राधे बाबा का नया देसी चूल्हा// बनाई सब्जी और टिक्कड़ प्रसादी — Transcript
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- 0:03भाई
- 0:07का बात ये है कि भजन करो ना करो चरित्र
- 0:10खराब नहीं करो
- 0:11और कहते भैया मुक्त हो गए
- 0:14जब हम जिंदा में मुक्त नहीं हो पाए तो म
- 0:16में कहा मुक्त होंगे
- 0:19समझ की बात है
- 0:20तो दोस्तों कुछ इस प्रकार से आज की टिक्कर
- 0:23बढ़िया मस्तमस्त बन गई और
- 0:26रामलीला रास लीला में हम प्रमुख रहे
- 0:29अच्छा
- 0:30बंदर का रोल कराओ।
- 0:31अच्छा बंदर का
- 0:32हां और जो है रावण को समझाने जाना है।
- 0:36अंगद जी का पाठ करेंगे।
- 0:37अच्छा
- 0:38इसके बाद
- 0:38जब भूसा लगाएंगे
- 0:39अब उनका लगाओ ना खा लिया
- 0:42और नम्रता नहीं है तो अहंकार आ गया।
- 0:45विद्या विनय निपुण गुण शीला निपुण है वो
- 0:48विद्या में शील भी है। और अगर उसको नम्रता
- 0:51नहीं आई तो कुछ भी नहीं होगा।
- 0:58अगर जो सही है
- 1:00जी
- 1:01अपने आचरण में सही चल रहा है धर्म कर्म
- 1:05में चल रहा है उसे भगवान हर जन्म में देगा
- 1:09और भगवान किसी को मिलते हैं ना मिले हैं
- 1:11किसी को देखो भगवान
- 1:14लेकिन भगवान नहीं मिलेंगे भाई देखो
- 1:19तो साथियों आप सभी को जय सियाराम दोस्तों
- 1:22आज चल रहे हैं राधे बाबा के यहां बड़े
- 1:25दिनों के बाद क्योंकि दोस्तों सेवा की
- 1:28उतनी जरूरत पड़ती नहीं है और हमारा प्रयास
- 1:30रहता है कि जहां सेवा की ज्यादा जरूरत हो
- 1:31वहीं चलते हैं। तो दोस्तों अब आने वाली है
- 1:34धीरे ठंडी तो महाराज जी के लिए एक स्टील
- 1:37का चूल्हा लाए हुए हैं। ये रखा हुआ है
- 1:39दोस्तों। ये एक स्टील का चूल्हा है। इसको
- 1:41हम अभी वहीं दिखाएंगे आप लोगों को। तो
- 1:44महाराज जी को देंगे जो लकड़ियों से जब
- 1:46भोजन बनाते हैं ना तो जगह-जगह चूल्हे
- 1:48बदलते रहते हैं। तो ईंटा इधर-उधर रखने की
- 1:51जरूरत ना पड़ेगी। और यह स्टील का एक
- 1:53चूल्हा रहेगा। तो इसी को महाराज जी जहां
- 1:55चाहेंगे वहां रखकर अपना सुविधा अनुसार
- 1:58भोजन पका सकते हैं।
- 2:02और ये है खोही
- 2:04छोटी सी मार्केट है।
- 2:07तो यहां अमूमन सब कुछ दोस्तों मिल जाता
- 2:09है। सब्जी किराना कपड़े
- 2:14बड़े मात्रा में कुछ लेना चाहोगे तो थोड़ा
- 2:16सा दिक्कत होती है। नहीं तो और तो सब
- 2:18व्यवस्थित तरीका है।
- 2:21और यहीं से हम आज शॉर्टकट चलेंगे परिक्रमा
- 2:24से ही।
- 2:28तो ये है दोस्तों परिक्रमा मार्ग।
- 2:32ये वाला।
- 2:43तो ये है कुछ दोस्तों इस प्रकार का
- 2:45परिक्रमा का दृश्य। सभी यात्री परिक्रमा
- 2:48लगा रहे हैं कामनाथ भगवान की।
- 2:51जो कि 5 किमी की परिक्रमा रहती है और लगभग
- 2:55एक से 1ढ़ घंटे में पूरी हो जाती है।
- 3:03जय सियाराम हो गया हो गया
- 3:06कुटिया यही है
- 3:08तो हम जरूरत हो तो लौट नहीं
- 3:11यही रह चूल्हा लाए हैं
- 3:14या ठंडी के लाने
- 3:17हां
- 3:18सुनो
- 3:18हां हम जाए पकम्मा चाबी ले जाओ
- 3:22अपना धरो वं
- 3:25और चाबी चाबी जो है कहां रखना है
- 3:28हां हां
- 3:29कब तक लौट हो
- 3:31हम 2:00 बजे लौट
- 3:322 बजे ही हो
- 3:34खाना पीना
- 3:35अब हम शाम के बनाए
- 3:36शाम को नहीं
- 3:37आज पंचमी है
- 3:38अच्छा आज पंचमी है हम नौ जना चले
- 3:41हां
- 3:42खावे की
- 3:43खाबे की चले
- 3:45अपनी व रख दे टंकी पानी की टंकी कोई
- 3:49ठीक तीन चार
- 3:51जोड़
- 3:53ठीक ठीक ठीक सब थोड़ी
- 3:56हां हां कर लेते
- 4:00ठीक ठीक ठीक है जी हां
- 4:04हां हां हां
- 4:10तो दोस्तों महाराज तो चले गए अब देखते हैं
- 4:14हम सामान रखते हैं वहां पे अगर व्यवस्था
- 4:16होगी तो कुछ बनाएंगे नहीं तो फिर दोपहर के
- 4:19बाद आएंगे।
- 4:32तो ये है दोस्तों राधे बाबा की कुटिया।
- 4:37कुछ इस प्रकार से बनाए हैं महाराज जी।
- 4:41देखिए कुत्ते को किस प्रकार से पड़ा हुआ
- 4:43है। निपट गया क्या?
- 4:46वाह रे।
- 4:49देखिए दोस्तों कुत्ते को
- 4:53हम
- 4:58देख
- 5:07पर
- 5:09ये महाराज जी के
- 5:13तो दोस्तों महाराज जी तो चले गए परिक्रमा
- 5:16लगाने उनका नियम यह रहता है कि 8:00 बजे
- 5:19के आसपास निकल जाना। तो यह हमको सब्जियां
- 5:22लाए थे और उनके कुटिया में कोई कमी तो है
- 5:25नहीं और यह खास सेवा थी चूल्हा था ये
- 5:29वाला। तो आइए रख दें।
- 5:37और देखिए ये महाराज जी ने अभी यहां पे चाय
- 5:41शायद बनाए हैं। बस चाय बना करके चले गए।
- 5:44और इसको दोस्तों क्या है इसको कहीं भी आप
- 5:46रख दो क्योंकि महाराज जी जगह-जगह बदलते
- 5:49रहते हैं। जैसे यहां धूप आ गई तो उठा के
- 5:51ईंट यहां यहां ले आएंगे कभी नीचे चले
- 5:53जाएंगे। तो इसके लिए यह बेस्ट रहेगा इसमें
- 5:56अपना इस प्रकार से कुछ बना है। ऐसे रख के
- 6:00इसमें पकाएंगे। इसमें लकड़ियां लगा देंगे।
- 6:03बस तो आइए चाबी हमको महाराज दे दिए थे।
- 6:08इसको रख देते हैं।
- 6:13तो दोस्तों महाराज जी लगभग 12 एक से 2:00
- 6:17बजे के बीच में आएंगे 2:00 बजे के लगभग और
- 6:19अभी टाइम दोस्तों लगभग 9:00 बजने वाले हैं
- 6:22तो अभी हम कुछ बना लेते हैं यहीं पे और जब
- 6:26तक महाराज जी आएंगे तो उनको भी प्रसाद बना
- 6:29बनाया मिल जाएगा। तो चलिए शुरू करते हैं।
- 6:32सब्जी भी ले आए और सारी सामग्री यहां है
- 6:34ही है और नए चूल्हे का उद्घाटन भी हो
- 6:36जाएगा। कर देते हैं। बड़े दिनों के बाद आज
- 6:38महाराज जी की कुटिया में हम कुछ प्रसाद
- 6:40बना रहे हैं। दोस्तों यहां पर थोड़ा आग
- 6:42जला दिए हैं। बुझ रही थी और अब हम बनाते
- 6:45हैं सब्जी और टिक्का।
- 7:03तो दोस्तों ये है वो नया चूल्हा सिस्टम बन
- 7:06गया। अब इसमें देखते हैं आग लगा के कैसा
- 7:09बनता है।
- 7:20इसमें कंडी डाल देती
- 7:26है।
- 7:39ये दोस्तों सिस्टम तो हमको बढ़िया जम रहा
- 7:41है इसमें
- 7:43लेकिन महाराज जी को जैसा लगे
- 7:47लगा दोस्तों इसमें दो तरह का सिस्टम है
- 7:50अगर बर्तन छोटा है तो इनको ऐसे कर दो ये
- 7:57ऐसे करके अब रख दो तो ये ठीक नहीं लग रहा
- 8:01अगर बड़ा बर्तन है इसको हटा करके डायरेक्ट
- 8:05ऐसे रख दो तो चपक के बैठ जाता है। तो यह
- 8:09बढ़िया लगा और जब हवा आती है हवा नहीं
- 8:12बढ़िया आराम से आग जलेगी और कम लकड़ियों
- 8:16में दोस्तों इसमें ज्यादा भोजन प्रसाद
- 8:19सिद्ध कर सकते हैं। लकड़ियां रहने लगेगी
- 8:21क्योंकि जो इसकी आंच रहेगी इधर-उधर नहीं
- 8:23भागेंगे। देखिए उसी तरीके से जल रही है
- 8:27यार।
- 8:53दोस्तों यदि आप इस प्रकार का चूल्हा लेना
- 8:55चाहते हैं तो लिंक हम डिस्क्रिप्शन में और
- 8:58यह जहां डिस्प्ले में चलता होगा तो आप ले
- 9:01सकते हैं। Meesho में और Flipkart में
- 9:03दोनों के दोस्तों मिलता है। लेकिन हमने
- 9:04इसको Meesho से ऑनलाइन मंगवाया था।
- 9:23तो दोस्तों देखिए कितना मस्त आग जल रही है
- 9:26एकदम से एक भी थोड़ा बहुत अगर आग टूटती है
- 9:29तब हमको फूंकना पड़ता है नहीं तो लगातार
- 9:31ऐसे ही जलती है।
- 9:39अब शुरू करते हैं टिक्कड़ बनाना।
- 10:02तो दोस्तों ऐसे टक्कर बन के तैयार
- 10:17तो दोस्तों कुछ इस प्रकार से आज की टिक्कर
- 10:19बढ़िया मस्तमस्त बन गई। प्रसाद पूरा बनके
- 10:21तैयार हो गया। टिक्कर कुछ और बची हैं। तो
- 10:23यहां पे सेक रहे हैं अभी और सबसे पहले हम
- 10:26महाराज जी को निकाल के रख देते हैं। भाई
- 10:28जब आए तो अपना खा
- 10:36भरावा
- 10:49ये दोस्तों इतना
- 10:52जी के लिए और महाराज जी के लिए दोस्तों
- 10:55यहां पे रख दिए हैं पूरा सिस्टम
- 10:57ये इसमें सब्जी रखी हुई है
- 11:00और टिक्कड़ इसमें रखी
- 11:05दोस्तों महाराज जी के लिए हमने कुटिया में
- 11:07रख दिया है और यहां पे कुछ और टिक्कड़ पक
- 11:09रही हैं। दोस्तों आज बनाने में इसमें ना
- 11:12जो आनंद आया ना बढ़िया मजा आ गया। एकदम ना
- 11:16कोई ज्यादा तामझाम कुछ नहीं आसानी से पक
- 11:19गई टिक्कड़। अब यहां हम पाते हैं और
- 11:22महाराज जी का वेट करेंगे। तो दोस्तों भोजन
- 11:24प्रसादी बन गई और पा भी लिए और सब फुर्सत
- 11:29कर दिए। यह हमारा जो चूहरा था इसको यहीं
- 11:31पे साइड पे लगा दिया। महाराज जी डेली इसी
- 11:33पे काम करेंगे बनाएंगे लेकिन अभी थोड़ा गम
- 11:35है दोस्तों ये
- 11:38और तो दोस्तों अभी दोबारा पुनः आ गए हैं
- 11:41महाराज जी की कुटिया में
- 11:44और
- 11:46यहां पे महाराज जी शायद आए कि नहीं
- 11:53आ
- 11:58देखिए महाराज जी
- 12:03यह कोई नहीं थी सुबह महाराज जी
- 12:05ये सुबह कोई नहीं थी कहां चली गई थी ये
- 12:08हमें नहीं भैया
- 12:10अच्छा हां
- 12:14बढ़िया सब्जी का
- 12:16पा लिए
- 12:17एक पाया हमने
- 12:19हां
- 12:19तीन चार बच्चे आ गए वही पाते समय
- 12:22हां हां
- 12:22आज टुकड़ा उनको दे दिया
- 12:24हम सोचे कि चलो बना ही खा लेते हैं
- 12:28मौका लगे सब सामान रखा
- 12:30हां हां हां
- 12:31ले आओ तो ना ले आओ तो दाल चावल आटा सब रखा
- 12:34सब देखे तो रखा था तुमको
- 12:36हां जो है गैया का राशन
- 12:38अब अब भी दोनों आएंगे मताई बिटिया जा
- 12:41आएंगे
- 12:42अबे जा भर आई
- 12:44अच्छा अब तीन ठा हो गई ना
- 12:46हां
- 12:47अब जा बड़ी ब
- 12:48हां हां
- 12:49छोटी बताई
- 12:51हम
- 12:51अब दो आई नहीं हम
- 12:54अब क्या घूम
- 12:55अभी गए थे करबी
- 12:56अरे वाह
- 12:57एक पहले वहां गए एक टाठी घाट में कुटिया
- 13:00बह गई थी
- 13:01हां कि
- 13:02सुखदेव
- 13:03हां सुखदेव महाराज
- 13:04हां तो उनका सामान पहुंचवा दिए
- 13:06हां सही
- 13:07तो सामान पहुंच के चला गया फिर घर भी चले
- 13:08गए हम 2:00 बजे का आप टाइम दिए थे
- 13:10कि 2:00 बजे आएंगे
- 13:112 बजे बस 2:00 बजे रोज
- 13:13हां
- 13:14खाए कहीं चाय ना खाए
- 13:16हां हां
- 13:17आओ खाए कहीं चाय ना खाए एक घंटा पैकमा
- 13:21हां हां
- 13:22एक घंटा रामघाट
- 13:23एक घंटा हनुमान धारा
- 13:25वहां तो चले जाते हैं
- 13:26वहां का जब तो हमारा चार घंटा लगेगा 4
- 13:30घंटे में हम सब घूम अगर 5 घंटा लग गए तो
- 13:33टाटी घाट
- 13:35[हंसी]
- 13:38घूम
- 13:39इतनी लंबी यात्रा महाराज जी करते
- 13:41अभी भी हमें कोई दिक्कत नहीं
- 13:42हां
- 13:43कहां है
- 13:47भगवान ने खुद कहा
- 13:49तुम्हारी आयु बहुत है सबकी
- 13:52बिल्कुल भी नहीं
- 13:55जैसे तुम बहुत पढ़ सकते हो और बिल्कुल
- 13:58नहीं पढ़ सकते हां दोनों
- 14:00बुद्धि खराब हो जाए तो एक अक्षर ना आए हां
- 14:04बुद्धि सही है तो तुम चाहे छ 18 पुराण
- 14:07पढ़ते रहो और बुद्धि बिगड़ गई तो नहीं वो
- 14:10तो बेकल हो गया इसी प्रकार से आयु है
- 14:15कि आयु के संयम नियम आचार विचार और
- 14:20माता-पिता की सेवा
- 14:23और गुरु लायक हो तो गुरु की सेवा और समाज
- 14:26लायक हो तो समाज की सेवा तब जो है आयु
- 14:29बढ़ती है, धर्म बढ़ता है, कर्म बढ़ता है,
- 14:32बुद्धि विवेक बढ़ता है, काम बढ़ता है।
- 14:36और ये कछु ना कहे तो काम भी ना मिले। सही
- 14:39में देख लो अब कई आदमी
- 14:41हां हां
- 14:41हर जात में लखपति हैं और गरीब हैं।
- 14:46हर जात में मां से लगा के से
- 14:52छूटा कोई है नहीं। हम
- 14:53तो अब चले जाओ वृंदावन में कोसी में हम
- 14:5622 मंजिल को मकान उसका बना है का
- 15:00अच्छा
- 15:0122 मंजिल का और कम से कम कम से कम उसमें
- 15:041000 कोठा है तो 1000 कोठन में एक-एक बाबा
- 15:09बैठ दे
- 15:11अच्छा
- 15:12इतनी सेवा चले ₹100 हर बाबा का रोज मिलेगा
- 15:16भोजन मिलेगा आज भी कोसी में
- 15:19अच्छा
- 15:20अब और नाम का है झाड़ू टंगी का हवेली
- 15:26भंगे की हवेली
- 15:27भंगे की हम वो खाए आए नहीं
- 15:28अच्छा
- 15:29हाथ पकड़ के लो आ जाए नौका नौकर ले का कर
- 15:33रहे का
- 15:34नाम है ना मिलेगा
- 15:38जैसे राजा
- 15:40राजा की होटल में राजा नहीं किसी को पैसे
- 15:43[हंसी]
- 15:43हां
- 15:44नौकर पैसे देंगे इस
- 15:47हम वहां हम वृंदावन से पैर कमाता है भादों
- 15:51में आधे भादों
- 15:52अच्छा तो वहां कोसी में जहां से पहुंचे तो
- 15:55पूरी कोसी में सेवा होगा। लेकिन के
- 15:58यहां जो नियम है
- 15:59के वो रोड पे है। उसका हबीबी नौकर लगे
- 16:02जितने भी बाबा सड़क पे दिखाएंगे। वहीं से
- 16:05हां आइए संत भगवान दूध की व्यवस्था कच्चा
- 16:10भोजन पक्का भोजन अपने हाथ से पाइए। ₹100
- 16:15विदाई लीजिए। हम हम
- 16:17तो गए जैसे जिसे अन्न बाहेर के लिए
- 16:21वो अन्न नहीं खाएगा
- 16:22दूध दूध पी जाएगा
- 16:24अच्छा
- 16:25क्विंटल दूध नहीं
- 16:27हम
- 16:28क्विंटलन
- 16:29अब अलग-अलग क्वार्टर है जनता अलग खाएगी
- 16:33बावन का अलग खवाया जाएगा बावन का अलग
- 16:36भंडारा रहेगा जनता का अलग रहेगा और एक-एक
- 16:39खाने में 10-10 आदमी का सेवा 10-10 आदमी
- 16:42करेंगे सेवा
- 16:44बताइए
- 16:45रोज
- 16:45रोज रोज
- 16:46और बाबा चाहे जोन फंस जाए रोड पे हम
- 16:50बुलाएंगे महाराज खाना खा लो चले जाओ
- 16:54हम
- 16:55अब दिल्ली में जाइए दिल्ली
- 16:57हम
- 16:58एक जमुना बाजार है जमुना बाजार
- 17:00अच्छा वहां भी घूमए हैं
- 17:02दिल्ली गिया मुंबई कोलकाता हम 1961 से
- 17:06घूमत घूमत 2005 तक घूमे
- 17:09अच्छा
- 17:10बंद कर 2000 से 2005 से चित्रकूट से कहीं
- 17:13गए नहीं 20 साल अयोध्या रहे 20 साल
- 17:16वृंदावन रहे ये हमारी स्थान है सुदामा
- 17:19कुटी वृंदावन
- 17:20जी जी
- 17:20और अयोध्या में मनीराम छावनी नित गोपाल
- 17:23दास जी जो अध्यक्ष हैं पूरे
- 17:25111 साल की उम्र हो चुकी है उनकी
- 17:28अच्छा वहां
- 17:28वहां जिंदा हैं
- 17:29वहां रहे
- 17:30अब मशीन में रखे
- 17:32हां तो वहां आप रहे हैं
- 17:33वहां रहे 20 साल है उनके साथ
- 17:35बताइए
- 17:35बजरंग दास जी का जब गौशाला बनी उस तरफ
- 17:38अच्छा
- 17:38वो हमारे पुजारी रहे एक बलदेव दास जी
- 17:40हमारे कोठारी जी रहे 1961 से
- 17:43बताइए
- 17:44पूरा देश घूमा है काठमांडू नेपाल पशपतिनाथ
- 17:49और का मुख्या आसाम गुवाहाटी गोवा इस
- 17:54प्रकार से हमने बद्रीनाथ केदारनाथ अमरनाथ
- 17:59हमारे कंट
- 18:01सब हम जगन्नाथ पुरी छोटी
- 18:04छोटी सुदामापुरी बड़ी सुदामापुरी
- 18:07ये सब बचपन से घूमे फ्री
- 18:10फ्री
- 18:11अच्छा [हंसी]
- 18:12अब का बताएं ट्रेन में आ गए टीटीआई आ गया
- 18:16तो टिकट नहीं मांग रहा बैठो महाराज
- 18:19और तुम्हारे पास टिकट ना हो बैठो
- 18:21बैठो
- 18:22लेकिन अपना क्या बोल रहे सीताराम
- 18:25शब्द तो बोलो
- 18:27शब्द की कीमत है दुनिया में शब्द अगर सही
- 18:30है तो तुम कहीं जा सका वाणी सुधारने
- 18:34निगाह सुधारने हाथ सुधारने सुधरे सब है
- 18:38हां सुधारने
- 18:39लेकिन उनको जैसे घोड़ा अगर तुम
- 18:44घोड़े की सफाई कर रहे हम
- 18:47तो घोड़े के दो तीन चीज मजबूत चाहने पड़
- 18:50लगाम हां
- 18:52लगाम ना निकल जाए ना तो हाथ नहीं रहेगा
- 18:54घोड़ा एक और उसका पलेचा
- 18:58जिस बैठना है
- 18:59वो बिल्कुल का जैसे कस ढीला होगा तो गए
- 19:02काम से
- 19:03काम से
- 19:03इस प्रकार से जो हम सवाई पे चल रहे हैं
- 19:06उसको मजबूत रखो यह कर्म क्षेत्र है संसार
- 19:11में आए हैं कर्म करने के लिए अगर हम अच्छे
- 19:14कर्म करेंगे तो चौपाई में आया है।
- 19:18करो कलब भर राज तुम सुमिरो मन माई पुण धम
- 19:22पाई हो जहां संत सब जाए जिसके चरित्र
- 19:25अच्छे हैं उसके एक कलब तक अब एक कलब कितना
- 19:29है है तो बहुत
- 19:31अच्छा
- 19:32है तो बहुत
- 19:33जी
- 19:33लेकिन घटाव घटाओ घटाव 100 तक रखा गया
- 19:36अच्छा एक कलब 100
- 19:38हां एक कलब का हिसाब बहुत लंबा चौड़ा है
- 19:42कई युग बीत जाएंगे हम
- 19:44लेकिन जब छोटे से छोटे में ले आएंगे तो
- 19:46100 साल
- 19:47अच्छा
- 19:48इसे से कम नहीं होगा।
- 19:49क्यों
- 19:52के जैसे 100 साल मामूली है
- 19:55हां तो एक की उम्र बढ़ा जाती है
- 19:57कोई जी नहीं पाता इतनी
- 19:59इस कारण से करो कल भर रहा हूं
- 20:03और जो जितनी जी रहा है उतनी बहुत है
- 20:06लेकिन ये है कि अच्छे कर्म से ही अच्छे फल
- 20:08मिलते हैं कुल मिला के
- 20:10अच्छा
- 20:10अच्छे कर्म से अब देखिए हम 85 84 86 में
- 20:14चले
- 20:16तो हम जो है 11
- 20:19छ साल के थे हमारे पिताजी खत्म हो गए 12
- 20:22साल के माताजी खत्म हो गई
- 20:25हमें चाचा जी को सब छोड़ के हम अयोध्या आ
- 20:28गए 20 साल में पढ़ व
- 20:30फिर व
- 20:30अनाथशाला में पढ़ाई वही होती थी
- 20:33पढ़ाई तो दुनिया में हो रही हम अनाथशाला
- 20:36में पहुंच गए थे पहले स्कूल नहीं थे
- 20:39अच्छा
- 20:40चाहते थे वो प्राइवेट पढ़ाई होती थी
- 20:42हमने कहा हमारे पास कोई खर्चा नहीं
- 20:45हमें ऐसी जगह रहना है कि मैं खाएं मैं पिए
- 20:48मैं सोए नित गोपाल दास जी ना गए
- 20:53बोले चले जाओ गौशाला में 100 200 लड़का
- 20:57पढ़ रहे उसी में तुम पढ़ना और खाना पीना
- 21:01वन्ना कपड़ा जैसे अब बड़ी गुफा में
- 21:041050 लड़का पढ़ते हैं पंजाई भगवान के यहां
- 21:07पढ़ते हैं जी
- 21:08यहां रामायण कुटी में पढ़ते हैं तो ऐसे
- 21:11पहले से ही होत रहा गुरुकुल गुरुकुल
- 21:14तो हम गुरुकुल में हरिद्वार ऋषि
- 21:18और अयोध्या और वृंदावन चार पांच जगह पड़ी।
- 21:23अच्छा
- 21:23वृंदावन में तो पहुंची और बंगाली पढ़ाता
- 21:27था। बोले अब महाराज तुम अब नहीं पढ़ो बेटा
- 21:30अब तुम जो तबला सीखो और और जो है नाना
- 21:35प्रकार की संगीत में आ जाओ।
- 21:39ले रोज एक घंटा सुबह एक घंटा शाम के जाते
- 21:42थे। हां हां
- 21:43तबला बजाओ बढ़िया बाजा बजाओ और जो जो
- 21:46पार्टी में बैठ रहे
- 21:48हां
- 21:48₹100 तुम्हें मिल रहे भंडार में घंटाघाट
- 21:52चलो भाई अब भंडारे में टाइम है अब
- 21:55सुंदरकांड का पाठ होगा
- 21:57जब तो है मोखा रामायण
- 21:59हां पूरा रामायण
- 22:00साज बाज हमने सब छोड़ दे लेकिन रामायण में
- 22:03मोखा कंठ हो गए
- 22:06रामलीला रास लीला में हम प्रमुख रहे
- 22:10अच्छा
- 22:10अयोध्या पहुंच गए रामलीला हुए तो उसी के
- 22:13समाज में बैठ गए तो हमें ₹1000 मिले रात
- 22:18भर
- 22:18अच्छा तो जी काहे का रोल करते थे हम
- 22:23बंदर का रोल कराओ
- 22:25अच्छा बंदर का
- 22:26हां और जो है रावण को समझाने जाना है अंगद
- 22:30जी का पाठ करेंगे
- 22:31अच्छा
- 22:31इसके बाद आ जाओ नील नल का पाठ करें
- 22:35अच्छा
- 22:35पहा पहाड़ लेके आ रहे सब बंदर अति उतरंगे
- 22:39पादप लील ले उठाए आ गए नल नील नल और नील
- 22:43का हमारे जो हाथ चल ज्यादा जो चलता था
- 22:49उसने फबारा टाइप का पहाड़ आया वजन है कोई
- 22:53वजन नहीं
- 22:54फबाराकी आया और उसने वहां से फेंका और
- 22:58हमने अपनी कन्नी पे लिया और वहां जमा दिया
- 23:02हल फटी गई
- 23:05खेल में जो डिपार्टमेंट बड़ा सब में आगे
- 23:08रहो
- 23:09जो किसी से ना बने रोल वो दिखाओ
- 23:12हां अब अयोध्या वृंदावन में रसोई में रहे
- 23:1520 साल है
- 23:17लड्डू पेरा बर्फी गुलाब जामुन बालूशाही
- 23:19बसत पहनी रसगुल्ला पूरी कचौड़ी हम सब बना
- 23:22ले
- 23:26100 आदमी का खाना हम अकेले देते एक घंटे
- 23:29में
- 23:30पूरी पूरी में लगने दे
- 23:32हां हां हां
- 23:33एक क्विंटल की पूरी एक घंटा खा जाएगा
- 23:36हां दे
- 23:37और आधा घंटा सब्जी
- 23:39हम
- 23:40सब्जी में टाइम कम लगा
- 23:42क्यों कह रहे छक द
- 23:45और पानी डाल दिया
- 23:46दूसरा
- 23:46ढक्कन लगा दिया
- 23:47हां दूसरा काम करने लगे
- 23:48बस अब चलो मां पूरी कमी हो तो निकालो 10
- 23:53चढ़ा दो
- 23:55दो घंटे में रसोई बने तुम्हारी हम 6:00
- 23:58बजे के रसोई में और 10:00 बजे
- 24:01फाइनल क्विंटल 20 क्विंटल हम [हंसी]
- 24:07सुदामा कुटी वृंदावन में 20 क्विंटल का
- 24:11खाना बनता है 12:00 बजे प्रतिदिन
- 24:1420 क्विंटल का
- 24:14हां 20 क्विंटल का खाना बनना ही बनना है
- 24:18सुदामा कुटी
- 24:19अच्छा
- 24:19और 10 क्विंटल का खाना
- 24:22अटल चुंगी गोरे दाऊद वहां 10 ही क्विंटल
- 24:27का बने
- 24:27वृंदावन में भी है
- 24:28हां वो भी वृंदावन में
- 24:30और वृंदावन में कहीं भोजन नहीं मिलेगा सही
- 24:34अच्छा
- 24:34वो तो पूरी जगह है
- 24:35हां
- 24:35तुम्हें एक प्लेट कटवा दे क्या हो रहा
- 24:38हां पेट भर
- 24:39समोसा में क्या हो
- 24:41पवा भाई दूध में क्या हो रहा है जब तक वो
- 24:43बैठकर खाना नहीं खाएगा जब तक वो शांत नहीं
- 24:46मानो सुदामा कुटी
- 24:49गोदा
- 24:52बस दो जगह होती है सेवा सही
- 24:55नहीं होती है 100 जगह
- 24:56हां तो वही पेट
- 24:57वही है एक दो रोटी दिया गया एक चम्मच
- 25:00सब्जी फिर नहीं आया
- 25:02ये
- 25:03बड़ा मतलब महाराज जी विचित्र जीवन रहा
- 25:05पूरा जहां रहे वहां अपना बढ़िया रोल निभाए
- 25:08हां महाराज हमने गंजन की सेवा हमें क्या
- 25:12किया समय का 1961 में जब महाराज जी बोले
- 25:16वृंदावन से आए अयोध्या हम वही मिल गए हम
- 25:19नित गोपाल दास जी बोले महाराज जी लड़का लो
- 25:22जाना और ये वही पड़ेगा हम
- 25:2518 19 साल के हो गए हम
- 25:27तो महाराज जी बोले कि चलो तुम गौशाला में
- 25:30रहो अब तुमसे कोई सेवा नहीं पढ़ो लिखो और
- 25:33दूध पियो जम के हां
- 25:35एक बाल की दूध हमारे कमरा में ध
- 25:39100 गैया 100 गैया हम चरावे ले जाते जमुना
- 25:42उस पार प्ली पाए उल्ली पाली पा वहां की
- 25:46भाषा है
- 25:46अच्छा
- 25:47उल्ली पा अपने तरफ का प्ली पा उस तरफ का
- 25:51गोवर्धन नंद गांव बरसाना 84 को उसका
- 25:54परिक्रमा हमने 20 साल किया
- 25:57अयोध्या का 20 साल किया वही मिला के
- 26:01हर साल नीमसारण का परिकम किया 20 साल और
- 26:05चितकूट का ये गोविंद दास जी का भी नहीं
- 26:08उठता था परिकम ्मा हां हां
- 26:10हमारे अयोध्या नित गोपाल दास जी उठाते थे
- 26:13अब गोविंदा
- 26:15जी हमने 20ों परिक्रमा किया
- 26:17यहां की भी परिक्रमा
- 26:18हां
- 26:18अच्छा
- 26:19यहां उठती है ना फागगुन में
- 26:20हां जी
- 26:20फागगुन में फागगुन में
- 26:21यहां के कितनी परिक्रमा
- 26:2320 कम से कहां है लड़का उम में अब 20ों
- 26:26साल से तो बन रही है ज्यादा ही नहीं है
- 26:29गोविंदा दास की एक एक समय गए बाकी हम नहीं
- 26:31याद हम कह भैया तुम ही कमाओ
- 26:33महाराज जी कोई चूल्हा लाए हैं
- 26:35हां देख लिया हमने अंदर रख दिया
- 26:36बढ़िया है
- 26:37हम
- 26:39कुच है
- 26:39हां
- 26:40तो चपट हो
- 26:42अपना वहां अंदा लिया
- 26:43अंध बांधना हैो
- 26:46हां ये बढ़िया रहेगा
- 26:47कोई दो चार कंधा लगा लो धुआ होत रहे
- 26:49धुआ होत रहे
- 26:50बहुत सही आ गया
- 26:51राख ना फैलेगी
- 26:52कतई नहीं
- 26:53आगे ना फैले
- 26:55हां हां
- 26:55एक सी आगी चले
- 26:57ये यहां से बंद है नहीं
- 26:58हम हम वो आप सभी जगह चूल्हा बदलते रहते थे
- 27:01इसमें सोचा चलो
- 27:02ईंट ईंट के देखते थे
- 27:04हां हां
- 27:04अब जो सही आ गया
- 27:06हां
- 27:07अभी अब इसका एक और करना है जब समय मिले।
- 27:10जी जी।
- 27:10अब इसके पे बनाते हैं। गैस पे बनाते हैं।
- 27:14हां।
- 27:15अब को माने से गैस को
- 27:19वो ले आना है।
- 27:20नीचे वाला चूल्हा बोल से।
- 27:22अब ऊपर वाला है।
- 27:23ऊपर अब ऊपर ही बना है।
- 27:25अब नीचे वाला नहीं है।
- 27:26हां।
- 27:27अच्छा तो ठीक है।
- 27:28जब भी इच्छा हो। हां हां हां हां
- 27:30एक इतना सा है
- 27:34वो सिलेंडर
- 27:35नीचे वाला ठीक रहता है
- 27:36नीचे वाले में बैठ के बना लो
- 27:38लुढ़कता नहीं है
- 27:39हां वह ऊपर है तो दिखा ना जो चाहिए [हंसी]
- 27:43अगर आदमी के चरित्र सही है
- 27:46जी
- 27:46तो सात जुग लग बदलेगा महाराज हम
- 27:50तुम्हारा धन कोई खा जाए हम
- 27:53तो भगवान निर्णय करता है जहां भी जन्म
- 27:57होगा तुम्हें वहीं मिलेगा
- 27:59अब देखिए हम अपनी जमीन जायदाद दुकान मकान
- 28:02अपने चाचा के लड़का ने दिया
- 28:04तो हमें घर से ज्यादा सुख है यहां
- 28:07सही कह
- 28:08घर में तो हमें सभी नती करने पे
- 28:10रिश्तेदारी के और गांव के
- 28:13यहां तो हमें भगवान के नाम से सब मिल रहा
- 28:15है देखो सब खट विकास से दूर
- 28:18कोई चिंता नहीं कोई झंझट नहीं
- 28:20क्या बताएं
- 28:21तो जो भजन करने वाला है तो वो घाय गी सब
- 28:25छोड़ देता है तो वो सुखी हो सका भजन कर
- 28:29सका और वो फिर ग फिर आओ तो बहुत दिक्कत
- 28:33में हमारा देखो
- 28:34वो फिर जाल में फस गया
- 28:35वो का है कि जैसे दुकान खोली
- 28:38हां
- 28:38अब महीना भर में दुकान दुकान खोल ले तो
- 28:40दुकान मिट गई घाटा आ जाएगा
- 28:44कोनो चीज समझो जो सामान प्रतिदिन किया
- 28:48जाता है वो अमर है उसमें फायदा है नुकसान
- 28:53होगा हमारे से हम
- 28:55दुकान की तरफ से नुकसान ही होता है हम
- 28:58टाइम से ना खोलें नुकसान होगा।
- 29:00टाइम से खोलोगे जैसे भजिया मंगोड़ी बनाना
- 29:03है
- 29:03तो सुबह शाम बनाओ। 12:00 बजे कोई नहीं
- 29:06खाएगा।
- 29:07हां हां
- 29:08और 12:00 बजे अगर तुम्हें पैसा कमाना है
- 29:10तो दाल चावल रोटी बनाओ
- 29:12तो वो 12:00 बजे तुम्हारी होटल चल जाएगा।
- 29:14शाम के भजिया मंगोड़ी बनाओ खाना बनाओ।
- 29:17जितना हम कर लेंगे उतना हमें पा जाएंगे।
- 29:21टाइम टाइम का खेल है। 10:00 बजे उठोगे तो
- 29:25चाय नहीं किसी को पिया पाओगे। 10:00 बजे
- 29:27तो 10,000 कमा ली।
- 29:29बताइए।
- 29:303:00 बजे से।
- 29:31हां। हां।
- 29:331961 में हमने आगरा में दुकान खोली।
- 29:36अच्छा।
- 29:37एक बानिया मिल गया।
- 29:39हां।
- 29:39बोले महाराज अब ऐसा है कि हमारी दुकान पे
- 29:42दो चार दिन ना बने रहो।
- 29:44हां। हम
- 29:46खाओ पियो। आगरा।
- 29:48मैंने कहा उस समय में हमारे पास में 10
- 29:502000 थे। हम
- 29:5215 16 साल की उम्र
- 29:54सब घूमघम के ले की दुकान पे रूम गए तो वो
- 29:59छोड़ के पता नहीं कहां चला गया हम
- 30:01अब लाखों म लाखों सामान पड़ा है टपरा में
- 30:06हमने किया जो तो अकेली चाय बनाता था वो
- 30:09कुछ नहीं
- 30:10हम
- 30:11अब हमने की जब तक आएगा जब दे हमने सब
- 30:14बर्तन खरीदा
- 30:15हम
- 30:16दो करैया छोटी एक करैया भजिया के लिए एक
- 30:19सिरा के लिए जलेबी बना ले।
- 30:22अच्छा
- 30:23खोल दे ना चाय दुकान है।
- 30:25हां
- 30:26बच गया मंगवाड़ी। हां
- 30:27चाय की
- 30:28जलेबी
- 30:29जलेबी की चाय से सामान खोल दे कचौड़ी
- 30:34महाराज एक नौकर रखने पड़ा उस समय में
- 30:36चुन्नी में
- 30:39[हंसी] 10 पैसा की चाय बिकती जब
- 30:41हां
- 30:42चुन्नी में दिन भर कपड़े धोए लड़का
- 30:46अब तो पांच छ धो [हंसी]
- 30:49ऐसा खेले [नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 30:50महाराज जी सब लोग भक्ति के लिए परेशान
- 30:52होते हैं। भक्ति वास्तव में है क्या
- 30:54महाराज जी आपकी दृष्टि से
- 30:55देखो भक्ति है भाव की
- 30:57जी
- 30:58जैसे विचार मान लो के बदमाश और सच्चा
- 31:04एक बदमाश आदमी है नंबर वन का और एक सच्चा
- 31:08आदमी है तो सच्चा आदमी और बदमाश में क्या
- 31:12अंतर है?
- 31:14बोले ये है कि सच्चा आदमी का मन स्थता
- 31:19भी नहीं डरता भी नहीं उसका कलेजा कपता ही
- 31:23नहीं
- 31:24और बदमाश का कलेजा कपेगा क्योंकि उसने
- 31:26ऊटपटांग काम करे
- 31:28डर रहेगा
- 31:29डर बढ़ जाएगा
- 31:30इसी प्रकार से भक्ति ही भाव है भक्ति अगर
- 31:35चाहना है तो विद्या विनय निपुण गुण शीला
- 31:39विद्या का लक्षण क्या है कि विद्या विनय
- 31:44अगर नम्रता आ गई तो विद्या सिद्ध हो गई।
- 31:48अच्छा विद्या चढ़ गई। और नम्रता नहीं है तो
- 31:52अहंकार आ गया। विद्या विनय निपुण गुण
- 31:55शीला। निपुण है वो विद्या में शील भी है।
- 31:58और अगर उसको नम्रता नहीं आई तो कुछ भी
- 32:02नहीं होगा। नम्रता ही भाव भक्ति है।
- 32:05माता-पिता को नमस्कार करना। साधु
- 32:08ब्राह्मणों को नमस्कार करना और बड़े देवता
- 32:11को नमस्कार करना। इसको भक्ति भाव कहते
- 32:14हैं। अच्छा
- 32:15जे नाना भाई सुर गुरु जी देखी आपसे इसका
- 32:19विनय विषयी कहते हैं देव तनखा देख के बड़े
- 32:23पंडितन का देख के साधु महात्म देख के
- 32:26बड़े-बड़े साहब लोग हैं देवी हमारे भगवान
- 32:30के भक्त हैं जब उन्हें इतनी नौकरी मिली है
- 32:32लंबी चौड़ी
- 32:33जी
- 32:33जैसे मोदी से धर लो योगी से धर लो
- 32:36तो कुछ तो ऐसा तपस्या होगा वो जमाने की
- 32:40जैसे हम तुम कर रहे
- 32:41जी जी
- 32:42अब हमारी तुम्हारी जितनी हती वो मिले ले
- 32:45अब के अगर मालिक की इच्छा है एक गुना 100
- 32:48गुना बढ़ा दे तो आगे चलके फिर मिलेगा
- 32:52एक सही तो एक ही समय का है
- 32:55जी जी जी
- 32:56सही शरीर नाशमान है
- 32:58सही ज्यादा से ज्यादा 100 साल की डिग्री
- 33:00है इसकी बस
- 33:01हां हां हैं
- 33:02अब 100 साल में जितने हमारे पूरब के पुण्य
- 33:07होंगे वे मिल जाएंगे
- 33:09अच्छा
- 33:09और जो बीते में चला गया
- 33:12तो जमा
- 33:14जहां भी अवतार होगा उसका जन्म होगा वहीं
- 33:17सब मिलेगा जन्मजनम रति राम पद वरदान न तो
- 33:22यह बताया है कि जन्मजनम मुनि जतन कराएं
- 33:25अंत राम कहीं आवत नहीं जैसे गैस की मार्ग
- 33:28में देख लो दिल्ली ग्वालियर बॉम्ब कोलकाता
- 33:30बड़ी-बड़ी दुकानें खुली हैं
- 33:34जिनकी दुकान का सामान नहीं कोई गिन सकता
- 33:36है
- 33:37ऐसीसी दुकानें हैं
- 33:38जी
- 33:39तो वे रह चाहे ना रह उनको भगवान एक ना एक
- 33:43संतान देता रहेगा
- 33:46तो जुगों तक चल रही इसी प्रकार से भगवान
- 33:50की भक्ति है कि अगर जो सही है
- 33:54जी
- 33:55अपने आचरण में सही चल रहा है धर्म कर्म
- 33:59में चल रहा है उसे भगवान हर जन्म में देगा
- 34:03अब जैसे हम अब
- 34:06हमने ना शादी कराई ना किसी से मतलब रखा ना
- 34:11जमीन जायदाद का ना जन्म जन्मभूमि का हमने
- 34:13कोई सुख नहीं लिया। हम
- 34:16हमें भक्ति भाव में मगन हो गए। तो अब समझ
- 34:19लीजिए के जन्म जहां जन्म तो होगा।
- 34:22हां जी।
- 34:23ये तो बहुत दिक्कत है कि जन्म नहीं होगा।
- 34:27भक्ति करो तो मरना है ना भक्ति करो तो
- 34:30मरना है।
- 34:31और भक्ति करो तो अवतार होना है।
- 34:35जहां लिखा होगा वहां अवतार होगा।
- 34:38तो वहां मिलेगा। ये सब लिखा है शास्त्रों
- 34:42में कि जन्मजनम तक
- 34:45हमें तुम्हें जन्मजनम तक आना है और कहते
- 34:48भैया मुक्त हो गए जब हम जिंदा में मुक्त
- 34:52नहीं हो पाए तो मरे में का मुक्त होंगे
- 34:56समझ की बात है जिंदा उसको कहते हैं जिंदा
- 35:00है भजन कर रहे भाव कर नाम रूप लीला धाम और
- 35:05भगवान किसी को मिलते हैं ना मिले हैं किसी
- 35:08को देखो भगवान का नाम, भगवान का रूप,
- 35:13भगवान का चरित्र, भगवान का धाम, नाम जाप
- 35:17करते रहो, कर्म करते रहो तो सब मिलेगा।
- 35:21लेकिन भगवान नहीं मिलेंगे। भाई देखो मिलने
- 35:24होते तो सबको मिलती
- 35:26और ना मिलने एक आदमी का है भगवान मिल गए।
- 35:29हम कैसे मान जाए
- 35:32भगवान के हाथ गो है ही नहीं। हम मिल कहां
- 35:34से गए? बिन पद चले सुने बिन काना कर बिन
- 35:37कर्म करे विधि नाना आन रहे सकल रस भोगी
- 35:40बिन वाणी भक्तावर जोगी
- 35:43भगवान की शब्द नहीं मिल रहा सुन भगवान का
- 35:47ठोर नहीं मिल रहा है कि कौन जगह है
- 35:50भगवान के हाथ गोले नहीं है भगवान का रूप
- 35:54रंग नहीं है तो तुम्हें मिल का
- 35:56तो कैसे मिल गया [हंसी]
- 35:57हैं
- 35:58तुम कहो कि हमें आगे आगे मिल गई बात कहत
- 36:01रही
- 36:02तो झूठी बात है क्या
- 36:03परप आगे मिले सब लेकिन बात नहीं करेगा
- 36:07चूक जाओगी तो जलाओ ऐसे
- 36:10कपड़े ही जला देगा और प्रतिप हो रहा खान
- 36:14से पीन से आगी से हमारा सब काम चल रहा
- 36:18लेकिन वो तुमसे हमसे जवाब नहीं देगा जल
- 36:22पाव गगन समीरा पंचर धम शरीरा छ पावक ये
- 36:27पांच तत्व है सबको मिल रहे लेकिन जवाब
- 36:31नहीं मिलेगा
- 36:32ना धरती बोलेगी
- 36:35ना आकाश बोलेगा
- 36:37ना हवा बोलेगी बोल सब हम
- 36:40पानी बरसेगा तो दूर से समझ में आ जाएगा
- 36:44बिजली तड़केगा तो आवाज सुनाई देगा आकाश से
- 36:48बोले सब लेकिन तुमसे हमसे नहीं बोलेगा
- 36:51अपने में बोलेगा इसी प्रकार से भगवान है
- 36:55के पहले और महाप्रलय
- 36:58और ज्ञान और बुद्धि विवेक सब है लेकिन
- 37:01समझना मुश्किल है
- 37:03और समझना है तो बस अपने भगवान का भजन करते
- 37:07रहो। वही भक्ति भाव है। सब जीव से प्रेम,
- 37:10चराचर से प्रेम, पशु पक्षियों से प्रेम,
- 37:13मानवता से प्रेम, जो गलत चले वो भोगे हम
- 37:16क्यों प्रपंच में फसे?
- 37:18फसे भैया भी ऐसा कहते जैसो कहते सो कहते
- 37:21हमें कोई मतलब नहीं भैया।
- 37:23हम अपना कर्म कर रहे हैं।
- 37:24हमें अपना करना है। खुद बचो और दूसरे का
- 37:27बचाओ।
- 37:29वही भजन है। खुद बचो। और दूसरे का बचाओ और
- 37:34दुर्घटनाओं से दूर रहना ही भजन है।
- 37:36भजन है बस
- 37:37और दुर्घटना अब जैसे बाबा है
- 37:40भजन तो खूब करता है। संयम नियम करता है।
- 37:43वो को इसमें फंस गया हम तो गई जिंदगी भजन
- 37:49करो ना करो चरित्र खराब नहीं करो। हम जैसे
- 37:53हम किसी की मदद करें चाहे ना करें कि किसी
- 37:56को दिक्कत ही ना दें। हम
- 37:59इस कारण से बताया है कि खुद बचाओ और दूसरे
- 38:03का बचाओ।
- 38:04अच्छा
- 38:04और चरित्र वे करो के माता-पिता खुशी
- 38:07परिवार सुखी गांव के भी माने कि हां इंसान
- 38:10है।
- 38:11ऐसे काम ना करो के माता-पिता लज्जित हो
- 38:15जाए। हमारा परिवार लज्जित हो जाए। हमारा
- 38:17गुरु लज्जित हो जाए। हुआ है तो कर्म
- 38:21चूकोगे तो दिक्कत है
- 38:24कर्म की यहां ये मृतलोक में कर्म की गिनती
- 38:28है
- 38:30हमें तुम्हें भी कहना पड़ेगा कि हां इंसान
- 38:32सही है और गलत होगा तो वो भी कहना पड़ेगा
- 38:36कि भैया हम नहीं जाना ऐसे पूछ ले
- 38:39इसे कर्म प्रधान विश्व का राखा जो जस का
- 38:42सो तस पर चाका
- 38:43चल
- 38:44हमारा हम भी बच के आ गए
- 38:46अच्छा हां
- 38:47उसको थोड़ा राशन पानी दे दे
- 38:49हां हां महाराज जी
- 38:50कभी भी आया तो
- 38:51जी जी महाराज जी
- 38:52अरे हम दम देखते
- 38:54हां जी
- 38:54हम जो है हम
- 38:56देखो अब तुम्हारी कैसी तपस्या किसी की
- 39:00नहीं
- 39:01जहां भी जाओगे
- 39:03हां
- 39:03व दुनिया हित मानता है
- 39:05जो शुरुआत आप से हुई थी
- 39:08आओ आओ भैया
- 39:09आओ आओ
- 39:11आओ
- 39:13हां बिलकुल सुदामा
- 39:16वृंदावन में किसी से पूछो
- 39:19तो दोस्तों यह रही महाराज जी की कुटिया
- 39:21कुछ इस प्रकार से है और गौ माता आ गई चार
- 39:24ठ गई महाराज जी की नहीं है
- 39:27अच्छा वो दूसरे की है
- 39:28होगा
- 39:29अच्छा ये इधर एक है
- 39:31दूसरे की है
- 39:32अच्छा
- 39:32अपनी दो खाई
- 39:34हम हम है अब उनको देना है राशन पानी
- 39:39अब ये ये टुकड़िया तो यही खा गई देख लो
- 39:42हां
- 39:43जब दो दफा खा गई और दो दफा भाग गई
- 39:46अच्छा
- 39:47फिर आ जाती है
- 39:48हां हां इसकी खुराक दोनों से ज्यादा है।
- 39:51अब डेढ़ साल की बचिया है। हां
- 39:54डेढ़ साल की बचिया है और दो साल की हो जाए
- 39:56ना
- 39:57तो ऐसे ज्यादा हो
- 39:59ज्यादा हो जी हां हां पक्का है
- 40:01जो है
- 40:02ये महाराज जी अब दूसा लगाएंगे
- 40:04अब उनका लगाओ ना इन्हें खा लिया
- 40:07अच्छा
- 40:08एक दो किलो उनको डाल दे
- 40:11अपना 5:00 बजे तक चले जाएंगे गंगा जी
- 40:15नहाएंगे वहीं अगरबत्ती ले जाए दीपक जलाएं
- 40:19अच्छा
- 40:20सुबहेरे कामताना जी परिक्मा
- 40:22शाम को गंगा
- 40:24और ये गौ की सेवा हम कोई काम नहीं हम
- 40:29जो भजन है
- 40:30अब फिर रात में जी कब लौटते हैं
- 40:328:00 बजे
- 40:338:00 बजे
- 40:348:00 बजे आए तो हम शाम के खाना खाते नहीं
- 40:36हां
- 40:37अभी दही थी वही खा लिया एक रोटी हो गया
- 40:39अच्छा
- 40:40और ना हो आधा किलो दूध ले शाम के खाना
- 40:43नहीं खा
- 40:43नहीं तो हमारा पेट जाम हो
- 40:45हां सही कह रहे हैं
- 40:46हां
- 40:47अब बुढ़ापे में कितना चलेगा
- 40:49ये बुढ़ापे का दाना कम खाओ
- 40:52एक टाइम भाई पेट खा लो
- 40:54और दूसरे टाइम ना खाओ दूजी ले लो
- 40:59हमें ठीक रख लिया
- 41:03रात में रहेंग कि चली जाती है
- 41:05अरे रात में कोई नहीं रहेगा
- 41:07अच्छा
- 41:07रहेगा हल्की
- 41:09हां
- 41:09हम
- 41:25लो जल्दी
- 41:30अब अब ना खा पाए
- 41:31अब ना खाए
- 41:32अब ना खा पाए
- 41:33अच्छा वो मारेगी क्या अब इसको
- 41:35खाने ही ना दे
- 41:38और ये है दोस्तों महाराज जी की
- 41:41बढ़िया मस्त दोस्तों अब लग रहा है पूरा
- 41:44स्थान बढ़िया बन सज गया है ये पेड़ भी
- 41:47बढ़िया सज गए हैं और यह शीशम का पेड़ है।
- 41:51जब दोस्तों कुठिया बनाए थे ना तो एकदम से
- 41:53छोटी सी यह पेड़ था। अब तो बढ़िया छाया भी
- 41:57हो गई है।
- 42:11ठीक है मां जी चलते हैं फिर आशीर्वाद है
- 42:13सबको
- 42:14लाखों प्रकार की दुआएं मिलेंगे
- 42:16और आपका भविष्य बनता ही रहेगा ये संतों का
- 42:19भजन है
- 42:20हर हर महादेव
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This page contains the full transcript of राधे बाबा का नया देसी चूल्हा// बनाई सब्जी और टिक्कड़ प्रसादी by Dharm Ki Raah, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 5,477 words across 953 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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