्योग्राफी है उसके हिसाब से तो कहीं पर
  948. 52:05दूध की नदी बहनी चाहिए। कहीं पर मक्खन है,
  949. 52:07कहीं शहद है, कहीं खीर का सागर है, कहीं
  950. 52:11कुछ है। कह तुम्हारे यहां यह लेवल है
  951. 52:14जग्राफी का। यह पढ़ाते हो तुम अपने बच्चों
  952. 52:17को कि उतनी दूर अगर चले जाओगे तो वहां
  953. 52:20तुम्हें मक्खन की नदी मिलेगी।
  954. 52:22कह रहे तुम ये जब पढ़ा रहे हो तो तुम्हारा
  955. 52:24देश आगे बढ़ेगा क्या? और आज भी क्या हम इन
  956. 52:26सब बातों में यकीन नहीं करते हैं? बोलिए।
  957. 52:31जग्राफी में भले ही नहीं पढ़ाया जाता हो
  958. 52:33पर संस्कृत में मौजूद है कि मरोगे वहां
  959. 52:36जाओगे तो बीच में फलानी नदी मिलेगी फिर
  960. 52:38ऐसे पार करोगे फिर दूध आएगा फिर मक्खन
  961. 52:41आएगा फिर फलाना ढिकाना ये अप्सरा आएगी
  962. 52:48क्यों हम किसी मैले को मौका दे रहे हैं
  963. 52:54हमें आहत करने का
  964. 52:58और मैकाले मर नहीं गया मैकोले आज भी जिंदा
  965. 53:00है। वो हजार तरीकों से आज भी हम पर व्यंग
  966. 53:04कर रहा है।
  967. 53:13और यह हक उसे
  968. 53:16बहुत अफसोस की बात है। हमने ही दिया है।
  969. 53:34वेद है हमारे प्राथमिक ग्रंथ ठीक है वैदिक
  970. 53:38धर्म
  971. 53:40जिस दिन से वेदांत
  972. 53:43वेदांत माने वेदों का दर्शन जिस दिन से
  973. 53:47वेदांत का गलत अर्थ भारत में प्रचलित हुआ
  974. 53:51उस दिन से भारत की अवनति शुरू शुरू हो गई।
  975. 53:54बस यह है बात।
  976. 53:58अगर आप भारत की गुलामी
  977. 54:01की टाइमलाइन देखेंगे और वेदांत की विकृति
  978. 54:04की टाइमलाइन देखेंगे तो दोनों बिल्कुल
  979. 54:07समानांतर है।
  980. 54:16वेदांत बहुत सीधा है। श्रुति धर्म अद्वैत
  981. 54:22और भारत ने
  982. 54:24जब यह स्वीकार कर लिया कि वेदांत को
  983. 54:26तोड़ना मरोड़ना ठीक है। उसमें इधर-उधर की
  984. 54:29बातें मान्यताएं डालना ठीक है। जो बात कही
  985. 54:31ही नहीं जा रही वो बात उस पर प्रक्षेपित
  986. 54:33करना ठीक है। वहीं से भारत की अवनति शुरू
  987. 54:36हो गई।
  988. 54:38ये है कारण।
  989. 54:45हम
  990. 54:47आचार्य जी एक अभी खबर भी आई है कि एक
  991. 54:51मंदिर में एमपी के एक मंदिर में 11 अगस्त
  992. 54:54को मनेगा स्वतंत्रता दिवस क्योंकि वहां के
  993. 54:56पुजारी कह रहे हैं कि तिथि देखकर मनाना
  994. 54:59चाहिए राष्ट्रीय पर्व भी।
  995. 55:06ट्रेन भले ही शाम को 7:00 बजे आती हो। आप
  996. 55:09जाइएगा रात में 10:00 बजे।
  997. 55:13क्योंकि आप तो तब जाएंगे ना जब आपका
  998. 55:17हिसाब किताब बोलता हो कि अब यह मुहूर्त
  999. 55:19है।
  1000. 55:21तथ्यों के लिए तो हमारे पास कोई सम्मान ही
  1001. 55:24नहीं है।
  1002. 55:26मेरी धारणा, मेरी मान्यता, मेरी कल्पना
  1003. 55:28मैं उस पर चलूंगा।
  1004. 55:42आपको खुशी होगी इस नाते जो हमारी अपनी ऐप
  1005. 55:46है जिसमें हमारे गीता और बाकी सब
  1006. 55:48कार्यक्रम चलते हैं। यहां पर बुद्ध हैं,
  1007. 55:51गीता है, उपनिषद है, अष्टावक्र हैं। यह
  1008. 55:54मुझे [संगीत] मिले मेरी जिंदगी बदली। यह
  1009. 55:56तुम्हें मिलेंगे तुम्हारी जिंदगी भी
  1010. 55:57बदलेगी। सच पूछिए तो मतलब लाखों नहीं तो
  1011. 56:00कम से कम हजारों जिंदगियां तो हैं जो
  1012. 56:02बिल्कुल बदली हैं।
  1013. 56:032 लाख से अधिक गीता प्रतिभागियों के साथ
  1014. 56:06जुड़े [संगीत] आचार्य प्रशांत ऐप पर। पहला
  1015. 56:09महीना बिल्कुल फ्री गीता मिशन का पूरा
  1016. 56:12एक्सेस ऐप पर आपको मिलेंगे नियमित लाइव
  1017. 56:15सत्र हर दिन आचार्य प्रशांत के विशेष
  1018. 56:18संवाद गीता कम्युनिटी का एक्सेस गीता
  1019. 56:21परीक्षा चयनित समाचार ऑडियो बुक्स कोर्ट्स
  1020. 56:25और भी बहुत कुछ Google Play स्टोर या
  1021. 56:28Apple App स्टोर पर आचार्य प्रशांत सर्च
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