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दूसरों पर निर्भर खुशियाँ || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014) — Transcript

by आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant · 1,536 words · 245 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00[संगीत]
  2. 0:07हमारी खुशिया
  3. 0:12दस बेटा पूछ रहे हो कि हमारी खुशिया दूसरो
  4. 0:15पर क्यों निर्भर होती है हमारा सब कुछ ही
  5. 0:18दूसरो पर निर्भर है क्या तुम्हारे दुख
  6. 0:21दूसरों पर निर्भर नहीं
  7. 0:23है क्या सिर्फ तुम्हारी खुशिया दूसरो पर
  8. 0:26निर्भर है
  9. 0:31कोई आकर तुम्ह हसा सकता है तो कोई आकर के
  10. 0:34तुम्हे रुला भी तो सकता है तुम्हारा अपना
  11. 0:38है
  12. 0:41क्या उदास होते हो तो दूसरों की वजह
  13. 0:45से उत्तेजित होते हो दूसरों की वजह
  14. 0:48से उते हो तो दूसरों की वजह से आकांक्षा
  15. 0:52है तो दूसरों की और डर है तो दूसरों
  16. 0:56से सब कुछ तो दूसरों का ही है
  17. 1:02हम दूसरों के प्रभावों के अलावा है
  18. 1:07क्या हम मैं मैं माने आत्म
  19. 1:12आत्म आत्म को हमने जाना कहां
  20. 1:16है हम तो ऐसे हैं कि
  21. 1:20जैसे एक हिस्सा इसका एक हिस्सा उसका एक
  22. 1:23हिस्सा
  23. 1:24उसका जैसे मोहल्ले में 100 घरों से थोड़ा
  24. 1:28थोड़ा खाना इकट्ठा किया जा
  25. 1:30और उसको मिला दिया जाए ऐसे हम है
  26. 1:36खिचड़ी हमारा अपना कुछ है
  27. 1:39[संगीत]
  28. 1:45कहां जब अपना कुछ नहीं होता उसी स्थिति को
  29. 1:48गुलामी कहते
  30. 1:53हैं तुम जो कुछ भी सोचती हो कि पा कर के
  31. 1:57जिंदगी जीने लायक बनती है तुम देखो ना कि
  32. 2:00उसमें पानी की हसरत दूसरों से ही
  33. 2:04है कोई पैसा दे दे कोई प्रतिष्ठा दे दे
  34. 2:07कोई नौकरी दे दे कोई प्रेम दे
  35. 2:10दे अपनी हालत कैसी है भिखारियों जैसी कहीं
  36. 2:14और से मिलेगा कोई बाहर वाला दे
  37. 2:17देगा कुछ ऐसा भी है जिसको कहते हो कि कहीं
  38. 2:20से ना मिले तो भी मेरे पास
  39. 2:24है कुछ ऐसा भी है जिसको कहते हो कि
  40. 2:31देने वाले का
  41. 2:32धन्यवाद कि उसने दिया ही
  42. 2:39है हमारे भीतर ऐसा कोई भाव ही नहीं होता
  43. 2:42कि मिला
  44. 2:44है इसीलिए हमारे भीतर कृतज्ञता नहीं होती
  45. 2:48बस शिकायत होती है कभी तुमने गौर किया है
  46. 2:51कि हम शिकायतों से कितना भरे हुए हैं हर
  47. 2:54समय हमारे
  48. 2:56भीतर एक निराशा एक कुंठ था एक
  49. 3:03विद्रोह उबलता से रहता
  50. 3:07है लगातार ये लगता रहता है कि जाकर
  51. 3:14के कहीं व्यक्त करते धोखा
  52. 3:20हुआ एक खालीपन का भाव रहता है ना सूनापन
  53. 3:24ये लगता ही नहीं कि मिला है
  54. 3:27कुछ जब ये नहीं लगता कि कुछ मिला है तो
  55. 3:30लगातार खड़े रहते हो पानी के लिए तू दे दे
  56. 3:33तू दे दे तुम अगर कभी गौर
  57. 3:37करो कि हमारा सूनापन कितना घना है तो हैरत
  58. 3:41में पड़
  59. 3:41[संगीत]
  60. 3:43जाओगे तुम सड़क पर चल रहे हो एक आदमी जा
  61. 3:46रहा है जिसे तुम बिल्कुल जानते
  62. 3:49नहीं उससे भी तुम्ह यह अभिलाषा रहती है कि
  63. 3:53व तुम्ह थोड़ी सी स्वीकृति तो दे ही दे
  64. 4:01तुम सड़क पर चल रहे हो कोई तुम्हें देखे
  65. 4:03ही ना तु बहुत बुरा
  66. 4:05लगेगा तुम अनजाने लोगों से भी मान्यता
  67. 4:08चाहते हो ऐसा हमारा भिखारी पन
  68. 4:10[संगीत]
  69. 4:13है तुम बाजार जाके कोई नया कपड़ा खरीद के
  70. 4:16ले आए हो तुम पहन के निकलो और कोई जिक्र
  71. 4:19ही ना
  72. 4:20करे तु पसंद नहीं आएगी य बात
  73. 4:33यही इंसान का अकेला कष्ट है कि उसको आत्म
  74. 4:38मिला नहीं
  75. 4:40है
  76. 4:41मैं की उपलब्ध नहीं हुई है इसके अलावा कोई
  77. 4:46कष्ट होता
  78. 4:47नहीं इसीलिए जानने वालो ने लगातार जो कहा
  79. 4:50है ना कि संसार झमेला है संसार दुख है
  80. 4:55उसका अर्थ यही है उन्होंने यह नहीं कहा कि
  81. 4:57संसार में कोई दुख है
  82. 5:00संसार में दुख तब है जब तुम संसार के
  83. 5:03सामने याचक की तरह खड़े रहते
  84. 5:06हो संसार में दुख तब है जब तुम नहीं हो और
  85. 5:10बस संसार
  86. 5:11[संगीत]
  87. 5:12है और तुम्ह संसार
  88. 5:15से अपने आप को इकट्ठा करना है निर्मित
  89. 5:18करना है टुकड़ा टुकड़ा तब संसार दुख है
  90. 5:22अन्यथा संसार दुख नहीं
  91. 5:23[संगीत]
  92. 5:26है हम सबका दुनिया से जो रिश्ता
  93. 5:32वो बड़ी हिंसा का रिश्ता है तुम कभी गौर
  94. 5:35[संगीत]
  95. 5:37करो तुम कहती हो हम अपने सुख के लिए
  96. 5:40दूसरों पर निर्भर क्यों है सोचो कि अगर
  97. 5:43तुम्ह किसी से सुख की उम्मीद हो और तुम
  98. 5:45सुख ना दे तो तुम्हारे मन में उस व्यक्ति
  99. 5:48के लिए कैसे विचार
  100. 5:49[संगीत]
  101. 5:52आएंगे तुम्हे किसी से उम्मीद थी कि वो आज
  102. 5:55आकर
  103. 5:57के तुम्ह कुछ दे
  104. 6:00[संगीत]
  105. 6:04उपहार उसने नहीं दिया तुम्हारे मन में
  106. 6:08उसके लिए सद्भावना उठेगी
  107. 6:09[संगीत]
  108. 6:11या क्रोध उठेगा उम्मीद टूटी है जब उमीद
  109. 6:16टूटती है तो कैसा लगता
  110. 6:20है तुम सुख की सबसे ज्यादा उम्मीद किससे
  111. 6:23करते हो उन लोगों से जिनसे तुम्हारा
  112. 6:26तथाकथित प्रेम का रिश्ता है उन्हीं से तो
  113. 6:29उमीद करते हो ना ये जिंदगी में सुख
  114. 6:32देंगे खुशी
  115. 6:35मिलेगी और जिससे तुमने उम्मीद की उसी से
  116. 6:38तुम्हारा हिंसा का रिश्ता बन
  117. 6:41जाएगा हम बड़े हिंसक लोग हैं पूरी दुनिया
  118. 6:44से हमारा हिंसा का रिश्ता है और जो हमारे
  119. 6:47जितने करीब होता है हम उसके प्रति उतनी
  120. 6:49ज्यादा हिंसा से भरे होते हैं क्योंकि
  121. 6:51उससे उतनी ज्यादा उम्मीद होती है करीब
  122. 6:53होने का अर्थ ही यही
  123. 6:56है बाप पड़ोसी से नहीं उम्मीद करेगा कि
  124. 6:59मुझे पानी देगा पर बेटे से उम्मीद
  125. 7:01[संगीत]
  126. 7:03करेगा जहा उमीद है वही दुख
  127. 7:05[संगीत]
  128. 7:17है इस चेतना में जीना
  129. 7:22सीखो कि हम भिखारी नहीं है
  130. 7:30जब भी तुम्हारे भीतर यह विचार उठे कि
  131. 7:33दुनिया से कुछ पाना है कुछ अर्जित करना है
  132. 7:36कि जिंदगी तो दौड़ने का और हासिल करने का
  133. 7:39नाम
  134. 7:42है तभी स्मरण करने की कोशिश
  135. 7:45[संगीत]
  136. 7:48करो कि हासिल किए बिना भी तुम बहुत कुछ
  137. 7:52[संगीत]
  138. 7:56हो कि जो असली है वो तु मिला ही हुआ
  139. 8:00है और तुम्हें उसके लिए किसी के प्रमाण
  140. 8:04पत्र की जरूरत नहीं
  141. 8:08है तुम्हें दुनिया से जाकर के अनुमोदन
  142. 8:12लेने की जरूरत नहीं है कि मैं कुछ हूं या
  143. 8:14नहीं हूं दुनिया की नजर में तुम कुछ तभी
  144. 8:17होगे जब तुम दुनिया के अनुसार काम
  145. 8:22करोगे एक ठसक रखो अपने
  146. 8:27भीतर कि जैसे भी है बहुत बढ़िया
  147. 8:29[संगीत]
  148. 8:31मैं अहंकार की बात नहीं कर रहा
  149. 8:32[संगीत]
  150. 8:35हूं मैं इस श्रद्धा की बात कर रहा
  151. 8:39हूं कि अस्तित्व मेरा हक
  152. 8:42है कि यदि
  153. 8:46हूं तो छोटा या बुरा या निंदनीय नहीं हो
  154. 8:50सकता दुनिया में कुछ भी ऐसा है
  155. 8:54जो है तो पर उसे होना नहीं चाहिए था
  156. 8:57दुनिया में कुछ भी ऐसा है क्या
  157. 9:00कुछ भी ऐसा दिखा दो छोटा से छोटा घास का
  158. 9:03तिनका भी ऐसा है क्या जो है तो पर उसे
  159. 9:06होना नहीं चाहिए था
  160. 9:08है जो भी कुछ
  161. 9:11है वह अपनी जगह पर पूरा है और ठीक
  162. 9:17है वो कुछ बन के ठीक नहीं होगा वो ठीक
  163. 9:21है वो कुछ हासिल करके जीने काबिल नहीं
  164. 9:27बनेगा उसके होने मेंही उसकी पात्रता
  165. 9:30[संगीत]
  166. 9:32है इंसान अकेला है जिसे यह लगता है कि वो
  167. 9:35ठीक नहीं
  168. 9:41है अपने भीतर से भाव निकाल दो कि मैं ठीक
  169. 9:44नहीं
  170. 9:45हूं यह हीन भावना हमारे भीतर बहुत गहरी
  171. 9:49बैठ गई
  172. 9:53है हम बड़ा छोटा अनुभव करते हैं डरे डरे
  173. 9:57रहते हैं
  174. 10:04जब सब कुछ अपनी जगह पर है और सुव्यवस्थित
  175. 10:06है तो यह संभव कैसे है कि तुम में ही कोई
  176. 10:10खोट होगी बताओ
  177. 10:13मुझे सूरज अपनी जगह पर है मिट्टी अपनी जगह
  178. 10:17पर है छोटे मोटे कीड़े भी अपनी जगह पर है
  179. 10:20और खुश है और कोई अड़चन नहीं
  180. 10:28है और कोई अव्यवस्था भी नहीं
  181. 10:31है आउट ऑफ प्लेस कुछ भी नहीं है तो तुम ही
  182. 10:35कैसे हो सकते
  183. 10:45हो तुम सुंदर पक्षियों की तो बात करते हो
  184. 10:49कहते हो बड़े सुंदर है बड़े सुंदर है
  185. 10:51सुंदर जानवरों की बात करते हो पर जिनको
  186. 10:54तुम सुंदर नहीं भी कहते मान लो कोई घिनौना
  187. 10:56सा कीड़ा है ते है ना कई जिनको देख कर उता
  188. 11:00हट लगती
  189. 11:01है हमारी दृष्टि है हम किसी को सुंदर
  190. 11:03बोलते हैं हम किसी को कुरूप बोलते हैं कोई
  191. 11:07गंदा सा लिजजा सा कीड़ा
  192. 11:09है क्या उसके भीतर भी य हीनता होती है कि
  193. 11:13मैं कुछ और बन
  194. 11:14[संगीत]
  195. 11:16जाऊ होती है
  196. 11:18क्या वो मिट्टी में पड़ा रहता
  197. 11:22है और तब भी मरा नहीं जा रहा तनाव में कि
  198. 11:26क्या यार जिंदगी में कुछ हासिल नहीं किया
  199. 11:29और क्या रूप रंग है
  200. 11:33गंदा पर तुम हो जिसे अपना रूप रंग बदलने
  201. 11:37की बड़ी जरूरत
  202. 11:40है है कि नहीं
  203. 11:43है तुम हो जिसे अपना व्यवहार अपना मन
  204. 11:47बदलने की बहुत जरूरत
  205. 11:50है तुम हो जिसे जिंदगी में तरक्की
  206. 11:54की और हासिल की बहुत जरूरत है
  207. 12:10जो भी कोई
  208. 12:14इस खेल में
  209. 12:16[संगीत]
  210. 12:19पड़ेगा व धोखे ही धोखे
  211. 12:24खाएगा और इस बात से डर मत जाओ प्रभावित मत
  212. 12:28हो जाओ कि
  213. 12:29पूरी दुनिया ऐसे ही कर रही है तो यही तो
  214. 12:31सही
  215. 12:34होगा तु क्या पड़ी
  216. 12:37है संख्या गिनने की तुम्ह क्या पड़ी है यह
  217. 12:42देखने की कि सब लोग क्या कर रहे हैं
  218. 12:44तुम्हें कितनी जिंदगिया जीनी है अपनी या
  219. 12:47सबकी तुम यह देखो ना तुम्हारे लिए क्या
  220. 12:50उचित
  221. 12:51है तुम्हारी एक जिंदगी तुम उसके लिए देखो
  222. 12:54क्या उचित
  223. 12:56है या तो इसी र पड़े रहोगे कि सब करते हैं
  224. 13:00तो ठीक ही
  225. 13:10होगा तुम्हारे पास यदि समझने की योग्यता
  226. 13:14है जो तुम्हें बखी गई है तुमने अर्जित
  227. 13:17नहीं करी है उपहार स्वरूप मिली है बहुत
  228. 13:18बड़ी चीज है तुम्ह उपहार स्वरूप मिली है
  229. 13:21जब तुम्हारे पास वो समझने की काबिलियत
  230. 13:25है तो फिर जिंदगी कैसे बितानी है
  231. 13:30संसार को देख देख देख के या फिर इस समझ
  232. 13:33पे अगर संसार को ही देख देख देख के और
  233. 13:36उन्हीं प आश्रित रह के जीवन बिताना होता
  234. 13:39तो तुम्हारे भीतर समझ दी ही क्यों जाती
  235. 13:44तुमने कभी देखा नहीं तुम्ह तो फिर मशीन
  236. 13:47होना चाहिए था कि जैसे सब चल रहे हैं वैसे
  237. 13:50ही सारी मशीने एक जैसी चलती है तुम भी
  238. 13:56चलो पर तुम्हें कुछ ऐसा दिया गया है जो
  239. 13:59अद्भुत है विलक्षण है काबिलियत क्या कि
  240. 14:02तुम जान
  241. 14:04सको पहचान
  242. 14:12सको समझ
  243. 14:13[संगीत]
  244. 14:16सको उसमें जियो
  245. 14:21[संगीत]

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