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100 साल पहले भारत में कैसे होती थी शादी? जब 7 दिन तक रुकती थी बारात! | Full Documentary — Transcript

by 𝗨𝗻𝗸𝗻𝗼𝘄𝗻 𝗜𝘁𝗶𝗵𝗮𝗮𝘀 · 3,331 words · 401 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00साल 1925 आज एक बारात निकलने वाली है।
  2. 0:05सुबह के करीब 5:00 बजे हैं। एक आदमी अपने
  3. 0:07घर से बाहर निकलता है और सीधा अपनी
  4. 0:10बैलगाड़ी के पास जाता है। सबसे पहले वह
  5. 0:13बैलगाड़ी के लकड़ी वाले तख्ते साफ करता
  6. 0:15है। फिर पहियों को हाथ से घुमा कर देखता
  7. 0:18है। इसके बाद घर से सूखी घास की एक बड़ी
  8. 0:21गठरी लेकर आता है। उसे खोलता है और पूरी
  9. 0:24बैलगाड़ी में घास की मोटी परत बिछाने लगता
  10. 0:27है। घास बिछाने के बाद उसके ऊपर दो
  11. 0:30रजाइयां फैलाता है। फिर एक तरफ बिस्तर
  12. 0:33रखता है और दूसरी तरफ कपड़ों की गठरियां
  13. 0:36बांध देता है। अब वो बैलों के पास जाता
  14. 0:39है। उनकी पीठ साफ करता है। सींगों पर तेल
  15. 0:42लगाता है और गले में छोटी-छोटी घंटियां
  16. 0:45बांध देता है। फिर बैलों को गाड़ी में
  17. 0:48जोतता है और रस्सियां कसने लगता है। सब
  18. 0:50कुछ तैयार करने के बाद वो अगली बैलगाड़ी
  19. 0:53की तरफ बढ़ जाता है। क्योंकि आज एक नहीं
  20. 0:56कई बैलगाड़ियां बारात में जाने वाली हैं।
  21. 0:59उधर घर के अंदर औरतें रात भर से काम में
  22. 1:02लगी हुई हैं। चूल्हों पर पूरियां तली जा
  23. 1:04रही हैं। एक तरफ गुड़ और सत्तू रखा है।
  24. 1:07बड़े-बड़े बर्तनों में खाना भरा जा रहा
  25. 1:09है। फिर खाने की गठरियां बांधी जाती हैं
  26. 1:12और एक-एक करके बैलगाड़ियों पर रख दी जाती
  27. 1:15हैं। पानी के मटके भी गाड़ियों में चढ़ाए
  28. 1:18जा रहे हैं। दूसरी तरफ दूल्हा तैयार हो
  29. 1:20रहा है। उसके सिर पर पगड़ी बांधी जाती है।
  30. 1:24गले में फूलों की माला डाली जाती है और
  31. 1:26चेहरे के आगे फूलों की लड़ियां लटका दी
  32. 1:29जाती हैं। घर के बाहर घोड़ा भी तैयार खड़ा
  33. 1:32है। आंगन में बैठा एक बुजुर्ग आदमी बारात
  34. 1:35में जाने वालों के नाम गिन रहा है। कोई
  35. 1:37अपनी पगड़ी ठीक कर रहा है तो कोई बैलगाड़ी
  36. 1:40में बैठने की जगह बना रहा है। अब सूरज
  37. 1:42निकल चुका है। सबसे आगे बाजे बजाने वाले
  38. 1:46चल रहे हैं। उनके पीछे घोड़े पर दूल्हा और
  39. 1:49फिर एक-एक करके बैलगाड़ियां चलने लगती
  40. 1:51हैं। कुछ बाराती गाड़ियों में बैठे हैं तो
  41. 1:54कुछ पैदल चल रहे हैं। बैलों के गले की
  42. 1:57घंटियां बज रही हैं और लकड़ी के पहहिए
  43. 1:59कच्चे रास्ते पर धीरे-धीरे घूम रहे हैं।
  44. 2:02दोपहर होते-होते बारात एक पेड़ के नीचे
  45. 2:05रुकती है। बैलों को गाड़ियों से खोला जाता
  46. 2:08है। उन्हें पानी पिलाया जाता है। बाराती
  47. 2:10अपनी गठरियां खोलते हैं। पूरियां और गुड़
  48. 2:13निकालते हैं और वहीं बैठकर खाना खाने लगते
  49. 2:16हैं। थोड़ी देर बाद सामान वापस बांधा जाता
  50. 2:19है और बारात फिर चल पड़ती है। धीरे-धीरे
  51. 2:22शाम हो जाती है। अब बैलगाड़ियां रास्ते के
  52. 2:25पास एक खाली जगह पर रोक दी जाती हैं। कुछ
  53. 2:28लोग नीचे बैठ जाते हैं। कुछ बैलगाड़ियों
  54. 2:30पर बिछी रजाइयों को ठीक करते हैं और वहीं
  55. 2:33लेट जाते हैं। बैलों को पास में बांध दिया
  56. 2:35जाता है। थोड़ी देर बाद चारों तरफ सन्नाटा
  57. 2:38छा जाता है। अगली सुबह फिर वही
  58. 2:41बैलगाड़ियां तैयार होती हैं। बैलों को
  59. 2:43जोता जाता है, बिस्तर समेटे जाते हैं और
  60. 2:46बारात दोबारा अपने रास्ते पर निकल पड़ती
  61. 2:48है। लेकिन उधर दुल्हन के गांव में अभी
  62. 2:51बारात का इंतजार हो रहा है। गांव के बाहर
  63. 2:54कुछ लोग बार-बार दूर वाले रास्ते की तरफ
  64. 2:56देख रहे हैं। घर में मेहमानों के बैठने और
  65. 2:59सोने की जगह तैयार की जा रही है। आखिर कई
  66. 3:02दिनों का सफर तय करके जब बारात लड़की के
  67. 3:05गांव पहुंचती थी तो उसका स्वागत कैसे होता
  68. 3:08था? इतने सारे बाराती कहां रुकते थे? उनके
  69. 3:11खाने का इंतजाम कौन करता था? और कुछ जगहों
  70. 3:14पर बाराती सात-सात दिन तक क्यों ठहरते थे?
  71. 3:17आज हम करीब 100 साल पीछे चलकर उस जमाने की
  72. 3:21एक बारात का पूरा सफर देखेंगे।
  73. 3:42साल 1925 उत्तर भारत का एक छोटा सा गांव
  74. 3:46लड़की की शादी की तारीख तय हो चुकी है।
  75. 3:48पंडित ने दिन बता दिया है और लड़की के घर
  76. 3:51के बड़े ने आंगन में बैठकर वह दिन गिन
  77. 3:54लिया है। अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। उसी
  78. 3:56शाम लड़की का पिता गांव के नाई को बुलवाता
  79. 3:59है। नाई आंगन में आकर बैठ जाता है। दोनों
  80. 4:02के बीच थोड़ी देर बात होती है। फिर लड़की
  81. 4:04का पिता उसे एक मुड़ी हुई चिट्ठी पकड़ा
  82. 4:07देता है। उस चिट्ठी में शादी की तारीख
  83. 4:09लिखी है। लेकिन सिर्फ तारीख नहीं उसी
  84. 4:12चिट्ठी में एक और बात लिखी है कि लड़की
  85. 4:14वाले अपनी हैसियत के हिसाब से ज्यादा से
  86. 4:17ज्यादा कितने मेहमानों को खाना खिला सकते
  87. 4:19हैं। फिर वो पिता नाई को लड़कों वालों के
  88. 4:22गांव और बाकी रिश्तेदारों के नाम गिनाता
  89. 4:24है। कहां-कहां जाना है? किस घर में कहना
  90. 4:27है और किससे क्या कहना है। नाई सब सुनता
  91. 4:30है, सिर हिलाता है और चिट्ठी अपने गमछे
  92. 4:33में बांध लेता है। अगली सुबह वो लड़की के
  93. 4:35गांव से निकल जाता है। पैदल कंधे पर गमछा
  94. 4:38है और उसी में वह चिट्ठी बंधी हुई है। वह
  95. 4:41खेतों के बीच वाले कच्चे रास्ते पर चल
  96. 4:44पड़ता है। बस आगे बढ़ता जाता है। पीछे एक
  97. 4:47गांव छूट जाता है। फिर खाली खेत आते हैं।
  98. 4:49कुछ पेड़ आते हैं और दूर कहीं से धुआं
  99. 4:52उठता दिखाई देता है। मतलब अगला गांव आ
  100. 4:55गया। वह गांव में पहुंच जाता है। अंदर
  101. 4:57जाते ही वह सबसे पहले किसी से पूछता है कि
  102. 5:00भाई उनका घर कहां है? कोई हाथ के इशारे से
  103. 5:03गली बता देता है और वह उसी गली में मुड़
  104. 5:06जाता है। दरवाजे पर पहुंचकर वह आवाज लगाता
  105. 5:09है। लड़के वाले उसे पहचानते हैं और फिर
  106. 5:11उसे आंगन में ले जाकर खाट पर बिठा देते
  107. 5:14हैं। कोई लोटे में पानी लाकर रख देता है।
  108. 5:16अब वह चिट्ठी खोलता है और शादी की तारीख
  109. 5:19बताता है। आंगन में बैठे लड़के वालों और
  110. 5:22रिश्तेदारों के चेहरे खिल जाते हैं। कोई
  111. 5:24बच्चा दौड़कर पड़ोस में खबर देने चला जाता
  112. 5:27है। फिर उससे सवाल शुरू होते हैं। लड़की
  113. 5:29के गांव की तैयारियां कैसी हैं? लड़का
  114. 5:31कैसा है? गांव कितना दूर है? वो उनके हर
  115. 5:34सवाल का तसल्ली से जवाब देता है क्योंकि
  116. 5:37लड़के और लड़की दोनों के घर उसी ने देखे
  117. 5:40हैं। थोड़ा गुड़ पानी पीकर वो अगले
  118. 5:42रिश्तेदारों के घर के लिए निकल पड़ता है।
  119. 5:44दिनभर यही सिलसिला चलता है। हर दरवाजे पर
  120. 5:48वही खुशी, ढेरों सवाल और शादी की वही
  121. 5:51तारीख। सूरज ढलने तक एक गांव का काम पूरा
  122. 5:54हो जाता है। यह कोई एक दिन का काम नहीं
  123. 5:57था। कई दिनों तक पैदल गांव दर गांव घूमकर
  124. 6:00वह चिट्ठी वाली बात लड़के वालों और हर
  125. 6:03रिश्तेदार तक पहुंचा देता था कि लड़की
  126. 6:05वाले ज्यादा से ज्यादा कितने लोगों को
  127. 6:07खाना खिला सकते हैं। चिट्ठी पहुंचने के
  128. 6:10बाद नाई का काम खत्म हो जाता था। लेकिन
  129. 6:13उधर लड़की के गांव में उसके पिता की रातों
  130. 6:16की नींद यहीं से उड़ जाती थी। लड़की के घर
  131. 6:19के आंगन में बड़ी-बड़ी पत्थर की चक्कियां
  132. 6:21बिछा दी जाती थी। गांव की औरतें और
  133. 6:24रिश्तेदार मिलकर दिन रात गेहूं, चावल और
  134. 6:27दाल पीसने में जुट जाते थे। काम की थकान
  135. 6:30ना लगे इसलिए साथ-साथ शादी के गीत गाए
  136. 6:33जाते थे। आप सोचिए 100 200 लोगों के लिए
  137. 6:36अगर तीन-चार दिन का खाना बनना है तो कितने
  138. 6:39क्विंटल अनाज हाथों से पीसना पड़ता होगा।
  139. 6:42लड़की के पूरे कच्चे घर को मिट्टी और गोबर
  140. 6:45से दोबारा लीपा जाता था। इतनी बड़ी तैयारी
  141. 6:48कोई एक परिवार अकेले नहीं कर सकता था।
  142. 6:51यहीं से शुरू होता था 1920 के दशक का वो
  143. 6:54सिस्टम जहां लड़की की शादी के लिए उसका
  144. 6:57पूरा गांव काम पर लग जाता था। गांव का
  145. 7:00कुम्हार दिन रात चाक चलाकर मिट्टी के
  146. 7:03सैकड़ों कुल्हड़ और प्लेट बनाता था
  147. 7:05क्योंकि तब झूठे बर्तनों में दोबारा खाना
  148. 7:08नहीं खाया जाता था। बढ़ई लड़की के आंगन
  149. 7:10में लकड़ी का मंडप और पीढ़ी तैयार करता और
  150. 7:13धोबी बारातियों के लिए बिस्तर धोकर लाता।
  151. 7:16लेकिन सबसे हैरानी की बात यह थी कि इस
  152. 7:19पूरी मेहनत के बदले इनमें से किसी को एक
  153. 7:22भी रुपया नगद नहीं मिलता था। पैसे की जगह
  154. 7:25इन्हें अपनी मेहनत के बदले लड़की वालों से
  155. 7:27कच्चा अनाज, कोई कपड़ा और शादी का बचा हुआ
  156. 7:31खाना दिया जाता था। उस दौर में गरीब
  157. 7:33कारीगरों के लिए शादी का यह बचा हुआ खाना
  158. 7:36ही कई दिनों के राशन का काम करता था। अब
  159. 7:39सब कुछ तैयार था। दिए जल चुके थे।
  160. 7:41बारातियों को खिलाने के लिए क्विंटलों
  161. 7:44गेहूं, घी और गुड़ का इंतजाम हो चुका था।
  162. 7:46जिसके लिए लड़की के उस गरीब पिता ने
  163. 7:49साहूकार के पास अपनी जमीन तक गिरवी रख दी
  164. 7:52थी। उधर मीलों दूर लड़के के गांव में एक
  165. 7:55अलग ही हलचल थी। बारात के निकलने का वक्त
  166. 7:58हो गया था। दूल्हे को भारी कपड़ों में
  167. 8:00सजाया गया। सिर पर पगड़ी और चेहरे पर
  168. 8:03फूलों का सेहरा बांधा गया। चाहे कितनी भी
  169. 8:06भयंकर गर्मी क्यों ना हो, उसे घंटों तक
  170. 8:08यही पहनना था। दूल्हा घोड़े पर बैठता है
  171. 8:11और उसके पीछे तैयार खड़ी हैं बैलगाड़ियों
  172. 8:14की लंबी कतारें। हर बैलगाड़ी में सूखी घास
  173. 8:17और रजाइयां बिछी हैं। जिनमें लड़के वाले
  174. 8:19और उनके रिश्तेदार बैठे हैं। आगे-आगे बाजे
  175. 8:22वाले चल रहे हैं। बैलों के गले की घंटियों
  176. 8:25की छमम छमम और लकड़ी के पहियों की आवाज के
  177. 8:28साथ बारात लड़की के गांव की तरफ निकल
  178. 8:31पड़ती है। यह सफर आज की तरह 2-4 घंटे का
  179. 8:34नहीं था। पक्के रास्ते नहीं थे। बस खेतों
  180. 8:37के बीच से गुजरने वाले कच्चे, धूल भरे और
  181. 8:40उबड़ खाबड़ रास्ते थे। बैलगाड़ियां
  182. 8:42धीरे-धीरे चलती रहती। जब दोपहर की तेज धूप
  183. 8:46सिर पर चुभने लगती, कच्चा रास्ता तपने
  184. 8:48लगता और बैलों के मुंह से झाग निकलने
  185. 8:51लगता, तो रास्ते में किसी गांव की सरहद पर
  186. 8:53दिखने वाले बड़े बरगद के पेड़, किसी
  187. 8:56पुराने कुएं या तालाब के पास बारात रोक दी
  188. 8:59जाती। सबसे पहले बैलों को गाड़ियों से
  189. 9:02खोला जाता। उन्हें पास के तालाब में ले
  190. 9:04जाया जाता या कुएं से पानी खींचकर उन्हें
  191. 9:07पिलाया जाता ताकि उनकी थकान मिटे। इधर
  192. 9:09बाराती कुएं में बाल्टी डालकर ठंडा पानी
  193. 9:12खींचते। उसी ठंडे पानी से धूल से सने हाथ
  194. 9:16मुंह धोए जाते। अब सफर के बीच में खाने का
  195. 9:18इंतजाम कैसे होता था? इसके लिए पेड़ की
  196. 9:21घनी छांव में दरिया बिछाई जाती। घरों से
  197. 9:23ही कपड़े की जो गठरियां बांधकर लाई गई थी,
  198. 9:26उन्हें खोला जाता। इनमें घर की बनी सूखी
  199. 9:29पूरियां, गुड़, अचार और सत्तू होता था।
  200. 9:32सारे बाराती वहीं जमीन पर बैठकर अपना खाना
  201. 9:35खाते। कुएं के उसी ताजे और ठंडे पानी से
  202. 9:38अपने लोटे भर-भर कर पीते। थोड़ी देर छांव
  203. 9:41में सुस्ताते और फिर से बैलों को गाड़ियों
  204. 9:44में जोड़कर आगे चल पड़ते। जैसे-जैसे शाम
  205. 9:47ढलती, रास्ते सुनसान हो जाते। बारात कई
  206. 9:50बार रात के सन्नाटे में भी अपना सफर जारी
  207. 9:53रखती। अगर थकान ज्यादा हो जाती तो रास्ते
  208. 9:56में किसी सुरक्षित और खाली मैदान को देखकर
  209. 9:59गाड़ियां वहीं रोक दी जाती। रात बिताने के
  210. 10:01लिए तब सड़कों के किनारे कोई होटल नहीं
  211. 10:04होते थे। बाराती उसी बैलगाड़ी में बिछी
  212. 10:06सूखी घास और रजाइयों के बीच सिमट कर अपनी
  213. 10:10थकान मिटाते। पूरा एक दिन और एक रात का यह
  214. 10:13थका देने वाला सफर तय करने के बाद अगली
  215. 10:16सुबह बारात फिर अपने रास्ते पर आगे बढ़ती।
  216. 10:18और अब कई मीलों का यह सफर तय करके बारात
  217. 10:22लड़की के गांव के करीब पहुंचने वाली थी।
  218. 10:24गांव के बाहर एक बड़े पेड़ के नीचे लड़की
  219. 10:27का पिता घर के कुछ बड़े बुजुर्ग और गांव
  220. 10:30का नाई हाथ जोड़े खड़े थे। बैलगाड़ियां
  221. 10:32एक-एक करके रुकने लगती हैं। लड़की का पिता
  222. 10:35मन ही मन गाड़ियां गिन रहा है। उसका दिल
  223. 10:37जोरों से धड़क रहा है कि कहीं चिट्ठी में
  224. 10:40लिखी गिनती से ज्यादा बाराती ना आ गए हो।
  225. 10:43भगवान का शुक्र है गाड़ियां लगभग उतनी ही
  226. 10:46थी। लड़की वाले आगे बढ़कर लड़के वालों के
  227. 10:49गले मिलते हैं। इस मिलन को मिलनी कहा जाता
  228. 10:51था। लेकिन यहां एक बात समझना बहुत जरूरी
  229. 10:54है। बारात सीधे लड़की के घर नहीं जाती थी।
  230. 10:57इतने सारे अनजान लोगों को घर के अंदर ले
  231. 11:00जाना तब सही नहीं माना जाता था। इसलिए
  232. 11:02गांव की चौपाल, स्कूल या किसी बड़े खाली
  233. 11:06मैदान में बारातियों के रुकने का इंतजाम
  234. 11:08किया जाता था। इसे जनवासा कहा जाता था।
  235. 11:11बाराती अपनी बैलगाड़ियों से उतर कर जनवासे
  236. 11:14में पहुंचते हैं। वहां दर्जनों चारपाइयां
  237. 11:16बिछी हुई हैं। थक कर बाराती खटियों पर बैठ
  238. 11:19जाते हैं। सबसे पहले गांव का नाई और उसके
  239. 11:22घर वाले सबको गुड़ और ठंडा शरबत लाकर
  240. 11:25पिलाते हैं। अब शुरू होता था असली
  241. 11:27इम्तिहान। आज की तरह बारात रात को खाना
  242. 11:30खाकर वापस नहीं लौटती थी। लड़के वालों की
  243. 11:32पूरी भीड़ तीन-4 दिन तक इसी जगह पर रहती
  244. 11:35थी। इन दिनों लड़की वालों को आराम करने और
  245. 11:38सोने तक का समय नहीं मिलता था। उनका एक ही
  246. 11:41काम होता था। हर हाल में बारातियों को खुश
  247. 11:43रखना और कोई गलती ना होने देना। हलवाई
  248. 11:46बाहर खुले में बड़ी-बड़ी कढ़ाईयां चढ़ा
  249. 11:48देता था। नीचे सूखी लकड़ियां और गोबर के
  250. 11:51उपले जल रहे होते। उस जमाने में छुआछूत और
  251. 11:54जातप-पात बहुत ज्यादा था। इसलिए बारातियों
  252. 11:57को कच्चा खाना जैसे दाल चावल नहीं खिलाया
  253. 12:00जा सकता था। उनके लिए पक्का खाना बनता था।
  254. 12:02यानी शुद्ध घी या तेल में तली हुई
  255. 12:05पूरियां, कचौड़ियां, कटहल या कद्दू की
  256. 12:08सब्जी और बेसन की बूंदी। सैकड़ों
  257. 12:10कुल्हड़ों और पत्तलों में दिन में दो-दो
  258. 12:13बार खाना परोसा जाता। लड़के वालों का
  259. 12:15रुतबा इतना ज्यादा होता था कि लड़की के
  260. 12:17गांव वाले उनके सामने सिर झुका कर चलते
  261. 12:20थे। अगर भूल से भी बैलों के चारे में कोई
  262. 12:23कमी रह गई, अगर किसी बाराती की चारपाई पर
  263. 12:25चादर नहीं मिली या खाना परोसते वक्त किसी
  264. 12:28रिश्तेदार के अहंकार को ठेस पहुंच गई तो
  265. 12:31सीधा हंगामा हो जाता था। बात-बात पर लड़के
  266. 12:34वाले धमकी दे देते थे कि हम अभी बिना
  267. 12:36लड़की के बारात वापस लेकर जा रहे हैं। उस
  268. 12:39जमाने में अगर किसी के दरवाजे से बारात
  269. 12:41लौट जाती तो वह लड़की वालों के लिए जीते
  270. 12:44जी मरने के बराबर होता था। उनकी पीढ़ियों
  271. 12:46की इज्जत मिट्टी में मिल जाती थी। लेकिन
  272. 12:49जैसे-जैसे रात गहरी होती है, सारी हलचल
  273. 12:52लड़की के घर के आंगन की तरफ आ जाती है।
  274. 12:54आंगन में बढ़ई का बनाया हुआ लकड़ी का मंडप
  275. 12:57सजा है। लालटेन और दियों की पीली रोशनी
  276. 13:00में आधी रात के वक्त दूल्हा आंगन में आता
  277. 13:03है। रात के सन्नाटे में पंडित जी के
  278. 13:05संस्कृत के मंत्र गूंजने लगते हैं। बीच
  279. 13:08में सुलगती हुई आग है। दूल्हा भारी भरकम
  280. 13:11कपड़ों और सेहरे में घंटों उस आग के सामने
  281. 13:14बैठा रहता है। हवन का धुआं आंखों में
  282. 13:16चुभता है। पसीना बहता है, लेकिन उसे उठने
  283. 13:19की मनाही है। लेकिन जिस दुल्हन के लिए
  284. 13:22बाहर इतना बड़ा तामझाम चल रहा था, वह कहां
  285. 13:25थी? दरअसल, उसे मंडप में सिर्फ फेरों के
  286. 13:28वक्त लाया जाता था। बाकी तीन-चार दिनों तक
  287. 13:30उसे घर के सबसे अंदर वाले अंधेरे कमरे में
  288. 13:33रहने को कहा जाता था। उसके शरीर पर हल्दी
  289. 13:36लगी होती थी। वो एक कोने में डरी सहमी
  290. 13:39बैठी रहती। मंडप में फेरे हो जाते हैं।
  291. 13:41मांग में सिंदूर भर दिया जाता है। शादी
  292. 13:44पूरी हो गई। लेकिन अब आती है वह बात जो आज
  293. 13:47के लोगों को सबसे ज्यादा हैरान कर देगी।
  294. 13:49शादी पूरी होने के बावजूद दुल्हन की असली
  295. 13:52विदाई उस दिन नहीं होती थी। उस दौर में
  296. 13:55लड़कियों की उम्र 15 साल या उससे भी कम
  297. 13:58होती थी। इसलिए शादी के बाद लड़की सिर्फ
  298. 14:00रस्म पूरी करने के लिए एक रात ससुराल जाती
  299. 14:03और अगले ही दिन वापस अपने मायके लौट आती
  300. 14:06थी। उसकी असली विदाई यानी हमेशा के लिए
  301. 14:09पति के घर जाना सालों बाद तब होता था जब
  302. 14:12वह बड़ी हो जाती थी। उत्तर भारत में इसे
  303. 14:15गौना कहा जाता था। सब कुछ ऐसे ही सदियों
  304. 14:18से चल रहा था। ना ही रिश्ते तय कर रहा था,
  305. 14:20गरीब किसान कर्ज ले रहा था और बचपन में ही
  306. 14:24लड़कियों का गौना तय हो रहा था। लेकिन फिर
  307. 14:26आया साल 1929। अंग्रेज सरकार ने भारत में
  308. 14:30एक ऐसा कानून पास किया जिसने इस पूरे
  309. 14:33सिस्टम की जड़े हिला दी। इस कानून का नाम
  310. 14:36था शारदा एक्ट, चाइल्ड मैरिज रिस्ट्रेन
  311. 14:39एक्ट। सरकार का मकसद था कि 14 साल से कम
  312. 14:42उम्र की बच्चियों की शादी पर रोक लगाई
  313. 14:45जाए। कानून बन गया। लेकिन जमीनी हकीकत में
  314. 14:48इस कानून ने एक ऐसा भयानक पैनिकिक पैदा कर
  315. 14:51दिया जिसने पूरे देश को खौफ में डाल दिया।
  316. 14:54नियम बना दिया गया कि 14 साल से कम उम्र
  317. 14:56की लड़की और 18 साल से कम उम्र के लड़के
  318. 14:59की शादी करना अब एक जुर्म होगा। सरकार को
  319. 15:02लगा था कि इस कानून से बाल विवाह का ये
  320. 15:05दर्द हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। लेकिन
  321. 15:07अंग्रेजों ने एक बहुत बड़ी गलती कर दी थी।
  322. 15:10कानून तो सितंबर 1929 में पास हो गया था
  323. 15:13लेकिन उसे लागू करने की तारीख रखी गई थी 1
  324. 15:16अप्रैल 1930 यानी कानून के लागू होने में
  325. 15:20पूरे 6 महीने का गैप छोड़ दिया गया था। बस
  326. 15:22यही वो 6 महीने थे जिसने पूरे भारत की
  327. 15:25तस्वीर बदल कर रख दी। गांव-गांव शहर-शहर
  328. 15:29खबर आग की तरह फैल गई। लोगों को लगा कि
  329. 15:32अंग्रेज उनके धर्म, उनके रिवाजों और उनके
  330. 15:35घरों में जबरदस्ती घुस रहे हैं। उन्हें डर
  331. 15:37था कि 1 अप्रैल के बाद वो अपनी बच्चियों
  332. 15:40के हाथ पीले नहीं कर पाएंगे। पुलिस उन्हें
  333. 15:42गिरफ्तार कर लेगी और फिर शुरू हुआ इतिहास
  334. 15:45का सबसे खौफनाक मैरिज रश। लोग किसी भी
  335. 15:49कीमत पर 1 अप्रैल की वो डेडलाइन पार नहीं
  336. 15:52होने देना चाहते थे। अचानक पूरे देश में
  337. 15:54बहुत सारी शादियां होने लगी। ना कोई
  338. 15:56मुहूर्त देखा गया ना कुंडली। नाई दिन रात
  339. 15:59दौड़ने लगे। जिन बच्चियों की उम्र 10 या
  340. 16:0212 साल थी उनकी तो शादी हुई ही खौफ इतना
  341. 16:05ज्यादा था कि लोगों ने 3 से 4 साल की
  342. 16:08मासूम बच्चियों को भी रातोंरात मंडप में
  343. 16:11बिठा दिया। 1931 में जब अंग्रेज अफसरों ने
  344. 16:14पूरे भारत की जनगणना की तो जो आंकड़े
  345. 16:17सामने आए, वह इतने डरावने थे कि सेंसेस
  346. 16:20कमिश्नर जे एच हटन खुद हैरान रह गए। इस
  347. 16:23हड़बड़ी के कारण पूरे भारत में शादी की
  348. 16:26औसत उम्र अचानक नीचे गिर गई। आंकड़ों ने
  349. 16:28गवाही दी कि सिर्फ 10 साल से कम उम्र की
  350. 16:31बच्चियों की शादियों में 18 से 25% का
  351. 16:34भयानक उछाल आया था। कानून बच्चों को बचाने
  352. 16:37के लिए बना था लेकिन उस कानून के डर से
  353. 16:40लाखों बच्चों की शादी छोटी उम्र में ही कर
  354. 16:42दी गई और इस डर की सबसे भारी कीमत चुकाई
  355. 16:45उस गरीब किसान ने। सोचिए जिस दौर में एक
  356. 16:48शादी के लिए क्विंटलों अनाज और सैकड़ों
  357. 16:51मेहमानों का इंतजाम करने में महीनों लग
  358. 16:53जाते थे। वहां इस शारदा एक्ट के खौफ ने
  359. 16:56किसानों को महज कुछ हफ्तों के अंदर
  360. 16:58शादियां करने पर मजबूर कर दिया। इतनी
  361. 17:00जल्दी इंतजाम कैसे होता? जाहिर है
  362. 17:03रातोंरात अंधाधुंध कर्ज लिया गया। अगर हम
  363. 17:061921 के आंकड़ों को देखें तो बंबई के एक
  364. 17:09मिल मजदूर की महीने की पक्की कमाई सिर्फ
  365. 17:12₹33 हुआ करती थी और एक गांव के खेत मजदूर
  366. 17:15की कमाई तो इससे भी बहुत कम थी। लेकिन उस
  367. 17:18समय की एक मामूली सी शादी का कम से कम
  368. 17:20खर्चा ₹150 से ₹300 के बीच आता था। यानी
  369. 17:24एक मजदूर की पूरे साल भर की कमाई से भी
  370. 17:27ज्यादा। अब क्योंकि किसी भी गरीब किसान या
  371. 17:29मजदूर के पास इतने रुपए नगद में नहीं होते
  372. 17:32थे। इसलिए वह सीधा गांव के साहूकार के पास
  373. 17:35जाता था। साहूकार से लिया गया यह कर्ज कोई
  374. 17:38आम कर्ज नहीं होता था। उस जमाने में शादी
  375. 17:40के लिए लिया गया कर्ज अक्सर 75% सालाना
  376. 17:44ब्याज पर मिलता था। कुछ मामलों में तो यह
  377. 17:46150% तक चला जाता था। क्या आपको पता है कि
  378. 17:50इस 75% ब्याज का नतीजा क्या हुआ? इसका
  379. 17:52नतीजा यह हुआ कि पंजाब और बंगाल जैसे
  380. 17:56राज्यों के किसानों पर करोड़ों रुपए का
  381. 17:58कर्ज चढ़ गया। 1929 की बैंकिंग इंक्वायरी
  382. 18:01कमेटी की रिपोर्ट बताती है कि अकेले पंजाब
  383. 18:04के किसानों पर उस वक्त ₹177 करोड़ का
  384. 18:07भयानक कर्ज था और बंगाल के किसानों पर
  385. 18:10करीब 100 करोड़ का और इस कर्ज का एक बहुत
  386. 18:13बड़ा हिस्सा सिर्फ और सिर्फ शादियों और
  387. 18:15दिखावे के कारण लिया गया था। गरीब किसान
  388. 18:18अपनी थोड़ी सी जमीन गिरवी रखता एक आध फसल
  389. 18:21खराब होती ब्याज पर ब्याज जुड़ता जाता और
  390. 18:24कुछ ही सालों में वो अपनी पुश्तैनी जमीन
  391. 18:27हमेशा के लिए हार जाता। तो यह थी 1920 के
  392. 18:30दशक की भारतीय शादियों की वो सच्ची और
  393. 18:33खौफनाक तस्वीर जो इतिहास के पन्नों और
  394. 18:36पुराने सरकारी दस्तावेजों में कहीं दब कर
  395. 18:38रह गई। अगर आपको यह वीडियो पसंद आई हो तो
  396. 18:41इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर
  397. 18:44जरूर करें। नीचे कमेंट्स में हमें बताएं
  398. 18:46कि क्या आपने भी कभी अपने दादा-दादी या
  399. 18:49नाना-नानी से पुराने जमाने की बैलगाड़ी
  400. 18:51वाली बारात या तीन दिन के जनवासे के
  401. 18:54किस्से सुने हैं।

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This page contains the full transcript of 100 साल पहले भारत में कैसे होती थी शादी? जब 7 दिन तक रुकती थी बारात! | Full Documentary by 𝗨𝗻𝗸𝗻𝗼𝘄𝗻 𝗜𝘁𝗶𝗵𝗮𝗮𝘀, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,331 words across 401 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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