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राधे बाबा का नया देसी चूल्हा// बनाई सब्जी और टिक्कड़ प्रसादी — Transcript

by Dharm Ki Raah · 5,477 words · 953 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:03भाई
  2. 0:07का बात ये है कि भजन करो ना करो चरित्र
  3. 0:10खराब नहीं करो
  4. 0:11और कहते भैया मुक्त हो गए
  5. 0:14जब हम जिंदा में मुक्त नहीं हो पाए तो म
  6. 0:16में कहा मुक्त होंगे
  7. 0:19समझ की बात है
  8. 0:20तो दोस्तों कुछ इस प्रकार से आज की टिक्कर
  9. 0:23बढ़िया मस्तमस्त बन गई और
  10. 0:26रामलीला रास लीला में हम प्रमुख रहे
  11. 0:29अच्छा
  12. 0:30बंदर का रोल कराओ।
  13. 0:31अच्छा बंदर का
  14. 0:32हां और जो है रावण को समझाने जाना है।
  15. 0:36अंगद जी का पाठ करेंगे।
  16. 0:37अच्छा
  17. 0:38इसके बाद
  18. 0:38जब भूसा लगाएंगे
  19. 0:39अब उनका लगाओ ना खा लिया
  20. 0:42और नम्रता नहीं है तो अहंकार आ गया।
  21. 0:45विद्या विनय निपुण गुण शीला निपुण है वो
  22. 0:48विद्या में शील भी है। और अगर उसको नम्रता
  23. 0:51नहीं आई तो कुछ भी नहीं होगा।
  24. 0:58अगर जो सही है
  25. 1:00जी
  26. 1:01अपने आचरण में सही चल रहा है धर्म कर्म
  27. 1:05में चल रहा है उसे भगवान हर जन्म में देगा
  28. 1:09और भगवान किसी को मिलते हैं ना मिले हैं
  29. 1:11किसी को देखो भगवान
  30. 1:14लेकिन भगवान नहीं मिलेंगे भाई देखो
  31. 1:19तो साथियों आप सभी को जय सियाराम दोस्तों
  32. 1:22आज चल रहे हैं राधे बाबा के यहां बड़े
  33. 1:25दिनों के बाद क्योंकि दोस्तों सेवा की
  34. 1:28उतनी जरूरत पड़ती नहीं है और हमारा प्रयास
  35. 1:30रहता है कि जहां सेवा की ज्यादा जरूरत हो
  36. 1:31वहीं चलते हैं। तो दोस्तों अब आने वाली है
  37. 1:34धीरे ठंडी तो महाराज जी के लिए एक स्टील
  38. 1:37का चूल्हा लाए हुए हैं। ये रखा हुआ है
  39. 1:39दोस्तों। ये एक स्टील का चूल्हा है। इसको
  40. 1:41हम अभी वहीं दिखाएंगे आप लोगों को। तो
  41. 1:44महाराज जी को देंगे जो लकड़ियों से जब
  42. 1:46भोजन बनाते हैं ना तो जगह-जगह चूल्हे
  43. 1:48बदलते रहते हैं। तो ईंटा इधर-उधर रखने की
  44. 1:51जरूरत ना पड़ेगी। और यह स्टील का एक
  45. 1:53चूल्हा रहेगा। तो इसी को महाराज जी जहां
  46. 1:55चाहेंगे वहां रखकर अपना सुविधा अनुसार
  47. 1:58भोजन पका सकते हैं।
  48. 2:02और ये है खोही
  49. 2:04छोटी सी मार्केट है।
  50. 2:07तो यहां अमूमन सब कुछ दोस्तों मिल जाता
  51. 2:09है। सब्जी किराना कपड़े
  52. 2:14बड़े मात्रा में कुछ लेना चाहोगे तो थोड़ा
  53. 2:16सा दिक्कत होती है। नहीं तो और तो सब
  54. 2:18व्यवस्थित तरीका है।
  55. 2:21और यहीं से हम आज शॉर्टकट चलेंगे परिक्रमा
  56. 2:24से ही।
  57. 2:28तो ये है दोस्तों परिक्रमा मार्ग।
  58. 2:32ये वाला।
  59. 2:43तो ये है कुछ दोस्तों इस प्रकार का
  60. 2:45परिक्रमा का दृश्य। सभी यात्री परिक्रमा
  61. 2:48लगा रहे हैं कामनाथ भगवान की।
  62. 2:51जो कि 5 किमी की परिक्रमा रहती है और लगभग
  63. 2:55एक से 1ढ़ घंटे में पूरी हो जाती है।
  64. 3:03जय सियाराम हो गया हो गया
  65. 3:06कुटिया यही है
  66. 3:08तो हम जरूरत हो तो लौट नहीं
  67. 3:11यही रह चूल्हा लाए हैं
  68. 3:14या ठंडी के लाने
  69. 3:17हां
  70. 3:18सुनो
  71. 3:18हां हम जाए पकम्मा चाबी ले जाओ
  72. 3:22अपना धरो वं
  73. 3:25और चाबी चाबी जो है कहां रखना है
  74. 3:28हां हां
  75. 3:29कब तक लौट हो
  76. 3:31हम 2:00 बजे लौट
  77. 3:322 बजे ही हो
  78. 3:34खाना पीना
  79. 3:35अब हम शाम के बनाए
  80. 3:36शाम को नहीं
  81. 3:37आज पंचमी है
  82. 3:38अच्छा आज पंचमी है हम नौ जना चले
  83. 3:41हां
  84. 3:42खावे की
  85. 3:43खाबे की चले
  86. 3:45अपनी व रख दे टंकी पानी की टंकी कोई
  87. 3:49ठीक तीन चार
  88. 3:51जोड़
  89. 3:53ठीक ठीक ठीक सब थोड़ी
  90. 3:56हां हां कर लेते
  91. 4:00ठीक ठीक ठीक है जी हां
  92. 4:04हां हां हां
  93. 4:10तो दोस्तों महाराज तो चले गए अब देखते हैं
  94. 4:14हम सामान रखते हैं वहां पे अगर व्यवस्था
  95. 4:16होगी तो कुछ बनाएंगे नहीं तो फिर दोपहर के
  96. 4:19बाद आएंगे।
  97. 4:32तो ये है दोस्तों राधे बाबा की कुटिया।
  98. 4:37कुछ इस प्रकार से बनाए हैं महाराज जी।
  99. 4:41देखिए कुत्ते को किस प्रकार से पड़ा हुआ
  100. 4:43है। निपट गया क्या?
  101. 4:46वाह रे।
  102. 4:49देखिए दोस्तों कुत्ते को
  103. 4:53हम
  104. 4:58देख
  105. 5:07पर
  106. 5:09ये महाराज जी के
  107. 5:13तो दोस्तों महाराज जी तो चले गए परिक्रमा
  108. 5:16लगाने उनका नियम यह रहता है कि 8:00 बजे
  109. 5:19के आसपास निकल जाना। तो यह हमको सब्जियां
  110. 5:22लाए थे और उनके कुटिया में कोई कमी तो है
  111. 5:25नहीं और यह खास सेवा थी चूल्हा था ये
  112. 5:29वाला। तो आइए रख दें।
  113. 5:37और देखिए ये महाराज जी ने अभी यहां पे चाय
  114. 5:41शायद बनाए हैं। बस चाय बना करके चले गए।
  115. 5:44और इसको दोस्तों क्या है इसको कहीं भी आप
  116. 5:46रख दो क्योंकि महाराज जी जगह-जगह बदलते
  117. 5:49रहते हैं। जैसे यहां धूप आ गई तो उठा के
  118. 5:51ईंट यहां यहां ले आएंगे कभी नीचे चले
  119. 5:53जाएंगे। तो इसके लिए यह बेस्ट रहेगा इसमें
  120. 5:56अपना इस प्रकार से कुछ बना है। ऐसे रख के
  121. 6:00इसमें पकाएंगे। इसमें लकड़ियां लगा देंगे।
  122. 6:03बस तो आइए चाबी हमको महाराज दे दिए थे।
  123. 6:08इसको रख देते हैं।
  124. 6:13तो दोस्तों महाराज जी लगभग 12 एक से 2:00
  125. 6:17बजे के बीच में आएंगे 2:00 बजे के लगभग और
  126. 6:19अभी टाइम दोस्तों लगभग 9:00 बजने वाले हैं
  127. 6:22तो अभी हम कुछ बना लेते हैं यहीं पे और जब
  128. 6:26तक महाराज जी आएंगे तो उनको भी प्रसाद बना
  129. 6:29बनाया मिल जाएगा। तो चलिए शुरू करते हैं।
  130. 6:32सब्जी भी ले आए और सारी सामग्री यहां है
  131. 6:34ही है और नए चूल्हे का उद्घाटन भी हो
  132. 6:36जाएगा। कर देते हैं। बड़े दिनों के बाद आज
  133. 6:38महाराज जी की कुटिया में हम कुछ प्रसाद
  134. 6:40बना रहे हैं। दोस्तों यहां पर थोड़ा आग
  135. 6:42जला दिए हैं। बुझ रही थी और अब हम बनाते
  136. 6:45हैं सब्जी और टिक्का।
  137. 7:03तो दोस्तों ये है वो नया चूल्हा सिस्टम बन
  138. 7:06गया। अब इसमें देखते हैं आग लगा के कैसा
  139. 7:09बनता है।
  140. 7:20इसमें कंडी डाल देती
  141. 7:26है।
  142. 7:39ये दोस्तों सिस्टम तो हमको बढ़िया जम रहा
  143. 7:41है इसमें
  144. 7:43लेकिन महाराज जी को जैसा लगे
  145. 7:47लगा दोस्तों इसमें दो तरह का सिस्टम है
  146. 7:50अगर बर्तन छोटा है तो इनको ऐसे कर दो ये
  147. 7:57ऐसे करके अब रख दो तो ये ठीक नहीं लग रहा
  148. 8:01अगर बड़ा बर्तन है इसको हटा करके डायरेक्ट
  149. 8:05ऐसे रख दो तो चपक के बैठ जाता है। तो यह
  150. 8:09बढ़िया लगा और जब हवा आती है हवा नहीं
  151. 8:12बढ़िया आराम से आग जलेगी और कम लकड़ियों
  152. 8:16में दोस्तों इसमें ज्यादा भोजन प्रसाद
  153. 8:19सिद्ध कर सकते हैं। लकड़ियां रहने लगेगी
  154. 8:21क्योंकि जो इसकी आंच रहेगी इधर-उधर नहीं
  155. 8:23भागेंगे। देखिए उसी तरीके से जल रही है
  156. 8:27यार।
  157. 8:53दोस्तों यदि आप इस प्रकार का चूल्हा लेना
  158. 8:55चाहते हैं तो लिंक हम डिस्क्रिप्शन में और
  159. 8:58यह जहां डिस्प्ले में चलता होगा तो आप ले
  160. 9:01सकते हैं। Meesho में और Flipkart में
  161. 9:03दोनों के दोस्तों मिलता है। लेकिन हमने
  162. 9:04इसको Meesho से ऑनलाइन मंगवाया था।
  163. 9:23तो दोस्तों देखिए कितना मस्त आग जल रही है
  164. 9:26एकदम से एक भी थोड़ा बहुत अगर आग टूटती है
  165. 9:29तब हमको फूंकना पड़ता है नहीं तो लगातार
  166. 9:31ऐसे ही जलती है।
  167. 9:39अब शुरू करते हैं टिक्कड़ बनाना।
  168. 10:02तो दोस्तों ऐसे टक्कर बन के तैयार
  169. 10:17तो दोस्तों कुछ इस प्रकार से आज की टिक्कर
  170. 10:19बढ़िया मस्तमस्त बन गई। प्रसाद पूरा बनके
  171. 10:21तैयार हो गया। टिक्कर कुछ और बची हैं। तो
  172. 10:23यहां पे सेक रहे हैं अभी और सबसे पहले हम
  173. 10:26महाराज जी को निकाल के रख देते हैं। भाई
  174. 10:28जब आए तो अपना खा
  175. 10:36भरावा
  176. 10:49ये दोस्तों इतना
  177. 10:52जी के लिए और महाराज जी के लिए दोस्तों
  178. 10:55यहां पे रख दिए हैं पूरा सिस्टम
  179. 10:57ये इसमें सब्जी रखी हुई है
  180. 11:00और टिक्कड़ इसमें रखी
  181. 11:05दोस्तों महाराज जी के लिए हमने कुटिया में
  182. 11:07रख दिया है और यहां पे कुछ और टिक्कड़ पक
  183. 11:09रही हैं। दोस्तों आज बनाने में इसमें ना
  184. 11:12जो आनंद आया ना बढ़िया मजा आ गया। एकदम ना
  185. 11:16कोई ज्यादा तामझाम कुछ नहीं आसानी से पक
  186. 11:19गई टिक्कड़। अब यहां हम पाते हैं और
  187. 11:22महाराज जी का वेट करेंगे। तो दोस्तों भोजन
  188. 11:24प्रसादी बन गई और पा भी लिए और सब फुर्सत
  189. 11:29कर दिए। यह हमारा जो चूहरा था इसको यहीं
  190. 11:31पे साइड पे लगा दिया। महाराज जी डेली इसी
  191. 11:33पे काम करेंगे बनाएंगे लेकिन अभी थोड़ा गम
  192. 11:35है दोस्तों ये
  193. 11:38और तो दोस्तों अभी दोबारा पुनः आ गए हैं
  194. 11:41महाराज जी की कुटिया में
  195. 11:44और
  196. 11:46यहां पे महाराज जी शायद आए कि नहीं
  197. 11:53आ
  198. 11:58देखिए महाराज जी
  199. 12:03यह कोई नहीं थी सुबह महाराज जी
  200. 12:05ये सुबह कोई नहीं थी कहां चली गई थी ये
  201. 12:08हमें नहीं भैया
  202. 12:10अच्छा हां
  203. 12:14बढ़िया सब्जी का
  204. 12:16पा लिए
  205. 12:17एक पाया हमने
  206. 12:19हां
  207. 12:19तीन चार बच्चे आ गए वही पाते समय
  208. 12:22हां हां
  209. 12:22आज टुकड़ा उनको दे दिया
  210. 12:24हम सोचे कि चलो बना ही खा लेते हैं
  211. 12:28मौका लगे सब सामान रखा
  212. 12:30हां हां हां
  213. 12:31ले आओ तो ना ले आओ तो दाल चावल आटा सब रखा
  214. 12:34सब देखे तो रखा था तुमको
  215. 12:36हां जो है गैया का राशन
  216. 12:38अब अब भी दोनों आएंगे मताई बिटिया जा
  217. 12:41आएंगे
  218. 12:42अबे जा भर आई
  219. 12:44अच्छा अब तीन ठा हो गई ना
  220. 12:46हां
  221. 12:47अब जा बड़ी ब
  222. 12:48हां हां
  223. 12:49छोटी बताई
  224. 12:51हम
  225. 12:51अब दो आई नहीं हम
  226. 12:54अब क्या घूम
  227. 12:55अभी गए थे करबी
  228. 12:56अरे वाह
  229. 12:57एक पहले वहां गए एक टाठी घाट में कुटिया
  230. 13:00बह गई थी
  231. 13:01हां कि
  232. 13:02सुखदेव
  233. 13:03हां सुखदेव महाराज
  234. 13:04हां तो उनका सामान पहुंचवा दिए
  235. 13:06हां सही
  236. 13:07तो सामान पहुंच के चला गया फिर घर भी चले
  237. 13:08गए हम 2:00 बजे का आप टाइम दिए थे
  238. 13:10कि 2:00 बजे आएंगे
  239. 13:112 बजे बस 2:00 बजे रोज
  240. 13:13हां
  241. 13:14खाए कहीं चाय ना खाए
  242. 13:16हां हां
  243. 13:17आओ खाए कहीं चाय ना खाए एक घंटा पैकमा
  244. 13:21हां हां
  245. 13:22एक घंटा रामघाट
  246. 13:23एक घंटा हनुमान धारा
  247. 13:25वहां तो चले जाते हैं
  248. 13:26वहां का जब तो हमारा चार घंटा लगेगा 4
  249. 13:30घंटे में हम सब घूम अगर 5 घंटा लग गए तो
  250. 13:33टाटी घाट
  251. 13:35[हंसी]
  252. 13:38घूम
  253. 13:39इतनी लंबी यात्रा महाराज जी करते
  254. 13:41अभी भी हमें कोई दिक्कत नहीं
  255. 13:42हां
  256. 13:43कहां है
  257. 13:47भगवान ने खुद कहा
  258. 13:49तुम्हारी आयु बहुत है सबकी
  259. 13:52बिल्कुल भी नहीं
  260. 13:55जैसे तुम बहुत पढ़ सकते हो और बिल्कुल
  261. 13:58नहीं पढ़ सकते हां दोनों
  262. 14:00बुद्धि खराब हो जाए तो एक अक्षर ना आए हां
  263. 14:04बुद्धि सही है तो तुम चाहे छ 18 पुराण
  264. 14:07पढ़ते रहो और बुद्धि बिगड़ गई तो नहीं वो
  265. 14:10तो बेकल हो गया इसी प्रकार से आयु है
  266. 14:15कि आयु के संयम नियम आचार विचार और
  267. 14:20माता-पिता की सेवा
  268. 14:23और गुरु लायक हो तो गुरु की सेवा और समाज
  269. 14:26लायक हो तो समाज की सेवा तब जो है आयु
  270. 14:29बढ़ती है, धर्म बढ़ता है, कर्म बढ़ता है,
  271. 14:32बुद्धि विवेक बढ़ता है, काम बढ़ता है।
  272. 14:36और ये कछु ना कहे तो काम भी ना मिले। सही
  273. 14:39में देख लो अब कई आदमी
  274. 14:41हां हां
  275. 14:41हर जात में लखपति हैं और गरीब हैं।
  276. 14:46हर जात में मां से लगा के से
  277. 14:52छूटा कोई है नहीं। हम
  278. 14:53तो अब चले जाओ वृंदावन में कोसी में हम
  279. 14:5622 मंजिल को मकान उसका बना है का
  280. 15:00अच्छा
  281. 15:0122 मंजिल का और कम से कम कम से कम उसमें
  282. 15:041000 कोठा है तो 1000 कोठन में एक-एक बाबा
  283. 15:09बैठ दे
  284. 15:11अच्छा
  285. 15:12इतनी सेवा चले ₹100 हर बाबा का रोज मिलेगा
  286. 15:16भोजन मिलेगा आज भी कोसी में
  287. 15:19अच्छा
  288. 15:20अब और नाम का है झाड़ू टंगी का हवेली
  289. 15:26भंगे की हवेली
  290. 15:27भंगे की हम वो खाए आए नहीं
  291. 15:28अच्छा
  292. 15:29हाथ पकड़ के लो आ जाए नौका नौकर ले का कर
  293. 15:33रहे का
  294. 15:34नाम है ना मिलेगा
  295. 15:38जैसे राजा
  296. 15:40राजा की होटल में राजा नहीं किसी को पैसे
  297. 15:43[हंसी]
  298. 15:43हां
  299. 15:44नौकर पैसे देंगे इस
  300. 15:47हम वहां हम वृंदावन से पैर कमाता है भादों
  301. 15:51में आधे भादों
  302. 15:52अच्छा तो वहां कोसी में जहां से पहुंचे तो
  303. 15:55पूरी कोसी में सेवा होगा। लेकिन के
  304. 15:58यहां जो नियम है
  305. 15:59के वो रोड पे है। उसका हबीबी नौकर लगे
  306. 16:02जितने भी बाबा सड़क पे दिखाएंगे। वहीं से
  307. 16:05हां आइए संत भगवान दूध की व्यवस्था कच्चा
  308. 16:10भोजन पक्का भोजन अपने हाथ से पाइए। ₹100
  309. 16:15विदाई लीजिए। हम हम
  310. 16:17तो गए जैसे जिसे अन्न बाहेर के लिए
  311. 16:21वो अन्न नहीं खाएगा
  312. 16:22दूध दूध पी जाएगा
  313. 16:24अच्छा
  314. 16:25क्विंटल दूध नहीं
  315. 16:27हम
  316. 16:28क्विंटलन
  317. 16:29अब अलग-अलग क्वार्टर है जनता अलग खाएगी
  318. 16:33बावन का अलग खवाया जाएगा बावन का अलग
  319. 16:36भंडारा रहेगा जनता का अलग रहेगा और एक-एक
  320. 16:39खाने में 10-10 आदमी का सेवा 10-10 आदमी
  321. 16:42करेंगे सेवा
  322. 16:44बताइए
  323. 16:45रोज
  324. 16:45रोज रोज
  325. 16:46और बाबा चाहे जोन फंस जाए रोड पे हम
  326. 16:50बुलाएंगे महाराज खाना खा लो चले जाओ
  327. 16:54हम
  328. 16:55अब दिल्ली में जाइए दिल्ली
  329. 16:57हम
  330. 16:58एक जमुना बाजार है जमुना बाजार
  331. 17:00अच्छा वहां भी घूमए हैं
  332. 17:02दिल्ली गिया मुंबई कोलकाता हम 1961 से
  333. 17:06घूमत घूमत 2005 तक घूमे
  334. 17:09अच्छा
  335. 17:10बंद कर 2000 से 2005 से चित्रकूट से कहीं
  336. 17:13गए नहीं 20 साल अयोध्या रहे 20 साल
  337. 17:16वृंदावन रहे ये हमारी स्थान है सुदामा
  338. 17:19कुटी वृंदावन
  339. 17:20जी जी
  340. 17:20और अयोध्या में मनीराम छावनी नित गोपाल
  341. 17:23दास जी जो अध्यक्ष हैं पूरे
  342. 17:25111 साल की उम्र हो चुकी है उनकी
  343. 17:28अच्छा वहां
  344. 17:28वहां जिंदा हैं
  345. 17:29वहां रहे
  346. 17:30अब मशीन में रखे
  347. 17:32हां तो वहां आप रहे हैं
  348. 17:33वहां रहे 20 साल है उनके साथ
  349. 17:35बताइए
  350. 17:35बजरंग दास जी का जब गौशाला बनी उस तरफ
  351. 17:38अच्छा
  352. 17:38वो हमारे पुजारी रहे एक बलदेव दास जी
  353. 17:40हमारे कोठारी जी रहे 1961 से
  354. 17:43बताइए
  355. 17:44पूरा देश घूमा है काठमांडू नेपाल पशपतिनाथ
  356. 17:49और का मुख्या आसाम गुवाहाटी गोवा इस
  357. 17:54प्रकार से हमने बद्रीनाथ केदारनाथ अमरनाथ
  358. 17:59हमारे कंट
  359. 18:01सब हम जगन्नाथ पुरी छोटी
  360. 18:04छोटी सुदामापुरी बड़ी सुदामापुरी
  361. 18:07ये सब बचपन से घूमे फ्री
  362. 18:10फ्री
  363. 18:11अच्छा [हंसी]
  364. 18:12अब का बताएं ट्रेन में आ गए टीटीआई आ गया
  365. 18:16तो टिकट नहीं मांग रहा बैठो महाराज
  366. 18:19और तुम्हारे पास टिकट ना हो बैठो
  367. 18:21बैठो
  368. 18:22लेकिन अपना क्या बोल रहे सीताराम
  369. 18:25शब्द तो बोलो
  370. 18:27शब्द की कीमत है दुनिया में शब्द अगर सही
  371. 18:30है तो तुम कहीं जा सका वाणी सुधारने
  372. 18:34निगाह सुधारने हाथ सुधारने सुधरे सब है
  373. 18:38हां सुधारने
  374. 18:39लेकिन उनको जैसे घोड़ा अगर तुम
  375. 18:44घोड़े की सफाई कर रहे हम
  376. 18:47तो घोड़े के दो तीन चीज मजबूत चाहने पड़
  377. 18:50लगाम हां
  378. 18:52लगाम ना निकल जाए ना तो हाथ नहीं रहेगा
  379. 18:54घोड़ा एक और उसका पलेचा
  380. 18:58जिस बैठना है
  381. 18:59वो बिल्कुल का जैसे कस ढीला होगा तो गए
  382. 19:02काम से
  383. 19:03काम से
  384. 19:03इस प्रकार से जो हम सवाई पे चल रहे हैं
  385. 19:06उसको मजबूत रखो यह कर्म क्षेत्र है संसार
  386. 19:11में आए हैं कर्म करने के लिए अगर हम अच्छे
  387. 19:14कर्म करेंगे तो चौपाई में आया है।
  388. 19:18करो कलब भर राज तुम सुमिरो मन माई पुण धम
  389. 19:22पाई हो जहां संत सब जाए जिसके चरित्र
  390. 19:25अच्छे हैं उसके एक कलब तक अब एक कलब कितना
  391. 19:29है है तो बहुत
  392. 19:31अच्छा
  393. 19:32है तो बहुत
  394. 19:33जी
  395. 19:33लेकिन घटाव घटाओ घटाव 100 तक रखा गया
  396. 19:36अच्छा एक कलब 100
  397. 19:38हां एक कलब का हिसाब बहुत लंबा चौड़ा है
  398. 19:42कई युग बीत जाएंगे हम
  399. 19:44लेकिन जब छोटे से छोटे में ले आएंगे तो
  400. 19:46100 साल
  401. 19:47अच्छा
  402. 19:48इसे से कम नहीं होगा।
  403. 19:49क्यों
  404. 19:52के जैसे 100 साल मामूली है
  405. 19:55हां तो एक की उम्र बढ़ा जाती है
  406. 19:57कोई जी नहीं पाता इतनी
  407. 19:59इस कारण से करो कल भर रहा हूं
  408. 20:03और जो जितनी जी रहा है उतनी बहुत है
  409. 20:06लेकिन ये है कि अच्छे कर्म से ही अच्छे फल
  410. 20:08मिलते हैं कुल मिला के
  411. 20:10अच्छा
  412. 20:10अच्छे कर्म से अब देखिए हम 85 84 86 में
  413. 20:14चले
  414. 20:16तो हम जो है 11
  415. 20:19छ साल के थे हमारे पिताजी खत्म हो गए 12
  416. 20:22साल के माताजी खत्म हो गई
  417. 20:25हमें चाचा जी को सब छोड़ के हम अयोध्या आ
  418. 20:28गए 20 साल में पढ़ व
  419. 20:30फिर व
  420. 20:30अनाथशाला में पढ़ाई वही होती थी
  421. 20:33पढ़ाई तो दुनिया में हो रही हम अनाथशाला
  422. 20:36में पहुंच गए थे पहले स्कूल नहीं थे
  423. 20:39अच्छा
  424. 20:40चाहते थे वो प्राइवेट पढ़ाई होती थी
  425. 20:42हमने कहा हमारे पास कोई खर्चा नहीं
  426. 20:45हमें ऐसी जगह रहना है कि मैं खाएं मैं पिए
  427. 20:48मैं सोए नित गोपाल दास जी ना गए
  428. 20:53बोले चले जाओ गौशाला में 100 200 लड़का
  429. 20:57पढ़ रहे उसी में तुम पढ़ना और खाना पीना
  430. 21:01वन्ना कपड़ा जैसे अब बड़ी गुफा में
  431. 21:041050 लड़का पढ़ते हैं पंजाई भगवान के यहां
  432. 21:07पढ़ते हैं जी
  433. 21:08यहां रामायण कुटी में पढ़ते हैं तो ऐसे
  434. 21:11पहले से ही होत रहा गुरुकुल गुरुकुल
  435. 21:14तो हम गुरुकुल में हरिद्वार ऋषि
  436. 21:18और अयोध्या और वृंदावन चार पांच जगह पड़ी।
  437. 21:23अच्छा
  438. 21:23वृंदावन में तो पहुंची और बंगाली पढ़ाता
  439. 21:27था। बोले अब महाराज तुम अब नहीं पढ़ो बेटा
  440. 21:30अब तुम जो तबला सीखो और और जो है नाना
  441. 21:35प्रकार की संगीत में आ जाओ।
  442. 21:39ले रोज एक घंटा सुबह एक घंटा शाम के जाते
  443. 21:42थे। हां हां
  444. 21:43तबला बजाओ बढ़िया बाजा बजाओ और जो जो
  445. 21:46पार्टी में बैठ रहे
  446. 21:48हां
  447. 21:48₹100 तुम्हें मिल रहे भंडार में घंटाघाट
  448. 21:52चलो भाई अब भंडारे में टाइम है अब
  449. 21:55सुंदरकांड का पाठ होगा
  450. 21:57जब तो है मोखा रामायण
  451. 21:59हां पूरा रामायण
  452. 22:00साज बाज हमने सब छोड़ दे लेकिन रामायण में
  453. 22:03मोखा कंठ हो गए
  454. 22:06रामलीला रास लीला में हम प्रमुख रहे
  455. 22:10अच्छा
  456. 22:10अयोध्या पहुंच गए रामलीला हुए तो उसी के
  457. 22:13समाज में बैठ गए तो हमें ₹1000 मिले रात
  458. 22:18भर
  459. 22:18अच्छा तो जी काहे का रोल करते थे हम
  460. 22:23बंदर का रोल कराओ
  461. 22:25अच्छा बंदर का
  462. 22:26हां और जो है रावण को समझाने जाना है अंगद
  463. 22:30जी का पाठ करेंगे
  464. 22:31अच्छा
  465. 22:31इसके बाद आ जाओ नील नल का पाठ करें
  466. 22:35अच्छा
  467. 22:35पहा पहाड़ लेके आ रहे सब बंदर अति उतरंगे
  468. 22:39पादप लील ले उठाए आ गए नल नील नल और नील
  469. 22:43का हमारे जो हाथ चल ज्यादा जो चलता था
  470. 22:49उसने फबारा टाइप का पहाड़ आया वजन है कोई
  471. 22:53वजन नहीं
  472. 22:54फबाराकी आया और उसने वहां से फेंका और
  473. 22:58हमने अपनी कन्नी पे लिया और वहां जमा दिया
  474. 23:02हल फटी गई
  475. 23:05खेल में जो डिपार्टमेंट बड़ा सब में आगे
  476. 23:08रहो
  477. 23:09जो किसी से ना बने रोल वो दिखाओ
  478. 23:12हां अब अयोध्या वृंदावन में रसोई में रहे
  479. 23:1520 साल है
  480. 23:17लड्डू पेरा बर्फी गुलाब जामुन बालूशाही
  481. 23:19बसत पहनी रसगुल्ला पूरी कचौड़ी हम सब बना
  482. 23:22ले
  483. 23:26100 आदमी का खाना हम अकेले देते एक घंटे
  484. 23:29में
  485. 23:30पूरी पूरी में लगने दे
  486. 23:32हां हां हां
  487. 23:33एक क्विंटल की पूरी एक घंटा खा जाएगा
  488. 23:36हां दे
  489. 23:37और आधा घंटा सब्जी
  490. 23:39हम
  491. 23:40सब्जी में टाइम कम लगा
  492. 23:42क्यों कह रहे छक द
  493. 23:45और पानी डाल दिया
  494. 23:46दूसरा
  495. 23:46ढक्कन लगा दिया
  496. 23:47हां दूसरा काम करने लगे
  497. 23:48बस अब चलो मां पूरी कमी हो तो निकालो 10
  498. 23:53चढ़ा दो
  499. 23:55दो घंटे में रसोई बने तुम्हारी हम 6:00
  500. 23:58बजे के रसोई में और 10:00 बजे
  501. 24:01फाइनल क्विंटल 20 क्विंटल हम [हंसी]
  502. 24:07सुदामा कुटी वृंदावन में 20 क्विंटल का
  503. 24:11खाना बनता है 12:00 बजे प्रतिदिन
  504. 24:1420 क्विंटल का
  505. 24:14हां 20 क्विंटल का खाना बनना ही बनना है
  506. 24:18सुदामा कुटी
  507. 24:19अच्छा
  508. 24:19और 10 क्विंटल का खाना
  509. 24:22अटल चुंगी गोरे दाऊद वहां 10 ही क्विंटल
  510. 24:27का बने
  511. 24:27वृंदावन में भी है
  512. 24:28हां वो भी वृंदावन में
  513. 24:30और वृंदावन में कहीं भोजन नहीं मिलेगा सही
  514. 24:34अच्छा
  515. 24:34वो तो पूरी जगह है
  516. 24:35हां
  517. 24:35तुम्हें एक प्लेट कटवा दे क्या हो रहा
  518. 24:38हां पेट भर
  519. 24:39समोसा में क्या हो
  520. 24:41पवा भाई दूध में क्या हो रहा है जब तक वो
  521. 24:43बैठकर खाना नहीं खाएगा जब तक वो शांत नहीं
  522. 24:46मानो सुदामा कुटी
  523. 24:49गोदा
  524. 24:52बस दो जगह होती है सेवा सही
  525. 24:55नहीं होती है 100 जगह
  526. 24:56हां तो वही पेट
  527. 24:57वही है एक दो रोटी दिया गया एक चम्मच
  528. 25:00सब्जी फिर नहीं आया
  529. 25:02ये
  530. 25:03बड़ा मतलब महाराज जी विचित्र जीवन रहा
  531. 25:05पूरा जहां रहे वहां अपना बढ़िया रोल निभाए
  532. 25:08हां महाराज हमने गंजन की सेवा हमें क्या
  533. 25:12किया समय का 1961 में जब महाराज जी बोले
  534. 25:16वृंदावन से आए अयोध्या हम वही मिल गए हम
  535. 25:19नित गोपाल दास जी बोले महाराज जी लड़का लो
  536. 25:22जाना और ये वही पड़ेगा हम
  537. 25:2518 19 साल के हो गए हम
  538. 25:27तो महाराज जी बोले कि चलो तुम गौशाला में
  539. 25:30रहो अब तुमसे कोई सेवा नहीं पढ़ो लिखो और
  540. 25:33दूध पियो जम के हां
  541. 25:35एक बाल की दूध हमारे कमरा में ध
  542. 25:39100 गैया 100 गैया हम चरावे ले जाते जमुना
  543. 25:42उस पार प्ली पाए उल्ली पाली पा वहां की
  544. 25:46भाषा है
  545. 25:46अच्छा
  546. 25:47उल्ली पा अपने तरफ का प्ली पा उस तरफ का
  547. 25:51गोवर्धन नंद गांव बरसाना 84 को उसका
  548. 25:54परिक्रमा हमने 20 साल किया
  549. 25:57अयोध्या का 20 साल किया वही मिला के
  550. 26:01हर साल नीमसारण का परिकम किया 20 साल और
  551. 26:05चितकूट का ये गोविंद दास जी का भी नहीं
  552. 26:08उठता था परिकम ्मा हां हां
  553. 26:10हमारे अयोध्या नित गोपाल दास जी उठाते थे
  554. 26:13अब गोविंदा
  555. 26:15जी हमने 20ों परिक्रमा किया
  556. 26:17यहां की भी परिक्रमा
  557. 26:18हां
  558. 26:18अच्छा
  559. 26:19यहां उठती है ना फागगुन में
  560. 26:20हां जी
  561. 26:20फागगुन में फागगुन में
  562. 26:21यहां के कितनी परिक्रमा
  563. 26:2320 कम से कहां है लड़का उम में अब 20ों
  564. 26:26साल से तो बन रही है ज्यादा ही नहीं है
  565. 26:29गोविंदा दास की एक एक समय गए बाकी हम नहीं
  566. 26:31याद हम कह भैया तुम ही कमाओ
  567. 26:33महाराज जी कोई चूल्हा लाए हैं
  568. 26:35हां देख लिया हमने अंदर रख दिया
  569. 26:36बढ़िया है
  570. 26:37हम
  571. 26:39कुच है
  572. 26:39हां
  573. 26:40तो चपट हो
  574. 26:42अपना वहां अंदा लिया
  575. 26:43अंध बांधना हैो
  576. 26:46हां ये बढ़िया रहेगा
  577. 26:47कोई दो चार कंधा लगा लो धुआ होत रहे
  578. 26:49धुआ होत रहे
  579. 26:50बहुत सही आ गया
  580. 26:51राख ना फैलेगी
  581. 26:52कतई नहीं
  582. 26:53आगे ना फैले
  583. 26:55हां हां
  584. 26:55एक सी आगी चले
  585. 26:57ये यहां से बंद है नहीं
  586. 26:58हम हम वो आप सभी जगह चूल्हा बदलते रहते थे
  587. 27:01इसमें सोचा चलो
  588. 27:02ईंट ईंट के देखते थे
  589. 27:04हां हां
  590. 27:04अब जो सही आ गया
  591. 27:06हां
  592. 27:07अभी अब इसका एक और करना है जब समय मिले।
  593. 27:10जी जी।
  594. 27:10अब इसके पे बनाते हैं। गैस पे बनाते हैं।
  595. 27:14हां।
  596. 27:15अब को माने से गैस को
  597. 27:19वो ले आना है।
  598. 27:20नीचे वाला चूल्हा बोल से।
  599. 27:22अब ऊपर वाला है।
  600. 27:23ऊपर अब ऊपर ही बना है।
  601. 27:25अब नीचे वाला नहीं है।
  602. 27:26हां।
  603. 27:27अच्छा तो ठीक है।
  604. 27:28जब भी इच्छा हो। हां हां हां हां
  605. 27:30एक इतना सा है
  606. 27:34वो सिलेंडर
  607. 27:35नीचे वाला ठीक रहता है
  608. 27:36नीचे वाले में बैठ के बना लो
  609. 27:38लुढ़कता नहीं है
  610. 27:39हां वह ऊपर है तो दिखा ना जो चाहिए [हंसी]
  611. 27:43अगर आदमी के चरित्र सही है
  612. 27:46जी
  613. 27:46तो सात जुग लग बदलेगा महाराज हम
  614. 27:50तुम्हारा धन कोई खा जाए हम
  615. 27:53तो भगवान निर्णय करता है जहां भी जन्म
  616. 27:57होगा तुम्हें वहीं मिलेगा
  617. 27:59अब देखिए हम अपनी जमीन जायदाद दुकान मकान
  618. 28:02अपने चाचा के लड़का ने दिया
  619. 28:04तो हमें घर से ज्यादा सुख है यहां
  620. 28:07सही कह
  621. 28:08घर में तो हमें सभी नती करने पे
  622. 28:10रिश्तेदारी के और गांव के
  623. 28:13यहां तो हमें भगवान के नाम से सब मिल रहा
  624. 28:15है देखो सब खट विकास से दूर
  625. 28:18कोई चिंता नहीं कोई झंझट नहीं
  626. 28:20क्या बताएं
  627. 28:21तो जो भजन करने वाला है तो वो घाय गी सब
  628. 28:25छोड़ देता है तो वो सुखी हो सका भजन कर
  629. 28:29सका और वो फिर ग फिर आओ तो बहुत दिक्कत
  630. 28:33में हमारा देखो
  631. 28:34वो फिर जाल में फस गया
  632. 28:35वो का है कि जैसे दुकान खोली
  633. 28:38हां
  634. 28:38अब महीना भर में दुकान दुकान खोल ले तो
  635. 28:40दुकान मिट गई घाटा आ जाएगा
  636. 28:44कोनो चीज समझो जो सामान प्रतिदिन किया
  637. 28:48जाता है वो अमर है उसमें फायदा है नुकसान
  638. 28:53होगा हमारे से हम
  639. 28:55दुकान की तरफ से नुकसान ही होता है हम
  640. 28:58टाइम से ना खोलें नुकसान होगा।
  641. 29:00टाइम से खोलोगे जैसे भजिया मंगोड़ी बनाना
  642. 29:03है
  643. 29:03तो सुबह शाम बनाओ। 12:00 बजे कोई नहीं
  644. 29:06खाएगा।
  645. 29:07हां हां
  646. 29:08और 12:00 बजे अगर तुम्हें पैसा कमाना है
  647. 29:10तो दाल चावल रोटी बनाओ
  648. 29:12तो वो 12:00 बजे तुम्हारी होटल चल जाएगा।
  649. 29:14शाम के भजिया मंगोड़ी बनाओ खाना बनाओ।
  650. 29:17जितना हम कर लेंगे उतना हमें पा जाएंगे।
  651. 29:21टाइम टाइम का खेल है। 10:00 बजे उठोगे तो
  652. 29:25चाय नहीं किसी को पिया पाओगे। 10:00 बजे
  653. 29:27तो 10,000 कमा ली।
  654. 29:29बताइए।
  655. 29:303:00 बजे से।
  656. 29:31हां। हां।
  657. 29:331961 में हमने आगरा में दुकान खोली।
  658. 29:36अच्छा।
  659. 29:37एक बानिया मिल गया।
  660. 29:39हां।
  661. 29:39बोले महाराज अब ऐसा है कि हमारी दुकान पे
  662. 29:42दो चार दिन ना बने रहो।
  663. 29:44हां। हम
  664. 29:46खाओ पियो। आगरा।
  665. 29:48मैंने कहा उस समय में हमारे पास में 10
  666. 29:502000 थे। हम
  667. 29:5215 16 साल की उम्र
  668. 29:54सब घूमघम के ले की दुकान पे रूम गए तो वो
  669. 29:59छोड़ के पता नहीं कहां चला गया हम
  670. 30:01अब लाखों म लाखों सामान पड़ा है टपरा में
  671. 30:06हमने किया जो तो अकेली चाय बनाता था वो
  672. 30:09कुछ नहीं
  673. 30:10हम
  674. 30:11अब हमने की जब तक आएगा जब दे हमने सब
  675. 30:14बर्तन खरीदा
  676. 30:15हम
  677. 30:16दो करैया छोटी एक करैया भजिया के लिए एक
  678. 30:19सिरा के लिए जलेबी बना ले।
  679. 30:22अच्छा
  680. 30:23खोल दे ना चाय दुकान है।
  681. 30:25हां
  682. 30:26बच गया मंगवाड़ी। हां
  683. 30:27चाय की
  684. 30:28जलेबी
  685. 30:29जलेबी की चाय से सामान खोल दे कचौड़ी
  686. 30:34महाराज एक नौकर रखने पड़ा उस समय में
  687. 30:36चुन्नी में
  688. 30:39[हंसी] 10 पैसा की चाय बिकती जब
  689. 30:41हां
  690. 30:42चुन्नी में दिन भर कपड़े धोए लड़का
  691. 30:46अब तो पांच छ धो [हंसी]
  692. 30:49ऐसा खेले [नाक से की जाने वाली आवाज़]
  693. 30:50महाराज जी सब लोग भक्ति के लिए परेशान
  694. 30:52होते हैं। भक्ति वास्तव में है क्या
  695. 30:54महाराज जी आपकी दृष्टि से
  696. 30:55देखो भक्ति है भाव की
  697. 30:57जी
  698. 30:58जैसे विचार मान लो के बदमाश और सच्चा
  699. 31:04एक बदमाश आदमी है नंबर वन का और एक सच्चा
  700. 31:08आदमी है तो सच्चा आदमी और बदमाश में क्या
  701. 31:12अंतर है?
  702. 31:14बोले ये है कि सच्चा आदमी का मन स्थता
  703. 31:19भी नहीं डरता भी नहीं उसका कलेजा कपता ही
  704. 31:23नहीं
  705. 31:24और बदमाश का कलेजा कपेगा क्योंकि उसने
  706. 31:26ऊटपटांग काम करे
  707. 31:28डर रहेगा
  708. 31:29डर बढ़ जाएगा
  709. 31:30इसी प्रकार से भक्ति ही भाव है भक्ति अगर
  710. 31:35चाहना है तो विद्या विनय निपुण गुण शीला
  711. 31:39विद्या का लक्षण क्या है कि विद्या विनय
  712. 31:44अगर नम्रता आ गई तो विद्या सिद्ध हो गई।
  713. 31:48अच्छा विद्या चढ़ गई। और नम्रता नहीं है तो
  714. 31:52अहंकार आ गया। विद्या विनय निपुण गुण
  715. 31:55शीला। निपुण है वो विद्या में शील भी है।
  716. 31:58और अगर उसको नम्रता नहीं आई तो कुछ भी
  717. 32:02नहीं होगा। नम्रता ही भाव भक्ति है।
  718. 32:05माता-पिता को नमस्कार करना। साधु
  719. 32:08ब्राह्मणों को नमस्कार करना और बड़े देवता
  720. 32:11को नमस्कार करना। इसको भक्ति भाव कहते
  721. 32:14हैं। अच्छा
  722. 32:15जे नाना भाई सुर गुरु जी देखी आपसे इसका
  723. 32:19विनय विषयी कहते हैं देव तनखा देख के बड़े
  724. 32:23पंडितन का देख के साधु महात्म देख के
  725. 32:26बड़े-बड़े साहब लोग हैं देवी हमारे भगवान
  726. 32:30के भक्त हैं जब उन्हें इतनी नौकरी मिली है
  727. 32:32लंबी चौड़ी
  728. 32:33जी
  729. 32:33जैसे मोदी से धर लो योगी से धर लो
  730. 32:36तो कुछ तो ऐसा तपस्या होगा वो जमाने की
  731. 32:40जैसे हम तुम कर रहे
  732. 32:41जी जी
  733. 32:42अब हमारी तुम्हारी जितनी हती वो मिले ले
  734. 32:45अब के अगर मालिक की इच्छा है एक गुना 100
  735. 32:48गुना बढ़ा दे तो आगे चलके फिर मिलेगा
  736. 32:52एक सही तो एक ही समय का है
  737. 32:55जी जी जी
  738. 32:56सही शरीर नाशमान है
  739. 32:58सही ज्यादा से ज्यादा 100 साल की डिग्री
  740. 33:00है इसकी बस
  741. 33:01हां हां हैं
  742. 33:02अब 100 साल में जितने हमारे पूरब के पुण्य
  743. 33:07होंगे वे मिल जाएंगे
  744. 33:09अच्छा
  745. 33:09और जो बीते में चला गया
  746. 33:12तो जमा
  747. 33:14जहां भी अवतार होगा उसका जन्म होगा वहीं
  748. 33:17सब मिलेगा जन्मजनम रति राम पद वरदान न तो
  749. 33:22यह बताया है कि जन्मजनम मुनि जतन कराएं
  750. 33:25अंत राम कहीं आवत नहीं जैसे गैस की मार्ग
  751. 33:28में देख लो दिल्ली ग्वालियर बॉम्ब कोलकाता
  752. 33:30बड़ी-बड़ी दुकानें खुली हैं
  753. 33:34जिनकी दुकान का सामान नहीं कोई गिन सकता
  754. 33:36है
  755. 33:37ऐसीसी दुकानें हैं
  756. 33:38जी
  757. 33:39तो वे रह चाहे ना रह उनको भगवान एक ना एक
  758. 33:43संतान देता रहेगा
  759. 33:46तो जुगों तक चल रही इसी प्रकार से भगवान
  760. 33:50की भक्ति है कि अगर जो सही है
  761. 33:54जी
  762. 33:55अपने आचरण में सही चल रहा है धर्म कर्म
  763. 33:59में चल रहा है उसे भगवान हर जन्म में देगा
  764. 34:03अब जैसे हम अब
  765. 34:06हमने ना शादी कराई ना किसी से मतलब रखा ना
  766. 34:11जमीन जायदाद का ना जन्म जन्मभूमि का हमने
  767. 34:13कोई सुख नहीं लिया। हम
  768. 34:16हमें भक्ति भाव में मगन हो गए। तो अब समझ
  769. 34:19लीजिए के जन्म जहां जन्म तो होगा।
  770. 34:22हां जी।
  771. 34:23ये तो बहुत दिक्कत है कि जन्म नहीं होगा।
  772. 34:27भक्ति करो तो मरना है ना भक्ति करो तो
  773. 34:30मरना है।
  774. 34:31और भक्ति करो तो अवतार होना है।
  775. 34:35जहां लिखा होगा वहां अवतार होगा।
  776. 34:38तो वहां मिलेगा। ये सब लिखा है शास्त्रों
  777. 34:42में कि जन्मजनम तक
  778. 34:45हमें तुम्हें जन्मजनम तक आना है और कहते
  779. 34:48भैया मुक्त हो गए जब हम जिंदा में मुक्त
  780. 34:52नहीं हो पाए तो मरे में का मुक्त होंगे
  781. 34:56समझ की बात है जिंदा उसको कहते हैं जिंदा
  782. 35:00है भजन कर रहे भाव कर नाम रूप लीला धाम और
  783. 35:05भगवान किसी को मिलते हैं ना मिले हैं किसी
  784. 35:08को देखो भगवान का नाम, भगवान का रूप,
  785. 35:13भगवान का चरित्र, भगवान का धाम, नाम जाप
  786. 35:17करते रहो, कर्म करते रहो तो सब मिलेगा।
  787. 35:21लेकिन भगवान नहीं मिलेंगे। भाई देखो मिलने
  788. 35:24होते तो सबको मिलती
  789. 35:26और ना मिलने एक आदमी का है भगवान मिल गए।
  790. 35:29हम कैसे मान जाए
  791. 35:32भगवान के हाथ गो है ही नहीं। हम मिल कहां
  792. 35:34से गए? बिन पद चले सुने बिन काना कर बिन
  793. 35:37कर्म करे विधि नाना आन रहे सकल रस भोगी
  794. 35:40बिन वाणी भक्तावर जोगी
  795. 35:43भगवान की शब्द नहीं मिल रहा सुन भगवान का
  796. 35:47ठोर नहीं मिल रहा है कि कौन जगह है
  797. 35:50भगवान के हाथ गोले नहीं है भगवान का रूप
  798. 35:54रंग नहीं है तो तुम्हें मिल का
  799. 35:56तो कैसे मिल गया [हंसी]
  800. 35:57हैं
  801. 35:58तुम कहो कि हमें आगे आगे मिल गई बात कहत
  802. 36:01रही
  803. 36:02तो झूठी बात है क्या
  804. 36:03परप आगे मिले सब लेकिन बात नहीं करेगा
  805. 36:07चूक जाओगी तो जलाओ ऐसे
  806. 36:10कपड़े ही जला देगा और प्रतिप हो रहा खान
  807. 36:14से पीन से आगी से हमारा सब काम चल रहा
  808. 36:18लेकिन वो तुमसे हमसे जवाब नहीं देगा जल
  809. 36:22पाव गगन समीरा पंचर धम शरीरा छ पावक ये
  810. 36:27पांच तत्व है सबको मिल रहे लेकिन जवाब
  811. 36:31नहीं मिलेगा
  812. 36:32ना धरती बोलेगी
  813. 36:35ना आकाश बोलेगा
  814. 36:37ना हवा बोलेगी बोल सब हम
  815. 36:40पानी बरसेगा तो दूर से समझ में आ जाएगा
  816. 36:44बिजली तड़केगा तो आवाज सुनाई देगा आकाश से
  817. 36:48बोले सब लेकिन तुमसे हमसे नहीं बोलेगा
  818. 36:51अपने में बोलेगा इसी प्रकार से भगवान है
  819. 36:55के पहले और महाप्रलय
  820. 36:58और ज्ञान और बुद्धि विवेक सब है लेकिन
  821. 37:01समझना मुश्किल है
  822. 37:03और समझना है तो बस अपने भगवान का भजन करते
  823. 37:07रहो। वही भक्ति भाव है। सब जीव से प्रेम,
  824. 37:10चराचर से प्रेम, पशु पक्षियों से प्रेम,
  825. 37:13मानवता से प्रेम, जो गलत चले वो भोगे हम
  826. 37:16क्यों प्रपंच में फसे?
  827. 37:18फसे भैया भी ऐसा कहते जैसो कहते सो कहते
  828. 37:21हमें कोई मतलब नहीं भैया।
  829. 37:23हम अपना कर्म कर रहे हैं।
  830. 37:24हमें अपना करना है। खुद बचो और दूसरे का
  831. 37:27बचाओ।
  832. 37:29वही भजन है। खुद बचो। और दूसरे का बचाओ और
  833. 37:34दुर्घटनाओं से दूर रहना ही भजन है।
  834. 37:36भजन है बस
  835. 37:37और दुर्घटना अब जैसे बाबा है
  836. 37:40भजन तो खूब करता है। संयम नियम करता है।
  837. 37:43वो को इसमें फंस गया हम तो गई जिंदगी भजन
  838. 37:49करो ना करो चरित्र खराब नहीं करो। हम जैसे
  839. 37:53हम किसी की मदद करें चाहे ना करें कि किसी
  840. 37:56को दिक्कत ही ना दें। हम
  841. 37:59इस कारण से बताया है कि खुद बचाओ और दूसरे
  842. 38:03का बचाओ।
  843. 38:04अच्छा
  844. 38:04और चरित्र वे करो के माता-पिता खुशी
  845. 38:07परिवार सुखी गांव के भी माने कि हां इंसान
  846. 38:10है।
  847. 38:11ऐसे काम ना करो के माता-पिता लज्जित हो
  848. 38:15जाए। हमारा परिवार लज्जित हो जाए। हमारा
  849. 38:17गुरु लज्जित हो जाए। हुआ है तो कर्म
  850. 38:21चूकोगे तो दिक्कत है
  851. 38:24कर्म की यहां ये मृतलोक में कर्म की गिनती
  852. 38:28है
  853. 38:30हमें तुम्हें भी कहना पड़ेगा कि हां इंसान
  854. 38:32सही है और गलत होगा तो वो भी कहना पड़ेगा
  855. 38:36कि भैया हम नहीं जाना ऐसे पूछ ले
  856. 38:39इसे कर्म प्रधान विश्व का राखा जो जस का
  857. 38:42सो तस पर चाका
  858. 38:43चल
  859. 38:44हमारा हम भी बच के आ गए
  860. 38:46अच्छा हां
  861. 38:47उसको थोड़ा राशन पानी दे दे
  862. 38:49हां हां महाराज जी
  863. 38:50कभी भी आया तो
  864. 38:51जी जी महाराज जी
  865. 38:52अरे हम दम देखते
  866. 38:54हां जी
  867. 38:54हम जो है हम
  868. 38:56देखो अब तुम्हारी कैसी तपस्या किसी की
  869. 39:00नहीं
  870. 39:01जहां भी जाओगे
  871. 39:03हां
  872. 39:03व दुनिया हित मानता है
  873. 39:05जो शुरुआत आप से हुई थी
  874. 39:08आओ आओ भैया
  875. 39:09आओ आओ
  876. 39:11आओ
  877. 39:13हां बिलकुल सुदामा
  878. 39:16वृंदावन में किसी से पूछो
  879. 39:19तो दोस्तों यह रही महाराज जी की कुटिया
  880. 39:21कुछ इस प्रकार से है और गौ माता आ गई चार
  881. 39:24ठ गई महाराज जी की नहीं है
  882. 39:27अच्छा वो दूसरे की है
  883. 39:28होगा
  884. 39:29अच्छा ये इधर एक है
  885. 39:31दूसरे की है
  886. 39:32अच्छा
  887. 39:32अपनी दो खाई
  888. 39:34हम हम है अब उनको देना है राशन पानी
  889. 39:39अब ये ये टुकड़िया तो यही खा गई देख लो
  890. 39:42हां
  891. 39:43जब दो दफा खा गई और दो दफा भाग गई
  892. 39:46अच्छा
  893. 39:47फिर आ जाती है
  894. 39:48हां हां इसकी खुराक दोनों से ज्यादा है।
  895. 39:51अब डेढ़ साल की बचिया है। हां
  896. 39:54डेढ़ साल की बचिया है और दो साल की हो जाए
  897. 39:56ना
  898. 39:57तो ऐसे ज्यादा हो
  899. 39:59ज्यादा हो जी हां हां पक्का है
  900. 40:01जो है
  901. 40:02ये महाराज जी अब दूसा लगाएंगे
  902. 40:04अब उनका लगाओ ना इन्हें खा लिया
  903. 40:07अच्छा
  904. 40:08एक दो किलो उनको डाल दे
  905. 40:11अपना 5:00 बजे तक चले जाएंगे गंगा जी
  906. 40:15नहाएंगे वहीं अगरबत्ती ले जाए दीपक जलाएं
  907. 40:19अच्छा
  908. 40:20सुबहेरे कामताना जी परिक्मा
  909. 40:22शाम को गंगा
  910. 40:24और ये गौ की सेवा हम कोई काम नहीं हम
  911. 40:29जो भजन है
  912. 40:30अब फिर रात में जी कब लौटते हैं
  913. 40:328:00 बजे
  914. 40:338:00 बजे
  915. 40:348:00 बजे आए तो हम शाम के खाना खाते नहीं
  916. 40:36हां
  917. 40:37अभी दही थी वही खा लिया एक रोटी हो गया
  918. 40:39अच्छा
  919. 40:40और ना हो आधा किलो दूध ले शाम के खाना
  920. 40:43नहीं खा
  921. 40:43नहीं तो हमारा पेट जाम हो
  922. 40:45हां सही कह रहे हैं
  923. 40:46हां
  924. 40:47अब बुढ़ापे में कितना चलेगा
  925. 40:49ये बुढ़ापे का दाना कम खाओ
  926. 40:52एक टाइम भाई पेट खा लो
  927. 40:54और दूसरे टाइम ना खाओ दूजी ले लो
  928. 40:59हमें ठीक रख लिया
  929. 41:03रात में रहेंग कि चली जाती है
  930. 41:05अरे रात में कोई नहीं रहेगा
  931. 41:07अच्छा
  932. 41:07रहेगा हल्की
  933. 41:09हां
  934. 41:09हम
  935. 41:25लो जल्दी
  936. 41:30अब अब ना खा पाए
  937. 41:31अब ना खाए
  938. 41:32अब ना खा पाए
  939. 41:33अच्छा वो मारेगी क्या अब इसको
  940. 41:35खाने ही ना दे
  941. 41:38और ये है दोस्तों महाराज जी की
  942. 41:41बढ़िया मस्त दोस्तों अब लग रहा है पूरा
  943. 41:44स्थान बढ़िया बन सज गया है ये पेड़ भी
  944. 41:47बढ़िया सज गए हैं और यह शीशम का पेड़ है।
  945. 41:51जब दोस्तों कुठिया बनाए थे ना तो एकदम से
  946. 41:53छोटी सी यह पेड़ था। अब तो बढ़िया छाया भी
  947. 41:57हो गई है।
  948. 42:11ठीक है मां जी चलते हैं फिर आशीर्वाद है
  949. 42:13सबको
  950. 42:14लाखों प्रकार की दुआएं मिलेंगे
  951. 42:16और आपका भविष्य बनता ही रहेगा ये संतों का
  952. 42:19भजन है
  953. 42:20हर हर महादेव

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