दूसरों पर निर्भर खुशियाँ || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014) — Transcript
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- 0:00[संगीत]
- 0:07हमारी खुशिया
- 0:12दस बेटा पूछ रहे हो कि हमारी खुशिया दूसरो
- 0:15पर क्यों निर्भर होती है हमारा सब कुछ ही
- 0:18दूसरो पर निर्भर है क्या तुम्हारे दुख
- 0:21दूसरों पर निर्भर नहीं
- 0:23है क्या सिर्फ तुम्हारी खुशिया दूसरो पर
- 0:26निर्भर है
- 0:31कोई आकर तुम्ह हसा सकता है तो कोई आकर के
- 0:34तुम्हे रुला भी तो सकता है तुम्हारा अपना
- 0:38है
- 0:41क्या उदास होते हो तो दूसरों की वजह
- 0:45से उत्तेजित होते हो दूसरों की वजह
- 0:48से उते हो तो दूसरों की वजह से आकांक्षा
- 0:52है तो दूसरों की और डर है तो दूसरों
- 0:56से सब कुछ तो दूसरों का ही है
- 1:02हम दूसरों के प्रभावों के अलावा है
- 1:07क्या हम मैं मैं माने आत्म
- 1:12आत्म आत्म को हमने जाना कहां
- 1:16है हम तो ऐसे हैं कि
- 1:20जैसे एक हिस्सा इसका एक हिस्सा उसका एक
- 1:23हिस्सा
- 1:24उसका जैसे मोहल्ले में 100 घरों से थोड़ा
- 1:28थोड़ा खाना इकट्ठा किया जा
- 1:30और उसको मिला दिया जाए ऐसे हम है
- 1:36खिचड़ी हमारा अपना कुछ है
- 1:39[संगीत]
- 1:45कहां जब अपना कुछ नहीं होता उसी स्थिति को
- 1:48गुलामी कहते
- 1:53हैं तुम जो कुछ भी सोचती हो कि पा कर के
- 1:57जिंदगी जीने लायक बनती है तुम देखो ना कि
- 2:00उसमें पानी की हसरत दूसरों से ही
- 2:04है कोई पैसा दे दे कोई प्रतिष्ठा दे दे
- 2:07कोई नौकरी दे दे कोई प्रेम दे
- 2:10दे अपनी हालत कैसी है भिखारियों जैसी कहीं
- 2:14और से मिलेगा कोई बाहर वाला दे
- 2:17देगा कुछ ऐसा भी है जिसको कहते हो कि कहीं
- 2:20से ना मिले तो भी मेरे पास
- 2:24है कुछ ऐसा भी है जिसको कहते हो कि
- 2:31देने वाले का
- 2:32धन्यवाद कि उसने दिया ही
- 2:39है हमारे भीतर ऐसा कोई भाव ही नहीं होता
- 2:42कि मिला
- 2:44है इसीलिए हमारे भीतर कृतज्ञता नहीं होती
- 2:48बस शिकायत होती है कभी तुमने गौर किया है
- 2:51कि हम शिकायतों से कितना भरे हुए हैं हर
- 2:54समय हमारे
- 2:56भीतर एक निराशा एक कुंठ था एक
- 3:03विद्रोह उबलता से रहता
- 3:07है लगातार ये लगता रहता है कि जाकर
- 3:14के कहीं व्यक्त करते धोखा
- 3:20हुआ एक खालीपन का भाव रहता है ना सूनापन
- 3:24ये लगता ही नहीं कि मिला है
- 3:27कुछ जब ये नहीं लगता कि कुछ मिला है तो
- 3:30लगातार खड़े रहते हो पानी के लिए तू दे दे
- 3:33तू दे दे तुम अगर कभी गौर
- 3:37करो कि हमारा सूनापन कितना घना है तो हैरत
- 3:41में पड़
- 3:41[संगीत]
- 3:43जाओगे तुम सड़क पर चल रहे हो एक आदमी जा
- 3:46रहा है जिसे तुम बिल्कुल जानते
- 3:49नहीं उससे भी तुम्ह यह अभिलाषा रहती है कि
- 3:53व तुम्ह थोड़ी सी स्वीकृति तो दे ही दे
- 4:01तुम सड़क पर चल रहे हो कोई तुम्हें देखे
- 4:03ही ना तु बहुत बुरा
- 4:05लगेगा तुम अनजाने लोगों से भी मान्यता
- 4:08चाहते हो ऐसा हमारा भिखारी पन
- 4:10[संगीत]
- 4:13है तुम बाजार जाके कोई नया कपड़ा खरीद के
- 4:16ले आए हो तुम पहन के निकलो और कोई जिक्र
- 4:19ही ना
- 4:20करे तु पसंद नहीं आएगी य बात
- 4:33यही इंसान का अकेला कष्ट है कि उसको आत्म
- 4:38मिला नहीं
- 4:40है
- 4:41मैं की उपलब्ध नहीं हुई है इसके अलावा कोई
- 4:46कष्ट होता
- 4:47नहीं इसीलिए जानने वालो ने लगातार जो कहा
- 4:50है ना कि संसार झमेला है संसार दुख है
- 4:55उसका अर्थ यही है उन्होंने यह नहीं कहा कि
- 4:57संसार में कोई दुख है
- 5:00संसार में दुख तब है जब तुम संसार के
- 5:03सामने याचक की तरह खड़े रहते
- 5:06हो संसार में दुख तब है जब तुम नहीं हो और
- 5:10बस संसार
- 5:11[संगीत]
- 5:12है और तुम्ह संसार
- 5:15से अपने आप को इकट्ठा करना है निर्मित
- 5:18करना है टुकड़ा टुकड़ा तब संसार दुख है
- 5:22अन्यथा संसार दुख नहीं
- 5:23[संगीत]
- 5:26है हम सबका दुनिया से जो रिश्ता
- 5:32वो बड़ी हिंसा का रिश्ता है तुम कभी गौर
- 5:35[संगीत]
- 5:37करो तुम कहती हो हम अपने सुख के लिए
- 5:40दूसरों पर निर्भर क्यों है सोचो कि अगर
- 5:43तुम्ह किसी से सुख की उम्मीद हो और तुम
- 5:45सुख ना दे तो तुम्हारे मन में उस व्यक्ति
- 5:48के लिए कैसे विचार
- 5:49[संगीत]
- 5:52आएंगे तुम्हे किसी से उम्मीद थी कि वो आज
- 5:55आकर
- 5:57के तुम्ह कुछ दे
- 6:00[संगीत]
- 6:04उपहार उसने नहीं दिया तुम्हारे मन में
- 6:08उसके लिए सद्भावना उठेगी
- 6:09[संगीत]
- 6:11या क्रोध उठेगा उम्मीद टूटी है जब उमीद
- 6:16टूटती है तो कैसा लगता
- 6:20है तुम सुख की सबसे ज्यादा उम्मीद किससे
- 6:23करते हो उन लोगों से जिनसे तुम्हारा
- 6:26तथाकथित प्रेम का रिश्ता है उन्हीं से तो
- 6:29उमीद करते हो ना ये जिंदगी में सुख
- 6:32देंगे खुशी
- 6:35मिलेगी और जिससे तुमने उम्मीद की उसी से
- 6:38तुम्हारा हिंसा का रिश्ता बन
- 6:41जाएगा हम बड़े हिंसक लोग हैं पूरी दुनिया
- 6:44से हमारा हिंसा का रिश्ता है और जो हमारे
- 6:47जितने करीब होता है हम उसके प्रति उतनी
- 6:49ज्यादा हिंसा से भरे होते हैं क्योंकि
- 6:51उससे उतनी ज्यादा उम्मीद होती है करीब
- 6:53होने का अर्थ ही यही
- 6:56है बाप पड़ोसी से नहीं उम्मीद करेगा कि
- 6:59मुझे पानी देगा पर बेटे से उम्मीद
- 7:01[संगीत]
- 7:03करेगा जहा उमीद है वही दुख
- 7:05[संगीत]
- 7:17है इस चेतना में जीना
- 7:22सीखो कि हम भिखारी नहीं है
- 7:30जब भी तुम्हारे भीतर यह विचार उठे कि
- 7:33दुनिया से कुछ पाना है कुछ अर्जित करना है
- 7:36कि जिंदगी तो दौड़ने का और हासिल करने का
- 7:39नाम
- 7:42है तभी स्मरण करने की कोशिश
- 7:45[संगीत]
- 7:48करो कि हासिल किए बिना भी तुम बहुत कुछ
- 7:52[संगीत]
- 7:56हो कि जो असली है वो तु मिला ही हुआ
- 8:00है और तुम्हें उसके लिए किसी के प्रमाण
- 8:04पत्र की जरूरत नहीं
- 8:08है तुम्हें दुनिया से जाकर के अनुमोदन
- 8:12लेने की जरूरत नहीं है कि मैं कुछ हूं या
- 8:14नहीं हूं दुनिया की नजर में तुम कुछ तभी
- 8:17होगे जब तुम दुनिया के अनुसार काम
- 8:22करोगे एक ठसक रखो अपने
- 8:27भीतर कि जैसे भी है बहुत बढ़िया
- 8:29[संगीत]
- 8:31मैं अहंकार की बात नहीं कर रहा
- 8:32[संगीत]
- 8:35हूं मैं इस श्रद्धा की बात कर रहा
- 8:39हूं कि अस्तित्व मेरा हक
- 8:42है कि यदि
- 8:46हूं तो छोटा या बुरा या निंदनीय नहीं हो
- 8:50सकता दुनिया में कुछ भी ऐसा है
- 8:54जो है तो पर उसे होना नहीं चाहिए था
- 8:57दुनिया में कुछ भी ऐसा है क्या
- 9:00कुछ भी ऐसा दिखा दो छोटा से छोटा घास का
- 9:03तिनका भी ऐसा है क्या जो है तो पर उसे
- 9:06होना नहीं चाहिए था
- 9:08है जो भी कुछ
- 9:11है वह अपनी जगह पर पूरा है और ठीक
- 9:17है वो कुछ बन के ठीक नहीं होगा वो ठीक
- 9:21है वो कुछ हासिल करके जीने काबिल नहीं
- 9:27बनेगा उसके होने मेंही उसकी पात्रता
- 9:30[संगीत]
- 9:32है इंसान अकेला है जिसे यह लगता है कि वो
- 9:35ठीक नहीं
- 9:41है अपने भीतर से भाव निकाल दो कि मैं ठीक
- 9:44नहीं
- 9:45हूं यह हीन भावना हमारे भीतर बहुत गहरी
- 9:49बैठ गई
- 9:53है हम बड़ा छोटा अनुभव करते हैं डरे डरे
- 9:57रहते हैं
- 10:04जब सब कुछ अपनी जगह पर है और सुव्यवस्थित
- 10:06है तो यह संभव कैसे है कि तुम में ही कोई
- 10:10खोट होगी बताओ
- 10:13मुझे सूरज अपनी जगह पर है मिट्टी अपनी जगह
- 10:17पर है छोटे मोटे कीड़े भी अपनी जगह पर है
- 10:20और खुश है और कोई अड़चन नहीं
- 10:28है और कोई अव्यवस्था भी नहीं
- 10:31है आउट ऑफ प्लेस कुछ भी नहीं है तो तुम ही
- 10:35कैसे हो सकते
- 10:45हो तुम सुंदर पक्षियों की तो बात करते हो
- 10:49कहते हो बड़े सुंदर है बड़े सुंदर है
- 10:51सुंदर जानवरों की बात करते हो पर जिनको
- 10:54तुम सुंदर नहीं भी कहते मान लो कोई घिनौना
- 10:56सा कीड़ा है ते है ना कई जिनको देख कर उता
- 11:00हट लगती
- 11:01है हमारी दृष्टि है हम किसी को सुंदर
- 11:03बोलते हैं हम किसी को कुरूप बोलते हैं कोई
- 11:07गंदा सा लिजजा सा कीड़ा
- 11:09है क्या उसके भीतर भी य हीनता होती है कि
- 11:13मैं कुछ और बन
- 11:14[संगीत]
- 11:16जाऊ होती है
- 11:18क्या वो मिट्टी में पड़ा रहता
- 11:22है और तब भी मरा नहीं जा रहा तनाव में कि
- 11:26क्या यार जिंदगी में कुछ हासिल नहीं किया
- 11:29और क्या रूप रंग है
- 11:33गंदा पर तुम हो जिसे अपना रूप रंग बदलने
- 11:37की बड़ी जरूरत
- 11:40है है कि नहीं
- 11:43है तुम हो जिसे अपना व्यवहार अपना मन
- 11:47बदलने की बहुत जरूरत
- 11:50है तुम हो जिसे जिंदगी में तरक्की
- 11:54की और हासिल की बहुत जरूरत है
- 12:10जो भी कोई
- 12:14इस खेल में
- 12:16[संगीत]
- 12:19पड़ेगा व धोखे ही धोखे
- 12:24खाएगा और इस बात से डर मत जाओ प्रभावित मत
- 12:28हो जाओ कि
- 12:29पूरी दुनिया ऐसे ही कर रही है तो यही तो
- 12:31सही
- 12:34होगा तु क्या पड़ी
- 12:37है संख्या गिनने की तुम्ह क्या पड़ी है यह
- 12:42देखने की कि सब लोग क्या कर रहे हैं
- 12:44तुम्हें कितनी जिंदगिया जीनी है अपनी या
- 12:47सबकी तुम यह देखो ना तुम्हारे लिए क्या
- 12:50उचित
- 12:51है तुम्हारी एक जिंदगी तुम उसके लिए देखो
- 12:54क्या उचित
- 12:56है या तो इसी र पड़े रहोगे कि सब करते हैं
- 13:00तो ठीक ही
- 13:10होगा तुम्हारे पास यदि समझने की योग्यता
- 13:14है जो तुम्हें बखी गई है तुमने अर्जित
- 13:17नहीं करी है उपहार स्वरूप मिली है बहुत
- 13:18बड़ी चीज है तुम्ह उपहार स्वरूप मिली है
- 13:21जब तुम्हारे पास वो समझने की काबिलियत
- 13:25है तो फिर जिंदगी कैसे बितानी है
- 13:30संसार को देख देख देख के या फिर इस समझ
- 13:33पे अगर संसार को ही देख देख देख के और
- 13:36उन्हीं प आश्रित रह के जीवन बिताना होता
- 13:39तो तुम्हारे भीतर समझ दी ही क्यों जाती
- 13:44तुमने कभी देखा नहीं तुम्ह तो फिर मशीन
- 13:47होना चाहिए था कि जैसे सब चल रहे हैं वैसे
- 13:50ही सारी मशीने एक जैसी चलती है तुम भी
- 13:56चलो पर तुम्हें कुछ ऐसा दिया गया है जो
- 13:59अद्भुत है विलक्षण है काबिलियत क्या कि
- 14:02तुम जान
- 14:04सको पहचान
- 14:12सको समझ
- 14:13[संगीत]
- 14:16सको उसमें जियो
- 14:21[संगीत]
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